व्यापार
E20 फ्यूल पर बहस के बीच सरकार का मास्टर प्लान, इथेनॉल ब्लेंडिंग को मिलेगी नई रफ्तार
20 Jul, 2026 12:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश में पारंपरिक ईंधन यानी पेट्रोल और डीजल के आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार इथेनॉल मिश्रण (ब्लेंडिंग) कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। इस दिशा में एक बड़ा निर्णय लेते हुए सरकार ने इथेनॉल विनिर्माता डिस्टिलरियों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध कराने का खाका तैयार कर लिया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा भारतीय खाद्य निगम (FCI) के बफर स्टॉक से डिस्टिलरियों को रियायती दरों पर चावल आवंटित करने के साथ-साथ ई-नीलामी की प्रक्रिया को भी हरी झंडी दे दी गई है। इस दूरगामी नीति से घरेलू स्तर पर जैव ईंधन के उत्पादन को नया आयाम मिलेगा और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
डिस्टिलरियों के लिए 72 लाख टन चावल का ऐतिहासिक आवंटन
अनाज आधारित इथेनॉल निर्माण को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने आपूर्ति वर्ष 2026-27 हेतु भारतीय खाद्य निगम के भंडार से 72 लाख टन चावल आरक्षित करने का निर्णय लिया है। यह मात्रा पूर्ववर्ती आपूर्ति वर्ष 2025-26 के 52 लाख टन आवंटन की तुलना में काफी अधिक है। इसके अतिरिक्त राइस मिलिंग ट्रांसफॉर्मेशन योजना के तहत उत्पादित 55 लाख टन टूटे (ब्रोकन) चावल को ई-नीलामी के माध्यम से बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। मंत्रालय द्वारा डिस्टिलरियों के लिए चावल की बिक्री दर ₹2,390 प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है, जिससे डिस्टिलरियों को पूरे वर्ष बिना किसी बाधा के कच्चा माल मिलता रहेगा।
ईंधन विपणन कंपनियों की खरीद दर और डिस्टिलरी इकॉनमी
वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत पेट्रोलियम तेल विपणन कंपनियों के लिए एफसीआई के चावल से निर्मित इथेनॉल को ₹58.5 प्रति लीटर की पूर्व-निर्धारित दर से खरीदना अनिवार्य किया गया है, जबकि टूटे चावल से उत्पादित इथेनॉल का क्रय मूल्य ₹64 प्रति लीटर तय है। ई-नीलामी के जरिए उपलब्ध कराए जा रहे शत-प्रतिशत टूटे हुए चावल के उपयोग पर कोई तकनीकी प्रतिबंध न होने से डिस्टिलरियां इसका उपयोग इथेनॉल विनिर्माण में सुगमता से कर सकेंगी। इस कदम से डिस्टिलरी उद्योग की परिचालन लागत में सुधार होगा और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।
पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य की दिशा में कदम
सरकार पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण को मौजूदा 20 प्रतिशत के स्तर से आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर गंभीरता से परीक्षण कर रही है। देश में लगभग 2,000 करोड़ लीटर की वार्षिक इथेनॉल निर्माण क्षमता के मुकाबले तेल कंपनियों को 20 फीसदी मिश्रण के लक्ष्य को बनाए रखने के लिए प्रतिवर्ष 1,050 से 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल की जरूरत होती है। मानसून की अनिश्चितताओं के कारण गन्ने और मक्के की पैदावार में होने वाले उतार-चढ़ाव के दौरान केंद्रीय भंडार में मौजूद यह अधिशेष चावल इथेनॉल की अबाध आपूर्ति की गारंटी देगा।
राज्य एजेंसियों हेतु अनाज आवंटन और केंद्रीय दिशा-निर्देश जारी
केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों और उनकी अधिकृत एजेंसियों के लिए भी चावल आपूर्ति के दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके तहत जुलाई से अक्टूबर अवधि के लिए ₹2,320 प्रति क्विंटल की दर से 16 लाख टन तथा नवंबर 2026 से जून 2027 के मध्य ₹2,390 प्रति क्विंटल की दर से 32 लाख टन चावल आवंटित किया गया है। दूसरी ओर, राष्ट्रीय सहकारी समितियों के माध्यम से 'भारत' ब्रांड के तहत की जाने वाली खुदरा बिक्री के लिए आवंटन को फिलहाल स्थगित रखा गया है, जिसकी संशोधित मात्रा और समय-सारणी शीघ्र ही जारी की जाएगी।
SBI Funds IPO को लेकर बाजार में उत्साह, लिस्टिंग से पहले प्रीमियम में बड़ा उछाल
20 Jul, 2026 12:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: देश के सबसे बड़े म्यूचुअल फंड मैनेजर 'एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट' के शेयरों की कल यानी मंगलवार, 21 जुलाई को घरेलू शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री होने जा रही है। बाजार में कदम रखने से ठीक पहले अनऑफिशियल ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयरों को लेकर जबर्दस्त उत्साह देखा जा रहा है और यह करीब 18 फीसदी के मजबूत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। यह आईपीओ ओवरऑल सब्सक्रिप्शन के मामले में देश का पांचवां सबसे बड़ा आईपीओ बन चुका है। जिन निवेशकों को इस आईपीओ में अलॉटमेंट मिला है, वे कल सुबह की लिस्टिंग का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
देश का 5वां सबसे बड़ा आईपीओ और बोलियों का रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन
कुल ₹9,813 करोड़ के इस विशाल आईपीओ को लेकर बाजार के सभी वर्गों के निवेशकों में अभूतपूर्व क्रेज देखने को मिला था। 14 जुलाई से 16 जुलाई तक खुले रहे इस इश्यू को रिकॉर्ड तोड़ रिस्पांस मिला और यह कुल मिलाकर 41.66 गुना सब्सक्राइब हुआ। संस्थागत निवेशकों यानी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के कैटेगरी में रिकॉर्ड 140.11 गुना से अधिक बोलियां प्राप्त हुई थीं, जिसने इस आईपीओ को भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास के सबसे सफल आईपीओ की सूची में शामिल कर दिया।
प्राइस बैंड और ऑफर फॉर सेल संरचना की जानकारी
कंपनी ने इस आईपीओ का प्राइस बैंड ₹545 से ₹574 प्रति शेयर निर्धारित किया था। यह सार्वजनिक निर्गम पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) संरचना पर आधारित था, जिसके अंतर्गत प्रमोटर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और अमुंडी इंडिया होल्डिंग ने मिलकर अपनी हिस्सेदारी के 20.37 करोड़ इक्विटी शेयर बेचे हैं। चूंकि यह पूरी तरह से ओएफएस आधारित इश्यू था, इसलिए आईपीओ के माध्यम से जुटाए गए संपूर्ण फंड प्रमोटर्स के पास जाएंगे और कंपनी के खाते में कोई नई पूंजी शामिल नहीं होगी।
भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में निर्विवाद मार्केट लीडर
वर्ष 1992 में स्थापित हुई यह दिग्गज परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी देश के सबसे बड़े 'एसबीआई म्यूचुअल फंड' के निवेश का प्रबंधन करती है। उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) लगभग ₹16.32 लाख करोड़ के विशाल स्तर को छू चुका है। पूरे भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में कंपनी अकेले 15.5 फीसदी से अधिक की विशाल बाजार हिस्सेदारी पर काबिज है, जो इसे इस सेक्टर की निर्विवाद लीडर बनाती है।
