बिहार-झारखण्ड
इंसानियत शर्मसार! बिहार में थानेदार ने रिक्शा चालक को पीटा, चमड़ी उधेड़ी
2 Jul, 2025 05:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देश भर में अक्सर पुलिस ने ये कहती है कि वो जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए है. पुलिस से किसी भी आमजन को डरने की आवश्यकता नहीं है. पीपुल फ्रेंडली पुलिसिंग के दावे पुलिस की ओर से किए जाते हैं, लेकिन बिहार में बिल्कुल इसके उलट एक घटना देखने को मिली है, जिससे पुलिस की छवि जनता की नजरों में धुमिल हुई है. बिहार के शेखपुरा जिले में पुलिस का अमानवीय चेहरा नजर आया है.
यहां एक थाना प्रभारी ने एक ई-रिक्शा चालक की बेरहमी से पिटाई कर दी. थाना प्रभारी ने रिक्शा चालक को सिर्फ इसलिए बेहरमी से पीटा क्योंकि उसने थाना प्रभारी को रास्ता नहीं दिया. इतना ही नहीं जब थाना प्रभारी का गुस्सा शांत हुआ तो रिक्शा चालक को थाने ले जाया गया. फिर उससे थूक चाटने और मांफी मांगने के लिए कहा गया.
थाना प्रभारी सस्पेंड
ये मामला जैसे ही एएसपी राकेश कुमार के संज्ञान में आया उन्होंने तुरंत आरोपी थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया और विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की है. ये पूरी घटना जिले के मेहूस थाना इलाके की बताई जा रही है. जानकारी के अनुसार, सोमवार देर शाम को पीड़ित ई-रिक्शा चालक मेहुस गांव का रहने वाला प्रद्युमन कुमार शाम को सवारी उतारकर घर जा रहा था, तभी थाना प्रभारी प्रवीण चंद्र दिवाकर सादे कपड़ों में उसके पीछे बुलेट से आ रहे था.
थाना प्रभारी पर क्या हैं आरोप
थाना प्रभारी रास्ता देने के लिए हॉर्न बजा रहा था, लेकिन ई-रिक्शा को निकलने के लिए जगह नहीं मिल रही थी. इसके बाद थाना प्रभारी को गुस्सा आ गया. फिर थाना प्रभारी ने डंडे से प्रद्युमन कुमार को पीटा. इसके बाद थाना प्रभारी ने थाने से अन्य पुलिसकर्मियों को बुलाया और ई-रिक्शा चालक को थाने ले जाया गया. आरोप है कि थाने में पुलिसकर्मियों के सामने उससे थूक चटवाया गया. जाति पूछकर आपत्तिजनक शब्द कह गया.
इसके बाद माफी मांगने पर उसको छोड़ा गया. वहीं थाना प्रभारी प्रवीण चंद्र दिवाकर ने कहा कि ई-रिक्शा चालक को इसलिए थाने ले जाकर पीटा गया क्योंकि उसने गश्त कर रही एक महिला सिपाही को देखकर सीटी मारी थी.
दरिंदगी की हद: सौतेले बाप ने किया अपनी ही नाबालिग बेटी से रेप, प्रेग्नेंट होने पर हुआ खुलासा
2 Jul, 2025 05:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार के भागलपुर जिले से दूसरी बार पिता-बेटी के रिश्ते को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है. इस बार एक सौतेले पिता की हैवानियत की वजह से 14 साल की मासूम बच्ची गर्भवती हो गई. उसके बाद उसकी मां ने अपने पति के खिलाफ महिला थाने में मुकदमा दर्ज कराया. वहीं, पुलिस ने नाबालिग बच्ची की मेडिकल जांच भी करवाई है. पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है.
आरोपी सौतेला पिता पिछले काफी लंबे समय से किशोरी का यौन शोषण कर रहा था. 26 जून को पीड़िता के गर्भवती होने का खुलासा हुआ. उस दिन पीड़िता की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी. वह लगातार उल्टी कर रही थी, जिसके बाद बच्ची ने अपनी मां को घटना के बारे में विस्तार से बताया. मां ने ही बच्ची का अल्ट्रासाउंड करवाया गया, जिसमें मालूम पड़ा कि वह 2 महीने की गर्भवती है. बता दें कि आरोपी ने दूसरी शादी की थी. वहीं उसकी पहली पत्नी से भी चार बच्चे हैं.
आरोपी ने कबूल किया जुर्म
पहेली पत्नी की मौत हो चुकी है. पीड़िता उसकी सौतेली बेटी है. आरोपी मूल रूप से भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखंड का रहने वाला है. वह 15 सालों से शहर के बरारी इलाके में एक रिटायर्ड कर्मी के यहां नौकर कर रहा था. बेटी के गर्भवती होने की सूचना होते ही मां ने अपने पति के खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज कराया.पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी ने अपना जुर्म भी कबूल लिया है, उसका बयान दर्ज किया गया है.
‘पहले भी कर चुका है गलत काम’
पीड़िता की मां ने बताया कि आरोपी पिता पहले भी एक बार इस तरह का गलत काम कर चुका है, लेकिन उस समय माफी मांगने पर हमनें बात को दबा दिया था. बता दें की चार दिनों के अंदर भागलपुर से दूसरा मामले सामने आया है. बीते रविवार को एक किशोरी ने अपने पिता पर 5 साल से यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज करवाया था, जिसमें आरोपी की गिरफ्तारी हो गई थी.
न्याय न मिलने पर छात्रा का खौफनाक कदम: अश्लील वीडियो से परेशान होकर कर ली खुदकुशी
2 Jul, 2025 03:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार के मुजफ्फरपुर से आत्महत्या का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां आबरू बचाने की गुहार नहीं सुनी जाने थाने से लौटी 9वीं की छात्रा ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. युवती अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल रहे युवक के खिलाफ शिकायत लेकर थाने पहुंची थी, लेकिन घंटों थाने में बैठने के बाद भी उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई तो घर लौट आई. इसके बाद उसने घर आकर आत्मघाती कदम उठकर खुद को खत्म कर लिया.
