राजनीति
मेकेदातु बांध विवाद गरमाया, CM विजय ने अधिकारियों के साथ की अहम बैठक
25 May, 2026 03:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच चल रहा पुराना विवाद एक बार फिर गरमा गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर एक हाई-लेवल (उच्चस्तरीय) बैठक की। इस बैठक में उन्होंने अधिकारियों को कर्नाटक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं।
तमिलनाडु सरकार ने अचानक क्यों बुलाई बैठक?
यह आपातकालीन बैठक तब बुलाई गई, जब खबर आई कि कर्नाटक सरकार मेकेदातु परियोजना के लिए भूमि पूजन करने की तैयारी कर रही है। तमिलनाडु सरकार शुरू से ही इस प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध कर रही है। उसका मानना है कि अगर यह बांध बना, तो तमिलनाडु के किसानों और वहां की सिंचाई व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचेगा।
क्या है मेकेदातु परियोजना और कर्नाटक का दावा?
कर्नाटक सरकार कावेरी नदी पर 'मेकेदातु' नाम की जगह पर एक बड़ा जलाशय (बैलेंसिंग रिजर्वायर) और बांध बनाना चाहती है।
कर्नाटक का तर्क: राज्य सरकार का कहना है कि इस बांध को बनाने से बेंगलुरु और उसके आसपास के इलाकों में पीने के पानी की कमी दूर होगी। साथ ही, इससे बिजली बनाने में भी मदद मिलेगी।
तमिलनाडु का विरोध: निचले इलाके में बसे तमिलनाडु का कहना है कि इस बांध के बनने से उसे मिलने वाले कावेरी नदी के पानी में कमी आ जाएगी, जिससे लाखों किसानों की खेती बर्बाद हो सकती है।
कोर्ट के फैसलों पर हुई चर्चा
बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामलों की जानकारी दी।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में तमिलनाडु की उस पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि इस मामले में तकनीकी और कानूनी फैसले लेने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के एक्सपर्ट्स के पास है।
इस फैसले को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अधिकारियों से कहा कि वे राज्य के अधिकारों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए नए कानूनी रास्ते तलाशें और कोर्ट की कार्यवाही में तेजी लाएं।
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री के साथ तमिलनाडु सरकार के कई बड़े मंत्री और सीनियर अधिकारी शामिल हुए। बैठक में आगे की रणनीति और कानूनी कदमों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई ताकि कर्नाटक के इस कदम को रोका जा सके।
कर्नाटक की राजनीति में हलचल! मुख्यमंत्री बदलने के सवाल पर सिद्धारमैया का जवाब
25 May, 2026 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु : कर्नाटक की राजनीति में इस समय मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर काफी हलचल मची हुई है। इसी खींचतान के बीच कांग्रेस आलाकमान ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को 26 मई को दिल्ली बुलाया है, जहाँ उनकी बंद कमरे में सीनियर नेताओं के साथ बैठक होगी। इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार और पार्टी के अन्य नेताओं के बड़े बयान सामने आए हैं।
बैठक के एजेंडे पर क्या बोले सीएम सिद्धारमैया?
दिल्ली बुलाए जाने पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि उन्हें अभी तक इस बैठक के मुख्य एजेंडे (विषय) की जानकारी नहीं है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मुझे दिल्ली बुलाया गया है और कल सुबह 11 बजे बैठक है। कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने मुझे सिर्फ तारीख और समय बताया है, लेकिन बैठक किस मुद्दे पर है, यह मुझे नहीं पता।"
क्या कर्नाटक में बदलेगा मुख्यमंत्री?
जब सीएम सिद्धारमैया से राज्य में नेतृत्व परिवर्तन (मुख्यमंत्री बदलने) की अफवाहों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे टालते हुए सिर्फ इतना कहा कि ऐसी अटकलें और अफवाहें हमेशा चलती रहती हैं।
क्या डीके शिवकुमार भी दिल्ली जाएंगे?
