व्यापार
सोना-चांदी वीकली अपडेट: अमेरिकी-ईरान बातचीत से कम हुआ दबाव; जानें इस हफ्ते कितना बदला भाव
30 May, 2026 02:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | वैश्विक बाजार में जारी हलचल के बीच इस सप्ताह भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय नरमी दर्ज की गई है। बीते कुछ दिनों में सोने के भाव में एक हजार रुपये से अधिक और चांदी की कीमत में दो हजार रुपये से ज्यादा की बड़ी गिरावट आई है, जिससे आभूषण खरीदारों को बड़ी राहत मिली है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, शुद्धता के पैमाने पर सर्वोच्च माने जाने वाले 24 कैरेट सोने का भाव इस हफ्ते $1,257$ रुपये प्रति 10 ग्राम तक टूट गया है। इस गिरावट के बाद इसका दाम $1,58,720$ रुपये से घटकर अब $1,56,463$ रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है।
कैरेट के हिसाब से जानिए आभूषणों की नई दरें और हफ्ते का उतार-चढ़ाव
बाजार में केवल 24 कैरेट ही नहीं, बल्कि आभूषणों के लिए सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में भी मंदी का रुख रहा।
22 कैरेट सोने की कीमत, जो पहले $1,44,835$ रुपये थी, अब कम होकर $1,43,320$ रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है।
इसी तरह, 18 कैरेट सोने का भाव भी $1,18,588$ रुपये से गिरकर $1,17,347$ रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।
अगर इस पूरे सप्ताह के उतार-चढ़ाव पर नजर डालें, तो कीमती पीली धातु अपने न्यूनतम स्तर पर 27 मई को $1,56,072$ रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ गई थी, जबकि सप्ताह के शुरुआती दिन यानी 25 मई को यह $1,58,857$ रुपये के अपने उच्चतम शिखर पर थी।
चांदी की चमक भी हुई फीकी, एक झटके में ₹2,650 प्रति किलो सस्ती हुई
सोने के नक्शेकदम पर चलते हुए इस हफ्ते चांदी के खरीदारों के लिए भी अच्छी खबर आई। चांदी की कीमतों में प्रति किलोग्राम $2,650$ रुपये की बड़ी कटौती देखी गई है। इस मंदी के साथ चांदी का हाजिर भाव $2,66,000$ रुपये प्रति किलो से लुढ़ककर अब $2,63,350$ रुपये प्रति किलो रह गया है। चांदी के लिए भी चालू सप्ताह का सबसे निचला स्तर 27 मई को $2,60,917$ रुपये प्रति किलो रहा, जबकि 25 मई को चांदी अपने सबसे ऊंचे स्तर $2,71,100$ रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी। इस तरह निवेशकों और आम उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी का यह एक बेहतर अवसर बनकर उभरा है।
वैश्विक युद्ध और महंगाई की आशंका से टूटे दाम, फिर भी साल भर में मिला बंपर रिटर्न
सर्राफा विशेषज्ञों के मुताबिक, घरेलू बाजार में आई इस गिरावट के तार सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से जुड़े हैं। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4,600 { Dollar}$ प्रति औंस और चांदी $76 { Dollar}$ प्रति औंस के आस-पास कारोबार कर रही है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है और इसी वजह से कीमती धातुओं पर दबाव देखा जा रहा है। हालांकि, इस तात्कालिक गिरावट के बावजूद बीते एक साल का रिकॉर्ड शानदार रहा है; डॉलर के मूल्य में समीक्षाधीन अवधि के दौरान सोने ने $37\%$ से अधिक और चांदी ने $127\%$ से ज्यादा का बंपर रिटर्न देकर निवेशकों को मालामाल किया है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मुहर लगना तय: अमेरिकी राजदूत का दावा- 99 फीसदी काम पूरा, जल्द होंगे हस्ताक्षर
30 May, 2026 02:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) को लेकर एक बहुत बड़ा और सकारात्मक मोड़ सामने आया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस विषय पर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों महाशक्तियां एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक डील का 99 प्रतिशत काम पूरी तरह संपन्न हो चुका है और अब महज एक फीसदी हिस्से पर ही चर्चा होनी शेष है। अमेरिकी राजदूत ने यह घोषणा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली में आयोजित 'यूएस-इंडिया ट्रस्ट इनिशिएटिव' (US-India TRUST Initiative) के एक विशेष कार्यक्रम के दौरान की।
अगले कुछ हफ्तों में हो सकते हैं हस्ताक्षर, दिल्ली आएगा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भरोसा जताया है कि दोनों देशों के बीच यह व्यापार समझौता आने वाले कुछ ही हफ्तों या महीनों के भीतर आधिकारिक रूप से साइन हो सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष शेष बचे मुद्दों को सुलझाने के लिए बेहद गंभीरता से काम कर रहे हैं। इस वार्ता को तार्किक अंत तक पहुंचाने के लिए अमेरिका के मुख्य व्यापार वार्ताकार के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 1 से 4 जून तक भारत के दौरे पर आ रहा है। यह दल यहां आकर भारतीय अधिकारियों के साथ अंतिम दौर की रणनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाएगा।
राष्ट्रपति ट्रंप का विजन और वाशिंगटन में भारतीय टीम की अहम बैठक
साक्षात्कार और कार्यक्रम के दौरान राजदूत ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक बाधाओं को दूर करना है, ताकि अमेरिकी व्यवसायों, उद्योगों और कामगारों के लिए प्रगति के अभूतपूर्व अवसरों के द्वार खुल सकें। उन्होंने खुलासा किया कि अभी पिछले सप्ताह ही भारत सरकार ने व्यापार समझौते के अंतिम एक प्रतिशत तकनीकी हिस्से को अंतिम रूप देने के लिए वाशिंगटन डीसी में अपनी एक विशेष टीम भेजी थी। अब अगले हफ्ते अमेरिकी दल भारत आकर इस सिलसिले को आगे बढ़ाएगा, जिससे इस समझौते पर जल्द से जल्द मुहर लग सके।
दो दशकों में 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर के पार पहुंचा आपसी व्यापार
आईआईटी दिल्ली के मंच से दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों की मजबूती को रेखांकित करते हुए सर्जियो गोर ने कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े भी सामने रखे। उन्होंने बताया कि महज दो दशकों से कुछ अधिक समय में ही भारत और अमेरिका के बीच वस्तुओं और सेवाओं का आपसी द्विपक्षीय व्यापार लगभग 20 अरब डॉलर से छलांग लगाकर अब 220 अरब डॉलर से भी अधिक के पार पहुंच चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह असाधारण प्रगति सिर्फ व्यापार के बढ़ते आंकड़ों को ही नहीं दर्शाती, बल्कि यह दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच गहरे होते जा रहे आपसी भरोसे, मजबूत रणनीतिक संबंधों और मजबूत आर्थिक एकीकरण का भी एक बड़ा प्रमाण है।
