व्यापार
शेयर बाजार में हाहाकार, शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम
7 Apr, 2026 08:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन सेंसेक्स 800 अंक से अधिक गिर गया। वहीं, निफ्टी 22,800 से नीचे पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 824.44 अंक गिरकर 73,282.41 पर आ गया; निफ्टी 248.95 अंक गिरकर 22,719.30 पर पहुंच गया। इटरनल और इंडिगो के शेयरों में 2% की गिरावट दिख रही है। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे गिरकर 93.07 पर आ गया।
एशियाई बाजारों का क्या हाल?
मंगलवार को एशियाई शेयर बाजार में सतर्कतापूर्ण कारोबार के बीच मिला-जुला रुख देखने को मिला। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से द्वारा ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी प्रकार के समुद्री यातायात के लिए फिर से खोलने या बिजली संयंत्रों और पुलों पर बमबारी का जोखिम उठाने की समय सीमा निर्धारित करने से पहले तेल की कीमतों में लगातार उछाल जारी रहा। जापान का बेंचमार्क निक्केई 225 शुरुआती बढ़त को गंवाते हुए सुबह के कारोबार में 0.2 प्रतिशत गिरकर 53,310.30 पर आ गया। ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 1.5 प्रतिशत बढ़कर 8,706.90 पर पहुंच गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी मामूली रूप से अपरिवर्तित रहा और 0.1 प्रतिशत से भी कम गिरकर 5,445.80 पर आ गया। शंघाई कंपोजिट 0.4 प्रतिशत बढ़कर 3,896.98 पर पहुंच गया। हांगकांग में छुट्टी के कारण कारोबार बंद रहा।
वॉल स्ट्रीट की चाल कैसी रही?
वॉल स्ट्रीट पर शेयर की कीमतों में मामूली उछाल आया, एसएंडपी 500 में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले छह हफ्तों में पहली बार सकारात्मक रुझान वाला सप्ताह रहा। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 165 अंक या 0.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई और नैस्डैक कंपोजिट में 0.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। ऊर्जा व्यापार में, बेंचमार्क अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 2.37 अमेरिकी डॉलर बढ़कर 114.78 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.40 अमेरिकी डॉलर बढ़कर 111.17 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह युद्ध से पहले की लगभग 70 अमेरिकी डॉलर की कीमत से काफी अधिक है।
Stock Market Update: सेंसेक्स में 400+ अंकों की तेजी, निफ्टी 22800 के ऊपर
6 Apr, 2026 01:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्ध के और बढ़ने की आशंकाओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी जैसे बेंचमार्क सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकी कारोबार के दौरान यह हरे निशान पर आ गया, 1:15 तक सेंसेक्स 430.94 अंक या 0.59% बढ़कर 73,750.49 अंक पर आ गया। वहीं निफ्टी 144.25 अंक या 0.64% बढ़कर 22,857.35 अंक पर आ गया। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 270.13 अंक गिरकर 73,049.42 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 93.60 अंक गिरकर 22,619.50 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान करीब 10:30 बजे तक बीएसई का बेंचमार्क 509.77 अंक गिरकर 72,822.60 पर और निफ्टी 141.20 अंक गिरकर 22,571.90 पर कारोबार कर रहा था। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 33 पैसे बढ़कर 92.85 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से रिलायंस इंडस्ट्रीज, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, इंटरग्लोब एविएशन, अदानी पोर्ट्स और आईसीआईसीआई बैंक प्रमुख पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। ट्रेंट, टाइटन, टेक महिंद्रा और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लाभ कमाने वालों में शामिल थे।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर अनिश्चितता के माहौल में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा और संभावित अच्छी-बुरी खबरों के कारण इसमें बदलाव देखने को मिलेगा। आने वाले दिनों में युद्ध के और बढ़ने की आशंका बहुत अधिक है। बाजार कच्चे तेल की कीमतों पर युद्ध से संबंधित घटनाओं के प्रभाव पर पैनी नजर रखेगा। अनुसंधान विश्लेषक और लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उन टिप्पणियों ने, जिनमें प्रमुख आपूर्ति मार्गों को बहाल न किए जाने पर संभावित वृद्धि का संकेत दिया गया है, जोखिम लेने की प्रवृत्ति को नियंत्रण में रखा है। इससे कच्चे तेल और वैश्विक अनिश्चितता बाजारों के प्रमुख चालक बने हुए हैं।
एशियाई बाजारों में दिखी तेजी
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी और जापान का निक्केई 225 सूचकांक उच्च स्तर पर कारोबार कर रहे थे। गुड फ्राइडे के उपलक्ष्य में शुक्रवार को अमेरिकी बाजार बंद रहे।
ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 109.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.74 प्रतिशत बढ़कर 109.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। गुड फ्राइडे के कारण शुक्रवार को शेयर बाजार बंद रहे। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 9,931.13 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 7,208.41 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। गुरुवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 185.23 अंक या 0.25 प्रतिशत बढ़कर 73,319.55 पर बंद हुआ। निफ्टी 33.70 अंक या 0.15 प्रतिशत बढ़कर 22,713.10 पर बंद हुआ।
सुप्रीम कोर्ट से वेदांता को झटका: अदाणी की ₹14535 करोड़ बोली को मिली राहत
