गुजरात
पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट का कहर जारी, इलाज के दौरान एक और घायल की मौत
20 Jul, 2026 02:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद शहर स्थित रामोल क्षेत्र में संचालित एक अवैध पटाखा निर्माण इकाई में हुए भीषण विस्फोट के उपरांत मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 10 तक पहुँच गया है। हादसे में अत्यधिक झुलसे एक अन्य पीड़ित ने सोमवार तड़के शहर के सिविल अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान गोविंद डामोर के रूप में हुई है, जो मूलतः दाहोद जिले का निवासी था। इस भयावह हादसे में गंभीर रूप से घायल कई अन्य श्रमिकों की भांति वह भी रोजगार की तलाश में दाहोद से अहमदाबाद आया हुआ था और कारखाने में काम कर रहा था।
सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान तड़के हुई मौत
चिकित्सकीय सूत्रों के अनुसार गोविंद डामोर का शरीर धमाके के बाद भड़की भीषण आग की चपेट में आने से 95 प्रतिशत से अधिक जल चुका था। डॉक्टरों की टीम द्वारा किए गए निरंतर प्रयासों के बावजूद उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हो सका और सोमवार तड़के लगभग 2:15 बजे उसने अंतिम सांस ली। इस दुखद समाचार के सामने आते ही मृतक के परिजनों और गृह जिले में मातम का माहौल छा गया है।
अस्पताल प्रशासन और वरिष्ठ चिकित्सकों का बयान
अहमदाबाद सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने हादसे के संदर्भ में विस्तृत विवरण साझा करते हुए बताया कि रामोल पटाखा कारखाने में हुए विस्फोट के तुरंत बाद कुल पांच गंभीर मरीजों को आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया था। भर्ती कराए गए घायलों में एक महिला तथा चार पुरुष शामिल थे, जिनकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई थी।
गंभीर रूप से झुलसे घायलों की वर्तमान स्थिति
चिकित्सा अधीक्षक ने आगे जानकारी दी कि भर्ती मरीजों में से दो लोग सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। इनमें से मृत घोषित किए गए पुरुष मरीज का शरीर 95 प्रतिशत से अधिक झुलस चुका था, जबकि भर्ती कराई गई महिला मरीज का शरीर भी 75 प्रतिशत से अधिक जल गया है। अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की विशेष टीम द्वारा अन्य सभी घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा देखभाल प्रदान की जा रही है और उनकी स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है।
अवैध कारखाने और सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
रामोल इलाके में बिना आवश्यक प्रशासनिक अनुमतियों और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर चलाई जा रही इस अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए हादसे ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों ने घटनास्थल को सील कर दिया है तथा मामले की वैज्ञानिक जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध रूप से विस्फोटक सामग्री का भंडारण करने और कारखाने का संचालन करने वाले दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गुजरात में बड़ा एक्शन, लड़की हत्या मामले के आरोपी को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया
20 Jul, 2026 10:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आणंद: गुजरात के आणंद जिले में स्थित वासद में साढ़े चार साल की मासूम बच्ची के अपहरण और हत्या मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पुलिस कस्टडी से भागने और जानलेवा हमला करने के दौरान आरोपी पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। रेलवे ट्रैक पर बच्ची का क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद जांच में जुटी पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध आरोपी सुरेश परमार को कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस टीम जब आरोपी को लेकर आ रही थी, तब उसने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया, जिसके जवाब में आत्मरक्षार्थ की गई फायरिंग में आरोपी गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
वासद रेलवे स्टेशन पर मिला मासूम बच्ची का शव
घटना की शुरुआत वासद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म के समीप रेलवे ट्रैक पर एक चार वर्षीय मासूम बच्ची का कुचला हुआ शव मिलने से हुई। घटनास्थल की स्थिति और पास में पाए गए कपड़ों के आधार पर बच्ची के साथ दुष्कर्म के पश्चात साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को ट्रेन के आगे फेंकने की आशंका जताई गई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, रेलवे पुलिस तथा फोरेंसिक टीमों ने मौके पर पहुँचकर वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करना प्रारंभ किया और मामले की गहनता से पड़ताल शुरू की।
सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक साक्ष्यों से आरोपी गिरफ्तार
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्च पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में विशेष जांच टीमों का गठन किया गया। स्टेशन परिसर के सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर एक संदिग्ध युवक बच्ची को ले जाता हुआ दिखाई दिया। फुटेज के आधार पर पहचान स्थापित करते हुए बोचासन क्षेत्र निवासी आरोपी सुरेश परमार को बोरसद ग्रामीण पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए गिरफ्तार कर लिया और आगे की जांच हेतु क्राइम ब्रांच को सौंप दिया।
आरोपी का पुलिस टीम पर हमला और दो जवान घायल
