व्यापार
दवा और आभूषण क्षेत्र को मिली आईपीओ की सौगात, सेबी ने दी मंजूरी
24 May, 2026 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने दवा क्षेत्र की कोटेक हेल्थकेयर और आभूषण क्षेत्र की दीपा ज्वेलर्स को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की मंजूरी दे दी है, जिससे दोनों कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने का रास्ता साफ हो गया है। इन कंपनियों ने पहले ही अपने मसौदा दस्तावेज (डीआरएचपी) सेबी के पास दाखिल किए थे और हाल ही में नियामक से आवश्यक टिप्पणियां प्राप्त कीं, जिसे आईपीओ लाने की अनुमति माना जाता है। कोटेक हेल्थकेयर का आईपीओ 295 करोड़ रुपये तक के नए शेयर निर्गम के साथ-साथ 60 लाख शेयरों की बिक्री पेशकश (ओएफएस) का प्रस्ताव है। कंपनी इस पूंजी का उपयोग नई परियोजनाएं स्थापित करने, मौजूदा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए उत्पाद बनाने में करेगी, जिसके लिए 226.25 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। शेष राशि सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए खर्च होगी। वहीं दीपा ज्वेलर्स का आईपीओ 250 करोड़ रुपये के नए निर्गम और 1,18,48,340 शेयरों की बिक्री पेशकश (ओएफएस) का संयोजन है। इस ओएफएस में प्रर्वतक अशोक अग्रवाल और सीमा अग्रवाल अपने शेयर बेचेंगे। यह मंजूरी इन कंपनियों को बाजार से पूंजी जुटाने और अपनी विस्तार योजनाओं को गति देने का अवसर प्रदान करेगी।
दालों का आयात 34 फीसदी घटा, बढ़ेंगे दाम
24 May, 2026 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । देश में दालों की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में दालों का आयात 34 प्रतिशत घटकर 3.63 अरब डॉलर रह गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 5.54 अरब डॉलर था। आयात में कमी के कारण आने वाले महीनों में दालों की कीमतों में तेजी आने की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार मसूर और पीली मटर के आयात में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। मसूर दाल के आयात में करीब 6 प्रतिशत और पीली मटर में 47 प्रतिशत तक कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू उत्पादन में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं हुई तो बाजार में दालों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
इस बार मानसून और फसल उत्पादन को लेकर भी चिंता बनी हुई है। यदि उत्पादन कमजोर रहा तो सरकार पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। हालांकि सरकार के पास फिलहाल बफर स्टॉक मौजूद है, लेकिन लगातार घटते आयात के चलते खुदरा बाजार में दाम बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीण युवाओं के लिए खुशखबरी, VB-G RAM G कानून के मसौदे पर सरकार का बड़ा कदम।
23 May, 2026 04:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025' (VB-G-RAM-G) के मसौदा नियमों को आधिकारिक तौर पर प्रकाशित कर दिया है। सरकार ने इन नियमों को आम जनता और संबंधित पक्षों के सुझावों व परामर्श के लिए सार्वजनिक किया है। इस नए कानून को आगामी 1 जुलाई से देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, इन नियमों का मुख्य उद्देश्य इस महत्वाकांक्षी कानून को जमीन पर प्रभावी ढंग से उतारने के लिए एक मजबूत और पारदर्शी ढांचा तैयार करना है।
1. मनरेगा की जगह लेगा नया कानून, काम और अधिकार रहेंगे सुरक्षित
यह नया अधिनियम मौजूदा ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम 'मनरेगा' (MGNREGA) का स्थान लेगा। सरकार द्वारा जारी मसौदा नियमों में मनरेगा से 'वीबी-ग्राम जी' में बदलाव की पूरी रूपरेखा तय की गई है। इस संक्रमण काल (Transition Period) के दौरान यह विशेष ध्यान रखा गया है कि गांवों में चल रहे मौजूदा काम प्रभावित न हों। इसके तहत पुरानी देनदारियों का निपटान, रिकॉर्ड का ट्रांसफर और ई-केवाईसी (e-KYC) सत्यापित जॉब कार्ड की वैधता को बरकरार रखा गया है, ताकि नई योजना के पूरी तरह लागू होने तक श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रहें।
2. शिकायत निवारण और बेरोजगारी भत्ते के लिए बनेगा मजबूत ढांचा
यह मसौदा नियम अधिनियम की धारा 33 और अन्य प्रमुख प्रावधानों के तहत तैयार किए गए हैं। नियमों के दायरे में प्रशासनिक खर्चों का प्रबंधन, श्रमिकों की शिकायतों के निवारण के लिए एक मजबूत तंत्र की स्थापना, और समय पर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अलावा, यदि समय पर काम नहीं मिलता है, तो बेरोजगारी भत्ते के भुगतान के नियम और सामान्य आवंटन से अधिक होने वाले खर्चों के मैनेजमेंट को भी इसमें बेहद स्पष्ट किया गया है।
3. राष्ट्रीय संचालन समिति और केंद्रीय परिषद संभालेंगी कमान
देशभर में इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक विस्तृत प्रशासनिक और वित्तीय ढांचा तैयार किया जा रहा है। इन नियमों के तहत एक राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति और 'केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद' का गठन किया जाएगा, जो इसके कार्यों और जिम्मेदारियों की निगरानी करेगी। इसमें बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनिक व वित्तीय खर्चों के प्रबंधन के लिए भी विशेष प्रावधान जोड़े गए हैं।
4. सहभागी शासन पर जोर: जनता और विशेषज्ञों से मांगे सुझाव
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों को अंतिम रूप देने से पहले एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया अपनाई जा रही है। सरकार का उद्देश्य सहभागी शासन को बढ़ावा देना है। इसके लिए सभी राज्य सरकारों, विषय विशेषज्ञों, संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों (NGOs) और आम जनता से रचनात्मक प्रतिक्रिया और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, ताकि इस कानून को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाया जा सके।
पेट्रोल-डीजल की खपत को लेकर अफवाहों पर Indian Oil का जवाब
