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अमेरिका ने बदले वीजा नियम, भारतीय स्टूडेंट्स के भविष्य पर क्यों मंडरा रहा संकट?
20 Jul, 2026 04:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। भारतीय प्रवासियों के प्रमुख नीति समूह 'फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज' (FIIDS) ने अमेरिका के नए वीजा नियमों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि एफ-1 और जे-1 वीजा पर चार साल की नई समय सीमा लागू होने से अंतरराष्ट्रीय छात्रों की पढ़ाई और शोध कार्य बीच में ही अधर में लटक सकते हैं। सितंबर के मध्य से प्रभावी होने जा रहे इस नियम को रोकने के लिए संगठन ने अमेरिकी जनप्रतिनिधियों और आव्रजन सेवा (USCIS) से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
नए वीजा नियमों का छात्रों पर प्रभाव
इस विवादास्पद नीति के तहत पुरानी 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था को हटाकर अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए रहने की अधिकतम अवधि केवल चार साल निश्चित कर दी गई है। इस सीमा में ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) और एसटीईएम ओपीटी की अवधि भी सम्मिलित है। साथ ही, पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाले 60 दिनों के ग्रेस पीरियड को घटाकर अब महज 30 दिन कर दिया गया है। वीजा अवधि के विस्तार के लिए छात्रों को अब फॉर्म आई-539 के माध्यम से पूर्व-अनुमति लेना अनिवार्य होगा, जो प्रक्रियागत जटिलताओं को और बढ़ाएगा।
अनुसंधान और नवाचार क्षमता को चुनौती
विशेषज्ञों का तर्क है कि स्नातक और पीएचडी जैसे उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में औसतन 5 से 6 साल का समय लगता है, ऐसे में चार साल की सीमा अव्यावहारिक है। पहले से ही लाखों लंबित आवेदनों के बोझ तले दबी अमेरिकी आव्रजन प्रणाली वीजा विस्तार के आवेदनों को समय पर निस्तारित करने में सक्षम नहीं दिखती। इस नीति से प्रयोगशालाओं में शोध कार्य बाधित होंगे और अमेरिका अपनी नवाचार क्षमता को खोकर प्रतिस्पर्धी देशों के लिए रास्ता साफ कर सकता है। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय छात्रों का करियर प्रभावित होगा, बल्कि अमेरिकी रिसर्च संस्थानों की उत्पादकता भी घटेगी।
आर्थिक नुकसान और सुधार की मांग
FIIDS ने चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों की घटती संख्या का सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। वर्ष 2025 के फॉल सेमेस्टर में दाखिलों में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान और हजारों नौकरियों का संकट खड़ा हुआ है। संगठन ने मांग की है कि 'ड्यूरेशन-ऑफ-स्टेटस' सुरक्षा को पुन: बहाल किया जाए, ओपीटी को चार साल की गणना से बाहर रखा जाए और 60 दिनों का ग्रेस पीरियड वापस लाया जाए। यदि ये कदम नहीं उठाए गए, तो प्रतिभाओं का पलायन अमेरिका के शैक्षिक भविष्य के लिए बड़ा जोखिम साबित होगा।
भारत-मोल्दोवा रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती, राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे पर दुनिया की नजर
20 Jul, 2026 03:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चिशिनाउ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सोमवार को मोल्दोवा की अपनी ऐतिहासिक यात्रा पर चिशिनाउ पहुँचीं। किसी भी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की ओर से इस यूरोपीय देश की यह पहली आधिकारिक यात्रा है। अपनी तीन देशों की इस महत्वपूर्ण यात्रा के पहले चरण के अंतर्गत, राष्ट्रपति मुर्मू व्यापार, प्रौद्योगिकी और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से यहाँ पहुँची हैं। चिशिनाउ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मोल्दोवा के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मिहाई पोपसोई ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।
उच्च स्तरीय वार्ता और कूटनीतिक संबंध
अपनी एक दिवसीय मोल्दोवा यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति मुर्मू वहां की राष्ट्रपति माया सैंडू के साथ विस्तृत प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगी। इस दौरे में वे मोल्दोवा की संसद के अध्यक्ष इगोर ग्रोसू से भी मुलाकात करेंगी। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति मोल्दोवा-भारत संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों के साथ चर्चा करेंगी, एक व्यापार मंच को संबोधित करेंगी और वहां रह रहे भारतीय समुदाय के साथ संवाद करेंगी। मोल्दोवा में लगभग 2,000 भारतीय नागरिक निवास करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में मेडिकल छात्र शामिल हैं, जो दोनों देशों के बीच संबंधों की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
यूरोपीय देशों के साथ भारत की बढ़ती सहभागिता
राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा पूर्वी यूरोपीय देशों के साथ भारत के बढ़ते कूटनीतिक संबंधों को दर्शाता है। मोल्दोवा के बाद, राष्ट्रपति 21 से 22 जुलाई तक उत्तरी मैसेडोनिया का दौरा करेंगी, जो किसी भारतीय राष्ट्रपति की इस देश की पहली यात्रा होगी। इसके बाद, दौरे के अंतिम चरण में वे 23 से 25 जुलाई तक रोमानिया की राजकीय यात्रा पर रहेंगी, जो तीन दशकों से अधिक के अंतराल के बाद वहां किसी भारतीय राष्ट्रपति का पहला दौरा है। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि व्यापक पूर्वी यूरोपीय क्षेत्र के साथ नई दिल्ली की सहभागिता को भी नई दिशा प्रदान करेगी।
प्रतिनिधिमंडल और रणनीतिक महत्व
रोमानिया, उत्तरी मैसेडोनिया और मोल्दोवा की यह राजकीय यात्रा भारत द्वारा इन देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को दिए जाने वाले महत्व का प्रमाण है। राष्ट्रपति मुर्मू के साथ इस यात्रा में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया, राज्यसभा सदस्य दिनेश शर्मा और लोकसभा सदस्य विजय बघेल का एक उच्च स्तरीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल है। यह दौरा व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से भारत की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमले का दावा, IRGC बोला- कई सैनिक मारे गए
