नारी विशेष
फिटनेस लवर्स के लिए खास रेसिपी, 5 सामग्री से तैयार होगा प्रोटीन पाउडर
5 Jun, 2026 04:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आजकल फिटनेस, वेट लॉस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। जिम जाने वाले युवाओं से लेकर वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे आम लोग, हर कोई अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। इसी बढ़ती मांग के कारण बाजार में तरह-तरह के प्रोटीन सप्लीमेंट्स की बाढ़ आ गई है।
हालांकि, बाजार में मिलने वाले डिब्बाबंद प्रोटीन पाउडर अक्सर काफी महंगे होते हैं और उनमें कृत्रिम फ्लेवर, प्रिजर्वेटिव्स व अतिरिक्त चीनी (ऐडेड शुगर) होने का खतरा रहता है। यही वजह है कि अब लोग घर पर ही प्राकृतिक चीजों से बने प्रोटीन पाउडर को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह होममेड प्रोटीन पाउडर न केवल बजट में किफायती होता है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी 100% शुद्ध और सुरक्षित है। आइए जानते हैं इसे बनाने की बेहद आसान विधि और इसके बेहतरीन फायदे।
घर पर प्रोटीन पाउडर बनाने के लिए जरूरी सामग्री
इस नेचुरल प्रोटीन पाउडर को बनाने के लिए आपको नीचे दी गई सामग्रियों की आवश्यकता होगी, जो प्रोटीन, फाइबर, विटामिंस और हेल्दी फैट्स से भरपूर हैं:
भुना चना: 1 कप (बिना छिलके वाला)
बादाम: 1 कप
मूंगफली: 1 कप (भुनी और छिलका उतरी हुई)
ओट्स (Oats): आधा कप
अलसी के बीज (Flax seeds): $1/4$ कप
कद्दू के बीज (Pumpkin seeds): $1/4$ कप
इलायची पाउडर: 2 छोटे चम्मच (बेहतरीन खुशबू और स्वाद के लिए)
बनाने की सबसे आसान विधि (Step-by-Step Recipe)
हल्का भूनें (Dry Roast): सबसे पहले एक कढ़ाई में बादाम, मूंगफली, ओट्स, अलसी और कद्दू के बीजों को धीमी आंच पर 3 से 4 मिनट के लिए हल्का भून लें। ऐसा करने से इन चीजों की नमी खत्म हो जाती है और पाउडर लंबे समय तक खराब नहीं होता। (ध्यान रखें, भुने चने को दोबारा भूनने की जरूरत नहीं है)।
ठंडा करें: भूनने के बाद सभी सामग्रियों को एक प्लेट में निकालें और पूरी तरह से ठंडा होने दें। गरम सामग्री को पीसने से उनमें से तेल निकलने लगता है, जिससे पाउडर चिपचिपा हो सकता है।
ग्राइंड करें: अब भुने हुए चने के साथ बाकी सभी ठंडी की हुई सामग्रियों को मिक्सर ग्राइंडर के जार में डालें। मिक्सर को लगातार चलाने के बजाय 'पल्स मोड' पर (रुक-रुक कर) चलाएं और एक बारीक पाउडर तैयार कर लें।
स्टोर करें: तैयार पाउडर में इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह चम्मच से मिला लें। अब इस होममेड प्रोटीन पाउडर को कांच के एक साफ और एयरटाइट कंटेनर (डब्बे) में भरकर रख लें।
इस नेचुरल प्रोटीन पाउडर के बेमिसाल फायदे
मसल्स ग्रोथ में मददगार: बादाम, चने और बीजों से मिलने वाला शुद्ध प्रोटीन वर्कआउट के बाद मांसपेशियों की रिकवरी और विकास में मदद करता है।
लंबे समय तक रखे भरा पेट: इसमें मौजूद ओट्स और चने का हाई फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, जिससे असमय लगने वाली भूख (क्रैविंग्स) नियंत्रित होती है और वजन घटाने में मदद मिलती है।
पाचन तंत्र रखे दुरुस्त: अलसी के बीज और ओट्स का कॉम्बिनेशन फाइबर का बेहतरीन स्रोत है, जो कब्ज की समस्या को दूर कर पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है।
दिनभर बनी रहेगी एनर्जी: मूंगफली और कद्दू के बीजों में पाए जाने वाले ओमेगा-3 और हेल्दी फैट्स शरीर को सुस्ती से बचाते हैं और दिनभर ऊर्जावान बनाए रखते हैं।
सेवन करने का सही और सटीक तरीका
मात्रा: रोजाना 1 से 2 बड़े चम्मच (लगभग 20-30 ग्राम) इस पाउडर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
कैसे लें: इसे आप सुबह नाश्ते के समय गुनगुने दूध, बनाना शेक, स्मूदी या फिर दही/ओट्स में मिलाकर खा सकते हैं। जिम जाने वाले लोग इसे अपने पोस्ट-वर्कआउट शेक के रूप में ले सकते हैं।
सावधानी: यदि आपको मूंगफली, बादाम या किसी विशेष बीज से एलर्जी है, या आप किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, तो इसका सेवन शुरू करने से पहले एक बार डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह जरूर लें।
बाजार के सप्लीमेंट्स बनाम होममेड प्रोटीन: कौन सा बेहतर?
घर पर बने प्रोटीन पाउडर का सबसे बड़ा फायदा इसकी पारदर्शिता (ट्रांसपेरेंसी) है। आपको पूरी तरह पता होता है कि आपके शरीर में क्या जा रहा है और यह पूरी तरह केमिकल-मुक्त है। हालांकि, बाजार में मिलने वाले स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन सप्लीमेंट्स (जैसे व्हे प्रोटीन) में प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक केंद्रित (आइसोलेटेड) होती है। इसलिए, यदि आप एक सामान्य स्वस्थ जीवनशैली, थकावट दूर करने और घरेलू फिटनेस के लिए विकल्प ढूंढ रहे हैं, तो यह होममेड नेचुरल प्रोटीन पाउडर आपके लिए सबसे बेहतरीन और सुरक्षित चॉइस है।
नाश्ते में क्या बनाएं? आजमाएं 10 टेस्टी परांठा रेसिपीज
3 Jun, 2026 03:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय व्यंजनों में परांठा सिर्फ एक साधारण डिश नहीं, बल्कि हमारे खानपान की समृद्ध परंपरा और बेमिसाल स्वाद का एक अहम हिस्सा है। सुबह के ब्रेकफास्ट से लेकर रात के डिनर तक, गरमागरम परांठे हर उम्र के लोगों की पहली पसंद बने रहते हैं। अमूमन हर घर में आलू, गोभी या सादे परांठे ही ज्यादा बनाए जाते हैं, लेकिन अगर आप अपनी कुकिंग में थोड़ा सा बदलाव करें, तो रोजाना अपनी थाली में नए-नए स्वादों का तड़का लगा सकते हैं।
यदि आपके घर के सदस्य भी रोज एक ही तरह का उबाऊ नाश्ता खाकर बोर हो चुके हैं और आप कुछ नया व पौष्टिक बनाना चाहती हैं, तो यह खास रेसिपी गाइड आपके लिए ही है। यहाँ हम आपको 10 ऐसे चुनिंदा परांठों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो स्वाद में तो बेमिसाल हैं ही, साथ ही सेहत के लिहाज से भी बेहद गुणकारी हैं। इनमें बच्चों के पसंदीदा परांठों से लेकर फिटनेस फ्रीक और डाइट पर रहने वाले लोगों के लिए भी बेहतरीन ऑप्शन्स मौजूद हैं।
किचन में मौजूद सामग्री से तैयार करें ये 10 तरह के परांठों की लिस्ट:
आलू परांठा: उबले आलू, बारीक कटी हरी मिर्च, हरा धनिया और खास मसालों के मिश्रण से तैयार होने वाला यह सबसे लोकप्रिय परांठा है। इसे ठंडे दही, सफेद मक्खन और तीखे अचार के साथ परोसने पर इसका स्वाद दोगुना हो जाता है।
पनीर परांठा: यह प्रोटीन और कैल्शियम का एक बेहतरीन स्रोत है, जो बच्चों के शारीरिक विकास और बड़ों की हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है।
दाल परांठा: रात की बची हुई दाल या उबली हुई दाल को आटे में गूंथकर बनाया जाने वाला यह परांठा फाइबर से भरपूर होता है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा रहता है।
मेथी परांठा: हरी ताजी मेथी के पत्तों से तैयार यह परांठा आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में बेहद मददगार है।
पालक परांठा: विटामिन्स और मिनरल्स का पावरहाउस माना जाने वाला यह परांठा बच्चों को हरी सब्जियां खिलाने का एक शानदार और स्वादिष्ट तरीका है।
चीज़ कॉर्न परांठा: स्वीट कॉर्न और मेल्टेड चीज़ का यह मॉडर्न कॉम्बिनेशन बच्चों का ऑल-टाइम फेवरेट है। इसे आप उनके स्कूल टिफिन के लिए भी झटपट तैयार कर सकते हैं।
प्याज परांठा: अगर घर में कोई सब्जी न हो, तो बारीक कटी प्याज और अजवाइन के साथ यह परांठा मिनटों में तैयार हो जाता है और शाम की गरमागरम चाय के साथ गजब का स्वाद देता है।
गोभी परांठा: कद्दूकस की हुई फूलगोभी में चटपटे मसाले मिलाकर बनाया गया यह परांठा काफी कुरकुरा और जायकेदार होता है।
मूली परांठा: कद्दूकस की हुई मूली और ढेर सारे धनिए के साथ बनने वाला यह परांठा सर्दियों और बरसात के मौसम की एक बेहद खास डिश है।
मिक्स वेज परांठा: गाजर, बीन्स, मटर और आलू जैसी कई पौष्टिक सब्जियों के बारीक मिश्रण से तैयार यह परांठा सेहत और स्वाद का अल्टीमेट कॉम्बो है।
परफेक्ट और फूले हुए परांठे बनाने के 7 आसान स्टेप्स:
परांठा बनाने के दो मुख्य तरीके होते हैं- या तो आप सब्जियों को आटे के साथ गूंथ लें या फिर स्टफिंग करके बनाएं। आइए जानते हैं एकदम परफेक्ट स्टफ्ड परांठा बनाने का सही तरीका:
स्टेप 1 (गूंधने का तरीका): यदि आप पालक, मेथी, बथुआ या प्याज का झटपट परांठा बनाना चाहते हैं, तो इन सामग्रियों को बारीक काटकर सीधे आटे में मिलाकर गूंथ सकते हैं।
स्टेप 2 (मसालों का बेस): सादा आटा गूंथते समय उसमें हमेशा हल्का सा जीरा, अजवाइन, एक चम्मच तेल और चुटकी भर नमक जरूर डालें, इससे परांठे की बाहरी परत बेहद खस्ता बनती है।
स्टेप 3 (तैयार करें लोई): आटे को गूंथकर 10 मिनट के लिए कपड़े से ढककर छोड़ दें, इसके बाद इसकी मध्यम आकार की लोइयां (पेड़े) बना लें।
स्टेप 4 (स्टफिंग का सूखा होना): ध्यान रखें कि आप पनीर, कॉर्न, गोभी या मूली जिसकी भी फिलिंग करने जा रहे हैं, उस मिश्रण में नमी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। सामग्री को अच्छी तरह निचोड़कर सुखा लें।
स्टेप 5 (सीक्रेट शेफ टिप): स्टफिंग के मिश्रण में नमक बिल्कुल आखिरी वक्त पर (जब आप परांठा बेलने जा रहे हों) ही मिलाएं। अगर आप पहले से नमक मिलाकर रख देंगे, तो सब्जियां पानी छोड़ देंगी और परांठे बेलते समय फट जाएंगे।
स्टेप 6 (बेलने की कला): लोई के बीच में स्टफिंग भरकर उसे चारों तरफ से अच्छी तरह सील करें। इसके बाद हल्के हाथों से बेलन चलाते हुए परांठे को मनचाहा आकार दें।
स्टेप 7 (सेकने का तरीका): तवे को अच्छे से गर्म करें और परांठे को दोनों तरफ से हल्का सेकने के बाद ही घी, बटर या रिफाइंड तेल लगाएं। मध्यम आंच पर परांठे को तब तक सेकें जब तक वह दोनों तरफ से सुनहरा और क्रिस्पी न हो जाए।
आप भी अपने वीकली मील प्लान में इन 10 परांठों को शामिल करके अपने पूरे परिवार को एक हेल्दी और टेस्टी सरप्राइज दे सकती हैं। इस नए मैन्यू के सामने आते ही मुंबई, दिल्ली या लखनऊ जैसे बड़े शहरों के आलीशान रेस्टोरेंट्स का नाश्ता भी आपके घर के बने परांठों के आगे फीका नजर आएगा।
परफेक्ट फाउंडेशन के लिए अपनाएं ये 4 टिप्स, मिलेगा फ्लॉलेस और स्मूथ लुक
3 Jun, 2026 02:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अक्सर देखा जाता है कि मॉइश्चराइजर लगाने के बाद जब फाउंडेशन अप्लाई किया जाता है, तो वह त्वचा पर ठीक से बैठता नहीं है। इसके बजाय वह पैची दिखने लगता है, जिससे पूरा मेकअप खराब हो जाता है। यह समस्या कई महिलाओं के लिए आम है, जहां महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स भी बेअसर लगने लगते हैं जब फाउंडेशन स्मूथ और फ्लॉलेस न दिखे। मेकअप का पूरा लुक तभी सुंदर दिखाई देता है, जब बेस सही और एक समान हो। गलत स्किन प्रेप, गलत एप्लिकेशन टेक्नीक या जरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट का इस्तेमाल ऐसी समस्याओं की मुख्य वजह हो सकती है। मेकअप के इस महत्वपूर्ण चरण को सुधारने के लिए कुछ आसान टिप्स अपनाए जा सकते हैं, जो आपको नेचुरल और स्मूथ मेकअप बेस बनाने में मदद करेंगे।
मेकअप की शुरुआत हमेशा साफ त्वचा से करनी चाहिए। अपने चेहरे को अच्छी तरह साफ करने के बाद, अगला कदम है सही मॉइश्चराइजर का चुनाव और उसका प्रयोग। मॉइश्चराइजर न सिर्फ आपकी त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करता है, बल्कि यह ड्राई पैचेस को बनने से भी रोकता है, जिससे फाउंडेशन का लुक एक समान आता है। अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार एक हल्का मॉइश्चराइजर चुनें और उसे त्वचा में पूरी तरह से सेट होने के लिए कुछ मिनट दें। यह सुनिश्चित करेगा कि आपकी त्वचा फाउंडेशन के लिए पूरी तरह से तैयार है और पैची दिखने से बचेगी।
फ्लॉलेस मेकअप बेस के लिए प्राइमर का इस्तेमाल अनिवार्य है, खासकर यदि आपके पोर्स बड़े हैं या त्वचा का टेक्सचर असमान है। कुछ लोग प्राइमर को छोड़ देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप फाउंडेशन लगाने के बाद त्वचा पर फाइन लाइन्स दिखना शुरू हो जाती हैं और वह त्वचा में ठीक से नहीं बैठता। मॉइश्चराइजर सेट होने के बाद, प्राइमर को पूरे चेहरे पर एक समान रूप से लगाएं और इसे भी लगभग 5 मिनट तक सेट होने दें। प्राइमर एक चिकनी परत बनाता है जो फाउंडेशन को त्वचा में धंसने से रोकता है और उसे लंबे समय तक टिकाए रखता है, जिससे पैची मेकअप की संभावना काफी कम हो जाती है।
फाउंडेशन लगाते समय अक्सर यह गलत धारणा होती है कि अधिक मात्रा लगाने से चेहरा ज्यादा सुंदर दिखेगा। हालांकि, यह तरीका अक्सर विपरीत परिणाम देता है और चेहरे को भारी या केकी बना देता है। एक साथ ज्यादा फाउंडेशन लगाने के बजाय, चेहरे पर छोटी-छोटी मात्रा में प्रोडक्ट लगाएं, जैसे कि माथे, गालों, नाक और ठुड्डी पर। इसके बाद, एक अच्छी क्वालिटी के मेकअप स्पॉन्ज या ब्यूटी ब्लेंडर का उपयोग करके इसे चेहरे पर अच्छी तरह से फैलाएं। फाउंडेशन को रगड़ने के बजाय, हमेशा डबिंग (थपथपाने) विधि का इस्तेमाल करें। रगड़ने से फाउंडेशन असमान दिख सकता है और त्वचा पर धब्बे छोड़ सकता है। यदि आपको अधिक कवरेज की आवश्यकता महसूस हो, तो आप फाउंडेशन की दूसरी पतली परत भी लगा सकते हैं, लेकिन हमेशा कम मात्रा से ही शुरुआत करें।
मेकअप को लंबे समय तक टिकाऊ और नेचुरल लुक देने के लिए, फाउंडेशन लगाने के बाद सेटिंग स्प्रे का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। सबसे पहले, फाउंडेशन को हल्का सा ट्रांसलूसेंट पाउडर या कॉम्पैक्ट से सेट करें, खासकर उन जगहों पर जहां आपको ज्यादा ऑइल आता है या जहां मेकअप क्रीज हो सकता है। इसके बाद, पूरे चेहरे पर सेटिंग स्प्रे का हल्का छिड़काव करें। यह आपके मेकअप को लॉक कर देता है, जिससे वह पूरे दिन ताजा और फ्लॉलेस दिखता है। यह न सिर्फ मेकअप को स्मूथ फिनिश देता है और त्वचा के साथ घुलने में मदद करता है, बल्कि चेहरे को एक नेचुरल और चमकदार लुक भी प्रदान करता है। इन आसान लेकिन प्रभावी मेकअप टिप्स को अपनाकर आप आसानी से एक ऐसा फ्लॉलेस और नेचुरल फाउंडेशन बेस प्राप्त कर सकती हैं, जो आपके पूरे मेकअप लुक को निखार देगा और आपको आत्मविश्वास से भर देगा।
इस प्रकार आप से नहीं हटेंगी लोगों की नजरें
3 Jun, 2026 02:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सुंदर के लिए अपनायें ये तरीके। इस प्रकार आप अपनी सुंदरता को बढ़ा सकती हैं। आंखों की सुंदरता के लिए गोल्ड आई शैडो का प्रयोग करें। आंखों पर गहरे रंग के आई पेंसिल का प्रयोग करें1 आप इलेक्ट्रिक ब्लर आईलाइनर के इस्तेमाल करने से भी अच्छा लुक पा सकती हैं1 रात के समय ब्लशर रंगों का होठों के रंगों से मेल जरूरी नहीं है, लेकिन टोन का रंग सामान्यता एक जैसा होना चाहिए। यदि आपने नांरगी लिपस्टिक लगाई है तो गुलाबी ब्लश से दूर रहिए।
आप लिपस्टिक में लाल गहरे लाल रंग की शेड की लिपस्टिक का प्रयोग कर सकती हैं। गहरा गुलाबी रंग भी काफी आकर्षक लगेगा। ज्यादातर त्वचा के रंगों में नारंगी शेड भी काफी सराही जाती है। उमस भरे मौसम में 3डी लुक पाने के लिए फेस पर ब्रांजिंग और हाइलाइटिंग बहुत जरूरी है। इसके साथ ही फेस पर बेस ब्लेंडेड करना भी बहुत जरूरी है। इसके साथ ही टोनिंग भी बेहद अनिवार्य है1 इसके लिए आप किसी मलमल के कपड़े में बर्फ डालकर अपने चेहरे पर हल्के-हल्के से मल सकती हैं। इससे पोर्स तो बंद हो ही जाएंगे और मेकअप भी देर तक टिका रहेगा। अगर आपकी स्किन ड्राई है तो आप मॉइश्चराइजिंग लोशन से कुछ मिनट तक हल्के-हल्के मसाज कर सकती हैं। अपनी त्वचा से अनचाहे दाग-धब्बे छुपाने के लिए कंसीलर का यूज कर सकती हैं। कंसीलर को अपनी उंगली में लेकर प्रभावित स्थान पर हल्के से थपथपा कर लगाएं, जिससे कंसीलर आपकी स्किन में अच्छे से समा जाए. अगर आपकी ड्रेस ज्यादा भारी नहीं है तो बहुत डार्क मेकअप ना करें, बल्कि लिपस्टिक और आई शेड्स में हल्के रंगों के उपयोग करें। आंखों पर मस्कारा लगाएं। आप लिक्विड काजल की जगह पेंसिल वाला काजल भी इस्तेमाल कर सकती हैं।अगर आपकी ड्रेस हैवी है तो लिक्विड काजल का इस्तेमाल करें और मस्कारा लगाएं। साथ ही लिपस्टिक और आई शेड्स डार्क गहरे रंग के इस्तेमाल करें। चाहें तो होठों के लिए लिक्विड लिप ग्लॉस का उपयोग भी कर सकती हैं।ड्रेस के बाद बारी आती है हेयर स्टाइल की। आप चाहे कितना भी अच्छा मेकअप कर लें या ज्वेलरी पहने जब तक आपका हेयर स्टाइल सही नहीं है आपका लुक परफेक्ट नहीं लग सकता। इसलिए अपने बालों को अच्छा सा हेयर स्टाइल दें।अगर आपके बाल छोटे हैं तो उन्हें खुला ही छोड़ दें। खुले बालों में भी काफी स्टाइल दिए जा सकते हैं। जैसे कि आप अपने बालों को सामने की ओर से पफ दे सकती हैं या क्लिप्स की मदद से सामने के बाल थोड़े-थोड़े लेकर पीछे की ओर घुमाकर पिनअप कर सकती हैं।
