मध्य प्रदेश
रफ्तार का कहर! स्कूल वैन की टक्कर से दो युवकों ने गंवाई जान
1 Jul, 2026 12:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सागर: जैसीनगर थाना क्षेत्र के सरखड़ी-वांसा मार्ग पर स्थित ताजपुर तिराहा के पास बुधवार सुबह करीब साढ़े सात बजे एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। एक स्कूल वैन और मोटरसाइकिल के बीच हुई आमने-सामने की जोरदार भिड़ंत में बाइक सवार दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में वैन में सवार एक स्कूली बच्चा भी घायल हुआ है, जिसे इलाज के लिए सागर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
आमने-सामने की भिड़ंत इतनी भीषण कि युवकों ने मौके पर तोड़ा दम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल वैन सरखड़ी से बांसा की ओर जा रही थी, तभी ताजपुर तिराहा के पास सामने से आ रही एक तेज रफ्तार मोटरसाइकिल से उसकी सीधी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सवार दोनों युवक दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए घायल बच्चे और दोनों युवकों को एक निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों युवकों को मृत घोषित कर दिया।
मृतकों की हुई पहचान, वैन छोड़कर भागा चालक
हादसे में जान गंवाने वाले युवकों की पहचान बांसा निवासी 42 वर्षीय गुड्डू यादव (पिता दशरथ यादव) और सिंघार चौरी निवासी 27 वर्षीय रामबाबू कुर्मी (पिता प्यारेलाल कुर्मी) के रूप में हुई है। वैन में सवार घायल बच्चे को प्राथमिक उपचार देने के बाद बेहतर इलाज के लिए सागर रेफर किया गया, जहां फिलहाल उसका उपचार जारी है। घटना के बाद आरोपी वैन चालक पकड़े जाने के डर से अपने वाहन को मौके पर ही छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलते ही जैसीनगर थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शवों का पंचनामा बनाकर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त दोनों वाहनों को जब्त कर लिया है और फरार चालक की तलाश के साथ-साथ हादसे के कारणों की बारीकी से जांच कर रही है।
भोपाल से खुशखबरी, महंगाई भत्ता बढ़ा, जल्द मिलेगा एरियर
1 Jul, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: लगातार बढ़ती महंगाई के बीच भोपाल नगर निगम ने अपने हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों को एक बड़ी राहत दी है। राज्य शासन की मंजूरी के बाद नगर निगम प्रशासन ने अपने अमले के महंगाई भत्ते (डीए) में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी के आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। सातवां वेतनमान प्राप्त कर रहे कर्मचारियों का महंगाई भत्ता अब 252 प्रतिशत से बढ़कर 257 प्रतिशत हो गया है। बढ़ा हुआ यह महंगाई भत्ता 1 जुलाई 2025 से लागू माना जाएगा, जिससे कर्मचारियों को वित्तीय मोर्चे पर खासी मदद मिलेगी।
मई से अक्टूबर 2026 के वेतन में जुड़कर आएगी राशि
नगर निगम के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, महंगाई भत्ते की बढ़ी हुई दरें भले ही जुलाई 2025 से प्रभावशील होंगी, लेकिन इस बढ़ी हुई राशि का नियमित भुगतान मई 2026 से अक्टूबर 2026 तक कर्मचारियों के हर महीने के नियमित वेतन के साथ जोड़कर किया जाएगा।
सेवानिवृत्त और दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों को एकमुश्त एरियर
आदेश की सबसे बड़ी राहत यह है कि बढ़े हुए महंगाई भत्ते के साथ ही कर्मचारियों को पिछले महीनों के एरियर (बकाया राशि) का लाभ भी दिया जाएगा। आम कर्मचारियों के लिए यह एरियर पांच किस्तों में देय होगा। वहीं, जो कर्मचारी 1 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच सेवानिवृत्त (रिटायर) हो चुके हैं, उन्हें एरियर की पूरी राशि एकमुश्त (एक साथ) दी जाएगी। इसके अलावा, जिन कर्मचारियों का इस अवधि के दौरान निधन हो चुका है, उनके नामांकित आश्रितों या परिजनों को भी एरियर की पूरी राशि का एकमुश्त भुगतान किया जाएगा। नगर निगम प्रशासन ने सभी विभागाध्यक्षों और शाखा प्रभारियों को इस आदेश का तत्काल और कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
भोपाल नगर निगम डीए वृद्धि के प्रमुख बिंदु
महंगाई भत्ते में वृद्धि: 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।
नया डीए रेट: महंगाई भत्ता अब 252% से बढ़कर 257% हो गया है।
लागू होने की तिथि: बढ़ी हुई दरें 1 जुलाई 2025 से प्रभावी मानी जाएंगी।
नियमित भुगतान: मई 2026 से अक्टूबर 2026 तक नियमित वेतन के साथ जुड़कर मिलेगा।
एरियर का भुगतान: सामान्य कर्मचारियों को पांच किस्तों में भुगतान होगा।
विशेष राहत: सेवानिवृत्त कर्मचारियों और दिवंगत कर्मियों के आश्रितों को पूरा एरियर एकमुश्त दिया जाएगा।
कार्यकारिणी की सूची बनी विवाद की वजह, दो पदाधिकारियों ने छोड़ा पद
1 Jul, 2026 10:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्वालियर: ग्वालियर शहर जिला कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी घोषित होते ही संगठन के भीतर का असंतोष और गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। नई सूची जारी होने के कुछ ही समय बाद दो नवनियुक्त पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। दोनों ही नेताओं ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट साझा कर पद छोड़ने की जानकारी दी है, जिसके बाद से जिले की सियासत और कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
सचिव बनने के तुरंत बाद लतीफ खान ने छोड़ा पद
कांग्रेस द्वारा जारी की गई नई कार्यकारिणी की सूची में लतीफ खान को 47वें क्रम पर सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, नियुक्ति की घोषणा के कुछ ही देर बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर पद छोड़ने का ऐलान कर सबको चौंका दिया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "शहर जिला कांग्रेस कमेटी में स्वाभिमान से समझौता नहीं। नवनियुक्त सचिव पद से अपना इस्तीफा देता हूं। माननीय अध्यक्ष जीतू पटवारी जी का धन्यवाद।" इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि वे अपना आधिकारिक इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (पीसीसी चीफ) जीतू पटवारी को भेज रहे हैं।
महासचिव बनाए गए प्रतीक जैन ने भी दी इस्तीफे की घोषणा
इस्तीफा देने वाले दूसरे नेता प्रतीक जैन हैं, जिन्हें नई कार्यकारिणी में 26वें क्रम पर महासचिव बनाया गया था। उन्होंने भी सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए पद संभालने से इनकार कर दिया। प्रतीक जैन ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मुझे महासचिव पद की जिम्मेदारी देने के लिए वरिष्ठ नेतृत्व का आभार। मैं कांग्रेस का निष्ठावान कार्यकर्ता हूं। मुझे किसी पद की लालसा नहीं है, इसलिए मैं अपने पद से इस्तीफा देता हूं।”
