बिहार-झारखण्ड
आरजेडी सरकार पर नीतीश का तंज – 15 साल में राज्य का खजाना लूटा, युवाओं को भूल गए
28 Oct, 2025 06:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने महागठबंधन के घोषणापत्र में किए वादों पर निशाना साधा. सीएम ने आरजेडी को निशाने पर लेते हुए कहा कि जब 15 साल तक राज्य में उनकी सरकार थी तो उन्होंने युवाओं के हित में कोई काम नहीं किया और राज्य के खजाने को लूटने में व्यस्त रहे. उन्होंने कहा कि आज कल कुछ लोग युवाओं को बरगलाने के लिए सरकारी नौकरी और रोजगार को लेकर भ्रामक घोषणाएं कर रहे.
एक्स पोस्ट में मुख्यमंत्री ने कहा, "मेरा अनुरोध है कि आप किसी भ्रम में नहीं रहें. हमारी सरकार ने जो आपके लिए काम किए हैं, उसे याद रखिए. आगे भी हमलोग ही काम करेंगे. हमलोग जो कहते हैं, वह पूरा करते हैं."
‘घी दाल में ही गिरता है’—महुआ में वोटरों की सोच ने बनाया मुकाबला दिलचस्प
27 Oct, 2025 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार विधानसभा चुनाव में महुआ निर्वाचन क्षेत्र में एक दिलचस्प बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। इस सीट पर मतदाताओं के बीच यह धारणा हावी है कि अगर वे तेज प्रताप यादव के पक्ष में मतदान करते हैं, तो भी इसका सीधा लाभ उनकी पसंदीदा पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को ही मिलेगा। राजद के कट्टर समर्थकों के बीच एक कहावत अक्सर सुनाई देती है: 'घी दाल में ही गिरता है।' उनका मानना है कि अगर वे लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और RJD से निष्कासित तेज प्रताप यादव को वोट देते हैं, तो भी यह वोट अंततः RJD को ही मजबूत करेगा, क्योंकि तेज प्रताप अंततः अपने पिता की पार्टी के साथ ही खड़े होंगे।
RJD के उम्मीदवार हैं मुकेश रौशन
इस सीट पर RJD के अधिकृत उम्मीदवार मौजूदा विधायक मुकेश रौशन हैं। वह लगातार मतदाताओं को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर वे तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं, तो वोट उन्हीं के पक्ष में जाना चाहिए। तेजस्वी यादव खुद समीपवर्ती राघोपुर सीट से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें 'इंडिया' गठबंधन का मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया गया है। महुआ में यादव मतदाताओं की अच्छी-खासी तादाद है, जो तेजस्वी के नाम पर उत्साहित दिखते हैं।
महुआ ने 2015 में तेज प्रताप को पहली बार विधायक चुना था, लेकिन 2020 में उन्हें समस्तीपुर जिले की हसनपुर सीट से उतारा गया था। उस समय ऐसी चर्चा थी कि लोकप्रियता में कमी के कारण महुआ उनके लिए 'असुरक्षित' हो गया था।
तेज प्रताप के बयान को गंभीरता से नहीं ले रह लोग
तेज प्रताप यादव और उनके पिता के बीच ताजा विवाद तब बढ़ा जब तेज प्रताप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए तलाक का मामला लंबित होने के बावजूद एक महिला से 12 साल से रिश्ते में होने का दावा किया। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असली नाराजगी तब बढ़ी थी जब तेज प्रताप ने महुआ लौटने की घोषणा की थी, जिससे तेजस्वी खेमे के वफादार रौशन फूट-फूट कर रो पड़े थे।
तेज प्रताप (37) अब अपनी नई पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ के बैनर तले चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने भले ही यह कहा था कि 'उस पार्टी (RJD) में लौटने से अच्छा मौत को चुनना' होगा, लेकिन महुआ में लोग उनके इस बयान को ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
तेज प्रताप ने विधायक रहते हुए क्षेत्र में काफी काम करने और लोगों के लिए अधिक सुलभ रहने का दावा किया है। वह अपने कार्यकाल में मंजूर हुए मेडिकल कॉलेज का श्रेय भी लेते हैं, हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह विशाल भवन अक्सर बंद रहता है और इसमें न फैकल्टी है और न ही अस्पताल में बिस्तर। तेज प्रताप ने वादा किया है कि जीतने पर वह 'अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम' बनवाएंगे, जहां भारत-पाकिस्तान मैच होगा।
यादव और मुस्लिम वोट में बिखराव की आशंका
महुआ में मुकाबला बहुकोणीय होने से तेज प्रताप की राह कठिन हो गई है। यादव वोट तेज प्रताप और मुकेश रौशन के बीच बंटने की संभावना है। वहीं मुस्लिम मतदाता भी तीनों प्रमुख उम्मीदवारों- तेज प्रताप, मुकेश रौशन और निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. अशमा परवीन के बीच बंट सकते हैं।
डॉ. अशमा परवीन (50) पेशे से चिकित्सक हैं और लालू प्रसाद की बेटी मीसा भारती की करीबी मानी जाती हैं। उनके पिता इलियास हुसैन RJD के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रहे हैं। परवीन ने 2020 में JDU के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए करीब 50 हजार वोट हासिल किए थे और दूसरे स्थान पर रही थीं।
