व्यापार
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम
28 Apr, 2026 11:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी कामयाबी: लीबिया में मिला तेल और गैस का भंडार, 'ऑयल इंडिया' और 'IOC' को मिली सफलता
भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। लीबिया में भारतीय कंपनियों के एक समूह (कंसोर्टियम) ने प्राकृतिक गैस और तेल (कंडेनसेट) के नए स्रोतों की खोज की है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इस महत्वपूर्ण खोज की पुष्टि की है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए संबंधित कंपनियों को बधाई दी और इसे देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर बताया।
खोज का तकनीकी विवरण: गदामेस बेसिन
यह खोज लीबिया के प्रसिद्ध गदामेस बेसिन (कॉन्ट्रैक्ट एरिया 95/96) में की गई है। इस परियोजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
साझेदार: इस परियोजना में ऑयल इंडिया लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) भारतीय समूह का हिस्सा हैं। परियोजना का संचालन (ऑपरेटर) अल्जीरियाई कंपनी SIPX द्वारा किया जा रहा है।
उत्पादन क्षमता: लगभग 8,440 फीट की गहराई तक की गई खुदाई के बाद सफल परीक्षण हुआ। यहां से प्रतिदिन:
13 मिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस।
327 बैरल कंडेनसेट (तरल हाइड्रोकार्बन) का उत्पादन प्राप्त हुआ है।
फॉर्मेशन: यह भंडार अविनात वानिन और अविन काजा फॉर्मेशन में पाया गया है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव
मंत्रालय के अनुसार, यह खोज भारतीय ऊर्जा कंपनियों के बढ़ते वैश्विक पदचिह्नों और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक साझेदारी की मजबूती को दर्शाती है।
विदेशी संपत्तियों में निवेश: भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विदेशों में तेल और गैस क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
आयात पर निर्भरता कम करना: सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन को वर्तमान के 29 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़ाकर 35 मिलियन मीट्रिक टन तक ले जाया जाए।
नीतिगत सुधार: इस लक्ष्य को पाने के लिए केंद्र सरकार 'डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी' और HELP (हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी) जैसे सुधारों के जरिए अन्वेषण कार्यों में तेजी ला रही है।
वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर साफ नजर आया
28 Apr, 2026 09:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शेयर बाजार समाचार: वैश्विक तनाव और तेल की कीमतों में उछाल से बाजार में हलचल, सेंसेक्स-निफ्टी में उतार-चढ़ाव
सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्ती के साथ हुई। वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू बैंकों के शेयरों में बिकवाली के कारण शुरुआती सत्र में बाजार दबाव में नजर आया।
बाजार का शुरुआती हाल
सेंसेक्स और निफ्टी: कारोबार के शुरुआती दौर में सेंसेक्स 208.84 अंक लुढ़ककर 77,094.79 के स्तर पर आ गया, वहीं निफ्टी में भी 42.8 अंक की गिरावट देखी गई और यह 24,049.90 पर कारोबार करता दिखा।
रिकवरी के संकेत: शुरुआती गिरावट के बाद बाजार ने संभलने की कोशिश की। सुबह 9:48 बजे तक सेंसेक्स 57 अंक की रिकवरी के साथ 77,360.95 पर पहुंच गया।
रुपये में गिरावट: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ और 24 पैसे की गिरावट के साथ 94.39 के स्तर पर आ गया।
गिरावट के मुख्य कारण
बाजार में आई इस अस्थिरता के पीछे तीन प्रमुख वैश्विक और आर्थिक कारक रहे:
कच्चे तेल की कीमतों में आग: अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने की आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड 1% से ज्यादा उछलकर 109 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है।
भू-राजनीतिक तनाव: ऐसी खबरें हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकरा सकते हैं, जिससे मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भारतीय बाजार से पैसा निकालना जारी है। सोमवार को ही विदेशी निवेशकों ने करीब 1,151 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
शेयरों का प्रदर्शन: कौन गिरा, कौन संभला?
बड़े शेयरों (लार्जकैप) में सुस्ती के बावजूद छोटे और मझोले शेयरों में थोड़ी मजबूती दिखी।
पछड़ने वाले शेयर: बैंकिंग सेक्टर, खासकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) में सबसे ज्यादा मार पड़ी। SBI, एक्सिस बैंक, सन फार्मा और इंडिगो के शेयरों में लगभग 1% तक की गिरावट रही।
चमकने वाले शेयर: विपरीत परिस्थितियों में भी अदाणी पोर्ट्स, TCS, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।
स्मॉलकैप और मिडकैप: निफ्टी स्मॉलकैप 100 और मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.3% की बढ़त दर्ज की गई।
एनपीए मानने के नियमों में स्पष्टता, बैंकों को मिले नए निर्देश
28 Apr, 2026 06:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आरबीआई का बड़ा फैसला: बैंकिंग व्यवस्था में ईसीएल (ECL) फ्रेमवर्क लागू, बदलेंगे कर्ज के नियम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और भविष्य के जोखिमों को कम करने के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है। 1 अप्रैल, 2027 से बैंकों के लिए 'अपेक्षित ऋण हानि' (Expected Credit Loss - ECL) आधारित ढांचा अनिवार्य हो जाएगा।
क्या है मुख्य बदलाव?
