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TVS Motor ने Q1 में किया कमाल, मुनाफा ₹1,174 करोड़ पहुंचा; निवेशकों की बल्ले-बल्ले
21 Jul, 2026 03:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी टीवीएस मोटर (TVS Motor) ने चालू वित्त वर्ष की पहली यानी जून तिमाही में बेहद मजबूत वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने मुनाफा, राजस्व और परिचालन मार्जिन जैसे सभी प्रमुख मानकों पर बाजार के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। बेहतर व्यावसायिक प्रदर्शन और गाड़ियों की बढ़ती मांग के चलते कंपनी के समग्र प्रदर्शन में ऐतिहासिक सुधार देखा गया है।
कंपनी के शुद्ध लाभ में पचास प्रतिशत से अधिक का उछाल
जून तिमाही के दौरान टीवीएस मोटर का शुद्ध मुनाफा 50.7 प्रतिशत बढ़कर 1,174 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी को 779 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था। बाजार विश्लेषकों ने इस तिमाही में करीब 1,022 करोड़ रुपये के मुनाफे का अनुमान जताया था। इसके अतिरिक्त कंपनी की अन्य आय भी बढ़कर 150 करोड़ रुपये हो गई, जिसने कुल लाभ को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
राजस्व और मार्जिन में बढ़ोतरी से वित्तीय स्थिति हुई मजबूत
कंपनी का कुल राजस्व 37.8 प्रतिशत बढ़कर 13,896 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 10,081 करोड़ रुपये था। वहीं कंपनी का एबिटडा (EBITDA) 41 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,779 करोड़ रुपये हो गया। परिचालन मार्जिन में भी सुधार देखने को मिला और यह बढ़कर 12.8 प्रतिशत पर पहुंच गया। इस दौरान वाहनों की कुल बिक्री में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई और प्रति वाहन औसतन मिलने वाली कीमत में भी छह प्रतिशत का इजाफा हुआ।
मजबूत नतीजों के बाद शेयर में आई पांच प्रतिशत से ज्यादा की तेजी
वित्तीय आंकड़ों के सामने आने के बाद शेयर बाजार में टीवीएस मोटर के शेयरों के प्रति निवेशकों का उत्साह साफ नजर आया। कारोबारी सत्र में कंपनी का शेयर 5.56 प्रतिशत चढ़कर 3,789 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस उछाल के साथ शेयर अपने सर्वकालिक उच्च स्तर के बेहद करीब आ गया है। पिछले एक साल की अवधि में कंपनी के शेयरों में निवेशकों को करीब 33.66 प्रतिशत का शानदार रिटर्न मिला है।
अस्त्र मिसाइल की ताकत का दुनिया में जलवा, भारत से खरीद में कई देश दिखा रहे दिलचस्पी
21 Jul, 2026 01:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: इंडोनेशिया के बाद अब आर्मेनिया और सऊदी अरब ने भी भारत की दुश्मन के रडार से बच निकलने में सक्षम स्वदेशी 'अस्त्र' मिसाइल को खरीदने में गहरा रुझान दिखाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के साथ-साथ हवा से हवा में मार करने वाली इस अत्याधुनिक स्वदेशी मिसाइल को लेकर सहमति बनी थी। रक्षा क्षेत्र के सूत्रों के अनुसार, इंडोनेशिया के नक्शेकदम पर चलते हुए अब आर्मेनिया और सऊदी अरब भी भारत के साथ अस्त्र मिसाइल सौदे पर द्विपक्षीय बातचीत कर रहे हैं। आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर कई अन्य देश भी इस स्वदेशी हथियार प्रणाली को हासिल करने की दौड़ में शामिल हो सकते हैं।
आर्मेनियाई वायुसेना के सुखोई-30 बेड़े के लिए सबसे मुफीद साबित होगा अस्त्र मिसाइल का सौदा
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आर्मेनिया इस समय अस्त्र मिसाइल को अपने रक्षा बेड़े में शामिल करने की रेस में सबसे आगे चल रहा है। आर्मेनियाई वायुसेना के पास सुखोई-30 फाइटर जेट्स का बेड़ा मौजूद है, जो इस सौदे को बेहद व्यावहारिक बनाता है। चूंकि भारतीय वायुसेना पहले ही अपने सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के साथ अस्त्र मिसाइल का सफल एकीकरण कर चुकी है, इसलिए आर्मेनिया के लिए यह तकनीकी रूप से सबसे उपयुक्त सौदा साबित हो सकता है। आर्मेनिया अपने फाइटर जेट्स के आधुनिकीकरण के लिए भारत के समृद्ध अनुभव का लाभ उठाने का इच्छुक है।
भारत और आर्मेनिया के बीच अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा और सामरिक संचार पर भी सहयोग की राह आसान
अस्त्र मिसाइल सौदे के साथ-साथ भारत और आर्मेनिया अपने रक्षा व तकनीकी संबंधों को नए आयाम देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देश निगरानी प्रणालियों, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, सामरिक संचार और सैन्य प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग की असीम संभावनाएं तलाश रहे हैं। इससे पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान की आर्मेनिया यात्रा के दौरान भी दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच इन विषयों और रक्षा सौदों पर गहन चर्चा हुई थी।
जैमिंग-रोधी क्षमता और किफायती लागत से प्रभावित हुआ सऊदी अरब, पश्चिमी विमानों पर एकीकरण की उम्मीद
सऊदी अरब की वायुसेना में मुख्य रूप से अमेरिकी और ब्रिटिश लड़ाकू विमान शामिल हैं, लेकिन अस्त्र मिसाइल की किफायती लागत और इसकी बेजोड़ जैमिंग-रोधी तकनीक ने रियाद का ध्यान अपनी ओर मजबूती से खींचा है। सऊदी अरब अपने रक्षा आयात को किसी एक देश पर निर्भर रखने के बजाय विविध बनाना चाहता है। यदि अस्त्र मिसाइल का सफल एकीकरण सऊदी अरब के एफ-15 और यूरोफाइटर टाइफून जैसे पश्चिमी लड़ाकू विमानों पर हो जाता है, तो यह भारतीय रक्षा उद्योग और निर्यात क्षमताओं के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जाएगी।
Gold Price में बड़ी गिरावट के संकेत, दिग्गज बैंक की भविष्यवाणी से मचा हड़कंप