लोजपा (रामविलास) के संजय सिंह 'छुपे रुस्तम'
सत्ताधारी NDA का प्रतिनिधित्व इस सीट पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) कर रही है। चिराग पासवान के संसदीय क्षेत्र का हिस्सा होने के बावजूद, लोजपा (रामविलास) के उम्मीदवार संजय सिंह ने पिछले चुनाव में जमानत गंवा दी थी। सिंह राजपूत वर्ग से आते हैं और ऊपरी जातियों के वोट पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में चार-कोणीय इस मुकाबले में वह 'छुपे रुस्तम' (डार्क हॉर्स) के रूप में उभर सकते हैं।
इस सीट से कुल 15 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जहां 2.95 लाख से अधिक मतदाता 6 नवंबर को पहले चरण के चुनाव में अपने मत का प्रयोग करेंगे।
बिहार चुनाव: प्रशांत किशोर बोले — 14 नवंबर को देश की राजनीति का नया अध्याय लिखा जाएगा
27 Oct, 2025 03:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीतामढ़ीः बिहार विधानसभा चुनाव की तिथि नजदीक आने के साथ ही विभिन्न दलों के प्रत्याशी और उनके नेता प्रचार में लग गए है। इस बीच, जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर भी सीतामढ़ी जिले के विभिन्न प्रखंडों में अपने प्रत्याशियों के पक्ष में रोड शो कर वोट मांग रहे है। बहरहाल, उनके बहाए जा रहे पसीने की यहां के वोटर कितना अहमियत देते है और उनके प्रत्याशी को कितना समर्थन मिलता है, यह 14 नवंबर को जब मतगणना होगी, तभी खुलासा होगा। वैसे किशोर को वोटरों पर समर्थन का भरोसा है।
बाहर से आए वोटरों पर अधिक भरोसा
प्रशांत किशोर को अन्य वोटरों के आलावा बाहर से छठ पर्व में घर पर पहुंचे मजदूर वोटरों पर कुछ ज्यादा ही भरोसा है। रोड शो में भीड़ को देख प्रसन्न किशोर ने कहा कि यह भीड़ और जनसमर्थन उन्हें नहीं मिल रहा है, बल्कि बाहर से आए लोग/मजदूर फिर बाहर नहीं जाना चाहते है। ऐसे लोग बिहार में ही रोजगार चाहते है। रुन्नीसैदपुर प्रखंड मुख्यालय में पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में रोड शो के दौरान किशोर ने उक्त बातें कहीं।
देखिए कि हवा का रुख किधर है
उन्होंने कहा कि रून्नीसैदपुर आने के क्रम में एक पार्टी का चुनाव कैंप दिखा, जहां पांच लोग भी नहीं थे और उनके साथ इतने लोग है। इसे से देखिए कि हवा का रुख किधर है। कहा,14 नवंबर को देश की राजनीति के नया अध्याय लिखा जायेगा। बाहर में जिस बिहारी को लोग गाली देते है, 14 के बाद उसी बिहारी को देख लोग कहेंगे कि यह क्या हुआ ? बिहार में जनता की सरकार बनने जा रही है।
बिहार में बदलाव का संकल्प
इस बार लोग चाहते है कि बिहार में बदलाव होना ही चाहिए। लोग बदलाव का संकल्प ले चुके है। किशोर ने लोगों से पूछा कि बिहार में बदलाव होना चाहिए या नहीं ? लोगों का जवाब "हां" में सुनकर किशोर खुश दिखे। भ्रष्टाचारियों के हटाने की बात पर भी लोगों ने हां में जवाब दिया।
बिहार चुनाव में कांग्रेस की एंट्री तेज़, राहुल गांधी 29 अक्टूबर को करेंगे पहली रैली
27 Oct, 2025 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अब पूरे जोश के साथ उत्तरने जा रही है। राहुल गांधी 29 अक्टूबर को बिहार में अपनी पहली चुनावी रैली करेंगे, जबकि प्रियंका गांधी भी वायनाड के दो दिवसीय दौरे के बाद वापस लौटकर जल्द प्रचार अभियान में उतरेंगी। कांग्रेस की योजना के मुताबिक, राहुल गांधी कुल 12 और प्रियंका गांधी 10 रैलियां करेंगी।
28 अक्टूबर को महागठबंधन अपना घोषणापत्र जारी करेगा
इससे ठीक एक दिन पहले, यानी 28 अक्टूबर को महागठबंधन अपना घोषणापत्र जारी करेगा। घोषणापत्र जारी होने के बाद राहुल गांधी की पहली सभा से महागठबंधन के प्रचार अभियान को औपचारिक रूप से गति मिलेगी। कांग्रेस ने पहले चरण के प्रचार अभियान के लिए अपने 40 स्टार कैंपेनर मैदान में उतारे है। इनमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत, केसी वेणुगोपाल, भूपेश बघेल समेत कई दिग्गज शामिल है।
टिकट बंटवारे के असंतोष को शांत करने में जुटा आलाकमान
टिकट वितरण को लेकर पार्टी में जो असंतोष उभरा था. उसे शांत करने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने खुद मोर्चा संभाला है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार चुनाव पर्यवेक्षक अशोक गहलोत, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और चुनाव स्क्रीनिंग कमेटी प्रमुख अजय माकन शनिवार देर शाम पटना पहुंचे और लगातार बैठकों में स्थिति का जायजा लिया। कई स्थानीय नेताओं ने टिकट बंटवारे में मनमानी और कार्यकर्ताओं की अनदेखी के आरोप लगाए थे।
खास रणनीति पर काम कर रही पार्टी
कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि छठ पूजा के बाद राहुल और प्रियंका की सभाओं से पहले संगठन मे एकजुटता का संदेश जाए, ताकि पार्टी पूरी मजबूती के साथ उतर सके। राहुल ने इससे पहले बिहार में वोटर अधिकार यात्रा निकाली थी, जो 110 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरी थी। पार्टी अब उसी जनसंपर्क मोमेटम को चुनावी ऊर्जा में बदलने की रणनीति पर काम कर रही है।
झामुमो ने महिला मतदाताओं को लुभाने की बढ़ाई कोशिशें, बीजेपी ने कसा सियासी जाल
27 Oct, 2025 12:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
घाटशिला उपचुनाव के प्रचार अभियान में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ऑल-वूमन टीम और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज स्टार प्रचारकों के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। झामुमो की इस महिला टीम का नेतृत्व दिवंगत झारखंड मंत्री रामदास सोरेन की पत्नी सुरजमणि सोरेन कर रही हैं।
झामुमो की महिला टीम में लोकसभा सांसद जोबा मांझी, राज्यसभा सांसद महोआ मांझी, इचागढ़ विधायक सबीता महतो, पूर्व जमशेदपुर सांसद सुमन महतो, पूर्वी सिंहभूम की पार्षद बारी मुर्मू, और ओडिशा झामुमो महिला मोर्चा की अध्यक्ष व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बहन अंजलि सोरेन शामिल हैं। यह टीम रामदास सोरेन की मौत से उपजे भावनात्मक माहौल को खासकर महिला मतदाताओं के बीच साधने में जुटी है।
58 वर्षीय सुरजमणि सोरेन ने एक सभा में कहा मुझे राजनीति की समझ नहीं है। यह मेरे लिए नया है। मैं बस इतना कहना चाहूंगी कि मेरे पति (रामदास सोरेन) ने अपनी सेहत की परवाह किए बिना आपकी सेवा में जीवन बलिदान कर दिया। अब मैं अपने बेटे (सोमेश चंद्र सोरेन) को उनके अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए आपके हवाले कर रही हूं। हमारा दरवाज़ा पहले भी आपके लिए खुला था और आगे भी खुला रहेगा। रामदास सोरेन पिछले एक साल से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे और दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज करा रहे थे। गिरने से उनके सिर में चोट लगी और ब्रेन हेमरेज हो गया। उनका निधन 15 अगस्त को हुआ, जिसके बाद घाटशिला सीट पर 11 नवंबर को उपचुनाव कराया जा रहा है।
यहां महिला मतदाता ज्यादा
स्थानीय झामुमो नेता जगदीश भगत ने बताया सुरजमणि ‘बौदी’ पहले कभी राजनीति में सामने नहीं आईं। लेकिन इस बार उन्होंने अपने पति की स्मृति में बेटे के लिए प्रचार का जिम्मा लिया है। उनका सीधा-सादा संदेश लोगों, खासकर महिलाओं, को खूब प्रभावित कर रहा है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में महिला मतदाता पुरुषों से लगभग 5 प्रतिशत अधिक हैं। कुल 2,56,252 मतदाताओं में से 1,31,180 महिलाएं और 1,25,078 पुरुष हैं।
बाबूलाल सोरेन के समर्थन में दिग्गज उतरे
वहीं दूसरी ओर भाजपा अपने उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन के समर्थन में सितारों की फौज उतार रही है। पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कई बड़े नेताओं के साथ-साथ कई केंद्रीय मंत्री भी प्रचार की कमान संभालने वाले हैं। भाजपा उम्मीदवार के सोशल मीडिया प्रभारी सुधीर कुमार ने बताया कि पार्टी के कई दिग्गज नेताओं के रोड शो और रैलियों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इनमें अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुवेंदु अधिकारी, टॉलीवुड अभिनेत्री लॉकेट चटर्जी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी जैसे नाम शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि पार्टी को अन्य केंद्रीय मंत्रियों, जिनमें पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुकांत मजूमदार भी शामिल हैं, से भी सहमति मिलने की उम्मीद है। पूर्व झारखंड मुख्यमंत्री और विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी, पूर्व सीएम चंपई सोरेन और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू मिलकर भाजपा उम्मीदवार के लिए बूथ स्तर पर रणनीति बना रहे हैं। सुधीर कुमार ने कहा कि फिलहाल हम अपने बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर रहे हैं। छठ पर्व के बाद नवंबर के पहले सप्ताह से पार्टी के बड़े नेता रैलियां करेंगे और राज्य सरकार की नाकामियों को जनता के सामने रखेंगे।
छठ महापर्व पर राजधानी पटना में विशेष व्यवस्था, ट्रैफिक प्लान में किए गए बड़े बदलाव
