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TCS Q1 Results के बाद शेयर खरीदें या इंतजार करें? जानिए एक्सपर्ट्स की राय
9 Jul, 2026 05:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के अपने वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस पहली तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है, जहां मुनाफा बाजार के विश्लेषकों द्वारा लगाए गए अनुमानों से थोड़ा कम दर्ज किया गया, वहीं दूसरी ओर राजस्व के मोर्चे पर कंपनी ने अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए बेहतर प्रदर्शन किया है। इस अवधि के दौरान आईटी क्षेत्र की इस दिग्गज कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और वैश्विक सौदों के मामले में अपनी मजबूत बाजार हिस्सेदारी को बनाए रखा है, जिससे भविष्य में टिकाऊ विकास की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।
वित्तीय नतीजों में राजस्व मजबूत पर मुनाफा रहा सुस्त
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में टीसीएस का समेकित शुद्ध लाभ (कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट) 13,349 करोड़ रुपये रहा। बाजार के प्रमुख सर्वे में इसके 13,461 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद जताई जा रही थी, जिससे यह थोड़ा पीछे रह गया। हालांकि, राजस्व के मोर्चे पर कंपनी को बड़ी कामयाबी मिली और कुल रेवेन्यू 72,275 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जिसने बाजार के 71,847 करोड़ रुपये के अनुमान को आसानी से पार कर लिया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बड़े सौदों में शानदार वृद्धि
कंपनी ने तकनीकी मोर्चे पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कारोबार में शानदार तेजी दिखाई है। टीसीएस का एनुअलाइज्ड एआई रेवेन्यू रन रेट बढ़कर 2.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछली तिमाही की तुलना में 13.6 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसके अलावा, कंपनी ने कुल 9.5 अरब डॉलर की नई डील (टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू) हासिल की है, जिसमें एसकेएफ के साथ हुआ 80 करोड़ डॉलर का बड़ा एआई-आधारित करार और सर्विसनाउ जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ मिले मल्टी-मिलियन डॉलर के समझौते शामिल हैं।
वैश्विक चुनौतियों के बीच प्रबंधन का सकारात्मक रुख
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक के. कृतिवासन ने इन नतीजों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद टीसीएस ने अपनी मजबूत विकास गति को बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि ग्राहकों द्वारा एआई, साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाने के कारण टीसीएस को नए ऑर्डर बुक करने और मौजूदा क्लाइंट्स से अपने व्यापार को और अधिक विस्तार देने में उल्लेखनीय सफलता मिली है।
निवेशकों के लिए लाभांश का एलान और बाजार की प्रतिक्रिया
तिमाही नतीजों के साथ ही टीसीएस के निदेशक मंडल ने अपने शेयरधारकों के लिए 12 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम लाभांश (डिविडेंड) को मंजूरी दी है, जिसके भुगतान की अंतिम तारीख 31 जुलाई तय की गई है। हालांकि, कार्यबल के मोर्चे पर जून तिमाही के अंत तक कर्मचारियों की कुल संख्या 5,93,798 रही और आईटी सेवाओं में नौकरी छोड़ने की दर (एट्रिशन रेट) 13.6 प्रतिशत दर्ज की गई। अमेरिका में वीजा जांच से जुड़ी चिंताओं के कारण शुरुआती कारोबार में दबाव झेलने के बाद कंपनी का शेयर अंततः रिकवरी करते हुए 2,059 रुपये के स्तर पर करीब-करीब सपाट बंद हुआ।
IMF ने जताया भरोसा, महंगे तेल का असर सीमित; विकास दर पर क्या कहा?
9 Jul, 2026 03:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती की सराहना की है। वैश्विक संस्था का कहना है कि मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद बेहद सुदृढ़ बनी हुई है। हालांकि, आईएमएफ ने चालू वर्ष 2026 के लिए भारत की विकास दर (ग्रोथ रेट) के अनुमान को मामूली रूप से संशोधित कर 6.4 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन साथ ही यह भरोसा भी जताया है कि अगले साल ऊर्जा संकट का दबाव कम होते ही देश की जीडीपी रफ्तार पकड़ेगी।
आर्थिक आउटलुक में मामूली संशोधन और भविष्य के संकेत
आईएमएफ द्वारा जारी 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वर्ष 2026 की अनुमानित विकास दर में अप्रैल के मुकाबले 0.1 प्रतिशत अंक की सूक्ष्म कटौती की गई है। इसके विपरीत, वर्ष 2027 के विकास अनुमान को 0.2 प्रतिशत अंक बढ़ाकर देश के आर्थिक परिदृश्य को और मजबूत बताया गया है। संस्था का मानना है कि उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन और घरेलू बाजार में वस्तुओं व सेवाओं की मजबूत मांग भारत की आर्थिक प्रगति को लगातार सहारा दे रही है।
वैश्विक चुनौतियों का भारत ने दृढ़ता से किया सामना
रिपोर्ट जारी करने के दौरान आईएमएफ के शीर्ष अधिकारियों ने रेखांकित किया कि भारत ने दुनिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सामना कहीं अधिक परिपक्वता और मजबूती से किया है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी सैन्य टकराव की वजह से ईंधन और ऊर्जा की आसमान छूती कीमतों का असर इस साल देश की कुल विकास दर पर थोड़ा दिखाई दे सकता है, जिसे एक तात्कालिक प्रभाव माना जा रहा है।
ऊर्जा संकट कम होते ही बढ़ेगी विकास की रफ्तार
आईएमएफ के अनुसंधान विभाग की प्रमुख डेनिज इगन ने प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि हालिया आर्थिक आंकड़े उम्मीद से कहीं बेहतर रहे हैं। अप्रैल तक के हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर भी यही दर्शाते हैं कि देश के भीतर औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां पूरी रफ्तार से चल रही हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि वर्ष 2027 में प्रवेश करते ही जैसे ही वैश्विक ऊर्जा बाजार का झटका कम होगा, वैसे ही भारत की विकास दर और अधिक मजबूत होकर मध्यमावधि में लगभग 6.5 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच जाएगी।
कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता और वैश्विक महंगाई का रुख
भारत अपनी कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतें देश की महंगाई और चालू खाता घाटे (कैड) को सीधे प्रभावित करती हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) जैसे रणनीतिक मार्गों से तेल की आपूर्ति बाधित होने पर भारत की आयात लागत बढ़ने का जोखिम हमेशा बना रहता है। इस बीच, आईएमएफ ने वैश्विक विकास दर का अनुमान 2026 के लिए 3 प्रतिशत पर स्थिर रखते हुए वैश्विक महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र में हो रहा भारी निवेश आर्थिक नुकसान की भरपाई करने में मददगार साबित हो रहा है।
Axis Securities का संकेत, सही एंट्री पर मेटल शेयर दे सकते हैं शानदार रिटर्न
