राजनीति
देश का युवा सिस्टम से नाराज, आखिर क्या है गुस्से की वजह?
22 May, 2026 02:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश की राजनीति और सोशल मीडिया पर इन दिनों एक अनोखा नाम 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) खूब सुर्खियां बटोर रहा है। भले ही यह कोई असली राजनीतिक दल नहीं है और न ही इसका जमीन पर कोई संगठन है, लेकिन इंटरनेट की दुनिया में इसका असर इतना बढ़ गया है कि इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के मामले में इसने कई बड़े और पारंपरिक दलों को पछाड़ दिया है। इस अनोखे डिजिटल मूवमेंट पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का एक बड़ा बयान सामने आया है। थरूर का मानना है कि इसे महज एक सोशल मीडिया मजाक समझकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि यह देश के युवाओं में मौजूदा व्यवस्था के प्रति छिपे गहरे गुस्से और निराशा का प्रतीक है।
एक विशेष इंटरव्यू में शशि थरूर ने उन वजहों को खुलकर सामने रखा, जिसके चलते युवाओं का यह गुस्सा डिजिटल माध्यम से बाहर आ रहा है। उनके मुताबिक, हाल ही में हुए नीट (NEET) पेपर लीक, देश में बढ़ती बेरोजगारी, बेकाबू महंगाई और युवाओं के सामने अवसरों की कमी ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है। जब युवाओं को लोकतंत्र में अपनी बात रखने का कोई सही मंच नहीं मिलता, तो वे व्यंग्य और सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं। 'सीजेपी' उसी संचित गुस्से का एक बड़ा डिजिटल विस्फोट है।
नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली से टूटा भरोसा
शशि थरूर ने नीट पेपर लीक विवाद को युवाओं के सब्र का बांध टूटने की सबसे बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि देश के लाखों छात्र अपने भविष्य को संवारने के लिए सालों तक दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं और उनके परिवार इस पढ़ाई के लिए कर्ज के जाल में डूब जाते हैं। लेकिन जब अंत में पूरी परीक्षा व्यवस्था ही भ्रष्टाचार और धांधली की भेंट चढ़ जाती है, तो यह छात्रों को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ देता है। इसी अव्यवस्था और भविष्य के धुंधलेपन के कारण आज की युवा पीढ़ी गहरे तनाव से गुजर रही है।
सोशल मीडिया पर पाबंदी और लोकतंत्र में असहमति की जगह
इस पूरे घटनाक्रम के बीच शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (ट्विटर) पर लगे कुछ प्रतिबंधों को भी गलत ठहराया। उनका कहना है कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में असहमति, रचनात्मक आलोचना और व्यंग्य को पूरी जगह मिलनी चाहिए। युवाओं की इस आवाज को दबाने के बजाय राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि नई पीढ़ी की यह नाराजगी केवल किसी एक सरकार से नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक ढांचे से है। हाल के क्षेत्रीय चुनावों का उदाहरण देते हुए उन्होंने इसे 'जेन-जी' (Gen-Z यानी आज के युवा) की जीत बताया, जो अब पारंपरिक राजनीति से ऊबकर नए रास्ते तलाश रहे हैं।
मुख्यधारा की राजनीति और विपक्ष के लिए बड़ी चेतावनी
शशि थरूर ने सभी मुख्यधारा के राजनीतिक दलों और विपक्ष को एक गंभीर सलाह दी है। उन्होंने कहा कि नेताओं को अब अपनी पुरानी शैली छोड़कर युवाओं की बेचैनी और उनकी आधुनिक भाषा को समझना होगा। अगर राजनीतिक दल युवाओं की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे और उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले समय में ऐसे डिजिटल आंदोलन और ज्यादा मजबूत होंगे। यह नई पीढ़ी का डिजिटल मूवमेंट भविष्य में देश के मतदान के रुख को पूरी तरह से बदलने की ताकत रखता है।
ममता की पार्टी में सब ठीक नहीं? हार के बाद पार्षदों ने छोड़ा पद
22 May, 2026 01:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के हाथों करारी हार मिलने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदरूनी हालात ठीक नहीं चल रहे हैं। पार्टी के भीतर मचे इस घमासान के संकेत उस समय साफ देखने को मिले, जब चुनाव के बाद आयोजित किए गए टीएमसी के पहले बड़े विरोध प्रदर्शन में विधायकों की संख्या बेहद कम रही। इसके साथ ही, टीएमसी के नियंत्रण वाली दो नगरपालिकाओं में पार्षदों द्वारा किए गए सामूहिक इस्तीफों ने पार्टी के भीतर एक बड़ी बगावत और राजनीतिक संकट की अटकलों को हवा दे दी है।
विरोध प्रदर्शन से गायब रहे आधे से ज्यादा टीएमसी विधायक
विधानसभा परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने आयोजित किए गए धरना प्रदर्शन में टीएमसी के 80 विधायकों में से केवल 36 विधायक ही शामिल हुए। यह प्रदर्शन राज्य की नई सरकार द्वारा की जा रही बुलडोजर कार्रवाई, चुनाव बाद हुई हिंसा और फुटपाथ दुकानदारों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के विरोध में था। इतनी बड़ी संख्या में विधायकों का न पहुंचना टीएमसी के लिए तब और चिंताजनक हो जाता है, जब वह राज्य में अपनी खोई हुई जमीनी पकड़ को दोबारा हासिल करने की कोशिश कर रही है। इससे पहले 19 मई को कालीघाट में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की अध्यक्षता में हुई बैठक से भी करीब 15 विधायक गायब रहे थे, जहां मौजूद कुछ विधायकों ने बंद कमरों की बैठकों को छोड़कर जनता के बीच जाने की वकालत की थी।
जहांगीर खान के मामले पर अभिषेक बनर्जी पर उठे सवाल
कालीघाट की बैठक में कोलकाता के दो और हावड़ा के एक विधायक ने एक ही गाड़ी में आकर अपनी एकजुटता दिखाई और पार्टी नेतृत्व के फैसलों पर सीधे सवाल खड़े किए। इन विधायकों ने फलता सीट से दिग्गज नेता जहांगीर खान के मतदान से ठीक दो दिन पहले चुनाव मैदान से हटने के फैसले पर नाराजगी जताई। उन्होंने पूछा कि इतने बड़े कदम के बाद भी जहांगीर खान के खिलाफ अब तक कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? चूंकि फलता विधानसभा क्षेत्र टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के तहत आता है, इसलिए इन बयानों को सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी पर एक राजनैतिक तंज के रूप में देखा जा रहा है।
कांचरापाड़ा और हलीशहर नगरपालिकाओं में पार्षदों की बड़ी बगावत
