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रोहतक नगर निगम को मिली बम धमाके की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
17 Jul, 2026 12:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गोरखपुर: स्थानीय नगर निगम प्रशासन में उस वक्त हड़कंप और अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब विभाग को एक अज्ञात प्रेषक द्वारा बम से उड़ाने की खौफनाक धमकी दी गई। यह धमकी भरा संदेश एक इलेक्ट्रॉनिक मेल (ईमेल) के जरिए भेजा गया है, जिसने प्रशासनिक हलकों में सनसनी फैला दी है। इस अप्रत्याशित घटना के सामने आते ही नगर निगम परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक के बीच डर और चिंता का माहौल बना हुआ है।
संयुक्त आयुक्त की आधिकारिक ईमेल आईडी पर आई धमकी
मिली जानकारी के अनुसार, यह धमकी भरा ईमेल सीधे नगर निगम के संयुक्त आयुक्त मनजीत कुमार की आधिकारिक ईमेल आईडी पर प्राप्त हुआ है। संयुक्त आयुक्त ने जैसे ही अपने इनबॉक्स में आए इस संदेश को खोला और पढ़ा, उनके होश उड़ गए। ईमेल में नगर निगम भवन को बम से उड़ाने की स्पष्ट बात कही गई थी, जिसके बाद इसकी गंभीरता को देखते हुए तुरंत शीर्ष अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया गया।
धमकी भरा संदेश मिलते ही अलर्ट मोड पर आया प्रशासन
संवेदनशील और सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण प्रशासनिक अमला तुरंत बेहद सक्रिय हो गया। संयुक्त आयुक्त से सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस के आला अधिकारी, बम निरोधक दस्ता और अन्य सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आ गईं। एहतियात के तौर पर नगर निगम कार्यालय और उसके आसपास के पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है तथा हर आने-जाने वाले पर पैनी नजर रखी जा रही है।
आरोपी की तलाश में साइबर सेल और पुलिस टीमों का संयुक्त अभियान
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस प्रकार की घिनौनी और डराने वाली हरकत के पीछे किसका हाथ है और इसे किस इरादे से अंजाम दिया गया है। पुलिस विभाग की विशेषज्ञ साइबर सेल टीम ने मामले को अपने हाथ में ले लिया है। तकनीकी टीमें ईमेल के आईपी एड्रेस (IP Address) और उसके डिजिटल सोर्स को गहराई से ट्रैक करने में जुटी हैं, ताकि इस फर्जी या असली धमकी को भेजने वाले शातिर आरोपी की सही लोकेशन का पता लगाकर उसे जल्द गिरफ्तार किया जा सके।
निगम परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सख्त और चौकसी बढ़ाई गई
इस घटना के बाद से नगर निगम परिसर की सुरक्षा को चाक-चौबंद कर दिया गया है। मुख्य द्वारों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और बिना सघन जांच के किसी भी बाहरी व्यक्ति या संदेहास्पद सामान को अंदर ले जाने की सख्त मनाही है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और पुलिस की मुस्तैदी के कारण किसी भी प्रकार के पैनिक की आवश्यकता नहीं है, लेकिन जांच पूरी होने तक पूरी सावधानी बरती जाएगी।
शाह पर Gen-Z का तंज, बयान ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
17 Jul, 2026 12:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। नेपाल की राजधानी काठमांडू इस समय भीषण जनाक्रोश और उग्र विरोध प्रदर्शनों की आग में सुलग रही है। महज 25 वर्षीय युवक गणेश नेपाली के दर्दनाक आत्मदाह की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह त्रासदी अब काठमांडू के मेयर बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) की सरकार के खिलाफ युवाओं के पनप रहे गुस्से का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी है। विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस और अन्य दलों ने बालेन शाह पर चौतरफा हमला बोलते हुए उन्हें अपने 'काले चश्मे' उतारकर जनता की जमीनी हकीकत देखने की तीखी नसीहत दी है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस जेन-जी (युवा वोटर्स) के प्रचंड समर्थन के दम पर बालेन्द्र शाह सत्ता के शिखर पर पहुंचे थे, आज वही युवा उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आया है, जो उनकी सरकार के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा है।
लोन की बाइक, पुलिस की सख्ती और आत्मदाह
मूल रूप से नेपाल के बेहद पिछड़े मुगु क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाला गणेश काठमांडू में एक राइड-शेयरिंग ऐप के जरिए बाइक चलाकर अपने परिवार का पेट पालता था। घटना के दिन पासपोर्ट विभाग के बाहर कथित रूप से रास्ता ब्लॉक करने के आरोप में ट्रैफिक पुलिस ने उसकी मोटरसाइकिल पर क्लैंप लगा दिया था। पुलिस की इस एकतरफा कार्रवाई और उसके बाद अधिकारियों के साथ हुई तीखी बहस से आहत होकर गणेश इस कदर टूट गया कि उसने अपनी ही बाइक से पेट्रोल निकाला, खुद पर छिड़का और सरेराह आग लगा ली। करीब 60 प्रतिशत से अधिक झुलसने के बाद अस्पताल में एक दिन तक जिंदगी और मौत की जंग लड़ते हुए उसने दम तोड़ दिया।
पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, दलित समुदाय से आने वाले गणेश ने यह बाइक लोन पर ली थी और उस पर किश्तें चुकाने का भारी मानसिक दबाव था। पुलिस द्वारा रोजी-रोटी का इकलौता साधन जब्त कर लिए जाने के बाद उसे परिवार पालने का कोई रास्ता नहीं सूझा और वह गहरे डिप्रेशन में चला गया। गणेश और उसका भाई जल्द ही खाड़ी देशों या फिर जापान या दक्षिण कोरिया जाकर मेहनत-मजदूरी कर पैसा कमाने का सपना देख रहे थे।
संसद स्थगित, बैकफुट पर आई सरकार ने की घोषणाएं
गणेश की इस दर्दनाक मौत ने काठमांडू में पहले से सुलग रहे नागरिक असंतोष की आग में घी डालने का काम किया है। चौतरफा घिरी सरकार के बचाव में गृह मंत्री सुधन गुरुंग ने विपक्ष पर इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति चमकाने का आरोप लगाया, लेकिन जनता के भारी गुस्से के आगे आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा। डैमेज कंट्रोल के तहत सरकार ने मृत गणेश की गर्भवती पत्नी 'एकमाया परियार' को सरकारी नौकरी देने, उनकी दो वर्षीय मासूम बेटी की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने और तत्काल नागरिकता प्रमाण पत्र जारी करने का आधिकारिक एलान किया है। इसके अलावा, मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए डीआईजी स्तर के अधिकारी की अगुवाई में 5 सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की गई है और सरकार गणेश को 'शहीद' का दर्जा देने पर भी विचार कर रही है। भारी हंगामे के चलते चल रहे संसद सत्र को भी अनिश्चितकाल के लिए टालना पड़ा है।
क्यों बालेन शाह से नाराज है जनता और युवा वर्ग?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गणेश नेपाली की मौत तो महज एक तात्कालिक चिंगारी थी, असल में बालेन्द्र शाह सरकार के कामकाज के तरीकों को लेकर जनता में लंबे समय से गुस्सा उबल रहा था। इसके मुख्य कारणों में निम्नलिखित मुद्दे शामिल हैं:
अलोकतांत्रिक फैसले: ट्रेड यूनियनों और छात्र संगठनों को पूरी तरह भंग करना।
अध्यादेश राज: लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसद को दरकिनार कर सीधे अध्यादेशों के जरिए मनमाने कानून पास कराना।
