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बूंद-बूंद पानी के लिए जूझ रहा पाकिस्तान, कनाडा से मांगा सहयोग
21 Jul, 2026 03:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए बर्बर आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को स्थगित किए जाने से पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। नई दिल्ली के इस बेहद कड़े रुख के बाद पाकिस्तान गहराते जल संकट और कूटनीतिक दबाव से घबराकर अब अंतरराष्ट्रीय मंचों का दरवाजा खटखटा रहा है।
पाकिस्तान ने कनाडा से मांगी मदद, संधि बहाल करने की गुहार
इस्लामाबाद में कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ आयोजित एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत पर संधि को पुनः लागू करने के लिए दबाव बनाने की अपील की। डार का आरोप है कि अप्रैल 2025 में भारत द्वारा उठाए गए इस कदम से क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
आतंकवाद पर भारत का स्पष्ट रुख: कार्रवाई तक जारी रहेगा निलंबन
दूसरी ओर, भारत ने इस मामले में अपनी नीति पूरी तरह स्पष्ट रखी है। पहलगाम आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की शहादत के बाद निलंबित की गई इस 1960 की ऐतिहासिक संधि को लेकर भारत का कहना है कि जब तक इस्लामाबाद सीमा पार आतंकवाद पर ठोस और सत्यापन योग्य कदम नहीं उठाता, तब तक यह रोक बरकरार रहेगी।
खराब जल प्रबंधन है असली वजह, भारत करेगा अपने जल का पूर्ण उपयोग
भारतीय अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान की समस्या जल की कमी से अधिक उसका ढचर-पचर जल प्रबंधन है। भारत सरकार अब सिंधु बेसिन के अपने वैध हिस्से के जल का आधुनिक तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से अधिकतम इस्तेमाल करने की रणनीति पर काम कर रही है। भारत ने यह भी साफ कर दिया है कि भविष्य में यदि जल बंटवारे पर कोई बात होती भी है, तो वह पूरी तरह से एक नए ढांचे के तहत ही संभव होगी।
विशाल हिमखंड का अस्तित्व खत्म, वैज्ञानिकों ने दर्ज किया बड़ा बदलाव
21 Jul, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंटार्कटिका/लंदन: दक्षिणी महासागर में बीते चार दशकों से भटक रहा दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड 'ए23ए' (A23a) आखिरकार पूरी तरह पिघलकर अदृश्य हो गया है। आकार में भारत के गोवा राज्य से भी बड़ा और ग्रेटर लंदन के क्षेत्रफल से दोगुना यह हिमखंड 40 साल की लंबी यात्रा के बाद अब इतने छोटे टुकड़ों में तब्दील हो चुका है कि उपग्रहों (Satellites) से भी इन्हें ट्रैक करना नामुमकिन है, जिसके बाद इसे औपचारिक रूप से समाप्त घोषित कर दिया गया है।
34 वर्षों तक वेडेल सागर में फंसा रहा ए23ए
ए23ए हिमखंड सबसे पहले वर्ष 1986 में अंटार्कटिका की प्रसिद्ध फिल्चनर आइस शेल्फ से टूटकर अलग (Calving) हुआ था। अत्यधिक विशाल होने के कारण यह तुरंत समुद्र में बहने के बजाय वेडेल सागर के तल में फंस गया और लगभग 34 वर्षों तक वहीं जमा रहा। इसके बाद समुद्री धाराओं के प्रभाव से यह मुक्त हुआ और अंटार्कटिका से दूर उत्तर दिशा की ओर अपनी 2,000 किलोमीटर लंबी यात्रा पर निकल पड़ा।
उत्तरी महासागरों के गर्म पानी ने किया नामोनिशान खत्म
अंटार्कटिका के ठंडे समुद्री क्षेत्रों से बाहर निकलकर जैसे ही ए23ए उत्तर की ओर अपेक्षाकृत गर्म जलधाराओं के संपर्क में आया, इसका क्षरण तेजी से होने लगा। बढ़ते तापमान और लहरों के थपेड़ों के कारण यह धीरे-धीरे छोटे-छोटे हिमखंडों में बिखर गया और अंततः महासागर में विलीन हो गया।
वैज्ञानिकों के लिए एक 'चलता-फिरता प्रयोगशाला'
अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के लिए ए23ए महज एक हिमखंड नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन और समुद्री पारिस्थितिकी को समझने की एक प्राकृतिक प्रयोगशाला था। हालांकि इसके पिघलने से सीधे तौर पर समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी नहीं हुई है क्योंकि यह पहले से ही पानी पर तैर रहा था, लेकिन वैज्ञानिक अंटार्कटिका की मुख्य 'आइस शेल्फ' के कमजोर होने को लेकर चिंतित हैं, जो भविष्य में वैश्विक समुद्र स्तर के बढ़ने का बड़ा कारण बन सकती है।
कच्चे तेल की महंगाई का असर, पेट्रोल की कीमतों में इजाफा
