राजनीति
महिला मतदाताओं का असर, बंगाल की राजनीति में नया समीकरण
2 May, 2026 11:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बंगाल चुनाव: खामोश मतदाता और रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग, महिला शक्ति ने बदला इतिहास का रुख
पश्चिम बंगाल का वर्तमान विधानसभा चुनाव केवल राजनीतिक नारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने दशकों पुराने चुनावी कीर्तिमानों को ध्वस्त कर दिया है। जहाँ एक ओर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा (BJP) सार्वजनिक रूप से अपनी प्रचंड जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं भीतर ही भीतर दोनों खेमों में बढ़े हुए मतदान प्रतिशत को लेकर गहरी बेचैनी और गणित का दौर जारी है।
आधी आबादी का 'महासंकल्प': पुरुषों से आगे निकलीं महिलाएं
बंगाल के चुनावी इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले ढाई प्रतिशत अधिक मतदान किया है।
आंकड़े: इस चुनाव में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 93.24% रहा, जबकि पुरुषों का 91.74% दर्ज किया गया।
व्याख्या: भाजपा इसे 'आरजी कर कांड' के बाद उपजी असुरक्षा और बदलाव की लहर बता रही है। वहीं, टीएमसी का मानना है कि कन्याश्री, रूपाश्री और लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं के लाभ ने महिलाओं को सरकार के पक्ष में 'अभयदान' देने के लिए प्रेरित किया है।
शहरी मतदाताओं की बेमिसाल भागीदारी
आमतौर पर चुनावों के प्रति उदासीन रहने वाला शहरी मतदाता इस बार ग्रामीण मतदाताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चला है।
नया रिकॉर्ड: आजादी के बाद पहली बार शहरी क्षेत्रों में 90% से अधिक वोटिंग दर्ज की गई है।
वजह: क्या शहरी मतदाता 'बंगाल अस्मिता' के नारे से प्रभावित थे या वे बेरोजगारी और जनसांख्यिकी बदलाव जैसे भाजपा के आक्रामक मुद्दों की ओर आकर्षित हुए? यह नतीजों के बाद ही साफ होगा।
मतदान विश्लेषण: रिकॉर्ड तोड़ प्रतिशत पर संख्या में कमी?
प्रतिशत के लिहाज से भले ही यह चुनाव ऐतिहासिक रहा हो, लेकिन वास्तविक संख्या के गणित में एक दिलचस्प पहलू सामने आया है:
वोटों की संख्या: लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार करीब 29.41 लाख कम लोगों ने मतदान किया।
मतदाता सूची का असर: इसका मुख्य कारण मतदाता सूची में सुधार (SIR) रहा, जिसके चलते कुल मतदाताओं की संख्या में 68 लाख की कमी आई है।
भीतरघात और टिकट वितरण की चिंता
दोनों ही प्रमुख दलों को अपने ही खेमे में असंतोष का डर सता रहा है:
भाजपा और टीएमसी: दोनों ही दलों में करीब 60-60 सीटों पर उम्मीदवारों के चयन को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी की शिकायतें मिलीं।
नेतृत्व पर निर्भरता: यही वजह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दोनों ने अपनी रैलियों में मतदाताओं से यह अपील की कि वे उम्मीदवार के बजाय सीधे शीर्ष नेतृत्व (स्वयं) को देखकर वोट दें।
Result Day से पहले TMC अलर्ट, ममता ने एजेंटों को दिए सख्त निर्देश
2 May, 2026 10:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बंगाल चुनाव परिणाम: नतीजों से पहले ममता का 'मिशन काउंटिंग', एजेंटों को दिए जीत का सर्टिफिकेट मिलने तक डटे रहने के निर्देश
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने में अब महज 48 घंटे का समय बचा है। मतगणना से ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी ने किसी भी प्रकार की 'मानवीय चूक' या 'धांधली' को रोकने के लिए अपने काउंटिंग एजेंटों की एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक बुलाई है।
291 सीटों के एजेंटों के साथ महामंथन
यह वर्चुअल बैठक शनिवार शाम 4 बजे आयोजित की गई है, जिसमें उन सभी 291 निर्वाचन क्षेत्रों के एजेंट शामिल होंगे जहाँ तृणमूल कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं। शेष 3 सीटों पर टीएमसी की सहयोगी 'भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा' (BGPM) के एजेंटों को भी सतर्क रहने को कहा गया है।
काउंटिंग एजेंटों के लिए 'डू एंड डॉन्ट्स' (सख्त निर्देश)
पार्टी नेतृत्व ने अपने एजेंटों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
मैदान न छोड़ें: एजेंटों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे मतगणना पूरी होने और उम्मीदवार को जीत का आधिकारिक सर्टिफिकेट मिलने से पहले केंद्र से बाहर न निकलें।
संदिग्ध हलचल पर नजर: 2021 के नंदीग्राम चुनाव का हवाला देते हुए नेताओं ने कहा कि यदि बिजली गुल होने जैसी कोई भी संदिग्ध घटना दिखे, तो फौरन शीर्ष नेतृत्व को सूचित करें।
तालमेल और धैर्य: किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में एजेंट खुद फैसला लेने के बजाय पार्टी मुख्यालय के अगले आदेश का इंतजार करेंगे।
