व्यापार
Sansera Engineering का शेयर उड़ा, Q4 में मुनाफा दोगुना से अधिक
21 May, 2026 01:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। ऑटो कंपोनेंट्स और इक्विपमेंट बनाने वाली दिग्गज कंपनी संसेरा इंजीनियरिंग लिमिटेड के निवेशकों के लिए आज गुरुवार (21 मई) का दिन बेहद मुनाफेमंद साबित हो रहा है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कंपनी के शेयर की कीमत पिछले बंद भाव के मुकाबले 15.68 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ 2,875 रुपये के स्तर पर पहुंच गई। यह शेयर का बीएसई पर 52 सप्ताह का नया उच्चतम स्तर (All-Time High) भी है। दरअसल, कंपनी द्वारा घोषित किए गए चौथी तिमाही के धमाकेदार वित्तीय नतीजों के चलते बाजार में इस स्टॉक को लेकर भारी खरीदारी देखी जा रही है।
चौथी तिमाही में दोगुना हुआ मुनाफा, रेवेन्यू भी 998 करोड़ के पार
जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के दौरान संसेरा इंजीनियरिंग ने वित्तीय मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन किया है। इस अवधि में कंपनी का एकीकृत शुद्ध मुनाफा (Consolidated Net Profit) करीब 105 फीसदी की छलांग लगाकर 121.41 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 59.27 करोड़ रुपये था। वहीं, कंपनी का परिचालन राजस्व (Revenue from Operations) भी लगभग 28 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी के साथ 998.74 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो मार्च 2025 तिमाही में 781.65 करोड़ रुपये था। पूरे वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो कंपनी ने 3,24.08 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा और 3,497.91 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल किया है।
शेयरधारकों की मौज; कंपनी देगी ₹4 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड
बेहतरीन सालाना नतीजों से उत्साहित संसेरा इंजीनियरिंग के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने अपने निवेशकों को लाभांश का तोहफा देने का ऐलान किया है। बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 4 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड (लाभांश) की सिफारिश की है। इस घोषणा पर आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों की अंतिम मंजूरी ली जाएगी। गौरतलब है कि कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष (FY25) में अपने निवेशकों को 3.25 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड दिया था, जिसके मुकाबले इस बार ज्यादा मुनाफे का फायदा सीधे निवेशकों को ट्रांसफर किया गया है।
मार्केट कैप 17,300 करोड़ के पार; 3 साल में निवेशकों का पैसा किया ढाई गुना
शानदार तेजी के बदौलत संसेरा इंजीनियरिंग का कुल बाजार पूंजीकरण (Market Cap) बढ़कर अब 17,300 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। 2 रुपये की फेस वैल्यू वाले इस शेयर ने लंबी और छोटी दोनों अवधियों में निवेशकों को मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 6 महीनों में यह स्टॉक 74 प्रतिशत मजबूत हुआ है, जबकि पिछले एक साल में इसने 127 प्रतिशत की दमदार ग्रोथ दिखाई है। वहीं, जिन निवेशकों ने इस शेयर को 3 साल से अपने पोर्टफोलियो में बनाए रखा है, उन्हें 260 प्रतिशत का बंपर रिटर्न मिला है।
प्रमोटर होल्डिंग और इंडेक्स प्रोफाइल
मार्च 2026 के अंत तक के आधिकारिक शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार, संसेरा इंजीनियरिंग में प्रमोटर्स के पास 30.10 प्रतिशत की हिस्सेदारी सुरक्षित है। वर्तमान में यह शेयर बीएसई 1000 (BSE 1000) इंडेक्स का एक मजबूत हिस्सा बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऑटो सेक्टर में आ रही तेजी और कंपनी के शानदार मार्जिन को देखते हुए आने वाले दिनों में भी इस स्टॉक में सकारात्मक हलचल बनी रह सकती है।
Ola Electric: शेयर 6% नीचे, निवेशकों में चिंता बढ़ी
21 May, 2026 01:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। देश की दिग्गज इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता कंपनी ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड के शेयरों में आज गुरुवार (21 मई) को भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कंपनी का स्टॉक शुरुआती कारोबार में करीब 6 प्रतिशत टूटकर 34.83 रुपये के निचले स्तर पर आ गया। दरअसल, कंपनी ने एक दिन पहले ही अपने चौथी तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित किए थे, जिसमें सालाना आधार पर घाटे में तो बड़ी कमी आई है, लेकिन परिचालन राजस्व (Revenue) में आई भारी गिरावट के चलते बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया है।
चौथी तिमाही में घाटा घटकर हुआ 500 करोड़, मगर रेवेन्यू 91% लुढ़का
जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के दौरान ओला इलेक्ट्रिक के वित्तीय संकेतकों में मिला-जुला असर देखने को मिला। कंपनी का शुद्ध समेकित घाटा (Consolidated Net Profit) सालाना आधार पर 42.5 फीसदी कम होकर 500 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 870 करोड़ रुपये था। हालांकि, इस दौरान ऑपरेशंस से मिलने वाला कंसोलिडेटेड रेवेन्यू लगभग 91 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ महज 56.6 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो मार्च 2025 तिमाही में 611 करोड़ रुपये था। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी का कुल शुद्ध घाटा 1,833 करोड़ रुपये और रेवेन्यू 2,253 करोड़ रुपये रहा है।
सालाना 1.73 लाख से अधिक ई-स्कूटर्स की डिलीवरी, अगली तिमाही में बाउंस बैक की उम्मीद
वाहन डिलीवरी के मोर्चे पर कंपनी ने मजबूत पकड़ बनाए रखी है। ओला इलेक्ट्रिक ने जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में कुल 20,256 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स ग्राहकों को सौंपे। वहीं, पूरे वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने रिकॉर्ड 1,73,794 यूनिट्स की डिलीवरी पूरी की। भविष्य के अनुमानों को लेकर कंपनी काफी सकारात्मक है; मैनेजमेंट को उम्मीद है कि आगामी अप्रैल-जून 2026 तिमाही में उसका कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सुधरकर 500-550 करोड़ रुपये के बीच पहुंच जाएगा और इस दौरान करीब 40,000 से 45,000 यूनिट्स के नए ऑर्डर्स मिलने की संभावना है।
3 महीने में 33% रिटर्न देने वाले स्टॉक पर ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म्स ने जताई चिंता
अगस्त 2024 में 6,145.56 करोड़ रुपये के भारी-भरकम आईपीओ (IPO) के साथ लिस्ट होने वाली ओला इलेक्ट्रिक का मार्केट कैप फिलहाल 15,500 करोड़ रुपये से अधिक है। पिछले 3 महीनों में इस शेयर ने निवेशकों को 33 फीसदी का दमदार रिटर्न दिया है, लेकिन ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस इसके भविष्य को लेकर अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं:
Citi की 'सेल' रेटिंग: ब्रोकरेज फर्म 'सिटी' ने टारगेट प्राइस को 22 रुपये से बढ़ाकर 26 रुपये तो किया है, लेकिन इस पर अपनी "सेल" (बेचने की) रेटिंग बरकरार रखी है। उनका मानना है कि कंपनी के मार्जिन में सुधार तो है, पर मुनाफे के लिए जरूरी वॉल्यूम ग्रोथ की अब भी कमी है।
HSBC का रुख: एचएसबीसी ने इस स्टॉक का टारगेट प्राइस घटाकर 33 रुपये प्रति शेयर कर दिया है और अपनी रेटिंग 'रिड्यूस' (हिस्सेदारी घटाने) की रखी है।
Emkay Global: एमके ग्लोबल ने शेयर के लिए अपना टारगेट प्राइस 20 रुपये से बढ़ाकर 25 रुपये प्रति शेयर तय किया है।
प्रमोटर होल्डिंग और 52 हफ्तों का उतार-चढ़ाव