पार्टी को सबसे बड़ा झटका उत्तर 24 परगना जिले की कांचरापाड़ा और हलीशहर नगरपालिकाओं में लगा है, जहां पार्षदों ने सामूहिक रूप से अपने पद छोड़ दिए हैं। कांचरापाड़ा नगरपालिका में कुल 24 में से 15 पार्षदों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया है। टीएमसी सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही स्थानीय नेतृत्व के काम करने के तरीके और नागरिक सुविधाओं को लेकर पार्षदों के भीतर भारी असंतोष पनप रहा था, जो अब इस बड़े इस्तीफे के रूप में सबके सामने आया है।
भाजपा विधायक ने जारी की इस्तीफा देने वाले पार्षदों की लिस्ट
हलीशहर नगरपालिका में भी बगावत की यही तस्वीर देखने को मिली, जहां 23 में से 16 पार्षदों ने पार्षद राजू साहनी के नेतृत्व में एक आपात बैठक की और डिप्टी चेयरमैन की मौजूदगी में अपना सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा देने वालों में पांच महिला पार्षद भी शामिल हैं, हालांकि नगरपालिका के चेयरमैन शुभंकर घोष ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। इस बगावत के तुरंत बाद बिजपुर से बीजेपी विधायक सुदीप्त दास ने इस्तीफा देने वाले सभी 16 पार्षदों की सूची जारी की। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि इस राजनैतिक बदलाव से नगर की सरकारी सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी। इन सामूहिक इस्तीफों के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम हो गई है कि ये बागी पार्षद बहुत जल्द बीजेपी का दामन थाम सकते हैं, जबकि टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल पूरी तरह चुप्पी साध रखी है।
ममता बनर्जी की सियासी चिंता बढ़ी, अभिषेक के इलाके में TMC की पकड़ ढीली
22 May, 2026 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए एक बेहद चौंकाने वाली खबर आ रही है। कभी टीएमसी का अभेद्य किला माने जाने वाले फलता विधानसभा क्षेत्र में पार्टी को बहुत बड़ा झटका लगने की चर्चा तेज हो गई है। यह इलाका इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह डायमंड हार्बर लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, जहां से खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के कद्दावर नेता अभिषेक बनर्जी सांसद हैं। इस क्षेत्र में टीएमसी की ताकत का मुख्य आधार माने जाने वाले स्थानीय दिग्गज नेता जहांगीर खान के अचानक चुनावी मैदान छोड़ने से यहां के सारे राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
कुछ ही दिनों में पलट गई फलता की राजनीतिक तस्वीर
बीती 29 अप्रैल को जब इस क्षेत्र में दूसरे चरण का मतदान हुआ था, तब चारों तरफ टीएमसी का ही दबदबा और झंडे दिखाई दे रहे थे, लेकिन अब जमीनी हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। खबरों के मुताबिक, अब फलता के बाजारों और रास्तों पर विपक्षी दलों के झंडे और दफ्तर नजर आ रहे हैं, जबकि टीएमसी के कार्यकर्ता और होर्डिंग्स गायब से हो गए हैं। ताकतवर नेता जहांगीर खान भी चुनाव से हटने की घोषणा करने के बाद से इलाके में दिखाई नहीं दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें आखिरी बार मंगलवार को देखा गया था और गुरुवार को हुए पुनर्मतदान (दोबारा वोटिंग) के दौरान भी वे कहीं नजर नहीं आए।
अभिषेक बनर्जी के बेहद खास माने जाते थे जहांगीर खान
जहांगीर खान को सांसद अभिषेक बनर्जी का बेहद करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार माना जाता रहा है। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले लोकसभा चुनाव 2024 में उनके दम पर टीएमसी को इस क्षेत्र से 89 प्रतिशत से भी ज्यादा रिकॉर्ड वोट मिले थे। इतने मजबूत नेता के अचानक चुनाव से ठीक पहले पीछे हट जाने के बाद टीएमसी बैकफुट पर आ गई है, हालांकि पार्टी के बड़े नेताओं ने इसे जहांगीर खान का व्यक्तिगत फैसला बताते हुए मामले को शांत करने की कोशिश की है।
कड़ी सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण हुआ दोबारा मतदान
गुरुवार को फलता क्षेत्र के प्रभावित बूथों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी में दोबारा मतदान कराया गया, जिसमें 86 प्रतिशत से भी ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई। गनीमत यह रही कि इस बार मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। इससे पहले 29 अप्रैल को हुई वोटिंग के दौरान कई पोलिंग बूथों पर ईवीएम (EVM) में गड़बड़ी और धांधली की गंभीर शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद चुनाव आयोग ने यहां फिर से वोटिंग कराने का आदेश दिया था।
टीएमसी के मैदान छोड़ने से भाजपा और माकपा में सीधी टक्कर
जहांगीर खान के हटने के बाद फलता सीट पर टीएमसी की स्थिति बेहद कमजोर हो गई है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय से बदलकर आमने-सामने का हो गया है। अब राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा और माकपा (सीपीआईएम) के शंभूनाथ कुर्मी के बीच है। वहीं, कांग्रेस की तरफ से अब्दुर रज्जाक मोल्ला भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। भवानीपुर सीट पर मिली राजनीतिक चुनौती के बाद फलता में आया यह संकट ममता बनर्जी की पार्टी के लिए उनके अपने ही गढ़ में एक बहुत बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
PM मोदी एक्शन मोड में, विदेश दौरे से लौटते ही मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड सामने
22 May, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों (यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली) के सफल दौरे से लौटते ही सीधे काम में जुट गए हैं। दिल्ली में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की एक बेहद महत्वपूर्ण और लंबी बैठक हुई, जिसकी चर्चा राजनीतिक गलियारों में बहुत तेज है। इस बैठक में सीधे तौर पर मंत्रियों के कामकाज का ‘रिपोर्ट कार्ड’ सामने रख दिया गया। एनडीए-3 सरकार के दो साल पूरे होने से ठीक पहले हुई इस समीक्षा बैठक ने मंत्रिमंडल में बहुत जल्द बड़े फेरबदल की संभावनाओं को बढ़ा दिया है।
फाइलों की रफ्तार और जनता की शिकायतों के आधार पर बनी रैंकिंग