9 Jul, 2026 02:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। कमोडिटी बाजार में जारी भारी उतार-चढ़ाव के बीच यदि आप भी मेटल सेक्टर के शेयरों में पूंजी लगाने की योजना बना रहे हैं, तो फिलहाल आपको थोड़ा धैर्य रखने की जरूरत है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा समय में इन शेयरों में पैसा लगाने के लिए जल्दबाजी दिखाना नुकसानदेह साबित हो सकता है। एक्सिस सिक्योरिटीज के मेटल विभाग के वरिष्ठ शोध विश्लेषक आदित्य वेलेकर का मानना है कि निवेशकों को मेटल स्टॉक्स में नए निवेश के लिए सही और निचले स्तरों का इंतजार करना चाहिए। इसका मुख्य कारण यह है कि मानसून के आगमन के साथ ही घरेलू बाजार में स्टील की कीमतें सीजनल रूप से कमजोर दौर में प्रवेश कर जाती हैं। हालांकि, दीर्घकालिक नजरिए से इस सेक्टर की बुनियाद मजबूत दिखाई दे रही है, लेकिन निकट भविष्य में होने वाली गिरावट खरीदारी के अधिक शानदार अवसर प्रदान कर सकती है।
मानसून के चलते कीमतों पर बढ़ेगा दबाव
बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि स्टील उत्पादक कंपनियों के चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के परिणाम बेहतर रहने के बाद भी आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव देखा जा सकता है। स्टील की मांग और इसकी दरें अब मौसमी रूप से कमजोर होने वाले मानसून के फेज में जा रही हैं, जिसके कारण टाटा स्टील जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में शॉर्ट-टर्म करेक्शन यानी गिरावट की पूरी संभावना बनी हुई है। ऐसे में नई पोजीशन बनाने के इच्छुक निवेशकों को तब तक रुकना चाहिए जब तक कि इन शेयरों का मूल्यांकन और अधिक आकर्षक स्तर पर न आ जाए।
फेरस और नॉन फेरस श्रेणी में पसंदीदा विकल्प
ब्रोकरेज हाउस ने इस गिरावट के दौर में भी कुछ चुनिंदा स्टॉक्स पर अपना भरोसा जताया है। फेरस यानी लौह धातु श्रेणी के शेयरों में जेएसडब्ल्यू स्टील को उनकी सूची में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। इसके बाद स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), हिंदुस्तान कॉपर और टाटा स्टील जैसी कंपनियों के नाम आते हैं। जानकारों का कहना है कि यदि बाजार में और सुधार होता है, तो 'सेल' के शेयरों में वैल्यू बाइंग का एक बेहतरीन मौका बन सकता है। वहीं दूसरी तरफ, गैर-लौह यानी नॉन-फेरस श्रेणी में हिंडाल्को को सबसे पसंदीदा स्टॉक के रूप में देखा जा रहा है।
एल्युमीनियम और कॉपर के वैश्विक मूल्य अनुमान
अंतरराष्ट्रीय बाजार में धातुओं की कीमतों को लेकर ब्रोकरेज हाउस ने अपने दीर्घकालिक अनुमान साझा किए हैं। एल्युमीनियम के लिए आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान लगभग $3,000 प्रति टन का भाव रहने की उम्मीद है, जो बाद के वर्षों में आंशिक रूप से घटकर $2,800 से $2,900 प्रति टन तक आ सकता है। उत्पादन की बढ़ती लागत के चलते एल्युमीनियम की कीमतों में किसी बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है। इसके अलावा, कॉपर कंसन्ट्रेट की वैश्विक किल्लत को देखते हुए तांबे की कीमतें $10,000 से $11,000 प्रति टन के उच्च स्तर पर टिकी रह सकती हैं, जो हिंडाल्को जैसी कंपनियों के लिए फायदेमंद होगा।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सावधानी की सलाह
विशेषज्ञों ने जिंदल स्टील एंड पावर के परिचालन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उसके विदेशी प्लांट में प्रदूषण से जुड़े मुद्दे एक सतत प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिससे कंपनी के लॉन्ग-टर्म निवेश की संभावनाओं पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। नॉन-फेरस धातुओं के क्षेत्र में नाल्को और श्याम मेटालिक्स के शेयर भी इस समय काफी आकर्षक नजर आ रहे हैं। इसके बावजूद, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरों के बदलते परिदृश्य को देखते हुए निवेशकों को बाजार के निचले स्तरों पर ही दांव लगाने की सख्त हिदायत दी गई है।
Zomato की Eternal ने छुआ ₹300 का स्तर, 5 महीने बाद लौटी रफ्तार
9 Jul, 2026 12:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो की मूल कंपनी एटर्नल के शेयरों में बुधवार को एक बार फिर जबरदस्त रौनक देखने को मिली। करीब 5 महीने के लंबे इंतजार के बाद कंपनी के शेयर एक बार फिर ₹300 के मनोवैज्ञानिक स्तर को छूने में कामयाब रहे। बाजार बंद होने के समय हालांकि इसमें थोड़ी मुनाफावसूली देखी गई, लेकिन इसके बावजूद बीएसई पर यह 2.39 फीसदी की शानदार बढ़त के साथ ₹293.40 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह शेयर 4.76 फीसदी तक दौड़ लगाते हुए ₹300.20 के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया था। इससे पहले इसी साल 13 फरवरी 2026 को इस शेयर ने ₹300 का स्तर छुआ था, जिसके बाद से इसमें लगातार उतार-चढ़ाव का दौर बना हुआ था।
नए शेयरहोल्डिंग पैटर्न से मिला बड़ा बूस्ट
एटर्नल के शेयरों में आई इस तूफानी तेजी के पीछे कंपनी द्वारा जारी जून 2026 तिमाही का नवीनतम शेयरहोल्डिंग पैटर्न है। इस नए डेटा के सामने आते ही निवेशकों का भरोसा कंपनी पर एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दिया। वित्तीय विश्लेषकों और मोतीलाल अल्टरनेट रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, नए शेयरहोल्डिंग पैटर्न ने वैश्विक बाजारों में कंपनी की स्थिति को और मजबूत कर दिया है। इसी सकारात्मक रिपोर्ट और भविष्य में बड़े निवेश की संभावनाओं के चलते घरेलू शेयर बाजार में इस स्टॉक को लेकर अचानक खरीदारी का भारी दबाव देखा गया, जिसने शेयर को ऊपरी स्तरों पर धकेल दिया।
विदेशी निवेशकों के लिए खुला निवेश का बड़ा रास्ता
जून तिमाही के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि अब विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के लिए निवेश योग्य हिस्सेदारी यानी फॉरेन ओनरशिप हेडरूम बढ़कर 25 फीसदी से अधिक हो चुका है। पहले विदेशी हिस्सेदारी सीमित होने के कारण जो तकनीकी अड़चनें आ रही थीं, वे अब पूरी तरह समाप्त हो गई हैं। मोतीलाल अल्टरनेट रिसर्च के मुताबिक, इस बदलाव के बाद आगामी अगस्त महीने में होने वाले एमएससीआई (MSCI) रिव्यू में एटर्नल को दोबारा से फुल वेटेज दिया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो इंडेक्स को ट्रैक करने वाले विदेशी फंडों के माध्यम से कंपनी में करीब 52 करोड़ डॉलर का भारी-भरकम पैसिव इनफ्लो आने का रास्ता साफ हो जाएगा।
वेटेज घटने के बाद वापसी की तैयारी
उल्लेखनीय है कि इससे पहले विदेशी निवेशकों के लिए उपलब्ध सीमित हिस्सेदारी के चलते वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई ने एटर्नल के वेटेज को 1.33 फीसदी से घटाकर आधा कर दिया था, जिसके कारण बड़े फंडों की ओर से बिकवाली का दबाव देखा गया था। लेकिन जून तिमाही के ताजातरीन वित्तीय आंकड़ों ने पूरी तस्वीर बदल दी है। आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी पिछले 9.33 फीसदी के स्तर से काफी आगे निकलकर अब 25 फीसदी से ऊपर जा सकती है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक स्तर पर बड़े फंड हाउस इस भारतीय न्यू-एज टेक कंपनी पर दोबारा बड़ा दांव लगाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
एक साल के उतार-चढ़ाव में निवेशकों की परीक्षा