21 Jul, 2026 12:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: आमतौर पर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता और तनाव बढ़ने के दौर में सोने को सुरक्षित निवेश मानकर इसकी मांग और कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया जाता है। हालांकि वर्तमान में कमोडिटी बाजार का रुख इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रहा है, जिसने वित्तीय विश्लेषकों को आश्चर्यचकित कर दिया है। एक ओर जहां दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती देने के लिए सोने की लगातार खरीदारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दिग्गज ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका के तकनीकी विशेषज्ञों ने बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट का अंदेशा जताया है।
तकनीकी संकेतकों में दिखा डेथ क्रॉस, अगस्त-सितंबर तक रह सकती है सुस्ती
बैंक ऑफ अमेरिका की हालिया रिपोर्ट के अनुसार सोने के वायदा व हाजिर चार्ट पर दो प्रमुख मंदी के तकनीकी संकेतक स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आए हैं। तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक चार्ट पर 'डेथ क्रॉस' की स्थिति बनी है, जो कि तब दर्ज की जाती है जब 50 दिनों का लघु अवधि मूविंग एवरेज अपने 200 दिनों के दीर्घकालिक मूविंग एवरेज से नीचे आ जाता है। वर्ष 1975 के ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर जब भी सोने में ऐसी स्थिति बनी है, उसके बाद लगभग 70 प्रतिशत मामलों में अगले डेढ़ से दो महीनों तक कीमतों में निरंतर गिरावट ही देखी गई है।
ओवरबॉट स्थिति और आरएसआई के आंकड़ों से बड़े करेक्शन की पुष्टि
सोने में पिछले दिनों दर्ज की गई अनवरत तेजी के कारण बाजार अत्यधिक खरीदारी यानी 'ओवरबॉट' स्थिति में पहुंच चुका था। इस दौरान रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स बढ़कर 90 के अत्यधिक ऊंचे स्तर को छू गया था, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण था कि तेजी का यह दौर अपनी क्षमता से अधिक खिंच चुका था। बाजार विश्लेषकों के अनुसार इस स्थिति के बाद बाजार में एक बड़े मूल्य संशोधन की आवश्यकता थी, जिसके चलते अब सोने के दामों में लगातार बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है।
4,000 डॉलर का अहम स्तर टूटने से हावी हुए मंदड़िये, आगे और गिरावट के आसार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना $4,000 प्रति औंस के महत्वपूर्ण सहायता स्तर के नीचे फिसल चुका है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि फिलहाल बाजार का नियंत्रण पूरी तरह मंदड़ियों के हाथ में आ चुका है। ब्रोकरेज फर्म के विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि यह रुख वर्ष 1980 और 2011 में देखी गई ऐतिहासिक गिरावट के पैटर्न से मेल खाता है। इन चार्ट पैटर्नों के आधार पर सोना नीचे गिरकर पहले $3,600 प्रति औंस और तत्पश्चात $3,315 प्रति औंस तक के निचले स्तर को छू सकता है, जिससे नए निवेशकों को अगस्त और सितंबर के दौरान सतर्क रहने की आवश्यकता होगी।
चार बड़े कारणों से फिसला बाजार, Sensex में गिरावट और Nifty पर दबाव
21 Jul, 2026 10:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव की छाया घरेलू शेयर बाजार पर साफ देखने को मिल रही है। साप्ताहिक एक्सपायरी के दिन भारतीय बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 300 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 फिसलकर 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गया। हालांकि, व्यापक बाजार में स्थिति थोड़ी बेहतर रही और निफ्टी मिडकैप 100 तथा स्मॉलकैप 100 सूचकांकों में हल्की बढ़त दर्ज की गई। सुबह 10:56 बजे के आसपास सेंसेक्स 245.51 अंक यानी 0.32 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,463.01 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 59.05 अंक फिसलकर 24,179.45 के स्तर पर बना हुआ था।
पश्चिम एशिया में गहराते संकट ने बिगाड़ा बाजार का मूड
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के गंभीर मोड़ पर पहुंचने से वैश्विक बाजारों के साथ-साथ घरेलू निवेशकों की धारणा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार हवाई हमले किए जाने से भू-राजनीतिक अनिश्चितता काफी बढ़ गई है। इस बढ़ते तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिससे भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। इसके साथ ही आज निफ्टी के इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की साप्ताहिक एक्सपायरी होने के कारण भी बाजार में उतार-चढ़ाव काफी बढ़ गया है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार जारी है बिकवाली
शेयर बाजार में गिरावट की एक प्रमुख वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली भी है। आंकड़े दर्शाते हैं कि विदेशी निवेशकों ने लगातार छठे कारोबारी दिन भारतीय बाजार में शुद्ध बिकवाली दर्ज की। हालिया कारोबारी सत्र में FIIs ने ₹1,121.04 करोड़ मूल्य के शेयरों की बिक्री की। पिछले छह दिनों के आंकड़ों को मिलाकर देखें तो विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय इक्विटी बाजार से कुल मिलाकर ₹10,240.8 करोड़ की पूंजी निकाल चुके हैं, जिससे घरेलू सूचकांकों पर लगातार दबाव बना हुआ है।
आईटी, ऑटो और बैंकिंग सेक्टरों के शेयरों पर बढ़ा दबाव
क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो बाजार की इस गिरावट की अगुवाई मुख्य रूप से आईटी और ऑटोमोबाइल सेक्टर कर रहे हैं, जिनके निफ्टी इंडेक्स में लगभग आधा प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा पीएसयू बैंक और फार्मास्यूटिकल सेक्टर के शेयरों में भी बिकवाली का रुझान देखने को मिला, जिससे इनके सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते पाए गए। हालांकि फिलहाल किसी भी सेक्टर इंडेक्स में 1 फीसदी से अधिक की बड़ी उथल-पुथल नहीं देखी गई है, लेकिन प्रमुख क्षेत्रों में तेजी का अभाव रहने से बाजार को सहारा नहीं मिल पा रहा है।
UltraTech Cement Share Price में उछाल, एक्सपर्ट्स क्या दे रहे हैं सलाह?