20 Jul, 2026 02:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि जॉर्डन में मौजूद गुप्त मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर उसने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। आईआरजीसी का आरोप है कि जॉर्डन के अल-अजराक हवाई अड्डे पर किए गए हमले में अमेरिकी सेना के 20 हैंगर नष्ट कर दिए गए और कई सैनिकों की जान गई है। हालांकि, वाशिंगटन ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए हताहतों की संख्या काफी कम बताई है। पेंटागन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, संघर्ष के दौरान अब तक कुल 17 अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मृत्यु हुई है।
मिसाइल हमलों से दहला जॉर्डन और हवाई अड्डे
तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान ने जॉर्डन की सीमा की ओर मिसाइलों की बौछार कर दी। आईआरजीसी ने दावा किया कि उनके बैलिस्टिक मिसाइलों ने अकाबा हवाई अड्डे पर तैनात अमेरिकी परिवहन विमान और निगरानी विमानों को भी गंभीर नुकसान पहुँचाया है। यह सैन्य कार्रवाई शुक्रवार को जॉर्डन में मारे गए अमेरिकी सैनिकों का बदला लेने के लिए अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों का जवाब मानी जा रही है। पेंटागन ने स्पष्ट किया है कि उनके अभियान विशेष रूप से आईआरजीसी के बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के लिए केंद्रित हैं, ताकि भविष्य में और हमले न हो सकें।
होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आपातकाल
सैन्य हमलों के साथ-साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में भी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। क्षेत्र में एक वाणिज्यिक जहाज में रहस्यमय तरीके से आग लग गई है, जिसके बाद ब्रिटिश सेना ने इस मार्ग पर सतर्कता बढ़ा दी है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने यह स्वीकार किया है कि वे इस महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट में टैंकरों को जानबूझकर निशाना बना रहे हैं। इसके कारण अमेरिकी नौसेना ने क्षेत्र से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों को ईरानी नियंत्रण वाले समुद्री मार्गों से दूर रहने की सख्त सलाह दी है, जिससे वैश्विक व्यापार मार्ग पूरी तरह असुरक्षित हो गए हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बढ़ता संकट
ईरान के जवाबी हमलों ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन जैसे खाड़ी देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इन देशों ने अपने हवाई रक्षा नेटवर्क को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है ताकि ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया जा सके। बहरीन में अमेरिकी दूतावास ने अपनी सुरक्षा सलाह जारी करते हुए नागरिकों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। वहीं, इजरायल ने भी चेतावनी दी है कि ईरानी मिसाइलों के कारण भीषण जंगल की आग भड़क सकती है, जिसका प्रभाव इजरायली क्षेत्र तक फैल सकता है। पश्चिम एशिया में जारी यह तीव्र सैन्य संघर्ष अब एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता दिख रहा है।
कोर्ट से घर जा रहे भाइयों पर बदमाशों का हमला, डंडों से की मारपीट
20 Jul, 2026 02:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
खरखौदा: हरियाणा के खरखौदा में सोमवार को अदालती कार्यवाही के उपरांत वापस लौट रहे दो सगे भाइयों पर अज्ञात युवकों द्वारा अचानक जानलेवा हमला किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित भाई अदालत से अपनी हाजिरी दर्ज कराकर पैदल बस स्टैंड की ओर बढ़ रहे थे, तभी रास्ते में हमलावरों ने उन्हें घेर लिया। आरोपियों ने लकड़ी के डंडों और लाठियों से दोनों भाइयों पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार होने में कामयाब रहे। घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को इलाज के लिए तुरंत खरखौदा के नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनका इलाज जारी है।
अदालत में हाजिरी लगाने के बाद लौट रहे थे दोनों भाई
घटनाक्रम के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार फरमाना गांव के निवासी अनुज और रोहित दोनों सगे भाई हैं। वे सोमवार सुबह एक पुराने आपराधिक मामले के सिलसिले में निर्धारित तिथि पर खरखौदा स्थित न्यायालय में पेशी के लिए आए हुए थे। संबंधित न्यायिक अधिकारी के अवकाश पर होने की वजह से दोनों भाइयों ने अदालत में अपनी हाजिरी दर्ज करवाई और इसके बाद पैदल ही बस अड्डे की तरफ रवाना हो गए।
रास्ते में रोककर लकड़ी के डंडों से किया हमला
पैदल लौटते समय रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे कुछ युवकों ने अचानक दोनों भाइयों को रोक लिया और बिना किसी कहासुनी के लकड़ी के डंडों से मारपीट शुरू कर दी। हमलावरों ने बिना संभलने का मौका दिए ताबड़तोड़ वार किए, जिससे दोनों भाई सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से चोटिल हो गए। आसपास के लोगों को एकत्र होते देख हमलावर उन्हें जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से भाग निकले।
सरकारी अस्पताल में घायलों का उपचार जारी
वारदात के तुरंत बाद मौके पर मौजूद लोगों और राहगीरों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को खरखौदा के सरकारी अस्पताल पहुँचाया। अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा दोनों पीड़ितों का प्राथमिक उपचार किया गया, जिसके बाद उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। चिकित्सकों के अनुसार दोनों भाइयों के शरीर पर कई जगह गंभीर चोटों के निशान आए हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से उनकी स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर शुरू की छानबीन
