व्यापार
दामों में बढ़ोतरी का खतरा, ऑयल कंपनियों ने जताई नाराजगी
15 May, 2026 02:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश में आम जनता पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ बढ़ गया है क्योंकि पंद्रह मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सीधे तीन रुपये प्रति लीटर का तगड़ा इजाफा कर दिया गया है। आम उपभोक्ताओं की जेब ढीली करने वाली इस मूल्य वृद्धि के बाद भी तेल संकट के और गहराने तथा कीमतों में आगामी दिनों में और अधिक बढ़ोतरी होने की प्रबल आशंका बनी हुई है। देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियां इस ताजा बढ़ोतरी से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं और उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के दबाव को देखते हुए यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था।
वैश्विक बाजार के दबाव और बढ़ती लागत के बीच मामूली राहत
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के निदेशक अरविंद कुमार ने इस मूल्य वृद्धि पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और रिफाइनिंग लागत को देखते हुए तीन रुपये की यह बढ़ोतरी बेहद मामूली है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की जो वास्तविक लागत बढ़ी है, उसकी पूरी भरपाई करने के लिए कीमतों में इससे कहीं ज्यादा इजाफा करने की आवश्यकता थी। वर्तमान में की गई यह वृद्धि बढ़ी हुई लागत का महज दस प्रतिशत यानी केवल दसवां हिस्सा ही है, जिसका सीधा मतलब है कि तेल कंपनियों ने अभी भी घाटे का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन करते हुए जनता पर न्यूनतम बोझ डाला है।
ईंधन की निर्बाध आपूर्ति के लिए रिफाइनरियों पर भारी दबाव
घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की किल्लत न हो और सभी पेट्रोल पंपों पर ईंधन की निर्बाध सप्लाई लगातार बनी रहे, इसके लिए देश की तेल रिफाइनरियां इस समय अपनी तय सीमा से कहीं ज्यादा दबाव में काम कर रही हैं। रिफाइनिंग क्षेत्र के उच्चाधिकारियों के अनुसार देश में ईंधन की मांग और आपूर्ति का संतुलन बनाए रखने के लिए सभी रिफाइनिंग इकाइयां अपनी शत-प्रतिशत क्षमता से भी अधिक पर संचालित की जा रही हैं। कंपनियां भारी आर्थिक दबाव और कच्चे तेल के ऊंचे दामों के बावजूद देश की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं।
भविष्य में और अधिक मूल्य वृद्धि की मंडराती आशंका
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे बेतहाशा उछाल के कारण घरेलू तेल कंपनियों के मुनाफे और कार्यशील पूंजी पर विपरीत असर पड़ रहा है। बाजार विशेषज्ञों और न्यूज एजेंसी की रिपोर्टों के अनुसार यदि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव या अन्य कारणों से कच्चे तेल के दाम इसी तरह ऊंचे बने रहे, तो आने वाले समय में तेल विपणन कंपनियां अपने वित्तीय नुकसान को कम करने के लिए खुदरा कीमतों में एक बार फिर बड़ा बदलाव कर सकती हैं। इस स्थिति को देखते हुए यह माना जा रहा है कि वर्तमान में दी गई तीन रुपये की राहत अस्थाई साबित हो सकती है और आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को ईंधन के लिए और अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
मुनाफावसूली हावी, सोना-चांदी के दाम गिरे, कैरेट अनुसार रेट देखें
15 May, 2026 01:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन शुक्रवार को सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार में निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने के कारण घरेलू वायदा और हाजिर दोनों ही बाजारों में बहुमूल्य धातुओं के दाम लाल निशान पर आ गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी में शुद्धता के विभिन्न पैमानों पर सोने के भाव में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे शादियों के इस सीजन में खरीदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक संकेतों और स्थानीय स्तर पर मांग में आए बदलाव के कारण बाजार में यह उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
घरेलू हाजिर बाजार और बड़े ब्रांड्स के शोरूम में नरमी
दिल्ली के हाजिर बाजार में शुद्ध चौबीस कैरेट सोने के दाम में दो हजार रुपये से अधिक की बड़ी कटौती दर्ज की गई है, जिसके बाद इसके भाव घटकर एक लाख साठ हजार रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर के आस-पास आ गए हैं। इसी तरह बाईस कैरेट और अठारह कैरेट जेवराती सोने की कीमतों में भी भारी मंदी का रुख बना हुआ है। देश के प्रतिष्ठित आभूषण ब्रांड्स जैसे तनिष्क और कल्याण ज्वैलर्स के दिल्ली स्थित आउटलेट्स पर भी इस गिरावट का सीधा असर देखा जा रहा है, जहाँ ग्राहकों के लिए नई दरें लागू कर दी गई हैं और विभिन्न श्रेणियों के सोने के गहनों पर प्रति दस ग्राम हजारों रुपये की बचत हो रही है।
चांदी के दामों में ऐतिहासिक मंदी और वायदा बाजार का हाल
सोने की तर्ज पर ही औद्योगिक मांग कमजोर होने और बिकवाली के दबाव के कारण चांदी की कीमतों को भी बड़ा झटका लगा है। स्थानीय बाजार में चांदी का भाव सीधे दस हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक लुढ़क गया है, जिससे इसका दाम दो लाख नब्बे हजार रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर भी दोपहर के सत्र में सोने और चांदी के वायदा अनुबंधों में भारी बिकवाली देखी गई, जहाँ दोनों ही कीमती धातुएं अपने पिछले बंद स्तर से कई प्रतिशत नीचे कारोबार करती नजर आईं।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सुस्ती और वैश्विक दरों का दबाव
घरेलू बाजार में आई इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह वैश्विक स्तर पर धातुओं के दाम टूटना माना जा रहा है। अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज कॉमेक्स पर सोने का वायदा और हाजिर भाव दो फीसदी से अधिक की कमजोरी के साथ साढ़े चार हजार डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों में भी सात प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर भारतीय सर्राफा बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा है और स्थानीय स्तर पर भी दोनों धातुओं के भाव धड़ाम हो गए हैं।
