गुजरात
अब हर बच्चे की हेल्थ हिस्ट्री होगी सुरक्षित, गुजरात में शुरू हुई हेल्थ पासपोर्ट योजना
1 Jul, 2026 05:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गांधीनगर। देश में 'स्वस्थ बचपन' के जरिए 'स्वस्थ भारत' की मजबूत नींव रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। बच्चों और किशोरों की स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं को अधिक आधुनिक, सुदृढ़ और परिवार के अनुकूल बनाने के लिए गुजरात सरकार एक अनूठी पहल लेकर आई है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य में बच्चों के लिए 'हेल्थ पासपोर्ट' की अवधारणा को धरातल पर उतारा गया है, जो आने वाले समय में बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा।
क्या है अनूठा हेल्थ पासपोर्ट और इसका उद्देश्य
स्कूल हेल्थ - राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत शुरू की गई इस योजना में राज्य के जन्म से लेकर 18 वर्ष तक की आयु के प्रत्येक बच्चे को एक विशेष हेल्थ पासपोर्ट प्रदान किया जाएगा। यह पारंपरिक हेल्थ कार्ड से बिल्कुल अलग और उन्नत होगा। इसके माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य की पूरी निगरानी की जाएगी, ताकि उनके विकास में आने वाली किसी भी शारीरिक या मानसिक रुकावट को समय रहते पहचान कर दूर किया जा सके।
जन्म से किशोरावस्था तक की स्वास्थ्य यात्रा का लेखा-जोखा
यह डिजिटल और भौतिक पासपोर्ट सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि बच्चे के जन्म से लेकर उसकी किशोरावस्था तक की पूरी स्वास्थ्य यात्रा का एक प्रामाणिक रिकॉर्ड होगा। इसमें बच्चे की हर छोटी-बड़ी बीमारी, टीकाकरण, पोषण स्तर और समय-समय पर होने वाले मेडिकल चेकअप की पूरी जानकारी दर्ज रहेगी। इससे डॉक्टरों को किसी भी बच्चे के इलाज के दौरान उसकी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री को आसानी से समझने में मदद मिलेगी।
विकसित और स्वस्थ भारत के विजन को मिलेगी रफ्तार
इस राज्यव्यापी महत्वपूर्ण कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की गरिमामयी उपस्थिति में की गई है। इस दूरदर्शी कदम का मुख्य लक्ष्य बच्चों को शुरुआत से ही एक सुरक्षित और स्वस्थ माहौल देना है, जिससे 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने के लिए आने वाली पीढ़ी को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया जा सके।
स्कूल में सजा बनी दर्दनाक हादसा, शिक्षक के थप्पड़ से छात्र गंभीर घायल
30 Jun, 2026 10:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद शहर से एक बेहद हैरान और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां शिक्षा के मंदिर में एक छात्र के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। यहां के एक नामी प्राइवेट स्कूल में एक शिक्षक ने अनुशासन के नाम पर दसवीं कक्षा के एक छात्र को इतनी जोर से थप्पड़ मार दिया कि बच्चे के कान का पर्दा ही फट गया। छात्र की हालत इस समय इतनी गंभीर बनी हुई है कि डॉक्टरों ने उसे सर्जरी (ऑपरेशन) तक की नौबत आने की बात कही है। इस खौफनाक घटना के सामने आने के बाद छात्र के परिजनों में भारी आक्रोश है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शिकायत दर्ज कर फौरन जांच शुरू कर दी है, वहीं शिक्षा विभाग के कड़े रुख के बाद आरोपी शिक्षक को स्कूल से निलंबित कर दिया गया है।
पीटी पीरियड में बातचीत करने पर आपा खो बैठे शिक्षक
यह पूरी घटना अहमदाबाद के निकोल इलाके में स्थित 'चाणक्य स्कूल' की है, जहां पीड़ित छात्र स्कूल के गुजराती मीडियम सेक्शन में पढ़ाई करता है। घटना वाले दिन छात्र खेल के मैदान में अपने पीटी पीरियड के दौरान दोस्तों के साथ बैठकर सामान्य बातचीत कर रहा था। इसी बीच वहां से गुजर रहे इंग्लिश मीडियम के एक शिक्षक, जिनकी पहचान लक्ष्मण के रूप में हुई है, अचानक छात्र के पास पहुंचे। उस क्लास या छात्र से कोई सीधा संबंध न होने के बावजूद, शिक्षक ने आव देखा न ताव और छात्र को एक के बाद एक कई जोरदार थप्पड़ जड़ दिए। थप्पड़ का प्रभाव इतना घातक था कि छात्र का बायां कान तुरंत सूज गया, उससे खून बहने लगा और उसे सुनाई देना भी बंद हो गया। आनन-फानन में स्कूल प्रशासन ने छात्र के पिता को इसकी सूचना दी, जो तुरंत स्कूल पहुंचे और बच्चे की हालत देखकर दंग रह गए।
डॉक्टरों ने जताई ऑपरेशन की आशंका, पिता ने दी चेतावनी
परिजनों द्वारा छात्र को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने गहन जांच के बाद पुष्टि की कि थप्पड़ के अत्यधिक दबाव के कारण बच्चे के बाएं कान का पर्दा बुरी तरह फट चुका है। डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल कान में काफी सूजन है और यदि अगले एक सप्ताह के भीतर यह सूजन कम नहीं होती है, तो बच्चे के कान का ऑपरेशन करना पड़ेगा। इस स्थिति से दुखी और आक्रोशित पिता ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि उनके बेटे की सुनने की क्षमता पर हमेशा के लिए कोई बुरा असर पड़ता है, तो इसकी पूरी और सीधी जिम्मेदारी स्कूल ट्रस्ट तथा उस बेरहम शिक्षक की होगी, जिसके लिए वे किसी भी हद तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
आरोपी शिक्षक हुआ सस्पेंड, पुलिस ने लिया हिरासत में
मामला बढ़ने और चौतरफा दबाव के बाद आरोपी शिक्षक लक्ष्मण ने स्कूल ट्रस्ट और पीड़ित परिवार के सामने अपनी बड़ी गलती स्वीकार कर ली है। हालांकि, बेटे को आई गंभीर चोट और दर्द को देखते हुए पिता ने शिक्षक को माफ करने से साफ इनकार कर दिया और कानून का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद कृष्णनगर थाना पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए केस दर्ज किया और आरोपी शिक्षक को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया है। दूसरी ओर, अहमदाबाद के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) रोहित चौधरी ने मामले का संज्ञान लेते हुए तुरंत जांच के कड़े आदेश दिए, जिसके बाद स्कूल प्रबंधन ने जांच पूरी होने तक आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है।
अवैध पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट, 6 घायल; कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी धमाके की आवाज
