महाराष्ट्र
PM मोदी पर खरगे की टिप्पणी को संजय राउत ने दिया नया नाम
22 Apr, 2026 03:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में दिए गए कथित बयान पर छिड़े सियासी घमासान में अब शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत भी कूद पड़े हैं। राउत ने खरगे के बयान का बचाव करते हुए केंद्र सरकार की कार्यशैली पर कड़े प्रहार किए हैं।
'पॉलिटिकल टेररिज्म' पर संजय राउत का बयान
मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए संजय राउत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश भर में भय का माहौल बना रहे हैं।
एजेंसियों का दुरुपयोग: राउत ने आरोप लगाया कि ईडी (ED), सीबीआई (CBI), चुनाव आयोग और यहां तक कि न्यायपालिका का डर दिखाकर विपक्ष को दबाया जा रहा है। उन्होंने इन संस्थाओं को पीएम मोदी के 'हथियार और मिसाइल' करार दिया।
दहशत और चुनाव: राउत के अनुसार, महाराष्ट्र से लेकर पश्चिम बंगाल तक डराने-धमकाने की राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी दहशत के दम पर चुनाव जीते जा रहे हैं, जिसे 'पॉलिटिकल टेररिज्म' (राजनीतिक आतंकवाद) कहना गलत नहीं होगा।
धमकी भरी भाषा: उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री अक्सर 'परिणाम भुगतने' की बात करते हैं। राउत ने पूछा, "आप हमें धमकियां क्यों दे रहे हैं? यह डराने वाली भाषा ही दूसरे शब्दों में आतंकवाद है।"
महाराष्ट्र में मराठी भाषा की अनिवार्यता का समर्थन
टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के मुद्दे पर संजय राउत ने दो टूक जवाब दिया:
स्थानीय भाषा का सम्मान: राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी की अनिवार्यता पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण दिया कि तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने भी अपनी क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता दी है।
रोजगार और भाषा: उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग यहां काम करने और पैसा कमाने आते हैं, उन्हें स्थानीय भाषा सीखनी ही चाहिए। महाराष्ट्र में अपनी भाषा का सम्मान करना कोई विद्रोह नहीं है।
पहलगाम हमले और केंद्र की विदेश नीति पर प्रहार
पहलगाम हमले की बरसी का जिक्र करते हुए संजय राउत ने सुरक्षा व्यवस्था और कूटनीति पर सवाल उठाए:
न्याय पर सवाल: राउत ने पूछा कि हमले में मारे गए निर्दोष हिंदू पर्यटकों को अब तक क्या न्याय मिला? उन्होंने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और विदेश मंत्री से इस पर जवाब मांगा।
ऑपरेशन सिंदूर और ट्रंप का जिक्र: राउत ने आरोप लगाया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान राजनीति की गई। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एक फोन के बाद भारत ने अपने कदम पीछे खींच लिए, जबकि आरोपी आतंकवादी आज भी पाकिस्तान में सुरक्षित हैं।
महिला के समर्थन में उतरीं प्रियंका चतुर्वेदी, बयान ने बढ़ाई सियासत
22 Apr, 2026 03:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: वर्ली में भारतीय जनता पार्टी की 'महिला जन आक्रोश रैली' के दौरान लगा ट्रैफिक जाम अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। जाम से परेशान होकर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन को खरी-खोटी सुनाने वाली महिला के पक्ष में विपक्षी दल लामबंद हो गए हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने महिला को बताया 'साहसी'
शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मंत्री से भिड़ने वाली महिला की सराहना करते हुए कहा:
सलाम और समर्थन: प्रियंका चतुर्वेदी ने उस महिला के साहस को सलाम किया, जिसने राजनीतिक प्रदर्शन के नाम पर आम जनता का रास्ता रोकने वाले सत्ताधारी दल और मंत्री को सीधा जवाब दिया।
जनता की सहनशीलता: उन्होंने कहा कि मुंबई की जनता पहले ही घंटों ट्रैफिक जाम से जूझती है, ऐसे में वीआईपी मूवमेंट और राजनीतिक रैलियां उनकी परेशानी को और बढ़ा देती हैं। सत्ता पक्ष को जनता की तकलीफों की कोई परवाह नहीं है।
सत्ता पक्ष से तीखे सवाल
पूर्व सांसद ने रैली के आयोजन और प्रशासन की अनुमति पर भी सवाल उठाए हैं:
सड़क ही क्यों? बीजेपी ने निर्धारित मैदानों के बजाय व्यस्त सड़कों पर विरोध प्रदर्शन क्यों किया?
