व्यापार
एमजी कामेट ईवी सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कारों में शामिल
29 Mar, 2026 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका -इजराइल-ईरान के मध्य जारी लडाई का असर अब भारत में भी होने लगा है। देश में कहीं गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही है तो कहीं पेट्रोल-डीजल की किल्लत सामने आ रही है। ऐसे माहौल में कालाबाजारी भी चांदी काटने में लगे है। ऐसे हालात में इलेक्ट्रिक वाहन किफायती विकल्प के रूप में तेजी से उभर रहे हैं। खासतौर पर एमजी कामेट ईवी देश की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कारों में शामिल है, जिसकी शुरुआती कीमत करीब 7.49 लाख रुपए है। इसकी रनिंग कॉस्ट इसे और आकर्षक बनाती है। एमजी कामेट ईवी को फुल चार्ज करने में लगभग 18 यूनिट बिजली लगती है।
यदि प्रति यूनिट कीमत 8 रुपए मानी जाए, तो कुल खर्च 144 रुपए आता है। कंपनी के अनुसार इसकी रेंज 230 किमी है, जबकि वास्तविक रेंज करीब 200 किमी मानी जाती है। इस हिसाब से प्रति किलोमीटर लागत करीब 72 पैसे पड़ती है। वहीं पेट्रोल कार में औसतन 15 किमी प्रति लीटर माइलेज के आधार पर प्रति किलोमीटर खर्च करीब 6.60 रुपए आता है। यानी हर किलोमीटर पर लगभग 5.88 रुपए की बचत संभव है।
अगर कोई व्यक्ति महीने में 2000 किमी और साल में 24,000 किमी ड्राइव करता है, तो वह हर महीने करीब 11,760 रुपए और सालाना लगभग 1.41 लाख रुपए तक बचा सकता है। पांच साल में यह बचत 7 लाख रुपए के आसपास पहुंच सकती है, जिससे कार की लागत भी वसूल हो जाती है। फीचर्स की बात करें तो इसमें 10.25 इंच की ड्यूल स्क्रीन, स्मार्ट कनेक्टिविटी, नेविगेशन और रियल-टाइम अपडेट जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
रियलमी 16 5जी भारत में जल्द होगा लॉन्च
29 Mar, 2026 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत में रियलमी ने अपने नए स्मार्टफोन रियलमी 16 5जी के लॉन्च की घोषणा कर दी है। यह स्मार्टफोन 2 अप्रैल को लॉन्च किया जाएगा। इसके साथ ही फलीपकार्ट व अन्य प्लेटफॉर्म्स पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 7000एमएएच की पावरफुल बैटरी है, जो 60वॉट फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आती है। कंपनी इस बैटरी पर छह साल की वारंटी भी दे रही है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें डायमेंसिटी 6400 टर्बो प्रोसेसर दिया गया है, जो स्मूद एक्सपीरियंस देने का दावा करता है। कैमरा सेटअप में 50 मेगापिक्सल का प्राइमरी रियर कैमरा आईआईएस सपोर्ट के साथ मिलेगा, जबकि फ्रंट में भी 50 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है। खास बात यह है कि इसमें ‘सेल्फी मिरर’ के साथ नया कैमरा डिजाइन देखने को मिलेगा। फोन में 6.57 इंच का एफएचडी प्लस अमोलेड डिस्प्ले दिया गया है, जो शानदार विजुअल एक्सपीरियंस प्रदान करेगा।
इसके अलावा स्टीरियो स्पीकर्स और एडवांस कूलिंग सिस्टम भी इसमें शामिल हैं। यह स्मार्टफोन एंड्राएड 16 आधारित रियलमी यूआई 7.0 पर चलेगा और कंपनी तीन साल के ओएस अपडेट व चार साल तक सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा कर रही है। इसकी शुरुआती कीमत 30,000 रुपये से कम रहने की संभावना है। डिजाइन के मामले में यह फोन आईफोन जैसे प्रीमियम लुक के साथ आता है और आईपी 66, आईपी 68 व आईपी69 रेटिंग के साथ धूल-पानी से सुरक्षित रहेगा।
वीडा स्कूटर ने किया 2 लाख यूनिट्स की बिक्री का आंकडा पार
29 Mar, 2026 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। स्कूटर निर्माता कंपनी हीरो मोटोकॉर्प का वीडा इलेक्ट्रिक स्कूटर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह स्कूटर 23 मार्च 2026 तक 2 लाख यूनिट्स की बिक्री का आंकड़ा पार कर चुका है। कुल 2,02,422 यूनिट्स की बिक्री यह दर्शाती है कि ग्राहकों के बीच इसकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। प्रारंभ में इस स्कूटर की बिक्री धीमी रही, लेकिन समय के साथ इसमें तेजी आई है। पहली 1 लाख यूनिट्स तक पहुंचने में ज्यादा समय लगा, जबकि अगली 1 लाख यूनिट्स कम अवधि में ही बिक गईं। फिलहाल हर महीने औसतन 12,500 यूनिट्स की बिक्री हो रही है, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दिखाती है।
कंपनी की बाजार में स्थिति भी समय के साथ मजबूत हुई है। खासतौर पर 2025 में एक साल के भीतर 1 लाख से ज्यादा यूनिट्स की बिक्री ने इसे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। इससे इसकी बाजार हिस्सेदारी में भी इजाफा हुआ है। इस सफलता के पीछे कंपनी की नई रणनीतियों और किफायती मॉडल्स का बड़ा योगदान रहा है।
बैटरी को लेकर लचीले विकल्प देने से ग्राहकों की शुरुआती लागत कम हुई, जिससे ज्यादा लोगों ने इस स्कूटर को अपनाया। यह पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने में भी सहायक साबित हुई है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद वीडा स्कूटर ने अपनी स्थिति लगातार बेहतर की है। इसकी रैंकिंग में सुधार हुआ है और यह कई स्थापित ब्रांड्स को चुनौती दे रहा है। 2026 की शुरुआत भी कंपनी के लिए सकारात्मक रही है, जहां शुरुआती महीनों में ही बिक्री में अच्छा उछाल देखने को मिला है।
रिनाल्ट इंडिया ने तैयार की ‘फुटुरेडी’ रणनीति
