छत्तीसगढ़
भीषण आग से फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी, कई मजदूरों के अंदर होने की आशंका
13 Jun, 2026 01:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र से एक बड़ी दुर्घटना की खबर सामने आई है। यहाँ स्थित एक डामर बनाने वाली फैक्ट्री में शनिवार (13 जून) को अचानक भीषण आग लग गई। इस भयावह हादसे के बाद से पूरे औद्योगिक इलाके में अफरा-तफरी और हड़कंप का माहौल है। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां और स्थानीय प्रशासन तुरंत मौके पर पहुँचे। आग इतनी विकराल है कि उसे बुझाने के प्रयास लगातार जारी हैं, वहीं फैक्ट्री के भीतर कुछ कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका भी जताई जा रही है।
कैसे हुआ यह हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों और प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह हादसा उरला स्थित 'पोरवाल ऑयल फैक्ट्री' में घटित हुआ। इस प्लांट में पुराने टायरों को बेहद उच्च तापमान पर पिघलाकर और जलाकर डामर (कोलतार) तैयार करने का काम किया जाता है। शनिवार को काम के दौरान अचानक एक यूनिट ने आग पकड़ ली, जो देखते ही देखते पूरी फैक्ट्री में फैल गई। आग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आसमान में काले धुएं का एक विशाल गुबार उठ खड़ा हुआ, जिसे कई किलोमीटर दूर से भी साफ देखा जा सकता था।
राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी
राहत की बात यह है कि अब तक इस घटना में किसी भी श्रमिक या कर्मचारी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, कुछ मजदूरों के अंदर फंसे होने की खबरों को देखते हुए उरला थाने की पुलिस टीम और फायर ब्रिगेड के जवान युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं।
प्रशासनिक अधिकारी फैक्ट्री प्रबंधन के सहयोग से वहां काम करने वाले कर्मचारियों की सूची (अटेंडेंस लिस्ट) तैयार कर रहे हैं, ताकि शिफ्ट में मौजूद सभी लोगों का मिलान किया जा सके। इसके साथ ही अगर कोई लापता है, तो उसकी तलाश के लिए खोजी अभियान चलाया जा रहा है। प्राथमिकता सबसे पहले आग पर पूरी तरह काबू पाने और परिसर को सुरक्षित करने की है।
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी भर्ती, इस तारीख तक भर सकेंगे फॉर्म
13 Jun, 2026 11:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर: छत्तीसगढ़ में सरकारी सेवा का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) ने ओटी टेक्नीशियन के रिक्त 15 पदों को भरने के लिए आधिकारिक तौर पर आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह नियुक्तियां सीधी भर्ती के माध्यम से बस्तर और सरगुजा संभाग के लिए की जा रही हैं। इच्छुक उम्मीदवार अपनी पात्रता जांच कर निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।
जरूरी तारीखें और समय-सीमा
भर्ती की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संपन्न होगी। आवेदन से संबंधित मुख्य तिथियां इस प्रकार हैं:
आवेदन की शुरुआत: प्रक्रिया 10 जून 2026 से प्रारंभ हो चुकी है।
अंतिम तिथि: उम्मीदवार 3 जुलाई 2026 (शाम 5 बजे तक) अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।
त्रुटि सुधार: यदि फॉर्म भरते समय कोई गलती हो जाती है, तो 4 से 6 जुलाई 2026 के बीच उसमें सुधार किया जा सकता है।
प्रवेश पत्र: परीक्षा के एडमिट कार्ड 24 अगस्त 2026 को जारी किए जाएंगे।
परीक्षा का कार्यक्रम
व्यापम ने लिखित परीक्षा के लिए राजधानी रायपुर को केंद्र बनाया है:
परीक्षा की तिथि: 30 अगस्त 2026 (रविवार)।
समय: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक।
केंद्र: भर्ती परीक्षा केवल रायपुर जिला मुख्यालय पर आयोजित की जाएगी।
कौन कर सकता है आवेदन? (पात्रता एवं योग्यता)
इस पद के लिए शैक्षणिक और आयु संबंधी शर्तें निम्नानुसार हैं:
स्थानीय निवासी: आवेदक का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना अनिवार्य है।
शैक्षणिक योग्यता: अभ्यर्थी ने 12वीं की परीक्षा विज्ञान विषय (जीव विज्ञान, भौतिकी और रसायन शास्त्र) के साथ उत्तीर्ण की हो।
तकनीकी कोर्स: किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से ओटी टेक्नीशियन या एनेस्थेसिया टेक्नीशियन का कोर्स पूरा होना चाहिए।
पंजीयन: छत्तीसगढ़ पैरामेडिकल काउंसिल में जीवित पंजीयन होना आवश्यक है।
आयु सीमा: आवेदक की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और अधिकतम 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए (आरक्षित वर्ग को नियमानुसार छूट दी जाएगी)।
आवेदन शुल्क और आधिकारिक वेबसाइट
विभिन्न वर्गों के लिए परीक्षा शुल्क का निर्धारण इस प्रकार किया गया है:
सामान्य वर्ग: 350 रुपये
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 250 रुपये
SC/ST एवं दिव्यांग: 200 रुपये
भर्ती से संबंधित विस्तृत विज्ञापन, पाठ्यक्रम और ऑनलाइन आवेदन के लिए अभ्यर्थी व्यापम की आधिकारिक वेबसाइट [suspicious link removed] पर लॉग इन कर सकते हैं।
नक्सलियों की साजिश पर फिरा पानी, सर्च ऑपरेशन में मिला विस्फोटकों का जखीरा
