राजनीति
विजय के सत्ता समीकरण में उलझन, कोर्ट के फैसले से बढ़ी टेंशन
12 May, 2026 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: तमिलनाडु की राजनीति में अपनी नई पारी शुरू करने वाले सुपरस्टार विजय के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले ही उनकी पार्टी 'तमिलगा वेट्री कजगम' (TVK) बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई थी और अब सरकार बनाने के बाद फ्लोर टेस्ट (बहुमत साबित करना) से ठीक पहले एक नया कानूनी पेंच फंस गया है। मद्रास हाई कोर्ट ने टीवीके के एक विधायक की शपथ पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
महज एक वोट से जीत और कोर्ट का दखल
यह पूरा मामला तिरुपत्तूर विधानसभा सीट का है, जहाँ टीवीके के उम्मीदवार आर. श्रीनिवासा सेतुपति ने बेहद रोमांचक मुकाबले में डीएमके के उम्मीदवार को मात्र एक वोट के अंतर से हराया था। सेतुपति को कुल 83,375 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 83,374 वोट प्राप्त हुए। इस मामूली अंतर को लेकर हारने वाले उम्मीदवार ने डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलेट) की गिनती में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सेतुपति को विधायक पद की शपथ लेने से रोक दिया है।
फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करने की चुनौती
विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ लिए अभी कुछ ही दिन हुए हैं और अब उन्हें बुधवार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना है। तमिलनाडु की 234 सीटों वाली विधानसभा में सरकार चलाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है। विजय की पार्टी के पास वर्तमान में 107 विधायक हैं, जिन्हें कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों का समर्थन हासिल है। सहयोगियों को मिलाकर विजय के पास कुल 121 विधायकों का समर्थन है। हालांकि सेतुपति के वोट न दे पाने से सरकार को सीधा खतरा तो नहीं दिख रहा, लेकिन एक विधायक का कम होना मनोवैज्ञानिक रूप से विजय की चिंता बढ़ा सकता है।
विजय के लिए राजनीतिक परीक्षा की घड़ी
चार बार राज्यपाल से मुलाकात और काफी जद्दोजहद के बाद विजय ने रविवार को पद की शपथ ली थी। अब श्रीनिवासा सेतुपति की शपथ पर रोक लगना उनकी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले इस तरह की कानूनी रुकावटें विपक्षी दलों को हमला करने का मौका देती हैं। अब सबकी निगाहें बुधवार को होने वाले फ्लोर टेस्ट पर टिकी हैं, जहाँ यह साफ होगा कि विजय अपनी कुर्सी सुरक्षित रख पाते हैं या नहीं।
उदयनिधि स्टालिन का विवादित बयान, सनातन पर फिर साधा निशाना
12 May, 2026 12:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और डीएमके (DMK) विधायक उदयनिधि स्टालिन के एक ताजा बयान ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट पैदा कर दी है। विधानसभा सत्र के दौरान सदन को संबोधित करते हुए उदयनिधि ने 'सनातन धर्म' को लेकर अपनी पुरानी और विवादित टिप्पणी को दोहराया। उन्होंने कहा कि जिस विचारधारा ने लोगों के बीच भेदभाव किया और समाज को बांटने का काम किया, उसे खत्म कर देना चाहिए। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर वैचारिक और राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं।
राजनीतिक शिष्टाचार और विकास पर जोर
अपने संबोधन में उदयनिधि स्टालिन ने कड़वाहट के साथ-साथ सहयोग का हाथ भी बढ़ाया। उन्होंने सदन में राजनीतिक शिष्टाचार की अहमियत पर बात करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को विपक्ष के कई बड़े नेताओं ने जीत की शुभकामनाएं दी हैं, और यही सौहार्द विधानसभा की कार्यवाही में भी दिखना चाहिए। उदयनिधि ने कहा, "सत्ता पक्ष और विपक्ष के बैठने की कतारें भले ही अलग हों, लेकिन तमिलनाडु की प्रगति और विकास के लिए हम सभी का लक्ष्य एक ही होना चाहिए और हमें मिलकर काम करना चाहिए।"
'वंदे मातरम' और राज्य गीत पर विवाद
विधानसभा में उदयनिधि ने तमिलनाडु के राज्य गीत (तमिल ताई वाझथु) के अपमान का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि सदन में राज्य गीत को 'वंदे मातरम' के बाद बजाया गया। उन्होंने इसे परंपरा के विरुद्ध बताते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण का उदाहरण दिया और कहा कि वहां वंदे मातरम नहीं बजाया गया था। उदयनिधि ने सरकार से मांग की कि भविष्य में तमिलनाडु के सम्मान और पहचान से जुड़े राज्य गीत को कभी भी दूसरे स्थान पर न रखा जाए।
साझा कॉलेज और साझा अनुभव
सदन के भीतर एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब उदयनिधि ने मुख्यमंत्री के साथ अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वे और मुख्यमंत्री दोनों एक ही कॉलेज के छात्र रहे हैं। इस पुरानी पहचान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने अनुभव और ज्ञान को मुख्यमंत्री के साथ साझा करना चाहते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री बड़े दिल का परिचय देंगे और राज्य के बेहतर भविष्य के लिए विपक्ष द्वारा दिए गए सकारात्मक सुझावों को स्वीकार करेंगे।
