मध्य प्रदेश
उमरिया जिले की पूजा सिंह ने रची आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी
18 Apr, 2026 11:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : उमरिया जिले के घंघरी ग्राम की पूजा सिंह ने अपनी वस्त्र निर्माण इकाई स्थापित कर आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी रची है। आज उनकी इकाई द्वारा निर्मित वस्त्र प्रदेश के विभिन्न जिलों तक जा रहे हैं। उनकी यह सफलता अन्य महिलाओं के लिये भी प्रेरणा बन रही है। पूजा सिंह ने इस सफलता को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में मिले ऋण की मदद से साकार किया है।
सीमित संसाधनों के कारण लंबे समय तक स्वयं का व्यवसाय शुरू करने में असमर्थ रहीं पूजा सिंह को जब मुद्रा योजना की जानकारी मिली, तो उन्होंने बैंक में आवेदन किया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें मुद्रा योजना के तहत 8 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इस वित्तीय सहयोग से उन्होंने “हीरा फैब्रिक” नाम से अपनी वस्त्र निर्माण इकाई स्थापित की। आज उनकी यूनिट में स्कूल ड्रेस, शर्ट, पैंट, ट्रैक सूट, टी-शर्ट और लोअर जैसे परिधानों का निर्माण किया जा रहा है। उत्पादों की उत्कृष्ट गुणवत्ता और समय पर आपूर्ति के कारण उन्हें होशंगाबाद, सीधी, मैहर, सतना, कटनी, इटारसी और बुधनी जैसे विभिन्न क्षेत्रों से निरंतर ऑर्डर मिल रहे हैं। इससे उनका व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ रहा है और पहचान भी बन रही है।
पूजा सिंह आज न केवल अपने परिवार के लिए आर्थिक रूप से मजबूत सहारा बनी हैं, बल्कि अपने उद्यम के माध्यम से 8 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराकर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। पूजा सिंह के पति धर्मेंद्र सिंह बताते हैं कि यदि सही जानकारी और मार्गदर्शन मिल जाए, तो कोई भी व्यक्ति अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुद्रा योजना ने उनके जीवन को नई दिशा और पहचान दी है।
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री मुद्रा योजना आज ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार को नई दिशा दे रही है। वर्ष 2015 में प्रारंभ की गई इस योजना का उद्देश्य छोटे उद्यमियों, युवाओं, महिलाओं और स्टार्टअप्स को बिना गारंटी के सरल ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। योजना के अंतर्गत शिशु (₹50,000 तक), किशोर (₹50,000 से ₹5 लाख) और तरुण (₹5 लाख से ₹10 लाख) श्रेणियों में ऋण प्रदान किया जाता है।
हमने सीवर सफाई के काम को चुनौती के रुप में स्वीकार किया है और हम बदलाव लाकर दिखाएंगे : ऊर्जा मंत्री तोमर
18 Apr, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के आहवान पर 15 ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र में शनिवार से सीवर स्वच्छता अभियान शुरू किया गया है। क्षेत्र में सीवर समस्या को लेकर विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से परेशानी बनी हुई थी। सीवर समस्या को दूर करने के लिए ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने खुद पहल करते हुए 3 करोड़ 15 लाख रुपए कीमत की सीवर सकर मशीन विधानसभा क्षेत्र के लिए उपलब्ध कराई है। उप नगर ग्वालियर के कांच मिल क्षेत्र से इस मशीन ने शनिवार से सीवर लाइनों की सफाई करना शुरू कर दिया।
मंत्री तोमर ने सीवर सफाई का पूरा शेड्यूल बताते हुए कहा कि 18 अप्रैल से 30 अप्रैल तक किस-किस तारीख को कहां-कहां सफाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आज ग्वालियर की स्वच्छता को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए सीवर समस्या के समाधान के लिए “सुपर सकर” मशीन का शुभारंभ कर इसे नगर निगम को समर्पित किया है। अब आधुनिक तकनीक के माध्यम से सफाई व्यवस्था और अधिक तेज, प्रभावी व सुदृढ़ बनेगी। उन्होंने जन कल्याण समिति को अहम जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा कि जहां-जहां सीवर सफाई का काम चले, जन कल्याण समिति के लोग इस कार्य की न केवल निगरानी रखें, बल्कि यह सुनिश्चित करें की सीवर सफाई का कार्य सुव्यवस्थित तरीके से हो। उन्होंने कहा कि यह नगर निगम के लिए चुनौती है। हमने सीवर सफाई के कार्य को अपने हाथ में लिया है और हम इसमें बदलाव लाकर दिखाएंगे।
ऊर्जा मंत्री ने सिविल अस्पताल हजीरा का जिक्र करते हुए कहा कि यह हमारी और आपकी जिद का ही परिणाम है कि सिविल अस्पताल हजीरा उन मरीजों को सुविधा दे रहा है, जिन्हें इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता था। उन्होंने विधानसभा क्षेत्र में सड़क के किनारे बने अस्थाई अतिक्रमण को स्वयं हटाए जाने का भी आहवान किया, जिससे आवागमन में किसी तरह की परेशानी ना हो।
ऊर्जा मंत्री ने 15 ग्वालियर विधानसभा में आ रहे बदलाव का जिक्र करते हुए कहा, आज स्वास्थ्य, सड़क, खेलकूद, शिक्षा हर क्षेत्र में बदलाव हो रहा है। पहले लोग हमारे पास आकर निजी स्कूलों में अपने बच्चों का एडमिशन कराने की बात कहते थे, लेकिन अब यहां के लोग अपने बच्चों को सांदीपनी स्कूल में भर्ती कराने की बात कहते हैं। यही बदलाव है। जो हमने और आपने साथ मिलकर किया है। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि हमने बदलाव लाने की ठान ली है और जल्दी ही ग्वालियर स्वच्छता के मामले में नंबर एक पर होगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छता, सुविधा और बेहतर जीवन स्तर बनाना हमारा संकल्प है।
इस अवसर पर वरिष्ठ पार्षद, प्रशासन, नगर निगम, विद्युत वितरण कंपनी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्यमंत्री गौर का सख्त रुख: लापरवाही पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश
18 Apr, 2026 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : गोविंदपुरा क्षेत्र के विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने कहा है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वार्ड 68 में 1.37 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के भूमिपूजन एवं लोकार्पण के दौरान मंत्री ने निर्माण कार्य में देरी और अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने और टेंडर निरस्त करने के निर्देश दिए।
राज्यमंत्री गौर ने वार्ड 68 अयोध्या नगर में परशुराम चौराहे से जोन कार्यालय मंगल भवन तक पेवर ब्लॉक लगाने के कार्य का भूमिपूजन किया , जिसकी लागत 26 लाख रुपए है। इस दौरान उन्होंने स्थानीय रहवासियों और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर जीरो टॉलरेंस अपनाते हुए ठेकेदार मेसर्स वैभव सक्सेना को निर्माण कार्य में लापरवाही पर कमिश्नर से शिकायत और टेंडर रद्द करने के आदेश मौजूद अधिकारियों को दिए।
वार्ड 68 में 4 लाख रुपए की लागत से एल सेक्टर पार्क में पेवर ब्लॉक लगाने का कार्य, प्लेग्राउंड इक्यूपमेंट्स एवं ओपन जीप इक्विपमेंट लगाने के निर्माण कार्य और 10 लाख की लागत से जी सेक्टर में बाबूलाल गौर पार्क में बाउंड्री वॉल व पाथवे निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। उन्होंने गीत बंगलो फेस 4 में लगभग 7 लाख की लागत से बनने वाली आरसीसी नाली निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया और एम सेक्टर में कम्युनिटी हॉल के निर्माण कार्य का भी भूमिपूजन किया, जिसकी लागत 4 लाख रुपए है।
राज्यमंत्री ने अयोध्या नगर मारुति विहार के पास आरसीसी नाली निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया, जिसकी लागत 3 लाख रुपए आएगी। अयोध्या नगर फेस-5 पार्ट 1 में कम्यूनिटी हाल की बाउंड्री वाल का काम 10 लाख की लागत से किया जाएगा। अयोध्या नगर फेस-5 पार्ट 2 में सीवेज कार्य का भूमिपूजन भी किया गया, जिसकी लागत 31 लाख रुपए है। सुख सागर फेस-1 में 4 लाख रुपये की लागत से कम्यूनिटी हाल का निर्माण कार्य भी किया जाएगा और भवानी केम्पस में शेड लगाने का कार्य लगभग 2 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा। उन्होंने अयोध्या नगर फेस-5 पार्ट 1 के रहवासियों के लिए लोकार्पण कर सामुदायिक भवन की सौगात दी।
राज्यमंत्री गौर ने भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों से चर्चा की और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी निर्देशित किया। कार्यक्रम के दौरान उर्मिला मौर्य, शिरोमणी शर्मा, लवकुश यादव, भीकम सिंह बघेल समेत बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
एकात्म पर्व के दूसरे दिन अध्यात्म, पर्यावरण और संस्कृति का एक अनूठा समागम
18 Apr, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : पुण्य सलिला नर्मदा के पावन तट ओंकारेश्वर में आयोजित 'एकात्म पर्व' के दूसरे दिन अध्यात्म, पर्यावरण और संस्कृति का एक अनूठा समागम देखने को मिला। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा आयोजित इस महोत्सव में देश के प्रख्यात संतों और विचारकों ने आदि गुरु शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन की वैश्विक प्रासंगिकता पर गहन विमर्श किया। जहाँ एक ओर गुरुवाणी और वेदांत के साझा सूत्रों को तलाशा गया, वहीं दूसरी ओर प्रकृति को स्वयं का ही विस्तार मानकर उसके संरक्षण का संकल्प दोहराया गया। शाम ढलते ही ओड़िसी और भरतनाट्यम की शास्त्रीय मुद्राओं ने शंकर के कालजयी स्तोत्रों को मंच पर जीवंत कर दर्शकों को एकात्म भाव के आनंदमय रस में सराबोर कर दिया।
आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा 17 से 21 अप्रैल तक चल रहे पंच दिवसीय एकात्म पर्व के दूसरे दिन सिख संप्रदाय पर विशेष सत्र हुआ,जिसमें गुरु ग्रन्थ साहिब से लेकर अद्वैत दर्शन की चर्चा हुई। इस सत्र में निर्मल अखाड़ा के महंत दर्शन सिंह ने कहा कि गुरुनानक देव गुरुवाणी का मंगलाचरण अद्वैत से ही करते है। एक ओंकार की अनुगूँज सर्वप्रथम इसी ओंकारेश्वर की पुण्य भूमि से हुई है। उन्होंने कहा कि सभी शास्त्रों के पीछे की मूल शक्ति है एक ओंकार ही है। उन्होंने कहा कि गुरुवाणी में ब्रह्म के अनेक उदाहरण है, ब्रह्म ही इस संसार का आधार है।
रामकृष्ण मिशन पर आधारित सत्र में स्वामी जापसिद्धानंद, स्वामी वेदतत्त्वानंद पुरी तथा स्वामी सर्वभद्रानंद ने सहभागिता की। इस सत्र में वक्ताओं ने रामकृष्ण परमहंस के जीवन, उनके अद्वैत दर्शन तथा मिशन की व्यापक भूमिका पर गहन विचार प्रस्तुत किए। स्वामी वेदतत्त्वानंद पुरी जी के अनुसार, रामकृष्ण मिशन को केवल एक संस्था के चश्मे से देखना इसकी व्यापकता को सीमित करना होगा। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि रामकृष्ण मिशन वास्तव में “श्री रामकृष्ण और उनके मिशन” का एक जीवंत विस्तार है। उन्होंने अपने विचारों को चार मुख्य स्तंभों, रामकृष्ण परमहंस का जीवन दर्शन, उनके शिष्यों का योगदान, संस्थागत ढांचा और समाज पर प्रभाव, में विभाजित कर प्रस्तुत किया। उन्होंने ‘शिव ज्ञाने जीव सेवा’ के मंत्र को समझाते हुए कहा कि सेवा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव में शिव का दर्शन करना है।
स्वामी सर्वभद्रानंद ने बताया कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने सन् 1897 में अपने शिष्यों के साथ मिलकर रामकृष्ण आश्रम की स्थापना की। उन्होंने यह भी कहा कि परमहंस जैसे संत विरले होते हैं, जो यह कह सकें कि वे ईश्वर के साक्षात दर्शन करा सकते हैं। स्वामी जापसिद्धानंद ने अद्वैत की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए तोतापुरी बाबा के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार तोतापुरी बाबा ने रामकृष्ण परमहंस को निर्विकल्पता की ओर अग्रसर किया। माँ काली के साकार रूप के कारण ध्यान में आने वाली बाधाओं के बावजूद, अंततः उन्होंने निर्विकल्प समाधि का अनुभव प्राप्त किया। स्वामी जी ने माँ शारदा देवी की पवित्रता का भी उल्लेख किया और बताया कि वे रामकृष्ण परमहंस की प्रथम शिष्या थीं, जिनकी पवित्रता के कारण वे लंबे समय तक समाधि में स्थित रह सके।