6 Apr, 2026 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत के कॉरपोरेट जगत से जुड़ी एक अहम कानूनी लड़ाई में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने अदाणी ग्रुप की ₹14,535 करोड़ की बोली के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के अधिग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए जेएएल की निगरानी कर रही मॉनिटरिंग कमेटी को बिना नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) की अनुमति के कोई बड़ा नीतिगत फैसला लेने से रोक दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि इस मामले में सभी पक्ष खासतौर पर वेदांता लिमिटेड और अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड अपनी दलीलें एनसीएलएटी के सामने रखें। अदालत ने एनसीएलएटी को निर्देश दिया कि वह इस मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करे। एनसीएलएटी इस विवाद पर 10 अप्रैल से अंतिम सुनवाई शुरू करेगा।
विवाद की पृष्ठभूमि
दरअसल, वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए एनसीएलएटी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अदाणी ग्रुप की बोली पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था।
इससे पहले:
24 मार्च को एनसीएलएटी ने अंतरिम रोक देने से इनकार किया था।
25 मार्च को वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
एनसीएलएटी ने जेएएल के कर्जदाताओं की समिति (CoC) से जवाब मांगा था।
अधिग्रहण की कहानी
जेएएल दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है और इसके अधिग्रहण के लिए कई कंपनियां दौड़ में थीं। अंततः नवंबर में कर्जदाताओं ने अदाणी एंटरप्राइजेज की योजना को मंजूरी दी, जिसे बाद में कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने भी हरी झंडी दे दी।
वेदांता ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दो अलग-अलग अपीलें दायर की हैं
रेजोल्यूशन प्लान की वैधता पर सवाल।
सीओसी और एनसीएलटी द्वारा मंजूरी पर आपत्ति।
अब आगे क्या?
अब इस पूरे मामले का फैसला एनसीएलएटी में होने वाली सुनवाई पर टिका है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से साफ है कि फिलहाल अदाणी ग्रुप की बोली पर कोई रोक नहीं है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है।
देश के सेवा क्षेत्र पर ब्रेक: मार्च में PMI 57.5 पर, 14 महीनों का निचला स्तर
6 Apr, 2026 11:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत के सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर मार्च 2026 में कुछ धीमी पड़ गई है। एचएसबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, HSBC इंडिया सर्विसेज पीएमआई फरवरी के 58.1 से घटकर मार्च में 57.5 पर आ गया, जो पिछले 14 महीनों का सबसे धीमा विस्तार है। हालांकि, सूचकांक अब भी अपने दीर्घकालिक औसत 54.4 से ऊपर बना हुआ है, जो संकेत देता है कि सेवा क्षेत्र में कुल मिलाकर वृद्धि जारी है।
पीएमआई (Purchasing Managers' Index) एक आर्थिक सूचकांक है, जो बताता है कि किसी देश के उद्योग या सेवा क्षेत्र की गतिविधियां बढ़ रही हैं या घट रही हैं। इसे कंपनियों के खरीद प्रबंधकों (Purchasing Managers) से सर्वे के जरिए तैयार किया जाता है।
कैसे समझें?
50 से ऊपर- आर्थिक गतिविधि बढ़ रही है
50 से नीचे- गतिविधि घट रही है
50 के आसपास- स्थिर स्थिति
क्या है ये सुस्ती की वजह?
रिपोर्ट के मुताबिक, सेवा क्षेत्र की इस सुस्ती की प्रमुख वजह नए कारोबार की रफ्तार में कमी रही। मार्च में नए ऑर्डर जनवरी 2025 के बाद सबसे धीमी गति से बढ़े, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ा। वित्त, रियल एस्टेट और परिवहन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में मांग अपेक्षाकृत कमजोर रही। हालांकि, निर्यात मांग ने राहत दी। रिपोर्ट में कहा गया कि विदेशी ऑर्डर लगभग रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गए, जिनमें अफ्रीका, एशिया, यूरोप और अमेरिका से मजबूत मांग देखने को मिली। सर्वे में शामिल कंपनियों ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का नकारात्मक असर बाजार स्थितियों, मांग और पर्यटन गतिविधियों पर पड़ा, जिससे कुल कारोबारी माहौल प्रभावित हुआ।
निर्यात आधारित मांग से सेक्टर को सहारा मिला
एचएसबीसी के अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि मार्च में सेवा क्षेत्र विस्तार में बना रहा, लेकिन लगातार दूसरे महीने वृद्धि की रफ्तार कमजोर हुई। उन्होंने बताया कि निर्यात आधारित मांग मजबूत रही, जिससे सेक्टर को सहारा मिला।
महंगाई को लेकर चिंता
रिपोर्ट में महंगाई के दबाव को लेकर भी चिंता जताई गई है। इनपुट लागत लगभग चार वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिसका कारण ईंधन, परिवहन और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी है। इसके बावजूद, कंपनियों का भविष्य को लेकर भरोसा मजबूत बना हुआ है। करीब 12 वर्षों में पहली बार कारोबारियों ने उत्पादन को लेकर इतनी सकारात्मक उम्मीद जताई है, जो आने वाले समय में मांग और बाजार परिस्थितियों में सुधार की उम्मीद पर आधारित है। कुल मिलाकर, मार्च के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सेवा क्षेत्र में विस्तार जारी है, लेकिन वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ रही है और महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, जो आगे के महीनों में चुनौती बन सकता है।
लाल निशान पर खुला बाजार: सेंसेक्स-निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट
6 Apr, 2026 10:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्ध के और बढ़ने की आशंकाओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी जैसे बेंचमार्क सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान बीएसई का बेंचमार्क 509.77 अंक गिरकर 72,822.60 पर और निफ्टी 141.20 अंक गिरकर 22,571.90 पर कारोबार कर रहा था। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 33 पैसे बढ़कर 92.85 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 270.13 अंक गिरकर 73,049.42 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 93.60 अंक गिरकर 22,619.50 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से रिलायंस इंडस्ट्रीज, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, इंटरग्लोब एविएशन, अदानी पोर्ट्स और आईसीआईसीआई बैंक प्रमुख पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। ट्रेंट, टाइटन, टेक महिंद्रा और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लाभ कमाने वालों में शामिल थे।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर अनिश्चितता के माहौल में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा और संभावित अच्छी-बुरी खबरों के कारण इसमें बदलाव देखने को मिलेगा। आने वाले दिनों में युद्ध के और बढ़ने की आशंका बहुत अधिक है। बाजार कच्चे तेल की कीमतों पर युद्ध से संबंधित घटनाओं के प्रभाव पर पैनी नजर रखेगा। अनुसंधान विश्लेषक और लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उन टिप्पणियों ने, जिनमें प्रमुख आपूर्ति मार्गों को बहाल न किए जाने पर संभावित वृद्धि का संकेत दिया गया है, जोखिम लेने की प्रवृत्ति को नियंत्रण में रखा है। इससे कच्चे तेल और वैश्विक अनिश्चितता बाजारों के प्रमुख चालक बने हुए हैं।
एशियाई बाजारों में दिखी तेजी
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी और जापान का निक्केई 225 सूचकांक उच्च स्तर पर कारोबार कर रहे थे। गुड फ्राइडे के उपलक्ष्य में शुक्रवार को अमेरिकी बाजार बंद रहे।
ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 109.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.74 प्रतिशत बढ़कर 109.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। गुड फ्राइडे के कारण शुक्रवार को शेयर बाजार बंद रहे। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 9,931.13 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 7,208.41 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। गुरुवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 185.23 अंक या 0.25 प्रतिशत बढ़कर 73,319.55 पर बंद हुआ। निफ्टी 33.70 अंक या 0.15 प्रतिशत बढ़कर 22,713.10 पर बंद हुआ।
Crude Oil Price: होर्मुज संकट गहराया, ट्रंप के बयान से तेल बाजार में उछाल
6 Apr, 2026 09:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई सख्त चेतावनी के बाद बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.74 प्रतिशत बढ़कर 109.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। वहीं रवीवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.4% बढ़कर 110.60 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि अमेरिकी क्रूड (WTI) में 1.8% की तेजी आई और यह 113.60 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
ट्रंप की सख्त चेतावनी
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर होर्मुज को तुरंत नहीं खोला गया, तो ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया जा सकता है। उन्होंने बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हुए संकेत दिया कि अमेरिका कड़े सैन्य कदम उठा सकता है। इस बयान के जवाब में एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में जलडमरूमध्य नहीं खोला जाएगा। उनका कहना था कि जब तक युद्ध से हुए नुकसान की पूरी भरपाई नहीं होती, तब तक यह मार्ग बंद रहेगा।
कूटनीतिक कोशिशें जारी
तनाव के बीच ओमान ने मध्यस्थता की पहल की है। ओमान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसके प्रतिनिधियों ने रविवार को ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की, जिसमें व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने के संभावित विकल्पों पर चर्चा हुई।
ओपेक+ का उत्पादन बढ़ाने का फैसला
इस बीच, वैश्विक आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए ओपेक+ और सहयोगी देशों ने उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। सऊदी अरब, रूस, इराक, यूएई, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान सहित आठ देशों ने मई 2026 से प्रतिदिन 2.06 लाख बैरल (kbd) उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है।
इस योजना के तहत:
सऊदी अरब और रूस: 62-62 kbd
इराक: 26 kbd
यूएई: 18 kbd
कुवैत: 16 kbd
कजाखस्तान: 10 kbd
अल्जीरिया: 6 kbd
ओमान: 5 kbd
ओपेक+ ने कहा कि यह कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है और उत्पादन में बदलाव परिस्थितियों के अनुसार धीरे-धीरे लागू किया जाएगा।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। वहीं, ओपेक+ की उत्पादन वृद्धि इस दबाव को कुछ हद तक संतुलित करने की कोशिश मानी जा रही है।
चांदी में भारी गिरावट, सोना भी लुढ़का: जानें आज के ताजा भाव
6 Apr, 2026 07:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सोमवार को बुलियन पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। चांदी की कीमत 2290 रुपये गिरकर 2.31 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 1100 रुपये गिरकर 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव घटकर 1,51,070 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि मुंबई में इसकी कीमत 1,50,920 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। दिलचस्प बात यह है कि गिरावट के बावजूद बीते एक सप्ताह में 24 कैरेट सोना करीब 2,860 रुपये तक महंगा हुआ है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमतों में भी लगभग 2,600 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले सप्ताह शुक्रवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत स्थिर रही थी और यह 1,51,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर टिकी रही।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
वैश्विक बाजार में भी सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। हाजिर सोना फिलहाल 4,591.52 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतें सिर्फ स्थानीय मांग-आपूर्ति से ही नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक संकेतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से भी प्रभावित होती हैं।
क्या हैं आगे के संकेत?
