व्यापार
1 अप्रैल से झटका: तेल कंपनियों ने बढ़ाए LPG सिलेंडर के रेट
1 Apr, 2026 09:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर महीने की पहली तारीख को तेल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से एलपीजी के दाम जारी किए जाते हैं। अब नए वित्त वर्ष के पहले दिन आम जनता को महंगाई का जोरदार झटका लगा है। एक बार फिर कंपनियों की ओर से एलपीजी के रेट में वृद्धि के दी गई है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर होने वाला है। पश्चिम एशिया में जो सैन्य संघर्ष और अस्थिरता देखने को मिल रही है। उसके चलते वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल आया है। हर जगह कच्चे तेल की कीमत काफी बढ़ गई है। यही वजह है कि गैस की कीमतों में भी इजाफा किया गया है।
कहां कितना है LPG का दाम
तेल कंपनियों की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक राजधानी दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 2078.50 रुपए हो गई है। एक महीने के अंतराल में सिलेंडर की कीमतों में 300 रुपए का उछाल देखने को मिला है। कोलकाता में इसकी कीमत 1990 से 2208 हो गई है। चेन्नई में इसके दाम 2043.50 से बढ़कर 2246.50 हो गए हैं। मुंबई में इसके रेट 2031 रुपए पर पहुंच गए हैं जो पहले 1835 रुपए थे।
4 महीने से लगातार बढ़ रही कीमत
कॉमर्शियल LPG की कीमतों में पिछले 4 महीने से लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। लगभग 5 बार भाव में वृद्धि की जा चुकी है। सबसे पहले 1 मार्च को इसकी कीमत 28 रुपए बढ़ी थी। 7 मार्च को यह 114.5 रुपए महंगा हुआ था। फरवरी में इसके दाम 49 रुपए और जनवरी में 111 रुपए बढ़े थे। दिसंबर 2025 में भाव में कटौती देखने को मिली थी।
कितनी है घरेलू सिलेंडर की कीमत
महंगाई की इस मार के बीच राहत की बात यह है कि घरेलू सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि नहीं की गई है। आखिरी बार 7 मार्च 2026 को इसके दाम 60 रुपए बढ़ाए गए थे। बिना सब्सिडी का घरेलू सिलेंडर दिल्ली में 913 रुपए कोलकाता में 939 रुपए, मुंबई में 912.50 रुपए और चेन्नई में 928.50 रुपए में मिल रहा है।
बाजार में बंपर तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी ने लगाई लंबी छलांग
1 Apr, 2026 09:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार ने बुधवा को मजबूत शुरुआत की। वैश्विक बाजारों में आई तेजी और पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1,899.53 अंक बढ़कर 73,847.08 पर पहुंचा; निफ्टी 572.55 अंक बढ़कर 22,903.95 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे बढ़कर 94.70 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई, जिनमें ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, अदानी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन और लार्सन एंड टुब्रो प्रमुख लाभ कमाने वाली कंपनियां बनकर उभरीं।
बाजार में उछाल का कारण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि यह संघर्ष अगले तीन हफ्तों में समाप्त हो सकता है। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी कहा कि तेहरान इस संकट को खत्म करने की जरूरी इच्छाशक्ति रखता है। इन बयानों के बाद एशियाई और वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना। इस सकारात्मक संकेत का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला, जहां शुरुआती कारोबार में खरीदारी हावी रही। हालांकि, डॉलर पर दबाव बना हुआ है और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में तेजी जारी है, जो निवेशकों की सतर्कता को भी दर्शाता है।
एशियाई बाजारों में दिखी तेजी
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक तेजी से ऊपर चढ़ रहे थे। कोस्पी में लगभग 7 प्रतिशत की उछाल आई, जबकि निक्केई 225 सूचकांक में 4 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। मंगलवार को अमेरिकी बाजार में उल्लेखनीय तेजी देखी गई। नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स में 3.83 प्रतिशत, एसएंडपी 500 में 2.91 प्रतिशत और डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 2.49 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
ब्रेंट का भाव 105.3 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया
हालांकि, दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता के चलते सप्लाई बाधित होने का खतरा बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा। इस संघर्ष का आर्थिक असर भी साफ दिखने लगा है। अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत चार साल में पहली बार 4 डॉलर प्रति गैलन के पार पहुंच गई है। वहीं यूरोप में महंगाई तेज हो गई है, जिससे निपटने के लिए सरकारें राहत पैकेज और समर्थन उपाय लागू कर रही हैं। श्री महावीर जयंती के उपलक्ष्य में मंगलवार को शेयर बाजार बंद रहे। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 11,163.06 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 14,894.72 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। सोमवार को सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत गिरकर 71,947.55 पर बंद हुआ। निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत गिरकर 22,331.40 पर समाप्त हुआ।
रेस्टोरेंट-होटल पर असर, कमर्शियल LPG ₹195.50 महंगा
1 Apr, 2026 06:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सरकारी कंपनियों ने बुधवार को कमर्शियल एलपीजी की कीमत में 195.50 रुपये की बढ़ोतरी की है। यह बढ़ोतरी 19 किलो सिलिंडर पर की गई है। हालांकि, सरकारी कंपनियों की ओर से घरेलू सिलिंडरों के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। घरों में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी गैस की दरें पहले के जैसी ही हैं। कमर्शियल सिलिंडरों के दामों में हुई यह वृद्धि सीधे तौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों में आई तेजी का नतीजा है। नई दरें लागू होने के बाद दिल्ली में 19 किलोग्राम के वाणिज्यिक एलपीजी सिलिंडर की कीमत अब 2,078.50 रुपये हो गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने इससे पहले एक मार्च को 19 किलोग्राम के सिलिंडर पर 114.5 रुपये की वृद्धि की थी।
घरेलू एलपीजी दरों में नहीं हुआ कोई बदलाव
हालांकि, सरकार की ओर से घरेलू एलपीजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 14.2 किलोग्राम के सिलिंडर के लिए पिछली बार सात मार्च को 60 रुपये की वृद्धि की गई थी। दिल्ली में यह सिलेंडर अब 913 रुपये में उपलब्ध है।
कैसे तय होती हैं कीमत?