"हम प्रकृति के संरक्षक है मालिक नहीं"
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम, नई दिल्ली के राष्ट्र प्रमुख डॉ. बालकृष्ण पिसुपति ने अपने वक्तव्य में अद्वैत के श्लोक 'ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या' का उदाहरण लेते हुए बताया कि पर्यावरण हमसे अलग नहीं है, अपितु यह हमारा ही एक हिस्सा है इसलिए किसी भी चीज को अलग समझना भ्रम है। उन्होंने कहा कि प्रकृति को बाहरी मानने के कारण ही संकटों की शुरुआत होती है। बालकृष्ण जी ने कहा कि पानी और जीव-जगत किसी सीमा को नहीं मानते, लेकिन मनुष्य ने सदैव उन्हें बाँटने की कोशिश की है। यही सोच पर्यावरण समस्याओं को जन्म देती है। पिसुपति ने कहा कि हम पर्यावरण संसाधनों के मालिक नहीं हैं, बल्कि उसके संरक्षक हैं। उन्होंने बताया कि कैसे सुविधाप्रधान जीवनशैली के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है। डॉ बालकृष्ण ने यह भी बताया कि हमें 10,000 साल पुरानी जीवनशैली जीने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अपने पर्यावरण के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। बालकृष्ण ने सलाह देते हुए कहा कि बदलाव की शुरुआत हमें खुद से करनी चाहिए। उसका प्रभाव भले ही कम लगे, परंतु उसका सामूहिक प्रभाव एक बड़ा अंतर ला सकता है। उनसे पूछे गए एक सवाल के उत्तर में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वक्त विश्व के सामने समस्या ये है कि हमारे पास एक समस्या के कई समाधान है और उनमें से किसी एक को चुनना मुश्किल है, क्योंकि हर देश विकास का अपना तरीका चुनता है।
सौर गांधी के नाम से प्रसिद्ध चेतन सिंह सोलंकी ने अद्वैत एवं पर्यावरण विषय पर बोलते हुए कहा कि विज्ञान प्रगति कर रहा है परंतु पृथ्वी का आकार, संसाधन नहीं बढ़ रहा है और मनुष्य निरंतर मिट्टी, जल , हवा दूषित कर रहा है। चेतन ने सत्र के दौरान अद्वैत कैसे पर्यावरण की रक्षा कर रहा है, सब में ब्रह्म है तो पर्यावरण दूषित क्यों हो रहा है? UN के नियमों को किस तरह से अद्वैत से जोड़ सकते है जिससे सब के लिए समान नियम बने जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न वक्ताओं से पूछे और साथ ही उन्होंने कहा कि हम कुछ न करके भी पर्यावरण को सुरक्षित कर सकते है। उन्होंने कहा हमारी जरूरतें बढ़ रही है परन्तु पृथ्वी सीमित है इसलिए हमारी जरूरतें सीमित होनी चाहिए।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जीवंत हुआ आचार्य शंकर का दर्शन
पुण्य सलिला नर्मदा के तट पर आयोजित 'एकात्म पर्व' में आध्यात्मिक चेतना और कला का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं, जिन्होंने आदि गुरु शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन और उनकी कालजयी रचनाओं को मंच पर जीवंत कर दिया।
प्रकृति और स्तोत्रों का अनूठा संगम
आचार्य शंकर ने प्रकृति को ईश्वर का स्वरूप माना था। उन्होंने नदियों की दिव्यता को रेखांकित करते हुए गंगा, यमुना और नर्मदा पर कई स्तोत्रों की रचना की। कार्यक्रम में यह तथ्य प्रमुखता से उभरा कि हजारों वर्ष पूर्व, मात्र आठ वर्ष की अल्पायु में आचार्य शंकर ने ओंकारेश्वर की इसी पावन भूमि पर 'नर्मदाष्टकम्' की रचना की थी।
आज भी "त्वदीय पाद पंकजम्, नमामि देवी नर्मदे" के स्वर करोड़ों लोगों के कंठ में गूँजते हैं। इसी तरह, जब वे गंगा के तट पर पहुँचे, तो उन्होंने "देवी सुरेश्वरी भगवती गंगे" के माध्यम से गंगा की अलौकिकता का गान किया। ये स्तोत्र आज के समय में भी पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक शांति के लिए हम सभी के लिए प्रेरणा पुंज बने हुए हैं।
मंच पर उतरीं शास्त्रीय कलाएँ
सांस्कृतिक संध्या में भारत की समृद्ध शास्त्रीय नृत्य परंपरा के माध्यम से शंकर के दर्शन को प्रस्तुत किया गया। प्रसिद्ध नृत्यांगना शुभदा वराड़कर ने अपने समूह के साथ ओड़िसी शैली में आचार्य शंकर द्वारा रचित स्तोत्रों पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी। उन्होंने नृत्य के माध्यम से नदियों की चंचलता और उनके प्रति भक्ति भाव को बखूबी दर्शाया। सुप्रसिद्ध कलाकार पद्मजा सुरेश ने शक्ति पर केंद्रित भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी। उनकी मुद्राओं और पदचाप में आदि शक्ति का तेज और आचार्य शंकर की 'सौंदर्य लहरी' की झलक दिखाई दी।
कार्यक्रम में केवल नदियों पर केंद्रित स्तोत्र ही नहीं, बल्कि आचार्य शंकर की अन्य महान रचनाओं जैसे 'निर्वाणषटकम्' और 'गणेश पंचरत्नम्' पर भी कोरियोग्राफी प्रस्तुत की गई।
“मनोबुद्ध्यहंकार चित्तानि नाहं..." के स्वर जब वातावरण में गूँजे, तो दर्शक दीर्घा में बैठा हर व्यक्ति अद्वैत भाव में सराबोर हो गया।
जन-मानस में गूँजता एकात्म भाव
एकात्म पर्व के इन कार्यक्रमों ने यह सिद्ध कर दिया कि आचार्य शंकर का ज्ञान केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह संगीत, नृत्य और लोक समाज की संस्कृति में रचा-बसा है। ओंकारेश्वर की इस पुण्य भूमि पर हुई इन प्रस्तुतियों ने युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और महान सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
जनगणना एक राष्ट्रीय कार्य, इसमें सबका सक्रिय सहयोग बेहद जरूरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
