राजनीति
‘अपराधियों को संरक्षण मिल रहा’, RG Kar पीड़िता की मां ने पूर्व CM पर लगाए गंभीर आरोप
16 May, 2026 11:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता | आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुए जघन्य दुष्कर्म और हत्याकांड मामले में जांच के दौरान बरती गई घोर लापरवाही को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार ने तीन पुलिस अफसरों को निलंबित कर दिया है। सरकार के इस कड़े कदम के बाद मृतका की मां और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक रत्ना देबनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ममता बनर्जी को कथित तौर पर अपराधियों का संरक्षणदाता बताते हुए मांग की है कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री से सही तरीके से पूछताछ की जाए और उन्हें हिरासत में लिया जाए, तो इस पूरी साजिश में शामिल कई रसूखदार चेहरों के नाम बेनकाब हो सकते हैं।
जांच के दायरे से बाहर छूटे कई संदिग्ध
विधायक रत्ना देबनाथ ने मीडियाकर्मियों से चर्चा करते हुए आरोप लगाया कि इस बर्बर कृत्य में कई लोग संलिप्त थे, लेकिन वास्तविक सच को अब तक छुपाकर रखा गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि घटना वाली रात पीड़िता के साथ रात्रिभोज करने वाले अन्य संदिग्धों की गहनता से जांच क्यों नहीं की गई? देबनाथ के अनुसार, अब तक केवल मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रिसिंपल को ही सलाखों के पीछे भेजा गया है, जबकि कई अन्य संदेहास्पद किरदारों की भूमिका पर से पर्दा उठना अभी बाकी है।
हत्या के पीछे बड़ी साजिश और केस को दबाने का प्रयास
पीड़िता की मां ने इस पूरी घटना को एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा करार दिया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के साथ-साथ तत्कालीन कॉलेज प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों को भी इसका उत्तरदायी ठहराया। उन्होंने तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव नारायणस्वरूप निगम का नाम लेते हुए उन पर भी गंभीर आरोप मढ़े। वहीं, मृतका के पिता शेखररंजन देबनाथ ने दावा किया कि इस मामले को शुरुआत से ही रफा-दफा करने की कोशिश की गई थी। उनके मुताबिक, एक आईपीएस अधिकारी ने पहले ही दिन से साक्ष्यों को छिपाने का प्रयास किया और यह सब पूर्व मुख्यमंत्री के इशारे पर किया जा रहा था, जो अब पूरी तरह साफ हो चुका है।
नए नेतृत्व की कार्रवाई का स्वागत और पूर्व पुलिस कमिश्नर पर जांच
पीड़ित परिवार ने हालांकि सूबे की मौजूदा सरकार द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई का स्वागत किया है और नए मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए न्याय की उम्मीद जताई है। इस बीच, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि आरजी कर मामले में कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर विनीत कुमार गोयल सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। हावड़ा में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ अधिकारियों पर पीड़ित परिवार को रुपयों का लालच देकर मामले को दबाने के भी संगीन आरोप हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए दागी अफसरों को सस्पेंड कर जांच को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर कार्रवाई, गंभीर आरोपों के बीच FIR ने बढ़ाई चर्चा
16 May, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता | पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारे में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पुलिस ने एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। अभिषेक बनर्जी पर आरोप है कि उन्होंने हालिया चुनाव प्रचार के दौरान अत्यंत विवादास्पद और भड़काऊ वक्तव्य दिए थे। दर्ज कराई गई शिकायत में उल्लेख किया गया है कि उनके भाषणों का उद्देश्य चुनावी माहौल को बिगाड़ना था, जिससे सामाजिक सद्भाव और शांति व्यवस्था भंग होने का खतरा पैदा हो सकता था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है।
गृह मंत्री को धमकी देने का संगीन आरोप
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि टीएमसी सांसद पर देश के गृह मंत्री को कथित रूप से सीधे तौर पर धमकी देने का बेहद गंभीर आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, सार्वजनिक मंच से दिए गए इस बयान से संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन हुआ है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले को अत्यंत संवेदनशील श्रेणी में रखकर देखा जा रहा है और इस संबंध में सभी कानूनी पहलुओं का बारीकी से मूल्यांकन किया जा रहा है।
वीडियो फुटेज और सबूतों की हो रही है जांच
कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए पुलिस और जांच दल उन जनसभाओं के वीडियो फुटेज और ऑडियो क्लिप्स को खंगाल रहे हैं, जिनमें यह कथित टिप्पणी की गई थी। अधिकारियों के मुताबिक, डिजिटल साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को इस जांच का मुख्य आधार बनाया जा रहा है ताकि घटना की सच्चाई और इरादे को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके। जांच के बाद ही आगे की दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।
राज्य की राजनीति में मंचा घमासान
इस एफआईआर के दर्ज होने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक तरफ जहां विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस पर चुनावी मर्यादाओं को ताक पर रखने और वैमनस्य फैलाने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ टीएमसी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित कार्रवाई करार दिया है। इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है और दोनों ही खेमों में हलचल तेज है।
पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर राजनीतिक संग्राम, भाजपा-कांग्रेस ने एक-दूसरे को घेरा
16 May, 2026 10:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | देश में पेट्रोल और डीजल के दामों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। ईंधन की कीमतों में हो रहे बदलावों को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच तीखी बयानबाजी का दौर जारी है। इसी सिलसिले में भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी हमेशा की तरह एक ऐसे बेखबर नेता की तरह बात कर रहे हैं, जिनके पास न तो सही आंकड़े हैं और न ही वैश्विक ज्ञान।
वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों की तुलना
भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया की दस बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत में ईंधन के दाम बेहद नियंत्रित हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में 44.5%, चीन में 21.7%, जर्मनी में 13.7%, यूके में 19.2% और फ्रांस में 20.9% तक का इजाफा हुआ है। इसके विपरीत, भारत में यह बढ़ोतरी महज 3% रही है, जो दुनिया के औसत से पेट्रोल के मामले में 7 गुना और डीजल के मामले में 8 गुना कम है। उन्होंने राहुल गांधी को सलाह दी कि वे एक जागरूक नागरिक की तरह बात करें और उन्हें गलत आंकड़े देने वाली अपनी रिसर्च टीम को तुरंत पद से हटा दें।
विपक्ष का महंगाई और टैक्स को लेकर सरकार पर हमला
दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया है कि वह ईंधन पर भारी टैक्स वसूल कर आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ा रही है। विपक्ष का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से मालभाड़ा और परिवहन लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजों पर पड़ता है। कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सरकार को घेरते हुए कहा कि चुनाव के समय सस्ते ईंधन का वादा करने वाली भाजपा अब लगातार दाम बढ़ाकर आम आदमी की जेब काट रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर और आर्थिक जानकारों की राय
भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस के इन आरोपों को पूरी तरह राजनीतिक बताया है। सत्तापक्ष का तर्क है कि भारत में ईंधन की दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव से तय होती हैं, फिर भी केंद्र सरकार ने समय-समय पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर जनता को राहत दी है। इस बीच, आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम इसी तरह बढ़ते रहे, तो आने वाले समय में घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल दोनों ही दल इस संवेदनशील मुद्दे पर एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।
तृणमूल में अनुशासन पर ममता का जोर, कहा- जो जाना चाहें वे जा सकते हैं
16 May, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता | पश्चिम बंगाल के चुनावी समर में मिली शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने संगठन को नए सिरे से मजबूत करने का बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा कि जो भी नेता दल का साथ छोड़ना चाहते हैं, वे जाने के लिए पूरी तरह आजाद हैं। शुक्रवार को कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने निजी आवास पर ममता बनर्जी ने पार्टी के चुनावी उम्मीदवारों के साथ एक बेहद अहम समीक्षा बैठक की। इस उच्च स्तरीय बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
संगठन को पुनर्जीवित करने का संकल्प
ममता बनर्जी ने हार से मायूस नेताओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों के बावजूद पार्टी एक बार फिर पूरी ताकत के साथ खड़ी होगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं और पराजित प्रत्याशियों से अपील की कि वे बंद या क्षतिग्रस्त हो चुके पार्टी दफ्तरों की मरम्मत कराएं, उन्हें नया रंग-रोगन देकर दोबारा क्रियाशील बनाएं। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो वह खुद भी कार्यालयों को पेंट करने के लिए तैयार हैं। टीएमसी प्रमुख ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी किसी के आगे घुटने नहीं टेकेगी। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इन चुनावों में जनता के वास्तविक जनादेश के साथ खिलवाड़ किया गया है।
चुनावी नतीजों में टीएमसी को लगा बड़ा झटका
यह समीक्षा बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है जब तृणमूल कांग्रेस सत्ता की गद्दी से बेदखल होकर मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में आ गई है। राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से पार्टी इस बार महज 80 सीटों पर ही सिमट कर रह गई। खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी अपने पारंपरिक राजनीतिक क्षेत्र भवानीपुर से पराजय का स्वाद चखना पड़ा। ज्ञात हो कि टीएमसी ने 291 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, जबकि 3 सीटें सहयोगी दल बीजीपीएम के लिए छोड़ी थीं। इस चुनाव में पार्टी के 211 उम्मीदवारों को शिकस्त का सामना करना पड़ा, जिनमें कई दिग्गज चेहरे और पूर्व मंत्री शामिल हैं।
दलबदल की अटकलों और असंतोष पर दोटूक
नेताओं के भीतर पनप रहे असंतोष और पाला बदलने की चर्चाओं पर ममता बनर्जी ने अपनी रणनीति साफ कर दी। उन्होंने कहा कि वह इस बात से भली-भांति वाकिफ हैं कि कुछ लोग दूसरी पार्टियों का रुख कर सकते हैं, क्योंकि हर किसी की अपनी कुछ मजबूरियां होती हैं। इसलिए वह किसी को भी जबरन पार्टी में बांधकर रखने के पक्ष में नहीं हैं। बैठक के समापन के बाद टीएमसी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने सभी उम्मीदवारों के जुझारूपन की तारीफ की। पार्टी ने कहा कि उनके नेताओं ने हर तरह के दबाव और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद बहादुरी से चुनाव लड़ा। इस बैठक के जरिए ममता बनर्जी ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने और एकजुटता का संदेश देने का पुरजोर प्रयास किया है।
टीएमसी में नई जिम्मेदारी से सियासी टकराव, कल्याण बनर्जी बने निशाने पर
15 May, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: लोकसभा चुनावों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न रहने के बाद अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के भीतर सांगठनिक बदलावों को लेकर आंतरिक घमासान तेज हो गया है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा लोकसभा में मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के पद पर काकोली घोष दस्तीदार को हटाकर कल्याण बनर्जी को नियुक्त किए जाने के फैसले से टीएमसी सांसदों का एक बड़ा धड़ा असंतुष्ट नजर आ रहा है। इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर गंभीर मतभेद उभरकर सामने आए हैं, जिससे आने वाले दिनों में पार्टी में बड़ी टूट और बगावत का खतरा मंडराने लगा है।
