व्यापार
वैश्विक तनाव के बीच सोने-चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव
28 May, 2026 09:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। गुरुवार, 28 मई को वैश्विक बाजार में सोना लुढ़ककर करीब दो महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। ईरान पर अमेरिका के नए सैन्य हमलों और मजबूत होते डॉलर ने वैश्विक कमोडिटी बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे निवेशकों में यह डर पैदा हो गया है कि महंगाई उम्मीद से ज्यादा समय तक बरकरार रह सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड (हाजिर सोना) 1.1% की गिरावट के साथ $4,406.81 प्रति औंस पर आ गया, जो 27 मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 0.9% टूटकर $4,404.90 पर बंद हुआ। चांदी भी दबाव में रही और स्पॉट चांदी 1.7% गिरकर $73.34 प्रति औंस पर आ गई। हालांकि, बकरीद के अवकाश के कारण गुरुवार को भारतीय कमोडिटी बाजार बंद रहे।
डॉलर की मजबूती और अमेरिकी हमलों से गिरा बाजार
बुलियन (सोना-चांदी) की कीमतों में आई इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। डॉलर इंडेक्स में बढ़त के कारण अन्य विदेशी मुद्राओं के खरीदारों के लिए सोने में निवेश करना महंगा हो गया है। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित ईरानी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों ने बाजार पर दबाव और बढ़ा दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ किसी भी समझौते की खबरों को खारिज करने के तुरंत बाद ये हमले हुए। इन हमलों के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें करीब 2% बढ़ गईं, जिससे आने वाले समय में ऊर्जा जनित महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों में कटौती की घटी उम्मीदें
आमतौर पर युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव के समय सोने को सबसे सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) माना जाता है और इसकी मांग बढ़ती है। लेकिन इस बार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। तेल महंगा होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रह सकती है, जिसके कारण केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना बेहद कम हो गई है। फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक ने भी संकेत दिए हैं कि अमेरिकी सेंट्रल बैंक को अभी शॉर्ट-टर्म ब्याज दरें स्थिर रखनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर टैरिफ, ईरान विवाद और एआई निवेश के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ता है, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाने पर भी विचार कर सकता है।
बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए हांगकांग एक्सचेंज की नई पहल
वैश्विक बाजार की इस उथल-पुथल के बीच हांगकांग फ्यूचर्स एक्सचेंज ने बाजार में निवेशकों की हिस्सेदारी और लिक्विडिटी को बेहतर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। एक्सचेंज ने घोषणा की है कि वह गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के लिए मार्केट-वाइड ट्रेडिंग फीस में डिस्काउंट और नए इंसेंटिव प्रोग्राम की शुरुआत करेगा, ताकि सुस्त पड़े बाजार को फिर से गति दी जा सके।
क्या है सोने-चांदी का अगला टारगेट और आउटलुक?
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि मॉनेटरी पॉलिसी की अनिश्चितता और भू-राजनीतिक मोर्चे पर जारी तनाव के कारण सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का यह दौर आगे भी जारी रह सकता है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार महत्वपूर्ण स्तर:
सोना (Gold): वर्तमान में सोना $4,450–$4,600 की रेंज के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा है। यदि यह गिरावट जारी रहती है, तो भारी मुनाफावसूली (Profit-Booking) देखने को मिल सकती है, जिससे अगला डाउनसाइड टारगेट $4,380 प्रति औंस तक जा सकता है।
चांदी (Silver): चांदी की कीमतें फिलहाल $72 से $78.50 प्रति औंस की बड़ी रेंज में घूम रही हैं। जब तक अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो जाती, तब तक बाजार की चाल सीमित रहने की संभावना है।
महाराष्ट्र में 45 करोड़ रुपये के कथित गलत भुगतान पर विवाद, एचडीएफसी बैंक ने दी सफाई
27 May, 2026 02:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) ने मीडिया में चल रही उन खबरों का पूरी तरह से खंडन किया है, जिनमें ₹45 करोड़ के ट्रांजैक्शन में गड़बड़ी की बात कही जा रही थी। बुधवार को बैंक ने आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि उसकी आंतरिक निगरानी, ऑडिट और नियंत्रण प्रणालियां पूरी तरह मजबूत, पारदर्शी और सुरक्षित हैं। हालांकि, इस स्पष्टीकरण के बाद भी शेयर बाजार में निवेशकों के बीच घबराहट दिखी और दोपहर 1:45 बजे तक बैंक के शेयर 2.45% की गिरावट के साथ ₹759.80 पर आ गए, जिससे कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर बहस तेज हो गई है।
क्या है पूरा विवाद? सरकारी एजेंसी को मार्केटिंग खर्च के नाम पर भुगतान का आरोप
आंतरिक दस्तावेजों के हवाले से दावा किया जा रहा था कि बैंक की ऑडिट कमेटी ने एक सरकारी कंपनी को किए गए ₹45 करोड़ के भुगतान की आंतरिक सतर्कता (Vigilance) जांच के आदेश दिए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, यह रकम महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को दी जानी थी, जो कि जमा राशि पर तय दर से ज्यादा ब्याज (इंटरेस्ट डिफरेंशियल) का हिस्सा थी। लेकिन आरोप है कि इस राशि को सीधे ब्याज के रूप में देने के बजाय, मार्केटिंग विभाग का खर्च दिखाकर चार स्थानीय वेंडर्स के माध्यम से 'सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान' के नाम पर घुमाकर (रूट करके) दिया गया। वित्तीय वर्ष 2025 के आंतरिक ऑडिट में इस पर आपत्ति जताते हुए विभाग के काम को 'असंतोषजनक' बताया गया था।
शीर्ष प्रबंधन पर उंगली: पूर्व चेयरमैन के इस्तीफे और एमडी की भूमिका पर सवाल
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह संदिग्ध लेनदेन 18 मार्च को बैंक के पूर्व अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती के पद छोड़ने से कुछ दिन पहले ही हुआ था। आंतरिक जांच के रिकॉर्ड बताते हैं कि इस भुगतान को एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन की मौजूदगी में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग के दौरान मौखिक सहमति मिली थी। जांच के दौरान कई अधिकारियों और मुख्य विपणन अधिकारी (CMO) रवि संथानम ने कथित तौर पर यह माना कि मार्केटिंग विभाग ने इस अतिरिक्त ब्याज को विज्ञापन खर्च के रूप में छिपाने के लिए एक 'सुविधाप्रदाता' की तरह काम किया था ताकि MSRDC को मुआवजा दिया जा सके।
