उत्तर प्रदेश
30 लाख में MBBS सीट दिलाने का खेल पकड़ा गया, चार आरोपी गिरफ्तार
14 May, 2026 04:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में धांधली करने और एमबीबीएस की सीट दिलाने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया है, जिसमें कथित मास्टरमाइंड और एक डॉक्टर समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
नीट परीक्षा से ठीक पहले बड़े गिरोह का भंडाफोड़
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक गुप्त सूचना और तकनीकी निगरानी के आधार पर कार्रवाई करते हुए नीट अभ्यर्थियों के साथ धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के मुख्य सरगना संतोष कुमार जायसवाल और उसके तीन अन्य साथियों को दबोच लिया है। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह छात्रों और उनके अभिभावकों को मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने का लालच देकर अपना शिकार बनाता था। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गाजियाबाद और दिल्ली के विभिन्न इलाकों से करीब 18 छात्रों को आरोपियों के चंगुल से मुक्त कराया है, जिन्हें कथित तौर पर प्रश्न पत्र मुहैया कराने के बहाने अज्ञात स्थानों पर रखा गया था।
फर्जी प्रश्न पत्र और वसूली का काला कारोबार
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि आरोपी पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों और विभिन्न कोचिंग संस्थानों के नोट्स को मिलाकर एक फर्जी प्रश्न पत्र तैयार करते थे ताकि छात्रों को गुमराह किया जा सके। इस काम के लिए गिरोह के सदस्य प्रत्येक परिवार से 20 से 30 लाख रुपये की मोटी रकम मांगते थे और गारंटी के तौर पर उनसे 10वीं व 12वीं की मूल मार्कशीट के साथ-साथ हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक भी ले लेते थे। पुलिस ने छापेमारी के दौरान प्रश्न-उत्तर सामग्री के लगभग 149 पन्ने और कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद किए हैं जो आरोपियों की संलिप्तता को पुख्ता करते हैं।
संगठित तरीके से अंजाम दी जाती थी ठगी
पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह का प्रत्येक सदस्य एक निर्धारित भूमिका निभाता था ताकि पूरा नेटवर्क बिना किसी बाधा के संचालित हो सके। मास्टरमाइंड संतोष जायसवाल जहां पूरी साजिश का मुख्य संचालक था, वहीं गिरफ्तार किया गया डॉक्टर अखलाक आलम कथित फर्जी प्रश्न पत्र तैयार करने का विशेषज्ञ था। गिरोह के अन्य सदस्य जैसे संत प्रताप सिंह छात्रों के ठहरने और आवास की व्यवस्था देखता था, जबकि विनोद भाई पटेल का काम गुजरात जैसे राज्यों से जरूरतमंद परिवारों को ढूंढकर उन्हें गिरोह के जाल में फंसाना था।
सूरत पुलिस की सूचना और सफल पुलिसिया कार्रवाई
इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत सूरत पुलिस से मिली एक गोपनीय जानकारी के बाद हुई, जिसमें दिल्ली के महिपालपुर इलाके में संदिग्ध गतिविधियों की बात कही गई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने होटलों और संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गाजियाबाद के एक फ्लैट तक पहुंची। पुलिस ने सभी बरामद छात्रों को काउंसलिंग के बाद परीक्षा में बैठने की अनुमति दी ताकि उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो। फिलहाल पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और इस नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों की तलाश जारी है।
मंदिर में प्रेम की मूरत, 60 की उम्र में प्यार ने जीता दिल
14 May, 2026 04:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कटिहार: बिहार के कटिहार जिले में प्रेम की एक ऐसी अनोखी मिसाल सामने आई है जहां उम्र की तमाम बंदिशों को किनारे रखते हुए एक बुजुर्ग जोड़े ने मंदिर में एक-दूसरे का हाथ थाम लिया और हमेशा के लिए एक-दूजे के हो गए।
सामाजिक चर्चाओं के बीच परवान चढ़ी प्रेम कहानी
मनिहारी प्रखंड की बाघमारा पंचायत में साठ साल के एक बुजुर्ग और उनकी प्रेमिका के बीच के रिश्ते को लेकर पिछले काफी समय से गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म था। जब समाज में इस प्रेम प्रसंग को लेकर बातें अधिक होने लगीं, तो मामले को सुलझाने के लिए पंचायत बुलाई गई ताकि किसी विवाद की स्थिति से बचा जा सके। ग्रामीणों और पंचायत सदस्यों ने दोनों को समझाने और सामाजिक मान्यताओं का हवाला देने की कोशिश की, लेकिन प्रेमी जोड़ा अपने फैसले पर पूरी तरह अडिग रहा और उन्होंने समाज के सामने अपने रिश्ते को स्वीकार करने की इच्छा जताई।
पंचायत की सहमति और मंदिर में संपन्न हुआ विवाह
काफी देर तक चली गहमागहमी और आपसी बातचीत के बाद पंचायत ने दोनों के अटूट प्रेम को देखते हुए विवाद खत्म करने का रास्ता निकाला। सामाजिक सहमति और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से पंचायत ने दोनों की शादी कराने का निर्णय लिया, जिसके बाद गांव के ही एक मंदिर में पूरे विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न कराया गया। बुजुर्ग दूल्हे ने जब अपनी प्रेमिका की मांग में सिंदूर भरा, तो वहां मौजूद ग्रामीणों ने तालियां बजाकर इस जोड़े का स्वागत किया और उन्हें नए जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई अनोखी शादी की तस्वीरें
इस विवाह का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रही हैं, जिसे देखकर लोग हैरान भी हैं और तरह-तरह की दिलचस्प प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं। इंटरनेट पर लोग इस घटना को सच्चे प्यार की जीत बता रहे हैं, तो कुछ लोग इतनी अधिक उम्र में शादी के फैसले को लेकर अचंभित नजर आ रहे हैं। यह वीडियो अब केवल मनिहारी प्रखंड ही नहीं, बल्कि पूरे कटिहार जिले में कौतूहल का विषय बन गया है और लोग इस जोड़े के साहस की चर्चा कर रहे हैं।
