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भारत ने अफ्रीका के लिए स्वास्थ्य सहायता में 43 टन सामग्री भेजी
2 Jun, 2026 02:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/अफ्रीकी: भारत ने अफ्रीकी देशों की मदद के लिए आपातकालीन चिकित्सा सहायता की दूसरी बड़ी खेप रवाना कर दी है। विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस बार भारत की ओर से कुल 43 टन राहत सामग्री भेजी गई है। इस खेप में मुख्य रूप से डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सुरक्षात्मक उपकरण, बीमारियों की जांच और निगरानी करने वाले यंत्र, जरूरी दवाएं और पोषक पूरक आहार शामिल हैं।
बीमारियों से लड़ने में मिलेगी मजबूती
भारत सरकार का मानना है कि इस विशेष चिकित्सा सहायता से अफ्रीकी देशों में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और मजबूत होगी। विशेष रूप से इबोला जैसी खतरनाक और जानलेवा बीमारियों से निपटने में वहां की स्वास्थ्य एजेंसियों की क्षमता काफी बढ़ जाएगी। भारत हमेशा से ही संकट के समय अन्य देशों की मदद के लिए आगे आता रहा है और यह कदम उसी वैश्विक सहयोग का हिस्सा है।
अफ्रीका ने किया भारत का धन्यवाद
अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) ने भारत सरकार द्वारा भेजी गई इस आपातकालीन मदद का दिल से स्वागत किया है और आभार जताया है। भारत की ओर से भेजी गई इस राहत सामग्री को युगांडा में बने क्षेत्रीय समन्वय केंद्र के माध्यम से लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो के पूर्वी इलाकों में सुरक्षित पहुंचा दिया गया है, ताकि जरूरतमंदों को समय पर इलाज और सुरक्षा मिल सके।
भीषण हमले से हाहाकार, यूक्रेन में तीन मौतें
2 Jun, 2026 01:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव: रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव को एक बार फिर अपना निशाना बनाते हुए बेहद भीषण हवाई हमला किया है। यूक्रेनी अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कीव शहर पर हुए इस बड़े सामूहिक हमले में कम से कम 3 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। अचानक हुए इस हमले से पूरे इलाके में एक बार फिर दहशत का माहौल है और राहत कार्य तेजी से जारी है।
चार साल से जारी भीषण तबाही
गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच छिड़े इस विनाशकारी सैन्य संघर्ष को अब चार साल पूरे हो चुके हैं। इन बीते चार वर्षों के दौरान दोनों ही देशों को भारी तबाही का सामना करना पड़ा है और बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय दबाव और गंभीर हालातों के बीच भी दोनों देशों में से कोई भी पीछे हटने या झुकने को तैयार नहीं दिख रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
अमेरिका: हंतावायरस संपर्क में आए यात्रियों को सुरक्षित लौटाया गया
2 Jun, 2026 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिका की राष्ट्रीय क्वारंटाइन सुविधा में हंतावायरस के संपर्क में आने के बाद रखे गए 18 अमेरिकी क्रूज जहाज यात्रियों में से पांच लोगों को उनके घर भेज दिया गया है। अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ये पांचों व्यक्ति अब अपने घर पर ही रहकर स्वास्थ्य निगरानी (होम मॉनिटरिंग) की बची हुई प्रक्रिया को पूरा करेंगे।
संक्रमण के लक्षणों से पूरी तरह मुक्त
राहत की बात यह है कि घर लौटे ये पांचों यात्री अब तक हंतावायरस के किसी भी तरह के लक्षणों से पूरी तरह मुक्त रहे हैं। वे नेब्रास्का मेडिकल सेंटर की क्वारंटाइन इकाई के बाहर रहकर निगरानी से जुड़े सभी जरूरी स्वास्थ्य मानदंडों को भी पूरा करते हैं। यह सभी यात्री करीब तीन हफ्ते पहले नेब्रास्का पहुंचे थे, जहां उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही थी।
क्रूज जहाज पर फैला था वायरस
यह पूरी स्थिति तब पैदा हुई जब लगभग तीन सप्ताह पहले दक्षिण अटलांटिक महासागर में यात्रा कर रहे एक क्रूज जहाज पर अचानक हंतावायरस का घातक प्रकोप फैल गया था। स्वास्थ्य संगठनों के अनुसार, उस क्रूज जहाज से जुड़े हंतावायरस के कुल 13 पुष्ट या संभावित मामले सामने आए थे, जिनमें से तीन मरीजों की मौत भी हो चुकी है। इसी खतरे के मद्देनजर बाकी यात्रियों को अलग रखकर जांच की जा रही थी।
चार दलों की गठबंधन सरकार का नेतृत्व करेंगी मेटे फ्रेडरिकसन, डेनमार्क में खुशहाली का संदेश
2 Jun, 2026 11:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोपेनहेगन: डेनमार्क में हुए संसदीय चुनावों के लगभग 10 सप्ताह बाद आखिरकार गठबंधन सरकार बनाने को लेकर सहमति बन गई है। इस समझौते के साथ ही मेटे फ्रेडरिकसन ने लगातार तीसरी बार डेनमार्क की प्रधानमंत्री के रूप में अपनी सत्ता सुरक्षित कर ली है। फ्रेडरिकसन अब चार अलग-अलग राजनीतिक दलों से मिलकर बनने वाली एक नई मध्य-वामपंथी (सेंटर-लेफ्ट) सरकार की कमान संभालेंगी।