अतिक्रमण हटाओ अभियान: काठमांडू में बिना किसी ठोस पुनर्वास नीति के बड़े पैमाने पर अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाना, जिससे हजारों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार रातों-रात बेघर हो गए।
सोमवार को जब पशुपतिनाथ मंदिर के पवित्र घाट पर नम आंखों से गणेश नेपाली का अंतिम संस्कार किया गया, तो वहां उनके बिलखते माता-पिता के साथ बड़ी संख्या में वे परिवार भी एकजुट थे जो हालिया अतिक्रमण हटाओ अभियान की भेंट चढ़कर पाई-पाई को मोहताज हो चुके हैं। यह भीड़ साफ इशारा कर रही है कि बालेन शाह के लिए आने वाली राजनीतिक राह अब कतई आसान नहीं होने वाली है।
दुनिया का सबसे अनोखा नियम, स्वालबार्ड में जन्म और मृत्यु दोनों पर रोक
17 Jul, 2026 10:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओस्लो। आर्कटिक महासागर के सुदूर बर्फीले इलाके में स्थित नॉर्वे का स्वालबार्ड द्वीप अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ दुनिया के सबसे अनोखे और अजीबोगरीब कानूनों के लिए जाना जाता है। बर्फ से ढके पहाड़ों और चमचमाते ग्लेशियरों से घिरे इस द्वीप को 'जन्नत' तो कहा जाता है, लेकिन यहाँ की रहस्यमयी जीवनशैली और कड़े नियम इसे पूरी दुनिया में सबसे अलग बना देते हैं। यहाँ धरातल पर न तो किसी को मरने की इजाजत है और न ही किसी बच्चे को जन्म देने की।
बिना वीजा एंट्री, लेकिन नियम हैं बेहद सख्त
स्वालबार्ड की एक बड़ी विशेषता यह है कि दुनिया के कई देशों के नागरिक यहाँ बिना किसी वीजा के आ सकते हैं। हालांकि, द्वीप पर कदम रखते ही यहाँ के सख्त स्थानीय नियमों का पालन करना हर किसी के लिए अनिवार्य हो जाता है। यही कारण है कि यह द्वीप न केवल पर्यटकों को आकर्षित करता है, बल्कि अपने अद्भुत सामाजिक नियमों के कारण हमेशा वैश्विक चर्चा में बना रहता है।
मरने पर क्यों है पाबंदी? जानिए इसके पीछे का विज्ञान
स्वालबार्ड में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर शव को वहीं दफनाने की सख्त मनाही है। इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प वैज्ञानिक वजह है। यहाँ साल भर इतनी भीषण ठंड पड़ती है कि जमीन हमेशा बर्फ से जमी रहती है (जिसे पेरमाफ्रॉस्ट कहा जाता है)। इस अत्यधिक ठंड के कारण दफनाए गए शव सदियों तक प्राकृतिक रूप से गल या सड़ नहीं पाते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि शवों के नष्ट न होने से सदियों पुराने खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया भी सुरक्षित रह सकते हैं, जो भविष्य में किसी बड़ी महामारी का रूप लेकर इंसानी आबादी के लिए खतरा बन सकते हैं।
इसी खतरे को देखते हुए नियम बनाया गया है कि यदि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार होता है या उसकी हालत नाजुक होती है, तो उसे तुरंत हवाई मार्ग से नॉर्वे की मुख्य भूमि (मेनलैंड) पर भेज दिया जाता है, ताकि उसका इलाज और अंतिम संस्कार वहीं हो सके।
गर्भवती महिलाओं को छोड़ना पड़ता है द्वीप
सिर्फ मौत ही नहीं, बल्कि स्वालबार्ड की धरती पर बच्चे को जन्म देना भी संभव नहीं है। सुदूर क्षेत्र में होने के कारण यहाँ कोई आधुनिक मैटरनिटी (प्रसूति) या डिलीवरी अस्पताल मौजूद नहीं है। आपातकालीन स्थितियों में जच्चा-बच्चा की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, जैसे ही किसी गर्भवती महिला की डिलीवरी का समय नजदीक आता है, उसे प्रसव से कुछ हफ्ते पहले ही अनिवार्य रूप से नॉर्वे के मेनलैंड भेज दिया जाता है, जहां सुरक्षित अस्पतालों में बच्चे का जन्म होता है।
इंसानों से ज्यादा पोलर बियर और बंदूकों का साया
इस द्वीप की एक और हैरान करने वाली हकीकत यह है कि यहाँ इंसानों की तुलना में ध्रुवीय भालुओं (पोलर बियर) की आबादी कहीं ज्यादा है। खूंखार भालुओं के खतरे के कारण यहाँ के नागरिक जब भी घरों या शहर की सीमा से बाहर निकलते हैं, तो आत्मरक्षा के लिए अपने साथ राइफल या बंदूक जैसा हथियार जरूर रखते हैं। बिना सुरक्षा या हथियार के द्वीप के कई इलाकों में जाना बेहद खतरनाक और जानलेवा माना जाता है।
शराब की खरीदी पर भी है कोटा सिस्टम
कठिन भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण यहाँ कानून-व्यवस्था बनाए रखने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शराब की बिक्री पर भी सख्त नियंत्रण लागू है। यहाँ रहने वाले हर नागरिक और पर्यटक के लिए शराब खरीदने की एक तय सीमा (कोटा) निर्धारित की गई है, जिससे अधिक मात्रा में शराब की लत और उससे होने वाले हादसों को रोका जा सके।
रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, हाइड्रोजन ट्रेन में सफर की तारीख का इंतजार
17 Jul, 2026 09:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गोहाना। भारतीय रेलवे के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश की पहली पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन ट्रेन का नियमित परिचालन आगामी शनिवार यानी 18 जुलाई से आम यात्रियों के लिए शुरू कर दिया जाएगा। जींद-सोनीपत रेलखंड पर दौड़ने वाली इस अत्याधुनिक ट्रेन में आम लोग बेहद किफायती दरों पर सफर कर सकेंगे। आज शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जींद से इसे हरी झंडी दिखाए जाने के बाद इसके पहले सफर की शुरुआत हो रही है। उद्घाटन यात्रा के दौरान इस ट्रेन में वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ विभिन्न स्टेशनों से चुने गए करीब एक हजार स्कूली विद्यार्थी भी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनेंगे, जिसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
सस्ता सफर और नियमित संचालन का समय
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस ग्रीन-ट्रेन का किराया बेहद सामान्य पैसेंजर ट्रेनों के बराबर रखा गया है। जींद से लेकर सोनीपत तक के कुल 89 किलोमीटर के सफर के लिए अधिकतम किराया मात्र 25 रुपये तय किया गया है, जबकि बीच के छोटे स्टेशनों के लिए न्यूनतम किराया 5 रुपये से शुरू होगा। नियमित संचालन के दौरान यह ट्रेन प्रतिदिन सुबह 7:40 बजे जींद से प्रस्थान करेगी और विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए सुबह 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी। इसके बाद वापसी दिशा में यह सुबह 10:30 बजे सोनीपत से रवाना होकर दोपहर 1:00 बजे जींद वापस लौटेगी। ट्रेन की अधिकतम गति सीमा 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है।
इन 14 स्टेशनों पर होगा ट्रेन का ठहराव
दैनिक यात्रियों और नौकरीपेशा वर्ग को सीधा लाभ पहुंचाने के लिए इस ट्रेन के रूट में 14 महत्वपूर्ण स्टेशनों को शामिल किया गया है। जींद जंक्शन से प्रस्थान करने के बाद यह ट्रेन जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, भंभेवा, ईशापुर खेड़ी, बुटाना, खंदराई, गोहाना, रभड़ा, लाठ, मोहाना और बड़वासनी स्टेशनों पर रुकते हुए सोनीपत जंक्शन पहुंचेगी। ट्रेन सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए इसे 74010 और 74009 नंबर आवंटित किए गए हैं। इन सभी स्टेशनों पर ठहराव होने से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को जिला मुख्यालयों तक आने-जाने के लिए एक बेहतरीन और प्रदूषण मुक्त परिवहन का जरिया मिल जाएगा।
