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"वाहन शौकीनों को हाईकोर्ट की बड़ी राहत: नए वीआईपी नंबर के लिए नहीं देनी होगी दोबारा फीस"
1 Jun, 2026 01:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। दशकों पुराने और अपनी पसंद के वीआईपी वाहन नंबर रखने वाले हजारों वाहन स्वामियों को माननीय उच्च न्यायालय ने एक बड़ी सौगात दी है। अदालत ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया है कि जब पुरानी सीरीज के नंबरों को नए वीआईपी या पसंदीदा (प्रेफरेंशियल) नंबरों में तब्दील किया जाएगा, तो प्रशासन इसके एवज में वाहन मालिकों से किसी भी प्रकार की अतिरिक्त फीस या जुर्माना नहीं वसूल सकता है। न्यायमूर्ति जगमोहन बंसल की एकल पीठ ने इस विषय से जुड़ी 14 से अधिक याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह बड़ा आदेश जारी किया।
बार-बार रुख बदलने पर अदालत ने सरकार को टोका
अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर हैरानी जताई कि यह विवाद तीसरी बार न्यायपालिका के दहलीज पर पहुंचा है। पूरा मामला मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के वजूद में आने से पहले के उन नंबरों से जुड़ा है, जो 'एचआर' (HR) की जगह पुरानी सीरीज के अक्षरों से शुरू होते थे। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि सरकार ने पहले भी अदालत को यह भरोसा दिलाया था कि इन नंबरों को नई सीरीज में बदलने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके विपरीत, 8 नवंबर 2019 को एक नया आदेश जारी कर पसंदीदा नंबर रखने वालों से अचानक मोटी फीस की मांग की जाने लगी, जो कि पूर्व के आश्वासनों का खुला उल्लंघन था।
नियम तय करने का हक सिर्फ केंद्र को, राज्यों को नहीं
उच्च न्यायालय ने कानूनी स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि वाहनों के पंजीकरण चिह्नों की वैधता, उनके स्वरूप और नवीनीकरण से संबंधित किसी भी प्रकार के नियम या कानून बनाने का अधिकार विशेष रूप से केवल केंद्र सरकार के पास सुरक्षित है। राज्य सरकार के पास इस विषय में समानांतर नियम बनाने या अलग से आदेश थोपने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। हरियाणा सरकार ने बिना किसी वैधानिक कानून के महज आंतरिक मेमो और सर्कुलर के जरिए इस नीति को लागू करने की कोशिश की थी, जिसके चलते कोर्ट ने इस विवादित आदेश को पूरी तरह अवैध और शून्य घोषित कर दिया।
हजारों वीआईपी और पसंदीदा नंबर धारकों को सीधा फायदा
अदालत ने अपने पुराने फैसलों का हवाला देते हुए समझाया कि यदि किसी पुराने नंबर (जैसे HRK-4 या HRO-10) को नई सीरीज के समान मूल्य वाले नंबर (जैसे HR 0004 या HR 0010) में बदला जाता है, तो यह प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क होगी। इस फैसले से अविभाजित पंजाब के समय के या पुरानी सीरीज के विशेष और आकर्षक नंबर रखने वाले हजारों वाहन मालिकों को सीधा वित्तीय लाभ मिलेगा। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि यह रियायत केवल साधारण नंबरों के लिए नहीं है, बल्कि वीआईपी और पसंदीदा नंबरों पर भी समान रूप से प्रभावी रहेगी।
"शॉर्ट सर्किट या लापरवाही? जिंदल पेट्रो गोदाम में आग से लाखों का नुकसान, बुझाने में जुटे दमकलकर्मी"
1 Jun, 2026 01:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला। जिले के मंडोर इलाके में स्थित जिंदल पेट्रो के एक गोदाम में सोमवार सुबह करीब 9 बजे अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते इस आग ने बेहद खतरनाक रूप अख्तियार कर लिया और गोदाम से आसमान छूती आग की लपटें उठने लगीं। कुछ ही पलों में पूरे आसमान में काले धुएं का एक विशाल गुबार छा गया, जिससे आस-पास के रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्रों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए इस बड़े हादसे की जानकारी दमकल विभाग और नजदीकी पुलिस स्टेशन को दी।
ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण तेजी से फैली आग
दुर्घटना का संदेश मिलते ही दमकल विभाग की आधा दर्जन से अधिक गाड़ियां तुरंत घटना स्थल पर पहुंच गईं और राहत कार्य शुरू किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस गोदाम में भारी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पाद, इंडस्ट्रियल ऑयल और विभिन्न प्रकार के केमिकल्स का स्टॉक रखा हुआ था। केमिकल और ऑयल के अत्यधिक ज्वलनशील होने के कारण आग ने पल भर में पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें और तपिश इतनी भयानक थीं कि दमकल कर्मियों को पास जाकर आग बुझाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
लाखों का सामान जलकर स्वाहा, कर्मियों को सुरक्षित निकाला गया
प्रशासनिक अधिकारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए एहतियात के तौर पर गोदाम और उसके आस-पास काम कर रहे सभी मजदूरों व कर्मचारियों को तुरंत वहां से हटाकर सुरक्षित दूरी पर भेज दिया, जिससे एक बड़ा जानी नुकसान होने से टल गया। हालांकि, इस तबाही में गोदाम के अंदर रखा लाखों रुपये का कीमती कच्चा माल और तैयार प्रॉडक्ट्स जलकर पूरी तरह से राख हो गए। फैक्टरी प्रबंधन को इस हादसे में भारी आर्थिक क्षति पहुंचने का अनुमान है।
शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका
दमकल की टीमें लगातार पानी और फोम की बौछारों के जरिए आग को पूरी तरह से शांत करने की कोशिशों में जुटी हुई हैं। हालांकि, अभी तक इस भीषण अग्निकांड की असल वजह आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं हो सकी है, लेकिन शुरुआती जांच और परिस्थितियों को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि यह हादसा बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण हुआ होगा। पुलिस और तकनीकी टीमें मामले की पूरी बारीकी से तफ्तीश कर रही हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने दी चेतावनी, मिसाइल संकट वैश्विक खतरे की ओर
1 Jun, 2026 11:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने एक बड़ा बयान जारी करते हुए अमेरिका को देश और दुनिया की रक्षा प्रणाली के प्रति आगाह किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका में एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों का वर्तमान उत्पादन बेहद धीमा और कम है। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि अमेरिकी हथियारों के उत्पादन में यह सुस्ती सिर्फ यूक्रेन के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में दुनिया के कई अन्य हिस्सों में भी एक नया और गंभीर सुरक्षा संकट खड़ा कर सकती है।
रूस के बढ़ते उत्पादन से मुकाबले में अमेरिका पीछे
जेलेंस्की द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, एक तरफ जहां रूस अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों के उत्पादन को लगातार और तेजी से बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया की महाशक्ति कहा जाने वाला अमेरिका हर महीने केवल 60 से 65 एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों का ही निर्माण कर पा रहा है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में यूक्रेन और दुनिया के सामने जो युद्ध कालीन और रक्षात्मक चुनौतियां खड़ी हैं, उनके सामने अमेरिका का यह उत्पादन न के बराबर है, जिससे वैश्विक शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है।