21 Jul, 2026 02:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के मध्य गहराते सैन्य संकट का विपरीत प्रभाव अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई हैं। इस उछाल के चलते दुनिया के कई देशों ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर महंगाई का बोझ जनता पर डालना शुरू कर दिया है।
अमेरिका और पाकिस्तान में ईंधन महंगा, कई देशों में 200 के पार
कच्चे तेल के दामों में तेजी आते ही अमेरिका में पेट्रोल की औसत खुदरा दर बढ़कर 4 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष 3.14 डॉलर थी। वहीं, आर्थिक तंगी झेल रहे पड़ोसी देश पाकिस्तान ने पेट्रोल की कीमत में 13.18 रुपये का इजाफा कर इसे 310.71 रुपये और डीजल को 323.30 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। इसके अलावा साउथ अफ्रीका, साइप्रस, यूक्रेन, स्पेन और इटली जैसे देशों में पेट्रोल के दाम 150 से 200 रुपये प्रति लीटर के पार जा चुके हैं।
भारत में दरें स्थिर, लेकिन लंबे संकट से व्यापार घाटे की चिंता
वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत में फिलहाल पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं को राहत मिली हुई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व का तनाव लंबा खींचता है तो अधिकांश कच्चा तेल आयात करने वाले भारत के लिए चालू खाते का घाटा (CAD) और व्यापार घाटा बढ़ने की चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
शिपिंग भाड़ा और माल ढुलाई बढ़ने से महंगाई का खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण जहाजों को लंबे समुद्री रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। परिवहन दूरी बढ़ने और बीमा प्रीमियम में उछाल से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लागत दोगुनी से अधिक हो गई है। निर्यात विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि यदि स्थितियां जल्द सामान्य नहीं हुईं, तो ईंधन के साथ-साथ उर्वरक, रसायन, खाद्य वस्तुओं और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के दाम भी बढ़ेंगे, जिससे देश में व्यापक महंगाई का दबाव बन सकता है।
हूतियों की नाकेबंदी से रेड सी रूट पर संकट, दुनिया की बढ़ी चिंता
21 Jul, 2026 01:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के मध्य भीषण सैन्य संघर्ष लगातार 10वें दिन भी गंभीर रूप से जारी है। अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के तटीय क्षेत्रों में स्थित कई ठिकानों—चाबहार, कोनारक, सिरिक, बंदर अब्बास और केश्म द्वीप पर जोरदार बमबारी की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई पर बयान देते हुए तेहरान को चेतावनी दी कि तीन अमेरिकी सैनिकों के बलिदान की कीमत ईरान को हर हाल में चुकानी होगी और अमेरिका अपने ऊपर होने वाले हर वार का जवाब बेहद सख्ती से देगा।
ईरान की जवाबी कार्रवाई और कुवैत स्थित अमेरिकी ठिकाने पर हमला
दूसरी तरफ, ईरानी सेना ने भी हार न मानते हुए जवाबी हमले तेज कर दिए हैं। ईरान ने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे 'कैंप अरिफजान' की मिसाइल डिफेंस प्रणाली को निशाना बनाने का दावा किया है। इस भीषण गोलाबारी और हमलों के बीच दोनों देशों के बीच टकराव और अधिक भयावह रूप ले चुका है।
ओमान तट पर तेल टैंकर निशाना, हूतियों ने दी नाकेबंदी की धमकी
इसी दौरान, ओमान के समुद्री तट के निकट एक अन्य क्रूड ऑयल टैंकर पर हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय नौवहन सुरक्षा पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात तब और बिगड़ गए जब ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के विरुद्ध समुद्री घेराबंदी की घोषणा कर दी। हूतियों ने चेतावनी दी है कि वे लाल सागर से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों का मार्ग अवरुद्ध करेंगे, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाज़ार, कच्चा तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों में भारी हड़कंप मच गया है।
नाली में मिला युवक का शव, हादसा या कुछ और? लालकुर्ती बाजार की घटना से सनसनी
21 Jul, 2026 12:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला: अंबाला कैंट के लालकुर्ती बाजार में एक दुखद हादसे में 31 वर्षीय युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में जान चली गई। मृतक की पहचान राणा कॉम्प्लेक्स के निवासी हिमांशु शर्मा के रूप में हुई है। बाजार में बनी एक नाली के पास दो थड़ों के बीच बनी बेहद तंग जगह में मुंह के बल गिर जाने से यह दर्दनाक हादसा हुआ। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल की मोर्चरी में भिजवाया।