29 Mar, 2026 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । साल 2026 से 2030 तक के लिए रिनाल्ट इंडिया कंपनी ने ‘फुटुरेडी’ रणनीति तैयार की है। इस योजना के तहत कंपनी कई नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करने जा रही है, जिनका फोकस खासतौर पर तेजी से बढ़ते एसयूवी सेगमेंट पर होगा। कंपनी आने वाले समय में तीन नई एसयूवी पेश करेगी, जिनमें रिनाल्ट डस्टर हायब्रिड , रिनाल्ट डस्टर 7-सीटर और रिनाल्ट बोरियल शामिल हैं। इन मॉडलों के जरिए रेनो अलग-अलग ग्राहक वर्गों को टारगेट करने की तैयारी में है, जिससे उसकी बाजार हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है। डस्टर हाइब्रिड को लॉन्च से पहले ही शानदार प्रतिक्रिया मिली है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 2026 के लिए इसकी सभी यूनिट्स पहले ही बुक हो चुकी हैं, खासकर मेट्रो शहरों में इसकी मांग ज्यादा देखने को मिली है। फिलहाल कंपनी ने इसकी बुकिंग अस्थायी रूप से बंद कर दी है, जिसे लॉन्च के समय दोबारा खोला जा सकता है। इस एसयूवी में 1.8 लीटर का पेट्रोल इंजन, दो इलेक्ट्रिक मोटर और 1.4 केडब्ल्यूएच की बैटरी दी जाएगी, जो करीब 160पीएस की पावर और 172एनएम का टॉर्क जनरेट करेगी।
यही पावरट्रेन 7-सीटर डस्टर में भी मिल सकता है। लॉन्च की बात करें तो डस्टर हाइब्रिड को 2026 की दिवाली के आसपास पेश किया जा सकता है, जबकि बाकी दो मॉडल 2027 में बाजार में आ सकते हैं। 7-सीटर डस्टर को हाल ही में टेस्टिंग के दौरान देखा गया है, जिसमें आधुनिक फीचर्स जैसे बड़ा टचस्क्रीन, 360 डिग्री कैमरा और एडवांस सेफ्टी सिस्टम मिलने की उम्मीद है।
सोने-चांदी की कीमतें अपडेट: सोना सस्ता, चांदी महंगी या सस्ती, भोपाल से जयपुर तक के रेट
29 Mar, 2026 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शादियों के सीजन के बीच भारतीय सराफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में हलचल देखने को मिल रही है। अगर आप आज संडे को सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं और बाजार जाने का सोच रहे हैं तो पहले ताजा भाव जान लीजिए। शनिवार शाम (रविवार को IBJA द्वारा भाव घोषित नहीं किए जाते) को भारतीय सराफा बाजार (व्यापारियों द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार) द्वारा जारी कीमतों के अनुसार, सोने के भाव 1,48, 220 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गए हैं। वहीं देश भर में चांदी का औसत भाव 2,45,000 रुपये प्रति किग्रा के आसपास ट्रेंड कर रहा है।
प्रमुख शहरों का चांदी (Silver Rate Today) का भाव
10 ग्राम: ₹2,450
100 ग्राम: ₹24,500
₹2,50,000 (प्रति किग्रा): दिल्ली, मुंबई, पुणे, नागपुर, जयपुर, लखनऊ, अहमदाबाद, कोलकाता, भोपाल और इंदौर ।
₹2,50,000 (प्रति किग्रा): चेन्नई, मदुरै, हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और केरल। (दक्षिण भारत के राज्यों के भाव में मेकिंग चार्ज, डीलर प्रीमियम/स्थानीय शुल्क, परिवहन लागत और मांग के चलते कीमतों में बढ़त बनी है।)
18 कैरेट (18K) सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम में)
मेरठ, जयपुर, दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़: ₹1,11,220
इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद: ₹1,11,120
मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु: ₹1,11,070
चेन्नई, कोयंबटूर: ₹1,14,000
22 कैरेट (22K) सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम में)
मेरठ, जयपुर, दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़:₹1,35,900
इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद: ₹1,35,800
मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु: ₹1,35,750
चेन्नई, कोयंबटूर:₹1,36,600
24 कैरेट (24K) सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम में)
मेरठ, जयपुर, दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़: ₹1,48,220
इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद: ₹1,48,120
मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु: ₹1,48,090
चेन्नई, कोयंबटूर: ₹1,49,020 (दक्षिण भारत के कुछ शहरों में स्थानीय प्रीमियम/मेकिंग/डीलर मार्जिन के कारण अंतर)
जानिए 18, 20, 22 और 24 कैरेट सोने के बारे में
24 कैरेट (99.9% शुद्ध) : सोने की शुद्धता को ‘कैरेट’ में मापा जाता है। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है। 24 कैरेट पर 999 लिखा होता है। इसमें कोई अन्य धातु नहीं मिली होती। बहुत नरम (Soft) होने के कारण इससे जटिल नक्काशी वाले आभूषण बनाना संभव नहीं है।
18 कैरेट (75.0% शुद्ध)/20 कैरेट (83.3% शुद्ध): 18 कैरेट पर 750 लिखा होता है। इसका अक्सर हीरे या कीमती पत्थरों वाले गहनों में उपयोग होता है। 20 कैरेट पर सोने पर 833 लिखा होता है। इसमें 16.7% अन्य धातुएँ (जैसे तांबा, चांदी, जस्ता) मिलाई जाती है।
22 कैरेट (91.6% शुद्ध): 916 लिखा होता है। गहने बनाने के लिए यह सबसे लोकप्रिय है। इसमें 8.4% तांबा या चांदी या अन्य धातु मिलाई जाती है, ताकि गहने मजबूत रहें। यही कारण है कि ज्यादातर दुकानदार 18, 20 और 22 कैरेट का ही सोना बेचते हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से सोने के सिक्के, बार (ईंटें) और निवेश के लिए किया जाता है। खरीदारी करते समय यह सुनिश्चित करें कि आप जितने कैरेट का पैसा दे रहे हैं, गहने पर वही अंक (जैसे 916 या 750) दर्ज हो।