27 Jun, 2026 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
खेड़ा (कपडवंज):गुजरात के खेड़ा जिले के कपडवंज इलाके से एक बेहद खौफनाक हादसे की खबर सामने आई है। यहाँ शनिवार को एक अवैध रूप से चल रही पटाखा फैक्ट्री में अचानक जोरदार विस्फोट (ब्लास्ट) हो गया। इस दर्दनाक हादसे में 5 से 6 लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की शुरुआती जानकारी मिली है। घटना के तुरंत बाद पुलिस प्रशासन और फायर ब्रिगेड (दमकल विभाग) की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और राहत व बचाव कार्य के साथ-साथ मामले की जांच में जुट गई हैं।
इतना शक्तिशाली था ब्लास्ट कि हिल गई आस-पास के गांवों की धरती
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह अवैध कारखाना कपडवंज में डंपिंग स्टेशन के ठीक सामने संचालित किया जा रहा था। शनिवार को हुआ यह धमाका इतना भीषण और शक्तिशाली था कि इसके तगड़े कंपन और गूंज से आस-पास के कई गांवों की धरती तक कांप उठी। धमाके की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस कंक्रीट की इमारत में यह अवैध पटाखा फैक्ट्री चल रही थी, वह पल भर में ताश के पत्तों की तरह ढह गई और मलबे में तब्दील हो गई।
मलबे में दबे होने की आशंका, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
विस्फोट के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। धमाके के कारण इमारत का ढांचा पूरी तरह जमींदोज़ हो चुका है, जिससे मलबे में कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। दमकल कर्मी मलबे को हटाने और स्थिति को काबू में करने की कोशिशों में लगे हैं। पुलिस इस बात की भी तफ्तीश कर रही है कि बिना अनुमति के आबादी वाले क्षेत्र के पास यह बारूद का खेल किसके संरक्षण में चल रहा था।
राजकोट में AAP नेता की मौत से सनसनी, लिव-इन पार्टनर पर परिजनों का आरोप
26 Jun, 2026 05:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जेतपुर। गुजरात के जेतपुर शहर में आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर स्थानीय निकाय चुनाव लड़ चुकी एक 23 वर्षीय महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। महिला का शव उसके किराए के फ्लैट में फंदे से लटका हुआ मिला। मृतका के परिवार ने उसके लिव-इन पार्टनर पर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच तेज कर दी है।
गोंडल चौराहे के पास फ्लैट में मिला शव
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, मृतका की पहचान राजकोट जिले के जेतपुर की रहने वाली नंदनी बोसामिया के रूप में हुई है। 22 जून की शाम को गोंडल चौराहे के पास स्थित एक फ्लैट में उनका शव पंखे से लटका पाया गया था। नंदनी पिछले करीब एक साल से असलम हुसैन समा नामक व्यक्ति के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी, जो पहले से ही शादीशुदा है।
रिश्ते में तनाव और खुदकुशी की आशंका
मामले की जानकारी देते हुए सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) बी जे चौधरी ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि नंदनी अपने पार्टनर असलम के व्यवहार से काफी परेशान थी। असलम अक्सर जूनागढ़ में रहने वाली अपनी पत्नी से मिलने जाता था, जो नंदनी को पसंद नहीं था। पुलिस के अनुसार, इस बात को लेकर वह काफी आहत थी और प्राथमिक तौर पर लगता है कि इसी मानसिक तनाव के कारण उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।
परिजनों का आरोप— हुई है हत्या, आरोपी फरार
दूसरी तरफ, नंदनी के परिजनों का कहना है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का मामला है और इसके पीछे असलम का ही हाथ है। घटना के बाद से ही आरोपी लिव-इन पार्टनर असलम हुसैन समा फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दे रही है।
गहनता से जांच में जुटी पुलिस
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं। अधिकारियों का कहना है कि परिजनों की शिकायत के आधार पर मामले की हर एंगल से गहनता से जांच की जा रही है। पुलिस का दावा है कि फरार आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और पूछताछ के बाद स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी। इस दर्दनाक घटना के बाद से पीड़ित परिवार में मातम पसरा हुआ है।
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन, 7 साल से फरार बदमाश तस्लीम गिरफ्तार
22 Jun, 2026 02:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। गुजरात पुलिस की क्राइम ब्रांच को एक बड़ी कामयाबी मिली है। सात साल पहले पैरोल मिलने के बाद चकमा देकर फरार हुए कुख्यात गैंगस्टर मोहम्मद तस्लीम उर्फ मोहम्मद उमर शेख को पुलिस ने आखिरकार दबोच लिया है। अंडरवर्ल्ड डॉन अब्दुल लतीफ गैंग के इस गुर्गे को पकड़ने के लिए पुलिस लंबे समय से जाल बिछा रही थी।
फरार गैंगस्टर राजस्थान से गिरफ्तार
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के मुताबिक, मोहम्मद तस्लीम साल 2019 में जेल से पैरोल पर बाहर आया था, जिसके बाद वह फरार हो गया। पिछले सात सालों से वह देश के अलग-अलग राज्यों में अपनी पहचान और ठिकाने बदल-बदलकर कानून की नजरों से छिप रहा था। रविवार को पुलिस ने बताया कि एक पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम ने राजस्थान में उसके गुप्त ठिकाने का पता लगाया और एक विशेष ऑपरेशन चलाकर उसे धर दबोचा।
अब्दुल लतीफ गैंग और संगीन जुर्म
पकड़ा गया अपराधी मोहम्मद तस्लीम मामूली अपराधी नहीं है, बल्कि वह 90 के दशक में गुजरात को दहलाने वाले अब्दुल लतीफ गिरोह का सक्रिय सदस्य रहा है। उसे साल 1992 में हुए चर्चित राधिका जिमखाना सामूहिक हत्याकांड और पूर्व राज्यसभा सदस्य रऊफ वलीउल्लाह की सनसनीखेज हत्या के मामले में दोषी पाते हुए अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
जेल भेजने की कानूनी कार्रवाई शुरू
इतने लंबे समय तक पुलिस को छकाने वाले इस मोस्ट वांटेड अपराधी की गिरफ्तारी के बाद क्राइम ब्रांच ने राहत की सांस ली है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तस्लीम को दोबारा साबरमती सेंट्रल जेल भेजने की कानूनी औपचारिकताएं और प्रक्रियाएं तेजी से पूरी की जा रही हैं, ताकि उसे उसके किए की सजा भुगतने के लिए वापस सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
