व्यापार
दवाओं पर 100% टैरिफ, भारत की फार्मा इंडस्ट्री कितनी होगी प्रभावित
3 Apr, 2026 11:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सप्लाई चेन जोखिमों का हवाला देते हुए पेटेंटेड फार्मास्युटिकल उत्पादों के आयात पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला किया है। यह निर्णय सेक्शन 232 जांच के बाद लिया गया है, जिसका उद्देश्य दवा आपूर्ति में विदेशी निर्भरता को कम करना है।
जेनेरिक दवाओं को टैरिफ से रखा गया बाहर
हालांकि भारत के लिए राहत की बात यह है कि जेनेरिक दवाओं को फिलहाल इस टैरिफ से बाहर रखा गया है। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भारतीय कंपनियों की प्रमुख ताकत माने जाने वाले जेनेरिक ड्रग्स पर अभी कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इससे भारत से अमेरिका को होने वाले सस्ते दवाओं के निर्यात पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा। भारत की फार्मा इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा अमेरिकी जेनेरिक बाजार पर निर्भर है और इस छूट से अल्पकाल में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है। एक वरिष्ठ व्हाइट हाउस अधिकारी के अनुसार, भविष्य में जेनेरिक उत्पादन की स्थिति की समीक्षा कर टैरिफ नीति में बदलाव किया जा सकता है।
भारत के लिए क्या चुनौती?
हालांकि, लंबे समय में यह फैसला भारत के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। पेटेंटेड दवाओं और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) पर भारी टैरिफ से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है, जिसमें भारतीय कंपनियां अहम भूमिका निभाती हैं। खासकर कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और इंटरमीडिएट सप्लाई के क्षेत्र में इसका असर देखने को मिल सकता है।
कंपनियों को लेकर ट्रंप प्रशासन का क्या रुख
अमेरिकी प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन कंपनियों के पास अमेरिका में उत्पादन शिफ्ट करने की योजना नहीं होगी, उनके भारत से आयातित पेटेंटेड उत्पादों पर 100 प्रतिशत शुल्क लागू होगा। हालांकि, जो कंपनियां उत्पादन अमेरिका में स्थानांतरित करने के लिए प्रतिबद्ध होंगी, उन्हें शुरुआती राहत के तौर पर 20 प्रतिशत टैरिफ दिया जाएगा, जो चार साल में बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा।
कैसे लागू होगा टैरिफ?
यह टैरिफ जुलाई और सितंबर 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वर्तमान में अमेरिका में वितरित लगभग 53 प्रतिशत पेटेंटेड दवाएं विदेशों में बनती हैं, जबकि केवल 15 प्रतिशत APIs का उत्पादन घरेलू स्तर पर होता है। ऐसे में किसी वैश्विक संकट की स्थिति में दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। अमेरिका का मानना है कि कैंसर, दुर्लभ बीमारियों और संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में उपयोग होने वाली पेटेंटेड दवाओं के लिए आत्मनिर्भरता जरूरी है। इसी उद्देश्य से घरेलू उत्पादन और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है।
गैस सिलिंडर को लेकर फेक न्यूज पर एक्शन, केंद्र ने राज्यों को दी सलाह
3 Apr, 2026 09:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। एलपीजी की उपलब्धता को लेकर फैल रही अफवाहों पर केंद्र सरकार ने चिंता जताई है। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि सिर्फ 17 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश ही नियमित प्रेस ब्रीफिंग कर रहे हैं, जो स्थिति को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं है।
राज्यों से संचार व्यवस्था को मजबूत करने की अपील
पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने अपने पत्र में कहा कि कुछ क्षेत्रों में अब भी अफवाहें और गलत जानकारी फैल रही है, जिससे लोगों में अनावश्यक डर पैदा हो रहा है और कई जगहों पर घबराहट में खरीदारी (पैनिक बायिंग) देखी जा रही है। मंत्रालय ने राज्यों से अपील की है कि वे संचार व्यवस्था को और मजबूत करें ताकि स्थिति सामान्य बनी रहे। वर्तमान में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, नागालैंड, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे 17 राज्य/यूटी नियमित या अंतराल पर प्रेस ब्रीफिंग कर रहे हैं। केंद्र ने बाकी राज्यों से भी तुरंत इसी तरह के कदम उठाने को कहा है।
मंत्रालय ने राज्यों को क्या दिया सलाह
मंत्रालय ने सलाह दिया है कि वरिष्ठ स्तर पर रोजाना प्रेस ब्रीफिंग की जाए और सोशल व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए सही और समय पर जानकारी दी जाए, ताकि लोगों को एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता और सुचारु वितरण का भरोसा मिल सके और अफवाहों पर रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही केंद्र ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि इस तरह की गलत गतिविधियों को रोकने के लिए जरूरी कदम लगातार उठाए जाएं। यह निर्देश 27 मार्च को जारी उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन पर असर की बात कही थी। इन परिस्थितियों के चलते पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों व उपलब्धता को लेकर सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें तेजी से फैल रही हैं, जिससे घरेलू वितरण प्रणाली पर दबाव बढ़ा है।
टैरिफ वॉर का असर दिखा? व्हाइट हाउस बोला—घाटा कम हुआ
3 Apr, 2026 08:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' टैरिफ नीति के एक साल पूरे होने पर बड़ा दावा किया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, इस नीति के तहत किए गए नए व्यापार समझौतों ने वैश्विक व्यापार संतुलन को बदल दिया है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और सुरक्षित बनाया है।
एक साल में कितने व्यापार समझौते हुए?
व्हाइट हाउस प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि 'लिबरेशन डे' के एक साल में 20 से अधिक नए व्यापार समझौते हुए, ट्रिलियन डॉलर के निवेश आए, दवाओं की कीमतें घटीं और वस्तु व्यापार घाटा कम हुआ। उनका कहना है कि यह बदलाव अभी शुरुआत है और आने वाले समय में इसके और बड़े परिणाम देखने को मिलेंगे।
वस्तु व्यापार घाटे में आई कितनी कमी?
