खेल
फॉकलैंड विवाद पर नया मोड़, ब्रिटेन के कदम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी हलचल
16 Jul, 2026 03:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अटलांटा: फुटबॉल विश्व कप के बेहद रोमांचक और हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड को 2-1 से शिकस्त देने के बाद अर्जेंटीना की टीम एक बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद में फंस गई है। मैच में जीत का जश्न मनाने के दौरान अर्जेंटीना के फुटबॉल खिलाड़ियों ने मैदान पर एक ऐसा विवादित राजनीतिक बैनर प्रदर्शित किया, जिसने फॉकलैंड द्वीप समूह पर संप्रभुता के पुराने जख्मों को हरा कर दिया है। इस घटना से ब्रिटेन सरकार बेहद गुस्से में है और उसने गुरुवार को फुटबॉल की वैश्विक शासी निकाय, फीफा (FIFA) से इस गंभीर मामले की तुरंत जांच करने और अर्जेंटीना के खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की है।
क्या अर्जेंटीना की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम पर गिरेगी फीफा की गाज?
मैच खत्म होने के बाद जब अर्जेंटीना के खिलाड़ी मैदान पर जीत की खुशियां मना रहे थे, तब उन्होंने अपने हाथों में एक बड़ा बैनर थाम रखा था। इस बैनर पर स्पैनिश भाषा में लिखा था— 'लास माल्विनास सोन अर्जेंटिनास', जिसका सीधा मतलब है 'माल्विनास अर्जेंटीना का है'। दरअसल, अर्जेंटीना के लोग फॉकलैंड द्वीप समूह को 'इस्लास माल्विनास' कहकर पुकारते हैं। बताया जा रहा है कि यह बैनर स्टैंड में मौजूद एक लैटिन अमेरिकी दर्शक ने खिलाड़ियों की तरफ फेंका था। फीफा के कड़े नियमों के मुताबिक, फुटबॉल के मैदान पर किसी भी तरह के राजनीतिक, धार्मिक या व्यक्तिगत संदेश को प्रदर्शित करने पर पूरी तरह पाबंदी है। ऐसे में नियमों के उल्लंघन को लेकर अर्जेंटीना की टीम पर बड़े जुर्माने या निलंबन जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है।
ब्रिटिश सरकार ने जताई कड़ी आपत्ति, कहा— खेल में राजनीति बर्दाश्त नहीं
व्यापार सचिव का तीखा रुख: ब्रिटेन के व्यापार सचिव पीटर काइल ने अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के इस कृत्य की घोर निंदा करते हुए इसे पूरी तरह से अमर्यादित और खेल भावना के विपरीत बताया है।
फीफा से जांच की उम्मीद: पीटर काइल ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बात करते हुए कहा कि खेल और राजनीति को हमेशा एक-दूसरे से दूर रखा जाना चाहिए। विश्व कप जैसे वैश्विक मंच का मुख्य सिद्धांत ही यही है कि यहाँ राजनीतिक एजेंडे के लिए कोई जगह नहीं है। अब यह पूरा मामला फीफा के पाले में है और हमें पूरी उम्मीद है कि शासी निकाय खेल की गरिमा बनाए रखने के लिए इसकी निष्पक्ष जांच करेगा।
मैदान से बाहर का पुराना भू-राजनीतिक तनाव अब फुटबॉल पिच पर उतरा
दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित फॉकलैंड द्वीपसमूह को लेकर ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच का भू-राजनीतिक विवाद दशकों पुराना है, जिसने खेल के मैदान पर भी दोनों देशों के बीच की प्रतिद्वंद्विता को बेहद तनावपूर्ण बना दिया है। भौगोलिक दृष्टि से यह द्वीपसमूह वर्तमान में ब्रिटिश ओवरसीज टेरिटरी के अंतर्गत आता है, जिसकी कुल जनसंख्या लगभग 3,500 है। यह इलाका ब्रिटेन की मुख्य भूमि से करीब 13,000 किलोमीटर (8,000 मील) दूर है, जबकि अर्जेंटीना के तट से इसकी दूरी महज 480 किलोमीटर (300 मील) है।
दोनों देशों के अपने-अपने दावे और 1982 के युद्ध का खूनी इतिहास
अर्जेंटीना की दलील: अर्जेंटीना का दावा है कि साल 1833 में ब्रिटेन ने उपनिवेशवादी नीति के तहत इस द्वीप पर अवैध रूप से अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था, इसलिए ऐतिहासिक रूप से यह उनका हिस्सा है।
ब्रिटेन का पक्ष: वहीं ब्रिटेन का दृढ़ तर्क है कि यह द्वीपसमूह 1765 से ही उनके प्रशासनिक नियंत्रण में रहा है और यहाँ के नागरिक ब्रिटिश शासन के साथ ही रहना चाहते हैं।
1982 का भीषण युद्ध: इसी संप्रभुता की लड़ाई के चलते वर्ष 1982 में अर्जेंटीना ने इस द्वीप पर सैन्य हमला कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच लगभग 10 हफ्तों तक भीषण युद्ध चला था। इस जंग में अर्जेंटीना के 649 और ब्रिटेन के 255 सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी, जबकि 3 स्थानीय नागरिक भी मारे गए थे। तब से लेकर आज तक दोनों देशों के बीच इस द्वीप को लेकर कड़वाहट बनी हुई है, जो अब विश्व कप के मंच पर दोबारा उजागर हो गई है।
सेमीफाइनल में बेलिंगहम का गुस्सा बना चर्चा का विषय, थप्पड़ मारने की वजह पर उठे सवाल
16 Jul, 2026 11:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अटलांटा| फीफा विश्व कप 2026 के हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल मुकाबले में अर्जेंटीना के हाथों 2-1 से मिली करारी हार के बाद इंग्लैंड के स्टार मिडफील्डर जूड बेलिंगहम एक गंभीर विवाद के केंद्र में आ गए हैं। मैच समाप्त होने के तुरंत बाद खेल के मैदान पर दोनों टीमों के बीच जमकर तनातनी हुई। इस दौरान बेलिंगहम का एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित (वायरल) हो रहा है, जिसमें वे विरोधी टीम अर्जेंटीना के खिलाड़ी वेलेंटिन बार्को के सिर पर पीछे से थप्पड़ मारते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं।
मैदान पर कैसे भड़की चिंगारी, कैसे पलटा पूरा मैच?
अटलांटा के स्टेडियम में खेले गए इस नॉकआउट मुकाबले में इंग्लैंड की टीम 55वें मिनट तक 1-0 की बढ़त के साथ मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही थी। हालांकि, इसके बाद अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी ने अपने जादुई खेल का प्रदर्शन करते हुए दो शानदार असिस्ट किए, जिसकी बदौलत अर्जेंटीना ने महज सात मिनट के भीतर पासा पलट दिया। एंजो फर्नांडीज और लौटारो मार्टिनेज द्वारा किए गए दो दनादन गोलों ने इंग्लैंड के फाइनल में पहुंचने के अरमानों पर पानी फेर दिया।
जैसे ही मुख्य रेफरी ने मैच समाप्ति की अंतिम सीटी बजाई, अर्जेंटीना के खेमे में जश्न का माहौल बन गया। इस बीच, हार से निराश बेलिंगहम मैदान के बीच में अकेले खड़े थे। तभी वेलेंटिन बार्को अपने अन्य साथियों के साथ वहां से जश्न मनाते हुए गुजरे। चश्मदीदों के मुताबिक, बार्को ने बेलिंगहम को देखकर कुछ टिप्पणी की, जिससे ब्रिटिश मिडफील्डर अपना नियंत्रण खो बैठे।
बीच-बचाव में उतरे खिलाड़ी, फीफा की अनुशासनात्मक कार्रवाई का खतरा
कैमरे में कैद हुई तस्वीरों में बेलिंगहम को बार्को के सिर पर हाथ मारते देखा जा सकता है, जिसके जवाब में बार्को ने भी उन्हें पीछे धकेला। माहौल को बिगड़ता देख दोनों पक्षों के बाकी खिलाड़ियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और मामले को ज्यादा बढ़ने से रोक लिया। हालांकि, मैच के दौरान फील्ड अंपायरों की नजर इस घटना पर नहीं पड़ी थी, लेकिन अब फुटेज सामने आने के बाद बेलिंगहम पर फीफा (FIFA) की अनुशासनात्मक समिति द्वारा कड़ा एक्शन लिए जाने की अटकलें तेज हैं। यदि महासंघ इस आचरण को खेल भावना के विपरीत मानता है, तो उन पर मैच बैन (निलंबन) या भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
मैदान के मुख्य घेरे में भी हुई तीखी नोकझोंक
विवाद सिर्फ यहीं नहीं थमा, मैच खत्म होने के बाद सेंटर सर्कल में भी दोनों टीमों के खिलाड़ी आपस में भिड़ गए। इंग्लैंड के मॉर्गन रोजर्स और अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की देखने को मिली। इस दौरान माहौल को शांत करने के लिए रिजर्व गोलकीपर डीन हेंडरसन, जेम्स ट्रैफर्ड और इवान टोनी को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
यह हमारे करियर का सबसे निराशाजनक दिन: जूड बेलिंगहम
इस विवाद और हार पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए जूड बेलिंगहम ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'यह हमारे लिए, पूरी टीम और हमारे प्रशंसकों के लिए एक बेहद निराशाजनक और दुखद दिन है। हमने मैदान पर अपना शत-प्रतिशत दिया और अंतिम क्षणों तक संघर्ष किया, लेकिन दुर्भाग्य से आज का दिन हमारा नहीं था।'
आलोचनाओं के बीच मुख्य कोच थॉमस टुकेल ने किया बचाव
मैच गंवाने के बाद इंग्लैंड के मुख्य कोच थॉमस टुकेल की रक्षात्मक रणनीति को लेकर खेल विशेषज्ञों द्वारा काफी आलोचना की जा रही है। हालांकि, टुकेल ने अपने फैसलों को सही ठहराते हुए कहा, 'हमने शुरुआती गोल करने के बाद विरोधी टीम को लगातार कई क्रॉस और मौके बनाने दिए, जिसके कारण हमें बैकफुट पर जाना पड़ा। यही वजह थी कि हमने अंतिम समय में पांच डिफेंडरों के साथ खेलने की रणनीति बनाई। परिणाम अनुकूल न होने पर फैसलों को गलत ठहराना आसान होता है, लेकिन एक कोच के तौर पर इसकी पूरी जिम्मेदारी मेरी है।'