ग्रे मार्केट में दमदार रुझान और तगड़े लिस्टिंग गेन के संकेत
आईपीओ गतिविधियों पर नजर रखने वाले प्रमुख विश्लेषकों के अनुसार, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹103 प्रति शेयर के आसपास मजबूत बना हुआ है। इस जीएमपी के आधार पर यदि गणना की जाए तो ऊपरी प्राइस बैंड ₹574 की तुलना में यह शेयर लगभग ₹677 के स्तर पर लिस्ट हो सकता है। ऐसे में कल बाजार खुलते ही निवेशकों को पहले ही दिन प्रति शेयर करीब 18 फीसदी का तगड़ा लिस्टिंग मुनाफा मिलने के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं।
Stock Market Update: बाजार में कमजोरी, सेंसेक्स में बड़ी गिरावट; निफ्टी ने गंवाया अहम स्तर
20 Jul, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान के साथ कारोबार करने लगे। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 523.22 अंक लुढ़ककर 77,628.23 अंक के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी भी 134.10 अंकों की गिरावट दर्ज करते हुए 24,198.25 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। बाजार में जारी इस गिरावट के पीछे वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली को मुख्य कारण माना जा रहा है।
विदेशी पूंजी की निकासी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का रुख
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में विदेशी पूंजी के लगातार बाहर जाने से भारतीय मुद्रा पर दबाव साफ तौर पर दिखाई दिया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पिछले बंद स्तर 96.30 की तुलना में 96.53 के स्तर पर कमजोरी के साथ खुला। यद्यपि कारोबार के दौरान स्थानीय मुद्रा ने अपनी शुरुआती गिरावट में आंशिक सुधार किया और 96.41 के स्तर पर पहुंचकर 11 पैसे की कमजोरी के साथ कारोबार करने लगी। इससे पूर्व शुक्रवार को अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई कमी और सकारात्मक घरेलू माहौल के कारण रुपया 12 पैसे मजबूत होकर 96.30 पर बंद हुआ था।
वैश्विक तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका व ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई। वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 2.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 90.26 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही ठप होने और अमेरिकी हवाई हमलों के बाद ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई को लेकर बहरीन द्वारा जारी मिसाइल अलर्ट ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी का सकारात्मक संकेत
वित्तीय बाजार में मची उथल-पुथल के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के मोर्चे पर राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 10 जुलाई को समाप्त सप्ताह में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 964 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि के साथ 675.157 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। इससे पिछले सप्ताह में भी कुल भंडार में 7.26 बिलियन डॉलर की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जो देश की बाह्य वित्तीय स्थिति को मजबूती प्रदान करती है।
शेयर बाजार की अनिश्चितता और निवेशकों के लिए दृष्टिकोण
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अस्थिर भू-राजनीतिक माहौल के कारण घरेलू शेयर बाजार में आने वाले दिनों में भी उतार-चढ़ाव बना रहने की संभावना है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की चाल और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम आगामी कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में सतर्कता बरतें और मौलिक रूप से मजबूत क्षेत्रों में ही अपने निवेश को प्राथमिकता दें।
महंगाई की चिंता बढ़ी, कच्चे तेल के उबाल के बीच सोने पर दबाव
20 Jul, 2026 10:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है। वैश्विक समाचार एजेंसियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना घटकर 4,014.53 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया है। इसके साथ ही आगामी अगस्त महीने की डिलीवरी वाला अमरीकी गोल्ड फ्यूचर्स भी फिसलकर 4,019.80 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुमूल्य धातुओं के मूल्यों में हो रहे इस बदलाव का सीधा असर भारतीय आभूषण बाजार पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
कच्चे तेल में उछाल और ब्याज दरों में वृद्धि की आशंका
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के कारण ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई हैं। कच्चे तेल के दामों में आई इस तेजी ने दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की चिंताओं को एक बार फिर गहरा कर दिया है। इस स्थिति को देखते हुए अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के कई नीति-निर्माताओं ने संकेत दिए हैं कि बढ़ती कीमतों और महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए आने वाले समय में ब्याज दरों में पुनः बढ़ोतरी की जा सकती है।
ब्याज दरों के रुख का सोने की चमक पर असर
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार जब ब्याज दरों में वृद्धि होती है, तो निवेशक अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों की ओर रुख करने लगते हैं जहाँ उन्हें अधिक रिटर्न की उम्मीद होती है। यही वजह है कि ब्याज दरों का बढ़ना सोने और चांदी जैसी धातुओं के लिए एक नकारात्मक कारक माना जाता है। इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और जॉर्डन सीमा पर हुई हालिया हिंसक घटनाओं ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का माहौल और अधिक गहरा दिया है।
सोने से इतर चांदी और प्लेटिनम में तेजी
सोने के विपरीत अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अन्य कीमती धातुओं के दामों में मजबूती का रुख देखने को मिल रहा है। हाजिर चांदी यानी स्पॉट सिल्वर का भाव बढ़कर 56.95 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुँच गया है। इसी प्रकार प्लेटिनम की कीमतों में भी उछाल आया है और इसका भाव बढ़कर 1,599.97 डॉलर प्रति औंस पर दर्ज किया गया है। औद्योगिक मांग और बाजार के बदलते समीकरणों के कारण इन धातुओं को निचले स्तरों पर अच्छा समर्थन मिल रहा है।
चांदी खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर, फिर बढ़े दाम