"आम आदमी की जेब पर 'दोहरी मार'; ग्लोबल संकट के बीच मुंबई में फिर ₹2 महंगी हुई सीएनजी, ऑटो-टैक्सी का सफर होगा महंगा"
30 May, 2026 10:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई | पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाजार में छाई अनिश्चितता के चलते आम जनता पर महंगाई की एक और मार पड़ी है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और उससे सटे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में सीएनजी (CNG) की दरों में एक बार फिर इजाफा कर दिया गया है। इस ताजा संशोधन के तहत सीएनजी के खुदरा मूल्य में प्रति किलोग्राम दो रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिसका सीधा असर आम वाहन चालकों के बजट पर पड़ेगा।
महज 17 दिनों में दूसरी बार बढ़ी सीएनजी की कीमत
सीएनजी की यह नई दरें 29 मई 2026 की मध्यरात्रि से पूरे क्षेत्र में प्रभावी हो चुकी हैं। इस दो रुपये की बढ़ोतरी के साथ ही मुंबई में अब सीएनजी का खुदरा भाव 84 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 86 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है। इस बढ़ोतरी से निजी कार मालिकों के साथ-साथ ऑटो-टैक्सी और व्यावसायिक वाहन चालकों की परिचालन लागत बढ़ जाएगी। गौरतलब है कि इससे पहले बीते 14 मई को भी सीएनजी के दाम दो रुपये बढ़ाए गए थे, यानी केवल 17 दिनों के अंतराल में जनता को यह दूसरा झटका लगा है। वर्तमान में एमजीएल मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण, रायगढ़, रत्नागिरी, चित्रदुर्ग, दावणगेरे, लातूर और उस्मानाबाद जैसे प्रमुख इलाकों में गैस की आपूर्ति करती है।
पेट्रोल और डीजल के दामों में भी लगातार उछाल
सीएनजी के अलावा पारंपरिक ईंधनों की कीमतें भी लगातार आसमान छू रही हैं। हाल ही में सोमवार को पेट्रोल के दामों में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। पिछले महज दो हफ्तों के भीतर तेल की कीमतों में किया गया यह चौथा संशोधन था। इस बढ़ोतरी के बाद मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 97.83 रुपये प्रति लीटर के उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जिससे माल ढुलाई और आवाजाही दोनों महंगी हो गई हैं।
वैश्विक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का असर
ईंधन की कीमतों में आ रही यह तेजी ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार देश के बढ़ते तेल आयात बिल को कम करने और घरेलू खपत को नियंत्रित करने के प्रयास कर रही है। दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पूरी तरह अस्थिर हो गया है। ईरान की जवाबी कार्रवाई और इजरायल व अमेरिकी ठिकानों पर हमलों से पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। इस वैश्विक टकराव के कारण रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' से होने वाली कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हुई है। मालूम हो कि दुनिया की कुल तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है, और यहीं से सप्लाई चेन टूटने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
ग्राहकों के लिए राहत की खबर: औंधे मुंह गिरे सोने-चांदी के दाम, जानें अपने शहर का ताजा भाव
29 May, 2026 04:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | वैश्विक बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों के बीच आज घरेलू सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर आ रही सकारात्मक खबरों से वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद जगी है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, जब भी वैश्विक स्तर पर शांति की स्थिति बनती है, निवेशक सोने जैसे सुरक्षित निवेश माध्यमों से अपना पैसा निकालकर शेयर बाजार का रुख करते हैं। मांग में आई इसी कमी के कारण कीमती धातुओं के दाम नीचे आए हैं। आज 24 कैरेट सोने के भाव में कल के मुकाबले प्रति 10 ग्राम 400 से 500 रुपये की कमी आई है, जिसके बाद इसके दाम 1,55,900 रुपये से 1,56,100 रुपये के दायरे में आ गए हैं। वहीं, 22 कैरेट सोना भी आज मामूली गिरावट के साथ 1,42,800 रुपये से 1,43,050 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय बिकवाली और मजबूत डॉलर ने बनाया दबाव
घरेलू बाजार में कीमतों के गिरने की मुख्य वजह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रही बिकवाली है। वैश्विक कमोडिटी एक्सचेंज (COMEX) पर सोने का भाव घटकर 2400 डॉलर के नीचे फिसल गया है, जिसका सीधा असर भारतीय सर्राफा बाजारों पर देखा जा रहा है। इसके साथ ही, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती के चलते निवेशकों का रुझान डॉलर की तरफ बढ़ा है और उन्होंने सोने में अपनी हिस्सेदारी कम की है। पिछले कुछ महीनों के दौरान सोने की कीमतें अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं, जिसके बाद अब बड़े संस्थागत निवेशक ऊंचे भावों पर मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) कर रहे हैं, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया है।
शादियों का सीजन बीतने से स्थानीय मांग में आई सुस्ती
वैश्विक कारणों के अलावा स्थानीय स्तर पर मांग का कम होना भी एक बड़ा कारक बना है। भारत में शादियों का मुख्य सीजन अब समाप्ति की ओर है, जिसकी वजह से खुदरा खरीदारों और आभूषण निर्माताओं की ओर से नई मांग बेहद सीमित हो गई है। मांग घटने का असर देश के प्रमुख महानगरों में आज दर्ज की गई कीमतों में साफ दिखाई दे रहा है, जहां 24 कैरेट सोने के भाव इस प्रकार रहे:
दिल्ली: 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम
मुंबई: 1,56,050 रुपये प्रति 10 ग्राम
कोलकाता: 1,56,050 रुपये प्रति 10 ग्राम
चेन्नई: 1,58,170 रुपये प्रति 10 ग्राम
चांदी के दामों में भी देखा गया मामूली उतार-चढ़ाव
सोने की राह पर चलते हुए आज चांदी की कीमतों में भी कल के मुकाबले हल्का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। सर्राफा बाजार में आज चांदी प्रति 10 ग्राम लगभग 2,850 रुपये से 2,900 रुपये के बीच बिक रही है। वहीं, अगर थोक बाजार की बात करें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर प्रति किलोग्राम चांदी का भाव आज लगभग 2,85,000 रुपये से 2,90,000 रुपये के दायरे में बना हुआ है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक परिस्थितियां पूरी तरह स्थिर नहीं हो जातीं, तब तक कीमती धातुओं की कीमतों में इस तरह का उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
महंगाई की चौतरफा मार: पश्चिम एशिया में तनाव के चलते खाद्य तेलों की कीमतों में 13 फीसदी का भारी उछाल