13 Jun, 2026 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गरियाबंद: नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। एक संयुक्त खोज अभियान (सर्च ऑपरेशन) के दौरान मुस्तैद जवानों ने दंडईपानी के सघन वन क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा गुप्त रूप से छिपाकर रखे गए एक बड़े डंप (सामग्री भंडारण) का भंडाफोड़ किया है। डंप मिलने की प्रारंभिक सूचना के बाद एहतियात के तौर पर तुरंत बम निरोधक दस्ते (BDDS) को मौके पर बुलाया गया। दस्ते ने सघन जांच के बाद डंप में भारी मात्रा में बारूद और विस्फोटक होने की पुष्टि की, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने बेहद सतर्कता बरतते हुए आगे की कार्रवाई शुरू की।
प्रेशर कुकर बम, राइफल और लॉजिस्टिक सामान जब्त
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा चलाए गए इस खोजी अभियान में जमीन के नीचे से विनाशकारी हथियारों का जखीरा बरामद किया गया है। जब्त की गई सामग्रियों में शामिल हैं:
विस्फोटक: लगभग 4 किलोग्राम वजनी एक खतरनाक प्रेशर कुकर आईईडी (IED), कुकर बम और टिफिन बम। किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए बम निरोधक दस्ते ने इन सभी विस्फोटकों को जंगल में ही सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज (निष्क्रिय) कर दिया।
हथियार और गोला-बारूद: डंप से एक भरमार राइफल, इंटरसेप्टर, यूबीजीएल (UBGL) राउंड, कारतूस की मैगजीन, बिजली के तार और भारी मात्रा में गन पाउडर (बारूद) बरामद किया गया है।
दैनिक उपयोगी वस्तुएं: हथियारों के साथ-साथ मौके से भारी मात्रा में नक्सली साहित्य, दवाइयां, राशन और रोजमर्रा के इस्तेमाल के सामान भी मिले हैं, जिसका उपयोग नक्सली संगठन के सदस्य जंगलों में छिपने के दौरान करते थे।
बड़ी नक्सली साजिश नाकाम, नेटवर्क को लगा झटका
वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और जिला पुलिस बल की यह संयुक्त टीम अंदरूनी इलाकों में लगातार गश्त कर रही है। इतनी बड़ी मात्रा में घातक हथियारों और विस्फोटकों की बरामदगी से यह साफ जाहिर होता है कि नक्सली इस क्षेत्र में किसी बड़ी हिंसक वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। हालांकि, जवानों की सूझबूझ और तत्परता ने उनके इन खतरनाक मंसूबों को समय रहते नाकाम कर दिया, जिससे स्थानीय नक्सली नेटवर्क को गहरा धक्का लगा है।
जंगलों में गश्त रहेगी जारी
पुलिस प्रशासन और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि नक्सल प्रभावित और सीमावर्ती इलाकों में यह तलाशी अभियान आने वाले दिनों में और अधिक तीव्रता के साथ जारी रहेगा। अधिकारियों का दावा है कि इस तरह की प्रभावी कार्रवाइयों से नक्सली गतिविधियों की कमर टूट रही है और अंदरूनी ग्रामीण अंचलों में सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है ताकि आम नागरिक निडर होकर रह सकें।
देश की विविध संस्कृति का प्रतीक बनेगा PM एकता मॉल, 193 करोड़ से हो रहा निर्माण
13 Jun, 2026 10:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी के पंडरी क्षेत्र में देश की विविध संस्कृतियों को समेटने वाले 'पीएम एकता मॉल' (पीएम यूनिटी मॉल) का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस भव्य मॉल की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यहाँ देश के अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक हस्तशिल्प (हैंडीक्राफ्ट), लोक कलाएं और स्थानीय उत्पाद एक ही जगह पर खरीदे जा सकेंगे। इसे पूरी तरह से 'मिनी इंडिया' की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है, जहाँ आने वाले लोग पूरे भारत की कला, संस्कृति और खान-पान का जीवंत अनुभव एक ही छत के नीचे ले सकेंगे।
193 करोड़ रुपये का बजट और 6 मंजिला भव्य ढांचा
लगभग 4 एकड़ के विशाल भूभाग पर बन रहे इस आधुनिक मॉल को सर्वसुविधाजनक बनाया जा रहा है, जिसमें वाहनों के लिए बड़ी पार्किंग व्यवस्था भी शामिल है। कुल 193 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस 6 मंजिला इमारत का खाका कुछ इस तरह तय किया गया है:
ग्राउंड फ्लोर: यहाँ मौसमी परिधान (सीजनल क्लोदिंग) और बागवानी (गार्डनिंग) से जुड़े उत्पाद मिलेंगे।
दूसरा फ्लोर: यह मंजिला पूरी तरह देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक दुकानों और हस्तशिल्प के लिए आरक्षित होगी।
तीसरा और चौथा फ्लोर: यहाँ आने वाले लोगों के मनोरंजन के लिए गेमिंग ज़ोन, एक्टिविटी एरिया और एक बड़ा फूड कोर्ट बनाया जा रहा है।
पांचवां और छठा फ्लोर: कलात्मक आयोजनों के लिए यहाँ 200 सीटों की क्षमता वाले दो अत्याधुनिक ऑडिटोरियम तैयार किए जा रहे हैं।
पर्यावरण अनुकूल 'ग्रीन बिल्डिंग' कॉन्सेप्ट
इस मॉल की बनावट में पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इसे पूरी तरह 'ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट' के आधार पर निर्मित किया जा रहा है:
इसके मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर छत (रूफटॉप) तक हर जगह हरियाली के लिए विशेष स्थान छोड़ा गया है।
प्राकृतिक रोशनी (धूप) और हवा के बेहतर बहाव के लिए भवन के मध्य हिस्से को खुला (वेंटिलेशन युक्त) रखा गया है।
मॉल की छत पर एक खूबसूरत डेकोरेटिव ज़ोन और ओपन-एयर फूड कोर्ट विकसित किया जाएगा।
पानी की बर्बादी को रोकने के लिए मॉल में 'वेस्ट वॉटर रिसाइक्लिंग प्लांट' भी लगाया जा रहा है।
निर्माण की समय-सीमा अब दिसंबर तक बढ़ी
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत दिसंबर 2025 में की गई थी, और शुरुआती योजना के तहत इसे अक्टूबर 2026 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, निर्माण की वर्तमान गति को देखते हुए इसका करीब 30 प्रतिशत ढांचागत काम ही धरातल पर आ सका है।
