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पश्चिम एशिया संघर्ष में चीन का हाथ? सबूतों की कमी बनी सवाल
3 Jun, 2026 05:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 'हाउस एप्रोप्रियेशन्स सबकमेटी' की एक अहम सुनवाई के दौरान साफ किया है कि अमेरिका को मौजूदा क्षेत्रीय संकट में चीन द्वारा ईरान को किसी भी तरह की सैन्य मदद देने के सबूत नहीं मिले हैं। विदेश मंत्री रुबियो ने बीजिंग (चीन) से अपील की है कि वह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का साथ दे। रुबियो ने यह भी माना कि चीन ने ईरान को न तो कोई सैन्य सहायता दी है और न ही उसने अमेरिकी अभियानों या उनकी काम करने की क्षमता में कोई अड़चन पैदा की है। अमेरिकी विदेश मंत्री के इस बयान ने दुनिया के सबसे संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दे पर चीन की भूमिका को लेकर वाशिंगटन के नजरिए को साफ कर दिया है।
ईरान के साथ पुराने रिश्ते, लेकिन युद्ध से दूरी
अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस बात को स्वीकार किया कि ईरान के पास चीन में बने कुछ सैन्य हथियार और उपकरण जरूर हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक संबंध रहे हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि हालिया संघर्ष में चीन की तरफ से ऐसी कोई भी गतिविधि नहीं देखी गई है, जिससे युद्ध की स्थिति बिगड़े या सैन्य संतुलन पर कोई असर पड़े। रुबियो ने संकट के इस दौर में चीन के रवैये को बेहद 'सावधानीपूर्ण' बताया। उनका कहना था कि बीजिंग ने ईरान के साथ अपनी गहरी दोस्ती के बावजूद इस जंग में सीधे तौर पर कूदने से खुद को बचाए रखा है।
संयुक्त राष्ट्र में रचनात्मक भूमिका और वीटो न करने की अपील
मार्को रुबियो ने चीन से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अधिक सकारात्मक भूमिका निभाने का आग्रह किया है। अमेरिका वर्तमान में सुरक्षा परिषद के एक ऐसे प्रस्ताव का समर्थन कर रहा है, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के लिए पैदा हुई बाधाओं को दूर करना है। दुनिया के तेल व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। रुबियो ने चीन को घेरते हुए कहा कि अगर वह वास्तव में इस समुद्री रास्ते को बंद किए जाने के खिलाफ है, तो उसे इस अमेरिकी प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए, या कम से कम अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल करके इसे रोकना नहीं चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में चीन का खुद का बड़ा आर्थिक फायदा छिपा है।
समुद्री संकट से चीन की अर्थव्यवस्था को खतरा
अमेरिकी विदेश मंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर ईरान की वजह से इस समुद्री मार्ग में लंबे समय तक रुकावट बनी रहती है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान खुद चीन को उठाना पड़ेगा। चीन दुनिया की सबसे बड़ी निर्यात-आधारित (एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड) अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जो वैश्विक व्यापार और कच्चे तेल की सप्लाई पर निर्भर है। अगर दुनिया भर के देशों को ईंधन (ईंधन और तेल) पर ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा, तो उनकी चीजें खरीदने की क्षमता घट जाएगी। बाजार में मांग कम होने का सीधा असर चीन के निर्यात और उसकी पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है।
भारत के लिए क्यों मायने रखता है यह घटनाक्रम?
यह पूरा घटनाक्रम भारत के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। भारत और चीन दोनों ही खाड़ी देशों (मिडल ईस्ट) से आने वाले कच्चे तेल और ऊर्जा संसाधनों के सबसे बड़े खरीदार हैं। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण सप्लाई चेन लंबे समय तक प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और जहाजों के किराए (शिपिंग कॉस्ट) में बढ़ोतरी के रूप में दिखेगा। यह स्थिति न केवल भारत के आर्थिक बजट को बिगाड़ सकती है, बल्कि पूरे एशिया की सप्लाई चेन के लिए एक नया संकट खड़ा कर सकती है।
दिल दहला देने वाली दुर्घटना: बैक हो रही कचरा गाड़ी के नीचे आया दो साल का मासूम, मौके पर मची चीख-पुकार
3 Jun, 2026 05:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फतेहाबाद | हरियाणा के भूना शहर के वार्ड नंबर पांच में बुधवार सुबह एक बेहद हृदयविदारक हादसा सामने आया है। यहां गली में खेल रहा दो साल का एक मासूम बच्चा नगर पालिका की कचरा उठाने वाली गाड़ी (डोर-टू-डोर गारबेज व्हीकल) की चपेट में आ गया। इस दर्दनाक दुर्घटना में अंश नामक मासूम गंभीर रूप से जख्मी हो गया, जिसे आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया। मगर, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बाद भी उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद से पूरे इलाके और पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
संकरी गली में बैक करते समय हुआ हादसा, चालक की नजर से चूका मासूम
चश्मदीदों के मुताबिक, यह वाकया सुबह करीब नौ बजे बाबा राणाधीर मंदिर के सामने वाली गली में पेश आया। उस वक्त ठेकेदार की कचरा संग्रहण गाड़ी रोज की तरह वार्ड से कूड़ा उठाने आई थी। उसी दौरान गली के मुहाने पर पानी का एक टैंकर खड़ा होने की वजह से रास्ता काफी संकरा हो गया था। जगह कम होने के कारण ड्राइवर बेहद सावधानी से गाड़ी को पीछे (बैक) कर रहा था, लेकिन इसी बीच खेल रहा मासूम अंश अचानक वाहन के पिछले हिस्से के नीचे आ गया। गाड़ी बड़ी होने के कारण चालक को नीचे खेल रहा बच्चा दिखाई नहीं दिया।
मौके पर मची चीख-पुकार, पुलिस ने वाहन को लिया कब्जे में
