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आर्थिक मोर्चे पर हलचल: मिडिल ईस्ट संकट के कारण बढ़े दबाव के बाद क्या केंद्रीय बैंक ने बाजार में उतारा अपना गोल्ड रिजर्व?
3 Jun, 2026 10:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई | अमेरिका और ईरान के मध्य बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। एक हालिया रिपोर्ट में यह अंदेशा जताया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपये की कीमत को संभालने और अपने विदेशी मुद्रा कोष को संतुलित करने के लिए सोने के भंडार का एक हिस्सा बेचा है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के इस विश्लेषण के मुताबिक, बाईस मई को पूरे हुए दो हफ्तों के भीतर केंद्रीय बैंक ने करीब बारह अरब डॉलर मूल्य के सोने की बिक्री की है। रिपोर्ट के अनुसार, इसी समय के दौरान आरबीआई ने अपने खजाने में लगभग साढ़े सात अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां भी शामिल की हैं।
पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है और वह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। ऐसे में पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य और राजनीतिक संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे भारत पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। तेल खरीदने के लिए ज्यादा भुगतान करने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये के मूल्य पर विपरीत असर पड़ता है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि आयात शुल्क में बढ़ोतरी के बाद सोने की कीमतों में उछाल आना चाहिए था, लेकिन आंकड़ों के मुताबिक आरबीआई के स्वर्ण भंडार का कुल मूल्य कम हुआ है, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि केंद्रीय बैंक ने सोने की बिकवाली की होगी।
विदेशी मुद्रा भंडार को तरलता और मजबूती देने की कोशिश
अगर विशेषज्ञों का यह आकलन सही है, तो इसका सीधा संकेत है कि आरबीआई ने आपातकालीन स्थितियों में तुरंत इस्तेमाल की जा सकने वाली विदेशी मुद्रा को तरलता और मजबूती देने के लिए यह रणनीति अपनाई है। यह कदम इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि ईरान विवाद और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में आ रही बाधाओं से वैश्विक व्यापार और तेल की आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ता है, विदेशी निवेश में तेजी आती है या कच्चे तेल की कीमतें घटती हैं, तो आरबीआई अपने विदेशी मुद्रा भंडार को और अधिक बढ़ाने के लिए आक्रामक कदम उठा सकता है।
विदेशों में जमा संपत्तियों को लेकर सतर्कता और भारत वापसी
वर्ष दो हजार पच्चीस के मार्च अंत तक भारतीय रिजर्व बैंक के पास आठ सौ अस्सी दशमलव पांच दो मीट्रिक टन सोना मौजूद था, जिसका करीब सतहत्तर प्रतिशत हिस्सा भारत के भीतर ही सुरक्षित रखा गया है। पूर्व में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का विदेश में जमा अधिकांश सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास रखा हुआ है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस की विदेशी संपत्तियों को फ्रीज किए जाने की घटना से दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सावधान हो गए हैं, यही वजह है कि भारत भी अपने सोने को वापस देश लाने की प्रक्रिया में तेजी ला रहा है। फिलहाल, आरबीआई प्रमुख संजय मल्होत्रा रुपये को स्थिरता देने के लिए ब्याज दरों में सुधार और विदेशी निवेश आकर्षित करने जैसे विकल्पों पर काम कर रहे हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर सोना बेचने के दावों की पुष्टि होना अभी बाकी है।
ईंधन संकट की मार: ₹130 प्रति लीटर के पार बिका पेट्रोल, मिट्टी के तेल (Kerosene) की कीमतों ने भी तोड़े सारे रिकॉर्ड
2 Jun, 2026 03:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दामों में हो रही उथल-पुथल का असर अब भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में साफ देखने को मिल रहा है, जहां पेट्रोल और केरोसिन की कीमतों में एक बार फिर जोरदार उछाल आया है। हैरान करने वाली बात यह है कि बीते महज छह हफ्तों के भीतर बांग्लादेशी सरकार द्वारा ईंधन की दरों में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी की गई है। इस नए मूल्य संशोधन के बाद वहां पेट्रोल की कीमतें 130 टका प्रति लीटर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं। प्रशासन का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ते दबाव के चलते कीमतों को बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया था, लेकिन इस फैसले ने आम जनता के बजट को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है।
छह सप्ताह में दूसरी बार लगा झटका, पेट्रोल की कीमतें 130 टका के पार
बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, देश में पेट्रोल की खुदरा कीमत अब बढ़कर 130 टका प्रति लीटर से ऊपर निकल चुकी है। मात्र डेढ़ महीने के भीतर दूसरी बार ईंधन के दाम बढ़ने से आम वाहन चालकों और मध्यम वर्ग में भारी असंतोष है। इस फैसले का सबसे पहला और सीधा असर निजी कार और बाइक मालिकों पर पड़ेगा, जिन्हें अब रोजमर्रा के सफर के लिए अपनी जेब काफी ज्यादा ढीली करनी होगी। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर की लागत बढ़ने से माल ढुलाई भी महंगी होने की कगार पर पहुंच गई है।
निम्न वर्ग पर दोहरी मार, केरोसिन और डीजल के दाम भी आसमान पर
सरकार ने इस बार केवल पेट्रोल ही नहीं, बल्कि आम जनजीवन से जुड़े दो अन्य महत्वपूर्ण ईंधनों—केरोसिन और डीजल की कीमतों में भी भारी इजाफा किया है। केरोसिन (मिट्टी का तेल) का इस्तेमाल बांग्लादेश के ग्रामीण अंचलों और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बेहद गरीब और निम्न आय वर्ग के लोग खाना पकाने व रोशनी के लिए करते हैं। ऐसे में केरोसिन के दाम बढ़ने से सीधे तौर पर गरीब परिवारों का चूल्हा प्रभावित होगा। वहीं दूसरी ओर, डीजल महंगा होने से सार्वजनिक परिवहन की बसें, थ्री-व्हीलर्स और कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले पंपिंग सेट व ट्रैक्टर चलाना भी काफी खर्चीला हो जाएगा।
भू-राजनीतिक तनाव और आयात निर्भरता बनी वजह, बढ़ेगा महंगाई का ग्राफ
बांग्लादेश अपनी ऊर्जा और ईंधन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर विदेशी आयात पर निर्भर है। वर्तमान में चल रहे वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट में क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की अनिश्चितता के कारण बांग्लादेश का आयात बिल लगातार बढ़ रहा था, जिसे संतुलित करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर सिर्फ यातायात तक सीमित नहीं रहेगा। डीजल और पेट्रोल महंगा होने से मंडियों तक फल-सब्जियों और खाद्यान्न को लाना महंगा हो जाएगा, जिससे आने वाले दिनों में देश में खुदरा महंगाई दर का ग्राफ तेजी से ऊपर जा सकता है।
