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इंजीनियर और नेट क्वालिफाइड भाइयों ने बदला हरियाणा का म्यूजिक सीन, बॉलीवुड से आए ऑफर
20 Apr, 2026 01:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिवानी। आलोचना जब जुनून बन जाए, तो सफलता की नई इबारत लिखती है। भिवानी जिले के संडवा गांव निवासी दो चचेरे भाइयों, सुमित और अनुज ने यह साबित कर दिखाया है। कभी लोगों के ताने सुनने वाले इन भाइयों के हरियाणवी गाने 'बैरण' ने दुनियाभर में धूम मचा दी है। यह गाना पिछले तीन सप्ताह से प्रतिष्ठित बिलबोर्ड इंडिया की टॉप रैंकिंग में बना हुआ है और यूट्यूब पर इसे 10 करोड़ से ज्यादा लोग देख चुके हैं।
तानों से बिलबोर्ड तक का सफर
अनुज और सुमित ने 2020 के लॉकडाउन के दौरान संगीत को करियर बनाने की ठानी। शुरुआत में 5 गाने असफल रहे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सुमित ने म्यूजिक कंपोज किया और अनुज ने अपनी आवाज दी। मात्र 50 हजार रुपये में तैयार हुए इस गाने ने रातों-रात इनकी किस्मत बदल दी। आज आलम यह है कि सोशल मीडिया पर इस गाने की रील्स की बाढ़ आई हुई है।
बॉलीवुड से मिल रहे हैं बड़े ऑफर
पॉपुलैरिटी मिलने के बाद इन भाइयों को बॉलीवुड, पंजाब और हरियाणा के बड़े कलाकारों (जैसे दिलप्रीत ढिल्लों, मासूम शर्मा, और केडी) से ऑफर मिल रहे हैं। अनुज ने पॉलिटिकल साइंस में नेट क्वालीफाई किया है, वहीं सुमित बीटेक कर चुके हैं। अपनी प्रतिभा के दम पर अब ये दोनों भाई गूगल की टीम के बुलावे पर मुंबई पहुंचे हुए हैं।
ऊर्जा के क्षेत्र में नई साझेदारी: त्रिकोमाली प्रोजेक्ट और गैस ग्रिड पर भारत-श्रीलंका में बनी सहमति
20 Apr, 2026 01:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलंबो: भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर उच्च स्तरीय वार्ता हुई। विदेश सचिव विक्रम मिसरी के अनुसार, इस बैठक का मुख्य केंद्र दोनों देशों के बीच प्रस्तावित तेल और गैस पाइपलाइन लिंक तथा त्रिकोमाली में ऊर्जा केंद्र परियोजना रही।
इन प्रमुख मुद्दों पर हुई चर्चा:
उपराष्ट्रपति ने भारत की 'पड़ोसी प्रथम' (Neighbour First) नीति को दोहराते हुए विकास सहयोग पर बल दिया। बैठक में मछुआरों की समस्या, आवासीय परियोजनाओं और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
तमिल नेताओं से मुलाकात और आभार:
अपनी यात्रा के दौरान श्री राधाकृष्णन ने श्रीलंका के तमिल दलों के नेताओं से भी मुलाकात की। तमिल नेताओं ने चक्रवात 'दित्वाह' के बाद भारत सरकार द्वारा दिए गए 45 करोड़ डॉलर के राहत व पुनर्वास पैकेज के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।
खूनी हुआ रास्त: ट्रैक्टर-ट्रॉली निकालने को लेकर विवाद, दबंग ने छाती में मारी गोली
20 Apr, 2026 12:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीका। गांव स्यू माजरा में खेत से लौटते समय रास्ते के मामूली विवाद ने खूनी रूप ले लिया। गांव के ही एक व्यक्ति ने अंधाधुंध फायरिंग कर गुरविंदर सिंह (45) नामक व्यक्ति की हत्या कर दी। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत और तनाव का माहौल है।
रास्ते के विवाद में चली गोलियां
मृतक के भतीजे सतनाम सिंह के अनुसार, रविवार रात करीब 11 बजे वे ट्रैक्टर-ट्रॉली में तूड़ी लेकर घर लौट रहे थे। नहर के पास गांव के ही प्रताप सिंह ने उन्हें रोक लिया और रास्ते को निजी बताते हुए वहां से गुजरने से मना कर दिया। बहस बढ़ने पर आरोप है कि प्रताप सिंह ने फायरिंग शुरू कर दी। उसने तीन राउंड फायर किए, जिनमें से एक गोली गुरविंदर की छाती में जा लगी।
अस्पताल पहुंचने से पहले मौत