तकनीकी चुनौती: क्यूआर कोड और मोबाइल
चुनाव आयोग ने इस बार सुरक्षा के लिए क्यूआर कोड तकनीक का इस्तेमाल किया है। इसे ध्यान में रखते हुए:
टीएमसी ने ऐसे एजेंटों को प्राथमिकता दी है जो स्मार्टफोन और नई तकनीक के संचालन में माहिर हैं।
स्ट्रॉन्गरूम से ईवीएम बाहर आने के बाद से लेकर अंतिम राउंड तक की प्रक्रिया का एजेंटों को विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया है।
ममता बनर्जी की चिंता और रणनीति
ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी की भारी जीत का दावा तो किया है, लेकिन वे ईवीएम और स्ट्रॉन्गरूम की सुरक्षा को लेकर लगातार संशय जता रही हैं।
शुक्रवार शाम को ममता और अभिषेक बनर्जी के बीच कालीघाट स्थित आवास पर घंटों रणनीति तैयार की गई।
मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से स्ट्रॉन्गरूम के बाहर 'अतिरिक्त पहरा' देने की अपील की है।
हालिया बवाल और तनावपूर्ण माहौल
बता दें कि गुरुवार देर रात कोलकाता के दो प्रमुख केंद्रों— सखावत मेमोरियल स्कूल और खुदीराम अनुशीलन केंद्र—पर भारी हंगामा हुआ था।
ममता बनर्जी खुद रात में सखावत मेमोरियल स्कूल पहुंची थीं और करीब चार घंटे तक वहां डटी रहीं।
टीएमसी नेताओं का आरोप था कि उनकी अनुपस्थिति में स्ट्रॉन्गरूम के भीतर कुछ अनधिकृत गतिविधियां हो रही थीं। हालांकि, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता बताया है।
पंजाब में बड़ी कार्रवाई: AAP सांसद के खिलाफ दर्ज हुए गंभीर मामले
2 May, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियासी घमासान: भाजपा में शामिल हुए सांसद संदीप पाठक पर पंजाब पुलिस का शिकंजा, गिरफ्तारी की तलवार
चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी (आप) का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद संदीप पाठक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते पंजाब के अलग-अलग जिलों में उनके खिलाफ दो प्राथमिकियां (FIR) दर्ज की गई हैं। इन मामलों में गैर-जमानती धाराएं लगाई गई हैं, जिसके बाद पंजाब पुलिस की एक टीम दिल्ली पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, पाठक की किसी भी समय गिरफ्तारी हो सकती है।
केजरीवाल के 'चाणक्य' से भाजपा के सदस्य तक का सफर
मूल रूप से छत्तीसगढ़ के रहने वाले और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी धारक संदीप पाठक कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माने जाते थे। आईआईटी दिल्ली की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए पाठक ने ही पंजाब विधानसभा चुनावों में 'आप' की ऐतिहासिक जीत की पटकथा लिखी थी। हालांकि, 25 अप्रैल को उन्होंने राघव चड्ढा, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल जैसे दिग्गजों के साथ भाजपा का दामन थाम लिया, जिससे पंजाब से लेकर दिल्ली तक की सियासत गरमा गई है।
बदले की राजनीति या कानूनी कार्रवाई?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पंजाब प्रभारी के पद से हटाए जाने और छत्तीसगढ़ का प्रभार दिए जाने के बाद से पाठक पार्टी से नाराज चल रहे थे। वहीं, आम आदमी पार्टी के भीतर दिल्ली चुनाव 2025 के परिणामों को लेकर भी उन पर सवाल उठ रहे थे। भाजपा में उनके प्रवेश के तुरंत बाद हुई इस पुलिसिया कार्रवाई को राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं।
उद्योगपति राजिंदर गुप्ता के ठिकानों पर भी कार्रवाई
इसी सिलसिले में एक और बड़ी कार्रवाई बरनाला (पंजाब) में देखने को मिली। आप छोड़ने वाले प्रमुख उद्योगपति पद्मश्री राजिंदर गुप्ता की कंपनी 'ट्राईडेंट इंडस्ट्री' (गांव धौला) पर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) ने छापेमारी की है।
मामले की वर्तमान स्थिति:
हाईकोर्ट का दखल: ट्राईडेंट ग्रुप ने इस कार्रवाई को 'राजनीतिक प्रतिशोध' बताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
कोर्ट का आदेश: हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है। पीपीसीबी ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि 4 मई तक कंपनी के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।
संदीप पाठक पर नजर: दिल्ली में मौजूद पंजाब पुलिस की हलचल ने राजधानी के सियासी पारे को बढ़ा दिया है।
ईवीएम विवाद ने बढ़ाया सियासी तापमान, बंगाल में हाई वोल्टेज ड्रामा
1 May, 2026 08:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
west bengal elections : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर है। भाजपा के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। शुभेंदु ने ममता बनर्जी की ओर से देर रात मतगणना केंद्र के बाहर धरना देने को ड्रामेबाजी बताया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह के हथकंडों से जनता का फैसला नहीं बदलने वाला है।
शुभेंदु अधिकारी ने क्या-क्या कहा?
