राजनीति
संसद में घमासान: लगातार दो दिन की चर्चा के बाद भी बेनतीजा रहा महिला आरक्षण विधेयक
18 Apr, 2026 10:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र के दौरान संविधान संशोधन विधेयकों पर दो दिनों की गहन चर्चा के बाद भी महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा से पारित नहीं हो सका। सदन में शुक्रवार शाम को हुई वोटिंग में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया।
विधेयक के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं हुआ, जिसके कारण यह गिर गया। आज संसद के विशेष सत्र का आखिरी दिन है और कार्यवाही सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
दिल्ली में हाई-लेवल मीटिंग: कोयला भंडार और किसानों की जरूरतों पर मंथन करेंगे प्रधानमंत्री
18 Apr, 2026 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राजधानी में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। सुबह 11:30 बजे होने वाली इस बैठक में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) देश की सुरक्षा स्थिति की व्यापक समीक्षा करेगी। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) और केंद्रीय कैबिनेट की बैठक को भी संबोधित करेंगे।
राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक संकट पर नजर यह बैठक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हो रही है। सरकार वैश्विक संघर्षों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, देश में ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए पेट्रोलियम, एलएनजी और बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
आर्थिक और कृषि व्यवस्था की समीक्षा सुरक्षा के साथ-साथ बैठक में घरेलू जरूरतों पर भी चर्चा होगी। इसमें बिजली उत्पादन के लिए कोयला भंडार की स्थिति, उर्वरकों की उपलब्धता और आगामी खरीफ व रबी सीजन के लिए किसानों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बावजूद देश की खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर कोई आंच न आए।
महिला आरक्षण पर टीएमसी का हमला: 'बिना परिसीमन के तुरंत लागू हो कोटा'
18 Apr, 2026 08:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: लोकसभा में 'संविधान संशोधन बिल' (परिसीमन एवं महिला आरक्षण) के गिरने पर टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस हार ने भाजपा की 'बेचैनी' को उजागर कर दिया है। बनर्जी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की पकड़ सत्ता पर कमजोर हो रही है।
बिल क्यों गिरा?
शुक्रवार को सदन में पेश किए गए इस बिल का उद्देश्य साल 2029 से महिलाओं को 33% आरक्षण देना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करना था। वोटिंग के दौरान पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। दो-तिहाई बहुमत (352 वोट) का आंकड़ा न छू पाने के कारण बिल गिर गया।
अभिषेक बनर्जी के तर्क
अभिषेक बनर्जी ने 'एक्स' पर लिखा कि विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन ने निष्पक्षता की कमी के कारण इस बिल को खारिज किया है। उन्होंने सरकार द्वारा 2011 की जनगणना के आधार पर सीटें बढ़ाने की कोशिश को गलत बताया। बनर्जी ने मांग की कि चूंकि महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पहले ही पास हो चुका है, इसलिए सरकार को इसे विवादित परिसीमन से अलग रखकर तुरंत लागू करना चाहिए। उन्होंने गर्व से कहा कि टीएमसी ने पहले ही संसद में महिलाओं को 41% प्रतिनिधित्व देकर मिसाल कायम की है।
बालाकोट-नोटबंदी पर राहुल का तंज, संसद में हंगामा
17 Apr, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन बिलों पर चर्चा के दौरान आज लोकसभा में जबरदस्त सियासी संग्राम देखने को मिला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इस विधेयक को 'महिला सशक्तिकरण' के बजाय 'निर्वाचन क्षेत्रों का भूगोल बदलने' का हथियार करार दिया।
भाषण की 3 प्रमुख बातें:
'पकड़ा गया जादूगर': राहुल गांधी ने प्रतीकात्मक लहजे में पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि "नोटबंदी और बालाकोट जैसे मुद्दों का जादूगर अब पकड़ा गया है।" उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जानती है कि यह बिल लागू नहीं हो सकता, इसलिए वे केवल चुनावी नक्शा बदलने के लिए इसका सहारा ले रहे हैं। (हालांकि, स्पीकर ने 'जादूगर' जैसे विवादित शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटा दिया है)।