परिजनों ने घायल गुरविंदर को तुरंत गुहला के सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। गुहला थाना प्रभारी सुनेश कुमार ने बताया कि पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। गवाहों के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस आरोपी की तलाश के साथ मामले की गहन जांच कर रही है।
कर्ज से बढ़ी मालदीव की मुश्किलें, मुइज्जू ने भारत से की करेंसी स्वैपिंग सुविधा बढ़ाने की मांग
20 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
माले मालदीव इस समय अपने सबसे कठिन आर्थिक दौर से गुजर रहा है। भारी अंतरराष्ट्रीय कर्ज और तेजी से घटते विदेशी मुद्रा भंडार के कारण देश की अर्थव्यवस्था चरमराने की कगार पर है। इस बीच, मालदीव सरकार ने भारत से एक बार फिर करेंसी स्वैप सुविधा की अवधि बढ़ाने की गुहार लगाई है। हालांकि, भारत के लिए इस अनुरोध को स्वीकार करना कूटनीतिक और तकनीकी रूप से एक बड़ी चुनौती बन गया है।
मालदीव की वित्तीय स्थिति वर्तमान में बेहद चिंताजनक है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों, जैसे फिच ने इसकी सॉवरेन रेटिंग को सीसी पर रखा है, जो कर्ज चूक (डिफ़ॉल्ट) की उच्च संभावना की ओर इशारा करता है। देश पर अप्रैल 2026 में लगभग 1 अरब डॉलर के कर्ज भुगतान का दबाव था। हालांकि मालदीव ने अपने सॉवरेन डेवलपमेंट फंड का उपयोग कर 500 मिलियन डॉलर के सुकुक बॉन्ड का भुगतान तो कर दिया है, लेकिन इस कदम ने उसके विदेशी मुद्रा भंडार को लगभग खाली कर दिया है। भारत ने हमेशा मालदीव की मुश्किल समय में मदद की है। अक्टूबर 2024 में भारत ने 400 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप सुविधा दी थी, जिसे नियमों में ढील देते हुए पहले भी दो बार विस्तार दिया जा चुका है। इसके अलावा, भारत ने 50-50 मिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिलों की अवधि बढ़ाई और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 565 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट भी प्रदान की। लेकिन अब समस्या तकनीकी नियमों की है।
भारतीय नियमों के अनुसार, दो बार की निकासी के बीच एक अनिवार्य कूलिंग-ऑफ अवधि (निश्चित समय का अंतर) होनी चाहिए। इसके साथ ही कर्ज विस्तार की भी एक तय सीमा होती है। मालदीव की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन पर निर्भर है, लेकिन मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने पर्यटन उद्योग की कमर तोड़ दी है। ईंधन की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय ऋण मिलने में हो रही देरी ने संकट को और गहरा कर दिया है। यदि भारत तकनीकी कारणों से इस बार करेंसी स्वैप सुविधा को विस्तार नहीं दे पाता है, तो मालदीव के लिए अल्पावधि में अपनी वित्तीय स्थिरता बनाए रखना असंभव हो सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें भारत के फैसले पर टिकी हैं कि वह अपने नियमों और पड़ोसी की बिगड़ती आर्थिक सेहत के बीच कैसे संतुलन बिठाता है।
युद्ध का कोई भी टिकाऊ समाधान ईरान के सभी खतरों को ध्यान में रखकर हो
20 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान-अमेरिका के बीच आधिकारिक तौर पर अभी सीजफायर जारी है। इसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की घोषणा कर दी, लेकिन 24 घंटे के बाद ही उसने ये आदेश वापस ले लिया और इसे बंद कर दिया। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने समझौता नियमों का उल्लंघन किया है। जब से यह युद्ध शुरू हुआ, उसके बाद ईरान ने खाड़ी देशों पर भी हमले किए हैं। इसमें यूएई भी शामिल है जिसपर ईरान ने सबसे ज्यादा मिलसाइलें दागीं। यूएई के विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री सईद बिन मुबारक अल हाजेरी का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि युद्ध का कोई भी टिकाऊ समाधान ईरान के सभी खतरों को ध्यान में रखकर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि होर्मुज का बंद होना आर्थिक आतंकवाद है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक इंटरव्यू में हाजेरी ने पश्चिम एशिया में युद्ध, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक करने, ईरान के हमलों और उसके असर, सीजफ़ायर और बातचीत और यूएई में बड़ी भारतीय कम्युनिटी पर बात की। यूएई के विदेश मंत्री ने कहा कि हमारा देश सीजफ़ायर की घोषणा और उससे जुड़ी बातचीत पर करीब से नज़र रख रहा है। उन्होंने कहा कि हम सीजफायर एग्रीमेंट के नियमों पर और स्पष्टीकरण चाहते हैं ताकि यह पक्का हो सके कि ईरान सभी दुश्मनी को तुरंत खत्म करने के लिए पूरी तरह से और वेरिफाई किया जा सकने वाला कमिटमेंट दिखाए।
उन्होंने कहा कि सिर्फ़ सीजफायर काफी नहीं है। इस युद्ध का कोई भी टिकाऊ हल ईरान के सभी खतरों से निपटना होगा। उसकी न्यूक्लियर क्षमताएं, उसकी बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन, उससे जुड़े प्रॉक्सी, और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह और बिना किसी शर्त के फिर से खोलना भी शामिल है। हमें इस बात को लेकर साफ-साफ पता होना चाहिए कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी बंद है। आने-जाने पर रोक लगाई जा रही है, शर्तें तय की जा रही हैं और उसे कंट्रोल किया जा रहा है। ईरान जहाजों को ट्रांज़िट के लिए परमिशन लेने के लिए मजबूर कर रहा है और हर जहाज पर टोल ले रहा है। इसका असर सिर्फ यूएई और उसके पड़ोसियों पर ही नहीं पड़ रहा है, बल्कि भारत पर भी पड़ रहा है।
यूएई के मंत्री हाजेरी ने कहा कि हमने यह लड़ाई नहीं चाही थी। उन्होंने कहा कि असल में हमने इसे रोकने की पूरी कोशिश की और यह युद्ध शुरू होने से पहले यूएई और दूसरे खाड़ी देशों ने हर मौजूद चैनल से यह साफ कर दिया था कि उनके इलाके और एयरस्पेस का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए नहीं किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि यह भरोसा पूरी ईमानदारी और अच्छी नीयत से किया गया था। ईरान ने इसे नज़रअंदाज़ करके उन्हीं देशों पर हमला किया जिन्होंने शांति बनाए रखने के लिए सबसे ज़्यादा मेहनत की थी।
बता दें 28 फरवरी से ईरान ने अकेले यूएई के खिलाफ 537 बैलिस्टिक मिसाइलें, 26 क्रूज़ मिसाइलें और 2,256 ड्रोन लॉन्च किए हैं, जो हर दूसरे टारगेटेड देश के खिलाफ से ज़्यादा हैं। मंत्री के मुताबिक यूएई ने लड़ाई को बढ़ने से रोकने के लिए ईमानदारी से और लगातार कोशिशें कीं और उन कोशिशों का जवाब पहले से सोचे-समझे हमले से मिला।
यूक्रेन ने मास्को से जंग में उतारे रोबोट, रुस के कई ठिकानों पर किया कब्जा
20 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव। रोबोट्स घरों से निकलकर युद्ध के मैदान में पहुंच चुके हैं हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन की तरफ से जमीन पर चलने वाले ड्रोन यानी रोबोट का इस्तेमाल किया गया, जिन्होंने आगे बढ़कर ना सिर्फ दुश्मनों पर हमला किया, बल्कि उनके ठिकाने पर कब्जा करने में भी मदद की।
रोबोट्स अब घरों का काम करने तक सीमित नहीं हैं उन्होंने जंग कमान संभाल ली है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रूस-यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन के खारकीव के पास बर्फ से ढके इलाके में, हाल ही में कुछ ऐसा हुआ, जिसने लोगों को चौंका दिया। वहां सैनिक नहीं, उनकी जगह मशीनें आगे बढ़कर दुश्मनों का खात्मा कर रही थीं। रूस-यूक्रेन युद्ध में पहली बार ऐसा हुआ कि दुश्मन के किसी ठिकाने पर बिना किसी सैनिक के ही कब्जा कर लिया गया हो। तकनीक का इस्तेमाल करते हुए दर्जनों मशीन के दम पर ठिकाने पर कब्जा किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सार्वजनिक तौर पर इस बदलाव की ओर इशारा किया है। डिफेंस इंडस्ट्री वर्कर डे के मौके पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस युद्ध के इतिहास में पहली बार दुश्मन के किसी ठिकाने पर जमीनी सिस्टम और ड्रोन की मदद से कब्जा किया गया। कब्जा करने वालों ने सरेंडर कर दिया और यह ऑपरेशन बिना सैनिकों और किसी नुकसान के पूरा किया गया। हालांकि उन्होंने उस ऑपरेशन का नाम नहीं बताया। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक इस ऑपरेशन की शुरुआत सैनिकों के आगे बढ़ने से नहीं हुई थी। इसके बजाय, जमीन पर चलने वाला ड्रोन यानी रोबोट को रूसी बंकर की तरफ भेजा गया। वह कीचड़ भरे रास्ते से गुजरता हुआ अपने टारगेट तक पहुंचा और फिर धमाके के साथ फट गया। इसके बाद, कई सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए एक हमला किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध में हवा और जमीन दोनों तरह के ड्रोन को एक साथ तैनात किया गया था। कुछ ड्रोन ऊपर हवा में मंडराते रहे ताकि युद्ध के मैदान को सीधा निशाना बना सकें, दूसरे ड्रोन का इस्तेमाल विस्फोटक गिराने या सीधे हमले करने के लिए किया गया। जमीन पर, मुश्किल रास्तों के बावजूद रोबोटिक यूनिट्स लगातार आगे बढ़ती रहे। एक ही ऑपरेशन में दर्जनों ड्रोन का इस्तेमाल किया। हवा और जमीन, दोनों तरफ से हो रहे हमलों की वजह से, बचाव करने वाली टीम को एक ही समय पर कई खतरों का सामना करना पड़ा। यह ऑपरेशन कई घंटों तक चला और जब बाद में यूक्रेनी सैनिक वहां पहुंचे, तो उन्हें रूसी सैनिकों की लाशें मिलीं और उन्होंने उस जगह पर कब्जा कर लिया। जीत के साथ-साथ इस मिशन से कुछ अहम सबक भी मिले। ऑपरेटर्स ने उन क्षेत्रों की पहचान की जहां भविष्य में इस्तेमाल के लिए ड्रोन्स में सुधार किया जा सकता है।
चाहे लोग इजराइल को पसंद करें या न करें, वह अमेरिका का महान सहयोगी...
20 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इजराइल की तारीफ करते हुए उसे संयुक्त राज्य अमेरिका का एक महान सहयोगी बताया और मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच देश के साहस और वफादारी की तारीफ की। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि लोगों की राय चाहे जो भी हो, इजराइल लगातार अमेरिका के साथ खड़ा रहा है। ट्रंप ने कहा कि चाहे लोग इजराइल को पसंद करें या न करें, उन्होंने खुद को अमेरिका का एक महान सहयोगी साबित किया है। वे साहसी, निडर, वफादार और समझदार हैं और दूसरों से अलग, जिन्होंने संघर्ष और तनाव के समय अपना असली रंग दिखाया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप की ये टिप्पणियां इजराइल से यह कहने के एक दिन बाद सामने आईं कि उसे लेबनान पर बमबारी करने से मना किया गया है और उन्होंने कहा अब बहुत हो गया। ट्रंप की ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब क्षेत्रीय तनाव काफी बढ़ गया है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य का फिर से बंद होना भी शामिल है। ईरान ने कहा है कि यह रणनीतिक जलमार्ग तब तक बंद रहेगा, जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटा नहीं लेता।
एक रिपोर्ट के मुताबिक तेहरान ने शनिवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य तब कर नहीं खुलेगा जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटा नहीं लेता, साथ ही एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने चेतावनी दी कि अंतिम समझौता अभी भी काफी दूर है।
मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की परीक्षा; क्या थमेगा मिडिल ईस्ट का महायुद्ध?
