राजस्थान
सद्भावना यात्रा के समापन पर समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ी
23 May, 2026 05:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह डूमरखां के बेटे और पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की प्रदेश स्तरीय 'सद्भावना यात्रा' शनिवार शाम को रोहतक में आकर पूरी हो गई। इस यात्रा का भव्य समापन समारोह दिल्ली बाईपास पर आयोजित किया गया। इस खास मौके पर कार्यक्रम स्थल पर करीब 300 लोग मौजूद रहे।
दिग्गज कांग्रेस नेताओं को भेजा गया न्यौता
इस समापन समारोह को बड़ा रूप देने के लिए पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह ने कांग्रेस के आठ पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और चार पूर्व कार्यकारी अध्यक्षों को विशेष रूप से आमंत्रित किया है। आमंत्रित मेहमानों की सूची में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद कुमारी सैलजा, रणदीप सुरजेवाला, सूरजभान, फूलचंद मौलाना और धर्मपाल मलिक जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
समारोह में शामिल होने पहुंचे ये प्रमुख चेहरे
सद्भावना यात्रा के समापन पर कई वरिष्ठ नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। कार्यक्रम में पहुँचने वाले नेताओं में असंध के पूर्व विधायक शमशेर गोगी, रघबीर रंगा (बवानी खेड़ा), रघबीर संधू (पानीपत), अशिम (मेवात), जगदेव मलिक (पानीपत), ओमप्रकाश (कुरुक्षेत्र), सत्ते पहलवान (गुरुग्राम), अनिल शर्मा (करनाल), सुनीता रानी (करनाल), कांग्रेस नेत्री लवली यादव और अंबाला के एमसी हीरालाल सहित कई अन्य पदाधिकारी शामिल हैं।
स्थानीय कांग्रेसी विधायकों और सांसद ने बनाई दूरी!
इस पूरे आयोजन में सबसे ज़्यादा चर्चा स्थानीय नेताओं की गैर-मौजूदगी की है। रोहतक जिले में कांग्रेस के मौजूदा सांसद दीपेंद्र हुड्डा के अलावा चार विधायक—भूपेंद्र सिंह हुड्डा, भारत भूषण बतरा, बलराम दांगी और शकुंतला खटक हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि कार्यक्रम की शुरुआत और प्रगति के दौरान इनमें से कोई भी स्थानीय बड़ा नेता मंच या कार्यक्रम स्थल पर नज़र नहीं आया।
DFSC की जांच में खुलासा, करनाल में दो राइस मिलों से 10.19 करोड़ का घोटाला
23 May, 2026 12:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करनाल: जिले में दो राइस मिलों द्वारा सरकार को अरबों का चूना लगाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग (DFSC) के जिला नियंत्रक मुकेश कुमार द्वारा किए गए औचक भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) में करीब 10.19 करोड़ रुपये का धान घोटाला उजागर हुआ है। जांच के दौरान दोनों मिलों के स्टॉक से 36 हजार क्विंटल धान गायब मिला। इस महाघोटाले में तरावड़ी थाना पुलिस ने दो मिल संचालकों, विभाग के दो निरीक्षकों और एक सहायक निरीक्षक समेत कई लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बिना चालू मशीनों के चल रहा था खेल, दो मिलों से धान गायब
अधिकारियों ने जब तरावड़ी की 'बालाजी राइस मिल' और 'विश्वकर्मा राइस मिल' पर छापा मारा, तो वहाँ की स्थिति देखकर वे दंग रह गए। दोनों ही मिलों में धान से चावल बनाने वाली मशीनें चालू हालत में नहीं थीं। इसके बावजूद कागजों पर उन्हें धान अलॉट किया गया था। जांच में सामने आया कि बालाजी राइस मिल से 10 हजार क्विंटल और विश्वकर्मा राइस मिल से 26 हजार क्विंटल धान गायब था। इस लापरवाही और हेराफेरी से सरकार को कुल $10,19,52,000$ रुपये का सीधा वित्तीय नुकसान हुआ है।
अधिकारियों की मिलीभगत और फर्जीवाड़े की खुली पोल
जांच में यह बात साफ हो गई है कि मिल मालिकों ने विभाग के अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। 'बालाजी राइस मिल' की देखरेख का जिम्मा संभाल रहे निरीक्षक देवेंद्र (जो अब निलंबित हैं) और सहायक निरीक्षक रामफल (बर्खास्त) अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे। वहीं 'विश्वकर्मा राइस मिल' में तो चावल बनाने की मशीन तक मौजूद नहीं थी, फिर भी विभाग के निरीक्षक हिमांशु और सहायक निरीक्षक रामफल के हस्ताक्षरों से उसे धान अलॉट कर दिया गया। पकड़े जाने के डर से आरोपी मिल मालिक बाद में फैक्ट्रियों में कबाड़ और नई मशीनें फिट करने की कोशिश कर रहे थे।
सरकार को नहीं लौटाया चावल का एक भी दाना
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब 'विश्वकर्मा राइस मिल' की तरफ से सरकार को अलॉटेड धान के बदले चावल का एक भी दाना वापस नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर, 'बालाजी राइस मिल' ने भी नाममात्र का चावल ही जमा कराया था। इस संदिग्ध गतिविधि पर जब डीएफएससी विभाग को शक हुआ, तो उन्होंने औचक निरीक्षण की योजना बनाई, जिससे इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ हो गया।
आरोपियों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज, पुलिस करेगी पड़ताल
तरावड़ी थाना प्रभारी राजपाल ने बताया कि डीएफएससी मुकेश कुमार की शिकायत के आधार पर मिल मालिकों (मोहित, सुरेंद्र, अरुण और महेंद्र जांगड़ा) तथा विभागीय अधिकारियों के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश करेगी कि क्या मिलों में कभी धान आया ही नहीं था और सिर्फ कागजी हेराफेरी की गई, या फिर अफसरों की शह पर मिल मालिकों ने करोड़ों का धान खुले बाजार में बेच दिया।
