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जी7 समिट में भारत की मजबूत मौजूदगी, फ्रांस और स्लोवाकिया पहुंचे पीएम मोदी
13 Jun, 2026 02:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की एक सप्ताह लंबी महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्रा पर रवाना हो गए हैं। इस दौरे का मुख्य आकर्षण फ्रांस के एवियन में आयोजित होने वाला G7 शिखर सम्मेलन है, जहाँ भारत एक प्रमुख आमंत्रित भागीदार के रूप में शामिल हो रहा है। अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री विश्व के कई शक्तिशाली देशों के शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और ज्वलंत वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
भारत से प्रस्थान करने से पहले सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री ने अपनी इस यात्रा को कूटनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। विशेष रूप से, 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की वहां की पहली और ऐतिहासिक यात्रा होने जा रही है।
फ्रांस के साथ रणनीतिक संबंधों पर जोर
प्रधानमंत्री ने अपनी रवानगी से पूर्व कहा कि भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में फ्रांस एक बेहद विश्वसनीय और अहम साझेदार है। उन्होंने गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' के शिखर तक पहुँचाया है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "जब मैं राष्ट्रपति मैक्रों से मिलूंगा, तो हम फरवरी के बाद से हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और आपसी सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने के रोडमैप पर चर्चा करेंगे।" इसके अलावा, 'भारत-फ्रांस नवाचार (इनोवेशन) वर्ष' के तहत आयोजित कार्यक्रम भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेश से जोड़ने और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसरों के द्वार खोलने का काम करेगा।
लगातार आठवीं बार G7 सम्मेलन में भारत की मौजूदगी
G7 शिखर सम्मेलन को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि एवियन में भारत की निरंतर भागीदारी वैश्विक मंच पर हमारे सहयोगियों द्वारा दिखाए गए अटूट भरोसे का प्रमाण है। गौरतलब है कि यह लगातार आठवां मौका है जब भारत को इस शक्तिशाली समूह की बैठक में अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया गया है, जो भारत की बढ़ती आर्थिक और कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है।
14-15 जून: स्लोवाकिया का ऐतिहासिक दौरा
ब्रातिसलावा: प्रधानमंत्री मोदी 14 और 15 जून को स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिसलावा में रहेंगे। यहाँ वे राष्ट्रपति पीटर पिलग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ उच्च स्तरीय वार्ता करेंगे। पीएम ने इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिए एक 'मील का पत्थर' बताया है। इस ऐतिहासिक यात्रा से मध्य यूरोप के इस देश के साथ भारत के व्यापारिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंध एक नए युग में प्रवेश करेंगे।
जोरहाट एयरबेस पर हादसा, लैंडिंग के वक्त क्रैश हुआ एयरफोर्स का विमान
13 Jun, 2026 01:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जोरहाट। असम के जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर शनिवार को भारतीय वायुसेना का एक एएन-32 (AN-32) मालवाहक विमान उतरने के तुरंत बाद अचानक आग की चपेट में आ गया। इस अप्रत्याशित हादसे के बाद पूरे सैन्य बेस पर हड़कंप मच गया और आनन-फानन में आपातकालीन सुरक्षा घेरा सक्रिय किया गया। शुरुआती विवरण के अनुसार, जैसे ही इस विमान ने रनवे को छुआ, वैसे ही उसमें भयंकर आग लग गई और चारों तरफ काले धुएं का गुबार उठने लगा। इस खतरनाक स्थिति को भांपते ही एयरबेस पर तैनात वायुसेना की फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीमों ने बिना वक्त गंवाए मोर्चा संभाला और आग पर काबू पाने की कवायद शुरू कर दी ताकि लपटें विमान के अन्य संवेदनशील हिस्सों तक न पहुंच सकें। वायुसेना की ओर से अभी इस हादसे पर कोई आधिकारिक बयान साझा नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि तकनीकी खराबी के कारणों का पता लगाने के लिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए जाएंगे।
लंबे समय से वायुसेना की रीढ़ रहा है सोवियत काल का यह विमान
हादसे का शिकार हुआ एएन-32 एक मध्यम श्रेणी का ट्विन-इंजन (जुड़वां इंजन) मालवाहक विमान है, जिसका निर्माण सोवियत संघ के दौर में एंटोनोव डिजाइन ब्यूरो द्वारा किया गया था। भारतीय वायुसेना पिछले कई दशकों से देश के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों, विशेषकर पूर्वोत्तर और हिमालयी इलाकों में सैनिकों की आवाजाही, रसद आपूर्ति और सैन्य हथियारों को पहुंचाने के लिए इस पर निर्भर रही है। इस विमान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बेहद छोटे और उबड़-खाबड़ या कच्चे रनवे पर भी आसानी से लैंडिंग और टेक-ऑफ कर सकता है। लगभग 40 से अधिक जवानों अथवा कई टन वजनी सैन्य साजो-सामान को एक साथ ले जाने की क्षमता रखने वाले इस विमान बेड़े के पुराने होने के कारण, वायुसेना अब चरणबद्ध तरीके से इसके आधुनिकीकरण और नए विमानों को बेड़े में शामिल करने की योजना पर काम कर रही है।
पूर्व में भी बड़े हादसों और आपदाओं से जुड़ा रहा है इतिहास
इस मालवाहक विमान के साथ सुरक्षा और तकनीकी विश्वसनीयता को लेकर पहले भी कई बड़े सवाल खड़े होते रहे हैं, क्योंकि इसका अतीत कुछ बेहद दर्दनाक हादसों से जुड़ा रहा है। साल 2019 में इसी जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरने के बाद एक एएन-32 विमान अरुणाचल प्रदेश के मेचुका के पास लापता हो गया था, जिसका मलबा बाद में घने पहाड़ी जंगलों में मिला और उसमें सवार सभी 13 सैन्य कर्मियों की जान चली गई थी। इससे पहले, वर्ष 2016 में भी चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर की उड़ान पर निकला ऐसा ही एक विमान बंगाल की खाड़ी के ऊपर रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया था, जिसमें सवार 29 लोगों का लंबे खोज अभियान के बाद भी कोई सुराग नहीं मिल सका था। जोरहाट की इस ताजा घटना ने एक बार फिर रक्षा गलियारों में इस विमान की परिचालन सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