20 Jul, 2026 10:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के मध्य उपजे ताजा तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। इसका सीधा प्रभाव भारतीय सर्राफा बाजार पर भी पड़ा है। कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में ही चांदी के दामों में एक बार फिर बड़ी बढ़त दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुरुआती सौदों के दौरान चांदी का वायदा भाव 1.38 प्रतिशत यानी 2,979 रुपये की छलांग लगाकर 2,19,382 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुँच गया। वैश्विक बाजार में भी हाजिर चांदी का भाव 57.37 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े को छू गया है।
घरेलू सर्राफा बाजार और खुदरा कीमतों में तेजी
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार सुबह के कारोबार में चांदी का भाव 2,15,474 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। वहीं खुदरा बाजार में विभिन्न विक्रेताओं और एजेंसियों के अनुसार चांदी का खुदरा मूल्य बढ़कर 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुँच चुका है। यदि आप भी इस बहुमूल्य धातु में निवेश या खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो अपने नजदीकी बाजार के हिसाब से रेट अवश्य जांच लें।
देश के विभिन्न प्रमुख शहरों में चांदी के ताजा दाम
देश के प्रमुख महानगरों और बड़े शहरों में चांदी की कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल रहा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पटना, लखनऊ, जयपुर, इंदौर, अहमदाबाद और बेंगलोर में एक किलोग्राम चांदी का भाव 2,30,000 रुपये दर्ज किया गया है। वहीं चेन्नई, हैदराबाद और भुवनेश्वर में यह दर 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई है। चंडीगढ़ में एक किलो चांदी 2,34,800 रुपये में बिक रही है, जबकि नासिक में यह दर 2,29,900 रुपये प्रति किलोग्राम बनी हुई है।
कीमतों में उछाल के पीछे प्रमुख वैश्विक कारण
बाजार के विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से वैश्विक अनिश्चितता गहरा गई है। ऐसी परिस्थितियों में निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में कीमती धातुओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त सौर ऊर्जा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी की निरंतर बढ़ती मांग, डॉलर के सूचकांक में उतार-चढ़ाव और आगामी समय में ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीदों ने भी चांदी की चमक को और बढ़ा दिया है।
पिछले कारोबारी सत्र का कैसा रहा था हाल
इससे पूर्व के कारोबारी सत्र में स्थानीय बाजार में कमजोर मांग के चलते चांदी के दामों में गिरावट देखी गई थी। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार पिछले शुक्रवार को चांदी 2,000 रुपये टूटकर 2,22,500 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बंद हुई थी। उस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी का भाव घटकर 55.37 डॉलर प्रति औंस दर्ज हुआ था। हालांकि नए सप्ताह की शुरुआत के साथ ही वैश्विक बाजार के नए समीकरणों ने चांदी की कीमतों को दोबारा नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया है।
शेयर बाजार में मंदी का असर, फिर भी ये 2 स्टॉक्स दे सकते हैं मुनाफा
20 Jul, 2026 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: वैश्विक बाजारों से मिले बेहद कमजोर संकेतों के प्रभाव से भारतीय शेयर बाजार सोमवार को भारी गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में ही मुख्य सूचकांक निफ्टी 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह के सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 676.84 अंक यानी 0.87 प्रतिशत टूटकर 77,474.61 पर कारोबार कर रहा था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 168.45 अंक यानी 0.69 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,165.85 के स्तर पर आ गया। शेयर बाजार में लगभग 1480 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि 1331 शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया।
प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन और बाजार की स्थिति
शुरुआती दौर में निफ्टी पर आईसीआईसीआई बैंक, टेक महिंद्रा, ओएनजीसी, जेएसडब्ल्यू स्टील और सिप्ला जैसे दिग्गज शेयरों में मजबूती दर्ज की गई। इसके विपरीत एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, इंटरग्लोब एविएशन और बजाज फाइनेंस जैसे शेयरों में तेज बिकवाली देखी गई। इसके साथ ही निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी हल्की नरमी के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
निफ्टी सूचकांक के लिए तकनीकी स्तर और रणनीति
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए पहला प्रतिरोध स्तर 24381-24423 पर बना हुआ है, जबकि बड़ा प्रतिरोध 24505-24545 के दायरा में है। निचले स्तरों पर निफ्टी को 24210-24161 पर पहला आधार मिल रहा है, वहीं मुख्य समर्थन स्तर 24139-24063 के पास है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर के आसपास पहुंचने और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं। आंकड़ों के लिहाज से समर्थन स्तर के समीप आने पर गिरावट में खरीदारी का अवसर बन सकता है।
बैंक निफ्टी का रुझान और दिशा की संभावना
बैंकिंग सूचकांक के लिए पहला प्रतिरोध स्तर 58710-58978 के बीच है, जबकि बड़ा प्रतिरोध 59378-59513 पर देखा जा रहा है। बैंक निफ्टी को 58210-58045 के पास प्राथमिक समर्थन और 57811-57631 के पास मजबूत दूसरा आधार प्राप्त है। निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंकों के तिमाही परिणामों और कच्चे तेल की चाल के बीच बाजार विशेषज्ञों ने स्तरों के आधार पर कारोबार करने का सुझाव दिया है। जब तक प्राथमिक समर्थन स्तर सुरक्षित रहता है, तब तक गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाई जा सकती है।
विशेषज्ञों द्वारा अनुशंसित प्रमुख शेयर
बाजार के तकनीकी विशेषज्ञों ने मजबूत चार्ट वाले चुनिंदा शेयरों पर खरीदारी की सलाह दी है। कोलगेट पॉमोलिव (COLPAL) के शेयर में 2014 रुपये के स्टॉप-लॉस के साथ 2090 रुपये के लक्ष्य के लिए दांव लगाने का सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त बैंकिंग क्षेत्र से कोटक बैंक के शेयर में 384 रुपये का स्टॉप-लॉस बनाए रखते हुए 400 रुपये के लक्ष्य के लिए खरीदारी की जा सकती है।
HDFC Bank के Q1 नतीजे शानदार, नेट प्रॉफिट में दर्ज हुई जबरदस्त बढ़ोतरी
