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सूत्रों का दावा- इजराइल ने चोरी-छिपे इराक में तैयार किया सैन्य अड्डा
11 May, 2026 09:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Washington: ईरान के खिलाफ चल रहे हवाई हमलों के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अमेरिकी सूत्रों के मुताबिक, इजराइल ने इराक के सुनसान रेगिस्तानी इलाके में एक गुप्त सैन्य ठिकाना (Secret Base) बनाया था। यह ठिकाना इतना गोपनीय था कि इसकी जानकारी बहुत ही कम लोगों को थी। इजराइल ने इस बेस का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने वाले अपने लड़ाकू विमानों की मदद और आपातकालीन स्थितियों के लिए किया था।
ईरान पर हमले के लिए बना था 'लॉजिस्टिक हब'
इजराइल से ईरान की दूरी लगभग 1,000 मील है, जो हवाई हमलों के लिए बहुत लंबी दूरी मानी जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल ने युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका की सहमति से इस बेस का निर्माण किया था। यहाँ इजराइल की स्पेशल फोर्स और 'सर्च-एंड-रेस्क्यू' टीमें तैनात थीं। इनका मुख्य काम यह था कि अगर ईरान पर हमले के दौरान किसी इजराइली पायलट का विमान क्रैश हो जाए, तो उसे तुरंत वहां से सुरक्षित निकाला जा सके।
इराकी सैनिकों ने खोज लिया था ठिकाना, हुआ हमला
यह सीक्रेट बेस मार्च की शुरुआत में लगभग पकड़ा ही गया था। एक स्थानीय चरवाहे की सूचना पर जब इराकी सेना जांच करने पहुंची, तो वहां मौजूद इजराइली सुरक्षा तंत्र ने उन्हें पीछे हटाने के लिए हवाई हमला कर दिया। इस हमले में एक इराकी सैनिक की मौत हो गई। शुरुआत में इराक ने इस हमले के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए संयुक्त राष्ट्र में शिकायत भी की थी, लेकिन बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया कि इस मिशन में उनका हाथ नहीं था।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है यह इलाका
इराक का पश्चिमी रेगिस्तानी इलाका काफी विशाल और कम आबादी वाला है, जो इसे गुप्त सैन्य गतिविधियों के लिए मुफीद बनाता है। जानकारों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने भी 1991 और 2003 के युद्धों में ऐसे ठिकानों का इस्तेमाल किया था। इजराइली वायु सेना के प्रमुख ने भी हाल ही में अपने सैनिकों को लिखे पत्र में ऐसे 'कल्पना से परे' सीक्रेट मिशनों का जिक्र किया था, जो अब धीरे-धीरे दुनिया के सामने आ रहे हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनवात्रा को मिली रिहाई, थाई राजनीति में हलचल तेज
11 May, 2026 07:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैंकॉक: थाईलैंड की राजनीति के सबसे कद्दावर और चर्चित नेता, पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनवात्रा रविवार को जेल से बाहर आ गए हैं। भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप में एक साल की सजा काट रहे 76 वर्षीय थाकसिन को उनकी उम्र और खराब सेहत के आधार पर पैरोल पर रिहा किया गया है। जब वे बैंकॉक की जेल से बाहर निकले, तो उनके स्वागत के लिए समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिन्होंने 'वी लव थाकसिन' के नारों से आसमान गुंजा दिया।
15 साल के वनवास के बाद मिली बड़ी राहत
टेलीकॉम सेक्टर के अरबपति कारोबारी रहे थाकसिन साल 2001 में पहली बार प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन 2006 में सेना ने तख्तापलट कर उन्हें सत्ता से हटा दिया था। इसके बाद वे करीब 15 साल तक देश से बाहर (निर्वासन में) रहे और 2023 में वापस लौटे। शुरुआत में उन्हें आठ साल की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में थाईलैंड के राजा ने घटाकर एक साल कर दिया था। अब करीब आठ महीने जेल और अस्पताल में बिताने के बाद उन्हें रिहा किया गया है।
रिहाई के बाद भी रहेंगे कड़ी निगरानी में
पैरोल पर बाहर आने के बावजूद थाकसिन को अगले चार महीनों तक सख्त नियमों का पालन करना होगा। उन्हें बैंकॉक स्थित अपने घर पर ही रहना होगा और एक इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग ब्रेसलेट पहनना होगा जिससे उनकी लोकेशन पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा उन्हें समय-समय पर अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट भी देनी होगी। उनके परिवार और समर्थकों ने उन्हें लाल गुलाब भेंट कर अपनी खुशी जाहिर की।
थाईलैंड की राजनीति में मची है उथल-पुथल
थाकसिन की रिहाई ऐसे वक्त में हुई है जब थाईलैंड का राजनीतिक माहौल काफी गर्म है। हाल ही में उनकी बेटी पैतोंगटार्न शिनवात्रा को, जो देश की सबसे युवा प्रधानमंत्री बनी थीं, एक विवादित मामले के चलते कोर्ट ने पद से हटा दिया था। इस राजनीतिक संकट के बीच थाकसिन का बाहर आना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके समर्थकों को उम्मीद है कि उनके आने से उनकी पार्टी 'फेउ थाई' एक बार फिर मजबूती से खड़ी होगी।
विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए भारत के खिलाफ बोले पाक सेना प्रमुख
11 May, 2026 04:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रावलपिंडी: पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने एक बार फिर अपनी पुरानी रणनीति अपनाते हुए भारत के खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी है। रावलपिंडी में एक कार्यक्रम के दौरान मुनीर ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी दुस्साहस का 'दर्दनाक जवाब' दिया जाएगा। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह बयान और कुछ नहीं बल्कि पाकिस्तान की अंदरूनी समस्याओं, जैसे चरमराती अर्थव्यवस्था और राजनीतिक अस्थिरता से अपनी जनता का ध्यान भटकाने का एक जरिया है।
आतंकवाद पर चुप्पी और कश्मीर का पुराना राग
जनरल मुनीर ने अपने भाषण में भारत पर आतंकवाद फैलाने के बेबुनियाद आरोप तो लगाए, लेकिन पाकिस्तान में पल रहे आतंकी संगठनों पर एक शब्द भी नहीं बोला। उन्होंने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को उछालने की कोशिश की और यहां तक दावा कर दिया कि पाकिस्तान में हो रही आतंकी घटनाओं के पीछे भारत का हाथ है। मुनीर का यह रुख उनकी हताशा को साफ दर्शाता है, क्योंकि भारत पहले ही कह चुका है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद बंद नहीं करता, बातचीत संभव नहीं है।
अपने ही देश में घिरी पाकिस्तानी सेना
हकीकत यह है कि पाकिस्तानी सेना इन दिनों अपने ही घर में उग्रवादी गुटों के सामने बेबस नजर आ रही है। हाल ही में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने सेना को बड़ा नुकसान पहुँचाया है। संगठन का दावा है कि अप्रैल के आखिरी दिनों में हुए हमलों में कम से कम 42 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। इसके अलावा खैबर पख्तूनख्वा में भी एक भीषण बम धमाके में 21 सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई। जनरल मुनीर इन हमलों को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं, जिससे सेना के भीतर ही उनकी कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश
पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पूरी तरह चरमरा चुकी है और सेना अपनी गिरती साख बचाने के लिए अब भारत विरोधी बयानबाजी को ढाल बना रही है। पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व असल समस्याओं को हल करने के बजाय 'काल्पनिक दुश्मनों' का डर दिखाकर अपनी सत्ता बचाए रखना चाहता है। हालांकि, अब पाकिस्तान की जनता भी सेना की इस पुरानी चाल को समझने लगी है और वह जुमलों के बजाय असली समाधान चाहती है।
संक्रमित क्रूज शिप पर फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया
11 May, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Madrid: स्पेन के कैनरी द्वीप तट पर हंटा वायरस (Hanta Virus) की आशंका के चलते हड़कंप मच गया, जिसके बाद डच क्रूज शिप 'एमवी होंडियस' से दो भारतीयों समेत सभी 150 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। रविवार को स्पेनिश स्वास्थ्य अधिकारियों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सख्त नियमों के तहत यह बचाव अभियान चलाया। राहत की खबर यह है कि जहाज पर काम करने वाले दोनों भारतीय नागरिक पूरी तरह ठीक हैं और उनमें बीमारी का कोई भी लक्षण नहीं मिला है।
भारतीय दूतावास की निगरानी और क्वारंटाइन
स्पेन के राष्ट्रीय आपातकालीन विभाग के अनुसार, भारतीय दूतावास लगातार वहां के अधिकारियों के टच में है। सुरक्षा के लिहाज से दोनों भारतीयों को आगे की जांच और क्वारंटाइन के लिए नीदरलैंड भेज दिया गया है। स्पेन में भारतीय राजदूत ने भरोसा दिलाया है कि हमारे नागरिकों की सुरक्षा के लिए स्थिति पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए स्पेनिश सेना और सिविल गार्ड ने खास बसों का इस्तेमाल किया, ताकि वे किसी के संपर्क में न आएं।
WHO की सलाह: घबराने की जरूरत नहीं
हंटा वायरस को लेकर फैली अफवाहों के बीच डब्ल्यूएचओ (WHO) के चीफ टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा कि यह मामला कोविड-19 जैसा गंभीर नहीं है और आम लोगों के लिए खतरा बहुत कम है। टेड्रोस ने कैनरी द्वीप के लोगों को पत्र लिखकर बताया कि डब्ल्यूएचओ के एक्सपर्ट्स और जरूरी दवाएं पहले से ही जहाज पर मौजूद हैं, इसलिए हालात पूरी तरह कंट्रोल में हैं।
सावधानी के लिए जहाज को रखा गया दूर
एहतियात के तौर पर प्रभावित जहाज को अभी किनारे से दूर समुद्र में ही लंगर डालकर खड़ा किया गया है। यात्रियों को बंदरगाह से सीधे एयरपोर्ट के रनवे तक ले जाया गया, जहां से अलग-अलग देशों के लिए फ्लाइट्स की व्यवस्था की जा रही है। नीदरलैंड उन यात्रियों के लिए स्पेशल फ्लाइट भेज रहा है, जिन्हें उनके देशों ने अब तक वापस नहीं बुलाया है। स्पेनिश यात्रियों को पहले ही मैड्रिड रवाना किया जा चुका है।