राजस्थान से पटना तक कांग्रेस का अभियान, NEET विवाद पर छात्रों को करेगी लामबंद
13 Jun, 2026 11:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट) के कथित पर्चा लीक मामले को लेकर देश भर के युवाओं और छात्रों को एकजुट करने की बड़ी कार्ययोजना बना रहे हैं। इसके तहत वे एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन की कमान संभालेंगे, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के छात्र वर्ग को एक मंच पर लाना है। इस बड़े देशव्यापी अभियान का शंखनाद आगामी 17 जून को राजस्थान की कोचिंग सिटी कोटा से किया जाएगा।
कोटा के बाद उत्तर और मध्य भारत के इन शहरों में भी गूंजेगी आवाज
राजस्थान में इस अभियान की शुरुआत करने के उपरांत कांग्रेस इस सिलसिले को आगे भी जारी रखेगी। इस देशव्यापी कार्यक्रम के तहत आगामी 10 जुलाई को इलाहाबाद (प्रयागराज), 11 जुलाई को बिहार की राजधानी पटना और 14 जुलाई को देश की राजधानी नई दिल्ली में भी बड़े सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। इस मुहिम के जरिए पार्टी का लक्ष्य भारी जनसमर्थन जुटाना है, जिसमें विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे अभ्यर्थी, छात्र, युवा संगठन, प्रबुद्ध शिक्षक और परीक्षाओं में हुई धांधली से सीधे तौर पर प्रभावित हुए पीड़ित परिवार बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। यह आंदोलन उन लाखों युवा भारतीयों की पीड़ा और संघर्ष को उजागर करेगा, जिनका भविष्य बार-बार होने वाले पेपर लीक, परीक्षाओं के महंगे फॉर्म और एक पारदर्शी व निष्पक्ष भर्ती प्रणाली विकसित करने में प्रशासनिक तंत्र की विफलता के कारण अधर में लटका हुआ है।
छात्रों को जोड़ने के लिए कोचिंग सेंटरों और विश्वविद्यालयों में विशेष संवाद
राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जाने वाले इस महाअभियान को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए विपक्ष के नेता राहुल गांधी छात्रों के साथ सम्मेलनों की एक पूरी श्रृंखला को संबोधित करेंगे। इस आंदोलन को धार देने के लिए कांग्रेस अपनी सभी छात्र और युवा इकाइयों जैसे एनएसयूआई, युवा कांग्रेस के साथ-साथ प्रादेशिक व जिला स्तर के संगठनों के माध्यम से देश भर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाएगी। इसके तहत सभी प्रमुख शिक्षण संस्थानों, कोचिंग हबों, केंद्रीय व राज्य विश्वविद्यालयों, स्कूलों और युवा केंद्रों में जाकर सीधे संवाद स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही इस पूरे अभियान को डिजिटल माध्यमों से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया कैंपेन और छात्र सम्मेलनों की लाइव स्क्रीनिंग भी की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक युवाओं तक इस मुद्दे की गूंज पहुंचाई जा सके।
सबरीमाला गोल्ड स्कैम केस में बड़ा घटनाक्रम, दूसरे आरोपी का निधन
13 Jun, 2026 11:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम। केरल के बहुचर्चित सबरीमाला स्वर्ण घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी मुरारी बाबू का शनिवार को देहावसान हो गया। वह लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग लड़ रहे थे और कोच्चि के एक निजी चिकित्सालय में उनका उपचार चल रहा था। उनका निधन ऐसे मोड़ पर हुआ है जब सबरीमाला मंदिर के सोने की परत वाले पैनलों की कथित हेराफेरी और वित्तीय धोखाधड़ी की उच्च स्तरीय जांच अभी भी गतिमान है। इस पूरे घटनाक्रम ने केरल के धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में एक बार फिर जवाबदेही को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है।
दरवाजों के सोने के पैनल और हेरफेर का पूरा मामला
यह पूरा विवाद सबरीमाला मंदिर के कपाटों के फ्रेम और द्वारपाल मूर्तियों पर मढ़े गए सोने की परत वाले पैनलों को हटाने तथा उनके कथित गबन से जुड़ा हुआ है। जांच में यह बात सामने आई थी कि मंदिर परिसर से हटाए गए इन बहुमूल्य सोने के पैनलों का कोई पुख्ता रिकॉर्ड नहीं रखा गया और उन्हें गायब कर दिया गया। इस मामले में घिरे मुरारी बाबू ने पूछताछ के दौरान यह दलील दी थी कि सोने के इन पैनलों को सरकारी दस्तावेजों में तांबे के पैनल के रूप में दर्ज करने का फैसला मंदिर के मुख्य पुजारी के एक पत्र के आधार पर लिया गया था, जिसकी सत्यता की पड़ताल जांच एजेंसियां कर रही हैं।
अवैध संपत्ति और संदेहास्पद नियुक्तियों के गंभीर आरोप
विजिलेंस विभाग की जांच में मुरारी बाबू के खिलाफ कई अन्य चौंकाने वाले खुलासे भी हुए थे। आरोप था कि देवस्वोम बोर्ड में एक साधारण पद पर रहने के बावजूद उन्होंने अपने सेवाकाल में करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति खड़ी कर ली थी, जिसमें चंगनासेरी स्थित उनका आलीशान पैतृक बंगला भी शामिल था। इसके अलावा, उन पर बड़े मंदिर उत्सवों में हाथियों की सप्लाई के ठेकों में भ्रष्टाचार करने और हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों की अवहेलना कर सबरीमाला जैसे बेहद संवेदनशील और प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल पर प्रशासनिक अधिकारी का पद हथियाने के भी आरोप लगे थे।
कांस्टेबल की नौकरी छोड़ प्रभावशाली अधिकारी बनने का सफर
मुरारी बाबू का सफर बेहद साधारण पृष्ठभूमि से शुरू हुआ था। वर्ष 1994 में उनका चयन पुलिस विभाग में बतौर कांस्टेबल हुआ था, लेकिन ट्रेनिंग पूरी होने से पहले ही उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद साल 1997 में वे त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड में शामिल हुए और अपनी चालाकी व रसूख के बल पर वाइकोम, एट्टुमानूर और थिरुनक्कारा जैसे बड़े व धनी मंदिरों के प्रशासनिक दायित्व संभालते हुए बोर्ड के सबसे रसूखदार चेहरों में शुमार हो गए। भले ही उनके निधन से इस घोटाले का एक बड़ा अध्याय बंद हो गया हो, लेकिन विजिलेंस और कानूनी जांच का शिकंजा अन्य दोषियों पर लगातार कसता जा रहा है।