इस महत्वपूर्ण बैठक में कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के शामिल होने की उम्मीद कम है। दिल्ली जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, "अगर मुझे आलाकमान द्वारा बुलाया जाएगा, तभी मैं जाऊंगा।" वहीं मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रही बातचीत पर उन्होंने कहा, "मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता और मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। यह मेरा काम नहीं है।"
रणदीप सुरजेवाला ने अफवाहों पर लगाया विराम
कांग्रेस के सीनियर नेता रणदीप सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री बदलने की खबरों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया को दिल्ली किसी विवाद के लिए नहीं, बल्कि आने वाले राज्यसभा और एमएलसी (MLC) चुनावों की रणनीति पर चर्चा करने के लिए बुलाया गया है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे इस मामले पर गलत अटकलें न लगाएं।
केंद्र सरकार पर साधा निशाना, `गिनाए पेट्रोल-डीजल के दाम
इस दौरान सीएम सिद्धारमैया ने बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने जनता से किए वादे पूरे नहीं किए।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा:
पिछले 11 दिनों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम चार बार बढ़ाए गए हैं।
बेंगलुरु में फिलहाल पेट्रोल 110.93 रुपये और डीजल 98.89 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।
मई 2014 में पेट्रोल 71.41 रुपये और डीजल 56.71 रुपये था, जो अब बहुत ज्यादा बढ़ चुका है।
वहीं रसोई गैस (LPG) का सिलेंडर भी 412 रुपये से बढ़कर 915.50 रुपये का हो गया है।
फाल्टा की हार से नाराज ममता, जिम्मेदारों को चेतावनी
25 May, 2026 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रिकॉर्ड तोड़ जीत के बाद राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार ने 1,09,021 वोटों के ऐतिहासिक अंतर से जीत दर्ज की है, जिसे पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में भाजपा की अब तक की सबसे बड़ी जीत माना जा रही है। इस करारी शिकस्त के बाद मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी कर केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व पर चौतरफा तीखा हमला बोला है। ममता बनर्जी ने पूरी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए ईवीएम (EVM) में बड़े पैमाने पर हेराफेरी करने और वोट लूटने का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि उनकी पार्टी के लोगों को मतगणना केंद्र (काउंटिंग सेंटर) से जबरन बाहर धकेल दिया गया।
ममता बनर्जी ने लगाया राज्य प्रायोजित आतंकवाद का आरोप
मुख्यमंत्री ने बेहद तीखे लहजे में कहा कि आज के शासन में पुलिस निष्पक्ष काम करने के बजाय एक शिकारी की तरह व्यवहार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि फाल्टा में तृणमूल कांग्रेस के दफ्तरों में खुलेआम तोड़फोड़ की जा रही है और टीएमसी कार्यकर्ताओं, खासकर महिला कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को ढाढस बंधाते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि फाल्टा में जो कुछ भी हुआ है, वह और कुछ नहीं बल्कि पूरी तरह से राज्य प्रायोजित आतंकवाद है। उन्होंने देश की न्यायपालिका से इस मामले में तुरंत दखल देने की भावुक अपील की और सवाल उठाया कि आज के दौर में किसमें ज्यादा ताकत बची है, देश के पवित्र संविधान में या फिर बंदूक की नली में? इसके साथ ही उन्होंने भाजपा को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि दिल्ली की सत्ता से हटने के बाद उन्हें अपने इन सभी कृत्य और तानाशाही का परिणाम भुगतना ही होगा।
जमानत जब्त होने पर शुभेंदु अधिकारी का तंज
गौरतलब है कि फाल्टा विधानसभा सीट पर टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में ही पूरी तरह मैदान छोड़ चुके थे, जिसके बाद नतीजों में उनकी जमानत तक जब्त हो गई। टीएमसी की इस ऐतिहासिक और शर्मनाक हार पर तंज कसते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह तो अभी सिर्फ शुरुआत है, आने वाले समय में टीएमसी का पतन इस कदर होगा कि उनके नेतृत्व को चुनाव जीतने के लिए नोटा (NOTA) से मुकाबला करना पड़ेगा। दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस हार को जनता का फैसला स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है और इस पूरी चुनावी गड़बड़ी के खिलाफ कोर्ट जाकर एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने का कड़ा संकल्प लिया है।
‘किस्तों में महंगाई की मार’: ईंधन के दामों को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र को घेरा
25 May, 2026 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली:कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले 10 दिनों के भीतर चौथी बार हुई बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर चौतरफा तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार किस्तों में ईंधन के दाम बढ़ाकर आम जनता की जेब पर चुपचाप डाका डालने का काम कर रही है। विपक्षी नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी बात रखते हुए कहा कि सरकार सोची-समझी रणनीति के तहत किस्तों में ईंधन के दाम बढ़ा रही है, ताकि आम लोगों को एक बार में झटका न लगे और उनकी जेब पर लगातार बोझ भी पड़ता रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई महीनों से देश में आर्थिक संकट की चेतावनी दी जा रही थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल चुनावों में व्यस्त थे और चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल के दाम 8 रुपये तक बढ़ा दिए गए।
मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सरकार को घेरा
राहुल गांधी से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। खड़गे ने कहा कि ईंधन की कीमतों में होने वाली हर बढ़ोतरी का सीधा असर आम परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ता है और इसका नकारात्मक प्रभाव पूरी अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश का किसान हो या छोटे उद्योग चलाने वाले व्यापारी, समाज का हर वर्ग भाजपा सरकार की इस कथित आर्थिक लूट का भारी बोझ झेलने को मजबूर है।
‘राज्य में कानून व्यवस्था चरमराई’: पलानीस्वामी का सरकार पर बड़ा हमला
25 May, 2026 12:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: तमिलनाडु में लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष के नेता और एआईएडीएमके (AIADMK) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री विजय पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए राज्य सरकार से अपराधियों के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई करने की मांग की। पलानीस्वामी ने कहा कि मदुरै के कीलामथुर में 10वीं कक्षा की एक छात्रा के साथ हुए कथित यौन उत्पीड़न और प्रसिद्ध मीनाक्षी अम्मन मंदिर के पास एक 17 साल के मासूम युवक की बेरहमी से की गई हत्या की घटनाएं बेहद चौंकाने वाली और विचलित करने वाली हैं। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन संवेदनशील मामलों में सत्ताधारी दल के लोगों के शामिल होने की चर्चाएं आम हैं।
सरकारी कर्मचारियों को धमकाने और लापरवाही के आरोप
पलानीस्वामी ने अपने बयान में राज्य के कुछ अन्य हालिया घटनाक्रमों का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने तांबरम के पास एक कॉलेज छात्रा को गलत नजर से देखने के आरोप में एक टीआरपी कार्यकर्ता की गिरफ्तारी और थिरुवोत्रियूर में एक सरकारी इंजीनियर के घर जाकर उसे खुलेआम धमकाने की घटना को उठाया। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं द्वारा आम जनता और सरकारी कर्मचारियों को डराने-धमकाने का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा, एआईएडीएमके नेता ने सेलम जिले के ओमालुर में हुई एक दुखद घटना पर भी सरकार को घेरा, जहाँ बारिश के पानी से भरी एक रेलवे सुरंग में कार फंसने से पति-पत्नी की मौत हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन ने समय रहते पानी निकालने का कोई इंतजाम नहीं किया, जिसकी वजह से दो बेगुनाह लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
प्रचार छोड़ जमीन पर काम करने की नसीहत
मुख्यमंत्री पर सीधा तंज कसते हुए पलानीस्वामी ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से एक अच्छी सरकार और बड़े बदलाव का वादा किया गया था, लेकिन आज हकीकत यह है कि पूरे तमिलनाडु में अराजकता और भय का माहौल बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार जमीनी स्तर पर काम करने के बजाय केवल सोशल मीडिया पर अपना प्रचार करने में व्यस्त है, जबकि राज्य की आम जनता खुद को पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से भावुक अपील करते हुए कहा कि यदि उन्हें सचमुच राज्य की जनता की परवाह है, तो वे सोशल मीडिया से बाहर आएं और तमिलनाडु में कानून का राज व शांति बहाल करने के लिए तुरंत प्रभावी और कड़े कदम उठाएं।
ममता की करीबी सांसद के इस्तीफे की अटकलें, बंगाल की राजनीति में मचा हलचल
25 May, 2026 11:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगने के आसार दिखाई दे रहे हैं। पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वाली बारासात से चार बार की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार अब सांसद पद से इस्तीफा दे सकती हैं। हालांकि उन्होंने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उन्होंने टीएमसी के जिला पदाधिकारी और महिला मोर्चा के अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। फलता सीट पर मिली करारी हार के बाद उपजे इस नए संकट से राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।
बेटे ने दिए सांसद पद छोड़ने के संकेत
काकोली घोष दस्तीदार के बेटे वैद्यनाथ घोष ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए संकेत दिए हैं कि उनकी मां जल्द ही लोकसभा की सदस्यता भी छोड़ सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पिछले कुछ समय में ममता बनर्जी सरकार के दौरान हुए कई बड़े घोटालों और प्रशासनिक गड़बड़ियों ने उनके परिवार की सामाजिक छवि को गहरी चोट पहुंचाई है। बारासात लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सात विधानसभा सीटों में से टीएमसी को छह सीटों पर करारी हार का सामना करना पड़ा है, जिसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए और राज्य में चल रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए काकोली घोष ने यह बड़ा कदम उठाया है।
