उत्तर प्रदेश
कोडरमा मुआवजा घोटाले की जांच तेज, पूर्व भू-अर्जन पदाधिकारी पर शिकंजा
13 Jun, 2026 01:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोडरमा। कोडरमा-रांची रेल परियोजना के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा राशि के आवंटन में भारी धांधली और लाभार्थियों से मोटी दलाली वसूलने के मामले में कोडरमा के तत्कालीन जिला भू-अर्जन अधिकारी शारदानंद देव के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन अधिकारी पर विस्थापितों को मुआवजा बांटने के एवज में 10 से लेकर 25 फीसदी तक का फिक्स कमीशन लेने का गंभीर आरोप है। एसीबी ने अंदेशा जताया है कि इस काली कमाई के जरिए बड़े पैमाने पर आय से अधिक संपत्ति बनाई गई है। वित्तीय विश्लेषण के अनुसार, 1 मार्च 2014 से 31 जनवरी 2016 के बीच अधिकारी की वैध स्रोतों से कुल कमाई महज 16.47 लाख रुपये थी, जबकि इसी दौरान उनका कुल खर्च और निवेश बढ़कर 90.27 लाख रुपये तक पहुंच गया, जो उनकी वास्तविक आय के मुकाबले बेहद ज्यादा है।
पीड़ित महिला की शिकायत पर खुला फर्जीवाड़े का खेल
इस पूरे भ्रष्टाचार की कहानी साल 2017 में तब शुरू हुई, जब रेल परियोजना में जमीन गंवाने वाले ग्रामीणों ने मुआवजा वितरण में धांधली की लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद एसीबी ने प्राथमिक जांच दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। तफ्तीश के दौरान कुश्मा देवी नामक एक पीड़ित ग्रामीण महिला ने चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए बताया कि उसे मुआवजे की राशि आवंटित करने के बाद, विभाग के लोगों ने बैंक में खाता खुलवाने का झांसा देकर उससे कई कोरे दस्तावेजों और कागजातों पर दस्तखत करवा लिए थे। बाद में शातिर तरीके से उसके बैंक खाते से एक बड़ी रकम गायब कर दी गई।
परिजनों के बैंक खातों में लाखों का लेन-देन और जमीन की खरीद
एसीबी की वित्तीय जांच में यह बात सामने आई है कि वित्तीय वर्ष 2014-15 के दौरान शारदानंद देव, उनकी पत्नी सुधा देव, कथित पत्नी सुमित्रा देवी सहित अन्य करीबियों के बैंक खातों में 54 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध नकदी जमा कराई गई थी। केवल बैंक लेन-देन ही नहीं, बल्कि इसी समयावधि में इस सिंडिकेट द्वारा परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर करीब 20.76 लाख रुपये मूल्य की बेनामी जमीनें भी खरीदी गईं। इसके अलावा आरोपी अधिकारी की पुत्री स्मिता देव के नाम पर भी कई भूखंडों की रजिस्ट्री कराए जाने के पुख्ता प्रमाण जांच टीम के हाथ लगे हैं।
चास में आलीशान तीन मंजिला इमारत और आगामी कानूनी शिकंजा
भ्रष्टाचार की कड़ियों को जोड़ते हुए जांच टीम जब बोकारो के चास इलाके में पहुंची, तो वहां आरोपी अधिकारी का एक आलीशान तीन मंजिला मकान मिला, जिसे बनाने में शुरुआती अनुमान के मुताबिक लगभग 75 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अब इस अवैध कमीशनखोरी, अकूत अचल संपत्ति और संदिग्ध बैंक लेन-देन के तमाम साक्ष्यों को मजबूत करने में जुटी है। जांच एजेंसी का कहना है कि तमाम सबूतों का मिलान अंतिम दौर में है और जल्द ही इस मामले में संलिप्त तत्कालीन अधिकारी और उनके मददगारों पर गिरफ्तारी सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
85 वर्षीय महिला मृत मिली, हत्या की आशंका से इलाके में हड़कंप
13 Jun, 2026 01:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पंकरी बरवाडीह गांव में शनिवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहाँ एक बुजुर्ग महिला की लाश उसके अपने ही घर के भीतर रक्तरंजित हालत में बरामद हुई, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। वारदात की भनक लगते ही बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण घटना स्थल पर एकत्रित हो गए। मृत महिला की पहचान स्वर्गीय चौधरी साव की 85 वर्षीय पत्नी मंगनी के रूप में की गई है। बुजुर्ग महिला का शव अत्यंत संदेहास्पद स्थिति में मिला है और उनके सिर पर किसी भारी वस्तु से किए गए हमले के गहरे जख्म मौजूद हैं, जिसके कारण प्रथम दृष्टया इस मामले को हत्या से जोड़कर देखा जा रहा है।
पुलिस टीम ने संभाला मोर्चा और तकनीकी विशेषज्ञों को बुलाया
स्थानीय निवासियों द्वारा घटना की तत्काल जानकारी दिए जाने के बाद बड़कागांव थाने की पुलिस टीम बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंची और घटनास्थल को अपने नियंत्रण में लेकर तफ्तीश शुरू कर दी। मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा वारदात से जुड़े सूक्ष्म साक्ष्य और सुराग बटोरने के लिए फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट्स (अंगुलियों के निशान लेने वाले विशेषज्ञ) तथा डॉग स्क्वॉड (खोजी कुत्तों के दस्ते) की विशेष टीमों को मौके पर बुलाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराधियों तक पहुंचने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों और हर मुमकिन पहलू का सहारा लिया जा रहा है ताकि घटना स्थल से कोई भी महत्वपूर्ण सबूत छूटने न पाए।
शव को भेजा गया विच्छेदन गृह, रिपोर्ट के बाद साफ होगी तस्वीर
जांच टीम ने घटना स्थल की बारीकी से कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद बुजुर्ग महिला के शव को अपने कब्जे में ले लिया है और उसे पोस्टमार्टम (शव परीक्षण) के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही इस बात का आधिकारिक और सटीक खुलासा हो सकेगा कि वृद्धा की मौत किन परिस्थितियों में और किस वजह से हुई थी। फिलहाल, पुलिस आपसी रंजिश, लूटपाट और पारिवारिक विवाद सहित सभी संभावित कोणों को ध्यान में रखकर गहनता से सुराग तलाशने में जुटी हुई है।
अस्पताल पहुंचाने की जद्दोजहद में मौत, एंबुलेंस सेवा पर उठे गंभीर सवाल
13 Jun, 2026 12:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जामताड़ा। देश की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता का एक बेहद हृदयविदारक मामला सामने आया है। समय पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण एक मरणासन्न मरीज को ट्रैक्टर-ट्रॉली पर चारपाई लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इस विचलित करने वाली घटना ने सरकारी दावों और आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं की जमीनी हकीकत की पोल खोलकर रख दी है। पूरा वाकया जामताड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली गोपालपुर पंचायत के शहरबेड़ा गांव का है, जहां शुक्रवार 12 जून की रात को मोनू टुडू नामक युवक की अचानक तबीयत बेहद खराब हो गई। उसकी बिगड़ती हालत को देख घबराए परिवार वालों ने तत्काल सरकारी 108 एंबुलेंस सेवा को फोन मिलाया, परंतु आरोप है कि बार-बार मिन्नतें करने और मदद की गुहार लगाने के बाद भी एंबुलेंस गांव नहीं पहुंची।