राजा से मुलाकात और गठबंधन को मंजूरी
प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने डेनमार्क के राजा फ्रेडरिक एक्स से मुलाकात कर उन्हें नए गठबंधन के गठन की आधिकारिक जानकारी दी है। इस नए राजनीतिक गठबंधन में फ्रेडरिकसन की अपनी पार्टी 'सोशल डेमोक्रेट्स' के साथ-साथ 'सोशलिस्ट पीपुल्स पार्टी', दक्षिणपंथी विचारधारा वाली 'लिबरल वेंत्रे पार्टी' और 'मध्यमार्गी मॉडरेट्स' शामिल हैं। राजा ने इस गठबंधन को स्वीकार करते हुए मेटे फ्रेडरिकसन को देश में नई सरकार का गठन करने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है।
मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण
गठबंधन समझौते के बाद अब देश में नई सरकार की प्राथमिकताओं और नीतियों को सामने रखने की तैयारी कर ली गई है। तय कार्यक्रम के अनुसार, मेटे फ्रेडरिकसन की नई कैबिनेट के मंत्रियों की सूची बुधवार को राजा के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जिसके बाद सभी नए मंत्री अपने पद और गोपनीयता की शपथ लेकर औपचारिक रूप से अपना कार्यभार संभालेंगे।
नारनौल में दिल दहला देने वाली वारदात: पारिवारिक कलह में पति ने की पत्नी और बेटी की बेरहमी से हत्या
2 Jun, 2026 10:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नारनौल | नांगल चौधरी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव ढाणी ठाकरान में सोमवार की देर शाम एक खौफनाक वारदात सामने आई है। यहाँ एक व्यक्ति पर अपनी ही जीवनसंगिनी और मासूम बेटी की बेरहमी से हत्या करने का संगीन आरोप लगा है। इस दोहरे हत्याकांड की खबर मिलते ही पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया है और हर कोई इस घटना से हैरान है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को अपनी कस्टडी में ले लिया है।
कहा-सुनी के बीच आई बेटी भी बनी सनकी पिता का शिकार
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ढाणी ठाकरान निवासी अशोक सिंह का सोमवार की शाम अपनी 40 वर्षीया पत्नी राजबाला देवी के साथ किसी पारिवारिक विषय को लेकर झगड़ा शुरू हुआ था। देखते ही देखते दोनों के बीच का यह विवाद बेहद उग्र रूप ले बैठा। माता-पिता के बीच बढ़ती तकरार को देख उनकी 14 साल की बेटी मीनाक्षी दोनों को शांत कराने और बीच-बचाव करने के लिए वहां पहुंची। लेकिन गुस्से में अंधा हो चुके अशोक सिंह ने अपनी पत्नी के साथ-साथ उस मासूम बेटी को भी मौत के घाट उतार दिया।
गला घोंटकर हत्या की आशंका, शव अस्पताल के मुर्दाघर पहुंचे
शुरुआती जांच और घटनास्थल के हालातों को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि आरोपी ने दोनों की गला दबाकर जान ली है। हालांकि, मौत की असली वजह क्या थी, इसका पूरी तरह से खुलासा पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। वारदात के तुरंत बाद जब परिवार के अन्य सदस्य वहां पहुंचे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। परिजनों ने बिना वक्त गंवाए स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने दोनों शवों को अपने नियंत्रण में लेकर पोस्टमार्टम के लिए नारनौल के नागरिक अस्पताल के शवगृह (मॉर्च्युरी) भिजवा दिया है।
आरोपी किसान पुलिस की गिरफ्त में, तफ्तीश शुरू
वारदात को अंजाम देने के बाद भागने की फिराक में लगे आरोपी अशोक सिंह को पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए हिरासत में ले लिया है। ग्रामीणों के अनुसार, आरोपी पेशे से किसान है और खेती-बाड़ी का काम करता है। मंगलवार को डॉक्टरों के पैनल द्वारा दोनों शवों का पोस्टमार्टम किया जाएगा। पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपी से पूछताछ जारी है और इस जघन्य अपराध के पीछे की असल वजहों को जानने के लिए मामले के हर छोटे-बड़े पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।
डोभ गांव में हत्या का मामला: सिर पर डंडा मारकर पति ने की असम निवासी पत्नी की हत्या, पुलिस जांच में जुटी
2 Jun, 2026 10:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक | रोहतक के भिवानी रोड पर स्थित डोभ गांव में सोमवार की रात एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। यहां पारिवारिक विवाद के चलते एक शख्स ने अपनी पत्नी जोशना के सिर पर लाठी (डंडा) से हमला कर उसकी जान ले ली। चोट इतनी गंभीर थी कि महिला ने घटना स्थल पर ही दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही बहुअकबरपुर थाना पुलिस और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम जांच के लिए मौके पर पहुंच गई है।
घरेलू विवाद में खूनी खेल, दो मासूम बच्चे हुए अनाथ