ITR फाइलिंग की घड़ी आई, जानें ITR-1 और ITR-4 के बारे में
15 May, 2026 11:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: आयकर दाताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है क्योंकि आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया का औपचारिक रूप से शुभारंभ कर दिया है। विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आईटीआर-1 और आईटीआर-4 फॉर्म की एक्सेल यूटिलिटीज पोर्टल पर उपलब्ध करा दी हैं, जिससे पात्र नागरिक अब अपनी आय का विवरण साझा करना शुरू कर सकते हैं। समय से पहले इन सुविधाओं के उपलब्ध होने से करदाताओं को अपनी कर गणना और फाइलिंग प्रक्रिया को बिना किसी जल्दबाजी के पूरा करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा, जिससे अंतिम समय में होने वाली तकनीकी समस्याओं का जोखिम भी न्यूनतम हो जाएगा।
सुगम फाइलिंग के लिए ऑफलाइन यूटिलिटीज की उपलब्धता
आयकर विभाग द्वारा जारी की गई नई एक्सेल यूटिलिटीज करदाताओं को एक प्रभावी ऑफलाइन विकल्प प्रदान करती हैं, जिससे वे बिना इंटरनेट के अपनी आय और कटौतियों का विस्तृत विवरण दर्ज कर सकते हैं। करदाता ई-फाइलिंग पोर्टल से इन यूटिलिटीज को डाउनलोड कर अपनी कर देनदारी की सटीक गणना कर सकते हैं और अंत में एक फाइल तैयार कर उसे वेबसाइट पर अपलोड कर सकते हैं। इस पहल का प्राथमिक उद्देश्य वेतनभोगी कर्मचारियों और छोटे व्यवसायियों को एक ऐसा मंच देना है जहाँ वे अपनी फाइलिंग को सरल और त्रुटिहीन तरीके से अंजाम दे सकें।
आईटीआर-1 फॉर्म की पात्रता और दायरे का विस्तार
आईटीआर-1 फॉर्म विशेष रूप से उन निवासी व्यक्तियों के लिए बनाया गया है जिनकी कुल वार्षिक आय 50 लाख रुपये की सीमा तक है और उनके पास वेतन, पेंशन या गृह संपत्ति जैसे नियमित आय के स्रोत हैं। इस श्रेणी के अंतर्गत बैंक ब्याज और पांच हजार रुपये तक की कृषि आय रखने वाले नागरिकों को भी शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त विभाग ने उन करदाताओं को भी इस फॉर्म के उपयोग की अनुमति दी है जिन्हें विशिष्ट धाराओं के तहत सवा लाख रुपये तक का दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ प्राप्त हुआ है, जिससे मध्यम वर्ग के एक बड़े हिस्से को रिटर्न भरने में आसानी होगी।
पेशेवरों और उद्यमियों के लिए आईटीआर-4 के लाभ
छोटे उद्यमियों और पेशेवरों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आईटीआर-4 फॉर्म को प्रकल्पित कराधान योजनाओं के अनुरूप तैयार किया गया है, जो मुख्य रूप से उन फर्मों और व्यक्तियों पर लागू होता है जिनकी आय 50 लाख रुपये तक है। यह फॉर्म उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है जो अपनी व्यावसायिक आय की गणना एक निश्चित अनुमानित आधार पर करना चाहते हैं। आईटीआर-1 की ही तरह इसमें भी पूंजीगत लाभ से जुड़ी विशेष छूटों का प्रावधान रखा गया है ताकि छोटे व्यवसायी बिना किसी जटिल दस्तावेजी प्रक्रिया के अपना कर दायित्व पूरा कर सकें।
समय पूर्व अनुपालन और अंतिम तिथि का महत्व
आयकर विभाग ने करदाताओं को सलाह दी है कि वे 31 जुलाई की सामान्य समय सीमा का इंतजार किए बिना अपनी फाइलिंग प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी कर लें। जल्दी रिटर्न दाखिल करने से न केवल सिस्टम पर पड़ने वाले दबाव में कमी आती है, बल्कि करदाताओं को भी अपने रिफंड आदि की प्रक्रिया समय पर शुरू होने का लाभ मिलता है। विभाग के इस सक्रिय कदम से यह सुनिश्चित होगा कि देश का कर ढांचा अधिक सुदृढ़ हो और नागरिकों को कर अनुपालन की दिशा में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूती, शेयरों की कीमतों में उछाल
15 May, 2026 10:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को एक बार फिर रौनक लौट आई और प्रमुख सूचकांकों ने तेज रफ्तार के साथ कारोबार की शुरुआत की। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों में हुई भारी लिवाली और अमेरिकी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने घरेलू निवेशकों के उत्साह को दोगुना कर दिया। शुरुआती सत्र के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 451 अंकों से अधिक की छलांग लगाकर 75,850 के स्तर को पार कर गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी ने भी 143 अंकों की बढ़त के साथ 23,832 के स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत कर ली।
आईटी शेयरों की चमक और बाजार का उतार-चढ़ाव
सेंसेक्स की इस तेजी में इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी आईटी कंपनियों ने अग्रणी भूमिका निभाई, जिससे बाजार को ऊपरी स्तरों पर टिके रहने में मदद मिली। इसके साथ ही निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंकों और वाहन निर्माता कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों ने खासी दिलचस्पी दिखाई, जिससे बाजार का सेंटिमेंट सकारात्मक बना रहा। हालांकि इस तेजी के बीच कुछ बड़े नाम जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारतीय स्टेट बैंक के शेयरों में दबाव देखा गया, जिसके कारण ऊपरी स्तरों पर मामूली मुनाफावसूली भी देखने को मिली।
ईंधन की कीमतों में वृद्धि और विपणन कंपनियों पर दबाव
बाजार की इस हलचल के बीच तेल क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी खबर ने निवेशकों का ध्यान खींचा, जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर तीन रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। चार वर्षों से अधिक समय के बाद हुई इस वृद्धि का सीधा असर तेल विपणन कंपनियों के शेयरों पर पड़ा और उनमें दो प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनियों को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था, ताकि लागत आधारित महंगाई को नियंत्रित रखा जा सके।