हिमंता बिस्वा सरमा ने फिर संभाली असम की कमान, कई दिग्गज नेता रहे मौजूद
12 May, 2026 11:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी। असम में एक बार फिर केसरिया परचम लहराया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले गठबंधन ने विधानसभा चुनावों में शानदार जीत दर्ज की है, जिसके बाद हिमंता बिस्वा सरमा को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। आज गुवाहाटी में आयोजित एक भव्य समारोह में हिमंता बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली।
राजभवन में शपथ ग्रहण और भव्य समारोह
गुवाहाटी में आयोजित इस गौरवशाली शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने हिमंता बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। इस अवसर पर भारी संख्या में समर्थक और देश के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता का आभार जताया और असम के विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प दोहराया। उनके साथ उनके नए मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों ने भी शपथ ली, जिससे राज्य में नई सरकार के कामकाज का रास्ता साफ हो गया है।
विकसित असम के लिए 'डबल इंजन' की रफ्तार
शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस जीत को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में 'डबल इंजन' की सरकार ने 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने के लिए 'विकसित असम' का निर्माण किया है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले पांच वर्षों में असम प्रगति के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने इस जीत को पूर्वोत्तर में पार्टी की मजबूत पकड़ और विकास की राजनीति की जीत करार दिया है।
पड़ोसी राज्यों से बधाई और राजनीतिक हलचल
असम की इस जीत की गूंज पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में भी सुनाई दी। बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने असम की जनता को बधाई देते हुए कहा कि यह जीत विकास और विश्वास की जीत है। उन्होंने साथ ही बंगाल का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने वहां भी बड़ी सफलता हासिल की है। असम में नई सरकार के गठन के साथ ही अब पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, जहां भाजपा अपनी विकास योजनाओं के दम पर आगे बढ़ रही है।
तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल, AIADMK टूटने से TVK को मिला बड़ा सहारा
12 May, 2026 11:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला उलटफेर हुआ है, जिसने अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय की राह आसान कर दी है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके (AIADMK) में आधिकारिक रूप से बड़ी टूट हो गई है, जिसका सीधा फायदा विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्त्री कझगम' (TVK) को मिलता दिख रहा है। बहुमत के आंकड़ों के लिए संघर्ष कर रही टीवीके के लिए यह किसी बड़ी संजीवनी से कम नहीं है।
एआईएडीएमके में दो फाड़: टीवीके को मिला बड़ा समर्थन
तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट (बहुमत परीक्षण) से ठीक पहले एआईएडीएमके दो गुटों में बंट गई है। मंगलवार को सीवी शनमुगम के नेतृत्व वाले विद्रोही गुट ने थलापति विजय की पार्टी टीवीके को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इस टूट के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी (EPS) के पास केवल 22 विधायकों का समर्थन बचा है, जबकि सीवी शनमुगम के गुट में 24 विधायक शामिल हो गए हैं। इन 24 विधायकों के साथ आने से विधानसभा में टीवीके की स्थिति न केवल मजबूत हुई है, बल्कि सरकार बनाने की उनकी दावेदारी को भी भारी बल मिला है।
डीएमके के साथ गठबंधन से इनकार और वैचारिक स्टैंड
विद्रोही गुट के नेता सीवी शनमुगम ने स्पष्ट किया कि उन्होंने डीएमके (DMK) के साथ मिलकर सरकार बनाने के सुझाव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि एआईएडीएमके का जन्म ही 53 साल पहले डीएमके के विरोध में हुआ था और अगर वे सत्ता के लालच में उनके साथ हाथ मिलाते, तो पार्टी का अस्तित्व ही खत्म हो जाता। शनमुगम के अनुसार, उनके गुट के अधिकांश सदस्यों ने डीएमके को सत्ता से बाहर रखने के संकल्प के साथ थलापति विजय का साथ देने का फैसला किया है। इसके साथ ही इस गुट ने एसपी वेलुमणि को अपना नया फ्लोर लीडर भी चुन लिया है।
थलापति विजय के लिए खुशखबरी और नया सियासी समीकरण