27 Oct, 2025 12:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना में छठ को लेकर सारी तैयारी पूरी हो चुकी है। पूरा पटना भक्तिमय माहौल में डूब चुका है। हर गली में छठी मैय्या की गीतों की धुन गूंज रही है। श्रद्धालु सुबह से ही छठ का महाप्रसाद बनाने में जुट गए। पटना की सड़कों को धोया जा रहा है। पटना सिटी से लेकर दानापुर तक 109 छठ घाट बनाए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से कलेक्ट्रेट घाट, महेंद्रु घाट, दीघा घाट, जेपी सेतु घाट, दीघा पाटलिपुल घाट, मीनार घाट और गाय घाट पर काफी भीड़ उमड़ने वाली है। पटना में दानापुर से दीदारगंज तक 30 किमी हिस्से में गंगा घाटों पर 25 लाख से अधिक श्रद्धालु भगवान सूर्य नारायण को अर्घ्य देंगे। इसकी तैयारी जिला प्रशासन ने पूरी कर ली है। घाटों पर महिला व्रतियों के लिए चेंजिंग रूम, सुरक्षा को लेकर वाच टावर, शौचालय, पीने के पानी, मेडिकल कैंप, भीड़ नियंत्रण के लिए जगह-जगह माइक, नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था की गई है। पार्किंग से गंगा घाटों की दूरी 200 से 500 मीटर है।
पटना डीएम ने की यह अपील
पटना के जिलाधिकारी त्याग राजन और वरीय आरक्षी अधीक्षक कार्तिकेय शर्मा लगातार छठ घाटों पर भ्रमण करके सभी स्थिति का जायजा ले रहे हैं। पटना डीएम ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी हाल में छह खतरनाक घाटों (राजापुर पुल घाट, बांस घाट, पहलवान घाट, कंटाही घाट, बुद्धा घाट, नया पंचमुखी चौराहा) पर नहीं जाएं। अधिक गहराई में जाने से बचें। खतरे के निशान को पर नहीं करें। अफवाहों पर ध्यान नहीं दें।
400 चेंजिंग रूम, 171 वॉच टावर, 552 अस्थायी शौचालय बनाए गए
घाटों पर अस्थायी अस्पताल, डॉक्टरों की टीम, एबुंलेंस तैनात किए गए हैं। इसके अलावा 21 बड़े निजी अस्पतालों को भी अलर्ट किया गया है। डॉक्टरों की इमरजेंसी ड्यूटी भी लगाई गई है। किसी भी तरह की चिकित्सकीय आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने सारी तैयारी पूरी कर ली है। जिला नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे एक्टिव रखा गया है। इसके अलावा कुल 400 चेंजिंग रूम, 171 वॉच टावर, 552 अस्थायी शौचालय बनाए गए हैं। 400 से अधिक एनडीआरएफ और एसडीआरएफ कर्मी तैनात किए गए हैं। 444 गोताखोर और 323 नावों को हमेशा तैयार रखने का निर्देश दिया गया है। करीब 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी की जा रही है।
पटना के ट्रैफिक रूट में किया गया बदलाव
छठ व्रतियों और श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से ट्रैफिक रूप में बदलाव किया गया है। सोमवार दोपहर 12 बजे से शाम सात बजे तक और मंगलवार सुबह आठ बजे तक कई रूट पर वाहन नहीं चलेंगे। दीदारगंज से लेकर कारगिल चौक तक वाहनों के परिचालन पर रोक है। कारगिल चौक से पश्चिम शाहपुर तक छठ व्रतियों के सभी प्रकार के वाहनों का परिचालन होगा। अशोक राजपथ पर सभी इंट्री प्वाइंट बंद रहेंगे। वहीं अटल पथ से जेपी सेतु सोनपुर की ओर से सभी प्रकार के वाहनों का परिचालन बंद रहेगा। इसके अलावा जेपी सेतु से उतरने वाले वाहनों को गंगा पथ पर नीचे नहीं आने दिया जाएगा। लोगों से गांधी सेतु का प्रयोग करने की अपील की गई है। रामजीचक आरओबी के ऊपर से केवल छठ व्रती वाहनों को जेपी सेतु तक जाने की अनुमति होगी। वहीं मोकामा से आने वाले भारी वाहन फतुहा से बिहटा-सरमेरा पथ के मार्ग से डायवर्ट किए जाएंगे। बिहार की ओर से आने वाले ट्रक कन्हौली मोड़ से बायपास की ओर जाएंगे।
मौसम विभाग का अलर्ट: झारखंड में छठ पूजा के दौरान बरस सकते हैं बादल
27 Oct, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में छठ पूजा को लेकर चारों तरफ गजब की रौनक देखने को मिल रही है. खरना के बाद अब संध्या अर्घ्य के लिए लोग तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में रांची मौसम केंद्र के मुताबिक आज कुछ जिलों में बूंदाबांदी हो सकती है. कहीं-कहीं तो आंशिक बादल छाए रहेंगे तो कहीं पर गरज व वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. ऐसे में घाट पर जानें से पहले एक बार मौसम का अपडेट जरूर देख लें.
जानें आज संध्या अर्घ्य पर कैसा रहेगा मौसम
रांची मौसम विभाग के अनुसार आज संथाल परगना के जिलों को छोड़कर अन्य जिलो जैसे गुमला, सिमडेगा, पलामू, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा में दिन भर आंशिक बादल छाए रहेंगे. वहीं, कुछ जिलों में बूंदबंदी भी हो सकती है. इसके अलावा अन्य जिलों की बात की जाए, तो दिन भर मौसम शुष्क रहेगा.
6 डिग्री तक घटेगा तापमान
रांची मौसम केंद्र के मुताबिक 29 अक्टूबर से एकाएक ठंड का अटैक पड़ेगा. अधिकतम और न्यूनतम तापमान में एक साथ गिरावट देखने को मिल सकती है. अभी तक जहां अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री तक जा रहा है. यह आपको 28 डिग्री के आसपास देखने को मिलेगा व न्यूनतम तापमान 15 से 16 डिग्री तक पहुंच जाएगा, जो अभी 23 डिग्री के आसपास है.
लातेहार में बारिश से बढ़ी ठंड
वहीं, पिछले 24 घंटे में सबसे अधिक वर्षा 5.5 मिमी बारिश लातेहार में दर्ज की गई. यहां पर गर्जन भी देखी गई. जिस वजह से लोग काफी सतर्क हो गए हैं. वहीं, आज भी यहां पर बारिश होने की प्रबल संभावना है. आज सबसे कम तापमान लातेहार में 19.2 डिग्री दर्ज किया गया है.
