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Tulsi Gabbard के इस्तीफे के बाद प्रशासन में बदलाव पर उठे नए सवाल
23 May, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने इस फैसले के पीछे पारिवारिक वजहों का हवाला देते हुए बताया कि उनके पति अब्राहम विलियम्स एक गंभीर और दुर्लभ बोन कैंसर (हड्डी के कैंसर) से पीड़ित हैं, जिसके चलते आगामी महीनों में उन्हें अपने परिवार के साथ रहने की सख्त आवश्यकता है। तुलसी गबार्ड का यह इस्तीफा आगामी 30 जून से प्रभावी माना जाएगा, जिसकी पुष्टि स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कर दी है। ट्रंप ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में उनका अपने पति के साथ रहने का फैसला बिल्कुल सही है। फिलहाल प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर आरोन लुकास इस पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालेंगे।
व्हाइट हाउस से बढ़ती दूरियां और मतभेदों की रही चर्चा
तुलसी गबार्ड का सेवाकाल लगातार कई तरह के विवादों और प्रशासनिक खींचतान से घिरा रहा। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं थीं कि वे राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी राष्ट्रीय सुरक्षा समूह से लगातार अलग-थलग होती जा रही थीं। मीडिया कयासों में तो यहां तक दावा किया गया कि व्हाइट हाउस उनके कामकाज के तौर-तरीकों से संतुष्ट नहीं था और उन पर पद छोड़ने का अंदरूनी दबाव बनाया जा रहा था। हालांकि, गबार्ड के दफ्तर और व्हाइट हाउस के प्रवक्ता डेविस इंगले ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा है कि उन्हें जबरन नहीं हटाया गया है। इसके अलावा, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी राष्ट्रपति और गबार्ड के बीच सार्वजनिक रूप से मतभेद उजागर हुए थे।
अहम सुरक्षा बैठकों से दूरी और प्रशासनिक नीतियां
अपने कार्यकाल के दौरान तुलसी गबार्ड को वेनेजुएला और ईरान जैसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठकों से अलग रखा गया था। गबार्ड हमेशा से ही दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में अमेरिकी सेना के हस्तक्षेप की मुखर विरोधी रही हैं। पूर्व में डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद रहीं गबार्ड बाद में रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हुई थीं, जिसके बाद जनवरी 2025 में ट्रंप ने खुफिया एजेंसियों के व्यापक अनुभव न होने के बावजूद उन्हें इस बेहद अहम पद की कमान सौंपी थी। यह भी सामने आया है कि जॉन एफ कैनेडी की हत्या, कोरोना महामारी की उत्पत्ति और वोटिंग मशीनों से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के लिए गबार्ड द्वारा बनाई गई टास्क फोर्स से भी ट्रंप प्रशासन नाखुश था।
ट्रंप कैबिनेट से अलग होने वाली चौथी महिला मंत्री
तुलसी गबार्ड का जाना वर्तमान अमेरिकी प्रशासन के लिए एक और बड़ा फेरबदल है, क्योंकि वे इस साल ट्रंप कैबिनेट से हटने वाली चौथी वरिष्ठ महिला अधिकारी बन गई हैं। उनसे पहले मार्च के महीने में होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम को उनके पद से मुक्त किया गया था, जबकि अप्रैल में अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को भी अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। वहीं, लेबर सेक्रेटरी लोरी चावेज-डीरेमर ने कुछ निजी विवादों और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के चलते अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था।
विवादित शख्स के जनाजे में जुटी भीड़, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
23 May, 2026 05:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। वर्ष 2019 में हुए भीषण पुलवामा आत्मघाती हमले के मुख्य साजिशकर्ता हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। वारदात के बाद उसके शव को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दफनाया गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और स्थानीय खुफिया सूत्रों के अनुसार, इस दुर्दांत आतंकी के अंतिम संस्कार में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के आला अधिकारियों समेत कई खूंखार आतंकी सरगनाओं ने शिरकत की।
जनाजे में पहुंचे सलाहुद्दीन और आईएसआई के शीर्ष अधिकारी
'डॉक्टर' और 'अर्जुमंद गुलजार डार' जैसे कोड नामों से पहचाने जाने वाले हमजा बुरहान को मौत के अगले ही दिन इस्लामाबाद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज के मुताबिक, उसके जनाजे में हिज्बुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन और अल-बद्र के चीफ बख्त जमीन खान जैसे कुख्यात चेहरे मौजूद थे। इसके अलावा पाकिस्तानी खुफिया तंत्र (ISI) के अधिकारियों और प्रतिबंधित संगठनों के लड़ाकों की मौजूदगी ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि उसे सीमा पार से कितना बड़ा संरक्षण मिला हुआ था।
अत्याधुनिक हथियारों के साये में हुआ अंतिम संस्कार
आतंकी के अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा के बेहद कड़े और अभूतपूर्व इंतजाम देखे गए। जनाजे के सामने आए दृश्यों में कई नकाबपोश और हथियारबंद कैडर एके-47 तथा अन्य आधुनिक स्वचालित हथियारों से लैस होकर मार्च करते नजर आए। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिबंधित आतंकी गुटों के लड़ाके अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन करते हुए सुरक्षा घेरा बनाए हुए थे।
कॉलेज प्रिंसिपल बनकर युवाओं को धकेल रहा था आतंक के रास्ते पर
