महाराष्ट्र
संजय राउत का बयान- ममता बनर्जी को इस्तीफा देने की जरूरत नहीं
6 May, 2026 03:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: ममता बनर्जी का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार, इंडिया गठबंधन और संजय राउत ने जताया खुला समर्थन
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद राज्य में राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में मुख्यमंत्री पद का त्याग करने से मना कर दिया है, उनका तर्क है कि जब उन्होंने हार स्वीकार ही नहीं की है, तो पद छोड़ने का कोई औचित्य नहीं बनता। इस बयान ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। इसी बीच, उद्धव ठाकरे गुट के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने ममता बनर्जी के इस फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। राउत ने ममता बनर्जी के रुख को पूरी तरह न्यायसंगत बताते हुए कहा है कि विपरीत परिस्थितियों में भी संवैधानिक पद पर बने रहना लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवश्यक है।
पूर्व सीजेआई के फैसले का हवाला देते हुए फैसले को बताया तर्कसंगत
संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट का उदाहरण पेश करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ द्वारा उद्धव ठाकरे बनाम महाराष्ट्र सरकार मामले में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय का उल्लेख किया। राउत ने समझाया कि उस समय अदालत उद्धव ठाकरे को उनके पद पर वापस इसलिए बहाल नहीं कर पाई थी क्योंकि उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया था। इसी अनुभव को आधार बनाते हुए उन्होंने ममता बनर्जी को सलाह दी है कि वे जल्दबाजी में इस्तीफा न दें, क्योंकि संवैधानिक प्रक्रियाओं में पद पर बने रहने का अपना महत्व होता है।
इंडिया गठबंधन की एकजुटता और ममता बनर्जी को शीर्ष नेताओं का साथ
विपक्षी एकता का परिचय देते हुए संजय राउत ने प्रेस वार्ता में साफ किया कि पूरा इंडिया गठबंधन इस समय ममता बनर्जी के साथ चट्टान की तरह खड़ा है। उन्होंने जानकारी दी कि उद्धव ठाकरे और राहुल गांधी जैसे बड़े नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से ममता बनर्जी से संवाद कर उन्हें अपना समर्थन दिया है। राउत के अनुसार, राहुल गांधी ने भी इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इसे केवल एक नेता की हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह लोकतंत्र के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय है। गठबंधन के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे आने वाले समय में किसी भी संघर्ष के लिए तैयार हैं और ममता बनर्जी को अलग-थलग नहीं पड़ने दिया जाएगा।
तमिलनाडु के चुनावी समीकरण और टीवीके के प्रभाव पर गठबंधन का रुख
तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने डीएमके और टीवीके के बीच चल रही चर्चाओं पर भी अपनी राय रखी। उनका मानना है कि जब भी किसी क्षेत्रीय राजनीति में किसी तीसरी शक्ति का उदय होता है, तो पारंपरिक मतदाता आधार में बिखराव आना स्वाभाविक है। उन्होंने स्वीकार किया कि तमिलनाडु में कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के बीच मतों का जो ध्रुवीकरण हुआ, वह एक नई लहर का परिणाम था। राउत ने कहा कि चुनावी राजनीति में इस तरह के उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और गठबंधन इन सभी चुनौतियों का विश्लेषण कर भविष्य की रणनीति तैयार कर रहा है।
लोकतंत्र की रक्षा और भविष्य की कठिन सियासी राह
संजय राउत ने अपने संबोधन के अंत में इस बात पर जोर दिया कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को बचाए रखने के लिए संघर्ष अब और भी तेज होगा। गठबंधन का मानना है कि ममता बनर्जी के खिलाफ चल रही लहर को केवल चुनावी आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसके पीछे की बड़ी साजिशों को समझना होगा। विपक्ष अब एकजुट होकर जनता के बीच जाने की योजना बना रहा है ताकि यह संदेश दिया जा सके कि वे झुकने वाले नहीं हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब बंगाल के अगले घटनाक्रमों पर टिकी है क्योंकि मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख ने भविष्य के बड़े संवैधानिक टकराव की ओर इशारा कर दिया है।
NCP नेता अमोल मिटकरी का बयान, अजित पवार मामले में CBI जांच जरूरी
6 May, 2026 03:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़: रणदीप सुरजेवाला ने पंचकूला नगर निगम में फर्जी वोटिंग का लगाया आरोप, कहा—लोकतंत्र में सेंध लगाने की हो रही है बड़ी साजिश
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने पंचकूला नगर निगम चुनाव की मतदाता सूची में भारी अनियमितताओं का दावा करते हुए सत्तारूढ़ भाजपा पर तीखा हमला बोला है। चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान सुरजेवाला ने सरकार पर 'वोट चोरी' का मॉडल अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन की मिलीभगत से चुनावी प्रक्रिया को दूषित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मतदाता सूची में हजारों की संख्या में ऐसी प्रविष्टियां मिली हैं जो दोहराव का शिकार हैं, जिससे निष्पक्ष चुनाव की संभावनाओं पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा कि इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां कोई मानवीय भूल नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीतिक साजिश का हिस्सा प्रतीत होती हैं।
हजारों मतदाताओं की डुप्लीकेट एंट्री और चुनावी शुचिता पर गंभीर सवाल