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी आजाद मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कासगंज का रहने वाला है, जिसने असम की निवासी जोशना से विवाह किया था। आजाद रोहतक में रहकर कबाड़ का काम करता था और दोनों के दो छोटे बच्चे हैं, जिनकी उम्र पांच और तीन साल है। सोमवार की रात पति-पत्नी के बीच किसी घरेलू बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो इतनी बढ़ गई कि आजाद ने गुस्से में आकर जोशना के सिर पर डंडा मार दिया। इस हमले में जोशना की मौके पर ही मौत हो गई।
पीर बाबा मंदिर के पास कमरे में मिला शव, मायके वालों का इंतजार
मंगलवार की सुबह पुलिस को खबर मिली कि भिवानी रोड किनारे पीर बाबा मंदिर के सामने बने एक कमरे में एक महिला का शव संदिग्ध अवस्था में पड़ा है। पुलिस टीम एफएसएल विशेषज्ञ के साथ घटना स्थल पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लिया। मृतका के सिर पर गहरे जख्म के निशान पाए गए हैं। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए पीजीआई के शवगृह (डेड हाउस) भिजवा दिया है। पुलिस का कहना है कि मृतका के मायके वालों को सूचित कर दिया गया है और उनके बयानों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
रोहतक में अपराध का ग्राफ बढ़ा, पांच दिनों में मर्डर की चौथी वारदात
इस घटना ने जिले की कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि रोहतक में बीते पांच दिनों के भीतर हत्या का यह चौथा मामला सामने आया है। इससे पहले 29 मई की सुबह नेहरू कॉलोनी में चिंकी नामक महिला की लाश मिली थी। उसके अगले ही दिन मोखरा गांव में किसान ओमबीर की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इसके बाद नेहरू कॉलोनी में ही ज्योति नाम की एक विवाहिता की संदिग्ध मौत हुई, जिसमें उसके ससुराल वालों पर हत्या का केस दर्ज कराया गया है। अब डोभ गांव में हुई इस ताजा वारदात से इलाके के लोग सहमे हुए हैं।
खतरा बरकरार: ईरान की चेतावनी से होर्मुज में नई तनाव की लहर
2 Jun, 2026 09:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम (सीजफायर) को लेकर चल रही बातचीत के बीच दोनों देशों के बीच जुबानी जंग और तीखी हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त धमकी के बाद अब ईरान ने एक ऐसी चेतावनी दी है, जिसने पूरी दुनिया के व्यापार और ऊर्जा बाजारों (Energy Markets) में खलबली मचा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पहले से जारी नाकेबंदी के बीच ईरान ने संकेत दिया है कि वह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, 'बाब-अल-मंदेब' (Bab-al-Mandeb Strait) को भी पूरी तरह बंद कर सकता है। अगर ईरान ऐसा कदम उठाता है, तो तेल और गैस की किल्लत से जूझ रहे दुनिया के तमाम देशों के सामने एक बहुत बड़ा ऊर्जा संकट खड़ा हो जाएगा।
दरसअल, ईरान की सबसे ताकतवर सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) की कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल क़ानी ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर इजरायल ने गजा और लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई को तुरंत नहीं रोका, तो उनका सहयोगी संगठन 'रेजिस्टेंस एक्सिस' इस युद्ध का दायरा और बढ़ा देगा। उन्होंने खुले तौर पर चेतावनी दी कि लाल सागर को अरब सागर से जोड़ने वाले बाब-अल-मंदेब में भी वैसे ही हालात पैदा कर दिए जाएंगे, जैसे इस समय होर्मुज में बने हुए हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्यों बड़ी चिंता है यह धमकी?
कमांडर कानी के इस बयान को मिडिल ईस्ट में तनाव को चरम पर ले जाने वाली एक गंभीर चेतावनी माना जा रहा है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोशिशों के बाद इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्षविराम की घोषणा से तात्कालिक खतरा थोड़ा टल गया है, लेकिन रक्षा और विदेश मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी हालात अब भी बेहद नाजुक हैं।
क्यों अहम हैं ये समुद्री रास्ते? होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दुनिया के दो ऐसे संकरे समुद्री रास्ते हैं, जहां से अंतरराष्ट्रीय बाजार का अधिकांश कच्चा तेल, गैस और व्यापारिक जहाजों का आवागमन होता है। यदि ये दोनों रास्ते बंद होते हैं, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो जाएगी।
हरियाणा वासियों को भीषण गर्मी से राहत: सात जून तक लगातार सक्रिय होंगे चार पश्चिमी विक्षोभ, मौसम रहेगा खुशनुमा
2 Jun, 2026 08:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ | जून महीने का आगाज उत्तर भारत के लोगों के लिए बेहद खुशनुमा और ठंडे मौसम के साथ हुआ है। बीते तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश और आंधी की वजह से सोमवार को पूरे क्षेत्र में पारा सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जून के पहले 15 दिनों (प्रथम पखवाड़े) के दौरान एक के बाद एक कुल चार पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) एक्टिव होने जा रहे हैं, जिसकी बदौलत लोगों को भीषण चुभती गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, महीने के उत्तरार्ध यानी दूसरे पखवाड़े में एक बार फिर तीखी धूप और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