NIT में लगातार आत्महत्या के मामलों से बढ़ी चिंता, अब कर्मचारी ने उठाया कदम
11 May, 2026 02:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र: कुरुक्षेत्र नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) में एक बार फिर दुखद घटना सामने आई है। सोमवार सुबह करीब 6 बजे संस्थान के हॉस्टल नंबर चार की मेस के पीछे एक कर्मचारी ने फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इस घटना के बाद से पूरे परिसर में शोक और सन्नाटे का माहौल है।
मेस कर्मचारी ने उठाया आत्मघाती कदम
मृतक की पहचान कौशल के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले का निवासी था। कौशल एनआईटी के हॉस्टल नंबर चार की मेस में रोटियां बनाने का काम करता था। सोमवार की सुबह जब अन्य कर्मचारी काम पर पहुंचे, तो उन्होंने कौशल का शव मेस के पिछले हिस्से में लटका हुआ पाया।
दो महीने में पांचवीं बड़ी घटना
संस्थान के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। पिछले मात्र दो महीनों के भीतर एनआईटी कुरुक्षेत्र में यह आत्महत्या का पांचवां मामला है। इससे पहले चार छात्र भी अलग-अलग कारणों से खुदकुशी जैसा कदम उठा चुके हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस जांच और छानबीन शुरू
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी तक मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। कौशल ने यह कदम क्यों उठाया, इसके कारणों का पता लगाने के लिए उसके सहयोगियों और परिवार से पूछताछ की जा रही है।
परिसर में पसरा सन्नाटा
एक के बाद एक हो रही इन मौतों से एनआईटी के छात्रों और कर्मचारियों में डर और चिंता का माहौल है। संस्थान प्रशासन इस मामले में फिलहाल चुप्पी साधे हुए है, लेकिन स्थानीय पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है ताकि इन घटनाओं के पीछे की असल वजह सामने आ सके। मृतक के परिजनों को सूचित कर दिया गया है।
हरियाणा से सोमनाथ यात्रा होगी आसान, 8 जून से विशेष ट्रेन शुरू
11 May, 2026 12:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र: मुख्यमंत्री नायब सैनी ने आज कुरुक्षेत्र प्रवास के दौरान प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि आगामी 8 जून को हरियाणा से भक्तों का एक विशाल जत्था विशेष ट्रेन के जरिए सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए प्रस्थान करेगा। मुख्यमंत्री ने आज गीता स्थली ज्योतिसर में नमन करने के बाद पिहोवा के अरुणाय स्थित श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' में शिरकत की और कलश यात्रा को झंडी दिखाकर रवाना किया।
सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष और गौरवशाली इतिहास
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। उन्होंने इतिहास का स्मरण कराते हुए कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल के संकल्प और 1951 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के कर-कमलों द्वारा इस मंदिर का पुनरुद्धार हुआ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास केवल पत्थरों की इमारत नहीं, बल्कि भारत की वीरता और अटूट आस्था की विजय गाथा है।
मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना से गरीबों का सपना हो रहा साकार
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की मदद के लिए मुख्यमंत्री ने 'मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना' की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत हाल ही में 850 श्रद्धालुओं का दल पांच दिवसीय धार्मिक यात्रा संपन्न कर लौटा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर नागरिक, चाहे उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन कर सके।
सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ रहा है आधुनिक भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का लाइव प्रसारण देखने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान केंद्र और राज्य सरकार देश को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का निरंतर प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कुरुक्षेत्र का विशेष जिक्र करते हुए कहा कि 'स्वदेश दर्शन योजना' के तहत कुरुक्षेत्र को 2015 में ही 'श्री कृष्णा सर्किट' का हिस्सा बनाया गया था, जिससे यहाँ पर्यटन और सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
भविष्य के विकसित भारत का संकल्प
