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योगी सरकार का ऐलान — विरोध के बाद वेतन वृद्धि, जानें नया न्यूनतम सैलरी स्ट्रक्चर
14 Apr, 2026 10:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Yogi Government: उत्तर प्रदेश नोएडा में सोमवार को निजी कंपनी के कर्मचारियों का प्रदर्शन उग्र हो गया और इस दौरान काफी तोड़फोड़ हुई. गुस्साई भीड़ ने कुछ गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया. जिसके बाद बवाल मच गया. हालांकि सरकार ने मामले पर एक्शन लिया और देर रात न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का आदेश दिया. सरकार के अनुसार, बढ़ाई गई न्यूनतम सैलरी का आदेश 1 अप्रैल 2026 से ही लागू होगा. सरकार ने तात्कालिक फैसला लेकर स्थाई समाधान की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सरकार के इस फैसले से अलग-अलग श्रेणियों में अधिकतम 3,000 रुपए तक की बढ़ोत्तरी हुई है. जानें सरकार ने क्या आदेश दिए.
यूपी सरकार ने न्यूनतम सैलरी बढ़ाने के आदेश के साथ ही सोशल मीडिया पर चल रही झूठी खबरों का भी खंडन किया है. दरअसल, सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 20,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है. यह खबर काफी तेजी से फैलने लगी थी, जिसको लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह से झूठी और मनगढ़ंत सूचना है. इस पर ध्यान न दें. इसके साथ ही सरकार ने अपील की है कि केवल आधिकारिक सूचना स्त्रोतों पर ही विश्वास करें.
जानें क्या है न्यूनतम सैलरी स्ट्रक्चर?
अकुशल श्रमिक: ₹11,313.65 प्रति माह (दैनिक: ₹435.14)
अर्धकुशल श्रमिक: ₹12,446 प्रति माह (दैनिक: ₹478.69)
कुशल श्रमिक: ₹13,940.37 प्रति माह (दैनिक: ₹536.16)
महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही
योगी सरकार ने यह फैसला वर्तमान आर्थिक परिस्थिति और श्रमिकों की मांगों को देखते हुए लिया है. जिसके अनुसार, अगले माह एक वेज बोर्ड का गठन किया जाएगा. इसके साथ ही सरकार ने नियोक्ताओं से अपील की है कि वे श्रमिकों को नियमानुसार वेतन, ओवरटाइम भुगतान, साप्ताहिक अवकाश और बोनस देना सुनिश्चित करें. इसके साथ ही महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता देने की बात कही है.
बड़ा विकास कदम! पीएम Narendra Modi का दौरा Dehradun में — दून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर का होगा शुभारंभ
14 Apr, 2026 08:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली को 11,963 करोड़ रुपये की लागत से बने दून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर की सौगात देंगे। इस मौके पर प्रधानमंत्री देहरादून में 12 किलोमीटर लंबा रोड शो भी करेंगे और मां डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद जनसभा को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर देहरादून में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और कई जगहों पर यातायात रूट डायवर्ट किया गया है। दून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बीच यात्रा आसान और तेज हो जाएगी। इस परियोजना की कुल लागत करीब 11,963 करोड़ रुपये बताई जा रही है। माना जा रहा है कि इस कॉरिडोर से तीनों राज्यों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम पर डालें नजर
प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम सुबह करीब 10:30 बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचने से शुरू होगा। इसके बाद वे हेलिकॉप्टर से सहारनपुर के गणेशपुर हेलीपैड पहुंचेंगे। यहां से वे एलिवेटेड कॉरिडोर के व्यू प्वाइंट का निरीक्षण करेंगे, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ उनका स्वागत किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री एशिया के सबसे लंबे एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर से होते हुए कार से मां डाट काली मंदिर पहुंचेंगे। इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ मौजूद रह सकते हैं। डाट काली मंदिर में प्रधानमंत्री करीब 10 मिनट तक पूजा-अर्चना करेंगे। यहां उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद मंदिर से शहीद जसवंत सिंह मैदान तक प्रधानमंत्री का 12 किलोमीटर लंबा रोड शो निकलेगा। रोड शो के दौरान रास्ते में कई जगहों पर भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय लोग फूल बरसाकर उनका स्वागत करेंगे।
12:30 बजे प्रधानमंत्री जनसभा स्थल पहुंचेंगे
दोपहर करीब 12:30 बजे प्रधानमंत्री जनसभा स्थल पहुंचेंगे, जहां से वे दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे को जनता को समर्पित करेंगे और सभा को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देख सकें।
प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर देहरादून में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शहर के कई हिस्सों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तैनात की गई हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई जगहों पर यातायात का रूट बदला गया है और रैली में आने वाली बसों की पार्किंग भी दूर रखी गई है। पुलिस ने शहर के होटल और गेस्ट हाउस में ठहरे लोगों का भी सत्यापन किया है।
वन विभाग ने ‘गुलेल टीम’ तैनात की
वन विभाग ने भी कार्यक्रम के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए खास व्यवस्था की है। मां डाट काली मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में बंदर होने के कारण वन विभाग ने ‘गुलेल टीम’ तैनात की है। वनकर्मी गुलेल की मदद से बंदरों को सड़क से दूर रखेंगे ताकि प्रधानमंत्री के काफिले या कार्यक्रम में कोई बाधा न आए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे को राज्य के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे बनने से उत्तराखंड में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही राज्य की कनेक्टिविटी भी काफी बेहतर होगी। प्रधानमंत्री का यह दौरा उत्तराखंड के विकास के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
धार्मिक तैयारियां शुरू: मद्महेश्वर और तुंगनाथ के कपाट खुलने की तिथि कल तय, डीएम रहेंगे मौजूद
13 Apr, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रुद्रप्रयाग: द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर एवं तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि कल यानी बैसाखी पर्व के पावन अवसर पर घोषित की जाएगी. इसी दिन चल विग्रह उत्सव डोलियों के शीतकालीन गद्दी स्थलों से धाम प्रस्थान का शुभ मुहूर्त भी निकाला जाएगा.