सरकारी स्वामित्व वाली इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क और विनिमय दर के आधार पर विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) और एलपीजी की कीमतों में संशोधन करती हैं।
वैश्विक तेल कीमतों में उछाल
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान आने से वैश्विक तेल की कीमतें लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। इसी का असर एलपीजी की कीमतों पर भी देखा जा रहा है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछले साल मार्च में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती के बाद से ये दरें स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत वर्तमान में 94.72 रुपये प्रति लीटर है, जबकि डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। यह मूल्य वृद्धि व्यवसायों और छोटे उद्योगों के लिए चिंता का विषय हो सकती है, जो ऊर्जा लागत में वृद्धि से सीधे प्रभावित होंगे।
टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर
31 Mar, 2026 11:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नए वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत के साथ ही 1 अप्रैल 2026 से देश का आयकर ढांचा बड़े बदलावों के दौर में प्रवेश करने जा रहा है। नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू होगा, जो करीब छह दशक पुराने 1961 के कानून की जगह लेगा। इस नए कानून के तहत टैक्स सिस्टम, प्रक्रियाओं और नियमों में कई अहम बदलाव किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव फाइनेंशियल ईयर (FY) और असेसमेंट ईयर (AY) की जगह एकल टैक्स ईयर की शुरुआत है, जिससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को सरल बनाने की कोशिश की गई है।
रिटर्न फाइन करने की समयसीमा में हुआ बदलाव
रिटर्न फाइल करने की समयसीमा में भी बदलाव किया गया है। जहां सैलरीड वर्ग के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन बरकरार है, वहीं गैर-ऑडिट मामलों जैसे स्वरोजगार और प्रोफेशनल्स के लिए अब 31 अगस्त तक का समय मिलेगा।
डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर एसटीटी को बढ़ाया गया
सरकार ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ा दिया है, जिससे फ्यूचर्स और ऑप्शंस में ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसकी घोषणा की थी। डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग वह प्रक्रिया है, जिसमें लोग ऐसे वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट्स खरीदते-बेचते हैं, जिनकी कीमत किसी मूल संपत्ति पर आधारित होती है जैसे शेयर, सोना, तेल, इंडेक्स आदि।
हाउस रेंट के नियम किए गए सख्त
हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के नियमों को भी सख्त किया गया है। अब कुछ मामलों में मकान मालिक का PAN और अन्य विवरण देना अनिवार्य होगा। साथ ही, ज्यादा छूट वाले शहरों की सूची में बंगलूरू, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी शामिल किया गया है।
कर्मचारियों से संबंधित कर लाभों को बढ़ाया गया
इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों से संबंधित कर लाभों को बढ़ाया गया है, जिसमें भोजन भत्ते पर छूट को बढ़ाया गया है और कर-मुक्त उपहारों पर वार्षिक सीमा को बढ़ाया गया है। इसी बीच, पुरानी कर व्यवस्था के तहत बच्चों के लिए भत्ते, जिनमें शिक्षा और छात्रावास खर्च शामिल हैं, में भी वृद्धि की गई है।
शेयर मार्केट से जुड़े नियमों में क्या बदलाव किए गए?
एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत, स्टॉक बायबैक पर अब अनुमानित लाभांश के बजाय पूंजीगत लाभ के रूप में कर लगाया जाएगा, जिससे प्रमोटरों और खुदरा निवेशकों दोनों पर असर पड़ेगा। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) के टैक्स नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब केवल मूल जारी के दौरान खरीदे गए बॉन्ड्स के रिडेम्प्शन पर ही टैक्स छूट मिलेगी। नए नियमों के तहत अब डिविडेंड और म्यूचुअल फंड आय पर ब्याज खर्च की कटौती की अनुमति नहीं होगी, भले ही निवेश उधार लेकर किया गया हो।
टैक्सपेयर्स के लिए प्रक्रियाओं को बनाया गया आसान
प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए टैक्सपेयर्स अब एक ही घोषणा के जरिए कई स्रोतों पर टीडीएस से बच सकेंगे। साथ ही, एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदने पर अब खरीदार PAN के जरिए ही टीडीएस काट सकेंगे, टीएएन लेने की जरूरत नहीं होगी।
विदेशों में होने वाले खर्च पर राहत
विदेश में होने वाले खर्च पर राहत दी गई है, जिसके तहत विदेशी यात्राओं पर लगने वाला स्रोत-आधारित कर (TCS) घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। विदेश में शिक्षा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए भेजे गए धन पर भी TCS कम कर दिया गया है।
सरकार इन क्षेत्रों में किए अहम बदलाव
टैक्स रिटर्न संशोधित करने की समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है, हालांकि दिसंबर के बाद देरी से फाइल करने पर अतिरिक्त शुल्क लगेगा।
इसके अलावा, मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री कर दिया गया है।
सरकार ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR-1 से ITR-7 तक के फॉर्म भी जारी कर दिए हैं, जिससे टैक्सपेयर्स समय पर रिटर्न दाखिल कर सकेंगे।
खास बात यह है कि ITR-1 (सहज) में अब एक की बजाय दो घरों से होने वाली आय भी दिखाने की अनुमति दी गई है, जिससे फाइलिंग और आसान होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव टैक्स सिस्टम को अधिक सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं।
बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सिस्टम अपडेट करने का समय मिलेगा
31 Mar, 2026 11:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पूंजी बाजार एक्सपोजर से जुड़े संशोधित फ्रेमवर्क के लागू होने की समयसीमा तीन महीने के लिए बढ़ा दी है। अब ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 के बजाय 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे। केंद्रीय बैंक का यह फैसला बैंकों, कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज (CMIs) और उद्योग संगठनों से मिले फीडबैक के बाद लिया गया है। इन संस्थाओं ने नए नियमों को लागू करने में परिचालन और व्याख्यात्मक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया था।
किन क्षेत्रों में स्पष्टता प्रदान की गई?
आरबीआई ने इस फ्रेमवर्क के लिए 13 फरवरी 2026 को संशोधन निर्देश जारी किए थे, जो सार्वजनिक परामर्श के बाद तैयार किए गए थे। अब RBI ने अधिग्रहण वित्त , वित्तीय परिसंपत्तियों के खिलाफ ऋण और सीएमआई को दिए जाने वाले क्रेडिट एक्सपोजर जैसे क्षेत्रों में स्पष्टता भी प्रदान की है।
संशोधित नियमों में क्या खास?
संशोधित नियमों के तहत अधिग्रहण वित्त के दायरे को बढ़ाकर अब इसमें विलय और समामेलन को भी शामिल किया गया है। हालांकि, इस तरह की फंडिंग केवल गैर-वित्तीय कंपनियों में नियंत्रण हासिल करने के लिए ही दी जाएगी, जिससे स्पष्ट है कि आरबीआई का फोकस केवल नियंत्रण आधारित सौदों पर है, न कि छोटे निवेशों पर। अगर लक्ष्य कंपनी एक होल्डिंग कंपनी है, तो बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि संभावित तालमेल सिर्फ मूल कंपनी ही नहीं बल्कि उसकी सभी सहायक कंपनियों में भी मौजूद हो।
कंपनियों के लिए अधिग्रहण वित्त नियमों में बदलाव
नए फ्रेमवर्क में कंपनियों को अधिग्रहण वित्त को भारतीय या विदेशी सहायक कंपनियों के माध्यम से लेने की अनुमति भी दी गई है। वहीं, रीफाइनेंसिंग नियमों को सख्त किया गया है। बैंक अब केवल उसी स्थिति में अधिग्रहण ऋण का पुनर्वित्त कर सकेंगे जब सौदा पूरा हो जाए और नियंत्रण स्थापित हो जाए। साथ ही, यह राशि केवल मूल ऋण चुकाने के लिए ही इस्तेमाल की जा सकेगी। इसके अलावा, अगर अधिग्रहण वित्त किसी सहायक कंपनी या विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) को दिया जाता है, तो अधिग्रहण करने वाली कंपनी की कॉरपोरेट गारंटी अनिवार्य होगी, जिससे क्रेडिट सुरक्षा मजबूत होगी। बैंकों के लिए यह स्थगन सिस्टम और प्रक्रियाओं को नए नियमों के अनुरूप ढालने का अतिरिक्त समय देगा, जबकि स्पष्ट परिभाषाओं से कानूनी अस्पष्टता और जोखिम भी कम होने की उम्मीद है। वहीं, अधिग्रहण करने वाली कंपनियों के लिए यह फ्रेमवर्क अवसर और सीमाएं दोनों लेकर आया है, जहां एक ओर विलय और सहायक कंपनियों के जरिए फंडिंग के विकल्प बढ़े हैं, वहीं दूसरी ओर केवल नियंत्रण आधारित अधिग्रहण की अनुमति और सख्त रीफाइनेंसिंग शर्तें लागू की गई हैं।
कोलैटरल को लेकर क्या हुए बदलाव?
कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज को भी राहत देते हुए आरबीआई ने 100% नकद या नकद-समान संपार्श्विक या कोलैटरल के खिलाफ प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए बैंक फंडिंग की अनुमति दी है। साथ ही, मार्केट मेकर्स को उन्हीं सिक्योरिटीज़ के खिलाफ फंडिंग लेने की पाबंदी भी हटा दी गई है, जिनका वे बाजार निर्माण में उपयोग करते हैं।
सप्लाई बाधित होने की आशंका से दामों में तेजी का दबाव
31 Mar, 2026 10:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते वैश्विक तेल बाजार में मंगलवार को जोरदार उछाल देखने को मिला। आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें कई हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.26 डॉलर यानी करीब 2% बढ़कर 115.04 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 3.10 डॉलर यानी लगभग 3% की तेजी के साथ 105.96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इस महीने तेल की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड में करीब 59% और WTI में लगभग 58% की बढ़ोतरी हुई है, जो मई 2020 के बाद सबसे बड़ा मासिक उछाल है।
क्या है इस तेजी का कारण?
इस तेजी की मुख्य वजह वैश्विक आपूर्ति पर बढ़ता खतरा है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बाधित करने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% गुजरता है।
जंग के किसी भी नरमी के संकेत नहीं
अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष में फिलहाल किसी भी तरह की नरमी के संकेत नहीं हैं। यही कारण है कि पिछले एक महीने से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल बना हुआ है। WTI ने जुलाई 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार किया और 106 डॉलर के आसपास पहुंच गया। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर और हमले करने की चेतावनी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला गया, तो ईरान के बिजली संयंत्रों, तेल सुविधाओं, खार्ग आइलैंड और डीसैलिनेशन प्लांट्स को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे पास कई विकल्प हैं। खार्ग द्वीप ईरान के लिए बेहद अहम तेल निर्यात केंद्र है, जहां से देश के करीब 90% तेल का निर्यात होता है। ऐसे में इस पर किसी भी संभावित हमले से वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा झटका लग सकता है। तनाव को और बढ़ाते हुए यमन के हूती विद्रोहियों ने सप्ताहांत में इस्राइल पर बैलिस्टिक मिसाइल दागे। इसके साथ ही अमेरिका द्वारा क्षेत्र में जमीनी सैनिक तैनात करने की तैयारियों की खबरों ने बाजार में बेचैनी और बढ़ा दी है।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
कोटक सिक्योरिटीज की असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी रिसर्च) कायनात चैनवाला के मुताबिक, एक महीने में 50% से ज्यादा की तेजी केवल सप्लाई टाइट होने का संकेत नहीं है, बल्कि यह गहरे भू-राजनीतिक तनाव को दर्शाती है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ना तय है।
केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने हालिया बैठकों में संकेत दिए कि दोनों पक्ष इसे जल्द लागू करने की प्रक्रिया तेज कर रहे हैं
31 Mar, 2026 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय संसद के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के जल्द क्रियान्वयन पर चर्चा की। यह प्रतिनिधिमंडल एंजेलिका नीबलर के नेतृत्व में भारत आया था। बैठक में दोनों पक्षों ने एफटीए को द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक निर्णायक कदम बताया।
भारत-ईयू के रिश्तों पर गोयल ने क्या कहा?
मंत्री गोयल ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के रिश्ते तेजी से मजबूत हो रहे हैं और व्यापार, तकनीक, हरित ऊर्जा, कनेक्टिविटी, रक्षा, अंतरिक्ष, मोबिलिटी, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने इस समझौते को परिभाषित मील का पत्थर बताते हुए कहा कि इससे दोनों पक्षों के व्यवसायों, एमएसएमई और कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसर खुलेंगे। भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापक एफटीए पर बातचीत इसी साल 27 जनवरी को पूरी हुई थी। यह समझौता वस्तुओं, सेवाओं और निवेश में व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ 2027 की शुरुआत तक लागू होने की उम्मीद है।
इस एफटीए से भारत को कैसे फायदा होगा?
