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बैंक जाने से पहले देखें छुट्टियों की लिस्ट, इस सप्ताह 4 दिन नहीं खुलेंगी शाखाएं
13 Jul, 2026 09:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अगर आप इस हफ्ते बैंक जाकर कोई जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले छुट्टियों की लिस्ट जरूर देख लें। 13 से 19 जुलाई 2026 के बीच एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक समेत सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के कई बैंक अलग-अलग राज्यों में चार दिन बंद रहेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक के हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार, जुलाई 2026 में राष्ट्रीय, धार्मिक और क्षेत्रीय त्योहारों के अलावा दूसरे और चौथे शनिवार तथा सभी रविवार को भी बैंक बंद रहेंगे।
इस हफ्ते बैंकों की बंदी का पूरा शेड्यूल
गुरुवार, 16 जुलाई को भुवनेश्वर (ओडिशा), देहरादून (उत्तराखंड) और इंफाल (मणिपुर) में रथ यात्रा, कांग और हरेला के अवसर पर सभी बैंक बंद रहेंगे। इसके बाद शुक्रवार, 17 जुलाई को शिलांग (मेघालय) में यू तिरोत सिंह की पुण्यतिथि के कारण बैंक बंद रहेंगे। शनिवार, 18 जुलाई को गंगटोक (सिक्किम) में द्रुकपा त्शे-जी पर्व के अवसर पर बैंक बंद रहेगा, जबकि रविवार, 19 जुलाई को साप्ताहिक छुट्टी होने के कारण पूरे देश में सभी बैंक बंद रहेंगे। हालांकि, हाल ही में तकनीकी गड़बड़ी के कुछ मामलों के कारण डिजिटल बैंकिंग और एईपीएस आधारित लेन-देन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तकनीकी त्रुटियां ग्राहकों में भ्रम पैदा कर सकती हैं और बैंकिंग प्रणाली पर भरोसा प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि बैंक समय रहते ऐसी खामियों को दूर करें, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
जुलाई के महीने में कुल बारह दिन की छुट्टियां
केंद्रीय बैंक ने जुलाई 2026 के महीने में कुल 12 दिन बैंकों के बंद रहने की घोषणा की है, जिसमें महीने के सभी रविवार, दूसरे और चौथे शनिवार भी शामिल हैं। जुलाई के बचे हुए दिनों में वीकेंड की छुट्टियों की बात करें तो 19 जुलाई को रविवार, 25 जुलाई को चौथा शनिवार और 26 जुलाई को रविवार के कारण पूरे भारत में बैंक बंद रहेंगे। इसके अलावा 22 जुलाई को खारची पूजा के चलते अगरतला में भी बैंक बंद रहेंगे।
ऑनलाइन और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं रहेंगी चालू
बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को डिजिटल सेवाओं में कोई परेशानी नहीं होगी और छुट्टियों के दौरान भी ऑनलाइन सेवाएं चालू रहेंगी। भले ही अगले हफ्ते बैंकों के शटर गिरे रहेंगे, लेकिन ग्राहकों को परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। डिजिटल इंडिया के इस दौर में आपकी बैंकिंग से जुड़ी कई ऑनलाइन सेवाएं चौबीसों घंटे चालू रहेंगी।
छुट्टियों के दौरान ऐसे निपटाएं अपने जरूरी काम
आप घर बैठे अपने फोन से गूगल पे, फोनपे, पेटीएम या बैंक के ऑफिशियल ऐप के ज़रिए यूपीआई ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। पैसे भेजने या मंगाने के लिए नेट बैंकिंग के ज़रिए आईएमपीएस, एनईएफटी और आरटीजीएस की सुविधाएं बिना किसी रुकावट के काम करेंगी। कैश निकालने या जमा करने के लिए एटीएम मशीनें खुली रहेंगी। इसके साथ ही क्रेडिट या डेबिट कार्ड के लिए अप्लाई करना, चेकबुक रिक्वेस्ट डालना या लॉकर के लिए आवेदन
आज का चांदी का भाव: 13 जुलाई को धड़ाम हुए दाम, देखें शहरवार ताजा रेट
13 Jul, 2026 08:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: जियोपॉलिटिकल टेंशन ने एक बार फिर सोने और चांदी की कीमतों पर अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। भारतीय बाजारों में सोमवार को हफ्ते के पहले कारोबारी दिन चांदी के दामों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी का वायदा भाव करीब दो फीसदी तक टूट गया, जिससे प्रति किलोग्राम की कीमत में भारी कमी आई। इसके अलावा इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन और गुडरिटर्न्स जैसी संस्थाओं की रिपोर्ट में भी घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।
वायदा बाजार और हाजिर मांग में चांदी का ताजा हाल
कमोडिटी मार्केट में चांदी का वायदा भाव शुरुआती सत्र में ही चार हजार रुपये से ज्यादा फिसलकर निचले स्तर पर आ गया, जबकि इससे पिछले सत्र में बाजार काफी ऊंचे स्तर पर बंद हुआ था। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वायदा बाजार में मुनाफावसूली और कारोबारियों द्वारा की गई बिकवाली के चलते चांदी की कीमतों पर यह दबाव देखने को मिला है। इसके साथ ही हाजिर मांग कमजोर रहने की वजह से भी कीमतों में गिरावट को बढ़ावा मिला है। जानकारों के मुताबिक, घरेलू बाजार के कारक तो जिम्मेदार हैं ही, साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले बदलाव भी कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।
देश के महानगरों और प्रमुख शहरों में चांदी का मौजूदा रेट
देशभर के अलग-अलग राज्यों और प्रमुख शहरों में चांदी के भाव में थोड़ा अंतर देखा जा रहा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, पटना और मेरठ जैसे शहरों में चांदी की कीमत लगभग एक समान स्तर पर बनी हुई है। वहीं चेन्नई और हैदराबाद जैसे दक्षिण भारतीय शहरों में चांदी के दाम थोड़े ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। इससे पिछले कारोबारी सत्रों की बात करें तो डॉलर में कमजोरी की वजह से दिल्ली के सर्राफा बाजार में जोरदार तेजी आई थी, जिससे शुक्रवार को टैक्स समेत कीमतें काफी बढ़ गई थीं, लेकिन नए हफ्ते की शुरुआत गिरावट के साथ हुई है।
खरीदारी से पहले शुद्धता और हॉलमार्क की जांच जरूरी
चांदी खरीदते समय उसकी शुद्धता का ध्यान रखना बेहद जरूरी माना जाता है। बाजार में नौ सौ निन्यानवे फाइन सिल्वर को सबसे शुद्ध माना जाता है, जिसमें शुद्धता का स्तर लगभग सौ फीसदी के करीब होता है। वहीं दूसरी ओर आभूषण और घरेलू सामान बनाने के लिए सबसे ज्यादा नौ सौ पच्चीस स्टर्लिंग सिल्वर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें शुद्धता का स्तर साढ़े बाणवे फीसदी होता है। ग्राहकों को असली चांदी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए खरीदारी के समय ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स हॉलमार्क और शुद्धता के तय निशानों को अनिवार्य रूप से जांचना चाहिए।
खराब दूध और एक्सपायर्ड सामान की डिलीवरी? Swiggy Instamart को FSSAI के 9 नोटिस
11 Jul, 2026 03:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली:देश की दिग्गज क्विक कॉमर्स डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी इंस्टामार्ट की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस प्लेटफॉर्म को कुल 9 नोटिस जारी किए हैं। सोशल मीडिया के जरिए सामने आई इस जानकारी के मुताबिक, रेगुलेटर ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के तहत नियमों के गंभीर उल्लंघन को देखते हुए यह सख्त कदम उठाया है।
खराब और एक्सपायर्ड भोजन डिलीवर करने का आरोप
