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भारतीयों का रुझान बदला? प्यू सर्वे में ट्रंप पीछे, पुतिन पर सबसे ज्यादा भरोसा
18 Jul, 2026 03:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क। वैश्विक परिदृश्य में हाल के वर्षों में आए बदलावों के बीच भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मोड़ देखा जा रहा है। प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा जारी एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमेरिका के प्रति भारतीय जनमानस की सकारात्मक सोच में गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट बताती है कि भारतीयों की अमेरिका के बारे में अच्छी राय रखने का प्रतिशत पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम हो गया है। सर्वेक्षण में शामिल महज 18 फीसदी भारतीयों ने ही अमेरिकी राष्ट्रपति की टैरिफ नीतियों का समर्थन किया है, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक कूटनीति के प्रति बढ़ती दूरी को दर्शाता है।
वैश्विक नेतृत्व और राष्ट्रपति ट्रंप पर गिरता भरोसा
सर्वेक्षण के आंकड़ों पर गौर करें तो वैश्विक मामलों में सही निर्णय लेने के संदर्भ में डोनाल्ड ट्रंप पर भारतीय जनता का भरोसा पिछले साल के 52 फीसदी से घटकर इस साल 39 फीसदी पर आ गया है। इसके विपरीत, अंतरराष्ट्रीय पटल पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को 51 फीसदी भारतीयों का समर्थन प्राप्त हुआ है, जो उन्हें इस सूची में सबसे विश्वसनीय वैश्विक नेता बनाता है। नेतन्याहू, मैक्रों और जेलेंस्की जैसे अन्य प्रमुख नेताओं की तुलना में ट्रंप को लेकर भारतीय दृष्टिकोण में स्पष्ट संशय देखा जा रहा है, विशेष रूप से इमिग्रेशन, गाजा और यूक्रेन जैसे मुद्दों पर उनकी नीतियों को लेकर लोगों में असहमति है।
हस्तक्षेप की राजनीति और अमेरिका की छवि
सर्वेक्षण में शामिल 47 फीसदी भारतीयों का मानना है कि अमेरिका अन्य देशों के आंतरिक मामलों में जरूरत से ज्यादा दखल देता है। हालांकि, अन्य देशों के औसत आंकड़ों की तुलना में भारत में अमेरिका के प्रति फिर भी थोड़ी बेहतर सकारात्मक सोच बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, 36 देशों के वैश्विक औसत में ट्रंप की नीतियों को लेकर अविश्वास का भाव 76 फीसदी तक है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका की छवि को लेकर एक बड़ा वर्ग असंतुष्ट है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सम्मान के मामले में 54 फीसदी भारतीय अभी भी अमेरिका पर भरोसा जताते हैं।
पाकिस्तान और चीन के साथ तुलनात्मक रुख
पाकिस्तान के संदर्भ में सर्वे के आंकड़े काफी भिन्न और कठोर हैं, जहां 82 फीसदी लोग अमेरिका के प्रति नकारात्मक राय रखते हैं। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप द्वारा पाकिस्तान को प्राथमिकता दिए जाने के बावजूद वहां अमेरिका की लोकप्रियता में कोई खास सुधार नहीं दिखा है। इसके विपरीत, पाकिस्तान में 90 फीसदी लोग चीन के प्रति अनुकूल राय रखते हैं, जो दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों को एक नया अर्थ देता है। वहीं, भारत में चीन के प्रति सकारात्मक सोच का स्तर पिछले वर्ष के 21 फीसदी से मामूली बढ़कर 23 फीसदी तक पहुंचा है, जो भारत-चीन के जटिल संबंधों को दर्शाने के लिए पर्याप्त है।
यमुनानगर दुष्कर्म केस में बड़ा एक्शन, आरोपी परिवार के चार सदस्य कानून के घेरे में
18 Jul, 2026 01:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यमुनानगर: हरियाणा के यमुनानगर जिले के अंतर्गत आने वाले एक ग्रामीण क्षेत्र से महिला सुरक्षा को तार-तार करने वाली एक बेहद संगीन और दुखद घटना प्रकाश में आई है। यहां एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा को जबरन बंधक बनाकर उसके साथ दुराचार करने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार की लिखित शिकायत पर तत्परता दिखाते हुए साढ़ौरा थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी युवक, उसकी माता, दो सगे भाइयों और तीन अन्य करीबियों समेत कुल सात लोगों के खिलाफ विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर मामले की सघन तफ्तीश शुरू कर दी है।
छात्राओं का पीछा करने और प्रताड़ित करने का आरोप
पीड़ित छात्रा के पिता ने स्थानीय पुलिस प्रशासन को सौंपे गए शिकायती पत्र में अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उनकी तीन बेटियां गांव में ही स्थित एक राजकीय विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। आरोप है कि यासीन माजरी क्षेत्र के रहने वाले अंसुल, वंश, मनदीप और खेरड़ा खुर्द निवासी वंश नामक युवक काफी समय से उनकी बेटियों पर बुरी नजर रखे हुए थे। ये आरोपी स्कूल आते-जाते समय छात्राओं का पीछा करते थे, उन पर अश्लील फब्तियां कसते थे और रास्ते में रोककर सरेराह छेड़खानी जैसी ओछी हरकतों को अंजाम देकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे।
घर के बाहर बाइकों से चक्कर काटकर दी जाती थी धमकी
परिजनों का यह भी आरोप है कि इन मनचले युवकों का हौसला इतना बढ़ चुका था कि वे केवल रास्ते तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि रोजाना शाम के समय योजनाबद्ध तरीके से पीड़ित परिवार के गांव में दाखिल हो जाते थे। आरोपी अपनी तेज रफ्तार बाइकों पर सवार होकर पीड़ित के घर के ठीक सामने लगातार चक्कर काटते थे, तेज आवाज में हूटिंग करते थे और घर के सदस्यों को बाहर निकलने की खुली चुनौती देते हुए ललकारते थे। इस अवांछित गतिविधि के कारण पूरा परिवार पिछले कई दिनों से अत्यधिक डर और मानसिक तनाव के साए में जीने को मजबूर था।
बंधक बनाकर वारदात को अंजाम देने का मामला दर्ज
इस पूरी प्रताड़ना के बीच आरोपियों ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघते हुए छात्रा को एकांत में पाकर बंधक बना लिया और उसके साथ जबरन इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद सहमी हुई पीड़ित ने पूरी बात अपने माता-पिता को बताई, जिसके बाद न्याय की गुहार लेकर परिजन साढ़ौरा थाने पहुंचे। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य आरोपी के अलावा उसकी मां और भाइयों को भी साजिश रचने, सह देने और पीड़िता को डराने-धमकाने के अपराध में सह-आरोपी बनाया है।