सोने की कीमत प्रभावित करने वाले कारण: अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर में उतार-चढ़ाव, वैश्विक मांग, भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी व ब्याज दरें और शेयर बाजार का प्रदर्शन के चलते सोने-चांदी के भाव परिवर्तन देखने को मिलता है। भारतीय बाजार, स्थानीय कारक, भारत जैसे देशों में आयात शुल्क और अन्य कर घरेलू दामों पर USD-INR, आयात शुल्क, जीएसटी/टीसीएस, लोकल मेकिंग चार्ज, देश की महंगाई दर, त्योहार और शादियों का सीजन भी कीमतों पर असर डालते हैं।
सोने से जुड़ी काम की बातें: भारत में सोने-चांदी के मानक भाव इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए जाते हैं। शनिवार, रविवार और केंद्र सरकार द्वारा घोषित छुट्टियों के दिन नए रेट जारी नहीं होते हैं। IBJA के रेट में GST और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होते। इसलिए, अलग-अलग शहरों और शोरूम्स में अंतिम दाम अलग हो सकते हैं। सोना खरीदते समय BIS हॉलमार्क और HUID कोड की जांच अवश्य करें। BIS लोगो भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards) का आधिकारिक प्रतीक है। HUID नंबर 6 अंकों का एक विशिष्ट अल्फा-न्यूमेरिक कोड (Hallmark Unique Identification) है।
Hindustan Petroleum Corporation Limited का बड़ा बयान, कहा—फ्यूल सप्लाई पूरी तरह सामान्य
28 Mar, 2026 01:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर उठ रही आशंकाओं के बीच हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने देश में ईंधन की उपलब्धता को लेकर बड़ा बयान जारी किया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर है तथा देशभर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है। एचपीसीएल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित और स्थिर है। पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है और सभी फ्यूल स्टेशन सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं।
देश की रिफाइनरियों को लेकर क्या कहा?
कंपनी ने यह भी बताया कि देश की रिफाइनिंग और सप्लाई प्रणाली सुचारु रूप से काम कर रही है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर चल रही हैं, भंडार पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और भविष्य की आपूर्ति भी सुरक्षित कर ली गई है।
पेट्रोल पंपों पर भीड़ गलत जानकारी का कारण बनी
कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर देखी गई भीड़ को लेकर HPCL ने साफ किया कि यह स्थिति गलत जानकारी (मिसइन्फॉर्मेशन) के कारण बनी। कंपनी ने लोगों से अपील की कि वे घबराएं नहीं और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
घेरलू उत्पादन में हुई वृद्धि और आयात पूरी तरह सुरक्षित है
कंपनी की अतिरिक्त एडवाइजरी में भी कहा गया है कि देश के सभी राज्यों में पेट्रोल, डीजल और LPG सामान्य रूप से उपलब्ध हैं और कहीं भी सप्लाई में कोई बाधा नहीं है। भारत का मजबूत रिफाइनिंग नेटवर्क लगातार स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है और कच्चा तेल वैश्विक स्रोतों से नियमित रूप से प्राप्त हो रहा है।
पीएनजी नेटवर्क का विस्तार पर कंपनी ने क्या बताया?
HPCL के अनुसार, घरेलू उत्पादन में वृद्धि हुई है और आयात भी पूरी तरह सुरक्षित है, जिससे मौजूदा मांग को आसानी से पूरा किया जा रहा है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क का विस्तार देश की स्वच्छ ऊर्जा की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है और इसका मौजूदा ईंधन उपलब्धता से कोई संबंध नहीं है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव के चलते होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यह मार्ग वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई संभालता है। संकट से पहले भारत अपने कुल तेल आयात का करीब 12 से 15 प्रतिशत इसी मार्ग के जरिए करता था।
आपूर्ति संकट से महंगाई बढ़ने के आसार, West Asia हालात बने चिंता
28 Mar, 2026 01:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। अगर यह संकट लंबा चलता है तो 2026-27 के दौरान क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि में 1.3 फीसदी अंक तक गिरावट आ सकती है, जबकि महंगाई 3.2 फीसदी बढ़ सकती है। कहा जा रहा कि संघर्ष का असर मुख्य रूप से महंगे ऊर्जा शुल्क, आपूर्ति शृंखला में बाधा, व्यापार में रुकावट और वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने के रूप में सामने आ रहा है। रेटिंग एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया के देशों का पश्चिम से सीधा व्यापार भले कम हो, लेकिन वे ऊर्जा आयात और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर निर्भर होने के कारण ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। रेटिंग एजेंसियों ने खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र किया है, जहां से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है। इसका बड़ा हिस्सा एशिया तक पहुंचता है।
प्रभावित हुई शिपिंग, कैसे?