18 Jul, 2026 03:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: निजी क्षेत्र के देश के सबसे अग्रणी बैंकिंग संस्थान, एचडीएफसी (HDFC) बैंक ने चालू वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही के अपने आधिकारिक वित्तीय लेखा-जोखा के आंकड़े सार्वजनिक कर दिए हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को सौंपी गई वित्तीय रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक ने इस तिमाही के दौरान अपने शुद्ध मुनाफे और ऋण संपत्तियों की गुणवत्ता (एसेट क्वालिटी) दोनों में ही काफी मजबूत और सकारात्मक सुधार दर्ज किया है। इस वित्तीय प्रगति से बैंकिंग क्षेत्र और शेयर बाजार के निवेशकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।
स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ में दर्ज की गई बंपर बढ़ोतरी
बैंक द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस तिमाही के दौरान एचडीएफसी बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ बढ़कर ₹19,059.72 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है। यदि इसकी तुलना बीते वर्ष की समान तिमाही (जून 2025) से की जाए, तो उस समय बैंक को ₹18,155.21 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ था, जिसके मुकाबले इस बार बैंक ने अपनी कमाई में शानदार उछाल हासिल किया है। यह वृद्धि दर्शाती है कि बैंक की मुख्य परिचालन गतिविधियों और ऋण वितरण प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार हो रहा है।
कंसोलिडेटेड मुनाफे में करीब 18 प्रतिशत की भारी वृद्धि
स्टैंडअलोन मुनाफे के साथ-साथ अगर बैंक की सभी अनुषंगी (कंसोलिडेटेड) इकाइयों के समेकित मुनाफे पर नजर डालें, तो वहां भी नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे हैं। समीक्षाधीन तिमाही में बैंक का कुल कंसोलिडेटेड शुद्ध लाभ ₹19,244.71 करोड़ दर्ज किया गया है। वार्षिक आधार पर तुलना करने पर इसमें लगभग 18 प्रतिशत की एक बेहद मजबूत और शानदार विकास दर देखी गई है, जो विभिन्न सहायक वित्तीय सेवाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन को प्रमाणित करती है।
लोन एसेट क्वालिटी और वित्तीय प्रबंधन में हुआ बड़ा सुधार
वित्तीय परिणामों में सबसे राहत की बात बैंक की एसेट क्वालिटी को लेकर सामने आई है। पिछले कुछ समय से बैंकिंग उद्योग के सामने फंसे हुए कर्जों (एनपीए) के प्रबंधन की जो चुनौती थी, उससे निपटते हुए एचडीएफसी बैंक ने अपनी ऋण संपत्तियों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। बैंक प्रबंधन की कुशल नीतियों और सख्त ऋण समीक्षा प्रणाली के कारण डूबते कर्जों के अनुपात में कमी आई है, जिससे बैंक का वित्तीय आधार पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सुदृढ़ नजर आ रहा है।
शेयर बाजार और बैंकिंग सेक्टर पर दिखेगा गहरा असर
त्रैमासिक नतीजों के इस शानदार प्रदर्शन का सीधा और सकारात्मक असर आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार पर दिखने की पूरी उम्मीद है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस हैवीवेट बैंकिंग स्टॉक के मजबूत प्रदर्शन से समूचे निफ्टी और बैंक निफ्टी इंडेक्स को भारी सपोर्ट मिलेगा। निवेशकों के बढ़ते भरोसे और बेहतर वित्तीय गाइडेंस के चलते बाजार में एचडीएफसी बैंक के शेयरों की लिवाली बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जो समग्र बाजार धारणा को और मजबूत करेगी।
Oppo K15 में मिलेगी 8000mAh बैटरी, लॉन्च से पहले फीचर्स हुए लीक
18 Jul, 2026 01:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: वैश्विक स्मार्टफोन निर्माता कंपनी ओप्पो ने अपनी लोकप्रिय 'K' सीरीज के विस्तार की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस सीरीज के दो प्रीमियम मॉडल्स के सफल लॉन्च के बाद अब कंपनी इस श्रृंखला का तीसरा किफायती लेकिन दमदार वेरिएंट बाजार में उतारने जा रही है। नया स्मार्टफोन आगामी सप्ताह चीनी बाजार में आधिकारिक तौर पर दस्तक देगा। लॉन्च से ठीक पहले इस आगामी हैंडसेट को कंपनी के आधिकारिक ऑनलाइन स्टोर पर भी लिस्ट कर दिया गया है, जिससे इसके मुख्य तकनीकी फीचर्स, आकर्षक डिजाइन, रंग और अलग-अलग स्टोरेज वेरिएंट्स से जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां तकनीकी गलियारों में सार्वजनिक हो गई हैं।
आगामी 24 जुलाई को चीनी बाजार में दी जाएगी दस्तक
आधिकारिक लिस्टिंग के अनुसार, यह नया स्मार्टफोन आगामी 24 जुलाई को स्थानीय समयानुसार सुबह 10:00 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 7:30 बजे) एक भव्य इवेंट के जरिए लॉन्च किया जाएगा। चीनी उपभोक्ताओं के लिए इस डिवाइस की प्री-बुकिंग प्रक्रिया को पहले ही लाइव कर दिया गया है। शुरुआती जानकारियों के मुताबिक, यह फोन बाजार में न्यूनतम 12GB रैम और 256GB की विशाल इंटरनल स्टोरेज क्षमता के साथ कदम रखेगा। इसके अलावा, उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए कंपनी इस हैंडसेट को दो बेहद खूबसूरत रंगों—गेल ग्रे और रैपिड व्हाइट विकल्पों में पेश करने जा रही है।
इन-बिल्ट एक्टिव कूलिंग फैन और आधुनिक थर्मल मैनेजमेंट
इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसका कूलिंग सिस्टम है, जो भारी गेमिंग के दौरान भी फोन को स्मूथ रखता है। अपने प्रो मॉडल्स की तरह ही इस डिवाइस में भी एक इन-बिल्ट एक्टिव कूलिंग फैन दिया गया है, जो सीधे तौर पर तापमान को नियंत्रित करता है। इसके साथ ही, फोन के भीतर एक एडवांस्ड वेपर चैंबर कूलिंग सॉल्यूशन लगाया गया है, जिसका हीट डिसिपेशन एरिया 4,950 वर्ग मिलीमीटर का है। यह बेहतरीन थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम लंबे समय तक हाई-ग्राफिक्स टास्क या गेमिंग करते समय हैंडसेट को ओवरहीटिंग और थ्रॉटलिंग की समस्या से पूरी तरह सुरक्षित रखता है।
दमदार डाइमेंसिटी प्रोसेसर और विशाल ग्लेशियर बैटरी क्षमता
हार्डवेयर और पावर बैकअप के मामले में यह फोन बेहद खास होने वाला है। इसमें 6.59-इंच का एक शानदार फ्लैट डिस्प्ले दिया गया है, जिसे धूल और पानी से सुरक्षा के लिए उच्चतम IP69 रेटिंग प्रदान की गई है। परफॉर्मेंस को रफ्तार देने के लिए स्मार्टफोन में ऑक्टा-कोर मीडियाटेक डाइमेंसिटी 7360 सुपर चिपसेट का इस्तेमाल किया गया है, जो टाइडल इंजन तकनीक पर काम करता है। ऊर्जा के लिए इसमें 8,000mAh की बेहद शक्तिशाली बैटरी दी गई है, जो 80W की वायर्ड फास्ट चार्जिंग और बायपास चार्जिंग के साथ-साथ एक विशेष 'ग्लेशियर बैटरी एनर्जी गैदरिंग चिप' को सपोर्ट करती है।
हांगकांग को लेकर नरम पड़ा अमेरिका? चीन के दावे से बढ़ी वैश्विक हलचल
