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PM मोदी और मेलोनी की अहम पहल, दोनों देशों ने तय किया बड़ा व्यापारिक विजन
20 May, 2026 01:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत और इटली ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए और ऐतिहासिक मुकाम पर ले जाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी कार्ययोजना (रोडमैप) तैयार की है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया मंचों पर साझा किए गए एक विशेष लेख में अपने आपसी रिश्तों को 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' यानी विशेष रणनीतिक साझेदारी का नाम दिया है। इस लेख में रेखांकित किया गया है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और इटली के मजबूत होते संबंध उभरते हुए 'इंडो-मेडिटेरेनियन' (हिंद-भूमध्यसागरीय) युग का सबसे मजबूत आधार बनने जा रहे हैं, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र से लेकर भूमध्य सागर तक शांति और प्रगति को बढ़ावा देगा।
साझा विजन और लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ
'इटली एंड इंडिया: ए स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फॉर द इंडो-मेडिटेरेनियन' शीर्षक से लिखे गए इस साझा लेख में दोनों देशों के नेतृत्व ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि भारत और इटली के आपसी संबंध अब एक निर्णायक और ऐतिहासिक मोड़ पर आ खड़े हुए हैं। नेताओं का मानना है कि यह रिश्ता अब केवल औपचारिक कूटनीति या सामान्य दोस्ती तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और भविष्य के एक जैसे साझा दृष्टिकोण पर टिकी हुई एक बेहद मजबूत एवं भरोसेमंद वैश्विक साझेदारी का रूप ले चुका है।
औद्योगिक तालमेल और व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प
इस नए रणनीतिक रोडमैप के तहत दोनों देशों की अद्वितीय ताकतों को एक मंच पर लाने की व्यापक रूपरेखा तैयार की गई है, जिसमें इटली की विश्व प्रसिद्ध औद्योगिक व विनिर्माण विशेषज्ञता को भारत की तेजी से बढ़ती विशाल अर्थव्यवस्था, मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम और बेहतरीन इंजीनियरिंग कौशल के साथ जोड़ा जाएगा। दोनों देशों ने आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ा मील का पत्थर तय करते हुए साल 2029 तक अपने आपसी द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो से अधिक के पार पहुंचाने का एक बड़ा लक्ष्य रखा है। इस भारी-भरकम व्यापारिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए रक्षा उत्पादन, एयरोस्पेस, स्वच्छ व नवीकरणीय ऊर्जा, आधुनिक मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा उद्योग (टेक्सटाइल) और पर्यटन जैसे प्रमुख व उभरते हुए क्षेत्रों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
बीन और सपेरे की तस्वीर पर विवाद, PM मोदी से जुड़े कार्टून पर मचा हंगामा
20 May, 2026 12:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओस्लो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान वहां के एक प्रतिष्ठित और मुख्यधारा के समाचार पत्र 'आफ्टेनपोस्टेन' (Aftenposten) में छपे एक कार्टून को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस व्यंग्यचित्र में पीएम मोदी को पारंपरिक सपेरे के रूप में चित्रित किया गया है, जहां बीन के आगे सांप की जगह पेट्रोल पंप की पाइप को लहराते हुए दिखाया गया है। चूंकि पश्चिमी मीडिया में लंबे समय से भारत की छवि को सपेरों, हाथियों और रूढ़िवादिता से जोड़कर मखौल उड़ाया जाता रहा है, इसलिए इस रेखाचित्र को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से नस्लभेदी, अपमानजनक और भारत विरोधी मानसिकता का प्रतीक बताया जा रहा है।
पुराना चश्मा और 'चालाक' बताने की कोशिश
यह विवादित कार्टून प्रधानमंत्री मोदी के ओस्लो हवाई अड्डे पर उतरने से महज कुछ घंटे पहले अखबार के मुख्य पन्ने पर नजर आया था। इस रेखाचित्र के साथ समाचार पत्र ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कैप्शन में लिखा, 'एक चालाक लेकिन परेशान करने वाला व्यक्ति'। इस पूरे लेख में इस बात का विश्लेषण किया गया था कि भारत का झुकाव नॉर्डिक देशों की तरफ क्यों बढ़ रहा है, लेकिन लेख से ज्यादा इस नस्लीय कार्टून ने लोगों का ध्यान खींचा। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने याद दिलाया कि यह पहली बार नहीं है; इससे पहले साल 2022 में स्पेन के मशहूर अखबार 'ला वेंगार्डिया' ने भी भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को सपेरे की टोकरी से निकलते हुए दिखाया था, जिसकी वैश्विक स्तर पर थू-थू हुई थी।
'सपेरों का देश' नहीं, अब 'माउस चार्मर' है भारत
इस तरह के औपनिवेशिक और पिछड़े चित्रण पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्व में कई बार पश्चिमी देशों को कड़ा जवाब दे चुके हैं। साल 2014 में अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान उन्होंने प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए गर्व से कहा था कि हमारा देश अब सांपों से नहीं, बल्कि कंप्यूटर के 'माउस' से दुनिया को चमत्कृत कर रहा है। इससे भी पहले, साल 2013 में वाइब्रेंट गुजरात यूथ कन्वेंशन में उन्होंने युवाओं के बीच कहा था कि भारत अब सपेरों (स्नेक चार्मर्स) के युग से आगे निकलकर 'माउस चार्मर्स' का देश बन चुका है। भारतीय प्रशंसकों का कहना है कि नॉर्वे के मीडिया का यह रवैया भारत की आधुनिक तकनीकी, डिजिटल क्रांति और मजबूत आर्थिक पहचान को जानबूझकर नजरअंदाज करने जैसा है।
प्रेस स्वतंत्रता और तीखे सवालों का दूसरा विवाद
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान केवल कार्टून ही नहीं, बल्कि एक प्रेस कार्यक्रम के दौरान भी भारी राजनीतिक और राजनयिक ड्रामा देखने को मिला। नॉर्वे की एक जानी-मानी महिला पत्रकार हेले लिंग ने एक संयुक्त प्रेस मीट के दौरान पीएम मोदी के सामने सीधे तौर पर तीखा सवाल दाग दिया था। प्रधानमंत्री द्वारा उस सवाल का सीधा जवाब न दिए जाने पर पत्रकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक वीडियो साझा कर नाराजगी जाहिर की। वीडियो में वह पीएम मोदी से कहती सुनी जा सकती हैं कि 'आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवालों का सामना करने से क्यों कतराते हैं?' इस मुद्दे के तूल पकड़ने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने आनन-फानन में एक अलग प्रेस ब्रीफिंग बुलाई और भारतीय पक्ष की ओर से उस पत्रकार के सभी सवालों के विस्तृत जवाब देकर स्थिति को संभालने का प्रयास किया।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर आयोग ने जताई गंभीर चिंता
