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पेरू में भूकंप के बाद राहत अभियान तेज, 27 लोगों के घायल होने की खबर
20 May, 2026 09:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लॉस एंजिल्स। दक्षिणी कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी भीषण आग के कारण मंगलवार को 17,000 से अधिक लोगों को अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने (निकासी) के आदेश दिए गए हैं। 'सैंडी' नाम की यह आग सोमवार को लॉस एंजिल्स से लगभग 30 मील (48 किलोमीटर) उत्तर-पश्चिम में स्थित सिमी घाटी की पहाड़ियों में भड़की थी। तेज और अनियंत्रित हवाओं के कारण इस आग ने बेहद आक्रामक रूप अख्तियार कर लिया है, जिससे अब रिहायशी इलाकों और उपनगरीय घरों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
सूखे झाड़ बने आग का ईंधन, एक घर तबा
वेंटुरा काउंटी अग्निशमन विभाग (फायर डिपार्टमेंट) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह तक इस विनाशकारी आग ने दो वर्ग मील (लगभग पांच वर्ग किलोमीटर) से अधिक क्षेत्र में फैले सूखे झाड़ों और वनस्पतियों को जलाकर राख कर दिया है। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उनकी चपेट में आने से कम से कम एक घर पूरी तरह नष्ट हो गया है। दमकल विभाग की कई टीमें लगातार आग पर काबू पाने और रिहायशी इलाकों को बचाने के प्रयास में जुटी हुई हैं, लेकिन तेज हवाएं उनके काम में लगातार बाधा डाल रही हैं।
ब्रिटेन का बड़ा आर्थिक फैसला, पाकिस्तान की मदद पर असर संभव
20 May, 2026 08:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटेन सरकार ने अपनी खस्ताहाल आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए विदेशी सहायता (फॉरेन फंड) में एक बहुत बड़ी कटौती करने का ऐतिहासिक ऐलान किया है। इस फैसले का सबसे घातक और सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ने वाला है। एक आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन सरकार ने साल 2027 तक अपनी विकास सहायता को सकल राष्ट्रीय आय (GNI) के 0.5 फीसदी से घटाकर 0.3 फीसदी करने का कड़ा फैसला लिया है। इस नई नीति के तहत ब्रिटेन अपनी विदेशी सहायता में 6 अरब डॉलर से ज्यादा की भारी कटौती करने जा रहा है, जिससे पाकिस्तान और मोजाम्बिक जैसे देशों को सबसे बड़ा झटका लगेगा। इसके अलावा यमन, सोमालिया और अफगानिस्तान जैसे संकटग्रस्त देशों को मिलने वाले फंड में भी भारी कमी आएगी।
यूक्रेन युद्ध और रक्षा खर्च बना बड़ी वजह
ब्रिटेन की विदेश मंत्री इवैट कूपर ने संसद में इस फैसले की वजह साफ करते हुए कहा कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और खासकर यूक्रेन युद्ध के चलते सरकार पर रक्षा खर्च बढ़ाने का भारी दबाव है। इसी वजह से देश की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए सरकार को ऐसे ‘कठिन फैसले और समझौते’ करने पड़ रहे हैं। गौरतलब है कि कोरोना महामारी से पहले तक ब्रिटेन अपनी जीएनआई (GNI) का 0.7 फीसदी हिस्सा विदेशी सहायता पर खर्च करता था, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें लगातार गिरावट आई है। ब्रिटिश सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब वह विकासशील देशों को सीधे फंड देने के बजाय वहां निजी निवेश और विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के लिए ‘निवेश आधारित साझेदारी’ (इन्वेस्टमेंट बेस्ड पार्टनरशिप) मॉडल पर ज्यादा ध्यान देगी।
प्रवासियों की कमाई और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों पर बढ़ेगी निर्भरता
ब्रिटेन द्वारा फंड रोके जाने के बाद अब प्रभावित देशों को अपने विकास कार्यक्रमों को चलाने के लिए वैकल्पिक आर्थिक रास्तों पर निर्भर होना पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि इन देशों को अब विदेशों में रहने वाले अपने नागरिकों द्वारा भेजी जाने वाली रकम (रेमिटेंस) का सहारा लेना होगा। पाकिस्तान के मामले में, विदेशों में रहने वाले उसके 80 लाख से ज्यादा नागरिकों द्वारा भेजी जाने वाली राशि बढ़कर करीब 30 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे ब्रिटेन की कटौती से होने वाले नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकेगी।
दूसरी तरफ, मोजाम्बिक जैसे गरीब देशों के लिए स्थिति बेहद गंभीर होने वाली है, क्योंकि वहां प्रवासियों से आने वाली कमाई बेहद कम है। हाल ही में आई भीषण बाढ़ के कारण मोजाम्बिक में लाखों लोग बेघर हुए हैं, ऐसे में ब्रिटेन से मदद रुकने के बाद अब उसे पूरी तरह से संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसी बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के भरोसे रहना पड़ेगा।
इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने कहा- मेहनत ही सफलता की चाबी, भारत से रिश्ते गहरे
20 May, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोम: भारत और इटली के बीच मजबूत होते जा रहे द्विपक्षीय संबंधों के बीच एक बेहद दिलचस्प और दिल छू लेने वाली तस्वीर सामने आई है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी की राजकीय यात्रा का स्वागत करते हुए एक मशहूर हिंदी कहावत का इस्तेमाल किया। भारत-इटली के प्रगाढ़ होते रिश्तों का जिक्र करते हुए मेलोनी ने कहा कि 'परिश्रम ही सफलता की कुंजी है', जो दोनों देशों के साझा प्रयासों को बिल्कुल सटीक तरीके से बयां करता है।
'पीएम मोदी के आगमन से शुरू हुआ दोस्ती का नया दौर'
इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने गर्मजोशी से प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि आपका इटली आना हमारे लिए बेहद गौरव की बात है। यह यात्रा दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि आप दोनों देशों की लंबी और अटूट साझेदारी की जिस किताब को एक मजबूत संकल्प के साथ आगे बढ़ा रहे हैं, यह उसका आखिरी पन्ना बिल्कुल नहीं है। हम दोनों ही राष्ट्र अपने साझा हितों और विकास को सबसे बेहतरीन मुकाम पर ले जाने के लिए पूरी शिद्दत से काम कर रहे हैं।
मेलोनी ने समझाया 'परिश्रम' का असली महत्व
कूटनीतिक मंच पर भारतीय संस्कृति की झलक दिखाते हुए इतालवी पीएम ने 'परिश्रम' शब्द की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा:
