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Q1 रिजल्ट का असर! Tata Elxsi के शेयर टूटे, निवेशकों के लिए क्या है रणनीति
15 Jul, 2026 12:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। टाटा समूह की प्रमुख डिजाइन और टेक्नोलॉजी सेवा प्रदाता कंपनी टाटा एलेक्सी के शेयरों में आज यानी 15 जुलाई को चौतरफा बिकवाली का माहौल देखने को मिला। कंपनी के शेयर लगभग 6 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 3,473.75 रुपये के स्तर पर आ गए, जो कि इसका 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। दरअसल, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम बाजार विश्लेषकों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, जिससे निराश होकर निवेशकों ने शेयरों को बेचना शुरू कर दिया। मुनाफे में आई इस अप्रत्याशित गिरावट के कारण यह शेयर आज निफ्टी 500 इंडेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों की सूची में शीर्ष पर पहुंच गया।
कमजोर मार्जिन ने बिगाड़ा निवेशकों का मूड
स्थिर मुद्रा यानी कॉन्स्टेंट करेंसी के मामले में कंपनी ने तिमाही आधार पर 1.3 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि दर्ज की है, जो बाजार के विश्लेषकों के अनुमानों के बिल्कुल करीब रही। इसके विपरीत, टाटा एलेक्सी का परिचालन मार्जिन यानी ईबीआईटी मार्जिन तिमाही दर तिमाही आधार पर 340 बेसिस प्वाइंट्स घटकर महज 21.2 प्रतिशत रह गया, जो बाजार की उम्मीदों से काफी नीचे रहा। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, बड़ी डील्स के क्रियान्वयन की लागत, ग्राहकों से जुड़े खर्च, ऑनसाइट डिलीवरी और नए टैलेंट को जोड़ने के लिए किए गए भारी निवेश के कारण मुनाफे पर यह दबाव देखने को मिला है। आगामी सितंबर तिमाही में सालाना वेतन वृद्धि लागू होने के कारण मार्जिन पर दबाव आगे भी जारी रहने की आशंका जताई गई है।
जेपी मॉर्गन ने तटस्थ रेटिंग के साथ घटाया अनुमान
प्रमुख वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन ने टाटा एलेक्सी के शेयरों पर अपनी तटस्थ यानी 'न्यूट्रल' रेटिंग बरकरार रखते हुए 3,500 रुपये का संशोधित लक्ष्य निर्धारित किया है। ब्रोकरेज ने कंपनी के तिमाही प्रदर्शन को मिला-जुला करार दिया है, जिसमें मीडिया और टेलीकॉम सेक्टर ने तो अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन ऑटोमोटिव और हेल्थकेयर सेगमेंट में मंदी का रुख बना हुआ है। यूरोपीय ऑटोमोटिव बाजार में चल रही ढांचागत चुनौतियों का असर सीधे तौर पर कंपनी के वाहन कारोबार पर पड़ा है, जो कि इसके कुल बिजनेस का एक बड़ा हिस्सा है। इन तमाम विपरीत परिस्थितियों और मार्जिन रिकवरी में लगने वाले लंबे समय को देखते हुए ब्रोकरेज ने आगामी वित्तीय वर्षों के लिए अपने अर्निंग अनुमानों में एक से लेकर तेरह प्रतिशत तक की कटौती की है।
कोटक सिक्योरिटीज की बिकवाली की स्पष्ट सलाह
दूसरी ओर, कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने इस शेयर पर अपनी बिकवाली यानी 'सेल' रेटिंग को यथावत रखा है और इसके लिए 3,000 रुपये का बेहद निचला लक्ष्य तय किया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के लागत खर्च में हुई बढ़ोतरी कोई अस्थाई समस्या नहीं है, बल्कि यह एक ढांचागत बदलाव है जो आने वाले समय में भी कंपनी की लाभप्रदता को प्रभावित करता रहेगा। वैश्विक स्तर पर ऑटोमेकर्स द्वारा रिसर्च और डेवलपमेंट खर्च में की जा रही कटौती तथा चीनी ऑटो कंपनियों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण टाटा एलेक्सी के ऑटोमोटिव विंग में सुधार की गति काफी धीमी रहने की आशंका है, जिसके चलते ब्रोकरेज ने अपने भविष्य के मुनाफे के अनुमान को 10 से 14 फीसदी तक घटा दिया है।
भारत में इंडस्ट्रियल AI का नया दौर, TCS-NVIDIA की लैब बदलेगी फैक्ट्रियों का भविष्य
15 Jul, 2026 12:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। देश की अग्रणी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। टीसीएस द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कंपनी ने बेंगलुरु स्थित अपने ग्लोबल एक्सिस कैंपस में वैश्विक तकनीकी दिग्गज एनवीडिया (NVIDIA) के साथ मिलकर एक अत्याधुनिक 'ऑटोनॉमस इंजीनियरिंग लैब' की स्थापना की है। यह अपनी तरह की अनूठी प्रयोगशाला है, जो एनवीडिया के अत्याधुनिक एआई बुनियादी ढांचे का उपयोग करके परिवहन (मोबिलिटी) और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) के क्षेत्रों में उन्नत एआई-आधारित समाधानों को तैयार और व्यावहारिक रूप से लागू करेगी।
प्रोजेक्ट्स को परीक्षण से हकीकत में बदलने की पहल
इस नवोन्मेषी प्रयोगशाला की स्थापना का मुख्य उद्देश्य वैश्विक व्यवसायों को उनके एआई से जुड़े प्रोजेक्ट्स को महज शुरुआती परीक्षणों या पायलट प्रोजेक्ट्स तक सीमित रखने के बजाय, उन्हें बड़े पैमाने पर वास्तविक उत्पादन स्तर पर ले जाने में सशक्त मदद करना है। इस लैब के माध्यम से विभिन्न उद्यम अपने नए और अनोखे विचारों को व्यावहारिक रूप देने के लिए उनका प्रोटोटाइप तैयार कर सकेंगे और वास्तविक दुनिया के बाजारों में उतारने से पहले डिजिटल माध्यमों पर उनका गहन सिमुलेशन परीक्षण कर सकेंगे।
मोबिलिटी और विनिर्माण क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव
इस साझेदारी के तहत विकसित की जा रही तकनीकें भविष्य के परिवहन और औद्योगिक विनिर्माण क्षेत्रों की पूरी रूपरेखा को बदलने की क्षमता रखती हैं। लैब में स्व-चालित प्रणालियों, स्मार्ट फैक्ट्रियों और उन्नत रोबोटिक्स से जुड़े बेहद जटिल कार्यों को सुगम बनाने के लिए एनवीडिया के शक्तिशाली कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है, जिससे उद्योगों की कार्यक्षमता और उत्पादन क्षमता में अभूतपूर्व सुधार होने की पूरी उम्मीद है।
वैश्विक तकनीकी विकास को मिलेगी नई दिशा
टीसीएस और एनवीडिया का यह संयुक्त प्रयास न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर औद्योगिक तकनीकी विकास को एक नई और गतिशील दिशा प्रदान करेगा। इस आधुनिक केंद्र के माध्यम से दुनिया भर की कंपनियों को तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य के अनुकूल ढलने और अधिक सुरक्षित, कुशल व टिकाऊ स्वायत्त प्रणालियां विकसित करने के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय मंच हासिल होगा।
शेयर बाजार में रौनक, इस फार्मा शेयर में कमाई का बड़ा मौका!