चुनावी नक्शे पर घेराबंदी: राहुल ने कहा कि सरकार अपनी घटती राजनीतिक शक्ति से डरी हुई है। असम की तर्ज पर पूरे देश का चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश की जा रही है, जिसे विपक्ष सफल नहीं होने देगा।
वंचित वर्गों के साथ क्रूरता: उन्होंने इस बिल को ओबीसी और दलितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि सरकार इसके जरिए पिछड़ों का हक छीनना चाहती है।
राहुल के बयानों पर एनडीए सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और इसे प्रधानमंत्री का अपमान बताया। गौरतलब है कि इन महत्वपूर्ण बिलों पर आज ही वोटिंग होनी है, जिससे पहले सदन का तापमान चरम पर है।
ओबीसी अधिकार पर घमासान: राहुल बोले- सरकार छीनना चाहती है हक
17 Apr, 2026 03:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधित बिलों पर चर्चा के दूसरे दिन सदन का माहौल पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार के इरादों पर सवाल उठाते हुए इस बिल को 'शेमफुल' (शर्मनाक) करार दिया और कहा कि यह कानून महिलाओं को अधिकार देने के लिए नहीं, बल्कि विपक्षी राजनीति को खत्म करने के लिए लाया गया है।
यह बिल नहीं, परिसीमन की साजिश है
राहुल गांधी ने कड़े शब्दों में कहा कि यह बिल भारत के निर्वाचन क्षेत्रों के नक्शे को बदलने का एक माध्यम मात्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी 'घटती ताकत' से डर गई है और इसीलिए असम की तर्ज पर पूरे देश का चुनावी भूगोल बदलना चाहती है।
राहुल का प्रहार: "आप ओबीसी और दलितों के अधिकार छीनना चाहते हैं। आप उन्हें हिंदू तो कहते हैं, लेकिन जब हक देने की बात आती है, तो पीछे हट जाते हैं। यह बिल ओबीसी और वंचित वर्गों के प्रति क्रूरता है।"
विपक्ष का एकजुट विरोध: पुराना बिल लाओ, समर्थन देंगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने साफ कर दिया कि वे इस बिल को पास नहीं होने देंगे और इसके खिलाफ वोट करेंगे। वहीं, टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने सरकार की इस पूरी प्रक्रिया को 'परिसीमन की नौटंकी' करार दिया। विपक्ष की मांग है कि सरकार पुराने बिल को उसी स्वरूप में लाए, तभी वे समर्थन करेंगे।
पीएम मोदी का सांसदों को संदेश: घर की महिलाओं को याद कर करें वोट
वोटिंग से ठीक दो घंटे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक भावनात्मक अपील की। उन्होंने लिखा: "मैं सभी सांसदों से आग्रह करता हूँ कि आप अपने घर की माँ, बहन, बेटी और पत्नी का चेहरा याद करते हुए मतदान करें। नारी शक्ति के वंदन का यह एक ऐतिहासिक अवसर है।"
क्या होगा आगे?
शाम 4 बजे होने वाली वोटिंग देश की राजनीति की दिशा तय करेगी। जहाँ सरकार इसे महिलाओं के लिए एक 'क्रांतिकारी कदम' बता रही है, वहीं विपक्ष इसे 'मनुवाद को थोपने' और 'जातीय जनगणना से ध्यान भटकाने' का जरिया मान रहा है।
हिमाचल कांग्रेस का प्लान: मंत्री-विधायक संभालेंगे पंचायत और निकाय चुनाव
17 Apr, 2026 03:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शिमला | हिमाचल प्रदेश में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों का बिगुल बजने से पहले ही राजनीतिक पारा चढ़ गया है। राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने इन चुनावों को "सत्ता का सेमीफाइनल" मानते हुए अपनी पूरी ताकत झोंकने का फैसला किया है। शिमला स्थित कांग्रेस मुख्यालय 'राजीव भवन' में गुरुवार को हुई राजनीतिक मामलों की कमेटी की बैठक में चुनावी फतह के लिए एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार किया गया।
कैबिनेट मंत्रियों को मिलेगी 'फील्ड' की कमान
बैठक में लिया गया सबसे बड़ा फैसला यह है कि इस बार चुनाव की जिम्मेदारी केवल संगठन पर नहीं, बल्कि सीधे सरकार के मंत्रियों और विधायकों पर होगी।
पर्यवेक्षक के रूप में तैनाती: प्रत्येक जिले और विधानसभा क्षेत्र में मंत्रियों और विधायकों को बतौर पर्यवेक्षक उतारा जाएगा।
जवाबदेही तय: वे न केवल चुनावी रणनीति बनाएंगे, बल्कि जिला परिषद और नगर निगमों में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों की जीत भी सुनिश्चित करेंगे।
सुक्खू और विनय कुमार को मिला 'फ्री हैंड'
चुनावों के लिए समितियों के गठन और प्रभार सौंपने का पूरा अधिकार मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार को दिया गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अगले एक सप्ताह के भीतर इन कमेटियों की घोषणा कर दी जाएगी, ताकि समय रहते रणनीति को जमीन पर उतारा जा सके।
संगठनात्मक एकता पर जोर
