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डिजिटल ठगी का शिकार हुए दंपती, पुलिस ने तीन आरोपी पकड़े
21 May, 2026 05:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
धारूहेड़ा: डिजिटल अरेस्ट के जरिए एक बुजुर्ग दंपती से 1.89 करोड़ रुपये की सनसनीखेज साइबर ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने इस गिरोह के तीन और गुर्गों को दबोच लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान जींद के न्यू हाउसिंग बोर्ड निवासी मनोज श्योकन्द, गांव करेला के पंकज और जोगेंद्र नगर के हरप्रीत के रूप में हुई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस सात आरोपियों को पहले ही सलाखों के पीछे भेज चुकी है, जिसके बाद अब कुल गिरफ्तारियों की संख्या दस हो गई है।
'सिम बंद होने और अश्लील वीडियो' का डर दिखाकर जाल में फंसाया
ठगी का यह खौफनाक खेल धारूहेड़ा के सेक्टर-6 निवासी रिटायर्ड कर्मचारी राजपाल सिंह के साथ खेला गया। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि बीती 27 और 28 फरवरी को उनके पास अनजान नंबरों से कॉल आए। फोन करने वाले ने खुद को 'ट्राई' (TRAI) का अधिकारी बताते हुए डराया कि उनकी आईडी पर फर्जी सिम एक्टिवेट है, जिससे अश्लील तस्वीरें और वीडियो भेजे जा रहे हैं। ठगों ने पीड़ित को झांसा दिया कि इस मामले में उनके खिलाफ मुंबई में एक एफआईआर (FIR) भी दर्ज हो चुकी है।
खुद को सीबीआई इंस्पेक्टर और जज बताकर किया डिजिटल अरेस्ट, कमरे में रखा बंधक
इसके बाद जालसाजों ने पीड़ित से संपर्क कर खुद को सीबीआई (CBI) इंस्पेक्टर और फर्जी जज बताया। उन्होंने दंपती को कानूनी कार्रवाई का खौफ दिखाकर 'डिजिटल अरेस्ट' कर लिया और फोन पर एक संदिग्ध ऐप डाउनलोड करवाकर उन पर चौबीसों घंटे नजर रखने लगे। डर के मारे बुजुर्ग दंपती कई दिनों तक अपने ही कमरे में बंधक बने रहे। ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में फंसाने और प्रॉपर्टी वेरिफिकेशन के नाम पर 3 मार्च से 20 अप्रैल के बीच डरा-धमकाकर अलग-अलग खातों में कुल 1 करोड़ 89 लाख 28 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
बैंक खाते और दलाली का नेटवर्क; तीन नए आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की जांच में सामने आया कि पकड़े गए नए आरोपियों में से मनोज श्योकन्द के बैंक अकाउंट में ठगी की रकम से 1 लाख 8 हजार रुपये भेजे गए थे। वहीं, पंकज और हरप्रीत ने मुख्य साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए बिचौलियों (दलालों) के रूप में काम किया था। पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश किया, जहां से अदालत ने मनोज को जेल भेज दिया है, जबकि पंकज और हरप्रीत को दो दिन के पुलिस रिमांड पर सौंपा है ताकि गिरोह के अन्य नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा बयान, परमाणु हमले की नीति पर कही अहम बात
21 May, 2026 03:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियोल: भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस समय दक्षिण कोरिया की महत्वपूर्ण यात्रा पर हैं। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा साइबरस्पेस और सैन्य ट्रेनिंग के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने को लेकर कई बेहद अहम समझौते हुए हैं। यह समझौता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके दक्षिण कोरियाई समकक्ष एह्न ग्यू-बैक के बीच सियोल में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान हुआ। अपनी इस यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री ने वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों को भी संबोधित किया और वैश्विक मंच पर भारत की परमाणु नीति को लेकर देश का रुख पूरी तरह साफ किया।
न्यूक्लियर ब्लैकमेल को भारत कभी बर्दाश्त नहीं करेगा
भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परमाणु हमले की नीति पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आज के भारत और पहले के भारत में एक बहुत बड़ा और साफ अंतर आ चुका है। पहले दुनिया भारत को सिर्फ एक नरम देश (सॉफ्ट पावर) के रूप में देखती थी, लेकिन आज दुनिया भारत को हर समस्या का समाधान निकालने वाली एक मजबूत शक्ति के रूप में मानती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत एक जिम्मेदार परमाणु संपन्न देश है और अपनी 'नो फर्स्ट यूज' यानी पहले परमाणु हथियार इस्तेमाल न करने की नीति पर पूरी तरह कायम है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह भी साफ कर दिया कि कुछ लोग भारत के इस संयम और शांतिप्रियता को उसकी कमजोरी समझने की भूल न करें, क्योंकि भारत किसी भी तरह के न्यूक्लियर ब्लैकमेल को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।
रिएक्टिव नहीं, अब प्रोएक्टिव है भारत की नीतियां
रक्षा मंत्री ने देश की बदलती सुरक्षा नीतियों और स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में रक्षा क्षेत्र के भीतर बहुत बड़ा बदलाव आया है और अब भारत की नीतियां किसी घटना के बाद कदम उठाने (रिएक्टिव) के बजाय, पहले से ही तैयार रहने (प्रोएक्टिव) की रणनीति पर काम करती हैं। देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसी मजबूत संकल्प के साथ भारत अब अपने देश में ही रक्षा उपकरणों के निर्माण को तेजी से बढ़ावा दे रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आत्मनिर्भरता और सामाजिक न्याय को एक नई गति मिली है, और पिछले 12 वर्षों में देश के भीतर आए इस बड़े बदलाव ने हर नागरिक के इस भरोसे को और मजबूत किया है कि भारत तेजी से एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सीवर सफाई हादसे में मृतक के परिजन अड़े, 1 करोड़ मुआवजा चाहिए