अब तक बैंक किसी कर्ज के डूबने (NPA होने) के बाद उसके लिए प्रावधान (पैसा अलग रखना) करते थे। लेकिन नए नियमों के तहत:
भविष्य का आकलन: यदि बैंक को लगता है कि किसी कर्ज में भविष्य में नुकसान की संभावना है, तो उसे पहले ही रकम सुरक्षित रखनी होगी।
समय सीमा: आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि बैंकों को अपनी आंतरिक प्रणालियों को सुधारने के लिए पर्याप्त समय दिया जा चुका है, इसलिए कार्यान्वयन की तारीख आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
कर्ज खातों का नया वर्गीकरण (Three-Stage Model)
आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपने सभी लोन खातों को जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में विभाजित करें:
श्रेणी
स्थिति
प्रावधान (Provisioning)
स्टेज 1
सामान्य खाते
अगले 12 महीनों के संभावित नुकसान का आकलन।
स्टेज 2
जोखिम वाले खाते (भुगतान में देरी)
पूरे लोन पीरियड (Lifetime) के संभावित नुकसान का प्रावधान।
स्टेज 3
तनावग्रस्त/NPA खाते
लाइफटाइम नुकसान का पूर्ण प्रावधान।
महत्वपूर्ण नए प्रावधान
1. दो महत्वपूर्ण समय-सीमाएं
30 दिन का विलंब: इसे खतरे का शुरुआती संकेत माना जाएगा और बैंक को तुरंत सतर्क होना होगा।
90 दिन का विलंब: 90 दिनों से अधिक बकाया रहने पर कर्ज को आधिकारिक तौर पर NPA (खराब कर्ज) घोषित कर दिया जाएगा।
2. बॉरोअर लेवल क्लासिफिकेशन (एक खाता डूबा, तो सब पर असर)
अब ग्राहक अपने खातों को अलग-अलग नहीं छिपा पाएंगे। यदि किसी ग्राहक का एक बड़ा लोन NPA बनता है, तो बैंक को उसके अन्य सभी सक्रिय लोन खातों को भी 'जोखिम की श्रेणी' में डालकर समीक्षा करनी होगी। यह कदम एनपीए को छिपाने की प्रथा को रोकने के लिए उठाया गया है।
3. व्यक्तिगत ऋण (Personal Loan) की सीमा में वृद्धि
आरबीआई ने पूंजी शुल्क नियमों में ढील देते हुए व्यक्तिगत ऋण जोखिम (Individual Loan Exposure) की सीमा 7.5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी है। इसका लाभ यह होगा कि 10 करोड़ तक के व्यक्तिगत कर्ज अब कम जोखिम भार (Low Risk Weight) की श्रेणी में आएंगे, जिससे बैंकों के लिए कर्ज देना आसान होगा।
FTA पर मुहर: भारत से न्यूज़ीलैंड जाने वाला सामान पूरी तरह टैक्स-फ्री
27 Apr, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) न केवल व्यापारिक दृष्टि से ऐतिहासिक है, बल्कि यह प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर एक बड़ा रणनीतिक कदम भी है। 27 अप्रैल, 2026 (सोमवार) को आधिकारिक रूप से संपन्न हुआ यह समझौता वैश्विक व्यापार के मानचित्र पर भारत की बढ़ती साख को दर्शाता है।
इस समझौते के प्रमुख पहलुओं का विश्लेषण यहाँ दिया गया है:
1. भारतीय निर्यातकों के लिए 'गोल्डन अवसर'
इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि भारत को मिलने वाली 100% शुल्क-मुक्त पहुंच है।
तत्काल लाभ: भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले सभी उत्पादों पर अब कोई सीमा शुल्क (Tariff) नहीं लगेगा।
प्रमुख क्षेत्र: टेक्सटाइल (कपड़ा), चमड़ा उद्योग, कालीन, वाहन के पुर्जे और चीनी मिट्टी के बर्तनों के निर्यात में भारी उछाल आने की उम्मीद है। अभी तक इन पर लगभग 10% शुल्क लगता था, जो अब शून्य हो जाएगा।
2. घरेलू उद्योग और किसानों की सुरक्षा
भारत ने अपनी आर्थिक कूटनीति में चतुराई दिखाते हुए संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा है:
डेयरी सेक्टर: भारतीय डेयरी उद्योग की चिंताओं को देखते हुए दूध, पनीर, दही और क्रीम जैसे उत्पादों को एफटीए से बाहर रखा गया है। इससे न्यूजीलैंड के सस्ते डेयरी उत्पादों से भारतीय किसानों को खतरा नहीं होगा।
कृषि क्षेत्र: स्थानीय कृषि बाजार के हितों की रक्षा के लिए अन्य संवेदनशील खाद्य उत्पादों पर भी आयात छूट नहीं दी गई है।
4. छात्रों के लिए 'गेम-चेंजर' प्रावधान
न्यूजीलैंड ने पहली बार किसी देश के साथ पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा को लेकर ऐसा अनुबंध किया है:
भारतीय छात्रों को अब पढ़ाई के साथ प्रति सप्ताह 20 घंटे काम करने की कानूनी अनुमति होगी।
पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाले 'वर्क वीजा' की अवधि को बढ़ाया गया है, जिससे छात्रों को वहां करियर बनाने के बेहतर अवसर मिलेंगे।
5. पीयूष गोयल की 'हैट्रिक' और भविष्य की राह
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में यह साढ़े तीन वर्षों में 7वां सफल मुक्त व्यापार समझौता है।
रिकॉर्ड समय: सामान्यतः ऐसे समझौतों में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन इसे मात्र 9 महीनों में पूरा करना दोनों देशों के आपसी विश्वास को दर्शाता है।
अगला लक्ष्य: मंत्री ने संकेत दिया है कि अगले कुछ महीनों में यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका के साथ भी महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते हो सकते हैं।
शेयर बाजार हरे निशान में बंद, निफ्टी ने 24000 का स्तर पार किया
27 Apr, 2026 03:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: पिछले सप्ताह की भारी बिकवाली से परेशान निवेशकों के लिए सोमवार का दिन राहत भरा रहा। रिलायंस इंडस्ट्रीज और सन फार्मा जैसे बड़े शेयरों में आई तेजी के चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1% की बढ़त के साथ बंद हुए। वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने की उम्मीदों ने बाजार के सेंटिमेंट को सुधारने में अहम भूमिका निभाई।
बाजार का लेखा-जोखा
सोमवार को बाजार बंद होने तक की स्थिति इस प्रकार रही:
सेंसेक्स: बीएसई (BSE) का सूचकांक 639.42 अंक (0.83%) की तेजी के साथ 77,303.63 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इसने 77,420 का उच्च स्तर भी छुआ।
निफ्टी: एनएसई (NSE) का सूचकांक 194.75 अंक (0.81%) चढ़कर 24,092.70 पर पहुंच गया।
