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कोयला मंत्रालय की आरोह रिपोर्ट: बंद होंगी 42 खदानें, पुनर्विकास और नए रोजगार के रास्ते खुलेंगे
23 Jul, 2026 11:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली:देश में खदानों को वैज्ञानिक तरीके से बंद करने और उनके बेहतर पुनर्वास की दिशा में कोयला मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने बुधवार को 'आरोह' नाम से खदान बंद करने से जुड़ी एक विस्तृत वार्षिक रिपोर्ट का आधिकारिक विमोचन किया। यह प्रकाशन भारत में माइन क्लोजर (खदान बंदी) की दिशा में हुई अभूतपूर्व प्रगति को रेखांकित करता है। इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से पारिस्थितिकी की बहाली, पर्यावरण संरक्षण और खनन कार्य समाप्त होने के बाद भूमि के टिकाऊ तथा बहुउपयोगी उपयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें देश की 42 प्रमुख कोयला खदानों को बंद करने का संपूर्ण ब्योरा प्रस्तुत किया गया है।
खनन के अंत को नए आर्थिक और सामाजिक अवसरों की शुरुआत के रूप में देखने की नई सोच
'आरोह' रिपोर्ट के विमोचन के अवसर पर केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने खदानों को बंद करने के दृष्टिकोण में आए दूरगामी बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में खदान बंदी के पूरे दर्शन को ही बदल दिया गया है। अब इसे केवल खनन गतिविधियों के औपचारिक समापन के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि इसे राष्ट्रीय और मंत्रालयी स्तर पर प्राथमिकता देते हुए नए आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय अवसरों की शुरुआत माना जा रहा है। यह नया दृष्टिकोण खनन प्रभावित क्षेत्रों में सतत विकास को बढ़ावा देने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रहा है।
क्यूआर कोड और दृश्य दस्तावेजों से सुसज्जित 'आरोह' रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं
जारी की गई 'आरोह' रिपोर्ट में शामिल प्रत्येक खदान का एक संपूर्ण और प्रामाणिक प्रोफाइल तैयार किया गया है। इसमें खदान बंदी से जुड़ी प्रमुख पहलों और उनके बाद भूमि उपयोग से निकले सकारात्मक परिणामों का पूरा लेखा-जोखा मौजूद है। रिपोर्ट को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए इसमें खदान क्षेत्रों की पुरानी और कायाकल्प के बाद की तस्वीरों के दृश्य दस्तावेज शामिल किए गए हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट में क्यूआर कोड (QR Code) आधारित वृत्तचित्र वीडियो भी जोड़े गए हैं, जिन्हें स्कैन करके कोई भी व्यक्ति खदान स्थलों के पुनरुद्धार की पूरी परिवर्तन यात्रा को सीधे देख सकता है।
सामुदायिक भागीदारी और सुव्यवस्थित पहलों से सुधर रहा स्थानीय पर्यावरण
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि संरचित सुधार प्रक्रियाओं और व्यवस्थित पारिस्थितिक पहलों के जरिए खनन प्रभावित क्षेत्रों का कायाकल्प किया जा रहा है। स्थानीय समुदायों को ध्यान में रखकर किए गए प्रशासनिक और पर्यावरणीय हस्तक्षेपों ने बंजर पड़े भू-भागों को हरे-भरे और सुरम्य परिदृश्यों में परिवर्तित कर दिया है। इस तरह के दूरदर्शी प्रयासों से न केवल स्थानीय पर्यावरण का संतुलन बहाल हो रहा है, बल्कि आसपास निवास करने वाले नागरिकों को भी स्वच्छ वातावरण और आजीविका के नए साधनों के रूप में व्यापक सामाजिक और आर्थिक लाभ मिल रहे हैं।
भारत के विकसित होते माइन क्लोजर ढांचे में 'रिक्लेम' (RECLAIM) मॉडल की अहम भूमिका
यह विशेष प्रकाशन भविष्य के लिए एक बहुमूल्य ज्ञान भंडार के रूप में कार्य करेगा, जो अन्य खदानों के पुनरुद्देश्यीकरण और वैज्ञानिक प्रबंधन हेतु उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत का खदान बंदी ढांचा किस प्रकार आधुनिक तकनीकों के साथ लगातार विकसित हुआ है। इस दिशा में कोयला मंत्रालय की 'रिक्लेम' (RECLAIM) जैसी प्रमुख पहलें वैज्ञानिक मूल्यांकन को बढ़ावा दे रही हैं। यह ढांचा सभी हितधारकों की भागीदारी, ज्ञान के आदान-प्रदान और खनन के बाद भूमि के दीर्घकालिक व टिकाऊ उपयोग को प्रोत्साहित करने में मील का पत्थर साबित हो रहा है।
Silver Price Today: राहत की खबर! आज घटे चांदी के दाम, जानें आपके शहर का रेट
23 Jul, 2026 09:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पिछले सत्र में रिकॉर्ड तेजी दर्ज करने के बाद आज गुरुवार 23 जुलाई को सर्राफा बाजार और वायदा बाजार में चांदी की कीमतों में मुनाफावसूली का असर देखने को मिल रहा है। दिल्ली सर्राफा बाजार में करों सहित चांदी का मूल्य बढ़कर 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। वहीं घरेलू वायदा बाजार यानी एमसीएक्स (MCX) पर कारोबार की शुरुआत लाल निशान के साथ हुई। सुबह के कारोबार में सितंबर वायदा का भाव 0.23 प्रतिशत की नरमी के साथ ₹2,26,474 प्रति किलोग्राम के स्तर पर ट्रेड कर रहा था।
विभिन्न संस्थानों के आंकड़ों में दिखा अंतर
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अनुसार गुरुवार सुबह चांदी की दर 2,25,460 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ गुडरिटर्न्स के आंकड़ों के अनुसार यह भाव 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक जा पहुंचा है। कीमतों में दिख रहे इस अंतर को देखते हुए यदि आप आभूषण खरीदने या कीमती धातुओं में नया निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो खरीदारी से पूर्व अपने स्थानीय बाजार के ताजा रेट अवश्य जांच लें।
देश के अलग-अलग महानगरों में चांदी के रेट
देशभर के अधिकांश प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पटना, लखनऊ और जयपुर में एक किलोग्राम चांदी की कीमत 2,40,000 रुपये दर्ज की गई है। इन शहरों में 10 ग्राम चांदी 2,400 रुपये और 100 ग्राम 24,000 रुपये में मिल रही है। वहीं चेन्नई, हैदराबाद और भुवनेश्वर में चांदी का भाव थोड़ा अधिक रहकर 2,45,000 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है, जहां 10 ग्राम का दाम 2,450 रुपये है। वडोदरा और पुणे जैसे शहरों में प्रति किलोग्राम भाव 2,40,000 रुपये के आसपास बना हुआ है।