अनुमति का आधार: पीक आवर्स (व्यस्त समय) में इस तरह के प्रदर्शन की इजाजत किसने और क्यों दी?
आमजन की परेशानी: राजनीतिक दिखावे और शक्ति प्रदर्शन के लिए आम मुंबईवासियों को बंधक क्यों बनाया जा रहा है?
विवाद की पृष्ठभूमि: क्या हुआ था वर्ली में?
बीते दिनों वर्ली इलाके में बीजेपी की रैली के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया था। इसी बीच वहां फंसी एक महिला यात्री का सब्र टूट गया और वह सीधे प्रदर्शनकारियों के बीच मौजूद जल शक्ति मंत्री गिरीश महाजन से उलझ पड़ी। महिला ने तीखे शब्दों में नाराजगी जाहिर करते हुए मंत्री को वहाँ से चले जाने तक कह दिया था।
गरमाई महाराष्ट्र की राजनीति
जहां एक ओर मंत्री गिरीश महाजन ने महिला की भाषा को 'अनुचित' करार दिया है, वहीं विपक्ष इसे आम आदमी के मौलिक गुस्से की अभिव्यक्ति मान रहा है। प्रियंका चतुर्वेदी के अनुसार, उस महिला का गुस्सा केवल उसका व्यक्तिगत गुस्सा नहीं है, बल्कि उन तमाम मुंबईवासियों की आवाज है जो रोज ट्रैफिक की अव्यवस्था से प्रताड़ित होते हैं।
मुंबई BJP रैली में ‘गेट आउट’ विवाद, मंत्री गिरीश महाजन का बयान
22 Apr, 2026 02:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: मुंबई में महिला आरक्षण के समर्थन में आयोजित भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की रैली के दौरान एक महिला और कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन के बीच हुई तीखी बहस का मामला गरमाया हुआ है। इस घटना में महिला के कड़े रुख और 'गेट आउट' कहने के बाद अब मंत्री महाजन ने अपनी चुप्पी तोड़ी है।
क्या था पूरा मामला?
बीजेपी की ओर से आयोजित इस विशाल मोर्चे के कारण दक्षिण मुंबई के वर्ली इलाके में भारी ट्रैफिक जाम लग गया था। घंटों तक यातायात बाधित रहने से परेशान एक महिला यात्री अपना आपा खो बैठी और सीधे मंत्री गिरीश महाजन पर भड़क गई। महिला की नाराजगी और भाषा को लेकर अब मंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
मंत्री गिरीश महाजन की सफाई और प्रतिक्रिया
विवाद पर अपना पक्ष रखते हुए गिरीश महाजन ने कहा:
आक्रोश का कारण: महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष के अड़ियल रवैये के कारण महिलाओं में भारी गुस्सा है, इसी वजह से मुंबई से लेकर दिल्ली तक हजारों महिलाएं सड़कों पर उतरीं।
भाषा पर आपत्ति: महाजन ने कहा कि ट्रैफिक जाम से परेशानी होना स्वाभाविक है और उस महिला की समस्या जायज थी, लेकिन जिस तरह की भाषा का उन्होंने इस्तेमाल किया, वह अनुचित थी। उन्होंने पुलिस के साथ भी बदसलूकी की और पानी की बोतल तक फेंकी।
संयम का परिचय: मंत्री ने बताया कि महिला की बातें सुनकर बीजेपी कार्यकर्ता भी भड़क गई थीं, लेकिन उन्होंने सभी को शांत रहने को कहा। उन्होंने मौके पर ही माफी मांगकर जल्द ट्रैफिक साफ कराने का निर्देश दिया था।
विपक्ष पर साधा निशाना
गिरीश महाजन ने विपक्षी नेता विजय वडेट्टीवार पर पलटवार करते हुए कहा कि यह महिलाओं का स्वतःस्फूर्त आंदोलन था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष को इस बात पर आत्ममंथन करना चाहिए कि उनकी सभाओं और कार्यक्रमों में भीड़ क्यों नहीं जुटती। कुछ नेता केवल बैठकों तक सीमित हैं, जबकि बीजेपी जमीन पर उतरकर संघर्ष कर रही है।
धर्मांतरण मामले पर भी बोले मंत्री
नासिक में सामने आए धर्मांतरण के मामले पर महाजन ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री स्वयं इस गंभीर मुद्दे पर नजर रखे हुए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
