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Wipro Stock Update: जून तिमाही के रिजल्ट के बाद बढ़ी हलचल, खरीदें, बेचें या होल्ड करें?
17 Jul, 2026 11:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी विप्रो के शेयरों में आज यानी 17 जुलाई को भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिल रहा है। कंपनी द्वारा 16 जुलाई को बाजार बंद होने के बाद घोषित किए गए चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (जून तिमाही) के कमजोर वित्तीय नतीजों का सीधा असर आज इसके शेयर की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। पिछले छह महीनों के दौरान विप्रो का शेयर लगभग 29 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है, जबकि इस अवधि में निफ्टी आईटी इंडेक्स में भी करीब 25 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी का शुद्ध लाभ बाजार के अनुमानों से काफी कम रहने के कारण अब निवेशकों के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि इस आईटी शेयर में उन्हें बने रहना चाहिए या बाहर निकल जाना चाहिए।
बिकवाली की सलाह देने वाले विश्लेषकों की संख्या बढ़ी
विप्रो के तिमाही प्रदर्शन के बाद शेयर बाजार के विशेषज्ञों और विश्लेषकों के बीच इसे लेकर चिंता बढ़ गई है। वर्तमान में इस शेयर पर नजर रखने वाले 45 प्रमुख विश्लेषकों में से 19 ने निवेशकों को इस शेयर को तुरंत बेचने यानी 'सेल' की रेटिंग दी है। जून 2025 के बाद से यह पहला मौका है जब विप्रो के शेयरों को बेचने की सलाह देने वाले विशेषज्ञों की संख्या अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। हालांकि, मौजूदा बाजार भाव पर कंपनी का डिविडेंड यील्ड लगभग 5 प्रतिशत के आकर्षक स्तर पर बना हुआ है, जिसके कारण कुछ बड़े ब्रोकरेज घराने और निवेशक अभी भी इस शेयर को लेकर अपनी बंटी हुई राय रख रहे हैं।
विदेशी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने जताया भरोसा
कमजोर नतीजों के बावजूद विदेशी ब्रोकरेज हाउस नोमुरा ने विप्रो के प्रति अपना सकारात्मक रुख बरकरार रखा है। नोमुरा ने इस शेयर पर अपनी 'खरीदें' (बाय) की रेटिंग को यथावत रखते हुए इसके लिए 190 रुपये का भविष्य का लक्ष्य तय किया है। ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि भले ही जून तिमाही के वित्तीय आंकड़े और अगली तिमाही के लिए कंपनी का राजस्व अनुमान बाजार की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा है, लेकिन वर्तमान में मिल रहा 5 प्रतिशत का मजबूत डिविडेंड यील्ड इस शेयर को निचले स्तरों पर एक मजबूत सहारा प्रदान करेगा जिससे इसमें और बड़ी गिरावट की आशंका सीमित हो जाती है।
जेफरीज ने जैविक विकास में ठहराव की जताई आशंका
इसके विपरीत, वैश्विक ब्रोकरेज दिग्गज जेफरीज ने विप्रो के प्रदर्शन पर काफी निराशा जताई है और शेयर को 'अंडरपरफॉर्म' की रेटिंग देते हुए इसका टारगेट प्राइस घटाकर 150 रुपये कर दिया है। जेफरीज के विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी की पहली तिमाही के नतीजे और दूसरी तिमाही का रिवेन्यू गाइडेंस बेहद निराशाजनक है। ब्रोकरेज फर्म ने रेखांकित किया कि कंपनी पिछले तीन सालों से अपनी ऑर्गेनिक यानी मुख्य व्यावसायिक ग्रोथ को बढ़ाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है और आने वाले वित्त वर्ष 2027 में भी इस स्थिति में किसी बड़े और सकारात्मक बदलाव की उम्मीद बेहद कम नजर आ रही है।
मोतीलाल ओसवाल का न्यूट्रल रुख और मार्जिन पर दबाव
घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने भी विप्रो के शेयर पर अपना रुख तटस्थ यानी 'न्यूट्रल' रखा है और इसके लिए 160 रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया है। पहली तिमाही में कंपनी के परिचालन मार्जिन में आई गिरावट के बाद, जो कि पिछले चार वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, ब्रोकरेज हाउस ने वित्त वर्ष 2027 के लिए कंपनी के अर्निंग प्रति शेयर (ईपीएस) के अनुमान में 3.5 प्रतिशत की कटौती कर दी है। उतार-चढ़ाव के इस दौर में, जहां 16 जुलाई को विप्रो का शेयर मामूली बढ़त के साथ 177.7 रुपये पर बंद हुआ था, वहीं आज यानी 17 जुलाई को दोपहर के कारोबार के दौरान यह 1.51 प्रतिशत की गिरावट के साथ 174.81 रुपये के स्तर पर कारोबार करता देखा गया।
बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स-निफ्टी की तेजी से निवेशकों ने कमाए ₹42,642 करोड़
17 Jul, 2026 09:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में आज जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है और दोनों प्रमुख सूचकांक शानदार बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। शुक्रवार सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में भारी उत्साह है। शुरुआती कारोबार में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएससी) का सेंसेक्स 532 अंकों की छलांग लगाकर रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ता दिखा। बाजार में आई इस तेजी के चलते बीएससी पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में भी तगड़ा उछाल आया है और चंद पलों में ही निवेशकों की संपत्ति में 42,642 करोड़ रुपये से ज्यादा का इजाफा हो गया है। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की लिवाली के चलते बाजार को यह मजबूत सहारा मिला है।
शुरुआती कारोबार में सूचकांकों की तेज रफ्तार
दलाल स्ट्रीट पर आज सुबह से ही बुल्स का दबदबा साफ नजर आ रहा है। सेंसेक्स ने हरे निशान के साथ 77,370.77 के स्तर पर अपनी शुरुआत की और देखते ही देखते यह पिछले बंद स्तर के मुकाबले 532 अंक चढ़कर 77,718.66 के उच्च स्तर पर पहुंच गया। सेंसेक्स की तरह ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी ने भी मजबूती के साथ 24,127.60 पर ओपनिंग की। इसके बाद चौतरफा खरीदारी के दम पर निफ्टी 147 अंकों से अधिक की छलांग लगाकर 24,220.25 के उच्चतम स्तर को छूने में कामयाब रहा। बाजार के जानकारों का मानना है कि प्रमुख हैवीवेट शेयरों में आई खरीदारी से इंडेक्स को ऊपर जाने में मदद मिली है।
निवेशकों की पूंजी में हुआ बंपर इजाफा
बाजार में आई इस हरियाली से सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार मूल्य में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बीते गुरुवार को जब शेयर बाजार बंद हुआ था, तब बीएससी पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4,80,10,512.78 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। आज यानी शुक्रवार को बाजार खुलते ही इसमें तेजी आई और यह बढ़कर 4,80,53,154.39 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस प्रकार शुरुआती कुछ ही मिनटों के भीतर बाजार पूंजीकरण में 42,641.61 करोड़ रुपये की बड़ी वृद्धि देखी गई है, जिसने पिछले सत्र की सुस्ती को पूरी तरह से पीछे छोड़ दिया है।
पिछले कारोबारी सत्र का लेखा-जोखा
अगर इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार के कारोबार की बात करें, तो उस दिन शेयर बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला था और सूचकांक लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए थे। सेंसेक्स महज 1.44 अंकों की मामूली बढ़त लेकर 77,186.87 के स्तर पर सिमट गया था, जबकि निफ्टी में हल्की गिरावट देखी गई थी और वह 5.75 अंक टूटकर 24,072.75 पर बंद हुआ था। पिछले सत्र में मुख्य रूप से आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में अच्छी हलचल रही थी, जिसके चलते बाजार भारी गिरावट से बचने में सफल रहा था और आज की तेजी के लिए जमीन तैयार हुई।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में सुधार
शेयर बाजार में आई तेजी के बीच विदेशी मुद्रा बाजार से भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर आ रही है। आज शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 14 पैसे की मजबूती के साथ 96.28 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी दिन अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 17 पैसे कमजोर होकर 96.42 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। जानकारों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती से विदेशी फंडों की निकासी बढ़ी थी, जिससे रुपये पर दबाव बना हुआ था, लेकिन आज बाजार के सकारात्मक रुख से स्थानीय मुद्रा को दोबारा संभलने का मौका मिला है।
Gold Price Today: लगातार गिर रहे सोने के दाम, आज कितना सस्ता हुआ?
