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श्रद्धालुओं की नाव डूबने से 6 से अधिक की मौत, कई की तलाश जारी
10 Apr, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मथुरा|मथुरा के वृंदावन में शुक्रवार दोपहर यमुना नदी में एक नाव पलटने से बड़ा हादसा हो गया। केसी घाट पर श्रद्धालुओं से भरी एक नाव पंटून पुल से टकराकर यमुना के पानी में डूब गई। इस दुर्घटना में 6 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो गई है, जबकि कई अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीमों ने तुरंत बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया। गोताखोर यमुना के गहरे और तेज बहाव वाले पानी में डूबे हुए लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं, जिससे बचाव कार्य में चुनौतियां आ रही हैं।
हादसे के तुरंत बाद मिली जानकारी के अनुसार, नाव पर 25 से ज्यादा श्रद्धालु सवार थे। पुलिस और गोताखोरों की संयुक्त टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 15 लोगों को सुरक्षित पानी से बाहर निकाल लिया। इनमें से एक श्रद्धालु को गंभीर हालत में संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। दुर्भाग्यवश, बाकी दस लोगों को बचाया नहीं जा सका और उनकी मौत की पुष्टि हो चुकी है। नदी के गहरे पानी में डूबी हुई नाव की तलाश भी जारी है, जिससे यह आशंका बनी हुई है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। यह पूरा इलाका अब शोक में डूबा है।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचा प्रशासन और पुलिस बल
सूचना मिलते ही पुलिस बल, गोताखोरों की टीमें और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी बिना किसी देरी के मौके पर पहुंच गए। उन्होंने तुरंत बचाव अभियान शुरू कर दिया, जो अब भी युद्धस्तर पर जारी है। यमुना नदी का पानी काफी गहरा है और इस समय बहाव भी तेज है, जिससे गोताखोरों को पानी के अंदर काम करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। दुर्घटनास्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और अन्य श्रद्धालु जमा हो गए हैं, जिससे बचाव कार्यों में थोड़ी बाधा उत्पन्न हो रही है। प्रशासन ने लोगों से शांत रहने और बचाव दल का सहयोग करने की लगातार अपील की है, ताकि डूबे हुए लोगों की तलाश और घायलों को निकालने का काम बिना किसी रुकावट के पूरा किया जा सके। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पूरी कार्रवाई का जायजा ले रहे हैं।
जांच में यह बात सामने आई है कि दुर्घटना का शिकार हुए श्रद्धालु पंजाब के लुधियाना और मुक्तेश्वर से आए 150 लोगों के एक बड़े दल का हिस्सा थे। यह दल मथुरा और वृंदावन के मंदिरों और धार्मिक स्थलों के दर्शनों के लिए आया था। जिस नाव में ये श्रद्धालु सवार थे, वह भी दुर्घटना के बाद यमुना में पलटकर पूरी तरह डूब गई है। पुलिस टीम अब उस डूबी हुई नाव की तलाश भी कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसके नीचे कोई और व्यक्ति फंसा न हो। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह नाव एक निजी नाविक द्वारा संचालित की जा रही थी। ऐसे निजी नाविकों के पास अक्सर सुरक्षा मानकों और यात्री क्षमता को लेकर कोई पुख्ता नियम नहीं होते, जो इस तरह के हादसों की वजह बन सकते हैं। प्रशासन अब इस पहलू की भी जांच करेगा।
सीएम योगी ने व्यक्त किया दुख
नाव दुर्घटना और जनहानि की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जनपद मथुरा में नाव पलटने से हुई दुर्घटना में जनहानि अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं।” मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचने, बचाव व राहत कार्य संचालित करने और सभी घायलों का समुचित उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रभु श्री राम से दिवंगत आत्माओं को सद्गति प्रदान करने और शोकाकुल परिजनों को इस अथाह दुःख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना भी की है। साथ ही, घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना भी की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि पीड़ितों को हर संभव सहायता और सहयोग मिले।
यमुना नदी में इस तरह की दुर्घटनाएं, खासकर पंटून पुलों के आसपास, पहले भी देखने को मिली हैं। पंटून पुल, जो अस्थायी रूप से नदी पर बनाए जाते हैं, अक्सर बदलते जलस्तर और बहाव के कारण अपनी स्थिति बदल सकते हैं। नावों के संचालन में सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करना, क्षमता से अधिक सवारियां भरना और नाविकों की लापरवाही ऐसे हादसों का मुख्य कारण बनती है। केसी घाट जैसे व्यस्त धार्मिक स्थलों पर जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है, वहां निजी नावों के संचालन पर सख्त निगरानी और सुरक्षा उपायों की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर नदी परिवहन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के गंभीर परिणामों को उजागर किया है। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे स्थानों पर नावों के संचालन के लिए कड़े नियम बनाने और उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
लापता लोगों की तलाश में जुटा बचाव दल