20 Apr, 2026 08:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्र बन गया है। पहले दौर की विफलता के बाद अब दूसरे चरण की वार्ता शुरू हो रही है। व्हाइट हाउस के अनुसार, सोमवार को एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुँचेगा, जिसमें विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल हैं। हालांकि, ईरान ने फिलहाल अमेरिकी प्रस्तावों को ठुकराते हुए वार्ता से दूरी बना ली है।
शहबाज-पेजेश्कियान संवाद:
शांति प्रयासों के बीच पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर चर्चा की। शरीफ ने उन्हें सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के साथ हुई हालिया बातचीत का ब्योरा दिया। उधर, ईरान ने अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी और विरोधाभासी बयानों को वार्ता में शामिल न होने का मुख्य कारण बताया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम:
इस्लामाबाद में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अमेरिकी सैन्य विमान C-17 ग्लोबमास्टर III के रावलपिंडी उतरने के बाद रेड जोन की सड़कें बंद कर दी गई हैं। सेरेना और मैरियट जैसे प्रमुख होटलों को खाली कराकर नई बुकिंग पर रोक लगा दी गई है। अब सबकी नजरें पाकिस्तान की मध्यस्थता पर टिकी हैं कि क्या वह ईरान को बातचीत की मेज पर वापस ला पाएगा।
बीमारी ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार: मासूम बेटी संग माता-पिता ने लगाया मौत को गले
20 Apr, 2026 08:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र। प्रेम नगर इलाके में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां एक दंपती ने अपनी तीन वर्षीय बीमार बच्ची के साथ फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। घर की पहली मंजिल पर बंद कमरे में तीनों के शव लटके मिले, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई।
मैसेज भेजकर दी जानकारी
घटना का खुलासा तब हुआ जब मृतक जितेंद्र ने अपने एक रिश्तेदार को मोबाइल पर टेक्स्ट मैसेज भेजा। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर 32 वर्षीय जितेंद्र, उसकी पत्नी युक्ता (30) और बेटी माधवी (3) के शव बरामद किए। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।
बच्ची की बीमारी से थे परेशान
जितेंद्र अंबाला पोस्ट ऑफिस में कार्यरत था। बताया जा रहा है कि उनकी तीन साल की बेटी पैरालिसिस (लकवा) से पीड़ित थी, जिसके कारण दंपती मानसिक रूप से काफी परेशान रहता था। आशंका जताई जा रही है कि इसी दुख के चलते उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया। जितेंद्र मूल रूप से करनाल के सीकरी गांव का निवासी था और उसके पिता पंजाब पुलिस में एसएचओ रह चुके थे।
ईरान युद्ध नहीं चाहता, केवल आत्मरक्षा कर रहा है: राष्ट्रपति पेजेश्कियन
20 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। होर्मुज पर बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया है कि उनका देश किसी भी प्रकार के युद्ध का पक्षधर नहीं है और वर्तमान परिस्थितियों में केवल आत्मरक्षा के तहत ही कदम उठा रहा है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया है और न ही भविष्य में ऐसा करने का कोई इरादा है।
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने जोर देकर कहा कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखना ईरान की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा तनावपूर्ण हालात के बीच भी ईरान का रुख रक्षात्मक और संयमित रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए प्रयास करना चाहिए, ताकि किसी भी तरह के संघर्ष को टाला जा सके। पेजेश्कियन के अनुसार, ईरान की नीति हमेशा से शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और संवाद पर आधारित रही है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति को लेकर लगातार तनाव की खबरें सामने आ रही हैं। ईरान का कहना है कि वह किसी भी उकसावे का जवाब केवल आत्मरक्षा के तहत ही दे रहा है, न कि आक्रामक नीति के तहत। राष्ट्रपति ने एक बार फिर दोहराया कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पाक में भारत के मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों का सफाया, अज्ञात हमलावरों के खौफ से कांपे आतंकी
