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क्या ईरान बढ़ाएगा इजराइल से रिश्ते? अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने की अटकलें तेज
25 May, 2026 04:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया की राजनीति में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान जल्द ही ऐतिहासिक 'अब्राहम अकॉर्ड' (Abraham Accords) का हिस्सा बन सकता है। ट्रंप ने इस कूटनीतिक बातचीत में मदद के लिए खाड़ी (Gulf) देशों का आभार जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मिडल ईस्ट के देशों ने अमेरिका का बहुत सहयोग किया है, जिससे इस समझौते को मजबूती मिली है और संभव है कि आने वाले समय में ईरान भी इसमें शामिल हो जाए।
क्या है अब्राहम अकॉर्ड?
अब्राहम अकॉर्ड अमेरिका की मध्यस्थता में तैयार किया गया एक ऐतिहासिक समझौता है।
मुख्य उद्देश्य: इसका मकसद इजरायल और अरब देशों के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी को खत्म कर कूटनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को सामान्य बनाना है।
शुरुआत: साल 2020 में इस समझौते के तहत सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन ने इजरायल के साथ दोस्ती का हाथ मिलाया था। बाद में मोरक्को और सूडान भी इसमें शामिल हुए।
दिलचस्प बात: इस समझौते को बनाने का एक बड़ा मकसद ही यह था कि इजरायल और अरब देश मिलकर क्षेत्र में ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोक सकें। लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति खुद ईरान को इसमें शामिल करने की बात कह रहे हैं।
ईरान का शामिल होना क्यों है बेहद मुश्किल?
मौजूदा हालातों को देखते हुए ईरान का इस समझौते से जुड़ना बहुत पेचीदा और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है:
पुरानी दुश्मनी: साल 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ही ईरान और इजरायल एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन रहे हैं।
फिलिस्तीन का मुद्दा: ईरान हमेशा से इस समझौते का विरोध करता आया है और उसका मानना है कि इजरायल से हाथ मिलाना फिलिस्तीन के लोगों के साथ धोखा है।
ईरान का पुराना रुख: इससे पहले भी जब ट्रंप ने ऐसी संभावना जताई थी, तब ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ कह दिया था कि तेहरान (ईरान) इजरायल को कभी एक देश के रूप में मान्यता नहीं देगा।
दुनिया भर के विशेषज्ञों की नजर
फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान पर ईरान की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या जवाब सामने नहीं आया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप का यह दावा सच साबित होता है, तो यह पश्चिम एशिया की पूरी व्यवस्था और समीकरण को हमेशा के लिए बदल कर रख देगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इस कूटनीतिक हलचल पर टिकी हुई हैं।
गला दबाकर बच्ची की हत्या, फिर शव नाले में फेंका; पत्नी ने बताई दर्दनाक कहानी
25 May, 2026 04:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करनाल। हरियाणा के करनाल शहर के चार चमन इलाके से दिल को झकझोर देने वाली एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहाँ एक कलयुगी पिता ने घरेलू विवाद के चलते अपनी ही 3 महीने की मासूम दुधमुंही बच्ची की बेरहमी से हत्या कर दी। आरोप है कि शराब के नशे में धुत पिता ने पहले बच्ची का गला दबाया और फिर उसे मुगल कनाल के गहरे नाले में फेंक दिया। वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नाले से बच्ची का शव बरामद कर लिया है और आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है।
पति-पत्नी के विवाद के कारण मायके में रह रही थी मां
पुलिस को दी गई शिकायत में मृतक बच्ची की बदहवास मां अनीता ने बताया कि उसका अपने पति सोनू के साथ लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी पारिवारिक कलह और रोज-रोज के झगड़ों से तंग आकर वह पिछले दो महीनों से अपने बच्चों के साथ मायके (पीहर) में रह रही थी। अनीता के दो बच्चे हैं, जिनमें तीन साल का एक बेटा और महज तीन महीने की मासूम बेटी दिव्यांशी शामिल थी, जिसे पिता की क्रूरता ने हमेशा के लिए दुनिया से छीन लिया।
नशे में मायके पहुंचा आरोपी, मां की गोद से मासूम को छीनकर भागा
अनीता के अनुसार, मंगलवार की रात उसका पति सोनू अत्यधिक शराब के नशे में धुत होकर अचानक उसके मायके आ धमका। वहां आते ही उसने अनीता और उसके परिवार के साथ गाली-गलौज और झगड़ा करना शुरू कर दिया। विवाद इतना बढ़ गया कि सोनू ने तैश में आकर अनीता की गोद में सो रही तीन महीने की दिव्यांशी को जबरन छीन लिया। परिवार वाले कुछ समझ पाते, इससे पहले ही वह मासूम को लेकर अंधेरे में घर से बाहर भाग निकला।
लौटकर खुद कबूला गुनाह— "सब्जी मंडी के पीछे नाले में फेंक दिया"
कुछ समय बाद जब सोनू वापस लौटा, तो उसके हाथ खाली थे और बच्ची उसके साथ नहीं थी। जब बदहवास मां और परिजनों ने बच्ची के बारे में कड़ाई से पूछा, तो सोनू ने बिना किसी खौफ के बेहद बेरहमी से कहा कि उसने बच्ची को ठिकाने लगा दिया है और सब्जी मंडी के पीछे स्थित मुख्य नाले में फेंक आया है। यह सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई और उन्होंने तुरंत इस खौफनाक घटना की जानकारी पुलिस को दी।