सुरजेवाला ने विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि जांच के दौरान 8545 ऐसे लोग पाए गए हैं जिनकी मतदाता सूची में कुल 17,086 बार प्रविष्टियां की गई हैं। यह कुल मतदाताओं का 8 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा है, जो चुनावी परिणामों को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखता है। कांग्रेस सांसद ने स्पष्ट किया कि यदि यह संख्या महज दो-चार होती तो इसे सामान्य लिपिकीय त्रुटि माना जा सकता था, परंतु 17 हजार से अधिक फर्जी प्रविष्टियां यह दर्शाती हैं कि पूरी वोटर लिस्ट इस समय अशुद्ध और संदिग्ध है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बताते हुए मांग की है कि इसे तुरंत दुरुस्त किया जाए ताकि वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा हो सके।
हरियाणा के अन्य नगर निगमों में भी व्यापक फर्जीवाड़े की आशंका
हरियाणा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र ने इस मुद्दे को और विस्तार देते हुए कहा कि दिल्ली में राहुल गांधी ने जिस तरह फर्जी वोटों का भंडाफोड़ किया था, उसी तर्ज पर हरियाणा में भी कांग्रेस इस भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने अंदेशा जताया कि केवल पंचकूला ही नहीं बल्कि सोनीपत और अंबाला जैसे अन्य नगर निगमों में भी इसी तरह का बड़ा चुनावी फर्जीवाड़ा होने की पूरी संभावना है। प्रदेशाध्यक्ष ने बताया कि उनकी टीम ने पिछले एक महीने की कड़ी मेहनत के बाद इस पूरे गोरखधंधे को उजागर किया है। कांग्रेस का मानना है कि यह केवल एक शहर की समस्या नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने की एक विस्तृत योजना का हिस्सा हो सकता है।
चुनाव आयोग को सौंपे गए साक्ष्य और तत्काल कार्रवाई की पुरजोर मांग
प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी भी दी गई कि कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर उन्हें इस फर्जीवाड़े से जुड़े तमाम दस्तावेजी सबूत सौंप दिए हैं। सुरजेवाला ने कहा कि अब यह मामला केवल जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि साक्ष्यों के आधार पर सीधे तौर पर कठोर कार्रवाई करने का समय आ गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि चुनाव आयोग साक्ष्यों की गंभीरता को समझते हुए उचित कदम उठाएगा और लोकतंत्र की गरिमा को बहाल करेगा। कांग्रेस पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में त्वरित एक्शन नहीं लिया गया तो वे जनता के बीच जाकर इस 'वोट चोर' सरकार की असलियत को और भी बड़े स्तर पर बेनकाब करेंगे।
मुंबई में 54 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’, दिल्ली ब्लास्ट में फंसाने की धमकी
6 May, 2026 11:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: रिटायर बैंक मैनेजर के साथ 40.90 लाख की डिजिटल ठगी, एटीएस अधिकारी बनकर ठगों ने 54 दिनों तक घर में रखा कैद
मुंबई के भांडुप क्षेत्र में साइबर अपराधियों ने दुस्साहस की सारी हदें पार करते हुए एक सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर को अपने जाल में फंसाकर लाखों रुपये की चपत लगाई है। ठगों ने स्वयं को एटीएस और एनआईए का वरिष्ठ अधिकारी बताकर पीड़ित को दिल्ली में हुए बम धमाकों और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी। इस गिरोह ने पीड़ित को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया कि उन्हें पूरे 54 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया, जिसका अर्थ है कि उन्हें घर के एक कमरे में कैद रहकर हर पल कैमरे के सामने अपनी मौजूदगी दर्ज करानी पड़ती थी। इस लंबी अवधि के दौरान ठगों ने किस्तों में पीड़ित से कुल 40.90 लाख रुपये ऐंठ लिए, जिसके बाद अब मुंबई की साइबर सेल ने इस जटिल मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।
फर्जी जांच और सुप्रीम कोर्ट के जाली दस्तावेजों से पैदा किया खौफ
ठगी के शिकार 61 वर्षीय राजेंद्र तुकाराम सुर्वे को मार्च माह में एक कॉल आया था, जिसमें सामने वाले व्यक्ति ने खुद को दिल्ली पुलिस का सब-इंस्पेक्टर बताया। जालसाजों ने पीड़ित को यह विश्वास दिला दिया कि उनके पहचान पत्रों का दुरुपयोग कर कर्नाटक में एक संदिग्ध बैंक खाता खोला गया है, जिसके जरिए करोड़ों का अवैध लेन-देन हुआ है। सुर्वे को डराने के लिए ठगों ने न केवल पुलिसिया वर्दी का इस्तेमाल किया, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेशों की प्रति भी दिखाई, जिससे एक बैंक मैनेजर के रूप में कार्य कर चुके सुर्वे भी झांसे में आ गए। उन्हें मजबूर किया गया कि वे किसी भी बाहरी व्यक्ति या परिवार के सदस्य से इस 'गोपनीय जांच' के बारे में चर्चा न करें, वरना उन्हें तुरंत जेल भेज दिया जाएगा।
शेयर बेचकर और पत्नी के नाम पर लोन लेकर चुकाई ठगी की रकम
ठगों की मांगें समय के साथ बढ़ती गईं और उन्होंने पीड़ित को मानसिक रूप से इस कदर विवश कर दिया कि सुर्वे ने अपने जीवन भर की जमा पूंजी उनके हवाले कर दी। पहले चरण में करीब तीन लाख रुपये लेने के बाद ठगों ने उन पर शेयर बाजार में निवेश किए गए अपने 29 लाख रुपये के शेयर बेचने का दबाव बनाया, जिसकी पूरी राशि अपराधियों के बताए खातों में हस्तांतरित कर दी गई। क्रूरता की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब ठगों ने जमानत की सुरक्षा निधि के नाम पर 10 लाख रुपये और मांगे, जिसे चुकाने के लिए पीड़ित की पत्नी को बैंक से कर्ज लेना पड़ा। ठगों ने यह झूठा आश्वासन दिया था कि जांच प्रक्रिया पूर्ण होते ही उनकी पूरी राशि ससम्मान वापस कर दी जाएगी।
संपर्क टूटने पर हुआ धोखाधड़ी का अहसास और पुलिस की कार्रवाई