क्राइम ब्रांच की टीम जब आरोपी सुरेश को लेकर आणंद आ रही थी, तभी रास्ते में उसने स्वास्थ्य खराब होने का बहाना बनाकर वाहन रुकवाया। गाड़ी रुकते ही आरोपी ने अचानक धारदार हथियार से पुलिस टीम पर प्राणघातक हमला कर दिया। इस अचानक हुए हमले में महिपाल सिंह और राजवीर सिंह नामक दो पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थिति अचानक अत्यधिक तनावपूर्ण और अनियंत्रित हो गई।
पुलिस की आत्मरक्षार्थ फायरिंग में आरोपी ढेर
सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारियों ने आरोपी को तत्काल आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी, किंतु आरोपी लगातार हमलावर रहा। परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस अधिकारी ने आत्मरक्षा में आरोपी पर गोलियां चलाईं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल आरोपी को तुरंत इलाज के लिए करमसद स्थित श्री कृष्णा मेडिकल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उपचार के दौरान उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
निवेश के मामले में गुजरात की बड़ी छलांग, महाराष्ट्र और तमिलनाडु पीछे
18 Jul, 2026 01:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गांधीनगर: देश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और 'विकसित भारत @2047' के राष्ट्रीय विजन को गति देने के प्रयासों के तहत गुजरात ने औद्योगिक विकास के क्षेत्र में एक और अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। नीति आयोग द्वारा आधिकारिक तौर पर जारी किए गए देश के पहले 'इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स 2026' में गुजरात ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बड़े राज्यों की सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया है। इस राष्ट्रीय सूचकांक में 56.6 के सर्वोच्च स्कोर के साथ गुजरात देश का सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य बनकर उभरा है, जिसने देश के अन्य विकसित औद्योगिक राज्यों को पीछे छोड़ते हुए अपनी साख को और अधिक मजबूत किया है।
महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों को पछाड़कर गुजरात बना नंबर वन
नीति आयोग द्वारा देश के 17 प्रमुख और बड़े राज्यों की निवेश क्षमता तथा औद्योगिक माहौल का गहन मूल्यांकन किया गया था। इस कड़े मुकाबले में गुजरात ने 53.7 अंक हासिल करने वाले महाराष्ट्र और 53.3 अंक प्राप्त करने वाले तमिलनाडु जैसे मजबूत औद्योगिक राज्यों को पछाड़कर पहला स्थान सुरक्षित किया है। वाणिज्यिक सुगमता और सुरक्षित निवेश के मोर्चे पर गुजरात का यह प्रदर्शन यह साबित करता है कि घरेलू और वैश्विक निवेशकों के लिए यह राज्य पहली पसंद बना हुआ है, जिससे आने वाले समय में यहां बड़े पैमाने पर नए रोजगार सृजित होने की राह आसान होगी।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की उद्योग-अनुकूल नीतियों को मिली राष्ट्रीय पहचान
गुजरात को मिली इस गौरवपूर्ण राष्ट्रीय रैंकिंग का मुख्य श्रेय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के कुशल नेतृत्व और राज्य सरकार की दीर्घकालिक रणनीतियों को जाता है। सरकार द्वारा लागू की गई उद्योग-अनुकूल नीतियों, पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए किए गए सुधारों (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को इस राष्ट्रीय सूचकांक के माध्यम से एक बड़ी और महत्वपूर्ण मान्यता मिली है। प्रशासनिक स्तर पर लालफीताशाही को कम करने और सिंगल विंडो सिस्टम को प्रभावी बनाने के कारण ही राज्य निवेशकों का विश्वास जीतने में पूरी तरह सफल रहा है।
चौरासी कड़े संकेतकों और आठ मुख्य स्तंभों पर हुआ राज्यों का सटीक मूल्यांकन
नीति आयोग द्वारा तैयार किया गया यह सूचकांक बेहद विस्तृत और वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित है, जो राज्यों की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है। किसी भी राज्य को रैंकिंग देने से पहले कुल 84 कड़े संकेतकों और 8 मुख्य पिलर्स (स्तंभों) के आधार पर वहां के बुनियादी ढांचे, कानूनी व्यवस्था, श्रम कानूनों और सरकारी सहयोग का बारीक मूल्यांकन किया गया है। इन सभी मानकों पर खरा उतरते हुए गुजरात ने यह साबित किया है कि वह न केवल बुनियादी ढांचा प्रदान करने में आगे है, बल्कि निवेशकों को एक सुरक्षित, स्थिर और प्रगतिशील व्यावसायिक माहौल देने में भी देश में सबसे अग्रणी है।
जिंदा नहीं थीं फिर भी मिला इनकम टैक्स नोटिस, गुजरात HC ने किया रद्द
16 Jul, 2026 10:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद:गुजरात हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आयकर विभाग (इनकम टैक्स डिपार्टमेंट) की उस दंडात्मक कार्रवाई पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जिसके तहत विभाग एक मृत महिला के टैक्स मूल्यांकन को फिर से शुरू करने का प्रयास कर रहा था। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार यह मामला बेहद चौंकाने वाला था क्योंकि जिस महिला के खिलाफ विभाग ने डिमांड नोटिस जारी किया था, उसकी मृत्यु नोटिस मिलने से करीब पांच वर्ष पहले ही हो चुकी थी। अदालत के इस रुख के बाद कर विभाग की इस एकतरफा और त्रुटिपूर्ण कार्यवाही को बड़ा झटका लगा है।
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने टैक्स विभाग के दोबारा मूल्यांकन आदेश को किया रद