वैश्विक हलचल का घरेलू वायदा कारोबार पर प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आए उछाल के चलते बीते दिन बुधवार को वायदा बाजार में चांदी जोरदार तेजी के साथ बंद हुई थी। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सितंबर डिलीवरी वाले अनुबंधों में 2,478 रुपये यानी 1.11 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई थी, जिससे भाव 2,26,257 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था। वैश्विक मोर्चे पर न्यूयॉर्क में चांदी 1.34 प्रतिशत चढ़कर 59.58 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गई थी।
वैश्विक फैसलों और संकेतों पर टिकी निवेशकों की नजर
वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता के बीच दुनिया भर के निवेशकों की निगाहें अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक पर टिकी हुई हैं। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि फेडरल रिजर्व 29 जुलाई की बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। हालांकि, आर्थिक संकेतों को देखते हुए चालू वर्ष के दौरान दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं लगातार मजबूत बनी हुई हैं।
निफ्टी-बैंक निफ्टी में तेजी के बीच बिकवाली की रणनीति, आज ये 2 शेयर देंगे कमाई का मौका
23 Jul, 2026 09:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में 22 जुलाई को लगातार तीसरे दिन मंदी का रुख देखने को मिला और मार्केट ब्रेथ भी काफी कमजोर नजर आई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर करीब 2,120 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि महज 875 शेयर ही बढ़त दर्ज कर सके। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के चढ़ते दामों और बढ़ते वैश्विक तनाव के कारण आने वाले दिनों में बाजार में और दबाव देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 24051 से 24110 के बीच और बड़ा रेजिस्टेंस 24189 से 24221 के पास बना हुआ है। वहीं, नीचे की तरफ निफ्टी का पहला सपोर्ट यानी बेस 23877 से 23931 के बीच है, जबकि दूसरा बड़ा बेस 23777 से 23856 के दायरे में नजर आ रहा है।
बाजार में बिकवाली का दबाव और कमजोरी के संकेत
पिछले सत्र में 24080 के स्तर से नीचे बिकवाली की रणनीति पूरी तरह कारगर साबित हुई और इंडेक्स ने 50 DEMA का स्तर भी टेस्ट किया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की ओर से कैश मार्केट में बिकवाली भले ही सीमित रही हो, लेकिन वायदा बाजार (F&O) में विदेशी निवेशकों की बिकवाली में बड़ा उछाल देखा गया है। FIIs का नेट शॉर्ट बढ़कर 2.51 लाख अनुबंधों के पार पहुंच चुका है, जो बाजार में बनी कमजोरी की ओर स्पष्ट इशारा करता है। अमेरिकी बाजारों से मिले-जुले संकेतों और कच्चे तेल का भाव $96 के आसपास पहुंचने से सेंटिमेंट पर नकारात्मक असर पड़ा है। बाजार में जब तक 24051 से 24110 के स्तर के ऊपर मजबूती नहीं बनती, तब तक स्थिरता की उम्मीद कम ही है।
बैंक निफ्टी के प्रमुख रेजिस्टेंस और सपोर्ट जोन
बैंकिंग इंडेक्स यानी बैंक निफ्टी की बात करें तो इसके लिए पहला रेजिस्टेंस 57467 से 57641 के स्तर पर है, जबकि ऊपरी स्तरों पर बड़ा रेजिस्टेंस 57881 से 58089 के आसपास दिखेगा। नीचे की ओर बैंक निफ्टी का पहला बेस 56467 से 56865 के दायरे में है और दूसरा बड़ा बेस 56177 से 56309 के बीच देखा जा रहा है। बीते कारोबारी दिन यह 20 DEMA से नीचे फिसलकर अपने 50 DEMA के लक्ष्य तक पहुंचा। क्रूड ऑयल के $96 प्रति बैरल पर पहुंचने का सबसे ज्यादा प्रतिकूल असर बैंकिंग और रेट सेंसिटिव सेक्टर्स पर पड़ सकता है। हालांकि 56467 से 56865 का जोन काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस बेस में 50, 100 और 200 DEMA तीनों मौजूद हैं, जो इसे एक बेहद मजबूत सपोर्ट जोन बनाते हैं।
मौजूदा बाजार में ट्रेडिंग रणनीति और दमदार शेयर
तकनीकी संकेत कमजोर होने के कारण विशेषज्ञ फिलहाल बाजार में हर बड़े उछाल पर बिकवाली की रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं। पहले बेस के टूटने पर निफ्टी और बैंक निफ्टी के अगले बेस तक फिसलने की पूरी आशंका बनी हुई है, हालांकि बेस के पास से कभी भी तेज रिवर्सल भी संभव है, इसलिए पोजिशन्स को अगली अवधि के लिए कैरी करने से बचना चाहिए। इस वोलैटिलिटी के बीच फिनबर्ग मैनेजमेंट की मधु बंसल ने मजबूत चार्ट पैटर्न वाले दो शेयरों पर खरीदारी की राय दी है। उन्होंने एजिस वोपाक टर्मिनल्स में 285 रुपये के स्टॉप-लॉस के साथ 321 रुपये के लक्ष्य के लिए दांव लगाने की सलाह दी है, जबकि इंडसइंड बैंक को 1040 रुपये के स्टॉप-लॉस के साथ 1170 रुपये के टारगेट के लिए पोर्टफोलियो में शामिल करने का सुझाव दिया है।
चिप की दुनिया में भारत का नया मिशन, चीन को चुनौती देने की रणनीति तैयार
22 Jul, 2026 02:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में चीन का एक मजबूत और सशक्त विकल्प बनने के लिए भारत ने एक और बड़ा कदम उठाया है। देश जल्द ही सेमीकंडक्टर और चिप पैकेजिंग के एक बड़े वैश्विक केंद्र के तौर पर उभरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दुनिया भर के प्रमुख निर्माताओं को भारत में चिप निर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से ठोस प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।
निवेश बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता और सब्सिडी योजना
चिप पैकेजिंग और निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार कंपनियों को यूनिट लगाने पर पूंजीगत व्यय का 35 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त पारंपरिक पैकेजिंग इकाइयों को 25 प्रतिशत तक की सहायता दी जाएगी। सरकार का स्पष्ट मानना है कि केवल चिप का निर्माण ही नहीं, बल्कि उनकी टेस्टिंग और पैकेजिंग भी वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे भारत में तेजी से विकसित किया जा रहा है।