आरबीआई के नियमों और भ्रष्टाचार विरोधी नीति के उल्लंघन का दावा
इस मामले को लेकर बैंकिंग रेगुलेटर के नियमों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यह कथित तौर पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उन मास्टर निर्देशों का सीधा उल्लंघन है, जो बैंकों को किसी खास जमाकर्ता के साथ बातचीत करके अलग से ज्यादा ब्याज दर देने से रोकते हैं। वेंडर्स के जरिए इस पैसे को रूट करना एक तरह से किसी एक ग्राहक को विशेष फायदा पहुँचाने जैसा है। इसके अलावा, विश्लेषकों का कहना है कि यह कृत्य बैंक की अपनी 'रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार विरोधी नीति' (Anti-Bribery and Anti-Corruption Policy) के भी खिलाफ है, जो किसी भी तरह के अनुचित प्रलोभन या वित्तीय हेरफेर को प्रतिबंधित करती है।
बैंक का पक्ष: चुनिंदा तथ्यों के आधार पर लगाए गए आरोप गलत
इन तमाम गंभीर आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए एचडीएफसी बैंक के प्रवक्ता ने कहा कि चुनिंदा जानकारियों को तोड़-मरोड़ कर पेश किए जा रहे दावों और गलतियों के आरोपों को बैंक पूरी तरह खारिज करता है। बैंक प्रशासन का कहना है कि उनके यहाँ हर मुद्दे को तय मानकों और स्थापित प्रक्रियाओं के तहत ही सुलझाया जाता है और किसी भी आंतरिक समीक्षा का फैसला पूरी छानबीन के बाद ही होता है। फिलहाल बैंक अपनी पारदर्शिता के वादे पर कायम है और अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नियामक संस्थाएं इस मामले में क्या कदम उठाती हैं।
घरेलू उड़ानों में कटौती, दोनों प्रमुख एयरलाइंस के फैसले से यात्रियों को झटका
27 May, 2026 02:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: एविएशन सेक्टर में गहराते वित्तीय संकट को देखते हुए देश की दो सबसे बड़ी एयरलाइंस, एअर इंडिया (Air India) और इंडिगो (IndiGo) ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। ये दोनों विमानन कंपनियां आगामी 1 जून से अपनी घरेलू उड़ानों की संख्या (फ्लाइट कैपेसिटी) में कटौती करने जा रही हैं। यह नई व्यवस्था अगले तीन महीनों तक प्रभावी रहेगी, जिसके कारण आगामी दिनों में हवाई सफर करने वाले यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और टिकटें महंगी होने की भी आशंका है।
ईंधन के आसमान छूते दाम और ईरान-अमेरिका जंग बनी मुख्य वजह
विमानन क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, उड़ानों में इस कटौती की सबसे बड़ी वजह एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) यानी हवाई ईंधन की कीमतों में आया रिकॉर्ड उछाल है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। चूंकि किसी भी एयरलाइंस के कुल संचालन खर्च का एक बड़ा हिस्सा ईंधन पर ही व्यय होता है, इसलिए एटीएफ की बढ़ती लागत ने कंपनियों के मुनाफे और रोजाना के ऑपरेशनल बजट पर भारी दबाव डाल दिया है।
छुट्टियां खत्म होने के बाद मौसमी मंदी से निपटने की तैयारी
ईंधन संकट के अलावा, इस फैसले के पीछे एक और वजह गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने के बाद आने वाली 'सीजनल मंदी' (विमानन क्षेत्र में यात्रियों की कमी का दौर) भी है। जून के महीने में स्कूल-कॉलेज दोबारा खुलने के बाद आमतौर पर लोग हवाई यात्राएं कम करते हैं। इस सुस्त अवधि में खाली सीटें लेकर उड़ान भरने के बजाय एयरलाइंस अपनी उड़ानों को सीमित कर वित्तीय नुकसान को कम करने की रणनीति पर काम कर रही हैं।
एअर इंडिया 15% और इंडिगो 7% तक कम करेगी अपनी उड़ानें
लागत को नियंत्रित करने के लिए दोनों कंपनियों ने अलग-अलग योजनाएं तैयार की हैं। सरकारी से निजी हाथों में गई एअर इंडिया अपने घरेलू रूटों पर उड़ानों के संचालन में करीब 15 फीसदी तक की बड़ी कटौती करेगी। दूसरी तरफ, देश की सबसे बड़ी बजट एयरलाइंस इंडिगो भी अपनी सेवाओं को 5 से 7 प्रतिशत तक कम करने का मन बना चुकी है। दोनों ही कंपनियां इस मंदी के दौर में अपने विमानों और स्टाफ के खर्चों को री-शेड्यूल (अनुकूलित) कर रही हैं।
यात्रियों को झेलनी पड़ सकती है परेशानी, वित्तीय दबाव में एयरलाइंस
कंपनियों के इस संयुक्त कदम से जहां एक तरफ उन्हें अपने बढ़ते खर्चों को काबू करने और आर्थिक नुकसान से बचने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ यात्रियों के लिए विकल्प सीमित हो जाएंगे। अचानक उड़ानों की संख्या घटने से आखिरी वक्त में टिकट बुक कराने वाले यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम स्थिर नहीं होते, तब तक एयरलाइंस पर यह वित्तीय दबाव बना रहेगा।
एल्युमिनियम चार साल के उच्च स्तर पर, शेयर बाजार में दिखी तेज़ी
27 May, 2026 12:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: अंतरराष्ट्रीय बाजार में एल्युमीनियम की कीमतों में आई भारी तेजी के दम पर आज घरेलू शेयर बाजार में मेटल कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त रौनक देखी जा रही है। दिग्गज मेटल कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज (Hindalco Industries) और नेशनल एल्युमीनियम कंपनी (NALCO) के शेयर आज के कारोबार में 5% तक दौड़ गए। इस तेजी के चलते हिंडाल्को के शेयर 4.49% की मजबूती के साथ ₹1,153.75 और नाल्को के शेयर 5.17% की बढ़त लेकर ₹437.50 के स्तर पर पहुँच गए। मेटल शेयरों में आई इस चौतरफा खरीदारी की बदौलत निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 3% चढ़कर आज बाजार का टॉप परफॉर्मिंग सेक्टर बन गया, जिसके सभी 15 शेयर हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं।
चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुँचा एल्युमीनियम, सप्लाई चेन में रुकावट बनी वजह
वैश्विक कमोडिटी मार्केट में एल्युमीनियम की कीमतें उछलकर लगभग चार साल के सबसे ऊपरी स्तर पर आ गई हैं। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर एल्युमीनियम का भाव 0.6% बढ़कर $3,672.50 प्रति मीट्रिक टन दर्ज किया गया, जो कि 7 मार्च 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (जंग) के कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) के जरिए होने वाली वैश्विक सप्लाई बाधित हुई है, जिसने कीमतों को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाई है।
चीन में उत्पादन घटने की आशंका से सहमे ट्रेडर्स
