संपादकीय
नारी है युग की परिभाषा | शक्ति साहस और विश्वास की भाषा ||
23 Aug, 2025 03:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस एक प्रेरणादायक पंक्ति से नारी के जीवन को प्रकट करने की कुछ हद तक कोशिश की गई है मुझे पता है कि नारी का अस्तित्व इतना बड़ा है कि शायद स्वयं संसार रचेयता भी इसका सुलभ प्रस्तुतिकरण नहीं कर सकता है लेकिन नारी ने अपने निभाए हुए किरदारों से इस संसार में अपने जीवन को त्याग, समर्पण, शक्ति, साहस, ममत्व और विश्वास की परिभाषा में बदलकर रख दिया है साथ ही मानव जीवन के हर किरदार में अपने आपको उत्कृष्ट सिद्ध किया है |
इस संसार में नारी की भूमिका के इतने किस्से भरे पड़े है की उन्हें ना तो बोलना संभव है और ना ही लिखना संभव है नारी के समर्पण को सिर्फ एक नारी ही समझ सकती है | अतुलनीय और अकल्पनीय जीवन यात्रा में एक नारी ना जाने कितने पड़ावों को समझदारी और विश्वास के साथ पार करती है| सबसे बड़ी बात यह है कि जंहा मानव जीवन अपने से कभी ऊपर नहीं उठता है वहां केवल नारी ही परिवार और समाज को साथ रखने का निरंतर काम करती है नारी ने सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर पारिवारिक जीवन के साथ सार्वजनिक जीवन में अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर हर क्षेत्र में विजय श्री हासिल की |
रानी लक्ष्मीबाई (झांसी की रानी), रानी दुर्गावती, झलकारी बाई, बेगम हज़रत महल, अवंति बाई लोधी, सरोजिनी नायडू, अरुणा आसफ़ अली, लक्ष्मी सहगल ये वो नाम है जिनके कारण आज हम आजाद हैं| वहीँ आजाद भारत में राजनैतिक मोर्चे पर झंडा फहराने वाली सफलतम महिलाओं में पहली महिला प्रधानमंत्री व पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, भारत की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, वर्त्तमान राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, सुषमा स्वराज विदेश मंत्री ने अपने अपने पदों की शोभा बढ़ाई तो वहीं विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला बनी, भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में रिकॉर्डधारी बनी, टीसीए अंशु ISRO में मिशन डायरेक्टर, ने उपग्रह प्रक्षेपण में विशेष योगदान दिया तो डॉ. टेसी थॉमस ने ‘मिसाइल वुमन ऑफ इंडिया’, अग्नि-IV और अग्नि-V प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनकर अतुलनीय योगदान दिया |
भारतीय खेल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाईयां दिलाने वाली पी.टी. ऊषा को कौन नहीं जनता है तो वहीं बैडमिंटन की विश्व रैंकिंग में नं. 1 स्थान पर रहने वाली सायना नेहवाल, टेनिस में डबल्स और मिक्स्ड डबल्स ग्रैंड स्लैम विजेता, सानिया मिर्ज़ा, छह बार की विश्व चैंपियन बॉक्सर मेरी कॉम, महिला क्रिकेट टीम की कप्तान, सर्वाधिक रन बनाने वाली महिला खिलाड़ी मिताली राज, ओलंपिक पदक विजेता पहलवान साक्षी मलिक जैसी सफलतम महिलाएं आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है | तो वहीं साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में लेखक महाश्वेता देवी, भारत रत्न से सम्मानित स्वर कोकिला लता मंगेशकर, भारतीय सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्रियां मधुबाला, वैजयंतीमाला, हेमा मालिनी, माधुरी दीक्षित और लोक गायन में तीजन बाई व शारदा सिन्हा अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं|