भ्रष्टाचार और घोटालों से नाराज था परिवार
पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी को उजागर करते हुए उनके परिवार ने हालिया घोटालों का खुलकर जिक्र किया है। उनके अनुसार, पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी के कार्यकाल में सरकारी नौकरियां बेची गईं, जिससे राज्य के लाखों योग्य युवा बेरोजगार हो गए। इसके अलावा, ज्योतिप्रिय मल्लिक को राशन घोटाले में गिरफ्तार किया गया और आरजी कर अस्पताल की संवेदनशील घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। इन तमाम मामलों के कारण एक शिक्षित और सम्मानित परिवार होने के नाते उन पर भी उंगलियां उठ रही थीं, जिसके चलते सिर्फ निजी पारिवारिक रिश्तों की वजह से अब तक चुप रहीं काकोली घोष ने आखिरकार अपना कड़ा स्टैंड ले लिया है।
बीजेपी में जाने की चर्चा और आंतरिक कलह
काकोली घोष दस्तीदार के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलों को उनके परिवार ने फिलहाल खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह किसी दूसरी पार्टी में जाने का मामला नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सैद्धांतिक लड़ाई है। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा हाल ही में काकोली घोष को वाई (Y) श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने के बाद से राजनीतिक कयासों का दौर जारी है। गौर करने वाली बात यह भी है कि लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से हटाए जाने और उनकी जगह कल्याण बनर्जी को नियुक्त किए जाने के कुछ दिनों बाद ही काकोली घोष ने टीएमसी प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को अपना त्यागपत्र भेजा है, जो पार्टी के भीतर की गहरी दरार को साफ दर्शाता है।
हिमंत सरकार का बड़ा दांव: विधानसभा में UCC बिल पेश, विपक्ष ने खोला मोर्चा
25 May, 2026 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी: असम कैबिनेट की मंजूरी मिलने के ठीक दो हफ्ते बाद राज्य सरकार ने सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश कर दिया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने सदन के पटल पर 'द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, बिल, 2026' प्रस्तुत किया। इस बेहद अहम और ऐतिहासिक विधेयक पर 27 मई को विधानसभा में विस्तार से चर्चा होने और इसके पारित (पास) किए जाने की पूरी संभावना है। हालांकि, विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किए जाने का विपक्षी विधायकों ने कड़ा विरोध किया है। विपक्ष की मांग है कि इस कानून को सदन में लाने से पहले इससे जुड़े सभी पक्षों और हितधारकों के साथ व्यापक बातचीत होनी चाहिए थी।
कैबिनेट बैठक में पहले ही हो गया था फैसला
इस विधेयक को लाने की पृष्ठभूमि पहले ही तैयार हो चुकी थी। इससे पहले 13 मई को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक आयोजित की गई थी। उसी बैठक में सरकार ने यह साफ कर दिया था कि 21 से 26 मई तक चलने वाले मौजूदा विधानसभा सत्र के दौरान इस कानून को सदन में लाया जाएगा। कैबिनेट के फैसलों की आधिकारिक जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने खुद बताया था कि मंत्रिमंडल ने समान नागरिक संहिता के मसौदे (ड्राफ्ट) को अपनी हरी झंडी दे दी है और इसे सत्र के अंतिम दिनों में पेश किया जाएगा।
असम के सामाजिक ताने-बाने पर आधारित पांच मुख्य बातें
राज्य सरकार का कहना है कि इस विधेयक के मसौदे को असम की अनूठी जनसांख्यिकीय विविधता और यहाँ के सामाजिक ताने-बाने को ध्यान में रखकर बेहद सावधानी से तैयार किया गया है। सरकार के मुताबिक, यह नया कानून मुख्य रूप से असम के नागरिक समाज से जुड़े पांच बड़े और महत्वपूर्ण मुद्दों को नियमित और कानून के दायरे में लाने का काम करेगा।
फलता चुनाव के बाद आमना-सामना: शुभेंदु बनाम अभिषेक से गरमाई पश्चिम बंगाल की राजनीति
25 May, 2026 09:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर हुए चुनाव के नतीजों ने राज्य के सियासी पारे को गरमा दिया है। इस चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने एकतरफा मुकाबला करते हुए माकपा के शंभु नाथ कुर्मी को 1,09,021 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया और एक बड़ी जीत अपने नाम की। इस मुकाबले में कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मुल्ला मात्र 10 हजार वोटों के साथ तीसरे स्थान पर सिमट गए, जबकि राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रत्याशी जहांगीर खान चौथे नंबर पर खिसक गए। फलता सीट पर मिली इस करारी शिकस्त के बाद टीएमसी और भाजपा के शीर्ष नेता आमने-सामने आ गए हैं और दोनों दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल
इस चौंकाने वाले चुनावी नतीजे के बाद डायमंड हार्बर सीट से टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने वोटों की गिनती में गड़बड़ी का दावा करते हुए कहा कि पहले जहां दोपहर तीन बजे तक सिर्फ 2 से 4 राउंड की ही मतगणना हो पाती थी, वहीं इस बार इसी समय तक 21 राउंड की गिनती पूरी कर ली गई, जो बड़े संदेह पैदा करती है। अभिषेक बनर्जी ने आगे आरोप लगाया कि फलता में टीएमसी के एक हजार से अधिक कार्यकर्ताओं को डरा-धमकाकर भगा दिया गया और पार्टी दफ्तरों पर खुलेआम हमले किए गए, लेकिन चुनाव आयोग मूकदर्शक बना रहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा को छोड़कर बाकी सभी दलों के पोलिंग एजेंटों को काउंटिंग सेंटरों से बाहर निकाल दिया गया, जो लोकतंत्र पर सीधा हमला है।
विवादों के बाद दोबारा हुआ था मतदान
गौरतलब है कि फलता सीट पर मुख्य मतदान के दौरान ईवीएम पर इत्र छिड़कने, चुनाव चिह्न को ढकने और बूथ कैप्चरिंग जैसी गंभीर गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए 29 अप्रैल को यहाँ दोबारा मतदान (रीपोलिंग) कराने का आदेश दिया था। दोबारा हुए इस मतदान में जनता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और 86 फीसदी की रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई, हालांकि टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने पहले ही मैदान छोड़ दिया था।
शुभेंदु अधिकारी का टीएमसी पर तीखा पलटवार
टीएमसी के इन सभी आरोपों पर कड़ा पलटवार करते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में करीब 15 साल के लंबे समय के बाद जनता को बिना किसी डर के आजादी से वोट डालने का मौका मिला है, जिससे सच पूरी तरह साफ हो गया है। उन्होंने टीएमसी पर हमला बोलते हुए कहा कि यह पार्टी अब एक माफिया कंपनी बन चुकी है, जिसने सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल करके जनता के पैसों की जमकर लूट मचाई है। शुभेंदु अधिकारी ने तंज कसते हुए कहा कि जिस 'डायमंड हार्बर मॉडल' की बात टीएमसी हमेशा करती थी, वही मॉडल अब फलता में उनकी इस ऐतिहासिक और शर्मनाक हार की मुख्य वजह बन गया है।
राज्यसभा में बढ़ा राघव चड्ढा का कद, याचिका समिति की जिम्मेदारी मिली
24 May, 2026 10:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को संसद में एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से नवाजा गया है। उन्हें राज्यसभा की प्रतिष्ठित “याचिका समिति” (कमिटी ऑन पेटिशन्स) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राघव चड्ढा को यह बड़ा पद ऐसे समय पर मिला है, जब कुछ ही सप्ताह पहले उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी से बगावत करते हुए कई अन्य सांसदों के साथ मिलकर बीजेपी की सदस्यता ली थी। इस नियुक्ति को राजनीतिक गलियारों में राघव चड्ढा के बढ़ते कद और बीजेपी में उनकी नई व मजबूत भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या काम करती है यह समिति
राज्यसभा के सभापति द्वारा संसद की इस विशेष समिति का पुनर्गठन किए जाने के बाद राघव चड्ढा को इसकी कमान सौंपी गई है। संसदीय व्यवस्था में यह समिति बेहद खास मानी जाती है, क्योंकि इसका मुख्य काम देश की आम जनता की ओर से सीधे संसद में आने वाली विभिन्न याचिकाओं, समस्याओं और गंभीर शिकायतों की बारीकी से समीक्षा करना होता है। इसके बाद यह समिति उन मामलों पर गहन विचार-विमर्श करके अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करती है और सदन के पटल पर रखती है।
आम आदमी पार्टी को लगा था बड़ा झटका
गौरतलब है कि कुछ समय पहले राघव चड्ढा के नेतृत्व में ही आम आदमी पार्टी के कई राज्यसभा सांसदों ने एक साथ मिलकर पार्टी से नाता तोड़ा था और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। सांसदों के इस बड़े दलबदल के कारण संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में आम आदमी पार्टी की ताकत और संख्या बल को बहुत बड़ा झटका लगा था। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी को इस सियासी उलटफेर से सदन के भीतर अपनी स्थिति और मजबूत करने में बड़ी कामयाबी मिली थी।
नियुक्ति पर छिड़ा सियासी घमासान
राघव चड्ढा को इतनी जल्दी यह अहम पद मिलने के बाद देश की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। पूरा विपक्ष इस फैसले को लेकर सरकार और बीजेपी पर सवाल खड़े कर रहा है। विपक्षी नेताओं का सीधा आरोप है कि पार्टी बदलने के फौरन बाद राघव चड्ढा को इनाम के तौर पर यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई है, जो साफ तौर पर एक खास राजनीतिक संदेश देती है। दूसरी तरफ, पलटवार करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि राघव चड्ढा के लंबे संसदीय अनुभव, उनकी योग्यता और सदन में उनकी लगातार सक्रियता को देखते हुए ही उन्हें पूरी निष्पक्षता के साथ यह नया दायित्व सौंपा गया है।
संविधान और लोकतंत्र पर राहुल गांधी का संवाद, अल्पसंख्यक नेताओं के साथ हुई बैठक
24 May, 2026 08:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक में शिरकत की। इस उच्च स्तरीय बैठक में देश के वर्तमान राजनीतिक माहौल, भारतीय संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और अल्पसंख्यक समाज से जुड़े विभिन्न जरूरी मुद्दों पर गहराई से मंथन किया गया। बैठक में हिस्सा लेने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से आए प्रतिनिधियों के साथ-साथ कांग्रेस के कई अन्य दिग्गज नेता भी मौजूद रहे, जिन्होंने आगामी रणनीतियों को लेकर अपने विचार साझा किए।