दुनियाभर के कमोडिटी ट्रेडर्स के बीच इस बात को लेकर भी चिंता बनी हुई है कि मुख्य मैन्युफैक्चरिंग देशों में ऊर्जा की खपत और कार्बन उत्सर्जन की समीक्षा की जा रही है। इसके तहत चीन में एल्युमीनियम स्मेल्टर्स को अपने उत्पादन में कटौती करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। बढ़ती इन्वेंट्री और पर्यावरण नियमों को देखते हुए चीनी अधिकारी अतिरिक्त उत्पादन को कम करने के लिए कदम उठा रहे हैं। सप्लाई में इस संभावित कमी के चलते खरीदार भारी मात्रा में बुकिंग कर रहे हैं, जिससे कीमतों को लगातार सपोर्ट मिल रहा है।
एक साल में निवेशकों की लगी लॉटरी, नाल्को का पैसा ढाई गुना बढ़ा
पिछले एक साल के दौरान इन दोनों ही मेटल स्टॉक्स ने अपने शेयरधारकों को मल्टीबैगर रिटर्न देकर मालामाल कर दिया है:
हिंडाल्को: पिछले साल 2 जून 2025 को यह शेयर ₹617.90 के निचले स्तर पर था, जहाँ से महज 11 महीनों के भीतर इसमें 86.72% की शानदार बढ़त दर्ज की गई और यह आज ₹1,153.75 के नए शिखर पर पहुँच गया।
नाल्को (NALCO): इस शेयर ने तो निवेशकों की संपत्ति को ढाई गुना से भी ज्यादा बढ़ा दिया है। 2 जून 2025 को यह ₹176.40 के लो लेवल पर था, जहाँ से सिर्फ 10 महीनों में 152.32% की तूफानी तेजी दिखाते हुए इसने ₹445.10 का हाई लेवल छुआ।
तीन बड़े कारणों से शेयर बाजार में तेजी, Nifty ने दोबारा पार किया 23,950 स्तर
27 May, 2026 11:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी का दिन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। सुबह के शुरुआती कारोबार में घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स सुस्त नजर आए, जिसके बाद बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स और निफ्टी 50 लाल निशान में फिसल गए। हालांकि, बाजार ने निचले स्तरों से दमदार वापसी की। सेंसेक्स ने अपने इंट्रा-डे लो से बेहतरीन रिकवरी दिखाई, वहीं निफ्टी भी शुरुआती गिरावट को भुलाकर ऊपरी स्तरों पर पहुंचने में कामयाब रहा। व्यापक बाजार में भी खरीदारी का रुख रहा, जहाँ निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स लगभग आधा-आधा फीसदी की मजबूती के साथ कारोबार कर रहे हैं।
निचले स्तरों से पलटा बाजार, मेटल और रियल्टी शेयरों में रौनक
आज सेक्टोरल परफॉर्मेंस की बात करें तो निफ्टी मेटल इंडेक्स में सबसे ज्यादा तेजी देखी जा रही है, जो करीब 2.5% तक उछल गया है। इसके साथ ही रियल्टी सेक्टर भी 1% से ज्यादा की बढ़त के साथ दौड़ रहा है। इसके विपरीत, फार्मा सेक्टर पर कुछ दबाव है और निफ्टी फार्मा आधा फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। सुबह लगभग 11:05 बजे सेंसेक्स 107.28 अंक (0.14%) की बढ़त के साथ 76,116.98 पर और निफ्टी 23,955.00 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स 212.69 अंक गिरकर 75,797.01 तक आ गया था, जहाँ से इसने करीब 394 अंकों की शानदार रिकवरी की। वहीं निफ्टी भी 45 अंक की गिरावट के बाद संभलकर 23,976.40 के हाई तक पहुँचा।
इंडिया विक्स (India VIX) में गिरावट से निवेशकों को मिली राहत
बाजार में उतार-चढ़ाव और घबराहट को दर्शाने वाला इंडेक्स 'India VIX' आज शांत होता दिखा, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इंडिया विक्स करीब 6.95% की नरमी के साथ 15.01 के स्तर पर आ गया है। इस इंडेक्स में गिरावट का मतलब है कि बाजार में वोलैटिलिटी (अस्थिरता) कम हो रही है, जिससे शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को राहत मिली है।
क्या कहते हैं तकनीकी चार्ट और बाजार विशेषज्ञ?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब तक निफ्टी 23,800 के अहम सपोर्ट लेवल के ऊपर टिका हुआ है, तब तक बाजार में वापसी की उम्मीदें जिंदा रहेंगी। बजाज ब्रोकिंग के विश्लेषकों का मानना है कि यदि निफ्टी 24,000 के नीचे जाता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है, लेकिन अगर यह 24,200 के पार निकलने में सफल रहा, तो शॉर्ट-कवरिंग के दम पर 24,300 से 24,400 के जोन को छू सकता है।
आने वाले सत्रों के लिए अहम रेजिस्टेंस और सपोर्ट लेवल्स
एक्सिस सिक्योरिटीज के तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, अब निवेशकों की नजरें 24,000 से 24,126 के दायरे पर टिकी होंगी। अगर निफ्टी इस ऊपरी स्तर को पार करता है, तो यह 24,500 की तरफ कदम बढ़ा सकता है। वहीं, गिरावट की स्थिति में पिछले कारोबारी सत्र का बुलिश गैप (23,922 और 23,836) बाजार के लिए तत्काल सपोर्ट का काम करेगा, जिसके बाद अगला मजबूत सपोर्ट लेवल 23,719 के पास देखा जा रहा है।
Q4 में शानदार प्रदर्शन के बाद भी Senco Gold के शेयर पर दबाव
27 May, 2026 10:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: आभूषण विक्रेता कंपनी सेन्को गोल्ड (Senco Gold) के शेयरों के लिए आज का दिन निराशाजनक रहा। मार्च तिमाही के बेहद शानदार कारोबारी नतीजों के बाद भी कंपनी के शेयरों में निवेशकों का भरोसा नहीं जग सका। पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में कंपनी के मुनाफे में 151% और रेवेन्यू में लगभग 45% का बंपर उछाल दर्ज किया गया, लेकिन इसके बावजूद आज के कारोबार में शेयर 4% से ज्यादा टूट गए। निचले स्तरों पर मामूली खरीदारी के बाद भी शेयर संभल नहीं पाए। फिलहाल बीएसई (BSE) पर यह करीब 3.70% की कमजोरी के साथ ₹336.70 के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि इंट्रा-डे में यह ₹333.50 के निचले स्तर तक चला गया था।
मार्च तिमाही में मुनाफे और रेवेन्यू में बंपर उछाल
कंपनी द्वारा जारी किए गए तिमाही नतीजे बेहद मजबूत रहे। सालाना आधार पर सेन्को गोल्ड का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) 151.3% बढ़कर ₹156.8 करोड़ रुपये पर पहुँच गया है। वहीं, इस अवधि के दौरान कंपनी का कुल रेवेन्यू भी 44.9% की छलांग लगाकर ₹1,996.6 करोड़ रुपये रहा। ऑपरेटिंग स्तर पर भी प्रदर्शन बेहतरीन रहा; कंपनी का कामकाजी मुनाफा (EBITDA) 116.1% बढ़कर ₹274.27 करोड़ रुपये हो गया और ऑपरेटिंग मार्जिन भी सुधरकर 13.7% पर पहुँच गया। इन नतीजों के साथ ही कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए ₹1 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की भी घोषणा की है।
कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी की चिंता ने बिगाड़ा सेंटिमेंट