18 Jul, 2026 12:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मैड्रिड: वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली अमेरिका और चीन के बीच की दीर्घकालिक व्यापारिक कड़वाहट अब धीरे-धीरे ढलती हुई दिखाई दे रही है। स्पेन की राजधानी मैड्रिड में संपन्न हुई उच्च स्तरीय आर्थिक वार्ता के बाद चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर यह दावा किया है कि अमेरिकी प्रशासन उस पुराने कार्यकारी आदेश की अवधि को आगे नहीं बढ़ाएगा, जिसने हांगकांग को मिलने वाले विशेष व्यावसायिक एवं आर्थिक दर्जे को समाप्त कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकार वाशिंगटन के इस रुख को दोनों महाशक्तियों के द्विपक्षीय और व्यापारिक संबंधों को एक नई व सकारात्मक दिशा में ले जाने वाला एक मील का पत्थर मान रहे हैं।
वैश्विक राष्ट्रपतियों की शिखर बैठक और बदलते कूटनीतिक संकेत
इस महत्वपूर्ण आर्थिक बदलाव को कुछ समय पहले बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय शिखर वार्ता के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में देखा जा रहा है। उस मुलाकात के बाद से ही दोनों देशों के बीच लगातार कई सकारात्मक और सहयोगात्मक कदम उठाए गए हैं, जिसमें हाल ही में चीनी प्रशासन द्वारा एक प्रमुख चर्च पादरी की ससम्मान रिहाई भी शामिल है। राजनयिक विश्लेषकों का मानना है कि चालू वर्ष के अंत में चीनी राष्ट्रपति की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा से ठीक पहले यह फैसला दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने और आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने में एक बड़ी भूमिका निभाएगा।
प्रतिबंधों के नियमों में संशोधन और अमेरिकी आदेश की समाप्ति
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो जुलाई 2020 में हांगकांग के विशेष व्यापारिक दर्जे को रद्द करने वाला एक कड़ा कार्यकारी आदेश जारी किया गया था, जिसे बाद में वर्ष 2025 में एक साल के लिए विस्तारित भी किया गया। हालांकि, नई सहमति के तहत अब इस प्रतिबंधात्मक आदेश का नवीनीकरण न करने का निर्णय लिया गया है, जिसकी पुष्टि अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने राष्ट्रीय आपातकाल से जुड़े कुछ तकनीकी प्रावधानों की अवधि समाप्त होने का हवाला देकर की है। इसी कूटनीतिक फेरबदल के अंतर्गत हांगकांग के मुख्य कार्यकारी जॉन ली और पूर्व शीर्ष नेता कैरी लैम को भी पुरानी कड़ी प्रतिबंध सूची से बाहर कर दूसरे कानूनी दायरे में स्थानांतरित कर दिया गया है।
चीन और हांगकांग प्रशासन द्वारा अमेरिकी पहल का स्वागत
बीजिंग ने अमेरिकी सरकार के इस कदम को मैड्रिड आर्थिक वार्ता में बनी आपसी सहमतियों को धरातल पर उतारने की दिशा में एक स्वागत योग्य और प्रगतिशील कदम बताया है। दूसरी ओर, हांगकांग के स्थानीय प्रशासन ने भी इस पर अपनी अनुकूल प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि अमेरिका आने वाले समय में चीन की संप्रभुता का पूर्ण आदर करेगा। इसके साथ ही, वहां के प्रशासन ने वैश्विक मंचों पर 'एक देश, दो प्रणाली' की नीति का सम्मान किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है, जिससे क्षेत्र में विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को एक बार फिर से नई गति मिलने की उम्मीद जग गई है।
लोकतांत्रिक अधिकारों की स्थिति और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों की चिंता
व्यापारिक संबंधों में सुधार के इस दौर के बीच हांगकांग में आंतरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर वैश्विक चिंताएं अब भी बरकरार हैं। बीजिंग का इस मामले पर दृढ़ता से कहना है कि वर्ष 2019 में हुए हिंसक सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद 2020 में लागू किया गया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून वहां की आंतरिक शांति और स्थिरता के लिए अपरिहार्य था। इसके विपरीत, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और पश्चिमी देशों का यह गंभीर आरोप है कि इस दमनकारी कानून की आड़ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचला गया है, जिसके चलते मीडिया जगत के रसूखदार कारोबारी जिमी लाई समेत कई लोकतंत्र समर्थक नेता आज भी कारागार में बंद हैं, हालांकि इस विषय पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
चांदी की चमक फीकी, कीमतों में गिरावट से खरीदारों को मिली राहत
18 Jul, 2026 10:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वैश्विक मोर्चे पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में भारी हलचल देखी जा रही है। इस वैश्विक टकराव का सीधा प्रभाव सोने और चांदी जैसी बहुमूल्य धातुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, सभी स्थानीय करों (टैक्स) सहित चांदी की खुदरा कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर, वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के भाव में मामूली बढ़त दर्ज की गई, जो पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले कुछ रुपये की तेजी के साथ कारोबार कर रही है।
वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और अवकाश का प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मंचों पर भी श्वेत धातु की कीमतों में लगातार अस्थिरता का माहौल बना हुआ है, जहां हाजिर चांदी के दाम ऊंचे स्तरों पर मंडरा रहे हैं। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अनुसार, सप्ताहांत पर बाजार बंद होने तक चांदी के भाव में सीमित दायरे का उतार-चढ़ाव देखा गया। चूंकि शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश होने के कारण घरेलू सराफा बाजार बंद रहते हैं, इसलिए इस दौरान शुक्रवार को तय किए गए बंद भाव ही पूरे देश में प्रभावी रहेंगे। बाजार के जानकारों का कहना है कि वर्तमान में विभिन्न एजेंसियों और एसोसिएशनों के दरों में मामूली अंतर देखा जा सकता है।
देश के प्रमुख शहरों में चांदी की दरें
भारत के भौगोलिक विस्तार और स्थानीय कर व्यवस्था के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में चांदी की कीमतों में भिन्नता नजर आ रही है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख महानगरों में प्रति किलोग्राम के हिसाब से अलग-अलग दरें लागू हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, मेरठ, नोएडा और गाजियाबाद सहित बिहार के पटना और मध्य प्रदेश के इंदौर में कीमतें एक समान स्तर पर बनी हुई हैं। इसके विपरीत, दक्षिण भारत के चेन्नई, भुवनेश्वर और हैदराबाद जैसे शहरों में चांदी के भाव में अन्य राज्यों के मुकाबले थोड़ी अधिक तेजी देखने को मिल रही है, इसलिए निवेशकों को खरीदारी से पहले स्थानीय भाव जांचने की सलाह दी जाती है।
मुनाफावसूली और बदलती प्राथमिकताओं से कीमतों पर दबाव
