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पानीपत सिविल अस्पताल में निरीक्षण के दौरान मिली खामियां, अधिकारियों की लगी क्लास
24 Jul, 2026 04:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत: जिला नागरिक अस्पताल में शुक्रवार दोपहर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष उषा प्रियदर्शनी ने अचानक पहुंचकर औचक निरीक्षण किया और अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं में कई तरह की खामियां उजागर होने पर उन्होंने मौजूद अधिकारियों और चिकित्सकों को आड़े हाथों लेते हुए सख्त फटकार लगाई। महिला आयोग अध्यक्ष ने अस्पताल में आए मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संवाद कर मिलने वाले इलाज, जांच सुविधाओं और मुफ्त दवाइयों की स्थिति का फीडबैक लिया, जिसमें मरीजों ने व्यवस्थागत ढिलाई और इलाज में देरी को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं।
अल्ट्रासाउंड केंद्र की लापरवाही पर बिफरीं महिला आयोग अध्यक्ष
अस्पताल के विभिन्न वार्डों के भ्रमण के दौरान आयोग की अध्यक्ष अल्ट्रासाउंड केंद्र पहुंचीं, जहां अव्यवस्था की एक बड़ी बानगी देखने को मिली। वहां एक गर्भवती महिला जांच कराने के लिए आई हुई थी, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों और डॉक्टरों ने उसकी जांच उसी दिन करने के बजाय अगले सप्ताह बुधवार की तारीख थमा दी थी। यह देखकर उषा प्रियदर्शनी ने गहरा असंतोष व्यक्त किया और मौके पर ही संबंधित चिकित्सक को बुलाकर इस हीलाहवाली का स्पष्ट कारण पूछा।
गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच के लिए कड़े निर्देश
आयोग अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि गर्भवती महिलाओं को इलाज या जांच के लिए इस तरह बार-बार अस्पताल के चक्कर कटवाना बेहद गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को सख्त हिदायत दी कि गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में इस तरह की संवेदनहीनता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और व्यवस्था को सुधारा जाए।
मरीजों की शिकायतों पर संज्ञान और सुधार का आदेश
निरीक्षण के दौरान कई अन्य मरीजों ने भी डॉक्टरों की देरी से उपस्थिति और रिपोर्ट मिलने में लगने वाले लंबे समय को लेकर अपनी पीड़ा बताई। महिला आयोग की अध्यक्ष ने इन सभी समस्याओं को गंभीरता से नोट किया और नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे कार्यप्रणाली में सुधार लाएं। उन्होंने कहा कि दूर-दराज से आने वाले आम नागरिकों को बिना किसी परेशानी के समय पर उचित इलाज और दवाइियां मिलना सुनिश्चित होना चाहिए।
अस्पताल प्रशासन को व्यवस्था दुरुस्त करने की चेतावनी
औचक निरीक्षण के अंत में महिला आयोग अध्यक्ष ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अस्पताल प्रबंधन तुरंत अपनी कमियों को दूर करे और मरीजों को बेहतर माहौल प्रदान करे। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में दोबारा ऐसा ही औचक दौरा किया जाएगा और यदि तब भी सुधार नहीं दिखा या लापरवाही जारी रही, तो जिम्मेदार चिकित्सकों व प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
समुद्र में शक्ति प्रदर्शन! चीन-फिलीपींस विवाद ने फिर बढ़ाया क्षेत्रीय तनाव
24 Jul, 2026 04:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन/दुबई। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पूरे क्षेत्र में हालात बेहद नाजुक और विस्फोटक हो चुके हैं। शांति और सीजफायर की जारी वार्ताओं के बीच इजरायली सेना ने लेबनान और गाजा में अपनी सैन्य कार्रवाइयों को और तेज कर दिया है, जिससे युद्ध की आग तेजी से फैल रही है। लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार, इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के अल-मंसूरी शहर और मजदल जून गांव पर भीषण हवाई हमले किए, जिनसे पूरा इलाका गूंज उठा। वहीं गाजा शहर के घनी आबादी वाले रिहायशी क्षेत्र 'अल-जला' में भी इजरायल द्वारा की गई बमबारी से भारी तबाही और अफरा-तफरी का माहौल बन गया है।
हूती विद्रोही का सऊदी टैंकरों पर हमला, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में स्थित दो सऊदी तेल टैंकरों—'ENCELIA' और 'LAYLA'—पर बैलिस्टिक, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से हमला करने की जिम्मेदारी ली है। हूती संगठन का दावा है कि जहाजों में आग लगने से भारी नुकसान पहुंचा है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए ईरान को सीधी और कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्गों पर हमले जारी रहे, तो ईरान और हूती दोनों को ही अमेरिका की कड़ी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
फ्रांस और कतर ने जताया कड़ा विरोध, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गहराया संकट
लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने की इस घटना की फ्रांस और कतर ने भी सख्त लहजे में निंदा की है। दोनों देशों ने संयुक्त बयानों में कहा कि ऐसे हमले न केवल अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन हैं, बल्कि ये वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी सीधा खतरा पैदा करते हैं। कतर ने सऊदी अरब के साथ अपनी पूर्ण एकजुटता जताते हुए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को सख्ती से लागू करने की मांग की, वहीं फ्रांस ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों से ऐसी हिंसक कार्रवाइयों को तुरंत रोकने का आग्रह किया है।
न्यूयॉर्क हमले की जांच तेज, नस्लीय नफरत से जुड़ा हो सकता है मामला
24 Jul, 2026 03:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क। अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर स्थित अपर वेस्ट साइड इलाके में चाकूबाजी की दो अलग-अलग घटनाओं ने हड़कंप मचा दिया है। अज्ञात हमलावर ने एक एशियाई और एक यहूदी नागरिक पर चाकू से जानलेवा हमला कर दिया। न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (NYPD) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों हमलों के आरोपी 51 वर्षीय राउल मोरालेस को गिरफ्तार कर लिया है। सुरक्षा एजेंसियाँ अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह कोई नफरती अपराध (हेट क्राइम) है।
दोनों पीड़ित खतरे से बाहर, आरोपी का कोई पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं
न्यूयॉर्क पुलिस आयुक्त जेसिका एस. टिश ने बताया कि घायल एशियाई और यहूदी नागरिकों को तुरंत 'माउंट सीनाई सेंट ल्यूक्स अस्पताल' में भर्ती कराया गया, जहाँ दोनों पीड़ितों की हालत स्थिर बताई जा रही है और उनके पूरी तरह ठीक होने की उम्मीद है। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि आरोपी राउल मोरालेस को हिरासत में ले लिया गया है और इस मामले में किसी अन्य संदिग्ध की तलाश नहीं है। उन्होंने बताया कि आरोपी और पीड़ितों के बीच पूर्व परिचय का कोई संबंध सामने नहीं आया है।
'अल्लाहु अकबर' के नारे और मानसिक तनाव का कोण
पुलिस आयुक्त और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के अनुसार, आरोपी ने वारदात को अंजाम देते वक्त 'अल्लाहु अकबर' के नारे लगाए थे। इस आधार पर पुलिस मामले की जाँच हेट क्राइम के एंगल से भी कर रही है। हालाँकि, पुलिस फाइलों में आरोपी के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कोई पुरानी हिस्ट्री नहीं मिली है, लेकिन शुरुआती संकेतों से अनुमान लगाया जा रहा है कि मानसिक असंतुलन इस अपराध की वजह हो सकता है। पुलिस ने उस जांबाज नागरिक की सराहना भी की जिसने आरोपी का पीछा कर पुलिस को उसकी सटीक लोकेशन बताई, जिससे उसे बिना किसी अन्य नुकसान के दबोच लिया गया।
मेयर जोहरान ममदानी ने जताई राहत, दिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश
न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने इस वीभत्स घटना पर गहरा दुख जताते हुए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्हें अपर वेस्ट साइड में हुए इस दुखद हमले की पूरी जानकारी दे दी गई है। मेयर ने पीड़ितों के स्थिर होने पर राहत व्यक्त की और आश्वासन दिया कि शहर में नफरत फैलाने वाले ऐसे अपराधों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा निष्पक्षता से कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
क्या तेल की जंग ने बढ़ाई ईरान-सऊदी दूरी? सामने आई नई थ्योरी
24 Jul, 2026 03:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के थल सेनाध्यक्ष जनरल आसिम मुनीर की ईरान और सऊदी अरब के बीच मध्यस्थता कराने की भूमिका को लेकर एक नई रिपोर्ट में सनसनीखेज दावे किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच तनाव घटाने के पीछे केवल शांतिपूर्ण कूटनीति ही नहीं, बल्कि आसिम मुनीर और ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के एक शीर्ष अधिकारी के बीच कथित गुप्त तेल कारोबार भी एक प्रमुख वजह था।
अमेरिकी पाबंदियों के बावजूद गुप्त कारोबार और हमलों पर रोक का दावा
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कथित व्यावसायिक लेन-देन उस दौर में भी जारी रहा जब ईरान के तेल व्यापार पर कड़े अमेरिकी प्रतिबंध लागू थे। दावा है कि इसी आर्थिक साठगांठ का लाभ उठाकर मुनीर ने ईरान को सऊदी अरब की सीमा पर हमले बंद करने के लिए राजी किया। बताया जाता है कि इस समझौते के बाद जब ईरान की ओर से दोबारा मिसाइल दागे जाने की खबरें आईं, तो मुनीर ने ईरानी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश भेजा कि ऐसी सैन्य कार्रवाइयों से उनके साझा कारोबारी हितों पर आंच आ सकती है, जिसके बाद कथित तौर पर हमले रुक गए।
कूटनीतिक मध्यस्थता या आर्थिक-रणनीतिक खेल?