अनिल अग्रवाल के वेदांता ग्रुप पर ईडी की बड़ी कार्रवाई: फॉरेन एक्सचेंज नियमों के उल्लंघन के आरोप में ताबड़तोड़ छापेमारी
2 Jun, 2026 03:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को उद्योगपति अनिल अग्रवाल के स्वामित्व वाले महाकाय 'वेदांता समूह' (Vedanta Group) के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। ईडी की टीमों ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में समूह के कई ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई विदेशी मुद्रा से जुड़े लेन-देन में बरती गई कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में की गई है।
दिल्ली और मुंबई में छापेमारी, मूल कंपनी को किए गए 'ब्रांड शुल्क' भुगतान पर संदेह
ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच दल ने देश की वित्तीय राजधानी मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वेदांता समूह से जुड़े एक-एक परिसर पर दबिश दी। सोमवार को शुरू हुआ यह तलाशी अभियान अब पूरी तरह संपन्न हो चुका है। जांचकर्ताओं का मुख्य ध्यान समूह की विभिन्न कंपनियों द्वारा अपनी पेरेंट कंपनी (मूल कंपनी) को 'ब्रांड शुल्क' (Brand Fee) के रूप में किए गए करोड़ो रुपये के कथित भुगतान पर है। ईडी की टीमों ने इस संदिग्ध लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज, एग्रीमेंट्स और कंप्यूटर रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या ये भुगतान विदेशी मुद्रा नियमों के दायरे में रहकर किए गए थे या नहीं।
वेदांता ने दी कानून के पालन की दलील, सहायक कंपनी पर लगा 127 करोड़ का जुर्माना
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए वेदांता समूह के प्रवक्ता ने कहा कि वे जांच में पूरी तरह पारदर्शी रुख अपना रहे हैं और अधिकारियों द्वारा मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा रहे हैं। कंपनी देश के सभी कानूनों का सम्मान और अनुपालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, यह समूह हाल के दिनों में एक और कानूनी झटके का सामना कर चुका है। पिछले महीने ही वेदांता लिमिटेड ने शेयर बाजारों को बताया था कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी सहायक कंपनी 'तलवंडी साबो पावर लिमिटेड' (TSPL) के खिलाफ बिजली उपलब्धता की गलत घोषणा करने के एक मामले में पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसके चलते कंपनी पर लगभग 127 करोड़ रुपये का बड़ा जुर्माना और लेट पेमेंट सरचार्ज लगाया गया है।
जानिए क्या है फेमा कानून और प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में कितना बड़ा है वेदांता का साम्राज्य
विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत ईडी को तब कार्रवाई करने का अधिकार मिलता है जब किसी भारतीय नागरिक या कॉरपोरेट घराने द्वारा विदेशों में अवैध तरीके से धन भेजने, विदेशी निवेश के नियमों को ताक पर रखने या बिना अनुमति के विदेशों में संपत्ति बनाने का संदेह होता है। अगर वेदांता समूह की बात करें, तो वर्ष 1976 में स्थापित हुआ यह समूह भारत का एक अग्रणी बहुराष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन और खनन संगठन है। अनिल अग्रवाल की अगुवाई में यह समूह एल्युमीनियम, जस्ता (जिंक), तांबा, इस्पात, लौह अयस्क के साथ-साथ तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में वैश्विक स्तर पर बड़ी भूमिका निभाता है। 'हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड' और 'केयर्न इंडिया' जैसी दिग्गज कंपनियां इसी समूह का हिस्सा हैं, जिनका कारोबार भारत के अलावा अफ्रीकी महाद्वीप के कई देशों में फैला हुआ है।
ग्लोबल शेयर बाजार रैंकिंग में भारत की रैंकिंग गिरी: ताइवान के बाद अब दक्षिण कोरिया ने भी पछाड़ा, जानिए क्यों आई यह गिरावट
2 Jun, 2026 03:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई | ग्लोबल इक्विटी मार्केट (वैश्विक शेयर बाजार) से भारतीय निवेशकों के लिए एक मायूस करने वाली खबर आई है। कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) के पैमाने पर भारत अब दुनिया के टॉप-5 शेयर बाजारों की एलीट लिस्ट से बाहर हो गया है। भारतीय शेयर बाजार को सिर्फ सात दिनों के भीतर दो बड़े झटके लगे हैं। पहले ताइवान ने भारत को पछाड़ते हुए पांचवें पायदान पर कब्जा जमाया और अब दक्षिण कोरिया ने भी लंबी छलांग लगाकर भारत को पीछे छोड़ दिया है। इस उथल-पुथल के बाद भारत अब वैश्विक रैंकिंग में खिसककर सातवें स्थान पर पहुंच गया है।
बाजार का नया समीकरण: 5 ट्रिलियन डॉलर के साथ दक्षिण कोरिया की बड़ी छलांग
ब्लूमबर्ग द्वारा जारी किए गए ताजा वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में इस साल अभूतपूर्व और ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई है। दक्षिण कोरियाई शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों का कुल मूल्यांकन 86 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ 5 ट्रिलियन (50 खरब) डॉलर के पार पहुंच गया है। इस तूफानी रफ्तार के दम पर उसने कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे दिग्गज बाजारों को बहुत पीछे छोड़ दिया है। दूसरी तरफ, भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप घटकर करीब 4.8 ट्रिलियन डॉलर पर आ गया है, जिसके चलते भारत छठे से सातवें स्थान पर आ गया। वहीं, ताइवान अब अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग के बाद दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा बाजार बनकर मजबूती से टिका हुआ है।
ताइवान और दक्षिण कोरिया की तेजी का राज: एआई बूम और सेमीकंडक्टर की बादशाहत
इन दोनों एशियाई देशों के शेयर बाजारों में आई इस ऐतिहासिक तेजी का पूरा सेहरा 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) और सेमीकंडक्टर (चिप) बनाने वाली कंपनियों के सिर जाता है। दक्षिण कोरियाई बाजार की इस चमक के पीछे 'सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स' और 'एसके हाइनिक्स' जैसी महाकाय कंपनियां हैं। एआई मेमोरी-चिप तकनीक में अपना दबदबा होने के कारण इन दोनों कंपनियों का संयुक्त वैल्यूएशन हाल ही में 1 ट्रिलियन डॉलर को पार कर गया, जिससे वहां के 'कोस्पी इंडेक्स' ने साल 2026 में 100% से ज्यादा का रिटर्न दिया है। वहीं, ताइवान की ताकत दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट चिप निर्माता कंपनी 'टीएसएमसी' (TSMC) है। इस साल इस अकेले कंपनी के शेयरों में 46% का उछाल आया है और ताइवान के मुख्य सूचकांक में इसकी हिस्सेदारी लगभग 42% है।