वैश्विक परिस्थितियों का प्रभाव और निवेशकों की सक्रियता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने और एशियाई बाजारों में मिश्रित रुझान के बावजूद भारतीय बाजार अपनी मजबूती बनाए रखने में सफल रहे। विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही खरीदारी ने बाजार को निचले स्तरों पर अच्छा सहारा प्रदान किया है। पिछले सत्र की भारी तेजी को बरकरार रखते हुए बाजार ने लगातार दूसरे दिन बढ़त का सिलसिला जारी रखा है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति निवेशकों के बढ़ते भरोसे और वैश्विक बाजार के सकारात्मक तालमेल को दर्शाता है।
समुद्री उत्पादों का निर्यात आसान, यूरोप में नई मांग
15 May, 2026 10:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय समुद्री खाद्य उद्योग के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है क्योंकि यूरोपीय संघ ने अपनी संशोधित और नई मसौदा सूची में भारत को आधिकारिक तौर पर स्थान दे दिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद अब भारतीय मछुआरों और निर्यातकों के लिए यूरोपीय देशों में समुद्री उत्पादों का व्यापार बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। लंबे समय से इस बात की आशंका बनी हुई थी कि कड़े नियमों के कारण भारत इस सूची से बाहर हो सकता है, परंतु सरकार के निरंतर कूटनीतिक प्रयासों और मानकों में सुधार के चलते भारत ने वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ और भी मजबूत कर ली है।
कड़े स्वास्थ्य मानकों पर भारत की जीत और निर्यात सुरक्षा
यूरोपीय संघ अपनी खाद्य सुरक्षा नीतियों और पशु मूल के उत्पादों के लिए विश्वभर में सबसे सख्त नियम लागू करने के लिए जाना जाता है। सितंबर 2026 से लागू होने वाले नए प्रावधानों के तहत भारत का इस सूची में होना अनिवार्य था, अन्यथा भारतीय सीफूड के लिए यूरोप के दरवाजे पूरी तरह बंद हो सकते थे। भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सिद्ध कर दिया है कि उसके समुद्री उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनमें ऐसी किसी भी रोगाणुरोधी औषधि या मानव चिकित्सा के लिए प्रतिबंधित दवाओं का उपयोग नहीं किया गया है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं। इसी भरोसे और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर यूरोपीय संघ ने भारतीय उत्पादों को हरी झंडी दिखाई है।
आर्थिक मजबूती के लिए यूरोपीय बाजार की अहम भूमिका
भारतीय समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए यूरोपीय संघ दुनिया के तीसरे सबसे बड़े बाजार के रूप में एक स्तंभ की तरह कार्य करता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों को देखें तो भारत ने यूरोपीय देशों को लगभग 1.593 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों का निर्यात किया है, जो देश के कुल समुद्री निर्यात का तकरीबन 18.94 प्रतिशत हिस्सा है। यदि यह बाजार हाथ से निकल जाता तो मत्स्य पालन क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता था, लेकिन अब इस मार्ग के प्रशस्त होने से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी वैश्विक स्तर पर एक नई गति प्राप्त होगी।
वैश्विक साख में वृद्धि और भविष्य की उज्ज्वल राह
यूरोपीय संघ की इस मंजूरी का प्रभाव केवल यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इससे पूरी दुनिया में भारतीय समुद्री उत्पादों की गुणवत्ता की धाक जमेगी। संशोधित सूची में जगह मिलना इस बात का प्रमाण है कि भारत ने खाद्य उत्पादन में रोगाणुरोधी दवाओं के प्रतिबंध को बेहद प्रभावी ढंग से लागू किया है। इस उपलब्धि के बाद विकसित देशों के अन्य बाजारों में भी भारतीय सीफूड की मांग में भारी उछाल आने की उम्मीद है, जिससे भविष्य में निर्यात के नए कीर्तिमान स्थापित होंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत एक भरोसेमंद खाद्य आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी पहचान और सुदृढ़ करेगा।
DGFT के नए नियम: सोने के व्यापारियों को अब मिलेगी सीमित मंजूरी
15 May, 2026 08:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश के बढ़ते आयात खर्च और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ते बोझ को देखते हुए सरकार ने सोने के शुल्क-मुक्त आयात से जुड़े नियमों को पहले से कहीं अधिक कड़ा कर दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स के लिए पांच नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जिन्हें तुरंत लागू कर दिया गया है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य सोने के व्यापार में पारदर्शिता लाना और अनावश्यक आयात पर लगाम लगाना है।
आयात की सीमा और पात्रता के कड़े मानक
नए प्रावधानों के अंतर्गत अब अग्रिम प्राधिकार योजना के तहत एक लाइसेंस पर अधिकतम 100 किलो सोना ही बिना शुल्क के मंगाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पहली बार आवेदन करने वाले व्यापारियों के कार्यस्थलों का अनिवार्य रूप से निरीक्षण करें। सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी कारोबारी को दूसरा आयात लाइसेंस केवल तभी प्रदान किया जाएगा जब उसने अपने पिछले लाइसेंस से जुड़े निर्यात लक्ष्य का कम से कम आधा हिस्सा सफलतापूर्वक पूरा कर लिया हो।
निगरानी और रिपोर्टिंग की द्वि-साप्ताहिक व्यवस्था
पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए अब लाइसेंस धारकों को अपने हर लेन-देन का पूरा विवरण प्रत्येक 15 दिनों में साझा करना होगा जिसे एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित कराना अनिवार्य है। केवल व्यापारियों पर ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय कार्यालयों पर भी जिम्मेदारी तय की गई है कि वे हर महीने अपने सभी लाइसेंसों और गतिविधियों की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजें। इस त्रिस्तरीय निगरानी तंत्र के माध्यम से सरकार सोने के अवैध इस्तेमाल को रोकने और रिकॉर्ड को दुरुस्त रखने की योजना बना रही है।
उद्योग की आशंकाएं और बढ़ता व्यापार घाटा