बैठक की अध्यक्षता कर रहीं पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन चुनावों में टीम वर्क ही सबसे बड़ा हथियार है। मुख्यमंत्री सुक्खू, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और संगठन महामंत्री विनोद ज़िंटा की मौजूदगी में पार्टी ने संदेश दिया कि नगर निगमों (धर्मशाला, सोलन, मंडी) से लेकर 3,600 से अधिक पंचायतों तक कांग्रेस की मजबूत पकड़ बनाना ही एकमात्र लक्ष्य है।
सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन: जल्द होगा तारीखों का ऐलान
हिमाचल में चुनावी हलचल तेज होने की मुख्य वजह सुप्रीम कोर्ट का वह निर्देश है, जिसमें 31 मई से पहले पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव संपन्न कराने के आदेश दिए गए हैं। संभावना जताई जा रही है कि राज्य निर्वाचन आयोग अगले 4-5 दिनों के भीतर चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर सकता है।
परिसीमन पर शाह की साफ तस्वीर: बड़े राज्यों की बढ़ेगी ताकत
17 Apr, 2026 03:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान लोकसभा की भविष्य की तस्वीर अब साफ होने लगी है। गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में उन आशंकाओं को दूर किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि परिसीमन के बाद दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी। शाह ने आंकड़ों के जरिए स्पष्ट किया कि सीटों की संख्या बढ़ने से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं, बल्कि फायदा ही होगा।
कैसे पहुंचेंगे 816 के आंकड़े तक?
अमित शाह ने सदन में सीटों की वृद्धि का सरल गणित साझा किया। उन्होंने बताया कि '850' एक अनुमानित संख्या है, जबकि वास्तविक गणना 816 के आसपास रहने वाली है।
गणित इस प्रकार है:
वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटें हैं।
प्रस्तावित परिसीमन के तहत सीटों में 50% की वृद्धि की संभावना है।
इस आधार पर कुल सीटें बढ़कर 816 हो जाएंगी।
जब इन 816 सीटों पर 33% महिला आरक्षण लागू होगा, तो महिलाओं की भागीदारी मौजूदा सदन की कुल संख्या के एक बड़े हिस्से के बराबर हो जाएगी।
दक्षिण भारत की चिंता और शाह का जवाब
विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस का आरोप था कि परिसीमन उत्तर भारतीय राज्यों के पक्ष में झुका हुआ है क्योंकि वहां जनसंख्या वृद्धि अधिक रही है। इसके जवाब में गृह मंत्री ने दक्षिण के पांच राज्यों के आंकड़े पेश किए:
सीटों में इजाफा: दक्षिण भारत की कुल सीटें 129 से बढ़कर 195 होने का अनुमान है।
प्रतिनिधित्व प्रतिशत: सदन में दक्षिण भारत का कुल प्रतिनिधित्व 23.76% से बढ़कर 23.87% हो जाएगा, जो कि वर्तमान से थोड़ा अधिक ही है।
राज्यवार लाभ: तमिलनाडु को 20, आंध्र प्रदेश को 13, केरल को 10 और तेलंगाना को 9 अतिरिक्त सीटें मिलने की उम्मीद है।
संविधान में होंगे बड़े बदलाव
परिसीमन की इस विशाल प्रक्रिया को अमली जामा पहनाने के लिए संविधान के 7 प्रमुख अनुच्छेदों (55, 81, 82, 170, 330, 332 और 334-ए) में संशोधन का प्रस्ताव है। यह पूरी प्रक्रिया 2011 की जनगणना को आधार बनाकर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय करेगी।
सपा और कांग्रेस पर मायावती का तीखा प्रहार, महिला आरक्षण बना मुद्दा
17 Apr, 2026 02:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा)की प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा)को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने दोनों दलों पर आरोप लगाया कि ये समय-समय पर एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के संवैधानिक अधिकारों को लेकर अपना रुख बदलते रहे हैं और अब महिला आरक्षण जैसे मुद्दों को भी राजनीतिक फायदा लेने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।मायावती ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में कभी भी इन वर्गों के आरक्षण को पूरी तरह और गंभीरता से लागू करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों का जिक्र करते हुए दावा किया कि ओबीसी आरक्षण को लागू कराने में तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार और बसपा के प्रयास अहम रहे हैं।
सपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने संबंधी आयोग की रिपोर्ट को सपा सरकार ने लंबे समय तक लागू नहीं किया, जबकि बसपा सरकार ने 1995 में इसे लागू कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि अब वही सपा महिला आरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर रही है।