समाज के लिए मिसाल और चर्चा का केंद्र
कटिहार में हुई इस शादी ने यह संदेश दिया है कि प्रेम के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती और यदि इरादे सच्चे हों तो समाज भी अंततः अपनी स्वीकृति दे ही देता है। मंदिर परिसर में मौजूद चश्मदीदों का कहना है कि यह शादी इलाके में लंबे समय तक याद रखी जाएगी क्योंकि इसमें किसी प्रकार का कोई दिखावा नहीं बल्कि केवल आपसी विश्वास और समर्पण दिखाई दिया। वर्तमान में यह पूरी घटना बाघमारा पंचायत के आसपास के गांवों में चर्चा का मुख्य केंद्र बनी हुई है।
दरभंगा में अधिकारियों ने दी CISF गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सम्मान
14 May, 2026 12:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दरभंगा: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी गुरुवार को मिथिलांचल की धरती दरभंगा पहुंचे, जहाँ एयरपोर्ट पर उनका भव्य और पारंपरिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर, विधायक डॉ. मुरारी मोहन और जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री को पाग, चादर और मखाने की माला पहनाकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री का यह दौरा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की समीक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एयरपोर्ट सुरक्षा और सीआईएसएफ को कमान
दरभंगा एयरपोर्ट पहुंचने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वहां की वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत जायजा लिया। उन्होंने हवाई अड्डे की सुरक्षा को और अधिक चाक-चौबंद बनाने के उद्देश्य से इसकी जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों को सौंपे जाने के विषय पर उच्चाधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। इस दौरान सीआईएसएफ की एक टुकड़ी ने मुख्यमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया, जिसके बाद उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यात्रियों की सुरक्षा और हवाई अड्डे की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए।
विकास परियोजनाओं और एम्स निर्माण की प्रगति
मुख्यमंत्री के इस दौरे का मुख्य केंद्र दरभंगा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन और बहुप्रतीक्षित एम्स (AIIMS) के निर्माण कार्य की समीक्षा करना था। उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों से निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली और स्पष्ट किया कि इन परियोजनाओं का समय पर पूरा होना पूरे उत्तर बिहार के विकास के लिए आवश्यक है। सम्राट चौधरी ने जोर देकर कहा कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता से समझौता किए बिना तय समय सीमा के भीतर सभी तकनीकी बाधाओं को दूर किया जाए ताकि आम जनता को जल्द से जल्द बेहतर स्वास्थ्य और हवाई सेवाएं मिल सकें।
पारंपरिक उद्घाटन और जनप्रतिनिधियों का संवाद
एयरपोर्ट की समीक्षा के पश्चात मुख्यमंत्री ने आयोजित कार्यक्रम में दीप प्रज्वलित कर औपचारिक रूप से समारोह की शुरुआत की। इस दौरान भाजपा और जेडीयू के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कई प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे, जिनसे मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की अन्य स्थानीय समस्याओं और विकास कार्यों पर चर्चा की। उन्होंने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि मिथिला क्षेत्र का समग्र विकास उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है और दरभंगा को एक प्रमुख आर्थिक व स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
सिस्टम की लापरवाही या बदहाल ट्रैफिक? एंबुलेंस में गई मरीज की जान
14 May, 2026 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कानपुर: शहर का जाम बना काल, एंबुलेंस में फंसे बुजुर्ग ने तोड़ा दम, लंदन से बेटे को भेजा गया डेथ सर्टिफिकेट
कानपुर। औद्योगिक नगरी कानपुर की यातायात व्यवस्था अब आम जनमानस के लिए जानलेवा साबित होने लगी है। बुधवार को साकेत नगर निवासी एक बुजुर्ग को दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन शहर के प्रमुख चौराहों पर लगे भीषण जाम ने समय पर इलाज नहीं मिलने दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।
38 मिनट तक जाम में जूझती रही एंबुलेंस
साकेत नगर सब्जी मंडी के रहने वाले रामचंद्र शुक्ला (74) को दोपहर करीब 12 बजे हार्ट अटैक आया। उनके दामाद अनिल त्रिपाठी उन्हें निजी एंबुलेंस से कार्डियोलॉजी अस्पताल ले जाने के लिए निकले। एंबुलेंस को गोविंदपुरी पुल, फजलगंज और मरियमपुर जैसे इलाकों में भारी जाम का सामना करना पड़ा। महज कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में एंबुलेंस को 38 मिनट लग गए। जब तक वे अस्पताल पहुंचे, डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
लंदन में बेटे को वीजा के लिए मेल किया मृत्यु प्रमाण पत्र
मृतक का बड़ा बेटा अभिषेक शुक्ला लंदन में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। पिता के निधन की खबर सुनकर वह बदहवास हो गया। वीजा संबंधी दिक्कतों के कारण उसे तुरंत छुट्टी मिलने में परेशानी हो रही थी, जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल से प्राप्त डेथ सर्टिफिकेट उसे मेल किया। इसके बाद उसे भारत आने की अनुमति मिल सकी। छोटा बेटा रितेश भी नोएडा से कानपुर के लिए रवाना हो गया है। दोनों बेटों के आने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा।
कानपुर में 'ट्रैफिक जाम' से मौतों का सिलसिला