नफरत की राजनीति के खिलाफ एकजुटता का संदेश
बैठक को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस पार्टी देश के संविधान और सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा के लिए जमीन पर लगातार संघर्ष कर रही है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने सत्तापक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि इस समय देश में नफरत और समाज को बांटने वाली राजनीति को हवा दी जा रही है, जिससे हमारे देश का आपसी भाईचारा और सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस की मूल विचारधारा हमेशा से देश के सभी धर्मों और वर्गों को एक साथ लेकर आगे बढ़ने की रही है।
शिक्षा, रोजगार और संगठन को मजबूत करने पर मंथन
इस रणनीतिक बैठक के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं के लिए बेहतर शिक्षा, रोजगार के नए अवसर, सामाजिक सुरक्षा और राजनीति में उनकी हिस्सेदारी बढ़ाने जैसे जमीनी मुद्दों पर भी गंभीर बातचीत हुई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस बात की जरूरत बताई कि संगठन को बूथ और जमीनी स्तर पर और ज्यादा मजबूत किया जाए। साथ ही, अल्पसंख्यक समाज के लोगों के बीच जाकर उनसे सीधा संवाद स्थापित करने और उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाने की रणनीति पर भी सहमति बनी।
आगामी चुनावों की दिशा और राजनीतिक रार
कांग्रेस ने यह साफ कर दिया है कि वह आने वाले तमाम चुनावों में देश के संविधान की रक्षा, आरक्षण की सीमा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को ही अपना मुख्य चुनावी हथियार बनाएगी और जनता के बीच जाएगी। दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस की इस बैठक पर पलटवार करते हुए उस पर हमेशा की तरह तुष्टिकरण की राजनीति करने का पुराना आरोप लगाया है। इस बैठक और दोनों तरफ से आ रहे बयानों को देखकर यह साफ है कि आने वाले दिनों में देश के सियासी गलियारों में जुबानी जंग और तेज होने वाली है।
बंगाल में विपक्षी राजनीति तेज, माकपा ने टीएमसी को घेरा
23 May, 2026 05:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। भारतीय मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर एक बड़ा दावा किया है। माकपा के राज्य महासचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का जनाधार इस भीषण गर्मी में बर्फ की तरह तेजी से घट रहा है। वाम दल को पूरी उम्मीद है कि वह जल्द ही टीएमसी को पछाड़कर राज्य में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में आ जाएगा। सलीम ने जोर देकर कहा कि वामपंथी ताकतें राज्य में अपनी वैचारिक विरोधी भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ जमीनी स्तर पर मजबूती से संघर्ष कर रही हैं।
टीएमसी की नीतियों के कारण भाजपा को मिला मौका
माकपा नेतृत्व का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस ने पिछले डेढ़ दशक के अपने शासनकाल में पुलिस और बाहुबलियों का जमकर दुरुपयोग किया है। इस दमनकारी नीति की वजह से ही आरएसएस और भाजपा को राज्य के ग्रामीण इलाकों में अपने पैर पसारने का अनुकूल माहौल मिला। माकपा के अनुसार, टीएमसी और भाजपा दोनों ही दल धर्म के नाम पर राजनीति करके वामपंथ को मुख्यधारा से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब राज्य की जनता विकल्प के तौर पर वाम मोर्चे की ओर देख रही है।
गरीब तबके और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर संघर्ष की रणनीति
आगामी रणनीतियों को साझा करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि वामपंथी दल और श्रमिक संगठन उन गरीब फेरीवालों के हक में आवाज उठा रहे हैं, जिन्हें भाजपा शासित क्षेत्रों या प्रशासनिक कार्रवाइयों के कारण बेदखल होना पड़ा है। उन्होंने भाजपा पर सीधे तौर पर गरीबों की आजीविका छीनने का आरोप लगाया। इसके साथ ही माकपा ने संकल्प जताया है कि वह राज्य की साझी संस्कृति, आपसी भाईचारे और अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर लगातार अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
गिरते वोट बैंक के बीच खोई सियासी जमीन पाने की कवायद
यदि चुनावी इतिहास पर नजर डालें, तो साल 1977 से 2011 तक बंगाल की सत्ता संभालने वाले वाम मोर्चे को हाल के वर्षों में भारी चुनावी नुकसान उठाना पड़ा है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2011 में वाम दल का जो वोट शेयर 39 फीसदी (जिसमें माकपा का हिस्सा 30 फीसदी था) था, वह 2021 के विधानसभा चुनाव में घटकर बेहद कम रह गया था, जहां माकपा केवल 4.45 प्रतिशत वोट ही हासिल कर सकी थी। पिछले चुनावों में वाम दल ने आईएसएफ जैसे दलों के साथ गठबंधन किया था, जबकि कांग्रेस अकेले चुनावी मैदान में उतरी थी। इन विपरीत आंकड़ों के बावजूद, माकपा नेतृत्व पश्चिम बंगाल में अपनी खोई हुई राजनीतिक प्रासंगिकता को दोबारा हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।
भाजपा में शामिल होने के तुरंत बाद राघव चड्ढा का बढ़ा कद, संसद की अहम समिति की कमान मिली
