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ईरान की शर्तों पर नहीं बनी बात, ट्रंप बोले- समझौते के आसार नहीं
19 May, 2026 03:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन / तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच दुनिया ने थोड़ी राहत की सांस ली है। पिछले कुछ दिनों से लगातार ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि दोनों पक्ष जल्द ही एक बड़े युद्ध में आमने-सामने होंगे। अमेरिका की ओर से मिल रही लगातार धमकियों और ईरान के कड़े पलटवार के बाद यह माना जा रहा था कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर खाड़ी क्षेत्र फिर से जंग के मैदान में तब्दील हो जाएगा। हालांकि, वैश्विक स्तर पर तेल की आसमान छूती कीमतों और आपूर्ति के संकट के बीच, अब एक सकारात्मक खबर सामने आई है कि अमेरिका ने ईरान पर होने वाले अपने आगामी हमलों की योजना को फिलहाल टालने का फैसला किया है।
खाड़ी देशों की अपील पर राष्ट्रपति ट्रंप ने रोके हमले
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चरम पर पहुंचे इस संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और रणनीतिक बयान जारी किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। उनके मुताबिक, यह महत्वपूर्ण निर्णय कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे प्रमुख खाड़ी देशों के विशेष अनुरोध और मध्यस्थता की मांग के बाद लिया गया है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस फैसले के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच बेहद गंभीर कूटनीतिक बातचीत का दौर शुरू हो चुका है।
ईरानी राष्ट्रपति का रुख, बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं
दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका के साथ चल रही इस कूटनीतिक वार्ता को लेकर अपने देश का रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। उन्होंने अपने बयान में कड़े लहजे में कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर बैठने का मतलब यह कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि ईरान ने घुटने टेक दिए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि तेहरान इस वार्ता में अपने पूरे सम्मान, सैन्य ताकत और अपने राष्ट्रीय व संप्रभु अधिकारों की रक्षा की शर्त पर ही शामिल हुआ है और देश के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
युद्धविराम के बावजूद इजरायल और लेबनान में खूनी संघर्ष जारी
एक तरफ जहां खाड़ी में ईरान-अमेरिका युद्ध का खतरा कुछ टला है, वहीं दूसरी तरफ इजरायल और लेबनान के बीच का हिंसक संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिकी मध्यस्थता के जरिए युद्धविराम की अवधि बढ़ाए जाने के बावजूद सोमवार को इजरायली लड़ाकू विमानों ने लेबनान में बमबारी की, जिसमें कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीते 2 मार्च से लेकर अब तक हुए इजरायली हमलों और सैन्य ऑपरेशनों में 3,020 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 9,273 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गाजा सहायता जहाजों को रोकने पर विवाद
इन हमलों के अलावा, गाजा के पीड़ित नागरिकों के लिए मानवीय राहत सामग्री ले जा रहे जहाजों (सहायता बेड़े) को रोकने को लेकर इजरायल की वैश्विक स्तर पर चौतरफा आलोचना और घेराबंदी शुरू हो गई है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली बलों ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा का उल्लंघन करते हुए गाजा सहायता बेड़े के कई जहाजों को बीच समुद्र में ही बंधक बना लिया। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई के दौरान इजरायली नौसेना ने करीब 47 नौकाओं को अपने कब्जे में ले लिया और राहत सामग्री पहुंचाने जा रहे सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है।
वैश्विक नियमों के उल्लंघन पर दुनिया भर में आक्रोश
इजरायल द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में की गई इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद कई देशों, वैश्विक नेताओं और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने अपनी तीव्र नाराजगी और आक्रोश जाहिर किया है। मानवाधिकार संस्थाओं का साफ तौर पर कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत खुले समुद्र (इंटरनेशनल वॉटर्स) में मानवीय सहायता ले जा रहे असैन्य जहाजों को बलपूर्वक रोकना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस चौतरफा तनाव, ईरान-अमेरिका वार्ता के भविष्य, लेबनान में लगातार गिरती लाशों और गाजा सहायता बेड़े पर हुए इस नए विवाद ने पूरी दुनिया को एक बार फिर एक महासंकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
होर्मुज से अच्छी खबर, जहाजों की बढ़ी आवाजाही से तेल-गैस बाजार में उम्मीद
19 May, 2026 02:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई / वाशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बाद से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आसमान छूती कीमतों ने पूरी दुनिया को संकट में डाल रखा है। भारत सहित कई बड़े देशों में ईंधन के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह के भीतर इस रणनीतिक जलमार्ग से मालवाहक जहाजों (शिप्स) की रिकॉर्ड आवाजाही दर्ज की गई है। कमोडिटी डेटा फर्म 'केपलर' (Kpler) के शिप ट्रैकिंग डेटा और समुद्री निगरानी कंपनियों के इन आंकड़ों ने वैश्विक शिपिंग बाजार को बड़ी उम्मीद दी है।
तनाव के बीच जहाजों की संख्या में रिकॉर्ड सुधार
समुद्री यातायात की निगरानी करने वाली एजेंसियों के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 11 मई से 17 मई के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी उछाल आया है और अब यहाँ से हर हफ्ते लगभग 55 मालवाहक जहाज सुरक्षित गुजर रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि युद्ध के चरम पर होने के दौरान सुरक्षा कारणों से यह ग्राफ बेहद डराने वाले स्तर पर पहुंच गया था और इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर महज 19 रह गई थी, जो संघर्ष की शुरुआत के बाद का सबसे निचला स्तर था। अब इस यातायात में आ रहे सुधार को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
ईरानी हमलों और नाकेबंदी के बाद सुधर रहे हालात