मजबूर परिजनों ने ट्रैक्टर पर चारपाई रखकर तय किया सफर
जब सिस्टम की तरफ से कोई मदद नहीं मिली और मरीज की स्थिति लगातार नाजुक होती गई, तो असहाय परिजनों और ग्रामीणों ने अपनी तरफ से प्रयास करने का फैसला किया। गांव में मौजूद एक ट्रैक्टर की ट्रॉली पर खटिया बिछाई गई और उस पर बीमार मोनू टुडू को लिटाकर जैसे-तैसे जामताड़ा सदर अस्पताल पहुंचाया गया। दुर्भाग्यवश, एंबुलेंस न मिलने के कारण रास्ते में ही काफी कीमती समय बर्बाद हो चुका था। अस्पताल पहुंचने के तुरंत बाद चिकित्सकों ने मरीज का इलाज शुरू भी किया, लेकिन समय पर प्राथमिक चिकित्सा न मिलने के कारण उपचार के दौरान ही उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
चूक की कड़ियों को जोड़ने के लिए सिविल सर्जन ने दिए जांच के निर्देश
इस पूरे गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी यानी सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद मिश्रा ने कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इसमें कहां पर लापरवाही हुई है, इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि जांच दल इस बात की विशेष पड़ताल करेगा कि परिजनों द्वारा किए गए कॉल के बाद भी 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा समय पर क्यों नहीं उपलब्ध हो सकी। इसके लिए कॉल सेंटर के रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे और यदि किसी भी स्तर पर प्रशासनिक या तकनीकी चूक पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
AEDO भर्ती परीक्षा में खेल की परतें खुलीं, जांच एजेंसी ने बताई हैरान करने वाली बात
13 Jun, 2026 12:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा अप्रैल 2026 में स्थगित की गई सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) और सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी भर्ती परीक्षा को लेकर एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला पर्दाफाश हुआ है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की गहन तफ्तीश में यह बात खुलकर सामने आई है कि इस पूरी परीक्षा प्रणाली में बड़े पैमाने पर धांधली की गई थी और पूरा प्रशासनिक तंत्र कथित रूप से परीक्षा माफिया के इशारों पर काम कर रहा था। जांच रिपोर्ट के अनुसार, अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक मिलान के लिए अधिकृत की गई निजी एजेंसी ने रेंडमाइजेशन (यैंडम चयन) के अनिवार्य नियमों को ताक पर रख दिया। नियमों को दरकिनार कर अंतिम पलों में उन बाहरी और अनधिकृत लोगों को परीक्षा केंद्रों पर तैनात कर दिया गया, जिनका नाम आधिकारिक सूची में था ही नहीं। इस घोर लापरवाही ने परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता पर गहरे सवालिया निशान लगा दिए हैं।
परीक्षार्थी ही कर रहे थे बायोमेट्रिक जांच, एजेंसी होगी ब्लैकलिस्ट
जांच एजेंसी ने एक और हैरान करने वाला खुलासा करते हुए बताया कि परीक्षा केंद्रों पर जिन लोगों को बायोमेट्रिक सत्यापन की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उनमें से कई कर्मचारी खुद इसी एईडीओ परीक्षा में बतौर अभ्यर्थी शामिल हो रहे थे। परीक्षा नियमों के तहत ऐसे किसी भी हितधारक को परीक्षा ड्यूटी का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता, इसके बावजूद उन्हें संवेदनशील पदों पर बैठाया गया। इस मामले के सामने आने के बाद जयपुर की बायोमेट्रिक सत्यापन कंपनी 'मेसर्स साईं एजुकेयर प्राइवेट लिमिटेड' के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। इस दागी कंपनी को ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालना) करने का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे बिहार सरकार के साथ-साथ देश की अन्य सभी प्रमुख परीक्षा आयोजक संस्थाओं को भी भेजा जा रहा है ताकि वे भविष्य में इसके साथ कोई काम न करें।
35 जालसाज गिरफ्तार और जैमर प्रणाली में भी भारी सेंधमारी
इस महाघोटाले को लेकर अब तक मुंगेर, नालंदा, वैशाली, बेगूसराय और नवादा जिलों में पांच अलग-अलग आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें कार्रवाई करते हुए जांच दल ने अब तक 35 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। पकड़े गए लोगों में बायोमेट्रिक कंपनी के कई तकनीकी कर्मचारी, सुपरवाइजर और जिला को-ऑर्डिनेटर शामिल हैं। इसके अलावा, बेगूसराय, छपरा और नालंदा के केंद्रों से ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल कराए जाने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। ईओयू को तगड़ा अंदेशा है कि परीक्षा हॉल में इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों को रोकने के लिए लगाए गए जैमर सिस्टम को जानबूझकर निष्क्रिय या कमजोर किया गया था। इस साजिश में जैमर सेवा प्रदाता कंपनी 'ईसीआईएल' के कर्मचारियों की भूमिका की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
पुराने दागियों को सौंपी कमान, बीपीएससी अधिकारी भी रडार पर
पूरी परीक्षा व्यवस्था को दागी हाथों में सौंपने की बात भी साबित हुई है। मुंगेर में जिला समन्वयक बनाए गए सुजल कुमार और समीर कुमार पहले भी सिपाही भर्ती परीक्षा में हुई धांधली के मुख्य आरोपियों में शामिल थे, जबकि नालंदा के चंदन कुमार को पूर्व में कदाचार (नकल) के आरोप में परीक्षा से बाहर किया जा चुका था। ऐसे आपराधिक इतिहास वाले लोगों को इतनी बड़ी परीक्षा के प्रबंधन का जिम्मा मिलना एक गंभीर साजिश की ओर इशारा करता है। आर्थिक अपराध इकाई अब इस बात की तह तक जाने में जुटी है कि बीपीएससी (BPSC) के किन अधिकारियों और कर्मचारियों के पास परीक्षा के सुचारू संचालन और इसकी निगरानी की जिम्मेदारी थी। जांच टीम का कहना है कि आयोग के भीतर बैठे जिन भी चेहरों ने लापरवाही बरती या माफिया का साथ दिया, उन्हें चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मेरठ में सीरियाई महिला की मौजूदगी से बढ़ी हलचल, खुफिया एजेंसियां जुटीं जांच में
13 Jun, 2026 10:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के अंतर्गत आने वाले नौचंदी थाना क्षेत्र में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक विदेशी महिला सार्वजनिक स्थान पर लोगों से चंदा और आर्थिक सहायता मांगती हुई नजर आई। महिला को सीरिया का निवासी बताया जा रहा है, जिसकी उम्र 35 वर्ष के आसपास है। विदेशी नागरिक द्वारा इस तरह सरेराह मदद मांगने की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस और खुफिया विभाग की टीमें तुरंत सक्रिय हो गईं और महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
