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ईरान में एकता का आह्वान, खामेनेई ने विदेशी साजिशों के खिलाफ चेताया
4 Jun, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: ईरान के इस्लामी गणराज्य के संस्थापक इमाम खुमैनी की 37वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनके पवित्र मकबरे पर एक विशाल श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक समारोह के दौरान देश के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता मोजतबा खामेनेई का एक विशेष और बेहद महत्वपूर्ण लिखित संदेश पढ़कर सुनाया गया। इस आधिकारिक संदेश में देश की संप्रभुता को बनाए रखने और वैश्विक मंच पर ईरान की भूमिका को लेकर कई बड़ी बातें कही गईं।
दुश्मनों की चालों को नाकाम करने की अपील
अपने आधिकारिक संदेश में सर्वोच्च नेता ने देश की जनता और प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक महाशक्तियों की चालों को विफल करने के लिए देश में आपसी भरोसा, राष्ट्रीय एकता, दूरदर्शिता और अटूट दृढ़ता बेहद जरूरी है। उन्होंने आगाह किया कि किसी भी परिस्थिति में विरोधियों और शत्रुओं के एजेंडे का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पुण्यतिथि केवल एक शोक का दिन नहीं है, बल्कि यह इमाम खुमैनी के सिद्धांतों और उनके द्वारा दिखाए गए क्रांतिकारी रास्ते पर चलने की देश की एक वार्षिक सामूहिक प्रतिज्ञा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरानी राष्ट्र अपने नए संकल्पों के साथ आज वैश्विक मोर्चे पर स्वतंत्रता प्रिय देशों के लिए आत्मसम्मान और गौरव का मुख्य स्रोत बन चुका है।
क्षेत्रीय तनाव और इजरायल पर तीखा हमला
इस संदेश में मध्य-पूर्व (पश्चिम एशिया) के मौजूदा भू-राजनीतिक हालातों और इजरायल के साथ चल रहे कड़े तनाव का भी खुलकर जिक्र किया गया। संदेश में बेहद सख्त लहजे में कहा गया कि इस क्षेत्र को अस्थिर करने वाली ताकतें और इजरायल का अस्तित्व अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। ईश्वर की कृपा और पूर्व के नीतिगत बयानों के अनुसार, वह समय अब दूर नहीं है जब यह दमनकारी व्यवस्था अपनी तय समय-सीमा से आगे नहीं टिक पाएगी। इस संदेश को पढ़ने के दौरान वहां मौजूद हजारों की संख्या में आए नागरिक, सेना के आला अधिकारी और विदेशी राजनयिक बेहद गंभीर नजर आए।
ईरान-अमेरिका सैन्य संघर्ष को लेकर बड़ा दावा
दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी प्रशासन के भीतर चल रही अंदरूनी चर्चाओं की भी कुछ बातें सामने आई हैं। इन दावों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने करीबी सलाहकारों और रणनीतिकारों के साथ एक बंद कमरे की बैठक में यह स्पष्ट किया है कि वे ईरान के साथ किसी भी बड़े और सीधे सैन्य युद्ध को शुरू करने के पक्ष में नहीं हैं।
हालांकि, यह भी कहा गया है कि यदि इस क्षेत्र में किसी भी हमले में अमेरिकी सैनिकों को नुकसान पहुंचता है, तो वे मौजूदा युद्धविराम को समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध का जोखिम उठाने के बजाय कुछ हफ्तों या महीनों तक चलने वाली छोटी-मोटी सैन्य झड़पों या जवाबी कार्रवाइयों को बर्दाश्त करना बेहतर समझते हैं।
अरबों डॉलर की फ्रीज संपत्ति को लेकर कूटनीतिक गतिरोध
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही बेहद गोपनीय कूटनीतिक बातचीत में एक बड़ा अवरोध पैदा हो गया है। इस गतिरोध की मुख्य वजह यह है कि ईरान ने किसी भी प्रकार के समझौते की शुरुआत करने से पहले अपनी उस विशाल पूंजी और संपत्तियों पर लगी अंतरराष्ट्रीय रोक को तुरंत हटाने की कड़ी शर्त रख दी है, जिसे अन्य देशों के बैंकों में फ्रीज (जब्त) करके रखा गया है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सूत्रों के मुताबिक, तेहरान इस बात पर अड़ा हुआ है कि बातचीत के पहले ही चरण में उसकी अरबों डॉलर की रोकी गई नकदी को पूरी तरह से बहाल किया जाए। इस गंभीर वित्तीय और राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए वैश्विक मध्यस्थ देशों द्वारा पिछले कई दिनों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख पर कायम रहने के कारण फिलहाल इसका कोई सर्वमान्य समाधान निकलता दिखाई नहीं दे रहा है।
अमेरिका की मेडिकल व्यवस्था पर संकट, विदेशी डॉक्टर छोड़ सकते हैं देश
4 Jun, 2026 04:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन/न्यूयॉर्क। अमेरिकी सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड ने एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि जे-1 (J-1) वीजा छूट (वेवर) की प्रशासनिक प्रक्रिया में हो रही अत्यधिक देरी के कारण विदेशों में प्रशिक्षित सैकड़ों योग्य डॉक्टरों को अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। इस सुस्ती की वजह से देश के ग्रामीण और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित इलाकों में डॉक्टरों की कमी का संकट और ज्यादा गहरा सकता है। न्यूयॉर्क से डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रतिनिधि गिलिब्रैंड ने अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा (HHS) मंत्री को एक पत्र लिखकर इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
प्रशासनिक सुस्ती से अधर में लटका डॉक्टरों का भविष्य
सीनेटर गिलिब्रैंड के अनुसार, अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के 'ऑफिस ऑफ ग्लोबल अफेयर्स' में प्रशासनिक स्तर पर लंबित (पेंडिंग) मामलों के कारण योग्य विदेशी डॉक्टर देशभर के अस्पतालों में अपनी सेवाएं शुरू नहीं कर पा रहे हैं। इस समस्या का सबसे सीधा और बुरा असर न्यूयॉर्क के कई ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ रहा है।
भारतीय डॉक्टरों के लिए क्यों बड़ा है यह संकट? यह पूरा मुद्दा भारतीय डॉक्टरों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका में कार्यरत अंतरराष्ट्रीय मेडिकल ग्रेजुएट्स (IMGs) में भारतीय डॉक्टरों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। ऐसे में वीजा वेवर में हो रही देरी से सैकड़ों भारतीय डॉक्टरों के करियर और वहां रहने पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
विदेशी डॉक्टरों के भरोसे न्यूयॉर्क की स्वास्थ्य व्यवस्था
न्यूयॉर्क राज्य अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने और डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए विदेशी प्रशिक्षित डॉक्टरों पर काफी हद तक निर्भर है।
राज्य के कुल कार्यरत डॉक्टरों में से एक-तिहाई (33%+) से अधिक संख्या विदेशी डॉक्टरों की है।
वर्ष 2025 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि न्यूयॉर्क के 16 ग्रामीण काउंटियों (जिलों) में डॉक्टरों की भारी किल्लत है।
स्थिति इतनी खराब है कि कई काउंटियों में तो एक भी बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) या स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) उपलब्ध नहीं है।
इन पिछड़े क्षेत्रों में औसतन हर 10,000 लोगों पर केवल 4 प्राथमिक स्वास्थ्य चिकित्सक (Primary Care Physicians) हैं, जो राज्य के सामान्य औसत से आधे से भी कम है।
क्या है जे-1 वीजा वेवर कार्यक्रम और क्यों मची है खलबली?