संगठन में बढ़ी हलचल, वरिष्ठता की अनदेखी की चर्चा
नई सूची के आते ही एक के बाद एक दो बड़े पदाधिकारियों के इस्तीफों से ग्वालियर कांग्रेस में खलबली मच गई है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि इतनी जल्दी पद छोड़ने के पीछे पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी और संगठनात्मक तालमेल की कमी एक मुख्य वजह हो सकती है। सूची में दिए गए क्रम और पदों को लेकर नेताओं में नाराजगी देखी जा रही है।
कांग्रेस संगठन की ओर से अब तक प्रतिक्रिया नहीं
इस पूरे सियासी घटनाक्रम और दोनों नेताओं के इस्तीफों पर फिलहाल कांग्रेस संगठन या किसी बड़े पदाधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना यह होगा कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इन नाराज नेताओं के इस्तीफे सीधे स्वीकार करता है या फिर संगठन में डैमेज कंट्रोल के लिए इन्हें मनाने की कोई कोशिश की जाती है।
भोपाल सहित 3 जिलों में शुरू होगी विशेष मुहिम, बेतवा को साफ बनाने पर फोकस
1 Jul, 2026 10:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार 'नमामि गंगे मिशन' के अंतर्गत बेतवा नदी के संरक्षण और उसे नया जीवन देने के लिए एक बड़े स्तर पर अभियान शुरू करने जा रही है। सरकार की यह योजना केवल नदी की ऊपरी सफाई तक सीमित नहीं होगी, बल्कि एक वैज्ञानिक और दीर्घकालिक रणनीति के तहत पूरे नदी तंत्र को पुनर्जीवित किया जाएगा। इस बड़े प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार करने के लिए राजधानी भोपाल में विभागीय इंजीनियरों और अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि बेतवा नदी के लिए एक मजबूत और प्रभावी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा सके।
सबसे ज्यादा प्रदूषित हिस्सों से शुरू होगा संरक्षण का काम
अधिकारियों के मुताबिक, बेतवा नदी का उद्गम रायसेन जिले के जंगलों में स्थित झिरी नामक स्थान से होता है। उद्गम स्थल से आगे बढ़ते ही भोपाल, रायसेन और विदिशा जिलों में यह नदी भारी प्रदूषण की चपेट में आ जाती है। भोपाल की कलियासोत नदी और बेतवा का संगम भोजपुर के पास होता है, जहां नदी का हाल बेहद चिंताजनक है। इसके अलावा, मंडीदीप के पास बेतवा का एक बड़ा हिस्सा जलकुंभी से पूरी तरह ढक चुका है। इसी को देखते हुए सरकार सबसे पहले इन तीनों जिलों में बेतवा के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए विशेष फोकस कर रही है।
सीवेज और उद्योगों के प्रदूषित पानी को रोकने पर जोर
नदी को साफ और अविरल बनाने के लिए सबसे ज्यादा ध्यान सीवेज ट्रीटमेंट पर दिया जा रहा है। भोपाल की कलियासोत नदी से लेकर बेतवा में मिलने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए तीनों जिलों के नगरीय निकायों के इंजीनियरों को विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। असल में, औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप में उद्योग स्थापित होने के इतने सालों बाद भी अब तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बन पाया है, जिससे फैक्ट्रियों का जहरीला पानी सीधे बेतवा नदी में मिल रहा है। इसका बुरा असर नदी के जल के साथ-साथ आसपास की खेती पर भी पड़ रहा है। नई डीपीआर में अनुपचारित सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, नदी तटों के कटाव को रोकने, जैव विविधता के संरक्षण और जनभागीदारी जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।
मध्य प्रदेश का गंगा बेसिन और नमामि गंगे मिशन
नमामि गंगे भारत सरकार का एक एकीकृत मिशन है, जिसका उद्देश्य गंगा और उसकी सहायक नदियों का समग्र विकास और संरक्षण करना है। मध्य प्रदेश का गंगा बेसिन राज्य के 34 जिलों और 283 शहरी निकायों तक फैला हुआ है, जिसमें चंबल, बेतवा, सिंध, काली सिंध, धसान, केन, क्षिप्रा, गंभीर, टोंस, सोन और पार्वती जैसी 11 प्रमुख नदियां शामिल हैं। साल 2014 में शुरू हुए इस मिशन के पहले चरण में गंगा किनारे के 5 राज्यों में काम किया गया था, जबकि दूसरे चरण में मध्य प्रदेश जैसी सहायक नदियों वाले राज्यों को शामिल किया गया है।
प्रदेश में 824.57 करोड़ की आठ योजनाएं मंजूर
नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण के तहत मध्य प्रदेश को 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता के साथ 824.57 करोड़ रुपये की आठ परियोजनाएं पहले ही मंजूर हो चुकी हैं। इनमें सबसे बड़ी परियोजना इंदौर की कान्ह और सरस्वती नदी प्रदूषण नियंत्रण योजना है, जिसकी लागत 511.15 करोड़ रुपये है। इसके अलावा उज्जैन और नागदा में सीवेज प्रबंधन, चित्रकूट की मंदाकिनी नदी पर घाट निर्माण, मंदसौर की शिवना नदी का पर्यावरण उन्नयन, ग्वालियर की मोरार नदी का पुनर्जीवन व रिवर फ्रंट विकास और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) की चार प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने का काम चल रहा है। इन सभी स्वीकृत कार्यों का विवरण इस प्रकार है:
इंदौर (कान्ह एवं सरस्वती नदी प्रदूषण नियंत्रण हेतु अतिरिक्त विकेन्द्रीकृत STP): स्वीकृत लागत 511.15 करोड़ रुपये (416.46 करोड़ रुपये का अवार्ड)।
उज्जैन (इंटरसेप्शन, डायवर्जन एवं STP कार्य): स्वीकृत लागत 101.57 करोड़ रुपये।
नागदा (इंटरसेप्शन, डायवर्जन एवं STP कार्य): स्वीकृत लागत 65.98 करोड़ रुपये।
ग्वालियर (मोरार नदी का पुनर्जीवन एवं विकास): स्वीकृत लागत 39.24 करोड़ रुपये (22.19 करोड़ रुपये का अवार्ड + 18% GST)।
ग्वालियर (मोरार नदी रिवर फ्रंट विकास - फेज II): स्वीकृत लागत 32.44 करोड़ रुपये।
चित्रकूट, सतना (मंदाकिनी नदी पर घाट निर्माण): स्वीकृत लागत 31.88 करोड़ रुपये (26.22 करोड़ रुपये का अवार्ड)।
मंदसौर (शिवना नदी का पर्यावरण उन्नयन): स्वीकृत लागत 28.91 करोड़ रुपये (27.12 करोड़ रुपये का अवार्ड)।
MPPCB (प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण): स्वीकृत लागत 13.40 करोड़ रुपये।
भोपाल के बड़ा तालाब विवाद में प्रशासन हरकत में, दो इंजीनियरों पर कार्रवाई शुरू
