बिहार-झारखण्ड
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का मौका, झारखंड में 7-9 अक्टूबर तक विशेष कैंप
7 Oct, 2026 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची: विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने और प्रविष्टियों को दुरुस्त करने की प्रक्रिया को और अधिक तेज करने के लिए झारखंड राज्यभर में 7 से 9 अक्तूबर तक सभी मतदान केंद्रों पर विशेष डिजिटाइजेशन कैंप लगाए जा रहे हैं। इन विशेष कैंपों के दौरान फॉर्म-6 के माध्यम से नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया के साथ-साथ फॉर्म-7 और फॉर्म-8 से जुड़े आवेदनों के डिजिटाइजेशन का कार्य भी युद्धस्तर पर किया जाएगा।
10 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी चौथी बार मेगा हेल्पडेस्क बैठक
इसके पश्चात, आगामी 10 अक्तूबर को राज्य के सभी मतदान केंद्रों पर चौथी बार बीएलओ-बीएलए-2 की महत्वपूर्ण बैठक सह 'मेगा हेल्पडेस्क' का आयोजन किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों, निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों (ईआरओ) और सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों (एईआरओ) को इस संबंध में सख्त और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देशित किया है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम शामिल होने से किसी भी स्थिति में वंचित नहीं रहना चाहिए। इसके साथ ही, विशेष कैंप की इस पूरी जानकारी को सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ साझा करने तथा पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए जागरूक व प्रेरित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मतदाता सूची में विसंगति के संभावित कारण
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम के सामने तार्किक विसंगति होने के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। गणना प्रपत्र (इम्यूमरेशन फॉर्म) में गलत जानकारी दर्ज हो जाना, पिछले एसआईआर के दौरान गलत मैपिंग होना या पूर्व से दर्ज जानकारी में कोई त्रुटि रह जाना इसकी मुख्य वजहें हो सकती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान एसआईआर के तहत आयोजित होने वाली सुनवाई का मुख्य उद्देश्य पिछली गलतियों को सुधारना नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक मकसद मौजूदा मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाना और प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक का पंजीकरण सुनिश्चित करना है।
मतदान सूची में नाम दर्ज कराने के लिए इन शर्तों को पूरा करना अनिवार्य
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि निर्धारित और वैध दस्तावेजों के आधार पर यह पूरी तरह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित व्यक्ति भारत का वास्तविक नागरिक हो, 1 अक्तूबर 2026 तक अपनी 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो और संबंधित मतदान केंद्र क्षेत्र का सामान्य निवासी हो। उन्होंने विशेष कैंप के दौरान प्राप्त होने वाले फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के डिजिटाइजेशन के काम में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, ताकि सभी पात्र नागरिकों के आवेदनों पर तय समय-सीमा के भीतर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
बिहार क्राइम: नाबालिग की हत्या से सनसनी, प्रेम प्रसंग के शक को लेकर वारदात
7 Oct, 2026 03:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कटरा थाना क्षेत्र में प्रेम प्रसंग के शक में एक 14 वर्षीय नाबालिग किशोर की हत्या का बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले इस किशोर की कथित तौर पर गमछे से गला घोंटकर निर्ममता से हत्या कर दी गई और इसके बाद साक्ष्य छुपाने की नीयत से उसके शव को पास के ही एक पोखर में फेंक दिया गया। पुलिस ने जलकुंभी के बीच से कड़ी मशक्कत के बाद किशोर का शव बरामद कर लिया है।
इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद से पूरे इलाके में भारी दहशत और सनसनी का माहौल है। वहीं, जवान बेटे की असामयिक मौत से उसके पूरे परिवार में कोहराम मचा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी समेत कुल तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर आगे की तफ्तीश शुरू कर दी है।
गेहूं पिसाने के लिए घर से निकला था किशोर, वापस नहीं लौटने पर दर्ज हुई गुमशुदगी
मृतक किशोर की मां ने पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने सोमवार को ही कटरा थाने में अपने बेटे की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया था कि उनका बेटा रविवार की शाम करीब सात बजे राजाडीह पुल के पास गेहूं पिसाने के लिए घर से निकला था, लेकिन उसके बाद वह देर रात तक वापस नहीं लौटा।
परिजनों द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत उसकी तलाश शुरू कर दी। छानबीन के दौरान पुलिस को एक पड़ोसी पर गंभीर संदेह हुआ। पुलिस टीम ने जब उस संदिग्ध के घर की तलाशी ली, तो वहाँ से लापता किशोर की साइकिल बरामद हो गई, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल उस संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी।
लंबी पूछताछ के बाद आरोपी ने कबूला जुर्म, पोखर से मिला शव
पुलिस के अनुसार, करीब 12 से 15 घंटे तक चली लंबी और कड़ी पूछताछ के बाद आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी व्यक्ति टेंट हाउस का व्यवसाय करता है। पड़ोसी होने के कारण मृतक किशोर अक्सर उसके काम में हाथ बंटाने के लिए जाया करता था। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि रविवार की रात जब वह घर पहुँचा, तो उसने किशोर को अपनी बेटी के साथ देख लिया था, जिसके बाद वह गुस्से से आगबबुला हो गया। इसी रंजिश और गुस्से में आकर उसने गमछे से किशोर का गला घोंट दिया और हत्या के बाद शव को पास के एक पोखर में फेंक दिया।
आरोपी की निशानदेही पर ही पुलिस ने उस पोखर में सघन तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान पानी में फैली जलकुंभी के बीच से किशोर का शव बरामद कर लिया गया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए एसकेएमसीएच भेज दिया है। मृतक के पिता फिलहाल राजस्थान में रहकर मजदूरी करते हैं और वहीं से अपने पूरे परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। बेटे की दर्दनाक मौत की खबर मिलने के बाद से परिवार में मातम पसरा हुआ है।
तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, पुलिस मामले की कर रही है विस्तृत जांच
पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी, उसकी पत्नी और बेटी समेत कुल तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। कटरा थानाध्यक्ष ने मीडिया को बताया कि आरोपी को जेल भेजने की पुख्ता कानूनी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही इस मामले से जुड़े अन्य सभी पहलुओं की भी गहराई से जांच की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस जघन्य वारदात को अंजाम देने में किसी अन्य व्यक्ति की भी कोई भूमिका थी या नहीं।