पिछले एक साल के दौरान इस काउंटर पर निवेशकों को भारी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा है। बीते साल 16 अक्टूबर 2025 को बीएसई पर इस शेयर ने ₹368.40 का अपना ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड स्तर छुआ था, जहां से यह लगातार मुनाफावसूली का शिकार होता चला गया। इसके बाद महज पांच महीनों के भीतर यह ऊपरी स्तरों से करीब 42.30 फीसदी टूटकर इसी साल 16 मार्च 2026 को ₹212.55 के अपने एक साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया था। निचले स्तरों से आई इस शानदार रिकवरी और ₹300 के स्तर को दोबारा हासिल करने से बाजार के जानकारों का मानना है कि शेयर अब अपने सुधारात्मक दौर से बाहर निकल रहा है।
वेतन बढ़ोतरी को लेकर बढ़ीं उम्मीदें, सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर
9 Jul, 2026 09:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद अच्छी खबर सामने आ रही है। चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही यानी जुलाई महीने से मिलने वाले महंगाई भत्ते (DA) में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी होना लगभग तय माना जा रहा है। देश में मौजूद मौजूदा महंगाई की स्थिति और ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) के अब तक के रुझानों को देखते हुए आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों ने यह बड़ा दावा किया है।
आगामी 13 जुलाई को साफ होगी अंतिम तस्वीर
इस संभावित बढ़ोतरी पर अंतिम मुहर जून महीने के महंगाई के अधिकृत आंकड़े आने के बाद ही लगेगी। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) आगामी सोमवार, 13 जुलाई 2026 को जून महीने के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) और खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी करने जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के ट्रेंड यही इशारा कर रहे हैं कि 3 फीसदी की बढ़ोतरी की संभावना सबसे अधिक मजबूत है और इन आंकड़ों के जारी होते ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।
सरकारी कर्मचारियों की क्रय शक्ति को मिलेगा बल
भले ही यह बढ़ोतरी प्रतिशत के लिहाज से सामान्य दिखे, लेकिन बाजार में बढ़ती दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों के बीच यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को अपनी क्रय शक्ति यानी खर्च करने की क्षमता को बनाए रखने में सीधी मदद मिलेगी। इसके साथ ही मध्यमवर्गीय परिवारों को अपने घर का मासिक बजट संतुलित रखने और महंगाई के आर्थिक बोझ से निपटने में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
साल में दो बार डीए में बदलाव का गणित
केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को महंगाई के विपरीत प्रभावों से सुरक्षित रखने के लिए साल में दो बार महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR) की समीक्षा कर इसमें बदलाव करती है। नियम के अनुसार पहली छमाही की बढ़ोतरी 1 जनवरी से प्रभावी होती है, जबकि दूसरी छमाही का लाभ 1 जुलाई से दिया जाता है। यह पूरी गणना मुख्य रूप से औद्योगिक श्रमिकों के लिए खुदरा महंगाई सूचकांक के औसत मूवमेंट पर आधारित होती है, जो देश में महंगाई के वास्तविक स्तर को दर्शाती है।
एरियर के साथ खाते में आएगी बढ़ी हुई सैलरी
प्रक्रिया के तहत यदि सरकार इस वृद्धि की औपचारिक घोषणा केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद अगस्त या सितंबर महीने में भी करती है, तो भी इसे पिछली तारीख यानी 1 जुलाई 2026 से ही लागू माना जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि घोषणा होने तक के पिछले महीनों का बढ़ा हुआ पूरा पैसा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को एरियर के रूप में एकमुश्त दिया जाएगा, जिससे उनके बैंक खातों में एक साथ मोटी रकम आएगी।
सोने में विदेशी निवेश घटा, भारतीय निवेशकों ने बढ़ाई खरीदारी
9 Jul, 2026 08:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। वैश्विक बाजारों में सोने के प्रति घटते रुझान के विपरीत भारतीय बाजार में इसकी मांग में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। पिछले महीने जून के दौरान दुनिया भर में जहां गोल्ड ईटीएफ से बड़े पैमाने पर फंड निकाले गए, वहीं भारतीय निवेशकों ने इसमें भारी निवेश किया। देश के निवेशकों का सोने की कीमतों को लेकर सकारात्मक रुख बना हुआ है और उन्होंने बाजार में आई हालिया गिरावट को निवेश के एक बेहतरीन अवसर के रूप में भुनाया है।
भारतीय बाजार में गोल्ड ईटीएफ की भारी मांग
भारत में सोने के प्रति निवेशकों का आकर्षण लगातार मजबूत हो रहा है, जिसका सीधा असर घरेलू म्यूचुअल फंड्स पर दिख रहा है। आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में भारतीय गोल्ड ईटीएफ में करीब 38.8 करोड़ डॉलर का बड़ा निवेश दर्ज किया गया। घरेलू निवेशकों का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में और तेजी आ सकती है, इसलिए वे हर गिरावट पर खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
प्रमुख भारतीय फंड्स में निवेश की बाढ़
इस तेजी के बीच देश के कुछ खास गोल्ड ईटीएफ फंड्स में निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा जताया है। निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड बीईईएस इस सूची में सबसे आगे रहा, जिसने अकेले 15.84 करोड़ डॉलर का निवेश आकर्षित किया। इसके बाद एसबीआई ईटीएफ गोल्ड का स्थान रहा, जिसमें 8.12 करोड़ डॉलर की पूंजी आई। इससे ठीक एक महीने पहले यानी मई में आयात शुल्क बढ़ने के कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली की थी, लेकिन जून में बाजार ने दोबारा शानदार वापसी की।
वैश्विक स्तर पर निवेशकों ने बनाई दूरी
भारत के इस सकारात्मक माहौल के उलट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गोल्ड ईटीएफ की चमक फीकी पड़ती दिखाई दे रही है। वैश्विक स्तर पर निवेशकों ने जून के दौरान अपनी होल्डिंग को काफी कम किया है और कुल मिलाकर करीब 890 करोड़ डॉलर की निकासी की है। इस बिकवाली का सबसे बड़ा असर उत्तरी अमेरिका में देखा गया, जहां से 550 करोड़ डॉलर निकाले गए। इसके बाद एशिया से 230 करोड़ डॉलर और यूरोप से 81.8 करोड़ डॉलर की पूंजी बाहर गई, जिससे ग्लोबल गोल्ड ईटीएफ का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट भी प्रभावित हुआ।
एशियाई बाजारों और चीन में बिकवाली के कारण
एशियाई क्षेत्र में सोने के फंड्स से सबसे ज्यादा निकासी चीन के बाजारों में देखने को मिली, जिसका मुख्य कारण वहां के शेयर बाजार में आई रौनक और सोने की कीमतों में आई नरमी रही। इसके अलावा जापान में केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बाद निवेशकों के लिए बिना ब्याज वाले सोने को अपने पास रखने की लागत बढ़ गई, जिससे उन्होंने फंड निकालना शुरू कर दिया। अमेरिका में सख्त मौद्रिक नीतियों के संकेतों और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव ने भी वैश्विक स्तर पर निवेशकों की प्राथमिकताओं को बदल दिया है।
ट्रंप के बयान के बाद कमोडिटी बाजार में हलचल, गोल्ड-सिल्वर टूटे, क्रूड चढ़ा
8 Jul, 2026 04:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया और अप्रत्याशित बयान के बाद गुरुवार को वैश्विक और घरेलू कमोडिटी बाजारों में एक बड़ा भूचाल आ गया। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच आए इस बड़े बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले बहुमूल्य धातुओं के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। राष्ट्रपति के इस रुख से वैश्विक बाजार से लेकर भारत के घरेलू वायदा बाजार (एमसीएक्स) तक में सोना और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि इसके विपरीत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के दामों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है।