जैसे ही ठगों के पास बड़ी रकम पहुँच गई, उन्होंने सुर्वे के साथ सभी संचार माध्यमों को बंद कर दिया और उनके नंबर ब्लॉक कर दिए। कई दिनों के इंतजार के बाद जब कोई पैसा वापस नहीं आया, तब पीड़ित को समझ आया कि वे एक सोची-समझी साजिश का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने मई माह में औपचारिक रूप से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर अब साइबर सेल उन बैंक खातों और डिजिटल हस्ताक्षरों की पड़ताल कर रही है जिनका उपयोग इस ठगी में हुआ है। पुलिस ने नागरिकों को सचेत किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन कॉल के जरिए किसी को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है, इसलिए ऐसे संदिग्ध कॉल्स आने पर तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करना चाहिए।
ममता बनर्जी पर संजय राउत का तीखा हमला, सियासत गरमाई
5 May, 2026 04:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावी परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने ममता बनर्जी के फैसलों पर सवाल उठाए हैं। संजय राउत के अनुसार, ममता बनर्जी द्वारा राहुल गांधी के सुझावों को नजरअंदाज करना एक बड़ी भूल साबित हुई। उन्होंने तर्क दिया कि यदि ममता बनर्जी और राहुल गांधी मिलकर चुनावी रणनीति पर चर्चा करते और साथ आते, तो बंगाल के चुनावी नतीजे निश्चित रूप से अलग हो सकते थे। राउत ने राहुल गांधी की दूरदर्शिता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके द्वारा की गई भविष्यवाणियां सच साबित हुई हैं।
चुनावी निष्पक्षता और विपक्षी एकजुटता पर सवाल
संजय राउत ने बंगाल और तमिलनाडु के चुनावी परिणामों पर अपनी असहमति जताते हुए यह गंभीर आरोप लगाया कि इन चुनावों को 'चुराया' गया है। उन्होंने राहुल गांधी को एक विजनरी नेता बताते हुए कहा कि उनके पास देश के भविष्य को लेकर स्पष्ट सोच है। इसके साथ ही उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए इंदिरा गांधी के दौर का जिक्र किया और कहा कि जिस तरह एक समय पूरे देश में सत्ता होने के बावजूद जनता ने इंदिरा गांधी को हरा दिया था, वैसा ही भविष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी का भी होने वाला है।
सत्ता के अहंकार और भाजपा के भविष्य पर कटाक्ष
भाजपा के बढ़ते प्रभाव पर प्रहार करते हुए शिवसेना नेता ने कहा कि वर्तमान में सत्ता पक्ष को यह भ्रम हो गया है कि वे पूरे देश के 'चक्रवर्ती सम्राट' बन चुके हैं। उन्होंने एक रूपक का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जब दीया बुझने वाला होता है, तो उसकी लौ एक बार तेजी से बढ़ती है और फिर वह शांत हो जाता है, भाजपा की स्थिति भी वर्तमान में ऐसी ही दिखाई दे रही है। उनके अनुसार, भाजपा की यह सत्ता अब ढलान की ओर है और आगामी समय में राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
बंगाल में सत्ता परिवर्तन और नतीजों का विश्लेषण
पश्चिम बंगाल के चुनावी आंकड़ों की बात करें तो भाजपा ने इस पूर्वी राज्य में एक दशक से चले आ रहे ममता बनर्जी के गढ़ में सेंध लगाते हुए प्रचंड जीत हासिल की है। भाजपा ने 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत के साथ इतिहास रचा है, जिससे टीएमसी के 15 वर्षों के शासन का समापन हो गया है। इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को केवल 80 सीटों पर ही सफलता मिली है, जबकि कांग्रेस और वामपंथी दल जैसे अन्य विपक्षी दल दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके और केवल दो-दो सीटों तक ही सिमट कर रह गए।
बंगाल चुनाव परिणामों पर Supriya Sule की प्रतिक्रिया चर्चा में
5 May, 2026 02:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ममता बनर्जी के व्यक्तित्व की सराहना की है। उन्होंने ममता बनर्जी को एक अत्यंत उत्तरदायी और साहसी महिला बताते हुए कहा कि वे इस हार को एक नई चुनौती की तरह स्वीकार करेंगी और मजबूती से आगे बढ़ेंगी। सुप्रिया सुले ने जानकारी दी कि उनकी पार्टी की तृणमूल कांग्रेस और डीएमके के नेताओं के साथ चर्चा हुई है और आगामी एक-दो दिनों में चुनावी आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण जनता के सामने रखा जाएगा। उन्होंने जीवन में हार-जीत की तुलना सिनेमा जगत से करते हुए कहा कि जिस तरह एक फिल्म के फ्लॉप होने पर कोई अभिनेता काम करना नहीं छोड़ता, वैसे ही राजनीति में भी उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।
बंगाल में भाजपा का ऐतिहासिक उदय और प्रचंड बहुमत
पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने अभूतपूर्व सफलता प्राप्त करते हुए सत्ता की बागडोर अपने हाथ में ली है। दो चरणों में संपन्न हुए इस मतदान के बाद सोमवार को घोषित नतीजों ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। भाजपा ने 293 सीटों के परिणामों में से 207 सीटों पर कब्जा जमाकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है, जबकि पिछले 15 वर्षों से सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस मात्र 80 सीटों पर सिमट गई। इस चुनाव में अन्य विपक्षी दलों की स्थिति भी काफी दयनीय रही, जहां कांग्रेस को केवल 2 सीटें मिलीं और आम जनता उन्नयन पार्टी ने भी 2 सीटों पर जीत दर्ज की, वहीं वामपंथी दलों को केवल एक-एक सीट से ही संतोष करना पड़ा।
ममता बनर्जी की व्यक्तिगत हार और मत प्रतिशत का गणित
भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर ममता बनर्जी को अपनी साख बचाने में असफलता मिली है, जहां भाजपा के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें 15 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया। मत प्रतिशत के लिहाज से भी भाजपा ने बंगाल में बड़ी बढ़त हासिल की है, जहां उसे कुल 45.84 प्रतिशत वोट मिले, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 40.80 प्रतिशत वोट शेयर प्राप्त हुआ है। कांग्रेस का प्रदर्शन वोट प्रतिशत के मामले में भी काफी कमजोर रहा और वह केवल 2.97 प्रतिशत वोट ही जुटा सकी। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल ममता बनर्जी की यह हार राज्य की राजनीति में एक बड़े सत्ता परिवर्तन का प्रतीक बन गई है।