मुनाफे के बावजूद शेयरों में गिरावट की मुख्य वजह भविष्य को लेकर जताई गई चिंताएं हैं। हालांकि कंपनी ने आगामी वित्त वर्ष के लिए 20% रेवेन्यू ग्रोथ का सकारात्मक भरोसा जताया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि सरकार द्वारा इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) में किए गए बदलावों का असर आने वाली तिमाहियों में देखने को मिल सकता है। कंपनी की इसी सावधानी भरी टिप्पणी ने निवेशकों को सतर्क कर दिया, जिससे शेयरों पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
आयात शुल्क बढ़ने से ज्वेलरी इंडस्ट्री पर पड़ेगा असर
हाल ही में सरकार ने सोने, चांदी और प्लेटिनम जैसे कीमती धातुओं के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 10% कर दिया है। इसके अलावा, इन पर 5% का एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) भी जोड़ दिया गया है, जिससे कुल प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी अब सीधे 6% से बढ़कर 15% पर पहुँच गई है। टैक्स में हुई इस भारी बढ़ोतरी से सोने-चांदी की लागत बढ़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर सेन्को गोल्ड जैसी आभूषण कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है और यही वजह है कि शानदार नतीजों के बाद भी शेयर लाल निशान में आ गए।
सिंगापुर अदालत का बड़ा फैसला, Byju Raveendran को अवमानना केस में जेल
27 May, 2026 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत के सबसे बड़े एडटेक स्टार्टअप्स में से एक रहे 'बायजू' (Byju's) के संस्थापक बायजू रवींद्रन के संकट कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। एक बड़े झटके के तहत सिंगापुर की एक अदालत ने उन्हें कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) का दोषी करार देते हुए छह महीने के कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब रवींद्रन पहले से ही भारी कर्ज, निवेशकों के मुकदमों और वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं।
अदालती आदेशों की अनदेखी पड़ी भारी, लगा आर्थिक दंड भी
सिंगापुर की अदालत के मुताबिक, रवींद्रन ने अप्रैल 2024 से अपनी संपत्तियों के खुलासे से जुड़े कई अदालती निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन किया। आदेशों की लगातार अनदेखी करने के कारण कोर्ट ने उन पर कड़ा रुख अपनाया है। जेल की सजा के साथ-साथ अदालत ने उन पर 90,000 सिंगापुर डॉलर (लगभग 70,500 अमेरिकी डॉलर) का कानूनी खर्च भुगतने का भी जुर्माना लगाया है और उन्हें तुरंत संबंधित अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का आदेश दिया है। इसके अलावा, कोर्ट ने उन्हें 'बीएआर इन्वेस्टको पीटीई' नामक कॉरपोरेट इकाई के मालिकाना हक से जुड़े कानूनी दस्तावेज भी पेश करने को कहा है।
दुनियाभर के विदेशी निवेशकों का चौतरफा दबाव
एक समय भारतीय स्टार्टअप जगत के पोस्टर बॉय रहे रवींद्रन पर दुनिया भर के कर्जदाताओं और निवेशकों का शिकंजा कसता जा रहा है। अमेरिका में ऋणदाता (Lenders) अपने 1.2 अरब डॉलर के भारी-भरकम लोन की वसूली के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। वहीं, सिंगापुर में कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (QIA) की एक सहायक कंपनी ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। कतर के इस सॉवरेन वेल्थ फंड ने बायजू में उस दौर में भारी निवेश किया था, जब कंपनी तंगहाली और कर्मचारियों की छंटनी के दौर से गुजर रही थी।
रवींद्रन का पलटवार: बातचीत के बीच दबाव बनाने की रणनीति
इस कड़े अदालती फैसले के बाद बायजू रवींद्रन ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए गहरी निराशा जताई है। उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और जीएलएएस (GLAS) ट्रस्ट जैसे बड़े कर्जदाताओं के साथ उनका समझौता अंतिम चरण में है, जहाँ सिर्फ कुछ छोटे-मोटे विवाद सुलझने बाकी हैं। रवींद्रन ने दावा किया कि बातचीत में शामिल सभी पक्ष इस बात से सहमत हैं कि उनकी या अन्य संस्थापकों की तरफ से कोई वित्तीय हेराफेरी नहीं की गई है।
मामले को तूल देकर बनाई जा रही नकारात्मक छवि
अपने बचाव में रवींद्रन ने तर्क दिया कि उन्होंने विवादों को बढ़ावा देने के बजाय समाधान को चुना, यही वजह थी कि उन्होंने समझौते की उम्मीद में हालिया अदालती कार्यवाहियों का पुरजोर विरोध नहीं किया। उन्होंने कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी के इस कानूनी कदम को केवल एक दबाव बनाने का हथकंडा बताया। रवींद्रन का आरोप है कि बातचीत के इस बेहद संवेदनशील मोड़ पर उनके खिलाफ जानबूझकर मीडिया और जनता में एक नकारात्मक और भ्रामक माहौल तैयार किया जा रहा है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि रवींद्रन इस समय सिंगापुर में ही हैं या किसी अन्य देश में।
1860 में लागू हुआ भारत का पहला इनकम टैक्स, वजह बनी थी 1857 की क्रांति
26 May, 2026 04:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: आज के समय में इनकम टैक्स भारत सरकार के राजस्व (कमाई) का मुख्य जरिया बन चुका है, जिससे देश के विकास कार्यों को गति मिलती है। लेकिन भारत में टैक्स की शुरुआत किसी आर्थिक तरक्की की योजना के तहत नहीं हुई थी, बल्कि ब्रिटिश शासनकाल के दौरान सरकारी खजाने को कंगाली से बचाने के लिए की गई थी। इसके पीछे एक बड़ा ऐतिहासिक कारण छिपा हुआ है।
1857 के विद्रोह के आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए लगा टैक्स
भारत में इनकम टैक्स की शुरुआत साल 1860 में ब्रिटिश सरकार द्वारा की गई थी। इसका मुख्य कारण 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (विद्रोह) था। इस बड़े जन-विद्रोह को कुचलने के लिए अंग्रेजों को पानी की तरह पैसा बहाना पड़ा था। सेना, हथियार और प्रशासनिक व्यवस्था पर हुए भारी खर्च के कारण ब्रिटिश सरकार का खजाना पूरी तरह खाली हो गया था। उस समय सरकार का सालाना राजस्व करीब 30-35 करोड़ रुपये था, जबकि विद्रोह को दबाने का खर्च ही 40 करोड़ रुपये (लगभग 4 करोड़ पाउंड स्टर्लिंग) के पार निकल गया था। इस बड़े घाटे को पूरा करने के लिए ही टैक्स का सहारा लिया गया।
जेम्स विल्सन ने पेश किया था देश का पहला बजट और टैक्स प्रस्ताव
ब्रिटिश सरकार ने इस गंभीर आर्थिक संकट से निपटने के लिए स्कॉटलैंड के जाने-माने अर्थशास्त्री जेम्स विल्सन को भारत भेजा था, जिन्हें भारत का पहला वित्त सदस्य भी कहा जाता है। जेम्स विल्सन ने ही साल 1860 में देश का पहला बजट पेश किया और इसी दौरान भारत में पहली बार इनकम टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा। शुरुआत में इस टैक्स का ढांचा बेहद सीमित था और इसे केवल अमीर व उच्च आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था।