लगातार बदलता रहेगा मौसम, इस तारीख को आ सकता है मानसून
मौसम विभाग के अनुसार, जून के दूसरे सप्ताह में ही प्री-मानसून की बौछारें पड़ने की उम्मीद है, जबकि 3 जुलाई को मुख्य मानसून के दस्तक देने की संभावना जताई जा रही है। 2 जून की रात से और उसके बाद पुनः 4 जून को एक और नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों में 3 से 7 जून तक लगातार मौसम का मिजाज बदलता रहेगा। जून के पूरे महीने में करीब 7 से 8 पश्चिमी विक्षोभ आने के आसार हैं। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में 2 से 4 कम दबाव के क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) और डीप डिप्रेशन बनने की संभावना है, जो बार-बार मौसम में उलटफेर लाते रहेंगे।
मध्य जून में सताएगी उमस, फिर मिलेगी राहत
महीने के दूसरे पखवाड़े की शुरुआत होते ही हवाओं का रुख बदलेगा। लगातार चलने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के कारण उमसभरी चिपचिपी गर्मी लोगों को परेशान करेगी। लेकिन यह दौर ज्यादा लंबा नहीं खिंचेगा; 19 जून को एक और ताजा पश्चिमी विक्षोभ दस्तक देगा। इसी दौरान अरब सागर में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र का असर राजस्थान के रास्ते हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचेगा, जिससे एक बार फिर धूलभरी आंधी और बारिश का दौर शुरू होगा और मौसम सुहावना हो जाएगा।
सामान्य से 6 डिग्री नीचे गिरा पारा, मई का ऐसा रहा मिजाज
हालिया बारिश के चलते सिरसा में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सबसे ज्यादा था। वहीं महेंद्रगढ़ में पारा सामान्य से 6.8 डिग्री कम होकर 35.5 डिग्री और करनाल में भी सामान्य से 6.8 डिग्री गिरकर 32.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। हिसार में दिन का तापमान सामान्य से 3.7 डिग्री कम (38.4 डिग्री) और रात का तापमान सामान्य से 4.1 डिग्री सेल्सियस कम मापा गया। अगर पिछले महीने की बात करें तो मई में मौसम तीन बार बदला; शुरुआती 14 दिन बारिश रही, फिर 15 से 25 मई तक भीषण लू चली और आखिरी चार दिनों में आंधी-पानी ने फिर सबको कूल कर दिया। इस वर्ष मार्च, अप्रैल और मई तीनों ही महीनों में अच्छी वर्षा दर्ज की गई है।
‘तुम पागल हो गए हो’ – ट्रंप ने फोन पर जताई नेतन्याहू से असहमति
2 Jun, 2026 08:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में लगातार बढ़ता तनाव अब अमेरिका और इजराइल के रिश्तों में कड़वाहट पैदा कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर हुई एक तीखी बातचीत इस समय दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर इजराइल द्वारा किए जा रहे हवाई हमलों और सैन्य कार्रवाई को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने नेतन्याहू के प्रति अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है।
हाल के दिनों में इजराइल ने लेबनान में ताबड़तोड़ हमले किए हैं, जिससे इस पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा और ज्यादा गहरा गया है। इस हालात से अमेरिका बेहद चिंतित है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि लगातार की जा रही यह सैन्य कार्रवाई शांति की कोशिशों को पूरी तरह बर्बाद कर सकती है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यहां तक दावा किया गया है कि ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू से बेहद कड़े शब्दों में कहा, "तुम पूरी तरह पागल हो चुके हो। अगर मैं न होता, तो तुम आज जेल में होते। मैं तुम्हारी जान बचा रहा हूं। इस समय हर कोई तुमसे नफरत करता है और तुम्हारी इन हरकतों की वजह से आज पूरी दुनिया इजरायल से नफरत कर रही है।"
नेतन्याहू के आक्रामक रुख से बेहद नाराज हैं ट्रंप
सूत्रों के मुताबिक, इस बातचीत के दौरान ट्रंप ने इजराइली प्रधानमंत्री को तुरंत संयम बरतने की सलाह दी। उन्होंने साफ संदेश दिया कि यदि यह संघर्ष और आगे बढ़ा, तो पूरे मिडिल ईस्ट में ऐसी अस्थिरता फैलेगी जिसे संभालना मुश्किल होगा। ट्रंप ने नेतन्याहू के कुछ फैसलों पर गहरी असहमति जताते हुए उन्हें इतना ज्यादा आक्रामक रुख न अपनाने के लिए कहा है।
दूसरी तरफ, इजराइल अपनी कार्रवाई के पीछे देश की सुरक्षा का तर्क दे रहा है। इजरायली सरकार का कहना है कि हिज्बुल्लाह की ओर से होने वाले हमलों का जवाब देना उनके नागरिकों की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है और देश की सुरक्षा के मामले में वो किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकते।
