व्यापार
PhonePe की आय में 11% ग्रोथ, फिर भी घाटा 62% बढ़ा
25 Jul, 2026 03:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश की प्रमुख डिजिटल पेमेंट्स प्लेटफॉर्म फोनपे (PhonePe) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में जमा कराई गई फाइलिंग के अनुसार, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 11 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹7,920 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹7,115 करोड़ था। हालांकि, इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट लॉस 62 प्रतिशत बढ़कर ₹2,792 करोड़ पर पहुंच गया। देश में यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन में 45 प्रतिशत से अधिक बाजार हिस्सेदारी रखने वाली इस कंपनी के घाटे में यह बढ़ोतरी कई परिचालन और नीतिगत बदलावों के कारण दर्ज की गई है।
राजस्व वृद्धि दर में नरमी और शुद्ध घाटा बढ़ने के प्रमुख कारण
कंपनी के राजस्व की धीमी गति और शुद्ध घाटे में वृद्धि के पीछे कई बड़े कारण रहे हैं। पिछले वित्त वर्ष के दौरान क्रेडिट कार्ड के जरिए रेंट पेमेंट पर रोक लगाने, सरकार द्वारा रियल मनी गेम्स पर प्रतिबंध लागू करने और यूपीआई भुगतान के लिए सरकारी सब्सिडी न मिलने जैसे फैसलों का कंपनी के परिचालन पर सीधा प्रभाव पड़ा है। नॉर्मलाइज्ड ऑपरेशनल आधार पर देखा जाए तो वित्त वर्ष 2026 में फोनपे का शुद्ध घाटा ₹1,377 करोड़ रहा है।
बाजार की परिस्थितियों के कारण फिलहाल टल चुका है आईपीओ
कंपनी द्वारा बाजार में लाया जाने वाला बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) फिलहाल के लिए टाल दिया गया है। वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार के माहौल को देखते हुए कंपनी ने यह निर्णय लिया है, हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि इस वर्ष के अंत तक लिस्टिंग की प्रक्रिया पुनः प्रारंभ की जा सकती है। फोनपे ने जनवरी 2026 में बाजार नियामक सेबी के पास अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) जमा किया था, जिसके अनुसार यह सार्वजनिक निर्गम पूरी तरह से ऑफर-फॉर-सेल (OFS) पर आधारित होगा। इसमें 5.06 करोड़ इक्विटी शेयर बिक्री के लिए रखे जाएंगे और कोई नया शेयर जारी नहीं किया जाएगा।
वॉलमार्ट की मुख्य हिस्सेदारी और मौजूदा निवेशकों की स्थिति
फोनपे में वॉलमार्ट इंटरनेशनल होल्डिंग्स की सहायक कंपनी डब्ल्यूएम डिजिटल कॉमर्स होल्डिंग्स की 71.77 प्रतिशत की बहुलांश हिस्सेदारी है। इसके अलावा जनरल अटलांटिक सिंगापुर, हेडस्टैंड, टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट ग्लोबल फाइनेंस जैसे प्रमुख वैश्विक निवेशक भी कंपनी में भागीदार हैं। ऑफर-फॉर-सेल के माध्यम से टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां अपनी आंशिक अथवा पूर्ण हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकल सकती हैं। कंपनी में रिबिट कैपिटल, टीवीएस कैपिटल और कतर इनवेस्टमेंट अथॉरिटी का भी निवेश लगा हुआ है।
गोपनीय रूट के जरिए सेबी से आईपीओ ड्राफ्ट को मिली थी मंजूरी
सितंबर 2025 में फोनपे ने गोपनीय (कॉन्फिडेंशियल) तरीके से सेबी के समक्ष लगभग 12,000 करोड़ रुपये का ड्राफ्ट जमा कराया था। गोपनीय रूट की व्यवस्था से कंपनियों को अंतिम निर्णय होने तक अपनी रणनीतिक जानकारियों की गोपनीयता बनाए रखने का अवसर मिलता है। बाजार नियामक सेबी ने 20 जनवरी 2026 को इस ड्राफ्ट को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी थी, जिसके बाद अब परिस्थितियां अनुकूल होने पर कंपनी अपनी लिस्टिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।
India-UK FTA से खुलेगा अवसरों का नया दौर, 2030 तक निर्यात में बड़ी छलांग की उम्मीद
25 Jul, 2026 01:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत और ब्रिटेन के बीच लागू हुआ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भारतीय निर्यात और अर्थव्यवस्था के लिए एक नया और स्वर्णिम अवसर लेकर आया है। उद्योग निकाय एसोचैम (ASSOCHAM) द्वारा जारी एक विस्तृत अध्ययन में यह महत्वपूर्ण बात कही गई है। इसी वर्ष 15 जुलाई को आधिकारिक रूप से प्रभावी हुए इस समझौते के बल पर वर्ष 2030 तक ब्रिटेन को होने वाला भारतीय निर्यात अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंचने की उम्मीद जताई गई है, जिससे देश के व्यापारिक परिदृश्य में व्यापक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
द्विपक्षीय व्यापार में दोगुनी वृद्धि और लाखों नए रोजगारों का सृजन
एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार भारत और यूनाइटेड किंगडम का कुल द्विपक्षीय व्यापार तेजी से गति पकड़ेगा। वित्त वर्ष 2025-26 के अनुमानित 58 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर यह व्यापार 2030 तक 115 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर को छू सकता है। इस व्यापक व्यापारिक विस्तार का सीधा फायदा देश के श्रम बाजार को मिलेगा, जिससे विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में 7 से 10 लाख नए रोजगार के अवसरों का सृजन होने की प्रबल संभावना है। यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार प्रदान करेगी।
वैश्विक मानकों और गुणवत्ता पर खरा उतरने की बड़ी चुनौती
इस विशाल क्षमता का पूर्ण लाभ उठाने के लिए भारतीय उद्योगों और निर्यातकों के सामने अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बने रहने की चुनौती होगी। भारतीय व्यवसायों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता में उच्च मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। इसके साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणन प्रक्रियाओं, नियमों के अनुपालन और वैश्विक पर्यावरण एवं स्थिरता मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा। इन कड़े मानकों पर खरा उतरकर ही भारतीय उत्पाद ब्रिटिश बाजारों में अपनी स्थाई जगह बना सकेंगे।
सुदृढ़ बुनियादी ढांचा और आपूर्ति श्रृंखला बनेगी सफलता की कुंजी