यूक्रेन ने मांगी 'पैट्रियट' मिसाइल बनाने की अनुमति
इस गंभीर रक्षा संकट और हथियारों की कमी से निपटने के लिए राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सीधे व्हाइट हाउस और अमेरिकी कांग्रेस (संसद) को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने अमेरिका से मांग की है कि वह यूक्रेन को अपनी सबसे आधुनिक और अचूक 'पैट्रियट' मिसाइल रक्षा प्रणाली बनाने का तकनीकी लाइसेंस और अधिकार प्रदान करे। यूक्रेन का मानना है कि लाइसेंस मिलने के बाद वे अपने घरेलू स्तर पर ही इन मिसाइलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर सकेंगे, जिससे अमेरिकी आपूर्ति पर उनकी निर्भरता कम होगी और वे रूसी हवाई हमलों का मजबूती से सामना कर पाएंगे।
दिसंबर 2025 से कमजोर पड़ा रूस, कूटनीति पर जोर
युद्ध के मैदान की मौजूदा स्थिति का विश्लेषण करते हुए जेलेंस्की ने एक सकारात्मक दावा भी किया। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 के बाद से रूसी सेना ने अग्रिम मोर्चों और युद्ध के मैदान में अपनी बढ़त खोनी शुरू कर दी है, जिससे यूक्रेन को अपनी रणनीतियां मजबूत करने का मौका मिला है। हालांकि, लंबे समय से खिंच रहे इस विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने के लिए उन्होंने दूरदर्शिता दिखाते हुए कहा कि सर्दियों का मौसम शुरू होने से पहले सभी संबंधित पक्षों को बातचीत की मेज पर आना चाहिए और आपसी संवाद के जरिए एक ठोस कूटनीतिक रास्ता तलाशना चाहिए।
इबोला की आशंका से इटली में दहशत, अस्पताल में मरीज की जांच जारी
1 Jun, 2026 10:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काग्लियारी। इटली के प्रसिद्ध काग्लियारी शहर में इबोला वायरस का एक बेहद संदिग्ध मामला सामने आने के बाद पूरे देश के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। अफ्रीकी देश कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य से हाल ही में लौटे एक मरीज में इबोला वायरस के गंभीर लक्षण देखे गए हैं। इसके तुरंत बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने सक्रियता दिखाते हुए पीड़ित को सारदीनिया की राजधानी स्थित एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां उसका इलाज शुरू कर दिया गया है। इस संदिग्ध मामले के सामने आते ही स्थानीय नागरिकों और प्रशासन में चिंता का माहौल है।
मरीज को कड़ी सुरक्षा के बीच आइसोलेशन में रखा गया
संक्रमण के इस संभावित खतरे की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने बेहद सख्त कदम उठाए हैं। संदिग्ध मरीज को वर्तमान में अस्पताल के 'इन्फेक्शियस डिजीज' (संक्रामक रोग) विभाग में पूरी तरह से एक अलग वार्ड यानी आइसोलेशन में रखा गया है। अस्पताल परिसर और शहर में वायरस के किसी भी संभावित प्रसार या संक्रमण को फैलने से पूरी तरह रोकने के लिए सभी कड़े चिकित्सा और सुरक्षा नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
रोम की प्रसिद्ध लैब भेजे गए टेस्ट सैंपल
मरीज में इबोला वायरस की मौजूदगी की सटीक पुष्टि करने के लिए उसके टेस्ट सैंपल ले लिए गए हैं। सुरक्षा और समय की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए इन सैंपलों को एक विशेष हवाई एम्बुलेंस (एयर एम्बुलेंस) के जरिए रोम की विश्व प्रसिद्ध 'स्पालनजानी लैब' में जांच के लिए भेजा गया है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम इस समय जांच रिपोर्ट का बड़ी उत्सुकता और सतर्कता से इंतजार कर रही है ताकि आगे की चिकित्सा रणनीति तय की जा सके।
प्रधानमंत्री मेलोनी ने यूरोपीय संघ से की बड़ी अपील
इटली की सरकार और शीर्ष नेतृत्व इस पूरी स्थिति पर चौबीसों घंटे बेहद करीबी नजर बनाए हुए है। कांगो में तेजी से पैर पसार रहे खतरनाक 'बुंडिबुग्यो इबोला वायरस' के प्रकोप को देखते हुए इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने वैश्विक स्तर पर चिंता जताई है। उन्होंने यूरोपीय संघ (EU) से आधिकारिक तौर पर अपील की है कि वे बाहरी देशों से आने वाले यात्रियों और अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर तत्काल प्रभाव से सख्त निगरानी व जांच बढ़ा दें। इसके साथ ही, इस वैश्विक स्वास्थ्य संकट से जमीनी स्तर पर निपटने के लिए इटली सरकार ने अपने शीर्ष विशेषज्ञों की एक विशेष मेडिकल टीम को भी कांगो भेजने का बड़ा फैसला किया है।
भगवान बुद्ध के शिष्यों के अवशेष पहुंचे मंगोलिया, श्रद्धालुओं में भारी उत्साह
1 Jun, 2026 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उलानबटार। भारत के ऐतिहासिक सांची स्तूप में संरक्षित भगवान बुद्ध के दो सबसे प्रमुख शिष्यों—अरहत सारिपुत्र और अरहत महामोग्लान (मौद्गल्यायन)—के पावन अवशेषों को 10 दिवसीय विशेष प्रदर्शनी के लिए मंगोलिया ले जाया गया है। बुद्ध पूर्णिमा (वेसाक दिवस) के पावन और ऐतिहासिक मौके पर इन पवित्र अवशेषों को मंगोलिया की राजधानी उलानबटार के प्रसिद्ध गंदनतेगचिनलिंग मठ (गंडेन मठ) में पूरे विधि-विधान और पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ स्थापित किया गया। इस पावन अवसर पर इन पवित्र अवशेषों के दर्शन और वंदन करने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु, बौद्ध भिक्षु और संघ के सदस्य उमड़ पड़े, जिन्होंने अत्यंत आदर, श्रद्धा और सम्मान के साथ इन अवशेषों का भव्य स्वागत किया।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
यह पवित्र प्रदर्शनी 1 जून से शुरू होकर 10 जून तक आम जनता और श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुली रहेगी। भारतीय वायु सेना के विशेष सी-17 'गजराज' (IL-76) विमान के जरिए इन बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक अवशेषों को पूरी सुरक्षा और राजकीय सम्मान के साथ नई दिल्ली से उलानबटार पहुंचाया गया। इस खास अवसर पर असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल भी मंगोलिया पहुंचा है। इस दौरान मंगोलिया में भारत के राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सुर्वे और देश-विदेश के कई बड़े बौद्ध नेता व शीर्ष अधिकारी भी वहां उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पल को ऐतिहासिक बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर हुआ आयोजन
इन पावन अवशेषों को मंगोलिया भेजे जाने की पृष्ठभूमि पिछले साल तैयार हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2025 में मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख की भारत यात्रा के दौरान इस भव्य आध्यात्मिक प्रदर्शनी को आयोजित करने की आधिकारिक घोषणा की थी। मंगोलियाई सरकार और वहां के नागरिकों की विशेष इच्छा के बाद संस्कृति मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) के समन्वय से इस यात्रा को अमलीजामा पहनाया गया है। यह अनूठी पहल भारत और मंगोलिया के बीच सदियों पुराने गहरे आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत रिश्तों को एक नया आयाम देने का काम करेगी।
लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद
बौद्ध धर्म में अरहत सारिपुत्र को जहां 'ज्ञान और धर्म का प्रधान' माना जाता है, वहीं अरहत महामोग्लान को उनकी 'अलौकिक व मानसिक शक्तियों' के लिए जाना जाता है। इन दोनों महापुरुषों के पवित्र अवशेष भारत की अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर हैं जो मध्य प्रदेश के सांची विहार चैत्य में सुरक्षित रखे रहते हैं। इससे पहले इन पावन अवशेषों को कंबोडिया और थाईलैंड भी ले जाया गया था, जहां लाखों की संख्या में लोगों ने इनके दर्शन कर आशीर्वाद लिया था। मंगोलियाई प्रशासन का अनुमान है कि इस 10 दिवसीय प्रदर्शनी के दौरान देश और दुनिया भर से 10 लाख से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक उलानबटार पहुंचकर अपनी गहरी आस्था प्रकट करेंगे।
अमेरिका-ईरान टकराव बढ़ा, पश्चिम एशिया में सुरक्षा संकट गहराया
1 Jun, 2026 08:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी भीषण टकराव के बीच हालात एक बार फिर बेहद विस्फोटक हो गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत शुरू हो गई है, जिसके तहत अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागी हैं। इस बड़े सैन्य हमले के बाद ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में भारी बवाल मच गया है और आक्रोशित जनता सड़कों पर उतर आई है। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के इस्तीफे की खबरों को लेकर देश के भीतर बड़ा राजनीतिक भ्रम पैदा हो गया है, हालांकि सरकारी मीडिया ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।
अमेरिका ने ईरान के रडार और ड्रोन ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि उन्होंने ईरान के गोरुक और केशम शहरों में स्थित रडार और ड्रोन कमांड ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिका के मुताबिक, ईरान ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में उनके एक MQ-1 प्रीडेटर ड्रोन को मार गिराया था, जिसके जवाब में यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है। अमेरिकी हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और आक्रामक ड्रोन प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचने का दावा किया गया है।
ईरान का पलटवार और कुवैत में अलर्ट
इस अमेरिकी हमले के तुरंत बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई का एलान किया। आईआरजीसी ने बताया कि उन्होंने जवाबी हमले में अमेरिका के उन एयरबेस को निशाना बनाया है, जहां से ईरान पर बमबारी की गई थी। इस भीषण जंग की आंच पड़ोसी देशों तक भी पहुंच गई है; कुवैत ने दावा किया है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने उसकी सीमा की ओर बढ़ रहे कई संदिग्ध ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया है। आसमान में हुए इन इंटरसेप्शन के कारण कुवैत के कई इलाकों में धमाकों की तेज आवाजें सुनी गईं, जिससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गई हैं।
ईरान में अंदरूनी बवाल और प्रदर्शन
सैन्य हमलों के बीच ईरान के भीतर आंतरिक संकट भी गहरा गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में राष्ट्रपति पेजेश्कियन के इस्तीफे की खबरें आने के बाद तेहरान की सड़कों पर हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिसमें कई लोगों के घायल होने की खबर है। हालांकि, ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने एक विशेष बयान जारी कर राष्ट्रपति के इस्तीफे का पूरी तरह से खंडन किया है। इसके बावजूद अमेरिकी कार्रवाई और अंदरूनी अस्थिरता के खिलाफ आक्रोशित लोग लगातार सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
लेबनान मोर्चे पर इस्राइल की बड़ी सैन्य कार्रवाई
पश्चिम एशिया का दूसरा मोर्चा लेबनान में खुला हुआ है, जहां इस्राइली रक्षा बलों (IDF) ने भीषण जमीनी और हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के ब्यूफोर्ट रिज और वादी अल-सलुकी क्षेत्र में प्रवेश कर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'ब्यूफोर्ट किले' पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। दक्षिणी लेबनान में हुए इन ताजा हमलों में तीन महिलाओं समेत 8 नागरिकों की मौत हो गई है। इसके जवाब में हिजबुल्ला ने भी इस्राइल पर कई रॉकेट और मिसाइलें दागीं, जिन्हें इस्राइली डिफेंस सिस्टम ने आसमान में ही नष्ट कर दिया।
वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता और कूटनीतिक निंदा
लेबनान में इस्राइल की इस बढ़ती सैन्य आक्रामकता पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने इस सैन्य कार्रवाई पर गहरी चिंता जताते हुए चेतावनी दी है कि इससे लेबनान में विस्थापन की एक भयानक लहर पैदा होगी, जो दीर्घकाल में खुद इस्राइल की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। वहीं, ब्रिटेन के विदेश मंत्री और अरब लीग के प्रमुख ने भी इस्राइल की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि इस सैन्य आक्रामकता ने कूटनीति के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। सभी वैश्विक नेताओं ने क्षेत्र में महाविनाश को रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से युद्धविराम लागू करने की मांग की है।
चीन रेगिस्तान में बना रहा विशाल परमाणु सुरक्षा नेटवर्क
31 May, 2026 12:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन के उत्तर-पश्चिमी रेगिस्तानी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य निर्माण गतिविधियों की खबरों ने वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों और अमेरिकी रणनीतिक समुदाय का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। उपग्रह तस्वीरों और रक्षा विश्लेषणों के अनुसार, चीन अपने परमाणु हथियारों और लंबी दूरी की मिसाइलों की सुरक्षा के लिए व्यापक बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है। विशेषज्ञ इसे चीन की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।
मीडिया रिपोट्स के अनुसार, हामी न्यूक्लियर साइलो फील्ड के आसपास लॉन्चिंग साइट्स, मजबूत बंकर, संचार केंद्र और सैन्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में 80 से अधिक बड़े कंक्रीट लॉन्च पैड तैयार किए गए हैं, जिनका उपयोग मोबाइल मिसाइल लॉन्चर, वायु रक्षा प्रणालियों और अन्य सैन्य उपकरणों की तैनाती के लिए किया जा सकता है। विशेषज्ञों के बीच सबसे अधिक चर्चा एक बहुस्तरीय सुरक्षा संरचना वाले कथित ऑक्टागन बेस को लेकर है। विश्लेषकों का मानना है कि इसमें केंद्रीय कमांड सेंटर, सैन्य कर्मियों के लिए संचालन सुविधाएं और हथियारों व सैन्य वाहनों के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं। हालांकि चीन ने इस संबंध में कोई आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया है।
उपग्रह तस्वीरों में क्षेत्र को रेलवे नेटवर्क, हथियार भंडारण केंद्रों और अन्य रणनीतिक सुविधाओं से जुड़ा हुआ भी दिखाया गया है। हाल के महीनों में यहां सैन्य गतिविधियों और अभ्यासों में वृद्धि के संकेत मिलने की बात कही गई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अपनी तथाकथित सेकंड स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। इसका अर्थ है कि यदि किसी संभावित संघर्ष में उस पर पहला परमाणु हमला होता है, तब भी वह जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता बनाए रख सके। विश्लेषकों के अनुसार, इसी उद्देश्य से चीन प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और मिसाइल सुरक्षा ढांचे को भी उन्नत कर रहा है।