झारखंड बंद: OBC जनगणना की मांग को लेकर खूंटी में प्रदर्शन, हाईवे पर यातायात प्रभावितv
6 Oct, 2026 12:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची| आगामी जनगणना के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए एक अलग से कॉलम शामिल किए जाने की पुरजोर मांग को लेकर 'पिछड़ा वर्ग संघर्ष समिति' के आह्वान पर मंगलवार को झारखंड के कई जिलों में बंद का व्यापक असर देखने को मिला। खूंटी जिले में इस बंद का प्रभाव सबसे अधिक नजर आया। सुबह होते ही समिति के तमाम पदाधिकारी और कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए बाजारों को बंद करवाया। इस दौरान कई प्रमुख स्थानों पर सड़कों को जाम कर वाहनों की आवाजाही को भी पूरी तरह से बाधित कर दिया गया।
खूंटी शहर में अधिकांश दुकानें रहीं बंद, हाईवे और चौराहों पर लगा जाम
खूंटी शहर में सुबह से ही बाजार की लगभग अधिकांश दुकानें बंद रहीं। बंद समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-20 पर स्थित हूटार चौक के पास मुख्य सड़क को पूरी तरह से जाम कर दिया। इसके अलावा खूंटी के व्यस्त नेताजी चौक पर भी यातायात पूरी तरह से बाधित रहा, जिससे शहर के भीतर वाहनों की आवाजाही पर काफी प्रभाव पड़ा। समिति के कार्यकर्ता पूरे शहर में घूम-घूमकर दुकानदारों से स्वेच्छा से अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद रखने का आग्रह करते नजर आए।
सुबह-सुबह समिति के प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता नेताजी चौक पर एकत्रित हुए। इसके बाद उन्होंने पूरे शहर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों का दौरा कर बंद के हालातों का जायजा लिया तथा आम नागरिकों से इस बंद को सफल बनाने में अपना सहयोग देने की अपील की। तोरपा प्रखंड में भी इस बंद का स्पष्ट असर देखा गया, जहाँ कई दुकानें बंद रहीं। इसके अलावा जिले के अन्य विभिन्न प्रखंडों में भी समिति के कार्यकर्ता काफी सक्रिय नजर आए।
बंद से ठीक एक दिन पहले निकाला गया था मशाल जुलूस
इस सफल बंद की तैयारी के लिए एक दिन पहले यानी सोमवार की शाम को खूंटी क्लब से एक भव्य मशाल जुलूस निकाला गया था। इस जुलूस के माध्यम से समिति ने स्थानीय दुकानदारों, व्यवसायियों और वाहन मालिकों से अपील की थी कि वे इस आंदोलन को सफल बनाने में अपना पूरा सहयोग दें। समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम जोड़े जाने की यह मांग केवल आज की वर्तमान पीढ़ी के लिए नहीं, बल्कि देश और समाज की आने वाली पीढ़ियों के व्यापक हितों से भी गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने नागरिकों से शांतिपूर्ण तरीके से इस बंद को समर्थन देने की अपील करते हुए पूरे आंदोलन के दौरान आपसी शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
कई प्रमुख सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने निभाई सक्रिय भूमिका
इस बंद को पूरी तरह सफल बनाने में छोटानागपुरिया तेली उत्थान समाज के संरक्षक किशोर गंझू, जिलाध्यक्ष शिवनारायण गंझू और मोटिया मजदूर संघ के अध्यक्ष सयूम अंसारी समेत बड़ी संख्या में विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता डटे रहे। समिति ने सभी के सामूहिक सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखना सबकी साझा जिम्मेदारी है।
उमेश पाल हत्याकांड में आरोपी अरमान पर शिकंजा, अब पुलिस रिमांड की तैयारी
6 Oct, 2026 11:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गया| चर्चित उमेश पाल हत्याकांड के प्रमुख आरोपी और माफिया अतीक अहमद के कुख्यात शूटर अरमान को प्रयागराज की विशेष एससी-एसटी कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। सोमवार को उत्तर प्रदेश पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर प्रयागराज पहुँची थी। अदालत में पेशी के बाद मंगलवार सुबह उसे वापस गया सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। अब प्रयागराज पुलिस आरोपी अरमान की पुलिस रिमांड हासिल करने की तैयारी कर रही है, ताकि इस सनसनीखेज हत्याकांड से जुड़े कई अनसुलझे सवालों के पुख्ता जवाब हासिल किए जा सकें।
साढ़े तीन साल से गया जेल में बंद था कुख्यात शूटर अरमान
कुख्यात शूटर अरमान मूल रूप से गया के कठोतर तालाब मोहल्ले का रहने वाला है। उमेश पाल हत्याकांड को अंजाम देने के बाद वह चुपचाप वापस गया लौट आया था। पुलिस के अनुसार, उत्तर प्रदेश पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने एक सोची-समझी रणनीति के तहत वर्ष 2022 के एक पुराने मामले में चुपचाप सरेंडर कर दिया और जेल चला गया। इसके बाद से वह पिछले करीब साढ़े तीन साल से गया सेंट्रल जेल के भीतर ही बंद था। इस दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार उसकी तलाश करती रही, जबकि वह सलाखों के पीछे गया जेल के अंदर ही मौजूद था। इसी वर्ष सितंबर के महीने में प्रयागराज पुलिस को उसके गया जेल में बंद होने की सटीक जानकारी मिली, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उसे प्रयागराज लाने की कार्रवाई शुरू की गई।
अदालत में दर्ज हुई गिरफ्तारी, अब पुलिस रिमांड की पुख्ता तैयारी
सोमवार की शाम को उत्तर प्रदेश पुलिस अरमान को ट्रांजिट रिमांड पर प्रयागराज लेकर पहुँची। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उसे एससी-एसटी कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने अदालत को अवगत कराया कि उमेश पाल हत्याकांड में अरमान की औपचारिक गिरफ्तारी पहले दर्ज नहीं हो पाई थी, लेकिन गया जेल में उसके बंद होने की बात सामने आने के बाद अब इस मामले में उसकी गिरफ्तारी दर्ज कर ली गई है। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने अरमान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अब प्रयागराज पुलिस पूछताछ के लिए अदालत से उसकी पुलिस रिमांड की मांग करने जा रही है।
सफेद गमछे से ढका था चेहरा, कोर्ट परिसर में तैनात रही भारी सुरक्षा
अदालत में पेशी के दौरान आरोपी अरमान ने अपना चेहरा एक सफेद गमछे से पूरी तरह ढंक रखा था। लगभग 40 सशस्त्र पुलिसकर्मियों की कड़ी सुरक्षा के बीच उसे अदालत में लाया गया। इस दौरान मीडियाकर्मियों ने उससे कई सवाल किए, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। कोर्ट परिसर के भीतर भी सुरक्षा के बेहद व्यापक इंतजाम किए गए थे, जहाँ 100 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे। महिला पुलिसकर्मियों के साथ-साथ पीएसी, तीन एसीपी और बिहार पुलिस के विशेष कमांडो भी सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद रखे गए थे।
रिमांड के दौरान खुल सकते हैं हत्याकांड से जुड़े कई अहम और बड़े राज
प्रयागराज पुलिस अब इस बात का गहराई से पता लगाने का प्रयास करेगी कि उमेश पाल की हत्या के बाद अरमान किन-किन लोगों के संपर्क में लगातार बना हुआ था और वारदात को अंजाम देने के बाद वह आखिरकार गया कैसे पहुँचा। पुलिस यह भी जानना चाहती है कि उसे लंबे समय तक छिपने या जेल के भीतर सुरक्षित रहने में किसने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद पहुँचाई थी। इसके अतिरिक्त, अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन सहित इस हत्याकांड से जुड़े अन्य फरार चल रहे आरोपियों के बारे में भी उससे पूछताछ की जा सकती है। पुलिस अरमान की भूमिका, उसके आपराधिक संपर्कों और वारदात के बाद की उसकी तमाम गतिविधियों की कड़ियों को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की कोशिश करेगी।