छह महीने पहले हुई थी शादी, परिवार का इकलौता सहारा था हिमांशु
इस हादसे से मृतक के परिवार में गहरा शोक व्याप्त है। हिमांशु शर्मा अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और महज छह महीने पहले ही उसकी शादी हुई थी। अचानक हुई इस अनहोनी से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। आशंका जताई जा रही है कि नाली के पानी और कीचड़ में मुंह डूबने तथा सांस रुकने की वजह से युवक की मौके पर ही दम घुटने से मौत हो गई।
दो थड़ों के बीच फंसा मिला शव, संतुलन बिगड़ने की जताई जा रही आशंका
घटनास्थल के निरीक्षण के अनुसार युवक दो थड़ों के बीच बनी महज कुछ फीट की संकरी जगह में अचेत अवस्था में फंसा हुआ था। उसके पैर बाहर की ओर थे, जबकि सिर और चेहरा पूरी तरह से नाले के पानी में डूबा हुआ था। शुरुआती आकलन के मुताबिक, रास्ते से गुजरते समय संतुलन बिगड़ने या अचानक चक्कर आ जाने के कारण वह सीधे नाली में जा गिरा और खुद को बाहर नहीं निकाल सका।
पुलिस जांच में जुटी, परिजनों के बयान के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई
मामले की जांच कर रहे लालकुर्ती चौकी प्रभारी राजिंद्र के अनुसार घटनास्थल के आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा मौजूद नहीं है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक दृष्टि से यह मामला दुर्घटना या सामान्य मृत्यु का प्रतीत हो रहा है। परिजनों के विस्तृत बयान दर्ज किए जा रहे हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पूरी तरह से खुलासा हो पाएगा।
जालंधर दौरे पर हरियाणा CM, समाजसेवा के प्रयासों को बताया प्रेरणादायक
21 Jul, 2026 12:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जालंधर:हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने नूरमहल स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के आश्रम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्था द्वारा धर्म तथा आध्यात्मिकता के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ-साथ सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे अभूतपूर्व कार्यों की खुलकर प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के संस्थान समाज को सही दिशा देने और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कामधेनु गौशाला, जैविक कृषि और आयुर्वेद प्रकल्पों का लिया जायजा
आश्रम प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संस्थान द्वारा संचालित कामधेनु गौशाला, जैविक कृषि और आयुर्वेदिक उत्पादों से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने आश्रम में चल रहे इन प्रकल्पों को ध्यान से देखा और कहा कि इन प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जनस्वास्थ्य और भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को सहेजने का कार्य बेहद सराहनीय और अनुकरणीय है।
नेत्रहीनों के स्वावलंबन और गोवंश संरक्षण अभियानों पर हुई विस्तृत चर्चा
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज के प्रमुख शिष्यों स्वामी परमानंद, स्वामी विश्वानंद, स्वामी गिरिधरानंद, स्वामी उमेश आनंद और स्वामी गुरु कृपानंद ने मुख्यमंत्री को संस्थान के सेवा कार्यों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संस्थान का ‘दृष्टि प्रकल्प’ दृष्टिहीन व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए निरंतर समर्पित है। इसके साथ ही भारतीय नस्लों की गायों के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी संस्थान द्वारा लगातार विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
संस्थान प्रबंधन ने मुख्यमंत्री को किया सम्मानित, सांस्कृतिक संरक्षण का संकल्प दोहराया
कार्यक्रम के अंत में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रतिनिधियों द्वारा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का भव्य स्वागत और विशेष सम्मान किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने संस्थान के सभी प्रतिनिधियों को सामाजिक व सांस्कृतिक उत्थान के इन महान कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं। वहीं संस्थान के प्रतिनिधियों ने भी समाज, गोवंश और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए सेवा कार्यों को और अधिक विस्तार देने का संकल्प व्यक्त किया।