शरद पवार अस्पताल में भर्ती, चोट लगने के बाद उपचार जारी
21 Apr, 2026 05:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: दिग्गज नेता शरद पवार पिछले दो दिनों से मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उपचाराधीन हैं। दिल्ली दौरे से लौटने के बाद उनके हाथ में चोट लग गई थी, जिसके कारण उन्हें भर्ती करना पड़ा। हालांकि उन्हें सोमवार को छुट्टी मिलने वाली थी, लेकिन डॉक्टरों ने बेहतर रिकवरी के लिए उन्हें अभी अस्पताल में ही रुकने और पूर्ण विश्राम करने का निर्देश दिया है।
स्वास्थ्य को लेकर पहले भी रहे हैं अलर्ट
85 वर्षीय शरद पवार पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक सक्रियता में कोई कमी नहीं आई है:
फरवरी 2026: इसी साल फरवरी के अंतिम सप्ताह में भी उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।
पुणे में इलाज: इससे पहले फरवरी की शुरुआत में सीने में जकड़न की शिकायत के बाद उन्हें पुणे के रूबी हॉल अस्पताल ले जाया गया था, जिसकी जानकारी उनकी बेटी सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया के जरिए साझा की थी।
राजनीतिक सक्रियता और जज्बा
बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद शरद पवार ने हाल ही में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। शारीरिक कमजोरी के चलते उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर यह शपथ ग्रहण की थी, जो उनकी कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाता है।
बारामती उपचुनाव: सभा में नहीं हो पाएंगे शामिल
अस्पताल में होने के कारण शरद पवार बारामती विधानसभा उपचुनाव के प्रचार अभियान का हिस्सा नहीं बन पाएंगे।
उपचुनाव का कारण: यह सीट शरद पवार के भतीजे और पूर्व नेता अजित पवार के आकस्मिक निधन (28 जनवरी को विमान दुर्घटना में) के बाद खाली हुई थी।
चुनावी मुकाबला: इस सीट पर अब अजित पवार की पत्नी और वर्तमान डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार सहित कुल 23 उम्मीदवार मैदान में हैं।
मतदान: बारामती सीट पर 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे।
एक्साइज पॉलिसी केस में केजरीवाल को राहत नहीं, राउत का तीखा हमला
21 Apr, 2026 03:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: आबकारी मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के फैसले को लेकर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सोमवार (20 अप्रैल) को कोर्ट द्वारा केजरीवाल की याचिका खारिज किए जाने के बाद, संजय राउत ने न्यायपालिका की निष्पक्षता और महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा है।
'न्याय व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति'
मंगलवार (21 अप्रैल) को मीडिया से रूबरू होते हुए संजय राउत ने अदालत के रुख पर नाराजगी व्यक्त की। उनके बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
विश्वास का अभाव: राउत ने कहा कि यदि किसी पक्ष को जज की निष्पक्षता पर संदेह है और उससे जुड़े साक्ष्य दिए गए हैं, तो सुनवाई से न हटना दुर्भाग्यपूर्ण है।
हितों का टकराव: उन्होंने आरोप लगाया कि जब किसी खास विचारधारा या सरकार से लाभ लेने की बात सामने आती है, तो न्याय की गरिमा प्रभावित होती है।
SC से हस्तक्षेप की मांग: राउत ने इस पूरे विषय पर सर्वोच्च न्यायालय से दखल देने की अपील की है।