सरकार द्वारा आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने के तुरंत बाद लिए गए इस फैसले ने रत्न एवं आभूषण जगत में हलचल पैदा कर दी है। कारोबारियों का मानना है कि करों में वृद्धि और सख्त नियमों के कारण बाजार में तस्करी और ग्रे-मार्केट की गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। यह चिंताजनक स्थिति ऐसे समय में बनी है जब भारत का स्वर्ण आयात पिछले वित्त वर्ष में 24 प्रतिशत की भारी उछाल के साथ लगभग 72 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुका है।
2000 किमी लंबी समुद्री गैस पाइपलाइन, भारत का सबसे बड़ा ऊर्जा प्रोजेक्ट
14 May, 2026 04:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़े संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा गया है, जिससे निपटने के लिए भारत ने अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है।
वैश्विक संघर्ष और कच्चे तेल की आपूर्ति पर संकट
बीते फरवरी माह के अंत में मध्य पूर्व में शुरू हुए युद्ध ने दुनिया भर में तेल और गैस के व्यापार को हिलाकर रख दिया है, विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण मार्ग के बाधित होने से भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं। दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक चौथाई हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है, लेकिन वर्तमान नाकाबंदी और तनावपूर्ण हालातों के कारण आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है। भारत अपनी आवश्यकता का लगभग आधा कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलपीजी इसी रास्ते से मंगवाता है, जिसके कारण देश के भीतर ऊर्जा की कमी और कीमतों में अस्थिरता का खतरा मंडराने लगा है।
भारत का मेगा प्लान और समुद्री पाइपलाइन की तैयारी
इस अभूतपूर्व संकट का स्थायी समाधान खोजने के लिए भारत सरकार ने समुद्र के भीतर एक विशाल गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना तैयार की है, जो भविष्य में किसी भी भू-राजनीतिक तनाव से बेअसर रहेगी। यह मेगा प्रोजेक्ट भारत को सीधे खाड़ी देशों से जोड़ने का काम करेगा, जिससे तेल और गैस के आयात के लिए समुद्री जहाजों और विवादित जलमार्गों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। इस तकनीक के माध्यम से सुरक्षित और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना ही इस योजना का मुख्य लक्ष्य है, ताकि देश की विकास दर और घरेलू जरूरतों पर वैश्विक संघर्षों का असर न्यूनतम किया जा सके।
होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी और बढ़ता दबाव
होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रही नाकाबंदी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में न केवल कच्चे तेल की कमी पैदा की है, बल्कि लॉजिस्टिक और बीमा लागतों में भी भारी वृद्धि कर दी है। चूंकि भारत का 80 प्रतिशत से अधिक एलपीजी आयात इसी संवेदनशील मार्ग पर टिका है, इसलिए वैकल्पिक रास्तों और पाइपलाइन नेटवर्क का विकास करना अब एक रणनीतिक अनिवार्यता बन गया है। इस समय यह मार्ग बाधित होने से ऊर्जा क्षेत्र में जो अस्थिरता आई है, उसने नीति निर्माताओं को परंपरागत आयात मार्गों के स्थान पर अधिक सुरक्षित और आधुनिक बुनियादी ढांचे में निवेश करने के लिए प्रेरित किया है।
आत्मनिर्भरता की ओर कदम और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा
भारत का यह नया कदम न केवल वर्तमान संकट से उबरने का एक रास्ता है, बल्कि यह लंबी अवधि में देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक क्रांतिकारी पहल मानी जा रही है। समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली यह पाइपलाइन तकनीक और इंजीनियरिंग का एक अनूठा उदाहरण होगी, जो चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों के बावजूद ईंधन के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखेगी। इस प्रोजेक्ट के सफल होने से भविष्य में मध्य पूर्व के युद्ध जैसे हालात भारत की ऊर्जा आपूर्ति में बाधा नहीं डाल पाएंगे और देश को अधिक स्थिर और सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था प्राप्त हो सकेगी।
BRICS में सबसे रईस कौन? जानें नंबर-1 का ताज किसके सिर!
14 May, 2026 03:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत की राजधानी में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों का महत्वपूर्ण दो-दिवसीय शिखर सम्मेलन शुरू हो गया है, जिसकी कमान भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर संभाल रहे हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की अध्यक्षता और विजन
इस वर्ष भारत की मेजबानी में आयोजित हो रहे इस सम्मेलन का मुख्य केंद्र लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित है। बैठक के दौरान सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ गहन चर्चा की जा रही है ताकि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत और टिकाऊ ढांचा तैयार किया जा सके। डॉ. जयशंकर की अध्यक्षता में हो रहा यह आयोजन न केवल राजनयिक संबंधों को प्रगाढ़ कर रहा है, बल्कि विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक पटल पर मजबूती से रखने का कार्य भी कर रहा है।
आर्थिक शक्ति और ब्रिक्स का बढ़ता दायरा
मौजूदा समय में ब्रिक्स समूह अपनी सदस्य संख्या विस्तार के बाद विश्व की एक बड़ी आर्थिक शक्ति बनकर उभरा है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ अब मिस्र, ईरान और सऊदी अरब जैसे प्रभावशाली देश भी शामिल हैं। क्रय शक्ति समता के आधार पर देखा जाए तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में इस समूह की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से भी अधिक हो चुकी है, जो विश्व मंच पर इसके बढ़ते प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। हालिया आंकड़ों के अनुसार इस समूह की कुल जीडीपी 31.7 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच गई है, जो वैश्विक उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा है।
प्रति व्यक्ति आय के मामले में सदस्य देशों की स्थिति