रोजगार के नए अवसर और आयात पर निर्भरता में कमी
नई रणनीति के तहत इंटेल, लॉकहीड मार्टिन और एप्लाइड मैटेरियल्स जैसी दुनिया की दिग्गज कंपनियों ने भारत में निवेश करने में गहरी रुचि दिखाई है। देश में नई पैकेजिंग और टेस्टिंग इकाइयां शुरू होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, हार्डवेयर और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में हजारों की संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही ऑटोमोबाइल, स्मार्टफोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली चिप्स के लिए भारत की विदेशी आयात पर निर्भरता काफी हद तक कम होगी।
सेमिकॉन मिशन और उन्नत तकनीकों की स्थापना
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में असेंबली, टेस्टिंग, पैकेजिंग और आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली टेस्ट इकाइयों को आधिकारिक स्वीकृति मिल चुकी है। सेमिकॉन 2.0 पहल के अंतर्गत कम्प्यूटिंग, मेमोरी, पावर, नेटवर्किंग और सेंसर जैसे प्रमुख घटकों की पहचान कर काम शुरू किया गया है। देश की पहली फैब यूनिट के शुरू होने के साथ-साथ पहली कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट और पहली थ्री-डी ग्लास सब्सट्रेट पैकेजिंग सुविधा भी देश में स्थापित की जा रही है।
भविष्य की सेमीकंडक्टर क्रांति का नया खाका
अगली पीढ़ी की पैकेजिंग तकनीकों को आकर्षित करने के लिए दी जा रही विशेष सब्सिडी व्यवस्था वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों को भारत की ओर खींच रही है। इन दूरगामी सुधारों और नई तकनीकों के समावेश से भारत न केवल अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में एक प्रमुख निर्यातक के रूप में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।
क्रूड में तेजी से बढ़ी चिंता, महंगे ईंधन का असर दिख सकता है बाजार में
22 Jul, 2026 02:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की वैश्विक कीमतों में 22 जुलाई को अचानक भारी उछाल दर्ज किया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी सीधा असर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड 2.76 प्रतिशत चढ़कर 93.54 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड में भी 2.83 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इस तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार और मुद्रा बाजार पर तुरंत देखा गया, जहां प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई और सेंसेक्स करीब 700 अंक तक गिर गया।
मध्य पूर्व में तनाव से कच्चे तेल में उबाल
कच्चे तेल की कीमतों में आए इस अचानक उछाल की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष को माना जा रहा है। सैन्य कार्रवाइयों और जवाबी हमलों के कारण खाड़ी क्षेत्र में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित हुई है। इस वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के चलते आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार चढ़ रहे हैं।
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर और आयात बिल में भारी वृद्धि
तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय मुद्रा रुपये पर दबाव बढ़ गया है और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 11 पैसे टूटकर 96.36 के स्तर पर आ गया। भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून तिमाही में भारत का कच्चा तेल आयात खर्च पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 60 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिससे सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ बढ़ा है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण देश में ईंधन की कीमतों में पहले ही कई बार बढ़ोतरी की जा चुकी है, जिससे विभिन्न शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का यह रुख आगे भी जारी रहता है, तो तेल विपणन कंपनियां ईंधन के खुदरा दामों में फिर से वृद्धि करने के लिए मजबूर हो सकती हैं।
आम जनता के बजट और मुद्रास्फीति पर पड़ेगा सीधा असर
ईंधन की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ेगा, जिससे दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे आम नागरिकों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और देश में समग्र मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका भी गहरी हो जाएगी।
मुनाफे में जबरदस्त उछाल, अदाणी पावर की Q1 कमाई में 42% की बढ़ोतरी
22 Jul, 2026 01:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद: देश की प्रमुख बिजली उत्पादक कंपनी अदाणी पावर ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के अपने वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस अवधि के दौरान कंपनी के एकीकृत शुद्ध लाभ में 42 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। मजबूत परिचालन प्रदर्शन और राजस्व में हुई उल्लेखनीय बढ़ोतरी के दम पर कंपनी ने यह उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही भविष्य की विस्तार योजनाओं को गति देने के लिए कंपनी के निदेशक मंडल ने 15,000 करोड़ रुपये की विशाल पूंजी जुटाने के प्रस्ताव को भी अपनी हरी झंडी दे दी है।
पहली तिमाही में मुनाफे और राजस्व में भारी उछाल
अदाणी पावर ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 4,806 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ हासिल किया है, जो पिछले साल की समान अवधि के 3,385 करोड़ रुपये के मुकाबले 42 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही परिचालन से प्राप्त कंपनी का कुल राजस्व भी 34 प्रतिशत की जोरदार बढ़त के साथ 18,902 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़े कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति और परिचालन दक्षता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