23 May, 2026 05:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। हाल ही में आम आदमी पार्टी का दामन छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को संसद में एक अहम और बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। चड्ढा को उच्च सदन की प्रतिष्ठित 'याचिका समिति' (कमिटी ऑन पेटिशंस) का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इस समिति का पुनर्गठन करते हुए इसके नए स्वरूप को मंजूरी दी है, जिसमें राघव चड्ढा को कमान सौंपी गई है।
राज्यसभा के सभापति ने किया समिति का पुनर्गठन
संसद के उच्च सदन के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने याचिका समिति को नया रूप देते हुए इसमें कुल दस सदस्यों को नामित किया है। राघव चड्ढा की बतौर अध्यक्ष यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। इस नई जिम्मेदारी के बाद अब वे उच्च सदन में समिति के कामकाज और बैठकों का संचालन करेंगे।
क्या काम करती है संसद की यह अहम समिति
संसदीय व्यवस्था में याचिका समिति का स्थान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह समिति आम जनता और नागरिकों द्वारा संसद को भेजी जाने वाली विभिन्न याचिकाओं और जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों की बारीकी से जांच करती है। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट और सुझाव सदन के पटल पर रखती है, ताकि आम लोगों की समस्याओं का प्रशासनिक स्तर पर समाधान हो सके।
राघव चड्ढा के राजनीतिक सफर में नया पड़ाव
राजनीतिक गलियारों में राघव चड्ढा को भाजपा में शामिल होने के तुरंत बाद मिली इस जिम्मेदारी को काफी अहम माना जा रहा है। दल बदलने के बाद सदन के भीतर उन्हें यह पहला बड़ा प्रशासनिक और विधायी कार्य सौंपा गया है। इसे पार्टी और संसदीय नेतृत्व द्वारा उनके संगठनात्मक व नीतिगत कौशल पर जताए गए भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।
पीएम मोदी को लेकर टिप्पणी के बाद गिरिराज सिंह भड़के, बढ़ा राजनीतिक विवाद
23 May, 2026 05:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायबरेली। लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। अपने हालिया रायबरेली दौरे के समय उन्होंने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा जैसे गंभीर विषयों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश की आम जनता इस समय भीषण आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है, लेकिन सत्ता में बैठे लोग उनकी तकलीफों को लेकर पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं।
ईंधन और जरूरी चीजों के बढ़ते दामों पर जताई चिंता
जनता को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं। इस अनियंत्रित मूल्यवृद्धि के कारण मध्यमवर्ग और गरीब परिवारों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। उन्होंने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि देश का नागरिक आर्थिक मोर्चे पर चौतरफा मार झेल रहा है, मगर शासन स्तर पर इन समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
बेरोजगारी और संविधान की सुरक्षा को लेकर बोला हमला
महंगाई के अलावा कांग्रेस नेता ने बेरोजगारी की समस्या और संविधान को बचाने के मुद्दे पर भी सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि युवाओं के पास रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं, जिससे देश का भविष्य अंधकार में जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान की गरिमा को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए दावा किया कि मौजूदा शासन में संवैधानिक व्यवस्थाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का पलटवार
राहुल गांधी के इन तीखे आरोपों पर पलटवार करने में सत्ता पक्ष ने भी देर नहीं की। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्ष के इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधा। गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेता को वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और जमीनी हकीकत का कोई ज्ञान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि वैश्विक संकटों के इस दौर में भी राहुल गांधी सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए देश की जनता को भ्रमित और गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।
तमिलनाडु में पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम, कई टेंडर कैंसिल
23 May, 2026 05:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई । तमिलनाडु में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने की दिशा में नवगठित सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की अगुवाई वाले प्रशासन ने अलग-अलग सरकारी महकमों द्वारा जारी किए गए 100 से अधिक 'शॉर्ट-टर्म टेंडर' (कम अवधि वाले टेंडर) को निरस्त कर दिया है। इस कार्रवाई की जद में लोक निर्माण, विद्युत, ग्रामीण विकास और नगर प्रशासन जैसे कई मुख्य विभाग आए हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य सरकारी कामकाज के तरीकों को और ज्यादा जवाबदेह बनाना है।
आपातकालीन टेंडर नीति पर सरकार का सख्त रुख