मौजूदा तनाव के कारण यहां शिपिंग प्रभावित हुई है, जिससे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया और कुछ समय के लिए यह 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इसके अलावा, वित्तीय बाजारों में भी तनाव दिखा। शेयर बाजार गिरे हैं और बॉन्ड यील्ड बढ़ी है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कीमतों को पूरी तरह नियंत्रित करने के बजाय उन्हें आंशिक रूप से बढ़ने दिया जाए, ताकि ऊर्जा स्रोतों की बचत हो और वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा मिले। केंद्रीय बैंक महंगाई पर नजर रखें और बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव को रोकें।
आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा विपरीत प्रभाव
रेटिंग एजेंसी इक्रा का कहना है, अगर संघर्ष जल्दी खत्म हो जाता है तो इसका असर सीमित रह सकता है। अगर हालात लंबे समय ऐसे ही तक बने रहते हैं तो यह क्षेत्र की आर्थिक संभावनाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। एशियाई विकास बैंक ने सरकारों को सलाह दी है कि वे आर्थिक स्थिरता बनाए रखें, ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करें और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से काम करें। साथ ही, सब्सिडी और कीमत नियंत्रण के बजाय जरूरतमंद वर्गों के लिए सीमित समय के समर्थन उपाय अपनाने पर जोर दिया गया है।
खाड़ी देशों से आने वाले धन में कमी
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि शिपिंग में रुकावट से लागत बढ़ेगी, उत्पादन में देरी होगी और आपूर्ति शृंखला पर दबाव बढ़ेगा। उसने कहा, खाड़ी देशों पर निर्भर राष्ट्रों को झटका लग सकता है, क्योंकि वहां आर्थिक गतिविधियां कमजोर होने से प्रवासी कामगारों की आय घट सकती है। इससे रेमिटेंस (विदेश से आने वाला पैसा) कम हो सकता है।
आगे दिख सकते हैं ये हालात
एडीबी का मानना है कि अगर संघर्ष जल्दी खत्म हो जाता है तो असर सीमित रहेगा। लंबा संघर्ष ग्रोथ और महंगाई असर डालेगा। दक्षिण-पूर्व एशिया और प्रशान्त देशों की ग्रोथ पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, जबकि भारत सहित दक्षिण एशियामें महंगाई सबसे ज्यादा बढ़ सकती है। एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री अल्बर्ट पार्क ने कहा कि लंबा संकट देशों के लिए मुश्किल स्थिति पैदा कर सकता है, जहां उन्हें कम ग्रोथ और ज्यादा महंगाई के बीच संतुलन बनाना होगा।
बढ़ सकता है राजकोषीय घाटा
वेस्ट एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते बढ़ती तेल और गैस की कीमतें भारत की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती हैं। ऊर्जा की ऊंची कीमतें वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर दबाव डाल सकती हैं। सरकार को उर्वरक और एलपीजी जैसी सब्सिडी पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।
West Asia तनाव का असर, India में महंगाई बढ़ने की आशंका
28 Mar, 2026 12:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक बाजार एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव को नजरअंदाज कर रहे हैं। सिस्टमैटिक्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा हालात केवल तात्कालिक उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि वैश्विक परिदृश्य में एक बड़े बदलाव का संकेत हैं, जो आगे चलकर बार-बार उभर सकते हैं और लंबी अवधि तक अनिश्चितता बनाए रख सकते हैं।
वैश्विक बाजार उम्मीद और डर के बीच झूल रहा है
रिपोर्ट के अनुसार, बाजार फिलहाल हर युद्ध से जुड़ी खबर पर उम्मीद और डर के बीच झूल रहे हैं, लेकिन इसके पीछे एक गहरा बदलाव चल रहा है। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में बदलती नीतियां और ईरान की प्रतिक्रिया मिलकर ऐसी स्थिति बना रही हैं, जहां निवेशकों के लिए लंबी अवधि के जोखिमों का आकलन करना मुश्किल हो गया है। रिपोर्ट ने इसे वैश्विक भू-राजनीतिक ढांचे में एक बड़े मेटामॉर्फोसिस के रूप में बताया है, जिसमें अमेरिका और चीन के नेतृत्व वाले ग्लोबल साउथ के बीच शक्ति संतुलन बदल रहा है। इससे आने वाले समय में इस तरह के तनाव और टकराव बार-बार देखने को मिल सकते हैं।
संकट का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर दिख रहा
आर्थिक मोर्चे पर रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि इस संकट का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास या उससे ऊपर पहुंच चुकी है, जो न सिर्फ सप्लाई से जुड़े जोखिम बल्कि बढ़ते जियोपॉलिटिकल प्रीमियम को भी दर्शाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर तनाव कम भी होता है, तब भी कच्चे तेल और गैस की सप्लाई में बाधाएं बनी रह सकती हैं, जिससे कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।
भारी कर्ज बढ़ा रही चिंता
इसके साथ ही वैश्विक कर्ज भी चिंता का बड़ा कारण बनता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के दौरान वैश्विक कर्ज करीब 29 ट्रिलियन डॉलर बढ़कर 348 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे सरकारों की आर्थिक प्रोत्साहन देने की क्षमता सीमित हो सकती है।
भारत को लेकर क्या आशंका?