तख्ती पर अंग्रेजी में लिखी थी बेबसी की कहानी
प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह सीरियाई महिला अपने हाथ में अंग्रेजी भाषा में लिखा हुआ एक बड़ा सा बोर्ड (प्लेकार्ड) लेकर राहगीरों से पैसे मांग रही थी। उस तख्ती पर लिखा था कि वह युद्धग्रस्त देश सीरिया की रहने वाली है और इस समय बेहद लाचार है। उसने बोर्ड के जरिए लोगों को बताया कि उसके पति का एक्सीडेंट हो गया है और उनके इलाज के लिए उसे भारी-भरकम रकम की सख्त जरूरत है। सड़क पर विदेशी महिला को इस हाल में देख कुछ प्रबुद्ध नागरिकों ने इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी, जिसके बाद नौचंदी पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को थाने ले आई।
पति के इलाज के लिए दिल्ली आने का किया दावा
महिला सुरक्षाकर्मियों और दुभाषिए (ट्रांसलेटर) की मौजूदगी में हुई शुरुआती पूछताछ में महिला ने अपना नाम फनादी बताया है। उसने सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी दी है कि वह अपने गंभीर रूप से बीमार पति के इलाज के सिलसिले में ही वीजा लेकर भारत आई है। महिला का दावा है कि उसके पति के पैरों में बेहद गंभीर चोटें आई हैं, जिसके चलते वे वर्तमान में देश की राजधानी दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में उपचाराधीन हैं। अस्पताल और दवाइयों का भारी खर्च उठाने में असमर्थ होने के कारण वह आर्थिक मदद जुटाने के मकसद से सड़कों पर उतरी थी।
वीजा शर्तों के उल्लंघन और सुरक्षा पहलुओं पर संयुक्त जांच
थाने में महिला को रखे जाने के बाद स्थानीय पुलिस के साथ-साथ इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) की संयुक्त टीमों ने भी उससे काफी लंबी और बिंदुवार पूछताछ की। जांच अधिकारी फिलहाल उसके पासपोर्ट, यात्रा संबंधी जरूरी दस्तावेजों, भारत आने की वास्तविक तारीख और वीजा के प्रकार की गहनता से स्क्रूटनी कर रहे हैं।
पुलिस के आला अफसरों का कहना है कि शुरुआती तौर पर महिला के पास मेडिकल वीजा होने की बात सामने आई है। हालांकि, कूटनीतिक नियमों और मेडिकल वीजा की शर्तों के तहत किसी भी विदेशी नागरिक को बिना पूर्व सूचना या तय प्रशासनिक अनुमति के एक शहर से दूसरे शहर जाने अथवा सार्वजनिक रूप से धन इकट्ठा करने (फंड रेजिंग) की मनाही होती है। एजेंसियां अब इसी तकनीकी और सुरक्षात्मक पहलू को केंद्र में रखकर अपनी तफ्तीश आगे बढ़ा रही हैं।
इस संवेदनशील मामले पर आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए पुलिस अधीक्षक नगर (SP City) विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि विदेशी महिला को सुरक्षा घेरे में लेकर पूछताछ की जा रही है। उसके दूतावास (एम्बेसी) से भी संपर्क साधकर दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है। पूरी जांच रिपोर्ट सामने आने और वीजा शर्तों के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद ही नियमानुसार अगली कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
बिहार में पुलिस-मुठभेड़, एक बदमाश मारा गया; थानेदार समेत दो जवान घायल
13 Jun, 2026 10:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की राजधानी पटना के मसौढ़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत मनीचक गांव में शुक्रवार की शाम एक अपहृत युवक को छुड़ाने गई पुलिस टीम पर बदमाशों ने अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। इस अचानक हुए हमले में एडिशनल थाना प्रभारी राहुल कुमार के पैर में गोली लगी है, जबकि एएसआई संजय कुमार के हाथ को छूती हुई एक गोली निकल गई। इस जानलेवा हमले के बाद भी पुलिस बल ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए जवाबी फायरिंग की, जिससे घबराकर अपराधी पीछे हटने को मजबूर हो गए। दोनों जख्मी पुलिसकर्मियों को तुरंत इलाज के लिए पटना एम्स में दाखिल कराया गया है, जहां उनकी हालत अब नियंत्रण में बताई जा रही है।
छापेमारी के दौरान मुठभेड़ और इनामी हैदर का खात्मा
पुलिस की ओर से की गई आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई में गिरोह के एक मुख्य शातिर अपराधी को भी गोली लगी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, घायल होने के बाद उसके साथी उसे छुपाकर पहले पुनपुन स्वास्थ्य केंद्र, फिर पीएमसीएच और उसके बाद अन्य निजी अस्पतालों में ले गए, लेकिन आखिरकार दम तोड़ने के कारण उसकी मौत हो गई। मृत अपराधी की शिनाख्त मोहम्मद हैदर के रूप में की गई है, जो मसौढ़ी इलाके का एक पुराना और कुख्यात हिस्ट्रीशीटर था। हैदर पहले भी कत्ल के एक संगीन मामले में जेल की हवा खा चुका था और कुछ ही समय पूर्व जमानत पर जेल से छूटकर बाहर आया था।
मोबाइल सौदे के बहाने जाल बिछाकर किया था किडनैप
अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते बंधक बनाए गए युवक को अपराधियों के चंगुल से पूरी तरह सुरक्षित बचा लिया गया है। मुक्त कराए गए पीड़ित युवक ने पूछताछ में एक बड़े रैकेट का खुलासा करते हुए बताया कि बदमाशों ने उसे एक ऑनलाइन शॉपिंग ऐप के जरिए मोबाइल फोन खरीदने और बेचने के बहाने बात करने के लिए मनीचक गांव बुलाया था। जैसे ही वह तय स्थान पर पहुंचा, वहां पहले से घात लगाए बैठे करीब छह अपराधियों ने उसे हथियारों के बल पर बंधक बना लिया। बदमाशों ने उसके पास मौजूद नकदी लूटने की कोशिश की और विरोध करने पर उसकी हत्या की योजना बना रहे थे, तभी मौके पर पुलिस की टीम पहुंच गई।
फरार बदमाशों की तलाश में पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश
मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) परिचय कुमार ने बताया कि शुक्रवार की शाम करीब 7:30 बजे मुखबिर से पुख्ता इनपुट मिला था कि कुछ अपराधी एक युवक को बंधक बनाकर उसकी जान लेने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही अतिरिक्त थाना प्रभारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित कर मौके पर रवाना की गई थी, जिस पर अपराधियों ने देखते ही गोलियां चलाना शुरू कर दिया था। पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस वारदात में शामिल गिरोह के अन्य सभी सदस्यों की पहचान सुनिश्चित कर ली गई है और फरार आरोपियों को सरगर्मी से तलाशने के लिए पूरे इलाके की नाकेबंदी कर लगातार छापेमारी की जा रही है।
ईद पर मिलने आई थी प्रेमिका, जिद को लेकर हुआ विवाद और चली गई जान