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच अमेरिका का वस्तु व्यापार घाटा सालाना आधार पर 24 प्रतिशत तक घटा है। यह भी दावा किया गया कि इस अवधि में हर महीने घाटा साल-दर-साल कम हुआ।
चीन के साथ अमेरिका का व्यापार
चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा पिछले एक साल में 32 प्रतिशत और अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच 46 प्रतिशत तक घटा है। पहली बार साल 2000 के बाद चीन अमेरिका का सबसे बड़ा घाटा वाला व्यापारिक साझेदार नहीं रहा। यूरोपीय संघ के साथ भी घाटा लगभग 40 प्रतिशत घटा है, जबकि स्विट्जरलैंड के साथ अमेरिका ने 2012 के बाद पहली बार सरप्लस दर्ज किया है।
विदेशी उत्पादकों का बोझ पड़ने का दावा
व्हाइट हाउस ने यह भी कहा कि टैरिफ का बोझ विदेशी उत्पादकों पर पड़ा है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के अध्ययन का हवाला देते हुए बताया गया कि अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए निर्यातकों ने अपने उत्पादों की कीमतें घटाईं। सरकार के मुताबिक, यूरोपीय संघ, जापान, भारत, वियतनाम और अर्जेंटीना जैसे प्रमुख साझेदारों के साथ 20 से ज्यादा समझौते हुए हैं, जो वैश्विक जीडीपी के आधे से ज्यादा हिस्से को कवर करते हैं। इन समझौतों से कृषि, ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादों के लिए नए बाजार खुले हैं।
उद्योग क्षेत्र को लेकर क्या दावा?
उद्योग क्षेत्र में भी सुधार का दावा किया गया है। एपल, टोयोटा, माइक्रोन और फाइजर जैसी कंपनियों के निवेश से अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला है। 2025 में कोर कैपिटल गुड्स की शिपमेंट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, जबकि 2026 की शुरुआत में दो साल बाद पहली बार मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि में विस्तार दर्ज हुआ। अमेरिका ने 2025 में कच्चे स्टील उत्पादन में जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक बनने का भी दावा किया है। मजदूरों की आय में भी बढ़ोतरी हुई है प्राइवेट सेक्टर में औसतन 1,400 डॉलर से ज्यादा की वास्तविक वेतन वृद्धि दर्ज की गई।
भारत अमेरिका के प्रमुख घाटा साझेदारों में है शामिल
हालांकि, भारत के साथ व्यापार में तस्वीर थोड़ी अलग है। पिछले 12 महीनों में अमेरिका का भारत के साथ वस्तु व्यापार घाटा 54.91 अरब डॉलर रहा, जिससे भारत अमेरिका के प्रमुख घाटा साझेदारों में शामिल है। फरवरी 2026 में ही अमेरिका को भारत के साथ करीब 3.5 अरब डॉलर का घाटा हुआ।
क्या कहते हैं आंकड़े?
इस अवधि में भारत से अमेरिका को 101.97 अरब डॉलर के सामान का आयात हुआ, जिसमें फार्मास्युटिकल, इंजीनियरिंग और अन्य उत्पाद शामिल हैं। इन आयातों पर अमेरिका ने 12.34 अरब डॉलर की कस्टम ड्यूटी वसूली, जबकि औसत टैरिफ दर 12.12 प्रतिशत रही।
फरवरी 2026 के मासिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका का कुल व्यापार घाटा बढ़कर 57.35 अरब डॉलर हो गया, जो जनवरी से 2.67 अरब डॉलर ज्यादा है, हालांकि यह 12 महीने के औसत से 11 प्रतिशत कम है।
इस महीने कुल निर्यात 314.8 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 372.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वस्तु व्यापार में 84.60 अरब डॉलर का घाटा रहा, जबकि सेवाओं में 27.26 अरब डॉलर का सरप्लस दर्ज किया गया।
आयात में तेज वृद्धि के पीछे कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर, कच्चा तेल और दवाओं की मांग रही, जबकि निर्यात में औद्योगिक सामग्री, प्राकृतिक गैस और सोने की शिपमेंट बढ़ी।
दोहरी मार: प्रॉपर्टी में निवेश गिरा, महिंद्रा कारें होंगी महंगी
3 Apr, 2026 08:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण आपूर्ति शृंखला में आई रुकावटों और बढ़ती कीमतों के चलते चालू वित्त वर्ष में भारत में रिफाइंड सूरजमुखी तेल की बिक्री में 10 फीसदी घट सकती है। क्रिसिल रेटिंग्स ने कहा, दोहरी चुनौतियों के कारण मांग पर असर पड़ेगा। उपभोक्ता राइस ब्रान और सोयाबीन तेल जैसे सस्ते विकल्पों का रुख कर सकते हैं।
हल्की बढ़त के साथ बंद हुए अमेरिकी शेयर बाजार
अमेरिका के शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बाद आखिरकार हल्की बढ़त के साथ बंद हुए और पूरे हफ्ते में मुनाफे के साथ खत्म हुए। यह ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पहला ऐसा हफ्ता रहा जब बाजार ने बढ़त दर्ज की। हालांकि दिन की शुरुआत में बाजार में गिरावट देखी गई थी, लेकिन बाद में स्थिति संभल गई। इस बीच कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। अमेरिकी कच्चा तेल 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इसकी बड़ी वजह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान है, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान पर हमले जारी रखेगा। इससे युद्ध जल्द खत्म होने की उम्मीद कम हो गई है और बाजार पर दबाव बना हुआ है। टेस्ला के शेयर में 5 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट आई, क्योंकि कंपनी की बिक्री उम्मीद से कम रही। वहीं कुछ टेक कंपनियों के शेयरों में तेजी आई, जिससे बाजार को सहारा मिला। तेल की कीमत बढ़ने से महंगाई का खतरा बढ़ गया है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं, जिससे आम लोगों का खर्च बढ़ रहा है। इसके अलावा हवाई यात्रा और सामान ढुलाई भी महंगी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चलता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद भी कम हो जाएगी।
रियल एस्टेट में विदेशी निवेश 75 फीसदी घटा
ईरान युद्ध के कारण मार्च तिमाही में भारतीय रियल एस्टेट में निवेश को लेकर विदेशी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। इससे विदेश निवेश 75 फीसदी घटकर 40 करोड़ डॉलर रह गया। कॉलियर्स इंडिया के अनुसार, इस अवधि में क्षेत्र में कुल संस्थागत निवेश 61 फीसदी घटकर 1.6 अरब डॉलर रह गया।
एयरटेल दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी
भारती एयरटेल ग्राहक संख्या के आधार पर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बन गई है। जीएसएमए के आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च तक एयरटेल का कुल ग्राहक आधार करीब 65 करोड़ तक पहुंच गया। कंपनी के भारत में 36.8 करोड़ और अफ्रीका में 17.9 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैं।
महिंद्रा 6 अप्रैल से गाड़ियों के दाम 2.5 फीसदी तक बढ़ाएगी