समूह के भीतर आर्थिक संपन्नता का विश्लेषण करने पर यह तथ्य सामने आता है कि संयुक्त अरब अमीरात प्रति व्यक्ति आय के मामले में सबसे शीर्ष पायदान पर काबिज है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार यूएई की प्रति व्यक्ति आय 50,000 डॉलर के पार है, जबकि सऊदी अरब और रूस भी इस सूची में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं। हालांकि भारत और इथियोपिया जैसे देश इस सूची में निचले क्रम पर हैं, लेकिन उनकी बढ़ती आर्थिक विकास दर और विशाल बाजार उन्हें इस समूह का अनिवार्य हिस्सा बनाते हैं।
भविष्य की रणनीतियां और नए साझेदार देशों का आगमन
ब्रिक्स समूह अपनी पहुंच को और व्यापक बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, जिसके तहत बेलारूस, मलेशिया और वियतनाम जैसे 10 नए पार्टनर देशों को भी इस गठबंधन से जोड़ा गया है। इन नए सहयोगियों के आने से न केवल इस ब्लॉक की भौगोलिक विविधता बढ़ी है, बल्कि व्यापार और तकनीकी साझाकरण के नए रास्ते भी खुले हैं। आगामी सत्रों में इन सहयोगी देशों के साथ मिलकर वैश्विक व्यापार नीतियों और साझा सुरक्षा हितों पर ठोस रणनीतियां बनाने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की नींव और मजबूत होगी।
Gold Silver Today: सोने की कीमतों में उछाल, चांदी में मामूली गिरावट
14 May, 2026 01:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: सराफा बाजार में आज सोने और चांदी की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है, जहां सोने की चमक बढ़ी है वहीं चांदी के भाव में गिरावट दर्ज की गई है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने की बढ़त
बाजार खुलने के साथ ही एमसीएक्स पर सोने की कीमतों में तेजी का दौर शुरू हो गया और सुबह लगभग साढ़े दस बजे के करीब 10 ग्राम सोने का भाव 1,62,758 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। आज के कारोबार के दौरान सोने ने निचले स्तर पर 1,61,027 रुपये और ऊपरी स्तर पर 1,63,055 रुपये प्रति 10 ग्राम की सीमाओं को छुआ है, जिससे निवेशकों के बीच पीली धातु की मांग स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
चांदी की कीमतों में दर्ज हुई गिरावट
सोने के विपरीत चांदी के बाजार में आज नरमी का माहौल बना हुआ है और सुबह सवा दस बजे के आसपास प्रति किलो चांदी की कीमत में 1738 रुपये तक की कमी देखी गई। वर्तमान में चांदी का व्यापार 2,98,500 रुपये प्रति किलो के दायरे में हो रहा है, हालांकि उतार-चढ़ाव के बीच चांदी ने दिन का अधिकतम स्तर 2,99,000 रुपये भी छुआ है लेकिन शुरुआती बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम रही।
अलग-अलग शहरों में भाव का अंतर
देश के प्रमुख शहरों में स्थानीय मांग और करों के कारण कीमतों में विभिन्नता नजर आ रही है। पटना और रायपुर जैसे शहरों में सोने की कीमतें तुलनात्मक रूप से कम हैं जहाँ भाव 1,62,970 रुपये के आसपास बना हुआ है, जबकि मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों भोपाल और इंदौर में सोने के दाम सबसे ऊंचे स्तर 1,63,210 रुपये पर पहुंच गए हैं।
सस्ते और महंगे बाजार की स्थिति
चांदी की खरीदारी के लिहाज से आज रायपुर का बाजार सबसे किफायती साबित हो रहा है क्योंकि वहां कीमतें 2,97,420 रुपये प्रति किलो के स्तर पर हैं। इसके उलट यदि भोपाल और इंदौर की बात करें तो वहां चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 2,97,850 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं, जो देश के अन्य प्रमुख केंद्रों के मुकाबले अधिक है।
Sugar Stocks में गिरावट, निर्यात रोक का असर दिखा
14 May, 2026 12:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा घरेलू बाजार में मिठास बनाए रखने और बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के उद्देश्य से चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी लागू कर दी गई है। वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक अधिसूचना जारी कर चीनी की निर्यात नीति को 'प्रतिबंधित' श्रेणी से हटाकर पूरी तरह से 'निषिद्ध' श्रेणी में डाल दिया है, जो आगामी 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। सरकार के इस कड़े कदम का सीधा असर शेयर बाजार पर देखने को मिला, जहाँ खबर सार्वजनिक होते ही चीनी उत्पादक क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली का दौर शुरू हो गया।
चीनी कंपनियों के शेयरों में मची खलबली
सरकार के इस फैसले से चीनी मिलों के निवेशकों में घबराहट फैल गई, जिसके कारण प्रमुख चीनी स्टॉक्स औंधे मुंह गिर पड़े। बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयरों में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि धामपुर शुगर मिल्स के शेयर सबसे अधिक चार प्रतिशत से ज्यादा टूटकर निचले स्तर पर आ गए। इसी प्रकार त्रिवेणी इंजीनियरिंग, श्री रेणुका शुगर्स, डालमिया भारत शुगर और ईआईडी पैरी जैसी स्थापित कंपनियों के शेयर भी बिकवाली के दबाव से अछूते नहीं रहे और लाल निशान पर कारोबार करते देखे गए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात बंद होने से कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
निर्यात पाबंदी के दायरे और विशेष छूट की स्थिति
सरकार ने हालांकि इस प्रतिबंध में कुछ विशेष परिस्थितियों और देशों को रियायत प्रदान की है, जिसके तहत यूरोपीय संघ और अमेरिका को टैरिफ रेट कोटा योजना के अंतर्गत होने वाला चीनी का निर्यात निर्बाध रूप से जारी रहेगा। इसके साथ ही उन खेपों को भी राहत दी गई है जिनकी लोडिंग प्रक्रिया अधिसूचना जारी होने से पहले ही प्रारंभ हो चुकी थी या जिनके शिपिंग बिल पहले ही दाखिल किए जा चुके थे। जिन जहाजों ने भारतीय बंदरगाहों पर एंकर कर लिया था या जो खेप सीमा शुल्क अधिकारियों को सौंपी जा चुकी थीं, उन्हें तकनीकी जांच के उपरांत गंतव्य तक जाने की अनुमति दी जाएगी।
खाद्य सुरक्षा और वैश्विक अनुरोध पर लचीला रुख