ट्रेन के स्वागत में स्टेशन पर विशेष श्रमदान
इस ऐतिहासिक रेल सेवा के शुभारंभ से ठीक एक दिन पहले गोहाना रेलवे जंक्शन पर एक भव्य और विशेष स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। सूबे के सहकारिता, कारागार, निर्वाचन, विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने अपनी धर्मपत्नी डॉ. रीटा शर्मा और सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर रेलवे स्टेशन परिसर में झाड़ू लगाई और श्रमदान किया। कैबिनेट मंत्री ने इस मौके पर कहा कि भारतीय संस्कृति में अतिथि देवो भवः की परंपरा सर्वोपरि है और देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का गोहाना आगमन किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है, इसलिए पूरे जंक्शन को स्वच्छ और सुंदर बनाकर इसका स्वागत किया जा रहा है।
हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश का बड़ा कदम
इस नई तकनीक और इको-फ्रेंडली ट्रेन के संचालन से गोहाना और पूरे हरियाणा को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक नई और विशिष्ट पहचान मिलने जा रही है। डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में देश हरित ऊर्जा और शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इस ऐतिहासिक परियोजना के शुभारंभ के अवसर पर जींद में एक विशेष इको-फ्रेंडली रैली का भी आयोजन किया जा रहा है। स्टेशन पर आयोजित इस वृहद सफाई अभियान में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी दीपक गोयल, सचिव सुंदर शर्मा, मार्केट कमेटी चेयरमैन कृष्ण सैनी सहित कई सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
शादी में सबसे खास मेहमान बना पपी लूना, सर्टिफिकेट पर छोड़ी अपनी छाप
17 Jul, 2026 09:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
क्विटो। आधुनिक दौर में शादियों का रंग-रूप और उनके आयोजन का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब विवाह केवल दो इंसानों का मिलन नहीं, बल्कि पूरे परिवार का एक बड़ा उत्सव बन चुका है, जिसमें अब पालतू जानवर भी घर के सदस्यों की तरह अपनी खास मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। ऐसा ही एक बेहद अनोखा और दिल को छू लेने वाला मामला इक्वाडोर से सामने आया है, जहां एक अनोखी पहल के तहत एक प्रेमी जोड़े ने अपनी पालतू पेकिंगीज नस्ल की पपी 'लूना' को अपनी शादी का आधिकारिक गवाह बनाया।
गुलाबी गाउन में पहुंची अनूठी गवाह
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 38 वर्षीय डायना टुपिजा और 31 वर्षीय एंड्रेस अल्किंगा ने अपनी सिविल मैरिज (कोर्ट मैरिज) के दौरान अपनी लाडली पपी लूना को एक बेहद खास सम्मान दिया। इस खास मौके के लिए लूना को एक बेहद खूबसूरत गुलाबी रंग के ट्यूल गाउन में तैयार किया गया था। शादी के आधिकारिक पंजीकरण के दौरान लूना ने बाकायदा अपने पंजे पर स्याही लगवाकर प्रतीकात्मक विवाह प्रमाणपत्र पर अपना निशान (सिग्नेचर) भी दर्ज किया। हालांकि, इस पंजे के निशान की कोई कानूनी मान्यता नहीं है, लेकिन इस भावुक दंपति के लिए इसका महत्व किसी भी कानूनी दस्तावेज से कहीं बढ़कर है।
बेजुबानों का निस्वार्थ प्रेम और बदलती सोच
समारोह संपन्न होने के बाद दुल्हन डायना टुपिजा ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जीवन के इस सबसे बड़े और खास पड़ाव पर लूना का उनके साथ होना एक अविस्मरणीय अनुभव रहा। वहीं पेशे से प्रोग्रामर दूल्हे एंड्रेस का कहना था कि भले ही पालतू जानवर इंसानों की तरह अपनी बात बोलकर नहीं समझा सकते और न ही कोई सलाह दे सकते हैं, लेकिन उनका प्रेम पूरी तरह निस्वार्थ और सच्चा होता है। लूना उनके परिवार का एक अभिन्न हिस्सा है, इसलिए उसका इस शादी में शामिल होना पूरी तरह से स्वाभाविक था। वहीं दुल्हन की मां लूज लीमा ने भी इस नई सोच का समर्थन करते हुए बताया कि शुरुआत में उन्हें यह विचार थोड़ा अजीब जरूर लगा था, लेकिन बाद में उन्होंने खुद बड़े चाव से लूना के लिए यह खास पोशाक तैयार की।
भावनात्मक रिश्तों को मिला सरकारी समर्थन
इस अनोखे दंपति ने बताया कि उनके घर में लूना के अलावा दो और कुत्ते और एक बिल्ली भी हैं। वे सभी को इस शादी का गवाह बनाना चाहते थे, लेकिन व्यावहारिक दिक्कतों के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाया, इसलिए लूना ने अकेले ही पूरे पालतू परिवार का वहां प्रतिनिधित्व किया। इस बीच, इक्वाडोर की सिविल रजिस्ट्री के निदेशक ने भी इस अनोखे कदम की सराहना करते हुए इसका पूरा समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में पारिवारिक संरचनाएं बदल रही हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए रजिस्ट्री विभाग ने प्रतीकात्मक विवाह प्रमाणपत्रों में पालतू जानवरों के पंजों के निशान के लिए एक विशेष स्थान सुरक्षित रखा है। यह कदम भले ही कानूनी रूप से बेअसर हो, लेकिन इंसानों और बेजुबानों के बीच के अटूट भावनात्मक रिश्ते को सम्मान देने का एक बेहतरीन जरिया है।
ईरान मुद्दे पर आमने-सामने अमेरिका और चीन, वैश्विक शांति पर मंडराया खतरा
17 Jul, 2026 08:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक महाशक्तियों अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता को बेहद तेज कर दिया है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों, समुद्री सुरक्षा को लेकर गहराती चिंताओं और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते खतरे ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात भले ही गंभीर हैं, लेकिन इसे 'तीसरे विश्व युद्ध' की शुरुआत कहना फिलहाल जल्दबाजी होगा।
महाशक्तियों की टकराती रणनीतियां और सैन्य उपस्थिति
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका लंबे समय से खाड़ी क्षेत्र में अपनी मजबूत सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है। उसका साफ कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और अपने सहयोगी देशों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। दूसरी ओर, चीन पश्चिम एशिया से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है और इस क्षेत्र में स्थिरता को अपनी ऊर्जा सुरक्षा तथा आर्थिक हितों के लिए बेहद अहम मानता है। यही वजह है कि दोनों महाशक्तियां इस गंभीर संकट पर बिल्कुल अलग-अलग रणनीतियां अपनाती नजर आ रही हैं।
कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर चीन की बढ़ती भूमिका
जानकारों के मुताबिक, चीन अब पश्चिम एशिया में अपनी आर्थिक और कूटनीतिक भूमिका को लगातार बढ़ा रहा है। ईरान के साथ उसका दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग समझौता और ऊर्जा संबंध इस क्षेत्र में उसकी रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करते हैं। इसके विपरीत, अमेरिका के सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और अन्य सहयोगी देशों के साथ दशकों पुराने सुरक्षा गठबंधन हैं। इस कारण कई मामलों में दोनों महाशक्तियों के हित एक-दूसरे से सीधे टकराते दिखाई देते हैं, हालांकि दोनों ही देश खुली सैन्य भिड़ंत से बचने की कोशिश करते रहे हैं।