मार्च 2026 के अंत तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ओला इलेक्ट्रिक में प्रमोटर्स के पास 34.59 प्रतिशत की हिस्सेदारी बनी हुई है। बीएसई 500 इंडेक्स का हिस्सा बन चुके इस शेयर का 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई लेवल 71.24 रुपये रहा है, जबकि इसका एडजस्टेड लो लेवल 21.21 रुपये प्रति शेयर है। बाजार के जानकारों का मानना है कि अगली तिमाही के रेवेन्यू और ऑर्डर बुक के वास्तविक आंकड़ों के बाद ही इस शेयर की अगली दिशा तय होगी।
Q4 नतीजों के असर से Jubilant Foodworks के शेयर में 8% की गिरावट
21 May, 2026 12:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। डोमिनोज पिज्जा और डंकिन डोनट्स जैसी दिग्गज फूड चेन्स का संचालन करने वाली कंपनी जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड के शेयरों में आज गुरुवार (21 मई) को शुरुआती कारोबार के दौरान भारी गिरावट देखी गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कंपनी का स्टॉक करीब 8 प्रतिशत लुढ़ककर 434.65 रुपये के निचले स्तर पर आ गया। दरअसल, कंपनी द्वारा चौथी तिमाही के वित्तीय परिणाम घोषित किए जाने के बाद वैश्विक ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी (HSBC) और जेफरीज (Jefferies) द्वारा इसकी रेटिंग और टारगेट प्राइस में की गई कटौती के चलते निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपना लिया है।
मुनाफे में 66% का बंपर उछाल, रेवेन्यू भी 2,499 करोड़ के पार
अगर वित्तीय मोर्चे पर बात करें तो जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में जुबिलेंट फूडवर्क्स का प्रदर्शन शानदार रहा है। कंपनी का एकीकृत शुद्ध मुनाफा (Consolidated Net Profit) सालाना आधार पर 66.2 फीसदी बढ़कर 79.79 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 48 करोड़ रुपये था। वहीं, इस अवधि में परिचालन राजस्व (Revenue from Operations) भी मार्च 2025 के 2,095.02 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,499.46 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो कंपनी का कुल मुनाफा 444.24 करोड़ रुपये और रेवेन्यू 9,512.51 करोड़ रुपये रहा है।
शेयरधारकों के लिए ₹1.2 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान
शानदार सालाना नतीजों के बीच जुबिलेंट फूडवर्क्स के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने अपने निवेशकों को राहत देते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.2 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के लाभांश (Dividend) की सिफारिश की है। इस घोषणा पर आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों की अंतिम मंजूरी ली जाएगी, जिसके बाद अगले 30 दिनों के भीतर पात्र निवेशकों को इसका भुगतान कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि पिछले वित्त वर्ष (FY25) में भी कंपनी ने इतना ही डिविडेंड दिया था।
ब्रोकरेज फर्म्स ने क्यों घटाया टारगेट? ग्रोथ बनाम मार्जिन की जंग
बाजार के जानकारों और दिग्गज ब्रोकरेज हाउसेज ने कंपनी के भविष्य और मार्जिन को लेकर कुछ चिंताएं जताई हैं:
HSBC की 'होल्ड' रेटिंग: एचएसबीसी ने स्टॉक को "बाय" से डाउनग्रेड कर "होल्ड" कैटेगरी में डाल दिया है और टारगेट प्राइस 630 रुपये से घटाकर 530 रुपये कर दिया है। उनका मानना है कि समान-स्टोर (Like-for-Like) बिक्री में मामूली सुधार तो है, लेकिन यह मुख्य रूप से प्रमोशनल ऑफर्स के कारण है। बढ़ती महंगाई के चलते कंपनी के सामने ग्रोथ और मार्जिन में से किसी एक को चुनने की चुनौती है।
Jefferies ने 30% घटाया टारगेट: जेफरीज ने हालांकि "बाय" रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस को 850 रुपये से सीधे घटाकर 600 रुपये कर दिया है। उनका कहना है कि मैनेजमेंट की सतर्क टिप्पणी दर्शाती है कि पूर्ण रिकवरी में अभी थोड़ा वक्त लगेगा।
JPMorgan का रुख: जेपीमॉर्गन ने स्टॉक को 474 रुपये के लक्ष्य के साथ "न्यूट्रल" रेटिंग दी है।
एनालिस्ट्स की राय में बंटा बाजार
वर्तमान में जुबिलेंट फूडवर्क्स के स्टॉक को कवर करने वाले कुल 30 बाजार विश्लेषकों (Analysts) में से 20 विशेषज्ञ अब भी इस शेयर में खरीदारी (Buy) की सलाह दे रहे हैं। वहीं, 6 विशेषज्ञों ने इसे होल्ड (बनाए रखने) करने और 4 ने इसे तुरंत बेचने (Sell) की राय दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशियाई देशों (भारत, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश) में क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेगमेंट में मजबूत पकड़ होने के बावजूद, अल्पावधि में बढ़ती लागत कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन की असली परीक्षा लेगी।
खपत की धीमी रफ्तार, FMCG मांग सुस्त होने से निवेशकों में चिंता
21 May, 2026 11:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी मजबूती इसके कारखाने या औद्योगिक उत्पादन नहीं, बल्कि इसका विशाल घरेलू बाजार है। ग्रामीण इलाकों की छोटी किराना दुकानों से लेकर महानगरों के बड़े शॉपिंग मॉल्स तक आम जनता द्वारा किया जाने वाला खर्च ही देश की आर्थिक प्रगति की असली धड़कन है। यही कारण है कि देश के भीतर खरीदारी (उपभोग) में आने वाली मामूली सुस्ती भी अर्थव्यवस्था की रफ्तार को धीमा कर सकती है। वर्तमान में भारत पश्चिम एशिया के संकट, महंगे कच्चे तेल, विदेशी निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार पैसे निकालने, डॉलर के मुकाबले रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरने और बढ़ते आयात बिल जैसी कई वैश्विक चुनौतियों से मुकाबला कर रहा है।
जीडीपी में निजी खर्च की हिस्सेदारी 57% से ज्यादा, उपभोग ही असली इंजन
भारत की आर्थिक वृद्धि का सबसे बड़ा सहारा देश के नागरिकों का घरेलू खर्च है। भारत की कुल जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में निजी उपभोग की हिस्सेदारी लगभग 57 प्रतिशत है। सरल शब्दों में कहें तो आम जनता की जेब, उनकी खरीदारी की क्षमता और बाजार पर उनका भरोसा ही देश के विकास का पहिया चलाता है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 की तिमाही के दौरान निजी उपभोग का यह आंकड़ा बढ़कर जीडीपी के 57.5 फीसदी के स्तर तक पहुंच गया है।
वैश्विक और घरेलू रेटिंग एजेंसियों ने घटाया भारत की ग्रोथ का अनुमान
बाजार में मांग सुस्त होने की आशंका के बीच कई प्रमुख वैश्विक संस्थाओं ने भारत की आगामी विकास दर (Growth Rate) के अनुमानों में कटौती की है, जिसने नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है:
संयुक्त राष्ट्र (UN): साल 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को 6.6% से घटाकर 6.4% कर दिया है।
मूडीज रेटिंग्स (Moody's): इसने साल 2026 के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान 6.8% से सीधे कम करके 6.0% कर दिया है।
इंडिया रेटिंग्स: पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और अल-नीनो के खतरे को देखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर 6.7% रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि, इन झटकों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
एफएमसीजी सेक्टर में सुस्ती के संकेत, ग्राहकों ने बदला खरीदारी का तरीका
रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें जैसे साबुन, तेल, बिस्कुट, शैंपू और पैकेज्ड फूड (FMCG) देश में उपभोग की रफ्तार का सबसे सटीक पैमाना हैं। 'वर्ल्डपैनल बाय न्यूमरेटर' की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी-मार्च तिमाही में एफएमसीजी की वैल्यू ग्रोथ 13.1% और वॉल्यूम ग्रोथ (बिक्री की मात्रा) 5.4% रही। अनुमान है कि यदि मानसून सामान्य रहा और कच्चा तेल स्थिर रहा, तो साल 2026 में वॉल्यूम ग्रोथ 5% के आसपास रहेगी, अन्यथा यह सिमटकर 3-4% तक आ सकती है। महंगाई के इस दौर में ग्राहक गैर-जरूरी खर्चों को टाल रहे हैं और महंगे ब्रांड्स को छोड़कर सस्ते विकल्पों या बड़े डिस्काउंट वाले 'वैल्यू पैक' की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं।