कल्याण बनर्जी की नियुक्ति पर महिला सांसदों ने उठाए सवाल
सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व के इस फैसले के खिलाफ सबसे मुखर आवाज टीएमसी की महिला सांसदों की तरफ से उठ रही है। नाराजगी की मुख्य वजह यह है कि कल्याण बनर्जी का ट्रैक रिकॉर्ड महिला सहकर्मियों के साथ व्यवहार को लेकर विवादों में रहा है, और उन पर पहले भी कई बार बदसलूकी के आरोप लग चुके हैं। वर्तमान में लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 28 सांसद हैं, जिनमें से 11 महिला सांसद हैं। महिला सांसदों की यह बड़ी संख्या पार्टी के भीतर एक मजबूत धड़ा बनाती है, और इनमें से कई सांसदों ने इस नियुक्ति पर खुलकर अपनी चिंता और विरोध दर्ज कराने के संकेत दिए हैं।
महुआ मोइत्रा के साथ पुराना विवाद और पद से इस्तीफा
कल्याण बनर्जी का मुख्य सचेतक पद पर यह कोई नया चयन नहीं है, बल्कि उनकी इस पद पर वापसी हुई है। पिछले साल, कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी के बीच सार्वजनिक रूप से हुई तीखी बहस के बाद विवाद काफी बढ़ गया था। यह विवाद तब और गहरा गया जब महुआ मोइत्रा ने वरिष्ठ वकील और पूर्व सांसद पिनाकी मिश्रा के साथ अपनी शादी की चर्चाओं पर कल्याण बनर्जी द्वारा कथित तौर पर की गई कुछ विवादित और निजी टिप्पणियों को लेकर उन पर सीधा हमला बोला था।
'सूअर से कुश्ती नहीं लड़ते'— महुआ मोइत्रा का वो तीखा पलटवार
उस दौरान महुआ मोइत्रा ने कल्याण बनर्जी का नाम लिए बिना सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर बेहद कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा था कि, "आप सूअर से कुश्ती नहीं लड़ते, क्योंकि सूअर को इसमें मजा आता है और आप खुद गंदे हो जाते हैं।" उन्होंने आगे बेहद कड़े शब्दों में कहा था कि भारतीय राजनीति में ऐसे पुरुष मौजूद हैं जो गहरे तौर पर स्त्री-द्वेषी (मिसोजिनिस्ट), यौन रूप से कुंठित और पतित हैं, और दुर्भाग्य से संसद में लगभग सभी राजनीतिक दलों के भीतर ऐसे लोगों का प्रतिनिधित्व बना हुआ है। इस बड़े विवाद और चौतरफा दबाव के बाद कल्याण बनर्जी को लोकसभा में टीएमसी के चीफ व्हिप के पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
कालीघाट बैठक में फैसला, बगावत रोकने की चुनौती
कल्याण बनर्जी को दोबारा इस अहम पद पर बहाल करने की घोषणा ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर आयोजित एक उच्च स्तरीय और अंदरूनी बैठक में की गई। पार्टी नेतृत्व का मानना था कि हालिया राजनीतिक और कानूनी लड़ाइयों में कल्याण बनर्जी ने कोर्ट से लेकर सड़क तक पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा है, इसलिए मुश्किल समय में उनकी आक्रामक राजनीति की आवश्यकता है। हालांकि, पार्टी को एकजुट रखने और हार के बाद मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से बुलाई गई इस बैठक का नतीजा अब आंतरिक असंतोष के रूप में सामने आ रहा है, जिससे निपटना ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
राहुल गांधी सिर्फ बयानबाजी करते हैं, कोई स्पष्ट विचारधारा नहीं: वल्लभ
15 May, 2026 06:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता और जाने-माने अर्थशास्त्री गौरव वल्लभ ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पास न तो कोई स्पष्ट राजनीतिक नैरेटिव (कथानक) है और न ही कोई ठोस वैचारिक आधार। बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की पूरी राजनीति केवल अवसरवाद और तात्कालिक फायदों पर टिकी हुई है, जहां वे अपने राजनीतिक लाभ के अनुसार गठबंधन सहयोगी बदलते रहते हैं।
फिल्मी गानों के जरिए साधा निशाना: दिल्ली में 'हम साथ-साथ हैं', तिरुवनंतपुरम में 'हम आपके हैं कौन'
गौरव वल्लभ ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के दोहरे रवैये पर तंज कसने के लिए बॉलीवुड फिल्मों के प्रसिद्ध गानों का सहारा लिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस और वामपंथी (लेफ्ट) दल 'हम साथ-साथ हैं' की भूमिका में नजर आते हैं, लेकिन जैसे ही वे केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम पहुंचते हैं, वही लोग एक-दूसरे से 'हम आपके हैं कौन?' पूछने लगते हैं। इसी तरह, दिल्ली में कांग्रेस नेता तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं, जबकि कोलकाता पहुंचते ही वे ममता बनर्जी की पार्टी को भ्रष्ट बताने में कोई कसर नहीं छोड़ते।
क्षेत्रीय चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन और सहयोगी दलों से रिश्तों पर उठाए सवाल
बीजेपी नेता ने विभिन्न राज्यों में कांग्रेस की गिरती चुनावी स्थिति और क्षेत्रीय दलों के साथ उसके विवादों का विस्तार से जिक्र किया:
असम और पश्चिम बंगाल: उन्होंने कहा कि कांग्रेस असम में लगातार तीसरी बार चुनाव हारी है और हर चुनाव के साथ उसकी सीटों की संख्या घटती जा रही है। वहीं, पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य में अब कांग्रेस का नामोनिशान तक नहीं बचा है।
तमिलनाडु की राजनीति: गौरव वल्लभ ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु में कांग्रेस दूसरों के कंधों का सहारा लेकर आगे बढ़ी, लेकिन अब वह अपने ही सहयोगियों को धोखा देने पर उतारू है। उन्होंने तंज कसा कि महज पांच दिन पहले तक डीएमके (DMK) के नेता राहुल गांधी के बड़े भाई जैसे थे, लेकिन अब वे एमके स्टालिन को पहचानने से भी इनकार कर रहे हैं।
केरल और कर्नाटक की गुटबाजी का हवाला: विकास ठप होने का लगाया आरोप
केरल की राजनीति और वीडी सतीशन को लेकर चल रही चर्चाओं पर बात करते हुए गौरव वल्लभ ने दावा किया कि गांधी परिवार के बाद इस समय कांग्रेस पार्टी के असल नियंता केसी वेणुगोपाल हैं। उन्होंने केरल कांग्रेस के भीतर मचे आंतरिक घमासान को उजागर करते हुए कहा कि वहां पार्टी वर्तमान में तीन से चार अलग-अलग गुटों में बंट चुकी है। इनमें एक गुट सतीशन का है, दूसरा रमेश चेन्निथला का, तीसरा वेणुगोपाल का और एक गुट केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मौजूदा अध्यक्ष का है।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कांग्रेस की इस आंतरिक गुटबाजी का खामियाजा केरल की जनता को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने पड़ोसी राज्य कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी अंदरूनी कलह के कारण विकास पूरी तरह ठप हो चुका है, क्योंकि कर्नाटक सरकार का पूरा ध्यान इस समय केवल अपनी कुर्सी बचाने और यह सुनिश्चित करने पर लगा है कि सरकार गिर न जाए।