इस हार के बाद अब इंग्लैंड की टीम विश्व कप में तीसरे स्थान (थर्ड प्लेस) के लिए फ्रांस से लोहा लेगी, जबकि अर्जेंटीना का सामना खिताबी मुकाबले में स्पेन से होगा।
उम्र को मात देता मेसी का खेल, इंग्लैंड के खिलाफ फिर बने जीत के सबसे बड़े हीरो
16 Jul, 2026 10:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फुटबॉल की दुनिया में अमूमन बढ़ती उम्र के साथ खिलाड़ियों की गति धीमी होने लगती है, उनका पुराना जादू फीका पड़ने लगता है और मैदान पर उनका असर कम होने लगता है। लेकिन लियोनल मेसी उन गिने-चुने दिग्गजों में शुमार हैं, जिन्होंने समय की मांग के अनुसार अपने खेल को पूरी तरह ढाल लिया है। आज वे पहले की तरह हर वक्त डिफेंडरों को छकाते हुए गोल दागते नजर नहीं आते, बल्कि अपनी असाधारण समझ, गजब के धैर्य और अचूक पासिंग से पूरे मैच का पासा पलट देते हैं। फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ यह खूबी खुलकर सामने आई। 39 साल के मेसी ने खुद कोई गोल नहीं किया, लेकिन दो जादुई असिस्ट (पास) देकर अर्जेंटीना को लगातार दूसरी और कुल सातवीं बार फाइनल में पहुंचा दिया।
शुरुआती हाफ में काम आई इंग्लैंड की चक्रव्यूह रणनीति
इंग्लैंड के रणनीतिकार थॉमस टुकेल ने मेसी को रोकने के लिए किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर रहने के बजाय एक पूरा चक्रव्यूह तैयार किया था। मैदान पर इलियट एंडरसन, जूड बेलिंगहम और डेक्लान राइस की तिकड़ी ने मिलकर मेसी के इर्द-गिर्द के स्पेस को पूरी तरह ब्लॉक रखा।
इस तगड़ी घेराबंदी का असर भी देखने को मिला। पहले हाफ में मेसी को खुलकर खेलने या गोल करने का कोई बड़ा मौका नहीं मिला और अर्जेंटीना का आक्रामक विभाग बेअसर नजर आया। इसके बाद दूसरे हाफ की शुरुआत में ही एंथनी गॉर्डन ने शानदार गोल दागकर इंग्लैंड को 1-0 की बढ़त दिला दी। उस समय तक ऐसा लग रहा था कि ब्रिटिश टीम का प्लान पूरी तरह सफल हो रहा है।
मेसी ने बदली अपनी जगह और पलट गया पूरा खेल
बढ़त हासिल करने के बाद इंग्लैंड ने अपनी डिफेंस लाइन को थोड़ा पीछे खींच लिया। इंग्लिश टीम की यही चूक मेसी के लिए सबसे बड़ा हथियार बन गई। मेसी ने भांप लिया कि अब उन्हें बीच के हिस्से से हटकर दाईं विंग (राइट विंग) की तरफ जाना होगा।
जैसे ही वे दाईं ओर खिसके, इंग्लैंड के डिफेंडरों को अपनी तय जगह छोड़नी पड़ी। इसका फायदा यह हुआ कि अर्जेंटीना के बाकी फॉरवर्ड खिलाड़ियों के लिए मैदान पर खाली जगह (स्पेस) बनने लगी। मेसी ने इसी खाली जगह का इस्तेमाल करते हुए एक के बाद एक कई खतरनाक मूव बनाए। उनके पास गेंद आते ही अर्जेंटीना का दबाव बढ़ता गया और इंग्लैंड की टीम अपने ही पेनाल्टी बॉक्स में सिमटने को मजबूर हो गई।
गोल का सूखा, लेकिन दो असिस्ट से पलट दी बाजी
अर्जेंटीना का बराबरी का गोल पूरी तरह से मेसी के विजन और समझदारी का परिणाम था। दाईं ओर गेंद मिलने पर उन्होंने हड़बड़ी में क्रॉस डालने के बजाय सही पल का इंतजार किया। जैसे ही मौका मिला, उन्होंने एंजो फर्नांडीज को एक ऐसा तीखा पास दिया जिसने इंग्लैंड की पूरी डिफेंस लाइन को भेद दिया। एंजो ने बेहतरीन फिनिशिंग दिखाते हुए स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया।
इसके बाद इंजरी टाइम में मेसी ने एक बार फिर अपना करिश्मा दिखाया। उन्होंने बाउंड्री लाइन के पास से गेंद को बाहर जाने से बचाया और एक कमाल का क्रॉस डाला, जिस पर लौटारो मार्टिनेज ने शानदार हेडर लगाकर टीम को विजयी गोल दिला दिया। दिलचस्प बात यह है कि पूरे मैच में मेसी का एक्सपेक्टेड गोल (xG) सिर्फ 0.01 था, लेकिन उन्होंने चार बड़े मौके बनाए जिसमें से दो गोल में तब्दील हुए।
अब ड्रिब्लिंग नहीं, दिमागी कौशल से जीतते हैं मैच
एक दौर था जब मेसी अपनी रफ्तार और ड्रिब्लिंग के दम पर अकेले ही कई डिफेंडरों को छका देते थे। आज उनकी ड्रिब्लिंग का तरीका और मकसद बदल चुका है। अब वे ड्रिब्लिंग करके विरोधी खिलाड़ियों को अपनी तरफ खींचते हैं, ताकि उनके साथी खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का खुला मौका मिल सके।
इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 11 में से 9 सफल ड्रिब्लिंग कीं, लेकिन इनका उद्देश्य खुद गोल करना नहीं बल्कि विपक्षी टीम के डिफेंस के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करना था। यही उनका हाई फुटबॉल आईक्यू (IQ) दर्शाता है।
अनुभव और युवा जोश का शानदार तालमेल
आज के मेसी बार्सिलोना के उस युवा खिलाड़ी से काफी अलग हैं जो सिर्फ अपनी रफ्तार से दुनिया को हैरान करता था। अब वे हर हमले में बेवजह ऊर्जा बर्बाद नहीं करते, बल्कि सही मौके का इंतजार करते हैं और निर्णायक पलों में मैच का रुख मोड़ देते हैं।
कोच लियोनल स्कालोनी ने भी टीम को इसी रणनीति के तहत ढाला है। एलेक्सिस मैक एलिस्टर, एंजो फर्नांडीज, रोड्रिगो डी पॉल और जूलियन अल्वारेज जैसे युवा खिलाड़ी मैदान पर लगातार दौड़-भाग करते हैं, जिससे मेसी अपनी ऊर्जा बचाकर सही समय पर कमान संभाल सकें। इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने पूरे 120 मिनट मैदान पर बिताए। इस मैच के साथ ही विश्व कप के इतिहास में उनके असिस्ट की संख्या रिकॉर्ड 12 हो गई है, जबकि छह विश्व कप में उनके कुल 21 गोल उनकी महानता की गवाही देते हैं।
फाइनल में स्पेन की युवा ब्रिगेड से महामुकाबला
इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब फाइनल में अर्जेंटीना का सामना स्पेन की मजबूत चुनौती से होगा। एक तरफ पिछले दो दशकों से फुटबॉल की दुनिया पर राज करने वाले मेसी होंगे, तो दूसरी तरफ स्पेन की नई पीढ़ी के उभरते सितारे लामिन यामाल, पाउ कुबार्सी और दानी ओल्मो होंगे। इंग्लैंड के खिलाफ इस मैच ने साबित कर दिया है कि मेसी को एक घंटे तक रोक लेना ही काफी नहीं है, उन्हें जैसे ही थोड़ा सा भी मौका मिलेगा, वे अपने अनुभव से पूरे मैच की कहानी बदल देंगे। अब देखना होगा कि स्पेन का मिडफील्ड उन्हें रोक पाता है या मेसी एक बार फिर इतिहास रचते हैं।
आखिरी मिनटों में पलटा मैच, इंग्लैंड की हार पर टुकेल की रणनीति सवालों के घेरे में
16 Jul, 2026 09:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फुटबॉल के दिग्गज लियोनल मेसी पर उंगली उठाने वालों को एक बार फिर करारा जवाब मिला है। 39 वर्ष की उम्र में भी अर्जेंटीना के इस करिश्माई कप्तान ने यह साबित कर दिया कि महान खिलाड़ी सिर्फ स्कोरशीट पर नाम दर्ज कराने के लिए नहीं, बल्कि बड़े मैचों का रुख पलटने के लिए जाने जाते हैं। फीफा विश्व कप 2026 के इस रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ भले ही मेसी के पैर से गोल न निकला हो, लेकिन उनके दो जादुई पास (असिस्ट) की बदौलत अर्जेंटीना ने 2-1 से शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के साथ अर्जेंटीना ने लगातार दूसरी और मेसी की अगुआई में तीसरी बार विश्व कप के फाइनल का टिकट पक्का कर लिया है। हालांकि, यह मुकाबला जितना मेसी की सूझबूझ का था, उतना ही इंग्लैंड के कोच थॉमस टुकेल की उस रणनीतिक भूल का भी गवाह बना जिसने जीती हुई बाजी को हार में बदल दिया।
55 मिनट तक इंग्लैंड का दबदबा, फिर पलटी बाजी
मैच की शुरुआत से ही इंग्लिश टीम ने अपनी रफ्तार और आक्रामक रुख से लातिनी अमेरिकी चैंपियन अर्जेंटीना को बैकफुट पर रखा। शुरुआती हाफ में दोनों ही टीमों ने एक-दूसरे के डिफेंस को कड़ी टक्कर दी, जिससे मुकाबला काफी शारीरिक और संघर्षपूर्ण नजर आया। मैच के 55वें मिनट में मॉर्गन रोजर्स के बेहतरीन क्रॉस को एंथनी गॉर्डन ने गोल में तब्दील कर इंग्लैंड को 1-0 की बढ़त दिला दी। उस पल ऐसा लग रहा था कि थॉमस टुकेल की रणनीति कामयाब हो गई है और इंग्लैंड फाइनल की तरफ बढ़ रहा है। अर्जेंटीना बेहद दबाव में था क्योंकि उसके मुख्य डिफेंडर लिसांद्रो मार्टिनेज और क्रिस्टियन रोमेरो पहले ही यलो कार्ड पा चुके थे।
कोच टुकेल की वह रक्षात्मक भूल जो भारी पड़ी
बढ़त हासिल करने के बाद इंग्लैंड ने अपना आक्रामक खेल जारी रखने के बजाय जरूरत से ज्यादा रक्षात्मक रवैया अपना लिया, जो उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई। कोच टुकेल ने 72वें मिनट में गोल दागने वाले एंथनी गॉर्डन को मैदान से बाहर बुलाकर डिफेंडर एज्री कॉन्सा को उतार दिया और टीम पांच डिफेंडरों के साथ खेलने लगी। इसके बाद 82वें मिनट में उन्होंने रीस जेम्स और डेक्लान राइस जैसे प्रमुख खिलाड़ियों को हटाकर डैन बर्न और निको ओ'राइली को मौका दिया। इन बदलावों ने साफ कर दिया कि इंग्लैंड अब अंतर बढ़ाने के मूड में नहीं है, बल्कि सिर्फ स्कोर को बचाने की कोशिश कर रहा है।
मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना का पलटवार
जैसे ही इंग्लिश टीम ने अपने कदम पीछे खींचे, अर्जेंटीना ने मैदान और गेंद पर पूरी तरह से नियंत्रण बना लिया। मेसी ने हर एक मूव की कमान अपने हाथों में ली। उन्होंने किसी तरह की जल्दबाजी दिखाने के बजाय धैर्यपूर्वक मौके बनाए और विरोधी टीम के डिफेंस को छकाया। 85वें मिनट में मेसी ने दाएं छोर से गेंद को अपने नियंत्रण में लिया। सबको लगा कि वह हमेशा की तरह अपने बाएं पैर से निशाना साधेंगे, लेकिन उन्होंने चतुराई से बाहर खड़े एंजो फर्नांडीज की तरफ पास बढ़ा दिया। फर्नांडीज ने बिना कोई गलती किए बॉक्स के बाहर से एक दमदार शॉट दागकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया।
इंजरी टाइम का रोमांच और लौटारो का हेडर
बराबरी का गोल होते ही अर्जेंटीना के हौसले बुलंद हो गए और ब्रिटिश टीम दबाव में बिखरने लगी। अतिरिक्त समय (स्टॉपेज टाइम) के दूसरे मिनट में मेसी ने एक बार फिर अपना क्लास दिखाया। उन्होंने अपने कमजोर माने जाने वाले दाएं पैर से एक बेहद सटीक क्रॉस डाला। इंग्लैंड के डिफेंडर जॉन स्टोन्स मार्किंग करने में चूक गए और लौटारो मार्टिनेज ने शानदार हेडर के जरिए गेंद को जाल में भेजकर अर्जेंटीना को 2-1 की चमत्कारी जीत दिला दी। आंकड़ों की मानें तो इंग्लैंड के गोल करने के बाद से लेकर मैच खत्म होने तक ब्रिटिश टीम के पास केवल 12 फीसदी बॉल पजेशन रहा, जबकि अर्जेंटीना ने 88 फीसदी समय तक गेंद को अपने कब्जे में रखा।
दिग्गजों ने माना रणनीति में हुई चूक
टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले मेसी की उम्र को लेकर कई सवाल खड़े किए जा रहे थे, लेकिन उन्होंने इस मुकाबले में 9 सफल ड्रिब्लिंग और 2 असिस्ट देकर सबका मुंह बंद कर दिया। वह लगातार 13 अंतरराष्ट्रीय मैचों से गोल या असिस्ट में योगदान दे रहे हैं। मैच के बाद इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन ने भी अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा, 'बढ़त मिलते ही हम सिर्फ मैच बचाने में लग गए, जो इस स्तर पर काफी नहीं होता।' वहीं पूर्व दिग्गज वेन रूनी ने भी कोच टुकेल के इन रक्षात्मक बदलावों की कड़ी आलोचना की।
फाइनल में स्पेन की युवा सेना से होगी भिड़ंत
अब खिताब के महामुकाबले में अर्जेंटीना का सामना स्पेन से होगा। एक तरफ जहां 39 साल के मेसी अपने करियर का एक और विश्व कप जीतकर इतिहास को और सुनहरा करना चाहेंगे, वहीं दूसरी तरफ स्पेन की युवा और ऊर्जावान टीम होगी जिसकी कमान लामिन यमाल जैसे युवा सितारों के हाथों में है। इस मैच ने साफ कर दिया है कि मेसी को पूरे 90 मिनट तक रोक पाना असंभव है।
फाइनल का टिकट कौन दिलाएगा? इंग्लैंड-अर्जेंटीना मुकाबले के 6 सबसे बड़े मैच विनर
15 Jul, 2026 03:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फीफा विश्व कप 2026 का दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला केवल दो शक्तिशाली देशों की जंग नहीं है, बल्कि यह आधुनिक फुटबॉल के सबसे बड़े सितारों का एक महासंग्राम बनने जा रहा है। अटलांटा के भव्य मैदान पर होने वाले इस हाई-वोल्टेज मैच में लियोनल मेसी, जूड बेलिंगहम और हैरी केन जैसे वैश्विक सुपरस्टार्स अपनी चमक बिखेरेंगे। पूरे 24 साल के लंबे अंतराल के बाद ये दोनों पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण में एक-दूसरे के आमने-सामने आ रहे हैं। इस ऐतिहासिक रात में फाइनल का टिकट कौन सी टीम कटाएगी, इसका फैसला इन 6 प्रमुख खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन और रणनीतियों पर काफी हद तक निर्भर करेगा:
जूड बेलिंगहम: इंग्लैंड के सबसे भरोसेमंद मैच विनर
रियल मैड्रिड की तरफ से खेलने वाले स्टार मिडफील्डर जूड बेलिंघम इस विश्व कप में इंग्लैंड की सबसे मजबूत रीढ़ साबित हुए हैं। टूर्नामेंट में अब तक उन्होंने कुल 574 मिनट मैदान पर बिताए हैं, जिसमें उनके नाम 6 शानदार गोल और 1 असिस्ट दर्ज है। बेलिंघम ने क्वार्टर फाइनल के बेहद दबाव वाले मैच में नॉर्वे के खिलाफ दो गोल दागकर अपनी टीम को सेमीफाइनल का टिकट दिलाया था। इससे पहले प्री-क्वार्टर फाइनल में मेक्सिको के खिलाफ भी उन्होंने दो गोल किए थे। नॉकआउट के लगातार दो मैचों में दो-दो गोल करने का यह ऐतिहासिक कारनामा कर वे साल 1986 में महान डिएगो माराडोना के बनाए रिकॉर्ड के बाद ऐसा करने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बने हैं।
हैरी केन: पूर्व गोल्डन बूट विजेता की नजर अब वर्ल्ड कप फाइनल पर
इंग्लैंड के कप्तान और साल 2018 के रूस विश्व कप में गोल्डन बूट का खिताब जीतने वाले हैरी केन एक बार फिर अपनी घातक फॉर्म में लौट चुके हैं। उन्होंने इस सीजन में अब तक 627 मिनट खेलते हुए 6 गोल दागे हैं और 1 गोल करने में मदद (असिस्ट) की है। केन ने क्रोएशिया और कांगो डीआर जैसी टीमों के खिलाफ मैदान पर अपना दबदबा दिखाते हुए दो-दो गोल दागे थे। हालांकि नॉर्वे के खिलाफ वे कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सके थे, लेकिन अटलांटा के इसी मैदान पर उनका पिछला रिकॉर्ड शानदार रहा है। ऐसे में अर्जेंटीना के डिफेंडरों के लिए केन को रोकना सबसे मुश्किल काम होने वाला है।
एंथनी गॉर्डन: बिना कोई गोल किए भी विरोधी डिफेंस के लिए बड़ा खतरा
बार्सिलोना क्लब के युवा और फुर्तीले विंगर एंथनी गॉर्डन ने भले ही इस विश्व कप में व्यक्तिगत रूप से कोई गोल न किया हो, लेकिन इंग्लैंड के आक्रामक चक्रव्यूह में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। गॉर्डन ने अब तक मैदान पर 327 मिनट बिताए हैं और टीम के लिए 3 महत्वपूर्ण असिस्ट किए हैं। नॉर्वे के खिलाफ मैच में बेलिंघम के पहले गोल की पटकथा गॉर्डन ने ही लिखी थी, जबकि मेक्सिको के खिलाफ टीम को पेनल्टी दिलाने में भी उनका बड़ा योगदान था। उनकी बिजली जैसी रफ्तार और खतरनाक ड्रिब्लिंग स्किल्स अर्जेंटीना की रक्षापंक्ति को संकट में डाल सकती हैं।
लियोनल मेसी: अर्जेंटीना को लगातार दूसरी बार चैंपियन बनाने की इकलौती उम्मीद
डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना के करिश्माई कप्तान लियोनल मेसी एक बार फिर अपनी जादुई फॉर्म से दुनिया को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। इस विश्व कप में उन्होंने 608 मिनट के खेल में 8 गोल दागे हैं और 2 असिस्ट किए हैं, जिसके कारण वे गोल्डन बूट की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। मेसी ने टूर्नामेंट की शुरुआत में ही अल्जीरिया के खिलाफ एक शानदार हैट्रिक लगाई थी। अपने लंबे और ऐतिहासिक करियर में मेसी पहली बार विश्व कप के मंच पर इंग्लैंड की सीनियर टीम के खिलाफ खेलने उतरेंगे। उनका लक्ष्य डिएगो माराडोना की तरह इंग्लैंड को शिकस्त देकर अपनी टीम को लगातार दूसरे फाइनल में ले जाना होगा।
लौटारो मार्टिनेज: बेंच से मैदान पर उतरकर तख्तापलट करने वाले स्ट्राइकर
इंटर मिलान के खतरनाक स्ट्राइकर लाउतारो मार्टिनेज ने इस विश्व कप में सीमित मौकों के बावजूद 2 गोल और 1 असिस्ट अपने नाम किया है। उन्होंने अब तक कुल 347 मिनट ही मैदान पर गुजारे हैं। स्विट्जरलैंड के खिलाफ खेले गए क्वार्टर फाइनल मैच में अतिरिक्त समय (एक्स्ट्रा टाइम) के दौरान उन्होंने टीम के लिए तीसरा निर्णायक गोल दागकर अर्जेंटीना की जीत पर मुहर लगाई थी। भले ही पिछले दो मैचों में कोच ने उन्हें शुरुआती एकादश (प्लेइंग इलेवन) में शामिल न कर एक सब्स्टीट्यूट के रूप में उतारा हो, लेकिन मैदान पर आते ही गोल दागने की उनकी अद्भुत क्षमता इंग्लैंड के लिए बड़ा खतरा है।
एलेक्सिस मैक एलिस्टर: अर्जेंटीना के मिडफील्ड की सबसे मजबूत धुरी
लिवरपूल के स्टार मिडफील्डर एलेक्सिस मैक एलिस्टर को अर्जेंटीना के गेम-प्लान का असली इंजन माना जाता है। इस विश्व कप में उन्होंने 540 मिनट खेलते हुए 1 गोल और 1 असिस्ट किया है। स्विट्जरलैंड के खिलाफ बड़े मैच में उन्होंने कप्तान मेसी के पास को बेहद खूबसूरती से गोल में तब्दील कर टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई थी। भले ही कागजों पर उनके आंकड़े बहुत विशाल न दिखें, लेकिन मैदान पर डिफेंस लाइन और फॉरवर्ड लाइन के बीच तालमेल बिठाने में उनका कोई सानी नहीं है। इसके अलावा, प्रीमियर लीग में खेलने का उनका लंबा अनुभव इंग्लैंड की रणनीति को समझने में उनके बेहद काम आएगा।
सुपरस्टार्स की भिड़ंत: इतिहास रचने के मुहाने पर खड़ी हैं दोनों टीमें