इस संवेदनशील और कानूनी पेचीदगी से भरे मामले की सुनवाई गुजरात हाई कोर्ट के माननीय न्यायाधीश जस्टिस ए.एस. सुपेहिया और जस्टिस वी.डी. नानावटी की संयुक्त खंडपीठ में हुई। खंडपीठ ने मामले के सभी तथ्यों और तारीखों का गहन अध्ययन करने के बाद आयकर विभाग द्वारा जारी किए गए दोबारा मूल्यांकन के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। अदालत ने माना कि एक मृत नागरिक के नाम पर इस तरह की कानूनी कार्यवाही को आगे बढ़ाना वैधानिक रूप से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
जमीन के सौदे पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स से जुड़ा था पूरा मामला
यह पूरा विवाद दरअसल एक जमीन के सौदे से उत्पन्न हुआ था, जिसे दिवंगत महिला ने अपने जीवनकाल में पूरा किया था। आयकर विभाग का मानना था कि इस भूखंड के क्रय-विक्रय के सौदे पर नियमानुसार लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लागू होता है, जिसकी सही तरीके से गणना नहीं की गई थी। इसी टैक्स राशि के निर्धारण और वसूली के उद्देश्य से विभाग ने मृत महिला के नाम पर पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसे अब अदालत ने कानूनी रूप से अमान्य घोषित कर दिया है।
मृत व्यक्ति के खिलाफ टैक्स कार्यवाही जारी रहने के कानूनी सवाल पर रुख साफ
आयकर विभाग की वर्तमान कार्रवाई को पूरी तरह से रद करने के बावजूद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इससे जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी सवाल को भविष्य की समीक्षा के लिए खुला छोड़ दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस बात पर विचार होना अभी बाकी है कि यदि किसी मृत व्यक्ति के नाम पर आए नोटिस का जवाब उसके परिवार के सदस्य या कानूनी वारिस विभाग को दे देते हैं, तो क्या वैसी स्थिति में मृत व्यक्ति के खिलाफ टैक्स की कानूनी कार्यवाही को निरंतर जारी रखा जा सकता है या नहीं।
जिस पीड़िता को दिलाना था न्याय, उसी से दुष्कर्म के आरोप में वकील घिरा
15 Jul, 2026 12:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने यौन शोषण की शिकार बच्चियों की सुरक्षा और इंसाफ दिलाने वाले सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पूरा मामला ढोलका तालुका के एक गांव से जुड़ा है, जहां एक 43 वर्षीय वकील प्रणयराज रणवीर को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी वकील पर आरोप है कि उसने किसी और के साथ नहीं, बल्कि उसी नाबालिग पीड़िता के साथ इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया, जिसका न्याय दिलाने के लिए वह खुद अदालत में केस लड़ रहा था।
केस लड़ने वाले रक्षक ही बन बैठे भक्षक
पीड़िता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि वकील प्रणयराज रणवीर उसका केस लड़ रहा था और इसी का फायदा उठाकर उसने नाबालिग के साथ बलात्कार किया। इस घिनौनी वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी वकील ने पीड़िता को मुंह बंद रखने और किसी को भी इस बारे में न बताने की सख्त धमकी दी थी। बच्ची के साथ हुए इस दोहरे उत्पीड़न के बाद जब मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंची, तो पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी वकील को सलाखों के पीछे भेज दिया।
अपहरण और पहले भी यौन उत्पीड़न की शिकार रही है पीड़िता
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि यह नाबालिग बच्ची पहले भी एक बेहद दर्दनाक दौर से गुजर चुकी है। सितंबर 2025 में जब वह मात्र 12 वर्ष की थी, तब कुछ बदमाशों ने उसका अपहरण कर लिया था। अपहरण के बाद दो आरोपियों ने उसके साथ दुष्कर्म किया था, जिसकी शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और इसी मामले की कानूनी पैरवी आरोपी वकील प्रणयराज कर रहा था।
न्याय प्रणाली और बच्चों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
इस बेहद संवेदनशील मामले के सामने आने के बाद पूरे कानूनी और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। समाज में न्याय की आखिरी उम्मीद माने जाने वाले वकील द्वारा ही इस तरह का घिनौना कृत्य किए जाने से लोगों में भारी आक्रोश है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी वकील के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने और पीड़िता को उचित सुरक्षा व मानसिक संबल प्रदान करने की मांग की है।
रथ यात्रा से पहले सुरक्षा अलर्ट, ATS ने पकड़े पांच संदिग्धों के जैश कनेक्शन की जांच शुरू की
14 Jul, 2026 12:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। गुजरात में आस्था के सबसे बड़े पर्व भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा शुरू होने में अब महज दो दिन का समय बचा है। इस ऐतिहासिक और संवेगात्मक उत्सव से ठीक पहले सुरक्षा एजेंसियों ने राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। इसी मुस्तैदी के बीच गुजरात एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वाड) ने सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल की है, जिससे संभावित खतरों को समय रहते टाला जा सके।
एटीएस की बड़ी कार्रवाई में पांच संदिग्ध हिरासत में
सुरक्षा को चाक-चौबंद करने में जुटी एटीएस की टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर सिद्धपुर इलाके में एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया। इस छापेमारी के दौरान टीम ने पांच संदिग्ध व्यक्तियों को अपनी हिरासत में लिया है। इन सभी संदेहास्पद लोगों को अज्ञात स्थान पर ले जाकर सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के आला अधिकारियों द्वारा बेहद गहनता से पूछताछ की जा रही है ताकि उनके मंसूबों का पता लगाया जा सके।