सूत्रों के अनुसार, करीब चार घंटे तक चली यह बैठक कोई सामान्य मुलाकात नहीं थी, बल्कि इसमें सभी मंत्रालयों के कामकाज का बारीकी से ऑडिट किया गया। बैठक में कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने मंत्रालयों के प्रदर्शन पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। मंत्रालयों की रैंकिंग तय करने के लिए मुख्य रूप से दो पैमाने बनाए गए थे—पहला यह कि सरकारी फाइलें कितनी तेजी से आगे बढ़ रही हैं, और दूसरा यह कि आम जनता की शिकायतों को सुलझाने में मंत्रालय कितना फुर्तीला है। इन्हीं मानकों के आधार पर सबसे अच्छा काम करने वाले ‘टॉप-5’ और सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले ‘बॉटम-5’ मंत्रालयों की एक लिस्ट बैठक में रखी गई।
खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों को प्रधानमंत्री की सख्त हिदायत
जिन मंत्रालयों का प्रदर्शन इस रैंकिंग में सबसे निचले पायदान पर रहा, उनके मंत्रियों को प्रधानमंत्री मोदी ने बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। निचले स्तर पर रहे मंत्रालयों को अपने काम करने के तरीके में तुरंत सुधार करने और जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि सभी फैसले बिना किसी देरी के और तेजी से लिए जाने चाहिए, काम की उत्पादकता बढ़ाई जानी चाहिए और सरकारी फाइलों को बिना किसी लालफीताशाही (अनावश्यक देरी) के तुरंत क्लियर किया जाना चाहिए।
दो साल पूरे होने पर कैबिनेट में बड़े फेरबदल की चर्चा तेज
आगामी 9 जून 2026 को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होने जा रहे हैं। सरकार की इस दूसरी वर्षगांठ से ठीक पहले सभी केंद्रीय मंत्रियों को दिल्ली में ही मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है, जिसने राजनैतिक हलचल को और बढ़ा दिया है। मंत्रालयों के इस रिपोर्ट कार्ड के बाद यह माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री जल्द ही अपनी टीम में बड़ा बदलाव कर सकते हैं। उम्मीद के मुताबिक काम न करने वाले मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है या उनके विभाग बदले जा सकते हैं, जबकि अच्छा काम करने वाले युवा चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
नियम ऐसे हों जो जनता की जिंदगी को आसान बनाएं
इस महत्वपूर्ण बैठक में कृषि, श्रम, सड़क परिवहन, विदेश और ऊर्जा सहित कई बड़े मंत्रालयों ने पिछले दो साल के कामकाज का ब्योरा दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों और बड़े अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार का काम लोगों की जिंदगी में बेवजह दखल देना नहीं, बल्कि जरूरत के समय उनकी मदद करना है। उन्होंने ‘ईज ऑफ लिविंग’ (आसान जीवन) पर जोर देते हुए कहा कि हर नए सुधार का आखिरी लक्ष्य आम नागरिक के जीवन को सरल बनाना होना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि ‘विकसित भारत 2047’ महज एक नारा नहीं, बल्कि देश के प्रति सरकार का अटूट संकल्प है।
राहुल गांधी के समर्थन में लगे नारे, तमिलनाडु का शपथ समारोह चर्चा में
22 May, 2026 11:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के मंत्रिमंडल विस्तार समारोह के दौरान एक बेहद दिलचस्प और सियासी वाकया सामने आया है। राजभवन (लोक भवन) में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कांग्रेस विधायक एस. राजेश कुमार ने मंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद मंच से ही राहुल गांधी और राजीव गांधी के समर्थन में नारे लगा दिए। इस पर तुरंत एक्शन लेते हुए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें बीच में ही टोका और याद दिलाया कि यह सब निर्धारित शपथ प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है।
शपथ पूरी होते ही गूंजे कांग्रेस नेताओं के नारे
समारोह में सबसे ज्यादा सुर्खियां किल्लियूर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक एस. राजेश कुमार ने बटोरीं। उन्होंने जैसे ही अपने पद और गोपनीयता की शपथ पूरी की, वैसे ही अचानक कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने मंच से कहा, “कामराज अमर रहें, भारत रत्न राजीव गांधी अमर रहें” और “जननेता राहुल गांधी जिंदाबाद।” इस पर राज्यपाल आर्लेकर ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए मुस्कुराकर कहा कि यह शपथ का हिस्सा नहीं है और उन्हें केवल निर्धारित पत्र पढ़ने की सलाह दी, जिसके बाद विधायक भी मुस्कुराते हुए हस्ताक्षर करने चले गए। उनके बाद टीवीके विधायक ए. विजय तमिलन पार्थिबन ने भी मंत्री बनने के बाद मुख्यमंत्री विजय की तारीफ में नारे लगाए।
तमिलनाडु में करीब 60 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस
इस नए मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही तमिलनाडु की राजनीति में एक नया इतिहास रच गया है। राज्य की सत्ता में कांग्रेस पार्टी की लगभग छह दशकों (60 साल) के लंबे इंतजार के बाद प्रत्यक्ष भागीदारी हुई है। तमिलनाडु में लंबे समय तक राज करने वाले द्रविड़ दलों (द्रमुक और अन्नाद्रमुक) का यह इतिहास रहा है कि वे चुनाव तो गठबंधन में लड़ते थे, लेकिन सहयोगियों को सरकार में शामिल नहीं करते थे। राज्य में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री एम. भक्तवत्सलम थे, जिन्होंने 1963 से 1967 तक शासन किया था, जिसके बाद 1967 में द्रमुक संस्थापक सी.एन. अन्नादुरई ने पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई थी।
बहुमत के जादुई आंकड़े और समर्थन के बदले मिली हिस्सेदारी
मुख्यमंत्री विजय की पार्टी टीवीके हालिया विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत के आंकड़े से कुछ सीटें पीछे रह गई थी। ऐसे में तमिलनाडु विधानसभा में 5 विधायकों वाली कांग्रेस का समर्थन सरकार चलाने के लिए बेहद जरूरी और अहम बन गया था। कांग्रेस ने सबसे पहले टीवीके को बिना शर्त समर्थन देने का एलान किया था और इसी के साथ द्रमुक (DMK) से अपना करीब दो दशक पुराना गठबंधन भी तोड़ लिया था। इसी राजनैतिक समर्थन के बदले मुख्यमंत्री विजय ने अपने 11 दिन पुराने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए दो कांग्रेस विधायकों और अन्य सहयोगियों समेत कुल 23 नए मंत्रियों को अपनी सरकार में शामिल किया है।
विजय के ‘सबसे भरोसेमंद’ श्रीनाथ कौन? कॉलेज दिनों से है खास रिश्ता
