व्यापार
ईरान के फैसले का असर: सप्लाई की चिंता खत्म होते ही कच्चा तेल सस्ता, अब भारत पर टिकी सबकी नजर।
18 Apr, 2026 03:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली।अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी गिरावट की खबर आ रही है, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम अब भी पुराने स्तर पर ही टिके हुए हैं। शुक्रवार को वैश्विक बाजार में क्रूड की कीमतें 10 फीसदी तक लुढ़क गईं और भाव 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है। इसके बावजूद, घरेलू तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में कटौती का कोई संकेत नहीं दिया है।
राजधानी और देश का हाल
देश की राजधानी दिल्ली में आज भी पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। वहीं, देश में सबसे किफायती ईंधन अब भी अंडमान की राजधानी पोर्टब्लेयर में मिल रहा है, जहाँ पेट्रोल के दाम 78.05 रुपये और डीजल 82.64 रुपये प्रति लीटर हैं।
क्यों आई कच्चे तेल में इतनी बड़ी गिरावट?
वैश्विक बाजार में आई इस मंदी के पीछे मुख्य कारण ईरान का एक सकारात्मक बयान है। ईरान ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के रास्ते अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को फिर से सुचारू करने का आश्वासन दिया है। इससे दुनिया भर में तेल की आपूर्ति को लेकर बना डर खत्म हो गया और कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
बढ़ चुकी हैं कीमतें: प्रीमियम और निजी कंपनियों का रुख
एक ओर जहाँ सरकारी कंपनियां दाम स्थिर रखे हुए हैं, वहीं निजी कंपनियों जैसे शेल इंडिया और नायरा ने हाल के महीनों में कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही, इंडियन ऑयल का हाई-परफॉर्मेंस पेट्रोल XP100 भी अब 160 रुपये प्रति लीटर के ऊंचे स्तर पर पहुँच गया है। मध्यम वर्ग अब भी इस उम्मीद में है कि वैश्विक गिरावट का लाभ उन्हें पेट्रोल पंपों पर कब मिलेगा।
प्रमुख शहरों में ईंधन की वर्तमान स्थिति (₹/लीटर)
मुंबई: पेट्रोल 104.21 और डीजल 92.15
हैदराबाद: पेट्रोल 107.46 और डीजल 95.70
जयपुर: पेट्रोल 104.72 और डीजल 90.21
चेन्नई: पेट्रोल 100.75 और डीजल 92.34
कोलकाता: पेट्रोल 103.94 और डीजल 90.76
लखनऊ: पेट्रोल 94.69 और डीजल 87.80
बेंगलुरु: पेट्रोल 94.49 और डीजल 89.02
चंडीगढ़: पेट्रोल 94.30 और डीजल 82.45
इंदौर: पेट्रोल 106.48 और डीजल 91.88
पटना: पेट्रोल (पुराना दर) और डीजल 93.80
₹1,00,000 करोड़ का प्रोजेक्ट: मुंबई के गोरेगांव में 10 साल में तैयार होगी 'अदाणी सिटी'।
18 Apr, 2026 03:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई | गौतम अदाणी के नेतृत्व वाली अदाणी प्रॉपर्टीज ने मुंबई के गोरेगांव (वेस्ट) में स्थित 143 एकड़ के 'मोतीलाल नगर' को नया रूप देने की कमान संभाल ली है। इस महत्वाकांक्षी पुनर्विकास परियोजना (Redevelopment) के लिए कंपनी ने ₹1,00,000 करोड़ ($10 बिलियन से अधिक) के निवेश का भारी-भरकम बजट तय किया है। धारावी के बाद यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी आवासीय कायाकल्प योजना मानी जा रही है।
दशकों पुराना इंतजार होगा खत्म
महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) के मार्गदर्शन में चलने वाला यह प्रोजेक्ट मोतीलाल नगर 1, 2 और 3 के निवासियों के लिए खुशहाली लेकर आएगा। 1960 के दशक में बसा यह इलाका पिछले 20 सालों से नवीनीकरण की राह देख रहा था। अगले 10 वर्षों के भीतर, इस पूरे क्षेत्र को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्मार्ट टाउनशिप में तब्दील कर दिया जाएगा।
निर्माण का मेगा स्ट्रक्चर
इस योजना के तहत कुल 28.8 लाख वर्ग मीटर निर्माण क्षेत्रफल (FSI) का उपयोग होगा। इसका विभाजन कुछ इस प्रकार है:
अदाणी प्रॉपर्टीज का हिस्सा: करीब 18.9 लाख वर्ग मीटर (बिक्री के लिए)।
पुनर्वास (Rehab) और MHADA का कोटा: शेष 10 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र निवासियों और सरकारी हिस्सेदारी के लिए सुरक्षित।
निवासियों के लिए 'लग्जरी' तोहफा
इस रिडेवलपमेंट की सबसे खास बात घर का क्षेत्रफल है। मुंबई के औसत प्रोजेक्ट्स के उलट, यहाँ रहने वाले 3,702 परिवारों को लगभग 1,600 वर्ग फीट के बड़े फ्लैट मिलेंगे। इसके अलावा, 1,600 स्लम निवासियों को 300 वर्ग फीट से ज्यादा के पक्के मकान और 328 दुकानदारों को करीब 987 वर्ग फीट का व्यवसायिक स्थान दिया जाएगा।
हाईटेक और इको-फ्रेंडली सुविधाएं:
टाउनशिप को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है। इसमें:
पर्यावरण: 15 एकड़ में हरियाली और विशाल पार्क।
इंफ्रास्ट्रक्चर: स्कूल, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, मॉडर्न मार्केट और मल्टी-लेवल पार्किंग।
टेक्नोलॉजी: सोलर पावर प्लांट, हाई-टेक फायर सेफ्टी, और जलभराव रोकने के लिए एडवांस्ड ड्रेनेज सिस्टम।
FII का बदला मन: लगातार बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों ने फिर लगाया भारत पर दांव
18 Apr, 2026 12:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | अंतरराष्ट्रीय मंच पर तनाव कम होने की आहट और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए 'संजीवनी' का काम किया। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत शुरू होने की संभावनाओं ने निवेशकों के डर को कम किया, जिससे दलाल स्ट्रीट पर लिवाली का माहौल बना रहा। भारतीय मुद्रा में आई मजबूती ने भी बाजार की इस बढ़त को सहारा दिया।
मिडकैप और सेक्टोरल चमक