प्रत्यक्ष युद्ध के बजाय कूटनीतिक और आर्थिक टकराव
रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का स्पष्ट कहना है कि वर्तमान स्थिति को अमेरिका और चीन के बीच प्रत्यक्ष युद्ध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। दोनों देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक-दूसरे से बहुत गहराई से जुड़े हुए हैं, जिसके कारण किसी भी बड़े युद्ध की कीमत दोनों को भारी आर्थिक नुकसान के रूप में चुकानी पड़ सकती है। इसलिए प्रत्यक्ष जंग के बजाय कूटनीतिक दबाव, आर्थिक प्रतिबंध, सैन्य तैनाती और क्षेत्रीय सहयोगियों के माध्यम से एक-दूसरे पर प्रभाव बढ़ाने की रणनीति अधिक संभावित मानी जा रही है।
विश्व युद्ध की संभावना सीमित, मगर वैश्विक बाजारों पर पड़ेगा गहरा असर
भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में जारी संकट निश्चित रूप से अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए एक गंभीर चुनौती है, लेकिन इसके विश्व युद्ध में बदलने की संभावना बेहद सीमित है। व्यापक वैश्विक टकराव का खतरा तभी बढ़ सकता है जब यह क्षेत्रीय संघर्ष पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाए और कई देशों की सेनाएं इसमें सीधे तौर पर शामिल हो जाएं। फिलहाल दुनिया की निगाहें कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर होना तय है।
ईरान में अस्पताल के पास हमला, बच्चों समेत 211 मरीज सुरक्षित; अमेरिका पर भड़का तेहरान
16 Jul, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी सैन्य संघर्ष अब एक बेहद विनाशकारी और अनियंत्रित दौर में पहुंच गया है। ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के बीच सीधे सैन्य टकराव की आशंकाओं ने वैश्विक स्तर पर तनाव चरम पर पहुंचा दिया है। ईरान ने गुरुवार को सीधे तौर पर अमेरिका पर एक बेहद गंभीर आरोप मढ़ते हुए दावा किया है कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत में स्थित एक बड़े कैंसर अस्पताल के अति-संवेदनशील इलाके को निशाना बनाकर हवाई हमले किए हैं। इस भीषण बमबारी और उसके बाद उठे धुएं के गुबार के चलते अस्पताल प्रशासन को तुरंत पूरे परिसर को खाली कराना पड़ा, जिससे वहां भर्ती सैकड़ों गंभीर मरीजों की जान पर बन आई।
ईरान ने हमलों को बताया 'बर्बर', अमेरिका को दी बुनियादी ढांचा तबाह करने की चेतावनी
ईरानी सरकार और सेना ने इस हवाई हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ एक बेहद क्रूर और बर्बर कृत्य करार दिया है। तेहरान ने इस घटना के तुरंत बाद वाशिंगटन को सीधे शब्दों में एक बेहद खतरनाक और खुली सैन्य चेतावनी जारी की है। ईरान के सैन्य प्रवक्ता ने कहा, "अगर अमेरिकी सेना या उसके सहयोगियों ने ईरान के किसी भी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे (जैसे तेल रिफाइनरियों, पावर ग्रिडों या बांधों) को नुकसान पहुंचाने की जरा भी हिमाकत की, तो इसके विनाशकारी परिणाम पूरे मध्य पूर्व को भुगतने होंगे। जवाब में ईरान इस पूरे क्षेत्र के हर एक अमेरिकी और उसके मित्र देशों के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से मलबे के ढेर में तब्दील कर देगा।"
कैंसर अस्पताल के पास मिसाइल गिरने से मची चीख-पुकार, दहशत में भागे मरीज
दहशत का माहौल: चश्मदीदों और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम ईरान के इस घनी आबादी वाले इलाके में अचानक हुए मिसाइल हमलों से आसमान दहल उठा। जिस वक्त यह हमला हुआ, अस्पताल में सैकड़ों मरीज कीमोथेरेपी और अन्य जटिल इलाजों से गुजर रहे थे।
इमरजेंसी इवेक्युएशन: हालांकि मिसाइलें सीधे अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग पर न गिरकर उसके ठीक पास स्थित एक परिसर पर गिरीं, लेकिन धमाके की तीव्रता इतनी तेज थी कि अस्पताल की खिड़कियां और वेंटिलेटर सिस्टम पूरी तरह टूट गए। धुएं और आग की लपटों को देखते हुए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ ने आनन-फानन में स्ट्रेचरों और एम्बुलेंसों की मदद से मरीजों को बाहर निकालना शुरू किया।
मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध की आहट, तेल आपूर्ति ठप होने का बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की यह ताजा और बेहद आक्रामक चेतावनी केवल एक कोरी धमकी नहीं है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच यह टकराव और आगे बढ़ता है, तो ईरान खाड़ी क्षेत्र में स्थित प्रमुख तेल मार्गों (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) को पूरी तरह ब्लॉक कर सकता है। इसके अलावा, ईरान के पास मौजूद लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें और घातक ड्रोन बेड़े पूरे क्षेत्र में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकानों को आसानी से निशाना बना सकते हैं।
वैश्विक बिरादरी चिंतित, संयुक्त राष्ट्र से तुरंत दखल देने की अपील
वैश्विक बाजारों में हलचल: इस तनावपूर्ण घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अचानक भारी उछाल आने की आशंका पैदा हो गई है।
शांति की अपील: यूरोपीय संघ (EU) और संयुक्त राष्ट्र (UN) के शीर्ष राजनयिकों ने दोनों पक्षों से तुरंत संयम बरतने की अपील की है। राजनयिकों का कहना है कि एक नागरिक अस्पताल के नजदीक इस तरह का सैन्य हमला अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है। यदि इस विवाद को कूटनीतिक बातचीत के जरिए तुरंत नहीं रोका गया, तो यह संघर्ष तीसरे विश्व युद्ध जैसी भीषण विभीषिका का रूप ले सकता है।
रोबोट क्रांति में चीन की बड़ी छलांग, भारत में ऑटोमेशन की रफ्तार अब भी धीमी
16 Jul, 2026 05:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। वर्तमान वैज्ञानिक युग में स्वचालन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने पूरी दुनिया के कामकाजी तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। कारखाने, माल गोदाम, चिकित्सालय, होटल और कृषि फार्म जैसी जगहों पर अब मानव श्रम की जगह तेजी से आधुनिक मशीनें लेती जा रही हैं। पूर्व में जहां इन स्वचालित प्रणालियों का उपयोग केवल मोबाइल और वाहन निर्माता कंपनियों तक ही सीमित माना जाता था, वहीं अब पार्सल पहुंचाने, साफ-सफाई करने, होटल प्रबंधन संभालने और घरेलू कामकाज निपटाने में भी इनका धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर औद्योगिक रोबोटिक्स की मांग में अभूतपूर्व उछाल
वैश्विक रोबोटिक्स उद्योग की नवीनतम रिपोर्ट के आंकड़े गवाही देते हैं कि दुनिया भर के विनिर्माण क्षेत्र में स्वचालन को अपनाने की होड़ मची हुई है। बीते एक वर्ष के भीतर वैश्विक स्तर पर विभिन्न उद्योगों में रिकॉर्ड 5.55 लाख नए औद्योगिक रोबोट स्थापित किए गए हैं। यह प्रवृत्ति साफ दर्शाती है कि उत्पादन की गुणवत्ता और गति को सुधारने के लिए पूरी दुनिया की कंपनियां अब पूरी तरह से मशीनीकृत कार्यप्रणाली पर निर्भर होती जा रही हैं।
स्वचालन की दौड़ में महाशक्ति बनकर उभरा पड़ोसी देश चीन