21 May, 2026 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
झज्जर। नूना माजरा के महाराजा अग्रसेन अस्पताल में सीवर की सफाई करते समय प्लंबर सुनील की हुई दर्दनाक मौत के बाद गुरुवार को मामला पूरी तरह गरमा गया है। मृतक के दुखी परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है, जिसके चलते उन्होंने नागरिक अस्पताल (सिविल हॉस्पिटल) से सुनील का शव उठाने से साफ मना कर दिया है। गुस्साए लोगों ने अस्पताल प्रशासन के रवैये के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोल दिया है।
सुरक्षा उपकरणों की कमी का आरोप, पीड़ित परिवार के लिए मांगी पेंशन
अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे परिजनों और ग्रामीणों ने प्रबंधन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई साधारण हादसा नहीं, बल्कि अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही है; सुनील को बिना किसी सुरक्षा किट और उपकरणों के जहरीले सीवर में उतारा गया था। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं:
मुआवजा: मृतक के आश्रितों को तुरंत 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
पारिवारिक पेंशन: सुनील की पत्नी के जीवन-यापन के लिए हर महीने स्थायी पेंशन का प्रबंध किया जाए।
मांगें पूरी न होने पर यूनिवर्सिटी गेट पर तालाबंदी का अल्टीमेटम
नागरिक अस्पताल में भारी तादाद में इकट्ठा हुए ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन को खुली चेतावनी दी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि उनकी जायज मांगों पर अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो वे अपने विरोध प्रदर्शन को और उग्र करेंगे। इसके तहत उन्होंने पास ही स्थित यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर ताला जड़ने और पूरी तरह चक्का जाम करने की धमकी दी है।
रणनीति तय करने के लिए आज शाम 4 बजे बैठेगी महापंचायत
इस पूरे गतिरोध को सुलझाने और आंदोलन की आगे की दिशा तय करने के लिए ग्रामीणों ने आज शाम 4 बजे एक बड़ी पंचायत बुलाई है। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि इस महापंचायत में जो भी सामूहिक निर्णय लिया जाएगा, उसी के आधार पर आगे कदम उठाए जाएंगे। तब तक अस्पताल से शव नहीं लिया जाएगा।
प्रशासनिक अमला अलर्ट, शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश जारी
घटना के बाद से उपजे तनाव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। नागरिक अस्पताल और नूना माजरा के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस के आला अधिकारी ग्रामीणों को समझाने-बुझाने और अस्पताल प्रबंधन के साथ बातचीत के जरिए बीच का रास्ता निकालने की कोशिशों में जुटे हैं, ताकि कानून-व्यवस्था नियंत्रण में रहे।
थाईलैंड यात्रा होगी मुश्किल? वीजा नियमों में बदलाव का असर भारतीयों पर
21 May, 2026 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैंकॉक: थाईलैंड सरकार ने भारत सहित 93 देशों के पर्यटकों के लिए अपनी बेहद लोकप्रिय 'वीजा-मुक्त प्रवेश' (वीजा-फ्री एंट्री) नीति में एक बहुत बड़ा और अचानक बदलाव किया है। बैंकॉक में हुई कैबिनेट की अहम बैठक में यह फैसला लिया गया कि विदेशी यात्रियों को मिलने वाली 60 दिनों की वीजा छूट को अब पूरी तरह वापस ले लिया जाएगा। गौरतलब है कि कोरोना महामारी के बाद देश की अर्थव्यवस्था और पर्यटन को दोबारा पटरी पर लाने के लिए जुलाई 2024 में इस योजना की शुरुआत की गई थी, जिसमें भारत के अलावा अमेरिका, इजरायल, दक्षिण अमेरिका और यूरोप के शेंगेन क्षेत्र जैसे कई बड़े देश शामिल थे। नए नियमों के तहत सरकार अब पुरानी व्यवस्था पर लौट रही है, जिसके मुताबिक अधिकांश देशों के लिए बिना वीजा रुकने की समयसीमा को घटाकर 30 दिन कर दिया जाएगा, जबकि कुछ चुनिंदा देशों के नागरिकों के लिए इसे और कम करके महज 15 दिन ही रखा जाएगा।
सुरक्षा चिंताएं और वीजा नियमों का गलत इस्तेमाल बनी बड़ी वजह
थाईलैंड सरकार के प्रवक्ता रचादा धनादिरेक ने इस कड़े फैसले की वजह साफ करते हुए बताया कि मौजूदा 60 दिनों की ढील का कई विदेशी नागरिकों द्वारा बड़े पैमाने पर गलत फायदा उठाया जा रहा था। सरकार का मानना है कि पर्यटन बेशक देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन इसके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। थाईलैंड के अधिकारियों ने माना कि 60 दिनों की लंबी छूट के कारण देश में अवैध ग्रे-मार्केट व्यापार, बिना वर्क परमिट के अवैध रूप से काम करने वाले विदेशी मजदूरों और ऑनलाइन स्कैम (धोखाधड़ी) के मामलों में खतरनाक बढ़ोतरी देखी गई थी। हाल ही में हुई कई हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियों में विदेशी नागरिक नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और अवैध रूप से स्थानीय व्यापार चलाने में संलिप्त पाए गए थे। विदेश मंत्री सिहासाक फुंगकेटकेओ ने स्पष्ट किया कि यह नीतिगत बदलाव किसी खास देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि सिर्फ उन अपराधियों को रोकने के लिए है जो कानून से बचने के लिए थाईलैंड की उदार वीजा प्रणाली का दुरुपयोग कर रहे थे।
भारतीय पर्यटकों पर सीधा असर और इमिग्रेशन के कड़े नियम
थाईलैंड सरकार के इस औचक फैसले का भारत से जाने वाले सैलानियों पर बहुत बड़ा और सीधा असर पड़ने वाला है। जो भारतीय थाईलैंड के विभिन्न खूबसूरत द्वीपों पर घूमने और छुट्टियां बिताने के लिए दो-दो महीने (60 दिन) का लंबा प्लान बनाते थे, उन्हें अब एक बड़ा झटका लगा है, क्योंकि वे अब बिना वीजा के 30 दिनों से ज्यादा वहां नहीं ठहर पाएंगे। शानदार हवाई कनेक्टिविटी, कम हवाई किराए और पहले की बेहद आसान वीजा नीतियों के कारण थाईलैंड हमेशा से भारतीय पर्यटकों की पहली पसंद रहा है। नए नियम लागू होने के बाद अब बैंकॉक या अन्य एयरपोर्ट्स पर उतरने वाले भारतीय यात्रियों से इमिग्रेशन अधिकारी आगे की यात्रा या वापसी का कन्फर्म टिकट, होटल बुकिंग का पक्का सबूत मांग सकते हैं। साथ ही, अब वहां पहुंचने पर होने वाली इमिग्रेशन जांच और पूछताछ भी पहले की तुलना में काफी सख्त कर दी जाएगी।