भारत के गृह मंत्रालय द्वारा साल 2022 में आधिकारिक तौर पर आतंकी घोषित किया गया बुरहान पिछले कुछ समय से पीओके में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। वह मुजफ्फराबाद के एक प्राइवेट कॉलेज में प्रिंसिपल और शिक्षक के तौर पर काम कर रहा था, जिसकी आड़ में वह कश्मीरी युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें अल-बद्र संगठन में भर्ती करने और टेरर फंडिंग जुटाने का काम करता था। गुरुवार सुबह जब वह कॉलेज से बाहर निकला, तभी घात लगाए हमलावरों ने उसके सिर में कई गोलियां मार दीं।गौरतलब है कि मई 2025 में भारत द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' (जो अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए 26 नागरिकों के नरसंहार के जवाब में शुरू किया गया था) के दौरान मारे गए आतंकियों को भी पाकिस्तानी सेना ने राजकीय सम्मान के साथ झंडे में लपेटकर दफनाया था, जिससे पाकिस्तान का आतंकी कनेक्शन एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब हुआ है।
सद्भावना यात्रा के समापन पर समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ी
23 May, 2026 05:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह डूमरखां के बेटे और पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की प्रदेश स्तरीय 'सद्भावना यात्रा' शनिवार शाम को रोहतक में आकर पूरी हो गई। इस यात्रा का भव्य समापन समारोह दिल्ली बाईपास पर आयोजित किया गया। इस खास मौके पर कार्यक्रम स्थल पर करीब 300 लोग मौजूद रहे।
दिग्गज कांग्रेस नेताओं को भेजा गया न्यौता
इस समापन समारोह को बड़ा रूप देने के लिए पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह ने कांग्रेस के आठ पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और चार पूर्व कार्यकारी अध्यक्षों को विशेष रूप से आमंत्रित किया है। आमंत्रित मेहमानों की सूची में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद कुमारी सैलजा, रणदीप सुरजेवाला, सूरजभान, फूलचंद मौलाना और धर्मपाल मलिक जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
समारोह में शामिल होने पहुंचे ये प्रमुख चेहरे
सद्भावना यात्रा के समापन पर कई वरिष्ठ नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। कार्यक्रम में पहुँचने वाले नेताओं में असंध के पूर्व विधायक शमशेर गोगी, रघबीर रंगा (बवानी खेड़ा), रघबीर संधू (पानीपत), अशिम (मेवात), जगदेव मलिक (पानीपत), ओमप्रकाश (कुरुक्षेत्र), सत्ते पहलवान (गुरुग्राम), अनिल शर्मा (करनाल), सुनीता रानी (करनाल), कांग्रेस नेत्री लवली यादव और अंबाला के एमसी हीरालाल सहित कई अन्य पदाधिकारी शामिल हैं।
स्थानीय कांग्रेसी विधायकों और सांसद ने बनाई दूरी!
इस पूरे आयोजन में सबसे ज़्यादा चर्चा स्थानीय नेताओं की गैर-मौजूदगी की है। रोहतक जिले में कांग्रेस के मौजूदा सांसद दीपेंद्र हुड्डा के अलावा चार विधायक—भूपेंद्र सिंह हुड्डा, भारत भूषण बतरा, बलराम दांगी और शकुंतला खटक हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि कार्यक्रम की शुरुआत और प्रगति के दौरान इनमें से कोई भी स्थानीय बड़ा नेता मंच या कार्यक्रम स्थल पर नज़र नहीं आया।
भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ी बैठक, व्यापार से सुरक्षा तक कई मुद्दों पर चर्चा
23 May, 2026 05:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | चार दिनों के आधिकारिक भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच द्विपक्षीय व्यापार, रणनीतिक सुरक्षा संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। इस मुलाकात के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने पीएम मोदी को वाशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस आने का औपचारिक निमंत्रण भी सौंपा। भारत पहुंचने पर रूबियो शनिवार को पहले कोलकाता उतरे थे, जहां से वे सीधे देश की राजधानी दिल्ली के लिए रवाना हुए।अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से विदेश मंत्री मार्को रूबियो के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका आने का न्योता भेजा गया है। उन्होंने पीएम मोदी और रूबियो के बीच हुई वार्ता को बेहद सकारात्मक और रचनात्मक बताया। इस बैठक में दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार और आधुनिक तकनीकों (क्रिटिकल टेक्नोलॉजी) के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर सहमति जताई है।
भारतीय विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता और दिल्ली में कार्यक्रम
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो अपने दिल्ली प्रवास के दौरान कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का हिस्सा बनेंगे। वे अमेरिकी दूतावास की नई 'सपोर्ट एनेक्स बिल्डिंग' के उद्घाटन समारोह को संबोधित करेंगे और राजदूत सर्जियो गोर द्वारा आयोजित 'रूजवेल्ट हाउस रिसेप्शन' में भी शिरकत करेंगे। इसके अतिरिक्त, रविवार को रूबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होगी। इस वार्ता में मुख्य रूप से स्वच्छ ऊर्जा, व्यापार, निवेश, तकनीकी साझेदारी और दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संबंधों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। साथ ही, पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और वैश्विक ईंधन आपूर्ति जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी मंथन होगा।
भारत की मेजबानी में होने वाली 'क्वाड' बैठक पर टिकीं दुनिया की नजरें
हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र की सुरक्षा और आपसी तालमेल को सुदृढ़ करने के इरादे से भारत आगामी 26 मई को 'क्वाड' (Quad) समूह के विदेश मंत्रियों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। इस सम्मेलन में भारत और अमेरिका के अलावा जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री भी शामिल होंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह बैठक एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझा संकल्प को आगे बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस बैठक को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बेहद अहम माना जा रहा है।
कार्यभार संभालने के बाद पहला दौरा; आगरा और जयपुर भी जाएंगे रूबियो
पिछले वर्ष अमेरिकी विदेश मंत्री का पदभार ग्रहण करने के बाद मार्को रूबियो की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। शनिवार सुबह भारत की धरती पर उतरने पर भारतीय विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। अपने इस चार दिवसीय दौरे के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देखने के लिए आगरा और जयपुर जैसे ऐतिहासिक शहरों का भ्रमण भी करेंगे, जिससे दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को एक नया आयाम मिलेगा।
चांद के दक्षिणी ध्रुव पर संसाधनों की खोज में जुटा चीन, मिशन लॉन्च की तैयारी तेज
23 May, 2026 05:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग | चीन अपने महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत इस साल के अंत में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक नया खोजी अभियान भेजने की तैयारी कर रहा है। चीनी मानव अंतरिक्ष एजेंसी ने शनिवार को इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि उनका आगामी चंद्र अन्वेषण मिशन ‘चांग'ई-7’ (Chang'e-7) चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पर्यावरण, वहां की सतह और उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण करेगा। इस रोबोटिक मिशन के तहत चीनी अंतरिक्ष विज्ञानी चंद्रमा के उस हिस्से का बारीकी से अध्ययन करना चाहते हैं जो अब तक दुनिया की नजरों से काफी हद तक ओझल रहा है। चीन का यह अभियान अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में उसकी बढ़ती ताकत को प्रदर्शित करने की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।
जल-बर्फ की खोज और भविष्य के रिसर्च बेस का आकलन
चीनी अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रवक्ता झांग जिंगबो के अनुसार, चांग'ई-7 मिशन के लिए एक बेहद उन्नत और व्यापक तकनीकी दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। इस अभियान में चंद्रमा की परिक्रमा करने वाले ऑर्बिटर के साथ-साथ वहां की सतह पर उतरने वाला लैंडर, घूमने वाला रोवर और एक विशेष हॉपिंग क्राफ्ट (उछलकर चलने वाला उपकरण) शामिल होगा। इस रोबोटिक मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पानी के अंश (जल-बर्फ) की खोज करना है। साथ ही, यह दल उस सुदूर क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का आकलन भी करेगा ताकि भविष्य में वहां इंसानों के रहने योग्य एक स्थायी अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र (रिसर्च बेस) स्थापित किया जा सके।
प्रक्षेपण की अंतिम तैयारियां और भारत की ऐतिहासिक सफलता
इस मिशन को अंजाम देने के लिए चांग'ई-7 चंद्रयान को चीन के हैनान द्वीप प्रांत में स्थित मुख्य लॉन्चिंग साइट पर सुरक्षित पहुंचा दिया गया है। वहां इस अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण-पूर्व के सभी जरूरी परीक्षण और तकनीकी तैयारियां बेहद तेजी से चल रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि मिशन से जुड़े सभी सुरक्षात्मक और तकनीकी कार्य तय योजना के मुताबिक सुचारू रूप से आगे बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि अंतरिक्ष के इस विशेष क्षेत्र में भारत पहले ही इतिहास रच चुका है; वर्ष 2023 में भारत का चंद्रयान-3 मिशन अपने लैंडर और प्रज्ञान रोवर के साथ चंद्रमा के इसी दुर्गम दक्षिणी ध्रुव के पास कदम रखने वाला दुनिया का पहला देश बना था।
वर्ष 2030 तक चंद्रमा पर इंसान भेजने का चीन का बड़ा लक्ष्य
चांग'ई-7 से पहले चीन का 'चांग'ई-6' चंद्रयान भी एक अभूतपूर्व कारनामा कर चुका है, जब उसने चंद्रमा के सबसे दूर और अनदेखे हिस्से (फॉदर साइड) से मिट्टी और पत्थरों के ऐतिहासिक नमूने एकत्र किए और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर लेकर लौटा। चीन की योजनाएं यहीं नहीं रुकती हैं; उसका अंतिम लक्ष्य साल 2030 तक चंद्रमा की धरती पर अपने अंतरिक्ष यात्रियों (मानवयुक्त यान) को उतारना है। प्रवक्ता झांग के मुताबिक, देश ने अपने आगामी मानवयुक्त चंद्र लैंडिंग कार्यक्रमों और मानवरहित रोबोटिक अभियानों को एक साथ जोड़कर एक एकीकृत और ठोस रोडमैप तैयार किया है, ताकि चांद पर इंसानी बस्ती बसाने के सपने को सच किया जा सके।
ईरान ने अमेरिका को दी सख्त चेतावनी, कहा- दबाव की नीति अब नहीं चलेगी
23 May, 2026 03:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान | ईरान और अमेरिका के मध्य स्थायी युद्धविराम को लेकर कूटनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है, लेकिन इसके साथ ही दोनों देशों के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। शनिवार को ईरान के रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक बड़ा और कड़ा बयान जारी किया है। मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिका और इस्राइल के पास ईरान की शर्तों और मांगों को स्वीकार करने के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।ईरानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यदि अमेरिका और इस्राइल शांतिपूर्ण रास्ता नहीं चुनते हैं, तो दोनों ही देशों को भविष्य में भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इस बीच क्षेत्र में शांति बहाली और तनाव को कम करने के लिए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी मोर्चा संभाल लिया है और वैश्विक स्तर पर कई देशों से संपर्क साधा है।