इन विपरीत परिस्थितियों में ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल मुख्य रूप से जे-1 वीजा वेवर कार्यक्रम (J-1 Visa Waiver Program) पर निर्भर रहते हैं। यह कार्यक्रम विदेशी डॉक्टरों को अमेरिका में अपनी पढ़ाई या मेडिकल रेजिडेंसी पूरी करने के बाद भी वहीं रहने और काम करने की कानूनी अनुमति देता है, बशर्ते वे डॉक्टरों की भारी कमी वाले ग्रामीण या उपेक्षित क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देने के लिए लिखित रूप से सहमत हों।
लेकिन वर्तमान में इस आवेदन प्रक्रिया में कई-कई महीनों की देरी हो रही है, जिससे डॉक्टर समय पर ग्रामीण अस्पतालों से नहीं जुड़ पा रहे हैं। स्थिति इसलिए भी अधिक संवेदनशील और आपातकालीन हो गई है क्योंकि अपनी रेजिडेंसी पूरी कर रहे कई डॉक्टरों के लिए 30 जुलाई की अंतिम समयसीमा (डेडलाइन) बेहद करीब है। यदि इस तय तारीख तक उनके वेवर आवेदन मंजूर नहीं होते हैं, तो उन्हें कानूनी रूप से अमेरिका छोड़कर अपने वतन वापस लौटना होगा।
15 जून तक मांगा जवाब
इस बड़े स्वास्थ्य संकट को समय रहते टालने के लिए सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड ने अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग से 15 जून तक लंबित पड़े आवेदनों की स्पष्ट संख्या और उन्हें निपटाने की अंतिम समयसीमा से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी है, ताकि इन डॉक्टरों को देश छोड़ने से रोका जा सके और ग्रामीण मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
क़ेशम द्वीप पर ईरान की मिसाइल तैयारी, क्षेत्र में बढ़ी चिंता
4 Jun, 2026 02:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई/वाशिंगटन। मिडल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी भारी तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा संघर्षविराम उस समय पूरी तरह खतरे में पड़ गया, जब अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण क़ेशम द्वीप पर बड़े हमले किए। इस अमेरिकी कार्रवाई से भड़के ईरान ने भी पलटवार करते हुए कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोनों की जोरदार बारिश कर दी। हालांकि, दोनों देशों के उच्च अधिकारी और राजनयिक पर्दे के पीछे से कूटनीतिक बातचीत के जरिए इस सैन्य संघर्ष को शांत करने की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन इस ताज़ा दुश्मनी ने शांति वार्ता को पूरी तरह पटरी से उतारने का एक बड़ा जोखिम खड़ा कर दिया है।
दुनिया का सबसे अहम समुद्री चोकपॉइंट: होर्मुज़ का मुहाना
यह पूरा विवाद जिस क़ेशम द्वीप को लेकर बढ़ा है, वह भौगोलिक रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के मुहाने पर स्थित है, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री चोकपॉइंट्स में गिना जाता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन इस जलमार्ग से जुड़ी है, क्योंकि:
दुनिया के कुल लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) व्यापार का करीब 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले कुल कच्चे तेल (Oil Shipment) के व्यापार का लगभग 25% हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से जाता है।
अपनी इसी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर ईरान क़ेशम द्वीप पर तैनात अपनी सैन्य ताकतों के जरिए इस पूरे जलमार्ग से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह नियंत्रित या प्रभावित कर सकता है।
यह जलमार्ग इराक, कुवैत, बहरीन और कतर जैसे खाड़ी देशों के व्यापार और तेल निर्यात का प्राथमिक समुद्री रास्ता है, साथ ही संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के ऊर्जा निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा भी इसी मार्ग पर निर्भर करता है।
ईरान का 'न डूबने वाला विमानवाहक पोत' और मिसाइल सिटी
वैश्विक सैन्य विश्लेषक और रक्षा विशेषज्ञ अक्सर क़ेशम द्वीप को "ईरान का कभी न डूबने वाला विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier)" कहकर बुलाते हैं, क्योंकि ईरान ने यहाँ पर बहुत ही विशाल और आधुनिक सैन्य बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) तैयार कर रखा है।
भूमिगत सुरंगों का जाल: ईरान की मुख्य सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने पूरे द्वीप के नीचे भूमिगत मिसाइल सुविधाओं और मजबूत रक्षात्मक ठिकानों का एक अभेद्य नेटवर्क तैयार किया है, जिसके कारण रक्षा गलियारों में इसे ईरान का 'मिसाइल शहर' भी कहा जाता है।
घातक मिसाइलों का जखीरा: इन बेहद सुरक्षित भूमिगत सुरंगों में भारी मात्रा में आधुनिक मिसाइलों का भंडारण किया गया है। यहाँ से जहाज-रोधी बैलिस्टिक मिसाइलें (Anti-ship Ballistic Missiles) और क्रूज मिसाइलें पलक झपकते ही दागी जा सकती हैं।
झुंड-शैली की नौसैनिक रणनीति: द्वीप पर आधुनिक नौसैनिक ठिकाने भी मौजूद हैं, जहाँ रॉकेटों और समुद्री बारूदी सुरंगों (Naval Mines) से लैस बेहद तेज रफ्तार वाली हमलावर नावें (Fast-attack Boats) तैनात रहती हैं। ये नावें खाड़ी में मौजूद अमेरिकी या किसी भी अन्य देश की बड़ी पारंपरिक नौसैनिक सेनाओं को चुनौती देने के लिए 'झुंड-शैली' (Swarm Tactics) से अचानक हमला करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का बड़ा दावा
इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि उसने शनिवार और रविवार को ईरान के गेरुक शहर के पास और क़ेशम द्वीप पर सटीक हवाई हमले किए थे। अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन हमलों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जहाजों और व्यापारिक पोतों के लिए बड़ा खतरा बन चुकीं ईरान की हवाई रक्षा प्रणालियों (Air Defense Systems), एक ड्रोन ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और दो सक्रिय हमलावर ड्रोनों को पूरी तरह तबाह करना था। इस बड़े ऑपरेशन में अमेरिका ने ईरान के एक एक्टिव रडार इंस्टॉलेशन और एक प्रमुख ड्रोन कमांड सेंटर को पूरी तरह से निष्क्रिय (मलबे में तब्दील) कर दिया है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान इसी द्वीप और रडार सिस्टम का इस्तेमाल कर खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर होने वाले मिसाइल हमलों को कोऑर्डिनेट करता था।