15 Jul, 2026 10:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में बुधवार सुबह के कारोबारी सत्र में शानदार रिकवरी देखने को मिली है, जहां प्रमुख इंडेक्स मजबूत बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। बैंकिंग, वाहन (ऑटो), और तेल एवं गैस क्षेत्र के शेयरों में आई जोरदार लिवाली ने बाजार को निचले स्तरों से उबारने में अहम भूमिका निभाई है। मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ आज छोटे और मझोले (स्मॉलकैप व मिडकैप) शेयरों में भी निवेशकों की तरफ से अच्छी खरीदारी देखी जा रही है, जिससे बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह सकारात्मक बना हुआ है।
प्रमुख सूचकांकों में आई जोरदार तेजी
शुरुआती कारोबार के दौरान बंबई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स करीब 486 अंकों की उछाल के साथ 77,541 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 148 अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 24,200 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने में सफल रहा। बाजार में चौतरफा खरीदारी के चलते एनएसई के सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों, ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र के इंडेक्स में सबसे ज्यादा मजबूती देखी जा रही है। हालांकि, इस तेजी के बीच सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र के शेयरों पर हल्का दबाव बना हुआ है, लेकिन स्मॉलकैप इंडेक्स बेंचमार्क के मुकाबले कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
पश्चिम एशिया संकट और क्रूड का बाजार पर असर
बाजार के जानकारों का मानना है कि पिछले सत्रों में पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और उसके कारण कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आए उछाल की वजह से भारतीय बाजारों पर काफी दबाव देखा गया था। क्रूड की बढ़ती कीमतों ने विशेष रूप से बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र के शेयरों को प्रभावित किया था। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए निचला स्तर एक बेहद मजबूत सपोर्ट जोन का काम कर रहा है, और जब तक यह स्तर सुरक्षित है, तब तक हर बड़ी गिरावट को निवेशकों द्वारा खरीदारी के बेहतरीन अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
सुरक्षित दांव के रूप में फार्मा सेक्टर पर भरोसा
वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में बाजार विशेषज्ञ अब रक्षात्मक (डिफेंसिव) सेक्टर्स की तरफ रुख करने की सलाह दे रहे हैं, जिनमें दवा (फार्मा) क्षेत्र सबसे प्रमुख बनकर उभरा है। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की अस्थिरता के बावजूद फार्मा कंपनियों के शेयरों ने चार्ट पर बेहद मजबूत प्रदर्शन दिखाया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस सेक्टर की दिग्गज कंपनियों में दो दिनों के आंशिक ठहराव के बाद एक बार फिर से तेजी के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं, जिसके चलते निवेशक इसे एक सुरक्षित और बेहतर रिटर्न देने वाले विकल्प के रूप में देख रहे हैं और गिरावट पर इसमें दांव लगा रहे हैं।
चांदी के दाम फिसले, निवेश और खरीदारी से पहले जानें लेटेस्ट भाव
15 Jul, 2026 08:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। घरेलू सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन मंदी का रुख देखने को मिला है। स्थानीय आभूषण विक्रेताओं की कमजोर मांग और वैश्विक बाजारों में बड़े निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली के चलते चांदी की कीमतों पर तगड़ा दबाव देखा जा रहा है। हाजिर बाजार में आई इस भारी गिरावट के बाद अब प्रमुख महानगरों दिल्ली और मुंबई सहित देश के अधिकांश हिस्सों में चांदी के दाम एक खास दायरे में सिमट कर स्थिर बने हुए हैं।
घरेलू सर्राफा बाजारों में चांदी की वर्तमान स्थिति
देश के प्रमुख सर्राफा बाजारों में चांदी की खुदरा कीमतें गिरावट के बाद स्थिर बनी हुई हैं।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और पटना जैसे बड़े शहरों में प्रति किलोग्राम चांदी का भाव 2,35,000 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।
दक्षिण भारत के प्रमुख केंद्र चेन्नई में चांदी की कीमत थोड़ी उच्च स्तर पर बनी हुई है, जहां यह 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिक रही है।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे लखनऊ, कानपुर, मेरठ, नोएडा और गाजियाबाद में भी भाव 2,35,000 रुपये प्रति किलो पर दर्ज किए गए।
अन्य बड़े कारोबारी केंद्रों जैसे जयपुर, इंदौर, चंडीगढ़, गुरुग्राम और लुधियाना में भी ग्राहकों को इसी स्थिर भाव पर चांदी मिल रही है।
वैश्विक और वायदा बाजार में दिखा बिल्कुल विपरीत रुख
स्थानीय हाजिर बाजार की सुस्ती के उलट अंतरराष्ट्रीय और वायदा बाजारों में कीमती धातुओं में जोरदार उछाल दर्ज किया गया।
विदेशी बाजार कोमेक्स पर सोना 1.86 प्रतिशत की बड़ी तेजी के साथ 4,080 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी भी 2.39 फीसदी की छलांग लगाकर 59 डॉलर प्रति औंस के बेहद करीब कारोबार करती दिखी।
अमेरिकी बाजारों में मुद्रास्फीति (महंगाई) के आंकड़े उम्मीद से कम आने के कारण निवेशकों में यह धारणा बनी है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर रोक लगा सकता है, जिससे विदेशी बाजारों को बल मिला।
मांग में कमी और आगामी दिनों के लिए बाजार का अनुमान
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आई इस मजबूती के बावजूद भारत के घरेलू बाजार में आभूषण निर्माताओं और औद्योगिक इकाइयों की मांग काफी ठंडी पड़ी हुई है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि औद्योगिक खरीदारों की बेरुखी और शादियों के सीजन से ठीक पहले की सुस्ती के चलते स्थानीय कीमतों में सुधार नहीं हो पा रहा है।
आने वाले समय में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति क्या रुख अपनाती है और देश में त्योहारी मांग कब तक जोर पकड़ती है।
सुबह तड़के से देर शाम तक निगरानी, बिजली चोरी के खिलाफ अदाणी इलेक्ट्रिसिटी का अभियान तेज
14 Jul, 2026 03:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने बिजली चोरी के खिलाफ एक बेहद आक्रामक और सघन अभियान चलाकर अपने नुकसान को न्यूनतम स्तर पर लाने में बड़ी सफलता हासिल की है। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अपने एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (एटीएंडसी) नुकसान को घटाकर महज 4.46 प्रतिशत पर समेट दिया है, जो कि बीते वर्ष 4.7 प्रतिशत के स्तर पर था। इस उल्लेखनीय प्रदर्शन के बाद कंपनी पूरे भारत में सबसे बेहतरीन और न्यूनतम एटीएंडसी लॉस दर्ज करने वाली बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की अग्रणी सूची में शामिल हो गई है।