'उड़ता भाजपा' और ड्रग्स का मुद्दा
संजय राउत ने महाराष्ट्र के वर्तमान हालात पर कटाक्ष करते हुए प्रदेश भाजपा को 'उड़ता भाजपा' करार दिया।
नशे का कारोबार: उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई, पुणे, नागपुर और नासिक जैसे बड़े शहरों में ड्रग्स की बरामदगी लगातार बढ़ रही है, जिससे राज्य की स्थिति चिंताजनक हो गई है।
महिला आरक्षण पर घेरा: उन्होंने भाजपा के मोर्चे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब महिला आरक्षण बिल 2023 में ही पारित हो चुका है और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हो चुके हैं, तो अब इस मुद्दे पर प्रदर्शन करने का क्या औचित्य है।
खुली बहस की चुनौती
मुख्यमंत्री की ओर से दी गई 'ओपन डिबेट' की चुनौती पर राउत ने कहा:
उन्होंने भाजपा को सलाह दी कि वे पहले लोकसभा में हुई चर्चाओं का अध्ययन करें।
राउत ने सीधे तौर पर कहा कि यदि डिबेट करनी है, तो उनके स्तर के नेता को सामने लाएं। उन्होंने इस बहस के लिए प्रधानमंत्री को आमंत्रित करने की बात भी कही।
नाबालिग बच्चे को पीटने का आरोप, मुंबई पुलिस अधिकारी पर सवाल
21 Apr, 2026 03:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। ताड़देव पुलिस स्टेशन में तैनात एपीआई (API) हितेश जोष्ठे पर एक नाबालिग बच्चे के साथ गुंडागर्दी और मारपीट करने के संगीन आरोप लगे हैं। घटना के तीन दिन बाद भी पुलिस प्रशासन द्वारा आरोपी अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कदम न उठाए जाने पर पीड़ित परिवार ने गहरा रोष व्यक्त किया है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 17 अप्रैल 2026 की शाम ताड़देव के तुलसीवाडी इलाके में घटित हुई।
अमानवीय व्यवहार: सादे कपड़ों (सिविल ड्रेस) में पहुंचे एपीआई जोष्ठे ने रास्ते से गुजर रहे एक किशोर को रोककर उसका नाम पूछा। आरोप है कि नाम बताने के दौरान ही जोष्ठे ने जानबूझकर अपना पैर बच्चे के पैर पर रख दिया और विरोध करने पर उसे और जोर से दबाया।
सरेआम पिटाई: जब नाबालिग ने अपना पैर छुड़ाने की कोशिश की, तो जोष्ठे ने उसे कई थप्पड़ जड़ दिए। चौंकाने वाली बात यह है कि इस दौरान साथ मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने बच्चे को पकड़ रखा था ताकि अधिकारी उसे पीट सके।
आरोपी अधिकारी का पुराना 'ट्रैक रिकॉर्ड'
पीड़ित बच्चे की माँ ने बताया कि हितेश जोष्ठे का व्यवहार पहले भी हिंसक रहा है:
पहले भी की मारपीट: पिछले साल भी इसी अधिकारी ने उनके दूसरे बेटे के साथ मारपीट की थी।
राहगीरों से बदसलूकी: कुछ वर्ष पूर्व ताड़देव सिग्नल पर एक बाइक सवार को भी बिना किसी गलती के थप्पड़ मारने का मामला सामने आया था, लेकिन उस समय भी कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
घटना की पूरी फुटेज CCTV में कैद होने और ताड़देव डिवीजन के एसीपी (ACP) के पास लिखित शिकायत देने के बावजूद अब तक आरोपी अधिकारी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
प्रमुख बिंदु:
पीड़ित परिवार ने आरोपी अधिकारी की तत्काल बर्खास्तगी और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों का इस तरह का व्यवहार इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्थानीय निवासियों में पुलिस की इस कार्यप्रणाली को लेकर भारी असुरक्षा का भाव है।
सूरत से मजदूरों का पलायन: संजय राउत ने पूछा—गुजरात में रोजगार और चूल्हे क्यों बंद हैं?