यूसुफ पठान के कब्जे वाले प्लॉट पर कार्रवाई, गुजरात में होगी नीलामी
20 Jun, 2026 02:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वडोदरा। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से बगावती तेवर अपनाने वाले पूर्व ऑलराउंडर और सांसद यूसुफ पठान के आवासीय भूखंड से जुड़े विवाद में एक बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) के उस दावे को विधि सम्मत ठहराए जाने के बाद, जिसमें यूसुफ पठान पर अपने घर के बगल वाली सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप था, कोर्ट ने पूर्व क्रिकेटर को सख्त फटकार लगाई थी। अब इस कानूनी रस्साकशी के बीच जहां यूसुफ पठान के टीएमसी से नाता तोड़ने की सियासी चर्चाएं तेज हैं, वहीं वडोदरा नगर निगम ने शहर के सात प्रमुख भूखंडों को सार्वजनिक नीलामी पर चढ़ाने का बड़ा फैसला किया है, जिसमें पठान के कब्जे वाला विवादित प्लॉट भी शामिल है। ज्ञात हो कि पूर्व क्रिकेटर वडोदरा के तांदलजा क्षेत्र में निवास करते हैं।
विवादित भूखंड सहित सात प्लॉटों की नीलामी करेगा वडोदरा नगर निगम
यूसुफ पठान द्वारा नगर निगम की इस बेशकीमती भूमि को अपने कब्जे में लेने का यह पूरा मामला उनके टीएमसी के टिकट पर सांसद चुने जाने के बाद मुख्यधारा में आया था। उस दौरान भाजपा के स्थानीय पार्षद नितिन डोंगा द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद निगम प्रशासन ने पठान को बेदखली का नोटिस थमाया था। वीएमसी के इस सख्त नोटिस के खिलाफ यूसुफ पठान ने राहत की उम्मीद में गुजरात हाईकोर्ट की शरण ली थी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए उन्हें कोई भी राहत देने से साफ इनकार कर दिया था। अब इस पूरे प्रकरण में कड़ा रुख अपनाते हुए वीएमसी ने इस जमीन को सीधे नीलाम करने का निर्णय लिया है और स्टैंडिंग कमेटी की चेयरमैन वर्षाबेन व्यास ने स्पष्ट किया है कि आगामी सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं नियमों के दायरे में ही पूरी की जाएंगी।
चौदह वर्षों के अवैध कब्जे का जुर्माना वसूलने और बीस करोड़ बेस प्राइस की मांग
दूसरी ओर, 'विश्वामित्री बचाओ समिति' के प्रमुख और सामाजिक कार्यकर्ता शैलेष अमीन ने इस मामले में एक नई मांग उठाकर प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। अमीन का तर्क है कि इस भूखंड को सीधे तौर पर नीलाम करने से पहले वीएमसी को यूसुफ पठान द्वारा किए गए इतने लंबे समय के अवैध कब्जे के लिए हर्जाना और किराया वसूलना चाहिए, जिसकी गणना यदि वर्ष 2012 से की जाए तो यह राशि करोड़ों रुपये बैठती है। वर्तमान में नगर निगम ने इस 978 वर्ग मीटर के विशाल भूखंड का शुरुआती मूल्य (ऑक्शन वैल्यू) लगभग 20 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। हालांकि, स्थानीय हलकों में यह सवाल भी तेजी से उठ रहा है कि जमीन का वास्तविक कब्जा पूरी तरह से खाली कराए बिना ही निगम इसे नीलाम कैसे कर सकता है, जिस पर फिलहाल वीएमसी के आला अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
तबेले के आवेदन से शुरू हुआ विवाद और राजस्व जुटाने का प्रशासनिक लक्ष्य
इस पूरे भूमि विवाद के आधिकारिक दस्तावेजों को खंगालने पर पता चलता है कि यूसुफ पठान ने साल 2012 में इस सरकारी जमीन पर अस्तबल (तबेला) बनाने के उद्देश्य से इसके आवंटन के लिए वीएमसी के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत किया था। हालांकि, इस आवंटन की प्रक्रिया को राज्य सरकार की अंतिम स्वीकृति न मिलने के कारण खारिज कर दिया गया था, जिसके बाद इस जमीन को खाली कराने के लिए वीएमसी का बुलडोजर एक्शन भी प्रस्तावित था। अब नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में जिन सात भूखंडों को बेचने का खाका तैयार किया गया है, वे शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं और इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की जमीनों को पूर्ण पारदर्शिता के साथ बेचकर निकाय के लिए वित्तीय राजस्व जुटाना है, जिसके लिए प्रस्ताव को जल्द ही जनरल बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा।
आग की लपटों में घिरी पेपर मिल, मोरबी में दमकल टीम अलर्ट पर
19 Jun, 2026 04:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। गुजरात के मोरबी जिले में शुक्रवार को एक पेपर मिल के भीतर अचानक भयंकर आग भड़क उठी, जिससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय दमकल विभाग ने बिना वक्त गंवाए त्वरित एक्शन लिया। आग एक प्रमुख औद्योगिक इकाई में लगी थी, जिसकी भयावहता को देखते हुए आपदा प्रबंधन और अग्निशमन दल की कई गाड़ियां तुरंत राहत एवं बचाव कार्य के लिए घटना स्थल की ओर रवाना कर दी गईं।
आसपास के कारखानों को सुरक्षित बचाने के लिए दमकल विभाग का मोर्चा
अग्निशमन विभाग के आला अधिकारियों ने जानकारी दी कि आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उनके आसपास की अन्य फैक्ट्रियों और फैक्ट्रियों के गोदामों तक फैलने का बड़ा खतरा मंडरा रहा था। इस आपदा को रोकने के लिए दमकल कर्मियों ने चारों तरफ से घेराबंदी कर तुरंत कूलिंग ऑपरेशन और बचाव अभियान शुरू किया। हालांकि, इस दुर्घटना में नुकसान का सटीक आकलन और मिल के भीतर आग सुलगने की मुख्य तकनीकी वजह क्या रही, इसका वास्तविक खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा।
हादसे में जानमाल का नुकसान नहीं, स्थिति पर बनी हुई है प्रशासनिक नजर
राहत की बात यह रही कि इस पूरे अग्निकांड में फिलहाल किसी भी मजदूर या कर्मचारी के हताहत होने अथवा झुलसने की कोई अप्रिय खबर सामने नहीं आई है। सुरक्षा अधिकारी और स्थानीय प्रशासन मौके पर मौजूद रहकर पूरी स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। दमकल की टीमें पूरी मुस्तैदी से लपटों को पूरी तरह शांत करने में जुटी हुई हैं, ताकि वहां मौजूद औद्योगिक बुनियादी ढांचे और कीमती मशीनरी को और ज्यादा क्षति पहुंचने से बचाया जा सके।
पूर्व की घटनाओं से सबक और औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर उठते गंभीर सवाल