व्यवसाय और नेतृत्व के क्षेत्र में नई पटकथा लिखने वाली पेप्सिको की CEO और विश्व की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में शामिल इंदिरा नूई, बायोकॉन कंपनी की संस्थापक, बायोटेक इंडस्ट्री की अग्रणी किरण मजूमदार-शॉ, बालाजी टेलीफिल्म्स की डायरेक्टर एकता कपूर तो वही समाजसेवा और अन्य क्षेत्रों में अपना जीवन लगाने वाली मिशनरीज ऑफ चैरिटी की संस्थापक, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा, पर्यावरण कार्यकर्ता और लेखक, वंदना शिवा, पहली महिला IPS अधिकारी, तिहाड़ जेल सुधारक किरण बेदी, कृषि और ग्रामीण उद्यमिता के क्षेत्र में चेतना सिन्हा महाराष्ट्र मन्न देशी बैंक और मन्न देशी फाउंडेशन की संस्थापक ने ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय सशक्तिकरण में मदद की, संतोष देवी हरियाणा जैविक खेती और महिला किसानों के संगठन की नेता ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान हासिल किया, सिंधुताई सपकाल महाराष्ट्र ‘अनाथों की माँ’ के रूप में जानी जाती हैं जिन्होंने 1,000 से अधिक अनाथ बच्चों की परवरिश की, मध्यप्रदेश की गोंड जनजाति की चित्रकार भूरी बाई ने कला के जरिए अपनी आजीविका और समुदाय का विकास किया, केरल की भगीरथी अम्मा ने 105 वर्ष की उम्र में परीक्षा देकर शिक्षा का महत्व दिखाया और ग्रामीण शिक्षा की प्रेरणा बनी |
महिलाओ के योगदान को हम ना ही कभी किसी रूप में नाप सकते है और ना ही कभी उनके द्वारा किये गए कार्यो की हम बराबरी कर सकते हैं महिलाओ का पूरा जीवन ही प्रेरणा से ओतप्रोत है जिससे हम हमेशा सीख ही सकते हैं |
विनीत श्रीवास्तव
संपादक
(Gramin bharat ki pukar patrika)
https://graminbharattv.in/emagazine.php
नारी: सृजन, पालन और प्रेरणा की जीवंत प्रतिमा
23 Aug, 2025 03:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नारी… एक शब्द, जिसमें पूरी सृष्टि की रचना और पालन की कहानी छुपी है। वह माँ है, जो अपने आँचल में संसार का ममत्व समेट लेती है। वह बहन है, जो घर में अपनापन और हँसी बिखेरती है। वह पत्नी है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने साथी का सहारा बनती है। और वह बेटी है, जो परिवार में नई उम्मीद और उजाला लाती है। वह धरती की तरह धैर्यवान, नदी की तरह निरंतर बहने वाली और आकाश की तरह असीम है। नारी केवल एक इंसान नहीं, वह सृजन की पहली साँस, पालन की मधुर धुन और प्रेरणा की शाश्वत लौ है। जब वह माँ बनती है, तो केवल एक शिशु को जन्म नहीं देती—वह पूरे युग को जन्म देती है। उसकी गोद में पलने वाले नन्हे कदम आने वाले कल की दिशा तय करते हैं। घर का पहला विद्यालय माँ की गोद होती है, और माँ ही उस विद्यालय की पहली शिक्षिका। वह लोरी में भी धर्म, आस्था और प्रेम के बीज बो देती है। पूजा की थाली सजाते समय, दीपक जलाते समय, या किसी त्योहार की तैयारी में, वह अनजाने में बच्चों को परंपरा का पाठ पढ़ाती है। परंपराएं सिर्फ रस्में नहीं हैं। वे जीवन के ऐसे सूत्र हैं जो समाज को जोड़ते हैं, परिवार में अपनापन जगाते हैं और आने वाली पीढ़ियों में सामूहिकता की भावना भरते हैं। नारी जब इन परंपराओं को निभाती है, तो वह समय के साथ-साथ अपनी संतान को धैर्य, अनुशासन, और करुणा भी सिखाती है।
नारी की आस्था उसकी सबसे बड़ी ताकत है। चाहे वह व्रत-उपवास हो, त्यौहार की तैयारी हो, या परिवार के लिए प्रार्थना—इन सबमें उसकी निष्ठा और समर्पण झलकता है। यही आस्था पीढ़ियों को यह संदेश देती है कि कठिन समय में भी विश्वास और सकारात्मक सोच हमें आगे बढ़ाती है। सनातन संस्कृति में नारी को ‘गृहलक्ष्मी’ कहा गया है, क्योंकि वह घर को सिर्फ ईंट और दीवारों का ढांचा नहीं रहने देती, बल्कि उसमें प्रेम, आदर और संस्कार की सुगंध भर देती है। वह पुरानी परंपराओं को समय के अनुसार ढालते हुए अगली पीढ़ी तक पहुँचाती है—यही उसे संस्कृति की सच्ची वाहक बनाता है।