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या यह मध्यस्थता वाकई खाड़ी क्षेत्र में शांति बहाली के लिए थी या इसके तार निजी आर्थिक और रणनीतिक फायदों से जुड़े थे। एक खुफिया अधिकारी के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान की मंशा सऊदी अरब को अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह खुद पर निर्भर बनाने की थी। हालांकि, रिपोर्ट में किसी पंजीकृत तेल कंपनी के नाम या ठोस सबूतों का ब्योरा सामने नहीं आया है और निष्पक्ष पुष्टि के लिए आधिकारिक पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
डॉलर की कमी से परेशान पाकिस्तान को चीन ने दी नई संजीवनी
24 Jul, 2026 02:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। गंभीर विदेशी मुद्रा संकट की मार झेल रहा पाकिस्तान अब अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा देने के लिए कृषि निर्यात का सहारा ले रहा है। कुवैत को तेल के बदले सैन्य सेवाएँ देने की खबरों के बाद, इस्लामाबाद ने अब चीन के साथ एक बड़ा व्यापारिक समझौता किया है। इस नए करार के तहत पाकिस्तान चालू वर्ष में चीन के ग्वांगझू और शेनझेन प्रांतों में 60 हजार टन चावल की आपूर्ति करेगा। इस सौदे के जरिए पाकिस्तान को लगभग 300 से 400 मिलियन डॉलर (करीब 3 to 4 अरब डॉलर) के निर्यात ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।
चीन में बढ़ा पाकिस्तानी चावल का कारोबार, 3 गुना उछाल का अनुमान
राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान (REAP) का 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल व्यापारिक वार्ताओं को अंतिम रूप देने के लिए 28 जुलाई तक चीन के दौरे पर है। आरईएपी के उपाध्यक्ष जावेद जिलानी ने बताया कि चीन के बाजारों में बासमती और गैर-बासमती चावल की मांग तेजी से बढ़ी है। बीते वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान ने चीन को 124 मिलियन डॉलर का चावल बेचा था, लेकिन इस नए समझौते के बाद यह आंकड़ा करीब तीन गुना बढ़कर 300 से 400 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
डॉलर भंडार मजबूत करने और मक्का निर्यात की नई रणनीति
विदेशी मुद्रा की किल्लत से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए टेक्सटाइल के बाद चावल ही सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा अर्जक स्रोत है। आर्थिक जानकारों के मुताबिक, पाकिस्तान में चावल का उत्पादन घरेलू जरूरत से ज्यादा होता है, इसलिए वह इसका इस्तेमाल डॉलर भंडार बढ़ाने के लिए कर रहा है। इसके साथ ही, पाकिस्तान अब सिर्फ चावल तक सीमित न रहकर चीन को मक्का (कॉर्न) निर्यात करने की भी तैयारी कर रहा है, जिसके लिए चीनी अधिकारियों ने पाकिस्तानी कारोबारियों का पंजीकरण शुरू कर दिया है।
इलेक्ट्रिक बसों का ट्रायल शुरू, सोनीपत से दिल्ली रूट पर जल्द मिलेगी नई सुविधा
24 Jul, 2026 01:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोनीपत: हरियाणा परिवहन विभाग द्वारा पर्यावरण-अनुकूल यातायात व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया गया है। इसके तहत अब इलेक्ट्रिक बसों (ई-बस) का संचालन राज्य की सीमा तक सीमित न रखकर सीधे दिल्ली के अंतरराज्यीय बस अड्डे (आईएसबीटी, कश्मीरी गेट) तक किया जाएगा। लंबे समय से अटकी इस अंतरराज्यीय सेवा को शुरू करने के लिए विभागीय स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस नए रूट के शुरू होने से दिल्ली और हरियाणा के बीच रोजाना सफर करने वाले हजारों दैनिक यात्रियों और आम जनता को काफी राहत मिलेगी।
यात्रियों के लिए किफायती किराए का निर्धारण
ई-बस सेवा के सुचारू संचालन में किराए की दरें मुख्य बाधा बनी हुई थीं, जिसे अब सुलझा लिया गया है। इस रूट के लिए प्रति यात्री किराया 70 रुपये तय करने पर पूरी तरह सहमति बन गई है। किराए में की गई इस कटौती से यात्रियों को न केवल पर्यावरण-अनुकूल और आरामदायक बस सेवा मिलेगी, बल्कि उनका सफर काफी किफायती और सुगम भी हो जाएगा।
सड़क पर ई-बसों का ट्रायल और समय-सारणी
योजना को धरातल पर उतारने के लिए प्राथमिक चरण में ट्रायल प्रक्रिया शुरू की जा रही है। तय योजना के मुताबिक शुक्रवार को दो इलेक्ट्रिक बसों को ट्रायल रन के लिए सोनीपत से दिल्ली के आईएसबीटी कश्मीरी गेट मार्ग पर भेजा जाएगा। ट्रायल के दौरान मार्ग की स्थिति, समय और तकनीकी पहलुओं का जायजा लिया जाएगा। ट्रायल सफल रहने के तुरंत बाद ई-बसों की नियमित समय-सारणी निर्धारित कर बसों का औपचारिक संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
किराया संशोधन और प्रशासनिक समन्वय
प्रारंभिक प्रस्ताव के तहत दिल्ली रूट के लिए ई-बसों का किराया 87 रुपये तय किया गया था, जबकि सामान्य वातानुकूलित (एसी) बसों का किराया 79 रुपये था। किराए में इस बड़े अंतर के कारण यात्रियों की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए ई-बसों का संचालन रोक दिया गया था। इसके बाद डिपो स्तर से मुख्यालय को पत्र भेजकर किराए को घटाकर 70 रुपये करने की मांग की गई थी, जिसे अब मंजूरी दे दी गई है।