गौरतलब है कि मोरबी जिला देश में पेपर मिलों और सिरेमिक (टाईल्स) निर्माण कारखानों के एक बहुत बड़े औद्योगिक क्लस्टर के रूप में विख्यात है। पूर्व में भी इस अंचल के विभिन्न कारखानों में इस तरह की आगजनी की कई बड़ी घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। बार-बार होने वाले इन हादसों ने न केवल स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि संपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा मानकों (सेफ्टी ऑडिट) की अनदेखी और लेबर सेफ्टी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दर्दनाक हादसा: लग्जरी बस और ट्रक की जोरदार टक्कर, 5 मृत; कई घायल
17 Jun, 2026 12:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वडोदरा। गुजरात के वडोदरा जिले से एक बेहद दर्दनाक और भीषण सड़क दुर्घटना की खबर सामने आई है। यहां एक अनियंत्रित लग्जरी बस और ट्रक के बीच हुई जोरदार भिड़ंत में 5 यात्रियों की असमय मौत हो गई है, जबकि 26 से अधिक लोग गंभीर रूप से जख्मी बताए जा रहे हैं। यह दर्दनाक हादसा कोटंबी स्टेडियम के समीप उस वक्त घटित हुआ, जब तेज रफ्तार लग्जरी बस ने आगे चल रहे एक ट्रक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। घटना की भयावहता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमों को तुरंत मोर्चे पर लगाया गया है, जो स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
बांसवाड़ा से सूरत जा रही थी बस और मार्ग पर लगा लंबा जाम
शुरुआती जानकारी के अनुसार, दुर्घटना का शिकार हुई यह अभागा लग्जरी बस राजस्थान के बांसवाड़ा शहर से सवारियां लेकर गुजरात के सूरत की तरफ जा रही थी। इसी दौरान वडोदरा के पास यह भीषण हादसे का शिकार हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। इस खौफनाक हादसे के बाद से ही हालोल की तरफ से आने वाले मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं और यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है, जिसे सुचारू कराने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
अस्पताल में घायलों का इलाज और रेस्क्यू ऑपरेशन
राहत दल ने स्थानीय लोगों की मदद से बस में फंसे घायलों को बेहद मशक्कत के बाद बाहर निकाला और तुरंत एम्बुलेंस के जरिए इलाज के लिए वडोदरा के एसएसजी (SSG) अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां डॉक्टरों की टीम घायलों के उपचार में जुटी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह गाड़ी बालाजी ट्रैवल्स नामक एजेंसी की लग्जरी बस थी। घटना का पता चलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और वडोदरा दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड) की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गई थीं और गैस कटर की मदद से बस की बॉडी को काटकर भीतर फंसे चीखते-चिल्लाते मुसाफिरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
दुर्घटना के असली कारणों की पड़ताल में जुटी पुलिस
प्रशासनिक स्तर पर अभी तक इस बात के पुख्ता कारणों का खुलासा नहीं हो सका है कि यह भयंकर एक्सीडेंट आखिर किस वजह से हुआ। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या यह हादसा बस चालक की लापरवाही या उसे झपकी आने की वजह से हुआ, या फिर अचानक वाहन में कोई गंभीर तकनीकी खराबी आ गई थी। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को कब्जे में लेकर दोनों ही पहलुओं को केंद्र में रखते हुए अपनी कानूनी और तकनीकी जांच-पड़ताल की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।
धरने पर बैठीं BJP विधायक दर्शना देशमुख चर्चा में, PM मोदी से जुड़ा खास रिश्ता
16 Jun, 2026 02:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद । गुजरात में आम आदमी पार्टी (आप) के आक्रामक नेता चैतर वसावा के बढ़ते प्रभाव के कारण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए नर्मदा जिला पहले से ही एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस बीच, अब जिले के भीतर एक बेहद चौंकाने वाला राजनैतिक घटनाक्रम सामने आया है। प्रधानमंत्री के सुशासन के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में अंबेडकर हॉल में आयोजित 'प्रबुद्ध नागरिक सम्मान' समारोह के दौरान नर्मदा जिला भाजपा की आंतरिक कलह खुलकर सबके सामने आ गई। कार्यक्रम में स्थानीय महिला विधायक डॉ. दर्शना देशमुख का उचित सत्कार न होने और तय प्रोटोकॉल की अनदेखी किए जाने से नाराज होकर वह बीच में ही सभा छोड़कर चली गईं। इसके बाद विधायक डॉ. दर्शना देशमुख वाडिया के गांधी चौक पर धरने पर बैठ गईं, जहां उनके समर्थन में भरूच के वरिष्ठ सांसद मनसुख वसावा भी आकर बैठ गए, जिससे नर्मदा जिले की राजनीति में भारी उबाल आ गया है।
राजनैतिक गलियारों में यह सुगबुगाहट तेज है कि डॉ. दर्शना देशमुख के इस आक्रोश की मुख्य वजह नर्मदा जिला भाजपा अध्यक्ष नील राव हैं, जिनके द्वारा कथित तौर पर लगातार विधायक की उपेक्षा की जा रही थी। जब यह तिरस्कार सहनशीलता की सीमा पार कर गया, तो दर्शना देशमुख ने खुलकर अपना विरोध दर्ज कराया। उल्लेखनीय है कि दर्शना देशमुख भरूच के प्रथम भाजपा सांसद चंदूभाई देशमुख की सुपुत्री हैं, जिन्होंने पूर्व में कांग्रेस के एक कद्दावर नेता को पराजित कर राजनैतिक हलकों में सनसनी फैला दी थी। चंदूभाई देशमुख को भरूच संसदीय सीट से चुनावी मैदान में उतारने का ताना-बाना तब नरेंद्र मोदी ने ही बुना था और उस ऐतिहासिक जीत के बाद से लेकर आज तक कांग्रेस इस सीट पर दोबारा वापसी नहीं कर पाई है।
मैं चुनाव जीतकर आई हूं, पैराग्लाइडिंग करके नहीं