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि मंदिरों का संरक्षण और तीर्थ यात्राओं का आयोजन केवल अतीत को याद करना नहीं है, बल्कि यह विकसित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भारत के निर्माण का एक मजबूत संकल्प है। इस अवसर पर पिहोवा में आयोजित 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के दौरान श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। सरकार अब 8 जून की विशेष यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी है।
मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव, ईरान ने जासूसी मामले में उठाया बड़ा कदम
11 May, 2026 12:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद/रावलपिंडी: पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक बार फिर भारत के खिलाफ तीखी बयानबाजी की है। भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' को एक साल पूरा होने पर अपनी खीझ मिटाते हुए मुनीर ने धमकी दी है कि अगर भविष्य में ऐसी कोई कार्रवाई हुई, तो इसके परिणाम 'दर्दनाक' होंगे। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान केवल अपनी जनता का ध्यान भटकाने और सेना की गिरती साख को बचाने की एक कोशिश है।
ब्रह्मोस की मार और 'ऑपरेशन सिंदूर' का खौफ
पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था। इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने ब्रह्मोस मिसाइलों का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के भीतर स्थित आतंकी ठिकानों और कई महत्वपूर्ण सैन्य केंद्रों को सटीक निशाना बनाया था। इस हमले ने पाकिस्तानी डिफेंस की पोल खोल दी थी। अब एक साल बाद रावलपिंडी के जनरल मुख्यालय (GHQ) में मुनीर उसी हार को 'जीत' बताकर अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।
भाषण में कश्मीर राग और खोखली धमकियां
आसिम मुनीर ने अपने भाषण में फिर से पुराना कश्मीर राग अलापा। उन्होंने कहा कि कश्मीर के बिना पाकिस्तान की कहानी अधूरी है और वे इसका राजनीतिक व कूटनीतिक समर्थन जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होगा। असल में, पाकिस्तान इस वक्त गहरे आर्थिक संकट और आंतरिक अस्थिरता से जूझ रहा है, ऐसे में युद्ध की बात करना केवल जनता को भावनात्मक रूप से उलझाने का एक जरिया है।
जमीनी हकीकत बनाम पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा
मुनीर ने भले ही 'दर्दनाक जवाब' देने की बात कही हो, लेकिन सच्चाई यह है कि पिछले साल के संघर्ष में पाकिस्तानी सेना पूरी तरह बैकफुट पर थी। ब्रह्मोस मिसाइलों की रफ्तार और सटीकता के सामने पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम बौना साबित हुआ था। यही कारण है कि भारतीय रक्षा खेमे में मुनीर के इन बयानों को केवल एक 'गीदड़भभकी' के रूप में देखा जा रहा है।
ईरान में जासूसी के आरोपियों को फांसी, अमेरिका-इजरायल से बढ़ा तनाव
11 May, 2026 11:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 10 हफ्तों से चल रही जंग को खत्म करने की उम्मीदों को उस वक्त करारा झटका लगा, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। रविवार को ईरान ने इस संघर्ष को थामने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव पेश किया था। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस डील में लेबनान में जारी हिंसा को रोकने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री रास्ते पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का भरोसा दिया गया था। लेकिन जैसे ही यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस पहुंचा, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साफ कर दिया कि यह समझौता अमेरिका के हितों के अनुकूल नहीं है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
ईरान की सख्त शर्तें और ट्रंप का इनकार
ईरान ने इस प्रस्ताव के साथ अमेरिका के सामने कई कड़ी शर्तें भी रखी थीं। ईरान चाहता था कि अमेरिका युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा दे, उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों को तुरंत हटाए और ईरानी तेल की बिक्री पर लगी रोक को खत्म करे। इसके अलावा, ईरान ने भविष्य में किसी भी अमेरिकी हमले के खिलाफ लिखित गारंटी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता का सम्मान करने की मांग की थी। हालांकि, ट्रंप के सख्त रुख ने साफ कर दिया कि अमेरिका इन शर्तों के आगे झुकने को तैयार नहीं है। अमेरिका का तर्क है कि पहले पूरी तरह से युद्धविराम हो, उसके बाद ही परमाणु कार्यक्रम जैसे विवादित मुद्दों पर कोई चर्चा की जाएगी।
कच्चे तेल के दाम बढ़े और पाकिस्तान की मध्यस्थता