मात्र 2% से हुई थी शुरुआत, 200 रुपये सालाना कमाने वाले आते थे दायरे में
साल 1860 के नियमों के मुताबिक, उस दौर में जिन लोगों की सालाना कमाई 200 रुपये से 500 रुपये के बीच थी, उन पर 2 फीसदी टैक्स लगाया गया था। वहीं, 500 रुपये से अधिक की वार्षिक कमाई करने वालों को 4 फीसदी टैक्स देना पड़ता था। हालांकि आज के समय में यह रकम बेहद मामूली लगती है, लेकिन उस जमाने में 200 रुपये की सालाना आय बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। यही वजह थी कि आम किसान और मजदूर इसके दायरे से पूरी तरह बाहर थे और यह केवल बड़े व्यापारियों व पेशेवरों पर ही लागू होता था।
अस्थायी शुरुआत से लेकर आधुनिक आयकर अधिनियम 1961 का सफर
शुरुआत में ब्रिटिश सरकार ने इसे एक अस्थायी व्यवस्था के रूप में लागू किया था और 1865 में इसे हटा भी दिया गया था। लेकिन बाद में राजस्व जुटाने के इस प्रभावी तरीके को देखते हुए 1886 में एक नया आयकर अधिनियम लाया गया। आजादी के बाद भारतीय टैक्स व्यवस्था में कई बड़े सुधार किए गए और आखिरकार साल 1961 में नया 'आयकर अधिनियम' (Income Tax Act, 1961) लागू किया गया। यही कानून आज भी हमारे देश की टैक्स व्यवस्था का मुख्य आधार है, जिसमें समय-समय पर जरूरी बदलाव किए जाते रहते हैं।
नालंदा यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों की पढ़ाई, रामायण-महाभारत से कूटनीति के सबक
26 May, 2026 02:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नालंदा (बिहार):अगर आज के दौर में होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) जैसा गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट खड़ा हो जाए, तो भगवान राम भारत की विदेश नीति को किस दिशा में ले जाते? या फिर अमेरिका, रूस और चीन जैसी महाशक्तियों के साथ जटिल कूटनीतिक रिश्तों को साधने के लिए भगवान कृष्ण की क्या सलाह होती? वर्तमान में बिहार के ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय में वैश्विक राजनीति से जुड़े इन्हीं गूढ़ सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। 30 से अधिक देशों के छात्रों वाले इस अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय ने अपने विशेष पोस्टग्रेजुएट कोर्स 'इंटरनेशनल रिलेशन्स एंड पीस स्टडीज' (IRPS) के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक कूटनीति से जोड़ने की एक अनूठी पहल की है।
प्राचीन ग्रंथों के जरिए वैश्विक चिंताओं का समाधान
नालंदा विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर सचिन चतुर्वेदी के अनुसार, इस विशेष कोर्स का मुख्य उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणालियों और परंपराओं को पुनर्जीवित करना है। हाल के दिनों में विश्वविद्यालय ने कई ऐसे बहु-विषयक (interdisciplinary) अकादमिक शोध शुरू किए हैं, जो आज की वैश्विक चिंताओं और रणनीतिक अध्ययनों को रामायण, महाभारत और अर्थशास्त्र जैसे महान ग्रंथों से जोड़ते हैं। छात्र अपने शोध-पत्रों (dissertations) में यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ESG) के आधुनिक सिद्धांतों को प्राचीन शासन-प्रशासन के अनुभवों से कैसे बेहतर बनाया जा सकता है।
राम-सुग्रीव गठबंधन से समझी जा रही है आधुनिक रणनीतिक साझेदारी
विश्वविद्यालय की मास्टर डिग्री की छात्रा सुरभि रानी ने अपने शोध-पत्र में रामायण के 'किष्किंधा कांड' को आधुनिक कूटनीतिक गठबंधनों को समझने का एक बेहतरीन जरिया बताया है। उनके शोध के अनुसार, श्रीराम और सुग्रीव के बीच का गठबंधन केवल एक पौराणिक मित्रता नहीं, बल्कि राजधर्म, आपसी विश्वास और धार्मिक यथार्थवाद पर आधारित 'समान और संप्रभु साझेदारी' का एक बेहतरीन मॉडल है। यह मॉडल दिखाता है कि बिना किसी प्रभुत्व या कब्जे के भी एक शक्तिशाली और जिम्मेदार नेतृत्व कैसे तैयार किया जा सकता है। छात्र इस प्राचीन दर्शन की तुलना पश्चिमी विद्वानों के सिद्धांतों के साथ-साथ वर्तमान भारतीय विदेश नीति के 'विश्व बंधु' दृष्टिकोण से भी कर रहे हैं।
भगवान कृष्ण की रणनीतिक सूझबूझ और 'सॉफ्ट पावर' पर शोध
एक अन्य शोधकर्ता प्रीति कुमारी ने महाभारत के संदर्भ में भगवान कृष्ण द्वारा इस्तेमाल की गई 'सॉफ्ट पावर' (नरम शक्ति) और 'नियम-आधारित व्यवस्था' पर प्रकाश डाला है। उनका शोध बताता है कि महाभारत में कृष्ण का दर्शन आधुनिक अंतरराष्ट्रीय संबंधों के 'न्यायपूर्ण युद्ध' (Just War) और 'परम आपातकाल' (Supreme Emergency) के सिद्धांतों से मेल खाता है। जिस तरह कृष्ण ने अतीत में नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्ण को युद्ध के नियमों के तहत मिलने वाली सुरक्षा से वंचित कर दिया था, ठीक उसी तरह आज की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था भी उन आतंकवादी नेटवर्कों या दुष्ट देशों का सामना कर रही है जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन तो करते हैं, लेकिन खुद पर कार्रवाई के वक्त उन्हीं कानूनों को ढाल बना लेते हैं।
अगले साल से 'शास्त्रार्थ' के जरिए वैश्विक व्यवस्था को नई दिशा
पश्चिमी देशों की वाद-विवाद पद्धतियों से इतर, भारतीय ज्ञान परंपरा हमेशा से ज्ञान के संचय और आपसी समझ पर आधारित रही है। कुलपति सचिन चतुर्वेदी ने बताया कि नालंदा विश्वविद्यालय अगले शैक्षणिक सत्र से अपने पाठ्यक्रम में 'शास्त्रार्थ' (पारंपरिक बहस) जैसी पहलों को और अधिक व्यवस्थित रूप से शामिल करने जा रहा है। विश्वविद्यालय का मानना है कि रामायण, महाभारत और प्राचीन दर्शन के माध्यम से दुनिया को वैश्विक संघर्षों, शांति स्थापना और नई वैश्विक व्यवस्था को समझने के लिए एक मजबूत और समृद्ध 'भारतीय ज्ञान परंपरा' का विकल्प दिया जा सकता है।
ब्याज दरों में सख्ती की आशंका, El Niño और ग्लोबल क्रूड से RBI पर दबाव: नितिन कामत
26 May, 2026 11:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। देश की दिग्गज ब्रोकरेज फर्म जीरोधा (Zerodha) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नितिन कामत ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि यदि देश में कमजोर मानसून के साथ-साथ अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत को इस साल भीषण महंगाई के दौर से गुजरना पड़ सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी बात साझा करते हुए जीरोधा के फाउंडर ने साल 2026 को 'चौतरफा संकट' वाला समय बताया है। उनका मानना है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को मजबूरन अपनी मौद्रिक नीति को कड़ा करना पड़ेगा, जिससे विकास दर प्रभावित हो सकती है।