औद्योगिक स्वचालन की इस वैश्विक दौड़ में चीन अन्य विकसित देशों को कोसों पीछे छोड़ते हुए शीर्ष पर काबिज हो गया है। चीनी उद्योगों ने अपनी उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए अकेले ही लगभग 2.95 लाख नए रोबोट अपने कार्यस्थलों पर तैनात किए हैं। चीन में इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के तीव्र विस्तार, बढ़ती हुई मानव मजदूरी दरों और सरकार की ओर से मिलने वाली विशेष रियायतों ने इस तकनीकी बदलाव की रफ्तार को अत्यधिक तेज कर दिया है।
भारतीय बाजार में रोबोटिक्स तकनीक के विस्तार की वर्तमान रफ्तार
महाशक्ति चीन की तुलना में भारत में रोबोटिक्स तकनीक को अपनाने की गति अभी काफी धीमी बनी हुई है और पिछले वर्ष देश के विभिन्न उद्योगों में केवल 9,100 नए रोबोट लगाए गए हैं। इस संख्या के साथ भारत वैश्विक स्तर पर रोबोट तैनाती के मामले में छठे स्थान पर बना हुआ है। वर्तमान में भारत के भीतर रोबोटिक तकनीक का मुख्य उपयोग केवल वाहन निर्माता उद्योग तक ही सीमित दिखाई दे रहा है, जबकि अन्य क्षेत्रों में इसका विस्तार होना अभी शेष है।
भविष्य के कामकाजी स्वरूप और मानव कौशल विकास की नई चुनौतियां
कार्यस्थलों पर मशीनों के इस बढ़ते हस्तक्षेप ने भविष्य के कामकाजी ढांचे और मानव रोजगार के स्वरूप को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे रोबोट इंसानी श्रम का स्थान लेंगे, वैसे-वैसे पारंपरिक नौकरियों में बदलाव आएगा और युवाओं को अधिक तकनीकी रूप से कुशल होना पड़ेगा। आने वाले समय में केवल वही कार्यबल प्रासंगिक रह पाएगा जो इन आधुनिक मशीनों को संचालित करने और उनके साथ मिलकर काम करने में सक्षम होगा।
फारूक अब्दुल्ला को NOC, कोर्ट ने पासपोर्ट नवीनीकरण की दी अनुमति
16 Jul, 2026 05:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के कद्दावर नेता डॉ. फारूक अब्दुल्ला को श्रीनगर की अतिरिक्त सत्र अदालत से एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने उनके पासपोर्ट नवीनीकरण के रास्ते में आ रही कानूनी अड़चनों को दूर करते हुए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी करने की मंजूरी दे दी है। हालांकि, अदालत ने इस राहत के साथ कुछ सख्त शर्तें भी लागू की हैं, जिससे उनकी आगामी विदेश यात्राओं पर अदालती निगरानी बनी रहेगी।
अदालत ने एनओसी के साथ लगाई विदेश यात्रा पर सख्त शर्त
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फारूक अहमद बट ने अपने आदेश में यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि केवल पासपोर्ट का नवीनीकरण हो जाने से डॉ. फारूक अब्दुल्ला को विदेश यात्रा करने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता। न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया है कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री देश से बाहर यात्रा करना चाहते हैं, तो उन्हें हर बार भारत से रवाना होने से पहले संबंधित सक्षम अदालत के समक्ष आवेदन करना होगा और वहां से बकायदा पूर्व अनुमति लेनी होगी।
जेकेसीए क्रिकेट फंड गबन मामले से जुड़ा है पूरा विवाद
यह पूरा मामला जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) के फंड में हुए कथित गबन से जुड़ा हुआ है, जिसकी जांच वर्तमान में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जा रही है। इस आपराधिक मामले में डॉ. फारूक अब्दुल्ला आरोपी हैं और इसी लंबित मुकदमे के कारण क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (श्रीनगर) ने उनके पासपोर्ट को दोबारा रिन्यू करने के आवेदन पर रोक लगा रखी थी, जिसके खिलाफ उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
पासपोर्ट होल्ड होने से आ रही व्यावहारिक दिक्कतों का हवाला
डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने अपनी याचिका में अदालत को बताया था कि उनके खिलाफ चल रहे मामले की वजह से पासपोर्ट नवीनीकरण की प्रक्रिया रुकी हुई है, जिससे उन्हें लगातार कई व्यावहारिक और अनावश्यक परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई थी कि एक नागरिक के तौर पर उन्हें वैध यात्रा दस्तावेज रखने का अधिकार दिया जाए, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने पासपोर्ट कार्यालय को एनओसी जारी करने का रास्ता साफ कर दिया।
भूकंप से कांपा न्यूजीलैंड, 5.9 की तीव्रता के बाद सुनामी की चेतावनी
16 Jul, 2026 04:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वेलिंगटन: न्यूजीलैंड के दक्षिणी द्वीप (साउथ आइलैंड) के पश्चिमी तटीय इलाके में गुरुवार को रिक्टर स्केल पर 5.9 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। इस तेज कंपन के तुरंत बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया और नागरिक सुरक्षा अधिकारियों ने तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी की चेतावनी (सुनामी अलर्ट) जारी कर दी है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से बिना कोई वक्त गंवाए तुरंत सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर चले जाने की बेहद जरूरी अपील की है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की रिपोर्ट के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र ते अनाउ शहर से लगभग 42 किलोमीटर उत्तर-उत्तर पश्चिम में जमीन के अंदर करीब 76.4 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। यह भूकंपीय घटना भारतीय समयानुसार दोपहर के वक्त दर्ज की गई।
आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी ने जारी किया रेड अलर्ट, लोगों से पलायन की अपील
भूकंप के तुरंत बाद हरकत में आई न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी ने तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए तत्काल निर्देश जारी किए हैं। एजेंसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि प्रभावित क्षेत्रों के लोग किसी भी तरह की देरी किए बिना सुनामी निकासी जोन को खाली कर दें। नागरिकों से कहा गया है कि वे नजदीकी पहाड़ियों, ऊंचे स्थानों या समुद्र तट से काफी दूर अंदरूनी मैदानी इलाकों की तरफ प्रस्थान कर जाएं। गनीमत यह रही कि भूकंप के तुरंत बाद किसी बड़े जान-माल के नुकसान या किसी नागरिक के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।
नागरिक सुरक्षा विभाग की चेतावनी— समुद्र में उठ सकती हैं जानलेवा लहरें
असामान्य समुद्री हलचल: नागरिक सुरक्षा विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक आपातकालीन पोस्ट साझा करते हुए बताया कि फियोर्डलैंड के नजदीक रात करीब 9:14 बजे (स्थानीय समय) आए इस 5.9 तीव्रता के झटके के बाद न्यूजीलैंड के समुद्री तटों पर बेहद तेज और असामान्य लहरें उठ सकती हैं, जिससे अचानक जलस्तर बढ़ जाएगा।
खतरे में आ सकती है जान: विभाग ने पानी के खेल प्रेमियों और समुद्र पर निर्भर लोगों को आगाह किया है कि अचानक उठने वाली ये विशाल लहरें लोगों को गहरे पानी में खींच सकती हैं। तटीय क्षेत्रों में मौजूद तैराकों, सर्फिंग करने वालों, मछुआरों और नाविकों के लिए इस समय पानी में रहना जानलेवा साबित हो सकता है।
तटों से दूरी बनाने के निर्देश: प्रशासन ने सभी लोगों से तत्काल पानी से बाहर आने, बंदरगाहों, नाव खड़े करने वाले जेटी (Docks), नदियों के मुहानों और समुद्री किनारों से तत्काल दूर हटने को कहा है।
नाविकों के लिए विशेष गाइडलाइन और स्थानीय प्रशासन की सलाह