कनाडा पर अमेरिका की सख्ती, ट्रंप ने बढ़ाया आयात शुल्क का बोझ
21 Jul, 2026 11:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन/ओटावा: अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयात होने वाले अधिकांश सामानों पर 50 प्रतिशत का भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने वाले एक कार्यकारी आदेश पर दस्तखत कर दिए हैं। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि यह कदम ऑटोमोबाइल, डेयरी और शराब (अल्कोहल) जैसे क्षेत्रों में कनाडा द्वारा अमेरिकी उत्पादों के खिलाफ किए जा रहे 'भेदभावपूर्ण रवैये' और असमान व्यवहार के जवाब में उठाया गया है। यह नया 50% शुल्क आगामी 19 अगस्त 2026 से प्रभावी हो जाएगा, जिसे दोनों पड़ोसी देशों के बीच एक बड़े 'टैरिफ वॉर' की शुरुआत माना जा रहा है।
दैनिक वस्तुओं से लेकर औद्योगिक सामान पर गिरेगी गाज
वाइट हाउस द्वारा जारी बयान में कहा गया कि अमेरिकी कारोबारियों और घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए यह कठोर निर्णय लेना आवश्यक था। इस नए 50% टैरिफ के दायरे में वाइन्स और हॉकी स्टिक जैसी रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों से लेकर कमर्शियल सीमेंट जैसे बड़े औद्योगिक उत्पाद शामिल हैं। हालांकि, अमेरिका ने राहत देते हुए ऊर्जा उत्पाद (Energy Products), पोटाश, आवश्यक खनिज (Critical Minerals) और मछली जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कनाडाई आयातों को फिलहाल इस शुल्क के दायरे से बाहर रखा है।
USMCA समझौते के बावजूद लागू होगा टैरिफ
अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह 50% शुल्क उन सभी संबंधित उत्पादों पर समान रूप से लागू होगा, चाहे वे अमेरिका-कनाडा-मैक्सिको मुक्त व्यापार समझौते (USMCA/CUSMA) के तहत आते हों या नहीं। गौरतलब है कि अमेरिका पहले से ही कनाडाई स्टील, एल्युमीनियम, सॉफ्टवुड लकड़ी और ऑटो पार्ट्स पर अलग-अलग दर से शुल्क वसूल रहा है, जबकि कनाडा भी जवाबी कार्रवाई के रूप में अमेरिकी उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाता आ रहा है।
कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की तीखी प्रतिक्रिया
इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) ने अमेरिकी कदम को एकतरफा कार्रवाई और मुक्त व्यापार समझौते का सीधा उल्लंघन करार दिया है। उन्होंने कहा कि कनाडा अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बातचीत और जवाबी कदमों के लिए तैयार है। ओटावा और वॉशिंगटन के बीच लंबे समय से जारी व्यापार वार्ता के विफल होने के बाद 19 अगस्त से लागू होने वाले इस आदेश से दोनों देशों के द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों में भारी खटास आने की आशंका जताई जा रही है।
मिसाइल हमले ने ली चार भारतीय नाविकों की जान, युद्ध क्षेत्र में बढ़ा खतरा
21 Jul, 2026 10:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओडेसा/नई दिल्ली: यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए कमर्शियल जहाज 'एमवी गोल्डन लियो' (MV Golden Leo) पर हुए मिसाइल हमले में 4 भारतीय नाविकों की दुखद मौत हो गई है। 17 सदस्यीय चालक दल वाले इस जहाज पर 5 भारतीय सवार थे, जिनमें से एक भारतीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हैं। इस हमले में कुल 10 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। भारत सरकार ने घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
'डेथ ऑन बोर्ड बेनिफिट स्कीम' और सरकारी मुआवजा प्रावधान
नौवहन निदेशालय (Directorate General of Shipping) के नियमों के अनुसार, ड्यूटी के दौरान भारतीय नाविक की मौत होने पर उनके आश्रितों को 'सीफेयरर वेलफेयर फंड सोसाइटी' द्वारा संचालित 'डेथ ऑन बोर्ड बेनिफिट स्कीम' के तहत 6 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। इस राशि को इसी वर्ष जनवरी में 4 लाख रुपये से बढ़ाकर 6 लाख रुपये किया गया था। इसके अतिरिक्त, भारतीय शिपिंग कंपनियों के जहाजों पर तैनात नाविकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये की अलग से अनुग्रह राशि का प्रावधान है।