शुभेंदु अधिकारी का दोहरा प्रदर्शन और नंदीग्राम की जीत
भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस चुनाव में अपनी राजनीतिक क्षमता का लोहा मनवाते हुए दो महत्वपूर्ण सीटों पर जीत का परचम लहराया है। उन्होंने नंदीग्राम में तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी पवित्र कर को करीब 9 हजार 665 वोटों के अंतर से मात दी, जहां उन्हें 1 लाख 27 हजार से अधिक वोट प्राप्त हुए। दिलचस्प बात यह है कि शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराने के साथ-साथ नंदीग्राम में भी अपनी धाक जमाए रखी है। वर्ष 2021 के चुनाव में भी उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को शिकस्त दी थी और इस बार भी दोहरी जीत हासिल कर उन्होंने बंगाल में भाजपा की सरकार बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका सिद्ध कर दी है।
नतीजों के बाद प्रियंका चतुर्वेदी ने विपक्षी गठबंधन पर उठाए सवाल
5 May, 2026 01:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) की फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने विपक्षी खेमे के भीतर पनप रहे विरोधाभासों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध एकजुटता का आह्वान किया है। उन्होंने गठबंधन के कुछ सहयोगी दलों के व्यवहार पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसे महत्वपूर्ण दलों की चुनावी हार पर जश्न मनाना या अहंकार प्रदर्शित करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रियंका के अनुसार, इस प्रकार की आंतरिक खींचतान न केवल गठबंधन की छवि को धूमिल करती है बल्कि विपक्षी एकता की नींव को भी कमजोर करने का काम करती है।
विपक्षी दलों के भीतर बढ़ती दूरियां और पुराने उदाहरण
प्रियंका चतुर्वेदी ने विपक्षी एकता के इतिहास को याद दिलाते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब सहयोगियों ने एक-दूसरे की हार पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पूर्व के घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए बताया कि अरविंद केजरीवाल और तेजस्वी यादव की चुनावी असफलताओं के दौरान भी कुछ विपक्षी दलों का रवैया ऐसा ही उपेक्षापूर्ण रहा था। उन्होंने हाल के दिनों में आम आदमी पार्टी के भीतर चले अंतर्विरोधों का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि यदि सहयोगी दल एक-दूसरे का सम्मान करना नहीं सीखेंगे, तो गठबंधन का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। उनका मानना है कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों को देखते हुए अखिलेश यादव को जिस तरह निशाना बनाया जा रहा है, वह विपक्षी एकता के लिए एक खतरनाक संकेत है।
आंतरिक कलह से सत्तापक्ष को मिलने वाली बढ़त
विपक्षी रणनीतियों का विश्लेषण करते हुए शिवसेना नेता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इंडिया गठबंधन के भीतर उठने वाले इन मतभेदों का सीधा और सबसे बड़ा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलता है। जब जनता विपक्ष को बिखरा हुआ और आपस में ही लड़ता हुआ देखती है, तो मतदाताओं का विश्वास डगमगाने लगता है, जिसके कारण मजबूत विकल्प होने के बावजूद विपक्ष पिछड़ जाता है। प्रियंका का कहना है कि गठबंधन की शक्ति किसी एक व्यक्ति या विशेष दल के वर्चस्व में नहीं, बल्कि सभी दलों के साझा संघर्ष में निहित है। उन्होंने आगाह किया कि अगर आपसी बयानबाजी और अहंकार को नियंत्रित नहीं किया गया, तो चुनावी मैदान में सत्ताधारी दल को चुनौती देना और भी कठिन हो जाएगा।
गठबंधन के मूल उद्देश्यों को याद रखने की अपील
प्रियंका चतुर्वेदी ने वर्ष 2024 के आम चुनाव के दौर की याद दिलाते हुए सभी सहयोगी दलों से यह आत्ममंथन करने की अपील की है कि आखिर इस बड़े गठबंधन का निर्माण किन लक्ष्यों के साथ किया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि गठबंधन की ताकत सामूहिक प्रयासों से बनी थी और इसे बनाए रखने की जिम्मेदारी भी साझा है। उन्होंने विपक्षी दलों को अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और मतभेदों को हाशिए पर रखकर एकजुट होने की सलाह दी ताकि एक सशक्त विकल्प के रूप में जनता के सामने पेश आया जा सके। प्रियंका के मुताबिक, केवल सामूहिक एकता के बल पर ही लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सकती है और वर्तमान सत्ता के एकाधिकार को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
नतीजों के बाद प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं, कांग्रेस की जीत पर दिया बयान
4 May, 2026 02:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र। राज्यसभा की पूर्व सांसद और शिवसेना (UBT) की कद्दावर नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी के चुनाव परिणामों पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इन नतीजों को भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत बताया है।
केरल में कांग्रेस की वापसी पर टिप्पणी
प्रियंका चतुर्वेदी ने न्यूज़ चैनलों के रुझानों का हवाला देते हुए लिखा कि केरल में वामपंथी पार्टी का लंबा वर्चस्व अब समाप्त हो गया है। उन्होंने इसे कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण जीत करार दिया।
तमिलनाडु: विजय (Vijay) और उनकी पार्टी TVK का उदय
तमिलनाडु के नतीजों पर हैरानी और खुशी जताते हुए उन्होंने लिखा कि राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है।
नई शक्ति: उन्होंने अभिनेता विजय की पार्टी TVK के विजेता बनकर उभरने को एक 'शानदार जीत' बताया और उन्हें इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के लिए बधाई दी।
पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में भाजपा का प्रदर्शन
शिवसेना नेता ने पश्चिम बंगाल के नतीजों को राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर बताया।