परिजनों ने जताई थी एनकाउंटर की आशंका, कोर्ट के आदेश के बाद लौटा गया जेल
अरमान को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा अपने साथ ले जाए जाने के बाद उसके परिवारवालों ने उसकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। उसके पिता शमीम और माँ असगरी खातून ने उसके एनकाउंटर की आशंका भी जताई थी। परिवार की ओर से गया की एक अदालत में अर्जी दाखिल कर उसे उत्तर प्रदेश पुलिस के हवाले नहीं करने की माँग की गई थी। फिलहाल, प्रयागराज अदालत के आदेश के बाद अरमान सुरक्षित गया सेंट्रल जेल वापस लौट चुका है। अब सबकी निगाहें प्रयागराज पुलिस की रिमांड अर्जी और अदालत के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं। रिमांड मिलने के बाद पूछताछ के दौरान उमेश पाल हत्याकांड में अरमान की वास्तविक भूमिका और कई नए तथ्य सामने आने की पूरी संभावना है।
महीनेभर जमीन पर पड़ी रही शहीद की टूटी प्रतिमा, मां ने खर्च किए 3 लाख और फिर कराया स्थापित
6 Oct, 2026 11:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची| भारत की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीद संतोष उरांव की खंडित प्रतिमा पिछले लगभग एक महीने से जमीन पर लावारिस हालत में पड़ी रही। गुमला जिले में घटी इस बेहद संवेदनशील घटना के बाद शहीद की प्रतिमा को ससम्मान दोबारा स्थापित कराने के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई, लेकिन जब कोई भी ठोस पहल नहीं हुई, तो अंततः शहीद की बुजुर्ग मां गीता देवी ने खुद आगे बढ़कर अपने बेटे को उसका वाजिब सम्मान दिलाने का जिम्मा उठाया। उन्होंने अपनी खुद की जमापूंजी से करीब तीन लाख रुपये खर्च करके शहीद संतोष उरांव की एक नई और भव्य आदमकद प्रतिमा तैयार करवाई और उसे उसी स्थान पर दोबारा पूरी शान के साथ स्थापित करवाया।
मंत्री से तीन बार की मुलाकात, सुनवाई न होने पर मां ने खुद उठाया ऐतिहासिक जिम्मा
शहीद की माता गीता देवी के मुताबिक, अपने बेटे की प्रतिमा को ससम्मान दोबारा स्थापित करवाने के लिए उन्होंने स्थानीय विधायक सह मंत्री चमरा लिंडा से व्यक्तिगत रूप से तीन बार मुलाकात की थी। इसके अलावा जिले के तमाम संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से भी बार-बार आग्रह किया गया कि शहीद की प्रतिमा को पुनः स्थापित कराया जाए। इसके बावजूद जब शासन-प्रशासन की ओर से कोई भी सकारात्मक कार्रवाई देखने को नहीं मिली, तो एक मां ने अपने स्तर से ही नई प्रतिमा बनवाने और उसे लगवाने का कड़ा निर्णय लिया। गीता देवी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश के लिए जान न्यौछावर करने वाले शहीद का सम्मान करना हम सबका परम कर्तव्य है। जब इस नेक काम के लिए कोई भी आगे नहीं आया, तो एक मां होने के नाते उन्होंने अपनी निजी संपत्ति से पैसे खर्च कर बेटे की प्रतिमा पुनः स्थापित करने का साहसिक फैसला लिया।
घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का ग्रामीणों ने लगाया गंभीर आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष देखने को मिला। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि पिछली बार प्रतिमा के निर्माण के दौरान ठेकेदारों द्वारा बेहद घटिया स्तर की निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया था, जिसके चलते पुरानी प्रतिमा अचानक टूटकर जमीन पर गिर गई थी। हालांकि, अब नई आदमकद प्रतिमा के स्थापित हो जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने शहीद की मां के इस जज्बे और ममता के प्रति गहरा सम्मान प्रकट किया है और उनके इस अतुलनीय कदम की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। इसके साथ ही ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से यह मांग की है कि गुमला जिले के भीतर स्थित सभी शहीदों की प्रतिमाओं और स्मारकों के नियमित रखरखाव के लिए एक पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि शहीदों के सम्मान से जुड़े स्थलों की देखरेख में कभी कोई लापरवाही न बरती जाए।
ग्रामीणों का तीखा सवाल: आखिर शहीदों के स्मारकों की देखरेख की जिम्मेदारी किसकी है?
इस घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने एक बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने पूछा कि आखिर देश के वीर शहीदों की प्रतिमाओं और उनके स्मारकों की सुरक्षा व देखरेख करने की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी किसकी है? ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि क्या यह बेहद शर्मनाक स्थिति नहीं है कि एक शहीद की मां को अपने ही बेटे के सम्मान और गरिमा को बचाने के लिए अपनी जेब से करीब तीन लाख रुपये खर्च करने की नौबत आ जाए? ग्रामीणों की मांग है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे शहीदों की प्रतिमाओं के रखरखाव की जिम्मेदारी तय हो सके, ताकि भविष्य में कभी भी किसी भी शहीद की प्रतिमा लंबे समय तक इस तरह क्षतिग्रस्त और अपमानजनक हालत में जमीन पर न पड़ी रहे।
जनसुराज से जुड़ने के बाद राजकिशोर सिंह की घर वापसी, 24 घंटे में बदला फैसला
6 Oct, 2026 08:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेगूसराय: बेगूसराय की स्थानीय राजनीति में सोमवार को उस वक्त एक नाटकीय और बड़ा मोड़ आ गया, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व जिलाध्यक्ष राजकिशोर सिंह ने 'जन सुराज' संगठन की सदस्यता ग्रहण करने के मात्र 24 घंटे के भीतर ही अपना यह फैसला वापस लेने का चौंकाने वाला ऐलान कर दिया। रविवार को जन सुराज का दामन थामने वाले राजकिशोर सिंह ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर यह स्पष्ट कर दिया कि वह आगे भी भाजपा में ही बने रहेंगे और पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में पूरी निष्ठा से काम करेंगे। अपने इस वीडियो संदेश में राजकिशोर सिंह ने हवाला दिया कि वह करीब 40 वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्पित स्वयंसेवक रहे हैं, और संघ के शीर्ष निर्देशों के अनुसार ही वह फिलहाल कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि उनकी संपूर्ण राजनीतिक भूमिका सिर्फ भाजपा के साथ ही जुड़ी रहेगी।
महज एक दिन के भीतर बदल गया पूरा राजनीतिक घटनाक्रम
राजकिशोर सिंह के अचानक जन सुराज में शामिल होने की खबर जैसे ही सार्वजनिक हुई, वैसे ही बेगूसराय की सियासत मेंवानों भूचाल आ गया और राजनीतिक हलचल काफी तेज हो गई। उनके इस अप्रत्याशित कदम को भाजपा के आंतरिक संगठन में चल रही सुगबुगाहट और गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा था। हालांकि, अगले ही दिन उनके द्वारा जारी किए गए वीडियो संदेश ने एक झटके में पूरे घटनाक्रम को ही पूरी तरह से पलट दिया।
राजकिशोर सिंह ने सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति को बिल्कुल स्पष्ट करते हुए कहा कि वह भाजपा को छोड़कर किसी भी अन्य दूसरे दल के साथ चुनावी मैदान में कदम नहीं रखेंगे। उन्होंने दृढ़ता से दोहराया कि वह पार्टी में ही रहकर अधिकृत उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार करेंगे।