13 Jun, 2026 09:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहाँ मुंबई की रहने वाली एक नर्स की उसके ही प्रेमी ने बेरहमी से हत्या कर दी। शादी का दबाव बनाने से नाराज प्रेमी ने प्रेमिका का गला घोंट दिया और पहचान छिपाने के लिए उसके शव को गन्ने के खेत में गहरे गड्ढे में दफन कर दिया। मुंबई पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ के बाद आरोपी को हिरासत में लिया और उसकी निशानदेही पर शुक्रवार को बिजनौर के मंडावर इलाके से मृतका का शव बरामद कर लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
सैलून में काम के दौरान परवान चढ़ा था प्यार
पुलिस तफ्तीश में सामने आया कि 35 वर्षीय तलाकशुदा नर्स सना, मुंबई के एक अस्पताल में कार्यरत थी। वहीं मंडावर थाना क्षेत्र के ग्राम सैफपुर खादर का रहने वाला 21 वर्षीय फैसल अंसारी मुंबई के जोगेश्वरी वेस्ट इलाके में एक सैलून में काम करता था। इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वे प्रेम संबंधों में आ गए। फैसल से शादी करने की खातिर सना ने अपने पहले पति को तलाक दे दिया था। सना का नौ साल का एक बेटा भी है। उम्र में फैसल से करीब 15 साल बड़ी होने के बावजूद वह उसके साथ अपनी आगे की जिंदगी बिताना चाहती थी, लेकिन फैसल और उसका परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था।
ईद मनाने गांव आया था आरोपी, पीछे-पीछे पहुंच गई प्रेमिका
फैसल कुछ दिन पहले ईद का त्योहार मनाने के लिए बिजनौर अपने पैतृक गांव आया था। उसके पीछे-पीछे 29 मई को सना भी बिजनौर पहुंच गई और फैसल पर साथ रहने व तुरंत निकाह करने का दबाव बनाने लगी। इस बात से पीछा छुड़ाने के लिए फैसल उसे अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर फतेहपुर सभाचंद के जंगलों की तरफ ले गया। वहां सुनसान जगह देखकर उसने सना का गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया और एक किसान के गन्ने के खेत में शव को छिपा दिया। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी वापस मुंबई लौट गया ताकि किसी को शक न हो।
कमरे की चाबी ढुंढवाकर परिजनों को करता रहा गुमराह
उधर, सना से संपर्क न होने पर 2 जून को मुंबई के ओसीवारा थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। सना की बहन शबाना आसिफ शेख ने जब फैसल से सना के बारे में पूछा, तो वह लगातार अनजान बनता रहा। वह पुलिसिया कार्रवाई पर नजर रखने के साथ-साथ सना की बहनों को यह कहकर गुमराह करता रहा कि "कमरे की चाबी ढूंढो, वह चाबी लेकर गई है तो खुद लौट आएगी।"
मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल (CDR) से खुला राज
मुंबई पुलिस ने जब मामले की गहराई से जांच की और दोनों की कॉल डिटेल (CDR) निकाली, तो पता चला कि सना की आखिरी मोबाइल लोकेशन बिजनौर में फैसल के गांव के पास थी। 10 जून को सीडीआर के पुख्ता सबूत मिलने के बाद मुंबई पुलिस ने फैसल को धरदबोचा। पुलिस की सख्ती के आगे फैसल टूट गया और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
शुक्रवार को मुंबई पुलिस की टीम आरोपी फैसल और मृतका की बहन शबाना को लेकर बिजनौर के मंडावर थाने पहुंची। स्थानीय पुलिस और सीओ सिटी अभय प्रताप सिंह की मौजूदगी में कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने गन्ने के खेत में खुदाई कराई गई, जहां से सना का शव बरामद हुआ। फिलहाल दोनों राज्यों की पुलिस कानूनी क्षेत्राधिकार और प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया को पूरा करने में जुटी है।
बिहार में मानसून की रफ्तार तेज, कई इलाकों में बारिश के आसार
13 Jun, 2026 09:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। पूर्णिया के रास्ते बिहार में मानसून की दस्तक तो हो गई है, लेकिन आम जनता को चिलचिलाती गर्मी और उमस से अब तक पूरी राहत नहीं मिल सकी है। राजधानी पटना सहित दक्षिण-पश्चिम बिहार के तमाम जिलों में उमस भरे मौसम ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। इसी बीच, मौसम विज्ञान केंद्र ने कोसी, सीमांचल, मिथिला और अंग प्रदेश के कई जिलों के लिए वर्षा का अलर्ट जारी किया है। विभाग के मुताबिक, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, खगड़िया, भागलपुर, बांका, मुंगेर और जमुई में अनेक स्थानों पर बादल बरसने की उम्मीद है, जबकि उत्तर, मध्य और दक्षिण-पश्चिम बिहार के कुछ हिस्सों में छिटपुट वर्षा दर्ज की जा सकती है।
कोसी और सीमांचल अंचल में मानसूनी बादल पूरी तरह सक्रिय
मौसम विज्ञान केंद्र के बुलेटिन के अनुसार, मानसून ने उत्तर-पश्चिम और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के साथ-साथ बिहार के शेष हिस्सों, ओडिशा और झारखंड के कुछ नए क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढ़ा ली है। इसके प्रभाव से सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, बेगूसराय, खगड़िया, बांका, मुंगेर और लखीसराय जैसे जिलों में मानसूनी हवाएं पूरी तरह प्रभावी हो चुकी हैं। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर अनुकूल परिस्थितियों के चलते यह मानसूनी सिस्टम महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और झारखंड के साथ बिहार के अन्य हिस्सों की तरफ तेजी से आगे बढ़ेगा।
कटिहार के प्राणपुर में रिकॉर्ड 82.8 मिलीमीटर मूसलाधार वर्षा
बीते 24 घंटों के दौरान कटिहार और पूर्णिया प्रमंडल के विस्तृत इलाकों में जोरदार मानसूनी फुहारें पड़ी हैं। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा 82.8 मिलीमीटर पानी कटिहार के प्राणपुर में बरसा, जबकि बरारी में 82.2 मिलीमीटर और धमदाहा में 56.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त आजमनगर, समेली, बरहरा कोठी, बनमनखी, पूर्णिया शहर, किशनगंज और जाले समेत कई अन्य स्थानों पर भी मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई है। इस बीच, विभिन्न शहरों का न्यूनतम तापमान भी दर्ज किया गया, जिसमें वाल्मीकिनगर में 25.0 डिग्री, पटना में 28.5 डिग्री, गया में 27.2 डिग्री, मुजफ्फरपुर में 27.6 डिग्री, भागलपुर व पूर्णिया में 27.1 डिग्री और जीरादेई में सबसे अधिक 31.7 डिग्री सेल्सियस पारा रहा।
राजधानी पटना में 16 और 17 जून से मिलेगी उमस से राहत
पटना वासियों को आगामी पांच दिनों तक उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद कम ही है। 13 से 17 जून के मध्य शहर का अधिकतम तापमान 36 से 38 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। हालांकि, 14 जून को मौसम का मिजाज थोड़ा बदल सकता है और हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन 15 जून को एक बार फिर तीखी धूप निकलने की संभावना है। पटना में मौसम का असल यू-टर्न 16 और 17 जून को देखने को मिलेगा, जब बादलों की आवाजाही बढ़ने के साथ ही गरज-चमक के साथ झमाझम बारिश का दौर शुरू होगा, जिससे तापमान लुढ़क कर 36 डिग्री सेल्सियस तक आ सकता है।