पुलिस द्वारा आरोपियों की धरपकड़ के लिए विशेष टीमों का गठन
साढ़ौरा थाना प्रभारी ने मामले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और अन्य विशेष अधिनियमों की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण (मेडिकल मुआयना) कराने के साथ ही उसके बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पुलिस उपाधीक्षक के निर्देश पर फरार चल रहे सभी सातों नामजद आरोपियों की संभावित ठिकानों पर त्वरित गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दो विशेष टीमों का गठन कर दिया गया है, और प्रशासन ने जल्द ही सभी को सलाखों के पीछे भेजने का भरोसा दिया है।
हरियाली बढ़ाने के लिए झज्जर में शुरू होगा मेगा पौधारोपण अभियान
18 Jul, 2026 12:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
झज्जर: हरियाणा के झज्जर जिले को एक सुंदर हरित पट्टी के रूप में विकसित करने और पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ बनाने के संकल्प के साथ वन विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। मानसून के मौजूदा सीजन का भरपूर लाभ उठाने के लिए विभाग ने पूरे जिले में एक व्यापक और सघन वृक्षारोपण अभियान का शंखनाद किया है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य घटते वन क्षेत्र को बढ़ाना और स्थानीय नागरिकों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इस बार सरकारी जमीनों को हरा-भरा करने के साथ-साथ आम जनता को भी इस मुहिम का एक अहम हिस्सा बनाने की रणनीति तैयार की गई है।
हजारों नए पौधों से आच्छादित होगा झज्जर का भूगोल
वन विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के अंतर्गत इस वर्ष वर्षा ऋतु के दौरान जिले के विभिन्न चिन्हित अंचलों में लगभग 82 हजार नए पौधे रोपने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। इन पौधों में मुख्य रूप से घनी छाया देने वाले, पौष्टिक फल देने वाले और बहुउपयोगी औषधीय प्रजातियों के वृक्ष शामिल हैं, जो स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल हैं। विभाग ने इसके लिए उन क्षेत्रों का चयन किया है जहां वर्तमान में हरित आवरण बेहद कम है, ताकि आने वाले समय में उन स्थानों पर सघन वन क्षेत्र विकसित किए जा सकें।
सामुदायिक भागीदारी के लिए होगा भारी मात्रा में निशुल्क वितरण
इस हरियाली मुहिम को एक जन आंदोलन का रूप देने के लिए वन विभाग ने सामुदायिक सहभागिता पर सबसे अधिक भरोसा जताया है। इसके तहत जिले भर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों, सक्रिय सामाजिक संगठनों, ग्राम पंचायतों और विभिन्न सरकारी कार्यालयों के सहयोग से करीब 2 लाख पौधों का निशुल्क वितरण करने की योजना बनाई गई है। इस पहल के माध्यम से प्रशासन का प्रयास है कि समाज का हर वर्ग अपने घरों, खेतों और सार्वजनिक स्थानों पर खुद आगे आकर पौधे लगाए, जिससे पर्यावरण संरक्षण में प्रत्येक नागरिक की सीधी हिस्सेदारी सुनिश्चित हो सके।
केवल रोपण ही नहीं बल्कि सुरक्षा और जीवन पर रहेगा मुख्य फोकस
वन विभाग के आला अधिकारियों ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि इस वर्ष का अभियान केवल गड्ढे खोदकर नए पौधे लगाने तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके जीवित रहने और पूर्ण विकास की भी कड़ाई से निगरानी की जाएगी। इसके लिए रोपे गए पौधों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं, जिसमें ट्री-गार्ड लगाना और नियमित सिंचाई की व्यवस्था करना शामिल है। विभाग का मानना है कि पूर्व के वर्षों में देखभाल के अभाव में कई पौधे नष्ट हो जाते थे, इसलिए इस बार पौधों के दीर्घकालिक संरक्षण पर ही पूरा ध्यान केंद्रित किया गया है।
बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक मजबूत ढाल
ग्लोबल वार्मिंग और मौसम चक्र में आ रहे अप्रत्याशित बदलावों को देखते हुए वन अधिकारियों ने इस अभियान को समय की सबसे बड़ी मांग बताया है। लगातार बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण और वाहनों के धुएं के कारण हवा की गुणवत्ता में आ रही गिरावट को केवल बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करके ही सुधारा जा सकता है। झज्जर वन विभाग इस पूरे अभियान को अत्यंत योजनाबद्ध तरीके से धरातल पर उतार रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, शुद्ध और प्रदूषण मुक्त वातावरण की सौगात दी जा सके।
हरियाणा में स्कूल बसों की सुरक्षा जांच तेज, छह जगह बनाए गए चेकिंग प्वाइंट
18 Jul, 2026 12:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार: हरियाणा के नूंह में सामने आए एक संवेदनशील मामले के बाद राज्य मानवाधिकार आयोग ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। आयोग के सख्त निर्देश पर अब प्रदेश भर के साथ-साथ हिसार जिले में भी समस्त निजी शिक्षण संस्थानों की बसों की सघन जांच का अभियान शुरू कर दिया गया है। इस राष्ट्रव्यापी सुरक्षा पहल के अंतर्गत जिले के करीब 650 निजी स्कूलों के बेड़े में शामिल 2300 से अधिक बसों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों को परखा जाएगा। इस व्यापक चेकिंग अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर जिले में छह विशेष जांच केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले वाहनों पर नकेल कसी जा सके।
नूंह के छछेड़ा गांव की घटना के बाद जागा प्रशासन