29 May, 2026 02:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक संकट और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में मची उथल-पुथल का सीधा असर अब भारतीय आम उपभोक्ताओं की रसोई के बजट पर दिखने लगा है। ईंधन की बढ़ती कीमतों की मार झेल रहे परिवारों के लिए खाने वाले तेलों (खाद्य तेल) की महंगाई एक नया सिरदर्द बन गई है। चालू वर्ष में फरवरी महीने से लेकर अब तक विभिन्न प्रकार के खाद्य तेलों के थोक दामों में लगभग 13 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। जानकारों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर माल ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन), बीमा प्रीमियम और ट्रांजिट की लागत में बेतहाशा इजाफा हुआ है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपये में आई कमजोरी के कारण पाम तेल सहित अन्य वनस्पति तेलों का आयात करना अब काफी महंगा साबित हो रहा है।
आयात पर अत्यधिक निर्भरता के कारण भारत पर सबसे ज्यादा असर
भारत अपनी खाद्य तेलों की कुल घरेलू खपत का करीब 60 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात करके पूरा करता है। यही वजह है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में होने वाली किसी भी हलचल, शिपिंग संकट या फ्रेट चार्ज में बढ़ोतरी का सीधा और त्वरित असर भारत के घरेलू बाजारों पर पड़ता है। पहले रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण देश में सूरजमुखी (सनफ्लावर) तेल की आवक प्रभावित हुई थी और अब ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने वनस्पति तेल के वैश्विक बाजार को संकट में डाल दिया है। इसके अलावा, इंडोनेशिया द्वारा अपने बायोफ्यूल कार्यक्रम के तहत 50 प्रतिशत पाम तेल के मिश्रण की योजना पर काम करने से वैश्विक बाजार में पाम तेल की उपलब्धता और कम होने की आशंका है, जिससे लंबे समय तक खाद्य तेलों की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।
एफएमसीजी (FMCG) उत्पाद भी होंगे महंगे, जेब पर बढ़ेगा बोझ
कच्चे खाद्य तेलों की कीमतों में आई इस तेजी का असर केवल रसोई तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। पैकेज्ड फूड बनाने वाली एफएमसीजी कंपनियों के लिए इनपुट लागत काफी बढ़ गई है, क्योंकि खाद्य तेलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल नमकीन (पैकेज्ड स्नैक्स), बिस्कुट, बेकरी उत्पाद, फ्रोजन फूड और रेडी-टू-ईट जैसी चीजों को तैयार करने में होता है। उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तनाव के चलते न केवल खाद्य तेल बल्कि पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और पेपर की लागत भी बढ़ रही है। कंपनियां अब तक इस बढ़ी हुई लागत का बोझ खुद उठा रही थीं, लेकिन अब वे इसका कुछ भार कीमतों में बढ़ोतरी करके सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर डालने की तैयारी कर रही हैं।
प्रमुख खाद्य तेलों की कीमतों में आया उछाल
ईरान संकट और अन्य वैश्विक कारणों से फरवरी से लेकर मई के अंत तक प्रमुख खाद्य तेलों के थोक भाव में दर्ज किया गया उछाल इस प्रकार है:
राइसब्रान तेल: फरवरी में इसकी कीमत 1,177 रुपये थी, जो 28 मई को 12.57% की बढ़ोतरी के साथ 1,325 रुपये पर पहुंच गई।
पाम तेल: फरवरी के 1,224 रुपये के मुकाबले 28 मई को इसका भाव 11.93% बढ़कर 1,370 रुपये हो गया।
सोया रिफाइंड: फरवरी में इसकी कीमत 1,355 रुपये दर्ज की गई थी, जो मई के अंत तक 9.23% के उछाल के साथ 1,480 रुपये हो गई।
सरसों तेल: यह पारंपरिक तेल फरवरी के 1,450 रुपये से 8.28% महंगा होकर 28 मई को 1,570 रुपये पर पहुंच गया।
सूरजमुखी तेल: अन्य तेलों के मुकाबले इसमें सबसे कम बदलाव देखा गया; यह फरवरी के 1,623 रुपये से महज 0.43% बढ़कर 1,630 रुपये हुआ।
ओपनएआई को मात: क्लोन (Claude) मेकर एंथ्रोपिक की वैल्यूएशन $965 बिलियन पहुंची, रेस में शीर्ष पर
29 May, 2026 02:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के वैश्विक बाजार में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला है। अग्रणी एआई स्टार्टअप 'एंथ्रोपिक' (Anthropic) ने एक ट्रिलियन (एक लाख करोड़) डॉलर के वैल्यूएशन के बेहद करीब पहुंचकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अपने लोकप्रिय एआई चैटबॉट 'क्लाउड' (Claude) के लिए मशहूर इस कंपनी ने बाजार मूल्यांकन के मामले में अपनी मुख्य प्रतिद्वंद्वी कंपनी 'ओपनएआई' (OpenAI) को पछाड़ दिया है। यह बड़ी कामयाबी ऐसे समय पर आई है जब दोनों ही टेक दिग्गज कंपनियां आने वाले दिनों में शेयर बाजार में अपना पहला कदम (आईपीओ) रखने की तैयारियों में जुटी हुई हैं।
फंडिंग का नया रिकॉर्ड और ओपनएआई से आगे निकली वैल्यूएशन
एंथ्रोपिक ने अपने हालिया निवेश दौर (फंडिंग राउंड) में निवेशकों से 65 अरब डॉलर की रिकॉर्ड राशि जुटाई है। इस निवेश का नेतृत्व अल्टीमीटर कैपिटल, ड्रैगनियर, ग्रीनओक्स और सिकोइया कैपिटल जैसे वैश्विक स्तर के दिग्गज निवेशकों ने किया। इस भारी-भरकम पूंजी निवेश के बाद कंपनी का कुल बाजार मूल्यांकन (वैल्यूएशन) बढ़कर 965 अरब डॉलर के जादुई आंकड़े पर पहुंच गया है। इस फंडिंग राउंड में ब्लैकस्टोन, ब्रुकफील्ड और डी.ई. शॉ वेंचर्स जैसी वित्तीय संस्थाओं के साथ-साथ माइक्रोन, सैमसंग और एसके हाइनिक्स जैसी कंपनियां भी बतौर इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर शामिल रहीं। इसके मुकाबले, प्रतिद्वंद्वी कंपनी ओपनएआई ने इसी साल मार्च में 122 अरब डॉलर जुटाए थे, जिसके बाद उसकी वैल्यूएशन 852 अरब डॉलर आंकी गई थी।
रेवेन्यू में भारी उछाल और पहली बार मुनाफे की उम्मीद
वैश्विक स्तर पर कॉर्पोरेट घरानों और बड़े बिजनेस उद्यमों के बीच 'क्लाउड एआई' की मांग में लगातार जबरदस्त बढ़ोतरी हो रही है। इसी मजबूत मांग के चलते एंथ्रोपिक का 'रन-रेट रेवेन्यू' चालू महीने की शुरुआत में ही 47 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया। कंपनी को भरोसा है कि उसका कुल राजस्व (रेवेन्यू) इस बार दोगुने से भी अधिक उछाल के साथ 10.9 अरब डॉलर रहेगा। इसके अतिरिक्त, एंथ्रोपिक को जून तिमाही में अपना पहला ऑपरेटिंग प्रॉफिट (परिचालन मुनाफा) हासिल होने की उम्मीद है। कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) कृष्णा राव के अनुसार, इस फंड का उपयोग एआई रिसर्च को एडवांस बनाने और 'क्लाउड कोड' व 'को-वर्क' जैसे व्यावसायिक टूल्स को अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए किया जाएगा।
कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने के लिए टेक दिग्गजों से महाकरार
क्लाउड चैटबॉट के बढ़ते नेटवर्क को संभालने के लिए एंथ्रोपिक अपने बुनियादी ढांचे और कंप्यूटिंग क्षमता का बहुत तेजी से विस्तार कर रहा है। इसी सिलसिले में कंपनी ने अमेज़ॅन (Amazon) के साथ 5 गीगावॉट तक की नई क्षमता का एक बड़ा समझौता किया है। इसके साथ ही, नेक्स्ट-जनरेशन टीपीयू के लिए गूगल व ब्रॉडकॉम के साथ 5 गीगावॉट का करार और जीपीयू क्षमता के लिए एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) के 'कोलोसस' प्रोजेक्ट्स के साथ हाथ मिलाया गया है। सिकोइया कैपिटल के पार्टनर अल्फ्रेड लिन के मुताबिक, दुनिया की शीर्ष कंपनियां अपने जटिल डेटा और कार्यों को व्यवस्थित करने के लिए क्लाउड का रुख कर रही हैं। वर्तमान में यह एआई मॉडल दुनिया के तीन सबसे बड़े क्लाउड प्लेटफॉर्म- एडब्ल्यूएस (AWS), गूगल क्लाउड और माइक्रोसॉफ्ट एज़्योर पर अपनी सेवाएं दे रहा है।
आरबीआई की रिपोर्ट में राहत की खबर: दुनिया में तनाव के बावजूद 6.9% की रफ्तार से बढ़ेगी भारत की जीडीपी
29 May, 2026 02:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में जारी सैन्य संघर्ष और बढ़ते वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती और रफ्तार बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में भरोसा जताया है कि मजबूत घरेलू बुनियादी ढांचे (फंडामेंटल्स) के दम पर भारत आर्थिक तरक्की की राह पर तेजी से आगे बढ़ता रहेगा। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, कॉरपोरेट और बैंकिंग क्षेत्र की मजबूत बैलेंस शीट तथा सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे के विकास (कैपिटल एक्सपेंडिचर) पर लगातार दिए जा रहे जोर से इस विकास यात्रा को निरंतर गति मिलती रहेगी। बीते वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत 7.6% की जीडीपी (GDP) वृद्धि दर दर्ज कर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा, जो इसके पिछले साल के 7.1% के मुकाबले काफी बेहतर है।
वैश्विक संकट और महंगाई का नया दबाव
आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में आगाह किया है कि पश्चिम एशिया का विवाद वर्ष 2026 में वैश्विक आर्थिक विकास के लिए सबसे बड़ा रोड़ा बनकर उभरा है। इस संकट के कारण अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय बाजारों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के दामों में उछाल और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में पैदा हुई रुकावटों से आने वाले समय में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर (CPI) 4.6% रहने का अनुमान लगाया गया है, जो कि वित्त वर्ष 2025-26 के 2.1% के स्तर से काफी ज्यादा है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, ईंधन और अन्य कमोडिटी की कीमतों में तेजी के कारण कंपनियों की इनपुट लागत और मजदूरी का खर्च बढ़ सकता है, जिससे भारतीय रुपये की विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
राजकोषीय घाटा नियंत्रण में और रेपो रेट पर तटस्थ रुख
आर्थिक मोर्चे पर राहत की बात यह है कि केंद्र सरकार राजकोषीय घाटे (फिस्कल डेफिसिट) को थामने में सफल रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सकल राजकोषीय घाटा देश की कुल जीडीपी का 4.4% रहा, जो सरकार द्वारा तय किए गए 4.5% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से भी कम है। आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस घाटे को और कम करके 4.3% पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं दूसरी ओर, ब्याज दरों को लेकर रिजर्व बैंक फिलहाल 'फूंक-फूंक कर कदम' रखने की रणनीति अपना रहा है। इससे पहले, महंगाई में कमी को देखते हुए मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) में 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की थी। हालांकि, अप्रैल 2026 की हालिया समीक्षा बैठक में वैश्विक जोखिमों को भांपते हुए एमपीसी ने रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का सर्वसम्मत फैसला लिया और अपना रुख 'न्यूट्रल' (तटस्थ) बनाए रखा।
मजबूत घरेलू मांग बनेगी भारत का मुख्य ग्रोथ ड्राइवर
आने वाले समय के लिए आर्थिक परिदृश्य (आउटलुक) पर नजर डालें तो पश्चिम एशिया संकट के लंबा खिंचने की आशंका जरूर है, लेकिन भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति (मैक्रोइकॉनॉमिक फंडामेंटल्स) किसी भी बड़े झटके को झेलने में सक्षम है। भविष्य में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के सामने बार-बार पैदा होने वाले आपूर्ति संकटों के बीच आर्थिक विकास दर को बचाए रखने और महंगाई को काबू में रखने का एक कठिन संतुलन बनाना होगा। इन सबके बीच, वैश्विक स्तर पर छाई आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भी भारत के बाजारों में मौजूद मजबूत घरेलू मांग देश की तरक्की के लिए सबसे बड़ा सहारा यानी 'ग्रोथ ड्राइवर' बनी रहेगी।
अब सुपरमार्केट की तरह पेट्रोल भी चुनेंगे आप: E20 से E30 तक के विकल्पों की तैयारी में सरकार
29 May, 2026 10:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | आने वाले समय में जब आप अपने वाहन में ईंधन भरवाने के लिए पेट्रोल पंप पर जाएंगे, तो आपको वहां ईंधन के कई नए विकल्प देखने को मिलेंगे। केंद्र सरकार एक ऐसी दूरदर्शी योजना पर तेजी से काम कर रही है, जिसके तहत वाहन चालक अपनी गाड़ी के इंजन की क्षमता और बनावट के अनुसार खुद यह चुन सकेंगे कि उन्हें कितने प्रतिशत इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल खरीदना है। सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—के साथ-साथ जियो-बीपी, नायरा एनर्जी और शेल जैसी निजी कंपनियों को भी ई20, ई22, ई25 और ई30 श्रेणी का ईंधन बेचने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यहाँ ई20 का मतलब है कि उस पेट्रोल में 80 फीसदी शुद्ध पेट्रोल और 20 फीसदी इथेनॉल का मिश्रण है।
उपभोक्ताओं की आशंकाएं: माइलेज और इंजन की सुरक्षा
सरकार के इस बड़े फैसले के बीच उपभोक्ताओं के मन में नए ईंधन को लेकर दो मुख्य चिंताएं बनी हुई हैं। पहली चिंता गाड़ी के माइलेज को लेकर है; चूंकि इथेनॉल का ऊर्जा घनत्व (Energy Density) शुद्ध पेट्रोल की तुलना में कम होता है, इसलिए पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने से गाड़ी का औसत (माइलेज) घटने का डर रहता है। हालांकि, सरकारी दावों के मुताबिक ई20 ईंधन से गाड़ी का पिकअप और परफॉर्मेंस बेहतर होता है और माइलेज पर कोई खास नकारात्मक असर नहीं पड़ता। दूसरी बड़ी आशंका इंजन की लाइफ को लेकर है। दरअसल, इथेनॉल में नमी (मॉइस्चर) सोखने की क्षमता होती है, जिससे पुराने इंजनों के रबर पार्ट्स, पाइप और प्लास्टिक के पुर्जे खराब होने या इंजन में जंग लगने का जोखिम बढ़ जाता है।
