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Berger Paints के शेयर 9% बढ़े, ग्रास मार्जिन पर जश्न का माहौल
13 May, 2026 12:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। देश की प्रमुख पेंट निर्माता कंपनी बर्जर पेंट्स के लिए आज का कारोबारी सत्र खुशियों की सौगात लेकर आया है। पिछले वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही के दौरान कंपनी ने वॉल्यूम ग्रोथ और मार्जिन में जो जबरदस्त सुधार दिखाया है, उससे निवेशकों का उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच गया। इस शानदार वित्तीय प्रदर्शन के दम पर 'डुलक्स' ब्रांड के स्वामित्व वाली इस कंपनी के शेयरों में आज 9 प्रतिशत से अधिक की तूफानी तेजी दर्ज की गई। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली का रुख अपनाया, जिससे भाव में हल्की नरमी आई, लेकिन निचले स्तरों पर खरीदारों की सक्रियता ने स्टॉक को अब भी मजबूती के साथ हरे निशान में बनाए रखा है।
मजबूत मुनाफे और राजस्व वृद्धि से मिली बाजार को दिशा
मार्च 2026 में समाप्त हुई तिमाही के वित्तीय आंकड़े कंपनी की मजबूत कारोबारी सेहत की गवाही दे रहे हैं, जहां वार्षिक आधार पर राजस्व में 6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। शुद्ध मुनाफे के मामले में कंपनी ने लंबी छलांग लगाते हुए 28 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है, जो अब बढ़कर 335 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि कंपनी का ग्रास मार्जिन पिछले 12 तिमाहियों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कच्चे माल की लागत और परिचालन कुशलता के मोर्चे पर बर्जर पेंट्स ने उत्कृष्ट प्रबंधन का परिचय दिया है।
बाजार हिस्सेदारी और विभिन्न सेगमेंट में शानदार पकड़
भारतीय पेंट बाजार में अपनी करीब 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी को मजबूती से बरकरार रखते हुए कंपनी ने कंस्ट्रक्शन केमिकल्स और वाटरप्रूफिंग जैसे क्षेत्रों में भी अपनी पैठ गहरी की है। ऑटोमोटिव कोटिंग्स और प्रोटेक्टिव कोटिंग्स जैसे विशिष्ट सेगमेंट में भी वॉल्यूम के मामले में दोहरे अंकों की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार भी तेजी से हुआ है, जिसके तहत अब खुदरा स्टोर्स की संख्या 1,900 के करीब पहुंच गई है, जो भविष्य में बाजार पहुंच को और अधिक सुदृढ़ बनाने का संकेत दे रही है।
आगामी वित्त वर्ष के लिए रणनीतिक तैयारी और सतर्कता
भविष्य की संभावनाओं को लेकर कंपनी प्रबंधन का मानना है कि हाल ही में की गई कीमतों में बढ़ोतरी से आगामी तिमाहियों में मार्जिन को और अधिक सहारा मिलेगा। हालांकि, बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए कंपनी ने निवेशकों को आगाह भी किया है कि वे मांग के रुझानों पर निरंतर नजर बनाए रखेंगे। पेंट क्षेत्र में बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के बीच बर्जर पेंट्स अपनी नई मशीनों और विस्तारित नेटवर्क के जरिए अपनी बढ़त को कायम रखने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है, जिससे लॉन्ग टर्म निवेशकों में सकारात्मक संदेश गया है।
शेयरों के ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव और सुधार के संकेत
पिछले एक साल के दौरान बर्जर पेंट्स के शेयरों ने निवेशकों को काफी उतार-चढ़ाव दिखाए हैं, जहां जुलाई 2025 में यह अपने शिखर पर था और मार्च 2026 तक आते-आते इसमें बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। रिकॉर्ड निचले स्तरों को छूने के बाद अब जिस तरह से शेयरों ने वापसी की है, वह तकनीकी रूप से एक मजबूत रिकवरी का संकेत दे रही है। आज की इस बड़ी तेजी ने उन निवेशकों को राहत दी है जो लंबे समय से स्टॉक में स्थिरता की उम्मीद कर रहे थे, और अब बाजार की नजरें कंपनी की भविष्य की विस्तार योजनाओं पर टिकी हुई हैं।
बिड़ला का हाथ, वीआई शेयर ने किया 52 हफ्तों का रिकॉर्ड
13 May, 2026 11:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी वोडाफोन आइडिया के शेयरों में आज जबरदस्त तेजी का रुख देखने को मिल रहा है। कारोबारी सत्र की शुरुआत सामान्य बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन जैसे ही बाजार में प्रमोटरों द्वारा कंपनी में नई पूंजी निवेश करने की खबर आई, निवेशकों ने जमकर खरीदारी शुरू कर दी। सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आ रही है कि कंपनी के नॉन-एग्जिक्यूटिव चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला स्वयं इस संकटग्रस्त टेलीकॉम कंपनी में ताजी पूंजी डालने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे कंपनी के भविष्य को लेकर निवेशकों का भरोसा एक बार फिर लौट आया है।
पूंजी निवेश की खबर से शेयर बाजार में भारी उछाल
वोडाफोन आइडिया के शेयरों ने आज बाजार में नई ऊंचाइयों को छुआ है और शुरुआती सुस्ती के बाद इसमें करीब 7 प्रतिशत की बड़ी बढ़त दर्ज की गई है। सुबह के समय शेयर मामूली बढ़त के साथ खुला था, परंतु बिड़ला समूह द्वारा फंड डाले जाने की सूचना मिलते ही भाव 12.72 रुपये के स्तर तक जा पहुंचे। पिछले एक महीने के प्रदर्शन पर नजर डालें तो कंपनी का स्टॉक लगभग 38 फीसदी तक चढ़ चुका है, जिससे उन निवेशकों को बड़ी राहत मिली है जो लंबे समय से निचले स्तरों पर निवेश कर फंसे हुए थे।
वित्तीय संकट के बीच परिचालन सुधारने की कवायद
कंपनी को वर्तमान में अपने दैनिक परिचालन को सुचारू रखने और तकनीक को उन्नत करने के लिए बड़े पैमाने पर फंड की आवश्यकता है। नए उपकरणों की खरीद और 5G विस्तार जैसे लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कंपनी पहले से ही भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाले बैंकिंग कंसोर्शियम के साथ ऋण के लिए बातचीत कर रही है। प्रमोटरों द्वारा खुद पूंजी लगाने का फैसला बैंकों के सामने भी एक सकारात्मक संदेश भेजेगा, क्योंकि बैंक ऋण देने के लिए कंपनी के सामने प्रमोटरों की प्रतिबद्धता जैसी कुछ कड़ी शर्तें रख रहे थे।