आम उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत और सुधरेगी बिजली वितरण प्रणाली
वितरण नुकसान में आई 0.24 प्रतिशत की यह कमी न केवल तकनीकी मजबूती को दर्शाती है, बल्कि इसका सीधा फायदा आम जनता को भी मिलेगा। कंपनी के अनुसार, बिजली चोरी में आई इस कमी से उन ईमानदार उपभोक्ताओं पर से आर्थिक बोझ काफी कम होगा जो नियमित रूप से अपने बिजली बिलों का भुगतान करते हैं। इसके साथ ही वितरण प्रणाली की पूरी कार्यक्षमता और बुनियादी ढांचे में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा, जिससे भविष्य में बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
चोरी रोकने के लिए बिछाया गया देशव्यापी छापों का मजबूत जाल
बिजली की इस चोरी को जड़ से खत्म करने के लिए अदाणी इलेक्ट्रिसिटी के सतर्कता दल ने पूरे वित्त वर्ष के दौरान रिकॉर्ड तोड़ कार्रवाई को अंजाम दिया। बिजली चोरों के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए विभाग की विभिन्न टीमों ने इस दौरान कुल 36,720 बड़े स्तर के ठिकानों पर अचानक छापेमारी की। कंपनी ने कड़ी कानूनी कार्रवाई का रुख अपनाते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाले और बिजली चोरी के गंभीर आरोपियों के खिलाफ विभिन्न थानों में 486 एफआईआर भी दर्ज कराई हैं।
विशेष छापेमारी के दम पर पकड़े गए हजारों अवैध मामले
कंपनी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए सुबह तड़के, देर शाम और सरकारी छुट्टियों के दिनों में औचक निरीक्षण करने वाली विशेष टीमों की संख्या में 40 प्रतिशत तक का इजाफा किया था। इस रणनीतिक फेरबदल के कारण बिजली चोरों को संभलने का बिल्कुल मौका नहीं मिला और जांच दल कुल 5,897 बिजली चोरी के मामलों को रंगे हाथों पकड़ने में पूरी तरह कामयाब रहा। इस विशेष मुस्तैदी की बदौलत ही इतने बड़े स्तर पर अवैध बिजली के इस्तेमाल पर लगाम लगाई जा सकी है।
टन के हिसाब से अवैध केबल जब्त और करोड़ों की बिजली चोरी उजागर
चलाए गए इस सघन जांच अभियान के दौरान अधिकारियों ने अलग-अलग इलाकों से कुल 79.25 टन अवैध बिजली के तार, कटिया और बिजली चोरी में इस्तेमाल होने वाले अन्य खतरनाक उपकरण मौके से जब्त किए हैं। सघन जांच-पड़ताल और फॉरेंसिक मीटर रीडिंग के दौरान यह बात सामने आई कि इन अवैध माध्यमों से करीब 1.98 करोड़ यूनिट यानी 19.82 मिलियन यूनिट बिजली की भारी-भरकम चोरी की जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार, इस चोरी की गई कुल बिजली की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 43.39 करोड़ रुपये आंकी गई है।
India-UK FTA से बदलेगी कारोबार की तस्वीर, MSME को मिलेगा नया मौका
14 Jul, 2026 01:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाते हुए आगामी १५ जुलाई से ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पूरी तरह से लागू होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक समझौते के प्रभावी होते ही भारत से ब्रिटेन को निर्यात किए जाने वाले तमाम प्रमुख उत्पादों और वस्तुओं पर से हर प्रकार की इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा। भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस दूरगामी समझौते के बाद भारत के ९९ प्रतिशत से अधिक उत्पादों को ब्रिटेन के विशाल बाजार में बिना किसी सीमा शुल्क के सीधी पहुंच प्राप्त हो सकेगी, जिससे वैश्विक व्यापार परिदृश्य में भारत की स्थिति और अधिक मजबूत होगी।
भारतीय किसानों और छोटे उद्योगों के लिए खुलेंगे प्रगति के असीम द्वार
इस व्यापक व्यापार समझौते के लागू होने से भारत के कृषि क्षेत्र, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के साथ-साथ उभरते हुए स्टार्टअप्स और आयातकों के लिए संभावनाओं के नए और बेहद आकर्षक अवसर पैदा होंगे। भारतीय उद्यमियों को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने पैर पसारने और ब्रिटिश बाजार की मांग के अनुरूप अपने उत्पादों को बिना किसी अतिरिक्त कर के बोझ के वहां बेचने की बड़ी सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, भारत में निर्मित विभिन्न उच्च गुणवत्ता वाले सामानों की मांग ब्रिटेन के बाजारों में तेजी से बढ़ेगी, जिससे देश के भीतर रोजगार के नए साधन विकसित होने की उम्मीद है।
ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को नेशनल इंश्योरेंस में मिलेगी बड़ी राहत
व्यापारिक लाभ से इतर यह समझौता वहां रह रहे और काम कर रहे लाखों भारतीय कामकाजी पेशेवरों के लिए भी बेहद कल्याणकारी साबित होने वाला है। इस समझौते के अंतर्गत दोनों देशों के बीच 'डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन' (DCC) व्यवस्था को लागू किया गया है, जिसके तहत ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय नागरिकों को वहां के अनिवार्य नेशनल इंश्योरेंस के दोहरे भुगतान से बड़ी राहत और विशेष छूट प्रदान की जाएगी। इस कदम से न केवल भारतीय पेशेवरों की मासिक बचत में उल्लेखनीय इजाफा होगा, बल्कि उनके लिए वहां काम करने की परिस्थितियां भी पहले से कहीं अधिक सुगम और अनुकूल हो जाएंगी।
द्विपक्षीय व्यापार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और वैश्विक बाजार में भारत का बढ़ता दबदबा
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इस एफटीए के धरातल पर उतरने के बाद भारत और ब्रिटेन के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार के टर्नओवर में आने वाले वर्षों में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। शून्य आयात शुल्क होने के कारण भारत के कपड़ा, चमड़ा, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग से जुड़े पारंपरिक उद्योगों को सीधे तौर पर ब्रिटिश कंपनियों से कड़ा मुकाबला करने और अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह समझौता न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों को एक नया आयाम देगा, बल्कि यूरोपीय महाद्वीप में भारतीय उत्पादों की साख को भी कई गुना बढ़ा देगा।
तकनीकी आदान-प्रदान और निवेश के नए दौर की शुरुआत