रथयात्रा को लेकर पूरे गुजरात में सुरक्षा घेरा सख्त
आगामी १६ जुलाई को अहमदाबाद के साथ-साथ भावनगर, वडोदरा, पाटन और राजकोट समेत गुजरात के कई छोटे-बड़े शहरों में भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक रथयात्राएं बेहद धूमधाम से निकाली जानी हैं। इन सभी शहरों में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के उमड़ने की उम्मीद है, जिसके मद्देनजर पूरे राज्य में सुरक्षा घेरे को अभेद्य बना दिया गया है और चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर रखी जा रही है।
अहमदाबाद में सुरक्षा के किए गए विशेष इंतजाम
मुख्य रथयात्रा के केंद्र अहमदाबाद में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की जा रही है। संवेदनशील इलाकों और रथयात्रा के मुख्य मार्ग पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए निगरानी रखी जा रही है। एटीएस द्वारा संदिग्धों की इस धरपकड़ के बाद से संवेदनशील मार्गों पर चेकिंग अभियान को और ज्यादा तेज कर दिया गया है ताकि त्योहार के दौरान शांति व्यवस्था बनी रहे।
शांतिपूर्ण आयोजन के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद
राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन इस बेहद संवेदनशील और बड़े धार्मिक आयोजन को पूरी तरह सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रतिबद्ध है। संदिग्धों से मिल रहे इनपुट के आधार पर अन्य शहरों में भी संदिग्ध ठिकानों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या अफवाह फैलाने की कोशिश करने वालों से बेहद सख्ती से निपटा जाएगा।
सूरत अवैध निर्माण तोड़फोड़ मामला पहुंचा हाईकोर्ट, आयुक्त नागरत्ना से जवाब तलब
13 Jul, 2026 06:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। गुजरात उच्च न्यायालय ने सूरत में लगभग एक सौ मकानों और झुग्गियों को गैर-कानूनी तरीके से गिराए जाने के मामले में एक बेहद कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सूरत के पुलिस आयुक्त एम नागरत्ना की संलिप्तता की आशंका जताई है। माननीय न्यायालय ने पुलिस आयुक्त को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए आगामी 21 जुलाई तक एक आधिकारिक शपथ पत्र के माध्यम से अदालत के समक्ष अपना लिखित जवाब पेश करने का आदेश दिया है।
पुलिस आयुक्त की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया के एक साथ इतने सारे आशियानों को जमींदोज किए जाने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं। उच्च न्यायालय ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर पुलिस विभाग के सर्वोच्च अधिकारी की भूमिका को संदिग्ध माना है। अदालत का मानना है कि इतनी बड़ी कार्रवाई बिना उच्च स्तर की अनुमति या सहभागिता के संभव नहीं हो सकती, इसीलिए इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए सीधे आयुक्त से जवाब तलब किया गया है।
पांच विभागीय अधिकारियों पर निलंबन की गाज
इस विवादित मामले के तूल पकड़ने के बाद, पुलिस आयुक्त ने प्रथम दृष्टया लापरवाही बरतने के आरोप में एक कार्यकारी अभियंता सहित कुल पांच विभागीय अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया था। इस सख्त प्रशासनिक कार्रवाई का उद्देश्य मामले को शांत करना था, लेकिन इस निलंबन ने एक नए कानूनी विवाद को जन्म दे दिया है। निलंबित अधिकारियों ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से एकतरफा और दुर्भावना से प्रेरित बताया है।
मोबाइल चैट के सबूतों से अदालत में नया मोड़
मामले में उस वक्त एक नया और बेहद रोचक मोड़ आ गया जब निलंबित कार्यकारी अभियंता ने अपने सस्पेंशन के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दे दी। अभियंता ने अपने बचाव में पुलिस आयुक्त के साथ हुई बातचीत के मोबाइल चैट के स्क्रीनशॉट और डिजिटल साक्ष्य अदालत के सामने प्रस्तुत किए हैं। इन साक्ष्यों के जरिए यह साबित करने का प्रयास किया गया है कि तोड़फोड़ की यह पूरी कार्रवाई आला अधिकारी के सीधे निर्देशों और इच्छा पर की गई थी, जिसके आधार पर निलंबन को रद्द करने की मांग की गई है।
आगामी सुनवाई और शपथ पत्र पर टिकी निगाहें
सूरत से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब सभी की नजरें आगामी 21 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं। पुलिस आयुक्त द्वारा दाखिल किए जाने वाले शपथ पत्र और उसमें दिए जाने वाले तर्कों से ही यह साफ हो पाएगा कि इस अवैध तोड़फोड़ के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन था। उच्च न्यायालय इन डिजिटल सबूतों और आयुक्त के जवाब की समीक्षा करने के बाद ही दोषियों के खिलाफ आगे की कड़ी दंडात्मक कार्रवाई तय करेगा।
गुजरात में रफ्तार का कहर, खड़े ट्रक से टकराई कार; चार की मौत, चार घायल
11 Jul, 2026 11:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। गुजरात के जूनागढ़ जिले में एक बेहद दर्दनाक और भीषण सड़क हादसा सामने आया है, जहां मजेवड़ी गांव के समीप फोर-लेन हाईवे पर एक तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकरा गई। यह टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और मौके पर ही चीख-पुकार मच गई। इस दिल दहला देने वाली घटना में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जबकि कुछ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