भारतीय बाजार के पिछड़ने के कारण और मजबूत जीडीपी का सुरक्षा कवच
भारत के सातवें स्थान पर खिसकने के पीछे कुछ तात्कालिक और वैश्विक चुनौतियां जिम्मेदार हैं। इनमें विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा बाजार से लगातार की जा रही भारी बिकवाली और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी मुख्य हैं। इसके अलावा, वैश्विक निवेशक आज एआई इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों में दिल खोलकर पैसा लगा रहे हैं, जबकि भारतीय शेयर बाजार में ऐसी टेक कंपनियों की भारी कमी है। हालांकि, शेयर बाजार की इस रैंकिंग के बावजूद भारत की जमीनी अर्थव्यवस्था अब भी बेहद मजबूत है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक, भारत की जीडीपी का आकार 4.15 ट्रिलियन डॉलर है, जो दक्षिण कोरिया की जीडीपी (1.93 ट्रिलियन डॉलर) से दोगुनी से भी ज्यादा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण कोरिया की यह तेजी पूरी तरह से सेमीकंडक्टर साइकिल पर टिकी है, जबकि भारत अपनी मजबूत जीडीपी ग्रोथ और घरेलू मांग के दम पर लंबी अवधि के लिए एक बेहद सुरक्षित और मजबूत अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
अब दूध के खाली पैकेट से नहीं फैलेगा प्रदूषण: मदर डेयरी का बड़ा आविष्कार, मिट्टी में आसानी से घुल जाएगी यह नई पैकेजिंग
2 Jun, 2026 03:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए देश की जानी-मानी डेयरी कंपनी 'मदर डेयरी' ने एक बेहद खास और अनूठे दूध के पाउच (थैली) को बाजार में उतारने का एलान किया है। कंपनी ने मंगलवार, 2 जून को आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि यह नया पाउच इस्तेमाल के बाद फेंक दिए जाने पर मिट्टी में पूरी तरह और प्राकृतिक रूप से विलीन (सड़) हो जाएगा। यह भारत की पहली ऐसी तकनीक है, जो कचरे में जाने के बाद पर्यावरण में प्लास्टिक का नामोनिशान नहीं छोड़ेगी।
विश्व पर्यावरण दिवस से होगी शुरुआत, गाय के दूध से मिलेगी पहली सौगात
मदर डेयरी इस ऐतिहासिक और इको-फ्रेंडली पैकेजिंग की शुरुआत आगामी 5 जून को 'विश्व पर्यावरण दिवस' के मौके से करने जा रही है। शुरुआती चरण में इस तकनीक का इस्तेमाल दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के बाजारों में मिलने वाले गाय के दूध (Cow Milk) के पाउच के लिए किया जाएगा। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के पूर्ण स्वामित्व वाली इस सहायक कंपनी का यह कदम प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन में एक मिसाल बनेगा। प्रतिदिन लगभग 55 लाख लीटर दूध की सप्लाई करने वाली कंपनी के इस बड़े बदलाव से सिंगल-यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल में भारी कमी आने की उम्मीद है।
चार साल की कड़ी रिसर्च से तैयार हुई तकनीक, जेब पर नहीं पड़ेगा कोई बोझ
मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयतीर्थ चारी ने खुलासा किया कि इस विशेष और सुरक्षित बायो-डिग्रेडेबल पाउच को विकसित करने में वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को 4 साल से अधिक का लंबा वक्त लगा है। इस पाउच में एक बेहद उन्नत और अनूठी पैकेजिंग तकनीक का प्रयोग किया गया है, जिसके तहत इस्तेमाल के बाद यह सामग्री एक 'बायोउपलब्ध मोम' (Bio-available wax) का रूप ले लेती है। इसके बाद मिट्टी में पाए जाने वाले प्राकृतिक सूक्ष्मजीव इसे आसानी से पूरी तरह नष्ट कर देते हैं। एनडीडीबी के अध्यक्ष मीनेश शाह ने स्पष्ट किया कि यह पैकेजिंग कुछ ही वर्षों में मिट्टी में मिलकर खाद बन जाएगी और सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस नई तकनीक के कारण उपभोक्ताओं के लिए दूध की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।
रीसाइक्लिंग के अनुकूल और मदर डेयरी का विशाल साम्राज्य
यह नया पाउच न केवल मिट्टी में गलने की क्षमता रखता है, बल्कि इसे सामान्य प्लास्टिक की तरह रीसायकिल भी किया जा सकता है। यह दोहरी खूबी प्लास्टिक प्रदूषण की वैश्विक चुनौती से निपटने में गेम-चेंजर साबित होगी। सन 1974 में स्थापित हुई मदर डेयरी पिछले कई दशकों से भारतीय घरों का एक अभिन्न हिस्सा रही है। कंपनी दूध के अलावा दही, आइसक्रीम, पनीर और शुद्ध घी जैसे बेहतरीन डेयरी उत्पादों का निर्माण करती है। इसके साथ ही, कंपनी 'धारा' (Dhara) ब्रांड नाम से उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य तेल और 'सफल' (Safal) ब्रांड के अंतर्गत ताजे फल, सब्जियां, फ्रोजन फूड और स्नैक्स भी देश के कोने-कोने तक पहुंचाती है।
टेक जगत का सबसे बड़ा मुकाबला: एंथ्रोपिक बनाम ओपनएआई; शेयर बाजार में होने वाली इस महाजंग के हर पहलू को समझें इन 10 पॉइंट्स में
2 Jun, 2026 03:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया अब केवल तकनीकी आविष्कारों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्लोबल कैपिटल मार्केट यानी शेयर बाजार का सबसे बड़ा कुरुक्षेत्र बन चुकी है। चैटजीपीटी (ChatGPT) की जनक कंपनी 'ओपनएआई' और क्लॉउड (Claude) चैटबॉट बनाने वाली 'एंथ्रोपिक' के बीच इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ (IPO) की रेस शुरू हो चुकी है। एआई जगत की यह महासंग्राम निवेशकों, टेक इंडस्ट्री और हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह बदलने का माद्दा रखती है।
वॉल स्ट्रीट पर निवेश का महाभूकंप और नंबर वन की गद्दी के लिए जंग
एआई सेक्टर की दिग्गज कंपनी एंथ्रोपिक ने गोपनीय तरीके से अपने आईपीओ के लिए दस्तावेज जमा कर दिए हैं। इसके साथ ही ओपनएआई और एलन मस्क की अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) भी इसी साल पब्लिक होने की कतार में हैं, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजार में पूंजी की एक अभूतपूर्व सुनामी आने के आसार हैं। दिलचस्प बात यह है कि वैल्यूएशन के मोर्चे पर एंथ्रोपिक ने ओपनएआई को पीछे छोड़ दिया है। हालिया फंडिंग राउंड के बाद एंथ्रोपिक का मूल्यांकन (वैल्यूएशन) 965 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जबकि ओपनएआई की पिछली वैल्यूएशन 730 बिलियन डॉलर आंकी गई थी। एंथ्रोपिक भविष्य की अनुमानित आय (रेवेन्यू रन रेट) के मामले में भी आगे निकल चुकी है।
कोडिंग पर खास फोकस, पेंटागन का बैन और स्पेसएक्स के साथ सीक्रेट डील