हालांकि चीन लंबे समय से नो फर्स्ट यूज़ यानी पहले परमाणु हमला न करने की नीति का समर्थन करता रहा है, लेकिन पश्चिमी देशों और विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में इस सैन्य विस्तार को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग पहले भी चेतावनी दे चुका है कि चीन दुनिया में सबसे तेजी से अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार करने वाले देशों में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सामरिक प्रतिस्पर्धा के बीच चीन का यह सैन्य विस्तार आने वाले वर्षों में वैश्विक सुरक्षा संतुलन और रणनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
एआई से नौकरियां जाने का डर बेवजह? टेक दिग्गजों ने बदली अपनी बात
31 May, 2026 10:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर नौकरियों के खत्म होने का जो डर बीते कुछ सालों से मंडरा रहा था, उस अब गूगल, एनवीडिया और चैटजीपीटी बनाने वाली ओपनएआई जैसी दिग्गज कंपनियों के सीईओ बेवजह बता रहे हैं। उनका कहना है कि एआई इंसानों की जगह नहीं लेगा, बल्कि काम करने के तरीके को बदलेगा और एक सहयोगी के रूप में काम करेगा।
बीते कुछ सालों में एआई के तेजी से विकास और चैटजीपीटी जैसे टूल्स के आने से यह बहस और तेज हो गई थी कि लाखों लोग बेरोजगार हो सकते हैं। दुनिया भर में कई कंपनियों ने एआई के नाम पर छंटनी भी की, जिससे डर बढ़ गया। लेकिन अब इन्हीं टेक दिग्गजों के सुर बदले हुए नजर आ रहे हैं, जो एआई के भविष्य को लेकर अधिक आशावादी दिख रहे हैं। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में स्वीकार किया कि एआई को लेकर नौकरियों के खत्म होने का उनका अपना अनुमान गलत साबित हुआ है। उन्हें लगा था कि एआई सबसे पहले एंट्री-लेवल ऑफिस जॉब्स को तेजी से प्रभावित करेगा, लेकिन बड़े पैमाने पर ऐसा अभी तक देखने को नहीं मिला। ऑल्टमैन ने कहा कि वह अपनी गलती से खुश हैं। उनके मुताबिक, एआई भले ही कई काम आसान कर रहा हो, लेकिन मानवीय जुड़ाव और बातचीत की अहमियत को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाया है, जिसे मशीनें आसानी से कॉपी नहीं कर सकतीं।
दूसरी ओर, अमेरिकी टेक कंपनी एनवीडिया के सीईओ जेनसन हुआंग ने कहा कि एआई नौकरियों को पूरी तरह खत्म नहीं करेगा, बल्कि यह उन लोगों को आगे बढ़ने का मौका देगा जो एआई को सीखते और इसके साथ काम करना चाहते है। उन्होंने उन कंपनियों पर भी सवाल उठाया जो हर छंटनी का कारण एआई को बताती हैं। हुआंग का तर्क है कि एआई अभी इतना परिपक्व नहीं है कि अचानक पूरी दुनिया की नौकरियां खत्म कर दे।
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई भी एआई को डर के बजाय एक नए उपकरण के रूप में देखने की बात करते रहे हैं। उनका मानना है कि आने वाली पीढ़ी एआई के साथ काम करके अपना भविष्य बनाएगी और लोगों को नई स्किल्स सीखनी होंगी। पिचाई का मानना है कि एआई इंसानों की मदद करेगा, लेकिन लोगों को नई स्किल्स सीखनी होंगी।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि चुनौती खत्म हो गई है। कुछ एंट्री-लेवल और दोहराए जाने वाले काम कम हुए हैं, लेकिन साथ ही एआई ट्रेनिंग, मॉनिटरिंग और एआई -आधारित कंटेंट वर्क जैसे नए तरह के काम भी पैदा हो रहे हैं। एक नई रिसर्च भी दर्शाती है कि एआई सीधे नौकरियां खत्म करने के बजाय काम करने के तरीके और जिम्मेदारियों को बदल रहा है।
अकेलेपन का आनंद ले रही हैं पॉप स्टार शकीरा
31 May, 2026 10:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लॉस एंजेलिस। मशहूर पॉप गायिका और गीतकार शकीरा एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने अपने रिश्तों, बच्चों और जिंदगी के कठिन दौर को लेकर खुलकर बात की। वर्ष 2022 में फुटबॉलर जेरार्ड पिके से अलग होने के बाद शकीरा अब पूरी तरह से अपने बच्चों और करियर पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनकी जिंदगी में किसी नए रिश्ते या प्यार के लिए कोई जगह नहीं है। एक ब्रिटिश समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में शकीरा ने कहा कि इस समय उनकी प्राथमिकता उनके दोनों बेटे मिलान और साशा हैं। वह अपने काम और बच्चों की परवरिश में काफी व्यस्त हैं, जिसके कारण किसी रोमांटिक रिश्ते के बारे में सोच भी नहीं रही हैं। शकीरा के मुताबिक, वह अपने अकेलेपन का भी पूरी तरह आनंद ले रही हैं और यह समय उनके लिए खुद को गहराई से समझने का है। उनचास वर्षीय शकीरा ने अपने करियर को लेकर कहा कि वह अब अपने काम से पहले से कहीं ज्यादा जुड़ाव महसूस करती हैं और उन्होंने अपने करियर को कभी इतनी गहराई से महसूस नहीं किया था, जितना अब कर रही हैं। यह दौर उन्हें जिंदगी को नए नजरिए से देखने और खुद को मजबूत बनाने का अवसर दे रहा है। उन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल समय को याद करते हुए बताया कि जब उनका रिश्ता टूट रहा था, ठीक उसी दौरान उनके पिता विलियम एक गंभीर हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती थे। उस समय वह मानसिक और भावनात्मक रूप से पूरी तरह टूट चुकी थीं। जिस परिवार को वह हमेशा एकजुट रखना चाहती थीं, उसके बिखरने का दर्द उनकी जिंदगी का सबसे अंधकारमय दौर था। हालांकि, उनका मानना है कि मुश्किल वक्त इंसान को बहुत कुछ सिखाता है और कठिन परिस्थितियां उसे अंदर से सुदृढ़ बनाती हैं। उन्होंने कहा कि अब उन्हें यह बात सच लगती है कि जो चीज इंसान को खत्म नहीं करती, वह उसे और ज्यादा मजबूत बना देती है। शकीरा ने कहा कि वह अपनी जिंदगी के हर अच्छे और बुरे पल के लिए आभार व्यक्त करती हैं, क्योंकि हर अनुभव ने उन्हें आगे बढ़ना सिखाया है।
पाकिस्तान की आर्थिक रणनीति पर आलोचना, बजट फैसलों पर उठे सवाल
30 May, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: गंभीर आर्थिक संकट, आसमान छूती महंगाई और रिकॉर्ड बेरोजगारी से बेहाल पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी मटियामेट हो चुकी छवि को बचाने के लिए विदेशी लॉबिस्ट्स और प्रेशर ग्रुप्स (दबाव समूहों) पर करोड़ों रुपये फूंक रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में मानवाधिकारों के खुलेआम उल्लंघन, अल्पसंख्यकों पर जुल्म और सेना की तानाशाही को लेकर इस्लामाबाद लगातार वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ रहा है। अपनी इस दोहरी नीति के तहत, पाकिस्तान घरेलू मोर्चे पर जनता को बुनियादी सुविधाएं देने में भले ही नाकाम रहा हो, लेकिन विदेशों में पीआर (पब्लिक रिलेशंस) चमकाने के लिए सरकारी खजाना खोल चुका है।
ट्रंप प्रशासन के दौर में पाकिस्तान की छटपटाहट
पाकिस्तान लंबे समय से खुद को दुनिया के सामने एक लोकतांत्रिक और मजबूत देश के रूप में पेश करने का ढोंग करता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन के साथ संबंधों को सुधारने के लिए भी इस्लामाबाद लगातार प्रोपेगैंडा फैला रहा है। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके उलट है। सोशल मीडिया के इस दौर में बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से आ रही दमन की तस्वीरें दुनिया के सामने आ चुकी हैं, जिससे घबराकर पाकिस्तान अब अमेरिकी लॉबिंग कंपनियों के सहारे नैरेटिव बदलने की कोशिश कर रहा है।
हर महीने $50,000 का खर्च: आखिर अमेरिका में कौन संभाल रहा है कमान?