19 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद,। पाकिस्तान की धरती पर पनाह लिए भारत के मोस्ट वॉन्टेड घोषित आतंकियों के लिए इन दिनों अज्ञात हमलावर काल बनकर उभर रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक सदस्य और कुख्यात आतंकी हाफिज सईद के बेहद करीबी आमिर हमजा को लाहौर में निशाना बनाया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मोटरसाइकिल सवार अज्ञात हमलावरों ने हमजा पर उस वक्त ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं जब वह असुरक्षित स्थिति में था। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया है और फिलहाल अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। यह घटना पाकिस्तान में छिपे उन तमाम आतंकियों के लिए एक कड़ा संदेश मानी जा रही है जो दशकों से वहां सुरक्षित पनाहगाहों का आनंद ले रहे थे।
पिछले दो-तीन वर्षों के दौरान पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे खतरनाक संगठनों के कई शीर्ष कमांडरों का रहस्यमय तरीके से सफाया हुआ है। साल 2023 के बाद से इन टारगेट किलिंग्स में जबरदस्त तेजी देखी गई है, जहां महज सात महीनों के भीतर सात बड़े आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया। इन हत्याओं की सूची लंबी और चौंकाने वाली है। इसमें जैश प्रमुख मसूद अजहर का भाई मोहम्मद ताहिर अनवर, रियासी हमले का मास्टरमाइंड अबू कतल, और पठानकोट हमले का मुख्य आरोपी शाहिद लतीफ शामिल हैं। इसके अलावा खालिस्तान कमांडो फोर्स के प्रमुख परमजीत सिंह पंजवड़ को भी लाहौर के जौहर टाउन में सुबह की सैर के दौरान ढेर कर दिया गया था।
इन अज्ञात हमलावरों के निशाने पर केवल नए आतंकी ही नहीं हैं, बल्कि पुराने हिसाब भी बराबर किए जा रहे हैं। वर्ष 1999 के कुख्यात आईसी-814 विमान अपहरण कांड के मुख्य अपहरणकर्ताओं में से एक मिस्त्री जहूर इब्राहिम, जो दशकों से अपनी पहचान बदलकर पाकिस्तान में छिपा था, उसे भी कराची में मार गिराया गया। लश्कर की भर्ती सेल का मुख्य चेहरा अकरम खान गाजी और कराची के धार्मिक संस्थान के पास मारा गया मुफ्ती कैसर फारूक भी इसी अज्ञात शक्ति का शिकार बने हैं। ख्वाजा शाहिद जैसे कमांडरों की सिर कटी लाशें मिलना आतंकी संगठनों के भीतर पैदा हुए भारी डर और असुरक्षा की भावना को और गहरा कर रहा है। लगातार हो रही इन सिलसिलेवार हत्याओं ने न केवल आतंकी संगठनों की कमर तोड़ दी है, बल्कि पाकिस्तानी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पाकिस्तान की सरजमीं पर भारत के दुश्मनों का इस तरह एक-एक कर खत्म होना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, इन हमलों के पीछे कौन सी ताकतें सक्रिय हैं, यह अब भी एक गहरा रहस्य बना हुआ है, लेकिन इसने आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों को अब मौत के अड्डों में तब्दील कर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव: ईरानी नौसेना ने दो भारतीय जहाजों पर की फायरिंग
19 Apr, 2026 11:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार को ईरानी नौसेना (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों, 'सनमार हेराल्ड' और 'जग अर्नव', पर गोलीबारी की। इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया है। राहत की बात यह है कि हमले में किसी क्रू मेंबर को चोट नहीं आई है और जहाजों को भी कोई नुकसान नहीं पहुँचा है।
शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, दोनों जहाज कच्चे तेल और अन्य माल लेकर भारत आ रहे थे, जिन्हें फायरिंग के बाद वापस मुड़ना पड़ा। वहीं, ईरान के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने इस घटना की जानकारी होने से इनकार किया है और भारत-ईरान संबंधों को मजबूत बताया है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कदम को लेकर ईरान पर तंज कसते हुए कहा कि वे हमें 'ब्लैकमेल' नहीं कर सकते। फिलहाल, डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।