एंथ्रोपिक की इस अप्रत्याशित सफलता के पीछे उसकी खास रणनीति है। जहां ओपनएआई ने इमेज जनरेशन और ब्राउजर जैसे कई तरह के टूल्स बनाए, वहीं एंथ्रोपिक ने अपना पूरा ध्यान सिर्फ 'सॉफ्टवेयर कोडिंग' को अचूक बनाने पर केंद्रित रखा। उनके नवीनतम मॉडल Claude Opus 4.5 ने कोडिंग के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल की है, जिससे कॉर्पोरेट ग्राहक इसकी ओर तेजी से खिंचे चले आ रहे हैं। हालांकि, कंपनी की 'मायथोज' नामक सुरक्षा तकनीक को लेकर अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) और खुफिया एजेंसियां इतनी सतर्क हो गईं कि उन्होंने इस पर अस्थाई प्रतिबंध लगा दिया। इस रेस का सबसे रोमांचक मोड़ एंथ्रोपिक की स्पेसएक्स के साथ हुई डील है, जिसके तहत वे एलन मस्क के मेम्फिस स्थित 'Colossus 1' डेटा सेंटर के 2,20,000 एआई चिप्स का उपयोग करेंगे।
एलन मस्क के 'ट्रिलियनेयर' बनने की राह और निवेशकों के लिए जरूरी चेतावनी
इस आईपीओ बाजार से न केवल टेक कंपनियों को फायदा होगा, बल्कि इसके चलते स्पेसएक्स के आधे मालिक एलन मस्क दुनिया के पहले 'ट्रिलियनेयर' (लाख करोड़पति) बन सकते हैं। साथ ही, दोनों एआई कंपनियों ने अपने शेयरों का एक बड़ा हिस्सा समाज कल्याण के लिए दान करने का संकल्प लिया है। हालांकि, वित्तीय विश्लेषकों और डॉयचे बैंक की रिपोर्ट ने निवेशकों को थोड़ा संभलकर चलने की सलाह दी है। जानकारों का मानना है कि जब ये कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट होंगी और इनके वास्तविक वित्तीय खाते सार्वजनिक होंगे, तभी इनके बिजनेस मॉडल की असल मजबूती का पता चलेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि स्पेसएक्स और ओपनएआई के आईपीओ आने वाले कुछ हफ्तों में दस्तक दे सकते हैं, जबकि एंथ्रोपिक साल के अंत तक बाजार में उतरेगी।
घरेलू बाजार पर दबाव कायम: बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक टूटे
2 Jun, 2026 10:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई | भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को भी मंदी का दौर जारी रहा, जिससे निवेशकों में मायूसी दिखी। बाजार लगातार पांचवें कार्यदिवस (ट्रेडिंग सेशन) पर बिकवाली के दबाव में लाल निशान पर कारोबार करता नजर आया। कारोबार की शुरुआत होते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सूचकांक सेंसेक्स करीब 350 अंक नीचे गोता लगा गया, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 100 अंकों से अधिक की कमजोरी के साथ 23,300 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे खिसक गया।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
मंगलवार सुबह बाजार खुलते ही बिकवाली हावी हो गई। सुबह 9:25 बजे सेंसेक्स 302.16 अंक (-0.40%) की गिरावट दर्ज करते हुए 73,965.18 के स्तर पर आ गया। ठीक इसी समय, निफ्टी भी संभल नहीं पाया और वह 105.00 अंक (-0.45%) की गिरावट के साथ 23,277.60 के स्तर पर संघर्ष करता नजर आया। लगातार हो रही इस गिरावट से बाजार का सेंटिमेंट कमजोर हुआ है।
एशियाई बाजारों में सुस्ती का असर
घरेलू शेयर बाजार में देखी जा रही इस गिरावट के पीछे वैश्विक संकेत भी जिम्मेदार रहे। मंगलवार को प्रमुख एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का रुख देखा गया, जिसका सीधा असर भारतीय सूचकांकों पर पड़ा। विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से लगातार हो रही बिकवाली और वैश्विक आर्थिक चिंताओं के कारण बाजार पर दबाव साफ महसूस किया जा रहा है।
डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ भारतीय रुपया
शेयर बाजार में मचे इस हाहाकार के बीच मुद्रा बाजार (करेंसी मार्केट) से एक राहत भरी खबर सामने आई। शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में मजबूती दर्ज की गई। रुपया डॉलर के सामने 16 पैसे की बढ़त हासिल करते हुए 95.03 के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, रुपये की इस मजबूती का शेयर बाजार के सेंटिमेंट पर कुछ खास सकारात्मक असर नहीं दिखा।
"बाजार में सुस्ती बरकरार: सेंसेक्स 508 अंक गिरकर बंद, 23,400 के नीचे पहुंचा निफ्टी"
1 Jun, 2026 04:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में हफ्ते के पहले कारोबारी दिन जबरदस्त उतार-चढ़ाव का माहौल देखने को मिला। सोमवार को मजबूती के साथ हरे निशान पर शुरुआत करने के बावजूद, बिकवाली के भारी दबाव के चलते दोनों बेंचमार्क सूचकांक अंततः लाल निशान में डूबकर बंद हुए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 508.40 अंक यानी 0.67% का गोता लगाकर 74,267.34 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 165.16 अंक (-0.70%) फिसलकर 23,382.60 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार की इस चौतरफा गिरावट के बीच अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपया भी 12 पैसे कमजोर होकर 94.97 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ।
एचयूएल और श्रीराम फाइनेंस के शेयर टूटे, बिकवाली का रहा बोलबाला
सोमवार के ट्रेडिंग सेशन के दौरान दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी मुनाफावसूली देखी गई। खासतौर पर हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) और श्रीराम फाइनेंस जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर करीब तीन फीसदी तक टूट गए। एनएसई (NSE) पर दिनभर के कारोबार के बाद बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह निगेटिव नजर आया; जहां 2,201 शेयर गिरावट के लाल निशान के साथ बंद हुए, वहीं केवल 1151 शेयरों में ही तेजी दर्ज की जा सकी। इसके अलावा, 99 शेयरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं देखा गया और वे स्थिर रहे।
अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक कारणों से सहमे निवेशक
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को आई इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। पश्चिम एशिया के इस संकट से जुड़ी पल-पल की खबरों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में तेजी आ रही है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसे खींचने (बिकवाली करने) और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हो रही बढ़ोतरी ने भी घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को बिगाड़ने का काम किया है।
उतार-चढ़ाव के बीच सतर्कता बरत रहे हैं ट्रेडर्स