रिश्तों पर काला साया: जायदाद के झगड़े में पोते ने लाठी-डंडों से मारा दादा
23 May, 2026 10:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हांसी (कुंभा): कुंभा गाँव से रिश्तों को कलंकित कर देने वाली एक बेहद सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहाँ एक कलयुगी पोते ने जमीन के लालच में अपने ही 80 वर्षीय सगे दादा बरखा राम की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मृतक बुजुर्ग की बेटी की शिकायत पर आरोपी भतीजे के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी पोते को हिरासत में ले लिया है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है।
देर रात वारदात को दिया अंजाम, अस्पताल में तोड़ा दम
यह खौफनाक घटना गुरुवार रात करीब 10 बजे की है। वारदात के बाद लहूलुहान हालत में बुजुर्ग को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें देखते ही मृत घोषित कर दिया। मृतक बरखा राम के बारे में बताया गया है कि वे अमूमन अपनी बेटियों के पास रहते थे और करीब 15 दिन पहले ही गाँव लौटे थे। वारदात की खबर मिलते ही रोते-बिलखते परिजन मौके पर पहुँचे।
मकान अपने नाम कराने के लिए अक्सर करता था प्रताड़ित
हिसार निवासी मृतक की बेटी कमलेश ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि वे दो भाई और तीन बहनें हैं। उनके पिता गाँव में अपने बेटे रामफल के परिवार के साथ रहते थे। कमलेश के अनुसार, उनके पिता ने पहले भी रोते हुए बताया था कि उनका पोता अंकित मकान को अपने नाम लिखवाने के लिए उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता था। वह बुजुर्ग को समय पर खाना तक नहीं देता था और आए दिन घर से निकालने की धमकियां देता रहता था।
जमीन के टुकड़े के लिए पूरे परिवार ने किया दुर्व्यवहार
परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक, बुजुर्ग बरखा राम को अपने दैनिक काम करने से भी रोका जाता था और उनके साथ अक्सर गाली-गलौज की जाती थी। गुरुवार की रात को भी जमीन और मकान के विवाद को लेकर दादा, पोते, बेटे और बहू के बीच तीखी बहस हुई थी। विवाद इतना बढ़ गया कि पोते अंकित ने आपा खो दिया और बुजुर्ग दादा पर डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। सिर पर गंभीर चोट लगने की वजह से बुजुर्ग की जान चली गई।
पुलिस ने शव सौंपकर शुरू की कानूनी कार्रवाई
सदर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सदानंद ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग को नागरिक अस्पताल लाया गया था, जहाँ उनकी मौत हो गई। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर उसे अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।
बहादुरगढ़ के केमिकल फैक्टरी में विस्फोट, इमारत ध्वस्त, कर्मचारियों के दबने की आशंका
22 May, 2026 03:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बहादुरगढ़। हरियाणा के बहादुरगढ़ में स्थित मॉडर्न इंडस्ट्रियल एस्टेट (एमआईई) पार्ट-बी के प्लॉट नंबर 2224 में शुक्रवार दोपहर एक भीषण औद्योगिक दुर्घटना सामने आई है। यहाँ संचालित क्लासिक कोल प्राइवेट लिमिटेड नामक फैक्ट्री में दोपहर करीब 12:30 बजे अचानक एक बॉयलर जोरदार धमाके के साथ फट गया। बॉयलर ब्लास्ट इतना भयानक था कि इसके तुरंत बाद पूरी फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। धमाके की गूंज से पूरा औद्योगिक क्षेत्र दहल उठा और आस-पास की अन्य फैक्ट्रियों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस कारखाने में मुख्य रूप से फेविकोल (लोशन) बनाने का काम होता था।
ब्लास्ट के प्रभाव से ढहा लेंटर; कारखाने के अंदर मचा हाहाकार
धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री की इमारत का लेंटर (छत) ताश के पत्तों की तरह भरभरा कर नीचे गिर गया। छत गिरते ही अंदर काम कर रहे श्रमिकों के बीच जान बचाने के लिए चीख-पुकार मच गई। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, हादसे के वक्त फैक्ट्री के भीतर लगभग 10 से 12 मजदूर ड्यूटी पर तैनात थे। इसके अलावा, फैक्ट्री के ठीक बाहर काम कर रहे करीब 7 से 8 अन्य लोग भी इस ब्लास्ट की चपेट में आकर गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं।
मलबे में दबे होने की आशंका; नागरिक अस्पताल में घायल भर्ती
दुर्घटना की भयावहता को देखते हुए मलबे के नीचे अभी भी कम से कम दो लोगों के फंसे होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है। वहीं, फैक्ट्री के बाहर घायल हुए सभी 7 से 8 व्यक्तियों को आनन-फानन में एम्बुलेंस की मदद से नागरिक अस्पताल बहादुरगढ़ ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है। मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
दमकल की 6 गाड़ियां मौके पर; आग पर काबू पाने की जद्दोजहद जारी
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड) की 6 गाड़ियों को तुरंत घटना स्थल के लिए रवाना किया गया। दमकल कर्मी लगातार पानी और फोम की बौछार कर फैक्ट्री में धधक रही आग को शांत करने के प्रयास में जुटे हुए हैं। केमिकल और फेविकोल होने के कारण आग पर काबू पाने में फायर फाइटर्स को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा; जांच के आदेश जारी