बंगाल: उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा को स्पष्ट जनादेश मिलना एक जबरदस्त बदलाव है।
असम और पुडुचेरी: उन्होंने असम और पुडुचेरी में भाजपा और उसके सहयोगियों की जीत की सराहना करते हुए कहा कि पार्टी ने सत्ता-विरोधी लहर (Anti-incumbency) को सफलतापूर्वक मात देकर अपनी पकड़ बनाए रखी है।
चुनावी रुझानों के ताज़ा आंकड़े
समाचार लिखे जाने तक विभिन्न राज्यों की स्थिति कुछ इस प्रकार थी:
राज्य
अग्रणी दल/गठबंधन (सीटें)
अन्य प्रमुख दल (सीटें)
पश्चिम बंगाल
बीजेपी: 193
टीएमसी: 94
तमिलनाडु
TVK: 110
AIADMK: 62, DMK: 52
केरल
कांग्रेस गठबंधन: 100
वामपंथी गठबंधन: 38
असम
बीजेपी गठबंधन: 97
कांग्रेस गठबंधन: 25
पुडुचेरी
बीजेपी गठबंधन: 22
कांग्रेस: 06
BJP के प्रदर्शन पर मेघा बोर्डिंकर का बयान, ममता बनर्जी पर कसा तंज
4 May, 2026 01:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र। पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के लिए सोमवार (4 मई) सुबह से जारी मतगणना के बीच राजनीतिक गहमागहमी तेज हो गई है। शुरुआती रुझानों में बंगाल और असम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को स्पष्ट बहुमत मिलता नजर आ रहा है, जिसे लेकर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो चुका है।
ममता बनर्जी पर बरसीं मंत्री मेघा बोर्डिंकर
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री मेघा बोर्डिंकर ने चुनाव रुझानों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला।
डर का माहौल: उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में ममता बनर्जी ने इस कदर खौफ फैला रखा था कि महाराष्ट्र से गए बीजेपी कार्यकर्ताओं को वहां होटल तक में कमरे नहीं दिए जाते थे।
जनता की जीत: बोर्डिंकर ने कहा कि यह रुझान बीजेपी की जमीनी मेहनत का परिणाम हैं और बंगाल के लोगों ने भय के ऊपर लोकतंत्र को चुना है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का भरोसा
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने भी रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि असम और बंगाल दोनों ही राज्यों में भाजपा की सरकार बनना तय है। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की "निरंकुश सरकार" को उखाड़ फेंकने का मन बना लिया है और रुझान इसी दिशा में इशारा कर रहे हैं।
भवानीपुर सीट की स्थिति
भले ही पूरे राज्य में टीएमसी पिछड़ती दिख रही हो, लेकिन भवानीपुर विधानसभा सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी बढ़त मजबूत कर ली है।
मतों का अंतर: छठे दौर की मतगणना के बाद ममता बनर्जी अपने प्रतिद्वंद्वी और भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से 19,393 मतों से आगे चल रही हैं।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, ममता बनर्जी को अब तक 30,548 वोट मिले हैं, जबकि अधिकारी को 11,155 वोट प्राप्त हुए हैं।
बंगाल और असम के रुझान: एक नजर में
मतगणना के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी दोनों ही राज्यों में सत्ता की ओर मजबूती से बढ़ रही है।
राज्य
बीजेपी (अग्रणी)
टीएमसी/अन्य (अग्रणी)
कुल सीटें
पश्चिम बंगाल
194
91 (TMC), 06 (अन्य)
294
असम
बहुमत के करीब
विपक्षी गठबंधन पिछड़ा
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बारामती में आगे चल रहीं सुनेत्रा पवार, जनता से संयम की अपील
4 May, 2026 12:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र। बारामती विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के परिणामों के बीच उप मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने जनता के प्रति आभार व्यक्त किया है। जीत की ओर बढ़ते हुए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने दिवंगत पति और पूर्व दिग्गज नेता अजित पवार को याद किया।
अजित पवार की स्मृतियों को समर्पित जीत
सुनेत्रा पवार ने बारामती की जनता द्वारा दिखाए गए भरोसे को दिवंगत अजित पवार को समर्पित करते हुए लिखा:
भावुक क्षण: उन्होंने कहा कि आज जब परिणाम सामने आ रहे हैं, तो 'अजितदादा' की यादें ताजा हो गई हैं, जिससे पूरा परिवार और समर्थक भावुक हैं।
अपूर्ण सपनों को पूरा करने का संकल्प: उन्होंने बारामतीवासियों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि यह जीत दादा के सपनों की 'नई बारामती' बनाने के संघर्ष की एक शुरुआत है।
कार्यकर्ताओं से संयम की अपील
अपनी जीत को गरिमापूर्ण बनाए रखने के लिए सुनेत्रा पवार ने समर्थकों और एनसीपी कार्यकर्ताओं से एक विशेष आग्रह किया है:
जुलूस पर रोक: उन्होंने निवेदन किया कि जीत की खुशी में कोई भी विजय जुलूस न निकाला जाए और न ही गुलाल उड़ाया जाए।
शालीन आचरण: उन्होंने समर्थकों से संयम बनाए रखने और अजित पवार के विचारों व आदर्शों के अनुरूप आचरण करने की अपील की।
नई बारामती का विजन
सुनेत्रा पवार ने स्पष्ट किया कि यह उपचुनाव उनके लिए केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने लिखा, "यह अंत नहीं है, बल्कि एक नए संकल्प और संघर्ष का आरंभ है।"
लिंक रोड परियोजना में दर्दनाक हादसा, क्रेन गिरने से मजदूरों की मौत
2 May, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
1. ठाणे: लिंक रोड परियोजना स्थल पर क्रेन गिरने से दो मजदूरों की जान गई
ठाणे जिले के भायंदर में निर्माणाधीन 'दहिसर-भायंदर लिंक रोड' (DBLR) प्रोजेक्ट पर शनिवार दोपहर एक भीषण हादसा हो गया।
कैसे हुई घटना: दोपहर करीब 12:30 बजे निर्माण कार्य के दौरान इस्तेमाल होने वाला 'गैन्ट्री क्रेन कोस्टल गर्डर प्लेटफॉर्म' अचानक भरभराकर गिर गया।