समारोह के दौरान जब महिला विधायक को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया और लगातार दरकिनार किया गया, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। कार्यक्रम स्थल से बाहर निकलते हुए उन्होंने तीखे लहजे में अपना रोष प्रकट करते हुए सवाल किया कि क्या उन्हें यहां केवल अपमानित करने के लिए आमंत्रित किया गया था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह जनता का जनादेश पाकर लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव जीतकर यहां पहुंची हैं, न कि ऊपर से सीधे पैराग्लाइडिंग करके टपकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन के इन पदाधिकारियों को आदिवासी समाज के मान-सम्मान की कोई परवाह नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा संगठन और विधायक पद दोनों से त्यागपत्र देने की कड़ी चेतावनी दे डाली। उन्होंने जिला अध्यक्ष नील राव पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वह पिछले दो वर्षों से उनका मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं और गांधीनगर के एक रसूखदार मंत्री का वरदहस्त प्राप्त होने के कारण अपनी मनमानी चला रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि संगठन की इन्हीं तानाशाही नीतियों की वजह से पार्टी को चुनावी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सांसदों और विपक्षी विधायक का मिला साथ
इस पूरे सियासी ड्रामे के बाद जहां एक तरफ भाजपा सांसद मनसुख वसावा और आम आदमी पार्टी के डेडियापाड़ा से विधायक चैतर वसावा ने डॉ. दर्शना देशमुख के रुख का खुला समर्थन किया है, वहीं दूसरी तरफ डैमेज कंट्रोल के लिए जिले के प्रभारी मंत्री ईश्वर सिंह पटेल और पूर्व मंत्री गणपत सिंह वसावा तुरंत राजपीपला सर्किट हाउस पहुंचे। उन्होंने स्थिति को संभालने के लिए दर्शना देशमुख को बातचीत का न्योता भेजा, परंतु आहत विधायक ने उनसे मुलाकात करने से साफ इनकार कर दिया।
सीट के टिकट को लेकर अंदरूनी खींचतान
वर्ष 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में डॉ. दर्शना देशमुख ने नादोद विधानसभा सीट से शानदार जीत दर्ज की थी। वह उच्च शिक्षित होने के साथ-साथ पेशे से एक डॉक्टर (एमडी गायनेकोलॉजिस्ट) हैं। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि नर्मदा जिले के वर्तमान अध्यक्ष नील राव की नजर असल में इसी नादोद विधानसभा क्षेत्र पर टिकी हुई है और वह आगामी चुनाव में अपनी धर्मपत्नी के लिए यहां से टिकट की दावेदारी मजबूत करना चाहते हैं। राजनैतिक पंडितों का मानना है कि इसी टिकट की होड़ और वर्चस्व की लड़ाई के कारण ही विधायक दर्शना देशमुख और जिला अध्यक्ष नील राव के बीच के समीकरण पूरी तरह बिगड़ चुके हैं, जो अब सड़क पर खुलकर सामने आ गए हैं।
मैट्रिमोनियल साइट पर धोखाधड़ी, नकली नाम से महिलाओं को ठगने वाला आरोपी दबोचा गया
15 Jun, 2026 01:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। वैवाहिक वेबसाइटों (मैट्रिमोनियल साइट्स) के माध्यम से अपने लिए जीवनसाथी की तलाश करने वाले लोगों के लिए एक बेहद हैरान करने वाला और सतर्क करने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां 'आदित्य पटेल' नाम से एक फर्जी पहचान (प्रोफाइल) तैयार कर अकेली और विधवा महिलाओं को अपने जाल में फंसाने वाले एक शातिर जालसाज को पुलिस ने दबोचा है, जिसका वास्तविक नाम करीम सिपाही है। पीड़ित महिला ने सूझबूझ दिखाते हुए इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया, जिसके बाद आरोपी अब पुलिस की सलाखों के पीछे है।
फर्जी पहचान का जाल और ट्रू-कॉलर ऐप से खुला आरोपी का राज
इस ठगी का शिकार हुई अहमदाबाद की एक विधवा महिला का संपर्क मैट्रिमोनियल साइट के जरिए 'आदित्य पटेल' नाम के एक व्यक्ति से हुआ था। पिछले करीब 4 से 5 महीनों से दोनों लगातार बातचीत कर रहे थे। खुद को उच्च शिक्षित बताने वाले इस ठग ने महिला के सामने दावा किया था कि उसकी पत्नी का देहांत हो चुका है और वह प्लास्टिक का एक बड़ा व्यापार चलाता है। महिला का भरोसा जीतने के लिए उसने आदित्य पटेल के नाम से बने बोगस पहचान पत्र जैसे पैन कार्ड, [आधार कार्ड रिडक्टेड], राशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी दिखाए थे। हालांकि, एक दिन जब उसने महिला को कॉल किया, तो महिला के स्मार्टफोन पर 'ट्रू-कॉलर' एप्लीकेशन में 'करीम' नाम दिखाई दिया, जिसने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया।
महिला की गुप्त पड़ताल, स्थानीय संगठन की मदद और असली पहचान
नाम में आए इस बड़े अंतर से महिला को गहरा संदेह हुआ, जिसके बाद उसने बिना घबराए उन जाली दस्तावेजों पर लिखे पते पर जाकर गुपचुप तरीके से छानबीन की। वहां पहुंचने पर महिला को पता चला कि उस जगह पर आदित्य नाम का कोई व्यक्ति रहता ही नहीं है। अपने साथ हुई धोखाधड़ी को भांपकर महिला ने हिम्मत दिखाई और स्थानीय सामाजिक व सांस्कृतिक संगठन के पदाधिकारियों से मदद मांगी। संगठन द्वारा अपने स्तर पर की गई त्वरित जांच में यह कड़वा सच उजागर हुआ कि आरोपी का असली नाम करीम रफीकभाई सिपाही है, जो मेहसाणा जिले के कडी इलाके का निवासी है। वह न केवल पहले से विवाहित है, बल्कि बेहद शातिराना अंदाज में अपनी असली धार्मिक और पारिवारिक पहचान छिपाकर भोली-भाली महिलाओं को अपना शिकार बना रहा था।
महिला क्राइम ब्रांच की कार्रवाई और मोबाइल से आपत्तिजनक डेटा की बरामदगी
मामले की पूरी जानकारी मिलते ही अहमदाबाद पश्चिम महिला क्राइम ब्रांच को सूचित किया गया, जिसने तत्परता दिखाते हुए जालसाज करीम सिपाही को गिरफ्तार कर लिया। जब पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की, तो उसमें से विभिन्न महिलाओं के साथ की गई बातचीत (चैट्स) और बेहद आपत्तिजनक अवस्था के करीब 8,000 तस्वीरें और वीडियो क्लिप्स बरामद हुए। पुलिस ने आरोपी के पास से 'आदित्य पटेल' के नाम पर तैयार किए गए फर्जी पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, [आधार कार्ड रिडक्टेड] और राशन कार्ड भी जब्त किए हैं। इस मामले की संवेदनशीलता और पीड़ित महिलाओं की सामाजिक निजता को ध्यान में रखते हुए पुलिस बेहद सतर्कता से आगे की कड़ियों को जोड़ रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी अब तक कितनी और महिलाओं को अपनी इस साजिश का शिकार बना चुका है।
गुजरात से राज्यसभा नतीजे: BJP को सभी सीटें, विपक्ष को सिर्फ एक सीट