दुनिया भर में मंडरा रहे युद्ध के बादलों के बावजूद चांदी की कीमतों में उम्मीद के मुताबिक उछाल न आने की मुख्य वजह निवेशकों का बदला हुआ रुख है। इस अनिश्चित और संकटपूर्ण वैश्विक माहौल में बड़े निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए चांदी के मुकाबले सोने को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय विकल्प माना है। इसके साथ ही, ऊंचे स्तरों पर पहुंच चुकी चांदी में ट्रेडर्स द्वारा जमकर मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) की गई है, जिससे बाजार में इसकी तरलता बढ़ी और कीमतों पर दबाव आने से घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नरमी का रुख बन गया।
औद्योगिक मांग और भविष्य के आर्थिक समीकरण
चांदी की कीमतों का निर्धारण केवल निवेश के आधार पर नहीं होता, बल्कि यह एक प्रमुख औद्योगिक धातु भी है जिसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और अन्य विनिर्माण उद्योगों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। यही कारण है कि इसकी चाल पूरी दुनिया की आर्थिक सेहत और कारखानों की मांग पर काफी हद तक निर्भर करती है। वर्तमान समय में वैश्विक मंदी और औद्योगिक मांग में संभावित कमी की आशंका के चलते बड़े खरीदार थोक लिवाली से बच रहे हैं, जिससे बाजार में चांदी के भाव में यह सुस्ती और ठहराव देखने को मिल रहा है।
सोना हुआ सस्ता, चांदी भी टूटी; निवेशकों के लिए बदले बाजार के हालात
18 Jul, 2026 10:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: घरेलू सराफा बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में लगातार मंदी का रुख देखने को मिल रहा है। वैश्विक और स्थानीय स्तर पर मांग घटने से सोने के भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी दिल्ली के साथ-साथ देश के अन्य प्रमुख महानगरों में भी कीमती धातुओं की दरों में भारी कमी आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे बदलावों और निवेशकों द्वारा मुनाफ़ा वसूली (प्रॉफ़िट बुकिंग) किए जाने के चलते भारतीय बाजारों में भी 24 कैरेट और 22 कैरेट दोनों ही तरह के सोने की कीमतों में लगातार गिरावट का सिलसिला बना हुआ है।
वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक कारणों से बदला मिजाज
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर अमेरिका और ईरान के मध्य एक बार फिर बढ़ते हुए राजनीतिक तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर डाला है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण ऊर्जा स्रोतों की कीमतें बढ़ने लगी हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंताएं गहरा गई हैं। इस स्थिति को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले समय में बेंचमार्क ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। वित्तीय नियमों के अनुसार, ब्याज दरों में वृद्धि होने पर निवेशक सुरक्षित रिटर्न वाले दूसरे विकल्पों की ओर आकर्षित होते हैं, जो सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए एक नकारात्मक कारक माना जाता है।
देश के प्रमुख महानगरों में आज के भाव
भारतीय बाजार में आज दिल्ली के भीतर 24 कैरेट सोने की कीमतें काफी नीचे आ गई हैं, जबकि 22 कैरेट के भाव में भी तदनुसार कमी देखी गई है। व्यापारिक नगरी मुंबई और कोलकाता में भी सोने की दरें इसी तर्ज पर कम दर्ज की गई हैं। दक्षिण भारत के प्रमुख केंद्र चेन्नई में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जो कि देश के अन्य शहरों की तुलना में मामूली अंतर पर बनी हुई है। इसके अलावा पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद और जयपुर जैसे बड़े शहरों के सराफा बाजारों में भी मंदी का असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
औद्योगिक और स्थानीय मांग घटने से चांदी भी हुई सस्ती
सोने के साथ-साथ दूसरी सबसे महत्वपूर्ण धातु चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट का दौर जारी है। औद्योगिक इकाइयों (इंडस्ट्रीज) और स्थानीय आभूषण निर्माताओं की ओर से थोक खरीदारी में आई भारी कमी के कारण घरेलू बाजार में चांदी के भाव पर गहरा दबाव बना हुआ है। इसके साथ ही, निवेशकों द्वारा की जा रही लगातार बिकवाली भी इसके दाम नीचे लाने के लिए जिम्मेदार है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हाजिर चांदी (स्पॉट सिल्वर) की कीमतों में कमी आई है, जिसका सीधा असर भारतीय खुदरा और थोक बाजार में चांदी के प्रति किलोग्राम के भाव पर पड़ रहा है।
आगामी दिनों में बाजार की संभावित दिशा
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो जाती, तब तक सराफा बाजार में यह अस्थिरता बनी रहने की संभावना है। स्थानीय बाजारों में आभूषणों की खुदरा मांग कमजोर रहने की उम्मीद है, क्योंकि ग्राहक कीमतों के और अधिक स्थिर होने का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले समय में यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आता है, तो सोने-चांदी के भाव में कुछ और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
Apple का मार्केट कैप पहुंचा $4.88 लाख करोड़, दुनिया में फिर दबदबा कायम
18 Jul, 2026 08:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैलिफ़ोर्निया: वैश्विक तकनीकी बाजार में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जहां आईफोन निर्माता कंपनी एप्पल ने दिग्गज चिपमेकर एनवीडिया को पछाड़कर एक बार फिर दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी होने का गौरव हासिल कर लिया है। हालिया कारोबारी सत्र के दौरान एप्पल के शेयरों में स्थिरता देखी गई, जिससे उसकी कुल बाजार हिस्सेदारी 4.88 लाख करोड़ डॉलर के स्तर पर पहुंच गई। दूसरी ओर, एनवीडिया के शेयरों में आई लगभग 3.5 प्रतिशत की गिरावट के चलते उसकी कुल वित्तीय वैल्यूएशन घटकर 4.86 लाख करोड़ डॉलर रह गई। बाजार में आया यह बदलाव यह संकेत देता है कि निवेशक अब केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की लहर पर सवार कंपनियों से इतर तकनीकी क्षेत्र के अन्य बड़े खिलाड़ियों पर भी भरोसा जता रहे हैं।
एप्पल ने एक साल बाद हासिल किया शीर्ष स्थान
एप्पल ने पिछले वर्ष की शुरुआत के बाद पहली बार इस सर्वोच्च मुकाम पर अपनी वापसी दर्ज की है। गौरतलब है कि एनवीडिया पिछले करीब एक साल से वैश्विक स्तर पर सबसे मूल्यवान कंपनी के पद पर मजबूती से काबिज थी। एनवीडिया ने वर्ष 2025 के मध्य में सॉफ्टवेयर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट को पछाड़ते हुए यह शीर्ष स्थान अपने नाम किया था। इसके तुरंत बाद, उसी वर्ष के अंत में एनवीडिया 5 लाख करोड़ डॉलर के ऐतिहासिक मार्केट कैप को छूने वाली दुनिया की इकलौती कंपनी बन गई थी, जिसने कॉरपोरेट जगत में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया था।