इस बड़े प्रशासनिक कदम की पृष्ठभूमि नूंह जिले के अंतर्गत आने वाले गांव छछेड़ा के एक निजी विद्यालय से जुड़ी हुई है, जहां एक सात वर्षीय मासूम छात्रा के साथ शिक्षक द्वारा बर्बरतापूर्वक मारपीट करने का मामला प्रकाश में आया था। इस घटना के बाद जब जांच टीम ने साक्ष्य जुटाने के उद्देश्य से स्कूल बस के चालक से सीसीटीवी फुटेज की मांग की, तो यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि बस के भीतर सीसीटीवी कैमरे ही स्थापित नहीं थे। सुरक्षा में इस गंभीर लापरवाही को संज्ञान में लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने प्रादेशिक स्तर पर आरटीए (RTA) और संबंधित विभागों को तत्काल प्रभाव से सभी स्कूली वाहनों की चेकिंग कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के आदेश जारी किए।
पुलिस लाइन में बसों की अनिवार्य चेकिंग और ईंधन की बर्बादी पर सवाल
आयोग के आदेश के अनुपालन की पहली कड़ी के तहत शनिवार को हिसार शहर के विभिन्न निजी स्कूलों की बसों को सामूहिक रूप से पुलिस लाइन परिसर में एकत्र होने के निर्देश दिए गए हैं। वहां क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण की विशेष तकनीकी टीमें इन वाहनों की फिटनेस, कागजातों और अन्य तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच कर एक आधिकारिक रिपोर्ट तैयार करेंगी। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर भी उठ रहे हैं, क्योंकि एक ओर सरकार ईंधन संरक्षण का संदेश देती है, वहीं दूसरी ओर मुख्य बस स्टैंड से करीब पौने चार किलोमीटर दूर स्थित पुलिस लाइन तक हजारों बसों को बुलाए जाने से ईंधन की भारी बर्बादी हो रही है, जिससे नियम कायदों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के सख्त सुरक्षा मानकों को परखने की कवायद
इस विशेष जांच अभियान के दौरान परिवहन विभाग की टीमें मुख्य रूप से माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्कूली छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए तय किए गए कड़े नियमों की उपलब्धता की जांच कर रही हैं। इसके तहत सभी बसों का रंग अनिवार्य रूप से पीला होना, आगे-पीछे स्पष्ट अक्षरों में स्कूल बस अथवा अनुबंधित होने पर 'ऑन स्कूल ड्यूटी' लिखा होना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, खिड़कियों पर लोहे की सुरक्षित ग्रिल, दरवाजों पर मजबूत ऑटोमैटिक लॉक, सीटों के नीचे बैग रखने की समुचित जगह, प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड) बॉक्स और वैध अग्निशमन यंत्रों की मौजूदगी को अनिवार्य रूप से परखा जा रहा है।
वाहनों में आधुनिक तकनीक और चालकों की योग्यता की होगी सघन जांच
छात्रों के सुरक्षित सफर को सुनिश्चित करने के लिए इस अभियान में आधुनिक तकनीकों की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिसमें वाहनों में गति नियंत्रक (स्पीड गवर्नर), जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और चालू हालत में सीसीटीवी कैमरों का होना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। इसके साथ ही, बसों के चालकों के पास भारी वाहन चलाने का न्यूनतम 5 वर्षों का वैध अनुभव होना चाहिए और उनका पिछला रिकॉर्ड किसी भी प्रकार के ट्रैफिक उल्लंघन या शराब पीकर गाड़ी चलाने से मुक्त होना आवश्यक है। परिवहन विभाग का कहना है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों और बस संचालकों के खिलाफ परमिट रद्द करने सहित भारी जुर्माने की दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
UN ने PoK के हालात पर जताई चिंता, गिरफ्तारी और इंटरनेट बंदी पर पाकिस्तान से जवाब तलब
18 Jul, 2026 11:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जिनेवा। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में व्याप्त अशांति और हिंसा की घटनाओं पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव को नियंत्रित करने के लिए सभी पक्षों से संयम बरतने का आह्वान किया है। उन्होंने इस हिंसा में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों की जान जाने की घटनाओं की त्वरित और निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि दोषियों की जवाबदेही तय की जा सके।
नागरिक अधिकारों और संगठन पर प्रतिबंध का संकट
क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही 'संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिसमें व्यापारी, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस कदम को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा करने के बुनियादी अधिकारों का सीधा उल्लंघन बताया है। प्रशासन द्वारा संगठन के नेताओं की गिरफ्तारी और उनके प्रति अपनाए गए कड़े रुख को लेकर मानवाधिकार आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई है। आयोग का मानना है कि नेताओं को कानूनी सहायता और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिलना अनिवार्य है।
इंटरनेट बंदी और सूचना का अधिकार
तनावपूर्ण माहौल में क्षेत्र में लगाई गई इंटरनेट सेवाओं पर रोक को भी मानवाधिकार कार्यालय ने चिंताजनक बताया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाने से नागरिकों के सूचना प्राप्त करने और साझा करने के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस स्थिति ने स्थानीय लोगों की समस्याओं को और गंभीर बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल प्रभाव से इंटरनेट सेवाएं बहाल करने की अपील की है, ताकि लोगों का संपर्क बना रहे और सूचना का प्रवाह सुचारू हो सके।
राजनीतिक संवाद और शांति का मार्ग
संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में व्याप्त अशांति का समाधान बल प्रयोग में नहीं, बल्कि समावेशी और व्यापक राजनीतिक संवाद में निहित है। उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने स्थानीय निवासियों की शिकायतों को सुनने और उनके समाधान के लिए सार्थक चर्चा शुरू करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि स्थायी शांति और स्थिरता केवल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और जनहितकारी संवाद के माध्यम से ही संभव है। यह अपील ऐसे समय में आई है जब आगामी चुनावों के मद्देनजर क्षेत्र में भारी तनाव बना हुआ है।
ईरान की धमकी से बढ़ी वैश्विक चिंता: क्या पूरे पश्चिम एशिया में फैल जाएगी जंग?