17 Jul, 2026 09:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय सर्राफा बाजार में आज सोने की कीमतों में एक बार फिर गिरावट का रुख देखने को मिल रहा है। देश के अधिकांश प्रमुख शहरों में 22 कैरेट और 24 कैरेट दोनों ही प्रकार के सोने के दाम नीचे लुढ़क गए हैं। आज सुबह देश की राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत गिरकर 1,43,430 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गई है। वहीं, व्यापारिक राजधानी मुंबई और कोलकाता में इसका भाव 1,43,280 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जबकि चेन्नई में यह 1,43,450 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हाजिर सोने की कीमत 4,030.84 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई है, जिसके चलते घरेलू बाजारों में यह नरमी देखी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, स्थानीय मांग इस समय बेहद संतुलित बनी हुई है, लेकिन वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों का असर घरेलू कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है।
महानगरों और प्रमुख शहरों में सोने का हाल
देश के विभिन्न शहरों में सोने की कीमतों में आंशिक अंतर देखा जा रहा है। दिल्ली और जयपुर जैसे शहरों में जहां 24 कैरेट सोना 1,43,430 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,31,490 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेंड कर रहा है, वहीं मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में 24 कैरेट का दाम 1,43,280 रुपये तथा 22 कैरेट का भाव 1,31,340 रुपये प्रति 10 ग्राम बना हुआ है। इसके अलावा अहमदाबाद और भोपाल में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 1,43,330 रुपये और 22 कैरेट की कीमत 1,31,390 रुपये प्रति 10 ग्राम रिकॉर्ड की गई है। लखनऊ और चंडीगढ़ के बाजारों में भी दिल्ली की तर्ज पर ही सोने के दाम ऊंचे स्तरों पर बने हुए हैं, जिससे लिवाल अब बाजार की अगली चाल पर नजरें टिकाए हुए हैं।
सोना आयात में दर्ज की गई भारी बढ़ोतरी
एक तरफ जहां कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ देश में सोने की मांग और आयात को लेकर सरकारी आंकड़े चौंकाने वाले आए हैं। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष की अप्रैल से जून 2026 तिमाही के दौरान भारत में सोने का आयात बढ़कर 11.01 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की इसी समान तिमाही के मुकाबले काफी अधिक है, क्योंकि बीते साल की अप्रैल-जून अवधि में देश के भीतर कुल 7.49 अरब डॉलर मूल्य के सोने का आयात किया गया था। आयात में आई इस भारी तेजी से यह साफ होता है कि वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय बाजार में इस कीमती धातु की बुनियादी मांग बेहद मजबूत बनी हुई है।
चांदी के दामों में भी लगातार नरमी जारी
सोने के साथ-साथ दूसरी सबसे कीमती धातु चांदी की चमक भी आज फीकी पड़ती दिखाई दे रही है और इसमें गिरावट का दौर लगातार बरकरार है। आज सुबह के कारोबार में घरेलू बाजार में चांदी की कीमत 2,34,900 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर दर्ज की गई है। सराफा विश्लेषकों का कहना है कि बड़े आभूषण निर्माताओं और औद्योगिक इकाइयों की तरफ से खरीदारी में दिखाई गई सुस्ती के कारण घरेलू बाजार में चांदी के भाव दबाव में हैं। इसके अतिरिक्त, बाजार में निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही मुनाफावसूली यानी प्रॉफिट-बुकिंग भी चांदी को नीचे धकेलने का एक बड़ा कारण साबित हो रही है, जिससे फिलहाल इसमें तेजी की गुंजाइश कम दिख रही है।
वैश्विक और घरेलू कारकों का संयुक्त असर
सर्राफा बाजार के जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों ही तरह के कारक इस समय कीमती धातुओं की चाल तय कर रहे हैं। वैश्विक मंच पर इस समय हाजिर चांदी यानी स्पॉट सिल्वर की कीमत 56.79 डॉलर प्रति औंस पर चल रही है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी कमजोर स्थिति को दर्शाती है। भारत में सोने और चांदी की दरें न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति पर निर्भर करती हैं, बल्कि देश के भीतर स्थानीय करों, चुंगी और त्योहारों व शादियों के सीजन में होने वाली मांग जैसे आंतरिक कारकों से भी गहराई से प्रभावित होती हैं।
ऑयल मार्केट में चीन की रणनीति से हलचल, भारत समेत दुनिया पर पड़ेगा बड़ा प्रभाव?