अमेरिका और इस्राइल के पास शर्तों को मानने के अलावा विकल्प नहीं
ईरानी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रजा तलाए-निक ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के अधिकारों और उसकी मांगों को हर हाल में स्वीकार करना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थिति चाहे युद्ध की हो या फिर शांति वार्ता की, अमेरिका और इस्राइल के हित इसी में हैं कि वे ईरान के रुख का सम्मान करें। प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो दोनों ही देशों को इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति के रवैये से युद्ध के दलदल में फंसने की आशंका
ईरान ने अमेरिकी प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने देश के राष्ट्रीय हितों की अनदेखी कर रहे हैं और पूरी तरह से इस्राइल के पक्ष में खड़े हैं। प्रवक्ता के अनुसार, ट्रंप की यह नीतियां और उनका आक्रामक रुख अमेरिका को मध्य पूर्व में युद्ध के एक ऐसे दलदल की तरफ धकेल रहा है, जिससे बाहर निकलना उनके लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा। ईरान का मानना है कि इस पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण ही क्षेत्र में शांति बहाली की कोशिशों को झटका लग रहा है।
युद्ध रोकने और तनाव कम करने के लिए ईरान की कूटनीतिक पहल
एक तरफ जहाँ रक्षा मंत्रालय सख्त बयान दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थायी संघर्ष विराम के लिए राजनयिक प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं। इसी सिलसिले में शनिवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कई देशों के विदेश मंत्रियों से फोन पर मैराथन बातचीत की। उन्होंने तुर्की, कतर, जापान, ओमान और इराक के अपने समकक्षों से अलग-अलग चर्चा की। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में तेजी से बदलते घटनाक्रमों की समीक्षा करना, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और मध्य पूर्व में जारी तनाव को समाप्त कर युद्ध रोकने के लिए एक साझा रणनीति तैयार करना था।
चीन में कोयला खदान बनी मौत का गड्ढा, गैस ब्लास्ट में दर्जनों लोगों की जान गई
23 May, 2026 12:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शांक्सी | चीन के उत्तरी क्षेत्र में स्थित शांक्सी प्रांत की एक कोयला खदान में शुक्रवार की शाम को एक बड़ा गैस धमाका हुआ, जिसमें कम से कम 82 खनिकों (मजदूरों) की असामयिक मौत हो गई। सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक वाकया चांगझी शहर के अंतर्गत आने वाली लिउशेन्यू कोयला खदान में पेश आया। जिस समय यह भयानक विस्फोट हुआ, उस वक्त खदान के भीतर जमीन के काफी नीचे बड़ी संख्या में श्रमिक अपनी ड्यूटी पर तैनात थे।
फंसे हुए श्रमिकों की संख्या और रेस्क्यू का बदलता आंकड़ा
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के मुताबिक, दुर्घटना के शुरुआती दौर में खदान के भीतर लगभग 247 कामगारों के फंसे होने की बात सामने आई थी। शनिवार की सुबह प्रशासनिक अधिकारियों ने पहले केवल आठ लोगों की मौत और 38 मजदूरों के लापता होने की पुष्टि की थी। लेकिन जैसे-जैसे मलबे को हटाने और खदान के भीतर दाखिल होने का काम आगे बढ़ा, वैसे-वैसे हताहतों की संख्या तेजी से बढ़ती चली गई और अब तक 82 शव बाहर निकाले जा चुके हैं।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कड़े निर्देश और उच्चस्तरीय जांच
इस भीषण त्रासदी पर गहरा दुख जताते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने स्थानीय प्रशासन और बचाव दलों को घायलों के त्वरित इलाज तथा मलबे के नीचे दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पूरी ताकत झोंकने के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रपति ने इस पूरे मामले की एक उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरतने वाले दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। घटना के तुरंत बाद एक्शन में आई पुलिस ने खदान प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
जहरीली गैस का बढ़ा स्तर और सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल
हालांकि, अभी तक इस ब्लास्ट के सटीक कारणों का पता नहीं चल सका है, लेकिन शुरुआती तकनीकी जांच में यह बात सामने आई है कि खदान के भीतर 'कार्बन मोनोऑक्साइड' जैसी जानलेवा गैस का स्तर सामान्य से कई गुना अधिक हो गया था। बिना गंध और रंग वाली यह गैस बंद और संकरे स्थानों पर दम घुटने की सबसे बड़ी वजह बनती है। इस बीच, देश के आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय ने राहत कार्यों को गति देने के लिए 6 विशेष बचाव दलों के 345 पेशेवर कमांडो को ग्राउंड जीरो पर तैनात किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2000 के शुरुआती दशक में चीन की खदानों में ऐसे हादसे बेहद आम थे, जिन्हें बाद में कड़े नियम बनाकर रोका गया था। लेकिन इस ताजा विनाशकारी घटना ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा के दावों पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।
DFSC की जांच में खुलासा, करनाल में दो राइस मिलों से 10.19 करोड़ का घोटाला
