व्यापार
चांदी में जोरदार उछाल, इस साल अब तक ₹21 हजार महंगी हुई
7 May, 2026 01:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार में आज यानी 7 मई को बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला है। सोने के भाव में प्रति दस ग्राम 377 रुपए की तेजी दर्ज की गई है, जिसके बाद 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत 1.51 लाख रुपए के स्तर को पार कर गई है। चांदी के बाजार में भी जबरदस्त तेजी का रुख रहा और यह 2318 रुपए प्रति किलोग्राम महंगी होकर 2.51 लाख रुपए के ऐतिहासिक आंकड़े पर पहुंच गई है। वैश्विक आर्थिक संकेतों और घरेलू मांग में आए उछाल को इन बढ़ती कीमतों की मुख्य वजह माना जा रहा है।
साल 2026 में कीमती धातुओं का रिकॉर्ड प्रदर्शन
वर्तमान वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में ही कीमती धातुओं ने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। साल 2026 में अब तक सोने की कीमतों में लगभग 18 हजार रुपए की भारी बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि पिछले साल के अंत में यह 1.33 लाख रुपए के स्तर पर था। इसी प्रकार चांदी ने भी इस साल निवेशकों को चौंकाते हुए 21 हजार रुपए प्रति किलो तक की छलांग लगाई है। दिसंबर 2025 में 2.30 लाख रुपए पर बिकने वाली चांदी अब ढाई लाख रुपए के पार निकल चुकी है, जो बाजार में धातुओं की बढ़ती मजबूती को दर्शाता है।
आभूषणों की खरीदारी में सावधानी और हॉलमार्क का महत्व
महंगे रत्नों और धातुओं की खरीद के समय ग्राहकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है ताकि वे धोखाधड़ी का शिकार न हों। खरीदारी करते समय हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड द्वारा प्रमाणित हॉलमार्क वाले आभूषणों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि यह सोने की शुद्धता की आधिकारिक गारंटी होती है। इसके अतिरिक्त, खरीदारी वाले दिन की सटीक कीमत की पुष्टि इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन जैसे विश्वसनीय स्रोतों से अवश्य करनी चाहिए, क्योंकि सोने के भाव उसकी शुद्धता यानी 24, 22 या 18 कैरेट के आधार पर भिन्न-भिन्न होते हैं।
घरेलू स्तर पर असली चांदी की पहचान के सरल उपाय
चांदी की शुद्धता जांचने के लिए विशेषज्ञ कुछ आसान घरेलू तरीकों के उपयोग का सुझाव देते हैं। असली चांदी की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह चुंबकीय गुणों से मुक्त होती है और चुंबक के संपर्क में आने पर आकर्षित नहीं होती। इसके अलावा, चांदी की ऊष्मीय चालकता बहुत अधिक होती है, इसलिए इस पर बर्फ रखने से वह सामान्य की तुलना में कहीं अधिक तेजी से पिघलने लगती है। असली चांदी पूरी तरह गंधहीन होती है और यदि इसे किसी सफेद सूती कपड़े से रगड़ा जाए, तो उस पर काला निशान उभर आता है, जो धातु की प्रामाणिकता की पुष्टि करता है।
एपल ने भारत में बढ़ाया निवेश, रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं को मिलेगा बढ़ावा
7 May, 2026 11:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु: वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गज एपल ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी पहल करते हुए 100 करोड़ रुपये के निवेश की महत्वपूर्ण घोषणा की है। कंपनी का यह कदम उसके वैश्विक स्थिरता लक्ष्यों और साल 2030 तक पूरी आपूर्ति शृंखला को कार्बन मुक्त बनाने की दिशा में एक रणनीतिक प्रयास है। इस निवेश के माध्यम से भारत में पर्यावरण संरक्षण और हरित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजना बनाई गई है, जो देश की स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को भी रेखांकित करता है। यह पहल न केवल कार्बन पदचिह्नों को कम करने में सहायक होगी, बल्कि भारत की ग्रीन सप्लाई चेन को भी एक नई दिशा प्रदान करेगी।
क्लीनमैक्स के साथ साझेदारी और ऊर्जा उत्पादन का विस्तार
एपल ने भारत के प्रमुख ऊर्जा डेवलपर 'क्लीनमैक्स' के साथ हाथ मिलाकर देशभर में 150 मेगावाट से अधिक क्षमता के नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस परियोजना से उत्पादित होने वाली स्वच्छ ऊर्जा की मात्रा इतनी विशाल होगी कि इससे प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ लाख भारतीय परिवारों की बिजली संबंधी जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकेगा। यह पहली बार नहीं है जब दोनों कंपनियों ने साथ काम किया हो, क्योंकि इससे पहले भी एपल ने अपने भारतीय कार्यालयों और रिटेल आउटलेट्स को सौर ऊर्जा से संचालित करने के लिए इसी प्रकार के प्रोजेक्ट्स पर काम किया था। भविष्य में इस उत्पादन क्षमता को और अधिक विस्तार देने की भी योजना है, जिससे औद्योगिक परिचालन में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को न्यूनतम किया जा सके।
कार्बन तटस्थता का लक्ष्य और पर्यावरण के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता
कंपनी का प्राथमिक उद्देश्य अपनी पूरी विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला को 100 प्रतिशत कार्बन न्यूट्रल बनाना है, जिसके लिए भारत एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। एपल की नेतृत्व टीम का मानना है कि पर्यावरण की रक्षा करना केवल एक कॉर्पोरेट जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह नवाचार के लिए एक बड़ी प्रेरक शक्ति भी है। भारत के प्राकृतिक संसाधनों को सहेजने और यहां की स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कंपनी लगातार नए निवेश कर रही है। यह प्रतिबद्धता वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों का एक अभिन्न हिस्सा है, जो अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भी एक उदाहरण पेश करती है।
प्लास्टिक मुक्त भविष्य और हरित उद्यमिता को प्रोत्साहन
ऊर्जा क्षेत्र के अलावा एपल ने भारत में प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने और पारिस्थितिक तंत्र में सुधार के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया जैसी संस्थाओं के साथ भी महत्वपूर्ण करार किए हैं। इस सहयोग के जरिए अपशिष्ट प्रबंधन और सामग्रियों के पुनर्चक्रण की प्रणालियों को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा ताकि पर्यावरण में प्लास्टिक के रिसाव को रोका जा सके। साथ ही, कंपनी ने 'एक्यूमेन' के साथ मिलकर नए और छोटे ग्रीन स्टार्टअप्स को मेंटरशिप और वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना बनाई है, जो पुनर्योजी कृषि और सर्कुलर इकॉनमी जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। ये सभी प्रयास सामूहिक रूप से भारत में एक सशक्त और टिकाऊ पर्यावरण अनुकूल व्यापारिक वातावरण तैयार करने में सहायक सिद्ध होंगे।