सोमनाथ जा रहे श्रद्धालु बने भीषण हादसे का शिकार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बनासकांठा जिले का एक परिवार अपने परिजनों की अस्थि विसर्जन की धार्मिक विधि संपन्न करने के लिए अर्टिगा कार से सोमनाथ धाम की ओर जा रहा था। पूरा परिवार शोक संतप्त माहौल में पवित्र यात्रा पर निकला था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जैसे ही उनकी कार मजेवड़ी गांव के पास पहुंची, वहां हाईवे पर पहले से ही एक बंद ट्रक खड़ा था, जिसे कार चालक समय रहते देख नहीं पाया और यह भयानक दुर्घटना हो गई।
चार लोगों की मौके पर मौत और चार गंभीर रूप से घायल
सड़क पर खड़े ट्रक के पिछले हिस्से में तेज रफ्तार कार के अनियंत्रित होकर घुस जाने से वाहन में सवार चार लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह से मलबे में तब्दील हो गया। इस हादसे में कार के भीतर मौजूद चार अन्य सदस्य भी गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
भीषण टक्कर के बीच मासूम बच्चे को मिला नया जीवन
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे में जहां कई परिवारों के चिराग बुझ गए, वहीं एक चमत्कारिक घटना भी देखने को मिली। कार में सवार एक छोटा बच्चा इस पूरी तबाही के बीच पूरी तरह से सुरक्षित बच गया। दुर्घटना की भयावहता को देखते हुए बच्चे का सकुशल बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है, हालांकि उसे भी प्राथमिक जांच के लिए डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।
हाईवे पर बंद पड़े वाहनों के खिलाफ प्रशासन की जांच शुरू
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और आपातकालीन सेवाएं तुरंत मौके पर पहुंच गईं और राहत कार्य शुरू किया गया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की कानूनी तफ्तीश शुरू कर दी है। हाईवे पर बिना किसी संकेतक या चेतावनी के बंद हालत में ट्रक खड़ा करने वाले वाहन मालिक और चालक के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज करने की प्रक्रिया की जा रही है।
गुजरात में बढ़ा चांदीपुरा वायरस का खतरा, बच्चों की मौत के बाद अलर्ट जारी
10 Jul, 2026 04:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गांधीनगर। गुजरात के उत्तर और मध्यवर्ती इलाकों में एक बेहद दुर्लभ और घातक वायरस के पैर पसारने से चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। इस संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए राज्य का स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से हाई-अलर्ट पर आ गया है और प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन कदम उठाए जा रहे हैं।
चांदीपुरा वायरस के संक्रमण से अब तक तीन मासूमों ने गंवाई जान
राज्य में इस जानलेवा बीमारी ने बच्चों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है, जिससे स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस वायरस के गंभीर संक्रमण की वजह से अब तक तीन बच्चों की असामयिक मौत हो चुकी है। चिकित्सा जांच में इन सभी बच्चों की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई थी। इस दुःखद घटना के बाद से ही प्रशासन ने प्रभावित ग्रामीण और शहरी अंचलों में बीमारी की रोकथाम के लिए कड़े सुरक्षात्मक उपाय और दवाइयों का छिड़काव युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है।
प्रभावित क्षेत्रों का विवरण और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति
संक्रमण के भौगोलिक प्रसार पर नजर डालें तो जान गंवाने वाले बच्चों में से दो का संबंध वडोदरा और गोधरा के स्थानीय इलाकों से था। वहीं, तीसरा बच्चा पड़ोसी राज्य राजस्थान का रहने वाला था, जिसे अत्यंत गंभीर स्थिति में इलाज के लिए हिम्मतनगर के सिविल अस्पताल में रेफर किया गया था, जहाँ उसने दम तोड़ दिया। वर्तमान में, विसनगर क्षेत्र का एक और बच्चा इस खतरनाक वायरस से ग्रसित मिला है, जिसे तुरंत वडनगर के विशेषज्ञ अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की विशेष टीम उसकी स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रख रही है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा संदिग्ध लक्षणों वाले बच्चों की सघन स्क्रीनिंग
इस फैलते संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों में तेज बुखार, उल्टी और अचेत होने जैसे लक्षणों पर विशेष नजर रखी जा रही है। संदिग्ध लक्षण दिखने पर मरीजों को तुरंत आइसोलेट कर उनके रक्त के नमूने जांच के लिए राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में भेजे जा रहे हैं। सरकार ने सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि वे बाल रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करें ताकि शुरुआती स्तर पर ही बीमारी की पहचान की जा सके।
ग्रामीण इलाकों में जन-जागरूकता और बचाव कार्य तेज
यह वायरस मुख्य रूप से कटीली झाड़ियों और कच्चे मकानों में पाए जाने वाले कीड़ों (सैंडफ्लाई) के जरिए फैलता है, जिसे देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान तेज कर दिया गया है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं और रात में मच्छरों व कीड़ों से बचाव के लिए जाली का उपयोग करें। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी तरह के तेज बुखार को सामान्य न समझें और तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करें।
अहमदाबाद ब्लास्ट केस में हाई कोर्ट का फैसला, 38 दोषियों की फांसी की सजा कायम