शुभेंदु अधिकारी ने कहा, 'मुख्यमंत्री जो कर रही हैं, वह ड्रामेबाजी के अलावा और कुछ नहीं है। वह कल रात एक ऐसी गाड़ी लेकर मतगणना केंद्र पहुंची थीं, जिसमें वॉशरूम जैसी तमाम सुविधाएं मौजूद थीं। वहां वह चार घंटे तक रुकी रहीं।' अधिकारी ने आगे तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अगले दो दिनों तक ऐसी नौटंकी जारी रख सकती हैं, लेकिन इससे परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि बंगाल की सत्ता से ममता बनर्जी की विदाई तय है।
ईवीएम पर घमासान
ममता बनर्जी की ओर से ईवीएम के साथ छेड़छाड़ के आरोपों पर शुभेंदु ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने सवाल किया, 'आखिर उनकी योजना क्या है? वह जो कर रही हैं, वह सरासर गलत है। वह अपनी हार के डर से बौखला गई हैं।' शुभेंदु ने कहा कि बंगाल में परिवर्तन की लहर चल रही है और यह बात हर कोई जानता है। उन्होंने घोषणा की कि चार मई की दोपहर तक सटीक आंकड़े सामने आ जाएंगे और बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी।
देर रात की गहमागहमी
गौरतलब है कि गुरुवार शाम को ममता बनर्जी ईवीएम में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए भवानीपुर के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित काउंटिंग सेंटर पहुंची थीं। वह आधी रात के बाद वहां से निकलीं। उन्होंने कहा कि काउंटिंग एरिया के अंदर केवल एक व्यक्ति को ही अनुमति दी जाएगी। बनर्जी ने चेतावनी देते हुए कहा, 'अगर गिनती की प्रक्रिया में किसी भी तरह की छेड़छाड़ की योजना बनाई गई, तो उसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' यह विवाद केवल भवानीपुर तक सीमित नहीं रहा। उत्तर कोलकाता के खुदीराम अनुशीलन केंद्र के बाहर भी टीएमसी उम्मीदवारों कुणाल घोष और शशि पांजा ने धरना दिया। उन्होंने स्ट्रांग रूम में रखी ईवीएम के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया। इस दौरान टीएमसी और भाजपा समर्थकों के बीच जमकर नोकझोंक भी देखने को मिली।
EC का बड़ा फैसला, 2 मई को फिर होगा मतदान
1 May, 2026 07:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Repolling In West Bengal: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के तहत 15 मतदान केंद्रों पर फिर वोट डाले जाएंगे। चुनाव आयोग के अनुसार 2 मई को यहां पुनर्मतदान होगा। ये सभी मतदान केंद्र दक्षिण 24 परगना जिले में आते हैं, जहां पर गड़बड़ी की आशंका के मद्देनजर आयोग ने यह फैसला लिया है।
भारतीय निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर और मगरा हाट पश्चिम क्षेत्रों के 15 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराने का आदेश दिया है। आयोग के निर्देशानुसार इन सभी केंद्रों पर 2 मई को दोबारा मतदान कराया जाएगा। मतदान सुबह सात बजे से होगा। इन 15 मतदान केंद्रों में डायमंड हार्बर के चार और मगराहाट पश्चिम के 11 मतदान केंद्र शामिल हैं, जहां पर फिर से शनिवार को वोटिंग होगी। आयोग ने यह फैसला मतदान के दौरान मिली शिकायतों और अनियमितताओं की रिपोर्ट के आधार पर लिया है। जिन बूथों पर गड़बड़ी की आशंका जताई गई थी।
‘क्या बेशर्मी है’: स्वाति मालीवाल ने मुख्यमंत्री पर साधा निशाना
1 May, 2026 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ | पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान पर शराब के नशे में होने के आरोपों ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। आम आदमी पार्टी की पूर्व सांसद और अब भाजपा नेता स्वाति मालीवाल ने इस मुद्दे पर बेहद तीखा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री के तत्काल 'अल्कोहल टेस्ट' की मांग की है। मालीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक विवादित पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मान कई महत्वपूर्ण मौकों पर नशे की हालत में रहे हैं, यहाँ तक कि उन्होंने पूर्व में विदेश यात्रा के दौरान प्लेन से उतारे जाने वाली कथित घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने मुख्यमंत्री के आचरण को 'बेशर्मी' करार देते हुए कहा कि जो व्यक्ति संवेदनशील सीमावर्ती राज्य की फाइलें नशे की हालत में साइन करता हो, उसे पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने केंद्र और राज्यपाल से मांग की है कि जांच में दोषी पाए जाने पर मुख्यमंत्री को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए।
विधानसभा सत्र पर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन: एल्कोमीटर लाने की उठी मांग