पीड़ित: हादसे के समय वहां काम कर रहे दो मजदूर, रघुनाथ दास (38) और काना सिंह (45) इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जांच: भायंदर पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया है। वरिष्ठ निरीक्षक जितेंद्र कांबले ने बताया कि पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या हादसे के पीछे सुरक्षा मानकों में कोई लापरवाही बरती गई थी।
2. मुंबई: सांताक्रूज में 2.5 करोड़ की हेरोइन के साथ तस्कर गिरफ्तार
मुंबई पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC) ने ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक तस्कर को गिरफ्तार किया है।
बरामदगी: एएनसी की कांदिवली इकाई ने सांताक्रूज (पूर्व) में छापेमारी कर एक व्यक्ति को दबोचा। तलाशी के दौरान उसके पास से 508 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाली हेरोइन बरामद हुई।
कीमत: अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस नशीले पदार्थ की कीमत लगभग 2.54 करोड़ रुपये आंकी गई है।
कार्रवाई: आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे शुक्रवार तड़के गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब उसके नेटवर्क और सप्लाई चेन का पता लगाने में जुटी है।
3. मुंबई-नासिक हाईवे: तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से दो की मौत
भिवंडी इलाके में शुक्रवार तड़के एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हुई, जिसमें एक बाइक सवार और एक बुजुर्ग की जान चली गई।
हादसा: डोंबिवली का निवासी अरुणकुमार शर्मा (32) अपनी बाइक से तेज रफ्तार में नासिक की ओर जा रहा था। इसी दौरान सड़क पार कर रहे 64 वर्षीय मोहम्मद रामबिसाल खान उससे टकरा गए।
परिणाम: टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार अनियंत्रित होकर दूर जा गिरा। चोटें इतनी गंभीर थीं कि दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
4. बीड: कुएं में तैरना सीख रहे 14 साल के किशोर की डूबने से मौत
बीड जिले की काइज तहसील के पिंपलगांव से एक हृदयविदारक खबर आई है, जहां एक स्कूली छात्र की जल समाधि हो गई।
वजह: 14 वर्षीय विराज विशाल शिंगारे एक 35 फीट गहरे कुएं में तैरने का अभ्यास कर रहा था। सुरक्षा के लिए उसने थर्माकोल का सहारा लिया था, लेकिन अचानक वह शरीर से अलग हो गया और विराज गहरे पानी में डूब गया।
सहायता: आठवीं कक्षा के इस छात्र की मौत के बाद गांव में शोक की लहर है। स्कूल प्रशासन ने पीड़ित परिवार को छात्र बीमा योजना के तहत 75 हजार रुपये का मुआवजा दिलाने का प्रस्ताव भेजा है।
घूमने वालों के लिए राहत, नेशनल पार्क में महंगी टिकट का फैसला वापस
2 May, 2026 01:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
SGNP में महंगी नहीं होगी सैर: मॉर्निंग वॉकर्स के विरोध के आगे झुका प्रशासन, फीस बढ़ोतरी के फैसले पर फिलहाल रोक
मुंबई। बोरीवली स्थित संजय गांधी नेशनल पार्क घूमने आने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिली है। प्रशासन ने 1 मई से लागू होने वाले नए शुल्क ढांचे को 'प्रशासनिक और तकनीकी' कारणों का हवाला देते हुए स्थगित कर दिया है। इसका मतलब है कि अब पर्यटकों को सभी सुविधाओं के लिए पुरानी दरों पर ही भुगतान करना होगा।
क्यों टला फैसला?
पार्क प्रबंधन द्वारा जारी आधिकारिक ज्ञापन के अनुसार, नई दरों की समीक्षा की जा रही है। एक वन अधिकारी ने संकेत दिए हैं कि शुल्क वृद्धि के मामले में अब मई के अंत तक ही कोई नई स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। तब तक पार्क की सभी सेवाओं के लिए पुराने रेट ही प्रभावी रहेंगे।
क्या था विवाद का मुख्य कारण?
21 अप्रैल को जारी आदेश में शुल्कों में भारी वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया था, जिसने आम जनता को चौंका दिया था:
सालाना पास: मॉर्निंग वॉकर्स के लिए सालाना फीस 383 रुपये से सीधे बढ़ाकर 10,000 रुपये करने का प्रस्ताव था।
वरिष्ठ नागरिक: बुजुर्गों के लिए यह शुल्क 5,000 रुपये तय किया गया था।
मासिक पास: आम नागरिकों के लिए 1,000 रुपये और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 500 रुपये की मासिक फीस प्रस्तावित की गई थी।
अन्य सुविधाएं: सफारी, मिनी ट्रेन, नौका विहार और ई-बस के टिकटों के दामों में भी वृद्धि का ऐलान हुआ था।
नागरिकों का कड़ा विरोध
इस फैसले के खिलाफ मुंबईवासियों, खासकर मॉर्निंग वॉकर्स एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया था। प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि:
वार्षिक शुल्क में लगभग 25 गुना वृद्धि पूरी तरह अनुचित और अव्यावहारिक है।
पार्क की कई सुविधाएं और रखरखाव CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड से संचालित होते हैं, ऐसे में जनता पर इतना वित्तीय बोझ डालना गलत है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए पार्क स्वास्थ्य और सुकून का साधन है, जिसे महंगा करना उनके साथ अन्याय है।
प्रशासन का पक्ष
हालांकि, प्रशासन ने तर्क दिया था कि पार्क में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कर्मचारियों के वेतन, आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास और रखरखाव के बढ़ते खर्चों को पूरा करने के लिए राजस्व बढ़ाना जरूरी हो गया है।
किरीट सोमैया का दावा, BMC में बड़े पैमाने पर फर्जी जन्म प्रमाणपत्र
2 May, 2026 12:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई में 'बर्थ सर्टिफिकेट' घोटाला: 87 हजार से ज्यादा प्रमाणपत्र होंगे रद्द, 4 अधिकारी निलंबित, राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी उठे सवाल
मुंबई। देश की सबसे अमीर महानगरपालिका, बीएमसी एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों से जुड़ा है, जिसे लेकर भाजपा नेता किरीट सोमैया ने मोर्चा खोल रखा है। इस घोटाले के सामने आने के बाद बीएमसी प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।
क्या है पूरा घोटाला?