18 Apr, 2026 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश की जनसंख्या के आंकड़े ही केंद्र सरकार द्वारा नीति निर्माण एवं मानव संसाधन के नियोजन का पहला आधार होते हैं। देश की आबादी की गणना के लिए राष्ट्रीय जनगणना-2027 का कार्य आगामी एक मई से आरंभ होने जा रहा है। यह एक राष्ट्रीय महत्व का कार्य है। इसमें सभी का सक्रिय सहयोग बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनता के नाम एक अपील संदेश भी जारी कर आहवान किया है कि प्रदेश के सभी नागरिक अपनी सहभागिता से इस पुनीत राष्ट्रीय कार्य को सम्पन्न कराने में सहयोग दें। संदेश में उन्होंने कहा है कि प्रदेश में एक मई 2026 से प्रारंभ हो रहे जनगणना-2027 के पहले चरण, 'मकान सूचीकरण एवं गणना' कार्य एक राष्ट्रीय दायित्व है। राज्य का प्रत्येक नागरिक पूर्ण निष्ठा और सक्रिय सहयोग के साथ इस कार्य को सफल बनाये।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि जनसामान्य की सुविधा के लिए "स्व-गणना" का विकल्प भी ऑनलाईन उपलब्ध कराया गया है। इसमें कोई भी नागरिक 16 से 30 अप्रैल 2026 के बीच http://se.census.gov.in पोर्टल पर अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी प्रदेशवासियों की सहभागिता प्रदेश और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। उन्होंने राज्य के प्रत्येक नागरिक से स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से अपने परिवार की सही और पूर्ण जानकारी प्रदान करने की अपेक्षा भी की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना' के इस अभियान में सभी शासकीय अधिकारी, कर्मचारी और नागरिक अपने-अपने स्तर पर पूरी निष्ठा, समर्पण, उत्तरदायित्व एवं सहयोग की भावना से इस देशव्यापी राष्ट्रीय अभियान में सहभागिता सुनिश्चित करें।
आधुनिक डिजिटल तकनीकों का अधिकतम उपयोग हो रहा जनगणना में
भारत की जनगणना विश्व की सबसे बड़ी प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय प्रक्रियाओं में से एक है। वर्तमान शताब्दी की तीसरी जनगणना वर्ष 2027 में संपादित की जानी है, जो राष्ट्र एवं राज्य के भावी विकास के लिए आधारभूत और विश्वसनीय जन सांख्यिकीय आंकड़े उपलब्ध कराएगी। जनगणना 2027 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इस बार की जनगणना में आधुनिक डिजिटल तकनीक का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है। पहली बार बड़े पैमाने पर मोबाइल ऐप आधारित डेटा संकलन किया जाएगा।
10वीं-12वीं बोर्ड के विद्यार्थियों को द्वितीय अवसर परीक्षा का मिलेगा मौका : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
18 Apr, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व और स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों के परिणामस्वरूप प्रदेश के बच्चों ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया है। शासकीय स्तर पर की गई पहल के साथ-साथ यह उपलब्धि विद्यार्थियों और शिक्षकों की कड़ी मेहनत का प्रमाण भी है। इस वर्ष किसी भी छात्र का परीक्षाफल पूरक घोषित नहीं किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब विद्यार्थियों के लिए द्वितीय परीक्षा आयोजित की जा रही है। जो विद्यार्थी अनुपस्थित रहे, अनुत्तीर्ण हुए या अंक सुधारना चाहते हैं, वे निराश न हों, सरकार उनके साथ खड़ी है। "द्वितीय अवसर परीक्षा" 7 से 25 मई तक आयोजित होगी। राज्य सरकार द्वारा विद्यार्थियों को पिछली बार से अधिक परिश्रम और बेहतर करने के लिए एक मौका और दिया गया है। अनुत्तीर्ण हुए बच्चों के माता-पिता को ऐसे मौके पर अपने बच्चे के साथ खड़े होने और उन्हें हौसला देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि आज की असफलता से निराश होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। जीवन की राह में छोटी-मोटी असफलताएं हमें और अधिक मजबूत बनाने के लिए आती है। गिरकर संभलने वाला ही असली विजेता कहलाता है।
माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित की जा रही द्वितीय अवसर परीक्षा में ऐसे छात्र जो मंडल की प्रथम परीक्षा में एक या अधिक विषयों में अनुपस्थित/अनुत्तीर्ण रहे हों, सम्मिलित हो सकेंगे। ऐसे परीक्षार्थी जो किसी विषय में उत्तीर्ण हो गए हों, वे भी अंक सुधारने के लिए द्वितीय अवसर परीक्षा में सम्मिलित हो सकते हैं। परीक्षार्थियों का प्रथम एवं द्वितीय अवसर में से जो भी श्रेष्ठ परिणाम होगा, वह अंतिम रूप से मान्य रहेगा। प्रायोगिक विषयों में किसी छात्र को प्रायोगिक और आंतरिक परीक्षा के केवल अनुत्तीर्ण भाग में शामिल होने की पात्रता होगी। द्वितीय अवसर परीक्षा में परीक्षार्थी को विषय परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी। द्वितीय अवसर परीक्षा में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन 22 अप्रैल रात 12 बजे तक एम.पी. ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भरे जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाले देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में प्राइमरी स्तर पर 'ड्रॉप आउट रेट' शून्य (Zero) हो गया है। प्रदेश में 369 सर्वसुविधायुक्त सांदीपनी विद्यालय और 730 पीएम श्री स्कूल, शालेय शिक्षा की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं। शिक्षा के लिए बजट में 36 हज़ार 730 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष से 11% अधिक है। यह निवेश अगली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर 8 लाख 50 हज़ार से अधिक बच्चों की फीस राज्य सरकार भर रही है, ताकि कोई भी बच्चा संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रहे।
साहब की बहाली के लिए बाबू ने मांगी घूस: 40 हजार रुपये के साथ पकड़े गए स्थापना शाखा प्रभारी।
18 Apr, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्वालियर/शिवपुरी: ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस ने शिवपुरी नगर पालिका में पदस्थ एक लिपिक (क्लर्क) को सहायक राजस्व निरीक्षक से 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी क्लर्क ने यह राशि निलंबित सहायक राजस्व निरीक्षक की बहाली कराने के एवज में ली थी। फिलहाल लोकायुक्त पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस भ्रष्टाचार के पीछे और कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 'जीरो टॉलरेंस' के निर्देशानुसार प्रदेश भर में भ्रष्टाचारियों पर सख्त कार्रवाई जारी है। ग्वालियर लोकायुक्त एसपी निरंजन शर्मा के अनुसार, शिवपुरी के कमलागंज निवासी हरिवल्लभ चंदौरिया ने शिकायत दर्ज कराई थी। हरिवल्लभ नगर पालिका में निलंबित सहायक राजस्व निरीक्षक हैं। उन्होंने बताया कि नगर पालिका के स्थापना शाखा प्रभारी क्लर्क भगवान लाल करोसिया ने उन्हें सेवा में बहाल कराने के बदले 60 हजार रुपये की घूस मांगी थी।