इस समझौते के दूरगामी परिणामों में केवल वस्तुओं का आदान-प्रदान ही शामिल नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के प्रवाह में भी भारी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। ब्रिटेन की कई बड़ी और नामी कंपनियां अब भारतीय बाजार में निवेश करने के लिए और अधिक प्रोत्साहित होंगी, जिससे भारत के औद्योगिक बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, दोनों देशों के स्टार्टअप्स आपस में मिलकर अत्याधुनिक तकनीकों पर काम कर सकेंगे, जो भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सिर्फ ज्यादा इनकम वालों के लिए नहीं है ITR, ये 7 नियम हर करदाता को पता होने चाहिए
14 Jul, 2026 01:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। आम जनता के बीच अक्सर यह एक आम धारणा बनी रहती है कि यदि उनकी वार्षिक आय टैक्स के दायरे यानी टैक्सेबल लिमिट से कम है, तो उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है। परंतु, वित्तीय और कानूनी दृष्टिकोण से यह सोचना पूरी तरह गलत साबित हो सकता है। आयकर विभाग के वर्तमान नियमों के अनुसार, कई ऐसी विशेष परिस्थितियां और वित्तीय लेन-देन हैं, जिनमें शून्य या बेहद कम आय होने के बावजूद भी प्रत्येक नागरिक के लिए आईटीआर फाइल करना बेहद जरूरी और अनिवार्य हो जाता है। इन नियमों की अनदेखी करने पर भविष्य में भारी जुर्माना, कानूनी नोटिस और कई अन्य गंभीर वित्तीय दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
आयकर विभाग के विशेष वित्तीय मानदंडों के दायरे में आने पर अनिवार्यता
यदि किसी व्यक्ति की कुल वार्षिक आय बुनियादी छूट सीमा से कम है, फिर भी कुछ खास तरह के वित्तीय लेन-देन करने पर उसे आईटीआर भरना ही होगा। उदाहरण के तौर पर, यदि आपने एक वर्ष में अपने चालू खाते (Current Account) में एक करोड़ रुपये या उससे अधिक की राशि जमा की है, या फिर अपने एक या अधिक बचत खाते (Savings Account) में कुल मिलाकर ५० लाख रुपये या उससे अधिक नकद जमा किए हैं, तो आपके लिए रिटर्न दाखिल करना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाता है। इसके अलावा, यदि व्यवसाय से होने वाली कुल बिक्री या टर्नओवर ६० लाख रुपये से अधिक है, या फिर पेशेवर आय १० लाख रुपये से ज्यादा है, तो भी बिना किसी छूट के आईटीआर भरना आवश्यक है।
विदेश यात्रा पर भारी खर्च और बिजली बिल की निर्धारित सीमा
आजकल कई लोग अपनी व्यक्तिगत या व्यावसायिक प्राथमिकताओं के चलते विदेश यात्राएं करते हैं या घर में आधुनिक सुख-सुविधाओं का उपभोग करते हैं। आयकर नियमों के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति ने अपने या किसी अन्य व्यक्ति की विदेश यात्रा पर एक वर्ष में कुल २ लाख रुपये या उससे अधिक की राशि खर्च की है, तो उसे अपनी आय चाहे कितनी भी कम हो, आईटीआर दाखिल करना होगा। इसी तरह, यदि आपके घर या कार्यालय का वार्षिक बिजली बिल एक लाख रुपये या उससे अधिक आता है, तो इसे भी एक बड़ा वित्तीय संकेतक माना जाता है और इस स्थिति में भी कर विभाग को अपनी आय का ब्योरा देना अनिवार्य हो जाता है।
टीडीएस रिफंड का दावा करने और बैंक लोन की प्रक्रिया को आसान बनाना
कम आय होने के बावजूद आईटीआर दाखिल करने का एक सबसे बड़ा व्यावहारिक फायदा वित्तीय साख को मजबूत बनाना है। यदि विभिन्न निवेशों या सेवाओं पर आपका टीडीएस (TDS) या टीसीएस (TCS) कटा है और आपकी कुल आय टैक्स सीमा से नीचे है, तो उस कटे हुए पैसे को वापस पाने यानी रिफंड का दावा करने के लिए आईटीआर फाइल करना एकमात्र जरिया है। इसके अलावा, भविष्य में जब भी आप किसी बैंक से होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते हैं, या फिर विदेश जाने के लिए वीजा प्रक्रिया से गुजरते हैं, तो वित्तीय संस्थान और दूतावास आपकी साख और आय के आधिकारिक प्रमाण के रूप में पिछले तीन वर्षों का आईटीआर जरूर मांगते हैं।
ब्याज आय और विदेशी संपत्ति के स्वामियों के लिए सख्त नियम
यदि आपकी आय कम है लेकिन आपके पास कोई विदेशी संपत्ति है या आप किसी विदेशी खाते में हस्ताक्षर करने का अधिकार रखते हैं, तो भारत के कानून के तहत आपको अनिवार्य रूप से आईटीआर फाइल करना होगा। इसके साथ ही, यदि आपकी कुल कर देनदारी शून्य है परंतु विभिन्न जमा योजनाओं से होने वाली ब्याज आय या अन्य स्रोतों से प्राप्त राशि पर आपका कुल टीडीएस या टीसीएस २५,००० रुपये (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ५0,000 रुपये) या उससे अधिक कटा है, तो भी रिटर्न भरना आवश्यक है। अतः समझदारी इसी में है कि समय रहते अपनी वित्तीय गतिविधियों का सही आकलन करें और किसी भी अनचाहे कानूनी नोटिस से बचने के लिए नियमित रूप से अपना आईटीआर दाखिल करें।
कनाडा की कंपनी की नजर 62 साल पुराने बैंक पर, बिक्री की खबर से मची हलचल
14 Jul, 2026 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश के बैंकिंग क्षेत्र से इस वक्त की एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारत का एक बड़ा बैंक निजी हाथों में जाने वाला है और क्या कोई विदेशी कंपनी इसका अधिग्रहण करने जा रही है। दरअसल, आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) को लेकर बाजार में कयासों का दौर गर्म है क्योंकि ऐसी रिपोर्ट सामने आई हैं कि सरकार ने इस बैंक के रणनीतिक विनिवेश को अंतिम मंजूरी दे दी है। कई दौर की उच्च स्तरीय बैठकों और गहन विचार-विमर्श के बाद बैंक में बड़ी हिस्सेदारी बेचने का यह बड़ा फैसला लिया गया है, जिसने देश के वित्तीय क्षेत्र में एक नई बहस छेड़ दी है।
क्या है विनिवेश और कैसे काम करती है इसकी प्रक्रिया
आसान शब्दों में समझें तो विनिवेश यानी डिसइन्वेस्टमेंट का सीधा अर्थ अपनी संपत्ति या संचित हिस्सेदारी को बेचना अथवा उसे कम करना है। जब भी सरकार देश के किसी सार्वजनिक उपक्रम या सरकारी बैंक में अपने पास मौजूद शेयर्स को आम जनता, शेयर बाजार या किसी बड़ी निजी कंपनी को बेचकर राजस्व जुटाती है, तो इस पूरी वित्तीय प्रक्रिया को विनिवेश का नाम दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी कंपनियों में सरकारी पूंजी को कम करके निजी क्षेत्र की भागीदारी और निवेश को बढ़ावा देना होता है।
राजकोषीय घाटा सुधारने और विकास कार्यों के लिए जरूरी है यह कदम
सरकार द्वारा किसी भी उपक्रम में अपनी हिस्सेदारी बेचने के पीछे कई बेहद ठोस वित्तीय कारण होते हैं। सरकार को देश में बुनियादी ढांचे जैसे सड़कों, आधुनिक अस्पतालों, स्कूलों और अन्य बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के निर्माण के साथ-साथ अपनी पुरानी देनदारियों को चुकाने के लिए एकमुश्त बड़ी रकम की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, जब सरकार का खर्च उसकी कुल कमाई से अधिक हो जाता है, तो राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए विनिवेश एक मजबूत जरिया बनता है। साथ ही, निजी निवेशकों के आने से बैंक या कंपनी के प्रबंधन में बड़ा सुधार होता है और कार्यशैली अधिक पेशेवर हो जाती है।