मजदूर दिवस के अवसर पर बुलाए गए विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस की पंजाब इकाई ने चंडीगढ़ की सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सत्र केवल एक 'राजनीतिक नाटक' है और सरकार को इसके बजाय मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। सदन के भीतर विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने मोर्चा संभालते हुए मांग की कि विधानसभा के सभी दरवाजे बंद कर हर विधायक का एल्कोमीटर टेस्ट कराया जाए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह सदन की गरिमा को बनाए रख सकें। विपक्ष ने स्पष्ट किया कि जब तक मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य और स्थिति की निष्पक्ष जांच नहीं होती, वे सरकार की नीतियों का विरोध जारी रखेंगे। इस पूरे विवाद ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट को और बढ़ा दिया है।
‘जनता के लिए लड़ना था…’ हरभजन सिंह के बयान से सियासत गरमाई
1 May, 2026 04:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ | क्रिकेट के मैदान से राजनीति की पिच पर उतरे हरभजन सिंह इन दिनों अपनी सुरक्षा को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। आम आदमी पार्टी के टिकट पर पंजाब से राज्यसभा पहुंचे हरभजन ने हाल ही में राघव चड्ढा के नेतृत्व में भाजपा का दामन थाम लिया, जिसके बाद पंजाब की भगवंत मान सरकार ने उन्हें दी गई 'Y' कैटेगरी की सुरक्षा वापस ले ली। राज्य सरकार के इस कदम के खिलाफ हरभजन सिंह ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनकी दलील है कि पार्टी छोड़ने के बाद जालंधर स्थित उनके आवास के बाहर हिंसक प्रदर्शन हुए और दीवारों पर उन्हें 'गद्दार' तक लिखा गया, जिससे उनके और उनके परिवार की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। हालांकि केंद्र सरकार ने उन्हें तत्काल सीआरपीएफ की सुरक्षा मुहैया करा दी है, लेकिन हरभजन का तर्क है कि स्थानीय स्तर पर सुरक्षा देना पंजाब पुलिस का दायित्व है। इस मामले में 30 अप्रैल को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि वह पूर्व क्रिकेटर और उनके परिवार की शारीरिक सुरक्षा सुनिश्चित करे।
सांसदों की जवाबदेही पर उठे सवाल: सुविधाओं और प्रदर्शन के बीच गहराता अंतर
हरभजन सिंह के सुरक्षा विवाद ने भारतीय राजनीति में राज्यसभा सांसदों के चयन और उनकी सक्रियता पर एक नई बहस छेड़ दी है। यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या राज्यसभा की सदस्यता केवल रसूख और सुरक्षा जैसी सुविधाएं प्राप्त करने का जरिया बन गई है। आंकड़ों की बात करें तो संसद में हरभजन सिंह की औसत उपस्थिति मात्र 28 प्रतिशत रही है, जो उनके विधायी कार्यों के प्रति समर्पण पर प्रश्नचिह्न लगाती है। इसी तरह के सवाल पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की सक्रियता पर भी उठते रहे हैं, जिन्होंने लंबी अवधि में न तो कोई सवाल पूछा और न ही किसी बहस में हिस्सा लिया। विशेषज्ञों का तर्क है कि जब जनता के टैक्स के पैसे से सांसदों की सुरक्षा पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, तो सदन में उनकी नगण्य उपस्थिति लोकतंत्र के साथ एक मजाक की तरह है। वर्तमान घटनाक्रम यह सोचने पर मजबूर करता है कि राजनीतिक दल किस योग्यता के आधार पर उच्च सदन के प्रतिनिधि चुनते हैं और क्या सुरक्षा कवच का इस्तेमाल विरोधियों को साधने के लिए एक राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है।
‘नशे में सदन चला रहे हैं CM’, कांग्रेस और अकाली दल का बड़ा प्रहार
1 May, 2026 04:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ | पंजाब विधानसभा का सत्र शुक्रवार को उस समय भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया, जब कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (SAD) सहित पूरे विपक्ष ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर गंभीर आरोप लगाए। विपक्षी दलों का दावा है कि मुख्यमंत्री सदन की कार्यवाही के दौरान नशे की हालत में थे और उनका आचरण सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं था। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया और विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां से मुख्यमंत्री का तत्काल अल्कोहल टेस्ट कराने का आग्रह किया। कांग्रेस ने न केवल मुख्यमंत्री बल्कि सदन के सभी विधायकों के डोप टेस्ट और पीजीआईएमईआर (PGIMER) के माध्यम से एक स्वतंत्र चिकित्सा जांच कराने की भी मांग रखी है। विपक्ष का कहना है कि राज्य के मुखिया का ऐसा व्यवहार लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए बेहद चिंताजनक है।