हादसा होते ही गली में जोर-जोर से चीख-पुकार मच गई। रोने-चिल्लाने की आवाज सुनकर परिजन और आस-पड़ोस के लोग घरों से बाहर दौड़े और लहुलुहान हालत में बच्चे को नजदीकी नागरिक अस्पताल लेकर भागे, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस और वार्ड के पार्षद भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। कानून व्यवस्था और स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने दुर्घटना को अंजाम देने वाली कचरा गाड़ी को तुरंत अपने कब्जे में ले लिया है।
कचरा गाड़ियों में हेल्पर रखने की उठी मांग, परिजनों की शिकायत पर होगी कार्रवाई
इस दर्दनाक हादसे के बाद स्थानीय निवासियों में भारी रोष देखा जा रहा है। वार्ड के लोगों का कहना है कि संकरी गलियों में सुबह के वक्त अक्सर छोटे बच्चे खेलते रहते हैं। ऐसे में नगर पालिका और ठेकेदार की इन गाड़ियों के साथ एक हेल्पर (सहयोगी) का होना बेहद जरूरी है, जो गाड़ी को बैक करवाते समय पीछे खड़े होकर ध्यान रख सके। लोगों ने प्रशासन से कचरा उठाने के समय में भी बदलाव करने की मांग की है। स्थानीय थाना पुलिस के अनुसार, परिजनों द्वारा दी जाने वाली लिखित शिकायत के आधार पर फरार चालक के खिलाफ कानून के तहत सख्त मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जापान में भारतीय रेस्टोरेंट उद्योग पर संकट की लकीर
3 Jun, 2026 04:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो। जापान में भारतीय स्वाद और खानपान की पहचान बना चुका रेस्टोरेंट उद्योग इन दिनों अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। देशभर में चल रहे करीब 5,000 भारतीय रेस्टोरेंट पर बंद होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। लगातार बढ़ती लागत, सरकार के सख्त नियम और काम करने वाले कर्मचारियों (श्रमिकों) की भारी कमी इस संकट की मुख्य वजह बनकर उभरे हैं। जापान में रहने वाले लगभग 69 हजार भारतीयों में से एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रेस्टोरेंट कारोबार से जुड़ा हुआ है। भारतीय और नेपाली समुदायों द्वारा चलाए जाने वाले ये रेस्टोरेंट जापानी शहरों में अपनी खास करी और मसालेदार व्यंजनों के लिए बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन अब इनका अस्तित्व ही दांव पर लग गया है।
वीजा और रोजगार के सख्त नियमों की दोहरी मार
इस संकट की सबसे बड़ी वजह जापान सरकार द्वारा विदेशी कर्मचारियों को लेकर नियमों को कड़ा करना है। पहले के समय में कुशल विदेशी कारीगरों और रसोइयों (शेफ) को काफी आसानी से वीजा मिल जाता था, लेकिन अब सरकार ने स्थायी निवास (परमानेंट रेजिडेंसी) और रोजगार से जुड़ी शर्तों को बेहद सख्त कर दिया है। इसके साथ ही, रेस्टोरेंट मालिकों पर टैक्स और कागजी कार्रवाई (प्रशासनिक खर्च) का बोझ भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। कई छोटे व्यवसायियों का दर्द है कि मंदी के कारण उनकी कमाई लगातार घट रही है, जबकि दुकानों का किराया, कर्मचारियों का वेतन और अन्य जरूरी खर्च लगातार आसमान छू रहे हैं।
नेपाली कर्मचारियों की कमी से थमी रफ्तार
जापान में भारतीय रेस्टोरेंट उद्योग की सफलता के पीछे नेपाली कर्मचारियों की भी एक बहुत बड़ी भूमिका रही है। अमूमन इन रेस्टोरेंटों में काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारी नेपाल से आते हैं, लेकिन वीजा नियमों में हुए हालिया बदलावों के कारण अब नए श्रमिकों का जापान आना बेहद मुश्किल हो गया है। इस वजह से छोटे और मध्यम स्तर के रेस्टोरेंट मालिकों के पास काम करने वाले लोगों का टोटा पड़ गया है और वे भारी दबाव में काम कर रहे हैं।
आजीविका और भारतीय पहचान पर संकट
इस उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों और कारोबारियों का मानना है कि यदि जापान सरकार ने इन कड़े नियमों में जल्द ही कोई ढील या राहत नहीं दी, तो आने वाले कुछ ही सालों में हजारों भारतीय रेस्टोरेंट हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे। ऐसा होने से न केवल वहां रह रहे हजारों लोगों की आजीविका और रोजगार छिन जाएगा, बल्कि जापान की संस्कृति में घुल-मिल चुकी भारतीय खानपान की खास पहचान को भी एक बड़ा और गहरा झटका लगेगा।
संसद में नया बिल: तिब्बत में चीन के अत्याचारों की जांच करेगा अमेरिका
3 Jun, 2026 01:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन:अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में दोनों प्रमुख पार्टियों (रिपब्लिकन और डेमोक्रेट) के सांसदों ने मिलकर एक नया बिल पेश किया है। 'तिब्बत एट्रोसिटीज डिटरमिनेशन एक्ट' नाम के इस बिल के तहत अमेरिकी विदेश विभाग को यह तय करना होगा कि क्या चीन ने तिब्बत के लोगों के खिलाफ नरसंहार या मानवता के खिलाफ कोई बड़ा अपराध किया है। इस बिल को न्यू जर्सी के रिपब्लिकन प्रतिनिधि क्रिस स्मिथ और न्यूयॉर्क के डेमोक्रेट सांसद टॉम सुओजी ने मंगलवार को सदन में रखा। यह बिल सीनेट में पहले से पेश हो चुके एक दूसरे बिल का ही रूप है, जिसे सीनेटर रिक स्कॉट और जेफ मर्कले ने आगे बढ़ाया था।
एक साल के अंदर देनी होगी रिपोर्ट
अगर यह बिल पास होकर कानून का रूप ले लेता है, तो अमेरिकी विदेश मंत्री को एक साल के भीतर संसद (कांग्रेस) को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस रिपोर्ट में तिब्बत के अंदर चीन की सभी गतिविधियों का पूरा आकलन किया जाएगा। इस जांच में सरकारी आंकड़ों के साथ-साथ स्वतंत्र स्रोतों से मिली जानकारियों को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिए जाएंगे कि इस मामले में अमेरिका चीन के खिलाफ क्या कदम उठा सकता है, जैसे कि आर्थिक प्रतिबंध लगाना, अधिकारियों का वीजा रोकना या कोई बड़ी कूटनीतिक कार्रवाई करना।
इन गंभीर आरोपों की होगी जांच