बचाव दल अभी भी नदी में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं और उनके मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति के बारे में तुरंत पुलिस को सूचित करने की अपील की है। मृतकों के परिजनों तक सूचना पहुंचाने और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करने का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। इस दुखद घटना ने पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल पैदा कर दिया है, और लोग प्रशासन से भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। घटना के बाद, नदी में नावों के संचालन को लेकर सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा और कड़े नियम लागू करने पर विचार किया जा सकता है, ताकि ऐसी त्रासदियों को दोहराया न जा सके।
LPG सप्लाई संकट को लेकर कर्नाटक ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप मांगा
10 Apr, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु|कर्नाटक के मंत्री केएच मुनियप्पा ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से ऑटो गैस आपूर्ति के मुद्दे को जल्द से जल्द हल करने का आग्रह किया। उन्होंने इस पर संकट में फंसे ऑटो चालकों की मदद करने में विफल रहने का आरोप लगाया। पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट के बाद, मंत्री ने ऑटो गैस आपूर्ति के मुद्दे पर वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी तेल एवं गैस कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।
सरकार कोई जवाब नहीं दे रही
बेंगलुरु और राज्य के कई अन्य स्थानों पर ऑटो एलपीजी की कमी के कारण ऑटो सेवाओं में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। कई इलाकों में पेट्रोल पंपों के बाहर ऑटो की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जहां चालक आपूर्ति के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री ने पत्रकारों को बताया, “व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति में सुधार हुआ है, लेकिन ऑटो गैस की आपूर्ति में नहीं। मुख्य सचिव ने 6 अप्रैल को केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। इससे पहले मुख्यमंत्री (सिद्धारमैया) और मैंने भी उन्हें पत्र लिखे थे, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।”
बेंगलुरु में सबसे अधिक ऑटो चालक
ऑटो चालकों की मदद के लिए उपायों पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाई गई थी। उन्होंने कहा, "ऑटो गैस पर निर्भर लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है। मुझे लगता है कि केंद्र सरकार उनकी चिंताओं को दूर करने की अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही है।" आगे उन्होंने कहा “राज्य में लगभग पांच लाख ऑटो में से तीन लाख ऑटो ईंधन पर निर्भर हैं। इनमें से 1.6 लाख बेंगलुरु में हैं। उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हमने केंद्र सरकार को इस समस्या के समाधान के लिए पत्र लिखा है, क्योंकि चालकों की आजीविका ऑटो पर निर्भर है। मैं केंद्र से इस समस्या का समाधान निकालने का आग्रह करता हूं।” इसके साथ ही यह भी बताया कि कर्नाटक में ईंधन से चलने वाले ऑटो की संख्या सबसे अधिक है।
निजी कंपनियों को बैठक के लिए बुलाएंगे
मंत्री ने बताया कि प्रतिदिन 280 मीट्रिक टन ऑटो गैस की आवश्यकता होती है, जिसमें से 60 मीट्रिक टन की आपूर्ति इंडियनऑयल, बीपीसी और एचपीसी जैसी सरकारी कंपनियों द्वारा की जाती है, और शेष 220 मीट्रिक टन की आपूर्ति निजी क्षेत्र द्वारा की जाती है। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियां आपूर्ति सुनिश्चित करने में विफल रही हैं, और कुछ ने अपने स्टेशन बंद कर दिए हैं। उन्होंने कहा, "निजी क्षेत्र द्वारा आपूर्ति बंद करने के कारण सरकारी गैस स्टेशनों पर दबाव बढ़ गया है। इसके कारण लंबी कतारें लग गई हैं और एक तरह की अराजकता फैल गई है।" उन्होंने आगे कहा कि वे जल्द ही निजी कंपनियों के साथ एक बैठक बुलाएंगे ताकि उनकी स्थिति और आगे की रणनीति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।
भारत सरकार के मानकों के अनुसार, चार से पांच सदस्यों वाले परिवार के लिए एक घरेलू गैस सिलेंडर 25 दिनों तक चलता है, इस बात को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने गैस कंपनियों से उपभोक्ताओं को 26वें दिन सिलेंडर की आपूर्ति करने को कहा। उन्होंने कहा, "26वें दिन बुकिंग के तुरंत बाद गैस उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इस संबंध में विभाग द्वारा कंपनियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।" उन्होंने आगे कहा कि इससे उपभोक्ताओं के बीच भ्रम कम होगा और गैस एजेंसियों पर लंबी कतारों से बचने में मदद मिलेगी।
मोदी करेंगे ग्रीन कॉरिडोर का उद्घाटन, सफर में बड़ी राहत—7 घंटे से 2.30 घंटे का सफर
10 Apr, 2026 05:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
100 की रफ्तार से दौड़ेंगे वाहन, जानवर भी सुरक्षित
देहरादून। पहाड़ों के बीच सिंगल लेन सड़क पर सामने से अचानक हाथियों का झुंड आने से पीछे गाड़ियों को लंबा जाम लगाता था, कभी उफनती नदी.....तब कभी शिवालिक पहाड़ियों से गिरता मलबा सड़क पर जमा लगा देता था। पहले ऐसा ही नजारा दिखाता था दिल्ली से देहरादून रोड पर आने वाला मोहंड बेल्ट पर। 210 किमी लंबे और तीन राज्यों से गुजरने वाले इस एक्सप्रेस-वे का 20 किमी का हिस्सा राजाजी टाइगर रिजर्व में आता है। लेकिन यह हिस्सा अब पूरी तरह बदल चुका है।