हर साल बैसाखी के दिन निकाली जाती है तिथियां: धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, हर साल बैसाखी के दिन विद्वान आचार्यों और तीर्थ पुरोहितों की उपस्थिति में पंचांग का गहन अध्ययन कर कपाट उद्घाटन की तिथियां निर्धारित की जाती हैं. इस अवसर पर दोनों शीतकालीन गद्दीस्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है.
भगवान शिव की मध्य भाग की होती है पूजा: बता दें कि मद्महेश्वर या मध्यमहेश्वर धाम में भगवान शिव के मध्य भाग की पूजा होती है. इसलिए इस धाम को मद्महेश्वर या मध्यमहेश्वर कहा जाता है. इसके अलावा भगवान मद्महेश्वर को केदारघाटी समेत मनसूना समेत तुंगनाथ घाटी के लोग न्याय के देवता के रूप में भी पूजते हैं. भले ही मंदिर में भगवान शिव के मध्य भाग की पूजा होती है, लेकिन भगवान मद्महेश्वर की स्थानीय लोग न्याय के देवता के रूप में भी पूजा अर्चना करते हैं.
"द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट खुलने की तिथि एवं चल विग्रह उत्सव डोली के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर (ऊखीमठ) से धाम के लिए प्रस्थान का शुभ मुहूर्त बैसाखी पर्व पर पंचांग गणना के आधार पर घोषित किया जाएगा. यह घोषणा मंदिर समिति के पदाधिकारियों, विद्वान आचार्यों एवं हक-हकूकधारियों की उपस्थिति में की जाएगी. तिथि घोषणा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं."- डीएस भुजवाण, प्रभारी अधिकारी, ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ
भगवान शिव के भुजाओं की होती है पूजा: बता दें कि हिमालय में सबसे ऊंचाई और चंद्रशिला की तलहटी में विराजमान तुंगनाथ धाम पंच केदारों में तृतीय केदार है. यहां भगवान शिव के भुजाओं की पूजा होती है. तुंगनाथ मंदिर की ऊंचाई समुद्र तल से 3,680 मीटर है. जो 1,000 साल से भी ज्यादा पुराना माना जाता है. तुंगनाथ मंदिर से ठीक एक किमी ऊपर चंद्रशिला शिखर मौजूद है. यहां पर गंगा मैया का मंदिर भी है. यहां से रुद्रप्रयाग और चमोली की हिम श्रृंखलाओं का दीदार होता है.
"तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट खुलने की तिथि एवं चल विग्रह उत्सव डोली के शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ से धाम के लिए प्रस्थान का मुहूर्त भी बैसाखी पर्व पर ही पंचांग गणना के अनुसार घोषित किया जाएगा. इस दौरान विद्वान आचार्यों एवं हक-हकूकधारियों की मौजूदगी रहेगी."- बलवीर सिंह नेगी, प्रबंधक, तुंगनाथ धाम
डिप्टी स्पीकर पद खाली रहने पर विपक्ष का सरकार पर निशाना
13 Apr, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली|लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद नौ साल से खाली है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने इसी बात पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने सरकार पर संसद का मजाक बनाने का आरोप लगाया है। ओ ब्रायन का कहना है कि सरकार संसदीय कामकाज को गंभीरता से नहीं ले रही है और देश के सबसे बड़े विधायी निकाय के संवैधानिक पदों की गरिमा का ध्यान नहीं रख रही है।
ओ ब्रायन ने सरकार के दोहरे मानदंड पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीधे-सीधे कहा, लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद साल 2019 से खाली पड़ा है। मौजूदा सरकार ने इतने लंबे समय तक इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद को भरने की कोई कोशिश नहीं की है। वहीं दूसरी ओर, राज्यसभा के उपसभापति का पद सिर्फ दस दिन पहले खाली हुआ है, और इसे भरने के लिए भाजपा इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रही है? यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार अपनी राजनीतिक सुविधा और तात्कालिक लाभ के हिसाब से संसदीय प्रक्रियाओं को अपनाती है, न कि संवैधानिक दायित्वों और परंपराओं के तहत।
डेरेक ओ ब्रायन ने राज्यसभा उपसभापति चुनाव की तारीख पर आपत्ति जताई
सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने राज्यसभा उपसभापति चुनाव की प्रस्तावित तारीख पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने बताया कि भाजपा यह चुनाव 17 अप्रैल को करवाना चाहती है। उनके अनुसार, इस समय देश के कई हिस्सों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में सांसद अपने-अपने राज्यों में चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं। वे अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए अभियान चला रहे हैं, रैलियों में भाग ले रहे हैं और जनसभाएं कर रहे हैं।
ओ ब्रायन का तर्क है कि जब बड़ी संख्या में सांसद चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं, तब सदन में इस तरह का महत्वपूर्ण चुनाव कराना सरासर गलत है। इससे कई सांसद मतदान में हिस्सा नहीं ले पाएंगे, जिससे चुनाव की निष्पक्षता, वैधता और प्रतिनिधित्व पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को ‘शर्मनाक’ बताया है। उनके अनुसार, यह संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का सीधा अनादर है, जहां सभी निर्वाचित सदस्यों को महत्वपूर्ण चुनावों में भाग लेने का समान और उचित अवसर मिलना चाहिए।
संवैधानिक पदों की अहमियत और सरकार का दोहरा रवैया
लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद सदन के अध्यक्ष (स्पीकर) के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पद होता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 93 के तहत, लोकसभा को यथाशीघ्र अपने दो सदस्यों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में चुनने का प्रावधान है। यह पद स्पीकर की अनुपस्थिति में सदन की कार्यवाही का संचालन करता है, महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा कराता है और नियमों के तहत सदन की गरिमा बनाए रखता है। नौ साल से इस पद का खाली रहना न केवल संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी है, बल्कि यह संसदीय लोकतंत्र की मजबूती पर भी गहरा सवाल उठाता है। यह दर्शाता है कि संवैधानिक प्रक्रियाओं को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है।
इस लंबी रिक्ति ने विपक्ष को सरकार पर लगातार हमला करने का मौका दिया है। विपक्षी दल कई बार इस मुद्दे को संसद के अंदर और बाहर उठा चुके हैं। उनका आरोप है कि सरकार जानबूझकर इस पद को खाली रखे हुए है ताकि सदन में अपनी मनमानी चला सके और स्पीकर पर पड़ने वाले काम के दबाव को कम न होने दे, जिससे कहीं न कहीं सदन की निष्पक्षता प्रभावित होती है। इस पद के न होने से स्पीकर पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ता है और कई बार सदन की कार्यवाही में भी रुकावटें आने की आशंका रहती है। हालांकि, सरकार की तरफ से इस लंबी रिक्ति पर कोई संतोषजनक या स्पष्टीकरण अभी तक नहीं आया है, जिससे विपक्ष के आरोप और मजबूत होते दिख रहे हैं।
वहीं, राज्यसभा के उपसभापति का पद भी ऊपरी सदन में सभापति की अनुपस्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सुनिश्चित करता है कि विधायी कार्य बिना किसी बाधा के आगे बढ़े और सदन की कार्यवाही सुचारू रहे। दस दिन की रिक्ति पर चुनाव की जल्दबाजी और लोकसभा में नौ साल से चल रही रिक्ति पर चुप्पी, यह अंतर स्पष्ट रूप से सरकार के दोहरे रवैये को उजागर करता है। डेरेक ओ ब्रायन का यह आरोप कि सरकार ‘संसद का मजाक बना रही है’, इसी विरोधाभास और असमानता को दर्शाता है, जहां एक ही सरकार दो सदनों में अलग-अलग मानक अपना रही है।
महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों की लंबित नियुक्तियां गंभीर चिंता का विषय
संसदीय लोकतंत्र में ऐसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों का खाली रहना या उन्हें भरने में अत्यधिक देरी करना गंभीर चिंता का विषय है। यह दिखाता है कि सरकार किस तरह से संवैधानिक प्रावधानों, परंपराओं और संसदीय गरिमा को नजरअंदाज कर रही है। डेरेक ओ ब्रायन ने जो सवाल उठाए हैं, वे सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी के आरोप नहीं हैं, बल्कि ये भारतीय लोकतंत्र की नींव और उसकी कार्यप्रणाली से जुड़े मौलिक प्रश्न हैं। इन सवालों का जवाब और समाधान न केवल सरकार के लिए बल्कि भारतीय लोकतंत्र के भविष्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि संसदीय संस्थाओं में जनता का विश्वास बना रहे।
फिलहाल, तृणमूल कांग्रेस के सांसद ने केंद्र सरकार पर संसद के कामकाज को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोकसभा डिप्टी स्पीकर पद की नौ साल की रिक्ति और राज्यसभा उपसभापति चुनाव की जल्दबाजी को उन्होंने ‘शर्मनाक’ बताया है। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और इन महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों को लेकर आगे क्या कदम उठाती है, खासकर तब जब विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठा रहा है और इसे एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के तौर पर देख रहा है।
केदारनाथ यात्रा को लेकर प्रशासन अलर्ट, डीएम-एसपी ने मौके पर पहुंचकर परखी व्यवस्थाएं
13 Apr, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रुद्रप्रयाग: केदारनाथ धाम यात्रा 2026 को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है. इसी कड़ी में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा और पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर ने संयुक्त टीम के साथ केदारनाथ पहुंचकर व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया. साथ ही संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.
गौर हो कि विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 का आगाज 19 अप्रैल यानी अक्षय तृतीया के दिन से होने जा रहा है. इस दिन यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खोले जाएंगे. इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे. ऐसे में अब कपाट खुलने में गिनती भर के दिन रह गए हैं. यही वजह है कि तमाम व्यवस्थाएं जुटाने के साथ ही सभी तैयारियां मुकम्मल की जा रही है.
डीएम विशाल मिश्रा और एसपी निहारिका तोमर ने परखी तैयारियां
आज यानी 13 अप्रैल को डीएम विशाल मिश्रा और एसपी निहारिका तोमर केदारनाथ पहुंचे. जहां उन्होंने तैयारियों का जायजा लिया. इस दौरान डीएम मिश्रा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी मूलभूत सुविधाएं हर हाल में पूरी कर ली जाएं.
किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं की जाएगी बर्दाश्त: डीएम विशाल मिश्रा ने कहा कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है, इसलिए कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी. इस दौरान उन्होंने पैदल मार्ग का निरीक्षण कर यात्री सुविधाओं का भी जायजा लिया.
केदारनाथ में जमी है 4 से 5 फीट तक बर्फ
बता दें कि केदारनाथ में इस समय भारी बर्फबारी के कारण 4 से 5 फीट तक बर्फ जमी हुई है, जिसे हटाने का काम तेजी से जारी है. धाम में 60 से ज्यादा श्रमिक और ट्रेक रूट पर 70 से 75 मजदूर लगातार काम में जुटे हैं. पैदल मार्ग से बर्फ हटाने का काम लगभग पूरा हो चुका है और जल्द ही ट्रेक रूट का पुनर्निर्माण भी पूरा कर लिया जाएगा.
"यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा. इसके साथ ही आईटीबीपी के जवानों और अतिरिक्त सुरक्षा बल की भी तैनाती की जाएगी. आधुनिक तकनीक के जरिए सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी रखी जाएगी."- निहारिका तोमर, एसपी, रुद्रप्रयाग
तमाम विभागों के अधिकारी भी रहे मौजूद: वहीं, निरीक्षण के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे. डीएम विशाल मिश्रा ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए. ताकि, केदारनाथ यात्रा का संचालन सफलतापूर्वक और सुव्यवस्थित ढंग से किया जा सके.
श्रमिकों का उग्र प्रदर्शन, नोएडा में हिंसा—5 वाहन जलाए, दिल्ली पुलिस हाई अलर्ट पर
13 Apr, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/नोएडा। नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में श्रमिकों का उग्र प्रदर्शन अब कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन गया है। सोमवार सुबह शुरू हुआ उग्र प्रदर्शन दिन चढ़ने के साथ ही उग्र होता चला गया। देखते ही देखते वेतन बढ़ोतरी से लेकर अन्य मांगों के लिए सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की दो गाड़ियों समेत पांच वाहनों को आग के हवाले कर दिया। कई जगहों पर पत्थरबाजी की भी खबर है। इसी क्रम में अब दिल्ली पुलिस भी आशंका देखते हुए अलर्ट मोड में आ गई है। इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए सम्मानजनक मानदेय, सुरक्षित कार्य वातावरण और समय पर समस्याओं के समाधान के कड़े निर्देश दिए हैं।
जो कंपनी खुली मिली, वहां किया हमला
इस बीच नोएडा के फेस टू के हाजरी कंपलेक्स में जो भी फैक्ट्री आज खुली दिखी या संचालित मिली, उसमें तोड़फोड़ की गई। श्रमिकों के पीछे छुपे अराजक तत्वों ने ऐसी कंपनियों में घुसकर उत्पात मचाते हुए संपत्ति को क्षति पहुंचाया। इस बीच भाजपा नेता संजय बाली की फैक्ट्री भी चलती देख, श्रमिक उसमें अंदर घुस गए और तोड़फोड़ शुरू कर दी।
वेतन में सुधार की मांग पर प्रदर्शन
पुलिस सूत्रों के अनुसार, विभिन्न औद्योगिक इकाइयों से बड़ी संख्या में मजदूर लंबे समय से लंबित वेतन संशोधन की मांग को लेकर इकट्ठा हुए। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने नारेबाजी की। हालांकि, यह प्रदर्शन बाद में हिंसक हो गया और नोएडा के फेज-2 तथा सेक्टर-60 क्षेत्रों में आगजनी, तोड़फोड़ और पथराव की घटनाएं रिपोर्ट हुईं।
तीन साल बाद पकड़ी गई महिला आरोपी, पति को आत्महत्या के लिए उकसाने का गंभीर आरोप
13 Apr, 2026 01:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुरादाबाद: कानून के हाथ लंबे होते हैं, यह कहावत एक बार फिर सच साबित हुई है. मुरादाबाद पुलिस ने 3 साल से आंख-मिचौली खेल रही उस गुनाहगार पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने अपने ही सुहाग को जीते-जी नर्क दिखाया और अंततः उसे मौत को गले लगाने पर मजबूर कर दिया. मुरादाबाद के मझोला थाना क्षेत्र के चर्चित मोनू हत्याकांड (आत्महत्या के लिए उकसाने) की मुख्य आरोपी सोनिया अब जेल की सलाखों के पीछे है.
फरवरी 2023 में पति मोनू की मौत के बाद से ही सोनिया फरार थी. वह अपनी पहचान छिपाकर सहारनपुर के मंडी थाना इलाके के मातागढ़ (पुराना चिलकाना अड्डा) में रह रही थी. उसे लगा था कि वक्त के साथ पुलिस उसे भूल जाएगी, लेकिन मझोला पुलिस की टीम उसकी परछाईं की तरह पीछा कर रही थी. एसआई सतीश कुमार की टीम ने सटीक सूचना के आधार पर सहारनपुर में दबिश दी और सोनिया को उस वक्त दबोच लिया जब वह बेखौफ घूम रही थी.
घटनाक्रम 23 फरवरी 2023 की उस शाम का है, जिसने गांगन वाली मैनाठेर इलाके को दहला दिया था. 35 वर्षीय मोनू ने अपने ही घर में फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली थी. मोनू की मौत के बाद उसकी मां रामवती ने जो दर्द बयां किया, वह सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं.
मां का आरोप था कि सोनिया ने मोनू को शारीरिक और मानसिक रूप से इस कदर तोड़ा था कि वह अंदर से खत्म हो चुका था. सोनिया अकेले नहीं थी. इस साजिश में पड़ोस में रहने वाले संजय और विनोद भी शामिल थे. इन सबने मिलकर मोनू को प्रताड़ित किया, उसके साथ मारपीट की और उसे जान से मारने की धमकियां दीं.
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सोनिया और उसके साथियों ने मोनू के लिए हर दिन एक नई चुनौती खड़ी कर दी थी. गाली-गलौज और सरेआम अपमान मोनू की जिंदगी का हिस्सा बन चुका था. इसी मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर मोनू ने मौत को गले लगाना ही बेहतर समझा. इस मामले में पुलिस ने धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत मामला दर्ज किया था.
इस मामले में पुलिस पहले ही चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी, लेकिन मास्टरमाइंड पत्नी सोनिया पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई थी. 12 अप्रैल 2026 को सोनिया की गिरफ्तारी के बाद उसे मुरादाबाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है. यह गिरफ्तारी न केवल मोनू की आत्मा को शांति देगी, बल्कि उस बूढ़ी मां के लिए भी न्याय की किरण है, जिसने अपने जवान बेटे को एक सोची-समझी साजिश के तहत खो दिया था.