विश्लेषकों के मुताबिक इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतें एक सीमित दायरे में रह सकती हैं, लेकिन रुझान सकारात्मक रहने की उम्मीद है। निवेशक खासतौर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और प्रमुख वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं।
MCX पर मिला-जुला रुख
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को सोने के वायदा भाव में हल्की गिरावट देखने को मिली। सोना 0.02 फीसदी यानी 30 रुपये टूटकर 1,49,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं चांदी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 4.48 फीसदी यानी 10,901 रुपये लुढ़ककर 2,32,600 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई।
पूरे वित्त वर्ष में चमके कीमती धातु
वित्त वर्ष 2025-26 सोने और चांदी के लिए शानदार रहा। इस दौरान सोने की कीमत में करीब 57,350 रुपये प्रति 10 ग्राम यानी लगभग 61 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। वहीं चांदी ने इससे भी ज्यादा तेजी दिखाई और इसकी कीमत में 1,34,500 रुपये प्रति किलो यानी करीब 131 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया।
भारत का फार्मा निर्यात 28 अरब डॉलर पार, FY26 में मजबूत ग्रोथ
4 Apr, 2026 02:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सरकार ने एक शीर्ष अधिकारी ने शनिवार को बताया कि इस वित्तीय वर्ष में फरवरी तक भारतीय दवाओं का निर्यात 28 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में पांच प्रतिशत ज्यादा है। फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (फार्मेक्सिल) के महानिदेशक के राजा भानु के अनुसार, वर्तमान में लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर के इस क्षेत्र के 2030 तक बढ़कर 130 अरब अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।
उन्होंने कहा, "वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, दवा निर्यात उन चुनिंदा क्षेत्रों में से एक रहा है जिसने अपनी विकास गति को बनाए रखा है। वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल-फरवरी की अवधि के दौरान दवा निर्यात 28.29 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। इसमें वित्त वर्ष 2025 की इसी अवधि की तुलना में 5.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इस वृद्धि में फॉर्मूलेशन, बायोलॉजिकल, टीके और आयुष उत्पादों का अहम योगदान रहा।" अधिकारी ने आगे कहा कि वैश्विक मूल्य दबाव और व्यापार अस्थिरता के बावजूद, वित्त वर्ष 2024-25 में निर्यात 30.47 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.4 प्रतिशत अधिक है।
Delhi में व्यापारियों को झटका, PNG कनेक्शन के लिए आवेदन जरूरी
4 Apr, 2026 02:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने राजधानी में व्यापारिक और औद्योगिक गतिविधियों के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलिंडरों की आपूर्ति के नियमों को सख्त कर दिया है। खाद्य, आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से 2 अप्रैल को एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया। इसके तहत, अब उन इलाकों में जहां पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध है, वहां व्यवसायों के लिए कमर्शियल एलपीजी प्राप्त करना तभी संभव होगा, जब उनके पास पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) का कनेक्शन हो या उन्होंने इसके लिए आवेदन कर दिया गया हो। सरकार ने हाल ही में अधिसूचित कमर्शियल एलपीजी वितरण नीति से जुड़े एक प्रमुख नियम में यह संशोधन किया है।
क्या हैं नए नियम और अनुपालन?