सरकार और एलआईसी मिलकर बेचेंगे अपनी बड़ी हिस्सेदारी
वर्तमान में आईडीबीआई बैंक के मालिकाना हक की बात करें तो इसमें भारत सरकार और लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) की हिस्सेदारी सबसे मजबूत है, जो मिलकर कुल इक्विटी का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा संभालते हैं। इस रणनीतिक विनिवेश योजना के तहत दोनों पक्ष मिलकर बैंक का पूरा मैनेजमेंट कंट्रोल सौंपने के साथ कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं। इस प्रस्तावित सौदे के अंतर्गत केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी का सौदा करेगी, जबकि जीवन बीमा निगम अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बाजार में बेचेगा।
कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स रेस में सबसे आगे
इस बहुचर्चित बैंक को खरीदने और इसके अधिग्रहण की रेस में एक बड़ी विदेशी फर्म का नाम सबसे आगे चल रहा है। कनाडाई मूल की दिग्गज वित्तीय कंपनी 'फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स' इस हिस्सेदारी को खरीदने के लिए मुख्य दावेदार के रूप में उभरी है। फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स ने इस प्रस्तावित सौदे के लिए अपना 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EoI) भी दाखिल कर दिया है और वह बोली लगाने वाले रणनीतिक खरीदारों की सूची में शामिल है। यदि यह सौदा तय मानदंडों के अनुसार पूरा होता है, तो आईडीबीआई बैंक के पूर्ण निजीकरण का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।
₹9813 करोड़ का SBI Funds Management IPO लॉन्च, GMP में गिरावट से बढ़ी चिंता
14 Jul, 2026 11:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) आज से आम निवेशकों के लिए खुल चुका है। पहले इस सार्वजनिक निर्गम का कुल आकार ११,६९३ करोड़ रुपये तय किया गया था, लेकिन प्री-आईपीओ राउंड के दौरान करीब ३० बड़े और दिग्गज निवेशकों से १,८८० करोड़ रुपये की राशि सफलतापूर्वक जुटाने के बाद अब इस आईपीओ का शुद्ध आकार घटकर ९,८१३ करोड़ रुपये रह गया है। इस आईपीओ के खुलने के साथ ही घरेलू शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है और निवेशक इस बड़ी कंपनी में हिस्सेदार बनने के लिए काफी उत्सुक नजर आ रहे हैं।
प्राइस बैंड, लॉट साइज और महत्वपूर्ण तारीखों का निर्धारण
कंपनी के ९,८१३ करोड़ रुपये के इस आईपीओ के लिए मूल्य दायरा यानी प्राइस बैंड ५४५ रुपये से लेकर ५७४ रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। खुदरा निवेशकों के लिए न्यूनतम लॉट साइज २६ शेयरों का रखा गया है, जिसका मतलब है कि निवेशकों को कम से कम एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा। कंपनी ने अपने और मूल बैंक एसबीआई के पात्र कर्मचारियों को प्रति शेयर ५४ रुपये की विशेष छूट देने की घोषणा की है, हालांकि एसबीआई के आम शेयरधारकों के लिए कोई अतिरिक्त छूट नहीं रखी गई है। यह आईपीओ निवेश के लिए १४ जुलाई से १६ जुलाई तक खुला रहेगा, जिसके बाद १७ जुलाई को शेयरों का आवंटन अंतिम रूप से तय किया जाएगा और २१ जुलाई को बीएसई एवं एनएसई पर इसकी लिस्टिंग होगी।
एंकर निवेशकों से भारी निवेश और ओएफएस का ढांचा
आईपीओ के औपचारिक रूप से खुलने से ठीक पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों के जरिए बाजार से २,६६३ करोड़ रुपये जुटाकर अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। इस एंकर बुक के तहत ब्लैकरॉक, अबूधाबी इंवेस्टमेंट अथॉरिटी, मॉर्गन स्टैनले और गोल्डमैन सैक्स जैसे वैश्विक दिग्गजों को ५७४ रुपये के भाव पर शेयर जारी किए गए हैं, जिनमें कई प्रतिष्ठित घरेलू म्यूचुअल फंड्स भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि इस निर्गम के तहत कोई भी नया शेयर जारी नहीं किया जा रहा है, बल्कि यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) पर आधारित है, जिसमें प्रमोटर एसबीआई और एमुंडी इंडिया होल्डिंग्स अपने पास मौजूद शेयरों की बिक्री कर रहे हैं, जिससे मिलने वाली पूरी राशि सीधे इन्हीं प्रमोटर्स के पास जाएगी।
मजबूत वित्तीय स्थिति और बाजार में कंपनी का दबदबा
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी है, जो मुख्य रूप से एसबीआई और एमुंडी के संयुक्त उद्यम के रूप में काम करती है। वित्तीय प्रदर्शन के लिहाज से कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है और हाल के वर्षों में इसका शुद्ध मुनाफा २१ प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़कर ३,०६७.३८ करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जबकि कुल आय भी २० प्रतिशत के सीएजीआर से बढ़कर ४,९७६.११ करोड़ रुपये हो चुकी है। बाजार में अपनी मजबूत पैठ के चलते यह कंपनी वर्तमान में १६ लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति (एयूएम) का प्रबंधन कर रही है, जो पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग के कुल एयूएम का लगभग १५.५ प्रतिशत हिस्सा है और इसके सक्रिय ग्राहकों की संख्या १.६० करोड़ से अधिक है।
ग्रे मार्केट के बदलते संकेत और ब्रोकरेज हाउसेज का सकारात्मक नजरिया
वर्तमान में ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयरों को लेकर उत्साह थोड़ा नरम पड़ा है और आईपीओ खुलने से ठीक पहले इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (जीएमपी) ऊपरी प्राइस बैंड से लगभग १६.२० प्रतिशत यानी ९३ रुपये के प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है। हालांकि, बाजार के प्रमुख विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों को केवल ग्रे मार्केट के आंकड़ों के बहकावे में आने के बजाय कंपनी के मजबूत फंडामेंटल्स को देखकर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। देश की इस अग्रणी म्यूचुअल फंड कंपनी के मजबूत ब्रांड नेम, एसबीआई के विशाल वितरण नेटवर्क और ऊंचे ऑपरेटिंग मार्जिन को देखते हुए अधिकांश प्रतिष्ठित ब्रोकरेज हाउसेज और स्वास्तिक इंवेस्टमार्ट जैसे विश्लेषकों ने इस आईपीओ को लंबी अवधि के लिए खरीदने यानी 'सब्सक्राइब' करने की स्पष्ट सलाह दी है।
सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट, बैंकिंग सेक्टर की कमजोरी बनी सबसे बड़ी वजह