रथ यात्रा डेट को लेकर विवाद, जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और इस्कॉन आमने-सामने
13 Apr, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: ओडिशा स्थित पुरी जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इस्कॉन की ओर से निर्धारित तिथियों में रथ यात्रा और स्नान यात्रा न आयोजित करने को लेकर सख्त नाराजगी जाहिर की है. मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस्काॅन मनमाने तरीके से रथ यात्रा और स्नान यात्रा आयोजित करता है. सदियों पुरानी परंपरा का पालन नहीं करना श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहता करना है, जो किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने कहा कि इसकी जानकारी पीएम मोदी को भी दी गई है. अगर जरूत पड़ी तो कोर्ट का दरवाजा खड़खड़ाया जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी. गजपति महाराजा दिब्य सिंहदेव की अध्यक्षता में हुई बैठक में जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई गई.
जगन्नाथ मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस्काॅन द्वारा रथ यात्रा और स्नान यात्रा को निर्धारित धार्मिक तिथियों के अनुरूप नहीं आयोजित किया जाता है. सिंहदेव ने कहा कि ऐसी प्रथाओं से भगवान जगन्नाथ के लाखों भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं. उन्होंने कहा कि हमने पीएम को अवगत कराया है कि कैसे दुनिया भर में निर्धारित कैलेंडर से हटकर रथ यात्राएं आयोजित करके सदियों पुरानी परंपराओं की अवहेलना की जा रही है. मंदिर प्रशासन ने कहा कि अगर मामला नहीं सलझा तो हम कोर्ट भी जा सकते हैं. कानूनी कार्रवाई करना हमारा अंतिम विकल्प हो सकता है.
सिंहदेव के अनुसार इस्काॅन ने अक्टूबर 2025 में यह आश्वासन दिया था कि वह वैश्विक स्तर पर निर्धारित कैलेंडर से हटकर स्नान यात्रा और भारत में रथ यात्रा आयोजित करने से परहेज करेगा, लेकिन उसने इसका पालन नहीं किया. देव और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में दावा किया गया कि इस्काॅन ने शास्त्रों के नियमों से हटकर 79 स्थानों पर निर्धारित कैलेंडर से हटकर रथ यात्राएं और 10 स्नान यात्राएं आयोजित कीं.
देव ने कहा कि कोई भी व्यक्ति भगवान के जन्मदिवस को कैसे बदल सकता है, जिसे ‘ज्येष्ठ पूर्णिमा’ के दिन स्नान यात्रा के रूप में मनाया जाता है. उन्होंने कहा कि शास्त्र के अनुसार रथ यात्रा ‘आषाढ़ शुक्ल द्वितीया’ को ही मनाई जाए, हालांकि इससे जुड़े अनुष्ठान सात दिनों की अवधि के भीतर किए जा सकते हैं.
इस बीच, मंदिर प्रशासन ने 2026-27 के लिए त्योहारों का कैलेंडर जारी किया, जिसकी शुरुआत 14 अप्रैल को ‘महाविषुव संक्रांति’ से होगी. साथ ही, उन्होंने दुनिया भर में मौजूद जगन्नाथ मंदिरों से अपील की है कि वह कम से कम मुख्य वार्षिक त्योहारों को निर्धारित तिथियों के अनुसार ही मनाएं.
दर्दनाक यमुना हादसा: एक और शव मिला, नाव दुर्घटना में मौत का आंकड़ा 15 तक पहुंचा
13 Apr, 2026 12:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मथुरा। मथुरा के वृंदावन क्षेत्र में 10 अप्रैल को यमुना नदी में हुई नाव दुर्घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। सोमवार को एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस के संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान एक और शव बरामद किया गया, जिसकी पहचान पंजाब निवासी यश भल्ला उर्फ युवराज के रूप में हुई है। अधिकारियों के अनुसार यश भल्ला उन 16 लोगों में शामिल थे, जो नाव पलटने के बाद यमुना के तेज बहाव में लापता हो गए थे। उनका शव केशीघाट के निकट देवराह बाबा घाट के पास झाड़ियों में फंसा मिला। लंबे समय तक पानी में रहने के कारण शव क्षत-विक्षत अवस्था में था।
सोमवार को सर्च अभियान के दौरान अब तक दो शव बरामद किए गए हैं, जिनमें एक महिला मोनिका तथा दूसरा यश भल्ला का शव शामिल है। इन बरामदगियों के साथ हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रशासन के अनुसार नाव हादसे में कुल 16 लोग लापता हुए थे। अब तक 15 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि एक व्यक्ति की तलाश अभी भी जारी है। अंतिम लापता व्यक्ति की खोज के लिए बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं।
एनडीआरएफ, जल पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें नावों तथा आधुनिक ड्रोन कैमरों की मदद से यमुना नदी के विभिन्न हिस्सों में तलाशी अभियान चला रही हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अंतिम व्यक्ति का पता चलने तक अभियान जारी रहेगा।
नोएडा में तनाव: प्रदर्शन उग्र हुआ, पत्थरबाजी और आगजनी से हालात बिगड़े, पुलिस ने संभाला मोर्चा
13 Apr, 2026 12:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/नोएडा: सैलरी में बढ़ोतरी की मांग लिए नोएडा फेज 2 में कर्मचारियों का हंगामा देखने को मिल रहा है. नोएडा के फेज़ 2 में गाड़ियों और प्रॉपर्टी में तोड़फोड़ की गई और पत्थर फेंके गए हैं. तोड़फोड़ और गाड़ियों में आगजनी जैसी तस्वीरें भी सामने आ रही है.