22 May, 2026 11:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय (थलापति विजय) के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान एक बेहद दिलचस्प नजारा देखने को मिला। राजभवन में जब राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर नए मंत्रियों को पद की शपथ दिला रहे थे, तब मंच पर आए एक चेहरे ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यह चेहरा फिल्मों में अपनी कॉमेडी से लोगों को हंसाने वाले अभिनेता श्रीनाथ का था। उन्हें देखकर टीवी स्क्रीन के सामने बैठे आम लोग और समारोह में मौजूद मेहमान हैरान रह गए कि फिल्मों का एक कॉमेडियन अचानक राजनेता बनकर मंत्री पद की शपथ कैसे ले रहा है। दरअसल, श्रीनाथ कोई साधारण राजनेता नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री विजय के कॉलेज के दिनों के सबसे पक्के दोस्त हैं।
सिनेमा के पर्दे से शुरू हुआ था दोनों का सफर
श्रीनाथ को भले ही तमिल सिनेमा में सिर्फ कॉमेडी किरदारों के लिए जाना जाता हो, लेकिन मुख्यमंत्री विजय के जीवन में उनका स्थान बेहद खास है। दोनों की दोस्ती कॉलेज के दिनों में शुरू हुई थी और जब विजय ने साल 1992 में महज 18 साल की उम्र में फिल्म ‘नालैया थीरपु’ से बतौर हीरो कदम रखा, तब भी श्रीनाथ उनके साथ थे। इस फिल्म में श्रीनाथ ने विजय के दोस्त की भूमिका निभाई थी। इसके बाद दोनों ने 'वेट्टईकरन' और 'भीमा' जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में एक साथ काम किया। श्रीनाथ ने अभिनय के साथ-साथ कुछ फिल्मों का निर्देशन भी किया है, लेकिन विजय के साथ उनकी अटूट दोस्ती हमेशा बनी रही।
चुनावी मैदान में डीएमके के कद्दावर मंत्री को चटाई धूल
थलापति विजय ने जब राजनीति में कदम रखा और अपनी पार्टी टीवीके बनाई, तो उन्होंने अपने 53 वर्षीय दोस्त श्रीनाथ पर पूरा भरोसा जताया। विजय ने श्रीनाथ को उनके गृह क्षेत्र 'थूथुकुडी' से विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारा, जिससे यह सीट अचानक वीआईपी सीट बन गई। श्रीनाथ ने अपने दोस्त के भरोसे को सही साबित करते हुए डीएमके सरकार की मौजूदा मंत्री गीताजीवा को एक कड़े मुकाबले में हरा दिया। श्रीनाथ को चुनाव में एक लाख से भी ज्यादा वोट मिले और उन्होंने डीएमके उम्मीदवार को लगभग 37 हजार वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त देकर सबको चौंका दिया।
कॉलेज कैंटीन की दोस्ती अब संभालेगी सरकार
चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने का इनाम श्रीनाथ को मंत्रिमंडल में शामिल करके दिया गया है। मुख्यमंत्री विजय ने अपने इस जिगरी दोस्त को राज्य के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाने वाला 'मत्स्य पालन मंत्रालय' (फिशरीज) की जिम्मेदारी सौंपी है। एक इंटरव्यू में श्रीनाथ ने पुरानी यादें ताजा करते हुए बताया था कि विजय से उनकी पहली मुलाकात कॉलेज की कैंटीन में हुई थी। कॉलेज के दिनों में विजय, श्रीनाथ और अभिनेता संजीव की एक मशहूर तिकड़ी हुआ करती थी, जिसने पहले फिल्मों में धूम मचाई और अब राजनीति में एंट्री के बाद यह अटूट दोस्ती तमिलनाडु सरकार को चलाने में अपनी अहम भूमिका निभाएगी।
राज्यसभा की 24 सीटों के चुनाव का शेड्यूल जारी, 18 जून को मतदान
22 May, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने देश में राज्यसभा चुनाव की तारीखों का बड़ा एलान कर दिया है। आयोग की तरफ से जारी किए गए आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक, देश के अलग-अलग राज्यों में खाली हो रही राज्यसभा की 24 सीटों को भरने के लिए आगामी 18 जून को वोट डाले जाएंगे। चुनाव आयोग ने यह साफ किया है कि इन सीटों पर मतदान की प्रक्रिया सुबह 9 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलेगी, जिसके बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे।
जून के पहले हफ्ते से शुरू होगी प्रक्रिया
चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन के अनुसार, इस चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत 1 जून को अधिकारिक अधिसूचना जारी होने के साथ हो जाएगी। इसके बाद उम्मीदवारों के पास पर्चा दाखिल करने का समय होगा। 9 जून को जमा किए गए सभी नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) की जाएगी। अगर कोई उम्मीदवार अपना नाम वापस लेना चाहता है, तो उसके लिए 11 जून की तारीख तय की गई है। इन सभी प्रक्रियाओं के पूरे होने के बाद 18 जून को अंतिम रूप से मतदान कराया जाएगा।
देश के 10 राज्यों में खाली हो रही हैं सीटें
यह चुनाव देश के 10 अलग-अलग राज्यों की खाली सीटों पर होने जा रहा है। चुनाव आयोग ने अपने बयान में बताया कि जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, वहां के मौजूदा राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 21 जून से 19 जुलाई 2026 के बीच अलग-अलग तारीखों पर समाप्त हो रहा है। सीटों के हिसाब से देखें तो आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में सबसे ज्यादा चार-चार सीटों पर चुनाव होंगे। इसके अलावा मध्य प्रदेश और राजस्थान में तीन-तीन सीटों पर, झारखंड में दो सीटों पर और मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश व मिजोरम में एक-एक सीट के लिए वोट डाले जाएंगे।
खरगे और दिग्विजय सिंह सहित कई दिग्गजों का कार्यकाल खत्म
इस बार जिन 24 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें देश की राजनीति के कई बड़े और दिग्गज नाम शामिल हैं। इन नेताओं में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, देश के पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम प्रमुख है। इनके अलावा केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन और रवनीत सिंह बिट्टू का भी कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनकी खाली हो रही सीटों को भरने के लिए अब नए सिरे से चुनाव कराया जा रहा है।
स्टालिन कैबिनेट का विस्तार आज, IUML-VCK नेताओं को मंत्री पद की जिम्मेदारी
22 May, 2026 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति से आज एक बड़ी खबर आ रही है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय अपनी सरकार के मंत्रिमंडल का एक बार फिर से विस्तार करने जा रहे हैं। अपनी टीम को और मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने कैबिनेट में दो नए नेताओं को शामिल करने का फैसला किया है। इस नए बदलाव में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेता एएम शाहजहां और वीसीके (VCK) के नेता वन्नी अरासु को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