इस कानून के बनने के बाद अमेरिकी विदेश विभाग को चीन के कई गंभीर अत्याचारों की जांच करनी होगी। इसमें तिब्बतियों की मनमानी हत्याएं, उन्हें गंभीर शारीरिक या मानसिक नुकसान पहुंचाना, अमानवीय परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर करना और बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेना शामिल है। इसके साथ ही जबरन नसबंदी, गर्भपात, और तिब्बती बच्चों को जबरन सरकारी बोर्डिंग स्कूलों में भेजकर उनके परिवारों व समुदाय से अलग करने के आरोपों की भी पड़ताल की जाएगी, जहां कथित तौर पर उनकी संस्कृति और पहचान को बदलने की कोशिश की जाती है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि चीन किस तरह तिब्बती बौद्ध धर्म, वहां की भाषा और संस्कृति को दबाने की कोशिश कर रहा है।
मानवाधिकारों की रक्षा के लिए उठाई आवाज
सांसद क्रिस स्मिथ का कहना है कि चीन लंबे समय से तिब्बत में गंभीर अत्याचार कर रहा है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इन अपराधों को साफ तौर पर दुनिया के सामने लाना जरूरी है ताकि जिम्मेदार चीनी अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया जा सके। वहीं, टॉम सुओजी और सीनेटर रिक स्कॉट ने कहा कि चीन की यह कार्रवाई सिर्फ तिब्बत ही नहीं बल्कि वैश्विक लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी एक बड़ा खतरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तिब्बतियों, उइगर मुसलमानों और हांगकांग के लोकतंत्र समर्थकों के साथ हो रहे बुरे बर्ताव के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।
जानिए सेक्शन 301 क्या है और कैसे US बना रहा 60 देशों की टैरिफ लिस्ट
3 Jun, 2026 01:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन:अमेरिका भारत समेत दुनिया के करीब 60 देशों के खिलाफ कड़े व्यापारिक कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने इशारा किया है कि 1974 के अमेरिकी व्यापार कानून की 'धारा 301' के तहत चल रही जांच के नतीजे अगले कुछ हफ्तों में आ सकते हैं। इस जांच के दायरे में भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया सहित 70 से ज्यादा देशों की व्यापारिक नीतियां शामिल हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर का कहना है कि अगर जांच में गलत व्यापारिक तौर-तरीके, जरूरत से ज्यादा उत्पादन या जबरन मजदूरी (जबरन श्रम) कराने जैसी बातें सच साबित होती हैं, तो अमेरिका इन देशों के सामान पर अतिरिक्त टैक्स (टैरिफ) या अन्य कारोबारी पाबंदियां लगा सकता है।
क्या है धारा 301 और क्यों हो रही जांच?
धारा 301 अमेरिका का एक ऐसा कानून है जो उनकी सरकार को यह अधिकार देता है कि अगर कोई देश अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचाता है या गलत नीतियां अपनाता है, तो उसके खिलाफ जवाबी कार्रवाई की जाए। अमेरिकी जांच एजेंसी का मानना है कि इन 60 देशों की नीतियां अमेरिकी कारोबार में अड़चनें पैदा कर रही हैं। अमेरिका की यह संघीय एजेंसी ही देश की विदेश व्यापार नीति तय करने और ऐसी जांच करने के लिए जिम्मेदार है। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक पुराने टैक्स नियम को रद्द किए जाने के बाद, ट्रंप प्रशासन इसी धारा 301 का सहारा लेकर अलग-अलग देशों पर नए टैक्स लगाने की तैयारी में है।
भारत समेत कई देशों पर लगे आरोप
अमेरिकी बयान के अनुसार, भारत सहित 54 देश ऐसे सामानों के एक्सपोर्ट को रोकने में नाकाम रहे हैं, जिन्हें बनाने में जबरन मजदूरी कराने का शक है। इस लिस्ट में भारत के साथ-साथ बांग्लादेश, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, सऊदी अरब, सिंगापुर और यूएई जैसे बड़े देश भी शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उनका मुख्य मकसद अमेरिकी फैक्ट्रियों को मजबूत करना और उत्पादन के काम को वापस अमेरिका लाना है। उनका मानना है कि दुनिया भर में चल रहे गलत व्यापारिक तौर-तरीकों और बढ़ते व्यापार घाटे की वजह से ही अमेरिका को यह सख्त कदम उठाना पड़ रहा है। इस जांच रिपोर्ट के आने के बाद भारत के निर्यात पर भी बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
ट्रंप ने नेतन्याहू को फोन पर लगाई डांट, कहा—मैं न होता तो जेल में होते
3 Jun, 2026 01:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन/तेल अवीव: इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और दक्षिणी बेरुत पर इजरायली हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बेहद तीखी बातचीत की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स (विशेष रूप से अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस और न्यूयॉर्क पोस्ट) के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच हुई इस फोन कॉल के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप बेहद गुस्से में थे और उन्होंने बेहद कड़े व तल्ख शब्दों का इस्तेमाल किया।
ट्रंप की इस नाराजगी की मुख्य वजह यह है कि इजरायल द्वारा लेबनान में किए जा रहे हमलों के कारण अमेरिका और ईरान के बीच चल रही महत्वपूर्ण शांति वार्ता खटाई में पड़ती दिख रही है।
'पूरी तरह पागल हो चुके हो' – फोन कॉल की इनसाइड स्टोरी
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से लीक हुई जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने बेरुत में इजरायली हमलों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए नेतन्याहू से इन कार्रवाइयों को तुरंत रोकने के लिए कहा। बातचीत के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू से यहां तक कह दिया:
"तुम पूरी तरह पागल हो चुके हो। अगर मैं न होता, तो तुम आज जेल में होते (नेतन्याहू के भ्रष्टाचार ट्रायल के संदर्भ में)। मैं तुम्हारी जान बचा रहा हूं। इस समय तुम्हारी इन हरकतों की वजह से हर कोई तुमसे और इजरायल से नफरत कर रहा है।"
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप इस बात से नाराज थे कि इजरायल सिर्फ एक हिज्बुल्लाह कमांडर को निशाना बनाने के लिए पूरी इमारतें तबाह कर रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर इजरायल अलग-थलग पड़ रहा है।
ईरान की बातचीत से पीछे हटने की धमकी