ट्रंप के बयान से कमोडिटी मार्केट में मची भारी खलबली
वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीतिक गलियारों में आए इस नए मोड़ ने निवेशकों को पूरी तरह चौंका दिया है। अमूमन युद्ध या किसी भी तरह के सैन्य तनाव की स्थिति में निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित विकल्प मानकर उसमें बड़े पैमाने पर निवेश करते हैं, जिससे दाम आसमान छूने लगते हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति के इस नए बयान ने बाजार की धारणा को पूरी तरह उलट दिया, जिससे सटोरियों और बड़े संस्थागत निवेशकों ने कीमती धातुओं में मुनाफावसूली शुरू कर दी। इस अचानक हुई बिकवाली के दबाव के कारण कमोडिटी बाजार में सोने और चांदी के भाव ताश के पत्तों की तरह बिखर गए।
अंतरराष्ट्रीय कोमेक्स बाजार में सोना दो फीसदी से ज्यादा टूटा
वैश्विक स्तर पर धातुओं के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्र कोमेक्स (COMEX) पर गुरुवार को दोपहर करीब ढाई बजे तक सोने की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव देखते ही देखते दो फीसदी यानी अस्सी डॉलर से भी ज्यादा की बड़ी गिरावट के साथ चार हजार पचहत्तर डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कई हफ्तों से लगातार ऊपरी स्तरों पर कारोबार कर रहे सोने के लिए यह गिरावट एक बड़ा करेक्शन है, जो आने वाले दिनों में खुदरा बाजारों में भी कीमतों को काफी नीचे ले आएगा।
चांदी की कीमतों में भी आया साढ़े तीन प्रतिशत का तगड़ा फॉल
सोने की राह पर चलते हुए औद्योगिक और आभूषण क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली चांदी की कीमतों में भी गुरुवार को तगड़ी गिरावट दर्ज की गई। कोमेक्स बाजार में चांदी के दाम करीब साढ़े तीन फीसदी तक लुढ़क गए, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत साठ डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से काफी नीचे आ गई। चांदी में आई इस भारी गिरावट का सीधा असर भारत के सर्राफा बाजारों पर भी पड़ने की उम्मीद है, जिससे आम उपभोक्ताओं को आभूषणों की खरीदारी पर बड़ी राहत मिल सकती है।
कच्चे तेल के दामों में उछाल से बढ़ी नई आर्थिक चिंताएं
एक तरफ जहां सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट से आभूषण प्रेमियों और खुदरा खरीदारों ने राहत की सांस ली है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी ने नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप के बयान के बाद पैदा हुई नई अनिश्चितता के कारण क्रूड ऑयल के दामों में तेज उछाल देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी आने वाले दिनों में भी जारी रहती है, तो इससे आयात लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर देश में परिवहन लागत और आम जरूरत की चीजों की महंगाई पर देखने को मिल सकता है।
मीठी चीजों का स्वाद होगा महंगा! चीनी की कीमत बढ़ने से आम लोगों पर असर
8 Jul, 2026 03:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में इस वर्ष मानसून की बेरुखी और कम बारिश के पूर्वानुमान के बीच अब आम जनता की जेब पर महंगाई का बोझ बढ़ना शुरू हो गया है। वैश्विक मौसम प्रणाली में आए अलनीनो के कड़े प्रभाव के कारण इस साल सामान्य से काफी कम वर्षा होने की आशंका जताई गई थी, जिसका सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ता दिख रहा है। कम बारिश के इस शुरुआती अनुमान ने गन्ने की खड़ी फसलों की पैदावार को बुरी तरह प्रभावित करने का डर पैदा कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप जून के महीने में ही देश भर के बाजारों में चीनी की कीमतों में अचानक जोरदार तेजी दर्ज की जाने लगी है।
गन्ने की कमजोर पैदावार की आशंका से चीनी बाजार में आया उछाल
पर्यावरण में आए बदलावों और पानी की कमी के चलते देश के प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्रों में गन्ने की बुवाई और उसकी बढ़त पर प्रतिकूल असर पड़ने की रिपोर्ट आ रही है। बाजार के जानकारों और कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि आने वाले समय में मानसूनी बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो चीनी के कुल उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। इसी संभावित किल्लत को भांपते हुए थोक व्यापारियों और मिल मालिकों ने अभी से स्टॉक को रोकना और कीमतों को बढ़ाना शुरू कर दिया है, जिससे आने वाले त्योहारी सीजन में मीठे का स्वाद और कड़वा होने के आसार बन गए हैं।
महाराष्ट्र की चीनी मिलों में कीमतों में दर्ज की गई भारी बढ़ोतरी
घरेलू स्तर पर चीनी उत्पादन के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में प्राकृतिक चीनी का सबसे बड़ा योगदान देने वाला राज्य महाराष्ट्र इस समय कीमतों की इस तेजी का मुख्य केंद्र बना हुआ है। चीनी उद्योग से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र की विभिन्न मिलों से निकलने वाली चीनी की थोक कीमत करीब 38.5 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से छलांग लगाकर अब लगभग 41.5 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है। मिल स्तर पर हुई इस तीन रुपये प्रति किलो की सीधी बढ़ोतरी ने खुदरा बाजार के समीकरणों को भी पूरी तरह से बदल दिया है।
कोल्हापुर के थोक बाजार में सात फीसदी से अधिक उछले दाम
चीनी व्यापार के प्रमुख और ऐतिहासिक केंद्र माने जाने वाले कोल्हापुर मार्केट में भी इस महंगाई का सबसे तगड़ा असर देखने को मिला है। ताजा व्यापारिक रिपोर्ट के अनुसार कोल्हापुर के थोक बाजार में चीनी के दामों में अचानक सात फीसदी से ज्यादा का भारी उछाल दर्ज किया गया है। इस तेजी के बाद वहां चीनी की थोक कीमत बढ़कर 4,120 रुपये प्रति क्विंटल के रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंची है, जिसका सीधा असर उत्तर और पश्चिमी भारत के अन्य राज्यों के थोक और खुदरा बाजारों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।
आने वाले दिनों में खुदरा उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
थोक और मिल स्तर पर चीनी के दामों में आई इस अचानक तेजी का खामियाजा अब सीधे तौर पर देश के आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा। स्थानीय किराना दुकानों और खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतें आने वाले हफ्तों में और अधिक बढ़ सकती हैं, जिससे आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। इसके साथ ही चीनी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने वाले अन्य उद्योगों जैसे कन्फेक्शनरी, कोल्ड ड्रिंक्स और मिठाई निर्माताओं की लागत बढ़ने से इनसे जुड़े अन्य खाद्य उत्पाद भी महंगे होने की पूरी संभावना बन गई है।
Ayushman Card से फ्री इलाज कहां मिलेगा? मोबाइल से मिनटों में ऐसे देखें अस्पतालों की सूची