बजाज ब्रोकिंग रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, यह सप्ताह पूरी तरह खरीदारों के नाम रहा। जहाँ आईटी कंपनियों के शेयरों में दबाव देखा गया, वहीं धातु , एफएमसीजी (FMCG) और ऊर्जा क्षेत्रों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 3% तक की मजबूती दिखाई। बड़े सूचकांकों के मुकाबले मंझली और छोटी कंपनियों (मिडकैप व स्मॉलकैप) के शेयरों में अधिक चमक रही, जिनमें करीब 1.5% का उछाल दर्ज किया गया।
जानकारों का नजरिया
बाजार के जानकारों का कहना है कि यह रिकवरी भले ही क्रमिक है, लेकिन काफी ठोस है। विशेषज्ञ पोनमुडी आर के अनुसार, बाजार में अब भारी उतार-चढ़ाव की जगह स्थिरता दिख रही है। निवेशकों ने हर गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया है, जो इस बात का प्रमाण है कि बाजार का 'मूड' सकारात्मक हो रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ अभी भी एक बड़े और निर्णायक उछाल की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
निवेश का प्रवाह: विदेशी निवेशकों की घर वापसी
बाजार के लिए सबसे सुखद संकेत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) का बदला हुआ रुख रहा। पिछले कई सत्रों से पैसा निकाल रहे विदेशी निवेशकों ने हफ्ते के आखिरी दिनों में शुद्ध खरीदारी की। दूसरी तरफ, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने इस बढ़त का लाभ उठाते हुए भारी मुनाफावसूली की और लगभग 6,300 करोड़ रुपये की निकासी की। कुल मिलाकर, बाजार वर्तमान में "वेट एंड वॉच" की स्थिति में है, जहाँ वैश्विक सुधारों ने तेजी की नई उम्मीदें जगा दी हैं।
वैश्विक तनाव के बीच अमेरिका का बड़ा फैसला: तेल कीमतों को थामने के लिए बढ़ाई समयसीमा
18 Apr, 2026 12:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन | वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। अमेरिकी प्रशासन ने रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट को एक माह के लिए और विस्तार दे दिया है। ट्रंप प्रशासन का यह फैसला चौंकाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि पहले इस राहत को खत्म करने के संकेत दिए गए थे।
16 मई तक मिली अनुमति
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी नए लाइसेंस के अनुसार, अब विभिन्न देश 16 मई तक समुद्री मार्ग से रूसी कच्चे तेल का आयात कर सकेंगे। इससे पहले यह समयसीमा 11 अप्रैल को समाप्त हो गई थी। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि इस छूट के दायरे में ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से संबंधित किसी भी प्रकार के लेनदेन को अनुमति नहीं दी गई है।
कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश
जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतों को काबू में रखने के उद्देश्य से अमेरिका ने यह कदम उठाया है। इससे पहले मार्च में भारत सहित कई देशों को अस्थायी राहत दी गई थी, जिसे अब आगे बढ़ाया गया है।
भारत को मिलेगा बड़ा लाभ
इस फैसले से भारत को रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल मंगाने में सहूलियत होगी। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने भी पुष्टि की है कि रूस भारत को कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति में और वृद्धि करेगा। आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में भारत ने रूस से करीब 5.8 अरब डॉलर का तेल खरीदा, जो पिछले महीनों की तुलना में काफी अधिक है। 2024 में भारत ने औसतन 20 लाख बैरल प्रतिदिन का आयात कर रूसी तेल के लिए खुद को एक बड़े बाजार के रूप में स्थापित किया है।
अमेरिकी सांसदों का विरोध
दूसरी ओर, इस यू-टर्न पर अमेरिका के भीतर ही विरोध के सुर उठने लगे हैं। कुछ अमेरिकी सांसदों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसी रियायतों से रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। इससे पहले ट्रेजरी सचिव ने भी संकेत दिए थे कि छूट का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा, लेकिन बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच प्रशासन ने अपना रुख बदल लिया है।
अमेरिकी बाजार में भारत का जलवा; 40 फीसदी स्मार्टफोन सप्लाई कर चीन को पछाड़ा
18 Apr, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | वर्ष 2026 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में भारतीय स्मार्टफोन बाजार के प्रदर्शन में गिरावट देखी गई है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, वार्षिक आधार पर शिपमेंट में 3 फीसदी की कमी आई है, जो पिछले छह सालों का सबसे कमजोर स्तर है। इस मंदी के पीछे उपकरणों की बढ़ती कीमतें, उच्च आपूर्ति लागत और ग्राहकों की कमजोर मांग को मुख्य कारण माना जा रहा है। विशेष रूप से 15,000 रुपये से सस्ते फोन के सेगमेंट में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि कीमतों में बढ़ोतरी के चलते उपभोक्ता नए फोन खरीदने में देरी कर रहे हैं, जिससे पूरे साल के बाजार में 10 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है।
ब्रांड्स का प्रदर्शन
बाजार हिस्सेदारी के मामले में वीवो 21% के साथ शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि सैमसंग अपनी 'एस-26' सीरीज के दम पर दूसरे स्थान पर है। ओप्पो 14% हिस्सेदारी के साथ तीसरे और शाओमी चौथे स्थान पर है। प्रीमियम सेगमेंट में एप्पल ने 9% कब्जा जमाया है, वहीं गूगल ने 39% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है। 'नथिंग' ब्रांड 47% की बढ़त के साथ सबसे तेजी से उभरता नाम रहा।