विस्तार योजनाओं के लिए 15,000 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी
भविष्य के विकास और नई परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए कंपनी के निदेशक मंडल ने 15,000 करोड़ रुपये तक की पूंजी जुटाने की योजना को स्वीकृति दी है। यह पूंजी इक्विटी शेयर जारी करके जुटाई जाएगी, जिसके लिए क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) अथवा अन्य स्वीकृत माध्यमों का सहारा लिया जाएगा। इस राशि का उपयोग कंपनी अपनी विभिन्न विस्तार योजनाओं और ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने में करेगी।
नेस्ले इंडिया के शुद्ध लाभ में 48 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि
दूसरी तरफ, एफएमसीजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी नेस्ले इंडिया ने भी अपने जून तिमाही के बेहतरीन वित्तीय परिणाम जारी किए हैं। मजबूत बिक्री के बल पर नेस्ले इंडिया का शुद्ध लाभ 48.26 प्रतिशत बढ़कर 958.68 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले साल की समान तिमाही में 646.59 करोड़ रुपये था। उत्पादों की बिक्री से प्राप्त राजस्व में भी 25.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और यह बढ़कर 6,363.27 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
घरेलू मांग और निर्यात में मजबूती से बढ़ा कारोबार
नेस्ले इंडिया के प्रबंधन के अनुसार उपभोक्ता विश्वास और बेहतर बाजार निष्पादन के कारण बिक्री में यह शानदार बढ़त देखने को मिली है। इस अवधि में कंपनी के निर्यात में 35.6 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया, जबकि घरेलू बिक्री भी 25 प्रतिशत बढ़कर 6,073.05 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। इन सब के परिणामस्वरूप कंपनी की कुल आय 25.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ 6,400.65 करोड़ रुपये दर्ज की गई है।
Q1 नतीजों से Nestle India को मिला बूस्ट, ₹959 करोड़ के मुनाफे के बाद चढ़ा शेयर
22 Jul, 2026 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: एफएमसीजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी नेस्ले इंडिया ने चालू वित्तीय वर्ष की जून तिमाही के अपने वित्तीय आंकड़े जारी कर दिए हैं। इस अवधि के दौरान कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 48 प्रतिशत की जोरदार बढ़त के साथ 958.7 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। वहीं, परिचालन से प्राप्त राजस्व भी 25 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 6,378.2 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इन मजबूत नतीजों की घोषणा के तुरंत बाद शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों में तेजी देखी गई और कारोबार के दौरान इसका शेयर मूल्य 3.32 प्रतिशत चढ़कर 1500.60 रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
अनुमान से बेहतर रहा मुनाफे का प्रदर्शन
जून तिमाही में नेस्ले इंडिया का एकल आधार पर कर-पश्चात लाभ 47.9 प्रतिशत बढ़कर 975.1 करोड़ रुपये रहा, जो बाजार विशेषज्ञों द्वारा लगाए गए अनुमानों से कहीं अधिक है। वित्तीय विश्लेषकों ने इस अवधि के लिए मुनाफा कम रहने का अनुमान जताया था। इसके अतिरिक्त, कंपनी की कुल बिक्री सालाना आधार पर 25.4 प्रतिशत बढ़कर 6,363.3 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो बाजार की उम्मीदों के मुकाबले काफी बेहतर आंकड़े को दर्शाती है।
घरेलू बिक्री और विज्ञापन खर्च में जोरदार वृद्धि
कंपनी की घरेलू बाजार में बिक्री 25 प्रतिशत बढ़ी है और इसका मार्जिन 24.2 प्रतिशत दर्ज किया गया। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, इस तिमाही में न केवल बिक्री का मूल्य बढ़ा है, बल्कि बिक्री की मात्रा में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। ब्रांड्स की पहुंच और मजबूती बढ़ाने के लिए कंपनी ने भारत में अपने विज्ञापनों पर होने वाले खर्च में सालाना आधार पर 40 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की है, जिसके परिणामस्वरूप इसके सभी प्रमुख उत्पाद श्रेणियों ने दोहरे अंकों में वृद्धि हासिल की है।
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद निर्यात में तेजी
वैश्विक स्तर पर जारी भौगोलिक और राजनीतिक तनावों के बावजूद, कंपनी के निर्यात व्यवसाय ने 35.6 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की है। इस दौरान कंपनी ने अपने परिचालन लागत को नियंत्रित करने और बचत बढ़ाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। लागत प्रबंधन के साथ-साथ भारतीय बाजार में लगातार किए जा रहे निवेश ने कंपनी की समग्र वित्तीय स्थिति को अधिक मजबूती प्रदान की है।
बाजार के दबाव के बीच शेयर का शानदार प्रदर्शन
चालू वर्ष में अब तक नेस्ले इंडिया के शेयरों में लगभग 16 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है, जो व्यापक बाजार सूचकांकों के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन है। इस अवधि के दौरान मुख्य बाजार सूचकांकों में गिरावट का रुख रहने के बावजूद कंपनी के शेयर ने निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न दिया है। बेंचमार्क सूचकांकों निफ्टी और सेंसेक्स में देखी जा रही मंदी के बावजूद इस शेयर में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।
अमेरिका के टैरिफ ऐलान से भारतीय दवा कंपनियों की बढ़ी चिंता, जानिए वजह
22 Jul, 2026 10:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 जुलाई 2026 को बड़ा ऐलान करते हुए अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर नए टैरिफ नियमों की समयसीमा घोषित कर दी है। इस घोषणा के बाद सन फार्मा (Sun Pharma), ल्यूपिन (Lupin) और सिप्ला (Cipla) समेत भारत की प्रमुख दवा कंपनियां वैश्विक निवेशकों की नजरों में आ गई हैं। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर साझा किए गए संदेश में बताया कि अमेरिका में आयात की जाने वाली सभी जेनेरिक औषधियों पर अगले दो वर्षों तक कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। इसके पश्चात् 1 अगस्त 2028 से 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा, जिसे 1 अगस्त 2029 से बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