अब मोहंड घाटी के ऊपर बने एलिवेटेड कॉरिडोर से गाड़ी 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बिना ब्रेक, बिना जाम दौड़ रही हैं और नीचे हाथियों का झुंड आराम से गुजर रहा है। 20 किमी लंबे हिस्से में एलिवेटेड पार्ट 12 किमी का है। यह ग्रीन कॉरिडोर पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन का बेहतरीन मिसाल बना है। इस शानदार एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 14 अप्रैल को पीएम नरेंद्र मोदी करने वाले है।
मोहंड घाटी जिस बरसाती नदी से घिरती थी, वहां अब नजर नहीं आती, क्योंकि उस नदी को एलिवेटेड रोड के नीचे से निकाला गया है। सड़क को 35-40 फीट ऊपर, 400 से ज्यादा पिलर्स पर खड़ा किया गया है, ताकि नदी का बहाव, जानवरों के झुंड और विकास तीनों बिना रुकावट चलते रहें।
राजाजी टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर बताते हैं कि 14 हजार करोड़ रुपए में बने एक्सप्रेस-वे का 12 किमी का हिस्सा एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर है। तस्वीरें इस बात का संकेत हैं कि जानवर इसके नीचे से सुरक्षित निकल रहे हैं। ऊपर से भारी वाहन 80 की स्पीड में बाएं और हल्के वाहन 100 की स्पीड पर दाएं चलने वाले है।
पे-पर-यूज टोल सिस्टम, टोल पारंपरिक नाकों वाला नहीं, बल्कि क्लोज्ड टोलिंग सिस्टम होगा। एंट्री-एग्जिट के आधार पर दूरी के हिसाब से शुल्क कटेगा। फास्टैग से बिना रुके भुगतान, जाम की समस्या नहीं। सहारनपुर के कुम्हारहेड़ा में एक टोल प्लाजा पहले से सक्रिय, बाकी एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स पर टोल गेट्स।
इस शानदार एक्सप्रेसवे के बनने से सफर तेज, खर्च कम होगा। 6-7 घंटे का सफर अब 2.5-3 घंटे में, दूरी 260 किमी से 210 किमी होगी। 20 किमी जोखिम भरा पहाड़ी रास्ता अब 12 किमी एलिवेटेड, एक्सीडेंट रिस्क कम होगा। इतना ही नहीं सालाना 93 लाख किलो कार्बन उत्सर्जन घटेगा। इस एक्सप्रेसवे के बनने से पर्यटन, व्यापार को बूस्ट मिलेगा। हरिद्वार-ऋषिकेश-देहरादून का सफर आसान, छुटमलपुर इंटरचेंज से लॉजिस्टिक्स तेज। पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। वहीं बागपत, शामली, सहारनपुर जैसे शहरों में एक्सप्रेसवे पर नए ग्रोथ हब के रुप में विकसित होने वाले है।
यमुना नदी में दर्दनाक दुर्घटना: 25 में से 15 को बचाया गया, 10 लोगों की गई जान
10 Apr, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मथुरा : उत्तर प्रदेश के वृंदावन में शुक्रवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया। केसी घाट पर श्रद्धालुओं से भरी एक नाव पंटून पुल से टकराकर यमुना नदी में पलट गई। पुलिस और स्थानीय प्रशासन मिलकर बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया। गोताखोर यमुना के गहरे पानी में डूबे हुए लोगों की तलाश में जुटे हैं।
10 श्रद्धालुओं की मौत
इस दुर्घटना में नाव सवार करीब 25 श्रद्धालु यमुना के पानी में डूब गए। पुलिस की टीम ने गोताखोरों की मदद से 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इनमें से एक श्रद्धालु को संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। दुखद रूप से, इस हादसे में 10 श्रद्धालुओं की मौत हो गई है।
बचाव कार्य और स्थिति
सूचना मिलते ही पुलिस और गोताखोरों की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। उन्होंने बिना देर किए बचाव अभियान शुरू कर दिया। दुर्घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई है, जिससे बचाव कार्य में थोड़ी बाधा आ रही है। प्रशासन ने लोगों से शांत रहने और बचाव दल का सहयोग करने की अपील की है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
पंजाब से आया था 150 लोगों का दल
जांच में यह बात भी सामने आ रही है कि 150 लोगों का दल लुधियाना, पंजाब और मुक्तेश्वर से आया है और ये सभी उनमें ही शामिल थे। बताया गया है जिस नाव में लोग सवार थे वो भी पलट कर डूब गई है और उसकी तलाश भी जारी है। जिसकी यह नाव है वो प्राइवेट नाविक था।
कांगड़ा सड़क हादसा: ट्रैक्टर-ट्रॉली खाई में गिरी, कई श्रद्धालु घायल
10 Apr, 2026 04:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डाडासीबा (कांगड़ा)। एनएच-503 पर ढलियारा स्थित ‘खूनी मोड़’ के पास राधा स्वामी सत्संग घर के नजदीक एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। एक ट्रैक्टर-ट्राली अनियंत्रित होकर करीब 90 फीट गहरी खाई में जा गिरी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब के कपूरथला से श्रद्धालुओं का एक समूह ट्रैक्टर-ट्राली में सवार होकर देवी दर्शन के लिए हिमाचल आया हुआ था। श्रद्धालुओं ने पहले चिंतपूर्णी मंदिर में माथा टेका और इसके बाद ज्वालामुखी मंदिर के लिए रवाना हुए थे।
बताया जा रहा है कि जैसे ही ट्रैक्टर ढलियारा के खतरनाक ‘खूनी मोड़’ के पास पहुंचा, अचानक ब्रेक फेल हो गए। चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाया और ट्रैक्टर-ट्राली सीधी खाई में जा गिरी। हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।
घटना के समय सड़क से गुजर रहे स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए आगे आए और घायलों को खाई से बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य तेज किया गया। घायलों को उपचार के लिए नजदीकी अस्पतालों में भेजा जा रहा है। फिलहाल हादसे में घायल लोगों की संख्या और स्थिति की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
गगनयान की बड़ी सफलता: क्रू मॉड्यूल लैंडिंग के बाद वैज्ञानिकों के चेहरे खिले