मुजफ्फरपुर जिले के पारु थाना क्षेत्र में रहने वाली एक नाबालिग युवती का एक युवक ने चोरी छिपे अश्लील वीडियो बना लिया था. वह उसे वीडियो करने की धमकी देकर ब्लैकमेल कर रहा था. इस बात से युवती काफी परेशान हो गई थी. सोमवार को वह आरोपी युवक के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए पारु थाना पहुंची थी. करीब 2 घंटे तक उसने थाने में बैठकर मदद की गुहार लगाई, लेकिन किसी भी पुलिसकर्मी ने उसकी बात नहीं सुनी.
फांसी लगाकर की आत्महत्या
मामला दर्ज नहीं होने से निराश होकर युवती घर लौट आई और फिर गले में दुपट्टा बांधकर आत्महत्या कर ली. पुलिस कार्रवाई न होने से निराश होकर युवती के आत्महत्या की जानकारी होते ही परिजन और गांव वालों का गुस्सा पुलिस के खिलाफ फूट पड़ा. गुस्साए गांव वालों पर आगजनी कर जाम कर दिया. साथ ही पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. अनियंत्रित स्थिति को देखते ही कई थानों की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच गई.
SDPO ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
पुलिस ने गुस्साए गांव वालों पर लाठीचार्ज कर मामला को शांत कराया. सूचना मिलते ही मौके पर सरैया एसडीपीओ कुमार चंदन भी पहुंच गए थे. उन्होंने मामले की जांच और कार्रवाई करने का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया. साथ ही मृतका की मां के बयान दर्ज कर पुलिस ने मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है. पुलिस ने छात्रा के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए एसकेएमसीएच भेज दिया है.
जानें क्या है मामला
मामले की जानकारी देते हुए स्थानीय लोगों ने बताया कि युवती को प्रेमजाल में फंसाकर आरोपी दीपक ने उसके अश्लील वीडियो बना लिए थे. वह उसे लगातार वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल देकर मनमानी कर रहा था. सोमवार को आरोपी दीपक युवती को फोन कर सरैया बसैठा बाजार के होटल में चलने का दबाव बना रहा था. लोगों ने दोनों को पकड़कर परिजनों को सौंप दिया था.
परिजन का आरोप है कि वह अपनी बेटी को लेकर शिकायत दर्ज करवाने के लिए थाने गए थे. हालांकि, दो घंटे बीत जाने के बाद पुलिस ने मामले में कोई संज्ञान नहीं लिया. इसके बाद युवती ने फांसी लगा ली थी.
ज्योति सिंह का बड़ा सियासी दांव, बोलीं- 'पार्टी टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय लड़ूंगी चुनाव'
2 Jul, 2025 03:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोजपुरी सिनेमा के ‘सुपरस्टार’ अभिनेता पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह अब चुनावी मैदान में दमखम दिखाती नजर आएंगी. आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर ज्योति ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है. हाल ही में डेहरी में एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि वे इस बार काराकाट की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी. सबसे अहम बात यह रही कि उन्होंने यह भी ऐलान कर दिया कि अगर किसी बड़ी पार्टी से टिकट नहीं मिला, तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरेंगी.
पिछले एक साल से ज्योति सिंह लगातार काराकाट क्षेत्र में सक्रिय हैं. सामाजिक और स्थानीय कार्यक्रमों में उनकी लगातार मौजूदगी ने इस बात के संकेत पहले ही दे दिए थे कि वे विधानसभा चुनाव में अपना भाग्य आजमा सकती हैं. अब जबकि उन्होंने स्वयं अपने चुनावी इरादों को सार्वजनिक कर दिया है, इससे इलाके की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है.
चुनाव लड़ने के फैसले पर क्या बोलीं ज्योति सिंह?
ज्योति सिंह ने कहा कि उनका राजनीति में आने का निर्णय कोई तात्कालिक फैसला नहीं है, बल्कि पिछले कई महीनों की तैयारी और क्षेत्रीय जुड़ाव का परिणाम है. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो महीनों में उनकी किसी भी राजनीतिक दल से बातचीत नहीं हुई है. इसीलिए यदि कोई दल उन्हें टिकट नहीं देता, तो वे जनता के सहयोग से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी. उनके अनुसार, उन्हें स्थानीय जनता का पूरा समर्थन प्राप्त है और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है.
इस घोषणा के साथ ही यह भी तय हो गया है कि काराकाट ही उनकी चुनावी कर्मभूमि होगी. उन्होंने यह भी दोहराया कि वे किसी अन्य क्षेत्र से चुनाव नहीं लड़ेंगी. उनका लक्ष्य केवल काराकाट विधानसभा क्षेत्र पर केंद्रित रहेगा. इससे साफ है कि उन्होंने अपनी रणनीति को लेकर पूरी तैयारी कर ली है.
2024 में पवन सिंह ने लड़ा था लोकसभा चुनाव
2024 के लोकसभा चुनाव में पवन सिंह ने भी काराकाट से किस्मत आजमाई थी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल सकी. उस समय ज्योति सिंह अपने पति के साथ प्रचार में सक्रिय रही थीं. चुनाव के बाद भी वे क्षेत्र में बनी रहीं और स्थानीय गतिविधियों में भाग लेती रहीं. अब उनकी यह राजनीतिक घोषणा इस बात का प्रमाण है कि वे सिर्फ प्रचार तक सीमित नहीं थीं, बल्कि स्वयं को राजनीति में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही थीं.
पति छोड़ा, प्रेमी संग भागी, फिर बंद घर में मिली लाश; पटना में मौत बनी पहेली
2 Jul, 2025 03:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार के बेगूसराय में एक युवती का शव फंदे से लटका मिला. उसके हाथ और पैर पर जगह जगह कटे हुए निशान मिले. युवती के परिजनों ने प्रेमी के परिजनों पर लड़की की हत्या करने का आरोप लगाया. बताया जा रहा है कि मृतक युवती का गावं के ही एक लड़के से प्रेम प्रसंग चल रहा था. एक दिन प्रेमी के कहने पर लड़की लड़के के घर चली गई थी, जहां लड़के के परिजनों ने उसे रखने से इंकार कर दिया. और उसे अपने एक रिश्तेदार के यहां भेज दिया.
इसके बाद लड़की का शव उसके खुद के घर मे फंदे से लटका हुआ मिला.दरअसल, ये मामला बलिया थाना क्षेत्र के जाफर नगर सनहा गांव से सामने आया है. जहां मृतका की पहचान 20 साल की हिना कुमारी के रूप में हुई है. हिना पहले से शादीशुदा थी. लेकिन उसने अपने बॉयफ्रेंड के साथ रहने के लिए अपने पति को छोड़ दिया था. एक दिन वह अपने बॉयफ्रेंड के बुलाने पर उसके घर पहुंच गई. लेकिन प्रेमी के घरवालों ने हिना को रखने से मना कर दिया था और उसे अपने एक रिश्तेदार के यहां भेज दिया था.