सर्च ऑपरेशन चलाकर निकाला गया शव, आरोपी पिता सलाखों के पीछे
जघन्य अपराध की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस दलबल के साथ तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस टीम ने स्थानीय गोताखोरों की मदद से मुगल कनाल के नाले में देर रात ही सघन सर्च अभियान चलाया और काफी मशक्कत के बाद मासूम दिव्यांशी के शव को कीचड़ और पानी से बाहर निकाला। थाना प्रभारी रामलाल ने बताया कि पीड़ित मां अनीता की शिकायत के आधार पर आरोपी पति सोनू के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की गहन जांच जारी है।
पेट्रोल-डीजल के बाद पाकिस्तान में आटे का संकट गहराया, लंबी कतारों में लोग
25 May, 2026 03:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद: पाकिस्तान इस समय इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। देश की जनता पर एक तरफ खाने का संकट मंडरा रहा है, तो दूसरी तरफ ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की किल्लत हो गई है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और आंतरिक नीतियों की विफलता के कारण देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
नता पर खाद्य और ईंधन की दोहरी मार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे पाकिस्तान में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की भारी कमी हो गई है। वहीं दूसरी तरफ, देश के भीतर गेहूं की नई फसल उम्मीद के मुताबिक न होने से अब आटे का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
जमाखोरों के खिलाफ मरियम नवाज सख्त
इस बदहाली को देखते हुए पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने जमाखोरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने आदेश दिया है कि:
जिन भी व्यापारियों के पास गेहूं का स्टॉक है, वे दो हफ्ते के भीतर उसका पूरा ब्योरा सरकार को सौंपें।
ऐसा न करने वाले जमाखोरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार को डर है कि इस कमी का फायदा उठाकर आने वाले दिनों में आटे की कीमतें बेलगाम हो सकती हैं।
फसल की कटाई के तुरंत बाद क्यों गहराया संकट?
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह संकट मार्च और अप्रैल के महीनों में गेहूं की नई फसल की कटाई पूरी होने के तुरंत बाद पैदा हुआ है।
पंजाब कृषि विभाग के मुताबिक, इस बार औसतन करीब 33 मन प्रति एकड़ गेहूं का उत्पादन हुआ है।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इस साल गेहूं की कुल पैदावार देश की सालाना जरूरत से 20 फीसदी से भी ज्यादा कम रह सकती है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के तनाव के कारण वैश्विक अनाज बाजार पहले से अस्थिर है, जिससे पाकिस्तान के पास बाहर से अनाज मंगाने के विकल्प भी सीमित हैं।
किसान संगठन का गुस्सा: 'पाकिस्तान किसान इत्तेहाद' के अध्यक्ष खालिद खोखर ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब किसान बेहद कम दाम पर अपनी फसल बेचने को मजबूर थे, तब प्रशासनिक तंत्र सोया हुआ था और अब जब कीमतें बढ़ने लगी हैं, तो छापेमारी की नौटंकी की जा रही है।
इस महासंकट के मुख्य कारण क्या हैं?
पाकिस्तान के इस कृषि संकट के लिए मुख्य रूप से वहां की नीतियां और खराब बुनियादी ढांचा जिम्मेदार हैं:
खेती की बदहाली: देश में आधुनिक सिंचाई व्यवस्था नहीं है, नहरें पुरानी और गाद (मिट्टी) से भरी हैं, और जमीन के पानी (Ground Water) का स्तर लगातार गिर रहा है।
महंगी लागत: खाद, डीजल, बिजली और मजदूरी की बढ़ती लागत के कारण अब किसानों के लिए गेहूं उगाना पूरी तरह से घाटे का सौदा बन चुका है।
नीतियों में अस्थिरता: आटा मिल उद्योग ने सरकार की अस्थिर नीतियों, फाइनेंसिंग में देरी और गोदामों पर बेवजह की छापेमारी को बाजार का भरोसा तोड़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
दोगुना हुआ तेल का बिल, खाली हुआ खजाना
पाकिस्तान की यह मुश्किल सिर्फ रसोई के बजट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते वैश्विक तेल बाजार में आए उछाल ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को खाली करना शुरू कर दिया है।
पाकिस्तान का मासिक तेल आयात बिल जो पहले करीब 30 करोड़ डॉलर हुआ करता था, वह अब बढ़कर 60 से 80 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है।
तेल खरीदने का खर्च लगभग दोगुना हो जाने से देश का खजाना खाली हो रहा है, जिससे आने वाले दिनों में आम जनता की मुश्किलें और बढ़ने की पूरी आशंका है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का बड़ा फैसला: ग्रेडिंग मानकों में सख्ती लागू
25 May, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: दुनिया की मशहूर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने अपने अंडरग्रेजुएट (स्नातक) कोर्सों की ग्रेडिंग व्यवस्था को लेकर एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तय किया है कि साल 2027 से किसी भी क्लास में केवल 20 प्रतिशत छात्रों को ही 'ए' (A) ग्रेड दिया जाएगा। इस कड़े प्रस्ताव के समर्थन में यूनिवर्सिटी के 458 फैकल्टी सदस्यों ने वोट किया, जबकि 201 सदस्यों ने इसका विरोध किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विश्वविद्यालय का मानना है कि लगातार बढ़ते "ग्रेड इन्फ्लेशन" (अंकों की महंगाई या आसानी से ज्यादा नंबर मिलना) के कारण अब ग्रेड्स छात्रों की वास्तविक योग्यता का सही पैमाना नहीं रह गए हैं। यूनिवर्सिटी का तर्क है कि जब क्लास के ज्यादातर बच्चों को 'ए' ग्रेड मिलने लगेगा, तो बेहद असाधारण और प्रतिभाशाली छात्रों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
