छत्तीसगढ़
रायगढ़ हादसे से पसरा मातम, कार-बाइक टक्कर में एक की जान गई, घायल को रायपुर रेफर किया गया
20 Jul, 2026 11:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायगढ़। रायगढ़ जिले के जूटमिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत पटेलपाली सब्जी मंडी के पास रविवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में बाइक सवार एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया है। घायल को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर कर दिया गया है।
तेज रफ्तार कार ने बाइक को मारी जोरदार टक्कर
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शहर से सटे पटेलपाली सब्जी मंडी के पास रविवार देर रात करीब 3 बजे एक तेज रफ्तार नेक्सॉन कार के चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए सामने से आ रहे बाइक सवार दो युवकों को जोरदार टक्कर मार दी। इस भयानक टक्कर में उमेश ठाकुर नामक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका साथी संदीप शाह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसकी नाजुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत रायपुर अस्पताल रेफर किया गया है।
सब्जी कारोबार से जुड़े थे दोनों युवक
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, मृतक और घायल दोनों युवक पेशे से सब्जी का कारोबार करते थे। वे रोजाना की तरह तड़के पटेलपाली सब्जी मंडी सब्जी खरीदने जा रहे थे, तभी यह हादसा हो गया। दुर्घटना को अंजाम देने के बाद कार चालक मौके पर ही वाहन छोड़कर फरार हो गया।
पुलिस जांच और कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही जूटमिल थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने मृतक के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। वहीं, फरार कार चालक की तलाश के लिए आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और उसके खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
स्टिंग ऑपरेशन से खुली पोल, ग्राहक बनकर पहुंचे कर्मचारियों ने पेट शॉप से कछुए पकड़े
20 Jul, 2026 09:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिलासपुर। बिलासपुर में वन विभाग और राज्य उड़नदस्ता टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए वन्यजीवों की अवैध तस्करी का भंडाफोड़ किया है। जरहाभाठा मंदिर चौक स्थित 'पेट पॉइंट' नामक दुकान पर छापेमारी कर वन विभाग की टीम ने चार 'इंडियन रूफ्ड टर्टल' (कछुए) बरामद किए और मौके से दुकान संचालक को गिरफ्तार कर लिया।
ग्राहक बनकर पहुंचे थे वन कर्मचारी
वन विभाग को कछुओं की अवैध खरीद-बिक्री की गुप्त सूचना मिली थी। इसी सूचना के आधार पर राज्य उड़नदस्ता और बिलासपुर वन परिक्षेत्र की संयुक्त टीम ने यह योजना बनाई। कार्रवाई को पुख्ता करने के लिए विभाग के एक कर्मचारी को सादे कपड़ों में ग्राहक बनाकर उस पेट शॉप पर भेजा गया। कर्मचारी द्वारा तय कीमत पर एक कछुआ खरीदे जाने और मामला सही पाए जाने पर टीम ने दुकान पर छापा मार दिया।
कछुओं की खरीद-बिक्री है पूरी तरह प्रतिबंधित
जानकारी के अनुसार, 'इंडियन रूफ्ड टर्टल' वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 के अंतर्गत आने वाला संरक्षित जीव है, जिसके कारण इसकी खरीदी और बिक्री दोनों कानूनी रूप से प्रतिबंधित हैं। इसके बावजूद कुछ दुकानदारों द्वारा चोरी-छिपे इन वन्यजीवों का व्यापार किया जा रहा है। विभाग ऐसी अन्य संदिग्ध दुकानों की भी सूची तैयार कर रहा है जहाँ इस प्रकार की अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
न्यायिक रिमांड पर भेजा गया आरोपी
वन विभाग ने आरोपी दुकानदार के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया। अदालत ने सुनवाई के बाद आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि इन कछुओं को तस्करों द्वारा कहाँ से लाया गया था और इस अवैध रैकेट में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
1000 करोड़ कॉर्पोरेट घोटाले में बड़ा मोड़, महेंद्र गोयनका 10 दिन पुलिस हिरासत में