कुमार मंगलम बिड़ला की सक्रियता से लौटा आत्मविश्वास
एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी एजीआर के मामले में मिली राहत के बाद कुमार मंगलम बिड़ला की नॉन-एग्जिक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर वापसी ने कंपनी के भीतर और बाहर आत्मविश्वास को नई ऊर्जा दी है। पिछले सप्ताह रवींदर टक्कर के स्थान पर उनकी नियुक्ति को बाजार ने एक टर्निंग पॉइंट के रूप में लिया है। अब बिड़ला के स्वयं निवेश करने की संभावनाओं ने बैंकों की दिलचस्पी भी वोडाफोन आइडिया को लोन देने में बढ़ा दी है, जिससे कंपनी के लिए फंड जुटाने की राह अब पहले से कहीं अधिक आसान नजर आ रही है।
भविष्य की चुनौतियां और बाजार की उम्मीदें
हालांकि कंपनी को अभी भी एक लंबी दूरी तय करनी है, लेकिन वर्तमान घटनाक्रम ने उसे एक मजबूत आधार प्रदान किया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमोटरों का समर्थन और एजीआर जैसे कानूनी मामलों में सुधरती स्थिति कंपनी को अपनी बाजार हिस्सेदारी बचाने और नई तकनीक को अपनाने में मदद करेगी। फिलहाल निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रमोटरों द्वारा निवेश की जाने वाली राशि कितनी होगी और आगामी तिमाहियों में कंपनी अपने तकनीकी अपग्रेडेशन के जरिए ग्राहकों को कैसे जोड़ पाती है।
Sensex की बड़ी गिरावट, निवेशकों में बढ़ी बेचैनी
13 May, 2026 10:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में आज के कारोबारी सत्र की शुरुआत सकारात्मक संकेतों के साथ हुई, लेकिन ऊपरी स्तरों पर टिकने में नाकाम रहने के कारण बाजार में अचानक उतार-चढ़ाव का दौर शुरू हो गया। शुरुआती घंटों में एशियाई बाजारों की मजबूती का सहारा लेते हुए सेंसेक्स और निफ्टी ने क्रमशः 74,950 और 23,500 के महत्वपूर्ण स्तरों को पार किया, परंतु कुछ ही समय में निवेशकों द्वारा की गई चौतरफा मुनाफावसूली ने इस बढ़त को पूरी तरह धो दिया। वर्तमान स्थिति में दोनों ही प्रमुख सूचकांक लाल निशान के साथ कारोबार कर रहे हैं, जिससे निवेशकों में बेचैनी बढ़ गई है।
कच्चे तेल की कीमतों और इंडिया विक्स का अनिश्चित प्रभाव
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई मामूली गिरावट ने सुबह के समय भारतीय शेयर बाजार को कुछ राहत प्रदान की थी, लेकिन ब्रेंट क्रूड का अभी भी 107 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहना अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसके साथ ही बाजार की अस्थिरता को मापने वाला 'इंडिया विक्स' शुरुआती नरमी के बाद अचानक उछलकर 19 के स्तर को पार कर गया है, जिसने निवेशकों के आत्मविश्वास को हिलाकर रख दिया है। डर के इस सूचकांक में आई बढ़त के कारण लोग जोखिम लेने से बच रहे हैं और बाजार से अपनी पूंजी सुरक्षित बाहर निकालने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सोने-चांदी पर आयात शुल्क का बाजार की धारणा पर असर
केंद्र सरकार द्वारा सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने के फैसले ने भी बाजार की रौनक कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इस अप्रत्याशित कदम से न केवल आभूषण क्षेत्र की कंपनियों पर दबाव बढ़ा है, बल्कि इसने बाजार की समग्र धारणा को भी प्रभावित किया है। आयात शुल्क में इस ढाई गुना बढ़ोतरी को वित्तीय विशेषज्ञ बाजार के लिए एक नकारात्मक संकेत मान रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं से जुड़ी ट्रेडिंग और संबंधित शेयरों में बिकवाली का दबाव गहरा गया है।
मुनाफावसूली की होड़ और बैंकिंग शेयरों में भारी गिरावट
बाजार में आई शुरुआती तेजी को भुनाने के उद्देश्य से निवेशकों ने ऊंचे भावों पर जमकर मुनाफावसूली की, जिसके चलते सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से करीब 850 अंक नीचे गिर गया। सबसे ज्यादा नुकसान सरकारी बैंकों के शेयरों में देखा जा रहा है, जहां निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में एक प्रतिशत से भी अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी का रुख बना हुआ है, जिससे स्पष्ट हो रहा है कि छोटे और मझोले शेयरों के साथ-साथ दिग्गज कंपनियों में भी बिकवाली हावी है।
बाजार में भविष्य की दिशा और तकनीकी चुनौतियां
सूचकांकों के अपने सर्वोच्च स्तरों से फिसलने के बाद तकनीकी रूप से बाजार अब एक नाजुक मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निफ्टी और सेंसेक्स अपने मौजूदा निचले स्तरों को संभालने में नाकाम रहते हैं, तो गिरावट का यह सिलसिला और भी बढ़ सकता है। फिलहाल ट्रेडर्स की नजरें वैश्विक संकेतों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की अगली चाल पर टिकी हैं क्योंकि ब्रॉडर मार्केट में स्मॉलकैप और मिडकैप सेगमेंट में भी वैसी ही बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है जो फ्रंटलाइन इंडेक्स में मौजूद है।
सोने-चांदी की इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ी, निवेशकों में हलचल
13 May, 2026 10:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती देने और कीमती धातुओं के बेलगाम आयात पर नियंत्रण कसने के उद्देश्य से सोना-चांदी खरीदने वालों को बड़ा झटका दिया है। सरकार ने इन बहुमूल्य धातुओं पर लगने वाले आयात शुल्क में भारी वृद्धि करते हुए इसे 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधा 15 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले के तहत मूल सीमा शुल्क को 10 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर को 5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। सरकार के इस सख्त कदम का असर घरेलू बाजार पर तुरंत देखने को मिला है, जहां एमसीएक्स पर सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल दर्ज किया गया है।
घरेलू बाजार में कीमतों का ऐतिहासिक उछाल और निवेशकों की हलचल