शराब और डोप टेस्ट पर अड़ा विपक्ष: 'आप' के नेतृत्व से कार्रवाई की अपील
विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा और सुखपाल सिंह खैरा ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है। खैरा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने और उनकी पार्टी ने खुद भी जांच कराने की पेशकश की है ताकि सच्चाई सामने आ सके। बाजवा ने सवाल उठाया कि जब राज्य का प्रमुख ही नशे में हो, तो विधानसभा सत्र आयोजित करने का क्या औचित्य रह जाता है। शिरोमणि अकाली दल ने भी इस घटनाक्रम को 'बेहद शर्मनाक' करार देते हुए कहा कि मजदूर दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री का ऐसा व्यवहार निंदनीय है। विपक्ष ने अब सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल से हस्तक्षेप की मांग की है और मुख्यमंत्री के खिलाफ अनुचित व्यवहार के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को कहा है। फिलहाल, आम आदमी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, जिससे सदन में गतिरोध और गहरा गया है।
अनधिकृत प्रवेश का आरोप, बंगाल चुनाव को लेकर बढ़ी चिंता
1 May, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से ठीक पहले राज्य में प्रशासनिक और राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा में बड़ी चूक और मतगणना प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिशों का आरोप लगाकर चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने दावा किया है कि बाहरी और अनधिकृत व्यक्ति स्ट्रॉन्ग रूम के आसपास देखे गए हैं, जिसका पार्टी कड़ा विरोध कर रही है। सौगत रॉय के मुताबिक, कुछ संदिग्ध लोग मतगणना केंद्रों के बाहर नारेबाजी कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल देने की साजिश है। इसी कड़ी में सिलीगुड़ी के महापौर और प्रत्याशी गौतम देब ने भी चेतावनी दी है कि यदि जनता के जनादेश के साथ किसी भी तरह की हेराफेरी हुई, तो इसके लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार होगा और टीएमसी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
ममता बनर्जी का आधी रात स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा: ईवीएम छेड़छाड़ की आशंका पर दी 'आर-पार' की चेतावनी
ईवीएम में गड़बड़ी की खबरों के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद कमान संभालते हुए कोलकाता के भवानीपुर स्थित स्ट्रॉन्ग रूम का औचक निरीक्षण किया। लगभग चार घंटे तक मतगणना केंद्र पर रुकने के बाद ममता बनर्जी ने कड़े शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी ईवीएम के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ के प्रयास को सफल नहीं होने देगी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का रवैया एकतरफा है और उनके चुनाव एजेंटों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज और केंद्रीय बलों की कार्यप्रणाली पर संदेह जताते हुए कार्यकर्ताओं से 24 घंटे सतर्क रहने का आह्वान किया है। टीएमसी प्रमुख ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि मतगणना के दौरान धांधली की कोई भी कोशिश की गई, तो उनकी पार्टी अपनी 'जान की बाजी' लगाकर इसका मुकाबला करेगी। यह टकराव ऐसे समय में बढ़ा है जब सभी की निगाहें 4 मई को आने वाले चुनावी परिणामों पर टिकी हैं।
सिलेंडर महंगा, अब पेट्रोल की बारी: राहुल गांधी का केंद्र पर तीखा वार
1 May, 2026 03:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | देशभर में आम चुनाव की प्रक्रिया संपन्न होते ही आम आदमी की जेब पर महंगाई की बड़ी मार पड़ी है। तेल विपणन कंपनियों ने आज यानी 1 मई से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹993 की भारी बढ़ोतरी कर दी है। इस ऐतिहासिक वृद्धि के बाद दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत अब ₹3,071.50 पर पहुंच गई है। इसके साथ ही 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर के दाम में भी ₹261 की वृद्धि की गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। बाजार जानकारों का मानना है कि मिडिल ईस्ट (ईरान-इजराइल) में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई अस्थिरता के चलते सरकार को यह कड़ा फैसला लेना पड़ा है, जिसका सीधा असर अब होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों पर पड़ना तय है।