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा के अनुसार, इस समझौते की वास्तविक सफलता व्यापार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) के सुधारात्मक कदमों पर निर्भर करेगी। सरकार द्वारा लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश किए जाने से माल की आवाजाही आसान होगी। इसके अलावा, एक मजबूत, पारदर्शी और कुशल आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) का निर्माण करना बेहद जरूरी है, जो समय पर निर्यात डिलीवरी सुनिश्चित कर भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बढ़त दिला सके।
इंजीनियरिंग और एमएसएमई क्षेत्र को मिलेगा सबसे बड़ा प्रोत्साहन
व्यापार समझौते से विशेष रूप से इंजीनियरिंग सामान क्षेत्र को जबरदस्त लाभ मिलने की संभावना जताई गई है। यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ है और इसमें अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इस क्षेत्र को मिलने वाली रफ्तार से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) का तेजी से विस्तार होगा। एमएसएमई क्षेत्र का यह विकास देश के छोटे शहरों और ग्रामीण अंचलों में बड़े पैमाने पर नए रोजगार पैदा करेगा और भारतीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर चिंता के संकेत, नाबार्ड रिपोर्ट में आय और भविष्य के भरोसे में गिरावट
25 Jul, 2026 01:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: ग्रामीण भारत में आमदनी की रफ्तार में आ रही सुस्ती का असर अब परिवारों की बचत, रोजगार और भविष्य के वित्तीय भरोसे पर साफ दिखने लगा है। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के जुलाई 2026 के ताजा सर्वेक्षण में देशभर के 20,000 ग्रामीण परिवारों से प्राप्त डेटा के अनुसार 52.6% परिवारों ने माना कि पिछले एक वर्ष में उनकी आय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि 19.8% परिवारों की कमाई में गिरावट दर्ज की गई। महज 27.7% परिवारों ने आय वृद्धि की बात स्वीकार की है, जो सितंबर 2024 में शुरू हुए सर्वे के बाद से न्यूनतम स्तर पर है। इसके बावजूद दैनिक जीवन से जुड़े घरेलू खर्चों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है।
घरेलू खर्च में लगातार वृद्धि और मासिक बजट पर पड़ता दबाव
कमाई की सुस्त चाल के बाद भी ग्रामीण इलाकों में घरेलू खर्चों का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ा है। सर्वे में शामिल 74.1% उत्तरदाताओं ने स्वीकार किया कि बीते एक वर्ष के दौरान उनके उपभोग व्यय में बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार औसतन एक ग्रामीण परिवार अपनी कुल मासिक कमाई का 66.5% हिस्सा भोजन व रोजमर्रा के उपभोग पर खर्च कर देता है। इसके विपरीत बचत के खाते में केवल 13.6% हिस्सा ही जा पाता है, जबकि मासिक आय का 12.5% हिस्सा पुराने लिए गए कर्जों की किश्तें चुकाने में निकल जाता है।
भविष्य की कमाई और रोजगार के अवसरों को लेकर घटता भरोसा
आने वाले महीनों को लेकर भी ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। सर्वे के अनुसार अगले तीन महीनों के दौरान रोजगार के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद जताने वाले परिवारों का आंकड़ा घटकर 39.3% पर आ गया है। इसके साथ ही आगामी तिमाही में अपनी आय में सुधार की संभावना देखने वाले परिवारों का प्रतिशत भी सिमटकर 41.2% रह गया है, जो अब तक की सबसे कम दर है। हालांकि जब एक साल के दीर्घकालिक नजरिए की बात आती है, तो लगभग 69.6% परिवार आय बढ़ने के प्रति आशान्वित दिखते हैं।
बढ़ती महंगाई की आशंका से ग्रामीण इलाकों में बढ़ रही चिंता
कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव ने ग्रामीण परिवारों के बजट को और अधिक असहज कर दिया है। जुलाई 2026 के इस सर्वे में ग्रामीणों ने अगले एक वर्ष के दौरान औसतन 5.8% महंगाई दर रहने का अनुमान व्यक्त किया है। यह आंकड़ा मार्च 2026 के सर्वे में लगाए गए 4.4% के अनुमान से काफी अधिक है। आय में सीमित बढ़ोतरी के बीच महंगाई का यह बढ़ता हुआ डर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है, क्योंकि परिवारों की क्रय शक्ति सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।
अनौपचारिक ऋण चक्र और ग्रामीण परिवारों का वित्तीय संतुलन
वित्तीय तंत्र की पहुंच के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण का दबाव बना हुआ है। सर्वेक्षण से उजागर हुआ है कि लगभग 23.6% ग्रामीण परिवार आज भी अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर हैं। सीमित बचत और बढ़े हुए उपभोग खर्च के कारण अनौपचारिक कर्ज की यह निर्भरता आने वाले समय में ग्रामीण परिवारों की वित्तीय स्थिति और जीवन स्तर पर गहरा असर डाल सकती है।
होर्मुज-लाल सागर तनाव के बीच तेल बाजार में हलचल, जानिए भारत पर कितना पड़ेगा असर
25 Jul, 2026 11:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई: ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के जरिए लाल सागर में स्थित सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बाब अल-मंदेब जलमार्ग को अवरुद्ध करने की रणनीति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर सकती है। यदि यह मार्ग बाधित होता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए दूसरा सबसे बड़ा झटका होगा। दुनिया के इन दो प्रमुख समुद्री मार्गों पर एक साथ संकट गहराने से पश्चिम एशिया के ऊर्जा उत्पादक देशों का संपर्क एशिया और यूरोप के प्रमुख उपभोक्ता बाजारों से कट सकता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा जाएगी।
लाल सागर के ऊर्जा गलियारा बनने से बदला वैश्विक व्यापार तंत्र
होर्मुज के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव के कारण खाड़ी के तेल उत्पादक देशों ने लाल सागर के वैकल्पिक मार्ग को प्राथमिकता दी थी, जिसके चलते इस गलियारे से कच्चे तेल की आवाजाही में काफी बढ़ोतरी देखी गई। जहाजरानी आंकड़ों के मुताबिक, हालिया हफ्तों में लाल सागर के रास्ते प्रतिदिन औसतन 40 लाख बैरल तेल का परिवहन किया गया। अकेले जून माह के भीतर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाली कुल पेट्रोलियम सामग्री का आंकड़ा 74 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था, जो दुनिया के कुल दैनिक तेल उत्पादन का लगभग सात प्रतिशत है।
भारतीय अर्थव्यवस्था और विदेशी व्यापार पर गहराएगा संकट