ऊर्जा मंत्री के आरोपों के बाद सरकार सतर्क, बिजली विभाग के साथ होगी चर्चा
13 Jun, 2026 08:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष आशीष कुमार गोयल के बीच उपजा अंदरूनी विवाद अब खुलकर सामने आ गया है, जिससे शक्ति भवन के गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। आगामी 15 जून को मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक को देखते हुए बिजली विभाग के आला अधिकारी ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) और संविदा कर्मचारियों की छंटनी से जुड़ी फाइलों को आनन-फानन में दुरुस्त करने में जुट गए हैं।
ऊर्जा मंत्री ने बिना प्रशासनिक अनुमति के उपभोक्ताओं पर 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार थपने को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने लिखित तौर पर आपत्ति जताई है कि इस संवेदनशील मामले में उनसे किसी भी प्रकार का परामर्श नहीं लिया गया। वहीं, नियामक आयोग ने भी इस मनमानी बढ़ोतरी को नियमों के पूरी तरह खिलाफ बताया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बड़ी बैठक के बाद जनता के भारी विरोध को देखते हुए इस बढ़े हुए सरचार्ज को वापस लेने का निर्णय लिया जा सकता है।
ऊर्जा मंत्री और पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष के बीच छिड़ा शीतयुद्ध
गुरुवार को ऊर्जा विभाग के भीतर चल रही खींचतान उस वक्त सार्वजनिक हो गई जब ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने विभाग के अपर मुख्य सचिव और पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल को एक कड़ा पत्र भेजा। इस पत्र में उन्होंने चेयरमैन पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग में जाति, धर्म और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर अनुभवी व कुशल संविदा कर्मियों को निकाला जा रहा है और अकुशल लोगों की भर्तियां की जा रही हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए लिखा कि बिजली उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ डालने से पहले सरकार को भरोसे में नहीं लिया गया, जिसे दोबारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस पत्र को शासन का अंतिम निर्देश समझा जाए।
राहत: उपभोक्ताओं को बिजली सिक्योरिटी राशि पर मिलेगा 6.50% ब्याज
इस गहमागहमी के बीच सूबे के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। अब उपभोक्ताओं द्वारा विभाग के पास जमा की गई सिक्योरिटी राशि पर 6.50 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलना शुरू हो गया है। पावर कॉरपोरेशन ने अपने मुख्य बिलिंग सॉफ्टवेयर को अपडेट कर दिया है, जिसके तहत ब्याज के पैसों को सीधे उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिलों में घटाकर (समायोजित कर) दिया जा रहा है।
लाभार्थी संख्या: इस नई व्यवस्था से प्रदेश के लगभग 3.73 लाख बिजली उपभोक्ताओं को सीधा फायदा पहुंचेगा।
ब्याज की रकम: उपभोक्ताओं की कुल जमा प्रतिभूति (सिक्योरिटी) राशि लगभग 4,616 करोड़ रुपये है, जिस पर विभाग की ओर से करीब 300 करोड़ रुपये का ब्याज वितरित किया जा रहा है।
सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद शुरू हुआ समायोजन
नियमों के मुताबिक, यह ब्याज राशि हर तीन महीने में बिजली बिल में जुड़ जानी चाहिए थी, लेकिन जून महीने के बिलों में यह छूट दिखाई नहीं दी। इस लापरवाही पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी और तुरंत कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद शुक्रवार को तकनीकी खामियों को दूर कर सॉफ्टवेयर अपडेट किया गया। उपभोक्ता परिषद ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने मौजूदा बिजली बिलों की जांच अवश्य कर लें। जिन उपभोक्ताओं ने जून का बिल पहले ही भर दिया है, उन्हें इस ब्याज का लाभ जुलाई के आगामी बिल में एडजस्ट होकर मिल जाएगा।
प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर अर्जुन मुंडा गंभीर, श्रमायुक्त को भेजा विस्तृत पत्र
12 Jun, 2026 01:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने दूसरे राज्यों में काम करने वाले झारखंड के प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, अधिकारों और संकट के समय फौरन मदद पहुंचाने की लचर प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने राज्य के श्रमायुक्त (लेबर कमिश्नर) को एक विस्तृत और आधिकारिक पत्र लिखकर कई तीखे सवाल पूछे हैं और इस दिशा में एक कारगर नीति बनाने का अनुरोध किया है। 6 जून 2026 को भेजे गए इस पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री ने हाल ही में हुई दो झारखंडी श्रमिकों की असामयिक मौतों का हवाला देते हुए कहा कि इन घटनाओं ने न केवल उनके परिवारों को तबाह कर दिया, बल्कि अन्य राज्यों में पसीना बहा रहे झारखंड के लाखों मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चल रहे सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है।
प्रवासी श्रमिकों की मृत्यु और पार्थिव शरीर लाने में हुई फजीहत
अर्जुन मुंडा ने पत्र में विशेष रूप से खरसावां क्षेत्र के हलुदबनी के रहने वाले विशाल महतो की घटना का जिक्र किया, जो कर्नाटक के बेंगलुरु में एक निजी तकनीक कंपनी में कार्यरत थे और झारखंड वापस आते समय आंध्र प्रदेश के तिरुपति में ट्रेन के भीतर अचानक तबीयत खराब होने से दम तोड़ बैठे। इसी तरह बहरागोड़ा के आसनबनी निवासी कार्तिक मुंडा की भी आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में काम के दौरान असमय मृत्यु हो गई। वरिष्ठ नेता ने आक्रोश जताते हुए कहा कि दुख की इस घड़ी में दोनों मृत श्रमिकों के शवों को उनके पैतृक गांवों तक वापस लाने में परिजनों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं। पीड़ित परिवारों की गुहार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यालय ने व्यक्तिगत स्तर पर दोनों राज्यों के जिला कप्तानों और प्रशासनिक अमले से संपर्क साधा, तब जाकर शवों की ससम्मान वापसी मुमकिन हो सकी। उन्होंने कहा कि यह स्थिति स्पष्ट करती है कि संकटकाल में अपने ही नागरिकों की मदद करने वाला सरकारी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय साबित हो रहा है।
श्रम विभाग के पास डिजिटल डेटाबेस और हेल्पलाइन का अभाव