कांग्रेस की रणनीति में बदलाव, एंटनी की सलाह पर राहुल गांधी का नया कदम
15 May, 2026 01:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम: केरल में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर पिछले दस दिनों से जारी कड़ा सस्पेंस आखिरकार गुरुवार को समाप्त हो गया है। कांग्रेस आलाकमान ने काफी माथापच्ची के बाद वरिष्ठ नेता वीडी सतीशन के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है, जबकि इस रेस में आगे चल रहे केसी वेणुगोपाल मुख्यमंत्री की दौड़ से बाहर हो गए हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, इस पूरे फैसले में कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेता एके एंटनी की भूमिका अत्यंत निर्णायक रही, जिन्होंने राहुल गांधी को जमीनी हकीकत समझाते हुए अपना रुख बदलने के लिए प्रेरित किया।
राहुल गांधी की पसंद पर भारी पड़ा जमीनी समर्थन
रणनीतिक चर्चाओं के शुरुआती दौर में लोकसभा सांसद और पार्टी के बड़े राष्ट्रीय चेहरे केसी वेणुगोपाल को आलाकमान का मजबूत समर्थन हासिल था, और अधिकांश नवनिर्वाचित विधायक भी उनके पक्ष में लामबंद थे। इसके विपरीत, केरल कांग्रेस के स्थानीय संगठन, गठबंधन के सहयोगी दलों और जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के बीच वीडी सतीशन के नाम को लेकर जबरदस्त उत्साह था। सतीशन को जनता के बीच गहरी पैठ रखने वाले और विपक्ष के सबसे मुखर चेहरे के रूप में देखा जाता है। जब मुख्यमंत्री पद को लेकर राज्य और दिल्ली के बीच गुटबाजी और खींचतान बढ़ने लगी, तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने संकटमोचक माने जाने वाले एके एंटनी की शरण ली।
एके एंटनी की सलाह पर आलाकमान ने बदला फैसला
सोनिया गांधी के सबसे भरोसेमंद सलाहकारों में शुमार एके एंटनी ने साफ शब्दों में आलाकमान को संदेश दिया कि केरल की जनता और जमीनी संगठन वीडी सतीशन के नेतृत्व को स्वीकार करना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि एंटनी की इस दो टूक राय के बाद सोनिया और राहुल गांधी के बीच मैराथन बैठक हुई, जिसमें वेणुगोपाल को पीछे हटने के लिए राजी किया गया। आखिरकार, व्यापक जनभावनाओं का सम्मान करते हुए राहुल गांधी भी सतीशन को कमान सौंपने पर सहमत हो गए। एके एंटनी का कांग्रेस में यह प्रभाव कोई नया नहीं है; वे पूर्ववर्ती यूपीए सरकार में देश के रक्षा मंत्री जैसे अहम पद संभाल चुके हैं और केरल के तीन बार मुख्यमंत्री रहने का उनके पास एक लंबा राजनीतिक अनुभव है।
एंटनी की ऐतिहासिक रिपोर्ट और कांग्रेस की बदली रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल से लेकर दिल्ली तक आज भी एंटनी की राय को बेहद गंभीरता से लिया जाता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण साल 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस की करारी शिकस्त के बाद गठित हुई "एके एंटनी कमेटी" है, जिसने हार के कारणों की एक विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट तैयार की थी। उस ऐतिहासिक रिपोर्ट में एंटनी ने साफ लिखा था कि कांग्रेस पर लगातार लग रहे अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के आरोपों के कारण बहुसंख्यक हिंदू मतदाता पार्टी से दूर हो गए हैं। माना जाता है कि इसी महत्वपूर्ण रिपोर्ट की सिफारिशों के बाद कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक लाइन बदलते हुए 'सॉफ्ट हिंदुत्व' के रास्ते पर चलना शुरू किया था।
BJP बनाम पूर्व प्रवक्ता, तमिलनाडु में कानूनी लड़ाई ने पकड़ा तूल
15 May, 2026 12:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त मिलने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राज्य इकाई में अंदरूनी कलह और सियासी घमासान चरम पर पहुंच गया है। पार्टी ने अपने ही पूर्व प्रदेश प्रवक्ता एएनएस प्रसाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें 1 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस थमा दिया है। बीजेपी का आरोप है कि प्रसाद ने पार्टी के राज्य नेतृत्व पर भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर, मनगढ़ंत और बेबुनियाद आरोप लगाकर संगठन की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है। यह कानूनी नोटिस बीजेपी लीगल सेल के अध्यक्ष ए. कुमारगुरु की ओर से जारी किया गया है।
अखबारों और सार्वजनिक मंचों पर लगाए गंभीर आरोप
पार्टी द्वारा भेजे गए इस कानूनी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि एएनएस प्रसाद ने बीते 9 मई को एक नामी दैनिक समाचार पत्र सहित कई सार्वजनिक मंचों पर बीजेपी के शीर्ष प्रादेशिक नेताओं के खिलाफ अशोभनीय और गंभीर टिप्पणियां की थीं। बीजेपी का मानना है कि ये तमाम बयान विशुद्ध रूप से राजनैतिक द्वेष और निजी एजेंडे के तहत दिए गए थे। नोटिस में कहा गया कि राज्य के संवेदनशील राजनैतिक माहौल के बीच इस तरह की बयानबाजी का एकमात्र मकसद आम जनता और कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम तथा अविश्वास की स्थिति पैदा करना था।
बिना शर्त माफी और 1 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग
बीजेपी ने अपने पूर्व प्रवक्ता को चेतावनी देते हुए मांग की है कि वे पार्टी नेतृत्व पर इस तरह के झूठे कीचड़ उछालना तुरंत बंद करें। नोटिस के माध्यम से प्रसाद को निर्देश दिया गया है कि वे आगामी 7 दिनों के भीतर उन्हीं मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अखबारों में पार्टी से बिना शर्त लिखित माफी मांगें, जहां उन्होंने ये बयान दिए थे। इसके साथ ही, संगठन की प्रतिष्ठा और साख को पहुंचाए गए भारी नुकसान के एवज में उनसे 1 करोड़ रुपये बतौर हर्जाना देने को भी कहा गया है।
टिकटों की खरीद-फरोख्त और पार्टी फंड में हेराफेरी का दावा
दरअसल, यह पूरा विवाद एएनएस प्रसाद के उन सनसनीखेज दावों के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने हालिया विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं होने की बात कही थी। प्रसाद ने सीधे तौर पर आरोप लगाया था कि चुनाव में उम्मीदवारों को टिकट बांटने के बदले मोटी रकम वसूली गई है। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि चुनाव के लिए आए केंद्रीय पार्टी फंड का इस्तेमाल शराब, ऐशो-आराम के खाने और कुछ नेताओं के निजी फायदों के लिए किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैलियों के लिए आवंटित धनराशि के दुरुपयोग और पार्टी के कुछ बड़े नेताओं के विरोधी दलों के साथ गुप्त राजनैतिक संबंध होने जैसे कई संगीन आरोप जड़ दिए थे।