यह पहली बार नहीं है जब कानपुर के जाम ने किसी की जान ली हो। पिछले कुछ समय में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं:
सितंबर 2025: हैलट पुल के पास जाम में फंसकर कौशांबी के रामदयाल और शुक्लागंज के मुन्ना की मौत हुई।
अगस्त 2025: शास्त्री चौक पर जाम के कारण दबौली की बरखा गुप्ता ने दम तोड़ दिया।
मेट्रो निर्माण: कल्याणपुर और हमीरपुर हाईवे पर मेट्रो कार्य के चलते लगे जाम में एक गर्भवती महिला के नवजात और एक घायल व्यक्ति की जान जा चुकी है।
अन्य हादसे: रामादेवी और गोविंदपुरी ब्रिज पर भी ट्रैफिक के कारण एंबुलेंस फंसने से कई लोग समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सके।
स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के मोबाइल पर पहुंचने लगे पोस्टपेड संदेश
14 May, 2026 10:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ: मध्यांचल के 19 जिलों में अब पोस्टपेड हुए स्मार्ट मीटर, 10 जून तक आएगा बिल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने अपने कार्यक्षेत्र में आने वाले 19 जिलों के करीब 18.67 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को वापस पोस्टपेड मोड पर शिफ्ट कर दिया है। विभाग ने इस बदलाव की प्रक्रिया पूरी कर ली है और अब उपभोक्ताओं को उनके मोबाइल पर बिल के संदेश भी प्राप्त होने लगे हैं।
इन जिलों के उपभोक्ताओं पर होगा असर
मध्यांचल निगम के अंतर्गत आने वाले लखनऊ, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर, बाराबंकी, अयोध्या, बहराइच, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर, अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, अमेठी, बरेली, शाहजहांपुर, बदायूं और पीलीभीत के स्मार्ट मीटर उपभोक्ता अब पोस्टपेड व्यवस्था के दायरे में आ गए हैं। निगम के निदेशक (वाणिज्य) रजत जुनेजा ने बताया कि भेजे जा रहे संदेशों में उपभोक्ता की बैलेंस राशि का भी विवरण दिया जा रहा है।
हर महीने की 10 तारीख तक मिल जाएगा बिल
पॉवर कॉर्पोरेशन के नए निर्देशों के अनुसार, मई महीने की बिजली खपत का बिल उपभोक्ताओं को 10 जून तक उनके मोबाइल और व्हाट्सएप पर भेज दिया जाएगा। उपभोक्ता 'स्मार्ट ऐप' के माध्यम से अपना विस्तृत बिल डाउनलोड कर सकेंगे। भविष्य में भी हर माह की 10 तारीख तक बिल सीधे उपभोक्ता के मोबाइल पर भेजने की व्यवस्था की गई है।
स्मार्ट मीटरों की जांच पर उठा विवाद
एक तरफ जहाँ मीटरों का मोड बदला जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की गुणवत्ता जांचने वाली समिति पर सवाल खड़े किए हैं। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि मध्यांचल निगम की जिस लैब में 24 स्मार्ट मीटरों की जांच की गई, वह केवल साधारण मीटरों (IS 14697 व 13779) की जांच के लिए ही मान्यता प्राप्त है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के लिए IS 16444 मानक अनिवार्य है, जिसकी 'क्रिटिकल' जांच करने के लिए मध्यांचल की प्रयोगशाला अधिकृत नहीं है। परिषद ने आरोप लगाया है कि बिना मानक वाली लैब से रिपोर्ट तैयार करना नियमों के विरुद्ध है, क्योंकि स्मार्ट मीटरों की संचार क्षमता और तकनीकी बारीकियों की जांच विशेष लैब में ही संभव है।
गोरखपुर के छात्रों ने CBSE रिजल्ट में लगाए अंकों की झड़ी
14 May, 2026 10:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गोरखपुर: सीबीएसई 12वीं के नतीजों में चमके मेधावी, संस्कृति और अभिनंदनेश ने जिले में मारी बाजी
गोरखपुर। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा बुधवार को इंटरमीडिएट के परीक्षा परिणाम घोषित किए जाते ही 'गोरक्षनगरी' के शैक्षणिक संस्थानों और घरों में उत्सव जैसा माहौल बन गया। दोपहर करीब दो बजे जैसे ही बोर्ड ने नतीजे ऑनलाइन जारी किए, छात्र-छात्राओं में अपना स्कोर देखने की होड़ मच गई।
शानदार प्रदर्शन: जिले के टॉपर्स ने गाड़े सफलता के झंडे
इस वर्ष भी गोरखपुर के छात्र-छात्राओं ने अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। आरपीएम एकेडमी की संस्कृति गुप्ता और क्रिस किंजल स्कूल के अभिनंदनेश ने 98.4 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में संयुक्त रूप से शीर्ष स्थान प्राप्त किया। इनके अलावा आरपीएम एकेडमी की ही उज्ज्वला कुमारी यादव ने 97.8% और निहाल मौर्या ने 97.4% अंक पाकर अपनी प्रतिभा साबित की।
ऐसा रहा जिले का रिपोर्ट कार्ड
आंकड़ों के मुताबिक, इस साल गोरखपुर जिले से सीबीएसई 12वीं की परीक्षा के लिए करीब 11 हजार छात्र पंजीकृत थे, जिनमें से 8500 छात्र परीक्षा में शामिल हुए। इस बार जिले का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 78% रहा, जो पिछले वर्ष के 80% के मुकाबले थोड़ा कम है।
मेधावियों के सफलता मंत्र: लक्ष्य पर रहा ध्यान
अभिनंदनेश अशेष उमर (98.4%): तारामंडल निवासी अभिनंदनेश के पिता शिक्षक और मां गृहिणी हैं। उन्होंने किताबों को ही अपना मित्र बनाया और अब डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं। फिलहाल वे 'नीट' (NEET) की तैयारी में जुटे हैं।
संस्कृति गुप्ता (98.4%): दाउदपुर की रहने वाली संस्कृति ने अपनी सफलता के लिए सोशल मीडिया से दूरी को अहम बताया। व्यवसायी पिता की पुत्री संस्कृति का सपना अब प्रशासनिक सेवा (UPSC) में जाकर देश सेवा करने का है।
उज्ज्वला कुमारी यादव (97.8%): सूरजकुंड निवासी उज्ज्वला ने टाइम टेबल और अनुशासन को अपनी कामयाबी का आधार बताया। उनके पिता स्कूल प्रिंसिपल हैं। उज्ज्वला भी भविष्य में सिविल सर्विस में करियर बनाना चाहती हैं।
खुशी और मिठाई का दौर
परिणाम आने के बाद स्कूलों में शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं का मुंह मीठा कराया और उनके उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। वहीं घरों पर भी बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। अभिभावकों ने बच्चों की इस उपलब्धि का श्रेय उनकी कड़ी मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल, काफिले में बड़ी कटौती