ईरान-अमेरिका युद्धविराम पर गहराया संकट, राष्ट्रपति ट्रंप की तेहरान को अंतिम चेतावनी
19 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव एक बार फिर नाजुक मोड़ पर पहुँच गया है। खाड़ी क्षेत्र में अस्थायी शांति के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि बुधवार तक कोई दीर्घकालिक समझौता नहीं होता, तो वर्तमान युद्धविराम को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। सोमवार को दोनों देशों के प्रतिनिधियों के इस्लामाबाद में बातचीत की मेज पर बैठने की संभावना है, जिसे शांति बहाली की आखिरी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने शुक्रवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से चर्चा के दौरान संकेत दिए कि मध्य पूर्व से कुछ सकारात्मक खबरें मिली हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि समझौता न होने की स्थिति में अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई और बमबारी शुरू कर सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान के साथ सौ फीसदी डील फाइनल नहीं हो जाती। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान में यह महत्वपूर्ण जलमार्ग व्यापार के लिए खुला है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव कम होने के संकेत मिले हैं। लेकिन ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिकी सेना की मौजूदगी और नाकाबंदी में तब तक ढील नहीं दी जाएगी, जब तक औपचारिक हस्ताक्षर नहीं हो जाते। ट्रंप के इस बयान ने दुनिया के सबसे संवेदनशील एनर्जी कॉरिडोर में फिर से अनिश्चितता पैदा कर दी है।
एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में ट्रंप ने ‘न्यूक्लियर डस्ट’ को वापस लाने की योजना का भी जिक्र किया। यह डस्ट ईरान में पुराने अमेरिकी हमलों के मलबे से संबंधित है, जिसे वापस लाने के लिए उन्होंने एक संयुक्त खुदाई ऑपरेशन का सुझाव दिया है। राष्ट्रपति ने अपनी कूटनीतिक कोशिशों का बचाव करते हुए दावा किया कि हाल के प्रयासों से इजरायल और लेबनान के बीच ऐसा युद्धविराम संभव हुआ है, जो पिछले 78 सालों में नहीं देखा गया। उन्होंने इस क्षेत्रीय स्थिरता के लिए पाकिस्तान के नेतृत्व सहित सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत जैसे देशों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। अब पूरी दुनिया की नजरें बुधवार की समयसीमा पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि खाड़ी क्षेत्र शांति की ओर बढ़ेगा या फिर से युद्ध की आग में झुलसेगा।
अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर सोमवार को होगी इस्लामाबाद में वार्ता
19 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद,। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अब एक बार फिर कूटनीतिक हल तलाशने की कोशिश तेज हो गई है। अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर नई वार्ता का दौर शुरू होने वाला है और एक बार फिर मंच बना है इस्लामाबाद। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के प्रतिनिधि रविवार तक पाकिस्तान पहुंच सकते हैं और सोमवार को औपचारिक बातचीत शुरू हो सकती है।
हालांकि अभी तक न तो वॉशिंगटन और न ही तेहरान की ओर से इस बैठक की आधिकारिक पुष्टि हुई है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि बातचीत जल्द हो सकती है। इससे साफ है कि पर्दे के पीछे तैयारी पूरी हो चुकी है। इनके अलावा ईरानी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इस्लामाबाद में अगले दौर की बातचीत सोमवार को तय है। इससे पहले पिछले वीकेंड हुई बातचीत कई घंटों तक चली, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था। ऐसे में इस बार की वार्ता और भी अहम है, क्योंकि पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ दो हफ्तों का सीजफायर अब खत्म होने वाला है। अगर इस बार भी बातचीत विफल रहती है, तो क्षेत्र में तनाव फिर से भड़क सकता है। यही वजह है कि पूरी दुनिया की नजर इस बैठक पर टिकी है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने भरोसा जताया है कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं। उनका कहना है कि ईरान कुछ अहम मुद्दों पर सहमति को तैयार है, लेकिन दूसरी तरफ ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रंप के इन दावों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि तेहरान ने अभी तक कोई बड़ा समझौता नहीं किया है और कई मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं यानी साफ है कि दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी अभी भी बड़ी बाधा है।