इस मार्ग में किसी भी प्रकार का व्यवधान भारत के लिए अत्यधिक नुकसानदेह साबित हो सकता है क्योंकि देश का कुल 95 प्रतिशत व्यापार मात्रा के लिहाज से समुद्री रास्तों पर ही निर्भर है। भारत के वैश्विक वस्तु निर्यात का लगभग आधा हिस्सा और कुल आयात का 30 प्रतिशत व्यापार इसी लाल सागर गलियारे के जरिए होता है। यूरोपीय देशों के साथ होने वाले भारत के 80 फीसदी व्यापार के लिए स्वेज नहर और लाल सागर ही प्राथमिक मार्ग हैं, जिससे कृषि, कपड़ा, रसायन और पेट्रोलियम उत्पादों जैसे प्रमुख क्षेत्रों के निर्यात पर सीधा विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और घरेलू मुद्रास्फीति का खतरा
अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पुनः 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब पहुंच गई हैं। यद्यपि भारत के पास अपनी रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व क्षमता मौजूद है जो अल्पकालिक संकट से सुरक्षा प्रदान करती है, परंतु यह गतिरोध लंबा खींचने पर सरकारी तेल विपणन कंपनियों का मार्जिन बुरी तरह प्रभावित होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम ऊंचे रहने से देश के भीतर पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और एटीएफ की दरों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी और आम उपभोक्ता को महंगाई का सामना करना पड़ेगा।
Renewable Energy पर बड़ा दांव, 30 जुलाई से खुलेगा Juniper Green Energy का IPO
25 Jul, 2026 10:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुरुग्राम: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी जुनिपर ग्रीन एनर्जी का आईपीओ आगामी 30 जुलाई को निवेश के लिए खुलने जा रहा है। कुल 1,800 करोड़ रुपये के इस पब्लिक इश्यू के माध्यम से कंपनी नए शेयर जारी करेगी। इस आईपीओ की खास बात यह है कि इसमें कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) घटक शामिल नहीं किया गया है, जिसका सीधा अर्थ है कि कंपनी के प्रमोटर्स या मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे।
एंकर निवेशकों के लिए 29 जुलाई से खुलेगा इश्यू और शेयर आवंटन की तिथियां
शुरुआती योजना में कंपनी ने 3,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था, जिसे बाद में घटाकर 1,800 करोड़ रुपये कर दिया गया। कंपनी सोमवार 27 जुलाई को शेयरों के प्राइस बैंड की घोषणा करेगी, जबकि एंकर निवेशकों के लिए यह इश्यू 29 जुलाई को ही खोल दिया जाएगा। सफल आवेदकों को 4 अगस्त तक शेयर आवंटित किए जाने की संभावना है और उसके बाद कंपनी के शेयर स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होंगे। इस इश्यू में एंप्लॉयीज के लिए 2 करोड़ रुपये के शेयर सुरक्षित रखे गए हैं, जबकि शेष हिस्से का 50 प्रतिशत क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) और 35 प्रतिशत रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित है।
देश की शीर्ष रिन्यूएबल ऊर्जा उत्पादकों में शामिल हुआ संस्थान
गुरुग्राम में मुख्यालय वाली जुनिपर ग्रीन एनर्जी देश के टॉप 10 स्वतंत्र रिन्यूएबल पावर प्रोड्यूसर्स में गिनी जाती है। कंपनी के पास कुल 50 प्रोजेक्ट्स का मजबूत पोर्टफोलियो है, जिसकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता जून माह तक 7,910.20 मेगावॉट पहुंच चुकी है। साल 2020 में महज 100 मेगावॉट के एक सोलर प्रोजेक्ट से शुरुआत करने वाली इस कंपनी के पास वर्तमान में 20 चालू प्रोजेक्ट्स, 19 अनुबंधित प्रोजेक्ट्स और 11 आवंटित प्रोजेक्ट्स हैं जिन पर काम जारी है।
कर्ज भुगतान और कारोबारी विस्तार में किया जाएगा राशि का उपयोग
कंपनी आईपीओ से प्राप्त होने वाली 1,411.9 करोड़ रुपये की धनराशि का प्राथमिक उपयोग अपने मौजूदा बकाये कर्ज को चुकाने के लिए करेगी, जबकि शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा। जून माह के आंकड़ों के अनुसार कंपनी पर कंसॉलिडेटेड आधार पर 13,266 करोड़ रुपये का कर्ज दर्ज था। बाजार में इस कंपनी की सीधी प्रतिस्पर्धा शेयर बाजार में पहले से सूचीबद्ध ACME सोलर, NTPC ग्रीन एनर्जी और अडाणी ग्रीन एनर्जी जैसी बड़ी कंपनियों से मानी जा रही है।
वित्तीय प्रदर्शन में सुधार और अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ता आकर्षण
चालू वित्त वर्ष में कंपनी के वित्तीय नतीजों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है, जहां इसका कुल राजस्व 41.3 प्रतिशत बढ़कर 718.9 करोड़ रुपये हो गया और शुद्ध लाभ 10.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 40.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। भारत में कुल बिजली उत्पादन में रिन्यूएबल एनर्जी का योगदान अब करीब 50 प्रतिशत के स्तर को छू रहा है, ऐसे में यह आईपीओ स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश की इच्छा रखने वाले निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर उभरा है।
निवेशकों के लिए बड़ा मौका, Manipal Health से Juniper Green तक कई IPO खुलने को तैयार
25 Jul, 2026 09:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: आगामी सप्ताह प्राथमिक शेयर बाजार (प्राइमरी मार्केट) के निवेशकों के लिए बेहद हलचल भरा रहने वाला है। 27 जुलाई से शुरू हो रहे कारोबारी हफ्ते में कुल 8 नए आईपीओ अपनी शुरुआत करने जा रहे हैं, जिनमें निवेशकों को पूंजी लगाने का अवसर मिलेगा। इनमें मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज और जुनिपर ग्रीन एनर्जी जैसे बड़े मेनबोर्ड सेगमेंट के इश्यू शामिल हैं, जबकि शेष 6 आईपीओ एसएमई श्रेणी के हैं। इसके अलावा पहले से ही खुले 4 अन्य आईपीओ में भी इस सप्ताह की शुरुआत में बोली लगाने का अंतिम मौका उपलब्ध रहेगा।
मेनबोर्ड सेगमेंट के दो प्रमुख आईपीओ में निवेश का बड़ा अवसर
नए सप्ताह में पेश होने वाले इश्यू में स्वास्थ्य क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज 9,275.22 करोड़ रुपये का विशाल पब्लिक इश्यू 29 जुलाई को ला रही है, जो 31 जुलाई तक खुला रहेगा। इसके लिए 560 से 590 रुपये प्रति शेयर का मूल्य दायरा तय किया गया है और 25 शेयरों का लॉट साइज निर्धारित है। वहीं स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र से जुनिपर ग्रीन एनर्जी का 1,800 करोड़ रुपये का आईपीओ 30 जुलाई को खुलकर 3 अगस्त को बंद होगा, जो निवेशकों के लिए रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में दीर्घकालिक भागीदारी का विकल्प प्रदान करेगा।