20 Apr, 2026 03:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र। शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सूरत में मजदूरों के पलायन और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राउत ने गुजरात के हालातों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां आज भी मुख्यमंत्री के तौर पर केवल नरेंद्र मोदी और अमित शाह ही नजर आते हैं।
मजदूरों के पलायन पर तंज
सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर उमड़ी भारी भीड़ और पुलिसिया कार्रवाई का जिक्र करते हुए राउत ने कहा, "गुजरात में सब ठीक क्यों नहीं है? लोग पलायन कर रहे हैं क्योंकि उनके पास रोजगार नहीं है और चूल्हे बंद हो गए हैं।" बता दें कि औद्योगिक मंदी और छुट्टियों के चलते रविवार को स्टेशन पर हजारों मजदूरों के जुटने से भगदड़ जैसी स्थिति बन गई थी।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर घेरा
महिला आरक्षण के मुद्दे पर राउत ने देवेंद्र फडणवीस के पुराने पोस्ट का हवाला देते हुए पूछा कि जब कानून बन चुका है, तो अब पीछे क्यों हट रहे हैं? उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने केवल सीटों के 'गैर-कानूनी' परिसीमन और लोकसभा की 850 सीटें करने की योजना का विरोध किया है, क्योंकि यह सत्ता में बने रहने की एक चाल थी। इसके साथ ही उन्होंने बंगाल चुनाव में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
धर्मांतरण का दबाव और यौन शोषण: नागपुर की 'फिक्र फाउंडेशन' के संचालक की काली करतूतें उजागर
20 Apr, 2026 02:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नागपुर। नासिक जैसा ही 'कॉर्पोरेट जिहाद' का मामला सामने आया है, जहां एक संस्था में काम करने वाली युवतियों ने धर्मांतरण के दबाव और यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 'फिक्र फाउंडेशन' के संचालक रियाज काजी को गिरफ्तार कर लिया है।
नमाज और रोजे का दबाव
नागपुर के मनकापुर थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, 22 से 28 वर्ष की चार युवतियों ने आरोप लगाया कि रियाज काजी उन्हें जबरन नमाज पढ़ने, रोजा रखने और अभिवादन में 'खुदा हाफिज' बोलने के लिए मजबूर करता था। मना करने पर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती थी। पीड़ितों ने बताया कि काजी पिछले एक साल से उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था।
यौन शोषण और पुलिसिया कार्रवाई
युवतियों ने आरोपी पर यौन शोषण और उनकी निजी जिंदगी में दखल देने के भी आरोप लगाए हैं। पुलिस निरीक्षक हरीश कलसेकर के अनुसार, आरोपी के खिलाफ यौन शोषण, धमकी और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे 23 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। एक महिला अधिकारी मामले की जांच कर रही हैं और संस्था को मिलने वाली आर्थिक मदद के स्रोतों का पता लगाया जा रहा है।
स्कूल के नाम पर मस्जिद? किरीट सोमैया का आरोप—मंदिर की जमीनों पर भी हुआ कब्जा
20 Apr, 2026 07:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने 'स्कूल जिहाद' और 'लैंड जिहाद' का आरोप लगाते हुए मुंबई की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने दावा किया कि शहर में 164 स्कूल अवैध रूप से चल रहे हैं, जिनमें से 152 स्कूल मुस्लिम बहुल इलाकों में स्थित हैं। सोमैया के अनुसार, यह सरकारी जमीन हड़पने की एक अंतरराष्ट्रीय साजिश हो सकती है।
लैंड माफिया पर गंभीर आरोप
किरीट सोमैया ने कहा कि मानखुर्द, गोवंडी, कुर्ला और मालवणी जैसे इलाकों में कई जगहों पर स्कूल के नाम पर बिल्डिंग बनाई गई, लेकिन बाद में वहां मस्जिदें खड़ी कर दी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर की जमीनों पर भी इसी तरह कब्जा किया गया है। इन 164 स्कूलों में 145 अंग्रेजी, 11 उर्दू और हिंदी-मराठी माध्यम के स्कूल शामिल हैं।
कार्रवाई की मांग और चेतावनी
सोमैया ने बीएमसी प्रशासन से इन अवैध स्कूलों को तुरंत बंद करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा, "बीएमसी में अब बीजेपी की सत्ता है, इसलिए त्वरित कार्रवाई होगी। यदि प्रशासन कदम नहीं उठाता, तो मैं खुद बीएमसी दफ्तर के सामने विरोध प्रदर्शन करूंगा।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पास के सरकारी स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा।