‘अब युद्ध का चेहरा बदल चुका है’, रक्षा मंत्री ने बताई नई चुनौतियां
13 Jun, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद। समकालीन और आधुनिक युद्ध कला के बदलते तौर-तरीकों के बीच देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय वायुसेना के युवा जांबाजों को आने वाले समय की जटिल सैन्य चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहने का आह्वान किया है। तेलंगाना के हैदराबाद स्थित प्रतिष्ठित एयर फोर्स अकादमी में आयोजित 217वें कोर्स की कंबाइंड ग्रेजुएशन परेड (सीजीपी) को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए उन्होंने नए अधिकारियों को "एडाप्ट, अडॉप्ट और अमेंड" (परिस्थितियों के अनुकूल बनना, नई तकनीकों को अपनाना और नीतियों में सुधार करना) का मूलमंत्र दिया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज के दौर में युद्ध का मैदान केवल लड़ाकू विमानों, तोपों या थल सैनिकों तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी, एडवांस्ड सेंसर, रोबोटिक्स और साइबर डोमेन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों ने इसका पूरा ढांचा ही बदल कर रख दिया है।
सैन्य इतिहास के गौरव और सफल ऑपरेशनों का गौरव गान
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में वायुसेना के स्वर्णिम इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा कि देश की संप्रभुता की रक्षा में इस बल की भूमिका हमेशा से ढाल और तलवार दोनों जैसी रही है। उन्होंने वर्ष 1947-48 के कश्मीर संघर्ष के दौरान किए गए ऐतिहासिक 'श्रीनगर एयरलिफ्ट' और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में ढाका पर किए गए अचूक हवाई हमलों का स्मरण कराया, जिन्होंने इतिहास और भूगोल दोनों को बदल दिया था। इसके साथ ही उन्होंने हालिया 'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे वायुसेना ने आतंकवादियों के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने में बेजोड़ रणनीति और सटीक मारक क्षमता का प्रदर्शन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन कामयाबियों के पीछे केवल हमारे पास मौजूद स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म ही नहीं, बल्कि भारतीय जांबाजों का अद्वितीय साहस, अनुशासन और स्मार्ट वर्क की काबिलियत भी शामिल रही है।
अदृश्य दुश्मन और डिजिटल मोर्चे पर नई सुरक्षा चुनौतियां
आधुनिक सैन्य परिदृश्य में आ रहे क्रांतिकारी बदलावों पर चर्चा करते हुए राजनाथ सिंह ने नए कैडेट्स को आगाह किया कि पारंपरिक युद्ध की तुलना में भविष्य की लड़ाइयां बेहद जटिल होंगी। आज के समय में हमले करने वाले हथियार या उन्हें संचालित करने वाले सैनिक कई बार आंखों से दिखाई भी नहीं देते और मीलों दूर बैठकर युद्ध का संचालन किया जाता है। उन्होंने एक बड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले समय में हमारा मुकाबला ऐसे अदृश्य दुश्मनों से भी हो सकता है, जो किसी देश की सीमाओं पर सीधे आक्रमण करने के बजाय वहां के ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम, संवेदनशील संचार नेटवर्क, बैंकिंग चैनल्स या सीसीटीवी कैमरों के डिजिटल सिग्नलों को हैक कर उन्हें नियंत्रित करने का प्रयास करें। इसलिए वर्तमान पीढ़ी के सैन्य नेतृत्व को इन गैर-पारंपरिक और तकनीकी खतरों के प्रति अपनी समझ को लगातार अपग्रेड करना होगा।
भविष्य के कुशल योद्धाओं के लिए खास रणनीतिक संदेश
समारोह के समापन पर रक्षा मंत्री ने नव-नियुक्त अधिकारियों को जीवन के इस नए सफर की बधाई देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर होने वाला हर छोटा-बड़ा सैन्य संघर्ष अपने साथ रणनीति और तकनीक का एक नया सबक लेकर आता है। उन्होंने पास आउट होने वाले जांबाजों से अपील की कि वे दुनिया भर में विकसित हो रही नई युद्ध प्रणालियों का बारीकी से अध्ययन करें। उन्होंने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि वायुसेना अकादमी में दिया गया कड़ा और उत्कृष्ट प्रशिक्षण कैडेट्स को भविष्य की किसी भी अनिश्चित या अप्रत्याशित परिस्थिति का डटकर मुकाबला करने के योग्य बनाएगा। उन्होंने अंत में कहा कि 21वीं सदी में जीत केवल उसी सेना की होगी जो तेजी से बदलती तकनीक को समय रहते आत्मसात कर उसका सही उपयोग करना जानती हो, और भारत इसी विजन के साथ अपनी तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण में जुटा हुआ है।
एयर अरेबिया विमान में तकनीकी गड़बड़ी, सभी 170 यात्री सुरक्षित
13 Jun, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोच्चि। संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह शहर से केरल के कोझिकोड जा रहे एयर अरेबिया के एक यात्री विमान को तकनीकी खराबी के चलते शनिवार तड़के आपातकालीन परिस्थितियों में कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तरफ मोड़ना पड़ा। एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार, एयर अरेबिया की उड़ान संख्या G9 454 के इंजन रिवर्स थ्रस्ट सिस्टम में अचानक कुछ खराबी आ गई थी, जिसके कारण पायलट ने विमान को कोच्चि में ही उतारने का निर्णय लिया।
सुरक्षा के लिहाज से घोषित की गई फुल इमरजेंसी
हवाई अड्डे के सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत शनिवार तड़के 3:19 बजे पहले 'लोकल स्टैंडबाय' लागू किया गया और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुबह 3:34 बजे 'फुल इमरजेंसी' का ऐलान कर दिया गया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि एयरपोर्ट की सभी आपातकालीन राहत और बचाव सेवाएं किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहें। इसके बाद सुबह 3:38 बजे विमान ने रनवे पर सुरक्षित लैंडिंग की, जिसके बाद उसे निर्धारित पार्किंग बे की ओर रवाना किया गया। सभी जरूरी सुरक्षा जांचें संतोषजनक पाए जाने के बाद सुबह 3:45 बजे आपातकाल हटा लिया गया।
विमान में सवार थे नौ शिशुओं समेत 170 यात्री