"'परिश्रम' एक ऐसा भारतीय शब्द है, जो हमारी साझा सोच और समर्पण की भावना को बेहद खूबसूरती से दर्शाता है। इसका सीधा अर्थ है—कड़ी मेहनत। मैं इस बात से भली-भांति वाकिफ हूं कि भारत की रोजमर्रा की जिंदगी में इस शब्द का बहुत गहरा महत्व है। वहां एक बेहद लोकप्रिय कहावत भी है कि 'परिश्रम ही सफलता की कुंजी है'।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस कहावत का साफ संदेश है कि कठिन और ईमानदारी से की गई मेहनत ही कामयाबी का एकमात्र रास्ता है। आज भारत और इटली भी अपने कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को इसी मजबूत सोच के साथ आगे बढ़ा रहे हैं, जहां दोनों तरफ से किया जा रहा अथक प्रयास सबसे अहम बन चुका है।
ट्रंप प्रशासन ने WHO को घेरा, समय पर अलर्ट न देने का आरोप
20 May, 2026 06:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। सेंट्रल अफ्रीका में तेजी से पैर पसार रहे इबोला के प्रकोप को रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन ने बड़े पैमाने पर वित्तीय और स्वास्थ्य सहायता देने का ऐलान किया है। हालांकि, इस मदद के साथ ही अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि डब्ल्यूएचओ ने इस बीमारी को लेकर वैश्विक चेतावनी जारी करने में बहुत देर की, जिसकी वजह से प्रभावित इलाकों में समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए जा सके और कीमती समय बर्बाद हो गया। अमेरिका पहले ही इस संकट से निपटने के लिए लगभग 23 मिलियन डॉलर (करीब 1.9 अरब रुपये) की मानवीय सहायता देने की घोषणा कर चुका है और अब वह एक और बड़ा राहत पैकेज तैयार कर रहा है।
प्रभावित क्षेत्रों में बनाए जाएंगे 50 उपचार केंद्र
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन अब इस स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए बेहद आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह नई वित्तीय सहायता सैकड़ों मिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। इस भारी-भरकम बजट का इस्तेमाल इबोला प्रभावित इलाकों में लगभग 50 विशेष उपचार केंद्र और क्लीनिक बनाने के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही वहां बड़ी संख्या में मेडिकल स्टाफ और जरूरी दवाएं भेजी जा रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि इबोला का यह प्रकोप मुख्य रूप से कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के एक बेहद दूरदराज और आंतरिक संघर्ष से जूझ रहे इलाके में फैला है। इस वजह से वहां मरीजों की पहचान करना, राहत सामग्री पहुंचाना और डॉक्टरों की टीमों को तैनात करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
डब्ल्यूएचओ की देरी पर जताई कड़ी नाराजगी
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि इस संकट से निपटने में हमारी तरफ से थोड़ी देरी इसलिए हुई क्योंकि डब्ल्यूएचओ ने खुद इस पर कदम उठाने में सुस्ती दिखाई। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ ने 15 मई को सार्वजनिक रूप से इस इबोला प्रकोप की पुष्टि की थी, जिसके तुरंत बाद अमेरिका ने अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया इकाइयां सक्रिय कर दीं। इस अभियान में अमेरिका का सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC), स्टेट डिपार्टमेंट और कई अन्य मानवीय एजेंसियां शामिल हैं। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने इस महामारी से निपटने के लिए 24 घंटे काम करने वाली एक विशेष टास्क फोर्स बनाई है, जिसमें साल 2014 और 2018 के इबोला संकट का अनुभव रखने वाले अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है।
एक अमेरिकी नागरिक संक्रमित, यात्रा पर सख्त प्रतिबंध
अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वहां चलाए जा रहे निकासी अभियान (इवैकुएशन मिशन) से जुड़े लोगों में से अब तक एक व्यक्ति इबोला वायरस से संक्रमित (पॉजिटिव) पाया गया है, जबकि कई अन्य संदिग्धों को कड़ी निगरानी में रखा गया है। संक्रमण को अमेरिका में फैलने से रोकने के लिए सीडीसी (CDC) के 'टाइटल 42' आदेश के तहत बेहद सख्त यात्रा प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। नए नियमों के मुताबिक, कोई भी ऐसा विदेशी नागरिक जो पिछले 21 दिनों के भीतर कांगो (DRC), युगांडा या दक्षिण सूडान की यात्रा कर चुका है, उसे अमेरिका में एंट्री नहीं दी जाएगी। हालांकि, खेल प्रेमियों के लिए राहत की बात यह है कि कांगो की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को आगामी फीफा वर्ल्ड कप में खेलने की अनुमति मिल जाएगी, क्योंकि उसके खिलाड़ी पहले से ही यूरोप में ट्रेनिंग कर रहे हैं और वे इस 21 दिन वाले प्रतिबंध के दायरे में नहीं आते हैं।
पंखे से लटका मिला शव, पुलिस ने शुरू की जांच
20 May, 2026 05:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रेवाड़ी: जिले के गांव नेहरूगढ़ में सेना के ऑर्डिनेंस डिपो में तैनात एक जवान द्वारा घर के भीतर फांसी लगाकर आत्महत्या करने का अत्यंत दुखद मामला सामने आया है। मृतक की शिनाख्त 28 वर्षीय योगेश के तौर पर हुई है, जो राजस्थान के बाड़मेर में भारतीय सेना के ऑर्डिनेंस डिपो में टी-मेट के पद पर कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि योगेश करीब 25 दिन पहले ही छुट्टी पर अपने गांव आए हुए थे।
सुबह कमरे में पंखे से लटका मिला जवान का शव
मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार की रात को योगेश रोज की तरह अपने घर के एक अलग कमरे में सोने के लिए गए थे। बुधवार सुबह करीब 5 बजे तक जब उनके कमरे का दरवाजा नहीं खुला और कोई हलचल नहीं हुई, तो चिंतित परिजनों ने कमरे के भीतर जाकर देखा। अंदर योगेश का शव फंदे के सहारे पंखे से झूल रहा था। बदहवास परिजन उन्हें तुरंत कोसली के नागरिक अस्पताल ले गए, लेकिन वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
शुरुआती तफ्तीश में मानसिक तनाव की बात आई सामने
घटना की जानकारी मिलते ही नाहड़ पुलिस चौकी की टीम अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस को घटनास्थल से किसी भी प्रकार का सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। हालांकि, शोकाकुल परिजनों ने पुलिस को बताया कि योगेश पिछले कुछ समय से भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे थे, लेकिन उनकी इस मानसिक परेशानी की असली वजह क्या थी, यह अभी तक साफ नहीं हो पाई है।