10 Apr, 2026 03:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष में तिरंगा फहराने के अपने सपने गगनयान की ओर एक और विशाल कदम बढ़ा दिया है। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में इसरो ने दूसरे इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (आईएडीटी-02) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह परीक्षण इतना महत्वपूर्ण है कि इसकी सफलता ने भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की सुरक्षा को पक्का कर दिया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस गौरवशाली उपलब्धि को देश के साथ साझा किया।
इस परीक्षण की जटिलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें एक डमी क्रू मॉड्यूल को कई किलोमीटर की ऊंचाई से नीचे गिराया गया। मिशन का सबसे मुश्किल हिस्सा तब होता है जब अंतरिक्ष यात्री 400 किलोमीटर ऊपर से वापस धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं। उस वक्त मॉड्यूल की रफ्तार इतनी तेज होती है कि उसे सुरक्षित उतारने के लिए पैराशूट का सही क्रम में खुलना अनिवार्य है। आईएडीटी -02 ने साबित कर दिया कि भारत का पैराशूट सिस्टम और रिकवरी तकनीक पूरी तरह सटीक है। गगनयान मिशन के तहत तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 3 दिन के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाना है। इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती उन्हें सुरक्षित समुद्र में उतारना है। इसरो की इस सफलता ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि लैंडिंग के वक्त कोई अनहोनी नहीं होगी। यह मिशन अगले साल के लिए निर्धारित है और ऐसी हर कामयाबी भारत को उन गिने-चुने देशों की कतार में खड़ा कर रही है जो इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता रखते हैं।
तिलक नगर में बवाल: बाल संत अभिनव अरोड़ा के परिवार पर हमला, 3 आरोपी गिरफ्तार
10 Apr, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Abhinav Arora: पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में रविवार रात एक मामूली सड़क हादसे ने बड़े विवाद का रूप ले लिया। यह घटना मशहूर आध्यात्मिक कंटेंट क्रिएटर, 10 वर्षीय अभिनव अरोड़ा के पिता से जुड़ी है। पुलिस ने इस मामले में शांति भंग करने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। मिली जानकारी के अनुसार, घटना 7 अप्रैल की रात करीब 10 बजे तिलक नगर के मुख्य बाजार में एक रेस्टोरेंट के पास हुई। अभिनव अरोड़ा के पिता अपनी कार से जा रहे थे, तभी उनकी गाड़ी की एक मोटरसाइकिल से हल्की टक्कर हो गई। गनीमत यह रही कि घटना के समय अभिनव अरोड़ा कार में मौजूद नहीं थे।
बहस से बढ़ा मामला, कार में की तोड़फोड़
मोटरसाइकिल के पास मौजूद लोगों ने कार चालक के ड्राइविंग तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि वह तेज और लापरवाही से गाड़ी चला रहा था, जिससे वहां मौजूद लोगों की जान को खतरा हो सकता था और किसी को गंभीर चोट भी लग सकती थी। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो कुछ ही देर में तीखी बहस और नोकझोंक में बदल गई। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि आसपास मौजूद लोग भी घबरा गए। पुलिस के अनुसार, गुस्साए समूह के कुछ सदस्यों ने अपने हाथों में पहने ‘कड़े’ (धातु के ब्रेसलेट) का इस्तेमाल करते हुए कार के बोनट और खिड़कियों पर कई बार वार किए। इस दौरान वाहन को मामूली नुकसान पहुंचा, हालांकि घटना ने इलाके में अफरा-तफरी का माहौल जरूर पैदा कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
विवाद बढ़ता देख अभिनव के पिता ने पीसीआर (PCR) कॉल कर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाला। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुख्य हमलावरों के रूप में पहचान किए गए तीन व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया और शांति भंग होने से रोकने के लिए निवारक धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया।
दो दिन की न्यायिक हिरासत
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस पूरी घटना में किसी को भी गंभीर चोट नहीं आई है। अधिकारियों का कहना है कि आगे की कार्रवाई शामिल पक्षों के बयानों के आधार पर की जाएगी।
सीमा पर राहत: BSF ने बॉर्डर पार फंसे परिवारों को भारत में प्रवेश की अनुमति दी
10 Apr, 2026 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Assam Assembly Election 2026: भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से सटे असम के श्रीभूमि जिले में गुरुवार को मतदान के दौरान एक अनोखी, प्रेरणादायक और लोकतंत्र को मजबूत करने वाली पहल देखने को मिली। सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने न सिर्फ तय समय से पहले सीमा गेट खोले, बल्कि तारों के पार बसे ग्रामीणों को अपनी गाड़ियों से मतदान केंद्र तक पहुंचाकर मिसाल पेश की।
70 परिवारों को मिला मतदान का अवसर
करीमगंज दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले करीब 70 परिवार, जो सीमा के बाहर बसे हुए हैं, इस विशेष व्यवस्था का लाभ उठा सके। गबिंदापुर, उत्तर लाफासाइल, तेसुआ, देउटोली और मैशाशन जैसे पांच गांवों के मतदाताओं को BSF ने सुरक्षित तरीके से मतदान केंद्र तक पहुंचाया और मतदान के बाद वापस उनके घरों तक भी छोड़ा।
क्या बोले स्थानीय मतदाता?