नए मंत्रियों का परिचय और विधानसभा क्षेत्र
सरकार में शामिल हो रहे दोनों ही नेता जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हैं। एएम शाहजहां पापनाशम विधानसभा सीट से विधायक हैं, वहीं वन्नी अरासु टिंडीवनम सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन दोनों नेताओं को सरकार में शामिल करके मुख्यमंत्री ने अपने सहयोगी दलों को बड़ा मौका दिया है।
आज सुबह होगा भव्य शपथ ग्रहण समारोह
इन दोनों नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आज शुक्रवार सुबह 9:30 बजे चेन्नई के लोक भवन में एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया है, जहां दोनों नेता अपने पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। इस समारोह में सरकार और गठबंधन के कई बड़े नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
कैबिनेट में बढ़ेगा सहयोगियों का दबदबा
तमिलनाडु सरकार में यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है। हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार में 23 मंत्रियों को जगह मिली थी, जिसके जरिए करीब 59 साल बाद कांग्रेस पार्टी की भी राज्य सरकार में वापसी हुई थी। अब इन दो नए मंत्रियों के आने से मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय का मंत्रिमंडल और भी बड़ा और मजबूत हो जाएगा, जिससे सरकार को चलाने में सहयोगियों की भूमिका और बढ़ जाएगी।
उत्तर प्रदेश के 11,672 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की गडकरी ने की समीक्षा
21 May, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मीडिया और सोशल मीडिया से मिले फीडबैक को ध्यान में रखते हुए आज नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक में उन्होंने उत्तर प्रदेश में 11,672 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता और उनके रखरखाव (मेंटेनेंस) के काम की प्रगति की समीक्षा की। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टमटा और हर्ष मल्होत्रा के साथ-साथ सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय व राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के वरिष्ठ अधिकारी और परियोजनाओं से जुड़े ठेकेदार (संवेदक) भी मौजूद रहे।
गुणवत्ता मानकों और नई तकनीकों पर दिया जोर
समीक्षा के दौरान नितिन गडकरी ने मजबूत और टिकाऊ राजमार्ग बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को तैयार करने के लिए समय पर काम पूरा करने की जरूरत बताई। उन्होंने निर्माण में गुणवत्ता के कड़े नियमों का पालन करने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के महत्व पर विशेष जोर दिया। केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि देश में कनेक्टिविटी बढ़ाने, आर्थिक विकास को रफ्तार देने और आम यात्रियों के सफर को आरामदायक व सुगम बनाने के लिए सड़कों के मजबूत नेटवर्क का होना बेहद जरूरी है।
मानसून को लेकर प्रभावी रिस्पांस सिस्टम बनाने के निर्देश
आने वाले मानसून के सीजन को देखते हुए गडकरी ने अधिकारियों को विशेष हिदायत दी। उन्होंने निर्देश दिया कि पूरे सड़क नेटवर्क में सुरक्षा और मजबूती बनाए रखने के लिए अभी से मानसून की व्यापक तैयारियां सुनिश्चित की जाएं। इसके लिए उन्होंने एक प्रभावी प्रत्युत्तर प्रणाली (रिस्पांस सिस्टम) स्थापित करने को कहा, ताकि किसी भी समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके। साथ ही, उन्होंने सड़कों को नुकसान से बचाने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पहले से ही बचाव के उपाय लागू करने के आदेश दिए।
ममता बनर्जी को अपने गढ़ में झटका, भवानीपुर के बूथ पर सिर्फ 51 वोट मिले
21 May, 2026 04:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में सबसे बड़ा उलटफेर भवानीपुर विधानसभा सीट पर देखने को मिला है। अपनी आक्रामक चुनावी रैलियों के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने दावा किया था कि अगर सिर्फ एक वोटर भी बचा रहा, तो भी वह भवानीपुर से जीतेंगी। उन्होंने इस सीट को अपनी मां जैसा बताया था, लेकिन चुनाव आयोग द्वारा जारी बूथ स्तर के आंकड़ों ने ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार और अब बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके अपने ही गढ़ में 15,105 वोटों के अंतर से करारी शिकस्त दी है। आंकड़ों का विश्लेषण साफ दर्शाता है कि साल 2021 के उपचुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद, 2026 में ममता बनर्जी के घरेलू समर्थन में भारी गिरावट आई है।
ममता बनर्जी के खुद के पोलिंग बूथ पर पलटा पासा
ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा झटका हरीश मुखर्जी रोड पर स्थित मित्रा इंस्टीट्यूशन पोलिंग स्टेशन से लगा, जहां वह खुद अपना वोट डालती हैं। साल 2021 के उपचुनाव में इस बूथ पर ममता बनर्जी को 36 वोटों की बढ़त मिली थी, जहां उन्हें 321 वोट और बीजेपी की प्रियंका टिबरेवाल को 285 वोट मिले थे। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में इस बूथ पर पहली बार दरार देखने को मिली, जब भाजपा ने टीएमसी पर 36 वोटों की लीड बना ली। साल 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने यहां ममता बनर्जी को पूरी तरह पछाड़ दिया और इस बूथ से शुभेंदु को 238 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को महज 51 वोटों से संतोष करना पड़ा।
बूथ स्तर पर पूरी तरह ढह गई टीएमसी
भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र के भीतर बूथ स्तर पर टीएमसी का किला पूरी तरह ढह गया। भवानीपुर के कुल 267 पोलिंग बूथों में से शुभेंदु अधिकारी ने 206 बूथों पर शानदार बढ़त हासिल की, जबकि ममता बनर्जी सिर्फ 60 बूथों तक सिमट कर रह गईं। इस विधानसभा के 24 बूथ ऐसे रहे जहां ममता बनर्जी को 50 वोट भी नसीब नहीं हुए। हालांकि शुभेंदु अधिकारी भी 38 बूथों पर 50 से कम वोट पर अटके, लेकिन उन्होंने बाकी बूथों पर भारी अंतर से इसकी भरपाई कर ली। सरकारी प्रेस परिसर में स्थित बूथ नंबर 227 पर सबसे चौंकाने वाला उलटफेर देखने को मिला, जहां 2021 में ममता को 326 वोट मिले थे, लेकिन इस बार पासा ऐसा पलटा कि ममता को यहां सिर्फ 12 वोट मिले और शुभेंदु अधिकारी को 287 वोट प्राप्त हुए।