आयात शुल्क में वृद्धि की खबर फैलते ही भारतीय बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों ने आसमान छूना शुरू कर दिया है। एमसीएक्स पर सोने का वायदा भाव करीब 6 प्रतिशत की बढ़त के साथ एक लाख बासठ हजार रुपए के पार पहुंच गया है, वहीं चांदी में भी 6 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई जो लगभग दो लाख छियानवे हजार रुपए के स्तर पर कारोबार कर रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतें प्रति दस ग्राम 1.70 लाख रुपए और चांदी प्रति किलोग्राम 3 लाख रुपए के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर सकती हैं, जिससे आम खरीदारों की जेब पर सीधा बोझ बढ़ना तय है।
अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और अमेरिकी मुद्रास्फीति का प्रभाव
घरेलू बाजार में तेजी के विपरीत वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पश्चिम एशिया के तनाव और अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा महंगाई के आंकड़ों ने ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को कम कर दिया है, जिसके चलते वहां स्पॉट गोल्ड की कीमतों में नरमी देखी जा रही है। भारतीय बाजार में छाई यह तेजी पूरी तरह से सरकार द्वारा ड्यूटी बढ़ाए जाने का परिणाम है, जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव को भी बेअसर कर रही है और घरेलू निवेशकों के लिए नए समीकरण पैदा कर रही है।
शेयर बाजार में गिरावट और बढ़ती महंगाई का खतरा
कीमती धातुओं पर टैक्स बढ़ाए जाने का नकारात्मक असर ज्वैलरी क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ा है, जहां कल्याण ज्वैलर्स जैसे बड़े स्टॉक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि सरकार का यह कदम केवल सोने-चांदी तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार अब पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में संभावित बड़ी वृद्धि को लेकर भी आशंकित है। विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि सरकार ने तेल कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए, तो देश में महंगाई का एक बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है जो शेयर बाजार के लिए आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती बनेगा।
ब्रोकर्स की बढ़ती मुश्किलें और कमोडिटी बाजार के नए अवसर
आयात शुल्क में अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने कमोडिटी ब्रोकर्स और उनके क्लाइंट्स के सामने मार्जिन को लेकर बड़ी समस्या खड़ी कर दी है क्योंकि कीमतों में अचानक आए उछाल के कारण अतिरिक्त मार्जिन की तत्काल व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालांकि, इस अनिश्चितता के बीच भी बाजार विशेषज्ञ सोने और चांदी में गिरावट आने पर खरीदारी की सलाह दे रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि तेजी का यह रुख लंबी अवधि तक बना रह सकता है। दूसरी ओर, बेस मेटल्स जैसे कॉपर और नैचुरल गैस में भी हल्की बढ़त देखी जा रही है, जबकि क्रूड ऑयल की कीमतों में कुछ नरमी के संकेत मिल रहे हैं।
UPL Q4 नतीजों के बाद शेयर में दबाव, एक्सपर्ट से समझें क्या करना चाहिए
12 May, 2026 03:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को एग्रोकेमिकल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी यूपीएल (UPL) के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर कंपनी का स्टॉक लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹629.50 के स्तर पर आ गया। हैरानी की बात यह है कि शेयरों में यह गिरावट तब देखी गई जब कंपनी ने मार्च 2026 की तिमाही में मुनाफे के मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन किया है।
मुनाफे में 18 फीसदी का दमदार उछाल
यूपीएल द्वारा जारी तिमाही नतीजों के अनुसार, मार्च 2026 की तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ (Consolidated Net Profit) ₹1,061 करोड़ रहा। यह पिछले साल की इसी तिमाही के ₹896 करोड़ के मुकाबले 18 प्रतिशत अधिक है। यदि पिछली तिमाही (दिसंबर 2025) से तुलना करें, तो कंपनी के मुनाफे में 168 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़त दर्ज की गई है, जो कंपनी की मजबूत रिकवरी को दर्शाता है।
मार्जिन और एबिटडा में गिरावट से निवेशक चिंतित
मुनाफा बढ़ने के बावजूद ऑपरेशनल मोर्चे पर कंपनी को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। कंपनी की ब्याज, टैक्स और डेप्रिसिएशन से पहले की कमाई (Ebitda) 13 प्रतिशत घटकर ₹3,646 करोड़ रह गई। इसके साथ ही एबिटडा मार्जिन में भी 90 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है, जो अब 19.9 प्रतिशत पर सिमट गया है। जानकारों का मानना है कि मार्जिन में आई इसी कमी के कारण निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपनाया।
शेयरधारकों के लिए डिविडेंड की सिफारिश
बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कंपनी के बोर्ड ने अपने शेयरधारकों को राहत देते हुए ₹6 प्रति इक्विटी शेयर के डिविडेंड (लाभांश) की सिफारिश की है। ₹2 की फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर यह 300 प्रतिशत का रिटर्न होगा। हालांकि, इस लाभांश के भुगतान के लिए आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में सदस्यों की औपचारिक मंजूरी मिलना अनिवार्य है।
बाजार की तुलना में स्टॉक का प्रदर्शन
बीते एक साल के आंकड़ों को देखें तो यूपीएल का शेयर निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। सालाना आधार पर स्टॉक में करीब 15.8 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि इसी अवधि के दौरान निफ्टी-50 (Nifty50) में केवल 8.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दोपहर के कारोबार में स्टॉक अपने पिछले क्लोजिंग ₹669 से टूटकर ₹629.50 पर संघर्ष करता नजर आया।
एआई पर जोर, खर्च में रिकॉर्ड, मेटा ने 8000 कर्मचारियों को किया बाहर