वैश्विक स्तर पर भारत की धमक
बाजार में मंदी के बावजूद, विनिर्माण के क्षेत्र में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मैकेंजी की रिपोर्ट के अनुसार, अब अमेरिका की 40 फीसदी स्मार्टफोन आपूर्ति भारत से हो रही है। चीन पर निर्भरता कम करते हुए भारत अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) के एक मजबूत केंद्र के रूप में उभरा है।
रिकॉर्ड पूंजी संग्रहण: इक्विटी और ऋण बाजारों ने जुटाए 154 अरब डॉलर
18 Apr, 2026 10:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | दुनिया भर में जारी आर्थिक उथल-पुथल के बीच भारतीय शेयर बाजार निवेशकों के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद ठिकाने के रूप में सामने आया है। हाल ही में उद्योग जगत के साथ हुई एक बैठक में सेबी प्रमुख तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट किया कि भारत अब वैश्विक स्तर पर एक मजबूत पूंजी केंद्र बन चुका है। देश का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) 4.4 लाख करोड़ डॉलर के प्रभावशाली स्तर पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य सेवा, तकनीक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में विकास की संभावनाओं ने निवेशकों का भरोसा जीता है। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने इक्विटी और ऋण बाजार के माध्यम से रिकॉर्ड 154 अरब डॉलर की राशि जुटाई है।
आरबीआई और बाजार के आंकड़े
वर्ष 2025 में भारत आईपीओ की संख्या के आधार पर विश्व में शीर्ष पर रहा, जबकि जुटाई गई पूंजी के लिहाज से तीसरे स्थान पर रहा। आरबीआई के अनुमानों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी विकास दर 7.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। वहीं, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की परिसंपत्तियां भी बढ़कर 780 अरब डॉलर हो गई हैं, और कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार अब 650 अरब डॉलर का आकार ले चुका है।
लिक्विडिटी पर RBI का बड़ा एक्शन, VRRR ऑक्शन में भारी भागीदारी
17 Apr, 2026 05:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में नकदी की अधिकता (Liquidity Surplus) को नियंत्रित करने के लिए शुक्रवार को 7-दिवसीय वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी के माध्यम से बाजार से 2,00,031 करोड़ रुपये वापस निकाल लिए हैं। केंद्रीय बैंक का यह कदम वित्तीय स्थिरता और संतुलित नकदी प्रवाह बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है।
इस वित्तीय कार्रवाई के मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं:
नीलामी और बैंकों की प्रतिक्रिया
भारी मांग: आरबीआई ने शुरुआत में 2 लाख करोड़ रुपये निकालने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बैंकों ने इसमें गहरी दिलचस्पी दिखाई। नीलामी के दौरान कुल 2,28,098 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं, जो निर्धारित सीमा से अधिक थीं।
ब्याज दरें: इस प्रक्रिया के लिए 5.24% की कट-ऑफ दर और 5.23% की भारित औसत दर तय की गई है।
बैंकिंग सिस्टम में नकदी की स्थिति
सरप्लस लिक्विडिटी: वर्तमान में भारतीय बैंकिंग प्रणाली में लगभग 4.09 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी मौजूद है। इतनी बड़ी मात्रा में सरप्लस राशि को प्रबंधित करने के लिए ही आरबीआई समय-समय पर वीआरआरआर (VRRR) जैसे उपकरणों का उपयोग करता है।
फंड्स का चक्र: यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। हाल ही में 10 अप्रैल को निकाली गई लगभग इतनी ही राशि आज सिस्टम में वापस लौट आई थी, जिसे प्रबंधित करने के लिए यह नई नीलामी आयोजित की गई।
आरबीआई का दृष्टिकोण
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति के दौरान स्पष्ट किया था कि केंद्रीय बैंक तरलता प्रबंधन को लेकर पूरी तरह सक्रिय और सतर्क है। बैंक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में न तो नकदी की कमी हो और न ही इतनी अधिकता कि जिससे वित्तीय असंतुलन पैदा हो।
ईंधन को लेकर चिंता बेवजह, सप्लाई पूरी तरह सामान्य: सरकार
17 Apr, 2026 03:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे भू-राजनीतिक संकट के बीच भारत सरकार ने देशवासियों को ईंधन की आपूर्ति को लेकर आश्वस्त किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य है।
इस महत्वपूर्ण जानकारी के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
ईंधन आपूर्ति की वर्तमान स्थिति
सामान्य उपलब्धता: पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, देश के किसी भी हिस्से से गैस खत्म होने या 'ड्राई-आउट' की कोई खबर नहीं है। रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से कार्य कर रही हैं।
ऑटो एलपीजी की मांग में उछाल: आंकड़ों के अनुसार, ऑटो एलपीजी की दैनिक बिक्री में भारी वृद्धि हुई है। फरवरी के 177 टन के मुकाबले अप्रैल में यह बढ़कर 296 टन प्रतिदिन हो गई है। इसका सबसे अधिक असर कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में देखा जा रहा है।
रणनीतिक कदम: सरकार अब एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) के नेटवर्क को तेजी से फैलाने पर ध्यान दे रही है।
समुद्री सुरक्षा और नाविकों का हाल
