बिहार-झारखण्ड
बिहार में लॉटरी से नियुक्ति पर विवाद: होम साइंस की टीचर बनीं कॉमर्स कॉलेज की प्रिंसिपल, राज्यपाल ने दी सफाई
4 Jul, 2025 03:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार की राजधानी पटना में कॉलेज के प्रिंसिपल का चयन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया गया. इस लॉटरी के जरिए कॉलेज में होम साइंस की टीचर सुहेली मेहता को कॉमर्स कॉलेज का प्रिंसिपल बनाया गया हैं. अब इस नियुक्ति प्रक्रिया पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. कई लोग इसे गलत तो कई लोग इसे सही बता रहे हैं. यही कारण है कि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को खुद सफाई देनी पड़ रही है.
लॉटरी सिस्टम के जरिए अभी 5 कॉलेजों में प्रिंसिपल का चयन किया गया है. इन कॉलेजों में प्रिंसिपल की नियुक्ति का फैसला राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के आदेश के बाद लिया गया. इसके पीछे की वजह लगातार शिकायतों का मिलना बताया गया है. इस प्रक्रिया से कॉलेजों में प्रिंसिपल की नियुक्ति की कथित गड़बड़ियों को रोका जा सके.
बिहार के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आरिफ मोहम्मद खान ने गुरुवार को इस सिस्टम का बचाव करते हुए कहा, “हमने एक ऐसी प्रणाली अपनाई है, जिसमें प्राचार्य की नियुक्ति व्यक्तिगत पसंद-नापसंद या किसी के निर्देश से नहीं होती है.
इन कॉलेजों को मिले नए प्रिंसिपल
बुधवार को विश्वविद्यालय से संबंधित 5 कॉलेजों में प्रिंसिपल नियुक्त किए गए हैं. इनमें हैरान करने वाली बात है कि महिला कॉलेज का प्रिंंसिपल पुरुष को है, तो वहीं होम साइंस की टीचर सुहेली मेहता कॉमर्स कॉलेज की प्रिंसिपल बन गई हैं.
1.मगध महिला कॉलेज नागेंद्र प्रसाद वर्मा (इतिहास, जे.पी. विश्वविद्यालय, छपरा)
2. पटना कॉलेज अनिल कुमार (रसायन विज्ञान, यूपी स्थित कॉलेज)
3.पटना साइंस कॉलेज अलका यादव (होम साइंस, महिला कॉलेज, हाजीपुर) यहां पहली बार कोई महिला प्रिंसिपल की नियुक्ति हुई है.
4.वाणिज्य महाविद्यालय सुहेली मेहता (होम साइंस, Magadh Mahila College)
5. पटना लॉ कॉलेज- योगेंद्र कुमार वर्मा
लॉटरी सिस्टम को लेकर क्या बोले राज्यपाल?
पटना के जिन कॉलेजों में प्रिंसिपल का चयन लॉटरी सिस्टम की मदद से किया गया. उसको लेकर राज्यपाल ने कहा कि पिछली बार इस तरह की नियुक्ति में कई शिकायतें मिली थीं. इसी को ध्यान में रखते हुए ये सिस्टम अपनाया गया है. ये पूरी प्रक्रिया तीन सदस्यीय कमेटी की देखरेख में की गई है.
पक्ष विपक्ष ने दिए अपने- अपने तर्क
राज्यपाल के इस फैसले पर कई राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई है. सीपीआई (एम) विधायक अजय कुमार ने कहा कि होम साइंस के प्रोफेसर ह्यूमैनिटीज साइंस का डिपार्टमेंट कैसे संभाल सकते हैं. यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि सरकार की शिक्षा को लेकर कोई प्राथमिकता नहीं है.
राज्यपाल के इस सिस्टम का जेडीयू) ने बचाव किया है. एमएलसी नीरज कुमार ने कहा, “इस मुद्दे का बिल्कुल भी राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए. यह निर्णय विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति की तरफ से लिया गया है और राज्य सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है.”
सेकुलर दलों को क्यों नहीं भाती AIMIM की दोस्ती? तेजस्वी ने फिर किया किनारा
4 Jul, 2025 03:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक बिसात बिछाई जाने लगी है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्ताहादुल मुस्लिमीन विपक्षी इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर बिहार चुनाव लड़ने की उम्मीदों पर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने पानी फेर दिया है. AIMIM ने बिहार में इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी, जिसके लिए प्रदेश अध्यक्ष अख्तारुल ईमान ने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को एक पत्र लिखा है. इसके बावजूद ओवैसी के ऑफर को लालू-तेजस्वी ने स्वीकार नहीं किया.
AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान ने लालू प्रसाद यादव को एक पत्र लिखकर कहा, सेकुलर वोटों को बंटने से रोकना है, तो AIMIM को महागठबंधन में शामिल करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि वोटों के बंटवारे से सांप्रदायिक ताकतों को फायदा होता है. इसे 2025 के चुनाव में रोकना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि AIMIM ने 2020 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी महागठबंधन का हिस्सा बनने की कोशिश की थी, लेकिन सफलता नहीं मिली. अब पार्टी फिर से गठबंधन में शामिल होकर चुनाव लड़ना चाहती है.
ओवैसी से हाथ मिलने से तेजस्वी का इनकार
बिहार विधानसभा चुनाव में सेकुलर वोटों को बंटने से रोकने की दुहाई देकर गठबंधन की बात अख्तारुल ईमान ने की है. AIMIM ने यह बात आरजेडी के साथ-साथ कांग्रेस से भी कही है. इससे पहले AIMIM मौखिक रूप से गठबंधन की बात करती रही है, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को AIMIM की ओर से कोई सीधा प्रस्ताव गठबंधन के लिए नहीं मिला. इसके बाद अख्तारुल ईमान ने लालू यादव को पत्र लिखकर गठबंधन की गुहार लगाई है, जिसके बाद आरजेडी और कांग्रेस की तरफ से AIMIM को जवाब का इंतजार है.
बिहार में इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनने के लिए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी बेचैन है, लेकिन तेजस्वी और लालू यादव तैयार नहीं है. सूबे में ओवैसी तमाम छोटे-छोटे दलों के साथ मिलकर तीसरा मोर्चा बनाने का भी ऐलान कर रहे हैं. पिछले दिनों तेजस्वी यादव ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन के सवाल पर कहा था कि कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं आया, बिहार में हमारा कांग्रेस, लेफ्ट, माले और वीआईपी पार्टी के साथ गठबंधन है. ऐसे में साफ है कि ओवैसी के साथ दोस्ती करने के लिए इंडिया गठबंधन तैयार नहीं है.
ओवैसी की छवि से बच रहे तेजस्वी यादव
असदुद्दीन ओवैसी बिहार विधानसभा चुनाव मैदान में उतरकर मुस्लिम मतों को अपने पाले में लाकर सेकुलर दलों का सियासी खेल बिगाड़ सकते हैं. 2020 के चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने पांच सीटें जीतकर महागठबंधन का समीकरण बिगाड़ दिया था, लेकिन इस बार सियासी हालात बदले हुए हैं. ऐसे में ओवैसी को मुस्लिम वोटर भले ही साथ न दे, लेकिन वो अपनी राजनीति के जरिए वोटों का ध्रुवीकरण कर सकते हैं. ओवैसी के चलते हिंदू वोट एकजुट होने का भी खतरा दिख रहा है, जिस वजह से तेजस्वी यादव बिहार में AIMIM से हाथ मिलाने से बच रहे हैं.