आंकड़ों में चौंकाने वाला उछाल और आसान ग्रेडिंग की वजह
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो हार्वर्ड में साल 2005 के दौरान लगभग 24 प्रतिशत छात्र 'ए' ग्रेड की श्रेणी में आते थे, लेकिन साल 2025 तक यह संख्या बढ़कर 60 प्रतिशत से भी ज्यादा हो गई। हालात ये हो गए कि पिछले शैक्षणिक सत्र में सबसे ऊंचे जीपीए (GPA) पुरस्कार के लिए 55 छात्र एक साथ बराबरी पर आ गए थे। हार्वर्ड के अलावा येल यूनिवर्सिटी में भी 'ए' और 'ए-माइनस' ग्रेड पाने वाले छात्र 80 प्रतिशत तक पहुंच गए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दो दशकों में विश्वविद्यालयों पर छात्रों को खुश रखने का दबाव बढ़ा है, ताकि कोर्स की रेटिंग अच्छी रहे। प्रोफेसरों में यह डर बैठ गया था कि अगर वे सख्त चेकिंग करेंगे, तो छात्र उनके कोर्स को छोड़ देंगे, जिससे उनके करियर पर असर पड़ सकता था। इसी डर के कारण प्रोफेसर आसान ग्रेडिंग करने लगे थे, जिससे आखिरकार पूरी फैकल्टी ने मिलकर सामूहिक रूप से इस नई नीति को लागू करने का फैसला किया।
मार्केट में कमजोर हुई डिग्री की वैल्यू और एआई का असर
जानकारों के मुताबिक, आसानी से मिलने वाले 'ए' ग्रेड के कारण छात्रों में कुछ नया सीखने की इच्छा कम होने लगती है। जब सबकी मार्कशीट एक जैसी दिखने लगती है, तो कंपनियां और नौकरी देने वाले लोग नंबरों के बजाय छात्र के रसूख, जान-पहचान और इंटर्नशिप जैसी चीजों को ज्यादा तरजीह देने लगते हैं, जिससे जीपीए की वैल्यू कमजोर हो जाती है। इस पूरे मामले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। शिक्षकों का मानना है कि एआई की मदद से कोई भी औसत छात्र अपने काम को एकदम परफेक्ट बनाकर पेश कर सकता है। ऐसे दौर में यूनिवर्सिटी के लिए छात्र की असली सोच, गहराई और वास्तविक क्षमता को परखना बेहद जरूरी हो गया है।
छात्रों का भारी विरोध और पहले भी हो चुके हैं ऐसे प्रयोग
हार्वर्ड प्रशासन के इस फैसले का छात्रों के बीच जबरदस्त विरोध शुरू हो गया है। एक सर्वे के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के करीब 94 प्रतिशत छात्रों ने इस नई नीति के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है। छात्रों का कहना है कि सिर्फ 20 फीसदी बच्चों को ही 'ए' ग्रेड देने की इस सीमा से पढ़ाई का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो जाएगा और छात्र फेल होने या कम ग्रेड मिलने के डर से कठिन विषयों को चुनना बंद कर देंगे। गौरतलब है कि इससे पहले प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी ने भी साल 2000 के दशक में ऐसी ही एक नीति लागू की थी, लेकिन छात्रों और प्रोफेसरों के भारी विरोध के कारण साल 2014 में उसे यह फैसला वापस लेना पड़ा था। इन सब विरोधों के बीच हार्वर्ड प्रशासन ने साफ किया है कि इस नई व्यवस्था को लागू करने के तीन साल बाद इसकी दोबारा समीक्षा की जाएगी।
भारतीय संस्कृति की झलक! रूस के ओकुनेवो को लोग कह रहे “साइबेरिया का मिनी India”
25 May, 2026 11:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को: रूस के साइबेरिया क्षेत्र का एक छोटा सा गांव इन दिनों सोशल मीडिया पर दुनिया भर के लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस इलाके में हाड़ कंपाने वाली कड़ाके की ठंड पड़ती है और तापमान अक्सर माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, लेकिन इसके बावजूद यहाँ का माहौल पूरी तरह भक्तिमय रहता है। बर्फ की सफेद चादर से ढके इस सुदूर इलाके में भगवान शिव और भगवान श्रीकृष्ण के भजनों की गूंज सुनाई देती है। चारों ओर फैली बर्फ, शांत वातावरण और बेहद ठंडी जलवायु के बीच भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं की यह अनूठी मौजूदगी हर किसी को हैरान कर रही है। यही वजह है कि रूस के ओम्स्क क्षेत्र में स्थित इस 'ओकुनेवो' गांव को अब लोग "साइबेरिया का मिनी इंडिया" और "रूस का हिंदू गांव" कहकर बुलाने लगे हैं।
इस्कॉन मंदिर और वैदिक जीवन शैली का प्रभाव
ओकुनेवो गांव में भारतीय सनातन परंपरा की जड़ें काफी गहरी हो चुकी हैं। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण का एक भव्य मंदिर भी स्थापित है, जिसका संबंध इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस यानी 'इस्कॉन' (ISKCON) से बताया जाता है। इस मंदिर में स्थानीय लोगों द्वारा नियमित रूप से 'हरे कृष्ण' महामंत्र का जाप किया जाता है और इसके साथ ही भगवान शिव की पूजा-अर्चना भी पूरे श्रद्धाभाव के साथ की जाती है। इस गांव में रहने वाले रूसी और अन्य स्थानीय लोग रोजमर्रा के जीवन में योग, ध्यान (मेडिटेशन) और वैदिक दर्शन से जुड़ी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। मानसिक और आध्यात्मिक शांति व सुकून की तलाश में दूर-दूर से लोग इस अनोखे गांव में खिंचे चले आते हैं।