टैरिफ नीति का उद्देश्य और अमेरिकी बाजार की निर्भरता
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार इस टैरिफ व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। जो कंपनियां निर्धारित समयावधि के भीतर अमेरिका में अपने विनिर्माण संयंत्र स्थापित नहीं करेंगी, उन्हें भारी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। पूर्व में घोषित टैरिफ केवल ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं तक सीमित थे। जेनेरिक दवाओं को पूर्व में इसलिए छूट दी गई थी क्योंकि अमेरिका में डॉक्टर लगभग 90 प्रतिशत मामलों में जेनेरिक दवाएं ही लिखते हैं। साथ ही ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से दवा उद्योग की समीक्षा शुरू की गई है और सीधे सस्ती दवाओं की आपूर्ति के लिए 'ट्रंप आरएक्स' नामक मंच भी प्रस्तुत किया गया है।
भारतीय फार्मा उद्योग पर संभावित प्रभाव
जेनेरिक दवाओं पर शुल्क लगाने के इस कदम का भारतीय औषधि क्षेत्र पर व्यापक असर पड़ सकता है। भारतीय दवा कंपनियों की अमेरिकी बाजार में कुल बिक्री का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा जेनेरिक दवाओं का है, वहीं अमेरिका द्वारा आयात की जाने वाली कुल जेनेरिक औषधियों में भारत की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है। भारत से अमेरिका को प्रतिवर्ष लगभग 10 अरब डॉलर का फार्मा निर्यात होता है। इसके अतिरिक्त अमेरिका से बाहर यूएस-एफडीए द्वारा स्वीकृत विनिर्माण इकाइयों की सर्वाधिक संख्या भारत में ही है, जो लगभग 670 के आसपास है।
उत्पादन लागत का अंतर और अमेरिकी चुनौतियां
भारत में दवाओं के विनिर्माण की लागत अमेरिका की तुलना में 30 से 50 प्रतिशत तक कम आती है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका में बड़े पैमाने पर जेनेरिक उत्पादन क्षमता विकसित करना अत्यधिक चुनौतीपूर्ण है क्योंकि लगातार मूल्य दबाव, कड़े गुणवत्ता मानक और तीव्र प्रतिस्पर्धा के कारण अमेरिका में कम लागत वाली उत्पादन क्षमता काफी हद तक सीमित हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वहां पर्याप्त उत्पादन क्षमता स्थापित करने में दशकों का समय लग सकता है।
भारतीय कंपनियों की अमेरिका में व्यावसायिक उपस्थिति
विभिन्न भारतीय दवा निर्माताओं की अमेरिकी बाजार में उपस्थिति का स्वरूप भिन्न है। अरबिंदो फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, ल्यूपिन, सिप्ला और जाइडस लाइफ जैसी कंपनियों के अमेरिका में स्थानीय विनिर्माण संयंत्र या मजबूत कारोबारी नेटवर्क मौजूद हैं। इसके विपरीत एल्केम लैब्स और टोरेंट फार्मा जैसी कंपनियां प्राथमिक रूप से भारत में स्थित इकाइयों से आपूर्ति करती हैं और उनकी अमेरिकी आय का हिस्सा सीमित है। वहीं बायोकॉन जैसी कंपनियां बायोसिमिलर और जेनेरिक उत्पादन के लिए भारत एवं मलेशिया के संयंत्रों पर निर्भर हैं।
आज का LPG रेट जारी, जानिए आपके शहर में 14.2 किलो सिलेंडर की नई कीमत
22 Jul, 2026 10:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश की राजधानी में 22 जुलाई 2026 को 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की कीमतें ₹942 पर स्थिर बनी हुई हैं। बीते महीने यानी 22 जून 2026 को भी इसकी दरें ₹942 ही दर्ज की गई थीं, जिससे इस महीने आम उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की अतिरिक्त बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ा है। हालांकि, बीते एक साल के रुझानों को देखें तो घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में कुल मिलाकर ₹89 का इजाफा दर्ज किया जा चुका है।
घरेलू एलपीजी की वर्तमान स्थिति और एक साल का लेखा-जोखा
हालिया आंकड़ों पर गौर करें तो रसोई गैस की दरों में सबसे ताजा संशोधन जून 2026 में देखने को मिला था, जब सिलेंडर के दाम में ₹29 की बढ़ोतरी की गई थी। इस बढ़ोतरी के बाद से वर्तमान में कीमतें स्थिर रखी गई हैं, जिससे घरेलू बजट पर फिलहाल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ा है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय करों और परिवहन शुल्क के भिन्न होने के कारण देश भर के विभिन्न शहरों में सिलेंडर के अंतिम मूल्य में मामूली अंतर देखने को मिलता है।
एलपीजी की दरें तय करने वाले प्रमुख वैश्विक कारक
घरेलू एलपीजी की कीमतों का निर्धारण सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के दामों से जुड़ा होता है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की विनिमय दर, आयात पर आने वाली लागत और केंद्र व राज्य सरकारों की कर नीतियों का भी इस पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इन्हीं वैश्विक और घरेलू आर्थिक मापदंडों के आधार पर पेट्रोलियम कंपनियां समय-समय पर दरों की समीक्षा कर संशोधन करती हैं।
देश के प्रमुख शहरों में 14.2 किलोग्राम सिलेंडर के भाव
मौजूदा समय में देश के विभिन्न महानगरों और प्रमुख शहरों में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के भाव में भिन्नता देखने को मिलती है। राजधानी नई दिल्ली में यह ₹942.00 में उपलब्ध है, जबकि मुंबई में इसकी कीमत ₹941.50, कोलकाता में ₹968.00 और चेन्नई में ₹957.50 है। इसी प्रकार जयपुर में इसका दाम ₹945.50, लखनऊ में ₹965.50, कानपुर में ₹957.00, भोपाल में ₹948.50, चंडीगढ़ में ₹952.50, देहरादून में ₹960.50 तथा पटना में यह ₹1,042.50 में मिल रहा है।
कीमतों में बदलाव की व्यवस्था और उपभोक्ताओं के लिए सुझाव
भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम आमतौर पर प्रत्येक माह की पहली तारीख को रसोई गैस की दरों की समीक्षा करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों के उतार-चढ़ाव और राज्य स्तरीय वैट (VAT) के कारण अंतर को देखते हुए उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने क्षेत्र में बुकिंग कराने से पूर्व आधिकारिक डिजिटल पोर्टल या अधिकृत वितरकों से अपने शहर की अद्यतन दरों का मिलान अवश्य कर लें।