इंग्लैंड और अर्जेंटीना दोनों ही टीमों के पास ऐसे मैच-विनर खिलाड़ी मौजूद हैं जो चंद सेकंड में पूरे खेल का पासा पलटने का माद्दा रखते हैं। एक तरफ जहाँ जूड बेलिंगहम और हैरी केन अपनी युवा सेना के साथ इंग्लैंड को साल 1966 के बाद पहली बार विश्व कप के फाइनल में पहुँचाने का 60 साल पुराना सपना पूरा करना चाहेंगे, वहीं दूसरी तरफ लियोनल मेसी अपनी अंतिम हुंकार के साथ अर्जेंटीना को लगातार दूसरी बार विश्व विजेता बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। अटलांटा स्टेडियम में होने वाला यह महामुकाबला आधुनिक फुटबॉल के दो अलग-अलग दर्शन और सितारों की एक ऐतिहासिक जंग के रूप में याद रखा जाएगा।
माइटी स्पेन की शानदार एंट्री, अब फाइनल की दूसरी सीट पर इंग्लैंड-अर्जेंटीना की नजर
15 Jul, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फीफा विश्व कप 2026 के पहले सेमीफाइनल मुकाबले में फुटबॉल की दो महाशक्तियों के बीच हुए कांटे के संघर्ष में स्पेन ने बाजी मार ली है। डलास स्टेडियम में खेले गए इस बेहद रोमांचक मैच में स्पेन ने फ्रांस को 2-0 से शिकस्त देकर पूरे 16 साल के लंबे सूखे के बाद विश्व कप के फाइनल का टिकट कटा लिया है। साल 2010 में पहली बार विश्व चैंपियन का खिताब अपने नाम करने वाली स्पेनिश टीम अब इतिहास में दूसरी बार चमचमाती ट्रॉफी उठाने से महज एक कदम की दूरी पर है। इस शानदार जीत के बाद अब खेल प्रेमियों की नजरें दूसरे सेमीफाइनल पर टिक गई हैं, जहाँ मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच भिड़ंत होगी। इस मुकाबले की विजेता टीम 20 जुलाई को फाइनल में स्पेन से लोहा लेगी।
स्पेन की आक्रामक रणनीति के आगे बेबस नजर आई फ्रांस की टीम, ओयारजाबाल और पोरो ने दागे शानदार गोल
मुकाबले की शुरुआत में फ्रांस की टीम को जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन मैदान पर उतरते ही स्पेनिश खिलाड़ियों ने खेल की दिशा बदल दी। स्पेन ने गेंद पर अपना शानदार नियंत्रण बनाए रखा और फ्रांस की अग्रिम पंक्ति को खुलकर खेलने का कोई मौका नहीं दिया।
मैच के 22वें मिनट में लामिन यामाल को फ्रांस के रक्षात्मक क्षेत्र (बॉक्स) के भीतर फाउल का शिकार होना पड़ा, जिस पर स्पेन को पेनल्टी मिली। मिकेल ओयारजाबाल ने इस सुनहरे अवसर को गोल में तब्दील कर अपनी टीम को 1-0 की शुरुआती बढ़त दिला दी। इसके बाद दूसरे हाफ के 58वें मिनट में खेल को और मजबूत करते हुए डानी ओल्मो के सटीक पास पर पेड्रो पोरो ने एक बेहतरीन फिनिश के साथ गेंद को गोल पोस्ट के निचले कोने में डाल दिया, जिससे स्पेन की बढ़त 2-0 हो गई। दो गोल से पिछड़ने के बाद फ्रांस ने आक्रामक रुख अपनाकर वापसी की बहुत कोशिश की, लेकिन स्पेन की दीवार जैसी रक्षापंक्ति और गोलकीपर उनाई सिमोन की मुस्तैदी के आगे उनकी एक न चली।
कुकुरेला के चक्रव्यूह में फंसे स्टार स्ट्राइकर किलियन एमबाप्पे, खिताब बचाने का फ्रांस का सपना टूटा
फ्रांस के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी और कप्तान किलियन एमबाप्पे ने अपनी रफ्तार के दम पर कई बार काउंटर अटैक कर स्पेनिश पाले में खौफ पैदा करने की कोशिश की, लेकिन स्पेन के डिफेंडरों ने उनके खिलाफ बेहद सख्त घेराबंदी कर रखी थी। विशेष रूप से डिफेंडर मार्क कुकुरेला ने एमबाप्पे के खिलाफ कुछ बेहद महत्वपूर्ण टैकल किए, जिसने फ्रांसीसी कप्तान की हर उम्मीद पर पानी फेर दिया।
इसके साथ ही स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन ने भी अपनी भूमिका को शानदार ढंग से निभाया। रेफरी की अंतिम सीटी बजते ही जहां स्पेनिश खेमे में जश्न का माहौल बन गया, वहीं फ्रांस का लगातार दूसरी बार विश्व कप जीतने का गौरवशाली सफर यहीं समाप्त हो गया। अब फ्रांस को सांत्वना स्वरूप तीसरे स्थान के मुकाबले में अपनी किस्मत आजमानी होगी।
अभेद्य डिफेंस बना स्पेन की असली ताकत, टूर्नामेंट के 7 मैचों में दर्ज की 6 क्लीन शीट
स्पेन की टीम ने इससे पहले साल 2010 के विश्व कप में फाइनल का सफर तय किया था, जहाँ उन्होंने नीदरलैंड को मात देकर पहली बार इतिहास रचा था। उस स्वर्णिम काल के बाद स्पेनिश टीम कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी थी, लेकिन इस बार टीम ने एक बिल्कुल नए जज्बे के साथ फाइनल में जगह बनाई है।
इस पूरे टूर्नामेंट में स्पेन की सबसे बड़ी ताकत उसकी चट्टान जैसी मजबूत रक्षापंक्ति (डिफेंस) साबित हुई है। अब तक खेले गए 7 मुकाबलों में स्पेनिश टीम ने रिकॉर्ड 6 बार विपक्षी टीमों को एक भी गोल नहीं करने दिया (क्लीन शीट रखी) है और पूरे विश्व कप के दौरान विरोधी टीमें उनके खिलाफ केवल 2 गोल ही दाग पाई हैं।
अटलांटा: आज रात इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच महामुकाबला, मेसी और हैरी केन के बीच होगी खिताबी जंग
फीफा विश्व कप का दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला अटलांटा स्टेडियम में खेला जाएगा, जहाँ एक तरफ महान खिलाड़ी लियोनल मेसी की अगुआई वाली मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना की टीम अपने खिताब को बचाने के इरादे से उतरेगी, वहीं दूसरी तरफ इंग्लैंड की टीम अपने इतिहास के दूसरे विश्व कप फाइनल टिकट की तलाश में होगी।
इंग्लैंड ने इस पूरे टूर्नामेंट में बेहद जुझारू खेल दिखाया है और नॉकआउट चरणों में कांगो डीआर, मेक्सिको और नॉर्वे जैसी बेहद कठिन टीमों को शिकस्त देकर यहां तक का सफर तय किया है। इंग्लिश टीम के कप्तान हैरी केन और मिडफील्डर जूड बेलिंघम इस समय अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में चल रहे हैं। दूसरी ओर, अर्जेंटीना के लिए लियोनल मेसी लगातार रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में स्विट्जरलैंड के खिलाफ अतिरिक्त समय (एक्स्ट्रा टाइम) में टीम को एक यादगार जीत दिलाई थी और वे लगातार दूसरी बार अपनी टीम को फाइनल में पहुंचाने के लिए पूरा जोर लगाएंगे।
खिताबी जंग का मंच तैयार: विजेता टीम न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी में स्पेन से करेगी दो-दो हाथ
एक तरफ तकनीकी रूप से बेहद सुदृढ़ और संतुलित नजर आ रही इंग्लैंड की युवा टीम है, तो दूसरी तरफ बड़े और दबाव वाले नॉकआउट मैचों का अपार अनुभव रखने वाली अर्जेंटीना की अनुभवी सेना। फुटबॉल के जानकार इस भिड़ंत को इस दशक के सबसे बड़े मुकाबलों में से एक मान रहे हैं। आज रात जो भी टीम इस महामुकाबले को जीतने में सफल रहेगी, वह सीधे न्यू जर्सी के भव्य स्टेडियम में रविवार को स्पेन के खिलाफ विश्व चैंपियन बनने के अंतिम महासंग्राम में उतरेगी।
स्पेन का फाइनल प्रतिद्वंद्वी कौन? इंग्लैंड-अर्जेंटीना मुकाबले पर टिकी दुनिया की नजर
15 Jul, 2026 12:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
स्पेन की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने फीफा विश्व कप 2026 के पहले सेमीफाइनल मुकाबले में दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में से एक फ्रांस को 2-0 से शिकस्त देकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। इस धमाकेदार जीत के साथ ही स्पेनिश टीम ने पूरे 16 साल के लंबे अंतराल के बाद विश्व कप के खिताबी मुकाबले (फाइनल) में कदम रखा है। अमेरिका के डलास स्टेडियम में खेले गए इस ब्लॉकबस्टर मैच में मिकेल ओयारजाबाल और पेड्रो पोरो द्वारा दागे गए दो शानदार गोलों की मदद से स्पेन ने मैच के पहले मिनट से लेकर आखिरी सीटी बजने तक खेल पर अपना पूर्ण नियंत्रण बनाए रखा। मुकाबले के बाद जहाँ स्पेन के मुख्य कोच लुइस डे ला फुएंते ने टीम की एकजुटता को इस ऐतिहासिक सफलता का मुख्य श्रेय दिया, वहीं फ्रांस के रणनीतिकार डिडिएर डेशॉ ने बेहद निराशा के साथ स्वीकार किया कि उनकी टीम आज अपने वास्तविक स्तर का खेल दिखाने में पूरी तरह नाकाम रही।
स्पेनिश कोच फुएंते का बड़ा बयान: किसी एक स्टार का जादू नहीं, बल्कि 4 साल की सामूहिक तपस्या का परिणाम है यह जीत
मैच की समाप्ति के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पेन के मुख्य कोच लुइस डे ला फुएंते भावुक और बेहद गौरवान्वित नजर आए। उन्होंने कहा कि यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि टीम पिछले चार सालों से एक बेहद स्पष्ट रोडमैप और दूरगामी योजना पर काम कर रही थी, जिसका बेहतरीन नतीजा आज पूरी दुनिया के सामने है। उन्होंने कहा, "हमने करीब चार साल पहले स्पेनिश फुटबॉल को एक नई दिशा देने की सोच के साथ काम शुरू किया था और हर मुश्किल दौर में अपनी इस रणनीति पर पूरा भरोसा बनाए रखा। आज हमारा सामना दुनिया की सबसे आक्रामक टीम फ्रांस से था, लेकिन उनके सामने आज दुनिया की सबसे सर्वश्रेष्ठ और अनुशासित टीम खड़ी थी। हमारे खिलाड़ियों ने मैदान पर अपनी कड़ी मेहनत, अटूट समर्पण और अद्भुत प्रतिभा का बेजोड़ परिचय दिया है।"
अद्भुत टीमवर्क: मैच न खेलने वाले खिलाड़ी भी रात को मैदान पर बहाते रहे पसीना, किंग फेलिप ने फोन पर दी बधाई