बीजेपी ने आरोपों को नकारा, पहले ही छीन चुकी है पद
बीजेपी आलाकमान ने पूर्व प्रवक्ता के इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह काल्पनिक और मनगढ़ंत करार दिया है। पार्टी का कहना है कि प्रसाद अपने द्वारा लगाए गए किसी भी आरोप के समर्थन में कोई पुख्ता दस्तावेज या कानूनी रूप से मान्य सबूत पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। गौरतलब है कि एएनएस प्रसाद को पार्टी विरोधी बयानों के चलते पहले ही प्रवक्ता पद से कार्यमुक्त किया जा चुका है। उन्होंने बीजेपी के आधिकारिक रुख के खिलाफ जाते हुए अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी नई पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) से एनडीए (NDA) गठबंधन में शामिल होने की सार्वजनिक अपील की थी, जिसे अनुशासनहीनता मानते हुए पार्टी उन पर यह कार्रवाई पहले ही कर चुकी थी।
TMC से सस्पेंड होने के बाद रिजु दत्ता का तीखा बयान, राजनीति गरमाई
15 May, 2026 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित किए गए नेता रिजु दत्ता ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की नई शुभेंदु अधिकारी सरकार को लेकर एक बेहद संतुलित और चौंकाने वाला बयान दिया है। कोलकाता में बनी भारतीय जनता पार्टी की पहली सरकार पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने साफ किया कि वे फिलहाल 'इंतजार करो और देखो' की नीति अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई सरकार को अपनी नीतियां लागू करने और परिणाम देने के लिए समय दिया जाना चाहिए।
शुभेंदु अधिकारी कोई हैरी पॉटर नहीं हैं
एएनआई (ANI) से विशेष बातचीत के दौरान रिजु दत्ता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में नवगठित बीजेपी सरकार का यह शुरुआती दौर एक 'हनीमून फेज' की तरह है। उन्होंने राजनीतिक माहौल के गर्माए होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि आलोचकों या जनता को अभी से किसी जल्दबाजी में किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए। विपक्ष के नेता से सूबे के मुख्यमंत्री और रणनीतिकार बने शुभेंदु अधिकारी का जिक्र करते हुए दत्ता ने कहा कि शुभेंदु अधिकारी कोई हैरी पॉटर नहीं हैं, जो कोई जादुई छड़ी घुमाएंगे और बंगाल की दशकों पुरानी सारी समस्याएं एक झटके में गायब कर देंगे। सरकार को अपनी कार्यप्रणाली दिखाने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना जरूरी है।
नई कैबिनेट के शुरुआती फैसलों की सराहना
दत्ता ने वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर नई सरकार के शुरुआती प्रशासनिक कदमों की खुले दिल से तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि पहली कैबिनेट बैठक में सरकार द्वारा लिए गए कई फैसले नीतिगत रूप से बेहद शानदार हैं और प्रशासन फिलहाल सही दिशा में कदम बढ़ाता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि, उन्होंने सचेत करते हुए यह भी जोड़ा कि केवल अच्छी शुरुआत ही काफी नहीं है, बल्कि सरकार को आने वाले समय में भी इसी रफ्तार और सकारात्मकता के साथ लगातार काम जारी रखना होगा।
वोटर लिस्ट में नाम कटने को हार का एकमात्र कारण मानना गलत
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अपनी ही पुरानी पार्टी के रुख से अलग राय रखते हुए रिजु दत्ता ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के लिए केवल एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को दोष देना पूरी तरह से गलत होगा और ऐसा करना राज्य की जनता के जनादेश का सीधा अपमान करने जैसा है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए थे, जिनमें से 26 से 27 लाख मामलों की सुनवाई अब भी ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित है। इन सबके बावजूद टीएमसी को कुल 41 प्रतिशत वोट मिले और भाजपा के साथ उसका अंतर लगभग 32 लाख वोटों का रहा।
रिकॉर्ड मतदान और जनता के फैसले का सम्मान जरूरी
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि इस सच को कोई नकार नहीं सकता कि इस बार बंगाल में इतिहास का सबसे रिकॉर्डतोड़ यानी 93 प्रतिशत मतदान हुआ है, जो देश की आजादी के बाद से राज्य में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। ऐसे माहौल में यदि टीएमसी के नेता यह दलील देते फिरें कि वे हारे नहीं हैं बल्कि उन्हें प्रशासनिक एसआईआर प्रक्रिया ने हराया है, तो यह बंगाल की जागरूक जनता के लोकतांत्रिक फैसले को खारिज करने जैसा होगा। उन्होंने नसीहत दी कि पार्टी को अपनी कमियों को पहचानते हुए इस चुनावी शिकस्त को बेहद विनम्रता के साथ स्वीकार करना चाहिए।
टीएमसी की अंदरूनी राजनीति और कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार
रिजु दत्ता ने टीएमसी के आंतरिक संगठन और कार्यप्रणाली पर भी बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए। उन्होंने खुद को उन जमीनी नेताओं की फेहरिस्त में शामिल बताया जिन्हें पार्टी ने तरक्की करने पर खुद बाहर का रास्ता दिखा दिया। उन्होंने हालिया समय में पार्टी से अलग हुए तपस रॉय और निसिथ प्रामाणिक जैसे कद्दावर नेताओं का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि ये लोग खुद अपनी मर्जी से पार्टी छोड़कर नहीं गए थे, बल्कि इन्हें पार्टी के भीतर मौजूद एक गुट द्वारा धक्का देकर जानबूझकर बाहर का रास्ता दिखाया गया था।
सोशल मीडिया के भरोसे चुनावी जंग जीतने की सोच पर सवाल
उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर जमीनी हकीकत से दूर होने का आरोप लगाते हुए कहा कि संगठन अपने सबसे वफादार कार्यकर्ताओं को मुश्किल और हिंसक समय में अक्सर अकेला छोड़ देता है। दत्ता ने शीर्ष नेतृत्व को आईना दिखाते हुए कहा कि कोई भी बड़ी चुनावी लड़ाई केवल फेसबुक, ट्विटर या सोशल मीडिया के हैंडल्स पर नैरेटिव सेट करके नहीं जीती जा सकती। चुनावी मैदान में फतह हासिल करने के लिए जमीन पर एक मजबूत संगठन का होना और विपरीत परिस्थितियों में अपने अंतिम कार्यकर्ता के साथ खड़े रहना सबसे अनिवार्य शर्त होती है।
अनुशासनहीनता के आरोप में छह साल के लिए निलंबन
गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस ने हाल ही में पार्टी विरोधी गतिविधियों, अनुशासन तोड़ने और अनुशासन समिति द्वारा भेजे गए समन का उचित जवाब न देने के आरोप में रिजु दत्ता को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया था। पार्टी की केंद्रीय इकाई द्वारा जारी निलंबन आदेश में कहा गया था कि दत्ता पिछले काफी समय से लगातार सार्वजनिक मंचों और मीडिया में पार्टी की नीतियों और शीर्ष नेतृत्व के फैसलों के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे, जिसके बाद यह दंडात्मक कार्रवाई की गई।
‘PM ने अडाणी के लिए डील की’, राहुल गांधी के बयान से सियासी हलचल तेज
15 May, 2026 11:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अमरीका में प्रख्यात भारतीय उद्योगपति गौतम अडाणी से जुड़े कथित रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामले में आए एक बड़े मोड़ के बाद देश की सियासत एक बार फिर पूरी तरह गरमा गई है। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक खोजी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि अमरीकी न्याय विभाग अडाणी समूह के खिलाफ दर्ज आपराधिक आरोपों को वापस लेने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष का आरोप है कि भारत और अमरीका के बीच हाल ही में हुए व्यापारिक व कूटनीतिक समझौतों का वास्तविक मकसद राष्ट्रीय हित नहीं, बल्कि अडाणी समूह को अमरीकी कानूनी फंदे से राहत दिलाना था।
राहुल गांधी का तीखा हमला और 'सौदेबाजी' के आरोप
इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे घेरा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा तंज कसते हुए लिखा कि देश के 'कॉम्प्रोमाइज्ड' प्रधानमंत्री ने अमरीका के साथ कोई व्यापारिक समझौता नहीं किया है, बल्कि अडाणी की रिहाई का सीधा सौदा किया है। राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस पार्टी पहले भी कई मौकों पर सरकार पर गौतम अडाणी को अनुचित राजनैतिक संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाती रही है। विपक्ष का तर्क है कि अमरीकी जांच एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोप बेहद संगीन थे, और अब यदि इस मामले को अचानक ठंडा या कमजोर किया जा रहा है, तो इसके पीछे निश्चित रूप से भारी राजनैतिक व आर्थिक दबाव काम कर रहा है।
अमरीकी राष्ट्रपति के करीबी वकील और 10 अरब डॉलर का दांव
'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कानूनी संकट से उबरने के लिए गौतम अडाणी ने अमरीका में एक बेहद रसूखदार और नई कानूनी टीम को मैदान में उतारा है। इस टीम की कमान रॉबर्ट जे. गिफ्रा जूनियर के हाथों में है, जिन्हें अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का निजी वकील भी माना जाता है। इस कद्दावर कानूनी टीम ने अमरीकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कर यह दलील दी है कि अभियोजन पक्ष के पास अडाणी के खिलाफ न तो पर्याप्त सबूत हैं और न ही यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अडाणी समूह ने अमरीका में करीब 10 अरब डॉलर के भारी-भरकम निवेश और हजारों नई नौकरियां पैदा करने का संकेत दिया है। हालांकि, अमरीकी अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि इस निवेश प्रस्ताव का कानूनी केस की निष्पक्षता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
जयराम रमेश के सवाल और सिविल मुकदमे में भारी-भरकम समझौता
इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने भी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए भारत-अमरीका व्यापार समझौते को पूरी तरह एकतरफा और देश के हितों के खिलाफ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अमरीकी प्रशासन के सामने घुटने टेक दिए हैं और 'ऑपरेशन सिंदूर' को अचानक रोकना व अडाणी मामले में दिख रही नरमी इसी साठगांठ का हिस्सा है। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय मीडिया से यह भी खबरें आ रही हैं कि अमरीकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने गौतम अडाणी और सागर अडाणी के साथ चल रहे एक सिविल मुकदमे में आपसी समझौता कर लिया है। इसके तहत गौतम अडाणी 6 मिलियन डॉलर और सागर अडाणी 12 मिलियन डॉलर का नागरिक जुर्माना भरने को तैयार हो गए हैं, हालांकि इस कानूनी समझौते के तहत उन्होंने अपनी तरफ से किसी भी प्रकार के दोष या अपराध को स्वीकार नहीं किया है।
तमिलनाडु से उठी परीक्षा छूट की मांग, एमके स्टालिन ने PM मोदी को भेजा पत्र
15 May, 2026 11:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके (DMK) प्रमुख एमके स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा से छूट देने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार हो रहे पेपर लीक, गंभीर अनियमितताओं और छात्रों के बीच पैदा हुए अविश्वास को देखते हुए अब राज्यों को कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर ही मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में दाखिला देने की अनुमति मिलनी चाहिए।
नीट व्यवस्था की विफलताओं पर उठाए सवाल
एमके स्टालिन ने ध्यान दिलाया कि 3 मई को आयोजित हुई नीट-यूजी परीक्षा को पेपर लीक के कारण रद्द करना पड़ा, जिसने देश के लाखों होनहार छात्रों के भविष्य को अधर में लटका दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच चल रही है और अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह परीक्षा प्रणाली लगातार नाकाम साबित हो रही है, जिसका सबसे बड़ा नुकसान ग्रामीण पृष्ठभूमि और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों को उठाना पड़ रहा है, क्योंकि वे महंगे कोचिंग सेंटरों का खर्च उठाने में असमर्थ हैं।
पुराने 'प्री-नीट मॉडल' को दोबारा लागू करने की वकालत
प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में स्टालिन ने तमिलनाडु के पुराने 'प्री-नीट' दाखिला मॉडल को फिर से बहाल करने की वकालत की। उन्होंने तर्क दिया कि पहले राज्य में मेडिकल कॉलेजों की सीटें 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर ही भरी जाती थीं, जिससे सरकारी स्कूलों, ग्रामीण क्षेत्रों और वंचित समुदायों के बच्चों को डॉक्टरों के रूप में आगे आने का समान अवसर मिलता था। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसी पुरानी व्यवस्था के कारण तमिलनाडु में एक बेहद मजबूत और समावेशी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण हो सका था।
अध्यादेश लाने और लंबित विधेयक को मंजूरी देने की मांग