7 Jul, 2026 02:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। गुजरात उच्च न्यायालय ने लगभग 18 वर्ष पुराने अहमदाबाद श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने विशेष कोर्ट द्वारा पूर्व में दोषी ठहराए गए 38 आतंकवादियों को दी गई मृत्युदंड (फांसी) की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा है। इसके साथ ही, मामले में 11 अन्य दोषियों को मिली उम्रकैद की सजा भी यथावत जारी रहेगी। न्यायमूर्ति एवाई कोगजे और न्यायमूर्ति समीर दवे की खंडपीठ ने विशेष अदालत के निर्णय के विरुद्ध दोषियों द्वारा दायर की गईं सभी पुनरीक्षण अपीलों को सिरे से खारिज कर दिया और प्रतिबंधित संगठन 'इंडियन मुजाहिदीन' के इन सदस्यों की सजा पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी।
70 मिनट में दहला था शहर, विशेष अदालत ने 14 साल बाद सुनाया था फैसला
इस खौफनाक आतंकी साजिश को 26 जुलाई 2008 को अंजाम दिया गया था, जब महज 70 मिनट के भीतर शहर के विभिन्न व्यस्त इलाकों में एक के बाद एक 21 धमाके हुए थे। इन विस्फोटों में 56 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी और 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए थे। इस पूरे मामले में कुल 78 लोगों को आरोपी बनाया गया था और विभिन्न थानों में 35 अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। कानूनी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए एक विशेष अदालत का गठन किया गया था, जिसने करीब 14 साल तक चली लंबी सुनवाई के बाद फरवरी 2022 में 38 दोषियों को फांसी और 11 को आजीवन कारावास का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसकी अब उच्च न्यायालय ने भी पुष्टि कर दी है।
बसों, बाजारों और अस्पतालों को बनाया गया था निशाना
अन्वेषण एजेंसियों के मुताबिक, देश को झकझोर देने वाले इस हमले में आतंकियों ने बेहद क्रूर रणनीति अपनाई थी। विस्फोटकों को टिफिन बॉक्स में छिपाकर उन सार्वजनिक बसों, बाजारों और अस्पतालों के बाहर खड़ी साइकिलों पर रखा गया था, जहां अमूमन भारी भीड़ जुटती है। विशेष रूप से अस्पतालों को इसलिए निशाना बनाया गया था ताकि शुरुआती धमाकों के घायलों को जब वहां लाया जाए, तो वहां होने वाले दूसरे विस्फोट से और अधिक तबाही मचाई जा सके। जांच रिपोर्टों में यह बात भी सामने आई थी कि इन आत्मघाती धमाकों की साजिश वर्ष 2002 के गुजरात दंगों का प्रतिशोध लेने के उद्देश्य से रची गई थी।
उच्च न्यायालय का पीड़ितों को बड़ा मुआवजा देने का आदेश
सजा बरकरार रखने के साथ-साथ उच्च न्यायालय ने इस त्रासदी का दंश झेल रहे पीड़ितों और उनके परिवारों के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए बड़े मुआवजे की घोषणा की है। अदालत के आदेशानुसार, हमले में मारे गए सभी 56 मृतकों के आश्रित परिवारों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, इस भयावह आतंकी घटना में घायल हुए 200 से अधिक लोगों को भी राहत के तौर पर 1-1 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाएगा। अदालत के इस सख्त रुख के बाद वर्षों पुराने इस सबसे बड़े कानूनी मामले के फैसलों पर उच्च स्तरीय विधिक मुहर लग गई है।
माता-पिता पर बेटे की हत्या का आरोप, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोले चौंकाने वाले राज
4 Jul, 2026 11:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राजकोट। गुजरात के राजकोट में एक 26 वर्षीय युवक की संदिग्ध मौत का मामला, जिसे शुरुआत में आत्महत्या माना जा रहा था, अब एक सनसनीखेज हत्या के रूप में सामने आया है। पुलिस ने शुक्रवार को इस खौफनाक वारदात का पर्दाफाश करते हुए बताया कि मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई है। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मृतक के माता-पिता को फौरन गिरफ्तार कर लिया है। यह दर्दनाक घटना गोंडल तालुका के अंतर्गत आने वाले गुंडाला गांव की है, जहां राम भरवाड नामक युवक की बीती 30 जून को रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
घरेलू विवाद में तेजाब पिलाया और घोंटा गला
पुलिस जांच और पूछताछ में इस खौफनाक हत्याकांड की जो वजह सामने आई है, वह बेहद हैरान करने वाली है। अधिकारियों के मुताबिक, मृतक राम भरवाड को शराब पीने की गंभीर लत थी, जिसे लेकर घर में अक्सर कलह होती रहती थी। घटना के दिन भी इसी बात को लेकर राम का अपने पिता बाबूभाई बंबवा और मां मनीषाबेन बंबवा के साथ तीखा विवाद हुआ था। झगड़ा इतना बढ़ गया कि माता-पिता ने कथित तौर पर पहले अपने ही बेटे को जबरन तेजाब पिला दिया और उसके बाद बड़ी बेरहमी से गला घोंटकर उसे मौत के घाट सुला दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला राज और माता-पिता गिरफ्तार
राजकोट (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक (SP) विजय सिंह गुर्जर ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच में माता-पिता ने पुलिस को गुमराह करने के लिए बेटे द्वारा खुदकुशी किए जाने का बयान दिया था। हालांकि, जब मृतक की विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, तो उसके निष्कर्ष माता-पिता की कहानी से बिल्कुल अलग थे। संदेह के आधार पर जब पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने अपना गुनाह कबूल कर लिया, जिसके बाद शुक्रवार को दोनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
ससुराल पक्ष के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
इस पूरे मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मृतक राम भरवाड की पत्नी ने अपने सास-ससुर के खिलाफ स्थानीय पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) (हत्या), धारा 124 (तेजाब या रासायनिक पदार्थ से जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना) और धारा 54 (समान इरादे से कई व्यक्तियों द्वारा मिलकर किया गया कृत्य) के तहत एक आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की आगे की कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