परियोजना की संजीदगी को देखते हुए अब इसकी अंतिम समय-सीमा (डेडलाइन) को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया गया है। मुख्य सिविल ढांचा तैयार होने के बाद अंदरूनी साज-सज्जा (इंटीरियर), बिजली व्यवस्था, प्लंबिंग, लिफ्ट लगाने और फिनिशिंग जैसे तकनीकी कार्यों को इस बढ़ी हुई अवधि के भीतर पूरा किया जाएगा।
स्कूलों में नई व्यवस्था लागू, राष्ट्रगान के साथ होगा राज्यगीत और भोजन मंत्र का गायन
13 Jun, 2026 09:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर: छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय और निजी विद्यालयों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने एक नया और महत्वपूर्ण टाइम-टेबल (शेड्यूल) जारी किया है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के सभी स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राज्यगीत और विभिन्न सांस्कृतिक व नैतिक गतिविधियों का आयोजन अनिवार्य कर दिया गया है। महानदी भवन (मंत्रालय) की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में साफ कहा गया है कि सूबे के सभी जिला शिक्षा अधिकारी (DEOs) अपने-अपने कार्यक्षेत्र के स्कूलों में इसे तुरंत प्रभाव से अमलीजामा पहनाएं।
तीन चरणों में बंटा होगा दैनिक शेड्यूल
शिक्षा विभाग की नई गाइडलाइन के अनुसार, छात्र-छात्राओं के मानसिक और नैतिक विकास के लिए पूरे दिन की गतिविधियों को तीन विशेष सत्रों में विभाजित किया गया है:
सुबह (स्कूल प्रारंभ होने पर): सुबह की शुरुआत मुख्य प्रार्थना सभा से होगी। इसमें अनिवार्य रूप से राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीपमंत्र, मां सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र का गान होगा। साथ ही विद्यार्थियों को देश के महान सपूतों और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रेरक जीवन प्रसंग पढ़कर सुनाए जाएंगे।
दोपहर (मध्यान्ह भोजन के समय): लंच टाइम में सभी छात्र-छात्राएं एक साथ बैठकर सामूहिक रूप से 'भोजन मंत्र' का पाठ करेंगे और उसके बाद ही भोजन ग्रहण करेंगे।
शाम (स्कूल की छुट्टी के समय): विद्यालय की समाप्ति पर विदाई से ठीक पहले सभी विद्यार्थी सामूहिक रूप से छत्तीसगढ़ का राज्यगीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र गाएंगे।
लापरवाही बरतने वाले प्राचार्यों पर होगी सख्त कार्रवाई
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से बच्चों में राष्ट्रप्रेम, अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान और कड़े अनुशासन की भावना मजबूत होगी। सरकार ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्कूलों का औचक निरीक्षण (सरप्राइज चेकिंग) करें। यदि किसी भी स्कूल में इन नियमों की अनदेखी पाई जाती है, तो सीधे तौर पर संबंधित स्कूल प्रबंधन और वहां के प्रिंसिपल (प्राचार्य) के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
16 जून से शुरू हो रहा है 'शाला प्रवेश उत्सव 2026'
भीषण गर्मी की छुट्टियों के बाद छत्तीसगढ़ के सभी स्कूल आगामी 16 जून 2026 से विधिवत रूप से खुलने जा रहे हैं। नए सत्र की शुरुआत को यादगार बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने ‘शाला प्रवेश उत्सव 2026’ की तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं कि पहले ही दिन स्कूलों में शिक्षकों की 100 फीसदी उपस्थिति होनी चाहिए। साथ ही बच्चों के आने से पहले कक्षाओं की साफ-सफाई, नए टाइम-टेबल की तैयारी और मुफ्त पाठ्यपुस्तकों के वितरण की व्यवस्था चाक-चौबंद रखने को कहा गया है।
योग दिवस के मंच से दिख सकती है नितिन नवीन की सक्रियता, दौरे की तैयारी तेज
13 Jun, 2026 08:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन आगामी 20 जून को छत्तीसगढ़ के प्रवास पर आ सकते हैं। देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के शीर्ष पद की कमान संभालने के बाद नितिन नवीन का यह पहला प्रांतीय दौरा होगा। राजनीतिक गलियारों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, वे 21 जून को राजधानी रायपुर में आयोजित होने वाले 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' के मुख्य शासकीय समारोह में विशेष रूप से शिरकत करेंगे। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने दिल्ली दौरे के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष से शिष्टाचार मुलाकात कर उन्हें छत्तीसगढ़ आने का ससम्मान निमंत्रण दिया था, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया है।
छत्तीसगढ़ के संगठन प्रभारी से राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर
मूल रूप से बिहार की राजनीति से ताल्लुक रखने वाले नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी संभालने से ठीक पहले छत्तीसगढ़ राज्य के संगठन प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वर्तमान में राज्यसभा सांसद नितिन नवीन के पास संगठन संचालन और जमीनी राजनीति का एक लंबा और बेहद सफल अनुभव है। उन्हीं के कुशल मार्गदर्शन और चुनावी रणनीति के तहत राज्य में साल 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा गया था, जिसमें भाजपा ने प्रदेश की कुल 11 सीटों में से 10 पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उन्होंने छत्तीसगढ़ भाजपा के संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। इससे पहले वे बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट से लगातार 4 बार विधायक चुने जा चुके हैं।