महिंद्रा एंड महिंद्रा ने डीजल-पेट्रोल ईंधन वाले एसयूवी और व्यावसायिक वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। कंपनी ने बृहस्पतिवार को बताया, 6 अप्रैल से इन वाहनों की कीमत में 2.5 फीसदी तक बढ़ोतरी की जाएगी। पूरे पोर्टफोलियो में गाड़ियों की औसत कीमत 1.6 फीसदी बढ़ेगी। कंपनी ने कहा, उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी की वजह से यह फैसला लिया गया है। हालांकि, हाल में लॉन्च एक्सयूवी 7 एक्सओ मॉडल की कीमत 40,000 बुकिंग की डिलीवरी के बाद ही बढ़ाई जाएगी।
रिलायंस की एसईजेड रिफाइनरी से निर्यात पर विंडफॉल टैक्स नहीं
डीजल और विमान ईंधन पर हाल ही में लगाए गए अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) रिलायंस इंडस्ट्रीज की एसईजेड रिफाइनरी पर लागू नहीं होंगे। राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि न्यायिक फैसलों के चलते विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में स्थित रिफाइनरी को इन करों से छूट मिली हुई है। ईरान युद्ध के कारण आपूर्ति संकट को देखते हुए सरकार ने 26 मार्च से डीजल पर 21.50 रुपये और विमान ईंधन पर 29.50 रुपये प्रति लीटर निर्यात शुल्क फिर से लगा दिया है। पेट्रोल को इससे बाहर रखा गया है।
पेट्रोल पर 24 व डीजल पर 104 रुपये घाटा सह रहीं तेल कंपनियां
पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण विश्व स्तर पर कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। इसका सीधा असर भारतीय तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) पर पड़ रहा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के बावजूद घरेलू बाजार में दाम स्थिर रखने के चलते कंपनियों को पेट्रोल पर 24 व डीजल पर 104 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है। सरकार ने कहा, आम जनता को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी कम की गई है और घाटे का हिस्सा कंपनियां वहन कर रही हैं। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। मंत्रालय के अनुसार, अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार सुरक्षित है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं।
विनिर्माण सेक्टर सुस्त, लेकिन निर्यात और नौकरियों में तेजी
2 Apr, 2026 01:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर अब भारत के विनिर्माण क्षेत्र पर दिखने लगा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों और मांग में अनिश्चितता के कारण मार्च महीने में भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर लगभग चार वर्षों के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई है।
क्या कह रहे पीएमआई के ताजा आंकड़े?
एसएंडपी ग्लोबल द्वारा संकलित 'एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स' (पीएमआई) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मार्च में यह सूचकांक गिरकर 53.9 पर आ गया है, जो फरवरी में 56.9 पर था। यह आंकड़ा 53.8 के प्रारंभिक अनुमान के लगभग अनुरूप ही है। इस गिरावट का मुख्य कारण मांग का कमजोर होना है, जिसके चलते नए ऑर्डर और उत्पादन का विस्तार लगभग चार वर्षों में अपनी सबसे धीमी दर से हुआ है। एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, "पश्चिम एशिया में संघर्ष से जुड़ी बाधाएं वैश्विक अर्थव्यवस्था में गूंज रही हैं और भारतीय निर्माताओं पर भारी पड़ रही हैं"।
उद्योग जगत के लिए इन आंकड़ों का क्या मतलब?
निजी क्षेत्र की ओर से की गई इस सर्वे रिपोर्ट में कुछ चिंताजनक रुझानों के साथ-साथ मजबूत बुनियादी संकेत भी सामने आए हैं:
लागत में भारी वृद्धि: एल्युमीनियम, रसायन, ईंधन और स्टील की कीमतों में तेज उछाल के कारण कंपनियों को अगस्त 2022 के बाद से सबसे भारी लागत दबाव का सामना करना पड़ा है।
बिक्री मूल्य: इनपुट लागत में भारी वृद्धि के बावजूद, कंपनियों ने ग्राहकों पर पूरा बोझ नहीं डाला और पिछले दो वर्षों में सबसे धीमी गति से अपने बिक्री मूल्य बढ़ाए हैं।
निर्यात में मजबूती: मांग में समग्र सुस्ती के बावजूद विदेशी बाजारों से समर्थन मिला है, जिससे मार्च में निर्यात ऑर्डर उछलकर छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं।
रोजगार में वृद्धि: कंपनियों ने अपने लंबित काम निपटाने और भविष्य की विस्तार योजनाओं को समर्थन देने के लिए नई भर्तियां की हैं। इसके चलते रोजगार वृद्धि की दर सात महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
अब आगे क्या
हालांकि भू-राजनीतिक तनाव और ईंधन की महंगी कीमतों ने मैन्युफैक्चरिंग की वर्तमान रफ्तार को धीमा कर दिया है, लेकिन भारत के विनिर्माता भविष्य के व्यापार को लेकर अत्यधिक आश्वस्त बने हुए हैं। कृषि क्षेत्र में मजबूती की उम्मीद और क्षमता विस्तार की योजनाओं के दम पर आगामी वर्ष के लिए निर्माताओं का व्यापारिक आशावाद मई 2024 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 63% बढ़ा, पहली बार नया रिकॉर्ड
2 Apr, 2026 11:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। आत्मनिर्भर भारत अभियान के मोर्चे पर भारतीय अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर है। देश का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ₹38,424 करोड़ के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा न केवल भारतीय उद्योग की बढ़ती उत्पादन क्षमता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की मजबूत होती साख का भी सीधा प्रमाण है।
आंकड़ों में रिकॉर्ड छलांग
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा गुरुवार को साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष में रक्षा निर्यात में पिछले साल के मुकाबले 62.66 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। मूल्य के लिहाज से देखा जाए तो यह ₹14,802 करोड़ का बड़ा उछाल है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस अहम उपलब्धि की जानकारी देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा निर्यात की एक प्रभावशाली सफलता की कहानी लिख रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्यात में आया यह भारी उछाल भारत की स्वदेशी क्षमताओं और उन्नत विनिर्माण ताकत में बढ़ते वैश्विक भरोसे को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी से हासिल हुई उपलब्धि
इस रिकॉर्ड व्यावसायिक प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की मजबूत संयुक्त भागीदारी है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार:
डीपीएसयू की हिस्सेदारी: इस कुल रक्षा निर्यात में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) का योगदान 54.84 प्रतिशत रहा है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी: वहीं, निजी उद्योगों ने 45.16 प्रतिशत का अहम योगदान देकर देश में एक सहयोगी और आत्मनिर्भर रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र की ताकत का प्रदर्शन किया है।