6 महीने पहले प्रेमी के लिए छोड़ दिया था पति
मृतका साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के जाफर नगर के रहने वाले मुकेश कुमार की बेटी थी. घटना को लेकर मृतका के भाई छोटू कुमार ने आरोप लगाया कि एक साल पहले उसकी बहन की शादी घर वालों की रजामंदी से हुई. लेकिन उसने गावं के ही रहने वाले अपने प्रेमी के लिए पति से छह महीने पहले ही रिश्ता खत्म कर दिया था. इसके बाद हिना के माता पिता ने गावं छोड़ दिया था और पटना जाकर रहने लगे और हिना भी माता-पिता के साथ पटना में ही रहने लगी. लेकिन उसका अफेयर गांव के अपने प्रेमी से चलता रहा.
बंद पड़े घर में फंदे पर लटका मिला शव
हिना के भाई ने बताया कि उसका प्रेमी बाहर रहकर काम करता है. उसने बहन के पास फोन किया और कहा कि वह उसके घर पर जाकर रहे. ऐसे में हिना प्रेमी की बात मानते हुए पटना से भागकर उसके घर पहुंच गई. लेकिन हिना के प्रेमी के घरवालों ने उसे अपने घर पर रहने नहीं दिया और उसे अपने रिश्तेदारों के यहां भेज दिया. इसके बाद हिना का शव उनके ही गांव वाले बंद पड़े पुराने घर में फंदे पर लटका हुआ मिला.
रहस्यमयी बन गई हिना की मौत
हिना के भाई छोटू कुमार का आरोप है कि उसकी बहन की किसी ने हत्या कर उसके शव को फंदे पर लटकाया. उसने कहा कि बहन के हाथ-पैर पर कटे हुए के भी निशान थे. अब पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में ले लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस हिना की इस रहस्यमयी मौत का असल वजह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हिना ने आत्महत्या की है या उसकी हत्या की गई है.
अयोध्या की तर्ज पर बनेगा पुनौरा धाम, जानकी मंदिर के लिए बिहार कैबिनेट ने दिए 882 करोड़
2 Jul, 2025 03:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीतामढ़ी स्थित ऐतिहासिक पुनौरा धाम में माता जानकी मंदिर का भव्य निर्माण कराने के लिए 882 करोड़ 87 लाख रुपये जारी किए गए हैं. मंदिर का निर्माण कार्य तीन चरणों में कराने का निर्णय लिया गया है. इसमें 137.34 करोड़ रुपये की लागत से पुनौराधाम स्थित पुराने मंदिर का उन्नयन कार्य, 728 करोड़ रुपये खर्च करके पर्यटन संबंधित आधारभूत संरचना का विकास तथा 10 वर्ष तक इसके रख-रखाव पर 16.62 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान किया गया है.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में इस मुद्दे पर मुहर लगी. इसमें 24 एजेंडों पर मुहर लगी. इसकी जानकारी कैबिनेट मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ ने सूचना भवन के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में दी. उन्होंने बताया कि धार्मिक पर्यटन देश की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है.
देवी सीता की जन्मस्थली पुनौराधाम का विशेष धार्मिक और पर्यटकीय महत्व है. इसके मद्देनजर अयोध्या में श्रीराम मंदिर की तर्ज पर पुनौराधाम में माता जानकी मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है.
जानकारी के मुताबिक योजना के तहत क्रियान्वयन के लिए ईपीसी मॉडल पर निविदा का प्रकाशन, निष्पादन और योजना का क्रियान्वयन बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के स्तर पर कराया जा रहा है. यह स्थान रामायण सर्किट का प्रमुख हिस्सा है.
उन्होंने कहा कि देवी सीता की जन्मस्थली पुनौराधाम का विशेष धार्मिक और पर्यटकीय महत्व है. सरकार के इस तरह के प्रयास से अयोध्या धाम और पुनौराधाम के बीच सीधा संपर्क हो जाएगा. व्यापक जनहित में श्रद्धालुओं की भावना और पर्यटन के व्यापक विकास की संभावना को ध्यान में रखते हुए मौजूदा पुनौराधाम को रामायण सर्किट के तौर पर विकसित किया जाएगा.
विधायक जी भी साइबर ठगी के शिकार, फॉर्च्यूनर का झांसा देकर 1.27 लाख उड़ाए
2 Jul, 2025 09:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आधुनिकता के इस दौर में साइबर फ्रॉड एक जटिल समस्या बनती जा रही है. इसने आम से लेकर खास हर किसी को अपना शिकार बना लिया है. हाल ही में साइबर ठगों ने झारखंड की राजधानी रांची के डीसी आईएएस अधिकारी मंजूनाथ भजंत्री के नाम पर फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर आम लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज ठगी की कोशिश की थी.
अभी यह मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था. इसी बीच साइबर ठागों ने बेहद ही अजीबो गरीब ढंग से राज्य की पांकी विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता को अपना शिकार बना लिया. पहले कुशवाहा शशि भूषण मेहता को गाड़ी की नीलामी में भाग लेने का झांसा देते हुए ठगों ने खुद को जीएसटी कस्टम अधिकारी बताया. फिर ठगों ने विधायक से कहा कि उन्होंने पश्चिम बंगाल के मालदा में कई गाड़ियां जब्त की हैं.
ठगों ने बीजेपी विधायक को ऐसा ठगा
साइबर ठगों ने विधायक से कहा कि इन जब्त गाड़ियों की निलामी की जा रही है. रितेश नाम के एक साइबर ठग ने विधायक को व्हाट्सएप पर गाड़ियों की तस्वीर भी भेजी. इसमें एक फॉर्च्यूनर गाड़ी की कीमत 12.70 लाख रुपये बताई. इसी फॉर्च्यूनर गाड़ी को नीलामी में देने के बहाने ठगों ने विधायक से गाड़ी का 10 फीसदी यानी 1.27 लाख रुपया भुगतान करवा लिया. यही नहीं ठगों ने विधायक को भुगतान की फर्जी रशीद भी भेजी.