क्षेत्र में इस अभूतपूर्व तनाव की शुरुआत बीते 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए बड़े हमलों के बाद खाड़ी देशों में युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ा पहरा बैठा दिया था और जहाजों के आवागमन को बाधित कर दिया था। इस नाकेबंदी के कारण दुनिया भर के तेल और गैस बाजारों में हाहाकार मच गया था। हालांकि, ईरान की सरकारी मीडिया से आ रही खबरों के अनुसार, वहां के 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' ने पिछले कुछ दिनों में अपनी कड़ाई कम की है और अधिक वाणिज्यिक जहाजों को इस मार्ग से आगे बढ़ने की अनुमति दी है, जिससे समुद्री यातायात धीरे-धीरे अपनी पुरानी स्थिति की ओर लौट रहा है।
ईरान की नई निगरानी संस्था से बढ़ी वैश्विक चिंता
यातायात बहाल होने के बीच ईरान ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता और चिंता को फिर से बढ़ा दिया है। ईरान सरकार ने होर्मुज जलमार्ग पर अपना नियंत्रण और कड़ा करने के लिए एक नई विशेष संस्था (Authority) के गठन का ऐलान किया है, जो वहां से गुजरने वाले जहाजों के संचालन की देखरेख करने के साथ-साथ उनसे शुल्क (टैक्स) वसूलने का काम भी करेगी। इस नई व्यवस्था के जरिए ईरान इस पूरे समुद्री रास्ते पर 'रीयल टाइम' (पल-पल की) निगरानी रख सकेगा। जहाँ एक तरफ ईरान का तर्क है कि वह इसके माध्यम से केवल एक सुव्यवस्थित सुरक्षा व्यवस्था बनाना चाहता है, वहीं दुनिया के कई प्रमुख देशों का मानना है कि ईरान इस संस्था की आड़ में होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह से अपना एकाधिकार और अवैध कब्जा जमाना चाहता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बेनतीजा
समुद्री मार्ग पर जारी इस कूटनीतिक रस्साकशी के बीच, इस संकट को सुलझाने के लिए अमेरिका और ईरान के राजनयिकों के बीच पर्दे के पीछे चल रही बातचीत अभी तक किसी ठोस या बड़े नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। दोनों ही देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं, जिसके कारण इस रणनीतिक क्षेत्र में स्थायी शांति को लेकर संशय बरकरार है। दुनिया भर के नीति निर्माताओं और तेल समीक्षकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि ईरान की इस नई निगरानी संस्था के लागू होने के बाद वैश्विक शिपिंग कंपनियां और अमेरिकी नौसेना इस पर क्या रुख अपनाती हैं।
नेपाल में छोटे आयातकों को राहत, ₹100 से अधिक के सामान पर कस्टम फीस पर रोक
19 May, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोनबरसा। नेपाल-भारत बॉर्डर से जुड़े आम नागरिकों के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर सामने आई है। नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने सीमा पार से सामान्य नागरिकों द्वारा लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक के रोजमर्रा के सामान पर लगाए गए कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) की वसूली पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले से सीमावर्ती तराई-मधेश क्षेत्र के निवासियों और स्थानीय व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है।
सुप्रीम कोर्ट का सरकार को सख्त निर्देश
नेपाल सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हरि प्रसाद फुयाल और न्यायाधीश टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए एक बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने प्रधानमंत्री व मंत्रिपरिषद कार्यालय और वित्त मंत्रालय सहित सभी संबंधित विभागों को यह साफ निर्देश दिया है कि जब तक इस मामले पर कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक आम जनता से दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर किसी भी तरह का सीमा शुल्क न वसूला जाए।
विवादित सरकारी अधिसूचना और जनविरोध
गौरतलब है कि नेपाल सरकार ने बीते 2 मई को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत भारत से नेपाल लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के हर सामान पर कस्टम शुल्क चुकाना अनिवार्य कर दिया गया था। सरकार के इस नियम का सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आम लोगों ने भारी विरोध किया था। स्थानीय नागरिकों का तर्क था कि इस अव्यवहारिक नियम की वजह से उनकी रोजमर्रा की जरूरी चीजों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो रही थी। इस सरकारी फैसले के खिलाफ अधिवक्ताओं ने 14 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर इसे चुनौती दी थी, जिसे गंभीर मानते हुए अदालत ने अब अंतरिम राहत दी है।
दोनों देशों के सीमावर्ती बाजारों में खुशी की लहर
अदालत के इस फैसले के बाद भारत और नेपाल, दोनों ही तरफ के सीमावर्ती क्षेत्रों में खुशी का माहौल है। सोनबरसा सहित भारतीय सीमा के बाजारों के कारोबारियों ने इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि इस रोक के बाद अब सीमावर्ती बाजारों में रौनक फिर से लौट आएगी और नेपाल के नागरिक पहले की तरह ही बिना किसी परेशानी के अपनी जरूरत का सामान आसानी से खरीद सकेंगे।
सुबह की सैर बन गई दुखद हादसा, कपिल मुनि तालाब में डूबीं दो बहनें
19 May, 2026 12:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैथल। हरियाणा के कलायत इलाके से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ मंगलवार की अलसुबह दो सगी बहनें कपिल मुनि तालाब में डूब गईं, जिससे दोनों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान कलायत की रहने वाली 20 वर्षीय पलक और उसकी छोटी बहन 18 वर्षीय परमजीत के रूप में हुई है। इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
रोजाना की तरह सुबह की सैर पर निकली थीं दोनों बहनें
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, दोनों बहनें पलक और परमजीत की दिनचर्या थी कि वे हर रोज सुबह करीब 5:00 बजे वॉक (सैर) के लिए घर से बाहर जाती थीं। मंगलवार सुबह भी दोनों सामान्य दिनों की तरह सुबह की ताजी हवा में टहलने के लिए निकली थीं। लेकिन जब काफी समय बीत जाने के बाद भी वे घर वापस नहीं लौटीं, तो परिजनों को चिंता होने लगी। अनहोनी की आशंका के चलते परिवार के लोग उनकी खोजबीन करते हुए कपिल मुनि तालाब की तरफ पहुंचे, जहाँ उन्हें दोनों के डूबने की प्राथमिक जानकारी मिली।