बिहार विधानसभा चुनाव में सेकुलर दल अगर ओवैसी के साथ मैदान में उतरे तो उन पर भी मुस्लिम परस्त और कट्टरपंथी पार्टी के साथ खड़े होने का आरोप बीजेपी लगाएगी. यही वजह है कि ओवैसी के साथ आरजेडी गठबंधन करने से परहेज कर रही है. 2014 के बाद से देश का राजनीति पैटर्न बदल गया है. देश में अब पूरी तरह से बहुसंख्यक समाज केंद्रित राजनीति हो गई है और इस फॉर्मूला के जरिए बीजेपी लगातार चुनाव जीत रही है.
असदुद्दीन ओवैसी की छवि एक कट्टर मुस्लिम नेता के तौर पर है और उनके भाषण भी इसी तरह के हैं. ऐसे में ओवैसी के साथ हाथ मिलाने से बहुसंख्यक वोटर का ध्रुवीकरण होगा. बिहार में सिर्फ मुस्लिम वोटों के सहारे सरकार नहीं बनाई जा सकती है. इसीलिए आरजेडी से लेकर कांग्रेस तक ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करना चाहते. इसके अलावा ओवैसी के साथ हाथ मिलाने पर तेजस्वी और कांग्रेस दोनों के लिए भविष्य में सियासी खतरा उत्पन्न हो सकता है, जिसके चलते भी गठबंधन के लिए रजामंद नहीं है.
मुस्लिम वोटों के बिखरने का खतरा कम
बिहार के विधानसभा चुनाव में मुकाबला बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन के बीच ही है. एनडीए के सीएम पद के चेहरे नीतीश कुमार हैं तो इंडिया गठबंधन का फेस तेजस्वी यादव हैं. नीतीश बनाम तेजस्वी के बीच सिमटते बिहार चुनाव में ओवैसी की पार्टी की राह काफी मुश्किल भरी होती जा रही है. आरजेडी और कांग्रेस का कोर वोटबैंक मुस्लिम है और ओवैसी की नजर भी मुस्लिमों पर ही टिकी है. आरजेडी की पूरी कोशिश मुस्लिम वोटों को एकमुश्त अपने साथ बांधकर रखने की है, जिसके लिए तेजस्वी यादव वक्फ कानून का विरोध करने को लेकर पसमांदा मुस्लिमों तक को साधने में जुटे हैं.
वहीं, बिहार में मुस्लिम समाज के लोगों ने 2020 चुनाव में ओवैसी की पार्टी को वोट देकर देख लिया है कि AIMIM दो-चार सीटें तो जीत सकती है, लेकिन सरकार नहीं बना सकती. बिहार में बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने की ताकत ओवैसी नहीं रखते हैं. वक्फ संशोधन कानून से लेकर मुस्लिमों के खिलाफ होने वाले हमले के विरोध में ओवैसी से कहीं ज्यादा कांग्रेस और आरजेडी खड़ी नजर आईं हैं. बिहार में मुस्लिमों के बीच कांग्रेस और आरजेडी के प्रति सॉफ्ट कार्नर है, जिसके चलते ही AIMIM गठबंधन के लिए बेचैन है.
गठबंधन के साथ एकजुट M-Y समीकरण
नीतीश कुमार के अगुवाई वाले इंडिया गठबंधन का हिस्सा आरजेडी, कांग्रेस, वामपंथी दल और मुकेश सहनी की पार्टी है. विपक्षी गठबंधन होने के चलते मुसलमानों के वोट में बिखराव का कोई खतरा नहीं दिख रहा है. तेजस्वी यादव एक बार फिर मुस्लिम-यादव की तासीर से सत्ता समीकरण पाना चाहते हैं, ठीक जिस समीकरण के साथ लालू प्रसाद यादव ने बेधड़क 15 सालों तक राज किया, लेकिन बाद के दिनों में इस समीकरण में बिखराव आया तो नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने A टू Z पर भरोसा किया. इसके बाद भी मुस्लिम वोटों पर अपनी पकड़ कमजोर नहीं होने देना चाहते हैं, जिसके लिए खुलकर मुस्लिमों से जुड़े मुद्दे पर बोल रहे हैं.
गठबंधन के सहारे ओवैसी जमीन तलाश रहे
वहीं, असदुद्दीन ओवैसी का बिहार में कोई जमीनी आधार नहीं है बल्कि उनकी पकड़ सीमांचल के इलाके की कुछ सीट तक पर ही रही है. मुसलमानों के मुद्दे पर न तो वो कभी सड़क पर उतरे और न ही उनकी पार्टी नजर आई. ओवैसी अपने सिर्फ बयानों से सनसनी पैदा कर सियासी लाभ उठाना चाहते हैं. हैदराबाद से बाहर ओवैसी ने जहां भी सियासी जगह बनाई है, वहां खुद की राजनीति के दम पर नहीं बल्कि किसी न किसी दल के सहारे जीत दर्ज की है.
महाराष्ट्र में प्रकाश अंबेडकर के साथ गठबंधन कर जीत दर्ज की और बिहार में उपेंद्र कुशवाहा और मायावती के सहारे. ऐसे ही गुजरात में भारतीय ट्राइबल पार्टी के साथ हाथ मिलाकर पार्षद की सीटें जीते हैं. ऐसे में बिहार में भी ऐसी ही कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यहां कोई भी राजनीति दल उन्हें भाव नहीं देना चाहते हैं. इतना ही नहीं ओवैसी के साथ हाथ मिलाने में फायदा कम और सियासी नुकसान ज्यादा है. इसीलिए बिहार के इंडिया गठबंधन उनसे दूरी बनाए रखकर राजनीतिक दांव चल रहे हैं.