विभाग द्वारा जारी की गई आधिकारिक सलाह में विशेष रूप से नाविकों और जहाजों पर रहने वाले लोगों को अपनी बोट या जहाजों को सुरक्षित बांधकर तुरंत किनारे पर सुरक्षित स्थानों पर चले जाने को कहा गया है। सुरक्षा बलों के अगले निर्देश तक किसी को भी वापस अपनी नावों पर जाने की इजाजत नहीं होगी। हालांकि, राहत की बात यह है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए समुद्र के पानी के रिहायशी इलाकों में घुसने (जमीनी बाढ़) की आशंका नहीं है। अन्य क्षेत्रों के लोगों को तब तक सुरक्षित स्थानों पर भागने की आवश्यकता नहीं है, जब तक कि उनके स्थानीय सुरक्षा अधिकारी सीधे तौर पर ऐसा करने का निर्देश न दें।
भारत में भी डोली धरती, गुजरात के कच्छ में महसूस किए गए तीन झटके
गांधीनगर: दूसरी तरफ, भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात के सीमावर्ती कच्छ जिले में भी गुरुवार की दोपहर भूकंप के झटके महसूस किए गए। यहाँ कुछ ही मिनटों के अंतराल पर धरती तीन बार हिली, जिससे लोगों में घबराहट फैल गई और वे घरों से बाहर निकल आए। रिक्टर पैमाने पर इन झटकों की तीव्रता क्रमशः 3.6 और 3.2 दर्ज की गई है। राहत की बात यह रही कि झटके हल्के होने के कारण जिले में कहीं से भी किसी प्रकार के नुकसान या किसी व्यक्ति के घायल होने की कोई अप्रिय खबर नहीं मिली है।
गांधीनगर भूकंप संस्थान ने साझा किए झटकों के आंकड़े
गुजरात के भूकंप विज्ञान अनुसंधान संस्थान (ISR) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भूकंपीय हलचल का पूरा विवरण इस प्रकार है:
पहला झटका: दोपहर ठीक 2:20 बजे पहला कंपन महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 3.6 मापी गई। इसका केंद्र कच्छ के खावड़ा क्षेत्र से लगभग 32 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पूर्व में जमीन से 22.6 किलोमीटर नीचे स्थित था।
दूसरा झटका: पहले झटके के ठीक तीन मिनट बाद, यानी दोपहर 2:23 बजे दूसरा झटका आया, जिसकी तीव्रता 3.2 दर्ज की गई। इसका केंद्र प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल धोलावीरा से 32 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की दिशा में जमीन के भीतर 12.9 किलोमीटर की गहराई पर था। इसी केंद्र के आसपास वैज्ञानिकों ने एक और बहुत ही हल्का कंपन भी रिकॉर्ड किया है। स्थानीय प्रशासन ने सीमावर्ती इलाकों में नजर बनाए रखी है।
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर, अमेरिकी सेना ने सैन्य ठिकानों को किया टारगेट
16 Jul, 2026 04:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां दोनों ओर से ताबड़तोड़ हमलों का सिलसिला शुरू हो चुका है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने गुरुवार को आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ हवाई हमलों की दूसरी लहर (सेकंड वेव) के तहत एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया है। इस दौरान अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने लगभग 90 मिनट तक ईरानी ठिकानों पर भारी बमबारी की। सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन हमलों का सीधा निशाना ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को ध्वस्त करना है, जिनका इस्तेमाल वह 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को डराने और धमकाने के लिए करता आ रहा है।
ग्रेटर टुंब आइलैंड में अमेरिका के सटीक और विनाशकारी हमले
सैन्य रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बुधवार सुबह ठीक 6 बजे (ईस्टर्न टाइम) ईरान के खिलाफ इस आक्रामक सैन्य अभियान का पहला दौर शुरू किया था। पूरे डेढ़ घंटे तक चले इस हवाई हमले में अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'ग्रेटर टुंब आइलैंड' को निशाना बनाया। इस दौरान वहां मौजूद ईरान के तटीय रक्षा तंत्र (कोस्टल डिफेंस सिस्टम), क्रूज मिसाइलों के बड़े भंडारों (स्टोरेज) और उनके लॉन्चिंग पैड्स पर सटीक हमले कर उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया गया।
बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का भीषण पलटवार
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स' (IRGC) ने भी बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर जोरदार जवाबी कार्रवाई की है। आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स ने दावा किया है कि उन्होंने जॉर्डन के 'अल-अजराक' में स्थित अमेरिकी एयरबेस पर भीषण हमला किया। इस हमले में अमेरिकी सेना के उन शेल्टरों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया, जहां अत्याधुनिक एफ-15, एफ-16 और एफ-35 फाइटर जेट्स के साथ-साथ खतरनाक एमक्यू-9 (MQ-9) रणनीतिक ड्रोन तैनात थे। ईरान का आरोप है कि उसके खिलाफ होने वाले अधिकांश अमेरिकी हवाई हमले इसी जॉर्डन वाले बेस से संचालित किए जा रहे थे।
ईरान की जॉर्डन के नागरिकों से अपील और बहरीन में 5वें फ्लीट पर हमला
जॉर्डन में अमेरिकी बेस को निशाना बनाने के बाद आईआरजीसी ने वहां के स्थानीय नागरिकों से एक भावुक और भड़काऊ अपील की है। ईरान ने जॉर्डन की जनता से कहा है कि वे अपने देश से अमेरिकी ताकतों की मौजूदगी को पूरी तरह खत्म करें और अपनी धरती का इस्तेमाल इस्लामी देशों व फिलिस्तीनी नागरिकों के खिलाफ न होने दें। वहीं दूसरी तरफ, ईरानी नौसेना ने बहरीन में तैनात अमेरिका के कुख्यात 'पांचवें फ्लीट' (5th Fleet) के मुख्यालय पर भी धावा बोला। इस हमले में अमेरिकी नौसेना के एनएसआई मैनेजमेंट सेंटर, सैन्य उपकरणों के बड़े वेयरहाउस, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और ईंधन भंडारों (फ्यूल स्टोरेज) को मुख्य रूप से निशाना बनाया गया। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा हिंद महासागर में नौसैनिक बेड़े तैनात करने और होर्मुज में की गई समुद्री नाकाबंदी के विरोध में की गई है।
तनाव के बीच ईरान ने अमेरिकी नागरिक को किया रिहा, डोनाल्ड ट्रम्प ने की तारीफ
इस भीषण युद्ध जैसे हालात और भारी गोलाबारी के बीच एक चौंकाने वाली कूटनीतिक राहत भी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर जानकारी देते हुए बताया कि ईरान ने एक अमेरिकी नागरिक को सुरक्षित रूप से अपने देश से जाने की अनुमति दे दी है। इस नागरिक को दिसंबर 2024 में जो बाइडेन के प्रशासन के दौरान ईरान में गलत तरीके से हिरासत में लिया गया था। ट्रम्प ने लिखा कि वह अमेरिकी नागरिक अब ईरान की सीमा से बाहर है और पूरी तरह स्वस्थ है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने युद्ध के इस माहौल के बीच ईरान द्वारा दिखाई गई इस 'सद्भावना' और अच्छी मंशा वाले कदम की खुलकर सराहना की है।
ईरानी बंदरगाहों पर फिर शिकंजा, दो जहाजों को बदलना पड़ा रास्ता