पिछले सत्र की तुलना: यह रिकवरी इसलिए खास है क्योंकि बीते शुक्रवार को सेंसेक्स में करीब 1,000 अंकों की बड़ी गिरावट देखी गई थी।
सन फार्मा की मेगा डील और अन्य टॉप शेयर्स
आज की तेजी का सबसे बड़ा हीरो सन फार्मा रहा, जिसके शेयर में 7% का उछाल दर्ज किया गया।
बड़ी डील: कंपनी द्वारा 'ऑर्गेनॉन एंड कंपनी' का 11.75 अरब डॉलर में अधिग्रहण करने की घोषणा से निवेशक गदगद नजर आए। यह किसी भारतीय कंपनी द्वारा किए गए सबसे बड़े विदेशी अधिग्रहणों में से एक है।
अन्य गेनर्स: रिलायंस इंडस्ट्रीज (2.88%), अडानी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा, एनटीपीसी और टीसीएस जैसे शेयरों ने भी बाजार को ऊपर खींचने में मदद की।
गिरावट वाले शेयर: शानदार तेजी के बावजूद एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और ट्रेंट जैसे शेयर दबाव में रहे और लाल निशान में बंद हुए।
रिकवरी के पीछे के मुख्य कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, तेजी के पीछे तीन प्रमुख वजहें रहीं:
भू-राजनीतिक राहत: अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता शुरू होने की खबरों से मध्य-पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद जगी है, जिससे निवेशकों का जोखिम लेने का भरोसा बढ़ा।
घरेलू मांग: बैंकिंग, कैपिटल गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में मजबूत तिमाही नतीजों ने बाजार को सहारा दिया।
आईटी सेक्टर में खरीदारी: कमजोर नतीजों के बाद भी आकर्षक वैल्युएशन के चलते निवेशकों ने आईटी शेयरों में रुचि दिखाई।
आगे के लिए चुनौतियां और सतर्कता
बाजार में हरियाली के बावजूद विशेषज्ञों ने निवेशकों को सावधान रहने की सलाह दी है।
कच्चा तेल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल अभी भी 107.9 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो महंगाई बढ़ा सकता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व: भविष्य में ब्याज दरों को लेकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व का क्या रुख रहता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है।
‘मशीनों के जादूगर’ जॉन टर्नस अब Apple Inc. के CEO, शानदार सफर
27 Apr, 2026 11:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैलिफोर्निया: तकनीक की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी 'एप्पल' (Apple) में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। कंपनी ने आधिकारिक एलान कर दिया है कि टिम कुक के पद छोड़ने के बाद, 1 सितंबर 2026 से जॉन टर्नस नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में कार्यभार संभालेंगे। तीन दशकों में यह पहला मौका होगा जब हार्डवेयर बैकग्राउंड का कोई इंजीनियर इस शीर्ष पद पर बैठेगा।
पेंसिल्वेनिया से एप्पल के शिखर तक का सफर
90 के दशक में पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के कैंपस में एक छात्र ने शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए 'मैकेनिकल फीडिंग आर्म' बनाई थी, जो बिना हाथ लगाए खाना खाने में मदद करती थी। वह छात्र कोई और नहीं, जॉन टर्नस ही थे।
परफेक्शन का जुनून: टर्नस के बारे में मशहूर है कि एक बार वे आधी रात को मैग्नीफाइंग ग्लास लेकर कंप्यूटर मॉनिटर के पेंच की लकीरें गिन रहे थे ताकि उसे बिल्कुल सटीक बनाया जा सके।
सादगी: प्रमोशन के बाद जब उन्हें एक आलीशान प्राइवेट केबिन ऑफर किया गया, तो उन्होंने इसे ठुकरा दिया और अपने साथियों के साथ खुले हॉल में ही काम करना पसंद किया।
'इंजीनियरों का इंजीनियर'
टर्नस ने एप्पल में अपने सफर की शुरुआत साल 2001 में 'प्रोडक्ट डिजाइन' टीम के सदस्य के रूप में की थी। उन्होंने आईफोन, आईपैड और एयरपॉड्स जैसी क्रांतिकारी खोजों को आकार देने में मुख्य भूमिका निभाई। उनकी इंजीनियरिंग समझ को देखते हुए सहकर्मी उन्हें 'इंजीनियरों का इंजीनियर' कहते हैं।
हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का अनूठा तालमेल
टर्नस केवल मशीनें बनाना नहीं जानते, बल्कि उन्हें सॉफ्टवेयर की ताकत का भी गहरा अंदाजा है।
iPadOS के जनक: उन्होंने ही सबसे पहले इस बात की पैरवी की थी कि आईपैड को आईफोन के सॉफ्टवेयर से अलग एक विशेष 'iPadOS' की जरूरत है, ताकि उसका शक्तिशाली हार्डवेयर पूरी क्षमता से काम कर सके।
निजी जीवन: एथलीट और 'क्रैश' का टैग
तैराकी और रेसिंग: टर्नस कॉलेज के दिनों में एक चैंपियन तैराक रहे हैं। इसके अलावा उन्हें रैली कार रेसिंग और स्कूबा डाइविंग का भी जबरदस्त शौक है।
अजीब उपनाम: दिलचस्प बात यह है कि छात्र जीवन में एक प्रोजेक्ट के दौरान उन्होंने यूनिवर्सिटी की एकमात्र सीएनसी मशीन तोड़ दी थी, जिसके बाद दोस्तों ने उनका नाम 'क्रैश' रख दिया था।
एक नजर जॉन टर्नस पर:
विवरण
जानकारी
जन्म
1975, कैलिफोर्निया
शिक्षा
मैकेनिकल इंजीनियरिंग (यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया)
एप्पल में प्रवेश
साल 2001
नया पद
सीईओ (1 सितंबर 2026 से प्रभावी)
मार्गदर्शक
स्टीव जॉब्स और टिम कुक
फार्मा सेक्टर में बड़ी हलचल, Sun Pharmaceutical Industries की सबसे बड़ी विदेशी डील
27 Apr, 2026 10:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय दवा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज ने वैश्विक बाजार में अपनी धमक बढ़ाते हुए एक ऐतिहासिक व्यापारिक समझौते की घोषणा की है। कंपनी ने अमेरिकी दवा निर्माता ऑर्गेनॉन एंड कंपनी (Organon & Co.) के अधिग्रहण का निर्णय लिया है। यह सौदा लगभग 11.75 अरब डॉलर (करीब 98 हजार करोड़ रुपये) का है, जो सन फार्मा के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश माना जा रहा है।
इस अधिग्रहण के तहत सन फार्मा, ऑर्गेनॉन के शत-प्रतिशत शेयरों को 14 डॉलर प्रति शेयर की दर से खरीदेगी। इस डील की कुल 'एंटरप्राइज वैल्यू' 11.75 अरब डॉलर आंकी गई है।
क्यों खास है यह सौदा?