8 Jul, 2026 01:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश के करोड़ों मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने वाली आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को लेकर सरकार ने एक बड़ा और जनहितैषी कदम उठाया है। यदि आप भी इस योजना के लाभार्थी हैं और अपने आयुष्मान कार्ड के जरिए मुफ्त इलाज कराने के लिए सही और मान्यता प्राप्त अस्पताल की तलाश कर रहे हैं, तो अब आपकी यह चिंता पूरी तरह समाप्त हो गई है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी डिजिटल पहल के अंतर्गत अब कोई भी नागरिक घर बैठे ही देश भर के हजारों सूचीबद्ध सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की पूरी सूची ऑनलाइन देख सकता है, जिससे आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को भटकना नहीं पड़ेगा।
देशभर के हजारों सरकारी और निजी अस्पतालों में मिलेगा कैशलेस इलाज
इस स्वास्थ्य योजना के तहत पात्र नागरिकों को गंभीर से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए पांच लाख रुपये तक के मुफ्त उपचार की गारंटी दी जाती है। सरकार द्वारा जारी की गई नई ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से अब मरीज अपनी सुविधा और बीमारी की गंभीरता के हिसाब से देश के किसी भी कोने में स्थित पैनलबद्ध चिकित्सा संस्थानों का चयन कर सकते हैं। इस पारदर्शी प्रणाली के आने से मरीजों को पहले से यह पता रहेगा कि उनके नजदीकी क्षेत्र में कौन सा अस्पताल आयुष्मान कार्ड स्वीकार कर रहा है, जिससे वे बिना किसी नकद भुगतान (कैशलेस) के सीधे जाकर अपनी चिकित्सा प्रक्रिया शुरू करवा सकेंगे।
अस्पतालों की पूरी लिस्ट ऑनलाइन जांचना हुआ अब बेहद आसान
आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक बेहद सरल और यूजर-फ्रेंडली सर्च टूल को अपडेट किया है। अब लाभार्थियों को अस्पतालों की सूची देखने के लिए किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने या दलालों के झांसे में आने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए योजना के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर कुछ ही सेकंड में अपने राज्य, जिले और वांछित चिकित्सा विशेषता (स्पेशियलिटी) के आधार पर सक्रिय अस्पतालों की एकदम सटीक और प्रमाणित सूची निकाल सकता है।
डिजिटल खोज प्रणाली से मरीजों के समय और धन की होगी बड़ी बचत
सरकार की इस ऑनलाइन अस्पताल खोज प्रणाली के लागू होने से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा फायदा पहुंचने की उम्मीद है। पहले सटीक जानकारी न होने के कारण कई बार लोग गलत अस्पतालों में पहुंच जाते थे, जहां उनका आयुष्मान कार्ड मान्य नहीं होता था और उन्हें मजबूरन कर्ज लेकर इलाज कराना पड़ता था। अब इस डिजिटल अपग्रेडेशन के बाद मरीज घर से निकलने से पहले ही यह सुनिश्चित कर सकेंगे कि संबंधित अस्पताल में उनकी बीमारी के इलाज की सुविधा आयुष्मान योजना के तहत उपलब्ध है या नहीं, जिससे उनके समय की बचत होगी और मानसिक तनाव से भी मुक्ति मिलेगी।
निवेशकों को झटका, Sensex धड़ाम 650 अंक नीचे; Nifty ने गंवाया 24,200 का स्तर
8 Jul, 2026 01:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। पश्चिमी एशिया में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंचने के कारण भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली का तूफान आ गया है। वैश्विक स्तर पर उपजे युद्ध के हालातों से घबराए निवेशकों ने बाजार खुलते ही बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी भरभराकर टूट गए। शुरुआती कारोबार में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये घट गया, जिससे निवेशकों को भारी चपत लगी। जैसे-जैसे कारोबारी सत्र आगे बढ़ा, बाजार का घाटा और गहरा गया, जिसमें सेंसेक्स ने 650 से अधिक अंकों की गोता लगाई और निफ्टी अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे खिसक गया। व्यापक बाजार में भी चौतरफा लाली छाई रही और मिडकैप व स्मॉलकैप सूचकांक पूरी तरह रेड जोन में कारोबार करते नजर आए।
ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव से वैश्विक बाजारों में हड़कंप
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर आई खबरों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बन गई है। इस सैन्य कार्रवाई के कारण ईरान के प्रमुख बंदरगाहों और द्वीपों पर भीषण विस्फोट होने की सूचना है, जिसके जवाब में ईरानी बलों ने भी बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दर्जनों मिसाइलें और घातक ड्रोन दाग दिए हैं। महाशक्तियों के बीच छिड़ी इस सीधी जंग ने वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार के सेंटिमेंट को भी बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है।
भू-राजनीतिक संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आया भयंकर उबाल
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सबसे सीधा और बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जहां ईंधन के दाम अचानक उबल पड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अगस्त डिलीवरी के लिए अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड दो फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ 71.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि सितंबर डिलीवरी वाला ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी करीब दो फीसदी चढ़कर 75.53 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल के आयात पर बहुत अधिक निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल में आई इस तेजी ने भारतीय अर्थव्यवस्था और दलाल स्ट्रीट की रौनक को पूरी तरह फीका कर दिया है।
बाजार में बढ़ी भारी घबराहट और इंडिया विक्स इंडेक्स में आया उछाल
शेयर बाजार में छाए इस अनिश्चितता के माहौल के बीच बाजार की घबराहट और उतार-चढ़ाव को मापने वाला सूचकांक 'इंडिया विक्स' (India VIX) अचानक तेज छलांग लगाने लगा। इस सूचकांक में आई बड़ी तेजी इस बात का साफ संकेत है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार के भीतर वोलैटिलिटी यानी उतार-चढ़ाव का दौर बेहद तीव्र रह सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब भी वैश्विक मोर्चों पर अनिश्चितता बढ़ती है, तब इंडिया विक्स का ग्राफ ऊपर जाता है, जो निवेशकों को बाजार में कोई भी नया और बड़ा जोखिम लेने से पूरी तरह रोकता है।
सरकारी बैंकों और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों में देखी गई सबसे बड़ी गिरावट
इस महाबिकवाली के दौर में घरेलू बाजार को सबसे बड़ा नुकसान सरकारी बैंकों और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों से पहुंचा है। इन दोनों ही प्रमुख सेक्टर्स के निफ्टी इंडेक्स एक-एक फीसदी से ज्यादा टूटकर बंद हुए, जिसने पूरे बाजार को नीचे धकेलने में मुख्य भूमिका निभाई। बैंकिंग और ऑटो शेयर्स में आई इस भारी गिरावट के चलते रिकवरी के सारे प्रयास पूरी तरह विफल साबित हुए और बाजार के प्रमुख सूचकांक दिन के निचले स्तरों के आसपास ही संघर्ष करते नजर आए।
10,000mAh तक की बैटरी और 200MP कैमरा, Redmi के नए 5G फोन ने मचाई हलचल