साइबर फ्रॉड की ये घटना बनी चर्चा का विषय
इसके बाद से लगातार ठगों का मोबाइल फोन स्विच ऑफ आने लगा. विधायक कुशवाहा शशि भूषण मेहता ने तीन ठगों के खिलाफ साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है. विधायक ने अपने निजी सहायक के माध्यम से 1.27 लाख रुपये का भुगतान कराया था. बीजेपी विधायक के साथ साइबर फ्रॉड की घटना प्रकाश में आते ही चर्चा का विषय बन गई है.
रांची साइबर थाना पुलिस ने एक ठग पकड़ा
वहीं दूसरी तरफ राजधानी रांची की साइबर थाना की पुलिस ने यूट्यूब पर विज्ञापन के बहाने इन्वेस्टमेंट के नाम पर 23.95 लाख रुपयों की ठगी करने वाले उत्तर प्रदेश के लखनऊ के साइबर फ्रॉड विजय प्रकाश को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार साइबर ठग यूट्यूब पर विज्ञापन के जरिए लोगों को प्रलोभन देकर ठगी करता था.
बताया जा रहा है कि इन्वेस्टमेंट से जुड़े फर्जी विज्ञापन पर क्लिक करते ही एक व्हाट्सएप ग्रुप में लोग जुड़ जाते थे और फिर बेहतर मुनाफे का झांसा देकर उसने ठग लाखों की ठगी किया करता था. गिरफ्तार ठग के खिलाफ झारखंड समेत देश के 10 से ज्यादा राज्यों में कुल 38 मामले दर्ज हैं.
बिहार में अजब-गजब विकास! 100 करोड़ की लागत से बनी सड़क के बीचों-बीच खड़ा है पेड़
2 Jul, 2025 08:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार में बनाई जा रही एक सड़क आजकल चर्चा का केंद्र बनी हुई है. दरअसल, पटना से गया जी के लिए सड़क का निर्माण हो रहा है. जहानाबाद में DM ऑफिस के पास 100 करोड़ रुपए की लागत से रोड काम शुरू हुआ. भारी भरकम बजट के साथ बनाई जा रही सड़क के बीचों-बीच पेड़ है. इस सड़क से जो कोई भी गुजर रहा हर कोई हैरान है. यह लापरवाही किसी भी वक्त हादसे को जन्म दे सकती है. साथ ही यह जानलेवा हो सकती है.
इस सड़क का वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. स्थानीय लोग का कहना है कि दिन में तो वाहन संभल जाते हैं, लेकिन रात के समय में बिना स्ट्रीट लाइट के यह पेड़ दुर्घटना का कारण बन रहे हैं. सड़क के बीच इन पेडों से अब तक कई दोपहिया वाहन टकरा चुके हैं.
दरअसल, वन विभाग से अनुमति न मिलने पर पथ निर्माण निगम विभाग ने पेडों को तो नहीं काटा, लेकिन ऐसी सड़क बना दी जिसकी चर्चा हर कोई कर रहा है. पथ निर्माण निगम ने सड़क को पेड़ों के चारों ओर से घुमाकर बना दिया. नतीजा यह हुआ कि सड़क के बीच में खड़े पेड़ दुर्घटना का कारण बन रहे हैं. पथ निर्माण विभाग का कहना है कि उन्होंने पहले ही पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग से NOC मांगी थी, लेकिन अब तक उन्हें मंजूरी नहीं मिली.
एनओसी को लेकर हो रहा इंतजार
पथ निर्माण विभाग ने कहा कि एनओसी प्राप्त होते ही इन पेड़ों को सुरक्षित रूप से हटा दिया जाएगा, जिससे आवागमन सुरक्षित हो पाएगा. यूजर एजेंसी द्वारा वन अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में वन विभाग द्वारा प्रकरण संख्या 06/25 दर्ज किया गया है. डीएम अलंकृता पांडेय ने जन-सुरक्षा को सर्वोच्च बताते हुए सुरक्षा उपाय लागू करवाया है. सभी पेड़ों पर ट्री रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं, जिससे रात में यात्रा कर रहे लोगों को दुर्घटना से बचाया जा सके.
क्या है परियोजना को लेकर अपडेट?
अगर परियोजना की बात करें तो अप्रैल 2022 में शुरू हुई इस परियोजना की डेडलाइन 2025 थी, लेकिन अभी तक इस परियोजना का मात्र 30 प्रतिशत ही काम पूरा हो पाया है. पथ निर्माण विभाग का कहना है कि बनाए जा रहे मार्ग में पेड़ों और अतिक्रमण के कारण काम लगातार नहीं हो पा रहा है, जिसकी वजह से काम में लगातार देरी हो रही है. स्थानीय लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि या तो पेड़ों को हटाकर सड़क को सुरक्षित बनाया जाए या फिर कोई अन्य उपाय किया जाए.
बिहार को मिलेंगे 6 नए रीजनल एयरपोर्ट, मधुबनी, मुजफ्फरपुर समेत कई शहरों को मिलेगी सौगात
1 Jul, 2025 01:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आज सोमवार को नई दिल्ली स्थित बिहार निवास में मुख्य सचिव अमृतलाल मीणा की उपस्थिति में बिहार सरकार एवं एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के बीच छह हवाईअड्डों के विकास हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए.
उल्लेखनीय है कि बिहार सरकार के स्वामित्व वाले पांच हवाईअड्डे बीरपुर, वाल्मीकिनगर, सहारसा, मधुबनी और मुंगेर तथा एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के स्वामित्व वाला मुजफ्फरपुर हवाईअड्डा, भारत सरकार की उड़ान योजना के अंतर्गत चिन्हित किए गए हैं. नागर विमानन मंत्रालय द्वारा प्रत्येक हवाईअड्डे के लिए ₹25 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है
बिहार सरकार द्वारा इन सभी छह हवाईअड्डों के लिए पूर्व-अव्यवहार्यता अध्ययन (Pre-Feasibility Study) करवाया गया था. इसके उपरांत, बिहार मंत्रिपरिषद की स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात आज यह MoU संपन्न हुआ.
समझौता ज्ञापन पर AAI की ओर से कार्यपालक निदेशक अनामी पाण्डेय एवं बिहार सरकार की ओर से निदेशक नागरिक उड्डयन डॉ. निलेश रामचंद्र देवरे ने हस्ताक्षर किए.