सन फार्मा का यह कदम उसकी वैश्विक विस्तार रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार होंगे:
नवाचार को बढ़ावा: कंपनी अपने 'इनोवेटिव ड्रग्स' पोर्टफोलियो को और अधिक सशक्त बनाना चाहती है।
बायोसिमिलर क्षेत्र में पैठ: ऑर्गेनॉन के जरिए सन फार्मा जैविक दवाओं के सस्ते विकल्पों (बायोसिमिलर्स) के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो जाएगी।
बाजार में बढ़ेगा कद: इस मर्जर के बाद बनने वाली संयुक्त इकाई दुनिया की टॉप 25 दवा कंपनियों में शुमार हो सकती है, जिसका कुल सालाना टर्नओवर लगभग 12.4 अरब डॉलर होने का अनुमान है।
ऑर्गेनॉन: एक वैश्विक प्रोफाइल
अमेरिका के न्यू जर्सी में स्थित ऑर्गेनॉन विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य (Women’s Health), पुरानी स्थापित दवाओं और बायोसिमिलर सेक्टर में विशेषज्ञता रखती है।
पहुँच: कंपनी 140 से अधिक देशों में सक्रिय है और इसके पास 70 से ज्यादा प्रतिष्ठित उत्पाद हैं।
समयसीमा: दोनों कंपनियों के बोर्ड ने इस सौदे को स्वीकृति दे दी है। विनियामक मंजूरी मिलने के बाद, यह प्रक्रिया 2027 की शुरुआत तक पूरी होने की उम्मीद है।
निवेश और वित्तीय रणनीति
सन फार्मा के चेयरमैन दिलीप संघवी ने विश्वास जताया है कि इस कदम से कंपनी अधिक विविध और प्रतिस्पर्धी बनेगी। कंपनी इस विशाल राशि का इंतजाम अपने आंतरिक स्रोतों और बाजार से लिए जाने वाले ऋण (कर्ज) के जरिए करेगी।
बाजार की प्रतिक्रिया
इस खबर के सार्वजनिक होते ही शेयर बाजार में सन फार्मा के प्रति निवेशकों का उत्साह चरम पर दिखा:
शेयर में उछाल: सोमवार को कंपनी के शेयरों में जोरदार लिवाली हुई और यह 6.7% तक की बढ़त के साथ 1,728.65 रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
विश्लेषण: बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारतीय फार्मा जगत के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी और वैश्विक स्तर पर भारत की फार्मा शक्ति को नई ऊंचाई देगी।
विवरण
प्रमुख आंकड़े
सौदे की कीमत
~11.75 अरब डॉलर
प्रति शेयर भाव
14 डॉलर
अनुमानित वार्षिक आय
12.4 अरब डॉलर
लक्ष्य
महिलाओं का स्वास्थ्य, बायोसिमिलर और वैश्विक विस्तार
बाजार की मजबूत शुरुआत, Sensex-Nifty 50 में तेजी; रुपये पर दबाव
27 Apr, 2026 08:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय शेयर बाजार में हफ्ते के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को शानदार बढ़त देखने को मिली। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही मजबूती के साथ हरे निशान पर खुले। शुरुआती सत्र के दौरान 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 546.64 अंक उछलकर 77,210.85 के स्तर पर पहुंच गया, वहीं निफ्टी में भी 169.55 अंकों की तेजी आई और यह 24,067.50 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
हालांकि, शेयर बाजार की इस तेजी के बीच भारतीय रुपया कमजोर हुआ। डॉलर की मजबूत मांग के चलते शुरुआती कारोबार में रुपया 11 पैसे टूटकर 94.27 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया।
कॉरपोरेट जगत की हलचल: सन फार्मा ने मारी बाजी
सेंसेक्स की कंपनियों में आज सबसे ज्यादा चर्चा सन फार्मा की रही। कंपनी के शेयरों में 4% से अधिक का उछाल दर्ज किया गया। इसका मुख्य कारण एक बड़ी वैश्विक डील है:
अधिग्रहण: सन फार्मा ने अमेरिकी कंपनी 'ऑर्गानोन एंड कंपनी' को 11.75 बिलियन डॉलर (एंटरप्राइज वैल्यू) में खरीदने का ऐलान किया है। यह पूरा सौदा नकद (कैश डील) में होगा।
अन्य टॉप गेनर्स: अडानी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी दिखी।
गिरावट वाले शेयर: रिलायंस इंडस्ट्रीज, एक्सिस बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और बजाज फाइनेंस के शेयरों में शुरुआती सत्र में दबाव देखा गया।
एशियाई बाजारों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी
वैश्विक मोर्चे पर एशियाई बाजारों का रुख मिला-जुला रहा, लेकिन जापान का निक्केई 225 सूचकांक 1.4% की बढ़त के साथ 60,564.18 के नए ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी 2.1% उछला। वहीं, हांगकांग और ऑस्ट्रेलिया के बाजारों में मामूली गिरावट रही।
कच्चा तेल और भू-राजनीतिक तनाव
ईरान के साथ शांति वार्ता में आ रही बाधाओं और मध्य-पूर्व के तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में फिर उबाल आ गया है:
ब्रेंट क्रूड: वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड 1.16% बढ़कर 106.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
राजनीतिक असर: अमेरिका द्वारा पाकिस्तान में दूत भेजने की योजना रद्द करने और राष्ट्रपति ट्रंप के कड़े रुख से बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है।
संस्थागत निवेशकों का रुझान (FII/DII)
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। पिछले कारोबारी सत्र (शुक्रवार) में उन्होंने 8,827.87 करोड़ रुपये की बिकवाली की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 4,700.71 करोड़ रुपये का निवेश कर बाजार को सहारा देने की कोशिश की।