20 May, 2026 11:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा में बच्चों के विरुद्ध लगातार बढ़ रहे गंभीर अपराधों को लेकर हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB-2024) के चौंकाने वाले आंकड़ों को आधार बनाते हुए आयोग ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। आयोग ने प्रदेश में बाल सुरक्षा की स्थिति को “अत्यंत चिंताजनक” करार देते हुए कहा कि ये आंकड़े राज्य के बाल संरक्षण तंत्र और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
देश में सबसे आगे हरियाणा: एक साल में दर्ज हुए 7,547 मामले
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा, न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया की पूर्ण पीठ ने सुनवाई के दौरान एनसीआरबी की रिपोर्ट का हवाला दिया। आयोग ने बताया कि वर्ष 2024 में हरियाणा में बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल 7,547 मामले सामने आए, जो साल 2023 के मुकाबले लगभग 17.9 प्रतिशत ज्यादा हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य में प्रति एक लाख बच्चों पर अपराध की दर 82.8 है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है।
पोक्सो और गंभीर मामलों में बढ़ोतरी पर जताई गहरी चिंता
आयोग ने रेखांकित किया कि इन दर्ज मामलों में हत्या, बलात्कार, यौन उत्पीड़न, अपहरण, मानव तस्करी, बाल विवाह, भ्रूण हत्या और पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत आने वाले बेहद गंभीर अपराध शामिल हैं। विशेषकर बालिकाओं के साथ बढ़ते पोक्सो के मामलों को आयोग ने बच्चों की सुरक्षा, उनके आत्मसम्मान और मानसिक विकास के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। आयोग ने टिप्पणी की कि सुरक्षा के तमाम दावों और कानूनों के बावजूद ऐसी घटनाएं प्रशासनिक निगरानी प्रणाली और संस्थागत जवाबदेही की विफलता को दर्शाती हैं।
सुरक्षित माहौल देने में स्कूल, हॉस्टल और सरकारी संस्थाएं कमजोर
मानवाधिकार आयोग ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि स्कूल, छात्रावास (हॉस्टल्स) और बाल देखभाल संस्थान (चाइल्ड केयर होम्स) बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह कमजोर साबित हो रहे हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए आयोग ने गृह विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, पुलिस महानिदेशक (DGP) और विशेष किशोर पुलिस इकाइयों के नोडल अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
विभिन्न विभागों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट, 6 अगस्त को अगली सुनवाई
आयोग ने इन सभी विभागों को बच्चों की सुरक्षा, अपराधों की रोकथाम, जांच की स्थिति, दोषियों को सजा दिलाने के प्रयासों और पीड़ितों के पुनर्वास से जुड़ी एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने जानकारी दी कि सभी संबंधित अधिकारियों को आगामी सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अपनी स्टेटस रिपोर्ट आयोग के सामने प्रस्तुत करनी होगी। इस मामले की अगली उच्च स्तरीय सुनवाई 6 अगस्त 2026 को तय की गई है।
इटली में PM मोदी का खास स्वागत, मेलोनी संग दिखे कई यादगार पल
20 May, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोम। भारत और इटली के बीच के राजनयिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने इटली दौरे के तहत रोम पहुंच चुके हैं। वहां पहुंचते ही उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से एक बेहद खास मुलाकात की। दोनों नेताओं ने एक औपचारिक डिनर के दौरान वैश्विक पटल से जुड़े कई जरूरी मुद्दों और आपसी हितों पर विस्तार से चर्चा की। इस अनौपचारिक बैठक के बाद दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने रोम की ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध धरोहर 'कोलोसियम' का दीदार भी किया। इससे पहले पीएम मोदी के इटली आगमन पर प्रधानमंत्री मेलोनी ने सोशल मीडिया पर बेहद गर्मजोशी से 'रोम में आपका स्वागत है मेरे दोस्त' लिखकर उनका स्वागत किया था।
द्विपक्षीय वार्ता को लेकर उत्सुकता और भविष्य की उम्मीदें
इस यात्रा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहद सकारात्मक रुख जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि वह इटली के साथ भारत के रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के लिए होने वाली औपचारिक बातचीत को लेकर काफी उत्साहित हैं। प्रधानमंत्री को पूरा भरोसा है कि इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नया आयाम मिलेगा, साथ ही व्यापार, निवेश और आपसी सहयोग के नए रास्ते भी खुलेंगे।
प्रवासी भारतीयों के स्नेह पर जताया आभार
रोम की धरती पर कदम रखते ही मिले भव्य स्वागत से अभिभूत प्रधानमंत्री ने वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रवासी भारतीयों की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि अपनी मातृभूमि के प्रति उनका यह अटूट प्रेम और भारत-इटली के संबंधों को मजबूत करने का जज्बा वाकई काबिले तारीफ है। पीएम मोदी ने इस बात को भी रेखांकित किया कि दुनिया के किसी भी कोने में बसे भारतीय आज वैश्विक स्तर पर देश का मान बढ़ा रहे हैं।
मजबूत होते आर्थिक रिश्ते और रणनीतिक साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक और रणनीतिक तालमेल का एक बड़ा सबूत है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देश मिलकर 'संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029' को अमलीजामा पहनाने में जुटे हैं। इस दीर्घकालिक योजना के तहत रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच का आपसी व्यापार 16.77 अरब अमेरिकी डॉलर के पार जा चुका है, जबकि पिछले ढाई दशकों में इटली से भारत में 3.66 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है, जो दोनों देशों की मजबूत होती आर्थिक साझीदारी को दर्शाता है।