इस अवसर पर बिहार सरकार की ओर से मुख्य सचिव एवं कुंदन कुमार (स्थानिक आयुक्त, बिहार), तथा AAI की ओर से सदस्य (वित्त) सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.
यह समझौता राज्य में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है और इससे बिहार के दूरवर्ती क्षेत्रों का भी तीव्र आर्थिक एवं सामाजिक विकास सुनिश्चित होगा.
ओवैसी की पार्टी बिहार में बनाएगी तीसरा मोर्चा, RJD से नहीं बनी बात; BSP पर सबकी नजर
1 Jul, 2025 01:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले तमाम पार्टियां जाति से लेकर गठबंधन पॉलिटिक्स तक, गंठजोड़ में लग गई हैं. सीट शेयरिंग पर बातें चल रही हैं. इसी बीच यह बात चली कि 2020 के विधानसभा चुनाव में 5 सीटें जीतनी वाली ओवैसी की पार्टी महागठबंधन के साथ जा सकती है. एआईएमआईएम की ओर से बयान भी आए कि वो बीजेपी और उसके गठबंधन को फिर से सत्ता में आने से रोकने के लिए महागठबंधन के साथ जाने को तैयार है.
AIMIM प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमाम ने आगे बढ़कर इस बात की पहल की. इसके बाद आरजेडी की तरफ से तेजस्वी यादव का बयान आया कि उनकी इस विषय पर किसी से बात नहीं हुई है. लेकिन इन सब के बीच रविवार को ओवैसी ने खुद मीडिया से बताया कि हमारी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने गठबंधन का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन अभी जवाब नहीं मिला है.
2020 में भी हुई थी गठबंधन की कोशिश
ओवैसी ने कहा कि हमने 2020 में भी कोशिश की थी लेकिन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया. और फिर हमने 5 सीटों पर जीत दर्ज की. ओवैसी के एक दिन बाद सोमवार को AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान का भी बयान आ गया. उन्होंने आरजेडी पर आरोप लगाते हुए कहा हमारे 4 विधायक तोड़ लिए फिर भी हमने सदन में कई बार इनका समर्थन किया.
उन्होंने कहा कि हम एनडीए को सत्ता में आने से रोकना चाहते हैं इसलिए खुद आगे बढ़कर गठबंधन का प्रस्ताव दिया. लेकिन हमें कमजोर ना समझा जाए. इसके बाद अख्तरुल ने कहा कि हम थर्ड फ्रंट के साथ भी जा सकते हैं. इसके लिए विकल्पों की तलाश हो रही है, संपर्क में हैं.
कयासों के बाजार गर्म
अख्तरुल ईमान के थर्ड फ्रंट वाले बयान के बाद कयासों के बाजार गर्म हो गए हैं. ऐसा माना जा रहा है कि वो एक बार फिर 2020 की तरह ही कुछ छोटे दलों को साथ लेकर नया अलायंस बना सकते हैं. 2020 के चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने उपेंद्र कुशवाहा की तब की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP), मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP), देवेंद्र प्रसाद यादव की समाजवादी जनता दल (डेमोक्रेटिक), ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और संजय सिंह चौहान की जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) के साथ मिलकर ग्रैंड डेमक्रैटिक सेकुलर फ्रंट बनाया था.
छोटे दलों से चल रही बात
सोचिए इतनी पार्टियों को ओवैसी ने बिहार में इकट्ठा कर दिया था. इन सब का श्रेय वो अख्तरुल ईमान को ही देते हैं. अब एक बार फिर अख्तरुल के इशारे से यही लग रहा है कि वो प्रदेश के छोटे दलों से बात कर रहे हैं. अब सवाल यह है कि अगर एआईएमआईएम थर्ड फ्रंट बनाती है तो सबसे ज्यादा नुकसान किसको होगा? जवाब साफ है आरजेडी और कांग्रेस को.
आरजेडी का बेस वोट ही एम-वाई समीकरण
बिहार में आरजेडी के पॉलिटिक्स का बेस वोट ही एम-वाई समीकरण के तहत है. ऐसे में मुस्लिम बाहुल सीटों पर ओवैसी सीधे आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन को पहुंचाएंगे. लेकिन बीएसपी के साथ आने से आरजेडी मुस्लिम बाहुल सीटों पर ही नहीं, उन सीटों पर भी खतरे में आएंगे, जहां दलित और मुस्लिम वोट मिलकर निर्णायक हैं. 2020 के चुनाव में बसपा ने एकमात्र सीट चैनपुर जीती थी. मोहम्मद जमा खान यहां से जीते थे.
6 सीटें आरजेडी के हाथ से निकलीं
एआईएमआईएम के 5 और जोड़ लें तो ये 6 सीटें आरजेडी के हाथ से सीधे निकल गईं. ये बात अलग है कि चुनाव बाद अख्तरुल ईमान छोड़ बाकी विधायकों ने अपनी पार्टी छोड़ दी. लेकिन इससे मजेदार रिजल्ट आया था बिहार के रामगढ़ सीट पर. अभी के आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह इसी सीट पर विधानसभा का चुनाव लड़े थे. बसपा उम्मीदवार अंबिका सिंह से मात्र 189 मतों से उनकी जीत हुई थी. मतलब हारते-हारते बचे थे वो. इस बार उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के साथ हैं. राजभर भी एनडीए में हैं.
कांग्रेस के मुस्लिम वोट को भी झटका
जाहिर है बीएसपी और एआईएमाईएम ही हैं, जो अभी अलग-अलग बिहार की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. ऐसे में यदि इनका गठजोड़ एक बार फिर होता है तो कांग्रेस की नई दलित पॉलिटिक्स के साथ ही आरजेडी कांग्रेस के मुस्लिम वोट को भी झटका लगेगा. बीएसपी की ओर से मायावती के भतीजे आकाश आनंद को भी बिहार चुनाव प्रचार में उतारा जा रहा है.