"हालिया कूटनीतिक दस्तावेजों के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिका की दिग्गज लॉबिंग फर्म ‘एर्विन ग्रेव्स स्ट्रेटजी ग्रुप एलएलसी’ के साथ एक बड़ा करार किया है। इसके लिए पाकिस्तान इस फर्म को हर महीने 50 हजार अमेरिकी डॉलर (लगभग 42 लाख रुपये) का भुगतान करेगा। इस फर्म का मुख्य काम वाशिंगटन में अमेरिकी नीति निर्माताओं, सांसदों और बड़े नेताओं के बीच पाकिस्तान के पक्ष में माहौल तैयार करना और वहां गोलमेज सम्मेलनों व सेमिनारों के जरिए पाकिस्तान के मानवाधिकारों के काले रिकॉर्ड पर परदा डालना है।"
अफगानिस्तान के बहाने खुद को विक्टिम दिखाने की चाल
पाकिस्तान अब वैश्विक मंचों पर अफगानिस्तान के मुद्दे को भुनाने की फिराक में है। वह लगातार यह नैरेटिव सेट करने में जुटा है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी संगठन 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (TTP) कर रहा है, जिससे खुद पाकिस्तान पीड़ित है। हालांकि, अफगान तालिबान इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। अब अमेरिकी लॉबिंग फर्मों को यह टास्क दिया गया है कि वे पश्चिमी देशों को समझाएं कि अफगानिस्तान ही पूरे क्षेत्र में अस्थिरता की जड़ है, ताकि पाकिस्तान को मिलने वाली मदद जारी रह सके।
UN की रिपोर्ट ने उतारी इज्जत
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (UN) मानवाधिकार समिति की एक बेहद तल्ख रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की पोल खोल दी थी। इस रिपोर्ट में पाकिस्तान के भीतर:
हिंदू और ईसाई लड़कियों के जबरन अपहरण और धर्म परिवर्तन पर गहरी चिंता जताई गई थी।
शिया, अहमदी, ईसाई, हिंदू और सिख समुदायों पर लगातार हो रहे जानलेवा हमलों को रोकने में वहां की सरकार को पूरी तरह नाकाम बताया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र की इस फटकार के बाद ही पाकिस्तान ने लॉबिंग फर्मों को सक्रिय किया है ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में पाकिस्तान के समर्थन में प्रायोजित (Paid) लेख छपवाए जा सकें।
आर्मी चीफ आसिम मुनीर पर चौतरफा दबाव
जानकारों के मुताबिक, पाकिस्तान इस समय पूरी तरह से सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के शिकंजे में है। लेकिन टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा पाकिस्तानी फौज पर किए जा रहे ताबड़तोड़ हमलों ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को घुटनों पर ला दिया है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बेअसर साबित होने के बाद आसिम मुनीर की साख को गहरा धक्का लगा है।
आलोचकों का साफ कहना है कि जहां एक तरफ आम पाकिस्तानी नागरिक दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहा है, वहीं जनरल मुनीर और शहबाज सरकार करोड़ों रुपये सिर्फ अपनी झूठी साख बचाने वाले विदेशी अभियानों पर बर्बाद कर रहे हैं।
ईरान-अमेरिका में आर-पार: प्रतिबंधों के बाद ईरान की खुली चुनौती, कहा- होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का नहीं चलेगा जोर
30 May, 2026 01:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान | मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक खींचतान के बीच ईरान के नवनिर्मित समुद्री नियामक निकाय 'फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण' (PGSA) ने वाशिंगटन द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों पर कड़ा ऐतराज जताया है। ईरान की इस नवगठित संस्था ने दोटूक शब्दों में कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग में अपने सभी अभियानों और गतिविधियों को बिना किसी रुकावट के जारी रखेगी। इसके साथ ही, प्राधिकरण ने यह भी साफ किया है कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले उन तमाम अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को नहीं रोका जाएगा जो किसी शत्रुतापूर्ण गतिविधि में शामिल नहीं हैं।
अमेरिकी प्रतिबंधों को बताया नाकाम, एक्स (X) पर जारी किया तीखा बयान
पीजीएसए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए अमेरिकी नीतियों पर सीधा प्रहार किया है। संस्था ने कहा कि अमेरिका पूर्व में सैन्य आक्रामकता और कूटनीतिक दबाव के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना वर्चस्व स्थापित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है, और अब आर्थिक प्रतिबंधों का सहारा लेकर भी वह अपने मंसूबों में कभी कामयाब नहीं हो सकेगा। ईरानी संस्था ने इन प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ और पूरी तरह अनुचित करार देते हुए दावा किया कि वाशिंगटन के इस कदम से उनके प्रशासनिक और समुद्री कामकाज पर रत्ती भर भी असर नहीं पड़ेगा।
अमेरिका का गंभीर आरोप: जहाजों से अवैध वसूली कर आईआरजीसी को भेजा जा रहा फंड
दूसरी तरफ, अमेरिकी प्रशासन ने इस ईरानी संस्था पर पाबंदियां लगाने के पीछे गंभीर तर्क दिए हैं। वाशिंगटन का आरोप है कि तेहरान इस नए समुद्री प्राधिकरण की आड़ में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वैश्विक कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों से कथित तौर पर अवैध टैक्स वसूल रहा है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, इस वसूली से होने वाली मोटी कमाई को सीधे तौर पर ईरान की कुलीन सैन्य शाखा 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के खातों में ट्रांसफर किया जा रहा है। अमेरिकी वित्त विभाग का दावा है कि पीजीएसए का गठन ही आईआरजीसी की नौसेना के साथ मिलकर वैश्विक समुद्री व्यापार पर दबाव बनाने के लिए किया गया है, जिसके चलते इसे ब्लैकलिस्ट किया गया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान की यह नई पैंतरेबाज़ी साबित करती है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण तेहरान को अपनी सेना के लिए धन जुटाने में भारी किल्लत हो रही है, इसलिए अमेरिका ईरानी तेल निर्यात और उसके वित्तीय नेटवर्क पर नकेल और कसना जारी रखेगा।
वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद अहम है होर्मुज जलमार्ग, ईरान ने तय की सीमाएं
इन आरोपों के बीच, पीजीएसए ने अपनी भूमिका को सही ठहराते हुए कहा है कि उसका एकमात्र उद्देश्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में समुद्री यातायात को सुचारु और सुरक्षित बनाए रखना है। इसके साथ ही संस्था ने होर्मुज जलमार्ग में अपने विशेष निगरानी क्षेत्र की भौगोलिक सीमाएं भी निर्धारित कर दी हैं और स्पष्ट किया है कि इस क्षेत्र से पार होने वाले सभी जहाजों को सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ईरानी अधिकारियों के साथ अनिवार्य रूप से समन्वय स्थापित करना होगा। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन माना जाता है, क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कुल आपूर्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में महाशक्तियों के बीच बढ़ता यह नया विवाद आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और समुद्री व्यापार को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।