23 May, 2026 01:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: पश्चिम एशिया में गहराते अमेरिका-ईरान सैन्य गतिरोध ने पूरी दुनिया को बड़े ऊर्जा संकट में डाल दिया है। 28 फरवरी 2026 से भड़की इस जंग के चलते रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज स्ट्रेट' जलमार्ग से कच्चे तेल और गैस का परिवहन लगभग रुक गया है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा है, जहां क्रूड ऑयल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल की सीमा को पार कर गए हैं। वैश्विक स्तर पर मची इस खलबली के बीच भारत में ईंधन की उपलब्धता को लेकर देश की दिग्गज सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी का कहना है कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई किल्लत नहीं है। कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर दिखी अस्थाई कमी केवल स्थानीय स्तर पर सप्लाई चेन में आए बदलावों की वजह से है।
इन कारणों से सरकारी फ्यूल स्टेशनों पर उमड़ी उपभोक्ताओं की भीड़
इंडियन ऑयल ने कुछ चुनिंदा आउटलेट्स पर मांग में आई अचानक तेजी की वजहों का खुलासा किया है। कंपनी के अनुसार, वर्तमान में फसलों की कटाई का सीजन होने के कारण ग्रामीण इलाकों में डीजल की मौसमी मांग काफी बढ़ गई है। इसके अलावा, प्राइवेट रिटेलर्स के पंपों पर तेल की कीमतें ज्यादा होने की वजह से भारी वाहन और आम उपभोक्ता बड़ी संख्या में सरकारी पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर थोक ईंधन की ऊंची कीमतों का असर इस पूरे बदलाव में साफ देखा जा रहा है।
चालू महीने में ईंधन की मांग ने बनाए नए रिकॉर्ड
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 से 22 मई के बीच देश में पेट्रोल की खपत में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 14 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, डीजल की मांग में भी करीब 18 प्रतिशत का असाधारण उछाल आया है। ईंधन की इस रिकॉर्ड मांग के बाद भी तेल कंपनियां देश के हर हिस्से में आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पूरी ताकत से जुटी हुई हैं।
सरकारी तेल कंपनियों के पास सुरक्षित है पर्याप्त बैकअप
उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाते हुए IOC ने कहा कि देश भर में फैले उसके 42,000 से अधिक पेट्रोल पंपों में से अधिकांश पर ईंधन का स्टॉक पूरी तरह सामान्य है। सप्लाई में रुकावट की शिकायतें केवल कुछ गिने-चुने पंपों से ही आई हैं। सभी प्रमुख सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां देश में ईंधन का पर्याप्त रिजर्व बनाए हुए हैं और जहां भी स्थानीय स्तर पर दिक्कतें आ रही हैं, उन्हें तुरंत ठीक किया जा रहा है।
अनावश्यक भीड़ लगाने से बचें, अफवाहों पर न करें भरोसा
इंडियन ऑयल ने आम जनता से पैनिक बाइंग (घबराहट में जरूरत से ज्यादा तेल खरीदने) न करने की पुरजोर अपील की है। कंपनी ने आश्वस्त किया है कि वह जमीनी हालात पर लगातार नजर रख रही है। उपभोक्ताओं तक बिना किसी बाधा के ईंधन पहुंचाने के लिए सभी उचित कदम उठाए जा चुके हैं, इसलिए किसी भी तरह की भ्रामक खबरों में आकर पेट्रोल पंपों पर कतारें न लगाएं।
ITR में इनकम मिसमैच होने पर क्या करें, आसान उपाय जानें
23 May, 2026 12:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख जैसे-जैसे पास आ रही है, टैक्सपेयर्स की धड़कनें बढ़ने लगी हैं। इस बार रिटर्न दाखिल करते समय आपको एक्स्ट्रा सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। पिछले साल जिन रिटर्न में कमियां पाई गई थीं, उनकी प्रोसेसिंग में काफी लंबा वक्त लगा था। इनमें सबसे ज्यादा मामले कमाई की सही जानकारी न देने (इनकम मिसमैच) के थे, जिसके चलते लाखों लोगों का रिफंड अटक गया था और कईयों को टैक्स विभाग के नोटिस का सामना करना पड़ा था।
टैक्स विभाग का एडवांस एआई सिस्टम पकड़ रहा है गलतियां
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का डेटा-मैचिंग सिस्टम पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुका है। विभाग अब गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित रिस्क एसेसमेंट और सिस्टम-बेस्ड वेरिफिकेशन का इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में अगर आपके द्वारा दिखाई गई कमाई और टैक्स विभाग के पास मौजूद आपके डेटा में थोड़ा भी अंतर मिलता है, तो आपका फॉर्म रिजेक्ट हो सकता है और जांच शुरू हो सकती है।
एआईएस (AIS) को बनाएं अपना मददगार
इस तरह की परेशानियों से बचने के लिए जानकारों का कहना है कि टैक्सपेयर्स को एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) की मदद लेनी चाहिए। टैक्स विभाग के पास हर टैक्सपेयर का पूरा वित्तीय लेखा-जोखा इस स्टेटमेंट में मौजूद रहता है। राहत की बात यह है कि आप इसे इनकम टैक्स की आधिकारिक वेबसाइट से आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। रिटर्न भरने से पहले इसके जरिए अपनी इनकम को क्रॉस-चेक करना सबसे सुरक्षित तरीका है।
आपके हर बड़े-छोटे लेन-देन पर है पैनी नजर
AIS में आपके पूरे फाइनेंशियल ईयर की हर छोटी-बड़ी गतिविधि दर्ज होती है। इसमें आपकी सैलरी, बैंक से मिलने वाला ब्याज, डिविडेंड, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में किया गया निवेश, टीडीएस (TDS), टीसीएस (TCS), विदेश भेजा गया पैसा और प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री जैसी तमाम जानकारियां शामिल होती हैं। ये सारा डेटा टैक्स विभाग के पास बैंकों, म्यूचुअल फंड हाउसेज और अन्य वित्तीय संस्थानों के जरिए पहुंचता है।
इन जरूरी दस्तावेजों से जरूर करें मिलान
टैक्स कंसल्टेंट्स का मानना है कि केवल AIS देखना ही काफी नहीं है, बल्कि इसमें दी गई जानकारियों का मिलान अपने बैंक अकाउंट स्टेटमेंट, फॉर्म 26AS और फॉर्म 16 से भी कर लें। खासतौर पर नौकरीपेशा लोगों के लिए यह बेहद जरूरी है कि उनके फॉर्म 16 में दर्ज सैलरी और AIS में दिख रही सैलरी का अमाउंट एक समान हो। अगर इसमें कोई गलती नजर आती है, तो उसे समय रहते ठीक कराया जा सकता है।
मिसमैच होने पर आ सकता है कानूनी नोटिस