शराबबंदी के बाद बिहार में बूम पर तस्करी, झारखंड बना 'सप्लाई बेस'
4 Jul, 2025 02:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची/पटना: बिहार में 2016 से लागू शराबबंदी भले ही सरकार की सामाजिक पहल रही हो, लेकिन इसका फायदा उठाकर झारखंड के शराब माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों ने एक संगठित तस्करी नेटवर्क खड़ा कर लिया। हालिया जांच और गिरफ्तारियों से यह खुलासा हुआ है कि झारखंड में नकली शराब का उत्पादन कर उसे बिहार के सीमावर्ती जिलों में भेजा जा रहा था।
इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा चलाए गए अभियान से हुआ, जिसे “झारखंड शराब घोटाला” कहा जा रहा है। ACB की रिपोर्ट के अनुसार, इस नेटवर्क में सरकारी ठेकों की आड़ में नकली और मिलावटी शराब बनाई जा रही थी, जिसे बिहार में नकली होलोग्राम लगाकर असली की तरह बेचा जा रहा था।
सबसे बड़ा खुलासा यह है कि प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ने 50 करोड़ रुपये के नकली होलोग्राम झारखंड को सप्लाई किए। इन होलोग्राम्स के जरिए अवैध शराब को वैध दिखाकर उसे बिहार में ऊंचे दामों पर बेचा गया। इस रैकेट में छत्तीसगढ़ के कारोबारी, झारखंड के अधिकारी और बिहार के तस्कर शामिल पाए गए हैं।
घोटाले के मुख्य आरोपी पूर्व उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे, छत्तीसगढ़ के कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया और पूर्व उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश बताए गए हैं। पूछताछ में सिंघानिया ने चौबे को मास्टरमाइंड बताया, जो 50 करोड़ रुपये की घूस में संलिप्त थे।
साहिबगंज में नकली शराब का एक कारखाना पकड़ा गया, जहां से 10 लाख रुपये की अवैध शराब बरामद हुई। वहीं, गोड्डा में एक सरकारी गाड़ी से शराब की तस्करी और एक चौकीदार से मारपीट का मामला सामने आया, जिससे प्रशासनिक तंत्र की विफलता उजागर हुई।
नालंदा, मुजफ्फरपुर, भागलपुर जैसे बिहार के सीमावर्ती जिलों में शराब की भारी मांग के चलते, तस्करों ने मुनाफे के लिए नकली शराब की आपूर्ति की। बिहार में शराबबंदी के चलते नकली शराब की कीमतों में उछाल आया, जिससे इस नेटवर्क को करोड़ों का मुनाफा हुआ।
इस घोटाले ने दोनों राज्यों की कानून व्यवस्था, प्रशासनिक पारदर्शिता और राजस्व प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ACB और अब संभावित रूप से CBI की कार्रवाई से इस तस्करी नेटवर्क को तोड़ने की तैयारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस-प्रशासन की निष्क्रियता और माफिया से सांठगांठ ने इस अवैध कारोबार को पनपने दिया। अब समय है कि बिहार और झारखंड की सरकारें परस्पर समन्वय से कार्रवाई करें ताकि भविष्य में ऐसी संगठित आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लग सके।
NIA ने झारखंड में माओवादी पर की बड़ी कार्रवाई: राजेश देवगम के ठिकानों पर छापेमारी
4 Jul, 2025 12:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने झारखंड में माओवादी गतिविधियों पर नकेल कस दी है. पश्चिम सिंहभूम के राजेश देवगम के खिलाफ 3 जुलाई को रांची के विशेष NIA कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई है. राजेश पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन CPI (माओवादी) के लिए काम करने का आरोप है. NIA के मुताबिक, राजेश माओवादी कैडर को न सिर्फ छिपाने में मदद करता था, बल्कि हथियार जुटाने, जबरन वसूली (लेवी) और संगठन की बैठकों के आयोजन में भी शामिल था.
यह मामला मार्च 2024 में सामने आया, जब चाईबासा जिले के टोंटो पुलिस स्टेशन में पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था. इस दौरान CPI (माओवादी) के वरिष्ठ नेता मिसिर बेसरा से जुड़ा भारी मात्रा में कैश और संदिग्ध सामान बरामद हुआ था. जुलाई 2024 में NIA ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी. राजेश देवगम की निशानदेही पर हुसिपी और राजाभासा गांव के बीच जंगल में छिपाए गए सामान की बरामदगी हुई थी. इसमें 10.50 लाख रुपये नकद, जेलटिन की छड़ें, वॉकी-टॉकी, सैमसंग टैबलेट, पावर बैंक, रेडियो सेट और लेवी वसूली की रसीदें शामिल थीं.
राजेश माओवादी संगठन को लॉजिस्टिक और आर्थिक मदद पहुंचाता था: NIA
NIA ने राजेश देवगम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की है. एजेंसी का कहना है कि राजेश माओवादी संगठन को लॉजिस्टिक और आर्थिक मदद पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा था. इसके अलावा NIA ने जनवरी में पश्चिम सिंहभूम के नौ स्थानों पर छापेमारी कर कई संदिग्धों और माओवादी समर्थकों के ठिकानों से मोबाइल फोन, मेमोरी कार्ड, सिम कार्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की थी. ये छापेमारी उसी केस के तहत की गई थीं, जिसमें राजेश की गिरफ्तारी हुई है.
क्यों CPI (माओवादी) संगठन भारत में बैन है?
CPI (माओवादी) देश में प्रतिबंधित संगठन है. जो झारखंड, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सबसे अधिक सक्रिय हैं. जो नक्सलियों को पनाह देने के लिए जाना जाता है. बता देें कि नक्सलियों का मुख्य मकसद भारत सरकार को उखाड़ फेंकना और एक कम्युनिस्ट राज्य स्थापित करना है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि नक्सलवाद को 31 मार्च 2026 तक पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा. NIA की यह कार्रवाई उसी दिशा में एक बड़ा कदम है.
नक्सलवाद के खिलाफ NIA बड़ा एक्शन लेने को तैयार
NIA ने बताया कि इस मामले में अन्य संदिग्धों और माओवादी समर्थकों की जांच अभी जारी है. जल्द ही मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. यह कार्रवाई नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. NIA की ताजा कार्रवाई से झारखंड में माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. राजेश देवगम के खिलाफ चार्जशीट और जंगल से बरामद सामान इस बात का सबूत हैं कि माओवादी गतिविधियों को कमजोर करने के लिए जांच एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हैं.
गडकरी ने झारखंड को ₹2460 करोड़ की सौगात से नवाजा, राज्य में बढ़ेगी कनेक्टिविटी
4 Jul, 2025 12:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
झारखंड के पलामू और गढ़वा जिले के लिए 3 जुलाई का दिन ऐतिहासिक रहा. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गढ़वा में 2460 करोड़ रुपये की लागत वाली दो राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. इस मौके पर राज्य के मंत्री राधाकृष्ण किशोर, पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम, सांसद काली चरण सिंह, विधायक और कई सम्मानीय लोग वहां मौजूद रहे. इन परियोजनाओं से न सिर्फ यातायात व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, व्यापार और पर्यटन को भी नई रफ्तार मिलेगी.
राष्ट्रीय राजमार्ग-39 के शंखा-खजुरी खंड में 22.73 किलोमीटर लंबी 4-लेन सड़क का निर्माण 1129.48 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हुआ है. इस सड़क का उद्घाटन गडकरी ने गढ़वा के हूर गांव में किया है. यह मार्ग पलामू और गढ़वा जिलों को जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमाओं तक सीधा संपर्क स्थापित करता है. इस सड़क के बनने से यात्रा का समय आधा हो जाएगा. पहले जहां एक घंटे का सफर तय होता था, वह अब मात्र 20 मिनट में पूरा होगा. यह सड़क स्थानीय लोगों के लिए जाम से राहत दिलाने के साथ-साथ व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी.
रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर: गुमला तक नई सड़क का शिलान्यास
गडकरी ने छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा से गुमला तक बनने वाली नई सड़क का शिलान्यास भी किया है. यह सड़क रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस मार्ग के निर्माण से रुपसेरा, रैदीह, सिलाम और गुमला जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात को बाईपास किया जाएगा. इससे मौजूदा सड़कों और कस्बों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा. साथ ही, सड़क सुरक्षा में सुधार होगा और वाणिज्य, व्यापार व पर्यटन को नई गति मिलेगी. यह परियोजना क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती देगी.