स्थानीय लोगों और गोताखोरों ने चलाया डेढ़ घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की भनक लगते ही कलायत थाना पुलिस तुरंत एक्शन में आई और बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने तुरंत गोताखोरों की टीम को काम पर लगाया। इस दौरान वहां मौजूद स्थानीय निवासियों ने भी मानवता का परिचय देते हुए तालाब में उतरकर युवतियों को ढूंढने में मदद की। करीब डेढ़ घंटे तक चले कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन (बचाव अभियान) के बाद दोनों बहनों को पानी से बाहर निकाला गया। उन्हें तुरंत एम्बुलेंस की मदद से कैथल के सिविल अस्पताल (नागरिक अस्पताल) ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपे जाएंगे शव, तफ्तीश में जुटी पुलिस
इस मामले को लेकर कलायत थाना प्रभारी सुभाष चंद्र ने बताया कि पुलिस टीम सूचना मिलते ही घटनास्थल पर सक्रिय हो गई थी। ग्रामीणों के सहयोग से दोनों युवतियों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा है और पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। थाना प्रभारी ने कहा कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने और वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए शोकाकुल परिवार को सौंप दिए जाएंगे। फिलहाल पुलिस हादसे के सही कारणों और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए मामले की गहनता से जांच कर रही है।
हरियाणा रोडवेज की नई सुविधा: रोहतक-शिमला सीधी बस, जानें किराया
19 May, 2026 12:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। चिलचिलाती गर्मी के इस मौसम में पहाड़ों की सैर पर जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए हरियाणा रोडवेज ने एक बड़ी सौगात दी है। विभाग की ओर से रोहतक से शिमला के लिए सीधी बस सेवा का सफल आगाज किया गया है। मंगलवार को स्थानीय बस स्टैंड के काउंटर नंबर आठ से पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और रोडवेज के महाप्रबंधक (GM) नवीन कुमार ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर इस नई बस को अपने गंतव्य के लिए रवाना किया।
मात्र 581 रुपये में तय होगा शिमला तक का सफर
यात्रियों की जेब का ख्याल रखते हुए रोडवेज प्रशासन ने इस रूट का किराया बेहद किफायती रखा है। रोहतक से शिमला तक के सफर के लिए यात्रियों को प्रति सवारी केवल 581 रुपये का टिकट लेना होगा। दूरी के लिहाज से यह पूरा सफर लगभग 373 किलोमीटर का रहने वाला है, जिसे यह बस बेहद आरामदायक तरीके से तय करेगी।
इन प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा रूट, रात को पहुंचेगी शिमला
रोहतक डिपो की यह बस अपने निर्धारित समय पर प्रस्थान करने के बाद हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहरों को आपस में जोड़ेगी। यह बस रोहतक से रवाना होकर चंडीगढ़, पंचकूला, पिंजौर, कालका, सोलन और धर्मपुर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकते हुए रात को 8:10 बजे शिमला के मुख्य बस स्टैंड पर पहुंचेगी। इससे यात्रियों को बार-बार बस बदलने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी।
व्यापार, शिक्षा और पर्यटन को मिलेगा नया बढ़ावा
बस के उद्घाटन समारोह के दौरान पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस डायरेक्ट बस सर्विस के शुरू होने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि उच्च शिक्षा और व्यापार के सिलसिले में हिमाचल प्रदेश आने-जाने वाले लोगों का समय और पैसा दोनों बचेगा। विशेषकर गर्मियों के सीजन में शिमला की वादियों का लुत्फ उठाने वाले सैलानियों के लिए यह सरकारी बस सेवा बेहद मददगार और आरामदायक साबित होगी।
सैन डिएगो मस्जिद शूटिंग पर ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- ‘बहुत गंभीर मामला’
19 May, 2026 12:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सैन डिएगो / कैलिफोर्निया: अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत से एक बेहद दुखद और स्तब्ध करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ सैन डिएगो स्थित एक प्रसिद्ध इस्लामिक सेंटर के बाहर दो किशोर बंदूकधारियों ने अचानक अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस भीषण और हिंसक हमले में एक मुस्तैद सुरक्षाकर्मी सहित तीन पुरुषों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस इस पूरे मामले की तफ्तीश 'हेट क्राइम' (नफरती अपराध) के कोण से कर रही है। देश में सनसनी फैलाने वाली इस वारदात पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
राष्ट्रपति ट्रंप की प्रतिक्रिया और हमलावरों की आत्महत्या
इस कायराना हमले पर कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे एक अत्यंत भयानक और दर्दनाक घटना करार दिया है। उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि प्रशासन इस पूरे मामले की तह तक जाएगा और इसकी बेहद गंभीरता से जांच की जाएगी। इस बीच, वारदात के कुछ ही देर बाद पुलिस को घटनास्थल के नजदीक ही एक गली में खड़ी कार से दो किशोरों के शव बरामद हुए, जिनकी उम्र क्रमशः 17 और 19 वर्ष बताई जा रही है। शुरुआती जांच के आधार पर पुलिस का अनुमान है कि मस्जिद परिसर को निशाना बनाने के बाद इन दोनों हमलावरों ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
मस्जिद परिसर में मची भगदड़, बच्चे सुरक्षित
यह जानलेवा हमला दोपहर होने से ठीक पहले मस्जिद परिसर के बाहरी हिस्से में अंजाम दिया गया। चूंकि यह इस्लामिक सेंटर सैन डिएगो काउंटी का सबसे बड़ा केंद्र है, इसलिए गोलियों की तड़तड़ाहट सुनते ही वहां मौजूद आम लोगों और परिसर के भीतर पढ़ रहे छात्रों के बीच भारी अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई। सूचना मिलते ही सैन डिएगो पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया। सैन डिएगो के पुलिस प्रमुख स्कॉट वाह्ल ने राहत की खबर देते हुए बताया कि मस्जिद परिसर के भीतर संचालित हो रहे स्कूल के सभी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें किसी भी तरह की चोट नहीं आई है।
सुरक्षाकर्मी की बहादुरी ने टाला बड़ा नरसंहार
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस्लामिक सेंटर की इमारत के बाहर तीन लोगों के शव मिले थे। जांच दल ने ड्यूटी पर तैनात मृत सुरक्षाकर्मी के अदम्य साहस और बहादुरी की जमकर सराहना की है। अधिकारियों का मानना है कि यदि इस जांबाज सुरक्षाकर्मी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए हमलावरों को रोकने का प्रयास न किया होता, तो शायद यह घटना एक बहुत बड़े सामूहिक नरसंहार में तब्दील हो सकती थी। मामले की गहराई और अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को देखते हुए अब अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई (FBI) भी स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर जांच में जुट गई है।