ईरान-अमेरिका शांति वार्ता पर पड़ेगा इसका सीधा असर
यह पूरा विवाद एक ऐसे संवेदनशील समय पर सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते को लेकर बेहद महत्वपूर्ण बातचीत चल रही है। ईरान ने साफ किया है कि इस समझौते के लिए लेबनान में शांति होना जरूरी है। यही वजह है कि इजराइल के इन हमलों से ईरान वार्ता से पीछे हट सकता है, जिससे ट्रंप की कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका लगेगा। इसी नुकसान को देखते हुए ट्रंप ने नेतन्याहू पर अपना गुस्सा निकाला है।
आगे क्या? भले ही अमेरिका और इजराइल एक-दूसरे के सबसे पक्के मददगार माने जाते हों, लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि रणनीतिक फैसलों को लेकर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं में बड़े मतभेद हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रंप की इस सख्त चेतावनी के बाद इजराइल अपने कदम पीछे खींचता है या यह तनाव किसी बड़े युद्ध का रूप ले लेता है।
नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक, मलेशिया में नए नियम से हड़कंप
1 Jun, 2026 06:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मलेशिया ने सोमवार को बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इस नए नियम के लागू होने के बाद अब वहां बच्चे अपनी मर्जी से इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय नहीं हो सकेंगे।
नए सरकारी नियम के अनुसार, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे सभी बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अब अपने यहाँ 'आयु सत्यापन प्रणाली' (एज वेरिफिकेशन सिस्टम) लागू करना अनिवार्य होगा। इसके जरिए कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 16 साल से कम उम्र का कोई भी यूजर उनके प्लेटफॉर्म पर नया अकाउंट न बना पाए।
नियमों का पालन न करने पर लगेगा भारी जुर्माना
मलेशियाई सरकार ने इस कानून को बेहद कड़ाई से लागू करने के संकेत दिए हैं। आदेश में साफ कहा गया है कि जो भी सोशल मीडिया कंपनियां इस नियम का पालन करने में लापरवाही बरतेंगी, उन पर 100 लाख रिंगिट (लगभग 25 लाख अमेरिकी डॉलर) तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इस सख्त कदम से बच्चों को इंटरनेट पर परोसी जा रही हानिकारक सामग्री, अश्लीलता और साइबर बुलिंग (इंटरनेट पर मानसिक उत्पीड़न) से सुरक्षित रखा जा सकेगा।
दुनिया के कई अन्य देशों में भी चल रही है तैयारी
मलेशिया ऐसा कदम उठाने वाला पहला देश नहीं है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देश भी बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल को रोकने के लिए उम्र के आधार पर प्रतिबंध लगा चुके हैं या इसकी घोषणा कर चुके हैं। इसके अलावा ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, डेनमार्क, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया सहित दुनिया के कई अन्य प्रमुख देश भी अपने यहाँ बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए इसी तरह के कानूनों और उपायों का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं।
"नेपाल जाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए नई गाइडलाइन; एंट्री के लिए अब आधार कार्ड मान्य नहीं"
1 Jun, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ठाकुरगंज। भारत और नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चौकसी को पहले से कहीं ज्यादा पुख्ता बनाने के लिए जिला प्रशासन और तमाम सुरक्षा एजेंसियों ने कमर कस ली है। राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए अब बिना मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) या किसी अन्य पुख्ता सरकारी दस्तावेज के नेपाल की सीमा में दाखिल होने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। भारत-नेपाल सीमा के मुख्य प्रवेश द्वार गलगलिया बॉर्डर पर मुस्तैद सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों को इन नए और कड़े दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के आदेश जारी किए गए हैं।
अवैध घुसपैठ पर लगेगी लगाम, केवल 'आधार' दिखाने से नहीं मिलेगी एंट्री
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय सीमा मार्ग से रोजाना हजारों की तादाद में नागरिकों की आवाजाही होती है। सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों और अवैध आवागमन पर पूरी तरह अंकुश लगाने के इरादे से ही इस चेकिंग अभियान को बेहद कड़ा किया गया है। नए नियमों के तहत अब केवल भारत सरकार द्वारा जारी सामान्य विशिष्ट पहचान पत्र (Aadhaar Card) दिखाकर सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जो लोग इस दस्तावेज के भरोसे यात्रा कर रहे हैं, उन्हें वापस लौटा दिया जाएगा। सरहद पार करने के लिए अब वोटर आईडी कार्ड, वैध पासपोर्ट या अन्य उच्च स्तरीय सरकारी पहचान पत्र का होना अनिवार्य कर दिया गया है।