प्रतिद्वंद्विता और भविष्य के बाजार समीकरण
शीर्ष स्थान से एनवीडिया के मामूली रूप से पीछे खिसकने का यह कतई मतलब नहीं है कि वैश्विक टेक उद्योग की रैंकिंग में यह कोई स्थायी बदलाव है। एनवीडिया वर्तमान में एआई (AI) बुनियादी ढांचे पर होने वाले भारी-भरकम वैश्विक खर्चों का सबसे बड़ा लाभार्थी बना हुआ है, और निवेशकों के दृष्टिकोण में थोड़ा सा भी बदलाव उसे दोबारा शीर्ष पर ला सकता है। हालांकि, एप्पल के सामने भी अपनी चुनौतियां कम नहीं हैं, क्योंकि कंपनी इस समय परिचालन लागत में हो रही बढ़ोतरी से निपटने के लिए संघर्ष कर रही है, जिसका असर उसकी भावी रणनीतियों पर पड़ सकता है।
मूल्य वृद्धि और शेयर बाजार में प्रदर्शन
लागत को नियंत्रित करने और अपने मुनाफे को बनाए रखने के लिए एप्पल ने हाल ही में वैश्विक स्तर पर अपने प्रीमियम उपकरणों जैसे मैकबुक और आईपैड की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत तक का भारी इजाफा किया है। इस मूल्य वृद्धि का असर आने वाले समय में उपभोक्ताओं की मांग पर देखने को मिल सकता है। इसके बावजूद, शेयर बाजार में एप्पल का प्रदर्शन शानदार रहा है और इस साल अब तक उसके शेयरों में 22 से 23 फीसदी की जबरदस्त तेजी आई है, जबकि इसके मुकाबले एनवीडिया के शेयरों में इस अवधि के दौरान केवल 7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर, एक्सपर्ट्स ने बताई आगे की संभावित दिशा
17 Jul, 2026 03:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू बाजार में डॉलर की बढ़ती मांग के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ऐतिहासिक गिरावट के बेहद करीब पहुंच गया है। वित्तीय बाजार के जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों, विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पूंजी निकालने और देश के व्यापार असंतुलन जैसे बहुआयामी कारणों से रुपये की सेहत लगातार बिगड़ रही है। गौरतलब है कि गत 20 मई को रुपया डॉलर के मुकाबले 96.83 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था और आज शुक्रवार को यह 96.30 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो इसके सर्वकालिक निचले स्तर से महज 0.55 प्रतिशत की दूरी पर है।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाईं संरचनात्मक चुनौतियां
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने रुपये पर दबाव बनाने में एक तात्कालिक उत्प्रेरक (ट्रिगर) का काम किया है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, जिससे चालू खाता घाटा (करंट अकाउंट डेफिसिट) बढ़ना स्वाभाविक है। इसके साथ ही मजबूत होता अमेरिकी डॉलर, चीन द्वारा की जा रही आक्रामक डंपिंग और वैश्विक निर्यात में आ रही बाधाओं ने मिलकर भारतीय मुद्रा की रिकवरी की उम्मीदों को करारा झटका दिया है, जिससे रुपया इस महीने एशियाई मुद्राओं में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया है।
विदेशी पूंजी की निकासी और डॉलर की आवक में कमी
भारतीय शेयर और ऋण बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा बड़े पैमाने पर की जा रही बिकवाली ने संकट को और गहरा कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से चालू वर्ष में 36 अरब डॉलर से अधिक की निकासी की है, क्योंकि वैश्विक निवेश का रुख अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सेमीकंडक्टर जैसे उन्नत क्षेत्रों की तरफ बढ़ रहा है। वहीं दूसरी ओर, रिजर्व बैंक द्वारा अनिवासी भारतीयों के लिए घोषित की गई विशेष जमा योजनाओं (FCNR-B) के तहत भी अनुमान से काफी कम विदेशी निवेश हासिल हुआ है, जिससे रुपये को मिलने वाला तात्कालिक सहारा कमजोर पड़ गया है।
आयातकों की आक्रामक हेजिंग से डॉलर पर बढ़ा दबाव
मुद्रा बाजार में इस समय डॉलर की मांग और आपूर्ति का संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है। भू-राजनीतिक तनाव और रक्षा भुगतानों के कारण डॉलर की मांग लगातार चरम पर है, जबकि देश का व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। ऐसी स्थिति में निर्यातक भविष्य में रुपये के और कमजोर होने की आशंका में अपनी डॉलर की कमाई को रोककर रख रहे हैं, जबकि आयातक अपने नुकसान से बचने के लिए आक्रामक रूप से डॉलर खरीदकर फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट बुक कर रहे हैं। बाजार की यह स्थिति एक ऐसा चक्र बना रही है जो भारतीय मुद्रा पर निरंतर गिरावट का दबाव बनाए हुए है।
तकनीकी चार्ट पर कमजोर स्थिति और भविष्य का आउटलुक
आने वाले समय के लिए बाजार विशेषज्ञों का अनुमान मिला-जुला है। कुछ विश्लेषकों को उम्मीद है कि आगामी महीनों में विदेशी फंडों के आगमन से रुपये को कुछ राहत मिल सकती है, जिससे यह वापस 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के नीचे आ सकता है। हालांकि, तकनीकी विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि दैनिक और साप्ताहिक चार्ट पर डॉलर का दबदबा बेहद मजबूत बना हुआ है। यदि आने वाले दिनों में रुपया 97 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर जाता है और वहां खुद को संभाल नहीं पाता है, तो तकनीकी गिरावट इसे 98 से लेकर 98.70 रुपये प्रति डॉलर के बेहद चिंताजनक स्तर तक भी धकेल सकती है।
मुकेश अंबानी का बड़ा दांव, ₹9000 करोड़ की चाल से रिलायंस शेयर में तेजी की उम्मीद
17 Jul, 2026 01:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: देश की सबसे मूल्यवान कॉर्पोरेट दिग्गज रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के प्रमोटर ग्रुप ने बाजार में एक बड़ा कदम उठाते हुए कंपनी में अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान प्रमोटर समूह ने खुले बाजार से रिलायंस के शेयरों की अतिरिक्त खरीदारी की है। प्रमोटर्स द्वारा अपनी ही कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाने के इस बड़े फैसले को बाजार के विशेषज्ञ रिलायंस के दीर्घकालिक भविष्य, उसकी व्यावसायिक रणनीतियों और विकास की संभावनाओं के प्रति प्रमोटर ग्रुप के अटूट भरोसे और प्रतिबद्धता के एक बेहद सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहे हैं।
तिमाही नतीजों के साथ शेयरहोल्डिंग का नया डेटा आया सामने
आधिकारिक रेगुलेटरी शेयरहोल्डिंग डेटा के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही के अंत में रिलायंस इंडस्ट्रीज में प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी बढ़कर अब 50.48 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। अगर इसकी तुलना तीन महीने पहले यानी जनवरी-मार्च तिमाही के आंकड़ों से की जाए, तो उस समय यह हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत पर थी। इस प्रकार प्रमोटर ग्रुप ने महज एक तिमाही के भीतर बाजार से शेयर खरीदकर कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को करीब 0.5 प्रतिशत तक बढ़ा लिया है, जिससे कंपनी पर उनका नियंत्रण और सुदृढ़ हुआ है।