हनोई में राजनाथ सिंह की बड़ी बैठक, भारत-वियतनाम रक्षा सहयोग पर जोर
20 May, 2026 08:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हनोई। भारत और वियतनाम ने हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को एक बार फिर मजबूती से दोहराया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को वियतनाम की राजधानी हनोई में वहां के उप प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रहे रक्षा संबंधों की समीक्षा की गई तथा समुद्री सुरक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर सहयोग के नए रास्तों पर चर्चा हुई।
द्विपक्षीय बैठक के मुख्य बिंदु और सहयोग के क्षेत्र
दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच हुई इस रणनीतिक बैठक में वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए कई अहम समझौतों और भावी योजनाओं पर मुहर लगी:
वैश्विक सुरक्षा पर मंथन: दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े समसामयिक घटनाक्रमों पर विस्तार से अपने विचारों का आदान-प्रदान किया।
बहुआयामी सहयोग पर सहमति: रक्षा मंत्रियों ने सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग में आपसी सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति अभियानों, साइबर सुरक्षा और दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय दौरों को बढ़ाने पर सहमति जताई।
वियतनाम के राष्ट्रपति से मुलाकात और व्यापक चर्चा
अपनी इस यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के जनरल सेक्रेटरी और राष्ट्रपति तो लाम से भी एक विशेष शिष्टाचार मुलाकात की।
रक्षा मंत्री का बयान: मुलाकात के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रपति तो लाम से मिलकर उन्हें बेहद सम्मान की अनुभूति हुई। इस बैठक के दौरान भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाने, क्षेत्रीय सुरक्षा को पुख्ता करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों पर बेहद सकारात्मक बातचीत हुई।
एआई (AI) और क्वांटम टेक्नोलॉजी में ऐतिहासिक समझौता
इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक दोनों देशों के बीच अत्याधुनिक तकनीक को लेकर हुआ करार रहा, जिसे द्विपक्षीय संबंधों में एक मील का पत्थर माना जा रहा है:
एमओयू का आदान-प्रदान: भारत के 'मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस इंजीनियरिंग' और वियतनाम की 'टेलीकम्युनिकेशंस यूनिवर्सिटी' के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
वियतनाम में भारत स्थापित करेगा AI लैब: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के न्हा ट्रांग स्थित दूरसंचार विश्वविद्यालय में भारत के सहयोग से एक अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रयोगशाला (AI Lab) स्थापित करने की बड़ी घोषणा की।
भाषा प्रयोगशाला का डिजिटल उद्घाटन: इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने वियतनाम के वायुसेना अधिकारी महाविद्यालय में भारतीय वित्तीय व तकनीकी सहायता से तैयार की गई एक आधुनिक भाषा प्रयोगशाला (Language Lab) का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन भी किया।
ईरान की शर्तों पर नहीं बनी बात, ट्रंप बोले- समझौते के आसार नहीं
19 May, 2026 03:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन / तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच दुनिया ने थोड़ी राहत की सांस ली है। पिछले कुछ दिनों से लगातार ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि दोनों पक्ष जल्द ही एक बड़े युद्ध में आमने-सामने होंगे। अमेरिका की ओर से मिल रही लगातार धमकियों और ईरान के कड़े पलटवार के बाद यह माना जा रहा था कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर खाड़ी क्षेत्र फिर से जंग के मैदान में तब्दील हो जाएगा। हालांकि, वैश्विक स्तर पर तेल की आसमान छूती कीमतों और आपूर्ति के संकट के बीच, अब एक सकारात्मक खबर सामने आई है कि अमेरिका ने ईरान पर होने वाले अपने आगामी हमलों की योजना को फिलहाल टालने का फैसला किया है।
खाड़ी देशों की अपील पर राष्ट्रपति ट्रंप ने रोके हमले
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चरम पर पहुंचे इस संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और रणनीतिक बयान जारी किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। उनके मुताबिक, यह महत्वपूर्ण निर्णय कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे प्रमुख खाड़ी देशों के विशेष अनुरोध और मध्यस्थता की मांग के बाद लिया गया है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस फैसले के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच बेहद गंभीर कूटनीतिक बातचीत का दौर शुरू हो चुका है।
ईरानी राष्ट्रपति का रुख, बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं
दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका के साथ चल रही इस कूटनीतिक वार्ता को लेकर अपने देश का रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। उन्होंने अपने बयान में कड़े लहजे में कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर बैठने का मतलब यह कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि ईरान ने घुटने टेक दिए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि तेहरान इस वार्ता में अपने पूरे सम्मान, सैन्य ताकत और अपने राष्ट्रीय व संप्रभु अधिकारों की रक्षा की शर्त पर ही शामिल हुआ है और देश के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
युद्धविराम के बावजूद इजरायल और लेबनान में खूनी संघर्ष जारी
एक तरफ जहां खाड़ी में ईरान-अमेरिका युद्ध का खतरा कुछ टला है, वहीं दूसरी तरफ इजरायल और लेबनान के बीच का हिंसक संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिकी मध्यस्थता के जरिए युद्धविराम की अवधि बढ़ाए जाने के बावजूद सोमवार को इजरायली लड़ाकू विमानों ने लेबनान में बमबारी की, जिसमें कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीते 2 मार्च से लेकर अब तक हुए इजरायली हमलों और सैन्य ऑपरेशनों में 3,020 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 9,273 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गाजा सहायता जहाजों को रोकने पर विवाद