1 Jul, 2026 07:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: भोजवेटलैंड क्षेत्र (बड़ा तालाब) के 50 मीटर दायरे के सीमांकन को लेकर भोपाल नगर निगम में बड़ा प्रशासनिक हड़कंप मच गया है। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने नगर निगम के ही दो वरिष्ठ अधिकारियों—भवन अनुज्ञा शाखा के सहायक यंत्री प्रदीप कुमार जड़िया और झील संरक्षण प्रकोष्ठ के तत्कालीन सहायक यंत्री आदित्य खरे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि सीमांकन के बाद तैयार किए गए पंचनामे में रिकॉर्ड से अलग और गलत तथ्य होने के बावजूद इन्होंने कोई आपत्ति नहीं जताई और चुपचाप उस पर अपने हस्ताक्षर कर दिए।
एनजीटी आदेशों की समीक्षा बैठक में खुली लापरवाही
यह पूरा मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों के पालन की समीक्षा के दौरान उजागर हुआ। मंगलवार को नगर निगम आयुक्त ने एक महत्वपूर्ण बैठक ली, जिसमें बड़ा तालाब के 50 मीटर प्रतिबंधित दायरे में किए गए अतिक्रमण और अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की समीक्षा की जा रही थी। इस दौरान सामने आया कि 4 जून 2026 को होने वाली अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को संबंधित पक्ष द्वारा दोबारा सीमांकन की मांग करने पर टाल दिया गया था। इसके बाद 18 जून को राजस्व विभाग की टीम की मौजूदगी में फिर से सीमांकन किया गया, जिसमें नगर निगम की तरफ से ये दोनों सहायक यंत्री शामिल हुए थे।
सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए पंचनामे के तथ्य
मामले की जांच में यह पाया गया कि दोबारा किए गए सीमांकन के बाद जो पंचनामा तैयार हुआ, उसमें लिखे गए कई महत्वपूर्ण तथ्य झील संरक्षण प्रकोष्ठ के मूल रिकॉर्ड से बिल्कुल अलग थे। इसके बावजूद दोनों जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर न तो कोई लिखित विरोध दर्ज कराया और न ही एनजीटी से जुड़े इस संवेदनशील मामले में नगर निगम का मजबूत पक्ष रखा। निगम प्रशासन ने अधिकारियों के इस रवैए को बेहद गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और शासकीय कर्तव्यों के प्रति घोर अनदेखी माना है।
आचरण नियमों का उल्लंघन, दो दिनों में मांगा जवाब
नगर निगम आयुक्त ने जारी नोटिस में स्पष्ट किया है कि दोनों अधिकारियों का यह कदम मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियमों के पूरी तरह विपरीत है, जो उनके पदीय दायित्वों के प्रति लापरवाही को दर्शाता है। दोनों ही अधिकारियों को दो दिन के भीतर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर इस मामले में अपना स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया गया है। आयुक्त ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो दोनों के खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत कड़ी विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
HIV पॉजिटिव डिलीवरी बॉय गिरफ्तार, 100 से ज्यादा लोगों के संपर्क का दावा
30 Jun, 2026 08:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में हुए सनसनीखेज ब्लाइंड मर्डर केस में पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी ने पूछताछ में ऐसे खौफनाक राज उगले हैं, जिसने पुलिस महकमे के साथसाथ पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है. आरोपी युवक, जो भोपाल की सड़कों पर एक आम डिलीवरी बॉय बनकर घूमता था, असल में एक साइको सीरियल प्रेडेटर निकला. पुलिस रिमांड के दौरान हुए खुलासों से साफ है कि वह अनजाने में नहीं, बल्कि बेहद शातिराना अंदाज में लोगों के बीच मौत का वायरस बांट रहा था. आरोपी फिलहाल 30 जून तक पुलिस रिमांड पर है. पूछताछ में उसने कुबूल किया है कि वह भोपाल में डिलीवरी बॉय का काम करता था, जिससे उसे शहर के चप्पेचप्पे और सुनसान इलाकों की सटीक जानकारी थी. वह अक्सर सुनसान सड़कों पर रात के समय डिलीवरी के बहाने निकलता था और फिर शराब खरीदकर शिकार की तलाश में जुट जाता था. जहां किसी को अकेला देखता था, उसे ही अपना शिकार बना लेता था. पुलिस के मुताबिक, आरोपी जेंडर आधारित सोशल मीडिया ऐप्स के जरिए लोगों से संपर्क साधता था. इसके अलावा, रात के अंधेरे में वह प्रभात चौराहा, बोर्ड ऑफिस और नाका जैसे व्यस्त और संवेदनशील क्षेत्रों में एक्टिव रहता था. वहां वह अकेले मिलने वाले पुरुषों को या तो पैसों का लालच देता था या फिर शराब पिलाकर अपने जाल में फंसाता था।
115 लोगों से संबंध का दावा, फूले पुलिस के हाथपांव
साल 2018 में जेल से छूटने के बाद से आरोपी का कोई स्थाई ठिकाना नहीं था. वह घर पर कम और सड़कों पर ज्यादा रहता था. रिमांड के दौरान उसने बेहद चौंकाने वाला दावा किया है कि वह अब तक 100 से ज्यादा पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बना चुका है. यह सुनने के बाद पुलिस के भी हाथपैर फूल गए हैं. अब पुलिस सड़कों पर उतर कर उसके संपर्क में आए लोगों की तलाश में जुटी हुई है।
बेसहारा और फुटपाथ वाले लोग थे आसान शिकार
इस साइको सीरियल प्रेडेटर का सबसे आसान और बड़ा शिकार सड़क किनारे या फुटपाथ पर सोने वाले बेसहारा लोग होते थे. वह इन कमजोर और बेघर लोगों को निशाना बनाता था और उन्हें जबरन या बहलाफुसलाकर शराब पिलाता था. आरोपी ने बताया कि वह जानबूझकर उन्हें अत्यधिक शराब पिलाता था, ताकि अगर वे कभी होश में आकर पुलिस के पास जाएं भी, तो नशे की हालत के कारण पुलिस उनकी बात पर यकीन न करे।
मर्डर सीन का रीक्रिएशन और HIV पॉजिटिव का खौफनाक सच
शनिवार को कटारा हिल्स थाना पुलिस और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की टीम आरोपी को इकोलॉजिकल पार्क स्थित घटनास्थल पर ले गई. वहां एक पुतले की मदद से पूरे घटनाक्रम का रीक्रिएशन कराया गया, जिसे देखकर वहां मौजूद अधिकारियों के रोंगटे खड़े हो गए. मामले में सबसे डरावना मोड़ तब आया जब पुलिस को पता चला कि आरोपी एचआईवी पॉजिटिव है. साल 2022 / 2023 में जब वह भोपाल के मिसरोद थाने के एक अन्य आपराधिक मामले में जेल गया था, तब मेडिकल जांच में उसके एचआईवी संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी. अब पुलिस इस सबसे गंभीर और खौफनाक पहलू की जांच कर रही है कि क्या वह किसी गहरी मानसिक सनक या फितूर का शिकार है? पुलिस को अंदेशा है कि कहीं वह खुद को हुए इस जानलेवा रोग का बदला पूरी दुनिया से लेने की मानसिकता के तहत तो लोगों को संक्रमित नहीं कर रहा था. आरोपी फिलहाल कुंवारा है।
बेसुध कर पत्थर से कुचला सिर, फिर की दरिंदगी
आरोपी ने कड़ाई से पूछताछ में बताया कि वारदात के दिन उसने पहले मृतक को दो देसी शराब पिलाईं. जब वह बेसुध हो गया, तो उसने उसकी शर्ट उतारी और उसे करीब 15 मीटर तक घसीटते हुए एक पुल के नीचे ले गया. इसके बाद उसने बेरहमी से पीड़ित को सिर के बल एक भारी पत्थर पर पटक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई. हत्या की इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद भी आरोपी का दिल नहीं पसीजा और उसने शव के साथ कुकृत्य किया।