एसएमई क्षेत्र में विभिन्न श्रेणियों के 6 नए इश्यू होंगे शामिल
छोटे और मध्यम उद्यमों के खंड में भी कंपनियों की ओर से पूंजी जुटाने की जोरदार तैयारियां देखी जा रही हैं। सप्ताह की शुरुआत 27 जुलाई को प्रोपशॉप इवेंट्स एंड एग्जीबिशन्स के 28.57 करोड़ रुपये और एडवांस टेक्नोफोर्ज के 24.03 करोड़ रुपये के इश्यू से होगी। इसके पश्चात 28 जुलाई को पूजा प्रिसिजन इंजीनियरिंग का 159.83 करोड़ रुपये का बड़ा एसएमई आईपीओ खुलेगा। सप्ताह के उत्तरार्ध में एच.आर. हाइजीन प्रोडक्ट्स, धवल पैकेजिंग और फ्यूजन क्लासरूम एडुटेक के पब्लिक इश्यू भी निवेशकों के लिए अपनी बोलियां स्वीकार करना आरंभ करेंगे।
पहले से खुले 4 आईपीओ में बोली लगाने का अंतिम चरण
निवेशकों के पास पूर्व से जारी 4 आईपीओ में भी दांव लगाने का अवसर रहेगा, जिनमें से 3 मेनबोर्ड और 1 एसएमई श्रेणी का है। 23 जुलाई से खुले एक्सट्रानेट टेक्नोलॉजीज (166.80 करोड़ रुपये), इंडो-एमआईएम (3,811.21 करोड़ रुपये) और लोहिया कॉर्प (1,101.28 करोड़ रुपये) के मुख्य आईपीओ 27 जुलाई को बंद हो रहे हैं। इन्हें अब तक बाजार से काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। इसके अतिरिक्त सिल्वरस्टॉर्म पार्क्स एंड रिसॉर्ट्स का एसएमई इश्यू 28 जुलाई तक खुला रहेगा, जिसके बाद सभी प्रक्रिया पूर्ण होकर आवंटन और लिस्टिंग का कार्य शुरू होगा।
EPFO ने शुरू किया ब्याज का भुगतान, आपके खाते में आया पैसा या नहीं ऐसे करें पता
24 Jul, 2026 03:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने करोड़ों अंशधारकों के पीएफ खातों में ब्याज की राशि ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष के लिए तय की गई 8.25 प्रतिशत की ब्याज दर को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी अपने खातों में ब्याज जमा होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। ईपीएफओ द्वारा शुरू की गई इस प्रक्रिया से देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों को बड़ा वित्तीय लाभ मिलेगा।
सब्सक्राइबर्स के मोबाइल पर पहुंचने लगे ब्याज जमा होने के मैसेज
ईपीएफओ के अनेक खाताधारकों को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ब्याज की राशि क्रेडिट होने के आधिकारिक एसएमएस (SMS) प्राप्त होने शुरू हो गए हैं। इन संदेशों में स्पष्ट किया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 के ब्याज का पैसा उनके ईपीएफ खाते में भेज दिया गया है। हालांकि, मैसेज मिलने के बाद भी यदि किसी सदस्य को पोर्टल पर तुरंत संशोधित बैलेंस नहीं दिखता है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सिस्टम में करोड़ों खातों को एक साथ अपडेट करने का काम चल रहा है।
नई सीआईटीईएस प्रणाली से 34 करोड़ खातों में जल्द पहुंचेगा पैसा
इस वर्ष ईपीएफओ कुल 34 करोड़ ईपीएफ खातों में वार्षिक ब्याज के रूप में लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपये की विशाल राशि हस्तांतरित कर रहा है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार ब्याज ट्रांसफर करने की यह प्रक्रिया काफी तेजी से पूरी की जा रही है। इसका मुख्य कारण ईपीएफओ का नया सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सिस्टम (CITES) प्लेटफॉर्म है, जिसने पूरे ब्याज हस्तांतरण की प्रक्रिया को स्वचालित और अधिक पारदर्शी बना दिया है।
इस तरह आसानी से चेक करें अपना संशोधित ईपीएफ बैलेंस
ईपीएफ सब्सक्राइबर्स अपने खाते में जमा हुए ब्याज और कुल बैलेंस की जानकारी बेहद आसानी से घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए सदस्यों को ईपीएफओ के आधिकारिक मेंबर पासबुक पोर्टल पर जाना होगा और अपने यूएएन (UAN) तथा पासवर्ड की मदद से लॉग-इन करना होगा। लॉग-इन करने के पश्चात 'व्यू पासबुक' विकल्प का चयन करते ही स्क्रीन पर कुल जमा राशि और हाल ही में क्रेडिट हुए ब्याज का पूरा ब्योरा दिखाई देने लगेगा।
पोर्टल पर एंट्रियां अपडेट होने में लग सकता है थोड़ा समय
यदि किसी कारणवश ईपीएफ खाते की पासबुक में तुरंत ब्याज की राशि प्रदर्शित नहीं होती है, तो सदस्यों को थोड़ा धैर्य बनाए रखने की सलाह दी गई है। ईपीएफओ विशाल डेटाबेस होने के कारण चरणबद्ध तरीके से सभी खातों को अपडेट करता है। ऐसे में देश भर के सभी 34 करोड़ सब्सक्राइबर्स के खातों में अपडेटेड पासबुक एंट्री दिखने में कुछ दिनों का समय लग सकता है, लेकिन ब्याज का पैसा सभी पात्र खाताधारकों के खातों में सुरक्षित पहुंच रहा है।
कमजोर मार्केट में भी मुनाफे का मौका, एक्सपर्ट ने बताई कमाई की रणनीति
24 Jul, 2026 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी के कारण घरेलू शेयर बाजार में लगातार पांचवें दिन भारी बिकवाली का माहौल बना हुआ है। बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी में 200 अंकों से ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह 23,650 के अहम स्तर से नीचे आ गया है। इस गिरावट को बढ़ाने में भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गजों का सबसे बड़ा हाथ रहा। बैंकिंग इंडेक्स बैंक निफ्टी भी 400 से ज्यादा अंक टूटकर कारोबार कर रहा है। लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी चौतरफा दबाव दिख रहा है, जबकि बाजार में उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला इंडिया विक्स (INDIA VIX) 6 फीसदी से ज्यादा उछलकर 14 के पार पहुंच गया है।
सेक्टोरल इंडेक्स का हाल और बिकवाली का दायरा
बाजार में बिकवाली की सबसे तेज मार रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑटो सेक्टर पर पड़ी है, जहां तीनों सेक्टोरल इंडेक्स एक फीसदी से ज्यादा टूट चुके हैं। इसके अलावा मेटल और एनबीएफसी (NBFCs) शेयरों में भी लगभग एक फीसदी की गिरावट देखी जा रही है। हालांकि, इस भारी बिकवाली के बीच एफएमसीजी (FMCG), फार्मा और चुनिंदा आईटी शेयरों में निचले स्तरों से खरीदारी लौटती हुई नजर आ रही है, जिससे बाजार को थोड़ा सहारा मिला है।
निफ्टी और बैंक निफ्टी के लिए तकनीकी स्तर व रणनीति
वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल के कारण बाजार का ओवरऑल सेटअप कमजोर बना हुआ है। निफ्टी के लिए ऊपर की तरफ 24,061 से 24,110 और 24,159 से 24,209 के स्तर मजबूत रेजिस्टेंस का काम करेंगे, जबकि नीचे की ओर 23,766 से 23,681 और फिर 23,645 से 23,531 का दायरा मुख्य सपोर्ट बेस है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से लगातार बिकवाली जारी है और शॉर्ट पोजीशंस बढ़कर 2.63 लाख तक पहुंच गई हैं। यदि निफ्टी 23,766 के नीचे टिकता है, तो नीचे के नए स्तर खुल सकते हैं। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 56,832 से 57,040 पहला रेजिस्टेंस है, जबकि 56,110 से 55,890 के बीच पहला सपोर्ट बेस देखा जा रहा है।
वायदा बाजार के लिए एक्सपर्ट की चुनिंदा कॉल्स
मौजूदा बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच विश्लेषकों ने ट्रेडर्स के लिए चुनिंदा शेयरों में ट्रेडिंग की सलाह दी है। ऑटो सेक्टर से हीरो मोटोकॉर्प फ्यूचर्स (Hero Moto Futures) में तेजी का रुख देखने को मिल रहा है, जिसे 5,030 रुपये के स्टॉप लॉस के साथ 5,240 रुपये के लक्ष्य के लिए खरीदा जा सकता है। इसके विपरीत, दबाव झेल रहे अदाणी एंटरप्राइजेज फ्यूचर्स (Adani Enterprises Futures) में बिकवाली की राय दी गई है, जहां 3,050 रुपये का स्टॉप लॉस लगाकर 2,940 रुपये के टारगेट के लिए पोजीशन बनाई जा सकती है।
निवेशकों को बड़ा झटका! स्विगी के शेयर में तेज गिरावट, ये है पूरी वजह
24 Jul, 2026 11:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु: प्रमुख ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स कंपनी स्विगी के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में कमजोरी के साथ खुलने के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ने से शेयर में करीब 7 फीसदी तक की बड़ी गिरावट आई, जिससे यह अपने अब तक के सबसे निचले स्तर की ओर खिसक गया। इस गिरावट के पीछे कंपनी द्वारा किया गया एक नया रणनीतिक ऐलान है।
विदेशी हिस्सेदारी की सीमा 49.5 प्रतिशत तय करने की तैयारी
कंपनी ने शेयर बाजारों को सूचित किया कि उसके बोर्ड ने विदेशी हिस्सेदारी की सीमा को 49.5 प्रतिशत तक सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जबकि वर्तमान में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति है। इस प्रस्ताव को 18 अगस्त को आयोजित होने वाली एनुअल जनरल मीटिंग में शेयरधारकों की स्वीकृति के लिए विशेष प्रस्ताव के रूप में पेश किया जाएगा।
वैश्विक बाजार सूचकांकों से बाहर होने का गहराया खतरा
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस सीमा के तय होने के बाद कंपनी में अतिरिक्त विदेशी पूंजी के लिए जगह नहीं बचेगी। इसके चलते स्विगी के वैश्विक शेयर सूचकांकों से बाहर होने की संभावना बन गई है, जिससे विदेशी निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर शेयर बेचे जा सकते हैं और स्टॉक की कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय इंडेक्स से हटने पर करोड़ों शेयरों की बिकवाली संभव
यदि स्विगी MSCI और FTSE जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय इंडेक्स से बाहर होती है, तो बड़े फंडों द्वारा लगभग 34 करोड़ डॉलर मूल्य के 12.5 करोड़ से अधिक शेयरों की बिकवाली की जा सकती है। इसके साथ ही FTSE इंडेक्स से हटने पर भी करीब 4.6 करोड़ शेयर बाजार में बेचे जाने का अनुमान जताया जा रहा है।
क्विक कॉमर्स में नए मॉडल से लंबे समय में मार्जिन सुधार की उम्मीद
हालांकि, इस प्रस्ताव का उद्देश्य अपने क्विक कॉमर्स कारोबार को 'फर्स्ट पार्टी इनवेंट्री मॉडल' पर संचालित करना है, जिसका उपयोग ब्लिंकिट और ज़ेप्टो जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियां करती हैं। इससे आने वाले समय में कंपनी के परिचालन मार्जिन में सुधार की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल बिकवाली के दबाव के बीच शेयर 245.58 रुपये के स्तर पर आ गया है और इस साल अब तक इसमें 37 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है।
शेयर बाजार में कैलिबर माइनिंग की शानदार एंट्री, पहले दिन 19% की बढ़त
24 Jul, 2026 10:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: शेयर बाजार में शुक्रवार को कैलिबर माइनिंग एंड लॉजिस्टिक्स के शेयरों की बेहद शानदार और धमाकेदार शुरुआत हुई। बीएसई (BSE) पर कंपनी का शेयर लगभग 19 फीसदी के प्रीमियम के साथ 504 रुपये के स्तर पर सूचीबद्ध हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर इसकी एंट्री करीब 18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 500.25 रुपये पर दर्ज की गई। आईपीओ के तहत 424 रुपये का फाइनल प्राइस बैंड तय किया गया था, जिसकी तुलना में निवेशकों को पहले ही दिन बेहतरीन रिटर्न हासिल हुआ है।
निवेशकों ने दिखाया जबरदस्त उत्साह और मिला बंपर सब्सक्रिप्शन
कंपनी के 450 करोड़ रुपये के आईपीओ को प्राइमरी मार्केट में निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था, जिसके चलते यह इश्यू कुल 108.26 गुना सब्सक्राइब हुआ। इस पब्लिक इश्यू के माध्यम से जुटाए गए फंड में 400 करोड़ रुपये मूल्य के 94 लाख फ्रेश शेयर जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त कंपनी के मौजूदा प्रमोटरों और निवेशकों ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए 50 करोड़ रुपये मूल्य के 12 लाख शेयरों की बिक्री की है।
कोयला खनन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखती है कंपनी
महाराष्ट्र में आधारित कैलिबर माइनिंग एंड लॉजिस्टिक्स लिमिटेड एक प्रमुख इंटीग्रेटेड सर्विस प्रोवाइडर के रूप में काम करती है। कंपनी मुख्य रूप से कोयला निष्कर्षण और उससे जुड़ी लॉजिस्टिक्स सेवाओं में विशेषज्ञता रखती है। खनन उद्योग की विविध जरूरतों को पूरा करते हुए यह कंपनी माइनिंग और ट्रांसपोर्टेशन के पूरे तंत्र को सुचारू रूप से संचालित करने की क्षमता रखती है।
एंड-टू-एंड समाधान से खनन उद्योग को मिल रही बड़ी राहत