राहुल गांधी ने केंद्र को घेरा: 'चुनाव खत्म, महंगाई शुरू' का नारा देकर साधा निशाना
एलपीजी की कीमतों में इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी पर विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे 'चुनावी बिल' करार देते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि मतदान खत्म होते ही महंगाई की गर्मी बढ़ेगी। राहुल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि एक ही दिन में ₹993 की यह वृद्धि अब तक की सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़ोतरी है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले तीन महीनों में कमर्शियल गैस के दाम 81 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं, जिससे चाय वाले, ढाबा चलाने वाले और छोटे मिठाई विक्रेताओं की रसोई पर भारी बोझ पड़ गया है। राहुल गांधी ने यह अंदेशा भी जताया कि गैस के बाद अब जल्द ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी भारी इजाफा कर जनता को दूसरी मार दी जाएगी।
बिहार की राजनीति गरमाई, तेजस्वी यादव ने भाजपा पर साधा निशाना
1 May, 2026 02:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना | अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर बिहार की सियासत में जुबानी तीर तेज हो गए हैं। नेता प्रतिपक्ष और राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने श्रमिकों को शुभकामनाएं देने के साथ ही केंद्र और राज्य की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला है। तेजस्वी यादव ने बिहार से होने वाले भारी पलायन पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य की वर्तमान स्थिति को देखते हुए 'श्रमिक दिवस' का नाम बदलकर 'बिहार समर्पित दिवस' कर देना चाहिए। उन्होंने तंजिया लहजे में यह भी कहा कि नाम बदलने की राजनीति में माहिर भाजपा नेताओं और मुख्यमंत्री को अब बिहार का नाम बदलकर 'श्रमिक प्रदेश' रख देना चाहिए, क्योंकि यह राज्य देश भर में मजदूरों की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। तेजस्वी ने स्पष्ट किया कि देश के निर्माण में श्रमिकों का योगदान अतुलनीय है, लेकिन उनकी बेहतरी और सामाजिक उत्थान पर कोई ठोस चर्चा नहीं हो रही है।
एनडीए की नीतियों पर निशाना: पलायन और बेरोजगारी को बताया सरकार की विफलता
राजद नेता ने डबल इंजन सरकार की आर्थिक नीतियों को पूरी तरह 'पूंजीपरस्त' करार देते हुए आरोप लगाया कि पिछले 21 वर्षों से जारी राजग की गरीब विरोधी नीतियों ने बिहार को बदहाली की कगार पर ला खड़ा किया है। उन्होंने भयावह आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि प्रतिवर्ष बिहार से करीब चार करोड़ लोग आजीविका की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करते हैं, जहाँ उन्हें अक्सर अपमान और हिंसा का सामना करना पड़ता है। तेजस्वी ने नोटबंदी, लॉकडाउन और वर्तमान में गैस सिलेंडर की कीमतों से उपजे संकट का जिक्र करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों ने सबसे अधिक चोट प्रवासी मजदूरों पर ही की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिहार के श्रमिक काम बंद कर दें तो अन्य राज्यों की फैक्ट्रियों के पहिए थम जाएंगे। अंत में, उन्होंने बिहार से पलायन रोकने और मजदूरों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए प्रदेशवासियों से एकजुट होकर संकल्प लेने का आह्वान किया।
पंजाब में सत्ता की जंग तेज, आम आदमी पार्टी और बीजेपी आमने-सामने
1 May, 2026 02:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ | पंजाब विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राज्य का सियासी पारा अचानक गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ी रणनीतिक घेराबंदी करते हुए सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को तगड़ा झटका दिया है। भगवा दल ने अपने कूटनीतिक कौशल का परिचय देते हुए 'आप' के सात राज्यसभा सांसदों को अपने पाले में कर लिया है, जिससे प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा की यह रणनीति नई नहीं है। साल 2022 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भी भाजपा ने इसी तर्ज पर चलते हुए तत्कालीन सत्ताधारी दल कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के कई दिग्गज चेहरों को अपने साथ जोड़ा था। उस समय भाजपा के निशाने पर कांग्रेस थी, लेकिन इस बार उन्होंने अपनी बिसात मौजूदा सरकार के खिलाफ बिछाई है, जो सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी की जड़ों को हिलाने की एक सोची-समझी कोशिश मानी जा रही है।