डिजिटल साक्ष्यों से कॉन्टैक्ट चेन खंगाल रही पुलिस
कटारा हिल्स थाना प्रभारी सुनील दुबे के मुताबिक, आरोपी का मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है. जांच टीम उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स, ऐप हिस्ट्री और चैट रिकॉर्ड्स को बारीकी से खंगाल रही है. डिजिटल साक्ष्यों के जरिए उन सभी युवकयुवतियों की पहचान की जा रही है जो पिछले कुछ सालों में इसके संपर्क में आए थे, ताकि उन्हें इस खतरे के प्रति सचेत किया जा सके और उनकी काउंसलिंग कराई जा सके. हालांकि, अब तक की जांच में किसी महिला या लड़की के साथ सीधे तौर पर जबरन दुष्कर्म का मामला सामने नहीं आया है, लेकिन पुलिस हर पहलू पर गहन तफ्तीश कर रही है।
यशस्वी प्रधानमंत्री के विश्वसनीय सलाहकार:अमित शाह
30 Jun, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
-सुरेश पचौरी
भारतीय राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनका मूल्यांकन केवल उनके पदों से नहीं, बल्कि उनके निर्णयों, संगठन निर्माण की क्षमता से किया जाता है। मेरे सार्वजनिक जीवन के छह दशकों में मुझे अनेक प्रधानमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और विभिन्न दलों के शीर्ष नेताओं के साथ निकटता से काम करने का अवसर मिला है।
जब मैंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की, तदोपरांत पहली बार दिल्ली स्थित अमित शाह जी के निवास पर मुझे मिलने का अवसर मिला। यह मेरे लिए अत्यंत सुखद और आश्चर्यजनक अनुभव था। हमारी पहली औपचारिक मुलाकात से पहले ही उन्हें मेरे सार्वजनिक जीवन, कांग्रेस संगठन में मेरी भूमिका, संसदीय अनुभव और राजनीतिक यात्रा की विस्तृत जानकारी ले रखी थी। मुझे स्पष्ट हो गया कि वे किसी व्यक्ति से मिलने से पहले उसकी पूरी जानकारी करते हैं। यह उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है—तैयारी, तथ्य, अध्ययन और सूक्ष्म विश्लेषण।
मेरे लंबे राजनीतिक जीवन में मैंने अनेक कुशल प्रशासकों और रणनीतिकारों को देखा है, लेकिन अमित शाह जैसा लौहपुरुष गृह मंत्री और राजनीतिक रणनीतिकार बिरले ही होते हैं । वे केवल घटनाओं पर प्रतिक्रिया नहीं देते, बल्कि उनकी दिशा और संभावनाओं आँकलन कर संगठन और सरकार—दोनों को उसी अनुरूप तैयार करते हैं।
सन 2014 का लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति का निर्णायक मोड़ था। उस समय वर्तमान यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सामने परिवर्तन, विकास और नए विश्वास का चेहरा थे, लेकिन उस जनसमर्थन को बूथ स्तर तक संगठित कर ऐतिहासिक जनादेश में परिवर्तित करने वाले प्रमुख रणनीतिकार अमित शाह थे। उत्तर प्रदेश में उनके मार्गदर्शन में भाजपा ने अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की और उसी विजय ने केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार का मार्ग प्रशस्त किया। इसके बाद 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि यह केवल चुनावी लहर नहीं थी, बल्कि सुदृढ़ संगठन, सूक्ष्म प्रबंधन और देवतुल्य कार्यकर्ता-आधारित राजनीति का परिणाम था।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में श्री अमित शाह ने भारतीय जनता पार्टी को केवल एक राजनीतिक दल नहीं रहने दिया, बल्कि उसे विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक राजनीतिक संगठन बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई। बूथ सशक्तिकरण, सदस्यता अभियान, पन्ना प्रमुख जैसी अवधारणाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर उन्होंने संगठन को गांव-गांव तक पहुँचाया। आज भाजपा का देश के लगभग प्रत्येक राज्य में संगठनात्मक आधार दिखाई देता है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन निरंतर विस्तार की दिशा में आगे बढ़ा है।
अमित शाह की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे केवल चुनाव जीतने की रणनीति नहीं बनाते, बल्कि भारत के राजनीतिक भूगोल को बदलने की दीर्घकालिक योजना पर काम करते हैं। महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा, उत्तर-पूर्व, ओडिशा और अन्य राज्यों में भाजपा तथा एनडीए का विस्तार इसी सोच का परिणाम माना जा सकता है। राज्यसभा में भाजपा और एनडीए की लगातार मजबूत होती स्थिति भी श्री शाह की दूरगामी सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का परिणाम है।
दक्षिण भारत, जिसे कभी भाजपा के लिए सबसे कठिन क्षेत्र माना जाता था, आज वहाँ भी पार्टी लगातार अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है।
यदि उनके सार्वजनिक जीवन की ऐतिहासिक उपलब्धियों का उल्लेख किया जाए, तो अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने का निर्णय स्वतंत्र भारत के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक निर्णयों में गिना जाएगा। दशकों से लंबित विषय पर जिस दृढ़ता और स्पष्टता के साथ श्री शाह के द्वारा जो निर्णय लिया गया, उसने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी। राष्ट्रीय एकीकरण के प्रश्न पर यह निर्णय लंबे समय तक चर्चा और अध्ययन का विषय रहेगा।
इसी प्रकार तीन तलाक के विरुद्ध कानून, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में उठाए गए कदम, नक्सलवाद और आतंकवाद के विरुद्ध कठोर नीति तथा पूर्वोत्तर भारत में अनेक शांति समझौतों ने केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में उनकी कार्यशैली को अलग पहचान दी।
कोविड-19 जैसी अभूतपूर्व वैश्विक महामारी के दौरान भी गृह मंत्रालय के स्तर पर राज्यों के साथ समन्वय, कानून-व्यवस्था बनाए रखना, आवश्यक सेवाओं की निर्बाध व्यवस्था और संकट प्रबंधन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। ऐसे समय में त्वरित निर्णय क्षमता और प्रशासनिक समन्वय किसी भी सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा होती है।
राजनीति के चाणक्य हैं- अमित शाह
देश की सबसे बड़ी चुनौती नक्सलवाद को अमित शाह ने खत्म कर दिया। लोकसभा या राज्यसभा की व्यूहरचना हो, अमित शाह हमेशा फ्लोर मैनेजमेंट में मास्टर साबित हुए और दोनों सदन में उनकी तर्कपूर्ण आक्रामकता रही। आने वाले सदन के सत्र में अमित शाह की रणनीति सफल साबित होगी।