8 Jul, 2026 12:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। टेक जगत में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाली स्मार्टफोन निर्माता कंपनी रेडमी जल्द ही चीनी बाजार में अपनी बहुप्रतीक्षित और नई 5G स्मार्टफोन सीरीज पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी अपनी लोकप्रिय नोट सीरीज को आगे बढ़ाते हुए आगामी 14 जुलाई को घरेलू बाजार में नई नोट 17 सीरीज से आधिकारिक तौर पर पर्दा उठाएगी। लॉन्चिंग की तारीख की घोषणा करने के साथ ही कंपनी ने इन अपकमिंग डिवाइसेज का पहला आधिकारिक लुक भी जारी कर दिया है, जिसने टेक प्रेमियों और उपभोक्ताओं के बीच उत्सुकता को काफी बढ़ा दिया है। लीक हुई विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार सीरीज के एक प्रीमियम मॉडल में अब तक की सबसे दमदार 10,000 एमएएच की महाबैटरी और 200 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा देखने को मिल सकता है।
रेडमी नोट 17 सीरीज का बिल्कुल नया और प्रीमियम लुक
लॉन्च की तारीख के साथ ही सामने आई तस्वीरों से साफ है कि आगामी सीरीज के डिजाइन में कंपनी ने बड़ा बदलाव किया है। इस नए हैंडसेट के रियर पैनल को पूरी तरह से रीडिजाइन किया गया है, जिसमें आकर्षक फ्लैट साइड्स (किनारे) और ऊपरी-बाएं कोने पर एक रेक्टेंगुलर (आयतकार) कैमरा मॉड्यूल दिया गया है। कंपनी ने इसके प्रो वेरिएंट के लिए एक बेहद खूबसूरत 'स्काई ब्लू' कलर ऑप्शन को टीज किया है, जो देखने में काफी प्रीमियम लुक देता है। कंपनी ने इस सीरीज को 'बिना दाम बढ़ाए बड़े अपग्रेड' के वादे के साथ प्रमोट किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य पार्ट्स की बढ़ती कीमतों के बावजूद मिड-रेंज बजट में ग्राहकों को फ्लैगशिप जैसी खूबियां प्रदान करना है।
खूबियों की कमी को पूरा करने और मजबूती पर विशेष ध्यान
कंपनी का मानना है कि आजकल बाजार में मिलने वाले मिड-रेंज या बजट फ्रेंडली स्मार्टफोन्स से प्रीमियम वॉटरप्रूफिंग और मजबूत प्रोटेक्टिव ग्लास जैसी जरूरी खूबियां धीरे-धीरे गायब होती जा रही हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए नई नोट 17 सीरीज को खास तौर पर अत्यधिक ड्यूरेबिलिटी यानी मजबूती को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इन फोन्स को अचानक हाथ से छूटकर गिरने पर होने वाले नुकसान से बचाने के लिए बेहतर ड्रॉप रेजिस्टेंस तकनीक और पानी से सुरक्षा के लिए एडवांस वॉटरप्रूफिंग रेटिंग से लैस किया गया है, ताकि उपभोक्ता बिना किसी डर के लंबे समय तक इसका इस्तेमाल कर सकें।
स्टैंडर्ड और प्रो मॉडल के लीक हुए शानदार स्पेसिफिकेशन्स
बाजार के जानकारों और लीक रिपोर्ट्स की मानें तो इस बार कंपनी अपनी पुरानी परंपरा को बदलते हुए प्रो प्लस मॉडल को छोड़ सकती है और लाइनअप में केवल स्टैंडर्ड तथा प्रो वेरिएंट ही उतारेगी। कयास हैं कि इस सीरीज के बेस मॉडल में स्नैपड्रैगन 6 जेन 5 प्रोसेसर, शानदार विजुअल के लिए 1.5K ओएलईडी डिस्प्ले, 50 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा और बैकअप के लिए 9,000 एमएएच की विशाल बैटरी दी जा सकती है। यह बड़ी बैटरी उन यूजर्स के लिए गेम चेंजर साबित होगी जो लगातार फोन का इस्तेमाल करते हैं।
प्रो वेरिएंट में मिलेगी दस हजार एमएएच की महाबैटरी और दो सौ एमपी कैमरा
दूसरी तरफ, सीरीज के सबसे प्रीमियम मॉडल यानी रेडमी नोट 17 प्रो में परफॉर्मेंस को रफ्तार देने के लिए मीडियाटेक डाइमेंशन 7500 चिपसेट का इस्तेमाल किया जा सकता है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए इस फोन के बैक पैनल पर 200 मेगापिक्सल का बेहद पावरफुल प्राइमरी कैमरा सेंसर मिलने की पूरी उम्मीद है, जो बेहद बारीकी और साफ तस्वीरें खींचने में सक्षम होगा। इन सब फीचर्स के अलावा जो चीज इस फोन को सबसे खास बनाती है, वह है इसकी रिकॉर्डतोड़ 10,000 एमएएच की बैटरी क्षमता, जो भारी इस्तेमाल के बाद भी कई दिनों का बैकअप देने का दम रखती है।
मिडिल ईस्ट संकट का असर, सोने के दाम फिसले; दिल्ली-मुंबई में इतना रह गया रेट
8 Jul, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। घरेलू सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह कीमती धातु लाल निशान पर कारोबार करती दिखाई दी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुबह के कारोबार के दौरान 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने का भाव 770 रुपये फिसलकर 1,44,640 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। इसी तरह 22 कैरेट सोने की कीमत भी 700 रुपये की कटौती के साथ 1,32,600 रुपये प्रति 100 ग्राम दर्ज की गई, जबकि गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 18 कैरेट सोने का दाम 570 रुपये टूटकर 1,08,520 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
सर्राफा बाजार में चांदी की चाल रही कुछ अलग
एक तरफ जहां सोने के दामों में मंदी का माहौल रहा, वहीं दूसरी तरफ चांदी के घरेलू हाजिर बाजार में बुधवार को मामूली सुधार देखा गया। दिल्ली के बाजारों में दोपहर के समय चांदी की कीमतों में 100 रुपये प्रति किलोग्राम की हल्की बढ़त दर्ज की गई, जिसके बाद इसका भाव 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर भी अगस्त डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में 0.14 फीसदी यानी 207 रुपये की कमजोरी देखी गई, जबकि सितंबर डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव महज 57 रुपये की मामूली गिरावट के साथ 2,30,800 रुपये पर कारोबार करता दिखा।
देश के अन्य महानगरों और बड़े शहरों में सोने के दाम
दिल्ली के अलावा देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में बदलाव का असर साफ देखने को मिला। मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और केरल में 24 कैरेट सोने का भाव 1,44,490 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर देखा गया, जबकि इन सभी शहरों में 22 कैरेट का दाम 1,32,450 रुपये रहा। चेन्नई में सोने की कीमतें सबसे ऊंचे स्तर पर रहीं, जहां 24 कैरेट का भाव 1,45,420 रुपये दर्ज किया गया। गुजरात के अहमदाबाद और वडोदरा में शुद्ध सोना 1,44,540 रुपये पर बिका, वहीं राजस्थान की राजधानी जयपुर में दिल्ली के समान ही 1,44,640 रुपये प्रति 10 ग्राम का रेट रहा।
वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की तेजी से बना दबाव
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा हुए नए भू-राजनीतिक संकट ने सर्राफा बाजार की चाल को प्रभावित किया है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। इस अशांति के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें उछलकर 76 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। ईंधन के दामों में आई इस तेजी से अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की आशंका को बल मिला है, जिसने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग को प्रभावित कर कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं का ताजा रुख
वैश्विक मंच पर कमोडिटी एक्सचेंज (कॉमेक्स) की बात करें तो वहां वायदा सोना 0.38 फीसदी की गिरावट के साथ 4,141.50 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता नजर आया, जबकि हाजिर सोना मामूली बढ़त के साथ 4,125.81 डॉलर प्रति औंस पर बना रहा। चांदी की बात करें तो कॉमेक्स पर इसका वैश्विक वायदा भाव 0.09 फीसदी की हल्की बढ़त के साथ 61.39 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय हाजिर चांदी बाजार में डेढ़ फीसदी से ज्यादा की मजबूती देखी गई और यह 60.88 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करती नजर आई।
IRFC Stock में कमजोरी जारी, जानें क्यों टूट रहे हैं शेयर और आगे क्या संकेत हैं?