ट्रंप के इस कड़े फैसले का असर पूरी दुनिया के बाजारों पर देखने को मिला। जैसे ही डील कैंसिल होने की खबर आई, इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें करीब 3 डॉलर प्रति बैरल तक उछल गईं। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा में रही। दरअसल, पाकिस्तान इस जंग में मध्यस्थ (Mediator) के तौर पर काम कर रहा है और उसी ने ईरान का यह संदेश अमेरिका तक पहुंचाया था। हालांकि, पाकिस्तान की तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के बीच की खाई कम होती नहीं दिख रही है और शांति का रास्ता फिर से भटक गया है।
खाड़ी देशों में ड्रोन का साया और एलएनजी जहाज की आवाजाही
एक तरफ जहाँ कूटनीतिक बातचीत फेल हो रही है, वहीं दूसरी तरफ खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में सैन्य हलचल तेज हो गई है। रविवार को सीजफायर के दावों के बीच यूएई, कतर और कुवैत के ऊपर कई संदिग्ध ड्रोन देखे गए। यूएई ने दो ड्रोन को मार गिराने का दावा किया, जबकि कतर ने अपने समुद्री क्षेत्र में एक जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की। इसी तनाव के बीच एक राहत भरी खबर भी आई जब कतर एनर्जी का एक एलएनजी गैस जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर पाकिस्तान के पोर्ट कासिम के लिए रवाना हुआ। बताया जा रहा है कि जंग शुरू होने के बाद पहली बार ईरान की मंजूरी से कोई गैस जहाज इस रास्ते से गुजरा है, जिसे भरोसे की बहाली की एक छोटी कोशिश माना जा रहा है।
बाइक सवार दोस्तों पर टूटा मौत का कहर, हादसे में 2 की जान गई
11 May, 2026 11:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत: हरियाणा के इसराना थाना क्षेत्र के अंतर्गत शाहपुर अड्डे पर रविवार देर रात एक भीषण सड़क हादसा हो गया। रोहतक के लाखन माजरा गांव से बाइक पर सवार होकर हरिद्वार जा रहे चार दोस्तों को एक अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी। इस दर्दनाक हादसे में दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
हरिद्वार की यात्रा बनी काल
जानकारी के अनुसार, लाखन माजरा निवासी प्रदीप (30), रोहित (25), संजय और सोहन रविवार रात करीब 10:30 बजे अपनी बाइक से धार्मिक यात्रा पर हरिद्वार के लिए निकले थे। चारों दोस्त एक ही मोटरसाइकिल पर सवार थे। जैसे ही उनकी बाइक शाहपुर बस स्टैंड के पास पहुंची, पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए।
दो दोस्तों की मौत, दो अस्पताल में भर्ती
हादसे के बाद चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े। दुर्भाग्यवश, प्रदीप और रोहित ने इस दुर्घटना में दम तोड़ दिया। वहीं, सोहन और संजय की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने घायलों को पास के ही एक निजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया है, जहाँ उनका उपचार जारी है।
पुलिस की कार्रवाई और अज्ञात की तलाश
घटना की सूचना मिलते ही इसराना थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया है। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और अज्ञात वाहन की पहचान के लिए आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है।
घायल के बयान पर मामला दर्ज
हादसे में जीवित बचे एक दोस्त के बयान के आधार पर पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने और हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी चालक को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस हादसे के बाद लाखन माजरा गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
व्यापार युद्ध से ताइवान तक, चीन दौरे में कई बड़े मुद्दों पर चर्चा संभव
11 May, 2026 09:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच रिश्तों की जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है। करीब नौ साल के लंबे इंतजार के बाद कोई अमेरिकी राष्ट्रपति चीन के आधिकारिक दौरे पर जा रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कन्फर्म किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन की यात्रा पर रहेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी दुनिया की नजरें ईरान-इस्राइल युद्ध और ग्लोबल एनर्जी संकट पर टिकी हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के न्योते पर हो रही यह यात्रा न केवल व्यापार बल्कि ग्लोबल पॉलिटिक्स के लिहाज से भी बहुत 'क्रिटिकल' मानी जा रही है।
ट्रंप का बिजी शेड्यूल: द्विपक्षीय बैठक और वर्किंग लंच
व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप बुधवार शाम को बीजिंग लैंड करेंगे। गुरुवार को उनका जोरदार स्वागत किया जाएगा, जिसके बाद वे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हाई-लेवल मीटिंग करेंगे। इस दौरान वे 'टेंपल ऑफ हेवन' का दीदार करेंगे और राजकीय भोज (State Banquet) में शामिल होंगे। शुक्रवार को भी दोनों नेताओं के बीच चाय पर चर्चा और वर्किंग लंच होगा। खबर तो यह भी है कि इस साल के अंत तक शी जिनपिंग भी अमेरिका के दौरे पर जा सकते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद है।