दो साल पहले ही हुआ था विवाह, पत्नी हैं गर्भवती
योगेश की शादी साल 2024 में बैहरमपुर की रहने वाली युवती से हुई थी। उनके परिवार में उनका एक करीब सवा साल का मासूम बेटा है, जबकि उनकी पत्नी इस समय गर्भवती हैं। योगेश की माता का देहांत पहले ही हो चुका है और उनके पीछे परिवार में पिता, दादा-दादी और एक छोटा भाई है। इस असमय हादसे से पूरे गांव और परिवार में मातम पसरा हुआ है।
पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंपा
कोसली थाना के एसएचओ मनोज कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने नागरिक अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम करवाकर उसे अंतिम संस्कार के लिए परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। पुलिस ने परिजनों के बयानों के आधार पर सीआरपीसी के तहत इत्तेफाकिया मौत की कार्रवाई दर्ज की है और मामले के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।
बिना गियर के काम करना पड़ा जानलेवा, प्लंबर की मौत से हड़कंप
20 May, 2026 05:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बहादुरगढ़: महाराजा अग्रसेन यूनिवर्सिटी परिसर में सीवरेज टैंक की सफाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में डाबौदा कलां के रहने वाले प्लंबर सुनील की मौत के बाद मामला गरमा गया है। मृतक की पत्नी ने स्थानीय सदर थाने में अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि सुनील की तबीयत ठीक नहीं थी और उनकी ड्यूटी का समय भी खत्म हो चुका था, फिर भी उन्हें जबरन जहरीली गैस से भरे सीवर टैंक में उतारा गया, जिससे उनकी जान चली गई।
अस्पताल प्रबंधन सहित 8 जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा दर्ज
इस मामले में मुस्तैदी दिखाते हुए पुलिस ने मृतक की पत्नी की तहरीर पर महाराजा अग्रसेन अस्पताल प्रबंधन के आला पदाधिकारियों और सुपरवाइजर सहित कुल 8 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। मालूम हो कि सोमवार को यूनिवर्सिटी परिसर में सीवर की सफाई के दौरान अचानक जहरीली गैस का रिसाव होने से पांच कर्मचारी अचेत हो गए थे। अस्पताल में इलाज के दौरान बुधवार को प्लंबर सुनील ने दम तोड़ दिया।
परिजनों का आरोप: बिना सुरक्षा उपकरणों के जबरन कराया जानलेवा काम
मृतक सुनील की पत्नी मीनू ने पुलिस को बताया कि उनके पति अस्पताल में बतौर प्लंबर सेवाएं दे रहे थे। 18 मई को सुबह 9 बजे उनकी शिफ्ट खत्म हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद उन पर दबाव बनाकर उन्हें सीवरेज टैंक की सफाई के काम में धकेल दिया गया। गंभीर आरोप यह भी है कि इस बेहद खतरनाक और जानलेवा काम के लिए कर्मचारियों को कोई भी सुरक्षा किट या उपकरण मुहैया नहीं कराए गए थे। जहरीली गैस की चपेट में आने से सुनील के साथ तीन अन्य सफाईकर्मियों की हालत भी बेहद नाजुक हो गई थी।
सूचना छिपाने और लापरवाही बरतने के आरोप से घिरा प्रशासन
पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि हादसे के बाद उन्हें समय पर कोई जानकारी नहीं दी गई। परिजनों को न तो सुनील के स्वास्थ्य की सही स्थिति बताई गई और न ही इलाज के बारे में स्पष्ट किया गया। जब परिवार के लोग खुद अस्पताल पहुंचे, तब उन्हें सुनील की मौत का पता चला। परिजनों का कहना है कि प्रबंधन ने इस पूरी घटना पर चुप्पी साध रखी है और वे अब दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
इन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम FIR में शामिल
सदर थाना पुलिस ने मीनू की शिकायत के आधार पर मीना सुभाष गुप्ता, कुनाल बंसल, प्रेम गर्ग, अशोक कुमार गर्ग, संजय गुप्ता, प्रधान राजेश गुप्ता, एचओडी राजीव भारद्वाज और इलेक्ट्रिकल सुपरवाइजर अंशुल के खिलाफ कानूनी धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहनता से तफ्तीश शुरू कर दी गई है और जांच में जो भी लापरवाही बरतने का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
रक्षा सौदे में बड़ा मोड़: नॉर्वे ने मलेशिया को मिसाइल सिस्टम रोका
20 May, 2026 05:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुआलालंपुर। नॉर्वे सरकार ने मलेशिया को दी जाने वाली आधुनिक ‘नेवल स्ट्राइक मिसाइल सिस्टम’ के एक्सपोर्ट (निर्यात) पर अचानक रोक लगा दी है। नॉर्वे के इस अप्रत्याशित फैसले ने न केवल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ा दिया है, बल्कि मलेशिया को एक बड़ा आर्थिक और सैन्य नुकसान भी पहुंचाया है। मलेशियाई रक्षा मंत्री मोहम्मद खालिद नॉर्डिन ने जानकारी दी है कि उनकी सरकार ने नॉर्वे की हथियार निर्माता कंपनी ‘कोंग्सबर्ग डिफेंस एंड एयरोस्पेस’ को एक कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस के जरिए मलेशिया ने लगभग 251 मिलियन डॉलर (करीब 1 अरब मलेशियाई रिंगिट) के मुआवजे की मांग की है। मलेशिया इस सौदे के लिए पहले ही 95 फीसदी रकम का भुगतान कर चुका था, जिसके बाद ऐन वक्त पर लगी इस रोक से मलेशियाई सरकार बेहद नाराज है।
नॉर्वे ने क्यों रद्द किया मिसाइल सौदा?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नॉर्वे के विदेश मंत्रालय ने अपने इस फैसले पर सफाई देते हुए कहा है कि तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल को देखते हुए देश ने अपनी सैन्य और रक्षा तकनीकों के एक्सपोर्ट नियमों को काफी कड़ा कर दिया है। नॉर्वे की नई रक्षा नीति के मुताबिक, अब वह अपनी सबसे संवेदनशील और आधुनिक सैन्य तकनीकें केवल नाटो (NATO) के सदस्य देशों या अपने सबसे करीबी सहयोगियों को ही सप्लाई करेगा। चूंकि मलेशिया इस श्रेणी में नहीं आता, इसलिए उसके एक्सपोर्ट लाइसेंस को रद्द कर दिया गया है।
मलेशिया का नौसैनिक आधुनिकीकरण अधर में लटका
नॉर्वे के इस कदम से मलेशिया का पूरा नौसैनिक आधुनिकीकरण कार्यक्रम (नेवल मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम) संकट में आ गया है। मलेशिया ने साल 2018 में कोंग्सबर्ग कंपनी के साथ अपने नए श्रेणी के युद्धपोतों को इस मिसाइल सिस्टम से लैस करने का समझौता किया था। अब स्थिति यह है कि मलेशियाई नौसेना को अपने जहाजों पर पहले से लगाए जा चुके मिसाइल माउंटिंग सिस्टम को हटाना पड़ेगा। इसके अलावा, युद्धपोतों के लिए किसी दूसरे देश से नया वैकल्पिक मिसाइल सिस्टम तलाशने और उसे जहाजों के डिजाइन के अनुसार फिट करने में मलेशिया को भारी अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा और इसमें काफी समय भी बर्बाद होगा।