चुनौतियों को देख बढ़ी गश्त, संदिग्धों की हो रही सघन तलाशी
बॉर्डर सिक्योरिटी से जुड़े आला अफसरों ने स्पष्ट किया है कि हालिया खुफिया इनपुट और सुरक्षा संबंधी गंभीर चुनौतियों के मद्देनजर यह कड़ा फैसला लिया गया है। नाकों पर तैनात जवानों को हर एक आने-जाने वाले शख्स के दस्तावेजों की गहराई से जांच करने को कहा गया है। मुख्य रास्तों के अलावा सीमा से सटे अन्य सुदूर रास्तों पर भी एसएसबी की खुफिया विंग और गश्ती दलों की सक्रियता बढ़ा दी गई है, ताकि कोई भी अवांछित तत्व भारतीय सीमा में प्रवेश न कर सके या यहां से भाग न पाए।
पर्यटकों और व्यापारियों के लिए एडवाइजरी, सहयोग की अपील
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों, सीमावर्ती व्यापारियों और घूमने आने वाले पर्यटकों से अपील की है कि वे जब भी नेपाल की यात्रा की योजना बनाएं, तो अपने पास तयशुदा मूल दस्तावेज जरूर रखें। नियमों की अनदेखी करने या सुरक्षाकर्मियों के साथ सहयोग न करने वाले तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है। सीमा क्षेत्र में इस नई व्यवस्था को लेकर लगातार जागरूकता फैलाई जा रही है ताकि आम जनता को जांच के दौरान किसी भी तरह की प्रशासनिक असुविधा का सामना न करना पड़े। सुरक्षा एजेंसियों का दृढ़ विश्वास है कि यह कदम सीमा प्रबंधन को मजबूत बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
लेबनान सीमा पर तनाव तेज, इजरायली सेना ने किले पर फहराया झंडा
1 Jun, 2026 05:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में एक बड़ी सैन्य कामयाबी हासिल करते हुए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण पहाड़ी पर कब्जा कर लिया है, जिसके शिखर पर ऐतिहासिक 'ब्यूफोर्ट किला' (Beaufort Castle) मौजूद है। इस ऐतिहासिक किले पर करीब 44 साल बाद एक बार फिर इजरायल का झंडा फहराया गया है। इजरायली सेना द्वारा पिछले 26 वर्षों के दौरान लेबनान की सीमा के भीतर जाकर की गई यह अब तक की सबसे बड़ी और सबसे अंदरूनी सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है। इजरायली सेना ने रविवार को इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक जानकारी साझा की।
सेना के मुताबिक, नबातियेह शहर के पास स्थित इस किले पर कब्जा करने के लिए इजरायली सैनिकों को इसके आसपास के गांवों में कई दिनों तक भीषण जमीनी लड़ाई और जोरदार हवाई हमलों का सहारा लेना पड़ा। इजरायली सैनिकों ने इस बेहद दुर्गम और पथरीले इलाके में हिजबुल्लाह के लड़ाकों के साथ आमने-सामने की जंग लड़ी। मार्च की शुरुआत में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच दोबारा भड़के इस ताजा युद्ध के बाद से इस किले पर नियंत्रण हासिल करना इजरायल के लिए एक बहुत बड़ी रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक उपलब्धि माना जा रहा है।
संघर्षविराम और शांति वार्ता के बीच सैन्य कार्रवाई
यह चौंकाने वाला घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब साल 1948 में इजरायल की स्थापना के बाद से ही हमेशा युद्ध की स्थिति में रहने वाले दोनों पड़ोसी देश वाशिंगटन में सीधी शांति वार्ता कर रहे हैं। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच 17 अप्रैल से एक नाममात्र का संघर्षविराम (सीजफायर) लागू है, इसके बावजूद इजरायल ने इतनी बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है। यह कार्रवाई इसलिए भी वैश्विक सुर्खियां बटोर रही है क्योंकि अगले दौर की बेहद महत्वपूर्ण शांति वार्ता दो और तीन जून को अमेरिकी विदेश मंत्रालय में आयोजित होने वाली है।
रक्षा मंत्री ने शेयर की झंडा फहराने की तस्वीर
इस सैन्य सफलता के बाद इजरायली सेना के अरबी भाषा के प्रवक्ता अवीचाय अद्राई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें इजरायली सैनिक इस ऐतिहासिक किले के मुख्य परिसर के बाहर गश्त करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी सोशल मीडिया पर घोषणा करते हुए लिखा कि देश के वीर सैनिकों ने ब्यूफोर्ट किले की चोटी पर पूरी शान से इजरायल का राष्ट्रीय ध्वज फहरा दिया है।
अगर इस किले के इतिहास पर नजर डालें, तो इससे पहले साल 1982 में लेबनान युद्ध के दौरान इजरायली सैनिकों ने पहली बार इस पर नियंत्रण स्थापित किया था। इसके बाद साल 2000 में जब इजरायली सेना ने लेबनान से पूरी तरह पीछे हटने का फैसला किया, तब तक यानी लगभग 18 सालों तक यह किला इजरायल के ही कब्जे में रहा था। अब करीब 44 साल बाद इतिहास ने खुद को दोहराया है और यह रणनीतिक पहाड़ी एक बार फिर इजरायल के नियंत्रण में आ गई है।
क्या रुक जाएगा बुढ़ापा? रूस विकसित कर रहा है नई एंटी-एजिंग तकनीक