जहां एक कंपनी के कर्मचारी सैलरी बढ़ाने की अपनी मांग को लेकर प्रोटेस्ट करने के लिए इकट्ठा हुए थे. हालात को कंट्रोल करने के लिए यहां भारी पुलिस तैनात की गई है. तस्वीरों में देखा जा सकता है कि मौके पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. सड़कों पर हजारों की तादाद में कर्मचारी नजर आ रहे हैं. इलाके में भारी भीड़ होने के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं.
प्रदर्शनकारी का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से अनसुनी की जा रही हैं. उन्हें मिलने वाला वेतन 10,000 से 11,000 के बीच है, जिसमें गुजारा करना नामुमकिन है. उनकी मांग है कि इन-हैंड सैलरी कम से कम 20,000 की जाए. मजदूरों ने आरोप लगाया कि 16-16 घंटे काम करने के बाद भी उन्हें उचित लाभ नहीं मिल रहा है. प्रशासन केवल 'माँगें मान ली गई हैं' का आश्वासन दे रहा है, लेकिन धरातल पर कुछ भी लागू नहीं हुआ है.
नोएडा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और मजदूरों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं. गोल चक्कर पर भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी (PAC) की तैनाती की गई है. पुलिस ने यातायात को डायवर्ट किया है, लेकिन मुख्य मार्ग जाम होने से आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
प्रशासन ने की श्रमिकों से अपील
बता दें कि रविवार को ही गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के श्रमिकों के हित में कई बड़े फैसले लिए हैं. साथ ही डीएम मेधा रूपम ने श्रमिकों से एक बेहद महत्वपूर्ण अपील की है. दरअसल, पिछले 2-3 दिनों से औद्योगिक इकाइयों के साथ चली लंबी बैठकों के बाद, प्रशासन ने यह निर्णय लिए हैं. श्रमिकों से अपील करते हुए डीएम ने स्पष्ट किया है कि जनपद की सभी औद्योगिक इकाइयों में नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा
डीएम ने कहा कि ओवरटाइम का डबल भुगतान, यानी अब से किसी भी श्रमिक को ओवरटाइम करने पर उसकी सामान्य दर से दुगना भुगतान किया जाएगा. इसमें किसी भी प्रकार की कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी. हर श्रमिक को साप्ताहिक छुट्टी मिलना अनिवार्य है. यदि किसी स्थिति में रविवार को काम लिया जाता है, तो उसका भी डबल पेमेंट करना होगा. सभी श्रमिकों के बैंक खातों में बोनस का भुगतान 30 नवंबर तक अनिवार्य रूप से कर दिया जाएगा. वेतन महीने की 10 तारीख तक एकमुश्त मिलना और हर श्रमिकों को उसकी सेलरी सिल्प देना अनिवार्य होगा.
दर्दनाक सड़क हादसा: पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं पर ट्रक चढ़ा, 7 लोगों की जान गई
13 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Road Accident: गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले में सोमवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हो गया। यहां लखतर-विरमगाम हाईवे पर श्रद्धालुओं का एक समूह पैदल यात्रा कर रहा था। इसी दौरान तेज रफ्तार से आए एक डंपर ट्रक ने उन्हें पीछे से कुचल दिया, जिससे मौके पर ही सात लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। यह हादसा रात करीब 1:20 बजे लखतर के पास छराड और भास्करपरा गांवों के बीच हुआ। राजकोट जिले के गढका गांव से लगभग 700 श्रद्धालुओं का दल मंदिर दर्शन और ध्वज फहराने की रस्म के लिए विरमगाम जा रहा था। इसी दौरान यह दुखद घटना हो गई।
हादसा इतना भीषण कि शवों के उड़े चिथड़े
मृतकों में पांच महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं, जो सभी एक ही परिवार से जुड़े थे। मृतकों में मासाभाई मुंधवा, जालूबेन मुंधवा, रानीबेन लांबारिया और वाजीबेन मुंधवा के नाम सामने आए हैं। हादसे की टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कई शव सड़क पर दूर-दूर तक बिखर गए। घटना में कम से कम चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुल 10 से 12 लोग इस दुर्घटना की चपेट में आए हो सकते हैं। घायल लोगों का इलाज जारी है और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है।
ट्रक ने बिना धीमा किए लोगों को कुचला
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रक तेज रफ्तार में था और उसने ब्रेक लगाने की कोशिश भी नहीं की। एक व्यक्ति ने बताया कि श्रद्धालु सड़क के किनारे चल रहे थे तभी पीछे से आए ट्रक ने बिना धीमा किए उन्हें कुचल दिया। पीड़ित परिवार के एक सदस्य ने बताया, सुबह 8 बजे ध्वज फहराने का मुहूर्त था, इसलिए हम रात में भी पैदल चल रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि करीब 1:20 बजे हादसा हुआ। इस दौरान नौ लोग ट्रक की चपेट में आए, जिनमें सात की मौत हो गई। इनमें मेरे परिवार के सदस्य भी शामिल थे।
ट्रक चालक हुआ मौके से फरार
घटना के तुरंत बाद पुलिस और 108 एंबुलेंस टीम मौके पर पहुंची और सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं। पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, जो हादसे के बाद मौके से फरार हो गया। उसकी तलाश जारी है। स्थानीय विधायक पीके परमार ने भी घटनास्थल का दौरा किया और बताया कि श्रद्धालु पूजा के बाद विरमगाम और फिर मेरा गांव की ओर जा रहे थे। इस हाईवे पर हाल के महीनों में कई हादसे हो चुके हैं, जिससे स्थानीय लोग सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण की मांग कर रहे हैं।
बड़ा खुलासा: श्रीनगर में लश्कर मॉड्यूल पर कार्रवाई, नकली दस्तावेजों के जरिए देशभर में नेटवर्क का विस्तार
13 Apr, 2026 10:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस (J&K Police) ने बड़े ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के एक अंतरराज्यीय नेटवर्क (interstate network) का भंडाफोड़ किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि यह मॉड्यूल जाली पहचान पत्र और फर्जी दस्तावेजों के जरिए न सिर्फ जम्मू-कश्मीर, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी आतंकी गतिविधियों का जाल फैला रहा था।
फर्जी दस्तावेजों से आतंकी नेटवर्क को सहारा
पूछताछ में सामने आया कि गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए लोगों ने आतंकियों के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी जैसे दस्तावेज तैयार कराए। इनकी मदद से आतंकियों को ठिकाना, आवाजाही और अन्य लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराया जाता था। श्रीनगर पुलिस ने इस इनपुट को तुरंत केंद्रीय एजेंसियों और अन्य राज्यों की पुलिस के साथ साझा किया है।