ग्राहकों की तरफ से लगातार मिल रही गंभीर शिकायतों के बाद रेगुलेटर ने यह कार्रवाई की है। स्विगी इंस्टामार्ट पर आरोप है कि वह अपने उपभोक्ताओं को एक्सपायर हो चुके, सड़े-गले, दूषित और स्वास्थ्य के लिए बेहद असुरक्षित खाद्य पदार्थों की सप्लाई कर रहा था। FSSAI ने अब कंपनी से इन सभी मामलों पर विस्तृत स्पष्टीकरण और कंप्लायंस रिपोर्ट मांगी है। अगर प्लेटफॉर्म समय पर संतोषजनक जवाब नहीं देता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शिशु आहार और रोजमर्रा के सामानों में बड़ी लापरवाही
मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक शिकायत में शिशु आहार (इंफेंट फूड) बेहद खराब और असुरक्षित हालत में पाया गया, जिसके स्टोरेज और रखरखाव में भारी लापरवाही बरती गई थी। हैरान करने वाली बात यह है कि इस प्रोडक्ट को एक बार वापस करने के बाद भी दोबारा ग्राहक को सप्लाई कर दिया गया। इसके अलावा, दूषित दूध, अंडे और खराब पैक्ड फूड की डिलीवरी के भी आरोप हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि प्लेटफॉर्म पर फर्जी या अमान्य लाइसेंस नंबरों का इस्तेमाल हो रहा था और कंपनियां अपने असली रजिस्टर्ड नाम से अलग नाम से लिस्टेड थीं।
समस्या सुलझाने के बजाय सिर्फ रिफंड का खेल
ग्राहकों का आरोप है कि इतनी बड़ी लापरवाहियों को जब कंपनी के सामने ऊंचे स्तर पर उठाया गया, तब भी कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों का समाधान करने के बजाय कंपनी केवल पैसे रिफंड करके अपना पल्ला झाड़ रही थी। इसी रवैये के कारण अब मामला रेगुलेटर के पास पहुंचा है और प्लेटफॉर्म पर बड़ी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
टैक्सपेयर्स के लिए राहत, PhonePe और Jio Finance ने शुरू की 24 रुपये वाली ITR सेवा
11 Jul, 2026 03:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि बेहद नजदीक आ चुकी है। आगामी 31 जुलाई तक अपना रिटर्न जमा न करने पर करदाताओं को न सिर्फ भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है, बल्कि वे कई महत्वपूर्ण वित्तीय लाभों से भी वंचित रह जाएंगे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम समय की हड़बड़ी और तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए आखिरी तारीख का इंतजार करना बिल्कुल समझदारी नहीं है। ऐसे में यदि किसी टैक्सपेयर को खुद रिटर्न दाखिल करने में कोई परेशानी आ रही है, तो वे नामी फिनटेक प्लेटफॉर्म्स की आधुनिक टैक्स फाइलिंग सेवाओं की मदद ले सकते हैं।
फिनटेक कंपनियों के ऐप पर मिल रही हैं दोहरी सेवाएं
देश के प्रमुख फिनटेक प्लेटफॉर्म्स जैसे फोनपे (PhonePe) और जियोफाइनेंस (JioFinance) ने अपने यूजर्स के लिए ऐप के भीतर ही टैक्स फाइलिंग की विशेष सेवाएं शुरू की हैं। इन कंपनियों ने इसके लिए टैक्सबडी (TaxBuddy) नाम की संस्था के साथ हाथ मिलाया है, जिससे अब इनके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वित्तीय सेवाओं का दायरा काफी बढ़ गया है। इन ऐप्स के जरिए करदाताओं को खुद से रिटर्न भरने यानी डू-इट-योरसेल्फ (DIY) के साथ-साथ टैक्स एक्सपर्ट्स की देखरेख में रिटर्न दाखिल करने के दोनों विकल्प मिल रहे हैं, जिनकी शुरुआत बेहद मामूली शुल्क से हो रही है।
विभिन्न आय स्रोतों वाले करदाताओं के लिए आसान समाधान
यह नई डिजिटल सेवा न केवल वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए उपयोगी है, बल्कि उन करदाताओं के लिए भी बेहद मददगार है जिनकी कमाई के एक से अधिक साधन हैं। इनमें व्यापार से होने वाली आमदनी, कैपिटल गेंस, क्रिप्टो करेंसी का लेन-देन, विदेशी आय और गैर-प्रवासी भारतीयों (NRI) के रिटर्न शामिल हैं। यह तमाम तकनीकी सॉल्यूशंस एक पंजीकृत ई-रिटर्न इंटरमीडियरी के माध्यम से दिए जा रहे हैं, जिसकी वजह से टैक्सपेयर्स को अपना रिटर्न दाखिल करने के लिए किसी अन्य बाहरी पोर्टल या वेबसाइट पर जाने की कोई आवश्यकता नहीं रह जाती है।
ऐप के भीतर मौजूद हैं कई शानदार फीचर्स और सुरक्षा
जियोफाइनेंस के मुताबिक उनके इस नए टैक्स फाइलिंग सिस्टम में कई उन्नत फीचर्स को शामिल किया गया है। इसके जरिए आयकर विभाग के मुख्य पोर्टल से डेटा अपने आप आ जाता है, साथ ही इसमें टैक्स प्लानिंग टूल्स, टैक्स व्यवस्थाओं की तुलना, टैक्स छूट का आकलन और रिफंड को ट्रैक करने जैसी बेहतरीन सुविधाएं मौजूद हैं। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि टैक्सपेयर्स के सभी संवेदनशील डेटा की प्रोसेसिंग पूरी तरह से सुरक्षित और रेगुलेटेड फ्रेमवर्क के तहत की जाएगी, जिसका एकमात्र उद्देश्य केवल सुरक्षित रिटर्न दाखिल करना है।
सस्ते प्लान्स के साथ जीएसटी कंप्लायंस की भी सुविधा
फोनपे ने भी अपनी इस नई सुविधा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यूजर्स इसके जरिए न केवल अपना सालाना आईटीआर भर सकते हैं बल्कि अपने मंथली जीएसटी कंप्लायंस को भी आसानी से मैनेज कर सकते हैं। दोनों ही प्रमुख फिनटेक प्लेटफॉर्म्स पर खुद से टैक्स फाइल करने वाले शुरुआती प्लान मात्र 24 रुपये की न्यूनतम फीस से शुरू हो रहे हैं, जबकि एक्सपर्ट की मदद लेने के लिए जियोफाइनेंस ने एक विस्तृत और पारदर्शी प्राइसिंग स्ट्रक्चर भी पेश किया है जो उपभोक्ताओं को उनकी जरूरत के हिसाब से विकल्प चुनने की आजादी देता है।
भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों में नया अध्याय, व्यापार 38 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंचने की उम्मीद
11 Jul, 2026 02:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश के कूटनीतिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड की ऐतिहासिक यात्रा संपन्न की है, जिसने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। विगत चार दशकों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा की गई यह पहली न्यूजीलैंड यात्रा है, जो वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस मील का पत्थर साबित होने वाले दौरे के दौरान रक्षा, आधुनिक तकनीक और डिजिटल भुगतान सहित विभिन्न क्षेत्रों में रिकॉर्ड अठारह महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगी है, जिसके बाद दोनों देशों के आपसी संबंध अब एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी में तब्दील हो गए हैं।
चार दशकों का सूखा खत्म कर दोनों देशों के रिश्तों में आया ऐतिहासिक मोड़
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस विशेष कूटनीतिक पहल ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से चली आ रही दूरियों को पूरी तरह पाट दिया है। चार दशक के लंबे अंतराल के बाद शीर्ष स्तर पर हुए इस सीधे संवाद से दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और वैश्विक मंचों पर सहयोग की एक नई रूपरेखा तैयार हुई है। इस यात्रा के दौरान प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और तकनीकी विकास को लेकर दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच बेहद सकारात्मक और गंभीर चर्चा हुई, जिसके दूरगामी परिणाम आने वाले समय में पूरी दुनिया के सामने होंगे।
रोडमैप 2030 के तहत द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महालक्ष्य
आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों ने मिलकर एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना 'रोडमैप 2030' को पूरी सहमति के साथ स्वीकार किया है। इस विशेष आर्थिक एजेंडे का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच होने वाले आपसी व्यापार को वर्तमान स्तर से सीधे दोगुना करना है। हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से इस बड़े लक्ष्य को समय सीमा के भीतर हासिल करने में असाधारण गति मिलेगी, जिससे दोनों देशों के घरेलू उद्योगों और निर्यातकों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
पैंतीस हजार करोड़ रुपये के पार पहुंचेगा व्यापार और होगा भारी निवेश
इस कूटनीतिक समझौते के लागू होने से भारत और न्यूजीलैंड के बीच का द्विपक्षीय व्यापार आने वाले वर्षों में पैंतीस हजार करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े को पार करते हुए लगभग अड़तीस हजार चार सौ बासठ करोड़ रुपये से भी अधिक होने की उम्मीद है। इस व्यापारिक विस्तार के साथ-साथ न्यूजीलैंड सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा जताते हुए भारत के विभिन्न विकासशील क्षेत्रों में बीस बिलियन डॉलर का एक बड़ा निवेश करने का आधिकारिक वादा भी किया है, जो देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में सहायक होगा।
रक्षा, तकनीक और डिजिटल पेमेंट जैसे अट्ठारह समझौतों से मजबूत हुए संबंध
द्विपक्षीय वार्ता के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, उन्नत तकनीक के आदान-प्रदान और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लेकर कुल अठारह द्विपक्षीय समझौतों को अंतिम रूप दिया है। भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र को अब वैश्विक पहचान मिल रही है, जिसके तहत न्यूजीलैंड में भी इसे बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर संयुक्त सैन्य अभ्यास और खुफिया जानकारियों को साझा करने की प्रणाली को और अधिक पुख्ता बनाने पर सहमति बनी है, जो भारत की वैश्विक सुरक्षा नीति को और सुदृढ़ करेगी।
सरकार का बड़ा कदम: 39 दवाओं के नए दाम तय, ज्यादा कीमत वसूली तो होगी कार्रवाई
11 Jul, 2026 12:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश के आम नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर बड़ी राहत देते हुए राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने एक बड़ा कदम उठाया है। मूल्य नियामक संस्था ने औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) 2013 के तहत दी गई शक्तियों का उपयोग करते हुए बाजार में आने वाली उनतालीस नई दवा फॉर्मूलेशन की खुदरा कीमतों को आधिकारिक रूप से निर्धारित कर दिया है। सरकार के इस नीतिगत फैसले से विभिन्न गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक और संयोजन दवाओं की बाजार दरें अब पूरी तरह नियंत्रित और पारदर्शी हो सकेंगी।
गंभीर और असाध्य बीमारियों के इलाज को अधिक किफायती बनाने का प्रयास
नियामक प्राधिकरण द्वारा जारी की गई नई सूची में मानव जीवन से जुड़ी कई बेहद महत्वपूर्ण दवाओं को शामिल किया गया है। इनमें मुख्य रूप से उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन), मधुमेह (डायबिटीज), हृदय रोग, एचआईवी संक्रमण और आंखों की गंभीर बीमारियों के उपचार में काम आने वाली जीवनरक्षक दवाएं शामिल हैं। हाल ही में जारी की गई इस आधिकारिक अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य इन विशेष फॉर्मूलेशन को आम मरीजों की जेब के अनुकूल और अधिक सुलभ बनाना है, ताकि दवाओं की मनमानी कीमतों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
विभिन्न आवश्यक दवाओं और टैबलेट के खुदरा मूल्य हुए निर्धारित
नए दिशा-निर्देशों के तहत कुछ बेहद जरूरी और नियमित इस्तेमाल होने वाली दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतें तय कर दी गई हैं। इसके अंतर्गत उच्च रक्तचाप के इलाज में काम आने वाली एमलोडिपाइन, बिसोप्रोलोल और टेल्मिसार्टन के संयोजन वाली एक टैबलेट की कीमत चौदह रुपये चौहत्तर पैसे निर्धारित की गई है। इसी तरह आंखों के संक्रमण को रोकने वाले नेपाफेनाक और मोक्सीफ्लोक्सासिन ऑप्थेल्मिक आई ड्रॉप के घोल की कीमत सड़सठ रुपये चौंसठ पैसे प्रति मिलीलीटर तथा हृदय रोगियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्लोपिडोग्रेल, एस्पिरिन और एटोरवास्टेटिन के मिश्रण वाले एक कैप्सूल की कीमत छह रुपये सैंतीस पैसे तय की गई है।
दुकानों पर रेट लिस्ट को प्रमुखता से प्रदर्शित करना हुआ अनिवार्य
उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और बाजार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्राधिकरण ने खुदरा विक्रेताओं और डीलरों के लिए सख्त हिदायत जारी की है। नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि देश के प्रत्येक दवा विक्रेता को अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान या दुकान के किसी ऐसे प्रमुख हिस्से पर निर्माताओं द्वारा प्रदान की गई नवीनतम मूल्य सूची को अनिवार्य रूप से लगाना होगा जहां से वह आम जनता को आसानी से दिखाई दे सके। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जरूरतमंद मरीज या उसका परिजन दवाओं की तय कीमतों से अनभिज्ञ न रहे और उसे वास्तविक दरों की जानकारी हो।
Pure Petrol और E10 की मांग पर सरकार ने गिनाईं मुश्किलें, E20 को लेकर स्थिति साफ
11 Jul, 2026 11:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश के ईंधन बाजार में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की आपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं के बीच उठ रहे सवालों पर केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आम जनता की उन चिंताओं का सीधे तौर पर जवाब दिया है, जिसमें शुद्ध पेट्रोल, ई10 और ई20 ईंधन के बीच चयन का विकल्प न मिलने की बात कही जा रही थी। सरकार ने साफ किया है कि भारत जैसे विशाल और सघन वितरण नेटवर्क में एक साथ कई अलग-अलग श्रेणियों के पेट्रोल की राष्ट्रव्यापी आपूर्ति बनाए रखना व्यावहारिक और तार्किक रूप से संभव नहीं है।
कई श्रेणियों के ईंधन वितरण से खड़ी होंगी बड़ी लॉजिस्टिकल चुनौतियां
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश के कोने-कोने तक ईंधन पहुंचाने वाली मौजूदा वितरण प्रणाली को इस तरह डिजाइन नहीं किया गया है कि वह एक साथ कई प्रकार की आधारभूत ईंधन धाराओं का संचालन कर सके। वर्तमान में देश भर में एक लाख से अधिक रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) काम कर रहे हैं, जो रिफाइनरियों, बड़े टर्मिनलों, डिपो और पाइपलाइनों के एक बेहद जटिल नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अलग-अलग मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए समानांतर और स्वतंत्र आपूर्ति शृंखला तैयार करने से न केवल ईंधन के रख-रखाव की लागत में भारी बढ़ोतरी होगी, बल्कि इन्वेंट्री प्रबंधन भी बेहद पेचीदा हो जाएगा, जिससे पूरी प्रणाली की परिचालन दक्षता पर बुरा असर पड़ेगा।
प्रीमियम पेट्रोल से तुलना को मंत्रालय ने बताया पूरी तरह अनुचित