सेंसेक्स और निफ्टी में हल्की हलचल, बैंकिंग और आईटी शेयरों में मिला-जुला रुख
7 May, 2026 10:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत काफी उतार-चढ़ाव भरी रही, जहां शुरुआती मामूली बढ़त के बाद बिकवाली के दबाव ने बाजार की चमक फीकी कर दी। सुबह के समय सेंसेक्स में सौ अंकों से ज्यादा की तेजी देखी गई और निफ्टी भी 24,350 के स्तर को पार कर गया, लेकिन जल्द ही निवेशकों के सतर्क रुख और मुनाफावसूली के कारण सूचकांक लाल निशान में आ गए। सेंसेक्स करीब 160 अंकों की गिरावट के साथ 77,798 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, वहीं निफ्टी में भी तीस अंकों की सुस्ती दर्ज की गई। बाजार की इस अस्थिरता के बीच घरेलू मुद्रा में भी बड़ी कमजोरी देखी गई और रुपया डॉलर के मुकाबले फिसलकर 94.77 के स्तर पर पहुंच गया, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले संभावित समझौतों की खबरों के बीच उपजा नाटकीय बदलाव रहा।
विदेशी निवेश की निकासी और वैश्विक तनाव का दोहरा दबाव
घरेलू शेयर बाजार पर इस समय वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार जारी बिकवाली का गहरा साया बना हुआ है। एक्सचेंज के आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी फंडों ने हाल ही में हजारों करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की है, जिससे बाजार की रिकवरी में बाधा आ रही है। पश्चिम एशिया के संकट और ईरान से जुड़ी खबरों ने निवेशकों को बेहद सावधान कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप बाजार में निश्चित दिशा का अभाव दिख रहा है। बुधवार को बाजार में जो शानदार तेजी देखी गई थी, वह गुरुवार की सुबह बरकरार नहीं रह सकी क्योंकि विदेशी पूंजी का बाहर जाना बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और प्रमुख शेयरों की बदलती चाल
वैश्विक तेल बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू रही हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार पर दबाव बढ़ा है। इस अनिश्चितता के माहौल में शेयरों के प्रदर्शन में भी काफी भिन्नता देखी जा रही है। जहां एक ओर महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील और आईसीआईसीआई बैंक जैसे शेयर बाजार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आईटी और फार्मा सेक्टर की दिग्गज कंपनियों जैसे टीसीएस और सन फार्मा के शेयरों में कमजोरी का रुख बना हुआ है। एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिलने वाले सकारात्मक संकेतों के बावजूद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित कर रही हैं।
विशेषज्ञों का दृष्टिकोण और भविष्य की आर्थिक दिशा
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय बाजार वर्तमान में उम्मीद और आशंका के बीच झूल रहा है, जहां हर छोटी वैश्विक हलचल का असर कीमतों पर दिख रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया के राजनीतिक घटनाक्रम और तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। हालांकि सकारात्मक वैश्विक संकेतों और कुछ क्षेत्रों में दिख रही मजबूती से अल्पकालिक राहत मिल सकती है, लेकिन लंबी अवधि में स्थिरता तभी आएगी जब भू-राजनीतिक तनाव कम होगा और विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर से कायम होगा। फिलहाल निवेशकों की नजरें ईरान की प्रतिक्रिया और ऊर्जा क्षेत्र की कीमतों पर टिकी हुई हैं।
लखनऊ से कानपुर तक, जानिए यूपी के सबसे रईस शहरों की पूरी तस्वीर
7 May, 2026 09:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नोएडा: उत्तर प्रदेश की राजनीतिक अहमियत से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन अब यह राज्य आर्थिक मोर्चे पर भी नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 के ताजा आंकड़ों ने यूपी के औद्योगिक परिदृश्य की एक बेहद दिलचस्प तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में कुल 41 ऐसे अमीर व्यक्तित्व हैं जिन्हें अरबपतियों की श्रेणी में रखा गया है। ये रईस राज्य के 11 विभिन्न शहरों से ताल्लुक रखते हैं, जो यूपी की बदलती आर्थिक ताकत का प्रमाण है।
उत्तर प्रदेश में अरबपतियों का नया केंद्र
जब भी अमीरी की बात होती है, तो अक्सर कानपुर का नाम ज़हन में आता है, लेकिन वर्तमान आंकड़ों ने नोएडा को उत्तर प्रदेश का असली 'अरबपतियों का गढ़' घोषित कर दिया है। गौतमबुद्ध नगर जिले का यह हिस्सा 15 अरबपतियों के साथ सूची में शीर्ष पर काबिज है। इसके बाद औद्योगिक नगरी कानपुर 8 अरबपतियों के साथ दूसरे स्थान पर है। इस सूची में सबसे चौंकाने वाला नाम ताजनगरी आगरा का है, जो 5 अरबपतियों के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद है, जो शहर की मजबूत व्यापारिक जड़ों को दर्शाता है।
क्षेत्रीय वितरण और उभरते हुए शहर
राज्य के अन्य प्रमुख शहरों में भी धनकुबेरों की मौजूदगी दर्ज की गई है। राजधानी में 4 अरबपति निवास करते हैं, जबकि गाजियाबाद में इनकी संख्या 3 है। इनके अलावा प्रयागराज, फैजाबाद, बुलंदशहर, ग्रेटर नोएडा, अलीगढ़ और गोरखपुर जैसे शहरों से भी एक-एक अरबपति ने इस प्रतिष्ठित सूची में अपनी जगह बनाई है। यह विविधता स्पष्ट करती है कि अब प्रदेश का विकास केवल एक या दो केंद्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों से भी बड़े कारोबारी साम्राज्य खड़े हो रहे हैं।
प्रदेश के सबसे धनवान चेहरे और उनकी संपत्ति
संपत्ति के मामले में नोएडा के आदित्य खेमका उत्तर प्रदेश के सबसे अमीर व्यक्ति बनकर उभरे हैं। आदित्य इन्फोटेक के संस्थापक खेमका की कुल नेट वर्थ 35,140 करोड़ रुपये आंकी गई है। वहीं, शिक्षा जगत में क्रांति लाने वाले 'फिजिक्स वाला' के संस्थापक अलख पांडे राज्य के दूसरे सबसे अमीर शख्स हैं। प्रयागराज से संबंध रखने वाले अलख पांडे की कुल संपत्ति 14,520 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। ये आंकड़े बताते हैं कि तकनीक और शिक्षा जैसे नए क्षेत्रों ने भी यूपी में बड़े पैमाने पर संपदा सृजन में योगदान दिया है।
न्यूनतम सैलरी ₹65,000 की मांग से 8वें वेतन आयोग पर चर्चा तेज