केंद्र सरकार झारखंड को विकसित राज्य बनाएगी: गडकरी
इन परियोजनाओं से पलामू-गढ़वा क्षेत्र में कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. साथ ही स्थानीय व्यापारियों को बाजार तक पहुंचने में आसानी होगी और पर्यटन क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा. गडकरी ने अपने संबोधन में कहा कि ये सड़कें न सिर्फ यात्रा को सुगम बनाएंगी, बल्कि झारखंड के विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी. उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि केंद्र सरकार झारखंड को विकसित राज्य बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है.
झारखंड के लिए और भी योजनाएं
गडकरी ने इस मौके पर झारखंड के लिए कई अन्य सड़क परियोजनाओं की घोषणा की. इनमें रांची के रातू रोड एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन भी शामिल है, जो राजधानी में जाम की समस्या से निजात दिलाएगा. इन परियोजनाओं की कुल लागत 6300 करोड़ रुपये से अधिक है, जो झारखंड की सड़क संरचना को और मजबूत करेंगी. बता दें कि शंखा-खजुरी 4-लेन सड़क और रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं न सिर्फ यातायात को सुगम बनाएंगी, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगी. यह झारखंड के लिए एक नई शुरुआत है, जो इसे विकास के पथ पर और आगे ले जाएगी.
बिहार में SIR की जमीनी हकीकत: हर तरफ अफरातफरी का माहौल, लोग दस्तावेजों को लेकर परेशान
4 Jul, 2025 09:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार में चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) को लेकर मतदाताओं में अफरातफरी की स्थिति है. चुनाव आयोग ने सभी मतदाताओं को पुनरीक्षण प्रपत्र भरने और कागजात जमा करने के लिए 25 दिन का समय दिया है. इस पूरी प्रक्रिया को लेकर लोगों की क्या चिंताएं हैं, क्या समस्याएं हैं, ये टीवी9 भारतवर्ष ने पटना के अदालतगंज इलाके में जाकर हालात का जायजा लिया.
यहां के जोबा पासवान के परिवार के सदस्यों को गणना प्रपत्र मिल गया है. अब इसे भरने और कागजात की चिंता सता रही है. किसी के पास आधार और राशन कार्ड, वोटर कार्ड के अलावा कोई कागजात नहीं है. चुनाव आयोग को जन्म और आवासीय प्रमाण पत्र चाहिए.
अदालतगंज के एक आंगनबाड़ी केंद्र में हैरान करने वाली जानकारी सामने आई. महिला पुरुष सब अपना अपना प्रपत्र ढूंढने के लिए बंडल पर टूटे पड़े, जो महिला BLO लोगों की मदद कर रही हैं उनके पास ही वो दस्तावेज नहीं हैं जिसकी जरूरत चुनाव आयोग ने बताई है.
हर घर में यही चर्चा और अफरातफरी है. कुछ लोग तो कागजात बनवाने के लिए ब्लॉक तक का चक्कर लगा आए हैं. वहां के बाबू हजार रुपया मांग रहे हैं. मतदाताओं की तो छोड़िए खुद BLO कह रही हैं कि मेरे पास भी कुछ कागजात नहीं है. लगता है इस बार मेरा ही नाम वोटर लिस्ट से छांट दिया जाएगा.
विपक्ष के तमाम सवाल और आपत्तियां हैं, लेकिन इस बीच चुनाव आयोग ने अपना तर्क भी जारी किया है.
बिहार में कुल 7.89 करोड़ वोटर्स
4.96 करोड़ नाम 2003 की लिस्ट में दर्ज
4.96 करोड़ लोगों को सिर्फ फॉर्म भरना है
फॉर्म भरकर अपनी पहचान की पुष्टि करनी है
संविधान के मुताबिक पुनरीक्षण का फैसला
योग्य लोगों की वोटिंग सुनिश्चित करना मकसद
पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है
दस्तावेजों की लिस्ट में 11 विकल्प दिए गए
हर मतदाता को पर्याप्त मौका दिया जा रहा है
बिहार में वोटर पुनरीक्षण अभियान से जुड़े हर सवाल का जवाब
सवाल- 2003 के बाद अगर वोटर लिस्ट में नाम तो माता-पिता का प्रमाण देना पड़ेगा ?
जवाब- 2003 के बाद नाम जुड़ा तो नागरिकता से जुड़ा प्रमाण देना होगा
सवाल- 1987 के बाद जन्म तो क्या दस्तावेज देने होंगे ?
जवाब
जन्म प्रमाण पत्र
मूल निवास प्रमाण पत्र
पासपोर्ट
फैमिली रजिस्टर
शैक्षणिक प्रमाण पत्र
जाति प्रमाण पत्र
सवाल- क्या 2003 के बाद वाला फैसला पलायन वाले परिवारों के लिए है ?
जवाब– पलायन करने वालों के लिए फैसला नहीं. फर्जी या डबल वोटर्स को हटाने के लिए
सवाल– क्या चुनाव आयोग ऐसा अभियान चला सकता है ?
जवाब- संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत अधिकार वोटर लिस्ट की शुद्धता तय करने का हक
सवाल– दस्तावेज नहीं देने पर वोटर लिस्ट से नाम हट जाएगा?
जवाब– सिर्फ दस्तावेज न देने से नाम नहीं हटेगा अगर BLO पुष्टि न करे तभी नाम कटेगा
सवाल– कितने BLO और कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है ?
जवाब– 98,500 BLO, 100000+ वॉलेंटियर्स
सवाल– 1987 से पहले, 1987 के बाद 2003 का साल क्यों तय ?
जवाब– जन्म और नागरिकता की जांच आसान हो. 2003 के पहले की वोटर लिस्ट आधार बना.
सवाल– मौजूदा समय में बिहार में कुल कितने वोटर ?
जवाब– बिहार में कुल 7.89 करोड़ मतदाता
बिहार में वोटर लिस्ट पुनरीक्षण अभियान
25 जून से 26 जुलाई- घर घर सर्वे
1 अगस्त 2025- वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट का प्रकाशन
1 अगस्त-1 सितंबर 2025- दावा और आपत्तियां
30 सितंबर 2025- अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन
किन दस्तावेजों की जरूरत?
1. सरकार से जारी पहचान पत्र
2. पेंशन भुगतान आदेश
3 जुलाई 1987 से पहले जारी सर्टिफिकेट
4. जन्म प्रमाण पत्र
5. पासपोर्ट
6. बोर्ड का शैक्षणिक प्रमाण-पत्र
7. मूल निवास प्रमाण पत्र
8. जाति प्रमाण पत्र
9. वन अधिकार प्रमाण पत्र
10. फैमिली रजिस्टर
11. जमीन या घर का सरकारी प्रमाण पत्र
विपक्ष के आरोप क्या?
आयोग का फैसला अलोकतांत्रिक है
लोकतंत्र को कमज़ोर करने की कोशिश
साल 2003 में SIR में 18 महीने लगे थे
अब 1 महीने में पुनरीक्षण कैसे हो जाएगा?