फटी एड़ियों से मुक्ति के लिए अपनायें घरेलू उपाय
3 Jun, 2026 02:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पैरों की सुंदरता व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, लेकिन कई बार धूल, प्रदूषण, शुष्क हवा और सही देखभाल के अभाव में एड़ियां फटने लगती हैं। यह समस्या न केवल पैरों की खूबसूरती पर ग्रहण लगाती है, बल्कि कई बार दर्द, खुजली और असहजता का कारण भी बन जाती है। ऐसी स्थिति में महंगे पार्लर ट्रीटमेंट या कॉस्मेटिक उत्पादों पर निर्भर रहने की बजाय, घर पर मौजूद कुछ प्राकृतिक और बेहद प्रभावी उपायों से फटी एड़ियों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। ये उपाय न केवल आर्थिक रूप से किफायती हैं, बल्कि त्वचा के लिए भी सुरक्षित माने जाते हैं, जो आपके पैरों को एक बार फिर से मुलायम, स्वस्थ और आकर्षक बना सकते हैं। इन घरेलू नुस्खों को नियमित रूप से अपनाने से पैरों की खोई हुई चमक वापस पाई जा सकती है और आप आत्मविश्वास के साथ अपने सुंदर पैरों का प्रदर्शन कर सकेंगे।
नींबू का इस्तेमाल फटी एड़ियों के इलाज में बेहद लाभकारी सिद्ध हो सकता है। नींबू में मौजूद प्राकृतिक अम्लता त्वचा को एक्सफोलिएट करने और मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाने में मदद करती है, जिससे नई और स्वस्थ त्वचा सामने आती है। इस उपाय को आज़माने के लिए, एक टब या बड़े बर्तन में गरम पानी लें और उसमें ताज़े नींबू का रस निचोड़ दें। अब अपने पैरों को इस पानी में लगभग 10 से 15 मिनट तक डुबोकर रखें ताकि त्वचा नरम हो जाए। इसके बाद, एक प्यूमिक स्टोन या फुट स्क्रबर की मदद से अपनी एड़ियों को धीरे-धीरे रगड़कर साफ करें ताकि मृत त्वचा हट जाए। अंत में, पैरों को साफ पानी से धोकर तौलिये से अच्छी तरह पोंछ लें। नियमित उपयोग से एड़ियां धीरे-धीरे नरम और चिकनी होने लगेंगी।
गुलाब जल और ग्लिसरीन का मिश्रण फटी एड़ियों के लिए एक उत्कृष्ट मॉइस्चराइजर का काम करता है। गुलाब जल त्वचा को शांति और ताजगी देता है, जबकि ग्लिसरीन एक शक्तिशाली हुमेक्टेंट है जो हवा से नमी को खींचकर त्वचा में बनाए रखने में मदद करता है, जिससे त्वचा कोमल बनी रहती है। इस पेस्ट को बनाने के लिए, ग्लिसरीन और गुलाब जल को बराबर मात्रा में लेकर एक छोटी कटोरी में अच्छी तरह मिला लें। रात को सोने से ठीक पहले, इस पेस्ट को अपनी फटी एड़ियों पर अच्छी तरह लगाकर मालिश करें ताकि यह त्वचा में समा जाए। आप चाहें तो इसके बाद मोज़े पहनकर सो सकते हैं ताकि पेस्ट रात भर अपना काम कर सके और नमी बरकरार रहे। सुबह उठकर आप अपने पैरों में अद्भुत कोमलता महसूस करेंगे।
विभिन्न प्रकार के वनस्पति तेल भी फटी एड़ियों के उपचार में खासे प्रभावी होते हैं। जैतून का तेल, नारियल का तेल, तिल का तेल या कोई अन्य वनस्पति तेल – इनमें से किसी भी तेल का उपयोग किया जा सकता है, क्योंकि ये सभी त्वचा को गहराई से पोषण और नमी प्रदान करते हैं। इस उपाय को आज़माने के लिए, सबसे पहले अपने पैरों को गुनगुने पानी में कुछ देर भिगोकर रखें ताकि त्वचा नरम हो जाए और रोमछिद्र खुल जाएं। इसके बाद, पैरों को अच्छी तरह से स्क्रब करके मृत त्वचा हटा दें और फिर सुखा लें। अब अपनी एड़ी और तलवों पर चुने हुए वनस्पति तेल से हल्के हाथों से अच्छी तरह मालिश करें। मालिश के बाद, मोजे पहनकर सो जाएं ताकि तेल रात भर त्वचा में समा जाए और गहराई से पोषण दे सके। इस प्रक्रिया को नियमित रूप से दोहराने से फटी एड़ियां तेज़ी से ठीक होती हैं और कोमल बनती हैं।
नीम, अपने असाधारण औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है, फटी एड़ियों की समस्या में भी चमत्कारी परिणाम दे सकता है। नीम में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो त्वचा संक्रमण को रोकने और उपचार को बढ़ावा देने में सहायक होते हैं। इस उपाय को बनाने के लिए, नीम की ताज़ी पत्तियों को थोड़ी सी हल्दी के साथ मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें। यह मिश्रण त्वचा के घावों को भरने और उसे स्वस्थ रखने में मदद करता है। इस पेस्ट को अपनी फटी एड़ियों पर लगाएं और लगभग एक घंटे तक इसे लगा रहने दें ताकि इसके गुण त्वचा में समा सकें। इसके बाद, पैरों को साफ पानी से धो लें। नीम और हल्दी का यह मिश्रण एड़ियों को ठीक करने के साथ-साथ उन्हें संक्रमण से भी बचाता है और स्वस्थ, मुलायम त्वचा को बढ़ावा देता है।
इन सभी घरेलू उपायों को नियमितता और धैर्य के साथ अपनाकर आप आसानी से फटी एड़ियों की समस्या से निजात पा सकते हैं। पैरों की उचित देखभाल और ये प्राकृतिक नुस्खे मिलकर आपके पैरों की खोई हुई सुंदरता और कोमलता को वापस लाने में मदद करेंगे, जिससे आप आत्मविश्वास के साथ अपने सुंदर पैरों का प्रदर्शन कर सकें और खुद को बेहतर महसूस कर सकें।
बाजार जाने की झंझट खत्म: घर पर आसानी से बनाएं WHO स्टैंडर्ड वाला ORS घोल, पानी की कमी तुरंत होगी दूर
2 Jun, 2026 01:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भीषण गर्मी, लू के थपेड़ों, दस्त (डायरिया) या अत्यधिक उल्टी होने की स्थिति में मानव शरीर से पानी और जरूरी लवणों का स्तर बहुत तेजी से गिर जाता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में डिहाइड्रेशन कहा जाता है, जिससे निपटने के लिए ओआरएस (ORS - ओरल रीहाइड्रेशन साल्ट) का घोल सबसे अचूक और जीवनरक्षक उपाय माना जाता है। वैसे तो बाजार में ओआरएस के रेडीमेड पैकेट आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन हर बार इन्हें दुकान से खरीदना जेब पर भारी पड़ने के साथ-साथ आपातकालीन स्थिति में समय भी खराब करता है।
राहत की बात यह है कि डब्ल्यूएचओ (WHO) के मानकों के अनुरूप आप इस घोल को बेहद कम खर्च में अपने घर पर भी तैयार कर सकते हैं। सही माप और शुद्धता के साथ घर पर बनाया गया ओआरएस पूरी तरह सुरक्षित होता है और शरीर में खनिजों की कमी को तुरंत दूर करता है। आइए जानते हैं इसे बनाने का सटीक तरीका और इसके जादुई फायदे।
घरेलू ओआरएस बनाने की सटीक मात्रा और आसान विधि
आवश्यक सामग्री:
साफ या उबला हुआ ठंडा पानी: 1 लीटर
चीनी: 6 छोटे चम्मच (तकरीबन 30 ग्राम)
नमक: आधा छोटा चम्मच (तकरीबन 3 ग्राम)
बनाने के सरल स्टेप्स:
सबसे पहले एक लीटर पीने के पानी को अच्छी तरह उबाल लें और फिर उसे सामान्य तापमान पर ठंडा होने दें।
अब इस पानी को किसी पूरी तरह साफ किए गए बर्तन, जग या कांच की बोतल में पलट लें।
इस पानी में निर्धारित मात्रा के अनुसार 6 छोटे चम्मच चीनी और आधा छोटा चम्मच नमक डालें।
चम्मच की मदद से इस मिश्रण को तब तक अच्छी तरह हिलाते रहें, जब तक कि नमक और चीनी पानी में पूरी तरह विलीन (घुल) न हो जाएं।
आपका घरेलू जीवनरक्षक घोल तैयार है, इसे पीड़ित व्यक्ति को थोड़ी-थोड़ी देर में घूंट-घूंट करके पिलाते रहें।
कमजोरी दूर करने से लेकर हीट स्ट्रोक से बचाने तक, ओआरएस के फायदे
शरीर में पानी का स्तर दुरुस्त करने के अलावा ओआरएस का यह संतुलित घोल सोडियम, पोटैशियम और इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को फौरन पटरी पर लाता है। गर्मियों में जब तेज धूप और पसीने के कारण चक्कर आना, कमजोरी या आंखों के आगे अंधेरा छाने जैसी दिक्कतें होती हैं, तब यह घोल इंस्टेंट एनर्जी (तुरंत ऊर्जा) देने का काम करता है। भीषण गर्मी के दिनों में इसका नियमित सेवन 'हीट स्ट्रोक' या लू लगने के खतरे को बेहद कम कर देता है। विशेषकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों में, जिनमें पानी की कमी बहुत जल्दी जानलेवा स्तर तक पहुंच सकती है, यह घोल किसी सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और बीमारी के बाद शरीर की तेजी से रिकवरी (सुधार) सुनिश्चित करता है।