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस टीम ने अस्पताल पहुंचकर घायलों के बयान दर्ज किए हैं। पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत के आधार पर अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुरानी रंजिश और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल की जा रही है, तथा आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालकर फरार आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
राजनीति जगत को बड़ा झटका, पूर्व कांग्रेस विधायक राजपाल भूखड़ी का निधन
20 Jul, 2026 12:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यमुनानगर:साढौरा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजपाल भूखड़ी का 55 वर्ष की आयु में रविवार सुबह अचानक निधन हो गया। वह हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी संजय दत्त की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली कार्यकर्ताओं की अहम बैठक में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे। सुबह की सैर से वापस आने के बाद अचानक उनके सीने में तीव्र दर्द उठा, जिसके बाद परिजन तुरंत उन्हें चिकित्सक के पास ले गए। हालांकि, डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके इस तरह अचानक चले जाने से पूरे क्षेत्र और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में गहरा शोक फैल गया है।
बैठकों के बीच छाई शोक की लहर और अंतिम संस्कार की तैयारी
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी संजय दत्त दो दिवसीय दौरे पर यमुनानगर आए हुए थे और जगाधरी की मारवाड़ी धर्मशाला में नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ उनकी महत्वपूर्ण बैठक तय थी। इसी कार्यक्रम में शिरकत करने की तैयारियों के दौरान राजपाल भूखड़ी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। विधायक रहने के दौरान वे जगाधरी के सेक्टर-17 में निवास करते थे और बाद में अंसल टाउन में रहने लगे थे। उनका अंतिम संस्कार जिला अंबाला के उपमंडल नारायणगढ़ में स्थित उनके पैतृक गांव भूखड़ी में करने का निर्णय लिया गया है, जहां तमाम समर्थक और पार्टी नेता उन्हें अंतिम विदाई देंगे।
2009 में विधानसभा पहुंचकर साढौरा क्षेत्र की बने थे प्रमुख आवाज
राजनीतिक जीवन में राजपाल भूखड़ी ने वर्ष 2009 से 2014 तक साढौरा विधानसभा क्षेत्र का कुशल प्रतिनिधित्व किया था। वर्ष 2009 के चुनावों में 47,263 वोट हासिल करके उन्होंने शानदार जीत दर्ज की थी और विधानसभा में क्षेत्र के मुद्दों को मुखरता से उठाने वाले नेताओं में अपनी पहचान बनाई थी। इसके बाद 2014 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने फिर से उन पर विश्वास जताते हुए प्रत्याशी बनाया था, यद्यपि इस चुनाव में उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद क्षेत्र की जनता और संगठन के बीच उनका जुड़ाव हमेशा मजबूत बना रहा।
संगठन में मजबूत पकड़ और दिग्गजों के बीच खास पहचान
राजपाल भूखड़ी को कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री कुमारी सैलजा का बेहद करीबी और वफादार समर्थक माना जाता था। पार्टी के फैसलों और सांगठनिक गतिविधियों में वे हमेशा अग्रणी भूमिका निभाते रहे। वर्ष 2019 में भले ही टिकट किसी अन्य उम्मीदवार को मिला, लेकिन भूखड़ी ने पार्टी निष्ठा बनाए रखी, जिसके चलते बाद में यमुनानगर-जगाधरी नगर निगम चुनाव में उनकी पत्नी को मेयर पद का प्रत्याशी बनाया गया था। उनके निधन पर पार्टी के जिलाध्यक्षों, स्थानीय नेताओं, समर्थकों और सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे अपूरणीय क्षति बताया है।
दुनिया की नजर ASEAN बैठक पर, ईरान संघर्ष और दक्षिण चीन सागर विवाद पर हो सकते हैं अहम फैसले
20 Jul, 2026 11:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मनीला। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के शीर्ष राजनयिकों की एक महत्वपूर्ण बैठक फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित होने जा रही है। तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक में आसियान देशों के अलावा अमेरिका, चीन, रूस और यूरोपीय संघ के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इस आयोजन का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े हालिया संघर्ष और उससे वैश्विक स्तर पर उत्पन्न तनाव रहेगा। आसियान की अध्यक्षता कर रहे फिलीपींस द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में कूटनीति के कई बड़े चेहरे एक साथ दिखाई देंगे।
ईरान-अमेरिका संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा संकट
बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, चीन के विदेश मंत्री वांग यी और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव जैसे बड़े कूटनीतिज्ञ शिरकत करेंगे। चर्चा का मुख्य बिंदु ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष है, जिसने होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले समुद्री यातायात को खतरे में डाल दिया है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आसियान सदस्य देश इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए एक संयुक्त बयान जारी करने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें दोनों पक्षों से शांतिपूर्ण वार्ता बहाल करने की अपील की जाएगी। दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है, इसलिए कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर वहां की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलती रणनीतिक स्थिति
ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव का असर एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का ध्यान पश्चिम एशिया की ओर केंद्रित होने से दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामक गतिविधियों और ताइवान को लेकर तनाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने अपने एशियाई सहयोगियों को पूरी मदद का भरोसा दिलाया है। फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने पहले ही राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित कर ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं, ताकि क्षेत्र को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आ रहे बदलावों से बचाया जा सके।
क्वाड देशों की बैठक और भविष्य की दिशा
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के इतर, क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) समूह के विदेश मंत्रियों की बैठक भी मनीला में होनी तय है। महज दो महीने के भीतर यह दूसरी क्वाड बैठक है, जो इस क्षेत्र में बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों को रेखांकित करती है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस बैठक के लिए फिलीपींस पहुंच रहे हैं, जहां वे भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और अन्य क्वाड भागीदारों के साथ 'स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र' को बनाए रखने पर विचार-विमर्श करेंगे। यह बैठक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के दृष्टिकोण से न केवल आसियान देशों के लिए, बल्कि समूचे विश्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
FIFA फाइनल की हार के बाद अर्जेंटीना में हिंसा, सड़कों पर उतरे हजारों समर्थक
20 Jul, 2026 11:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ब्यूनस आयर्स। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में अर्जेंटीना को स्पेन के हाथों 1-0 से मिली हार के बाद ब्यूनस आयर्स में भारी बवाल मच गया है। राजधानी के ओबेलिस्क के समीप आक्रोशित प्रशंसकों और दंगा-रोधी पुलिस के बीच हिंसक झड़पें देखी गई हैं। हार के गम में डूबी भीड़ ने आगजनी की और कानून व्यवस्था को चुनौती दी, जिसके जवाब में पुलिस को स्थिति संभालने के लिए ढाल और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। शहर की सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल है और धुआं उठते हुए दृश्य किसी बड़े उपद्रव की गवाही दे रहे हैं।
मैदान पर खिलाड़ियों के बीच हाथापाई
तनाव केवल सड़कों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि फाइनल मैच के अंतिम क्षणों और उसके बाद मैदान पर भी खिलाड़ियों के बीच झड़प देखने को मिली। अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो पेरेडेस और डिफेंडर नहुएल मोलिना का व्यवहार बेहद आक्रामक रहा। पेरेडेस ने स्पेन के एरिक गार्सिया का गला पकड़कर धक्का दिया और गावी के साथ भी बदसलूकी की। वहीं, मोलिना ने स्पेनिश कप्तान रोड्री पर मुक्का चलाने का प्रयास किया। अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी को बीच-बचाव कर मामले को शांत कराना पड़ा, जिससे मैच का समापन एक शर्मनाक घटना के साथ हुआ।
विजेता टीम के प्रति अर्जेंटीना का अशोभनीय व्यवहार
खेल भावना के विपरीत, अर्जेंटीना की टीम पर एक और अत्यंत आपत्तिजनक हरकत का आरोप लगा है। जब स्पेनिश खिलाड़ी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हाथों अपना वर्ल्ड कप मेडल और ट्रॉफी प्राप्त कर रहे थे, तब अर्जेंटीना के सभी खिलाड़ी पुरस्कार समारोह की ओर पीठ करके खड़े हो गए। इस व्यवहार को खेल की गरिमा के विरुद्ध माना जा रहा है। फुटबॉल जगत के विशेषज्ञों ने अर्जेंटीना के इस अशोभनीय आचरण की कड़ी आलोचना की है, क्योंकि यह न केवल स्पेन की जीत का अपमान है, बल्कि फीफा के प्रोटोकॉल और खेल के सिद्धांतों का भी उल्लंघन है।
ईरान में फिर गूंजे धमाके! ट्रंप ने हमलों की बताई वजह, होर्मुज जलडमरूमध्य पर किया बड़ा दावा
20 Jul, 2026 10:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी सेना ने ईरान पर एक और सैन्य हमला किया है। यह कार्रवाई हाल ही में तीन अमेरिकी सैनिकों की संभावित शहादत के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए की गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि इस हमले में ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर क्षति पहुंची है और अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण समाप्त हो गया है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए इन सैनिकों को महान देशभक्त करार दिया और कहा कि वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के उद्देश्य से तैनात थे।
ईरान की सैन्य शक्ति और होर्मुज पर नियंत्रण का दावा
ट्रंप ने जोर देकर कहा कि सैन्य रूप से ईरान को भारी नुकसान झेलना पड़ा है और उसके पास अब केवल सीमित संख्या में मिसाइलें, ड्रोन और मामूली निर्माण क्षमता ही शेष रह गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य पर अब अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है। ट्रंप के अनुसार, यह जलमार्ग अब ईरानी प्रभाव से मुक्त है और अमेरिका इसे पूरी तरह नियंत्रित कर रहा है। हालांकि, उन्होंने शहीद हुए सैनिकों की पहचान या उनकी मृत्यु से जुड़ी विस्तृत परिस्थितियों पर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की।
कनाडा के जंगलों की आग पर तीखी प्रतिक्रिया
सैन्य तनाव के अलावा, राष्ट्रपति ट्रंप ने कनाडा के जंगलों में लगी भीषण आग पर भी चिंता जताई है। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि इस आग के धुएं से अमेरिका की हवा जहरीली हो रही है, जिसे तत्काल रोकने की आवश्यकता है। ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा कि कनाडा को इस नुकसान की भरपाई करनी चाहिए, अन्यथा अमेरिका उन पर टैरिफ शुल्क लगा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आवश्यक हुआ, तो अमेरिका इस आग को बुझाने में कनाडा की सहायता के लिए तैयार है।
वैश्विक संबंधों और सुरक्षा पर राष्ट्रपति का रुख