ट्रेड वॉर खत्म करने की कोशिश और बुसान में बातचीत
ट्रंप की इस यात्रा का सबसे बड़ा मकसद व्यापारिक तनाव (Trade Tension) को कम करना है। ट्रंप के पहुंचने से ठीक पहले, चीन के उपप्रधानमंत्री हे लिफेंग और अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट दक्षिण कोरिया के बुसान में व्यापार वार्ता का आखिरी दौर पूरा करेंगे। कोशिश यही है कि जब दोनों बड़े नेता मिलें, तो व्यापारिक समझौतों और टैरिफ को लेकर कोई ठोस रास्ता निकल सके। दोनों देश चाहते हैं कि व्यापारिक मतभेदों को पीछे छोड़कर इकोनॉमी को मजबूती दी जाए।
ताइवान और हथियारों की डील पर बना रहेगा सस्पेंस
भले ही दोनों नेता हाथ मिला रहे हों, लेकिन ताइवान का मुद्दा अभी भी गले की फांस बना हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि उनकी ताइवान पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं आया है। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि वे ताइवान को हथियारों की सप्लाई जारी रखेंगे, जैसा उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल में किया था। चीन के दबाव के बावजूद अमेरिका ताइवान के समर्थन से पीछे हटता नहीं दिख रहा है, जिससे यह साफ है कि बातचीत की मेज पर माहौल काफी गरमागरम रहने वाला है।
लैंडिंग के वक्त बड़ा हादसा टला, फ्लाइट के पहिए से उठीं आग की लपटें
11 May, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू (नेपाल): नेपाल की राजधानी काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक बड़ा विमान हादसा टल गया। इस्तांबुल (तुर्की) से आ रहे टर्किश एयरलाइंस के विमान (TK 726) की लैंडिंग के दौरान अचानक उसके टायर से आग की लपटें निकलने लगीं। इस घटना से एयरपोर्ट पर हड़कंप मच गया, लेकिन एयरपोर्ट प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों की मुस्तैदी की वजह से समय रहते आग पर काबू पा लिया गया। इस सूझबूझ ने एक बहुत बड़ी तबाही को रोक लिया।
लैंडिंग के वक्त टायर से निकलीं लपटें
जैसे ही विमान ने रनवे को छुआ, उसके एक टायर में आग लग गई। एयरपोर्ट सुरक्षा के एसपी राजकुमार सिलावाल के मुताबिक, टायर में आग लगने की सूचना मिलते ही इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तुरंत एक्टिव हो गईं। दमकल की गाड़ियों ने रनवे पर ही विमान को घेर लिया और पानी की बौछार कर कुछ ही मिनटों में आग को बुझा दिया। गनीमत रही कि आग विमान के बाकी हिस्सों तक नहीं फैली, जिससे एक भीषण विस्फोट होने का खतरा टल गया।
सभी यात्री सुरक्षित, UN अधिकारियों की मौजूदगी
विमान में कुल 278 यात्री और चालक दल (Crew) के 11 सदस्य सवार थे। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सभी 289 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इस विमान में संयुक्त राष्ट्र (UN) के कुछ सीनियर अधिकारी भी सफर कर रहे थे, जिन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच रेस्क्यू किया गया। पुलिस ने बताया कि यात्रियों को किसी भी तरह की चोट नहीं आई है और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।
सुरक्षा कर्मियों की फुर्ती से बचा बड़ा हादसा
हवाई अड्डा प्रशासन ने बताया कि अगर आग पर काबू पाने में कुछ सेकंड की भी देरी होती, तो नतीजे भयावह हो सकते थे। सुरक्षा कर्मियों और फायर फाइटिंग टीम के बीच शानदार तालमेल देखने को मिला। घटना के बाद रनवे को कुछ समय के लिए चेक किया गया ताकि अन्य उड़ानों पर इसका असर न पड़े। फिलहाल विमान को रनवे से हटाकर तकनीकी जांच के लिए भेज दिया गया है, ताकि आग लगने के सही कारणों का पता चल सके।
टेकऑफ के दौरान रनवे पर व्यक्ति से टकराया विमान, इंजन में आग लगने के बाद सुरक्षित निकाले गए यात्री
10 May, 2026 03:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के डेनवर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शुक्रवार देर रात एक रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा हुआ, जब उड़ान भरने की तैयारी कर रहा एक विमान रनवे पर मौजूद एक पैदल यात्री से टकरा गया। इस भीषण टक्कर के तुरंत बाद विमान के इंजन में आग की लपटें उठने लगीं, जिससे अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। पायलट की सूझबूझ से विमान को रनवे पर ही रोक लिया गया और विमान में धुआं भरते ही आपातकालीन द्वारों को खोलकर यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई।
पायलट की चेतावनी और इंजन में भीषण आग
हादसे के वक्त विमान डेनवर से लॉस एंजिल्स के लिए रवाना होने वाला था। जैसे ही विमान ने गति पकड़ी, पायलट ने कंट्रोल टावर को सूचित किया कि रनवे पार कर रहे एक व्यक्ति से उनकी टक्कर हो गई है और विमान के इंजन ने आग पकड़ ली है। विमान में सवार कुल 231 लोगों की जान खतरे में देख पायलट ने तत्काल इमरजेंसी इवैक्युएशन का निर्णय लिया। एयरबस A321 में मौजूद 224 यात्रियों और 7 क्रू सदस्यों को इमरजेंसी स्लाइड के जरिए सुरक्षित नीचे उतारा गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