14 May, 2026 09:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ: ईंधन बचत की मुहिम—सीएम योगी ने अपने काफिले की गाड़ियां आधी कीं, मंत्रियों ने भी बढ़ाया कदम
लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और ईंधन की कीमतों के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई बचत की अपील का उत्तर प्रदेश में व्यापक असर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं पहल करते हुए अपने सुरक्षा काफिले में शामिल सरकारी वाहनों की संख्या में 50 प्रतिशत तक की कमी कर दी है। मुख्यमंत्री के इस अनुकरणीय कदम के बाद प्रदेश के कई मंत्रियों ने भी अपने काफिले छोटे करने शुरू कर दिए हैं।
मंत्रियों ने छोड़ीं एस्कॉर्ट गाड़ियां
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपने काफिले के वाहनों को आधा करते हुए कहा कि राष्ट्रहित में प्रधानमंत्री की अपील का अक्षरश: पालन किया जाएगा। उनके साथ ही आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने भी अपनी फ्लीट के वाहनों की संख्या घटाकर आधी कर दी है। राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल और दिनेश खटीक ने अपनी एस्कॉर्ट गाड़ियां विभाग को वापस कर दी हैं।
अन्य मंत्रियों ने भी इस अभियान में उत्साह दिखाया है:
रवींद्र जायसवाल (स्टांप मंत्री): अब केवल एक एस्कॉर्ट वाहन का उपयोग करेंगे।
संजय गंगवार (गन्ना विकास मंत्री): इन्होंने मिसाल पेश करते हुए फ्लीट की सभी गाड़ियां लौटा दी हैं और अब केवल एक वाहन से सफर करेंगे।
जयवीर सिंह (पर्यटन मंत्री): खुद के काफिले में कटौती के साथ अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे वर्चुअल मीटिंग्स को प्राथमिकता दें ताकि आवाजाही में ईंधन कम खर्च हो।
विधानसभा समितियों के दौरे रद्द
ईंधन संरक्षण के इस अभियान को सख्ती से लागू करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने बड़ा फैसला लिया है। विधानसभा की विभिन्न संसदीय समितियों के पहले से तय अध्ययन दौरों (स्टडी टूर) को अगले आदेश तक रोक दिया गया है।
दो महीने की गर्भवती महिला की रहस्यमयी मौत, मां ने उठाया हत्या का सवाल
14 May, 2026 09:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फरपुर: जिले के बोचहा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मझौली गांव में एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मृतका की पहचान उन्नीस वर्षीय निशा कुमारी के रूप में हुई है, जिसकी शादी कुछ समय पूर्व ही संतोष कुमार के साथ संपन्न हुई थी। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए शव को अपने कब्जे में लिया और गहन जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया है, जबकि इस दुखद घटना के बाद से ही मृतका के मायके में शोक की लहर व्याप्त है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
दहेज की वेदी पर चढ़ी एक और मासूम जान
निशा की मां ने ससुराल पक्ष पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि शादी के बाद से ही उनकी बेटी को निरंतर मानसिक और शारीरिक यातनाएं दी जा रही थीं। परिजनों का दावा है कि ससुराल के लोग दहेज के रूप में एक मोटरसाइकिल की मांग पर अड़े हुए थे और मांग पूरी न होने के कारण अक्सर घर में विवाद की स्थिति बनी रहती थी। मृतका के मायके वालों का कहना है कि उन्होंने अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कुछ समय की मोहलत मांगी थी, परंतु ससुराल पक्ष ने उनकी एक न सुनी और प्रताड़ना का दौर जारी रखा।
गर्भवती होने के बावजूद बेरहमी और प्रताड़ना
इस पूरे मामले में सबसे हृदयविदारक पहलू यह है कि मृतका दो महीने की गर्भवती थी, लेकिन इसके बावजूद उसके प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूति नहीं दिखाई गई। मृतका की मां ने सीधे तौर पर दामाद और देवर पर मारपीट और उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उनका मानना है कि यह आत्महत्या का मामला नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है, जिसे अब आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी बेटी को प्रताड़ित करने वाले दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्यवाही की जाए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिसिया तफ्तीश पर टिकी निगाहें
बोचहा थाना प्रभारी ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर विस्तृत छानबीन कर रही है। हालांकि शुरुआती जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन वास्तविकता का पता पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिजनों की ओर से औपचारिक लिखित शिकायत मिलते ही संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर अग्रिम विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
19 जनवरी को अपर्णा से तलाक की घोषणा, फिर चर्चा में आए प्रतीक
14 May, 2026 08:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ: मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का आकस्मिक निधन, घर में मिले अचेत
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के संरक्षक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव (38) का बुधवार तड़के निधन हो गया। जानकारी के अनुसार, प्रतीक अपने विक्रमादित्य मार्ग स्थित निवास के रसोईघर में सुबह करीब 4 बजे बेहोश पाए गए थे। कर्मचारी द्वारा सूचना दिए जाने पर डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम में हुआ मौत की वजह का खुलासा