उद्योग मंत्रालय के अनुसार, यह एफटीए भारत की अर्थव्यवस्था के नए क्षेत्रों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। खासतौर पर इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर फोकस है, जहां भारत 300 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य लेकर चल रहा है। यूरोप के लगभग दो ट्रिलियन डॉलर के बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने से भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और वे यूरोपीय सप्लाई चेन से और गहराई से जुड़ सकेंगी। इस समझौते में एमएसएमई और क्षेत्रीय औद्योगिक क्लस्टर्स को भी प्राथमिकता दी गई है, ताकि वे अपने कारोबार का विस्तार कर वैश्विक स्तर पर अनुबंध हासिल कर सकें।
क्या कहते हैं आंकड़े?
आंकड़ों के मुताबिक, यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों के बीच वस्तुओं का व्यापार 11.5 लाख करोड़ रुपये (136.54 अरब डॉलर) रहा, जिसमें भारत का निर्यात 6.4 लाख करोड़ रुपये (75.85 अरब डॉलर) और आयात 5.1 लाख करोड़ रुपये (60.68 अरब डॉलर) रहा। वहीं सेवाओं का व्यापार 7.2 लाख करोड़ रुपये (83.10 अरब डॉलर) तक पहुंच गया। भारत और यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक जीडीपी का करीब 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा रखते हैं। ऐसे में यह एफटीए दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग, नवाचार और सतत विकास को नई गति देने वाला माना जा रहा है।
सोने और चांदी की कीमतों में 3% से ज्यादा की तेजी दर्ज
31 Mar, 2026 08:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में बढ़त दर्ज की गई है। इस तेजी को पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों का समर्थन मिला। इसके बावजूद, सोना इस महीने 17 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज करने की राह पर है। इसकी बड़ी वजह बढ़ती ऊर्जा कीमतें हैं, जिन्होंने महंगाई को बढ़ाया है और इस साल अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में क्या स्थिति?
आज सोना और चांदी दोनों ही हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। दोनों धातुओं में 3% से अधिक की तेजी दर्ज की गई। कॉमेक्स पर सोना करीब 1.25% बढ़कर 4,618 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि पिछले सत्र में इसमें 0.4% की बढ़त देखी गई थी। वहीं, एशियाई कारोबार के दौरान कॉमेक्स चांदी 3.7% उछलकर 73.2 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
उछाल का क्या है कारण?
कीमतों में इस उछाल के पीछे कई अहम वजहें हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिससे बाजार में यह धारणा मजबूत हुई है कि फेडरल रिजर्व भविष्य में दरों में कटौती के बजाय उन्हें ऊंचा रख सकता है या बढ़ा भी सकता है। हालांकि, फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि मौजूदा स्थिति में केंद्रीय बैंक की नीति इंतजार और निगरानी की है और दीर्घकालिक महंगाई की उम्मीदें अब भी नियंत्रण में हैं। इसके अलावा, बाजार में डिप बाइंग का ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट संघर्ष शुरू होने के बाद आई गिरावट का फायदा उठाते हुए निवेशक सोने में खरीदारी कर रहे हैं, जिससे कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है।
आपूर्ति संकट के बावजूद उर्वरकों की कमी नहीं होने का दावा
31 Mar, 2026 06:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि आगामी खरीफ सीजन से पहले देश में यूरिया और डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। सरकार के मुताबिक, 45 किलो यूरिया की बोरी 266 रुपये और 50 किलो की डीएपी बोरी 1,350 रुपये में मिल रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते वैश्विक बाजार में उर्वरकों और उनके कच्चे माल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे घरेलू उत्पादन पर असर पड़ा है। अधिकारियों के अनुसार, अमोनिया, सल्फर और सल्फ्यूरिक एसिड जैसे जरूरी कच्चे माल की लागत बढ़ने और गैस आपूर्ति प्रभावित होने से देश में यूरिया उत्पादन में अस्थायी गिरावट आई। शुरुआती दौर में उत्पादन करीब 30,000 से 35,000 टन प्रतिदिन तक घट गया था, लेकिन स्थिति अब धीरे-धीरे सुधर रही है। गैस आपूर्ति बढ़कर करीब 80 फीसदी तक पहुंच गई है, जिससे उत्पादन में सुधार की उम्मीद है।
देश में खाद का पर्याप्त स्टॉक
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल देश में कुल खाद का स्टॉक करीब 180 लाख मीट्रिक टन है, जो पिछले साल के 147 लाख टन के मुकाबले काफी अधिक है। वहीं, आगामी खरीफ सीजन के लिए कुल मांग 390 लाख टन आंकी गई है, जबकि पिछले साल बिक्री 361 लाख टन रही थी। सप्लाई को बनाए रखने के लिए सरकार रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया, मिस्र और टोगो जैसे देशों से वैकल्पिक स्रोत विकसित कर रही है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
फसलों के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडार
देश में खाद की उपलब्धता को लेकर सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, भारत के पास गर्मी की फसलों के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडार मौजूद है और सप्लाई को और मजबूत करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों से भी खरीद की जा रही है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो रही है। सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद मिल सके, ताकि फसल उत्पादन पर कोई असर न पड़े और कृषि क्षेत्र की रफ्तार बनी रहे।
बाजार में हाहाकार: खुलते ही शेयरों ने गंवाई 5 लाख करोड़ की संपत्ति
30 Mar, 2026 12:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार सुबह चौतरफा तेज गिरावट देखने को मिली है। सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों में 1% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1,200 अंक यानी 1.6% टूटकर इंट्राडे में 72,392 के निचले स्तर तक पहुंच गया। जबकि निफ्टी-50 350 अंक यानी 1.5% गिरकर दिन के निचले स्तर 22,470 तक फिसल गया। इस गिरावट के चलते निवेशकों को कुछ ही मिनटों में करीब 5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया। BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सत्र के 422 लाख करोड़ रुपये से घटकर 417 लाख करोड़ रुपये रह गया।
आज शेयर बाजार क्यों गिरा?