कमजोर मानसून और महंगा क्रूड ऑयल अर्थव्यवस्था के लिए दोहरी चुनौती
आने वाले समय में भारतीय बाजार की असल परीक्षा मौसम और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर टिकी है। अमेरिकी मौसम एजेंसी (NOAA) के अनुसार, मई-जुलाई 2026 में 'अल नीनो' के उभरने की 82% आशंका है, जो सर्दियों तक बढ़कर 96% हो सकती है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के शुरुआती अनुमान भी कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून की ओर इशारा कर रहे हैं। कम बारिश से कृषि उत्पादन, ग्रामीण मजदूरी और ग्रामीण मांग सीधे प्रभावित होगी। दूसरी तरफ, महंगा कच्चा तेल माल ढुलाई (ट्रांसपोर्ट) और पैकेजिंग की लागत बढ़ाकर महंगाई को और भड़काएगा। यदि उपभोग की यह रफ्तार थमी, तो इसका असर केवल एफएमसीजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऑटोमोबाइल, सीमेंट, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, जीएसटी कलेक्शन और रोजगार सृजन पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा।
Sensex में 600 प्वाइंट्स की तेजी, Nifty ने पार किया 23850
21 May, 2026 10:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों के चलते आज भारतीय शेयर बाजार ने शानदार रफ्तार पकड़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने की सकारात्मक खबरों ने दुनिया भर के निवेशकों में नया जोश भर दिया है। ग्लोबल मार्केट से मिले मजबूत संकेतों के दम पर घरेलू बाजार में चौतरफा लिवाली (खरीदारी) देखी जा रही है, जिससे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी रिकॉर्ड मजबूती के साथ कारोबार कर रहे हैं। शुरुआती मिनटों में ही सेंसेक्स जहां 600 से अधिक अंक चढ़ गया, वहीं निफ्टी ने भी 23,850 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया।
सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार उछाल, मिडकैप और स्मॉलकैप भी चमके
बाजार के मुख्य सूचकांकों की बात करें तो सुबह 09:56 बजे सेंसेक्स 359.82 अंक (0.48%) की बढ़त के साथ 75,678.21 पर और निफ्टी 50 भी 137.65 अंक (0.58%) की तेजी के साथ 23,796.65 पर ट्रेंड कर रहा था। इससे पहले इंट्रा-डे कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 75,945.79 का उच्च स्तर और निफ्टी ने 23,859.90 का स्तर छुआ। बड़े शेयरों के साथ-साथ ब्रॉडर मार्केट में भी रौनक है; निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स आधा फीसदी से ज्यादा की मजबूती दिखा रहे हैं। रियल्टी सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं।
ग्लोबल संकेतों ने बदला मूड: क्रूड सप्लाई की चिंता हुई दूर
बाजार में आई इस तेजी के पीछे दो मुख्य वैश्विक कारण माने जा रहे हैं:
ट्रंप का बयान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के जवाब के लिए कुछ दिनों का इंतजार करने की बात कहे जाने के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत के रास्ते खुलते दिख रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों के सुरक्षित निकलने की खबरों के बाद कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने का डर खत्म हो गया है। इस वजह से दुनिया भर के निवेशकों का सेंटिमेंट काफी मजबूत हुआ है।
एशियाई बाजारों में उत्सव का माहौल, अमेरिकी बाजार भी मजबूत
बीती रात अमेरिकी बाजारों में नास्डैक (Nasdaq) 1.5% और एसएंडपी 500 (S&P 500) 1% से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए। यूरोपीय बाजारों (जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन) में भी तेजी का रुख रहा। इसी राह पर चलते हुए आज एशियाई बाजारों में जबरदस्त खरीदारी देखी जा रही है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) 7% से ज्यादा के ऐतिहासिक उछाल पर है, जबकि जापान का निक्केई और ताइवान का इंडेक्स 3.5-3.5% से ज्यादा की बढ़त बना चुके हैं। हालांकि, इंडोनेशिया का बाजार इस तेजी के विपरीत ढाई फीसदी की गिरावट पर है।
रुपये में शानदार रिकवरी और इंडिया विक्स (India VIX) के गिरने से बढ़ी राहत
घरेलू बाजार के लिए दो और मोर्चों से बेहद अच्छी खबरें आईं, जिसने निवेशकों का भरोसा बढ़ा दिया:
मजबूत होता रुपया: बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹96.82 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद होने के बाद, आज भारतीय रुपया शानदार वापसी करते हुए ₹96.30 पर खुला।
बाजार का डर हुआ कम: बाजार में उतार-चढ़ाव और घबराहट को दर्शाने वाला 'इंडिया विक्स' (India VIX) 3% फिसलकर 18 के स्तर से नीचे (17.89 पर) आ गया है। विक्स का नीचे आना इस बात का संकेत है कि बाजार में अब अस्थिरता का खतरा कम हो रहा है और खरीदार सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
सोने-चांदी की बाजार खबर: चांदी के दामों में बड़ा बदलाव
21 May, 2026 09:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव का सीधा असर अब सराफा बाजार पर दिखने लगा है। वैश्विक उथल-पुथल के बीच कीमती धातुओं के बाजारों में अस्थिरता का माहौल है, जिसके चलते आज कारोबारी सत्र की शुरुआत होते ही चांदी के दामों में भारी गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव करीब 0.5% तक लुढ़क गया, जिससे यह 1,380 रुपये की कमजोरी के साथ 2,72,885 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। इससे पिछले सत्र में बाजार 2,74,265 रुपये पर बंद हुआ था।
ऑल-टाइम हाई से अब भी काफी नीचे चल रहे हैं दाम
भले ही आज चांदी में मंदी देखी जा रही है, लेकिन अगर लंबी अवधि के चार्ट को देखें तो यह अब भी ऊंचे स्तरों के आसपास बनी हुई है। गौरतलब है कि इसी साल 29 जनवरी को घरेलू बाजार में चांदी ने अपना सर्वकालिक रिकॉर्ड बनाते हुए 4,20,048 रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर छुआ था। वहीं आज दिल्ली के हाजिर सराफा बाजार में चांदी की कीमत में ₹5,000 की बड़ी कटौती देखी गई, जिसके बाद सभी करों (Taxes) को मिलाकर इसका दाम 2,66,000 रुपये प्रति किलो रह गया है। इसके विपरीत, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी मजबूती के साथ 75.42 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेंड कर रही थी।
अलग-अलग सूचकांकों पर चांदी का ताजा रुख
गुडरिटर्न्स के आंकड़ों के अनुसार, बाजार में चांदी का भाव फिलहाल 2,80,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है। दूसरी ओर, इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए रेट्स के मुताबिक, गुरुवार सुबह चांदी की कीमत 2,67,302 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। बाजार एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप शादी-ब्याह या निवेश के लिए चांदी के आभूषण, ईंट या सिक्के खरीदने का मन बना रहे हैं, तो अपने स्थानीय बाजार से भाव जरूर पता कर लें क्योंकि टैक्स और मेकिंग चार्ज के कारण राज्यों में रेट अलग हो सकते हैं।
देश के प्रमुख शहरों में चांदी की रिटेल कीमतें
आज भारत के बड़े शहरों में चांदी के खुदरा भाव कुछ इस प्रकार ट्रेंड कर रहे हैं:
शहर
10 ग्राम चांदी का भाव
100 ग्राम चांदी का भाव
1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता
₹2,800
₹28,000
₹2,80,000
चेन्नई, हैदराबाद, केरल
₹2,850
₹28,500
₹2,85,000
नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद
₹2,800
₹28,000
₹2,80,000
जयपुर, इंदौर, अहमदाबाद
₹2,800
₹28,000
₹2,80,000
लखनऊ, पटना, कानपुर
₹2,800
₹28,000
₹2,80,000
पुणे, बैंगलोर, चंडीगढ़
₹2,800
₹28,000
₹2,80,000
भुवनेश्वर, कटक
₹2,850
₹28,500
₹2,85,000
खरीदारों के लिए क्या है सलाह?