अल नीनो का साया: खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा
नितिन कामत ने अल नीनो (El Nino) के प्रभाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस साल सामान्य से 6% कम बारिश होने का अनुमान जताया है। हालांकि यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन भारत की करीब 70% वार्षिक बारिश मानसून के दौरान ही होती है और देश के लगभग 60% किसान आज भी सिंचाई के लिए पूरी तरह वर्षा जल पर निर्भर हैं। इतिहास का हवाला देते हुए कामत ने कहा कि साल 1951 के बाद से जब भी अल नीनो सक्रिय हुआ, उनमें से 60% मौकों पर सूखा या बेहद कम बारिश दर्ज की गई। साल 2009 में तो 37 वर्षों का सबसे कमजोर मानसून देखा गया था। कम बारिश से चावल, दालें, चीनी और सब्जियों की पैदावार घटने से खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू सकते हैं।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
कमजोर मानसून के अलावा वैश्विक स्तर पर चल रहा भू-राजनीतिक तनाव भी भारत की मुश्किलें बढ़ा रहा है। नितिन कामत के अनुसार, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी शिपिंग रूट को बाधित कर दिया है। इस मार्ग से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और इतनी ही एलएनजी (LNG) गुजरती है। भारत अपनी जरूरत का 80 से 90 प्रतिशत क्रूड ऑयल आयात करता है, ऐसे में वैश्विक बाजार में अप्रैल के दौरान भारतीय क्रूड बास्केट का दाम 114 डॉलर और मई में 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहना देश के लिए एक बड़ा खतरा है। इससे माल ढुलाई, पेट्रोल-डीजल और खाद की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे चालू खाते का घाटा (CAD) भी अनियंत्रित हो सकता है।
आरबीआई के सामने होगी 'अग्निपरीक्षा', बढ़ सकती हैं ब्याज दरें
आर्थिक विशेषज्ञों और नितिन कामत का मानना है कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें और कच्चे तेल का महंगा होना रिजर्व बैंक (RBI) के लिए सबसे पेचीदा स्थिति पैदा कर देता है। एक तरफ जहां इससे देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ जाती है, वहीं दूसरी तरफ खुदरा महंगाई दर तेजी से ऊपर भागती है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता और महंगाई को काबू में करने के लिए उसे एक सीमा के बाद लोन की ब्याज दरों (Repo Rate) में बढ़ोतरी करनी ही पड़ेगी। ब्याज दरें बढ़ने से कॉरपोरेट और आम आदमी के लिए कर्ज महंगा हो जाएगा, जिससे यह वित्तीय संकट और गहरा सकता है।
CNG ने बिगाड़ा बजट: दिल्ली-एनसीआर में फिर बढ़ी कीमतें
26 May, 2026 09:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों (एनसीआर) में रहने वाले लोगों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। मंगलवार को सीएनजी (CNG) की कीमतों में दो रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी गई है। पिछले केवल 12 दिनों के भीतर यह चौथी बार है जब सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं। इस नई बढ़ोतरी के बाद अब दिल्ली में सीएनजी की कीमत 83.09 रुपये प्रति किलो हो गई है। लगातार बढ़ती कीमतें आम जनता की जेब पर सीधा असर डाल रही हैं और उनके लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं।
दाम बढ़ने से बढ़ेगा गाड़ियों का किराया
सीएनजी के लगातार महंगे होने से अब माल ढोने वाले वाहनों और सवारियां ले जाने वाली गाड़ियों की लागत बढ़ने की पूरी आशंका है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा क्योंकि ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और कैब चालकों को अब अपनी गाड़ी चलाने में ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। अपनी लागत निकालने के लिए वे यात्रियों से ज्यादा किराया वसूल सकते हैं। इसके अलावा दैनिक उपयोग के सामानों की ढुलाई महंगी होने से दूसरी चीज़ों के दाम भी बढ़ सकते हैं। हालांकि, सरकार की तरफ से इस मूल्य वृद्धि पर अभी तक कोई बयान नहीं आया है।
12 दिनों में ऐसे बढ़े दाम
मई के महीने में सीएनजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी धीरे-धीरे की गई है। सबसे पहले 15 मई को सीएनजी के दाम दो रुपये बढ़ाए गए थे, जिसके बाद 17 मई को इसमें एक रुपये की और वृद्धि हुई। इसके बाद 23 मई को सीएनजी फिर से एक रुपये महंगी हुई और अब 26 मई को एक बार फिर दो रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। इस तरह पिछले 12 दिनों के भीतर ही सीएनजी के कुल दाम छह रुपये तक बढ़ चुके हैं, जिसने वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
दिल्ली-एनसीआर के शहरों में नई कीमतें
इस ताज़ा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के अन्य प्रमुख शहरों में भी सीएनजी के दाम काफी ऊंचे स्तर पर पहुँच गए हैं। अब दिल्ली में सीएनजी ₹83.09 प्रति किलो मिल रही है, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में इसकी कीमत सबसे ज्यादा यानी ₹91.70 प्रति किलो हो गई है। इसके अलावा गुरुग्राम में उपभोक्ताओं को अब ₹88.12 प्रति किलो और फरीदाबाद में ₹90.30 प्रति किलो के हिसाब से सीएनजी के दाम चुकाने पड़ रहे हैं। ईंधन की कीमतों में आया यह उछाल लोगों के रोजमर्रा के बजट को बिगाड़ रहा है।
निफ्टी भी फिसला, शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव
26 May, 2026 09:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत मंदी के साथ हुई, जहां शुरुआती सत्र में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सूचकांक सेंसेक्स 150 अंकों से अधिक टूट गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी लुढ़ककर 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चला गया। शुरुआती ट्रेडिंग के दौरान एयरटेल और इंडिगो जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में 4 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही, विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी 14 पैसे कमजोर होकर 95.40 के स्तर पर आ गया।
बाजार के शुरुआती आंकड़ों का लेखा-जोखा
सुबह 9:19 बजे सेंसेक्स 99.63 अंक (-0.13%) की कमजोरी के साथ 76,389.33 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 27.21 अंक (-0.11%) टूटकर 24,004.50 पर आ गया था। इससे पहले बाजार खुलते ही एक समय सेंसेक्स में 264.82 अंकों की गिरावट देखी गई और यह 76,224.14 तक फिसल गया था। इसी तरह निफ्टी भी गिरकर 24,004.10 के निचले स्तर तक पहुंच गया था।
इन शेयरों में रही हलचल: मुनाफा और घाटा कमाने वाले दिग्गज