‘उमर उर्फ खरगोश’ की विदेश भागने की कहानी
जांच में यह भी सामने आया कि “उमर उर्फ खरगोश” नाम का आतंकी जाली पासपोर्ट के जरिए इंडोनेशिया भाग गया था। आशंका है कि वह अब किसी खाड़ी देश में छिपा हुआ है। बताया गया कि वह पाकिस्तान के कराची का रहने वाला है और 2012 के बाद भारत में घुसपैठ कर आया था। 2024 में जयपुर से फर्जी पासपोर्ट बनवाकर देश छोड़ने में सफल रहा।
16 साल से फरार आतंकी भी गिरफ्तार
7 अप्रैल को किए गए ऑपरेशन में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें पाकिस्तानी आतंकी अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा और उस्मान उर्फ खुबैब भी शामिल हैं। अब्दुल्ला पिछले 16 साल से फरार था और जम्मू-कश्मीर के बाहर छिपकर रह रहा था। पूछताछ में उसने राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में अपनी गतिविधियों का खुलासा किया।
डीजीपी की निगरानी में चला ऑपरेशन
31 मार्च से शुरू हुए इस ऑपरेशन की निगरानी नलिन प्रभात कर रहे थे। जांच के दौरान न सिर्फ आतंकी नेटवर्क, बल्कि उसकी फंडिंग और वित्तीय पैटर्न का भी खुलासा हुआ है।
स्थानीय सहयोगियों की अहम भूमिका
गिरफ्तार पांच आरोपियों में तीन श्रीनगर के निवासी—मोहम्मद नकीब भट, आदिल राशिद भट और गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ मामा—शामिल हैं। इन पर आतंकियों को पनाह देने, भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के आरोप हैं।
पूछताछ में नकीब भट ने कबूल किया कि वह लश्कर से जुड़ा हुआ था और उसने आदिल से हथियार व गोला-बारूद हासिल किए थे। उसके खुलासों के बाद पुलिस अन्य आरोपियों तक पहुंची।
ठिकाने ध्वस्त, जांच जारी
गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर श्रीनगर और आसपास के जंगलों में बने आतंकियों के कई ठिकानों को ध्वस्त किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस नेटवर्क की देशभर में फैली कड़ियों को जोड़ने और खत्म करने में जुटी हैं।
रक्षा क्षमता में बड़ा इजाफा: भारत बना रहा 1500 किलो का प्रिसिजन बम
13 Apr, 2026 09:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत अपनी युद्धक क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। रूस-यूक्रेन और ईरान जंग ने दुनिया की तस्वीर बदल दी है। हर देश अपने पास ज्यादा से ज्यादा विनाशक हथियार जमा करने में जुटे हैं। फाइटर जेट, मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम, घातक बम, ड्रोन समेत कई वेपन सिस्टम पर फोकस किया जा रहा है। भारत भी पीछे नहीं है। स्वदेशी तकनीक से नेक्स्ट जेनरेशन फाइटर जेट डेवलप करने के लिए एएमसीए प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। अग्नि और ब्रह्मोस के बाद भारत के डिफेंस साइंटिस्ट अन्य घातक और उन्नत मिसाइल बनाने में जुटे हैं। कुछ मिसाइल प्रोजेक्ट को पूरा भी किया जा चुका है, तो कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक स्टील्थ ड्रोन सिस्टम के क्षेत्र में भारत ने बड़ी सफलता हासिल कर घातक यूसीएवी ड्रोन तैयार किया है। यह कॉम्बैट ड्रोन रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर टारगेट पर सवार करता है। इसके अलावा एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र लॉन्च किया है। इसके अलावा भारत एक और सेक्टर में काम कर रहा है – प्रिसिजन बम। कुछ सप्ताह पहले अग्नि सीरीज के तहत बंकर बस्टर बम डेवलप करने की बात सामने आई थी।
अब भारत प्रिसिजन गाइडेड ग्लाइड बम हासिल करने में जुटा है। यह बम कितना घातक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका वजन 1500 किलोग्राम है। 1500 किलो बारूद के साथ यदि किसी टरगेट पर अटैक किया जाएगा तो उसकी स्थिति क्या होगी, इसका बस अंदाजा ही लगाया जा सकता है। इंडियन एयरफोर्स अपनी लंबी दूरी की सटीक हमलावर क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठा सकती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत रूसी मूल के यूपीएबी-1500 कैटेगरी के प्रिसिजन-गाइडेड ग्लाइड बम को अपने एसयू-30एमकेआई लड़ाकू विमान बेड़े के साथ इंटीग्रेट करने पर विचार कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य खास तौर पर किलेबंद और हाई-वैल्यू वाले टारगेट पर सुरक्षित दूरी से सटीक हमले करने की क्षमता को बढ़ाना है। यूपीएबी-1500 एक भारी ग्लाइड बम है, जिसका वजन करीब 1500 किलोग्राम होता है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे लक्ष्य से काफी दूरी पर छोड़ा जा सके, जिससे हमला करने वाला विमान दुश्मन के एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम की पहुंच से बाहर रह सके।
यह बम विशेष रूप से मजबूत और संरक्षित ठिकानों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। इसमें हाई-एक्सप्लोसिव वारहेड लगाया जाता है, जो बंकर, किलेबंद सैन्य ठिकाने, एयरबेस इंफ्रास्ट्रक्चर और अहम लॉजिस्टिक केंद्रों को भेदने में सक्षम है। इस तरह के लक्ष्यों पर सटीक और प्रभावी हमले के लिए यह हथियार उपयोगी साबित हो सकता है। यह चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उच्च सटीकता बनाए रखता है. इसकी सर्कुलर एरर प्रॉबेबल सिंगल-डिजिट मीटर रेंज में बताई जाती है, जो इसे अपनी श्रेणी के अन्य एडवांस ग्लाइड बमों के बराबर खड़ा करती है।
अमरनाथ यात्रा 2026: सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और सुविधाओं में बड़ा बदलाव, जानें क्या है नया
13 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Aamarnath Yatra 2026: जम्मू-कश्मीर में होने वाली पवित्र अमरनाथ यात्रा की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है. उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बताया कि इस साल यह यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी. कुल 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के लिए पहला जत्था जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से रवाना होगा. अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए श्रद्धालु 15 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे.