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सीधे तौर पर झारखंड के श्रम विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जवाब मांगा है। उन्होंने पूछा है कि क्या राज्य सरकार के पास वर्तमान में अन्य प्रदेशों में काम कर रहे झारखंड के प्रवासी कामगारों का कोई प्रामाणिक और अद्यतन (अपडेटेड) डिजिटल डेटाबेस मौजूद है, जिससे यह सटीक जानकारी मिल सके कि कितने श्रमिक किस राज्य की किस कंपनी या ठेकेदार के अधीन कार्यरत हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना के समय संबंधित नियोक्ताओं से तुरंत संपर्क साधा जा सके। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विभाग द्वारा मजदूरों और उनके आश्रितों के लिए कोई 24 घंटे चलने वाली आपातकालीन टोल-फ्री हेल्पलाइन संचालित की जा रही है, क्योंकि ठोस आंकड़ों और प्रभावी हेल्पलाइन के अभाव में दुर्घटना, बीमारी या मृत्यु के समय पीड़ितों तक त्वरित सहायता पहुंचाना नामुमकिन हो जाता है।
मजदूरों के अनिवार्य पंजीकरण और नैतिक जिम्मेदारी की मांग
इस संवेदनशील मुद्दे पर जोर देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए राज्य सरकार को प्रवासी श्रमिकों के लिए एक अनिवार्य पंजीकरण नीति लागू करनी चाहिए। इसके तहत ग्राम पंचायत स्तर पर ही पंजीकरण केंद्र खोलकर एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल तैयार किया जाना चाहिए, साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एक पूर्णकालिक 24×7 टोल-फ्री सहायता केंद्र स्थापित करना बेहद जरूरी है। अर्जुन मुंडा ने श्रमायुक्त से विभाग की वर्तमान तैयारियों, उपलब्ध आंकड़ों और भविष्य की कार्ययोजना का पूरा ब्योरा साझा करने को कहा है। उन्होंने अंत में याद दिलाया कि ये प्रवासी मजदूर राज्य की आर्थिक रीढ़ हैं, इसलिए विपत्ति के समय उनकी सुरक्षा और गरिमा को अक्षुण्ण रखना केवल एक कागजी प्रशासनिक कर्तव्य नहीं है, बल्कि यह चुनी हुई सरकार की सबसे बड़ी नैतिक जवाबदेही भी है।
स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल: डीडीसी ने किया सीएचसी सरायकेला का निरीक्षण
12 Jun, 2026 01:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सरायकेला। उप विकास आयुक्त (डीडीसी) रीना हांसदा ने गुरुवार को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का अचानक दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस औचक निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल में मिलने वाली चिकित्सीय सुविधाओं, जीवन रक्षक दवाओं के स्टॉक, सरकारी दस्तावेजों के रखरखाव, साफ-सफाई की स्थिति और भर्ती मरीजों को दी जा रही भोजन व अन्य जरूरी सेवाओं की गहनता से पड़ताल की। प्रशासनिक प्रमुख के इस औचक दौरे से अस्पताल परिसर में दिनभर हड़कंप का माहौल बना रहा।
बायोमेट्रिक हाजिरी और समयबद्धता के कड़े निर्देश
निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त ने अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सहित ड्यूटी पर मौजूद सभी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को सख्त हिदायत दी कि वे निर्धारित समय पर अस्पताल में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र में स्थापित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का शत-प्रतिशत उपयोग करने का आदेश दिया और साफ कहा कि ड्यूटी से नदारद रहने वाले या लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके साथ ही, उन्होंने मुख्य स्टोर में दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा की और निर्देश दिया कि प्रखंड के अंतर्गत आने वाले सभी उप स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों तक जरूरी दवाइयों की सप्लाई समय पर की जाए ताकि ग्रामीण मरीजों को परेशान न होना पड़े। उन्होंने दवा भंडार पंजी (स्टॉक रजिस्टर) सहित सभी आवश्यक अभिलेखों को रोजाना अपडेट रखने पर भी विशेष बल दिया।
मरीजों से बेहतर व्यवहार और स्वच्छता पर जोर
डीडीसी ने डॉक्टरों और नर्सों को निर्देशित करते हुए कहा कि वे अस्पताल आने वाले पीड़ित मरीजों और उनके परिजनों के प्रति अधिक संवेदनशील, विनम्र और सहयोगात्मक रवैया अपनाएं। अस्पताल में आने वाले हर एक मरीज को बिना किसी देरी के उचित परामर्श, जरूरी पैथोलॉजी जांच और बेहतर इलाज मिलना चाहिए। उन्होंने ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग), जनरल वार्ड और पूरे अस्पताल परिसर में नियमित रूप से साफ-सफाई और कीटाणुशोधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, उन्होंने पीने के पानी, शौचालय और मरीजों के बैठने की उत्तम व्यवस्था करने को कहा ताकि तीमारदारों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रशासनिक निरीक्षण के दौरान डीडीसी ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भी देखी। उन्होंने विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, संस्थागत प्रसव, नियमित टीकाकरण अभियानों तथा विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशनों के जमीनी क्रियान्वयन की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों से कहा कि इन योजनाओं का सीधा लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े पात्र लाभार्थियों तक पहुंचना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में जनस्वास्थ्य से जुड़ी जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएं, क्योंकि प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता हर नागरिक तक सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।
रेलवे में चोरी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, 174 मोबाइल के साथ दो आरोपी दबोचे गए
12 Jun, 2026 10:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साहिबगंज। झारखंड के मालदा रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले बरहरवा रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। रांची से भागलपुर की ओर जा रही वनांचल एक्सप्रेस ट्रेन में सघन चेकिंग अभियान चलाकर आरपीएफ ने 174 पीस चोरी के मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके साथ ही इस अवैध खेप को ले जा रहे दो तस्करों को भी दबोचा गया है। जब्त किए गए सभी स्मार्टफोन की अनुमानित कीमत करीब 58.95 लाख रुपये बताई जा रही है। पकड़े गए दोनों आरोपी पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक इलाके के रहने वाले हैं। आरपीएफ को खुफिया तंत्र से इनपुट मिला था कि ट्रेन संख्या 13403 अप वनांचल एक्सप्रेस के सामान्य डिब्बे में दो यात्री भारी मात्रा में संदिग्ध मोबाइल लेकर सफर कर रहे हैं, जिसके बाद यह त्वरित कार्रवाई की गई।
चलती ट्रेन में घेराबंदी कर दबोचे गए तस्कर