12 May, 2026 01:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी बदलावों के बीच टेक दिग्गज कंपनी 'मेटा' एक बार फिर बड़े बदलाव की तैयारी में है। फेसबुक की पेरेंट कंपनी 20 मई को अपने 8,000 कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है। सीईओ मार्क जुकरबर्ग अब कंपनी को पूरी तरह से एआई (AI) पर केंद्रित कर रहे हैं, जिससे टेक जगत में हलचल मच गई है। जुकरबर्ग का स्पष्ट मानना है कि भविष्य में केवल वही कर्मचारी टिक पाएंगे जो एआई टूल्स की मदद से बड़े प्रोजेक्ट्स को अकेले संभालने का दम रखते हैं।
एआई के चलते बदला कंपनी का ढांचा
मेटा अब 'अल्ट्राफ्लैट' वर्किंग कल्चर की ओर बढ़ रही है, जहां 50 इंजीनियरों की टीम पर केवल एक मैनेजर होगा। जुकरबर्ग के अनुसार, जो काम पहले दर्जनों इंजीनियर महीनों में करते थे, अब उसे एक-दो लोग एआई की मदद से कुछ ही दिनों में पूरा कर रहे हैं। इसी कार्यकुशलता को देखते हुए कंपनी अपनी टीमों को छोटा और अधिक उत्पादक बना रही है। यह फैसला केवल खर्चे घटाने के लिए नहीं, बल्कि मेटा को भविष्य के लिए तैयार करने का एक रणनीतिक कदम है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश और बाजार की चिंता
मेटा इस साल अपने डेटा सेंटर, कस्टम चिप्स और एआई मॉडल ट्रेनिंग पर 125 से 145 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रही है। कंपनी की मुख्य वित्तीय अधिकारी सुसान ली के मुताबिक, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च पिछले साल की तुलना में दोगुना हो गया है। इसी भारी खर्च और कर्मचारियों के वेतन के बीच संतुलन बनाने के लिए छंटनी का यह कड़ा फैसला लिया गया है। हालांकि, इस अनिश्चितता के कारण निवेशकों में घबराहट देखी गई और मेटा के शेयरों में 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
कर्मचारियों की निगरानी और गिरता मनोबल
कंपनी के भीतर का माहौल काफी तनावपूर्ण है क्योंकि मेटा ने कर्मचारियों की निगरानी के लिए 'मॉडल कैपेबिलिटी इनिशिएटिव' जैसे सख्त टूल लागू किए हैं। यह टूल कर्मचारियों के कीस्ट्रोक्स और माउस मूवमेंट तक को ट्रैक कर रहा है ताकि एआई एजेंटों को प्रशिक्षित किया जा सके। जुकरबर्ग भले ही इसे क्षमता बढ़ाने वाला बदलाव कह रहे हों, लेकिन इन सख्त नियमों और नौकरियों पर मंडराते खतरे के कारण कर्मचारियों का मनोबल अपने निचले स्तर पर पहुंच गया है।
तकनीकी क्षेत्र में भविष्य की नई दिशा
मेटा की यह नई रणनीति तकनीकी क्षेत्र में काम करने के पारंपरिक तरीके को पूरी तरह से बदल रही है। कंपनी का साफ संदेश है कि भविष्य उन्हीं का है जो एआई उपकरणों के साथ तालमेल बिठाकर तेजी से काम कर सकते हैं। विशेषज्ञ अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि बुनियादी ढांचे पर किया जा रहा यह अरबों डॉलर का निवेश और टीमों का यह नया स्वरूप भविष्य में कंपनी को कितना आर्थिक लाभ पहुंचा पाता है।
चांदी में उछाल, डॉलर कमजोर होने से निवेशकों को मिला भरोसा
12 May, 2026 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी मुद्रा (डॉलर) में आई गिरावट के चलते भारतीय बाजारों में आज चांदी और सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अस्थिरता और मिडिल ईस्ट के बिगड़ते हालातों ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश के लिए कीमती धातुओं की ओर आकर्षित किया है। मंगलवार को भारतीय बाजार (MCX) पर चांदी की कीमतें 1.5% की बढ़त के साथ ₹2,82,463 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गईं, जबकि सोना भी 0.3% चढ़कर ₹1,54,150 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है।
1. वैश्विक संघर्ष और कच्चे तेल की सप्लाई का असर
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी जुबानी जंग और शांति प्रस्तावों पर असहमति के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, जिससे भविष्य में महंगाई और तेज होने की आशंका है। इसी अनिश्चितता के माहौल में ट्रेडर्स अब डॉलर के मुकाबले सोने और चांदी को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
2. कमजोर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में गिरावट से मिला सहारा
अमेरिकी डॉलर की मजबूती में कमी और बॉन्ड यील्ड के गिरने से बुलियन मार्केट (सोना-चांदी) को अतिरिक्त मजबूती मिली है। आमतौर पर जब डॉलर कमजोर होता है, तो विदेशी खरीदारों के लिए सोना-चांदी खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे इनकी मांग बढ़ जाती है। साथ ही, निवेशक अब अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे फेडरल रिजर्व के भविष्य के ब्याज दरों की दिशा तय होगी।
3. भविष्य का अनुमान: क्या जारी रहेगी यह तेजी?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में आई यह तेजी फिलहाल एक सीमित दायरे में रह सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी वर्तमान में अपनी ऊपरी सीमा को छू चुकी है और जल्द ही इसमें कुछ सुधार (Correction) देखा जा सकता है। सोने के लिए भी यही अनुमान लगाया जा रहा है कि पिछले हफ्ते के उच्चतम स्तर को छूने के बाद अब बाजार में मुनाफावसूली (Profit-booking) हावी हो सकती है, जिससे कीमतें वापस निचले स्तरों की ओर आ सकती हैं। इसके अलावा, ट्रंप और शी जिनपिंग की आगामी बैठक के नतीजों पर भी बाजार की पैनी नजर रहेगी।
दलाल स्ट्रीट पर मायूसी: सेंसेक्स 500 अंक फिसला, निफ्टी भी टूटा
12 May, 2026 11:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन मंदी का माहौल
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है और मंगलवार को भी प्रमुख सूचकांकों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। शुरुआती सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 525.44 अंकों की कमजोरी के साथ 75,489.84 के स्तर पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 164.5 अंक फिसलकर 23,651.35 पर पहुंच गया। सोमवार की बड़ी गिरावट के बाद मंगलवार को भी निवेशकों में घबराहट का माहौल बना रहा, जिसका सबसे ज्यादा असर आईटी सेक्टर पर पड़ा, जहाँ इंफोसिस और एशियन पेंट्स जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक तनाव और कच्चे तेल में उछाल ने बिगाड़ा गणित