23 May, 2026 12:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करनाल: जिले में दो राइस मिलों द्वारा सरकार को अरबों का चूना लगाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग (DFSC) के जिला नियंत्रक मुकेश कुमार द्वारा किए गए औचक भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) में करीब 10.19 करोड़ रुपये का धान घोटाला उजागर हुआ है। जांच के दौरान दोनों मिलों के स्टॉक से 36 हजार क्विंटल धान गायब मिला। इस महाघोटाले में तरावड़ी थाना पुलिस ने दो मिल संचालकों, विभाग के दो निरीक्षकों और एक सहायक निरीक्षक समेत कई लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बिना चालू मशीनों के चल रहा था खेल, दो मिलों से धान गायब
अधिकारियों ने जब तरावड़ी की 'बालाजी राइस मिल' और 'विश्वकर्मा राइस मिल' पर छापा मारा, तो वहाँ की स्थिति देखकर वे दंग रह गए। दोनों ही मिलों में धान से चावल बनाने वाली मशीनें चालू हालत में नहीं थीं। इसके बावजूद कागजों पर उन्हें धान अलॉट किया गया था। जांच में सामने आया कि बालाजी राइस मिल से 10 हजार क्विंटल और विश्वकर्मा राइस मिल से 26 हजार क्विंटल धान गायब था। इस लापरवाही और हेराफेरी से सरकार को कुल $10,19,52,000$ रुपये का सीधा वित्तीय नुकसान हुआ है।
अधिकारियों की मिलीभगत और फर्जीवाड़े की खुली पोल
जांच में यह बात साफ हो गई है कि मिल मालिकों ने विभाग के अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। 'बालाजी राइस मिल' की देखरेख का जिम्मा संभाल रहे निरीक्षक देवेंद्र (जो अब निलंबित हैं) और सहायक निरीक्षक रामफल (बर्खास्त) अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे। वहीं 'विश्वकर्मा राइस मिल' में तो चावल बनाने की मशीन तक मौजूद नहीं थी, फिर भी विभाग के निरीक्षक हिमांशु और सहायक निरीक्षक रामफल के हस्ताक्षरों से उसे धान अलॉट कर दिया गया। पकड़े जाने के डर से आरोपी मिल मालिक बाद में फैक्ट्रियों में कबाड़ और नई मशीनें फिट करने की कोशिश कर रहे थे।
सरकार को नहीं लौटाया चावल का एक भी दाना
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब 'विश्वकर्मा राइस मिल' की तरफ से सरकार को अलॉटेड धान के बदले चावल का एक भी दाना वापस नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर, 'बालाजी राइस मिल' ने भी नाममात्र का चावल ही जमा कराया था। इस संदिग्ध गतिविधि पर जब डीएफएससी विभाग को शक हुआ, तो उन्होंने औचक निरीक्षण की योजना बनाई, जिससे इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ हो गया।
आरोपियों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज, पुलिस करेगी पड़ताल
तरावड़ी थाना प्रभारी राजपाल ने बताया कि डीएफएससी मुकेश कुमार की शिकायत के आधार पर मिल मालिकों (मोहित, सुरेंद्र, अरुण और महेंद्र जांगड़ा) तथा विभागीय अधिकारियों के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश करेगी कि क्या मिलों में कभी धान आया ही नहीं था और सिर्फ कागजी हेराफेरी की गई, या फिर अफसरों की शह पर मिल मालिकों ने करोड़ों का धान खुले बाजार में बेच दिया।
कैलिफोर्निया की फैक्ट्री से केमिकल रिसाव के बाद हड़कंप, अब भी मंडरा रहा बड़े धमाके का खतरा
23 May, 2026 11:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैलिफोर्निया | अमेरिका में दक्षिणी कैलिफोर्निया के ऑरेंज काउंटी स्थित एक एयरोस्पेस विनिर्माण कारखाने (मैन्युफैक्चरिंग प्लांट) में केमिकल टैंक लीक होने से भारी अफरा-तफरी मच गई है। टैंक का तापमान अनियंत्रित रूप से बढ़ने के कारण उससे विषैली गैसों का उत्सर्जन शुरू हो गया है, जिससे एक बड़े धमाके की आशंका गहरा गई है। खतरे की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए आसपास के करीब 40,000 निवासियों को फौरन सुरक्षित स्थानों पर जाने का आदेश दिया है। आपातकालीन और बचाव दल स्थिति पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
कूलिंग सिस्टम बंद होने से रासायनिक आपदा का डर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह संकट गार्डन ग्रोव शहर में संचालित 'जीकेएन एयरोस्पेस' कंपनी के कारखाने में गुरुवार दोपहर को शुरू हुआ। प्लांट में मौजूद तीन बड़े स्टोरेज टैंकों में से एक का कूलिंग सिस्टम अचानक पूरी तरह ठप हो गया। इस प्रभावित टैंक में 'मिथाइल मेथाक्रायलेट' नाम का अत्यधिक ज्वलनशील और वाष्पशील औद्योगिक रसायन भरा हुआ है, जिसका प्रयोग एक्रिलिक प्लास्टिक के निर्माण में होता है। कूलिंग सिस्टम बंद होने की वजह से केमिकल उबलने लगा और टैंक का तापमान बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया, जिसके बाद गैस का रिसाव शुरू हुआ।
विस्फोट का खतरा: 'थर्मल रनअवे' की चेतावनी
ऑरेंज काउंटी फायर अथॉरिटी (OCFA) ने सोशल मीडिया पर इस संकट की गंभीरता की पुष्टि की है। अधिकारियों ने बताया कि इस समय टैंक के भीतर तकरीबन 6,000 से 7,000 गैलन घातक केमिकल मौजूद है। आशंका जताई जा रही है कि यह सिस्टम दो तरह से पूरी तरह फेल हो सकता है; या तो यह घातक रसायन जमीन पर फैल जाएगा, या फिर 'थर्मल रनअवे' (अनियंत्रित तापमान वृद्धि) के कारण टैंक में भीषण विस्फोट हो जाएगा। यदि टैंक फटता है, तो पास में मौजूद अन्य केमिकल कंटेनरों में भी चेन-रिएक्शन की वजह से धमाके हो सकते हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक हवा में किसी भी तरह का जहरीला धुआं सक्रिय रूप से नहीं फैला है।
स्कूल किए गए बंद, सुरक्षाकर्मी मुस्तैद
बचाव दलों ने पहले स्थिति को नियंत्रण में लेने का दावा किया था, लेकिन शुक्रवार को हालात और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गए। स्थिति को बिगड़ता देख प्रशासन को मजबूरन प्रभावित क्षेत्र का दायरा बढ़ाना पड़ा और निवासियों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम तेज करना पड़ा। एहतियात के तौर पर इलाके के कई स्कूलों को बंद कर दिया गया है। गार्डन ग्रोव और पड़ोसी इलाकों के नागरिकों को घर खाली करने की सख्त हिदायत दी गई है। फायर अथॉरिटी के चीफ क्रेग कोवे ने स्पष्ट किया कि यह सिस्टम किसी भी वक्त पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है और इसका समय तय नहीं है। अच्छी बात यह है कि इस संकट में अब तक किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है।