भारतीय ट्रैवलर के वीडियो से इंटरनेट पर हुआ वायरल
यह गांव वैसे तो पिछले कुछ समय से आध्यात्मिक केंद्र बना हुआ था, लेकिन हाल ही में एक भारतीय ट्रैवलर द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक खूबसूरत वीडियो के बाद यह इंटरनेट पर रातों-रात तेजी से वायरल हो गया। इस वीडियो में चारों तरफ जमी बर्फ के बीच स्थानीय लोग पूरी तरह भारतीय भक्ति रंग में डूबे नजर आ रहे हैं, जिसे देखकर भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स बेहद खुश और गर्व महसूस कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के बढ़ते प्रभाव का एक बेहतरीन उदाहरण बताया है।
प्राचीन सभ्यता के दावों का सच और आपसी सौहार्द
सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स इस गांव को प्राचीन हिंदू सभ्यता और इतिहास से जोड़कर भी तरह-तरह के दावे देख रहे हैं। हालांकि, विभिन्न रिपोर्ट्स और इतिहासकारों के अनुसार इस बात का कोई ऐतिहासिक या पुरातात्विक प्रमाण नहीं है कि यहाँ प्राचीन काल में कोई हिंदू सभ्यता थी। असल में, पिछले कुछ दशकों में ही यहाँ भारतीय आध्यात्मिक विचारधारा का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। यह गांव केवल हिंदू परंपराओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ अलग-अलग धर्मों और आध्यात्मिक विचारों को मानने वाले लोग भी पूरी श्रद्धा, शांति और आपसी सौहार्द के साथ एक दूसरे के साथ निवास करते हैं।
एफिल टॉवर की हालत पर सवाल, रूस का एयरबेस तबाह; सामने आया विनाश का दृश्य
25 May, 2026 11:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक बेहद अजीब और रहस्यमयी वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने इंटरनेट पर खलबली मचा दी है। इस वीडियो में नजर आने वाला एक शख्स खुद को 'टाइम ट्रैवलर' (समय यात्रा करने वाला) बता रहा है। उसका दावा है कि वह भविष्य यानी साल 2050 से लौटकर आया है और उसने तीसरे विश्व युद्ध के बाद दुनिया में मची भयानक तबाही को अपनी आंखों से देखा है। टिकटॉक अकाउंट से शेयर किए गए इस वीडियो में भविष्य की जो डरावनी तस्वीरें दिखाई गई हैं, उन्हें देखकर लोग हैरान भी हैं और काफी डरे हुए भी हैं। हालांकि, इस अकाउंट पर पहले भी कई रहस्यमयी और एआई से बने वीडियो पोस्ट किए जा चुके हैं, लेकिन इस बार के दावे ने दुनिया भर के लोगों का ध्यान खींचा है। फ्रांस की राजधानी पेरिस के मशहूर एफिल टॉवर से होती है, जिसे वह शख्स साल 2050 का पेरिस बताता है। वीडियो में दिखाया गया एफिल टॉवर पूरी तरह जंग खा चुका है और उसके आसपास की सड़कें एकदम खाली और टूटी-फूट नजर आ रही हैं। वहाँ कोई भी इंसान दिखाई नहीं देता है। इसके बाद वह ऐतिहासिक नोट्रे डेम कैथेड्रल को दिखाता है, जिसकी इमारतों पर जंगली बेलें और घास उगी हुई हैं। वीडियो का माहौल डरावना बनाने के लिए उसमें पीछे एक भयावह संगीत भी जोड़ा गया है। इसके बाद वीडियो रूस के एक सैन्य एयरबेस की तरफ जाता है, जहाँ चारों तरफ गोलियों के निशान वाले और जंग लगे टूटे विमान बिखरे पड़े हैं। शख्स का दावा है कि तीसरे विश्व युद्ध में यह एयरबेस पूरी तरह तबाह हो गया था। वीडियो में एक विशाल जहाज भी दिखाया गया है जो पानी न होने के कारण रेगिस्तान के बीचों-बीच फंसा हुआ है।
एआई का कमाल या हकीकत? सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स के बीच दो गुट बन गए हैं और तीखी बहस छिड़ गई है। अधिकांश लोगों और तकनीकी जानकारों का मानना है कि यह वीडियो असल में कुछ नहीं बल्कि आधुनिक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक और बेहतरीन वीडियो एडिटिंग का एक शानदार नमूना है। उनका कहना है कि यह केवल लोगों का ध्यान खींचने और मनोरंजन के लिए बनाया गया है क्योंकि वीडियो के विजुअल्स पूरी तरह काल्पनिक लगते हैं। इसके बावजूद, लाखों लोग इस वीडियो को देख चुके हैं। कुछ लोग इसे सिर्फ एक मजेदार क्लिप मानकर भूल रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग दुनिया में चल रहे मौजूदा तनाव को देखते हुए भविष्य को लेकर गहरी चिंता भी जता रहे हैं।
ईरान-अमेरिका के बीच बड़ी डील! 60 दिन का युद्धविराम, होर्मुज खुलने से दुनिया को राहत
25 May, 2026 11:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा ऐतिहासिक समझौता होने की खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश 60 दिनों के युद्धविराम (सीजफायर) समझौते के बेहद करीब पहुंच गए हैं। इस प्रस्तावित समझौते के तहत रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से पूरी तरह खोल दिया जाएगा। इस रास्ते को सामान्य बनाने के लिए ईरान वहाँ समुद्र में बिछाई गई अपनी बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए राजी हो सकता है। इसके बदले में अमेरिका भी ईरान को बड़ी राहत देते हुए उसके बंदरगाहों पर लगी रोक में ढील देगा और कुछ कड़े प्रतिबंधों को हटाकर ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में खुलकर तेल बेचने की मंजूरी दे सकता है।
परमाणु कार्यक्रम और इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष पर बनी सहमति