सराफा विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता के कारण आने वाले दिनों में सराफा बाजार में उतार-चढ़ाव का यह दौर जारी रह सकता है। खुदरा ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की बड़ी खरीदारी करने से पहले अपने शहर के ज्वैलर्स से हॉलमार्क और शुद्धता के साथ-साथ उस समय के लाइव रेट की पुष्टि जरूर कर लें।
लोअर टेन्योर बनाम हाई टेन्योर: किसमें बचत ज्यादा?
20 May, 2026 05:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: हम में से अधिकांश लोगों को लगता है कि बैंक से होम लोन की मंजूरी मिलते ही और नए आशियाने की चाबियां हाथ में आते ही हमने जीवन की एक बहुत बड़ी जंग जीत ली है। इस पल को हम अपनी अंतिम मंजिल मान लेते हैं, लेकिन असलियत इसके बिल्कुल उलट है। सच तो यह है कि घर खरीदना किसी वित्तीय रेस का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और चुनौतीपूर्ण दौड़ की महज शुरुआत है।
शुरुआत का उत्साह और जमीन पर बदलती हकीकत
लोन के शुरुआती दौर में सब कुछ बहुत सुहावना और आसान लगता है। हर महीने एक तय ईएमआई (EMI) चुकाना और अपने खुद के घर में रहने का अहसास हमें सुरक्षा की भावना देता है। लेकिन यह उत्साह ज्यादा दिनों तक नहीं टिकता। कुछ ही महीनों के भीतर जब रिजर्व बैंक की नीतियों या बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण बैंक ब्याज दरें (Interest Rates) बढ़ाना शुरू करते हैं, तब जेब पर अतिरिक्त दबाव महसूस होने लगता है।
कागजी हिसाब और जेब के खर्चों का अंतर्विरोध
लोन लेते समय जो वित्तीय गुणा-भाग कागजों पर बहुत सरल और व्यावहारिक नजर आ रहा था, वह वास्तविक जीवन के घरेलू खर्चों के बीच आकर भारी लगने लगता है। बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल इमरजेंसी, रोजमर्रा की महंगाई और उसके ऊपर से बढ़ती ईएमआई का बोझ मिलकर मध्यमवर्गीय परिवार के मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ देता है। कागजों का आसान सा दिखने वाला यह कर्ज धीरे-धीरे मानसिक और आर्थिक तनाव का बड़ा कारण बन जाता है।
सबसे बड़ी चूक: लोन लेकर निश्चिंत हो जाना
घर खरीदारों से सबसे बड़ी चूक यहीं पर होती है। हम अक्सर लोन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे एक 'सेट-एंड-फॉरगेट' (यानी लोन लेकर भूल जाना) सौदा मान लेते हैं। हम यह मान लेते हैं कि अगले 20 या 25 साल तक बस चुपचाप ईएमआई कटती रहेगी। जबकि वित्तीय समझदारी यह कहती है कि लोन को कभी भी लावारिस नहीं छोड़ना चाहिए।
समय-समय पर वित्तीय समीक्षा है जरूरी
लोन की अवधि के दौरान आपको समय-समय पर अपने कर्ज की समीक्षा करनी चाहिए। बाजार में जब भी ब्याज दरें कम हों, तो आपको अपने मौजूदा बैंक से दरें घटाने की बात करनी चाहिए या फिर किसी दूसरे बैंक में लोन ट्रांसफर (Home Loan Balance Transfer) करने के विकल्प पर विचार करना चाहिए। इसके अलावा, बोनस या अतिरिक्त आय होने पर लोन का कुछ हिस्सा समय से पहले चुकाना (Pre-payment) भी इस लंबे और थका देने वाले सफर को छोटा और आसान बना सकता है।
कृष्णा-गोदावरी गैस केस: लंबी कानूनी लड़ाई से बचने की कोशिश
20 May, 2026 04:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट कानूनी लड़ाइयों में से एक, कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन गैस माइग्रेशन विवाद में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक नया मोड़ आया। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और उसके विदेशी सहयोगियों ने केंद्र सरकार के साथ चल रहे इस बड़े विवाद को आपसी मध्यस्थता (Arbitration) के जरिए सुलझाने का प्रस्ताव रखा है। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ कर रही है।
रिलायंस की मध्यस्थता की पेशकश पर केंद्र का रुख
अदालती कार्यवाही के दौरान रिलायंस और उसके पार्टनर ग्रुप के वकीलों ने पीठ को सूचित किया कि वे बुधवार को ही केंद्र सरकार को औपचारिक पत्र भेजकर मध्यस्थता प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने की अपील करेंगे। कंपनियों ने कोर्ट से गुहार लगाई कि जब तक आपसी बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल जाता, तब तक इस मामले की अदालती सुनवाई को स्थगित रखा जाए। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटारमानी ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि कोर्ट की कार्यवाही जारी रहनी चाहिए। उन्होंने भरोसा दिया कि यदि मध्यस्थता में कोई सकारात्मक प्रगति होती है, तो सरकार कोर्ट को सूचित कर देगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई रोकने से किया इनकार
दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने फिलहाल सुनवाई पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने इस कदम का स्वागत करते हुए टिप्पणी की, "अगर दोनों पक्ष आपसी सहमति से कोई सफल समाधान निकाल लेते हैं, तो यह बेहद अच्छी बात होगी। ऐसी स्थिति में हम इस मामले का अंतिम निपटारा कर देंगे।" गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट 19 मई से इस मामले पर अंतिम सुनवाई कर रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, बीपी (BP) एक्सप्लोरेशन और निको लिमिटेड ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जो उनके खिलाफ गया था।
दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील
यह कानूनी लड़ाई तब सुप्रीम कोर्ट पहुंची जब दिल्ली हाई कोर्ट ने 14 फरवरी 2025 को अपने एक आदेश में रिलायंस के पक्ष में आए अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के फैसले को पलट दिया था। इससे पहले हाई कोर्ट के ही एक सिंगल जज बेंच ने अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराया था, लेकिन बाद में बड़ी बेंच ने सरकार की अपील पर सिंगल जज के फैसले को खारिज कर दिया, जिसके खिलाफ अब रिलायंस और उसकी सहयोगी कंपनियां देश की शीर्ष अदालत में अपील कर रही हैं।
क्या है अरबों डॉलर का यह पूरा विवाद?