जंग के बीच शांति की उम्मीद? इस्राइल-लेबनान के बीच ऐतिहासिक सैन्य वार्ता शुरू, पेंटागन में संघर्ष विराम पर मंथन
30 May, 2026 01:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेरूत | मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग के बीच इस्राइली जमीनी सेना शुक्रवार को दक्षिणी लेबनान के रणनीतिक रूप से अहम दिब्बीन गांव के भीतर प्रवेश कर गई। इस कदम से इस्राइल का सैन्य अभियान लेबनानी सरजमीं पर और गहरा गया है। इस जमीनी कार्रवाई के साथ ही इस्राइल द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों में कम से कम छह लोगों की जान चली गई। इनमें से पांच मौतें देइर कानौन अल नहर और अब्बासियेह गांवों में हुए हमलों में हुईं, जबकि एब्बा गांव में एक म्यूनिसिपल पुलिसकर्मी की मौत हो गई।
पेंटागन में ऐतिहासिक सीधी सैन्य बातचीत, संघर्षविराम को पूर्ण रूप से लागू करने पर जोर
एक बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम के तहत, वॉशिंगटन स्थित अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) में इस्राइल और लेबनान के सैन्य अधिकारियों के बीच दशकों बाद पहली बार आमने-सामने की सीधी बातचीत हुई। इस बैठक में छह सदस्यीय लेबनानी सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने इस्राइली अफसरों से मुलाकात की, जिसे पेंटागन ने सकारात्मक बताया। वार्ता के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के व्यावहारिक ढांचे पर विमर्श हुआ। लेबनान ने मांग रखी कि वर्ष 2024 में अमेरिका की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम की निगरानी समिति को पुनर्जीवित किया जाए और संघर्षविराम को व्यापक रूप से लागू किया जाए। लेबनानी सेना के प्रमुख जोसेफ औन ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर स्पष्ट किया कि किसी भी अन्य राजनीतिक मुद्दे या सीमा पर लेबनानी सेना की तैनाती से पहले युद्धविराम का पूर्ण पालन अनिवार्य है।
लितानी नदी के पास भीषण जमीनी जंग, नेतन्याहू ने उत्तरी मोर्चे का किया दौरा
दक्षिणी लेबनान में ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट किले के समीप स्थित योहमोर और जवतर अल-शर्कियेह गांवों के पास इस्राइली सुरक्षाबलों और हिजबुल्लाह के लड़ाकों के बीच आमने-सामने की खूनी झड़पें जारी हैं। हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने योहमोर में दाखिल हुए इस्राइली सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस बीच, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उत्तरी मोर्चे का रणनीतिक दौरा किया। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि उनकी सेना लितानी नदी पार कर बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर चुकी है और हिजबुल्लाह को कड़ा सबक सिखा रही है। नेतन्याहू ने साफ किया कि उनकी सेना बेरूत, बेका घाटी सहित पूरे मोर्चे पर आक्रामक अभियान चला रही है। इसी बीच, इस्राइली सेना की नई सैन्य चेतावनी के बाद सैकड़ों लेबनानी परिवारों को घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागना पड़ा है।
अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक सहमति की सुगबुगाहट, लेबनान में भारी तबाही
वैश्विक कूटनीति के गलियारों से यह खबर भी आ रही है कि अमेरिका और ईरान के वार्ताकारों के बीच युद्धविराम की अवधि को और 60 दिनों के लिए आगे बढ़ाने तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नए सिरे से बातचीत शुरू करने को लेकर एक प्रारंभिक सहमति बनी है। हालांकि, ईरान ने आधिकारिक तौर पर अब तक इसकी पुष्टि नहीं की है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी एक संभावित समझौते के संकेत दिए हैं, लेकिन यह साफ नहीं है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस पर अंतिम मुहर लगाएंगे या नहीं। हिजबुल्लाह के सांसद हसन फदलल्लाह का कहना है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच समझौता ही लेबनान में इस्राइली सैन्य चक्रव्यूह को रोक सकता है। गौरतलब है कि मार्च 2025 से भड़के इस ताजा संघर्ष में अब तक लेबनान में 3,200 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है और 10 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं।
सैटेलाइट इमेज ने खोले चीन के राज, परमाणु क्षमता को लेकर बढ़ी चर्चा
30 May, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था और रणनीतिक संतुलन के बीच चीन की एक नई सैन्य गतिविधि ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है। हाल ही में सामने आईं सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि चीन अपने परमाणु मिसाइल साइलो (जमीन के नीचे बने मिसाइल बेस) के इर्द-गिर्द एक बेहद अत्याधुनिक और विस्तृत सैन्य बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है। इस गोपनीय नेटवर्क में नए लॉन्च पैड, बख्तरबंद बंकर और हाई-टेक संचार केंद्र (कम्युनिकेशन सेंटर्स) शामिल हैं।
सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस विशाल निर्माण का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि यदि अमेरिका भविष्य में चीन के परमाणु ठिकानों पर पहले हमला (फर्स्ट स्ट्राइक) करता है, तो चीन उसे पूरी तरह नाकाम कर सके। इसके साथ ही, विपरीत परिस्थितियों में भी चीन की जवाबी हमला करने की क्षमता (सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी) पूरी तरह सुरक्षित रहे। आइए, सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं कि चीन की इस खुफिया और बड़ी तैयारी के पीछे का पूरा गणित क्या है:
सवाल: सैटेलाइट से मिलीं नई तस्वीरों में क्या नजर आ रहा है?
जवाब: रक्षा रिपोर्टों और उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों के मुताबिक, चीन अपने सुदूर रेगिस्तानी इलाकों में बड़े पैमाने पर सैन्य ढांचे का विस्तार कर रहा है। परमाणु मिसाइल अड्डों के चारों तरफ नए लॉन्च पैड, मजबूत बंकर और कमांड सेंटर बनाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरा जाल चीन की परमाणु मिसाइलों को सुरक्षित रखने और संकट के समय उन्हें तुरंत ऑपरेट करने के लिए बुना जा रहा है।
सवाल: चीन यह निर्माण किन संवेदनशील इलाकों में कर रहा है?