सुरक्षा घेरा तोड़कर रनवे तक पहुंचने का रहस्य
इस घटना ने अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एयरपोर्ट प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी हैं कि कड़ी निगरानी के बावजूद एक आम नागरिक प्रतिबंधित रनवे क्षेत्र तक कैसे पहुंच गया। ऑडियो रिकॉर्डिंग से यह स्पष्ट हुआ है कि वह व्यक्ति जानबूझकर या अनजाने में रनवे पार करने की कोशिश कर रहा था। फिलहाल उस पैदल यात्री की स्थिति के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन प्रशासन ने मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है।
यात्री सुरक्षित और रनवे पर परिचालन बंद
एयरलाइन द्वारा जारी बयान के अनुसार, विमान से सुरक्षित निकाले गए सभी यात्री फिलहाल खतरे से बाहर हैं और किसी के गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है। हालांकि, इस हादसे और जांच की प्रक्रिया के चलते एयरपोर्ट के रनवे 17एल को फिलहाल पूरी तरह बंद कर दिया गया है। विशेषज्ञ अब इस बात की तफ्तीश कर रहे हैं कि टक्कर के बाद इंजन में लगी आग ने विमान के अन्य हिस्सों को कितना नुकसान पहुंचाया है और सुरक्षा प्रोटोकॉल में कहां चूक हुई जिसकी वजह से एक व्यक्ति की जान जोखिम में पड़ गई।
तेल और गैस पर रूस-चीन की बढ़ती नजदीकी, पुतिन का बड़ा कदम
10 May, 2026 11:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के बीच, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के एक बयान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। पुतिन ने रूस और चीन के बीच एक ऐतिहासिक ऊर्जा समझौते के करीब पहुँचने की घोषणा की है, जो आने वाले समय में यूरेशियाई महाद्वीप में ईंधन के प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय सामरिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।
पावर ऑफ साइबेरिया-2: एक रणनीतिक पाइपलाइन
इस प्रस्तावित डील का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ 'पावर ऑफ साइबेरिया-2' पाइपलाइन परियोजना है। 2,600 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन रूस के यामल प्रायद्वीप से शुरू होकर मंगोलिया के रास्ते उत्तरी चीन तक गैस पहुँचाएगी। योजना के अनुसार, इस मार्ग से अगले 30 वर्षों तक सालाना 50 अरब क्यूबिक मीटर गैस की आपूर्ति की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक चीन को होने वाली कुल रूसी गैस आपूर्ति 100 बीसीएम के आंकड़े को पार कर सकती है, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा गलियारों में से एक बना देगा।
यूरोप से एशिया की ओर बड़ा बदलाव
यूक्रेन संघर्ष और पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस ने अपनी ऊर्जा रणनीति का रुख पूरी तरह एशिया की ओर मोड़ दिया है। इस नई पाइपलाइन के सक्रिय होने से रूस के उस गैस निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा चीन की ओर चला जाएगा, जो पहले यूरोपीय देशों को जाता था। यह बदलाव न केवल रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में यूरोप और अमेरिका के प्रभाव को भी चुनौती देगा।
वित्तीय और तकनीकी चुनौतियां
इस विशाल व्यापार की एक और खास बात डॉलर के बजाय युआन और रूबल में होने वाला लेन-देन है, जो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में भी नए संकेत दे रहा है। हालांकि, सितंबर 2025 में हुई इस डील पर अंतिम कानूनी मुहर और गैस की कीमतों से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर चीन की पूरी सहमति मिलना अभी शेष है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के कारण इस सौदे में चीन की स्थिति मोलभाव के मामले में काफी मजबूत है। यदि यह समझौता पूरी तरह धरातल पर उतरता है, तो यह इस दशक का सबसे बड़ा ऊर्जा और भू-राजनीतिक परिवर्तन साबित होगा।
पश्चिम अफ्रीका के माली में बड़ा आतंकी हमला, कई लोग मारे गए
10 May, 2026 08:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बमाको: पश्चिमी अफ्रीकी देश माली इस समय भीषण जिहादी हिंसा और अस्थिरता के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। अल-कायदा से जुड़े आतंकी संगठन 'जमात नुसरत अल-इस्लाम वल मुस्लिमीन' (JNIM) द्वारा किए गए सिलसिलेवार हमलों में अब तक 70 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि स्थानीय सूत्रों का अंदेशा है कि यह संख्या 80 के पार जा सकती है। आतंकियों ने उन निर्दोष ग्रामीणों को निशाना बनाया है जिन्होंने उनके द्वारा थोपे गए समझौतों को मानने से इनकार कर दिया था।
जेल पर धावा और राजधानी की घेराबंदी