इस विवाद की जड़ें कृष्णा-गोदावरी बेसिन से जुड़ी हैं, जहाँ केंद्र सरकार ने रिलायंस और उसके पार्टनर्स पर आरोप लगाया था कि उन्होंने तय सीमा से बाहर जाकर दूसरे ब्लॉक के गैस भंडारों से प्राकृतिक गैस निकाली, जिसका उन्हें कानूनी अधिकार नहीं था। इस कथित नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने कंपनियों पर 1.55 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 12,000 करोड़ रुपये से अधिक) का जुर्माना ठोका था। हालांकि, जुलाई 2018 में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता ट्रिब्यूनल ने बहुमत से सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया था और उल्टा सरकार को आदेश दिया था कि वह रिलायंस व अन्य कंपनियों को मुआवजे के तौर पर 8.3 मिलियन डॉलर का भुगतान करे।
बांग्लादेशी टका के मुकाबले रुपये की मौजूदा स्थिति
20 May, 2026 04:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: वैश्विक बाजारों के दबाव और घरेलू कारणों से भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला 20 मई को भी थमता नजर नहीं आया। रुपया न केवल अमेरिकी डॉलर बल्कि अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के सामने भी लगातार पस्त हो रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक साल में डॉलर के मुकाबले रुपये में 13.2 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि इस साल अब तक यह करीब 8 फीसदी टूट चुका है। जानकारों का मानना है कि यदि गिरावट की यही रफ्तार रही, तो रुपया जल्द ही प्रति डॉलर 100 के मनोवैज्ञानिक स्तर को छू सकता है।
फॉरेक्स मार्केट में 20 मई को शुरुआती कारोबार के दौरान ही रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 96.90 पर आ गया। तुलनात्मक रूप से देखें तो साल 2026 की शुरुआत में रुपया 89.89 के स्तर पर था, जबकि पिछले साल आज ही के दिन (20 मई को) यह 85.50 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
पड़ोसी देशों की करेंसी के सामने भी फीका पड़ा रुपया
भारतीय रुपया सिर्फ डॉलर के मुकाबले ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों की मुद्राओं के सामने भी कमजोर हुआ है। 'इकोनॉमिक टाइम्स' की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक साल पहले एक भारतीय रुपये की कीमत 1.42 बांग्लादेशी टका थी, जो अब घटकर महज 1.28 टका रह गई है। यानी टका के मुकाबले रुपये में करीब 10 फीसदी की कमजोरी आई है। इसका सीधा असर यह होगा कि एक साल पहले बांग्लादेश में जो सामान आप 10 रुपये (14 टका मूल्य) में खरीद सकते थे, उसके लिए अब आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। इसी तरह, 'द वायर' की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी रुपये के मुकाबले भी भारतीय रुपया इस साल कमजोर हुआ है; बीते 15 मई से अब तक इसमें 11.86 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।
क्या रुपये की कमजोरी खराब अर्थव्यवस्था का संकेत है?
इस सवाल पर विशेषज्ञों का जवाब बेहद स्पष्ट है—'नहीं'। किसी देश की मुद्रा का घटना या बढ़ना सीधे तौर पर उसकी अर्थव्यवस्था की सेहत नहीं दर्शाता। करेंसी की वैल्यू इस बात से तय होती है कि देश में डॉलर का प्रवाह (Inflow) कितना है, क्योंकि वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा डॉलर में ही होता है। चूंकि भारत अपनी बड़ी आबादी के लिए कच्चे तेल (क्रूड ऑयल), दालों और खाद्य तेलों का भारी मात्रा में आयात करता है, इसलिए देश को हमेशा बड़ी मात्रा में डॉलर की जरूरत बनी रहती है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और डॉलर की बढ़ती मांग
पिछले लगभग दो वर्षों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) भारतीय शेयर बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे रुपये पर दबाव बहुत बढ़ गया है। नियम सीधा है: जब विदेशी फंड भारत में निवेश करते हैं, तो वे डॉलर लाकर उसे रुपये में बदलते हैं, जिससे रुपया मजबूत होता है। इसके विपरीत, जब वे शेयर बेचकर बाजार से बाहर निकलते हैं, तो वे रुपये को डॉलर में बदलते हैं। इस बिकवाली के कारण बाजार में डॉलर की मांग अचानक बढ़ जाती है और रुपया कमजोर होने लगता है।
मिडिल ईस्ट संकट और कच्चे तेल की कीमतों का असर
बीते 28 फरवरी से मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में शुरू हुए भू-राजनीतिक तनाव के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी क्रूड ऑयल बाहर से खरीदता है। तेल के महंगे होने के कारण भारत को भुगतान के लिए बहुत ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्रूड ऑयल का महंगा होना ही है। हालांकि, यह एक अस्थायी समस्या है और जैसे ही वैश्विक स्थितियां सुधरेंगी, रुपये पर बना यह दबाव कम हो जाएगा।
Trent के बाहर होने से बाजार में हलचल, क्या करना चाहिए निवेशकों को?