घोल का इस्तेमाल करते समय इन जरूरी सावधानियों का रखें ध्यान
ओआरएस का उपयोग करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घर पर तैयार किए गए इस घोल को 24 घंटे से अधिक समय तक स्टोर करके न रखें। यदि 24 घंटे बाद भी घोल बच जाता है, तो उसे फेंक दें और नया घोल तैयार करें। नमक और चीनी के अनुपात में अपनी मर्जी से कोई बदलाव न करें, क्योंकि कम या ज्यादा मात्रा सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। घोल बनाने के लिए हमेशा पूरी तरह कीटाणुरहित और उबले हुए पानी का ही प्रयोग करें। इसके साथ ही यह ध्यान रखें कि यदि मरीज की उल्टी या दस्त की स्थिति बहुत ज्यादा गंभीर हो और ओआरएस देने के बाद भी सुधार न दिख रहा हो, तो बिना समय गंवाए तुरंत नजदीकी चिकित्सक से संपर्क करें।
गर्मियों में ऑयली स्किन का परफेक्ट इलाज: इन 5 आसान तरीकों से दूर होगा चेहरे का चिपचिपापन, तुरंत मिलेगा निखार
2 Jun, 2026 01:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चिलचिलाती गर्मियों की दस्तक के साथ ही हमारी त्वचा से जुड़ी परेशानियां भी तेजी से सिर उठाने लगती हैं। तेज धूप, आसमान छूता पारा, लगातार निकलने वाला पसीना और हवा की उमस मिलकर चेहरे को बेहद चिपचिपा और तैलीय (ऑयली) बना देते हैं। विशेषकर उन लोगों के लिए यह मौसम किसी परीक्षा से कम नहीं होता, जिनकी स्किन पहले से ही ऑयली है। चेहरे पर बार-बार तेल और धूल-मिट्टी की परत जमने से न सिर्फ रूप-रंग फीका और बेजान पड़ने लगता है, बल्कि कील-मुंहासे (पिंपल्स), ब्लैकहेड्स और व्हाइटहेड्स की समस्या भी दोगुनी हो जाती है।
राहत की बात यह है कि अपनी रोजमर्रा की आदतों में कुछ मामूली और सटीक बदलाव करके आप इस मौसम में भी अपनी त्वचा की रंगत, ताजगी और चमक बरकरार रख सकते हैं। आइए जानते हैं समर स्किन केयर के कुछ ऐसे ही आसान और असरदार तरीके जो आपको दिनभर एक फ्रेश लुक देंगे।
चेहरे की सही सफाई और जेल-बेस्ड हाइड्रेशन का फॉर्मूला
गर्मियों में त्वचा को साफ रखना सबसे पहला कदम है। दिनभर में कम से कम दो बार (सुबह सोकर उठने के बाद और रात को सोने से पहले) किसी सौम्य या माइल्ड फेस वॉश से चेहरा जरूर साफ करें ताकि रोमछिद्रों में जमी गंदगी बाहर निकल सके। ध्यान रहे कि बार-बार चेहरा धोने की गलती न करें, क्योंकि इससे त्वचा रूखी हो जाती है और खुद को हाइड्रेट रखने के लिए वह और ज्यादा तेल (सीबम) बनाने लगती है। चेहरा साफ करने के बाद मॉइस्चराइजर लगाना कभी न छोड़ें। गर्मियों में भारी या क्रीमी मॉइस्चराइजर के बजाय हल्के, वॉटर-बेस्ड या जेल-बेस्ड मॉइस्चराइजर का चुनाव करें। यह त्वचा में बिना कोई चिपचिपाहट पैदा किए उसे अंदर से नमी देता है और स्किन का नेचुरल बैलेंस बनाए रखता है।
धूप से सुरक्षा के लिए सनस्क्रीन का कवच और पानी की थेरेपी
तेज और हानिकारक यूवी (UV) किरणों से बचाव के लिए सनस्क्रीन गर्मियों का सबसे जरूरी हथियार है। जब भी आप घर से बाहर निकलें, तो उससे करीब 20 मिनट पहले चेहरे और गर्दन पर SPF 30 या उससे अधिक क्षमता वाला सनस्क्रीन अच्छी तरह लगाएं। यह आपकी त्वचा को सनबर्न, टैनिंग और असमय बुढ़ापे (झुर्रियों) से महफूज रखता है। इसके साथ ही, त्वचा को बाहर से चमकाने के साथ-साथ अंदर से साफ रखना भी जरूरी है। इसके लिए दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर के हानिकारक टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थ) बाहर निकल जाते हैं, जिससे त्वचा प्राकृतिक रूप से ग्लो करने लगती है।
मुल्तानी मिट्टी और खीरे का देसी इलाज, जो देगा चेहरे को ठंडक
त्वचा की अतिरिक्त चिकनाई और तेल को सोखने के लिए घरेलू फेस पैक बेहद कारगर साबित होते हैं। गर्मियों में हफ्ते में एक या दो बार मुल्तानी मिट्टी में थोड़ा सा गुलाब जल और खीरे का रस मिलाकर चेहरे पर लगाएं। मुल्तानी मिट्टी चेहरे के एक्स्ट्रा ऑयल को खींच लेती है, जबकि खीरा और गुलाब जल त्वचा को अंदरूनी ठंडक पहुंचाकर धूप से होने वाली जलन और रेडनेस (लालिमा) को शांत करते हैं। इस आसान और प्राकृतिक लेप के इस्तेमाल से बंद रोमछिद्र खुल जाते हैं और चेहरा एकदम तरोताजा व साफ नजर आने लगता है।
सिंपल रोटी को कहें अलविदा: चने के आटे और दही से बनाएं यह स्पेशल हाई-प्रोटीन रोटी, सेहत और स्वाद दोनों में है लाजवाब
2 Jun, 2026 01:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आजकल लोग अपनी जीवनशैली में पौष्टिक आहार को शामिल करना चाहते हैं, लेकिन वे स्वाद से कोई समझौता नहीं करना चाहते। ऐसे में कुछ ऐसे बेहतरीन और आसान विकल्प मौजूद हैं, जो आपके भोजन को स्वादिष्ट बनाने के साथ-साथ सेहत से भी भरपूर कर देते हैं। भारतीय परिवारों में रोटी आहार का एक बेहद मुख्य हिस्सा है, जिसे लंच या डिनर में चाव से खाया जाता है। अच्छी बात यह है कि बिना किसी तामझाम के, आप अपनी रोज की साधारण रोटी को ही सुपर-हेल्दी और एक्स्ट्रा सॉफ्ट बना सकते हैं।
यह खास रेसिपी उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है जो वजन कम करने के सफर पर हैं या अपने पाचन तंत्र को मजबूत करना चाहते हैं। इसके लिए आपको रागी या ज्वार जैसे अलग आटों की जरूरत नहीं है, बल्कि किचन में मौजूद चंद चीजें ही आपकी गेहूं की साधारण रोटी को प्रोटीन का पावरहाउस बना देंगी।
रसोई के तीन सुपरफूड्स: प्रोटीन और फाइबर का अनोखा संगम
इस खास रोटी को तैयार करने के लिए आपको केवल तीन मुख्य चीजों की आवश्यकता होगी—भुना हुआ चना, ताजा दही और पनीर। ये तीनों ही सामग्रियां अपने आप में पोषक तत्वों का भंडार हैं। भुना चना जहां प्रोटीन, फाइबर और जरूरी मिनरल्स का बेहतरीन जरिया है, वहीं दही में पाए जाने वाले प्रोबायोटिक्स हमारी आंतों (गट हेल्थ) को स्वस्थ रखते हैं। इसके अलावा पनीर से शरीर को हेल्दी फैट्स और जरूरी विटामिंस मिलते हैं। जब इन तीनों को मिलाकर आटा गूंथा जाता है, तो यह रोटी न केवल अत्यधिक मुलायम बनती है, बल्कि लंबे समय तक पेट को भरा रखकर असमय लगने वाली भूख (फूड क्रेविंग्स) पर भी लगाम लगाती है। यही वजह है कि न्यूट्रिशनिस्ट्स वेट लॉस डाइट में इसे शामिल करने की सलाह देते हैं।
हाई-प्रोटीन चने-दही की रोटी: सामग्री और बनाने के आसान स्टेप्स
आवश्यक सामग्री:
भुने हुए चने (बिना छिलके के): आधा कप
कद्दूकस किया हुआ पनीर: 100 ग्राम
ताजा दही: 3 से 4 बड़े चम्मच
गेहूं का आटा: डेढ़ से दो कप (आवश्यकतानुसार)
नमक: स्वादानुसार
अजवाइन या जीरा: आधा छोटा चम्मच (पाचन और स्वाद के लिए)
पानी: पेस्ट बनाने और आटा गूंथने के लिए
बनाने की सरल विधि:
स्टेप 1: सबसे पहले मिक्सर ग्राइंडर के जार में भुने चने, दही और कद्दूकस किया हुआ पनीर डालें।
स्टेप 2: इसी मिश्रण में स्वादानुसार नमक और अजवाइन या जीरा भी शामिल कर दें।
स्टेप 3: अब आवश्यकता के अनुसार थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए इसे पीस लें और एक हल्का गाढ़ा स्मूथ पेस्ट तैयार कर लें।
स्टेप 4: इस तैयार पेस्ट को एक बड़ी परात या बर्तन में निकालें और ऊपर से थोड़ा-थोड़ा गेहूं का आटा मिलाना शुरू करें।
स्टेप 5: इस मिश्रण को अच्छी तरह मिलाते हुए एक मुलायम और लचीला आटा गूंथ लें (जरूरत पड़ने पर ही अतिरिक्त पानी छिड़कें)।
स्टेप 6: गूंथे हुए आटे को किसी सूती कपड़े या ढक्कन से ढककर 10-15 मिनट के लिए सेट होने के लिए छोड़ दें।
स्टेप 7: तय समय बाद आटे की मध्यम आकार की लोइयां तोड़ें और उन्हें गोल रोटी के आकार में बेल लें।
स्टेप 8: गर्म तवे पर दोनों तरफ से अच्छे से सेक लें। आपकी बेहद नरम और स्वादिष्ट हाई-प्रोटीन रोटी तैयार है, इसे गरमागरम दाल या सूखी सब्जी के साथ परोसें।