निर्यात पर लंबी अवधि की इस रोक के बावजूद सरकार ने अन्य देशों के प्रति मानवीय और कूटनीतिक दृष्टिकोण खुला रखा है। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई देश अपनी खाद्य सुरक्षा की जरूरतों के आधार पर औपचारिक रूप से भारत सरकार से अनुरोध करता है, तो विशेष अनुमति के तहत चीनी निर्यात पर विचार किया जा सकता है। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य देश के भीतर चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और आम उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को स्थिर रखना है, ताकि वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं का प्रभाव घरेलू अर्थव्यवस्था पर न पड़े।
LPG और तेल पर भारत-UAE की बातचीत से उम्मीदें बढ़ीं
14 May, 2026 10:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी 15 मई को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा पर रहेंगे। मध्य पूर्व में व्याप्त मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक हितों के दृष्टिकोण से मील का पत्थर साबित हो सकता है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के मध्य होने वाली उच्च स्तरीय वार्ता में एलपीजी आपूर्ति और सामरिक तेल भंडार को लेकर दो निर्णायक समझौतों पर मुहर लगने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति पर विशेष विमर्श
प्रधानमंत्री की इस संक्षिप्त लेकिन प्रभावी यात्रा के दौरान ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर भी विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। भारत इस संवेदनशील क्षेत्र में स्थिरता और शांति बनाए रखने का पुरजोर समर्थन करता है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी प्रकार के सैन्य संघर्ष का सीधा प्रभाव कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों पर पड़ेगा। तेल की कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकती है, इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी इस मुलाकात के दौरान कूटनीतिक समाधान और आपसी सहयोग के माध्यम से आर्थिक हितों की रक्षा पर बल देंगे।
सामरिक तेल भंडार और ओपेक के नए समीकरण
ईरान और अमेरिका के मध्य संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों पर बढ़ते खतरे ने भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के प्रति अधिक सतर्क कर दिया है। चूंकि भारत अपनी पेट्रोलियम आवश्यकताओं के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है, इसलिए यूएई के साथ होने वाले नए समझौते भारत के आपातकालीन तेल भंडार को और अधिक सुदृढ़ बनाएंगे। यह दौरा इस लिहाज से भी ऐतिहासिक है क्योंकि हाल ही में यूएई द्वारा 'ओपेक' संगठन से अलग होने की घोषणा के बाद भारत के पास सीधे तौर पर अधिक अनुकूल और किफायती व्यापारिक शर्तें तय करने का एक बड़ा अवसर पैदा हो गया है।
व्यापक द्विपक्षीय एजेंडा और आर्थिक साझेदारी
भारत के तीसरे सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार के रूप में यूएई के साथ संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक ठोस रूपरेखा तैयार की गई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस संवाद में न केवल ऊर्जा, बल्कि रक्षा सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे भविष्योन्मुखी विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। भारत का लक्ष्य अपनी वैश्विक व्यापारिक उपस्थिति को मजबूत करना है, जिसमें खाड़ी देशों के साथ-साथ यूरोपीय भागीदारों के साथ भी समन्वय बिठाने की रणनीति शामिल है ताकि विभिन्न क्षेत्रों में निवेश और तकनीक के प्रवाह को सुनिश्चित किया जा सके।
चार देशों की महत्वपूर्ण यूरोपीय यात्रा का आगाज
यूएई में अपना संक्षिप्त प्रवास पूर्ण करने के पश्चात प्रधानमंत्री मोदी पांच दिवसीय यूरोप दौरे के लिए प्रस्थान करेंगे, जहाँ वे नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जैसे प्रमुख देशों का दौरा करेंगे। नीदरलैंड में किंग विलेम-अलेक्जेंडर और पीएम रोब जेटन के साथ निवेश पर चर्चा के बाद प्रधानमंत्री स्वीडन जाएंगे जहाँ रक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशेष फोकस रहेगा। इसके बाद वे 43 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में नॉर्वे की धरती पर कदम रखेंगे और 'भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन' में भाग लेंगे। इस कूटनीतिक यात्रा का समापन इटली में जॉर्जिया मेलोनी के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता से होगा, जो भारत और यूरोप के संबंधों को एक नई दिशा प्रदान करेगी।
निफ्टी 23500 के करीब, बाजार में मेटल-फार्मा शेयरों की बढ़त
14 May, 2026 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कई सत्रों से जारी गिरावट और बिकवाली के दौर के बाद गुरुवार को कारोबार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई। सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान तब लौटी जब शुरुआती मिनटों में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों ने अच्छी बढ़त के साथ हरे निशान पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सुबह सवा नौ बजे के आसपास बाजार में जबरदस्त उत्साह देखा गया और सेंसेक्स करीब साढ़े चार सौ अंकों की छलांग लगाकर 75,057 के पार निकल गया, जबकि निफ्टी ने भी 23,550 के मनोवैज्ञानिक स्तर को छूने का प्रयास किया।
बाजार की चाल और उतार-चढ़ाव का दौर
कारोबार की शुरुआत जितनी धमाकेदार रही, समय बीतने के साथ बाजार की चाल में उतनी ही अस्थिरता भी देखने को मिली। शुरुआती तेजी के बाद मुनाफावसूली का दबाव बढ़ा, जिसके कारण सूचकांक अपनी बढ़त को पूरी तरह बरकरार नहीं रख पाए और बढ़त का ग्राफ थोड़ा नीचे आया। सुबह दस बजे के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली बढ़त ही रह गई, जो इस बात का संकेत है कि निवेशक अभी भी ऊंचे स्तरों पर सावधानी बरत रहे हैं और बाजार में खरीदारों व बिकवालों के बीच कड़ी टक्कर जारी है।
दिग्गज शेयरों का प्रदर्शन और क्षेत्रीय स्थिति