21 Jul, 2026 10:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: देश की सबसे बड़ी सीमेंट निर्माण कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में 21 जुलाई के कारोबारी सत्र के दौरान शानदार तेजी दर्ज की गई। शेयर बाजार खुलते ही कंपनी के शेयरों में लिवाली का मजबूत रुख देखा गया, जिससे सुबह 10:10 बजे के करीब यह शेयर 1.71 प्रतिशत की बढ़त बनाकर 12,107 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इससे पूर्व 20 जुलाई को पहली तिमाही के वित्तीय आंकड़े जारी होने के उपरांत भी कंपनी का शेयर 1.5 फीसदी चढ़कर 11,903 रुपये पर बंद हुआ था। हालांकि इस कैलेंडर वर्ष में शेयर का प्रदर्शन सपाट रहा है, लेकिन बीते एक महीने की बात करें तो इसने निवेशकों को 6 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया है। वर्तमान में 3.51 लाख करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण वाली इस कंपनी ने बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है।
जून तिमाही में मुनाफा 17 प्रतिशत बढ़कर अनुमान से आगे निकला
विभिन्न आर्थिक चुनौतियों और बाजार के दबाव के बावजूद कंपनी ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में काफी मजबूत प्रदर्शन पेश किया है। जारी नतीजों के मुताबिक अल्ट्राटेक सीमेंट का संगठित शुद्ध लाभ (कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट) सालाना आधार पर 17.2 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 2,604 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो कि बाजार विश्लेषकों के 2,453 करोड़ रुपये के पूर्व अनुमान से काफी बेहतर है। इस अवधि में कंपनी की परिचालन आय (रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस) भी 15.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 24,648 करोड़ रुपये रही। वहीं कंपनी का एबिटा (EBITDA) 13.7 फीसदी बढ़कर 5,016 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी का ग्रे सीमेंट वॉल्यूम सालाना आधार पर 13.1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 3.91 करोड़ टन दर्ज किया गया, जबकि प्रति टन ऑपरेटिंग एबिटा बढ़कर 1,214 रुपये पर पहुंच गया।
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने दी खरीदारी की सलाह
कंपनी के बेहतर वित्तीय आंकड़ों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर पर अपना सकारात्मक रुख कायम रखा है। ब्रोकरेज ने निवेशकों को इसमें खरीदारी की सिफारिश करते हुए 14,065 रुपये का नया लक्ष्य मूल्य (टारगेट प्राइस) निर्धारित किया है। जेफरीज के विश्लेषकों का मानना है कि यह शेयर अपने हालिया बंद भाव से 18 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज करने में सक्षम है। ब्रोकरेज रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत बिक्री मात्रा (वॉल्यूम ग्रोथ) और उत्पादों की बेहतर कीमतों के दम पर कंपनी का प्रदर्शन बाजार की उम्मीदों से अधिक प्रभावी रहा है।
सीएलएसए ने आउटपरफॉर्म रेटिंग के साथ दिया 14,000 रुपये का टारगेट
एक अन्य प्रमुख वैश्विक ब्रोकरेज हाउस सीएलएसए (CLSA) ने भी अल्ट्राटेक सीमेंट के स्टॉक पर अपनी 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग को बरकरार रखा है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए 14,000 रुपये का टारगेट तय करते हुए कहा है कि पहली तिमाही के दौरान सीमेंट वॉल्यूम में 13 फीसदी की सालाना वृद्धि और 1,183 रुपये प्रति टन का एबिटा बाजार के अनुमानों से काफी आगे रहा है। इसके साथ ही भविष्य के लिए कंपनी का लागत मार्गदर्शन (कॉस्ट गाइडेंस) भी बेहद उत्साहजनक है, जिससे आने वाले समय में भी कंपनी के मार्जिन और लाभप्रदता में मजबूती बने रहने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
30 दिन बाद लागू होगा 50% टैरिफ, ट्रंप के फैसले से कनाडा की बढ़ी चिंता
21 Jul, 2026 07:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लेते हुए कनाडा से आने वाले अधिकांश सामानों पर 50 प्रतिशत का भारी सीमा शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा कर दी है। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि कनाडा अमेरिकी कारों, शराब और डेयरी उत्पादों के साथ अनुचित रूप से भेदभाव करता आया है। इस कड़े व्यापारिक फैसले से दोनों पड़ोसी देशों के बीच गंभीर आर्थिक संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल दोनों देशों में महंगाई में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हो सकती है, बल्कि उनके ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों में भी भारी खटास आ सकती है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि चीन के बाद कनाडा ही एकमात्र ऐसा देश था जिसने पहले लगाए गए शुल्कों का जवाब दिया था, इसलिए उस पर यह सख्त कार्रवाई आवश्यक हो गई थी।
धारा 338 के तहत जारी हुआ आदेश, 30 दिनों के भीतर लागू होंगे नए नियम
अमेरिकी राष्ट्रपति ने 1930 के व्यापार अधिनियम की धारा 338 का सहारा लेते हुए तीन अलग-अलग घोषणाओं पर हस्ताक्षर किए हैं। व्हाइट हाउस के अनुसार यह नया 50 फीसदी शुल्क अगले 30 दिनों के भीतर प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा। हालांकि इस नए शुल्क दायरे से ऊर्जा उत्पादों, पोटाश, मछली और अत्यंत आवश्यक खनिजों को बाहर रखा गया है, लेकिन इसमें वाइन, हॉकी स्टिक, सीमेंट और अन्य वे तमाम सामान शामिल होंगे जिन्हें पहले अंतर-सरकारी समझौतों के तहत सुरक्षा प्राप्त थी। कनाडाई जंगलों में लगने वाली आग से अमेरिका में फैलने वाले प्रदूषण को लेकर भी ट्रंप ने अपने अधिकारियों को अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए हैं, जिससे यह व्यापारिक तनाव आने वाले दिनों में और अधिक बढ़ने के संकेत दे रहा है।
व्यापार नीति और व्यापारिक प्रतिबंधों को लेकर दोनों नेताओं में गहराया पुराना विवाद
दोनों देशों के बीच इस तनाव की मुख्य वजह एक-दूसरे के उत्पादों पर लगाए गए जवाबी शुल्क और सख्त व्यापार नीतियां हैं। पूर्व में जब अमेरिका ने अवैध पदार्थों की तस्करी रोकने का हवाला देकर शुल्क लगाए थे, तब कनाडा ने भी अप्रैल 2025 से कुछ अमेरिकी वाहनों पर 25 फीसदी का सीमा शुल्क लगा दिया था। इसके अलावा कनाडा के अधिकांश प्रांतों द्वारा अमेरिकी शराब की खरीद रोकने और कनाडाई पनीर नीति को लेकर दोनों पक्षों में लंबे समय से गतिरोध बना हुआ था। हाल ही में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात के दौरान भी रिश्तों में जमी बर्फ पिघलती नजर नहीं आई, क्योंकि कनाडा सरकार लगातार दूसरे देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और अमेरिकी दबाव के सामने अपनी नीतियों पर कायम रहने का प्रयास कर रही है।
कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की तीखी प्रतिक्रिया, समझौते का उल्लंघन करार दिया
डोनाल्ड ट्रंप के इस कड़े फैसले पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका का यह कदम स्थापित त्रिस्तरीय व्यापार समझौते का सीधा और गंभीर उल्लंघन है। कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश अपनी आर्थिक संप्रभुता, श्रमिकों, किसानों और आम परिवारों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह से एकजुट है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस व्यापारिक विवाद का सबसे बड़ा खामियाजा दोनों देशों के आम नागरिकों को बढ़ती महंगाई के रूप में भुगतना पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने दोहराया कि कनाडा निष्पक्ष व्यापार का पक्षधर है और यदि अमेरिका सकारात्मक रुख दिखाए तो उनका देश आपसी बातचीत से इस मसले का सर्वसम्मति से समाधान निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है।
E20 फ्यूल पर बहस के बीच सरकार का मास्टर प्लान, इथेनॉल ब्लेंडिंग को मिलेगी नई रफ्तार
20 Jul, 2026 12:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश में पारंपरिक ईंधन यानी पेट्रोल और डीजल के आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार इथेनॉल मिश्रण (ब्लेंडिंग) कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। इस दिशा में एक बड़ा निर्णय लेते हुए सरकार ने इथेनॉल विनिर्माता डिस्टिलरियों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध कराने का खाका तैयार कर लिया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा भारतीय खाद्य निगम (FCI) के बफर स्टॉक से डिस्टिलरियों को रियायती दरों पर चावल आवंटित करने के साथ-साथ ई-नीलामी की प्रक्रिया को भी हरी झंडी दे दी गई है। इस दूरगामी नीति से घरेलू स्तर पर जैव ईंधन के उत्पादन को नया आयाम मिलेगा और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
डिस्टिलरियों के लिए 72 लाख टन चावल का ऐतिहासिक आवंटन
अनाज आधारित इथेनॉल निर्माण को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने आपूर्ति वर्ष 2026-27 हेतु भारतीय खाद्य निगम के भंडार से 72 लाख टन चावल आरक्षित करने का निर्णय लिया है। यह मात्रा पूर्ववर्ती आपूर्ति वर्ष 2025-26 के 52 लाख टन आवंटन की तुलना में काफी अधिक है। इसके अतिरिक्त राइस मिलिंग ट्रांसफॉर्मेशन योजना के तहत उत्पादित 55 लाख टन टूटे (ब्रोकन) चावल को ई-नीलामी के माध्यम से बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। मंत्रालय द्वारा डिस्टिलरियों के लिए चावल की बिक्री दर ₹2,390 प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है, जिससे डिस्टिलरियों को पूरे वर्ष बिना किसी बाधा के कच्चा माल मिलता रहेगा।
ईंधन विपणन कंपनियों की खरीद दर और डिस्टिलरी इकॉनमी
वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत पेट्रोलियम तेल विपणन कंपनियों के लिए एफसीआई के चावल से निर्मित इथेनॉल को ₹58.5 प्रति लीटर की पूर्व-निर्धारित दर से खरीदना अनिवार्य किया गया है, जबकि टूटे चावल से उत्पादित इथेनॉल का क्रय मूल्य ₹64 प्रति लीटर तय है। ई-नीलामी के जरिए उपलब्ध कराए जा रहे शत-प्रतिशत टूटे हुए चावल के उपयोग पर कोई तकनीकी प्रतिबंध न होने से डिस्टिलरियां इसका उपयोग इथेनॉल विनिर्माण में सुगमता से कर सकेंगी। इस कदम से डिस्टिलरी उद्योग की परिचालन लागत में सुधार होगा और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।
पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य की दिशा में कदम
सरकार पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण को मौजूदा 20 प्रतिशत के स्तर से आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर गंभीरता से परीक्षण कर रही है। देश में लगभग 2,000 करोड़ लीटर की वार्षिक इथेनॉल निर्माण क्षमता के मुकाबले तेल कंपनियों को 20 फीसदी मिश्रण के लक्ष्य को बनाए रखने के लिए प्रतिवर्ष 1,050 से 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल की जरूरत होती है। मानसून की अनिश्चितताओं के कारण गन्ने और मक्के की पैदावार में होने वाले उतार-चढ़ाव के दौरान केंद्रीय भंडार में मौजूद यह अधिशेष चावल इथेनॉल की अबाध आपूर्ति की गारंटी देगा।
राज्य एजेंसियों हेतु अनाज आवंटन और केंद्रीय दिशा-निर्देश जारी
केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों और उनकी अधिकृत एजेंसियों के लिए भी चावल आपूर्ति के दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके तहत जुलाई से अक्टूबर अवधि के लिए ₹2,320 प्रति क्विंटल की दर से 16 लाख टन तथा नवंबर 2026 से जून 2027 के मध्य ₹2,390 प्रति क्विंटल की दर से 32 लाख टन चावल आवंटित किया गया है। दूसरी ओर, राष्ट्रीय सहकारी समितियों के माध्यम से 'भारत' ब्रांड के तहत की जाने वाली खुदरा बिक्री के लिए आवंटन को फिलहाल स्थगित रखा गया है, जिसकी संशोधित मात्रा और समय-सारणी शीघ्र ही जारी की जाएगी।
SBI Funds IPO को लेकर बाजार में उत्साह, लिस्टिंग से पहले प्रीमियम में बड़ा उछाल
20 Jul, 2026 12:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: देश के सबसे बड़े म्यूचुअल फंड मैनेजर 'एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट' के शेयरों की कल यानी मंगलवार, 21 जुलाई को घरेलू शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री होने जा रही है। बाजार में कदम रखने से ठीक पहले अनऑफिशियल ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयरों को लेकर जबर्दस्त उत्साह देखा जा रहा है और यह करीब 18 फीसदी के मजबूत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। यह आईपीओ ओवरऑल सब्सक्रिप्शन के मामले में देश का पांचवां सबसे बड़ा आईपीओ बन चुका है। जिन निवेशकों को इस आईपीओ में अलॉटमेंट मिला है, वे कल सुबह की लिस्टिंग का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
देश का 5वां सबसे बड़ा आईपीओ और बोलियों का रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन
कुल ₹9,813 करोड़ के इस विशाल आईपीओ को लेकर बाजार के सभी वर्गों के निवेशकों में अभूतपूर्व क्रेज देखने को मिला था। 14 जुलाई से 16 जुलाई तक खुले रहे इस इश्यू को रिकॉर्ड तोड़ रिस्पांस मिला और यह कुल मिलाकर 41.66 गुना सब्सक्राइब हुआ। संस्थागत निवेशकों यानी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के कैटेगरी में रिकॉर्ड 140.11 गुना से अधिक बोलियां प्राप्त हुई थीं, जिसने इस आईपीओ को भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास के सबसे सफल आईपीओ की सूची में शामिल कर दिया।
प्राइस बैंड और ऑफर फॉर सेल संरचना की जानकारी
कंपनी ने इस आईपीओ का प्राइस बैंड ₹545 से ₹574 प्रति शेयर निर्धारित किया था। यह सार्वजनिक निर्गम पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) संरचना पर आधारित था, जिसके अंतर्गत प्रमोटर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और अमुंडी इंडिया होल्डिंग ने मिलकर अपनी हिस्सेदारी के 20.37 करोड़ इक्विटी शेयर बेचे हैं। चूंकि यह पूरी तरह से ओएफएस आधारित इश्यू था, इसलिए आईपीओ के माध्यम से जुटाए गए संपूर्ण फंड प्रमोटर्स के पास जाएंगे और कंपनी के खाते में कोई नई पूंजी शामिल नहीं होगी।
भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में निर्विवाद मार्केट लीडर
वर्ष 1992 में स्थापित हुई यह दिग्गज परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी देश के सबसे बड़े 'एसबीआई म्यूचुअल फंड' के निवेश का प्रबंधन करती है। उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) लगभग ₹16.32 लाख करोड़ के विशाल स्तर को छू चुका है। पूरे भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में कंपनी अकेले 15.5 फीसदी से अधिक की विशाल बाजार हिस्सेदारी पर काबिज है, जो इसे इस सेक्टर की निर्विवाद लीडर बनाती है।
ग्रे मार्केट में दमदार रुझान और तगड़े लिस्टिंग गेन के संकेत
आईपीओ गतिविधियों पर नजर रखने वाले प्रमुख विश्लेषकों के अनुसार, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹103 प्रति शेयर के आसपास मजबूत बना हुआ है। इस जीएमपी के आधार पर यदि गणना की जाए तो ऊपरी प्राइस बैंड ₹574 की तुलना में यह शेयर लगभग ₹677 के स्तर पर लिस्ट हो सकता है। ऐसे में कल बाजार खुलते ही निवेशकों को पहले ही दिन प्रति शेयर करीब 18 फीसदी का तगड़ा लिस्टिंग मुनाफा मिलने के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं।
Stock Market Update: बाजार में कमजोरी, सेंसेक्स में बड़ी गिरावट; निफ्टी ने गंवाया अहम स्तर
20 Jul, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान के साथ कारोबार करने लगे। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 523.22 अंक लुढ़ककर 77,628.23 अंक के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी भी 134.10 अंकों की गिरावट दर्ज करते हुए 24,198.25 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। बाजार में जारी इस गिरावट के पीछे वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली को मुख्य कारण माना जा रहा है।
विदेशी पूंजी की निकासी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का रुख
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में विदेशी पूंजी के लगातार बाहर जाने से भारतीय मुद्रा पर दबाव साफ तौर पर दिखाई दिया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पिछले बंद स्तर 96.30 की तुलना में 96.53 के स्तर पर कमजोरी के साथ खुला। यद्यपि कारोबार के दौरान स्थानीय मुद्रा ने अपनी शुरुआती गिरावट में आंशिक सुधार किया और 96.41 के स्तर पर पहुंचकर 11 पैसे की कमजोरी के साथ कारोबार करने लगी। इससे पूर्व शुक्रवार को अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई कमी और सकारात्मक घरेलू माहौल के कारण रुपया 12 पैसे मजबूत होकर 96.30 पर बंद हुआ था।
वैश्विक तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका व ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई। वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 2.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 90.26 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही ठप होने और अमेरिकी हवाई हमलों के बाद ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई को लेकर बहरीन द्वारा जारी मिसाइल अलर्ट ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी का सकारात्मक संकेत
वित्तीय बाजार में मची उथल-पुथल के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के मोर्चे पर राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 10 जुलाई को समाप्त सप्ताह में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 964 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि के साथ 675.157 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। इससे पिछले सप्ताह में भी कुल भंडार में 7.26 बिलियन डॉलर की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जो देश की बाह्य वित्तीय स्थिति को मजबूती प्रदान करती है।
शेयर बाजार की अनिश्चितता और निवेशकों के लिए दृष्टिकोण
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अस्थिर भू-राजनीतिक माहौल के कारण घरेलू शेयर बाजार में आने वाले दिनों में भी उतार-चढ़ाव बना रहने की संभावना है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की चाल और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम आगामी कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में सतर्कता बरतें और मौलिक रूप से मजबूत क्षेत्रों में ही अपने निवेश को प्राथमिकता दें।
महंगाई की चिंता बढ़ी, कच्चे तेल के उबाल के बीच सोने पर दबाव
20 Jul, 2026 10:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है। वैश्विक समाचार एजेंसियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना घटकर 4,014.53 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया है। इसके साथ ही आगामी अगस्त महीने की डिलीवरी वाला अमरीकी गोल्ड फ्यूचर्स भी फिसलकर 4,019.80 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुमूल्य धातुओं के मूल्यों में हो रहे इस बदलाव का सीधा असर भारतीय आभूषण बाजार पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
कच्चे तेल में उछाल और ब्याज दरों में वृद्धि की आशंका