हिंदू प्रत्याशियों पर भी दांव लगाने की तैयारी
दूसरी ओर ओवैसी इस बार मुस्लिम पॉलिटिक्स से आगे हिंदू प्रत्याशियों पर भी दांव चलने की तैयारी में हैं. ढाका सीट से एक प्रत्याशी राणा रंजीत सिंह के नाम का वो ऐलान भी कर चुके हैं. ऐसे में यदि AIMIM और आरजेडी एक साथ नहीं आए तो दर्जन भर सीटों पर तेजस्वी यादव को झटका मिल सकता है. हालांकि जानकारों का यह भी मानना है कि जिस तरह पिछले चुनाव में कुछ सीटों की वजह से आरजेडी सरकार बनने से रह गई थी. ऐसे में इस बार बिहार के मुसलमान फिर से ऐसा रिस्क लेने को तैयार नहीं होंगे.
तेजस्वी यादव वक्फ के मुद्दे पर पूरी मुखरता से मुस्लिम समाज के लिए आवाज उठा रहे हैं. और यह भी स्पष्ट संदेश है कि एनडीए को हराने के लिए विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा तेजस्वी ही हैं. ऐसे में वोट खराब करने बात भी मुस्लिम वोटर्स के दिमाग में जा सकती है, इसका बहुत चांस है. अब क्या होगा, यह देखना होगा.
गजब का 'दूल्हा'! पहले प्यार, फिर शादी, और बाद में दुल्हन को ही एक लाख में बेच डाला
1 Jul, 2025 01:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इश्क में धोखा कोई नहीं बात नहीं है, लेकिन क्या जब हो जब एक प्रेमी ही अपनी प्रेमिका को पैसों के लिए देह व्यापार के दलदल में धकेल दें. ऐसा ही एक मामला बिहार के बेगूसराय जिले से सामने आया है, जहां युवक ने प्रेमजाल में फंसाकर एक युवती को 1 लाख रुपये के लिए देह व्यापार के अड्डे पर बेंच दिया. मामले की जानकारी होते ही पुलिस तुरंत एक्टिव हो गई और उन्होंने कार्रवाई करते हुए पीड़िता को सकुशल बरामद कर लिया.
पटना की रहने वाली एक नाबालिग लड़की की दोस्ती करीब 9 महीने पहले एक युवक से हुई थी. दोस्ती से शुरू हुई बात धीरे-धीरे प्यार में बदल गई. दोनों के बीच नजदीकियां इतनी ज्यादा बढ़ गई कि वह शादी करने तक के लिए राजी हो गए. युवक के प्यार में युवती इतनी आंधी हो गई कि वह अपना घर परिवार छोड़कर युवक के साथ भाग गई. इसके बाद दोनों ने एक मंदिर में शादी कर ली. शादी के बाद युवक ने बताया कि उसका एक रिश्तेदार बेगूसराय के बखरी क्षेत्र के मीरकलापुर गांव में रहता है.
1 लाख में युवती को बेचा
अब हम दोनों वहीं जाकर अपना जीवन बसर करेंगे. युवती को लगा रहा था कि अब वह अपने पति के साथ आराम से अपना नया दांपत्य जीवन जीवन व्यतीत करेंगी, लेकिन पति के दिमाग में कुछ ही और ही चल रहा था. मीरकलापुर गांव में युवक के किसी रिश्तेदार का घर नहीं बल्कि जिस्मफरोशी का अड्डा था, जहां युवक ने जबरन अपनी पत्नी को 1 लाख में बेच दिया. इसके बाद पैसे लेकर वहां से चला गया.
गुप्त सूचना पर पुलिस ने की छापेमारी
बेगूसराय के एक महिला थाने की पुलिस को इस अमानवीय घटना की गुप्त सूचना से जानकारी मिली. पुलिस अधीक्षक ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए. बखरी डीएसपी के नेतृत्व में महिला थानाध्यक्ष समेत एक विशेष टीम बनाकर मीरकलापुर गांव स्थित जिस्मफरोशी के अड्डे पर भेजे गई. छापेमारी की कार्रवाई में पुलिस ने एक महिला और नाबालिग को एक घर से बरामद किया. गिरफ्तार की महिला की पहचान जागो देवी के तौर पर हुई है, जो कि देह व्यापार रैकेट मुख्य संचालिका की बताई जा रही है.
‘पहले प्यार में फंसाया, फिर जबरन बेचा’
पुलिस ने जब युवती से पूछताछ की तो उसने कुछ ऐसा बताया जिसे सुनकर सभी लोग हैरान रह गए. युवती ने बताया कि उसे पहले प्यार में फंसाया और फिर शादी करके जबरन देह व्यापार धंधे में धकेल दिया और फिर युवक फरार हो गया. महिला ने उसे घर में बंधकर बनाकर रखा हुआ था, जो कि एक दलाल के रूप में काम कर रही थी. छापेमारी के दौरान पुलिस ने मीरकलापुर गांव में स्थित जिस्मफरोशी के अड्डे से कई आपत्तिजनक चीजें बरामद की हैं.
इसमें ग्राहकों की लिस्ट, मोबाइल फोन और कुछ अन्य संदिग्ध सामान शामिल है. पुलिस ने मामले में अनैतिक देह व्यापार अधिनियम और पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. साथ ही गिरफ्तार महिला से भी पुलिस ने पूछताछ शुरू कर दी है.
हूल क्रांति: जब 1855 में सिदो-कान्हू ने अंग्रेजों की नींव हिलाई, मजबूर हुए थे झुकने पर
1 Jul, 2025 01:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंग्रेजों के खिलाफ पहले स्वतंत्रता संग्राम की जब बात आती है तो साल 1857 का जिक्र होता है, जबकि आजादी की पहली लड़ाई साल 1857 में नहीं बल्कि 1855 में ही झारखंड के संथाल परगना के भोगनाडीह में लड़ी गई थी. अंग्रेजों के खिलाफ साल 1855 में संथाल आदिवासियों ने ऐसी विद्रोह की चिंगारी जलाई, जिसने अंग्रेजों को संथालियों के सामने घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था.
झारखंड के साहिबगंज जिला के बरहेट विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले भोगनाडीह के एक गरीब आदिवासी संथाली परिवार में जन्में वीर नायकों ने अंग्रेजी हुकूमत और महाजनी प्रथा के खिलाफ ऐसी जंग छेड़ी, जिसकी चिंगारी से बंगाल सहित देश के अन्य हिस्सों तक ज्वाला पहुंच गई. साल 1855 में लगभग 9 महीने तक चला था अंग्रेजों के खिलाफ पहला आंदोलन जिसे हूल आंदोलन के रूप में याद किया जाता है.