यदि श्री अमित शाह की राजनीतिक यात्रा का सबसे प्रेरक अध्याय चुनना हो, तो मैं पश्चिम बंगाल का उल्लेख अवश्य करूँगा। एक समय ऐसा था जब वहाँ भाजपा का जनाधार अत्यंत सीमित था। 2017 के आसपास जिस संगठनात्मक बीजारोपण की शुरुआत हुई, 2021 में भाजपा राज्य की प्रमुख विपक्षी शक्ति बनकर उभरी और अंततः 2026 में ऐतिहासिक जनादेश के साथ सरकार बनाने में सफल हुई। भारतीय राजनीति में ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलते हैं जहाँ किसी दल ने इतने कम समय में इतनी बड़ी संगठनात्मक छलांग लगाई हो।
आज अनेक राजनीतिक विश्लेषक अमित शाह को समकालीन राजनीति का 'राजनीतिक चाणक्य' कहते हैं। लेकिन इतना अवश्य कहा जा सकता है कि जटिल राजनीतिक परिस्थितियों को अवसर में बदलने, संगठन को निरंतर गतिशील बनाए रखने और चुनौतीपूर्ण राज्यों में पार्टी का विस्तार करने की उनकी क्षमता उन्हें विशिष्ट बनाती है। भाजपा और एनडीए के भीतर श्री शाह को प्रधानमंत्री जी का सबसे विश्वसनीय संकटमोचक के रूप में देखा जाता है।
मेरे व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर मैं यह कह सकता हूँ कि अमित शाह की सबसे बड़ी शक्ति उनकी स्मरण क्षमता, अध्ययनशीलता, कार्यकर्ताओं के प्रति आत्मीयता और निर्णय लेने की क्षमता है।
मेरे अनुभव में अमित शाह उन बिरले नेताओं में से एक हैं जिन्होंने संगठन, चुनावी रणनीति, शासन, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक विस्तार—इन सभी क्षेत्रों में अपनी गहरी छाप छोड़ी है। यही किसी भी सफल राजनीतिक रणनीतिकार की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।
(लेखक भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय रक्षा उत्पादन, कार्मिक व संसदीय कार्य राज्य मंत्री हैं )
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. रोहाणी की जयंती पर किया नमन
30 Jun, 2026 04:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत ईश्वर दास रोहाणी की जयंती पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को विधानसभा के सेंट्रल हाल में ईश्वर दास रोहाणी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
पूर्व विधानसभा अध्यक्षों की स्मृति में अनूठी पहल
पुष्पांजलि कार्यक्रम के बाद मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों और पूर्व विधानसभा अध्यक्षों की जयंती व पुण्यतिथि के अवसर पर पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन एक अनुकरणीय पहल है।
जबलपुर से रहा गहरा नाता, लगातार जीते 4 चुनाव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ईश्वर दास रोहाणी के कार्यकाल को याद करते हुए कहा:
वे एक सच्चे जननेता थे, जिन्होंने अपने राजनैतिक जीवन का पहला चुनाव वर्ष 1993 में जबलपुर से लड़ा था।
इसके बाद उनके विधायक निर्वाचित होने का सिलसिला लगातार चलता रहा और उन्होंने 4 विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की।
उन्होंने जबलपुर की जनता के लिए संपूर्ण त्याग और समर्पण के साथ जनहितैषी कार्यों को आगे बढ़ाया।
"ईश्वर दास रोहाणी एक कर्मठ और स्पष्टवादी जनप्रतिनिधि होने के साथ-साथ एक आदर्श विधानसभा अध्यक्ष भी रहे। जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और संगठन निर्माण के प्रति उनका अद्वितीय योगदान प्रदेशवासियों के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा।" — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश
नमामि गंगे मिशन अंतर्गत बेतवा नदी के वैज्ञानिक एवं समग्र पुनर्जीवन के लिये क्षमता वर्धन कार्यशाला
30 Jun, 2026 04:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत बेतवा नदी के वैज्ञानिक एवं समग्र पुनर्जीवन के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने संबंधी दो दिवसीय क्षमता वर्धन कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी थीं।
नदियाँ संस्कृति का केंद्र, संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता: प्रतिमा बागरी
कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा कि भारत में नदियाँ केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति का केंद्र हैं। आमजन नदियों के जल को सर्वाधिक शुद्ध एवं पवित्र मानते हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि डीपीआर तैयार करने संबंधी प्रशिक्षण व्यावहारिक, सार्थक एवं प्रभावी होना चाहिए, जिससे भविष्य की परियोजनाएँ नदी संरक्षण के उद्देश्य को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें।
राज्यमंत्री ने कहा कि डीपीआर बनाते समय प्राकृतिक स्रोतों की उपयोगिता तथा उनके संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सनातन संस्कृति में प्रकृति की पूजा का मूल उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण है, क्योंकि नदियों और वृक्षों के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। वृक्ष प्राकृतिक रूप से नदियों को स्वच्छ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बरसाती नालों की नियमित सफाई पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इससे नदियों को प्रदूषण से बचाने में प्रभावी सहायता मिलती है।
नमामि गंगे मिशन के 5 प्रमुख स्तंभ
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के कार्यकारी निदेशक बृजेन्द्र स्वरूप ने कहा कि नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत गंगा की सहायक नदियों, विशेष रूप से बेतवा नदी के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। यह मिशन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप कार्य कर रहा है। उन्होंने मिशन के पाँच प्रमुख स्तंभों की जानकारी दी:
अविरल गंगा
निर्मल गंगा
जन गंगा
ज्ञान गंगा
अर्थ गंगा
बेतवा पुनर्जीवन के लिए मील का पत्थर होगी कार्यशाला
नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे ने विषय विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित यह दो दिवसीय कार्यशाला बेतवा नदी के पुनर्जीवन के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगी।
उपस्थिति एवं समन्वय: कार्यक्रम में नमामि गंगे मिशन के निदेशक धीरज जोशी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रमुख अभियंता प्रदीप मिश्रा भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय पर्यावरण विशेषज्ञ सीताराम टैगोर ने किया।
देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को मिला जी आई टैग