यूरोप में फैल रहा स्वास्थ्य संकट, एचआईवी और टीबी पर चिंता बढ़ी
4 Jun, 2026 01:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
स्टॉकहोम। यूरोप में संक्रामक बीमारियों के लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। 'यूरोपीय रोग निवारण एवं नियंत्रण केंद्र' (ECDC) ने एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि इन बीमारियों पर लगाम लगाने के लिए तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो अगले तीन सालों के भीतर पूरे यूरोप में ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) संक्रमण के लगभग 80 हजार नए मामले सामने आ सकते हैं। इसके साथ ही, इसी समयावधि में तपेदिक (टीबी) की वजह से 9 हजार से अधिक लोगों की जान जाने की भी आशंका जताई गई है।
एक दशक में दर्ज की गई यौन संचारित रोगों की सबसे ऊंची दर
ईसीडीसी की निदेशक पामेला रेंडी-वैगनर ने मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यूरोप इस समय एक बेहद गंभीर और चुनौतीपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के मुहाने पर खड़ा है। उन्होंने बताया कि एचआईवी, टीबी और अन्य यौन संचारित संक्रमणों (STIs) के ग्राफ में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो पूरे महाद्वीप की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में यूरोप में पिछले पूरे एक दशक (10 साल) की तुलना में यौन संचारित संक्रमणों की सबसे ऊंची दर दर्ज की गई है। इस दौरान सिफलिस और गोनोरिया जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में भी अप्रत्याशित उछाल देखा गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आम लोगों में जागरूकता की भारी कमी, समय पर बीमारियों की जांच (टेस्टिंग) न होना और सुरक्षित यौन व्यवहार को लेकर बरती जा रही लापरवाही इस खतरनाक उभार के मुख्य कारण हैं।
संक्रामक रोगों से हर साल 59 हजार मौतें
रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) के सदस्य देशों के साथ-साथ आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे जैसे देशों में भी इन संक्रामक रोगों का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि इन सभी देशों को मिलाकर हर साल लगभग 59 हजार लोग एचआईवी, टीबी और अन्य यौन जनित रोगों से पैदा होने वाली शारीरिक जटिलताओं के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। विभिन्न स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में यूरोपीय संघ, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे में तकरीबन 8 लाख लोग एचआईवी संक्रमण के साथ अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत करने की अपील
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ तौर पर कहना है कि समय पर सटीक जांच, प्रभावी व आधुनिक इलाज और जमीनी स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर ही इन डरावने आंकड़ों को बढ़ने से रोका जा सकता है। हालात की गंभीरता को देखते हुए ईसीडीसी (ECDC) ने सभी सहयोगी देशों से अपील की है कि वे अपने यहाँ एचआईवी और टीबी नियंत्रण कार्यक्रमों को और अधिक मजबूत करें। साथ ही, अस्पतालों में टेस्टिंग सुविधाओं का दायरा बढ़ाएं और समाज के सबसे संवेदनशील व उच्च जोखिम वाले समूहों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करें। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इस चेतावनी के बाद भी लापरवाही बरती गई, तो आने वाले सालों में पूरे यूरोप को एक बहुत बड़े मेडिकल इमरजेंसी जैसे संकट का सामना करना पड़ सकता है।
राजदूत ने घायलों से की बात, भारत की पूरी मदद का दिया भरोसा
4 Jun, 2026 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुवैत सिटी। कुवैत में भारत की राजदूत पारमिता त्रिपाठी ने बुधवार को कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए भीषण ड्रोन हमले में घायल हुए भारतीय नागरिकों से मुलाकात की। उन्होंने अस्पतालों का दौरा कर घायल भारतीयों का हालचाल जाना और उन्हें आश्वस्त किया कि भारतीय दूतावास उनकी हर संभव मदद के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके साथ ही, राजदूत कुवैत के सेंट्रल मॉर्चुरी (शवगृह) भी पहुंचीं, जहां इस हमले में अपनी जान गंवाने वाले इकलौते भारतीय नागरिक का पार्थिव शरीर रखा गया है।
भारतीय दूतावास ने दी जानकारी, शव को भारत लाने की कोशिशें तेज
कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस संवेदनशील दौरे की तस्वीरें और जानकारी साझा की। दूतावास के अनुसार, राजदूत पारमिता त्रिपाठी ने कुवैत के क्रिमिनल एविडेंस विभाग के जनरल मैनेजर ब्रिगेडियर अब्दुल रहीम अल-अवधी से विशेष मुलाकात की। उन्होंने इस बेहद दुखद और आपातकालीन घड़ी में कुवैती प्रशासन द्वारा दिखाई गई तत्परता, तुरंत मदद और संवेदनशीलता के लिए उनका धन्यवाद किया।
दूतावास ने साफ किया है कि वे मृतक भारतीय नागरिक के शोक संतप्त परिवार के साथ लगातार सीधे संपर्क में हैं। कानूनी कागजी कार्रवाई को जल्द पूरा कर शव को ससम्मान और अविलंब भारत भेजने के लिए कुवैत के उच्च अधिकारियों के साथ लगातार तालमेल बिठाया जा रहा है। इसके साथ ही, दूतावास की एक विशेष टीम घायलों के स्वास्थ्य और उनके इलाज की स्थिति पर नजर रखने के लिए अस्पतालों और उनके परिजनों के साथ लगातार जुड़ी हुई है।
भारत सरकार ने हमले की कड़े शब्दों में की निंदा