महिला आरक्षण को लेकर मायावती ने यह भी कहा कि इसका आधार 2011 की जनगणना के अनुसार परिसीमन होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वह सत्ता में होती तो उसके फैसले भी भाजपा जैसे ही होते।अपने बयान के अंत में मायावती ने कहा कि देश में एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समुदाय के वास्तविक हितों को लेकर कोई भी पार्टी पूरी तरह गंभीर नहीं रही है। उन्होंने इन वर्गों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और अपने हितों को समझते हुए आत्मनिर्भर बनने पर ध्यान दें।
परिसीमन विवाद: काले झंडे, बिल की कॉपी जलाकर विरोध, स्टालिन के प्रदर्शन से गरमाई राजनीति
17 Apr, 2026 12:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: लोकसभा में परिसीमन बिल पेश होते ही देश की राजनीति में बड़ा उबाल आ गया है। गुरुवार को लोकसभा में जैसे ही बिल पेश किया गया, सदन से लेकर सडक़ तक विरोध की आग फैल गई। जहां दक्षिण भारत के राज्यों ने इसे अपनी राजनीतिक शक्ति कम करने की साजिश बताया, वहीं विपक्षी दलों ने इसे सरकार का गुप्त एजेंडा करार दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन बिल के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ दी है। नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान स्टालिन ने सार्वजनिक रूप से विधेयक की प्रति जलाई और काला झंडा लहराकर अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने इस कदम को फासीवादी बताते हुए चेतावनी दी कि तमिलनाडु इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगा। स्टालिन ने भावुक अपील करते हुए कहा कि मैं इस बिल की प्रति जलाकर वह आग लगा रहा हूं जो उन लोगों को जवाब देगी जो तमिलों को अपने ही देश में शरणार्थी बनाना चाहते हैं।
डीएमके ने इसे दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लोकसभा में बिल पेश होने के दौरान सरकार को घेरते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पूछा कि सरकार को इतनी जल्दबाजी क्यों है? आखिर वह क्या छिपाना चाहती है? अखिलेश ने इसे ‘खुफिया लोगों की गुप्त योजना’ बताते हुए कहा कि सरकार महिला आरक्षण का नाम लेकर असल में परिसीमन के जरिए सत्ता पर कब्जा करना चाहती है। दिलचस्प बात यह है कि जहां अन्य विपक्षी दल विरोध में हैं, वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने महिला आरक्षण का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया है। हालांकि, उन्होंने भी एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से कोटा देने की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया है।
रिजिजू बोले, दक्षिण के राज्यों को बरगला रहा विपक्ष
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सफाई देते हुए कहा कि विपक्ष परिसीमन के गलत आंकड़े पेश कर दक्षिण के राज्यों को बरगला रहा है। उन्होंने कहा कि जब सीटें 850 होंगी, तो आनुपातिक रूप से दक्षिण को भी फायदा होगा।
तीसरी बार उपसभापति चुने गए हरिवंश नारायण, पीएम मोदी ने की जमकर तारीफ
17 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
PM Modi In Rajya Sabha: महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन बिलों पर दूसरे दिन चर्चा जारी है. इस बीच राज्यसभा में उपसभापति पद पर हरिवंश नारायण सिंह गए हैं. इस दौरान खुद पीएम मोदी राज्यसभा में मौजूद रहे. पीएम मोदी ने हरिवंश सिंह को उपसभापति पद पर चुने जाने की बधाई दी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सदन का हमेशा से ही आपके प्रति विश्वास रहा है. हरिवंश नारायण सिंह लगातार तीसरी बार उपसभापति चुने गए हैं.
पीएम मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि सदन की ओर से, मेरी तरफ से मैं हरिवंश जी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं. राज्यसभा उपसभापति के रूप में लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना, ये अपने आप में इस सदन का जो गहरा विश्वास है और बीते हुए कालखंड में आपके अनुभव का सदन को जो लाभ मिला है, सबको साथ लेकर चलने का आपका जो प्रयास रहा है, उसपर एक प्रकार से सदन ने आज एक मुहर लगा दी है.
उन्होंने कहा कि ये एक अनुभव और सहज कार्यशैली का सम्मान है और एक सहज कार्यशैली की स्वीकृति भी है. हम सबने हरिवंश जी के नेतृत्व में सदन की शक्ति को और अधिक प्रभावी होते हुए भी देखा है. मैं कह सकता हूं कि केवल सदन की कार्यवाही का संचालन ही नहीं, वे अपने जीवन के भूतकाल के अनुभवों का भी बहुत ही सटीक तरीके से सदन को समृद्ध करने में उपयोग करते हैं.