16 Jul, 2026 05:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध के कारण जब पूरी दुनिया कच्चे तेल की आपूर्ति ठप्प होने और आसमान छूती कीमतों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित थी, तब चीन ने एक अप्रत्याशित कदम उठाकर वैश्विक तेल बाजार को हैरान कर दिया। संकट के इस दौर में बीजिंग ने अचानक कच्चे तेल के अपने आयात में भारी कटौती कर दी, रिफाइंड ईंधन के निर्यात को कड़े नियंत्रण में ले लिया और अपनी घरेलू जरूरतों के लिए अपने विशाल आपातकालीन तेल भंडार (स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व) के दरवाजे खोल दिए। चीन की इस दूरदर्शी रणनीति ने न केवल उसे एक बड़े संभावित ऊर्जा संकट से सुरक्षित बचा लिया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि वह अब केवल कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार भर नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर इसकी कीमतों और आपूर्ति चक्र को नियंत्रित करने वाली एक बड़ी महाशक्ति बन चुका है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार और सत्ता के संतुलन को बदलने वाली चीनी रणनीति
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की इस नई और आक्रामक तेल नीति ने वैश्विक बाजार के पुराने समीकरणों को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। अपने विशाल तेल भंडार का बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग करके चीन ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह बाहरी संकटों के समय वैश्विक बाजार के दबाव में आने वाला नहीं है। विश्लेषकों के अनुसार, बीजिंग का यह आत्म-निर्भर रवैया आने वाले समय में न केवल अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की दिशा तय करेगा, बल्कि विभिन्न देशों के बीच भू-राजनीतिक शक्ति के संतुलन को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है।
पश्चिम एशिया के संघर्ष ने इस तरह बदल दिया वैश्विक तेल व्यापार का पूरा गणित
ईरान और उसके आसपास के क्षेत्रों में छिड़े इस भीषण सैन्य संघर्ष के कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) से होने वाला नौवहन पूरी तरह प्रभावित हो गया और यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग लगभग बंद होने की कगार पर पहुंच गया। ऐतिहासिक रूप से इस संकरे समुद्री रास्ते से दुनिया भर की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता था। इस रणनीतिक मार्ग के बाधित होने और वैश्विक स्तर पर आपूर्ति ठप्प होने के गहरे डर के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें कुछ ही समय में लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल से छलांग लगाकर मार्च के अंत तक रिकॉर्ड 118 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गईं।
अस्थिर बाजार के बीच कीमतों में उतार-चढ़ाव और भविष्य की अनिश्चितता
शुरुआती बड़े झटके के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आंशिक गिरावट आई और वे कुछ समय के लिए सामान्य स्तर पर लौटती हुई दिखाई दीं। इसके बावजूद, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य व कूटनीतिक तनाव ने बाजार को लगातार अस्थिर बनाए रखा है और कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर से तेज उछाल दर्ज किया जाने लगा है। इस अनिश्चित माहौल में जहां दुनिया के अन्य विकासशील देश महंगे तेल के आयात के बोझ तले दब रहे हैं, वहीं चीन ने अपनी रणनीतिक दूरदर्शिता के बल पर खुद को इस वैश्विक आर्थिक झटके से पूरी तरह सुरक्षित कर लिया है।
Gold बेचने से पहले सावधान! Jewellery, ETF, SGB और Digital Gold में क्या है अंतर?
16 Jul, 2026 05:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत में पारंपरिक और आधुनिक रूप से सोने में निवेश को हमेशा से सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद माना जाता रहा है। हालांकि, निवेशक अक्सर खरीदारी के समय तो काफी सावधानी बरतते हैं, लेकिन जब इसी सोने को बाजार में बेचने की बारी आती है, तो टैक्स का असली पेंच सामने आता है। वित्तीय विशेषज्ञों की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, सोना बेचने पर आपको कितना टैक्स चुकाना होगा, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपने निवेश किस माध्यम से किया था। फिजिकल ज्वेलरी, गोल्ड ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, इन चारों रूपों में टैक्स के नियम अलग-अलग हैं, जिसके चलते एक ही कीमत पर खरीदे गए सोने पर अलग-अलग टैक्स का बोझ पड़ सकता है।
फिजिकल गोल्ड और ज्वेलरी पर लागू होने वाले कड़े नियम
परंपरागत रूप से खरीदे जाने वाले फिजिकल गोल्ड यानी सोने के आभूषण, सिक्के या बिस्कुट को बेचने पर टैक्स के नियम काफी सख्त माने जाते हैं। यदि कोई निवेशक अपनी फिजिकल ज्वेलरी या सिक्कों को खरीदने की तारीख से लेकर 24 महीनों के भीतर ही बाजार में बेच देता है, तो इससे होने वाले पूरे मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाता है। इस स्थिति में यह मुनाफा निवेशक की कुल सालाना आय में जोड़ दिया जाता है और व्यक्ति जिस भी टैक्स स्लैब के अंतर्गत आता है, उसे उसी दर से टैक्स का भुगतान करना पड़ता है।
लंबी अवधि के निवेश पर मिलने वाली आंशिक राहत
यदि फिजिकल गोल्ड को 24 महीने या उससे अधिक समय तक अपने पास रखने के बाद बेचा जाता है, तो वित्तीय नियमों के तहत इसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) की श्रेणी में रखा जाता है। लंबी अवधि के इस निवेश से होने वाले मुनाफे पर सरकार द्वारा निर्धारित की गई 12.5% की दर से फ्लैट टैक्स वसूला जाता है। ऐसे में जो निवेशक ऊंचे टैक्स स्लैब में आते हैं, उनके लिए 24 महीने के बाद फिजिकल गोल्ड बेचना शॉर्ट टर्म में बेचने के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद और टैक्स की दृष्टि से किफायती साबित होता है।
डिजिटल गोल्ड और ईटीएफ में निवेश के अलग गणित
आधुनिक दौर में भौतिक रूप से सोना रखने के बजाय लोग डिजिटल गोल्ड, गोल्ड म्यूचुअल फंड या गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) में निवेश करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। हालांकि, इन डिजिटल माध्यमों को भुनाने या बेचने पर भी टैक्स के नियम फिजिकल गोल्ड से थोड़े भिन्न हो सकते हैं। इनमें किए गए निवेश की अवधि और होल्डिंग पीरियड के आधार पर ही टैक्स देनदारी तय की जाती है, इसलिए किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सोना खरीदने से पहले उसके लिक्विडेशन और टैक्स प्रावधानों को अच्छे से समझ लेना बेहद जरूरी है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में टैक्स छूट का विशेष लाभ
टैक्स बचाने के लिहाज से सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को निवेशकों के लिए सबसे बेहतरीन माध्यम माना जाता है। इस सरकारी योजना के तहत यदि कोई निवेशक बॉन्ड को उसकी मैच्योरिटी की पूरी अवधि यानी 8 साल तक अपने पास रखता है, तो मैच्योरिटी के समय मिलने वाले पूरे कैपिटल गेन पर सरकार द्वारा शत-प्रतिशत टैक्स छूट दी जाती है। यही कारण है कि यह माध्यम उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा मुनाफे वाला सौदा साबित होता है जो टैक्स का बोझ उठाए बिना सोने में लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं।