8 Jul, 2026 11:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। भारतीय रेलवे की समर्पित वित्तीय शाखा और दिग्गज नवरत्न कंपनी, इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (आईआरएफसी) के शेयरों में पिछले कुछ समय से बिकवाली का भारी दबाव देखा जा रहा है। इस तेज गिरावट के कारण शेयर ने अपने दो महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल तोड़ दिए हैं। हालांकि, निचले स्तर पर सक्रिय हुई खरीदारी के चलते शेयर थोड़ा संभलता हुआ नजर आया और अपने तीसरे मुख्य सपोर्ट स्तर के बेहद करीब पहुंचकर स्थिर हो गया। बाजार के जानकारों का कहना है कि जब से सरकार का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) बाजार में आया है, तब से इस स्टॉक पर मंदी का साया मंडरा रहा है। फिलहाल बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर कंपनी का शेयर मामूली रिकवरी के साथ सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है, जबकि इंट्रा-डे ट्रेड के दौरान यह करीब डेढ़ फीसदी से ज्यादा टूटकर निचले स्तरों पर आ गया था।
ऑफर फॉर सेल के कारण शेयर की कीमतों पर क्यों बना दबाव
आईआरएफसी के शेयरों में लगातार कई दिनों से बिकवाली का दौर बना हुआ है। हालिया कारोबारी सत्रों की बात करें तो कुछेक मौकों पर आई मामूली बढ़त को छोड़कर अधिकांश दिन शेयर लाल निशान में ही बंद हुआ है। विशेष रूप से जिस दिन इस हिस्सेदारी बिक्री का प्रस्ताव बाजार में खुला था, उसी दिन शेयर छह फीसदी से ज्यादा का गोता लगाकर बंद हुआ। इसकी मुख्य वजह यह थी कि सरकार ने इस ओएफएस के लिए प्रति शेयर 91 रुपये का फ्लोर प्राइस तय किया था, जिससे बाजार भाव पर दबाव आया। अगले ही दिन जब यह इश्यू खुदरा (रिटेल) निवेशकों के लिए खुला, तो बाजार में शेयर टूटकर लगभग फ्लोर प्राइस के बिल्कुल नजदीक पहुंच गया। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए बाजार में करीब 26.1 करोड़ नए शेयरों की भारी सप्लाई आ गई, जिसने कीमतों को नीचे धकेल दिया।
तकनीकी चार्ट पर आईआरएफसी के प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर
बाजार के तकनीकी विश्लेषकों और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, आईआरएफसी के शेयर के लिए जो शुरुआती सुरक्षा चक्र बने हुए थे, वे अब टूट चुके हैं। शेयर का पहला बड़ा सपोर्ट स्तर 89.5 रुपये पर और दूसरा सपोर्ट स्तर 89.1 रुपये पर था, जिन्हें पार करते हुए शेयर नीचे आ गया। अब बाजार की नजरें इसके तीसरे सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल 88.5 रुपये पर टिकी हुई हैं, जो फिलहाल इसे और गिरने से रोक रहा है। दूसरी ओर, यदि बाजार में दोबारा तेजी लौटती है और शेयर ऊपर की तरफ रुख करता है, तो इसे आगे बढ़ने के लिए क्रमशः 90.5 रुपये, 91.0 रुपये और फिर 91.4 रुपये के मजबूत रेजिस्टेंस (प्रतिरोध) स्तरों को पार करना होगा।
शेयर बाजार में लिस्टिंग से लेकर अब तक का सफर
घरेलू शेयर बाजार में इस दिग्गज सरकारी कंपनी की शुरुआत जनवरी 2021 में हुई थी, जब इसके 4,633 करोड़ रुपये के आईपीओ के तहत निवेशकों को 26 रुपये के भाव पर शेयर आवंटित किए गए थे। लिस्टिंग के बाद शुरुआती उतार-चढ़ाव के बीच करीब 14 महीने बाद जून 2022 में यह शेयर अपने सर्वकालिक निचले स्तर 19.30 रुपये पर पहुंच गया था। इस गिरावट के बाद स्टॉक ने ऐसी धमाकेदार वापसी की कि जुलाई 2024 तक यह दौड़ता हुआ 229.05 रुपये के अपने ऐतिहासिक शिखर पर जा पहुंचा। हालांकि, इस उच्चतम स्तर को छूने के बाद शेयर में फिर से बड़ी गिरावट आई और यह अपने ऑल-टाइम हाई से आधे से भी काफी नीचे आ चुका है।
पिछले एक साल के दौरान शेयर की चाल और उतार-चढ़ाव
अगर पिछले एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो जुलाई 2025 के दौरान यह शेयर अपने एक साल के उच्च स्तर 139.35 रुपये पर कारोबार कर रहा था। वहां से बाजार के बदलते मिजाज और बिकवाली के चलते इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई, और मात्र आठ महीनों के भीतर यह करीब 37 फीसदी से ज्यादा फिसलकर मार्च 2026 के अंत में अपने एक साल के सबसे न्यूनतम स्तर 87.05 रुपये तक आ गया था। वर्तमान में शेयर अपने इसी सालाना निचले स्तर के आसपास ही संघर्ष करता हुआ दिखाई दे रहा है, और निवेशक अब इसमें स्थिरता आने का इंतजार कर रहे हैं।
कोचिन शिपयार्ड OFS में निवेश का मौका, रिटेल निवेशक आज ऐसे लगा सकते हैं बोली
8 Jul, 2026 09:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख रक्षा कंपनी कोचिन शिपयार्ड का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) बुधवार, 8 जुलाई को रिटेल निवेशकों के लिए खुल गया है। इससे एक दिन पहले यानी 7 जुलाई को इसे गैर-रिटेल (संस्थागत) निवेशकों के लिए खोला गया था, जहां इसे बेहद शानदार रिस्पॉन्स मिला। हालांकि, इस हिस्सेदारी बिक्री की खबरों के बीच कंपनी के शेयरों में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है, जिससे निवेशक थोड़े सतर्क नजर आ रहे हैं।
सरकार द्वारा पांच फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी
केंद्र सरकार अपने चालू वित्त वर्ष के विनिवेश कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए कोचिन शिपयार्ड में अपनी 5.04 फीसदी तक हिस्सेदारी बेच रही है। शुरुआत में इस ओएफएस के तहत 13.2 लाख शेयर यानी 2.52 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव था, लेकिन पहले ही दिन गैर-रिटेल निवेशकों की श्रेणी में इसे 3.52 गुना अधिक सब्सक्रिप्शन मिला। इस जबरदस्त मांग को देखते हुए सरकार ने अतिरिक्त 2.52 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए 'ग्रीन-शू' विकल्प का उपयोग करने का निर्णय लिया है, जिसके बाद अब कुल 5.04 फीसदी हिस्सेदारी बाजार में बेची जाएगी। इस बड़ी हिस्सेदारी बिक्री से पहले मार्च तिमाही के अंत तक कंपनी में सरकार के पास 67.91 फीसदी शेयर थे।