हड्डियों की मजबूती से लेकर शुगर कंट्रोल तक, जानिए इस रोटी के बेमिसाल फायदे
इस खास विधि से तैयार की गई रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) काफी कम होता है, जिस वजह से यह डायबिटीज (मधुमेह) के रोगियों के लिए एक उत्तम आहार है। यह ब्लड शुगर के स्तर को अचानक बढ़ने से रोकती है। जिम जाने वाले युवाओं और शाकाहारी लोगों के लिए यह दैनिक प्रोटीन की कमी को पूरा करने का एक बेहतरीन और प्राकृतिक माध्यम है, जो मांसपेशियों (मसल मास) के निर्माण में मदद करता है। फाइबर और प्रोबायोटिक्स से भरपूर होने के कारण यह गैस, अपच जैसी पेट की समस्याओं को दूर कर पाचन क्रिया को तेज करती है। इसके अलावा, दही और पनीर में मौजूद प्रचुर कैल्शियम हड्डियों और दांतों को मजबूती देता है, जबकि चने में मौजूद जिंक और मैग्नीशियम शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
सेवन का सही समय और सावधानियां: इस रोटी का सेवन सुबह के नाश्ते में करना सबसे ज्यादा गुणकारी माना जाता है, क्योंकि यह दिनभर के लिए शरीर को ऊर्जा से सराबोर रखती है। इसके अलावा, इसे पोस्ट-वर्कआउट मील या रात को सोने से करीब 2-3 घंटे पहले डिनर में भी लिया जा सकता है। हालांकि, जिन लोगों को डेयरी प्रोडक्ट्स से एलर्जी (लैक्टोज इनटोलरेंस) है, या जिनका पेट बहुत ज्यादा संवेदनशील है और वे आईबीएस (IBS) जैसी समस्या से पीड़ित हैं, उन्हें शुरुआत में इसका सेवन बेहद सीमित मात्रा में करना चाहिए या किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
घर में बनाएं 5 लाजवाब कढ़ी रेसिपी, हर स्वाद के लिए एक खास विकल्प
1 Jun, 2026 03:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कढ़ी हमारे देश के खान-पान का एक ऐसा पारंपरिक और अभिन्न हिस्सा है, जो लगभग हर भारतीय थाली की शोभा बढ़ाता है। बेसन और मट्ठे (दही) के मेल से तैयार होने वाली कढ़ी का जायका जितना बेमिसाल होता है, देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे बनाने के उतने ही अनोखे अंदाज भी हैं।
अक्सर घरों में एक ही तरह की पकौड़ी वाली कढ़ी बनाई जाती है, जिससे कई बार लोग बोर हो जाते हैं। अगर आप भी अपने दोपहर या रात के भोजन में कुछ नयापन लाना चाहते हैं, तो कढ़ी के कुछ क्षेत्रीय स्वादों को आजमा सकते हैं। यहाँ कढ़ी के 5 लाजवाब विकल्पों और उन्हें तैयार करने के आसान तरीकों के बारे में बताया गया है:
1. एवरग्रीन पकौड़ी वाली कढ़ी
यह कढ़ी का सबसे पुराना और पसंदीदा रूप है, जिसे उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक बड़े चाव से खाया जाता है। दही-बेसन के गाढ़े घोल में डूबी हुई नरम-नरम पकौड़ियां इसका मुख्य आकर्षण होती हैं।
विधि: दही, बेसन, हल्दी और नमक को मिलाकर एक मखमली घोल तैयार करें और इसे धीमी आंच पर गाढ़ा होने तक उबालें। इसके बाद बेसन के फूले हुए पकौड़े तलकर कढ़ी में डालें। आखिरी में राई, कढ़ी पत्ता, हींग और सूखी लाल मिर्च का देसी घी में तड़का लगाएं और उबले हुए चावल के साथ परोसें।
2. सेहत से भरपूर पालक कढ़ी
यदि आप स्वाद के साथ-साथ सेहत और पोषण का कॉम्बिनेशन ढूंढ रहे हैं, तो पालक कढ़ी एक उत्तम चॉइस है। यह कढ़ी शरीर में आयरन और विटामिंस की कमी को पूरा करने में मददगार है।
विधि: सामान्य कढ़ी के उबलते समय उसमें बारीक कटी हुई ताजी पालक या पालक की प्यूरी मिला दें। पालक के अच्छी तरह पक जाने पर लहसुन और सूखी लाल मिर्च का छौंक लगाएं। यह कढ़ी खाने में बेहद स्वादिष्ट और सुपाच्य होती है।
3. तीखी और चटपटी राजस्थानी कढ़ी
राजस्थान की यह पारंपरिक कढ़ी बिना पकौड़े के तैयार की जाती है। इसका टेक्सचर थोड़ा पतला होता है, लेकिन स्वाद में यह बेहद चटपटी और तीखी होती है।
विधि: बेसन और खट्टी छाछ के मिश्रण को अच्छी तरह मथकर कड़ाही में पकने के लिए रख दें। इसमें हींग, मेथी दाना, सौंफ और साबुत गरम मसालों का कड़ा तड़का लगाया जाता है। जयपुर और जोधपुर जैसे शहरों में इसे बाजरे की रोटी या गरमा-गरम खींचू के साथ बड़े शौक से परोसा जाता है।
4. प्रोटीन से भरपूर मूंग दाल मंगौड़ी कढ़ी
अगर आप बेसन की साधारण पकौड़ियों से कुछ अलग हटकर खाना चाहते हैं, तो मूंग दाल की मंगौड़ी वाली कढ़ी एक बेहतरीन विकल्प है। यह खाने में हल्की और प्रोटीन से भरपूर होती है।
विधि: रात भर भीगी हुई मूंग की दाल को दरदरा पीसकर छोटे-छोटे मंगौड़े (पकौड़े) तल लें। जब कढ़ी उबलकर तैयार हो जाए, तो इन मंगौड़ियों को उसमें डालकर कुछ देर छोड़ दें ताकि वे कढ़ी को सोख लें। इसके बाद जीरे का तड़का लगाकर इसे रोटी के साथ खाएं।
5. खट्टी-मीठी टोमैटो कढ़ी
गर्मियों के मौसम में यह कढ़ी पेट को ठंडक पहुंचाने और मुंह का स्वाद बदलने के लिए एकदम परफेक्ट है। टमाटर की प्यूरी का इस्तेमाल होने के कारण इसका रंग और स्वाद दोनों ही बेहद रिफ्रेशिंग होते हैं।
विधि: दही-बेसन के घोल को पकाते समय उसमें उबले और पिसे हुए टमाटर का पल्प (प्यूरी) मिला दें। खटास को बैलेंस करने के लिए हल्की सी चीनी या गुड़ का इस्तेमाल करें। तैयार होने पर राई और कढ़ी पत्ते का छौंक लगाएं। इसे मुंबई और पुणे के तटीय इलाकों में चावल के साथ काफी पसंद किया जाता है।
कम तेल, ज्यादा स्वाद! जानिए पौष्टिक खाना बनाने की खास तकनीकें
30 May, 2026 03:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों के बीच चल रहे युद्ध और तनावपूर्ण हालातों का सीधा असर अब आम आदमी की थाली पर दिखने लगा है। पहले घरेलू गैस सिलेंडरों के दामों ने परेशान किया और अब खाने के तेल की बढ़ती कीमतें घर का मासिक बजट बिगाड़ रही हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में समझदारी इसी में है कि रसोई में कुछ ऐसे आसान और कारगर तरीके अपनाए जाएं, जिससे कम से कम तेल का उपयोग करके भी बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन तैयार किया जा सके। इससे पैसों की बचत तो होगी ही, साथ ही परिवार की सेहत भी दुरुस्त रहेगी।
हाल ही में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नागरिकों से अपने दैनिक आहार में चिकनाई और तेल की मात्रा घटाने का आग्रह किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि यह आदत देश और मानव शरीर दोनों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। दरअसल, भारत अपनी आवश्यकता का एक बहुत बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से इंपोर्ट (आयात) करता है, जिसके भुगतान में हर साल देश का विदेशी मुद्रा भंडार भारी मात्रा में खर्च होता है।
वैश्विक संकट के इस दौर में यदि हम सब मिलकर तेल की खपत को नियंत्रित करें, तो यह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ हमारी जीवनशैली को भी बेहतर बनाएगा। अत्यधिक तली-भुनी चीजें खाने से मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं कम तेल में शानदार कुकिंग करने के कुछ बेहतरीन उपाय।
1. नॉन-स्टिक बर्तनों को बनाएं अपनी पहली पसंद
कम घी-तेल में खाना पकाने का सबसे सरल माध्यम आधुनिक नॉन-स्टिक कड़ाही और पैन का इस्तेमाल करना है। साधारण लोहे या एल्युमिनियम के बर्तनों में सब्जी या मसाले को नीचे चिपकने और जलने से बचाने के लिए अत्यधिक तेल डालना पड़ता है। इसके विपरीत, नॉन-स्टिक बर्तनों की विशेष कोटिंग के कारण बहुत ही मामूली या सिर्फ कुछ बूंद तेल में भी भोजन पूरी तरह सुरक्षित और अच्छे से पक जाता है। बाजार में उपलब्ध ऐसे बर्तनों के उपयोग से तेल की मासिक खपत को आधा किया जा सकता है।
2. बोतल से सीधे तेल उड़ेलने की आदत बदलें
अक्सर खाना बनाते समय जल्दबाजी में लोग सीधे कंटेनर या बोतल से कड़ाही में तेल डाल देते हैं, जिससे जरूरत से ज्यादा मात्रा गिर जाती है। इस आदत को बदलकर हमेशा चम्मच (स्पून) या मेजरिंग कप की सहायता से नापकर ही तेल कड़ाही में डालें। यदि परिवार मिलकर यह तय कर ले कि प्रति सप्ताह या प्रति माह रसोई में कितने लीटर तेल का ही उपयोग करना है, तो फिजूलखर्ची और सेहत के नुकसान दोनों को आसानी से रोका जा सकता है। यह छोटी सी आदत शरीर को कम चिकनाई वाले भोजन का आदी बना देती है।