अगर आपकी प्रॉपर्टी की डील, म्यूचुअल फंड निवेश, क्रेडिट कार्ड के बड़े पेमेंट्स या विदेशी लेन-देन की जानकारी आपके टैक्स रिटर्न से मेल नहीं खाती है, तो ऑटोमैटिक सिस्टम इसे तुरंत पकड़ लेगा। ऐसी स्थिति में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपसे स्पष्टीकरण मांग सकता है और असंतोषजनक जवाब होने पर कानूनी नोटिस भी जारी कर सकता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि पूरा समय लेकर, सही आंकड़ों के साथ ही अपना रिटर्न फाइल करें।
F&O सेगमेंट से बाहर हुए एक्साइड और नुवामा, NSE ने किया ऐलान
23 May, 2026 11:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने वायदा एवं विकल्प (F&O) सेगमेंट से दो प्रमुख कंपनियों को बाहर करने का बड़ा फैसला लिया है। एनएसई ने अधिसूचना जारी कर बताया कि एक्साइड इंडस्ट्रीज (Exide Industries) और नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट (Nuvama Wealth Management) को डेरिवेटिव्स सेगमेंट से हटाया जा रहा है। दिए गए समाचार को बिना किसी बाहरी मीडिया संदर्भ के, नए शब्दों और सबहेडिंग्स के साथ नीचे व्यवस्थित किया गया है:
29 जुलाई के बाद दोनों शेयरों में नहीं होगी F&O ट्रेडिंग
एक्सचेंज द्वारा जारी बयान के मुताबिक, वर्तमान में चल रहे मई, जून और जुलाई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट्स अपनी तय एक्सपायरी तारीख तक सामान्य रूप से ट्रेड के लिए उपलब्ध रहेंगे। इस दौरान नियमों के तहत नई स्ट्राइक प्राइस भी पेश की जा सकती हैं। हालांकि, इन मौजूदा सीरीज की समाप्ति के बाद दोनों कंपनियों के लिए कोई भी नया मंथली कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि 29 जुलाई, 2026 के बाद से इन दोनों सिक्योरिटीज में वायदा कारोबार पूरी तरह बंद हो जाएगा।
सेबी (SEBI) के कड़े नियमों के तहत लिया गया एक्शन
NSE का यह कदम बाजार नियामक सेबी (SEBI) द्वारा अगस्त 2024 में जारी किए गए नए एलिजिबिलिटी फ्रेमवर्क पर आधारित है। सेबी ने मार्केट में होने वाले हेरफेर (Manipulation) को रोकने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए एफएंडओ सेगमेंट के नियमों को काफी सख्त कर दिया था। नए मानकों के अनुसार, किसी भी स्टॉक को डेरिवेटिव सेगमेंट में बने रहने या शामिल होने के लिए पिछले 6 महीनों के दौरान मार्केट कैपिटलाइजेशन और ट्रेडेड वैल्यू के मामले में देश के टॉप 500 शेयरों में शुमार होना अनिवार्य है।
क्या हैं F&O की शर्तें और कब हो सकती है दोबारा एंट्री?
बाजार के नियमों के तहत एफएंडओ लिस्ट में बने रहने के लिए कंपनियों को कुछ बेहद जरूरी पैमानों को पूरा करना होता है, जिनमें शामिल हैं:
MQSOS: मीडियन क्वार्टर-सिग्मा ऑर्डर साइज न्यूनतम ₹75 लाख होना चाहिए।
MWPL: मार्केट-वाइड पोजीशन लिमिट कम से कम ₹1,500 करोड़ की होनी जरूरी है।
ADDV: एवरेज डेली डिलीवरी वैल्यू का ₹35 करोड़ होना अनिवार्य है।
जो भी शेयर इन मानकों पर खरे नहीं उतरते, उन्हें इस सेगमेंट से बाहर का रास्ता देखना पड़ता है। नियम के अनुसार, एक बार बाहर होने के बाद इन स्टॉक्स को कम से कम एक साल के लिए दोबारा शामिल नहीं किया जा सकता। एक साल की अवधि बीतने के बाद, यदि ये स्टॉक्स लगातार छह महीनों तक इन सभी शर्तों को पूरा करते हैं, तभी इनकी वापसी पर विचार किया जा सकता है।
बाजार का हाल: रिकॉर्ड तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुए सूचकांक
इस बड़ी खबर के बीच, 22 मई को भारतीय शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद होने में कामयाब रहे। सेंसेक्स 0.31 फीसदी (231 अंक) की बढ़त दर्ज करते हुए 75,415 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.27 फीसदी (64 अंक) चढ़कर 23,719 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। बैंकिंग सेक्टर में अच्छी रौनक रही और बैंक निफ्टी 1.15 फीसदी उछलकर बंद हुआ। अन्य शेयरों की बात करें तो वरुण बेवरेजेज में 3.77 फीसदी की तेजी देखी गई, जबकि मैक्स हेल्थकेयर का शेयर 6 फीसदी से ज्यादा टूटकर बंद हुआ।
Wipro Share Buyback: रिकॉर्ड डेट 5 जून, निवेशकों के लिए बड़ा मौका
23 May, 2026 10:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु: दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो (Wipro) ने अपने शेयरहोल्डर्स के लिए बड़े बायबैक प्रोग्राम का एलान किया है। कंपनी बाजार से ₹15,000 करोड़ मूल्य के शेयर वापस खरीदने जा रही है। इस खबर में मनीकंट्रोल या किसी अन्य अनपेक्षित संदर्भ को हटाकर, पूरे समाचार को नए स्वरूप और सबहेडिंग्स के साथ नीचे प्रस्तुत किया गया है:
विप्रो का ₹15,000 करोड़ का मेगा बायबैक प्लान, ₹250 तय की कीमत
विप्रो लिमिटेड अपने शेयरधारकों से करीब 60 करोड़ इक्विटी शेयरों की वापस खरीदारी (बायबैक) करेगी। कंपनी बोर्ड ने इस ₹15,000 करोड़ के प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे दी थी, जिसमें प्रमोटर ग्रुप भी अपनी हिस्सेदारी बेचने में रुचि दिखा रहा है। इस बायबैक के लिए 5 जून को रिकॉर्ड डेट तय किया गया है, यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों के पास विप्रो के शेयर होंगे, केवल वही इस बायबैक का लाभ उठा सकेंगे। कंपनी ने बायबैक के लिए ₹250 प्रति शेयर का भाव तय किया है। गौरतलब है कि विप्रो करीब 3 साल के अंतराल के बाद यह कदम उठा रही है। इससे पहले कंपनी ने जून 2023 में ₹445 प्रति शेयर के भाव पर ₹12,000 करोड़ का बायबैक किया था।
शेयर बाजार में प्रदर्शन और 2026 में 24% की गिरावट
विप्रो का शेयर शुक्रवार, 22 मई को BSE पर ₹203.10 के स्तर पर बंद हुआ, जिससे कंपनी का कुल मार्केट कैप ₹2.13 लाख करोड़ बैठता है। साल 2026 में अब तक विप्रो के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई है और यह लगभग 24% तक टूट चुका है। BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा रहने वाले इस शेयर का 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर ₹273.15 और निचला स्तर ₹186.50 रहा है। हिस्सेदारी की बात करें तो मार्च 2026 के अंत तक कंपनी में प्रमोटर्स के पास 72.62% का बड़ा हिस्सा था।