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया में गहराता युद्ध का संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुख्य वजह मानी जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 105.2 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जिससे भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ गया है और रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 95.63 पर आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज करने और युद्धविराम की उम्मीदें धूमिल होने के बयानों ने वैश्विक निवेशकों के भरोसे को चोट पहुंचाई है, जिसके चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बाजार से भारी मात्रा में अपनी पूंजी निकालनी शुरू कर दी है।
सेक्टरवार नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का मिला-जुला रुख
बाजार की इस उठापटक में तकनीकी और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है, जिनमें टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसी कंपनियां शामिल हैं। हालांकि, इस भारी बिकवाली के बीच भारती एयरटेल और एनटीपीसी जैसे शेयरों ने मजबूती दिखाते हुए निवेशकों को कुछ राहत दी। वैश्विक स्तर पर एशियाई बाजारों में स्थिति मिली-जुली रही, जहाँ एक ओर चीन और दक्षिण कोरिया के बाजार गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, वहीं जापान और हांगकांग के बाजारों में मामूली बढ़त देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक खाड़ी देशों में संघर्ष की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी।
बचत से विकास तक: खर्चों में कटौती से देश को मिलेगा 5.6 लाख करोड़ का फायदा
12 May, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आयात बोझ कम करने के लिए व्यवहारिक बदलाव की जरूरत
नई दिल्ली। ईरान संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उछाल ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इस संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल के संयमित उपयोग, सोने की खरीद टालने और विदेश यात्राओं में कटौती करने का आग्रह किया है। आर्थिक विश्लेषणों के अनुसार, यदि देश इन अपीलों पर गंभीरता से अमल करता है, तो भारत एक वर्ष के भीतर लगभग 59.2 अरब डॉलर यानी करीब 5.6 लाख करोड़ रुपये की विशाल विदेशी मुद्रा बचाने में सक्षम हो सकता है। यह अनुमान वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कच्चा तेल, सोना, उर्वरक और खाद्य तेल के आयात पर हुए भारी खर्च के आंकड़ों पर आधारित है।
ईंधन और स्वर्ण आयात में कटौती से मिलेगी बड़ी राहत भारत सरकार का प्राथमिक लक्ष्य ईंधन की खपत में कम से कम 20 प्रतिशत तक की कमी लाना है, जिससे सालाना 27 अरब डॉलर की सीधी बचत संभव है। कच्चे तेल के आयात पर भारत ने बीते वित्त वर्ष में 135 अरब डॉलर खर्च किए हैं, जो अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ है। इसी तरह सोने के प्रति भारतीयों के गहरे लगाव के कारण बीते वर्ष 72 अरब डॉलर का सोना आयात किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की मांग में मात्र 10 प्रतिशत की भी गिरावट आती है, तो देश को 7.2 अरब डॉलर की अतिरिक्त बचत होगी। हालांकि, सांस्कृतिक और निवेश संबंधी कारणों से सोने की मांग को कम करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, लेकिन वर्तमान आर्थिक स्थितियों को देखते हुए इसमें संयम आवश्यक हो गया है।
बढ़ता व्यापार घाटा और भविष्य की आर्थिक रणनीति आंकड़े बताते हैं कि भारत का स्वर्ण आयात बिल पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है, जो वित्त वर्ष 2022-23 के 35 अरब डॉलर से बढ़कर अब 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस बेतहाशा वृद्धि ने व्यापार घाटे को 333.2 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचा दिया है, जिससे चालू खाता घाटा भी प्रभावित हो रहा है। सरकार की योजना केवल तेल और सोने तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य तेल में 10 प्रतिशत और उर्वरक आयात में 50 प्रतिशत की कटौती कर क्रमशः 1.95 अरब डॉलर और 7.3 अरब डॉलर बचाने की भी है। इसके अतिरिक्त, विदेशी यात्राओं पर खर्च होने वाले 15.8 अरब डॉलर को रोककर विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती प्रदान की जा सकती है ताकि वैश्विक अस्थिरता के समय रुपया और देश की अर्थव्यवस्था सुरक्षित रहे।
डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपया बना चुनौती, $5 ट्रिलियन इकॉनमी लक्ष्य पर संकट
12 May, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आर्थिक विकास की रफ्तार और मुद्रा अवमूल्यन का प्रभाव
मुंबई: ईरान संकट के चलते वैश्विक स्तर पर पैदा हुई अस्थिरता का सीधा असर अब भारतीय मुद्रा पर दिखने लगा है, जहाँ रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 95 के स्तर से नीचे चला गया है। एसबीआई रिसर्च की होलिया रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि यदि रुपये की स्थिति इसी स्तर पर बनी रहती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था का कुल आकार सिमटकर 4.04 लाख करोड़ डॉलर रह जाएगा। ऐसी स्थिति में भारत के 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य साल 2029-30 से पहले पूरा होना बेहद कठिन नजर आ रहा है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बाहरी कारकों और बाजार में अनियंत्रित सट्टेबाजी ने रुपये की सेहत बिगाड़ी है, जिससे निपटने के लिए अब भुगतान संतुलन के मोर्चे पर ठोस संरचनात्मक बदलाव करने की तत्काल आवश्यकता है।