6 May, 2026 02:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे: 8वें वेतन आयोग के समक्ष केंद्रीय कर्मचारियों की बड़ी मांग, न्यूनतम वेतन 65 हजार और फिटमेंट फैक्टर 3.8 करने का प्रस्ताव
केंद्रीय कर्मचारियों के भविष्य और उनके वेतन ढांचे को लेकर महाराष्ट्र के पुणे में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई है। इस बैठक में महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधियों ने 8वें वेतन आयोग की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई और आयोग के अन्य वरिष्ठ सदस्यों से मुलाकात कर कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए दूरगामी प्रस्ताव सौंपे। संगठन की ओर से प्रमुखता से यह मांग रखी गई है कि वर्तमान न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर 65,000 रुपये किया जाए और फिटमेंट फैक्टर को 3.8 के स्तर पर लाया जाए। लगभग आधे घंटे तक चली इस चर्चा में कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, पेंशन और कार्यस्थल की परिस्थितियों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया गया ताकि बढ़ती महंगाई के दौर में सरकारी सेवकों को उचित राहत मिल सके।
परिवार की नई परिभाषा और न्यूनतम वेतन में भारी बढ़ोतरी का आधार
संगठन ने आयोग के समक्ष तर्क दिया है कि वर्तमान में न्यूनतम वेतन के निर्धारण के लिए परिवार के सदस्यों की जो संख्या मानी जाती है, उसे बदला जाना चाहिए। अब कर्मचारी, जीवनसाथी, दो बच्चे और माता-पिता को मिलाकर परिवार की गणना तीन के बजाय पांच सदस्यों के आधार पर करने का सुझाव दिया गया है। इसी यथार्थवादी आकलन और एक्रोयड फॉर्मूले को आधार बनाकर एंट्री-लेवल वेतन को 18,000 रुपये से बढ़ाकर 65,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। प्रतिनिधियों का मानना है कि राजकोषीय संतुलन को बनाए रखते हुए यदि फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.8 कर दिया जाता है, तो इससे कर्मचारियों के जीवन स्तर में सार्थक सुधार होगा और वे अपनी बुनियादी जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगे।
भत्तों में संशोधन और करियर प्रोग्रेशन स्कीम पर विशेष जोर
वेतन वृद्धि के साथ-साथ भत्तों की संरचना में भी बड़े बदलावों की मांग की गई है, जिसमें महंगाई भत्ते के 50 प्रतिशत तक पहुँचने पर उसे स्वतः मूल वेतन में शामिल करने का प्रस्ताव शामिल है। मकान किराया भत्ते को शहरों की श्रेणी के आधार पर पुनर्गठित करने और यात्रा भत्ते को ढाई गुना तक बढ़ाने का आग्रह किया गया है ताकि परिवहन लागत में हुई वृद्धि की भरपाई हो सके। इसके अतिरिक्त, आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों के लिए विशेष भत्तों में बढ़ोतरी और शिक्षकों के लिए नई करियर प्रोग्रेशन स्कीम लागू करने की बात कही गई है। संगठन ने वार्षिक वेतन वृद्धि की दर को भी 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने का सुझाव दिया है ताकि कर्मचारियों की आर्थिक प्रगति सुनिश्चित हो सके।
पुरानी पेंशन योजना की बहाली और सेवानिवृत्ति लाभों में सुधार की मांग
इस बैठक का एक सबसे बड़ा केंद्र बिंदु पेंशन सुधार रहा है, जिसमें देश भर के लाखों कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने की पुरजोर वकालत की गई है। संगठन ने सुझाव दिया है कि यदि एनपीएस जारी रहता है, तो उसमें कम से कम 10 प्रतिशत रिटर्न की गारंटी और नियोक्ता का अंशदान बढ़ाकर साढ़े अठारह प्रतिशत किया जाना चाहिए। साथ ही, वरिष्ठ पेंशनभोगियों को मिलने वाली अतिरिक्त पेंशन की आयु सीमा को 80 वर्ष से घटाकर 75 वर्ष करने का प्रस्ताव भी दिया गया है। इन मांगों के माध्यम से कर्मचारियों की बदलती चिकित्सा आवश्यकताओं और मुद्रास्फीति के प्रभावों को संतुलित करने का प्रयास किया गया है, जिसकी परिणति अब आयोग की अंतिम रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
रुपये में बड़े सुधार की उम्मीद फिलहाल कम, 95 के करीब रह सकता है डॉलर
6 May, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारतीय रुपये पर दबाव जारी, साल के अंत तक 95 के स्तर पर रहने का अनुमान
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में छाई अस्थिरता का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ता दिखाई दे रहा है। फिच समूह की प्रमुख कंपनी बीएमआई की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के अंत तक भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 95 रुपये के दायरे में स्थिर रह सकता है। वर्तमान में रुपया 95.20 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है, जो इसकी कमजोरी को दर्शाता है। विशेष रूप से मार्च और अप्रैल के दौरान भारतीय मुद्रा के मूल्य में चार प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष और ऊर्जा कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव माना जा रहा है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक संघर्षों का असर रुपये की मजबूती पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
रिजर्व बैंक का हस्तक्षेप और गिरावट को नियंत्रित करने की रणनीति
यद्यपि रुपये पर दबाव बना हुआ है, लेकिन बीएमआई की रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि भारतीय रिजर्व बैंक इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगा। बाजार के जानकारों का मानना है कि विदेशी निवेशकों द्वारा की जा रही मुनाफे की निकासी और पूंजी के बहिर्वाह को रोकने के लिए केंद्रीय बैंक मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। हालांकि पिछले 12 महीनों में रुपये में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो साल 2022 के दौर की याद दिलाती है, लेकिन वर्तमान में रिजर्व बैंक के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। यह भंडार करीब सात महीने के आयात खर्च को कवर करने में सक्षम है, जिसका उपयोग आने वाले समय में बाजार की घबराहट को कम करने और रुपये की विनिमय दर को स्थिर रखने के लिए प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
ऊर्जा आयात और खाड़ी देशों से आने वाले धन पर संकट के बादल