यह विवाद तब और गहरा गया जब सोमवार को लेबनान के दक्षिणी सैदा जिले के मारवानियेह कस्बे पर इजरायली हमला हुआ, जिसमें एक महिला और दो बच्चों समेत छह लोगों की मौत हो गई। लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इन मौतों की पुष्टि की है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद, ईरान ने साफ कर दिया कि वह अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को सस्पेंड (स्थगित) कर देगा, क्योंकि अमेरिका इजरायल को लेबनान में आगे बढ़ने से नहीं रोक पा रहा है।
UNIFIL की भूमिका पर उठे सवाल
जैसे-जैसे इजरायली सैनिक दक्षिणी लेबनान के अंदर गहराई तक प्रवेश कर रहे हैं, वहां संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन UNIFIL (United Nations Interim Force in Lebanon) की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों और विश्लेषकों का पूछना है कि जब इस मिशन का मुख्य काम ही युद्धविराम की निगरानी करना और क्षेत्र में शांति बनाए रखना है, तो यह इजरायली सेना को आगे बढ़ने से रोकने में नाकाम क्यों साबित हो रहा है।
अपने फैसले पर अड़े रहे नेतन्याहू
अमेरिकी राष्ट्रपति की इस भारी नाराजगी और फटकार के बावजूद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपने सख्त रुख पर अड़े हुए हैं। इस फोन कॉल के बाद नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी बात रखते हुए साफ किया:
उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को स्पष्ट बता दिया है कि इजरायल का रुख बिल्कुल नहीं बदला है।
अगर हिज्बुल्लाह ने इजरायली शहरों और नागरिकों पर हमले बंद नहीं किए, तो इजरायल बेरुत में उसके आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाना जारी रखेगा।
इसके साथ ही, इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) दक्षिणी लेबनान में अपनी जमीनी कार्रवाई को जारी रखेंगी।
ईरान की कार्रवाई से बढ़ा तनाव, कुवैत-बहरीन पर दागीं मिसाइलें
3 Jun, 2026 11:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन/कुवैत सिटी: पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी सेना ने पड़ोसी देशों को निशाना बनाकर किए गए ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों की एक बड़ी लहर को नाकाम कर दिया है। इस हमले के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केश्म द्वीप पर जवाबी कार्रवाई भी की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि ईरान ने क्षेत्र के देशों की तरफ कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, लेकिन वे अपने मंसूबों में पूरी तरह नाकाम रहीं।
कुवैत और बहरीन पर हुए हमलों को हवा में मार गिराया
सेंटकॉम के मुताबिक, ईरान की ओर से कुवैत पर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलें या तो अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाईं या उन्हें रास्ते में ही नष्ट कर दिया गया। वहीं, बहरीन को निशाना बनाकर लॉन्च की गई तीन मिसाइलों को अमेरिकी और बहरीन के वायु रक्षा बलों (एयर डिफेंस सिस्टम) ने मुस्तैदी दिखाते हुए हवा में ही रोक दिया। इसके बाद बुधवार सुबह हमलों का दूसरा दौर शुरू हुआ, जिसमें कुवैत के एयर डिफेंस नेटवर्क ने देश के अलग-अलग हिस्सों में आ रहे मिसाइलों और ड्रोनों को सक्रियता से रोककर बेअसर कर दिया।
ईरानी मीडिया का दावा: अमेरिकी ठिकानों पर किया हमला
इन हमलों के बीच, ईरान के सरकारी प्रसारक (IRIB) ने एक अलग दावा किया है। ईरान का कहना है कि फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और केश्म द्वीप क्षेत्र में अमेरिका की आक्रामक व शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों के जवाब में कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को जानबूझकर निशाना बनाया गया था। दूसरी तरफ, कुवैती सेना के जनरल स्टाफ ने पुष्टि की है कि शहर में सुनाई दे रहे तेज धमाके उनके रक्षात्मक सिस्टम द्वारा दुश्मन की मिसाइलों को नष्ट किए जाने के कारण हो रहे हैं।
कुवैत में सुरक्षा अलर्ट और गाइडलाइन जारी
कुवैती सेना ने जनता के लिए एक जरूरी चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि लोग मिसाइलों के गिरे हुए मलबे, छर्रों या किसी भी अज्ञात वस्तु के पास न जाएं और न ही उसे छुएं, क्योंकि इससे गंभीर सुरक्षा जोखिम हो सकता है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता, कर्नल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने नागरिकों और प्रवासियों से अपील की है कि वे ऐसा कोई भी मलबा दिखने पर तुरंत आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 112 पर सूचना दें। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल सरकारी माध्यमों पर भरोसा करने को कहा है।
बहरीन में बजाए गए खतरे के सायरन
ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच सीधे सैन्य टकराव के बाद पूरे क्षेत्र की स्थिति तेजी से बिगड़ती जा रही है। बढ़ते हुए तनाव को देखते हुए पड़ोसी देश बहरीन में भी आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू कर दिए गए हैं। बहरीन के गृह मंत्रालय ने देश में चेतावनी सायरन बजाकर नागरिकों को शांत रहने और तुरंत अपने नजदीकी सुरक्षित स्थानों (बंकरों या सुरक्षित कमरों) में जाने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल, अमेरिकी सेंटकॉम और कुवैती सेना स्थिति पर पूरी तरह नजर बनाए हुए हैं।
वैश्विक व्यापार पर असर, अमेरिका 60 देशों पर टैरिफ लगाने को तैयार
3 Jun, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: एक तरफ जहां अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन भारत के खिलाफ सख्त आर्थिक कदम उठाने की तैयारी में है। अमेरिकी सरकार एक बार फिर भारत पर नया टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की योजना बना रही है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत सहित दुनिया के 60 देशों पर यह नया टैरिफ लगाने का प्रस्ताव पेश किया है। इस कार्रवाई की मुख्य वजह यह बताई गई है कि भारत समेत ये सभी देश बंधुआ या जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से बनने वाले सामानों के निर्यात पर प्रभावी रोक लगाने में नाकाम रहे हैं।
अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत प्रस्ताव
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अमेरिकी व्यापार कानून 1974 की धारा 301 के तहत एक जांच में यह पाया गया है कि इन 60 देशों की नीतियां और काम करने का तरीका अमेरिकी व्यापार पर बिना वजह का दबाव बनाते हैं और उसे नुकसान पहुंचाते हैं। आपको बता दें कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय वहां की एक प्रमुख संघीय एजेंसी है, जो अमेरिका की विदेशी व्यापार नीति (फॉरेन ट्रेड पॉलिसी) तैयार करने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है।
भारत के साथ ब्रिटेन, जापान और यूएई भी सूची में शामिल
अमेरिकी एजेंसी के मुताबिक, भारत सहित करीब 54 देश ऐसे सामानों की विदेशों में बिक्री पर जरूरी रोक लगाने में असफल रहे हैं, जिन्हें मजदूरों से जबरदस्ती या बंधुआ तरीके से काम करवाकर तैयार किया जाता है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस सूची में केवल विकासशील देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका के कई करीबी मित्र और बड़े विकसित देश भी शामिल हैं। भारत के अलावा इस फेहरिस्त में ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जापान, सिंगापुर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बांग्लादेश, बहरीन और चीन जैसे देशों के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार: पीजी डॉक्टर्स अब सीधे सिविल अस्पतालों में देंगे सेवाएं, नॉन-क्लीनिकल संभालेंगे एकेडमिक्स
3 Jun, 2026 10:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार ने सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और मेडिकल कॉलेजों में व्याख्याताओं की कमी को दूर करने के लिए सेवारत डॉक्टरों की पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) नीति में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। इस नए नीतिगत बदलाव के माध्यम से राज्य सरकार चिकित्सा शिक्षा के स्तर को सुधारने के साथ-साथ जिला अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी सुदृढ़ करना चाहती है।
क्लीनिकल पीजी डॉक्टरों को बॉन्ड से मुक्ति, अस्पतालों में सुधरेंगी सेवाएं
नई नीति के अनुसार, अब जो सरकारी डॉक्टर क्लीनिकल विषयों में पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) की पढ़ाई पूरी करेंगे, उन्हें मेडिकल एजुकेशन बॉन्ड की बाध्यता से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद ये विशेषज्ञ डॉक्टर मेडिकल कॉलेजों में रुकने के बजाय सीधे नागरिक अस्पतालों (सिविल हॉस्पिटल्स) में अपनी सेवाएं देंगे। इस फैसले से जिला स्तर के बड़े अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी दूर होगी और आम जनता को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर इलाज मिल सकेगा। सरकार ने यह राहत हरियाणा सिविल डेंटल सर्विस के डॉक्टरों को भी प्रदान की है।
नॉन-क्लीनिकल डॉक्टरों के लिए मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाना अनिवार्य
इसके विपरीत, प्री-क्लीनिकल और पैरा-क्लीनिकल जैसे नॉन-क्लीनिकल विषयों (जैसे एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी, पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी) में पीजी करने वाले डॉक्टरों के लिए नियम अलग रखे गए हैं। इन विषयों के डॉक्टरों को अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद तीन वर्षों तक चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के अधीन आने वाले मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण कार्य करना होगा। यह अनिवार्य अवधि पूरी होने के बाद डॉक्टरों को उसी विभाग में स्थायी रूप से संकाय (फैकल्टी) के तौर पर शामिल होने का विकल्प भी दिया जाएगा। विभाग के उच्च अधिकारियों के मुताबिक, इस कदम का मुख्य उद्देश्य हाल ही में खुले नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए योग्य अध्यापकों की कमी को पूरा करना है।
पुरानी नीति के प्रावधानों में बदलाव और संतुलन बनाने की कोशिश
यह नया संशोधन वर्ष दो हजार बाईस में लागू की गई उस नीति में किया गया है, जिसके तहत सेवारत डॉक्टरों को राज्य के मेडिकल कॉलेजों में चालीस प्रतिशत आरक्षित सीटों पर पीजी करने का मौका मिलता था। पुरानी व्यवस्था के तहत हर इन-सर्विस डॉक्टर को पढ़ाई के बाद तीन साल तक मेडिकल या डेंटल कॉलेजों में काम करना जरूरी था, जिससे जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों का भारी अकाल पड़ जाता था। स्वास्थ्य विभाग लंबे समय से इस नियम को बदलने की मांग कर रहा था। सरकार का मानना है कि इस संशोधित नीति से राज्य में चिकित्सा शिक्षा के स्तर और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच एक सटीक संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।
बर्थडे पार्टी में खूनी खेल: जश्न के माहौल में युवक की नृशंस हत्या, हमलावरों ने तेजधार हथियारों से उतारा मौत के घाट
3 Jun, 2026 10:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भूना | गुरुग्राम से अपने भतीजे के जन्मदिवस समारोह में शामिल होने आए एक युवक की मंगलवार देर रात अपराधियों ने धारदार हथियारों से गोदकर बेरहमी से हत्या कर दी। हमलावरों ने मोटरसाइकिल से जा रहे युवक को रास्ते में घेर लिया और पहले उसके साथ जमकर मारपीट की। इसके बाद धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ वार करने के बाद क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए उसके ऊपर गाड़ी भी चढ़ा दी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) नरसिंह और सीआईए की टीम भारी बल के साथ मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