उपभोक्ताओं द्वारा प्रीमियम पेट्रोल की तर्ज पर अलग विकल्प दिए जाने की मांग को खारिज करते हुए मंत्रालय ने कहा कि दोनों की तुलना करना तकनीकी रूप से सही नहीं है। प्रीमियम ईंधन दरअसल कोई अलग राष्ट्रव्यापी आपूर्ति शृंखला का हिस्सा नहीं होते हैं, बल्कि वे एक विशेष श्रेणी के उत्पाद हैं जिन्हें सीमित मात्रा में कुछ खास एडिटिव्स (योजक पदार्थ) मिलाकर बेचा जाता है। इसके विपरीत, ई10 या ई20 जैसे अलग-अलग मिश्रणों के लिए पूरी तरह से अलग बुनियादी ढांचे और रिफाइनरी स्तर से लेकर पंप तक अलग भंडारण व्यवस्था की आवश्यकता होती है, जो कि व्यावहारिक नहीं है।
पुराने वाहनों की वारंटी और इंजन सुरक्षा पर ऑटोमोबाइल कंपनियों की मुहर
पुराने वाहनों के मालिकों की आशंकाओं को दूर करते हुए सरकार ने भरोसा दिलाया है कि ई20 ईंधन को लागू करने का फैसला वाहन निर्माताओं, परीक्षण एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ गहन तकनीकी मूल्यांकन के बाद ही लिया गया था। वाहन निर्माताओं ने इस बदलाव का पूरा समर्थन किया है और वे आज भी पुराने और नए सभी वाहनों की वारंटी का सम्मान कर रहे हैं। इस संदर्भ में मंत्रालय ने वाहन कंपनियों के वास्तविक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मारुति सुजुकी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान करीब पौने तीन करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें डेढ़ करोड़ से अधिक पुराने व गैर-ई20 प्रमाणित वाहन थे, और उनमें इथेनॉल के कारण जंग लगने या पुर्जों के खराब होने की एक भी शिकायत सामने नहीं आई है।
माइलेज में मामूली कमी के बदले मिलेंगे बेहतर इंजन परफॉर्मेंस और पर्यावरणीय लाभ
मंत्रालय ने इस बात को स्वीकार किया है कि ई20 ईंधन के उपयोग से वाहनों की ईंधन दक्षता यानी माइलेज में तीन से पांच प्रतिशत की मामूली कमी आ सकती है, लेकिन ईंधन की गुणवत्ता के आकलन के लिए केवल माइलेज को ही एकमात्र पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। ई20 ईंधन वाहनों को उच्च ऑक्टेन रेटिंग प्रदान करता है, जिससे इंजन के भीतर दहन बेहतर होता है, पिकअप सुगम होता है और इंजन के पुर्जे साफ रहते हैं। इसके अलावा, यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, कच्चे तेल के महंगे आयात पर निर्भरता घटाने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और स्थानीय स्तर पर एथेनॉल उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आय में वृद्धि करने के बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य से जुड़ा हुआ है।
निवेशकों के लिए बड़ा मौका, 13 जुलाई से खुलेंगे 3 नए IPO; 4 शेयरों की होगी लिस्टिंग
11 Jul, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: भारतीय प्राइमरी मार्केट के लिए आने वाला सप्ताह बेहद शानदार रहने वाला है। 13 जुलाई से शुरू हो रहे इस नए हफ्ते में देश के आईपीओ बाजार में जबरदस्त रौनक देखने को मिलेगी, जहां निवेशकों के पास कमाई के कई बेहतरीन मौके होंगे। इस दौरान बाजार में तीन नए पब्लिक इश्यू दस्तक देने जा रहे हैं, जिनमें से दो बड़े मेनबोर्ड सेगमेंट के हिस्से हैं। इसके साथ ही निवेशकों को पहले से खुले हुए कुछ अन्य आईपीओ में भी दांव लगाने का अवसर मिलेगा। नए सप्ताह के दौरान न सिर्फ नए निवेश के रास्ते खुलेंगे, बल्कि शेयर बाजार में चार नई कंपनियों की लिस्टिंग के साथ उनकी बाजार यात्रा भी शुरू होने जा रही है।
बाजार में दस्तक देने वाले नए आईपीओ
नए हफ्ते में निवेशकों के लिए तीन नए विकल्प खुलने जा रहे हैं, जिनमें सबसे बड़ा नाम एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का है। मेनबोर्ड सेगमेंट का यह मेगा आईपीओ 14 जुलाई को खुलकर 16 जुलाई को बंद होगा, जिसके जरिए कंपनी ₹11,692.91 करोड़ की बड़ी पूंजी जुटाने की तैयारी में है। इसके लिए शेयर का प्राइस बैंड ₹545 से ₹574 और न्यूनतम लॉट साइज 26 शेयर तय किया गया है, जिसकी लिस्टिंग 21 जुलाई को होने की उम्मीद है। इसी के साथ टेक्सटाइल क्षेत्र की कंपनी अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड भी ₹126.25 करोड़ जुटाने के लिए अपना मेनबोर्ड आईपीओ ला रही है, जो 14 से 16 जुलाई तक खुला रहेगा और इसके लिए निवेशक ₹100 से ₹105 के भाव पर 142 शेयरों के लॉट में बोली लगा सकेंगे। वहीं, एसएमई सेगमेंट में मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज का ₹160.34 करोड़ का पब्लिक इश्यू भी 14 जुलाई को खुलेगा, जिसका प्राइस बैंड ₹315 से ₹331 और लॉट साइज 400 शेयर है।
निवेश के लिए उपलब्ध पुराने विकल्प
नए इश्यू के अलावा बाजार में पहले से खुले हुए तीन आईपीओ में भी इस हफ्ते के शुरुआती दिन दांव लगाने का आखिरी मौका होगा। मेनबोर्ड सेगमेंट से लेजर पावर एंड इन्फ्रा का ₹742 करोड़ का आईपीओ, जो पहले ही पूरी तरह सब्सक्राइब हो चुका है, दांव लगाने के लिए 13 जुलाई को बंद हो रहा है, जिसके लिए प्राइस बैंड ₹203 से ₹214 और लॉट साइज 70 शेयर रखा गया है। दूसरी तरफ, एसएमई सेगमेंट का डेवसन कैटलिस्ट आईपीओ भी 13 जुलाई को बंद होने जा रहा है, जो अब तक 29 गुना से अधिक भरा जा चुका है और इसका फाइनल प्राइस ₹118 प्रति शेयर है। इसके साथ ही ₹25 करोड़ जुटाने के लक्ष्य वाला हैप्पी स्टील्स का आईपीओ भी इसी दिन बंद होगा, जो अब तक तीन गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हो चुका है और निवेशक इसमें ₹62 से ₹66 के दायरे में 2,000 शेयरों के लिए आवेदन कर सकते हैं।
दलाल स्ट्रीट पर होने वाली नई लिस्टिंग
पूंजी जुटाने की इस प्रक्रिया के बीच दलाल स्ट्रीट पर नई कंपनियों की शुरुआत को लेकर भी काफी उत्साह देखा जा रहा है। आने वाले सप्ताह में कुल चार कंपनियों के शेयर घरेलू शेयर बाजारों में अपनी पहली उपस्थिति दर्ज कराएंगे। इनमें से दो कंपनियां देश के मुख्य बाजारों यानी बीएसई और एनएसई के मेनबोर्ड सेगमेंट पर लिस्ट होंगी, जबकि बाकी दो कंपनियां एसएमई प्लेटफॉर्म का हिस्सा बनेंगी। लेजर पावर एंड इन्फ्रा, डेवसन कैटलिस्ट और हैप्पी स्टील्स के शेयर 16 जुलाई को बाजार में ट्रेड करने के लिए तैयार हो जाएंगे। वहीं दूसरी ओर, नए खुलने वाले तीनों आईपीओ यानी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट, अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड और मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज की लिस्टिंग एक साथ 21 जुलाई को देखने को मिलेगी।
ग्लोबल संकेत और निवेशकों की रणनीति
प्राइमरी मार्केट की इस भारी हलचल को देखते हुए बाजार के जानकारों का मानना है कि लिक्विडिटी की मजबूत स्थिति निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। घरेलू निवेशकों के बढ़ते भरोसे और वैश्विक बाजारों से मिल रहे मिले-जुले संकेतों के बीच आईपीओ मार्केट में यह तेजी देखने को मिल रही है। हालांकि, विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को किसी भी पब्लिक इश्यू में पैसा लगाने से पहले कंपनी के वित्तीय आधार, भविष्य की योजनाओं और उनके वैल्यूएशन का ठीक से मूल्यांकन कर लेना चाहिए। इस हफ्ते मेनबोर्ड से लेकर एसएमई सेगमेंट तक फैले अवसरों के कारण रिटेल और संस्थागत दोनों ही तरह के निवेशकों की भागीदारी बाजार को और ज्यादा मजबूत बनाने का काम करेगी।
गोल्ड क्रैश का फायदा! भारतीयों ने Gold ETF में झोंकी ₹3,443 करोड़ की बड़ी रकम