इन हमलों के अलावा, गाजा के पीड़ित नागरिकों के लिए मानवीय राहत सामग्री ले जा रहे जहाजों (सहायता बेड़े) को रोकने को लेकर इजरायल की वैश्विक स्तर पर चौतरफा आलोचना और घेराबंदी शुरू हो गई है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली बलों ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा का उल्लंघन करते हुए गाजा सहायता बेड़े के कई जहाजों को बीच समुद्र में ही बंधक बना लिया। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई के दौरान इजरायली नौसेना ने करीब 47 नौकाओं को अपने कब्जे में ले लिया और राहत सामग्री पहुंचाने जा रहे सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है।
वैश्विक नियमों के उल्लंघन पर दुनिया भर में आक्रोश
इजरायल द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में की गई इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद कई देशों, वैश्विक नेताओं और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने अपनी तीव्र नाराजगी और आक्रोश जाहिर किया है। मानवाधिकार संस्थाओं का साफ तौर पर कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत खुले समुद्र (इंटरनेशनल वॉटर्स) में मानवीय सहायता ले जा रहे असैन्य जहाजों को बलपूर्वक रोकना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस चौतरफा तनाव, ईरान-अमेरिका वार्ता के भविष्य, लेबनान में लगातार गिरती लाशों और गाजा सहायता बेड़े पर हुए इस नए विवाद ने पूरी दुनिया को एक बार फिर एक महासंकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
होर्मुज से अच्छी खबर, जहाजों की बढ़ी आवाजाही से तेल-गैस बाजार में उम्मीद
19 May, 2026 02:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई / वाशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बाद से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आसमान छूती कीमतों ने पूरी दुनिया को संकट में डाल रखा है। भारत सहित कई बड़े देशों में ईंधन के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह के भीतर इस रणनीतिक जलमार्ग से मालवाहक जहाजों (शिप्स) की रिकॉर्ड आवाजाही दर्ज की गई है। कमोडिटी डेटा फर्म 'केपलर' (Kpler) के शिप ट्रैकिंग डेटा और समुद्री निगरानी कंपनियों के इन आंकड़ों ने वैश्विक शिपिंग बाजार को बड़ी उम्मीद दी है।
तनाव के बीच जहाजों की संख्या में रिकॉर्ड सुधार
समुद्री यातायात की निगरानी करने वाली एजेंसियों के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 11 मई से 17 मई के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी उछाल आया है और अब यहाँ से हर हफ्ते लगभग 55 मालवाहक जहाज सुरक्षित गुजर रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि युद्ध के चरम पर होने के दौरान सुरक्षा कारणों से यह ग्राफ बेहद डराने वाले स्तर पर पहुंच गया था और इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर महज 19 रह गई थी, जो संघर्ष की शुरुआत के बाद का सबसे निचला स्तर था। अब इस यातायात में आ रहे सुधार को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
ईरानी हमलों और नाकेबंदी के बाद सुधर रहे हालात
क्षेत्र में इस अभूतपूर्व तनाव की शुरुआत बीते 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए बड़े हमलों के बाद खाड़ी देशों में युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ा पहरा बैठा दिया था और जहाजों के आवागमन को बाधित कर दिया था। इस नाकेबंदी के कारण दुनिया भर के तेल और गैस बाजारों में हाहाकार मच गया था। हालांकि, ईरान की सरकारी मीडिया से आ रही खबरों के अनुसार, वहां के 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' ने पिछले कुछ दिनों में अपनी कड़ाई कम की है और अधिक वाणिज्यिक जहाजों को इस मार्ग से आगे बढ़ने की अनुमति दी है, जिससे समुद्री यातायात धीरे-धीरे अपनी पुरानी स्थिति की ओर लौट रहा है।
ईरान की नई निगरानी संस्था से बढ़ी वैश्विक चिंता
यातायात बहाल होने के बीच ईरान ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता और चिंता को फिर से बढ़ा दिया है। ईरान सरकार ने होर्मुज जलमार्ग पर अपना नियंत्रण और कड़ा करने के लिए एक नई विशेष संस्था (Authority) के गठन का ऐलान किया है, जो वहां से गुजरने वाले जहाजों के संचालन की देखरेख करने के साथ-साथ उनसे शुल्क (टैक्स) वसूलने का काम भी करेगी। इस नई व्यवस्था के जरिए ईरान इस पूरे समुद्री रास्ते पर 'रीयल टाइम' (पल-पल की) निगरानी रख सकेगा। जहाँ एक तरफ ईरान का तर्क है कि वह इसके माध्यम से केवल एक सुव्यवस्थित सुरक्षा व्यवस्था बनाना चाहता है, वहीं दुनिया के कई प्रमुख देशों का मानना है कि ईरान इस संस्था की आड़ में होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह से अपना एकाधिकार और अवैध कब्जा जमाना चाहता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बेनतीजा
समुद्री मार्ग पर जारी इस कूटनीतिक रस्साकशी के बीच, इस संकट को सुलझाने के लिए अमेरिका और ईरान के राजनयिकों के बीच पर्दे के पीछे चल रही बातचीत अभी तक किसी ठोस या बड़े नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। दोनों ही देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं, जिसके कारण इस रणनीतिक क्षेत्र में स्थायी शांति को लेकर संशय बरकरार है। दुनिया भर के नीति निर्माताओं और तेल समीक्षकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि ईरान की इस नई निगरानी संस्था के लागू होने के बाद वैश्विक शिपिंग कंपनियां और अमेरिकी नौसेना इस पर क्या रुख अपनाती हैं।
नेपाल में छोटे आयातकों को राहत, ₹100 से अधिक के सामान पर कस्टम फीस पर रोक