20 Jul, 2026 09:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर। रायपुर के उद्योगपति एवं विधायक संजय पाठक के परिवार से जुड़ी कंपनियों में कथित तौर पर लगभग 1000 करोड़ रुपये के कॉर्पोरेट फर्जीवाड़े के मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। इस मामले में कोतमा निवासी महेंद्र गोयनका को कोलकाता पुलिस द्वारा दिल्ली से गिरफ्तार किए जाने की बड़ी खबर सामने आई है। अदालत ने आरोपी को 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है, जिसके दौरान वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों में कथित हेराफेरी और अन्य पहलुओं पर गहन पूछताछ की जाएगी।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए नियंत्रण स्थापित करने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, महेंद्र गोयनका पर मुख्य आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों, कूटरचित दस्तावेजों और अन्य दस्तावेजी हेराफेरी के जरिए संजय पाठक परिवार से जुड़ी कई कंपनियों पर अवैध रूप से अपना नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया था। इस संबंध में कोलकाता में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग से जुड़ा मामला दर्ज किया गया है।
कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों की हो रही जांच
सूत्रों के मुताबिक, महेंद्र गोयनका पहले पाठक परिवार से जुड़ी प्रमुख कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में वरिष्ठ प्रबंधकीय पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन पर कंपनी के वित्तीय लेनदेन में गंभीर अनियमितताओं, संपत्तियों के दुरुपयोग और दस्तावेजों में फेरबदल करने के आरोप लगाए गए हैं। अब जांच एजेंसियां कंपनी के पुराने वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य कागजातों की विस्तार से जांच-पड़ताल कर रही हैं।
NCLT के आदेश का भी जांच में जिक्र
इस हाई-प्रोफाइल मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि 9 मई 2025 को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT), मुंबई पीठ द्वारा जारी किए गए एक आदेश में महेंद्र गोयनका और उनकी पत्नी मीनू गोयनका से जुड़े कुछ वित्तीय मामलों का विशेष उल्लेख किया गया था। इसके अलावा, उनकी एक अन्य कंपनी 'निसर्ग इस्पात' से जुड़े वित्तीय लेनदेन भी पूरी तरह जांच एजेंसियों के रडार पर बने हुए हैं।
कटनी में भी दर्ज हैं मामले
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महेंद्र गोयनका और उनके कुछ अन्य सहयोगियों के खिलाफ मध्य प्रदेश के कटनी जिले में भी धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और जालसाजी से जुड़े अलग-अलग मामले दर्ज बताए जाते हैं। इसके साथ ही, कुछ आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय से खारिज होने की जानकारी भी सामने आ रही है, जिससे उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खबर, श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेन का टाइम-टेबल जारी
20 Jul, 2026 08:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर। छत्तीसगढ़ से श्रावणी मेला के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए रेलवे ने एक बड़ी राहत भरी सौगात दी है। यात्रा के दौरान ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने और यात्रियों की सुविधा को सुनिश्चित करने के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने एक विशेष ट्रेन के संचालन का निर्णय लिया है।
साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन का संचालन
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा 1 अगस्त से 30 अगस्त 2026 तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी–मधुपुर–नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन का संचालन किया जाएगा। यह विशेष ट्रेन दोनों दिशाओं में कुल 5-5 फेरे लगाएगी, जिससे यात्रियों को आवागमन में खासी सहूलियत मिलेगी।
ट्रेन का समय और प्रमुख स्टॉपेज
गाड़ी संख्या 08895 (इतवारी से मधुपुर): यह ट्रेन प्रत्येक शनिवार (1, 8, 15, 22 और 29 अगस्त) को सुबह 4:30 बजे नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी स्टेशन से रवाना होगी। यह ट्रेन गोंदिया, डोंगरगढ़, राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, भाटापारा, बिलासपुर, चांपा, रायगढ़, बेलपहाड़ और ब्रजराजनगर समेत कई प्रमुख स्टेशनों पर रुकते हुए अगले दिन सुबह 6 बजे मधुपुर पहुंचेगी।
गाड़ी संख्या 08896 (मधुपुर से इतवारी): वापसी में यह ट्रेन प्रत्येक रविवार (2, 9, 16, 23 और 30 अगस्त) को सुबह 9 बजे मधुपुर से प्रस्थान करेगी और अगले दिन सुबह 11:50 बजे इतवारी पहुंचेगी। वापसी के दौरान भी यह गाड़ी रायगढ़, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, डोंगरगढ़ और गोंदिया जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ठहरेगी।
यात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं
रेलवे प्रशासन के अनुसार, इस स्पेशल ट्रेन में कुल 20 आधुनिक कोच जोड़े गए हैं, जिनमें 4 एसी थर्ड क्लास, 10 स्लीपर क्लास, 4 जनरल कोच और 2 एसएलआरडी (दिव्यांगजन और लगेज सह गार्ड) कोच शामिल हैं। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की योजना समयबद्ध तरीके से बनाएं तथा सफर पर निकलने से पहले ट्रेन के निर्धारित समय और ठहराव की पुष्टि रेलवे के आधिकारिक माध्यमों से अवश्य कर लें, ताकि उनकी यात्रा पूरी तरह से सुरक्षित और आरामदायक हो सके।
‘राम-नामी’ ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान, 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में जीता बड़ा सम्मान
20 Jul, 2026 07:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय फलक पर एक बार फिर बड़ी पहचान मिली है। रामनामी समुदाय की अनूठी और ऐतिहासिक परंपरा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री’ के प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने फिल्म के निर्देशक भरतबाला गणपति तथा उनकी पूरी निर्माण टीम को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि यह पुरस्कार राज्य की गौरवशाली लोक संस्कृति, गहरी आध्यात्मिक परंपराओं और अनूठी सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिला एक बेहद महत्वपूर्ण और गर्व का क्षण है।
रामनामी परंपरा का सांस्कृतिक महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनामी समाज की यह अनोखा पंथ अटूट श्रद्धा, समर्पण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का एक जीवंत प्रतीक है। इस डॉक्यूमेंट्री ने इस विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को बेहद प्रभावी और कलात्मक ढंग से देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का सराहनीय कार्य किया है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस राष्ट्रीय सम्मान से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, जनजातीय एवं लोक समुदायों की संस्कृति तथा प्रदेश की विविध पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी। यह उपलब्धि राज्य के कला जगत और कलाकारों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन साबित होगी।
झमाझम बारिश से बढ़ेगी मुश्किलें, छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में भारी वर्षा की चेतावनी
20 Jul, 2026 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून ने पूरी तरह से जोर पकड़ लिया है, और इसका व्यापक असर पूरे प्रदेश में देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है, जबकि कुछ विशेष इलाकों में तेज से भारी बारिश भी हो सकती है।
गरज-चमक और वज्रपात की चेतावनी
लगातार हो रही बारिश से भले ही आम जनता को भीषण गर्मी से राहत मिली है, लेकिन कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने का खतरा भी बढ़ गया है। मौसम विभाग ने खराब मौसम के दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग ने चेतावनी दी है कि गरज-चमक और बिजली गिरने के समय लोग खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से सुरक्षित दूरी बनाकर रखें तथा बिना किसी आवश्यक कार्य के घरों से बाहर न निकलें।
राजधानी रायपुर का हाल
रायपुर सहित प्रदेश के कई अन्य शहरों में दिनभर आसमान में बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने के आसार हैं। कई स्थानों पर तेज बौछारों के साथ बिजली चमकने की भी संभावना जताई गई है। प्रशासन ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे सड़कों पर चलते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग ने राज्य के विभिन्न जिलों के लिए चेतावनी जारी की है:
ऑरेंज अलर्ट: कुछ चुनिंदा इलाकों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
यलो अलर्ट: उत्तर बस्तर कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, बलौदा बाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर में अगले कुछ घंटों के दौरान बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में तेज हवाएं चलने और बादल गरजने की भी पूरी संभावना है।
रायपुर में 'बुराड़ी कांड' जैसा खौफनाक मंजर: कर्ज के जाल में फंसे कारोबारी ने पूरे परिवार समेत दी जान!
19 Jul, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से दिल्ली के बुराड़ी केस जैसी ही एक सनसनीखेज और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। शहर के संजय नगर इलाके में शुक्रवार (18 जुलाई) की देर रात एक ही परिवार के 5 लोगों के शव मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर सभी शवों को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
शुरुआती जांच: आर्थिक तंगी बनी वजह, बच्चों को जहर देकर खुद लगाई फांसी