उत्तर बनाम दक्षिण: संजय राउत ने महिला आरक्षण बिल के पीछे छिपे 'क्षेत्रीय असंतुलन' पर उठाए सवाल।
18 Apr, 2026 04:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के दो-तिहाई बहुमत के अभाव में गिरने के बाद विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर शिवसेना (UBT) के दिग्गज नेता और सांसद संजय राउत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रुख की जमकर सराहना की है। राउत ने कहा कि संसद में जिस तरह राहुल गांधी ने इस विधेयक को चुनौती दी और उसे रोकने में सफल रहे, वह देश के लोकतंत्र को बचाने के आंदोलन का एक ऐतिहासिक नेतृत्व है।
"यह मोदी सरकार के पतन का आगाज़ है"
संजय राउत ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इस विधेयक को एक "राजनीतिक षड्यंत्र" करार दिया। उन्होंने दावा किया कि महिला आरक्षण की आड़ में सरकार मतदाताओं के समीकरणों के साथ मनमानी छेड़छाड़ करना चाहती थी, ताकि भविष्य के चुनावों में अपनी जीत सुनिश्चित कर सके।
राउत ने तंज कसते हुए कहा:
"प्रधानमंत्री की कुर्सी आज मात्र 16 सांसदों के सहारे टिकी है। यदि ये बैसाखी भी हट गई, तो सरकार को अपना बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ेगा। संसद में इस योजना का विफल होना यह दर्शाता है कि अब सत्ता का पतन नजदीक है। राहुल गांधी ने उन निर्णायक 16 सांसदों को हकीकत का आईना दिखा दिया है।"
परिसीमन और 'पॉलिटिकल मैप' पर गंभीर सवाल
विधेयक के तकनीकी पहलुओं पर बात करते हुए राउत ने कहा कि आरक्षण के पीछे असल खेल 'परिसीमन' का था। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी अपनी सुविधा के अनुसार देश का राजनीतिक मानचित्र दोबारा तैयार करना चाहती है। उनके अनुसार, उत्तर और दक्षिण भारत के बीच जानबूझकर मतभेद पैदा किए जा रहे हैं और कुछ चुनिंदा राज्यों की ताकत बढ़ाकर दक्षिण के राज्यों को राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेलने की कोशिश हो रही है।
मातृभाषा के मुद्दे पर स्पष्ट स्टैंड
मराठी भाषा की अनिवार्यता पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए संजय राउत ने कहा कि हर राज्य में स्थानीय भाषा का सम्मान और उपयोग होना चाहिए। उन्होंने इसे सरकार और आरएसएस की नीतियों के अनुरूप बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र में काम करने या शिक्षा लेने वालों को मराठी का ज्ञान होना अनिवार्य है, इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
महिला आरक्षण पर आदित्य ठाकरे का सुझाव: 'सीटें बढ़ाए बिना आज से ही लागू करें कोटा'।
18 Apr, 2026 04:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख नेता आदित्य ठाकरे ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इस प्रस्तावित कानून को लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि अगर यह सफल हो जाता, तो यह भारतीय संविधान के मूल्यों की "पूर्ण पराजय" होती। सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के जरिए ठाकरे ने केंद्र की मंशा पर गंभीर संदेह व्यक्त किए हैं।
चुनावी फायदे के लिए परिसीमन का उपयोग
आदित्य ठाकरे का आरोप है कि इस विधेयक का प्राथमिक लक्ष्य महिलाओं का उत्थान करना नहीं, बल्कि राजनीतिक जोड़-तोड़ था। उन्होंने तर्क दिया कि आरक्षण को 'परिसीमन' से जोड़कर सरकार लोकसभा क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों की संख्या को अपने अनुकूल ढालना चाहती थी। ठाकरे के अनुसार, इस प्रक्रिया से कई राज्यों का राजनीतिक प्रभाव कम हो जाता और कुछ विशेष दलों को चुनाव में अनुचित लाभ मिलने का रास्ता साफ हो जाता।
तत्काल आरक्षण की मांग
विधेयक की टाइमलाइन पर सवाल उठाते हुए आदित्य ठाकरे ने इसे "छलावा" करार दिया। उन्होंने कहा:"अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को अधिकार देना चाहती है, तो उसे 2029 तक प्रतीक्षा करने की कोई जरूरत नहीं है। वर्तमान की 543 लोकसभा सीटों के भीतर ही तुरंत 33 फीसदी कोटा लागू किया जा सकता है। सीटों की संख्या बढ़ाने के पीछे केवल सत्ता के केंद्रीकरण की मंशा झलकती है।"
विपक्षी एकता ने रोका 'रास्ता'