इस संकट से छात्रों को तुरंत राहत दिलाने के लिए डीएमके प्रमुख ने केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत एक विशेष अध्यादेश लाने का अनुरोध किया है, ताकि आगामी 2026-27 के सत्र के लिए नीट की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा द्वारा दो बार सर्वसम्मति से पारित किए जा चुके 'तमिलनाडु अंडरग्रेजुएट मेडिकल डिग्री कोर्सेज बिल 2021' का भी हवाला दिया, जो राज्य के छात्रों को राहत देने के उद्देश्य से बनाया गया था लेकिन वर्तमान में राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए लंबित है।
परीक्षा प्रणाली में आपराधिक नेटवर्क की घुसपैठ का आरोप
स्टालिन ने अपने पत्र में केवल इस वर्ष की घटना ही नहीं, बल्कि पिछले एक दशक में आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की कई बड़ी चूकों का भी ब्यौरा दिया। उन्होंने साल 2015 के एआईपीएमटी (AIPMT) पेपर लीक, 2016 के अंतरराज्यीय लीक, 2017 में अनुवाद संबंधी त्रुटियों और 2020 से 2022 के बीच सक्रिय रहे सॉल्वर गैंग तथा फर्जी उम्मीदवारों के रैकेट का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कोचिंग सेंटरों की सांठगांठ से बायोमेट्रिक सिस्टम तक से छेड़छाड़ की जा चुकी है, जो दर्शाता है कि इस परीक्षा प्रणाली में संगठित आपराधिक नेटवर्क की गहरी घुसपैठ हो चुकी है।
डॉ. मोहन यादव की अमित शाह से अहम मुलाकात, कई बड़े राजनीतिक मुद्दों पर मंथन
15 May, 2026 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दिल्ली दौरा राज्य के विकास और सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। मुख्यमंत्री ने 14 मई, 2026 को देश की राजधानी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई कैबिनेट मंत्रियों से मुलाकात की। इन मुलाकातों का मुख्य एजेंडा प्रदेश की सुरक्षा, आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारी और राज्य में 'समान नागरिक संहिता' (UCC) को लागू करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों पर केंद्रित रहा।
यूसीसी की प्रक्रिया तेज और गृह मंत्री से नक्सल उन्मूलन पर चर्चा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए एक विशेष समिति का गठन किया जा चुका है, जिसने अपनी प्रारंभिक बैठकें भी कर ली हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सभी वर्गों और समाजों से संवाद कर उनके सुझाव लेगी ताकि संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर सामाजिक समरसता सुनिश्चित की जा सके। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री अमित शाह को बालाघाट और डिंडोरी जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में सुरक्षा बलों की सफलताओं की जानकारी दी और उन्हें 'बैगा महोत्सव' के अवसर पर बालाघाट आने का निमंत्रण भी दिया।
उज्जैन सिंहस्थ और एयर कनेक्टिविटी पर विशेष फोकस
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से उज्जैन एयरपोर्ट परियोजना पर विस्तार से चर्चा की। महाकाल लोक की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए उन्होंने उज्जैन के लिए बेहतर हवाई सेवाओं की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के साथ हुई बैठक में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर भविष्य का रोडमैप साझा किया गया। इसमें इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग अथॉरिटी और भोपाल मेट्रो जैसे शहरी बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष चर्चा हुई, ताकि कुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें।
कृषि विस्तार और नदी जोड़ो परियोजनाओं पर मंथन
विकास के आर्थिक मोर्चे पर मुख्यमंत्री ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटील से मुलाकात कर प्रदेश के किसानों के हित में कई मांगें रखीं। उन्होंने मध्य प्रदेश में इस वर्ष हुए रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन का हवाला देते हुए 75 लाख मीट्रिक टन से अधिक की खरीदी की जानकारी दी और केंद्र से लक्ष्य बढ़ाने का अनुरोध किया। इस दौरान बेतवा-पार्वती-कालीसिंध लिंक परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही, मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मध्य प्रदेश सौर ऊर्जा और 'पीएम कुसुम योजना' के माध्यम से किसानों को देश में सबसे सस्ती बिजली उपलब्ध कराने वाले राज्यों में अग्रणी बना हुआ है।
मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों के संकेत
इस उच्च स्तरीय दिल्ली दौरे का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू प्रदेश की राजनीति से जुड़ा रहा। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री के साथ हुई बैठक में मध्य प्रदेश में आगामी मंत्रिमंडल विस्तार और खाली पड़ी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भी गंभीर मंथन किया गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री जल्द ही अपनी टीम में नए चेहरों को जगह दे सकते हैं और विभिन्न निगम-मंडलों में नियुक्तियों का सिलसिला शुरू हो सकता है। यह दौरा न केवल प्रशासनिक विकास बल्कि राजनीतिक संतुलन के लिहाज से भी दूरगामी परिणाम वाला माना जा रहा है।
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी पर कांग्रेस आक्रामक, मोदी सरकार पर साधा निशाना
15 May, 2026 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में हुई हालिया बढ़ोतरी के बाद देश में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने ईंधन के बढ़ते दामों को चुनावी राजनीति से जोड़ते हुए आरोप लगाया है कि पाँच राज्यों (चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश) में विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही सरकार ने जनता की जेब पर बोझ डालना शुरू कर दिया है।
'महंगाई मैन' के संबोधन से तीखा प्रहार
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक बेहद कड़ा संदेश साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को 'महंगाई मैन' करार दिया है। पार्टी ने अपने पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री ने एक बार फिर आम जनता पर 'महंगाई का हंटर' चलाया है। कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कीमतों को स्थिर रखा गया था, लेकिन मतदान खत्म होते ही सरकार ने अपनी 'वसूली' शुरू कर दी है, जिसका सीधा असर देश के मध्यम और गरीब वर्ग के नागरिकों पर पड़ रहा है।