भविष्य की संभावनाएं: वर्तमान में, रक्षा उपकरणों और प्लेटफॉर्म्स के निर्माण में निजी उद्योग का योगदान लगभग 25 प्रतिशत है। रक्षा मंत्री के अनुसार, निकट भविष्य में इसके कुल उत्पादन मूल्य का 50 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है।
उत्पादन और नौसेना में शत-प्रतिशत आत्मनिर्भरता
निर्यात के साथ-साथ घरेलू रक्षा उत्पादन भी तेज गति से बढ़ रहा है। मार्च में आयोजित एक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने बताया था कि सरकार के प्रयासों से वित्त वर्ष 2024-25 में घरेलू रक्षा उत्पादन ₹1.50 लाख करोड़ के पार चला गया था, और तब निर्यात लगभग ₹24,000 करोड़ के स्तर पर था। आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा उदाहरण नौसेना के क्षेत्र में दिख रहा है। रक्षा मंत्री के मुताबिक, भारतीय नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए सभी युद्धपोत और पनडुब्बियां अब पूरी तरह भारतीय शिपयार्ड में ही बन रही हैं। इनकी डिजाइनिंग से लेकर इंजीनियरिंग, निर्माण और जीवनचक्र समर्थन तक सब कुछ स्वदेशी है। राजनाथ सिंह ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा, "आत्मनिर्भरता अब सिर्फ एक नारा नहीं है; यह एक व्यावहारिक वास्तविकता के रूप में स्थापित हो रही है। 'बिल्डर्स नेवी' कोई नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है"। सरकार ने वित्त वर्ष 2029-30 तक रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। 62.66% की वर्तमान विकास दर और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए, भारत न केवल इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सही ट्रैक पर है, बल्कि वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखला में खुद को एक प्रमुख निर्यातक के रूप में भी स्थापित कर रहा है।
ईरान मुद्दे पर ट्रंप के तेवर, निवेशकों में बढ़ी घबराहट
2 Apr, 2026 11:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव का सीधा असर अब वैश्विक और घरेलू सर्राफा बाजार पर दिखने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर कड़े सैन्य हमले जारी रखने की चेतावनी के बाद, गुरुवार को घरेलू वायदा बाजार (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। इस बयान ने युद्ध के शांत होने की उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया है, जिससे लगातार चार दिनों से जारी सोने की तेजी पर अचानक ब्रेक लग गया है।
वायदा बाजार और हाजिर कीमतों के आंकड़े
भू-राजनीतिक घटनाक्रमों में तेजी से हो रहे बदलाव के कारण कमोडिटी बाजार में भारी बिकवाली देखी जा रही है।
चांदी की कीमतों में क्रैश: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर मई 2026 डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव 13,613 रुपये (लगभग 5.5%) की भारी गिरावट के साथ 2,29,888 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है।
सोना भी धड़ाम: जून 2026 डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में भी 2,574 रुपये (1.6%) की बड़ी गिरावट आई है, जिसके बाद यह 1,51,161 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। यह अपने हालिया उच्चतम स्तर से बड़ी गिरावट है।
मुंबई हाजिर बाजार: स्थानीय हाजिर बाजार में, मुंबई में 22 कैरेट मानक सोने की कीमत 1,12,168 रुपये प्रति 8 ग्राम और 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत 1,22,368 रुपये प्रति 8 ग्राम दर्ज की गई है।
ईरान संकट और मजबूत डॉलर
टेलीविजन पर दिए गए एक संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर "बेहद कड़ा" प्रहार करेगा और वे अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के करीब हैं। इसके चलते पूरे कमोडिटी और वित्तीय बाजार का सेंटिमेंट बदल गया:
कच्चे तेल में उबाल: ट्रंप के बयानों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड 4 से 5 प्रतिशत तक उछलकर 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।
बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स: 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और मजबूत डॉलर इंडेक्स ने सोने-चांदी पर भारी दबाव बनाया है। पृथ्वी फिनमार्ट के विशेषज्ञ मनोज कुमार जैन के अनुसार, इन दोनों में बढ़त सोने के लिए नकारात्मक साबित हो रही है।
ब्याज दरों पर असर: मुद्रास्फीति बढ़ने के जोखिमों को देखते हुए अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 2026 के अंत से पहले ब्याज दरों में कटौती की संभावना काफी कम हो गई है।
प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी धातुओं में भी गिरावट
इस बिकवाली का असर केवल सोने-चांदी तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक धातु बाजार में प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी धातुओं में भी भारी गिरावट आई है। वैश्विक बाजार में भी स्पॉट चांदी 2.9% गिरकर 72.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। उच्च यील्ड के कारण निवेशकों का रुझान अब नॉन-यील्डिंग एसेट्स से कम हो रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण निकट भविष्य में कीमती धातुओं में भारी अस्थिरता बनी रहेगी। साप्ताहिक आधार पर चांदी को 64 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस और सोने को 4,470 डॉलर पर अहम सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। ऐसे में विश्लेषकों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे तेजी आने पर मुनाफावसूली करें और उच्च स्तरों पर नई लॉन्ग पोजीशन बनाने से फिलहाल परहेज करें।
शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स-निफ्टी दोनों लुढ़के
2 Apr, 2026 10:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को बुरी तरह धराशायी हो गए। सेंसेक्स लगभग 1300 अंकों से अधिक गिर गया और निफ्टी बुधवार की बढ़त के बाद 22,250 से नीचे आ गया। निवेशकों ने अन्य कारणों के साथ-साथ ईरान-अमेरिका युद्ध में ट्रंप की टिप्पणियों पर रिएक्शन दिया, जिससे बेंचमार्क पिटते दिखे। सुबह 9.39 बजे सेंसेक्स 1,394.38 (-1.90%) अंक टूटकर 71,739.94 पर जबकि निफ्टी 407.75 (1.80%) अंक फिसलकर 22,271.65 पर कारोबार करता दिखा। इस दौरान बैंकिंग और फार्मा सेक्टर के शेयरों में तेज बिकवाली दिखी। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग दो प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार सुबह के कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसईसेंसेक्स 1,433.72 अंक या 1.96 प्रतिशत लुढ़ककर 71,700.60 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 445.70 अंक या 1.97 प्रतिशत का गोता लगाकर 22,233.70 के स्तर पर पहुंच गया। उल्लेखनीय है कि इसके ठीक एक दिन पहले बुधवार को सेंसेक्स 1,186.77 अंकों की छलांग के साथ 73,134.32 पर और निफ्टी 348 अंक चढ़कर 22,679.40 पर बंद हुआ था। बाजार की इस भारी गिरावट के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव सबसे बड़ा कारक है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, "राष्ट्रपति ट्रंप की इस घोषणा के बाद कि 'हम अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर बेहद कड़ा प्रहार करने जा रहे हैं', बाजार की धारणा फिर से नकारात्मक हो गई है"।