8 वार्डों में से केवल एक वार्ड बचा पाईं ममता
रिपोर्ट के मुताबिक, भवानीपुर विधानसभा सीट कोलकाता नगर निगम के 8 नगर पालिका वार्डों को मिलाकर बनी है। साल 2021 के विधानसभा उपचुनाव में ममता बनर्जी ने इन सभी 8 वार्डों में क्लीन स्वीप किया था। इसके बाद लोकसभा चुनाव में टीएमसी की बढ़त घटकर सिर्फ 3 वार्डों में रह गई थी। साल 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी के तूफान के आगे ममता बनर्जी केवल वार्ड नंबर 77 को ही बचाने में कामयाब रहीं, जबकि बाकी के सभी 7 वार्डों में बीजेपी ने एकतरफा जीत दर्ज की।
ममता बनर्जी ने वोटर लिस्ट से नाम काटने का लगाया आरोप
इस करारी हार के बाद ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एसआईआर के नाम पर उनके निर्वाचन क्षेत्र से जानबूझकर 55,000 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए। उनके मुताबिक, हटाए गए इन मतदाताओं में से करीब 23 फीसदी मुस्लिम समुदाय के लोग थे, जो पारंपरिक रूप से टीएमसी के सबसे मजबूत और वफादार वोटर माने जाते रहे हैं। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो भवानीपुर का वार्ड नंबर 77 एक मुस्लिम बहुल इलाका है और यही एकमात्र ऐसा वार्ड रहा जहां इस चुनाव में ममता बनर्जी को बढ़त हासिल हो सकी।
X अकाउंट ब्लॉक होने के बाद भी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की लोकप्रियता बढ़ी, Instagram पर करोड़ों फॉलोअर्स
21 May, 2026 04:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश के सियासी गलियारों और सोशल मीडिया पर इस समय महज छह दिन पहले बनी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) की जबरदस्त चर्चा है। इस नई पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर गुरुवार दोपहर 2 बजे तक 1.34 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं, जो देश की किसी भी अन्य राजनीतिक पार्टी के मुकाबले सबसे अधिक हैं। तुलना के तौर पर देखें तो इंस्टाग्राम पर कांग्रेस के 1.33 करोड़, भाजपा के 87 लाख, आम आदमी पार्टी के 87 लाख और सीपीआई(एम) के 2.35 लाख फॉलोअर्स हैं। हालांकि, एक तरफ जहां इंस्टाग्राम पर पार्टी तेजी से लोकप्रिय हो रही है, वहीं दूसरी तरफ गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे इसका 'X' (ट्विटर) अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया, जिस पर 1.93 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे।
सीजेआई सूर्यकांत के बयान के विरोध में हुआ पार्टी का गठन
इस अनोखी पार्टी के गठन की कहानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत के एक विवादास्पद बयान से जुड़ी है। दरअसल, 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों (पैरासाइट्स) से कर दी थी, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर सवाल उठाते हैं। इस बयान के विरोध में अगले ही दिन यानी 16 मई को इस डिजिटल पार्टी की नींव रखी गई। हालांकि, विवाद बढ़ता देख सीजेआई सूर्यकांत ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनकी यह टिप्पणी केवल उन लोगों के लिए थी जो फर्जी और नकली डिग्रियों के सहारे वकालत, मीडिया या अन्य सम्मानित पेशों में घुस आए हैं।
अनोखा लोगो, नारा और सदस्यता की चार अनूठी शर्तें
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके हैं, जो अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन में मास्टर्स कर रहे हैं और पहले आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम में वॉलंटियर रह चुके हैं। अभिजीत ने पार्टी का लोगो जारी करते हुए इसका नारा ‘सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक, लेजी’ रखा है। इस पार्टी का सदस्य बनने के लिए चार मुख्य योग्यताएं तय की गई हैं, जिनमें पहली बेरोजगारी, दूसरी आलसी होना (यानी डले रहो, पड़े रहो), तीसरी ऑनलाइन रहने की लत और चौथी प्रोफेशनली अपनी भड़ास निकालने की क्षमता होना शामिल है। युवाओं के बीच राजनीतिक जागरूकता फैलाने के लिए दिल्ली में कुछ समर्थक कॉकरोच की ड्रेस पहनकर यमुना किनारे सफाई अभियान चलाते हुए भी नजर आए।
सीजेपी के मैनिफेस्टो में किए गए 5 बड़े और कड़े वादे
पार्टी ने अपना एक चुनावी घोषणापत्र (मैनिफेस्टो) भी जारी किया है, जिसमें बेहद कड़े और अलग वादे किए गए हैं। मैनिफेस्टो के मुताबिक, अगर सीजेपी सत्ता में आती है तो रिटायरमेंट के बाद किसी भी सीजेआई को राज्यसभा जाने का इनाम नहीं मिलेगा। इसके अलावा, महिलाओं को 33% के बजाय कैबिनेट और संसद में 50% आरक्षण दिया जाएगा। किसी वैध वोट को डिलीट करने पर मुख्य चुनाव आयुक्त को यूएपीए (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया जाएगा। मीडिया जगत में सुधार के लिए अंबानी और अडाणी के मीडिया संस्थानों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे और गोदी मीडिया एंकरों के बैंक खातों की जांच होगी। आखिरी वादे के तौर पर, दलबदल करने वाले सांसदों और विधायकों के चुनाव लड़ने पर रोक लगेगी और वे अगले 20 साल तक किसी सरकारी पद पर नहीं रह सकेंगे।
असम विधानसभा अध्यक्ष पद पर फिर काबिज हुए रंजीत कुमार दास, भाजपा में खुशी की लहर
21 May, 2026 03:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिसपुर: असम विधानसभा को गुरुवार को अपना नया अध्यक्ष (स्पीकर) मिल गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ और चार बार के विधायक रंजीत कुमार दास को सर्वसम्मति से 16वीं असम विधानसभा का अध्यक्ष चुन लिया गया है। प्रोटेम स्पीकर चंद्र मोहन पटवारी ने सदन में इसकी आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि रंजीत कुमार दास के समर्थन में कुल तीन नामांकन दाखिल किए गए थे, जबकि उनके खिलाफ किसी भी अन्य विधायक ने पर्चा दर्ज नहीं कराया। इसके बाद उन्हें निर्विरोध विधानसभा अध्यक्ष घोषित कर दिया गया।
रंजीत कुमार दास को दूसरी बार मिली स्पीकर पद की जिम्मेदारी