शुरुआती कारोबार में इंडिगो, भारती एयरटेल, सन फार्मा, ट्रेंट, टाइटन और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर घाटे के साथ लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे। इसके विपरीत आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों जैसे इंफोसिस, टेक महिंद्रा, टीसीएस, एचसीएल टेक और बीईएल (BEL) के शेयरों में तेजी देखी गई। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.31%, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.22% और ऑटो इंडेक्स में 0.14% की गिरावट रही, जबकि निफ्टी पीएसयू बैंक (+0.23%) और निफ्टी फार्मा (+0.18%) बढ़त बनाने में कामयाब रहे।
सोमवार की जोरदार तेजी के बाद बाजार में लौटी बिकवाली
इससे पहले सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में शानदार बढ़त देखी गई थी, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आई भारी गिरावट और अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर बने सकारात्मक वैश्विक संकेत थे। सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही एक फीसदी से ज्यादा की मजबूती के साथ बंद हुए थे। कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान के मुताबिक, तकनीकी रूप से निफ्टी लंबे समय बाद अपने 20-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) को पार कर उसके ऊपर बंद हुआ था, जो बाजार में आगे की मजबूती का संकेत था। हालांकि, मंगलवार सुबह मुनाफावसूली और बिकवाली हावी होने से यह तेजी टिक नहीं सकी।
वैश्विक तनाव का असर: सोने और बाजार की चाल पर विश्लेषकों की राय
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटीज विश्लेषक मानव मोदी ने बाजार की इस उठापटक पर अपनी राय देते हुए कहा कि ईरानी ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव एक बार फिर गहरा गया है। इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण एशियाई बाजारों में सोने की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखा गया, जिसने पिछले सत्र में हासिल हुई बढ़त को काफी हद तक कम कर दिया। इसी वैश्विक हलचल का असर भारतीय शेयर बाजार के सेंटिमेंट पर भी साफ दिखाई दिया।
टाटा ग्रुप में बड़े बदलाव की आहट, आज बोर्ड मीटिंग में होगा मंथन
26 May, 2026 09:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। टाटा संस के निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आज, 26 मई 2026 को होने जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य एजेंडा समूह की उन कंपनियों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना है जो वर्तमान में भारी घाटे से जूझ रही हैं। हालांकि, इस बात की संभावना बेहद कम है कि वर्तमान चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने या उनकी पुनर्नियुक्ति को लेकर कोई बातचीत होगी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब समूह के शीर्ष नेतृत्व के बीच अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।
कंपनियों के घाटे पर नोएल टाटा की चिंता, 29 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है नुकसान
टाटा ट्रस्ट्स के नवनियुक्त चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के प्रमुख एन. चंद्रशेखरन के बीच बीते 23-24 मई को कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर लंबी चर्चा हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 में टाटा समूह के गैर-सूचीबद्ध (अन्लिस्टेड) व्यवसायों को 10,905 करोड़ रुपये का बड़ा नुकसान झेलना पड़ा था, जिसके आगे बढ़कर 29,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। नोएल टाटा विशेष रूप से टाटा डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक्स वेंचर्स और एयर इंडिया जैसे नए कारोबारों के लगातार बढ़ते घाटे को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं और वे भविष्य की रणनीति पर ठोस कदम चाहते हैं।
टाटा संस की लिस्टिंग (IPO) को लेकर टकराव की स्थिति
समूह के भीतर एक बड़ा विवाद टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्ट) करने को लेकर भी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस को देश की शीर्ष-15 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) की श्रेणी में रखा है, जिसके नियमों के तहत कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। हालांकि, नोएल टाटा फिलहाल टाटा संस का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने के पक्ष में नहीं हैं। दूसरी तरफ, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और प्रॉक्सी सलाहकार फर्म 'इनगवर्न' का मानना है कि इतनी बड़ी और देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली होल्डिंग कंपनी को बाजार की पारदर्शिता और कड़े नियमों के दायरे से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।
नेतृत्व और ट्रस्टों में बदलाव के बीच आंतरिक मतभेद तेज
हालिया कुछ समय में टाटा समूह के शीर्ष स्तर पर वैचारिक मतभेद काफी बढ़ गए हैं। बोर्ड के कुछ सदस्यों को हटाने की कोशिशों और चेयरमैन चंद्रशेखरन के कार्यकाल के विस्तार में हो रही देरी ने इन चर्चाओं को और हवा दी है। इस बीच, सांगठनिक स्तर पर भी बदलाव देखे जा रहे हैं, जिसके तहत नोएल टाटा के पुत्र नेविल टाटा को समूह के कुछ महत्वपूर्ण ट्रस्टों में जिम्मेदारी सौंपी गई है। आज होने वाली इस बैठक में घाटे में चल रही व्यक्तिगत कंपनियों के प्रमुख अपने बिजनेस मॉडल और घाटे से उबरने की भावी योजनाओं पर बोर्ड के सामने प्रेजेंटेशन दे सकते हैं।
एयर इंडिया और नए उद्यमों पर रहेगा विशेष दबाव
इस बैठक में मुख्य ध्यान उन नए प्रोजेक्ट्स पर केंद्रित रहेगा जो चेयरमैन चंद्रशेखरन की देखरेख में शुरू किए गए थे लेकिन अभी तक मुनाफे में नहीं आ पाए हैं। सरकार से अधिग्रहित की गई विमानन कंपनी 'एयर इंडिया' भी इस समय बड़े वित्तीय संकट और परिचालन संबंधी चुनौतियों से गुजर रही है। चूंकि टाटा संस समूह की मुख्य निवेश कंपनी (कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी) है, इसलिए विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इसके सूचीबद्ध होने से समूह के भीतर पारदर्शिता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस का ढांचा और अधिक मजबूत होगा।
निवेशकों की बल्ले-बल्ले! सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा चढ़ा, निफ्टी 24000 पार