Vivo ने मचाई हलचल, 20 हजार से कम कीमत में आया 6500mAh बैटरी वाला 5G स्मार्टफोन
16 Jul, 2026 12:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली:ग्लोबल स्मार्टफोन निर्माता कंपनी वीवो ने भारतीय मोबाइल बाजार में अपना नया और किफायती 5G स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इस नए हैंडसेट को घरेलू मार्केट में 'वीवो टी5 लाइट 5जी' (Vivo T5 Lite 5G) के नाम से पेश किया है। कंपनी के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस नए डिवाइस को विशेष रूप से उन स्मार्टफोन यूजर्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जो एक ही हैंडसेट में लंबी बैटरी लाइफ, बेहतरीन प्रोसेसिंग स्पीड और एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फीचर्स की तलाश कर रहे हैं। इस फोन के आने से मध्यम बजट रेंज वाले 5G सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा और अधिक रोचक होने की उम्मीद है।
6500mAh की विशाल बैटरी और मीडियाटेक प्रोसेसर जैसी खूबियों से लैस
तकनीकी विशिष्टताओं (स्पेसिफिकेशन्स) की बात करें तो यह स्मार्टफोन अपने सेगमेंट में काफी दमदार नजर आ रहा है। वीवो के इस नए हैंडसेट में 6500mAh की बेहद शक्तिशाली और विशाल बैटरी दी गई है, जो भारी इस्तेमाल के बाद भी लंबे समय तक बैकअप देने में सक्षम है। इस बड़ी बैटरी को तेजी से चार्ज करने के लिए इसमें 44 वॉट का फ्लैशचार्ज सपोर्ट भी दिया गया है। परफॉर्मेंस को स्मूथ बनाने के लिए कंपनी ने इसमें मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6300 5G (MediaTek Dimensity 6300 5G) प्रोसेसर का इस्तेमाल किया है, जो हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी और बेहतरीन गेमिंग एक्सपीरियंस प्रदान करता है।
फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए 50 मेगापिक्सल का सोनी कैमरा सेंसर
बेहतरीन परफॉर्मेंस और बड़ी बैटरी के अलावा यह स्मार्टफोन फोटोग्राफी लवर्स के लिए भी एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। वीवो टी5 लाइट 5जी के रियर पैनल पर मुख्य कैमरे के रूप में 50 मेगापिक्सल का सोनी (Sony) कैमरा सेंसर दिया गया है, जो कम रोशनी में भी शानदार और हाई-डेफिनिशन तस्वीरें खींचने में सक्षम है। इसके साथ ही, फोन में दिए गए एडवांस एआई फीचर्स की मदद से यूजर्स अपनी तस्वीरों को और बेहतर तरीके से कस्टमाइज और एडिट कर सकते हैं। यह कैमरा सेटअप वीडियो कॉलिंग और रील्स बनाने वाले युवाओं को काफी आकर्षित करने वाला है।
तीन अलग-अलग वेरिएंट्स में लॉन्च, आकर्षक रंगों के साथ जानें कीमतें
कंपनी ने इस स्मार्टफोन को भारतीय उपभोक्ताओं के लिए तीन अलग-अलग स्टोरेज और रैम वेरिएंट्स में पेश किया है। इसके शुरुआती 4GB रैम और 128GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 19,999 रुपये निर्धारित की गई है। इसके अलावा, मिड-वेरिएंट 6GB रैम और 128GB स्टोरेज के साथ 21,999 रुपये में उपलब्ध होगा, जबकि सबसे टॉप मॉडल 6GB रैम और 256GB इंटरनल स्टोरेज के साथ 24,999 रुपये की कीमत पर बाजार में उतारा गया है। लुक और डिजाइन को आकर्षक बनाने के लिए कंपनी ने इसे दो बेहतरीन रंगों 'ट्विलाइट शैडो' और 'वेव ब्लू' में बिक्री के लिए उपलब्ध कराया है।
Q1 नतीजों से पहले Wipro शेयर में रैली, निवेशकों की नजर अब कंपनी के प्रदर्शन पर
16 Jul, 2026 12:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु:देश की दिग्गज सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कंपनी विप्रो चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही के अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। बाजार बंद होने के बाद जारी होने वाले इन नतीजों से पहले निवेशकों के सकारात्मक रुख के कारण कंपनी के शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिल रही है। घरेलू शेयर बाजार (BSE) में कारोबार के दौरान विप्रो का शेयर करीब दो प्रतिशत की मजबूती के साथ 178 रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गया। शेयरों में आई इस तेजी की बदौलत कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) भी बढ़कर 1.76 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है, जो निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है।
प्रबंधन के रेवेन्यू गाइडेंस और एआई रणनीति पर टिकी निवेशकों की निगाहें
शेयर बाजार के विश्लेषक और निवेशक विप्रो के इस तिमाही प्रदर्शन में केवल मुनाफे के आंकड़ों पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की योजनाओं पर भी नजर गड़ाए हुए हैं। बाजार को विशेष रूप से कंपनी के प्रबंधन द्वारा आगामी वित्त वर्ष 2027 के लिए दिए जाने वाले रेवेन्यू गाइडेंस, वैश्विक स्तर पर आईटी सेवाओं की मांग की स्थिति और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर कंपनी की नई रणनीति पर आधिकारिक टिप्पणी का इंतजार है। इससे पहले मार्च तिमाही के दौरान अजीम प्रेमजी के प्रवर्तन वाली इस कंपनी ने अनुमान जताया था कि जून तिमाही में आईटी सर्विसेज बिजनेस से मिलने वाला राजस्व 259.7 करोड़ डॉलर से 265.1 करोड़ डॉलर के दायरे में रह सकता है।
विगत तिमाहियों में विप्रो का वित्तीय प्रदर्शन और शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव
यदि विप्रो के हालिया इतिहास और वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें, तो जनवरी-मार्च तिमाही में कंपनी का एकीकृत शुद्ध मुनाफा मामूली गिरावट के साथ 3,501.8 करोड़ रुपये रहा था, जबकि कुल आय में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। पूरे पिछले वित्त वर्ष में कंपनी का कुल रेवेन्यू 92,624 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि, पिछले छह महीनों के दौरान शेयर बाजार में विप्रो के शेयरों में लगभग 33 प्रतिशत की गिरावट भी देखी गई है, जहां इसका 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 273.15 रुपये और निचला स्तर 168.55 रुपये दर्ज किया गया था। वर्तमान में कंपनी में प्रमोटर्स की कुल हिस्सेदारी 72.59 प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई है।
शेयरधारकों को तकनीकी लाभ देने के लिए जून में किया था भारी-भरकम बायबैक
विप्रो ने अपने निवेशकों को पुरस्कृत करने और बाजार में पूंजी संरचना को मजबूत करने के उद्देश्य से इसी वर्ष जून के महीने में एक बड़ा कदम उठाया था। कंपनी ने तीन साल के लंबे अंतराल के बाद 15,000 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों का बायबैक सफलतापूर्वक पूरा किया था। इस प्रक्रिया के तहत कंपनी ने 250 रुपये प्रति शेयर की तय कीमत पर अपने शेयरधारकों से करीब 60 करोड़ इक्विटी शेयरों की वापस खरीदारी की थी। इससे पहले कंपनी ने वर्ष 2023 में भी 12,000 करोड़ रुपये का बायबैक पेश किया था, जिससे बाजार में कंपनी के प्रति दीर्घकालिक दृष्टिकोण को हमेशा बल मिलता रहा है।