संशोधित नियमों के तहत, कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ता अब एलपीजी आपूर्ति प्राप्त करने के पात्र तभी माने जाएंगे, जब वे संबंधित तेल विपणन कंपनी (ओएमसी) के साथ पंजीकृत होंगे और नेटवर्क मौजूद होने की स्थिति में उन्होंने पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन किया होगा। आदेश में उन क्षेत्रों के लिए भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं जहां पीएनजी इन्फ्रास्ट्रक्चर अभी तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को एक आवेदन जमा करना होगा, जिसमें पीएनजी नेटवर्क उपलब्ध होने पर उस पर स्विच करने की मंशा साफ की गई हो।
ओएमसी और आईजीएल की भूमिका
इस नीति को धरातल पर उतारने के लिए तेल और गैस कंपनियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है:
दस्तावेजों का सत्यापन: कमर्शियल गैस उपभोक्ताओं को आपूर्ति करते समय ओएमसी (ओएमसी) को कम से कम एक बार यह सुनिश्चित करने के लिए दस्तावेज एकत्र करने होंगे कि उपभोक्ता पंजीकृत है और उसने पीएनजी के लिए आवेदन या मंशा पत्र जमा कर दिया है।
आईजीएल के साथ डेटा साझाकरण: पीएनजी पर शिफ्ट होने की इच्छा जताने वाले उपभोक्ताओं का रिकॉर्ड आगे की कार्रवाई के लिए इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) के साथ साझा किया जाएगा।
दोहरे उपयोग के लिए मिलेगी छूट
सरकार ने उन व्यवसायों को लचीलापन भी प्रदान किया है जिन्हें अपने संचालन के लिए पीएनजी के साथ-साथ एलपीजी की भी आवश्यकता होती है।
ऐसे कारोबारी अपनी जरूरतों का स्पष्टीकरण देते हुए विभाग के अतिरिक्त आयुक्त को आवेदन कर सकते हैं। ओएमसी भी इस तरह के आवेदनों को एकत्र करके त्वरित निर्णय के लिए अतिरिक्त आयुक्त को सौंप सकती हैं। आदेश के अनुसार, "अतिरिक्त आयुक्त तीनों तेल विपणन कंपनियों के परामर्श से इन आवेदनों का जल्द निपटारा करेंगे"।
आगे का आउटलुक
यह नया आदेश 26 मार्च को अनुपूरक के साथ अधिसूचित की गई मूल नीति का हिस्सा है। इस नीति के बाकी नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार के इस कदम से साफ है कि दिल्ली सरकार वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों में पारंपरिक सिलिंडरों के उपयोग को व्यवस्थित करते हुए पीएनजी के उपयोग को अनिवार्य बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
India ने खबरों को बताया बेबुनियाद, सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित
4 Apr, 2026 01:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ईरानी कच्चे तेल की खेप को लेकर फैल रही खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट्स को सिरे से खारिज किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है कि भुगतान संबंधी दिक्कतों के कारण गुजरात के वडीनार से ईरान का कच्चा तेल चीन की ओर मोड़ा गया। मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि पश्चिम एशिया में सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी कच्चे तेल की जरूरतों को सुरक्षित कर लिया है, जिसमें ईरान से आयात भी शामिल है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि ईरानी कच्चे तेल के भुगतान को लेकर किसी तरह की कोई बाधा नहीं है, जैसा कि कुछ अफवाहों में दावा किया जा रहा है। सरकार ने दोहराया कि आने वाले महीनों के लिए भारत की कच्चे तेल की आवश्यकताएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और सप्लाई को लेकर कोई चिंता की बात नहीं है।
दरअसल, तेल बाजार पर नजर रखने वाली एजेंसी केप्लर ने दावा किया था कि ईरान से लगभग 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा एक जहाज अचानक अपना मार्ग बदलकर चीन की दिशा में बढ़ गया । यह जहाज, जिसका नाम 'पिंग शुन' है, गुरुवार रात तक अरब सागर में भारत के रास्ते पर था और इसके गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पहुंचने की संभावना जताई जा रही थी। केप्लर में रिफाइनरी और ऑयल मार्केट मॉडलिंग के मैनेजर सुमित रितोलिया ने बताया था कि यह जहाज पिछले तीन दिनों से वाडिनार की ओर बढ़ रहा था, लेकिन मंजिल के करीब पहुंचने से ठीक पहले इसने अपनी दिशा बदल दी। उन्होंने कहा था कि जहाज ने अब अपने घोषित गंतव्य भारत से बदलकर चीन की ओर संकेत देना शुरू कर दिया है, जिससे इस अचानक बदलाव को लेकर सवाल खड़े हो गए थे।
भारत के लिए खुशखबरी, सातवां LPG टैंकर Green Shanvi सुरक्षित निकला
4 Apr, 2026 12:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत के लिए एक और राहत भरी खबर है। भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ग्रीन शान्वी 3 अप्रैल 2026 की रात हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजर गया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, जहाज में करीब 46,650 मीट्रिक टन एलपीजी कार्गो लदा हुआ था। आने वाले दिनों में दो और भारत-ध्वज वाले एलपीजी टैंकर ग्रीन आशा और जग विक्रम भी हॉर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर रवाना होंगे।
सात भारतीय जहाजों ने होर्मुज किया पार
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक ग्रीन शान्वी समेत कुल सात भारतीय एलपीजी टैंकर इस संवेदनशील जलमार्ग को पार कर चुके हैं। ग्रीन शान्वी के ट्रांजिट के बाद अब फारस की खाड़ी में कुल 17 भारतीय जहाज मौजूद हैं। इनमें तीन अन्य एलपीजी टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक एलएनजी टैंकर, एक केमिकल प्रोडक्ट्स टैंकर, तीन कंटेनर शिप, दो बल्क कैरियर और दो जहाज नियमित मरम्मत (मेंटेनेंस) के लिए शामिल हैं।