13 Jun, 2026 03:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। वर्ष 2024 के आम चुनावों में सफलता के बाद संसद के निचले सदन में प्रतिपक्ष के नेता बने राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को साल 2027 के विधानसभा चुनावों में उनके गृह राज्य गुजरात के राजनीतिक मैदान में कड़ी शिकस्त देने की चुनौती दी थी। मगर धरातल पर भारतीय जनता पार्टी के इस अभेद्य किले में कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व घटकर मात्र एक सांसद पर सिमट गया है। हालिया राज्यसभा चुनावों में भाजपा ने चारों सीटों पर निर्विरोध विजय हासिल कर एक नया इतिहास रचा है। गुजरात के संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब उच्च सदन (राज्यसभा) में कांग्रेस का एक भी प्रतिनिधि मौजूद नहीं है और सूबे की सभी 11 राज्यसभा सीटों पर पूरी तरह भाजपा का परचम लहरा रहा है। वहीं निचले सदन (लोकसभा) की बात करें तो कुल 26 सीटों में से 25 पर भाजपा का कब्जा है और कांग्रेस के खाते में एकमात्र बनासकांठा सीट आई है, जहाँ से गेनीबेन ठाकोर निर्वाचित हुई हैं। इस तरह राज्य की कुल 37 संसदीय सीटों (26 लोकसभा और 11 राज्यसभा) में से विपक्ष की हिस्सेदारी सिर्फ एक सीट तक महदूद रह गई है।
शक्ति सिंह गोहिल के हटने से शून्य हुई संख्या, विधानसभा में भी कांग्रेस सबसे कमजोर दौर में
उच्च सदन में गुजरात से कांग्रेस के अंतिम स्तंभ शक्ति सिंह गोहिल थे, जिनका निर्धारित कार्यकाल समाप्त होते ही संसद के इस सदन में पार्टी का संख्या बल शून्य हो गया है। इस नाटकीय गिरावट के बाद राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह विमर्श छिड़ गया है कि मुख्य विपक्षी दल आगामी विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी दल का सामना किस रणनीति के साथ करेगा, क्योंकि साल 2022 के प्रांतीय चुनावों में आम आदमी पार्टी की मौजूदगी के कारण कांग्रेस महज 17 सीटों पर सिमट गई थी। उस ऐतिहासिक हार के बाद पार्टी ने पहली बार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का आधिकारिक दर्जा भी खो दिया था। चुनावों के बाद से अब तक पांच अन्य विधायकों के पाला बदल लेने के कारण 182 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास अब केवल 12 विधायक ही शेष बचे हैं, जबकि राहुल गांधी ने संगठन सृजन अभियान के जरिए राज्य में एक नई और आक्रामक कांग्रेस खड़ी करने का संकल्प दोहराया था।
उच्च सदन की सभी सीटों पर भाजपा का पूर्ण नियंत्रण, ये नेता संभाल रहे हैं कमान
द्विवार्षिक चुनाव के इस नए समीकरण के बाद उच्च सदन में गुजरात का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी 11 चेहरे अब पूर्ण रूप से भाजपा के हैं। इन माननीय सदस्यों में जगत प्रकाश नड्डा, जसवन्तसिंह परमार, मयंकभाई नायक, गोविंद ढोलकिया, एस. जयशंकर, केसरीदेवसिंह झाला, बाबूभाई देसाई, रामभाई मोकारिया, रामिलाबेन बारा, नरहरि अमीन और जितेंद्र कंजरिया शामिल हैं। इस पूर्ण नियंत्रण ने राज्य की राजनीति पर सत्ताधारी दल की पकड़ को प्रशासनिक और विधायी दोनों स्तरों पर पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ और व्यापक बना दिया है।
स्थानीय निकायों से लेकर संसद तक घटा जनाधार, वजूद बचाने के लिए बड़े संगठनात्मक फेरबदल की जरूरत
गुजरात की राजनीतिक जमीन पर मुख्य विपक्षी दल की संगठनात्मक क्षमता संसद से लेकर पंचायती राज और स्थानीय निकायों के सबसे निचले स्तर तक कमजोर हुई है। वर्तमान में सूबे के सभी 17 नगर निगमों के प्रशासनिक बोर्ड पर भाजपा का एकछत्र राज है। इस राजनीतिक संकट के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विपक्ष को साल 2027 के विधानसभा चुनावों में सत्ता पक्ष को वास्तविक चुनौती देनी है, तो उसे राज्य में एक पूर्णकालिक संगठन मंत्री और नए प्रांतीय प्रभारी की नियुक्ति के साथ बड़े पैमाने पर सांगठनिक सर्जरी करनी होगी। वर्तमान में राज्य की कमान प्रभारी मुकुल वासनिक और प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा के हाथों में है। यदि आगामी आम चुनावों में पार्टी अपनी इकलौती बनासकांठा सीट भी कायम नहीं रख पाती, तो संसद के दोनों सदनों में उसका प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा, क्योंकि इससे पहले साल 2014 और 2019 के चुनावों में सत्ताधारी दल राज्य की सभी 26 लोकसभा सीटें जीतकर क्लीन स्वीप कर चुका है।
स्कूल में छात्राओं से कथित अभद्र बातचीत का आरोप, जांच में जुटी पुलिस
12 Jun, 2026 11:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राजकोट। गुजरात में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के 56 वर्षीय शिक्षक को करीब एक साल तक कई नाबालिग छात्राओं के साथ कथित तौर पर यौन दुराचार करने के आरोप में पुलिस ने धर-दबोचा है। जांच अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी शिक्षक की पहचान देवानंद बेरा के रूप में हुई है, जो एक ग्रामीण इलाके के सरकारी स्कूल में पिछले तीन वर्षों से पदस्थ था। अधिकारियों ने बताया कि सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुका यह शिक्षक शारीरिक रूप से दिव्यांग है, जिसका फायदा उठाकर वह स्कूल परिसर के भीतर ही छात्राओं को अपनी हवस का शिकार बनाता था और उनके साथ अत्यंत आपत्तिजनक तरीके से शारीरिक संपर्क स्थापित करता था।
पुलिस के मुताबिक, शोषण का यह घिनौना सिलसिला 28 जून, 2025 से लेकर 2 मई, 2026 के बीच अंजाम दिया गया। इस लंबी अवधि के दौरान आरोपी ने छात्राओं की नासमझी और मासूमियत की आड़ लेकर उनके साथ अश्लील हरकतें कीं। तफ्तीश में यह भी बात सामने आई है कि कुछ पीड़ित बालिकाओं को बेहद गंभीर स्तर के यौन उत्पीड़न का दंश झेलना पड़ा। इस घिनौनी करतूत का पर्दाफाश तब हुआ, जब एक पीड़ित छात्रा ने हिम्मत जुटाकर अपने माता-पिता को शिक्षक की अवांछित हरकतों (बैड टच) के बारे में बताया। इसके बाद जब सजग परिजनों ने स्कूल की अन्य बच्चियों से गुपचुप बात की, तो पता चला कि चार और छात्राएं इसी प्रकार के शोषण की शिकार हुई थीं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया।
परिजनों की शिकायत और पुलिस की कानूनी कार्रवाई
मामले की पूरी सच्चाई सामने आने के बाद आक्रोशित अभिभावक तुरंत पाटनवाव पुलिस थाने पहुंचे और दोषी शिक्षक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज कर तफ्तीश का पहिया घुमाया। जांच टीम ने सभी पीड़ित बच्चियों सहित उनके माता-पिता के बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए हैं। इसके साथ ही, कानूनी साक्ष्य मजबूत करने के उद्देश्य से बच्चियों और आरोपी शिक्षक का गहन चिकित्सीय परीक्षण (मेडिकल टेस्ट) भी संपन्न कराया गया है। शुरुआती पड़ताल में यह कमी भी सामने आई है कि स्कूल परिसर में सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे, जिसके चलते पुलिस को अन्य वैज्ञानिक व तकनीकी माध्यमों से अतिरिक्त सबूत जुटाने पड़ रहे हैं।