हेलीकॉप्टर निगरानी में ईरानी तेल टैंकर की जांच, बढ़ी हलचल
21 May, 2026 11:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक और नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में एक बड़ी और आक्रामक सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरानी ध्वज (झंडे) वाले एक कमर्शियल तेल टैंकर की घेराबंदी की और उस पर चढ़कर बेहद सघन तलाशी ली। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह तेल टैंकर अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाई गई नाकेबंदी का खुलेआम उल्लंघन करते हुए एक ईरानी बंदरगाह की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा था। इस हाई-प्रोफाइल सैन्य ऑपरेशन की आधिकारिक जानकारी देते हुए अमेरिकी सेना ने बताया कि मरीन एक्सपीडेशनरी यूनिट के जांबाज कमांडो ने 'सेलेशियल सी' (M/T Celestial Sea) नाम के इस विशालकाय तेल टैंकर को बीच समुद्र में ही रोक लिया।
हेलीकॉप्टर से उतरे मरीन कमांडो, खंगाला जहाज का कोना-कोना
तकरीबन 120 मीटर लंबे इस भारी-भरकम वाणिज्यिक जहाज को रोकने के लिए अमेरिकी नौसेना ने आधुनिक युद्धक हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया। हेलीकॉप्टर की मदद से अमेरिकी मरीन कमांडो तेजी से जहाज की छत पर उतरे और पूरे टैंकर को अपने नियंत्रण में ले लिया। इसके बाद सुरक्षाबलों ने जहाज के कोने-कोने की बारीकी से जांच की। हालांकि, विस्तृत तलाशी अभियान पूरा होने और कोई संदिग्ध वस्तु न मिलने के बाद अमेरिकी सेना ने जहाज को तो छोड़ दिया, लेकिन उसके चालक दल (क्रू) को तुरंत अपना समुद्री रास्ता बदलने और वापस लौटने का सख्त अल्टीमेटम जारी कर दिया।
91 जहाजों का बदला रास्ता, ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी
अमेरिकी प्रशासन का साफ कहना है कि वह वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद संवेदनशील 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (स्ट्रैट) और ओमान की खाड़ी में ईरान से जुड़े हर संदिग्ध जहाज पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रहा है। सेंट्रल कमांड के आंकड़ों के अनुसार, इस समुद्री नाकेबंदी के नियमों का पालन कराने के लिए अब तक 91 कमर्शियल जहाजों का रास्ता जबरन बदला जा चुका है। अमेरिकी नौसेना की यह बड़ी कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने खाड़ी देशों (गल्फ अलाइज) के विशेष अनुरोध के बाद ईरान पर होने वाले एक बहुत बड़े सैन्य हमले की योजना को फिलहाल दो-तीन दिनों के लिए टाल दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ईरान के साथ बातचीत अंतिम दौर में है, या तो दोनों देशों के बीच कोई ठोस समझौता होगा या फिर अमेरिका, ईरान पर पहले से भी कहीं ज्यादा घातक और बड़ा हमला करेगा।
ईरान का मल्टी-लेयर क्लियरेंस सिस्टम और दुनिया पर आर्थिक खतरा
दूसरी तरफ, अमेरिकी दबाव के आगे ईरान भी घुटने टेकने को बिल्कुल तैयार नहीं है। तेहरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण और मजबूत करने के लिए वहां से गुजरने वाले विदेशी जहाजों के लिए एक नया 'मल्टी-लेयर क्लियरेंस सिस्टम' लागू कर दिया है, जिसके तहत जहाजों को विशेष अनुमति लेनी होगी और भारी फीस चुकानी होगी। हालांकि, अमेरिका ने दुनिया भर की शिपिंग कंपनियों को सख्त हिदायत दी है कि वे ईरान के इस अवैध नियंत्रण को कतई स्वीकार न करें। ज्ञात हो कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन है, जहां से वैश्विक बाजार का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल और गैस गुजरता है। इस ताजा सैन्य टकराव के कारण फारस की खाड़ी में करीब 90 देशों के 1500 से अधिक मालवाहक जहाज बीच समुद्र में फंसे हुए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों पर भारी दबाव बढ़ गया है और वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने का खतरा पैदा हो गया है।
रेवाड़ी: लापता स्कूल संचालक का शव कार में मिला, पुलिस जांच में जुटी
21 May, 2026 10:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रेवाड़ी। विकास नगर कंकरवाली के रहने वाले एक स्कूल संचालक आकाश गौड़ का शव संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी ही कार के भीतर मिलने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। उनका शव सेक्टर-18 इलाके में सड़क के किनारे खड़ी एक कार की सीट पर बैठी हुई हालत में बरामद हुआ। इस दुखद घटना की भनक लगते ही मृतक के परिवार और स्थानीय निवासियों में कोहराम मच गया।
तीन दिनों से लापता थे स्कूल संचालक, पत्नी से हुई थी आखिरी बात
पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, आकाश गौड़ बीते 18 मई को किसी आवश्यक कार्य का हवाला देकर अपने घर से रवाना हुए थे, परंतु उसके बाद वह वापस नहीं लौटे। परिजनों ने बताया कि उनकी अपनी पत्नी से अंतिम बार 19 मई को मोबाइल पर बात हुई थी। उस बातचीत के बाद से ही उनका फोन कनेटिक्ट नहीं हो पा रहा था, जिससे पूरा परिवार किसी अनहोनी की आशंका से लगातार परेशान था।
स्कूल बस से जा रहे बेटे ने रास्ते में खड़ी देखी थी पिता की कार
इस पूरे मामले में एक हैरान करने वाला मोड़ मंगलवार को आया। आकाश का बेटा जब अपने स्कूल की बस से जा रहा था, तब उसने रास्ते में अपने पिता की गाड़ी खड़ी देखी थी। उस वक्त उसे किसी गड़बड़ी का अंदाजा नहीं हुआ। हालांकि, जब वह स्कूल से पढ़कर वापस घर लौटा, तो उसने परिवार के अन्य सदस्यों को रास्ते में खड़ी कार के बारे में बताया। बेटे से इनपुट मिलते ही परिजनों ने तुरंत उस लोकेशन की ओर दौड़ लगाई।