1 Jun, 2026 04:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने बढ़ती उम्र के असर को थामने और शरीर को हमेशा तंदुरुस्त बनाए रखने के लिए एक बेहद अनोखा और बड़ा सरकारी प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट का नाम ‘न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज’ रखा गया है, जिस पर करीब 2.47 लाख करोड़ रुपए (26 अरब डॉलर) खर्च किए जा रहे हैं। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक विज्ञान की मदद से इंसानों के बूढ़े होने की प्रक्रिया को धीमा करना है, जिससे इस दशक के खत्म होने तक लगभग पौने दो लाख लोगों की जान बचाई जा सके।
इस योजना के तहत वैज्ञानिक ऐसी जीन थेरेपी विकसित करने में जुटे हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को कमजोर होने से रोकेगी। साथ ही, इस प्रोजेक्ट में 'बायोप्रिंटिंग' तकनीक पर बहुत ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें 3D प्रिंटर के जरिए प्रयोगशाला में ही असली जैसे इंसानी अंग और टिश्यू तैयार किए जा रहे हैं। रूसी वैज्ञानिकों ने चूहे की ग्रंथि और इंसानी कार्टिलेज बनाने में सफलता हासिल कर ली है और उनका लक्ष्य साल 2030 तक जरूरत पड़ने पर पूरे इंसानी अंगों को बदलने की क्षमता हासिल करना है। इसके अलावा, खास प्रजाति के छोटे सुअरों (मिनी-पिग्स) के शरीर के अंदर इंसानी दिल, लिवर और किडनी विकसित करने पर भी काम चल रहा है, ताकि आने वाले समय में अंग दान की कमी को पूरा किया जा सके।
पुतिन की निजी दिलचस्पी और लंबा जीवन जीने की चर्चा
खबरों के अनुसार, 73 साल के राष्ट्रपति पुतिन खुद को हमेशा फिट और ऊर्जावान रखने के लिए काफी समय से क्रायोथेरेपी और पेप्टाइड थेरेपी जैसी तकनीकों का व्यक्तिगत रूप से उपयोग करते रहे हैं। क्रायोथेरेपी के दौरान शरीर को कुछ पलों के लिए माइनस 112 डिग्री सेल्सियस जैसे अत्यधिक ठंडे तापमान में रखा जाता है। इसके अलावा वे बछड़ों के टिश्यू से तैयार पेप्टाइड्स का भी इस्तेमाल करते आए हैं, जिसे लेकर वैज्ञानिकों का दावा है कि इसकी मदद से इंसान 120 साल तक जीवित रह सकता है।
इस विषय में पुतिन की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पिछले साल चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक सैन्य परेड के दौरान उनकी गुप्त बातचीत एक चालू माइक में रिकॉर्ड हो गई थी। उस बातचीत में दोनों नेता इंसानी अंगों को बदलकर उम्र बढ़ाने और 150 साल तक जीने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे थे। चूंकि रूस में पुरुषों की औसत उम्र केवल 68 वर्ष है, इसलिए इस योजना को रूस के शीर्ष नेताओं की लंबी उम्र और सेहत से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
पुतिन की बेटी और वैज्ञानिकों की टीम पर भरोसा
पुतिन ने इस बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की कमान अपने सबसे करीबी और भरोसेमंद लोगों को सौंपी है। इस टीम का नेतृत्व पुतिन की डॉक्टर बेटी मारिया वोरोत्सोवा कर रही हैं, जो खुद एक विख्यात एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (हार्मोन विशेषज्ञ) हैं। उनके साथ देश के बड़े वैज्ञानिक मिखाइल कोवलचुक भी इस मिशन से जुड़े हैं, जिनका मानना है कि विज्ञान बहुत जल्द इंसानों को अपने खराब हो चुके अंगों को नए अंगों से बदलने की पूरी आजादी दे देगा।
दूसरी तरफ, वैश्विक स्तर पर कई वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने रूस के इन बड़े दावों पर संदेह भी जताया है। उनका कहना है कि पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से रूसी वैज्ञानिक अंतरराष्ट्रीय विज्ञान जगत से अलग-थलग पड़ चुके हैं, इसलिए उनकी इस रिसर्च की बारीकी से जांच नहीं हो पाई है। कुछ विशेषज्ञों का तो यह भी मानना है कि भारी-भरकम सरकारी बजट और फंड हासिल करने के लिए वैज्ञानिक शायद राष्ट्रपति पुतिन को वही बड़ी-बड़ी बातें बता रहे हैं, जो वे सुनना पसंद करते हैं।
सीमा विवाद पर नेपाल का नया दावा, लिपुलेख को लेकर उठे सवाल
1 Jun, 2026 04:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने देश की संसद को संबोधित करते हुए सीमा विवाद पर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने रविवार को कहा कि केवल भारत ने ही नेपाल की जमीन पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि नेपाल के नियंत्रण में भी कुछ भारतीय इलाके मौजूद हैं। इस साल मार्च में प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद बालेन शाह पहली बार नेपाली संसद के सामने अपनी बात रख रहे थे।
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, संसद में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने खुलासा किया कि सत्ता में आने के दो महीने बाद ही उन्हें इस जमीनी हकीकत के बारे में जानकारी मिली है। उन्होंने दोनों पड़ोसी देशों के बीच रिश्तों की संवेदनशीलता को देखते हुए सुझाव दिया कि भारत और नेपाल को मिलकर इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए।