मुखबिरी के शक में अपराधियों ने रास्ते से किया अगवा
मृतक की पहचान भूना के वार्ड संख्या पांच के रहने वाले तेईस वर्षीय सचिन कुमार के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में इस जघन्य हत्याकांड का आरोप विक्रम भांभू गैंग के गुर्गों पर लगा है। बताया जा रहा है कि इस आपराधिक गिरोह को शक था कि सचिन पुलिस के लिए उनकी जासूसी और मुखबिरी करता था। मंगलवार रात करीब साढ़े दस बजे जब सचिन अपने एक दोस्त के साथ बाइक पर सवार होकर शहर की तरफ जा रहा था, तभी शहीद उधम सिंह चौक के पास बदमाशों ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया। इसके बाद वाल्मीकि चौक के पास उसे जबरन रोककर अगवा कर लिया गया।
बर्बरतापूर्वक हाथ-पैर तोड़े, फिर शरीर पर चढ़ा दी गाड़ी
अपराधी सचिन को अगवा कर हिसार रोड की तरफ ले गए, जहां उन्होंने उस पर जानलेवा हमला बोल दिया। बदमाशों ने बेरहमी से पीटकर पहले उसके हाथ-पैर तोड़ दिए और फिर उसकी गर्दन व छाती पर नुकीले व धारदार हथियारों से कई गहरे वार किए। इतने से भी जब मन नहीं भरा, तो तड़पते हुए सचिन के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देकर सभी हमलावर वहां से भाग निकले। स्थानीय निवासियों द्वारा आपातकालीन सेवा डायल-एक सौ बारह पर सूचना दिए जाने के बाद पुलिस ने मृतक के पिता राजबीर की तहरीर पर दस नामजद और पच्चीस अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
गुरुग्राम की निजी कंपनी में कार्यरत था होनहार बेटा
सचिन के आकस्मिक निधन से उसके परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजनों के मुताबिक, उसके पिता राजबीर सिंह मजदूरी करके घर चलाते हैं। परिवार में तीन भाई-बहनों में सचिन दूसरे स्थान पर था, जबकि उसकी एक बड़ी बहन और एक छोटा भाई सुनील कुमार है। तीनों अभी अविवाहित हैं। सचिन पहले स्थानीय कॉलेज से बीए की पढ़ाई कर रहा था, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उसने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी और गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में नौकरी करने लगा था। फिलहाल पुलिस की कई टीमें फरार आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
दुर्लभ खनिजों को लेकर वैश्विक होड़ तेज, अमेरिका ने बताया कूटनीति का आधार
3 Jun, 2026 08:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक महत्वपूर्ण बयान में कहा है कि दुर्लभ और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) अब अमेरिकी कूटनीति का एक मुख्य स्तंभ बन चुके हैं। दुनिया भर में फैले अमेरिकी दूतावास अब इन खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति शृंखला (सप्लाई चेन) तैयार करने और इस क्षेत्र में चीन के दबदबे को कम करने के मिशन पर काम कर रहे हैं। रूबियो ने इसे उन्नत विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रक्षा प्रणालियों, सेमीकंडक्टर और क्लीन एनर्जी तकनीकों के भविष्य के लिए सबसे जरूरी संसाधन बताया। अमेरिका अब अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर खनन, शोधन (रिफाइनिंग) और प्रोसेसिंग के नए विकल्प तैयार कर रहा है ताकि चीन पर निर्भरता से पैदा होने वाले खतरों को खत्म किया जा सके।
तीन दर्जन से ज्यादा देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी
मार्को रूबियो के अनुसार, दुर्लभ खनिजों को लेकर हुई एक बड़ी मंत्रिस्तरीय बैठक में तीन दर्जन से अधिक देशों ने हिस्सा लिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका की रणनीति सिर्फ खनिज भंडारों पर अधिकार हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन के बाहर इन सामग्रियों के प्रसंस्करण और शोधन की क्षमता को बढ़ाना भी है। इन कच्चे खनिजों को इस्तेमाल के योग्य उत्पाद में बदलने की क्षमता आज के समय में आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा योजना का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुकी है। अमेरिकी राजनयिक अब दुनियाभर की सरकारों के साथ मिलकर इस सप्लाई चेन की कमजोरियों की पहचान कर रहे हैं और देशों को निवेश के नए स्रोतों से जोड़ रहे हैं।
विकासशील देशों के सामने चीन एक बड़ी चुनौती
अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस बात को स्वीकार किया कि बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास की चाह रखने वाले कई विकासशील देशों के पास अक्सर चीन समर्थित परियोजनाओं को अपनाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होता, क्योंकि वहां निवेश के लिए केवल चीनी कंपनियां ही सबसे पहले पहुंचती हैं। इस चुनौती का सामना करने के लिए अमेरिका अब अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर खनन, प्रसंस्करण, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में मजबूत तथा वित्तीय रूप से व्यावहारिक विकल्प पेश कर रहा है। इसके लिए समान सोच वाले देशों के साथ मिलकर खनिज समृद्ध क्षेत्रों की रणनीतिक परियोजनाओं को आर्थिक और तकनीकी सहायता दी जा रही है।
एक ही देश पर निर्भरता से रणनीतिक जोखिम
मार्को रूबियो ने चेतावनी देते हुए कहा कि आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा को लेकर चिंताएं अब केवल खनिजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह उन सभी क्षेत्रों में फैल चुकी हैं जहां उत्पादन अत्यधिक रूप से कुछ ही जगहों पर केंद्रित हो गया है। कुछ खास उद्योगों में इस अत्यधिक केंद्रीकरण और किसी एक आपूर्तिकर्ता (सप्लायर) पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहने से बड़ा आर्थिक और रणनीतिक जोखिम पैदा हो रहा है। यह मुद्दा आज इसलिए भी वैश्विक चिंता बन गया है क्योंकि पूरी दुनिया की सरकारें इस समय इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों और एआई जैसी उभरती तकनीकों के लिए जरूरी सामग्रियों की सुरक्षित और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटी हुई हैं।