15% से कम लोगों के पास मैट्रिक सर्टिफिकेट
60 फीसदी लोगों के पास ही पक्के मकान
महादलित परिवार के पास दस्तावेज नहीं
2022 में 71.6% लोगों का बर्थ रजिस्ट्रेशन
वोटर लिस्ट चेकिंग में परेशानी क्या?
SIR के दस्तावेज में आधार कार्ड नहीं
सिर्फ 22% लोग पांचवीं तक पढ़े हैं
15% से कम लोग मैट्रिक पास हैं
सिर्फ 6% आबादी ग्रेजुएट है
सिर्फ 0.82% लोग पोस्ट ग्रेजुएट
26.5% लोग कच्चे घरों में रहते हैं
14% लोग झोपड़ी में रहते हैं
0.24% लोगों के पास घर नहीं है
21% वोटर राज्य से बाहर रहते हैं
मंडप में बनी दूल्हे की मौत की साजिश: 'गूंजा' का फूफा से चक्कर, सोनम गुप्ता से भी तेज निकली ये दुल्हन
4 Jul, 2025 07:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश, एमपी के बाद अब बिहार से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. औरंगाबाद जिले में हुए हत्याकांड ने एक बार फिर से झकझोर कर रख दिया है. शादी के महज 45 दिन बाद ही पत्नी ने अपने पति को मौत के नींद सुला दी. दरअसल, ये मामला भी राजा रघुवंशी के जैसा ही है. मृतक की पत्नी का उसके फूफा के साथ अवैध संबंध थे और शादी के मंडप में ही महिला ने पति की हत्या की साजिश रची थी. पुलिस ने इस मामले में मृतक प्रियांशू की पत्नी गूंजा सिंह समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है.
जानकारी के मुताबिक, 27 वर्षीय गूंजा ने अपने 60 साल के फूफा के प्यार में अपने पति की हत्या की साजिश रचकर अंजाम तक पहुंचाया. जिले के नवीनगर थाना क्षेत्र के लेंबोखाप गांव के पास 27 साल के प्रियांशू की 24 जून को गोली मारकर हत्या कर दी गई. मृतक की 21 मई को गूंजा सिंह से शादी हुई थी. वहीं पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो सच सामने आया.
शादी के दिन ही रची थी साजिश
पुलिस के मुताबिक, हत्या की साजिश शादी के ही दिन रची गई थी. शादी के करीब एक महीने बाद उसने पति को ठिकाने लगाने के लिए शूटर हायर कर पति की मौत की नींद सुला दी. गूंजा सिंह बचपन से ही अपने फूफा जीवन सिंह के घर पर रह रही थी. गूंजा सिंह ने बताया कि पढ़ाई के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी. वो जानती थी कि उसके फूफा उसकी उम्र से दोगुने हैं, लेकिन वो वह उससे बेइंतहा मोहब्बत करती थी.
पुलिस ने तीन लोगों को किया अरेस्ट
एसपी ने बताया कि 24 जून की रात प्रियांशू जब बाइक से अपने गांव बड़वान लौट रहा था तभी शूटरों ने उस पर हमला कर दिया. गोली लगने से प्रियांशू की मौत हो गई. घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक विशेष जांच दल का गठन किया. एसआईटी की टीम ने जांच शुरू की तो गूंजा सिंह, जयशंकर और मुकेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने बताया कि गूंजा सिंह और जीवन सिंह के बीच लगातार संपर्क था और जीवन ने ही शूटरों को हायर किया था. पुलिस ने इस मामले में गूंजा के अलावा जीवन सिंह को भी हिरासत में ले लिया है. जबकि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल रही है.
वंदे भारत पर फिर पथराव: गोरखपुर-पाटलिपुत्र रूट पर ट्रेन बनी निशाना, C-5 कोच का शीशा टूटा
3 Jul, 2025 05:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से बिहार के पाटलिपुत्र स्टेशन जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव करने वालों की फोटो सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है. आरपीएफ का कहना है कि जल्द ही बदमाशों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा. पथराव में वंदे भारत ट्रेन के एक कोच का शीशा टूट गया था. ट्रेन के बाहर लगे कैमरे में आरोपी तस्वीरें और पूरी घटना कैद हो गई. वंदे भारत पर इससे पहले भी कई रूट पर पथराव की घटना सामने आ चुकी है.
गोरखपुर से पाटलिपुत्र स्टेशन जा रही वंदे भारत ट्रेन पर सोमवार सुबह मोतीपुर के आउटर सिग्नल के पास कुछ अज्ञात बदमाशों ने पथराव कर दिया. बदमाशों ने इस दौरान कोच नंबर सी-5 पर ईंट फेंकी, जिससे सीट 70, 71 से लेकर 75 नंबर वाली सीट के सामने लगा शीशा टूट गया. शीशे के टूटते ही कोच में सवार सभी यात्री काफी घबरा गए. उन्होंने तुरंत इस बात की सूचना टीसी (टिकट कलेक्टर) और आरपीएफ के जवानों को दी.
CCTV में कैद हुई पथराव की घटना
इसके बाद मोतिहारी के RPF इंस्पेक्टर भरत प्रसाद ने गोरखपुर जाकर वंदे भारत ट्रेन में बाहर की तरफ लगा सीसीटीवी कैमरा कैद किया. CCTV फुटेज में दो बदमाश ट्रेन पर पत्थर मारते हुए नजर आ रहे हैं. साथ ही वीडियो में घटनास्थल के पास एक स्कूल भी नजर आ रहा है. जिसकी स्कूली बाउंड्रीवाल टूटी हुई है. इसी से निकालकर हमला करने के लिए ईंट लाई गई थी. आरपीएफ इंस्पेक्टर ने दोनों बदमाशों को जल्द से जल्द पकड़ने का दावा किया है.
वंदे भारत ट्रेन की बढ़ाई गई सुरक्षा
इस घटना के बाद से ही वंदे भारत ट्रेन में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पाटलिपुत्र स्टेशन से निकलने के बाद वहां की आरपीएफ टीम मुजफ्फरपुर तक सुरक्षा में आती है. इसके बाद मोतिहारी तक सुरक्षा की जिम्मेदारी मुजफ्फरपुर आरपीएफ की होती है. आखिर में इसकी जिम्मेदारी गोरखपुर आरपीएफ की होती है.
वोटर लिस्ट पुनरीक्षण पर तेजस्वी का आरोप: 'चुनाव आयोग संविधान के खिलाफ कर रहा काम'
3 Jul, 2025 05:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने आयोग पर भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश चल रही है. चुनाव आयोग संविधान की धज्जियां उड़ा रहा है.
तेजस्वी यादव ने कहा, “हम लगातार अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ चुनाव आयोग से मिलने का अनुरोध कर रहे हैं, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस राज्य में चुनाव होने जा रहे हैं, वहां विपक्ष को आयोग से मिलने का समय नहीं दिया जा रहा है.”
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की यह रवैया संविधान का उल्लंघन है और ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया. उन्होंने कहा, “पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष (लालू प्रसाद यादव) ने खुद चुनाव आयोग को पत्र लिखा है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है.”
तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर बोला हमला
तेजस्वी यादव ने यह भी दावा किया कि आयोग विपक्षी गठबंधन के प्रतिनिधिमंडल से मिलने को तैयार नहीं है, बल्कि हर पार्टी से अलग-अलग मिलना चाहता है, जिसे उन्होंने अनुचित करार दिया. उन्होंने सवाल उठाया, “क्यों? ऐसा क्यों किया जा रहा है? यह साफ दिखाता है कि चुनाव आयोग अब निष्पक्ष संस्था नहीं रहा, बल्कि यह भाजपा का आयोग बन गया है.”
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा और नीतीश कुमार की चुप्पी यह साबित करती है कि उन्हें चुनाव में हार का डर है और इसलिए चुनाव आयोग उनके लिए काम कर रहा है. उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग पीछे से इनकी मदद कर रहा है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि किसी राजनीतिक दल को आयोग ने मिलने का समय ही न दिया हो.”
चुनाव आयुक्त ‘मिस्टर इंडिया’ क्यों बन गए हैं?
तेजस्वी तेजस्वी ने केंद्र सरकार की एक राष्ट्र, एक चुनाव नीति पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि जब एक भी राज्य में निष्पक्ष चुनाव नहीं हो पा रहा, तो इस तरह की बातें केवल दिखावा हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “चुनाव आयुक्त ‘मिस्टर इंडिया’ क्यों बन गए हैं? क्या उनके पास हमारे सवालों का कोई जवाब नहीं है?”
तेजस्वी यादव के साथ-साथ महागठबंधन की पार्टियों ने इसके पहले चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर सवाल उठाया गया था और कहा था कि इस बाबत चुनाव आयोग को ज्ञापन देंगे, लेकिन तेजस्वी यादव का आरोप है कि चुनाव आयोग महागठबंधन की पार्टियों को एक साथ मिलने का समय नहीं दे रहा है.
तेजस्वी यादव ने कहा, “भविष्य में प्रधानमंत्री मोदी बिहार में राष्ट्रपति शासन लगा देंगे और पूरा प्रभार अपने हाथ में ले लेंगे. चुनाव आयोग कठपुतली बन गया है. यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है कि वोट का अधिकार छीना जा रहा है और चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के साथ बैठक नहीं कर रहा है. यह कहां का न्याय है? चुनाव आयोग ने कभी भी प्रधानमंत्री मोदी और अन्य प्रमुख नेताओं के भाषणों पर कोई कार्रवाई नहीं की.”
'नीतीश का जाना तय': प्रशांत किशोर का बड़ा बयान, बोले - 'जनता मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से नाराज'
3 Jul, 2025 05:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि नीतीश कुमार का जाना तय है. ये सिर्फ मैं ही नहीं कह रहा हूं. पिछले डेढ़ महीने से जो लोग जनसभाओं में जा रहे हैं और लोगों की बात सुन रहे हैं, लोगों की प्रतिक्रिया देख रहे हैं. ये उनका कहना है. पीके ने कहा कि जिन गांवों और छोटे शहरों में हम जा रहे हैं, वहां शायद ही कोई नेता पहुंचता है और जो भीड़ वहां आ रही है, वो सिर्फ प्रशांत किशोर को सुनने नहीं आ रही है. ये वो लोग हैं जो आरजेडी और नीतीश-बीजेपी की दो पार्टी व्यवस्था के कामकाज से खुश नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद लोग इनमें से किसी एक को वोट देते हैं क्योंकि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था और एक धारणा बन गई थी कि बिहार में कोई दूसरा विकल्प नहीं हो सकता. मगर जन सुराज के तीन साल के प्रयास ने लोगों में न सिर्फ विश्वास पैदा किया है, बल्कि उन्हें रास्ता भी दिखाया है कि जन सुराज एक विकल्प हो सकता है.
बिहार चुनाव के बाद JDU का अस्तित्व बचने वाला नहीं- PK
प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार को बिहार ने देखा है. बिहार में पिछले एक महीने रेप की पांच घटनाएं हुई हैं. अगर नीतीश कुमार सक्रिय हैं तो क्या उन्होंने इन घटनाओं पर कोई टिप्पणी की? पीड़ित परिवारों से मिले? क्या अधिकारियों पर कार्रवाई की? ये कैसे संभव है कि उनकी कैबिनेट के मंत्री अशोक चौधरी 58 साल की उम्र में पटना यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हो जाएं. बिहार चुनाव के बाद JDU का अस्तित्व बचने वाला नहीं है.
₹1 करोड़ का हर्जाना, DGP को नोटिस: महिला का आरोप- पुलिस ने की बदतमीजी, वीडियो भी बनाया
3 Jul, 2025 05:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार के भागलपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है. यहां की रहने वाली एक महिला ने शहर के एक थाना व ट्रैफिक पुलिस पर बदतमीजी और अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाया है. महिला ने बिना इजाजत वीडियो बनाने का भी आरोप लगाते हुए डीजीपी से एक करोड़ रुपए हर्जाने की मांग की है. महिला ने कहा कि गाड़ी पार्किंग को लेकर हुई बहस में पुलिस ने मेरी गाड़ी का फोटो खींचा. मैं गाड़ी के अंदर ही बैठी थी, यहां तक की पुलिस वालों ने मेरे पति को यह भी कहा कि अगर महिला साथ ना होती तब आपको बताते. एक घंटे तक उन लोगों ने हमें एक जगह खड़ा रखा. महिला ने डीजीपी को नोटिस भेजते हुए सवाल किया है कि क्या एक महिला नागरिक के साथ बदतमीजी शोभा देती है?
दरअसल शहर के खलीफाबाग के व्यवसायी प्रतीक झुनझुनवाला अपनी पत्नी के साथ गाड़ी से तिलका मांझी थाना क्षेत्र स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय के समीप एक फार्मेसी पर पहुंचे थे, जहां अपनी पत्नी श्रेया को गाड़ी में छोड़कर वह दवाई लाने गए थे. इसी दौरान यह घटना घटी.महिला ने एसएसपी से मामले की शिकायत की है. पीड़िता ने बताया कि तिलका मांझी थाना पुलिस और तिलकामांझी यातायात पुलिस ने मेरे साथ बदतमीजी और अमानवीय व्यवहार किया है.
क्या था मामला?
महिला ने बताया कि मेरी गाड़ी फार्मेसी के बाहर खड़ी थी. उसी दौरान ट्रैफिक पुलिस बिना मुझसे पूछे मेरी गाड़ी का फोटो खींचने लगी. कुछ देर में मेरे पति वहां पहुंचे और उन्होंने आपत्ति जताई तो पुलिसकर्मी उन्हें धमकाने लगे. पार्किंग में गाड़ी खड़ी करने का आरोप लगाकर 5 हजार का चालान काटने की बात कही. अपनी गलती को छुपाने के लिए उसने तिलका मांझी थाना गश्ती पुलिस और सिपाहियों को भी बुला लिया. वहां पहुंचे अन्य पुलिस कर्मियों में से एक ने कहा कि थाने चलिए तब बताते हैं. एक ने मेरे पति से कहा कि अगर मैडम साथ नहीं होती तब आपको बताते. वहीं मेरे परिचित को भी पुलिस ने डराया और धमकाया.