इस सैन्य तनाव के डर से ऊर्जा बाजार में भी भारी हलचल है:
कच्चा तेल: वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' लगभग 4.44 से 5 प्रतिशत की तेजी के साथ 105.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
बॉन्ड यील्ड और कमोडिटी: अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.36 प्रतिशत हो गई है, जिसका सोने और चांदी की कीमतों पर मामूली नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
विदेशी फंड्स की निकासी: एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 8,331.15 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी बिकवाली की, हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 7,171.80 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की।
प्रमुख कंपनियों और एशियाई बाजारों पर असर
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियां नुकसान में कारोबार कर रही थीं। सबसे ज्यादा पिछड़ने वाले प्रमुख शेयरों में सन फार्मा, इंडिगो, अदाणी पोर्ट्स, इटरनल, लार्सन एंड टुब्रो, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ट्रेंट, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक और पावरग्रिड शामिल रहे। इसका असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिकी बाजार बुधवार को भले ही बढ़त के साथ बंद हुए हों, लेकिन गुरुवार को व्यापक एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4.31 प्रतिशत, जापान का निक्केई 2.24 प्रतिशत, हांगकांग का हैंगसेंग 1.04 प्रतिशत और शंघाई का कंपोजिट इंडेक्स 0.53 प्रतिशत गिर गया।
रुपया 151 पैसे मजबूत हुआ
भारतीय रुपये ने ऐतिहासिक निचले स्तर से शानदार वापसी करते हुए गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 151 पैसे की मजबूत रिकवरी दर्ज की है। यह उछाल मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से 'ऑनशोर फॉरवर्ड डिलीवरी मार्केट' में बैंकों की नेट ओपन पोजीशन को सीमित करने के त्वरित कदम का नतीजा है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया 94.62 पर खुला और शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेजी से बढ़कर 93.19 पर पहुंच गया। पिछले बंद भाव के मुकाबले रुपये में 151 पैसे या 1.6 प्रतिशत की मजबूती आई है।
आगे का आउटलुक
वैश्विक अस्थिरता का सीधा असर भारतीय रुपये और घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। विशेषज्ञ वीके विजयकुमार ने आगाह किया है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमत, बढ़ता व्यापार घाटा, घटते रेमिटेंस (प्रेषण) की आशंका और लगातार एफपीआई (एफपीआई) बिकवाली रुपये पर भारी दबाव डाल रहे हैं। डॉलर वायदा सौदों पर आरबीआई (आरबीआई) के प्रतिबंधों के बावजूद यह दबाव कम नहीं हो रहा है। आगे चलकर बाजार और अर्थव्यवस्था की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया के सैन्य घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।
आरबीआई की सख्ती का असर, रुपये ने पकड़ी रफ्तार
2 Apr, 2026 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय रुपये ने ऐतिहासिक निचले स्तर से शानदार वापसी करते हुए गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 151 पैसे की मजबूत रिकवरी दर्ज की है। यह उछाल मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से 'ऑनशोर फॉरवर्ड डिलीवरी मार्केट' में बैंकों की नेट ओपन पोजीशन को सीमित करने के त्वरित कदम का नतीजा है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण मुद्रा बाजार पर अब भी दबाव बना हुआ है।
सोमवार को 95 का चिंताजनक स्तर पार कर गया था रुपया
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को रुपया 94.62 के स्तर पर खुला और जल्द ही 1.6 प्रतिशत (151 पैसे) की तेज बढ़त के साथ 93.19 के स्तर पर पहुंच गया। गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 94.84 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ था और सोमवार को इसने 95 का चिंताजनक स्तर भी पार कर लिया था। रुपये की इस भारी गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई को सीधा हस्तक्षेप करना पड़ा। केंद्रीय बैंक ने 27 मार्च, 2026 को जारी एक सर्कुलर के माध्यम से बैंकों के लिए भारतीय रुपये पर 'नेट ओपन पोजिशन' की सीमा 10 करोड़ डॉलर तय कर दी है और बैंकों को 10 अप्रैल तक इस नियम का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
क्रूड में उबाल और शेयर बाजार धड़ाम
रुपये को मिले इस नीतिगत सहारे के बावजूद मैक्रो-इकोनॉमिक चुनौतियां बरकरार हैं:
ग्लोबल मार्केट: डॉलर इंडेक्स 0.32 प्रतिशत बढ़कर 99.77 पर कारोबार कर रहा है, जो दुनिया की अन्य मुद्राओं पर दबाव डाल रहा है।
कच्चा तेल: वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' वायदा बाजार में 4.84 प्रतिशत के बड़े उछाल के साथ 106.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
शेयर बाजार: गुरुवार के शुरुआती कारोबार में घरेलू बाजारों में हाहाकार मचा। सेंसेक्स 1,312.91 अंक (1.80%) लुढ़ककर 71,821.41 पर और निफ्टी 410.45 अंक (1.81%) गिरकर 22,383.40 पर आ गया।
विदेशी निकासी: एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 8,331.15 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी शुद्ध बिकवाली की है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, "कच्चे तेल की ऊंची कीमत, बढ़ता व्यापार घाटा, घटते रेमिटेंस की आशंका और लगातार FPI बिकवाली एक साथ मिलकर रुपये पर भारी दबाव डाल रहे हैं"। 28 फरवरी, 2026 को पश्चिम एशिया युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है और मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में मुद्रा डॉलर के मुकाबले लगभग 10 प्रतिशत कमजोर हुई है।
जीएसटी कलेक्शन में तेजी
विदेशी मोर्चे पर चुनौतियों के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था से एक बड़ी राहत की खबर है। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयात और घरेलू बिक्री में तेजी के दम पर मार्च में जीएसटी राजस्व लगभग 9 प्रतिशत बढ़ा है। टैक्स कलेक्शन 2 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया है, जो 2025-26 के वित्तीय वर्ष में तीसरी सबसे बड़ी मासिक वसूली है।
अब आगे क्या?