14 Jul, 2026 09:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी ने घरेलू शेयर बाजार की कमर तोड़कर रख दी है। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के उछलकर प्रति बैरल $80 के पार जाने और $85 के करीब पहुंचने से पूरे एशियाई बाजारों में हड़कंप मच गया। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारतीय शेयर बाजार भी अछूता नहीं रहा और शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक फिसल गया, जबकि निफ्टी टूटकर 24,050 के स्तर पर आ गया। बाजार का दायरा भी बेहद कमजोर नजर आ रहा है, जिसके चलते मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में आधे फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की जा रही है।
वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव बढ़ने और ईरान द्वारा तेल परिवहन के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' को बंद करने की चेतावनी ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया है। इस तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2% बढ़कर $84.98 प्रति बैरल और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 2.1% उछलकर $79.79 प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जिससे आने वाले दिनों में ईंधन और महंगा होने का संकट खड़ा हो गया है।
ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और इंडिया विक्स में आया उछाल
कच्चे तेल में आई इस तेजी ने दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की आशंकाओं को एक बार फिर हवा दे दी है, जिससे अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल देखने को मिला है। बेंचमार्क 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी नोट पर यील्ड बढ़कर 4.618% और 30-वर्षीय बॉन्ड पर यील्ड 5.104% पर पहुंच गई है। इसके साथ ही, भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और घबराहट को मापने वाला सूचकांक 'इंडिया विक्स' (India VIX) भी 3.52% उछलकर 13.75 के स्तर पर पहुंच गया है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बाजार में आने वाले दिनों में भारी वोलैटिलिटी बनी रह सकती है।
बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में चौतरफा बिकवाली का दौर
आज के इस गिरावट वाले सत्र में सबसे ज्यादा मार बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर के शेयरों पर पड़ी है। निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 1% से अधिक की भारी गिरावट देखी जा रही है, जबकि रियल्टी इंडेक्स लगभग डेढ़ फीसदी की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा है। वित्तीय और रियल्टी कंपनियों में बड़े पैमाने पर हो रही मुनाफावसूली ने सूचकांकों को नीचे धकेलने में मुख्य भूमिका निभाई है, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विपरीत परिस्थितियों के बीच आईटी और फार्मा सेक्टर में मामूली राहत
बाजार में चारों तरफ मचे इस हाहाकार के बीच कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में खरीदारी भी देखने को मिल रही है। मेटल और फार्मा सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आधे-आधे फीसदी से अधिक की मजबूती के साथ कारोबार कर रहे हैं। वहीं, आईटी सेक्टर के शेयरों में भी शुरुआती बिकवाली के दबाव के बावजूद हल्की खरीदारी देखी जा रही है, जिससे यह इंडेक्स हरे निशान में बना हुआ है और बाजार को बहुत बड़ी गिरावट की खाई में गिरने से रोकने का प्रयास कर रहा है।
निवेशकों के लिए बड़ी खबर! ICICI प्रूडेंशियल AMC का बढ़ा मुनाफा, मिलेगा ₹12.4 का लाभांश
13 Jul, 2026 05:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। देश की अग्रणी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शुमार आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अपने वित्तीय नतीजों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। अप्रैल से जून 2026 की अवधि के लिए जारी किए गए इन आंकड़ों में कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया है। स्टॉक एक्सचेंजों को सौंपी गई वित्तीय रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने सालाना आधार पर अपने शुद्ध मुनाफे में जबरदस्त बढ़ोतरी हासिल की है, जिसके चलते आज घरेलू शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों में भी अच्छी खासी तेजी देखने को मिली है।
जून तिमाही में शुद्ध मुनाफे में तेईस फीसदी से अधिक का बड़ा उछाल
कंपनी द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 को समाप्त हुई इस तिमाही में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 23 प्रतिशत से अधिक की शानदार विकास दर के साथ आगे बढ़ा है। इस मजबूत प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच भी कंपनी की निवेश रणनीतियां और एसेट मैनेजमेंट का तरीका बेहद प्रभावी साबित हो रहा है। मुनाफे में आई इस बेहतरीन तेजी से न केवल कंपनी प्रबंधन उत्साहित है, बल्कि बाजार के विश्लेषक भी इसे कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति का संकेत मान रहे हैं।
कंपनी का शुद्ध मुनाफा बढ़कर हुआ करीब नौ सौ चौंसठ करोड़ रुपये
आय और लाभ के विस्तृत आंकड़ों पर नजर डालें तो जून 2026 की तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 9,646.3 मिलियन रुपये यानी लगभग 964.6 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। यदि इसकी तुलना पिछले वर्ष यानी जून 2025 को समाप्त हुई समान तिमाही से की जाए, तो उस समय कंपनी ने 7,836.4 मिलियन रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। पिछले साल के मुकाबले मुनाफे का यह आंकड़ा कंपनी की निरंतर वित्तीय प्रगति और निवेशकों के भरोसे को मजबूती से प्रदर्शित करता है।
कुल आय में भी दर्ज की गई भारी बढ़ोतरी और निवेशकों का बढ़ा भरोसा
मुनाफे के साथ-साथ समीक्षाधीन तिमाही के दौरान कंपनी की कुल आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी की कुल आय बढ़कर 17,450.2 मिलियन रुपये के स्तर पर जा पहुंची है, जबकि पिछले वर्ष की इसी समान अवधि में यह आंकड़ा 14,775.2 मिलियन रुपये दर्ज किया गया था। राजस्व के मोर्चे पर मिली यह बड़ी कामयाबी दर्शाती है कि कंपनी के विभिन्न म्यूचुअल फंड प्रोडक्ट्स और निवेश योजनाओं में आम निवेशकों का आकर्षण लगातार बना हुआ है।
शानदार नतीजों के दम पर शेयर बाजार में एक फीसदी से ज्यादा उछला कंपनी का स्टॉक