सीट पर बेसुध मिले आकाश, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
बेटे की निशानदेही पर जब परिजन गढ़ी बोलनी रोड से सेक्टर-18 की तरफ जाने वाले रास्ते पर पहुंचे, तो उन्हें सड़क किनारे आकाश की कार मिल गई। जब उन्होंने कार के करीब जाकर अंदर झांका, तो आकाश ड्राइविंग सीट पर अचेत अवस्था में बैठे हुए थे। उन्हें इस हालत में देख घबराए परिजन तुरंत कार का दरवाजा खोलकर उन्हें नजदीकी अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मामले की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस, जांच जारी
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम ने अस्पताल और वारदात वाली जगह का मुआयना किया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। कार के भीतर संदिग्ध हालत में शव मिलने के कारण पुलिस हर एंगल से इस मामले की तफ्तीश कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजहों का खुलासा हो सकेगा।
‘परिश्रम ही सफलता की कुंजी’, PM मेलोनी के हिंदी संदेश ने बटोरी सुर्खियां
21 May, 2026 10:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच बुधवार को राजधानी रोम में एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसके बाद दोनों नेताओं ने एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस मुलाकात को दोनों देशों के राजनयिक इतिहास में एक बड़े मील का पत्थर के रूप में देखा जा रहा है। साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम मोदी ने भारत और इटली के मजबूत होते रिश्तों पर खुशी जताई। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि दोनों ही देश इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ा और गंभीर खतरा है और आतंक की फंडिंग (वित्तीय मदद) को रोकने के लिए दोनों देशों की साझा कोशिशें दुनिया के सामने एक मजबूत मिसाल पेश करेंगी। इसी प्रतिबद्धता के साथ दोनों देशों ने अपने आपसी रिश्तों को अब 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' (विशेष रणनीतिक साझेदारी) का दर्जा देने का एक बड़ा फैसला किया है।
दो प्राचीन सभ्यताओं का मिलन और भारत आने का न्योता
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम मोदी ने दोनों देशों की प्राचीन संस्कृतियों को जोड़ते हुए एक बेहद खूबसूरत बात कही। उन्होंने कहा कि रोम को पूरी दुनिया में 'इटरनल सिटी' यानी कभी न खत्म होने वाला अमर शहर कहा जाता है, और ठीक इसी तरह भारत में मेरी लोकसभा सीट 'काशी' (वाराणसी) को भी इसी रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि जब दो प्राचीन सभ्यताएं इस तरह आपस में मिलती हैं, तो उनके बीच की बातचीत सिर्फ तय एजेंडे तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह दिल से दिल का जुड़ाव बन जाती है। शानदार स्वागत के लिए इटली की प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी को जल्द ही भारत आने का औपचारिक न्योता भी दिया।
इटली की पीएम ने कहावत सुनाकर की 'परिश्रम' की तारीफ
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे दिलचस्प और चर्चा में रहने वाला पल वह था जब इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मीडिया से बात करते हुए पीएम मोदी के सामने हिंदी शब्दों का इस्तेमाल किया। मेलोनी ने कहा कि भारत और इटली के रिश्ते आज इतिहास में सबसे ज्यादा मजबूत और करीब आ चुके हैं। उन्होंने भारत की एक बेहद चर्चित कहावत को दोहराते हुए कहा कि 'परिश्रम ही सफलता की कुंजी है'। मेलोनी ने 'परिश्रम' शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका सीधा मतलब कड़ी मेहनत, लगातार प्रयास और पूरी तरह से समर्पण है, जो भारत की संस्कृति में गहराई से बसा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक दिन करार दिया।
पीएम मोदी को मिला संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च 'एग्रीकोला मेडल'
इस ऐतिहासिक दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि दर्ज हो गई है। संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संस्था यानी फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) ने पीएम मोदी को वर्ष 2026 के अपने सर्वोच्च सम्मान ‘एग्रीकोला मेडल’ (Agricola Medal) से नवाजा है। इटली के रोम में स्थित एफएओ (FAO) मुख्यालय के ऐतिहासिक प्लेनरी हॉल में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया था, जहां संस्था के महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने खुद प्रधानमंत्री मोदी को यह सर्वोच्च पदक प्रदान किया। यह सम्मान मिलना पूरे भारत के लिए वैश्विक मंच पर एक गौरवपूर्ण क्षण है।
बांग्लादेश में इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा, दो बड़ी नदियों पर बनेगा बैराज
21 May, 2026 10:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका: बांग्लादेश ने अपने देश में गहराते जल संकट को दूर करने और खेती-किसानी को बढ़ावा देने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। बांग्लादेश सरकार ने तीस्ता और पद्मा नदी पर काफी समय से लंबित बैराज परियोजनाओं (मेगा प्रोजेक्ट्स) के निर्माण का आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री और बीएनपी (BNP) चेयरमैन तारिक रहमान ने ढाका के पास गाजीपुर में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए यह साफ कर दिया कि उनकी सरकार इन दोनों बड़ी जल परियोजनाओं पर बहुत जल्द काम शुरू करने जा रही है।
फंडिंग के लिए चीन का दौरा और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का सहारा