विदेश में भारतीय मजदूर की हत्या, इजरायली नागरिक पर लगा आरोप
24 Jul, 2026 01:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरुशलम: यरुशलम के कटामोन क्षेत्र में स्थित एक मकान से इजरायल में कार्यरत भारतीय नागरिक का शव बरामद किया गया है। स्थानीय पुलिस से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 40 वर्षीय इस व्यक्ति का देहांत संदिग्ध परिस्थितियों में हुआ और घटनास्थल पर काफी मात्रा में खून फैला हुआ पाया गया।
संदिग्ध परिस्थितियों में मिला शव
मोरियाह पुलिस स्टेशन के प्रमुख युवल रूवेन ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि सूचना मिलने पर जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो मकान के फर्श पर भारतीय नागरिक का शव पड़ा हुआ था। पूरे कमरे में जगह-जगह खून के निशान मौजूद थे। शुरुआती स्तर पर मृत्यु का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन घटनास्थल के हालात किसी अप्रिय घटना की ओर इशारा कर रहे हैं।
पुलिस जांच और संदिग्ध की गिरफ्तारी
इजरायली प्रशासन ने सुरक्षा व प्रक्रियात्मक कारणों से फिलहाल मृतक की पहचान का खुलासा नहीं किया है। हालांकि, मामले को आपराधिक दृष्टिकोण से देखते हुए विस्तृत छानबीन शुरू कर दी गई है। इस सिलसिले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दक्षिणी शहर इलात से संबंध रखने वाले 31 वर्षीय एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। पकड़े गए आरोपी पर इस वारदात में शामिल होने का अंदेशा है और उससे सघन पूछताछ की जा रही है।
इजरायल में भारतीय श्रमशक्ति का आंकड़ा
विदेश मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2024 तक इजरायल में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों की कुल संख्या लगभग 32,000 दर्ज की गई थी। इनमें से करीब 12,000 नागरिक अक्टूबर 2023 के पश्चात वहां पहुंचे हैं। वर्ष 2024 के दौरान दोनों देशों के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत 6,365 भारतीय कामगार इजरायल पहुंचे, जबकि अन्य लोगों ने निजी रास्तों व एजेंसियों के जरिए वहां का रुख किया।
पावर बैंक ब्लास्ट से मची अफरा-तफरी, मॉस्को की इन्फ्लुएंसर अन्ना अस्पताल पहुंचीं
24 Jul, 2026 01:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को: रूस की मशहूर महिला इन्फ्लुएंसर और ज्योतिषी अन्ना ओटाविना के मॉस्को स्थित पेंटहाउस में रात के समय एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। सोते समय उनके बिस्तर पर रखा पावर बैंक अचानक ओवरहीट होकर ब्लास्ट हो गया। इस धमाके की वजह से अन्ना ओटाविना की पीठ का करीब 30 फीसदी हिस्सा गंभीर रूप से झुलस गया और उनके बाल भी जल गए।
फॉलोअर्स को दी चेतावनी और सतर्क रहने की सलाह
अन्ना ओटाविना ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर अपने प्रशंसकों के साथ इस दर्दनाक हादसे की आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि उनका पोर्टेबल चार्जर, जिसे उन्होंने फोन चार्ज करने के लिए बिस्तर पर रखा था, अचानक बहुत अधिक गर्म हो गया और उसमें विस्फोट हो गया। इस घटना के बाद अन्ना ने अपने फॉलोअर्स को आगाह करते हुए कहा कि रात में सोते समय या बिस्तर जैसी नरम सतहों पर पावर बैंक व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कभी भी चार्जिंग पर न छोड़ें, क्योंकि ऐसा करना जानलेवा हो सकता है।
ज्योतिषी के अपने भविष्य को न जान पाने पर चर्चा
हादसे के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस और चर्चा भी शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि दूसरों के जीवन का भविष्य बताने वाली और सितारों की चाल से किस्मत का आकलन करने वाली ज्योतिषी खुद अपने साथ होने वाली इस बड़ी अनहोनी से बेखबर रहीं, जिसके कारण उन्हें इस गंभीर दुर्घटना का शिकार होना पड़ा।
सरकार नहीं कर सकती आश्रित मानने से इनकार, वृद्ध मां के हक पर बड़ा निर्णय
24 Jul, 2026 12:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम और राहत देने वाला फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारियों के बुजुर्ग माता-पिता को सिर्फ इसलिए आश्रित मानने से मना नहीं किया जा सकता कि उन्हें मामूली वृद्धावस्था पेंशन मिल रही है। अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में रेखांकित किया कि बुजुर्ग माता-पिता की अपने बच्चों पर निर्भरता को केवल उनकी छोटी-मोटी आय या पेंशन के आधार पर नहीं आंका जा सकता। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति करना सरकार की कोई अनुकंपा या दया नहीं है, बल्कि यह सरकारी कर्मचारियों और उनके आश्रित परिजनों के स्वास्थ्य कल्याण के लिए बनाई गई एक आवश्यक व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
हाईकोर्ट का कड़ा फैसला और हरियाणा सरकार का आदेश रद्द