कारोबारियों का मानना है कि जब तक वैश्विक मोर्चे पर भू-राजनीतिक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में ऐसा ही उतार-चढ़ाव बना रहेगा। विदेशी फंडों की लगातार निकासी से बाजार का ऊपरी स्तरों पर टिक पाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में रिटेल इनवेस्टर्स और शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को फिलहाल आक्रामक पोजीशन बनाने से बचने और फूंक-फूंक कर कदम रखने की सलाह दी जा रही है। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक संकेत ही बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।
"लाखों निवेशकों की गोपनीयता दांव पर! HDFC AMC डेटा चोरी केस में हाईकोर्ट ने कड़ा किया शिकंजा"
1 Jun, 2026 03:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। देश की दिग्गज म्यूचुअल फंड कंपनियों में शुमार एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (HDFC AMC) और उसके लाखों निवेशकों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। कंपनी के आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर में सेंध लगाकर बेहद संवेदनशील डेटा चोरी करने वाले 'मॉर्फियस' नामक रैनसमवेयर हैकर ग्रुप के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है।
डेटा लीक और सार्वजनिक करने पर कोर्ट की तत्काल रोक
बॉम्बे हाई कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ के जस्टिस श्रीराम शिरसाट ने 29 मई को इस गंभीर साइबर हमले के मामले की आपातकालीन सुनवाई की। अदालत ने 'मॉर्फियस' हैकर्स के खिलाफ एक अंतरिम निषेधाज्ञा (अस्थायी रोक) जारी करते हुए साफ किया कि चुराए गए किसी भी गोपनीय डेटा को वितरित करने, इंटरनेट पर डालने या उसका खुलासा करने पर तुरंत पाबंदी रहेगी। अदालत ने माना कि यदि इस संवेदनशील वित्तीय डेटा का दुरुपयोग, सौदा या सार्वजनिक तौर पर लीक किया जाता है, तो इसके बेहद विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं और इससे निवेश करने वाली जनता व वादी कंपनी को ऐसा नुकसान होगा जिसकी भरपाई नामुमकिन है।
केंद्र सरकार और आईटी मंत्रालयों को सख्त निर्देश
अदालत ने केवल साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने तक ही अपनी कार्रवाई को सीमित नहीं रखा, बल्कि केंद्र सरकार को भी इस डेटा लीक के दुष्परिणामों को रोकने के लिए युद्धस्तर पर कदम उठाने को कहा है। माननीय न्यायालय ने दूरसंचार विभाग (DoT) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के माध्यम से केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि चोरी किए गए गोपनीय डेटा को होस्ट करने वाले या उससे जुड़े सभी इंटरनेट अकाउंट्स, लिंक्स और यूआरएल को तुरंत हटाने, डिलीट करने, ब्लॉक करने और निष्क्रिय (डिसेबल) करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
एचडीएफसी एएमसी ने सुरक्षा के लिए खटखटाया था कोर्ट का दरवाजा
गौरतलब है कि इस रैनसमवेयर अटैक की शिकार हुई एचडीएफसी एएमसी ने निवेशकों के हितों और अपनी साख को सुरक्षित रखने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। कंपनी ने अपनी इस कानूनी गुहार में विशेष रूप से इन शीर्ष सरकारी तकनीकी विभागों से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की थी, ताकि हैकर्स चुराए गए डेटा के दम पर कंपनी को ब्लैकमेल न कर सकें और न ही इसे डार्क वेब या अन्य प्लेटफॉर्म्स पर बेच सकें। इस अदालती आदेश के बाद अब सरकारी सुरक्षा एजेंसियां और कंपनी की आईटी टीम मिलकर इस डिजिटल सेंधमारी के असर को कम करने में जुट गई हैं।
PMI रिपोर्ट में भारत की दमदार तस्वीर, ग्रोथ रेट ने छुआ 3 महीने का उच्चतम स्तर
1 Jun, 2026 11:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) उद्योग के लिए अच्छी खबर है। घरेलू बाजार में मजबूत मांग, बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) प्रोजेक्ट्स में आई तेजी और नए ऑर्डर्स मिलने से उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों की रफ्तार मई के महीने में काफी तेज हो गई है। इसके साथ ही यह सेक्टर पिछले तीन महीनों के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, पश्चिमी एशिया में चल रहे तनाव के कारण बढ़ती लागत और महंगाई अब भी इस सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
पीएमआई (PMI) आंकड़ों में दर्ज हुआ सुधार
सोमवार को जारी हुए ताजा एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के आंकड़ों के मुताबिक, मई में यह सूचकांक बढ़कर 55.0 के स्तर पर पहुंच गया, जो अप्रैल में 54.7 पर था। यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि पिछले तीन महीनों के मुकाबले विनिर्माण क्षेत्र में सबसे शानदार बढ़त दर्ज की गई है।
क्या होता है पीएमआई? इकोनॉमी की भाषा में अगर पीएमआई का आंकड़ा 50 से ऊपर रहता है, तो इसका मतलब सेक्टर में विस्तार (ग्रोथ) हो रहा है, जबकि 50 से नीचे रहना गिरावट को दर्शाता है। यह इंडेक्स नए ऑर्डर, उत्पादन, रोजगार और स्टॉक जैसे बड़े पैमानों को देखकर तय किया जाता है।
आखिर किन वजहों से आई यह तेजी?
रिपोर्ट के अनुसार, मई के दौरान नए ऑर्डर्स मिलने और उत्पादन की रफ्तार में फरवरी के बाद से सबसे बड़ी बढ़त देखी गई है। मुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों की कंपनियों का कहना है कि मार्केट में मजबूत डिमांड और सरकारी व निजी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से मिलने वाले बड़े ठेकों के चलते काम में यह तेजी आई है।
विशेषज्ञों का क्या है कहना?
एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के मुताबिक, मई के आंकड़े बताते हैं कि पश्चिमी एशिया के हालातों को देखते हुए कंपनियां सुरक्षा के लिहाज से पहले से ही अतिरिक्त स्टॉक तैयार कर रही हैं। इसके चलते उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ कच्चे माल की खरीद और तैयार माल के गोदामों (स्टॉक) में भी तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है।
घरेलू बाजार से मिला सबसे बड़ा सहारा
इस सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सबसे बड़ा सपोर्ट भारत के घरेलू बाजार से मिला है। हालांकि विदेशी निर्यात के ऑर्डर्स में भी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन उसकी रफ्तार थोड़ी धीमी रही।
दूसरी तरफ, बिजली, ईंधन, कच्चे माल और माल ढुलाई (ट्रांसपोर्ट) का खर्च बढ़ने से कंपनियों की जेब पर असर पड़ रहा है। पश्चिमी एशिया के युद्ध का असर कंपनियों की लागत पर साफ दिख रहा है। राहत की बात यह है कि कच्चे माल की महंगाई दर अप्रैल के मुकाबले थोड़ी कम हुई है, जिससे कंपनियों ने मुनाफा प्रभावित होने के डर के बावजूद कच्चे माल की खरीददारी जारी रखी। पिछले तीन महीनों में यह खरीद सबसे तेज दर्ज की गई है।
रोजगार के मोर्चे पर कैसी रही स्थिति?