सरकार बनाने के जादुई आंकड़े से दूर दिख रहे थलापति विजय के लिए यह घटनाक्रम किसी बड़ी जीत से कम नहीं है। जहां पहले वे एक-एक विधायक के समर्थन के लिए जूझ रहे थे, वहीं अब उनके पास विधायकों का एक पूरा कुनबा समर्थन के लिए खड़ा हो गया है। तमिलनाडु की वर्तमान बिखरी हुई राजनीतिक स्थिति में टीवीके अब एक निर्णायक शक्ति बनकर उभरी है। इस नए गठबंधन के बाद राज्य की राजनीति में सत्ता का संतुलन पूरी तरह बदल गया है, जिससे डीएमके खेमे में भी बेचैनी बढ़ गई है।
केरल CM चयन पर कांग्रेस का बड़ा मंथन, जल्द हो सकता है आधिकारिक एलान
12 May, 2026 10:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम/दिल्ली। केरल विधानसभा चुनाव में शानदार बहुमत हासिल करने के बाद भी कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कशमकश जारी है। चुनाव परिणाम आए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन 'राजतिलक' किसका होगा, इस पर सस्पेंस बरकरार है। इसी गतिरोध को तोड़ने के लिए आज देश की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान की एक निर्णायक बैठक बुलाई गई है, जिसे केरल की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली में दिग्गजों का जमावड़ा और राय-शुमारी
मुख्यमंत्री के नाम पर आम सहमति बनाने के लिए कांग्रेस नेतृत्व ने केरल के वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली तलब किया है। आज होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक में पूर्व केपीसीसी अध्यक्ष वी एम सुधीरन, मुल्लापल्ली रामचंद्रन, के मुरलीधरन और वर्तमान नेतृत्व के प्रमुख चेहरे शामिल होंगे। पार्टी नेतृत्व केवल विधायकों की पसंद ही नहीं, बल्कि अनुभवी नेताओं और कार्यकारी अध्यक्षों की राय भी जानना चाहता है। सूत्रों का कहना है कि आलाकमान इस बार किसी भी तरह की गुटबाजी की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता, इसलिए फैसले से पहले हर धड़े को सुना जा रहा है।
तीन दिग्गजों के बीच कड़ा मुकाबला
केरल की कमान संभालने के लिए इस समय तीन बड़े नाम चर्चा के केंद्र में हैं। पहले वी डी सतीशन, जिन्हें यूडीएफ के जमीनी कार्यकर्ताओं और सहयोगी दल आईयूएमएल (IUML) का मजबूत समर्थन हासिल है। दूसरे हैं केसी वेणुगोपाल, जिनके पास अधिकांश विधायकों और सांसदों का साथ बताया जा रहा है, हालांकि उनके चयन की स्थिति में उपचुनावों की चुनौती पार्टी के सामने होगी। वहीं, तीसरे दावेदार रमेश चेन्निथला हैं, जिनका खेमा उनकी वरिष्ठता, अनुभव और पार्टी के प्रति अटूट निष्ठा को सबसे बड़ा आधार मान रहा है।
देरी की वजह और आलाकमान की रणनीति
कांग्रेस आलाकमान के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह एक नेता को चुनते समय दूसरे गुटों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहता। अजय माकन और मुकुल वासनिक जैसे पर्यवेक्षकों ने पहले ही केरल जाकर विधायकों से वन-टू-वन चर्चा की है। वर्तमान में देरी का मुख्य कारण एक ऐसा 'मध्य मार्ग' खोजना है, जिससे सरकार बनने के बाद अंदरूनी कलह सामने न आए। पार्टी का प्रयास है कि दिल्ली की इस बैठक के बाद ऐसा नाम घोषित किया जाए जिस पर सभी पक्ष अपनी मुहर लगा दें।
अंतिम फैसले की घड़ी
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिल्ली की इस मैराथन बैठक के बाद आज देर शाम या कल तक मुख्यमंत्री के नाम का औपचारिक ऐलान किया जा सकता है। केरल की जनता और पार्टी कार्यकर्ता अब केवल दिल्ली की ओर देख रहे हैं, जहाँ कांग्रेस अध्यक्ष और राहुल गांधी अंतिम फैसला लेंगे।
असम में फिर बनेगी हिमंता सरकार, PM मोदी की मौजूदगी में होगा शपथ समारोह
12 May, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी। असम में एक बार फिर केसरिया परचम लहराया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने विधानसभा चुनावों में प्रचंड जीत हासिल की है। इस ऐतिहासिक जीत के बाद हिमंता बिस्वा सरमा को एक बार फिर सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया है। आज यानी मंगलवार, 12 मई 2026 को हिमंता बिस्वा सरमा दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे।
लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की कमान
हिमंता बिस्वा सरमा असम के इतिहास में पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता बनने जा रहे हैं, जो लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। इससे पहले केवल कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों के नाम ही यह रिकॉर्ड दर्ज था। 126 सीटों वाली असम विधानसभा में भाजपा और उसके सहयोगियों (AGP और BPF) ने मिलकर 102 सीटों पर कब्जा किया है, जिसमें अकेले भाजपा ने 82 सीटें जीती हैं। यह जीत राज्य में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता और विकास कार्यों पर जनता की मुहर मानी जा रही है।
भव्य शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां
गुवाहाटी के खानपारा स्थित वेटरनरी कॉलेज फील्ड में शपथ ग्रहण समारोह की भव्य तैयारियां की गई हैं। यह समारोह सुबह करीब 11:40 बजे आयोजित होगा। इस कार्यक्रम को खास बनाने के लिए देश के कई दिग्गज राजनेता गुवाहाटी पहुंच रहे हैं। मुख्य अतिथि के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समारोह में शामिल होंगे। उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और कई अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री भी उपस्थित रहेंगे।
नया मंत्रिमंडल और भविष्य की योजनाएं
मुख्यमंत्री के साथ आज उनके मंत्रिमंडल के कुछ सदस्य भी शपथ ले सकते हैं। जानकारी के अनुसार, शुरुआती तौर पर भाजपा और सहयोगी दलों के कुछ वरिष्ठ नेताओं को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी जाएगी। अपनी दूसरी पारी में हिमंता बिस्वा सरमा ने युवाओं के लिए रोजगार, बुनियादी ढांचे का विकास और असम की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया है। राज्य के लोगों को उम्मीद है कि नई सरकार विकास के पहिये को और तेजी से आगे बढ़ाएगी।
सीएम साय आज असम में, नई सरकार के शपथ समारोह में लेंगे हिस्सा
12 May, 2026 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दौरे पर असम जा रहे हैं। उनके इस प्रवास में राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्री, अरुण साव और विजय शर्मा भी उनके साथ मौजूद रहेंगे। छत्तीसगढ़ का यह शीर्ष नेतृत्व असम की राजधानी गुवाहाटी में आयोजित होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होगा। इस समारोह में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत के बाद हिमंता बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। मुख्यमंत्री साय का यह दौरा दोनों राज्यों के बीच मजबूत राजनीतिक संबंधों को भी दर्शाता है।
असम में भाजपा की हैट्रिक पर मुख्यमंत्री ने दी बधाई
गुवाहाटी रवाना होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने असम में भाजपा की जीत पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि असम में पार्टी ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम किया है। उन्होंने इस बात पर गर्व जताया कि उन्हें और उनकी टीम को भाजपा परिवार के इतने बड़े और महत्वपूर्ण उत्सव में शामिल होने का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे संगठन की अटूट मेहनत का परिणाम बताया।
विकास और सुशासन के मॉडल पर जनता की मुहर
असम के चुनाव परिणामों का विश्लेषण करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वहां की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और भाजपा के सुशासन पर अपना अटूट भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से असम के लोगों ने भारी बहुमत से भाजपा को जनादेश दिया है, उससे यह साफ है कि लोग केवल विकास की राजनीति को पसंद करते हैं। साय के अनुसार, यह जीत पूरे देश के लिए एक सकारात्मक संदेश है कि काम करने वाली सरकार को जनता हमेशा सिर-आंखों पर बिठाती है।
हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व की सराहना
मुख्यमंत्री ने असम के मनोनीत मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के पिछले कार्यकाल की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सरमा के कुशल नेतृत्व में असम ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है और वहां जनहित के कार्यों को अभूतपूर्व गति मिली है। इसी बेहतर प्रदर्शन का नतीजा है कि चुनाव परिणामों में भाजपा को जबरदस्त सफलता मिली। मुख्यमंत्री साय ने भरोसा जताया कि दूसरे कार्यकाल में भी सरमा के नेतृत्व में असम प्रगति के नए आयाम स्थापित करेगा।
गुवाहाटी में जुटेगा भाजपा का शीर्ष नेतृत्व
इस शपथ ग्रहण समारोह को लेकर गुवाहाटी में तैयारियां जोरों पर हैं, जहां छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री विशेष अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि वे सभी छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से असम के नए मंत्रिमंडल और भाजपा नेतृत्व को हार्दिक शुभकामनाएं देने जा रहे हैं। यह दौरा न केवल एक औपचारिक कार्यक्रम है, बल्कि यह भाजपा शासित राज्यों के बीच आपसी एकजुटता और साझा विकास के संकल्प को और मजबूत करने की एक कड़ी है।
सरकार गठन के 24 घंटे भीतर विवाद, थिरुमावलवन ने विजय की नीतियों पर जताई नाराजगी
11 May, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: तमिलनाडु में नई सरकार बने अभी एक दिन भी पूरा नहीं हुआ है कि गठबंधन के भीतर मतभेद उभरने लगे हैं। मुख्यमंत्री 'थलपति' विजय की पार्टी TVK को समर्थन दे रही वीसीके (VCK) के प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने शपथ ग्रहण समारोह और मुख्यमंत्री के बयानों पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की कार्यशैली और विचारधारा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है।