लोकसभा में इस बिल के पारित न हो पाने को ठाकरे ने विपक्ष की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने एकजुटता की प्रशंसा करते हुए कहा कि विपक्षी दलों के कड़े विरोध के कारण ही सरकार अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सकी। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं को आरक्षण मिलना ही चाहिए, लेकिन उसकी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, न कि चुनावी लाभ की दृष्टि से प्रेरित।
ED की पूछताछ के 72 घंटे बाद मौत: जितेंद्र शेल्के की दुर्घटना पर अंजलि दमानिया ने उठाए सवाल।
18 Apr, 2026 03:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहिल्यानगर । मुंबई-नागपुर समृद्धि एक्सप्रेसवे पर शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में विवादित 'स्वयंभू बाबा' अशोक खरात के करीबी सहयोगी जितेंद्र शेल्के (55) और उनकी पत्नी अनुराधा (50) की जान चली गई। कोपरगांव पुलिस के अनुसार, यह हादसा दोपहर करीब 12 बजे धोत्रे गांव के पास हुआ, जब उनकी कार सड़क किनारे खड़े एक कंटेनर ट्रक से जा टकराई।
हादसे में बेटा गंभीर, ईडी की जांच से जुड़े थे तार
मृतक जितेंद्र शेल्के, बलात्कार और धोखाधड़ी के मामलों में जेल में बंद अशोक खरात के न केवल व्यापारिक साझेदार थे, बल्कि उनके 'शिवानिका ट्रस्ट' के उपाध्यक्ष भी थे। पुलिस ने बताया कि परिवार छत्रपति संभाजीनगर से ठाणे की ओर जा रहा था, तभी चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया। इस टक्कर में दंपति के 14 वर्षीय बेटे को भी गंभीर चोटें आई हैं, जिसका उपचार जारी है। चौंकाने वाली बात यह है कि महज तीन दिन पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शेल्के से पूछताछ की थी।
विपक्ष ने जताई 'सुनियोजित हत्या' की आशंका
इस घटना के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्षी नेताओं ने इसे सामान्य दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए गहरी साजिश का अंदेशा जताया है:रोहित पवार (विधायक, NCP-SP): उन्होंने इस घटना को "चौंकाने वाला" बताते हुए सवाल किया कि कहीं खरात से जुड़े राज दफन करने के लिए तो यह हादसा नहीं कराया गया? उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।सुषमा अंधारे (शिवसेना UBT): उन्होंने कहा कि खरात मामले से जुड़े गवाहों को पहले से ही खतरे की आशंका थी। आज की घटना ने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।अंजलि दमानिया (सामाजिक कार्यकर्ता): उन्होंने दावा किया कि ईडी की पूछताछ के तुरंत बाद हुई यह मौत महज इत्तेफाक नहीं हो सकती।
जांच में जुटी पुलिस और आरटीओ
अहिल्यानगर के एसपी सोमनाथ घरगे ने स्पष्ट किया है कि आरटीओ अधिकारियों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से वाहन की तकनीकी जांच की जाएगी ताकि हादसे की वास्तविक वजह का पता चल सके। फिलहाल कोपरगांव पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का केस दर्ज किया है।
शादी का झांसा देकर संबंध, फिर जबरन कराया गर्भपात
17 Apr, 2026 03:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोलापुर। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के बारशी से यौन शोषण और धोखे का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। एक युवती ने नवी मुंबई (पनवेल) के रहने वाले एक व्यक्ति पर शादी का झांसा देकर लंबे समय तक शारीरिक शोषण करने और जबरन गर्भपात कराने का आरोप लगाया है।
इस घटना के मुख्य विवरण निम्नलिखित हैं:
शोषण और धोखाधड़ी
आरोपी की पहचान: आरोपी का नाम सोहेल बाबू शेख बताया गया है, जो नवी मुंबई के पनवेल का निवासी है।
घटनाक्रम: पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने मई 2024 से लेकर मार्च 2026 तक उसे शादी का लालच देकर अपनी बातों में फंसाए रखा। इस दौरान आरोपी ने बारशी के विभिन्न लॉज में युवती की इच्छा के विरुद्ध उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए।
जबरन गर्भपात का आरोप
साजिश: जब युवती गर्भवती हो गई, तो आरोपी उसे पुणे ले गया। आरोप है कि वहाँ उसने पीड़िता को धोखे से गर्भपात की दवाइयां खिला दीं और जबरदस्ती उसका गर्भपात करवा दिया।
धमकी और नियंत्रण: पीड़िता का कहना है कि आरोपी ने उसे भावनात्मक रूप से नियंत्रित कर पिछले दो वर्षों से उसका शोषण किया।
कानूनी कार्रवाई