स्पेनिश कोच ने टीम के अंदरूनी माहौल का खुलासा करते हुए बताया कि उनकी टीम की असली ताकत किसी एक बड़े खिलाड़ी की चमक नहीं, बल्कि पूरा ग्रुप (टीमवर्क) है। उन्होंने एक बेहद दिलचस्प बात साझा करते हुए बताया, "हमारी टीम में 2010 के विश्व कप जैसा ही जीतने का जूनून और अटूट विश्वास वापस लौट आया है। खिलाड़ियों के जज्बे का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि जिन खिलाड़ियों को सेमीफाइनल के मुख्य ग्यारह (प्लेइंग इलेवन) में खेलने का मौका नहीं मिला, वे भी मैच खत्म होने के बाद देर रात तक मैदान पर रुके रहे और पसीना बहाते हुए अभ्यास करते रहे। यही हमारी टीम की असली पहचान है।"
फ्रांस के सबसे खतरनाक स्ट्राइकर किलियन एमबाप्पे को पूरे 90 मिनट तक बांधे रखने और कोई गोल न करने देने पर फुएंते ने कहा कि उन्होंने बेहद कड़े अनुशासन और टीमवर्क के दम पर फ्रांस के हर बड़े अटैक को नाकाम किया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस ऐतिहासिक जीत के तुरंत बाद स्पेन के राजा फेलिप षष्ठम ने ड्रेसिंग रूम में सीधे फोन कर पूरी टीम को इस गौरवपूर्ण पल की बधाई दी। हालांकि, कोच ने खिलाड़ियों को आगाह करते हुए कहा, "हमने फाइनल में पहुंचकर एक बहुत बड़ा कदम जरूर उठाया है, लेकिन सबसे कठिन और आखिरी चुनौती अभी बाकी है। हमारा अंतिम सपना सिर्फ फाइनल खेलना नहीं, बल्कि विश्व कप की सुनहरी ट्रॉफी उठाकर अपने देश ले जाना है।"
फ्रांसीसी कोच डिडिएर डेशॉ ने कबूली अपनी नाकामी: तकनीकी गलतियों और खराब आक्रामकता के कारण हारे मैच
दूसरी ओर, इस करारी हार के बाद फ्रांस के मुख्य कोच डिडिएर डेशॉ ने बिना किसी बहानेबाजी के खुले तौर पर यह स्वीकार किया कि उनकी टीम तकनीकी और आक्रामक दोनों ही मोर्चों पर स्पेनिश डिफेंस के सामने पूरी तरह पस्त नजर आई। उन्होंने बेहद मायूसी के साथ कहा, "जाहिर तौर पर इस तरह विश्व कप से बाहर होना हमारे लिए बेहद निराशाजनक है। हमारा एकमात्र लक्ष्य फाइनल का टिकट कटाना था, लेकिन हमें पूरी ईमानदारी से यह मानना होगा कि स्पेन ने आज हमसे बहुत बेहतर फुटबॉल खेला और पूरे मैच को अपने इशारों पर नचाया। ड्रेसिंग रूम में सभी खिलाड़ी बेहद दुखी और निराश हैं क्योंकि देश को हमसे बहुत ज्यादा उम्मीदें थीं। आज हम तकनीकी रूप से अपने सामान्य खेल के स्तर से काफी नीचे नजर आए।"
डेशॉ ने आगे कहा कि फ्रांस की खुद की गलतियों ने स्पेन को मैच में हावी होने का पूरा मौका दिया। उन्होंने कहा, "यह मुख्य रूप से हमारी रणनीतिक विफलता है। हम फॉरवर्ड लाइन में उतने खतरनाक और आक्रामक साबित नहीं हो सके जितने हम आमतौर पर होते हैं। हमने मिडफील्ड और पासिंग में कुछ ऐसी तकनीकी गलतियां कीं, जिससे गोल करने के जो मौके बन सकते थे, वे हाथ से निकल गए। हमने आज वह फुटबॉल नहीं खेला जिसके लिए फ्रांस जाना जाता है और हमें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी।"
स्पेनिश चक्रव्यूह में फंसे किलियन एमबाप्पे, सालिबा की चोट ने तोड़ी फ्रांस की कमर
फ्रांसीसी कोच ने मैच के बाद स्पेन की रक्षापंक्ति (डिफेंस) की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने माना कि स्पेनिश डिफेंडर्स ने उनके सबसे बड़े स्टार खिलाड़ी किलियन एमबाप्पे को पूरे मैच के दौरान एक इंच की भी अतिरिक्त जगह नहीं दी और उन्हें पूरी तरह बांधकर रखा। उन्होंने कहा, "स्पेन का डिफेंस आज अभेद्य किले की तरह था, जिसके कारण हम गोल करने का कोई सही समाधान नहीं ढूंढ सके।" इसके अलावा, मैच के दौरान फ्रांस को एक बड़ा झटका तब लगा जब उनके स्टार डिफेंडर विलियम सालिबा खेल के बीच में ही चोटिल (इंजर्ड) होकर मैदान से बाहर हो गए। हालांकि डेशॉ ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि वे खिलाड़ी के स्वास्थ्य के साथ कोई बड़ा जोखिम नहीं उठाना चाहते थे, इसलिए उन्हें तुरंत सब्स्टीट्यूट करने का फैसला लिया गया।
19 जुलाई को होगा खिताबी महासंग्राम, फ्रांस को अब खेलना होगा तीसरे स्थान का मुकाबला
इस सेमीफाइनल के नतीजों के बाद अब दोनों टीमों का सफर बिल्कुल अलग-अलग दिशाओं में मुड़ गया है। विजेता स्पेन की टीम अब सीधे 19 जुलाई 2026 को होने वाले फीफा विश्व कप के भव्य फाइनल मुकाबले में उतरेगी, जहाँ उसका सामना इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा। वहीं दूसरी ओर, खिताब की रेस से बाहर हो चुकी फ्रांस की टीम को अब टूर्नामेंट में तीसरे स्थान (ब्रॉन्ज मेडल) के लिए होने वाले सांत्वना मैच में अपनी किस्मत आजमानी होगी। मैच के बाद जब डिडिएर डेशॉ से उनके कोच पद के भविष्य को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस वक्त टीम की हार के गम को स्वीकार करना और स्पेन को उनके बेहतरीन खेल के लिए बधाई देना ही सबसे सही कदम है।
सेमीफाइनल से पहले फाउलर का बड़ा बयान, गुएही ने टीम पर डाला जीत का दबाव
15 Jul, 2026 12:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फीफा विश्व कप 2026 का दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला फुटबॉल जगत के इतिहास का एक यादगार पन्ना बनने जा रहा है, जहाँ दुनिया की दो सबसे बड़ी फुटबॉल टीमें—इंग्लैंड और अर्जेंटीना—फाइनल के टिकट के लिए एक-दूसरे के सामने होंगी। इस ऐतिहासिक महामुकाबले की सीटी बजने से पहले ही दोनों खेमों के बीच जुबानी जंग और रणनीतिक बयानबाजी का दौर बेहद तेज हो गया है। इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज स्ट्राइकर रॉबी फाउलर ने जहाँ इस मैच के परिणाम के लिए मिडफील्ड (मैदान के मध्य भाग) के नियंत्रण को सबसे महत्वपूर्ण वजह बताया है, वहीं इंग्लिश टीम के स्टार डिफेंडर मार्क गुएही का दावा है कि गत चैंपियन होने के नाते मैदान पर असली मानसिक दबाव अर्जेंटीना की टीम पर होने वाला है।
रॉबी फाउलर का दावा: सितारों की चमक नहीं, बल्कि मिडफील्ड की जंग तय करेगी मैच का भाग्य
लिवरपूल के पूर्व स्टार स्ट्राइकर रॉबी फाउलर का मानना है कि यह मुकाबला केवल व्यक्तिगत स्टार खिलाड़ियों के हुनर का नहीं होगा, बल्कि जो टीम मैदान के बीचों-बीच (मिडफील्ड) अपना दबदबा बनाएगी, जीत उसी की झोली में जाएगी।
उन्होंने तकनीकी विश्लेषण करते हुए कहा, "इस नॉकआउट मैच का अंतिम परिणाम काफी हद तक मिडफील्ड में बॉल पजेशन (गेंद पर नियंत्रण) की लड़ाई पर तय होगा। अर्जेंटीना की रणनीति हमेशा गेंद को अपने पास रखकर खेल की गति को नियंत्रित करने की होती है। ऐसे में इंग्लैंड के खिलाड़ियों को बेहद अनुशासित डिफेंसिव खेल दिखाना होगा और विपक्षी टीम के दबाव में आकर जरूरत से ज्यादा पीछे हटने की गलती से बचना होगा।" फाउलर के अनुसार, अर्जेंटीना के पास एलेक्सिस मैक एलिस्टर, एंजो फर्नांडीज और रोड्रिगो डी पॉल जैसी मजबूत तिकड़ी है, जिसका सीधा मुकाबला इंग्लैंड के जूड बेलिंघम की अगुआई वाले आक्रामक मिडफील्ड से होगा।
डिएगो माराडोना के 'हैंड ऑफ गॉड' से लेकर बेकहम के रेड कार्ड तक: ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता का नया अध्याय
पूर्व फुटबॉलर फाउलर ने मैच की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच की भिड़ंत महज 90 मिनट का कोई आम फुटबॉल मैच नहीं है, बल्कि इसके साथ दोनों देशों का दशकों पुराना और बेहद जज्बाती इतिहास जुड़ा हुआ है। उन्होंने साल 1986 के विश्व कप में महान डिएगो माराडोना के ऐतिहासिक 'हैंड ऑफ गॉड' गोल, 1998 में डेविड बेकहम को मिले विवादास्पद रेड कार्ड और फिर 2002 में बेकहम की शानदार पेनल्टी से इंग्लैंड को मिली ऐतिहासिक जीत जैसे अविस्मरणीय पलों को याद किया। उन्होंने कहा कि ऐसे बड़े मुकाबले खिलाड़ियों को इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर होने का सुनहरा मौका देते हैं।
फाउलर ने आगे कहा, "इस स्तर पर सभी टीमों का तकनीकी स्तर लगभग बराबर होता है, इसलिए जीत और हार का फैसला केवल खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती और दबाव झेलने की क्षमता (माइंडसेट) से ही तय होता है।"
डिफेंडर मार्क गुएही की हुंकार: विश्व चैंपियन होने के कारण सारा दबाव अर्जेंटीना पर
इंग्लैंड के रक्षात्मक स्तंभ (डिफेंडर) मार्क गुएही ने मैच से पहले विपक्षी टीम पर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की है। उनका मानना है कि सेमीफाइनल जैसे बड़े मंच पर उनकी टीम पूरी तरह तनावमुक्त होकर उतरेगी, जबकि डिफेंडिंग चैंपियन होने के कारण अर्जेंटीना के ऊपर खिताब बचाने का भारी दबाव होगा। गुएही ने कहा, "दबाव पूरी तरह से अर्जेंटीना पर है क्योंकि वे मौजूदा विश्व विजेता हैं। यह हमारे पूरे फुटबॉल करियर और हमारे जीवन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण मैच है। हम अपने देश के गौरव के लिए मैदान पर अपनी जान लड़ा देंगे और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे।"
इंग्लैंड को अपनी आक्रामक फ्रंट लाइन पर पूरा भरोसा: नोनी माडुएके और बुकायो साका