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा आयात पर निर्भरता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि कुल आयात का लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा केवल ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा है। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि यदि खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति लंबी खिंचती है, तो वहां काम कर रहे भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले धन यानी रेमिटेंस में भी बड़ी कमी आ सकती है। भारत को मिलने वाले कुल रेमिटेंस का करीब 38 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से ही आता है, जो देश की जीडीपी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि वहां रहने वाले भारतीयों की आय प्रभावित होती है, तो इससे भारत का चालू खाता घाटा बढ़ सकता है, जिससे रुपये की स्थिति और अधिक नाजुक होने की संभावना बनी रहेगी।
जीडीपी वृद्धि के सकारात्मक अनुमान और विदेशी निवेशकों का रुख
आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत की विकास दर को लेकर सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रह सकती है, जबकि महंगाई दर के 3.4 प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना है। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशकों के बीच 'जोखिम से बचने' की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिसके चलते मार्च 2026 में भारत से 13.4 अरब डॉलर की भारी पूंजी निकासी देखी गई। यह महामारी के बाद का सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो है, जो यह दर्शाता है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा फिलहाल डगमगाया हुआ है। आने वाले महीनों में भारतीय बाजार की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक राजनीति किस दिशा में मुड़ती है और घरेलू स्तर पर रिजर्व बैंक इन बाहरी झटकों से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है।
सोने की कीमतों में तेजी, जानिए आज का ताजा भाव
6 May, 2026 11:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे भाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में आज पीली धातु और चांदी की कीमतों में जबरदस्त मजबूती देखने को मिली है, जिससे सर्राफा बाजार में हलचल तेज हो गई है। वैश्विक बाजार से मिल रहे सकारात्मक संकेतों और घरेलू मांग में आई स्थिरता के चलते सोने के भाव 2,047 रुपये की बड़ी बढ़त के साथ 1,51,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गए हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह के कारोबारी सत्र से ही निवेशकों का रुझान सोने की खरीद की तरफ बना रहा, जिसका असर 24 कैरेट से लेकर 18 कैरेट तक की सभी श्रेणियों पर पड़ा है। इस तेजी के बीच 22 कैरेट सोने की कीमत अब 13,870 रुपये प्रति ग्राम हो गई है, जबकि 18 कैरेट सोने का भाव 11,348 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किया गया है।
चांदी की कीमतों में भी आई भारी तेजी और औद्योगिक मांग का असर
सोने के साथ-साथ चांदी के बाजार में भी आज निवेशकों और औद्योगिक खरीदारों की सक्रियता के कारण बड़ी रैली देखी गई। चांदी की कीमतों में 6,134 रुपये प्रति किलो का भारी उछाल आया है, जिससे इसके दाम अब 2,50,450 रुपये प्रति किलो के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर औद्योगिक मांग में सुधार और सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी की बढ़ती लोकप्रियता ने इसे जबरदस्त सपोर्ट प्रदान किया है। बाजार की इस तेजी ने न केवल बड़े निवेशकों बल्कि आम खरीदारों को भी चौंका दिया है क्योंकि दोनों कीमती धातुओं के भाव अपने पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ रहे हैं।
देश के महानगरों में सोने के दामों की स्थिति और क्षेत्रीय रुझान
देश के प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में क्षेत्रीय करों और मांग के अनुसार बदलाव देखा गया है, जिसमें दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव 1,51,444 रुपये रहा, जबकि चेन्नई में यह आंकड़ा सबसे अधिक 1,53,280 रुपये के करीब पहुंच गया। मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में कीमतें लगभग समान स्तर पर बनी रहीं, जहां 22 कैरेट सोना 13,870 रुपये के आसपास कारोबार करता नजर आया। पटना और अन्य शहरों में भी आभूषणों की मांग में तेजी बनी हुई है, जिससे स्थानीय सर्राफा बाजारों में ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है और कीमतों में निरंतर उतार-चढ़ाव का दौर जारी है।
वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता ने बढ़ाया कीमती धातुओं का आकर्षण
बाजार विश्लेषकों का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को शेयर बाजार के बजाय सोने की ओर आकर्षित किया है। आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ती महंगाई के डर से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग में वैश्विक स्तर पर इजाफा हुआ है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर दिख रहा है। इसके साथ ही भारत में शादी-ब्याह के आगामी सीजन ने भी आभूषणों की घरेलू मांग को पंख लगा दिए हैं, जिससे बाजार में आपूर्ति और मांग का संतुलन कीमतों को ऊपर की ओर धकेल रहा है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि सोने और चांदी का यह सकारात्मक रुख आने वाले कुछ और दिनों तक बरकरार रह सकता है।
₹1681 करोड़ की मेगा परियोजना, चीन सीमा पर बनेगी रणनीतिक सुरंग
6 May, 2026 11:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत रचेगा इतिहास, शिंकुन ला दर्रे के नीचे बन रही दुनिया की सबसे ऊंची सुरंग अगस्त 2028 तक होगी तैयार
हिमाचल प्रदेश और लद्दाख की दुर्गम पहाड़ियों के बीच भारत एक ऐसा इंजीनियरिंग चमत्कार तैयार कर रहा है, जो पूरी दुनिया को हैरान कर देगा। शिंकुन ला सुरंग का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जो पूर्ण होने के बाद विश्व की सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित मोटर मार्ग सुरंग बन जाएगी। 15,800 फीट की गगनचुंबी ऊंचाई पर बन रही यह सुरंग न केवल तकनीकी कौशल का प्रतीक है, बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से भी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सीमा सड़क संगठन द्वारा 'प्रोजेक्ट योजक' के तहत इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारा जा रहा है, जिसकी शुरुआत जुलाई 2024 में हुई थी और इसके अगस्त 2028 तक पूरी तरह से संचालित होने की संभावना है।
लाहौल और जंस्कार घाटी के बीच हर मौसम में सुगम होगा सफर