इस अरबों डॉलर के मेगा प्रोजेक्ट को हकीकत में बदलने के लिए बांग्लादेश पूरी तरह चीन पर भरोसा कर रहा है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान जून के आखिरी हफ्ते में चीन के बेहद महत्वपूर्ण दौरे पर जाने वाले हैं, जहां बीजिंग में इस बैराज परियोजना की फंडिंग (आर्थिक मदद) को लेकर चीनी नेतृत्व के साथ विस्तार से चर्चा की जाएगी। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने खुद बीजिंग जाकर चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की है और इस करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 8300 करोड़ रुपये) के प्रोजेक्ट के लिए औपचारिक रूप से मदद मांगी है। बांग्लादेश इस पूरे प्रोजेक्ट को चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के तहत आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है।
भारत के फरक्का बैराज पर आरोप और गंगा जल संधि की समयसीमा
जनसभा को संबोधित करते हुए बांग्लादेशी प्रधानमंत्री ने देश के जल संकट के लिए पड़ोसी देश भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि भारत के फरक्का बैराज के कारण सूखे के दिनों में बांग्लादेश को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, जिससे दक्षिणी इलाकों में समुद्र का खारा पानी घुस रहा है और सुंदरबन के पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि मॉनसून के दौरान आने वाले अतिरिक्त पानी को रोकने और सूखे में किसानों को सिंचाई के लिए पानी देने के लिए बांग्लादेश को यह बैराज बनाना ही होगा। गौरतलब है कि भारत और बांग्लादेश के बीच साल 1996 में हुई ऐतिहासिक गंगा जल बंटवारा संधि की मियाद इसी साल दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है, जिसे आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है, जबकि तीस्ता जल समझौता पश्चिम बंगाल सरकार के विरोध के कारण साल 2011 से ही अधर में लटका हुआ है।
चिकन नेक के पास चीन की एंट्री से बढ़ी भारत की रणनीतिक चिंताएं
बांग्लादेश के इस फैसले और इस जल परियोजना में चीन की सीधी एंट्री ने भारत की राजधानी नई दिल्ली में रणनीतिक और सुरक्षा गलियारों में चिंता की लकीरें खींच दी हैं। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर है, क्योंकि तीस्ता नदी का यह पूरा इलाका भारत के सबसे संवेदनशील 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर' (जिसे चिकन नेक भी कहा जाता है) के बेहद करीब है। यह बेहद संकरा जमीनी रास्ता भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (नॉर्थ-ईस्ट) को बाकी पूरे देश से जोड़ता है। इस बड़े प्रोजेक्ट के बहाने चीनी कंपनियों, चीनी सैनिकों और इंजीनियरों की इस संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में मौजूदगी भारत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है। इसके साथ ही, बांग्लादेश का चीन की तरफ तेजी से बढ़ता यह झुकाव इस पूरे क्षेत्र में भारत के कूटनीतिक और राजनीतिक प्रभाव के लिए भी एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
भारत ने सुनाई दो टूक, ‘अपनों को निशाना बनाने वाले ज्ञान न बांटें’
21 May, 2026 09:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के मंच पर भारत ने एक बार फिर पड़ोसी देश पाकिस्तान को उसकी हरकतों के लिए कड़ी फटकार लगाई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान पाकिस्तान द्वारा जबरन जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर बेहद तीखा और करारा जवाब दिया। भारत ने बेहद साफ और दोटूक शब्दों में कहा कि जिस देश का खुद का इतिहास नरसंहार, हिंसा और क्रूरता के काले कारनामों से रंगा हुआ है, उस देश का भारत के आंतरिक मामलों पर उंगली उठाना या कोई टिप्पणी करना अपने आप में एक बेहद भद्दा मजाक है।
अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमले और मासूमों के कत्लेआम का खुलासा
भारतीय प्रतिनिधि ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के हालिया क्रूर कृत्यों का पूरा कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया। उन्होंने अफगानिस्तान की धरती पर पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों का मुद्दा बेहद आक्रामक तरीके से उठाया। दुनिया को याद दिलाते हुए भारतीय राजदूत ने कहा कि इसी साल मार्च के पवित्र रमजान महीने में, पाकिस्तानी सेना ने काबुल में स्थित ओमिद नशामुक्ति उपचार अस्पताल पर बेहद बर्बरता से हवाई हमला किया था। संयुक्त राष्ट्र मिशन के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए भारत ने बताया कि इस खौफनाक हमले में 269 बेगुनाह नागरिकों की मौत हो गई थी और 122 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। यह हमला कायरता की हद पार करते हुए उस समय किया गया था जब लोग नमाज खत्म करके मस्जिद से बाहर आ रहे थे। भारत ने बेबाकी से कहा कि पाकिस्तान रात के अंधेरे का फायदा उठाकर मासूमों पर बम बरसाता है और फिर दुनिया के सामने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पाखंड रचता है।
अपने ही नागरिकों पर अत्याचार और 1971 के काले इतिहास की याद
पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए भारतीय राजदूत ने उसके द्वारा अपने ही नागरिकों पर ढाए गए ऐतिहासिक जुल्मों को भी दुनिया के सामने उजागर किया। उन्होंने साल 1971 की बर्बरता का जिक्र करते हुए कहा कि यह वही पाकिस्तान है जिसने 'ऑपरेशन सर्चलाइट' के नाम पर अपनी ही बेकसूर जनता पर अमानवीय और रूह कंपा देने वाले अत्याचार किए थे। भारत ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो देश अपने ही लोगों का कत्लेआम करता आया हो, उसके मुंह से मानवाधिकारों की बड़ी-बड़ी बातें बिल्कुल शोभा नहीं देतीं। पाकिस्तानी हमलों के कारण अब तक 94,000 से ज्यादा अफगान नागरिकों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा है।