नियुक्ति नियम, RPSL लाइसेंस और कानूनी सुरक्षा
यह मुआवजा और बीमा लाभ प्राप्त करने के लिए नाविक की आधिकारिक नियुक्ति होना अनिवार्य है। भारतीय जहाजों के लिए जहां सीडीसी (CDC) लाइसेंस जरूरी है, वहीं विदेशी झंडे वाले जहाजों पर तैनात भारतीय नाविकों की नियुक्ति 'रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस' (RPSL) प्राप्त कंपनी के जरिए ही होनी चाहिए। RPSL-पंजीकृत नाविकों को अनिवार्य बीमा, कानूनी सुरक्षा और पार्थिव शरीर को वतन वापस लाने की पूरी सुविधा मिलती है।
हाई-रिस्क जोन के लिए 10 लाख का अतिरिक्त कवर
संघर्षपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए नौवहन निदेशालय ने मार्च 2026 से जोखिम भरे इलाकों (जैसे फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और लाल सागर) के लिए विशेष नीति लागू की है। इसके तहत हाई-रिस्क क्षेत्र में मौत होने पर 10 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि प्रदान की जाती है। गंभीर रूप से दिव्यांग होने की स्थिति में 6 लाख रुपये की आर्थिक मदद और कंपनियों के अनिवार्य बीमा का लाभ मिलता है। इस ताजा हादसे के बाद संघर्ष क्षेत्रों में जान गंवाने वाले भारतीय नाविकों का कुल आंकड़ा बढ़कर 20 पहुंच गया है।
नेशनल हाईवे पर ट्रक में लगी भीषण आग, घंटों चला राहत अभियान
21 Jul, 2026 09:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र / शाहाबाद: दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर शाहाबाद में बराडा चौक के पास एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में ट्रक धू-धूकर जल उठा। अंबाला से करनाल की तरफ बजरी के कट्टे ले जा रहे ट्रक और बुलेट मोटरसाइकिल के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, हालांकि ट्रक को भारी नुकसान पहुंचा है।
बुलेट मोटरसाइकिल की सीधी टक्कर के बाद भड़की चिंगारी
यह हादसा सुबह के वक्त हुआ जब हाईवे पर रफ्तार भर रहे ट्रक के सामने अचानक एक बुलेट बाइक आ गई। दोनों वाहनों की आमने-सामने की टक्कर इतनी भीषण थी कि बुलेट सीधे ट्रक के निचले हिस्से में जा घुसी। टकराते ही घर्षण के कारण निकली चिंगारी ने देखते ही देखते आग का रूप ले लिया और ट्रक लपटों में घिर गया।
बाल-बाल बचा बाइक सवार, मौके से हुआ फरार
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो बुलेट चालक बेहद किस्मत वाला रहा जो इतने बड़े हादसे के बावजूद सुरक्षित बच निकला। टक्कर होते ही वह बाइक से दूर छिटक गया। हालांकि, हादसे के तुरंत बाद घबराहट में वह अपनी जलती बाइक को ट्रक के नीचे ही छोड़कर मौके से भाग निकला, जिसकी तलाश की जा रही है।
दमकल और पुलिस टीम की त्वरित कार्रवाई, जांच शुरू
हादसे की खबर मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया। सूचना मिलते ही डायल 112 और शाहाबाद थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने यातायात सुचारू कराया और भागे हुए बुलेट चालक की तलाश शुरू कर दी है।
सुन्नी मौलवी मोहम्मद अनवर की हत्या, आरोपियों की तलाश तेज
21 Jul, 2026 09:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: ईरान के दक्षिण-पूर्वी सीमावर्ती प्रांत सिस्तान-बलूचिस्तान में एक प्रमुख सुन्नी धर्मगुरु की नृशंस हत्या का मामला सामने आया है। मिर्जावेह शहर की अली इब्न अबी तालिब मस्जिद में तड़के अज्ञात बंदूकधारियों ने सुन्नी मौलवी मोहम्मद अनवर रीगी की गोली मारकर हत्या कर दी। स्थानीय प्रशासन और मिर्जावेह प्रांत के गवर्नर ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक सोची-समझी आतंकी वारदात करार दिया है।
तड़के 4 बजे मस्जिद परिसर में हुआ हमला
घटनाक्रम के अनुसार, यह वारदात ईरानी समयानुसार तड़के लगभग 4 बजे घटित हुई। मौलवी अनवर रीगी जब मस्जिद परिसर के समीप मौजूद थे, तभी अचानक पहुंचे सशस्त्र आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। अचानक हुए इस हमले के कारण मौलवी रीगी को संभलने का मौका नहीं मिला और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के वक्त सुबह का समय होने के चलते आसपास कम लोग मौजूद थे, जिसका फायदा उठाकर हमलावर फरार हो गए।
बलूच और सुन्नी समुदाय के प्रभावशाली नेता थे मौलवी