प्रशासनिक और सांगठनिक अनुभव से समृद्ध है राजनीतिक सफर
नितिन नवीन ने अपने सियासी सफर की शुरुआत भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) से की थी, जहां वे बिहार इकाई के प्रदेश अध्यक्ष और बाद में भाजयुमो के राष्ट्रीय महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। इसके अलावा, उन्होंने बिहार सरकार में विभिन्न मंत्रालयों का जिम्मा भी बखूबी संभाला है, जिसमें वे नगर विकास एवं आवास मंत्री और विधि व न्याय मंत्री के रूप में अपनी प्रशासनिक कुशलताओं का लोहा मनवा चुके हैं।
छत्तीसगढ़ के अगले भाजपा प्रभारी को लेकर कयास तेज
नितिन नवीन को राष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश प्रभारी का पद तकनीकी रूप से रिक्त माना जा रहा है। हालांकि, पार्टी हाईकमान की ओर से अभी तक नए प्रदेश प्रभारी के नाम को लेकर कोई आधिकारिक पत्ता नहीं खोला गया है। राज्य में साल 2028 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय नेतृत्व किसी ऐसे कद्दावर नेता को छत्तीसगढ़ की कमान सौंपेगा, जो यहां की क्षेत्रीय राजनीति, सामाजिक समीकरणों और स्थानीय मुद्दों को बहुत बारीकी से समझता हो।
छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को बढ़ावा, 9580 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त
13 Jun, 2026 07:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर: छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश की रफ्तार तेज करने और नए उद्योगों को आकर्षित करने के उद्देश्य से तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक भव्य 'इन्वेस्टर कनेक्ट' रोड शो का आयोजन किया गया। इस हाई-प्रोफाइल बिजनेस मीट में देश के कई दिग्गज उद्योगपति, बिजनेस लीडर्स और निवेशक शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज 'विकसित भारत' के एक मजबूत ग्रोथ इंजन के रूप में तेजी से उभर रहा है। उन्होंने उद्योगपतियों को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार ने निवेशकों के स्वागत के लिए 'रेड कारपेट' नीति अपनाई है। मुख्यमंत्री ने साझा किया कि राज्य को अब तक देश-विदेश से 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।
मध्य भारत का नया लॉजिस्टिक हब बनने की ताकत
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति की खासियत बताते हुए कहा कि राज्य के भीतर मध्य भारत का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब बनने की पूरी क्षमता मौजूद है। छत्तीसगढ़ की भौगोलिक सीमाएं देश के 7 राज्यों को छूती हैं, जो इसे करीब 60 करोड़ की आबादी वाले बाजार तक सीधी और सुगम पहुंच प्रदान करता है। राज्य में मजबूत रेलवे नेटवर्क, भारत माला सड़क परियोजना, बेहतरीन एयर कार्गो सुविधाएं और प्रचुर मात्रा में मौजूद खनिज संपदा उद्योगों के विकास को नई गति दे रहे हैं।
9580 करोड़ के एमओयू से युवाओं को मिलेंगे 7800 से ज्यादा रोजगार
हैदराबाद में आयोजित इस बिजनेस समिट के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार और विभिन्न औद्योगिक घरानों के बीच बड़े समझौते हुए। कार्यक्रम में 7 बड़ी कंपनियों ने राज्य के लिए कुल 9,580 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों (MOU) पर हस्ताक्षर किए। इन नए उद्योगों के शुरू होने से छत्तीसगढ़ में 7,800 से अधिक स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस महत्वपूर्ण मौके पर राज्य के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
4200 करोड़ की लागत से बनेगा देश का पहला विशेष 'डेटा सेंटर'
इस समिट में सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव 'हाइपरनेक्स्ट डेटा सेंटर लिमिटेड' की ओर से आया है। यह कंपनी छत्तीसगढ़ में 4,200 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश के साथ एक अत्याधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने जा रही है। यह भारत का पहला समर्पित 'डिजास्टर रिकवरी डेटा सेंटर कैंपस' होगा, जिससे तकनीकी क्षेत्र में करीब 250 उच्च-स्तरीय रोजगार सृजित होंगे।
इसके साथ ही, कोर सेक्टर में 'फीग्रेड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड' सीमेंट उद्योग के क्षेत्र में लगभग 2,912 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश करने जा रही है, जिससे राज्य में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 4,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है।
छत्तीसगढ़ में मौसम ने ली करवट, बस्तर संभाग के लिए बारिश का अलर्ट जारी
13 Jun, 2026 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर: छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में इन दिनों आंधी-तूफान और बारिश का सिलसिला लगातार बना हुआ है। शुक्रवार, 12 जून को प्रांतीय राजधानी रायपुर समेत जशपुर, कबीरधाम, दुर्ग, बेमेतरा, राजनांदगांव और मुंगेली जिलों में बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली की चमक के साथ झमाझम बौछारें पड़ीं। मौसम के बदले मिजाज के बीच कुछ जगहों पर आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) की घटनाएं भी सामने आई हैं। इसके साथ ही बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और महासमुंद में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले कुछ दिनों तक प्रदेशवासियों को ऐसा ही मौसम देखने को मिलेगा।