भारतीय नाविक सुरक्षित: शिपिंग मंत्रालय ने जानकारी दी है कि तनावग्रस्त क्षेत्रों में मौजूद सभी भारतीय नाविक और जहाज पूरी तरह सुरक्षित हैं। पिछले 24 घंटों में किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।
बंदरगाहों का संचालन: देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों पर परिचालन सामान्य है और माल की आवाजाही में कोई बाधा नहीं आ रही है।
सरकार की अपील
प्रशासन ने जनता से अनुरोध किया है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास न करें और ईंधन की 'पैनिक बाइंग' (घबराहट में खरीदारी) न करें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल का स्टॉक किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त है।
हरे निशान पर बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स में जोरदार उछाल
17 Apr, 2026 03:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ संभावित समझौते के संकेत दिए जाने के बाद वैश्विक और घरेलू बाजारों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी और भू-राजनीतिक तनाव घटने की उम्मीद ने भारतीय शेयर बाजार और रुपये को मजबूती प्रदान की है।
इस आर्थिक घटनाक्रम के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
शेयर बाजार में उछाल
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय शेयर बाजारों में रौनक लौट आई है। शुक्रवार को दोनों प्रमुख सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई:
सेंसेक्स: 504.86 अंकों (0.65%) की तेजी के साथ 78,493.54 के स्तर पर बंद हुआ।
निफ्टी: 156.80 अंकों (0.65%) के सुधार के साथ 24,353.55 पर पहुंच गया।
विदेशी निवेश: आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बाजार में शुद्ध खरीदारी की, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा।
डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ मजबूत
अमेरिकी मुद्रा (डॉलर) में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण भारतीय रुपये में भी शानदार मजबूती देखी गई:
शुक्रवार को रुपया 29 पैसे की बढ़त के साथ 92.85 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान वार्ता और मध्य पूर्व में तनाव कम होने की संभावनाओं से रुपये में आने वाले समय में भी सकारात्मक रुझान बना रह सकता है।
कच्चा तेल और वैश्विक संकेत
ब्रेंट क्रूड: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 3.23% की बड़ी गिरावट आई और यह 96.18 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
डॉलर इंडेक्स: छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती मापने वाला इंडेक्स 0.12% गिरकर 97.90 पर आ गया।
ब्लूमबर्ग सूची में बड़ा उलटफेर, अदाणी फिर नंबर-1
17 Apr, 2026 10:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति के ताज को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दिग्गज कारोबारी गौतम अदाणी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ते हुए एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब फिर से अपने नाम कर लिया है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अदाणी की संपत्ति में हुए हालिया इजाफे ने उन्हें इस सूची में शीर्ष पर पहुंचा दिया है।
आंकड़ों में संपत्ति का हाल
इस नए फेरबदल के बाद दोनों भारतीय दिग्गजों की कुल संपत्ति और वैश्विक रैंकिंग इस प्रकार है:
गौतम अदाणी: इनकी कुल संपत्ति बढ़कर 92.6 अरब डॉलर हो गई है। इसके साथ ही वह वैश्विक स्तर पर दुनिया के 19वें सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं।
मुकेश अंबानी: लंबे समय तक शीर्ष पर रहने वाले अंबानी अब 90.8 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ एशिया में दूसरे और दुनिया में 20वें स्थान पर आ गए हैं।
क्यों आया यह बदलाव?
अदाणी और अंबानी की रैंकिंग और संपत्ति में आए इस अंतर के पीछे मुख्य रूप से शेयर बाजार का प्रदर्शन जिम्मेदार है:
अदाणी ग्रुप का शानदार प्रदर्शन: इस साल गौतम अदाणी की संपत्ति में 8.1 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। गुरुवार के एक हालिया कारोबारी सत्र में, जब बीएसई सेंसेक्स 123 अंक गिर गया था, तब भी अदाणी ग्रुप के शेयरों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। अकेले उस दिन अदाणी की संपत्ति में लगभग 3.56 अरब डॉलर जुड़ गए।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का मिला-जुला रुख: दूसरी ओर, मुकेश अंबानी को इस साल अपनी संपत्ति में 16.9 अरब डॉलर की गिरावट का सामना करना पड़ा है, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। हालांकि, उन्हें हाल ही में 7.67 करोड़ (76.7 मिलियन) डॉलर का मामूली फायदा भी हुआ, लेकिन रिलायंस के शेयर मोटे तौर पर सपाट ही रहे, जिससे रैंकिंग में बदलाव आ गया।
वैश्विक अरबपतियों का क्या है हाल?
दुनिया के शीर्ष 20 अरबपतियों में से सात को इस साल अपनी संपत्ति में गिरावट का सामना करना पड़ा है। सबसे बड़ा नुकसान लक्जरी ब्रांड के मालिक बर्नार्ड अरनॉल्ट को हुआ है, जिनकी संपत्ति 44 अरब डॉलर घटी है। बिल गेट्स, वारेन बफे, स्टीव बाल्मर, लैरी एलिसन और मुकेश अंबानी जैसे दिग्गज भी इस साल नुकसान उठाने वाली सूची में शामिल हैं। वहीं, दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति की बात करें तो टेस्ला के सीईओ एलन मस्क 656 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ पहले स्थान पर मजबूती से कायम हैं। उनके बाद 286 अरब डॉलर की कुल संपत्ति के साथ लैरी पेज दूसरे नंबर पर हैं।
अब आगे क्या?
