स्थानीय प्रशासन ने इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया।
गुजरात। के भरूच की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के विवाद ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है. बीते 3 मार्च को कुछ महिलाओं द्वारा मस्जिद परिसर में पूजा किए जाने के बाद मुस्लिम समाज और संत समाज आमने-सामने आ गए हैं. एक ओर जामा मस्जिद ट्रस्ट द्वारा गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर मुक्तानंद स्वामी और उनके अनुयायी पुरातत्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं.
भरूच शहर के पायोनियर स्कूल के सामने स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद पिछले कुछ महीनों से विवाद का केंद्र बनी हुई है. बीते 3 मार्च 2026 को सूरत से आई कुछ महिलाओं द्वारा मस्जिद परिसर में पूजा किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. मस्जिद ट्रस्ट के सदस्यों ने इस पूजा को रोकने का प्रयास किया था, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद शहर में चर्चा और तनाव का माहौल बन गया. इसके बाद मुस्लिम समाज के नेताओं और जामा मस्जिद ट्रस्ट के सदस्यों ने कलेक्टर कार्यालय, एसपी कार्यालय और बी डिवीजन पुलिस स्टेशन में आवेदन देकर विरोध दर्ज कराया.
जामा मस्जिद ट्रस्ट के अध्यक्ष मौलाना कुरैशी गुलाम मुस्तुफा ने मुक्तानंद स्वामी सहित कुछ लोगों पर शहर की शांति और भाईचारे को बिगाड़ने की कोशिश करने के गंभीर आरोप लगाए हैं. ट्रस्ट द्वारा इस मामले में कानूनी कार्रवाई की भी बात कही गई है. दूसरी ओर इस पूरे विवाद के बीच मुक्तानंद स्वामी एक बार फिर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे. दो महीने पहले शुरू किए गए अनशन को लेकर प्रशासन द्वारा दिए गए समय की अवधि पूरी होने के बाद उन्होंने महाराष्ट्र के संभाजीनगर से आए चक्रधर स्वामी के अनुयायियों के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की.
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुरातत्व विभाग (ASI) की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी व्यक्त की गई और कार्रवाई को एकतरफा बताया गया. इस दौरान मुक्तानंद स्वामी द्वारा "भरूच की राष्ट्रीय धरोहर का तथ्यात्मक इतिहास" नामक पुस्तक का विमोचन भी किया गया. मुक्तानंद स्वामी ने कहा कि आने वाले समय में भरूच शहर और जिले के मंदिरों में महाआरती और पूजा कार्यक्रम आयोजित कर इस स्थान और धर्म के बारे में प्रचार किया जाएगा. साथ ही अप्रैल महीने से हर सोमवार को कलेक्टर कार्यालय के बाहर एक घंटे का अनशन कर हनुमान चालीसा का पाठ भी किया जाएगा. गौरतलब है कि वर्ष 1965 से जामा मस्जिद का एक हिस्सा पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है और वर्तमान में इसकी देखरेख पुरातत्व विभाग द्वारा की जा रही है. हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह स्थल मूल रूप से मस्जिद था या मंदिर, जिसके चलते इस ऐतिहासिक स्थल को लेकर जांच और चर्चा अभी भी जारी है.

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