बातचीत में अड़चन या युद्ध की आहट? ईरान ने अमेरिका की मांगों पर उठाए सवाल
23 May, 2026 10:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान | ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा कूटनीतिक गतिरोध अब एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। तेहरान ने वाशिंगटन पर शांति प्रयासों को पूरी तरह नाकाम करने का आरोप लगाया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ फोन पर सीधी और विस्तृत बातचीत की है। इस दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका की अत्यधिक मांगें ही जारी शांति वार्ताओं और युद्धविराम समझौते के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़ी हैं।
कूटनीति और समझौतों को तोड़ने का आरोप
विदेशी मीडिया रिपोर्ट के हवाले से सामने आई इस खबर के मुताबिक, विदेश मंत्री अराघची ने बातचीत के दौरान अमेरिका की नीयत पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने लगातार अपने वादों को तोड़कर, विरोधाभासी रुख अपनाकर और सैन्य आक्रामकता दिखाकर कूटनीतिक प्रयासों को हमेशा कमजोर किया है। अराघची ने कहा कि इन तमाम विपरीत परिस्थितियों और अमेरिकी दबाव की राजनीति के बावजूद तेहरान लगातार युद्धविराम वार्ताओं में सकारात्मक रूप से शामिल है और बातचीत के जरिए समाधान का रास्ता तलाश रहा है। अराघची ने यह भी कहा कि एक तरफ सैन्य हमलों की धमकियां और दूसरी तरफ शांति का ढोंग, अमेरिका की यह विरोधाभासी और दबाव की राजनीति अब नहीं चलेगी। ईरान अपनी संप्रभुता की कीमत पर अमेरिका के आगे कभी घुटने नहीं टेकेगा।
व्हाइट हाउस में हलचल और सैन्य हमलों की आहट
इस बीच सुरक्षा के मोर्चे पर एक बेहद सनसनीखेज और परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन ईरान के खिलाफ नए सिरे से सैन्य हमले करने की गंभीर योजना बना रहा है। अमेरिकी खुफिया सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि शुक्रवार को अमेरिकी प्रशासन ईरान पर हमलों के एक नए दौर की रणनीतिक तैयारियों में जुटा था। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इन हमलों को लेकर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इस संभावित सैन्य कार्रवाई की खबर मिलते ही अमेरिकी सेना और खुफिया समुदाय के कई बड़े अधिकारियों ने अपने 'मेमोरियल डे वीकेंड' की छुट्टियां और प्लान तक रद्द कर दिए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी न्यू जर्सी में अपने गोल्फ रिसॉर्ट पर वीकेंड बिताने और अपने बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर की शादी में शामिल होने का कार्यक्रम रद्द कर दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट कर इसकी पुष्टि की और कहा कि देशहित और सरकार से जुड़ी महत्वपूर्ण परिस्थितियों के कारण उनका इस समय व्हाइट हाउस में उपस्थित रहना बेहद जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र का रुख और शांति की अपील
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र के सूत्रों के मुताबिक महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। गुटेरेस ने स्पष्ट शब्दों में किसी भी देश की संप्रभुता के खिलाफ बल प्रयोग या सैन्य कार्रवाई के विचार को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थिरता और शांति बहाल करने के लिए दोनों ही पक्षों से केवल और केवल कूटनीति का रास्ता अपनाने की पुरजोर वकालत की है।
रिश्तों पर काला साया: जायदाद के झगड़े में पोते ने लाठी-डंडों से मारा दादा
23 May, 2026 10:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हांसी (कुंभा): कुंभा गाँव से रिश्तों को कलंकित कर देने वाली एक बेहद सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहाँ एक कलयुगी पोते ने जमीन के लालच में अपने ही 80 वर्षीय सगे दादा बरखा राम की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मृतक बुजुर्ग की बेटी की शिकायत पर आरोपी भतीजे के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी पोते को हिरासत में ले लिया है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है।
देर रात वारदात को दिया अंजाम, अस्पताल में तोड़ा दम
यह खौफनाक घटना गुरुवार रात करीब 10 बजे की है। वारदात के बाद लहूलुहान हालत में बुजुर्ग को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें देखते ही मृत घोषित कर दिया। मृतक बरखा राम के बारे में बताया गया है कि वे अमूमन अपनी बेटियों के पास रहते थे और करीब 15 दिन पहले ही गाँव लौटे थे। वारदात की खबर मिलते ही रोते-बिलखते परिजन मौके पर पहुँचे।
मकान अपने नाम कराने के लिए अक्सर करता था प्रताड़ित
हिसार निवासी मृतक की बेटी कमलेश ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि वे दो भाई और तीन बहनें हैं। उनके पिता गाँव में अपने बेटे रामफल के परिवार के साथ रहते थे। कमलेश के अनुसार, उनके पिता ने पहले भी रोते हुए बताया था कि उनका पोता अंकित मकान को अपने नाम लिखवाने के लिए उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता था। वह बुजुर्ग को समय पर खाना तक नहीं देता था और आए दिन घर से निकालने की धमकियां देता रहता था।
जमीन के टुकड़े के लिए पूरे परिवार ने किया दुर्व्यवहार
परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक, बुजुर्ग बरखा राम को अपने दैनिक काम करने से भी रोका जाता था और उनके साथ अक्सर गाली-गलौज की जाती थी। गुरुवार की रात को भी जमीन और मकान के विवाद को लेकर दादा, पोते, बेटे और बहू के बीच तीखी बहस हुई थी। विवाद इतना बढ़ गया कि पोते अंकित ने आपा खो दिया और बुजुर्ग दादा पर डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। सिर पर गंभीर चोट लगने की वजह से बुजुर्ग की जान चली गई।
पुलिस ने शव सौंपकर शुरू की कानूनी कार्रवाई
सदर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सदानंद ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग को नागरिक अस्पताल लाया गया था, जहाँ उनकी मौत हो गई। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर उसे अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।
कोलकाता में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का स्वागत, पीएम मोदी से आज होगी बैठक
23 May, 2026 09:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो आज से 26 मई तक चलने वाली अपनी चार दिवसीय भारत यात्रा पर पहुंच चुके हैं। कार्यभार संभालने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है, जिसे दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिए बेहद खास माना जा रहा है। वह स्वीडन में नाटो देशों की बैठक में हिस्सा लेने के बाद सीधे भारत पहुंचे हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान वह नई दिल्ली के अलावा कोलकाता, आगरा और जयपुर जैसे प्रमुख शहरों का रुख भी करेंगे। इस दौरे का मुख्य आकर्षण भारत की मेजबानी में होने वाली क्वॉड (Quad) विदेश मंत्रियों की बैठक है।
रणनीतिक साझेदारी और द्विपक्षीय सहयोग पर जोर
अपनी यात्रा की शुरुआत करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री सबसे पहले कोलकाता पहुंचे, जहां से वह देश की राजधानी नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। नई दिल्ली में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे, जिसकी पुष्टि भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी की है। वाशिंगटन से रवाना होने से पहले मार्को रूबियो ने भारत को एक बेहद महत्वपूर्ण साझेदार बताया था। उम्मीद जताई जा रही है कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों के हस्तांतरण, रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने पर गंभीर चर्चा होगी।
ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिकी दूतावास का संदेश
वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच इस दौरे में ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा सबसे शीर्ष पर रहने वाला है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने साफ संकेत दिए हैं कि वाशिंगटन भारत की जरूरतों के मुताबिक बड़े पैमाने पर ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, अभी तक किसी बड़े समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दोनों पक्ष नए अवसरों की तलाश में हैं। इस बीच अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर कहा है कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य एक स्वतंत्र, मुक्त और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र का निर्माण करना है। साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की सप्लाई चेन को मजबूत करना भी इस एजेंडे का हिस्सा है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच सजेगा क्वॉड का मंच
यह दौरा वैश्विक भू-राजनीति के लिहाज से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम एशिया में इस समय भारी तनाव का माहौल है। ऐसे समय में, 26 मई को नई दिल्ली में क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों का महामंथन होने जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के निमंत्रण पर ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इस बैठक में शामिल होंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने और स्वतंत्र व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। मुख्य बैठक के अलावा सभी देशों के नेता आपस में द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे, जो वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद को दर्शाती है।
माउंट एवरेस्ट पर उमड़ी रिकॉर्ड भीड़, नेपाल रूट से एक दिन में 274 लोग पहुंचे टॉप
22 May, 2026 05:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर इस साल रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है। नेपाल की ओर से एक ही दिन में 274 पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट फतह कर नया इतिहास रच दिया। मौसम साफ होने और रास्ते से बर्फ हटने के बाद बुधवार सुबह अभियान शुरू हुआ, जो करीब 11 घंटे तक चला।
नेपाल पर्यटन विभाग के अधिकारी खेमलाल गौतम ने मीडिया को बताया, कि बुधवार को 274 पर्वतारोही एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचे। इससे पहले 22 मई 2019 को 223 पर्वतारोहियों ने नेपाल की ओर से एवरेस्ट पर चढ़ाई कर रिकॉर्ड बनाया था। इस वर्ष एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए करीब 500 विदेशी पर्वतारोहियों को परमिट जारी किए गए हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। विशेषज्ञ लगातार एवरेस्ट पर बढ़ती भीड़ और सुरक्षा जोखिमों को लेकर चिंता जता रहे हैं।
डेथ जोन तक दिखीं कतारें