25 May, 2026 04:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव में नरमी के संकेत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के चलते सोमवार को घरेलू शेयर बाजार ने एक नया इतिहास रच दिया है। चौतरफा घरेलू और विदेशी संस्थागत खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुए, जिससे निवेशकों के चेहरे खिल उठे हैं। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,073.61 अंक यानी 1.42 फीसदी की भारी छलांग लगाते हुए 76,488.96 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर बंद हुआ।
निफ्टी ने पार किया 24,000 का मनोवैज्ञानिक स्तर, रुपया भी हुआ मजबूत
सेंसेक्स की तरह ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निफ्टी ने भी आज बाजार में नया कीर्तिमान स्थापित किया। निफ्टी 312.41 अंक यानी 1.32 फीसदी की जोरदार बढ़त के साथ 24,031.70 के स्तर पर बंद हुआ। इस शानदार तेजी के साथ निफ्टी ने पहली बार 24,000 का बेहद महत्वपूर्ण और मनोवैज्ञानिक स्तर सफलतापूर्वक पार कर लिया है। बाजार में इस सकारात्मक माहौल के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी 35 पैसे की मजबूती के साथ 95.25 के स्तर पर बंद हुआ, जिससे अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिली है।
बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों ने किया लीड, बजाज फाइनेंस और HDFC में बंपर उछाल
बाजार की इस ऐतिहासिक रिकवरी और रिकॉर्डतोड़ तेजी की मुख्य कमान बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र (बैंकिंग एंड फाइनेंशियल सेक्टर) के शेयरों ने संभाली। निवेशकों ने इन सेक्टर्स में जमकर लिवाली की। सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले दिग्गज शेयरों में बजाज फाइनेंस और एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) शीर्ष पर रहे। इन दोनों ही बड़ी कंपनियों के शेयरों में आज तीन- can फीसदी से ज्यादा की शानदार तेजी दर्ज की गई, जिसने इंडेक्स को ऊपर खींचने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
कच्चा तेल सस्ता होने और वैश्विक सुधार से लौटी बाजार में रौनक
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस बंपर तेजी के पीछे वैश्विक बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेत और क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) का सस्ता होना है। कच्चा तेल सस्ता होने से भारत के आयात बिल में कमी आने की उम्मीद है, जिसका सीधा फायदा भारतीय कंपनियों और घरेलू अर्थव्यवस्था को मिलेगा। इसी भरोसे के कारण बाजार में आज सुबह से ही चौतरफा खरीदारी का माहौल बना रहा, जो बाजार बंद होने तक लगातार जारी रहा।
20 करोड़ की गड़बड़ी पर सेबी का एक्शन, कई लोगों पर लगा प्रतिबंध
25 May, 2026 02:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। देश के पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने शेयर बाजार में हेरफेर और धोखाधड़ी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश करते हुए एक ही परिवार के सात लोगों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। इन पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए 'पंप-एंड-डंप' (शेयरों के दाम कृत्रिम रूप से बढ़ाना और फिर बेचना) योजना चलाने का गंभीर आरोप है। इस अवैध खेल के जरिए इन लोगों ने भोले-भाले निवेशकों को जाल में फंसाकर 20.25 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमाया। सेबी ने इन सभी आरोपियों के प्रतिभूति बाजार (शेयर मार्केट) में कारोबार करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
पिता और बेटों ने बनाया 'ऑपरेटर' नेटवर्क, एसएमई शेयरों में की हेराफेरी
सेबी द्वारा जारी 234 पन्नों के विस्तृत अंतरिम आदेश के अनुसार, मुख्य आरोपी फिनफ्लुएंसर हेमंत गुप्ता और उनके दो बेटों—रोहन गुप्ता व अनिकेत गुप्ता ने इस पूरे रैकेट में 'ऑपरेटर' की भूमिका निभाई। ये तीनों बिना किसी पंजीकरण के अवैध रूप से रिसर्च एनालिस्ट (शोध विश्लेषक) के तौर पर काम कर रहे थे। इनका तरीका यह था कि ये पहले उन एसएमई (SME) शेयरों को खुद खरीद लेते थे जिनमें वॉल्यूम (कारोबार) बहुत कम होता था। इसके बाद सोशल मीडिया पर उन शेयरों को लेकर झूठी और बढ़ा-चढ़ाकर तेजी की सिफारिशें फैलाते थे, जिससे आम निवेशक उन्हें खरीदने लगते और कीमतें आसमान छूने लगती थीं। जैसे ही दाम बढ़ते, यह परिवार अपने शेयर बेचकर मुनाफा कमा लेता था। इस काम में परिवार की चार अन्य महिलाओं—शेरोन, लीना, रजनी और पूर्वांगी गुप्ता ने अपने ट्रेडिंग खातों का इस्तेमाल करने देकर मदद की।
एक्स, व्हाट्सएप और टेलीग्राम का चक्रव्यूह: ऐसे फंसाते थे निवेशकों को
नियामक की जांच में सामने आया कि यह पूरी हेराफेरी 1 दिसंबर 2023 से 20 जनवरी 2026 के बीच की गई, जिसमें कुल 82 कंपनियों के शेयरों को निशाना बनाया गया। रोहन और अनिकेत अपने 'एक्स' (ट्विटर) हैंडल पर इन शेयरों में तेजी के पोस्ट डालते थे। इसके बाद पिता हेमंत गुप्ता इन जानकारियों और स्टॉक टिप्स को व्हाट्सएप व टेलीग्राम के बड़े ग्रुप्स में फैला देते थे। चालाकी यह की गई कि टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर तो शेयरों का बकायदा टारगेट प्राइस (लक्ष्य मूल्य) बताया जाता था, लेकिन नियामक (सेबी) की सीधी नजर से बचने के लिए 'एक्स' पर टारगेट प्राइस नहीं लिखा जाता था।
20 करोड़ से ज्यादा का अवैध मुनाफा, 242 फीसदी बढ़ा गुप्ता परिवार का प्रॉफिट
सेबी के आंकड़ों के मुताबिक, इस जांच अवधि के दौरान इन सात लोगों का कुल टर्नओवर 548 करोड़ रुपये से बढ़कर सीधे 1023 करोड़ रुपये (86% की बढ़ोतरी) पर पहुंच गया। वहीं इनका कुल प्रॉफिट 242 फीसदी की छलांग लगाकर 58.40 करोड़ रुपये हो गया। इसमें से अकेले रोहन और शेरोन गुप्ता ने सबसे ज्यादा 50.03 करोड़ रुपये कमाए। सोशल मीडिया पर मिलने वाली टिप्स के भरोसे निवेश करने वाले आम और छोटे रिटेल निवेशकों की जेब काटकर इस परिवार ने कुल 20.25 करोड़ रुपये का नेट अवैध लाभ कमाया।
सेबी का कड़ा एक्शन: प्रॉफिट जब्त करने और ट्रेडिंग पर तुरंत रोक के निर्देश
चूंकि हेमंत, रोहन और अनिकेत सेबी के पास पंजीकृत शोध विश्लेषक नहीं थे, इसलिए वे कानूनी रूप से किसी को भी स्टॉक की सलाह देने के पात्र नहीं थे। सेबी ने इसे निवेशकों के साथ बड़ा धोखा माना है। नियामक ने कड़ा रुख अपनाते हुए गुप्ता परिवार को निर्देश दिया है कि वे कमाए गए 20.25 करोड़ रुपये के अवैध लाभ को संयुक्त या अलग-अलग रूप से तुरंत सरेंडर (जब्त) करें। इसके साथ ही, अगले आदेश तक ये सभी लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शेयर बाजार में किसी भी तरह की खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