सेंसेक्स की शीर्ष तीस कंपनियों में से अधिकांश शेयर मजबूती के साथ कारोबार कर रहे हैं, जिनमें विशेष रूप से अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और ट्रेंट जैसे शेयरों ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया। इसके विपरीत, तकनीकी क्षेत्र यानी आईटी शेयरों में सुस्ती का माहौल बना हुआ है जहाँ टीसीएस और इंफोसिस जैसी दिग्गज कंपनियाँ लाल निशान में कारोबार करती दिखीं। इसी बीच मुद्रा बाजार में कमजोरी दर्ज की गई और रुपया डॉलर के मुकाबले थोड़ा फिसलकर अपने नए स्तरों पर पहुँच गया, जिससे निर्यात आधारित कंपनियों पर असर दिखने की संभावना है।
वैश्विक कूटनीति और निवेशकों का भरोसा
बाजार में आई इस हरियाली के पीछे अमेरिका और चीन के बीच होने वाली उच्च स्तरीय शिखर वार्ता को एक बड़ा कारण माना जा रहा है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार और तकनीक को लेकर होने वाली चर्चा से वैश्विक बाजारों को स्थिरता मिलने की उम्मीद जगी है। साथ ही, घरेलू संस्थागत निवेशकों द्वारा की जा रही लगातार खरीदारी ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के प्रभाव को कम करने में मदद की है। विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों और अमेरिकी बाजारों में तकनीकी शेयरों में आई तेजी ने भारतीय निवेशकों के मनोबल को बढ़ाने का काम किया है।
तकनीकी दृष्टिकोण और भविष्य की राह
बाजार के जानकारों का कहना है कि वर्तमान तेजी वैश्विक इक्विटी में सुधार और घरेलू स्तर पर मजबूत बुनियादी ढांचों के कारण बनी हुई है। वॉल स्ट्रीट से मिल रहे सकारात्मक रुझानों ने स्थानीय बाजार को सहारा दिया है, भले ही मुद्रास्फीति के कुछ आंकड़ों ने चिंता पैदा की हो। आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार एक सीमित दायरे में रहकर अपनी मजबूती साबित करने की कोशिश कर रहा है जिससे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बन रहे हैं।
मुंबई में फिर बढ़ी CNG कीमत, अब ₹84 प्रति किलो पहुंची गैस
14 May, 2026 08:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में सफर करने वाले आम लोगों के लिए आज की सुबह महंगाई का नया झटका लेकर आई है। महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने सीएनजी की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इस वृद्धि के बाद मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई जैसे प्रमुख इलाकों में सीएनजी के दाम 82 रुपये से बढ़कर अब 84 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए हैं। ईंधन की कीमतों में अचानक हुए इस इजाफे ने न केवल निजी वाहन मालिकों बल्कि सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहने वाली एक बड़ी आबादी की चिंता बढ़ा दी है।
किराया बढ़ाने की तैयारी में जुटे ऑटो-टैक्सी यूनियन
सीएनजी के दाम बढ़ते ही मुंबई की लाइफलाइन कहे जाने वाले ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने भी तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। परिवहन यूनियनों का तर्क है कि ईंधन की कीमतों के साथ-साथ वाहनों के स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस लागत में भी भारी वृद्धि हुई है, जिससे पुराने किराए पर गाड़ी चलाना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है। ऑटो चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि न्यूनतम किराए में कम से कम 1 रुपये की वृद्धि की जाए। यूनियनों का कहना है कि यदि सरकार जल्द ही किराए में संशोधन नहीं करती है, तो उनके लिए अपनी आजीविका चलाना मुश्किल हो जाएगा।
महंगाई की दोहरी मार से यात्री बेहाल
दूसरी ओर, इस संभावित किराया वृद्धि की खबर ने रोजाना यात्रा करने वाले नौकरीपेशा और मध्यम वर्गीय परिवारों के माथे पर बल ला दिए हैं। यात्रियों का कहना है कि पहले से ही खाद्य वस्तुओं और बिजली के दामों ने घर का बजट बिगाड़ रखा है, और अब परिवहन के महंगे होने से उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। लोगों को डर है कि ऑटो और टैक्सी के न्यूनतम किराए में बढ़ोतरी का असर उनकी मासिक बचत पर पड़ेगा। विशेषकर उन इलाकों में जहां बस कनेक्टिविटी कम है और लोग पूरी तरह ऑटो पर निर्भर हैं, वहां यात्रियों को ज्यादा आर्थिक बोझ झेलना पड़ सकता है।
प्रशासन के फैसले पर टिकी सबकी नजरें
हालांकि, सीएनजी की कीमतों में बदलाव के बावजूद परिवहन किराए में कोई भी आधिकारिक बढ़ोतरी तब तक नहीं होगी, जब तक परिवहन विभाग और संबंधित प्राधिकरण इसे अपनी मंजूरी नहीं दे देते। प्रशासन फिलहाल स्थिति का आकलन कर रहा है और यूनियनों की मांगों पर विचार करने की बात कह रहा है। लेकिन जानकारों का मानना है कि सीएनजी की बढ़ी हुई दरों को देखते हुए आने वाले दिनों में किराए में मामूली वृद्धि को टालना मुश्किल होगा। फिलहाल, मुंबई और आसपास के शहरों में बढ़ती परिवहन लागत ने महंगाई के मुद्दे पर एक नई बहस छेड़ दी है।
HPCL के शानदार Q4, निवेशकों के लिए 5 साल का सबसे बड़ा डिविडेंड
13 May, 2026 03:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल दिग्गज हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) के निवेशकों के लिए आज का दिन खुशियां लेकर आया है। कंपनी द्वारा मार्च 2026 तिमाही के शानदार वित्तीय नतीजे पेश करने और पिछले पांच वर्षों के सबसे बड़े लाभांश की घोषणा के बाद इसके शेयरों में जबरदस्त लिवाली देखी गई। बाजार खुलते ही कंपनी के शेयरों ने रफ्तार पकड़ी और एक समय यह 5 प्रतिशत से भी ज्यादा की छलांग लगाने में सफल रहा। हालांकि ऊपरी स्तरों पर कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता चुना जिससे कीमतों में हल्की गिरावट जरूर आई लेकिन मजबूत बुनियादी आधार के कारण स्टॉक अब भी ठोस बढ़त के साथ हरे निशान में बना हुआ है।
तिमाही मुनाफे में जोरदार उछाल और बेहतर मार्जिन
मार्च 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही के दौरान हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अपने शुद्ध मुनाफे में तिमाही आधार पर 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है जो अब बढ़कर 4,901 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। राजस्व के मोर्चे पर कंपनी ने 1.15 लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया है जो पिछली तिमाही के लगभग बराबर ही रहा लेकिन परिचालन स्तर पर कंपनी का प्रदर्शन बेहद सराहनीय रहा है। परिचालन लाभ में 28 प्रतिशत की शानदार बढ़त देखने को मिली है और मार्जिन में भी 170 बेसिस प्वाइंट्स का सुधार हुआ है जो यह दर्शाता है कि कंपनी अपनी लागत और कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सफल रही है।