राज्यसभा में क्या-क्या बोले पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि उनका ये अनुभव पूरी कार्यवाही को, संचालन को और सदन के माहौल को और अधिक परिपक्व बनाता है. मुझे विश्वास है कि उप सभापति जी का नया कार्यकाल उसी भावना, संतुलन और समर्पण के साथ आगे बढ़ेगा और हम सबके प्रयासों से सदन की गरिमा को नई ऊंचाई प्राप्त होगी.
उन्होंने कहा कि हरिवंश जी का जन्म जेपी के गांव में हुआ और सहज रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण वो अपने गांव के विकास के लिए विद्यार्थी काल से भी कुछ न कुछ करते और उनकी शिक्षा-दिक्षा काशी में हुई.
आगे कहा कि आज 17 अप्रैल है और 17 अप्रैल, 1927 हमारे पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी की जन्म जयंती भी है. विशेषता ये भी है कि आज 17 अप्रैल को आप जब तीसरी बार इस दायित्व को संभालने जा रहे हैं, चन्द्रशेखर जी के साथ आपका जुड़ाव, उनके प्रति आपका लगाव रहा और एक प्रकार से आप उनके सहयात्री रहे, उनके पूरे कार्यकाल में, ये अपने आप में एक बड़ा सुयोग है.
पीएम मोदी ने कहा कि 2018 में जब हरिवंश जी ने राज्यसभा के उप सभापति की भूमिका निभानी शुरू की, उसके बाद मेरी जानकारी के अनुसार इन्होंने colleges और universities में 350 से अधिक कार्यक्रम किए हैं. ये बहुत बड़ा काम है.
कब होगा कैबिनेट विस्तार? BJP की बैठक से आया बड़ा अपडेट, जानें अंदर की बात
17 Apr, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ| उत्तर प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और भाजपा प्रदेश संगठन में बड़े बदलावों को लेकर अब दिल्ली में मंथन तेज हो गया है। गुरुवार को राजधानी में एक अहम बैठक आयोजित हुई, जिसमें बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी (Pankaj Chaudhary) और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह (Dharmapal Singh) ने पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ लंबी चर्चा की।
बंद कमरे की बैठक में क्या हुआ?
इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Nabin) और बीएल संतोष (B. L. Santhosh) भी शामिल रहे। बैठक बंद कमरे में हुई, जिसमें प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों और संगठनात्मक ढांचे पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
यूपी BJP मंत्रिमंडल को लेकर इस सप्ताह हो सकता है अंतिम फैसला
बंद कमरे में हुई बैठक के बाद ये संकेत मिल रहे हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बदलाव के स्वरूप को इसी सप्ताह अंतिम रूप दिया जा सकता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन दोनों स्तरों पर होने वाले बदलावों के लिए अगले सप्ताह की शुरूआत के पहले 2-3 दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।संभावना जताई जा रही है कि रविवार (19 अप्रैल) या सोमवार (20 अप्रैल) को मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है। इसके तुरंत बाद संगठन में नए पदाधिकारियों की सूची भी जारी कर दी जाएगी।
लखनऊ में भी हुई थी गहन चर्चा
इससे पहले भाजपा संगठन चुनाव के प्रेक्षक विनोद तावड़े (Vinod Tawde) ने हाल ही में दो दिनों तक लखनऊ में प्रवास किया था। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें कीं। इन बैठकों में मंत्रिमंडल विस्तार, संगठनात्मक बदलाव के साथ-साथ निगमों और बोर्डों में नियुक्तियों को लेकर भी रायशुमारी की गई। विभिन्न नेताओं से फीडबैक लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई।
अमित शाह को सौंपी गई रिपोर्ट
विनोद तावड़े ने अपनी रिपोर्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सौंप दी है। यह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्री (Amit Shah) और पार्टी अध्यक्ष को दी गई, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाना है। सूत्रों का कहना है कि अब इसी रिपोर्ट के आधार पर अंतिम दौर की बैठकों में निर्णय तय किए जा रहे हैं, ताकि सभी राजनीतिक और संगठनात्मक संतुलन बनाए रखे जा सकें।
अंतिम फैसले से पहले फिर होगी मुलाकात
सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार या शनिवार को प्रदेश के शीर्ष पदाधिकारी एक बार फिर अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं। इस बैठक के बाद मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बदलाव को लेकर अंतिम मुहर लगने की संभावना है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
इन बैठकों और संभावित फैसलों को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बदलाव को लेकर विभिन्न स्तरों पर कयास लगाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इन फैसलों से आने वाले समय में पार्टी की रणनीति और राजनीतिक समीकरणों पर बड़ा असर पड़ेगा।
Jairam Ramesh का महिला आरक्षण कानून पर हमला, कहा- लोगों को गुमराह कर रही सरकार
17 Apr, 2026 10:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Women Reservation News: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि यह बेहद अजीब स्थिति है कि सितंबर 2023 में पारित कानून आज लागू हो गया, जबकि इसमें संशोधन पर चर्चा अभी जारी है और कल मतदान होना है. जयराम रमेश ने इस प्रक्रिया पर हैरानी जताते हुए पारदर्शिता और स्पष्टता की कमी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार को पहले संशोधनों पर निर्णय लेना चाहिए था, उसके बाद ही कानून लागू किया जाना चाहिए था. विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है.