सत्यापन के बाद बिछाया गया जाल शिकायत के सत्यापन के दौरान क्लर्क ने 20 हजार रुपये पहले ही ले लिए थे और शेष 40 हजार रुपये की राशि आज, 18 अप्रैल को देना तय हुआ था। रिश्वत का पुख्ता प्रमाण मिलते ही लोकायुक्त की टीम ने ट्रैप प्लान किया। योजना के तहत आवेदक हरिवल्लभ को 40 हजार रुपये लेकर क्लर्क के पास भेजा गया।
घर के पास पकड़ा गया आरोपी क्लर्क भगवान लाल ने रिश्वत की रकम लेने के लिए हरिवल्लभ को कोतवाली के पास स्थित हरिजन बस्ती में अपने घर के पास बुलाया। जैसे ही आरोपी ने 40 हजार रुपये अपने हाथ में लिए, पहले से मुस्तैद लोकायुक्त पुलिस की टीम ने उसे दबोच लिया। टीम ने आरोपी के पास से रिश्वत की राशि भी बरामद कर ली है।
जांच के दायरे में आएंगे अन्य अधिकारी लोकायुक्त एसपी निरंजन शर्मा ने बताया कि आरोपी क्लर्क से पूछताछ की जा रही है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि इस रिश्वतखोरी में विभाग का कोई अन्य अधिकारी भी शामिल है या नहीं। साक्ष्यों के आधार पर जांच में जिसका भी नाम सामने आएगा, उसे भी इस प्रकरण में आरोपी बनाया जाएगा।
अनुभव का सम्मान या परीक्षा का दबाव? पात्रता परीक्षा पर मप्र के शिक्षकों ने खोला मोर्चा
18 Apr, 2026 05:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल | मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर छिड़ा संग्राम अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार को राजधानी भोपाल का भेल दशहरा मैदान उस समय शिक्षकों के आक्रोश का गवाह बना, जब 'अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा' के आह्वान पर हजारों की संख्या में शिक्षक 'मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा' में शामिल होने पहुंचे। आयोजकों का दावा है कि इस विरोध प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न कोनों से आए लगभग 50,000 शिक्षकों ने हिस्सा लेकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया।
वरिष्ठता के अपमान का आरोप: 'दशकों के अनुभव पर परीक्षा भारी क्यों?'
आंदोलनरत शिक्षकों का मुख्य विरोध वर्षों की सेवा के बाद थोपी जा रही TET की शर्त को लेकर है। उनका कहना है कि जो शिक्षक पिछले दो से तीन दशकों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन पर करियर के इस पड़ाव पर पात्रता परीक्षा अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है। शिक्षक नेताओं के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख से करीब 95 प्रतिशत अध्यापक प्रभावित हो रहे हैं। विशेषकर वे शिक्षक जो संवर्ग परिवर्तन के दौर से गुजरे हैं, वे अब अपने भविष्य को लेकर गहरे संशय में हैं।
आर्थिक हितों पर चोट और सरकार की कानूनी पहल
शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि मामला केवल परीक्षा का नहीं, बल्कि उनके आर्थिक अधिकारों का भी है। सेवा गणना में हो रही त्रुटियों के कारण उनकी पेंशन, वेतनमान और ग्रेच्युटी पहले ही प्रभावित हो रही है। इस बीच, राज्य सरकार ने भी अपना रुख साफ करते हुए इस मामले को कानूनी पटल पर ले जाने का फैसला किया है। शासन द्वारा 17 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय में एक पुनर्विचार याचिका दायर की गई है, जिससे यह संकेत मिलते हैं कि सरकार अदालत के माध्यम से बीच का रास्ता तलाश रही है।
संघर्ष का संकल्प: सड़क और न्यायालय दोनों मोर्चों पर लड़ाई
शिक्षक संगठनों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक TET का दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, उनका आंदोलन विराम नहीं लेगा। भले ही सरकार ने कोर्ट में याचिका लगाई हो, लेकिन शिक्षकों का जमीनी विरोध जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि TET वर्ष 2010 से प्रभावी हुई एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है, जिसे प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के मानक तय करने के लिए लागू किया गया था, लेकिन अब यह पुराने अनुभवी शिक्षकों के लिए गले की फांस बन गई है।
20 अप्रैल तक करना होगा सरेंडर: कोर्ट ने दोषी को दी राहत, मगर पुलिस को दी नसीहत
18 Apr, 2026 05:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जबलपुर | मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने मंडला जिले की पुलिस कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी व्यक्त की है। पूरा मामला एक गंभीर अपराध में सजा काट रहे कैदी की पैरोल अर्जी से जुड़ा है। दरअसल, एक अपराधी ने अपने परिवार में होने वाले मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन पुलिस की तरफ से पेश किए गए दस्तावेजों में इतनी बड़ी विसंगति निकली कि जजों ने एसपी की कार्यशैली पर ही सवाल उठा दिए।
दस्तावेजों में हेरफेर: भाई की जगह कैदी को ही बना दिया दूल्हा
जेल में बंद दुष्कर्म के अपराधी अन्नू आदिवासी ने आवेदन दिया था कि 17 अप्रैल को उसके सगे भाई का विवाह है, इसलिए उसे कुछ दिनों की अस्थायी राहत दी जाए। अदालत ने जब इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित पुलिस थाने से जानकारी मांगी, तो वहां से आई रिपोर्ट ने सबको हतप्रभ कर दिया। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख कर दिया कि 18 अप्रैल को खुद अन्नू आदिवासी की ही शादी होने वाली है।इस भारी चूक पर जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह की खंडपीठ ने कड़ा संज्ञान लिया। कोर्ट ने मंडला एसपी को फटकार लगाते हुए पूछा कि "क्या पुलिस विभाग में जिम्मेदार पद पर बैठे अफसर कागजों को पढ़े बिना ही उन पर मुहर लगा देते हैं?"