TVS Motor ने Q1 में किया कमाल, मुनाफा ₹1,174 करोड़ पहुंचा; निवेशकों की बल्ले-बल्ले
21 Jul, 2026 03:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी टीवीएस मोटर (TVS Motor) ने चालू वित्त वर्ष की पहली यानी जून तिमाही में बेहद मजबूत वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने मुनाफा, राजस्व और परिचालन मार्जिन जैसे सभी प्रमुख मानकों पर बाजार के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। बेहतर व्यावसायिक प्रदर्शन और गाड़ियों की बढ़ती मांग के चलते कंपनी के समग्र प्रदर्शन में ऐतिहासिक सुधार देखा गया है।
कंपनी के शुद्ध लाभ में पचास प्रतिशत से अधिक का उछाल
जून तिमाही के दौरान टीवीएस मोटर का शुद्ध मुनाफा 50.7 प्रतिशत बढ़कर 1,174 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी को 779 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था। बाजार विश्लेषकों ने इस तिमाही में करीब 1,022 करोड़ रुपये के मुनाफे का अनुमान जताया था। इसके अतिरिक्त कंपनी की अन्य आय भी बढ़कर 150 करोड़ रुपये हो गई, जिसने कुल लाभ को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
राजस्व और मार्जिन में बढ़ोतरी से वित्तीय स्थिति हुई मजबूत
कंपनी का कुल राजस्व 37.8 प्रतिशत बढ़कर 13,896 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 10,081 करोड़ रुपये था। वहीं कंपनी का एबिटडा (EBITDA) 41 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,779 करोड़ रुपये हो गया। परिचालन मार्जिन में भी सुधार देखने को मिला और यह बढ़कर 12.8 प्रतिशत पर पहुंच गया। इस दौरान वाहनों की कुल बिक्री में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई और प्रति वाहन औसतन मिलने वाली कीमत में भी छह प्रतिशत का इजाफा हुआ।
मजबूत नतीजों के बाद शेयर में आई पांच प्रतिशत से ज्यादा की तेजी
वित्तीय आंकड़ों के सामने आने के बाद शेयर बाजार में टीवीएस मोटर के शेयरों के प्रति निवेशकों का उत्साह साफ नजर आया। कारोबारी सत्र में कंपनी का शेयर 5.56 प्रतिशत चढ़कर 3,789 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस उछाल के साथ शेयर अपने सर्वकालिक उच्च स्तर के बेहद करीब आ गया है। पिछले एक साल की अवधि में कंपनी के शेयरों में निवेशकों को करीब 33.66 प्रतिशत का शानदार रिटर्न मिला है।
अस्त्र मिसाइल की ताकत का दुनिया में जलवा, भारत से खरीद में कई देश दिखा रहे दिलचस्पी
21 Jul, 2026 01:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: इंडोनेशिया के बाद अब आर्मेनिया और सऊदी अरब ने भी भारत की दुश्मन के रडार से बच निकलने में सक्षम स्वदेशी 'अस्त्र' मिसाइल को खरीदने में गहरा रुझान दिखाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के साथ-साथ हवा से हवा में मार करने वाली इस अत्याधुनिक स्वदेशी मिसाइल को लेकर सहमति बनी थी। रक्षा क्षेत्र के सूत्रों के अनुसार, इंडोनेशिया के नक्शेकदम पर चलते हुए अब आर्मेनिया और सऊदी अरब भी भारत के साथ अस्त्र मिसाइल सौदे पर द्विपक्षीय बातचीत कर रहे हैं। आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर कई अन्य देश भी इस स्वदेशी हथियार प्रणाली को हासिल करने की दौड़ में शामिल हो सकते हैं।
आर्मेनियाई वायुसेना के सुखोई-30 बेड़े के लिए सबसे मुफीद साबित होगा अस्त्र मिसाइल का सौदा
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आर्मेनिया इस समय अस्त्र मिसाइल को अपने रक्षा बेड़े में शामिल करने की रेस में सबसे आगे चल रहा है। आर्मेनियाई वायुसेना के पास सुखोई-30 फाइटर जेट्स का बेड़ा मौजूद है, जो इस सौदे को बेहद व्यावहारिक बनाता है। चूंकि भारतीय वायुसेना पहले ही अपने सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के साथ अस्त्र मिसाइल का सफल एकीकरण कर चुकी है, इसलिए आर्मेनिया के लिए यह तकनीकी रूप से सबसे उपयुक्त सौदा साबित हो सकता है। आर्मेनिया अपने फाइटर जेट्स के आधुनिकीकरण के लिए भारत के समृद्ध अनुभव का लाभ उठाने का इच्छुक है।
भारत और आर्मेनिया के बीच अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा और सामरिक संचार पर भी सहयोग की राह आसान
अस्त्र मिसाइल सौदे के साथ-साथ भारत और आर्मेनिया अपने रक्षा व तकनीकी संबंधों को नए आयाम देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देश निगरानी प्रणालियों, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, सामरिक संचार और सैन्य प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग की असीम संभावनाएं तलाश रहे हैं। इससे पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान की आर्मेनिया यात्रा के दौरान भी दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच इन विषयों और रक्षा सौदों पर गहन चर्चा हुई थी।
जैमिंग-रोधी क्षमता और किफायती लागत से प्रभावित हुआ सऊदी अरब, पश्चिमी विमानों पर एकीकरण की उम्मीद
सऊदी अरब की वायुसेना में मुख्य रूप से अमेरिकी और ब्रिटिश लड़ाकू विमान शामिल हैं, लेकिन अस्त्र मिसाइल की किफायती लागत और इसकी बेजोड़ जैमिंग-रोधी तकनीक ने रियाद का ध्यान अपनी ओर मजबूती से खींचा है। सऊदी अरब अपने रक्षा आयात को किसी एक देश पर निर्भर रखने के बजाय विविध बनाना चाहता है। यदि अस्त्र मिसाइल का सफल एकीकरण सऊदी अरब के एफ-15 और यूरोफाइटर टाइफून जैसे पश्चिमी लड़ाकू विमानों पर हो जाता है, तो यह भारतीय रक्षा उद्योग और निर्यात क्षमताओं के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जाएगी।
Gold Price में बड़ी गिरावट के संकेत, दिग्गज बैंक की भविष्यवाणी से मचा हड़कंप