दरअसल, केंद्र सरकार ने 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को 16 अप्रैल 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है, लेकिन इसके वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर अब भी असमंजस बना हुआ है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब संसद में इसी कानून में संशोधन से जुड़े तीन विधेयकों पर बहस जारी है और उन पर मतदान होना बाकी है. कानून मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया कि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रावधान 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे. गौरतलब है कि सितंबर 2023 में संसद ने इस ऐतिहासिक विधेयक को पारित किया था, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण कानून के नाम से जाना जाता है. इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है.
क्या हैं प्रावधान
हालांकि, इस अधिनियम के लागू होने के बावजूद इसके तत्काल प्रभाव से लागू होने की संभावना नहीं है. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मौजूदा लोकसभा या विधानसभा में महिला आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके लिए जनगणना के बाद परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है. 2023 के कानून में स्पष्ट किया गया था कि यह आरक्षण 2027 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के आधार पर ही लागू होगा, जिसके चलते इसका वास्तविक असर 2034 के बाद ही देखने को मिल सकता है. अब यह सवाल उठ रहा है कि जब कानून को लागू करने की अधिसूचना जारी हो चुकी है, तो फिर संशोधन विधेयकों की आवश्यकता क्यों पड़ी.
विपक्ष ने उठाया सवाल
विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए इसे असामान्य और भ्रम पैदा करने वाला बताया है. विपक्षी नेताओं का कहना है कि एक ओर सरकार कानून को लागू कर रही है, वहीं दूसरी ओर उसी कानून में संशोधन के लिए बहस कर रही है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि अधिसूचना जारी करना एक औपचारिक प्रक्रिया है, जिससे कानून को वैधानिक रूप से प्रभावी बनाया जाता है. लेकिन इसके प्रावधानों को लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं (जैसे जनगणना और परिसीमन) पूरी होना जरूरी है.
माफिया और अपराध को लेकर बयान से बढ़ा सियासी तनाव
16 Apr, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Bengal Election 2026:उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज गुरुवार को पश्चिम बंगाल दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने बाराबनी विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करते हुए टीएमसी को जमकर घेरा. उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि माफिया की हड्डी और पसली को यूपी का बुलडोजर ठीक करता है. आज यूपी में ना कर्फ्यू है ना दंगा है, यूपी में अब सब चंगा है. भाजपा को जिताइए. जिन माफियाओं ने भय का माहौल पैदा किया है. भाजपा उन्हें समाप्त करेगी|
सीएम योगी ने टीएमसी को घेरते हुए कहा, “मैं यहां आप सबसे इस बात की अपील करने आया हूं कि जिन लोगों के कारण पिछले 15 वर्षों से बंगाल के सामने पहचान का संकट है, जिन्होंने बंगाल को टेरर का, माफिया राज का और कटमनी व करप्शन का अड्डा बना दिया हो, वो TMC अब नहीं चाहिए. जिन माफियाओं ने डर का माहौल पैदा किया है. उनको बाहर उखाड़ फेकिए. इन्हीं के कारण माफिया पैदा हुए हैं|”
नहीं चाहिए टीएमसी: CM योगी
इस दौरान सीएम योगी ने यूपी का उदाहरण देते हुए कहा, याद करिए उत्तर प्रदेश में जब राम जन्मभूमि के लिए आंदोलन करना पड़ता था, तब रामभक्तों पर गोलियां चलती थी. अब भाजपा सरकार में दुनिया का सबसे बड़ा राम मंदिर बनकर खड़ा हो गया. कोई रोक पाया क्या? इसकी गारंटी सिर्फ मोदी हैं. भाजपा गारंटी देती है कि सरकार में आने के बाद कोई दंगा नहीं होगा. कर्फ्यू नहीं लगेगा, गौ माता को कटने नहीं देंगे और हिंदुओं को बटने नहीं देंगे|
9 साल पहले यूपी में माफिया पैदा होते थे
उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए सीएम योगी ने कहा, 9 साल पहले उत्तर प्रदेश में भी खूब माफिया पैदा होते थे. प्रदेश ऐसी ही बुरी हालत में था, इसका सिर्फ एक ही समाधान है और वह है ‘डबल-इंजन’ वाली BJP सरकार. टीएमसी ने पिछले 15 सालों में बंगाल को आतंक, माफिया राज और भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है. पीएम मोदी दिल्ली से जनता के लिए पैसा भेजते हैं, तो TMC के गुंडे उस पैसे को हड़प लेते हैं|
संविधान संशोधन पर पीएम का आह्वान: ‘यह अवसर महत्वपूर्ण, इसे न खोएं’
16 Apr, 2026 03:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | संसद के विशेष सत्र के दौरान आज लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'महिला आरक्षण विधेयक' यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम खुशकिस्मत हैं कि हम इस पल के साक्षी बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा यकीन है कि इस मंथन से अमृत निकलेगा और ये मंथन देश की दिशा और दशा तय करेगी। पीएम मोदी ने कहा कि आज देश के लिए महत्वपूर्ण दिन है। यह 20-25 वर्ष पहले हो जाना चाहिए था, समय समय पर इसमें सुधार होते रहते। सदन के सभी साथियों को यह अवसर मिला है।
हम मदर ऑफ डेमोक्रेसी रहे हैं- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने आगे कहा कि राष्ट्र के जीवन में कुछ बड़े पल आते हैं उस समय समाज की मनोस्थिति एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती हैं। मैं समझता हूं संसद के इतिहास में ये वैसे ही पल हैं। जरूरत महसूस हुई तब इसे लागू कर देते और आज तक इसे परिपक्वता तक पहुंचा देते। हम मदर ऑफ डेमोक्रेसी रहे हैं। हमारी हजार वर्ष की विकास यात्रा रही है।
जो विरोध करेंगे उसे कीतम चुकानी पड़ेगी- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने आगे कहा कि राजनीतिक जीवन में जो लोग सफलतापूर्वक आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्हें यह मान कर चलना पड़ेगा कि पिछले 25 से 30 साल में ग्रासरूट लेवल पर लीडर बन चुकी हैं। अब उनके अंदर सिर्फ यहां 33 फीसदी का नहीं, बल्कि वहां भी आपके फैसलों को प्रभावित करने वाली हैं। इसलिए जो आज विरोध करेंगे उन्हें लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी। राजनीतिक समझदारी इसी में है कि हम ग्रासरूट लेवल पर महिलाओं की जो राजनीतिक लीडरशिप खड़ी हुई है, उसे हमें संदर्भ में लेना पड़ेगा।
मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है-पीएम मोदी
हमारे मुलायम सिंह जी और उनके परिवार वाले एक बात चला रहे हैं। आप महिलाओं की समझदारी पर भरोसा करो। उन्हें निर्णय लेने दो कि किस वर्ग को आरक्षण देना है, किस वर्ग को नहीं। उन्हें आने तो दो। मैं अति-पिछड़े समाज से आता हूं। मेरे संविधान ने मुझे यही रास्ता दिखाया है। मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है। यह संविधान की ही ताकत है कि जिसने मुझे यहां तक आने का मौका दिया है। मैं संविधान निर्माताओं का ऋणी हूं।इतना बड़ा सामर्थ्य है, उसे हम हिस्सेदारी से रोकने के लिए क्यों इतनी ताकत खपा रहे हैं। उनके जुड़ने से सामर्थ्य बढ़ने वाला है। इसे राजनीति के तराजू से मत तोलिए। इस मामले को राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है। हमारे सामने यह अवसर एक साथ बैठकर एक दिशा में सोचकर विकसित भारत बनाने में हमारी नागरिक शक्ति को एक खुले मन से स्वीकार करने का अवसर है। आज पूरा देश और नारी शक्ति यह निर्णय तो देखेगी लेकिन इससे ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी। इसलिए हमारी नीयत की खोट देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।