पत्रकारों के साथ संक्षिप्त बातचीत के दौरान ट्रंप ने एयरफोर्स वन विमान की तकनीकी क्षमताओं का भी उल्लेख किया और बताया कि विमान को और अधिक उन्नत बनाने के लिए जल्द ही भेजा जाएगा। उन्होंने स्पेन के साथ संबंधों पर उपजे सवालों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनका किसी भी देश के साथ कोई तनावपूर्ण संबंध नहीं है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का केंद्र है, ऐसे में ट्रंप के इस कड़े रुख और सैन्य हस्तक्षेप से दुनिया भर में ऊर्जा संकट और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंकाएं बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ सकता है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की नई पहल, स्कूल समितियों को प्रोत्साहन राशि का ऐलान
20 Jul, 2026 09:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़: हरियाणा के सरकारी विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं और शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को प्रदेश भर की विद्यालय प्रबंधन समितियों (एसएमसी) के साथ आयोजित एक विशेष राज्य स्तरीय संवाद कार्यक्रम के दौरान यह ऐलान किया कि अब प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली विद्यालय प्रबंधन समिति को 10 लाख रुपये का प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इस पुरस्कार राशि का संपूर्ण उपयोग संबंधित विद्यालय में अवस्थापना विकास और अन्य सुधार संबंधी कार्यों को पूरा करने में किया जाएगा।
सच पोर्टल का शुभारंभ और निष्पादन का मूल्यांकन
कार्यक्रम के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली और दक्षता के सही आकलन हेतु 'सच' (स्कूल असेसमेंट एंड चेकिंग हब) नामक एक नए डिजिटल पोर्टल का विधिवत शुभारंभ किया। इस नवीन पोर्टल के जरिए प्रदेश भर की विद्यालय प्रबंधन समितियों के प्रदर्शन और उनके द्वारा किए गए सुधार कार्यों का पारदर्शी मूल्यांकन किया जाएगा। इसी डिजिटल व्यवस्था के आधार पर सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाली समितियों को चिन्हित कर पुरस्कार की राशि आवंटित की जाएगी, जिससे स्कूलों में बेहतर वातावरण तैयार हो सके।
एसएमसी को मिले अधिक वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार
विद्यालयों में छोटी-मोटी समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु सरकार ने प्रबंधन समितियों के वित्तीय अधिकारों में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। अब समितियां अपने स्तर पर पेयजल आपूर्ति, शौचालय मरम्मत, चहारदीवारी और अन्य आवश्यक रखरखाव संबंधी कार्यों के लिए 1 लाख रुपये तक की राशि स्वयं स्वीकृत कर खर्च कर सकेंगी। यदि किसी विद्यालय में किसी बड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण की आवश्यकता होती है, तो संबंधित जिले के अतिरिक्त उपायुक्त की प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त करने के उपरांत 25 लाख रुपये तक का बजट खर्च करने का प्रावधान भी किया गया है।
मुख्यमंत्री का जिलों से संवाद और पौधरोपण का संदेश
राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग माध्यम से प्रत्येक जिले के एक चयनित विद्यालय की समिति से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने स्कूलों में स्वच्छता, खेल मैदानों की स्थिति, छात्र नामांकन, बोर्ड नतीजों, सुपर-100 तथा बुनियाद जैसी कल्याणकारी योजनाओं के संचालन की विस्तृत समीक्षा की। संवाद के अंत में उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से परिसरों में अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से जुड़ने का आह्वान किया, साथ ही अधिकारियों को विद्यालयों के नियमित निरीक्षण के सख्त निर्देश दिए।
शिक्षा मंत्री का सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान
समारोह को संबोधित करते हुए राज्य के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने स्पष्ट किया कि विद्यालय प्रबंधन समितियों को केवल निगरानी करने वाली संस्था बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें संस्था प्रमुखों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर समस्याओं के समाधान में अग्रणी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने चालू शैक्षणिक सत्र में सरकारी विद्यालयों के शानदार बोर्ड परीक्षा परिणामों के लिए विद्यार्थियों, अध्यापकों और एसएमसी सदस्यों की सराहना की तथा आने वाले समय में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने का भरोसा जताया।
OpenAI को मिला नया CTO: कौन हैं भारतीय मूल के उदय रुद्दाराजू और क्यों छोड़ी xAI?
20 Jul, 2026 09:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। भारतीय मूल के अनुभवी टेक विशेषज्ञ उदय रुद्दाराजू को माइक्रोसॉफ्ट समर्थित प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी ओपनएआई में 'चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (सीटीओ), कंप्यूट' के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है। उदय ने स्वयं लिंक्डइन के माध्यम से इस नई जिम्मेदारी की घोषणा की है। पिछले वर्ष जुलाई में ओपनएआई से जुड़ने के बाद, उन्होंने अपनी कार्यक्षमता और तकनीकी कौशल से कंपनी में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
रुद्दाराजू का शैक्षणिक और पेशेवर सफर
उदय रुद्दाराजू की शैक्षिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत रही है। उन्होंने हैदराबाद के चैतन्य भारती इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस में बैचलर डिग्री प्राप्त की है। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) में इंटर्नशिप की थी। उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाने के बाद, उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा से कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री पूरी की। उनके करियर की शुरुआत ईबे (eBay) से हुई, जहाँ उन्होंने 2013 से 2018 तक अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने रॉबिनहुड और एलन मस्क की कंपनी एक्सएआई (xAI) में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पिछले वर्ष वह उन प्रमुख विशेषज्ञों में शामिल थे, जिन्होंने एक्सएआई छोड़कर ओपनएआई का रुख किया था।