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश के मुताबिक, मृतक सैय्यद शाहिद उर्फ सज्जू मौदहापारा इलाके में पुरानी बैटरियों की खरीद-बिक्री और रिपेयरिंग का काम करता था। वह लंबे समय से भारी आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। उस पर बैंक की ईएमआई (EMI) के साथ-साथ बाजार और निजी उधारी का भी भारी दबाव था। आशंका जताई जा रही है कि इसी मानसिक तनाव के चलते उसने पहले अपनी पत्नी और तीन बच्चों को खाने में जहर दिया और फिर खुद फांसी के फंदे पर झूल गया।
मामले की जांच के लिए 8 सदस्यीय SIT गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
नेतृत्व: इस 8 सदस्यीय एसआईटी (SIT) टीम का नेतृत्व एसीपी (ACP) पुरानी बस्ती कर रहे हैं।
टीम का गठन: इस टीम में एक महिला सब-इंस्पेक्टर (SI) और 3 सिपाही समेत कुल 8 पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया है, जो हर बारीकी और पहलू पर तफ्तीश करेगी।
मौके से मिला कीटनाशक, फोरेंसिक जांच शुरू
यह पूरा मामला टिकरापारा थाने में दर्ज किया गया है। पुलिस ने क्राइम सीन (घटनास्थल) को पूरी तरह से सील कर दिया है।
फोरेंसिक टीम की कार्रवाई: फोरेंसिक विशेषज्ञों ने मौके से कई महत्वपूर्ण सैंपल जुटाए हैं।
शुरुआती सबूत: पुलिस के अनुसार, मृतकों के मुंह से झाग निकल रहा था। कमरे की तलाशी के दौरान खाने-पीने के सामान के साथ एक कीटनाशक (Pesticide) का डिब्बा भी बरामद हुआ है।
"मामले की हर एंगल से गहराई से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों की असली और सटीक वजह पूरी तरह से साफ हो पाएगी।" — स्थानीय पुलिस प्रशासन
कोतबा-बागबहार सड़क अधूरी, 40 करोड़ की परियोजना पर लगा ब्रेक; राहगीरों की बढ़ी मुश्किलें
18 Jul, 2026 02:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में कोतबा से बागबहार को जोड़ने वाली लगभग 13 किलोमीटर लंबी मुख्य सड़क बारिश के बाद पूरी तरह बदहाल हो गई है। सड़क निर्माण के लिए करीब 40 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिलने के बावजूद नौ महीने बीत जाने के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ है। आलम यह है कि पहली ही बारिश में सड़क बड़े-बड़े गड्ढों और कीचड़ में तब्दील हो गई है, जिससे हजारों लोगों का दैनिक आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
हजारों लोगों के लिए बनी मुसीबत
कोतबा-बागबहार मार्ग इस क्षेत्र की जीवनरेखा है। इसी सड़क से स्थानीय ग्रामीण, विद्यार्थी, मरीज, यात्री बसें और मालवाहक वाहन गुजरते हैं। ओडिशा और झारखंड की ओर जाने वाले वाहनों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण रास्ता है। सड़क की खस्ताहाली के कारण हर दिन यहां दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। जगह-जगह जलभराव और गहरे गड्ढों की वजह से यातायात की गति बेहद धीमी हो गई है।
ग्रामीणों ने PWD और ठेकेदार पर लगाए गंभीर आरोप
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) और ठेकेदार ने सड़क की मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की है। ग्रामीणों के अनुसार, गड्ढों में अत्यंत निम्न गुणवत्ता की गिट्टी और मिट्टी भरी गई थी, जो पहली बारिश की मार भी नहीं झेल सकी और बह गई। लोगों का कहना है कि अब सड़क की स्थिति पहले से कहीं अधिक भयावह हो गई है, जबकि निर्माण कार्य अब तक शुरू करने के कोई संकेत नहीं हैं।
प्रशासन की चुप्पी और अधिकारियों का रुख
जब इस मामले में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो विभाग की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिली। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने सड़क की खराब स्थिति को स्वीकार करते हुए यह आश्वासन दिया है कि इस मुद्दे को आगामी समीक्षा बैठक में उठाया जाएगा और आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।
स्थानीय लोगों ने दी आंदोलन की चेतावनी
सड़क की दुर्दशा को लेकर क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन और पदयात्रा की घोषणा कर दी है।
40 करोड़ की परियोजना पर उठ रहे सवाल
क्षेत्रवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति के बाद भी निर्माण कार्य का शुरू न होना गंभीर लापरवाही का प्रमाण है। लोगों को डर है कि यदि समय रहते काम शुरू नहीं हुआ, तो यह परियोजना भी फाइलों में दबकर रह जाएगी और उन्हें लंबे समय तक जान जोखिम में डालकर बदहाल सड़क पर सफर करना पड़ेगा।
इस क्षेत्र के निवासियों की समस्याओं को देखते हुए, क्या आप चाहेंगे कि मैं इस सड़क की बदहाली को लेकर संबंधित अधिकारियों को भेजे जाने वाले पत्र का एक औपचारिक ड्राफ्ट तैयार करने में आपकी मदद करूं?