हादसे का संदेश मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का दस्ता भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गया। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने पूरे प्रभावित क्षेत्र की घेराबंदी (कॉर्डन ऑफ) कर दी है ताकि राहत कार्य में कोई बाधा न आए। प्रशासनिक टीमों द्वारा फिलहाल प्राथमिकता के आधार पर बचाव कार्य चलाया जा रहा है और इसके साथ ही हादसे के वास्तविक तकनीकी कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस और गुलेल गैंग के बीच महेंद्रगढ़ में मुठभेड़, 2 घायल, 7 गिरफ्तार
22 May, 2026 01:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महेंद्रगढ़। हरियाणा के महेंद्रगढ़ में पुलिस की मुस्तैदी से एक बड़ी वारदात टल गई। रात के करीब 3 बजे सीआईए (CIA) टीम और कुख्यात कच्छाधारी गुलेल गैंग के अपराधियों के बीच आमने-सामने की मुठभेड़ हो गई। दोनों ओर से हुई कई राउंड की भीषण गोलीबारी में दो बदमाश पैर में गोली लगने से घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद नागरिक अस्पताल से हायर मेडिकल सेंटर रेफर कर दिया गया है। पुलिस ने घेराबंदी करते हुए इस गिरोह के कुल सात सदस्यों को रंगे हाथों दबोच लिया है।
ट्रेन से उतरे थे पारदी गैंग के सदस्य, कॉलोनी में घुसते ही पुलिस ने घेरा
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि मध्य प्रदेश का बदनाम पारदी गुलेल गैंग किसी बड़ी डकैती या चोरी की नियत से ट्रेन के जरिए महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन पहुंचा है। स्टेशन से निकलकर बदमाश जैसे ही छाजूपुरम कॉलोनी की तरफ बढ़े, वैसे ही सीआईए महेंद्रगढ़, नारनौल और सिटी थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने मोर्चा संभाल लिया। पुलिस को अपने पीछे आता देख बदमाश हुड्डा सेक्टर के खाली इलाके की तरफ भागने लगे और खुद को घिरता देख उन्होंने पुलिस बल पर सीधे गोलियां चलानी शुरू कर दीं।
दोनों तरफ से चलीं ताबड़तोड़ गोलियां, दबोचे गए शातिर अपराधी
बदमाशों की ओर से अचानक हुए हमले के बाद पुलिस ने भी आत्मरक्षा में पोजिशन ली और जवाबी फायरिंग की। शुरुआती इनपुट्स के मुताबिक, इस मुठभेड़ के दौरान पुलिस की तरफ से 8 राउंड और बदमाशों की ओर से 4 राउंड गोलियां चलीं। इसी क्रॉस फायरिंग में दो डकैतों को गोली लगी और वे जमीन पर गिर पड़े। पुलिस ने बिना वक्त गंवाए मौके से सभी सात आरोपियों को धर-दबोचा। इनके पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार, जिंदा कारतूस और गुलेल जैसे घातक उपकरण बरामद किए गए हैं।
पकड़े गए बदमाशों में मध्य प्रदेश के दो इनामी अपराधी भी शामिल
गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों की पहचान सुनील, वीरेंद्र, अभय, चांद, मनीराम, विजय और अर्जुन के रूप में हुई है, जो मूल रूप से मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पकड़े गए अपराधियों में से विजय (पुत्र दुर्गा) पर 15 हजार रुपये और चांद (पुत्र आकाश) पर 5 हजार रुपये का नकद इनाम पहले से घोषित था। ये दोनों कई राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बने हुए थे।
इलाके में फैला रखी थी दहशत, पूछताछ में बड़े खुलासों की उम्मीद
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस कच्छाधारी गुलेल गिरोह ने पिछले कुछ समय से महेंद्रगढ़ और आस-पास के सीमावर्ती इलाकों में चोरी और जानलेवा हमलों की वारदातों को अंजाम देकर भारी दहशत पैदा कर रखी थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ की जा रही है, जिससे क्षेत्र में हुई पिछली कई अनसुलझी वारदातों का खुलासा होने की पूरी संभावना है।
सीवर सफाई के दौरान हुई मौत, 1 करोड़ मुआवजे की मांग को लेकर अस्पताल में पंचायत
22 May, 2026 01:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बहादुरगढ़। शहर में सीवर की सफाई के दौरान एक प्लंबर की दर्दनाक मृत्यु के बाद से स्थानीय प्रशासन और परिजनों के बीच गतिरोध गहरा गया है। मृतक के परिवार को इंसाफ दिलाने और उचित आर्थिक मदद की मांग को लेकर स्थानीय नागरिक अस्पताल परिसर में एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया है। दलाल खाप 84 के अध्यक्ष भूप सिंह की अगुवाई में चल रही इस पंचायत में ग्रामीण इलाकों से आए सैकड़ों पुरुषों और महिलाओं ने हिस्सा लिया। आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे अपना प्रदर्शन खत्म नहीं करेंगे। फिलहाल मृतक का शव अस्पताल में ही रखा हुआ है।
दलाल खाप के नेतृत्व में उमड़ी भीड़, मांगों पर अड़े परिजन
घटना के विरोध में बुलाई गई इस पंचायत में खाप नेताओं ने प्रशासनिक ढिलाई और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। दलाल खाप के प्रधान भूप सिंह ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि गरीब कामगारों की जान की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पंचायत ने एकजुटता दिखाते हुए निर्णय लिया है कि वे पीड़ित परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और किसी भी सूरत में अपने कदम पीछे नहीं खींचेंगे।
पीड़ित परिवार के पुनर्वास के लिए प्रशासन के सामने रखीं 3 बड़ी शर्तें
महापंचायत और शोकाकुल परिजनों ने मिलकर स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों के सामने त्वरित राहत और दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए तीन प्रमुख मांगें रखी हैं, जो निम्नलिखित हैं:
आर्थिक सहायता: पीड़ित परिवार को भरण-पोषण के लिए तुरंत एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि (मुआवजा) दी जाए।
पेंशन व्यवस्था: मृतक की पत्नी के भविष्य और सुरक्षित जीवन-यापन को सुनिश्चित करने के लिए हर महीने एक निश्चित पेंशन योजना लागू की जाए।
मुफ्त चिकित्सा सुविधा: अनाथ हुए बच्चे की उचित देखरेख के लिए भविष्य में उसके इलाज और पूरी मेडिकल सुविधाओं का खर्च सरकार उठाए।
मांगें पूरी होने तक पोस्टमार्टम और शव उठाने से साफ इनकार
हालात को देखते हुए अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इस बीच, खाप और परिजनों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर आकर उनकी इन तीनों शर्तों को लिखित रूप में मंजूर नहीं कर लेते, तब तक वे शव का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे। पंचायत ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर लिखित सहमति बनने के बाद ही शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने की अनुमति दी जाएगी।
सुरक्षा उपकरणों की कमी पर उठे गंभीर सवाल
स्थानीय लोगों और साथी कर्मचारियों का आरोप है कि सीवर की सफाई के दौरान प्लंबर को आवश्यक सुरक्षा उपकरण (जैसे मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर और सेफ्टी बेल्ट) उपलब्ध नहीं कराए गए थे। जहरीली गैस के रिसाव के कारण यह हादसा हुआ, जो सीधे तौर पर ठेकेदार और संबंधित एजेंसी की लापरवाही को दर्शाता है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि पीड़ित परिवार को राहत देने के साथ-साथ दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
डिजिटल ठगी का शिकार हुए दंपती, पुलिस ने तीन आरोपी पकड़े
21 May, 2026 05:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
धारूहेड़ा: डिजिटल अरेस्ट के जरिए एक बुजुर्ग दंपती से 1.89 करोड़ रुपये की सनसनीखेज साइबर ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने इस गिरोह के तीन और गुर्गों को दबोच लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान जींद के न्यू हाउसिंग बोर्ड निवासी मनोज श्योकन्द, गांव करेला के पंकज और जोगेंद्र नगर के हरप्रीत के रूप में हुई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस सात आरोपियों को पहले ही सलाखों के पीछे भेज चुकी है, जिसके बाद अब कुल गिरफ्तारियों की संख्या दस हो गई है।
'सिम बंद होने और अश्लील वीडियो' का डर दिखाकर जाल में फंसाया
ठगी का यह खौफनाक खेल धारूहेड़ा के सेक्टर-6 निवासी रिटायर्ड कर्मचारी राजपाल सिंह के साथ खेला गया। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि बीती 27 और 28 फरवरी को उनके पास अनजान नंबरों से कॉल आए। फोन करने वाले ने खुद को 'ट्राई' (TRAI) का अधिकारी बताते हुए डराया कि उनकी आईडी पर फर्जी सिम एक्टिवेट है, जिससे अश्लील तस्वीरें और वीडियो भेजे जा रहे हैं। ठगों ने पीड़ित को झांसा दिया कि इस मामले में उनके खिलाफ मुंबई में एक एफआईआर (FIR) भी दर्ज हो चुकी है।
खुद को सीबीआई इंस्पेक्टर और जज बताकर किया डिजिटल अरेस्ट, कमरे में रखा बंधक
इसके बाद जालसाजों ने पीड़ित से संपर्क कर खुद को सीबीआई (CBI) इंस्पेक्टर और फर्जी जज बताया। उन्होंने दंपती को कानूनी कार्रवाई का खौफ दिखाकर 'डिजिटल अरेस्ट' कर लिया और फोन पर एक संदिग्ध ऐप डाउनलोड करवाकर उन पर चौबीसों घंटे नजर रखने लगे। डर के मारे बुजुर्ग दंपती कई दिनों तक अपने ही कमरे में बंधक बने रहे। ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में फंसाने और प्रॉपर्टी वेरिफिकेशन के नाम पर 3 मार्च से 20 अप्रैल के बीच डरा-धमकाकर अलग-अलग खातों में कुल 1 करोड़ 89 लाख 28 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
बैंक खाते और दलाली का नेटवर्क; तीन नए आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की जांच में सामने आया कि पकड़े गए नए आरोपियों में से मनोज श्योकन्द के बैंक अकाउंट में ठगी की रकम से 1 लाख 8 हजार रुपये भेजे गए थे। वहीं, पंकज और हरप्रीत ने मुख्य साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए बिचौलियों (दलालों) के रूप में काम किया था। पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश किया, जहां से अदालत ने मनोज को जेल भेज दिया है, जबकि पंकज और हरप्रीत को दो दिन के पुलिस रिमांड पर सौंपा है ताकि गिरोह के अन्य नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
सीवर सफाई हादसे में मृतक के परिजन अड़े, 1 करोड़ मुआवजा चाहिए
21 May, 2026 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
झज्जर। नूना माजरा के महाराजा अग्रसेन अस्पताल में सीवर की सफाई करते समय प्लंबर सुनील की हुई दर्दनाक मौत के बाद गुरुवार को मामला पूरी तरह गरमा गया है। मृतक के दुखी परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है, जिसके चलते उन्होंने नागरिक अस्पताल (सिविल हॉस्पिटल) से सुनील का शव उठाने से साफ मना कर दिया है। गुस्साए लोगों ने अस्पताल प्रशासन के रवैये के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोल दिया है।
सुरक्षा उपकरणों की कमी का आरोप, पीड़ित परिवार के लिए मांगी पेंशन
अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे परिजनों और ग्रामीणों ने प्रबंधन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई साधारण हादसा नहीं, बल्कि अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही है; सुनील को बिना किसी सुरक्षा किट और उपकरणों के जहरीले सीवर में उतारा गया था। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं:
मुआवजा: मृतक के आश्रितों को तुरंत 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
पारिवारिक पेंशन: सुनील की पत्नी के जीवन-यापन के लिए हर महीने स्थायी पेंशन का प्रबंध किया जाए।
मांगें पूरी न होने पर यूनिवर्सिटी गेट पर तालाबंदी का अल्टीमेटम
नागरिक अस्पताल में भारी तादाद में इकट्ठा हुए ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन को खुली चेतावनी दी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि उनकी जायज मांगों पर अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो वे अपने विरोध प्रदर्शन को और उग्र करेंगे। इसके तहत उन्होंने पास ही स्थित यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर ताला जड़ने और पूरी तरह चक्का जाम करने की धमकी दी है।
रणनीति तय करने के लिए आज शाम 4 बजे बैठेगी महापंचायत
इस पूरे गतिरोध को सुलझाने और आंदोलन की आगे की दिशा तय करने के लिए ग्रामीणों ने आज शाम 4 बजे एक बड़ी पंचायत बुलाई है। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि इस महापंचायत में जो भी सामूहिक निर्णय लिया जाएगा, उसी के आधार पर आगे कदम उठाए जाएंगे। तब तक अस्पताल से शव नहीं लिया जाएगा।
प्रशासनिक अमला अलर्ट, शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश जारी
घटना के बाद से उपजे तनाव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। नागरिक अस्पताल और नूना माजरा के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस के आला अधिकारी ग्रामीणों को समझाने-बुझाने और अस्पताल प्रबंधन के साथ बातचीत के जरिए बीच का रास्ता निकालने की कोशिशों में जुटे हैं, ताकि कानून-व्यवस्था नियंत्रण में रहे।
रेवाड़ी: लापता स्कूल संचालक का शव कार में मिला, पुलिस जांच में जुटी
21 May, 2026 10:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रेवाड़ी। विकास नगर कंकरवाली के रहने वाले एक स्कूल संचालक आकाश गौड़ का शव संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी ही कार के भीतर मिलने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। उनका शव सेक्टर-18 इलाके में सड़क के किनारे खड़ी एक कार की सीट पर बैठी हुई हालत में बरामद हुआ। इस दुखद घटना की भनक लगते ही मृतक के परिवार और स्थानीय निवासियों में कोहराम मच गया।
तीन दिनों से लापता थे स्कूल संचालक, पत्नी से हुई थी आखिरी बात
पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, आकाश गौड़ बीते 18 मई को किसी आवश्यक कार्य का हवाला देकर अपने घर से रवाना हुए थे, परंतु उसके बाद वह वापस नहीं लौटे। परिजनों ने बताया कि उनकी अपनी पत्नी से अंतिम बार 19 मई को मोबाइल पर बात हुई थी। उस बातचीत के बाद से ही उनका फोन कनेटिक्ट नहीं हो पा रहा था, जिससे पूरा परिवार किसी अनहोनी की आशंका से लगातार परेशान था।
स्कूल बस से जा रहे बेटे ने रास्ते में खड़ी देखी थी पिता की कार
इस पूरे मामले में एक हैरान करने वाला मोड़ मंगलवार को आया। आकाश का बेटा जब अपने स्कूल की बस से जा रहा था, तब उसने रास्ते में अपने पिता की गाड़ी खड़ी देखी थी। उस वक्त उसे किसी गड़बड़ी का अंदाजा नहीं हुआ। हालांकि, जब वह स्कूल से पढ़कर वापस घर लौटा, तो उसने परिवार के अन्य सदस्यों को रास्ते में खड़ी कार के बारे में बताया। बेटे से इनपुट मिलते ही परिजनों ने तुरंत उस लोकेशन की ओर दौड़ लगाई।
सीट पर बेसुध मिले आकाश, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
बेटे की निशानदेही पर जब परिजन गढ़ी बोलनी रोड से सेक्टर-18 की तरफ जाने वाले रास्ते पर पहुंचे, तो उन्हें सड़क किनारे आकाश की कार मिल गई। जब उन्होंने कार के करीब जाकर अंदर झांका, तो आकाश ड्राइविंग सीट पर अचेत अवस्था में बैठे हुए थे। उन्हें इस हालत में देख घबराए परिजन तुरंत कार का दरवाजा खोलकर उन्हें नजदीकी अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मामले की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस, जांच जारी
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम ने अस्पताल और वारदात वाली जगह का मुआयना किया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। कार के भीतर संदिग्ध हालत में शव मिलने के कारण पुलिस हर एंगल से इस मामले की तफ्तीश कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजहों का खुलासा हो सकेगा।
पंखे से लटका मिला शव, पुलिस ने शुरू की जांच
20 May, 2026 05:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रेवाड़ी: जिले के गांव नेहरूगढ़ में सेना के ऑर्डिनेंस डिपो में तैनात एक जवान द्वारा घर के भीतर फांसी लगाकर आत्महत्या करने का अत्यंत दुखद मामला सामने आया है। मृतक की शिनाख्त 28 वर्षीय योगेश के तौर पर हुई है, जो राजस्थान के बाड़मेर में भारतीय सेना के ऑर्डिनेंस डिपो में टी-मेट के पद पर कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि योगेश करीब 25 दिन पहले ही छुट्टी पर अपने गांव आए हुए थे।