सिर्फ 24 घंटे के भीतर लिए गए इस यू-टर्न से उठे कई बड़े राजनीतिक सवाल
जन सुराज की सदस्यता लेने के ठीक 24 घंटे के भीतर ही राजकिशोर सिंह द्वारा अपना रुख पूरी तरह बदल लेने के कारण स्थानीय राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। एक तरफ जहाँ उनकी जन सुराज में शामिल होने की तस्वीरें और खबरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं, वहीं दूसरी ओर अगले ही दिन उन्होंने पुनः भाजपा में ही बने रहने की घोषणा कर दी।
अब राजनीतिक विश्लेषकों के बीच मुख्य चर्चा इस बात को लेकर है कि आखिर एक दिन के भीतर ऐसा क्या बड़ा बदलाव आया, जिसके चलते राजकिशोर सिंह को जन सुराज से जुड़ने के तुरंत बाद अपना यह निर्णय बदलना पड़ा। हालांकि, उन्होंने अपने आधिकारिक बयान में इसकी मुख्य वजह लंबे समय से संघ परिवार से जुड़े होने और संघ के अनुशासनात्मक निर्देशों को ही बताया है।
पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष रह चुके हैं राजकिशोर सिंह
उल्लेखनीय है कि राजकिशोर सिंह लंबे समय तक भाजपा के सांगठनिक ढांचे में अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभा चुके हैं और पूर्व में पार्टी के जिलाध्यक्ष पद पर भी अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। ऐसे में, महज एक दिन के भीतर उनके द्वारा दो बिल्कुल विपरीत राजनीतिक रुख अपनाए जाने को स्थानीय भाजपा संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
फिलहाल, राजकिशोर सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह आगामी चुनाव नहीं लड़ेंगे, भाजपा परिवार में ही बने रहेंगे और पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए कार्य करेंगे। उनके इस यू-टर्न का आने वाले दिनों में बेगूसराय की स्थानीय राजनीति और भाजपा संगठन पर क्या गहरा असर पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी।
गंडक तटबंध टूटने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई, 7 अभियंता निलंबित
5 Oct, 2026 03:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में गंडक नदी की बाढ़ और तटबंधों के टूटने की घटनाओं पर राज्य सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। जल संसाधन विभाग ने भारी लापरवाही बरतने के आरोप में सात अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा, मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता कुमार मनोज गुप्ता के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के बाद सरकार के इस कदम से महकमे में हड़कंप मच गया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि आपदा के दौरान राहत कार्यों और तटबंधों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
28 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच टूटे 13 तटबंध
रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर ऐतिहासिक रूप से बढ़ गया था। नेपाल के देवघाट में नदी का पानी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद बिहार में बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज जैसे इलाकों में भी जलस्तर पुराने रिकॉर्ड को पार कर गया। पानी के अत्यधिक दबाव के चलते 28 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच गंडक नदी के तटबंध 13 अलग-अलग जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे कई रिहायशी इलाकों में पानी भर गया।
लापरवाही और आकस्मिक कार्ययोजना में देरी का आरोप
तटबंध टूटने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीम ने निरीक्षण कर तुरंत बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, विभागीय जांच में यह सामने आया कि कुछ स्थानीय अभियंताओं ने आकस्मिक कार्ययोजना को लागू करने में भारी सुस्ती बरती। वे न तो समय पर ब्रीच स्थल पर पहुंचे और न ही पर्याप्त सामग्री व मानवबल का प्रबंधन किया। इसी आधार पर सात अभियंताओं—छपरा के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर, गोपालगंज के कार्यपालक अभियंता मो. साजिद इकबाल, सहायक अभियंता सुनील कुमार व विनोद कुमार, गोपालगंज के सहायक अभियंता मो. जावेद अंसारी, तथा कनीय अभियंता चंद्रशेखर कुमार और विकास कुमार को निलंबित किया गया है।
वर्तमान स्थिति और विभागीय प्राथमिकता
फिलहाल गंडक नदी के तटबंधों पर पानी का दबाव कम हुआ है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। टूटे हुए हिस्सों की मरम्मत के लिए युद्धस्तर पर निर्माण और बचाव सामग्री जुटाई जा रही है। सरकार का मुख्य उद्देश्य संवेदनशील स्थानों की टैगिंग कर भविष्य के लिए पुख्ता सुरक्षा प्रबंध करना है।
मंदिर में चढ़ावे को लेकर भिड़े दो पक्ष, फायरिंग में ग्रामीण घायल; पुलिस ने 3 हथियार पकड़े
5 Oct, 2026 12:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सहरसा: बिहार के सहरसा जिले में स्थित प्रसिद्ध संत कारू बाबा मंदिर परिसर में रविवार शाम न्यास समिति के संचालन और चढ़ावे की रकम पर वर्चस्व को लेकर दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि महंत पक्ष की ओर से ताबड़तोड़ फायरिंग की गई, जिसमें एक स्थानीय ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया।
फायरिंग में ग्रामीण घायल, महंत बंधक
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार शाम करीब 4:00 से 4:30 बजे के बीच मंदिर परिसर में दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हुई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर महंत निरंजन यादव और उनके समर्थकों ने अवैध हथियारों से फायरिंग कर दी। गोली लगने से स्थानीय ग्रामीण शंभु खिरहर गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं, एक अन्य व्यक्ति के पैर को गोली छूते हुए निकल गई, जबकि मारपीट में लक्ष्मण खिरहर भी घायल हुए हैं। सभी घायलों को तुरंत स्थानीय सीएचसी ले जाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें गंभीर हालत में सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, गाड़ी फूंकी
मंदिर परिसर में गोलीबारी की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। उग्र भीड़ ने महंत निरंजन यादव और उनके समर्थकों को एक कमरे में घेरकर बंधक बना लिया। इस दौरान आक्रोशित लोगों ने महंत की एक गाड़ी को भी आग के हवाले कर दिया, जिससे इलाके में भारी अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस ने तीन अवैध हथियारों के साथ महंत को दबोचा
वारदात की सूचना मिलते ही सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) पंकज कुमार और महिषी थानाध्यक्ष भारी पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने सूझबूझ दिखाते हुए आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराया और बंधक बनाए गए महंत को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस ने मुख्य आरोपी महंत निरंजन यादव को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही, मंदिर परिसर की तलाशी के दौरान तीन अवैध हथियार और घटनास्थल से चार खोखे बरामद किए गए हैं।
चढ़ावे और नई न्यास समिति को लेकर है विवाद