बीएमसी ने आधिकारिक तौर पर 1 जनवरी 2016 से सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) पोर्टल को अपना लिया था। नियम के अनुसार, सभी जन्म-मृत्यु पंजीकरण इसी पोर्टल पर होने चाहिए थे।
पुराने सिस्टम का खेल: आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत कर बीएमसी के पुराने और बंद हो चुके SAP सिस्टम का इस्तेमाल किया और पिछले तीन वर्षों में हजारों फर्जी प्रमाणपत्रों का री-रजिस्ट्रेशन कर दिया।
आंकड़ों की बाजीगरी: 2024 से 2026 के बीच आधिकारिक CRS पोर्टल पर केवल 33,772 प्रविष्टियां हुईं, जबकि बंद पड़े SAP सिस्टम में 87,149 एंट्री दर्ज पाई गईं।
सालों के हिसाब से फर्जी पंजीकरण का ब्यौरा:
वर्ष 2024: 30,507 प्रमाणपत्र
वर्ष 2025: 48,705 प्रमाणपत्र
वर्ष 2026: 7,135 प्रमाणपत्र
किरीट सोमैया का एक्शन और पुलिस शिकायत
पूर्व सांसद किरीट सोमैया जुलाई 2025 से इस घोटाले को उजागर करने के लिए लगातार सबूत पेश कर रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और बीएमसी कमिश्नर का जांच के आदेश देने के लिए आभार व्यक्त किया।
पुलिस में शिकायत: मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमैया आज शाम आजाद मैदान पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
मुंबई की मेयर रितु तावड़े और किरीट सोमैया ने इस मामले को केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि 'राष्ट्रीय सुरक्षा' से जुड़ा मुद्दा बताया है। आशंका जताई जा रही है कि:
इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल अवैध घुसपैठियों को भारतीय नागरिकता दिलाने और कानूनी पहचान देने के लिए किया गया हो सकता है।
बिना किसी अनुमति के पुराने सिस्टम में बदलाव कर देश की सुरक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किया गया है।
अब तक की कार्रवाई
इस मामले में बीएमसी ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए अब तक 4 स्वास्थ्य अधिकारियों (Health Officers) को निलंबित कर दिया है। कई वार्डों के मेडिकल ऑफिसर्स भी जांच के दायरे में हैं। प्रशासन का कहना है कि इन सभी 87,149 संदिग्ध प्रमाणपत्रों की स्क्रूटनी की जा रही है और अवैध पाए जाने पर इन्हें तत्काल निरस्त कर दिया जाएगा।
भाषा विवाद पर दलवाई ने दी नसीहत, बताया क्या है सही रास्ता
2 May, 2026 11:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हुसैन दलवाई के तीखे तेवर: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, मराठी भाषा और नमाज मामले पर भी दी प्रतिक्रिया
मुंबई। वरिष्ठ कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने हालिया घटनाक्रमों पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में अधिकारियों की नियुक्ति और महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी की अनिवार्यता पर सरकार को घेरा है।
पश्चिम बंगाल चुनाव: 'गड़बड़ी की आशंका और आयोग पर सवाल'
हुसैन दलवाई ने बंगाल चुनाव में केंद्रीय अधिकारियों की भूमिका पर चिंता जताते हुए इसे असामान्य बताया:
अधिकारियों की नियुक्ति: उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार राज्य के अधिकारी ही चुनाव निगरानी करते रहे हैं। केंद्रीय अधिकारियों का वर्चस्व बढ़ाना 'घपलेबाजी' की ओर इशारा करता है।
पुनर्मतदान (Re-polling) का समर्थन: दक्षिण 24 परगना के 15 बूथों पर दोबारा मतदान कराए जाने को उन्होंने सही ठहराया। दलवाई ने सीधा आरोप लगाया कि बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाएं केंद्र के प्रभाव में हो रही हैं।
स्ट्रांग रूम की निगरानी: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा स्ट्रांग रूम की खुद निगरानी किए जाने के फैसले को उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर संदेह का परिणाम बताया।
महाराष्ट्र: 'मराठी भाषा और लाइसेंस विवाद'
महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य करने और परिवहन मंत्री के 'लाइसेंस कैंसिलेशन' वाले बयान पर दलवाई ने तंज कसा:
प्रशासनिक चूक: उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मराठी अनिवार्य है, तो लाइसेंस देते वक्त इसकी जांच क्यों नहीं की गई?
व्यावहारिक ज्ञान: दलवाई ने कहा कि ड्राइवरों को इतनी मराठी जरूर आनी चाहिए कि वे स्थानीय यात्रियों को उनकी भाषा में जवाब दे सकें, लेकिन पढ़ने-लिखने की कड़ी अनिवार्यता पर उन्होंने सवाल खड़े किए।
दोहरा मापदंड: उन्होंने आलोचना करते हुए कहा कि एक तरफ मराठी स्कूल बंद हो रहे हैं और मराठी परिवारों में अंग्रेजी का चलन बढ़ रहा है, लेकिन सरकार का ध्यान केवल ड्राइवरों पर है।
सार्वजनिक जगहों पर नमाज: 'हाईकोर्ट का फैसला सही'
इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने की अनुमति देने वाली याचिका खारिज किए जाने पर हुसैन दलवाई ने अदालत का समर्थन किया:
अनुशासन जरूरी: उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थलों को हर वक्त धार्मिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करना सही नहीं है।
सहमति: दलवाई ने अपने बयान में इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस निर्णय को न्यायसंगत ठहराया है।
चुनावी निगरानी और TMC की याचिका
चुनाव आयोग द्वारा राज्य कर्मचारियों को मतगणना की निगरानी से बाहर रखने के फैसले का TMC ने सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया है। इस पर दलवाई ने समर्थन जताते हुए कहा कि राज्य के अधिकारियों को प्रक्रिया से बाहर रखना लोकतंत्र की स्थापित परंपराओं के विरुद्ध है और इससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
चौंकाने वाला केस: Watermelon खाने के बाद संदिग्ध मौत, जहर की आशंका
1 May, 2026 12:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई पायधुनी केस: डोडिया परिवार की मौत में बड़ा खुलासा, अंगों का रंग हरा पड़ना 'साजिश' की ओर दे रहा इशारा
मुंबई: पायधुनी इलाके में एक ही परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। जिसे पहले तरबूज खाने से हुई 'फूड पॉइजनिंग' माना जा रहा था, अब वह मामला हत्या की गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। फॉरेंसिक जांच में सामने आए तथ्यों ने डॉक्टरों और पुलिस के होश उड़ा दिए हैं।
फॉरेंसिक रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य
पोस्टमार्टम और शुरुआती फॉरेंसिक रिपोर्ट में मृतकों के महत्वपूर्ण अंगों (दिमाग, दिल और आंतों) का रंग हरा पाया गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य फूड पॉइजनिंग में अंगों का रंग इस तरह नहीं बदलता। यह स्थिति केवल तभी पैदा होती है जब शरीर में कोई बेहद घातक और विशेष प्रकार का जहरीला पदार्थ फैल गया हो। इसके अलावा, मृतक अब्दुल्ला के शरीर में मॉर्फीन के निशान भी मिले हैं, जिससे पुलिस का शक और पुख्ता हो गया है।
क्या गवाही बनी मौत की वजह?