महिला ने मांगा एक करोड़ रुपए का हर्जाना
पीड़िता ने मामले में डीजीपी से एक करोड़ रुपये हर्जाना की मांग की है. उसने भागलपुर जिला पुलिस और ट्रैफिक पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए बिना इजाजत वीडियो बनाने अमानवीय व्यवहार और अवैध तरीके से हिरासत में रखने की शिकायत की है. उसने धारा 80 के तहत डीजीपी को कानूनी नोटिस भेज कर कहा कि घटना की शिकायत उसने वरीय पुलिस अधीक्षक से की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. महिला ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस और तिलकामांझी थाने की पुलिस ने बार-बार मजबूरी बताने के बाद भी जबरन हमें रोक लिया, बदतमीजी की और धमकी भी दी. महिला ने कहा कि हाल में ही उनका ऑपेरशन हुआ है, इसके बाबजूद मुझे परेशान किया गया.
महिला ने अपनी मेडिकल रिपोर्ट, बिल और डिस्चार्ज टिकट भी डीजीपी के साथ साझा की है. पीड़िता ने कहा कि पुलिस ने हालत की अनदेखी कर मुझे अपमानित किया. इसके लिए जिम्मेदार पुलिसवालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और नागरिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की.
कोर्ट जाने की कही बात
आगे महिला ने कहा है कि यदि दो महीने में डीजीपी से संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वह अदालत में सिविल मुकदमा करेंगी. महिला श्रेया कुमारी ने मानसिक उत्पीड़न, अपमान और संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. यह नोटिस आइजी, एसएसपी, एसपी व डीएसपी को भी भेजी गई है. महिला ने कहा कि जब तक पुलिस वालों की अहंकार की संतुष्टि नहीं हो गई. उन लोगों ने मुझे जबरन रोक कर रखा. इस दौरान मेरी गाड़ी का चालान भी नहीं काटा.
मीटिंग बीच में छोड़ गए अश्विनी चौबे, बीजेपी हलकों में चर्चा तेज
3 Jul, 2025 11:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार की राजधानी पटना में बिहार बीजेपी की प्रदेश कार्य समिति की आयोजित मीटिंग में उस वक्त एक अजीब नजारा देखने को मिला, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अश्विनी चौबे मीटिंग के बीच में से ही निकलर चले गए. बताया जा रहा है कि अश्विनी चौबे ने यह कदम नाराजगी में उठाया.
राजधानी के ज्ञान भवन में बिहार बीजेपी की प्रदेश सरकार समिति की मीटिंग का आयोजन किया गया है. इस मीटिंग में विशेष रूप से हिस्सा लेने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह खुद उपस्थित थे.
मीटिंग में भारतीय जनता पार्टी के सभी सांसदों, विधायको और जिला कमेटी के नेताओं को आमंत्रित किया गया था. इसी मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए अश्विनी चौबे भी पहुंचे हुए थे, लेकिन उन्हें सीट नहीं मिली, जिसके बाद से वह नाराज होकर के आयोजन स्थल से चले गए।
सीट नहीं मिली तो अश्विनी चौबे को आया गुस्सा
हालांकि जब उनसे मीटिंग से जाने के बारे में पूछा गया तब उन्होंने कुछ और ही कहा. उन्होंने कहा कि मैं आ रहा हूं. एक मीटिंग है बगल में. हालांकि उन्होंने इस बात को सिरे से नकार दिया कि उनको सीट नहीं मिली. उनका कहना था कि पूरी जगह है. पूरा हाल हमारे लिए हैं. हमारा सनातन महाकुंभ का कार्यक्रम है. मैं उसमें जा रहा हूं. उसके बाद से मैं फिर आऊंगा.
इस मीटिंग को लेकर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से विशेष तैयारी की गई थी. पिछले कई दिनों से इस मीटिंग को लेकर के प्रदेश भाजपा में काफी चहल-पहल का माहौल था.
बिहार चुनाव से पहले बीजेपी में गुटबाजी
ऐसे में अश्विनी चौबे को सीट नहीं मिलने की बात सामने आने के बाद से प्रदेश की राजनीति में बीजेपी की गुटबाजी की खबरें अब सामने आने लगी है. हालांकि अश्विनी चौबे के द्वारा उठाए गए इस कदम को लेकर के अभी तक प्रदेश भाजपा की तरफ से किसी भी नेता का आधिकारिक बयान नहीं आया है.
बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव है और बीजेपी चुनाव की तैयारी में जुट गई है और चुनाव से पहले भाजपा नेताओं की आपसी गुटबाजी सामने आई है.
मतदाता सूची पुनरीक्षण: बिहार में लाखों लोग चिंतित, दस्तावेज जुटाने में आ रही भारी दिक्कतें
3 Jul, 2025 11:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त गहन पुनरीक्षण अभियान ने आम जनता के बीच भारी अफरातफरी मचा दी है. चुनाव आयोग द्वारा सभी मतदाताओं को 25 दिनों के भीतर पुनरीक्षण फॉर्म भरने और आवश्यक दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिए जाने के बाद राज्यभर में हड़कंप मच गया है. राज्य के लगभग 8 करोड़ मतदाताओं को इस कार्य में शामिल किया जा रहा है, लेकिन सीमित समय और दस्तावेजों की जटिल मांग के कारण कई लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
पटना के अदालतगंज की तस्वीर राज्यभर के हालात की बानगी पेश करती है. यहां रहने वाले जोबा पासवान और उनके परिवार को गणना प्रपत्र तो मिल गया, लेकिन अब उन्हें इसे भरने और संबंधित दस्तावेज जुटाने की चिंता सता रही है. उनके पास केवल आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी है, जबकि चुनाव आयोग द्वारा जन्म प्रमाण पत्र और आवासीय प्रमाण पत्र की भी मांग की जा रही है.
दस्तावेज जुटाने को लेकर अफरातफरी
इसी मोहल्ले के अन्य घरों में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है. हर गली-मोहल्ले में सिर्फ गणना प्रपत्र और दस्तावेजों की चर्चा हो रही है. लोग ब्लॉक कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन वहां के कर्मचारियों द्वारा प्रत्येक प्रमाण पत्र के लिए 1000 रुपये तक की मांग की जा रही है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय लोग खासे परेशान हैं.
स्थानीय आंगनवाड़ी केंद्रों पर तो हालात और भी खराब हैं. वहां पहुंचे लोगों की भारी भीड़ के कारण अफरा-तफरी का माहौल है. गणना प्रपत्रों के बंडल जमीन पर बिखरे पड़े हैं, और महिला-पुरुष सभी अपने नाम का प्रपत्र खोजने के लिए आपस में धक्कामुक्की कर रहे हैं. कई स्थानों पर BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) तक अपना नियंत्रण खो चुके हैं.
चुनाव आयोग की पहल से लोगों में नाराजगी
एक महिला BLO ने बताया, मेरे पास भी सारे कागजात नहीं हैं, मुझे डर है इस बार मेरा ही नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा. स्थिति यह है कि प्रपत्र खोजने से लेकर दस्तावेज़ जमा करने तक, हर चरण में मतदाता खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं.