इस हफ्ते की बड़ी नजर
निवेशकों की नजर इस सप्ताह होने वाली दुनिया के दिग्गज केंद्रीय बैंकों की बैठकों पर है। फेडरल रिजर्व (US), यूरोपीय सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ जापान और बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों पर अपना फैसला सुनाएंगे, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ना तय है।
निवेशकों के लिए बड़ा मौका, ETF के जरिए विदेशी बाजारों में एंट्री
27 Apr, 2026 06:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
निवेश की नई 'मल्टी-कुजीन थाली' बना ETF: सोने-चांदी के साथ सेक्टोरल फंड्स में भी भारी उछाल
नई दिल्ली: झांसी के रहने वाले अरविंद जैसे कई निवेशक इन दिनों असमंजस में हैं। पिछले एक साल में सोने ने 56% और चांदी ने 155% का बंपर रिटर्न दिया है, जिसे देख कई लोगों को लगता है कि उन्होंने निवेश का एक बड़ा मौका हाथ से गंवा दिया। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अवसर कभी खत्म नहीं होते। आज के दौर में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) निवेश का एक ऐसा विकल्प बनकर उभरा है, जहां बैंकिंग और आईटी से लेकर अमेरिकी बाजार तक हर तरह का 'जायका' मौजूद है।
यही कारण है कि वित्त वर्ष 2025-26 में पैसिव निवेश के प्रति भारतीयों का रुझान जबरदस्त बढ़ा है और ईटीएफ में निवेश पिछले साल के मुकाबले 94% तक उछल गया है।
सोना और चांदी: पिछले साल के 'सुपरस्टार'
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान निवेशकों ने कीमती धातुओं पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया।
गोल्ड ईटीएफ: निवेश में 350% की भारी वृद्धि।
सिल्वर ईटीएफ: निवेश में 296% का उछाल। इसका मुख्य कारण इन धातुओं द्वारा दिया गया शानदार रिटर्न रहा। हालांकि, केवल कमोडिटी ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य ईटीएफ ने भी पिछले 3 साल में 250% तक का मुनाफा कमा कर दिया है।
ETF क्यों बन रहा है पहली पसंद?
इसके लोकप्रिय होने के तीन प्रमुख कारण हैं:
सस्ता विकल्प: फंड मैनेजर को सिर्फ इंडेक्स फॉलो करना होता है, इसलिए इसका प्रबंधन खर्च (एक्सपेंस रेशियो) बहुत कम होता है।
पारदर्शिता: यह किसी इंडेक्स (जैसे निफ्टी या सेंसेक्स) की हूबहू नकल करता है, जिससे निवेशक को पता होता है कि उसका पैसा कहां लगा है।
लिक्विडिटी: इसे शेयर की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर कभी भी खरीदा या बेचा जा सकता है।
ETF के प्रमुख प्रकार: आपकी जरूरत के अनुसार
इक्विटी (शेयर): निफ्टी 50, सेंसेक्स, मिडकैप या किसी खास सेक्टर (बैंक, आईटी, फार्मा) पर आधारित।
कमोडिटी: भौतिक सोना-चांदी रखने के झंझट के बिना 'गोल्ड बीस' (Gold BeES) या 'सिल्वर बीस' के जरिए निवेश।
डेट (बॉन्ड): सरकारी प्रतिभूतियों या भारत बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों में निवेश।
इंटरनेशनल: भारत में रहकर अमेरिकी बाजार (Nasdaq 100) की बड़ी कंपनियों का हिस्सा बनने का मौका।
निवेश से पहले इन 3 बातों का रखें ध्यान
वॉल्यूम (तरलता): हमेशा उस ईटीएफ को चुनें जिसमें ट्रेडिंग ज्यादा हो, ताकि जरूरत पड़ने पर आप उसे तुरंत बेच सकें।
एक्सपेंस रेशियो: कम खर्च वाला ईटीएफ लंबी अवधि में आपके मुनाफे को बढ़ाता है।
ट्रैकिंग एरर: ईटीएफ और इंडेक्स के रिटर्न में जितना कम अंतर होगा, वह फंड उतना ही बेहतर माना जाता है।
औद्योगिक सेक्टर पर दबाव, ग्रोथ 2% तक सीमित रह सकती है: Union Bank of India
27 Apr, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की नवीनतम शोध रिपोर्ट के अनुसार, विनिर्माण और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आई सुस्ती के चलते मार्च महीने के औद्योगिक आंकड़ों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट का अनुमान है कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की विकास दर मार्च में घटकर मात्र 2% रह जाएगी।
यह गिरावट इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि फरवरी 2026 में यह दर 5.2% थी और मार्च 2025 में 3.9% रही थी।
औद्योगिक सुस्ती के प्रमुख कारण
औद्योगिक गतिविधियों में इस मंदी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक जिम्मेदार माने जा रहे हैं:
विनिर्माण में गिरावट: मैन्युफैक्चरिंग PMI मार्च में गिरकर 53.9 पर आ गई, जो जून 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है। बढ़ती इनपुट लागत और सप्लाई चेन में बाधाओं ने उत्पादन मार्जिन पर बुरा असर डाला है।
बुनियादी ढांचा (Core Sector): आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में मार्च में 0.4% की गिरावट आई है। पिछले 19 महीनों में यह इन क्षेत्रों का सबसे कमजोर प्रदर्शन है।