हजारों संथाली हुए थे एकत्रित
इस आंदोलन के दौरान संथाल के सैकड़ों गांव के 50,000 से ज्यादा लोग विद्रोह में उतरे थे. अंग्रेजों के साथ-साथ जमाखोरों और महाजनों के खिलाफ विद्रोह की शुरुआत करते हुए सिद्धू-कान्हू और चांद-भैरव ने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह के दौरान समानांतर सरकार चलाने के लिए लगभग 10,000 संथालियों को एकत्रित किया था. जिसका असर यह हुआ कि कई गांव में विद्रोह की ऐसी ज्वाला भड़की कि लोगों ने जमींदारों, साहूकारों और अंग्रेजी हुकूमत से जुड़े हुए लोगों को मार डाला.
अंग्रेजों ने महिलाओं और बच्चों पर किया था दमन
सिद्धू-कान्हू और चांद-भैरव के नेतृत्व में संथालियों ने जमींदारों और महाजनों को मालगुजारी देने से मना करते हुए अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो का भी ऐलान किया था. इसके बाद अंग्रेजों ने इन क्रांतिकारियों को रोकने के लिए अनेकों प्रकार से महिलाओं और बच्चों पर दमन करना शुरू कर दिया था. जिसके बाद आदिवासियों ने भी अंग्रेजी हुकूमत से जुड़े जमींदारों और सिपाहियों को मौत के घाट उतार दिया था.
इसके बाद अंग्रेजी हुकूमत ने इस आंदोलन को कुचलना के लिए और संथालियों में डर पैदा करने के लिए बड़ी संख्या में हाथियों को बुलाया गया था. ताकि लोग आंदोलन छोड़कर अपने घरों में छुप जाएं, बावजूद इसके आंदोलनकारी रुकने को तैयार नहीं थे. इसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने आंदोलन को रोकने के लिए एक बड़ी साजिश रचते हुए सिद्धू-कान्हू और चांद-भैरव पर गिरफ्तारी में मदद करने पर इनाम देने की घोषणा की थी.
1876 में एसपीटी एक्ट हुआ लागू
बावजूद इसके आंदोलनकारी न रुके न झुके और न कभी अंग्रेजों की गुलामी को स्वीकार किया. उन्होंने अपनी जमीन बचाने के लिए युद्ध किया. इसी आंदोलन का परिणाम था कि अंग्रेजों ने संथालियों की जमीनों को संरक्षित करने के लिए संताल परगना में एसपीटी एक्ट (संताल परगना टेनेंसी एक्ट) लागू किया. 1876 में लागू हुए इस एक्ट का उद्देश्य आदिवासियों की भूमि को उनके पास सुरक्षित रखना और उन इलाकों में उनका स्वशासन चलने देना था. ताकि उनकी संस्कृति बची रहे.
हजारों आदिवासियों ने दी शहादत
दरअसल, अंग्रेजों ने आदिवासियों की रक्षा के लिए नहीं बल्कि उनके हूल आंदोलन और विद्रोह की ज्वाला से डरकर यह एक्ट लागू किया था. हूल आंदोलन के प्रमुख नेता सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव और फूलों-झानो सहित हजारों संथाल आदिवासियों ने अपनी शहादत दी थी. हूल आंदोलन के विद्रोह के बाद ही अंग्रेजी हुकूमत ने सिद्धू कान्हू को गिरफ्तार कर लिया गया.
साहिबगंज जिला के बरहेट प्रखंड के पंचकठिया स्थित एक बरगद के पेड़ पर 26 जुलाई 1856 को सिद्धू मुर्मू को फांसी पर लटका दिया था, जबकि कान्हू मुर्मू को भोगनाडीह में फांसी दी गई थी. आज यानी 30 जून को संथाल हूल दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो संथाल हूल आंदोलन की याद दिलाती है.
नई नवेली दुल्हन बनी कलह की जड़, पति की दो पत्नियों में से एक ने सौतन को हटाया
1 Jul, 2025 01:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूं तो पति-पत्नी का रिश्ता दुनिया के सबसे खूबसूरत रिश्तों में से एक होता है, जो विश्वास, प्यार ,सम्मान और आपसी समझदारी पर टिका होता है. हालांकि, जब इस पवित्र रिश्ते में हवस और वासना की एंट्री हो जाती है तो फिर इसका भयावह रूप देखने को मिलता है. ऐसी ही एक झारखंड के गुमला जिले से सामने आया है, जहां एक पति ने अपनी तीसरी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी. आरोपी ने एक, दो नहीं बल्कि तीन महिलाओं से शादी की थी, जो कि समय के साथ उसके लिए ‘जी का जंजाल’ बन गई थी.
गुमला जिले के रहने सिसई थाना क्षेत्र में रहने वाले शमशाद ने एक, दो नहीं बल्कि तीन शादियां की थीं. पहली पत्नी ने शमशाद को छोड़ दिया था. जिसके बाद उसने अफसाना खातून से दूसरी शादी की थी. दो शादियां करने के बाद भी शमशाद अंसारी का मन नहीं भरा और उसने तीसरी शादी रांची के नगडी थाना क्षेत्र के रहने वाली रिजवाना परवीन कर ली. शमशाद ने तीसरी शादी आज से लगभग 7 महीने पहले 6 नवंबर 2024 की थी.
दुपट्टे से गला दबाकर की हत्या
शादी के बाद रिजवाना और अफसाना दोनों एक ही घर में रह रही थी. जिस कारण दोनों महिलाओं में पति शमशाद के साथ रहने को लेकर विवाद होता था. साथ ही दहेज को लेकर भी रिजवाना से पति-पत्नी का विवाद चल रहा था. इस बीच 28 जून की रात पति शमशाद ने अपनी दूसरी पत्नी अफसाना के साथ मिलकर रिजवाना पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया और फिर दुपट्टे से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी.
परिवार ने जताया था हत्या का शक
इसके बाद दोनों आरोपियों ने हत्या की घटना को हादसे का रूप देने की कोशिश की. नवविवाहित रिजवाना की मौत की सूचना मिलते ही उसके मायके वाले ससुराल पहुंच गए और बवाल करना शुरू कर दिया. उन्होंने रिजवाना की लाश का देखकर शक जताया कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि प्री प्लान मर्डर है. इसके बाद मृतका के परिजनों ने सिसई थाने पहुंचकर पति शमशाद अंसारी और उसकी दूसरी पत्नी अफसाना परवीन सहित अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई.