27 साल पुराने घोटाले में नया खुलासा, EOW ने 15 हजार पन्नों के सबूत कोर्ट में सौंपे
18 Jul, 2026 02:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर। पूर्व मध्य प्रदेश के समय हुए 1.86 करोड़ रुपये के चर्चित हाउसिंग लोन घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए विशेष अदालत में 15 हजार पन्नों का विस्तृत चालान पेश किया है। इस मामले में तीन आरोपियों पर सरकारी आवास योजना के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर करोड़ों रुपये के ऋण का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप है।
इन तीन आरोपियों के खिलाफ पेश हुआ चालान
ईओडब्ल्यू द्वारा दाखिल किए गए चालान में आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी, तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू और सहकारी आवास संघ भोपाल के तत्कालीन प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा को नामजद किया गया है।
186 फर्जी सदस्यों के नाम पर जारी किए गए लोन
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने सरकारी आवास योजना का लाभ देने के बहाने 186 फर्जी सदस्यों के दस्तावेज तैयार किए। इन्हीं फर्जी नामों का इस्तेमाल कर हाउसिंग लोन स्वीकृत कराए गए और पूरी राशि का गबन कर लिया गया। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि लोन लेने वाले उन लाभार्थियों का कोई वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था।
बकाया राशि 104 करोड़ रुपये तक पहुंची
ईओडब्ल्यू के अनुसार, समय पर ऋण की वसूली न होने के कारण 31 दिसंबर 2025 तक मूलधन और ब्याज जुड़कर यह राशि अब 104 करोड़ रुपये के डूबत ऋण (NPA) में तब्दील हो गई है। इस वित्तीय हेरफेर से सरकारी वित्तीय संस्थाओं को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
घोटाले की शिकायत के बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच टीम जब रिकॉर्ड में दर्ज पतों पर पहुंची, तो वहां मकानों के बजाय खाली जमीन पाई गई। इसके बाद जब तथाकथित ऋणधारकों की पहचान की कोशिश की गई, तो वे सभी लाभार्थी फर्जी पाए गए। इससे यह स्पष्ट हो गया कि पूरी आवास योजना केवल कागजों पर तैयार की गई थी ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा सके।
मामले की सुनवाई अब विशेष अदालत में
ईओडब्ल्यू द्वारा 15 हजार पन्नों का चालान पेश किए जाने के बाद अब इस मामले की सुनवाई विशेष अदालत में होगी। उम्मीद है कि इन दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा।
बाढ़ ने मचाई तबाही, 400 घर डूबे; 90 साल बाद दिखा ऐसा भयावह मंजर
18 Jul, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिलासपुर| बिलासपुर में हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। शहर के कई इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। लोगों के घरों का राशन, दुकान का सामान, सरकारी चिकित्सा संस्थान और पेट्रोल पंप तक क्षतिग्रस्त हो गए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने दशकों बाद तबाही का ऐसा मंजर देखा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को जलभराव वाले इलाकों में नाव का सहारा लेकर लोगों तक पहुँचना पड़ रहा है। पीड़ित अपनी बर्बादी का मुआवजा पाने के लिए प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं। वहीं, पिछले दो दिनों से प्रशासन द्वारा बिलासपुर संभाग के निवासियों को भारी बारिश को लेकर मोबाइल पर लगातार अलर्ट और सतर्क रहने की चेतावनी भेजी जा रही है।
400 से अधिक मकानों में भरा पानी
भारी बारिश के कारण 400 से ज्यादा घरों में पानी घुस गया है, जिसके चलते लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं। प्रभावित लोग अपने रिश्तेदारों के यहां या सुरक्षित ठिकानों की तलाश कर रहे हैं। घरों में 5 से 10 फीट तक पानी भरने से राशन, कपड़े, बिस्तर और बर्तन जैसे आवश्यक सामान पूरी तरह खराब हो गए हैं। कई कच्चे घर इस जलप्रलय में ढह गए हैं।
नेताओं के बयान पर भड़के लोग
इस संकट की घड़ी में जब बिलासपुर के विधायक अमर अग्रवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के साथ खड़े होने की बात कही, तो लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया गया और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर अधिकारियों व नेताओं के प्रति भारी आक्रोश देखा गया।
90 साल बाद देखा गया तबाही का मंजर
बिलासपुर के लोगों के लिए लगातार हो रही बारिश और घरों का जलमग्न होना सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, लगभग 90 साल बाद शहर ने इस तरह का भयावह मंजर झेला है। अब जनता की नजरें प्रशासन, कलेक्टर, कमिश्नर और मेयर जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस आपदा से निपटने और आमजन को राहत पहुँचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।