सेबी के 'क्रीपिंग एक्विजिशन' नियमों के तहत हुई खरीदारी
प्रमोटर समूह द्वारा शेयरों की यह महत्वपूर्ण खरीद पूरी तरह से स्थापित कानूनी दायरे में रहकर की गई है। नियामकीय प्रावधानों के मुताबिक, यह हिस्सेदारी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के 'क्रीपिंग एक्विजिशन' (Creeping Acquisition) नियमों के तहत निर्धारित की गई सीमा के भीतर ही बढ़ाई गई है। इन खास नियमों के तहत किसी भी कंपनी के मूल प्रमोटर्स को यह कानूनी अधिकार मिलता है कि वे बिना कोई अनिवार्य ओपन ऑफर लाए, बाजार से धीरे-धीरे और एक तय सीमा के अंदर अपनी कंपनी के अतिरिक्त शेयर खरीदकर अपनी हिस्सेदारी में इजाफा कर सकते हैं।
बाजार विशेषज्ञों ने लगाया हजारों करोड़ के निवेश का अनुमान
शेयर बाजार के प्रमुख विश्लेषकों और मार्केट एक्सपर्ट्स ने प्रमोटर ग्रुप द्वारा किए गए इस औचक सौदे की कुल कीमत को लेकर बड़े अनुमान लगाए हैं। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि रिलायंस जैसी विशालकाय कंपनी में 0.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी खरीदना एक बहुत बड़ा वित्तीय लेनदेन है। बाजार की मौजूदा दरों और शेयरों के मूल्यांकन के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि प्रमोटर ग्रुप ने इन अतिरिक्त शेयरों को बाजार से बटोरने के लिए लगभग ₹8,500 करोड़ से लेकर ₹9,000 करोड़ के बीच की एक भारी-भरकम धनराशि खर्च की होगी।
निवेशकों का बढ़ा भरोसा और रिलायंस के शेयरों पर दिखेगा असर
प्रमोटर्स द्वारा इतनी बड़ी पूंजी लगाकर अपनी ही कंपनी के शेयर खरीदने से आम निवेशकों और शेयर बाजार में एक बेहद सकारात्मक संदेश गया है। कॉरपोरेट जगत में माना जाता है कि जब प्रमोटर खुद बाजार से शेयर खरीदते हैं, तो इसका सीधा मतलब होता है कि कंपनी के शेयर की मौजूदा कीमत आकर्षक है और आने वाले समय में इसमें बड़ी तेजी आने की उम्मीद है। इस कदम से आने वाले दिनों में रिलायंस के शेयरों में निवेशकों की लिवाली बढ़ने और स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनी के दबदबे को और नई मजबूती मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर चढ़े 2%, Q1 में EBITDA बढ़ने की उम्मीद
17 Jul, 2026 12:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: देश की सबसे मूल्यवान कॉर्पोरेट दिग्गज, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के वित्तीय नतीजे आज घोषित होने जा रहे हैं। आज होने वाली कंपनी की महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक में इन वित्तीय परिणामों की गहन समीक्षा की जाएगी, जिसके बाद इन्हें आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक किया जाएगा। इस बहुप्रतीक्षित घोषणा के तहत न केवल मुख्य कंपनी बल्कि इसकी प्रमुख सहयोगी इकाइयों, रिलायंस जियो और रिलायंस रिटेल के तिमाही प्रदर्शन के आंकड़े भी सामने आएंगे, जिससे बाजार को देश की आर्थिक दिशा का एक बड़ा संकेत मिलेगा।
नतीजों की घोषणा से पहले रिलायंस के शेयरों में शानदार तेजी
तिमाही नतीजों के आधिकारिक ऐलान से ठीक पहले घरेलू शेयर बाजार में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कारोबार के दौरान रिलायंस का शेयर अपने पिछले बंद स्तर से लगभग 2.5 प्रतिशत तक उछलकर 1323.80 रुपये के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। फिलहाल आरआईएल देश की सबसे मूल्यवान कंपनी के रूप में स्थापित है, जिसका कुल मार्केट कैप 17.86 लाख करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस मजबूती से निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है।
कमाई और मुनाफे को लेकर बाजार का मजबूत अनुमान
बाजार विशेषज्ञों और विश्लेषकों को रिलायंस के विविध व्यावसायिक क्षेत्रों से काफी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। ऐसा माना जा रहा है कि रिफाइनिंग मार्जिन में मजबूती और पेट्रोकेमिकल सेगमेंट में सुधार से पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव का असर कम करने में मदद मिलेगी। उद्योग जगत के पूर्वानुमानों के मुताबिक, जून 2026 तिमाही में कंपनी का राजस्व पिछली तिमाही की तुलना में 3.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 3.05 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वहीं, कंपनी का परिचालन लाभ यानी EBITDA भी लगभग 4 प्रतिशत बढ़कर करीब 46,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जिससे इसका मार्जिन 15 प्रतिशत पर स्थिर बने रहने की उम्मीद है।
पिछली तिमाही के प्रदर्शन और शेयर होल्डिंग का मौजूदा गणित
अगर रिलायंस इंडस्ट्रीज के पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें, तो कंपनी का कुल कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 12.9 प्रतिशत बढ़कर 2,98,621 करोड़ रुपये रहा था, हालांकि इस दौरान शुद्ध मुनाफा मामूली गिरावट के साथ 16,971 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। हिस्सेदारी की बात करें तो जून 2026 के अंत तक कंपनी में प्रमोटर्स के पास 50.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार है। इस साल अब तक शेयर में कुछ उतार-चढ़ाव देखा गया है, जहां इसका 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर 1,611.20 रुपये और न्यूनतम स्तर 1,253.65 रुपये रहा है।
सहयोगी इकाई जियो फाइनेंशियल सर्विसेज का दमदार प्रदर्शन
रिलायंस इंडस्ट्रीज के नतीजों से ठीक एक दिन पहले, इसकी डीमर्ज हुई वित्तीय इकाई जियो फाइनेंशियल सर्विसेज ने अपने तिमाही परिणाम घोषित किए, जिसने बाजार को सुखद आश्चर्यचकित किया है। कंपनी ने सालाना आधार पर अपने ऑपरेशंस रेवेन्यू में 227.28 प्रतिशत की भारी-भरकम बढ़त दर्ज की है, जो बढ़कर 2,004.47 करोड़ रुपये हो गया है। इसके साथ ही कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा भी पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 155.7 प्रतिशत की छलांग लगाते हुए 830.25 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है, जिससे आज रिलायंस के नतीजों को लेकर भी सकारात्मक माहौल बना हुआ है।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
शिक्षा मंत्रालय में बड़ा बदलाव! प्रल्हाद जोशी ने संभाला कार्यभार
'न कर्फ्यू-न दंगा, सब चंगा', योगी के बयान से मैनपुरी की सियासत गरमाई
कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा खुलासा! बोले- आंदोलन के पहले दिन इस्तीफा देना चाहते थे धर्मेंद्र प्रधान