20 May, 2026 01:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स 'बीएसई सेंसेक्स-30' (BSE Sensex 30) में जल्द ही एक बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। वित्तीय विश्लेषक फर्म नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आगामी जून 2026 के इंडेक्स रिव्यू (रीजिग) में टाटा समूह की दिग्गज कंपनी 'ट्रेंट' (Trent) को सेंसेक्स से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। यह अनुमान ट्रेंट के शेयरों में आई हालिया भारी गिरावट और उसके फ्री-फ्लोट मार्केट कैप में कमी के आधार पर लगाया गया है।
ट्रेंट को लगेगा झटका, $25.7 करोड़ की पूंजी बाहर निकलने की आशंका
शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से ट्रेंट के शेयरों का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। अक्टूबर 2024 में ₹8,345 के अपने ऑल-टाइम हाई स्तर को छूने के बाद से कंपनी का शेयर 50% से अधिक टूट चुका है। शेयरों में इस भारी बिकवाली के कारण ट्रेंट का मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) भी ₹2 लाख करोड़ के स्तर से नीचे फिसलकर ₹1.4 लाख करोड़ पर आ गया है। जानकारों का मानना है कि यदि ट्रेंट सेंसेक्स से बाहर होता है, तो इससे कंपनी से लगभग $25.7 करोड़ (करीब 2,100 करोड़ रुपये) का पैसिव आउटफ्लो (पूंजी की निकासी) हो सकता है।
सेंसेक्स में एंट्री के लिए हिंडालको और श्रीराम फाइनेंस के बीच मुकाबला
इंडेक्स से ट्रेंट की विदाई के बाद उसकी जगह लेने के लिए आदित्य बिड़ला ग्रुप की 'हिंडालको इंडस्ट्रीज' (Hindalco Industries) और 'श्रीराम फाइनेंस' (Shriram Finance) प्रमुख दावेदार बनकर उभरी हैं। हालांकि फ्री-मार्केट कैप के लिहाज से रेस में श्रीराम फाइनेंस थोड़ा आगे चल रही है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि हिंडालको इंडस्ट्रीज की एंट्री की संभावना अधिक है। ऐसा इसलिए क्योंकि इंडेक्स कमेटी हमेशा विभिन्न सेक्टर्स के व्यापक प्रतिनिधित्व (Broader Sectoral Representation) को प्राथमिकता देती है। अगर हिंडालको शामिल होती है तो उसमें $36.6 करोड़ और श्रीराम फाइनेंस के आने पर $44.5 करोड़ का पैसिव इनफ्लो (नया निवेश) आ सकता है।
ट्रेंट के शेयरों में एक साल के दौरान रिकॉर्ड गिरावट
अगर बीते एक साल में कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो टाटा ग्रुप के ट्रेंट के लिए यह समय काफी निराशाजनक रहा है। पिछले साल 30 जून 2025 को बीएसई पर ट्रेंट का शेयर ₹6,259.00 के एक साल के उच्च स्तर पर कारोबार कर रहा था। लेकिन महज 9 महीनों के भीतर इसमें करीब 47.66% की भारी गिरावट दर्ज की गई और 30 मार्च 2026 तक यह टूटकर अपने एक साल के निचले स्तर ₹3,276.10 पर पहुंच गया।
जल्दी फाइल करेंगे तो नोटिस का खतरा, ITR की आखिरी तारीख 15 जून
20 May, 2026 11:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ज्यादातर टैक्सपेयर्स का मानना होता है कि अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) जितनी जल्दी हो सके फाइल कर देना चाहिए। लेकिन वित्तीय मामलों के विशेषज्ञों (एक्सपर्ट्स) के मुताबिक, बहुत ज्यादा जल्दबाजी करना कुछ मामलों में घाटे का सौदा साबित हो सकता है और आयकर विभाग का नोटिस भी आ सकता है। यह सावधानी विशेष रूप से नौकरीपेशा (सैलरीड) कर्मचारियों को बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि वेतनभोगी वर्ग को 15 जून के बाद ही अपना आईटीआर फाइल करना चाहिए, हालांकि जुर्माने से बचने के लिए इसे अंतिम तारीख 31 जुलाई से पहले जरूर जमा कर दें।
सैलरीड क्लास के लिए 15 जून तक इंतजार करना क्यों है जरूरी?
नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स को टैक्स फाइलिंग के दौरान फॉर्म 16, फॉर्म 16ए, फॉर्म 26एएस और एआईएस (AIS) जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जरूरत होती है। इन दस्तावेजों में आपके टीडीएस (TDS), वित्तीय लेनदेन, बैंक ब्याज, म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार के ट्रांजैक्शंस का पूरा ब्योरा होता है। बैंकों, कंपनियों और ब्रोकर्स जैसी संस्थाओं के लिए इन जानकारियों को अपडेट करने की आखिरी तारीख 31 मई होती है, जिसके बाद इसे एआईएस पोर्टल पर दिखने में 7 से 10 दिन का समय और लगता है। ऐसे में अगर आप 15 जून से पहले रिटर्न दाखिल करते हैं, तो डेटा मिसमैच (आंकड़ों में अंतर) होने के कारण टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस मिलने का खतरा बढ़ जाता है।
आयकर विभाग ने जारी किए सभी नए ITR फॉर्म
आयकर विभाग ने पिछले वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए ITR-1 से लेकर ITR-7 तक के सभी फॉर्म और अपडेटेड रिटर्न फॉर्म (ITR-U) को नोटिफाई कर दिया है। इसके साथ ही ITR-1 और ITR-4 के लिए एक्सेल यूटिलिटी भी लाइव कर दी गई है। इसकी मदद से टैक्सपेयर्स ऑफलाइन माध्यम से अपना रिटर्न तैयार कर सकते हैं और बाद में उसे सीधे आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं। तकनीकी दिक्कतों और आखिरी समय की हड़बड़ी से बचने के लिए डेडलाइन से एक हफ्ता पहले ही रिटर्न फाइल कर लेना समझदारी है।
15 जून से पहले कौन फाइल कर सकता है अपना रिटर्न?
ऐसा नहीं है कि हर किसी को 15 जून तक रुकना होगा। ऐसे गैर-सैलरीड (नॉन-सैलरीड) टैक्सपेयर्स जिन्हें फॉर्म 16 की आवश्यकता नहीं होती और जिनकी कमाई का जरिया सिर्फ फिक्स्ड इनकम (जैसे घर का किराया या अन्य निश्चित आय) है, वे अपनी फाइलिंग पहले भी कर सकते हैं। बशर्ते उनकी इस आय पर कोई टीडीएस या टीसीएस न कटा हो। इसके अलावा जिन लोगों की ब्याज से आय है या सिर्फ कैपिटल गेन्स है और उन्हें किसी ऐसी संपत्ति की बिक्री से मुनाफा नहीं हुआ है जिसे एआईएस में अपडेट होना बाकी हो, वे भी 15 जून से पहले अपना आईटीआर आराम से फाइल कर सकते हैं।
33% उछाल की संभावना, नोमुरा ने सरकारी कंपनी का शेयर करने को कहा खरीद
20 May, 2026 10:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और गिरावट के माहौल में भी निवेशक तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं। दिग्गज विदेशी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने भारतीय शेयर बाजार के लिए अपनी 'टॉप पिक' (पसंदीदा शेयर) की घोषणा की है। अपनी ताजा रिपोर्ट में नोमुरा ने ऑयल मार्केटिंग सेक्टर की दिग्गज सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) को अपनी पहली पसंद बताया है और निवेशकों को इसमें खरीदारी की बड़ी सलाह दी है।
IOC के शेयरों पर 180 रुपये का टारगेट, 33% रिटर्न की उम्मीद
नोमुरा ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के मार्च तिमाही के नतीजों की समीक्षा करने के बाद अपनी 'बाय' (Buy) रेटिंग को बरकरार रखा है। ब्रोकरेज फर्म ने इस शेयर के लिए 180 रुपये का टारगेट प्राइस (लक्ष्य) तय किया है। इसका सीधा मतलब यह है कि यह शेयर अपनी मौजूदा कीमतों से करीब 33 फीसदी तक ऊपर चढ़ सकता है। बाजार की चौतरफा गिरावट के बीच भी आईओसी के शेयरों में मजबूती देखी गई और यह करीब आधा फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ 135.78 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