21 Jul, 2026 12:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: आमतौर पर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता और तनाव बढ़ने के दौर में सोने को सुरक्षित निवेश मानकर इसकी मांग और कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया जाता है। हालांकि वर्तमान में कमोडिटी बाजार का रुख इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रहा है, जिसने वित्तीय विश्लेषकों को आश्चर्यचकित कर दिया है। एक ओर जहां दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती देने के लिए सोने की लगातार खरीदारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दिग्गज ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका के तकनीकी विशेषज्ञों ने बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट का अंदेशा जताया है।
तकनीकी संकेतकों में दिखा डेथ क्रॉस, अगस्त-सितंबर तक रह सकती है सुस्ती
बैंक ऑफ अमेरिका की हालिया रिपोर्ट के अनुसार सोने के वायदा व हाजिर चार्ट पर दो प्रमुख मंदी के तकनीकी संकेतक स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आए हैं। तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक चार्ट पर 'डेथ क्रॉस' की स्थिति बनी है, जो कि तब दर्ज की जाती है जब 50 दिनों का लघु अवधि मूविंग एवरेज अपने 200 दिनों के दीर्घकालिक मूविंग एवरेज से नीचे आ जाता है। वर्ष 1975 के ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर जब भी सोने में ऐसी स्थिति बनी है, उसके बाद लगभग 70 प्रतिशत मामलों में अगले डेढ़ से दो महीनों तक कीमतों में निरंतर गिरावट ही देखी गई है।
ओवरबॉट स्थिति और आरएसआई के आंकड़ों से बड़े करेक्शन की पुष्टि
सोने में पिछले दिनों दर्ज की गई अनवरत तेजी के कारण बाजार अत्यधिक खरीदारी यानी 'ओवरबॉट' स्थिति में पहुंच चुका था। इस दौरान रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स बढ़कर 90 के अत्यधिक ऊंचे स्तर को छू गया था, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण था कि तेजी का यह दौर अपनी क्षमता से अधिक खिंच चुका था। बाजार विश्लेषकों के अनुसार इस स्थिति के बाद बाजार में एक बड़े मूल्य संशोधन की आवश्यकता थी, जिसके चलते अब सोने के दामों में लगातार बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है।
4,000 डॉलर का अहम स्तर टूटने से हावी हुए मंदड़िये, आगे और गिरावट के आसार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना $4,000 प्रति औंस के महत्वपूर्ण सहायता स्तर के नीचे फिसल चुका है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि फिलहाल बाजार का नियंत्रण पूरी तरह मंदड़ियों के हाथ में आ चुका है। ब्रोकरेज फर्म के विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि यह रुख वर्ष 1980 और 2011 में देखी गई ऐतिहासिक गिरावट के पैटर्न से मेल खाता है। इन चार्ट पैटर्नों के आधार पर सोना नीचे गिरकर पहले $3,600 प्रति औंस और तत्पश्चात $3,315 प्रति औंस तक के निचले स्तर को छू सकता है, जिससे नए निवेशकों को अगस्त और सितंबर के दौरान सतर्क रहने की आवश्यकता होगी।
चार बड़े कारणों से फिसला बाजार, Sensex में गिरावट और Nifty पर दबाव
21 Jul, 2026 10:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव की छाया घरेलू शेयर बाजार पर साफ देखने को मिल रही है। साप्ताहिक एक्सपायरी के दिन भारतीय बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 300 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 फिसलकर 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गया। हालांकि, व्यापक बाजार में स्थिति थोड़ी बेहतर रही और निफ्टी मिडकैप 100 तथा स्मॉलकैप 100 सूचकांकों में हल्की बढ़त दर्ज की गई। सुबह 10:56 बजे के आसपास सेंसेक्स 245.51 अंक यानी 0.32 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,463.01 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 59.05 अंक फिसलकर 24,179.45 के स्तर पर बना हुआ था।
पश्चिम एशिया में गहराते संकट ने बिगाड़ा बाजार का मूड
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के गंभीर मोड़ पर पहुंचने से वैश्विक बाजारों के साथ-साथ घरेलू निवेशकों की धारणा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार हवाई हमले किए जाने से भू-राजनीतिक अनिश्चितता काफी बढ़ गई है। इस बढ़ते तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिससे भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। इसके साथ ही आज निफ्टी के इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की साप्ताहिक एक्सपायरी होने के कारण भी बाजार में उतार-चढ़ाव काफी बढ़ गया है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार जारी है बिकवाली
शेयर बाजार में गिरावट की एक प्रमुख वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली भी है। आंकड़े दर्शाते हैं कि विदेशी निवेशकों ने लगातार छठे कारोबारी दिन भारतीय बाजार में शुद्ध बिकवाली दर्ज की। हालिया कारोबारी सत्र में FIIs ने ₹1,121.04 करोड़ मूल्य के शेयरों की बिक्री की। पिछले छह दिनों के आंकड़ों को मिलाकर देखें तो विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय इक्विटी बाजार से कुल मिलाकर ₹10,240.8 करोड़ की पूंजी निकाल चुके हैं, जिससे घरेलू सूचकांकों पर लगातार दबाव बना हुआ है।
आईटी, ऑटो और बैंकिंग सेक्टरों के शेयरों पर बढ़ा दबाव
क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो बाजार की इस गिरावट की अगुवाई मुख्य रूप से आईटी और ऑटोमोबाइल सेक्टर कर रहे हैं, जिनके निफ्टी इंडेक्स में लगभग आधा प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा पीएसयू बैंक और फार्मास्यूटिकल सेक्टर के शेयरों में भी बिकवाली का रुझान देखने को मिला, जिससे इनके सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते पाए गए। हालांकि फिलहाल किसी भी सेक्टर इंडेक्स में 1 फीसदी से अधिक की बड़ी उथल-पुथल नहीं देखी गई है, लेकिन प्रमुख क्षेत्रों में तेजी का अभाव रहने से बाजार को सहारा नहीं मिल पा रहा है।
UltraTech Cement Share Price में उछाल, एक्सपर्ट्स क्या दे रहे हैं सलाह?