मार्च तिमाही के नतीजे: मुनाफे में मामूली कमी, रेवेन्यू बढ़ा
जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही के दौरान विप्रो का समेकित शुद्ध मुनाफा (Consolidated Net Profit) सालाना आधार पर 1.89% गिरकर ₹3,501.8 करोड़ रहा, जो पिछले साल समान अवधि में ₹3,569.6 करोड़ था। हालांकि, तिमाही आधार पर मुनाफे में 12.2% का सुधार देखा गया है। मार्च तिमाही में कंपनी की कुल आय 7.6% बढ़कर ₹24,236.3 करोड़ रही। अगर पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 की बात करें, तो कंपनी का सालाना शुद्ध मुनाफा 0.47% की मामूली बढ़त के साथ ₹13,197.4 करोड़ और कुल रेवेन्यू 3.96% बढ़कर ₹92,624 करोड़ पर पहुंच गया है।
विप्रो के स्टॉक पर दिग्गज ब्रोकरेज फर्म्स की मिली-जुली राय
कंपनी को ट्रैक करने वाले 45 मार्केट एनालिस्ट्स में से 11 ने इसे खरीदने ('Buy') की सलाह दी है, जबकि 19 ने 'Hold' और 15 ने 'Sell' रेटिंग दी है। तिमाही नतीजों और कमजोर गाइडेंस के बाद प्रमुख ब्रोकरेज हाउसेज का नजरिया इस प्रकार है:
नोमुरा: ₹250 के टारगेट के साथ 'Buy' रेटिंग दी।
मोतीलाल ओसवाल व HSBC: क्रमशः ₹215 और ₹210 के टारगेट के साथ 'Hold' रेटिंग बनाए रखी। विशेषज्ञों का मानना है कि बायबैक से शॉर्ट-टर्म में शेयर को सपोर्ट मिलेगा, लेकिन लॉन्ग-टर्म रिकवरी अभी भी धीमी है।
जेपी मॉर्गन व आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज: दोनों ने ₹200 के टारगेट के साथ 'Neutral/Hold' की सलाह दी।
मॉर्गन स्टेनली व कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज: क्रमशः ₹194 और ₹190 के प्राइस टारगेट के साथ 'Underweight/Sell' रेटिंग दी है।
CNG के बढ़ते दामों ने बढ़ाई लोगों की चिंता, देखें नया प्राइस लिस्ट
23 May, 2026 08:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी (CNG) गाड़ियों से सफर करने वाले आम लोगों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने कंप्रेस्ड नेचुरल गैस की कीमतों में ₹1 प्रति किलोग्राम का इजाफा कर दिया है। पिछले महज 10 दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं। इस खबर को बिना किसी बाहरी मीडिया संदर्भ के, नए शब्दों और सबहेडिंग्स के साथ नीचे प्रस्तुत किया गया है:
दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी के नए रेट लागू, 10 दिनों में तीसरी बढ़ोतरी
आज सुबह से प्रभावी हुई नई दरों के बाद देश की राजधानी दिल्ली में सीएनजी की कीमत बढ़कर ₹81.09 प्रति किलोग्राम हो गई है। वहीं, नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में अब ग्राहकों को प्रति किलो सीएनजी के लिए ₹89.70 का भुगतान करना होगा। इससे पहले तेल कंपनियों ने 15 मई को ₹2 और फिर 18 मई को ₹1 की बढ़ोतरी की थी।
विभिन्न शहरों में सीएनजी की नई दरें (रुपये/किग्रा) इस प्रकार हैं:
अंतरराष्ट्रीय संकट और सप्लाई रूट बाधित होना बनी मुख्य वजह
लगातार बढ़ रही कीमतों के पीछे मुख्य कारण वैश्विक मोर्चे पर उपजा तनाव है। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी गंभीर संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एनर्जी कॉस्ट काफी बढ़ गई है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' रूट के बंद होने से सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वैश्विक दबाव के चलते सरकारी तेल कंपनियों के लिए घरेलू बाजार में पुरानी कीमतों को बरकरार रखना मुमकिन नहीं रह गया था।
कंपनियों का दैनिक घाटा ₹1600 करोड़ पार, इसलिए टुकड़ों में बढ़ रहे दाम
इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगे दामों पर कच्चा तेल और गैस खरीदना पड़ रहा है। घरेलू बाजार में उस अनुपात में कीमतें न बढ़ने के कारण इन कंपनियों को रोजाना करीब ₹1,600 करोड़ का भारी नुकसान झेलना पड़ रहा था। हालांकि, देश में खुदरा महंगाई को बेलगाम होने से रोकने के लिए सरकार ने कंपनियों को एक साथ बड़ी बढ़ोतरी करने की इजाजत नहीं दी है, यही वजह है कि कंपनियां ₹1 या ₹2 करके टुकड़ों में दाम बढ़ा रही हैं।
आम जनता की जेब पर सीधा असर और पीएम मोदी की 'वर्क फ्रॉम होम' की अपील
सीएनजी के महंगे होने का सीधा असर आम आदमी के मासिक बजट और परिवहन लागत पर पड़ेगा। दिल्ली-एनसीआर में ऑटो, कैब (ओला/उबर), बसें और माल ढुलाई करने वाले वाहन मुख्य रूप से सीएनजी पर ही निर्भर हैं। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टर्स पर दबाव बढ़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में यात्रा और माल भाड़ा महंगा होना तय है।
इसी बढ़ते ऊर्जा संकट और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से ईंधन बचाने का आग्रह किया था। पीएम ने कंपनियों से अपील की थी कि वे अधिकतम 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम) को बढ़ावा दें, ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो और कच्चे तेल की घरेलू मांग को घटाया जा सके।
निफ्टी का प्रमुख रेजिस्टेंस 23800-23900, तोड़ने पर 24000-24200 की ओर उछाल
22 May, 2026 03:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में 22 मई को दोपहर के कारोबारी सत्र के दौरान जबरदस्त हलचल देखी गई। शुरुआती कारोबार में करीब 0.75 प्रतिशत की शानदार बढ़त बनाने के बाद बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी ने ऊपरी स्तरों से अपनी कुछ बढ़त गंवा दी। दोपहर 2:38 बजे के करीब, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स लगभग 267 अंकों की मजबूती के साथ 75,450.63 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी करीब 72 अंकों की बढ़त लेकर 23,727.40 पर बना हुआ था। बाजार के इस रुख के बीच करीब 2,058 शेयरों में खरीदारी और 1,726 शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया।
बैंकिंग और एनबीएफसी सेक्टर चमके; ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी आई तेजी