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संदीप मौदगिल ने हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी बलवंत सिंह की ओर से दायर याचिका को स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार के 14 अक्तूबर 2025 के उस विवादित आदेश को खारिज कर दिया, जिसके तहत याचिकाकर्ता की मां के इलाज का मेडिकल क्लेम निरस्त कर दिया गया था। अदालत ने हरियाणा सरकार को सख्त निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता को 1,30,073 रुपये की मेडिकल प्रतिपूर्ति राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अगले दो महीनों के भीतर हर हाल में जारी की जाए। यदि सरकार तय सीमा में भुगतान करने में विफल रहती है, तो उसे 9 प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा।
जानिए क्या था पूरा मामला और क्यों खारिज हुआ था क्लेम
मामले के विवरण के अनुसार याचिकाकर्ता बलवंत सिंह की 85 वर्षीय बुजुर्ग मां चन्नो देवी का जुलाई 2024 में मोहाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में दिल का आपातकालीन ऑपरेशन हुआ था। इस दौरान डॉक्टरों ने स्टेंट डाला, जिस इलाज पर कुल 1,30,073 रुपये की राशि खर्च हुई थी। जब रोडवेज कर्मचारी ने नियमानुसार इस चिकित्सा खर्च की भरपाई के लिए विभाग के समक्ष क्लेम पेश किया, तो स्वास्थ्य विभाग ने 14 दिसंबर 2007 के पुराने प्रशासनिक दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता की मां को पूर्ण आश्रित न मानकर उनके दावे को खारिज कर दिया था।
पूरी तरह आश्रित शब्द की हाईकोर्ट ने की नई व्याख्या
अदालत ने सुनवाई के दौरान 'पूरी तरह से आश्रित' शब्द को नए और मानवीय दृष्टिकोण से परिभाषित किया। पीठ ने कहा कि पूर्ण निर्भरता का दायरा केवल आर्थिक स्थिति तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें बढ़ती उम्र से जुड़ी शारीरिक और चिकित्सीय निर्भरता भी समान रूप से शामिल है। अदालत ने तर्क दिया कि बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे माता-पिता को मिलने वाली मामूली वृद्धावस्था पेंशन उन्हें निजी या सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में महंगे इलाज का खर्च उठाने के योग्य नहीं बनाती। ऐसे में पेंशन को आधार बनाकर इलाज के खर्च का दावा खारिज करना पूरी तरह से मनमाना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगी परिवारों को बड़ी राहत
हाईकोर्ट के इस दूरगामी फैसले से राज्य के हजारों सरकारी कर्मचारियों और उनके बुजुर्ग आश्रितों को बड़ी राहत मिली है। अदालत के इस रुख ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि भविष्य में प्रशासनिक नियमों का हवाला देकर कोई भी विभाग कर्मचारियों के वैध मेडिकल दावों को अकारण खारिज नहीं कर पाएगा। कोर्ट के निर्णय से स्पष्ट हो गया है कि वृद्धावस्था पेंशन पाने वाले माता-पिता भी अपने कामकाजी बच्चों के मेडिकल बेनिफिट्स और स्वास्थ्य प्रतिपूर्ति के पूरे हकदार हैं।
परमाणु समझौते पर बढ़ी सियासत, अमेरिका-सऊदी डील पर वैश्विक बहस तेज
24 Jul, 2026 11:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुए नए परमाणु सहयोग समझौते ने वैश्विक राजनीति और परमाणु सुरक्षा के गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। जिस यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) कार्यक्रम को लेकर अमेरिका सालों से ईरान पर कड़ा रुख अपनाता आ रहा है, अब वही तकनीक अपने सहयोगी देश सऊदी अरब को देने के कारण अमेरिकी प्रशासन आलोचनाओं के घेरे में आ गया है। जहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन इसे ऊर्जा, निवेश और रणनीतिक साझेदारी का एक बड़ा कदम बता रहा है, वहीं अमेरिकी कांग्रेस (संसद), परमाणु विशेषज्ञों और इजराइल के रणनीतिक विश्लेषकों ने इस पर गहरी चिंता जताई है।
सऊदी अरब में संवर्धन और अमेरिकी नियंत्रण का खाका
रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते के तहत सऊदी अरब को भविष्य में अपने देश में यूरेनियम संवर्धन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, इसके लिए कई सख्त शर्तें तय की गई हैं। प्रस्तावित योजना के मुताबिक, यदि संवर्धन की मंजूरी मिलती भी है, तो पूरी प्रक्रिया अमेरिकी कंपनियों की कड़ी निगरानी में होगी और संवर्धन से जुड़ी संवेदनशील तकनीक सऊदी अरब को हस्तांतरित नहीं की जाएगी। इसके अलावा, परमाणु रिएक्टरों के निर्माण और ईंधन की आपूर्ति में अमेरिकी कंपनियों की मुख्य भूमिका रहेगी, जिससे अमेरिकी कंपनी 'वेस्टिंगहाउस' के एपी-1000 रिएक्टरों के इस्तेमाल और व्यावसायिक लाभ के रास्ते खुलेंगे।
निरीक्षण में छूट पर उठ रहे सवाल
इस पूरे समझौते में सबसे विवादित पहलू अंतरराष्ट्रीय निगरानी से जुड़ा है। समझौते के तहत सऊदी अरब को सामान्य अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षण व्यवस्था से विशेष छूट दी गई है, और निगरानी का जिम्मा सीधे अमेरिकी विशेषज्ञों को सौंपा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) जैसी वैश्विक निगरानी प्रणाली को कमजोर कर सकता है और भविष्य में अन्य देश भी इसी तरह की विशेष छूट की मांग कर सकते हैं। हालाँकि, अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट का दावा है कि यह समझौता अप्रसार मानकों और परमाणु सुरक्षा के उच्चतम स्तर को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