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के कारण ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई हैं। कच्चे तेल के दामों में आई इस तेजी ने दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की चिंताओं को एक बार फिर गहरा कर दिया है। इस स्थिति को देखते हुए अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के कई नीति-निर्माताओं ने संकेत दिए हैं कि बढ़ती कीमतों और महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए आने वाले समय में ब्याज दरों में पुनः बढ़ोतरी की जा सकती है।
ब्याज दरों के रुख का सोने की चमक पर असर
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार जब ब्याज दरों में वृद्धि होती है, तो निवेशक अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों की ओर रुख करने लगते हैं जहाँ उन्हें अधिक रिटर्न की उम्मीद होती है। यही वजह है कि ब्याज दरों का बढ़ना सोने और चांदी जैसी धातुओं के लिए एक नकारात्मक कारक माना जाता है। इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और जॉर्डन सीमा पर हुई हालिया हिंसक घटनाओं ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का माहौल और अधिक गहरा दिया है।
सोने से इतर चांदी और प्लेटिनम में तेजी
सोने के विपरीत अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अन्य कीमती धातुओं के दामों में मजबूती का रुख देखने को मिल रहा है। हाजिर चांदी यानी स्पॉट सिल्वर का भाव बढ़कर 56.95 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुँच गया है। इसी प्रकार प्लेटिनम की कीमतों में भी उछाल आया है और इसका भाव बढ़कर 1,599.97 डॉलर प्रति औंस पर दर्ज किया गया है। औद्योगिक मांग और बाजार के बदलते समीकरणों के कारण इन धातुओं को निचले स्तरों पर अच्छा समर्थन मिल रहा है।
चांदी खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर, फिर बढ़े दाम
20 Jul, 2026 10:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के मध्य उपजे ताजा तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। इसका सीधा प्रभाव भारतीय सर्राफा बाजार पर भी पड़ा है। कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में ही चांदी के दामों में एक बार फिर बड़ी बढ़त दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुरुआती सौदों के दौरान चांदी का वायदा भाव 1.38 प्रतिशत यानी 2,979 रुपये की छलांग लगाकर 2,19,382 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुँच गया। वैश्विक बाजार में भी हाजिर चांदी का भाव 57.37 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े को छू गया है।
घरेलू सर्राफा बाजार और खुदरा कीमतों में तेजी
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार सुबह के कारोबार में चांदी का भाव 2,15,474 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। वहीं खुदरा बाजार में विभिन्न विक्रेताओं और एजेंसियों के अनुसार चांदी का खुदरा मूल्य बढ़कर 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुँच चुका है। यदि आप भी इस बहुमूल्य धातु में निवेश या खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो अपने नजदीकी बाजार के हिसाब से रेट अवश्य जांच लें।
देश के विभिन्न प्रमुख शहरों में चांदी के ताजा दाम
देश के प्रमुख महानगरों और बड़े शहरों में चांदी की कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल रहा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पटना, लखनऊ, जयपुर, इंदौर, अहमदाबाद और बेंगलोर में एक किलोग्राम चांदी का भाव 2,30,000 रुपये दर्ज किया गया है। वहीं चेन्नई, हैदराबाद और भुवनेश्वर में यह दर 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई है। चंडीगढ़ में एक किलो चांदी 2,34,800 रुपये में बिक रही है, जबकि नासिक में यह दर 2,29,900 रुपये प्रति किलोग्राम बनी हुई है।
कीमतों में उछाल के पीछे प्रमुख वैश्विक कारण
बाजार के विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से वैश्विक अनिश्चितता गहरा गई है। ऐसी परिस्थितियों में निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में कीमती धातुओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त सौर ऊर्जा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी की निरंतर बढ़ती मांग, डॉलर के सूचकांक में उतार-चढ़ाव और आगामी समय में ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीदों ने भी चांदी की चमक को और बढ़ा दिया है।
पिछले कारोबारी सत्र का कैसा रहा था हाल
इससे पूर्व के कारोबारी सत्र में स्थानीय बाजार में कमजोर मांग के चलते चांदी के दामों में गिरावट देखी गई थी। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार पिछले शुक्रवार को चांदी 2,000 रुपये टूटकर 2,22,500 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बंद हुई थी। उस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी का भाव घटकर 55.37 डॉलर प्रति औंस दर्ज हुआ था। हालांकि नए सप्ताह की शुरुआत के साथ ही वैश्विक बाजार के नए समीकरणों ने चांदी की कीमतों को दोबारा नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया है।
शेयर बाजार में मंदी का असर, फिर भी ये 2 स्टॉक्स दे सकते हैं मुनाफा
20 Jul, 2026 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: वैश्विक बाजारों से मिले बेहद कमजोर संकेतों के प्रभाव से भारतीय शेयर बाजार सोमवार को भारी गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में ही मुख्य सूचकांक निफ्टी 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह के सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 676.84 अंक यानी 0.87 प्रतिशत टूटकर 77,474.61 पर कारोबार कर रहा था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 168.45 अंक यानी 0.69 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,165.85 के स्तर पर आ गया। शेयर बाजार में लगभग 1480 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि 1331 शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया।
प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन और बाजार की स्थिति
शुरुआती दौर में निफ्टी पर आईसीआईसीआई बैंक, टेक महिंद्रा, ओएनजीसी, जेएसडब्ल्यू स्टील और सिप्ला जैसे दिग्गज शेयरों में मजबूती दर्ज की गई। इसके विपरीत एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, इंटरग्लोब एविएशन और बजाज फाइनेंस जैसे शेयरों में तेज बिकवाली देखी गई। इसके साथ ही निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी हल्की नरमी के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