इस गुप्त समझौते के मसौदे में परमाणु हथियारों को लेकर भी एक बड़ा वादा शामिल है। इसके तहत ईरान यह लिखित भरोसा देगा कि वह कभी भी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा। साथ ही, वह अपने यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) कार्यक्रम को सीमित करने और पहले से तैयार अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को नष्ट करने या हटाने पर भी बातचीत आगे बढ़ाएगा। इस बड़े समझौते का एक हिस्सा इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच चल रहे हिंसक संघर्ष को पूरी तरह खत्म करना भी है। हालांकि, इसमें एक शर्त यह भी जोड़ी गई है कि यदि इस शांति समझौते के बाद भी हिजबुल्लाह की तरफ से कोई हमला होता है, तो इजराइल को आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार होगा।
ईरान का रुख और नेतन्याहू को लगा बड़ा झटका
इस संभावित समझौते के बीच ईरान के भीतर से एक अलग सुर भी देखने को मिल रहा है। मीडिया में आई खबरों के अनुसार, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने आसिम मुनीर से हुई एक मुलाकात में दोटूक कहा है कि अमेरिका इस पूरी बातचीत में ईमानदारी नहीं दिखा रहा है और ईरान अपने अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार ने ईरान के साथ चल रही इस बातचीत से इजराइल की भूमिका को काफी हद तक सीमित (दूर) कर दिया है। अमेरिका के इस अप्रत्याशित कदम से इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका लगा है, क्योंकि वे इस बातचीत में सीधे तौर पर शामिल होना चाहते थे।
दिल्ली में क्वाड देशों का जमावड़ा: भारत की मेजबानी में अहम विदेश मंत्रियों की बैठक
25 May, 2026 11:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/ऑस्ट्रेलिया : भारत की मेजबानी में मंगलवार को होने वाली 'क्वाड' (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग आज भारत आ रही हैं। भारत इस समय क्वाड समूह की अध्यक्षता कर रहा है और इसी के तहत इस बेहद अहम बैठक का आयोजन किया जा रहा है। क्वाड देशों के इस रणनीतिक मंच में भारत के साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना है। इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी भारत पहुंच चुके हैं। यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि माना जा रहा है कि यह इस साल भारत में होने वाले क्वाड शिखर सम्मेलन के बड़े एजेंडे को तय करने में मुख्य भूमिका निभाएगी।
क्वाड साझेदारी पर ऑस्ट्रेलिया का बड़ा बयान
भारत दौरे पर रवाना होने से पहले ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने क्वाड समूह की अहमियत पर जोर दिया। ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच क्वाड देशों की यह साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है। ये चारों देश मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र को एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य देने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि चारों देश समुद्री सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) की सप्लाई चेन, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (बुनियादी ढांचा विकास) और आपदा राहत जैसे बेहद जरूरी और साझा हितों के मुद्दों पर मिलकर जमीन पर ठोस परिणाम दे रहे हैं।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी होगी
इस दौरे के दौरान ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग क्वाड बैठक में शामिल होने के साथ-साथ भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ '17वें ऑस्ट्रेलिया-भारत विदेश मंत्रियों के फ्रेमवर्क डायलॉग' में भी हिस्सा लेंगी। पेनी वोंग का मानना है कि बदलते वैश्विक समीकरणों को देखते हुए भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच की यह साझेदारी अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और महत्वपूर्ण हो चुकी है। एक व्यापक रणनीतिक साझेदार के रूप में दोनों देश मिलकर व्यापार, निवेश, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा परिवर्तन, आधुनिक टेक्नोलॉजी, शिक्षा और कौशल विकास जैसे कई बड़े क्षेत्रों में अपने सहयोग को लगातार नया विस्तार दे रहे हैं। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच के मजबूत सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध इस दोस्ती को और अधिक मजबूती प्रदान करते हैं।
घर के बाथरूम में मिला शव, मुंह में कपड़ा ठूंसे होने से हत्या की आशंका
25 May, 2026 10:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोनीपत। सोनीपत शहर से सटे गांव जटवाड़ा में रविवार रात उस समय सनसनी फैल गई, जब एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला का शव उनके घर के बाथरूम से बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ। मृतका के हाथ-पैर चुन्नी से बंधे हुए थे और चिल्लाने से रोकने के लिए मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था। घटनास्थल के हालात को देखते हुए पुलिस इसे लूट के इरादे से की गई क्रूर हत्या मानकर चल रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस के साथ ही फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
12 साल से अकेली रह रही थीं संतोष, पड़ोसियों को हुआ शक