भविष्य की तकनीक और कंप्यूटिंग चुनौतियां
ओपनएआई में अपनी कंप्यूट टीम के साथ उदय लगातार बुनियादी ढांचे की क्षमता विस्तार पर काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में टीम कंप्यूटिंग, नेटवर्किंग, स्टोरेज और मशीन लर्निंग के जटिल सिस्टम्स को विकसित करने में जुटी है, जो 'जीपीटी-5.6' जैसे अत्याधुनिक और भविष्य के एआई मॉडल्स को प्रशिक्षित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उदय का मानना है कि जैसे-जैसे एआई तकनीक का दायरा बढ़ रहा है, चुनौतियां भी जटिल होती जा रही हैं, जिसके लिए हर स्तर पर नए और नवाचारी प्रयोग करने की आवश्यकता है।
दुनिया का सबसे बड़ा कंप्यूट ढांचा बनाने का रोडमैप
उदय रुद्दाराजू के अनुसार, ओपनएआई का मुख्य उद्देश्य विश्व का सबसे विशाल कंप्यूटिंग ढांचा तैयार करना है, ताकि आधुनिक एआई तकनीक का लाभ हर क्षेत्र और हर व्यक्ति तक पहुंच सके। कंपनी के पास एक व्यापक भविष्य की योजना है, जिसके अंतर्गत बड़े पैमाने पर डिस्ट्रीब्यूटेड सिस्टम, हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग और डेटा सेंटर का निर्माण किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के साथ ही तकनीकी जगत के शीर्ष विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं, ताकि एआई के विकास में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके।
क्या ईरान में हालात और बिगड़ने वाले हैं? भारत की एडवाइजरी ने बढ़ाई चिंता
20 Jul, 2026 08:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान और अमेरिका के मध्य तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां अमेरिकी सेना द्वारा लगातार नौवें दिन ईरान के विभिन्न शहरों को निशाना बनाया गया है। इस बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने सतर्कता बरतते हुए अपने नागरिकों के लिए नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने रविवार को स्पष्ट रूप से कहा है कि जो भी भारतीय नागरिक ईरान यात्रा की योजना बना रहे हैं, वे फिलहाल अपनी यात्रा स्थगित कर दें।
ईरान में रह रहे भारतीयों के लिए निर्देश
दूतावास ने ईरान में पहले से मौजूद भारतीय नागरिकों को सलाह दी है कि वे व्यावसायिक उड़ानों का उपयोग कर जल्द से जल्द देश छोड़ने पर विचार करें। एडवाइजरी में कहा गया है कि हाल के दिनों में क्षेत्रीय अस्थिरता और संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिसके चलते सुरक्षा जोखिम बढ़ गए हैं। यदि किसी कारणवश भारतीय नागरिकों को ईरान में रुकना पड़ता है, तो उन्हें अत्यंत सावधानी बरतने और स्थानीय घटनाक्रमों पर निरंतर नजर रखने की हिदायत दी गई है। विशेष रूप से सैन्य गतिविधियों वाले क्षेत्रों और ईरान के दक्षिणी तटवर्ती इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
दूतावास में पंजीकरण की अनिवार्यता
भारतीय दूतावास ने सभी नागरिकों को अपने साथ समन्वय बनाए रखने के लिए पंजीकरण कराने का निर्देश दिया है। जो भारतीय नागरिक अभी तक दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट या पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें तत्काल अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करने को कहा गया है। सुरक्षा संबंधी अद्यतन जानकारी के लिए नागरिकों को दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल का नियमित रूप से अवलोकन करने की सलाह दी गई है। साथ ही, स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी किए गए सभी सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य बताया गया है।
संघर्ष और सुरक्षा हालात पर निगरानी
ईरान में गहराते संकट और सैन्य हमलों के बाद से दूतावास पूरी तरह सक्रिय हो गया है। भारतीय दूतावास लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा सके। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते इस तनाव के कारण विमानन सेवाओं और संचार व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है, जिसे देखते हुए नागरिकों को हर समय सतर्क रहने के लिए कहा गया है। यह एडवाइजरी तब तक प्रभावी रहेगी जब तक कि क्षेत्रीय हालात सामान्य नहीं हो जाते।
होर्मुज बंद होने से दुनिया चिंतित, खाड़ी देश इस रूट का खोज रहे विकल्प
19 Jul, 2026 10:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई। पिछले दिनों ईरान और अमेरिका के बीच समझौते के बाद होर्मुज खुला था, लेकिन हालिया तनाव के चलते ये फिर बंद कर दिया गया है। इस समुद्री रूट से गुजरने वाले टैंकरों पर हमले हुए हैं, जिससे यातायात बहुत कम हो गया है। इसने दुनिया के बड़े हिस्से की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर से खाड़ी देशों में अपने तेल और गैस के एक्सपोर्ट की चिंता है। ऐसे में तेल-गैस से संपन्न खाड़ी देश इस रूट के विकल्प खोज रहे हैं। वे नई पाइपलाइनों और एक नए बंदरगाह के जरिए भविष्य में किसी भी रुकावट से निपटने की तैयारी कर रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जानकारों का कहना है कि ईरान कुछ महीनों तक होर्मुज का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन हमेशा के लिए नहीं। उनका तर्क है कि युद्ध ने दुनिया को हालात के हिसाब से ढलने और ऊर्जा के लिए सिर्फ एक संकरे रास्ते पर अपनी भारी निर्भरता कम करने के लिए मजबूर किया है। हालांकि लंबे समय में ये विकल्प कितने कारगर होंगे, इस पर राय बंटी हुई है। ईरान पर हमले 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने से पहले दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल और गैस का व्यापार होर्मुज से होता था। इससे बाकी दुनिया को रोजाना 2 करोड़ बैरल तेल मिलता था। एक्सपर्ट का दावा है कि लड़ाई फिर से शुरू होने के बावजूद ग्लोबल ऑयल मार्केट में घबराहट कम है, जिसकी वजह आपातकालीन योजनाएं हैं।