19 May, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोनबरसा। नेपाल-भारत बॉर्डर से जुड़े आम नागरिकों के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर सामने आई है। नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने सीमा पार से सामान्य नागरिकों द्वारा लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक के रोजमर्रा के सामान पर लगाए गए कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) की वसूली पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले से सीमावर्ती तराई-मधेश क्षेत्र के निवासियों और स्थानीय व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है।
सुप्रीम कोर्ट का सरकार को सख्त निर्देश
नेपाल सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हरि प्रसाद फुयाल और न्यायाधीश टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए एक बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने प्रधानमंत्री व मंत्रिपरिषद कार्यालय और वित्त मंत्रालय सहित सभी संबंधित विभागों को यह साफ निर्देश दिया है कि जब तक इस मामले पर कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक आम जनता से दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर किसी भी तरह का सीमा शुल्क न वसूला जाए।
विवादित सरकारी अधिसूचना और जनविरोध
गौरतलब है कि नेपाल सरकार ने बीते 2 मई को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत भारत से नेपाल लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के हर सामान पर कस्टम शुल्क चुकाना अनिवार्य कर दिया गया था। सरकार के इस नियम का सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आम लोगों ने भारी विरोध किया था। स्थानीय नागरिकों का तर्क था कि इस अव्यवहारिक नियम की वजह से उनकी रोजमर्रा की जरूरी चीजों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो रही थी। इस सरकारी फैसले के खिलाफ अधिवक्ताओं ने 14 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर इसे चुनौती दी थी, जिसे गंभीर मानते हुए अदालत ने अब अंतरिम राहत दी है।
दोनों देशों के सीमावर्ती बाजारों में खुशी की लहर
अदालत के इस फैसले के बाद भारत और नेपाल, दोनों ही तरफ के सीमावर्ती क्षेत्रों में खुशी का माहौल है। सोनबरसा सहित भारतीय सीमा के बाजारों के कारोबारियों ने इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि इस रोक के बाद अब सीमावर्ती बाजारों में रौनक फिर से लौट आएगी और नेपाल के नागरिक पहले की तरह ही बिना किसी परेशानी के अपनी जरूरत का सामान आसानी से खरीद सकेंगे।
सुबह की सैर बन गई दुखद हादसा, कपिल मुनि तालाब में डूबीं दो बहनें
19 May, 2026 12:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैथल। हरियाणा के कलायत इलाके से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ मंगलवार की अलसुबह दो सगी बहनें कपिल मुनि तालाब में डूब गईं, जिससे दोनों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान कलायत की रहने वाली 20 वर्षीय पलक और उसकी छोटी बहन 18 वर्षीय परमजीत के रूप में हुई है। इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
रोजाना की तरह सुबह की सैर पर निकली थीं दोनों बहनें
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, दोनों बहनें पलक और परमजीत की दिनचर्या थी कि वे हर रोज सुबह करीब 5:00 बजे वॉक (सैर) के लिए घर से बाहर जाती थीं। मंगलवार सुबह भी दोनों सामान्य दिनों की तरह सुबह की ताजी हवा में टहलने के लिए निकली थीं। लेकिन जब काफी समय बीत जाने के बाद भी वे घर वापस नहीं लौटीं, तो परिजनों को चिंता होने लगी। अनहोनी की आशंका के चलते परिवार के लोग उनकी खोजबीन करते हुए कपिल मुनि तालाब की तरफ पहुंचे, जहाँ उन्हें दोनों के डूबने की प्राथमिक जानकारी मिली।
स्थानीय लोगों और गोताखोरों ने चलाया डेढ़ घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की भनक लगते ही कलायत थाना पुलिस तुरंत एक्शन में आई और बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने तुरंत गोताखोरों की टीम को काम पर लगाया। इस दौरान वहां मौजूद स्थानीय निवासियों ने भी मानवता का परिचय देते हुए तालाब में उतरकर युवतियों को ढूंढने में मदद की। करीब डेढ़ घंटे तक चले कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन (बचाव अभियान) के बाद दोनों बहनों को पानी से बाहर निकाला गया। उन्हें तुरंत एम्बुलेंस की मदद से कैथल के सिविल अस्पताल (नागरिक अस्पताल) ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपे जाएंगे शव, तफ्तीश में जुटी पुलिस
इस मामले को लेकर कलायत थाना प्रभारी सुभाष चंद्र ने बताया कि पुलिस टीम सूचना मिलते ही घटनास्थल पर सक्रिय हो गई थी। ग्रामीणों के सहयोग से दोनों युवतियों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा है और पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। थाना प्रभारी ने कहा कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने और वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए शोकाकुल परिवार को सौंप दिए जाएंगे। फिलहाल पुलिस हादसे के सही कारणों और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए मामले की गहनता से जांच कर रही है।
हरियाणा रोडवेज की नई सुविधा: रोहतक-शिमला सीधी बस, जानें किराया
19 May, 2026 12:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। चिलचिलाती गर्मी के इस मौसम में पहाड़ों की सैर पर जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए हरियाणा रोडवेज ने एक बड़ी सौगात दी है। विभाग की ओर से रोहतक से शिमला के लिए सीधी बस सेवा का सफल आगाज किया गया है। मंगलवार को स्थानीय बस स्टैंड के काउंटर नंबर आठ से पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और रोडवेज के महाप्रबंधक (GM) नवीन कुमार ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर इस नई बस को अपने गंतव्य के लिए रवाना किया।
मात्र 581 रुपये में तय होगा शिमला तक का सफर
यात्रियों की जेब का ख्याल रखते हुए रोडवेज प्रशासन ने इस रूट का किराया बेहद किफायती रखा है। रोहतक से शिमला तक के सफर के लिए यात्रियों को प्रति सवारी केवल 581 रुपये का टिकट लेना होगा। दूरी के लिहाज से यह पूरा सफर लगभग 373 किलोमीटर का रहने वाला है, जिसे यह बस बेहद आरामदायक तरीके से तय करेगी।