आंतरिक नाकामियों को छिपाने के लिए प्रोपेगैंडा और आतंकवाद का सहारा
भारत ने वैश्विक समुदाय के सामने यह बात पूरी तरह साफ कर दी कि पाकिस्तान पिछले कई दशकों से अपनी घरेलू और आंतरिक नाकामियों से अपनी जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए वह अपनी सीमाओं के अंदर और बाहर लगातार आतंकवाद तथा हिंसा को बढ़ावा देता आया है। भारतीय प्रतिनिधि ने अपने संबोधन के अंत में बेहद दृढ़ता और मजबूती से कहा कि जिस देश के पास न तो कोई अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता बची है, न ही कानून की कोई गरिमा है और न ही कोई नैतिक मूल्य हैं, उसकी इस खोखली बयानबाजी, झूठे दावों और प्रोपेगैंडा को अब पूरी दुनिया बहुत अच्छी तरह से समझ चुकी है।
पेरू में भूकंप के बाद राहत अभियान तेज, 27 लोगों के घायल होने की खबर
20 May, 2026 09:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लॉस एंजिल्स। दक्षिणी कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी भीषण आग के कारण मंगलवार को 17,000 से अधिक लोगों को अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने (निकासी) के आदेश दिए गए हैं। 'सैंडी' नाम की यह आग सोमवार को लॉस एंजिल्स से लगभग 30 मील (48 किलोमीटर) उत्तर-पश्चिम में स्थित सिमी घाटी की पहाड़ियों में भड़की थी। तेज और अनियंत्रित हवाओं के कारण इस आग ने बेहद आक्रामक रूप अख्तियार कर लिया है, जिससे अब रिहायशी इलाकों और उपनगरीय घरों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
सूखे झाड़ बने आग का ईंधन, एक घर तबा
वेंटुरा काउंटी अग्निशमन विभाग (फायर डिपार्टमेंट) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह तक इस विनाशकारी आग ने दो वर्ग मील (लगभग पांच वर्ग किलोमीटर) से अधिक क्षेत्र में फैले सूखे झाड़ों और वनस्पतियों को जलाकर राख कर दिया है। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उनकी चपेट में आने से कम से कम एक घर पूरी तरह नष्ट हो गया है। दमकल विभाग की कई टीमें लगातार आग पर काबू पाने और रिहायशी इलाकों को बचाने के प्रयास में जुटी हुई हैं, लेकिन तेज हवाएं उनके काम में लगातार बाधा डाल रही हैं।
ब्रिटेन का बड़ा आर्थिक फैसला, पाकिस्तान की मदद पर असर संभव
20 May, 2026 08:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटेन सरकार ने अपनी खस्ताहाल आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए विदेशी सहायता (फॉरेन फंड) में एक बहुत बड़ी कटौती करने का ऐतिहासिक ऐलान किया है। इस फैसले का सबसे घातक और सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ने वाला है। एक आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन सरकार ने साल 2027 तक अपनी विकास सहायता को सकल राष्ट्रीय आय (GNI) के 0.5 फीसदी से घटाकर 0.3 फीसदी करने का कड़ा फैसला लिया है। इस नई नीति के तहत ब्रिटेन अपनी विदेशी सहायता में 6 अरब डॉलर से ज्यादा की भारी कटौती करने जा रहा है, जिससे पाकिस्तान और मोजाम्बिक जैसे देशों को सबसे बड़ा झटका लगेगा। इसके अलावा यमन, सोमालिया और अफगानिस्तान जैसे संकटग्रस्त देशों को मिलने वाले फंड में भी भारी कमी आएगी।
यूक्रेन युद्ध और रक्षा खर्च बना बड़ी वजह
ब्रिटेन की विदेश मंत्री इवैट कूपर ने संसद में इस फैसले की वजह साफ करते हुए कहा कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और खासकर यूक्रेन युद्ध के चलते सरकार पर रक्षा खर्च बढ़ाने का भारी दबाव है। इसी वजह से देश की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए सरकार को ऐसे ‘कठिन फैसले और समझौते’ करने पड़ रहे हैं। गौरतलब है कि कोरोना महामारी से पहले तक ब्रिटेन अपनी जीएनआई (GNI) का 0.7 फीसदी हिस्सा विदेशी सहायता पर खर्च करता था, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें लगातार गिरावट आई है। ब्रिटिश सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब वह विकासशील देशों को सीधे फंड देने के बजाय वहां निजी निवेश और विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के लिए ‘निवेश आधारित साझेदारी’ (इन्वेस्टमेंट बेस्ड पार्टनरशिप) मॉडल पर ज्यादा ध्यान देगी।
प्रवासियों की कमाई और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों पर बढ़ेगी निर्भरता
ब्रिटेन द्वारा फंड रोके जाने के बाद अब प्रभावित देशों को अपने विकास कार्यक्रमों को चलाने के लिए वैकल्पिक आर्थिक रास्तों पर निर्भर होना पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि इन देशों को अब विदेशों में रहने वाले अपने नागरिकों द्वारा भेजी जाने वाली रकम (रेमिटेंस) का सहारा लेना होगा। पाकिस्तान के मामले में, विदेशों में रहने वाले उसके 80 लाख से ज्यादा नागरिकों द्वारा भेजी जाने वाली राशि बढ़कर करीब 30 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे ब्रिटेन की कटौती से होने वाले नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकेगी।
दूसरी तरफ, मोजाम्बिक जैसे गरीब देशों के लिए स्थिति बेहद गंभीर होने वाली है, क्योंकि वहां प्रवासियों से आने वाली कमाई बेहद कम है। हाल ही में आई भीषण बाढ़ के कारण मोजाम्बिक में लाखों लोग बेघर हुए हैं, ऐसे में ब्रिटेन से मदद रुकने के बाद अब उसे पूरी तरह से संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसी बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के भरोसे रहना पड़ेगा।
इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने कहा- मेहनत ही सफलता की चाबी, भारत से रिश्ते गहरे
20 May, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोम: भारत और इटली के बीच मजबूत होते जा रहे द्विपक्षीय संबंधों के बीच एक बेहद दिलचस्प और दिल छू लेने वाली तस्वीर सामने आई है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी की राजकीय यात्रा का स्वागत करते हुए एक मशहूर हिंदी कहावत का इस्तेमाल किया। भारत-इटली के प्रगाढ़ होते रिश्तों का जिक्र करते हुए मेलोनी ने कहा कि 'परिश्रम ही सफलता की कुंजी है', जो दोनों देशों के साझा प्रयासों को बिल्कुल सटीक तरीके से बयां करता है।