इस विमान में 9 छोटे बच्चों और क्रू मेंबर्स सहित कुल 170 यात्री सफर कर रहे थे, जो पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस अचानक हुए घटनाक्रम से एयरपोर्ट के सामान्य परिचालन और अन्य उड़ानों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा। तकनीकी टीम द्वारा खराबी को पूरी तरह दुरुस्त किए जाने के बाद, विमान ने सुबह करीब 7:15 बजे अपने मूल गंतव्य कोझिकोड एयरपोर्ट के लिए दोबारा उड़ान भरी।
मोदी-मैक्रों करेंगे ‘भारत इनोवेट्स’ पहल का शुभारंभ
13 Jun, 2026 09:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से फ्रांस की छह दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। वे 13-14 जून और 16-18 जून के दौरान एवियन और पेरिस में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। अपने इस दौरे पर रविवार को पीएम मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ मिलकर 'भारत इनोवेट्स-2026' का शुभारंभ करेंगे। भारत सरकार द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में देश के 120 इनोवेटर्स, 15 उच्च शिक्षण संस्थान और 500 से अधिक निवेशक शामिल हो रहे हैं। यह पूरा आयोजन एडवांस्ड कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, स्पेस टेक्नोलॉजी, बायोटेक, एनर्जी और हेल्थकेयर जैसे 13 प्रमुख सेक्टर्स पर केंद्रित रहेगा। इस मंच के जरिए दुनिया भारत के बढ़ते डीप टेक इकोसिस्टम और नवाचार की ताकत से रूबरू होगी। कार्यक्रम में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद के साथ-साथ वैश्विक कॉर्पोरेट जगत के दिग्गज और सीईओ भी मौजूद रहेंगे।
वैश्विक मंच पर भारतीय स्टार्टअप्स का प्रदर्शन
फ्रांस के नीस शहर में पहली बार आयोजित हो रहे 'भारत इनोवेट्स 2026' के माध्यम से भारत दुनिया के बड़े निवेशकों के सामने अपने डीपटेक और होनहार स्टार्टअप्स की क्षमताओं को पेश करेगा। इससे भारतीय और वैश्विक साझेदारों के बीच तकनीक आधारित रिश्तों को एक नया आयाम मिलेगा। इस खास मौके पर अनुसंधान, विकास, स्टार्टअप विस्तार और सीमा पार निवेश को आसान बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों और ढांचागत सहयोग की घोषणाएं होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
दोनों देशों के बीच मजबूत होगी तकनीकी साझेदारी
इस भव्य आयोजन से भारत और फ्रांस के बीच आपसी नवाचार तंत्र को बढ़ावा देने के नए रास्ते खुलेंगे। इसके तहत दोनों देश मिलकर सह-विकास, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज पर एक साथ काम करेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारतीय इनोवेटर्स और संस्थानों को वैश्विक निवेशकों, बड़े निगमों, विश्वविद्यालयों और सरकारी संगठनों से जोड़ना है, जिससे भारतीय आविष्कारों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक मजबूत पहचान मिल सके।
मुंबई में हुई थी 'नवाचार वर्ष' की शुरुआत
इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर जी7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए इसी स्थान पर पहुंचे थे, जहां उनके अन्य देशों के समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बातचीत करने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि इसी साल 17 से 19 फरवरी के बीच फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत का दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने मुंबई में '2026 भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष' का आगाज किया था और पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर दोनों देशों के रिश्तों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
18 जून तक बिगड़ा रहेगा मौसम, उत्तर से दक्षिण तक असर की संभावना
13 Jun, 2026 07:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की तेज रफ्तार और उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के डबल अटैक से देश के मौसम में बड़ा उलटफेर हुआ है। बीते 24 घंटों में जम्मू-कश्मीर से लेकर तटीय कर्नाटक तक बादलों की गड़गड़ाहट के साथ जमकर पानी बरसा है, जबकि कई इलाकों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली चक्रवाती हवाओं ने भारी तबाही मचाई है। इस मौसमी आफत के बीच बिहार में आकाशीय बिजली गिरने से 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि पंजाब में बारिश से जुड़े हादसों में 3 लोगों ने दम तोड़ दिया। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि प्रकृति का यह आक्रामक रुख आगामी 18 जून तक इसी तरह बरकरार रह सकता है।
उत्तर से दक्षिण तक आंधी-बारिश और बर्फबारी का दौर
मौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर, हापुड़, मुरादाबाद और मथुरा समेत कई जिलों के साथ-साथ हरियाणा के सोनीपत व रोहतक और राजस्थान के डीग व धौलपुर में अंधड़ के साथ बारिश दर्ज की गई। वहीं, पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश के रोहतांग जैसे ऊंचे शिखरों पर ताजा बर्फबारी हुई है, जिससे घाटी में ठंडक बढ़ गई है। दक्षिण के राज्यों की बात करें तो केरल में कुछ स्थानों पर 20 सेंटीमीटर तक मूसलाधार बारिश हुई है, जबकि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में धूल भरी तेज हवाएं चली हैं। इसके विपरीत विदर्भ के इलाके अभी भी भीषण लू और गर्म रातों की चपेट में हैं।
पहाड़ों पर भूस्खलन और 19 राज्यों में मानसून की एंट्री
उत्तराखंड में खराब मौसम के कारण बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भनेरपाणी के पास पहाड़ी दरकने से पांच घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा, जिससे करीब 2,000 तीर्थयात्री रास्ते में फंस गए। दूसरी तरफ, राहत की खबर यह है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अब पूर्वी उत्तर प्रदेश के मुहाने पर पहुंच चुका है। पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और झारखंड के बचे हुए हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। केरल में तीन दिन की देरी से पहुंचने के बावजूद मानसून ने महज 9 दिनों के भीतर देश के 19 राज्यों को अपनी आगोश में ले लिया है।