जांच में खुले नफरत के चौंकाने वाले राज
शुरुआती पड़ताल में इस सुनियोजित हमले को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला है कि हमलावरों में से एक किशोर अपने माता-पिता के घर से चोरी-छिपे हथियार लेकर निकला था। पुलिस को उसकी कार से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें कथित तौर पर 'नस्ली गौरव' (Racial Pride) और कट्टरता से जुड़ी बातें लिखी गई हैं। इसके अलावा, वारदात में इस्तेमाल किए गए एक हथियार पर भी नफरत भरे संदेश अंकित मिले हैं। पुलिस इस बात की भी गहनता से तफ्तीश कर रही है कि मस्जिद से कुछ ही दूरी पर एक माली पर की गई गोलीबारी की एक अन्य घटना का इस मुख्य हमले से कोई सीधा संबंध है या नहीं।
हो ची मिन्ह स्मारक पहुंचे राजनाथ सिंह, ब्रह्मोस सहयोग पर नजर
19 May, 2026 11:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हनोई / नई दिल्ली: भारत और वियतनाम के बीच गहरे होते रणनीतिक व सैन्य संबंधों को एक नए मुकाम पर ले जाने के लिए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों वियतनाम की आधिकारिक यात्रा पर हैं। अपने इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान मंगलवार को रक्षा मंत्री ने हनोई स्थित ऐतिहासिक 'हो ची मिन्ह समाधि' का दौरा किया। वहां उन्होंने वियतनाम के राष्ट्रपिता और महान नेता हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस गरिमामयी समारोह के दौरान राजनाथ सिंह ने समाधि स्थल पर पुष्पचक्र चढ़ाकर नमन किया, जहां कार्यक्रम की शुरुआत से पहले 969वीं रेजिमेंट के कमांडर ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
सोशल मीडिया पर दिया गहरी दोस्ती का संदेश
इस ऐतिहासिक पल की यादों को साझा करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विशेष संदेश पोस्ट किया। उन्होंने अपने संदेश में वियतनाम के राष्ट्रपिता को याद करते हुए लिखा कि हो ची मिन्ह का दूरदर्शी दृष्टिकोण, उनका कुशल नेतृत्व और अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के प्रति अटूट समर्पण आज भी दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है। रक्षा मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत और वियतनाम के बीच के ये दोस्ताना संबंध साझा सांस्कृतिक मूल्यों और गहरे आपसी सम्मान की मजबूत बुनियाद पर टिके हैं, जो वक्त की हर कसौटी पर खरे उतरते हुए लगातार और प्रगाढ़ होते जा रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय मुख्यालय में अहम मुलाक़ातें
अपनी आधिकारिक व्यस्तताओं के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वियतनाम के रक्षा मंत्रालय मुख्यालय भी पहुंचे। वहां उन्होंने मंत्रालय की आधिकारिक विजिटर बुक (आगंतुक पुस्तिका) में भारत-वियतनाम संबंधों की मजबूती की कामना करते हुए अपने विशेष विचार दर्ज किए। इसके बाद उन्होंने वहां के शीर्ष सैन्य व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मुलाकात की और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और व्यापक बनाने के अहम मुद्दों पर चर्चा की।
रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की कवायद
उल्लेखनीय है कि रक्षा मंत्री सोमवार को वियतनाम की धरती पर पहुंचे थे, जो उनके दो देशों के इस बेहद महत्वपूर्ण आधिकारिक दौरे का पहला पड़ाव है। इस यात्रा का मुख्य एजेंडा भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग को और अधिक गतिशील व रणनीतिक रूप से मजबूत बनाना है। हनोई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आगमन के दौरान वियतनाम पीपुल्स आर्मी के डिप्टी चीफ ऑफ जनरल स्टाफ, वहां तैनात भारतीय राजदूत और भारतीय दूतावास के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने पूरे प्रोटोकॉल के साथ भारत के रक्षा मंत्री का भव्य स्वागत किया था।
सरकारी कर्मचारियों के लिए जरूरी सूचना: प्रॉपर्टी रिटर्न न भरा तो वेतन रुकेगा
19 May, 2026 09:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचकूला। हरियाणा के मौलिक शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों द्वारा अपनी संपत्ति का ब्यौरा (प्रॉपर्टी रिटर्न) दाखिल करने को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मौलिक शिक्षा निदेशक (पंचकूला) की ओर से प्रदेश के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को एक ताजा रिमाइंडर (स्मरण पत्र) भेजा गया है। इस आदेश के तहत उनके अंतर्गत काम करने वाले क्लास-1, क्लास-2 और क्लास-3 (श्रेणी-1, 2 और 3) के सभी अधिकारी-कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 की ऑनलाइन प्रॉपर्टी रिटर्न आगामी 22 मई 2026 तक अनिवार्य रूप से भरने के निर्देश दिए गए हैं।
पोर्टल पर करना होगा ऑनलाइन आवेदन, पुराना बकाया भी चुकाना जरूरी
शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया है कि केवल चालू वित्तीय वर्ष ही नहीं, बल्कि जिन कर्मचारियों की पिछले सालों की भी प्रॉपर्टी रिटर्न किसी वजह से पेंडिंग (लंबित) है, वे भी उसे तुरंत क्लियर करें। कर्मचारियों को अपनी अचल संपत्ति का यह पूरा लेखा-जोखा राज्य सरकार के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म intrahry.gov.in पर जाकर ऑनलाइन मोड में ही दर्ज करना होगा। मैन्युअल या ऑफलाइन माध्यम से दी गई जानकारी स्वीकार नहीं की जाएगी।
तीसरी बार जारी हुआ आदेश, अंतिम तारीख नजदीक आने पर याद दिलाया नियम
विभागीय पत्र के अनुसार, संपत्ति का विवरण देने को लेकर प्रशासन की तरफ से यह कोई पहला आदेश नहीं है। इससे पहले भी 18 मार्च 2019 और हाल ही में 13 मई 2026 को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। चूंकि अब विभाग द्वारा तय की गई आखिरी तारीख बेहद करीब आ चुकी है, इसलिए सभी कर्मचारियों को सचेत करने के उद्देश्य से यह अंतिम स्मरण पत्र जारी कर मुस्तैदी दिखाने को कहा गया है।
लापरवाही पर रुकेगा वेतन, जिला अधिकारियों को 'हाई प्रायोरिटी' के निर्देश
मुख्यालय ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि कोई कर्मचारी नियत समय सीमा के भीतर अपनी संपत्ति का विवरण ऑनलाइन अपडेट करने में विफल रहता है और इस वजह से उसका मासिक वेतन (सैलरी) रुक जाता है, तो इसके लिए वह खुद पूरी तरह जिम्मेदार होगा। मौलिक शिक्षा विभाग ने सभी जिला स्तरीय अफसरों को इस मुहिम को 'हाई प्रायोरिटी' (उच्च प्राथमिकता) पर रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि समय रहते शत-प्रतिशत डेटा पोर्टल पर फीड किया जा सके।