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन 1980 के दशक की शुरुआत में बनाई गई थी। यह सऊदी अरब में 1,200 किलोमीटर लंबे नेटवर्क के जरिए कच्चा तेल ले जाती है और पूर्व में अबकैक ऑयल प्रोसेसिंग सुविधा को पश्चिम में यानबू के रेड सी पोर्ट से जोड़ती है। वहां से सऊदी तेल टैंकरों में भरा जाता है और रेड सी से होते हुए स्वेज नहर के जरिए यूरोप या बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गल्फ ऑफ एडेन तक ले जाया जाता है।
इस पाइपलाइन की क्षमता रोजाना 70 लाख बैरल तेल प्रोसेस करने की है। सऊदी अरब अब इसकी क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
यूएई क्रूड ऑयल पाइपलाइन पर काम कर रहा है। यह अबू धाबी के दक्षिण-पश्चिमी इलाके में मौजूद तेल क्षेत्रों से हर दिन 1.8 मिलियन बैरल तक तेल उस अमीराती टर्मिनल तक ले जा सकती है। यह जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में है, जो चोक पॉइंट से बचकर निकलता है। यूएई होर्मुज पर अपनी निर्भरता को और कम करने के लिए एक नया बंदरगाह बनाने की भी कोशिश कर रहा है। दुबई की एक सप्लाई चेन कंपनी फुजैराह के तटीय इलाके में एक नया बंदरगाह और कंटेनर टर्मिनल बनाने के लिए बातचीत कर रही है, जहां मौजूदा हबशान-फुजैराह पाइपलाइन खत्म होती है।
इराक में भी बसरा-हदीथा पाइपलाइन को 2024 में मंजूरी मिली है। यह एक बहुत बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसके तहत इराक के दक्षिणी शहर बसरा के आस-पास के तेल क्षेत्रों को जॉर्डन के लाल सागर वाले बंदरगाह शहर अकाबा से जोड़ा जाएगा और सीरिया व तुर्की से गुज़रने वाले प्रोजेक्ट्स से भी जोड़ा जाएगा। कुछ एनालिस्ट वैकल्पिक रास्तों से होर्मुज पर दुनिया की निर्भरता को कम होने की बात कह रहे हैं लेकिन कई इसे नकार रहे हैं। वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट के एनर्जी पॉलिसी एनालिस्ट का कहना है कि लोग जल्दबाजी में बहुत आगे की सोच रहे हैं। इनमें से कुछ पाइपलाइन प्रस्ताव मुख्य रूप से भूमध्य सागर के तट तक तेल पहुंचाने के लिए हैं। यह वह जगह नहीं है, जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। एक्सपर्ट ने इसको लेकर भी आगाह किया है कि ईरान एक और अहम समुद्री रास्ते बाब अल-मंडेब स्ट्रेट को बंद कर सकता है। यह यमन और अफ्रीका के बीच एक संकरा रास्ता है जो लाल सागर और एशिया के बीच आने-जाने का जरिया है। दुनिया का लगभग 5 प्रतिशत तेल उत्पादन इस जलडमरूमध्य से गुजरता है।
कुछ साल पहले बाब अल-मंडेब क्षमता दोगुनी थी। 2023 में इजराइल-हमास युद्ध की शुरुआत में यमन में हूती लड़ाकों ने कमर्शियल जहाजों पर बार-बार हमले किए। यमन में हूती शिपमेंट में रुकावट डाल रहे हैं। इसलिए सऊदी पाइपलाइन एक आंशिक समाधान तो है, लेकिन पूरी तरह भरोसेमंद समाधान नहीं है। यूएई की नई योजनाएं भी बहुत भरोसेमंद समाधान नहीं हैं। फुजैराह बंदरगाह पर ईरान पहले ही हमला कर चुका है। इसलिए फुजैराह तक एक और पाइपलाइन बनाना समस्या का समाधान कर दे, ये जरूरी नहीं है।
बलूचिस्तान: आजाद रियासत से पाकिस्तान के प्रांत तक संघर्ष
19 Jul, 2026 10:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। बलूचिस्तान, दक्षिण एशिया का एक ऐतिहासिक और खनिज संसाधनों से भरपूर क्षेत्र है, जो वर्तमान में पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान के बीच विभाजित है। पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत क्षेत्रफल के हिसाब से देश का सबसे बड़ा प्रांत है, हालांकि इसकी आबादी थोड़ी कम है। इतिहासकारों के अनुसार, ब्रिटिश शासन के दौरान यहां कई रियासतें मौजूद थीं, जिनमें कलात रियासत सबसे प्रमुख थी। 11 अगस्त 1947 को, भारत और पाकिस्तान के औपचारिक गठन से ठीक पहले, कलात के खान ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी थी। इसके बाद कुछ महीनों तक कलात ने स्वयं को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में संचालित किया और पाकिस्तान के साथ अपने भविष्य को लेकर बातचीत जारी रखी।
पाकिस्तान की स्थापना के बाद कलात और नवगठित पाकिस्तान के बीच कई दौर की वार्ताएं हुईं। पाकिस्तान चाहता था कि कलात उसके साथ विलय कर ले, जबकि कलात के शासक शुरुआत में अपनी स्वतंत्र स्थिति बनाए रखना चाहते थे। आखिरकार, 27 मार्च 1948 को, कलात के तत्कालीन खान, अहमद यार खान ने पाकिस्तान के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए। पाकिस्तान का आधिकारिक पक्ष इस विलय को एक स्वैच्छिक और कानूनी प्रक्रिया मानता है, लेकिन कई बलूच राष्ट्रवादी नेताओं और कुछ इतिहासकारों का दावा है कि यह फैसला राजनीतिक और सैन्य दबाव में लिया गया था। इसी मूलभूत विवाद के कारण आज भी इस विषय पर अलग-अलग मत देखने को मिलते हैं, और यह बलूचिस्तान के मौजूदा संघर्षों की जड़ में है।
विलय के तुरंत बाद ही इसका विरोध शुरू हो गया। कलात के खान के भाई प्रिंस अब्दुल करीम ने इस विलय को अस्वीकार कर दिया और पाकिस्तान के खिलाफ विद्रोह छेड़ दिया। तब से लेकर आज तक, बलूचिस्तान में समय-समय पर कई अलगाववादी आंदोलन और सशस्त्र संघर्ष हुए हैं। 1950 के दशक, 1960 के दशक, 1970 के दशक और फिर 2000 के दशक के बाद भी बलूच अलगाववादी संगठनों और पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के बीच संघर्ष लगातार जारी रहा है। बलूच संगठनों का आरोप है कि उनके प्राकृतिक संसाधनों (जैसे गैस, तांबा, सोना) का पर्याप्त लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिलता, और उन्हें विकास से वंचित रखा जाता है। वहीं, पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वह क्षेत्र के विकास और सुरक्षा के लिए लगातार काम कर रही है। आज बलूचिस्तान पाकिस्तान की राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक माना जाता है। 1948 में हुए विलय की वैधता और परिस्थितियों को लेकर विवाद अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। पाकिस्तान इसे अपने संघ का वैध हिस्सा मानता है, जबकि कई बलूच राष्ट्रवादी संगठन ऐतिहासिक आधार पर पूर्ण स्वतंत्रता की मांग करते हैं और अपनी आवाज विभिन्न माध्यमों से उठाते रहते हैं।