मलेशियाई प्रधानमंत्री ने जताई कड़ी आपत्ति
रिपोर्ट के मुताबिक, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने नॉर्वे की इस कार्रवाई पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर से फोन पर सीधी बातचीत करके अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। पीएम इब्राहिम ने सोशल मीडिया पर भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि दो देशों के बीच साइन किए गए आधिकारिक कॉन्ट्रैक्ट कोई हवा में उड़ाने वाले कागज के टुकड़े नहीं हैं, जिन्हें कोई भी देश अपनी मनमर्जी से रद्द कर दे। वहीं, रक्षा मंत्री खालिद नॉर्डिन ने इसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों और व्यापारिक नियमों में भरोसे की एक बड़ी कमी करार दिया है।
भूख और गरीबी से जूझ रहा अफगानिस्तान, इंसानियत को झकझोर रही तस्वीरें
20 May, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अफगानिस्तान: भुखमरी, कमरतोड़ गरीबी और बदहाली के चक्रव्यूह में फंसे अफगानिस्तान में मानवीय संकट हर बीतते दिन के साथ और गहराता जा रहा है। वैश्विक मीडिया और कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों में देश के भीतर उपजे इस भयावह हालात की रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। इन रिपोर्टों के अनुसार, अफगानिस्तान के सुदूर और ग्रामीण इलाकों में अत्यंत गरीब परिवार दाने-दाने को मोहताज हैं। नौबत यहाँ तक आ पहुंची है कि अपने परिवार का पेट पालने, गंभीर बीमारियों का इलाज कराने या कर्जदारों से जान छुड़ाने के लिए बेबस माता-पिता अपने ही मासूम बच्चों का सौदा करने पर मजबूर हो गए हैं।
तीन-चौथाई आबादी बुनियादी जरूरतों से महरूम
ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि बच्चों को बेचने की ये दर्दनाक घटनाएं अब कोई इक्का-दुक्का मामला नहीं रह गई हैं, बल्कि यह पूरे देश में फैले एक व्यापक संकट की बानगी हैं। आज अफगानिस्तान की लगभग तीन-चौथाई (75 प्रतिशत) आबादी दो वक्त की रोटी और पीने के साफ पानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए कड़ा संघर्ष कर रही है। देश में छाई भयानक मंदी, चरम बेरोजगारी और अंतरराष्ट्रीय मदद में हुई भारी कटौती ने परिवारों को अपनी ही बेटियों को बेचने जैसा अकल्पनीय और आत्मघाती कदम उठाने पर विवश कर दिया है। इसके अलावा, तालिबान शासन द्वारा महिलाओं और किशोरियों पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों ने इस सामाजिक और आर्थिक संकट को और ज्यादा पेचीदा बना दिया है।
इलाज के खर्च के लिए 5 साल की मासूम का सौदा
अफगानिस्तान के घोर प्रांत से सामने आई एक बेहद भावुक कर देने वाली कहानी में एक पिता की बेबसी को साफ देखा जा सकता है। सईद अहमद नाम के एक शख्स ने बताया कि उसकी पांच साल की मासूम बेटी 'शाइका' लिवर सिस्ट और अपेंडिक्स जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से पीड़ित थी। अस्पताल में उसकी सर्जरी के लिए भारी-भरकम रकम की जरूरत थी। कोई और रास्ता न देख, सईद ने अपनी बेटी को ही बेच दिया। हालांकि, उसने खरीदार के सामने यह शर्त रखी कि वे बच्ची को तब तक अपने साथ नहीं ले जा सकते जब तक कि उसका पूरा इलाज नहीं हो जाता। शाइका की सर्जरी तो कामयाब रही, लेकिन इसके लिए एक पिता को 200,000 अफगानी (लगभग 3,200 अमेरिकी डॉलर से कम) में अपनी ही संतान का सौदा करना पड़ा।
बच्चों में कुपोषण और मृत्यु दर में भारी उछाल
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का अनुमान है कि इस समय अफगानिस्तान में करीब 50 लाख (5 मिलियन) लोग आपातकालीन स्तर की भुखमरी का सामना कर रहे हैं। देश का स्वास्थ्य ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है, अस्पतालों में न दवाइयां हैं और न ही जरूरी जीवनरक्षक उपकरण। इसके चलते बच्चों में कुपोषण की दर खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है और शिशु मृत्यु दर में लगातार रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। राहत पहुंचाने वाली विदेशी संस्थाओं का बजट सिकुड़ जाने से जमीनी स्तर पर मदद नाममात्र की रह गई है।
"दूसरे बच्चों को भूख से तड़पकर मरते नहीं देख सकते"
संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार, कई लाचार माता-पिता अपने अन्य बच्चों को भूख से तड़पकर मरने से बचाने के लिए एक बच्चे को बेचने के इस गणित को ही आखिरी रास्ता मानते हैं। एक अन्य परेशान पिता ने अपनी 7 साल की जुड़वां बेटियों, रोकिया और रोहिला का हवाला देते हुए कहा कि वह कर्ज के बोझ तले इस कदर दबा हुआ है कि वह अपनी बेटियों को भी बेचने के लिए तैयार है ताकि बाकी परिवार जिंदा रह सके। 2021 और 2022 के दौरान भी ऐसी कई रिपोर्ट्स आईं, जिनमें सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में माताओं द्वारा अपने नवजात शिशुओं को किसी निःसंतान दंपत्ति या दलालों को बेचने के वीडियो और फुटेज वैश्विक स्तर पर वायरल हुए थे, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था।
80 प्रतिशत से ज्यादा परिवार कर्ज के दलदल में
आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि:
अफगानिस्तान के 80 प्रतिशत से अधिक परिवार इस समय कर्ज के जाल में पूरी तरह फंस चुके हैं।
लगातार पड़ने वाले सूखे, विदेशी सहायता पर रोक और तालिबान की वापसी के बाद देश की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह ढह चुकी है, जिससे 23 से 30 मिलियन लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।
एक ताजा आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में अफगानिस्तान के करीब 28 मिलियन लोग अत्यधिक गरीबी रेखा के नीचे जीवन बसर कर रहे हैं।
देश की जनसंख्या वृद्धि दर जहां 6.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है, वहीं वास्तविक जीडीपी विकास दर घटकर महज 1.9 प्रतिशत रह गई है, जिसके चलते प्रति व्यक्ति आय में भारी गिरावट आई है और अत्यधिक गरीबी अब कोई अपवाद नहीं, बल्कि वहां की जनता की रोजमर्रा की हकीकत बन चुकी है।
PM मोदी और मेलोनी की अहम पहल, दोनों देशों ने तय किया बड़ा व्यापारिक विजन