इस सुरंग का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यह हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी को लद्दाख की जंस्कार घाटी से सीधे जोड़ देगी, जिससे साल भर आवाजाही संभव हो सकेगी। वर्तमान में भारी बर्फबारी के कारण यह मार्ग सर्दियों में महीनों तक बंद रहता है, लेकिन 4.1 किलोमीटर लंबी यह ट्विन-ट्यूब सुरंग निमू-पदम-दारचा सड़क मार्ग पर बारहमासी संपर्क सुनिश्चित करेगी। केंद्र सरकार ने इस विशाल परियोजना के लिए 1681 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को एक नई दिशा प्रदान करेगा। यह सुरंग बन जाने के बाद दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आपातकालीन सेवाएं और रसद पहुंचना काफी आसान हो जाएगा।
सुरक्षा के आधुनिक मानक और आपातकालीन निकास की विशेष व्यवस्था
तकनीकी विशिष्टताओं की बात करें तो शिंकुन ला सुरंग में यात्रियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है और इसमें हर 500 मीटर की दूरी पर क्रॉस-पैसेज बनाए जा रहे हैं। ये क्रॉस-पैसेज दो समानांतर सुरंगों को जोड़ने वाली संकरी गलियां होती हैं, जिनका उपयोग किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी या सुरंग के रखरखाव के कार्यों के लिए किया जाता है। आधुनिक वेंटिलेशन और सुरक्षा प्रणालियों से लैस यह सुरंग अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाई जा रही है ताकि ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में ऑक्सीजन और दबाव की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
सीमा पर सैन्य मजबूती और लद्दाख के सामाजिक विकास को मिलेगी नई गति
सामरिक महत्व के लिहाज से यह सुरंग भारतीय सशस्त्र बलों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी क्योंकि इसके माध्यम से चीन सीमा के करीब सैनिकों और भारी सैन्य उपकरणों की आवाजाही पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेज और गोपनीय तरीके से हो सकेगी। युद्ध जैसी स्थितियों में यह मार्ग रसद आपूर्ति की जीवनरेखा बनेगा। इसके साथ ही, बेहतर कनेक्टिविटी के चलते लद्दाख के सुदूर क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिलेगी, जिससे इस केंद्र शासित प्रदेश में आर्थिक और सामाजिक समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे। यह सुरंग न केवल लद्दाख के पिछड़े इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ेगी, बल्कि वहां के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी।
निवेशकों के लिए बड़ा मौका, आज नहीं खरीदा तो नहीं मिलेगा फायदा
6 May, 2026 10:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु: ऑरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज के निवेशकों के लिए बड़ा दिन, 270 रुपये के भारी-भरकम डिविडेंड का लाभ उठाने का अंतिम अवसर
आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ऑरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज सॉफ्टवेयर के शेयरों में बुधवार को जबरदस्त हलचल देखी जा रही है क्योंकि निवेशकों के पास कंपनी द्वारा घोषित आकर्षक डिविडेंड का लाभ उठाने के लिए आज आखिरी मौका है। कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए प्रति शेयर 270 रुपये के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है, जिसके लिए 7 मई की रिकॉर्ड डेट निर्धारित की गई है। मौजूदा शेयर बाजार के नियमों के अनुसार, डिविडेंड का हकदार बनने के लिए निवेशकों को रिकॉर्ड तिथि से पहले शेयर खरीदना अनिवार्य होता है, यही कारण है कि आज बाजार खुलते ही इस स्टॉक पर निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है। कंपनी की योजना है कि इस लाभांश का भुगतान पात्र शेयरधारकों के खातों में 21 मई तक सुनिश्चित कर दिया जाए।
रिकॉर्ड तिथि और पात्रता को लेकर बाजार में सक्रियता
शेयर बाजार में प्रचलित टी+1 सेटलमेंट प्रणाली के चलते जो निवेशक बुधवार को इस कंपनी के शेयर खरीदेंगे, वे ही इस भारी-भरकम लाभांश को पाने के पात्र माने जाएंगे। यदि कोई निवेशक 7 मई या उसके बाद खरीदारी करता है, तो वे रिकॉर्ड तिथि तक कंपनी के रजिस्टर में दर्ज नहीं हो पाएंगे और इस लाभ से वंचित रह जाएंगे। 5 रुपये की फेस वैल्यू वाले इस शेयर पर मिलने वाला यह डिविडेंड निवेशकों के लिए एक बड़े वित्तीय प्रोत्साहन के रूप में देखा जा रहा है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मौजूदा बाजार मूल्य पर कंपनी की डिविडेंड यील्ड चार प्रतिशत से भी अधिक है, जो बैंकिंग और आईटी सेक्टर के अन्य शेयरों की तुलना में काफी प्रतिस्पर्धी मानी जा रही है।
शानदार तिमाही नतीजे और लाभ में जबरदस्त उछाल
कंपनी की इस उदार डिविडेंड नीति के पीछे उसके मजबूत वित्तीय परिणाम एक मुख्य आधार रहे हैं, जहाँ पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले शुद्ध लाभ में 31 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का मुनाफा 644 करोड़ रुपये से बढ़कर 842 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुँच गया है, जबकि कुल राजस्व में भी 20 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी देखी गई है। विशेष रूप से कंपनी के प्रोडक्ट और सर्विसेज सेगमेंट ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है। राजस्व का एक बड़ा हिस्सा प्रोडक्ट सेगमेंट से प्राप्त हुआ है, जिसने वार्षिक आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि के साथ कंपनी की वित्तीय स्थिति को और सुदृढ़ किया है।
शेयर बाजार में प्रदर्शन और भविष्य के प्रति निवेशकों का रुझान
ऑरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज के स्टॉक ने न केवल लाभांश के मामले में बल्कि शेयर की कीमतों में वृद्धि के लिहाज से भी निवेशकों को मालामाल किया है। पिछले एक महीने के भीतर इस शेयर ने करीब 38 प्रतिशत की तूफानी तेजी दिखाई है, जबकि बीते तीन वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो इसने निवेशकों के निवेश को दोगुने से भी अधिक बढ़ाते हुए 165 प्रतिशत का बम्पर रिटर्न दिया है। साल 2002 से अब तक कंपनी ने 18 बार अपने शेयरधारकों को डिविडेंड का तोहफा दिया है, जो इसके स्थिर प्रबंधन और लाभ साझा करने की स्वस्थ परंपरा को दर्शाता है। बाजार विश्लेषक अब इस बात पर नजर रख रहे हैं कि रिकॉर्ड डेट निकलने के बाद स्टॉक की कीमतों में किस तरह का सुधार या स्थिरता देखने को मिलती है।
वैश्विक संकेतों से घरेलू बाजार में दिखी मजबूती