30 Jun, 2026 03:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश ने कृषि और बागवानी के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। राज्य को एक साथ 12 उद्यानिकी (बागवानी) फसलों के लिए प्रतिष्ठित जीआई टैग (भौगोलिक संकेतक) प्राप्त हुआ है। देश के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी राज्य को एक साथ इतनी बड़ी संख्या में फसलों के लिए यह वैश्विक पहचान मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे कृषक कल्याण वर्ष की एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए किसानों से उद्यानिकी फसलों से जुड़ने का आह्वान किया है, ताकि उनकी आय को दोगुना किया जा सके। वर्तमान में राज्य के 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलें उगाई जा रही हैं, जिसे साल 2030 तक 30 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है।
इन 12 प्रसिद्ध फसलों को मिला जीआई टैग
इस ऐतिहासिक उपलब्धि में प्रदेश के अलग-अलग जिलों की खास पहचान रखने वाली 12 फसलों को शामिल किया गया है:
गुना का कुम्भराज धनिया: यह अपनी तेज खुशबू और मिठास के लिए मशहूर है। अकेले गुना में देश का करीब 20 से 25 प्रतिशत धनिया उत्पादित होता है, जिसका विदेशों में भी निर्यात किया जाता है।
नरसिंहपुर (बरमान घाट) का भटा (बैंगन): नर्मदा नदी की बलुई मिट्टी और अनुकूल तापमान के कारण इस बैंगन का स्वाद बेहद अनोखा होता है, जिसकी मंडियों में भारी मांग रहती है।
बैतूल का गजरिया आम: गोंड राजाओं के ऐतिहासिक गढ़ रहे बैतूल का यह आम अपने खास स्वाद और अचार, अमचूर व जूस जैसे उत्पाद बनाने के लिए प्रसिद्ध है।
खरगोन की लाल मिर्च: निमाड़ क्षेत्र की यह तीखी मिर्च चीन, पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देशों को निर्यात की जाती है। इसकी बड़ी मंडी बेदिया में स्थित है।
मांडू की खुरासानी इमली: इसे बाओबाब या मांडवी इमली भी कहते हैं। 14वीं शताब्दी में खिलजी शासनकाल के दौरान इसे अफ्रीका से लाया गया था। यह उल्टा दिखने वाले अनोखे पेड़ों पर लगती है।
जबलपुर की हरी मटर: रबी सीजन की यह पौष्टिक फसल अपनी मिठास के लिए जानी जाती है, जिसकी खेती जिले के बड़े हिस्से में की जाती है।
सिवनी का जंब सीताफल: अपने विशिष्ट बड़े आकार (600 से 700 ग्राम) और बेहतरीन स्वाद के कारण इसकी देश भर में भारी मांग है।
मालवी आलू और गराड़ू: मालवा क्षेत्र की रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले आलू और पारंपरिक मिठाइयों व व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले गराड़ू (बैंगनी रतालू) को यह टैग मिला है।
नरसिंहपुर का गुड़: काली मिट्टी में उगे गन्ने से बना यह गुड़ बेहद लोकप्रिय है। करीब 65% गन्ना क्षेत्र के साथ नरसिंहपुर को मध्य प्रदेश का 'चीनी का कटोरा' भी कहा जाता है।
जबलपुर का सिंघाड़ा: तालाबों में होने वाली इस सात महीने की कठिन फसल के मुख्य उत्पादक जबलपुर और सतना के किसान हैं। इसमें उच्च स्टार्च और पानी की मात्रा होती है।
आलीराजपुर का नूरजहां आम: कट्टीवाड़ा क्षेत्र का यह ऐतिहासिक आम अपने भारी-भरकम वजन (3 से 3.5 किलो) और एक फीट तक की लंबाई के लिए दुनिया भर में मशहूर है, जो अफगानिस्तान से यहां पहुंचा था।
इन फसलों को जीआई टैग दिलाने के लिए भेजे गए नए प्रस्ताव
एक साथ 12 टैग मिलने के बाद राज्य सरकार ने कई अन्य क्षेत्रीय व्यंजनों और फसलों को भी यह दर्जा दिलाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजे हैं। इन नए प्रस्तावों में उज्जैन की प्रसिद्ध इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का खास सफेद प्याज, झाबुआ का पारंपरिक व्यंजन दाल पानिया, मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की मशहूर मावा जलेबी और अशोक नगर की खिरनी शामिल हैं। इन फसलों को जीआई टैग मिलने से आने वाले समय में मध्य प्रदेश के किसानों को वैश्विक बाजार में अपनी उपज की और बेहतर कीमतें मिल सकेंगी।
चंबल नदी में बेखौफ चल रहा ओवरलोड स्टीमर, प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल
30 Jun, 2026 03:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुरैना: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में चंबल नदी के साहसपुरा घाट पर बना पांटून पुल टूटने के बाद से स्थानीय प्रशासन पूरी तरह बेपरवाह नजर आ रहा है। पुल हटने की वजह से इलाके के ग्रामीणों को नदी के उस पार जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस मजबूरी का फायदा उठाकर नियमों को ताक पर रखकर स्टीमर का संचालन किया जा रहा है। महज 50 रुपये के किराए के चक्कर में लोगों को क्षमता से अधिक भरकर नदी पार कराई जा रही है, जिससे यात्रियों की जान पर हर वक्त खतरा मंडरा रहा है।
सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर यूपी का सफर
पहले साहसपुरा घाट पर लोग पांटून पुल के जरिए आसानी से यूपी और एमपी के बीच आते-जाते थे, लेकिन अब पुल न होने से स्टीमर ही एकमात्र सहारा बचा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस स्टीमर को चलाने के लिए प्रशासन से कोई वैध अनुमति नहीं ली गई है और न ही इसमें सुरक्षा के कोई इंतजाम हैं। स्टीमर में क्षमता से कहीं ज्यादा मुसाफिरों को ठूंस-ठूंस कर बिठाया जा रहा है, जिससे चंबल नदी के बीचो-बीच कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। सोशल मीडिया पर इस खतरनाक सफर का वीडियो वायरल होने के बाद अब प्रशासनिक मुस्तैदी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले से अंजान बने बैठे हैं जिम्मेदार अधिकारी
कार्रवाई का आश्वासन:
इस पूरे गंभीर मामले पर वन विभाग के एसडीओ (SDO) श्याम सिंह चौहान ने अपनी अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि नगरा घाट या इसके आसपास स्टीमर चलाने की कोई आधिकारिक परमिशन नहीं दी गई है। यह मामला अभी तक उनके संज्ञान में नहीं था, और वे अब डीएफओ (DFO) से इसकी पूरी रिपोर्ट लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई करेंगे।
दूसरी तरफ, नगर थाना प्रभारी सुखदेव सिंह चौहान ने बताया कि यह लापरवाही भरा मामला उनके संज्ञान में आया है। पुलिस टीम को मौके पर भेजकर इसकी पूरी जांच कराई जा रही है। अगर स्टीमर का संचालन अवैध और नियमों के खिलाफ पाया जाता है, तो संचालक के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, प्रशासन की इस ढिलाई और बिना अनुमति चल रहे इस खेल ने आम जनता की सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं।
किसानों के साथ खेत में हल चलाते दिखे जीतू पटवारी, बैतूल में चर्चा का विषय बना दौरा
30 Jun, 2026 02:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैतूल: मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष जीतू पटवारी सोमवार (29 जून) को बैतूल जिले के दौरे पर एक बेहद अलग और जमीनी अंदाज में नजर आए। उन्होंने अपने इस प्रवास के दौरान न सिर्फ एक आध्यात्मिक समागम में हिस्सा लेकर सेवा कार्य किया, बल्कि वापस लौटते समय खेत में उतरकर किसान का हाथ भी बंटाया। राजनीति से इतर उनके इस सरल व्यवहार की इलाके में काफी चर्चा हो रही है।