मृतका की पहचान जटवाड़ा स्थित राजकीय स्कूल के सामने वाली गली की रहने वाली संतोष (65) के रूप में हुई है। उनके पति का करीब 12 वर्ष पहले ही निधन हो चुका था, जिसके बाद से वह घर में अकेली ही रहती थीं। उन्होंने अपने परिवार की एक बेटी को गोद लिया था, जिसकी शादी हो चुकी है। रविवार को दिनभर जब संतोष के घर में कोई हलचल दिखाई नहीं दी, तो पड़ोसियों को किसी अनहोनी का शक हुआ। लोग जब उनका हालचाल जानने घर पहुंचे, तो मुख्य दरवाजा खुला हुआ था।
बाथरूम में रोंगटे खड़े करने वाला मंजर, शरीर से गहने गायब
पड़ोसी जब घर के अंदर दाखिल हुए तो बाथरूम में संतोष का शव देखकर उनके होश उड़ गए। मृतका के गले पर भी गहरे निशान पाए गए हैं, जिससे गला घोंटकर हत्या किए जाने का अंदेशा है। इसके साथ ही, ग्रामीणों ने बताया कि संतोष रोजाना जो सोने-चांदी के गहने पहना करती थीं, वे उनके शरीर पर मौजूद नहीं थे। इससे साफ अंदाजा लगाया जा रहा है कि बदमाशों ने लूटपाट का विरोध करने पर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस और FSL टीम ने संभाला मोर्चा, साक्ष्य जुटाए
वारदात की सूचना मिलते ही डीसीपी वेस्ट कुशलपाल सिंह, डीसीपी क्राइम नरेंद्र कादियान और सिविल लाइन थाना प्रभारी रविंद्र सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तुरंत पूरे घर को सील कर फॉरेंसिक (FSL) टीम को बुलाया, जिसने घटनास्थल से उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट्स) और अन्य महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए। पुलिस इस बात का भी पता लगा रही है कि अलमारी या लॉकर से और क्या-क्या कीमती सामान गायब हुआ है।
CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों और समय की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी। फिलहाल पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। आरोपियों सुराग लगाने के लिए गांव और आसपास के रास्तों पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, साथ ही पड़ोसियों और रिश्तेदारों से भी पूछताछ जारी है।
मिडिल ईस्ट संघर्ष और तेल बाजार में उथल-पुथल से बढ़ी टेंशन
24 May, 2026 02:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। वल्र्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद दुनिया के 27 देशों ने इमरजेंसी फंड की मांग की है। इन देशों ने ऐसे सिस्टम लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है, जिनके जरिए जरूरत पडऩे पर वे जल्दी से विश्व बैंक से फंड ले सकें। एक आंतरिक दस्तावेज में बताया गया है कि इन देशों के नाम और मांगी गई रकम की जानकारी नहीं दी गई है। वल्र्ड बैंक ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।
रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी से मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढऩे के बाद तीन देशों ने नए क्राइसिस सपोर्ट सिस्टम को मंजूरी दे दी है, जबकि बाकी देश अभी इसकी प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। ईरान युद्ध का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से कई देशों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऊर्जा बाजार में अस्थिरता की वजह से सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई है। इसके अलावा खाद की सप्लाई भी रुक रही है, जिससे खेती पर असर पड़ रहा है।
केन्या और इराक ने मदद मांगने की पुष्टि की
केन्या और इराक ने पुष्टि की है कि उन्होंने विश्व बैंक से जल्दी आर्थिक मदद मांगी है। केन्या में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि इराक को तेल से होने वाली कमाई में भारी गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये 27 देश उन 101 देशों में शामिल हैं जिन्हें पहले से तैयार क्राइसिस फंड सिस्टम का फायदा मिल सकता है। इनमें से 54 देश रैपिड रिस्पॉन्स योजना का हिस्सा हैं। इस योजना के तहत कोई भी देश अपने मंजूर लेकिन अभी तक इस्तेमाल न किए गए फंड का 10 प्रतिशत तुरंत इस्तेमाल कर सकता है।
बांग्लादेश के दो पोर्ट अमेरिका करेगा इस्तेमाल
24 May, 2026 01:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश ने अमेरिका को दो महत्वपूर्ण बंदरगाहों के इस्तेमाल की इजाजत देने का फैसला किया है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच सीक्रेट जानकारी शेयर करने को लेकर भी समझौता हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और बांग्लादेश के बीच कुल तीन बड़े समझौते हुए हैं। इन समझौतों के बाद बंगाल के खाड़ी रीजन में अमेरिका की मौजूदगी और प्रभाव काफी बढ़ सकता है।
अमेरिका को बांग्लादेश के चिटगांव और मतारबाड़ी बंदरगाहों तक पहुंच मिलेगी। इन बंदरगाहों का इस्तेमाल अमेरिकी नौसेना और सैन्य जहाज कर सकेंगे। इससे अमेरिका को हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य और रणनीतिक ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी। चिटगांव बंदरगाह भारत के अंडमान-निकोबार क्षेत्र से सिर्फ 1100 किमी दूर है।
कोयला खदान में ब्लास्ट, 90 लोगों की मौत