शपथ समारोह में 'तमिल अस्मिता' की अनदेखी का आरोप
थिरुमावलवन ने शपथ ग्रहण समारोह के प्रोटोकॉल पर सवाल उठाते हुए कहा कि तमिलनाडु की परंपरा के खिलाफ जाकर काम किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत 'तमिल थाई वलथु' (राज्य गीत) से होनी चाहिए थी, लेकिन समारोह में पहले 'वंदे मातरम' और 'राष्ट्रगान' बजाया गया। थिरुमावलवन ने पूछा कि क्या यह बदलाव केवल राज्यपाल को खुश करने के लिए किया गया? उन्होंने इसे क्षेत्रीय पहचान के खिलाफ बताते हुए चिंता व्यक्त की है।
कर्ज के आंकड़ों पर छिड़ी जुबानी जंग
पद संभालते ही मुख्यमंत्री विजय ने पिछली सरकार पर राज्य का खजाना खाली करने और 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज छोड़ने का आरोप लगाया था। इस पर पलटवार करते हुए वीसीके प्रमुख ने कहा कि सिर्फ आंकड़ों से जनता को डराना ठीक नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि तमिलनाडु का कर्ज फिलहाल तय सीमा के भीतर है और इसे राज्य की जीडीपी के हिसाब से देखा जाना चाहिए। थिरुमावलवन के मुताबिक, नई सरकार को कर्ज का डर दिखाकर पुरानी योजनाओं पर सवाल नहीं उठाना चाहिए।
मुफ्त बिजली का स्वागत, लेकिन विचारधारा पर मांगा जवाब
हालांकि, थिरुमावलवन ने मुख्यमंत्री की कुछ बड़ी घोषणाओं, जैसे—नशामुक्ति, महिला सुरक्षा और 200 यूनिट मुफ्त बिजली का स्वागत किया है। लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री से अपनी विचारधारा स्पष्ट करने को कहा है। उन्होंने पूछा कि क्या विजय की सरकार पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष (Secular) रहेगी? शपथ ग्रहण के पहले ही दिन सहयोगियों के बीच आई इस दरार ने तमिलनाडु की राजनीति में भविष्य के गठबंधन की स्थिरता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
ममता सरकार की लक्ष्मी योजना पर बड़ा फैसला, सुवेंदु अधिकारी के कदम से हलचल
11 May, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की महिलाओं को बड़ी राहत देते हुए एलान किया है कि 'लक्ष्मी भंडार' योजना पहले की तरह ही जारी रहेगी। सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार पुरानी सरकार द्वारा शुरू की गई किसी भी जनकल्याणकारी योजना को बंद नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य लोगों की मदद करना है, न कि योजनाओं को रोकना।
कैबिनेट बैठक में लिए गए कई अहम फैसले
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई इस कैबिनेट बैठक में कुल छह महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक के दौरान चुनाव आयोग को बंगाल में हिंसा मुक्त और सफल चुनाव कराने के लिए धन्यवाद दिया गया। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने उन भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की, जिन्होंने राज्य में हुई राजनीतिक हिंसा के दौरान अपनी जान गंवाई थी।
क्या है लक्ष्मी भंडार योजना?
लक्ष्मी भंडार योजना ममता बनर्जी सरकार के समय की सबसे चर्चित योजनाओं में से एक रही है। साल 2021 में शुरू हुई इस योजना का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को सीधा आर्थिक लाभ पहुँचाना है। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की 25 से 60 साल की महिलाओं को हर महीने 1,200 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है।
सभी पुरानी योजनाएं रहेंगी जारी
सरकार ने साफ कर दिया है कि केवल लक्ष्मी भंडार ही नहीं, बल्कि बंगाल में चल रही अन्य सभी लाभार्थी योजनाएं भी चलती रहेंगी। सुवेंदु अधिकारी के इस बयान से उन अटकलों पर विराम लग गया है जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार बदलने के बाद पुरानी योजनाओं को बंद किया जा सकता है। सरकार का कहना है कि वे विकास और जनसेवा के कार्यों को बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ाएंगे।
26 मई को वोटिंग, 29 मई को मतगणना; चुनावी तैयारियां शुरू
11 May, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़| पंजाब में स्थानीय निकाय चुनावों का बिगुल फूंका जा चुका है। राज्य चुनाव आयोग ने शहरी क्षेत्रों में लोकतंत्र के इस उत्सव के लिए तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। राज्य चुनाव आयुक्त राजकमल चौधरी ने चंडीगढ़ में प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि इन चुनावों के माध्यम से आठ नगर निगमों और कई नगर परिषदों को नए जनप्रतिनिधि मिलेंगे।
निकाय चुनाव का पूरा कार्यक्रम
आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार:
नामांकन: उम्मीदवार 13 से 16 मई तक (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे के बीच) अपने पर्चे दाखिल कर सकेंगे।
जांच व वापसी: नामांकन पत्रों की जांच 18 मई को होगी, जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 19 मई तय की गई है।