Ather Energy पर सरकार का भरोसा, ₹200 करोड़ के निवेश से मिलेगी नई रफ्तार
16 Jul, 2026 12:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु:घरेलू इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बाजार की प्रमुख कंपनी एथर एनर्जी ने अपनी विस्तार योजनाओं के लिए बड़ी पूंजी जुटाने की घोषणा की है। इस नए निवेश दौर में सबसे खास नाम इंडिया-जापान फंड (IJF) का सामने आया है, जो भारत सरकार और जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (JBIC) का एक संयुक्त निवेश माध्यम है। एक सूचीबद्ध दोपहिया निर्माता कंपनी में इस तरह के रणनीतिक निवेश के पीछे सरकार की कोई तात्कालिक राहत योजना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी व्यापक औद्योगिक रणनीति काम कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धी ईवी कंपनियों को तैयार करना, देश की कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करना और भारत को क्लीन मोबिलिटी के एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना है।
इंडिया-जापान फंड के जरिए परोक्ष निवेश, क्लीन एनर्जी को बढ़ावा
एथर एनर्जी में होने वाले इस निवेश की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सरकार इसमें सीधे तौर पर पूंजी नहीं लगा रही है। यह पूरा वित्तीय लेन-देन इंडिया-जापान फंड के माध्यम से संचालित किया जा रहा है, जो करीब 60 करोड़ डॉलर का एक दीर्घकालिक फंड है। वर्ष 2023 में नेशनल इंवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) और जापानी बैंक द्वारा शुरू किए गए इस फंड में भारत सरकार की एनआईआईएफ के माध्यम से 49 प्रतिशत की हिस्सेदारी है, जबकि शेष 51 प्रतिशत हिस्सेदारी जापानी सहयोगी की है। यह विशिष्ट फंड मुख्य रूप से क्लीन एनर्जी, सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और कम-कार्बन उत्सर्जक तकनीकों पर काम करने वाले चुनिंदा व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए एक संस्थागत निवेशक के रूप में कार्य करता है।
स्वदेशी तकनीक और 'मेक इन इंडिया' के पैमानों पर खरी उतरी एथर
एथर एनर्जी इस बड़े निवेश के लिए सरकारी और संस्थागत क्राइटेरिया में पूरी तरह फिट बैठती है, क्योंकि विदेशी कलपुर्जों को आयात कर केवल असेंबलिंग करने वाली अन्य कंपनियों की तुलना में एथर ने अपनी अधिकांश मुख्य तकनीकों को भारत में ही विकसित किया है। कंपनी ने अपना खुद का बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म, कनेक्टेड व्हीकल इकोसिस्टम और एडवांस चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है। सरकार के लिए स्वदेशी तकनीकी क्षमता रखने वाले ऐसे उद्यमों को वित्तीय सहायता देना बेहद महत्वपूर्ण हो चुका है, क्योंकि इससे 'मेक इन इंडिया' अभियान को गति मिलती है और देश में उच्च मूल्य वाली मैन्युफैक्चरिंग नौकरियों के नए अवसर सृजित होते हैं।
संपूर्ण ईवी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए बहुआयामी निवेश रणनीति
इस रणनीतिक निवेश से बाजार के अन्य बड़े निवेशकों का भरोसा भी एथर एनर्जी के प्रति काफी मजबूत होने की उम्मीद है, क्योंकि इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि कंपनी को दीर्घकालिक सरकारी नीतियों का मजबूत समर्थन हासिल है। हालांकि, यह फंड केवल एथर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी और कमर्शियल वाहन निर्माता ईकेए मोबिलिटी जैसी अन्य प्रमुख कंपनियों में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। थ्री-व्हीलर, कमर्शियल वाहनों और प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटरों जैसे अलग-अलग सेग्मेंट्स में पूंजी लगाकर यह फंड किसी एक एकल कंपनी पर जोखिम लेने के बजाय देश के भीतर एक संपूर्ण और आत्मनिर्भर ईवी इकोसिस्टम का ढांचा खड़ा कर रहा है।
घाटे से निकली PSU कंपनी ने किया कमाल, नतीजे आते ही शेयरों में तेजी
16 Jul, 2026 10:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई:घरेलू शेयर बाजार में आज मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (एमआरपीएल) के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। कंपनी द्वारा जून 2026 तिमाही के बेहतरीन नतीजे घोषित किए जाने के बाद निवेशकों ने इसमें जमकर खरीदारी की, जिससे इसके शेयर आज रॉकेट बन गए। शुरुआती कारोबार में कंपनी का स्टॉक करीब 7 प्रतिशत तक उछल गया था। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर कुछ निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करने की वजह से कीमतों में मामूली नरमी जरूर आई, लेकिन निचले स्तरों पर मजबूत लिवाली के दम पर यह अब भी बेहद मजबूत स्थिति में बना हुआ है। फिलहाल बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर कंपनी का शेयर लगभग 5.99 प्रतिशत की बढ़त के साथ 167.15 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि इंट्रा-डे के दौरान इसने 168.60 रुपये के उच्च स्तर को छुआ था।
घाटे से उबरकर मुनाफे में आई सरकारी तेल रिफाइनरी
जून 2026 की तिमाही सरकारी क्षेत्र की इस तेल रिफाइनरी के लिए गेमचेंजर साबित हुई है। कंपनी सालाना आधार पर 270.7 करोड़ रुपये के बड़े घाटे से उबरकर सीधे 945.7 करोड़ रुपये के शुद्ध मुनाफे (नेट प्रॉफिट) में आ गई है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू भी सालाना आधार पर लगभग 120 प्रतिशत की भारी-भरकम बढ़ोतरी के साथ 38,254.2 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। परिचालन के मोर्चे पर भी कंपनी ने जबरदस्त सुधार दिखाया है, जहां इसका ईबीआईटीडीए (EBITDA) 179.5 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,317.6 करोड़ रुपये हो गया है और ईबीआईटीडीए मार्जिन भी 1.03 प्रतिशत से सुधरकर 3.44 प्रतिशत के स्तर पर दर्ज किया गया है।
नेटवर्क विस्तार और ग्रीन फ्यूल क्षेत्र में मिली बड़ी कामयाबियां
इस तिमाही के दौरान कंपनी ने अपने बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। एमआरपीएल को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक जाने वाली एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पाइपलाइन बिछाने के लिए पीएनजीआरबी (PNGRB) से अंतिम मंजूरी मिल गई है। इसके अतिरिक्त कंपनी ने मंगलुरु, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में स्थित अपने नए टर्मिनलों और डिपो से उत्पादों की लोडिंग का काम भी सफलतापूर्वक शुरू कर दिया है। पर्यावरण के अनुकूल ईंधन (ग्रीन फ्यूल) के क्षेत्र में कदम बढ़ाते हुए कंपनी को आईएससीसी कोर्सिया (ISCC CORSIA) प्रमाणन भी प्राप्त हुआ है, जिसके बाद अब कंपनी इस्तेमाल हो चुके कुकिंग ऑयल की मदद से सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) का निर्माण करने में पूरी तरह सक्षम हो गई है।
एक साल के भीतर निवेशकों को मिला बंपर रिटर्न