यह दूसरा मौका है जब रंजीत कुमार दास असम विधानसभा के अध्यक्ष पद की कमान संभालेंगे। इससे पहले साल 2016 में जब असम में पहली बार भाजपा की सरकार बनी थी, तब भी उन्हें ही स्पीकर पद की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उस दौरान उन्होंने राज्य में पहली बार सत्ता में आई भाजपा सरकार के तहत विधानसभा की कार्यवाही का कुशलतापूर्वक संचालन किया था।
भवानीपुर-सोरभोग सीट से लगातार चौथी बार जीता चुनाव
रंजीत कुमार दास असम की भवानीपुर-सोरभोग विधानसभा सीट से प्रतिनिधित्व करते हैं। वह साल 2011 से लगातार चार बार विधानसभा चुनाव जीतकर सदन पहुंच रहे हैं। उन्होंने असम की राजनीति में पार्टी संगठन और सरकार, दोनों ही स्तरों पर बेहद महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं और अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है।
मुख्यमंत्री सरमा के पिछले कार्यकाल में रहे थे कैबिनेट मंत्री
रंजीत कुमार दास मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के पहले कार्यकाल (साल 2021 से 2026 तक) में कैबिनेट मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने भाजपा की असम प्रदेश इकाई के अध्यक्ष के तौर पर भी लंबे समय तक पार्टी संगठन को मजबूत करने का काम किया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उन्हें दोबारा विधानसभा अध्यक्ष चुना जाना, भाजपा नेतृत्व और संगठन में उनके लंबे कूटनीतिक व विधायी अनुभव पर मुहर लगाता है।
तमिलनाडु शपथ समारोह में सियासी रंग, विधायक ने कहा ‘राहुल जिंदाबाद’, गवर्नर ने रोका
21 May, 2026 03:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय की कैबिनेट का विस्तार हो गया है, जिसमें 23 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली है। इस मंत्रिमंडल विस्तार में दो कांग्रेस विधायक भी शामिल हैं। हालांकि, गुरुवार को राजभवन में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह के दौरान दो बड़े विवाद सामने आ गए। पहला विवाद एक कांग्रेसी विधायक द्वारा शपथ के दौरान लगाए गए राजनीतिक नारों को लेकर हुआ, जिस पर राज्यपाल ने तुरंत आपत्ति जताई। वहीं, दूसरा विवाद कार्यक्रम के दौरान तमिल राज्य गीत बजाने के क्रम को बदलने को लेकर खड़ा हुआ, जिसने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।
शपथ के दौरान कांग्रेसी विधायक ने लगाए नारे, राज्यपाल ने टोका
किलियूर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक दल के नेता एस राजेश कुमार ने जब मंत्री पद की शपथ ली, तो उन्होंने निर्धारित शब्दों के साथ 'कामराज अमर रहें', 'भारत रत्न राजीव गांधी अमर रहें' और 'जननायक राहुल गांधी जिंदाबाद' के नारे लगा दिए। इस पर वहां मौजूद राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें बीच में ही टोक दिया। राज्यपाल ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह आपकी शपथ का हिस्सा नहीं है। राज्यपाल के टोकने के बाद राजेश कुमार भी मुस्कुराए और चुपचाप शपथ दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए आगे बढ़ गए।
तमिल राज्य गीत को सबसे आखिरी में बजाने पर बढ़ा विवाद
समारोह के दौरान दूसरा विवाद 'तमिल थाई वाझ्थु' (तमिलनाडु का राज्य गीत) को सबसे आखिर में बजाने को लेकर हुआ। राज्य की पुरानी परंपरा के मुताबिक सरकारी कार्यक्रमों में यह गीत हमेशा सबसे पहले बजाया जाता रहा है, लेकिन इस बार क्रम बदल दिया गया। समारोह की शुरुआत सबसे पहले राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' और फिर राष्ट्रगान 'जन गण मन' के साथ हुई, जबकि तमिल राज्य गीत को सबसे अंत में जगह मिली। इससे पहले 10 मई को जब विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब भी यही क्रम रखा गया था, जिस पर विपक्ष और सहयोगी दलों ने भारी नाराजगी जताई थी। तब विवाद बढ़ने पर विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने आश्वासन दिया था कि भविष्य में तमिल गान पहले बजाया जाएगा और इस बदलाव के पीछे केंद्र सरकार के एक सर्कुलर का हवाला दिया था।
तमिलनाडु सरकार में 59 साल बाद शामिल हुई कांग्रेस
इस कैबिनेट विस्तार के साथ ही कांग्रेस पार्टी पूरे 59 साल बाद तमिलनाडु सरकार का हिस्सा बनी है। इससे पहले साल 1952 से 1967 तक तमिलनाडु (जिसे तब मद्रास राज्य कहा जाता था) में कांग्रेस की सरकार रही थी, जिसके तहत सी. राजगोपालाचारी, के. कामराज और एम. भक्तवत्सलम मुख्यमंत्री रहे थे। साल 1967 में डीएमके के सत्ता में आने के बाद से कांग्रेस ने राज्य में डीएमके और एआईएडीएमके दोनों के साथ गठबंधन तो किए, लेकिन कभी सरकार में शामिल नहीं हुई थी।
मुख्यमंत्री विजय को भी शपथ के दौरान राज्यपाल ने दी थी हिदायत
यह पहली बार नहीं है जब इस सरकार के शपथ ग्रहण में राज्यपाल ने किसी को टोका हो। इससे पहले 10 मई को जब अभिनेता से नेता बने विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब वे भी शपथ पत्र की तय लाइनों के अलावा अपनी तरफ से कुछ और बातें बोलने लगे थे। उस समय भी राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें रोकते हुए सिर्फ तय शब्दों को ही पढ़ने की हिदायत दी थी। विजय ने अपनी शपथ में संविधान के प्रति निष्ठा और देश की अखंडता की बात करने के साथ ही यह भी जोड़ दिया था कि वे किसी से डरेंगे नहीं और न ही कोई एकतरफा आदेश मानेंगे, जिस पर राज्यपाल ने उन्हें टोक दिया था।
प्रशांत किशोर का बड़ा फैसला, अगले चुनाव तक आश्रम में बिताएंगे समय
21 May, 2026 12:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: जन सुराज पार्टी के मुखिया और जाने-माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने आगामी विधानसभा चुनावों तक एक आश्रम में शिफ्ट होने का एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा फैसला किया है। बुधवार को उन्होंने पटना के बाहरी इलाके में स्थित एक आश्रम में शरण ले ली और अब वे यहीं रहकर अपनी पार्टी की तमाम राजनीतिक गतिविधियों का संचालन करेंगे। प्रशांत किशोर का कहना है कि जब तक उनकी पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी मजबूत जगह नहीं बना लेती, तब तक वे इसी आश्रम को अपना ठिकाना बनाए रखेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे मंगलवार की रात को ही गुपचुप तरीके से पटना स्थित अपने निजी आवास से सामान समेटकर निकल गए थे।
'बिहार नवनिर्माण आश्रम' होगा नया राजनीतिक ठिकाना