16 Jul, 2026 02:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहां ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना ने अपनी नौसैनिक और हवाई कार्रवाई को बेहद तेज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस सैन्य अभियान की आधिकारिक जानकारी साझा की है। कमांड के मुताबिक, ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) दोबारा लागू किए जाने के बाद पिछले 17 घंटों के भीतर अमेरिकी सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई की है। इस दौरान नाकाबंदी को तोड़ने का प्रयास कर रहे दो अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों (कमर्शियल शिप्स) को अमेरिकी नौसेना ने रोककर उनका रास्ता बदलने पर मजबूर कर दिया। अमेरिकी सेना इस पूरे समुद्री क्षेत्र की स्थिति पर लगातार पैनी नजर रख रही है और अंतरराष्ट्रीय नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के लिए पूरी तरह तैनात है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए ईरान पर ताबड़तोड़ हवाई हमले
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने साफ किया है कि ईरान के खिलाफ की जा रही इस कड़ी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नौवहन की सुरक्षा और स्वतंत्रता को बहाल रखना है। इसी रणनीति के तहत अमेरिका ने ईरानी सेना के ठिकानों पर एक के बाद एक कई हवाई हमले शुरू किए हैं। इन हमलों का सीधा मकसद ईरानी सेना की उन सैन्य क्षमताओं और बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से ध्वस्त करना है, जिनका इस्तेमाल वह इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए करती आ रही है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति (कच्चे तेल की आवाजाही) के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है, और इसके लिए खतरा पैदा करने वाली ईरान की क्षमता को कुचलना बेहद जरूरी हो गया है।
शाम 4 बजे से लागू हुई सख्त समुद्री नाकाबंदी
अमेरिकी सेना की ओर से यह हवाई और नौसैनिक हमले ठीक उसी दिन शुरू किए गए, जब अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों और उसके तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले सभी प्रकार के जहाजों के खिलाफ एक सख्त नाकाबंदी की घोषणा की। यह प्रतिबंधात्मक नाकाबंदी अमेरिकी समयानुसार शाम 4 बजे से पूरी तरह प्रभावी हो चुकी है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब बिना अमेरिकी अनुमति के किसी भी कमर्शियल या अन्य जहाज को ईरानी जल क्षेत्र में आने या वहां से बाहर जाने की इजाजत नहीं होगी। इस नाकाबंदी को लागू कराने के लिए अमेरिकी युद्धपोत खाड़ी क्षेत्र में मुस्तैदी से गश्त कर रहे हैं।
ईरानी हमलों का करारा जवाब, 12 नागरिक क्रू मेंबर हुए हताहत
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर ने इस कड़े सैन्य कदम को जायज ठहराते हुए कहा कि यह हालिया कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों और पड़ोसी खाड़ी देशों पर ईरान द्वारा किए गए सिलसिलेवार हमलों का एक करारा जवाब है। कमांडर ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि पिछले महज सात दिनों के भीतर, ईरानी सेना ने इस समुद्री इलाके में जान-बूझकर आम नागरिकों को निशाना बनाया और सात कमर्शियल जहाजों पर बर्बर हमले किए। इन हमलों के कारण विभिन्न जहाजों के करीब 12 नागरिक क्रू मेंबर या तो मारे गए हैं, या लापता हैं और कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके अतिरिक्त, ईरानी सेना ने पड़ोसी खाड़ी देशों की संप्रभुता को चुनौती देते हुए उनकी ओर दर्जनों घातक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन भी दागे हैं, जिसके बाद अमेरिका को यह आक्रामक रुख अपनाना पड़ा।
परिवार पर हत्या का आरोप साबित, समन केस में कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
16 Jul, 2026 01:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोम: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने देश में महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर एक बेहद सख्त संदेश जारी किया है। पीएम मेलोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इटली में ऐसे लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है जो किसी भी सांस्कृतिक या धार्मिक परंपरा की आड़ में एक महिला की स्वतंत्रता, उसके आत्मसम्मान और उसके वजूद को ठेस पहुँचाने या नकारने का प्रयास करते हैं। मेलोनी का यह तीखा बयान पाकिस्तानी मूल की एक युवती की ऑनर किलिंग (सम्मान के नाम पर हत्या) के मामले में इटली की सर्वोच्च अपीलीय अदालत द्वारा सुनाए गए अंतिम फैसले का स्वागत करते हुए आया है।
समन अब्बास हत्याकांड पर अंतिम फैसला, पीएम ने जताई संवेदना
प्रधानमंत्री मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि समन अब्बास की नृशंस हत्या के मामले में अदालत के अंतिम फैसले के साथ ही एक बेहद दर्दनाक कानूनी लड़ाई का अंत हो गया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी मूल की समन को उसके ही माता-पिता और कुछ रिश्तेदारों ने सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया क्योंकि उसने अपनी मर्जी के खिलाफ जबरन की जा रही शादी का विरोध किया था और अपने भविष्य के फैसले खुद लेने के अधिकार की मांग की थी। मेलोनी ने कहा कि हालांकि कोई भी कानूनी फैसला उस मासूम की जिंदगी वापस नहीं ला सकता, लेकिन यह संतोषजनक है कि इस जघन्य अपराध के दोषियों को उनके किए की पूरी सजा मिली है। उन्होंने समन के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से उसकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
महिला अधिकारों पर कोई समझौता नहीं, पीछे नहीं हटेगा इटली
कड़ा रुख अख्तियार करते हुए पीएम मेलोनी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि महिलाओं की आजादी, सम्मान और जिंदगी से जुड़े सिद्धांत ऐसे मूल्य हैं जिनसे किसी भी परिस्थिति में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने साफ किया कि इटली इन अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा अडिग रहेगा। बता दें कि यह पूरा मामला साल 2021 का है, जब समन अब्बास अपने ही परिवार की रूढ़िवादी सोच और ऑनर किलिंग का शिकार हो गई थी। उसके परिवार ने पाकिस्तान में उसकी इच्छा के विरुद्ध शादी तय की थी, जिसका उसने पुरजोर विरोध किया था।
शेल्टर होम से माता-पिता के पास लौटी और फिर हो गई लापता
घटना के समय समन नाबालिग थी। जब उसने शादी करने से इनकार कर दिया, तो अपने परिवार के खौफ से बचने के लिए उसने इटली के समाज कल्याण विभाग से सुरक्षा की गुहार लगाई। नवंबर 2020 में प्रशासन ने उसे एक सुरक्षित शेल्टर होम भेज दिया था, जहाँ से उसने अपने माता-पिता के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। हालांकि, 11 अप्रैल 2021 को वह दोबारा अपने परिवार के पास लौट आई, जिसके बाद अप्रैल के मध्य से ही वह अचानक लापता हो गई। तफ्तीश के दौरान पुलिस को घर के पास के सीसीटीवी फुटेज मिले, जिसमें परिवार के पांच लोग फावड़े, लोहे की रॉड और बाल्टी लेकर बाहर जाते और करीब ढाई घंटे बाद वापस लौटते दिखाई दिए थे।
डेंटल रिकॉर्ड से हुई शव की पहचान, सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी उम्रकैद
समन के लापता होने के एक साल से भी अधिक समय बाद, नवंबर 2022 में इटली के नोवेल्लारा शहर में उसके घर के नजदीकी इलाके से इंसानी शरीर के कुछ अवशेष बरामद हुए। फॉरेंसिक टीम ने डेंटल रिकॉर्ड्स (दांतों के नमूनों) के मिलान के आधार पर पुष्टि की कि यह शव समन अब्बास का ही था। इसके बाद कानूनी कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ी और अब इटली की सर्वोच्च अपीलीय अदालत 'सुप्रीम कोर्ट ऑफ कैसेशन' ने इस पूरे मामले में समन के माता-पिता और उसके चचेरे भाइयों को हत्या का मुख्य दोषी करार देते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा है।