MEA का बड़ा बयान: 'सिर्फ आपसी बातचीत से सुलझेगा भारत-नेपाल बॉर्डर विवाद', 3 जून से वेनेजुएला की राष्ट्रपति का दिल्ली दौरा शुरू
2 Jun, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस ब्रीफिंग में देश की विदेश नीति और कई अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज का बहुप्रतीक्षित भारत दौरा अब 3 से 7 जून के बीच पुनर्निर्धारित किया गया है। इससे पहले वे 1 जून को अंतरराष्ट्रीय बिग कैट्स गठबंधन सम्मेलन का हिस्सा बनने वाली थीं, लेकिन अपरिहार्य कारणों से उस कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति का यह छठा भारत दौरा होगा, जिसमें दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रगाढ़ता को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति का दौरा, पीएम मोदी के साथ इन 7 अहम क्षेत्रों पर होगी बात
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ उनके देश का एक उच्च स्तरीय मंत्री-मंडल भी भारत आ रहा है। इस यात्रा के दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। इस शिखर बैठक का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के बीच ऊर्जा (क्रूड ऑयल), व्यापारिक लेन-देन, वित्तीय निवेश, फार्मास्यूटिकल्स (दवा निर्माण), जन-स्वास्थ्य, परिवहन नेटवर्क और रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) जैसे 7 प्रमुख क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करना है। कूटनीतिक जानकारों के मुताबिक, इस यात्रा से भारत-वेनेजुएला संबंधों के बीच आर्थिक सहयोग का एक नया अध्याय शुरू होगा।
भारत-नेपाल सीमा का 98% हिस्सा तय, रबी लामिछाने के दौरे के बीच तीसरे देश को कड़ा संदेश
पड़ोसी देश नेपाल के साथ चल रहे सीमा मुद्दों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बेहद स्पष्ट रूप से भारत का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि भारत और नेपाल की भौगोलिक सीमा का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा आपसी सहमति से पहले ही पूरी तरह निर्धारित किया जा चुका है। बचे हुए कुछ सीमित हिस्सों में जो विसंगतियां हैं, वे मुख्य रूप से सीमावर्ती नदियों द्वारा अपना प्राकृतिक मार्ग बदलने के कारण पैदा हुई हैं, जिन्हें दोनों देश आपसी संवाद के जरिए सुलझा रहे हैं। भारत ने दोटूक लहजे में कहा कि यह पूरी तरह से भारत और नेपाल का आपसी द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी भी 'तीसरे देश' के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। इसके साथ ही, नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी आरएसपी (RSP) के अध्यक्ष रबी लामिछाने के भारत आगमन पर मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच बहुआयामी ऐतिहासिक संबंध हैं और वे यहाँ कई उच्च स्तरीय बैठकों का हिस्सा बनेंगे।
कश्मीर पर पाकिस्तान-यूरोपीय संघ के साझा बयान पर भारत की तीखी आपत्ति, आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं
पाकिस्तान और यूरोपीय संघ (EU) द्वारा जारी किए गए एक संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का अवांछित जिक्र किए जाने पर भारत सरकार ने बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार किया है। विदेश मंत्रालय ने इस पर अपनी तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की टिप्पणियां भारत के संप्रभु और आंतरिक मामलों में पूरी तरह से अनावश्यक और अनुचित हस्तक्षेप हैं। मंत्रालय ने दुनिया को याद दिलाया कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न, संप्रभु और अविभाज्य हिस्से थे, हैं और हमेशा रहेंगे। भारत ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि जिन पक्षों का इस भू-भाग और मुद्दे से कोई कानूनी या भौगोलिक सरोकार नहीं है, उन्हें इस पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
गांधी और मंडेला की विरासत से मजबूत होते रिश्ते: दिल्ली में मिले जयशंकर और पॉल माशातिले, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर काम करने का संकल्प
2 Jun, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नए मुकाम पर ले जाने के उद्देश्य से मंगलवार को देश की राजधानी में एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। भारत के आधिकारिक दौरे पर आए दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति शिपोकोसा पॉलस माशातिले ने भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मैराथन द्विपक्षीय चर्चा की। इस दौरान माशातिले ने दोनों देशों के जुड़ाव को ऐतिहासिक और बेहद खास बताते हुए कहा कि भारत-दक्षिण अफ्रीका की यह जुगलबंदी केवल व्यापारिक आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के नागरिकों के कल्याण के लिए मजबूत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्थाओं का निर्माण करना है।
समान संघर्षों का इतिहास और आर्थिक साझेदारी को रणनीतिक मजबूती देने पर जोर
बैठक के दौरान दक्षिण अफ्रीकी उपराष्ट्रपति ने दोनों देशों के साझा औपनिवेशिक संघर्षों और चुनौतियों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद करते हुए कहा कि दक्षिण अफ्रीका की धरती पर मिले अनुभवों ने ही भारत के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई और निर्णायक दिशा दी थी। अब समय आ गया है कि इस गहरे राजनीतिक और भावनात्मक रिश्ते को एक ठोस आर्थिक साझेदारी में बदला जाए। दोनों देशों ने आपसी सहमति जताई कि भारत जहां डिजिटल इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग और हेल्थकेयर के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी है, वहीं दक्षिण अफ्रीका के पास रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा), माइनिंग (खनन), फार्मास्यूटिकल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों में असीम संभावनाएं हैं। इन दोनों ताकतों को मिलाकर बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