20 May, 2026 01:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत और इटली ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए और ऐतिहासिक मुकाम पर ले जाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी कार्ययोजना (रोडमैप) तैयार की है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया मंचों पर साझा किए गए एक विशेष लेख में अपने आपसी रिश्तों को 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' यानी विशेष रणनीतिक साझेदारी का नाम दिया है। इस लेख में रेखांकित किया गया है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और इटली के मजबूत होते संबंध उभरते हुए 'इंडो-मेडिटेरेनियन' (हिंद-भूमध्यसागरीय) युग का सबसे मजबूत आधार बनने जा रहे हैं, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र से लेकर भूमध्य सागर तक शांति और प्रगति को बढ़ावा देगा।
साझा विजन और लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ
'इटली एंड इंडिया: ए स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फॉर द इंडो-मेडिटेरेनियन' शीर्षक से लिखे गए इस साझा लेख में दोनों देशों के नेतृत्व ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि भारत और इटली के आपसी संबंध अब एक निर्णायक और ऐतिहासिक मोड़ पर आ खड़े हुए हैं। नेताओं का मानना है कि यह रिश्ता अब केवल औपचारिक कूटनीति या सामान्य दोस्ती तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और भविष्य के एक जैसे साझा दृष्टिकोण पर टिकी हुई एक बेहद मजबूत एवं भरोसेमंद वैश्विक साझेदारी का रूप ले चुका है।
औद्योगिक तालमेल और व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प
इस नए रणनीतिक रोडमैप के तहत दोनों देशों की अद्वितीय ताकतों को एक मंच पर लाने की व्यापक रूपरेखा तैयार की गई है, जिसमें इटली की विश्व प्रसिद्ध औद्योगिक व विनिर्माण विशेषज्ञता को भारत की तेजी से बढ़ती विशाल अर्थव्यवस्था, मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम और बेहतरीन इंजीनियरिंग कौशल के साथ जोड़ा जाएगा। दोनों देशों ने आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ा मील का पत्थर तय करते हुए साल 2029 तक अपने आपसी द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो से अधिक के पार पहुंचाने का एक बड़ा लक्ष्य रखा है। इस भारी-भरकम व्यापारिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए रक्षा उत्पादन, एयरोस्पेस, स्वच्छ व नवीकरणीय ऊर्जा, आधुनिक मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा उद्योग (टेक्सटाइल) और पर्यटन जैसे प्रमुख व उभरते हुए क्षेत्रों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
बीन और सपेरे की तस्वीर पर विवाद, PM मोदी से जुड़े कार्टून पर मचा हंगामा
20 May, 2026 12:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओस्लो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान वहां के एक प्रतिष्ठित और मुख्यधारा के समाचार पत्र 'आफ्टेनपोस्टेन' (Aftenposten) में छपे एक कार्टून को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस व्यंग्यचित्र में पीएम मोदी को पारंपरिक सपेरे के रूप में चित्रित किया गया है, जहां बीन के आगे सांप की जगह पेट्रोल पंप की पाइप को लहराते हुए दिखाया गया है। चूंकि पश्चिमी मीडिया में लंबे समय से भारत की छवि को सपेरों, हाथियों और रूढ़िवादिता से जोड़कर मखौल उड़ाया जाता रहा है, इसलिए इस रेखाचित्र को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से नस्लभेदी, अपमानजनक और भारत विरोधी मानसिकता का प्रतीक बताया जा रहा है।
पुराना चश्मा और 'चालाक' बताने की कोशिश
यह विवादित कार्टून प्रधानमंत्री मोदी के ओस्लो हवाई अड्डे पर उतरने से महज कुछ घंटे पहले अखबार के मुख्य पन्ने पर नजर आया था। इस रेखाचित्र के साथ समाचार पत्र ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कैप्शन में लिखा, 'एक चालाक लेकिन परेशान करने वाला व्यक्ति'। इस पूरे लेख में इस बात का विश्लेषण किया गया था कि भारत का झुकाव नॉर्डिक देशों की तरफ क्यों बढ़ रहा है, लेकिन लेख से ज्यादा इस नस्लीय कार्टून ने लोगों का ध्यान खींचा। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने याद दिलाया कि यह पहली बार नहीं है; इससे पहले साल 2022 में स्पेन के मशहूर अखबार 'ला वेंगार्डिया' ने भी भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को सपेरे की टोकरी से निकलते हुए दिखाया था, जिसकी वैश्विक स्तर पर थू-थू हुई थी।
'सपेरों का देश' नहीं, अब 'माउस चार्मर' है भारत
इस तरह के औपनिवेशिक और पिछड़े चित्रण पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्व में कई बार पश्चिमी देशों को कड़ा जवाब दे चुके हैं। साल 2014 में अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान उन्होंने प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए गर्व से कहा था कि हमारा देश अब सांपों से नहीं, बल्कि कंप्यूटर के 'माउस' से दुनिया को चमत्कृत कर रहा है। इससे भी पहले, साल 2013 में वाइब्रेंट गुजरात यूथ कन्वेंशन में उन्होंने युवाओं के बीच कहा था कि भारत अब सपेरों (स्नेक चार्मर्स) के युग से आगे निकलकर 'माउस चार्मर्स' का देश बन चुका है। भारतीय प्रशंसकों का कहना है कि नॉर्वे के मीडिया का यह रवैया भारत की आधुनिक तकनीकी, डिजिटल क्रांति और मजबूत आर्थिक पहचान को जानबूझकर नजरअंदाज करने जैसा है।
प्रेस स्वतंत्रता और तीखे सवालों का दूसरा विवाद
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान केवल कार्टून ही नहीं, बल्कि एक प्रेस कार्यक्रम के दौरान भी भारी राजनीतिक और राजनयिक ड्रामा देखने को मिला। नॉर्वे की एक जानी-मानी महिला पत्रकार हेले लिंग ने एक संयुक्त प्रेस मीट के दौरान पीएम मोदी के सामने सीधे तौर पर तीखा सवाल दाग दिया था। प्रधानमंत्री द्वारा उस सवाल का सीधा जवाब न दिए जाने पर पत्रकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक वीडियो साझा कर नाराजगी जाहिर की। वीडियो में वह पीएम मोदी से कहती सुनी जा सकती हैं कि 'आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवालों का सामना करने से क्यों कतराते हैं?' इस मुद्दे के तूल पकड़ने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने आनन-फानन में एक अलग प्रेस ब्रीफिंग बुलाई और भारतीय पक्ष की ओर से उस पत्रकार के सभी सवालों के विस्तृत जवाब देकर स्थिति को संभालने का प्रयास किया।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर आयोग ने जताई गंभीर चिंता