सामान्य तौर पर 'शॉर्ट-टर्म टेंडर' बेहद जरूरी या आपातकालीन हालातों में ही लाए जाते हैं, ताकि औपचारिकताएं जल्दी पूरी कर काम को तुरंत शुरू किया जा सके। इसमें कंपनियों को बोली लगाने के लिए बहुत कम समय मिलता है। हालांकि, 'तमिलगा वेट्री कजगम' (TVK) सरकार ने कार्यभार संभालते ही यह स्पष्ट कर दिया था कि बेहद असाधारण परिस्थितियों के अलावा इस विकल्प का उपयोग नहीं किया जाएगा। इसी नियम के तहत सरकार ने हाल ही में जारी हुए कम समय वाले टेंडरों की बारीकी से समीक्षा शुरू की है।
इन प्रमुख विभागों के ठेके किए गए वापस
प्रशासनिक समीक्षा के बाद पिछले कुछ हफ्तों के भीतर जारी हुए तमाम टेंडरों को वापस ले लिया गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 13 मई से 22 मई के बीच विभिन्न विभागों द्वारा निकाले गए टेंडरों को चिन्हित कर उन्हें रद्द करने की प्रक्रिया पूरी की गई। इस कार्रवाई से प्रभावित होने वाले महकमों में चेन्नई कॉर्पोरेशन, लोक निर्माण विभाग (PWD), परिवहन, ग्रामीण विकास, बिजली विभाग, जल आपूर्ति और नगर प्रशासन शामिल हैं। इस पूरी प्रक्रिया को अधिकारियों ने एक प्रशासनिक सुधारात्मक कदम बताया है।
लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर गिरी निलंबन की गाज
नियमों को ताक पर रखकर काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। चेन्नई कॉर्पोरेशन और ग्रामीण विकास विभाग के जिन अधिकारियों ने स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद शॉर्ट-टर्म टेंडर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया था, उन्हें सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। इस कार्रवाई के जरिए शासन ने संदेश दिया है कि टेंडर और खरीद से जुड़े नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य सरकारी खजाने के खर्च को पारदर्शी बनाना और ठेकों के आवंटन में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है।
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बदले सियासी समीकरण, AIADMK में एकजुटता की उम्मीद
23 May, 2026 04:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई | तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके (AIADMK) के भीतर चल रही आपसी कलह अब शांत होती दिखाई दे रही है और गुटों के बीच समझौते की कोशिशें तेज हो गई हैं। राज्य के राजनीतिक समीकरणों में उस समय बड़ा बदलाव आया जब मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने अपने कैबिनेट का विस्तार करते हुए गठबंधन सहयोगी दलों—वीसीके (VCK) और आईयूएमएल (IUML)—के विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इस नए सियासी घटनाक्रम के बाद एआईएडीएमके के असंतुष्ट खेमे की रणनीति बदल गई है और पार्टी में एकजुटता वापस लाने के लिए बातचीत के दरवाजे खुल गए हैं।पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, दोनों गुटों को एक मंच पर लाने के लिए वरिष्ठ नेताओं और शुभचिंतकों की मध्यस्थता में अनौपचारिक बातचीत शुरू हो चुकी है। यह मध्यस्थ दल एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व वाले मुख्य धड़े और सी. वे. शनमुगम व एस.पी. वेलुमणि की अगुवाई वाले बागी गुट के बीच के मतभेदों को सुलझाने में जुटा है।
समझौते के लिए दोनों गुटों ने रखीं अपनी शर्तें
सुलह की इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ईपीएस (EPS) खेमे ने विद्रोही गुट के सामने एक बड़ी शर्त रखी है। इसके तहत बागियों को चुनाव आयोग में पार्टी के खिलाफ दी गई अपनी शिकायत वापस लेनी होगी। दूसरी तरफ, असंतुष्ट नेताओं ने भी अपनी मांग सामने रखते हुए कहा है कि हाल ही में की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई के दौरान जिन पदाधिकारियों को पार्टी से निकाला गया था, उन्हें दोबारा उनके संगठनात्मक पदों पर बहाल किया जाए। इन शर्तों के बीच दोनों पक्षों में आपसी समझ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
कैबिनेट विस्तार के बाद बदले सियासी समीकरण
पार्टी में पुनर्मिलन की यह हलचल मुख्यमंत्री विजय द्वारा मंत्रिमंडल में किए गए फेरबदल के तुरंत बाद देखी गई। मुख्यमंत्री ने वीसीके के विधायक वन्नी अरसु और आईयूएमएल के विधायक ए.एम. शाहजहां को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया है, जिससे राज्य में मंत्रियों की कुल संख्या 35 हो गई है। इस विस्तार के ठीक बाद बागी गुट के नेता एस.पी. वेलुमणि के सुर बदलते नजर आए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि एआईएडीएमके में कोई बिखराव या विभाजन नहीं है, और उन्होंने ईपीएस से हालिया चुनावों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन की समीक्षा के लिए चर्चा शुरू करने की अपील की।
चुनाव चिह्न पर खतरे को लेकर बागी गुट की सफाई
विद्रोही खेमे ने चुनाव आयोग में 'चुनाव प्रतीक आदेश, 1968' के पैराग्राफ 15 के तहत एक याचिका दायर की थी, जिसे लेकर पार्टी में फूट की खबरें आ रही थीं। हालांकि, अब समझौते की सुगबुगाहट के बीच बागी नेताओं ने साफ किया है कि उनका इरादा एआईएडीएमके के पारंपरिक 'दो पत्ती' चुनाव चिह्न को फ्रीज (जब्त) कराने का बिल्कुल नहीं था। सूत्रों का कहना है कि यदि दोनों गुटों में सहमति बन जाती है, तो चुनाव आयोग से यह शिकायत वापस ले ली जाएगी। अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह अनौपचारिक बातचीत एआईएडीएमके को फिर से एक कर पाएगी।
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