इन प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा रूट, रात को पहुंचेगी शिमला
रोहतक डिपो की यह बस अपने निर्धारित समय पर प्रस्थान करने के बाद हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहरों को आपस में जोड़ेगी। यह बस रोहतक से रवाना होकर चंडीगढ़, पंचकूला, पिंजौर, कालका, सोलन और धर्मपुर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकते हुए रात को 8:10 बजे शिमला के मुख्य बस स्टैंड पर पहुंचेगी। इससे यात्रियों को बार-बार बस बदलने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी।
व्यापार, शिक्षा और पर्यटन को मिलेगा नया बढ़ावा
बस के उद्घाटन समारोह के दौरान पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस डायरेक्ट बस सर्विस के शुरू होने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि उच्च शिक्षा और व्यापार के सिलसिले में हिमाचल प्रदेश आने-जाने वाले लोगों का समय और पैसा दोनों बचेगा। विशेषकर गर्मियों के सीजन में शिमला की वादियों का लुत्फ उठाने वाले सैलानियों के लिए यह सरकारी बस सेवा बेहद मददगार और आरामदायक साबित होगी।
सैन डिएगो मस्जिद शूटिंग पर ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- ‘बहुत गंभीर मामला’
19 May, 2026 12:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सैन डिएगो / कैलिफोर्निया: अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत से एक बेहद दुखद और स्तब्ध करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ सैन डिएगो स्थित एक प्रसिद्ध इस्लामिक सेंटर के बाहर दो किशोर बंदूकधारियों ने अचानक अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस भीषण और हिंसक हमले में एक मुस्तैद सुरक्षाकर्मी सहित तीन पुरुषों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस इस पूरे मामले की तफ्तीश 'हेट क्राइम' (नफरती अपराध) के कोण से कर रही है। देश में सनसनी फैलाने वाली इस वारदात पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
राष्ट्रपति ट्रंप की प्रतिक्रिया और हमलावरों की आत्महत्या
इस कायराना हमले पर कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे एक अत्यंत भयानक और दर्दनाक घटना करार दिया है। उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि प्रशासन इस पूरे मामले की तह तक जाएगा और इसकी बेहद गंभीरता से जांच की जाएगी। इस बीच, वारदात के कुछ ही देर बाद पुलिस को घटनास्थल के नजदीक ही एक गली में खड़ी कार से दो किशोरों के शव बरामद हुए, जिनकी उम्र क्रमशः 17 और 19 वर्ष बताई जा रही है। शुरुआती जांच के आधार पर पुलिस का अनुमान है कि मस्जिद परिसर को निशाना बनाने के बाद इन दोनों हमलावरों ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
मस्जिद परिसर में मची भगदड़, बच्चे सुरक्षित
यह जानलेवा हमला दोपहर होने से ठीक पहले मस्जिद परिसर के बाहरी हिस्से में अंजाम दिया गया। चूंकि यह इस्लामिक सेंटर सैन डिएगो काउंटी का सबसे बड़ा केंद्र है, इसलिए गोलियों की तड़तड़ाहट सुनते ही वहां मौजूद आम लोगों और परिसर के भीतर पढ़ रहे छात्रों के बीच भारी अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई। सूचना मिलते ही सैन डिएगो पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया। सैन डिएगो के पुलिस प्रमुख स्कॉट वाह्ल ने राहत की खबर देते हुए बताया कि मस्जिद परिसर के भीतर संचालित हो रहे स्कूल के सभी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें किसी भी तरह की चोट नहीं आई है।
सुरक्षाकर्मी की बहादुरी ने टाला बड़ा नरसंहार
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस्लामिक सेंटर की इमारत के बाहर तीन लोगों के शव मिले थे। जांच दल ने ड्यूटी पर तैनात मृत सुरक्षाकर्मी के अदम्य साहस और बहादुरी की जमकर सराहना की है। अधिकारियों का मानना है कि यदि इस जांबाज सुरक्षाकर्मी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए हमलावरों को रोकने का प्रयास न किया होता, तो शायद यह घटना एक बहुत बड़े सामूहिक नरसंहार में तब्दील हो सकती थी। मामले की गहराई और अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को देखते हुए अब अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई (FBI) भी स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर जांच में जुट गई है।
जांच में खुले नफरत के चौंकाने वाले राज
शुरुआती पड़ताल में इस सुनियोजित हमले को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला है कि हमलावरों में से एक किशोर अपने माता-पिता के घर से चोरी-छिपे हथियार लेकर निकला था। पुलिस को उसकी कार से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें कथित तौर पर 'नस्ली गौरव' (Racial Pride) और कट्टरता से जुड़ी बातें लिखी गई हैं। इसके अलावा, वारदात में इस्तेमाल किए गए एक हथियार पर भी नफरत भरे संदेश अंकित मिले हैं। पुलिस इस बात की भी गहनता से तफ्तीश कर रही है कि मस्जिद से कुछ ही दूरी पर एक माली पर की गई गोलीबारी की एक अन्य घटना का इस मुख्य हमले से कोई सीधा संबंध है या नहीं।
हो ची मिन्ह स्मारक पहुंचे राजनाथ सिंह, ब्रह्मोस सहयोग पर नजर
19 May, 2026 11:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हनोई / नई दिल्ली: भारत और वियतनाम के बीच गहरे होते रणनीतिक व सैन्य संबंधों को एक नए मुकाम पर ले जाने के लिए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों वियतनाम की आधिकारिक यात्रा पर हैं। अपने इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान मंगलवार को रक्षा मंत्री ने हनोई स्थित ऐतिहासिक 'हो ची मिन्ह समाधि' का दौरा किया। वहां उन्होंने वियतनाम के राष्ट्रपिता और महान नेता हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस गरिमामयी समारोह के दौरान राजनाथ सिंह ने समाधि स्थल पर पुष्पचक्र चढ़ाकर नमन किया, जहां कार्यक्रम की शुरुआत से पहले 969वीं रेजिमेंट के कमांडर ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
सोशल मीडिया पर दिया गहरी दोस्ती का संदेश