प्रतीक यादव, उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति थे। केजीएमयू में किए गए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी मृत्यु का कारण हृदय गति रुकना (हार्ट फेलियर) और फेफड़ों में रक्त का थक्का जमना बताया गया है। डॉक्टरों ने गहन जांच के लिए विसरा और हृदय को सुरक्षित रखा है। रिपोर्ट में उनके शरीर पर कुछ पुराने चोट के निशान भी मिले हैं, जिन्हें पुलिस ने गंभीर नहीं माना है।
मुंबई से लखनऊ पहुंचीं अपर्णा यादव, सीएम ने जताया शोक
घटना के समय अपर्णा यादव मुंबई में थीं, जो खबर मिलते ही दोपहर में लखनऊ पहुंचीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके आवास पर जाकर शोक संवेदना व्यक्त की। वहीं, छोटे भाई के निधन की सूचना मिलते ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। उन्होंने प्रतीक को सरल स्वभाव का और स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने वाला व्यक्ति बताया।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब
विक्रमादित्य मार्ग पर सुबह से ही समर्थकों और करीबियों की भारी भीड़ जमा रही। दोपहर में जब पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया। लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल और महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान समेत कई बड़े नेताओं ने परिवार को ढांढस बंधाया। सुरक्षा की दृष्टि से आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
विवादों से दूर, फिर भी चर्चा में रहे प्रतीक
राजनीति से दूरी बनाए रखने के बावजूद प्रतीक यादव अक्सर सुर्खियों में रहते थे। साल 2011 में अपर्णा यादव से विवाह के बाद से ही वे चर्चा का केंद्र रहे। हालांकि, हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर उनके और अपर्णा के बीच अनबन और तलाक की खबरों ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं, जिस पर बाद में प्रतीक ने खुद ही विराम लगा दिया था।
एक साथ तीन थानेदार सस्पेंड, पुलिस विभाग में सख्ती बढ़ी
14 May, 2026 07:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मधेपुरा: जिले के पुलिस कप्तान संदीप सिंह ने कानून व्यवस्था और जनसुनवाई में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। कर्तव्य के प्रति उदासीनता और आम जनता की शिकायतों को नजरअंदाज करने के आरोपों के चलते एसपी ने तीन थानों के प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पुलिस अधीक्षक की इस सख्त कार्यवाही का मुख्य उद्देश्य जिले में पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और आम जनता के प्रति संवेदनशील बनाना है, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके और अपराधियों के मन में कानून का भय बना रहे।
लापरवाह थानाध्यक्षों पर अनुशासन का डंडा
निलंबन की इस कार्यवाही की चपेट में भर्राही, बिहारीगंज और पुरैनी थानों के अध्यक्ष आए हैं, जिन्हें तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इन अधिकारियों के विरुद्ध लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि वे थानों में आने वाले फरियादियों के साथ न केवल उदासीन व्यवहार करते हैं, बल्कि गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज करने में भी अनावश्यक टालमटोल की जाती है। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जब जिला पुलिस के वरीय अधिकारियों से जांच कराई गई, तो इन थानाध्यक्षों की कार्यशैली में भारी कमियां और अपराध नियंत्रण में ढिलाई की पुष्टि हुई, जिसके परिणाम स्वरूप यह निलंबन आदेश जारी हुआ।
आपराधिक मामलों में शिथिलता और जांच की पुष्टि
तीनों निलंबित अधिकारियों के विरुद्ध विशिष्ट मामलों में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं, जिनमें चेन स्नेचिंग, लूट और बैंक डकैती जैसे संगीन अपराधों के प्रति उनकी संवेदनहीनता उजागर हुई है। बिहारीगंज के पूर्व थानाध्यक्ष पर जहां प्राथमिकी दर्ज करने में देरी का दोष सिद्ध हुआ है, वहीं पुरैनी थानाध्यक्ष पर एक व्यवसायी के साथ हुई लूट के मामले में बयान तक दर्ज न करने का गंभीर आरोप लगा है। इसी तरह भर्राही थानाध्यक्ष की कार्यप्रणाली भी बैंक लूट जैसी वारदातों के बाद अपेक्षित सक्रियता न दिखाने के कारण कटघरे में रही। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि इन अधिकारियों ने अपराध रोकने और अपराधियों को पकड़ने की दिशा में पुलिस नियमावली के अनुरूप तत्परता नहीं दिखाई।
पुलिस महकमे को स्पष्ट संदेश और वैकल्पिक व्यवस्था
एसपी संदीप सिंह ने इस कार्यवाही के माध्यम से जिले के समस्त पुलिस बल को यह कड़ा संदेश दिया है कि अपराध नियंत्रण में किसी भी स्तर की कोताही सहन नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि थानों में आने वाले हर पीड़ित की बात गंभीरता से सुनी जानी चाहिए और कानून के दायरे में त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। वर्तमान में इन तीनों थानों का कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए जिम्मेदारी अपर थानाध्यक्षों को सौंप दी गई है, जबकि नए और नियमित थानाध्यक्षों की तैनाती के लिए चयन प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है ताकि क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।
नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा की राह देखी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं
14 May, 2026 07:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: बिहार की सियासत में पिछले एक महीने के भीतर आए भूचाल ने राजनीतिक पंडितों और नीतीश कुमार को दशकों से जानने वाले करीबियों को भी हैरत में डाल दिया है। किसी ने कल्पना नहीं की थी कि 'परिवारवाद' के धुर विरोधी रहे नीतीश कुमार इतनी नाटकीयता के साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी त्याग देंगे और अपने बेटे निशांत कुमार के राजनीतिक राजतिलक के साक्षी बनेंगे। 14 अप्रैल को उनके इस्तीफे के साथ ही अप्रत्याशित घटनाक्रमों का जो सिलसिला शुरू हुआ, उसने जेडीयू के भीतर और बाहर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जहाँ अब मुख्य चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि राज्यसभा जाने के फैसले के बदले क्या भाजपा नेतृत्व के साथ किसी विशेष सम्मानजनक पद को लेकर कोई गुप्त समझौता हुआ है।
सत्ता त्याग और राजनीतिक विरासत का हस्तांतरण
नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना महज एक प्रशासनिक निर्णय नहीं था, बल्कि इसे उनकी राजनीतिक विरासत के हस्तांतरण के रूप में देखा जा रहा है। आश्चर्यजनक यह रहा कि तीन सदनों के सदस्य रह चुके नीतीश ने अचानक राज्यसभा जाने की इच्छा जताई और जब तक विधान परिषद से इस्तीफे की अंतिम तारीख नहीं आई, उन्होंने सस्पेंस बनाए रखा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने बहुत ही सधे हुए तरीके से खुद को पृष्ठभूमि में धकेला ताकि उनके पुत्र निशांत कुमार के लिए कैबिनेट में जगह और पार्टी में सक्रिय भूमिका का मार्ग प्रशस्त हो सके। बेटे के शपथ ग्रहण समारोह में उनकी उपस्थिति ने उस हिचक को भी समाप्त कर दिया जो दशकों तक उनकी छवि का हिस्सा रही थी।
उपमुख्यमंत्री की मांग और भविष्य की कूटनीति
जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने और राज्यसभा की ओर रुख करने का ऐलान किया था, तब जदयू खेमे के भीतर उन्हें देश का उप-प्रधानमंत्री बनाए जाने की मांग ने काफी जोर पकड़ा था। हालांकि वर्तमान में यह मांग सार्वजनिक रूप से भले ही शांत नजर आ रही हो, लेकिन पार्टी के पुराने वफादार अब भी इस उम्मीद में हैं कि केंद्र सरकार में उन्हें कोई अत्यंत प्रभावशाली पोर्टफोलियो या सम्मानजनक ओहदा दिया जाएगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के पीछे जो 'डील' चर्चा में थी, उसका खुलासा आने वाले समय में होगा क्योंकि नीतीश कुमार जैसे कद्दावर नेता को सक्रिय राजनीति से पूरी तरह अलग समझना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है।
दिल्ली की राजनीति और भाजपा की रणनीति
राष्ट्रीय स्तर पर नीतीश कुमार का केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि जिस नेता ने वर्षों तक भाजपा के विरुद्ध विपक्षी मोर्चे की अगुवाई की, यदि वह केंद्र में मंत्री के तौर पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कार्य करते हैं, तो इससे भाजपा को एक मजबूत मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलेगी। इसके साथ ही, नीतीश कुमार को बिहार की सक्रिय राजनीति से दिल्ली स्थानांतरित करने से भाजपा को राज्य में अपने स्वतंत्र आधार विस्तार और नीतीश के प्रभाव क्षेत्र से बाहर निकलने का एक बेहतर अवसर मिल सकता है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नीतीश की सक्रियता
भले ही सत्ता की कमान अब सम्राट चौधरी के हाथों में है, लेकिन नीतीश कुमार की सक्रियता आज भी शासन और पार्टी के कामकाज में साफ झलकती है। वे न केवल अपने बेटे के मंत्रालय के कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं, बल्कि जदयू कोटे के अन्य मंत्रियों के साथ भी निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री भी इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि नीतीश कुमार का अनुभव और उनकी उपस्थिति सरकार के लिए कितनी महत्वपूर्ण है, इसीलिए दिल्ली प्रवास हो या पटना में वापसी, सम्राट चौधरी शिष्टाचार के नाते नीतीश से परामर्श लेना नहीं भूलते। हालांकि, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्यसभा में नामांकन के बाद केंद्र की राजनीति में नीतीश कुमार की क्या भूमिका तय होती है।
सीतामढ़ी स्कूल में दिनदहाड़े हमला, छात्र पर जानलेवा हमला
13 May, 2026 04:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीतामढ़ी। जिले के नानपुर थाना क्षेत्र से एक ऐसी दुस्साहसिक वारदात सामने आई है जिसने शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यहाँ के नानपुर उत्तरी पंचायत स्थित राजकीय उर्दू मध्य विद्यालय में पढ़ाई के दौरान अपराधियों ने दुस्साहस का परिचय देते हुए एक छात्र पर जानलेवा हमला कर दिया। दिनदहाड़े क्लासरूम में घुसकर की गई इस चाकूबाजी की घटना से न केवल विद्यालय के छात्र और शिक्षक बुरी तरह सहम गए बल्कि पूरे क्षेत्र में दहशत और सनसनी का माहौल व्याप्त हो गया है।
आपसी रंजिश और क्लासरूम में खूनी संघर्ष
इस पूरी वारदात के पीछे बाइक चलाने को लेकर हुआ एक मामूली विवाद बताया जा रहा है जो देखते ही देखते खूनी रंजिश में तब्दील हो गया। जानकारी के मुताबिक मोहम्मद अरहान और आरोपियों के बीच कुछ समय पहले तेज रफ्तार बाइक चलाने को लेकर कहासुनी हुई थी जिसे मन में रखते हुए तीन हमलावरों ने योजनाबद्ध तरीके से स्कूल पर धावा बोला। हमलावर सीधे विद्यालय की पहली मंजिल पर स्थित कक्षा में दाखिल हुए और वहां मौजूद छात्र अरहान पर चाकू से ताबड़तोड़ पांच वार किए जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा और क्लासरूम अखाड़े में तब्दील हो गया।
पुलिस की मुस्तैदी और दो हमलावरों की गिरफ्तारी
घटना के तुरंत बाद विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने साहस का परिचय देते हुए पुलिस हेल्पलाइन डायल 112 को इसकी जानकारी दी जिसके बाद पुलिस की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। पुलिस की गाड़ी का सायरन सुनते ही हमलावरों में हड़कंप मच गया और भागने की कोशिश कर रहे दो मुख्य आरोपियों आकाश कुमार और सार्थक कुमार को पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। हालांकि इनका तीसरा सहयोगी अभिषेक कुमार मौके पर मची अफरातफरी का लाभ उठाकर भागने में सफल रहा जिसकी तलाश में पुलिस की विभिन्न टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