प्रशांत महासागर में अल नीनो का बढ़ता खतरा
मौसम विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में इस समय 'अल नीनो' का असर पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। समुद्र की सतह पर बढ़ते तापमान के चलते वायुमंडल में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई देने लगे हैं, जिसके आने वाले समय में और अधिक मजबूत होने की आशंका है। भारत में इससे पहले साल 2023 में अल नीनो देखा गया था। ऐतिहासिक रूप से अल नीनो के हावी होने से देश में मानसूनी बारिश कमजोर पड़ने और सूखे जैसे हालात पैदा होने का जोखिम काफी हद तक बढ़ जाता है।
युद्ध प्रभावित देशों के छात्रों को मिल सकती है राहत, CBSE नीति पर मंथन जारी
12 Jun, 2026 07:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को देश की शीर्ष अदालत को सूचित किया कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के प्रभावित निजी विद्यार्थियों के हित में एक व्यापक नीति बनाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। ये वे छात्र हैं जिनके केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के परीक्षा परिणाम भू-राजनीतिक तनाव, क्षेत्रीय संघर्ष और सुरक्षा संबंधी प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण रोके गए हैं या घोषित नहीं हो सके हैं। सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्चतम न्यायालय को आश्वस्त किया कि यह समस्या किसी एक व्यक्तिगत छात्र तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में पढ़ रहे अनेक विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा एक संवेदनशील और व्यापक मामला है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे तमाम प्रभावित छात्र-छात्राओं के लिए एक समान और न्यायसंगत नीति तैयार कर रही है, जिस पर बहुत जल्द अंतिम मुहर लगा दी जाएगी।
अवकाशकालीन पीठ के समक्ष हुई महत्वपूर्ण सुनवाई
न्यायालय के भीतर इस बेहद महत्वपूर्ण मामले पर जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस विजय बिश्नोई की वेकेशन बेंच (अवकाशकालीन पीठ) के समक्ष विस्तृत बहस हुई। सॉलिसिटर जनरल की दलीलों और केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए शीर्ष अदालत ने मामले की अगली विधिक सुनवाई के लिए आगामी 22 जून 2026 की तारीख निर्धारित कर दी है। कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि अगली सुनवाई की तिथि तक सरकार प्रभावित बच्चों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने वाली अपनी प्रस्तावित गाइडलाइन के साथ अदालत के समक्ष उपस्थित होगी।
सऊदी अरब के छात्र की याचिका से सामने आया मामला
सीबीएसई परिणामों से जुड़ा यह पूरा विवाद मूल रूप से सऊदी अरब में रहकर पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्र प्रांशु जिगरकुमार पटेल द्वारा दायर की गई एक विशेष रिट याचिका के बाद उजागर हुआ है। पीड़ित छात्र ने अपनी कानूनी अर्जी में सर्वोच्च न्यायालय से गुहार लगाई थी कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को उसका कक्षा 12वीं का इंप्रूवमेंट (अंक सुधार) परीक्षा का रुका हुआ परिणाम तुरंत जारी करने का आदेश दे ताकि उसका पूरा साल बर्बाद होने से बच सके।
विदेशी केंद्रों पर सुरक्षा और समन्वय का संकट
शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, पश्चिम एशिया के कई देशों में चल रहे आंतरिक और बाहरी सैन्य गतिरोध के कारण कई परीक्षा केंद्रों पर कॉपियों के मूल्यांकन, सुरक्षित डेटा ट्रांसफर और प्रशासनिक समन्वय में भारी तकनीकी बाधाएं आई थीं। केंद्र सरकार अब सीबीएसई के शीर्ष अधिकारियों के साथ मिलकर एक ऐसा वैकल्पिक मार्ग तलाश रही है जिसके तहत इन विशेष परिस्थितियों वाले छात्रों को अन्य सामान्य विद्यार्थियों की तरह ही समय पर परिणाम मिल सके और वे उच्च शिक्षा के लिए आगामी सत्र में देश-विदेश के विश्वविद्यालयों में सुचारू रूप से दाखिला ले सकें।
पहली बरसी पर भावुक हुआ गुजरात, विमान दुर्घटना के मृतकों को नमन
12 Jun, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। गुजरात के इतिहास की सबसे दर्दनाक विमान त्रासदियों में से एक को आज पूरा एक वर्ष बीत चुका है। पिछले साल आज ही के दिन (12 जून) अहमदाबाद से लंदन जा रहा एयर इंडिया का विमान 'एआई171' उड़ान भरते ही मेघाणीनगर स्थित बी. जे. मेडिकल कॉलेज की मेस पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस भीषण हादसे ने कुल 260 मासूम जिंदगियों को लील लिया था, जिनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे। आज इस हादसे की पहली बरसी पर समूचे राज्य में अत्यंत भावुक माहौल देखा गया और लोगों ने मृतकों को याद किया।
बी. जे. मेडिकल कॉलेज में भावभीनी श्रद्धांजलि सभा
विमान हादसे की पहली बरसी के मौके पर दुर्घटनास्थल यानी बी. जे. मेडिकल कॉलेज परिसर में एक विशेष शोक सभा का आयोजन किया गया। इस प्रार्थना कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय विजय रूपाणी की सुपुत्री राधिका मिश्रा विशेष रूप से शामिल हुईं। उन्होंने अपने पिता और विमान में सवार अन्य सभी मृत यात्रियों की आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान वहां मौजूद परिजनों और आम नागरिकों की आंखें नम हो गईं और लोगों ने मौन रखकर दिवंगतों को नमन किया।
सामाजिक कार्यों और सेवा के जरिए अपनों को किया याद
इस दुखद अवसर को केवल शोक तक सीमित न रखते हुए स्वर्गीय विजय रूपाणी की बेटी राधिका मिश्रा ने समाज सेवा के कार्यों के जरिए अपने पिता को श्रद्धांजलि दी। कॉलेज परिसर में उनकी देखरेख में एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया, साथ ही पर्यावरण का संदेश देते हुए बड़े पैमाने पर पौधे रोपे गए। राधिका मिश्रा ने भावुक होते हुए कहा कि उनके पिता आज भी अपनी जनसेवा के कारण लोगों के दिलों में बसते हैं और वे उनके विकास एवं जनकल्याण के सपनों को पूरा करने के लिए हमेशा तत्पर रहेंगी।
विमानन सुरक्षा मानकों और घनी आबादी के बीच निर्माण पर बहस