सिमुलतला आवासीय जमुई की परीक्षा 31 अक्टूबर को
26 Oct, 2025 05:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मधुबनी। आगामी 31 अक्टूबर को सिमुलतला आवासीय विद्यालय जमुई में नामांकन प्रवेश परीक्षा 2026 के लिए आयोजित प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी को लेकर समीक्षा बैठक का आयोजन शनिवार को अनुमंडल पदाधिकारी के कार्यालय प्रकोष्ठ में आयोजित की गई। बैठक में सदर एसडीओ चंदन कुमार झा ने सभी प्रतिनियुक्त गश्ति दंडाधिकारी, स्टैटिक दंडाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी को जिला स्तर से निर्गत दिशा निर्देश से अवगत कराया। एसडीओ ने कदाचार मुक्त परीक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। विदित हो कि 31अक्टूबर को जिला के एक मात्र परीक्षा केंद्र वाटसन उच्च विद्यालय में सिमुलतला आवासीय विद्यालय जमुई में नामांकन के लिए प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित होना है।
मधुबनी जिला के सभी 10 विधानसभा क्षेत्र में कुल 100 प्रत्याशी चुनावी मैदान में
26 Oct, 2025 04:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मधुबनी। मधुबनी जिला के 10 विधानसभा क्षेत्र में नाम वापसी के बाद कुल 100 प्रत्याशी चुनावी मैदान में रह गए हैं। दसो विधानसभा क्षेत्र में कुल 129 अभ्यर्थियों ने नामांकन का पर्चा दाखिल किया था। इनमें 24 अभ्यर्थियों का नामांकन रद्द हो गया। 5 अभ्यर्थी ने नामांकन वापस ले लिया। सबसे अधिक मधुबनी विधानसभा क्षेत्र में 21 अभ्यर्थियों ने नामांकन पत्र दाखिल किया था। इनमें 11 अभ्यर्थियों का नामांकन संवीक्षा में रद्द किया गया। एक अभ्यर्थी ने नाम वापस लिया। अभी 9 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। हरलाखी विधानसभा क्षेत्र में 17 अभ्यर्थी ने नामांकन का पर्चा दाखिल किया था। 7 अभ्यर्थी का नामांकन रद्द हुआ। 10 प्रत्याशी चुनावी मैदान में है। बेनीपट्टी विधानसभा में 11 प्रत्याशी ने नामांकन पत्र दाखिल किया। 11 प्रत्याशी चुनाव में खड़े हैं। यहां किसी अभ्यर्थी का नामांकन रद्द नही हुआ। खजौली विधानसभा क्षेत्र में 10 अभ्यर्थी ने नामांकन का पर्चा दाखिल किया। दो अभ्यर्थी का नामांकन रद्द हुआ। 8 प्रत्याशी चुनावी समर में हैं। बाबूबरही विधानसभा क्षेत्र में 12 अभ्यर्थी ने नामांकन का पर्चा भरा। एक अभ्यर्थी का नामांकन रद्द हुआ। 11 अभ्यर्थी चुनावी मैदान में हैं। बिस्फी विधानसभा क्षेत्र में 12 अभ्यर्थियों ने नामांकन का पर्चा दाखिल किया। दो अभ्यर्थियों का नामांकन का पर्चा रद्द हुआ। दो अभ्यर्थियों ने नाम वापसी लिया। कुल 8 प्रत्याशी चुनावी मैदान में है। राजनगर सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से 9 अभ्यर्थियों ने नामांकन का पर्चा किया। दो अभ्यर्थियों का नामांकन रद्द हुआ। 7 प्रत्याशी चुनावी मैदान में है। झंझारपुर विधानसभा क्षेत्र में 13 अभ्यर्थियों ने नामांकन का पर्चा भरा। एक भी अभ्यर्थी का नामांकन पर्चा रद्द नहीं हुआ। 13 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। फुलपरास विधानसभा क्षेत्र से 10 अभ्यर्थियों ने नामांकन का पर्चा दाखिल किया। एक भी अभ्यर्थी का नामांकन रद्द नहीं हुआ कुल 10 अभ्यर्थी चुनावी मैदान में हैं। लौकहा विधानसभा क्षेत्र से 14 अभ्यर्थी ने नामांकन का पर्चा दाख़िल किया। एक अभ्यर्थी ने नाम वापसी लिया। कुल 13 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। इस प्रकार जिला में सभी 10 विधानसभा क्षेत्र में 100 प्रत्याशी चुनावी समर में है। सबसे अधिक झंझारपुर विधानसभा क्षेत्र एवं लौकहा विधानसभा क्षेत्र में कुल 13-13 प्रत्याशी चुनावी मैदान में है। जबकि सबसे कम राजनगर सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र में 7 प्रत्याशी चुनावी समर में है।
कांग्रेस-राजद ने हमेशा अति पिछड़ा वर्ग को ठगा, नीतीश कुमार ने दिया सम्मान और अधिकार- जद(यू)
26 Oct, 2025 03:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता अंजुम आरा एवं मीडिया पैनलिस्ट किशोर कुणाल ने मीडिया में जारी बयान में कहा कि कांग्रेस और राजद ने हमेशा से अति पिछड़ा समुदाय को ठगने का काम किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सच्चे अर्थों में अति पिछड़ा समुदाय को अधिकार एवं सम्मान देने का काम किया है। यह वही राजद है, जिसने 15 वर्षों के शासन में न तो अति पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया और न ही उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाया। यही कांग्रेस पार्टी है, जिसने अपने दशकों के शासनकाल में अति पिछड़ों की उपेक्षा की, काका कालेलकर आयोग की सिफारिशों को ठुकराया और आरक्षण व्यवस्था को लगातार कमजोर किया। आज जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अति पिछड़ा वर्ग विभाग और आयोग बनाकर मजबूत रोडमैप तैयार कर दिया है, तब चुनावी मौसम देखकर विपक्ष दिखावटी घोषणाओं का सहारा ले रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सत्ता में आते ही अति पिछड़ा वर्ग आयोग और विभाग का गठन किया, पंचायत और नगर निकाय चुनावों में 20ः आरक्षण लागू किया, न्यायिक सेवाओं तक में आरक्षण सुनिश्चित कराया और जिलों में जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास की स्थापना कर छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा व छात्रवृत्ति का प्रावधान किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकार द्वारा पंचायतों एवं नगर निकायों में दिए गए आरक्षण के चलते बिहार से नक्सल आंदोलन को खत्म करने में सफलता मिली। जिन हाथों में कभी हथियार हुआ करते थे उन हाथों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिए अधिकारों के चलते हथियार की जगह कलम ने ले ली।