आज के कारोबार की सबसे बड़ी विशेषता बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के शेयरों में आई जोरदार तेजी रही। एनबीएफसी इंडेक्स में 1.5 फीसदी से ज्यादा का उछाल दर्ज किया गया, जिसमें एमएफएसएल, आईसीआईसीआई प्रू और श्रीराम फाइनेंस जैसे बड़े शेयर दो से तीन प्रतिशत तक मजबूत हुए। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) सेगमेंट में भी बेहतरीन रौनक रही, जहां डिक्सन टेक्नोलॉजीज का शेयर 4 फीसदी तक उछल गया। ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी आज अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जबकि आईटी और फार्मा कंपनियों पर हल्का दबाव बना रहा।
कमजोर नतीजों से मैक्स हेल्थ और ऑरो फार्मा टूटे; अच्छे रिज़ल्ट से आरसीएफ उछला
कॉर्पोरेट नतीजों का सीधा असर आज के बाजार पर साफ दिखाई दिया। उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजे पेश करने के कारण मैक्स हेल्थकेयर और ऑरोबिंदो फार्मा के शेयर 5 फीसदी से ज्यादा टूटकर वायदा बाजार (F&O) के टॉप लूजर्स की कतार में शामिल हो गए। इसके साथ ही वेल्सपन कॉर्प, सन टीवी और इंजीनियर्स इंडिया के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, शानदार तिमाही नतीजों के दम पर राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (RCF) के शेयर में लगभग 5 फीसदी की शानदार बढ़त देखी गई।
आरबीआई डिविडेंड और शॉर्ट कवरिंग ने बाजार को दी बड़ी संजीवनी
बाजार के जानकारों और विश्लेषकों के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार इस समय एक बड़ी 'होप रैली' (उम्मीदों की दौड़) के दौर से गुजर रहा है। वीकेंड से ठीक पहले शॉर्ट कवरिंग (बिकवाली के सौदों को वापस खरीदना) होने की वजह से बाजार को निचला सपोर्ट मिला। इसके अलावा, आज होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अहम बोर्ड बैठक से रिकॉर्ड लाभांश (डिविडेंड) मिलने की उम्मीद ने भी सरकारी और निजी बैंकों के शेयरों में जान फूंक दी। बाजार के पंडितों का मानना है कि लार्ज कैप (बड़ी कंपनियों के) शेयरों पर निवेशकों का भरोसा आज ज्यादा मजबूत रहा।
निफ्टी के लिए 23,900 की बड़ी दीवार; बैंक निफ्टी में 55,000 का लक्ष्य संभव
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करने के लिए कुछ तकनीकी स्तर बेहद महत्वपूर्ण होंगे:
निफ्टी के लिए रणनीति: निफ्टी के लिए फिलहाल 23,600 से 23,650 का स्तर एक मजबूत आधार (बेस) का काम करेगा। ऊपरी स्तर पर 23,800 से 23,900 के बीच एक मजबूत प्रतिरोध (दीवार) है। यदि निफ्टी इस सीमा को पार करने में सफल रहता है, तो यह बहुत जल्द 24,000 से 24,200 के नए स्तरों को छू सकता है।
बैंक निफ्टी का आउटलुक: बैंकिंग इंडेक्स ने 52,800 के स्तर पर एक मजबूत डबल बॉटम (सुधार का संकेत) बनाया है। अब बैंक निफ्टी के लिए 54,200 के ऊपर बने रहना बेहद जरूरी है। यदि यह इसके ऊपर टिकने में कामयाब रहा, तो इसमें 55,000 के स्तर तक की रैली आसानी से देखी जा सकती है।
LG Electronics India में बिकवाली का दबाव, Q4 परिणाम के बाद शेयर 4% गिरा
22 May, 2026 02:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू उपकरण (होम अप्लायंसेज) और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड (LG Electronics India) के शेयरों में 22 मई को भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कारोबार के दौरान कंपनी का स्टॉक 4.4 प्रतिशत तक लुढ़क कर 1462.65 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया। शेयरों में आई इस गिरावट की मुख्य वजह जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के नतीजों में कंपनी के शुद्ध मुनाफे (नेट प्रॉफिट) का घटना माना जा रहा है।
तिमाही मुनाफे में 8% से अधिक की गिरावट, खर्चों ने बढ़ाया दबाव
मार्च 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही के दौरान एलजी इंडिया का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 8.19 प्रतिशत घटकर 692.7 करोड़ रुपये रह गया, जो इससे पिछले वर्ष की समान तिमाही में 754.54 करोड़ रुपये था। मुनाफे में आई इस कमी का बड़ा कारण इनपुट लागत (कच्चे माल की कीमत) में बढ़ोतरी और विदेशी मुद्रा (करेंसी) में आई कमजोरी को माना जा रहा है। इसके चलते कंपनी के कुल खर्च सालाना आधार पर 11 प्रतिशत बढ़कर 7,223.6 करोड़ रुपये पर पहुंच गए और कामकाजी मार्जिन (EBITDA मार्जिन) भी 230 बेसिस पॉइंट गिरकर 11.7 प्रतिशत रह गया।
रेवेन्यू में 8% की बढ़ोतरी; होम अप्लायंस और बड़े टीवी की मांग में उछाल
मुनाफे में गिरावट के बावजूद, कंपनी के परिचालन राजस्व (रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस) में सुधार दर्ज किया गया है। मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 8.12 प्रतिशत की बढ़त के साथ 8,053.55 करोड़ रुपये रहा, जो मार्च 2025 तिमाही में 7,448.42 करोड़ रुपये था। सभी सेगमेंट में मांग बढ़ने से राजस्व को सहारा मिला, जिसमें होम अप्लायंस बिजनेस में 6 फीसदी और बड़े स्क्रीन वाले टेलीविजन की शानदार मांग के चलते होम एंटरटेनमेंट बिजनेस में साल-दर-साल आधार पर 20 फीसदी की बेहतरीन ग्रोथ देखी गई। हालांकि, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो सालाना शुद्ध मुनाफा 23.52 प्रतिशत घटकर 1,685.09 करोड़ रुपये रह गया है।
धमाकेदार रहा था IPO का सफर, प्रमोटर्स के पास 85% हिस्सेदारी
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया (जो दक्षिण कोरियाई मूल की एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की भारतीय इकाई है) पिछले साल 14 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी। कंपनी का 11,607 करोड़ रुपये का आईपीओ देश का अब तक का सबसे बड़ा बोली पाने वाला आईपीओ साबित हुआ था, जिसे 4.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के सब्सक्रिप्शन मिले थे और यह 54.02 गुना भरकर बंद हुआ था। हालांकि, 1140 रुपये के आईपीओ प्राइस के मुकाबले शेयर अभी ऊपर है, लेकिन पिछले एक महीने में इसमें 8 फीसदी की गिरावट आई है। मार्च 2026 के अंत तक कंपनी में 85 प्रतिशत हिस्सेदारी प्रमोटर्स के पास सुरक्षित थी।
बाय, सेल या होल्ड: विश्लेषकों और ब्रोकरेज फर्म्स का क्या है अनुमान?