इस पूरी प्रक्रिया को लेकर लोग सरकार और चुनाव आयोग दोनों से नाराज हैं. लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी कवायद के लिए अधिक समय और सरल प्रक्रिया होनी चाहिए थी, वरना बड़ी संख्या में लोगों का मताधिकार छिन सकता है. चुनाव आयोग की इस कवायद का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है, लेकिन मौजूदा हालात में यह अभियान सरल प्रक्रिया के बजाय जटिल परेशानी बनकर सामने आया है.
झाड़-फूंक के बहाने हैवानियत: तांत्रिक ने 7 माह की गर्भवती से किया गैंगरेप, पुलिस के हत्थे चढ़ा
3 Jul, 2025 11:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार के मुजफ्फरपुर में झाड़-फूंक के नाम पर महिला के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है. 25 साल की पीड़ित महिला 7 महीने की गर्भवती थी. घटना शिवाईपट्टी थाना क्षेत्र के मडेरा गांव की है. कहा जा रहा कि महिला कि तबीयत कुछ खराब थी. अंधविश्वास के चलते महिला का ससुर उसे मधेरा गांव स्थित एक ओझा के पास झाड़-फूंक कराने ले गए थे.
तांत्रिक ने महिला के ससुर को बाहर बैठा दिया और महिला को अंदर ले गया. इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया. लोक-लाज और डर के चलते महिला ने किसी को यह बात नहीं बताई. दूसरी बार महिला कि तबीयत फिर खराब हुई तो परिवार वालों फिर से उसे तांत्रिक के पास ले गये. तांत्रिक ने फिर से ऐसा किया. तीसरी बार तबीयत बिगड़ने पर महिला को फिर से तांत्रिक के पास लाया गया तो आरोपी ने वही हरकत की. साथ ही आरोपी के दो अन्य साथियों ने भी महिला के साथ गैंगरेप किया.
इस बार महिला चुप नहीं रह सकी और उसने अपने परिजनों को उसके साथ हुई घटना के बारे में बता दिया. महिला पर आपबीती सुन परिवार के सदस्यों के पैरो तले जमीन खिसक गई. इस घटना के दौरान महिला कि हालत बिगड़ने लगी. महिला को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया और उसके परिवार के अन्य सदस्यों को घटना की जानकारी दी गई. परिजनों ने साथ ही शिवायपट्टी पुलिस स्टेशन को भी घटना को जानकारी दी गई. पुलिस ने आरोपी तांत्रिक को गिरफ्तार कर लिया है. बाकी दोनों आरोपियों की तालश जारी है.
छापा मारकर किया गिरफ्तार
सिवाईपट्टी थाने की पुलिस ने झाड़-फूंक के बहाने सात माह की गर्भवती से दुष्कर्म के आरोपित ओझा (तांत्रिक) शिवशंकर साह को उसके घर मधयपुर से गिरफ्तार किया है. थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार ने बताया कि मंगलवार की सुबह पुलिस को उसके घर पर होने की सूचना मिली थी. इसके बाद छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में आरोपित ने पुलिस के समक्ष गुनाह कबूल किया है.
पहले भी कर चुका है कई कांड
बताया जाता है कि इससे पहले भी झाड़-फूंक के नाम पर आरोपी तांत्रिक कई महिलाओं से गलत कर चुका है. लोकलाज के भय से महिलाओं के चुप रह जाने की वजह से आरोपित का मनोबल बढ़ता गया. कुछ महिलाओं ने मौके पर ही विरोध किया तो आरोपित के साथ मारपीट भी हुई. फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. थानेदार ने बताया कि महिला से दुष्कर्म की पुष्टि चिकित्सकों ने भी की है.
अवैध संबंध का खूनी अंजाम:भाभी से प्रेम-प्रसंग में भाई ने भाई की हत्या की
3 Jul, 2025 11:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
झारखंड की राजधानी रांची के नरकोपी थाना क्षेत्र में रहने वाले एक शख्स ने अपने चचेरे भाई की हत्या कर दी. सोमनाथ उरांव नामक शख्स को अपनी ही भाभी से इश्क प्यार हो गया. भाभी और देवर दोनों ने एक दूसरे के प्यार में पागल हो गए. लेकिन महिला के पति ने इस का विरोध किया. जब दोनों ने उसकी बात को नजर अंदाज किया तो महिला के पति ने अपने चचेरे भाई की हत्या कर दी.
दरअसल, पत्नी से अवैध संबंध रखने वाले चचेरे भाई की महिला के पति ने हत्या कर दी. पुलिस को जानकारी मिली तो मामले की जांच में जुटी गई. पुलिस जांच में मामले का खुलासा हुआ. हत्या का आरोपी कोई और नहीं, बल्कि उसका ही चचेरा बड़ा भाई झरिया उरांव ही निकला. 27 जून को रांची के नरकोपी थाना क्षेत्र के करकरी गांव में हुई सोमनाथ उरांव हत्याकांड का रांची के एसएसपी सह डीआइजी चंदन कुमार सिन्हा ने खुलासा किया.
पत्नी से था अवैध संबंध
मृतक सोमनाथ उरांव का अपने ही चचेरे भाई झरिया उरांव की पत्नी के साथ प्रेम संबंध था. दोनों के अवैध संबंधों की जानकारी मिलने पर पति झरिया उरांव के मना किया. लेकिन उसकी गैर मौजूदगी में उसका चचेरा भाई सोमनाथ, उसकी पत्नी के साथ घंटो रहता था. दोनों के बीच अवैध संबंधों की खबर पूरे गाव में फैल गई. इधर चचेरे भाई और पत्नी के बीच चल रहे अवैध संबंधों से नाराज पति झरिया उरांव ने नाराज होकर अपने भाई सोमनाथ उरांव की हत्या कर दी.
पति ने चचेरे भाई का काट दिया गला
हत्याकांड मामले को लेकर मृतक सोमनाथ उरांव की मां कामेश्वरी देवी ने नरकोपी थाना में केस दर्ज करवाया. मामले के खुलासे के लिए रांची के ग्रामीण एसपी के नेतृत्व में एक एसआईटी टीम का गठन किया गया. टीम ने विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जांच कर और ग्रामीणों से पूछताछ के आधार पर, मृतक के चचेरे भाई झरिया उरांव को हिरासत ले लिया. आरोपी से कड़ाई से पूछताछ करने पर पूरे मामले का खुलासा का हुआ.
संकल्प से समाधान अभियान’ से त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी निराकरण हुआ सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
यूरिया का प्रभावी विकल्प बन रही हरी खाद, जशपुर में 600 हेक्टेयर में प्रदर्शन
फॉरेस्ट ग्राउंड में बना बॉक्स क्रिकेट ग्राउंड युवाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहित और अनुशासित कर रहा
माता-पिता के संस्कार और गुरूओं से प्राप्त ज्ञान के प्रति सदैव रहें कृतज्ञ : राज्यपाल पटेल
आदि शंकराचार्य का दर्शन भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक एकता का बना आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