भारत को लेकर रिपोर्ट में विशेष रूप से चेतावनी दी गई है कि ऊंचे कच्चे तेल के दाम और कमजोर मांग मिलकर स्टैगफ्लेशन की स्थिति पैदा कर सकते हैं। इससे हाल के आर्थिक सुधारों पर असर पड़ सकता है और घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में भारत की खुदरा महंगाई दर 6 से 7 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है। अंत में रिपोर्ट ने कहा है कि मौजूदा हालात अस्थायी नहीं हैं। ऊंचे तेल के दाम, सख्त वित्तीय परिस्थितियां और बार-बार होने वाले भू-राजनीतिक झटके अब वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थायी विशेषताएं बन सकते हैं, जिससे लंबी अवधि तक समायोजन का दौर जारी रह सकता है।
केंद्र का बड़ा फैसला: बाजार से 8.2 लाख करोड़ जुटाने की योजना
28 Mar, 2026 11:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने बताया कि केंद्र सरकार राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए 2026-27 की अप्रैल-सितंबर अवधि के दौरान प्रतिभूतियों के माध्यम से 8 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में सकल बाजार उधार 17.20 लाख करोड़ रुपये था। बजट पेश होने के बाद से राजकोषीय प्रतिभूतियों की अदला-बदली की गई, जिससे सकल बाजार उधार घटकर 16.09 लाख करोड़ रुपये रह गया। मंत्रालय ने कहा, 16.09 लाख करोड़ रुपये में से, 8.20 लाख करोड़ रुपये (51 प्रतिशत) पहली छमाही में दिनांकित प्रतिभूतियों के माध्यम से उधार लेने की योजना है, जिसमें 15,000 करोड़ रुपये के संप्रभु ग्रीन बॉन्ड शामिल हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत अनुमानित राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए 17.2 लाख करोड़ रुपये उधार लेने का प्रस्ताव रखा था। पूर्ण रूप से, 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा 16.9 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। बयान के अनुसार, 8.2 लाख करोड़ रुपये का सकल बाजार उधार 26 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से पूरा किया जाएगा। संस्थागत और खुदरा निवेशकों को अपने निवेश की कुशलतापूर्वक योजना बनाने में सक्षम बनाने और सरकारी प्रतिभूति बाजार में पारदर्शिता और स्थिरता प्रदान करने के लिए, सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक के परामर्श से इस अवधि के दौरान प्रति सप्ताह 28,000 करोड़ रुपये से 34,000 करोड़ रुपये तक का उधार लेने की योजना बनाई है।
पांच फीसदी हिस्सा खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित
सरकार ने कहा कि इस कैलेंडर में शामिल सभी नीलामियों में गैर-प्रतिस्पर्धी बोली की सुविधा होगी, जिसके तहत अधिसूचित राशि का पांच प्रतिशत खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित होगा। सरकार पहले की तरह अधिसूचित राशि, निर्गमन अवधि, परिपक्वता अवधि आदि के संदर्भ में उपरोक्त कैलेंडर में संशोधन करती रहेगी। बाजार की बदलती स्थितियों और अन्य प्रासंगिक कारकों के आधार पर, गैर-मानक परिपक्वता वाले उपकरण, फ्लोटिंग रेट बॉन्ड, मुद्रास्फीति वाले बॉन्ड सहित विभिन्न प्रकार के उपकरण जारी करने के लिए लचीलापन बनाए रखेगी।
राज्यों के कर्ज लेने की लागत बढ़कर चार साल में सबसे ज्यादा
भारत में राज्यों के लिए कर्ज लेना तेजी से महंगा होता जा रहा है और शुक्रवार को हुई नीलामी में इसकी साफ झलक देखने को मिली। वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, कई राज्यों की बॉन्ड यील्ड 8 फीसदी के ऊपर पहुंच गई। ये जुलाई, 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। इस नीलामी में राज्यों ने करीब 40,000 करोड़ रुपये जुटाए, जिसमें से लगभग 45 फीसदी रकम 8 से 8.09 फीसदी की ऊंची ब्याज दर पर उठानी पड़ी। पिछली नीलामी में यह दर 7.60 से 7.88 फीसदी के बीच थी।
क्या कहना है विशेषज्ञों का?
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्याज दरों में यह उछाल कई वजहों से आई है। इसमें बाजार में कर्ज की अधिक सप्लाई, वैश्विक स्तर पर बढ़ती यील्ड, और पश्चिम एशिया संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी शामिल है। इसके अलावा इरडा के प्रस्तावित नियमों ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। इससे बीमा कंपनियों को राज्य बॉन्ड में निवेश पर अधिक पूंजी अलग रखनी पड़ सकती है। इससे इन बॉन्ड की मांग कमजोर पड़ रही है और यील्ड बढ़ रही है। ट्रेडर्स के मुताबिक, इस बार नीलामी में मांग भी खास मजबूत नहीं रही, खासकर बीमा कंपनियों की ओर से, क्योंकि नए नियमों को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। वहीं, पश्चिम एशिया तनाव से तेल कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा उछाल आया है, जिससे महंगाई और वित्तीय संतुलन को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसका असर केंद्र और राज्य दोनों के कर्ज पर दिख रहा है। आगे बीमा कंपनियों की मांग कम हो सकती है और राज्यों के बॉन्ड कम आकर्षक हो सकते हैं।
क्यों बढ़ रही है ब्याज दर
बाजार में ज्यादा कर्ज n बॉन्ड यील्ड में सामान्य बढ़ोतरी n इरडा के नए नियमों का असर n पश्चिम एशिया संकट के कारण तेल कीमतों में उछाल n सरकारी बॉन्ड यील्ड मार्च में 28 बेसिस पॉइंट बढ़ी।
ई-वाहन खरीदने वालों के लिए अलर्ट, PM E-DRIVE Scheme में नई शर्तें लागू
28 Mar, 2026 11:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाली पीएम ई-डीआरईवीई योजना के नियमों में अहम बदलाव किए हैं। भारी उद्योग मंत्रालय की नई अधिसूचना के मुताबिक अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के लिए अलग-अलग अंतिम तारीख और अधिकतम यूनिट सीमा तय कर दी गई है।
नई गाइडलाइंस के अनुसार
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए इंसेंटिव केवल 31 जुलाई 2026 तक रजिस्ट्रेशन पर मिलेगा।
जबकि इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के लिए यह सुविधा 31 मार्च 2028 तक जारी रहेगी।
सरकार ने क्या किया साफ?