मौलवी मोहम्मद अनवर रीगी सिस्तान-बलूचिस्तान क्षेत्र में बलूच समुदाय और सुन्नी मुसलमानों के एक बेहद सम्मानित और प्रभावशाली धार्मिक नेता थे। वे मिर्जावेह स्थित अली इब्न अबी तालिब मस्जिद के 'इमाम-ए-जुम्मा' के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। स्थानीय स्तर पर सुन्नी समुदाय की सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों को संचालित करने में उनकी प्रमुख भूमिका रहती थी, जिसके कारण क्षेत्र में उनका काफी प्रभाव था।
इलाके में तनाव का माहौल, जांच में जुटी एजेंसियां
तड़के हुई इस हत्या के बाद से पूरे मिर्जावेह शहर और आसपास के इलाकों में भारी तनाव व्याप्त है। घटना के समय और परिस्थितियों को देखते हुए विभिन्न तरह की आशंकाएं और थ्योरीज सामने आ रही हैं। सुरक्षा बलों और जांच एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर ली है तथा हमलावर आतंकियों की धरपकड़ के लिए व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
दिन में डिलीवरी, रात में लेखन; साहित्यिक सम्मान से चमका नाम
21 Jul, 2026 09:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: चीन में फूड डिलीवरी का काम करने वाले 56 वर्षीय वांग जिबिंग ने एक अनूठी उपलब्धि हासिल की है। उन्हें चीन के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक 'लू शुन साहित्य पुरस्कार' से नवाजा गया है। उन्हें यह सम्मान उनके बहुचर्चित कविता संग्रह 'लो फ्लाइट' के लिए प्रदान किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस किताब की अधिकांश कविताएं उन्होंने डिलीवरी के दौरान मिलने वाले चंद खाली लम्हों में कागज़ के छोटे-छोटे टुकड़ों पर लिखी थीं।
डिलीवरी राइडर से मशहूर कवि तक का सफर
वर्ष 2019 के आसपास फूड डिलीवरी राइडर के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले वांग जिबिंग की रचनाएं धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर बेहद लोकप्रिय होने लगीं। डिलीवरी के काम की आपाधापी के बीच भी उन्होंने अपनी रचनात्मकता को जीवित रखा। उनके द्वारा लिखे गए छोटे-छोटे काव्य अंशों ने आम जनता के दिलों को छुआ, जिससे उन्हें एक पहचान मिली और वे एक लोकप्रिय कवि के रूप में उभरकर सामने आए।
200 राइडर्स के संघर्ष और अनुभवों की गाथा
वर्ष 2024 में प्रकाशित हुई उनकी नई किताब 'लो फ्लाइट' मुख्य रूप से डिलीवरी बॉयज़ की दैनिक चुनौतियों, अनवरत संघर्ष और उनके जीवन के कड़वे यथार्थ पर आधारित है। इस संग्रह को तैयार करने के लिए वांग जिबिंग ने लगभग 200 सह-डिलीवरी राइडर्स से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उनके वास्तविक अनुभवों तथा पीड़ा को अपनी कविताओं के माध्यम से पन्नों पर उकेरा, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च साहित्यिक सराहना मिली है।
यूके को मिला नया पीएम, एंडी बर्नहैम ने संभाली कमान; स्टार्मर की विदाई
20 Jul, 2026 06:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटेन में राजनीतिक हलचलों के बीच सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। कीर स्टार्मर के पद छोड़ने के बाद सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के नेतृत्व चुनाव में निर्विरोध जीत दर्ज कर एंडी बर्नहैम ने यूनाइटेड किंगडम के 59वें प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। 56 वर्षीय बर्नहैम ने बकिंघम पैलेस पहुंचकर किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात की और औपचारिक रूप से ब्रिटेन में नई सरकार बनाने का शाही निमंत्रण स्वीकार किया।
10 वर्षों में सातवें प्रधानमंत्री बने एंडी बर्नहैम
ब्रिटिश राजनीति में पिछले एक दशक से जारी उथल-पुथल के बीच एंडी बर्नहैम का प्रधानमंत्री बनना बेहद खास माना जा रहा है। वे पिछले 10 वर्षों के अंतराल में यूनाइटेड किंगडम के सातवें प्रधानमंत्री बने हैं। लेबर पार्टी के भीतर उनके सर्वसम्मति से चुने जाने के बाद देश में नया नेतृत्व स्थापित हुआ है, जिससे ब्रिटिश प्रशासनिक हलकों में नए बदलावों की उम्मीद की जा रही है।
बकिंघम पैलेस में किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात
कीर स्टार्मर द्वारा महामहिम किंग को अपना आधिकारिक त्यागपत्र सौंपने के तुरंत बाद सत्ता हस्तांतरण की औपचारिकताएं तेजी से पूरी की गईं। इसके बाद नव-निर्वाचित नेता एंडी बर्नहैम बकिंघम पैलेस पहुंचे, जहां उन्होंने किंग चार्ल्स तृतीय से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान किंग ने उन्हें औपचारिक रूप से देश की बागडोर संभालने और नई सरकार का गठन करने का बुलावा दिया।