बढ़ते कामकाज को संभालने के लिए फैक्ट्रियों और कंपनियों में नई नियुक्तियों (रोजगार) का सिलसिला भी जारी रहा। भले ही अप्रैल की तुलना में मई में नई भर्तियों की स्पीड थोड़ी कम रही, लेकिन कुल मिलाकर रोजगार के बाजार में मजबूती बनी हुई है। आने वाले महीनों को लेकर कंपनियों का भरोसा सकारात्मक है और उन्हें उम्मीद है कि विज्ञापनों में बढ़ोतरी और मजबूत ऑर्डर बुक के दम पर आगे लागत का दबाव कम होगा।
आपको बता दें कि यह सर्वेक्षण एसएंडपी ग्लोबल द्वारा नई दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता समेत देश भर के लगभग 400 विनिर्माण प्रबंधकों से मिले फीडबैक के आधार पर तैयार किया जाता है।
कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर तेज कदम, UPI ट्रांजैक्शन ने छुआ ₹30 लाख करोड़ का आंकड़ा
1 Jun, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत में डिजिटल भुगतान का ग्राफ लगातार नई ऊंचाइयां छू रहा है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए होने वाले सालाना लेनदेन में 24 फीसदी का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है, जिसके बाद कुल ट्रांजैक्शन की संख्या 23.20 बिलियन (अंकीय मात्रा) पर पहुंच गई है। वहीं, अगर पैसों के मूल्य की बात करें, तो मई के महीने में इसके जरिए कुल लेनदेन 30 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गया।
अप्रैल के मुकाबले मई में भी बढ़त जारी
महीने-दर-महीने के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो अप्रैल की तुलना में मई में यूपीआई से होने वाले ट्रांजैक्शन की संख्या में तकरीबन 3.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह, कुल लेनदेन के मूल्य में भी लगभग 3 प्रतिशत का इजाफा देखा गया। इसके साथ ही, मई के महीने में तत्काल भुगतान सेवा (IMPS) के माध्यम से 358 मिलियन ट्रांजैक्शन पूरे किए गए, जबकि इसी दौरान बायोमेट्रिक आधारित भुगतान प्रणाली (AePS) के तहत 88 मिलियन लेनदेन रिकॉर्ड किए गए।
अगर इससे ठीक पिछले महीने यानी अप्रैल की बात करें, तो डिजिटल ट्रांजैक्शन पिछले साल के मुकाबले 25 फीसदी बढ़कर 22.35 अरब तक पहुंच गए थे। अप्रैल में हुए इन लेनदेनों की कुल कीमत 29.03 लाख करोड़ रुपये रही, जो सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की ग्रोथ को दर्शाती है। प्रतिदिन के हिसाब से देखें, तो रोजाना होने वाले औसत ट्रांजैक्शन की संख्या जो मार्च में 730 मिलियन थी, वह अप्रैल में बढ़कर 745 मिलियन हो गई।
10 सालों में 12,000 गुना की ऐतिहासिक छलांग
भारत का यह स्वदेशी डिजिटल पेमेंट सिस्टम अब घरेलू बाजार तक ही सीमित नहीं है। वर्तमान में यूपीआई दुनिया के आठ से ज्यादा देशों में पूरी तरह काम कर रहा है, जिनमें यूएई, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर जैसे देश शामिल हैं। इन वैश्विक कदमों ने भारत को डिजिटल करेंसी और भुगतान के मामले में दुनिया का अगुआ बना दिया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक (10 साल) के भीतर भारत के इस प्रमुख डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म ने लेनदेन की संख्या में 12,000 गुना की हैरान करने वाली तरक्की की है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहां सालाना केवल 2 करोड़ ट्रांजैक्शन होते थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,162 करोड़ से भी पार चला गया है। एनपीसीआई के इस सिस्टम ने मोबाइल के जरिए बैंकों के बीच तुरंत पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा देकर देश की बैंकिंग व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है।
सोना-चांदी खरीदने का है प्लान? जानिए आज आपके शहर में क्या चल रहा है भाव"
1 Jun, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सर्राफा बाजार से सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए एक जरूरी अपडेट सामने आया है। जून महीने के पहले ही दिन यानी 1 जून 2026 को घरेलू बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में नया बदलाव दर्ज किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिल रहे संकेत, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की चाल और स्थानीय स्तर पर ज्वैलर्स की मांग के मिले-जुले असर के कारण कीमतों में यह उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
सोने की कीमतों में सुधार, 24 कैरेट का भाव ₹15,703 के पार
वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई और सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की तरफ बढ़ते रुझान के कारण इसकी कीमतों में तेजी का रुख देखने को मिल रहा है। आज भारतीय बाजार में शुद्ध सोने यानी 24 कैरेट (999 प्योरिटी) के दाम 15,703 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किए गए हैं। वहीं, आभूषण बनाने के लिए सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले 22 कैरेट सोने की कीमत 14,394 रुपये प्रति ग्राम के स्तर पर पहुंच गई है।
देश के प्रमुख शहरों में आज सोने के दाम इस प्रकार रहे:
चेन्नई: यहां 24 कैरेट सोना 15,959 रुपये, 22 कैरेट 14,629 रुपये और 18 कैरेट 12,274 रुपये प्रति ग्राम पर बिक रहा है।
दिल्ली: देश की राजधानी में 24 कैरेट के दाम 15,718 रुपये, 22 कैरेट के 14,409 रुपये और 18 कैरेट के 11,792 रुपये प्रति ग्राम हैं।
मुंबई और कोलकाता: इन दोनों महानगरों में 24 कैरेट सोना 15,703 रुपये, 22 कैरेट 14,394 रुपये और 18 कैरेट 11,777 रुपये प्रति ग्राम के भाव पर उपलब्ध है।
बेंगलुरु, हैदराबाद, केरल और पुणे: इन सभी शहरों में भी कीमतें मुंबई के समान ही हैं, जहां 24 कैरेट का भाव 15,703 रुपये और 22 कैरेट का भाव 14,394 रुपये प्रति ग्राम है।
वडोदरा और अहमदाबाद: गुजरात के इन दोनों शहरों में 24 कैरेट सोना 15,708 रुपये, 22 कैरेट 14,399 रुपये और 18 कैरेट 11,782 रुपये प्रति ग्राम पर ट्रेंड कर रहा है।
चांदी की चमक भी हुई तेज, चेन्नई में सबसे महंगी
सोने की तर्ज पर चांदी की कीमतों में भी आज जोरदार बढ़त देखने को मिल रही है। देश भर के सर्राफा बाजारों में इंडस्ट्रियल डिमांड आने से शुद्ध सिल्वर 999 की कीमत लगभग 2,79,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेंड कर रही है। इसके साथ ही सिल्वर 925 की कीमत भी मजबूती दिखाते हुए करीब 2,74,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बनी हुई है।
अगर 10 ग्राम चांदी (सिल्वर 999) की बात करें तो देश के मुख्य शहरों में इसके दाम कुछ इस तरह हैं: दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में इसके दाम 2,799 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किए गए हैं, जबकि चेन्नई में यह कुछ अधिक मजबूती के साथ 2,899 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बनी हुई है।
औद्योगिक मांग और वैश्विक हालात तय करेंगे आगे की दिशा