सुबह कमरे में पंखे से लटका मिला जवान का शव
मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार की रात को योगेश रोज की तरह अपने घर के एक अलग कमरे में सोने के लिए गए थे। बुधवार सुबह करीब 5 बजे तक जब उनके कमरे का दरवाजा नहीं खुला और कोई हलचल नहीं हुई, तो चिंतित परिजनों ने कमरे के भीतर जाकर देखा। अंदर योगेश का शव फंदे के सहारे पंखे से झूल रहा था। बदहवास परिजन उन्हें तुरंत कोसली के नागरिक अस्पताल ले गए, लेकिन वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
शुरुआती तफ्तीश में मानसिक तनाव की बात आई सामने
घटना की जानकारी मिलते ही नाहड़ पुलिस चौकी की टीम अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस को घटनास्थल से किसी भी प्रकार का सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। हालांकि, शोकाकुल परिजनों ने पुलिस को बताया कि योगेश पिछले कुछ समय से भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे थे, लेकिन उनकी इस मानसिक परेशानी की असली वजह क्या थी, यह अभी तक साफ नहीं हो पाई है।
दो साल पहले ही हुआ था विवाह, पत्नी हैं गर्भवती
योगेश की शादी साल 2024 में बैहरमपुर की रहने वाली युवती से हुई थी। उनके परिवार में उनका एक करीब सवा साल का मासूम बेटा है, जबकि उनकी पत्नी इस समय गर्भवती हैं। योगेश की माता का देहांत पहले ही हो चुका है और उनके पीछे परिवार में पिता, दादा-दादी और एक छोटा भाई है। इस असमय हादसे से पूरे गांव और परिवार में मातम पसरा हुआ है।
पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंपा
कोसली थाना के एसएचओ मनोज कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने नागरिक अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम करवाकर उसे अंतिम संस्कार के लिए परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। पुलिस ने परिजनों के बयानों के आधार पर सीआरपीसी के तहत इत्तेफाकिया मौत की कार्रवाई दर्ज की है और मामले के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।
बिना गियर के काम करना पड़ा जानलेवा, प्लंबर की मौत से हड़कंप
20 May, 2026 05:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बहादुरगढ़: महाराजा अग्रसेन यूनिवर्सिटी परिसर में सीवरेज टैंक की सफाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में डाबौदा कलां के रहने वाले प्लंबर सुनील की मौत के बाद मामला गरमा गया है। मृतक की पत्नी ने स्थानीय सदर थाने में अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि सुनील की तबीयत ठीक नहीं थी और उनकी ड्यूटी का समय भी खत्म हो चुका था, फिर भी उन्हें जबरन जहरीली गैस से भरे सीवर टैंक में उतारा गया, जिससे उनकी जान चली गई।
अस्पताल प्रबंधन सहित 8 जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा दर्ज
इस मामले में मुस्तैदी दिखाते हुए पुलिस ने मृतक की पत्नी की तहरीर पर महाराजा अग्रसेन अस्पताल प्रबंधन के आला पदाधिकारियों और सुपरवाइजर सहित कुल 8 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। मालूम हो कि सोमवार को यूनिवर्सिटी परिसर में सीवर की सफाई के दौरान अचानक जहरीली गैस का रिसाव होने से पांच कर्मचारी अचेत हो गए थे। अस्पताल में इलाज के दौरान बुधवार को प्लंबर सुनील ने दम तोड़ दिया।
परिजनों का आरोप: बिना सुरक्षा उपकरणों के जबरन कराया जानलेवा काम
मृतक सुनील की पत्नी मीनू ने पुलिस को बताया कि उनके पति अस्पताल में बतौर प्लंबर सेवाएं दे रहे थे। 18 मई को सुबह 9 बजे उनकी शिफ्ट खत्म हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद उन पर दबाव बनाकर उन्हें सीवरेज टैंक की सफाई के काम में धकेल दिया गया। गंभीर आरोप यह भी है कि इस बेहद खतरनाक और जानलेवा काम के लिए कर्मचारियों को कोई भी सुरक्षा किट या उपकरण मुहैया नहीं कराए गए थे। जहरीली गैस की चपेट में आने से सुनील के साथ तीन अन्य सफाईकर्मियों की हालत भी बेहद नाजुक हो गई थी।
सूचना छिपाने और लापरवाही बरतने के आरोप से घिरा प्रशासन
पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि हादसे के बाद उन्हें समय पर कोई जानकारी नहीं दी गई। परिजनों को न तो सुनील के स्वास्थ्य की सही स्थिति बताई गई और न ही इलाज के बारे में स्पष्ट किया गया। जब परिवार के लोग खुद अस्पताल पहुंचे, तब उन्हें सुनील की मौत का पता चला। परिजनों का कहना है कि प्रबंधन ने इस पूरी घटना पर चुप्पी साध रखी है और वे अब दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
इन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम FIR में शामिल
सदर थाना पुलिस ने मीनू की शिकायत के आधार पर मीना सुभाष गुप्ता, कुनाल बंसल, प्रेम गर्ग, अशोक कुमार गर्ग, संजय गुप्ता, प्रधान राजेश गुप्ता, एचओडी राजीव भारद्वाज और इलेक्ट्रिकल सुपरवाइजर अंशुल के खिलाफ कानूनी धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहनता से तफ्तीश शुरू कर दी गई है और जांच में जो भी लापरवाही बरतने का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर आयोग ने जताई गंभीर चिंता