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध, जो 28 फरवरी से शुरू हुआ था, अब एक महीने से ज्यादा लंबा खिंच चुका है। अभी तक यह साफ नहीं है कि यह तनाव जल्द खत्म होगा या नहीं। पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमलों को रोकने की अवधि बढ़ा दी थी। हालांकि, इस संघर्ष को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव भेजा है। लेकिन अब तक दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक वार्ता नहीं हुई है। हालांकि, बैक-चैनल और मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी है, जिसमें पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें भी शामिल हैं।अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध, जो 28 फरवरी से शुरू हुआ था, अब एक महीने से ज्यादा लंबा खिंच चुका है। अभी तक यह साफ नहीं है कि यह तनाव जल्द खत्म होगा या नहीं। पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमलों को रोकने की अवधि बढ़ा दी थी। हालांकि, इस संघर्ष को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव भेजा है। लेकिन अब तक दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक वार्ता नहीं हुई है। हालांकि, बैक-चैनल और मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी है, जिसमें पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें भी शामिल हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में और तेजी आई है और यह 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है। इसकी बड़ी वजह अमेरिका-ईरान युद्ध को लेकर बनी अनिश्चितता है। दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति जिस होर्मुज स्ट्रेट से होती है, वह अब भी ज्यादातर शिपिंग के लिए बंद है। इससे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती हैं, क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है। हम अपनी 85-90% तेल जरूरतें आयात के जरिए पूरी करते हैं।
इंडिया VIX 28 के पार
वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX में 6% की तेजी आई और यह 28 के स्तर के ऊपर पहुंच गया, जो बाजार में कमजोर और अस्थिर निवेशक धारणा को दर्शाता है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, वोलैटिलिटी इंडेक्स की सामान्य रेंज 12 से 15 के बीच मानी जाती है। यदि यह 15 से ऊपर चला जाए, तो इसका मतलब होता है कि बाजार अगले 30 दिनों में अधिक उतार-चढ़ाव की आशंका को पहले से ही शामिल कर रहा है। इंडिया VIX का 28 के ऊपर पहुंचना इस बात का संकेत है कि भारतीय शेयर बाजार में घबराहट बढ़ रही है। इसकी बड़ी वजह यह है कि अमेरिका-ईरान युद्ध लंबा खिंचने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है, वैश्विक महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और दुनिया की आर्थिक विकास रफ्तार पर भी असर पड़ सकता है।
रुपये में जोरदार मजबूती, डॉलर के सामने 128 पैसे की बढ़त
30 Mar, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। निचले स्तर से उबरते हुए 128 पैसे की मजबूती के साथ 93.57 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। यह रिकवरी उस समय देखने को मिली जब रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए ओवरनाइट नेट ओपन पोजिशन की सीमा घटाकर 100 मिलियन डॉलर कर दी। ओवरनाइट नेट ओपन पोजिशन (NOP) वह सीमा होती है, जिसके तहत बैंक एक दिन के कारोबार के बाद (यानी रातभर) विदेशी मुद्रा में कितना जोखिम लेकर बैठे रह सकते हैं। आरबीआई ने 27 मार्च 2026 के सर्कुलर के जरिए यह नई सीमा तय की है, जिसका पालन बैंकों को 10 अप्रैल तक करना होगा। इस फैसले के बाद बैंकों को अपनी लंबी पोजिशन कम करनी पड़ सकती है, जिससे बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ी और रुपये को सपोर्ट मिला। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 93.62 पर खुला और बाद में 93.57 तक मजबूत हुआ। इससे पहले शुक्रवार को रुपया 89 पैसे टूटकर 94.85 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ था।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पाबरी के मुताबिक, बैंकों द्वारा पोजिशन कम करने की प्रक्रिया के चलते बाजार में डॉलर बिक सकता है, जिससे अल्पावधि में रुपये को राहत मिल रही है। हालांकि यह मजबूती मूलभूत आर्थिक बदलाव के बजाय तकनीकी कारणों से है। इसके बावजूद रुपये पर दबाव बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स 100 के ऊपर बना हुआ है, जो वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती को दर्शाता है। वहीं कच्चे तेल की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर हैं, जिससे भारत जैसे बड़े आयातक देश में डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है।
ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 115 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
ब्रेंट क्रूड करीब 115 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जो 2% से अधिक की तेजी दिखा रहा है। घरेलू शेयर बाजार की बात करें तो, शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1,191.24 अंक गिरकर 72,391.98 पर आ गया, जबकि निफ्टी 349.45 अंक गिरकर 22,470.15 पर पहुंच गया। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को शुद्ध आधार पर 4,367.30 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1191 अंक लुढ़का