'पीएम मोदी के आगमन से शुरू हुआ दोस्ती का नया दौर'
इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने गर्मजोशी से प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि आपका इटली आना हमारे लिए बेहद गौरव की बात है। यह यात्रा दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि आप दोनों देशों की लंबी और अटूट साझेदारी की जिस किताब को एक मजबूत संकल्प के साथ आगे बढ़ा रहे हैं, यह उसका आखिरी पन्ना बिल्कुल नहीं है। हम दोनों ही राष्ट्र अपने साझा हितों और विकास को सबसे बेहतरीन मुकाम पर ले जाने के लिए पूरी शिद्दत से काम कर रहे हैं।
मेलोनी ने समझाया 'परिश्रम' का असली महत्व
कूटनीतिक मंच पर भारतीय संस्कृति की झलक दिखाते हुए इतालवी पीएम ने 'परिश्रम' शब्द की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा:
"'परिश्रम' एक ऐसा भारतीय शब्द है, जो हमारी साझा सोच और समर्पण की भावना को बेहद खूबसूरती से दर्शाता है। इसका सीधा अर्थ है—कड़ी मेहनत। मैं इस बात से भली-भांति वाकिफ हूं कि भारत की रोजमर्रा की जिंदगी में इस शब्द का बहुत गहरा महत्व है। वहां एक बेहद लोकप्रिय कहावत भी है कि 'परिश्रम ही सफलता की कुंजी है'।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस कहावत का साफ संदेश है कि कठिन और ईमानदारी से की गई मेहनत ही कामयाबी का एकमात्र रास्ता है। आज भारत और इटली भी अपने कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को इसी मजबूत सोच के साथ आगे बढ़ा रहे हैं, जहां दोनों तरफ से किया जा रहा अथक प्रयास सबसे अहम बन चुका है।
ट्रंप प्रशासन ने WHO को घेरा, समय पर अलर्ट न देने का आरोप
20 May, 2026 06:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। सेंट्रल अफ्रीका में तेजी से पैर पसार रहे इबोला के प्रकोप को रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन ने बड़े पैमाने पर वित्तीय और स्वास्थ्य सहायता देने का ऐलान किया है। हालांकि, इस मदद के साथ ही अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि डब्ल्यूएचओ ने इस बीमारी को लेकर वैश्विक चेतावनी जारी करने में बहुत देर की, जिसकी वजह से प्रभावित इलाकों में समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए जा सके और कीमती समय बर्बाद हो गया। अमेरिका पहले ही इस संकट से निपटने के लिए लगभग 23 मिलियन डॉलर (करीब 1.9 अरब रुपये) की मानवीय सहायता देने की घोषणा कर चुका है और अब वह एक और बड़ा राहत पैकेज तैयार कर रहा है।
प्रभावित क्षेत्रों में बनाए जाएंगे 50 उपचार केंद्र
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन अब इस स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए बेहद आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह नई वित्तीय सहायता सैकड़ों मिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। इस भारी-भरकम बजट का इस्तेमाल इबोला प्रभावित इलाकों में लगभग 50 विशेष उपचार केंद्र और क्लीनिक बनाने के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही वहां बड़ी संख्या में मेडिकल स्टाफ और जरूरी दवाएं भेजी जा रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि इबोला का यह प्रकोप मुख्य रूप से कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के एक बेहद दूरदराज और आंतरिक संघर्ष से जूझ रहे इलाके में फैला है। इस वजह से वहां मरीजों की पहचान करना, राहत सामग्री पहुंचाना और डॉक्टरों की टीमों को तैनात करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
डब्ल्यूएचओ की देरी पर जताई कड़ी नाराजगी
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि इस संकट से निपटने में हमारी तरफ से थोड़ी देरी इसलिए हुई क्योंकि डब्ल्यूएचओ ने खुद इस पर कदम उठाने में सुस्ती दिखाई। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ ने 15 मई को सार्वजनिक रूप से इस इबोला प्रकोप की पुष्टि की थी, जिसके तुरंत बाद अमेरिका ने अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया इकाइयां सक्रिय कर दीं। इस अभियान में अमेरिका का सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC), स्टेट डिपार्टमेंट और कई अन्य मानवीय एजेंसियां शामिल हैं। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने इस महामारी से निपटने के लिए 24 घंटे काम करने वाली एक विशेष टास्क फोर्स बनाई है, जिसमें साल 2014 और 2018 के इबोला संकट का अनुभव रखने वाले अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है।
एक अमेरिकी नागरिक संक्रमित, यात्रा पर सख्त प्रतिबंध
अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वहां चलाए जा रहे निकासी अभियान (इवैकुएशन मिशन) से जुड़े लोगों में से अब तक एक व्यक्ति इबोला वायरस से संक्रमित (पॉजिटिव) पाया गया है, जबकि कई अन्य संदिग्धों को कड़ी निगरानी में रखा गया है। संक्रमण को अमेरिका में फैलने से रोकने के लिए सीडीसी (CDC) के 'टाइटल 42' आदेश के तहत बेहद सख्त यात्रा प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। नए नियमों के मुताबिक, कोई भी ऐसा विदेशी नागरिक जो पिछले 21 दिनों के भीतर कांगो (DRC), युगांडा या दक्षिण सूडान की यात्रा कर चुका है, उसे अमेरिका में एंट्री नहीं दी जाएगी। हालांकि, खेल प्रेमियों के लिए राहत की बात यह है कि कांगो की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को आगामी फीफा वर्ल्ड कप में खेलने की अनुमति मिल जाएगी, क्योंकि उसके खिलाड़ी पहले से ही यूरोप में ट्रेनिंग कर रहे हैं और वे इस 21 दिन वाले प्रतिबंध के दायरे में नहीं आते हैं।