एक स्थानीय मतदाता ने बताया, BSF ने सुबह जल्दी गेट खोल दिए और अपनी गाड़ियों से हमें मतदान केंद्र तक पहुंचाया। इससे हमें बहुत सुविधा हुई। वहीं पर मौजूद भावुक मतदाता ने कहा, हम मतदान को लेकर गंभीर हैं, क्योंकि इससे हमें यह भरोसा मिलता है कि हम भारतीय हैं, सिर्फ किसी भूले-बिसरे इलाके के निवासी नहीं।
चुनाव प्रचार में भी BSF की अहम भूमिका
सूत्रों के मुताबिक, BSF ने मतदान से पहले चुनाव प्रचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सीमा गेटों का सुचारु प्रबंधन किया और उम्मीदवारों व उनके समर्थकों को जीरो लाइन के पास बसे गांवों तक पहुंचने की अनुमति दी, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया बिना किसी बाधा के संपन्न हो सकी।
आखिर क्यों बाड़बंदी के बाहर बसे हैं ये गांव?
भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सीमा से 150 गज के भीतर स्थायी निर्माण या फेंसिंग की अनुमति नहीं है। इसी कारण ये गांव कंटीली तारों के बाहर स्थित हैं। यहां रहने वाले लोगों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां रहती हैं और सीमा गेट आमतौर पर शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक बंद रहते हैं।
मदद के लिए हमेशा मौजूद BSF
एक BSF अधिकारी ने बताया, आपात स्थिति में हम हमेशा उनकी मदद के लिए तैयार रहते हैं और जरूरत पड़ने पर निर्धारित समय के बाद भी उन्हें नजदीकी शहर तक पहुंचाते हैं।
पुनर्वास की प्रक्रिया तेज
सरकार अब श्रीभूमि जिले में बाड़बंदी के बाहर बसे गांवों के पुनर्वास पर तेजी से काम कर रही है। इस जिले की करीब 92 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है। वहीं, पड़ोसी कछार जिले (32 किलोमीटर सीमा) में पिछले कुछ वर्षों में ऐसे सभी गांवों का सफलतापूर्वक पुनर्वास किया जा चुका है। अब श्रीभूमि में भी इसी मॉडल पर परिवारों को कंटीली तारों के भीतर बसाने की प्रक्रिया जारी है, जिससे उनकी सुरक्षा, आवाजाही और बुनियादी सुविधाओं में सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
बड़ा खुलासा: PM मोदी को निशाना बनाने की साजिश, 3 आरोपी दबोचे गए
10 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Bihar News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले की साजिश रच रहे तीन आरोपियों को बक्सर पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने पीएम मोदी पर न केवल हमले की धमकी दी, बल्कि विदेशी एजेंसियों से पैसों की भी मांग की थी. तीनों पर आरोप है कि अमेरिका की एजेंसी सीआईए (CIA) को एक मैसेज भेजकर जानलेवा हमले की बात कही थी. जिसके बाद बक्सर पुलिस एक्टिव हुई और तीन आरोपियों को धर दबोचा. फिलहाल, अभी जांच जारी है.
इस घटना के बाद बिहार के बक्सर जिले में हड़कंप मच गया है. सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट मोड पर हैं. पूरे घटनाक्रम की गहन जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी 22 वर्षीय अमन तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है. इसके साथ ही दो अन्य साथी भी पकड़े गए हैं. जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी (CIA) को प्रस्ताव भेजकर मोटी रकम की मांग की थी. इसके लिए 22 दिनों का समय भी मांगा था. फिलहाल, पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है.
पुलिस ने कई सामान किए बरामद
PM मोदी पर जानलेवा हमले की साजिश रचने के मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है. सूचना मिलते ही बुधवार की रात पुलिस ने टीम ने तीनों आरोपियों के घर पर छापा मार कार्रवाई की, जिसके बाद तीनों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है. जिस सिस्टम से मैसेज भेजा गया था. पुलिस ने उसे भी बरामद कर लिया है. पुलिस को तलाशी के दौरान अमन के कमरे से लैपटॉप और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले हैं. उपकरणों के साथ कोई छेड़छाड़ ना हो, इसके लिए कमरे को सील कर दिया गया है.
पैसा कमाने की लालच में रची साजिश
पुलिस के अनुसार, मुख्य साजिशकर्ता अमन तिवारी का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है. इससे पहले भी वह कोलकाता एयरपोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दे चुका है. हालांकि, उस समय वह नाबालिग होने की वजह से बच गया था. अमन इंटरनेट पर काफी सक्रिय रहता था. लेकिन उसने अधिक पैसे कमाने की लालच में यह साजिश रची. फिलहाल, पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है.
लिव-इन रिलेशनशिप पर अहम निर्णय: शादीशुदा होने के बावजूद मिलेंगे अधिकार, हाईकोर्ट का फैसला
10 Apr, 2026 09:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट में एक लिव-इन में रह रहे कपल की सुरक्षा से संबंधित मामले की सुनवाई हुई, जिसमें महिला पहले से ही शादीशुदा थी। जस्टिस सौरभ बनर्जी की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कपल ने परिवार और महिला के पति से मिल रही धमकियों के कारण सुरक्षा मांगी थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता बालिग हैं और दोनों को सुरक्षा का अधिकार है। हाईकोर्ट में आए इस मामले ने रिश्तों और कानून के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।
क्या है मामला?