निफ्टी सूचकांक के लिए तकनीकी स्तर और रणनीति
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए पहला प्रतिरोध स्तर 24381-24423 पर बना हुआ है, जबकि बड़ा प्रतिरोध 24505-24545 के दायरा में है। निचले स्तरों पर निफ्टी को 24210-24161 पर पहला आधार मिल रहा है, वहीं मुख्य समर्थन स्तर 24139-24063 के पास है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर के आसपास पहुंचने और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं। आंकड़ों के लिहाज से समर्थन स्तर के समीप आने पर गिरावट में खरीदारी का अवसर बन सकता है।
बैंक निफ्टी का रुझान और दिशा की संभावना
बैंकिंग सूचकांक के लिए पहला प्रतिरोध स्तर 58710-58978 के बीच है, जबकि बड़ा प्रतिरोध 59378-59513 पर देखा जा रहा है। बैंक निफ्टी को 58210-58045 के पास प्राथमिक समर्थन और 57811-57631 के पास मजबूत दूसरा आधार प्राप्त है। निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंकों के तिमाही परिणामों और कच्चे तेल की चाल के बीच बाजार विशेषज्ञों ने स्तरों के आधार पर कारोबार करने का सुझाव दिया है। जब तक प्राथमिक समर्थन स्तर सुरक्षित रहता है, तब तक गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाई जा सकती है।
विशेषज्ञों द्वारा अनुशंसित प्रमुख शेयर
बाजार के तकनीकी विशेषज्ञों ने मजबूत चार्ट वाले चुनिंदा शेयरों पर खरीदारी की सलाह दी है। कोलगेट पॉमोलिव (COLPAL) के शेयर में 2014 रुपये के स्टॉप-लॉस के साथ 2090 रुपये के लक्ष्य के लिए दांव लगाने का सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त बैंकिंग क्षेत्र से कोटक बैंक के शेयर में 384 रुपये का स्टॉप-लॉस बनाए रखते हुए 400 रुपये के लक्ष्य के लिए खरीदारी की जा सकती है।
HDFC Bank के Q1 नतीजे शानदार, नेट प्रॉफिट में दर्ज हुई जबरदस्त बढ़ोतरी
18 Jul, 2026 03:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: निजी क्षेत्र के देश के सबसे अग्रणी बैंकिंग संस्थान, एचडीएफसी (HDFC) बैंक ने चालू वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही के अपने आधिकारिक वित्तीय लेखा-जोखा के आंकड़े सार्वजनिक कर दिए हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को सौंपी गई वित्तीय रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक ने इस तिमाही के दौरान अपने शुद्ध मुनाफे और ऋण संपत्तियों की गुणवत्ता (एसेट क्वालिटी) दोनों में ही काफी मजबूत और सकारात्मक सुधार दर्ज किया है। इस वित्तीय प्रगति से बैंकिंग क्षेत्र और शेयर बाजार के निवेशकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।
स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ में दर्ज की गई बंपर बढ़ोतरी
बैंक द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस तिमाही के दौरान एचडीएफसी बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ बढ़कर ₹19,059.72 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है। यदि इसकी तुलना बीते वर्ष की समान तिमाही (जून 2025) से की जाए, तो उस समय बैंक को ₹18,155.21 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ था, जिसके मुकाबले इस बार बैंक ने अपनी कमाई में शानदार उछाल हासिल किया है। यह वृद्धि दर्शाती है कि बैंक की मुख्य परिचालन गतिविधियों और ऋण वितरण प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार हो रहा है।
कंसोलिडेटेड मुनाफे में करीब 18 प्रतिशत की भारी वृद्धि
स्टैंडअलोन मुनाफे के साथ-साथ अगर बैंक की सभी अनुषंगी (कंसोलिडेटेड) इकाइयों के समेकित मुनाफे पर नजर डालें, तो वहां भी नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे हैं। समीक्षाधीन तिमाही में बैंक का कुल कंसोलिडेटेड शुद्ध लाभ ₹19,244.71 करोड़ दर्ज किया गया है। वार्षिक आधार पर तुलना करने पर इसमें लगभग 18 प्रतिशत की एक बेहद मजबूत और शानदार विकास दर देखी गई है, जो विभिन्न सहायक वित्तीय सेवाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन को प्रमाणित करती है।
लोन एसेट क्वालिटी और वित्तीय प्रबंधन में हुआ बड़ा सुधार
वित्तीय परिणामों में सबसे राहत की बात बैंक की एसेट क्वालिटी को लेकर सामने आई है। पिछले कुछ समय से बैंकिंग उद्योग के सामने फंसे हुए कर्जों (एनपीए) के प्रबंधन की जो चुनौती थी, उससे निपटते हुए एचडीएफसी बैंक ने अपनी ऋण संपत्तियों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। बैंक प्रबंधन की कुशल नीतियों और सख्त ऋण समीक्षा प्रणाली के कारण डूबते कर्जों के अनुपात में कमी आई है, जिससे बैंक का वित्तीय आधार पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सुदृढ़ नजर आ रहा है।
शेयर बाजार और बैंकिंग सेक्टर पर दिखेगा गहरा असर
त्रैमासिक नतीजों के इस शानदार प्रदर्शन का सीधा और सकारात्मक असर आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार पर दिखने की पूरी उम्मीद है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस हैवीवेट बैंकिंग स्टॉक के मजबूत प्रदर्शन से समूचे निफ्टी और बैंक निफ्टी इंडेक्स को भारी सपोर्ट मिलेगा। निवेशकों के बढ़ते भरोसे और बेहतर वित्तीय गाइडेंस के चलते बाजार में एचडीएफसी बैंक के शेयरों की लिवाली बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जो समग्र बाजार धारणा को और मजबूत करेगी।
Oppo K15 में मिलेगी 8000mAh बैटरी, लॉन्च से पहले फीचर्स हुए लीक
18 Jul, 2026 01:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: वैश्विक स्मार्टफोन निर्माता कंपनी ओप्पो ने अपनी लोकप्रिय 'K' सीरीज के विस्तार की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस सीरीज के दो प्रीमियम मॉडल्स के सफल लॉन्च के बाद अब कंपनी इस श्रृंखला का तीसरा किफायती लेकिन दमदार वेरिएंट बाजार में उतारने जा रही है। नया स्मार्टफोन आगामी सप्ताह चीनी बाजार में आधिकारिक तौर पर दस्तक देगा। लॉन्च से ठीक पहले इस आगामी हैंडसेट को कंपनी के आधिकारिक ऑनलाइन स्टोर पर भी लिस्ट कर दिया गया है, जिससे इसके मुख्य तकनीकी फीचर्स, आकर्षक डिजाइन, रंग और अलग-अलग स्टोरेज वेरिएंट्स से जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां तकनीकी गलियारों में सार्वजनिक हो गई हैं।
आगामी 24 जुलाई को चीनी बाजार में दी जाएगी दस्तक