दोहरे रवैये पर अमेरिकी कांग्रेस में विरोध
समझौते की खबर सामने आते ही अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। सांसद ब्रैड शेरमन ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि एक तरफ ईरान के यूरेनियम संवर्धन का कड़ा विरोध करना और दूसरी तरफ सऊदी अरब को इसकी अनुमति देना अमेरिका के दोहरे मानदंड (Double Standards) को दर्शाता है। वहीं विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सफाई देते हुए कहा कि अमेरिका ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा जिससे परमाणु हथियारों का प्रसार हो। इसके बावजूद, आगामी दो सालों तक सऊदी में संवर्धन की व्यावहारिक क्षमता का अध्ययन किया जाएगा, जिसने इजराइल और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
ICF कोच से आगे बढ़ा रेलवे, तिलकब्रिज-सिरसा ट्रेन का LHB रैक से होगा संचालन
24 Jul, 2026 10:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जयपुर: उत्तर पश्चिम रेलवे ने अपने रेल यात्रियों को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और सुगम यात्रा का अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। रेलवे प्रबंधन ने तीन जोड़ी प्रमुख रेल सेवाओं को पारंपरिक नीले डिब्बों से हटाकर अत्याधुनिक एलएचबी (LHB) रैक से संचालित करने की घोषणा की है। यह महत्वपूर्ण बदलाव यात्रियों को तेज, आरामदायक और सुरक्षित रेल संपर्क उपलब्ध कराने के रेलवे के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
कासगंज और नई दिल्ली रेल सेवा में एलएचबी रैक की शुरुआत
रेलवे द्वारा जारी नई समय-सारणी के अनुसार गाड़ी संख्या 15303/15304, कासगंज-नई दिल्ली-कासगंज रेल सेवा में यह परिवर्तन अगस्त महीने में लागू कर दिया जाएगा। कासगंज से यह ट्रेन आगामी 22 अगस्त से एलएचबी रैक के साथ संचालित होगी, जबकि नई दिल्ली से 23 अगस्त से यात्रियों को इस आधुनिक रैक में सफर करने की सुविधा प्राप्त होगी। इस व्यस्त मार्ग पर यात्रा करने वाले दैनिक यात्रियों को इस नए बदलाव से काफी सहूलियत मिलेगी।
रोहतक और सिरसा मार्ग की ट्रेनों का आधुनिकीकरण
इसी क्रम में गाड़ी संख्या 15305/15306, नई दिल्ली-रोहतक-नई दिल्ली रेल सेवा को नई दिल्ली तथा रोहतक दोनों दिशाओं से 22 अगस्त से एलएचबी रैक के साथ चलाया जाएगा। इसके साथ ही गाड़ी संख्या 15307/15308, तिलकब्रिज-सिरसा-तिलकब्रिज रेल सेवा तिलकब्रिज से 22 अगस्त 2026 से और सिरसा से 23 अगस्त से नए एलएचबी कोचों के साथ पटरी पर दौड़ेगी। इन बदलावों से हरियाणा और दिल्ली एनसीआर के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को उच्च स्तरीय सुविधाएं मिलेंगी।
ट्रेन में डिब्बों की नई संरचना और उपलब्ध श्रेणियां
इन तीनों जोड़ी रेल सेवाओं में नए एलएचबी रैक लगाए जाने के बाद कुल 16 कोचों की संरचना रहेगी। इस नए संयोजन में यात्रियों की सुविधा के लिए एक वातानुकूलित कुर्सीयान (AC Chair Car), नौ द्वितीय कुर्सीयान (Second Chair Car), चार साधारण श्रेणी (General Category) के डिब्बे, एक पावर कार श्रेणी और एक गार्ड डिब्बा शामिल किया गया है। डिब्बों की इस व्यवस्था से सभी वर्ग के यात्रियों को पर्याप्त सीटें और बेहतर यात्रा अनुभव मिल सकेगा।
एलएचबी रैक की खासियत और सुरक्षा के पहलू
भारतीय रेलवे में एलएचबी रैक का तात्पर्य 'लिंके-होफमैन-बुश' तकनीक से तैयार किए गए कोचों से होता है। यह कोच बेहद आधुनिक, हल्के और उच्च गुणवत्ता वाले स्टेनलेस स्टील से निर्मित होते हैं। पुराने नीले रंग के पारंपरिक आईसीएफ कोचों की तुलना में ये कोच दुर्घटना के समय एक-दूसरे पर नहीं चढ़ते हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त, ये कोच तेज रफ्तार में भी ट्रेन के भीतर झटके और शोर को कम करके सफर को अधिक आरामदायक बनाते हैं।
पानी बना विवाद की वजह, पाकिस्तान के दो प्रांतों में बढ़ी खींचतान
24 Jul, 2026 08:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद:पाकिस्तान इन दिनों आर्थिक और राजनीतिक संकट के साथ-साथ गंभीर जल संकट से भी जूझ रहा है। देश के सबसे बड़े और संसाधन संपन्न प्रांत बलूचिस्तान में पानी की किल्लत ने हालात बेहद बिगाड़ दिए हैं। प्रांतीय राजधानी क्वेटा में पेयजल का अभाव इतना गहरा गया है कि यह अब दो प्रांतों के बीच बड़े राजनीतिक विवाद में बदल चुका है। बलूचिस्तान के नेताओं ने सिंध प्रांत पर उनके हिस्से का पानी रोकने का आरोप लगाया है, जिससे किसानों की फसलें चौपट हो रही हैं और आम जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है।
क्वेटा में नलों से पानी गायब, भूजल स्तर गिरा
क्वेटा में भूजल स्तर लगातार नीचे गिरने की वजह से स्थिति भयावह हो चुकी है। शहर के कई इलाकों में कुएं और बोरवेल पूरी तरह सूख गए हैं, वहीं सरकारी जलापूर्ति प्रणाली भी चरमरा गई है। सरिएब, सिरकी रोड, समुंगली रोड, जिन्ना टाउन, कंबरनी रोड और सैटेलाइट टाउन जैसे क्षेत्रों में महीनों से नलों में पानी नहीं आया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे नियमित रूप से पानी के बिलों का भुगतान कर रहे हैं, फिर भी उन्हें पानी के लिए दूर-दराज के इलाकों में भटकना पड़ रहा है।