शराब बिक्री में गड़बड़ी पर बड़ा एक्शन, उप निरीक्षक पर गिरी गाज; जिला अधिकारी से जवाब तलब
18 Jul, 2026 01:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में शराब दुकानों पर मनमानी कीमतें वसूलने वाले कर्मचारियों और लापरवाह अधिकारियों पर आबकारी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। अनियमितता की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने एक उप निरीक्षक को निलंबित कर दिया है और जिला आबकारी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
औचक निरीक्षण में खुली धांधली
दुर्ग संभाग के उड़नदस्ता दल ने जिले की विभिन्न शराब दुकानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान विभाग ने सादे कपड़ों में ग्राहकों को खरीदारी के लिए भेजकर कीमतों की वास्तविकता की जांच की। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कई दुकानों पर निर्धारित सरकारी मूल्य से अधिक राशि वसूली जा रही थी।
लखोली और रेवाडीह की दुकानों में अनियमितता
विभागीय जांच में मुख्य रूप से दो स्थानों पर गड़बड़ी सामने आई:
लखोली: मंडी बाइपास स्थित दुकान पर 120 रुपये प्रति बोतल वाली 'जम्मू स्पेशल व्हिस्की' की 20 बोतलों के लिए ग्राहकों से 2,500 रुपये लिए गए, जबकि इनका सही मूल्य 2,400 रुपये था।
रेवाडीह: यहाँ की कंपोजिट शराब दुकान पर 'सुप्रीम डीलक्स व्हिस्की' के 20 पाव तय दाम से 100 रुपये अधिक में बेचे जा रहे थे।
अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने इस मामले को गंभीर कदाचार मानते हुए जिम्मेदारी तय की है:
निलंबन: रेवाडीह क्षेत्र के वृत्त प्रभारी एवं आबकारी उप निरीक्षक दिलीप कुमार प्रजापति को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विभाग का मानना है कि यह उनके क्षेत्र में प्रशासनिक नियंत्रण की विफलता को दर्शाता है।
नोटिस: जिला आबकारी अधिकारी राजेश शर्मा को प्रभावी निगरानी न रख पाने और प्रशासनिक लापरवाही के लिए कारण बताओ नोटिस दिया गया है। उन्हें सात दिनों के भीतर अपना जवाब सौंपने का निर्देश दिया गया है।
भविष्य के लिए चेतावनी
आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि शराब दुकानों पर 'ओवररेटिंग' (तय मूल्य से अधिक वसूली) किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी दुकानों की निरंतर निगरानी की जाएगी और यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी नियमों के विरुद्ध कार्य करते हुए पाया गया, तो उनके विरुद्ध कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
'समाज सेवा ही सबसे बड़ी सफलता', रोटरी क्लब के नए सत्र में डॉ. हिमांशु द्विवेदी का प्रेरक संदेश
18 Jul, 2026 12:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिलासपुर: समाज सेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में सक्रिय रोटरी क्लब के नए सत्र की शुरुआत पूरे उत्साह और सेवा भाव के साथ हुई। बिलासपुर में आयोजित पदभार ग्रहण समारोह के दौरान, प्रमुख वक्ताओं ने संगठन के उद्देश्यों और समाज के प्रति जिम्मेदारी पर विशेष बल दिया।
सेवा ही जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य: डॉ. हिमांशु द्विवेदी
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने अपने प्रेरक संबोधन में सामाजिक दायित्वों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रोटरी क्लब में पदभार ग्रहण करना महज एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के प्रति नई प्रतिबद्धता को स्वीकार करना है।
डॉ. द्विवेदी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा:
सेवा की परंपरा: रोटरी इंटरनेशनल ने पिछले 125 वर्षों में सेवा और समर्पण की जो मिसाल कायम की है, वह पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है। पोलियो उन्मूलन में रोटरी की भूमिका इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।
समाज के लिए जीना: स्वामी विवेकानंद के विचारों को उद्धृत करते हुए उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत सफलता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण समाज और जरूरतमंदों के लिए किया गया कार्य है। परोपकार की भावना ही व्यक्ति को वास्तविक सम्मान दिलाती है।
संगठित प्रयास: वर्तमान चुनौतियों के बीच संगठित प्रयासों से ही समाज में सकारात्मक और बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने क्लब के सदस्यों से स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में और अधिक प्रभावी योगदान देने का आह्वान किया।
नेतृत्व में बदलाव और नई संकल्पशक्ति