सिद्धांतों से भटकाव का आरोप लगाकर राज्यसभा सांसदों ने थामा भाजपा का दामन
आम आदमी पार्टी के लिए बीते 24 अप्रैल का दिन बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, जब पार्टी के कुल 10 राज्यसभा सदस्यों में से सात ने एक साथ बगावत का बिगुल फूंक दिया। राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल जैसे कद्दावर नेताओं ने पार्टी के बुनियादी मूल्यों और नैतिकता के पतन का हवाला देते हुए प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। पार्टी छोड़ने वाले इन सात सांसदों में से छह पंजाब का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जिससे आगामी चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को गहरी चोट पहुंची है। इन नेताओं का कहना है कि पार्टी अब अपने उन मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है जिनके दम पर उसने सत्ता हासिल की थी, और इसी वैचारिक मतभेद के कारण उन्होंने भाजपा के नेतृत्व में विश्वास जताने का फैसला किया है।
पंजाब विधानसभा में हलचल तेज, सत्र की शुरुआत श्रद्धांजलि से, फिर स्थगन
1 May, 2026 12:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र शुक्रवार, 1 मई 2026 को भारी राजनीतिक गहमागहमी के बीच शुरू हुआ। 'कीर्ति दिवस' (मजदूर दिवस) के अवसर पर बुलाए गए इस एक दिवसीय सत्र की शुरुआत में सदन ने महान हस्तियों को श्रद्धांजलि दी, लेकिन इसके तुरंत बाद सदन का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने अपनी सरकार के प्रति 'विश्वासमत प्रस्ताव' पेश किया है, जिसे हाल ही में पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने और 'ऑपरेशन लोटस' के आरोपों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
मजदूरों के नाम सत्र: न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का प्रस्ताव
राज्य सरकार ने इस सत्र को 'मजदूर दिवस' को समर्पित किया है। सदन में सत्ता पक्ष की ओर से राज्य में मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने को लेकर एक महत्वपूर्ण संकल्प (Resolution) पेश किया गया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विभिन्न मजदूर संघों के प्रतिनिधियों को विशेष अतिथि के रूप में सदन में आमंत्रित किया। सरकार का कहना है कि यह सत्र उन मेहनतकश लोगों को समर्पित है जो राज्य की आर्थिक प्रगति की रीढ़ हैं। इसके अतिरिक्त, सत्र में 'मनरेगा' योजना में केंद्र द्वारा किए गए बदलावों और उनके श्रमिकों पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
सियासी टकराव: भाजपा का समानांतर सत्र और कांग्रेस का घेराव
सदन के भीतर और बाहर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है:
भाजपा का बहिष्कार: भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने आधिकारिक सत्र का पूरी तरह बहिष्कार किया। इसके बजाय, भाजपा नेताओं ने चंडीगढ़ स्थित अपने पार्टी मुख्यालय पर एक समानांतर 'जनता की विधानसभा' (People's Assembly) आयोजित कर सरकार को चुनौती दी।
कांग्रेस का प्रदर्शन: कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर के बाहर 'घेराव' किया। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा और सुखपाल खैरा ने आरोप लगाया कि सरकार मजदूरों के नाम पर केवल 'राजनीतिक ड्रामा' कर रही है ताकि असल मुद्दों और पार्टी के भीतर मचे आंतरिक कलह से जनता का ध्यान भटकाया जा सके।
सदन में नोकझोंक: सदन की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान और कांग्रेस विधायक सुखपाल खैरा के बीच तीखी बहस हुई, जिसके कारण कार्यवाही में कई बार व्यवधान पड़ा।
सदन की कार्यवाही अभी जारी है, जहाँ विश्वासमत पर चर्चा के साथ-साथ राज्य के नए प्रिज़न बिल (Prisons Bill) और बेअदबी कानून में स्पष्टीकरण जैसे विधायी कार्यों के भी संपन्न होने की संभावना है।
फडणवीस बोले—मराठी सीखें सभी, लेकिन किसी भी तरह की हिंसा नहीं
1 May, 2026 11:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र राज्य के स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाषा और सद्भाव को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र की प्रगति और उसकी संस्कृति में मराठी भाषा का स्थान सर्वोपरि है, लेकिन इसके नाम पर होने वाली किसी भी प्रकार की हिंसा या समाज को बांटने वाली गतिविधियों को सरकार कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार ने सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में मराठी के उपयोग को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