पुख्ता जानकारी मिलते ही आरपीएफ के इंस्पेक्टर के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें सीपीडीएस और आरपीएफ के जवानों को शामिल किया गया। सुरक्षाबलों ने गुमानी स्टेशन से लेकर बरहरवा रेलवे स्टेशन के बीच ट्रेन के भीतर एक व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। इस सघन जांच के दौरान ट्रेन के जनरल कोच में दो युवक बड़े-बड़े पिट्ठू बैग के साथ बेहद संदेहास्पद स्थिति में दिखाई दिए। पुलिस टीम को अपनी तरफ आता देख दोनों घबरा गए और चलती ट्रेन से कूदकर भागने की कोशिश करने लगे। हालांकि, मुस्तैद जवानों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए घेराबंदी कर दोनों को ट्रेन के भीतर ही दबोच लिया। पूछताछ में उनकी पहचान मोहम्मद नासरुद्दीन शेख (28 वर्ष) और मोहम्मद रहमत शेख (23 वर्ष) के रूप में हुई।
बिना वैध कागजात के मिले 58 लाख के स्मार्टफोन
बरहरवा स्टेशन पर ट्रेन रुकने के बाद सुरक्षाबलों ने जब दोनों आरोपियों के बैगों की बारीकी से तलाशी ली, तो उनके भीतर से कुल 174 पुराने और इस्तेमाल किए जा चुके एंड्रॉइत फोन बरामद हुए। इनमें से 85 मोबाइल नासरुद्दीन के पास से और 89 फोन रहमत के बैग से मिले। बाजार में इन फोन्स की कुल कीमत 58,95,878 रुपये आंकी गई है। जब पुलिस ने इनसे इन मोबाइलों की खरीद या मालिकाना हक से जुड़े वैध कागजात मांगे, तो वे कोई भी दस्तावेज या संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की उचित धाराओं के तहत सभी मोबाइलों को जब्त कर लिया गया और दोनों आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए बरहरवा जीआरपी (रेल थाना) के हवाले कर दिया गया।
अंतरराज्यीय मोबाइल चोर सिंडिकेट की आशंका
आरपीएफ और स्थानीय रेल पुलिस के शुरुआती कयासों के अनुसार, यह मामला किसी बड़े अंतरराज्यीय मोबाइल चोर गिरोह से जुड़ा हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि एक संगठित सिंडिकेट अलग-अलग राज्यों और शहरों से लोगों के कीमती मोबाइल फोन चोरी या छिनैती कर इन्हें ठिकाने लगाने का काम करता है। फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियां पकड़े गए दोनों तस्करों से कड़ाई से पूछताछ कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रैकेट का मुख्य सरगना कौन है, इन्हें यह खेप किसने सौंपी थी और इसे आगे कहां बेचा जाना था। जांच पूरी होने के बाद इस पूरे सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों का भी पर्दाफाश होने की उम्मीद है।
सड़क पर कहर: बिहार में हाइवा की टक्कर से बुजुर्ग की मौत, तीन की हालत नाजुक
12 Jun, 2026 09:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की राजधानी से सटे नौबतपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत बादीपुर गांव के मुख्य मार्ग पर गुरुवार की देर रात एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हो गई। एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार हाइवा ने आगे जा रहे ट्रैक्टर को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। यह भिड़ंत इतनी भीषण थी कि ट्रैक्टर के परखच्चे उड़ गए। इस दर्दनाक हादसे में एक बुजुर्ग की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने सड़क जाम कर उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया।
मिली जानकारी के मुताबिक जानीपुर के रहने वाले 65 वर्षीय बुजुर्ग संजीवन राम कुछ अन्य ग्रामीणों के साथ ट्रैक्टर पर सवार होकर नौबतपुर से वापस अपने घर की ओर लौट रहे थे। इसी बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-139 पर बादीपुर गांव के पास पीछे से आ रहे तेज रफ्तार हाइवा ट्रक ने उनके ट्रैक्टर में जोरदार टक्कर मार दी। इस जबरदस्त टक्कर के कारण ट्रैक्टर और उससे जुड़ी ट्रॉली टूटकर अलग-अलग हो गए तथा पूरा वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस हादसे में संजीवन राम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं ट्रैक्टर पर सवार महंगूपुर निवासी सुरेंद्र प्रसाद, मंटू कुमार और उनका एक अन्य रिश्तेदार गंभीर रूप से जख्मी हो गए। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए सभी घायलों को तुरंत इलाज के लिए एम्स पटना भेजा, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
हादसे के बाद ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
दुर्घटना की खबर मिलते ही आस-पास के गांवों के सैकड़ों लोग रात में ही घटना स्थल पर एकत्र हो गए। इस हादसे से नाराज ग्रामीणों ने बादीपुर के पास टायर-ट्यूब जलाकर पटना-नौबतपुर मुख्य मार्ग को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का गंभीर आरोप था कि इस रूट पर चलने वाले भारी वाहनों की रफ्तार पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस का कोई नियंत्रण नहीं है, जिसकी वजह से इस इलाके में आए दिन इस तरह की जानलेवा सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
सड़क जाम से लगा वाहनों का लंबा जाम
ग्रामीणों के इस उग्र प्रदर्शन और चक्का जाम के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों तरफ गाड़ियों की मीलों लंबी कतारें लग गईं। कई घंटों तक इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप रहा, जिससे आम राहगीरों और मुसाफिरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालात बिगड़ते देख प्रशासन तुरंत हरकत में आया और स्थिति को संभालने के लिए नौबतपुर, जानीपुर तथा पिपलामा थानों की पुलिस फोर्स को मौके पर भेजा गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने काफी देर तक आक्रोशित ग्रामीणों को समझाने-बुझाने और शांत करने का प्रयास किया।
चालक फरार, आश्वासन के बाद खुला मार्ग
स्थानीय पुलिस प्रशासन ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बादीपुर के पास हाइवा और ट्रैक्टर के बीच हुई इस भिड़ंत में एक वृद्ध की मौत हुई है और तीन लोग घायल हैं। दुर्घटना को अंजाम देने के बाद हाइवा का चालक अपने वाहन को छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार होने में कामयाब रहा। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त हाइवा को अपने कब्जे में ले लिया है और फरार चालक की तलाश शुरू कर दी है। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को नियमानुसार उचित मुआवजा राशि और हर संभव कानूनी मदद जल्द से जल्द दिलाने का भरोसा दिया। प्रशासन के इस ठोस आश्वासन के बाद ही ग्रामीण शांत हुए और कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद हाईवे पर दोबारा यातायात को बहाल कराया जा सका। पुलिस ने मृतक के शव को पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच की जा रही है।
यात्रियों के लिए जरूरी खबर: बिहार के तीन पुलों पर यातायात रहेगा बंद