उत्पादन क्षमता बढ़ाने और कच्चे तेल की कीमतों का मिलेगा फायदा
रिपोर्ट के मुताबिक, आईओसी को अपनी उत्पादन क्षमता (कपैसिटी) बढ़ाने का सीधा फायदा मिलने वाला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बढ़ती कीमतों के बीच आईओसी अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले कहीं बेहतर स्थिति में नजर आ रही है। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की मार्केटिंग करने वाली इस दिग्गज सरकारी कंपनी को मार्च तिमाही के दौरान इनवेंट्री का बड़ा लाभ मिला, जिसके चलते इसका EBITDA अनुमान से कहीं बेहतर रहा है।
ग्लोबल संकट के बीच दूसरे देशों से तेल-गैस सप्लाई पर फोकस
पूंजी बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच आईओसी का क्षमता विस्तार करना कंपनी के लिए बेहद सही समय पर लिया गया फैसला है। हालांकि, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के कारण हाइड्रोकार्बन सप्लाई चेन में अनिश्चितता जरूर बनी हुई है। इस चुनौती से निपटने के लिए आईओसी के मैनेजमेंट ने साफ किया है कि कंपनी ने कच्चे तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अब दुनिया के अन्य वैकल्पिक देशों पर अपना फोकस काफी बढ़ा दिया है।
ज्यादातर बाजार विश्लेषक शेयर पर बुलिश, मिली 'बाय' रेटिंग
आईओसी के प्रदर्शन पर नजर रखने वाले कुल 34 बाजार विश्लेषकों (एनालिस्ट्स) में से 20 ने इस शेयर को तुरंत खरीदने की सलाह दी है। वहीं, 7 एनालिस्ट्स ने इसे होल्ड करने और 7 ने बेचने की राय दी है। गौरतलब है कि कच्चे तेल की लागत में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियों ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो बार संशोधन भी किया है, जिससे कंपनियों के मार्जिन में सुधार की उम्मीद है।
हाइब्रिड कारों में Toyota का जलवा, भारतीय बाजार में 3 लाख बिक्री
19 May, 2026 03:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मशहूर वाहन निर्माता कंपनी टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक नया और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। कंपनी द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारत में टोयोटा की हाइब्रिड (ईंधन और बिजली दोनों से चलने वाली) कारों की संचयी बिक्री का आंकड़ा 3 लाख यूनिट को पार कर गया है। यह शानदार रिकॉर्ड देश में कम प्रदूषण फैलाने वाले और अत्यधिक ईंधन-कुशल (फ्यूल एफिशिएंट) वाहनों की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता को साफ दर्शाता है। कंपनी ने इस सफलता पर भारतीय उपभोक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ब्रांड की विश्वसनीयता और आधुनिक हाइब्रिड तकनीक पर ग्राहकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।
इनोवा हाईक्रॉस से लेकर कैमरी तक, इन मॉडलों ने बाजार में मचाया धमाल
भारतीय बाजार में टोयोटा वर्तमान में पर्यावरण-अनुकूल कारों की एक विस्तृत श्रृंखला पेश कर रही है, जो ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इनमें प्रमुख रूप से टोयोटा अर्बन क्रूजर हाईराइडर ($Urban\ Cruiser\ Hyryder$), बेहद लोकप्रिय इनोवा हाईक्रॉस ($Innova\ HyCross$), प्रीमियम सेडान कैमरी हाइब्रिड ($Camry\ Hybrid$) और आलीशान टोयोटा वेलफायर ($Vellfire$) शामिल हैं। इन सभी वाहनों को बेहतरीन माइलेज, न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन और प्रीमियम ड्राइविंग अनुभव के लिए जाना जाता है, जो आज के दौर में पारंपरिक ईंधन कारों का एक बेहतरीन विकल्प साबित हो रहे हैं।
कार्बन मुक्त भविष्य के लिए टोयोटा का ग्लोबल प्लान; घट रहा प्रदूषण
टोयोटा ने स्पष्ट किया कि यह बड़ी सफलता कंपनी की उस दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत वह दुनिया को कार्बन न्यूट्रल (प्रदूषण मुक्त) बनाने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी केवल हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल ($HEV$) तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह भविष्य की तकनीक जैसे प्लग-इन इलेक्ट्रिक व्हीकल ($PHEV$), पूरी तरह से बिजली से चलने वाली गाड़ियां ($BEV$) और हाइड्रोजन आधारित फ्यूल-सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल ($FCEV$) के विकास पर भी तेजी से ध्यान केंद्रित कर रही है। आपको बता दें कि पिछले तीन दशकों में टोयोटा वैश्विक स्तर पर 3.8 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रिफाइड वाहन बेच चुकी है, जिससे दुनिया भर में लगभग 19.7 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) उत्सर्जन को कम करने में मदद मिली है।
जानिए कैसे काम करती है टोयोटा की 'सेल्फ-चार्जिंग' हाइब्रिड तकनीक
टोयोटा की गाड़ियों की सबसे बड़ी खासियत इसकी अनूठी सेल्फ-चार्जिंग हाइब्रिड तकनीक है। इस सिस्टम में एक कुशल पेट्रोल इंजन और एक शक्तिशाली इलेक्ट्रिक मोटर मिलकर काम करते हैं। कार चलाते समय यह तकनीक सड़क और रफ्तार की जरूरत के हिसाब से खुद-ब-खुद पेट्रोल इंजन और बैटरी पावर के बीच स्विच होती रहती है। सबसे खास बात यह है कि इन कारों को चार्ज करने के लिए किसी बाहरी चार्जिंग स्टेशन या प्लग की आवश्यकता नहीं होती। गाड़ी में लगी हाइब्रिड बैटरी 'रीजेनरेटिव ब्रेकिंग' (ब्रेक लगाने से पैदा होने वाली ऊर्जा) और चलते हुए इंजन की पावर से अपने आप ही चार्ज हो जाती है।
व्यावहारिक और भरोसेमंद सफर हमारी प्राथमिकता: मैनेजमेंट
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट सबारी मनोहर ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर कंपनी का दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा कि हमारी व्यापक इलेक्ट्रिफिकेशन रणनीति का मुख्य उद्देश्य आम उपभोक्ताओं को उनकी दैनिक जरूरतों के अनुसार व्यावहारिक, सुलभ और अत्यधिक भरोसेमंद सफर के साधन उपलब्ध कराना है। उन्होंने आगे कहा कि हाइब्रिड तकनीक पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ मोबिलिटी की ओर बढ़ता हुआ एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इसके जरिए ग्राहक बिना किसी अतिरिक्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की असुविधा के पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली को अपना पा रहे हैं।
Astral स्टॉक में 6% की गिरावट, Q4 नतीजों के बाद निवेशकों की नजरें
19 May, 2026 03:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में आज प्लास्टिक पाइप और एडहेसिव (गोंद) बनाने वाली दिग्गज कंपनी एस्ट्रल लिमिटेड ($Astral$) का शेयर निवेशकों के लिए निराशाजनक साबित हुआ। बाजार को कंपनी द्वारा जारी किए गए हालिया तिमाही वित्तीय परिणाम बिल्कुल रास नहीं आए, जिसके चलते आज के कारोबार में इस स्टॉक को 'एक्सीडेंट ऑफ द डे' के रूप में देखा जा रहा है। बिकवाली के भारी दबाव के कारण कंपनी का शेयर करीब 6 प्रतिशत यानी 92.80 रुपये की बड़ी कमजोरी के साथ 1,453 रुपये के आसपास ट्रेंड कर रहा है। आज बाजार खुलते ही यह शेयर 1,545.70 रुपये के उच्च स्तर (डे हाई) पर गया था, लेकिन नतीजों के बाद मुनाफावसूली हावी होने से यह 1,440.50 रुपये के निचले स्तर (डे लो) तक लुढ़क गया।
