राजनीति
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का निधन, नेताओं ने जताया शोक
19 May, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बेहद वरिष्ठ नेता भुवनचंद्र खंडूरी का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे और देहरादून स्थित मैक्स अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। उनके देहावसान की पुष्टि उनकी सुपुत्री और उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने की। खंडूरी के निधन की खबर सार्वजनिक होते ही देश और राज्य के राजनीतिक व सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित विभिन्न दलों के शीर्ष नेताओं ने उनके जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
पुत्री ऋतु खंडूरी और पुत्र मनीष ने जताया गहरा शोक
उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने एक अत्यंत भावुक संदेश जारी करते हुए इस दुखद समाचार की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वे बेहद भारी मन से सूचित कर रही हैं कि उनके आदरणीय 'जनरल साहब' (भुवनचंद्र खंडूरी) अब हमारे बीच नहीं रहे। वहीं, उनके पुत्र मनीष खंडूरी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पिता के प्रति अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने लिखा कि उनके पिता ही उनके लिए सब कुछ थे और वे केवल एक पिता ही नहीं, बल्कि उनके लिए भगवान के समान मार्गदर्शक थे।
मैक्स अस्पताल में लंबे समय से चल रहा था उपचार
पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूरी पिछले काफी समय से उम्र संबंधी और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, वे मुख्य रूप से हृदय संबंधी (हार्ट से जुड़ी) दिक्कतों से जूझ रहे थे, जिसके चलते उन्हें मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी नाजुक सेहत को देखते हुए पिछले महीने ही सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी खुद अस्पताल पहुंचे थे और डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य का हालचाल जाना था।
सैन्य पृष्ठभूमि: मेजर जनरल के पद से हुए थे सेवानिवृत्त
सक्रिय राजनीति के मंच पर कदम रखने से पहले भुवनचंद्र खंडूरी ने देश की सीमाओं की रक्षा में अपना एक लंबा और गौरवशाली समय बिताया था। वे भारतीय सेना में एक जांबाज सैन्य अधिकारी रहे और मेजर जनरल के प्रतिष्ठित पद से सेवानिवृत्त (रिटायर) हुए थे। सेना से अपनी सेवा पूरी करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन चुना और भाजपा के साथ जुड़कर राजनीति की मुख्यधारा में शामिल हो गए, जहां उनके अनुशासन को हमेशा सराहा गया।
दो बार संभाली देवभूमि के मुख्यमंत्री पद की कमान
अपनी कुशल प्रशासनिक क्षमता के चलते भुवनचंद्र खंडूरी ने दो अलग-अलग कार्यकालों में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य का नेतृत्व किया। वे पहली बार साल 2007 में राज्य के मुख्यमंत्री चुने गए और मार्च 2007 से जून 2009 तक इस पद पर रहे। हालांकि, साल 2009 के लोकसभा चुनाव में राज्य के भीतर पार्टी के कमजोर प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद, साल 2011 में पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया और वे सितंबर 2011 से मार्च 2012 तक दूसरी बार सूबे के मुखिया रहे।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े फैसलों और साफ छवि के लिए स्मरणीय
अपने दूसरे मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान भुवनचंद्र खंडूरी ने प्रशासनिक शुचिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ बेहद कड़ा व कड़ा रुख अख्तियार किया था। संपूर्ण राजनीतिक जीवन में उनकी पहचान एक बेहद ईमानदार, सिद्धांतवादी और अनुशासित राजनेता की रही। उत्तराखंड की सियासत और विकास यात्रा में उन्हें हमेशा एक साफ-सुथरी कार्यशैली, बेदाग छवि और बेहतरीन प्रशासनिक पकड़ वाले जननेता के रूप में याद किया जाएगा।
पहली बार बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक, अमित शाह रहेंगे मौजूद
19 May, 2026 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जगदलपुर: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के छत्तीसगढ़ दौरे का आज दूसरा दिन है। सोमवार देर शाम रायपुर पहुंचने के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से शिष्टाचार मुलाकात की। आज मुख्यमंत्री डॉ. यादव जगदलपुर में आयोजित होने वाली '26वीं मध्य क्षेत्रीय परिषद' (Central Zonal Council) की बेहद महत्वपूर्ण बैठक में शिरकत करेंगे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे शुरू होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी शामिल हो रहे हैं।
चार राज्यों के विकास और प्रशासनिक तालमेल पर महामंथन
जगदलपुर में होने वाली इस बैठक में चारों पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच प्रशासनिक और नीतिगत मामलों को लेकर आपसी समन्वय (कोऑर्डिनेशन) बढ़ाने पर मुख्य रूप से चर्चा होगी। इस परिषद का उद्देश्य राज्यों के बीच सीमा विवाद, सुरक्षा, बुनियादी ढांचे के विकास और जनहित की योजनाओं को मिलकर बेहतर ढंग से लागू करना है। इससे पहले मध्य क्षेत्रीय परिषद की 25वीं बैठक उत्तर प्रदेश में आयोजित की गई थी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे का भी आज दूसरा दिन है, जो इस बैठक के बाद दोपहर 3 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए चर्चा के मुख्य बिंदुओं को साझा करेंगे और शाम 4 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
'बंदूकों की गूंज से लोकगीतों की मधुर धुन तक' का सफर
सोमवार देर शाम गृहमंत्री अमित शाह ने जगदलपुर में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। बस्तर के इस बदलते रंग को देखकर उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी साझा करते हुए लिखा कि जिस जगदलपुर और बस्तर की पहचान कभी बंदूकों की गूंज से होती थी, आज वहाँ ढोल, मांदर और लोकगीतों की मधुर धुन सुनाई दे रही है। उन्होंने 'बस्तर के संग' कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह क्षेत्र अब अपनी अनूठी संस्कृति, कला और धरोहर को सहेज रहा है, जो वैश्विक पटल पर भारत का गौरव बढ़ाएगी। इससे पहले गृहमंत्री ने सोमवार को नक्सल पीड़ितों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल भी जाना था।
बस्तर में पहली बार इतनी बड़ी बैठक, सीएम साय ने जताया गर्व
इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक से पहले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर के बदलते स्वरूप पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर की धरती पर पहली बार इस तरह की उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। सीएम साय ने रेखांकित किया कि जो बस्तर कभी नक्सली हिंसा और चुनौतियों से जूझता था, वह आज शांति, सुरक्षा और तेज विकास की नई इबारत लिख रहा है। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की यह उपस्थिति अंतरराज्यीय संबंधों को मजबूत करेगी और एक विकसित व आत्मनिर्भर बस्तर के निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगी।
बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव, ‘कट मनी प्रथा’ पर लगा ब्रेक
19 May, 2026 08:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सत्ता संभालते ही पूरी तरह एक्शन मोड में आ गए हैं। राज्य में करीब 15 साल पुराने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन को समाप्त कर सत्ता में आई नई सरकार अब पिछले कई फैसलों और व्यवस्थाओं को बदलने की तैयारी कर रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जिस 'कट मनी' (जबरन वसूली और अवैध कमीशन) के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, सरकार बनते ही मुख्यमंत्री ने उस पर पूरी तरह से रोक लगाने की दिशा में कड़ा रुख अपना लिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि राज्य में कट मनी वसूली के सबूत मिलने पर दोषियों के खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर से दी सीधी चेतावनी
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर क्षेत्र का दौरा किया, जहाँ उन्होंने विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को मात दी थी। इस दौरान स्थानीय जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य से जबरन वसूली और 'कट मनी' जैसी कुप्रथाओं को जड़ से खत्म करने का दृढ़ संकल्प दोहराया। उन्होंने आम जनता से कहा कि यदि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के बदले कोई भी व्यक्ति या अधिकारी उनसे रिश्वत या कमीशन की मांग करता है, तो वे इसके खिलाफ आवाज उठाएं। शिकायतकर्ता द्वारा जरूरी दस्तावेज या प्रमाण पेश करते ही आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। इस मौके पर उन्होंने ममता बनर्जी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि अब उनका राजनीतिक करियर पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
डिजिटल सबूतों को माना जाएगा कानूनी आधार
मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को डिजिटल रूप देते हुए कहा कि रिश्वतखोरी या कमीशन के लेन-देन से जुड़े किसी भी प्रकार के डिजिटल दस्तावेज या सबूतों को पूरी तरह मान्य माना जाएगा। इन डिजिटल साक्ष्यों को भारतीय न्याय संहिता (पहले आईपीसी) के तहत कानूनी रूप से वैध मानकर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। भवानीपुर की जनसभा में उन्होंने यह दावा भी किया कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन और उनकी सरकार बनने के बाद से सीमा पार और जमात जैसे असामाजिक तत्वों की रात की नींद उड़ गई है।
आखिर क्या है यह 'कट मनी' प्रथा?