एमआरपीएल के शेयरों ने पिछले कुछ समय में अपने शेयरधारकों को बेहद कम अवधि के भीतर मोटी कमाई कराई है। बीते वर्ष 29 अगस्त 2025 को बीएसई पर इस शेयर का भाव 120.35 रुपये के स्तर पर था, जो कि इसका एक साल का सबसे निचला स्तर (52-वीक लो) माना जाता है। इस न्यूनतम स्तर से सुधार दर्ज करते हुए शेयर ने महज सात महीनों के भीतर शानदार रिकवरी की और लगभग 78.60 प्रतिशत की छलांग लगाकर 9 मार्च 2026 को 214.95 रुपये के रिकॉर्ड स्तर को छू लिया, जो इसके शेयरों के लिए पिछले एक साल का सबसे उच्चतम स्तर (52-वीक हाई) दर्ज किया गया है।
आज कितने में मिल रहा LPG सिलेंडर? चेक करें अपने शहर का नया रेट
16 Jul, 2026 10:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली:घरेलू और व्यावसायिक उपयोग में आने वाले एलपीजी सिलेंडरों के दामों में गुरुवार को कोई बदलाव नहीं देखा गया। देश के सभी प्रमुख शहरों में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू और 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडरों की कीमतें पूरी तरह स्थिर बनी हुई हैं। गौरतलब है कि चालू महीने की शुरुआत में कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में 183.50 रुपये की बड़ी कटौती की गई थी, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े उपभोक्ताओं को काफी राहत मिल रही है। ऐसे में जो उपभोक्ता आज अपनी गैस बुकिंग करने की योजना बना रहे हैं, वे वर्तमान स्थिर दरों पर बुकिंग करा सकते हैं।
महानगरों सहित प्रमुख शहरों में रसोई गैस की ताजा दरें
देश के विभिन्न हिस्सों में टैक्स और परिवहन लागत की वजह से गैस सिलेंडर की कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है। वर्तमान में देश की राजधानी दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 942 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2930 रुपये में उपलब्ध है। वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई में घरेलू गैस के दाम 941.5 रुपये और कमर्शियल के 2885.5 रुपये बने हुए हैं। कोलकाता में उपभोक्ताओं को घरेलू सिलेंडर के लिए 968 रुपये और कमर्शियल के लिए 3082 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं, जबकि चेन्नई में घरेलू गैस की कीमत 957.5 रुपये और कमर्शियल की 3106 रुपये है। इसी तरह चंडीगढ़ में 951.5 रुपये व 2954.5 रुपये तथा देहरादून में 961 रुपये व 2983.5 रुपये की दरें लागू हैं। हैदराबाद में यह दरें 934 रुपये और 2052.5 रुपये, भुवनेश्वर में 968 रुपये और 3115 रुपये तथा तिरुवनंतपुरम में 951 रुपये और 2970.5 रुपये पर स्थिर हैं।
वैश्विक तनाव के चलते भविष्य में दाम बढ़ने के आसार
अंतर्राष्ट्रीय मोर्चे पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण आने वाले समय में रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका गहराने लगी है। अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा भड़के विवाद तथा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से उछलकर 86 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की लागत में हो रहे इस इजाफे का सीधा असर घरेलू बाजार में एलपीजी और सीएनजी की कीमतों पर पड़ने का खतरा मंडरा रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय इस पूरे वैश्विक घटनाक्रम और बाजार की स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले बोझ का सही आकलन किया जा सके।
भारी सिलेंडरों से राहत देने आ रहे हल्के फाइबरग्लास सिलेंडर
रसोई गैस के मोर्चे पर उपभोक्ताओं को भारी-भरकम सिलेंडरों से निजात दिलाने के लिए एक नई और आधुनिक तकनीक पेश की जा रही है। बाजार में जल्द ही बेहद हल्के और पारदर्शी दिखने वाले 10 किलोग्राम के कंपोजिट (फाइबरग्लास) सिलेंडर व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराए जाएंगे, जो पारंपरिक लोहे के सिलेंडरों की तुलना में करीब पचास फीसदी तक हल्के होंगे। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) द्वारा इस नए सिलेंडर को 'एचपी नव्या' नाम से बाजार में उतारा जा रहा है। आधुनिक उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए इसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट के जरिए भी बुक किया जा सकेगा, जहां से ग्राहक 10 किलो वाले इस कंपोजिट सिलेंडर या 5 किलो वाले मेटल सिलेंडर को आसानी से ऑर्डर कर सकेंगे, जिसकी डिलीवरी विशेष सुरक्षा मानकों के तहत पूरी की जाएगी।
सोने की कीमतों में तेजी का दौर, देश के प्रमुख बाजारों में बढ़े दाम
16 Jul, 2026 08:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली:देश के सर्राफा बाजारों में बहुमूल्य धातु सोने की कीमतों में एक बार फिर तेजी का रुख देखने को मिल रहा है। अधिकांश प्रमुख शहरों में सोने के दाम ऊपर चढ़े हैं, जिससे आभूषण विक्रेताओं और निवेशकों की हलचल बढ़ गई है। चालू सप्ताह के दौरान दिल्ली के सर्राफा बाजार में जहां बीते दिनों शुद्धता वाले सोने की दरें एक निश्चित स्तर पर टिकी हुई थीं, वहीं आज सुबह के कारोबार में इसमें बदलाव दर्ज किया गया है। वैश्विक बाजारों से मिल रहे मजबूत संकेतों और स्थानीय मांग के चलते सोने के भाव को अच्छा समर्थन मिलता दिख रहा है।
महानगरों सहित देश के प्रमुख शहरों में सोने के ताजा भाव
देश के विभिन्न हिस्सों में आज 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने की कीमतों में मामूली अंतर के साथ मजबूती देखी जा रही है। देश की राजधानी दिल्ली, जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ में आज 24 कैरेट सोने का भाव 143730 रुपये प्रति 10 ग्राम तथा 22 कैरेट का भाव 131760 रुपये पर पहुंच गया है। आर्थिक राजधानी मुंबई, कोलकाता, पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद में 24 कैरेट का दाम 143580 रुपये और 22 कैरेट का दाम 131610 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है। दक्षिण भारत के प्रमुख केंद्र चेन्नई में 24 कैरेट सोना 143790 रुपये और 22 कैरेट 131810 रुपये पर ट्रेंड कर रहा है, जबकि अहमदाबाद और भोपाल में यह क्रमशः 143630 रुपये और 131660 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बना हुआ है।
वैश्विक बाजार की स्थिति और भविष्य में रिकॉर्ड तेजी का अनुमान
घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी सोने की स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है, जहां वैश्विक बाजार में हाजिर सोना 4,029.66 डॉलर प्रति औंस के उच्च स्तर पर कारोबार कर रहा है। वैश्विक वित्तीय संस्था एचएसबीसी (HSBC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में सोने की चमक और ज्यादा बढ़ सकती है। अनुमान जताया गया है कि इस साल के अंत तक सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4,750 डॉलर तक जा सकती हैं और वर्ष 2026 में इसकी औसत कीमत 4,560 डॉलर प्रति औंस रहने की उम्मीद है। इतना ही नहीं, दीर्घावधि में वर्ष 2027 तक इसके 4,925 डॉलर के औसत स्तर को छूने और अगले साल के अंत तक 5,025 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने की प्रबल संभावना है।
औद्योगिक मांग घटने से चांदी में मंदी, डोमेस्टिक और ग्लोबल फैक्टर्स का असर