स्टाफ की कमी और तकनीकी खामियों पर अलर्ट, बिजली व्यवस्था को लेकर इंजीनियरों ने जताई चिंता
16 Jul, 2026 01:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़:पंजाब में आने वाले दिनों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो सकता है, जिससे आम जनता और उद्योगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। राज्य में विद्युत आपूर्ति के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाले तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरों ने वर्तमान हालात को लेकर बेहद गंभीर चिंता व्यक्त की है। पंजाब राज्य बिजली इंजीनियर्स एसोसिएशन ने इस विषय को बेहद संवेदनशील मानते हुए सीधे प्रबंधन के शीर्ष स्तर पर अपनी आवाज उठाई है और स्पष्ट शब्दों में आगाह किया है कि यदि बुनियादी ढाँचे और तकनीकी तंत्र में सुधार नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश की विद्युत व्यवस्था किसी भी समय पूरी तरह ठप हो सकती है।
एसोसिएशन ने पावरकॉम के शीर्ष प्रबंधन को पत्र लिखकर दर्ज कराई अपनी गंभीर आपत्तियां
इंजीनियर्स एसोसिएशन की ओर से इस गहराते संकट को लेकर पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (पावरकॉम) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) को एक बेहद महत्वपूर्ण और आधिकारिक पत्र भेजा गया है। इस पत्र के माध्यम से संगठन ने लंबे समय से लंबित पड़ी तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं की एक लंबी फेहरिस्त प्रबंधन के सामने रखी है। इंजीनियरों का कहना है कि वे लगातार विपरीत परिस्थितियों में काम कर रहे हैं और शीर्ष स्तर पर बार-बार ध्यान आकर्षित कराए जाने के बावजूद अब तक इन बुनियादी समस्याओं का कोई ठोस या स्थाई समाधान नहीं निकाला गया है, जिससे तकनीकी अमले में निराशा का माहौल है।
स्टाफ की भारी कमी और बढ़ते कार्यभार से फील्ड स्तर पर चुनौतियां हुईं बेकाबू
इंजीनियरों द्वारा प्रबंधन को भेजे गए पत्र में जिन मुख्य कारणों का उल्लेख किया गया है, उनमें फील्ड स्तर पर कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ की भारी कमी सबसे प्रमुख है। रिक्त पदों को न भरे जाने के कारण मौजूदा अधिकारियों और कर्मचारियों पर काम का बोझ (वर्कलोड) कई गुना बढ़ चुका है। इसके साथ ही, सब-स्टेशनों और वितरण प्रणालियों में लंबे समय से बनी तकनीकी खामियों को दूर न किए जाने के कारण जमीनी स्तर पर रोज नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। कार्यभार के इस अत्यधिक मानसिक और शारीरिक दबाव के चलते फील्ड इंजीनियरों के लिए चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
सुधारात्मक कदम न उठाने पर बिजली संकट गहराने के आसार, बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट
एसोसिएशन ने अपने पत्र के अंत में प्रबंधन को कड़े लहजे में सचेत किया है कि यदि बिजली विभाग और राज्य सरकार ने इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया और जल्द ही कोई प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो इसके गंभीर और दूरगामी परिणाम पूरे राज्य को भुगतने पड़ सकते हैं। तकनीकी खामियों और जनशक्ति की कमी के कारण ग्रिड और ट्रांसमिशन लाइनों पर अत्यधिक दबाव बढ़ रहा है, जिससे किसी भी समय बड़े स्तर पर ब्रेकडाउन होने का खतरा बना हुआ है। यदि समय रहते रिक्त पदों को भरने और तकनीकी ढांचे को दुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आने वाले समय में इंजीनियर अपनी सुरक्षा और व्यवस्था के हित में सख्त रुख अपनाने पर मजबूर हो सकते हैं।
अंबाला कैंट में होगा बड़ा आयोजन, पीएम मोदी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे संत रविदास एक्सप्रेस
16 Jul, 2026 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाराणसी:धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी वाराणसी आने-जाने वाले रेल यात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। रेल कनेक्टिविटी को और अधिक मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी शुक्रवार को नई विशेष ट्रेन 'संत रविदास एक्सप्रेस' (गाड़ी संख्या 04686) को हरी झंडी दिखाकर देश को समर्पित करेंगे। इस नई रेल सेवा की शुरुआत होने से विशेषकर पंजाब और हरियाणा के क्षेत्रों से उत्तर प्रदेश के पावन शहर वाराणसी आने वाले लाखों भक्तों और तीर्थयात्रियों को सीधे सफर की एक बेहतरीन सौगात मिलेगी, जिससे उनकी यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और आरामदायक हो जाएगी।
उद्घाटन के दिन जालंधर से चलेगी स्पेशल ट्रेन, अंबाला कैंट में भव्य स्वागत की तैयारियां
उत्तर रेलवे के उच्च अधिकारियों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उद्घाटन के पहले दिन इस गाड़ी को जालंधर कैंट से वाराणसी के बीच एक विशेष उत्सव ट्रेन के रूप में संचालित किया जा रहा है। तय समय सारणी के मुताबिक, 17 जुलाई की शाम ठीक 19:00 बजे यह ट्रेन पहली बार हरियाणा के अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर प्रवेश करेगी। ट्रेन के इस ऐतिहासिक प्रथम आगमन को यादगार बनाने के लिए अंबाला कैंट स्टेशन पर एक भव्य और गरिमामयी स्वागत समारोह की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई हैं, जहां स्थानीय जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और भारी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं द्वारा ट्रेन का भव्य स्वागत किया जाएगा।
शुरुआती फेरों के बाद सप्ताह में तीन दिन नियमित चलेगी ट्रेन, रूट विस्तार से पंजाब को सीधा लाभ
रेलवे प्रशासन की योजना के मुताबिक, शुरुआती तौर पर कुछ दिनों तक स्पेशल के रूप में पटरियों पर दौड़ने के बाद बहुत जल्द ही इस गाड़ी को पूर्ण रूप से नियमित सेवा में बदल दिया जाएगा। नियमित परिचालन शुरू होने के बाद यह ट्रेन अपने नए आवंटित नंबर 14624/14625 के साथ सप्ताह में तीन दिन यानी प्रत्येक बुधवार, शुक्रवार और रविवार को दोनों दिशाओं से नियमित रूप से अपनी सेवाएं देगी। इसके साथ ही यात्रियों की सुविधा के लिए भविष्य में इसका विस्तार पंजाब के छेहरटा स्टेशन तक करने का भी निर्णय लिया गया है, जिसके बाद यह सीधी ट्रेन छेहरटा से वाराणसी के बीच का सफर तय करेगी।
व्यापारिक गतिविधियों को मिलेगा नया आयाम, आम जनता और कारोबारियों में भारी उत्साह
इस नई और बहुप्रतीक्षित रेल सेवा के शुरू होने की घोषणा से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच व्यापारिक गतिविधियों को भी एक नया आयाम मिलेगा। उत्तर भारत के इन प्रमुख राज्यों के आपस में सीधे रेल मार्ग से जुड़ने के कारण कपड़ा व्यवसाय, लघु उद्योगों और स्थानीय व्यापारियों को माल परिवहन के साथ-साथ आवाजाही में काफी सहूलियत होने वाली है। यही वजह है कि ट्रेन के संचालन की खबर मिलते ही क्षेत्र के व्यापारिक संगठनों, दैनिक यात्रियों और आम जनता के बीच भारी उत्साह और प्रसन्नता का माहौल देखा जा रहा है।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