24 May, 2026 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन के शांक्सी प्रांत में एक कोयला खदान में हुए भीषण विस्फोट में कम से कम 90 लोगों की मौत हो गई। यह हादसा चीन में पिछले एक दशक का सबसे बड़ा कोयला खदान हादसा माना जा रहा है। विस्फोट शांक्सी प्रांत के किनयुआन काउंटी में हुआ। यह इलाका बीजिंग से करीब 520 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। हादसे से पहले खदान में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का अलर्ट जारी किया गया था। इसके कुछ समय बाद जोरदार विस्फोट हुआ। जिस समय धमाका हुआ, उस वक्त खदान के अंदर 247 मजदूर काम कर रहे थे। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हादसे के बाद बचाव टीमों को लापता लोगों को खोजने के लिए हर संभव कोशिश करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हादसे के जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
चीन के राष्ट्रपति ने दुख जताया, कोयला खदान धमाके में 90 लोग मरे
24 May, 2026 11:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: चीन के शांक्सी प्रांत से एक बेहद दर्दनाक और बड़ा हादसा सामने आया है। यहां एक कोयला खदान में हुए भीषण गैस धमाके के कारण कम से कम 90 मजदूरों की मौत हो गई है। यह दिल दहला देने वाला हादसा शुक्रवार, 22 मई 2026 की देर रात किनयुआन काउंटी में स्थित 'लिउशेन्यू कोयला खदान' में हुआ। इसे साल 2009 के बाद से अब तक का चीन का सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक माइनिंग (खनन) हादसा माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, जिस वक्त खदान के भीतर यह जोरदार धमाका हुआ, उस समय वहां कुल 247 मजदूर काम कर रहे थे।
इस भीषण हादसे के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आपातकालीन निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बचाव कार्य में पूरी ताकत झोंकने और घायलों के इलाज में कोई कसर न छोड़ने की बात कही है। राष्ट्रपति ने हादसे के असली कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और साफ किया है कि सुरक्षा नियमों में लापरवाही बरतने वाले दोषियों के खिलाफ कानून के तहत सबसे सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी इस पूरे मामले की सही रिपोर्टिंग करने और जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया है।
755 बचावकर्मियों की टीमें राहत कार्य में जुटीं
स्थानीय इमरजेंसी मैनेजमेंट अथॉरिटी ने बताया कि हादसे की खबर मिलते ही बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन (राहत और बचाव कार्य) शुरू कर दिया गया था। कॉर्पोरेट डेटाबेस 'किचाचा' के अनुसार, यह खदान 'शांक्सी टोंगझोउ ग्रुप' की एक इकाई द्वारा चलाई जा रही थी। सरकारी मीडिया शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा में चूक को देखते हुए खदान कंपनी के बड़े अधिकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। किनयुआन इमरजेंसी मैनेजमेंट ब्यूरो ने जानकारी दी है कि शांक्सी प्रांत से कुल 755 एक्सपर्ट्स की 7 अलग-अलग रेस्क्यू और मेडिकल टीमें मौके पर तैनात की गई हैं, जो मलबे में फंसे लोगों को निकालने और घायलों को संभालने में जुटी हैं।
चीन का सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र है शांक्सी
भौगोलिक और औद्योगिक रूप से शांक्सी प्रांत को चीन का सबसे बड़ा कोयला खनन का गढ़ माना जाता है, जहां से पूरे देश के लिए ऊर्जा की आपूर्ति होती है। चीन की खदानों में सुरक्षा मानकों को लेकर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, साल 2000 के बाद सरकार ने नियमों को काफी कड़ा किया था, जिससे हादसों की संख्या में थोड़ी कमी जरूर आई थी, लेकिन इस ताज़ा घटना ने एक बार फिर दावों की पोल खोल दी है।
17 साल पुराना इतिहास: इससे पहले साल 2009 में चीन के हेइलोंगजियांग प्रांत की एक कोयला खदान में ऐसा ही बड़ा गैस धमाका हुआ था, जिसमें 108 मजदूरों की जान चली गई थी और 133 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। 2026 में हुआ यह ताजा हादसा दिखाता है कि आधुनिक तकनीक के बावजूद आज भी खदानों के भीतर मजदूरों की जिंदगी दांव पर लगी हुई है।
Tulsi Gabbard के इस्तीफे के बाद प्रशासन में बदलाव पर उठे नए सवाल
23 May, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने इस फैसले के पीछे पारिवारिक वजहों का हवाला देते हुए बताया कि उनके पति अब्राहम विलियम्स एक गंभीर और दुर्लभ बोन कैंसर (हड्डी के कैंसर) से पीड़ित हैं, जिसके चलते आगामी महीनों में उन्हें अपने परिवार के साथ रहने की सख्त आवश्यकता है। तुलसी गबार्ड का यह इस्तीफा आगामी 30 जून से प्रभावी माना जाएगा, जिसकी पुष्टि स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कर दी है। ट्रंप ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में उनका अपने पति के साथ रहने का फैसला बिल्कुल सही है। फिलहाल प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर आरोन लुकास इस पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालेंगे।
व्हाइट हाउस से बढ़ती दूरियां और मतभेदों की रही चर्चा