इस बीच, भारत सरकार ने कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए इस कायरतापूर्ण ड्रोन हमले की कड़े शब्दों में आलोचना की है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर मृतक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी मौजूदा तनाव और संघर्ष के बीच मासूम नागरिकों और हवाई अड्डे जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे (सिविलियन इन्फ्रास्ट्रक्चर) को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच से सभी पक्षों से ऐसे हमलों को तुरंत रोकने की अपील की है।
कुवैत ने बताया 'ईरानी हमला', ईरान ने कहा- अमेरिका को जवाब
कुवैत के रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कई आत्मघाती दुश्मन ड्रोनों ने हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 को निशाना बनाकर यह हमला किया था। इस हमले के कारण यात्री टर्मिनल भवन को भारी नुकसान पहुंचा है और कई हवाई यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं। कुवैती रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने इस घटना की सीधी जिम्मेदारी ईरान पर डालते हुए इसे 'ईरानी आक्रामकता' करार दिया। उन्होंने कहा कि कुवैत की सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है और संप्रभुता की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। दूसरी तरफ, ईरान ने इस हमले पर अपनी सफाई देते हुए इसे क्षेत्र में अमेरिकी कार्रवाइयों के खिलाफ एक जवाबी कार्रवाई बताया है।
सुरक्षा और आराम का डबल डोज: गीता जयंती एक्सप्रेस को मिले 22 एलएचबी कोच, जानें यात्रियों को क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं
4 Jun, 2026 12:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र | यदि आप नियमित रूप से गीता जयंती एक्सप्रेस से यात्रा करते हैं और आगामी दिनों में आपको रेलवे स्टेशन पर पारंपरिक डिब्बों की जगह लाल रंग के आधुनिक कोच दिखाई दें, तो हैरान होने की आवश्यकता नहीं है। उत्तर रेलवे ने मुसाफिरों की सहूलियत, हिफाजत और सफर को शानदार बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। रेलवे प्रशासन ने कुरुक्षेत्र से खजुराहो के बीच प्रतिदिन चलने वाली गाड़ी संख्या 11841/11842 (कुरुक्षेत्र-खजुराहो-कुरुक्षेत्र) गीता जयंती एक्सप्रेस के पुराने आईसीएफ (ICF) कोचों को हटाकर उनकी जगह अत्याधुनिक एलएचबी (LHB) रैक लगा दी है। इस बदलाव के बाद अब यात्री कुरुक्षेत्र से खजुराहो तक की लगभग 822 किलोमीटर की दूरी बेहद सुरक्षित और आरामदायक तरीके से पूरी कर सकेंगे। बता दें कि यह ट्रेन फरीदाबाद, पलवल, होडल और कोसीकलां जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकती है।
जर्मन तकनीक से लैस हैं नए कोच, दुर्घटना के समय रहेगा कम खतरा
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, नए जर्मन तकनीक पर आधारित एलएचबी कोच सुरक्षा के पैमानों पर पुराने डिब्बों के मुकाबले कई गुना ज्यादा आधुनिक और मजबूत हैं। इन नए डिब्बों की सबसे मुख्य विशेषता इनकी 'एंटी-टेलीस्कोपिक' प्रणाली है। इस तकनीक की वजह से किसी भी अप्रिय हादसे या ट्रेन के बेपटरी होने की स्थिति में डिब्बे एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते, जिससे यात्रियों के हताहत होने की आशंका न के बराबर हो जाती है। इसके अलावा, एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि यदि ट्रेन किसी स्टेशन या आउटर पर खड़ी भी रहेगी, तब भी कोच के भीतर लगे पंखे और लाइट पूरी क्षमता से चलते रहेंगे, जो पुराने डिब्बों में संभव नहीं था।
झटके और शोर से मिलेगी मुक्ति, आग लगने पर खुद रुक जाएगी ट्रेन
तकनीकी जानकारों ने बताया कि एलएचबी कोचों में उन्नत सस्पेंशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जो तेज रफ्तार के दौरान भी ट्रेन के भीतर होने वाले कंपन (वाइब्रेशन) और खड़खड़ाहट की आवाज को काफी कम कर देता है। इससे यात्रियों को शांत वातावरण में आरामदायक सीटों पर सफर का आनंद मिलेगा और झटके भी महसूस नहीं होंगे। सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए इन नए कोचों में आधुनिक स्मॉग डिवाइस (धुआं संसूचक प्रणाली) लगाई गई है। यदि ट्रेन के अंदर किसी भी वजह से धुआं उठता है या आग लगने की नौबत आती है, तो यह सिस्टम सक्रिय हो जाएगा और ट्रेन में ऑटोमैटिक ब्रेक लग जाएंगे।
कोचों की कुल संख्या में बदलाव नहीं, आंतरिक व्यवस्था में फेरबदल
रेलवे प्रशासन के मुताबिक, ट्रेन में डिब्बों की कुल संख्या पहले की तरह 22 ही रखी गई है, लेकिन यात्रियों की मांग और सुविधा को देखते हुए अलग-अलग श्रेणियों के डिब्बों के समीकरण में आंशिक बदलाव किया गया है:
सामान्य श्रेणी: साधारण द्वितीय श्रेणी (जनरल) के डिब्बों की संख्या को 10 से घटाकर अब 7 कर दिया गया है। वहीं, जनरल सीटिंग-कम-लगेज डिब्बों की संख्या को 5 से बढ़ाकर 6 कर दिया गया है।
एसी श्रेणी: वातानुकूलित सफर को सुगम बनाने के लिए एसी चेयर कार की संख्या को 3 से बढ़ाकर 4 किया गया है। इसके साथ ही, सामान और वातानुकूलित यात्रा के बेहतर तालमेल के लिए 2 नए 'लगेज-कम-एसी चेयर कार' कोच शामिल किए गए हैं।
अन्य बदलाव: पुराने रैक में चलने वाले 'फर्स्ट एसी-कम-चेयर कार' को अब नए बेड़े से हटा दिया गया है। इसके स्थान पर नई रैक में 1 पावर कार, 1 लगेज-कम-गार्ड डिब्बा और 1 अतिरिक्त बोगी को जोड़ा गया है।
ट्रंप का बड़ा निर्णय: टॉड ब्लैंच को अटॉर्नी जनरल बनाएंगे
4 Jun, 2026 11:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि वह टॉड ब्लैंच को देश के नए अटॉर्नी जनरल (कानून मंत्री) के पद पर नामित करने जा रहे हैं। टॉड ब्लैंच पहले राष्ट्रपति ट्रंप के निजी वकील रह चुके हैं। उन्होंने कार्यवाहक (एक्टिंग) अटॉर्नी जनरल के रूप में न्याय विभाग की कमान संभालते हुए रिपब्लिकन राष्ट्रपति ट्रंप के राजनीतिक एजेंडे और नीतियों को बेहद आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाया है।
व्हाइट हाउस के रात्रिभोज में ट्रंप ने किया एलान
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बड़े फैसले की जानकारी व्हाइट हाउस में आयोजित एक रात्रिभोज (डिनर) के दौरान दी। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी योजना गुरुवार को औपचारिक रूप से टॉड ब्लैंच के नाम का प्रस्ताव अटॉर्नी जनरल पद के लिए रखने की है। इस पूरे एलान का एक वीडियो व्हाइट हाउस के ही एक सहायक द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया है, जिसके बाद यह खबर सामने आई।