भुगतान संतुलन सुधारने के लिए नीतिगत उपायों की दरकार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने और परिवहन व बीमा लागत में हुई भारी बढ़ोतरी ने देश के आर्थिक संतुलन को बिगाड़ दिया है। इस गंभीर समस्या से उबरने के लिए विशेषज्ञों ने एक व्यापक नीतिगत पैकेज लागू करने का सुझाव दिया है, जिसमें विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए विशेष बॉन्ड जारी करना एक प्रभावी विकल्प हो सकता है। यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में की गई उस अपील के बाद आई है जिसमें उन्होंने नागरिकों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद पर लगाम लगाने और विदेश यात्राओं को कुछ समय के लिए टालने का आग्रह किया था ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके और निर्यात की प्रतिस्पर्धी क्षमता को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान की जा सके।
जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान और भविष्य की संभावनाएँ
अर्थव्यवस्था के भविष्य के आकलन को लेकर एसबीआई रिसर्च ने अनुमान जताया है कि चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत के आसपास बनी रह सकती है। हालांकि, अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर की रफ्तार थोड़ी धीमी होकर 6.6 प्रतिशत रहने की संभावना है, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह आंकड़ा 7.5 प्रतिशत के स्तर को छू सकता है। आगामी 29 मई को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी होने वाले वार्षिक जीडीपी के अस्थायी अनुमानों पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यही आंकड़े तय करेंगे कि आने वाले समय में भारतीय बाजार और विकास दर वैश्विक चुनौतियों का सामना किस मजबूती के साथ कर पाएंगे।
जेब पर पड़ेगी डबल मार, खाने-पीने और घरेलू सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं
11 May, 2026 11:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: रसोई के बजट पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ने वाली है। साबुन, डिटर्जेंट, बिस्कुट और पैकेट बंद खाद्य पदार्थों जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामान (FMCG) जल्द ही महंगे होने जा रहे हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, पैकेजिंग सामग्री की लागत में उछाल और ईंधन के महंगे होने से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ गया है, जिसकी भरपाई के लिए अब कीमतों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ोतरी की तैयारी है।
कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स की लागत में भारी उछाल
एफएमसीजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे न केवल कच्चा माल महंगा हुआ है, बल्कि माल ढुलाई और पैकेजिंग के खर्च में भी भारी इजाफा हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है। कंपनियों का कहना है कि वे पहले ही 3 से 5 प्रतिशत तक दाम बढ़ा चुकी हैं, लेकिन लागत का बोझ इतना अधिक है कि आने वाले समय में एक और दौर की मूल्य वृद्धि अनिवार्य हो गई है।
पैकेट का वजन घटाने और खर्चों में कटौती की रणनीति
महंगाई से निपटने के लिए कंपनियां केवल दाम ही नहीं बढ़ा रही हैं, बल्कि 'ग्रामेज कट' यानी पैकेट में सामान की मात्रा घटाने की रणनीति भी अपना रही हैं। इसके साथ ही, विज्ञापनों और प्रमोशन पर होने वाले खर्चों में कटौती की जा रही है और इन्वेंट्री मैनेजमेंट को अधिक कुशल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, कंपनियां 5, 10 और 15 रुपये वाले छोटे पैक की कीमतों और वजन को स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं ताकि निम्न और मध्यम आय वर्ग के ग्राहकों पर सीधा असर न पड़े।
दिग्गज कंपनियों के प्रमुखों ने दिए संकेत
उद्योग जगत के बड़े नामों ने मौजूदा स्थिति को बेहद अस्थिर बताया है। हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) के अनुसार, उन पर करीब 8 से 10 प्रतिशत महंगाई का बोझ पड़ा है, जिसके जवाब में कीमतों में कुछ वृद्धि की गई है। डाबर इंडिया और ब्रिटानिया जैसी कंपनियों ने भी स्वीकार किया है कि पैकेजिंग और ईंधन की लागत में 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। नेस्ले इंडिया के प्रबंधन का मानना है कि भविष्य का सटीक अंदाजा लगाना फिलहाल मुश्किल है, इसलिए बाजार की हर परिस्थिति के लिए तैयारी की जा रही है।
उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
आने वाले महीनों में ब्यूटी प्रोडक्ट्स, पेय पदार्थ, और घरेलू उपयोग की अन्य वस्तुओं की कीमतों में 4 से 10 प्रतिशत तक की और बढ़ोतरी देखी जा सकती है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल और कमोडिटी की कीमतों में नरमी नहीं आती है, तो मध्यम वर्ग को अपने मासिक खर्चों में बड़ी कटौती करनी पड़ सकती है। फिलहाल, सभी बड़ी कंपनियां बड़े पैक वाले उत्पादों की कीमतें बढ़ाने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
बुढ़ापे की टेंशन खत्म! UPI से शुरू करें पेंशन खाता
11 May, 2026 11:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत में अगले एक दशक के भीतर जनसांख्यिकीय बदलाव की एक नई तस्वीर उभरने वाली है। वर्ष 2036 तक देश में बुजुर्गों की जनसंख्या 20 करोड़ के पार पहुंच जाएगी, जो 2011 के मुकाबले दोगुनी होगी। परिवारों के छोटे होने और औसत आयु बढ़ने के साथ ही अब भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का सवाल महत्वपूर्ण हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए पेंशन नियामक (PFRDA) नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है।
'एनपीएस संचय': सरल और सुरक्षित निवेश का नया विकल्प
पेंशन को म्यूचुअल फंड के समान समझने के बजाय उसे एक मजबूत आर्थिक आधार बनाने के लिए 'एनपीएस संचय' योजना शुरू की जा रही है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए डिज़ाइन की गई है जो निवेश के जटिल विकल्पों (जैसे इक्विटी या बॉन्ड के चयन) में नहीं पड़ना चाहते। यह ढांचा 2004 से सरकारी कर्मचारियों के लिए चल रहे मॉडल पर आधारित होगा। पिछले 15 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, इस मॉडल ने लगभग 9.5% का औसत वार्षिक रिटर्न दिया है, जो बैंक एफडी और अन्य सरकारी बचत योजनाओं की तुलना में कहीं अधिक आकर्षक है।