इस भयावह दुर्घटना को एक साल बीत जाने के बाद भी चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में मौजूद निशान उस खौफनाक मंजर की याद दिला देते हैं। इस बरसी पर एक बार फिर रिहायशी और संवेदनशील इलाकों के ऊपर से गुजरने वाले हवाई मार्गों तथा विमानन सुरक्षा के कड़े नियमों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि प्रशासन और सामाजिक संगठन प्रभावित परिवारों को संबल देने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अपनों को असमय खोने का गम आज भी परिवारों के दिलों में ताजा है।
हॉर्मुज हमले के बाद भारत की कड़ी प्रतिक्रिया, विदेश मंत्रालय ने जताई नाराजगी
12 Jun, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) में एक विदेशी वाणिज्यिक टैंकर पर अमेरिकी हमले के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। ओमान के तट के पास नागरिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की इन घटनाओं पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में तैनात अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत (चार्ज डी’अफेयर्स) जेसन मीक्स को तलब किया और इस गंभीर लापरवाही पर भारत की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया। अमेरिकी दूतावास के शीर्ष राजनयिक को इस संवेदनशील मुद्दे पर बुलाए जाने का यह दूसरा मामला है।
तीन भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत से देश में शोक
'एमटी सेटेबेलो' (MT Settebello) नामक जिस टैंकर पर यह हमला हुआ, उसमें कुल 24 भारतीय क्रू मेंबर्स सवार थे। शुरुआत में तीन नाविक लापता थे, लेकिन अब उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। शेष 21 भारतीय नागरिकों को ओमान की सहायता से सुरक्षित बचा लिया गया है। इस दुखद घटना से पीड़ित परिवारों में मातम पसरा हुआ है और वे अपनों के शवों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं। केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर जताई आपत्ति
विदेश मंत्रालय में अमेरिका डेस्क के अतिरिक्त सचिव नागराज नायडू ने वर्तमान में अमेरिकी राजदूत की अनुपस्थिति में शीर्ष अधिकारी जेसन मीक्स को बुलाकर सख्त शब्दों में अपनी आपत्ति दर्ज कराई। भारत ने दोटूक कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर ऐसे हमलों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी हमले की कड़ी भर्त्सना करते हुए नागरिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर शांति बनाए रखने की अपील की है।
समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत की बढ़ती चिंताएं
उसी दौरान 'एमटी जालवीर' नामक एक अन्य वाणिज्यिक जहाज पर भी हमला हुआ था, जिसमें सवार सभी 20 भारतीय सुरक्षित हैं। अमेरिका इन हमलों को ईरान से जुड़े जहाजों की नाकाबंदी करने की अपनी रणनीति का हिस्सा बता रहा है, लेकिन भारत का मानना है कि इस क्षेत्रीय तनाव के कारण निर्दोष अंतरराष्ट्रीय नाविकों की जान जोखिम में पड़ रही है। चूंकि खाड़ी क्षेत्र सहित दुनियाभर के जहाजों पर हजारों भारतीय नाविक कार्यरत हैं, इसलिए समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत सरकार अब ओमान जैसे मित्र देशों के साथ मिलकर कूटनीतिक और जमीनी स्तर पर सुरक्षा बढ़ा रही है।
बर्फानी बाबा का समय से पहले अंतर्ध्यान? अमरनाथ यात्रा पर विशेषज्ञों की चेतावनी
12 Jun, 2026 02:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जम्मू: देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र 'श्री अमरनाथ यात्रा' पर भी अब ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। कश्मीर के अनंतनाग जिले में समुद्र तल से करीब 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा क्षेत्र के आसपास पिछले 12 वर्षों में मौसम के मिजाज में बेहद चिंताजनक बदलाव आया है। आंकड़ों के मुताबिक, यात्रा के मुख्य महीनों (जून से अगस्त) के दौरान इस उच्च पर्वतीय क्षेत्र के अधिकतम तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि न्यूनतम तापमान भी 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है।
समय से पहले अंतर्ध्यान हो रहे बाबा बर्फानी, 20 डिग्री तक पहुंचा पारा
मौसम विज्ञानियों और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तापमान में वृद्धि और स्थानीय पारिस्थितिकी पर बढ़ते दबाव का ही नतीजा है कि पिछले कुछ वर्षों से अमरनाथ यात्रा के पहले महीने (शुरुआती हफ्तों) में ही पवित्र हिमलिंग समय से पहले पिघलकर अंतर्ध्यान हो रहे हैं। वर्तमान समय में पवित्र गुफा के आसपास का तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि इस संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र को बचाने के लिए तुरंत कड़े व्यावहारिक कदम नहीं उठाए गए, तो अगले दो दशकों में यहां का तापमान और ज्यादा भयानक रूप ले सकता है, जिससे हिमलिंग के निर्माण की प्राकृतिक प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी।
12 वर्षों में 15 से बढ़कर 24 डिग्री तक पहुंचा अधिकतम तापमान
पवित्र गुफा क्षेत्र के तापमान का तुलनात्मक रिकॉर्ड बेहद चौंकाने वाला है:
वर्ष 2012 का हाल: आज से 12-14 साल पहले जून से अगस्त के बीच इस ऊंचाई पर अधिकतम तापमान महज 15 से 16 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता था, जिससे हिमलिंग लंबे समय तक सुरक्षित रहता था।
वर्ष 2024 और वर्तमान स्थिति: तापमान बढ़ने का यह सिलसिला वर्ष 2016 के बाद से और तेज हुआ और पिछले वर्षों में यह रिकॉर्ड 24 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा। 13 हजार फीट की ऊंचाई पर इतना अधिक तापमान ग्लेशियरों और बर्फ के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो रहा है।
भीड़ नियंत्रण और पर्यावरण संतुलन के लिए प्रशासन अलर्ट