वैश्विक मंचों पर साझा कूटनीति और एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने की कवायद
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बैठक को बेहद सार्थक बताते हुए स्पष्ट किया कि भारत और दक्षिण अफ्रीका आने वाले समय में प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक सुर में काम करेंगे। बातचीत के दौरान निवेश, द्विपक्षीय व्यापार, डिजिटल तकनीक, बुनियादी ढांचे और विशेष रूप से एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) जैसे क्षेत्रों में सहयोग का दायरा बढ़ाने पर विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार किया गया। भारत के जमीनी और लघु व्यापार मॉडल को करीब से समझने के लिए दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति ने अपनी लघु उद्योग मंत्री स्टेला टेम्बिसा नदाबेनी-अब्राहम्स के साथ 'दिल्ली हाट' का भी दौरा किया। उन्होंने दिल्ली हाट की सराहना करते हुए इसे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और जमीनी उद्यमिता (आंत्रप्रेन्योरशिप) का एक बेहतरीन उदाहरण बताया।
6 दिवसीय भारत दौरे से रणनीतिक संबंधों को मिलेगी नई ऊर्जा
दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति 29 मई से 3 जून तक के छह दिवसीय भारत दौरे पर हैं। इस बेहद महत्वपूर्ण यात्रा के अगले चरण में वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी शिष्टाचार मुलाकात करेंगे। राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण अफ्रीकी नेतृत्व के इस दौरे से दोनों देशों के बीच चल रहे रणनीतिक और व्यापारिक संबंधों को एक नई गति मिलेगी। गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता जैसी समान घरेलू समस्याओं से जूझ रहे दोनों देश अब तकनीकी हस्तांतरण और ज्ञान साझाकरण (नॉलेज शेयरिंग) के माध्यम से एक-दूसरे के विकास में सहभागी बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जिससे वैश्विक पटल पर 'ग्लोबल साउथ' की आवाज को और मजबूती मिलेगी।
अफ्रीका में अमेरिका ने वीजा सेवाओं में बड़ी कटौती की घोषणा
2 Jun, 2026 04:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी नई प्रवासन नीति के तहत एक बड़ा फैसला लिया है। इस नए बदलाव के कारण जून महीने से अफ्रीका में वीजा प्रोसेसिंग का काम करने वाले दूतावासों की संख्या को भारी कटौती के साथ करीब 50 से घटाकर केवल 20 क्षेत्रीय केंद्रों तक सीमित किया जा रहा है। सरकार के इस कड़े निर्देश के बाद अब उन देशों के नागरिकों को वीजा इंटरव्यू के लिए मजबूरन दूसरे देशों की यात्रा करनी पड़ेगी, जहाँ ये केंद्र बंद किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों का यात्रा खर्च और परेशानियां काफी ज्यादा बढ़ जाएंगी।
दूतावास रहेंगे खुले, पर वीजा के लिए जाना होगा दूसरे देश
राहत की बात यह है कि जिन देशों में वीजा केंद्र बंद किए जा रहे हैं, वहाँ के अमेरिकी दूतावास पूरी तरह से बंद नहीं होंगे। वे दूतावास पहले की तरह ही अपने नागरिकों की मदद, पासपोर्ट रिन्यूअल (नवीनीकरण) और अन्य आपातकालीन स्वास्थ्य व सुरक्षा सेवाओं का काम जारी रखेंगे। हालांकि, पूर्ण वीजा प्रोसेसिंग (फुल वीजा इंटरव्यू और डॉक्यूमेंटेशन) से जुड़े सभी बड़े कार्यों के लिए अब केवल 20 मुख्य शहरों के केंद्रों को ही अधिकृत किया गया है।
इन मुख्य शहरों से ही मिलेगी वीजा सर्विस
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में केवल चुनिंदा बड़े और प्रमुख शहरों में ही वीजा आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इन मुख्य शहरों में नाइजीरिया का लागोस, केन्या का नैरोबी और दक्षिण अफ्रीका का जोहान्सबर्ग शामिल हैं। प्रवासन को सीमित करने और अस्थायी वीजा के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से लागू की जा रही इस नीति के बाद अब इन बड़े क्षेत्रीय केंद्रों पर ही वीजा से जुड़ा सारा कामकाज संभाला जाएगा।
शंघाई में भारत-चीन संवाद: संस्कृति और पर्यटन को नई दिशा देने की योजना
2 Jun, 2026 03:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शंघाई: पूर्वी चीन में भारत और चीन के लोगों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। शंघाई में भारत के महावाणिज्यदूत प्रतीक माथुर ने चीन के एक वरिष्ठ सांस्कृतिक अधिकारी के साथ विशेष बैठक की है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग को और ज्यादा विस्तार देना है।
'अतुल्य भारत' अभियान और पर्यटन पर चर्चा
बैठक के दौरान भारतीय महावाणिज्यदूत प्रतीक माथुर ने गुओयुन अमूर्त सांस्कृतिक विरासत केंद्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) झांग जियाक्सिंग से मुलाकात कर विभिन्न विषयों पर विस्तार से बातचीत की। इस चर्चा में मुख्य रूप से भारत सरकार के "अतुल्य भारत" (इन्क्रेडिबल इंडिया) अभियान के तहत चीनी पर्यटकों को भारत आने के लिए प्रोत्साहित करने के उपायों पर विचार किया गया, ताकि चीन से अधिक से अधिक लोग भारत के पर्यटन स्थलों का दीदार करने पहुंच सकें।
सांस्कृतिक विरासत बनेगी मजबूत कड़ी
दोनों अधिकारियों के बीच हुई इस बातचीत में इस बात पर विशेष सहमति बनी कि पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत दोनों देशों के रिश्तों को जोड़ने का एक मजबूत जरिया है। दोनों पक्षों ने जोर देकर कहा कि अपनी-अपनी समृद्ध और ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासतों का सही उपयोग करके न केवल आपसी समझ को बढ़ाया जा सकता है, बल्कि द्विपक्षीय और सामाजिक संबंधों को भी एक नई ऊंचाई पर ले जाया जा सकता है।
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सुशासन तिहार के माध्यम से घर-घर पहुंच रही स्वास्थ्य सुरक्षा