पेट्रोल पंपों का आधुनिकीकरण और अलग-अलग वेरिएंट
इस नई व्यवस्था को धरातल पर लागू करने के लिए देश के करीब एक लाख पेट्रोल पंपों पर कुछ बुनियादी बदलाव करने होंगे। पंपों पर अलग-अलग मिश्रण वाले पेट्रोल की बिक्री के लिए अलग डिस्पेंसिंग नोजल, नए अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक और ब्लेंडिंग कंट्रोल सिस्टम स्थापित करने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया बहुत अधिक जटिल या खर्चीली नहीं होगी, क्योंकि वर्तमान में मौजूद प्रीमियम और रेगुलर ईंधन वाले सिस्टम का ही विस्तार किया जा सकता है। इस बदलाव का पूरा वित्तीय भार तेल कंपनियां खुद संभालेंगी। इसके साथ ही, ग्राहकों की सहूलियत के लिए पेट्रोल पंप की मशीनों पर स्पष्ट अक्षरों में इथेनॉल के वेरिएंट और उनकी अलग-अलग कीमतें प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा, ताकि किसी भी तरह के भ्रम से बचा जा सके।
विदेशी मुद्रा की बचत और पर्यावरण को बड़ा फायदा
वैश्विक तेल संकट के इस दौर में भारत का यह रणनीतिक कदम देश की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहा है। नवंबर 2014 से फरवरी 2026 के बीच इथेनॉल मिश्रण नीति की बदौलत भारत ने करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम विदेशी मुद्रा की बचत की है। इसके साथ ही, पर्यावरण के मोर्चे पर कार्बन उत्सर्जन में 8.7 करोड़ टन की कमी आई है, जो कि लगभग 35 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। मार्च 2026 तक देश में इथेनॉल का उत्पादन बढ़कर 20 अरब लीटर के स्तर पर पहुंच चुका है, जबकि मौजूदा 20 फीसदी मिश्रण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए केवल 11 अरब लीटर इथेनॉल की आवश्यकता है। उत्पादन की इस अतिरिक्त क्षमता का सही इस्तेमाल करने और किसानों व चीनी मिलों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए बाजार में ई22 और ई30 जैसे उच्च मिश्रण वाले विकल्प उतारना बेहद जरूरी हो गया है।
मार्केट अपडेट: चौतरफा खरीदारी से बाजार गुलजार, सेंसेक्स 350 अंक मजबूत
29 May, 2026 10:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | गुरुवार को बकरीद के अवकाश के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत शानदार बढ़त और हरे निशान के साथ हुई। घरेलू शेयर बाजारों ने बुधवार की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए पश्चिम एशिया के सुधरते राजनीतिक हालातों के बीच मजबूती दिखाई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 352.22 अंक उछलकर 76,220.02 के स्तर पर जा पहुंचा, जबकि निफ्टी भी 95.65 अंकों की तेजी के साथ 24,002.80 के पार निकल गया। हालांकि, इस शुरुआती उछाल के बाद बाजार पर बिकवाली का दबाव भी देखने को मिला। इसी दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 5 पैसे मजबूत होकर 95.53 के स्तर पर पहुंच गया।
कच्चे तेल में गिरावट से मिला सहारा और सेक्टर्स का हाल
बाजार के सेंटिमेंट को सबसे बड़ा सहारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी से मिला है। ब्रेंट क्रूड 0.93 प्रतिशत गिरकर 91.84 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.24 प्रतिशत फिसलकर 87.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कच्चे तेल का 92 डॉलर से नीचे रहना भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए बेहद सकारात्मक माना जा रहा है। सेक्टर्स की बात करें तो आईटी और फार्मा शेयरों में सबसे ज्यादा चमक दिखी। निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.01 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा, जबकि फार्मा में 0.88 प्रतिशत और पीएसयू बैंकों में 0.65 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर, एफएमसीजी और मीडिया सेक्टर्स में मामूली गिरावट देखी गई।
वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेत
भारतीय शेयर बाजार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी पूरा समर्थन मिला। अमेरिकी बाजार वॉल स्ट्रीट में तकनीकी (Tech) शेयरों की बदौलत रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली, जहाँ एसएंडपी 500 में 0.58 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.91 प्रतिशत का उछाल आया। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित 60 दिनों के युद्धविराम की खबरों से वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम हुआ है, जिसका सीधा फायदा दुनिया भर के बाजारों को मिला। इसी सकारात्मक माहौल के चलते एशियाई बाजारों में निक्केई और कोस्पी भी भारी बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।
बाजार के जानकारों की राय और आगे का रुख
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, घरेलू लिक्विडिटी (नकदी प्रवाह) मजबूत होने के कारण बाजार में हर गिरावट पर खरीदारी के अच्छे अवसर बन रहे हैं। निफ्टी में ऊपरी स्तरों पर दिख रहा हल्का दबाव केवल एक सीमित दायरे का ठहराव (कंसोलिडेशन) है, इसे बाजार के रुख में कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए। विश्लेषकों का मानना है कि यदि निफ्टी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर वहां टिकने में कामयाब रहता है, तो यह आगे 24,150 से 24,200 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। वहीं, किसी भी अप्रत्याशित गिरावट की स्थिति में 23,800 का स्तर बाजार के लिए एक मजबूत सपोर्ट का काम करेगा।
सोयाबीन के दाम बढ़े, बायोफ्यूल उत्पादन को दिया जा रहा प्राथमिकता
28 May, 2026 02:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: घरेलू बाजार में पिछले एक महीने के दौरान सोयाबीन और सोयामील की कीमतों में आई भारी तेजी ने पूरे बाजार का गणित बदल कर रख दिया है। साल 2021 के बाद यह पहला मौका है जब भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान और बढ़ती कीमतों के चलते 25,000 टन सोयामील के निर्यात सौदे रद्द करने पड़े हैं। स्थानीय बाजार में बढ़ती मांग की पूर्ति के लिए अफ्रीकी देशों से लगभग 80,000 टन सोयाबीन आयात करने का फैसला किया गया है। बाजार जानकारों का मानना है कि नई फसल के बाजार में आने तक आपूर्ति बेहद सीमित रहेगी, जिसके कारण इस साल कुल सोयाबीन आयात 8 लाख टन के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी आंकड़ों और व्यापारियों के अनुमानों में बड़ा अंतर होने के कारण भी असमंजस की स्थिति है। कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान में फसल वर्ष 2025-26 के लिए सोयाबीन उत्पादन 125.96 लाख टन रहने की बात कही गई है। इसके अलावा अल नीनो के खतरे और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के महंगे होने से खाद्य तेल उत्पादक देशों ने सोयाबीन का इस्तेमाल जैव ईंधन (बायोफ्यूल) बनाने में बढ़ा दिया है, जिससे खाने वाले तेल और सोयाबीन की किल्लत और गहरा गई है।