पुलिस अब इस मामले की जांच एक महत्वपूर्ण आपराधिक एंगल से कर रही है। परिवार के मुखिया, अब्दुल्ला डोकाडिया, वर्ष 2019 में दर्ज हुए धोखाधड़ी के एक हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्य गवाह थे।
मामला: जोगेश्वरी के एक रियल एस्टेट डेवलपर पर एक महिला से धोखाधड़ी करने का आरोप था, जिसमें अब्दुल्ला की गवाही बेहद निर्णायक मानी जा रही थी।
टाइमिंग: इस केस की सुनवाई इसी वर्ष (2026) में होनी तय थी। सुनवाई से ठीक पहले पूरे परिवार की इस तरह रहस्यमयी मौत ने इस संदेह को जन्म दिया है कि कहीं गवाह को रास्ते से हटाने के लिए तो यह वारदात नहीं की गई।
बैंकिंग ट्रांजेक्शन और लेन-देन की जांच
पुलिस ने अब्दुल्ला डोकाडिया के व्यावसायिक लेन-देन और बैंक खातों के विवरण खंगालने शुरू कर दिए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उन पर गवाही न देने के लिए कोई दबाव था या कोई पुरानी रंजिश इस घटना का कारण बनी।
मुख्य बिंदु:
मृतकों के शरीर के भीतरी अंग हरे पड़े, जहर देने की प्रबल आशंका।
शरीर में मॉर्फीन के अवशेष मिलने से साजिश का संदेह गहराया।
रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामले में अब्दुल्ला डोकाडिया थे अहम गवाह।
पुलिस अब इसे 'फूड पॉइजनिंग' के बजाय हत्या के दृष्टिकोण से देख रही है।
काले कपड़ों में प्रदर्शनकारियों का हुजूम, Vidarbha राज्य की मांग तेज
1 May, 2026 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र स्थापना दिवस: मुख्यमंत्री ने हुतात्माओं को दी श्रद्धांजलि, दूसरी ओर अलग विदर्भ की मांग को लेकर प्रदर्शन
मुंबई: महाराष्ट्र राज्य के 67वें स्थापना दिवस के अवसर पर राज्यभर में उत्साह और गौरव का माहौल रहा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हुतात्मा स्मारक पहुंचकर संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों को नमन किया। वहीं, दूसरी ओर अलग विदर्भ राज्य की मांग को लेकर नागपुर में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला।
मुख्यमंत्री का संबोधन: 'महाराष्ट्र देश का पावर इंजन'
हुतात्मा स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने राज्य की जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा:
छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित 'महाराष्ट्र धर्म' और यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत ही राज्य की असली पहचान है।
महाराष्ट्र आज देश का 'ग्रोथ इंजन' बन चुका है और निरंतर प्रगति की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
मजदूर दिवस पर श्रमिकों का आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि आज हम जो भी विकास देख रहे हैं, वह कामगारों के पसीने और मेहनत का ही फल है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए भी नागरिकों को शुभकामनाएँ देते हुए महाराष्ट्र को एक प्रगतिशील और विकसित राज्य बताया।
राजभवन में ध्वजारोहण
महाराष्ट्र दिवस के पावन अवसर पर राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मुंबई स्थित लोक भवन (राजभवन) में तिरंगा फहराया और राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। इस गरिमामयी समारोह में राष्ट्रगान और राज्य गीत की धुनें बजाई गईं। कार्यक्रम में राज्यपाल की पत्नी सुधा देव वर्मा सहित शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस बल मौजूद रहा।
अलग विदर्भ के लिए काला दिवस और विरोध
स्थापना दिवस के जश्न के बीच अलग विदर्भ राज्य की मांग एक बार फिर उठी। नागपुर के संविधान चौक और विधान भवन के समक्ष प्रदर्शनकारियों ने काले कपड़े पहनकर अपना विरोध दर्ज कराया। आंदोलनकारियों ने हवा में काले गुब्बारे छोड़े और जमकर नारेबाजी की। हंगामे को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर मौके से हटा दिया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि 1 मई 1960 को भाषाई आधार पर बॉम्बे स्टेट का विभाजन कर महाराष्ट्र राज्य का गठन किया गया था। इसकी नींव 1950 के दशक में चले 'संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन' ने रखी थी। तभी से हर साल 1 मई को पूरे राज्य में स्थापना दिवस को सांस्कृतिक गौरव के साथ मनाया जाता है।
भक्तों को चावल के दानों में दर्शन देते हैं भगवान श्रीनाथजी
राशिफल 07 मई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
जनजातीय खिलाड़ियों के लिए शानदार मंच साबित हुआ खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स
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प्रभारी सचिव ने शासकीय महाविद्यालय धनोरा के निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण किया
भक्ति की महायात्रा : रामलला के दर्शन को रायपुर से रवाना हुए 850 श्रद्धालु
टीकमगढ़ के डायल 112 हीरोज