20 May, 2026 11:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा में बच्चों के विरुद्ध लगातार बढ़ रहे गंभीर अपराधों को लेकर हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB-2024) के चौंकाने वाले आंकड़ों को आधार बनाते हुए आयोग ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। आयोग ने प्रदेश में बाल सुरक्षा की स्थिति को “अत्यंत चिंताजनक” करार देते हुए कहा कि ये आंकड़े राज्य के बाल संरक्षण तंत्र और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
देश में सबसे आगे हरियाणा: एक साल में दर्ज हुए 7,547 मामले
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा, न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया की पूर्ण पीठ ने सुनवाई के दौरान एनसीआरबी की रिपोर्ट का हवाला दिया। आयोग ने बताया कि वर्ष 2024 में हरियाणा में बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल 7,547 मामले सामने आए, जो साल 2023 के मुकाबले लगभग 17.9 प्रतिशत ज्यादा हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य में प्रति एक लाख बच्चों पर अपराध की दर 82.8 है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है।
पोक्सो और गंभीर मामलों में बढ़ोतरी पर जताई गहरी चिंता
आयोग ने रेखांकित किया कि इन दर्ज मामलों में हत्या, बलात्कार, यौन उत्पीड़न, अपहरण, मानव तस्करी, बाल विवाह, भ्रूण हत्या और पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत आने वाले बेहद गंभीर अपराध शामिल हैं। विशेषकर बालिकाओं के साथ बढ़ते पोक्सो के मामलों को आयोग ने बच्चों की सुरक्षा, उनके आत्मसम्मान और मानसिक विकास के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। आयोग ने टिप्पणी की कि सुरक्षा के तमाम दावों और कानूनों के बावजूद ऐसी घटनाएं प्रशासनिक निगरानी प्रणाली और संस्थागत जवाबदेही की विफलता को दर्शाती हैं।
सुरक्षित माहौल देने में स्कूल, हॉस्टल और सरकारी संस्थाएं कमजोर
मानवाधिकार आयोग ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि स्कूल, छात्रावास (हॉस्टल्स) और बाल देखभाल संस्थान (चाइल्ड केयर होम्स) बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह कमजोर साबित हो रहे हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए आयोग ने गृह विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, पुलिस महानिदेशक (DGP) और विशेष किशोर पुलिस इकाइयों के नोडल अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
विभिन्न विभागों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट, 6 अगस्त को अगली सुनवाई
आयोग ने इन सभी विभागों को बच्चों की सुरक्षा, अपराधों की रोकथाम, जांच की स्थिति, दोषियों को सजा दिलाने के प्रयासों और पीड़ितों के पुनर्वास से जुड़ी एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने जानकारी दी कि सभी संबंधित अधिकारियों को आगामी सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अपनी स्टेटस रिपोर्ट आयोग के सामने प्रस्तुत करनी होगी। इस मामले की अगली उच्च स्तरीय सुनवाई 6 अगस्त 2026 को तय की गई है।
इटली में PM मोदी का खास स्वागत, मेलोनी संग दिखे कई यादगार पल
20 May, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोम। भारत और इटली के बीच के राजनयिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने इटली दौरे के तहत रोम पहुंच चुके हैं। वहां पहुंचते ही उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से एक बेहद खास मुलाकात की। दोनों नेताओं ने एक औपचारिक डिनर के दौरान वैश्विक पटल से जुड़े कई जरूरी मुद्दों और आपसी हितों पर विस्तार से चर्चा की। इस अनौपचारिक बैठक के बाद दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने रोम की ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध धरोहर 'कोलोसियम' का दीदार भी किया। इससे पहले पीएम मोदी के इटली आगमन पर प्रधानमंत्री मेलोनी ने सोशल मीडिया पर बेहद गर्मजोशी से 'रोम में आपका स्वागत है मेरे दोस्त' लिखकर उनका स्वागत किया था।
द्विपक्षीय वार्ता को लेकर उत्सुकता और भविष्य की उम्मीदें
इस यात्रा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहद सकारात्मक रुख जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि वह इटली के साथ भारत के रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के लिए होने वाली औपचारिक बातचीत को लेकर काफी उत्साहित हैं। प्रधानमंत्री को पूरा भरोसा है कि इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नया आयाम मिलेगा, साथ ही व्यापार, निवेश और आपसी सहयोग के नए रास्ते भी खुलेंगे।
प्रवासी भारतीयों के स्नेह पर जताया आभार
रोम की धरती पर कदम रखते ही मिले भव्य स्वागत से अभिभूत प्रधानमंत्री ने वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रवासी भारतीयों की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि अपनी मातृभूमि के प्रति उनका यह अटूट प्रेम और भारत-इटली के संबंधों को मजबूत करने का जज्बा वाकई काबिले तारीफ है। पीएम मोदी ने इस बात को भी रेखांकित किया कि दुनिया के किसी भी कोने में बसे भारतीय आज वैश्विक स्तर पर देश का मान बढ़ा रहे हैं।
मजबूत होते आर्थिक रिश्ते और रणनीतिक साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक और रणनीतिक तालमेल का एक बड़ा सबूत है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देश मिलकर 'संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029' को अमलीजामा पहनाने में जुटे हैं। इस दीर्घकालिक योजना के तहत रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच का आपसी व्यापार 16.77 अरब अमेरिकी डॉलर के पार जा चुका है, जबकि पिछले ढाई दशकों में इटली से भारत में 3.66 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है, जो दोनों देशों की मजबूत होती आर्थिक साझीदारी को दर्शाता है।
हनोई में राजनाथ सिंह की बड़ी बैठक, भारत-वियतनाम रक्षा सहयोग पर जोर