'किसिंग हैंड्स' की ऐतिहासिक परंपरा के साथ मिली कमान
किंग चार्ल्स तृतीय का निमंत्रण स्वीकार करते ही एंडी बर्नहैम आधिकारिक तौर पर यूनाइटेड किंगडम के नए प्रधानमंत्री बन गए। ब्रिटिश राजनीतिक इतिहास और परंपरा में इस शाही एवं आधिकारिक समारोह को 'किसिंग हैंड्स' के नाम से जाना जाता है। इस ऐतिहासिक प्रक्रिया के संपन्न होते ही 10 डाउनिंग स्ट्रीट में नए प्रधानमंत्री के कार्यकाल का आगाज हो गया है।
नये नेतृत्व से देश को बड़ी उम्मीदें
एंडी बर्नहैम के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने और सरकार की कमान संभालने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय और घरेलू नीतियों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। सत्ता संभालने के बाद उनके सामने देश की अर्थव्यवस्था को गति देने और मौजूदा राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। लेबर पार्टी और उनके समर्थक इस नए दौर की शुरुआत को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।
उद्योगों के लिए राहत की खबर, हरियाणा ने मंजूर किए 21 बड़े सुधार
20 Jul, 2026 05:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्रदेश में उद्योगों और निवेशकों के लिए व्यापारिक माहौल को अधिक सुगम, पारदर्शी और अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार के अनुपालन बोझ को घटाने और वि नियमन (डी-रेग्यूलेशन) अभियान के तहत राज्य ने तय किए गए 28 प्राथमिकता वाले सुधारों में से 21 को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस महत्वपूर्ण कदम के साथ ही हरियाणा देश भर में औद्योगिक सुधारों को तेजी से लागू करने वाले अग्रणि राज्यों की सूची में शामिल हो गया है।
निवेशकों के लिए सुगम वातावरण बनाने की पहल
प्रदेश में नए उद्योगों को आकर्षित करने और मौजूदा व्यापारिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य गैर-जरूरी नियमों और कागजी औपचारिकताओं को समाप्त करना है, जिससे निवेशकों को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक रुकावटों का सामना न करना पड़े। इन नए सुधारों के लागू होने से राज्य में व्यापार करना पहले की तुलना में अधिक सरल और पारदर्शी हो जाएगा।
प्राथमिकता वाले सुधारों को तेजी से मिली स्वीकृति
केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 21 प्रमुख सुधारों को अमलीजामा पहना दिया है। यह सफलता दर्शाती है कि प्रदेश सरकार निवेश को बढ़ावा देने और प्रशासनिक सुधारों को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इन नीतिगत बदलावों से छोटे-बड़े सभी प्रकार के उद्यमियों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
मुख्य सचिव ने दिए समयबद्ध समीक्षा के निर्देश
इस पूरी प्रक्रिया को गति देने के लिए आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाकी बचे सुधारों को भी बिना किसी देरी के निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। अधिकारियों को पूरी सतर्कता के साथ इन व्यवस्थाओं को धरातल पर लागू करने के लिए कहा गया है।
एमआईएस पोर्टल पर दर्ज होगी प्रगति रिपोर्ट
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे स्वीकृत सुधारों और उनकी प्रगति से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज समय पर एमआईएस (MIS) पोर्टल पर अपलोड करें। ऐसा करने से राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की उपलब्धियों का सही मूल्यांकन हो सकेगा और केंद्र के आंकड़ों में हरियाणा की स्थिति बेहतर ढंग से प्रदर्शित होगी। सरकार का लक्ष्य शेष सुधारों को भी जल्द पूरा कर राज्य को शीर्ष स्थान दिलाना है।
ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव, एंडी बर्नहैम ने संभाला प्रधानमंत्री पद
20 Jul, 2026 05:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहाँ लेबर पार्टी के नए नेता एंडी बर्नहैम ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। कीर स्टार्मर के त्यागपत्र देने के बाद प्रधानमंत्री की दौड़ में सबसे आगे रहे बर्नहैम को 'किंग ऑफ द नॉर्थ' के नाम से भी जाना जाता है। ब्रिटेन की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच पिछले दस वर्षों में देश को सातवीं बार नया नेतृत्व मिला है, और बर्नहैम के सामने रिफॉर्म यूके जैसी पार्टियों के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करना मुख्य चुनौती होगी।