नई सरकार द्वारा जिस 'कट मनी' प्रथा को बंद करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है, वह असल में एक प्रकार का अनौपचारिक और अवैध कमीशन है। सरल शब्दों में कहें तो यह सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के बदले नेताओं या बिचौलियों द्वारा की जाने वाली अवैध उगाही है। पिछले शासनकाल के दौरान विपक्ष द्वारा लगातार यह आरोप लगाए जाते थे कि स्थानीय टीएमसी नेता अपने क्षेत्रों में किसी भी सरकारी अनुदान, निर्माण कार्य या लोक कल्याणकारी योजना का लाभ आम जनता और ठेकेदारों तक पहुँचाने के एवज में एक निश्चित हिस्सा (कट मनी) अपने पास रख लेते थे। अब सुवेंदु सरकार द्वारा इस पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के बड़े फैसले के बाद देखना होगा कि जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की इस व्यवस्था पर कितना लगाम लग पाता है।
NCP में गुटबाजी तेज, सुनेत्रा पवार की भूमिका पर उठे सवाल
18 May, 2026 06:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में आए बड़े बदलावों के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर संगठन पर वर्चस्व कायम करने को लेकर एक बेहद शांत लेकिन बेहद तीखी अंदरूनी जंग शुरू हो गई है। इस पूरे सियासी विवाद के केंद्र में महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री और पार्टी की नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार आ गई हैं। बारामती लोकसभा उपचुनाव में ऐतिहासिक और हाई-प्रोफाइल जीत दर्ज करने के बाद, सुनेत्रा पवार के सामने अब संगठन को बिखरने से बचाने और पार्टी के भीतर पनप रहे दो विरोधी गुटों के बीच संतुलन साधने की एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि इस आंतरिक खींचतान का असर आगामी चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन और उसकी साख पर सीधे तौर पर पड़ सकता है।
चुनाव आयोग को भेजे पत्र से शुरू हुआ विवाद, प्रफुल्ल पटेल और तटकरे के पद गायब
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों और राजनैतिक जानकारों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार इस समय अपने बेटे पार्थ पवार के नेतृत्व वाले आक्रामक युवा गुट और प्रफुल्ल पटेल व सुनील तटकरे जैसे राष्ट्रीय स्तर के बेहद अनुभवी व कद्दावर नेताओं के बीच में फंसी हुई नजर आ रही हैं। यह विवाद उस समय पूरी तरह खुलकर मीडिया के सामने आ गया, जब सुनेत्रा पवार के दफ्तर से केंद्रीय चुनाव आयोग को संगठन की नई सूची को लेकर एक आधिकारिक पत्र भेजा गया। इस पत्र में बेहद अजीबोगरीब ढंग से पार्टी के दो सबसे बड़े चेहरों—प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे—के आधिकारिक सांगठनिक पदों का कोई जिक्र ही नहीं किया गया था। पत्र में जहां छोटे और जिला स्तर के पदाधिकारियों के पद बिल्कुल साफ-साफ लिखे गए थे, वहीं इन दोनों दिग्गज नेताओं के नामों के आगे की जगह को रहस्यमयी तरीके से खाली छोड़ दिया गया था।
'तकनीकी गलती' या सोची-समझी चाल? पार्थ पवार के युवा गुट पर उंगली
इस अति-संवेदनशील पत्र के लीक होते ही महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों और मीडिया में एनसीपी के भीतर एक बार फिर बड़ी फूट होने की खबरें तेजी से तैरने लगीं। हालांकि, डैमेज कंट्रोल में जुटीं सुनेत्रा पवार और मुख्य प्रवक्ता उमेश पाटिल जैसे वरिष्ठ नेताओं ने तुरंत बयान जारी कर इसे एक महज क्लर्कियल या तकनीकी गलती (टाइपिंग एरर) करार दिया। इसके विपरीत, पार्टी के भीतर की राजनीति को करीब से देखने वाले विश्लेषकों का दावा है कि यह कोई सामान्य मानवीय चूक नहीं थी, बल्कि यह पार्थ पवार के नेतृत्व वाले युवा ब्रिगेड की एक बेहद सोची-समझी रणनीतिक चाल थी। इस गुट का मुख्य मकसद पार्टी के पुराने और अनुभवी नेताओं के बढ़ते रसूख को चुनौती देना और उन्हें संगठन पर पूरी तरह से कब्जा करने से रोकना था, ताकि भविष्य की राजनीति में युवाओं की पकड़ कमजोर न हो।
सुनेत्रा पवार के सामने तीन बड़ी दीवारें: संतुलन, फंड की कमी और शरद पवार गुट की चुनौती
इस समय सुनेत्रा पवार के राजनीतिक भविष्य और नेतृत्व क्षमता के सामने तीन सबसे बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। पहली और सबसे महत्वपूर्ण चुनौती अपने ही परिवार (युवा गुट) और पार्टी के वरिष्ठ दिग्गजों के बीच एक मजबूत संतुलन स्थापित करना है, क्योंकि यदि वे पुराने नेताओं को किनारे करती हैं तो पार्टी का राष्ट्रीय ढांचा ढह सकता है। दूसरी बड़ी समस्या वित्तीय संसाधनों और मंत्रालयों के रसूख की है; दिवंगत नेता अजित पवार के पास पूर्व में राज्य का कद्दावर वित्त मंत्रालय था, जिसके जरिए वे ग्रामीण क्षेत्रों के नेताओं को भारी फंड आवंटित कर अपने साथ जोड़े रखते थे। इसकी तुलना में सुनेत्रा पवार के पास वर्तमान में आबकारी और खेल जैसे सीमित बजट वाले मंत्रालय हैं, ऐसे में जिला सहकारी बैंकों और शुगर मिलों से जुड़े कद्दावर नेताओं को पार्टी में रोके रखना उनके लिए टेढ़ी खीर साबित होगा। तीसरी चुनौती विपक्षी खेमे यानी शरद पवार के गुट से मिल रही कड़ी टक्कर है, जहाँ रोहित पवार जैसे युवा नेता इस अंदरूनी कलह का पूरा फायदा उठाने के लिए सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय हैं।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाना अनिवार्य, सहयोगियों के सामने सीटों की रक्षा सबसे बड़ी परीक्षा
राजनैतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मत है कि सुनेत्रा पवार को यदि इस असंतोष की आग को दबाना है, तो उन्हें बिना कोई समय गंवाए तुरंत पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की एक आपात बैठक बुलानी चाहिए। इस बैठक के माध्यम से उन्हें अनुभवी नेताओं के सम्मान को बहाल करते हुए युवाओं की जिम्मेदारी और लक्ष्मण रेखा को कड़ाई से तय करना होगा। इसके अलावा, महायुति गठबंधन के भीतर आगामी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सामने अपनी पार्टी की पारंपरिक और मजबूत सीटों की रक्षा करना भी उनके लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा होगा। कुल मिलाकर, सुनेत्रा पवार के लिए असली चुनौती बाहरी राजनैतिक विरोधियों से निपटने की नहीं, बल्कि अपने ही घर और संगठन के भीतर शांति और अनुशासन बनाए रखने की है।
केरल की सियासत के बीच राहुल गांधी ने वी.डी. सतीशन को लगाया गले
18 May, 2026 05:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम: केरल के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा और ऐतिहासिक उलटफेर करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी.डी. सतीशन ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ले ली है। तिरुवनंतपुरम के प्रतिष्ठित सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित एक भव्य और विशाल समारोह में राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों पर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही राज्य में पिछले एक दशक (10 साल) से चला आ रहा वामपंथी दल (LDF) का शासन पूरी तरह समाप्त हो गया है।
राष्ट्रीय नेताओं का लगा जमावड़ा, विपक्षी मुख्यमंत्रियों ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान सेंट्रल स्टेडियम में देश भर के शीर्ष विपक्षी नेताओं का एक बड़ा जमावड़ा देखने को मिला। इस भव्य राजनीतिक समारोह में विशेष तौर पर कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाशरा और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद रहे। इनके अलावा कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, जिनमें कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू शामिल हैं, ने भी कार्यक्रम में शिरकत कर नई सरकार को अपनी शुभकामनाएं दीं। मंच पर उस समय एक बेहद सौहार्दपूर्ण दृश्य भी देखने को मिला जब शपथ लेने के तुरंत बाद नए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने मंच पर मौजूद निवर्तमान मुख्यमंत्री और अब विपक्ष के नए नेता पिनाराई विजयन के पास जाकर उन्हें गले लगाया और हाथ मिलाकर राज्य के विकास के लिए सहयोग मांगा।