20 May, 2026 08:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हनोई। भारत और वियतनाम ने हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को एक बार फिर मजबूती से दोहराया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को वियतनाम की राजधानी हनोई में वहां के उप प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रहे रक्षा संबंधों की समीक्षा की गई तथा समुद्री सुरक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर सहयोग के नए रास्तों पर चर्चा हुई।
द्विपक्षीय बैठक के मुख्य बिंदु और सहयोग के क्षेत्र
दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच हुई इस रणनीतिक बैठक में वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए कई अहम समझौतों और भावी योजनाओं पर मुहर लगी:
वैश्विक सुरक्षा पर मंथन: दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े समसामयिक घटनाक्रमों पर विस्तार से अपने विचारों का आदान-प्रदान किया।
बहुआयामी सहयोग पर सहमति: रक्षा मंत्रियों ने सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग में आपसी सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति अभियानों, साइबर सुरक्षा और दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय दौरों को बढ़ाने पर सहमति जताई।
वियतनाम के राष्ट्रपति से मुलाकात और व्यापक चर्चा
अपनी इस यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के जनरल सेक्रेटरी और राष्ट्रपति तो लाम से भी एक विशेष शिष्टाचार मुलाकात की।
रक्षा मंत्री का बयान: मुलाकात के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रपति तो लाम से मिलकर उन्हें बेहद सम्मान की अनुभूति हुई। इस बैठक के दौरान भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाने, क्षेत्रीय सुरक्षा को पुख्ता करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों पर बेहद सकारात्मक बातचीत हुई।
एआई (AI) और क्वांटम टेक्नोलॉजी में ऐतिहासिक समझौता
इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक दोनों देशों के बीच अत्याधुनिक तकनीक को लेकर हुआ करार रहा, जिसे द्विपक्षीय संबंधों में एक मील का पत्थर माना जा रहा है:
एमओयू का आदान-प्रदान: भारत के 'मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस इंजीनियरिंग' और वियतनाम की 'टेलीकम्युनिकेशंस यूनिवर्सिटी' के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
वियतनाम में भारत स्थापित करेगा AI लैब: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के न्हा ट्रांग स्थित दूरसंचार विश्वविद्यालय में भारत के सहयोग से एक अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रयोगशाला (AI Lab) स्थापित करने की बड़ी घोषणा की।
भाषा प्रयोगशाला का डिजिटल उद्घाटन: इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने वियतनाम के वायुसेना अधिकारी महाविद्यालय में भारतीय वित्तीय व तकनीकी सहायता से तैयार की गई एक आधुनिक भाषा प्रयोगशाला (Language Lab) का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन भी किया।
ईरान की शर्तों पर नहीं बनी बात, ट्रंप बोले- समझौते के आसार नहीं
19 May, 2026 03:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन / तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच दुनिया ने थोड़ी राहत की सांस ली है। पिछले कुछ दिनों से लगातार ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि दोनों पक्ष जल्द ही एक बड़े युद्ध में आमने-सामने होंगे। अमेरिका की ओर से मिल रही लगातार धमकियों और ईरान के कड़े पलटवार के बाद यह माना जा रहा था कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर खाड़ी क्षेत्र फिर से जंग के मैदान में तब्दील हो जाएगा। हालांकि, वैश्विक स्तर पर तेल की आसमान छूती कीमतों और आपूर्ति के संकट के बीच, अब एक सकारात्मक खबर सामने आई है कि अमेरिका ने ईरान पर होने वाले अपने आगामी हमलों की योजना को फिलहाल टालने का फैसला किया है।
खाड़ी देशों की अपील पर राष्ट्रपति ट्रंप ने रोके हमले
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चरम पर पहुंचे इस संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और रणनीतिक बयान जारी किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। उनके मुताबिक, यह महत्वपूर्ण निर्णय कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे प्रमुख खाड़ी देशों के विशेष अनुरोध और मध्यस्थता की मांग के बाद लिया गया है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस फैसले के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच बेहद गंभीर कूटनीतिक बातचीत का दौर शुरू हो चुका है।
ईरानी राष्ट्रपति का रुख, बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं
दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका के साथ चल रही इस कूटनीतिक वार्ता को लेकर अपने देश का रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। उन्होंने अपने बयान में कड़े लहजे में कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर बैठने का मतलब यह कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि ईरान ने घुटने टेक दिए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि तेहरान इस वार्ता में अपने पूरे सम्मान, सैन्य ताकत और अपने राष्ट्रीय व संप्रभु अधिकारों की रक्षा की शर्त पर ही शामिल हुआ है और देश के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
युद्धविराम के बावजूद इजरायल और लेबनान में खूनी संघर्ष जारी
एक तरफ जहां खाड़ी में ईरान-अमेरिका युद्ध का खतरा कुछ टला है, वहीं दूसरी तरफ इजरायल और लेबनान के बीच का हिंसक संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिकी मध्यस्थता के जरिए युद्धविराम की अवधि बढ़ाए जाने के बावजूद सोमवार को इजरायली लड़ाकू विमानों ने लेबनान में बमबारी की, जिसमें कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीते 2 मार्च से लेकर अब तक हुए इजरायली हमलों और सैन्य ऑपरेशनों में 3,020 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 9,273 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गाजा सहायता जहाजों को रोकने पर विवाद