21 Jul, 2026 10:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: देश की सबसे बड़ी सीमेंट निर्माण कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में 21 जुलाई के कारोबारी सत्र के दौरान शानदार तेजी दर्ज की गई। शेयर बाजार खुलते ही कंपनी के शेयरों में लिवाली का मजबूत रुख देखा गया, जिससे सुबह 10:10 बजे के करीब यह शेयर 1.71 प्रतिशत की बढ़त बनाकर 12,107 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इससे पूर्व 20 जुलाई को पहली तिमाही के वित्तीय आंकड़े जारी होने के उपरांत भी कंपनी का शेयर 1.5 फीसदी चढ़कर 11,903 रुपये पर बंद हुआ था। हालांकि इस कैलेंडर वर्ष में शेयर का प्रदर्शन सपाट रहा है, लेकिन बीते एक महीने की बात करें तो इसने निवेशकों को 6 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया है। वर्तमान में 3.51 लाख करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण वाली इस कंपनी ने बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है।
जून तिमाही में मुनाफा 17 प्रतिशत बढ़कर अनुमान से आगे निकला
विभिन्न आर्थिक चुनौतियों और बाजार के दबाव के बावजूद कंपनी ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में काफी मजबूत प्रदर्शन पेश किया है। जारी नतीजों के मुताबिक अल्ट्राटेक सीमेंट का संगठित शुद्ध लाभ (कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट) सालाना आधार पर 17.2 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 2,604 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो कि बाजार विश्लेषकों के 2,453 करोड़ रुपये के पूर्व अनुमान से काफी बेहतर है। इस अवधि में कंपनी की परिचालन आय (रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस) भी 15.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 24,648 करोड़ रुपये रही। वहीं कंपनी का एबिटा (EBITDA) 13.7 फीसदी बढ़कर 5,016 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी का ग्रे सीमेंट वॉल्यूम सालाना आधार पर 13.1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 3.91 करोड़ टन दर्ज किया गया, जबकि प्रति टन ऑपरेटिंग एबिटा बढ़कर 1,214 रुपये पर पहुंच गया।
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने दी खरीदारी की सलाह
कंपनी के बेहतर वित्तीय आंकड़ों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर पर अपना सकारात्मक रुख कायम रखा है। ब्रोकरेज ने निवेशकों को इसमें खरीदारी की सिफारिश करते हुए 14,065 रुपये का नया लक्ष्य मूल्य (टारगेट प्राइस) निर्धारित किया है। जेफरीज के विश्लेषकों का मानना है कि यह शेयर अपने हालिया बंद भाव से 18 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज करने में सक्षम है। ब्रोकरेज रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत बिक्री मात्रा (वॉल्यूम ग्रोथ) और उत्पादों की बेहतर कीमतों के दम पर कंपनी का प्रदर्शन बाजार की उम्मीदों से अधिक प्रभावी रहा है।
सीएलएसए ने आउटपरफॉर्म रेटिंग के साथ दिया 14,000 रुपये का टारगेट
एक अन्य प्रमुख वैश्विक ब्रोकरेज हाउस सीएलएसए (CLSA) ने भी अल्ट्राटेक सीमेंट के स्टॉक पर अपनी 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग को बरकरार रखा है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए 14,000 रुपये का टारगेट तय करते हुए कहा है कि पहली तिमाही के दौरान सीमेंट वॉल्यूम में 13 फीसदी की सालाना वृद्धि और 1,183 रुपये प्रति टन का एबिटा बाजार के अनुमानों से काफी आगे रहा है। इसके साथ ही भविष्य के लिए कंपनी का लागत मार्गदर्शन (कॉस्ट गाइडेंस) भी बेहद उत्साहजनक है, जिससे आने वाले समय में भी कंपनी के मार्जिन और लाभप्रदता में मजबूती बने रहने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
30 दिन बाद लागू होगा 50% टैरिफ, ट्रंप के फैसले से कनाडा की बढ़ी चिंता
21 Jul, 2026 07:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लेते हुए कनाडा से आने वाले अधिकांश सामानों पर 50 प्रतिशत का भारी सीमा शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा कर दी है। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि कनाडा अमेरिकी कारों, शराब और डेयरी उत्पादों के साथ अनुचित रूप से भेदभाव करता आया है। इस कड़े व्यापारिक फैसले से दोनों पड़ोसी देशों के बीच गंभीर आर्थिक संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल दोनों देशों में महंगाई में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हो सकती है, बल्कि उनके ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों में भी भारी खटास आ सकती है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि चीन के बाद कनाडा ही एकमात्र ऐसा देश था जिसने पहले लगाए गए शुल्कों का जवाब दिया था, इसलिए उस पर यह सख्त कार्रवाई आवश्यक हो गई थी।
धारा 338 के तहत जारी हुआ आदेश, 30 दिनों के भीतर लागू होंगे नए नियम
अमेरिकी राष्ट्रपति ने 1930 के व्यापार अधिनियम की धारा 338 का सहारा लेते हुए तीन अलग-अलग घोषणाओं पर हस्ताक्षर किए हैं। व्हाइट हाउस के अनुसार यह नया 50 फीसदी शुल्क अगले 30 दिनों के भीतर प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा। हालांकि इस नए शुल्क दायरे से ऊर्जा उत्पादों, पोटाश, मछली और अत्यंत आवश्यक खनिजों को बाहर रखा गया है, लेकिन इसमें वाइन, हॉकी स्टिक, सीमेंट और अन्य वे तमाम सामान शामिल होंगे जिन्हें पहले अंतर-सरकारी समझौतों के तहत सुरक्षा प्राप्त थी। कनाडाई जंगलों में लगने वाली आग से अमेरिका में फैलने वाले प्रदूषण को लेकर भी ट्रंप ने अपने अधिकारियों को अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए हैं, जिससे यह व्यापारिक तनाव आने वाले दिनों में और अधिक बढ़ने के संकेत दे रहा है।
व्यापार नीति और व्यापारिक प्रतिबंधों को लेकर दोनों नेताओं में गहराया पुराना विवाद
दोनों देशों के बीच इस तनाव की मुख्य वजह एक-दूसरे के उत्पादों पर लगाए गए जवाबी शुल्क और सख्त व्यापार नीतियां हैं। पूर्व में जब अमेरिका ने अवैध पदार्थों की तस्करी रोकने का हवाला देकर शुल्क लगाए थे, तब कनाडा ने भी अप्रैल 2025 से कुछ अमेरिकी वाहनों पर 25 फीसदी का सीमा शुल्क लगा दिया था। इसके अलावा कनाडा के अधिकांश प्रांतों द्वारा अमेरिकी शराब की खरीद रोकने और कनाडाई पनीर नीति को लेकर दोनों पक्षों में लंबे समय से गतिरोध बना हुआ था। हाल ही में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात के दौरान भी रिश्तों में जमी बर्फ पिघलती नजर नहीं आई, क्योंकि कनाडा सरकार लगातार दूसरे देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और अमेरिकी दबाव के सामने अपनी नीतियों पर कायम रहने का प्रयास कर रही है।
कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की तीखी प्रतिक्रिया, समझौते का उल्लंघन करार दिया
डोनाल्ड ट्रंप के इस कड़े फैसले पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका का यह कदम स्थापित त्रिस्तरीय व्यापार समझौते का सीधा और गंभीर उल्लंघन है। कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश अपनी आर्थिक संप्रभुता, श्रमिकों, किसानों और आम परिवारों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह से एकजुट है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस व्यापारिक विवाद का सबसे बड़ा खामियाजा दोनों देशों के आम नागरिकों को बढ़ती महंगाई के रूप में भुगतना पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने दोहराया कि कनाडा निष्पक्ष व्यापार का पक्षधर है और यदि अमेरिका सकारात्मक रुख दिखाए तो उनका देश आपसी बातचीत से इस मसले का सर्वसम्मति से समाधान निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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