60 साल बाद इतिहास में पहली बार पूरी कैबिनेट ने एक साथ ली शपथ
केरल के संसदीय इतिहास में यह पहला मौका है जब लगभग 60 वर्षों के बाद मुख्यमंत्री के साथ ही उनके पूरे मंत्रिमंडल ने एक ही दिन और एक ही समय पर शपथ ग्रहण की है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के साथ कुल 20 अन्य कैबिनेट मंत्रियों ने भी पद की शपथ ली, जिससे यह 21 सदस्यीय एक पूर्ण और सशक्त कैबिनेट बन गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि गठबंधन के भीतर आपसी अंतर्विरोधों को दूर कर महज 24 घंटे के भीतर मंत्रियों के नामों को अंतिम रूप दे दिया गया, जो यूडीएफ गठबंधन के भीतर की अटूट एकता को दर्शाता है। इस नई कैबिनेट में सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया है, जिसमें दो महिला मंत्रियों को शामिल करने के साथ-साथ अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के दो चेहरों को भी कैबिनेट में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
सहयोगियों को मिला उचित प्रतिनिधित्व: रमेश चेन्नीथला को गृह और कुन्हालीकुट्टी को उद्योग मिलने की चर्चा
मंत्रिमंडल के गठन में कांग्रेस ने अपने सबसे बड़े और पुराने सहयोगी दल 'इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग' (IUML) को पूरा तवज्जो देते हुए उनके कोटे से पांच मंत्रियों—पी.के. कुन्हालीकुट्टी, एन. शमसुद्दीन, के.एम. शाजी, पी.के. बशीर और वी.ई. अब्दुल गफूर—को कैबिनेट में शामिल किया है। इनके अलावा गठबंधन के अन्य घटक दलों जैसे केरल कांग्रेस (जोसेफ) से मोंस जोसेफ, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) से शिबू बेबी जॉन और कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी (CMP) से सी.पी. जॉन को भी मंत्री बनाया गया है। विभागों के आधिकारिक बंटवारे को अंतिम रूप दिया जा चुका है, जिसके तहत वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथला को राज्य का नया गृह मंत्री और आईयूएमएल के कद्दावर नेता पी.के. कुन्हालीकुट्टी को उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सौंपे जाने की प्रबल संभावना है, जबकि खुद मुख्यमंत्री सामान्य प्रशासन, कानून और वित्त जैसे महत्वपूर्ण नीतिगत विभाग अपने पास रख सकते हैं।
ममता की रणनीति पर पड़ा असर, विपक्ष की बिखरी ताकत बनी बड़ी वजह
18 May, 2026 04:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने भारतीय राजनीति की इस कड़वी हकीकत को एक बार फिर पुरजोर तरीके से साबित कर दिया है कि एक मजबूत विपक्षी एकजुटता के बिना चुनाव जीतना नामुमकिन है। पश्चिम बंगाल में सामने आए चुनावी आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि राज्य में सत्तारूढ़ रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) को भारतीय जनता पार्टी विरोधी वोटों के आपसी बिखराव के कारण लगभग तीन दर्जन विधानसभा सीटों का बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ा है। सूबे की कुल 294 विधानसभा सीटों के अंतिम परिणाम के विश्लेषण से यह पूरी तरह साफ होता है कि भाजपा ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए 207 सीटें जीती हैं और राज्य के इतिहास में पहली बार सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई है। इसके विपरीत, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के खाते में महज 80 सीटें ही आ सकी हैं, जबकि राष्ट्रीय दल कांग्रेस को केवल 2 और वाममोर्चा (लेफ्ट) को महज 1 सीट पर ही संतोष करना पड़ा है।
कांग्रेस-टीएमसी गठबंधन न होने का दिखा असर, दर्जनों सीटों पर बिगड़ा खेल
राजनैतिक विश्लेषकों और चुनाव विज्ञान के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव की घोषणा से पहले जमीनी हकीकत को भांपते हुए कांग्रेस और अन्य धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ एक मजबूत चुनावी गठबंधन कर लिया होता, तो आज पश्चिम बंगाल की पूरी सियासी तस्वीर और सत्ता का संतुलन बिल्कुल अलग हो सकता था। प्रदेश की एक दर्जन से भी अधिक अति-संवेदनशील सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों ने टीएमसी के पारंपरिक वोट बैंक में सीधे सेंध लगाकर उसके चुनावी समीकरण को जमींदोज कर दिया। साल 2021 के पिछले विधानसभा चुनाव में इन सीटों में से 10 पर टीएमसी ने एकतरफा जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार इन खास सीटों पर कांग्रेस को मिले कुल वोट टीएमसी और भाजपा के बीच रहे हार-जीत के वास्तविक अंतर से भी कहीं अधिक पाए गए हैं। इतना ही नहीं, करीब छह विधानसभा क्षेत्र ऐसे भी चिन्हित किए गए हैं जहाँ टीएमसी को सीधे तौर पर 'नोटा' (NOTA) के कारण पराजय का मुंह देखना पड़ा, क्योंकि उन क्षेत्रों में कांग्रेस को नोटा के मुकाबले कहीं अधिक वोट हासिल हुए थे।
मुस्लिम बहुल इलाकों में भी बिखरा वोट बैंक, मालदा और मुर्शिदाबाद में बीजेपी की सेंधमारी
वोटों के इस बहुकोणीय बिखराव का सबसे बड़ा और सीधा फायदा भाजपा को राज्य के उन मुस्लिम बहुल सीमावर्ती क्षेत्रों में भी मिला, जिन्हें अब तक टीएमसी का सबसे सुरक्षित अभेद्य किला माना जाता था। मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जिलों की कुल 43 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने अप्रत्याशित रूप से 20Target सीटें अपनी झोली में डाल ली हैं। इस ऐतिहासिक उलटफेर का मुख्य कारण यह रहा कि इन जिलों का अल्पसंख्यक मतदाता इस बार केवल टीएमसी के पाले में न रहकर कांग्रेस, लेफ्ट, इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) और अन्य छोटे क्षेत्रीय दलों के बीच कई हिस्सों में पूरी तरह विभाजित हो गया। इसकी तुलना में अगर साल 2021 के आंकड़ों को देखें, तो यह वोट बैंक पूरी तरह से टीएमसी के पक्ष में लामबंद था, जिसके दम पर पार्टी ने इन 43 में से 35 सीटों पर बंपर जीत हासिल की थी और तब भाजपा केवल आठ सीटों पर ही सिमट कर रह गई थी।
लेफ्ट का 7 फीसदी वोट बैंक आज भी मजबूत, क्षेत्रीय दलों को राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट होने की सीख
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण पहलू वामदलों (लेफ्ट) की जमीनी मौजूदगी है, जिनके पास आज भी तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद लगभग सात प्रतिशत का एक बेहद वफादार और मजबूत कोर वोट बैंक मौजूद है। राजनैतिक पंडितों का आकलन है कि पूरे राज्य में कई दर्जन सीटें ऐसी हैं, जहाँ लेफ्ट और कांग्रेस के प्रत्याशियों को मिले संयुक्त वोटों की संख्या टीएमसी की हार के कुल अंतर से बहुत ज्यादा है। चुनाव परिणामों के इस कड़े सबक के बाद अब विपक्षी खेमे के राष्ट्रीय और प्रांतीय नेताओं के भीतर यह सुगबुगाहट तेज हो गई है कि सभी क्षेत्रीय दलों को अपने व्यक्तिगत मतभेदों को दरकिनार कर धरातल की कड़वी सच्चाई को स्वीकार करना होगा। नेताओं का कहना है कि यदि देश में भाजपा के विजय रथ को रोकना है, तो न केवल आगामी लोकसभा चुनावों में बल्कि भविष्य के सभी राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी विपक्षी दलों को बहुत बेहतर तालमेल, सीट शेयरिंग और एक ठोस साझेदारी के साथ मैदान में उतरना होगा, क्योंकि मतों का ऐसा ही आत्मघाती विभाजन इससे पहले गुजरात और दिल्ली के चुनावों में भी विपक्ष को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर चुका है।
बंगाल की राजनीति में नया विवाद, अभिषेक की संपत्तियों को लेकर दावे तेज