गंभीर धाराओं में मुकदमा और आरोपी सस्पेंड
पीड़ित पक्षों से मिली लिखित शिकायतों के आधार पर पाटनवाव पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी देवानंद बेरा के विरुद्ध नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, जिसमें महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध शामिल हैं, के तहत केस दर्ज किया है। इसके साथ ही, इस मामले में बच्चों के यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की अत्यंत कठोर और गैर-जमानती धाराओं को भी जोड़ा गया है। पुलिस ने जाल बिछाकर आरोपी शिक्षक को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षा विभाग ने भी मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए आरोपी को तत्काल प्रभाव से नौकरी से सस्पेंड कर दिया है।
ग्रामीणों में दहशत और सुरक्षा पर उठे सवाल
इस जघन्य कृत्य के प्रकाश में आने के बाद से पूरे क्षेत्र के अभिभावकों में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता और भय का माहौल देखा जा रहा है। स्थानीय समाजसेवियों और ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि ग्रामीण अंचलों के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरों की अनिवार्यता को सख्ती से लागू किया जाए। इसके साथ ही, स्कूल स्टाफ के चरित्र और गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक विशेष समिति का गठन हो, ताकि भविष्य में शिक्षा के मंदिर में मासूम बच्चों के साथ इस प्रकार की किसी भी शर्मनाक घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।
एक साल बाद छलका दर्द, अहमदाबाद विमान हादसे के सर्वाइवर ने उठाए अनुत्तरित सवाल
11 Jun, 2026 03:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में हुए देश के सबसे भीषण विमान हादसों में से एक को पूरा एक वर्ष होने जा रहा है। पिछले साल 12 जून 2025 को हुए इस दर्दनाक प्लेन क्रैश में 260 मासूम लोगों की जान चली गई थी, जिसमें 180 भारतीय यात्री, चालक दल के 19 सदस्य और लगभग 50 विदेशी नागरिक (ब्रिटिश, पुर्तगाली व कनाडाई) शामिल थे। अहमदाबाद हवाई अड्डे से लंदन के लिए रवाना हुई एयर इंडिया की उड़ान संख्या AI-171 ने दोपहर 1.38 बजे जैसे ही रनवे छोड़ा, महज़ 32 सेकेंड के भीतर वह अनियंत्रित होकर नीचे गिर गई और देखते ही देखते आग के विशाल गोले में तब्दील हो गई। लाखों लीटर विमान ईंधन के कारण धधकती इस आग और मलबे के बीच से विश्वास कुमार रमेश नाम के एक यात्री चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बाहर निकल आए। विमान के दो टुकड़ों में बंटने और सब कुछ राख होने से चंद सेकेंड पहले वे मौत के मुंह से निकल पाए, लेकिन आज एक साल बाद भी उनका दिलोदिमाग उस खौफनाक मंजर के दर्द से कराह रहा है।
सीट नंबर 11A और मौत के मुंह से बचने का चमत्कार
हादसे के वक्त विश्वास कुमार बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान के विंग बॉक्स (डैने) के समीप आपातकालीन निकास वाली सीट संख्या 11A पर सवार थे। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, यह हिस्सा हवाई जहाज के सबसे मजबूत ढांचों में से एक माना जाता है। विमान के जमीन पर टकराते ही विश्वास ने फुर्ती से अपनी सीटबेल्ट खोली और मलबे में हुए एक अचानक सुराख के रास्ते रेंगते हुए बाहर की तरफ भागे। अगर उन्होंने बाहर निकलने में कुछ पल की भी देरी की होती, तो वे भी उस भीषण विस्फ़ोट की लपटों में विलीन हो जाते। ताज्जुब की बात यह थी कि इतने बड़े हादसे में उन्हें सिर्फ मामूली खरोंचें आई थीं। हालांकि, इस दुर्घटना में उनके छोटे भाई अजय कुमार रमेश, जो कुछ ही दूरी पर सीट संख्या 11J पर बैठे थे, अपनी जान नहीं बचा सके।
अपराध बोध, अवसाद और आर्थिक तंगहाली की दोहरी मार
मूल रूप से दीव के रहने वाले और पिछले 20 वर्षों से ब्रिटेन के लीस्टर शहर में बस चुके विश्वास कुमार इस हादसे के बाद से गहरे मानसिक आघात (डिप्रेशन) और अकेले जिंदा बच जाने के अपराध बोध (सरवाइवर गिल्ट) से जूझ रहे हैं। अपनी आंखों के सामने सगे भाई और सैकड़ों सह-यात्रियों को तड़पते हुए देखने का उनके मानस पटल पर ऐसा गहरा असर हुआ है कि वे अब भीड़भाड़ से दूर अपने कमरे में अकेले बंद रहना पसंद करते हैं। शारीरिक रूप से कंधे, पीठ और घुटने की चोटों के कारण वे अब काम करने या गाड़ी चलाने में पूरी तरह असमर्थ हैं। इस त्रासद घटना से दोनों भाइयों का दीव में चलने वाला मछली का पारिवारिक व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गया, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई। हालांकि उन्हें एयर इंडिया और टाटा समूह से मुआवजा प्राप्त हुआ, लेकिन ब्रिटिश सरकार से कोई सीधी मदद नहीं मिली, जिसके चलते एक वक्त उनका पूरा परिवार बेहद मामूली रकम में गुजारा करने को विवश था।
पीड़ित परिवारों को सच जानने का हक और अधूरी जांच
हादसे का एक साल बीत जाने के बाद भी जांच एजेंसियां दुर्घटना के मुख्य कारणों की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं कर पाई हैं। भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की प्रारंभिक तकनीकी रिपोर्ट में यह संकेत मिला था कि उड़ान भरते ही विमान के दोनों ईंधन स्विच 'कट-ऑफ' मोड में चले गए थे, जिससे इंजनों को तेल की आपूर्ति अचानक बंद हो गई। अपनी इस अधूरी तलाश को लेकर विश्वास कुमार ने भावुक होते हुए कहा कि विमान गिरने वाले दिन ही उनकी तकलीफ खत्म नहीं हुई थी, वे आज भी उन्हीं अनसुलझे सवालों के घाव लेकर जी रहे हैं कि आखिर वह विमान कैसे और क्यों गिरा। उन्होंने मांग की है कि जांच में पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता बरती जानी चाहिए, क्योंकि जो बीत गया उसे कोई बदल नहीं सकता, लेकिन इस हादसे में अपनों को खोने वाले हर पीड़ित परिवार को पूरी सच्चाई जानने का बुनियादी हक है।
जब कुत्तों की शादी बनी शाही आयोजन, करोड़ों रुपये खर्च करने वाले नवाब कौन थे?