18 Jul, 2026 09:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने संयुक्त राज्य अमेरिका को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि ईरान पर हमले नहीं रोके गए, तो संघर्ष एक विनाशकारी और आक्रामक मोड़ ले लेगा। ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मोहसेन रेजाई ने स्पष्ट किया है कि अब ईरान केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सेना को कहीं भी सुरक्षित नहीं रहने दिया जाएगा। उनका कहना है कि ईरान ने क्षेत्रीय अस्थिरता को रोकने के लिए अब तक संयम बरता था, लेकिन अमेरिका ने इस स्थिति का गलत आकलन किया है।
सैन्य जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ने की चेतावनी
रेजाई ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी आक्रामकता जारी रहती है, तो ईरान अपनी अतिरिक्त सैन्य क्षमताओं, विशेषकर जमीनी बलों को भी युद्ध के मैदान में उतारने के लिए तैयार है। उन्होंने क्षेत्र के देशों जैसे कुवैत, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के नागरिकों से भी तनाव को नियंत्रित करने में सहयोग की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वाशिंगटन को आने वाले दिनों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की और अधिक तीव्र लहरों का सामना करना पड़ेगा और किसी भी प्रकार के जमीनी अभियान के परिणाम अमेरिका के लिए गंभीर होंगे।
क्षेत्रीय तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति
तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक थाई ध्वज वाले जहाज को निशाना बनाया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस जहाज ने ईरानी नौसेना के नियमों का उल्लंघन किया था और चेतावनियों के बावजूद बिना अनुमति जलडमरूमध्य पार करने का प्रयास किया था। पिछले कुछ दिनों से अमेरिकी सेना ईरान के दक्षिणी प्रांतों पर निरंतर हमले कर रही है, जिसे वे समुद्री जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई कार्रवाई बता रहे हैं। इसके प्रत्युत्तर में ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में युद्ध का खतरा लगातार गहराता जा रहा है।
युद्ध और वार्ता की नीति का अंत
ईरान ने स्पष्ट किया है कि अब शांति वार्ता का दौर समाप्त हो चुका है और सैन्य विकल्प ही प्राथमिकता है। रेजाई ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने संघर्ष को क्षेत्रीय युद्ध में बदलकर बड़ी रणनीतिक भूल की है। ईरान का यह रुख दर्शाता है कि भविष्य में सैन्य अभियानों की तीव्रता में और भी अधिक वृद्धि की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा संकट उत्पन्न हो सकता है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि ईरान अपनी सैन्य स्थिति को और अधिक आक्रामक बनाने की दिशा में पूरी तरह तैयार है।
जहरीली हवा पर ट्रंप सख्त, कनाडा से टैरिफ के जरिए नुकसान वसूलने की कही बात
18 Jul, 2026 09:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। कनाडा के जंगलों में लगी भीषण आग के कारण उठ रहे धुएं और उससे अमेरिका में फैल रहे प्रदूषण को लेकर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा सरकार पर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने इसे कनाडा के जंगलों के कुप्रबंधन का परिणाम बताते हुए कहा है कि इस जहरीली हवा से अमेरिका को जो आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी नुकसान हो रहा है, उसकी भरपाई कनाडा को करनी होगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे इस प्रदूषण के चलते हुए नुकसान की भरपाई के लिए कनाडा पर लगाए जाने वाले टैरिफ में वृद्धि की मांग कर सकते हैं।
प्रदूषण के लिए कनाडा को ठहराया जिम्मेदार
ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कनाडा अपने जंगलों और सूखी झाड़ियों की सही देखभाल नहीं कर रहा है, जिसके कारण हर साल अमेरिका को 'अस्वास्थ्यकर हवा' का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इस मुद्दे पर कनाडा के प्रधानमंत्री से वार्ता करने की बात कही है। ट्रंप का मानना है कि प्रदूषण से होने वाले नुकसान का सही आकलन किया जाना चाहिए और उसकी कीमत कनाडा को टैरिफ के रूप में चुकानी होगी।
अमेरिकी शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर गिरा
कनाडा और उत्तरी मिनेसोटा की आग का धुआं अमेरिका के मिडवेस्ट और उत्तर-पूर्वी राज्यों तक पहुंच चुका है, जिसके चलते डेट्रॉइट, शिकागो और वॉशिंगटन जैसे शहरों में एयर क्वालिटी अलर्ट जारी कर दिया गया है। वैश्विक वायु गुणवत्ता निगरानी संस्थाओं के अनुसार, डेट्रॉइट की स्थिति दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में शुमार हो गई है। इसके अलावा, न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी में होने वाले विश्व कप फाइनल पर भी धुएं का साया मंडरा रहा है, जिसे लेकर अधिकारी लगातार मौसम के बदलते मिजाज और वायु गुणवत्ता की निगरानी कर रहे हैं।
जंगलों की आग से स्वास्थ्य के लिए बढ़ता खतरा
कनाडा के ओंटारियो सहित कई क्षेत्रों में 200 से अधिक स्थानों पर लगी आग के कारण स्थानीय समुदायों को विस्थापित करना पड़ा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि धुएं में मौजूद महीन कण सांस संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं, जो विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पूर्व-बीमार व्यक्तियों के लिए घातक हो सकते हैं। वैज्ञानिकों का स्पष्ट मानना है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और सूखे के चलते वैश्विक स्तर पर जंगलों में आग लगने की घटनाएं अब एक गंभीर और निरंतर चुनौती बनती जा रही हैं।
सऊदी और तुर्की के बाद कुवैत की ओर पाकिस्तान का रुख, बढ़ीं नई चर्चाएं
18 Jul, 2026 09:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान अपनी आर्थिक बदहाली से उबरने के लिए एक नई और विवादास्पद कूटनीति का सहारा ले रहा है, जिसे 'बैरल फॉर बूट्स' यानी 'तेल के बदले सैनिक' के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान और कुवैत के बीच एक संभावित रक्षा समझौते को लेकर प्रारंभिक स्तर की बातचीत चल रही है। इसके तहत पाकिस्तान कुवैत को सैन्य सुरक्षा प्रदान करने के बदले तेल, गैस और बड़े निवेश की उम्मीद कर रहा है। हालांकि, क्षेत्रीय भू-राजनीति और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस समझौते की राह में कई चुनौतियां भी मौजूद हैं।