तापमान का लेखा-जोखा: राजनांदगांव में सबसे ज्यादा तपिश
शुक्रवार को राजनांदगांव जिला पूरे राज्य में सबसे ज्यादा तपता हुआ नजर आया, जहां दिन का अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा राज्य के अन्य प्रमुख शहरों का तापमान इस प्रकार रहा:
बिलासपुर: 41.5 डिग्री सेल्सियस
रायपुर: 40.8 डिग्री सेल्सियस
दुर्ग: 39.6 डिग्री सेल्सियस
पेंड्रा रोड: 38 डिग्री सेल्सियस
अंबिकापुर: 37 डिग्री सेल्सियस
जगदलपुर: 33 डिग्री सेल्सियस
राहत की बात यह रही कि बारिश और ठंडी हवाओं के चलते रायपुर प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका भी बना रहा, जहां रात का न्यूनतम तापमान गिरकर 22 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
बस्तर अंचल में भारी बारिश के आसार, यलो अलर्ट जारी
मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में पूरे छत्तीसगढ़ में प्री-मानसून गतिविधियां काफी सक्रिय हैं, जिसके चलते धूलभरी आंधी और गरज-चमक के साथ पानी गिरने की पूरी संभावना बनी हुई है। मौसम केंद्र ने बस्तर संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों—कांकेर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर के लिए 'यलो अलर्ट' जारी करते हुए वहां भारी बारिश की चेतावनी दी है। माना जा रहा है कि आगामी दो दिनों के भीतर पूरे सूबे के अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की और गिरावट आएगी, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी।
प्रदेश में कब तक दाखिल होगा मुख्य मानसून?
मौसम का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक, अगले 48 से 72 घंटों के भीतर दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां बेहद मुफीद बनी हुई हैं। यह मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक के शेष हिस्सों, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में तेजी से प्रवेश कर सकता है।
इस समय समुद्र तल पर एक मौसमी द्रोणिका (ट्रफ लाइन) सक्रिय है, जो उत्तर-पश्चिम राजस्थान से सटे मध्य पाकिस्तान के चक्रवाती घेरे से शुरू होकर उत्तर मध्य प्रदेश, उत्तर छत्तीसगढ़ और झारखंड से गुजरते हुए सीधे पश्चिम बंगाल तक जा रही है, जिससे राज्य में नमी आ रही है और पानी बरस रहा है।
सूरज की रोशनी से चमका राजनांदगांव
12 Jun, 2026 11:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर : स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने उसे देशभर में नई पहचान दिलाई है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के बल पर राजनांदगांव देश में सर्वाधिक सोलर क्षमता वाले कनेक्शन स्थापित करने वाला जिला बन गया है। शहरों के साथ-साथ गांवों में भी सौर ऊर्जा को लेकर लोगों का उत्साह तेजी से बढ़ रहा है।
कलेक्टर जितेन्द्र यादव के मार्गदर्शन और जिला प्रशासन तथा विद्युत विभाग के समन्वित प्रयासों से यह सफलता संभव हुई है। योजना के तहत जिले में अब तक 6776 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 6381 हितग्राहियों ने वेंडर का चयन कर लिया है। वहीं 3255 घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो चुके हैं और 2218 लाभार्थियों को सब्सिडी का भुगतान भी किया जा चुका है।
जिले में 3255 घरेलू सोलर कनेक्शनों के माध्यम से लगभग 9 मेगावाट, 162 व्यावसायिक सोलर कनेक्शनों से 3.40 मेगावाट तथा 31 पावर प्लांटों के जरिए 383 मेगावाट क्षमता विकसित की गई है। इनमें सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि ढाबा स्थित मेसर्स सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के 160 मेगावाट क्षमता वाले सोलर कनेक्शन की है, जो देश में अपनी तरह का सबसे बड़ा कनेक्शन माना जा रहा है।
जिला प्रशासन द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हितग्राहियों को सम्मानित कर अन्य नागरिकों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। राजनांदगांव की यह उपलब्धि हरित ऊर्जा की दिशा में देश के लिए एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी है।
अबूझमाड़ के सुदूर वनांचल में फूटी विकास की नई ‘जल-धारा’: मुसपरसी गांव बना ‘हर घर जल ग्राम’
12 Jun, 2026 11:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर : अबूझमाड़—एक ऐसा क्षेत्र जिसे कभी उसकी भौगोलिक विषमताओं और दुर्गमता के लिए जाना जाता था, आज विकास की एक नई और सुखद इबारत लिख रहा है। नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 123 किलोमीटर दूर, महाराष्ट्र की सीमा से सटा ओरछा विकासखंड का एक छोटा सा वनांचल गांव है—मुसपरसी जो ग्राम पंचायत कोंगे के अंतर्गत आता है। इस गांव की तस्वीर और तकदीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। कभी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने वाला यह गांव आज देश के नक्शे पर ‘हर घर जल ग्राम’ के रूप में अपनी चमक बिखेर रहा है। जल जीवन मिशन (JJM) के सफल क्रियान्वयन ने यहाँ के ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं के जीवन में एक क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है।
बरसों का दर्द: जब पानी जुटाने में ही बीत जाती थी आधी जिंदगी