सेक्टरवार स्थिति: जहां स्टील, सीमेंट और नेचुरल गैस के उत्पादन में सुधार दिखा, वहीं कोयला, कच्चा तेल और बिजली जैसे क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा असर उर्वरक उत्पादन पर पड़ा, जिसमें मासिक आधार पर 25.9% की कमी आई।
आर्थिक संकेतकों की मिली-जुली स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ उच्च-आवृत्ति वाले संकेतकों (High-frequency indicators) ने बाजार की मिली-जुली तस्वीर पेश की है:
संकेतक
मार्च का प्रदर्शन
विश्लेषण
GST राजस्व
8.8% वृद्धि
फरवरी (8.1%) के मुकाबले सुधार, जो बेहतर खपत को दर्शाता है।
ई-वे बिल
12.9% वृद्धि
वृद्धि जारी है, लेकिन फरवरी (18.8%) के मुकाबले रफ्तार धीमी हुई है।
वाहन बिक्री
25.3% वृद्धि
टू-व्हीलर और ट्रैक्टरों की मांग मजबूत रही, हालांकि कारों की बिक्री कुछ सुस्त पड़ी।
ईंधन खपत
मिश्रित
पेट्रोल (7.6%) और डीजल (8%) की मांग बढ़ी, लेकिन विमान ईंधन (ATF) की मांग में भारी गिरावट आई।
बिजली और मौसम का प्रभाव
मार्च के शुरुआती दिनों में उम्मीद से अधिक बारिश होने के कारण गर्मी का प्रकोप कम रहा। इसके चलते कूलिंग उपकरणों की जरूरत कम हुई और बिजली की मांग सामान्य स्तर पर बनी रही।
रिपोर्ट में दावा—भारत-ताइवान सहयोग से दोनों देशों को होगा फायदा
25 Apr, 2026 04:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत और ताइवान के बीच विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), उच्च तकनीक और कृषि जैसे क्षेत्रों में एक सशक्त रणनीतिक साझेदारी की नई संभावनाएं उभर रही हैं। 'ताइवान न्यूज' की एक रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान के पास मौजूद विशाल विदेशी मुद्रा भंडार, अत्याधुनिक हार्डवेयर क्षमता और फूड प्रोसेसिंग के अनुभव का लाभ भारत अपनी 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के लिए उठा सकता है।
आर्थिक और तकनीकी पूरकता
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि दोनों देशों की आर्थिक शक्तियां एक-दूसरे के लिए पूरक का काम करती हैं:
भारत की ताकत: सॉफ्टवेयर विकास, आईटी सेवाएं और बड़ी संख्या में कुशल श्रमशक्ति।
ताइवान की ताकत: सेमीकंडक्टर, हार्डवेयर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक नेतृत्व।
बाजार का अवसर: भारत का विशाल उपभोक्ता बाजार ताइवान के लिए चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता को कम करने का एक बेहतरीन विकल्प पेश करता है।
कृषि क्षेत्र में आधुनिक बदलाव
ताइवान की उन्नत कृषि तकनीक भारतीय खेती की तस्वीर बदल सकती है। रिपोर्ट के अनुसार:
स्मार्ट फार्मिंग: बेहतर बीज तकनीक और स्मार्ट खेती के जरिए भारतीय किसानों की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।
सप्लाई चेन: खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) और कोल्ड चेन मैनेजमेंट में ताइवान का अनुभव भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
बढ़ते द्विपक्षीय संबंध और व्यापारिक पहल
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है:
सक्रिय नेतृत्व: ताइवान के प्रतिनिधि मुमिन चेन और भारत के महानिदेशक निनाद देशपांडे लगातार इन रिश्तों को प्रगाढ़ बनाने में जुटे हैं।
CII का दौरा: हाल ही में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के प्रतिनिधिमंडल ने ताइपे का दौरा किया, जहाँ ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्ट मोबिलिटी में सहयोग पर गहन चर्चा हुई।
व्यापारिक विस्तार: ताइवान ने मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु में अपने व्यापारिक कार्यालय खोलकर भारत में अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है।
भविष्य की राह: मुक्त व्यापार समझौता
2024 में जैविक (ऑर्गेनिक) उत्पादों को लेकर हुए समझौते ने व्यापारिक सहयोग को नई गति दी है। रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है कि भारत और ताइवान को किसी भी बाहरी दबाव की परवाह किए बिना अपने आर्थिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में एक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) व्यापार, निवेश और तकनीकी आदान-प्रदान को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।
इस साझेदारी से न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिलेगी, बल्कि यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में भी उभरेगा।
डिजिटल युग में निवेश का ट्रेंड बदला, नियामकों को रहना होगा सतर्क
25 Apr, 2026 03:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली।भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के 38वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारतीय पूंजी बाजार की मजबूती और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे उपस्थित रहे।
सेबी की विश्वसनीयता और विकास की यात्रा
चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने अपने संबोधन में कहा कि सेबी की असली ताकत उसकी विश्वसनीयता है। उन्होंने बाजार के क्रमिक विकास को रेखांकित करते हुए कहा:
ऐतिहासिक बदलाव: 12 अप्रैल 1988 को अपनी स्थापना के बाद से सेबी ने भारतीय बाजारों को पारदर्शी और आधुनिक बनाया है। स्क्रीन-आधारित ट्रेडिंग, डीमैट व्यवस्था और रोलिंग सेटलमेंट जैसे सुधारों ने इसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया।
मजबूत आंकड़े: वर्तमान में भारत में 5,900 से अधिक सूचीबद्ध कंपनियां हैं और निवेशकों की संख्या 14 करोड़ को पार कर गई है। पिछले दशक में बाजार पूंजीकरण में 15% और म्यूचुअल फंड क्षेत्र में 20% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।
पूंजी निर्माण: प्राथमिक बाजार अब हर साल लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने का सशक्त माध्यम बन चुका है।
साइबर सुरक्षा: राष्ट्रीय हित का विषय
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तकनीकी बदलावों के बीच साइबर सुरक्षा को सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने आगाह किया कि:
गंभीर खतरा: स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी या बड़े ब्रोकर्स पर किसी भी प्रकार का साइबर हमला निवेशकों के भरोसे को खत्म कर सकता है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को चोट पहुँचा सकता है।
AI का उपयोग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब साइबर हमलों को अधिक तीव्र और स्वचालित बना रही है, जिससे निपटने के लिए सुरक्षा तंत्र को भी उतनी ही तेजी से विकसित करना होगा।
नया फ्रेमवर्क: उन्होंने अप्रैल 2025 से लागू होने वाले साइबर सिक्योरिटी और साइबर रेजिलिएंस फ्रेमवर्क की सराहना की और इसे एक सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
भविष्य की प्राथमिकताएं: नवाचार और सुरक्षा
चेयरमैन पांडे ने कहा कि अब बाजार में डिजिटल पीढ़ी का प्रवेश हो रहा है, जो तकनीक की गहरी समझ रखती है। सेबी की आगामी रणनीतियों में निम्नलिखित बिंदु प्रमुख रहेंगे:
व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business): नियमों को और अधिक सरल बनाना।
आधुनिक तकनीक: डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल फॉरेंसिक और एआई-आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए निगरानी तंत्र को सख्त करना।
गवर्नेंस: कॉरपोरेट गवर्नेंस में सुधार और ई-ऑफिस सिस्टम को बढ़ावा देना।
टेक्सटाइल सेक्टर पर दबाव, निर्यात घटने से उद्योग चिंतित
25 Apr, 2026 03:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली।भारत के टेक्सटाइल और गारमेंट (वस्त्र एवं परिधान) निर्यात के लिए वित्त वर्ष 2025-26 चुनौतियों भरा रहा है। आर्थिक थिंक टैंक 'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' (GTRI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र के कुल निर्यात में 2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह आंकड़ा 35.8 अरब डॉलर पर सिमट गया है। भारतीय मुद्रा (रुपये) के मूल्य में भी निर्यात में 2.1 प्रतिशत की कमी आई है।
प्रमुख क्षेत्रों में गिरावट का रुझान
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि टेक्सटाइल की लगभग सभी बड़ी श्रेणियों को नुकसान उठाना पड़ा है:
सूती वस्त्र (Cotton Textiles): इसमें 3.9 प्रतिशत की कमी आई।
तैयार कपड़े (Ready-made Garments): इस क्षेत्र में 1.4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
कालीन निर्यात (Carpet Export): इसमें सबसे अधिक 5.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
हस्तशिल्प (Handicraft): केवल इस सेक्टर में मामूली सुधार दिखा, जहाँ 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
मुद्रा के उतार-चढ़ाव और आर्थिक चिंता
GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण आर्थिक चिंता की ओर इशारा किया है। उन्होंने बताया कि डॉलर और रुपये के बीच का अंतर भारतीय व्यापार की कमजोर स्थिति को दर्शाता है।
भ्रामक वृद्धि: कई क्षेत्रों में रुपये के हिसाब से निर्यात बढ़ता दिख रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमाई कम हो रही है।
उदाहरण: मैन-मेड टेक्सटाइल का निर्यात रुपये में 3.6% बढ़ा, लेकिन डॉलर में यह 0.8% घट गया। इसी तरह, गारमेंट निर्यात रुपये में 2.9% बढ़ा, जबकि डॉलर में इसमें 1.4% की गिरावट आई।
विफलता के कारण और नीतिगत सवाल
श्रीवास्तव के अनुसार, निर्यात में दिखने वाली छद्म बढ़त का कारण प्रतिस्पर्धा में सुधार नहीं, बल्कि रुपये का कमजोर होना है। वास्तविकता यह है कि भारत वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ खो रहा है और श्रम-प्रधान क्षेत्रों (Labor-intensive sectors) में पिछड़ रहा है।
सरकार के समक्ष चुनौतियां:
योजनाओं का प्रभाव: रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि PLI योजना, लॉजिस्टिक्स में सुधार और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' जैसे सरकारी प्रयासों के बावजूद निर्यात में अपेक्षित वृद्धि क्यों नहीं हो रही है?