रक्षा सहयोग और कुवैत की रणनीतिक प्राथमिकताएं
कुवैत की इच्छा है कि उसे पाकिस्तान से वैसे ही व्यापक रक्षा सहयोग मिले, जैसा पिछले वर्ष सऊदी अरब को प्राप्त हुआ था। इसमें हजारों पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती के साथ-साथ लड़ाकू विमान, ड्रोन और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। हालांकि, पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि वे वर्तमान में सीधे लड़ाकू सैनिकों की तैनाती पर विचार नहीं कर रहे हैं। कुवैत इन रक्षा सुविधाओं के अतिरिक्त पाकिस्तान में बॉन्डेड फ्यूल स्टोरेज बनाने की संभावनाओं पर भी गौर कर रहा है, ताकि दोनों देशों के बीच ईंधन आपूर्ति को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
इस्लामिक नाटो और क्षेत्रीय रक्षा समीकरण
पाकिस्तान खाड़ी देशों के साथ मिलकर एक 'इस्लामिक नाटो' जैसे रक्षा गठबंधन के निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। इस श्रृंखला में सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता पहले ही हो चुका है, जबकि तुर्की, बहरीन और जॉर्डन के साथ भी सैन्य प्रशिक्षण और हथियारों के आदान-प्रदान के लिए बातचीत जारी है। इस त्रिपक्षीय और बहु-पक्षीय रक्षा ढाँचे का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा की एक सामूहिक गारंटी तैयार करना है, जहाँ एक देश पर हुआ हमला सभी देशों पर हमला माना जाएगा।
अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर घटता भरोसा
खाड़ी देशों में पाकिस्तान के प्रति बढ़ते इस सैन्य झुकाव का एक मुख्य कारण अमेरिका की सुरक्षा गारंटी के प्रति इन देशों में पैदा हुआ अविश्वास है। पश्चिम एशिया के रणनीतिक जानकारों का मानना है कि खाड़ी देश अब अमेरिका के विकल्प के रूप में एक विश्वसनीय रक्षा साझीदार की तलाश कर रहे हैं। पाकिस्तान के साथ उनके ऐतिहासिक, धार्मिक और सैन्य संबंध होने के कारण इसे एक सुरक्षित और कम संवेदनशील विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। पाकिस्तान की यह नीति न केवल उसकी अपनी गिरती अर्थव्यवस्था को बचाने का एक प्रयास है, बल्कि मध्य-पूर्व में अपनी रणनीतिक धाक जमाने की कोशिश भी है।
चीन में लैंडस्लाइड से मची तबाही, कई घर मलबे में समाए, राहत-बचाव अभियान तेज
18 Jul, 2026 07:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चोंगकिंग। चीन के दक्षिण-पश्चिमी शहर चोंगकिंग में शुक्रवार को आए भीषण भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। पेंगशुई काउंटी में पहाड़ी से अचानक गिरी चट्टानों और मिट्टी के मलबे ने 10 से अधिक रिहायशी इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में अब तक आठ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 34 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करीब 1100 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया है, जबकि बचाव दल मलबे में दबे अन्य लोगों की तलाश में युद्धस्तर पर जुटे हैं।
युद्धस्तर पर जारी है बचाव अभियान
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भूस्खलन के कारण 5 से 15 मंजिला तक की इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। घटनास्थल पर 800 से अधिक राहतकर्मी तैनात किए गए हैं, जो मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को निकालने का कार्य कर रहे हैं। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र के एक किलोमीटर के दायरे में बिजली, पानी और गैस की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी है ताकि कोई अन्य अनहोनी न हो। अब तक 18 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जिनमें से दो की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
राहत सामग्री और प्रशासनिक तत्परता
प्रभावित परिवारों की मदद के लिए सरकार ने तत्काल प्रभाव से सहायता का जाल बिछाया है। क्षेत्र में राहत सामग्री के रूप में 8000 से अधिक टेंट, फोल्डिंग बेड और आपातकालीन किट भेजी गई हैं ताकि बेघर हुए लोगों को अस्थायी आश्रय मिल सके। भूस्खलन की तीव्रता इतनी अधिक थी कि मलबे के नीचे कई बिजली के खंभे और बुनियादी ढांचा पूरी तरह दब गया है। स्थानीय अधिकारियों द्वारा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावितों को भोजन तथा अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उच्चस्तरीय जांच के आदेश
चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग ने इस आपदा को गंभीरता से लेते हुए घटना की विस्तृत और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस बात की पड़ताल करें कि भूस्खलन के लिए जिम्मेदार भौगोलिक कारकों के अलावा क्या कोई मानवीय चूक भी थी। बचाव कार्यों के साथ-साथ अब सरकार का ध्यान भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने पर है। फिलहाल, पूरी प्रशासनिक मशीनरी लापता लोगों की खोजबीन और प्रभावितों के पुनर्वास के कार्य में जुटी हुई है।
रिकॉर्ड गर्मी से यूरोप में तबाही, 10 हजार मौतों ने बढ़ाई चिंता
18 Jul, 2026 06:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। यूरोप इस वर्ष भीषण गर्मी के अभूतपूर्व दौर से गुजर रहा है, जिसके कारण पूरे महाद्वीप में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, तापमान में हुई बेतहाशा वृद्धि से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते करीब 10 हजार लोगों की मृत्यु हो चुकी है। जून के अंत से तापमान में जो रिकॉर्ड तोड़ उछाल आया, उसने स्थिति को और अधिक चिंताजनक बना दिया है। विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि गर्मी से होने वाली मौतों का वास्तविक आंकड़ा आधिकारिक रिकॉर्ड से कहीं अधिक हो सकता है, क्योंकि अक्सर मृत्यु प्रमाण पत्र में मूल कारण के रूप में गर्मी के बजाय दिल का दौरा या अन्य पुरानी बीमारियों को दर्ज किया जाता है।
जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी का संकट
जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में भीषण गर्मी की आवृत्ति और तीव्रता दोनों में खतरनाक वृद्धि देखी जा रही है। यूरोएमओएमओ के आंकड़ों के अनुसार, जून के अंतिम सप्ताह में सामान्य से 14,260 अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। इन आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि इसका सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों पर पड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में यूरोप में लगातार बढ़ती इस तरह की आपदाएं भविष्य के लिए एक बड़ा संकेत दे रही हैं कि किस तरह मौसम का मिजाज मानव जीवन के लिए घातक सिद्ध हो रहा है।
विभिन्न देशों में बढ़ता मृत्यु दर का आंकड़ा
यूरोप के अलग-अलग देशों में भीषण गर्मी ने भारी तबाही मचाई है। स्पेन में इस गर्मी के चलते 937 लोगों की जान गई है, वहीं बेल्जियम में 18 जून से 1 जुलाई के बीच 1,747 अधिक मौतें दर्ज की गईं। नीदरलैंड में भी करीब 480 लोगों की मृत्यु गर्मी के प्रकोप से हुई है। जर्मनी इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित देशों में से एक रहा है, जहाँ जुलाई की शुरुआत तक 6,830 लोगों की मौत दर्ज की गई, जिनमें से अधिकांश बुजुर्ग थे। इसी प्रकार, ब्रिटेन में 2,700 और फ्रांस में एक सप्ताह के भीतर 2,000 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं, जो पूरे यूरोप में फैली इस आपदा की गंभीरता को दर्शाती हैं।
स्वास्थ्य प्रणालियों और डेटा पर चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि भीषण गर्मी का सीधा प्रभाव न केवल सीधे तौर पर मृत्यु का कारण बनता है, बल्कि यह उन लोगों की शारीरिक स्थिति को और अधिक जटिल बना देता है जो पहले से ही हृदय या श्वसन संबंधी रोगों से जूझ रहे हैं। गर्मी से होने वाली कई मौतों को आधिकारिक तौर पर 'गर्मी से मौत' के रूप में वर्गीकृत न किए जाने के कारण वास्तविक प्रभाव का आकलन करना और भी कठिन हो जाता है। भविष्य में इस प्रकार की मौतों को कम करने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को और अधिक सतर्क होने और विशेष रूप से बुजुर्गों व कमजोर वर्ग की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है।
अमेरिका के खिलाफ ईरान का एक्शन, दो ड्रोन गिराने का दावा; हालात गंभीर
17 Jul, 2026 04:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान/वाशिंगटन। खाड़ी क्षेत्र में जारी सैन्य संघर्ष अब बेहद खतरनाक और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। बुधवार रात को ईरान के अहवाज शहर में बच्चों के एक विशेष कैंसर अस्पताल के समीप हुई अमेरिकी बमबारी और उसके बाद कुवैत स्थित अमेरिकी एयरबेस पर ईरान की जवाबी कार्रवाई ने दोनों देशों के बीच युद्ध की विभीषिका को चरम पर पहुंचा दिया है।
कैंसर अस्पताल के समीप भीषण धमाके, बच्चों को सुरक्षित निकाला गया
ईरानी रक्षा विभाग और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के तटीय और सैन्य ठिकानों पर रात भर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। इस भारी गोलाबारी के दौरान कई मिसाइलें अहवाज प्रांत में स्थित कैंसर व रक्त रोग के विशेष केंद्र 'शाहिद बकाई अस्पताल' के बिल्कुल नजदीक आकर गिरीं। इन धमाकों के तेज झटकों से अस्पताल की इमारत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। उस समय अस्पताल में कीमोथेरेपी करवा रहे 211 मासूम बच्चों को डॉक्टरों और परिजनों ने आनन-फानन में भारी दहशत के बीच बाहर निकाला। इन सभी बाल मरीजों को सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तुरंत आपातकालीन एम्बुलेंसों के जरिए अन्य नजदीकी चिकित्सा केंद्रों में स्थानांतरित किया गया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस क्रूर हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे बच्चों के खिलाफ सीधा 'युद्ध अपराध' करार दिया है।
बंदरगाहों की नाकाबंदी और 'होर्मुज जलमार्ग' पर संकट
अमेरिकी नौसेना ने हवाई हमलों के साथ-साथ ईरान के कई प्रमुख बंदरगाहों को चारों तरफ से घेरकर उनकी नाकाबंदी शुरू कर दी है। इसके जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए दोटूक चेतावनी जारी की है कि जब तक अमेरिका अपने इन हमलों को पूरी तरह से बंद नहीं करता, तब तक दुनिया के सबसे प्रमुख तेल व्यापार मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को पूरी तरह से बंद रखा जाएगा। ईरान ने कसम खाई है कि इस दौरान इस मार्ग से तेल या गैस की एक भी बूंद बाहर नहीं जाने दी जाएगी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी बड़ा संकट मंडराने लगा है।
ईरान का भीषण पलटवार, कुवैत में अमेरिकी एयरबेस पर हमला
अमेरिकी हमलों का बदला लेने के लिए ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने तत्काल जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरान ने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने 'अली अल-सलेम एयर बेस' को निशाना बनाकर मिसाइलों और ड्रोनों की बौछार कर दी। IRGC का दावा है कि इस बड़े हमले में अमेरिकी बेस पर तैनात महत्वपूर्ण C-RAM अर्ली वार्निंग राडार प्रणाली को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। इसके अलावा, ईरान ने आसमान में गश्त लगा रहे अमेरिका के दो अत्याधुनिक MQ-9 रीपर ड्रोनों को भी मार गिराने का दावा किया है। इस टकराव के दौरान ईरान के बंदर अब्बास, चाबहार, केश्म द्वीप, कोनारक, सीरिक, रास्क और पश्चिमी शहर खुर्रमआबाद सहित कई इलाकों में देर रात तक भीषण धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच यह टकराव अब पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो चुका है।
रघुराम राजन समेत तीन भारतीय अर्थशास्त्रियों पर भरोसा, अमेरिकी महंगाई रोकने की बड़ी जिम्मेदारी