3. मसालों और नेचुरल फ्लेवर्स का सही कॉम्बिनेशन
ज्यादा तेल से स्वाद बढ़ने की धारणा सिर्फ एक मिथक है फूड एक्सपर्ट्स के अनुसार, व्यंजनों में असली और बेहतरीन स्वाद तेल के तैरने से नहीं, बल्कि मसालों के सही संतुलन और उन्हें पकाने के सही तरीके से आता है। आप अपने भोजन का जायका बढ़ाने के लिए अदरक, लहसुन, हरी मिर्च, हरा धनिया, पुदीना, कसूरी मेथी और नींबू के रस का सही इस्तेमाल करें। ये प्राकृतिक सामग्रियां भोजन को बिना भारी बनाए उसे अत्यंत स्वादिष्ट और सुगंधित बना देती हैं।
4. डीप-फ्राई के बजाय स्टीमिंग और ग्रिलिंग अपनाएं
पारंपरिक भारतीय रसोइयों में समोसे, कचोरी, पकौड़े और पूरियों जैसे डीप-फ्राई (ज्यादा तेल में तले हुए) व्यंजनों को काफी पसंद किया जाता है, लेकिन यह सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह है। अब समय आ गया है कि खाने को तलने के बजाय उसे भाप में पकाने (स्टीमिंग), उबालने (ब्वॉयलिंग) या ग्रिल करने की आदत डाली जाए। इडली, ढोकला, ग्रिल्ड पनीर, रोस्टेड सब्जियां और उबली हुई दालें स्वाद में भी लाजवाब होती हैं और इनके सेवन से शरीर में अतिरिक्त फैट (वसा) जमा नहीं होता, जिससे पाचन तंत्र भी मजबूत रहता है।
5. कम तेल के इस्तेमाल से शरीर को मिलेंगे अनगिनत फायदे
चिकनाई से दूरी बनाने और संतुलित खान-पान रखने से फिटनेस का स्तर सुधरता है। इससे धमनियों में खराब कोलेस्ट्रॉल जमने की प्रक्रिया रुकती है, जिससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा न्यूनतम हो जाता है। हल्का भोजन पेट में आसानी से पचता है, जिससे गैस, अपच और एसिडिटी जैसी रोजमर्रा की समस्याओं से निजात मिलती है। शरीर दिन भर ऊर्जावान महसूस करता है और कम तेल-मसाले के सेवन से चेहरे की त्वचा पर भी प्राकृतिक निखार आता है।
गर्मियों में स्कूल टिफिन के लिए हल्के और पौष्टिक खाने की लिस्ट
28 May, 2026 03:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस प्रचंड गर्मी और गर्म हवाओं (लू) के थपेड़ों के बीच स्कूली बच्चों की सेहत की देखभाल करना पैरेंट्स के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। तेज धूप और उमस भरे इस मौसम में बच्चों के शरीर से पानी और एनर्जी बहुत तेजी से खत्म होती है। ऐसे में बच्चों का खानपान उनके स्वास्थ्य पर सीधा असर डालता है। अगर सुबह स्कूल जाते समय बच्चों के लंच बॉक्स (टिफिन) में गरिष्ठ, ज्यादा तेल-मसाले वाला या फ्राइड खाना दिया जाए, तो उन्हें पेट में ऐंठन, डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त और सुस्ती जैसी गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
समर सीजन में बच्चों के लंच बॉक्स में हमेशा सुपाच्य, पौष्टिक और शरीर को भीतर से शीतलता देने वाले खाद्य पदार्थों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। इस मौसम में ऐसा भोजन देना समझदारी है जो पचने में आसान हो और बच्चों को दिनभर एक्टिव रखे। इसके साथ ही टिफिन में पानी से भरपूर ताजे फल और प्राकृतिक पेय पदार्थ (हेल्दी ड्रिंक्स) रखना भी बेहद गुणकारी साबित होता है।
आइए इस विशेष लेख में जानते हैं कि इस तपती गर्मी में बच्चों को हाइड्रेटेड और ऊर्जावान रखने के लिए उनके टिफिन में क्या शामिल करना चाहिए और किन चीजों से सख्त परहेज करना जरूरी है।
गर्मी के दिनों में बच्चों को हल्का भोजन देना क्यों है जरूरी?
उच्च तापमान के कारण गर्मियों में इंसानी शरीर का पाचन तंत्र (डाइजेस्टिव सिस्टम) थोड़ा धीमा और संवेदनशील हो जाता है। भारी, मैदे से बनी या तली-भुनी चीजें खाने से बच्चों का पेट भारी हो जाता है, जिससे उन्हें आलस और थकान महसूस होने लगती है। इसके विपरीत, हल्का और संतुलित अहार बच्चों को पेट की बीमारियों से बचाता है और उन्हें पढ़ाई व खेलकूद के दौरान तरोताजा रखता है।
लंच बॉक्स के लिए कुछ बेहतरीन और हेल्दी विकल्प:
व्यंजन / खाद्य पदार्थ
सेहत के लिए फायदे
दही-चावल (कर्ड राइस)
यह पेट को तुरंत ठंडक पहुंचाता है और पाचन के लिए सबसे सर्वोत्तम माना जाता है।
वेजिटेबल सैंडविच
हरी सब्जियों से भरपूर यह स्नैक बेहद हल्का, पौष्टिक और बच्चों का पसंदीदा होता है।
खीरा और तरबूज के टुकड़े
ये शरीर में पानी के स्तर को बनाए रखते हैं और लू के थपेड़ों से बचाते हैं।
पोहा या सूजी की इडली
कम तेल में बनने वाला यह नाश्ता लंबे समय तक शरीर को एनर्जी देता है।
मट्ठा (छाछ) या नारियल पानी
इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर ये ड्रिंक्स डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) को रोकने में रामबाण हैं।
गर्मियों में कौन-से फल टिफिन के लिए हैं बेस्ट?
समर सीजन में फलों का सेवन बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी माना जाता है। लंच बॉक्स के साइड कंपार्टमेंट में आप इन फलों को काटकर दे सकते हैं:
तरबूज और खरबूजा (पानी की प्रचुर मात्रा)
सेब और पपीता (फाइबर और विटामिंस)
अंगूर और केला (इंस्टेंट एनर्जी के लिए)
ये फल बच्चों को प्राकृतिक शर्करा (नेचुरल शुगर) और आवश्यक विटामिंस प्रदान करते हैं, जिससे वे दिनभर एक्टिव रहते हैं।
स्कूल स्नैक्स के लिए कुछ अन्य घरेलू ऑप्शन्स:
बाजार के पैकेटबंद स्नैक्स के बजाय घर पर तैयार किए गए निम्नलिखित विकल्प ज्यादा सुरक्षित हैं:
सब्जियों से भरपूर उपमा या वेज सैंडविच
हल्का भुना हुआ पोहा या भाप में पकी इडली
अंकुरित अनाज (स्प्राउट्स) चाट
सीमित मात्रा में सूखे मेवे (बादाम, अखरोट)
भूलकर भी बच्चों के टिफिन में न रखें ये चीजें (इनसे बचें):
गर्मियों के इस पूरे सीजन में माता-पिता को अपने बच्चों के भोजन से इन चीजों को पूरी तरह दूर रखना चाहिए:
अत्यधिक तला-भुना खाना: पूरी, पराठे या समोसे-कचौड़ी।
तीखे मसालेदार फूड: पैकेट वाले नूडल्स या अत्यधिक मिर्च-मसाले वाली सब्जियां।
जंक और पैकेज्ड फूड: बाजार के चिप्स, बर्गर, पिज्जा और ज्यादा चॉकलेट।
कृत्रिम ड्रिंक्स: ज्यादा चीनी वाले प्रिजर्वेटिव युक्त कोल्ड ड्रिंक्स या सिंथेटिक जूस।
ये सभी चीजें गर्मियों में शरीर के तापमान को बढ़ा सकती हैं और बच्चों को जल्दी थकाकर बीमार कर सकती हैं। इसलिए सादगीपूर्ण और पारंपरिक भारतीय घरेलू भोजन ही इस मौसम में बच्चों का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।
बार-बार भूख नहीं लगती? डाइट में शामिल करें दही, फल और छाछ
27 May, 2026 03:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जेठ महीने के 'नौतपा' के दौरान जब सूर्यदेव का रौद्र रूप अपने चरम पर होता है, तब असहनीय गर्मी, उमस और लगातार चढ़ता पारा इंसान को शारीरिक रूप से पूरी तरह थका देता है। इस झुलसाने वाले मौसम में अक्सर अधिकांश लोग यह शिकायत करते हैं कि उन्हें बार-बार भूख नहीं लगती, कुछ भी गरिष्ठ या भारी भोजन करने की इच्छा नहीं होती और पेट हमेशा भरा-भरा या फूला हुआ सा महसूस होता है। आहार विशेषज्ञों (डाइटिशियंस) के अनुसार, गर्मियों के दिनों में हमारे शरीर का चयापचय (मेटाबॉलिज्म) कुदरती रूप से थोड़ा धीमा हो जाता है, जिसके कारण पाचन तंत्र भोजन की मांग कम कर देता है।
परंतु, भूख न लगने का अर्थ यह कतई नहीं है कि आप भोजन करना ही छोड़ दें। इस भीषण तपन में भी मानव शरीर को सुचारू रूप से काम करने के लिए उचित पोषण और निरंतर हाइड्रेशन (पानी की पर्याप्त मात्रा) की सख्त आवश्यकता होती है। यदि आप इस मौसम में लापरवाही बरतते हुए अधिक ऑयली, मसालेदार या भारी पकवानों का सेवन जारी रखते हैं, तो इससे सुस्ती, एसिडिटी, डिहाइड्रेशन और कमजोरी की समस्या कई गुना बढ़ सकती है। इसके विपरीत, हल्के, तासीर में ठंडे और आसानी से पचने वाले व्यंजन शरीर को बिना कोई नुकसान पहुंचाए दिनभर एक्टिव बनाए रखते हैं।
आज के इस विशेष लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही बेहतरीन 'लाइट समर मील' के विकल्पों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो नौतपा के इस दौर में आपके शरीर को अंदर से ठंडा रखेंगे, आपकी भूख को जगाएंगे और आपको पूरे दिन तरोताजा महसूस कराएंगे।
आखिर समर सीजन में क्यों रूठ जाती है हमारी भूख?