20 May, 2026 11:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा में बच्चों के विरुद्ध लगातार बढ़ रहे गंभीर अपराधों को लेकर हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB-2024) के चौंकाने वाले आंकड़ों को आधार बनाते हुए आयोग ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। आयोग ने प्रदेश में बाल सुरक्षा की स्थिति को “अत्यंत चिंताजनक” करार देते हुए कहा कि ये आंकड़े राज्य के बाल संरक्षण तंत्र और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
देश में सबसे आगे हरियाणा: एक साल में दर्ज हुए 7,547 मामले
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा, न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया की पूर्ण पीठ ने सुनवाई के दौरान एनसीआरबी की रिपोर्ट का हवाला दिया। आयोग ने बताया कि वर्ष 2024 में हरियाणा में बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल 7,547 मामले सामने आए, जो साल 2023 के मुकाबले लगभग 17.9 प्रतिशत ज्यादा हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य में प्रति एक लाख बच्चों पर अपराध की दर 82.8 है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है।
पोक्सो और गंभीर मामलों में बढ़ोतरी पर जताई गहरी चिंता
आयोग ने रेखांकित किया कि इन दर्ज मामलों में हत्या, बलात्कार, यौन उत्पीड़न, अपहरण, मानव तस्करी, बाल विवाह, भ्रूण हत्या और पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत आने वाले बेहद गंभीर अपराध शामिल हैं। विशेषकर बालिकाओं के साथ बढ़ते पोक्सो के मामलों को आयोग ने बच्चों की सुरक्षा, उनके आत्मसम्मान और मानसिक विकास के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। आयोग ने टिप्पणी की कि सुरक्षा के तमाम दावों और कानूनों के बावजूद ऐसी घटनाएं प्रशासनिक निगरानी प्रणाली और संस्थागत जवाबदेही की विफलता को दर्शाती हैं।
सुरक्षित माहौल देने में स्कूल, हॉस्टल और सरकारी संस्थाएं कमजोर
मानवाधिकार आयोग ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि स्कूल, छात्रावास (हॉस्टल्स) और बाल देखभाल संस्थान (चाइल्ड केयर होम्स) बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह कमजोर साबित हो रहे हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए आयोग ने गृह विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, पुलिस महानिदेशक (DGP) और विशेष किशोर पुलिस इकाइयों के नोडल अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
विभिन्न विभागों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट, 6 अगस्त को अगली सुनवाई
आयोग ने इन सभी विभागों को बच्चों की सुरक्षा, अपराधों की रोकथाम, जांच की स्थिति, दोषियों को सजा दिलाने के प्रयासों और पीड़ितों के पुनर्वास से जुड़ी एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने जानकारी दी कि सभी संबंधित अधिकारियों को आगामी सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अपनी स्टेटस रिपोर्ट आयोग के सामने प्रस्तुत करनी होगी। इस मामले की अगली उच्च स्तरीय सुनवाई 6 अगस्त 2026 को तय की गई है।
सुबह की सैर बन गई दुखद हादसा, कपिल मुनि तालाब में डूबीं दो बहनें
19 May, 2026 12:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैथल। हरियाणा के कलायत इलाके से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ मंगलवार की अलसुबह दो सगी बहनें कपिल मुनि तालाब में डूब गईं, जिससे दोनों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान कलायत की रहने वाली 20 वर्षीय पलक और उसकी छोटी बहन 18 वर्षीय परमजीत के रूप में हुई है। इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
रोजाना की तरह सुबह की सैर पर निकली थीं दोनों बहनें
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, दोनों बहनें पलक और परमजीत की दिनचर्या थी कि वे हर रोज सुबह करीब 5:00 बजे वॉक (सैर) के लिए घर से बाहर जाती थीं। मंगलवार सुबह भी दोनों सामान्य दिनों की तरह सुबह की ताजी हवा में टहलने के लिए निकली थीं। लेकिन जब काफी समय बीत जाने के बाद भी वे घर वापस नहीं लौटीं, तो परिजनों को चिंता होने लगी। अनहोनी की आशंका के चलते परिवार के लोग उनकी खोजबीन करते हुए कपिल मुनि तालाब की तरफ पहुंचे, जहाँ उन्हें दोनों के डूबने की प्राथमिक जानकारी मिली।
स्थानीय लोगों और गोताखोरों ने चलाया डेढ़ घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की भनक लगते ही कलायत थाना पुलिस तुरंत एक्शन में आई और बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने तुरंत गोताखोरों की टीम को काम पर लगाया। इस दौरान वहां मौजूद स्थानीय निवासियों ने भी मानवता का परिचय देते हुए तालाब में उतरकर युवतियों को ढूंढने में मदद की। करीब डेढ़ घंटे तक चले कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन (बचाव अभियान) के बाद दोनों बहनों को पानी से बाहर निकाला गया। उन्हें तुरंत एम्बुलेंस की मदद से कैथल के सिविल अस्पताल (नागरिक अस्पताल) ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपे जाएंगे शव, तफ्तीश में जुटी पुलिस