मुसपरसी गांव के लिए पेयजल की उपलब्धता हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही। इस सुदूर वनांचल में रहने वाले ग्रामीण सदियों से झरिया, नदी और पारंपरिक प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर थे। सुबह की पहली किरण के साथ ही गाँव की महिलाओं और बच्चों के कंधों पर पानी के बर्तनों का बोझ आ जाता था।
पथरीले रास्तों से गुजरकर, लंबी दूरी तय कर पानी लाना उनकी दैनिक दिनचर्या का सबसे कठिन हिस्सा था। इस कड़े संघर्ष का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता था। पानी का इंतजाम करने में ही उनका इतना समय और श्रम खर्च हो जाता था कि वे किसी अन्य रचनात्मक या आर्थिक गतिविधि के बारे में सोच भी नहीं पाती थीं।
जल जीवन मिशन: इंजीनियरिंग और दृढ़ इच्छाशक्ति का संगम
इस दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाना और पानी पहुंचाना कोई आसान काम नहीं था, लेकिन प्रशासन की दृढ़ इच्छाशक्ति और जल जीवन मिशन के तहत तैयार की गई सटीक कार्ययोजना ने इस असंभव को संभव कर दिखाया।गांव की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए जल स्रोतों का सुदृढ़ीकरण किया गया। घने जंगलों और पथरीले रास्तों के बीच से होते हुए गांव के कोने-कोने तक पाइपलाइन का विस्तार किया गया। योजना के तहत गांव के हर एक घर को घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) से जोड़ा गया, जिससे मुसपरसी को 'हर घर जल ग्राम' का गौरव प्राप्त हुआ।
महिलाओं के चेहरे पर लौटी मुस्कान, बच्चों को मिला भविष्य
मुसपरसी की महिलाएं पहले सूरज उगने से पहले ही पानी की चिंता सताने लगती थी। पूरा दिन इसी उधेड़बुन में निकल जाता था। लेकिन अब घर के आंगन में ही नल लग गया है। बस टोटी खोलो और साफ पानी हाजिर है। ऐसा लगता है जैसे हमारी जिंदगी की सबसे बड़ी परेशानी हमेशा के लिए खत्म हो गई। घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचने से इस आदिवासी अंचल में एक नई सामाजिक और आर्थिक क्रांति की शुरुआत हुई है। पानी लाने में बर्बाद होने वाला समय अब बच रहा है। महिलाएं इस समय का उपयोग अपने घरेलू कार्यों, बच्चों की परवरिश और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से आजीविका गतिविधियों में कर रही हैं। पानी भरने के काम से मुक्ति मिलने के बाद अब गांव के बच्चे नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं। उनका बचपन अब सुरक्षित है और उन्हें पढ़ाई व खेलकूद के पूरे अवसर मिल रहे हैं। फ्लोराइड और अन्य अशुद्धियों से मुक्त, शुद्ध पेयजल मिलने से गांव में जलजनित बीमारियों जैसे डायरिया, पेट की बीमारियां में भारी कमी आई है। इसके साथ ही ग्रामीणों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है।
विकास की एक नई मिसाल
मुसपरसी गांव की यह सफलता कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि सही नीति और निष्ठा के साथ काम किया जाए, तो देश के सबसे सुदूर और चुनौतीपूर्ण अंचलों तक भी विकास की रोशनी पहुंचाई जा सकती है। 'हर घर जल' का यह तमगा सिर्फ पानी की उपलब्धता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह अबूझमाड़ के आदिवासियों के जीवन स्तर में आए सुधार, उनके सम्मान और एक सुरक्षित भविष्य की नई शुरुआत है।
छत्तीसगढ़ को मिला पहला संभागीय पोर्टल
12 Jun, 2026 10:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर : डिजिटल सुशासन की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। सरगुजा संभाग अब राज्य का पहला ऐसा संभाग बन गया है, जिसकी अपनी आधिकारिक वेबसाइट शुरू हो गई है। संभागायुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा ने शुक्रवार को
https://division-surguja.cg.gov.in/
पोर्टल का शुभारंभ किया। यह पोर्टल नागरिकों, पर्यटकों और विभिन्न हितधारकों को एकीकृत डिजिटल मंच उपलब्ध कराएगा।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) सरगुजा द्वारा विकसित यह वेबसाइट केंद्र सरकार के सुरक्षित S3WaaS प्लेटफॉर्म पर तैयार की गई है। आधुनिक तकनीक से लैस पोर्टल ‘सिक्योर बाय डिजाइन’ फ्रेमवर्क पर आधारित है तथा इसकी होस्टिंग एनआईसी के नेशनल डाटा सेंटर में की गई है। वेबसाइट हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है तथा मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर पर सहजता से संचालित होगी।
पोर्टल के माध्यम से नागरिक सरगुजा संभाग की प्रशासनिक संरचना, इतिहास, अधिकारियों की संपर्क सूची और सभी जिलों की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही बी-1/पी-11, नामांतरण, राजस्व न्यायालय आवेदन और डायवर्जन जैसी ऑनलाइन राजस्व सेवाओं तक भी सीधी पहुंच मिलेगी। संभागायुक्त नरेन्द्र दुग्गा ने कहा कि सभी जिलों और एनआईसी टीम के सहयोग से तैयार यह पोर्टल प्रशासन और नागरिकों के बीच संवाद को मजबूत करेगा तथा डिजिटल प्रशासन का नया मानक स्थापित करेगा।
कचरे से कमाई का रास्ता
12 Jun, 2026 10:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर : जिस प्लास्टिक कचरे को आमतौर पर पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जाता है, उसी कचरे को दुर्ग जिले के एक गांव ने आय और रोजगार का साधन बना दिया है। ग्राम पंचायत कोलिहापुरी में स्थापित जिले का पहला मटेरियल रिकवरी सेंटर (एमआरसी) आज ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल की ऐसी मिसाल बन चुका है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है।
कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में विकसित यह केंद्र अब केवल कचरा संग्रहण और निपटान तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के 381 गांवों से निकलने वाले प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन का प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां प्रतिदिन लगभग 150 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे का प्रसंस्करण किया जाता है। आधुनिक मशीनों की मदद से प्लास्टिक को पिघलाकर ‘लम्प्स’ तैयार किए जाते हैं, जिन्हें निर्माण क्षेत्र की कंपनियों को बेचा जाता है।
इस पहल की खास बात यह है कि यह परियोजना अब आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ चुकी है। संचालन, बिजली, रखरखाव और श्रमिकों के मानदेय का भुगतान करने के बाद भी केंद्र को हर महीने लगभग 15 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हो रहा है।
कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए डीएमएफ मद से उपलब्ध कराए गए चार जीपीएस युक्त ई-रिक्शा गांवों से प्लास्टिक अपशिष्ट एकत्र कर रहे हैं। इनकी निगरानी सीधे कंट्रोल रूम से की जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया रियल टाइम में मॉनिटर होती है।
यह मॉडल रोजगार सृजन का भी माध्यम बना है। निजी भागीदारी के तहत स्थानीय लोगों को काम मिला है, जबकि श्रमिकों को मनरेगा दरों के अनुरूप मजदूरी और बीमा सुरक्षा भी प्रदान की जा रही है। इतना ही नहीं, केंद्र के लाभ का एक हिस्सा ग्राम पंचायत और स्व-सहायता समूहों को भी दिया जा रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन, मनरेगा और निजी निवेश के अभिसरण से तैयार यह मॉडल साबित कर रहा है कि यदि सामुदायिक भागीदारी और तकनीक का सही उपयोग हो, तो कचरा भी ग्रामीण समृद्धि का आधार बन सकता है। कोलिहापुरी का यह प्रयोग अब दुर्ग जिले में सतत विकास और स्वावलंबन की नई पहचान बना है।
दिव्यांग मनुराज को मिला संबल, मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल से अब शिक्षा की राह होगी आसान
12 Jun, 2026 09:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर : सुशासन तिहार आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के साथ जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बना है। कबीरधाम जिले के पण्डरिया तहसील के ग्राम मोंहगांव निवासी 85 प्रतिशत अस्थि बाधित दिव्यांग मनुराज बंजारे को आवेदन करने पर बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्रदान की गई। ट्रायसायकल मिलने से अब उनके लिए आवागमन आसान हुआ है और लंबे समय से अधूरी रह गई शिक्षा तथा आत्मनिर्भर बनने के सपनों को नई दिशा मिली है। यह सहायता उनके लिए केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का सशक्त माध्यम बनी है।
मनुराज बंजारे 85 प्रतिशत अस्थि बाधित दिव्यांग हैं। उन्होंने सुशासन तिहार 2026 के दौरान बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्राप्त करने के लिए आवेदन दिया था। समाज कल्याण विभाग द्वारा उनके आवेदन पर त्वरित कार्यवाही करते हुए उन्हें यह सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे उनके आवागमन में अब काफी सहजता आएगी। मनुराज ने बताया कि पिता के निधन के बाद उनका जीवन कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था। शारीरिक दिव्यांगता एवं आर्थिक अभाव के कारण वे कक्षा 5वीं के बाद अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सके। इन परिस्थितियों के चलते वे मानसिक रूप से भी काफी परेशान और निराश रहने लगे थे। लेकिन अब बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्रायसायकल मिलने से उनके जीवन में एक नई आशा आई है।
मनुराज बंजारे ने कहा कि अब उन्हें विद्यालय आने-जाने में सुविधा होगी और वे अपनी अधूरी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए नियमित रूप से अध्ययन करने का प्रयास करेंगे। यह सहायता उनके लिए केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्राप्त कर मनुराज बंजारे ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सरकार को आभार ज्ञापित किया है। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल ने उनके जीवन में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास मिला है।
खरीफ 2026: धान और हरी खाद के बीजों का पर्याप्त भंडारण, किसानों को समय पर मिलेगा लाभ
12 Jun, 2026 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विभाग द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के लिए राज्य की सभी सहकारी समितियों में उन्नत बीजों का पर्याप्त भंडारण कर लिया गया है। भारत सरकार और राज्य सरकार के निर्देशों के तहत किसानों को उत्तम क्वालिटी के बीज सही समय पर मुहैया कराए जा रहे हैं। इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रक्रिया केंद्रों से लगातार बीजों की सप्लाई की जा रही है।
पिछले साल से ज्यादा बीजों का भंडारण (आंकड़े)
इस साल किसानों के लिए पिछले वर्ष की तुलना में अधिक मात्रा में बीज उपलब्ध कराए गए हैं। पिछले साल (खरीफ 2025) में इस समय तक जहां 3.73 लाख क्विंटल बीज का भंडारण हुआ था, वहीं इस साल (खरीफ 2026) में अब तक रिकॉर्ड 3.84 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का भंडारण पूरा हो चुका है। सहकारी समितियों के अलावा, बीज प्रक्रिया केंद्रों में अलग से बफर स्टॉक भी रखा गया है, ताकि किसान वहां से सीधे भी बीज खरीद सकें।