मराठी सीखना प्रेम और गर्व का हिस्सा, जबरदस्ती का नहीं
मुख्यमंत्री फडणवीस ने समावेशी दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि महाराष्ट्र हमेशा से ही बड़े दिल वाला और प्रगतिशील राज्य रहा है। उन्होंने राज्य में रहने वाले गैर-मराठी भाषियों से अपील की कि वे यहाँ की संस्कृति और भाषा से जुड़ने के लिए मराठी सीखने का प्रयास करें। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि यदि कोई भाषा सीखने में असमर्थ है, तो सरकार और समाज एक शिक्षक की भूमिका निभाते हुए उनकी सहायता करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाषा का उद्देश्य संवाद स्थापित करना और लोगों को जोड़ना होना चाहिए, न कि किसी पर अपनी सोच थोपना।
विकास का 'इंजन' है महाराष्ट्र: हिंसा पर जीरो टॉलरेंस
हाल ही में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के फैसले के बीच मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि भाषा के विवाद को कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का जरिया नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र देश की आर्थिक रीढ़ और विकास का इंजन है। ऐसे में संकीर्ण मानसिकता या भाषाई विवाद राज्य की छवि और प्रगति को नुकसान पहुँचाते हैं।" फडणवीस ने साफ किया कि सुधार और समावेशिता ही महाराष्ट्र की असली पहचान है और सरकार इसी मार्ग पर चलते हुए भाषाई गौरव और सामाजिक शांति के बीच संतुलन बनाए रखेगी।
महंगाई पर कांग्रेस का हमला तेज, LPG दाम बढ़ने पर उठाए सवाल
1 May, 2026 11:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: 1 मई 2026 से कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में हुई ₹993 की भारी बढ़ोतरी ने देश में एक नया राजनीतिक विवाद छेड़ दिया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर चौतरफा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर मोर्चा खोलते हुए कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधा और इस मूल्य वृद्धि को जनता पर 'चाबुक' चलाने जैसा करार दिया। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जनहित के बजाय केवल 'वसूली' पर ध्यान दे रही है।
'बड़े चालबाज लोग हैं': कांग्रेस का सरकार पर तंज
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक बयान में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले महज 4 महीनों के भीतर कमर्शियल सिलेंडर के दाम में ₹1,518 का इजाफा हो चुका है। पार्टी ने तंज कसते हुए लिखा, "अभी साल के 8 महीने बाकी हैं और मोदी की वसूली जारी है।" कांग्रेस ने सरकार पर 'चालबाजी' का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले आधार कार्ड के जरिए सिलेंडर बांटे गए और अब उनकी कीमतें इतनी बढ़ा दी गई हैं कि वे आम व्यापारियों की पहुंच से बाहर हो रहे हैं। साथ ही, 5 किलो वाले 'छोटू सिलेंडर' के दाम बढ़ने पर भी पार्टी ने गहरी नाराजगी जाहिर की है।
दामों में उछाल की बड़ी वजह: 'होर्मुज संकट' और वैश्विक अस्थिरता
व्यावसायिक सिलेंडर की कीमतों में आए इस उछाल के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां मुख्य कारण मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार:
पश्चिम एशिया संकट: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी जैसी स्थिति बनी हुई है।
सप्लाई चेन प्रभावित: दुनिया की 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति इसी मार्ग से होती है, जिसके बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें बढ़ी हैं।
बीते महीनों का ट्रेंड: अप्रैल में भी कमर्शियल सिलेंडर ₹196 और मार्च में ₹114 महंगा हुआ था, लेकिन मई की बढ़ोतरी ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
महिला मतदाताओं का असर, बंगाल की राजनीति में नया समीकरण
SRK विवाद पर चौंकाने वाला खुलासा, पूर्व ACP का बड़ा दावा
आपातकाल को लेकर दुबे का हमला, अभिनेत्री स्नेहलता की कैद पर उठे मुद्दे
कनाडा की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: खालिस्तानी तत्वों से सुरक्षा को खतरा
रहस्यमयी हालात में युवक की मौत, शव पर गोली के निशान से बढ़ी आशंका
लग्ज़री लाइफस्टाइल या अफवाह? बिसलेरी से नहाने वाले स्टार का नाम जानने को बेताब फैंस
Result Day से पहले TMC अलर्ट, ममता ने एजेंटों को दिए सख्त निर्देश
मंडप में देरी पर कपल का रिएक्शन—फैंस को आई हंसी