बाजार के जानकारों के अनुसार, हालिया गिरावट के बावजूद बाजार के विशेषज्ञ इस स्टॉक को लेकर काफी सकारात्मक हैं। इस शेयर पर नजर रखने वाले 30 मार्केट एनालिस्ट्स में से 29 ने इसे खरीदने ('Buy') की सलाह दी है, जबकि केवल एक विश्लेषक ने इसे बेचने ('Sell') की राय दी है। ब्रोकरेज फर्म्स के टारगेट प्राइस की बात करें तो:
ब्रोकरेज फर्म
रेटिंग/सलाह
टारगेट प्राइस (प्रति शेयर)
Way2Wealth Brokers
बुलिश (सर्वोच्च लक्ष्य)
₹1,950
HDFC Securities
कशियस (न्यूनतम लक्ष्य)
₹1,485
8th Pay Commission: मिनिमम बेसिक पे 68,000 पार, फिटमेंट फैक्टर से मिल सकती है बढ़त
22 May, 2026 01:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें इन दिनों आगामी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि आयोग की विस्तृत रिपोर्ट अगले साल तक सामने आ सकती है। हालांकि, इस बीच 'फिटमेंट फैक्टर' को लेकर चर्चाओं का बाजार अभी से गर्म हो गया है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन व भत्तों में होने वाली कुल बढ़ोतरी इसी फिटमेंट फैक्टर के गणित पर निर्भर करती है। इसके लागू होने से देश के एक करोड़ से अधिक परिवारों की आर्थिक स्थिति पर सीधा और सकारात्मक असर पड़ेगा।
एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा लाभ
8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद केंद्र सरकार के करीब 49 लाख सेवारत कर्मचारियों और लगभग 65 लाख पेंशनभोगियों के मूल वेतन (बेसिक पे) तथा पेंशन में बड़ा संशोधन किया जाएगा। यदि वेतन आयोग इस बार उच्च फिटमेंट फैक्टर की अनुशंसा करता है, तो टेक-होम सैलरी में बंपर इजाफा देखने को मिलेगा। इसके विपरीत, यदि पिछले यानी 7वें वेतन आयोग की बात करें, तो सरकार ने इसे 2.57 गुना तय किया था, जिसके कारण तत्कालीन न्यूनतम मूल वेतन 7,000 रुपये से बढ़कर सीधे 18,000 रुपये प्रति माह हो गया था।
3.83 गुना फिटमेंट फैक्टर की मांग, ₹18,000 से बढ़कर ₹69,000 हो सकती है बेसिक पे
वर्तमान में इस बात को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार का फिटमेंट फैक्टर कितना तय होगा। कर्मचारी यूनियनों की शीर्ष संस्था 'नेशनल काउंसिल ऑफ द ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी' (NC-JCM) ने सरकार के समक्ष 3.833 गुना फिटमेंट फैक्टर रखने की जोरदार मांग उठाई है। यदि कर्मचारी संगठनों की इस मांग को हुबहू स्वीकार कर लिया जाता है, तो केंद्रीय कर्मचारियों का मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये से बढ़कर सीधे 69,000 रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच जाएगा।
आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान: ₹30,000 से ₹52,000 के बीच रह सकता है न्यूनतम वेतन
दूसरी ओर, वित्तीय मामलों के जानकारों और एक्सपर्ट्स का गणित कर्मचारी संगठनों की मांग से थोड़ा अलग है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई के मौजूदा आंकड़ों (जनरल इनफ्लेशन) को आधार बनाने पर फिटमेंट फैक्टर 2.28 निर्धारित किया जा सकता है, जिससे न्यूनतम मूल वेतन 41,000 रुपये हो जाएगा। वहीं, कुछ अन्य विश्लेषकों का अनुमान है कि यह आंकड़ा 1.83 से 2.46 के दायरे में रह सकता है। इस परिस्थिति में न्यूनतम बेसिक सैलरी 30,000 रुपये से लेकर 52,000 रुपये के बीच तय होने की उम्मीद है।
वैश्विक अनिश्चितता और देश के खजाने की स्थिति देखकर कैबिनेट लेगी अंतिम फैसला
फिटमेंट फैक्टर की गणना का तरीका बेहद सीधा है—कर्मचारी के वर्तमान मूल वेतन को तय किए गए फिटमेंट फैक्टर से गुणा किया जाता है, जिससे नया संशोधित बेसिक पे निकल आता है। इसी आधार पर कर्मचारियों के अन्य भत्ते, इंक्रीमेंट और अंतिम पेंशन का निर्धारण होता है। बहरहाल, वेतन आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के बाद केंद्रीय कैबिनेट के पाले में गेंद डालेगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर मध्य-पूर्व के भू-राजनीतिक तनावों के कारण पैदा हुए वित्तीय दबावों को देखते हुए केंद्र सरकार अपने राजकोषीय घाटे और खजाने की सेहत का पूरा आकलन करने के बाद ही इस पर अंतिम मुहर लगाएगी।
Defense Stock Alert: सूर्यास्त्र रॉकेट टेस्ट ने शेयर को दिया जोरदार बूस्ट
22 May, 2026 12:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे। रक्षा क्षेत्र (डिफेंस) के कलपुर्जे बनाने वाली प्रमुख घरेलू कंपनी नाइबे (Nibe) के शेयरों में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार के दौरान जबरदस्त तेजी देखी गई। कंपनी के स्टॉक आज इंट्राडे में करीब 11 प्रतिशत तक मजबूत हो गए। इस बूम के पीछे की मुख्य वजह ओडिशा के तट पर कंपनी द्वारा किए गए 'सूर्यास्त्र' रॉकेटों के सफल परीक्षण को माना जा रहा है। कंपनी ने शेयर बाजार को सूचित किया है कि उसने 18 और 19 मई को दो अलग-अलग मारक क्षमता वाले रॉकेटों का सफलतापूर्वक परीक्षण पूरा कर लिया है, जिसके बाद से पिछले तीन सत्रों में यह शेयर लगभग 27 फीसदी चढ़ चुका है।
ओडिशा के चांदीपुर में हुआ परीक्षण, 300 किमी तक सटीक निशाना
कंपनी से प्राप्त विवरण के अनुसार, 'सूर्यास्त्र' सीरीज के तहत 'एक्सट्रा' (EXTRA) और 'प्रिडेटर हॉक' रॉकेटों का फायरिंग टेस्ट ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में आयोजित किया गया। इन रॉकेटों की मारक क्षमता क्रमशः 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर तक की है। परीक्षण के दौरान दोनों ही मिसाइल प्रणालियों ने समुद्र तट पर स्थित अपने निर्धारित लक्ष्यों को बेहद सटीकता के साथ ध्वस्त किया। इस कामयाबी ने सूर्यास्त्र प्रणाली की लंबी दूरी तक अचूक प्रहार करने की ताकत को दुनिया के सामने साबित कर दिया है।
दुनिया के सबसे सटीक आर्टिलरी सिस्टम में शुमार हुआ 'सूर्यास्त्र'