अदाणी और अंबानी के बीच संपत्ति का यह अंतर दर्शाता है कि शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव कितनी तेजी से अरबपतियों की रैंकिंग को बदल सकता है। आने वाले समय में भी दुनिया के सबसे अमीर लोगों के बीच यह प्रतिस्पर्धा जारी रहने की उम्मीद है, जो सीधे तौर पर उनकी कंपनियों के बाजार प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।
बाजार खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान पर, लेकिन रफ्तार सुस्त
17 Apr, 2026 09:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सुस्त शुरुआत हुई है। सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ हरे निशान पर कारोबार कर रहे हैं। एशियाई बाजारों और कच्चे तेल के भाव में नरमी है। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 177.52 अंक चढ़कर 78,166.20 पर पहुंच गया। निफ्टी 37.4 अंक बढ़कर 24,234.15 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 27 पैसे बढ़कर 92.87 पर पहुंच गया।
सूचकांक / मुद्रा शुरुआती बदलाव वर्तमान स्तर
सेंसेक्स 177.52 अंक की बढ़त 78,166.20
निफ्टी 37.4 अंक की बढ़त 24,234.15
रुपया (डॉलर के मुकाबले) 27 पैसे की बढ़त 92.87
वैश्विक भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता शुरू होने की उम्मीदों तथा लेबनान-इजरायल के बीच 10 दिवसीय युद्धविराम लागू होने के चलते शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख देखने को मिला। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और विदेशी फंडों की वापसी ने बाजार की धारणा को मजबूत किया है।
बाजार का हाल और ब्रॉडर मार्केट का दबदबा
शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 177.52 अंक चढ़कर 78,166.20 पर पहुंच गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 37.4 अंक बढ़कर 24,234.15 पर पहुंच गया। खास बात यह है कि बाजार की इस तेजी में बड़े शेयरों की तुलना में छोटे और मझोले शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.85% और निफ्टी मिडकैप 100 में 0.5% की तेजी दर्ज की गई, जबकि मुख्य सूचकांक निफ्टी 50 केवल 0.14% चढ़ा।
प्रमुख शेयरों और सेक्टर्स का क्या हाल?
बाजार के सेक्टोरल रुख और प्रमुख शेयरों की बात करें तो स्थिति कुछ इस प्रकार रही:
टॉप गेनर्स: सेंसेक्स में आईटीसी, एनटीपीसी, ट्रेंट, मारुति सुजुकी, अदाणी पोर्ट्स, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे शेयरों में 2% तक की तेजी दर्ज की गई।
टॉप लूजर्स: इसके विपरीत बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल और टाटा स्टील के शेयरों में मामूली गिरावट देखी गई।
सेक्टोरल इंडेक्स: निफ्टी एफएमसीजी और मीडिया इंडेक्स ने 1% से अधिक की छलांग लगाई, जबकि निफ्टी मेटल इंडेक्स 0.4% टूट गया।
कच्चे तेल में नरमी और रुपये की रिकवरी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ सप्ताहांत में वार्ता की संभावना जताने से कच्चे तेल के बाजार में शांति लौटी है। ब्रेंट क्रूड 1% से ज्यादा गिरकर 98.31 डॉलर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 93.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। अप्रैल महीने में क्रूड का 100 डॉलर से नीचे आना भारत के आयात बिल के लिहाज से बेहद सकारात्मक है। कच्चे तेल में नरमी का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा। शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 27 पैसे मजबूत होकर 92.87 के स्तर पर पहुंच गया।
विदेशी निवेशकों की वापसी
लगातार 1.6 लाख करोड़ रुपये की भारी बिकवाली के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक एक बार फिर लगातार दूसरे सत्र में शुद्ध खरीदार बने हैं। एफआईआई ने गुरुवार को 382 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और पिछले दो दिनों में कुल 1,048 करोड़ रुपये का निवेश किया है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, छोटे और मझोले शेयरों में रिटेल निवेशकों की खरीदारी से तेजी है। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी है कि लंबी अवधि के लिए लार्ज-कैप शेयरों पर ध्यान दें और मौजूदा चौथी तिमाही के नतीजों और मैनेजमेंट की टिप्पणियों पर करीब से नजर रखें। वहीं एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने आगाह किया है कि रुपये की रिकवरी अभी भी भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर है।
अब आगे क्या?