अनुमान से कमजोर रहे चौथी तिमाही के आंकड़े, मार्जिन पर दिखा दबाव
31 मार्च 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही ($Q4$) के वित्तीय परिणामों पर नजर डालें तो कंपनी का प्रदर्शन बाजार विश्लेषकों के अनुमानों से काफी पीछे रहा है। हालांकि, सालाना आधार पर कंपनी का शुद्ध मुनाफा 178 करोड़ रुपये से 20 फीसदी बढ़कर 213 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। लेकिन राजस्व (रेवेन्यू) के मोर्चे पर जहां बाजार को 30% की ग्रोथ (वृद्धि) की उम्मीद थी, वहीं कंपनी केवल 24% की बढ़त ही हासिल कर सकी। इसी तरह, कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 18% से मामूली बढ़कर 18.3% रहा, जबकि इसके 19.2% रहने का अनुमान लगाया गया था। प्लंबिंग (पाइप) बिजनेस में वित्त वर्ष 2026 ($FY26$) के दौरान कुल वॉल्यूम सालाना आधार पर 15.8% की बढ़त के साथ 2,63,026 मीट्रिक टन ($MT$) पर पहुंच गया है।
मैनेजमेंट को बेहतर भविष्य की उम्मीद, पॉलिमर की कीमतें बढ़ने के संकेत
तिमाही नतीजों के बाद एस्ट्रल के प्रबंधन (मैनेजमेंट कमेंट्री) की ओर से सकारात्मक रुख दिखाने का प्रयास किया गया। मैनेजमेंट का कहना है कि इस उद्योग में ओवरऑल ग्रोथ काफी मजबूत है और संगठित (ऑर्गेनाइज्ड) कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी (मार्केट शेयर) लगातार बढ़ रही है। चौथी तिमाही में मांग अच्छी रही है और वित्त वर्ष 2027 ($FY27$) में वैल्यू और वॉल्यूम दोनों में 15% की विकास दर देखी गई है। कंपनी ने बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाला है। इसके साथ ही प्रबंधन ने चेतावनी दी है कि मौजूदा स्तरों से आने वाले समय में पॉलिमर की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं।
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म CLSA और जेफरीज ने दी 'Hold' की रेटिंग
नतीजों के बाद बड़े ब्रोकरेज घरानों ने एस्ट्रल के शेयर पर अपनी नई समीक्षा रिपोर्ट जारी की है:
CLSA का नजरिया: वैश्विक ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ($CLSA$) ने एस्ट्रल के स्टॉक पर 'Hold' (बनाए रखने) की रेटिंग देते हुए प्रति शेयर 1,475 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज के अनुसार, विदेशी मुद्रा लागत (फॉरेक्स कॉस्ट) बढ़ने और टैक्स के कारण मुनाफा प्रभावित हुआ है। हालांकि, पाइप सेगमेंट में मुनाफा मजबूत है, लेकिन एडहेसिव (Adhesive) बिजनेस के कारण कंसोलिडेटेड मार्जिन पर दबाव देखा गया।
जेफरीज की राय: दूसरी बड़ी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ($Jefferies$) ने भी इस शेयर को 'Hold' श्रेणी में रखते हुए 1,570 रुपये का लक्ष्य दिया है। जेफरीज का कहना है कि कंपनी का प्लंबिंग वॉल्यूम तो 24 फीसदी की दर से ठीक रहा, लेकिन एडहेसिव मार्जिन में आई तेज गिरावट ने निवेशकों को थोड़ा निराश किया है। बाजार की नजरें अब कंपनी की आगामी एनालिस्ट मीटिंग पर टिकी हैं, जहां नए प्रोडक्ट्स और विदेशी एडहेसिव बिजनेस प्लान को लेकर स्थिति और साफ होगी।
Coforge स्टॉक पर जोर, 6% से ऊपर की बढ़त के साथ CLSA की राय जानें
19 May, 2026 01:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में आई तूफानी तेजी के दम पर घरेलू शेयर बाजार में आज शानदार रौनक देखने को मिल रही है। प्रमुख सूचकांक निफ्टी लगभग 85 अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 23,700 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार निकलकर कारोबार कर रहा है। हालांकि, आज बैंकिंग इंडेक्स (बैंक निफ्टी) में सुस्ती है और यह सपाट नजर आ रहा है, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में निवेशकों द्वारा की जा रही चौतरफा खरीदारी से बाजार को पूरा सपोर्ट मिल रहा है। इस तेजी के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला वोलैटिलिटी इंडेक्स 'इंडिया विक्स' ($INDIA\ VIX$) करीब 6 फीसदी तक लुढ़क गया है, जिससे बाजार के तेजड़ियों (बुल्स) ने बड़ी राहत की सांस ली है।
आईटी इंडेक्स में 4% की दौड़, वायदा बाजार के टॉप गेनर्स में टेक कंपनियां
आज के कारोबार में टेक शेयरों का दबदबा साफ नजर आ रहा है। निफ्टी का आईटी इंडेक्स करीब 4 प्रतिशत तक उछल गया है। दिग्गज आईटी कंपनियों में शुमार इंफोसिस, परसिस्टेंट और कोफोर्ज के शेयरों में 6 फीसदी से भी ज्यादा की शानदार तेजी देखी जा रही है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, वायदा बाजार (F&O) के आज के टॉप-5 गेनर्स की सूची में सभी पांचों नाम आईटी क्षेत्र की कंपनियों के ही शामिल हैं, जो इस सेक्टर में आई जबरदस्त बाइंग को दर्शाते हैं।
कोफोर्ज के शेयर में भारी लिवाली, ब्रोकरेज फर्म CLSA ने दिया बड़ा टारगेट
आईटी सेक्टर की इस रफ्तार में कोफोर्ज लिमिटेड के शेयर का बड़ा योगदान रहा है। दोपहर के कारोबार के दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर यह शेयर करीब 6.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,437 रुपये के आसपास ट्रेंड कर रहा था। आज के कारोबार में इसने 1,447 रुपये का उच्च स्तर (डे हाई) छुआ।
इस बीच वैश्विक ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ($CLSA$) ने कोफोर्ज के शेयर पर भरोसा जताते हुए इसे 'हाई कन्विक्शन आउटपरफॉर्म' रेटिंग दी है और प्रति शेयर 2,075 रुपये का बड़ा टारगेट (लक्ष्य) तय किया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के मैनेजमेंट का बेहतर कामकाज आगे भी जारी रहेगा और कम मार्जिन वाले सरकारी प्रोजेक्ट्स से बाहर निकलने का फैसला कंपनी के हक में जाएगा। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ($AI$) वर्टिकल और मजबूत ऑर्डर बुक से कंपनी को आने वाले समय में बड़ा मुनाफा होने की उम्मीद है।
जेनरेटिव AI के दौर में आईटी स्टॉक्स की चाल और चुनौतियां
यदि शेयर की हालिया चाल पर नजर डालें तो कोफोर्ज ने पिछले एक हफ्ते में करीब 8.14 प्रतिशत और एक महीने में 8.46 फीसदी का सकारात्मक रिटर्न दिया है। हालांकि, लंबी अवधि में इस सेक्टर को चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है। चालू वर्ष में जनवरी से लेकर अब तक आईटी इंडेक्स में 22% से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, एंथ्रोपिक के 'क्लॉड कोड' ($Claude\ Code$) और ओपनएआई ($OpenAI$) द्वारा लगातार लॉन्च किए जा रहे नए एडवांस्ड एआई टूल्स के कारण टेक इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव (डिस्रप्शन) आ रहा है। निवेशकों के मन में यह आशंका बनी हुई है कि जेनरेटिव एआई की यह तेज प्रगति ट्रेडिशनल आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज की मांग को सीमित कर सकती है। इसके बावजूद, पिछले कुछ सत्रों से तकनीकी शेयरों में आ रही यह रिकवरी निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
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