पांच वर्षों का सबसे बड़ा डिविडेंड और सरकार को बड़ा लाभ
शानदार कारोबारी नतीजों के साथ-साथ कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए 19 रुपये प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की घोषणा कर उन्हें बड़ा तोहफा दिया है। यह पिछले पांच वर्षों में घोषित किया गया सबसे तगड़ा लाभांश है जिसने निवेशकों के उत्साह को और बढ़ा दिया है। इस घोषणा का सबसे बड़ा फायदा भारत सरकार को मिलेगा जिसकी कंपनी में करीब 55 प्रतिशत की हिस्सेदारी है और इस नाते सरकारी खजाने में लाभांश के रूप में 2,219 करोड़ रुपये की बड़ी राशि जमा होगी। इससे पहले के वर्षों में कंपनी ने अलग-अलग समय पर लाभांश दिए थे लेकिन वर्तमान घोषणा ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार और शेयरों की भविष्य की चाल
वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी के ग्रास रिफाइनिंग मार्जिन में भी बड़ी बढ़त देखी गई है जो प्रति बैरल 8.79 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा काफी कम था। कच्चे तेल को फिनिश्ड उत्पादों में बदलने से होने वाले इस मुनाफे ने कंपनी की बैलेंस शीट को काफी मजबूती प्रदान की है। हालांकि पिछले एक साल के दौरान शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है जहां जनवरी 2026 में शेयर अपने शिखर पर थे और मार्च आते-आते रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गए थे लेकिन वर्तमान रिकवरी ने निवेशकों को एक बार फिर लंबी अवधि के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं।
MSCI इंडेक्स रिविजन: निवेशकों को तैयार रहना होगा नए वेटेज के साथ
13 May, 2026 01:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। वैश्विक स्तर पर शेयर बाजारों के लिए बेंचमार्क तैयार करने वाली संस्था एमएससीआई (मॉर्गन स्टैनले कैपिटल इंटरनेशनल) ने अपने आगामी ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में बड़े बदलावों की घोषणा की है। इस पुनर्गठन के तहत भारतीय शेयर बाजार की कई दिग्गज कंपनियों के स्थान में फेरबदल किया गया है, जिसका सीधा असर विदेशी पोर्टफोलियो निवेश पर पड़ेगा। नए बदलावों के अनुसार फेडरल बैंक, एमसीएक्स, नालको और इंडियन बैंक जैसे महत्वपूर्ण शेयरों को ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में प्रवेश मिला है, जबकि हुंडई मोटर और जुबिलैंट फूडवर्क्स सहित चार अन्य कंपनियों को इस प्रतिष्ठित सूची से बाहर कर दिया गया है। भारत का सूचकांक में कुल भार 12.3 प्रतिशत पर स्थिर रहेगा और ये सभी संशोधन 29 मई 2026 से प्रभावी माने जाएंगे।
नए प्रवेश और भारी विदेशी निवेश की संभावना
इंडेक्स में शामिल किए गए चार नए शेयरों के कारण भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। वित्तीय विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, फेडरल बैंक में लगभग 49.1 करोड़ डॉलर का सबसे बड़ा निवेश आ सकता है, जबकि एमसीएक्स और नालको में भी क्रमशः 37.3 करोड़ और 30.8 करोड़ डॉलर तक के प्रवाह की संभावना है। दूसरी ओर, इंडेक्स से बाहर किए गए हुंडई मोटर इंडिया, जुबिलैंट फूडवर्क्स, कल्याण ज्वैलर्स और आरवीएनएल जैसी कंपनियों से कुल मिलाकर भारी मात्रा में पूंजी निकासी हो सकती है, जिससे इन शेयरों पर अल्पावधि में दबाव देखने को मिल सकता है।
प्रमुख शेयरों के वेटेज में संशोधन और पूंजी का प्रवाह
इंडेक्स में केवल एंट्री और एग्जिट ही नहीं, बल्कि मौजूदा कंपनियों के वेटेज यानी उनके भार में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अदाणी पावर, बीपीसीएल, नायका और ट्रेंट जैसी कंपनियों के वेटेज में बढ़ोतरी की गई है, जिससे इन शेयरों में अतिरिक्त निवेश आने का रास्ता साफ हुआ है। इसके विपरीत, टीसीएस, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस और एचयूएल सहित करीब 75 बड़ी कंपनियों के वेटेज में कटौती का निर्णय लिया गया है। इस कटौती के परिणामस्वरूप इन दिग्गज कंपनियों से करोड़ों डॉलर की निकासी होने का अनुमान है, जिसमें सबसे अधिक प्रभाव हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयरों पर पड़ने की आशंका है।
स्मॉलकैप इंडेक्स का पुनर्गठन और नए स्टार्टअप्स की एंट्री
एमएससीआई के स्मॉलकैप इंडेक्स में भी व्यापक फेरबदल देखा गया है, जिसमें एडटेक दिग्गज फिजिक्सवाला और फिनटेक कंपनी पाइन लैब्स जैसे नए जमाने के स्टार्टअप्स को जगह दी गई है। स्टैंडर्ड इंडेक्स से बाहर हुए जुबिलैंट फूडवर्क्स और कल्याण ज्वैलर्स को अब स्मॉलकैप श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे इन स्टॉक्स में फिर से निवेश आने की उम्मीद है। हालांकि, इस पुनर्गठन के दौरान जीएचसीएल और वीआईपी इंडस्ट्रीज समेत 18 अन्य शेयरों को सूची से हटाया गया है, जिसके चलते स्मॉलकैप इंडेक्स में कुल कंपनियों की संख्या 474 से घटकर 459 रह गई है।
भारतीय बाजार की स्थिति और तकनीकी सुधार
इन वैश्विक बदलावों के बीच भारतीय शेयर बाजार की स्थिति तकनीकी रूप से स्थिर बनी हुई है क्योंकि इंडेक्स में कुल कंपनियों की संख्या 165 पर बरकरार है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इन एडजस्टमेंट्स से बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और विदेशी संस्थागत निवेशक नए शामिल हुए स्टॉक्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाएंगे। हालांकि, जिन बड़ी कंपनियों के वेटेज कम हुए हैं, उनके कारण बाजार में अस्थिरता का एक छोटा दौर देखा जा सकता है, लेकिन कुल मिलाकर भारत का विदेशी निवेश आकर्षण वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूती बनाए रखने में सफल रहा है।
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