याचिका के अनुसार, महिला साल 2016 से ही अपने पति द्वारा मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न झेल रही थी। ऐसे में उसने अपने जीवन में आगे बढ़ने का फैसला लिया और फरवरी 2026 से एक अन्य व्यक्ति के साथ हैदराबाद में लिव-इन में रहने लगी। साथ रहने के फैसले के बाद महिला के परिवार और पति की तरफ से उन्हें लगातार धमकियां मिलने लगीं। इतना ही नहीं, स्थानीय पुलिस के हस्तक्षेप से भी उनकी परेशानी बढ़ गई। इन हालातों से बचने के लिए दोनों दिल्ली आ गए और अपनी सुरक्षा के लिए हाई कोर्ट का रुख किया।
शादीशुदा होना बाधा नहीं
सुनवाई के दौरान जस्टिस सौरभ बनर्जी की बेंच ने साफ कहा कि अगर दोनों व्यक्ति बालिग हैं, तो उन्हें अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19 के तहत पूरी सुरक्षा मिलनी चाहिए। यानी हर नागरिक को अपनी जिंदगी अपनी मर्जी से जीने और अपने फैसले लेने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का शादीशुदा होना, अविवाहित होना या लिव-इन रिलेशनशिप में रहना उसके अधिकारों को कम नहीं करता। ये सभी व्यक्तिगत फैसले हैं और कानून इनके आधार पर किसी के मौलिक अधिकारों को नहीं छीन सकता। अदालत ने साफ संदेश दिया कि बालिग लोगों की पसंद और स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट का फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में कपल को राहत देते हुए उन्हें पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता बालिग हैं और उन्हें अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का पूरा अधिकार है। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है और इसके लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए।
श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर: अमरनाथ रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से, चारधाम यात्रा 19 से शुरू
10 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Amarnath Yatra -मध्यप्रदेश में गर्मी की दस्तक के साथ ही अब धार्मिक पर्यटन और तीर्थ यात्राओं की सरगर्मियां तेज हो गई है। अक्षय तृतीया पर केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चार धाम यात्रा की शुरुआत हो जाएगी। इसी प्रकार अमरनाथ यात्रा की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। इस यात्रा के लिए पंजीयन का सिलसिला 15 अप्रेल से चालू हो रहा है। इधर हज यात्रा के लिए भी 18 अप्रेल से फ़्लाइट की रवानगी की सिलसिला प्रारंभ होगा। ऐसे में कई लोग धार्मिक यात्राओं की तैयारियां कर रहे हैं।
ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन पंजीयन, यात्रियों का पंजीयन पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर
अमरनाथ यात्रा जून जुलाई में प्रारंभ होती है, इसके लिए पंजीयन का सिलसिला 15 अप्रेल से शुरू हो जाएगा। ऑनलाइन के साथ तीन बैंक शाखाओं में ऑफलाइन पंजीयन होंगे। एक दो दिनों में तिथि भी घोषित होने की संभावना है। जेएंडके बैंक के प्रबंधक मंसूर अहमद ने बताया कि बैंक में 15 से पंजीयन की शुरुआत होगी, 20 यात्रियों का पंजीयन पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर होगा।
चारधाम यात्रा के लिए जाएंगे जत्थे, पहला जत्था 30 अप्रेल, दूसरा 7 मई और तीसरा 11 मई को रवाना होगा
चारधाम यात्रा की शुरूआत 19 अप्रेल से हो रही है। इसके लिए शहर से कई श्रद्धालु रवाना होंगे, ओम शिव शक्ति सेवा मंडल के रिंकू भटेजा ने बताया कि इस वर्ष मंडल के तीन जत्थे यात्रा पर जा रहे हैं। इसमें पहला जत्था 30 अप्रेल, दूसरा 7 मई और तीसरा 11 मई को रवाना होगा। तीसरा जत्था में 50 से अधिक श्रद्धालु शामिल होंगे।
मुंबई से रवाना होंगे भोपाल के हजयात्री:
भोपाल से हजयात्रा पर जाने वाले लोग इस बार मुंबई एयरपोर्ट से रवाना होंगे। पहली हज उड़ान 18 अप्रेल को रहेगी। इसके 72 घंटे पहले यानि 14 अप्रेल को हजयात्री भोपाल से रवाना होंगे। इस बार शहर से हज की फ़्लाइट बंद हो गई है जिसका यात्रा पर असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। हज यात्रा के लिए रवानगी का सिलसिला अगले पंद्रह दिन जारी रहेगा।
रवानगी से पहले अपने पासपोर्ट, हज पास, क्यूआर कोड और हेल्थ कार्ड साथ रखें
इस साल प्रदेश से साढ़े आठ हजार लोग हजयात्रा पर रवाना होंगे। प्रदेश में इंदौर से हज के लिए सीधी उड़ान उपलब्ध रहेगी। हज यात्रियों की सुविधा के लिए सलाह दी गई है कि वे रवानगी से पहले अपने पासपोर्ट, हज पास, क्यूआर कोड और हेल्थ कार्ड साथ रखें।
प्रस्तावित चारधाम यात्रा की तिथि
यमुनोत्री धाम- 19 अप्रेल