इंग्लैंड के विंगर नोनी माडुएके ने टीम की रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि वे प्रतिद्वंद्वी टीम के नाम या इतिहास को देखने के बजाय पूरी तरह से अपनी ताकत पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हमारे ड्रेसिंग रूम में ऐसे मैच-विनर खिलाड़ी मौजूद हैं जो किसी भी क्षण पासा पलट सकते हैं। हमने विपक्षी टीम के बारे में ज्यादा सोचने के बजाय अपने गेम प्लान को मजबूत करने पर काम किया है।"
वहीं, टीम के स्टार विंगर बुकायो साका ने भी अपनी फॉरवर्ड लाइन (आक्रमण पंक्ति) का बचाव करते हुए कहा, "फुटबॉल का खेल चंद जादुई पलों का होता है। हमारा मुख्य फोकस अपनी नेट में गोल होने से रोकना है, क्योंकि हमें पूरा भरोसा है कि हमारी फ्रंट लाइन का कोई न कोई खिलाड़ी अंत में कोई जादुई मूव बनाकर हमें मैच जिता देगा।"
कोच थॉमस टुकेल के सामने इतिहास रचने की चुनौती, लियोनल मेसी रोकेंगे रास्ता
इंग्लैंड के मुख्य कोच थॉमस टुकेल के पास भी इस महामुकाबले के जरिए फुटबॉल इतिहास के विशिष्ट क्लब में शामिल होने का एक शानदार मौका है। यदि ब्रिटिश टीम फाइनल में जगह बनाने में कामयाब रहती है, तो टुकेल दुनिया के उन चुनिंदा विदेशी कोचों की सूची में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने अपने मूल देश के अलावा किसी दूसरी राष्ट्रीय टीम को विश्व कप के फाइनल तक पहुँचाया है। हालांकि, उनके इस ऐतिहासिक सपने के बीच महान फुटबॉलर लियोनल मेसी की अगुआई वाली बेहद आक्रामक और संतुलित अर्जेंटीना की टीम एक अभेद्य दीवार बनकर खड़ी होगी, जो लगातार दूसरी बार विश्व कप ट्रॉफी उठाने के इरादे से मैदान में उतरेगी।
सेमीफाइनल में हार के बाद भी फ्रांस के लिए खुशखबरी, एमबाप्पे और डेशां ने बनाया इतिहास
15 Jul, 2026 08:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फीफा विश्व कप 2026 के पहले सेमीफाइनल मुकाबले में स्पेन के हाथों 2-0 से शिकस्त झेलने के बाद फ्रांस का लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरवशाली सपना भले ही चकनाचूर हो गया हो, लेकिन इस मैच के दौरान फ्रांसीसी फुटबॉल के दो सबसे बड़े दिग्गजों ने खेल इतिहास में एक नया मील का पत्थर स्थापित कर दिया है। टीम के कप्तान किलियन एमबाप्पे और मुख्य कोच डिडिएर डेशॉ ने इस मुकाबले में उतरते ही ऐसे विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिए हैं, जिसने हार के गम के बीच भी उन्हें वैश्विक खेल जगत की सुर्खियों में ला दिया है। अब फ्रांस का कारवां मियामी की ओर कूच करेगा, जहाँ शनिवार को तीसरे स्थान (कांस्य पदक) के लिए महामुकाबला खेला जाना है। भारतीय समयानुसार यह मैच 19 जुलाई 2026 को रात 12:30 बजे शुरू होगा।
किलियन एमबाप्पे बने फ्रांस के लिए सबसे ज्यादा वर्ल्ड कप मैच खेलने वाले 'किंग', महज 27 साल की उम्र में लोरिस को पछाड़ा
मेरिका के डलास स्टेडियम में स्पेन के खिलाफ जैसे ही फ्रांस की टीम राष्ट्रगान के लिए मैदान पर खड़ी हुई, कप्तान किलियन एमबाप्पे ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का 21वां विश्व कप मैच खेलकर एक अभूतपूर्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इस ऐतिहासिक उपस्थिति के साथ ही वे फ्रांस के फुटबॉल इतिहास में विश्व कप के मंच पर सबसे अधिक मुकाबले खेलने वाले इकलौते खिलाड़ी बन गए हैं।
एमबाप्पे ने इस मामले में अपने ही देश के पूर्व महान गोलकीपर और कप्तान ह्यूगो लोरिस के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया, जिन्होंने साल 2010 से 2022 के बीच फ्रांस के लिए 20 विश्व कप मैच खेले थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एमबाप्पे ने यह विशाल कीर्तिमान महज 27 साल की उम्र में ही हासिल कर लिया है, जिससे यह पूरी तरह साफ है कि आगामी विश्व कप आयोजनों में वे इस आंकड़े को एक ऐसे स्तर पर ले जाएंगे जहाँ पहुंचना किसी भी खिलाड़ी के लिए एक सपना होगा।
फ्रांस की तरफ से विश्व कप इतिहास में सर्वाधिक मैच खेलने वाले शीर्ष 10 खिलाड़ी
स्थान
खिलाड़ी का नाम
कुल विश्व कप मैच
1.
किलियन एमबाप्पे
21
2.
ह्यूगो लोरिस
20
3.
एंटोनी ग्रीजमैन
19
4.
ओलिवियर गिरूड
18
5.
राफेल वराने
18
6.
फेबियन बार्थेज
17
7.
थिएरी हेनरी
17
8.
लिलियन थुराम
16
9.
मैक्सिम बॉसिस
15
10.
मिशेल प्लातिनी
14
गोल्डन बूट की रेस में एमबाप्पे नंबर-1 पर बरकरार, मियामी में मेसी को पछाड़ने का आखिरी मौका
भले ही फ्रांस की टीम अब फाइनल की चमचमाती ट्रॉफी नहीं उठा पाएगी, लेकिन किलियन एमबाप्पे व्यक्तिगत रूप से टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ स्कोरर को मिलने वाले 'गोल्डन बूट' पुरस्कार को जीतने की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। इस टूर्नामेंट में अब तक एमबाप्पे के नाम 8 गोल और 3 असिस्ट (गोल करने में मदद) दर्ज हैं। हालांकि, अर्जेंटीना के महान कप्तान लियोनल मेसी भी 8 गोल दागकर उनके बराबर खड़े हैं, लेकिन मेसी के खाते में केवल 2 असिस्ट हैं, जिसके कारण एमबाप्पे तकनीकी रूप से पहले स्थान पर काबिज हैं।
इस सूची में नॉर्वे के आक्रामक स्ट्राइकर एर्लिंग हालैंड 7 गोल के साथ तीसरे पायदान पर हैं, जबकि इंग्लैंड के जूड बेलिंगहम और हैरी केन 6-6 गोल के साथ क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर बने हुए हैं। शनिवार को मियामी में होने वाले तीसरे स्थान के मैच में एमबाप्पे के पास कुछ और गोल दागकर इस सुनहरी ट्रॉफी पर अपना कब्जा पूरी तरह सुरक्षित करने का अंतिम मौका होगा।
फीफा विश्व कप 2026: गोल्डन बूट की ताजा अंकतालिका (सेमीफाइनल के बाद)
खिलाड़ी का नाम
देश
दागे गए गोल
कुल असिस्ट
किलियन एमबाप्पे
फ्रांस
8
3
लियोनल मेसी
अर्जेंटीना
8
2
एर्लिंग हालंद
नॉर्वे
7
0
जूड बेलिंगहम
इंग्लैंड
6
1
हैरी केन
इंग्लैंड
6
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रणनीतिकार डिडिएर डेशॉ का भी महा-रिकॉर्ड: जर्मनी के हेल्मुट शॉन की बराबरी की, अगले मैच में बनेंगे नंबर-1
स्पेन के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में टीम की कमान संभालते ही फ्रांस के मुख्य कोच डिडिएर डेशॉ ने भी विश्व फुटबॉल के कोचिंग इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा लिया है। बतौर मुख्य प्रशिक्षक (कोच) यह विश्व कप इतिहास में उनका 25वां मुकाबला था। इस मैच के साथ ही उन्होंने जर्मनी के दिग्गज फुटबॉल मैनेजर हेल्मुट शॉन के विश्व कप में सर्वाधिक मैचों में कोचिंग देने के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है।
वर्तमान में विश्व कप के इतिहास में सबसे ज्यादा मैचों में रणनीतिक कमान संभालने वाले प्रशिक्षकों की सर्वकालिक सूची में ये दोनों दिग्गज संयुक्त रूप से शीर्ष पर आ गए हैं। आगामी शनिवार को होने वाले मैच में डेशॉ जैसे ही मैदान पर उतरेंगे, यह उनके करियर का 26वां विश्व कप मैच होगा और वे जर्मनी के हेल्मुट शॉन को पछाड़कर दुनिया के नंबर-1 कोच बन जाएंगे।
विश्व कप इतिहास में बतौर मुख्य कोच सर्वाधिक मैचों का रिकॉर्ड
डिडिएर डेशॉ (फ्रांस): 25 मैच
हेल्मुट शॉन (जर्मनी): 25 मैच
कार्लोस अल्बर्टो परेरा (ब्राजील): 23 मैच
लुइज़ फेलिपे स्कोलारी (ब्राजील): 21 मैच
बोरा मिलुटिनोविच: 20 मैच
ऑस्कर तबरेज (उरुग्वे): 20 मैच
मारियो जगालो (ब्राजील): 20 मैच
कोच के रूप में 14 साल के स्वर्णिम युग का होने जा रहा है समापन
डिडिएर डेशॉ का फ्रांस के मुख्य फुटबॉल प्रशिक्षक के रूप में पिछला 14 साल का लंबा और सफल कार्यकाल अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। उनके शानदार मार्गदर्शन में फ्रांस ने साल 2018 में विश्व कप का खिताब जीता था, जबकि इससे पहले वे साल 1998 में एक जुझारू खिलाड़ी के रूप में भी विश्व विजेता टीम का हिस्सा रह चुके थे। फुटबॉल के इतिहास में खिलाड़ी और कोच, दोनों ही भूमिकाओं में विश्व कप चूमने वाले वे दुनिया के गिने-चुने महान दिग्गजों में शुमार हैं।
भले ही इस बार फ्रांसीसी सेना फाइनल तक का सफर तय नहीं कर सकी, लेकिन एमबाप्पे और डेशॉ के इन ऐतिहासिक कीर्तिमानों ने इस विश्व कप को फ्रांस के लिए हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बना दिया है। अब खेल प्रेमियों की निगाहें शनिवार के मुकाबले पर टिकी हैं, जहाँ एक नया इतिहास बनने का गवाह पूरा विश्व बनेगा।
भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट रिश्तों को नई उड़ान, BBL का आगाज भारत से
10 Jul, 2026 09:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया की मशहूर क्रिकेट लीग, 'बिग बैश लीग' (बीबीएल), इस बार कुछ ऐसा करने जा रही है जो क्रिकेट इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। इस लीग का नया सीजन इसी साल दिसंबर में शुरू होने वाला है। आमतौर पर किसी भी देश की घरेलू क्रिकेट लीग का पहला और आखिरी मैच उसी के अपने देश में खेला जाता है, लेकिन इस बार बीबीएल ने एक अनोखा फैसला लिया है।