इस मामले को लेकर कलायत थाना प्रभारी सुभाष चंद्र ने बताया कि पुलिस टीम सूचना मिलते ही घटनास्थल पर सक्रिय हो गई थी। ग्रामीणों के सहयोग से दोनों युवतियों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा है और पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। थाना प्रभारी ने कहा कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने और वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए शोकाकुल परिवार को सौंप दिए जाएंगे। फिलहाल पुलिस हादसे के सही कारणों और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए मामले की गहनता से जांच कर रही है।
हरियाणा रोडवेज की नई सुविधा: रोहतक-शिमला सीधी बस, जानें किराया
19 May, 2026 12:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। चिलचिलाती गर्मी के इस मौसम में पहाड़ों की सैर पर जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए हरियाणा रोडवेज ने एक बड़ी सौगात दी है। विभाग की ओर से रोहतक से शिमला के लिए सीधी बस सेवा का सफल आगाज किया गया है। मंगलवार को स्थानीय बस स्टैंड के काउंटर नंबर आठ से पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और रोडवेज के महाप्रबंधक (GM) नवीन कुमार ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर इस नई बस को अपने गंतव्य के लिए रवाना किया।
मात्र 581 रुपये में तय होगा शिमला तक का सफर
यात्रियों की जेब का ख्याल रखते हुए रोडवेज प्रशासन ने इस रूट का किराया बेहद किफायती रखा है। रोहतक से शिमला तक के सफर के लिए यात्रियों को प्रति सवारी केवल 581 रुपये का टिकट लेना होगा। दूरी के लिहाज से यह पूरा सफर लगभग 373 किलोमीटर का रहने वाला है, जिसे यह बस बेहद आरामदायक तरीके से तय करेगी।
इन प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा रूट, रात को पहुंचेगी शिमला
रोहतक डिपो की यह बस अपने निर्धारित समय पर प्रस्थान करने के बाद हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहरों को आपस में जोड़ेगी। यह बस रोहतक से रवाना होकर चंडीगढ़, पंचकूला, पिंजौर, कालका, सोलन और धर्मपुर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकते हुए रात को 8:10 बजे शिमला के मुख्य बस स्टैंड पर पहुंचेगी। इससे यात्रियों को बार-बार बस बदलने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी।
व्यापार, शिक्षा और पर्यटन को मिलेगा नया बढ़ावा
बस के उद्घाटन समारोह के दौरान पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस डायरेक्ट बस सर्विस के शुरू होने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि उच्च शिक्षा और व्यापार के सिलसिले में हिमाचल प्रदेश आने-जाने वाले लोगों का समय और पैसा दोनों बचेगा। विशेषकर गर्मियों के सीजन में शिमला की वादियों का लुत्फ उठाने वाले सैलानियों के लिए यह सरकारी बस सेवा बेहद मददगार और आरामदायक साबित होगी।
सरकारी कर्मचारियों के लिए जरूरी सूचना: प्रॉपर्टी रिटर्न न भरा तो वेतन रुकेगा
19 May, 2026 09:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचकूला। हरियाणा के मौलिक शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों द्वारा अपनी संपत्ति का ब्यौरा (प्रॉपर्टी रिटर्न) दाखिल करने को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मौलिक शिक्षा निदेशक (पंचकूला) की ओर से प्रदेश के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को एक ताजा रिमाइंडर (स्मरण पत्र) भेजा गया है। इस आदेश के तहत उनके अंतर्गत काम करने वाले क्लास-1, क्लास-2 और क्लास-3 (श्रेणी-1, 2 और 3) के सभी अधिकारी-कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 की ऑनलाइन प्रॉपर्टी रिटर्न आगामी 22 मई 2026 तक अनिवार्य रूप से भरने के निर्देश दिए गए हैं।
पोर्टल पर करना होगा ऑनलाइन आवेदन, पुराना बकाया भी चुकाना जरूरी
शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया है कि केवल चालू वित्तीय वर्ष ही नहीं, बल्कि जिन कर्मचारियों की पिछले सालों की भी प्रॉपर्टी रिटर्न किसी वजह से पेंडिंग (लंबित) है, वे भी उसे तुरंत क्लियर करें। कर्मचारियों को अपनी अचल संपत्ति का यह पूरा लेखा-जोखा राज्य सरकार के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म intrahry.gov.in पर जाकर ऑनलाइन मोड में ही दर्ज करना होगा। मैन्युअल या ऑफलाइन माध्यम से दी गई जानकारी स्वीकार नहीं की जाएगी।
तीसरी बार जारी हुआ आदेश, अंतिम तारीख नजदीक आने पर याद दिलाया नियम
विभागीय पत्र के अनुसार, संपत्ति का विवरण देने को लेकर प्रशासन की तरफ से यह कोई पहला आदेश नहीं है। इससे पहले भी 18 मार्च 2019 और हाल ही में 13 मई 2026 को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। चूंकि अब विभाग द्वारा तय की गई आखिरी तारीख बेहद करीब आ चुकी है, इसलिए सभी कर्मचारियों को सचेत करने के उद्देश्य से यह अंतिम स्मरण पत्र जारी कर मुस्तैदी दिखाने को कहा गया है।
लापरवाही पर रुकेगा वेतन, जिला अधिकारियों को 'हाई प्रायोरिटी' के निर्देश
मुख्यालय ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि कोई कर्मचारी नियत समय सीमा के भीतर अपनी संपत्ति का विवरण ऑनलाइन अपडेट करने में विफल रहता है और इस वजह से उसका मासिक वेतन (सैलरी) रुक जाता है, तो इसके लिए वह खुद पूरी तरह जिम्मेदार होगा। मौलिक शिक्षा विभाग ने सभी जिला स्तरीय अफसरों को इस मुहिम को 'हाई प्रायोरिटी' (उच्च प्राथमिकता) पर रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि समय रहते शत-प्रतिशत डेटा पोर्टल पर फीड किया जा सके।
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