घायल छात्र की स्थिति और प्रशासनिक कार्यवाही
हमले में गंभीर रूप से घायल मोहम्मद अरहान को आनन-फानन में स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे सीतामढ़ी सदर अस्पताल रेफर कर दिया है। वर्तमान में छात्र का उपचार जारी है और उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है जबकि पुलिस प्रशासन ने घटना की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। थाना अध्यक्ष देवव्रत कुमार के नेतृत्व में पुलिस की टीमें फरार अपराधी की धरपकड़ के लिए सक्रिय हैं और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।
CM का निर्देश: ऑफिस में वर्क फ्रॉम होम, मंत्री कम गाड़ियों से चलें
13 May, 2026 02:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसाधनों के संरक्षण वाले आह्वान को आगे बढ़ाते हुए आम जनता और सरकारी तंत्र से विशेष अपील की है। उन्होंने नागरिकों से निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन के उपयोग पर बल देने और सरकारी व निजी कार्यालयों में 'वर्क फ्रॉम होम' को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री द्वारा पिछले दो दिनों में ईंधन और विदेशी मुद्रा की बचत को लेकर किए गए संदेश के बाद अब बिहार सरकार ने भी संसाधनों के संयमपूर्ण उपयोग की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं, जिसका उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना और अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाना है।
मंत्रियों के काफिले में बड़ी कटौती और सादगी की मिसाल
प्रधानमंत्री की अपील का व्यापक असर अब बिहार सरकार के कामकाज और मंत्रियों की जीवनशैली में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। नई सरकार के गठन के बाद मंत्रियों के साथ चलने वाले वाहनों के लंबे काफिले अब बीते दिनों की बात होती जा रहे हैं। पटना सचिवालय में आयोजित हालिया कैबिनेट बैठक के दौरान यह सुखद बदलाव देखने को मिला जहां मंत्रियों ने अपने एस्कॉर्ट और सुरक्षा वाहनों की संख्या में भारी कटौती की है। स्थिति यह रही कि कई प्रमुख मंत्री अलग-अलग गाड़ियों के बजाय एक ही वाहन में सवार होकर बैठक में पहुंचे, जो सरकारी संसाधनों की बचत और टीम वर्क का एक बड़ा संदेश दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्वयं किया इलेक्ट्रिक वाहनों का चुनाव
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री के विजन को धरातल पर उतारने के लिए स्वयं मिसाल पेश की है और वे अब आधिकारिक कार्यक्रमों में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग कर रहे हैं। सचिवालय की बैठक हो या पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम, मुख्यमंत्री को पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक गाड़ी में सफर करते देखा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्रोल और डीजल की खपत कम करना न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है बल्कि यह देश की आर्थिक सेहत के लिए भी अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से भी आग्रह किया है कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन 'नो व्हीकल डे' का पालन करें ताकि समाज में एक सकारात्मक चेतना जागृत हो सके।
संसाधनों के संरक्षण हेतु प्रधानमंत्री के राष्ट्रव्यापी सुझाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से देशहित में कई महत्वपूर्ण बदलाव अपनाने का आग्रह किया है जिसमें सोने की खरीद और अनावश्यक विदेश यात्राओं को कुछ समय के लिए टालना शामिल है। उनका मानना है कि खाद्य तेल, उर्वरक और ईंधन के आयात पर देश का एक बड़ा हिस्सा खर्च होता है, जिसे स्वदेशी विकल्पों और प्राकृतिक खेती को अपनाकर कम किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कारपूलिंग और मेट्रो जैसी सुविधाओं के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह भी सुझाव दिया है कि भारतीय नागरिक विदेशी मेहमानों को भारत आने के लिए प्रेरित करें। इन कदमों से न केवल विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित होगा बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी नई गति प्राप्त होगी।
8 साल की बच्ची के साथ अपराध, सीतामढ़ी में तनावपूर्ण स्थिति और आगजनी
13 May, 2026 12:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी जिले में मानवता को कलंकित करने वाली एक अत्यंत हृदयविदारक घटना प्रकाश में आई है। नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मेला रोड इलाके में एक आठ वर्षीय मासूम बच्ची को दरिंदगी का शिकार बनाया गया है। इस वीभत्स वारदात की खबर फैलते ही संपूर्ण क्षेत्र में सनसनी फैल गई और स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। पीड़ित परिवार के साथ एकजुट होकर आक्रोशित लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिससे स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है।
सड़क पर उतरकर भारी जन-आक्रोश और यातायात ठप
घटना के विरोध में स्थानीय नागरिकों ने सड़क जाम कर उग्र प्रदर्शन किया और न्याय की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की। आक्रोशित भीड़ ने सड़क के बीचों-बीच टायर जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया और आवाजाही पूरी तरह बाधित कर दी जिससे घंटों तक राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों की स्पष्ट मांग है कि दोषी को अविलंब गिरफ्तार कर उसे ऐसी कठोर सजा दी जाए जो समाज में एक मिसाल बन सके क्योंकि इस तरह की घटनाएं सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