SSC-HSC सप्लीमेंट्री परीक्षा का रिजल्ट घोषित, मिनटों में डाउनलोड करें स्कोरकार्ड
3 Jul, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गांधीनगर। गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (GSHSEB) ने कक्षा 10वीं (SSC) और कक्षा 12वीं (HSC) की सप्लीमेंट्री (पूरक) परीक्षा का इंतजार कर रहे हजारों छात्रों का इंतजार खत्म कर दिया है। बोर्ड की ओर से दोनों ही कक्षाओं के पूरक परीक्षा के परिणाम आधिकारिक तौर पर घोषित कर दिए गए हैं। इस परीक्षा में शामिल हुए विद्यार्थी अब अपना रिजल्ट देख सकते हैं।
कंपार्टमेंट वाले छात्रों को मिला आगे बढ़ने का मौका
यह परीक्षा उन छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित की गई थी, जिन्हें कक्षा 10वीं या 12वीं की मुख्य वार्षिक परीक्षा में एक या दो विषयों में कंपार्टमेंट (सप्लीमेंट्री) आई थी। बोर्ड द्वारा परिणाम जारी किए जाने के बाद अब सफल होने वाले सभी उम्मीदवार बिना अपना साल बर्बाद किए अगली कक्षा या कॉलेजों में दाखिला (एडमिशन) ले सकेंगे।
gseb.org पर उपलब्ध है स्कोरकार्ड
गुजरात बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, परीक्षा के नतीजे पूरी तरह डिजिटल मोड में जारी किए गए हैं। छात्र नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट से अपना स्कोरकार्ड चेक और डाउनलोड कर सकते हैं:
सबसे पहले छात्र गुजरात बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट gseb.org पर जाएं।
होम पेज पर दिए गए 'SSC / HSC Supplementary Result' के लिंक पर क्लिक करें।
इसके बाद अपना सीट नंबर और अन्य जरूरी क्रेडेंशियल्स दर्ज करें।
आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा, जिसे आप भविष्य के संदर्भ के लिए डाउनलोड कर सकते हैं।
गिर के जंगलों से उठी चेतावनी, मानव-वन्यजीव संघर्ष से घिरा शेरों का कुनबा
2 Jul, 2026 04:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। गुजरात के सुप्रसिद्ध गिर राष्ट्रीय उद्यान से एक बेहद विचलित करने वाली खबर सामने आई है, जहाँ हाल ही में आठ एशियाई शेर शावकों की असमय मौत हो गई है। इस दुखद घटना ने वैश्विक स्तर पर वन्यजीव प्रेमियों, पर्यावरणविदों और पशु संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को गहरी चिंता में डाल दिया है। संपूर्ण विश्व में केवल इसी क्षेत्र में पाए जाने वाले एशियाई शेरों की सुरक्षा और उनकी देखरेख की वर्तमान व्यवस्था पर इस घटना के बाद एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रशासन अब इस बात की गहन समीक्षा कर रहा है कि आखिर सुरक्षा चक्र के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में शावकों की जान कैसे चली गई।
भीषण गर्मी और कमजोर इम्युनिटी बनी मौत की मुख्य वजह
वन्यजीव विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किए गए शुरुआती आकलनों के अनुसार, इन नन्हे शावकों की मौत के पीछे मौसम का कड़ा मिजाज और शारीरिक कमियां मुख्य रूप से जिम्मेदार रही हैं। क्षेत्र में पड़ रही अत्यधिक और रिकॉर्डतोड़ गर्मी के कारण शावक भारी तनाव और डिहाइड्रेशन का शिकार हो गए। इसके साथ ही, कम उम्र होने के कारण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) भी काफी कमजोर थी, जिसके चलते वे मौसम के इस जानलेवा प्रभाव को सहन नहीं कर सके और उन्होंने दम तोड़ दिया।
'गिर पैराडॉक्स' और शेरों के संरक्षण का अनूठा इतिहास
इस दुखद घटना ने 'गिर पैराडॉक्स' यानी गिर के अंतर्विरोध को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। लगभग एक शताब्दी पहले एक समय ऐसा था जब अंधाधुंध शिकार और सिकुड़ते जंगलों के कारण एशियाई शेर पूरी तरह विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गए थे। इसके बाद सरकार और स्थानीय लोगों के सहयोग से शुरू हुए बेहद कड़े और ऐतिहासिक संरक्षण अभियानों के कारण इनकी आबादी में चमत्कारी सुधार देखने को मिला। इसे आधुनिक विश्व के सबसे सफल और अनुकरणीय वन्यजीव पुनरुद्धार अभियानों में गिना जाता है, जिसने शेरों को विलुप्त होने से बचा लिया।
एक दशक में तेजी से बढ़ी आबादी, मगर चुनौतियां अब भी बरकरार
प्राकृतिक संरक्षण के इन लगातार प्रयासों का ही परिणाम है कि गिर में शेरों का कुनबा लगातार बड़ा होता जा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2015 की गणना में जहाँ गिर के जंगलों में शेरों की कुल संख्या महज 523 दर्ज की गई थी, वहीं जनवरी 2026 तक के नवीनतम सर्वे में यह संख्या काफी हद तक बढ़कर 891 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है। हालांकि, शेरों की इस बढ़ती तादाद के बीच सीमित होते जा रहे जंगल और अचानक बदलने वाले मौसम ने प्रबंधन के सामने नई और जटिल चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जिससे निपटने के लिए अब नए सिरे से रणनीति बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
अब हर बच्चे की हेल्थ हिस्ट्री होगी सुरक्षित, गुजरात में शुरू हुई हेल्थ पासपोर्ट योजना
1 Jul, 2026 05:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गांधीनगर। देश में 'स्वस्थ बचपन' के जरिए 'स्वस्थ भारत' की मजबूत नींव रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। बच्चों और किशोरों की स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं को अधिक आधुनिक, सुदृढ़ और परिवार के अनुकूल बनाने के लिए गुजरात सरकार एक अनूठी पहल लेकर आई है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य में बच्चों के लिए 'हेल्थ पासपोर्ट' की अवधारणा को धरातल पर उतारा गया है, जो आने वाले समय में बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा।