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कुछ समय पहले पुरानी न्यास समिति को भंग कर निरंजन कुमार को नया न्यासधारी बनाया गया था, जिसके बाद से ही स्थानीय ग्रामीणों और पूर्व समिति के बीच असंतोष चल रहा था। मंदिर में आने वाले भारी-भरकम चढ़ावे और उसके प्रबंधन पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों में लंबे समय से रंजिश चल रही थी, जो आखिरकार रविवार को इस हिंसक झड़प में बदल गई। पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और इलाके में स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
अनंत सिंह के तेवर के बीच नीतीश की बड़ी कवायद, नीरज के नामांकन से पहले हलचल
5 Oct, 2026 12:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: बिहार विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों को लेकर सूबे की सियासत गरमा गई है। खास तौर पर पटना स्नातक सीट पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर चल रहा घमासान पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। पार्टी प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह के बगावती तेवर और विपक्षी खेमे की गतिविधियों ने राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है।
अनंत सिंह की बगावत और जेडीयू की मुश्किलें
पटना स्नातक सीट से जदयू ने अपने मौजूदा एमएलसी और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार को दोबारा मैदान में उतारा है। हालांकि, टिकट घोषणा के साथ ही मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने इसके खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। पुरानी राजनीतिक रंजिश और मतभेदों के चलते अनंत सिंह ने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार का समर्थन करने के बजाय जन सुराज समर्थित प्रत्याशी (डॉ. अनुज सिंह) के पक्ष में खड़े होने का ऐलान किया। इतना ही नहीं, वह नामांकन के दौरान भी खुलकर सामने आए थे, जिससे पार्टी के भीतर अनुशासन और एकजुटता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
डैमेज कंट्रोल में जुटे शीर्ष नेता
पार्टी के भीतर मचे इस घमासान को शांत करने और डैमेज कंट्रोल के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सक्रिय रुख अपनाया है। स्थिति को संभालने के लिए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह से मुलाकात कर इस पूरे घटनाक्रम पर गहन चर्चा की है। पार्टी यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि एनडीए खेमे में आपसी खींचतान का फायदा विरोधी दलों को न मिल सके। वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री के नेतृत्व और पार्टी की रणनीति के समर्थन में अन्य वरिष्ठ नेता व पदाधिकारी भी लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं।
विपक्ष की पैनी नजर और चुनावी समीकरण
इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर महागठबंधन के साथ-साथ प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' पार्टी की भी पैनी नजर टिकी हुई है। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की यह लड़ाई आम विधानसभा चुनावों से काफी अलग होती है, जहां प्राथमिकता आधारित मतदान (Preferential Voting) प्रणाली का उपयोग किया जाता है। ऐसे में अंदरूनी कलह और बागी तेवरों के बीच जदयू के लिए इस सीट पर जीत का अंतर और रणनीतिक संतुलन साधना बेहद अहम माना जा रहा है।
क्या पार्टी नेतृत्व के इस नए सियासी दांव से अनंत सिंह की नाराजगी दूर हो पाएगी और क्या एनडीए इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत रख पाएगा?
बक्सर में खड़ी लॉरी से भिड़ी टूरिस्ट बस, चालक समेत 23 लोग घायल
5 Oct, 2026 07:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बक्सर/अयोध्या: गयाजी से पिंडदान कर अयोध्या जा रही केरल के तीर्थयात्रियों से भरी एक टूरिस्ट बस बक्सर में हादसे का शिकार हो गई। उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने से ठीक पहले राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क किनारे खड़ी एक लॉरी (ट्रक) से बस पीछे से जोरदार तरीके से टकरा गई। इस दुर्घटना में बस चालक समेत 23 यात्री घायल हो गए।
गया से रात 10 बजे चली थी बस
प्राप्त जानकारी के अनुसार, केरल के 27 यात्रियों का एक दल टूरिस्ट बस से बिहार के गया पहुंचा था। गयाजी में पिंडदान की धार्मिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी यात्री बस से अयोध्या के लिए रवाना हुए थे। बस रविवार रात करीब 10 बजे गया से चली थी। सोमवार सुबह करीब तीन बजे जब बस वीर कुंवर सिंह गंगा सेतु पार कर उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर रही थी, तभी यह हादसा हुआ।
सो रहे यात्रियों में मची चीख-पुकार
हादसे के वक्त बस में सवार अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे। अचानक तेज धमाके के साथ बस के लॉरी से टकराने से यात्री अपनी सीटों से आगे की ओर जा गिरे, जिससे बस के भीतर चीख-पुकार मच गई। दुर्घटना की सूचना मिलते ही औद्योगिक थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को बस से बाहर निकालकर इलाज के लिए बक्सर सदर अस्पताल पहुंचाया।
चालक गंभीर रूप से घायल, चार यात्रियों का इलाज जारी
इस भीषण टक्कर में बस चालक रमेश स्वामी को सबसे गंभीर चोटें आई हैं। घायलों में के. वेणु राव, के. राजेश्वरी राव, के. नारायण राव, के. स्वामी राव, के. विजयल राव, के. संपत राव, पी. इलैया, जी. राम रेड्डी, जी. राजू रेड्डी, वी. सर्वैया, पी. वेंकट राव और जी. राजेश्वरी राव समेत अन्य यात्री शामिल हैं।
चार यात्रियों की चोटें अधिक गंभीर होने के कारण उनका इलाज बक्सर सदर अस्पताल में जारी है।
वहीं, मामूली रूप से घायल अन्य यात्रियों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
यात्री के. स्वामी और राम राव ने बताया कि चालक को संभवतः झपकी आने के कारण यह हादसा हुआ। प्राथमिक उपचार के बाद जिन यात्रियों को छुट्टी मिल गई थी, वे बक्सर रेलवे स्टेशन पहुंचे और ट्रेन के जरिए अपनी आगे की यात्रा के लिए रवाना हो गए।
औद्योगिक थानाध्यक्ष सोनू कुमार ने बताया कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और सभी घायलों का अस्पताल में त्वरित इलाज कराया गया। सभी घायल खतरे से बाहर हैं, और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
मां भद्रकाली मंदिर कीर्तन मंडली के पुजारी की मौत, पुलिस ने शुरू की जांच
3 Oct, 2026 02:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची| इटखोरी स्थित प्रसिद्ध मां भद्रकाली मंदिर की कीर्तन मंडली से जुड़े पुजारी स्वामी श्रीनिवास का शव उनके आश्रम स्थित कमरे में फंदे से संदिग्धावस्था में लटका हुआ मिला। मृतक की पहचान करीब 30 वर्षीय अमन द्विवेदी उर्फ स्वामी श्रीनिवास के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार के बलिया जिले के रहने वाले थे। इस घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अमला तुरंत मौके पर पहुंचा और मामले की जांच शुरू कर दी। परिजनों और परिचितों के अनुसार, अमन द्विवेदी ने अपने गांव स्थित गुरुकुल से ही धार्मिक शिक्षा प्राप्त की थी। गुरुकुल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर में भी सेवा दी थी। इसके पश्चात, वर्ष 2022 से वे लगातार इटखोरी के मां भद्रकाली मंदिर की कीर्तन मंडली से जुड़कर अपनी सेवाएं दे रहे थे।