UNSC में आज बड़ा मंथन संभव, अमेरिका-बहरीन प्रस्ताव पर दुनिया एकजुट
19 May, 2026 09:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क / दुबई: दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक मंच पर हलचल तेज हो गई है। इस रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित और खुला रखने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) मंगलवार को एक बेहद अहम आपात बैठक बुला सकती है। यह पूरी कवायद बहरीन और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए एक विशेष प्रस्ताव पर चर्चा के लिए की जा रही है। इस वैश्विक प्रयास की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे दुनिया भर के 129 से ज्यादा देशों का खुला समर्थन मिल चुका है। पिछले हफ्ते तक यह संख्या 112 थी, लेकिन अब सोमालिया और कांगो जैसे देशों ने भी इसके पक्ष में आकर इसे और मजबूती दी है, जो वर्तमान में सुरक्षा परिषद के सक्रिय सदस्य भी हैं।
वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को बचाना मुख्य लक्ष्य
इस दूरगामी प्रस्ताव को बहरीन और अमेरिका के अलावा कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत जैसे प्रमुख खाड़ी देशों का भी मुख्य प्रायोजन हासिल है। इसका मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह से सुरक्षित और बाधारहित बनाना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों, प्रमुख व्यापारिक रास्तों और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में कोई व्यवधान न आए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात के परमाणु केंद्रों पर हुए ड्रोन हमलों के बाद ही बहरीन ने इस आपातकालीन बैठक की मांग को तेजी से आगे बढ़ाया है।
ईरान की हरकतों पर अमेरिकी विदेश मंत्री का तीखा प्रहार
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि ईरान अपनी आक्रामक धमकियों और हरकतों से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका ने ईरान पर सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि वह समुद्री रास्तों को बाधित कर रहा है, जहाजों पर हमले करवा रहा है, अंतरराष्ट्रीय पानी में घातक बारूदी सुरंगें बिछा रहा है और वहाँ से गुजरने वाले जहाजों से अवैध रूप से टैक्स वसूलने का प्रयास कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे निर्देश पर तैयार इस प्रस्ताव में बेहद सख्त लहजे में मांग की गई है कि ईरान अपने हमलों और बारूदी सुरंगें बिछाने के काम को तुरंत रोके, साथ ही वह उन सभी ठिकानों को भी उजागर करे जहाँ उसने सुरंगें बिछाई हैं ताकि उन्हें हटाने में वैश्विक सहयोग मिल सके।
ईरान का पलटवार और राष्ट्रपति ट्रंप का कूटनीतिक रुख
दूसरी तरफ, ईरान ने इस अमेरिकी प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसकी तीखी आलोचना की है। ईरानी प्रशासन का कहना है कि अमेरिका इस संकट का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदों के लिए कर रहा है और अपने गैर-कानूनी फैसलों को सही ठहराने की कोशिश में जुटा है। ईरान के अनुसार, इस पूरे तनाव का एकमात्र समाधान क्षेत्र में जारी युद्ध को पूरी तरह समाप्त करना और ईरान के बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाना है। इस बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर किए जाने वाले संभावित सैन्य हमले को कुछ समय के लिए टालने का फैसला किया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब और कतर जैसे मित्र देशों ने उनसे कूटनीतिक बातचीत के लिए थोड़ा वक्त मांगा है, क्योंकि वे एक शांतिपूर्ण समझौता चाहते हैं, हालांकि वे ईरान के अड़ियल रवैये से खासे असहज हैं।
इंडिया-नॉर्डिक समिट में पीएम मोदी की अहम भागीदारी, द्विपक्षीय रिश्तों को मिलेगी मजबूती
19 May, 2026 08:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओस्लो: भारत और उत्तरी यूरोपीय देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में तीसरे 'इंडिया-नॉर्डिक समिट' का आयोजन किया जा रहा है। इस बेहद महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिस्सा ले रहे हैं। यह बैठक भारत और नॉर्डिक क्षेत्र के देशों के बीच आपसी तालमेल और सहयोग को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
नॉर्डिक देशों के शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत
इस समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के प्रधानमंत्रियों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर विस्तृत चर्चा करेंगे। इन बैठकों के मुख्य एजेंडे में व्यापार, निवेश, आधुनिक तकनीक, वैश्विक सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। यह शिखर सम्मेलन दोनों पक्षों को विभिन्न क्षेत्रों में अपने संबंधों को और अधिक मजबूत करने के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है।
पर्यावरण, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष अनुसंधान पर विशेष ध्यान
इस ऐतिहासिक दौरे में मुख्य रूप से ग्रीन एनर्जी, ब्लू इकॉनमी, ग्रीन शिपिंग और क्लाइमेट टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक क्षेत्रों पर गहराई से मंथन किया जाएगा। भारत और नॉर्डिक देश पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में एक-दूसरे का हाथ थामने के लिए तैयार हैं, जो वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से लड़ने में मददगार साबित होगा। इसके साथ ही, अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी को नया विस्तार दिया जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो और नॉर्वे की स्पेस एजेंसी के बीच आर्कटिक रिसर्च व सैटेलाइट टेक्नोलॉजी जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जा रही है।
वैश्विक मंच से शांति और अंतरराष्ट्रीय सुधारों का आह्वान
इससे पहले, ओस्लो में नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गार स्टोरे के साथ एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया की बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए कूटनीति और शांतिपूर्ण संवाद को जरूरी बताया। उन्होंने साफ किया कि चाहे यूक्रेन का संकट हो या पश्चिम एशिया का तनाव, भारत हमेशा शांतिपूर्ण प्रयासों के पक्ष में खड़ा रहेगा। इसके अलावा, उन्होंने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बदलाव लाने और दुनिया के लिए गंभीर खतरा बन चुके आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस मौके पर नॉर्वे सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से भी नवाजा।