आश्रम में पूड़ियां तलीं और बांटी सेवा
दौरे की शुरुआत में जीतू पटवारी उड़दन स्थित संत रामपाल के सतलोक आश्रम पहुंचे, जहां तीन दिवसीय महा समागम का आयोजन चल रहा था। आश्रम के सेवादारों ने बताया कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने वहां आम श्रद्धालुओं की तरह सेवा कार्यों में योगदान दिया। उन्होंने लंगर के लिए पूड़ियां तलने, श्रद्धालुओं के जूठे बर्तन साफ करने और प्रसाद बांटने जैसे कार्यों में हाथ बंटाया। वे करीब एक घंटे तक परिसर में रहे और वहां आए लोगों से आत्मीय मुलाकात की।
कांग्रेस भवन की भूमि का किया निरीक्षण
संगठनात्मक चर्चा:
आश्रम के कार्यक्रम के बाद वे सीधे बैतूल शहर पहुंचे, जहां उन्होंने जिला कांग्रेस अध्यक्ष निलय डागा से मुलाकात की। इस दौरान पटवारी ने जिला कांग्रेस भवन के लिए हाल ही में खाली कराई गई जमीन का बारीकी से निरीक्षण किया और वहां होने वाले आगामी निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय पदाधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश और सुझाव दिए।
खेत में किसान सकल धुर्वे संग चलाया हल
इसके बाद जब वे वापस भोपाल के लिए रवाना हुए, तो रास्ते में उन्हें एक खेत में जुताई करते हुए किसान सकल धुर्वे दिखाई दिए। जीतू पटवारी तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाकर सीधे खेत में पहुंच गए। उन्होंने किसान और उनके परिवार से खेती-किसानी के मौजूदा हालात, फसलों के दाम और ग्रामीण समस्याओं पर विस्तार से बातचीत की। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद बैलगाड़ी और हल थामकर खेत में कुछ देर जुताई भी की और बाद में पूरे किसान परिवार के साथ तस्वीरें खिंचवाईं।
कार्यकर्ताओं को नहीं थी पहले से खबर
जिला कांग्रेस अध्यक्ष निलय डागा ने स्पष्ट किया कि पीसीसी चीफ जीतू पटवारी का यह पूरा बैतूल दौरा पूरी तरह से निजी था। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर पार्टी के आम कार्यकर्ताओं को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। अपने सभी कार्यक्रमों और मुलाकातों को सादगी से पूरा करने के बाद वे देर शाम भोपाल के लिए प्रस्थान कर गए।
मध्य प्रदेश को आज मिलेगी 352 करोड़ की सौगात, सीएम मोहन यादव करेंगे लोकार्पण
30 Jun, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राजगढ़: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज (30 जून 2026) जिले के विकासखंड सारंगपुर के अंतर्गत सुप्रसिद्ध भैंसवामाता जी मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले एक भव्य समारोह में शिरकत करेंगे। इस गौरवमयी अवसर पर मुख्यमंत्री राजगढ़ जिले के चहुंमुखी विकास के लिए 352 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न कल्याणकारी विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात देंगे, जिनका डिजिटल माध्यम से लोकार्पण और भूमिपूजन किया जाएगा। इसी गरिमामयी मंच से मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश में चलाए गए राज्यव्यापी ‘जल गंगा संवर्धन अभियान 2.0’ के सफल समापन की औपचारिक घोषणा भी करेंगे। जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री के इस बेहद महत्वपूर्ण दौरे को लेकर सुरक्षा और व्यवस्था की सभी तैयारियां मुस्तैद कर ली हैं।
मुख्यमंत्री के राजगढ़ दौरे के मुख्य आकर्षण
तय कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दोपहर 1:45 बजे प्रसिद्ध भैंसवामाता मंदिर पहुंचेंगे, जहां वे माता जी के दर्शन कर विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद वे परिसर में स्थित दूध तलैया पर जाकर गंगा पूजन, गौ-पूजन और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधरोपण कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री यहां 'जल गंगा संवर्धन अभियान 2.0' पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन भी करेंगे, जिसमें राजगढ़ जिले में जल संरक्षण और पर्यावरणीय नवाचारों को लेकर किए गए बेहतरीन कार्यों को प्रदर्शित किया गया है। इस दौरान जिले के पर्यटन को बढ़ावा देने वाली एक फिल्म, कॉफी टेबल बुक और राजगढ़ के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स का अनावरण किया जाएगा। साथ ही, जिले के विकास कार्यों पर संकलित एक विशेष पुस्तक का विमोचन भी मुख्यमंत्री के कर-कमलों द्वारा संपन्न होगा।
अभियानों का आगाज और जनहितकारी घोषणाएं
इस भव्य मंच से आगामी मानसून सत्र को देखते हुए “एक पेड़ माँ के नाम” महा-अभियान के तहत पूरे प्रदेश में रिकॉर्ड स्तर पर पौधरोपण करने का जन-आह्वान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मध्य प्रदेश में 1 जुलाई 2026 (कल) से शुरू होने जा रहे नए “विकसित भारत-ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन (VB GRAM G)” की लोक-कल्याणकारी विशेषताओं और महत्वपूर्ण प्रावधानों की पहली झलक भी आम जनता के सामने प्रस्तुत की जाएगी। समारोह में जल स्रोतों के पुनरुद्धार, सुरक्षा और श्रमदान में अनुकरणीय योगदान देने वाली ग्राम व जनपद पंचायतों, जागरूक नागरिकों, जलदूतों, स्वयंसेवी संगठनों, शासकीय विभागों और महिला स्व-सहायता समूहों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में सभी उपस्थित जनप्रतिनिधि और आम नागरिक मिलकर जल स्रोतों के रख-रखाव का एक सामूहिक संकल्प भी लेंगे।
जल गंगा संवर्धन अभियान का ऐतिहासिक समापन
प्रदेश के पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के संकल्प के साथ शुरू हुए ‘जल गंगा संवर्धन अभियान-2026’ का आज औपचारिक समापन हो रहा है। इस महा-अभियान की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि बेहद कम समय में ग्रामीण, नगरीय, वन, सिंचाई और औद्योगिक क्षेत्रों को मिलाकर पूरे मध्य प्रदेश में 3.62 लाख से अधिक जल संरक्षण के कार्यों को सफलतापूर्वक धरातल पर उतारा गया है। इस दूरदर्शी अभियान ने राज्य में भू-जल स्तर को सुधारने, जल की गुणवत्ता जांचने, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सूखी नदियों को नया जीवन देने की दिशा में जनता के बीच एक नई चेतना और जन-आंदोलन का रूप ले लिया है, जिसकी उपलब्धियों को आज जनता के सामने रखा जाएगा।
दिग्गज मंत्रियों और सांसदों की गरिमामयी मौजूदगी