कंपनी के कामकाज में ओवरबर्डन हटाने, कोयले की लोडिंग व अनलोडिंग, सड़क मार्ग से परिवहन और रेल लॉजिस्टिक्स का प्रभावी तालमेल शामिल है। कोयला माइनिंग और लॉजिस्टिक्स ऑपरेशंस के लिए शुरू से अंत तक पूर्ण समाधान प्रदान करने के कारण कंपनी का बिजनेस मॉडल काफी मजबूत माना जाता है, जिसका फायदा लिस्टिंग के दिन निवेशकों के सकारात्मक रुख में साफ दिखाई दिया।
क्या है अमेरिका का Section 301? भारत ने कैसे बचाए करोड़ों रुपये, समझें पूरा मामला
24 Jul, 2026 10:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अमेरिका ने जबरन श्रम की रोकथाम से जुड़े मुद्दे पर भारत सहित दुनिया भर की 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए कड़े आयात शुल्क (टैरिफ) लागू करने की घोषणा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त निर्देशों के तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने यह बड़ा निर्णय लिया है। हालांकि, भारतीय निर्यातकों के लिए राहत की बात यह है कि अमेरिकी व्यापार कानून के 'सेक्शन 301' के तहत भारत पर 12.5% की भारी दर के स्थान पर केवल 10% का टैरिफ ही लगाया गया है, जिससे भारतीय व्यापार को एक बड़े झटके से बचा लिया गया है।
अमेरिका का व्यापार कानून 1974 और जांच का मुख्य कारण
यह पूरा मामला अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 के 'सेक्शन 301' से जुड़ा हुआ है। यह कानून अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को अधिकार देता है कि यदि कोई देश ऐसी व्यापारिक नीतियां अपनाता है जिससे अमेरिकी वाणिज्य को नुकसान पहुंचता है, तो उस पर दंडात्मक शुल्क लगाया जा सकता है। इसी के तहत मार्च 2026 में भारत समेत 60 देशों के खिलाफ जांच शुरू की गई थी। जांच का मूल आधार यह था कि ये देश जबरन श्रम से तैयार होने वाले सामानों की रोकथाम और उससे संबंधित कड़े नियम लागू करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पा रहे थे।
सफल कूटनीति से भारत को मिली उच्च टैरिफ से राहत
शुरुआती दौर में माना जा रहा था कि जांच के बाद भारत को भी 12.5% की उच्च टैरिफ श्रेणी में शामिल किया जाएगा, जिससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद काफी महंगे हो जाते। हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने समय रहते अमेरिकी प्रशासन के साथ प्रभावी और रणनीतिक बातचीत शुरू की। इस वार्ता में भारत में श्रम मानकों और प्रथाओं में किए जा रहे सकारात्मक सुधारों को मजबूती से पेश किया गया। इस कूटनीतिक पहल के परिणामस्वरूप अमेरिकी प्रशासन ने भारत की दलीलों को स्वीकार किया और भारत को 10% की कम टैरिफ श्रेणी में जगह दी।
10 प्रतिशत टैरिफ श्रेणी में भारत के साथ शामिल अन्य देश
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की अंतिम रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन 17 अर्थव्यवस्थाओं का हिस्सा है जिन पर 10% का निचला टैरिफ लागू होगा। इस सूची में भारत के साथ ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया, मैक्सिको, बांग्लादेश, मलेशिया, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देश शामिल हैं। इसके विपरीत, अन्य प्रभावित देशों पर सीधा 12.5% का टैरिफ लगाया गया है। यह नई टैरिफ व्यवस्था 24 जुलाई 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।
अमेरिकी रुख और भारतीय निर्यात पर इसका भावी प्रभाव
अमेरिकी व्यापार राजदूत जेमिसन ग्रीर ने स्पष्ट किया कि केवल अपील करने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जबरन श्रम को खत्म नहीं किया जा सका, इसलिए यह कदम उठाना पड़ा। हालांकि, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ आवश्यक कच्चे माल को इस टैरिफ से अलग रखा गया है। वैश्विक स्तर पर 60 देशों पर पड़े इस आर्थिक दबाव के बीच भारत ने सही समय पर प्रभावी रणनीति बनाकर खुद को बड़े नुकसान से बचा लिया है, हालांकि 10% का यह शुल्क आने वाले समय में भारतीय निर्यात को किस तरह प्रभावित करता है, इस पर विशेषज्ञों की नजर रहेगी।
आज चांदी के दाम में बड़ी नरमी, जानिए आपके शहर में क्या है लेटेस्ट रेट
24 Jul, 2026 09:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार में शुक्रवार को चांदी के दामों में नरमी का रुख देखने को मिला है। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के हाजिर बाजार में चांदी की कीमत में 300 रुपये की कमी दर्ज की गई, जिससे यह घटकर 2.29 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। इस गिरावट से कीमती धातुओं के बाजार में सुस्ती का माहौल नजर आ रहा है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर वायदा भाव में भारी गिरावट
घरेलू वायदा बाजार (MCX) पर भी चांदी के दामों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। ट्रेडिंग सत्र की शुरुआत से पहले चांदी का वायदा भाव 3.41 फीसदी यानी 7,748 रुपये की बड़ी नरमी के साथ 2,19,250 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। इससे पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,26,998 रुपये प्रति किलो के स्तर पर बंद हुई थी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव में दिखीं कीमती धातुएं
वैश्विक बाजार में भी सर्राफा कीमतों पर दबाव देखने को मिला। कोमेक्स (COMEX) गोल्ड फ्यूचर्स 0.06 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 4,047.70 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं, कोमेक्स सिल्वर फ्यूचर्स में भी 0.26 फीसदी की कमी आई और यह गिरकर 57.905 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया।
देश भर के प्रमुख शहरों में चांदी के ताजा दाम
देश के अलग-अलग शहरों में चांदी के भाव में हल्का अंतर देखा गया। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पटना, जयपुर, अहमदाबाद, पुणे और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में 10 ग्राम चांदी का भाव 2,400 रुपये, 100 ग्राम का भाव 24,000 रुपये और प्रति किलोग्राम चांदी का रेट 2,40,000 रुपये दर्ज किया गया। वहीं चेन्नई, हैदराबाद और भुवनेश्वर में चांदी का भाव थोड़ा ऊपर रहते हुए 2,450 रुपये प्रति 10 ग्राम यानी 2,45,000 रुपये प्रति किलो रहा।
मुनाफावसूली और वैश्विक चिंताएं बनीं गिरावट की मुख्य वजह