तिमाही के इन शानदार और उत्साहजनक वित्तीय नतीजों का सीधा और सकारात्मक असर आज शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक पर साफ तौर पर देखने को मिला। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन की बदौलत आज कारोबार के दौरान आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के शेयरों में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी का शेयर 1 फीसदी से अधिक की जोरदार बढ़त के साथ 3,210 रुपये के भाव पर बंद होने में कामयाब रहा। बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी इस शेयर में मजबूती बनी रह सकती है।
राम मंदिर दान चोरी केस में SC का बड़ा कदम, SIT से मांगी जांच की स्टेटस रिपोर्ट
13 Jul, 2026 01:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अयोध्या के ऐतिहासिक राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में हुई कथित वित्तीय हेराफेरी के मामले में देश की सर्वोच्च अदालत ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। सोमवार को हुई एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट का यह सख्त कदम मंदिर के चढ़ावे में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करने वाली विभिन्न याचिकाओं पर आया है।
सर्वोच्च अदालत का कड़ा रुख
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर ट्रस्ट से तीखे सवाल पूछे हैं। अदालत ने मामले की तह तक जाने के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित की गई विशेष जांच दल (एसआईटी) से अब तक की कार्रवाई की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही पीठ ने एसआईटी के गठन की प्रक्रिया और उससे जुड़े तमाम प्रशासनिक दस्तावेजों के रिकॉर्ड भी अदालत के समक्ष पेश करने का कड़ा निर्देश दिया है।
सीलबंद लिफाफे में आएगी रिपोर्ट
इस हाई-प्रोफाइल मामले की कानूनी कार्यवाही के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को आश्वस्त किया कि जांच एजेंसियां पूरी मुस्तैदी से काम कर रही हैं। उन्होंने पीठ को अवगत कराया कि विशेष जांच दल द्वारा तैयार की गई अब तक की प्रगति रिपोर्ट को बेहद गोपनीय तरीके से एक सीलबंद लिफाफे में सीधे अदालत के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। कोर्ट ने इन सभी दलीलों को सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए अगले सोमवार का दिन मुकर्रर किया है, जिसमें याचिकाओं में की गई फॉरेंसिक ऑडिट और सीबीआई जांच की मांगों पर विचार हो सकता है।
अयोध्या में एसआईटी की दोबारा दस्तक
सुप्रीम कोर्ट की इस तल्खी के बीच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल एक बार फिर उत्तर प्रदेश के अयोध्या का रुख करने की तैयारी में है। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अगुवाई में बनी यह कमेटी मंदिर परिसर और प्रशासनिक कार्यालयों का दोबारा दौरा कर सकती है। इस बार एसआईटी का मुख्य फोकस दान प्रबंधन से जुड़े उन अतिरिक्त दस्तावेजों की बारीक कड़ियों को जोड़ना है, जिनमें हेरफेर की आशंका जताई जा रही है।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों से होगी पूछताछ
जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों और दान व्यवस्था की देखरेख करने वाले कर्मचारियों पर भी शिकंजा कस सकता है। एसआईटी की टीम अयोध्या पहुंचकर इन सभी संबंधित लोगों से आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करने की योजना बना रही है। राज्य सरकार द्वारा जांच की अवधि पंद्रह दिनों के लिए बढ़ाए जाने के बाद अधिकारी जल्द से जल्द अपनी अंतिम फॉरेंसिक और प्रशासनिक रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपने की कवायद में जुट गए हैं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
शेयर बाजार में जोरदार वापसी, निचले स्तर से Sensex उछला 900 अंक, Nifty ने छुआ 24,250
13 Jul, 2026 01:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई अनिश्चितता की खबरों से घबराए निवेशकों की बिकवाली के कारण शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 24,000 के बेहद नाजुक स्तर तक लुढ़क गया। हालांकि, इस शुरुआती झटके के बाद घरेलू बाजार ने शानदार जुझारूपन दिखाया और निचले स्तरों से जबरदस्त वापसी करते हुए सेंसेक्स में 900 से अधिक अंकों का उछाल आया और निफ्टी भी 24,250 के पार निकल गया।
बाजार में तगड़ी रिकवरी
शुरुआती मंदी के बाद बाजार में निचले स्तरों पर चौतरफा लिवाली देखने को मिली, जिससे दोपहर के कारोबार तक सेंसेक्स 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,710.56 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी 0.10 फीसदी के सुधार के साथ 24,230.70 अंकों पर कारोबार करता दिखा। व्यापक बाजार में भी सुधार का असर दिखा, जहां निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक अपनी आधे प्रतिशत से अधिक की शुरुआती गिरावट को पूरी तरह पाटकर लगभग स्थिर स्तर पर आ गए, जिसने निवेशकों को बड़ी राहत दी।
विदेशी निवेशकों का बढ़ा भरोसा
भारतीय बाजार को इस उतार-चढ़ाव के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों के लगातार मिल रहे समर्थन से काफी मजबूती मिल रही है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में हजारों करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है, जो देश की मजबूत आर्थिक स्थिति और स्थिर मुद्रा के प्रति उनके बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि एशियाई क्षेत्र के अन्य प्रमुख बाजारों में आई कमजोरी के बीच भारत वैश्विक निवेशकों के लिए एक सुरक्षित और आकर्षक ठिकाने के रूप में उभरा है।
आईटी सेक्टर ने संभाली कमान
जब सुबह के समय बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल था, तब सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी सेक्टर ने बाजार को सहारा देने में सबसे अहम भूमिका निभाई। देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी टीसीएस के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजों ने पूरे सेक्टर के सेंटिमेंट को बदल दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स में आधे फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई और इसके अधिकांश शेयरों में जोरदार उछाल देखने को मिला, जिसने बाजार की गिरावट पर ब्रेक लगाने का काम किया।
अहम तकनीकी स्तर और कच्चे तेल का गणित
बाजार के जानकारों का कहना है कि निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर एक बेहद मजबूत तकनीकी सपोर्ट जोन साबित हुआ है, जहां से बाजार ने तुरंत यू-टर्न ले लिया। विश्लेषकों के मुताबिक जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बनी हुई है, तब तक पश्चिम एशिया के तनाव का भारतीय बाजार पर कोई बहुत बड़ा या स्थायी नकारात्मक असर होने की आशंका नहीं है।