पति के साथ रहने को लेकर था दोनों पत्नियों में विवाद
शक होने पर पुलिस ने पति शमशाद और उसकी दूसरी पत्नी को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ शुरू कर दी. इस दौरान कुछ ही समय में दोनों आरोपी टूट गए. पति-पत्नी ने कबूल किया कि उन्होंने ही दहेज की लालच में इस हत्या की घटना को अंजाम दिया है. उन्होंने बताया कि पहले कुल्हाड़ी से हमला कर रिजवाना को घायल किया था और फिर दुपट्टे से गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया था. पुलिस ने पति-पत्नी को गिरफ्तार करने के साथ-साथ हत्या में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी को भी जब्त कर लिया है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि पति के साथ रहने को लेकर भी दोनों पत्नियों में अक्सर विवाद होता रहता था.
धर्मसंकट! बिहार के गांव में ब्राह्मणों को पूजा-पाठ से रोका, जानें क्यों लगा ऐसा विवादित बोर्ड
1 Jul, 2025 09:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश के इटावा में कथा वाचक मुकुट मणि सिंह के साथ हुई बदसलूकी की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. मुकुट मणि को न केवल कथा कहने से रोका गया, बल्कि अपमानित करते हुए उनका सिर मुंडवाया गया और बुरी तरह पीटा गया. अब इस घटना की गूंज बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के आदापुर थाना क्षेत्र के टिकुलिया गांव तक पहुंच चुकी है. गांव में ब्राह्मणों के पूजा-पाठ कराने पर रोक लगा दी गई है.
टिकुलिया गांव में हर बिजली के खंभे और कई बोर्डों पर एक स्लोगन लिखा गया है “इस गांव में ब्राह्मणों को पूजा-पाठ करना सख्त मना है, पकड़े जाने पर दंड मिलेगा.” यह स्लोगन गांव के प्रवेश द्वार से लेकर अंत तक लगभग हर खंभे पर साफ देखा जा सकता है.
‘जो वेद के ज्ञाता हों, उनका सम्मान करते हैं’
जब इस मामले को लेकर ग्रामीणों से बातचीत की गई, तो उन्होंने कहा कि उनका विरोध उन ब्राह्मणों से है, जो वेद और संस्कृत का सही ज्ञान नहीं रखते और मांस-मदिरा का सेवन करते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वे उन लोगों का सम्मान करते हैं जो वेद के ज्ञाता हों, चाहे वे किसी भी जाति या धर्म के क्यों न हों. जातिगत पहचान के आधार पर लोगों को पूजा-पाठ से रोकना न केवल संविधान विरोधी है, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी खतरे में डालता है.
टिकुलिया गांव के लोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि इटावा जैसे ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करें और नफरत फैलाने वाले तत्वों पर तुरंत लगाम लगाएं. इटावा की घटना शर्मसार करने वाली है. उस घटना के जो भी दोषी हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए.
गांव पहुंची पुलिस की टीम
वहीं, जैसे ही टिकुलिया गांव का मामला पुलिस के संज्ञान में आया, तत्काल एक टीम गांव पहुंची. थानाक्ष्यक्ष के मुताबिक,बोर्ड हटाए जा रहे हैं. जहां पर मैसेज लिखे थे, उसे भी मिटाया जा रहा है. जिसने भी ऐसी हरकत की है, उसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है.
चुनाव आयोग का बड़ा कदम: 2003 की वोटर लिस्ट ऑनलाइन उपलब्ध, 4.96 करोड़ वोटरों को दस्तावेज़ से छूट
1 Jul, 2025 08:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार के करीब 4.96 करोड़ वोटर्स को अब दस्तावेज जमा करने की झंझट से राहत मिल गई है. देश के चुनाव आयोग ने साल 2003 की निर्वाचक नामावलियां अपनी आधिकारिक वेबसाइट https://voters.eci.gov.in पर अपलोड कर दी हैं. इन सूचियों में वोटर्स की पूरी डिटेल पहले से मौजूद है, जिससे उन्हें या उनके बच्चों को अलग से कोई दस्तावेज देने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
चुनाव आयोग ने 24 जून को जारी निर्देशों में कहा है कि सीईओ, डीईओ और ईआरओ को 2003 की निर्वाचक नामावलियां सभी बीएलओ को हार्ड कॉपी में उपलब्ध करानी होंगी. साथ ही ये सूचियां ऑनलाइन भी सार्वजनिक की गई हैं. ताकि लोग उन्हें डाउनलोड कर सकें और गणना फॉर्म जमा करते समय दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल कर सकें.
इन वोटर्स को दस्तावेज देने की जरूरत नहीं
बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision SIR) अभियान के तहत यह कदम अहम माना जा रहा है. आयोग के अनुसार, इससे करीब 60 प्रतिशत वोटर्स को दस्तावेज देने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्हें केवल 2003 की सूची में अपना नाम और विवरण सत्यापित कर गणना फॉर्म भरना होगा. इससे वोटर्स और बीएलओ दोनों को कार्य में सुविधा मिलेगी और प्रक्रिया तेज होगी.
इसके अलावा जिन लोगों का नाम 2003 की सूची में नहीं है, वो भी अपने माता या पिता के नाम को प्रमाणित करने के लिए इसी सूची के संबंधित अंश का उपयोग कर सकते हैं. ऐसे मामलों में माता-पिता के लिए अलग से दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी. इन वोटर्स को सिर्फ अपने व्यक्तिगत दस्तावेज गणना फॉर्म के साथ जमा करने होंगे.
पुनरीक्षण क्यों होता है जरूरी?
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(2)(क) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 25 के मुताबिक, प्रत्येक चुनाव से पहले निर्वाचक नामावलियों का पुनरीक्षण अनिवार्य होता है. आयोग पिछले 75 साल से नियमित रूप से वार्षिक, गहन और संक्षिप्त पुनरीक्षण करता आ रहा है.
यह पुनरीक्षण जरूरी है क्योंकि मतदाता सूची एक जीवंत दस्तावेज होती है. इसमें मृत्यु, स्थान परिवर्तन, नई उम्र के वोटर्स के नाम जोड़ने जैसे कारणों से लगातार संशोधन होते रहते हैं. संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत, 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के भारतीय नागरिक, जो संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के सामान्य निवासी हैं, ही मतदाता बनने के पात्र माने जाते हैं.
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