इस परीक्षण की सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीकता रही। रॉकेटों ने केवल 1.5 मीटर और 2 मीटर का 'सर्कुलर एरर प्रोबेबल' (CEP) दर्ज किया है। रक्षा विज्ञान में CEP किसी भी मिसाइल या रॉकेट की मारक सटीकता को मापने का सबसे विश्वसनीय पैमाना माना जाता है। 300 किलोमीटर जैसी लंबी दूरी पर महज 2 मीटर से कम का डिफ़्लेक्शन (विचलन) होना 'सूर्यास्त्र' को दुनिया के सबसे बेहतरीन और बेहद सटीक लंबी दूरी के रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम की कतार में खड़ा करता है। इसके जरिए सेना न्यूनतम नुकसान के साथ दुश्मन के रणनीतिक ठिकानों को तबाह कर सकेगी।
पूरी तरह मेड इन इंडिया: डीप-स्ट्राइक ऑपरेशन्स के लिए विशेष डिजाइन
'सूर्यास्त्र' को भारत के पहले पूर्णतः स्वदेशी, यूनिवर्सल और मल्टी-कैलिबर रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के तौर पर विकसित किया गया है। इसे विशेष रूप से जमीन से जमीन पर मार करने और दुश्मन के इलाके में काफी अंदर तक घुसकर हमला करने (Deep-Strike Operations) के लिए तैयार किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह आधुनिक प्रणाली हमारी पारंपरिक फील्ड आर्टिलरी और भारी भरकम बैलिस्टिक मिसाइल प्लेटफॉर्म्स के बीच के अंतर को पाटने का काम करेगी, जिससे भारतीय सशस्त्र बलों को एक गतिशील, तीव्र और घातक विकल्प मिलेगा।
NSE पर लिस्टेड है कंपनी, जनवरी में सेना से मिला था बड़ा कॉन्ट्रैक्ट
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्टेड Nibe कंपनी का भारतीय सेना के साथ व्यावसायिक तालमेल लगातार मजबूत हो रहा है। इससे पहले, इसी साल जनवरी महीने में रक्षा मंत्रालय की आपातकालीन खरीद प्रक्रिया के तहत कंपनी को भारतीय सेना की ओर से 'सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर' और संबंधित रॉकेटों की आपूर्ति के लिए एक बड़ा परचेज ऑर्डर मिला था। सेना से मिले इसी भरोसे और अब परीक्षणों की सफलता के कारण निवेशक इस डिफेंस स्टॉक पर जमकर दांव लगा रहे हैं।
बाजार में रैली, सेंसेक्स 540 अंक तक उछला; निवेशकों को मिले 5 अहम संकेत
22 May, 2026 11:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में पिछले सत्र की मंदी के बाद शुक्रवार (22 मई) को शानदार रिकवरी देखने को मिली है। शुरुआती कारोबार में ही चौतरफा खरीदारी के चलते बंबई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स करीब 540 अंकों की छलांग लगाकर 75,723.31 के उच्च स्तर पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 145 अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 23,800.15 के स्तर को पार कर गया। बाजार के जानकारों के मुताबिक, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों, विदेशी निवेशकों की वापसी और रुपये में आई मजबूती ने घरेलू बाजार को बूस्ट देने का काम किया है।
ग्लोबल मार्केट में तेजी और कूटनीतिक मोर्चे से राहत के संकेत
भारतीय शेयर बाजार में आई इस तेजी के पीछे वैश्विक परिस्थितियां बेहद अनुकूल रही हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के एक बयान से निवेशकों को बड़ी राहत मिली है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया है कि ईरान से जुड़ी भू-राजनीतिक चिंताओं को दूर करने के लिए कूटनीतिक बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता कम हुई है। अमेरिकी बाजारों की मजबूती को देखते हुए एशियाई बाजारों में भी बूम है; जहां जापान का निक्केई 2.6% और ताइवान का सूचकांक 1.7% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ मजबूत
घरेलू मुद्रा (रुपये) में आ रहा सुधार भी शेयर बाजार के लिए टॉनिक साबित हुआ है। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 18 पैसे मजबूत होकर 96.18 के स्तर पर आ गया। मध्य-पूर्व (मिडल-ईस्ट) के तनाव में कमी आने की उम्मीदों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मुद्रा बाजार को संभालने के लिए उठाए जा रहे कदमों की खबरों से रुपये को लगातार दूसरे दिन सपोर्ट मिला है। इससे पिछले सत्र (गुरुवार) को भी रुपया 50 पैसे सुधरकर 96.36 पर बंद हुआ था।
बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में जमकर हुई लिवाली
गुरुवार को बाजार में आई मामूली गिरावट (सेंसेक्स 135 अंक और निफ्टी 4 अंक टूटकर बंद हुए थे) के बाद शुक्रवार को बैंकिंग सेक्टर के शेयरों ने बाजार की कमान संभाल ली। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 1.4 प्रतिशत की जोरदार तेजी देखी जा रही है, जबकि सरकारी बैंकों के इंडेक्स (पीएसयू बैंक) में भी 0.30 प्रतिशत का सुधार दर्ज किया गया है। प्रमुख हैवीवेट बैंकिंग शेयरों में आई इस खरीदारी ने इंडेक्स को ऊपर ले जाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
विदेशी निवेशकों (FIIs) की बाजार में वापसी
भारतीय बाजारों के प्रति विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भरोसा एक बार फिर लौटता हुआ दिख रहा है। शेयर बाजार से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र (गुरुवार) को विदेशी निवेशक शुद्ध खरीदार (नेट बायर्स) रहे। उन्होंने भारतीय शेयर बाजार में 1,891.21 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। विदेशी फंड्स के इस सकारात्मक रुख ने स्थानीय निवेशकों के हौसले को और मजबूत कर दिया है।
ब्याज दर बढ़ाने की योजना फिलहाल नहीं, RBI की जून मीट से पहले रिपोर्ट
22 May, 2026 11:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और मध्य-पूर्व (मिडल-ईस्ट) के भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारतीय मुद्रा (रुपये) पर लगातार दबाव बना हुआ है। इसके बावजूद, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) नीतिगत ब्याज दरों में समय से पहले या अचानक (ऑफ-साइकिल) बढ़ोतरी करने पर कोई विचार नहीं कर रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय बैंक रुपये की गिरावट को थामने के लिए ब्याज दरों को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के पक्ष में नहीं है। आरबीआई का पूरा ध्यान इस समय देश की आर्थिक वृद्धि (ग्रोथ) और महंगाई के बीच एक बेहतर संतुलन बनाने पर केंद्रित है।
महंगाई और आर्थिक विकास में संतुलन बनाने की नीति पर कायम