ट्रंप के सबसे भरोसेमंद वकीलों में से एक हैं ब्लैंच
टॉड ब्लैंच को डोनाल्ड ट्रंप का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता है। उन्होंने ट्रंप के कई महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल कानूनी मामलों में उनकी पैरवी की है। अब कार्यवाहक भूमिका से आगे बढ़कर उन्हें स्थायी तौर पर अमेरिका के न्याय विभाग का सर्वोच्च अधिकारी बनाने की तैयारी की जा रही है। इस पद पर उनके नाम की औपचारिक घोषणा होने के बाद अमेरिकी कानून व्यवस्था और न्याय विभाग में कई बड़े नीतिगत बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
दोषी व्यक्ति को पेंटागन में पद मिलने से हड़कंप, सुरक्षा और नीतियों पर सवाल
4 Jun, 2026 10:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 6 जनवरी 2021 को अमेरिकी संसद (कैपिटल भवन) पर हुए हमले के मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को पेंटागन (रक्षा विभाग) में बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। इस फैसले के सामने आते ही अमेरिकी राजनीति में एक नया विवाद और तीखी बहस शुरू हो गई है। पेंटागन से मिली जानकारी के मुताबिक, एलियास इरिजारी नाम के इस युवा को रक्षा विभाग के नीति कार्यालय के तहत एक राजनैतिक पद पर नियुक्त किया गया है। यह वह संवेदनशील कार्यालय है जो देश के रक्षा मंत्री को सैन्य रणनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा योजनाओं से जुड़े सबसे अहम मुद्दों पर सलाह देने का काम करता है।
टूटी खिड़की से संसद में घुसा था आरोपी
एलियास इरिजारी साल 2021 में अमेरिकी संसद भवन पर हुए हिंसक हमले और घुसपैठ का हिस्सा था। उस समय वह दक्षिण कैरोलिना के एक सैन्य कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था। अदालत के रिकॉर्ड और दस्तावेजों से पता चलता है कि वह हमले के दौरान एक टूटी हुई खिड़की के रास्ते कैपिटल भवन के अंदर दाखिल हुआ था, काफी देर तक परिसर में घूमता रहा था और उसने वहां की तस्वीरें भी ली थीं। बाद में उसने अदालत में अवैध तरीके से परिसर में घुसने का अपना अपराध स्वीकार कर लिया था, जिसके बाद साल 2023 में कोर्ट ने उसे इस मामूली अपराध के लिए 14 दिन की जेल की सजा सुनाई थी। सजा मिलने से पहले उसने जज के सामने गहरा पछतावा जताते हुए कहा था कि उसकी इस हरकत से उसके परिवार और पूरे देश को शर्मिंदगी उठानी पड़ी है।
पेंटागन ने बताया 'देशभक्त' तो विपक्ष ने खड़े किए सवाल
इस विवादित नियुक्ति को लेकर जहां एक तरफ आलोचना हो रही है, वहीं पेंटागन के कार्यवाहक प्रेस सचिव जोएल वाल्डेज़ ने इस फैसले का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि इरिजारी एक योग्य और देशभक्त युवा पेशेवर हैं और रक्षा विभाग को एक राजनीतिक पद पर उनकी नियुक्ति करने पर गर्व है। दूसरी तरफ, विपक्ष इस फैसले से बिल्कुल सहमत नहीं है। सीनेट की खुफिया समिति के वरिष्ठ डेमोक्रेटिक सदस्य मार्क वार्नर ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सवाल उठाया कि संसद पर हुए हमले में दोषी पाए गए किसी व्यक्ति को आखिर देश की सुरक्षा से जुड़े इतने संवेदनशील और गोपनीय काम कैसे सौंपे जा सकते हैं?
ट्रंप प्रशासन में ऐसे फैसलों पर दोबारा छिड़ी बहस
अमेरिकी राजनीति में कैपिटल हमले से जुड़े किसी आरोपी को सरकारी पद दिए जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसी साल जनवरी में दोबारा व्हाइट हाउस (राष्ट्रपति पद) की कमान संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने 6 जनवरी के हमले से जुड़े करीब 1,600 आरोपियों के मामलों में बड़ी राहत दी है, जिनमें कई लोगों की माफी, सजा में छूट या मुकदमों को पूरी तरह खत्म करना शामिल है। ट्रंप प्रशासन के इन कदमों और अब पेंटागन में हुई इस नई नियुक्ति ने लोकतंत्र पर हुए उस हमले के मुद्दे को अमेरिकी राजनीति के केंद्र में दोबारा लाकर खड़ा कर दिया है।
घटती प्रजनन दर ने चौंकाया: हरियाणा में छोटे हो रहे परिवार, 1.9 पर पहुंचा टीएफआर
4 Jun, 2026 10:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ | बदलती जीवनशैली, बढ़ती उच्च शिक्षा और आर्थिक प्राथमिकताओं के चलते हरियाणा के पारंपरिक बड़े परिवारों का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। कभी 'हम दो हमारे दो' के नारे पर चलने वाले इस समाज में अब 'हम दो हमारा एक' की नई सोच जगह ले रही है, जिसके कारण घरों में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है। सूबे की नई पीढ़ी अब परिवार नियोजन को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रख रही है। यही कारण है कि हरियाणा की कुल प्रजनन दर (टोटल फर्टिलिटी रेट - टीएफआर) अब गिरकर 1.9 के स्तर पर आ गई है। यह बदलाव केवल एक सांख्यिकीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह राज्य के सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय भविष्य के एक बिल्कुल नए अध्याय की शुरुआत का संकेत है।
प्रतिस्थापन स्तर से नीचे पहुंची दर, शहरों ने पेश की नई मिसाल
सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा में एक महिला अपने पूरे प्रजनन काल के दौरान औसतन केवल 1.9 बच्चों को जन्म दे रही है। यह आंकड़ा जनसंख्या को स्थिर रखने वाले जरूरी 'प्रतिस्थापन स्तर' (रिप्लेसमेंट लेवल) यानी 2.1 से भी काफी नीचे चला गया है। प्रतिस्थापन स्तर वह सीमा होती है, जिससे एक पीढ़ी की आबादी अगली पीढ़ी में खुद का संतुलन बनाए रखती है; इसके नीचे जाने का सीधा मतलब यह है कि आने वाले सालों में राज्य की जनसंख्या वृद्धि की गति काफी धीमी पड़ जाएगी। इस सामाजिक बदलाव में शहरों की भूमिका सबसे आगे रही है, जहां शहरी क्षेत्रों में टीएफआर घटकर मात्र 1.6 रह गया है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह अभी 2.0 पर बना हुआ है।