18 May, 2026 03:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के प्रशासनिक गलियारों में भारी हलचल देखी जा रही है। नगर निगम के आला अधिकारियों और इंजीनियरों की एक विशेष टीम तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी तथा उनके परिवार से जुड़ी संपत्तियों की सघन जांच में जुट गई है। अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस जांच को लेकर निगम मुख्यालय में पिछले एक सप्ताह से मैराथन कागजी कार्रवाई चल रही है, जिसके तहत रविवार को साप्ताहिक छुट्टी के दिन भी अधिकारियों ने रिकॉर्ड्स खंगालने का काम जारी रखा। इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में 'लीप्स एंड बाउंड्स' नाम की एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है, जिसका सीधा व्यावसायिक संबंध सांसद अभिषेक बनर्जी से बताया जाता है। निगम के इंजीनियरों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे प्रॉपर्टी रिकॉर्ड्स और टैक्स दस्तावेजों की बारीकी से स्क्रूटनी कर अभिषेक बनर्जी, उनके माता-पिता या उनकी इस निजी कंपनी के नाम दर्ज सभी चल-अचल संपत्तियों की सूची तैयार करें।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बड़ा दावा, आमतला दफ्तर समेत 24 ठिकानों की सूची आई सामने
इस प्रशासनिक कवायद के बीच पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक जनसभा के दौरान इस मामले को लेकर बेहद सनसनीखेज दावा किया है। दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा में आयोजित एक विशाल राजनैतिक रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने जनता के सामने खुलासा किया कि उन्हें इस विवादित कंपनी और अभिषेक बनर्जी के साम्राज्य से जुड़ी दो दर्जन से अधिक गुप्त संपत्तियों का पूरा ब्यौरा हाथ लग चुका है। मुख्यमंत्री के अनुसार, उन्होंने कोलकाता नगर निगम के असेसमेंट विभाग से विशेष तौर पर फाइलें तलब की थीं, जिसके बाद उन्हें दक्षिण 24 परगना के आमतला स्थित इस कंपनी के एक बेहद आलीशान कॉर्पोरेट कार्यालय सहित कुल 24 संदिग्ध ठिकानों का पूरा विवरण मिल गया है। मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में स्पष्ट किया कि राज्य के सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर बनाई गई इन सभी अघोषित संपत्तियों की अब कानून के दायरे में बहुत जल्द एक व्यापक और निष्पक्ष जांच शुरू कराई जाएगी।
असेसमेंट से लेकर भवन निर्माण विभाग तक जांच तेज, नक्शों और अवैध निर्माण की हो रही पड़ताल
इस व्यापक जांच प्रक्रिया को धरातल पर उतारने के लिए कोलकाता नगर निगम के अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय के साथ काम शुरू हो गया है। रणनीति के तहत सबसे पहले नगर निगम के असेसमेंट (कर निर्धारण) विभाग ने अपने पुराने डिजिटल और भौतिक दस्तावेजों की री-चेकिंग की, जहां से अभिषेक बनर्जी और उनके करीबियों के नाम दर्ज संपत्तियों के सटीक पते, म्यूटेशन रिकॉर्ड और मकान नंबरों की एक सूची तैयार की गई। इसके तुरंत बाद इस पूरी सूची को आगे की कार्रवाई के लिए नगर निगम के भवन निर्माण (बिल्डिंग) विभाग को फॉरवर्ड कर दिया गया है। अब बिल्डिंग विभाग के विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि सूची में शामिल इन सभी बहुमंजिला इमारतों और दफ्तरों के निर्माण के समय केएमसी के सरकारी नियमों के तहत विधिवत नक्शा पास कराया गया था या नहीं, अथवा कहीं स्वीकृत नक्शे से अधिक अवैध निर्माण तो नहीं किया गया है।
शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े होने का आरोप, अभिषेक बनर्जी ने दी राजनीतिक द्वेष की दलील
इस पूरी बड़ी प्रशासनिक हलचल और फाइलों को खंगालने की कवायद को लेकर हालांकि अभी तक कोलकाता नगर निगम या गृह विभाग की तरफ से कोई औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति या आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि जांच के घेरे में आई निजी कंपनी 'लीप्स एंड बाउंड्स' पर पूर्ववर्ती शासनकाल में हुए कथित करोड़ों रुपये के प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले के अवैध धन को सफेद करने (मनी लॉन्ड्रिंग) के गंभीर आरोप लग रहे हैं। दूसरी ओर, खुद पर और अपने परिवार पर हो रही इस चौतरफा कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने ऊपर लगे सभी वित्तीय आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। टीएमसी सांसद का कहना है कि उनके खिलाफ की जा रही यह पूरी कानूनी और प्रशासनिक घेराबंदी पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और द्वेष की भावना से की जा रही है ताकि उनके राजनीतिक प्रभाव को कमजोर किया जा सके। बहरहाल, निगम के विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी लगातार फाइलों और रिकॉर्ड्स को खंगालने में मुस्तैदी से जुटे हुए हैं।
योगी का करिश्मा बरकरार, बड़े-बड़े नेताओं पर भारी पड़ रहे CM
18 May, 2026 02:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में नए और प्रोन्नत मंत्रियों के विभागों के आधिकारिक आवंटन के साथ ही राजनीतिक गलियारों में चल रही तमाम अटकलों और कयासों पर पूरी तरह विराम लग गया है। हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों के इस नए वितरण ने साफ कर दिया है कि सरकार के भीतर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पूरी तरह दबदबा कायम है। पिछले कई दिनों से यह कयास लगाए जा रहे थे कि नए मंत्रियों के चेहरों की तरह उनके विभागों का फैसला भी दिल्ली आलाकमान द्वारा ही तय किया जाएगा और मुख्यमंत्री के पास मौजूद कुछ बड़े विभागों को नए मंत्रियों को सौंप दिया जाएगा। हालांकि, रविवार को जारी हुई आधिकारिक सूची ने इन सभी दावों को खारिज करते हुए यह साबित कर दिया कि मंत्रियों को मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपने में सिर्फ और सिर्फ मुख्यमंत्री की मर्जी चली है, जिसमें उन्होंने बिना किसी बाहरी दबाव के अपनी प्रशासनिक पकड़ का मजबूत संदेश दिया है।
मनोज पांडेय को मिला सबसे बड़ा इनाम, दयालु मिश्रा के कद में भारी कटौती
इस पूरे फेरबदल और मंत्रियों की नई फेहरिस्त में सबसे बड़ा राजनैतिक फायदा समाजवादी पार्टी (सपा) से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए कद्दावर ब्राह्मण नेता मनोज कुमार पांडेय को हुआ है। मुख्यमंत्री ने उन्हें सीधे जनता की बुनियादी जरूरतों से जुड़ा 'खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति' जैसा भारी-भरकम और बेहद महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंप दिया है। दरअसल, भारतीय जनता पार्टी राज्य में ब्राह्मण समुदाय के भीतर चल रही कथित नाराजगी को दूर करने और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश में जुटी थी; ऐसे में मनोज पांडेय को इतना कद्दावर विभाग देकर सरकार ने उनका राजनीतिक कद काफी बढ़ा दिया है। वहीं दूसरी ओर, इस फैसले से वाराणसी (बनारस) के कद्दावर नेता दयाशंकर मिश्र 'दयाल' को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि यह महत्वपूर्ण मंत्रालय पहले उन्हीं के पास था। अब दयालु मिश्रा से खाद्य एवं रसद विभाग वापस ले लिया गया है और वे सरकार में सिर्फ आयुष विभाग के ही मंत्री बने रहेंगे।
भूपेंद्र चौधरी को मिला MSME, राकेश सचान के राजनैतिक रसूख को लगा झटका
मंत्रिमंडल में बतौर कैबिनेट मंत्री शामिल हुए भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा थी कि उन्हें लोक निर्माण विभाग (PWD) जैसा अति-महत्वपूर्ण मंत्रालय मिल सकता है। हालांकि, उन्हें अंततः सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय की जिम्मेदारी से ही संतोष करना पड़ा। प्रदेश में युवाओं और स्थानीय उद्योगों से सीधे जुड़े होने और कई बड़ी स्वरोजगार योजनाओं के संचालन के कारण प्रशासनिक लिहाज से यह विभाग भी बेहद अहम और सरकार की प्राथमिकताओं वाला माना जाता है। भूपेंद्र चौधरी को इस महत्वपूर्ण विभाग की कमान मिलने से वर्तमान मंत्री राकेश सचान के रसूख को बड़ा झटका लगा है। पहले एमएसएमई (MSME) विभाग पूरी तरह राकेश सचान के अधीन था, लेकिन अब उनके पास केवल खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम और हथकरघा उद्योग विभाग ही रह गए हैं, जिसके कारण सरकार के भीतर उनका कद पहले के मुकाबले कम आंका जा रहा है।