पुलिस द्वारा कमरे का मुआयना और शव को अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही इटखोरी थाना प्रभारी अभिषेक कुमार सिंह, अंचलाधिकारी सविता सिंह और मृत्युंजय सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आश्रम के कमरे का बारीकी से मुआयना करने के बाद फंदे से लटके शव को नीचे उतारा। इसके बाद शव को तत्काल इटखोरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां डॉक्टर अशोक कुमार ने जांच के बाद अमन द्विवेदी को मृत घोषित कर दिया। सभी आवश्यक कानूनी और कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए चतरा सदर अस्पताल भेज दिया है।
धार्मिक ज्ञान और अच्छे स्वभाव के कारण श्रद्धालुओं में थी विशेष पहचान
स्वामी श्रीनिवास अपने प्रचुर धार्मिक ज्ञान, शांत स्वभाव और मिलनसार आचरण के चलते स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच काफी सम्मानित और लोकप्रिय थे। उन्होंने क्षेत्र के कई भक्तों को धार्मिक दीक्षा भी प्रदान की थी। उनकी इस अचानक और संदिग्ध मौत की खबर फैलते ही मां भद्रकाली मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं, स्थानीय निवासियों और कीर्तन मंडली के सदस्यों में गहरा शोक छा गया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी मौत की असली वजह
घटना की सूचना मिलने के बाद मृतक के परिजन बिहार के बलिया से चतरा सदर अस्पताल के लिए रवाना हो चुके हैं। इटखोरी पुलिस ने आश्रम के कमरे से विभिन्न साक्ष्यों को अपने कब्जे में लेकर गहन छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना से पहले स्वामी श्रीनिवास की दिनचर्या कैसी थी, वे किन लोगों के संपर्क में थे और इस उठाए गए कदम के पीछे की क्या वजह हो सकती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी संभावित पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह का आधिकारिक खुलासा हो सकेगा।
रांची से पटना पहुंचे थे आलोक कुमार, संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से उठे कई सवाल
3 Oct, 2026 02:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची| पटना के राजीव नगर थाना क्षेत्र के फ्रेंड्स कॉलोनी रोड नंबर-4 स्थित जमुना पैलेस के पास शनिवार सुबह एक कार की ड्राइविंग सीट पर सीसीएल (CCL) के रिटायर्ड जनरल मैनेजर (GM) आलोक कुमार का संदिग्धावस्था में शव मिला है। उनके कनपटी के पीछे गोली लगने के निशान मिले हैं। घटनास्थल के पास से ही एक पिस्टल और खाली कारतूस भी बरामद किया गया है।
बहन के घर मिलने आए थे रिटायर्ड इंजीनियर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मूल रूप से मोतिहारी के रहने वाले आलोक कुमार इन दिनों रांची के कांके रोड स्थित इंदिरा नगर में रहते थे। 67 वर्षीय आलोक कुमार दो-तीन दिन पहले ही पटना के राजीव नगर स्थित फ्रेंड्स कॉलोनी में रहने वाली अपनी बहन से मिलने के लिए आए थे। शनिवार सुबह वह हमेशा की तरह घर से टहलने और घूमने के लिए निकले थे। काफी देर तक जब वे वापस नहीं लौटे और उनकी कार लावारिस हालत में खड़ी दिखाई दी, तो परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। जब परिजन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, तो कार की ड्राइवर सीट पर आलोक कुमार का खून से लथपथ शव पड़ा मिला।
परिजनों ने जताई हत्या की आशंका और रखे अपने पक्ष
मृतक के रिश्तेदार (जीजा) विनोद कुमार ने इस पूरी घटना पर गहरी शंका जताते हुए इसे सुनियोजित हत्या करार दिया है। उनका कहना है कि आलोक कुमार महज दो दिन पहले ही पटना आए थे और सुबह घूमने निकले थे। कार के अंदर से जो पिस्तौल बरामद हुई है, वह उनकी खुद की नहीं है। परिजनों का मानना है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी गोली मारकर हत्या की है। पटना में उनका किसी से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं था, यदि कोई पुरानी रंजिश रही होगी तो वह झारखंड में ही हो सकती है। इसके अलावा परिजनों ने यह भी जानकारी दी कि मृतक आलोक कुमार का एक बेटा है, जो वर्तमान में मलेशिया में रहकर नौकरी करता है।
फॉरेंसिक टीम द्वारा साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई और पुलिस जांच
इस सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलते ही राजीव नगर थाना पुलिस का अमला तुरंत मौके पर पहुंचा और पूरे इलाके को सील कर दिया। पुलिस ने फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की विशेषज्ञ टीम को तुरंत मौके पर बुलाया। फॉरेंसिक टीम ने कार और उसके आसपास के क्षेत्र से फिंगरप्रिंट (उंगलियों के निशान), कारतूस का खोखा तथा अन्य महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र कर लिए हैं। पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर मामले की गहराई से जांच कर रही है।
अनंत सिंह-नीरज कुमार आमने-सामने, श्रवण कुमार बोले- अभी नामांकन में वक्त है
3 Oct, 2026 01:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार| बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले जदयू के मुख्य प्रवक्ता एवं एमएलसी नीरज कुमार और मोकामा के विधायक अनंत सिंह के बीच जारी सियासी तनातनी पर राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री श्रवण कुमार ने प्रतिक्रिया दी है। श्रवण कुमार ने स्पष्ट किया है कि दोनों नेताओं के बीच मतभेद नीतिगत मामलों पर नहीं, बल्कि पूरी तरह व्यक्तिगत वजहों से हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के सीनियर नेता इस विवाद को सुलझाने में लगातार लगे हुए हैं और आपसी बातचीत के जरिए जल्द ही इसका कोई उचित समाधान निकाल लिया जाएगा। इसके अलावा, प्रभारी मंत्री के तौर पर उन्होंने मोतिहारी जिले में बाढ़ प्रभावित इलाकों में चलाए जा रहे राहत कार्यों की भी विस्तृत जानकारी दी।
पार्टी के बड़े नेता जल्द सुलझाएंगे आपसी मामला: श्रवण कुमार
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रही बयानबाजी पर मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि राजनीति में अलग-अलग नेताओं की कार्यशैली और विचार अलग हो सकते हैं। नीरज कुमार और अनंत सिंह का जो मामला है, वह कुछ व्यक्तिगत बातों से जुड़ा हुआ है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को इन सभी मामलों के समाधान के लिए अधिकृत किया गया है। इसमें कुछ समय जरूर लग रहा है, लेकिन बातचीत के माध्यम से इसका सकारात्मक समाधान जल्द सामने आ जाएगा।
नीरज कुमार के नामांकन और एनडीए की तैयारी पर प्रतिक्रिया
एनडीए उम्मीदवार के रूप में नीरज कुमार के नामांकन से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए श्रवण कुमार ने कहा कि नीरज ने अभी तक अपने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किए हैं, इसलिए प्रक्रिया के लिए अभी पर्याप्त समय है। उन्होंने पूरा विश्वास जताया कि चूंकि पार्टी के वरिष्ठ नेता इस पर निर्णय ले रहे हैं, इसलिए कोई बेहतर और स्वीकार्य समाधान अवश्य निकलेगा।
क्या है पूरा राजनीतिक विवाद और पृष्ठभूमि?