क्या है अनूठा हेल्थ पासपोर्ट और इसका उद्देश्य
स्कूल हेल्थ - राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत शुरू की गई इस योजना में राज्य के जन्म से लेकर 18 वर्ष तक की आयु के प्रत्येक बच्चे को एक विशेष हेल्थ पासपोर्ट प्रदान किया जाएगा। यह पारंपरिक हेल्थ कार्ड से बिल्कुल अलग और उन्नत होगा। इसके माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य की पूरी निगरानी की जाएगी, ताकि उनके विकास में आने वाली किसी भी शारीरिक या मानसिक रुकावट को समय रहते पहचान कर दूर किया जा सके।
जन्म से किशोरावस्था तक की स्वास्थ्य यात्रा का लेखा-जोखा
यह डिजिटल और भौतिक पासपोर्ट सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि बच्चे के जन्म से लेकर उसकी किशोरावस्था तक की पूरी स्वास्थ्य यात्रा का एक प्रामाणिक रिकॉर्ड होगा। इसमें बच्चे की हर छोटी-बड़ी बीमारी, टीकाकरण, पोषण स्तर और समय-समय पर होने वाले मेडिकल चेकअप की पूरी जानकारी दर्ज रहेगी। इससे डॉक्टरों को किसी भी बच्चे के इलाज के दौरान उसकी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री को आसानी से समझने में मदद मिलेगी।
विकसित और स्वस्थ भारत के विजन को मिलेगी रफ्तार
इस राज्यव्यापी महत्वपूर्ण कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की गरिमामयी उपस्थिति में की गई है। इस दूरदर्शी कदम का मुख्य लक्ष्य बच्चों को शुरुआत से ही एक सुरक्षित और स्वस्थ माहौल देना है, जिससे 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने के लिए आने वाली पीढ़ी को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया जा सके।
स्कूल में सजा बनी दर्दनाक हादसा, शिक्षक के थप्पड़ से छात्र गंभीर घायल
30 Jun, 2026 10:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद शहर से एक बेहद हैरान और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां शिक्षा के मंदिर में एक छात्र के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। यहां के एक नामी प्राइवेट स्कूल में एक शिक्षक ने अनुशासन के नाम पर दसवीं कक्षा के एक छात्र को इतनी जोर से थप्पड़ मार दिया कि बच्चे के कान का पर्दा ही फट गया। छात्र की हालत इस समय इतनी गंभीर बनी हुई है कि डॉक्टरों ने उसे सर्जरी (ऑपरेशन) तक की नौबत आने की बात कही है। इस खौफनाक घटना के सामने आने के बाद छात्र के परिजनों में भारी आक्रोश है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शिकायत दर्ज कर फौरन जांच शुरू कर दी है, वहीं शिक्षा विभाग के कड़े रुख के बाद आरोपी शिक्षक को स्कूल से निलंबित कर दिया गया है।
पीटी पीरियड में बातचीत करने पर आपा खो बैठे शिक्षक
यह पूरी घटना अहमदाबाद के निकोल इलाके में स्थित 'चाणक्य स्कूल' की है, जहां पीड़ित छात्र स्कूल के गुजराती मीडियम सेक्शन में पढ़ाई करता है। घटना वाले दिन छात्र खेल के मैदान में अपने पीटी पीरियड के दौरान दोस्तों के साथ बैठकर सामान्य बातचीत कर रहा था। इसी बीच वहां से गुजर रहे इंग्लिश मीडियम के एक शिक्षक, जिनकी पहचान लक्ष्मण के रूप में हुई है, अचानक छात्र के पास पहुंचे। उस क्लास या छात्र से कोई सीधा संबंध न होने के बावजूद, शिक्षक ने आव देखा न ताव और छात्र को एक के बाद एक कई जोरदार थप्पड़ जड़ दिए। थप्पड़ का प्रभाव इतना घातक था कि छात्र का बायां कान तुरंत सूज गया, उससे खून बहने लगा और उसे सुनाई देना भी बंद हो गया। आनन-फानन में स्कूल प्रशासन ने छात्र के पिता को इसकी सूचना दी, जो तुरंत स्कूल पहुंचे और बच्चे की हालत देखकर दंग रह गए।
डॉक्टरों ने जताई ऑपरेशन की आशंका, पिता ने दी चेतावनी
परिजनों द्वारा छात्र को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने गहन जांच के बाद पुष्टि की कि थप्पड़ के अत्यधिक दबाव के कारण बच्चे के बाएं कान का पर्दा बुरी तरह फट चुका है। डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल कान में काफी सूजन है और यदि अगले एक सप्ताह के भीतर यह सूजन कम नहीं होती है, तो बच्चे के कान का ऑपरेशन करना पड़ेगा। इस स्थिति से दुखी और आक्रोशित पिता ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि उनके बेटे की सुनने की क्षमता पर हमेशा के लिए कोई बुरा असर पड़ता है, तो इसकी पूरी और सीधी जिम्मेदारी स्कूल ट्रस्ट तथा उस बेरहम शिक्षक की होगी, जिसके लिए वे किसी भी हद तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
आरोपी शिक्षक हुआ सस्पेंड, पुलिस ने लिया हिरासत में
मामला बढ़ने और चौतरफा दबाव के बाद आरोपी शिक्षक लक्ष्मण ने स्कूल ट्रस्ट और पीड़ित परिवार के सामने अपनी बड़ी गलती स्वीकार कर ली है। हालांकि, बेटे को आई गंभीर चोट और दर्द को देखते हुए पिता ने शिक्षक को माफ करने से साफ इनकार कर दिया और कानून का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद कृष्णनगर थाना पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए केस दर्ज किया और आरोपी शिक्षक को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया है। दूसरी ओर, अहमदाबाद के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) रोहित चौधरी ने मामले का संज्ञान लेते हुए तुरंत जांच के कड़े आदेश दिए, जिसके बाद स्कूल प्रबंधन ने जांच पूरी होने तक आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है।
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