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार चांदी के भाव में आई इस गिरावट का मुख्य कारण मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से वैश्विक महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती टाल सकते हैं या नीतियां सख्त कर सकते हैं। भू-राजनीतिक तनाव और नीतिगत संकेतों के बीच बुलियन कारोबारी अब नए आर्थिक आंकड़ों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
62% तक रिटर्न की उम्मीद, मोतीलाल ओसवाल ने इन 5 शेयरों को बताया खरीदारी लायक
23 Jul, 2026 03:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई:भारतीय शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के माहौल में सही निवेश विकल्पों का चुनाव करना निवेशकों के लिए एक कठिन चुनौती बना हुआ है। ऐसे दौर में दिग्गज वित्तीय सेवा और ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने अपनी नवीनतम विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में मजबूत बुनियादी ढाँचे और बेहतरीन विकास संभावनाओं वाले कई प्रमुख शेयरों को चुनकर उन पर खरीदारी (Buy) की सलाह दी है। ब्रोकरेज के अध्ययन के अनुसार, वर्तमान बाजार स्तरों से इन चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में 31 प्रतिशत से लेकर लगभग 69 प्रतिशत तक की उल्लेखनीय तेजी दर्ज की जा सकती है, जिससे लंबी अवधि के निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न मिलने की उम्मीद है।
क्विक कॉमर्स में इटरनल का दबदबा और शोभा लिमिटेड का रियल एस्टेट में मजबूत प्रदर्शन
ब्रोकरेज हाउस ने इटरनल (Eternal) के शेयर पर अपना सकारात्मक रुख कायम रखते हुए 400 रुपये का लक्ष्य रखा है, जो मौजूदा स्तर से लगभग 41 प्रतिशत की बढ़त का संकेत देता है। ब्रोकरेज का मानना है कि ब्लिंकिट के बढ़ते बिजनेस मॉडल और वेयरहाउस पर किए जा रहे दूरदर्शी निवेश से कंपनी की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है। इसी क्रम में रियल एस्टेट क्षेत्र की दिग्गज कंपनी शोभा लिमिटेड (Sobha Ltd) पर भी 1,820 रुपये का लक्ष्य निर्धारित करते हुए खरीदारी की सिफारिश की गई है। बेंगलुरु में नए प्रोजेक्ट्स की भारी मांग के कारण जून तिमाही में कंपनी की प्री-सेल्स 36 प्रतिशत बढ़कर 2,006 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है, जो इसकी मजबूत परिचालन गति को दर्शाती है।
अरविंद फैशन की बेहतर मार्जिन प्रोफाइल और रिटेल सेगमेंट में बढ़ती हिस्सेदारी
फैशन और रिटेल सेक्टर में अग्रणी कंपनी अरविंद फैशन (Arvind Fashions) पर मोतीलाल ओसवाल ने 620 रुपये के लक्षित मूल्य के साथ खरीदारी की रेटिंग को बरकरार रखा है। कंपनी के डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) बिक्री माध्यमों में हुई वृद्धि, बेहतर सोर्सिंग रणनीतियों और प्रीमियम श्रेणी के परिधानों की बिक्री से लाभप्रदता मार्जिन में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। विश्लेषकों का आकलन है कि वित्त वर्ष 2026 से 2028 के दौरान कंपनी की राजस्व और लाभ वृद्धि दर काफी आकर्षक रहने वाली है, जिसके बावजूद इसका मौजूदा मूल्यांकन समकक्ष प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी किफायती और आकर्षक स्तर पर उपलब्ध है।
सैजिलिटी इंडिया का अमेरिकी हेल्थकेयर में विस्तार और केयरसीड्स अधिग्रहण से लाभ
स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से जुड़ी टेक्नोलॉजी प्रदाता कंपनी सैजिलिटी इंडिया (Sagility India) को भी ब्रोकरेज ने 57 रुपये के लक्ष्य के साथ अपनी पसंद में शामिल किया है, जिसमें लगभग 38 प्रतिशत की संभावित वृद्धि देखी जा रही है। जून तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन बाजार अनुमानों से काफी बेहतर रहा, जहाँ परिचालन राजस्व और शुद्ध लाभ में भारी उछाल दर्ज किया गया। अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा कंपनियों द्वारा परिचालन लागत कम करने के प्रयासों से सैजिलिटी के लिए बड़े व्यावसायिक अवसर उत्पन्न हो रहे हैं, जबकि केयरसीड्स का हालिया अधिग्रहण कंपनी के ग्राहक आधार को बढ़ाने और नए अनुबंध हासिल करने में मददगार साबित होगा।
सनटेक रियल्टी की लग्जरी हाउसिंग में मजबूत पकड़ और कम कर्ज से वित्तीय मजबूती
रियल एस्टेट डेवलपर सनटेक रियल्टी (Sunteck Realty) पर मोतीलाल ओसवाल ने 490 रुपये का संशोधित लक्ष्य तय किया है, जिसमें करीब 62 प्रतिशत की जोरदार संभावित बढ़त का अनुमान है। प्रीमियम तथा लग्जरी आवासीय संपत्तियों की जबरदस्त मांग के चलते कंपनी की प्री-सेल्स में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी के पास 7,100 करोड़ रुपये की नई परियोजनाएं कतार में हैं और प्रबंधन ने इस वर्ष 25 से 30 प्रतिशत की प्री-सेल्स वृद्धि का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। मजबूत नकदी प्रवाह और न्यूनतम कर्ज का स्तर इस कंपनी को अत्यधिक सुरक्षित और मजबूत स्थिति प्रदान करता है।
नतीजों से पहले Infosys के शेयर फिसले, IT कंपनी के तिमाही प्रदर्शन पर बाजार की नजर
23 Jul, 2026 12:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु:देश की प्रमुख आईटी सेवा प्रदाता कंपनी इंफोसिस द्वारा अप्रैल से जून 2026 तिमाही के अपने वित्तीय परिणाम घोषित किए जा रहे हैं। कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक में तिमाही नतीजों की गहन समीक्षा के बाद इन्हें आधिकारिक रूप से जारी किया जाएगा। हालांकि, नतीजों के सार्वजनिक होने से ठीक पहले शेयर बाजार में इंफोसिस के शेयरों पर दबाव देखा गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में कंपनी का शेयर पिछले बंद भाव की तुलना में लगभग दो प्रतिशत तक गिरकर 1032.30 रुपये के निचले स्तर तक पहुंच गया, जिससे कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर 4.24 लाख करोड़ रुपये रह गया।
डॉलर राजस्व में बढ़ोतरी और ब्रोकरेज फर्मों के विभिन्न अनुमान
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इंफोसिस का डॉलर राजस्व तिमाही आधार पर 1.7 प्रतिशत बढ़कर 512.70 करोड़ डॉलर के आसपास रह सकता है। वहीं स्थिर मुद्रा (कांस्टेंट करेंसी) राजस्व वृद्धि 1.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। वित्तीय विश्लेषक फर्मों और वैश्विक ब्रोकरेज घरानों के अनुमान इस वृद्धि को लेकर अलग-अलग हैं, जहां कुछ फर्मों ने इस विकास दर को 1 प्रतिशत से 1.1 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना जताई है, वहीं कुछ अन्य प्रमुख वैश्विक संस्थानों का अनुमान है कि यह आंकड़ा 2.3 से 2.5 प्रतिशत तक जा सकता है।