12 Jun, 2026 09:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में धीरे-धीरे मानसूनी वर्षा की रफ्तार तेज होने लगी है, जिसके मद्देनजर राज्य के तीन प्रमुख पीपा पुलों (फ्लोटिंग ब्रिज) पर वाहनों के परिचालन को पूरी तरह से रोकने की तैयारी कर ली गई है। आगामी 15 जून की आधी रात से इन तीनों अस्थायी पुलों पर गाड़ियों के प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। गंगा नदी के जलस्तर में हो रही लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से यह अहम कदम उठाया गया है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के पटना-1 कार्य प्रमंडल द्वारा इस संबंध में आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया गया है। जिन पीपा पुलों को बंद किया जा रहा है, उनमें पटना और वैशाली को जोड़ने वाला कच्ची दरगाह-रूस्तमपुर पीपा पुल, ग्यासपुर-कालादियारा पीपा पुल और पटना तथा सारण जिले के बीच संपर्क स्थापित करने वाला दानापुर-पानापुर पीपा पुल शामिल हैं। ये तीनों मार्ग स्थानीय लोगों के दैनिक सफर के लिए लाइफलाइन माने जाते हैं।
बाढ़ और तेज बहाव के खतरे से सुरक्षा की कवायद
गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और पानी की तेज धारा के कारण किसी भी प्रकार के जानमाल के नुकसान या अप्रिय घटना को टालने के लिए 15 जून की मध्यरात्रि से ही इन पुलों को खोलने (हटाने) की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। पीपा पुल पूरी तरह से एक अस्थायी ढांचा होते हैं, जिन्हें केवल शुष्क मौसम में नदी का पानी कम होने पर ही इस्तेमाल में लाया जाता है। हर साल मानसून की दस्तक से पहले इन्हें नदी से बाहर निकाल लिया जाता है, क्योंकि वर्षा ऋतु में नदी के उफान पर होने से इनके बहने या पलटने का गंभीर खतरा बना रहता है। बरसात का मौसम पूरी तरह समाप्त होने और जलस्तर के दोबारा सामान्य होने पर इन पुलों को फिर से स्थापित कर दिया जाएगा।
प्रशासन की अपील और वैकल्पिक मार्गों का चयन
पुलों को हटाए जाने के कारण इन रूटों पर यात्रा करने वाले हजारों लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने आम जनता से विशेष अपील की है कि वे 15 जून के बाद इन मार्गों से यात्रा करने की कोई योजना न बनाएं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए पहले से ही निर्धारित अन्य स्थायी पुलों और वैकल्पिक रास्तों का चुनाव करें ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
सूबे में मानसून का प्रवेश और आगे का पूर्वानुमान
मौसम के ताजा घटनाक्रम की बात करें तो बिहार में किशनगंज और अररिया के रास्ते मानसून ने बुधवार की देर रात दस्तक दे दी है। गुरुवार की शाम तक इसका प्रभाव सुपौल, पूर्णिया, कटिहार और मधेपुरा जैसे सीमावर्ती जिलों तक विस्तृत हो चुका है। पटना मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, वर्तमान में मौसमी परिस्थितियां आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं, जिससे उम्मीद है कि 14 से 15 जून तक मानसून पूरे बिहार को अपनी आगोश में ले लेगा। इसके बाद राज्य के तमाम हिस्सों में हल्की से लेकर भारी बारिश का दौर शुरू होने की प्रबल संभावना है।
ऊर्जा विभाग में घमासान, मंत्री का बयान- गलत छवि बनाने वालों पर कार्रवाई हो
12 Jun, 2026 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजली महकमे में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष (चेयरमैन) डॉ. आशीष कुमार गोयल को एक बेहद सख्त पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान जहां एक तरफ कई बिजली कर्मचारियों ने पूरी ईमानदारी से काम किया, वहीं कुछ लापरवाह कर्मियों ने सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश की। उन्होंने ऐसे दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और मौजूदा ट्रांसफर सीजन में उनका उचित तबादला कर पूरी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
संकट के समय मुख्यालय छोड़ने पर मंत्री ने जताई कड़ी आपत्ति
ऊर्जा मंत्री ने पत्र के जरिए चेयरमैन के रवैये पर भी गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने लिखा कि मई के महीने में आए आंधी-तूफान की वजह से राज्य का बिजली ढांचा बुरी तरह चरमरा गया था। इस बेहद चुनौतीपूर्ण समय में 30 मई को बुलाई गई समीक्षा बैठक के दौरान पता चला कि चेयरमैन खुद मुख्यालय से नदारद हैं और आगे भी तीन दिनों तक बाहर रहने वाले हैं। काफी कहने के बाद वे ऑनलाइन बैठक में शामिल हुए। मंत्री ने इसे जनहित के खिलाफ और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बताते हुए कहा कि भविष्य में मुख्यालय छोड़ने से पहले उन्हें अनिवार्य रूप से सूचित किया जाए।
उपभोक्ता परिषद की मांग: मनमाने फैसलों पर लगे लगाम, सीएम योगी करें हस्तक्षेप
इस पूरे विवाद के बीच राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने जून महीने से लागू की गई 10 फीसदी ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) शुल्क की वसूली पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन खुद विभागीय मंत्री और नियामक आयोग की बातों को नजरअंदाज कर रहा है, तो वह किसकी सुनेगा? वर्मा ने इस गंभीर संकट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तुरंत दखल देने की अपील की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नियामक आयोग पहले ही जून में इस शुल्क को लगाने को गैरकानूनी घोषित कर चुका है। इसके बावजूद कॉर्पोरेशन ने इसे लागू कर दिया, जिसकी भनक खुद ऊर्जा मंत्री को सोशल मीडिया के जरिए लगी। वर्मा ने आरोप लगाया कि पावर कॉर्पोरेशन में लगातार मनमाने ढंग से फैसले लिए जा रहे हैं, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।
तीन साल पुराने वादे पूरे न होने से बिजली कर्मचारियों में भारी आक्रोश
इधर, लखनऊ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने भी अपनी मांगों को लेकर पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल को एक ज्ञापन सौंपा है। समिति ने मार्च 2023 में हुए बिजली आंदोलन के दौरान कर्मचारियों पर की गई सभी दंडात्मक और दमनकारी कार्रवाइयों को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि ऊर्जा मंत्री की ओर से तीन साल पहले दिए गए निर्देशों पर भी कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने अब तक कोई अमल नहीं किया है, जिससे बिजली कर्मियों में भारी असंतोष है। ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद, दीपक चक्रवर्ती, सरजू त्रिवेदी, केएस रावत और आरसी पाल सहित कई पदाधिकारी शामिल रहे।
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