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में पर्वतारोहियों की लंबी कतारें साफ दिखाई दे रही हैं। ये कतारें एवरेस्ट के खतरनाक “डेथ जोन” तक फैली हुई थीं। “डेथ जोन” समुद्र तल से 8 हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले उस क्षेत्र को कहा जाता है, जहां ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम हो जाता है और जान का खतरा बढ़ जाता है। बढ़ती भीड़ के बावजूद एवरेस्ट पर्यटन में तेजी बनी हुई है। नेपाल सरकार ने सितंबर 2024 से एवरेस्ट चढ़ाई के परमिट शुल्क को 11 हजार डॉलर से बढ़ाकर 15 हजार डॉलर कर दिया था, लेकिन इसका असर पर्वतारोहियों की संख्या पर नजर नहीं आ रहा है।
तेल सप्लाई पर असर का खतरा! होर्मुज स्ट्रेट शुल्क मुद्दे पर ईरान-ओमान वार्ता
22 May, 2026 05:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान और ओमान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूलने की प्रणाली को लेकर चर्चा कर रहे हैं, जिसका अमेरिका कड़ा विरोध कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की नई बनाई गई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीजीएसए) ने होर्मुज स्ट्रेट के मैनेजमेंट सुपरविजन एरिया की सीमा तय कर दी है। अथॉरिटी ने घोषणा की है कि इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए अब परमिट अनिवार्य होगा। फरवरी में अमेरिकी और इजराइली हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक यातायात को करीब रोक दिया था, इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर बुरा असर पड़ा और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी आई। इसके बाद ईरानी अधिकारियों ने महत्वपूर्ण जलमार्ग से राजस्व जुटाने के विकल्पों पर चर्चा शुरू की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और यहां किसी भी तरह का टोल या शुल्क लगाया जाना अस्वीकार्य है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी ईरान के कदम का पुरजोर विरोध किया है। यह जलमार्ग दुनिया के करीब 20 प्रतिशत समुद्री तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का मुख्य मार्ग है। इसके बाद यहां किसी भी प्रकार के शुल्क या प्रतिबंध का वैश्विक ऊर्जा बाजार और शिपिंग उद्योग पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान सीधे टोल लगाने के बजाय सर्विस फीस मॉडल पर काम कर रहा है। इसके तहत जहाजों से ट्रांजिट फीस, पर्यावरण शुल्क और अन्य सेवाओं के नाम पर रकम वसूली जा सकती है। दो ईरानी अधिकारियों ने बताया कि ओमान भी इस प्रस्ताव में संभावित आर्थिक फायदे को देखकर इसमें हिस्सेदारी पर चर्चा कर रहा है। ओमान खाड़ी देशों और अमेरिका के साथ योजना को आगे बढ़ाने का प्रयास कर सकता है, जिससे इस संवेदनशील मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ सकता है।
बहादुरगढ़ के केमिकल फैक्टरी में विस्फोट, इमारत ध्वस्त, कर्मचारियों के दबने की आशंका
22 May, 2026 03:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बहादुरगढ़। हरियाणा के बहादुरगढ़ में स्थित मॉडर्न इंडस्ट्रियल एस्टेट (एमआईई) पार्ट-बी के प्लॉट नंबर 2224 में शुक्रवार दोपहर एक भीषण औद्योगिक दुर्घटना सामने आई है। यहाँ संचालित क्लासिक कोल प्राइवेट लिमिटेड नामक फैक्ट्री में दोपहर करीब 12:30 बजे अचानक एक बॉयलर जोरदार धमाके के साथ फट गया। बॉयलर ब्लास्ट इतना भयानक था कि इसके तुरंत बाद पूरी फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। धमाके की गूंज से पूरा औद्योगिक क्षेत्र दहल उठा और आस-पास की अन्य फैक्ट्रियों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस कारखाने में मुख्य रूप से फेविकोल (लोशन) बनाने का काम होता था।
ब्लास्ट के प्रभाव से ढहा लेंटर; कारखाने के अंदर मचा हाहाकार
धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री की इमारत का लेंटर (छत) ताश के पत्तों की तरह भरभरा कर नीचे गिर गया। छत गिरते ही अंदर काम कर रहे श्रमिकों के बीच जान बचाने के लिए चीख-पुकार मच गई। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, हादसे के वक्त फैक्ट्री के भीतर लगभग 10 से 12 मजदूर ड्यूटी पर तैनात थे। इसके अलावा, फैक्ट्री के ठीक बाहर काम कर रहे करीब 7 से 8 अन्य लोग भी इस ब्लास्ट की चपेट में आकर गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं।
मलबे में दबे होने की आशंका; नागरिक अस्पताल में घायल भर्ती
दुर्घटना की भयावहता को देखते हुए मलबे के नीचे अभी भी कम से कम दो लोगों के फंसे होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है। वहीं, फैक्ट्री के बाहर घायल हुए सभी 7 से 8 व्यक्तियों को आनन-फानन में एम्बुलेंस की मदद से नागरिक अस्पताल बहादुरगढ़ ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है। मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
दमकल की 6 गाड़ियां मौके पर; आग पर काबू पाने की जद्दोजहद जारी
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड) की 6 गाड़ियों को तुरंत घटना स्थल के लिए रवाना किया गया। दमकल कर्मी लगातार पानी और फोम की बौछार कर फैक्ट्री में धधक रही आग को शांत करने के प्रयास में जुटे हुए हैं। केमिकल और फेविकोल होने के कारण आग पर काबू पाने में फायर फाइटर्स को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा; जांच के आदेश जारी
हादसे का संदेश मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का दस्ता भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गया। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने पूरे प्रभावित क्षेत्र की घेराबंदी (कॉर्डन ऑफ) कर दी है ताकि राहत कार्य में कोई बाधा न आए। प्रशासनिक टीमों द्वारा फिलहाल प्राथमिकता के आधार पर बचाव कार्य चलाया जा रहा है और इसके साथ ही हादसे के वास्तविक तकनीकी कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।
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