पंखे से लटका मिला शव, पुलिस ने शुरू की जांच
20 May, 2026 05:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रेवाड़ी: जिले के गांव नेहरूगढ़ में सेना के ऑर्डिनेंस डिपो में तैनात एक जवान द्वारा घर के भीतर फांसी लगाकर आत्महत्या करने का अत्यंत दुखद मामला सामने आया है। मृतक की शिनाख्त 28 वर्षीय योगेश के तौर पर हुई है, जो राजस्थान के बाड़मेर में भारतीय सेना के ऑर्डिनेंस डिपो में टी-मेट के पद पर कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि योगेश करीब 25 दिन पहले ही छुट्टी पर अपने गांव आए हुए थे।
सुबह कमरे में पंखे से लटका मिला जवान का शव
मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार की रात को योगेश रोज की तरह अपने घर के एक अलग कमरे में सोने के लिए गए थे। बुधवार सुबह करीब 5 बजे तक जब उनके कमरे का दरवाजा नहीं खुला और कोई हलचल नहीं हुई, तो चिंतित परिजनों ने कमरे के भीतर जाकर देखा। अंदर योगेश का शव फंदे के सहारे पंखे से झूल रहा था। बदहवास परिजन उन्हें तुरंत कोसली के नागरिक अस्पताल ले गए, लेकिन वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
शुरुआती तफ्तीश में मानसिक तनाव की बात आई सामने
घटना की जानकारी मिलते ही नाहड़ पुलिस चौकी की टीम अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस को घटनास्थल से किसी भी प्रकार का सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। हालांकि, शोकाकुल परिजनों ने पुलिस को बताया कि योगेश पिछले कुछ समय से भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे थे, लेकिन उनकी इस मानसिक परेशानी की असली वजह क्या थी, यह अभी तक साफ नहीं हो पाई है।
दो साल पहले ही हुआ था विवाह, पत्नी हैं गर्भवती
योगेश की शादी साल 2024 में बैहरमपुर की रहने वाली युवती से हुई थी। उनके परिवार में उनका एक करीब सवा साल का मासूम बेटा है, जबकि उनकी पत्नी इस समय गर्भवती हैं। योगेश की माता का देहांत पहले ही हो चुका है और उनके पीछे परिवार में पिता, दादा-दादी और एक छोटा भाई है। इस असमय हादसे से पूरे गांव और परिवार में मातम पसरा हुआ है।
पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंपा
कोसली थाना के एसएचओ मनोज कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने नागरिक अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम करवाकर उसे अंतिम संस्कार के लिए परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। पुलिस ने परिजनों के बयानों के आधार पर सीआरपीसी के तहत इत्तेफाकिया मौत की कार्रवाई दर्ज की है और मामले के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।
बिना गियर के काम करना पड़ा जानलेवा, प्लंबर की मौत से हड़कंप
20 May, 2026 05:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बहादुरगढ़: महाराजा अग्रसेन यूनिवर्सिटी परिसर में सीवरेज टैंक की सफाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में डाबौदा कलां के रहने वाले प्लंबर सुनील की मौत के बाद मामला गरमा गया है। मृतक की पत्नी ने स्थानीय सदर थाने में अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि सुनील की तबीयत ठीक नहीं थी और उनकी ड्यूटी का समय भी खत्म हो चुका था, फिर भी उन्हें जबरन जहरीली गैस से भरे सीवर टैंक में उतारा गया, जिससे उनकी जान चली गई।
अस्पताल प्रबंधन सहित 8 जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा दर्ज
इस मामले में मुस्तैदी दिखाते हुए पुलिस ने मृतक की पत्नी की तहरीर पर महाराजा अग्रसेन अस्पताल प्रबंधन के आला पदाधिकारियों और सुपरवाइजर सहित कुल 8 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। मालूम हो कि सोमवार को यूनिवर्सिटी परिसर में सीवर की सफाई के दौरान अचानक जहरीली गैस का रिसाव होने से पांच कर्मचारी अचेत हो गए थे। अस्पताल में इलाज के दौरान बुधवार को प्लंबर सुनील ने दम तोड़ दिया।
परिजनों का आरोप: बिना सुरक्षा उपकरणों के जबरन कराया जानलेवा काम
मृतक सुनील की पत्नी मीनू ने पुलिस को बताया कि उनके पति अस्पताल में बतौर प्लंबर सेवाएं दे रहे थे। 18 मई को सुबह 9 बजे उनकी शिफ्ट खत्म हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद उन पर दबाव बनाकर उन्हें सीवरेज टैंक की सफाई के काम में धकेल दिया गया। गंभीर आरोप यह भी है कि इस बेहद खतरनाक और जानलेवा काम के लिए कर्मचारियों को कोई भी सुरक्षा किट या उपकरण मुहैया नहीं कराए गए थे। जहरीली गैस की चपेट में आने से सुनील के साथ तीन अन्य सफाईकर्मियों की हालत भी बेहद नाजुक हो गई थी।
सूचना छिपाने और लापरवाही बरतने के आरोप से घिरा प्रशासन
पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि हादसे के बाद उन्हें समय पर कोई जानकारी नहीं दी गई। परिजनों को न तो सुनील के स्वास्थ्य की सही स्थिति बताई गई और न ही इलाज के बारे में स्पष्ट किया गया। जब परिवार के लोग खुद अस्पताल पहुंचे, तब उन्हें सुनील की मौत का पता चला। परिजनों का कहना है कि प्रबंधन ने इस पूरी घटना पर चुप्पी साध रखी है और वे अब दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
इन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम FIR में शामिल
सदर थाना पुलिस ने मीनू की शिकायत के आधार पर मीना सुभाष गुप्ता, कुनाल बंसल, प्रेम गर्ग, अशोक कुमार गर्ग, संजय गुप्ता, प्रधान राजेश गुप्ता, एचओडी राजीव भारद्वाज और इलेक्ट्रिकल सुपरवाइजर अंशुल के खिलाफ कानूनी धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहनता से तफ्तीश शुरू कर दी गई है और जांच में जो भी लापरवाही बरतने का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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