व्यापारिक जगत से मुलाकात और भारत में निवेश का न्योता
अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को 'इंडिया-नॉर्वे बिजनेस एंड रिसर्च समिट' में शिरकत की, जहाँ उन्होंने नॉर्वे की दिग्गज कंपनियों और शोध संस्थानों के प्रमुखों से मुलाकात की। इस बिजनेस समिट में लगभग 200 अरब डॉलर के कुल बाजार मूल्य वाली बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, शिपिंग, हेल्थ टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने इस मंच से भारत को निवेश और नवाचार के लिए दुनिया का सबसे भरोसेमंद और बड़ा बाजार बताते हुए नॉर्वे के उद्योगपतियों को भारत में आने का आमंत्रण दिया।
क्यूबा के खिलाफ अमेरिका का बड़ा फैसला, 11 अधिकारियों पर लगे नए प्रतिबंध
19 May, 2026 08:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन / हवाना: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने क्यूबा के खिलाफ एक बार फिर बड़ा और कड़ा रुख अख्तियार किया है। अमेरिका ने क्यूबा के 11 शीर्ष अधिकारियों और तीन प्रमुख सरकारी संस्थानों पर नए वित्तीय प्रतिबंध आयद कर दिए हैं। इस सख्त कदम की जानकारी देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार लगातार अपने ही नागरिकों की आवाज को दबा रही है। इसके साथ ही वह न सिर्फ अमेरिकी सुरक्षा के लिए चुनौती बन रही है, बल्कि विदेशी खुफिया व सैन्य ऑपरेशनों को बढ़ावा देकर वैश्विक स्थिरता को भी खतरे में डाल रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उठाया सख्त कदम
अमेरिकी विदेश मंत्री ने अपने आधिकारिक बयान में जोर देकर कहा कि देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए यह कार्रवाई बेहद जरूरी थी। इन नए प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य क्यूबा की कम्युनिस्ट सत्ता और वहां के सैन्य तंत्र को मिलने वाले उन अवैध आर्थिक संसाधनों पर लगाम लगाना है, जिनका इस्तेमाल वे अपनी दमनकारी नीतियों को चलाने के लिए करते हैं। यह पूरी कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 1 मई, 2026 को हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश 14404 के तहत अमली जामे में लाई गई है, जो सीधे तौर पर उन तत्वों को लक्षित करता है जो अमेरिकी विदेश नीति और सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं।
रडार पर क्यूबा सरकार के कई शीर्ष चेहरे
इस कार्रवाई के तहत जिन 11 लोगों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है, वे क्यूबा के शासन और सेना में बेहद रसूखदार पदों पर बैठे हैं। इन अधिकारियों पर अपने ही देश के नागरिकों के मानवाधिकारों का हनन करने और उन्हें प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी एक घटना का परिणाम नहीं है, बल्कि क्यूबा की सरकार से मिलने वाली सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए चलाए जा रहे एक व्यापक और सुनियोजित अभियान का हिस्सा है। इसके जरिए उन सभी चेहरों और संस्थाओं को बेनकाब किया जाएगा जो इस दमनकारी व्यवस्था को आर्थिक या रणनीतिक मजबूती दे रहे हैं।
प्रतिबंधित अधिकारियों की बढ़ेगी मुश्किलें
लक्षित किए गए बड़े नामों में एडी मैनुअल सिएरा एरियस, ऑस्कर अलेजांद्रो कैलेजस वालकार्स, रोसाबेल गामोन वर्डे, जोकिन क्विंटास सोला, जुआन एस्टेबान लाजो हर्नांडेज़, विसेंट डे ला ओ लेवी और मायरा अरेविच मारिन जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इनके अलावा जोस मिगुएल गोमेज़ डेल वैलिन, राउल विलर केसेल, रॉबर्टो टॉमस मोरालेस ओजेडा और यूजेनियो आर्मंडो राबिलेरो अगुइलेरा पर भी शिकंजा कसा गया है। विदेश मंत्री रुबियो के अनुसार ये सभी लोग क्यूबा की बदहाल अर्थव्यवस्था, जनता की दुर्दशा और वहां की धरती पर चल रही विदेशी खुफिया गतिविधियों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि आने वाले समय में ऐसे और भी कड़े प्रतिबंध देखने को मिल सकते हैं।
संपत्तियां होंगी सीज और व्यापार पर रोक
इस प्रतिबंध के लागू होने के बाद अब अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाली इन सभी अधिकारियों और संस्थानों की संपत्तियों तथा वित्तीय हितों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज (जब्त) कर दिया जाएगा। कानूनन कोई भी अमेरिकी नागरिक या व्यावसायिक कंपनी अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की विशेष इजाजत के बिना इनके साथ किसी भी प्रकार का आर्थिक लेन-देन नहीं कर सकेगी। ट्रंप प्रशासन का यह फैसला साफ तौर पर दिखाता है कि वह क्यूबा को लेकर अपनी नीतियों में कोई ढील देने के मूड में नहीं है। अमेरिका का अंतिम लक्ष्य क्यूबा में मानवाधिकारों की बहाली, कानून के शासन की स्थापना और वहां लोकतंत्र व खुले बाजार को बढ़ावा देना है।
रिपोर्ट में खुलासा: अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान ने सऊदी में बल बढ़ाया
18 May, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति और रक्षा गलियारों से एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। एक द्विपक्षीय रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान ने अपने सदाबहार मित्र देश सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए वहाँ लगभग 8,000 जांबाज सैनिक, अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का पूरा स्क्वाड्रन और खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर दिया है। पाकिस्तान एक तरफ जहाँ रियाद के साथ अपने सैन्य और रणनीतिक गठजोड़ को नए शिखर पर ले जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह क्षेत्रीय शांति के लिए ईरान युद्ध में एक मुख्य मध्यस्थ (मिडिएटर) की अहम भूमिका भी निभा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट में पहली बार हुआ इस गुप्त तैनाती का खुलासा
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक विशेष रिपोर्ट के जरिए इस बेहद गोपनीय और महत्वपूर्ण रक्षा तैनाती की जानकारी पहली बार दुनिया के सामने आई है। इस रणनीतिक कदम की पुष्टि तीन शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों और दो आधिकारिक सरकारी सूत्रों ने की है। इन सभी सूत्रों ने इस संयुक्त सैन्य बल को एक बेहद शक्तिशाली और 'युद्ध-सक्षम' दस्ता बताया है। इस विशेष फोर्स को तैनात करने का मुख्य उद्देश्य किसी भी बाहरी या अचानक होने वाले हमले की स्थिति में सऊदी अरब की सेना को तुरंत और मजबूत बैकअप सहायता प्रदान करना है।