स्वतंत्र प्रभार और राज्यमंत्रियों के विभागों में भी बड़ा फेरबदल
मुख्यमंत्री ने केवल कैबिनेट मंत्रियों के स्तर पर ही नहीं, बल्कि राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) और राज्य मंत्रियों के पोर्टफोलियो में भी अपनी रणनीति के तहत बदलाव किए हैं। प्रमोट होकर स्वतंत्र प्रभार मंत्री बने सोमेंद्र तोमर को इस बार राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल (PRD) का जिम्मा सौंपा गया है, जबकि इससे पहले वे बतौर राज्यमंत्री ऊर्जा जैसे भारी-भरकम विभाग का काम देख रहे थे। उनके साथ ही स्वतंत्र प्रभार मंत्री बने अजीत सिंह पाल को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) का जिम्मा मिला है। नवनियुक्त राज्यमंत्रियों की बात करें, तो कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्रालय से संबद्ध किया गया है, जबकि कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा और सुरेंद्र दिलेर को महत्वपूर्ण राजस्व विभाग की जिम्मेदारी मिली है। इसके अतिरिक्त, वाराणसी क्षेत्र से आने वाले हंस राज विश्वकर्मा को कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी के साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग में राज्यमंत्री के तौर पर तैनात किया गया है, जिससे यह साफ संदेश जाता है कि मुख्यमंत्री ने हर क्षेत्र और वर्ग को साधते हुए अपनी टीम को नए सिरे से तैयार किया है।
महिलाओं के लिए ₹3000 महीना, मदरसे पर चला हथौड़ा; सुवेंदु सरकार के बड़े निर्णय
18 May, 2026 02:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नवगठित सरकार ने राज्य की जनता, विशेषकर महिलाओं और सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़े लोक-कल्याणकारी फैसलों का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में संपन्न हुई कैबिनेट की दूसरी महत्वपूर्ण बैठक में 'अन्नपूर्णा भंडार योजना' और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा सेवा को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के धरातल पर उतरते ही पश्चिम बंगाल की पात्र महिलाओं को आगामी 1 जून से हर महीने 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों में मिलना शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और दैनिक आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से सरकार ने 1 जून से ही राज्य की सभी महिलाओं के लिए सरकारी बसों में यात्रा को पूरी तरह से मुफ्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
लक्ष्मी भंडार की लाभार्थियों को दोबारा फॉर्म भरने की जरूरत नहीं, अग्निमित्रा पाल ने दी जानकारी
कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए राज्य सरकार की मंत्री अग्निमित्रा पाल ने योजना की प्रक्रिया को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने बताया कि जिन महिलाओं के नाम पूर्ववर्ती सरकार की 'लक्ष्मी भंडार योजना' में पहले से दर्ज थे और जिन्हें उसका लाभ मिल रहा था, उन्हें इस नई 'अन्नपूर्णा भंडार योजना' का लाभ उठाने के लिए नए सिरे से कोई फॉर्म भरने या दफ्तरों के चक्कर काटने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होगी। सरकार पुराने डेटा के आधार पर ही इन सभी लाभार्थियों को सीधे नई योजना से संबद्ध कर देगी, जिससे राज्य की लाखों महिलाओं को बिना किसी कागजी औपचारिकता और प्रशासनिक देरी के सीधे 3,000 रुपये प्रति माह की बढ़ी हुई राशि मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।
मदरसों की सरकारी सहायता बंद, इमाम और मोअज्जिम का मासिक भत्ता भी रोका गया
अन्नपूर्णा योजना के साथ ही शुभेंदु कैबिनेट ने राज्य की धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाओं को लेकर भी एक बेहद कड़ा और बड़ा प्रशासनिक नीतिगत निर्णय लिया है। सरकार ने राज्य के भीतर संचालित होने वाले तमाम मदरसों को दी जाने वाली सभी प्रकार की सरकारी वित्तीय और आर्थिक सहायता को पूरी तरह से बंद करने का प्रस्ताव पारित किया है। इस नए आदेश के दायरे में केवल मदरसों की ग्रांट ही नहीं, बल्कि पूर्ववर्ती शासनकाल से इमामों और मोअज्जिमों को दी जाने वाली मासिक भत्ते की तय व्यवस्था को भी तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्णय शामिल है। सरकार के इस कदम को राज्य की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था में एक बड़े नीतिगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग का गठन, बकाया डीए पर फैसला टला
राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए भी इस कैबिनेट बैठक से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव पूर्व किए गए अपने वादे को निभाते हुए राज्य में सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे में सुधार के लिए 'सातवें वेतन आयोग' (7th Pay Commission) के गठन को हरी झंडी दे दी है। हालांकि, कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित पड़े बकाया महंगाई भत्ते (DA) को लेकर इस दूसरी कैबिनेट बैठक में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका है। कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि वेतन आयोग के गठन के बाद अब आने वाले समय में उनके वित्तीय हितों और वेतन विसंगतियों को लेकर सरकार जल्द ही कोई दूसरा बड़ा और सकारात्मक कदम उठा सकती है।
अभिषेक बनर्जी समेत कई नेताओं की सुरक्षा घटी, राजनीतिक हलचल तेज
18 May, 2026 01:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में हुए ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने वीआईपी (VIP) संस्कृति और सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। सरकार के गृह विभाग ने रविवार को राज्य के अति-विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा का व्यापक और गहन रिव्यू (समीक्षा) करने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी सहित कई हाई-प्रोफाइल राजनेताओं, पूर्व मंत्रियों और पूर्व पुलिस कप्तानों की सुरक्षा में भारी कटौती करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस उच्च स्तरीय प्रशासनिक समीक्षा के तुरंत बाद सुरक्षा में तैनात अतिरिक्त पुलिस बल और कई नेताओं के आवासों के बाहर मुस्तैद रहने वाले हाउस गार्ड्स को तत्काल प्रभाव से वापस बैरक में बुला लिया गया है। गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, नए 'थ्रेट परसेप्शन' (संभावित खतरे के आकलन) की जांच में यह पाया गया कि इन चेहरों को अब इतने भारी-भरकम सुरक्षा घेरे की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं है।
अभिषेक बनर्जी का घटा सुरक्षा घेरा, ममता बनर्जी की सुरक्षा रहेगी अभेद्य
इस नए सुरक्षा वर्गीकरण के तहत सबसे बड़ी और प्रभावी गाज टीएमसी के कद्दावर नेता अभिषेक बनर्जी पर गिरी है। नई सरकार ने अभिषेक बनर्जी को पूर्व में दी गई वीवीआईपी 'जेड-प्लस' (Z+) कैटेगरी की विशेष सुरक्षा व्यवस्था और उनके काफिले के साथ चलने वाली पायलट कार की सुविधा को पूरी तरह से बंद कर दिया है। इसके साथ ही, कोलकाता के कालीघाट स्थित उनके निजी निवास और कैमैक स्ट्रीट पर बने उनके मुख्य कार्यालय परिसर के बाहर चौबीसों घंटे तैनात रहने वाले अतिरिक्त पुलिस मोर्चे को भी पूरी तरह हटा लिया गया है। हालांकि, नई सरकार ने इस राजनैतिक फेरबदल के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाते हुए यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था में रत्ती भर भी कटौती नहीं की जाएगी। कोलकाता पुलिस कमिश्नरेट को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि ममता बनर्जी के आवास की सुरक्षा और उनके दौरों के समय प्रोटोकॉल के तहत पुख्ता सुरक्षा इंतजाम लगातार जारी रहने चाहिए।