भारत में होगा पहला मुकाबला
क्रिकेट प्रेमियों को हैरान करते हुए लीग के आयोजकों ने तय किया है कि आने वाले सीजन का पहला मैच ऑस्ट्रेलिया में न होकर भारत में खेला जाएगा। यह फैसला बेहद चौंकाने वाला और नया है क्योंकि इससे पहले किसी भी विदेशी टी-20 लीग ने अपने सीजन की शुरुआत भारत की धरती से नहीं की है।
क्रिकेट इतिहास में पहली बार
इस ऐतिहासिक कदम से भारत में मौजूद बिग बैश लीग के प्रशंसकों को स्टेडियम में बैठकर लाइव मैच देखने का मौका मिलेगा। हालांकि मैच किन टीमों के बीच और भारत के किस शहर में होगा, इसकी पूरी जानकारी जल्द ही सामने आएगी। बीबीएल का यह अनोखा प्रयोग पूरी दुनिया के क्रिकेट फैंस के लिए एक बड़ा सरप्राइज है।
एर्लिंग हालैंड का जलवा, ब्राजील को हराकर नॉर्वे ने क्वार्टर फाइनल का टिकट कटाया
6 Jul, 2026 10:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
म्यूनिख। फीफा विश्व कप 2026 के प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) के एक बेहद रोमांचक मुकाबले में नॉर्वे ने फुटबॉल की दिग्गज टीम ब्राजील को 2-1 से शिकस्त देकर क्वार्टर फाइनल का टिकट कटा लिया है। इस करारी शिकस्त के साथ ही वर्ष 2002 के बाद से विश्व कप की ट्रॉफी उठाने का ब्राजील का सपना एक बार फिर टूट गया और उसका इंतजार और बढ़ गया है। इस महामुकाबले में पूरी दुनिया की निगाहें ब्राजील के जादुई फॉरवर्ड नेमार और नॉर्वे के गोल मशीन एर्लिंग हालैंड पर टिकी हुई थीं। ये दोनों ही खिलाड़ी मौजूदा समय में अपनी-अपनी राष्ट्रीय टीमों के सबसे बड़े कर्णधार हैं। दिलचस्प बात यह रही कि पूरे मैच का परिणाम भी इन्हीं दोनों स्टार खिलाड़ियों के पैरों से निकले गोलों द्वारा तय हुआ।
एर्लिंग हालैंड के दोहरे प्रहार से पस्त हुआ ब्राजील
मैच के शुरुआती आधे समय (पहले हाफ) तक दोनों ही टीमें एक-दूसरे के डिफेंस को भेदने में नाकाम रहीं और मुकाबला गोलरहित बराबरी पर रहा। इसके बाद दूसरे हाफ में नॉर्वे के स्टार स्ट्राइकर एर्लिंग हालैंड ने अपनी क्लास दिखाते हुए मैच का पासा पलट दिया। उन्होंने 79वें मिनट में एक शानदार मैदानी गोल दागकर नॉर्वे को 1-0 की महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई। मैच के अंतिम पलों में दबाव का फायदा उठाते हुए हालैंड ने 90वें मिनट में एक और बेहतरीन गोल करके स्कोर 2-0 कर दिया। हालैंड के इन दो बैक-टू-बैक गोलों ने ब्राजील की रक्षापंक्ति को पूरी तरह झकझोर दिया और नॉर्वे की ऐतिहासिक जीत तय कर दी।
नेमार का संघर्ष भी नहीं टाल सका ब्राजील की विदाई
दो गोल से पिछड़ने के बाद ब्राजीली टीम ने वापसी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। मैच के इंजरी टाइम (एक्स्ट्रा टाइम) में नेमार ने अपनी कलात्मकता का परिचय देते हुए एक गोल दागा और स्कोर लाइन को 2-1 कर दिया। हालांकि, नेमार का यह प्रयास ब्राजील को मैच में बराबरी दिलाने या क्वार्टर फाइनल की दौड़ में बनाए रखने के लिए काफी देर से आया और नाकाफी साबित हुआ। इस अंतिम सीटी के बजते ही फीफा विश्व कप 2026 में खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही ब्राजील का सफर नॉकआउट के पहले ही चरण में अप्रत्याशित रूप से समाप्त हो गया।
यूरोपीय टीमों के सामने ब्राजील का नॉकआउट फोबिया
फुटबॉल इतिहास पर नजर डालें तो साल 2002 में अपनी आखिरी विश्व कप खिताबी जीत के बाद से नॉकआउट दौर में यूरोपीय देशों के खिलाफ ब्राजील का खराब रिकॉर्ड इस बार भी जारी रहा। पिछले सात नॉकआउट मैचों में हर बार ब्राजील को किसी न किसी यूरोपीय टीम के हाथों ही टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा है। इस साल नॉर्वे से मिली हार से पहले, 2022 में क्रोएशिया ने, 2018 में बेल्जियम ने, 2014 के घरेलू विश्व कप में जर्मनी और नीदरलैंड्स ने, 2010 में फिर से नीदरलैंड्स ने और 2006 के क्वार्टर फाइनल में फ्रांस ने ब्राजील के विश्व विजेता बनने के रथ को रोका था।
'थप्पड़कांड' का नया अध्याय, श्रीसंत ने हरभजन सिंह को फाइट के लिए ललकारा
19 Jun, 2026 01:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सनसनीखेज विवादों में शुमार साल 2008 का 'स्लैपगेट' (थप्पड़कांड) मामला एक बार फिर से गरमा गया है। भारत के पूर्व तेज गेंदबाज एस. श्रीसंत ने पूर्व ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें बॉक्सिंग रिंग में आकर दो-दो हाथ करने का खुला चैलेंज दे दिया है। श्रीसंत ने तीखे लहजे में कहा कि यदि हरभजन में असली हिम्मत है, तो वे रिंग के भीतर आकर आमने-सामने मुकाबला करें। गौरतलब है कि यह पूरा विवाद आईपीएल के पहले सीजन (2008) के दौरान मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच खेले गए एक मैच के बाद पैदा हुआ था, जब हरभजन ने मैदान पर ही श्रीसंत को थप्पड़ जड़ दिया था। उस वक्त इस अप्रत्याशित घटना ने पूरे खेल जगत को स्तब्ध कर दिया था।
कमर्शियल विज्ञापन से पुराने जख्म हुए हरे और बढ़ी दूरियां
हालांकि, पिछले कुछ सालों में दोनों दिग्गज क्रिकेटरों के बीच कड़वाहट कम होती दिख रही थी। दोनों को कई मौकों, टीवी शो और विज्ञापनों में एक साथ खुशनुमा अंदाज में देखा गया था, और हरभजन ने भी कई मंचों पर अपनी उस पुरानी गलती के लिए सार्वजनिक तौर पर पछतावा जताया था। मगर हाल ही में प्रसारित हुए एक नए विज्ञापन ने इस शांत पड़े विवाद में दोबारा घी डालने का काम कर दिया है। श्रीसंत का आरोप है कि हरभजन सिंह ने उस संवेदनशील थप्पड़कांड की घटना का मजाक उड़ाते हुए व्यावसायिक और आर्थिक लाभ उठाने की कोशिश की है। इसी बात से आहत होकर श्रीसंत ने हरभजन से अपने सारे रिश्ते तोड़ लिए और उन्हें सोशल मीडिया पर ब्लॉक भी कर दिया।
इंटरव्यू के मंच से मुक्केबाजी रिंग में उतरने की खुली चुनौती
एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान के साथ बातचीत के दौरान जब श्रीसंत को हरभजन सिंह के साथ बॉक्सिंग ग्लव्स (मुक्केबाजी के दस्ताने) पहने हुए उनकी एक पुरानी तस्वीर दिखाई गई, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने बिना किसी संकोच के हरभजन को ललकारते हुए कहा, 'क्या आपमें मेरे साथ रिंग में उतरने का हौसला है? क्या आप इस फाइट के कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत करके आ सकते हैं? मैं आपको यह खुली चुनौती दे रहा हूं कि इन्हीं दस्तानों को पहनकर मेरे सामने आइए और मैच लड़िए।' श्रीसंत ने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस समय 'बेयर नकल फाइट लीग' का हिस्सा हैं और कॉम्बैट स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग ले रहे हैं, इसलिए वे पूरी तरह तैयार हैं।
विज्ञापनों में पैसे कमाने के बजाय असली मुकाबले की मांग
हरभजन सिंह पर अपना हमला जारी रखते हुए श्रीसंत ने कहा कि अगर उस थप्पड़ वाली घटना को लेकर कोई भी हिसाब चुकता करना है, तो उसे विज्ञापनों के जरिए भुनाने के बजाय असली लड़ाई में तय किया जाना चाहिए। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, 'भज्जी, अगर आपको उस वाकये से इतनी ही दिक्कत है और आप उसके दम पर पैसे कमा रहे हैं, तो मुझे भी कमाने का मौका दीजिए। विज्ञापन की नौटंकी छोड़कर रिंग में आइए। मैं यह बात पूरी गंभीरता से कह रहा हूं। अगर हमारे भीतर जरा सा भी आत्मसम्मान बचा है, तो फैसला बीच रिंग में होना चाहिए।' फिलहाल इस पूरे मामले पर हरभजन सिंह की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर खेल प्रेमियों के बीच यह बयानबाजी जमकर वायरल हो रही है।
दोहा डायमंड लीग में नीरज चोपड़ा की एंट्री, जानें किस दिन दिखेगा एक्शन
15 Jun, 2026 05:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत के दिग्गज भाला फेंक खिलाड़ी और ओलंपिक में दो बार देश का गौरव बढ़ाने वाले नीरज चोपड़ा आगामी 19 जून को आयोजित होने वाली दोहा डायमंड लीग के माध्यम से एक बार फिर मैदान पर वापसी करने जा रहे हैं। टोक्यो ओलंपिक 2020 में स्वर्ण और पेरिस ओलंपिक 2024 में रजत पदक अपने नाम करने वाले नीरज बीते साल 2025 की विश्व चैंपियनशिप में आठवें स्थान पर रहने के बाद से किसी भी खेल स्पर्धा में नजर नहीं आए हैं, ऐसे में खेल प्रेमी उनकी इस वापसी को लेकर बेहद उत्साहित हैं।
विदेशी सरजमीं पर चल रही है भाला फेंक चैंपियन की तैयारी