जवाब: यह नया और विशाल सैन्य परिसर मुख्य रूप से शिनजियांग और गांसू प्रांत के सीमावर्ती इलाकों में विकसित किया जा रहा है। ये वही दुर्गम क्षेत्र हैं, जहाँ चीन ने अपनी सबसे खतरनाक और लंबी दूरी तक मार करने वाली अंतरमहाद्वीपीय परमाणु मिसाइलों के साइलो बना रखे हैं। ये साइलो चीन की जमीनी परमाणु ताकत की रीढ़ माने जाते हैं।
सवाल: इन तस्वीरों में किस तरह के नए निर्माण चिह्नित किए गए हैं?
जवाब: तस्वीरों में 80 से अधिक ऐसे नए मिलिट्री स्ट्रक्चर्स दिखाई दिए हैं, जिनका उपयोग मोबाइल मिसाइल लॉन्चरों को छुपाने और हवाई रक्षा प्रणालियों (एयर डिफेंस सिस्टम) की तैनाती के लिए किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, वहां इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (ई-युद्ध), सैटेलाइट कम्युनिकेशन और उन्नत कमांड ऑपरेशंस से जुड़ी संदिग्ध इमारतें भी देखी गई हैं।
सवाल: रक्षा मामलों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इस पर क्या राय रख रहे हैं?
जवाब: हवाई स्थित पैसिफिक फोरम के वरिष्ठ फेलो अलेक्जेंडर नील के अनुसार, यह बुनियादी ढांचा बेहद असाधारण और बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है। यह मिसाइल साइलो के मुख्य क्षेत्रों से बाहर निकलकर हजारों वर्ग किलोमीटर के रेगिस्तानी इलाके को कवर कर रहा है। भले ही इसकी वास्तविक क्षमताएं आने वाले समय में पूरी तरह स्पष्ट होंगी, लेकिन यह साफ है कि चीन अपनी रणनीतिक परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है।
सवाल: चीन के लिए अपने इन मिसाइल साइलो की सुरक्षा इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
जवाब: चीन हमेशा से यह कहता रहा है कि उसकी परमाणु नीति न्यूनतम लेकिन पूरी तरह विश्वसनीय रक्षा तंत्र पर आधारित है। इसका सीधा मतलब यह है कि खुद पर परमाणु हमला होने की स्थिति में वह दुश्मन को पूरी तरह तबाह करने की क्षमता रखता हो। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन साइलो के चारों तरफ सुरक्षा का यह अभेद्य घेरा बनाना इसी रक्षा रणनीति का एक अनिवार्य हिस्सा है।
सवाल: क्या चीन अपनी परमाणु नीति में कोई बदलाव कर रहा है?
जवाब: आधिकारिक तौर पर चीन की नीति 'नो फर्स्ट यूज' (पहले इस्तेमाल नहीं करने) की है। यानी वह किसी भी युद्ध में पहले परमाणु हथियार नहीं चलाएगा। हालांकि, पश्चिमी राजनयिकों और रणनीतिकारों का मानना है कि ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर यदि कोई बड़ा टकराव होता है, तो चीन अपनी इस मजबूत होती परमाणु ताकत का इस्तेमाल विरोधी देशों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए कर सकता है।
सवाल: इन नए सैन्य परिसरों की बनावट कैसी है और इनका केंद्र कहां है?
जवाब: पूर्वी शिनजियांग में हमाई परमाणु साइलो क्षेत्र से लगभग 140 और 230 किलोमीटर की दूरी पर पिछले छह सालों के भीतर दो अष्टकोणीय (ऑक्टागोनल) सैन्य परिसर बनाए गए हैं। इन हाई-टेक अड्डों पर भारी सैन्य वाहनों और सैनिकों के रहने की पूरी व्यवस्था है। इसके अलावा वहां हथियार डिपो, कंक्रीट के बंकर, हवाई पट्टियां और सीधे संपर्क के लिए रेलवे लाइनें भी बिछाई गई हैं।
सवाल: क्या यह पूरी तरह साफ है कि इन गुप्त ठिकानों का इस्तेमाल किस काम के लिए होगा?
जवाब: नहीं, विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि इन नए लॉन्च पैड्स पर किस प्रकार के घातक हथियार तैनात किए जाएंगे या इन अष्टकोणीय परिसरों के भीतर वास्तव में किस स्तर की गतिविधियां चल रही हैं। हालांकि, उनका अनुमान यही है कि इनका उपयोग मोबाइल मिसाइल यूनिट्स, वायु रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के संचालन को मजबूती देने के लिए होगा।
सवाल: चीन की इस बढ़ती परमाणु ताकत पर अमेरिका का क्या आकलन है?
जवाब: अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) और हथियार नियंत्रण विशेषज्ञों का दावा है कि चीन दुनिया के किसी भी अन्य देश के मुकाबले सबसे तेज गति से अपने परमाणु जखीरे का विस्तार कर रहा है। पेंटागन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन साल 2030 तक 1,000 से अधिक सक्रिय परमाणु हथियार तैनात करने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि चीन ने अपने तीन मुख्य मिसाइल क्षेत्रों में करीब 100 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM) पहले ही तैनात कर दी हैं।
सवाल: चीन का मिसाइल अटैक अर्ली वार्निंग सिस्टम कितना मजबूत है?
जवाब: अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने अपने 'हुओयान-1' सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए अपनी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (अर्ली वार्निंग सिस्टम) को बेहद सटीक बना लिया है। यह सैटेलाइट नेटवर्क दुश्मन की ओर से आने वाली किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल का पता महज 90 सेकंड के भीतर लगा सकता है और कुछ ही मिनटों में इसकी सटीक जानकारी कमांड सेंटर को भेज देता है, जिससे जवाबी कार्रवाई के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।
सवाल: इस पूरे मामले में वैश्विक विश्लेषकों को सबसे ज्यादा हैरान किस बात ने किया है?