2023 में सभी ने अधिनियम को स्वीकार किया था- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने आगे कहा कि 2023 में इस नए सदन में हमने सर्वसम्मति से इस अधिनियम को स्वीकार किया था। पूरे देश में खुशी का वातावरण बना। उसमें कोई राजनीतिक रंग नहीं लगे। यह अच्छी चीज है। अब सवाल यह है कि हमें कितने समय तक इसे रोकना है। जो लोग यहां आबादी का विषय उठाते हैं, अमित शाह अपने भाषण में इसका जिक्र करेंगे कि हमने जनगणना के लिए क्या-क्या किया? यह बातें हम रखेंगे। लेकिन पिछले दिनों जब हम 2023 में चर्चा कर रहे थे, तब इसे जल्दी लागू करने की बात कर रहे थे। लेकिन कम समय में यह करना मुश्किल था। अब 2029 में यह किया जा सकता है। अब अगर 2029 में यह संभव नहीं होगा, तो हम विश्वास नहीं बना पाएंगे माता-बहनों में कि यह संभव भी है।पीएम मोदी ने आगे कहा कि जब मैं संगठन का एक कार्यकर्ता था, तब चर्चा होती थी कि देखिए ये कैसे लोग हैं, पंचायतों में आरक्षण आराम से दे देते हैं। लेकिन उनमें उनको खुद का पद जाने का डर नहीं लगता है। हम सुरक्षित हैं, इसलिए दे दो। इसलिए पंचायत में 50 प्रतिशत तक पहुंच गए। मैं एक और बात कहता हूं कि जिसने 30 साल पहले जिसने विरोध किया वह राजनीतिक गलियारों से नीचे नहीं गया, लेकिन ग्रास रूट पर आज वहीं बहनें मुखर हैं। लाखों बहनें जो काम कर चुकी हैं वे मुखरित हैं। वे कहती हैं कि हमें निर्णय प्रकि्रया में जोड़ो, जो संसद में होती है।
बंगाल से असम तक सियासी टकराव: ममता को बुलावा, हिमंत का नॉनवेज पर बयान चर्चा में
16 Apr, 2026 03:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता | पश्चिम बंगाल और असम की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। चुनावी रैलियों के दौरान दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने एक दूसरे पर खूब निशाने साधे और कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। पहले बात अगर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की करें तो उन्होंने बंगाल के कूच बिहार में एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी पर एक साथ कई मामलों को लेकर निशाना साधा। सीएम सरमा ने कहा कि ममता बनर्जी मांसहारी भोजन को लेकर लोगों में झूठा डर फैला रही हैं। रैली को संबोधित करते हुए सीएम सरमा ने कहा कि ममता बनर्जी यह कहकर डर फैला रही हैं कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनी तो नॉन-वेज खाने पर रोक लगाई जाएगी। सरमा ने ममता बनर्जी को असम आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि मैं उन्हें एक बार असम आने का न्योता देता हूं, ताकी वो आएं और देखे कि असम में नौन-वेज मिलता है की नहीं।
सीएम सरमा ने ममता बनर्जी पर लगाए गंभीर आरोप
सीएम सरमा ने अपने बयान में आगे इस बात पर जोर दिया कि असम में 10 साल से भाजपा की सरकार है, और वहां के लोग अच्छा नॉन-वेज खाना खाते हैं और इस पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि असली चिंता का कारण नॉन-बेज नहीं बीफ और गौहत्या है, क्योंकी अगर भाजपा बंगाल में सत्ता में आएगी तो गॉहत्या पर पूरी तरह से रोक लगा देगी। इसलिए ममता बनर्जी लोगों को नॉन वेज का डर दिखा कर भड़का रहीं हैं।
यूसीसी पर क्या बोले सीएम सरमा
इसके साथ ही अपने संबोधन में सीएम सरमा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की दिशा में काम चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है तो वहां भी ऐसे कानून लागू किए जाएंगे।
ममता बनर्जी ने भी ममता सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
दूसरी ओर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी मथाभांगा में एक चुनावी रैली के दौरान केंद्र सरकार और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि देश को बांटने की कोशिश की जा रही है और महिला आरक्षण तथा परिसीमन जैसे अहम मुद्दों को जोड़कर समाज में भ्रम फैलाया जा रहा है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इन विधेयकों के बहाने मतदाता सूची से नाम हटाने और एनआरसी लागू करने की साजिश की जा रही है।
कूच बिहार हिंसा पर चुनाव आयोग को घेरा
इसके साथ ही कूच बिहार में हो रही राजनीतिक हिंसा पर सवाल उठाते हुए सीएम ममता ने कहा कि जब भी चुनाव आयोग की निगरानी में मतदान होता है, तभी वहां कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में राजनीतिक हिंसा चिंता का विषय है और इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
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