हालिया अधिग्रहणों का राजस्व में योगदान और मार्जिन की स्थिति
जून तिमाही के प्रदर्शन में इंफोसिस द्वारा हाल ही में हासिल की गई दो प्रमुख वैश्विक कंपनियों 'ऑप्टिमम' और 'स्ट्रेटस' का महत्वपूर्ण योगदान रहने की उम्मीद है। मई 2026 में 46.5 करोड़ डॉलर में पूरी हुई ऑप्टिमम हेल्थ डील और अप्रैल में 9.5 करोड़ डॉलर में अधिग्रहीत टेक्नोलॉजी कंसल्टेंसी फर्म स्ट्रेटस से कंपनी के समेकित राजस्व को बल मिला है। विश्लेषकों के अनुसार इस तिमाही में कंपनी का ईबीआईटी (EBIT) मार्जिन 21.1 प्रतिशत के आसपास स्थिर रह सकता है, जबकि शुद्ध लाभ में तिमाही आधार पर करीब 7 प्रतिशत की कमी के साथ इसके 7,903 करोड़ रुपये रहने का आकलन किया गया है।
वार्षिक विकास पूर्वानुमान और पूर्व तिमाही के वित्तीय आंकड़े
बाजार की सबसे ज्यादा नजर इस बात पर टिकी है कि कंपनी अपने पूरे वित्त वर्ष के लिए दिए जाने वाले राजस्व मार्गदर्शन (गाइडेंस) में क्या संशोधन करती है। विश्लेषकों का अनुमान है कि कंपनी अपने वार्षिक जैविक विकास अनुमान के ऊपरी स्तर में 50 से 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती कर सकती है और यह नया गाइडेंस 2 से 4.5 प्रतिशत के दायरे में रह सकता है। इससे पूर्व जनवरी-मार्च 2026 की अंतिम तिमाही में इंफोसिस ने एकल आधार पर 38,641 करोड़ रुपये का राजस्व और 7,975 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था, जबकि पूरे बीते वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का कुल राजस्व 1,48,819 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 29,211 करोड़ रुपये दर्ज हुआ था।
एयरोस्पेस सेक्टर में भारत की बड़ी छलांग, HAL और Safran समझौते से देश में बनेंगे इंजन पार्ट्स
23 Jul, 2026 11:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। भारत की दिग्गज रक्षा एवं एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और फ्रांस की प्रमुख कंपनी साफरान एयरक्राफ्ट इंजन्स के बीच सीएफएम लीप इंजन प्रोग्राम के लिए सुपरएलॉय टरबाइन रिंग फोर्जिंग के निर्माण और आपूर्ति को लेकर एक दूरगामी दीर्घकालिक करार हुआ है। यह द्विपक्षीय समझौता देश के 'मेक इन इंडिया' विजन को नया आयाम देने के साथ-साथ वैश्विक एयरोस्पेस आपूर्ति श्रृंखला में भारत की महत्वपूर्ण भागीदारी को रेखांकित करता है। इस ऐतिहासिक समझौते का औपचारिक आदान-प्रदान फार्नबोरो इंटरनेशनल एयरशो 2026 में एचएएल के फाउंड्री एंड फोर्ज डिवीजन के महाप्रबंधक प्रवीण बी. और साफरान एयरक्राफ्ट इंजन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (परचेजिंग) डोमिनिक डुप्यू के मध्य संपन्न हुआ। इस गरिमामयी अवसर पर एचएएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रवि के. तथा बेंगलुरु कॉम्प्लेक्स के सीईओ जयकृष्णन एस. भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
बेंगलुरु फैसिलिटी में होगा अत्याधुनिक सुपरएलॉय टरबाइन रिंग्स का निर्माण
समझौते के नियमों के तहत एचएएल अपने बेंगलुरु स्थित फाउंड्री एंड फोर्ज डिवीजन की उन्नत रिंग रोलिंग फैसिलिटी में लीप इंजन के लिए नियर-नेट शेप सुपरएलॉय टरबाइन रिंग फोर्जिंग का उत्पादन करेगा। इन उच्च क्षमता वाले टरबाइन रिंग्स का प्रयोग विमान इंजन के उस अति-संवेदनशील हिस्से में होता है, जहां अत्यधिक उच्च तापमान और प्रचंड गति के दौरान भी इंजन को निर्बाध प्रदर्शन और स्थिरता बनाए रखनी होती है। उल्लेखनीय है कि इस लीप इंजन को जीई एयरोस्पेस और साफरान के संयुक्त उपक्रम सीएफएम इंटरनेशनल ने विकसित किया है, जो विश्व के बेहद लोकप्रिय कमर्शियल विमानों जैसे एयरबस ए320नियो, बोइंग 737 मैक्स और कोमैक सी919 में इस्तेमाल किया जाता है।
ग्लोबल सिविल एविएशन मार्केट में भारतीय क्षमता की मजबूती
साझा प्रेस वक्तव्य में एचएएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रवि के. ने स्पष्ट किया कि एचएएल और साफरान के बीच दशकों पुरानी अटूट साझेदारी रही है। यह नया अनुबंध इस तथ्य का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय एयरोस्पेस जगत का एचएएल की तकनीकी दक्षता और उच्च स्तरीय उत्पादन मानकों पर भरोसा लगातार सुदृढ़ हो रहा है। उन्होंने कहा कि सीएफएम लीप इंजन जैसे वैश्विक कार्यक्रम का हिस्सा बनने से एचएएल को अंतरराष्ट्रीय नागरिक विमानन क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करने का अवसर मिलेगा, साथ ही इससे भारत के भीतर भविष्य के स्वदेशी एयरो इंजन कार्यक्रमों हेतु आधुनिक विनिर्माण तकनीकों के विकास को अभूतपूर्व गति मिलेगी।
वैश्विक मांग पूर्ति और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला का विस्तार
साफरान एयरक्राफ्ट इंजन्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट डोमिनिक डुप्यू ने इस सहयोग पर उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए सीएफएम लीप इंजन के उत्पादन में तेजी लाई जा रही है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक मजबूत और स्थानीय सप्लाई चेन तंत्र विकसित करना उनकी रणनीति का प्रमुख बिंदु है, जिसमें एचएएल की भूमिका अत्यंत निर्णायक है।
भविष्य की एयरशिप प्रौद्योगिकी और स्वदेशी आत्मनिर्भरता
दोनों दिग्गजों के बीच यह तकनीकी सहयोग अन्य उन्नत क्षेत्रों तक भी विस्तृत है। इसके अंतर्गत विकसित की जा रही एयरशिप प्रौद्योगिकी 60 टन तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है, जिसमें वर्टिकल टेक-ऑफ एवं लैंडिंग (VTOL), न्यूनतम ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता और हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन जैसी क्रांतिकारी तकनीकें शामिल हैं। दोनों संस्थान भारत में ही इन एयरशिप्स के निर्माण, एकीकरण और असेंबली की पूर्ण व्यवस्था तैयार करेंगे, जिससे भारत को सामरिक एयरोस्पेस क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल होगी और देश की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमताएं नए शिखरों को छुएंगी।
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