लिपुलेख और लिम्पियाधुरा विवाद पर कूटनीतिक पहल
भारत और चीन के बीच लिपुलेख और लिम्पियाधुरा मार्ग से होने वाले व्यापारिक समझौते को लेकर प्रधानमंत्री शाह ने साफ किया कि इस पुराने सीमा विवाद का समाधान केवल आपसी कूटनीतिक बातचीत के जरिए ही निकाला जा सकता है। उन्होंने संसद को जानकारी दी कि नेपाल सरकार इस गंभीर मुद्दे पर भारत को एक राजनयिक नोट (आधिकारिक पत्र) भेज चुकी है, जिस पर भारत सरकार की तरफ से जवाब भी हासिल हो चुका है।
ब्रिटेन से भी बातचीत कर रहा है नेपाल
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने इस विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि लिपुलेख का मामला आज का नहीं है, बल्कि यह ब्रिटिश भारत (अंग्रेजों के शासनकाल) के समय से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि नेपाल सरकार इस ऐतिहासिक उलझन को सुलझाने के लिए सिर्फ भारत और चीन से ही संपर्क में नहीं है, बल्कि इस मामले पर ब्रिटेन से भी बातचीत की जा रही है।
गौरतलब है कि मार्च 2026 में हुए चुनावों के बाद सत्ता में आई नई सरकार के मुखिया बालेन शाह ने विपक्षी दलों के भारी और लगातार दबाव के बाद संसद का रुख किया। विपक्ष के सांसद लंबे समय से मांग कर रहे थे कि देश के ऐसे अति-महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर प्रधानमंत्री खुद सदन में आकर स्थिति स्पष्ट करें, जिसके बाद उन्होंने सांसदों के तीखे सवालों के जवाब देकर अपनी सरकार का रुख साफ किया।
"चोरी की बड़ी वारदात: सूने घर का ताला तोड़कर 40 तोला जेवरात और कैश पर हाथ साफ"
1 Jun, 2026 04:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शहजादपुर। स्थानीय थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव शहजादपुर माजरा में बेखौफ बदमाशों ने एक सूने मकान को अपना निशाना बनाते हुए करीब 40 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति पर हाथ साफ कर दिया। शातिर चोरों ने इस सनसनीखेज वारदात को उस समय अंजाम दिया जब गृहस्वामी अपने पूरे कुनबे के साथ धार्मिक यात्रा पर गए हुए थे। कंक्रीट और लोहे के सुरक्षा घेरे को ध्वस्त कर की गई इस बड़ी डकैती नुमा चोरी से पूरे ग्रामीण अंचल में दहशत और असुरक्षा का माहौल व्याप्त हो गया है।
धार्मिक यात्रा पर गया था परिवार, पीछे से उखाड़ दिया सुरक्षा जाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहजादपुर माजरा के रहने वाले डॉ. विवेक बराड़ 30 मई की रात को अपने मकान का मुख्य द्वार अच्छे से लॉक कर सपरिवार ब्यास (धार्मिक स्थल) के लिए रवाना हुए थे। इसी सूनेपन का फायदा उठाकर शातिर अपराधियों ने मकान के पिछले हिस्से का ताला चटकाया और मजबूत लोहे के सुरक्षा जाल को औजारों की मदद से उखाड़ फेंका। घर के भीतर दाखिल होकर चोरों ने लॉकरों को निशाना बनाया और अलमारियों के ताले तोड़कर उसमें रखी पुश्तैनी व शादियों के लिए संजोकर रखी गई करीब 40 तोला सोने की ज्वेलरी और लगभग 5 किलोग्राम चांदी के कीमती आभूषणों को बटोर लिया। इसके अलावा, लॉकर में सुरक्षित रखी गई 11 लाख रुपये की मोटी नकदी भी समेट कर फरार हो गए।
लौटने पर खुला कमरों का ताला, बिखरा सामान देख उड़े होश
इस महाचोरी का पर्दाफाश तब हुआ जब पीड़ित डॉ. विवेक बराड़ अगले दिन यानी 31 मई की रात करीब पौने दस बजे वापस अपने निवास स्थान पर पहुंचे। जैसे ही उन्होंने घर का ताला खोलकर भीतर प्रवेश किया, वहां का मंजर देखकर उनका पूरा परिवार सन्न रह गया। कमरों के भीतर रखी अलमारियां खुली पड़ी थीं, तिजोरी का दरवाजा टूटा हुआ था और कीमती सामानों के डिब्बे जमीन पर बिखरे हुए थे। सारा सोना, चांदी और कैश गायब पाकर गृहस्वामी ने बिना एक पल गंवाए तुरंत पड़ोसियों को इकट्ठा किया और डायल 112 के माध्यम से स्थानीय पुलिस को मामले की इत्तिला दी।
सीसीटीवी खंगालने में जुटी पुलिस, एएसआई को सौंपी गई कमान
बड़ी सेंधमारी की सूचना पाकर शहजादपुर थाना पुलिस की टीम दलबल के साथ फौरन मौके पर पहुंची और क्राइम सीन का बारीकी से मुआयना किया। हालांकि, शुरुआती तफ्तीश और स्थानीय लोगों से की गई पूछताछ में चोरों का कोई सीधा सुराग हाथ नहीं लग सका है। थाना प्रभारी ओमचंद ने बताया कि अज्ञात चोरों के विरुद्ध सुसंगत कानूनी धाराओं के तहत मामला पंजीकृत कर लिया गया है। इस अंधे मामले के खुलासे और आरोपियों की धरपकड़ के लिए सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) संदीप कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई है। पुलिस गांव और आसपास के मुख्य मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाल रही है, ताकि संदिग्धों के हुलिए और भागने के रास्तों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
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