जदयू ने बिहार विधान परिषद चुनाव में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए अपने मुख्य प्रवक्ता और मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार को एक बार फिर से उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के इस फैसले का मोकामा विधायक अनंत सिंह ने खुला विरोध किया है। इतना ही नहीं, अनंत सिंह ने प्रशांत किशोर की पार्टी 'जन सुराज' के उम्मीदवार डॉ. अनुज कुमार सिंह का समर्थन करने और उनके पक्ष में चुनाव प्रचार करने का भी ऐलान कर दिया है।
अनंत सिंह का मुख्य आरोप है कि नीरज कुमार ने ही एक राजनीतिक षड्यंत्र के तहत उनके घर पर एके-47 रखवाई थी, जिसके कारण उन्हें जेल जाना पड़ा था। अनंत सिंह ने यह भी दावा किया है कि वे इस चुनाव में नीरज कुमार को शिकस्त देंगे और उनकी जमानत जब्त करवाएंगे। हालांकि, नीरज कुमार ने इन सभी संगीन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
मोतिहारी में बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों का जायजा
राज्य के विभिन्न हिस्सों में उत्पन्न बाढ़ की स्थिति को लेकर मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ राहत और बचाव कार्यों को अंजाम दे रही है। उन्होंने कहा कि बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है और सरकार इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए हरसंभव प्रयास करती है। श्रवण कुमार ने बताया कि प्रभारी मंत्री के रूप में उन्होंने मोतिहारी में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जमीनी निरीक्षण किया है, प्रभावित लोगों से सीधे मुलाकात की है और स्थानीय स्कूल में संचालित कम्युनिटी किचन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया है।
उन्होंने आगे बताया कि तटबंध टूटने जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए पहले से ही एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) निर्धारित है, जिसमें प्रभावित नागरिकों को दी जाने वाली राहत सामग्री और प्रशासनिक कदमों का स्पष्ट उल्लेख होता है। मोतिहारी में स्थानीय अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और आम जनता के बीच बेहतरीन आपसी तालमेल देखने को मिला है। यदि प्रदेश के हर जिले में ऐसा ही आपसी सहयोग बना रहे, तो बाढ़ जैसी आपदा की चुनौती का सामना बहुत ही प्रभावी ढंग से और कम समय में किया जा सकता है।
बेगूसराय में वॉशिंग सेंटर संचालक की गोली मारकर हत्या, सड़क पर मिला शव
3 Oct, 2026 09:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेगूसराय| फुलवरिया थाना क्षेत्र में कार्बन फैक्ट्री चौक के पास शुक्रवार शाम अज्ञात बदमाशों ने वॉशिंग सेंटर संचालक गणेश कुमार (26) की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिससे गोली लगने के बाद गणेश सड़क पर अचेत होकर गिर पड़े। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई है।
दुकान बंद कर घर लौट रहे थे गणेश कुमार
गणेश कार्बन फैक्ट्री के पास वॉशिंग सेंटर चलाते थे और इसी काम से अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उनके सहकर्मी प्रकाश कुमार शर्मा के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब छह बजे के बाद गणेश दुकान बंद करके घर जाने की तैयारी में थे। गणेश अपनी बाइक से आगे निकल गए थे, जबकि उनके साथी कुछ पीछे रह गए थे। इसी दौरान बाइक में अचानक तकनीकी परेशानी आने के कारण साथियों को कुछ देर के लिए रुकना पड़ा। जब गणेश आगे बढ़ते हुए कार्बन फैक्ट्री चौक के पास पहुंचे, तो घात लगाए बदमाशों ने उन्हें निशाना बनाकर फायरिंग कर दी।
तीन गोलियां लगने के बाद सड़क पर गिरे गणेश
स्थानीय लोगों के मुताबिक, गोलियों की आवाज सुनते ही आसपास के लोग तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े, जहां गणेश गंभीर हालत में सड़क पर पड़े मिले। शुरुआती जानकारी के अनुसार उनके सीने और पेट में गोलियां लगी थीं। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने आसपास के इलाके में सघन छानबीन शुरू कर दी है, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और प्रत्यक्षदर्शियों से भी जानकारियां जुटाई जा रही हैं ताकि हमलावरों की जल्द से जल्द पहचान की जा सके।
बहन का गंभीर आरोप—जमीन छोड़ने के लिए मिल रही थीं धमकियां
मृतक गणेश की बहन रिंकी देवी ने इस हत्या के पीछे जमीन विवाद होने का बड़ा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनके परिवार को जमीन को लेकर पहले से लगातार धमकियां मिल रही थीं। रिंकी के मुताबिक, आरोपी पक्ष परिवार पर जमीन छोड़ने का भारी दबाव बना रहा था और जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) नहीं होने देने की बातें भी कही जा रही थीं।
उन्होंने दावा किया कि लगातार मिल रही धमकियों से परेशान होकर परिवार ने करीब दो-तीन महीने पहले फुलवरिया थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। परिवार ने तब पुलिस से सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई थी। रिंकी का यह भी आरोप है कि पुलिस में शिकायत देने के बावजूद कोई अपेक्षित और ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अपनी सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए परिवार ने जमीन पर खुद सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए थे। हालांकि, पुलिस को पहले शिकायत दी गई थी या नहीं, उस पर क्या कार्रवाई हुई और हत्या का जमीन विवाद से सीधा संबंध है या नहीं, यह सब पुलिस की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
तीन भाइयों में सबसे बड़े थे मृतक गणेश
परिजनों के अनुसार, गणेश तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। उनकी शादी हो चुकी थी और वह अपने परिवार की आर्थिक व सामाजिक जिम्मेदारियों को बखूबी संभाल रहे थे। उनकी अचानक हुई इस दर्दनाक हत्या के बाद से पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजन आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी और इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
पुलिस के सामने जांच के अहम और कड़े सवाल