धोखाधड़ी का अहसास होने पर पीड़िता ने बारशी शहर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी सोहेल शेख के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
हैवानियत की हद पार, पेट्रोल डालकर पत्नी को लगाई आग
17 Apr, 2026 03:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोलापुर। महाराष्ट्र के सोलापुर से एक अत्यंत विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक व्यक्ति ने आपसी विवाद के चलते अपनी पत्नी को जिंदा जलाने का प्रयास किया। यह वारदात सोलापुर के लोकमान्य नगर इलाके में बुधवार रात घटित हुई।
घटना का मुख्य विवरण इस प्रकार है:
विवाद और पृष्ठभूमि
दंपति की पहचान: आरोपी की पहचान फैजान जावेद शेख और पीड़िता की पहचान नर्गिस फैजान शेख के रूप में हुई है।
तनावपूर्ण संबंध: दोनों का विवाह वर्ष 2024 में हुआ था, लेकिन शादी के महज कुछ महीनों बाद ही उनके संबंधों में खटास आ गई। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों अलग रहने लगे थे और पिछले कुछ समय से उनके बीच तलाक को लेकर तकरार चल रही थी।
वारदात का तरीका
साजिश: बुधवार रात करीब 10 बजे आरोपी फैजान अपनी पत्नी के घर पहुँचा। उसने बातचीत करने का बहाना बनाया और नर्गिस को भरोसे में लेकर कमरे के अंदर ले गया।
हमला: कमरे में जाते ही आरोपी ने साथ लाए पेट्रोल को पत्नी पर छिड़क दिया और लाइटर से आग लगा दी। आग की लपटों से घिरी नर्गिस जब चीखते हुए बाहर की ओर भागी, तो पड़ोसियों और परिजनों ने मिलकर आग बुझाई।
वर्तमान स्थिति और पुलिस कार्रवाई
पीड़िता की हालत: गंभीर रूप से झुलसी नर्गिस को सोलापुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
फरार आरोपी: घटना को अंजाम देने के तुरंत बाद आरोपी मौके से भागने में सफल रहा। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
गिरफ्तारी से राहत की मांग, निदा खान का कोर्ट में बड़ा दावा
17 Apr, 2026 02:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र। नासिक स्थित आईटी कंपनी TCS में सामने आए धर्मांतरण और यौन शोषण के चौंकाने वाले मामले में मुख्य आरोपी और एचआर (HR) अधिकारी निदा खान को लेकर नया अपडेट सामने आया है। पिछले 11 दिनों से पुलिस की पकड़ से बाहर चल रही निदा खान ने अब कानूनी राहत के लिए कदम उठाए हैं।
इस मामले के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका
मेडिकल आधार: निदा खान ने अपने वकील के माध्यम से नासिक की स्थानीय अदालत में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन किया है। याचिका में उनकी गर्भावस्था (Pregnancy) को मुख्य आधार बनाया गया है।
वर्तमान स्थिति: उनके वकील का दावा है कि निदा फिलहाल मुंबई में हैं और अपने पहले बच्चे को जन्म देने वाली हैं। हालांकि, पुलिस की नजर में वे अभी भी फरार हैं, जबकि वकील का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के कारण उन्हें 'फरार' न कहा जाए।
केस की पृष्ठभूमि और गंभीर आरोप
शोषण और धर्मांतरण: कंपनी की महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि वहां वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उनका मानसिक और यौन उत्पीड़न किया गया। साथ ही, हिंदू कर्मचारियों के जबरन धर्मांतरण और छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
समय सीमा: यह पूरा घटनाक्रम फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच का बताया जा रहा है।
जांच का दायरा और गिरफ्तारियां
एसआईटी का गठन: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए महाराष्ट्र पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) बनाया है। अब तक इस मामले में 7 कर्मचारियों (6 पुरुष और 1 महिला एचआर हेड) को गिरफ्तार किया जा चुका है।
केंद्रीय एजेंसियों की एंट्री: स्थानीय पुलिस के अलावा, इस मामले के अंतरराष्ट्रीय या संगठित गिरोह से जुड़े तारों की जांच के लिए NIA, IB और महाराष्ट्र ATS भी समानांतर जांच कर रही हैं।
अगला कदम
जांच एजेंसियां अब निदा खान के मेडिकल दावों की पुष्टि करने की तैयारी में हैं। यदि अदालत से राहत नहीं मिलती, तो बचाव पक्ष ने सत्र न्यायालय (Sessions Court) जाने के संकेत दिए हैं। फिलहाल, पुलिस 9 अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रही है ताकि इस पूरे रैकेट की गहराई का पता लगाया जा सके।
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