पिछले 12 वर्षों में परिवारों के गणित में दर्ज हुई 13.6 फीसदी की गिरावट
यदि पिछले 12 सालों के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए, तो यह बदलाव बेहद चौंकाने वाला और साफ नजर आता है। वर्ष 2012-14 के दौरान हरियाणा की कुल प्रजनन दर जहां 2.2 थी, वहीं अब इसमें करीब 13.6 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी आई है। इस दौरान गांवों में यह दर 2.3 से घटकर 2.1 हुई है, जबकि शहरों में 2.0 से गिरकर 1.7 तक पहुंच गई है। इस बड़ी गिरावट के साथ ही हरियाणा अब 1.9 के राष्ट्रीय औसत के बिल्कुल बराबर खड़ा हो गया है। हालांकि, ग्रामीण हरियाणा की प्रजनन दर देश के शहरी औसत (1.5) से अभी भी कुछ ऊपर बनी हुई है, लेकिन हरियाणा के शहर राष्ट्रीय शहरी सूचकांक के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।
दूरगामी प्रभाव: बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और विकास की रफ्तार पर होगा असर
सामाजिक और जनसांख्यिकीय मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, प्रजनन दर में इस कमी के पीछे महिलाओं का बढ़ता साक्षरता स्तर, उनका नौकरीपेशा होना और परिवार नियोजन के आधुनिक साधनों की आसान उपलब्धता सबसे प्रमुख वजहें हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि टीएफआर इसी तरह 2.1 से नीचे बना रहा, तो इसका सीधा असर अगले 20 से 25 सालों में दिखाई देने लगेगा। जब दुनिया छोड़ने वाले लोगों के मुकाबले जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या कम होगी, तो कुल आबादी घटने लगेगी। इसके परिणामस्वरूप कार्यबल (वर्किंग पापुलेशन) में कमी आएगी, बुजुर्गों की आबादी का अनुपात बढ़ेगा और अंततः विकास की आर्थिक गति भी धीमी हो सकती है, जिससे भविष्य में अन्य राज्यों से पलायन (माइग्रेशन) बढ़ने की पूरी संभावना रहेगी।
हंसी-ठिठोली और गंभीर सीख के बीच मिला गुरुमंत्र: अर्चना गुप्ता को मिला राव, धनखड़ और पूनिया का त्रिवेणी साथ
4 Jun, 2026 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ | हरियाणा भाजपा की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के पदभार ग्रहण समारोह में राजनीतिक संदेशों, संगठनात्मक नसीहतों और हल्के-फुल्के हास्य का अनूठा संगम देखने को मिला। वरिष्ठ नेताओं ने जहां उन्हें इस नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं, वहीं संगठन को सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने अपने चिरपरिचित बेबाक अंदाज में कहा कि डॉ. अर्चना गुप्ता को पार्टी की एक सुदृढ़ संगठनात्मक विरासत मिली है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि आपको बनी-बनाई जमीन मिली है, इसलिए अत्यधिक मशक्कत की आवश्यकता नहीं होगी, परंतु कार्यकर्ताओं और नेताओं को उचित आदर-सम्मान देना सबसे अनिवार्य है। यदि सभी को उचित मान-सम्मान मिलता रहा, तो भाजपा को राज्य में चौथी बार सरकार बनाने से कोई नहीं रोक सकता।
अहंकार से दूरी और मातृत्व की भावना से नेतृत्व की सीख
समारोह के दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ ने प्रधानमंत्री का एक प्रसंग साझा करते हुए कहा कि मातृत्व ही वास्तव में नेतृत्व है। जिस तरह एक मां परिवार के प्रत्येक सदस्य का मनोबल बढ़ाती है, ठीक उसी तरह संगठन के मुखिया को भी कार्यकर्ताओं के उत्साह को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने डॉ. अर्चना गुप्ता को नसीहत देते हुए कहा कि अमूमन बड़े ओहदे पर पहुंचने के बाद व्यक्ति में अहंकार आ जाता है, लेकिन आपको अपने 'मैं' को त्यागकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के 'हम' की भावना के साथ काम करना होगा। उन्होंने याद दिलाया कि पद के साथ मिलने वाला आदर व्यक्ति का नहीं बल्कि उसकी जिम्मेदारी का होता है, इसलिए हमेशा जमीन से जुड़े रहना बेहद जरूरी है।
नेताओं की चुटकियों और हास्य-व्यंग्य से गूंजा सभागार
भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया ने अपने मजाकिया अंदाज से पूरे कार्यक्रम का माहौल बेहद हल्का-फुल्का बना दिया। उन्होंने हंसते हुए कहा कि वे ज्ञान की बातें नहीं करेंगे क्योंकि यह काम उन्होंने मुख्यमंत्री के भरोसे छोड़ रखा है, जो अमूमन सरकार की उपलब्धियों के पांच-छह पन्ने लेकर चलते हैं। इस पर सदन में जमकर ठहाके लगे। वरिष्ठ नेता अनिल विज के आगमन पर पूनिया ने टिप्पणी की कि इनकी एंट्री किसी धुरंधर की तरह हुई है। यही नहीं, उन्होंने राव इंद्रजीत सिंह की ओर इशारा करते हुए कहा कि राव साहब आसानी से अपना समर्थन नहीं देते, लेकिन आज उन्होंने दिल खोलकर आशीर्वाद दिया है। इसके साथ ही उन्होंने राज्यसभा सदस्यों संजय भाटिया, रेखा शर्मा और कार्तिकेय शर्मा पर भी मजाकिया तंज कसे, जिससे सभागार में हंसी की लहर दौड़ गई।
मजबूत विरासत को आगे ले जाने और बूथ विस्तार की चुनौती
निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली के संगठनात्मक कौशल की प्रशंसा करते हुए प्रदेश प्रभारी ने कहा कि उन्होंने पार्टी को एक बेहद मजबूत धरातल पर लाकर छोड़ा है। अब डॉ. अर्चना गुप्ता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती इस मजबूत विरासत को आगे बढ़ाने, भाजपा को और अधिक शक्तिशाली करने तथा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में पार्टी संगठन का प्रत्येक बूथ तक विस्तार करने की होगी। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने भी आश्वस्त किया कि वे मुख्यमंत्री और नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष को अपना पूरा सहयोग प्रदान करेंगे ताकि संगठन की मजबूती के लिए हर दायित्व को बखूबी निभाया जा सके।
10 लोगों की जान खतरे में, FBI ऑपरेशन में आरोपी ढेर