आश्रम में पूरी तरह शिफ्ट होने के बाद प्रशांत किशोर ने मीडिया से खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि कल रात वे पटना के उस घर को छोड़ चुके हैं जहां वे अब तक रहा करते थे। उन्होंने अपने नए पते का खुलासा करते हुए कहा कि अब उनका नया ठिकाना आईआईटी (IIT) पटना के पास स्थित ‘बिहार नवनिर्माण आश्रम’ होगा। प्रशांत किशोर ने संकल्प लेते हुए कहा कि जब तक बिहार का अगला विधानसभा चुनाव संपन्न नहीं हो जाता, तब तक वे इसी साधारण आश्रम में ही जीवन बिताएंगे। उन्हें पूरा भरोसा है कि जन सुराज पार्टी इस बार बिहार की सियासत में अपनी गहरी छाप छोड़ने में जरूर कामयाब होगी।
पीएम मोदी, नीतीश और लालू के बहकावे में न आने की अपील
जनता को संदेश देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के लोगों को इस बार मतदान करते समय किसी नेता के चेहरे को देखने के बजाय अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के बारे में जरूर सोचना चाहिए। उन्होंने बिहार के मतदाताओं को आगाह किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार या लालू प्रसाद यादव जैसे कद्दावर नेताओं के लोकलुभावन बहकावे में आने से बचें। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भारी सैन्य तनाव का जिक्र करते हुए आर्थिक मंदी की चेतावनी भी दी। उन्होंने दावा किया कि इस अंतरराष्ट्रीय टकराव की वजह से आने वाले दिनों में देश में ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और किसानों के लिए खाद की भारी किल्लत पैदा हो सकती है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के 25 एकड़ के बंगले पर उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्य सरकार पर सरकारी धन की फिजूलखर्ची को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बिहार आज भी देश के सबसे पिछड़े और गरीब राज्यों की सूची में शामिल है, लेकिन यहां के हुक्मरान जमकर सरकारी पैसे की बर्बादी कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य के मुख्यमंत्री खुद 25 एकड़ के आलीशान सरकारी आवास में ठाट-बाट से रहते हैं, जिसके रखरखाव में जनता के टैक्स का करोड़ों रुपया पानी की तरह बहाया जा रहा है। उन्होंने यहां तक दावा किया कि इस बंगले को और ज्यादा बड़ा और आधुनिक बनाने की तैयारी चल रही है। गौरतलब है कि प्रशांत किशोर और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बीच का यह राजनीतिक विवाद कोई नया नहीं है, इससे पहले भी दोनों नेता एक-दूसरे पर कई गंभीर आरोप लगा चुके हैं।
तमिलनाडु में मंत्रिमंडल विस्तार, TVK-कांग्रेस को जगह, सहयोगी दलों को झटका
21 May, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: तमिलनाडु की सियासत में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस नए मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री विजय की पार्टी 'टीवीके' के 21 विधायकों और उनकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस के 2 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली है। हालांकि, सरकार के बहुमत के लिए बेहद जरूरी माने जाने वाले दो अन्य सहयोगी दल, आईयूएमएल (IUML) और वीसीके (VCK) फिलहाल इस शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा नहीं बने हैं। इन दोनों दलों के पास विधानसभा में 2-2 विधायक हैं और इनके लिए कैबिनेट में एक-एक सीट खाली रखी गई है, क्योंकि इन्होंने अभी तक मंत्रियों के नामों का फैसला नहीं किया है। इन्हें अगले चरण में शामिल किया जाएगा।
गठबंधन के साथियों को सरकार में आने का खुला न्यौता
टीवीके पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लगातार अपने सहयोगी दलों जैसे वीसीके, सीपीआई, सीपीएम और आईयूएमएल को सरकार में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित कर रहा है। ये दल वर्तमान में सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं। राज्य के लोक निर्माण और खेल मंत्री आधव अर्जुन ने साफ किया कि सभी सहयोगियों को साथ लेकर चलना मुख्यमंत्री विजय का एक बड़ा सपना है। मुख्यमंत्री विजय ने बीते 10 मई को 9 मंत्रियों के साथ सरकार की कमान संभाली थी। राज्य के नियमों के मुताबिक कैबिनेट में अधिकतम 35 मंत्री हो सकते हैं और अब 23 नए मंत्रियों के जुड़ने से कुल संख्या 32 हो गई है, यानी सहयोगी दलों के लिए अभी भी 3 पद रिक्त हैं।
करीब छह दशकों के बाद सत्ता के गलियारे में कांग्रेस की वापसी
इस पूरे कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सुर्खी कांग्रेस पार्टी का सरकार में शामिल होना है। कांग्रेस के दो विधायक, राजेश कुमार और तिरु पी. विश्वनाथन ने नए मंत्रियों के रूप में शपथ ली है। तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में लगभग छह दशक (59 साल) के लंबे इंतजार के बाद ऐसा हो रहा है जब कांग्रेस राज्य की सत्ताधारी सरकार का हिस्सा बनी है। इससे पहले साल 1967 में एम. भक्तवत्सलम के नेतृत्व में राज्य में कांग्रेस की आखिरी सरकार चली थी।
साल 1967 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनावों में द्रविड़ दिग्गज सी.एन. अन्नादुरई के नेतृत्व वाली डीएमके (DMK) ने कांग्रेस को करारी शिकस्त दी थी। उस ऐतिहासिक चुनाव के बाद से लेकर अब तक कांग्रेस कभी भी तमिलनाडु की किसी सरकार में शामिल नहीं हो सकी थी। अब मुख्यमंत्री विजय के मंत्रिमंडल का हिस्सा बनकर पार्टी ने एक बार फिर राज्य की सत्ता में अपनी मजबूत और ऐतिहासिक वापसी दर्ज कराई है।
जबलपुर में NCC कैडेट्स पर गर्मी की मार, 31 की तबीयत बिगड़ने से मचा हड़कंप
हनुमानताल में ई-रिक्शा हादसे के बाद बवाल, पुलिस पहुंची मौके पर
युवक की संदिग्ध हालत में मौत, हाथ की नस कटी मिलने से बढ़ी आशंका
अकाली नेता के बेटे पर हमला करने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार, मुंबई पुलिस ने 2 को दबोचा
सीमा सुरक्षा में बड़ा बदलाव, अमित शाह ने की हाईटेक बॉर्डर प्रोजेक्ट की घोषणा
ममता की पार्टी में सब ठीक नहीं? हार के बाद पार्षदों ने छोड़ा पद
भारत-इटली संबंध होंगे और मजबूत, PM मोदी ने की स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा
बंगाल विजय से BJP उत्साहित, पंजाब में चुनावी अभियान की तैयारी तेज
8th Pay Commission: मिनिमम बेसिक पे 68,000 पार, फिटमेंट फैक्टर से मिल सकती है बढ़त