सोने की इस जोरदार तेजी के बिल्कुल विपरीत देश के भीतर चांदी की कीमतों में गिरावट का रुख देखा जा रहा है। स्थानीय सर्राफा बाजार में आज सुबह चांदी की कीमत नरम होकर 234900 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, आभूषण निर्माताओं, बड़े आभूषण विक्रेताओं और औद्योगिक इकाइयों की ओर से खरीदारी में आई कमी के कारण घरेलू बाजार में चांदी पर दबाव बना हुआ है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी का भाव 58.26 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया है। भारतीय बाजार में दोनों ही कीमती धातुओं की दरें घरेलू मांग और टैक्स जैसे कारकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले भू-राजनीतिक व आर्थिक बदलावों से सीधे प्रभावित हो रही हैं।
E20 नहीं पसंद? तो खरीद सकेंगे शुद्ध पेट्रोल, लेकिन कीमत देनी होगी ज्यादा: गडकरी
15 Jul, 2026 05:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वाहन चालकों के लिए एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जो लोग अपनी गाड़ियों में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं, उनके लिए शुद्ध पेट्रोल का विकल्प मौजूद रहेगा। हालांकि, इस 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल को खरीदने के लिए वाहन मालिकों को सामान्य से अधिक कीमत चुकानी होगी। सरकार का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब देश के वाहन चालकों के बीच इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर लगातार असमंजस और चिंताएं बनी हुई हैं। कई गाड़ी मालिकों ने इंजन की कार्यक्षमता, माइलेज और पुरानी गाड़ियों पर इसके पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठाए थे, जिस पर अब सरकार की तरफ से स्थिति साफ कर दी गई है।
इथेनॉल नीति पर सरकार का बड़ा फैसला
देश में पर्यावरण अनुकूल और सस्ते ईंधन को बढ़ावा देने के लिए सरकार तेजी से इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पर काम कर रही है। इसके तहत पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति को अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है। हालांकि, सरकार के इस कदम से उन वाहन मालिकों में चिंता देखी जा रही है जो अपनी गाड़ियों के इंजन की सेहत को लेकर फिक्रमंद हैं। केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि सरकार किसी पर भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन थोप नहीं रही है। जिन लोगों को इस ईंधन से समस्या है या जिनकी गाड़ियां इसके अनुकूल नहीं हैं, वे बिना मिलावट वाला पेट्रोल चुन सकते हैं, बशर्ते वे इसके लिए अतिरिक्त कीमत देने को तैयार हों।
ईंधन के परफॉर्मेंस और माइलेज पर उठते सवाल
वाहन चालकों के बीच सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन के परफॉर्मेंस पर क्या असर पड़ेगा। खासकर पुरानी गाड़ियों के मालिकों को डर है कि इथेनॉल इंजन के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा, कई रिपोर्ट्स और दावों में यह भी कहा गया है कि अधिक इथेनॉल वाले पेट्रोल से गाड़ी का माइलेज थोड़ा कम हो जाता है। इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए शुद्ध पेट्रोल का विकल्प खुला रखने का निर्णय लिया गया है ताकि लोग अपनी पसंद और बजट के अनुसार ईंधन का चुनाव कर सकें।
देशभर में E20 ईंधन का बढ़ता दायरा
जब केंद्रीय मंत्री से यह सवाल पूछा गया कि क्या पेट्रोल पंपों पर E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित ईंधन के साथ-साथ पहले की तरह E10 ईंधन का विकल्प भी मिलता रहेगा, तो उन्होंने देश की प्रगति का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि भारत ने तय समय से पहले ही पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने का अपना बड़ा लक्ष्य हासिल कर लिया है। देश के लगभग सभी पेट्रोल पंपों पर अब E20 ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा चुकी है। ऐसे में पुराने स्तर के ईंधन को समानांतर रूप से हर जगह उपलब्ध कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
शुद्ध ईंधन के लिए चुकाने होंगे ज्यादा पैसे
सरकार के इस रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि देश का मुख्य ईंधन ढांचा अब E20 की तरफ पूरी तरह शिफ्ट हो चुका है। ऐसे में जो भी उपभोक्ता पारंपरिक और बिना किसी मिलावट वाले शुद्ध ईंधन का उपयोग करना चाहते हैं, उन्हें इसे एक प्रीमियम विकल्प के रूप में देखना होगा। चूंकि शुद्ध पेट्रोल के आयात और वितरण की प्रक्रिया अलग होगी, इसलिए इसकी बाजार दरें सामान्य इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की तुलना में काफी अधिक होंगी। अब यह पूरी तरह से उपभोक्ताओं पर निर्भर करता है कि वे किफायती E20 ईंधन अपनाते हैं या फिर अतिरिक्त खर्च कर शुद्ध पेट्रोल का इस्तेमाल जारी रखते हैं।
सोने की कीमतों पर राहत के संकेत! जानिए क्यों थम सकती है तेजी
15 Jul, 2026 04:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में आई हालिया गिरावट के बाद मामूली सुधार जरूर दर्ज किया गया है, लेकिन साल 2026 की शुरुआत में बने रिकॉर्ड स्तर को दोबारा छू पाना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है। फिच सॉल्यूशंस की रिसर्च विंग बीएमआई ने साल 2026 के लिए सोने के औसत मूल्य का अनुमान 4,600 डॉलर से घटाकर अब 4,400 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 4,026 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है, जिससे इसमें अधिकतम 9 फीसदी तक की तेजी की गुंजाइश दिखती है। मजबूत होता अमेरिकी डॉलर, कम होता वैश्विक तनाव और सुधरती अर्थव्यवस्था सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रखने के मुख्य कारक साबित हो रहे हैं।
मजबूत डॉलर और ब्याज दरों में स्थिरता का दोहरा दबाव
वैश्विक बाजार में जब भी अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं वाले देशों के खरीदारों के लिए सोने का आयात महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग सीधे तौर पर प्रभावित होती है। बीएमआई के अनुसार, डॉलर इंडेक्स के 98 से 102 के दायरे में रहने की उम्मीद है, लेकिन यदि यह 110 के स्तर तक चढ़ता है, तो सोने की कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है। इसके साथ ही, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम दिखाई दे रही है और दरें 3.75 प्रतिशत पर स्थिर रह सकती हैं। चूंकि सोना कोई नियमित ब्याज या लाभांश नहीं देता, इसलिए ब्याज दरों के उच्च स्तर पर बने रहने से निवेशक बॉन्ड जैसे सुरक्षित और यील्ड देने वाले विकल्पों को अधिक प्राथमिकता देते हैं।
सुधरती वैश्विक अर्थव्यवस्था और घटता भू-राजनीतिक तनाव
वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार और अमेरिका व ईरान के बीच हुए समझौतों के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं काफी हद तक कम हुई हैं। अनुकूल आर्थिक परिस्थितियों के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने को छोड़कर शेयर बाजार और अन्य जोखिम वाले निवेश माध्यमों की ओर रुख कर रहे हैं। वर्ष 2026 में वैश्विक आर्थिक विकास दर 2.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके अलावा, हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आवागमन सामान्य होने और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के शांत पड़ने से सोने को मिलने वाला पारंपरिक 'सेफ हेवन' सपोर्ट भी धीरे-धीरे कमजोर होता नजर आ रहा है।