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की कीमतों में आ रही इस तेजी की एक बड़ी वजह आभूषणों के इतर विभिन्न उद्योगों (इंडस्ट्रियल सेक्टर) में इसकी बढ़ती खपत है। दुनिया भर में चल रहे आर्थिक घटनाक्रमों और बड़े निवेशकों के रुख को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में भी सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का यह सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में आम खरीदारों को बाजार की गतिविधियों पर नजर रखकर ही खरीदारी का फैसला लेना चाहिए।
रेस्तरां और होटल का खर्च बढ़ाएगा नया LPG दाम
1 Jun, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: तेल विपणन कंपनियों ने 1 जून 2026 से कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर के दामों में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। अच्छी बात यह है कि घर के किचन में इस्तेमाल होने वाले घरेलू रसोई गैस सिलिंडर (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम जनता के बजट पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा और उन्हें बड़ी राहत मिली है। कंपनियों द्वारा तय की गई यह नई दरें लागू हो चुकी हैं।
कमर्शियल सिलिंडर के बढ़े दाम
नई कीमतों के लागू होने के बाद अब दिल्ली में 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल गैस सिलिंडर 42 रुपये महंगा हो गया है, जिससे इसकी कीमत बढ़कर 3,113.50 रुपये पर पहुंच गई है। वहीं कोलकाता में इसमें 53.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद अब यह वहां 3,255.50 रुपये में मिलेगा। इसके साथ ही छोटे स्तर पर इस्तेमाल होने वाले 5 किलोग्राम के फ्री ट्रेड एलपीजी सिलिंडर की कीमत में भी 11 रुपये का इजाफा किया गया है, जिससे दिल्ली में अब इसकी नई कीमत 821.50 रुपये हो गई है।
होटल और रेस्तरां पर असर
चूंकि कमर्शियल गैस सिलिंडर का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटलों, रेस्तरां, ढाबों और अन्य व्यावसायिक जगहों पर किया जाता है, इसलिए इस बढ़ोतरी से इन कारोबारों की लागत बढ़ जाएगी। जानकारों का मानना है कि अगर गैस की यह बढ़ी हुई कीमतें लंबे समय तक ऐसे ही बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में बाहर मिलने वाले खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की 'एग्जिट' नीति: डॉलर की मजबूती या भारतीय बाजार का हाई वैल्यूएशन? समझें पूरी क्रोनोलॉजी इन 10 सवालों से
30 May, 2026 05:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई | भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा मुनाफावसूली और पूंजी निकासी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय निवेश के बदलते रुख के कारण विदेशी निवेशकों ने मई 2026 में लगातार तीसरे महीने घरेलू इक्विटी बाजार से भारी-भरकम धनराशि निकाली है। इस मौजूदा कारोबारी माहौल, बाजार की दिशा और निवेशकों के सेंटिमेंट को गहराई से समझने के लिए आइए 10 सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर के माध्यम से पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण करते हैं।
विदेशी निवेशकों की निकासी और बाजार के ताजा आंकड़े
1. वैश्विक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार के मौजूदा हालात क्या हैं?
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने मई 2026 में भारतीय शेयर बाजार से 32,963 करोड़ रुपये की बड़ी पूंजी निकाली है। इस चौतरफा बिकवाली के कारण इस साल अब तक सेंसेक्स अपने 86,100 के सर्वकालिक उच्च स्तर से 12.5 प्रतिशत से अधिक टूटकर 74,775 के स्तर तक आ गया है। इसी तरह निफ्टी भी अपने रिकॉर्ड स्तर 26,373.20 से करीब 10 से 11 फीसदी गोता लगाकर 25,500 के दायरे में कारोबार कर रहा है।
2. क्या विदेशी निवेशकों द्वारा पैसा निकालने का यह रुख हालिया है?
जी नहीं, यह साल 2026 में लगातार तीसरा ऐसा महीना है जब विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार में शुद्ध बिकवाल (नेट सेलर) बने हुए हैं। FPI के अंतर्गत आने वाले विदेशी पेंशन फंड, हेज फंड और म्यूचुअल फंड द्वारा लगातार शेयर बेचे जाने का साफ संकेत है कि वैश्विक फंड अब भारतीय इक्विटी से अपना पैसा समेटकर अपने गृह देशों या अन्य सुरक्षित विकल्पों की ओर स्थानांतरित कर रहे हैं।
3. वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशक कुल कितनी रकम निकाल चुके हैं?
इस साल जनवरी से लेकर अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से कुल 2,24,932 करोड़ रुपये की भारी पूंजी वापस ली है। रूस-यूक्रेन विवाद और अमेरिकी टैरिफ नीतियों के बाद पैदा हुई अनिश्चितता के बीच पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) संकट ने इस बिकवाली को और तेज कर दिया है। इसके चलते डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होकर 95 रुपये के पार निकल गया, जिससे विदेशी निवेशकों का मुनाफा घटने लगा और उन्होंने बाजार से निकलना बेहतर समझा।
4. पिछले कुछ महीनों के दौरान विदेशी निवेश के उतार-चढ़ाव का आंकड़ा कैसा रहा?
NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च महीना घरेलू बाजार के लिए सबसे खराब रहा जब रिकॉर्ड 1,17,775 करोड़ रुपये की निकासी हुई। इसके बाद अप्रैल में भी 60,847 करोड़ रुपये बाजार से निकाले गए। हालांकि, फरवरी में भारतीय बाजार को 22,615 करोड़ रुपये का निवेश मिला था, लेकिन उससे पहले जनवरी में भी 35,962 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली दर्ज की गई थी।
पूंजी निकासी के मुख्य कारण और भू-राजनीतिक प्रभाव
5. विदेशी फंड्स द्वारा भारतीय बाजार से दूरी बनाने की सबसे बड़ी वजह क्या है?
बाजार के जानकारों के अनुसार, इस बिकवाली का मुख्य कारण पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में व्यवधान पैदा हो गया। नतीजतन, कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं। चूंकि भारत अपनी जरूरतों के लिए विदेशी कच्चे तेल पर निर्भर है, इसलिए देश का आर्थिक गणित प्रभावित हुआ। इसके अलावा मॉरीशस, सिंगापुर, लक्जमबर्ग और आयरलैंड जैसे टैक्स हैवन देशों के रास्ते आने वाले अनरेगुलेटेड फंड्स ने भी अपनी हिस्सेदारी तेजी से घटाई है। सितंबर 2024 से अप्रैल 2026 के बीच अमेरिकी निवेशकों ने 10%, सिंगापुर ने 29%, मॉरीशस ने 26% और लक्जमबर्ग के निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी 16% तक कम की है, जबकि फ्रांस और जापान से मामूली निवेश आया है।
6. पश्चिम एशिया के संकट से भारतीय शेयर बाजार का क्या संबंध है?
तनाव के चरम पर पहुंचने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया था। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है, जिससे महंगे कच्चे तेल के कारण देश का आयात बिल बढ़ने, वित्तीय घाटा होने और घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंका से निवेशक डरे हुए हैं।
7. क्या वैश्विक निवेश के ट्रेंड में भी कोई ऐसा बदलाव आया है जिससे भारत को नुकसान हो रहा है?