तुलसी गबार्ड का सेवाकाल लगातार कई तरह के विवादों और प्रशासनिक खींचतान से घिरा रहा। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं थीं कि वे राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी राष्ट्रीय सुरक्षा समूह से लगातार अलग-थलग होती जा रही थीं। मीडिया कयासों में तो यहां तक दावा किया गया कि व्हाइट हाउस उनके कामकाज के तौर-तरीकों से संतुष्ट नहीं था और उन पर पद छोड़ने का अंदरूनी दबाव बनाया जा रहा था। हालांकि, गबार्ड के दफ्तर और व्हाइट हाउस के प्रवक्ता डेविस इंगले ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा है कि उन्हें जबरन नहीं हटाया गया है। इसके अलावा, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी राष्ट्रपति और गबार्ड के बीच सार्वजनिक रूप से मतभेद उजागर हुए थे।
अहम सुरक्षा बैठकों से दूरी और प्रशासनिक नीतियां
अपने कार्यकाल के दौरान तुलसी गबार्ड को वेनेजुएला और ईरान जैसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठकों से अलग रखा गया था। गबार्ड हमेशा से ही दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में अमेरिकी सेना के हस्तक्षेप की मुखर विरोधी रही हैं। पूर्व में डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद रहीं गबार्ड बाद में रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हुई थीं, जिसके बाद जनवरी 2025 में ट्रंप ने खुफिया एजेंसियों के व्यापक अनुभव न होने के बावजूद उन्हें इस बेहद अहम पद की कमान सौंपी थी। यह भी सामने आया है कि जॉन एफ कैनेडी की हत्या, कोरोना महामारी की उत्पत्ति और वोटिंग मशीनों से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के लिए गबार्ड द्वारा बनाई गई टास्क फोर्स से भी ट्रंप प्रशासन नाखुश था।
ट्रंप कैबिनेट से अलग होने वाली चौथी महिला मंत्री
तुलसी गबार्ड का जाना वर्तमान अमेरिकी प्रशासन के लिए एक और बड़ा फेरबदल है, क्योंकि वे इस साल ट्रंप कैबिनेट से हटने वाली चौथी वरिष्ठ महिला अधिकारी बन गई हैं। उनसे पहले मार्च के महीने में होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम को उनके पद से मुक्त किया गया था, जबकि अप्रैल में अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को भी अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। वहीं, लेबर सेक्रेटरी लोरी चावेज-डीरेमर ने कुछ निजी विवादों और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के चलते अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था।
विवादित शख्स के जनाजे में जुटी भीड़, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
23 May, 2026 05:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। वर्ष 2019 में हुए भीषण पुलवामा आत्मघाती हमले के मुख्य साजिशकर्ता हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। वारदात के बाद उसके शव को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दफनाया गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और स्थानीय खुफिया सूत्रों के अनुसार, इस दुर्दांत आतंकी के अंतिम संस्कार में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के आला अधिकारियों समेत कई खूंखार आतंकी सरगनाओं ने शिरकत की।
जनाजे में पहुंचे सलाहुद्दीन और आईएसआई के शीर्ष अधिकारी
'डॉक्टर' और 'अर्जुमंद गुलजार डार' जैसे कोड नामों से पहचाने जाने वाले हमजा बुरहान को मौत के अगले ही दिन इस्लामाबाद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज के मुताबिक, उसके जनाजे में हिज्बुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन और अल-बद्र के चीफ बख्त जमीन खान जैसे कुख्यात चेहरे मौजूद थे। इसके अलावा पाकिस्तानी खुफिया तंत्र (ISI) के अधिकारियों और प्रतिबंधित संगठनों के लड़ाकों की मौजूदगी ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि उसे सीमा पार से कितना बड़ा संरक्षण मिला हुआ था।
अत्याधुनिक हथियारों के साये में हुआ अंतिम संस्कार
आतंकी के अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा के बेहद कड़े और अभूतपूर्व इंतजाम देखे गए। जनाजे के सामने आए दृश्यों में कई नकाबपोश और हथियारबंद कैडर एके-47 तथा अन्य आधुनिक स्वचालित हथियारों से लैस होकर मार्च करते नजर आए। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिबंधित आतंकी गुटों के लड़ाके अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन करते हुए सुरक्षा घेरा बनाए हुए थे।
कॉलेज प्रिंसिपल बनकर युवाओं को धकेल रहा था आतंक के रास्ते पर
भारत के गृह मंत्रालय द्वारा साल 2022 में आधिकारिक तौर पर आतंकी घोषित किया गया बुरहान पिछले कुछ समय से पीओके में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। वह मुजफ्फराबाद के एक प्राइवेट कॉलेज में प्रिंसिपल और शिक्षक के तौर पर काम कर रहा था, जिसकी आड़ में वह कश्मीरी युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें अल-बद्र संगठन में भर्ती करने और टेरर फंडिंग जुटाने का काम करता था। गुरुवार सुबह जब वह कॉलेज से बाहर निकला, तभी घात लगाए हमलावरों ने उसके सिर में कई गोलियां मार दीं।गौरतलब है कि मई 2025 में भारत द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' (जो अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए 26 नागरिकों के नरसंहार के जवाब में शुरू किया गया था) के दौरान मारे गए आतंकियों को भी पाकिस्तानी सेना ने राजकीय सम्मान के साथ झंडे में लपेटकर दफनाया था, जिससे पाकिस्तान का आतंकी कनेक्शन एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब हुआ है।
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