जवाब: विशेषज्ञ इस बात से हैरान हैं कि मिसाइल साइलो की सुरक्षा के लिए बनाया गया यह सपोर्ट नेटवर्क जरूरत से ज्यादा बड़ा और फैला हुआ है। एक प्रमुख अमेरिकी थिंक टैंक के परमाणु सूचना परियोजना निदेशक हैंस क्रिस्टेंसेन ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, "मैंने अपने पूरे करियर में ऐसा व्यापक और असाधारण सुरक्षा नेटवर्क पहले कभी नहीं देखा।" उन्होंने इसे रक्षा इतिहास का एक अभूतपूर्व प्रयास करार दिया है।
'राष्ट्रपति पद के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम': डोनाल्ड ट्रंप की मेडिकल रिपोर्ट पर बोले डॉक्टर
30 May, 2026 12:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन | अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह से तंदुरुस्त हैं। उनके मुख्य चिकित्सक ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार को वाल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर में हुए व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण (हेल्थ चेकअप) के बाद ट्रंप को पूरी तरह स्वस्थ पाया गया है। डॉक्टर के अनुसार, राष्ट्रपति का स्वास्थ्य अत्यंत उत्कृष्ट श्रेणी का है और वे देश के शीर्ष पद की सभी संवैधानिक व प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पूरी मुस्तैदी से निभाने के लिए पूरी तरह सक्षम और फिट हैं।
22 चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख में संपन्न हुए सभी जटिल टेस्ट
राष्ट्रपति के मुख्य डॉक्टर शॉन बारबेला की ओर से शुक्रवार देर रात एक विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट जारी की गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप के स्वास्थ्य की बारीकी से जांच करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के 22 विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक विशेष टीम तैनात की गई थी। इस उच्च स्तरीय चिकित्सा दल की सीधी निगरानी में राष्ट्रपति का सीटी स्कैन, हृदय संबंधी एडवांस्ड इमेजिंग, कैंसर स्क्रीनिंग (कैंसर की प्रारंभिक जांच) और अन्य कई प्रकार के प्रिवेंटिव हेल्थ असेसमेंट (निवारक स्वास्थ्य आकलन) किए गए, जिनकी रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य रही है।
शानदार मानसिक और शारीरिक क्षमता, लेकिन पहले से बढ़ा वजन
अपनी चिकित्सा जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद 79 वर्षीय राष्ट्रपति ट्रंप ने भी संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सभी टेस्ट बिल्कुल सही रहे हैं। हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट में एक बात सामने आई है कि वर्तमान में राष्ट्रपति का वजन 238 पाउंड (लगभग 108 किलोग्राम) दर्ज किया गया है। यह वजन अप्रैल 2025 में हुए उनके पिछले मेडिकल टेस्ट की तुलना में 14 पाउंड (करीब 6 किलोग्राम) अधिक है। डॉक्टरों ने उनके इस बढ़ते वजन पर ध्यान देते हुए उन्हें अपने खान-पान (डाइट) में सुधार करने, दैनिक शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने और वजन को नियंत्रित करने की विशेष सलाह दी है।
उम्र के इस पड़ाव पर भी सेहत लाजवाब, कार्यक्षमता बेहतरीन
बढ़ते वजन की सलाह के बावजूद डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी डोनाल्ड ट्रंप की मानसिक सतर्कता, सोचने-समझने की शक्ति और शारीरिक कार्यक्षमता बेहद लाजवाब है। उनके वाइटल पैरामीटर्स (प्रमुख स्वास्थ्य सूचकांक) काफी मजबूत हैं, जो यह दर्शाते हैं कि उन पर काम के अत्यधिक दबाव का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं है। इस मेडिकल रिपोर्ट के सामने आने के बाद उनके समर्थकों और प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
'पैसा न मिले तो मेरे पास आना, मेरा ही विभाग है...': पंचायत मंत्री का फरियादियों को बड़ा भरोसा
30 May, 2026 11:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र | "यदि आगामी 15 दिनों के भीतर आपके रोके गए पैसे वापस नहीं मिले, तो सीधे मेरे पास चले आना। मैं स्वयं इस मामले को देखूंगा क्योंकि यह मेरा ही महकमा है। लापरवाही बरतने वाले अफसरों को मैं कतई नहीं बख्शता।" हरियाणा के विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने जिला सचिवालय में आयोजित जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की मासिक बैठक के दौरान एक पीड़ित को ढाढस बंधाते हुए यह बात कही। कैबिनेट मंत्री के इस सख्त रुख को देखकर बैठक में पहुंचे अन्य फरियादियों के मन में भी न्याय की आस जगी। इस बैठक में अध्यक्ष के तौर पर मंत्री ने कुल 12 जनसमस्याओं की सुनवाई की, जिनमें से 6 का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया और शेष 6 पर त्वरित जांच के आदेश दिए गए।
60 लाख के अटके भुगतान पर मंत्री सख्त, डिपो घोटाले में गिरफ्तारी के आदेश
बैठक में अजरानी के निवासी संतोष कुमार ने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020-21 के दौरान हंसाला, लुखी और उदारसी सहित कई गांवों में लाखों की लागत से इंटरलॉकिंग टाइलें लगाने का कार्य किया गया था। इस कार्य के कुल 60 लाख रुपये के बिल में से उन्हें केवल 10 लाख रुपये का ही भुगतान किया गया, जबकि बाकी की रकम के लिए वे पिछले कई सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए कैबिनेट मंत्री ने अधिकारियों को 15 दिन के भीतर बकाया राशि चुकाने का हुक्म दिया। इसके अलावा, लाडवा निवासी सोनू नारंग की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मंत्री पंवार ने पुलिस को निर्देश दिए कि अवैध रूप से राशन डिपो चलाने वाले आरोपी नरेश गर्ग को जांच में शामिल किया जाए और इस मिलीभगत में शामिल खाद्य आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर व सब-ईस्पेक्टर को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
सुस्त कार्यप्रणाली पर डीटीपी विभाग को फटकार, अंसल सिटी के लिए बनाई कमेटी
कष्ट निवारण समिति की बैठक में अंसल सुशांत सिटी के प्रधान ईश्वर सिंह और अन्य पदाधिकारियों ने वहां की बदहाल स्थिति को लेकर अपनी आवाज उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (DTP) विभाग की घोर लापरवाही के कारण वहां के करीब 2500 नागरिक नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं, जहां बिजली, पानी और सीवरेज की बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। निवासियों ने कहा कि डीटीपी इस कदर सुस्त विभाग है जो किसी भी आधिकारिक पत्र का जवाब तक नहीं देता। इस शिकायत पर कैबिनेट मंत्री ने एक विशेष जांच कमेटी का गठन किया, जो 15 दिनों के भीतर स्थानीय नागरिकों से बात कर अपनी रिपोर्ट उपायुक्त (डीसी) को सौंपेगी। वहीं, तंगोर ग्राम पंचायत द्वारा 22 किलोमीटर लंबी सड़क में से महज 100 मीटर का टुकड़ा वर्षों से अधूरा छोड़ने की शिकायत पर लोक निर्माण विभाग (PWD) को जल्द से जल्द टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य संपन्न कराने के निर्देश दिए गए।
कांग्रेस विधायकों ने भी उठाई आवाज, मास्टर प्लान को लेकर लगाए आरोप
इस मासिक बैठक में विपक्षी दल कांग्रेस के तीनों स्थानीय विधायक—थानेसर से अशोक अरोड़ा, पिहोवा से मनदीप चट्ठा और शाहाबाद से रामकरण काला भी जनता की पैरवी करने पहुंचे। पूर्व मंत्री व विधायक अशोक अरोड़ा ने ज्योतिसर क्षेत्र के किसानों की जमीनों से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामला कैबिनेट मंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुरुक्षेत्र विकास प्राधिकरण के 'मास्टर प्लान 2041' को कष्ट निवारण समिति के सदस्यों की सहमति और मंजूरी के बिना ही लगातार दूसरी बार राज्य सरकार के पास भेज दिया गया, जो नियमों के खिलाफ है। हालांकि, बैठक के उपरांत विधायक अरोड़ा ने असंतोष जाहिर करते हुए यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष द्वारा उठाए गए इन गंभीर मुद्दों पर कैबिनेट मंत्री की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
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