10 Jun, 2026 02:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जूनागढ़। शाही वस्त्रों से सुसज्जित और एक राजसी सिंहासन पर विराजमान जूनागढ़ के नवाब मुहम्मद महाबत खानजी तृतीय की ऐतिहासिक तस्वीरें आज भी लोगों को हैरत में डाल देती हैं। इन तस्वीरों में नवाब के ठीक बगल में मोतियों का कीमती हार पहने बैठा एक कुत्ता सबका ध्यान अपनी ओर खींचता है। जहां देश के अन्य राजा-महाराजाओं को महंगी गाड़ियों, शिकार या बेशकीमती हीरों का शौक था, वहीं गुजरात की इस समृद्ध रियासत के अंतिम शासक अपने अनूठे श्वान-प्रेम (कुत्तों के प्रति लगाव) के लिए पूरी दुनिया में विख्यात थे। वर्ष 1898 में जन्मे महाबत खानजी अपने पिता के देहावसान के बाद वर्ष 1911 में जूनागढ़ की गद्दी पर बैठे थे।
प्रिय कुतिया 'रोशनआरा' का विवाह और शाही खजाना
नवाब के इस अनोखे शौक का सबसे बड़ा उदाहरण वर्ष 1922 में देखने को मिला, जब उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास की सबसे अनूठी और भव्य शादियों में से एक का आयोजन किया। यह कोई इंसानी शादी नहीं, बल्कि उनकी सबसे चहेती कुतिया 'रोशनआरा' का विवाह संस्कार था। इस विवाह का निमंत्रण तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन को भी भेजा गया था, हालांकि उन्होंने इसमें आने से असमर्थता जता दी थी। नवाब ने अपनी इस प्रिय कुतिया के विवाह समारोह पर पानी की तरह पैसा बहाया और तत्कालीन समय में करीब 2 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च कर डाली।
चांदी की पालकी में बारात और पूरे राज्य में तीन दिनों का अवकाश
रोशनआरा का निकाह मैंगरोल के नवाब के आलीशान गोल्डन रिट्रीवर कुत्ते 'बॉबी' के साथ पूरे रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था। इस अनोखे विवाह के उपलक्ष्य में जूनागढ़ राज्य में बकायदा सरकारी छुट्टी घोषित की गई थी और पूरी प्रजा को तीन दिनों तक चलने वाले इस भव्य शाही भोज में आमंत्रित किया गया था। ऐतिहासिक वृत्तांतों के अनुसार, दुल्हन बनी रोशनआरा को चांदी की नक्काशीदार पालकी में बैठाकर लाया गया था, जबकि दूल्हा बने बॉबी की बारात में 25 अन्य राजसी कुत्ते शामिल थे, जिनके पैरों में सोने के कड़े बंधे थे। इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए सड़कों पर जनता का हुजूम उमड़ पड़ा था और महल में कई दिनों तक नाच-गाने का दौर चला था।
800 कुत्तों का शाही काफिला और कराची पलायन की दास्तान
नवाब के महल में केवल रोशनआरा ही नहीं, बल्कि विभिन्न विदेशी नस्लों के करीब 800 कुत्ते रहते थे, जिन्हें आम जानवरों की तरह नहीं बल्कि वीआईपी मेहमानों की तरह रखा जाता था। इन बेजुबानों की देखरेख के लिए व्यक्तिगत सेवक, वातानुकूलित (एसी) कमरे, विशेष टेलीफोन लाइनें और एक ब्रिटिश पशु चिकित्सक तैनात था। जब रोशनआरा की मृत्यु हुई, तो नवाब ने पूरे राज्य में राजकीय शोक की घोषणा की थी। वर्ष 1947 में देश के विभाजन के समय नवाब ने जूनागढ़ का विलय पाकिस्तान में करने का प्रयास किया, लेकिन जन-आक्रोश और भारतीय सेना के हस्तक्षेप के बाद वे विमान से कराची भाग गए। जल्दबाजी में हुए इस पलायन के दौरान वे अपनी एक बेगम और बच्चे को यहीं भूल गए, लेकिन अपने वफादार कुत्तों को विमान में बैठाकर साथ ले गए। वर्ष 1959 में कराची में उनका निधन हुआ, लेकिन उनका यह अनोखा श्वान-प्रेम इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।
यूसुफ पठान के सामने दोहरी चुनौती, एक ओर कोर्ट के सवाल तो दूसरी ओर सियासी अटकलें
9 Jun, 2026 03:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वडोदरा। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे सियासी घमासान और सांसदों की कथित बगावत की खबरों के बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर और वर्तमान सांसद यूसुफ पठान की मुश्किलें कानूनी मोर्चे पर भी बढ़ गई हैं। गुजरात के वडोदरा में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने टीएमसी सांसद को कड़ी फटकार लगाई है। माननीय उच्च न्यायालय ने बेहद सख्त लहजे में सवाल पूछा कि बिना किसी वैध अलॉटमेंट (आवंटन) प्रक्रिया को पूरा किए उन्होंने नगर निगम की इस बेशकीमती जमीन पर अपना कब्जा कैसे जमा लिया। यह कानूनी संकट ऐसे समय में आया है जब महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी के बाद यूसुफ पठान का नाम भी उन बागी टीएमसी सांसदों की सूची में उछाला जा रहा है, जिन्होंने कथित तौर पर दिल्ली में एनडीए को समर्थन देने के संकेत दिए हैं।
चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले को रखा बरकरार
हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी.एन. रे की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के अगस्त 2025 के उस पुराने फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की। एकल पीठ ने अपने आदेश में यूसुफ पठान को सरकारी भूखंड पर पूरी तरह 'अतिक्रमणकारी' घोषित किया था, क्योंकि जांच में पाया गया था कि बैंक या निगम की तरफ से उनके नाम कोई अलॉटमेंट लेटर जारी नहीं हुआ था और वे बिना किसी भुगतान के उस पर काबिज थे। अदालत ने पठान के वकील से दो टूक पूछा कि उनके मुवक्किल को इस विवादित जमीन को खाली करने में आखिर कितना वक्त लगेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने भारी जुर्माना लगाने के संकेत देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 जून की तारीख मुकर्रर की है।
बिना नीलामी के 99 साल की लीज पर प्लॉट देने का प्रस्ताव हुआ था खारिज
यह पूरा विवाद वडोदरा नगर निगम (VMC) के एक पुराने प्रस्ताव और उसके बाद आए गुजरात सरकार के 6 जून 2024 के एक आदेश से जुड़ा हुआ है। नगर निगम ने बिना किसी सार्वजनिक नीलामी या पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के ही इस 978 वर्ग मीटर के आलीशान प्लॉट को 99 साल की लंबी लीज पर सीधे यूसुफ पठान को सौंपने का एक प्रस्ताव तैयार किया था। राज्य सरकार ने नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए नगर निकाय के इस मनमाने प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था और प्रशासनिक अधिकारियों को जमीन से तत्काल अवैध ढांचा गिराकर अतिक्रमण हटाने के कड़े निर्देश दिए थे। इसके बाद ही यह मामला कानूनी लड़ाई में तब्दील होकर हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंचा था।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के लिए बनी पुरानी खेल नीति का वकील ने दिया हवाला
अदालत की कार्रवाई के दौरान यूसुफ पठान की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता शालिन मेहता ने अपने मुवक्किल का बचाव करते हुए एक नया तर्क पेश किया। उन्होंने दलील दी कि गुजरात सरकार की 25 अक्टूबर 1999 की एक बेहद महत्वपूर्ण खेल नीति को एकल जज की कोर्ट के समक्ष सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया जा सका था। वरिष्ठ वकील के मुताबिक, इस पुरानी सरकारी नीति में यह स्पष्ट प्रावधान है कि देश का नाम रोशन करने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को कुछ विशेष नियमों और शर्तों के अधीन सरकारी प्लॉट अलॉट किए जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि यूसुफ पठान एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के तौर पर उन सभी जरूरी विधिक शर्तों को पूरा करते हैं, इसलिए उन्हें अतिक्रमणकारी कहना गलत है।
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