6 May, 2026 09:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: वैश्विक संकेतों और नेतृत्व परिवर्तन से शेयर बाजार में उत्साह, सेंसेक्स और निफ्टी की ऊंची छलांग
घरेलू शेयर बाजार के लिए बुधवार का सवेरा निवेशकों के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आया, जहाँ वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और कच्चे तेल की घटती कीमतों ने बाजार को जबरदस्त सहारा दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के शांतिपूर्ण समाधान की बढ़ती उम्मीदों ने निवेशकों के आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम किया है। इसी सकारात्मक माहौल के चलते कारोबारी सत्र के शुरू होते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी आधे प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ हरे निशान पर कारोबार करते देखे गए। बाजार की इस हरियाली के बीच भारतीय रुपया भी अपने सबसे निचले स्तर से उबरने में सफल रहा और डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ 94.99 के स्तर पर पहुँच गया।
सेंसेक्स और निफ्टी के आंकड़ों में जोरदार बढ़त
बाजार खुलते ही चौतरफा खरीदारी का दौर शुरू हो गया जिससे सेंसेक्स ने 600 अंकों से अधिक की छलांग लगाते हुए 77,675 का आंकड़ा छू लिया, जबकि निफ्टी भी 200 से अधिक अंकों की मजबूती के साथ 24,250 के पार निकल गया। निवेशकों ने प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेजी को हाथों-हाथ लिया और शुरुआती कारोबार में ही बाजार की पूंजी में बड़ा इजाफा देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत का संकेत है, जिससे मुद्रास्फीति का दबाव कम होने की उम्मीद में बाजार ने इस शानदार रैली को बरकरार रखा।
वोडाफोन आइडिया के नेतृत्व में बड़ा बदलाव और शेयरों में तेजी
शेयर बाजार की इस व्यापक तेजी के बीच दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वोडाफोन आइडिया ने निवेशकों का विशेष ध्यान खींचा क्योंकि कंपनी के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है। दिग्गज उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला की लगभग पांच वर्षों के अंतराल के बाद गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में वापसी हुई है, जिसे बाजार ने एक मजबूत संकेत के रूप में स्वीकार किया। उनके दोबारा कमान संभालने की खबर से कंपनी के शेयरों में 3.2 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया और शेयर 11.15 रुपये के स्तर तक पहुँच गए। बिड़ला ने पूर्व में कंपनी के वित्तीय संकट के समय पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन अब उनकी घर वापसी से कंपनी के भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।
बाजार के भविष्य और वैश्विक परिस्थितियों का विश्लेषण
भू-राजनीतिक मोर्चे पर आ रही सकारात्मक खबरों और कच्चे तेल के नरम होते तेवरों ने भारतीय बाजारों को एक नई और टिकाऊ दिशा प्रदान की है। कॉर्पोरेट जगत में हो रहे इन बड़े बदलावों और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के बीच बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक स्थितियां इसी तरह अनुकूल रहीं, तो यह सकारात्मक रुझान लंबे समय तक जारी रह सकता है। वर्तमान में बाजार की पूरी नजरें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और कच्चे तेल की आपूर्ति से जुड़ी खबरों पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में ट्रेडिंग की दिशा तय करेंगी।
विभागों का बंटवारा बदला, RBI ने प्रशासनिक ढांचा किया मजबूत
5 May, 2026 03:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी प्रशासनिक संरचना में बड़ा बदलाव करते हुए डिप्टी गवर्नरों के बीच विभागों के कार्यभार का नया आवंटन किया है। इस संगठनात्मक पुनर्गठन के तहत नवनियुक्त डिप्टी गवर्नर रोहित जैन को दस महत्वपूर्ण विभागों की कमान सौंपी गई है, जबकि वरिष्ठ डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जानकीरमन को ग्यारह विभागों का दायित्व मिला है। केंद्रीय बैंक का यह कदम आगामी चुनौतियों और बैंकिंग संचालन को अधिक सुव्यवस्थित तथा प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसला माना जा रहा है, जिससे भविष्य की नीतिगत योजनाओं को नई गति मिलेगी।
वरिष्ठ अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का विभाजन
रिजर्व बैंक द्वारा जारी की गई नई व्यवस्था के अनुसार स्वामीनाथन जानकीरमन अब पर्यवेक्षण, विधि, निरीक्षण और जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम जैसे अत्यंत संवेदनशील विभागों का नेतृत्व करेंगे, साथ ही उन पर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का भी जिम्मा होगा। दूसरी ओर पूनम गुप्ता को मौद्रिक नीति विभाग सहित छह प्रमुख कार्यक्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है, जो देश की आर्थिक दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। इसी क्रम में शिरीष चंद्र मुर्मू को विनियमन और प्रवर्तन से जुड़े पांच महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार सौंपा गया है, जिससे बैंक के विनियामक ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रोहित जैन का व्यापक अनुभव और नई भूमिका
टी. रबी शंकर का कार्यकाल पूर्ण होने के बाद रोहित जैन को तीन वर्षों के लिए डिप्टी गवर्नर के पद पर नियुक्त किया गया है, जो इससे पहले कार्यकारी निदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। केंद्रीय बैंक में चौंतीस वर्षों से अधिक का लंबा अनुभव रखने वाले जैन ने अपने करियर के दौरान विदेशी मुद्रा प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय बाजार विनियमन और जोखिम निगरानी जैसे विविध क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है। उनकी इस विशेषज्ञता को देखते हुए ही उन्हें दस प्रमुख विभागों का प्रभार दिया गया है, ताकि उनके प्रशासनिक कौशल का लाभ रिजर्व बैंक के जटिल ऑपरेशंस को बेहतर बनाने में लिया जा सके।
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की दिशा में केंद्रीय बैंक का बड़ा कदम