1. निर्यात सौदे रद्द होने की बड़ी वजह
सोयाबीन से तेल निकालने के बाद बचने वाली खली को सोयामील कहा जाता है, जिसका मुख्य उपयोग पशु आहार में होता है। घरेलू बाजार में सोयाबीन के दाम आसमान छूने से सोयामील की कीमत 66,000 रुपये प्रति टन के पार चली गई। कीमतों में प्रति टन लगभग 200 डॉलर का उछाल आने की वजह से निर्यातकों के लिए पुराने सौदों को पूरा करना घाटे का सौदा बन गया। इसके चलते मई और जून में भेजी जाने वाली शिपमेंट के सौदे आपसी सहमति से निरस्त कर दिए गए।
2. देश में अनाज उत्पादन का नया कीर्तिमान
एक तरफ जहां सोयाबीन को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के कुल अनाज उत्पादन के मोर्चे पर बेहद राहत भरी खबर है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 3765.63 लाख टन तक पहुंचने की उम्मीद है। यह पिछले साल के 3577.32 लाख टन के मुकाबले 5.3 फीसदी की शानदार बढ़ोतरी को दर्शाता है।
3. रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा धान और गेहूं का उत्पादन
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस बार चावल का उत्पादन रिकॉर्ड 1540.24 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले आंकड़ों से लगभग 38.40 लाख टन ज्यादा है। वहीं, देश के प्रमुख खाद्य अनाज गेहूं का उत्पादन भी 1206.57 लाख टन होने की उम्मीद जताई गई है, जो पिछले साल के 1179.45 लाख टन के मुकाबले 27.12 लाख टन अधिक है।
4. मक्का और दलहन-तिलहन के बदलते आंकड़े
इस साल सबसे बड़ी छलांग मक्के की पैदावार में देखी गई है। मक्के का उत्पादन 550.93 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा महज 434.09 लाख टन था। इसके अलावा, मोटे अनाजों का उत्पादन 744.72 लाख टन और तिलहन की कुल पैदावार 430.59 लाख टन रहने की संभावना है। वहीं दलहन फसलों की बात करें तो अरहर (तुअर) का उत्पादन 35.92 लाख टन रहने की उम्मीद है, जो लगभग पिछले वर्ष के स्तर के बराबर ही है।
ITR Filing: ये 10 गलतियां कर सकती हैं आपकी जेब ढीली, बचकर रहें
28 May, 2026 02:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वित्तीय वर्ष 2026 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि करदाताओं को इस बार अपना रिटर्न तैयार करते और जमा करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। जरा सी लापरवाही के कारण टैक्स रिफंड अटक सकता है, आपकी टैक्स देनदारी बढ़ सकती है, या फिर आयकर विभाग की ओर से कानूनी नोटिस और भारी जुर्माना झेलना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि करदाताओं को अपनी कुल कमाई और टैक्स क्रेडिट की जानकारी का मिलान फॉर्म 26एएस (Form 26AS), एआईएस (AIS) और आयकर विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध 'प्री-फिल्ड' आंकड़ों से जरूर कर लेना चाहिए। टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस मिलान से गलतियों की संभावना खत्म हो जाती है और विभाग से नोटिस आने का खतरा टल जाता है। इसके अलावा, आईटीआर दाखिल करने के बाद तय समय सीमा के अंदर उसका ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है, वरना रिटर्न अमान्य घोषित कर दिया जाएगा।
ITR दाखिल करते समय इन 10 बड़ी चूकों से बचें
गलत फॉर्म का चयन: यदि आपने अपनी आय के अनुसार सही आईटीआर फॉर्म नहीं चुना, तो विभाग आपके रिटर्न को त्रुटिपूर्ण (डिफेक्टिव) मान लेगा, जिससे उसकी प्रोसेसिंग रुक जाएगी।
आमदनी के सभी स्रोतों को छुपाना: कई लोग बैंक ब्याज, डिविडेंड, मकान के किराए, फ्रीलांसिंग या विदेशी निवेश से होने वाली कमाई की जानकारी नहीं देते हैं। ऐसा करने से टैक्स चोरी का मामला बन सकता है।
दस्तावेजों में विसंगति: यदि आपके फॉर्म 16, एआईएस (AIS) और फॉर्म 26एएस के आंकड़ों में अंतर पाया गया, तो गलत रिपोर्टिंग के कारण टैक्स विभाग तुरंत नोटिस भेज सकता है।
अवैध टैक्स छूट (डिडक्शन) का दावा: पात्रता न होने के बावजूद गलत कटौतियों का दावा करने या फिर वैध छूटों को छोड़ देने से आपकी जेब पर सीधा असर पड़ता है और विभाग की जांच का दायरा बढ़ सकता है।
कैपिटल गेन की गलत रिपोर्टिंग: शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या किसी संपत्ति की खरीद-बिक्री से हुए मुनाफे (कैपिटल गेन) को गलत तरीके से पेश करने पर टैक्स स्क्रूटनी का सामना करना पड़ सकता है।
विदेशी संपत्तियों का ब्यौरा न देना: देश के बाहर मौजूद किसी भी संपत्ति या वहां से होने वाली कमाई की अधूरी जानकारी देने पर ब्लैक मनी एक्ट और इनकम टैक्स के तहत भारी पेनाल्टी लग सकती है।
टैक्स रिजीम का गलत चुनाव: पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था (Tax Regime) का ठीक से आकलन किए बिना रिटर्न भरने से आपका टैक्स का बोझ अनावश्यक रूप से बढ़ सकता है।
अंतिम तिथि (डेडलाइन) का ध्यान न रखना: तय तारीख के बाद रिटर्न भरने पर भारी लेट फीस, ब्याज और कुछ वित्तीय घाटों (Losses) को अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड न कर पाने का नुकसान उठाना पड़ता है।
ई-वेरिफिकेशन न करना: यदि आपने रिटर्न तो सबमिट कर दिया, लेकिन तय दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन करना भूल गए, तो भरा हुआ रिटर्न भी रद्दी मान लिया जाएगा।
बैंक खाते की अधूरी या गलत जानकारी: यदि बैंक अकाउंट नंबर या आईएफएससी (IFSC) कोड गलत है, या खाता वैलिडेट नहीं है, तो आपका टैक्स रिफंड अटक जाएगा।
रिटर्न जमा करने के बाद भी जांचें आंकड़े
टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि करदाताओं को केवल फॉर्म सबमिट करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि फाइलिंग के बाद भी अपने पोर्टल पर जाकर स्टेटस चेक करते रहना चाहिए। ई-वेरिफिकेशन की रसीद सुरक्षित रखना और समय-समय पर अपने रजिस्टर्ड ईमेल व मोबाइल पर आने वाले संदेशों को देखना जरूरी है ताकि किसी भी तरह के मिसमैच को वक्त रहते सुधारा जा सके।
अगर अनजाने में हो जाए गलती, तो क्या है उपाय?