भारत की कूटनीतिक बातचीत का असर
भारत ने अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की है। ईरान ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि जो देश उसके साथ समन्वय बनाए रखते हैं और शत्रु श्रेणी में नहीं आते, उनके जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जा रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा था कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की इजाजत दी जा रही है।
होर्मुज क्यों है इतना अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद संकरा लेकिन रणनीतिक समुद्री मार्ग है, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी माना जाता है। हर दिन दो करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यह मात्रा दुनिया की कुल तेल खपत का करीब पांचवां हिस्सा और समुद्री मार्ग से होने वाले तेल व्यापार का लगभग चौथाई हिस्सा है। दुनिया की बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की ढुलाई भी इसी रास्ते से होती है। ऐसे में अगर इस मार्ग में थोड़ी देर के लिए भी बाधा आती है, तो उसका असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वित्तीय बाजारों, वैश्विक सप्लाई चेन और आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट तक महसूस किया जाता है। यही वजह है कि होर्मुज में मौजूदा संकट को लेकर दुनिया भर की निगाहें अमेरिका, ईरान और ऊर्जा बाजारों पर टिकी हुई हैं।
पश्चिम एशिया संकट पर Kotak Mahindra Bank की रिपोर्ट, असर सीमित रहने की संभावना
4 Apr, 2026 11:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के इक्विटी बाजारों को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। कोटक संस्थागत इक्विटी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यदि मौजूदा संघर्ष अगले कुछ हफ्तों में समाप्त हो जाता है, तो भारतीय बाजारों की कमाई पर इसका असर सीमित रह सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालिया समय में शेयर बाजार में आई गिरावट के बाद निवेशकों के लिए जोखिम और रिटर्न का संतुलन बेहतर हुआ है। यानी मौजूदा स्तर पर निवेश के अवसर पहले की तुलना में अधिक आकर्षक हो सकते हैं। विशेष रूप से अमेरिका की ओर से ईरान-इस्राइल संघर्ष को लेकर दिए गए संकेतों ने तनाव कम होने और ऊर्जा आपूर्ति स्थिर होने की उम्मीद बढ़ाई है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति की हालिया टिप्पणियों से उम्मीद जगी है कि ईरान-इस्राइल/अमेरिका के बीच जारी संघर्ष का अंत हो सकता है और आने वाले महीनों में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति सामान्य हो सकती है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार की कमाई पर संभावित नुकसान सीमित रहेगा। कोटक ने अपने बेस केस परिदृश्य में माना है कि यह संघर्ष कुछ हफ्तों तक जारी रह सकता है, लेकिन इससे वैश्विक तेल आपूर्ति ढांचे पर कोई दीर्घकालिक असर नहीं पड़ेगा।
आत्मनिर्भरता की राह पर 25-27% एथेनॉल ब्लेंडिंग की तैयारी
पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण को लेकर भारत की नीति किसी भू-राजनीतिक संकट, खासकर पश्चिम एशिया के तनाव, से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा आत्मनिर्भरता के दीर्घकालिक लक्ष्य पर आधारित है। अनाज इथेनॉल निर्माता संघ (जीईएमए) के अध्यक्ष सीके जैन ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि ई20 का युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है। इसका एक ही उद्देश्य है ऊर्जा में आत्मनिर्भरता। जब हमारे पास खुद का उत्पादन है, तो हम दूसरों पर निर्भर क्यों रहें? भारत ने 1 अप्रैल से E20 का पूर्ण रोलआउट शुरू कर दिया है। जैन ने इसे अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि एक चेकपॉइंट बताया। उनके मुताबिक, इस चरण का मकसद यह देखना था कि क्या निवेशक आगे आते हैं और क्या पर्याप्त कच्चा माल (फीडस्टॉक) उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि अब स्थिति अनुकूल है अतिरिक्त अनाज जैसे फीडस्टॉक की उपलब्धता है और उत्पादन क्षमता भी विकसित हो चुकी है। ऐसे में एथेनॉल मिश्रण को आगे बढ़ाने की पूरी संभावना है। जैन ने संकेत दिया कि 20% अंतिम सीमा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह आगे बढ़ने की शुरुआत है। 25-27% तक ब्लेंडिंग बढ़ाने की 100% संभावना है।
सरकार का बड़ा फैसला: संकटग्रस्त इलाकों को मिलेगा आर्थिक सहारा
4 Apr, 2026 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों को राहत देने के लिए नई कर्ज गारंटी योजना लाने की तैयारी कर रही है। इस योजना का मकसद खासतौर पर उन कंपनियों को आसानी से कर्ज उपलब्ध कराना है, जो आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के साथ कच्चे माल और लॉजिस्टिक खर्च की बढ़ती लागत से परेशान हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नई योजना के तहत सरकार दो से 2.5 लाख करोड़ रुपये तक की कर्ज गारंटी दे सकती है। यह कोविड महामारी के दौरान शुरू की गई आपातकालीन कर्ज गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के मॉडल पर आधारित होगी। वित्तीय सेवा विभाग इस योजना पर काम रहा है। माना जा रहा है कि सरकार अगले 15 दिनों के भीतर इसकी आधिकारिक घोषणा कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, इस राहत पैकेज का मकसद यह सुनिशि्चत करना है कि आपूर्ति शृंखला में रुकावट की वजह से जो क्षेत्र चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उन्हें नकदी की कमी न हो और वे अपना कारोबार चालू रख सकें। योजना के तहत उन कंपनियों को सरकार की गारंटी पर कर्ज मिलेगा।