प्रति शेयर चौदह सौ रुपये का फ्लोर प्राइस तय
इस विनिवेश प्रक्रिया के लिए सरकार ने प्रति शेयर 1,400 रुपये का न्यूनतम मूल्य (फ्लोर प्राइस) निर्धारित किया है। फ्लोर प्राइस वह सबसे कम कीमत होती है, जिससे नीचे कोई भी निवेशक शेयरों के लिए अपनी बोली नहीं लगा सकता। जहाजों के निर्माण और उनकी मरम्मत के क्षेत्र में देश की अग्रणी पहचान रखने वाली इस डिफेंस पीएसयू में हिस्सेदारी बेचकर सरकार को बाजार से लगभग 1,800 करोड़ रुपये जुटाने की पूरी उम्मीद है।
बाजार में कोचिन शिपयार्ड के शेयरों में गिरावट
इस ओएफएस के आते ही कोचिन शिपयार्ड के शेयरों पर दबाव साफ देखा जा रहा है। बुधवार को सुबह के कारोबार में कंपनी का शेयर करीब 2.28 फीसदी की कमजोरी के साथ 1,412 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा। पिछले एक सप्ताह के भीतर इस शेयर के भाव में 6 फीसदी से ज्यादा की बड़ी गिरावट आ चुकी है, जिसके चलते बाजार में शेयर की मौजूदा कीमत और सरकार द्वारा तय किए गए 1,400 रुपये के फ्लोर प्राइस के बीच का अंतर अब बहुत कम रह गया है।
विनिवेश के जरिए बड़ा वित्तीय लक्ष्य हासिल करने का रोडमैप
सरकार ने इस पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान अलग-अलग सरकारी कंपनियों में अपनी आंशिक हिस्सेदारी बेचकर और परिसंपत्तियों के मौद्रिकरण से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। सरकार की यह रणनीतिक मुहिम लगातार जारी है, जिसके तहत जून के महीने में भी कोल इंडिया, एनएलसी इंडिया, एनएचपीसी, आईआरएफसी और जीआईसी जैसी कई बड़ी सरकारी कंपनियों के ओएफएस बाजार में पेश किए जा चुके हैं। आम निवेशक जो इस ओएफएस में भाग लेना चाहते हैं, वे अपने ब्रोकर ऐप या ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए तय फ्लोर प्राइस पर बोली लगाकर इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं।
भारत बनेगा सेमीकंडक्टर पावरहाउस! चिप मैन्युफैक्चरिंग से वैश्विक सप्लाई चेन में बढ़ेगी पकड़
7 Jul, 2026 03:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत ने पिछले दो वर्षों के भीतर रेयर अर्थ (दुर्लभ पृथ्वी तत्वों), क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी रणनीतिक छलांग लगाई है। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी विदेश और आर्थिक नीति के तहत भारत ने वैश्विक स्तर पर 35 देशों को एक मजबूत रणनीतिक तंत्र से जोड़ने का खाका तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत 24 देशों के साथ विभिन्न द्विपक्षीय समझौते, निवेश संधियां और रणनीतिक साझेदारियां पूरी की जा चुकी हैं, जबकि 11 अन्य खनिज संपन्न देशों के साथ उच्च स्तरीय वार्ता अंतिम दौर में है। इस अभूतपूर्व कूटनीति का मुख्य उद्देश्य घरेलू स्तर पर औद्योगिक आवश्यकताओं, हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) विनिर्माण, उन्नत बैटरी निर्माण, रक्षा उपकरण, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर उद्योगों के लिए कच्चे माल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
महाद्वीपों के पार भारत का रणनीतिक नेटवर्क और व्यापक कूटनीति
केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए एक विशेष मानचित्र और ग्राफिक डेटा के अनुसार, भारत ने किसी एक क्षेत्र पर अपनी निर्भरता खत्म करने के लिए उत्तरी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, पश्चिम एशिया, मध्य एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप तक अपनी पहुंच का विस्तार किया है। भारत की यह नई भू-राजनीतिक रणनीति महज दूसरे देशों से खनिज आयात करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत संयुक्त अन्वेषण (खोज), आधुनिक खनन, कच्चे माल की प्रोसेसिंग, तकनीकी हस्तांतरण, बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश और एक सुरक्षित तथा भरोसेमंद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) का निर्माण करना भी शामिल है, ताकि वैश्विक संकटों के समय भी भारतीय उद्योगों को झटका न लगे।
वैश्विक महाशक्तियों और खनिज संपन्न देशों के साथ महत्वपूर्ण समझौते
अपनी खनिज सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए भारत ने दुनिया की प्रमुख महाशक्तियों और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के साथ अलग-अलग स्तरों पर हाथ मिलाया है। इस वैश्विक नेटवर्क के तहत भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसी तकनीकी रूप से उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के साथ विशेष गठबंधन किए हैं। इसके साथ ही, लैटिन अमेरिका और अफ्रीकी महाद्वीप के खनिज संपन्न देशों जैसे ब्राजील, अर्जेंटीना, लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (डीआर कांगो), घाना, नामीबिया, मोजाम्बिक, जिम्बाब्वे और मलावी के साथ भी माइनिंग ब्लॉक और शोधन तकनीकों को लेकर समझौते किए गए हैं।
पश्चिम एशिया से लेकर रूस तक द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार
रणनीतिक साझेदारियों की इस फेहरिस्त में पश्चिम एशिया के प्रमुख देशों सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इजरायल को भी शामिल किया गया है, जो भारत के आर्थिक गलियारे का अहम हिस्सा हैं। इसके अतिरिक्त दक्षिण-पूर्व एशिया के उभरते बाजार वियतनाम और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सहयोगी देश रूस के साथ भी अलग-अलग क्षेत्रों में तकनीकी और व्यापारिक तालमेल स्थापित किया गया है। इन विविध और व्यापक समझौतों के माध्यम से भारत आने वाले दशकों के लिए अपनी तकनीकी और औद्योगिक क्रांति की बुनियाद को पूरी तरह सुरक्षित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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