भू-राजनीतिक मोर्चे पर आ रही शांति की खबरों ने शेयर बाजार को फौरी राहत जरूर दी है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता किसी सकारात्मक नतीजे पर पहुंचती है और विदेशी निवेशकों का पैसा यूं ही भारतीय बाजार में आता रहता है, तो आने वाले सत्रों में यह तेजी और स्थिरता कायम रह सकती है।
तेल कीमतों का असर सीमित, भारत की ग्रोथ 6.3% रहने का अनुमान
17 Apr, 2026 06:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/मुंबई। वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने कहा है कि अगर चालू वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है, तब भी भारत की अर्थव्यवस्था 6.3 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। एजेंसी के मुताबिक, यदि कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के आधार स्तर पर रहती है, तो भारत की वृद्धि दर 7.1 फीसदी रहने का अनुमान है। यह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज रफ्तार होगी।
एसएंडपी के निदेशक (संप्रभु एवं अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक वित्त रेटिंग) यी फर्न फुआ ने कहा, दुनिया की किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तुलना में यह आंकड़ा बहुत मजबूत है। इस संकट काल में भारत की विकास दर 6.3 फीसदी रहना एक मजबूत संकेत है जो अन्य अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। हालांकि, एजेंसी ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा आपूर्ति में बाधा या ईंधन की कमी जैसी स्थितियां जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसके अलावा, क्रूड की ऊंची कीमतों से चालू खाता घाटा बढ़ सकता है। कंपनियों की लागत बढ़ने से मुनाफा प्रभावित हो सकता है। इसके साथ ही महंगाई बढ़ने से उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति पर भी दबाव पड़ सकता है।
एसएंडपी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ऊर्जा की बढ़ी कीमतों का असर कम करने के लिए सरकार को उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सब्सिडी पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। इससे राजकोषीय दबाव बढ़ेगा, लेकिन भारत की संप्रभु क्रेडिट रेटिंग पर इसका खास असर नहीं पड़ेगा। सरकार दीर्घकाल में राजकोषीय संतुलन के प्रति प्रतिबद्ध है। खर्चों में लचीलापन है और जरूरत पड़ने पर वह अन्य मदों में कटौती कर राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को बनाए रख सकती है। यदि ऊर्जा कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो 2026-27 में देश की शीर्ष 100 कंपनियों की आय में 15 से 20 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। इससे कर्ज बढ़ेगा जो अंततः उनकी वित्तीय स्थिति पर दबाव डालेगा। बड़ी कंपनियों का कर्ज से कमाई अनुपात (लीवरेज) 0.5 से एक गुना तक बढ़ सकता है।
रिफाइनिंग और एविएशन सेक्टर सबसे अधिक संवेदनशील हैं। ऊर्जा आयात पर निर्भर होने के कारण सीमेंट, धातु और स्टील जैसे क्षेत्र भी जोखिम में हैं। ईधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी से लोगों की क्रय शक्ति घट सकती है, जिसका असर बैंकिंग क्षेत्र पर भी पड़ेगा। जोखिम वाले ऋण, वाहन ऋण और किफायती आवास में कमी आ सकती है। खराब स्थिति में एनपीए में बढ़ोतरी सालाना एक फीसदी के आसपास हो सकती है। यदि हालात लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण बने रहते हैं तो रिजर्व बैंक कुछ क्षेत्रों के लिए ऋण पुनर्गठन की अनुमति दे सकता है ताकि अल्पकालिक नकदी दबाव को संभाला जा सके। फिलहाल भारत की बीबीबी निवेश-ग्रेड संप्रभु रेटिंग पर तत्काल कोई खतरा नहीं है।
पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव सीमित देश की कर्ज अदायगी पर नहीं पड़ा असर
ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद भी भारत की कर्ज चुकाने की क्षमता मजबूत बनी हुई है। आयात-निर्यात बैंक (एक्जिम बैंक) ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का भारतीय कंपनियों की कर्ज अदायगी पर अब तक कोई असर नहीं पड़ा है। आयात-निर्यात बैंक की एमडी और सीईओ हर्षा बंगारी ने बताया कि भले ही पश्चिम एशिया में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों की गतिविधियों पर हाल के महीनों में कुछ असर पड़ा हो, लेकिन उनकी ऋण चुकाने (पुनर्भुगतान) की क्षमता मजबूत बनी हुई है। स्थिर और भरोसेमंद आर्थिक बुनियाद ने वैश्विक अनिश्चितता के दौर में कंपनियों को वित्तीय संकट में फंसने से बचाया है। भारतीय कंपनियों की मजबूती का मुख्य कारण उनके राजस्व स्रोतों का विविधीकरण है। यह सिर्फ पश्चिम एशिया के देशों तक सीमित नहीं हैं। हालांकि, यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो कंपनियों के लिए बहुत-सी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। रुपये में जारी कमजोरी से एक्जिम बैंक को फायदा हो सकता है। बैंक का बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा में होता है, ऐसे में बैलेंस शीट मजबूत हो सकती है। मौजूदा परिस्थितियों में रुपये में कर्ज लेने को प्राथमिकता दी जा रही है।
ट्रेड से डिफेंस तक मजबूत हुई साझेदारी, भारत-ऑस्ट्रिया ने किए 6 अहम MoU साइन
16 Apr, 2026 05:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत और ऑस्ट्रिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक सहयोग को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, अंतरिक्ष और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कुल छह समझौतों, समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और सहमति पत्रों (एलओआई) का आदान-प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ऑस्ट्रियाई चांसलर के सम्मान में आयोजित एक विशेष लंच के बाद इन समझौतों को अंतिम रूप दिया गया।
सरकार की ओर से क्या बताया गया?
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने इस उच्च स्तरीय दौरे पर एक विशेष ब्रीफिंग में बताया कि हैदराबाद हाउस में दोनों देशों के नेताओं के बीच व्यापक बातचीत हुई। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं को कवर किया और आपसी हित के क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विस्तार से विचारों का आदान-प्रदान किया।
भारत-ऑस्ट्रिया के बीच समझौतों का किस क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा?