आज के बदलते दौर में, जब पश्चिमी प्रभाव तेज़ी से फैल रहा है, तब भी नारी ही वह कड़ी है जो हमारी जड़ों को मजबूती से थामे हुए है। उसकी आस्था, उसकी परंपरा-निष्ठा और उसका संस्कार-संवर्धन ही हमारे समाज की असली शक्ति है।
इतिहास के पन्नों को पलटें तो हर युग में नारी का रूप बदलता रहा है—पर उसकी सार्थकता कभी नहीं बदली। कभी वह झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई बनकर रणभूमि में गरज उठी, तो कभी अहिल्याबाई होल्कर बनकर शासन और न्याय का आदर्श बनी। कभी मीरा की भक्ति में डूबी, तो कभी गार्गी की तरह ज्ञान की ज्योति फैलाई। उसके इन रूपों में एक बात समान है—वह हर परिस्थिति में प्रेरणा का स्रोत बनी रहती है।
नारी की ताकत को कम आंकना, मानो सूर्य की रोशनी को नकारना है। वह खेतों में पसीना बहा सकती है, प्रयोगशालाओं में खोज कर सकती है, मंच से क्रांति का बिगुल बजा सकती है और रणभूमि में दुश्मन से लोहा ले सकती है। उसकी शक्ति केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के हर क्षेत्र में अपना योगदान देती है।
आज का समय नारी के लिए अवसरों का द्वार खोल चुका है। वह शिक्षित है, आत्मनिर्भर है और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है। परंतु इस जागरूकता के साथ-साथ उसकी जिम्मेदारियाँ भी बढ़ी हैं—वह आधुनिकता के साथ परंपरा का संतुलन भी साध रही है। वह तकनीक के युग में कदम से कदम मिलाकर चल रही है, पर अपनी जड़ों से भी जुड़ी हुई है।
हमारी संस्कृति ने सदियों पहले ही कह दिया था—“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता”—जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है। इसलिए नारी का सम्मान केवल उसकी गरिमा के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज की उन्नति के लिए आवश्यक है। नारी—वह है जो सृजन करती है, पालन करती है और प्रेरणा देती है। वह मिट्टी की तरह सहनशील है, दीपक की तरह अंधेरों में रोशनी देती है, और पर्वत की तरह अडिग रहती है। उसका अस्तित्व सिर्फ एक जीवन नहीं, बल्कि लाखों जीवनों का आधार है।
इसलिए, नारी को केवल सम्मान मत दो, उसे निर्णय की शक्ति दो, नेतृत्व का अवसर दो और उसके सपनों को पंख दो। क्योंकि जब नारी आगे बढ़ती है, तो केवल एक व्यक्ति नहीं—पूरा समाज प्रगति की ओर बढ़ता है।
अनुराधा श्रीवास्तव
सह संपादक
किसी अनमोल ख़जाने सी होती हैं “यादें”
24 Jul, 2025 07:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
किसी अनमोल ख़जाने सी होती हैं “यादें”
समय समय पर खंगालते रहना ज़रूरी है
अनुराधा श्रीवास्तव
सह संपादक
कभी कभी यूँ ही किसी दिन मन की सफाई करते करते भविष्य की चिंता फ़िक्र जिम्मेदारियों से इतर अतीत की यादों पर जमी धूल की परत हटाकर देखिये, कितना कुछ गुज़र जाता है जीवन में साल दर साल और हम कभी क्षण भर बैठकर उसके बारे में सोच नहीं पाते या सोचना नहीं चाहते। जीवन हमारी अच्छी बुरी यादों का एल्बम ही तो है, जीवन में हर वक़्त अच्छा हो, ये ज़रूरी नहीं तो यादें सिर्फ अच्छी कैसे हो सकती हैं। जैसा जीवन हमने जिया यादों का एल्बम भी वैसा ही तैयार होता है जिसमे कुछ तस्वीरें हंसती खिलखिलाती होती हैं, तो कुछ दुःख और पीड़ा से भरी, वैसे ही कुछ यादें आपके मन को खुशियों से भरने वाली होती हैं, तो कुछ यादें दर्द और ज़ख्म को ताज़ा कर देने वाली जो समय के साथ धुंधली पड़ने लगती हैं। यादें भले ही समय के साथ धुंधली पड़ जाएँ, पर उनका एहसास, उनकी महक हमेशा जिंदा रहती है। शायद यही जीवन की खूबसूरती है, हर अच्छे-बुरे पल का एक निशान छोड़ जाना, जो हमें बताता है कि हमने क्या जिया और क्या सीखा।