10 Jul, 2026 05:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में लगातार जारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के माहौल के बीच घरेलू निवेशकों का रुझान म्यूचुअल फंड पर मजबूती से टिका हुआ है। देश के आम नागरिकों और संस्थागत निवेशकों ने एक बार फिर पारंपरिक बचत के बजाय वित्तीय बाजारों पर अपना भरोसा जताया है, जिससे निवेश के मोर्चे पर शानदार रिकवरी देखने को मिली है।
जून के महीने में इक्विटी म्यूचुअल फंड में रिकॉर्ड निवेश दर्ज
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) द्वारा जारी किए गए ताजा मासिक आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के जून महीने में म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया है। इस दौरान सक्रिय रूप से प्रबंधित यानी एक्टिवली मैनेज्ड इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में कुल 28,973.41 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश (नेट इनफ्लो) देखने को मिला है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बाजार की हलचल के बावजूद निवेशक दीर्घकालिक विकास को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं और वे बाजार की गिरावट को निवेश के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
मई के मुकाबले निवेश में दर्ज की गई छब्बीस फीसदी की भारी बढ़त
अगर हम पिछले महीने के आंकड़ों से इसकी तुलना करें, तो मई का महीना निवेश के लिहाज से चालू वर्ष 2026 का सबसे सुस्त दौर रहा था। मई में इक्विटी म्यूचुअल फंड में केवल 22,907.77 करोड़ रुपये का ही निवेश आया था, जो इस साल का न्यूनतम स्तर था। लेकिन जून आते-आते निवेशकों की धारणा में बड़ा बदलाव आया और निवेश की रफ्तार में लगभग 26 प्रतिशत का जोरदार उछाल दर्ज किया गया, जिसने बाजार के विश्लेषकों को भी सकारात्मक रूप से चौंका दिया है।
सुरक्षित निवेश की चाहत में गोल्ड ईटीएफ की तरफ तेजी से बढ़े कदम
एम्फी की इस रिपोर्ट में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाले आंकड़े सोने में निवेश को लेकर सामने आए हैं। जून के महीने में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (गोल्ड ईटीएफ) में निवेशकों की दिलचस्पी अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई। आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने की तुलना में जून में गोल्ड ईटीएफ के भीतर होने वाले निवेश में सीधे पांच गुना से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कमोडिटी बाजार में इस तरह का भारी निवेश अमूमन बड़े आर्थिक बदलावों या निवेशकों के सुरक्षात्मक रुख का संकेत माना जाता है।
बाजार की अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव ने बढ़ाया सोने का आकर्षण
गोल्ड ईटीएफ में आई इस अप्रत्याशित तेजी के पीछे मुख्य वजह शेयर बाजार में समय-समय पर आने वाली गिरावट और वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव को माना जा रहा है। जब भी इक्विटी मार्केट में जोखिम बढ़ता है, तब निवेशक अपने पोर्टफोलियो को संतुलित और सुरक्षित करने के लिए सोने जैसे पारंपरिक व भरोसेमंद विकल्प का रुख करते हैं। इसके अलावा, आने वाले समय में महंगाई के दबाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मुद्रा के मूल्य में उतार-चढ़ाव की आशंका ने भी निवेशकों को गोल्ड फंड्स में भारी पूंजी लगाने के लिए प्रेरित किया है।
कच्चे तेल के संकट से निपटने की तैयारी, ONGC का 17.5 लाख टन स्टोरेज प्लान
10 Jul, 2026 01:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली:पश्चिम एशिया में लगातार गहराते भू-राजनीतिक संकट और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर मंडराते खतरों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा आत्मनिर्भरता को चाक-चौबंद करने के लिए एक बेहद रणनीतिक और बड़ा कदम उठाया है. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितताओं के मद्देनजर देश की शीर्ष सार्वजनिक तेल और गैस अन्वेषण कंपनी ने दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्र में एक विशाल नया रणनीतिक कच्चे तेल का भंडार स्थापित करने की घोषणा की है. इस महत्वपूर्ण परियोजना के जरिए देश किसी भी अंतरराष्ट्रीय आपातकाल या युद्ध जैसी स्थितियों में अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को बिना किसी व्यवधान के पूरा करने में सक्षम हो सकेगा.
ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया सुरक्षा कवच, विदेशी तेल पर निर्भरता की चुनौती
दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता देश के रूप में भारत अपनी कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों से आयात करता है. हाल के दिनों में वैश्विक तनाव के चलते जब प्रमुख समुद्री संकीर्ण मार्गों से होने वाली सप्लाई चेन प्रभावित हुई, तो घरेलू स्तर पर सुरक्षात्मक कदम उठाने की आवश्यकता बेहद बढ़ गई. इसी के समाधान के तौर पर सरकारी तेल कंपनी ने नियामक फाइलिंग में जानकारी दी है कि वह मंगलुरु में 17.5 लाख टन की क्षमता वाला एक नया 'राष्ट्रीय रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व' विकसित करने जा रही है, जो संकट के समय देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार को थमने नहीं देगा.
व्यावसायिक उपयोग के लिए नीतिगत छूट की तैयारी, वर्तमान भंडारण क्षमता को मिलेगा विस्तार
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाए रखने के लिए सार्वजनिक उपक्रम की कंपनी केंद्र सरकार से इस नए विशाल भंडार के एक हिस्से को कमर्शियल यानी वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की विशेष अनुमति प्राप्त करने का प्रयास कर रही है. वर्तमान में देश के दक्षिण और पूर्वी तटीय इलाकों में पहले से संचालित तीन प्रमुख रणनीतिक भंडारों का प्रबंधन एक विशेष सरकारी इकाई द्वारा किया जा रहा है, जिनकी संयुक्त क्षमता 5.33 मिलियन मीट्रिक टन के करीब है. नई नीति के तहत इन भंडारों के व्यावसायिक इस्तेमाल से देश की तेल कंपनियों को वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव का लाभ उठाने और आपातकालीन स्टॉक को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के बनाए रखने में मदद मिलेगी.
वैश्विक मित्र देशों के साथ मजबूत हो रही एनर्जी पार्टनरशिप, विदेशी निवेश को बढ़ावा
भारत अपनी ऊर्जा भंडारण क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर अपग्रेड करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और जापान जैसे दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार देशों के साथ लगातार सहयोग बढ़ा रहा है. मंगलुरु रिफाइनरी परिसर के समीप पहले से मौजूद भंडारण क्षमता का एक बड़ा हिस्सा यूएई की राष्ट्रीय तेल कंपनी को लीज पर दिया जा चुका है, जो द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों की मजबूती को दर्शाता है. दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुए हालिया समझौतों के तहत खाड़ी देश की दिग्गज ऊर्जा कंपनियां भारत की धरती पर अपने कच्चे तेल के स्टॉक को कई गुना बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों पर भारतीय हितों के अनुरूप नए लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे को विकसित करने पर तेजी से काम कर रही हैं.