खेतों को उपजाऊ बनाने के लिए हरी खाद
धान के उन्नत बीजों के साथ-साथ इस बार खेतों की सेहत सुधारने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए समितियों में 5,945 देंचा और 5,946 क्विंटलमूंग, हरी खाद के रूप में श्ढेंचाश् और मूंगश् के बीजों का भंडारण किया गया है, जिसका उठाव किसानों ने शुरू कर दिया है। हरी खाद कम खर्च में मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने का सबसे बढ़िया प्राकृतिक तरीका है। इससे यूरिया और डीएपी (क्।च्) जैसे रासायनिक खादों पर होने वाला खर्च कम हो जाता है।
हरी खाद इस्तेमाल करने का सही तरीका
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, हरी खाद का पूरा फायदा लेने के लिए सबसे पहले खेतों में ढेंचा या मूंग के बीजों की बुवाई करें। इसके बाद फसल को 45 से 60 दिनों तक (फूल आने से पहले) बढ़ने दें। फिर ट्रैक्टर या हल चलाकर इस खड़ी फसल को मिट्टी में अच्छी तरह पलटकर मिला दें और हल्की सिंचाई कर दें। इस प्रक्रिया के 2 से 3 सप्ताह बाद जब यह खाद मिट्टी में गल जाए, तब धान, मक्का, गेहूं या गन्ना जैसी मुख्य फसलों की बुवाई करें। गौरतलब है कि कृषि विभाग द्वारा इस पूरी वितरण व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसानों को खेती के समय कोई परेशानी न हो।
ब्लड बैंक की बदहाल व्यवस्था उजागर, मरीजों को नहीं मिल रहीं जरूरी सुविधाएं
12 Jun, 2026 01:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर: पंडरी स्थित रायपुर जिला अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों को आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से खोला गया ब्लड बैंक अपने मूल लक्ष्यों को पूरा करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। करीब सात वर्ष पहले बड़े तामझाम के साथ स्थापित किए गए इस ब्लड बैंक में मौजूदा समय में खून का एक भी परमानेंट स्टॉक उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में दाखिल मरीजों को जब भी रक्त की सख्त जरूरत पड़ती है, तो उनके तीमारदारों को शहर के दूसरे सरकारी या प्राइवेट ब्लड बैंकों की तरफ दौड़ना पड़ता है। ऐसे में करोड़ों की लागत से बने इस ब्लड बैंक की उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आपातकालीन स्थिति में भी दूसरे अस्पतालों पर निर्भरता
जिला अस्पताल के भीतर गंभीर हालत में भर्ती मरीजों को खून की जरूरत होने पर अस्पताल प्रशासन खुद हाथ खड़े कर देता है। पीड़ित परिवारों को रक्त के इंतजाम के लिए मेकाहारा (डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल), रेडक्रॉस ब्लड बैंक या निजी पैथोलॉजी केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ता है। जबकि इस यूनिट को शुरू करने का मुख्य मकसद यही था कि अस्पताल को खून की जरूरतों के लिए किसी बाहरी संस्थान पर निर्भर न रहना पड़े।
मशीनें धूल खा रहीं, सिर्फ होल ब्लड का ही विकल्प
अस्पताल प्रबंधन की तरफ से यह दलील दी जाती है कि यहां आवश्यकता पड़ने पर सिर्फ 'होल ब्लड' (पूरा खून) देने का प्रावधान है। हालांकि, आज की आधुनिक चिकित्सा पद्धति में ज्यादातर बीमारियों के इलाज में पूरे खून के बजाय कंपोनेंट ब्लड (जैसे- प्लेटलेट्स, प्लाज्मा या पैक्ड रेड सेल्स) की मांग की जाती है। मरीज की स्थिति के अनुसार इन घटकों की जरूरत होती है, लेकिन जिला अस्पताल में यह आधुनिक सुविधा आज तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।
अस्पताल के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि ब्लड बैंक में लंबे समय से खून का कोई न्यूनतम कोटा या स्टॉक मेंटेन ही नहीं किया जा रहा है। अधिकारियों का तर्क है कि मांग कम होने से ब्लड एक्सपायर (खराब) होने का डर रहता है। इसके विपरीत, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ कहना है कि किसी भी आपातकालीन यूनिट का मतलब ही यह है कि वहां हर वक्त जरूरत के लिए पर्याप्त जीवन रक्षक रक्त मौजूद होना चाहिए।
लाइसेंस की फाइल अटकी, कंपोनेंट यूनिट बंद
हैरानी की बात यह है कि ब्लड कंपोनेंट को अलग करने वाली बेहद महंगी और आधुनिक मशीनें अस्पताल परिसर में लाकर स्थापित तो कर दी गई हैं, लेकिन संबंधित विभाग से जरूरी लाइसेंस न मिल पाने के कारण वे बेकार पड़ी धूल खा रही हैं। कानूनी मंजूरी के अभाव में मरीजों को प्लेटलेट्स और प्लाज्मा नहीं मिल पा रहा है और गंभीर मरीजों को तुरंत दूसरे बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है।
सामुदायिक केंद्रों से भी बदतर हालत, सिविल सर्जन ने दी सफाई
एक तरफ जहां जिले के दूर-दराज के कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में बनी ब्लड स्टोरेज इकाइयां रेडक्रॉस के समन्वय से बखूबी काम कर रही हैं, वहीं राजधानी के मुख्य जिला अस्पताल का यह हाल चिंताजनक है।
इस अव्यवस्था को लेकर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. बी.के. सिन्हा ने सफाई देते हुए कहा कि ब्लड कंपोनेंट की सुविधा को विधिवत शुरू करने के लिए ड्रग कंट्रोलर और संबंधित विभागों से लाइसेंस लेने की कागजी प्रक्रिया जारी है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि अनुमति मिलने में कुछ वक्त जरूर लग सकता है, लेकिन मंजूरी आते ही मरीजों को इसका पूरा लाभ मिलने लगेगा। फिलहाल आपातकालीन स्थिति में दूसरे स्वीकृत संस्थानों से तालमेल बिठाकर खून की व्यवस्था कराई जा रही है।
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