हां, वैश्विक स्तर पर इन दिनों उन बाजारों या कंपनियों में निवेश का प्रवाह सबसे अधिक है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकी विकास चक्र के केंद्र में हैं। वर्तमान परिदृश्य में वैश्विक फंड्स भारत को एक बड़े एआई-केंद्रित बाजार के रूप में नहीं देख रहे हैं, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय पूंजी का रुख भारत के बजाय तकनीकी रूप से अधिक उन्नत बाजारों की तरफ मुड़ रहा है।
बाजार के लिए राहत के संकेत और भविष्य की रणनीति
8. इस अनिश्चित कारोबारी माहौल के बीच भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक खबरें क्या हैं?
बाजार के वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार कुछ मोर्चों पर तात्कालिक राहत भी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों का घटकर 105 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आना और भारतीय रुपये का अपने निचले स्तर 96.96 से रिकवर होकर 96.20 के स्तर पर वापस मजबूत होना भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए शुभ संकेत हैं।
9. शेयर बाजार में इस समय किस तरह का ट्रेडिंग पैटर्न देखने को मिल रहा है?
मौजूदा समय में दलाल स्ट्रीट पर 'डिप्स पर खरीदारी और रैली में बिकवाली' (Buy on Dips, Sell on Rally) का स्पष्ट दौर चल रहा है। इसका मतलब है कि बाजार जब भी गिरता है तो खरीदारी होती है और थोड़ा ऊपर आते ही बड़े निवेशक मुनाफा कूट लेते हैं। ऐसे में खुदरा (रिटेल) निवेशकों को कोई भी बड़ा दांव लगाते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
10. लार्जकैप और स्मॉलकैप श्रेणी के शेयरों के प्रदर्शन में क्या अंतर दिख रहा है?
वैल्युएशन के लिहाज से देश की बड़ी कंपनियां (लार्जकैप) इस समय काफी आकर्षक और सस्ती कीमतों पर उपलब्ध हैं, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली का मुख्य दबाव इन्हीं शेयरों पर देखा जा रहा है। इसके विपरीत, जिन छोटी और मंझोली कंपनियों (स्मॉल व मिडकैप) के तिमाही नतीजे शानदार रहे हैं और जिनका भविष्य का ग्रोथ आउटलुक मजबूत है, वहां स्थानीय निवेशकों का रुझान बना हुआ है और उन शेयरों में अच्छी तेजी देखी जा रही है।
निष्कर्ष: कच्चे तेल के दामों में आई हालिया नरमी और रुपये की आंशिक मजबूती ने भारतीय बाजार को कुछ सहारा जरूर दिया है, लेकिन विदेशी निवेशकों का आक्रामक रुख अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है। जब तक विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयरों में दोबारा शुद्ध खरीदार के रूप में वापस नहीं लौटते, तब तक लार्जकैप और मिडकैप शेयरों के प्रदर्शन का यह उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। ऐसे में छोटे निवेशकों के लिए संयम और सही रणनीति ही बेहतर विकल्प है।
वित्त मंत्रालय की बड़ी चेतावनी: 'सजग रहने की जरूरत', मजबूत बुनियाद के बावजूद तेल, महंगाई और कमजोर मानसून बढ़ा सकते हैं मुश्किलें
30 May, 2026 05:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन आर्थिक मामलों के विभाग ने मई महीने की अपनी ताजा मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में भारत के तात्कालिक और निकट भविष्य के आर्थिक परिदृश्य को 'सतर्कता के साथ लचीलापन और मजबूती' दिखाने वाला बताया गया है। विभाग का विश्लेषण है कि तमाम अंतरराष्ट्रीय और वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत के घरेलू आर्थिक बुनियादी सिद्धांत (फंडामेंटल्स) बेहद मजबूत स्थिति में हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सचेत किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, सख्त वैश्विक वित्तीय स्थितियां और कमजोर मानसून की आशंका जैसी चुनौतियां देश में घरेलू खपत और मुद्रास्फीति (महंगाई) के मोर्चे पर प्रमुख जोखिम पैदा कर सकती हैं।
पीएमआई और विदेशी मुद्रा भंडार में विस्तार, मगर पश्चिम एशिया संघर्ष से बढ़ीं वैश्विक चुनौतियां
आर्थिक समीक्षा के अनुसार, देश के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सेवा (सर्विस) क्षेत्र का क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI) लगातार विस्तार के दायरे में बना हुआ है, जो औद्योगिक गतिविधियों में तेजी का संकेत है। इसके अलावा, देश का श्रम बाजार स्थिर है और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी आर्थिक झटकों के खिलाफ एक ठोस सुरक्षा कवच प्रदान कर रहा है। दूसरी ओर, विभाग ने यह भी स्वीकार किया है कि पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण वैश्विक आर्थिक वातावरण काफी पेचीदा और चुनौतीपूर्ण हो गया है। कच्चे तेल के ऊंचे दाम और दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं की सुस्त विकास दर भारत के विकास पथ के लिए बाहरी अड़चनें बनी हुई हैं।
थोक और खुदरा महंगाई के बीच का अंतर चिंताजनक, पेट्रोल-डीजल और मानसून बढ़ा सकते हैं लागत
आर्थिक मामलों के विभाग ने देश में महंगाई की बदलती गतिशीलता पर निरंतर पैनी नजर रखने की जरूरत बताई है। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई मामूली बढ़त के साथ 3.48 प्रतिशत दर्ज की गई, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्धारित सहज लक्ष्य सीमा के भीतर है। इसके विपरीत, वैश्विक ऊर्जा संकट और मुद्रा के अवमूल्यन (रुपये की कमजोरी) के चलते थोक महंगाई दर तेजी से उछलकर 8.3 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। खुदरा और थोक कीमतों के बीच का यह बड़ा अंतर चिंता का विषय है, क्योंकि यह विनिर्माण के स्तर पर लागत दबाव को दर्शाता है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है। इसके साथ ही पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम और कमजोर मानसून खाद्य पदार्थों की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना सकते हैं।
औद्योगिक मोर्चे पर मिला-जुला रुख, रिकॉर्ड एफडीआई के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 में देश की औद्योगिक गतिविधियों ने मिले-जुले संकेत दिए हैं, लेकिन मुख्य बुनियादी क्षेत्रों जैसे सीमेंट, इस्पात (स्टील) और बिजली उत्पादन में शानदार लचीलापन देखा गया है। एक बड़ी उपलब्धि के रूप में, वित्त वर्ष 2026 के दौरान देश में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 94.5 अरब डॉलर के ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, व्यापारिक मोर्चे पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में होने वाले भू-राजनीतिक व्यवधान भारत के आयात-निर्यात और मूल्य परिदृश्य के लिए बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस बार दीर्घकालिक औसत की तुलना में करीब 92 प्रतिशत ही मानसूनी बारिश होने का अनुमान जताया है। वर्षा में यह संभावित कमी और वैश्विक स्थितियां मिलकर खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण क्षेत्रों में मांग और देश की समग्र आर्थिक विकास दर को प्रभावित कर सकती हैं।
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