तेज गर्मी के कारण जब शरीर का आंतरिक तापमान बढ़ता है, तो हमारी पाचन क्रिया खुद को सुरक्षित रखने के लिए सुस्त हो जाती है। भारी और वसायुक्त भोजन को पचाने में शरीर को बहुत अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है, जिससे शरीर का तापमान और बढ़ सकता है। यही वजह है कि हमारा मस्तिष्क हमें भारी भोजन से दूर रहने का संकेत देता है और भूख कम लगती है।
नौतपा के लिए 5 सबसे बेहतरीन और हल्के भोजन विकल्प (Light Summer Meals):
1. अमृत समान दही-चावल (कर्ड राइस)
क्यों है फायदेमंद: यह पेट की गर्मी को शांत करने का सबसे अचूक और पारंपरिक भोजन है।
बनाने में आसान: इसे पचाना जितना सरल है, बनाना भी उतना ही आसान है। दोपहर की कड़कड़ाती धूप में घंटों किचन के चूल्हे के सामने खड़े रहने के बजाय, आप पके हुए चावलों को मीठे या हल्के नमकीन दही के साथ मिलाकर खा सकते हैं। यह आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है।
2. मूंग दाल की सुपाच्य खिचड़ी
क्यों है फायदेमंद: पोषण से भरपूर मूंग दाल की खिचड़ी को सबसे सुरक्षित और ऊर्जा देने वाला भोजन माना जाता है।
मुख्य लाभ: यदि अत्यधिक गर्मी के कारण आपका कुछ भी खाने का मन न हो, तब भी देसी घी की कुछ बूंदों के साथ मूंग दाल की पतली खिचड़ी का सेवन शरीर की कमजोरी को तुरंत दूर करता है और आपको रिफ्रेश रखता है।
3. रसीला फ्रूट सलाद (फलों का कटोरा)
क्यों है फायदेमंद: जब अन्न खाने की बिल्कुल इच्छा न हो, तो मौसमी फल सबसे उत्तम आहार हैं।
मुख्य लाभ: पानी और विटामिंस से भरपूर ताजे फलों का सलाद न केवल शरीर में पानी के स्तर को बनाए रखता है, बल्कि पेट को शीतलता देकर आवश्यक मिनरल्स की कमी को भी पूरा करता है।
4. पुदीने वाली छाछ और मट्ठा
क्यों है फायदेमंद: यह केवल एक पेय नहीं, बल्कि गर्मियों का सबसे मुकम्मल आहार पूरक है।
मुख्य लाभ: दोपहर के समय यदि भूख न भी हो, तो भुने जीरे, काले नमक और ताजे पुदीने के पत्तों से तैयार मटके की छाछ का एक बड़ा गिलास पेट को तुरंत तृप्ति देता है, गैस को शांत करता है और हाजमे को दुरुस्त रखता है।
5. जौ का दलिया या ओट्स
क्यों है फायदेमंद: यह कम कैलोरी में लंबे समय तक शरीर को ऊर्जा देने वाला एक बेहतरीन मील है।
उपयोग के तरीके: आप इसे अपनी पसंद के अनुसार नमकीन वेजीटेबल दलिया, सोक्ड ओट्स या दूध के साथ मीठा बनाकर खा सकते हैं। यह फाइबर से भरपूर होता है, जिससे पेट हल्का रहता है और कब्ज की शिकायत नहीं होती।
गर्मी की डाइट से जुड़े कुछ जरूरी सवाल और उनके जवाब:
Q. क्या समर सीजन में दही और मट्ठे का सेवन अमृत समान है? Ans. जी बिल्कुल। दही और छाछ में मौजूद प्रोबायोटिक्स शरीर के भीतर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं। ये पेट को ठंडा रखते हैं, डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) को रोकते हैं और लू के थपेड़ों से शरीर की रक्षा करते हैं। छाछ में थोड़ा सा पुदीना और जीरा मिला देने से इसकी गुणवत्ता चार गुना बढ़ जाती है।
Q. नौतपा के दौरान किन फलों को डाइट में प्रमुखता से शामिल करना चाहिए? Ans. इस मौसम में ऐसे फल खाएं जिनमें जल की मात्रा 80% से अधिक हो, जैसे:
तरबूज और खरबूजा (पानी का सबसे बड़ा स्रोत)
खीरा और ककड़ी (त्वचा और पेट के लिए वरदान)
पपीता (पाचन दुरुस्त रखने के लिए)
पका हुआ आम (स्वाद के लिए, लेकिन बहुत ही सीमित मात्रा में)
Q. गर्मियों में किन खाद्य पदार्थों से पूरी तरह तौबा कर लेनी चाहिए? Ans. शरीर में अंदरूनी गर्मी, एसिडिटी और घबराहट से बचने के लिए इन चीजों से सख्त दूरी बना लें:
अत्यधिक तला-भुना, समोसे, कचौड़ी और फास्ट फूड।
ज्यादा गरम मसाले, लहसुन और अदरक का अत्यधिक प्रयोग।
चाय, कॉफी और कैफीन युक्त एनर्जी ड्रिंक्स (ये शरीर को और सुखाते हैं)।
कृत्रिम शुगर वाली अत्यधिक ठंडी कोल्ड ड्रिंक्स।
लंबे समय तक भूखे पेट रहना (इससे पित्त की समस्या बढ़ जाती है)।
Nautapa Special: बिना गैस के बनाएं स्वाद और सेहत से भरपूर रेसिपीज
26 May, 2026 03:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस चिलचिलाती गर्मी और झुलसाने वाली लू का असर सिर्फ घर के बाहर ही नहीं, बल्कि घर के भीतर रसोई (किचन) में भी साफ महसूस हो रहा है, जो दोपहर के समय किसी तंदूर जैसी सुलगने लगती है। ऐसे माहौल में जलते हुए गैस चूल्हे के सामने घंटों खड़े होकर खाना पकाना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। भारी उमस और चढ़ते पारे के कारण इन दिनों लोगों का मन मसालेदार, गरिष्ठ और भारी भोजन से पूरी तरह उचटने लगा है। यही वजह है कि इस मौसम में हर कोई ऐसा आहार तलाश रहा है जो हल्का हो, पेट को ठंडक दे और झटपट तैयार हो जाए।
विशेषकर गृहिणियों और वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए 'नो-कुक' (बिना आग जलाए बनने वाली) डिशेज इस मौसम में किसी वरदान से कम नहीं हैं। ये रेसिपीज न सिर्फ रसोई के समय को आधा कर देती हैं, बल्कि शरीर को भीतर से ठंडी ऊर्जा भी प्रदान करती हैं। दही, मौसमी फल, चिया सीड्स, अंकुरित अनाज, ककड़ी-खीरा और मेवों के इस्तेमाल से बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजन मिनटों में मेज पर सजाए जा सकते हैं।
अगर आप भी इस नौतपा में चूल्हे की गर्मी से बचना चाहते हैं और अपने परिवार को कुछ सेहतमंद व टेस्टी खिलाना चाहते हैं, तो बिना गैस जलाए बनने वाले ये आसान विकल्प आपके बेहद काम आएंगे।
रसोई में बिना आग जलाए तैयार होने वाले 5 समर स्पेशल व्यंजन
1. ओवरनाइट ओट्स (रातभर भीगे हुए ओट्स)
अपने दिन की शुरुआत एक बेहद पौष्टिक और ठंडे ब्रेकफास्ट से करें।
बनाने का तरीका: एक कांच के जार या कटोरे में ओट्स, ठंडा दूध और थोड़े से चिया सीड्स को आपस में मिक्स कर लें। स्वाद के लिए इसमें थोड़ा शहद और अपनी पसंद के बारीक कटे फल मिला दें। इसे रातभर के लिए फ्रिज में रख दें और सुबह निकालकर सीधे ठंडे-ठंडे विटामिंस से भरपूर ओट्स का आनंद लें। यह दिनभर शरीर को ऊर्जावान और शीतल रखता है।
2. रिफ्रेशिंग दही चाट
दोपहर या शाम के नाश्ते के लिए यह एक बेहतरीन और पेट को तृप्त करने वाला विकल्प है।
बनाने का तरीका: गाढ़े और ठंडे दही में पहले से उबले हुए चने, बारीक कटे खीरे और टमाटर के टुकड़े डालें। ऊपर से थोड़ा भुना जीरा, काला नमक और चाट मसाला बुरकें। रंगत और स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें ताजे अनार के दाने और हरी धनिया पत्ती मिलाएं। यह डिश पाचन तंत्र को एकदम दुरुस्त रखती है।
3. प्रोटीन से भरपूर स्प्राउट्स भेल
कम कैलोरी में कुछ चटपटा और क्रंची खाने का मन हो तो यह भेल सबसे बेस्ट है।
बनाने का तरीका: एक बड़े बर्तन में अंकुरित मूंग या चना लें। इसमें कटे हुए प्याज, टमाटर और ककड़ी मिलाएं। स्वाद के अनुसार थोड़ा सा नींबू का रस, हरी मिर्च और सेंधा नमक डालकर अच्छे से टॉस करें। आखिरी में ऊपर से थोड़ी कुरकुरी मूंगफली या बारीक सेव डालकर सर्व करें।
4. फ्रूट और योगर्ट कॉम्बो बाउल
गर्मियों में शरीर में पानी का स्तर बनाए रखने के लिए फलों से बेहतर कुछ नहीं।
बनाने का तरीका: तरबूज, खरबूजा, पका आम, केला और सेब जैसे मौसमी फलों को छोटे चौकोर टुकड़ों में काट लें। एक बड़े बाउल में इन फलों के साथ गाढ़ा मलाईदार ठंडा दही (योगर्ट) मिलाएं। मिठास के लिए हल्का सा शहद और ऊपर से काजू-बादाम की कतरन डालकर इसे परोसें। यह बॉडी को तुरंत हाइड्रेट करता है।
5. नो-फ्लेम इंस्टेंट वेज सैंडविच
बिना टोस्ट किए भी एक शानदार और पेट भरने वाला सैंडविच बनाया जा सकता है।
बनाने का तरीका: फ्रेश ब्रेड स्लाइस लें और उन पर पुदीने की हरी चटनी या मायोनीज़ की एक परत लगाएं। इसके बाद ब्रेड के बीच में खीरा, टमाटर, प्याज और पनीर (कॉटेज चीज) की पतली स्लाइस सजाएं। ऊपर से चुटकी भर काली मिर्च पाउडर और नमक छिड़कें। इसे तरबूज या पुदीने के ठंडे जूस के साथ परोसें।
नौतपा और समर डाइट से जुड़े कुछ जरूरी सवाल-जवाब:
नौतपा के दौरान भोजन की थाली में क्या शामिल करना सबसे सही है?