एसपी की माफी और अदालत की अंतिम चेतावनी
अदालत के सख्त रुख को देखते हुए एसपी ने व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर अपनी गलती स्वीकार की और बिना किसी शर्त के माफी मांगी। बेंच ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि भविष्य में प्रशासनिक स्तर पर ऐसी लापरवाही को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि, एसपी की क्षमायाचना के बाद कोर्ट ने दोषी को भाई के विवाह में शामिल होने के लिए कुछ शर्तों के साथ इजाजत दे दी। कोर्ट के आदेशानुसार, आरोपी को समारोह संपन्न होने के बाद 20 अप्रैल तक वापस जेल प्रशासन के समक्ष समर्पण करना होगा।
"अब विकास में बाधा नहीं सहेगा बंगाल": भाजपा के समर्थन में बोले डॉ. मोहन यादव
18 Apr, 2026 05:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल | पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मियों के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मोर्चा संभाल लिया है। शनिवार को बंगाल प्रवास पर पहुंचे डॉ. यादव ने कोलकाता और मेदिनीपुर के चुनावी क्षेत्रों में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। दो विधानसभा क्षेत्रों में सघन जनसंपर्क करते हुए उन्होंने जमीनी स्तर पर मतदाताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने ममता बनर्जी सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो बंगाल कभी देश का नेतृत्व करता था, वह आज विकास के पायदान पर काफी नीचे गिर गया है। उन्होंने राज्य की खुशहाली के लिए केंद्र और राज्य में एक ही दल (डबल इंजन) की सरकार की वकालत की।
परिवर्तन की पुकार: 'अराजकता के दौर का होगा अंत'
कमरहाटी विधानसभा में पदयात्रा के दौरान डॉ. मोहन यादव का एक अलग अंदाज नजर आया। उन्होंने आम नागरिकों के घरों तक पहुंचकर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, "मोदी युग में जब हर राज्य विकास की नई गाथा लिख रहा है, तब बंगाल का पीछे रहना दुखद है। यहाँ की जनता अब अव्यवस्था और असुरक्षा के माहौल से तंग आ चुकी है और बदलाव के लिए तैयार है।" उन्होंने दावा किया कि जनता इस बार 'जंगलराज' को उखाड़ फेंकने का मन बना चुकी है।
युवाओं के भविष्य और रोजगार पर जोर
मुख्यमंत्री ने वार्ड स्तर पर पैदल भ्रमण कर दुकानदारों और स्थानीय निवासियों की शिकायतें सुनीं। भाजपा प्रत्याशी अरुप चौधरी को विजयी बनाने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में औद्योगिक निवेश और युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए भाजपा की जीत अनिवार्य है। डॉ. यादव ने तीखा सवाल किया कि "जब केंद्र सरकार देश को विश्व पटल पर गौरवान्वित कर रही है, तो बंगाल क्यों पतन की ओर अग्रसर है?" उन्होंने जोर देकर कहा कि बंगाल के गौरव को पुनर्जीवित करने के लिए 'कमल' का खिलना और भाजपा का सत्ता में आना समय की मांग है।
अभिभावकों को बड़ी राहत: राज्य सरकार ने RTE एडमिशन के लिए दिया 10 दिन का अतिरिक्त समय
18 Apr, 2026 03:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में निःशुल्क प्रवेश की बाट जोह रहे परिजनों के लिए अच्छी खबर है। राज्य शासन ने प्रथम चरण की लॉटरी में चयनित विद्यार्थियों के एडमिशन की अंतिम तिथि 15 अप्रैल से बढ़ाकर 25 अप्रैल कर दी है। राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने बताया कि यह निर्णय उन अभिभावकों के अनुरोध पर लिया गया है, जो किन्हीं कारणों से तय समय में प्रवेश नहीं दिला पाए थे।
उल्लेखनीय है कि 2 अप्रैल को ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से बच्चों का चयन किया गया था। शासन ने यह 10 दिन का अतिरिक्त समय इसलिए दिया है ताकि कोई भी पात्र विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न रहे। साथ ही, राज्य शिक्षा केंद्र ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि कोई निजी स्कूल आवंटित बच्चे को प्रवेश देने से मना करता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सभी संबंधित अधिकारियों (BRC और DPC) को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि हर चयनित बच्चे का एडमिशन समय पर हो।
भीषण लू की चपेट में मध्य प्रदेश: 20 जिलों के लिए मौसम विभाग की गंभीर चेतावनी
18 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश में अप्रैल के दूसरे सप्ताह में ही गर्मी ने प्रचंड रूप धारण कर लिया है। प्रदेश का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है, जिसे देखते हुए शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को 20 जिलों में लू (Heat Wave) का अलर्ट जारी किया गया है। फिलहाल दो दिन मौसम सख्त रहेगा, लेकिन 19-20 अप्रैल को पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से कहीं-कहीं बादल छाने और हल्की बारिश की संभावना है।
गुरुवार को प्रदेश के कई हिस्सों में पारा 40 से 43 डिग्री के बीच रहा। नर्मदापुरम 43 डिग्री के साथ सबसे गर्म रहा, जबकि भोपाल, इंदौर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में भी तापमान 40 डिग्री के पार दर्ज किया गया। भीषण गर्मी के कारण इंदौर, सागर और अशोकनगर सहित कई जिलों में स्कूलों का समय बदल दिया गया है।
मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में चक्रवातीय परिसंचरण और जेट स्ट्रीम हवाएं सक्रिय हैं। अप्रैल के अंत तक ग्वालियर-चंबल, भोपाल और इंदौर समेत कई संभागों में पारा 45°C तक जा सकता है।
आज यहाँ लू का अलर्ट:
रतलाम, झाबुआ, धार, अलीराजपुर, टीकमगढ़, छतरपुर, सतना, रीवा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट सहित 20 जिलों में गर्म हवाओं का असर रहेगा।
ड्रोन के साथ अपने हौसलों को उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा
17 Apr, 2026 11:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : सरकार द्वारा संचालित आजीविका मिशन ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इस मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से महिलाएं अब अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। रायसेन जिले के सांची विकासखण्ड के ग्राम रतनपुर गिरधारी निवासी सरूपी मीणा आजीविका मिशन से जुड़कर आज आर्थिक रूप में ना सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत भी हैं। सरूपी मीणा द्वारा सांची में रूरल मार्ट का संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने ड्रोन दीदी के नाम से भी अपनी अलग पहचान बनाई है।
आर्थिक तंगी से उभरकर आत्मनिर्भर बनीं सरूपी मीणा
सरूपी मीणा ने बताया कि वे 10वीं तक शिक्षित थीं। उनके पति कृषि कार्य करते थे, जिससे बड़ी मुश्किल से परिवार का भरण-पोषण हो पाता था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपनी आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सकीं, जबकि उनकी इच्छा पढ़ाई जारी रखने की थी। कुछ वर्ष पहले आजीविका मिशन के कर्मचारियों ने गांव में भ्रमण कर महिलाओं को स्व-सहायता समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उस समय सरूपी मीणा बेरोजगार थीं और आगे बढ़ने के अवसर तलाश रही थीं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने समूह से जुड़ने का निर्णय लिया।
समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत शुरू की और समूह से ऋण लेकर अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू की। साथ ही, उन्होंने समूह निर्माण और सर्वे कार्य सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) के रूप में काम करना शुरू किया, जिससे उन्हें मानदेय मिलने लगा। समूह से प्राप्त ऋण और मानदेय के सहयोग से उन्होंने एक किराना दुकान प्रारंभ की। इसके अलावा, उन्हें बैंक सखी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, जिससे उनके समूह का सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) भी स्वीकृत हुआ। इन सभी कार्यों से उनकी मासिक आय 4 से 5 हजार रुपये तक पहुंच गई। बाद में उन्होंने सीएससी सेंटर का संचालन भी शुरू किया, जिससे उनकी आय में और वृद्धि हुई। निरंतर मेहनत और लगन के चलते सरूपी मीणा ने अपनी शिक्षा जारी रखते हुए स्नातक तक की पढ़ाई पूर्ण कर ली।
आजीविका मिशन से मिली पहचान, ड्रोन तकनीक से बढ़ी आय
सरूपी मीणा की लगन और मेहनत के कारण उन्हें सांची में रूरल मार्ट का संचालन करने का अवसर मिला। वह रूरल मार्ट में दीदी समूहों के उत्पादों का विक्रय एवं अन्य सामग्री का विक्रय करने का कार्य करती है। इसके अतिरिक्त सरूपी मीणा को वर्ष 2023-24 में नमो ड्रोन योजना का भी लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि नमो ड्रोन योजना में चयनित होने के बाद उन्हें ग्वालियर में ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद उन्हें निःशुल्क ड्रोन दिया गया। कम्पनी से आए इंजीनियर ने भी उन्हें ड्रोन चलाने का पूरा प्रशिक्षण दिया। जिसके बाद वह खेतों में ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव करने लगी। इस प्रकार उन्हें प्रतिवर्ष लगभग तीन लाख रू की आमदनी हो जाती है। सरूपी मीणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देते हुए कहती हैं कि आजीविका मिशन महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ ही समाज में उनका मान-सम्मान भी बढ़ा है।
अल्पविराम की अवधारणा जीवन और कार्य के संतुलन के लिये अत्यंत आवश्यक : अर्गल
17 Apr, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान, पटना में तीन दिवसीय ‘अल्पविराम’ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिहार सरकार के विभिन्न विभागों से कुल 42 वरिष्ठ अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रतिभागियों में संयुक्त सचिव, उप सचिव, अवर सचिव एवं सहायक निदेशक स्तर के अधिकारी शामिल रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ बिहार सरकार के महानिदेशक-सह-मुख्य जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग तथा राज्य आनंद संस्थान, मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अखिलेश अर्गल के प्रेरणादायी संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में ‘खुशहाल राज्य’ की दिशा में किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने ‘अल्पविराम’ की अवधारणा को जीवन और कार्य के संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को आत्मचिंतन, तनाव प्रबंधन, कार्य-जीवन संतुलन एवं आंतरिक प्रसन्नता से जुड़े विषयों पर अनुभवात्मक सत्रों के माध्यम से मार्गदर्शन प्रदान किया गया। सत्रों का संचालन डॉ. सुधीर आचार्य, साधना श्रीवास्तव, सुश्री श्रद्धा ठाकुर एवं श्री प्रदीप महतो द्वारा प्रभावशाली एवं सहभागी शैली में किया गया, जिससे कार्यक्रम अत्यंत जीवंत, संवादात्मक एवं सार्थक बना।
यह ‘अल्पविराम’ कार्यक्रम बिहार सरकार के अधिकारियों के लिए आत्म-विकास, मानसिक शांति एवं सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुआ।
नगरीय निकायों के कायाकल्प और वित्तीय सुदृढ़ीकरण के लिये दो दिवसीय "शहरी सुधार कार्यशाला" का हुआ समापन