आधिकारिक लिस्टिंग के अनुसार, यह नया स्मार्टफोन आगामी 24 जुलाई को स्थानीय समयानुसार सुबह 10:00 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 7:30 बजे) एक भव्य इवेंट के जरिए लॉन्च किया जाएगा। चीनी उपभोक्ताओं के लिए इस डिवाइस की प्री-बुकिंग प्रक्रिया को पहले ही लाइव कर दिया गया है। शुरुआती जानकारियों के मुताबिक, यह फोन बाजार में न्यूनतम 12GB रैम और 256GB की विशाल इंटरनल स्टोरेज क्षमता के साथ कदम रखेगा। इसके अलावा, उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए कंपनी इस हैंडसेट को दो बेहद खूबसूरत रंगों—गेल ग्रे और रैपिड व्हाइट विकल्पों में पेश करने जा रही है।
इन-बिल्ट एक्टिव कूलिंग फैन और आधुनिक थर्मल मैनेजमेंट
इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसका कूलिंग सिस्टम है, जो भारी गेमिंग के दौरान भी फोन को स्मूथ रखता है। अपने प्रो मॉडल्स की तरह ही इस डिवाइस में भी एक इन-बिल्ट एक्टिव कूलिंग फैन दिया गया है, जो सीधे तौर पर तापमान को नियंत्रित करता है। इसके साथ ही, फोन के भीतर एक एडवांस्ड वेपर चैंबर कूलिंग सॉल्यूशन लगाया गया है, जिसका हीट डिसिपेशन एरिया 4,950 वर्ग मिलीमीटर का है। यह बेहतरीन थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम लंबे समय तक हाई-ग्राफिक्स टास्क या गेमिंग करते समय हैंडसेट को ओवरहीटिंग और थ्रॉटलिंग की समस्या से पूरी तरह सुरक्षित रखता है।
दमदार डाइमेंसिटी प्रोसेसर और विशाल ग्लेशियर बैटरी क्षमता
हार्डवेयर और पावर बैकअप के मामले में यह फोन बेहद खास होने वाला है। इसमें 6.59-इंच का एक शानदार फ्लैट डिस्प्ले दिया गया है, जिसे धूल और पानी से सुरक्षा के लिए उच्चतम IP69 रेटिंग प्रदान की गई है। परफॉर्मेंस को रफ्तार देने के लिए स्मार्टफोन में ऑक्टा-कोर मीडियाटेक डाइमेंसिटी 7360 सुपर चिपसेट का इस्तेमाल किया गया है, जो टाइडल इंजन तकनीक पर काम करता है। ऊर्जा के लिए इसमें 8,000mAh की बेहद शक्तिशाली बैटरी दी गई है, जो 80W की वायर्ड फास्ट चार्जिंग और बायपास चार्जिंग के साथ-साथ एक विशेष 'ग्लेशियर बैटरी एनर्जी गैदरिंग चिप' को सपोर्ट करती है।
हांगकांग को लेकर नरम पड़ा अमेरिका? चीन के दावे से बढ़ी वैश्विक हलचल
18 Jul, 2026 12:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मैड्रिड: वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली अमेरिका और चीन के बीच की दीर्घकालिक व्यापारिक कड़वाहट अब धीरे-धीरे ढलती हुई दिखाई दे रही है। स्पेन की राजधानी मैड्रिड में संपन्न हुई उच्च स्तरीय आर्थिक वार्ता के बाद चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर यह दावा किया है कि अमेरिकी प्रशासन उस पुराने कार्यकारी आदेश की अवधि को आगे नहीं बढ़ाएगा, जिसने हांगकांग को मिलने वाले विशेष व्यावसायिक एवं आर्थिक दर्जे को समाप्त कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकार वाशिंगटन के इस रुख को दोनों महाशक्तियों के द्विपक्षीय और व्यापारिक संबंधों को एक नई व सकारात्मक दिशा में ले जाने वाला एक मील का पत्थर मान रहे हैं।
वैश्विक राष्ट्रपतियों की शिखर बैठक और बदलते कूटनीतिक संकेत
इस महत्वपूर्ण आर्थिक बदलाव को कुछ समय पहले बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय शिखर वार्ता के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में देखा जा रहा है। उस मुलाकात के बाद से ही दोनों देशों के बीच लगातार कई सकारात्मक और सहयोगात्मक कदम उठाए गए हैं, जिसमें हाल ही में चीनी प्रशासन द्वारा एक प्रमुख चर्च पादरी की ससम्मान रिहाई भी शामिल है। राजनयिक विश्लेषकों का मानना है कि चालू वर्ष के अंत में चीनी राष्ट्रपति की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा से ठीक पहले यह फैसला दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने और आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने में एक बड़ी भूमिका निभाएगा।
प्रतिबंधों के नियमों में संशोधन और अमेरिकी आदेश की समाप्ति
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो जुलाई 2020 में हांगकांग के विशेष व्यापारिक दर्जे को रद्द करने वाला एक कड़ा कार्यकारी आदेश जारी किया गया था, जिसे बाद में वर्ष 2025 में एक साल के लिए विस्तारित भी किया गया। हालांकि, नई सहमति के तहत अब इस प्रतिबंधात्मक आदेश का नवीनीकरण न करने का निर्णय लिया गया है, जिसकी पुष्टि अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने राष्ट्रीय आपातकाल से जुड़े कुछ तकनीकी प्रावधानों की अवधि समाप्त होने का हवाला देकर की है। इसी कूटनीतिक फेरबदल के अंतर्गत हांगकांग के मुख्य कार्यकारी जॉन ली और पूर्व शीर्ष नेता कैरी लैम को भी पुरानी कड़ी प्रतिबंध सूची से बाहर कर दूसरे कानूनी दायरे में स्थानांतरित कर दिया गया है।
चीन और हांगकांग प्रशासन द्वारा अमेरिकी पहल का स्वागत
बीजिंग ने अमेरिकी सरकार के इस कदम को मैड्रिड आर्थिक वार्ता में बनी आपसी सहमतियों को धरातल पर उतारने की दिशा में एक स्वागत योग्य और प्रगतिशील कदम बताया है। दूसरी ओर, हांगकांग के स्थानीय प्रशासन ने भी इस पर अपनी अनुकूल प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि अमेरिका आने वाले समय में चीन की संप्रभुता का पूर्ण आदर करेगा। इसके साथ ही, वहां के प्रशासन ने वैश्विक मंचों पर 'एक देश, दो प्रणाली' की नीति का सम्मान किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है, जिससे क्षेत्र में विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को एक बार फिर से नई गति मिलने की उम्मीद जग गई है।
लोकतांत्रिक अधिकारों की स्थिति और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों की चिंता
व्यापारिक संबंधों में सुधार के इस दौर के बीच हांगकांग में आंतरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर वैश्विक चिंताएं अब भी बरकरार हैं। बीजिंग का इस मामले पर दृढ़ता से कहना है कि वर्ष 2019 में हुए हिंसक सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद 2020 में लागू किया गया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून वहां की आंतरिक शांति और स्थिरता के लिए अपरिहार्य था। इसके विपरीत, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और पश्चिमी देशों का यह गंभीर आरोप है कि इस दमनकारी कानून की आड़ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचला गया है, जिसके चलते मीडिया जगत के रसूखदार कारोबारी जिमी लाई समेत कई लोकतंत्र समर्थक नेता आज भी कारागार में बंद हैं, हालांकि इस विषय पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
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