पूर्वी और दक्षिणी तटों पर नए मेगा प्रोजेक्ट्स, भविष्य की किल्लत से मिलेगी मुक्ति
देश को ऊर्जा क्षेत्र में पूरी तरह सुरक्षित बनाने का यह खाका केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार देश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटों पर समानांतर रूप से भंडारण नेटवर्क का विस्तार कर रही है. इस व्यापक कार्ययोजना के तहत ओडिशा के चंडीखोल में 4 मिलियन मीट्रिक टन की क्षमता वाला एक विशाल पूर्वी तेल भंडार और कर्नाटक के पादुर में 2.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता की एक अतिरिक्त नई फैसिलिटी को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इन सभी परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद देश के पास इतना पर्याप्त बैकअप होगा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी, युद्ध या प्रतिबंधों जैसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
भारत-UK FTA की शुरुआत 15 जुलाई से, ब्रिटेन से आने वाली कारों पर सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन
10 Jul, 2026 01:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली:भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंधों में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है, जिससे दोनों देशों के बीच कारोबार को एक नई गति मिलेगी. दोनों देशों के मध्य बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) मध्य जुलाई से आधिकारिक रूप से प्रभावी होने जा रहा है. इस ऐतिहासिक कदम को अमलीजामा पहनाने के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय ने अपनी प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली हैं और आयात से जुड़े नियमों तथा रियायतों की आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी है. इस नीतिगत निर्णय के बाद वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े क्षेत्रों में बड़ी हलचल देखी जा रही है.
ब्रिटेन की शानदार कारों का आयात होगा सस्ता, सीमा शुल्क में भारी कटौती
सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक, समझौते के पहले ही वर्ष में यूनाइटेड किंगडम से आने वाली चुनिंदा प्रीमियम कारों पर लगने वाले आयात शुल्क में ऐतिहासिक रूप से बड़ी कटौती की गई है. अब बड़े और शक्तिशाली इंजन क्षमता वाले वाहनों को भारतीय बाजारों में लाने के लिए ऑटो कंपनियों को पहले के मुकाबले बेहद कम टैक्स चुकाना होगा. अलग-अलग इंजन क्षमता के आधार पर शुल्क की दरों को श्रेणीबद्ध किया गया है, जिसके तहत कुछ विशेष श्रेणी के वाहनों पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को तीन अंकों से घटाकर बेहद निचले स्तर पर ला दिया गया है. इस व्यवस्था से देश के वाहन शौकीनों को वैश्विक स्तर की लग्जरी कारें अब अधिक किफायती कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगी.
चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा कोटा, हाइब्रिड और ईवी के लिए भी खाका तैयार
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के इस नए फॉर्मूले के तहत शुरुआत में रियायती दरों पर देश में आने वाले वाहनों की एक निश्चित संख्या तय की गई है. आगामी पांच वर्षों तक इस निर्धारित कोटे में सालाना आधार पर क्रमिक वृद्धि की जाएगी, जिसके बाद एक लंबी अवधि के रोडमैप के तहत इसे धीरे-धीरे कम किया जाएगा. इस दीर्घकालिक योजना का अंतिम लक्ष्य डेढ़ दशक के बाद आयात शुल्क को न्यूनतम स्तर पर समेटना है. इसके अलावा, आधुनिक तकनीक और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), हाइब्रिड और पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन से चलने वाली गाड़ियों के लिए विशेष व्यापारिक कोटा नीति के छठवें वर्ष से प्रभावी करने का निर्णय लिया गया है.
भारतीय निर्यातकों की चमकेगी किस्मत, गारमेंट्स और मरीन प्रोडक्ट्स पर टैक्स होगा शून्य
इस द्विपक्षीय समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारतीय कपड़ा उद्योग, रसायन क्षेत्र और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यातकों को मिलने जा रहा है. अब तक ब्रिटेन के बाजारों में भारतीय कपड़ों, रसायनों और समुद्री उत्पादों पर लगने वाला भारी-भरकम टैक्स पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा, जिससे भारतीय सामान ब्रिटिश बाजारों में काफी प्रतिस्पर्धी और सस्ते हो जाएंगे. भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले लगभग निन्यानवे प्रतिशत सामानों को विभिन्न चरणों में पूरी तरह से टैक्स फ्री कर दिया जाएगा. इस बड़ी राहत से भारतीय विनिर्माण और निर्यात सेक्टर को वैश्विक स्तर पर एक नया बाजार मिलेगा, जिससे देश में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे.
स्कॉच व्हिस्की की कीमतों में आएगी गिरावट, जवाबी रियायतों से बढ़ेगा द्विपक्षीय व्यापार
इस समझौते के तहत भारत ने भी अपनी आयात नीतियों में लचीलापन दिखाते हुए ब्रिटेन से आने वाले कई प्रमुख उत्पादों पर टैक्स का बोझ कम करने की सहमति दी है. ब्रिटेन से भारत आने वाले सामानों में सबसे प्रमुख स्कॉच व्हिस्की और मेड इन इंग्लैंड कारें हैं, जिन पर वर्तमान में भारत सरकार द्वारा भारी आयात शुल्क वसूला जाता है. नए नियमों के लागू होने के बाद, स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाले डेढ़ सौ प्रतिशत के भारी शुल्क को किस्तों में घटाकर बेहद कम कर दिया जाएगा. इस पारस्परिक सहयोग नीति के तहत भारत भी ब्रिटेन के अधिकांश उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश के दौरान सीमा शुल्क में विशेष रियायतें प्रदान करेगा, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को समान रूप से लाभ होगा.
IPO से पहले SBI Funds Management को बड़ी सफलता, प्री-प्लेसमेंट में जुटी भारी रकम
10 Jul, 2026 01:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई:देश के वित्तीय बाजार में एक नया इतिहास रचने की तैयारी पूरी हो चुकी है, जहां दिग्गज बैंकिंग समूह की एक प्रमुख इकाई अपना बहुप्रतीक्षित सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लेकर बाजार में उतर रही है. इस बड़े कदम से पहले ही कॉरपोरेट जगत और बड़े संस्थागत निवेशकों के बीच भारी हलचल देखी जा रही है. एसेट मैनेजमेंट के क्षेत्र की इस दिग्गज कंपनी ने बाजार में कदम रखने से ऐन पहले ही बड़े निवेशकों को आकर्षित कर एक बेहद मजबूत वित्तीय आधार तैयार कर लिया है, जो इसके प्रति निवेशकों के गहरे भरोसे को दर्शाता है.
आईपीओ से पहले दिग्गज निवेशकों ने दांव लगाकर जुटाए 1,655 करोड़ रुपये
सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक की इस सहयोगी म्यूचुअल फंड इकाई ने अपने आगामी आईपीओ के आधिकारिक रूप से खुलने से पहले ही प्री-आईपीओ राउंड में जबरदस्त कामयाबी हासिल की है. बाजार की बड़ी बीमा कंपनियों और प्रमुख घरेलू वित्तीय फंडों सहित करीब तीस बड़े संस्थागत निवेशकों ने कंपनी में अपनी गहरी दिलचस्पी दिखाते हुए कुल 1,655 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश कर दिया है. देश की इस शीर्ष परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया है कि इसके लिए बकायदा शेयर खरीद समझौते संपन्न हो चुके हैं, जिसके तहत कंपनी की करीब 1.42 प्रतिशत की इक्विटी हिस्सेदारी को ट्रांसफर किया जा रहा है.