सुधार की मांग: GTRI ने सरकार से उन बाधाओं की तत्काल पहचान करने का आग्रह किया है जो कपड़ा और परिधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की निर्यात क्षमता को रोक रही हैं।
खाड़ी क्षेत्र के तेल उत्पादों में जल्द सुधार की उम्मीद, रिपोर्ट में दावा
25 Apr, 2026 12:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। गोल्डमैन सैक्स की हालिया शोध रिपोर्ट के अनुसार, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आवाजाही फिर से सुरक्षित रूप से शुरू हो जाती है, तो खाड़ी देशों के कच्चे तेल उत्पादन में अगले कुछ महीनों के भीतर बड़ी रिकवरी देखी जा सकती है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार रहता है, तो उत्पादन को युद्ध से पहले वाली स्थिति में लौटने में लंबा समय लग सकता है।
इस रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
उत्पादन में भारी गिरावट और बहाली की संभावना
मौजूदा स्थिति: संघर्ष के चलते खाड़ी देशों का तेल उत्पादन लगभग 57 प्रतिशत (14.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन) तक गिर गया है।
बहाली की शर्त: यदि तेल के बुनियादी ढांचे पर नए हमले रुक जाते हैं और जलमार्ग खुल जाता है, तो उत्पादन तेजी से पटरी पर लौट सकता है।
चुनौतियां: बहाली की गति पूरी तरह से पाइपलाइन की क्षमता, खाली टैंकरों की उपलब्धता और तेल क्षेत्रों में होने वाले मरम्मत कार्यों पर निर्भर करेगी।
टैंकरों की कमी और अतिरिक्त क्षमता
रिपोर्ट के अनुसार, तनाव शुरू होने के बाद से खाड़ी क्षेत्र में खाली टैंकरों की क्षमता 50 प्रतिशत घटकर महज 130 मिलियन बैरल रह गई है।
सऊदी और यूएई की भूमिका: सऊदी अरामको और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पास वर्तमान में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता मौजूद है। बाजार में स्थिरता लाने के लिए इस अतिरिक्त क्षमता का उपयोग किया जा सकता है।
रिकवरी का अनुमान: बाहरी विशेषज्ञों का मानना है कि जलमार्ग दोबारा खुलने के:
3 महीने बाद: लगभग 70 प्रतिशत उत्पादन बहाल हो सकता है।
6 महीने बाद: करीब 88 प्रतिशत तक उत्पादन सामान्य हो सकता है।
लंबी अवधि का जोखिम
गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि यदि मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो पूर्ण बहाली की प्रक्रिया कई तिमाहियों तक खिंच सकती है। बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान और रसद (Logistics) की कमी इस पूरी प्रक्रिया को जटिल बना सकती है।
RBI एक्शन के बाद Paytm का बयान, कहा—बिजनेस पर नहीं पड़ेगा असर
25 Apr, 2026 11:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पेटीएम का बड़ा बयान: पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस रद्द होने से कंपनी के कारोबार पर कोई असर नहीं, सेवाएं रहेंगी जारी
नई दिल्ली: फिनटेक दिग्गज पेटीएम (Paytm) ने स्पष्ट किया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (PPBL) का लाइसेंस रद्द किए जाने का उसके मुख्य व्यवसाय या वित्तीय स्थिति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। कंपनी ने रेगुलेटरी फाइलिंग के जरिए निवेशकों और ग्राहकों को आश्वस्त किया है कि उसका बैंक के साथ कोई महत्वपूर्ण व्यावसायिक समझौता या वित्तीय जोखिम नहीं जुड़ा है।
आरबीआई की कार्रवाई और पेटीएम की सफाई
भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा का हवाला देते हुए पीपीबीएल का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया था। इस पर पेटीएम ने निम्नलिखित स्पष्टीकरण दिए हैं:
स्वतंत्र संचालन: पेटीएम के अनुसार, पीपीबीएल एक स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य करता है। इसके प्रबंधन या बोर्ड के फैसलों में पेटीएम का कोई हस्तक्षेप नहीं है।
वित्तीय जोखिम शून्य: कंपनी ने बताया कि 1 मार्च 2024 को ही यह साफ कर दिया गया था कि पीपीबीएल में उनका कोई निवेश जोखिम (Exposure) नहीं है।
इम्पेयरमेंट (वैल्यू कम करना): पेटीएम ने 31 मार्च 2024 को ही बैंक में अपने निवेश के मूल्य को राइट-ऑफ (Impairment) कर दिया था, इसलिए अब कोई नया वित्तीय घाटा होने की आशंका नहीं है।
निर्बाध चलती रहेंगी सभी सेवाएं
पेटीएम ने ग्राहकों को भरोसा दिलाया है कि एप से जुड़ी उनकी पसंदीदा सेवाएं पहले की तरह बिना किसी रुकावट के काम करती रहेंगी। इनमें शामिल हैं:
पेटीएम यूपीआई (UPI) और ऐप सेवाएं
पेटीएम क्यूआर (QR) कोड और साउंडबॉक्स
कार्ड मशीनें और पेमेंट गेटवे
पेटीएम मनी और गोल्ड
मुनाफे में पेटीएम: वित्त वर्ष 2026 के शानदार आंकड़े
व्यावसायिक मोर्चे पर पेटीएम का प्रदर्शन लगातार मजबूत बना हुआ है। कंपनी के हालिया वित्तीय परिणाम इसके सशक्त बिजनेस मॉडल की तस्दीक करते हैं:
लगातार मुनाफा: वित्त वर्ष 2026 में कंपनी लगातार तीन तिमाहियों से लाभ में रही है।
शुद्ध लाभ: कंपनी ने 559 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। एकमुश्त खर्चों को हटाकर भी यह लाभ 369 करोड़ रुपये रहता है।
EBITDA में सुधार: दिसंबर तिमाही में कंपनी का कर पश्चात लाभ (PAT) सालाना आधार पर 433 करोड़ रुपये बढ़कर 225 करोड़ रुपये तक पहुँच गया।
UPI मार्केट में दबदबा
पेटीएम का यूपीआई कारोबार उद्योग की औसत दर से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है। पिछले नौ महीनों में कंपनी के उपभोक्ता यूपीआई के सकल बाजार मूल्य (GMV) में 35% की वृद्धि हुई है, जबकि पूरे उद्योग की विकास दर महज 16% रही।
बेहतर नतीजों और मजबूत मार्जिन प्रोफाइल को देखते हुए कई प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों ने कंपनी के भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेटीएम का राजस्व मॉडल अब पहले से कहीं अधिक स्थिर और लाभदायक है।
पश्चिम बंगाल में चुनावी छापे: 510 करोड़ की नकदी और सामान पकड़ा
आग का खौफनाक मंजर: बेंगलुरु में PG से कूदकर बचाईं 50 लड़कियों ने जान
सोशल मीडिया पर ट्रोल हुए पाकिस्तानी बल्लेबाज, यूजर्स ने दी नसीहत
कटहल: पोषक तत्वों से भरपूर एक बहुमुखी फल
दिल्ली में हुई घटना को लेकर सरकार पर निशाना
आयुर्वेदिक तरीके से सिरदर्द का समाधान, आज ही शुरू करें
युवक की मौत पर फूटा गुस्सा, परिजनों ने हाईवे पर किया प्रदर्शन