समारोह के दौरान रोटरी क्लब की नई टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई:
निवर्तमान अध्यक्ष की रिपोर्ट: क्लब के निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ वर्मा ने अपने कार्यकाल का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में पिछले एक वर्ष में किए गए कार्यों को जनहित के लिए समर्पित बताया।
नया नेतृत्व: डॉ. सिद्धार्थ वर्मा ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल को क्लब की कमान सौंपी।
भविष्य की कार्ययोजना: नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल ने रोटरी क्लब की सेवा परंपरा को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी सदस्यों के सहयोग और वरिष्ठों के मार्गदर्शन से क्लब समाज सेवा के नए प्रतिमान स्थापित करेगा।
यह आयोजन न केवल क्लब की संगठनात्मक शक्ति को दर्शाता है, बल्कि आने वाले समय में बिलासपुर में सेवा कार्यों को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने की स्पष्ट प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित करता है।
PM आवास योजना में बड़ा खुलासा, 1600 में 1200 आवेदन खारिज; लाभार्थियों में नाराजगी
18 Jul, 2026 12:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जगदलपुर: प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराने का दावा अब गंभीर सवालों के घेरे में है। जगदलपुर नगर निगम में आवेदनों की स्वीकृति और आवास आवंटन के आंकड़ों को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच खींचतान तेज हो गई है। नगर निगम प्रशासन का दावा है कि योजना के तहत 2036 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं और 1855 मकानों पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इसके विपरीत, विपक्ष का आरोप है कि बड़ी संख्या में आवेदनों को या तो खारिज कर दिया गया है या उन्हें होल्ड पर रखा गया है, जिससे जरूरतमंद परिवार आज भी अपने आशियाने की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं।
आवास आवंटन का अधूरा सपना
योजना के जमीनी क्रियान्वयन पर नजर डालें तो स्थिति काफी चिंताजनक है:
आवेदनों में बाधाएं: दस्तावेजों की जटिल प्रक्रिया, अगस्त 2015 से पहले के निवास का प्रमाण, वोटर आईडी, स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र, जनगणना में नाम और तीन लाख रुपये से कम आय का प्रमाण पत्र जुटाना आवेदकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस कारण लगभग 1600 आवेदनों में से एक बड़ा हिस्सा रिजेक्ट या लंबित हो गया है।
निर्माण और आवंटन की धीमी गति: कागजों पर 346 मकान तैयार बताए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि मात्र 303 हितग्राहियों को ही अब तक आवास आवंटित हो पाए हैं। वहीं, 116 मकान अभी भी निर्माणाधीन हैं, जिससे लाभार्थियों में असंतोष है।
आर्थिक बोझ: धरमपुरा और देवकी जैसे क्षेत्रों में मकान तैयार होने के बावजूद पात्र परिवार आवंटन का इंतजार कर रहे हैं। हितग्राहियों पर लगभग 10 प्रतिशत अंशदान (करीब 38 हजार रुपये) जमा करने का दबाव है, जबकि सब्सिडी मिलने के बाद भी मकान की लागत लगभग 3 लाख रुपये तक जा रही है, जो गरीब परिवारों के लिए एक बड़ी वित्तीय दीवार है।
पारदर्शिता बनाम जटिलता
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या दस्तावेजीकरण की यह सख्त प्रक्रिया वास्तव में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए है, या फिर यह गरीबों के लिए उनके अपने घर के सपने तक पहुंचने में सबसे बड़ी बाधा बन गई है? नगर निगम प्रशासन फिलहाल दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया का हवाला दे रहा है, लेकिन जवाबदेही तय करने का सवाल अब भी अनुत्तरित है।
बेघर परिवारों के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन रिजेक्शन के कारणों की समीक्षा कब करता है और वे परिवार, जो सालों से इस योजना का लाभ पाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, उन्हें पक्के मकानों का अधिकार कब प्राप्त होगा।
शिक्षक या हॉस्टल अधीक्षक? एमसीबी में डबल ड्यूटी ने बढ़ाई शिक्षा व्यवस्था की मुश्किलें
18 Jul, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
एमसीबी: छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले में शिक्षा विभाग द्वारा एक नया प्रशासनिक निर्णय लिया गया है, जिसके तहत 27 शिक्षकों को उनके नियमित शिक्षण कार्यों के साथ-साथ स्थानीय आदिवासी छात्रावासों और आश्रमों के अधीक्षक की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इस आदेश के बाद शैक्षणिक और प्रशासनिक हल्कों में इसे लेकर गंभीर बहस छिड़ गई है।
संलग्नीकरण के विरुद्ध अतिरिक्त प्रभार का विरोधाभास
राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि शिक्षकों का संलग्नीकरण समाप्त कर उन्हें पूरी तरह से उनके मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में अध्यापन के लिए केंद्रित किया जाए। इसके विपरीत, जिला प्रशासन ने छात्रावास अधीक्षकों की कमी का हवाला देकर शिक्षकों को यह अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। प्रशासन का कहना है कि यह एक अस्थायी व्यवस्था है और उन शिक्षकों को ही यह जिम्मेदारी दी गई है जो संबंधित छात्रावासों के समीप कार्यरत हैं।
दोहरी जिम्मेदारी: शैक्षणिक गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
शिक्षण कार्य और छात्रावास प्रबंधन दोनों ही पूर्णकालिक जिम्मेदारियां हैं, ऐसे में शिक्षकों के लिए इनका तालमेल बिठाना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है:
दूरी और समय प्रबंधन: नियमानुसार शिक्षकों को स्कूल में उपस्थित रहना अनिवार्य है, जहां उनकी उपस्थिति 'विद्या समीक्षा केंद्र' (VSK) ऐप के माध्यम से लोकेशन-आधारित प्रणाली से दर्ज होती है। यदि छात्रावास स्कूल से 15-20 किलोमीटर दूर है, तो दोनों स्थानों पर प्रभावी उपस्थिति और निगरानी सुनिश्चित करना लगभग असंभव है।
अधिकारों में स्पष्टता का अभाव: इस आदेश को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी सामंजस्य की कमी दिख रही है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने इस तरह के किसी भी आदेश की जानकारी होने से इनकार किया है, जबकि प्रशासन इसे जिला स्तर का निर्णय बता रहा है।
शिक्षा जगत में चिंता का माहौल
एमसीबी जिला पिछले बोर्ड परीक्षा परिणामों में राज्य के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल रहा है। ऐसे में शिक्षकों पर अतिरिक्त प्रशासनिक दबाव डालने से विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। शिक्षकों को बच्चों की सुरक्षा, भोजन व्यवस्था और अनुशासन जैसे कार्यों के लिए भी समय देना होगा, जिससे मुख्य शिक्षण कार्य बाधित हो सकता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या जिला प्रशासन इस फैसले की समीक्षा करता है या शिक्षकों को शिक्षा के साथ-साथ यह दोहरी जिम्मेदारी निर्वहन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
सूंड से उठाया, जमीन पर पटका और कुचला, हाथी के हमले में किसान की मौत
18 Jul, 2026 10:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। बलरामपुर और सूरजपुर जिले की सीमा से सटे इलाकों में हाथियों के दल ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। हाल ही में हुई एक दर्दनाक घटना में एक किसान की हाथियों द्वारा कुचलकर हत्या कर दी गई, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है।
सूंड से उठाकर पटका और कुचल दिया
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजपुर क्षेत्र के रेवतपुर पंचायत निवासी बालम अपने घर में मौजूद था। इसी दौरान जंगली हाथियों के एक दल ने उसके घर को निशाना बनाया और उसे तोड़ना शुरू कर दिया। अपनी जान बचाने के लिए जैसे ही वह घर से बाहर निकलकर भागा, हाथियों ने उसे घर से महज 100 मीटर की दूरी पर धर दबोचा। हाथियों ने उसे अपनी सूंड से हवा में उछाला और जमीन पर पटक कर बुरी तरह कुचल दिया, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
तीन जंगली हाथियों का दल बना मुसीबत
इलाके के ग्रामीण पिछले कई महीनों से तीन जंगली हाथियों के इस आक्रामक दल से जूझ रहे हैं। इन हाथियों की लगातार आवाजाही ने स्थानीय लोगों के सामान्य जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसी दल ने एक सप्ताह पूर्व भी एक ग्रामीण पर जानलेवा हमला किया था, जिसमें पीड़ित की रीढ़ की हड्डी टूट गई थी और वह अभी भी उपचाराधीन है।
वन विभाग के प्रयासों से नाखुश ग्रामीण
स्थानीय निवासियों में वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि:
विफल सुरक्षा: वन विभाग द्वारा हाथियों को आबादी से दूर रखने के लिए जंगल के किनारे सोलर फेंसिंग कराई गई थी, लेकिन इसके बावजूद हाथी लगातार गांवों और मुख्य सड़कों तक पहुंच रहे हैं।
खेतों में जाने का डर: हाथियों के निरंतर भय के कारण किसान अपनी फसलों की देखभाल के लिए खेतों में जाने से भी डर रहे हैं।
मुआवजे की मांग: ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से हाथियों के इस आतंक का कोई स्थायी समाधान खोजने और मृतक के परिवार को उचित मुआवजा प्रदान करने की पुरजोर मांग की है।
क्षेत्र में लगातार हो रही इन घटनाओं से ग्रामीण डरे हुए हैं और वन विभाग से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की अपेक्षा कर रहे हैं।
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