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह योजना पूरी तरह फंड-लिमिटेड है और इसका कुल बजट ₹10,900 करोड़ निर्धारित है। यदि यह राशि तय समयसीमा से पहले ही खर्च हो जाती है, तो योजना या उसके संबंधित हिस्सों को समय से पहले बंद कर दिया जाएगा और उसके बाद किसी भी तरह के नए दावों पर विचार नहीं किया जाएगा।
वाहनों की अधिकतम एक्स-फैक्ट्री कीमत की गई निर्धारित
इंसेंटिव का लाभ उठाने के लिए वाहनों की अधिकतम एक्स-फैक्ट्री कीमत भी निर्धारित की गई है। इसके तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए ₹1.5 लाख और इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के लिए ₹2.5 लाख तक की कीमत वाले वाहनों को ही सब्सिडी मिलेगी।
कितने लाभार्थियों को मिलेगा लाभ?
इसके अलावा, योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या भी सीमित कर दी गई है। सरकार अधिकतम 24,79,120 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और 39,034 ई-रिक्शा व ई-कार्ट को ही इस योजना के तहत प्रोत्साहन देगी।
कौन योजना के पात्र माने जाएंगे?
अधिसूचना में यह भी बताया गया है कि 'टर्मिनल डेट' वह अंतिम तारीख होती है, जिसके भीतर वाहन का रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है, तभी वह योजना के लाभ के लिए पात्र माना जाएगा। गौरतलब है कि L5 श्रेणी के इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के लिए निर्धारित लक्ष्य पहले ही पूरा हो चुका है, जिसके चलते इस सेगमेंट को 26 दिसंबर 2025 से बंद कर दिया गया है।
फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट, RBI का बड़ा कदम—अर्थव्यवस्था में 65,322 करोड़ डाले
28 Mar, 2026 06:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार दो महीने बाद पहली बार 700 अरब डॉलर के नीचे आ गया है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 20 मार्च 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का कुल भंडार घटकर 698.35 अरब डॉलर रह गया, जो एक हफ्ते पहले 709.76 अरब डॉलर था। फरवरी अंत में विदेशी मुद्रा भंडार 728.5 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इस दौरान गोल्ड रिजर्व का मूल्य 13.5 अरब डॉलर घटकर 117.2 अरब डॉलर रह गया।
आरबीआई ने अर्थव्यवस्था में डाले 65,322 करोड़
आरबीआई ने शुक्रवार को बैंकिंग प्रणाली में वीआरआर नीलामी के जरिये 65,322 करोड़ की नकदी डाली। वीआरआर यानी परिवर्तनीय रेपो दर बैंकों में नकदी डालने के लिए उपयोग की जाने वाली मौद्रिक नीति है। अग्रिम कर भुगतान और जीएसटी निकासी के कारण डाली गई राशि 75,000 करोड़ से कम रही। 26 मार्च तक बैंकों में 48,698.38 करोड़ रुपये की नकदी थी।
युद्ध से वैश्विक तेल आपूर्ति में रोजाना 1.1 करोड़ बैरल की कमी
पश्चिम एशिया युद्ध के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति से करीब 1.1 करोड़ बैरल प्रतिदिन की कमी आई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इस संकट को 1970 के दशक के तेल संकट और रूस-यूक्रेन गैस संकट से भी बड़ा बताया है। विश्लेषकों का अनुमान है कि युद्ध गहराया तो तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच सकती हैं। ईरान युद्ध को लेकर चल रही कूटनीतिक बातचीत के बीच शुक्रवार को तेल की कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई, लेकिन वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत मामूली गिरकर 107.97 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी घटकर 94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पिछले कुछ हफ्तों में कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। निवेशकों को डर है कि संघर्ष जल्द खत्म नहीं होगा, जिससे ऊर्जा बाजार पर दबाव जारी रह सकता है। उधर, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की समयसीमा 10 दिन बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दी है और ईरान से होर्मुज को दोबारा खोलने की मांग की है। अमेरिका और ईरान ने अपने तेवर में नरमी के संकेत दिए हैं, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव अब भी बना हुआ है।
आईफोन पर चलेंगे एक साथ दो वॉट्सएप खाते
मेटा के स्वामित्व वाले वॉट्सएप ने नई सेवाओं की पेशकश की। इसके तहत एपल आईफोन उपयोगकर्ता अब एक ही फोन पर दो खाते एक साथ चला सकेंगे। इसके अलावा इमेज एडिटिंग और संदेश लिखने के लिए नए टूल भी जोड़े गए हैं। इस अपडेट के बाद उपयोगकर्ताओं को व्यक्तिगत एवं कामकाजी बातचीत के लिए दो अलग-अलग फोन रखने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
शीर्ष शहरों में घरों की बिक्री 7 फीसदी घटी
देश के रियल एस्टेट सेक्टर में जनवरी से मार्च 2026 के दौरान हाउसिंग बिक्री में तिमाही आधार पर गिरावट देखने को मिली। एनरॉक के मुताबिक, पश्चिम एशिया संकट के चलते बाजार पर दबाव बना रहा। इस साल जनवरी-मार्च तिमाही में देश के टॉप-7 शहरों में कुल 1,01,675 घरों की बिक्री हुई, जो पिछले साल के मुकाबले 9 फीसदी ज्यादा है।
इस साल गेहूं की पैदावार बढ़ने की उम्मीद
भारत में 2026 में गेहूं की पैदावार पिछले साल के मुकाबले बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से पकती हुई फसल को नुकसान पहुंचने के कारण यह शुरुआती अनुमानों से कम रह सकती है। सरकार ने इस साल गेहूं उत्पादन का अनुमान करीब 12 करोड़ टन होने का लगाया है, आटा मिल मालिकों के संगठन ने 11.5 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान लगाया है। इस साल किसानों ने 3.3 करोड़ हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की है, जो पिछले साल के 3.2 करोड़ हेक्टेयर से ज्यादा है। भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है। यहां गेहूं की बुवाई अक्टूबर-नवंबर में होती है और कटाई मार्च-अप्रैल में की जाती है। हाल के वर्षों में, फरवरी के आखिर में पड़ने वाली गर्मी के कारण पैदावार में कमी देखने को मिली है। 2025 में अनुकूल मौसम के चलते गेहूं उत्पादन में सुधार हुआ था, लेकिन इस साल फरवरी के आखिर में अचानक गर्मी बढ़ने से चिंताएं बढ़ गई हैं। हाल में हुई बारिश से गेहूं उत्पादक किसानों को कुछ राहत मिली है, पर देश के कुछ हिस्सों में हुई ओलावृष्टि ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इससे पैदावार में कमी आने और फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने की चिंताएं बढ़ गई हैं।