मतदान व परिणाम: पूरे राज्य में 26 मई को वोट डाले जाएंगे और 29 मई को मतगणना के बाद चुनाव परिणामों की घोषणा की जाएगी।
इन शहरों में होगा मुकाबला
इस वर्ष पंजाब के आठ प्रमुख नगर निगमों में चुनावी घमासान देखने को मिलेगा, जिनमें मोहाली, बठिंडा, अबोहर, बरनाला, कपूरथला, मोगा, बटाला और पठानकोट शामिल हैं। इनके अलावा 76 नगर परिषदों और 21 नगर पंचायतों में भी मतदान होगा। मतदाताओं की सुविधा के लिए कुल 3,977 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं।
मतदाताओं की संख्या और आचार संहिता
इन चुनावों में कुल 36,72,932 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें लगभग 18 लाख पुरुष और 17.73 लाख महिला मतदाता शामिल हैं। चुनाव की घोषणा के साथ ही पूरे प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों के तबादलों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
कड़े नियम और डिजिटल प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने इस बार पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया है:
डिजिटल नामांकन: नामांकन प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जाएगी और उम्मीदवारों के शपथ पत्र (संपत्ति व आपराधिक रिकॉर्ड) सार्वजनिक किए जाएंगे।
खर्च की सीमा: नगर निगम उम्मीदवारों के लिए चुनावी खर्च की सीमा 4 लाख रुपये, नगर परिषद के लिए 3.60 लाख रुपये और नगर पंचायत के लिए 1.40 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था: शांतिपूर्ण मतदान के लिए करीब 35,500 पुलिसकर्मियों और कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। नामांकन के दौरान केंद्रों पर वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए निगरानी रखी जाएगी।
प्रशासन और पुलिस विभाग को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मतदाता बिना किसी डर या प्रलोभन के अपने प्रतिनिधि चुन सकें।
RJD सांसद ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, पीएम मोदी पर लगाए गंभीर आरोप
11 May, 2026 05:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली| देश के राजनीतिक मंच पर इन दिनों जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में की गई अपीलों ने विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का एक और अवसर दे दिया है। सोमवार (11 मई, 2026) को प्रधानमंत्री ने जनता से एक वर्ष तक सोना न खरीदने जैसे जो सुझाव साझा किए, उसके बाद से ही विपक्ष की तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं।
मनोज झा का तीखा प्रहार
राजद (RJD) सांसद मनोज झा ने प्रधानमंत्री की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश को मजबूत नेतृत्व की दरकार थी, तब सरकार चुनावी रैलियों और प्रचार में व्यस्त थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि संकट के समय जनता को 'पैनिक न करने' की सलाह दी जा रही थी, जबकि दूसरी ओर चुनाव प्रचार में हजारों करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए गए। झा ने अखबारों के पन्नों पर छपने वाले महंगे विज्ञापनों का जिक्र करते हुए पूछा कि आखिर यह जनता का पैसा किसकी अनुमति से इस तरह खर्च किया जा रहा है? उन्होंने प्रधानमंत्री को सलाह दी कि वे अपनी जिम्मेदारियों से भागने के बजाय यह स्वीकार करें कि सरकार से चूक हुई है।
कांग्रेस ने साधा निशाना
बिहार कांग्रेस के नेता राजेश राठौर ने भी प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जो जनता से तो सब कुछ मांगते हैं, लेकिन बदले में उन्हें कुछ नहीं देते। राठौर ने पुराने फैसलों की याद दिलाते हुए कहा:
नोटबंदी: जनता की गाढ़ी कमाई बैंकों में जमा करा दी गई, जिससे आम आदमी को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
कोरोना काल: बीमारी के इलाज के ठोस इंतजाम करने के बजाय ताली-थाली बजवाने और दीये जलवाने जैसे आयोजनों में समय व्यतीत किया गया।
आर्थिक नीतियों पर सवाल
प्रधानमंत्री की हालिया अपील, जिसमें उन्होंने सोना न खरीदने और तेल के कुएं न होने का हवाला देते हुए पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की बात कही है, उस पर भी कांग्रेस ने कड़ा पलटवार किया है। राजेश राठौर ने कटाक्ष किया कि पिछले 12 वर्षों में सरकार की नीतियों ने देश की अर्थव्यवस्था में विनाश का ऐसा गड्ढा खोद दिया है कि अब किसी भी सुधार की गुंजाइश नजर नहीं आ रही।
विपक्ष का यह हमला साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले समय में सरकार की आर्थिक नीतियों और प्रधानमंत्री की सार्वजनिक अपीलों पर राजनीतिक घमासान और अधिक बढ़ने वाला है।
पीएम मोदी के विदेशी दौरे से पहले डिफेंस मिनिस्टर का बड़ा कदम, अधिकारियों संग की समीक्षा बैठक
11 May, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सोमवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक (IGoM) में उन्होंने कहा कि सरकार ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के असर को कम करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने साफ किया कि जरूरी चीजों की सप्लाई और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