17 Jul, 2026 03:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी मौद्रिक नीति और कामकाज की गहन समीक्षा के लिए पांच विशेष टास्क फोर्स गठित की हैं। फेड के नए चेयरमैन केविन वॉर्श ने इन समितियों में दुनिया के कई प्रमुख विशेषज्ञों को शामिल किया है। इनमें भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री राज चेट्टी और माइक्रोसॉफ्ट की वरिष्ठ अधिकारी आशा शर्मा को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। ये विशेषज्ञ अमेरिका में बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के उपायों और आर्थिक नीतियों को बेहतर बनाने पर सुझाव देंगे।
रघुराम राजन करेंगे फेड की बैलेंस शीट नीति की समीक्षा
आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को फेडरल रिजर्व की बैलेंस शीट पॉलिसी से जुड़ी टास्क फोर्स में शामिल किया गया है। यह समूह फेड के पास मौजूद अरबों-खरबों डॉलर की संपत्तियों और मौद्रिक नीति पर उनके प्रभाव का अध्ययन करेगा। समिति यह समझने की कोशिश करेगी कि फेड की वित्तीय रणनीतियां महंगाई को नियंत्रित करने में कितनी प्रभावी साबित हो रही हैं।
राज चेट्टी संभालेंगे आर्थिक डेटा से जुड़ी जिम्मेदारी
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और दिल्ली में जन्मे राज चेट्टी को डेटा टास्क फोर्स का हिस्सा बनाया गया है। यह टीम फेडरल रिजर्व के फैसलों में इस्तेमाल होने वाले आर्थिक आंकड़ों की गुणवत्ता और उपलब्धता को बेहतर बनाने पर काम करेगी। राज चेट्टी को रोजगार, आर्थिक असमानता और लोगों की आर्थिक प्रगति से जुड़े अध्ययन के लिए जाना जाता है।
आशा शर्मा देखेंगी AI और तकनीक का आर्थिक प्रभाव
माइक्रोसॉफ्ट की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और एक्सबॉक्स की सीईओ आशा शर्मा को भी एक महत्वपूर्ण टास्क फोर्स में शामिल किया गया है। यह समूह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों के अमेरिका की उत्पादकता, रोजगार और आर्थिक विकास पर पड़ने वाले असर का विश्लेषण करेगा।
फेड की नीतियों में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश
इन टास्क फोर्स में डग मैकमिलन और शिकागो विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री केविन मर्फी जैसे विशेषज्ञ भी शामिल हैं। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के अनुसार, इन समितियों का उद्देश्य केंद्रीय बैंक के कामकाज में पारदर्शिता लाना, नए विचारों को अपनाना और भविष्य की आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए नीतियों को मजबूत बनाना है।
मिडिल ईस्ट तनाव का असर, भारतीय नाविकों की तैनाती रोकने का फैसला
17 Jul, 2026 02:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। खाड़ी क्षेत्र में तेजी से गहराते सुरक्षा जोखिमों और बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने एक बड़ा रक्षात्मक कदम उठाया है। सरकार ने अगले आदेश तक सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों (सीफेयरर्स) की नई नियुक्तियों और तैनाती पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
शिपिंग कंपनियों और रिक्रूटमेंट एजेंसियों पर आदेश लागू
यह प्रतिबंधात्मक आदेश सभी जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और नाविकों की भर्ती करने वाली 'रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस' (RPSL) कंपनियों पर पूरी तरह लागू होगा। इसके साथ ही सरकार ने सभी समुद्री व्यापारिक कंपनियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे अरब की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के पूरे समुद्री क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरतें। कंपनियों को हिदायत दी गई है कि वे नौवहन (नेविगेशन) सुरक्षा संबंधी सभी वैश्विक चेतावनियों पर लगातार पैनी नजर रखें और 'इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी' (ISPS) कोड का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
हमलों में 14 भारतीय नाविकों की मौत के बाद बड़ा एक्शन
सरकार का यह कड़ा सुरक्षात्मक फैसला ऐसे समय में आया है, जब इसी हफ्ते होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हुए ईरानी हमलों में दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बाद से इस समुद्री मार्ग पर वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों का खतरा काफी बढ़ गया है। प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक, इस साल 28 फरवरी से लेकर अब तक इस अशांत क्षेत्र में हुए विभिन्न हमलों में कम से कम 14 भारतीय नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं।
विदेशी जहाजों पर भी 'केंद्रीकृत डैशबोर्ड' से रखी जाएगी नजर
यदि कोई विदेशी शिपिंग कंपनी भारत की भौगोलिक सीमा से बाहर जाकर भारतीय नाविकों की सीधी भर्ती करती है, तो भारत सरकार का यह नया आदेश उन पर सीधे तौर पर लागू नहीं होगा।
हालांकि, प्रत्येक भारतीय नाविक की सुरक्षा को हर हाल में सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने महानिदेशक नौवहन (DG Shipping/DGMA) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि जहाज चाहे किसी भी देश का क्यों न हो, यदि उस पर कोई भी भारतीय नाविक कार्यरत है, तो उसकी पूरी जानकारी एक 'केंद्रीकृत डैशबोर्ड' (Centralized Dashboard) पर अनिवार्य रूप से दर्ज की जाए। इससे किसी भी आपातकालीन हमले या संकट की स्थिति में भारतीय नौसेना या संबंधित सुरक्षा बलों के जरिए तुरंत सहायता पहुंचाई जा सकेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक खाड़ी क्षेत्र के हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक भारतीय नाविकों की जान बचाने के लिए ये एहतियाती कदम जारी रहेंगे।
चंडीगढ़ जिला अदालत का विस्तार, 10 नए कोर्ट रूम से आसान होगा केसों का निपटारा
17 Jul, 2026 01:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़: केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ के सेक्टर-43 स्थित जिला अदालत परिसर के विस्तार और आधुनिकीकरण का वर्षों पुराना इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर मिली हरी झंडी के बाद अदालत परिसर में एक भव्य और सर्वसुविधायुक्त नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स के निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल न्यायपालिका को अतिरिक्त ढांचागत सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि लंबे समय से लंबित मामलों के त्वरित निपटारे में भी बड़ी मदद मिलेगी, जिससे कानूनी प्रक्रिया में तेजी आएगी।