अति पिछड़ा समुदाय के शैक्षणिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने अनेक क्रांतिकारी योजनाएँ लागू कीं। ‘‘मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना’’ के तहत लाखों बच्चों को प्रतिवर्ष आर्थिक सहायता दी जा रही है, जबकि ‘‘मुख्यमंत्री अत्यंत पिछड़ा वर्ग मेधावृत्ति योजना’’ से अब तक लाखों छात्र-छात्राएँ लाभान्वित हो चुके हैं। इसी तरह ‘‘अन्य पिछड़ा वर्ग प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना’’, ‘‘परीक्षा शुल्क प्रतिपूर्ति’’ और ‘‘अक्षर आंचल योजना’’ के माध्यम से शिक्षा को सभी वर्गों की पहुँच में लाया गया है।
राजद पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव ने जननायक कर्पूरी ठाकुर द्वारा लागू अति पिछड़ों के आरक्षण को खत्म करने की कोशिश की थी। लेकिन उस समय जनता दल के नेता नीतीश कुमार ने इसका डटकर विरोध किया और कर्पूरी ठाकुर के आरक्षण फार्मूले को कायम रखने की मांग की। नीतीश कुमार के दृढ़ रुख के कारण ही लालू प्रसाद यादव अपनी मंशा पूरी नहीं कर पाए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी नेता ने वास्तव में कर्पूरी ठाकुर के सपनों को साकार किया है, तो वे हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। पंचायती राज और नगर निकाय संस्थाओं में अति पिछड़ों, दलितों और सभी वर्गों की महिलाओं को आरक्षण देकर उन्होंने सामाजिक न्याय को धरातल पर उतारा। साथ ही शराबबंदी जैसे सामाजिक आंदोलन से समाज को नई दिशा दी।
खुद को अकेला महसूस कर रहे कांग्रेस उम्मीदवार, राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार से बनाई दूरी
26 Oct, 2025 02:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे कांग्रेस खेमे में यह सवाल गूंज रहा है कि विपक्ष के प्रमुख नेता राहुल गांधी चुनावी रणभूमि से दूरी क्यों बनाए हुए हैं। राहुल गांधी ने आखिरी बार 1 सितंबर को पटना में अपनी ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ के समापन के दौरान बिहार का दौरा किया था। यह यात्रा 15 दिनों में 1,300 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 20 जिलों तक पहुंची थी। इसके बाद से वे बिहार में नजर नहीं आए। दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव इस बीच दिल्ली पहुंचे और सूत्रों के अनुसार, उन्होंने वहां मुख्यमंत्री पद के लिए अपने नाम की घोषणा की मांग की।
कांग्रेस के कई प्रत्याशियों ने पार्टी नेतृत्व और राहुल गांधी के कार्यालय से अपने क्षेत्रों में प्रचार के लिए उनके आगमन की मांग की है। सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति से स्थानीय कार्यकर्ताओं में भ्रम और निराशा का माहौल है। हालांकि, पार्टी के आंतरिक सूत्रों का दावा है कि महागठबंधन के भीतर ज्यादातर मुद्दों का समाधान हो चुका है और राहुल गांधी अगले सप्ताह से बिहार में चुनावी प्रचार शुरू कर सकते हैं।महागठबंधन में तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की मांग ने शुरू में कांग्रेस को असमंजस में डाल दिया था। कांग्रेस को आशंका थी कि तेजस्वी यादव के खिलाफ हाल ही में एक नए मामले में आरोपपत्र दाखिल होने के कारण उनके नाम की घोषणा से गठबंधन और पार्टी की छवि को नुकसान हो सकता है।
इस मसले को सुलझाने के लिए कांग्रेस ने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को बिहार भेजा। पटना में गहलोत ने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की और इसके बाद एक संवाददाता सम्मेलन में तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया।‘इंडिया’ गठबंधन ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है, जबकि निषाद समुदाय के नेता और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के अध्यक्ष मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री पद का वादा किया गया है। अशोक गहलोत ने घोषणा के दौरान कहा कि अन्य सामाजिक और धार्मिक समूहों से भी अतिरिक्त उपमुख्यमंत्री बनाए जाएंगे। हालांकि, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नेताओं ने आरोप लगाया है कि बिहार की 17 प्रतिशत मुस्लिम आबादी के बावजूद विपक्ष ने इस समुदाय की उपेक्षा की है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और प्रत्याशियों को उम्मीद है कि राहुल गांधी के प्रचार में उतरने से महागठबंधन को मजबूती मिलेगी। दूसरी ओर, तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आरजेडी पहले से ही आक्रामक प्रचार में जुटी है। बिहार की जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या राहुल गांधी का प्रचार अभियान गठबंधन की संभावनाओं को नई दिशा देगा।
अमित शाह बोले—यह चुनाव किसी को मुख्यमंत्री बनाने का नहीं, बिहार को बचाने का है
25 Oct, 2025 06:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार (25 अक्टूबर, 2025) को मुंगेर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार का यह चुनाव किसी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए नहीं है, बल्कि यह चुनाव बिहार को लालू यादव और राबड़ी देवी के जंगलराज से बचाने का चुनाव है. लालू और राबड़ी ने बिहार में दशकों तक जंगलराज चलाया था. 2005 में बिहार की जनता ने लालू और राबड़ी के जंगलराज को उखाड़ फेका था और नीतीश कुमार को चुना था. उन्होंने आगे कहा, 'अगर लालू और राबड़ी दोबारा आए तो फिर से जंगलराज आएगा और मोदी जी और नीतीश जी आए तो बिहार में विकास होगा. NDA के हम सभी पांचों दल पंच पांडवों की तरह साथ हैं और वहां महागठबंधन आपस में ही लड़ रहे हैं.'
NDA ने बिहार को नक्सलवाद से कराया मुक्त
गृह मंत्री ने RJD पर आरोप लगाते हुए कहा, 'लालू-राबड़ी के शासन में हत्या, डकैती, फिरौती, अपहरण, नरसंहार रोज की बात थी. इनके शासन में बिहार से इंडस्ट्री चली गई और बिहार को पिछड़ा बिहार बनाने का काम किया. वहीं नीतीश बाबू के नेतृत्व में NDA ने जंगलराज से मुक्ति दिलाई, परिवारवाद को समाप्त किया और सबसे बड़ी बात ये है कि हमने बिहार को नक्सलवाद से मुक्त करने का काम किया.' उन्होंने कहा, 'मोदी जी ने अयोध्या में प्रभु राम जी का भव्य मंदिर बनवाया, हम सीतामढ़ी में भी माता सीता मां का भव्य मंदिर बनवा रहे हैं, लेकिन यह लालू और कांग्रेस पार्टी हमेशा से भगवान राम का विरोध करते रहे हैं.'