30 Mar, 2026 10:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। इसी के चलते सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी जैसे शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। विदेशी निधियों की निरंतर निकासी ने भी घरेलू शेयर बाजारों की कमजोरी को और बढ़ा दिया। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,191.24 अंक गिरकर 72,391.98 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 349.45 अंक गिरकर 22,470.15 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने सर्वकालिक निचले स्तर से 128 पैसे की मजबूती के साथ 93.57 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल और आईसीआईसीआई बैंक सबसे बड़े पिछड़ने वालों में शामिल थे। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, पावर ग्रिड, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और हिंदुस्तान यूनिलीवर को लाभ हुआ।
एशियाई बाजारों में रहा मिला-जुला हाल
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक तेजी से नीचे कारोबार कर रहे थे, जबकि शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक सकारात्मक दायरे में कारोबार कर रहा था। शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स में 2.15 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 1.73 प्रतिशत और एसएंडपी 500 में 1.67 प्रतिशत की गिरावट आई।
विदेशी निवेशकों ने घरेलू बाजार से 1.14 लाख करोड़ रुपये निकाले
पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव, कमजोर होते रुपये और भारत की विकास दर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के प्रभाव को लेकर चिंताओं के कारण विदेशी निवेशकों ने मार्च में घरेलू शेयरों से 1.14 लाख करोड़ रुपये (लगभग 12.3 अरब अमेरिकी डॉलर) निकाल लिए हैं, जो अब तक का सबसे खराब मासिक बहिर्वाह है।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
अनुसंधान विश्लेषक और लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा कि यह दबाव काफी हद तक बाहरी है, क्योंकि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का निवेशकों की भावना पर लगातार प्रभाव बना हुआ है। एशियाई बाजारों में भारी गिरावट के साथ शुरुआत हुई है, जिसमें दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई तेजी से गिरे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष के पांचवें सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही व्यापक स्तर पर आई इस कमजोरी ने क्षेत्र में नए सिरे से तनाव बढ़ा दिया है। यमन के हौथियों द्वारा कथित तौर पर इजरायल पर मिसाइल हमले किए जाने के बाद स्थिति और बिगड़ गई है। यह संघर्ष के दायरे में विस्तार का संकेत है और इससे क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता बने रहने की आशंकाएं बढ़ गई हैं।
ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 115.3 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.32 प्रतिशत गिरकर 115.3 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 4,367.30 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 3,566.15 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। शुक्रवार को सेंसेक्स 1,690.23 अंक या 2.25 प्रतिशत गिरकर 73,583.22 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 486.85 अंक या 2.09 प्रतिशत गिरकर 22,819.60 पर समाप्त हुआ।
सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट, निवेशकों को राहत
30 Mar, 2026 09:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सोमवार को बुलियन पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। चांदी की कीमत 1040 रुपये गिरकर 2.27 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 1050 रुपये गिरकर 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
वैश्विक बाजार में सोने-चांदी का हाल
वैश्विक बाजार में सोमवार को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। बढ़ती ऊर्जा कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ी हैं। इसी वजह से निवेशकों का रुझान सोने से हटता दिख रहा है। स्पॉट गोल्ड 0.6% गिरकर 4,466.99 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अप्रैल डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 0.6% गिरकर 4,496.30 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। स्पॉट सिल्वर 1.3% गिरकर 68.67 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। अन्य कीमती धातुओं की बात करें तो प्लैटिनम 0.3% बढ़कर 1,868.11 डॉलर और पैलेडियम 1% चढ़कर 1,391 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
मार्च के महीने में सोना 15% से अधिक टूटा
मार्च महीने में सोने में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। कीमतें अब तक 15% से ज्यादा टूट चुकी हैं, जो अक्तूबर 2008 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। इस गिरावट के पीछे अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मुख्य वजह माना जा रहा है। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी तनाव के बाद डॉलर में 2% से ज्यादा की मजबूती आई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में ब्याज दरों को लेकर धारणा में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां इस साल दो बार दर कटौती की उम्मीद थी, अब ट्रेडर्स को इसकी संभावना बेहद कम नजर आ रही है। ऊंची ऊर्जा कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं, जिससे फेड के लिए नीतिगत ढील देना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, आमतौर पर महंगाई बढ़ने पर सोना सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) के तौर पर मजबूत होता है, लेकिन ऊंची ब्याज दरें इस गैर-ब्याज देने वाली धातु की मांग को कमजोर कर देती हैं।