वकीलों की मौजूदा पार्किंग पर खड़ी होगी नई बहुमंजिला इमारत
प्रस्तावित योजना के अनुसार, जिला अदालत परिसर में वर्तमान समय में वकीलों के वाहनों के लिए उपयोग की जा रही पार्किंग की भूमि पर इस नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जाएगा। इस आधुनिक और विशाल भवन के भीतर विशेष रूप से 10 नए अत्याधुनिक कोर्ट रूम (अदालत कक्ष) बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके साथ ही, विभिन्न संवेदनशील और त्वरित मामलों की सुनवाई के लिए कई विशेष अदालतें (स्पेशल कोर्ट) और अदालती दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए एक विशाल सेंट्रलाइज्ड रिकॉर्ड रूम भी इसी परिसर में स्थापित किया जाएगा।
एक दशक से लंबित पड़े प्रोजेक्ट को अंततः मिली रफ्तार
यह महत्वपूर्ण विस्तार परियोजना पिछले कई वर्षों से प्रशासनिक फाइलों और तकनीकी स्वीकृतियों के फेर में अटकी हुई थी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में जिला अदालत को सेक्टर-17 के पुराने भवन से हटाकर सेक्टर-43 के इस नए और बड़े परिसर में स्थानांतरित किया गया था। उस समय भी इस खाली जगह पर नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स का निर्माण प्रस्तावित था, लेकिन वकीलों के वाहनों की बढ़ती संख्या और तत्काल आवश्यकता को देखते हुए अस्थाई रूप से इस भूखंड को पार्किंग क्षेत्र में तब्दील कर दिया गया था, जिससे यह प्रोजेक्ट लटक गया था।
साढ़े चार एकड़ में बनी भव्य मल्टीलेवल पार्किंग है तैयार
पुरानी पार्किंग की जगह पर नया भवन बनाने का निर्णय इसलिए संभव हो सका है क्योंकि वाहनों के खड़े होने का एक स्थाई और बड़ा विकल्प तैयार कर लिया गया है। जिला अदालत और चंडीगढ़ ज्यूडिशियल एकेडमी के बीच स्थित करीब साढ़े चार एकड़ के विशाल भूभाग पर एक अत्याधुनिक मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण कार्य पूरी तरह से मुकम्मल हो चुका है। इस आधुनिक पार्किंग स्थल में एक साथ लगभग 1500 वाहनों को पार्क करने की विशाल क्षमता है, जिससे आने वाले समय में अधिवक्ताओं और वादकारियों को जाम की समस्या से बड़ी निजात मिलेगी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश करेंगे इस नई सुविधा का उद्घाटन
इस नवनिर्मित और भव्य मल्टीलेवल पार्किंग के विधिवत शुभारंभ के लिए ऐतिहासिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आगामी 18 जुलाई को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत एक भव्य समारोह के दौरान इस विशाल पार्किंग परिसर का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन कर इसे जनता और वकीलों को समर्पित करेंगे। इस उद्घाटन के तुरंत बाद वकीलों की गाड़ियों को नई पार्किंग में शिफ्ट कर दिया जाएगा, जिसके बाद खाली हुई पुरानी जगह पर नए कोर्ट रूम और कॉम्प्लेक्स के निर्माण का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा।
'हम डोनाल्ड को मारेंगे'... ईरान के बिलबोर्ड संदेश से बढ़ा वैश्विक तनाव
17 Jul, 2026 01:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान/वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव गहराने के साथ ही अब दोनों देशों के बीच मनोवैज्ञानिक और कूटनीतिक जंग भी चरम पर पहुंच गई है। दोनों ओर से लगातार हो रहे हमलों के बीच ईरान की राजधानी तेहरान में एक बेहद विवादित और आक्रामक बिलबोर्ड लगाया गया है। इस विशाल बिलबोर्ड में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक काले ताबूत में मृत दिखाया गया है, जिस पर अंग्रेजी और फारसी भाषाओं में सीधे तौर पर 'हम ट्रंप को मारेंगे' (We will kill Trump) लिखा हुआ है।
इस आक्रामक कदम ने दोनों देशों के बीच पहले से ही बेहद तनावपूर्ण बने हालातों में आग में घी डालने का काम किया है।
एंगेलाब चौराहे पर लगा 'ताबूत वाला' विवादित बिलबोर्ड
यह भड़काऊ बिलबोर्ड राजधानी तेहरान के मध्य में स्थित सबसे व्यस्त और मशहूर एंगेलाब चौराहे (Engelab Square) पर लगाया गया है।
इस बिलबोर्ड के दृश्यों को बेहद आक्रामक तरीके से तैयार किया गया है:
चित्रण: बिलबोर्ड पर डोनाल्ड ट्रंप की आंखें और मुंह पूरी तरह बंद दिखाए गए हैं।
पोशाक व मुद्रा: ट्रंप अपनी चिर-परिचित लाल टाई पहने हुए हैं, उनके हाथ छाती के ऊपर मुड़े हुए हैं और पैर हवा में दिखाई दे रहे हैं।
ताबूत: उन्हें एक काले रंग के ताबूत में लेटा हुआ दर्शाया गया है।
धमकी: ताबूत के ठीक नीचे उन्हें जान से मारने की खुली चेतावनी लिखी गई है। साथ ही इस पर 'मिनाब की याद में' भी अंकित है, जो किसी हालिया घटना या सैन्य कार्रवाई की ओर इशारा करता है।
ईरान में पहले भी गूंजते रहे हैं ट्रंप विरोधी नारे
यह पहला मौका नहीं है जब ईरान की धरती से अमेरिकी नेतृत्व, खासकर डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाने या उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गई हों। 28 फरवरी से पहले भी ईरान के कई हिस्सों और रैलियों में 'डेथ टू अमरीका' (अमेरिका मुर्दाबाद) और 'डेथ टू ट्रंप' के हिंसक नारे आम रहे हैं।
हाल ही में ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान भी भारी जनसमूह ने सड़कों पर उतरकर अमेरिका और ट्रंप के खिलाफ इसी तरह की उग्र नारेबाजी की थी।
मनोवैज्ञानिक युद्ध और सैन्य तनाव चरम पर
रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेहरान के सार्वजनिक स्थल पर इस तरह के बिलबोर्ड का लगाया जाना केवल एक धमकी नहीं, बल्कि ईरान द्वारा अपने नागरिकों को लामबंद करने और अमेरिका को कड़ा संदेश देने का एक मनोवैज्ञानिक हथकंडा है। दोनों देशों के बीच जारी सैन्य हमलों के दौर में इस तरह के भड़काऊ प्रदर्शनों से कूटनीतिक स्तर पर बातचीत या शांति के रास्ते लगभग बंद होते दिख रहे हैं, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की विभीषिका और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