माली की सुरक्षा व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती तब पैदा हुई जब हथियारबंद लड़ाकों ने राजधानी बामको से मात्र 60 किलोमीटर दूर स्थित 'केनीरोबा सेंट्रल जेल' पर हमला बोल दिया। इस जेल में करीब 2,500 कैदी बंद हैं, जिनमें दर्जनों खूंखार आतंकी भी शामिल हैं। इस घटना के बाद जेएनआईएम ने बामको की ओर जाने वाली मुख्य सड़कों पर चेकपॉइंट बनाकर शहर की पूर्ण आर्थिक और सैन्य घेराबंदी करने की चेतावनी दी है, जिससे सरकार और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।
सेना की भूमिका पर बढ़ता जन आक्रोश
लगातार होती मौतों और सेना की कथित निष्क्रियता ने स्थानीय आबादी के गुस्से को भड़का दिया है। ग्रामीणों और युवा नेताओं का आरोप है कि पास में सैन्य टुकड़ियों की मौजूदगी के बावजूद, समय पर मदद नहीं पहुंची, जिससे आतंकियों को कत्लेआम मचाने का अवसर मिला। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जेएनआईएम और तुआरेग-बहुल 'अजावाद लिबरेशन फ्रंट' के बीच हुए नए गठबंधन ने आतंकी संगठनों की ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे देश की सुरक्षा दीवार ढहती नजर आ रही है।
रणनीतिक झटके और नेतृत्व संकट
सैन्य मोर्चे पर माली की स्थिति तब और गंभीर हो गई जब हालिया संघर्षों में देश के रक्षा मंत्री की मौत हो गई। इसके अतिरिक्त, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तरी शहर 'किडल' से रूसी सैनिकों का पीछे हटना सेना के मनोबल के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि सैन्य कमांडर विद्रोहियों के खिलाफ सक्रिय अभियान चलाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन राजधानी के इतने करीब बढ़ती आतंकी गतिविधियां इन सरकारी दावों की पोल खोल रही हैं।
होर्मुज संकट के बीच भारत ने बढ़ाया ऊर्जा और रक्षा आत्मनिर्भरता पर फोकस
10 May, 2026 08:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के तनाव ने अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। व्यापारिक मार्ग अब केवल आर्थिक लेन-देन का माध्यम न रहकर भू-राजनीतिक हथियारों में तब्दील हो गए हैं। इस बदलते परिवेश में, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संभावित बाधाओं ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक तैयारियों के सामने नई चुनौतियां पेश कर दी हैं। भारत अपनी तेल और गैस आवश्यकताओं के लिए एक बड़े आयात मार्ग पर निर्भर है, जहाँ ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता रणनीतिक टकराव कीमतों और आपूर्ति में अस्थिरता पैदा कर सकता है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की बढ़ती आवश्यकता
मौजूदा संकट ने भारत के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। चूंकि भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी संवेदनशील समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए किसी भी प्रकार की नाकाबंदी भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भारत को अपनी ऊर्जा नीतियों पर पुनर्विचार करने और घरेलू विकल्पों को तेजी से विकसित करने का एक कड़ा संदेश दे रही है, ताकि भविष्य में होने वाले किसी भी वैश्विक झटके से देश को सुरक्षित रखा जा सके।
रक्षा विनिर्माण और नीतिगत बदलाव
आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं ने रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता को कम करने की दिशा में भी एक बड़ा मोड़ ला दिया है। सरकार इस रणनीतिक कमजोरी को दूर करने के लिए 'डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर' (DAP 2020) और आगामी DAP 2026 जैसे ठोस कदम उठा रही है। निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन और निवेश नियमों में ढील देने के कारण देश में हथियारों के उत्पादन और निर्यात, दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यह कदम न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता को भी सुनिश्चित कर रहे हैं।
आर्थिक विकास और औद्योगिक गलियारे
रक्षा उत्पादन के विस्तार का सबसे सकारात्मक प्रभाव देश के एमएसएमई (MSME) सेक्टर और तकनीकी नवाचार पर पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में विकसित हो रहे डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डिजाइन और उत्पादन के नए केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं, जिससे रोजगार के व्यापक अवसर पैदा हो रहे हैं। हालांकि, पूर्ण आत्मनिर्भरता की यह राह जटिल है और इसके लिए निरंतर नीतिगत सुधारों तथा अनुसंधान में निवेश की आवश्यकता होगी। फिर भी, एक सुदृढ़ घरेलू रक्षा और ऊर्जा ढांचा तैयार करना भारत के दीर्घकालिक आर्थिक और सामरिक हितों के लिए अनिवार्य हो गया है।
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