रिजर्व बैंक की ओर से उठाए गए कदमों से गिरता रुपया फिलहाल थम गया है। लेकिन रिकॉर्ड महंगाई और कच्चे तेल की कीमतें जो 106 डॉलर का स्तर पार कर चुका है, से भारत का आयात बिल बढ़ना तय है। ऐसे में आने वाले समय में रुपये की स्थिरता बहुत हद तक पश्चिम एशिया के तनाव और विदेशी निवेशकों (एफपीआई) की वापसी पर निर्भर करेगी।
पेट्रोकेमिकल उद्योग को राहत, 30 जून तक ड्यूटी में छूट
2 Apr, 2026 09:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे मौजूदा भू-राजनीतिक संकट के बीच भारत सरकार ने घरेलू उद्योगों और आम जनता को बड़ी राहत दी है। वित्त मंत्रालय ने प्रमुख पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात पर कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) में छूट देने का एलान किया है। मंत्रालय के अनुसार, यह रियायत 30 जून तक लागू रहेगी। इस कदम का मकसद पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष प्रभावित होने वाली आपूर्ति शृंखला को दुरुस्त करने के लिए प्रमुख सेक्टर्स को कच्चे माल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
पश्चिम एशिया तनाव और कच्चे तेल में उबाल
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। इस युद्ध के कारण महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग बाधित हुए हैं, जिससे भारत में उर्वरक (फर्टिलाइजर), कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। गौरतलब है कि भारत उर्वरक और पेट्रोलियम का एक प्रमुख आयातक देश है। इस युद्ध के शुरू होने के बाद से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत का भारी उछाल आ चुका है।
उद्योगों के लिए रणनीतिक राहत
वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, कस्टम ड्यूटी में छूट का मुख्य उद्देश्य घरेलू उद्योग के लिए महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल इनपुट की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना और डाउनस्ट्रीम (आश्रित) क्षेत्रों पर लागत का दबाव कम करना है।
सरकार ने जिन प्रमुख उत्पादों को कस्टम ड्यूटी से मुक्त किया है, उनमें मेथेनॉल, निर्जल अमोनिया, टोल्यूनि , स्टाइरीन, डाइक्लोरोमेथेन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर और अनसैचुरेटेड पॉलिएस्टर रेजिन जैसी वस्तुएं शामिल हैं। इस फैसले से निम्नलिखित सेक्टर्स को सीधा फायदा होगा:
प्लास्टिक्स और पैकेजिंग: कच्चे माल की लागत घटने से इस सेक्टर में उत्पादन सस्ता होगा।
टेक्सटाइल्स: कपड़ा उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट्स को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने में मदद मिलेगी।
फार्मा और केमिकल्स: दवा उद्योग और रसायन क्षेत्र को सप्लाई में स्थिरता मिलेगी।
ऑटो कंपोनेंट्स: ऑटोमोबाइल कलपुर्जे बनाने वाले उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी।
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उत्पादन लागत घटने का फायदा अंतिम उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले आम उपभोक्ताओं को भी मिलेगा। इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर से आम जनता को बचाने के लिए सरकार ने पिछले सप्ताह ही पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की बड़ी कटौती की थी। इस कटौती के बाद वर्तमान में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क मात्र 3 रुपये प्रति लीटर रह गया है, जबकि डीजल पर उत्पाद शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर 29.50 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क भी लगा दिया है।
बैंकिंग सेक्टर में हड़कंप: RBI ने 14 बैंकों को दंडित किया, एक बैंक का लाइसेंस रद्द
2 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) बैंकिंग सेक्टर में नियमों का पालन सुनिश्चित करता है। ताकि ग्राहकों के हितों की रक्षा हो सके। मार्च में आरबीआई ने कई बैंकों के खिलाफ सख्ती दिखाई है। 14 बैंकों पर पेनल्टी लगाई है। इस लिस्ट में कई पब्लिक सेक्टर और सहकारी बैंक शामिल हैं। वहीं एक बैंक को हमेशा के लिए बंद भी कर दिया गया है, लाइसेंस रद्द करने का आदेश सेंटर बैंक ने जारी किया था। कुछ पर प्रतिबंध भी लगाया गया है, अस्थायी रूप से कारोबार बंद करने का आदेश जारी किया है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने 14 बैंकों पर जुर्माना लगाया है। सभी ने नियमों का उल्लंघन किया है, जिसका पता निरीक्षण के दौरान चला था। कारण बताओ नोटिस पर प्राप्त जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई प्रस्तुतियों के आधार आरोप साबित होने के बाद पेनल्टी लगाई गई। हालांकि यह कार्रवाई विनियामक खामियों पर आधारित है, इसलिए इसका असर ग्राहकों और बैंकों के बीच हो रहे किसी भी लेनदेन या एग्रीमेंट पर नहीं पड़ेगा।
इन बैंकों पर लगा जुर्माना
एयरटेल पेमेंट्स बैंक लिमिटेड
दावनगेरे डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, कर्नाटक
इटावा में स्थित नगर सहकारी बैंक लिमिटेड, उत्तर प्रदेश
यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया
बैंक ऑफ़ इंडिया
सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया
द तनूर को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड, केरल
लोकनेते आरडी अप्पा क्षीरसागर सहकारी बैंक लिमिटेड, निफाद, महाराष्ट्र
द पाली डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, राजस्थान
कोडागु डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड, कर्नाटक
द मैसूर एंड चमराजनगर डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड, कर्नाटक
हॉन्ग कोंग एंड शांगहाई बैंकिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड
वलचंदनगर में स्थित वलचंदनगर सहकारी बैंक लिमिटेड, महाराष्ट्र
द पल्लिकाेंडा को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, तमिलनाडु
इस बैंक का लाइसेंस रद्द
आरबीआई ने कर्नाटक में स्थित शिमशा सहकारा बैंक नियमिथा का लाइसेंस रद्द करने का आदेश मार्च 2026 में जारी किया है। अब इसे बैंकिंग कारोबार करने की अनुमति नहीं होगी। कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस बैंक को 24 मई 2026 तक बिजनेस बंद रखने का आदेश दिया था। जिसे खारिज कर दिया गया है।
इन बैंकों पर लगा प्रतिबंध
आरबीआई ने लखनऊ में स्थित द यूपी सिविल सेक्रेटेरिएट प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड और गुजरात में स्थित राज्य कर्मचारी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड अहमदाबाद पर प्रतिबंध लगाया गया है। दोनों को 11 मार्च से कारोबार बंद करने का निर्देश दिया है। वहीं कनक पट्टन सहकारी बैंक नियमित दावणगेरे को 12 मार्च से बिजनेस बंद करने का आदेश जारी किया है। तीनों बैंकों यह आदेश 6 महीने तक लागू रहेगा। गहकों को पैसे निकालने की अनुमति नहीं होगी। इस दौरान रिजर्व बैंक बैंकों के स्थिति की समीक्षा करेगा।
भारत की विदेश नीति स्वतंत्र, तेल बाजार पर दबाव स्वीकार नहीं: रूस
1 Apr, 2026 03:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत के तेल बाजार को लेकर अमेरिका के दबाव के आरोपों पर रूस ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलिपोव ने कड़े शब्दों में कहा है कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय राजनीति में किसी भी तरह के अमेरिकी दबाव को पूरी तरह खारिज करता है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि नई दिल्ली अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है। डेनिस अलिपोव ने कहा कि अमेरिका की ओर से भारत के बाजार में रूस के लिए बाधाएं खड़ी करने की कोशिशें वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से बिल्कुल सही नहीं हैं। जब अलिपोव से पूछा गया कि क्या टैरिफ विवाद के बीच भारत रूसी तेल का आयात कम कर रहा है, तो उन्होंने कहा, "मैं अमेरिका-भारत व्यापार पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हूं। लेकिन हम वैश्विक राजनीति में किसी भी तरह के दबाव को सख्ती से खारिज करते हैं। यह व्यापार करने का सही तरीका नहीं है।" उन्होंने आगे कहा, "हम साफ तौर पर देख रहे हैं कि अमेरिका भारत के बाजार में रूस के लिए बाधाएं खड़ी करने की कोशिश कर रहा है। यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और व्यापार के लिए सही तरीका नहीं है। हम भारतीय तेल बाजार पर अमेरिकी दबाव को खारिज करते हैं। भारत एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है और हम ऐसे दबाव नहीं मानने के उनके रुख का स्वागत करते हैं।" रूस के राजदूत ने यह भी कहा कि मॉस्को और नई दिल्ली के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, खासकर ऊर्जा क्षेत्र में। उन्होंने कहा कि हाल के समय में भारत ने रूस से तेल आयात काफी बढ़ा दिया है।डेनिस अलिपोव ने कहा, "हम दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों का विस्तार कर रहे हैं। हाल ही में भारत को रूस से तेल की आपूर्ति में काफी बढ़ोतरी हुई है। हम इस दिशा में लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिससे दोनों देशों को लाभ हो।" पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में ऊर्जा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। उन्होंने इसे 'अमेरिकी ऑयल डिसरप्शन डिप्लोमेसी' का परिणाम बताया। उन्होंने कहा, "मध्य पूर्व की परिस्थितियों के बीच ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। लेकिन रूस और भारत के बीच व्यापार, खासकर तेल के क्षेत्र में, तेजी से आगे बढ़ रहा है और हम इसे जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित रूस यात्रा को लेकर अलिपोव ने कहा कि मॉस्को इस साल उनकी यात्रा का दिल से स्वागत करेगा। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच हर साल शिखर बैठक का एक तंत्र है और पिछले साल दिसंबर में रूसी राष्ट्रपति ने भारत का दौरा किया था।
अमेरिका-ईरान की लड़ाई पर क्या बोले अलीपोव?
अमेरिका के हमलों के जवाब में ईरान की जवाबी कार्रवाई पर रूस के रुख के बारे में पूछे जाने पर, भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा, "स्पष्ट रूप से, ईरान हमलों को नाकाम कर रहा है। इसके परिणाम अमेरिका की कथित इच्छाओं के बिल्कुल विपरीत रहे हैं। ज्यादातर समय, ईरान ने आंतरिक रूप से हमलों, अपने ऊपर हुए हवाई हमलों के जवाब में अपनी प्रतिक्रिया को और मजबूत किया है। लेकिन फिर भी, यह संकट के विस्तार का संकेत है और इस समय हम सभी को क्या करना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सैन्य कार्रवाई को रोकने और विरोधाभासों के समाधान के लिए राजनयिक वार्ता शुरू करने की दिशा में अधिक प्रयास करने चाहिए।"
ईंधन महंगा हुआ, जानें अब प्रीमियम पेट्रोल और डीजल कितने में मिलेगा
1 Apr, 2026 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Premium Petrol-Diesel Price Hike: मिडिल ईस्ट जंग के बीच एक बार फिर प्रीमियम पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं. अभी सिर्फ इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL) ने प्रीमियम ईंधन की कीमत बढ़ाने का फैसला किया है. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के इस फैसले से आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा. यहां जानें अब कितने में मिलेगा प्रीमियम पेट्रोल-डीजल.