रोजमर्रा की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में से कुछ वक़्त निकालकर इन यादों की एल्बम को खंगालकर देखिये, कितनी ही कहानियां निकल कर आएँगी हमारे जीवन के हर दौर से जुड़ी। जिन्हें याद करके आपके होठों पर मुस्कान भी आ सकती है और आँखों में नमी भी पर दोनों ही बहुत अनमोल हैं क्योंकि ये हमारी अपनी यादें हैं, हमसे जुड़ी, हमारे जीवन का हिस्सा।
दरअसल यादें हमारे जीवन का वो अनमोल हिस्सा हैं, जो हमें सिर्फ बीते हुए पलों की सैर ही नहीं करातीं, बल्कि हमें अपने आप से भी जोड़े रखती हैं। कभी-कभी ये यादें एक पुरानी तस्वीर की तरह होती हैं, जिसे देखते ही उस वक्त की हवा, उसकी खुशबू, और उस पल की आवाज़ें तक जैसे हमारे आसपास मंडराने लगती हैं। और कभी ये एक धुंधली-सी छाया की तरह होती हैं, जिन्हें हम पूरी तरह देख तो नहीं पाते, पर उनके होने का अहसास हर कदम पर हमारे साथ चलता है।
इन यादों की खास बात ये है कि ये हमें वो सबक भी याद दिलाती हैं, जो हमने जीवन की राह में सीखे। मासूमियत से भरा बचपन, परिवार के साथ बिताया ख़ास दिन या दोस्तों के साथ बिताया कोई बेपरवाह समय, या फिर किसी अपने के जाने का दर्द, हर याद अपने साथ एक कहानी लाती है, और हर कहानी अपने साथ एक सबक। ये छोटी-छोटी यादें ही हमें वो ताकत देती हैं, जो मुश्किल वक्त में हमें संभालती हैं। जब भविष्य का बोझ कंधों पर भारी पड़ने लगता है, तो ये यादें एक हल्की-सी ठंडी हवा की तरह आकर मन को सुकून देती हैं।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि हम इन यादों को कितना संजोकर रखते हैं? आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम नए अनुभव तो बनाते हैं, पर पुराने को सहेजने का वक्त शायद ही निकाल पाते हैं। एक वक्त था जब लोग अपने एल्बम को बड़े जतन से सजाते थे, हर तस्वीर को जगह देते, उसके पीछे तारीख और छोटी-सी याद लिखते। आज डिजिटल दुनिया में तस्वीरें तो हज़ारों हैं, पर उनमें वो एहसास कहीं खो-सा गया है। हमें फिर से उस पुराने तरीके को अपनाना चाहिए, न सिर्फ तस्वीरों को, बल्कि उन पलों को भी सहेजना चाहिए, जो हमारे मन के किसी कोने में दबे हुए हैं।
सच कहूँ तो यादों के एल्बम की एक ख़ास बात ये है कि ये कभी पूरी नहीं होती। हर दिन, हर पल, इसमें कुछ नया जुड़ता जाता है। कल जो आज है, वो कल एक याद बन जाएगा। इसलिए इन पलों को जीना, इन्हें महसूस करना, और फिर इन्हें अपने मन के किसी कोने में संभालकर रखना—यही तो जीवन का असली मज़ा है। तो अगली बार जब आप अपने मन की सफाई करें, तो थोड़ा वक्त निकालिए, बैठिए चुपचाप, और अपने इस यादों के एल्बम को पलटिए। शायद कोई पुरानी याद आपको फिर से हंसा दे, या कोई आंसू आपको फिर से अपने भीतर की गहराई से मिला दे।
ग्रामीण महिलाएं देश की रीढ़ - वे सशक्त तो देश सशक्त
24 Jul, 2025 07:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्रामीण महिलाएं देश की रीढ़ - वे सशक्त तो देश सशक्त
विनीत श्रीवास्तव
संपादक
ग्रामीण महिलाओं की ताकत, संघर्ष और सफलता को प्रेरित करने वाले अनेक पल आज देश में मौजूद हैं। ये पल ग्रामीण महिलाओं के साहस, दृढ़ संकल्प और उनके योगदान को सम्मान देते हैं ग्रामीण भारत में निवास करने वाली महिलाओं की प्रगति और सशक्तिकरण की एक से बढ़कर एक प्रेरणादायक सच्ची कहानियां आज मौजूद हैं। पारंपरिक रूप से पिछड़े और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से भरे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अब अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए आगे बढ़ रही हैं। यह परिवर्तन शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक समानता के क्षेत्रों में अब देखा जा सकता है। सही बात तो यह है कि ग्रामीण महिलाएं देश की रीढ़ हैं। उन्हें सशक्त बनाना, देश को सशक्त बनाना है। जिसे आज हम साकार होते हुए देख रहे हैं आज ग्रामीण महिला उद्यमी ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर अपने छोटे व्यवसाय, उद्योग या कौशल के माध्यम से आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं। ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवार की आय बढानें में मदद कर रही हैं, बल्कि समुदाय और देश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। ग्रामीण महिला उद्यमिता ने हाल के वर्षों में तेजी से विकास किया है, जिसमें सरकारी योजनाओं, गैर-सरकारी संगठनों और तकनीकी सहायता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महिलाओं की सफलता की कहानियां हमें यह सिखाती हैं कि सही मार्गदर्शन और संसाधनों के साथ ग्रामीण महिलाएं किसी भी चुनौती का सामना कर सकती हैं और सफलता प्राप्त कर सकती हैं।
दरअसल महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है। अगले अंक (पत्रिका का मार्च के अंक) के प्रकाशन से पहले महिला दिवस निकल चुका होगा इसलिए आज महिलाओं के सम्मान में लिखना तो बनता है यह दिन महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों को सम्मान देने और लैंगिक समानता की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए समर्पित है। यह दिन महिलाओं के अधिकारों, सशक्तिकरण और उनके योगदान को मानने का अवसर प्रदान करता है। और फिर हमारा देश तो ग्रामीण क्षेत्रों में निवास कर रही महिलाओं की ओर सफलता के लिए देख रहा है ऐसें में हम आज ग्रामीण महिलाओं के सम्मान की बात नहीं करें तो किसकी बात करें। दरअसल महिला दिवस न केवल एक उत्सव या दिन है, बल्कि यह एक आंदोलन है जो लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम करता है । यह दिन हमें याद दिलाता है कि महिलाएं समाज की रीढ़ हैं और उनके बिना विकास असंभव है।
ग्रामीण महिलाओं के बढ़ते कदम को आंकड़ों से स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक स्वतंत्रता, और राजनीतिक भागीदारी के क्षेत्रों में उनकी प्रगति ने न केवल उनके जीवन को बेहतर बनाया है, बल्कि पूरे समाज और देश के विकास में योगदान दिया है। यह प्रगति ग्रामीण भारत के भविष्य के लिए एक उज्ज्वल संकेत है। ग्रामीण महिलाओं के बढ़ते कदम को आंकड़ों के माध्यम से समझना उनकी प्रगति और सशक्तिकरण की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करता है। भारत सरकार, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, और विभिन्न शोध संस्थानों द्वारा जारी आंकड़े ग्रामीण महिलाओं की स्थिति में सुधार और उनकी प्रगति को दर्शाते हैं। यहां कुछ प्रमुख आंकड़े और तथ्य आपके सामने रख रहे हैं।
v राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अनुसार देश में आज 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं।
v वही 2023 तक, भारत में लगभग 85 लाख स्वयं सहायता समूह हैं, जिनमें अधिकांश सदस्य ग्रामीण महिलाएं हैं। इन समूहों ने 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण प्राप्त किया है, जिससे उन्हें छोटे व्यवसाय शुरू करने में मदद मिली है।
v एएसईआर 2022 रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के स्कूल नामांकन दर में वृद्धि हुई है, और 15-16 वर्ष की आयु की 90% से अधिक लड़कियां स्कूल में नामांकित हैं।
v महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत, 55% से अधिक कार्यबल महिलाएं हैं, जो ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कर रहा है।
v कौशल विकास मिशन के तहत, 2015 से 2023 के बीच, 50 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को विभिन्न कौशल प्रशिक्षण प्रदान किए गए हैं।
v राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21) के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव की दर 81% हो गई है, जो महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार को दर्शाता है।
v आंगनवाड़ी सेवाओं के माध्यम से, 8 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं और बच्चे पोषण सहायता प्राप्त कर रहे हैं।
v 2023 तक, माइक्रोफाइनेंस संस्थानों ने 30 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को छोटे ऋण प्रदान किए हैं।
v 10 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं अब अपने छोटे व्यवसाय चला रही हैं, जैसे कि हस्तशिल्प, कृषि, और डेयरी उत्पादन।
v जन धन योजना के माध्यम से, 20 करोड़ से अधिक महिलाओं ने बैंक खाते खोले हैं, जिससे उनकी वित्तीय समावेशन में वृद्धि हुई है।
ग्रामीण भारत में महिलाओं की प्रगति और सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक कहानी है। पारंपरिक रूप से पिछड़े और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से भरे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अब अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए आगे बढ़ रही हैं। यह परिवर्तन शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक स्वतंत्रता, और सामाजिक समानता के क्षेत्रों में देखा जा सकता है। ग्रामीण महिलाओं के बढ़ते कदम न केवल उनके जीवन को बेहतर बना रहे हैं बल्कि पूरे समाज और देश के विकास में योगदान दे रहे हैं। यह प्रगति ग्रामीण भारत के भविष्य के लिए एक उज्ज्वल संकेत है। ग्रामीण महिला सशक्तिकरण न केवल महिलाओं के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए फायदेमंद है। यह ग्रामीण विकास और राष्ट्रीय प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्रामीण महिला सशक्तिकरण ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की प्रक्रिया है। यह उन्हें अपने जीवन के निर्णय लेने, आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने, और समाज में समान अधिकार प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। भारत सरकार और विभिन्न गैर-सरकारी संगठन ने इस दिशा में कई योजनाएं और कार्यक्रम शुरू किए हैं।
अंत में इतना ही कहूँगा की विकसित ग्रामीण महिलाएं, विकसित समाज और विकसित राष्ट्र की नींव हैं। जिसे हमें अब नई नई उच्चाईयों पर देखने की आदत में शामिल कर लेना चाहियें।
राशिफल 19 मई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
ऑडिटोरियम भवन में आयोजित हुआ जनसमस्या निवारण शिविर
प्रशासन की त्वरित पहल से ओरंगा में दूर हुआ जल संकट, 100 से अधिक ग्रामीणों को मिला स्वच्छ पेयजल
आजीविका मिशन अंतर्गत योजनाओं का वित्तीय प्रबंधन करें बेहतर : मंत्री पटेल
जम्मू-कश्मीर में नशे का बढ़ता कहर, लाखों युवा ड्रग्स की चपेट में
बिजली बिलों की वसूली की शुरूआत बड़े लोगों से करें : ऊर्जा मंत्री तोमर
खनिज माफियाओं पर प्रशासन का शिकंजा, अवैध रेत और मिट्टी ईंट परिवहन पर बड़ी कार्रवाई
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सल उन्मूलन अभियान में उत्कृष्ट योगदान हेतु डीजीपी कैलाश मकवाणा, वरिष्ठ अधिकारियों एवं हॉक फोर्स के जवानों को किया सम्मानित
स्लीपर सेल बिछाने आया आतंकी बोला- कश्मीर देखकर बदल गए हालात