राजगढ़ के इस मुख्य समारोह में विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, तकनीकी शिक्षा व कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल और स्थानीय सांसद रोडमल नागर प्रमुख रूप से मंच साझा करेंगे। इसके साथ ही, इस समापन उत्सव को राज्यव्यापी स्वरूप देते हुए मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में क्षेत्रीय सांसदों को मुख्य अतिथि की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी कड़ी में शहडोल में हिमाद्री सिंह, भिण्ड में संध्या राय, बालाघाट में भारती पारधी, रतलाम में अनिता नागर सिंह चौहान, बड़वानी में गजेन्द्र पटेल, सीधी में डॉ. राजेश मिश्रा, मंदसौर में सुधीर गुप्ता, श्योपुर में शिवमंगल सिंह तोमर, छिंदवाड़ा में बंटी विवेक साहू और जबलपुर में आशीष दुबे मुख्य अतिथि के रूप में कमान संभालेंगे, जबकि नीमच जिले में राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर मुख्य अतिथि के तौर पर अभियान के समापन कार्यक्रमों की अगुवाई करेंगे।
शशांक सिंह पर कानूनी शिकंजा, कुक से मारपीट और बंधक बनाने के आरोप में FIR दर्ज
30 Jun, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के जाने-माने क्रिकेटर शशांक सिंह और उनके पिता व रिटायर्ड आईपीएस (IPS) अधिकारी शैलेश सिंह पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। भोपाल पुलिस ने अपने घर के रसोइए (कुक) के साथ बेरहमी से मारपीट करने, गाली-गलौज करने और उसे बंधक बनाकर रखने के आरोप में दोनों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया है। इस मामले में उनके ड्राइवर को भी सह-आरोपी बनाया गया है। यह पूरी घटना भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मेंदोरी गांव की है।
सरकारी नौकरी का झांसा देकर रीवा से बुलाया था भोपाल
मूल रूप से रीवा जिले के रहने वाले 31 वर्षीय पीड़ित रसोइए विपेंद्र सिंह तोमर ने पुलिस में इस मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। विपेंद्र के मुताबिक, उन्हें हाल ही में एक परिचित के जरिए पूर्व पुलिस अधिकारी (शैलेश सिंह) के नीलबड़ स्थित बंगले पर काम के लिए लाया गया था। उन्हें ₹15,000 प्रति माह वेतन, रहने-खाने की सुविधा और भविष्य में सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था। शिकायत में आरोप है कि काम शुरू करने के कुछ ही घंटों के भीतर खाने की क्वालिटी को लेकर उन पर मानसिक दबाव बनाया गया और गंदी गालियां दी गईं।
कमरे में बंद होकर बचाई जान, मेडिकल टेस्ट में चोटों की पुष्टि
पीड़ित कुक ने बताया कि जब उसने घर के खराब माहौल को देखकर नौकरी छोड़ने और वापस रीवा लौटने की बात कही, तो आरोपी बुरी तरह भड़क गए। उन्होंने विपेंद्र का मोबाइल फोन जबरन छीन लिया ताकि वह किसी से मदद न मांग सके और उस पर जबरदस्ती काम करने का दबाव बनाया। खुद को बचाने के लिए कुक ने भागकर खुद को एक कमरे में बंद कर लिया, लेकिन आरोप है कि पिता-पुत्र और उनके ड्राइवर ने दरवाजा खोलकर उसके साथ बुरी तरह मारपीट की। पुलिस द्वारा कराए गए मेडिकल टेस्ट में पीड़ित के चेहरे और शरीर पर चोट के निशान मिले हैं, जिससे मारपीट की पुष्टि हुई है।
क्रिकेटर और पूर्व आईपीएस के खिलाफ इन धाराओं में केस दर्ज
रातीबड़ थाना पुलिस ने पीड़ित की औपचारिक शिकायत और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। इसमें सार्वजनिक रूप से गाली-गलौज करने (धारा 296-B), स्वेच्छा से चोट पहुँचाने या मारपीट करने (धारा 115-2) और एक ही इरादे से कई लोगों द्वारा मिलकर अपराध को अंजाम देने (धारा 3-5) की धाराएं शामिल की गई हैं। पुलिस अब इस पूरे मामले की आगे की जांच कर रही है।
कैंसर मरीजों के लिए राहत की खबर, भोपाल में आज खुलेगा हाईटेक कैंसर हीलर सेंटर
30 Jun, 2026 10:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: राजधानी भोपाल में कैंसर के इलाज के क्षेत्र में एक नई और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा की शुरुआत होने जा रही है। हबीबगंज स्थित 'कैंसर हीलर सेंटर' का भव्य उद्घाटन आज यानी मंगलवार, 30 जून 2026 को किया जाएगा। इस नए केंद्र का औपचारिक शुभारंभ बागेश्वर धाम के प्रसिद्ध महंत पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री करेंगे। यह समारोह सुबह 10:30 बजे से शुरू होगा, जिसमें चिकित्सा जगत के विशेषज्ञ, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि और शहर के कई गणमान्य नागरिक शामिल होंगे।
एक ही छत के नीचे मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
सेंटर के डायरेक्टर डॉ. तरंग कृष्ण ने बताया कि इस संस्थान को खोलने का मुख्य उद्देश्य कैंसर के मरीजों को एक ही जगह पर आधुनिक जांच, विशेषज्ञों की सलाह और बेहतर इलाज की सुविधा देना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर सही समय पर बीमारी का पता चल जाए और सही इलाज मिले, तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को आसानी से हराया जा सकता है। इसी सोच के साथ भोपाल में इस अत्याधुनिक सेंटर की स्थापना की गई है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के संबोधन से होगा शुभारंभ
उद्घाटन समारोह की शुरुआत पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के विशेष संबोधन के साथ होगी। इसके बाद सेंटर के डायरेक्टर डॉ. तरंग कृष्ण मीडिया से बातचीत करेंगे और उन्हें सेंटर में मौजूद आधुनिक मशीनों, इलाज की पूरी व्यवस्था और आगे की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। इस दौरान डॉक्टरों और विशेषज्ञों के बीच कैंसर के समय पर इलाज और मरीजों को बेहतर परिणाम देने की तकनीकों पर भी चर्चा होगी।
आसपास के जिलों के मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
आयोजकों का मानना है कि यह नया कैंसर सेंटर न केवल भोपाल, बल्कि इसके आसपास के कई जिलों के मरीजों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आएगा। यहाँ आधुनिक तकनीक और अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख में विश्वस्तरीय इलाज मिलेगा, जिससे अब स्थानीय मरीजों को कैंसर के इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े महानगरों की ओर भागने की जरूरत नहीं होगी।
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जमीन विवाद में गर्भवती महिला पर हमले से दो अजन्मे बच्चों की मौत, इलाके में आक्रोश
बटाला फायरिंग केस: धमकी और गोलियों से दहला इलाका, जांच जारी
कथित चंदा चोरी केस में बड़ा खुलासा: चार्टर्ड प्लेन से सिंडिकेट के आका, ट्रेन से ले जाया गया रामलला का सोना!
मानसून सत्र की तारीखों का ऐलान: 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा संसद का सत्र
क्या कानून बचा सकता है एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर के आरोपी पति को? सुप्रीम कोर्ट ने दिया अहम फैसला