IOCL ने पेट्रोल में करीब 11 रुपए और डीजल पर करीब 1.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की है. यानी दिल्ली में जो प्रीमियम पेट्रोल अब तक 149 रुपए में मिलता था. अब वह 160 रुपए प्रति लीटर मिलेगा. वहीं प्रीमियम डीजल ‘एक्स्ट्रा ग्रीन’ के दाम 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं. इन दिनों कच्चे तेल की कीमत आसमान छूती जा रही हैं. तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव को देखते हुए ही तेल कंपनियों ने यह निर्णय लिया है.
कई कंपनियां बढ़ा रहीं कीमत
मीडिया रिपोर्ट के सूत्रों के मुताबिक, भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी कंपनियों ने अपनी कीमतों पर इजाफा किया है. हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि कितने रुपए की बढ़ोत्तरी की जाएगी. प्रीमियम पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह से इसके इस्तेमाल पर कमी आ सकती है.
20 मार्च को बढ़ी थी प्रीमियम पेट्रोल की कीमत
बता दें, इससे पहले 20 मार्च को भी प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2 से 2.30 रुपये का इजाफा किया गया था. हालांकि नार्मल पेट्रोल पर कोई बदलाव नहीं किया गया था. एक बार फिर तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमत में इजाफा किया है. पेट्रोल-डीजल की कीमतें मिडिल ईस्ट जंग की वजह से बढ़ी हुई हैं. क्योंकि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर रखा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह रास्ता है, जहां से दुनिया के ज्यादातर देशों को तेल-गैस की सप्लाई होती है. फिलहाल, अगर यह जंग अभी कुछ और दिनों तक चलती रही, तो कीमतें और बढ़ने की उम्मीद है.
एयरलाइंस को मिली राहत, जेट फ्यूल प्राइस में बढ़ोतरी पर सरकार का फैसला सराहा
1 Apr, 2026 12:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जहाजों के ईंधन की कीमतों में केवल आंशिक बढ़ोतरी की अनुमति देने के सरकार के फैसले का विमानन कंपनियों ने स्वागत किया है। एयरलाइंस का कहना है कि इस कदम से हवाई किराए में स्थिरता बनी रहेगी और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यात्रियों और कंपनियों दोनों को राहत मिलेगी। इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने एक बयान में प्रधानमंत्री, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का आभार जताते हुए कहा कि यह फैसला एयरलाइंस के लिए स्थिरता सुनिश्चित करेगा और यात्रियों को सस्ती व सुलभ यात्रा का लाभ देने में मदद करेगा। स्पाइसजेट के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अजय सिंह ने भी इसे विमानन उद्योग के लिए बड़ी राहत बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में एटीएफ कीमतों में नियंत्रित बढ़ोतरी एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे एयरलाइंस पर लागत का दबाव कम होगा। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने भी इस फैसले को समयानुकूल बताते हुए कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण ATF कीमतों में 100% से अधिक वृद्धि की आशंका थी। ऐसे में पेट्रोलियम मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के समन्वय से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने घरेलू उड़ानों के लिए केवल 25% (करीब 15 रुपये प्रति लीटर) की चरणबद्ध बढ़ोतरी लागू की है, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पूरी बाजार आधारित कीमत लागू रहेगी।1 अप्रैल 2026 से लागू नई दरों के अनुसार, दिल्ली में ATF की कीमत 96,638.14 रुपये से बढ़कर 1,04,927 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है। कोलकाता में यह 99,587.14 रुपये से बढ़कर 1,09,450 रुपये, मुंबई में 90,451.87 रुपये से बढ़कर 98,247 रुपये और चेन्नई में 1,00,280.49 रुपये से बढ़कर 1,09,873 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है।
सर्राफा बाजार में कीमतों का खेल, कभी तेजी तो कभी गिरावट
1 Apr, 2026 09:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सोने-चांदी की कीमतों में बुधवार को उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सोना 750 रुपये उछलकर 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी 1380 रुपये गिरकर 2.40 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई।
वैश्विक बाजार का हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को लगातार तीसरे दिन तेजी दर्ज की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ जारी युद्ध के अगले दो से तीन हफ्तों में समाप्त होने की उम्मीद जताई। कॉमेक्स पर सोने की कीमत 1.25% बढ़कर 4,737 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, जबकि पिछले सत्र में इसमें 3.5% की मजबूती देखी गई थी। वहीं, चांदी की कीमत एशियाई कारोबार के दौरान 0.42% चढ़कर 75.23 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
तेजी के पीछे क्या वजह?
अमेरिका की ओर से संकेत मिले हैं कि उसने अपने सैन्य लक्ष्य काफी हद तक हासिल कर लिए हैं और अब होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े तनाव को सुलझाने की जिम्मेदारी अन्य देशों को निभानी चाहिए। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी शर्तों के साथ संघर्ष समाप्त करने की इच्छा जताई है। हालांकि हालिया तेजी के बावजूद मार्च महीने में सोने की कीमतों में करीब 12% की गिरावट दर्ज की गई, जो अक्तूबर 2008 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट है।
वैश्विक हालात का असर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका है, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। तेल और अन्य कमोडिटी की सप्लाई प्रभावित होने से महंगाई बढ़ने और आर्थिक विकास धीमा पड़ने की आशंका भी बढ़ी है। इस बीच, निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व और उसके चेयरमैन जेरोम पॉवेल के बयानों पर टिकी है, खासकर ब्याज दरों को लेकर संकेतों के लिए। बॉन्ड बाजार में भी फोकस अब महंगाई से हटकर युद्ध के आर्थिक असर पर शिफ्ट हो गया है।
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