अमित शाह का विपक्षी पार्टियों पर हमला
अमित शाह ने कहा, '550 साल से रामलला टेंट में रह रहे थे. कांग्रेस, सपा, बसपा, ममता, लालू, सबने इकट्ठा होकर मंदिर का विरोध किया. बिहार वालों, 2019 में आपने नरेंद्र मोदी जी को फिर से प्रधानमंत्री बनाया. मोदी जी ने अयोध्या में भूमिपूजन भी किया और प्राण प्रतिष्ठा करके जय श्रीराम कर दिया. अयोध्या में तो राम मंदिर बना ही बना, अब यहां सीतामढ़ी में भी 850 करोड़ के खर्च से मां सीता का भी भव्य मंदिर बन रहा है.'
रवि किशन बोले – भोजपुरी इंडस्ट्री को बदनाम करने वालों को जनता सजा देगी
25 Oct, 2025 06:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार चुनाव के बीच भोजपुरी के दो अभिनेता आमने सामने आ गए हैं. गोरखपुर से बीजेपी सांसद व अभिनेता रवि किशन ने छपरा से आरजेडी प्रत्याशी और एक्टर खेसारी लाल यादव पर जोरदार हमला किया और उनका नाम लिए बिना निशाना साधते हुए कहा कि इन लोगों ने भोजपुरी को बेच दिया. उनसे पूछना चाहिए कि आज भोजपुरी सिनेमा का ये हाल किसने किया. बीजेपी सांसद रवि किशन ने कहा कि "भोजपुरी सिनेमा में सनातन का नाम लेकर भोजपुरी सिनेमा में सब कुछ किया कमाया खाया.. आज भोजपुरी इंडस्ट्री बंद हो गया है. भोजपुरी इंडस्ट्री को जो हम राष्ट्रीय पुरस्कार दिलवा कर चले थे, इन लोगों को मशाल दिए और हम वहां सदन में गए, हम सदन में क्या चले गए इन लोगों ने भोजपुरी इंडस्ट्री को बेच दिया.
इन लोगों से पूछना चाहिए कि भोजपुरी इंडस्ट्री बंद क्यों हो गई. क्यों काम बंद हो गया? जहां मेरी फिल्में उसी छपरा और पूरे बिहार में सिल्वर जुबली करती थी. वहां आज एक दर्शक नहीं है. उसका कारण कौन है. किसने भोजपुरी को बदनाम किया, किसने भोजपुरी की ये हालत की? आज वो लोग जवाब दें, कि वे इंडस्ट्री पर ताला लगाकर कहीं और कुछ उम्मीदें देंगे. एक झूठ पर जहां पर जंगलराज था, उस दल के साथ जहां सनातन विरोधी आवाजें निकलने लगी हैं. राम मंदिर के ख़िलाफ़ आप लोग आवाज़ निकाल रहे थे, मां जानकी का जो मंदिर बनने जा रहा है उसके विरोध में आप लोगों की आवाजें निकल रही हैं.
इससे ये पता चलता है कि आपकी विचारधारा क्या है? और जनता जान रही है कि इन लोगों की ज़मानत आप जब्त कर देना. जो भी सनातन विरोधी बात कर रहा है. जो भी मां बहन की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहा है. हमारे सनातन, हमारे इतिहास को जड़ों को उखाड़कर फेंकना चाहता है उन लोगों को आप पनपने न दें." रवि किशन ने कहा कि जितने भी एनडीए के विरोध हैं जो हमारी आस्था को चोट पहुंचाते हैं उन्हें जनता माफ नहीं करेगी. इन सभी की ज़मानत जब्त हो जाएगी. बीजेपी सांसद खेसारी लाल यादव के आरजेडी खेमे में जाने से नाराज दिखें, उन्होंने कहा कि ये पहले किसके साथ थे और किसके लिए प्रचार किया ये सब जानते हैं लेकिन स्वार्थ के लिए अपने विचार बदल लिए हैं. बता दें कि इससे पहले बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने भी राजद प्रत्याशी खेसारी लाल यादव को नचनिया कहा था, जिसके बाद दोनों के बीच तीखी जुबानी जंग भी देखने को मिली थी.
बाढ़ पीड़ितों को मदद देने पर पप्पू यादव पर आयकर विभाग की कार्रवाई
25 Oct, 2025 01:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैशाली। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता और पूर्णिया से लोकसभा सांसद पप्पू यादव को आयकर विभाग ने नोटिस थमा दिया है. उनका कहना है कि यह नोटिस बाढ़ पीड़ितों को पैसे बांटने की वजह से दिया गया है. नोटिस मिलने के बाद पप्पू यादव ने मीडिया से बातचीत की और कहा कि अगर बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए पैसे बांटना अपराध है, तो मैं हमेशा यह अपराध करता रहूंगा.पप्पू यादव ने नोटिस मिलने की पुष्टि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की. उन्होंने लिखा, ‘मुझे इनकम टैक्स का नोटिस मिला है, बाढ़ पीड़ितों की मदद में रु बांटने को अपराध बताया है. यह अपराध है तो मैं हर वंचित पीड़ित की सहायता का अपराध सदैव करता रहूंगा.’ सांसद ने आगे लिखा, ‘वैशाली जिले के नयागांव पूर्वी पंचायत अंतर्गत मनियारी गांव के बाढ़ पीड़ितों जिनका घर-द्वार सब गंगाजी में विलीन हो गया, उनका मदद न करता तो क्या गृह राज्य मंत्री, स्थानीय MP जैसे स्वघोषित CM उम्मीदवारों की तरह मूकदर्शक बना रहता?’