कानूनी व टैक्स मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि किसी करदाता से मूल (ओरिजिनल) रिटर्न दाखिल करते समय अनजाने में कोई गलती या कोई जानकारी छूट जाती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कानूनन, टैक्सपेयर के पास अपनी गलती सुधारने का मौका होता है। ऐसी स्थिति में करदाता को बिना समय गंवाए तुरंत 'रिवाइज्ड रिटर्न' (संशोधित रिटर्न) फाइल कर देना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी कार्रवाई या नोटिस से बचा जा सके।
मध्य पूर्व में तनाव से कच्चा तेल 2% उछला, $96 के पार पहुंचा
28 May, 2026 12:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान के सैन्य ठिकानों पर अमेरिका द्वारा नए हमलों की खबरों के बाद गुरुवार को सुबह के कारोबार के दौरान वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। ईरान की आधिकारिक फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, गुरुवार तड़के बंदर अब्बास के पूर्वी इलाके में तीन भीषण धमाके सुने गए, जिसके बाद दक्षिणी ईरानी शहर में एयर डिफेंस सिस्टम को कुछ समय के लिए सक्रिय कर दिया गया। इसके तुरंत बाद, समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक अज्ञात अमेरिकी अधिकारी के हवाले से पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर नए हमले किए हैं।
क्रूड फ्यूचर्स में आई जोरदार तेजी
इन हमलों की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से ऊपर चढ़ गए। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $1.90 या 2.02% की बढ़त के साथ $96.19 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अधिक सक्रिय अगस्त कॉन्ट्रैक्ट $1.64 या 1.78% की मजबूती लेकर $93.89 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स भी $1.73 या 1.95% की तेजी के साथ $90.41 प्रति बैरल पर ट्रेंड करता देखा गया।
शांति समझौते की उम्मीदों को लगा झटका
इससे पिछले कारोबारी सत्र में, दोनों ही वैश्विक क्रूड बेंचमार्क में 5% से अधिक की बड़ी गिरावट देखी गई थी और वे एक महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गए थे। बाजार को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही कोई समझौता हो सकता है, जिससे यह टकराव समाप्त होगा और व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज स्ट्रेट' को फिर से खोल दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस त्रिपक्षीय युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के साथ हुई थी, जिसने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है और दुनिया भर में ईंधन, खाद व खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ा दी हैं।
ड्रोन हमले के बाद अमेरिका की जवाबी कार्रवाई
सप्लाई में व्यवधान और युद्ध के लंबा खिंचने की आशंका ही कच्चे तेल में तेजी की मुख्य वजह बनी हुई है। समाचार एजेंसी एपी (AP) के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने एक ईरानी हमलावर ड्रोन को मार गिराने के बाद वहां के सैन्य ठिकाने पर हमला बोला। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास में एक ईरानी ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को भी ध्वस्त कर दिया, जो कि पांचवां ड्रोन लॉन्च करने की तैयारी में था।
डोनाल्ड ट्रंप का बयान और राजनीतिक समीकरण
यह नया सैन्य एक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के कुछ ही घंटों बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान "व्यर्थ की बातचीत" कर रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव उन्हें इस तीन महीने पुराने युद्ध को खत्म करने के लिए किसी जल्दबाजी वाले समझौते के लिए मजबूर नहीं कर सकते। वर्तमान में अमेरिका एक ऐसे समझौते के प्रयास में है जिससे होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल जाए और ईरान की परमाणु क्षमताएं सीमित हो जाएं, ताकि रिपब्लिकन पार्टी इस मोर्चे पर अपनी जीत का एलान कर सके। हालांकि, सोमवार को भी अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में हमले किए थे, जिसे ईरान ने युद्धविराम का बड़ा उल्लंघन करार दिया था।
19 जून को होगी Reliance Industries की अहम बैठक, रिकॉर्ड डेट घोषित
28 May, 2026 11:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई:देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने अपनी 49वीं सालाना आम बैठक (AGM) की तारीख घोषित कर दी है। इसके साथ ही कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए दिए जाने वाले फाइनल डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट का भी एलान किया है। रिलायंस इस बार अपने शेयरधारकों को 6 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। कंपनी द्वारा स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी के मुताबिक, इस लाभांश (डिविडेंड) के लिए 5 जून को रिकॉर्ड डेट तय किया गया है। इस निर्धारित तारीख तक जिन निवेशकों के नाम कंपनी के रजिस्टर या डिपॉजिटरी रिकॉर्ड में बतौर बेनिफिशियल ओनर दर्ज होंगे, वे इस डिविडेंड को पाने के हकदार माने जाएंगे।
19 जून को शेयरहोल्डर्स से ली जाएगी मंजूरी
इस फाइनल डिविडेंड को आगामी 19 जून को होने वाली सालाना आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। शेयरहोल्डर्स से हरी झंडी मिलने के ठीक 7 दिनों के भीतर डिविडेंड की राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इससे पिछले वित्त वर्ष (2024-25) के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज ने प्रति शेयर 5.50 रुपये का फाइनल डिविडेंड दिया था।
शेयर बाजार में रिलायंस के स्टॉक की स्थिति
10 रुपये की फेस वैल्यू वाले रिलायंस के शेयर बुधवार, 27 मई को बीएसई (BSE) पर 1,350 रुपये के स्तर पर बंद हुए थे। गुरुवार को बकरीद के त्योहार के कारण शेयर बाजार में अवकाश रहा। वर्तमान में कंपनी का कुल मार्केट कैप 18.26 लाख करोड़ रुपये है। बीएसई पर इस शेयर का 52 हफ्तों का एडजस्टेड हाई 1,611.20 रुपये और एडजस्टेड लो 1,290 रुपये रहा है। पिछले 6 महीनों के दौरान इस शेयर में करीब 13 फीसदी की गिरावट आई है। कंपनी में प्रमोटर्स के पास कुल 50 फीसदी की हिस्सेदारी है।
मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज हाउसेज का भरोसा बरकरार
रिलायंस इंडस्ट्रीज के स्टॉक पर नजर रखने वाले 34 मार्केट एनालिस्ट्स में से 33 ने इसे 'बाय' (खरीदने) की रेटिंग दी है, जबकि केवल एक ने इसे 'सेल' करने की सलाह दी है। प्रमुख ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने इसके लिए सबसे ज्यादा 1,910 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस तय किया है। इसके अलावा नोमुरा ने 'बाय' रेटिंग के साथ 1,680 रुपये, मॉर्गन स्टेनली ने 'ओवरवेट' रेटिंग के साथ 1,803 रुपये और सीएलएसए (CLSA) ने 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग देते हुए 1,800 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है।
चौथी तिमाही के नतीजे और सालाना मुनाफा
अगर वित्तीय प्रदर्शन की बात करें, तो जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में रिलायंस इंडस्ट्रीज का नेट कंसोलिडेटेड प्रॉफिट (शुद्ध मुनाफा) सालाना आधार पर 12.5 प्रतिशत घटकर 16,971 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 19,407 करोड़ रुपये था। हालांकि, इस तिमाही में कामकाज से होने वाला कंसोलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर 2,98,621 करोड़ रुपये रहा, जो मार्च 2025 की तिमाही में 2,64,573 करोड़ रुपये था।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की बात करें तो कंपनी का कुल कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 10,75,675 करोड़ रुपये रहा (जो बीते वर्ष 9,80,136 करोड़ रुपये था) और पूरे साल का नेट प्रॉफिट बढ़कर 80,775 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 69,648 करोड़ रुपये था।