ऊपरी प्राइस बैंड पर हुई ब्लॉक डील, रिकॉर्ड वित्तीय लक्ष्य हासिल करने की तैयारी
वित्तीय नियामक को दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस प्री-आईपीओ ट्रांजैक्शन के लिए शेयरों का मूल्यांकन 574 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के स्तर पर तय किया गया है, जो कि आगामी सार्वजनिक निर्गम के अधिकतम मूल्य के बिल्कुल बराबर है. कंपनी ने इस बड़े इश्यू के लिए 545 रुपये से लेकर 574 रुपये प्रति शेयर का एक दायरा तय किया है. इस बड़े सार्वजनिक निर्गम के जरिए कुल मिलाकर 11,692 करोड़ रुपये जुटाने का एक विशाल लक्ष्य रखा गया है, जो चालू वर्ष के दौरान भारतीय शेयर बाजार में आने वाला अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक आईपीओ साबित होने जा रहा है.
पूरी तरह ऑफर फॉर सेल पर आधारित इश्यू, खुदरा निवेशकों के लिए लॉट साइज तय
इस बार बाजार में आ रहा यह मेगा आईपीओ पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (ओएफएस) के प्रारूप में डिजाइन किया गया है, जिसका सीधा मतलब यह है कि इसके तहत कोई भी नया इक्विटी शेयर जारी नहीं किया जा रहा है. कंपनी के कुछ वर्तमान शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी को बाजार में बेचकर बाहर निकल रहे हैं, जिससे इस पूरी प्रक्रिया से मिलने वाली रकम सीधे उन हिस्सेदारों के पास जाएगी और कंपनी के खजाने में कोई नई पूंजी नहीं जुड़ेगी. आम और छोटे निवेशकों की सहभागिता के लिए न्यूनतम 26 शेयरों का एक लॉट निर्धारित किया गया है, जिसके चलते ऊपरी स्तर के मूल्य के आधार पर प्रत्येक खुदरा आवेदन के लिए न्यूनतम 14,924 रुपये की पूंजी निवेश करना आवश्यक होगा.
सप्ताह के मध्य में खुलेगी बोलियां, स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने वाली तीसरी सहयोगी इकाई
समय सारणी के अनुसार, बड़े एंकर निवेशकों के लिए यह खिड़की आगामी 13 जुलाई को ही खोल दी जाएगी, जबकि आम जनता और खुदरा निवेशकों के लिए बोलियां लगाने की प्रक्रिया 14 जुलाई से शुरू होकर 16 जुलाई तक चालू रहेगी. इसके तुरंत बाद सफल आवेदकों को शेयरों का आवंटन करने की प्रक्रिया शुरू होगी और महीने के उत्तरार्ध यानी 21 जुलाई तक कंपनी के शेयरों की घरेलू स्टॉक एक्सचेंजों पर औपचारिक लिस्टिंग होने की प्रबल संभावना है. भारतीय स्टेट बैंक के समूह की बात करें तो अपनी लाइफ इंश्योरेंस और कार्ड्स इकाई की शानदार सफलताओं के बाद शेयर बाजार के मंच पर सूचीबद्ध होने वाली यह इसकी तीसरी सबसे बड़ी सब्सिडियरी कंपनी बनने जा रही है.
क्या E20 पेट्रोल से कार-बाइक को नुकसान? फ्यूल विवाद पर सरकार ने दूर की गलतफहमियां
10 Jul, 2026 11:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देशभर के वाहन चालकों और आम जनता के बीच इन दिनों E20 फ्यूल (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर कई तरह की आशंकाएं और भ्रामक खबरें तैर रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक और वॉट्सऐप पर लगातार यह दावा किया जा रहा है कि इस नए ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ियों के इंजन पर बुरा असर पड़ रहा है और वाहनों के रबर के पाइप गल रहे हैं। जनमानस में फैल रहे इसी असमंजस और डर को दूर करने के लिए अब खुद सरकार ने आगे आकर मोर्चा संभाला है। सरकार द्वारा इस संबंध में एक विस्तृत आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी की गई है, जिसमें आम जनता के मन में उठ रहे हर जरूरी सवाल का बेहद स्पष्ट और सीधे शब्दों में जवाब दिया गया है।
सोशल मीडिया पर फैलते भ्रम का खंडन
इंटरनेट और विभिन्न मैसेजिंग ऐप्स पर पिछले कुछ समय से E20 ईंधन को लेकर तरह-तरह की मनगढ़ंत बातें फैलाई जा रही हैं, जिससे वाहन मालिकों में डर का माहौल है। सरकार ने अपनी हालिया विज्ञप्ति में इन सभी दावों को पूरी तरह से भ्रामक और निराधार करार दिया है। आधिकारिक बयान में साफ किया गया है कि नए ईंधन को बाजार में उतारने से पहले वैज्ञानिक स्तर पर इसके हर पहलू की गहन जांच की गई है। जनता से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया पर बिना किसी प्रामाणिक आधार के शेयर की जा रही ऐसी अफवाहों पर बिल्कुल भी भरोसा न करें, क्योंकि यह आधुनिक ईंधन पूरी तरह से सुरक्षित है।
इंजन और रबर पाइप्स की सुरक्षा पर स्पष्टीकरण
वाहन चालकों की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि क्या इथेनॉल की मात्रा बढ़ने से उनकी गाड़ी के आंतरिक हिस्से, विशेषकर रबर के पाइप और सील गल जाएंगे। इस पर तकनीकी डेटा साझा करते हुए स्पष्ट किया गया है कि आधुनिक वाहनों को इस तरह से डिजाइन और अपग्रेड किया गया है कि वे इस ईंधन को आसानी से झेल सकें। सरकार के अनुसार, E20 फ्यूल से इंजन या उसके किसी भी हिस्से को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। वाहन निर्माताओं ने भी नए मानकों के अनुरूप ही ऑटोमोबाइल पार्ट्स का निर्माण किया है, जिससे पाइप गलने या इंजन के खराब होने जैसी तकनीकी खराबी की कोई गुंजाइश नहीं रह जाती।
हरित भविष्य और पर्यावरण को मिलने वाले लाभ
प्रेस रिलीज में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया है कि E20 ईंधन नीति को लागू करने के पीछे देश का एक बड़ा और दूरगामी लक्ष्य छिपा हुआ है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल का मिश्रण करने से न केवल वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आ रही है, बल्कि यह पर्यावरण को स्वच्छ रखने में भी बेहद मददगार साबित हो रहा है। इसके साथ ही, कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता कम हो रही है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। यह ईंधन पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल है और देश के हरित भविष्य के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
वाहन निर्माताओं के लिए जारी कड़े दिशा-निर्देश
भविष्य में उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए भी कड़े नियम तय किए हैं। देश में बनने वाले सभी नए वाहनों को पूरी तरह से E20 कंप्लायंट यानी इस ईंधन के अनुकूल बनाया जा रहा है। कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे वाहनों के मैनुअल और इंजन पर इसके उपयोग से जुड़ी सही और सटीक जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज करें। सरकार का कहना है कि चरणबद्ध तरीके से देश के बुनियादी ढांचे को इस नए और किफायती ईंधन के लिए तैयार किया जा चुका है, इसलिए नागरिकों को किसी भी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
Delhi Electricity Alert: 10 जुलाई को इन इलाकों में रहेगा बिजली संकट, जानें टाइमिंग और एरिया
10 Jul, 2026 10:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली:देश की राजधानी के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में रहने वाले लाखों लोगों को आज बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और तकनीकी सुधारों के उद्देश्य से बिजली आपूर्ति को अस्थायी रूप से रोका जा रहा है। बिजली वितरण कंपनी बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) के अनुसार, शुक्रवार को सुबह नौ बजे से लेकर शाम चार बजे के बीच अलग-अलग समय पर विभिन्न इलाकों में बिजली गुल रहेगी। कंपनी का कहना है कि ट्रांसफॉर्मर को अपग्रेड करने, नए एलटीएबी सर्किट लगाने और ग्रिड को और अधिक सक्षम बनाने के लिए यह शटडाउन बेहद जरूरी है।