हिंदू युवक की गिरफ्तारी के खिलाफ बांग्लादेश में प्रदर्शन, अल्पसंख्यक समुदाय ने उठाई रिहाई की मांग
18 Jul, 2026 05:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में एक हिंदू युवक की गिरफ्तारी के विरोध में राजधानी ढाका में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने भारी आक्रोश व्यक्त किया है। 'बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद' के बैनर तले नेशनल प्रेस क्लब के सामने आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हरिदास चंद्र तरणी दास को एक फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाकर गिरफ्तार किया गया है। उनका कहना है कि यह पूरी कार्रवाई केवल इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी इलाके में भगवान राम की 81 फीट ऊंची प्रतिमा बनाने का बीड़ा उठाया था।
गिरफ्तारी को बताया अन्यायपूर्ण और राजनीति से प्रेरित
परिषद के महासचिव मणिंद्र कुमार नाथ ने इस गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने दो-तीन दिन पहले हरिदास को जेल भेज दिया। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि प्रतिमा निर्माण जैसे धार्मिक कार्य से जुड़े होने के कारण किसी निर्दोष व्यक्ति को निशाना बनाना कानून का दुरुपयोग है।
अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर चिंता
प्रदर्शन के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं ने पिछले दो वर्षों में देश भर में अपने समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर गहरी चिंता जताई। मणिंद्र कुमार नाथ ने दावा किया कि पिछले एक वर्ष में ही देशभर में करीब 3,000 उत्पीड़न की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 66 लोगों की हत्या हुई और अनेक मंदिरों में तोड़फोड़ की गई। उन्होंने इन घटनाओं को लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया और कहा कि इन्हें और अधिक सहन नहीं किया जाएगा।
सरकार को दी कड़े आंदोलन की चेतावनी
परिषद के वरिष्ठ नेता सुब्रत चौधरी ने प्रशासन से सवाल किया कि आखिर किस अधिकारी के निर्देश पर यह गिरफ्तारी हुई है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए और दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करे। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि हरिदास चंद्र तरणी दास को तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदाय मिलकर राष्ट्रव्यापी बड़े आंदोलन का आह्वान करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी है चिंता का विषय
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पिछले महीने ही गाइबांधा में भगवान राम की प्रतिमा के कथित अपमान को लेकर स्थिति तनावपूर्ण थी। इस पूरे मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रखी जा रही है। इससे पूर्व 23 जून को भारत ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और धार्मिक प्रतीकों के अपमान की खबरों पर चिंता जताई थी। विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश सरकार से कड़ा रुख अपनाते हुए कट्टरपंथी तत्वों पर नकेल कसने और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया था।
क्या आप इस मुद्दे से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं या हालिया घटनाक्रमों के बारे में और जानकारी चाहते हैं?
यूक्रेन ने रूस पर किया ड्रोन हमला, तेल डिपो में लगी आग; 7 लोगों की जान गई
18 Jul, 2026 04:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मास्को। यूक्रेन द्वारा शनिवार तड़के रूस के विभिन्न क्षेत्रों पर किए गए भीषण ड्रोन हमलों ने भारी तबाही मचाई है। मास्को के दक्षिण-पूर्व में स्थित तांबोव क्षेत्र के कोटोव्स्क शहर में एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स वेयरहाउस को निशाना बनाया गया, जिसमें सात कर्मचारियों की दुखद मृत्यु हो गई और लगभग 24 से 25 लोग घायल हो गए। यह हमला रूस की जानी-मानी ऑनलाइन रिटेल कंपनी के वेयरहाउस पर हुआ, जहाँ नाइट शिफ्ट के दौरान काम कर रहे कर्मचारी इसकी चपेट में आ गए। स्थानीय प्रशासन ने घटना की पुष्टि करते हुए राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं।
हवा में मार गिराए गए दर्जनों ड्रोन
तांबोव के गवर्नर येवगेनी पेर्विशोव के अनुसार, रूसी वायु रक्षा प्रणालियों ने यूक्रेन द्वारा छोड़े गए 28 ड्रोन को अपने लक्ष्य तक पहुँचने से पहले ही मार गिराया। उन्होंने दावा किया कि यदि ये सभी ड्रोन अपने निशाने पर सटीक बैठते, तो नागरिक क्षति और जनहानि का आंकड़ा कहीं अधिक हो सकता था। वर्तमान में कोटोव्स्क स्थित वेयरहाउस में लगी आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति का बारीकी से आकलन कर रही हैं।
तेल डिपो में लगी भीषण आग
एक अन्य घटनाक्रम में, नोगिंस्क शहर स्थित एक तेल डिपो पर हुए ड्रोन हमले के मलबे के कारण वहां भीषण आग लग गई। मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने बताया कि इस घटना में दो लोग घायल हुए हैं। सुरक्षा के लिहाज से पास स्थित एक मैटरनिटी अस्पताल को तुरंत खाली करा लिया गया। यह डिपो पेट्रोल, डीजल और केरोसीन जैसे हल्के पेट्रोलियम उत्पादों के वितरण के लिए महत्वपूर्ण है। यहाँ कुल 24 स्टोरेज टैंक मौजूद हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता लगभग 11,500 घन मीटर है, जिससे आग के प्रसार का खतरा बना हुआ था।
बढ़ता तनाव और सुरक्षा चुनौतियां
रूस के प्रमुख केंद्रों पर हुए ये ड्रोन हमले दोनों देशों के बीच जारी तनाव को और अधिक गंभीर बना रहे हैं। नागरिक प्रतिष्ठानों और ऊर्जा संसाधनों पर हो रहे इन हमलों से रूस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकारी अधिकारियों ने बताया है कि प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। हमले की तीव्रता और उसके बाद के घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह संघर्ष अब ऐसे मोड़ पर है जहाँ बुनियादी ढांचे और आपूर्ति केंद्रों को सीधे तौर पर निशाना बनाया जा रहा है।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