आचार संहिता उल्लंघन का भी मामला हुआ था दर्ज
दरअसल, पप्पू यादव पिछले दिनों वैशाली जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे थे, यहां उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों को 3000-4000 रुपये वितरित किए थे, जिसका वीडियो भी सामने आया था. बताया जाता है कि पप्पू यादव ने करीब 5 लाख रुपये बाढ़ प्रभावितों को वितरित किए थे. इस मामले को लेकर सियासत गरमाने पर पप्पू यादव के खिलाफ आचार संहित उल्लंघन का मामला भी दर्ज किया गया था. बता दें कि बिहार में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होना है. पहले चरण में 6 नवंबर को वोटिंग होगी, जबकि दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होगा और नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे.
सूर्योपासना का महापर्व आरंभ, नहाय-खाय से घर-घर में छठ की तैयारी शुरू
25 Oct, 2025 12:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। भारत के सबसे पवित्र और अनूठे त्योहारों में से एक छठ पूजा आज से नहाय-खाय के साथ शुरू हो चुका है. यह चार दिन का महापर्व बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. सूर्य देव और छठी मइया की पूजा का यह पर्व प्रकृति, परिवार और आत्म-शुद्धि से गहरा जुड़ाव रखता है. आइए, इस खास पर्व की कहानी, इसके अनुष्ठान और महत्व को आसान भाषा में विस्तार से जानते हैं.
नहाय-खाय: शुद्धि और शुरुआत का दिन
छठ पूजा का पहला दिन नहाय-खाय कहलाता है. इस दिन व्रती सुबह जल्दी उठकर नदी या तालाब में स्नान करते हैं और घर की साफ-सफाई भी करते हैं. नए या साफ कपड़े पहनकर व्रती और उनके परिवारजन सात्विक भोजन बनाते हैं. इस भोजन में चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी शामिल होती है, जिसे बिना लहसुन-प्याज और कम मसालों के साथ तैयार किया जाता है. यह भोजन मिट्टी या तांबे के बर्तनों में पकाया जाता है ताकि पवित्रता बनी रहे. नहाय-खाय का मतलब है शरीर और मन को शुद्ध करके इस पवित्र व्रत की शुरुआत करना. यह दिन व्रती को अगले तीन दिनों के कठिन अनुष्ठानों के लिए तैयार करता है.
आस्था और इतिहास का संगम
छठ पूजा की जड़ें प्राचीन काल से जुड़ी हैं. कई लोग मानते हैं कि यह पर्व रामायण काल से शुरू हुआ, जब भगवान राम और माता सीता ने अयोध्या लौटने पर सूर्य देव की पूजा की थी. एक अन्य कहानी महाभारत से जुड़ी है, जिसमें द्रौपदी ने पांडवों के कष्ट दूर करने के लिए छठ व्रत रखा था. इसके अलावा, छठी मइया की कहानी भी खास है. मान्यता है कि छठी मइया बच्चों की रक्षा करती हैं और परिवार को सुख-समृद्धि देती हैं. एक लोककथा के अनुसार, एक नि:संतान दंपति ने छठी मइया की पूजा की और उन्हें संतान प्राप्त हुई. इसीलिए यह पर्व संतान की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए भी खास माना जाता है. छठ पूजा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि पर्यावरण से भी जुड़ा है. नदियों और तालाबों में अर्घ्य देने की परंपरा प्रकृति के प्रति सम्मान दर्शाती है. यह दुनिया का इकलौता पर्व है जिसमें डूबते और उगते दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जो जीवन के हर पहलू को स्वीकार करने का संदेश देता है.
संयम और प्रसाद का दिन खरना
दूसरे दिन, यानी 26 अक्टूबर को खरना मनाया जाता है. इस दिन व्रती पूरे दिन बिना पानी और भोजन के उपवास रखते हैं. सूर्यास्त के बाद छठी मइया की पूजा की जाती है और गुड़ की खीर, रोटी और फल प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाते हैं. यह प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनाया जाता है. पूजा के बाद व्रती और परिवारजन प्रसाद खाते हैं और इसके बाद 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू होता है. खरना का दिन संयम, धैर्य और भक्ति का प्रतीक है.
डूबते सूर्य का अर्घ्य
तीसरे दिन, 27 अक्टूबर को व्रती नदी या तालाब के किनारे जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं. इस दौरान बांस की टोकरी में ठेकुआ, फल और अन्य प्रसाद सजाए जाते हैं. व्रती पानी में खड़े होकर सूर्य को दूध और जल अर्पित करते हैं. यह दृश्य बड़ा ही मनमोहक होता है, जब हजारों लोग एक साथ नदी किनारे सूर्य की आराधना करते हैं. यह दिन प्रकृति और सूर्य की शक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का है.
उगते सूर्य का अर्घ्य
चौथे और अंतिम दिन, 28 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. सुबह तड़के व्रती फिर से जलाशय पर जाते हैं और सूर्योदय के समय पूजा करते हैं. इसके बाद व्रत खोला जाता है और प्रसाद बांटा जाता है. यह दिन आभार, नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है.
छठ का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
छठ पूजा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है. इस दौरान पूरा समुदाय एकजुट होकर नदियों और घाटों को सजाता है. यह पर्व लिंग, जाति या आर्थिक स्थिति से परे सभी को जोड़ता है. महिलाएं इस व्रत को मुख्य रूप से करती हैं, लेकिन पुरुष भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. छठ के गीत, जैसे “केलवा के पात पर उगेलन सूरज मल “, इस पर्व को और जीवंत बनाते हैं. छठ पूजा आस्था, अनुशासन और प्रकृति से जुड़ाव का अनोखा पर्व है. नहाय-खाय से शुरू होकर उगते सूर्य के अर्घ्य तक, यह चार दिन का उत्सव जीवन के हर रंग को समेटे हुए है. यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और मेहनत से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है. आज छठ दुनिया के हर हिस्से में मनाया जाने लगा है.
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