LPG सिलेंडर में बड़ा बदलाव, 10 किलो के कंपोजिट सिलेंडर पर कंपनियों का फोकस
13 Jul, 2026 12:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश के रसोई गैस बाजार में आने वाले दिनों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हर घर की जरूरत बन चुके पारंपरिक 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की जगह अब एक नया विकल्प तेजी से अपनी जगह बनाने की तैयारी में है। सरकारी तेल कंपनियों की एक नई रणनीति ने इस बात की चर्चा तेज कर दी है कि क्या भविष्य में भारी-भरकम सिलेंडरों का दौर धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा।
तेल कंपनियों का नया मास्टर प्लान
सरकारी तेल विपणन कंपनियां इन दिनों घरेलू गैस बाजार को लेकर एक विशेष कार्ययोजना पर काम कर रही हैं। इसके तहत अब 10 किलोग्राम वाले छोटे और हल्के एलपीजी सिलेंडरों के वितरण और बिक्री को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की तैयारी है। कंपनियां इस नए विकल्प को ग्राहकों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए अपनी रणनीतियों में लगातार बदलाव कर रही हैं, जिससे आने वाले समय में उपभोक्ताओं के अनुभव में बड़ा बदलाव आ सकता है।
छोटे सिलेंडर के पीछे की रणनीति
बाजार में 10 किलो वाले इस हल्के सिलेंडर को प्रमोट करने के पीछे कंपनियों का मकसद उपभोक्ताओं को सुविधा देना है। फाइबर या हल्के मटीरियल से बने होने के कारण इन्हें उठाना और एक जगह से दूसरी जगह ले जाना काफी आसान होता है। इसके साथ ही कम वजन होने की वजह से मध्यम और छोटे परिवारों के लिए यह बजट के लिहाज से भी एक बेहतर और आकर्षक विकल्प साबित हो सकता है।
पारंपरिक सिलेंडर का भविष्य
इस नई योजना के सामने आने के बाद से ही आम जनता के बीच इस बात को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि क्या पुराना 14.2 किलो का सिलेंडर पूरी तरह बंद हो जाएगा। हालांकि, तेल कंपनियों से जुड़े सूत्रों की मानें तो वर्तमान में पारंपरिक सिलेंडर को बाजार से हटाने का कोई भी आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि पुराना सिलेंडर फिलहाल बाजार में बना रहेगा और लोगों को अपनी पसंद चुनने की आजादी होगी।
बाजार और उपभोक्ताओं पर असर
कंपनियों का यह कदम एलपीजी मार्केट में रिप्लेसमेंट के तौर पर नहीं, बल्कि एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इस व्यवस्था से उपभोक्ताओं के पास अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सिलेंडर चुनने का मौका होगा। छोटे सिलेंडर की पहुंच बढ़ने से गैस वितरण प्रणाली में भी तेजी आने की उम्मीद है, जिससे आने वाले दिनों में गैस बुकिंग और डिलीवरी की प्रक्रिया और भी ज्यादा आसान हो सकती है।
महाराष्ट्र की लाडकी बहिन योजना में बड़ा बदलाव, लाखों महिलाओं की सहायता राशि रुकी
13 Jul, 2026 11:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार की सबसे चर्चित कल्याणकारी योजना मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राज्य स्तर पर चलाए गए एक बेहद सख्त वेरिफिकेशन अभियान के बाद इस योजना से करीब बानवे लाख लाभार्थियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। यह बड़ी संख्या योजना में शामिल कुल लाभार्थियों का लगभग अड़तीस फीसदी है। इस जांच अभियान में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि केवल महिलाओं के कल्याण के लिए बनाई गई इस योजना का अनुचित लाभ करीब उनतीस हजार पुरुषों ने भी उठाया है, जिसे सरकार ने एक गंभीर लापरवाही और धोखाधड़ी माना है।
जांच अभियान के बाद लाभार्थियों के आंकड़ों में भारी गिरावट
इस गहन वेरिफिकेशन प्रक्रिया के शुरू होने से पहले तक राज्य में लगभग दो करोड़ तिरालीस लाख महिलाओं को इस योजना के तहत नियमित रूप से वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही थी। हालांकि, सरकारी जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आने और अपात्र लोगों की छंटनी किए जाने के बाद अब वास्तविक लाभार्थियों की संख्या घटकर महज डेढ़ करोड़ रह गई है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, जिन अयोग्य और फर्जी लोगों के नाम सूची से काटे गए हैं, उन्हें भुगतान रोके जाने से पहले तक लगभग चौदह हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि बांटी जा चुकी थी।
नियमों के उल्लंघन और अनिवार्य प्रक्रिया न करने पर कटे नाम
योजना से इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण सामने आए हैं। इनमें से लगभग बासठ लाख नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि उन्होंने सरकार के बार-बार निर्देश देने के बावजूद अपनी अनिवार्य ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की थी। इसके साथ ही करीब सोलह लाख लाभार्थी ऐसे पाए गए जिनके परिवार की सालाना आय तय सीमा यानी ढाई लाख रुपये से अधिक थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि लगभग सवा चार लाख मामलों में लाभार्थी के परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में था और करीब साढ़े तीन लाख महिलाएं पहले से ही संजय गांधी निराधार योजना जैसी अन्य योजनाओं का दोहरा लाभ ले रही थीं। इसके अलावा एक ही परिवार से कई महिलाओं द्वारा लाभ लेने, उम्र सीमा पार होने और पुरुषों के खातों में राशि ट्रांसफर होने जैसे बड़े उल्लंघन पकड़े गए हैं।
वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठने के बाद सरकार ने की सख्त कार्रवाई
राज्य सरकार ने यह कदम देश की शीर्ष ऑडिट संस्था द्वारा योजना के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए जाने के बाद उठाया है। ऑडिट रिपोर्ट में बिना किसी उचित कारण के करोड़ों रुपये के अतिरिक्त खर्च और वित्तीय नियंत्रण में ढिलाई को लेकर प्रशासन को आगाह किया गया था। इस चेतावनी के बाद डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से जुड़ी योजनाओं को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए सरकार हरकत में आई। शासन ने अब पूरी तरह साफ कर दिया है कि जानबूझकर धोखाधड़ी करने वाले अयोग्य लोगों, सरकारी कर्मचारियों और फर्जी दस्तावेज लगाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने ऐसे सभी गलत लोगों से रेवेन्यू रिकवरी रसीद के तहत दी गई राशि को वापस वसूलने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और सभी जिला कलेक्टरों को इस मामले में सख्ती से निपटने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
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