LG सिन्हा के मुताबिक 13 से 70 साल तक के श्रद्धालु यात्रा में शामिल हो सकते हैं. गुफा में पहली पूजा 19 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन होगी. यात्रा के लिए इस बार भी दो प्रमुख मार्ग खुले रहेंगे. अनंतनाग जिले से पारंपरिक पहलगाम मार्ग (करीब 48 किमी) और गांदरबल जिले से छोटा लेकिन कठिन बालटाल मार्ग (करीब 14 किमी) का होगा.
कहां-कहां करा सकेंगे रजिस्ट्रेशन?
रजिस्ट्रेशन की सुविधा देशभर में लगभग 556 बैंक शाखाओं में उपलब्ध रहेगी. इसके अलावा श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकेगा. रजिस्ट्रेशन फॉर्म State Bank of India, Punjab National Bank, ICICI Bank, Axis Bank और Yes Bank की शाखाओं में मिलेंगे.
सुरक्षा के रहेंगे पुख्ता इंतजाम
इस बार यात्रा को और सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए कई नए कदम उठाए गए हैं. व्यवस्थाओं में लगभग 25% तक बढ़ोतरी की गई है.यात्रियों की निगरानी और सुरक्षा के लिए RFID कार्ड अनिवार्य किए गए हैं. साथ ही ग्रुप एक्सीडेंटल इंश्योरेंस कवर को बढ़ाकर 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये कर दिया गया है. यात्रा में इस्तेमाल होने वाले टट्टुओं की मृत्यु होने पर 50,000 रुपये का मुआवजा भी दिया जाएगा.
यात्री इन बातों का रखें ध्यान
यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा. उनके पास मेडिकल सर्टिफिकेट, आधार कर्ड, फोटो और RFID कार्ड होना जरूरी है.इसके अलावा यात्रा से पहले नियमित पैदल चलने की प्रैक्टिस, प्राणायाम और हल्की एक्सरसाइज करना फायदेमंद रहेगा.साथ ही ऊनी कपड़े, रेनकोट, पानी, ट्रैकिंग स्टिक और जरूरी दवाएं साथ रखना भी जरूरी है.
चारधाम यात्रा से पहले बड़ी खबर, केदारनाथ हेलीकॉप्टर सेवा बुकिंग 15 अप्रैल से
12 Apr, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केदारनाथ धाम की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के बीच काफी उत्साह देखने को मिलता है। वो दर्शन खुलने से लेकर रजिस्ट्रेशन और हेलीकॉप्टर सेवा सभी के बारे में जानकारी एकत्रित करने में लगे रहते हैं। भक्तों को पूरे साल उस दिन का इंतजार रहता है जब धाम के कपाट खोले जाते हैं। इस साल 22 अप्रैल को श्रद्धालुओं का ये इंतजार खत्म होगा।
अगर आप भी केदारनाथ धाम की यात्रा पर जाना चाहते हैं तो हम आपके लिए जरूरी खबर लेकर आए हैं। यात्रा के लिए हेली सेवा टिकट बुकिंग 15 अप्रैल से शुरू की जाएगी। पहले ये 11 अप्रैल से शुरू होने वाली थी लेकिन व्यवस्थागत कारणों के चलते इसकी तारीख 15 अप्रैल कर दी गई है। चलिए इस बारे में जान लेते हैं।
15 अप्रैल से होगी केदारनाथ हेली सेवा बुकिंग
हेलीकॉप्टर सेवा की बुकिंग 15 अप्रैल से शुरू होगी। इस दौरान 15 जून तक की अवधि की टिकट बुकिंग की जाएगी। श्रद्धालु IRCTC की वेबसाइट heliyatra.irctc.co.in से अपनी टिकट बुक कर सकते हैं। ये सेवा गुप्तकाशी, फाटा और सिरसा से बुक की जा सकती है।
कब खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट
चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल से होने वाली है। इस कड़ी में केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल को खोले जाएंगे। धाम के लिए रुद्रप्रयाग जिले के 3 स्थान सिरसी, फाटा और गुप्तकाशी से हेली सेवा का संचालन होता है।
8 कंपनियां करेंगी संचालन
हेली सेवा को लेकर जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक इस बार आठ कंपनियां इस सेवा का संचालन करने वाली है। श्रद्धालु आईआरसीटीसी के आधिकारिक वेबसाइट के जरिए अपनी टिकट बुकिंग कर सकते हैं। इस बारे में सीईओ यूकाडा आशीष चौहान ने टिकट बुकिंग की तिथि के संबंध में जानकारी दी है।
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