सेबी ने सात कृषि जिंसों की वायदा ट्रेडिंग पर रोक एक साल के लिए बढ़ाई
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कृषि जिंसों में सट्टेबाजी और कीमतों में उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए बड़ा फैसला किया है। सेबी ने गेहूं, मूंग और गैर-बासमती धान समेत सात कृषि वस्तुओं की डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर लगी रोक को एक साल और बढ़ाते हुए 31 मार्च 2027 तक जारी रखने का निर्णय किया है। चना, कच्चा पाम तेल, सरसों और उससे जुड़े उत्पाद, सोयाबीन जैसी फसलें भी इस प्रतिबंध के दायरे में शामिल हैं। सेबी ने साफ किया है कि इस अवधि के दौरान इन जिंसों में नए वायदा कारोबार की अनुमति नहीं होगी, हालांकि पहले ली गई पोजिशन से बाहर निकला जा सकता है। इन जिंसों में ट्रेडिंग पर रोक पहली बार दिसंबर 2021 में लगाई गई थी। सेबी के अनुसार, यह कदम खास तौर पर जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव और सट्टेबाजी को रोकने के लिए उठाया गया है, ताकि महंगाई पर काबू रखा जा सके।
‘सभी देशों को समान अवसर’, पीयूष गोयल ने रखी भारत की बात
27 Mar, 2026 12:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। विश्व व्यापार संगठन में सुधार को लेकर भारत ने स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-आधारित होनी चाहिए, जिसमें विकासशील देशों के विशेष अधिकारों को केंद्र में रखा जाए। कैमरून में आयोजित डब्ल्यूटीए मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि संगठन के सुधार विकास-केंद्रित होने चाहिए और इनमें भेदभावरहित व सहमति आधारित निर्णय प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि सभी सदस्य देशों के लिए समान अवसर सुनिश्चित हो सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि डब्ल्यूटीओ समझौतों में शामिल स्पेशल एंड डिफरेंशियल ट्रीटमेंट (S&DT) प्रावधान, जो विकासशील देशों को विशेष अधिकार देते हैं, उन्हें अधिक स्पष्ट, प्रभावी और व्यवहारिक बनाया जाना चाहिए। कृषि क्षेत्र पर बोलते हुए गोयल ने कहा कि यह करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ा है, खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए। उन्होंने खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण (पब्लिक स्टॉकहोल्डिंग), विशेष सुरक्षा तंत्र और कपास से जुड़े लंबित मुद्दों के जल्द समाधान की मांग की। मत्स्य पालन (फिशरीज) के मुद्दे पर भारत ने संतुलित समझौते की वकालत करते हुए कहा कि यह गरीब मछुआरों की आजीविका की रक्षा करे और वर्तमान व भविष्य की जरूरतों के बीच संतुलन बनाए, साथ ही S&DT प्रावधानों को भी प्रभावी बनाए। गोयल ने डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान तंत्र को बहाल करने की जरूरत पर भी जोर दिया, इसे दुर्बल बताते हुए कहा कि इसके कमजोर होने से सदस्य देशों को न्याय पाने में कठिनाई हो रही है। इसके अलावा, उन्होंने प्लूरिलेटरल (बहुपक्षीय से इतर) समझौतों को WTO ढांचे में शामिल करने के लिए सर्वसम्मति को जरूरी बताया और कहा कि इससे गैर-भागीदार देशों के अधिकारों पर असर नहीं पड़ना चाहिए। ई-कॉमर्स पर कस्टम ड्यूटी में छूट (मोराटोरियम) के मुद्दे पर भी भारत ने सतर्क रुख अपनाते हुए कहा कि इसके प्रभावों को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने पर पुनर्विचार जरूरी है। उभरती तकनीकों के संदर्भ में गोयल ने कहा कि भारत का मानना है कि इनका उपयोग ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए, ताकि विकास और नवाचार का लाभ सभी तक समान रूप से पहुंचे। उन्होंने अंत में कहा कि WTO को वैश्विक व्यापार व्यवस्था के केंद्र में बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि सुधारों के जरिए इसे अधिक प्रभावी, समावेशी और विकासोन्मुख बनाया जाए, ताकि यह गरीब और कमजोर वर्गों के हितों की बेहतर तरीके से रक्षा कर सके।
शेयर बाजार में भारी गिरावट, निफ्टी 23000 के नीचे
27 Mar, 2026 11:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। अमेरिका-ईरान संघर्ष बाजारों के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर 94.24 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1074.97 अंक गिरकर 74,198.48 अंक पर आ गया। वहीं निफ्टी 321.25 अंक गिरकर 22,985.20 अंक पर आ गया। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 926.92 अंक गिरकर 74,346.53 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 280.95 अंक गिरकर 23,025.50 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एटर्नल, इंटरग्लोब एविएशन और बजाज फिनसर्व प्रमुख पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और ट्रेंट लाभ कमाने वाली कंपनियों में शामिल थीं।
एशियाई बाजारों में रहा मिला-जुला हाल
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी और जापान का निक्केई 225 सूचकांक नीचे कारोबार कर रहे थे, जबकि शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक सकारात्मक दायरे में कारोबार कर रहे थे। गुरुवार को अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