चीन के सहयोग से बने JF-17 लड़ाकू विमान और ड्रोन के दो स्क्वाड्रन भेजे
रक्षा सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान ने अपनी वायुसेना के करीब 16 लड़ाकू विमानों का एक पूरा स्क्वाड्रन सऊदी अरब की धरती पर उतारा है। इस बेड़े में मुख्य रूप से वे 'JF-17' फाइटर जेट्स शामिल हैं, जिन्हें पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर संयुक्त रूप से विकसित किया है। इन लड़ाकू विमानों को अप्रैल महीने की शुरुआत में ही सऊदी अरब रवाना कर दिया गया था। इसके साथ ही दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने खुलासा किया है कि विमानों के अलावा पाकिस्तान ने जासूसी और हमले में माहिर ड्रोन के दो अत्याधुनिक स्क्वाड्रन भी रियाद की सुरक्षा में तैनात किए हैं।
2025 में हुए ऐतिहासिक द्विपक्षीय रक्षा समझौते के तहत हुई कार्रवाई
आपको बता दें कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल 2025 में एक ऐतिहासिक और बेहद अहम रक्षा समझौता हुआ था। इस आधिकारिक संधि की शर्तों के मुताबिक, यदि दोनों में से किसी भी देश पर कोई बाहरी हमला होता है, तो दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा के लिए सैन्य रूप से आगे आएंगे। वर्तमान में की गई यह बड़ी सैन्य तैनाती इसी आपसी समझौते का हिस्सा मानी जा रही है, और सूत्रों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर पाकिस्तान और अधिक सैनिक भेजने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
सऊदी अरब को मिलेगा पाकिस्तान का 'परमाणु सुरक्षा कवच'
इस सैन्य सहयोग के रणनीतिक और दूरगामी परिणामों को लेकर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी पूर्व में एक बड़ा संकेत दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि इस नए सुरक्षा समझौते के प्रभावी होने के बाद सऊदी अरब व्यावहारिक रूप से पाकिस्तान की 'परमाणु सुरक्षा छतरी' (Nuclear Umbrella) के दायरे में आ जाता है। हालांकि, इस बेहद संवेदनशील और बड़े सैन्य कदम पर अभी तक पाकिस्तान सेना, वहां के विदेश मंत्रालय या सऊदी अरब के आधिकारिक सरकारी मीडिया कार्यालय की तरफ से कोई भी औपचारिक प्रतिक्रिया या सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
पाकिस्तान-चीन की ‘सीक्रेट डील’ का पर्दाफाश, अमेरिकी रिपोर्ट से मचा हड़कंप
18 May, 2026 05:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिका के एक स्वतंत्र समाचार आउटलेट 'ड्रॉप साइट न्यूज़' ने पाकिस्तान के बेहद गोपनीय सैन्य दस्तावेजों की समीक्षा के आधार पर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान अपनी सैन्य जरूरतों के लिए चीन के सामने बेहद कड़ा मोलभाव कर रहा है। पाकिस्तान ने चीन को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ग्वादर पोर्ट को एक स्थायी सैन्य अड्डे के रूप में इस्तेमाल करने की हरी झंडी दी है, लेकिन इसके बदले में वह बीजिंग से ऐसी परमाणु पनडुब्बियों की मांग कर रहा है जो 'सेकेंड स्ट्राइक' की क्षमता से लैस हों। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि कोई दुश्मन देश पहले हमला करके पाकिस्तान के जमीनी और हवाई परमाणु ठिकानों को नष्ट भी कर दे, तब भी समुद्र की गहराइयों में छिपी ये पनडुब्बियां दुश्मन पर भारी जवाबी परमाणु हमला करने में सक्षम रहें।
जनरल आसिम मुनीर की अगुआई में हुआ था गुप्त मोलभाव
इस सनसनीखेज सौदे की कड़ियां साल 2024 में पाकिस्तानी सेना और चीन के बीच हुई एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत से जुड़ती हैं। उस समय पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इस गुप्त वार्ता का नेतृत्व कर रहे थे। साल 2024 की शुरुआत में पाकिस्तान ने बीजिंग को निजी तौर पर आश्वस्त किया था कि वह ग्वादर को चीनी सेना के स्थायी बेस के रूप में विकसित करने देगा, जिसके बाद उसने चीन से परमाणु-सक्षम पनडुब्बियों की मांग सामने रख दी। पाकिस्तान का मकसद इसके जरिए 'न्यूक्लियर ट्रायड' यानी जल, थल और नभ तीनों जगहों से परमाणु हमला करने की सर्वोच्च ताकत हासिल करना था। हालांकि, चीन ने पाकिस्तान की इस मांग को बहुत ज्यादा और अनुचित माना, जिसके कारण यह बातचीत वहीं रुक गई।
अमेरिका और चीन के बीच पाकिस्तान का दोहरा खेल
'ड्रॉप साइट न्यूज़' की हालिया रिपोर्ट पाकिस्तान की एक ऐसी तस्वीर पेश करती है, जो अपने दो सबसे बड़े रणनीतिक साझेदारों—चीन और अमेरिका—के साथ एक ही समय पर दोहरा खेल खेल रहा है। एक तरफ जहां पाकिस्तान खुद को अमेरिका के करीब लाने और वॉशिंगटन के साथ अपने दशकों पुराने अविश्वास को दूर करने में लगा है, वहीं दूसरी तरफ वह चीन से घातक और रणनीतिक हथियार ऐंठने के लिए ग्वादर का सौदा करने से भी पीछे नहीं हट रहा है। पाकिस्तान के इस रवैये ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की रफ्तार को भी धीमा किया है, जिससे चीन नाराज है, जबकि अमेरिकी प्रशासन के साथ इस्लामाबाद की नजदीकियां लगातार बढ़ रही हैं।
चीनी 'माल' के भरोसे समुद्र में ताकत बढ़ाने की नाकाम कोशिश
पाकिस्तान का परमाणु इतिहास गवाह है कि उसने हमेशा चीन की बैसाखियों का इस्तेमाल किया है। 1970 और 1980 के दशक में चीन ने ही पाकिस्तान को परमाणु बम के ब्लूप्रिंट और एनरिच्ड यूरेनियम मुहैया कराया था, जिसके बाद 1990 के दशक में चीन से मिली एम-11 मिसाइलों के दम पर पाकिस्तान ने हवा और जमीन से परमाणु हमले की क्षमता पाई थी। लेकिन समुद्र के नीचे से परमाणु मिसाइल दागने की तकनीक बेहद जटिल और महंगी होने के कारण यह हमेशा से इस्लामाबाद की पहुंच से बाहर रही है। वर्तमान में दुनिया के केवल छह देशों—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और भारत—के पास ही यह अचूक क्षमता मौजूद है।
हैंगोर क्लास पनडुब्बी सौदा और अधूरी हसरत
भारत के सुरक्षा विशेषज्ञों का लंबे समय से यह अनुमान था कि पाकिस्तान की अब तक की सबसे बड़ी 5 अरब डॉलर की 'हैंगोर क्लास' पनडुब्बी डील उसे समुद्र से परमाणु हमला करने की ताकत दे देगी। इस सौदे के तहत आठ पनडुब्बियों में से पहली 'पीएनएस हैंगोर' को चीन के सान्या में सर्विस में शामिल भी किया जा चुका है। भारतीय विश्लेषकों का मानना था कि इनमें से दो पनडुब्बियां 'S-30' क्लास की होंगी जो पानी के भीतर 30 दिनों तक रहकर 1,500 किलोमीटर दूर तक परमाणु क्रूज मिसाइल दाग सकेंगी। लेकिन 'ड्रॉप साइट न्यूज़' के नए खुलासे से यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान का यह तीन-चरणों वाला परमाणु सौदा फिलहाल खटाई में पड़ गया है क्योंकि चीन उसकी ग्वादर के बदले परमाणु पनडुब्बी की बड़ी मांग को पूरा करने के मूड में नहीं है।