आरबीआई के आंतरिक सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय बैंक के भीतर फिलहाल ऐसा कोई माहौल या संकेत नहीं हैं जो यह दर्शाए कि वह मुद्रा बाजार की अस्थिरता को रोकने के लिए अपनी मौद्रिक नीतियों में अचानक कोई कड़ा बदलाव करेगा। रिजर्व बैंक अपने 'लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढांचे' (फ्लेक्सिबल इन्फ्लेशन-टारगेटिंग फ्रेमवर्क) पर मजबूती से कायम है। इस नीति के तहत कोई भी फैसला लेते समय रिटेल महंगाई को काबू में रखने के साथ-साथ देश की आर्थिक तरक्की की रफ्तार को बनाए रखने पर समान रूप से जोर दिया जाता है।
नियंत्रण के भीतर है खुदरा महंगाई दर
राहत की बात यह है कि देश की खुदरा (रिटेल) महंगाई दर अभी भी रिजर्व बैंक द्वारा तय की गई सुरक्षित सीमा के भीतर बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई दर 3.48 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इसके अलावा, वित्तीय वर्ष 2027 के लिए आरबीआई ने महंगाई का जो 4.6 प्रतिशत का अनुमान लगाया है, वह भी तय दायरे के भीतर ही आता है। ऐसे में केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में आपातकालीन बदलाव करने की कोई जल्दबाजी नहीं है।
कच्चा तेल $95 प्रति बैरल होने पर भी 6.7% की रफ्तार से बढ़ेगी इकोनॉमी
सूत्रों ने केंद्रीय बैंक की मॉनीटरी पॉलिसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि आने वाले वित्तीय वर्ष 2028 में अनुकूल आधार प्रभाव (बेस इफेक्ट) के चलते खुदरा महंगाई में और कमी देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट के अनुमानों के मुताबिक, यदि आने वाले समय में कच्चे तेल की औसत कीमत बढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच जाती है, तब भी देश की औसत खुदरा महंगाई 5 प्रतिशत के आसपास ही रहेगी। वहीं, भारत की आर्थिक विकास दर (ग्रोथ रेट) के 6.7 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर बने रहने की पूरी संभावना है।
5 जून को होने वाली नीतिगत समीक्षा पर टिकीं बाजार की निगाहें
हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी स्पष्ट किया था कि केंद्रीय बैंक अपनी नीतियां तैयार करते समय आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई साइड) में आने वाले अस्थायी व्यवधानों के शुरुआती असर को नजरअंदाज करेगा। हालांकि, इससे पहले कुछ विदेशी रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि आरबीआई रुपये को संभालने के लिए ब्याज दर बढ़ाने और डॉलर जुटाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है, लेकिन वर्तमान रुख इन दावों के विपरीत है। अब सभी की नजरें 5 जून को होने वाली आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा पर टिकी हैं। ज्ञात हो कि आरबीआई ने आखिरी बार मई 2022 में तय समय से हटकर (ऑफ-साइकिल) ब्याज दरें बढ़ाई थीं।
ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई या मिलेगा अतिरिक्त समय?
21 May, 2026 02:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का सिलसिला शुरू हो चुका है। आयकर विभाग ने ITR-1 और ITR-4 फॉर्म्स को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में जारी कर दिया है। अब नौकरीपेशा लोग, पेंशनर्स, फ्रीलांसर्स और छोटे व्यापारी ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर अपना रिटर्न आसानी से दाखिल कर सकते हैं। भारी जुर्माने से बचने के लिए समय पर रिटर्न भरना जरूरी है, हालांकि अलग-अलग कैटेगरी के टैक्सपेयर्स के लिए आखिरी तारीखें अलग-अलग तय की गई हैं।
1. 31 जुलाई 2026: नौकरीपेशा और छोटे कारोबारियों के लिए आखिरी मौका
अगर आप सैलरीड कर्मचारी हैं, पेंशनर हैं या फिर हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) के अंतर्गत आते हैं और आपके खातों का ऑडिट जरूरी नहीं है, तो आपके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई, 2026 है।
इसके अलावा, 'एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स' (AOPs), 'बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स' (BOIs) और प्रिज्म्प्टिव टैक्सेशन स्कीम (सेक्शन 44AD, 44ADA या 44AE) का लाभ लेने वाले फ्रीलांसरों व छोटे व्यापारियों को भी इसी तारीख तक अपना आईटीआर जमा करना होगा।
2. 31 अक्टूबर और 30 नवंबर: ऑडिट व कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण तारीखें
31 अक्टूबर 2026: यह डेडलाइन उन कंपनियों, फर्म्स और बिजनेसेज के लिए है, जिनके खातों का आयकर अधिनियम के तहत ऑडिट (Audit) होना अनिवार्य है।
30 नवंबर 2026: वैसी कॉर्पोरेट कंपनियां या एंटिटीज, जिन्हें घरेलू या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष लेन-देन के लिए ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्ट जमा करनी होती है, वे 30 नवंबर तक अपना रिटर्न फाइल कर सकती हैं।
3. डेडलाइन चूकने पर लगेगा ₹5,000 तक का जुर्माना और ब्याज
अगर आप तय समय सीमा के भीतर रिटर्न नहीं भर पाते हैं, तो सेक्शन 234F के तहत लेट फीस देनी होगी।
₹5 लाख से अधिक आय पर: अधिकतम ₹5,000 का जुर्माना।
₹5 लाख से कम आय पर: अधिकतम ₹1,000 की लेट फीस।
अतिरिक्त नुकसान: लेट फीस के साथ-साथ धारा 234A के तहत बकाया टैक्स पर 1% प्रति महीना की दर से ब्याज भी लगेगा। साथ ही, देरी से फाइल करने पर टैक्स रिफंड अटक सकता है और आप अपने कुछ बिजनेस घाटों (Losses) को अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड (आगे ट्रांसफर) नहीं कर पाएंगे।
4. क्या होते हैं बिलेटेड (Belated) और अपडेटेड (U-ITR) रिटर्न?
बिलेटेड और रिवाइज्ड रिटर्न: यदि आप 31 जुलाई की डेडलाइन चूक जाते हैं, तो असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 31 मार्च, 2027 तक बिलेटेड (देरी से) या रिवाइज्ड (संशोधित) रिटर्न भर सकते हैं।
अपडेटेड आईटीआर (U-ITR): अगर रिटर्न में कोई बड़ी गलती रह गई हो या किसी कमाई की जानकारी छूट गई हो, तो उसे सुधारने के लिए अपडेटेड रिटर्न भरा जाता है। नियम के अनुसार, टैक्सपेयर्स संबंधित असेसमेंट ईयर के खत्म होने के बाद 48 महीनों के भीतर अतिरिक्त टैक्स और धारा 139(8A) की शर्तों के साथ U-ITR दाखिल कर सकते हैं।
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