जरूरी सामानों की कमी नहीं होने देगी सरकार
रक्षा मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार डीजल-पेट्रोल और अन्य जरूरी सामानों की चेन को टूटने नहीं देगी। उन्होंने लोगों से शांत रहने की अपील करते हुए कहा कि आपूर्ति में किसी भी तरह की रुकावट को रोकने के लिए ठोस रणनीति बनाई गई है। राजनाथ सिंह के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए देश की जनता का सहयोग और आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है।
पीएम मोदी ने दी खर्चों में कटौती की सलाह
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने भी देश के आर्थिक हालात और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए भारतीयों से खास अपील की थी। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे फिलहाल सोने की खरीदारी से बचें और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं को कुछ समय के लिए टाल दें। ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से दुनिया भर में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे भारत के सामने भी आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए घर से काम करने पर जोर
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया है कि जहां तक संभव हो, लोग 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम) को प्राथमिकता दें ताकि ईंधन की खपत को कम किया जा सके। सरकार का मानना है कि तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में अगर लोग अपने खर्चों में थोड़ी कटौती करेंगे, तो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और ऊर्जा संकट से निपटने में मदद मिलेगी।
केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस दिन लागू होगा वीबी-जी राम जी कानून
11 May, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने के लिए 'विकसित भारत-जी राम जी' (VB-G राम जी) कानून 2025 को लागू करने का बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने साफ किया है कि 1 जुलाई 2026 से यह नया कानून भारत के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा। इस ऐतिहासिक कदम का मुख्य उद्देश्य गांवों में रहने वाले परिवारों को आर्थिक मजबूती देना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
मनरेगा से ज्यादा काम और बेरोजगारी भत्ते की सुरक्षा
इस नए कानून के आने से अब ग्रामीण परिवारों को साल में मिलने वाली रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़कर 125 दिन हो जाएगी। कानून में इस बात का खास ख्याल रखा गया है कि अगर कोई पात्र व्यक्ति काम की मांग करता है और उसे 15 दिनों के भीतर रोजगार नहीं मिलता, तो सरकार उसे बेरोजगारी भत्ता देगी। इससे मजदूरों को काम न मिलने की स्थिति में भी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मजदूरी का सीधा हिसाब और देरी पर एक्स्ट्रा पैसा
मजदूरी के भुगतान को लेकर नई व्यवस्था काफी सख्त और पारदर्शी बनाई गई है। अब श्रमिकों को उनके काम का पैसा साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर सीधे उनके बैंक या डाकघर खातों में डीबीटी के माध्यम से भेज दिया जाएगा। यदि भुगतान में तय समय से देरी होती है, तो मजदूरों को प्रति दिन के हिसाब से 0.05 प्रतिशत का मुआवजा भी मिलेगा, जिससे उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहेगी।
डिजिटल हाजिरी और ग्राम पंचायतों की बड़ी भूमिका
भ्रष्टाचार को रोकने के लिए अब कार्यस्थलों पर फेस रिकग्निशन यानी चेहरे से पहचान वाली डिजिटल उपस्थिति अनिवार्य होगी, हालांकि तकनीकी समस्या आने पर दूसरे रास्ते भी खुले रहेंगे। इस पूरी योजना की कमान ग्राम पंचायतों के हाथों में होगी, जो पंजीकरण से लेकर विकास की योजनाएं बनाने तक का काम करेंगी। खास बात यह है कि इस कानून में ठेकेदारों और भारी मशीनों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है ताकि सारा काम केवल मजदूरों के जरिए ही पूरा किया जा सके।
मुख्यमंत्री चेहरे पर नहीं बनी सहमति, केरल कांग्रेस में अंदरूनी कलह
11 May, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत हासिल करने के बाद भी कांग्रेस अभी तक यह तय नहीं कर पाई है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। शनिवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर करीब तीन घंटे तक लंबी बैठक चली, लेकिन तीन बड़े दावेदारों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी। इस खींचतान की वजह से पार्टी के अंदर की लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है, जिससे हाईकमान की चिंता बढ़ गई है।
तीन दिग्गजों की दावेदारी और अपनी-अपनी दलीलें