मौसम के इस बिगड़ते रुख और पर्यावरण के खतरे को देखते हुए श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह चौकस है। पिछले दो वर्षों से यात्रा के दौरान पवित्र गुफा के ठीक आसपास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित और कम करने के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। गुफा के पास मानवीय गतिविधियों और उससे उत्पन्न होने वाली गर्मी (एंथ्रोपोजेनिक हीट) को कम करने के लिए दर्शन की कतारों और ठहरने की व्यवस्था में कड़े वैज्ञानिक बदलाव किए गए हैं, ताकि इस पावन प्राकृतिक विरासत को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
समाज की सोच बदले: महिलाओं को मिले ‘राष्ट्र निर्माता’ का दर्जा
12 Jun, 2026 01:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देशभर में सड़क हादसों में जान गंवाने वाली गृहिणियों (हाउसवाइफ) के परिवारों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक बेहद ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि घर संभालने वाली महिलाओं को ‘राष्ट्र निर्माता’ (नेशन बिल्डर) का दर्जा मिलना चाहिए। उनके चौबीस घंटे के अथक परिश्रम और निस्वार्थ योगदान की तुलना किसी भी कामकाजी पेशेवर (प्रोफेशनल) से करके उनके काम को कमतर नहीं आंका जा सकता।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने आदेश दिया कि भविष्य में किसी भी हादसे में गृहिणी की असमय मौत होने पर, उनके द्वारा की जाने वाली परिवार की देखभाल और घरेलू काम की काल्पनिक कीमत कम से कम 30 हजार रुपये प्रति महीना (3.6 लाख रुपये सालाना) मानी जाएगी।
गृहिणियों के हक में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बातें
न्यूनतम वेतन के पुराने ढर्रे का अंत: अब तक देश की अदालतें और मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) गृहिणियों का मुआवजा तय करने के लिए राज्यों के न्यूनतम वैधानिक वेतन को आधार बनाते थे, जो बेहद कम होता था। अब न्यूनतम आधार ही 30 हजार रुपये महीना तय कर दिया गया है।
लॉटरी नहीं, गरिमा का अधिकार: अदालत ने टिप्पणी की कि सड़क दुर्घटना का मुआवजा न तो किसी के लिए अचानक आई छप्परफाड़ लॉटरी जैसा होना चाहिए और न ही इतनी कम राशि होनी चाहिए कि वह पीड़ितों के दर्द का मजाक उड़ाए।
प्रणय सेठी केस से अलग लाभ: सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यह 30 हजार रुपये प्रति माह की राशि, ऐतिहासिक 'प्रणय सेठी मामले' में तय किए गए अन्य सभी मुआवजा नियमों व भत्तों (जैसे भविष्य की संभावनाएं, अंतिम संस्कार खर्च आदि) के अलावा जोड़ी जाएगी।
"गृहिणी केवल खाना नहीं बनाती, वह अगली पीढ़ी तैयार करती है" सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में भावुक और मजबूत टिप्पणी करते हुए कहा, "एक गृहिणी का काम केवल खाना पकाना, कपड़े धोना और बच्चों को संभालना नहीं है। वह पूरे परिवार की रीढ़ और नींव होती है, जो समाज के लिए अगली पीढ़ी का निर्माण करती है। किसी हादसे में उसकी मौत से परिवार को जो अपूरणीय क्षति होती है, उसका आकलन केवल पैसों की कमाई से नहीं किया जा सकता।"
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से अपील: 1 साल में हो निपटारा
अदालत ने देश में सड़क दुर्घटना दावों (Accident Claims) के निपटारे में होने वाली सालों-साल की देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। पीठ ने कहा कि यदि पीड़ित परिवारों को न्याय और आर्थिक सहायता के लिए दशकों तक अदालतों के चक्कर काटने पड़ें, तो कानून का मुख्य उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों के हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justices) से विशेष अपील की है कि वे खुद अपने स्तर पर इन मामलों की नियमित निगरानी (मॉनिटरिंग) करें। साथ ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर यह सुनिश्चित कराएं कि सड़क हादसे से जुड़े मुकदमों का निपटारा अधिकतम एक साल के भीतर अनिवार्य रूप से कर दिया जाए।
जयशंकर का तंज: ‘हमें खेल मत सिखाइए’, यूरोप-अमेरिका की नीति पर निशाना
12 Jun, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/हेलसिंकी: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने फिनलैंड में आयोजित प्रतिष्ठित ‘कुल्तारांता वार्ता’ (Kultaranta Talks) में रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर पश्चिमी देशों और मीडिया द्वारा की जाने वाली आलोचनाओं का एक बार फिर बेहद बेबाक और कड़ा जवाब दिया है। 'उभरती शक्तियां और नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा' विषय पर आयोजित चर्चा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और 140 करोड़ नागरिकों के आर्थिक हितों को सर्वोपरि रखकर ही फैसले लेता है। जयशंकर ने दोटूक शब्दों में कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान यूरोप और अमेरिका की नीतियों में खुद कई विरोधाभास रहे हैं, इसलिए भारत को नैतिकता का पाठ पढ़ाने की कोशिश कतई उचित नहीं है।
यूरोपीय देशों के रुख के कारण भारत को बदलना पड़ा रुख
चर्चा के दौरान जब एक पत्रकार ने भारत पर रूस के प्रति नरम रुख अपनाने और रूसी तेल खरीदने का सीधा आरोप लगाया, तो विदेश मंत्री ने उसे वैश्विक बाजार के आंकड़ों से समझाते हुए खारिज कर दिया। जयशंकर ने बताया कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोपीय देशों ने अचानक मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) के देशों से भारी मात्रा में तेल खरीदना शुरू कर दिया था, जो कि ऐतिहासिक रूप से भारत का मुख्य आपूर्तिकर्ता रहा है। जब यूरोप ने भारत के पारंपरिक बाजार पर कब्जा कर लिया, तो बाजार की परिस्थितियों और कीमतों के संतुलन ने भारत को वैकल्पिक स्रोत के रूप में रूस की तरफ बढ़ने के लिए मजबूर किया। यह फैसला किसी राजनीतिक संदेश के लिए नहीं, बल्कि अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए लिया गया था।
हथियारों की आपूर्ति और सुरक्षा पर यूरोप को दिखाया आईना
पश्चिमी देशों की सुरक्षा और नैतिकता संबंधी दलीलों पर सीधा प्रहार करते हुए विदेश मंत्री ने यूरोप के पुराने इतिहास पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज तक किसी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ है, लेकिन भारत ने दशकों से ऐसे हालातों का सामना किया है जहां यूरोपीय देशों द्वारा बनाए गए हथियार भारत के खिलाफ (पड़ोसी देशों द्वारा) इस्तेमाल किए गए। जयशंकर ने साफ किया कि भारत ने कभी भी यूरोप की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाला है, इसलिए पश्चिमी जगत को भी भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा और चिंताओं को उसी गंभीरता से समझना चाहिए।