संवैधानिक पद बना सुरक्षा का नया पैमाना: कल्याण बनर्जी और राजीव कुमार की सुरक्षा सीमित
गृह विभाग द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइन के अनुसार, अब किसी भी राजनेता या अधिकारी को व्यक्तिगत प्रभाव के आधार पर सुरक्षा नहीं मिलेगी, बल्कि सांसदों और विधायकों को केवल उनके वर्तमान संवैधानिक पद के तय कानूनी प्रोटोकॉल के मुताबिक ही सुरक्षा कवर दिया जाएगा। इसी कड़े नियम के आधार पर टीएमसी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी और राज्य के पूर्व पुलिस प्रमुख राजीव कुमार की अतिरिक्त सुरक्षा को हटाते हुए उन्हें केवल एक सामान्य सांसद स्तर का सुरक्षा घेरा प्रदान किया गया है। वहीं, पूर्व कद्दावर मंत्री अरूप बिस्वास के पास वर्तमान में कोई भी विधायी या संवैधानिक पद न होने के कारण उनकी पुरानी सुरक्षा को पूरी तरह से वापस ले लिया गया है। इसके अलावा, बेलियाघाटा के विधायक कुणाल घोष को पूर्व में कोर्ट के विशेष निर्देश पर मिली अतिरिक्त सुरक्षा को भी निरस्त कर दिया गया है, और अब उन्हें केवल एक साधारण विधायक स्तर का सुरक्षा कवर ही मिल सकेगा।
पूर्व पुलिस कप्तानों पर भी चली कैंची, वापस ड्यूटी पर लौटेंगे अतिरिक्त सुरक्षा बल
सुरक्षा में कटौती की इस लंबी प्रशासनिक सूची में केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि राज्य के पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी (DGP) मनोज मालवीय, पूर्व कार्यवाहक डीजीपी पीयूष पांडे और टीएमसी के लिए अदालतों में कानूनी पैरवी करने वाले एक प्रमुख वरिष्ठ अधिवक्ता की अतिरिक्त सुरक्षा पर भी प्रशासनिक कैंची चलाई गई है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पीयूष पांडे को अब केवल उनके वर्तमान पद की गरिमा और नियम के अनुसार ही सीमित सुरक्षा मिलेगी। राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों ने इस बड़े फैसले की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री और गृह मंत्रालय का यह बिल्कुल साफ संदेश है कि सरकारी खजाने और पुलिस बल का दुरुपयोग वीआईपी संस्कृति में नहीं होना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को उसकी वास्तविक थ्रेट रिपोर्ट और तय सरकारी नियमों से अधिक सुरक्षा नहीं दी जाएगी, और इस कटौती से मुक्त हुए सभी पुलिस जवानों को आम जनता की सुरक्षा के लिए मुख्यधारा की पुलिसिंग और थानों की सेवा में वापस तैनात किया जा रहा है।
भारत के रक्षा संबंधों को नई दिशा, राजनाथ सिंह का अहम विदेश दौरा
18 May, 2026 01:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) रणनीति को वैश्विक पटल पर और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को वियतनाम और दक्षिण कोरिया के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस उच्च स्तरीय विदेशी दौरे का मुख्य ध्येय उभरती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच मित्र देशों के साथ भारत की रक्षा साझेदारी को सुदृढ़ करना, रणनीतिक सैन्य सहयोग को बढ़ाना और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक नियम-आधारित व्यवस्था स्थापित कर शांति व स्थिरता को बढ़ावा देना है। यात्रा की शुरुआत करने से पहले रक्षा मंत्री ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी उत्सुकता साझा करते हुए बताया कि वे इस यात्रा के पहले चरण के तहत वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचेंगे और दोनों देशों के बीच सदियों पुराने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए महत्वपूर्ण वार्ताओं का नेतृत्व करेंगे।
रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा को अभेद्य बनाने पर रहेगा मुख्य फोकस
वैश्विक मोर्चे पर बढ़ रही सुरक्षा चुनौतियों और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर बढ़ते तनाव को देखते हुए इस दौरे को सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। रक्षा मंत्री ने प्रस्थान से पूर्व स्पष्ट किया कि इस पूरी यात्रा के दौरान उनका ध्यान मुख्य रूप से रक्षा उद्योग सहयोग, संयुक्त सैन्य साझेदारी और समुद्री सुरक्षा के रणनीतिक आयामों पर केंद्रित रहने वाला है। वर्तमान समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में जिस तरह से सुरक्षा समीकरण बदल रहे हैं, उसे देखते हुए लोकतांत्रिक देशों के बीच आपसी सैन्य समन्वय और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। भारत इन दोनों प्रमुख एशियाई देशों के साथ अपने रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को व्यापक विस्तार देकर क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ा रहा है।
भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी में नया मोड़, सैन्य क्षमता को मिलेगी वित्तीय ताकत
हाल ही में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने भारत का एक सफल आधिकारिक दौरा किया था, जिसके दौरान दोनों देशों ने अपने रक्षा और सुरक्षा संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (कॉम्प्रेहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप) का सबसे मजबूत स्तंभ घोषित किया था। दोनों देशों के बीच रक्षा नीति संवाद को निरंतर जारी रखने, तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास का दायरा बढ़ाने, उन्नत तकनीकी सहयोग, नौसैनिक बंदरगाहों के दौरों (पोर्ट कॉल्स) को सुगम बनाने और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार द्वारा वियतनाम को दी गई रक्षा ऋण लाइनों (क्रेडिट लाइन्स) के तहत वियतनामी नौसेना और वायुसेना की सैन्य क्षमता को आधुनिक हथियारों से लैस करने की दिशा में भी इस हनोई यात्रा के दौरान बड़ी प्रगति होने की उम्मीद है।
दक्षिण कोरिया के साथ मजबूत होगी आर्थिक और तकनीकी सुरक्षा की आपूर्ति श्रृंखला
यात्रा के दूसरे चरण में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दक्षिण कोरिया (सियोल) पहुंचेंगे, जहां हाल के वर्षों में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक सुरक्षा, उन्नत सैन्य हार्डवेयर और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध काफी तेजी से आगे बढ़े हैं। दोनों ही देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र को पूरी तरह स्वतंत्र, खुला और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुकूल बनाए रखने के लिए एक समान और साझा दृष्टिकोण रखते हैं। इस रणनीतिक साझेदारी के तहत रक्षा औद्योगिक गलियारों के निर्माण, क्रिटिकल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (उभरती तकनीक), सुरक्षित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) और समकालीन सुरक्षा चुनौतियों पर मिलकर काम करने की एक विस्तृत और दीर्घकालिक योजना है। रक्षा मंत्री का यह अहम दौरा न केवल भारत की रणनीतिक पहुंच को मजबूत करेगा, बल्कि पूर्वी एशिया के प्रमुख देशों के साथ भारत के समुद्री सुरक्षा सहयोग को एक बिल्कुल नई और निर्णायक दिशा भी प्रदान करेगा।
तमिलनाडु की सियासत गरम, DMK विधायक बोले- ज्यादा दिन नहीं टिकेगी विजय सरकार
18 May, 2026 12:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद हुए ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन ने राज्य के राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के कद्दावर नेता और तिरुचेंदूर विधानसभा सीट से विधायक अनीता राधाकृष्णन ने सूबे की नई सत्ता पर काबिज गठबंधन सरकार पर बेहद तीखा और हमलावर रुख अख्तियार किया है। दक्षिणी तमिलनाडु में आयोजित एक संगठनात्मक पार्टी कार्यक्रम के दौरान राधाकृष्णन ने खुले मंच से यह बड़ा दावा किया कि अभिनेता से राजनेता बने नवनियुक्त मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली यह नई सरकार छह महीने का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाएगी। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि चुनाव में मामूली शिकस्त झेलने वाले डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन बहुत जल्द एक बार फिर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में दमदार वापसी करेंगे।