अनिश्चित माहौल में मिलेगा भरोसा
सूत्रों ने कहा, इस योजना का मकसद कंपनियों को भरोसा देना है, ताकि वे अनिश्चित माहौल में भी काम जारी रख सकें। हालात अभी ज्यादा खराब नहीं हैं, लेकिन सरकार पहले से तैयारी कर रही है, ताकि अर्थव्यवस्था पर अधिक दबाव न पड़े। सरकार प्रभावित क्षेत्रों से संपर्क कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उनके उत्पादन पर कितना असर पड़ रहा है।
एमएसएमई और निर्यात क्षेत्र के लिए बड़ी राहत
सूत्रों ने कहा, ईरान युद्ध का सीधा असर लघु, सूक्ष्म एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई)और निर्यात पर पड़ा है। निर्यात से जुड़े क्षेत्र आवाजाही में रुकावट और बढ़ते मालभाड़े की वजह से दबाव में हैं। एमएसएमई क्षेत्र भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जो ब्याज दरों के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं और जिनकी कार्यप्रणाली स्थिर नकदी प्रवाह पर निर्भर करती है। सरकार की नई कर्ज गारंटी योजना से छोटे उद्यमों को अपना व्यापार बचाने और कर्मचारियों का समय पर वेतन देने में मदद मिलेगी।
कोरोना में ईसीएलजीएस से मिली थी बड़ी राहत
कोविड काल के दौरान शुरू की गई आपातकालीन कर्ज गारंटी योजना ने लाखों कर्जदारों की मदद की थी और महामारी के दौरान खासतौर पर एमएसएमई क्षेत्र को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई थी। ईसीएलजीएस के तहत अब तक 1.19 करोड़ लाभार्थियों को 3.62 लाख करोड़ रुपये की कर्ज गारंटी दी जा चुकी है। एमएसएमई क्षेत्र इसका सबसे बड़ा लाभार्थी रहा।
चुनौतियों के बावजूद निर्यात क्षेत्र में मजबूती
वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत के निर्यात क्षेत्र ने मजबूती दिखाई है। 2025-26 में निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज होने की उम्मीद है। वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक, 31 मार्च तक के रुझानों के आधार पर यह स्पष्ट है कि कई चुनौतियों के बावजूद निर्यात में गिरावट नहीं आई है। टैरिफ के अलावा अर्थव्यवस्था की विभिन्न चुनौतियों जैसे यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया तनाव जैसे मुद्दों के बावजूद भारत के वस्तु निर्यात ने अपनी रफ्तार बनाए रखी है।
चीन पर टेक्नोलॉजी नकेल, US ने पेश किया MATCH एक्ट
3 Apr, 2026 03:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक सेमीकंडक्टर और तकनीकी वर्चस्व की दौड़ में अमेरिका ने एक और आक्रामक कदम उठाया है। वाशिंगटन में अमेरिकी कांग्रेस के सीनेटरों ने चीन और अन्य प्रतिद्वंद्वी देशों को एडवांस्ड चिप निर्माण तकनीक हासिल करने से रोकने के लिए एक नया विधेयक पेश किया है। 'एमएटीसीएच' एक्ट नामक इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य निर्यात नियंत्रण (एक्सपोर्ट कंट्रोल) की मौजूदा खामियों को दूर करना और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सहयोगी देशों के साथ नीतियों में तालमेल स्थापित करना है।
क्या है बिल का मकसद?
यह कानून केंद्र सरकार को सेमीकंडक्टर उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण 'चोकपॉइंट्स' (व्यापार और आपूर्ति के प्रमुख मार्ग) की पहचान करने और मित्र देशों के साथ मिलकर एक समान एक्सपोर्ट कंट्रोल लागू करने का निर्देश देता है। सीनेटर पीट रिकेट्स और एंडी किम द्वारा संयुक्त रूप से लाए गए इस बिल को सीनेटर जिम रिश और चक शूमर का भी समर्थन प्राप्त है। सीनेटर रिकेट्स के अनुसार, वर्तमान में लागू इकाई-आधारित प्रतिबंधों का ढांचा बिखरा हुआ है, जिसे चीन फ्रंट कंपनियों या बिचौलियों के माध्यम से आसानी से चकमा दे देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेमीकंडक्टर को डिजाइन करने और बनाने की क्षमता कम्युनिस्ट चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा के केंद्र में है। यह नया बिल इन खामियों को खत्म कर अमेरिकी कंपनियों के लिए एक समान अवसर तैयार करेगा।
'एमएटीसीएच एक्ट' के प्रमुख प्रावधान
यह बिल सीधे तौर पर ग्लोबल सप्लाई चेन और तकनीकी बाजार को प्रभावित करेगा। इसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
तकनीक और उपकरणों पर पाबंदी: एमएटीसीएच एक्ट में डीप अल्ट्रावॉयलेट लिथोग्राफी इक्विपमेंट सहित आवश्यक चिप निर्माण उपकरणों पर देशव्यापी रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।
चीनी कंपनियों पर नकेल: इसके तहत हुआवेई, एसएमआईसी और यांग्त्जी मेमोरी टेक्नोलॉजीज जैसी प्रमुख चीनी कंपनियों के प्लांट को प्रतिबंधित इकाई घोषित कर निशाना बनाया गया है।
सहयोगियों पर दबाव और अधिकार क्षेत्र का विस्तार: बिल में ऐसे नियम शामिल हैं कि यदि साझेदार देश तय समय सीमा के भीतर अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन नहीं करते हैं, तो अमेरिका विदेशी निर्मित उन वस्तुओं पर भी अपना अधिकार क्षेत्र बढ़ा सकता है जो अमेरिकी तकनीक पर निर्भर हैं।
सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के बारे में क्या बोले जॉन डब्ल्यू. मैनियन?