सुबह के सत्र में प्रभावित होने वाले क्षेत्र
दिन के पहले हिस्से में बिजली विभाग द्वारा मुख्य रूप से बाहरी और पश्चिमी दिल्ली के रिहायशी इलाकों में मेंटेनेंस का काम शुरू किया गया है। सुबह नौ बजे से साढ़े दस बजे के बीच जोहर विलेज, नांगलोई एक्सटेंशन और मुंडका डिवीजन के तहत आने वाले आकाश विहार में बिजली की आवाजाही बंद रहेगी। इसके बाद सुबह दस बजे से दोपहर बारह बजे के बीच एक व्यापक हिस्से में कटौती की जा रही है, जिसमें मोहन गार्डन का ओम विहार फेज-5, जनकपुरी की दिल्ली मिल्क स्कीम कॉलोनी, हरि नगर, राजौरी गार्डन ब्लॉक-वी के साथ-साथ छतरपुर डिवीजन के मैदान गढ़ी, डीएलएफ फार्म्स, सुल्तानपुर, जोनापुर, गड़ाईपुर और राधे मोहन ड्राइव जैसे इलाके शामिल हैं। इसी दौरान सुबह दस से साढ़े ग्यारह बजे तक पश्चिम विहार की स्टेट बैंक कॉलोनी ब्लॉक-बी में भी बत्ती गुल रहेगी।
दोपहर के समय इन इलाकों में रहेगा शटडाउन
दोपहर के समय भी दक्षिण और पश्चिमी दिल्ली के कई बड़े व्यावसायिक और आवासीय परिसरों में रखरखाव का कार्य जारी रहेगा। सुबह ग्यारह बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे के बीच पालम गांव, राज नगर-2 का ब्लॉक-जे, मिर्जापुर, महावीर एन्क्लेव जैसी घनी आबादी वाले क्षेत्रों के साथ-साथ कुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया, कटवारिया सराय पॉकेट-बी और आईआईटी दिल्ली कैंपस जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में बिजली आपूर्ति ठप रहेगी। इसके अलावा, सुबह ग्यारह बजे से दोपहर एक बजे के बीच रघुबीर नगर ब्लॉक बी-2 और टैगोर गार्डन एक्सटेंशन ब्लॉक एई में भी तकनीकी काम किया जाएगा। दिन के आखिरी चरण में यानी दोपहर दो बजे से शाम चार बजे के बीच मोहन गार्डन डिवीजन के विपिन गार्डन ब्लॉक-सी और नवादा इलाके में बिजली प्रभावित रहेगी।
उपभोक्ताओं के लिए जारी जरूरी गाइडलाइन
अचानक होने वाली दिक्कतों से बचने के लिए बिजली कंपनी ने प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को पहले से ही सचेत रहने की सलाह दी है। उपभोक्ताओं से कहा गया है कि वे बिजली कटौती की समय सीमा शुरू होने से पहले ही अपने आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप और इनवर्टर आदि को पूरी तरह चार्ज करके रख लें। इसके साथ ही, जिन दफ्तरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों या घरों में लगातार बिजली की आवश्यकता होती है, उन्हें इस दौरान जनरेटर या अन्य वैकल्पिक स्रोतों की व्यवस्था पहले से कर लेनी चाहिए ताकि उनका कामकाज प्रभावित न हो।
बिजली बहाली और सहायता केंद्र की जानकारी
बिजली कंपनी ने स्थानीय नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि जैसे ही ग्रिड को अपग्रेड करने और मरम्मत का काम तय समय के भीतर पूरा हो जाएगा, वैसे ही सभी क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति तुरंत बहाल कर दी जाएगी। हालांकि, जमीनी स्तर पर काम की जटिलता और परिस्थितियों को देखते हुए बिजली चालू होने के समय में आंशिक बदलाव भी संभव है। शटडाउन के दौरान या काम पूरा होने के बाद भी यदि किसी उपभोक्ता को बिजली से जुड़ी कोई शिकायत दर्ज करानी हो, अथवा आपूर्ति के संबंध में कोई अन्य जानकारी चाहिए, तो वे बीएसईएस के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 19123 पर संपर्क करके सीधे सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
MCX Gold में आई बड़ी गिरावट, निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?
10 Jul, 2026 09:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों और घरेलू स्तर पर हाजिर मांग में कमी के चलते शुक्रवार, 10 जुलाई को भारतीय वायदा बाजार (MCX) में बहुमूल्य धातुओं के दामों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। सुबह के कारोबारी सत्र में सोने की कीमतों में जहां मामूली गिरावट दर्ज की गई, वहीं चांदी के भाव मामूली बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। अगस्त डिलीवरी वाले सोने के अनुबंधों में सुबह 9:15 बजे गिरावट देखी गई, जबकि इसके विपरीत सितंबर डिलीवरी वाली चांदी में हल्की तेजी का माहौल बना रहा।
वैश्विक तनाव और फेडरल रिजर्व की चिंता
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पीली धातु की कीमतों में इस हफ्ते गिरावट की आशंका गहरा गई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते इस बात की संभावना प्रबल हो गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला ले सकता है। फेड की पिछली बैठक के ब्योरे से भी यह साफ हुआ है कि नीति निर्माता मध्य पूर्व के संकट और उच्च मुद्रास्फीति को लेकर बेहद सतर्क हैं। आंकड़ों के मुताबिक, आगामी सितंबर महीने में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद अब पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है।
मध्य पूर्व का संकट और बाजार पर असर
आमतौर पर सोने को महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन जब केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीतियों को सख्त करते हैं, तो बिना ब्याज देने वाली इस परिसंपत्ति के आकर्षण में कमी आती है और इसकी कीमतें दबाव में आ जाती हैं। इस बीच, पश्चिम एशिया में हवाई हमलों का सिलसिला तेज हो गया है, जिससे क्षेत्र में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। ताजा सैन्य घटनाक्रमों के कारण दोनों देशों के बीच होने वाले अंतरिम समझौते पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं, जिसका सीधा असर निवेशकों की धारणा पर पड़ रहा है।
तकनीकी स्तर और विशेषज्ञों की राय
बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक सोने की कीमतें एक निश्चित दायरे से ऊपर टिकी हुई हैं, तब तक हर गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाना फायदेमंद हो सकता है। मौजूदा समय में सोने के लिए ऊपरी स्तरों पर कड़ा प्रतिरोध देखा जा रहा है और अगर कीमतें इस बाधा को पार कर जाती हैं, तो आने वाले दिनों में बड़ी तेजी का रास्ता साफ हो सकता है। फिलहाल वैश्विक बाजार और भारतीय वायदा बाजार दोनों में ही महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर सक्रिय हैं, जिन पर व्यापारियों को पैनी नजर रखनी होगी।
निवेशकों के लिए मुनाफावसूली की सलाह
मौजूदा अनिश्चित माहौल को देखते हुए कमोडिटी विश्लेषकों ने निवेशकों को फूंक-फूंक कर कदम रखने की सलाह दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी के लिए तय सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स के बीच भारी उतार-चढ़ाव की उम्मीद है। वीकेंड की शुरुआत होने और अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर बनी असमंजस की स्थिति के बीच बाजार के जानकारों का कहना है कि ट्रेडर्स को हर छोटी-बड़ी तेजी पर अपनी लॉन्ग पोजीशन से मुनाफा समेटने (प्रॉफिट बुकिंग) पर ध्यान देना चाहिए, ताकि किसी भी अप्रत्याशित जोखिम से बचा जा सके।
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