4 Jun, 2026 09:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेकर्सफील्ड। अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के बेकर्सफील्ड शहर से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक व्यक्ति ने एक दफ्तर की इमारत के अंदर 10 लोगों को बंधक बना लिया। यह पूरा ड्रामा और तनाव का माहौल 15 घंटे से भी अधिक समय तक चलता रहा। स्थानीय पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, इस संदिग्ध व्यक्ति ने बैंक की एक इमारत के भीतर खुद को इन लोगों के साथ बंद कर लिया था। पुलिस को इस पूरे मामले की जानकारी तब मिली जब उन्हें वहां बम होने की धमकी दी गई थी।
एफबीआई की जवाबी कार्रवाई में मारा गया संदिग्ध
बुधवार तड़के इस गंभीर मामले को सुलझाने और लोगों को बचाने के लिए अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) ने एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षाबलों की गोलीबारी में संदिग्ध हमलावर मारा गया, जिसके बाद इस खौफनाक सिलसिले का अंत हुआ।
सभी बंधक सुरक्षित, मामले की जांच जारी
पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि इमारत के भीतर फंसे सभी 10 बंधकों को पूरी तरह सुरक्षित और सही-सलामत बाहर निकाल लिया गया है। इस पूरे हादसे में किसी भी आम नागरिक को कोई चोट या नुकसान नहीं पहुंचा है। हमलावर ने ऐसा कदम क्यों उठाया और उसका क्या मकसद था, इसको लेकर सुरक्षा एजेंसियां गहराई से जांच में जुटी हुई हैं।
यूएफसी फाइट्स के बाद ट्रंप करेंगे जी-7 सम्मेलन में शिरकत
4 Jun, 2026 08:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि वह इसी महीने फ्रांस में आयोजित होने वाले जी-7 (G-7) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह बेहद महत्वपूर्ण सम्मेलन 15 से 17 जून तक फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन-ले-बैंस में होने जा रहा है। दुनिया के शक्तिशाली देशों की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब ईरान के मुद्दे पर अमेरिका और उसके पुराने मददगार व पारंपरिक सहयोगी देशों के बीच आपसी मतभेद काफी गहरे हो चुके हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस की इस यात्रा की जानकारी खुद अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट के जरिए साझा की है। उन्होंने अपनी पोस्ट में बताया कि वह 14 जून को व्हाइट हाउस परिसर में होने वाली यूएफसी (UFC) विश्व चैंपियनशिप फाइट्स का पूरा आनंद उठाएंगे और इसके तुरंत बाद सीधे फ्रांस के लिए रवाना हो जाएंगे। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में होने वाले इस खेल आयोजन को लेकर अपनी उत्सुकता जाहिर करते हुए इसे अमेरिकी इतिहास की सबसे मनोरंजक और शानदार रातों में से एक बताया।
पश्चिम एशिया संघर्ष में चीन का हाथ? सबूतों की कमी बनी सवाल
3 Jun, 2026 05:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 'हाउस एप्रोप्रियेशन्स सबकमेटी' की एक अहम सुनवाई के दौरान साफ किया है कि अमेरिका को मौजूदा क्षेत्रीय संकट में चीन द्वारा ईरान को किसी भी तरह की सैन्य मदद देने के सबूत नहीं मिले हैं। विदेश मंत्री रुबियो ने बीजिंग (चीन) से अपील की है कि वह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का साथ दे। रुबियो ने यह भी माना कि चीन ने ईरान को न तो कोई सैन्य सहायता दी है और न ही उसने अमेरिकी अभियानों या उनकी काम करने की क्षमता में कोई अड़चन पैदा की है। अमेरिकी विदेश मंत्री के इस बयान ने दुनिया के सबसे संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दे पर चीन की भूमिका को लेकर वाशिंगटन के नजरिए को साफ कर दिया है।
ईरान के साथ पुराने रिश्ते, लेकिन युद्ध से दूरी
अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस बात को स्वीकार किया कि ईरान के पास चीन में बने कुछ सैन्य हथियार और उपकरण जरूर हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक संबंध रहे हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि हालिया संघर्ष में चीन की तरफ से ऐसी कोई भी गतिविधि नहीं देखी गई है, जिससे युद्ध की स्थिति बिगड़े या सैन्य संतुलन पर कोई असर पड़े। रुबियो ने संकट के इस दौर में चीन के रवैये को बेहद 'सावधानीपूर्ण' बताया। उनका कहना था कि बीजिंग ने ईरान के साथ अपनी गहरी दोस्ती के बावजूद इस जंग में सीधे तौर पर कूदने से खुद को बचाए रखा है।
संयुक्त राष्ट्र में रचनात्मक भूमिका और वीटो न करने की अपील
मार्को रुबियो ने चीन से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अधिक सकारात्मक भूमिका निभाने का आग्रह किया है। अमेरिका वर्तमान में सुरक्षा परिषद के एक ऐसे प्रस्ताव का समर्थन कर रहा है, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के लिए पैदा हुई बाधाओं को दूर करना है। दुनिया के तेल व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। रुबियो ने चीन को घेरते हुए कहा कि अगर वह वास्तव में इस समुद्री रास्ते को बंद किए जाने के खिलाफ है, तो उसे इस अमेरिकी प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए, या कम से कम अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल करके इसे रोकना नहीं चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में चीन का खुद का बड़ा आर्थिक फायदा छिपा है।
समुद्री संकट से चीन की अर्थव्यवस्था को खतरा
अमेरिकी विदेश मंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर ईरान की वजह से इस समुद्री मार्ग में लंबे समय तक रुकावट बनी रहती है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान खुद चीन को उठाना पड़ेगा। चीन दुनिया की सबसे बड़ी निर्यात-आधारित (एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड) अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जो वैश्विक व्यापार और कच्चे तेल की सप्लाई पर निर्भर है। अगर दुनिया भर के देशों को ईंधन (ईंधन और तेल) पर ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा, तो उनकी चीजें खरीदने की क्षमता घट जाएगी। बाजार में मांग कम होने का सीधा असर चीन के निर्यात और उसकी पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है।
भारत के लिए क्यों मायने रखता है यह घटनाक्रम?