रात से लापता दो युवक, नहर में उतरते समय हुई हादसे में मौत
18 May, 2026 05:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महेंद्रगढ़। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले गांव पाथेड़ा में उस वक्त शोक की लहर दौड़ गई, जब दो पक्के दोस्तों की नहर के गहरे पानी में डूबने से असमय मौत हो गई। दोनों युवक रविवार शाम को खेतों की तरफ टहलने के लिए निकले थे, लेकिन जब वे देर रात तक वापस नहीं लौटे, तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। काफी खोजबीन के बाद सोमवार सुबह दोनों के शव पाथेड़ा और धनौंदा गांव के बीच बनी पुलिया के पास पानी में तैरते हुए मिले। पुलिस ने परिजनों के बयानों के आधार पर नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम कराने के बाद शवों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया है। गांव में एक साथ दो सहेलियों जैसी दोस्ती निभाने वाले युवकों की अर्थी उठने से हर आंख नम है।
खेतों में घूमने निकले थे हेमराज और रविंद्र, सुबह मिला शव
मृतक युवक के भाई वीरेंद्र ने पुलिस को बताया कि उसका 34 वर्षीय भाई हेमराज और उसका बचपन का परम मित्र रविंद्र उर्फ बजरंग (34) रविवार शाम को घर से यह कहकर निकले थे कि वे खेतों की तरफ चक्कर लगाने जा रहे हैं। जब देर रात तक दोनों का कोई सुराग नहीं मिला, तो परिवार वालों ने रातभर उन्हें हर संभावित जगह पर ढूंढा। सोमवार सुबह ग्रामीणों ने धनौंदा पुल के पास नहर में दो इंसानी शरीर उतराते देखे, जिसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने ग्रामीणों की मदद से दोनों शवों को बाहर निकाला।
नहर के किनारे मिले कपड़े और चप्पल, तैरना न जानना बना काल
सोमवार सुबह जब ग्रामीण और पुलिस मौके पर पहुंचे, तो नहर के किनारे रविंद्र के कपड़े और चप्पल करीने से रखे हुए मिले, जबकि हेमराज का शव कपड़ों समेत पानी के भीतर था। ग्रामीणों के अनुसार, पाथेड़ा नहर से पूरे जिले में पीने के पानी की सप्लाई होती है और करीब एक हफ्ते पहले ही इसमें पानी का बहाव बंद किया गया था। इसके बावजूद पाथेड़ा से धनौंदा के बीच बनी पुलिया के पास नहर में करीब 8 से 10 फीट गहरा पानी जमा था। आशंका है कि रविंद्र नहाने के लिए कपड़े उतारकर पानी में उतरा होगा, लेकिन गहराई का अंदाजा न होने से वह डूबने लगा।
दोस्ती निभाने के चक्कर में डूबा दूसरा दोस्त, परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
स्थानीय लोगों का अनुमान है कि जब रविंद्र पानी में छटपटाने लगा होगा, तो किनारे पर खड़े हेमराज ने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने जिगरी दोस्त को बचाने के लिए नहर में छलांग लगा दी। चूंकि दोनों में से किसी को भी तैरना नहीं आता था, इसलिए 10 फीट गहरे पानी और दलदल के कारण दोनों ही जिंदगी की जंग हार गए। दोनों दोस्त बेहद साधारण परिवार से थे और खेती-किसानी व मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते थे। इस हादसे ने दो हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है; मृतक रविंद्र अपने पीछे एक बेटा (15) व बेटी (10) छोड़ गया है, वहीं हेमराज के सिर से भी उसके दो बेटों (9 और 13 वर्ष) का साया उठ गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
स्वीडन के बाद नॉर्वे पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, प्रवासी भारतीयों ने किया स्वागत
18 May, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओस्लो (नॉर्वे): भारत और नॉर्वे के राजनयिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी द्विपक्षीय यात्रा और तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंचे। लगभग चालीस साल से भी अधिक समय के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला नॉर्वे दौरा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे ने पीएम मोदी का बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया और इस यात्रा को दोनों देशों के बीच के रिश्तों के लिए एक मील का पत्थर बताया।
ग्रीन ट्रांजिशन और व्यापारिक साझेदारी पर रहेगा मुख्य जोर
नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे ने इस यात्रा को लेकर भारी उत्साह जताया है। उनका मानना है कि भारत के प्रधानमंत्री का यह दौरा न केवल नॉर्वे बल्कि पूरे नॉर्डिक क्षेत्र और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। इस यात्रा के दौरान पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों यानी ग्रीन ट्रांजिशन और मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खास ध्यान दिया जाएगा। दोनों देशों के राष्ट्रप्रमुखों को उम्मीद है कि यह मुलाकात नई रणनीतिक साझेदारियों के रास्ते खोलेगी।
ओस्लो की सड़कों पर गूंजा भारत माता का जयकारा, प्रवासी भारतीयों में भारी उत्साह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओस्लो पहुंचने पर वहां रह रहे प्रवासी भारतीयों का उत्साह सातवें आसमान पर दिखाई दिया। होटल के बाहर बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग तिरंगा थामे और स्वागत के नारे लगाते हुए उनकी एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते रहे। जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी वहां पहुंचे, उन्होंने बेहद आत्मीयता के साथ मुस्कुराते हुए हाथ हिलाकर सभी समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया और उनके इस जबरदस्त उत्साह के लिए आभार व्यक्त किया।
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में वैश्विक मुद्दों पर होगी चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा के दौरान 19 मई को आयोजित होने वाले तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में मुख्य रूप से शामिल होंगे। इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच कई महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा, जिससे आने वाले समय में इन देशों के साथ भारत के रिश्ते और अधिक मजबूत और प्रगाढ़ होने की उम्मीद है।
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ओडिसा की बीयर-व्हिस्की समेत 96 लीटर से ज्यादा शराब जब्त
सुशासन तिहार बना राहत का जरिया
मध्यप्रदेश पुलिस की अवैध मादक पदार्थों की जब्तील के विरुद्ध बड़ी कार्यवाही
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी के दर्शन कर की सर्वकल्याण की प्रार्थना