टीवीके नेता आधव अर्जुना को खुली चुनौती, विधायक पद से इस्तीफे की मांग
अनीता राधाकृष्णन ने अपने संबोधन के दौरान सत्तारूढ़ दल 'तमिलगा वेत्री कज़गम' (TVK) के वरिष्ठ रणनीतिकार और विलीवक्कम सीट से नवनिर्वाचित विधायक आधव अर्जुना को सीधे निशाने पर लिया। राधाकृष्णन ने आधव अर्जुना के बढ़ते राजनीतिक कद और बयानों पर पलटवार करते हुए उन्हें चुनावी मैदान में उतरने की खुली चुनौती दे डाली। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में कहा कि इस सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और इसके पास महज चार महीने का वक्त बचा है। उन्होंने अर्जुना को ललकारते हुए कहा कि अगर उनमें राजनीतिक हिम्मत है, तो वे अपनी विलीवक्कम सीट से तुरंत इस्तीफा दें, जिसके बदले में वे खुद अपनी तिरुचेंदूर सीट छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने आधव अर्जुना को तिरुचेंदूर आकर आमने-सामने का चुनाव लड़ने की चुनौती दी।
ढाई दशकों से तिरुचेंदूर में अजेय रहे हैं अनीता राधाकृष्णन
चुनावी मैदान में धूल चटाने का यह कड़ा दावा असल में तिरुचेंदूर विधानसभा सीट पर अनीता राधाकृष्णन की मजबूत जमीनी पकड़ को दर्शाता है। यह क्षेत्र पिछले 25 वर्षों से राधाकृष्णन का अभेद्य गढ़ बना हुआ है, जहाँ उनकी मर्जी के बिना विपक्षी दलों के लिए सियासी जमीन तलाशना नामुमकिन माना जाता है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में पहली बार साल 2001 में डीएमके की धुर विरोधी पार्टी एआईएडीएमके (AIADMKE) के टिकट पर यहाँ से शानदार जीत दर्ज की थी। इसके बाद बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच साल 2009 में वे स्टालिन की पार्टी डीएमके में शामिल हो गए और तब से लेकर अब तक लगातार इस सीट पर भारी मतों से जीत हासिल करते आ रहे हैं।
सत्ता परिवर्तन के बाद दक्षिण की राजनीति में शह-मात का खेल तेज
तमिलनाडु की सत्ता की कमान जोसेफ विजय के हाथों में जाने के बाद से ही राज्य की प्रमुख द्रविड़ियन पार्टियां गहरे मंथन और आक्रामक रणनीति पर काम कर रही हैं। डीएमके नेताओं का मानना है कि नई सरकार के भीतर वैचारिक अंतर्विरोध और गठबंधन के साथियों के बीच आपसी खींचतान के चलते यह व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल पाएगी। इसी जमीनी हकीकत और अंतर्विरोधों का फायदा उठाने के लिए डीएमके के जिला स्तरीय नेता लगातार आक्रामक बयानबाजी कर रहे हैं ताकि नए शासन पर लगातार प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव बनाया जा सके। फिलहाल, इस खुली चुनौती और राधाकृष्णन के तीखे बयानों पर मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस बयान ने राज्य की भावी राजनीति को और अधिक दिलचस्प बना दिया है।
योगी कैबिनेट विस्तार के बाद विभागों का बंटवारा, जानिए किसे क्या जिम्मेदारी मिली
18 May, 2026 11:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार के ठीक एक हफ्ते बाद मंत्रियों के विभागों का आधिकारिक बंटवारा कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सिफारिश पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नए मंत्रियों और प्रोन्नत मंत्रियों के विभागों की सूची को अंतिम मंजूरी दे दी है। इस फेरबदल के जरिए सरकार ने अपने कई प्राथमिक विभागों की कमान नए चेहरों को सौंपी है। आगामी राजनीतिक चुनौतियों और प्रशासनिक दक्षता को ध्यान में रखते हुए इस नए ढांचे में अनुभव और वफादारी दोनों को ही विशेष तरजीह दी गई है।
भूपेंद्र चौधरी को मिला MSME और मनोज पांडेय को खाद्य एवं रसद की कमान
मंत्रिमंडल में बतौर कैबिनेट मंत्री शामिल हुए भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी को सरकार ने बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास की रीढ़ माने जाने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग का कार्यभार दिया गया है। इससे पहले यह विभाग राकेश सचान के पास था, जिनके पास अब खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा और वस्त्रोद्योग विभाग ही बचे रहेंगे। वहीं दूसरी ओर, राज्यसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी से बगावत कर भाजपा का दामन थामने वाले कद्दावर नेता मनोज कुमार पांडेय को इनाम देते हुए सरकार ने बेहद अहम 'खाद्य एवं रसद और नागरिक आपूर्ति' विभाग की जिम्मेदारी दी है, जो विभाग अब तक सीधे मुख्यमंत्री के अधीन था।
प्रमोट हुए राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) के बढ़े विभाग
मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान जिन दो राज्य मंत्रियों को प्रमोट कर स्वतंत्र प्रभार का जिम्मा सौंपा गया था, उन्हें भी भारी भरकम विभाग सौंपे गए हैं। इसमें अजीत सिंह पाल को मुख्यमंत्री ने अपने पास से हटाकर 'खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन' (FSDA) के साथ-साथ राजनीतिक पेंशन विभाग का स्वतंत्र प्रभार सौंप दिया है। इसी तरह, पदोन्नत हुए दूसरे मंत्री सोमेंद्र तोमर को भी मुख्यमंत्री के पास मौजूद विभागों में से 'सैनिक कल्याण' और 'प्रान्तीय रक्षक दल' (PRD) विभाग की स्वतंत्र प्रभार के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नवनियुक्त चारों राज्य मंत्रियों को इन मंत्रालयों से किया गया संबद्ध
मंत्रिमंडल में नए चेहरे के तौर पर शामिल हुए चारों राज्य मंत्रियों (MoS) को भी उनके विभागों से संबद्ध कर दिया गया है। इसमें नवनियुक्त राज्य मंत्री कृष्णा पासवान को पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि सुरेन्द्र दिलेर को महत्वपूर्ण राजस्व विभाग से जोड़ा गया है। इसके अलावा, वाराणसी क्षेत्र से आने वाले हंसराज विश्वकर्मा को कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी के साथ एमएसएमई (MSME) मंत्रालय में राज्य मंत्री के तौर पर तैनात किया गया है, वहीं कैलाश राजपूत को ऊर्जा और अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग का राज्य मंत्री बनाया गया है।
योगी मंत्रिमंडल विस्तार 2026: विभागों के आवंटन की पूरी लिस्ट
नीचे दी गई तालिका में कैबिनेट मंत्रियों को सौंपे गए विभागों का पूरा विवरण दिया गया है:
कैबिनेट मंत्री
मंत्री का नाम
विभाग
योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री)
नियुक्ति, कार्मिक, गृह, सतर्कता, आवास एवं शहरी नियोजन, राजस्व, भूतत्व एवं खनिकर्म, अर्थ एवं संख्या, राज्य कर एवं निबन्धन, सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, गोपन, सूचना, निर्वाचन, संस्थागत वित्त, नियोजन, राज्य सम्पत्ति, उप्र पुनर्गठन समन्वय, प्रशासनिक सुधार, कार्यक्रम कार्यान्वयन, अवस्थापना, भाषा, अभाव सहायता एवं पुनर्वास, लोक सेवा प्रबंधन, किराया नियंत्रण, प्रोटोकाल, नागरिक उड्डयन, न्याय एवं विधायी, धर्मार्थ कार्य, लोक निर्माण विभाग
केशव प्रसाद मौर्य (उप मुख्यमंत्री)
ग्राम्य विकास एवं समग्र ग्राम्य विकास तथा ग्रामीण अभियंत्रण, खाद्य प्रसंस्करण, मनोरंजन कर एवं सार्वजनिक उद्यम तथा राष्ट्रीय एकीकरण
ब्रजेश पाठक (उप मुख्यमंत्री)
चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा मातृ एवं शिशु कल्याण
सुरेश कुमार खन्ना
वित्त एवं संसदीय कार्य
सूर्य प्रताप शाही
कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान
स्वतंत्र देव सिंह
जल शक्ति तथा बाढ़ नियंत्रण
बेबी रानी मौर्य
महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार
लक्ष्मी नारायण चौधरी
गन्ना विकास एवं चीनी मिलें
जयवीर सिंह
पर्यटन एवं संस्कृति
धर्मपाल सिंह
पशुधन एवं दुग्ध विकास
नन्द गोपाल गुप्ता 'नन्दी'
औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआइ तथा निवेश प्रोत्साहन
अनिल राजभर
श्रम एवं सेवायोजन, समन्वय
राकेश सचान
खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग
अरविन्द कुमार शर्मा
नगर विकास, शहरी समग्र विकास, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन, ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा
योगेन्द्र उपाध्याय
उच्च शिक्षा
आशीष पटेल
प्राविधिक शिक्षा, उपभोक्ता संरक्षण एवं बांट माप
संजय निषाद
मत्स्य
ओम प्रकाश राजभर
पंचायती राज, अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज
दारा सिंह चौहान
कारागार
सुनील कुमार शर्मा
इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी
अनिल कुमार
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
भूपेन्द्र चौधरी
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम
मनोज कुमार पांडेय
खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
नाम
विभाग
नितिन अग्रवाल
आबकारी एवं मद्य निषेध
कपिल देव अग्रवाल
व्यवसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास
रवीन्द्र जायसवाल
स्टांप तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन
संदीप सिंह
बेसिक शिक्षा
गुलाब देवी
माध्यमिक शिक्षा
गिरीश चन्द्र यादव
खेल एवं युवा कल्याण
धर्मवीर प्रजापति
होमगार्ड्स, नागरिक सुरक्षा
असीम अरूण
समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण
जयेन्द्र प्रताप सिंह राठौर
सहकारिता
दयाशंकर सिंह
परिवहन
नरेन्द्र कुमार कश्यप
पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण
दिनेश प्रताप सिंह
उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार तथा कृषि निर्यात
अरूण कुमार सक्सेना
वन एवं पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन
दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’
आयुष
अजीत पाल
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन
सोमेन्द्र तोमर
राजनैतिक पेंशन, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल
राज्य मंत्री
नाम
विभाग
मयंकेश्वर शरण सिंह
संसदीय कार्य, चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा मातृ एवं शिशु कल्याण
दिनेश खटीक
जल शक्ति
संजीव गोंड
समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण
बलदेव सिंह ओलख
कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान
जसवन्त सिंह सैनी
संसदीय कार्य तथा औद्योगिक विकास
रामकेश निषाद
जल शक्ति
मनोहर लाल मन्नू कोरी
श्रम एवं सेवायोजन
संजय सिंह गंगवार
गन्ना विकास एवं चीनी मिलें
बृजेश सिंह
लोक निर्माण
के.पी. मलिक
वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन
सुरेश राही
कारागार
प्रतिभा शुक्ला
महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार
राकेश राठौर गुरू
नगर विकास, शहरी समग्र विकास, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन
रजनी तिवारी
उच्च शिक्षा
सतीश चन्द्र शर्मा
खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति
दानिश आजाद अंसारी
अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज
विजय लक्ष्मी गौतम
ग्राम्य विकास एवं समग्र ग्राम्य विकास तथा ग्रामीण अभियंत्रण
कृष्णा पासवान
पशुधन एवं दुग्ध विकास
कैलाश राजपूत
ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा
हंसराज विश्वकर्मा
राजस्व
सुरेन्द्र दिलेर
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम
केरल में नई सरकार का गठन, वीडी सतीशन ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ
18 May, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम: केरल की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीडी सतीशन ने केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ले ली है। राजधानी तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। वीडी सतीशन के साथ उनके 20 सदस्यीय मंत्रिमंडल ने भी एक साथ शपथ ग्रहण की है।
केरल के संसदीय इतिहास में करीब छह दशकों के बाद यह पहला मौका है जब पूरी कैबिनेट ने मुख्यमंत्री के साथ एक ही दिन और एक साथ शपथ ली है। इस नई सरकार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है, जिसमें दो महिला मंत्रियों और अनुसूचित जाति समुदाय के दो प्रतिनिधियों को भी कैबिनेट में शामिल किया गया है। गठबंधन की प्रमुख सहयोगी पार्टी 'इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग' (IUML) को भी मंत्रिमंडल में पांच सीटें दी गई हैं।
कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में आज CM पद की शपथ लेंगे सतीशन
18 May, 2026 08:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) ने प्रचंड बहुमत हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया है। कुल 140 सीटों में से रिकॉर्ड 102 सीटों पर शानदार जीत दर्ज करने के बाद, गठबंधन के सर्वसम्मत नेता वीडी सतीशन सोमवार यानी आज मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। राजधानी तिरुवनंतपुरम का सेंट्रल स्टेडियम इस भव्य और ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए पूरी तरह तैयार है, जहाँ राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर नए मुख्यमंत्री और उनके कैबिनेट सहयोगियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में थमेगी देश की नजर
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रीय राजनीति के कई दिग्गज शिरकत कर रहे हैं। तिरुवनंतपुरम में होने वाले इस कार्यक्रम में कांग्रेस आलाकमान की ओर से पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा सांसद राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। राष्ट्रीय नेताओं के अलावा कांग्रेस शासित राज्यों—कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश—के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए समारोह में शामिल हो रहे हैं।
अनुभव और युवा जोश का अनूठा संगम
नई सरकार के गठन की आधिकारिक प्रक्रिया के तहत वीडी सतीशन ने रविवार को ही राज्यपाल से मुलाकात कर अपने संभावित मंत्रियों की अंतिम सूची सौंप दी थी। तिरुवनंतपुरम से आ रही जानकारियों के मुताबिक, इस नए मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री सहित कुल 21 सदस्य शामिल होंगे। प्रशासनिक कार्यकुशलता को बेहतर बनाए रखने के लिए इस टीम में वरिष्ठ अनुभवी राजनेताओं के साथ-साथ ऊर्जावान युवा चेहरों को भी तरजीह दी गई है, जिससे सरकार में संतुलन और नया दृष्टिकोण दोनों दिखाई दे।
गठबंधन और सामाजिक समीकरणों का विशेष ध्यान
सत्ता के इस नए ढांचे में सामाजिक न्याय और गठबंधन धर्म का पूरा ख्याल रखा गया है। आपसी समझौतों के तहत नए मंत्रिमंडल में दो महिला विधायकों और अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के दो प्रतिनिधियों को कैबिनेट में खास जगह मिली है। इसके साथ ही, मोर्चे की सबसे प्रमुख सहयोगी पार्टी 'इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग' (IUML) को गठबंधन में उनके मजबूत प्रदर्शन के एवज में पांच महत्वपूर्ण कैबिनेट सीटें सौंपी गई हैं, जिससे इस नई सरकार की नीव और अधिक मजबूत नजर आ रही है।
होर्मुज से अच्छी खबर, जहाजों की बढ़ी आवाजाही से तेल-गैस बाजार में उम्मीद
प्रियंका चतुर्वेदी ने गिरिबाला सिंह पर साधा निशाना, ट्विशा शर्मा केस में विवाद
नेपाल में छोटे आयातकों को राहत, ₹100 से अधिक के सामान पर कस्टम फीस पर रोक
13 हजार मेगावाट प्रोजेक्ट से छत्तीसगढ़ की ऊर्जा तस्वीर बदलने की तैयारी
किसानों के लिए जरूरी खबर, रायपुर में खाद उपलब्धता अब भी चुनौती
पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ीं, राजस्थान में सप्लाई शॉर्ट और पैनिक खरीदारी
नए एयरपोर्ट और रेल लाइन का विरोध, राजस्थान में जनता का गुस्सा
संजू सैमसन को लेकर चर्चाओं पर CSK कोच फ्लेमिंग ने दिया चौंकाने वाला जवाब