इन हमलों के अलावा, गाजा के पीड़ित नागरिकों के लिए मानवीय राहत सामग्री ले जा रहे जहाजों (सहायता बेड़े) को रोकने को लेकर इजरायल की वैश्विक स्तर पर चौतरफा आलोचना और घेराबंदी शुरू हो गई है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली बलों ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा का उल्लंघन करते हुए गाजा सहायता बेड़े के कई जहाजों को बीच समुद्र में ही बंधक बना लिया। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई के दौरान इजरायली नौसेना ने करीब 47 नौकाओं को अपने कब्जे में ले लिया और राहत सामग्री पहुंचाने जा रहे सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है।
वैश्विक नियमों के उल्लंघन पर दुनिया भर में आक्रोश
इजरायल द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में की गई इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद कई देशों, वैश्विक नेताओं और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने अपनी तीव्र नाराजगी और आक्रोश जाहिर किया है। मानवाधिकार संस्थाओं का साफ तौर पर कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत खुले समुद्र (इंटरनेशनल वॉटर्स) में मानवीय सहायता ले जा रहे असैन्य जहाजों को बलपूर्वक रोकना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस चौतरफा तनाव, ईरान-अमेरिका वार्ता के भविष्य, लेबनान में लगातार गिरती लाशों और गाजा सहायता बेड़े पर हुए इस नए विवाद ने पूरी दुनिया को एक बार फिर एक महासंकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
होर्मुज से अच्छी खबर, जहाजों की बढ़ी आवाजाही से तेल-गैस बाजार में उम्मीद
19 May, 2026 02:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई / वाशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बाद से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आसमान छूती कीमतों ने पूरी दुनिया को संकट में डाल रखा है। भारत सहित कई बड़े देशों में ईंधन के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह के भीतर इस रणनीतिक जलमार्ग से मालवाहक जहाजों (शिप्स) की रिकॉर्ड आवाजाही दर्ज की गई है। कमोडिटी डेटा फर्म 'केपलर' (Kpler) के शिप ट्रैकिंग डेटा और समुद्री निगरानी कंपनियों के इन आंकड़ों ने वैश्विक शिपिंग बाजार को बड़ी उम्मीद दी है।
तनाव के बीच जहाजों की संख्या में रिकॉर्ड सुधार
समुद्री यातायात की निगरानी करने वाली एजेंसियों के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 11 मई से 17 मई के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी उछाल आया है और अब यहाँ से हर हफ्ते लगभग 55 मालवाहक जहाज सुरक्षित गुजर रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि युद्ध के चरम पर होने के दौरान सुरक्षा कारणों से यह ग्राफ बेहद डराने वाले स्तर पर पहुंच गया था और इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर महज 19 रह गई थी, जो संघर्ष की शुरुआत के बाद का सबसे निचला स्तर था। अब इस यातायात में आ रहे सुधार को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
ईरानी हमलों और नाकेबंदी के बाद सुधर रहे हालात
क्षेत्र में इस अभूतपूर्व तनाव की शुरुआत बीते 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए बड़े हमलों के बाद खाड़ी देशों में युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ा पहरा बैठा दिया था और जहाजों के आवागमन को बाधित कर दिया था। इस नाकेबंदी के कारण दुनिया भर के तेल और गैस बाजारों में हाहाकार मच गया था। हालांकि, ईरान की सरकारी मीडिया से आ रही खबरों के अनुसार, वहां के 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' ने पिछले कुछ दिनों में अपनी कड़ाई कम की है और अधिक वाणिज्यिक जहाजों को इस मार्ग से आगे बढ़ने की अनुमति दी है, जिससे समुद्री यातायात धीरे-धीरे अपनी पुरानी स्थिति की ओर लौट रहा है।
ईरान की नई निगरानी संस्था से बढ़ी वैश्विक चिंता
यातायात बहाल होने के बीच ईरान ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता और चिंता को फिर से बढ़ा दिया है। ईरान सरकार ने होर्मुज जलमार्ग पर अपना नियंत्रण और कड़ा करने के लिए एक नई विशेष संस्था (Authority) के गठन का ऐलान किया है, जो वहां से गुजरने वाले जहाजों के संचालन की देखरेख करने के साथ-साथ उनसे शुल्क (टैक्स) वसूलने का काम भी करेगी। इस नई व्यवस्था के जरिए ईरान इस पूरे समुद्री रास्ते पर 'रीयल टाइम' (पल-पल की) निगरानी रख सकेगा। जहाँ एक तरफ ईरान का तर्क है कि वह इसके माध्यम से केवल एक सुव्यवस्थित सुरक्षा व्यवस्था बनाना चाहता है, वहीं दुनिया के कई प्रमुख देशों का मानना है कि ईरान इस संस्था की आड़ में होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह से अपना एकाधिकार और अवैध कब्जा जमाना चाहता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बेनतीजा
समुद्री मार्ग पर जारी इस कूटनीतिक रस्साकशी के बीच, इस संकट को सुलझाने के लिए अमेरिका और ईरान के राजनयिकों के बीच पर्दे के पीछे चल रही बातचीत अभी तक किसी ठोस या बड़े नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। दोनों ही देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं, जिसके कारण इस रणनीतिक क्षेत्र में स्थायी शांति को लेकर संशय बरकरार है। दुनिया भर के नीति निर्माताओं और तेल समीक्षकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि ईरान की इस नई निगरानी संस्था के लागू होने के बाद वैश्विक शिपिंग कंपनियां और अमेरिकी नौसेना इस पर क्या रुख अपनाती हैं।
राशिफल 21 मई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
लाल आतंक से विकास की ओर बढ़ता दारेली
सीएचसी पलारी के लैब में जांच सुचारू रूप से संचालित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से की भेंट
ग्रामीण विकास में रोजगार सहायकों की महत्वपूर्ण भूमिका, राज्य सरकार इनके हित की चिंता करेगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
जहाँ राशन और जरूरतों के लिए भी तय करना पड़ता है 40 किलोमीटर का सफर… वहाँ पहुँची उपचार की दस्तक
विधानसभा को ‘पेपरलेस’ करने के कार्यों में आएगी तेजी
कौशल प्रशिक्षण से बढ़ रहा बेटियों का आत्मविश्वास, आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रहे कदम
जिन किसानों के स्लॉट बुक हैं, उनसे 28 मई तक गेहूं खरीदेगी सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
कतियाररास समाधान शिविर में हितग्राहियों को मिले आयुष्मान कार्ड