यह पूरा घटनाक्रम भारत के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। भारत और चीन दोनों ही खाड़ी देशों (मिडल ईस्ट) से आने वाले कच्चे तेल और ऊर्जा संसाधनों के सबसे बड़े खरीदार हैं। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण सप्लाई चेन लंबे समय तक प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और जहाजों के किराए (शिपिंग कॉस्ट) में बढ़ोतरी के रूप में दिखेगा। यह स्थिति न केवल भारत के आर्थिक बजट को बिगाड़ सकती है, बल्कि पूरे एशिया की सप्लाई चेन के लिए एक नया संकट खड़ा कर सकती है।
दिल दहला देने वाली दुर्घटना: बैक हो रही कचरा गाड़ी के नीचे आया दो साल का मासूम, मौके पर मची चीख-पुकार
3 Jun, 2026 05:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फतेहाबाद | हरियाणा के भूना शहर के वार्ड नंबर पांच में बुधवार सुबह एक बेहद हृदयविदारक हादसा सामने आया है। यहां गली में खेल रहा दो साल का एक मासूम बच्चा नगर पालिका की कचरा उठाने वाली गाड़ी (डोर-टू-डोर गारबेज व्हीकल) की चपेट में आ गया। इस दर्दनाक दुर्घटना में अंश नामक मासूम गंभीर रूप से जख्मी हो गया, जिसे आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया। मगर, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बाद भी उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद से पूरे इलाके और पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
संकरी गली में बैक करते समय हुआ हादसा, चालक की नजर से चूका मासूम
चश्मदीदों के मुताबिक, यह वाकया सुबह करीब नौ बजे बाबा राणाधीर मंदिर के सामने वाली गली में पेश आया। उस वक्त ठेकेदार की कचरा संग्रहण गाड़ी रोज की तरह वार्ड से कूड़ा उठाने आई थी। उसी दौरान गली के मुहाने पर पानी का एक टैंकर खड़ा होने की वजह से रास्ता काफी संकरा हो गया था। जगह कम होने के कारण ड्राइवर बेहद सावधानी से गाड़ी को पीछे (बैक) कर रहा था, लेकिन इसी बीच खेल रहा मासूम अंश अचानक वाहन के पिछले हिस्से के नीचे आ गया। गाड़ी बड़ी होने के कारण चालक को नीचे खेल रहा बच्चा दिखाई नहीं दिया।
मौके पर मची चीख-पुकार, पुलिस ने वाहन को लिया कब्जे में
हादसा होते ही गली में जोर-जोर से चीख-पुकार मच गई। रोने-चिल्लाने की आवाज सुनकर परिजन और आस-पड़ोस के लोग घरों से बाहर दौड़े और लहुलुहान हालत में बच्चे को नजदीकी नागरिक अस्पताल लेकर भागे, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस और वार्ड के पार्षद भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। कानून व्यवस्था और स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने दुर्घटना को अंजाम देने वाली कचरा गाड़ी को तुरंत अपने कब्जे में ले लिया है।
कचरा गाड़ियों में हेल्पर रखने की उठी मांग, परिजनों की शिकायत पर होगी कार्रवाई
इस दर्दनाक हादसे के बाद स्थानीय निवासियों में भारी रोष देखा जा रहा है। वार्ड के लोगों का कहना है कि संकरी गलियों में सुबह के वक्त अक्सर छोटे बच्चे खेलते रहते हैं। ऐसे में नगर पालिका और ठेकेदार की इन गाड़ियों के साथ एक हेल्पर (सहयोगी) का होना बेहद जरूरी है, जो गाड़ी को बैक करवाते समय पीछे खड़े होकर ध्यान रख सके। लोगों ने प्रशासन से कचरा उठाने के समय में भी बदलाव करने की मांग की है। स्थानीय थाना पुलिस के अनुसार, परिजनों द्वारा दी जाने वाली लिखित शिकायत के आधार पर फरार चालक के खिलाफ कानून के तहत सख्त मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जापान में भारतीय रेस्टोरेंट उद्योग पर संकट की लकीर
3 Jun, 2026 04:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो। जापान में भारतीय स्वाद और खानपान की पहचान बना चुका रेस्टोरेंट उद्योग इन दिनों अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। देशभर में चल रहे करीब 5,000 भारतीय रेस्टोरेंट पर बंद होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। लगातार बढ़ती लागत, सरकार के सख्त नियम और काम करने वाले कर्मचारियों (श्रमिकों) की भारी कमी इस संकट की मुख्य वजह बनकर उभरे हैं। जापान में रहने वाले लगभग 69 हजार भारतीयों में से एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रेस्टोरेंट कारोबार से जुड़ा हुआ है। भारतीय और नेपाली समुदायों द्वारा चलाए जाने वाले ये रेस्टोरेंट जापानी शहरों में अपनी खास करी और मसालेदार व्यंजनों के लिए बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन अब इनका अस्तित्व ही दांव पर लग गया है।
वीजा और रोजगार के सख्त नियमों की दोहरी मार
इस संकट की सबसे बड़ी वजह जापान सरकार द्वारा विदेशी कर्मचारियों को लेकर नियमों को कड़ा करना है। पहले के समय में कुशल विदेशी कारीगरों और रसोइयों (शेफ) को काफी आसानी से वीजा मिल जाता था, लेकिन अब सरकार ने स्थायी निवास (परमानेंट रेजिडेंसी) और रोजगार से जुड़ी शर्तों को बेहद सख्त कर दिया है। इसके साथ ही, रेस्टोरेंट मालिकों पर टैक्स और कागजी कार्रवाई (प्रशासनिक खर्च) का बोझ भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। कई छोटे व्यवसायियों का दर्द है कि मंदी के कारण उनकी कमाई लगातार घट रही है, जबकि दुकानों का किराया, कर्मचारियों का वेतन और अन्य जरूरी खर्च लगातार आसमान छू रहे हैं।
नेपाली कर्मचारियों की कमी से थमी रफ्तार
जापान में भारतीय रेस्टोरेंट उद्योग की सफलता के पीछे नेपाली कर्मचारियों की भी एक बहुत बड़ी भूमिका रही है। अमूमन इन रेस्टोरेंटों में काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारी नेपाल से आते हैं, लेकिन वीजा नियमों में हुए हालिया बदलावों के कारण अब नए श्रमिकों का जापान आना बेहद मुश्किल हो गया है। इस वजह से छोटे और मध्यम स्तर के रेस्टोरेंट मालिकों के पास काम करने वाले लोगों का टोटा पड़ गया है और वे भारी दबाव में काम कर रहे हैं।
आजीविका और भारतीय पहचान पर संकट
इस उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों और कारोबारियों का मानना है कि यदि जापान सरकार ने इन कड़े नियमों में जल्द ही कोई ढील या राहत नहीं दी, तो आने वाले कुछ ही सालों में हजारों भारतीय रेस्टोरेंट हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे। ऐसा होने से न केवल वहां रह रहे हजारों लोगों की आजीविका और रोजगार छिन जाएगा, बल्कि जापान की संस्कृति में घुल-मिल चुकी भारतीय खानपान की खास पहचान को भी एक बड़ा और गहरा झटका लगेगा।
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महतारी वंदन योजना बनी महिलाओं के आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का आधार
बैगा अंचल की संस्कृति से प्रभावित हुई नेशनल जियोग्राफी ट्रैवलर टीम, छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन को बताया अद्भुत
पुलिस प्रशिक्षण शाला उज्जैन में 206 नव आरक्षकों का दीक्षांत समारोह संपन्न
स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्य समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएँ : उप मुख्यमंत्री शुक्ल
पर्यावरण संरक्षण के लिए जन जागरूकता बढ़ाएं- डेका’
मेडिटेशन को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं - राज्यपाल रमेन डेका