1991 के जल समझौते को लेकर गरमाई राजनीति
पानी की कमी को लेकर अब सियासी जंग शुरू हो गई है। बलूचिस्तान सरकार के मंत्रियों और स्थानीय किसानों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया है। उनका कहना है कि वर्ष 1991 के जल बंटवारा समझौते के अनुसार, बलूचिस्तान को खिरथर नहर से 2,400 क्यूसेक और पट फीडर नहर से 6,700 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए। आरोप है कि सिंध सरकार तय मात्रा से बहुत कम पानी छोड़ रही है, जिससे सिंचाई व्यवस्था ठप हो गई है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
समाधान की कोशिशें और बढ़ता अंतरप्रांतीय तनाव
विवाद को सुलझाने के लिए बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो सिंध सरकार से वार्ता करेगी। दूसरी तरफ, सिंध के सिंचाई विभाग का दावा है कि वे बलूचिस्तान को उसके तय कोटे से भी ज्यादा पानी दे रहे हैं, जिसे बलूचिस्तान सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। जल विशेषज्ञों की मानें तो पाकिस्तान पहले ही भीषण जल संकट का सामना कर रहा है। ऐसे में अगर दोनों प्रांतों के बीच यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो यह आगे चलकर बड़े क्षेत्रीय तनाव और सामाजिक अस्थिरता का रूप ले सकता है।
हरियाणा में क्लर्कों की सैलरी बढ़ेगी, इंक्रीमेंट अब बेसिक वेतन का हिस्सा
23 Jul, 2026 03:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़:हरियाणा सरकार ने राज्य के लिपिकीय वर्ग (क्लेरिकल स्टाफ) को एक बड़ी वित्तीय और प्रशासनिक राहत प्रदान की है। प्रदेश में लिपिकों को प्रदान की जाने वाली अतिरिक्त वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) के लाभ को अब उनके मूल वेतनमान (बेसिक पे) में स्थायी रूप से शामिल कर दिया जाएगा। इस निर्णय के लागू होने के बाद भविष्य में मिलने वाले तमाम वित्तीय, सेवानिवृत्ति और सेवा संबंधी लाभ इस नए बढ़े हुए मूल वेतन के आधार पर ही तय किए जाएंगे।
वित्त विभाग ने कर्मचारियों की शंकाएं दूर करते हुए स्थिति की स्पष्ट
प्रदेश के वित्त विभाग ने क्लेरिकल एसोसिएशन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा उठाई गई विभिन्न प्रशासनिक आपत्तियों का संज्ञान लेते हुए स्थिति को पूरी तरह पारदर्शी और स्पष्ट कर दिया है। राज्य सरकार ने लगभग 15 हजार लिपिकों के हित में यह फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि उन्हें मिलने वाली अतिरिक्त इंक्रीमेंट कोई अस्थायी भत्ता नहीं है, बल्कि यह उनके बेसिक पे का एक अपरिवर्तनीय और स्थायी अंग होगी।
वरिष्ठ लिपिकों और 2020 बैच के कर्मचारियों को मिलेगा विशेष लाभ
विभाग द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, वरिष्ठ लिपिकों (सीनियर क्लर्कों) को मिलने वाली तीन अतिरिक्त वेतन वृद्धि और वर्ष 2020 बैच के लिपिकों को दी जाने वाली दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि को उनके वर्तमान बेसिक पे में स्थायी रूप से जोड़ दिया जाएगा। इस निर्णय के लागू होने से अलग-अलग श्रेणियों के कर्मचारियों के बीच वेतनमान को लेकर लंबे समय से चला आ रहा असंतुलन पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
वेतन निर्धारण, एसीपी, पदोन्नति और पेंशन के मामलों में मिलेगी राहत
अतिरिक्त वेतन वृद्धि के बेसिक पे में शामिल होने के साथ ही लिपिकों, वरिष्ठ लिपिकों, सहायकों और अन्य समकक्ष श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन पुनरीक्षण को लेकर बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो गई है। अब कर्मचारियों के एश्योर्ड करियर प्रमोशन (ACP), पदोन्नति के समय मिलने वाले वित्तीय लाभ, महंगाई भत्ता, ग्रैच्युटी और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन की गणना इस बढ़े हुए मूल वेतनमान के आधार पर ही की जाएगी।
कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर, लंबे समय से चली आ रही मांग हुई पूरी
सरकार के इस सकारात्मक कदम से प्रदेश भर के हजारों क्लेरिकल कर्मचारियों में खुशी का माहौल है। कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि बेसिक पे में इंक्रीमेंट जुड़ने से न केवल उनके मासिक वेतन में बढ़ोतरी होगी, बल्कि भविष्य में मिलने वाले तमाम सेवा लाभ भी सुरक्षित हो गए हैं। इस आदेश से लिपिकीय वर्ग का मनोबल बढ़ेगा और प्रशासनिक कामकाज में अधिक दक्षता देखने को मिलेगी।
अमेरिका के खिलाफ ईरान का आक्रामक रुख, 9/11 जैसे हमले की चेतावनी
23 Jul, 2026 12:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के प्रमुख बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को बमबारी कर तबाह करने की चेतावनी के बाद, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका को वर्ष 2001 में हुए 9/11 जैसे भयावह आतंकी हमले की सीधी धमकी दे डाली है। IRGC ने कहा है कि यदि अमेरिकी सेना ने अपने हमले तुरंत बंद नहीं किए, तो अमेरिका पर ऐसा घातक हमला किया जाएगा, जिससे देश में एक बार फिर राष्ट्रीय शोक की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।