व्यापारिक जगत के लिए इस वार्ता का सबसे बड़ा आकर्षण निवेश और उद्योग से जुड़े फैसले रहे:निवेश के लिए फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म: दोनों देशों की ओर से द्विपक्षीय निवेश को तेजी से बढ़ावा देने के लिए एक 'फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म' (त्वरित तंत्र) स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इससे भारतीय और ऑस्ट्रियाई कंपनियों के लिए एक-दूसरे के देश में पूंजी प्रवाह और व्यापार करना ज्यादा आसान हो जाएगा।खाद्य सुरक्षा और मानक: दोनों देशों ने खाद्य सुरक्षा और मानकों पर एक अहम समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) और कृषि व्यापार से जुड़े क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है|
रक्षा, अंतरिक्ष और अन्य अहम समझौते
भारत और ऑस्ट्रिया ने अपनी रणनीतिक साझेदारी का दायरा बढ़ाते हुए कई अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग की रूपरेखा तैयार की है:
रक्षा और तकनीक क्षेत्र: सैन्य मामलों, रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी साझेदारी में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक लेटर ऑफ इंटेंट पर मुहर लगी है। यह समझौता इस साल जनवरी में हस्ताक्षरित 'भारत-ईयू रक्षा और सुरक्षा साझेदारी' के आधार पर आगे बढ़ेगा।
ऑडियो-विजुअल और मीडिया: मीडिया और मनोरंजन उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'ऑडियो-विजुअल को-प्रोडक्शन' के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया गया है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग: अंतरिक्ष उद्योग को नई गति देने के लिए दोनों पक्ष वर्ष 2026 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में एक संयुक्त रूप से द्विपक्षीय अंतरिक्ष उद्योग सेमिनार आयोजित करने पर सहमत हुए हैं।
रोजगार और शांति स्थापना: युवाओं और पेशेवरों की गतिशीलता के लिए 'वर्किंग हॉलिडे प्रोग्राम' को शुरू करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही 'इंडिया सेंटर फॉर यूएन पीसकीपिंग' (संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना के लिए भारत केंद्र) और 'ऑस्ट्रियाई आर्म्ड फोर्सेज इंटरनेशनल सेंटर' के बीच एक नई साझेदारी का भी ऐलान किया गया है।
कुल मिलाकर, ऑस्ट्रियाई चांसलर की यह भारत यात्रा दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत है। विशेषकर निवेश के लिए स्थापित किया गया 'फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म' और रक्षा व अंतरिक्ष उद्योग में होने वाले संयुक्त प्रयास आने वाले समय में दोनों देशों के व्यापारिक समुदाय के लिए नए और मजबूत अवसर पैदा करेंगे।समझौतों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पीएम मोदी ने कहा, "चांसलर स्टॉकर, आपकी पहली भारत यात्रा पर मैं आपका हार्दिक स्वागत करता हूँ। हमे बहुत खुशी है कि आपने यूरोप के बाहर अपनी पहली यात्रा के लिए भारत को चुना। यह आपके विज़न और भारत-ऑस्ट्रीया संबंधों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"पीएम मोदी ने कहा कि चार दशकों के बाद ऑस्ट्रिया के चांसलर की भारत यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2026 के ऐतिहासिक भारत -यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड अग्रीमन्ट के बाद, भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच संबंधों में एक नए सुनहरे अध्याय की शुरुआत हुई है। चांसलर स्टॉकर की विज़िट से, हम भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों को भी एक नए कालखंड में ले जा रहे हैं।
नौकरी संकट की अफवाहों पर विराम, TCS ने कर्मचारियों को दी खुशखबरी
16 Apr, 2026 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने कहा है कि उनके यहां छंटनी का दौर अब खत्म हो गया है. अब कंपनी अपने स्टैंडर्ड इंक्रीमेंट साइकिल पर लौट आएगी. यानी कि अब कंपनी अपनी पुरानी सामान्य स्थिति में लौट आएगी, जिससे सैलरी में इंक्रीमेंट को लेकर न कोई अनिश्चितता रहेगी और न ही लंबा इंतजार करना पड़ेगा. TCS का स्टैंडर्ड साइकिल 1 अप्रैल से शुरू होता है, जिसमें पिछले साल देरी हुई थी.दरअसल, साल 2025 के जुलाई में कंपनी ने बड़े पैमाने पर छंटनी का ऐलान किया था, जो इसके ग्लोबल वर्कफोर्स का 2 परसेंट (लगभग 12,261 कर्मचारी) था. इसके पीछे स्ट्रक्चरल रिस्ट्रक्चरिंग और AI (Artificial Intelligence) जैसी तकनीकों के अनुरूप खुद को ढालने का हवाला दिया गया था. कंपनी के इस फैसले के चलते कर्मचारी सैलरी हाइक और अपनी जॉब सिक्योरिटी को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे थे. हालांकि, कंपनी के नए फैसले से अब इन कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है.
कैसे अपनी पुरानी स्थिति में लौटी कंपनी?