लेबर पार्टी के नए नेतृत्व का उदय
बीते शुक्रवार को पार्टी के एक विशेष सम्मेलन के दौरान लेबर पार्टी की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमेटी की चेयर शबाना महमूद ने एंडी बर्नहैम को नया मुखिया चुने जाने की आधिकारिक घोषणा की। इस चयन प्रक्रिया में बर्नहैम एकमात्र उम्मीदवार थे, जिसके चलते उन्हें पार्टी का नेतृत्व सौंपने का निर्णय निर्विरोध लिया गया।
प्रधानमंत्री पद की शपथ और संवैधानिक प्रक्रिया
कीर स्टार्मर द्वारा राजा को अपना औपचारिक इस्तीफा सौंपने के बाद संवैधानिक प्रक्रिया के तहत किंग चार्ल्स तृतीय ने एंडी बर्नहैम को सरकार गठन का न्यौता दिया। किंग के आमंत्रण को स्वीकार करते हुए बर्नहैम ने ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली है।
सरकार के समक्ष मुख्य चुनौतियाँ
प्रधानमंत्री बनने के साथ ही एंडी बर्नहैम के सामने कई महत्वपूर्ण कार्य हैं। अपने कार्यकाल की शुरुआत में उन्हें न केवल देश की आंतरिक राजनीतिक स्थिरता को बहाल करना है, बल्कि रिफॉर्म यूके जैसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के बढ़ते दबदबे को भी सीमित करने के लिए ठोस रणनीतियां अपनानी होंगी।
अमेरिका ने बदले वीजा नियम, भारतीय स्टूडेंट्स के भविष्य पर क्यों मंडरा रहा संकट?
20 Jul, 2026 04:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। भारतीय प्रवासियों के प्रमुख नीति समूह 'फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज' (FIIDS) ने अमेरिका के नए वीजा नियमों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि एफ-1 और जे-1 वीजा पर चार साल की नई समय सीमा लागू होने से अंतरराष्ट्रीय छात्रों की पढ़ाई और शोध कार्य बीच में ही अधर में लटक सकते हैं। सितंबर के मध्य से प्रभावी होने जा रहे इस नियम को रोकने के लिए संगठन ने अमेरिकी जनप्रतिनिधियों और आव्रजन सेवा (USCIS) से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
नए वीजा नियमों का छात्रों पर प्रभाव
इस विवादास्पद नीति के तहत पुरानी 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था को हटाकर अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए रहने की अधिकतम अवधि केवल चार साल निश्चित कर दी गई है। इस सीमा में ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) और एसटीईएम ओपीटी की अवधि भी सम्मिलित है। साथ ही, पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाले 60 दिनों के ग्रेस पीरियड को घटाकर अब महज 30 दिन कर दिया गया है। वीजा अवधि के विस्तार के लिए छात्रों को अब फॉर्म आई-539 के माध्यम से पूर्व-अनुमति लेना अनिवार्य होगा, जो प्रक्रियागत जटिलताओं को और बढ़ाएगा।
अनुसंधान और नवाचार क्षमता को चुनौती
विशेषज्ञों का तर्क है कि स्नातक और पीएचडी जैसे उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में औसतन 5 से 6 साल का समय लगता है, ऐसे में चार साल की सीमा अव्यावहारिक है। पहले से ही लाखों लंबित आवेदनों के बोझ तले दबी अमेरिकी आव्रजन प्रणाली वीजा विस्तार के आवेदनों को समय पर निस्तारित करने में सक्षम नहीं दिखती। इस नीति से प्रयोगशालाओं में शोध कार्य बाधित होंगे और अमेरिका अपनी नवाचार क्षमता को खोकर प्रतिस्पर्धी देशों के लिए रास्ता साफ कर सकता है। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय छात्रों का करियर प्रभावित होगा, बल्कि अमेरिकी रिसर्च संस्थानों की उत्पादकता भी घटेगी।
आर्थिक नुकसान और सुधार की मांग
FIIDS ने चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों की घटती संख्या का सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। वर्ष 2025 के फॉल सेमेस्टर में दाखिलों में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान और हजारों नौकरियों का संकट खड़ा हुआ है। संगठन ने मांग की है कि 'ड्यूरेशन-ऑफ-स्टेटस' सुरक्षा को पुन: बहाल किया जाए, ओपीटी को चार साल की गणना से बाहर रखा जाए और 60 दिनों का ग्रेस पीरियड वापस लाया जाए। यदि ये कदम नहीं उठाए गए, तो प्रतिभाओं का पलायन अमेरिका के शैक्षिक भविष्य के लिए बड़ा जोखिम साबित होगा।
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