घटनास्थल पर पुलिस की मुस्तैदी और सुरक्षा घेरा
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल को मौके पर तैनात कर दिया है और पूरे मेला रोड इलाके को एक तरह से पुलिस छावनी में बदल दिया गया है। सूचना मिलते ही नगर थाना पुलिस के साथ-साथ वरीय पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे ताकि कानून-व्यवस्था को संभाला जा सके और किसी भी अप्रिय स्थिति को टाला जा सके। अधिकारियों ने उग्र भीड़ से बातचीत कर उन्हें शांत करने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि पुलिस पूरी संवेदनशीलता से कार्य कर रही है तथा शांति बनाए रखने के लिए संवेदनशील बिंदुओं पर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी गई है।
आरोपी की धरपकड़ के लिए सघन छापेमारी अभियान
पुलिस प्रशासन ने दोषी को पकड़ने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और नगर थाना अध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस की अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया गया है। आरोपी के संभावित छिपने के ठिकानों पर पुलिस द्वारा लगातार छापेमारी की जा रही है और तकनीकी सर्विलांस के माध्यम से अपराधी की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश जारी है। पुलिस ने पीड़िता को तत्काल मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल भेजते हुए मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और यह दावा किया है कि जल्द ही अपराधी सलाखों के पीछे होगा।
गुरुजी की झपकी, बच्चों का मैदान में क्रिकेट का मज़ा
13 May, 2026 10:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। जिले के बाढ़ अनुमंडल अंतर्गत इब्राहिमपुर नयाटोला स्थित प्राथमिक विद्यालय से शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाली एक तस्वीर सामने आई है, जहाँ गुरुजी की भारी लापरवाही उजागर हुई है। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे एक वीडियो में स्कूल के प्रभारी शिक्षक कक्षा के भीतर ही गहरी नींद में सोते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि दूसरी ओर छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई और कक्षाओं को त्यागकर स्कूल के मैदान में खेलकूद में व्यस्त नजर आ रहे हैं। इस घटना ने सरकारी स्कूलों में दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिससे स्थानीय अभिभावकों में गहरा रोष व्याप्त है।
गुरुजी की निद्रा और मैदान में छात्रों का शोर
विद्यालय में शिक्षा के प्रति संवेदनहीनता का आलम यह रहा कि जिस समय बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, उस वक्त वे परिसर में क्रिकेट खेलने में मशगूल थे और उन्हें शिक्षा देने के लिए जिम्मेदार प्रभारी शिक्षक बेंच पर आराम फरमा रहे थे। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने नौनिहालों को उज्जवल भविष्य के सपने लेकर स्कूल भेजते हैं, परंतु शिक्षकों की ऐसी कार्यशैली उनके बच्चों के भविष्य को अंधकार की ओर धकेल रही है। बताया जा रहा है कि जनगणना कार्य में अन्य शिक्षकों की व्यस्तता का लाभ उठाते हुए प्रभारी शिक्षक ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया और शिक्षण कार्य को पूरी तरह ठप कर दिया।
पूर्व के विवाद और शिक्षक का विवादित इतिहास
इब्राहिमपुर नयाटोला के इस विद्यालय के प्रभारी शिक्षक का विवादों से पुराना नाता रहा है और यह पहली बार नहीं है जब उनकी कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठी हैं। इससे पूर्व भी एक वीडियो चर्चा का विषय बना था जिसमें वे एक महिला के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें छड़ी से पीटते नजर आए थे, जिस पर शिक्षा विभाग को संज्ञान लेने के लिए पत्र भी लिखा गया था। लगातार एक के बाद एक सामने आ रही इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर बार-बार की गई शिकायतों को नजरअंदाज किए जाने के कारण ही शिक्षक के हौसले बुलंद हैं और वे नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमानी कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आक्रोश और साक्ष्य के रूप में वीडियो
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि स्कूल में पढ़ाई का स्तर लंबे समय से गिरा हुआ है और कई बार मौखिक चेतावनी देने के बाद भी जब सुधार नहीं हुआ, तो उन्होंने खुद इस सच्चाई को उजागर करने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने ही चुपके से प्रभारी शिक्षक की सोते हुए वीडियो बनाई ताकि वे प्रशासन के सामने ठोस प्रमाण प्रस्तुत कर सकें। इस वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद अब पूरे क्षेत्र में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली की आलोचना हो रही है और लोग मांग कर रहे हैं कि केवल कागजी खानापूर्ति करने के बजाय ऐसे शिक्षकों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
विभागीय जांच और कार्रवाई का आश्वासन
बाढ़ के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अमित कुमार ने इस गंभीर मामले की पुष्टि करते हुए कहा है कि विद्यालय प्रबंधन और संबंधित शिक्षक के विरुद्ध पूर्व में भी कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। अब साक्ष्य के तौर पर वीडियो सामने आने के बाद विभाग ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया है और मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी ड्यूटी के दौरान इस तरह की अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने पर शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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