गंगोत्री धाम- 19 अप्रेल
केदारनाथ धाम- 22 अप्रेल
बद्रीनाथ धाम- 23 अप्रेल
RSS से जुड़ी बड़ी खबर: तेलंगाना में हेडगेवार स्मृति मंदिर का उद्घाटन करेंगे मोहन भागवत
10 Apr, 2026 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष में संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के पैतृक गांव में स्मृति मंदिर का शनिवार को लोकार्पण होगा। तेलंगाना के निजामाबाद जिले स्थित कंडाकुर्थी गांव में बने ‘केशव स्पूर्ति मंदिर’ में भूतल पर हेडगेवार की प्रतिमा और प्रथम तल पर भारत माता की प्रतिमा स्थापित होगी। इस स्मृति मंदिर का उद्घाटन संघ के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत करेंगे। स्मारक डॉ. हेडगेवार के जीवन, विचार और राष्ट्र निर्माण के उनके दृष्टिकोण को समर्पित है।
विस्तृत फोटो गैलरी और वीडियमें प्रदर्शित होगी जीवन यात्रा
केशव सेवा समिति की ओर से बनाए गए इस मंदिर की संरचना आधुनिक और पारंपरिक शैली का समन्वय है, जहां भूतल पर डॉ. हेडगेवार की प्रतिमा के साथ एक विस्तृत फोटो गैलरी स्थापित की गई है। इसमें उनके जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को दर्शाया गया है। प्रथम तल पर भारत माता की प्रतिमा स्थापित की जाएगी, साथ ही यहां एक अत्याधुनिक वीडियो प्रजेंटेशन के जरिए हेडगेवार के जीवन और वैचारिक यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा। ‘संग्रहालय’ में डॉ. हेडगेवार से जुड़ी व्यक्तिगत वस्तुएं, हस्तलिखित पत्रों की प्रतियां और पुस्तकें रखी जाएंगी। रामलला की प्रतिमा गढ़ने वाले योगीराज ने बनाईं प्रतिमाएं मंदिर में स्थापित डॉ. हेडगेवार और भारत माता की प्रतिमाएं मैसूर के शिल्पकार अरुण योगीराज ने निर्मित की हैं। गौरतलब है कि योगीराज ने ही अयोध्या में रामलला की मूर्ति का निर्माण भी किया है।
दिया पंच परिवर्तन का संदेश
1.सामाजिक समरसता
2.पर्यावरण संरक्षण
3. कुटुम्ब प्रबोधन
4 स्व का भाव
5. नागरिक कर्तव्य
शताब्दी वर्ष में यह हुए कार्यक्रम
विजयादशमी उत्सव: देशभर में सितम्बर और अक्टूबर में कुल 65,555 स्थानों पर उत्सव में कुल 32 लाख 45 हजार से ज्यादा लोग और 22656 संचलन में 25 लाख 45 हजार से ज्यादा स्वयंसेवक सम्मिलित ।गृह संपर्क अभियान: देश के 3 लाख 89, 465 गांवों और 31 हजार 143 बस्तियों में कुल दस करोड़ से ज्यादा घरों में सम्पर्क कर संघ की जानकारी दी गई। हिंदू सम्मेलन: नगर और खंड स्तर पर कुल 37 हजार से ज्यादा सम्मेलन में साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा लोग सहभागी।
बड़ा खुलासा: महाकुंभ की वायरल लड़की नाबालिग, NCST रिपोर्ट के बाद पति फरमान के खिलाफ केस
10 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Kumbh Viral Girl News: कुंभ वायरल गर्ल मोनालिसा और फरमान की शादी मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया कि लड़की का जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था, जबकि उसे बालिग बताकर निकाह कराया गया. इस शादी लड़की को बालिग बताने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र का उपयोग किया गया जबकि लड़की अभी नाबालिग है.
फर्जी प्रमाण पत्र से दिखाया था बालिग
मोनालिसा को बालिग दिखाने के लिए महेश्वर नगरपालिका से जारी एक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग किया गया था, जिसे अब निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. दूसरी तरफ पीड़िता के पिता की शिकायत पर महेश्वर पुलिस ने आरोपी फरमान खान के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट और एट्रोसिटी एक्ट के तहत FIR दर्ज की है.
बड़े एजेंडे के तहत निकाह की आशंका
सबसे बड़ी बात तो ये है कि अब आयोग ने इस मामले की जांच आदिवासी बच्चों की तस्करी के एंगल से करनी शुरू कर दी कर दी है. जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी और पीड़िता पिछले तीन महीनों से विभिन्न VIP होटलों में ठहरे रहे थे. मामले में अधिवक्ता प्रथम दुबे ने आयोग के समक्ष एक गंभीर मुद्दा उठाया है. आशंका जताई जा रही है कि यह निकाह किसी बड़े एजेंडे का हिस्सा हो सकता है.
दो राज्यों को डीजीपी को किया तलब
जांच में पता चला है कि महेश्वर के शासकीय अस्पताल के रिकार्ड में 30 दिसम्बर 2009 को शाम 5 बजकर 50 मिनट पर मोनालिसा का जन्म हुआ था. NCST अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 22 अप्रैल 2026 को केरल और मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को दिल्ली मुख्यालय तलब किया है और जांच की रिपोर्ट हर तीन दिन में देने के निर्देश भी दिए हैं.