इन दिनों ऐसा भोजन करें जो पचाने में बहुत हल्का हो, तासीर में ठंडा हो और जिसमें पानी की मात्रा अधिक हो; जैसे—मट्ठा, दही, सलाद, हरी सब्जियां और रसीले फल।
बिना चूल्हा जलाए कौन-कौन सी सेहतमंद चीजें बन सकती हैं?
बिना आंच के आप आसानी से मूसली बाउल, दही-चना चाट, फ्रूट कस्टर्ड (बिना उबाले), स्प्राउट्स सलाद और पनीर सैंडविच जैसी दर्जनों वैरायटी बना सकते हैं।
क्या बिना पकाए खाया जाने वाला भोजन वास्तव में शरीर को शीतलता देता है?
जी बिल्कुल। चूंकि इसमें प्रयुक्त होने वाली मुख्य सामग्रियां जैसे दही, खीरा और फल प्राकृतिक रूप से ठंडे और जल से भरपूर होते हैं, इसलिए ये बिना किसी अतिरिक्त हीट के शरीर के तापमान को नियंत्रित रखते हैं।
बालों से खूबसूरती निखारें: पार्टी के लिए आसान और आकर्षक हेयरस्टाइल
26 May, 2026 02:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महिलाएं अपनी खूबसूरती के लिए हर संभव प्रयास करती हैं, और इसमें बालों का विशेष स्थान होता है। बाल ही हमारे व्यक्तित्व को निखारते हैं और पूरी खूबसूरती को सामने लाते हैं। हालांकि, किसी पार्टी या खास मौके पर जाने के लिए बालों की साफ-सफाई और उन्हें स्टाइलिश तरीके से संवारना एक चुनौतीपूर्ण काम हो सकता है, खासकर तब जब समय की कमी हो। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद भी आप पार्टी में सबसे अलग और आकर्षक दिखना चाहती हैं, तो ये आसान और स्टाइलिश हेयरस्टाइल्स अपनाये। इन्हें आप आसानी से बना सकती हैं और किसी भी पार्टी में चार चाँद लगा सकती हैं।जूड़ा हेयरस्टाइल भारतीय महिलाओं के बीच हमेशा से लोकप्रिय रहा है। साड़ी या सूट के साथ यह क्लासिक और एलिगेंट लुक देता है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले अपने सारे बालों को पीछे की ओर अच्छी तरह कंघी करके इकट्ठा कर लें। इसके बाद एक रबर बैंड की मदद से हाई पोनीटेल बना लें। अब पोनीटेल के बालों को धीरे-धीरे रोल करते हुए एक गोलाकार आकृति दें और यू-पिन या बॉबी पिन की मदद से इसे सुरक्षित कर लें। आप चाहें तो अपने जूड़े को और आकर्षक बनाने के लिए इसमें ताजे फूल, हेयर एक्सेसरीज या मोतियों वाले पिन भी लगा सकती हैं। यह हेयरस्टाइल न केवल पारंपरिक परिधानों के साथ बल्कि आधुनिक ड्रेसेस के साथ भी एक सोफिस्टिकेटेड लुक देता है।आजकल कर्ली हेयरस्टाइल्स का ट्रेंड बहुत बढ़ गया है और यह किसी भी आउटफिट के साथ बेहद आकर्षक लगते हैं। यह आपको एक ग्लैमरस और बोहेमियन लुक देते हैं। इस स्टाइल को बनाने के लिए सबसे पहले बालों को अच्छी तरह से सुलझा लें। इसके बाद अपने बालों के छोटे-छोटे सेक्शन करें और कर्लिंग मशीन की मदद से उन्हें धीरे-धीरे कर्ल करते जाएं। आप अपनी पसंद के अनुसार ढीले वेव्स या टाइट कर्ल्स बना सकती हैं। कर्ल करने के बाद, अपनी उंगलियों से बालों को हल्का सा खोलें ताकि वे अधिक प्राकृतिक दिखें। इस लुक को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए आप हल्के हेयरस्प्रे का उपयोग कर सकती हैं। यह हेयरस्टाइल वेस्टर्न ड्रेसेस के साथ कमाल का लगता है।जब समय बिल्कुल न हो और आप तुरंत पार्टी के लिए तैयार होना चाहती हों, तो खुले बाल सबसे बेहतरीन विकल्प हैं। यह हेयरस्टाइल किसी भी आउटफिट के साथ आसानी से मैच हो जाता है और आपको एक सहज और आकर्षक लुक देता है। खुले बाल उन महिलाओं के लिए आदर्श हैं जिनके बाल लंबे या मध्यम लंबाई के हैं। इसे और भी स्टाइलिश बनाने के लिए आप बालों में हल्का सा सीरम लगाकर उन्हें चमकदार बना सकती हैं, या फ्रंट सेक्शन को हल्का सा पफ देकर पिन कर सकती हैं। एक साइड पार्टिंग या सेंटर पार्टिंग के साथ भी खुले बाल बेहद खूबसूरत लगते हैं। यह प्राकृतिक खूबसूरती को उजागर करता है।फ्रेंच चोटी, जिसे अक्सर ट्रेडिशनल माना जाता है, आजकल फिर से चलन में है और यह आपको एक एलिगेंट और अट्रैक्टिव लुक देती है। यह हेयरस्टाइल न केवल पारंपरिक परिधानों के साथ बल्कि कैजुअल और पार्टी ड्रेसेस के साथ भी खूब जँचती है। फ्रेंच चोटी बनाने के लिए आपको बालों को सिर के ऊपरी हिस्से से लेना शुरू करना होता है और हर बार नीचे से बालों के सेक्शन को जोड़ते हुए गूथना होता है। आप इसे पीठ पर एक साधारण चोटी के रूप में बना सकती हैं, या इसे और भी आकर्षक बनाने के लिए फिशटेल लुक दे सकती हैं। फिशटेल फ्रेंच चोटी एक जटिल लेकिन बेहद खूबसूरत स्टाइल है, जो आपके बालों को एक अनोखा आयाम देती है। यह आपके चेहरे की विशेषताओं को उजागर करती है और आपको एक साफ-सुथरा, क्लासी लुक देती है।इन आसान और स्टाइलिश हेयरस्टाइल्स को अपनाकर आप कम समय में भी पार्टी के लिए तैयार हो सकती हैं और अपनी खूबसूरती से सबका ध्यान आकर्षित कर सकती हैं। याद रखें, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप जिस भी स्टाइल को अपनाएं, उसमें आत्मविश्वास महसूस करें।
नारी सौंदर्य का अभिन्न अंग रहे हैं आभूषण
26 May, 2026 02:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सदियों से नारी सौंदर्य का अभिन्न अंग रहे हैं आभूषण। ये केवल शारीरिक शोभा ही नहीं बढ़ाते, बल्कि भारतीय संस्कृति में इन्हें स्वास्थ्य और कल्याण से भी जोड़ा गया है। परंपरागत रूप से, आभूषणों को केवल एक सजावटी वस्तु के रूप में नहीं देखा गया है; बल्कि प्रत्येक आभूषण अपने भीतर एक गहरा सांस्कृतिक और नैतिक संदेश समेटे हुए है। इन प्रतीकात्मक अर्थों को हृदयंगम करना आवश्यक है, ताकि आभूषणों का धारण करना मात्र फैशन न रहकर एक सार्थक और उद्देश्यपूर्ण क्रिया बन सके और आभूषण नाम सार्थक हो सके।भारतीय परंपरा में, ये आभूषण नारी को न केवल बाहरी रूप से सुशोभित करते हैं, बल्कि उन्हें आंतरिक गुणों और आदर्शों का भी स्मरण कराते हैं। वे जीवन के उन महत्वपूर्ण सिद्धांतों को दर्शाते हैं जिन्हें धारण करके नारी अपने व्यक्तित्व को और भी गरिमामय बना सकती है। हर आभूषण का अपना महत्व और संदेश है, जिसे समझने से हम अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ते हैं और इन परंपराओं के पीछे छिपी ज्ञान की गहराई को पहचानते हैं।आँखों में लगाया जाने वाला काजल शील और पवित्रता का प्रतीक है, जो नारी को अपनी आँखों में विनम्रता और मर्यादा का जल रखने का संदेश देता है। नाक की नथ मन को नियंत्रित रखने और संयम बरतने का सुझाव देती है, ताकि व्यक्ति अपनी नाक यानी सम्मान को ऊँचा रख सके। माथे पर शोभायमान टीका बुराई को त्यागने और सदाचार का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है। बिंदी इस बात पर ध्यान केंद्रित करने का संकेत है कि व्यक्ति अपने जीवन में केवल यश का ही टीका लगाए, अर्थात नेक कार्यों से ही ख्याति प्राप्त करे। सिर पर पहनी जाने वाली वंदनी पति और गुरुजनों के प्रति सम्मान और वंदना का भाव रखने का आह्वान करती है। कानों में पहने जाने वाले कर्ण फूल दूसरों की प्रशंसा सुनने और सकारात्मक बातों को ग्रहण करने की सीख देते हैं। गले का हार, नारी को अपने पति के लिए गले का हार बनने का अर्थात, उनके जीवन का आधार और सुख का स्रोत बनने का संदेश देता है। हाथों में खनकते कड़े इस बात की याद दिलाते हैं कि किसी से भी कड़ी बात या कटु वचन न बोलें। अंगुलियों के छल्ले हमें किसी से छल न करने और ईमानदारी बरतने की प्रेरणा देते हैं। कमर पर बंधा करधनी या कमरबंद हमेशा सत्कर्मों के लिए कमर कसकर तैयार रहने और सक्रिय रहने का प्रतीक है। पैरों की पायल, सभी बड़ी-बूढ़ी महिलाओं के पाँव (चरण) स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेने और विनम्रता बनाए रखने की याद दिलाती है। हाथों की मेहंदी न केवल सौंदर्य बढ़ाती है, बल्कि लाज की लाली बनाए रखने, अर्थात मर्यादा और शालीनता का पालन करने का भी संदेश देती है।इस प्रकार, भारतीय आभूषण केवल धातु और रत्नों के टुकड़े नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं, नैतिक मूल्यों और जीवन जीने की कला के प्रतीक हैं। वे नारी को न केवल शारीरिक रूप से सुशोभित करते हैं, बल्कि उन्हें आंतरिक रूप से भी समृद्ध और सशक्त बनाते हैं, उन्हें जीवन के मूलभूत सिद्धांतों का निरंतर स्मरण कराते हैं।
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