गणेश हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में सिर्फ हमलावरों और शूटरों की पहचान करना ही एकमात्र चुनौती नहीं है, बल्कि परिवार की ओर से पहले से धमकी मिलने और थाने में पूर्व शिकायत किए जाने के दावों की सच्चाई का पता लगाना भी बेहद महत्वपूर्ण होगा। पुलिस को यह जांचना होगा कि क्या परिवार ने वास्तव में दो-तीन महीने पहले कोई शिकायत दी थी? यदि शिकायत दी गई थी, तो उस पर पुलिस द्वारा क्या कानूनी कार्रवाई की गई? क्या स्थानीय पुलिस को परिवार को मिल रही धमकियों की पूरी जानकारी थी? इन सभी सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ ही सामने आएंगे। फिलहाल पुलिस हत्या के असली कारणों, हमलावरों की पहचान और इस वारदात के पीछे किसी गहरी साजिश की भूमिका की गहनता से पड़ताल कर रही है।
बिहार: फर्जी आधार-पासपोर्ट मामले में दो गिरफ्तार, फिंगर और आई स्कैनर भी मिले
2 Oct, 2026 11:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फरपुर | मुजफ्फरपुर जिले में नगर थाना की पुलिस ने धोखाधड़ी और अवैध दस्तावेजों के जरिए जाली पहचान पत्र तैयार करने तथा गलत दस्तावेजों के आधार पर एक विदेशी नागरिक का पासपोर्ट बनवाने के बड़े सिर्फ़ का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम ने मोतीझील स्थित 'कन्हाई कम्यूनिकेशन' और आरडीएस कॉलेज के समीप स्थित 'ओम कम्यूनिकेशन' नामक साइबर कैफे में छापेमारी कर लैपटॉप के साथ-साथ यूआईडीएआई मशीन, फिंगर स्कैनर, आई स्कैनर, क्लोन थंब इंप्रेशन और आठ मूल पहचान पत्र बरामद किए हैं। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जाँच कर रही है।
गुप्त सूचना के आधार पर साइबर कैफे पर छापेमारी
जिला पुलिस को गत 30 सितंबर की शाम को एक गुप्त सूचना मिली थी कि मोतीझील के उमा मार्केट स्थित 'कन्हाई कम्यूनिकेशन' नामक दुकान में आधिकारिक दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करके अवैध रूप से पहचान पत्र बनाए जा रहे हैं। इस पुख्ता सूचना के आधार पर नगर थाना पुलिस की टीम ने तुरंत उक्त दुकान पर छापा मारा। मौके से साहिल कुमार नामक एक आरोपी को दबोच लिया गया। उसके पास से दो मोबाइल फोन और दुकान के अंदर से डेल कंपनी का एक लैपटॉप जब्त किया गया। जब तकनीकी जाँच की गई, तो उस लैपटॉप में पहचान पत्र तैयार करने वाला विशेष सॉफ्टवेयर भी सक्रिय मिला।
पुलिस की पूछताछ के दौरान आरोपी साहिल ने खुलासा किया कि वह वर्ष 2019 से कन्हाई कुमार के कहने पर ही इस दुकान में पहचान पत्र बनाने और पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन दर्ज करने का कार्य करता था।
बांग्लादेशी नागरिक के नाम पर फर्जी पासपोर्ट तैयार करने का खुलासा
जाँच-पड़ताल के दौरान आरोपी साहिल के मोबाइल फोन की गैलरी और मेल्स की जाँच करने पर क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, पटना से प्राप्त एक ई-मेल बरामद हुआ। इस ई-मेल में पासपोर्ट संख्या U2185640 को गलत और भ्रामक जानकारियों के आधार पर रद्द किए जाने का जिक्र था। आगे की जाँच में यह बात खुलकर सामने आई कि उक्त पासपोर्ट वास्तव में एक बांग्लादेशी नागरिक के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे तैयार किया गया था।
साहिल से मिली अहम जानकारियों के आधार पर पुलिस ने छपरा जिले के दरियापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित शिव कुमार पंडित के घर पर भी दबिश दी और उसे धर दबोचा। पुलिस ने उसके पास से भी एक मोबाइल फोन बरामद किया है।
बैंक में पहचान पत्र ऑपरेटर के रूप में करता था काम
पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में आरोपी शिव कुमार पंडित ने स्वीकार किया कि वह एक बैंक में पहचान पत्र ऑपरेटर के रूप में कार्यरत था। इस पद का दुरुपयोग करते हुए वह अधिकृत यूआईडीएआई सिस्टम को अवैध रूप से इन साइबर कैफे संचालकों को उपलब्ध करवाता था। इस मामले में पुलिस ने साहिल कुमार और शिव कुमार पंडित को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है।
इस आपराधिक प्रकरण में साहिल कुमार (निवासी: केसरिया, पूर्वी चंपारण, वर्तमान पता: कलमबाग चौक, मुजफ्फरपुर), शिव कुमार पंडित (निवासी: दरियापुर, छपरा), सुजीत कुमार (निवासी: हथसारगंज, हाजीपुर), कन्हाई कुमार मिश्रा (निवासी: सदर, मुजफ्फरपुर) तथा अन्य कई अज्ञात लोगों को अभियुक्त बनाया गया है।
एसडीपीओ टाउन सुरेश कुमार का बयान और आगे की कार्रवाई
पूरे मामले का आधिकारिक खुलासा करते हुए एसडीपीओ टाउन वन सुरेश कुमार ने मीडिया को जानकारी दी कि नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत साइबर कैफे की आड़ में अवैध रूप से पहचान पत्र बनाए जाने की पुख्ता सूचना पर यह कार्रवाई की गई थी। मौके से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया जिसके जरिए एक विदेशी (बांग्लादेशी) नागरिक का पासपोर्ट बनवाने का अवैध कृत्य किया गया था।
उन्होंने बताया कि अनुसंधान के दौरान एक अन्य आरोपी को भी दबोचा गया है और इस प्रकरण में कई अन्य बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। पुलिस पूरे सिंडिकेट का पता लगाने के लिए गहनता से जाँच कर रही है और तदनुसार कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।
गुजरात से शुरू हुआ सेवा ज्योति का संदेश, पीएम मोदी की 25 साल की जनसेवा को किया नमन
हुमायूं कबीर बोले- रेजीनगर में भाजपा की जीत होगी, संन्यास को लेकर भी दिया संकेत
इतिहास का बड़ा उलटफेर! सऊदी की सुरक्षा के लिए तुर्की भेजेगा सैनिक, कभी थे कट्टर दुश्मन
जर्जर मकान ने ली जान जोखिम में, सीमापुरी में तीन मंजिला इमारत ढही; 2 घायल
मुंबई में रेल परियोजना के लिए 29 पेड़ काटने की अनुमति, 13 को मिलेगा नया ठिकाना
कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की उम्मीदों को झटका, UN चीफ ने साफ कर दी अपनी भूमिका
वायुसेना के अहम पद पर संभालेंगे जिम्मेदारी, आशुतोष दीक्षित ने राजनाथ सिंह से की भेंट
संबित पात्रा का बड़ा आरोप, बोले- राहुल गांधी के लिए लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश
गैरकानूनी गर्भपात पर लगेगी रोक, गर्भलिंग जांच के खिलाफ जिलास्तर पर होगी कड़ी निगरानी
बांग्लादेशी सेना में बदली ताकत की तस्वीर, तारिक रहमान ने आर्मी चीफ को दिया झटका