SC का संदेश: धार्मिक स्थलों में प्रतिबंध धर्म को विभाजित करता है
9 Apr, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ ने धार्मिक स्थलों पर भेदभाव और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी खास वर्ग या संप्रदाय को मंदिरों और 'मठों' में प्रवेश से रोका जाता है, तो इसका हिंदू धर्म पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और यह समाज को बांटने का काम करेगा।
क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध और अन्य धार्मिक स्थलों पर होने वाले भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ जजों की पीठ इस बात की जांच कर रही है कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार किस हद तक समानता के अधिकार के साथ मेल खाता है।
विशिष्टता हिंदू धर्म के लिए अच्छी नहीं: जस्टिस नागरत्ना
सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि हर किसी को हर मंदिर और मठ में जाने की अनुमति होनी चाहिए। अगर आप यह कहते हैं कि मेरी परंपरा के अनुसार मैं दूसरों को बाहर रखूंगा और केवल मेरा संप्रदाय ही मंदिर में आएगा, तो यह हिंदू धर्म के लिए अच्छा नहीं है। यह धर्म को नुकसान पहुंचाएगा और खुद उस संप्रदाय के लिए भी उल्टा साबित होगा। जस्टिस अरविंद कुमार ने भी इस बात पर सहमति जताते हुए कहा कि इस तरह के भेदभाव से समाज में दरार पैदा होगी।
सरकारी फंड और निजी दान का सवाल
बहस के दौरान संगठनों का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने तर्क दिया कि एक संप्रदाय विशेष का मंदिर केवल अपने लोगों तक ही अधिकारों को सीमित रख सकता है। इस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि अगर कोई मंदिर पूरी तरह निजी या एक खास संप्रदाय का है, तो वह सरकार या जनता से फंड की मांग नहीं कर सकता। लेकिन, यदि कोई मंदिर सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या स्वास्थ्य के परीक्षण से गुजरता है, तो उसे कानूनों का पालन करना होगा।
अनुच्छेद 25 बनाम अनुच्छेद 26
वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी धार्मिक समूह का अपना मामला प्रबंधित करने का अधिकार अनुच्छेद 26, किसी व्यक्ति के पूजा करने के मौलिक अधिकार, अनुच्छेद 25 से बड़ा हो सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि धर्म के नाम पर किसी वर्ग को बाहर करना धर्म की रक्षा नहीं, बल्कि उसे कमजोर करना है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ बना केस स्टडी, सेना प्रमुख ने बताया रणनीतिक महत्व
9 Apr, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने गुरुवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने डोमेन जॉइंटनेस की दिशा में भारत की प्रगति को दिखाया है। इस सैन्य अभियान को एकीकरण के परिचालन महत्व का निर्णायक केस स्टडी बताया। पिछले साल मई में, भारत ने 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में आतंकी लॉन्चपैड को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। पहलगाम हमले में 26 भारतीय पर्यटक मारे गए थे।जनरल द्विवेदी ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर, विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्तता की दिशा में भारत की प्रगति का सबसे शक्तिशाली साधन था। लेकिन हमें विभिन्न क्षेत्रों का एकीकरण और विलय हासिल करना होगा।" दरअसल, वह यहां रण संवाद मंच पर "थल सेना द्वारा बहु-क्षेत्रीय संचालन (एमडीओ) का दृश्य-विश्लेषण विषय पर संबोधित कर रहे थे। सेना प्रमुख ने कहा कि एमडीओ के बारे में उनकी कल्पना छह डोमेन के समानांतर संचालन की नहीं है, बल्कि उन सभी की निरंतर गतिशील बातचीत की है, जहां भार बदलता है और नेतृत्व में परिवर्तन होता है।
सेना प्रमुख ने क्या कहा?
सेना प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक युद्ध अब भौगोलिक सीमाओं या किसी एक सेना के प्रभुत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों, हितधारकों और संघर्ष के स्तरों में निरंतर क्रिया द्वारा परिभाषित होता है। उन्होंने कहा, "हम अपने समय के एक बिखरे हुए, अघोषित, बहु-मोर्चे वाले, बहु-क्षेत्रीय युद्ध का सामना कर रहे हैं। सवाल यह नहीं है कि क्या क्षेत्र आपस में परस्पर क्रिया करते हैं, बल्कि यह है कि युद्ध क्षेत्र में यह परस्पर क्रिया किस प्रकार संचालित होती है।"
स्थलीय क्षेत्र और स्थलीय बलों के बीच अंतर
इसके साथ ही जनरल द्विवेदी ने स्थलीय क्षेत्र और स्थलीय बलों के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए समझाया कि जहां पहला परिचालन क्षेत्र को संदर्भित करता है। वहीं दूसरा उन सभी छह क्षेत्रों - भूमि, वायु, समुद्री, साइबर, अंतरिक्ष और संज्ञानात्मक को शामिल करता है जो एक साझा वातावरण में काम करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये क्षेत्र अब पृथक नहीं हैं बल्कि गतिशील तालमेल के माध्यम से काम करते हैं।
युद्धक्षेत्र अब मानचित्र पर खींची गई एक रेखा मात्र नहीं
उन्होंने कहा, "एमडीओ में, युद्धक्षेत्र अब मानचित्र पर खींची गई एक रेखा मात्र नहीं है। यह एक 3डी परिदृश्य है - साइबर प्रभाव संज्ञानात्मक स्थान को आकार देते हैं। अंतरिक्षीय संसाधन लक्ष्यों को संकेत देते हैं। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध एक साथ हर आवृत्ति का मुकाबला करता है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कमांडरों को सामरिक से लेकर रणनीतिक स्तर तक, विभिन्न क्षेत्रों में स्थितिजन्य जागरूकता विकसित करनी चाहिए। जनरल द्विवेदी ने आगे कहा, "यह जमीनी खुफिया नेटवर्क, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईडब्ल्यू) से मिली जानकारियों का मेल था जिसने सेना और वायु सेना की संयुक्त कार्रवाई को लक्ष्य निर्धारित करने में मदद की, वहीं नौसेना की तैनाती में बदलाव ने रणनीतिक गणना को आकार दिया। किसी एक क्षेत्र ने इस अभियान का फैसला नहीं किया।"
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