ब्रेंट क्रूड का भाव 115 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
इसी बीच, कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो मार्च में करीब 60% की रिकॉर्ड बढ़त को दर्शाता है। यह तेजी यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा इस्राइल पर हमलों के बाद आई है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया है कि वह ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण चाहते हैं और खार्ग द्वीप जैसे प्रमुख निर्यात केंद्र को कब्जे में लेने की बात कही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले हफ्ते सोने में आई हल्की रिकवरी ओवरसोल्ड स्थिति की प्रतिक्रिया हो सकती है, लेकिन आगे की दिशा बाजार में आने वाली खबरों और वैश्विक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। फिलहाल, बाजार में अस्थिरता बने रहने की संभावना है।
बाजार पर जंग की मार: मार्च में विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
30 Mar, 2026 08:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखने लगा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मार्च महीने में अब तक रिकॉर्ड स्तर पर बिकवाली की है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, 27 मार्च तक एफपीआई ने नकदी बाजार में 1,13,380 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। यह किसी भी महीने में अब तक का सबसे बड़ा बाहरी पूंजी प्रवाह है। इससे पहले अक्तूबर 2024 में 94,017 करोड़ रुपये की बिकवाली का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से दूरी बना रहे हैं। इससे रुपया और इक्विटी बाजार दोनों पर दबाव देखा जा रहा है। इस बीच, डीमैट खातों की जब्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (NCLAT) ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की अपील खारिज कर दी है। एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि दिवालियापन प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) को हस्तक्षेप करने का पूरा अधिकार है। अदालत ने कहा कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) की धारा 60(5) के तहत एनसीएलटी को व्यापक शक्तियां प्राप्त हैं। दरअसल, बीएसई ने एनसीएलटी के उस अधिकार को चुनौती दी थी, जिसके तहत दिवालियापन समाधान या परिसमापन के दौरान कंपनियों के डीमैट खातों पर लगी रोक हटाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। बीएसई का तर्क था कि यह मामला भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियामकीय दायरे में आता है और एनसीएलटी को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। हालांकि, अपीलीय अधिकरण ने इस दलील को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि दिवालियापन से जुड़े मामलों में एनसीएलटी का अधिकार सर्वोपरि है, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों में स्पष्टता आएगी।
रॉयल एनफील्ड ने 10 लाख बाइक्स बेचने का बनाया रिकॉर्ड
29 Mar, 2026 06:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। किसी एक वित्तीय वर्ष में घरेलू बाजार में रॉयल एनफील्ड ने पहली बार 10 लाख से ज्यादा बाइक्स बेचने का रिकॉर्ड बनाया है। कंपनी ने अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच 10,06,937 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की। कंपनी की यह बिक्री पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 24 प्रतिशत अधिक है। इस बिक्री में मार्च के आंकड़े अभी शामिल नहीं हैं, जिससे कुल बिक्री और बढ़ने की संभावना है। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे कंपनी की मजबूत प्रोडक्ट लाइनअप और ग्राहकों का बढ़ता भरोसा अहम भूमिका निभा रहा है। रॉयल एनफील्ड क्लासिक 350, रॉयल एनफील्ड बुलेट 350 और रॉयल एनफील्ड हंटर 350 जैसी लोकप्रिय बाइक्स ने बिक्री में बड़ा योगदान दिया है।
खासतौर पर 350सीसी सेगमेंट में कंपनी की पकड़ बेहद मजबूत बनी हुई है, जहां उसका बाजार हिस्सा 90 प्रतिशत से अधिक बताया जा रहा है। कोविड के बाद प्रीमियम और पावरफुल बाइक्स की बढ़ती मांग ने भी कंपनी की सफलता को गति दी है। ग्राहकों का रुझान अब स्टाइलिश और दमदार मोटरसाइकिलों की ओर बढ़ा है, जिसका सीधा फायदा रॉयल एनफील्ड को मिला है। अनुमान है कि एफवाय 2026 के अंत तक कंपनी की कुल बिक्री 11 लाख यूनिट्स के करीब पहुंच सकती है, जो इसे बाजार में और मजबूत स्थिति में स्थापित करेगा। इसके साथ ही कंपनी ने नए मॉडल्स लॉन्च करने और कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने की रणनीति अपनाई, जिससे इसकी लोकप्रियता और बढ़ी। आज रॉयल एनफील्ड केवल एक बाइक ब्रांड नहीं, बल्कि मिड-साइज मोटरसाइकिल सेगमेंट में अग्रणी खिलाड़ी बन चुकी है।
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