इस ऐतिहासिक पल की यादों को साझा करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विशेष संदेश पोस्ट किया। उन्होंने अपने संदेश में वियतनाम के राष्ट्रपिता को याद करते हुए लिखा कि हो ची मिन्ह का दूरदर्शी दृष्टिकोण, उनका कुशल नेतृत्व और अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के प्रति अटूट समर्पण आज भी दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है। रक्षा मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत और वियतनाम के बीच के ये दोस्ताना संबंध साझा सांस्कृतिक मूल्यों और गहरे आपसी सम्मान की मजबूत बुनियाद पर टिके हैं, जो वक्त की हर कसौटी पर खरे उतरते हुए लगातार और प्रगाढ़ होते जा रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय मुख्यालय में अहम मुलाक़ातें
अपनी आधिकारिक व्यस्तताओं के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वियतनाम के रक्षा मंत्रालय मुख्यालय भी पहुंचे। वहां उन्होंने मंत्रालय की आधिकारिक विजिटर बुक (आगंतुक पुस्तिका) में भारत-वियतनाम संबंधों की मजबूती की कामना करते हुए अपने विशेष विचार दर्ज किए। इसके बाद उन्होंने वहां के शीर्ष सैन्य व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मुलाकात की और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और व्यापक बनाने के अहम मुद्दों पर चर्चा की।
रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की कवायद
उल्लेखनीय है कि रक्षा मंत्री सोमवार को वियतनाम की धरती पर पहुंचे थे, जो उनके दो देशों के इस बेहद महत्वपूर्ण आधिकारिक दौरे का पहला पड़ाव है। इस यात्रा का मुख्य एजेंडा भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग को और अधिक गतिशील व रणनीतिक रूप से मजबूत बनाना है। हनोई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आगमन के दौरान वियतनाम पीपुल्स आर्मी के डिप्टी चीफ ऑफ जनरल स्टाफ, वहां तैनात भारतीय राजदूत और भारतीय दूतावास के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने पूरे प्रोटोकॉल के साथ भारत के रक्षा मंत्री का भव्य स्वागत किया था।
सरकारी कर्मचारियों के लिए जरूरी सूचना: प्रॉपर्टी रिटर्न न भरा तो वेतन रुकेगा
19 May, 2026 09:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचकूला। हरियाणा के मौलिक शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों द्वारा अपनी संपत्ति का ब्यौरा (प्रॉपर्टी रिटर्न) दाखिल करने को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मौलिक शिक्षा निदेशक (पंचकूला) की ओर से प्रदेश के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को एक ताजा रिमाइंडर (स्मरण पत्र) भेजा गया है। इस आदेश के तहत उनके अंतर्गत काम करने वाले क्लास-1, क्लास-2 और क्लास-3 (श्रेणी-1, 2 और 3) के सभी अधिकारी-कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 की ऑनलाइन प्रॉपर्टी रिटर्न आगामी 22 मई 2026 तक अनिवार्य रूप से भरने के निर्देश दिए गए हैं।
पोर्टल पर करना होगा ऑनलाइन आवेदन, पुराना बकाया भी चुकाना जरूरी
शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया है कि केवल चालू वित्तीय वर्ष ही नहीं, बल्कि जिन कर्मचारियों की पिछले सालों की भी प्रॉपर्टी रिटर्न किसी वजह से पेंडिंग (लंबित) है, वे भी उसे तुरंत क्लियर करें। कर्मचारियों को अपनी अचल संपत्ति का यह पूरा लेखा-जोखा राज्य सरकार के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म intrahry.gov.in पर जाकर ऑनलाइन मोड में ही दर्ज करना होगा। मैन्युअल या ऑफलाइन माध्यम से दी गई जानकारी स्वीकार नहीं की जाएगी।
तीसरी बार जारी हुआ आदेश, अंतिम तारीख नजदीक आने पर याद दिलाया नियम
विभागीय पत्र के अनुसार, संपत्ति का विवरण देने को लेकर प्रशासन की तरफ से यह कोई पहला आदेश नहीं है। इससे पहले भी 18 मार्च 2019 और हाल ही में 13 मई 2026 को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। चूंकि अब विभाग द्वारा तय की गई आखिरी तारीख बेहद करीब आ चुकी है, इसलिए सभी कर्मचारियों को सचेत करने के उद्देश्य से यह अंतिम स्मरण पत्र जारी कर मुस्तैदी दिखाने को कहा गया है।
लापरवाही पर रुकेगा वेतन, जिला अधिकारियों को 'हाई प्रायोरिटी' के निर्देश
मुख्यालय ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि कोई कर्मचारी नियत समय सीमा के भीतर अपनी संपत्ति का विवरण ऑनलाइन अपडेट करने में विफल रहता है और इस वजह से उसका मासिक वेतन (सैलरी) रुक जाता है, तो इसके लिए वह खुद पूरी तरह जिम्मेदार होगा। मौलिक शिक्षा विभाग ने सभी जिला स्तरीय अफसरों को इस मुहिम को 'हाई प्रायोरिटी' (उच्च प्राथमिकता) पर रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि समय रहते शत-प्रतिशत डेटा पोर्टल पर फीड किया जा सके।
UNSC में आज बड़ा मंथन संभव, अमेरिका-बहरीन प्रस्ताव पर दुनिया एकजुट
19 May, 2026 09:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क / दुबई: दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक मंच पर हलचल तेज हो गई है। इस रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित और खुला रखने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) मंगलवार को एक बेहद अहम आपात बैठक बुला सकती है। यह पूरी कवायद बहरीन और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए एक विशेष प्रस्ताव पर चर्चा के लिए की जा रही है। इस वैश्विक प्रयास की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे दुनिया भर के 129 से ज्यादा देशों का खुला समर्थन मिल चुका है। पिछले हफ्ते तक यह संख्या 112 थी, लेकिन अब सोमालिया और कांगो जैसे देशों ने भी इसके पक्ष में आकर इसे और मजबूती दी है, जो वर्तमान में सुरक्षा परिषद के सक्रिय सदस्य भी हैं।
वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को बचाना मुख्य लक्ष्य
इस दूरगामी प्रस्ताव को बहरीन और अमेरिका के अलावा कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत जैसे प्रमुख खाड़ी देशों का भी मुख्य प्रायोजन हासिल है। इसका मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह से सुरक्षित और बाधारहित बनाना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों, प्रमुख व्यापारिक रास्तों और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में कोई व्यवधान न आए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात के परमाणु केंद्रों पर हुए ड्रोन हमलों के बाद ही बहरीन ने इस आपातकालीन बैठक की मांग को तेजी से आगे बढ़ाया है।