दोहा डायमंड लीग के लिए जारी आधिकारिक प्रविष्टियों में स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा का नाम प्रमुखता से शामिल किया गया है, जिन्होंने पिछले साल इसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में 90 मीटर की दूरी को पार किया था। हरियाणा के रहने वाले 28 वर्षीय नीरज इस समय स्विट्जरलैंड के बियेने शहर में हैं, जहां वे अपने कोच जय चौधरी और फिजियो ईशान मारवाहा की देखरेख में 47 दिनों के एक कड़े ऑफ-सीजन अभ्यास सत्र में पसीना बहा रहे हैं। इसके साथ ही अगले महीने होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के लिए घोषित भारतीय एथलेटिक्स टीम में भी उन्हें सशर्त जगह दी गई है, जिसके लिए उन्हें एथलेटिक्स महासंघ द्वारा निर्धारित 82.61 मीटर के क्वालिफिकेशन मानक को पार करना होगा।
पाकिस्तानी प्रतिद्वंद्वी बाहर और श्रीलंका के पथिरागे से मिलेगी कड़ी टक्कर
आगामी राष्ट्रमंडल खेलों में यदि नीरज हिस्सा लेते हैं, तो उनके साथ भारतीय चुनौती को मजबूत करने के लिए रोहित यादव और यशवीर भी मैदान में उतरेंगे, जो पहले ही इसके लिए अपनी पात्रता साबित कर चुके हैं। दोहा डायमंड लीग के इस चरण में श्रीलंका के उभरते खिलाड़ी रूमेश तरंगा पथिरागे भी शामिल हैं, जिन्होंने हाल ही में रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का बेमिसाल थ्रो फेंका था, साथ ही त्रिनिदाद और टोबैगो के केशोर्न वालकॉट भी अपनी चुनौती पेश करेंगे। हालांकि, खेल प्रशंसकों को इस बार पेरिस ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता पाकिस्तान के अरशद नदीम और नीरज के बीच का मुकाबला देखने को नहीं मिलेगा, क्योंकि नदीम का नाम इस प्रतियोगिता की सूची से नदारद है।
वैश्विक धुरंधरों के बीच खिताब के लिए मचेगा घमासान
इस बार दोहा के मैदान पर दुनिया के कई अन्य दिग्गज थ्रोअर्स भी अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे, जिनमें ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स (सत्र का सर्वश्रेष्ठ 86.08 मीटर), अमेरिका के कुर्टिस थॉम्पसन (85.33 मीटर) और चेक गणराज्य के याकूब वालेश (85.24 मीटर) जैसे बड़े नाम शामिल हैं। गौरतलब है कि पिछले मुकाबले में नीरज ने यहां 90.23 मीटर का शानदार थ्रो किया था, लेकिन अंतिम क्षणों में जर्मनी के जूलियन वेबर ने 91.06 मीटर की दूरी तय कर खिताब अपने नाम कर लिया था, जिससे इस बार नीरज के पास पुराना हिसाब चुकता करने का बेहतरीन मौका होगा।
आर्चरी वर्ल्ड कप में भारत की बड़ी जीत, धीरज बोम्मादेवरा ने दो गोल्ड पर साधा निशाना
15 Jun, 2026 12:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत के होनहार तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने आर्चरी वर्ल्ड कप स्टेज-3 में इतिहास रचते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। रविवार का दिन इस 24 वर्षीय खिलाड़ी के लिए बेहद अविस्मरणीय रहा, जहां उन्होंने पहले मिश्रित टीम स्पर्धा में कुमकुम मोहोद के साथ मिलकर सोने पर निशाना साधा और उसके बाद पुरुषों के व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग में भी स्वर्णिम सफलता हासिल कर दोहरा खिताब अपने नाम किया। धीरज ने व्यक्तिगत वर्ग के खिताबी मुकाबले में दक्षिण कोरिया के दिग्गज और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता ली वू-सियोक को 7-3 से करारी शिकस्त देकर अपने करियर का पहला व्यक्तिगत विश्व कप स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही धीरज ने पुरुषों के व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग में भारत के पिछले पांच साल के सूखे को खत्म कर देश की झोली में गोल्ड डाला है।
ऐतिहासिक क्लब में एंट्री और सेमीफाइनल की जादुई वापसी
इस ऐतिहासिक जीत के साथ धीरज बोम्मादेवरा वर्ष 2021 में अतनु दास की सफलता के बाद व्यक्तिगत रिकर्व में चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। वहीं, जयंत तालुकदार के बाद वह भारत के इतिहास में केवल दूसरे ऐसे पुरुष तीरंदाज हैं जिन्होंने वर्ल्ड कप स्तर पर व्यक्तिगत रिकर्व का खिताब जीतने का गौरव प्राप्त किया है। धीरज के लिए स्वर्ण पदक तक पहुंचने की यह राह बेहद कांटों भरी थी; सेमीफाइनल मैच में वह जर्मनी के मोरित्ज वीजर के खिलाफ 3-1 से पिछड़ रहे थे, लेकिन उन्होंने दबाव के क्षणों में कमाल का धैर्य दिखाया और शानदार वापसी करते हुए मुकाबला 6-4 से अपने पक्ष में कर लिया। इसके बाद फाइनल में उन्होंने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तीरंदाजों में शुमार ली वू-सियोक के खिलाफ शुरू से ही सटीक निशानेबाजी और अदम्य आत्मविश्वास का परिचय देकर 7-3 से एकतरफा जीत दर्ज की।
ओलंपिक चैंपियन को हराकर मिश्रित टीम स्पर्धा में लहराया परचम
व्यक्तिगत मुकाबले में उतरने से ठीक पहले धीरज ने दिन की शुरुआत भी बेहद धमाकेदार अंदाज में की थी। उन्होंने देश की 17 वर्षीय उभरती तीरंदाज कुमकुम मोहोद के साथ जोड़ी बनाकर रिकर्व मिश्रित टीम स्पर्धा में भारत को चैंपियन बनाया। इस टूर्नामेंट में तीसरी वरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी ने फाइनल के महामुकाबले में शीर्ष वरीयता प्राप्त दक्षिण कोरियाई टीम की धुरंधर जोड़ी ओह येजिन और किम जे-डियोक को 5-1 के बड़े अंतर से धूल चटाई। गौरतलब है कि कोरियाई जोड़ी के सदस्य किम जे-डियोक टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली अपनी टीम का हिस्सा रह चुके हैं, जिन्हें हराकर भारतीय युवाओं ने इस जीत का महत्व और बढ़ा दिया।
रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ नाम और लगातार दूसरा स्वर्ण पदक
धीरज बोम्मादेवरा और कुमकुम मोहोद की इस जादुई जोड़ी ने वर्ल्ड कप के मंच पर सोने का तमगा जीतकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। यह भारत की केवल तीसरी ऐसी मिश्रित रिकर्व जोड़ी बन गई है जिसने विश्व कप में चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है। इससे पहले साल 2021 में दीपिका कुमारी और अतनु दास की जोड़ी ने पेरिस में, जबकि 2022 में तरुणदीप राय और रिधि की जोड़ी ने अंताल्या में यह कमाल किया था। युवा तीरंदाज कुमकुम मोहोद के लिए भी यह पल बेहद यादगार रहा, क्योंकि यह लगातार दूसरा मौका है जब उन्होंने विश्व कप के मंच पर देश के लिए गोल्ड मेडल जीता है। धीरज के करियर के लिहाज से यह पूरा टूर्नामेंट अब तक का सबसे सफल और गौरवशाली सफर साबित हुआ है।
ओलंपिक मेडल पर नजर, अनाहत ने बताई अपनी बड़ी महत्वाकांक्षा
8 Jun, 2026 04:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत की स्टार महिला स्क्वाश खिलाड़ी अनाहत सिंह का कहना है कि उनका सबसे बड़ा लक्ष्य साल 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस ओलंपिक खेलों में देश के लिए पदक जीतना है। अनाहत ने खेलों के महाकुंभ के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि ओलंपिक में मेडल जीतने की चाहत हर एथलीट के दिल में होती है। स्क्वाश खेल को पहली बार ओलंपिक में शामिल किए जाने को लेकर दुनिया भर के खिलाड़ियों में भारी उत्साह है और सभी इस ऐतिहासिक मौके का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
स्क्वाश खिलाड़ियों के लिए खुला एक नया आसमान
अनाहत सिंह ने खेल के बदलते स्वरूप पर बात करते हुए कहा कि इससे पहले किसी भी स्क्वाश खिलाड़ी के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स (राष्ट्रमंडल खेल) ही सबसे बड़ा मंच हुआ करता था, जहां वह अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकता था। लेकिन अब ओलंपिक का रास्ता खुलने से खिलाड़ियों के पास दुनिया के सबसे बड़े मंच पर चमकने का मौका है। अनाहत ने अपने भविष्य के प्लान को लेकर साफ किया कि अगले कुछ सालों तक उनका पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ देश की झोली में मेडल डालने पर रहेगा। अपनी रणनीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह बहुत आगे की सोचने के बजाय एक समय में केवल एक ही टूर्नामेंट पर अपना ध्यान केंद्रित करना पसंद करती हैं।
ओलंपिक के आने से कॉर्पोरेट जगत का मिला साथ
दूसरी ओर, भारतीय पुरुष स्क्वाश वर्ग के स्टार खिलाड़ी रमित टंडन ने भी इस फैसले पर खुशी जताई है। रमित का मानना है कि स्क्वाश को ओलंपिक में जगह मिलने से इस खेल की लोकप्रियता और पहुंच में भारी बदलाव आया है। अब बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घराने भी इस खेल को बढ़ावा देने के लिए आगे आ रहे हैं। रमित ने कहा कि ओलंपिक विश्व खेल जगत का सबसे बड़ा आयोजन है और इसमें हिस्सा लेना हर किसी का एक सपना होता है। उन्होंने आगे बताया कि जेएसडब्ल्यू (JSW) और अन्य बड़े कॉर्पोरेट घरानों के जुड़ने से खिलाड़ियों को बहुत लाभ हुआ है, और यह सब सिर्फ इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि अब यह खेल ओलंपिक का हिस्सा बन चुका है।