अनुसंधान विश्लेषक और लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा कि वैश्विक बाजार में जोखिम से बचने का माहौल साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। अमेरिकी बाजारों में भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिला, नैस्डैक कंपोजिट 2.4 प्रतिशत गिरकर करेक्शन ज़ोन में प्रवेश कर गया और अब अपने हालिया उच्चतम स्तर से 10 प्रतिशत से अधिक नीचे कारोबार कर रहा है। डाउ जोन्स 400 से अधिक अंक गिर गया, जबकि एसएंडपी 500 में 1.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पश्चिम एशिया संघर्ष के बढ़ने के बाद से एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट है। यह दर्शाता है कि निवेशकों की चिंताएं अब अल्पकालिक अस्थिरता से परे गहरी होती जा रही हैं और व्यापक मैक्रो जोखिमों को प्रतिबिंबित करना शुरू कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस बदलाव का मुख्य कारण अमेरिका-ईरान संघर्ष को सुलझाने में सार्थक प्रगति का अभाव है। हरिप्रसाद ने आगे कहा कि कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कच्चे तेल के आयात पर अत्यधिक निर्भर है। ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष एक प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि बीच-बीच में तनाव कम होने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन फिर से तनाव बढ़ने का खतरा बना हुआ है, जिससे बाजार भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बने हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें ऊंची और अस्थिर बनी हुई हैं, जो 100-107 अमेरिकी डॉलर के दायरे में घूम रही हैं, जिससे एक बार फिर मुद्रास्फीति, इनपुट लागत और व्यापक मैक्रो दबावों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। पोनमुडी ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया में गहराते संघर्ष के कारण जारी अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने का माहौल फिर से पैदा कर दिया है, जिसके चलते अमेरिकी शेयर बाजार रात भर में काफी नीचे बंद हुए।
ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 106.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.17 प्रतिशत गिरकर 106.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 1,805.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 5,429.78 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। राम नवमी के कारण गुरुवार को शेयर बाजार बंद रहे। बुधवार को सेंसेक्स 1,205 अंक या 1.63 प्रतिशत बढ़कर 75,273.45 पर बंद हुआ। निफ्टी 394.05 अंक या 1.72 प्रतिशत बढ़कर 23,306.45 पर समाप्त हुआ।
ऊर्जा मुद्दे पर घिरी सरकार, जयराम रमेश का बड़ा बयान
27 Mar, 2026 10:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में तेल और गैस की उपलब्धता को लेकर उठ रही आशंकाओं के बीच कांग्रेस ने पीएम मोदी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि बीते एक दशक में भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि 2014-15 से 2024-25 के बीच कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता 84% से बढ़कर 90% हो गई है, जबकि एलपीजी आयात 46% से बढ़कर 62% तक पहुंच गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस गैस का वादा किया गया था, वह अब तक सिर्फ वादा ही बनी हुई है।
रमेश ने प्राकृतिक गैस के मुद्दे को लेकर लगाए गंभीर आरोप
रमेश ने प्राकृतिक गैस के मुद्दे पर भी सवाल उठाते हुए 2005 में गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (GSPC) द्वारा कृष्णा-गोदावरी बेसिन में बड़े गैस भंडार की खोज के दावे का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में 2011 से 2016 के बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों में इसे 20,000 करोड़ रुपये का घोटाला बताया गया, जिसे बाद में ओएनजीसी में विलय कर छिपाया गया।
सरकार क्या कर रही दावा?
इधर, पेट्रोल पंपों और एलपीजी एजेंसियों पर लंबी कतारों की खबरों के बीच सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए किसी भी तरह की कमी से इनकार किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि देश में करीब 60 दिनों का कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध है और एक महीने की एलपीजी सप्लाई सुनिश्चित की गई है। मंत्रालय ने इन खबरों को भ्रामक बताते हुए कहा कि देशभर के सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक है और कहीं भी पेट्रोल-डीजल की राशनिंग नहीं हो रही है। सरकारी तेल कंपनियों ने भी सप्लाई सामान्य रहने का दावा किया है। वहीं, विपक्ष ने संसद परिसर में एलपीजी आपूर्ति को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे, जिसमें पश्चिम एशिया के हालात के बीच तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की जाएगी।
रिकॉर्ड लो पर रुपया, डॉलर के सामने 94.24 तक लुढ़का
27 Mar, 2026 09:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय रुपया शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया 28 पैसे गिरकर 94.24 के नए निचले स्तर पर आ गया। यह लगातार तीसरे सत्र में रुपये में गिरावट दर्ज की गई है, जो बुधवार और मंगलवार को भी तेजी से टूटा था। रुपये में यह गिरावट विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार निकासी और ईरान संकट के कारण हुई है, जिससे बाजार की धारणा प्रभावित हुई है। बुधवार को पिछले सत्र में रुपया 29 पैसे फिसलकर 94 के स्तर को पार कर 94.05 पर बंद हुआ था।
लगातार तीसरे दिन गिरावट
रुपये में गिरावट का यह सिलसिला मंगलवार से जारी है। मंगलवार को रुपया 23 पैसे कमजोर होकर 93.76 पर बंद हुआ था। बुधवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 93.94 पर खुला और 93.86 से 94.08 के बीच कारोबार करने के बाद अपने अब तक के सबसे निचले बंद स्तर पर पहुंचा। मध्य पूर्व में जारी तनाव भी रुपये पर दबाव डाल रहा है।
गिरावट के प्रमुख कारण
रुपये की इस लगातार गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय बाजारों से पूंजी की लगातार निकासी एक बड़ा कारक है। इसके साथ ही, ईरान में जारी संकट और व्यापक मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक निवेशकों की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। इन कारकों के चलते रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है।
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