कमजोर होती महंगाई और घटती मांग का असर
महंगाई के खिलाफ एक बेहतरीन बचाव माध्यम माने जाने वाले सोने की मांग पर मुद्रास्फीति के नियंत्रण का भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। ऊर्जा की कीमतों में आई नरमी के कारण वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव काफी कम हुआ है, जिससे निवेशकों का सोने के प्रति आकर्षण घटा है। यदि भविष्य में भी महंगाई काबू में रहती है, तो सोने की कीमतों को सहारा देने वाला यह मजबूत कारक भी कमजोर पड़ जाएगा। हालांकि, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही सोने की निरंतर खरीदारी इस गिरावट को रोकने में एक सुरक्षा कवच का काम करेगी, जिससे कीमतें पूरी तरह से क्रैश होने से बची रहेंगी।
भविष्य के संभावित उतार-चढ़ाव और कीमतों का अनुमान
आने वाले समय में यदि फेडरल रिजर्व अपनी मौद्रिक नीति में ढील देता है या अमेरिकी डॉलर में कोई बड़ी कमजोरी आती है, तो सोना एक बार फिर 4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर सकता है। इसके विपरीत, यदि डॉलर की मजबूती बनी रहती है और बॉन्ड यील्ड में लगातार इजाफा होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम गिरकर 3,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक भी नीचे आ सकते हैं। फिलहाल सोने के बाजार में किसी भी बड़े अप्रत्याशित उछाल की संभावना कम ही दिखाई दे रही है और यह एक सीमित दायरे में ही घूमता रहेगा।
पतंजलि फूड्स के शेयर में बड़ी गिरावट, निवेशकों की चिंता बढ़ी
15 Jul, 2026 12:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पतंजलि फूड्स के शेयरों में आज बुधवार को भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसने घरेलू शेयर बाजार में निवेशकों के बीच खलबली मचा दी। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कारोबार की शुरुआत होते ही कंपनी के शेयर अपने पिछले बंद 407.65 रुपये के मुकाबले मामूली सुधार के साथ 408 रुपये पर खुले, लेकिन इसके तुरंत बाद इसमें चौतरफा बिकवाली शुरू हो गई। देखते ही देखते कंपनी का शेयर लुढ़ककर 328.05 रुपये के निचले स्तर तक पहुंच गया, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। दोपहर के कारोबारी सत्र के दौरान भी शेयर संभल नहीं पाया और करीब 16.67 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 339.70 रुपये के आसपास कारोबार करता देखा गया।
करोड़ों रुपये की बड़ी ब्लॉक डील बनी गिरावट की वजह
पतंजलि फूड्स के शेयरों में आई इस सुनामी के पीछे बाजार में हुई एक बेहद बड़ी ब्लॉक डील को मुख्य वजह माना जा रहा है। वित्तीय बाजार की रिपोर्टों के अनुसार, 15 जुलाई को कंपनी के शेयरों में 195 करोड़ रुपये की एक विशाल ब्लॉक डील को अंजाम दिया गया। इस भारी-भरकम सौदे के तहत पतंजलि फूड्स की कुल हिस्सेदारी में से लगभग 1.5 फीसदी इक्विटी का एकमुश्त लेन-देन किया गया, जिसने बाजार के सेंटिमेंट को सीधे तौर पर प्रभावित किया और शेयरों में बिकवाली का दबाव अचानक से बढ़ गया।
औसत कीमत से काफी नीचे हुए सौदे ने बढ़ाई चिंता
इस सौदे की बारीकियों पर नजर डालें तो बाजार में यह चर्चा आम है कि ब्लॉक डील के दौरान कंपनी के लगभग 54.24 लाख शेयरों का हस्तांतरण किया गया। सबसे ध्यान देने योग्य बात यह रही कि यह पूरा लेन-देन 355 रुपये प्रति शेयर की औसत कीमत पर हुआ, जो कि उस समय बाजार में चल रही शेयर की वास्तविक कीमत से काफी कम था। डिस्काउंट प्राइस पर हुई इस बड़ी डील के सार्वजनिक होते ही आम निवेशकों में घबराहट फैल गई, जिसके कारण शेयर लगातार नीचे की ओर खिसकता चला गया।
बैंकों की छुट्टी को लेकर बड़ा अपडेट, कल से बंद रहेंगी बैंक शाखाएं
15 Jul, 2026 12:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। यदि आपको अगले दो दिनों के भीतर अपनी बैंक शाखा जाकर कोई आवश्यक वित्तीय कार्य निपटाना है, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आगामी 16 और 17 जुलाई 2026 को देश के कुछ चुनिंदा राज्यों में बैंकों में कामकाज ठप रहेगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आधिकारिक हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार यह अवकाश पूरे देश में एक साथ लागू नहीं होगा। यह छुट्टियां केवल क्षेत्रीय त्योहारों और विशेष दिवसों के आधार पर कुछ राज्यों तक ही सीमित रहेंगी, जबकि देश के अन्य सभी हिस्सों में बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित की जाएंगी।
16 जुलाई को उत्तराखंड और मेघालय में रहेगा बैंक अवकाश
चालू सप्ताह के गुरुवार यानी 16 जुलाई को देश के दो प्रमुख राज्यों में स्थानीय उत्सवों के चलते बैंक बंद रहने वाले हैं। इस क्रम में उत्तराखंड में पारंपरिक लोक पर्व 'हरेला' बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा, जिसके कारण राज्य भर के सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों में छुट्टी रहेगी। इसी दिन पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में स्वतंत्रता सेनानी 'यू तिरोत सिंह डे' के उपलक्ष्य में बैंकों में राजकीय अवकाश घोषित किया गया है, जिसके चलते वहां भी वित्तीय संस्थानों के ताले नहीं खुलेंगे। इन दोनों राज्यों को छोड़कर देश के बाकी सभी हिस्सों में बैंकिंग कामकाज सामान्य दिनों की तरह ही सुचारू रहेगा।
17 जुलाई को मेघालय में लगातार दूसरे दिन बंद रहेंगे बैंक
सप्ताह के आखिरी कार्यदिवस यानी शुक्रवार, 17 जुलाई को भी देश के एक हिस्से में बैंक अवकाश की घोषणा की गई है। मेघालय में 'यू तिरोत सिंह डे' के सम्मान में लगातार दूसरे दिन भी सभी बैंक शाखाएं पूरी तरह बंद रखी जाएंगी। इस विशेष अवकाश के कारण स्थानीय निवासियों को शाखा जाकर किए जाने वाले कामों के लिए अगले सप्ताह का इंतजार करना होगा। मेघालय को छोड़कर भारत के अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस दिन बैंकों के द्वार आम जनता के लिए खुले रहेंगे और किसी भी तरह की रुकावट के बिना लेन-देन किया जा सकेगा।
छुट्टियों के दौरान भी निर्बाध रूप से चालू रहेंगी डिजिटल सेवाएं
बैंक शाखाओं के भौतिक रूप से बंद रहने के बावजूद खाताधारकों को घबराने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सभी तरह की डिजिटल और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के काम करती रहेंगी। ग्राहक अपने स्मार्टफोन के जरिए यूपीआई (UPI) सेवाओं का उपयोग कर त्वरित भुगतान कर सकेंगे। इसके अलावा, मोबाइल बैंकिंग और नेट बैंकिंग के माध्यम से फंड ट्रांसफर (NEFT/IMPS) जैसी सुविधाएं चौबीसों घंटे सक्रिय रहेंगी। नकदी की जरूरत को पूरा करने के लिए विभिन्न स्थानों पर लगे एटीएम (ATM) और कैश डिपॉजिट मशीनें भी हमेशा की तरह काम करती रहेंगी, जिससे आम जनता को कोई असुविधा नहीं होगी।
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