गुजरात विश्वविद्यालय से एमबीए और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से एम.कॉम की शिक्षा प्राप्त करने वाले रोहित जैन ने वर्ष 1991 में अपने करियर की शुरुआत की थी और वे पर्यवेक्षण विभाग में मुख्य महाप्रबंधक जैसे ऊंचे पदों पर भी रह चुके हैं। आरबीआई अधिनियम के तहत निर्धारित चार डिप्टी गवर्नरों की इस टीम के बीच विभागों का यह नया बंटवारा केंद्रीय बैंक की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से किया गया है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई टीम के पास अनुभव और नवाचार का बेहतरीन संतुलन है, जो भारतीय बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता और विकास को सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगा।
निवेशकों में सतर्कता बढ़ी, कीमती धातुओं में स्थिरता बनी रही
5 May, 2026 02:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय सराफा बाजार में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में सुस्ती देखी जा रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर दोनों कीमती धातुएं एक सीमित दायरे में कारोबार करती नजर आईं और शुरुआती सत्र में लाल निशान के साथ हल्की गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में जहां एक तरफ सैन्य टकराव की खबरें बाजार को प्रभावित कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर घरेलू स्तर पर डॉलर के मुकाबले रुपए की ऐतिहासिक कमजोरी ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों का उतार-चढ़ाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के जून अनुबंध में मामूली गिरावट देखी गई, जहां कीमतें एक लाख उनचास हजार तीन सौ पच्चीस रुपए के स्तर पर बनी रहीं। कारोबार के दौरान सोने ने एक लाख उनचास हजार नौ सौ पचास रुपए का उच्चतम स्तर भी छुआ, लेकिन मांग में कमी के चलते यह ऊंचे स्तर पर टिक नहीं सका। वहीं चांदी के जुलाई अनुबंध में भी गिरावट का रुख रहा और यह दो लाख तैंतालीस हजार दो सौ बाईस रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार करती देखी गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मिलाजुला रुझान देखने को मिल रहा है, जहां कॉमेक्स पर सोना हल्की बढ़त के साथ साढ़े चार हजार डॉलर के पार बना हुआ है, जबकि चांदी के भाव में गिरावट दर्ज की गई है।
मध्य पूर्व में सैन्य तनाव और ईरान-अमेरिका टकराव
वैश्विक बाजारों में इस अस्थिरता का मुख्य कारण मध्य पूर्व में पैदा हुआ नया सैन्य संकट माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावे ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है, जिसमें उन्होंने ईरानी जहाजों को निशाना बनाने की बात कही है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई थी। हालांकि ईरान ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन इस सामरिक क्षेत्र पर नियंत्रण को लेकर जारी खींचतान ने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के साथ-साथ धातु बाजार में भी अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
रुपए में रिकॉर्ड गिरावट और आर्थिक संकेतकों का प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बीच भारतीय मुद्रा पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और डॉलर के मुकाबले रुपया एक बार फिर कमजोर होकर बंद हुआ। इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, रुपया सुबह कमजोरी के साथ खुलने के बाद संभल नहीं सका और अंततः पच्चीस पैसे से अधिक की गिरावट के साथ पिंचानवे दशमलव तैंतीस के स्तर पर पहुंच गया। रुपए के इस अवमूल्यन ने आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ा दी है, जिससे घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों को एक तरफ समर्थन मिल रहा है, तो दूसरी तरफ वैश्विक मंदी की आशंका निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर रही है।
पांचवें दिन भी कर्मचारियों की हड़ताल नहीं रुकी
5 May, 2026 02:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियोल: सैमसंग ग्रुप की प्रसिद्ध बायोटेक इकाई 'सैमसंग बायोलॉजिक्स' में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर जारी कर्मचारियों का आंदोलन अब और तीव्र हो गया है। मंगलवार को कर्मचारियों की पहली आम हड़ताल लगातार पांचवें दिन भी जारी रही, जिसने कंपनी के परिचालन और उत्पादन पर बड़ा प्रभाव डाला है। यूनियन से जुड़े हजारों कर्मचारी अपने वेतन ढांचे में सुधार और प्रदर्शन के आधार पर मिलने वाले प्रोत्साहन में बड़ी बढ़ोतरी की जिद पर अड़े हुए हैं, जबकि प्रबंधन के साथ चल रही बातचीत फिलहाल बेनतीजा साबित हो रही है।
वेतन वृद्धि और बोनस की मांगों पर अड़ा श्रमिक संघ
कंपनी की स्थापना के बाद से पहली बार हुई इस हड़ताल में यूनियन के लगभग अट्ठाईस सौ सदस्यों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि उनके मूल वेतन और परफॉर्मेंस आधारित भुगतान में चौदह प्रतिशत का इजाफा किया जाए। इसके अतिरिक्त, यूनियन ने प्रत्येक श्रमिक के लिए लगभग बीस हजार अमेरिकी डॉलर के एकमुश्त नकद प्रोत्साहन और कंपनी के वार्षिक परिचालन लाभ के बीस प्रतिशत हिस्से को बोनस के रूप में देने की शर्त रखी है। हालांकि, कंपनी प्रबंधन ने अब तक केवल छह दशमलव दो प्रतिशत की कुल बढ़ोतरी का ही प्रस्ताव दिया है, जिसे यूनियन ने सिरे से खारिज कर दिया है।
हड़ताल से करोड़ों के आर्थिक नुकसान की आशंका
प्रबंधन और यूनियन के बीच जारी इस गतिरोध का सीधा असर कंपनी की वित्तीय स्थिति पर पड़ता दिखाई दे रहा है। कंपनी के सूत्रों के अनुसार, पिछले महीने हुई तीन दिनों की आंशिक हड़ताल से ही लगभग डेढ़ सौ अरब वॉन का भारी नुकसान हुआ था, और अब इस पूर्ण हड़ताल से यह आंकड़ा साढ़े छह सौ अरब वॉन तक पहुँचने की आशंका है। यह विशाल राशि कंपनी की पहली तिमाही की कुल बिक्री के लगभग आधे हिस्से के बराबर है, जो वैश्विक बाजार में सैमसंग बायोलॉजिक्स की साख और आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है।
मध्यस्थता के प्रयास और भविष्य की रणनीति
श्रम मंत्रालय के हस्तक्षेप और मध्यस्थता के अनुरोध के बावजूद दोनों पक्षों के बीच सहमति का कोई रास्ता नहीं निकल पाया है। कंपनी प्रबंधन ने यूनियन की मांगों को अतार्किक बताते हुए उन्हें सामूहिक कार्रवाई रोककर पुनः काम पर लौटने का आग्रह किया है, जबकि यूनियन ने बुधवार से 'वर्क-टू-रूल' अभियान शुरू करने की चेतावनी दे दी है। इस सप्ताह के अंत में दो और दौर की बैठकों की योजना बनाई गई है, जिसमें मतभेदों को कम करने और किसी ठोस समझौते पर पहुंचने की कोशिश की जाएगी, ताकि विश्व स्तरीय बायोटेक उत्पादन प्रक्रिया को फिर से पटरी पर लाया जा सके।