इस रेस में तीन मुख्य नाम शामिल हैं—वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला। बैठक के दौरान तीनों ही नेता अपने-अपने दावों पर अड़े रहे। केसी वेणुगोपाल का कहना है कि उन्हें 63 में से 40 से ज्यादा विधायकों का समर्थन हासिल है, जबकि रमेश चेन्निथला ने अपनी सीनियरिटी का हवाला देते हुए पद पर दावा किया। वहीं, वीडी सतीशन ने जनता की पसंद और गठबंधन के साथियों के सपोर्ट की बात कही। सतीशन ने तो यहाँ तक चेतावनी दे दी है कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया, तो वे मंत्रिमंडल में कोई और पद नहीं लेंगे।
राहुल गांधी की सख्ती और गुटबाजी पर गुस्सा
नेताओं के बीच चल रही इस वर्चस्व की जंग पर राहुल गांधी ने सख्त नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूडीएफ की इतनी शानदार जीत की चमक को इस आपसी कलह ने खराब कर दिया है। राहुल गांधी का मानना है कि भारी जनादेश मिलने के बाद इस तरह सार्वजनिक रूप से दबाव बनाना बिल्कुल गलत तरीका है। उन्होंने नेताओं को समझाया कि पार्टी की इमेज को नुकसान पहुँचाने वाली ऐसी बयानबाजी और गुटबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सड़कों से हटाए जाएंगे पोस्टर और बैनर
हाईकमान की फटकार के बाद तीनों नेताओं ने एक बात पर सहमति जताई है कि वे अपने समर्थकों को शांत करेंगे। नेताओं ने अपील की है कि उनके समर्थक सड़कों पर प्रदर्शन न करें। वीडी सतीशन ने कार्यकर्ताओं से कहा है कि राज्य भर में उनके समर्थन में लगाए गए सभी फ्लेक्स बोर्ड और बैनर तुरंत हटा दिए जाएं। फिलहाल हाईकमान ने कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है, लेकिन यह साफ कर दिया है कि अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दिल्ली से किसका नाम फाइनल होकर आता है।
शुभेंदु अधिकारी ने संभालते ही लिए बड़े निर्णय, प्रशासन में दिखी तेजी
11 May, 2026 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के नवान्न (राज्य सचिवालय) में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में पहली कैबिनेट बैठक संपन्न हुई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब राज्य में 'डबल इंजन सरकार' का दौर शुरू हो गया है। उन्होंने साफ किया कि नई सरकार प्रधानमंत्री मोदी के 'डर बाहर, भरोसा अंदर' के मंत्र पर काम करेगी और बंगाल के विकास को नई ऊंचाई पर ले जाएगी।
आयुष्मान भारत और केंद्रीय योजनाओं की वापसी
शुभेंदु सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए राज्य को आधिकारिक तौर पर 'आयुष्मान भारत योजना' से जोड़ने की मंजूरी दे दी है। पिछली सरकार और केंद्र के बीच विवाद के कारण यह योजना बंगाल में लागू नहीं थी, लेकिन अब पात्र परिवारों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा। इसके अलावा पीएम किसान बीमा, उज्ज्वला, पीएम श्री और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी सभी केंद्रीय योजनाओं को पूरे राज्य में तेजी से लागू करने का निर्देश दिया गया है।
सीमा सुरक्षा और घुसपैठ पर कड़ा रुख
सीमाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कैबिनेट ने एक अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने बीएसएफ (BSF) को सुरक्षा चौकियां बनाने के लिए जरूरी जमीन सौंपने की प्रक्रिया को 45 दिनों के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पिछली सरकार पर अवैध घुसपैठियों के हितों के लिए केंद्रीय निर्देशों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि अब सीमा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
नौकरियों में बड़ी राहत और प्रशासनिक सुधार
राज्य के युवाओं के लिए सरकार ने खुशबरी देते हुए सरकारी नौकरियों में आवेदन की अधिकतम आयु सीमा में 5 साल की बढ़ोतरी की है। प्रशासनिक मोर्चे पर भी बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, जिसके तहत आईएएस अधिकारियों को केंद्रीय ट्रेनिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा और पूरे ढांचे को 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) के अनुरूप ढाला जाएगा। साथ ही, जून 2025 से जनगणना के केंद्रीय निर्देशों को भी तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
राजनीतिक हिंसा की जांच और शहीदों को सम्मान
मुख्यमंत्री ने भाजपा के उन 321 कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि दी जिन्हें उन्होंने 'राजनीतिक शहीद' बताया। उन्होंने घोषणा की कि यदि इन शहीदों के परिवार चाहेंगे, तो सरकार पिछली राजनीतिक हिंसाओं की नए सिरे से जांच शुरू कराएगी। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की मौजूदा कल्याणकारी योजनाएं बंद नहीं होंगी, बल्कि उन्हें पारदर्शी बनाया जाएगा ताकि किसी मृत व्यक्ति या अवैध घुसपैठिये को सरकारी धन का लाभ न मिले।
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