यूपीआई के जरिए मात्र दो क्लिक में खुलेगा खाता
पेंशन प्रक्रिया को बैंक खाता खोलने या यूपीआई पेमेंट करने जितना आसान बनाया जा रहा है। अगले 30 दिनों के भीतर दो बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च होने की उम्मीद है। भीम (BHIM) इंटरफेस पर यूपीआई के माध्यम से निवेशक केवल दो क्लिक में अपना एनपीएस खाता खोल सकेंगे। यदि आपका पहले से किसी बैंक में खाता है, तो यूपीआई ऐप वहीं से आपकी केवाईसी (KYC) जानकारी प्राप्त कर लेगा, जिससे कागजी कार्रवाई की जरूरत खत्म हो जाएगी। 'स्टार एनपीएस' प्लेटफॉर्म के जरिए अब ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में भी एनपीएस की पहुंच आसान होगी।
पेंशन और स्वास्थ्य कवर का 'डबल धमाका'
बुढ़ापे की चिंताओं को दूर करने के लिए 'पेंशन-स्वास्थ्य खाता' एक क्रांतिकारी कदम साबित होने वाला है। इस योजना के तहत आपके पेंशन फंड का एक हिस्सा स्वास्थ्य जरूरतों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा, जो टॉप-अप इंश्योरेंस की तरह काम करेगा। अस्पताल के खर्च का शुरुआती हिस्सा आपके स्वास्थ्य खाते से चुकाया जाएगा और बाकी का 5 लाख तक का कवर बीमा कंपनी देगी। ग्रुप पॉलिसी होने के कारण इसका प्रीमियम भी काफी कम होगा, जिससे आम आदमी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
निकासी नियमों में लचीलापन और बढ़ती सुविधाएं
एनपीएस अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा लचीला और निवेशक-हितैषी हो गया है। अब मैच्योरिटी पर जमा राशि का एक बड़ा हिस्सा अपने पास रखने की सुविधा दी जा रही है। यदि आपका कुल फंड 5 लाख रुपये तक है, तो आप इसे कभी भी निकाल सकते हैं। इसके अलावा, अब 15 साल के लॉक-इन की बाध्यता भी खत्म हो गई है। निवेशक 75 साल की उम्र तक अपनी एन्युटी (नियमित पेंशन) को टाल सकते हैं, जिससे उनका पैसा बाजार के लाभ के साथ बढ़ता रहेगा। इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों के करीब 50 करोड़ उन लोगों को जोड़ने का लक्ष्य है जो फिलहाल पेंशन के दायरे से बाहर हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर खुशखबरी, FY2027 में 6.6% GDP ग्रोथ संभव
11 May, 2026 10:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: वैश्विक अस्थिरता और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती का लोहा मनवा रही है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की नवीनतम शोध रिपोर्ट के अनुसार, बाहरी चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की जीडीपी (GDP) विकास दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि घरेलू मांग और मजबूत आर्थिक नीतियां देश को प्रगति की दिशा में अग्रसर रख रही हैं।
घरेलू खपत: ग्रामीण और शहरी मांग में निरंतरता
एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष (FY26) में भारत की विकास दर 7.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष का मानना है कि कृषि क्षेत्र में सुधार और ग्रामीण आय बढ़ने से गांवों में खपत काफी मजबूत हुई है। वहीं, त्योहारी सीजन के बाद से शहरों में भी खरीदारी की रफ्तार तेज बनी हुई है। सरकार द्वारा दिए जा रहे राजकोषीय प्रोत्साहनों ने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मांग को बढ़ाकर आर्थिक वृद्धि को एक ठोस आधार प्रदान किया है।
बैंकिंग सेक्टर: ऋण वितरण में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
अर्थव्यवस्था में बढ़ती मांग का सबसे सकारात्मक असर बैंकिंग क्षेत्र पर दिख रहा है। आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ (ऋण वृद्धि) पिछले साल के 11% से बढ़कर अब 16.1% के प्रभावशाली स्तर पर पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कुल 29.5 लाख करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में यह तेजी बरकरार रहेगी, जबकि पूरे वर्ष के लिए औसत ऋण वृद्धि 13 से 14 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है।
कच्चे तेल का गणित: अर्थव्यवस्था पर असर और चुनौतियां
रिपोर्ट में कच्चे तेल की कीमतों और अर्थव्यवस्था के अंतर्संबंधों का भी विश्लेषण किया गया है। वर्तमान में मई 2026 में तेल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं। एसबीआई के अर्थशास्त्रियों का आकलन है कि यदि तेल की कीमतों में 10 डॉलर की वृद्धि होती है, तो देश का चालू खाता घाटा (CAD) 35 आधार अंक बढ़ सकता है और जीडीपी में करीब 0.25% की कमी आ सकती है। हालांकि, 100 डॉलर प्रति बैरल के औसत मूल्य को ध्यान में रखते हुए ही आगामी वर्ष के लिए 6.6% की विकास दर का अनुमान लगाया गया है।
भविष्य की राह: चुनौतियों के बीच मजबूत भारत
एसबीआई की यह रिपोर्ट पुष्टि करती है कि यद्यपि कच्चा तेल और वैश्विक तनाव महंगाई के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं, लेकिन भारत की आंतरिक अर्थव्यवस्था इन झटकों को सहने के लिए पूरी तरह सक्षम है। बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती और बढ़ती घरेलू मांग भारत को वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं की कतार में बनाए रखेगी। मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित रखना भविष्य की आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
निवेशकों को बड़ा झटका: सेंसेक्स 900 अंक लुढ़का, निफ्टी टूटा
11 May, 2026 09:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से विदेशी मुद्रा भंडार बचाने और खर्चों में कटौती की अपील के बाद सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त हड़कंप मच गया। बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा दौर चला कि सेंसेक्स करीब 900 अंकों तक गोता लगा गया, वहीं निफ्टी भी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलकर 23,950 के करीब आ गया।
बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन निवेशकों के बीच घबराहट साफ देखी गई। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री की अपील ने आग में घी का काम किया। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में ही 845.68 अंक गिरकर 76,482.51 पर आ गया, जबकि निफ्टी 237.90 अंक टूटकर 23,936.85 के स्तर पर पहुंच गया। वॉल स्ट्रीट से मिले कमजोर संकेतों और विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पूंजी निकालने से बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह बिगड़ गया।
पीएम की अपील का असर: ज्वैलरी शेयरों में भारी गिरावट
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए अनावश्यक विदेश यात्राओं, डेस्टिनेशन वेडिंग और कम से कम एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने का अनुरोध किया था। इस बयान का सीधा असर आभूषण क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों पर पड़ा। सेन्को गोल्ड के शेयर लगभग 9% तक टूट गए, वहीं कल्याण ज्वैलर्स में 7.43% और टाइटन के शेयरों में 5% से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। पीसी ज्वैलर के शेयरों में भी करीब 4% की कमजोरी देखी गई।
डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
विदेशी मुद्रा बाजार में भी सोमवार को स्थिति काफी तनावपूर्ण रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और शांति प्रस्तावों के खारिज होने के बाद रुपया डॉलर के मुकाबले 139 पैसे की भारी गिरावट के साथ 94.90 के स्तर पर आ गया। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा बाजार से भारी मात्रा में पैसा निकालने और डॉलर के मजबूत होने से भारतीय मुद्रा पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल के आयात बिल पर पड़ेगा।
महंगाई का खतरा: पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आहट
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, प्रधानमंत्री का संबोधन ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों की ओर इशारा करता है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) का मासिक घाटा 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाने के कारण विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्ताह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की जा सकती है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) में बाधाओं के कारण आने वाले दिनों में महंगाई की दर और अधिक बढ़ सकती है।
महंगे ईंधन का असर: पेट्रोल-डीजल और गैस बिक्री में कंपनियों को भारी नुकसान
11 May, 2026 07:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय सरकारी तेल कंपनियों की वित्तीय सेहत बिगाड़ दी है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां पिछले ढाई महीनों से पुराने दामों पर ही पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस बेच रही हैं, जिससे उन्हें रोजाना करीब 1,600 से 1,700 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो रहा है।
तेल कंपनियों पर एक लाख करोड़ का बोझ, जल्द बढ़ सकते हैं दाम
बीते 10 हफ्तों में पेट्रोलियम कंपनियों की कुल 'अंडर-रिकवरी' (लागत से कम कीमत पर बिक्री) एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गई है। युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम 50% तक बढ़ चुके हैं, लेकिन घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर हैं। हालांकि मार्च में एलपीजी सिलेंडर पर 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन वह अब भी लागत से कम पर बिक रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब ईंधन की कीमतों में इजाफा होना लगभग तय है, बस इसके समय और मात्रा पर फैसला होना बाकी है।
गोदरेज समूह की कमान पिरोजशा के हाथ, 5 लाख करोड़ का लक्ष्य
अगस्त से पिरोजशा गोदरेज 'गोदरेज इंडस्ट्रीज ग्रुप' के चेयरमैन का पदभार संभालेंगे। पद संभालने से पहले ही उन्होंने समूह की नई ब्रांड पहचान और भविष्य के रोडमैप का खुलासा कर दिया है। समूह ने लक्ष्य रखा है कि अगले पांच वर्षों में अपनी पूंजी को बढ़ाकर 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया जाए। इस रणनीतिक योजना के तहत, 2031 तक समूह की वर्तमान पूंजी में तीन गुना वृद्धि करने और दो गैर-सूचीबद्ध व्यवसायों को शेयर बाजार में लिस्ट करने की तैयारी है।
ई-प्राप्ति पोर्टल: आधार से खोजें अपना पुराना पीएफ फंड
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने 'ई-प्राप्ति' नाम से एक नया आधार-आधारित पोर्टल शुरू किया है। यह पोर्टल उन लाखों कर्मचारियों के लिए वरदान साबित होगा जिनका पैसा पुराने या निष्क्रिय खातों में फंसा हुआ है। अक्सर यूएएन (UAN) के दौर से पहले की नौकरियों का पीएफ विवरण कर्मचारियों के पास नहीं होता। अब आधार सत्यापन के जरिए वे अपने उन पुराने खातों को खोज सकेंगे जो उनकी वर्तमान आईडी से लिंक नहीं हैं, और उन्हें आसानी से मुख्य खाते में ट्रांसफर कर पाएंगे।
आरबीआई का सख्त रुख: कर्ज न चुकाने पर प्रॉपर्टी होगी जब्त
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लोन डिफॉल्टर्स के खिलाफ सख्त नियमों का मसौदा तैयार किया है। नए प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई कर्ज एनपीए (NPA) बन जाता है और वसूली के सभी कानूनी रास्ते विफल रहते हैं, तो बैंक और एनबीएफसी गिरवी रखी गई जमीन या मकान को सीधे जब्त कर सकेंगे। आरबीआई ने इन जब्त संपत्तियों को बेचने के लिए 7 साल की समय सीमा तय करने का सुझाव दिया है, ताकि वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और बैंकों का फंसा हुआ पैसा वापस आ सके।
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रहस्यमयी दुल्हनों की तलाश में जुटीं पूजा गौर
प्लेऑफ की उम्मीद बचाने उतरेगी केकेआर और दिल्ली, जीत के अलावा कोई विकल्प नहीं
मानसून का काउंटडाउन शुरू! सबसे पहले केरल में देगा दस्तक, MP-यूपी समेत उत्तर भारत में कब होगी बारिश?