कंपनी के CEO के. कृतिवासन के अनुसार, कंपनी मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, डिमांड में सुधार और कारोबारी माहौल के प्रति बढ़ते आत्मविश्वास को देखते हुए अपनी पुरानी स्थिति में लौट आई है. TCS ने Q4 में 13718 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया, जो पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 12.2 परसेंट ज्यादा है. कंपनी का रेवेन्यू भी 9.6 परसेंट की उछाल के साथ 70698 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. कंपनी ने पिछले कुछ समय में 12 बिलियन डॉलर के नए कॉन्ट्रैक्ट्स भी हासिल किए हैं, जिसमें कई मेगा डील्स भी हैं. इन सबके चलते कंपनी को अपनी पुरानी स्थिति में लौटने में मदद मिली है|
टीसीएस में सैलरी हाइक
टीसीएस में परफॉर्मेंस के आधार पर हर साल सैलरी बढ़ती है. अगर रिपोर्टों की माने तो TCS में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को आम तौर पर डबल डिजिट में सैलरी ग्रोथ मिलती है. ज्यादातर कर्मचारियों के लिए सामान्य वेतन वृद्धि आमतौर पर प्रदर्शन रेटिंग और ग्रेड के आधार पर 4.5 परसेंट से 7 परसेंट के बीच होती है|
TCS में हड़कंप
महाराष्ट्र के नासिक में TCS की BPO यूनिट में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण का हाल ही में सनसनीखेज खुलासा हुआ. यहां काम करने वाली कुछ महिलाओं ने कथित यौन उत्पीड़न, गंभीर शोषण और जबरन धर्मांतरण की कोशिशों के चौंकाने वाले दावे किए. इस मामले में नासिक पुलिस ने 9 FIR दर्ज की है और कई लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तौसिफ अत्तार और निदा खान नाम के दो सस्पेंड कर्मचारियों को इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है|
काले धन पर शिकंजा कसने की तैयारी, पेंशन सिस्टम को मजबूत करेगा नया समझौता
16 Apr, 2026 03:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आम आदमी के जीवन भर की बचत और पेंशन फंड को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। भारत में मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को वैध बनाने) और वित्तीय अपराधों के खिलाफ अपनी लड़ाई को मजबूत करते हुए 'फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया' (एफआईयू-आईएनडी) और 'पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी' (पीएफआरडीए) ने एक व्यापक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस करार का सीधा मकसद सूचनाओं को साझा करके पेंशन सिस्टम में पारदर्शिता लाना और संदिग्ध लेन-देन पर रोक लगाना है।
क्या हैं पीएफआरडीए और एफआईयू-आईएनडी?
आम निवेशक के लिहाज से यह जानना जरूरी है कि पीएफआरडीए भारत में 'नेशनल पेंशन सिस्टम' (एनपीएस) और 'अटल पेंशन योजना' (एपीवाई) सहित पूरे पेंशन सेक्टर का नियमन और विकास करता है। वहीं, एफआईयू-आईएनडी देश की वह केंद्रीय एजेंसी है जो संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जानकारी प्राप्त करने, उसका विश्लेषण करने और मनी लॉन्ड्रिंग व आतंकवाद की फंडिंग के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम देती है। इस महत्वपूर्ण समझौते पर फआईयू-आईएनडी के निदेशक अमित मोहन गोविल और पीएफआरडीए के पूर्णकालिक सदस्य रणदीप सिंह जगपाल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर पीएफआरडीए के अध्यक्ष शिवसुब्रमण्यम रमन भी मौजूद रहे।
सुरक्षा तंत्र मजबूत करने के लिए उठाए जाने वाले कदम
इस भागीदारी के तहत दोनों एजेंसियां मिलकर कई अहम मोर्चों पर काम करेंगी, जिनका सीधा फायदा पेंशन ढांचे की मजबूती में दिखेगा:
संदिग्ध लेन-देन की पहचान: मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग (एमएल/टीएफ) के जोखिमों का आकलन किया जाएगा और किसी भी संदिग्ध लेन-देन को पकड़ने के लिए 'रेड फ्लैग इंडिकेटर्स' (खतरे के संकेत) तैयार किए जाएंगे।
कड़ी निगरानी: पेंशन सेक्टर से जुड़ी संस्थाओं द्वारा 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), इसके नियमों और पीएफआरडीए के दिशानिर्देशों का सही से पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी की जाएगी।
ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण: एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (एएमएल) और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने (सीएफटी) से जुड़ी क्षमताओं को बेहतर करने के लिए आउटरीच और ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जाएंगे।
नोडल अधिकारियों की नियुक्ति: दोनों एजेंसियों के बीच लगातार संपर्क और बेहतर तालमेल बनाए रखने के लिए विशेष 'नोडल अधिकारी' और एक 'वैकल्पिक नोडल अधिकारी' नियुक्त किए जाएंगे।
नियमित समीक्षा और विदेशी एजेंसियों से सहयोग: अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ तालमेल बिठाने के लिए हर तिमाही बैठकें होंगी। इसके अलावा, 'एगमोंट प्रिंसिपल्स' के तहत विदेशी एफआईयू के साथ भी सूचनाओं के आदान-प्रदान में मदद मिलेगी।
आम आदमी को क्या फायदा?
पीएफआरडीए अपने अंतर्गत आने वाले मध्यस्थों जैसे- पेंशन फंड्स, सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियों, ट्रस्टियों, एग्रीगेटर्स और पॉइंट ऑफ प्रेजेंस के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा प्रदान करता है। इसका मुख्य उद्देश्य पेंशन इकोसिस्टम का सुव्यवस्थित विकास और अंशधारकों (सब्सक्राइबर्स) के हितों की रक्षा करना है। इस समझौते से वित्तीय उप-क्षेत्रों में जोखिमों पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी। इसका सीधा मतलब यह है कि आम आदमी जो पैसा अपने रिटायरमेंट या भविष्य के लिए एनपीएस और एपीवाई जैसी योजनाओं में जमा कर रहा है, वह वित्तीय धोखाधड़ी और काले धन के खतरे से सुरक्षित रहेगा।एफआईयू-आईएनडी और पीएफआरडीए के बीच हुआ यह रणनीतिक समझौता भारत के पेंशन सेक्टर को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह पहल न केवल वित्तीय अपराधों पर नकेल कसेगी, बल्कि आम लोगों का देश की नियामक संस्थाओं के प्रति भरोसा भी बढ़ाएगी।
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