डोनाल्ड ट्रंप की खुली चेतावनी और अमेरिका की शर्त
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों से नाराज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कड़ी चेतावनी दी थी। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान ने समुद्री मार्ग में किसी भी जहाज पर मिसाइल, ड्रोन या रॉकेट दागे, तो अमेरिका ईरान के पुलों, पावर प्लांट्स और तेहरान के आसपास स्थित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को नेस्तनाबूद कर देगा। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित युद्धविराम की पहली और अनिवार्य शर्त यह है कि ईरान जहाजों पर हमले रोके और होर्मुज में सामान्य जहाजरानी बहाल होने दे। गौरतलब है कि अमेरिका के अनुसार, ईरान बीते तीन महीनों में 30 से अधिक जहाजों को निशाना बना चुका है।
12 दिनों से अमेरिका की बमबारी और परमाणु ठिकाने पर मंडराता खतरा
अमेरिकी सेना बीते 12 दिनों से दक्षिणी ईरान में रणनीतिक ठिकानों और पुलों पर लगातार हवाई हमले कर रही है। अमेरिका ने ईरान के बेहद सुरक्षित भूमिगत परमाणु ठिकाने 'पिकैक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) को भी निशाना बनाने की धमकी दी है। इस पर पलटवार करते हुए तेहरान ने साफ किया है कि परमाणु ठिकाने पर हमला सीधे तौर पर पूरे पश्चिम एशिया में पूर्णकालिक युद्ध की घोषणा माना जाएगा, जिसके बाद ईरान अमेरिका और उसके सहयोगियों पर विनाशकारी हमले करने से नहीं हिचकिचाएगा।
9/11 की याद और गहराता युद्ध संकट
उल्लेखनीय है कि 11 सितंबर 2001 (9/11) को अल-कायदा के आतंकवादियों ने अपहृत विमानों को न्यूयॉर्क के ट्विन टावर्स से टकरा दिया था, जिसमें लगभग 3,000 बेकसूर लोगों की जान चली गई थी। ईरान द्वारा अमेरिका को 9/11 जैसा ही दर्द देने की सीधी धमकी और दोनों ओर से जारी प्रचंड सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) को एक बड़े महायुद्ध और तबाही की कगार पर ला खड़ा किया है।
होर्मुज के बाद बाब-अल-मंदेब पर नजर, बंद हुआ रास्ता तो बढ़ सकती है वैश्विक मुश्किलें
23 Jul, 2026 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान/सना: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण पहले से ही वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। इस बीच, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब से बदला लेने के उद्देश्य से लाल सागर के रणनीतिक मार्ग 'बाब-अल-मंदेब' (Bab-el-Mandeb) जलडमरूमध्य की नाकेबंदी करने का ऐलान कर दिया है। हूतियों ने यह कदम सना हवाई अड्डे पर सऊदी अरब के हमलों और वर्षों से जारी नाकेबंदी के जवाब में उठाने का दावा किया है। यदि यह नाकेबंदी लागू होती है, तो दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल आने की आशंका है।
वैश्विक ऊर्जा व्यापार का 30% हिस्सा खतरे में
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और यह होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद दुनिया का सबसे अहम तेल परिवहन मार्ग है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक तेल आपूर्ति के करीब 20 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करता है, जहाँ पहले से ही आपूर्ति बाधित चल रही है।
बाब-अल-मंदेब: वैश्विक तेल प्रवाह का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है।
बड़ा खतरा: यदि दोनों रणनीतिक मार्ग पूरी तरह बंद हो जाते हैं, तो दुनिया की कुल तेल और गैस आपूर्ति का 30 प्रतिशत प्रवाह ठप हो जाएगा, जिससे अभूतपूर्व महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।
सऊदी अरब के तेल निर्यात पर पड़ेगा सीधा असर
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण सऊदी अरब होर्मुज मार्ग का जोखिम उठाने के बजाय अपनी 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' के जरिए तेल को लाल सागर तक पहुंचाकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेज रहा था। हूतियों द्वारा लाल सागर के मुहाने पर स्थित बाब-अल-मंदेब को निशाना बनाए जाने से सऊदी अरब का यह वैकल्पिक निर्यात मार्ग भी पूरी तरह कट जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी कंपनियों में हड़कंप
गाजा संघर्ष के दौरान भी हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में लगभग 100 वाणिज्यिक जहाजों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया था। अब नई नाकेबंदी की धमकी के बाद अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी (शिपिंग) कंपनियों और वैश्विक समुदाय की चिंताएं चरम पर पहुंच गई हैं। यदि जहाजों को अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' मार्ग से घूमकर जाना पड़ा, तो माल भाड़ा और समुद्री परिवहन की लागत में कई गुना बढ़ोतरी तय है।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