अमेरिका की बदलती नीतियों पर 'खेल' वाली टिप्पणी
अपने संबोधन में डॉ. जयशंकर ने अमेरिका की दोहरी नीति पर भी तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने खुलासा किया कि वर्ष 2022 में खुद अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए पर्दे के पीछे से प्रोत्साहित किया था, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेल की भारी किल्लत न हो और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें नियंत्रण में रहें। उन्होंने कहा कि यह एक अजीब खेल है जहां एक समय तेल खरीदने का दबाव बनाया जाता है और दूसरे समय उसी नीति को लेकर सवाल खड़े किए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय राजनीति केवल सिद्धांतों या नैतिकता से नहीं, बल्कि व्यावहारिक हितों से चलती है और दुनिया के सभी देश इस सच को अच्छी तरह समझते हैं।
भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते पर बड़ी बात
वैश्विक मंच से विदेश मंत्री ने भारत की भविष्य की आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:
सप्लाई चेन का विविधीकरण: वैश्विक स्थिरता और आर्थिक मजबूती के लिए सुरक्षित और विविधता से भरी सप्लाई चेन (सप्लाई चेन विविधीकरण) आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
पश्चिम एशिया का महत्व: खाड़ी देश और पश्चिम एशिया भारत की विदेश नीति का एक मजबूत स्तंभ बने रहेंगे, जो ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से बेहद अहम हैं।
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता: तमाम मतभेदों के बावजूद भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों में लगातार मजबूती आ रही है। जयशंकर ने इस दौरान भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चल रही बातचीत के जल्द पूरा होने की उम्मीद जताई।
अंत में, उन्होंने साफ कर दिया कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर पूरी तरह कायम है और भविष्य में भी किसी बाहरी दबाव में आए बिना देशहित में व्यावहारिक निर्णय लेता रहेगा।
कानपुर से दिल्ली जा रही ट्रेन पर पथराव, E-1 कोच का शीशा क्षतिग्रस्त
12 Jun, 2026 11:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में गुरुवार शाम एक बेहद संवेदनशील सुरक्षा चूक का मामला सामने आया, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत की ट्रेन पर कुछ अज्ञात तत्वों द्वारा पथराव किया गया। पत्थर सीधे उसी बोगी से आकर टकराया जिसमें संघ प्रमुख सवार थे, जिससे खिड़की का शीशा चकनाचूर हो गया। भागवत कानपुर से शताब्दी एक्सप्रेस के जरिए नई दिल्ली की ओर जा रहे थे। इस औचक हमले के बाद रेलवे और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।
शताब्दी एक्सप्रेस की ई-वन बोगी पर फेंका गया पत्थर
संघ प्रमुख मोहन भागवत ट्रेन के एग्जीक्यूटिव क्लास के 'E-1' कोच में सफर कर रहे थे। ट्रेन जब मक्खनपुर और फिरोजाबाद रेलवे स्टेशन के बीच से गुजर रही थी, तभी अचानक बोगी को निशाना बनाकर पत्थरों से हमला किया गया। राहत की बात यह रही कि इस पथराव में संघ प्रमुख को कोई चोट नहीं आई और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। सुरक्षा प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए ट्रेन को बीच रास्ते में कहीं भी रोकने के बजाय सीधे अगले तय स्टॉपेज की ओर रवाना किया गया।
टूंडला जंक्शन पर अलर्ट और हमलावरों की तलाश में सर्च ऑपरेशन
घटना की जानकारी मिलते ही टूंडला जंक्शन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ अलर्ट मोड पर आ गए। शाम 7:34 बजे जैसे ही शताब्दी एक्सप्रेस टूंडला जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी, सुरक्षा घेरा बेहद कड़ा कर दिया गया। अधिकारियों ने बोगी की सुरक्षा जांच करने के बाद शाम 7:41 बजे ट्रेन को दिल्ली के लिए रवाना किया। वहीं, आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीमों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मक्खनपुर-फिरोजाबाद रेल खंड के आस-पास के इलाकों में संदिग्धों की तलाश के लिए एक बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
भाजपा नेता के पारिवारिक समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे संघ प्रमुख
इस घटना से पहले, गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे संघ प्रमुख कानपुर के पूर्व भाजपा सांसद सत्यदेव पचौरी की बड़ी बेटी नीतू सिंह के निवास पर आयोजित एक पारिवारिक आशीर्वाद समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। आगामी 21 जून को होने वाले विवाह कार्यक्रम के सिलसिले में रखे गए इस आयोजन में भागवत ने वर-वधू को आशीर्वाद दिया। इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, प्रदेश सरकार के मंत्री सूर्यप्रताप शाही, योगेंद्र उपाध्याय और भूपेंद्र चौधरी सहित कई वीआईपी नेता मौजूद थे। समारोह के संपन्न होने के बाद ही वे दिल्ली वापसी के लिए ट्रेन में सवार हुए थे।
शादी से मना करने पर बवाल, हिंसक झड़प में कई घायल; वाहनों को फूंका
विधायक से विवाद के बाद महिला अफसर पर गिरी गाज, निलंबन का आदेश
चलती ट्रेन में सनसनीखेज वारदात, नकाबपोश बदमाश लाखों रुपये लेकर फरार
भारत-पाकिस्तान मुकाबले से पहले टीम चयन पर मंथन, फुलमाली की दावेदारी मजबूत
बेटियों की शिक्षा और सपनों को मिला सहारा, प्रशासन ने रुकवाई नाबालिग शादियां
जमीन विवाद में खूनी संघर्ष, भरतपुर में फायरिंग से मचा हड़कंप
दुष्कर्म के आरोपी की फरारी से मचा हड़कंप, पुलिस ने स्टेशन से पकड़ा
पोस्टर विवाद से भड़की सियासत, उदयनिधि ने मुख्यमंत्री पर साधा निशाना
अड़ीबाजी को लेकर बदमाशों का हमला, दो युवक गंभीर रूप से जख्मी
रेलवे पुलिस की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए ई-विवेचना एप पर आयोजित हुई कार्यशाला