ईरान की हरकतों पर अमेरिकी विदेश मंत्री का तीखा प्रहार
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि ईरान अपनी आक्रामक धमकियों और हरकतों से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका ने ईरान पर सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि वह समुद्री रास्तों को बाधित कर रहा है, जहाजों पर हमले करवा रहा है, अंतरराष्ट्रीय पानी में घातक बारूदी सुरंगें बिछा रहा है और वहाँ से गुजरने वाले जहाजों से अवैध रूप से टैक्स वसूलने का प्रयास कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे निर्देश पर तैयार इस प्रस्ताव में बेहद सख्त लहजे में मांग की गई है कि ईरान अपने हमलों और बारूदी सुरंगें बिछाने के काम को तुरंत रोके, साथ ही वह उन सभी ठिकानों को भी उजागर करे जहाँ उसने सुरंगें बिछाई हैं ताकि उन्हें हटाने में वैश्विक सहयोग मिल सके।
ईरान का पलटवार और राष्ट्रपति ट्रंप का कूटनीतिक रुख
दूसरी तरफ, ईरान ने इस अमेरिकी प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसकी तीखी आलोचना की है। ईरानी प्रशासन का कहना है कि अमेरिका इस संकट का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदों के लिए कर रहा है और अपने गैर-कानूनी फैसलों को सही ठहराने की कोशिश में जुटा है। ईरान के अनुसार, इस पूरे तनाव का एकमात्र समाधान क्षेत्र में जारी युद्ध को पूरी तरह समाप्त करना और ईरान के बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाना है। इस बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर किए जाने वाले संभावित सैन्य हमले को कुछ समय के लिए टालने का फैसला किया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब और कतर जैसे मित्र देशों ने उनसे कूटनीतिक बातचीत के लिए थोड़ा वक्त मांगा है, क्योंकि वे एक शांतिपूर्ण समझौता चाहते हैं, हालांकि वे ईरान के अड़ियल रवैये से खासे असहज हैं।
इंडिया-नॉर्डिक समिट में पीएम मोदी की अहम भागीदारी, द्विपक्षीय रिश्तों को मिलेगी मजबूती
19 May, 2026 08:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओस्लो: भारत और उत्तरी यूरोपीय देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में तीसरे 'इंडिया-नॉर्डिक समिट' का आयोजन किया जा रहा है। इस बेहद महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिस्सा ले रहे हैं। यह बैठक भारत और नॉर्डिक क्षेत्र के देशों के बीच आपसी तालमेल और सहयोग को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
नॉर्डिक देशों के शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत
इस समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के प्रधानमंत्रियों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर विस्तृत चर्चा करेंगे। इन बैठकों के मुख्य एजेंडे में व्यापार, निवेश, आधुनिक तकनीक, वैश्विक सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। यह शिखर सम्मेलन दोनों पक्षों को विभिन्न क्षेत्रों में अपने संबंधों को और अधिक मजबूत करने के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है।
पर्यावरण, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष अनुसंधान पर विशेष ध्यान
इस ऐतिहासिक दौरे में मुख्य रूप से ग्रीन एनर्जी, ब्लू इकॉनमी, ग्रीन शिपिंग और क्लाइमेट टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक क्षेत्रों पर गहराई से मंथन किया जाएगा। भारत और नॉर्डिक देश पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में एक-दूसरे का हाथ थामने के लिए तैयार हैं, जो वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से लड़ने में मददगार साबित होगा। इसके साथ ही, अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी को नया विस्तार दिया जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो और नॉर्वे की स्पेस एजेंसी के बीच आर्कटिक रिसर्च व सैटेलाइट टेक्नोलॉजी जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जा रही है।
वैश्विक मंच से शांति और अंतरराष्ट्रीय सुधारों का आह्वान
इससे पहले, ओस्लो में नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गार स्टोरे के साथ एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया की बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए कूटनीति और शांतिपूर्ण संवाद को जरूरी बताया। उन्होंने साफ किया कि चाहे यूक्रेन का संकट हो या पश्चिम एशिया का तनाव, भारत हमेशा शांतिपूर्ण प्रयासों के पक्ष में खड़ा रहेगा। इसके अलावा, उन्होंने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बदलाव लाने और दुनिया के लिए गंभीर खतरा बन चुके आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस मौके पर नॉर्वे सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से भी नवाजा।
व्यापारिक जगत से मुलाकात और भारत में निवेश का न्योता
अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को 'इंडिया-नॉर्वे बिजनेस एंड रिसर्च समिट' में शिरकत की, जहाँ उन्होंने नॉर्वे की दिग्गज कंपनियों और शोध संस्थानों के प्रमुखों से मुलाकात की। इस बिजनेस समिट में लगभग 200 अरब डॉलर के कुल बाजार मूल्य वाली बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, शिपिंग, हेल्थ टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने इस मंच से भारत को निवेश और नवाचार के लिए दुनिया का सबसे भरोसेमंद और बड़ा बाजार बताते हुए नॉर्वे के उद्योगपतियों को भारत में आने का आमंत्रण दिया।
“मोदी-शाह पर टिप्पणी को लेकर घमासान, राहुल गांधी घिरे”
“BJP सरकार ज्यादा दिन नहीं चलेगी, ममता बनर्जी का बड़ा राजनीतिक दावा”
तीनों ट्रेनों की यात्रा रूट और स्टेशन की जानकारी जारी
अफगानिस्तान सीरीज ने बदली राजस्थान क्रिकेट की किस्मत, 12 साल बाद हुआ कमाल
रोज़गार और वेतन से जुड़ी दुर्दशा, सेविकाओं में भारी आक्रोश
इंडस्ट्रियल पार्क के निर्माण को लेकर स्थानीय विरोध तेज
Trent के बाहर होने से बाजार में हलचल, क्या करना चाहिए निवेशकों को?
बांग्लादेश के हाथों शर्मनाक हार, पाक कप्तान ने खिलाड़ियों को ठहराया जिम्मेदार