Facebook-WhatsApp यूजर्स अलर्ट! Meta के नए प्लान की खबर, जानें सच क्या है
28 May, 2026 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: सोशल मीडिया यूजर्स के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। दिग्गज टेक कंपनी मेटा (Meta) ने अपने बेहद लोकप्रिय प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के लिए नए 'पेड सब्सक्रिप्शन प्लान' (Paid Subscription Plans) का एलान कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप इन प्लेटफॉर्म्स पर कुछ बेहद खास और एडवांस फीचर्स का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो अब आपको हर महीने जेब ढीली करनी होगी। एलन मस्क के प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) की तर्ज पर अब मेटा ने भी कमाई बढ़ाने और सिर्फ विज्ञापनों पर निर्भर न रहने के लिए इस सब्सक्रिप्शन मॉडल को दुनिया भर में लागू करने का फैसला किया है।
मेटा लेकर आया ऐप्स के 'प्लस' वर्जन
मेटा कंपनी के इस नए प्लान के तहत तीनों बड़े ऐप्स के 'प्लस' (Plus) वर्जन पेश किए जा रहे हैं। मंथली फीस चुकाने वाले इन यूजर्स को कई एक्सक्लूसिव टूल्स, एडवांस प्राइवेसी और बेहतरीन कस्टमाइजेशन फीचर्स मिलेंगे, जो नॉर्मल यानी फ्री यूजर्स को नहीं दिए जाएंगे। कंपनी का मुख्य उद्देश्य इन प्रीमियम फीचर्स के जरिए अपने रेवेन्यू (कमाई) को बढ़ाना है। हालांकि, राहत की बात यह है कि आम यूजर्स के लिए इन सोशल मीडिया ऐप्स के बेसिक फीचर्स पहले की तरह ही मुफ्त में काम करते रहेंगे, यानी सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह बंद नहीं होगा।
फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के लिए कितनी होगी कीमत
मेटा द्वारा जारी की गई शुरुआती कीमतों के मुताबिक, इंस्टाग्राम प्लस (Instagram Plus) और फेसबुक प्लस (Facebook Plus) की कीमत $3.99 डॉलर (यानी करीब 387 रुपये) प्रति महीना तय की गई है। वहीं, व्हाट्सऐप प्लस (WhatsApp Plus) के लिए यूजर्स को $2.99 डॉलर (यानी करीब 290 रुपये) हर महीने देने होंगे। इसके अलावा, जो लोग बिजनेस या क्रिएटर्स के तौर पर प्रोफेशनल प्लान लेना चाहते हैं, उनके लिए 'मेटा वन एसेंशियल' (Meta One Essential) प्लान लाया गया है जिसकी कीमत $14.99 डॉलर (करीब 1,454 रुपये) महीना होगी। ध्यान देने वाली बात यह है कि कंपनी ने वैश्विक स्तर पर इन कीमतों का एलान किया है, लेकिन भारत के लिए आधिकारिक और सटीक कीमतों की घोषणा होना अभी बाकी है।
पैसे देने पर मिलेंगे ये शानदार और खुफिया फीचर्स
व्हाट्सऐप प्लस लेने वाले सब्सक्राइबर्स को ऐप के अंदर कस्टम थीम्स, यूनिक रिंगटोन्स, प्रीमियम स्टिकर्स और ज्यादा से ज्यादा चैट्स को ऊपर पिन करने की सुविधा मिलेगी। वहीं, इंस्टाग्राम प्लस और फेसबुक प्लस के फीचर्स तो और भी ज्यादा एडवांस हैं। इसके तहत यूजर्स बिना किसी को पता चले चुपके से दूसरों की 'इंस्टाग्राम स्टोरी' का प्रीव्यू देख सकेंगे और उनका नाम व्यूअर्स लिस्ट में भी नहीं आएगा। इसके अलावा, आपकी स्टोरी को किस-किसने दोबारा (Rewatch) देखा है, यह भी पता चल सकेगा। सब्सक्राइबर्स को स्टोरी के लिए अनलिमिटेड ऑडियंस लिस्ट बनाने, हफ्ते में एक बार स्टोरी को ज्यादा व्यूज के लिए स्पॉटलाइट करने और प्रोफाइल बायो के लिए अलग-अलग कस्टमाइज्ड फॉन्ट्स जैसी कई बेहतरीन सुविधाएं मिलेंगी।
फ्री रहेगा मेटा का एआई चैटबॉट
इस पूरे बड़े बदलाव के बीच मेटा ने अपने यूजर्स को एक बड़ी राहत भी दी है। कंपनी ने साफ किया है कि उनका 'मेटा एआई' (Meta AI) चैटबॉट सभी यूजर्स के लिए पूरी तरह से फ्री में जारी रहेगा। इसके बेसिक इस्तेमाल के लिए लोगों से कोई पैसा नहीं लिया जाएगा। हालांकि, भविष्य में और ज्यादा एडवांस एआई फीचर्स (जैसे वीडियो जनरेशन और हैवी रीज़निंग) के लिए कंपनी 'मेटा वन' के तहत अलग से पेड एआई प्लान्स की टेस्टिंग भी कर रही है, लेकिन सामान्य एआई चैटबॉट का लुत्फ लोग मुफ्त में उठा सकेंगे।
EV कंपनी Ather Energy का बड़ा विस्तार, इंश्योरेंस सेगमेंट में रखे कदम
28 May, 2026 10:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट की जानी-मानी कंपनी एथर एनर्जी लिमिटेड ने इंश्योरेंस कॉरपोरेट एजेंट के बिजनेस में प्रवेश करने का आधिकारिक एलान किया है। इस नए वेंचर के लिए कंपनी ने 27 मई, 2026 को 'एथर इंश्योरेंस लिमिटेड' नाम से अपनी एक नई सहायक कंपनी (Subsidiary) का गठन किया है। आपको बता दें कि इस नई कंपनी में एथर एनर्जी की पूरी 100% हिस्सेदारी होगी। यह सब्सिडियरी मुख्य रूप से इंश्योरेंस सेक्टर में एक कॉरपोरेट एजेंट के रूप में अपनी सेवाएं देगी, जिसका उद्देश्य ग्राहकों के लिए इंश्योरेंस पॉलिसियों को सुलभ और आसान बनाना है। इस नई यूनिट के शुरुआती पेड-अप शेयर कैपिटल को एथर एनर्जी ने 10 रुपये प्रति शेयर की फेस वैल्यू पर खरीदा है।
ऑटो इंश्योरेंस पॉलिसी देना होगा मुख्य उद्देश्य
गौर करने वाली बात है कि एथर एनर्जी के बोर्ड ने दिसंबर, 2025 में ही इस नई सहयोगी कंपनी को शुरू करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी थी। कंपनी की योजना विभिन्न इंश्योरेंस प्रदाताओं के साथ हाथ मिलाकर कॉरपोरेट एजेंट के तौर पर विशेष रूप से ऑटो इंश्योरेंस पॉलिसी पेश करने की है। इस नई एंटिटी का मुख्य ध्यान पूरी तरह से इंश्योरेंस बिजनेस पर ही केंद्रित रहेगा।
IRDAI से मंजूरी मिलने के बाद शुरू होगा काम
इस नई सब्सिडियरी कंपनी के गठन के लिए शुरुआत में किसी विशेष सरकारी या रेगुलेटरी अनुमति की आवश्यकता नहीं थी। हालांकि, प्रबंधन का कहना है कि वे अपना कमर्शियल बिजनेस पूरी तरह शुरू करने से पहले इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) से आवश्यक लाइसेंस और मंजूरियां प्राप्त करेंगे।
शेयर बाजार में आ सकती है तेजी
इस बड़े बिजनेस डेवलपमेंट के कारण शुक्रवार, 29 मई को बाजार खुलने पर एथर एनर्जी के शेयरों में उछाल आने की संभावना जताई जा रही है। गुरुवार को बकरीद के अवकाश के कारण शेयर बाजार बंद हैं। वर्तमान में बीएसई (BSE) पर कंपनी के शेयर का भाव 956.10 रुपये है। मई 2025 में 2,980.76 करोड़ रुपये के आईपीओ के साथ लिस्ट हुई इस कंपनी का मार्केट कैप अब 36,600 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 40.77 प्रतिशत है। एथर के शेयरों ने बीते एक साल में निवेशकों को लगभग 200% का शानदार रिटर्न दिया है, जबकि पिछले 3 महीनों में ही इसमें 34% की बढ़त देखी गई है।
चौथी तिमाही में घाटे में भारी कमी
बिजनेस विस्तार के साथ-साथ कंपनी के वित्तीय नतीजों में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है। जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में एथर एनर्जी का नेट लॉस (शुद्ध घाटा) सालाना आधार पर 57% कम होकर 100.23 करोड़ रुपये रह गया है, जो पिछले साल की समान तिमाही में 234.36 करोड़ रुपये था। वहीं, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू भी 74% की जोरदार बढ़त के साथ 1,174.66 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जो मार्च 2025 की तिमाही में 676.8 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।
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