17 Apr, 2026 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : नगरीय विकास एवं आवास विभाग के तत्वावधान में भोपाल के भौरी स्थित सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान (SPNIUM) में आयोजित दो दिवसीय "शहरी सुधार कार्यशाला" का शुक्रवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। 16 और 17 अप्रैल को आयोजित कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के नगरीय निकायों की कार्यक्षमता को सुदृढ़ करना, वित्तीय संसाधनों में वृद्धि के मार्ग प्रशस्त करना तथा नागरिक सेवाओं के बेहतर प्रबंधन के लिये आधुनिक नवाचारों और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का साझाकरण करना रहा। इस बौद्धिक समागम में प्रदेश के विभिन्न निकायों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और विषय-विशेषज्ञों ने भविष्य के शहरी परिदृश्य को बेहतर बनाने के लिए गंभीर विचार-विमर्श किया।
कार्यशाला के प्रथम दिन का केंद्र बिंदु नगरीय निकायों का आर्थिक सुदृढ़ीकरण और राजस्व वृद्धि रहा। इस दौरान शहरी सुधार, भूमि मुद्रीकरण और वित्तीय प्रबंधन के विविध आयामों पर व्यापक प्रकाश डाला गया। सूरत नगर निगम के उप आयुक्त नीलेश पटेल ने शोधित जल के प्रभावी पुन: उपयोग और उसके सफल क्रियान्वयन के मॉडल को साझा किया। वहीं, पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम के संयुक्त नगर अभियंता सुनील अंशीराम भगवानी ने राजस्व वृद्धि के व्यावहारिक तरीकों को रेखांकित किया। प्रथम दिन के विभिन्न तकनीकी सत्रों में 'क्रेडिटवर्थी सिटीज़' और सस्टेनेबल अर्बन फाइनेंस जैसे विषयों के साथ डिजिटल उपकरणों जैसे यूसीएफ, एईबीएएस और स्पैरो के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यशाला के दूसरे दिन नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे ने प्रतिभागियों को भविष्योन्मुखी मार्गदर्शन प्रदान करते हुए विभाग की प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने सभी नगरीय निकायों को अपने क्षेत्रों में डिजिटल लेनदेन को अनिवार्य रूप से बढ़ावा देने के निर्देश दिए, जिससे वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। भोंडवे ने मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना और अमृत (AMRUT) द्वितीय चरण के कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए इन्हें समयबद्ध सीमा में पूर्ण करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों को स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए "स्वच्छ जल अभियान" के तहत लीकेज सुधार और जल शुद्धिकरण के कार्यों में कोई शिथिलता नहीं बरती जानी चाहिए। आगामी स्वच्छता सर्वेक्षण की चर्चा करते हुए आयुक्त ने निर्देश दिए कि इसे "मिशन मोड" में लिया जाए और "मेरा वार्ड नंबर एक" जैसे जन-भागीदारी वाले अभियानों को प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने स्वच्छता मित्रों को विभाग की वास्तविक शक्ति बताते हुए उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपकरण और पीपीई किट उपलब्ध कराने के प्रति संवेदनशीलता प्रदर्शित करने को कहा।
दूसरे दिन के तकनीकी सत्रों में आधुनिक इंजीनियरिंग समाधानों पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञ प्रबल भारद्वाज एवं हिमांशु चतुर्वेदी ने लिगेसी वेस्ट और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के साथ उत्तर प्रदेश के बृजेश कुमार दुबे ने "फुल डेप्थ रिक्लेमेशन" तकनीक जैसी लागत प्रभावी सड़क निर्माण पद्धतियों की जानकारी साझा की। भूजल विशेषज्ञ डॉ. ए.के. विश्वकर्मा ने "जल गंगा संवर्धन अभियान" के अंतर्गत वर्षा जल संचयन और एक्विफर मैनेजमेंट के माध्यम से जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया। कार्यशाला के उत्तरार्ध में उड़ीसा से आए विशेषज्ञ चिन्मय त्रिपाठी ने 24x7 जल आपूर्ति की केस स्टडी प्रस्तुत करते हुए डिजिटल वाटर मैनेजमेंट की महत्ता बताई। इसके अतिरिक्त, सागर, अशोकनगर, छतरपुर, बालाघाट और पीथमपुर सहित विभिन्न निकायों के अधिकारियों ने अपने स्थानीय स्तर पर किए गए सफल नवाचारों को साझा किया, जो अन्य निकायों के लिए अनुकरणीय सिद्ध होंगे।
कार्यशाला के अंतिम चरण में स्मार्ट मॉनिटरिंग और रोबोटिक पाइपलाइन निरीक्षण जैसी उन्नत तकनीकों के माध्यम से जल प्रणालियों में लागत अनुकूलन पर चर्चा की गई। ललित मोटवानी और बीवीआर शर्मा जैसे विशेषज्ञों ने अत्याधुनिक मशीनों द्वारा पाइपलाइनों के रखरखाव और दक्षता बढ़ाने के गुर सिखाए। समापन सत्र में मध्यप्रदेश में "जल पुन: उपयोग नीति" के लिए एक रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत किया गया, जिसमें जल संरक्षण और सतत शहरी विकास के ढांचे को सुदृढ़ करने के संकल्प के साथ कार्यशाला का समापन हुआ। इस दो दिवसीय मंथन से उपजे विचार प्रदेश के शहरों को आधुनिक, आत्मनिर्भर और जन-सुविधाओं से परिपूर्ण बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होंगे।
विश्व धरोहर दिवस पर रायपुर में सजी विरासत की अनोखी झलक, संरक्षण पर विशेषज्ञों का मंथन
बंदूक से विकास की ओर: सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र की प्रेरक कहानी
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राज्यमंत्री गौर का सख्त रुख: लापरवाही पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश
महतारी वंदन योजना से संवर रही पहाड़ी कोरवा परिवारों की तकदीर