इस पूरे संकट का सबसे अहम केंद्र होर्मुज स्ट्रेट है। यह दुनिया का सबसे अहम ऑयल रूट है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई होती है। हालांकि ईरान ने कहा है कि यह रास्ता कमर्शियल जहाजों के लिए खुला है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दिख रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बहुत कम जहाज इस रास्ते से गुजर रहे हैं। ईरान की संसद के स्पीकर ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने अपना नौसैनिक ब्लॉकेड नहीं हटाया, तो इस स्ट्रेट को फिर से बंद किया जा सकता है। इससे वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
इधर लेबनान में इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच 10 दिन का सीजफायर लागू हो गया है। हालांकि यह समझौता अभी तक काफी हद तक कायम है, लेकिन लेबनान की तरफ से इजराइल पर उल्लंघन के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। यह मुद्दा भी अमेरिका-ईरान बातचीत में एक अहम भूमिका निभा रहा है, क्योंकि ईरान हिज्बुल्लाह का समर्थक है। ऐसे में क्षेत्रीय शांति के लिए लेबनान का मोर्चा भी उतना ही अहम है।
अफगानिस्तान में आया 5.0 तीव्रता का भूकंप, कश्मीर में भी लगे झटके
19 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल। सुबह अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों में रिक्टर पैमाने पर 5.0 तीव्रता का भूकंप आया, इसके झटके कश्मीर घाटी में भी महसूस किए गए। भूकंपीय आंकड़ों के मुताबिक भूकंप सुबह करीब 8:24 बजे आया। भूकंप अफगानिस्तान के बदख्शां क्षेत्र में ज़ायबक के पास केंद्रित था। यह सतह के नीचे करीब 190 किलोमीटर की गहराई पर हुई, जिससे संभवतः जमीन पर महसूस होने वाली तीव्रता कम हो गई।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि भूकंप से करीब 477 टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा निकली, जो इसकी गहराई के बावजूद भूकंपीय गतिविधि की ताकत को उजागर करती है। भूकंप के समय भूकंप के केंद्र पर मौसम बादल छाए हुए थे, तापमान करीब 20.5 डिग्री सेल्सियस और मध्यम आर्द्रता थी। कश्मीर घाटी के कई हिस्सों में हल्के झटके महसूस किए गए, हालांकि क्षति या चोट की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं थी।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भूकंप आने पर जमीन पर लेट जाएं, किसी मजबूत मेज या डेस्क के नीचे छिप जाएं और तब तक रुके रहें जब तक झटके बंद न हो जाएं। यदि कोई आश्रय उपलब्ध नहीं है तो अपने सिर और गर्दन को अपनी भुजाओं से सुरक्षित रखें। यदि आप अंदर हैं तो घर के अंदर ही रहें, झटकों के दौरान बाहर न भागें। खिड़कियों, कांच, दर्पणों और भारी वस्तुओं से दूर रहें जो गिर सकती हैं। यदि आप बाहर हैं, तो इमारतों, पेड़ों, स्ट्रीट लाइटों और उपयोगिता तारों से दूर किसी खुले क्षेत्र में चले जाएं। यदि आप गाड़ी चला रहे हैं, तो पुलों, फ्लाईओवरों और इमारतों से दूर सुरक्षित रूप से रुकें और वाहन के अंदर ही रहें।
अपनी और दूसरों की चोटों की जांच करें और यदि आवश्यक हो तो प्राथमिक उपचार प्रदान करें।
यदि आपकी इमारत क्षतिग्रस्त हो गई है तो झटकों की आशंका रखें और सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। यदि आपको रिसाव या क्षति का संदेह हो तो गैस और बिजली बंद कर दें। क्षतिग्रस्त इमारतों में प्रवेश करने से बचें। स्थानीय अधिकारियों और आपातकालीन सेवाओं के निर्देशों का पालन करें।
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