प्रतिनिधि जॉन डब्ल्यू. मैनियन ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी श्रमिकों और नवाचार ने दुनिया की सबसे एडवांस्ड सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि यह बिल उन उपकरणों, नौकरियों और तकनीकों की सुरक्षा करेगा जो 21वीं सदी में अमेरिका को चीन से आगे रखेंगे। कांग्रेसी माइकल बॉमगार्टनर और विश्लेषक रयान फेडासियुक ने चेतावनी दी है कि चीन अमेरिकी और सहयोगी देशों की निर्यात व्यवस्था के गैप का लगातार फायदा उठा रहा है, क्योंकि सहयोगी देशों के नियंत्रण हमेशा एक समान लागू नहीं होते। समर्थकों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में अमेरिकी लीडरशिप बनाए रखने के लिए यह सख्त कानून अनिवार्य है।
अब आगे क्या?
सेमीकंडक्टर अब केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि एआई, डिफेंस सिस्टम और ग्लोबल सप्लाई चेन का समर्थन करने वाली एक रणनीतिक तकनीक बन चुका है। यह नया कदम घरेलू चिप उत्पादन को मजबूत करने और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की वाशिंगटन की पूर्व की कोशिशों का ही विस्तार है। चूंकि अमेरिका और उसके सहयोगियों की नीतियों में मतभेद एक बड़ी चुनौती रहे हैं, इसलिए 'एमएटीसीएच एक्ट' वैश्विक स्तर पर तकनीक पर नियंत्रण के लिए अधिक समन्वित और बहुपक्षीय दृष्टिकोण स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक नीतिगत बदलाव साबित हो सकता है।
वैश्विक तनाव का असर, ब्रेंट क्रूड की कीमत 109 डॉलर के ऊपर
3 Apr, 2026 12:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को तेज उछाल दर्ज किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर अगले दो से तीन हफ्तों में संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बाद बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई, जिससे तेल कीमतों में तेजी आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स करीब आठ प्रतिशत उछलकर 109.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 111.54 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता देखा गया।
बाजार में दिख रही अस्थिरता
साप्ताहिक आधार पर भी तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। यूएस WTI क्रूड में पिछले शुक्रवार के मुकाबले 11.94 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, ब्रेंट क्रूड में इसी अवधि के दौरान 3.14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो बाजार में अस्थिरता को दर्शाती है। सप्ताह के दौरान यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड में पिछले शुक्रवार के मुकाबले 11.94 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि ब्रेंट क्रूड में इसी अवधि में 3.14 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
जंग पांचवे हफ्ते में पहुंच चुका है
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब पांचवें हफ्ते में पहुंच गया है, जिससे वैश्विक बाजार से हर दिन लाखों बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते ऊर्जा कीमतें कई साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से गुजरने वाली सप्लाई पर निर्भर देशों में ईंधन की कमी भी देखने को मिल रही है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। इस हफ्ते दिए गए अपने भाषण में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में ईरान पर 'बेहद कड़ा प्रहार' कर सकता है। हालांकि, उन्होंने इस अहम समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने की कोई स्पष्ट योजना नहीं बताई और अन्य देशों से इसे सुचारू करने की जिम्मेदारी लेने को कहा।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
विश्लेषकों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों, भारतीय रुपए और उभरते बाजारों में विदेशी निवेश पर दबाव बना रह सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर स्थिति में सुधार होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और करेंसी में स्थिरता आ सकती है, लेकिन तनाव बढ़ने पर बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और बढ़ेगी। कीमती धातुओं की बात करें तो कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स 0.48 प्रतिशत गिरकर 4,679.70 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था, क्योंकि निवेशक अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश विकल्प तलाश रहे हैं। इस बीच, गुड फ्राइडे के कारण घरेलू कमोडिटी बाजार सुबह के सत्र में बंद रहे। वहीं, पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव और करेंसी में उतार-चढ़ाव के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार छठे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुए, जहां दोनों प्रमुख बेंचमार्कों सेंसेक्स और निफ्टी में कमजोरी रही।
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