भारत की आर्थिक मजबूती पर मूडीज की बड़ी टिप्पणी
5 May, 2026 02:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर पिछले कुछ वर्षों में आए भीषण आर्थिक संकटों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद भारत दुनिया की सबसे मजबूत और टिकाऊ उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है। प्रतिष्ठित क्रेडिट रेटिंग एजेंसी 'मूडीज रेटिंग्स' द्वारा मंगलवार को जारी की गई एक विशेष रिपोर्ट में भारत की आर्थिक स्थिरता की जमकर सराहना की गई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार और स्पष्ट आर्थिक नीतियां वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने में सबसे बड़ी ताकत साबित हुई हैं, जिससे देश किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय झटके का सामना करने के लिए अन्य उभरते बाजारों की तुलना में कहीं अधिक सक्षम नजर आता है।
मजबूत आर्थिक नीतियां और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा
मूडीज की विश्लेषण रिपोर्ट इस बात को रेखांकित करती है कि भारत का मौद्रिक नीति ढांचा अत्यंत पारदर्शी है, जो देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी दबावों से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मुद्रास्फीति की दरें नियंत्रण में हैं और विनिमय दरों को जरूरत के हिसाब से ढालने की क्षमता ने इसे वैश्विक मंदी के दौर में भी लचीला बनाए रखा है। घरेलू फंडिंग के लिए गहरे स्थानीय बाजारों पर निर्भरता और विदेशी भंडार के विशाल बफर ने भारत को उन देशों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है जो किसी भी वित्तीय तनाव की स्थिति में भी अपनी स्थिरता बनाए रखने का माद्दा रखते हैं।
वैश्विक संकटों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था का सफल परीक्षण
पिछले पांच वर्षों में दुनिया ने कोविड-19 महामारी, ब्याज दरों में बेतहाशा वृद्धि, बैंकिंग क्षेत्र का तनाव और वर्ष 2025 में उत्पन्न हुए नए टैरिफ विवादों जैसे चार बड़े झटकों का सामना किया है, लेकिन भारत इन सभी चुनौतियों से बिना किसी बड़े नुकसान के बाहर निकलने में कामयाब रहा है। मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में भारत सहित दुनिया के दस बड़े उभरते बाजारों के प्रदर्शन की तुलना की है, जिसमें यह पाया गया कि भारत ने जोखिमों के बावजूद अपनी बाजार पहुंच को कभी कम नहीं होने दिया। अनुकूल बाहरी परिस्थितियों और समय रहते लिए गए कड़े नीतिगत फैसलों ने भारतीय बाजार को वैश्विक झटकों को सहन करने की एक नई शक्ति प्रदान की है।
भविष्य की चुनौतियां और कर्ज के बोझ पर सतर्क रहने की सलाह
सकारात्मक पहलुओं के साथ-साथ रेटिंग एजेंसी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष मौजूद कुछ महत्वपूर्ण जोखिमों की ओर भी संकेत किया है, जिसमें बढ़ता हुआ सार्वजनिक ऋण और राजकोषीय घाटा प्रमुख चिंता के विषय हैं। मूडीज ने आगाह किया है कि कर्ज का उच्च स्तर सरकार के लिए भविष्य के अचानक आने वाले झटकों पर त्वरित वित्तीय प्रतिक्रिया देने की क्षमता को सीमित कर सकता है। निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि जहां भारत के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्पष्ट नीतियां हैं, वहीं राजकोषीय असंतुलन जैसी चुनौतियों का प्रबंधन करना भविष्य में देश की आर्थिक सेहत को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए अनिवार्य होगा।
सरकार का बड़ा फैसला, अब बढ़ेगी कर्मचारियों की जेब
5 May, 2026 01:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ते में संशोधन की घोषणा की है, जिससे उनके मासिक वेतन में आंशिक वृद्धि देखने को मिलेगी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मई से जुलाई 2026 की तिमाही के लिए महंगाई भत्ते को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 25.70 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, भत्ते में हुई इस 0.70 प्रतिशत की मामूली वृद्धि को लेकर बैंक यूनियनों और कर्मचारियों के बीच असंतोष का भाव देखा जा रहा है, क्योंकि उनका मानना है कि वर्तमान महंगाई दर के मुकाबले यह इजाफा बेहद कम है।
वेतनमान के अनुसार मामूली आर्थिक लाभ
महंगाई भत्ते में की गई इस हालिया बढ़ोतरी का सीधा असर बैंक कर्मियों की जेब पर पड़ेगा, लेकिन इसकी राशि बहुत अधिक नहीं होगी। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि विभिन्न वेतन श्रेणियों के आधार पर कर्मचारियों के मासिक वेतन में 435 रुपये से लेकर 1,050 रुपये तक की ही वृद्धि संभव हो पाएगी। उदाहरण के तौर पर, जिन कर्मियों का मूल वेतन 48,480 रुपये है, उन्हें हर महीने मात्र 435 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे, जबकि 1,08,260 रुपये की अधिकतम बेसिक सैलरी पाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन में केवल 965 रुपये का इजाफा दर्ज किया जाएगा।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर गणना
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, इस नए भत्ते का निर्धारण मार्च 2026 को समाप्त हुई तिमाही के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के आधार पर किया गया है। सूचकांक के उतार-चढ़ाव पर नजर डालें तो जनवरी में यह 148.6 पर था, जो फरवरी में मामूली गिरकर 148.5 हुआ और मार्च में बढ़कर 149.1 के स्तर पर पहुंच गया। इन तीन महीनों के औसत के आधार पर जब 2016 के आधार सूचकांक से तुलना की गई, तो कुल अंतर 25.70 अंक निकलकर आया, जिसके चलते आगामी तिमाही के लिए भत्ते में 0.70 अंकों की बढ़ोतरी तय की गई है।
महंगाई के दौर में कर्मचारियों की प्रतिक्रिया
बैंकिंग सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यद्यपि यह बढ़ोतरी तकनीकी गणना के अनुसार सटीक है, लेकिन व्यावहारिक धरातल पर यह कर्मचारियों को बड़ी राहत देने में विफल रही है। भत्ते में वृद्धि का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की क्रय शक्ति को महंगाई के साथ तालमेल बिठाने में मदद करना होता है, परंतु न्यूनतम 435 रुपये की वृद्धि को बैंक कर्मी ऊंट के मुंह में जीरा समान मान रहे हैं। विभाग का तर्क है कि यह संशोधन सुनिश्चित करता है कि सरकारी नीतियों के तहत समय-समय पर मिलने वाले लाभ निरंतर जारी रहें, भले ही उनकी मात्रा वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार कम प्रतीत हो रही हो।
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