कीमतों में वृद्धि को बताया जनता पर प्रहार
पार्टी ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक की गई तीन रुपये की बढ़ोत्तरी और सीएनजी में दो रुपये का इजाफा जनता के साथ विश्वासघात है। कांग्रेस के अनुसार, तेल और गैस की कीमतों में यह वृद्धि केवल एक आर्थिक फैसला नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार की उन नीतियों का परिणाम है जो आम आदमी के हितों के बजाय राजस्व वसूली को प्राथमिकता देती हैं। विपक्ष ने इसे सरकार की सोची-समझी रणनीति बताते हुए इसे 'जनता पर करारा प्रहार' करार दिया है।
चुनावी नतीजों और तेल के खेल पर सवाल
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक बयानों में इस बात पर जोर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों की स्थिति के बावजूद भारत में कीमतों का बढ़ना चिंताजनक है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जैसे ही राजनीतिक उद्देश्य (चुनाव) पूरे हो जाते हैं, सरकार आम आदमी को महंगाई के बोझ तले दबा देती है। इस कूटनीतिक और राजनीतिक हमले के जरिए कांग्रेस ने सरकार को घेरने की कोशिश की है, जिससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने पर बोले अखिलेश- अब साइकिल ही सहारा
15 May, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/लखनऊ: देश के आम नागरिकों के लिए 15 मई की सुबह महंगाई की एक नई लहर लेकर आई है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक हुए इजाफे के बाद अब सीएनजी के दामों ने भी रफ्तार पकड़ ली है, जिससे मध्यम वर्ग और वाहन चालकों के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है। ईंधन के इन बढ़ते दामों ने न केवल परिवहन बल्कि रोजमर्रा की अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ा दिया है।
राजधानी लखनऊ में तेल और गैस की कीमतों में उछाल
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ा बदलाव देखा गया है। शहर में पेट्रोल की कीमतों में 2.84 रुपये और डीजल में 3.01 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इस बदलाव के बाद अब लखनऊ वासियों को एक लीटर पेट्रोल के लिए 97.55 रुपये और डीजल के लिए 90.82 रुपये चुकाने होंगे। केवल तेल ही नहीं, बल्कि सीएनजी की कीमतों में भी यहाँ दो रुपये की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। हालाँकि, ग्रीन गैस लिमिटेड के अधिकारियों का स्पष्टीकरण है कि वर्तमान में लागू 98 रुपये प्रति किलो की दर रिवीजन के बाद से ही प्रभावी है और फिलहाल अयोध्या, सुल्तानपुर तथा आगरा जैसे शहरों में पुराने दाम ही लागू रहेंगे।
दिल्ली में भी थमी रफ्तार, सीएनजी हुई महंगी
देश की राजधानी दिल्ली में भी सीएनजी की कीमतों में दो रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है। इस संशोधन के बाद दिल्ली में अब सीएनजी की नई दर 79.09 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के इस फैसले का सीधा असर दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, विशेषकर ऑटो और टैक्सियों पर पड़ेगा। कीमतों में यह वृद्धि तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है, जिससे सुबह-सुबह गैस भरवाने पहुंचे चालकों को बड़ा झटका लगा है।
सियासी गलियारों में हलचल, विपक्ष का तंज
महंगाई के इस ताज़ा झटके पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए बढ़ती कीमतों पर तंज कसा है। उन्होंने बढ़ते दाम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि जनता को महंगाई से बचना है और आगे बढ़ना है, तो अब 'साइकिल' ही एकमात्र विकल्प रह गया है। ईंधन की कीमतों में हुई इस चौतरफा वृद्धि ने एक बार फिर देश में महंगाई के मुद्दे पर बहस छेड़ दी है।
चार मंत्रियों को अहम विभाग देकर असम सरकार ने किया बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
14 May, 2026 05:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिसपुर: असम में नई सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक कामकाज ने रफ्तार पकड़ ली है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने अपने मंत्रिमंडल के चार प्रमुख मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया है। राजभवन से मंजूरी मिलने के बाद इसकी आधिकारिक सूची भी जारी कर दी गई है। फिलहाल मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण विभाग अपने पास ही रखे हैं, जिन्हें भविष्य में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान नए मंत्रियों को सौंपा जा सकता है।
चार मंत्रियों को मिली नई जिम्मेदारियां
मुख्यमंत्री के साथ शपथ लेने वाले चार अनुभवी नेताओं को उनके क्षेत्रीय और सामाजिक प्रभाव के आधार पर विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली को श्रम कल्याण, चाय जनजाति, आदिवासी कल्याण और ट्रांसफॉर्मेशन एवं डेवलपमेंट जैसे महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए हैं। वहीं, पिछली सरकार में वित्त मंत्रालय संभालने वाली अजंता नेओग को इस बार महिला एवं बाल विकास और पर्यटन विभाग की कमान दी गई है।
गठबंधन सहयोगियों का बढ़ा कद
सरकार में शामिल सहयोगी दलों के नेताओं को भी अहम पोर्टफोलियो दिए गए हैं। असम गण परिषद (AGP) के अध्यक्ष अतुल बोरा को पंचायत एवं ग्रामीण विकास, असम समझौता क्रियान्वयन, सीमा संरक्षण और आबकारी विभाग की जिम्मेदारी मिली है। वहीं, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) के नेता चरण बोरो ने अपना पुराना दबदबा कायम रखा है; उन्हें पिछली बार की तरह ही परिवहन और बोडोलैंड कल्याण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन नियुक्तियों में असम के अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व का खास ख्याल रखा गया है।
जल्द होगा मंत्रिमंडल का विस्तार
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में जो विभाग किसी मंत्री को नहीं दिए गए हैं, वे फिलहाल उनके पास ही रहेंगे। उन्होंने संकेत दिया है कि 26 मई को विधानसभा का पहला सत्र समाप्त होने के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा, जिसमें कई नए चेहरों को जगह मिल सकती है। गौरतलब है कि असम विधानसभा चुनाव में भाजपा नीत एनडीए ने 126 में से 102 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है, जिसके बाद सरमा ने 12 मई 2026 को लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
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