मध्य प्रदेश
न्यूजीलैंड के विशेषज्ञों ने साझा की शहद प्रसंस्करण और विपणन की आधुनिक तकनीकें
13 May, 2026 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ की उत्पादन इकाई लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र, बरखेड़ा पठानी, भोपाल में आयोजित ‘वनधन संवाद’ कार्यशाला में न्यूजीलैंड से आए विशेषज्ञों ने शहद संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की आधुनिक तकनीकों पर विस्तृत जानकारी साझा की। कार्यशाला का उद्देश्य वन समितियों और वनधन केंद्रों को शहद संग्रहण, ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग की उन्नत तकनीकों से जोड़ना तथा मध्यप्रदेश के शहद को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाना है।
कार्यशाला में न्यूजीलैंड के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य श्री ईशान जयवर्धने, श्री बायरन पीटर टेलर एवं सुश्री प्रियम अरोरा ने सहभागिता करते हुए वनधन विकास केंद्रों के प्रतिनिधियों को शहद उत्पादन की उत्कृष्ट पद्धतियों, गुणवत्ता नियंत्रण तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रसंस्करण तकनीकों से अवगत कराया। विशेषज्ञों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अपने अनुभव साझा किए और बताया कि वैज्ञानिक तरीकों एवं आधुनिक प्रबंधन से शहद उत्पादन को अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।
कार्यशाला में मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ की प्रबंध संचालक श्रीमती कमलिका मोहंता ने वनधन केंद्रों एवं वन समितियों को सशक्त बनाने पर बल देते हुए शहद के ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन और निर्यात को बढ़ावा देने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के अनुभवों से प्रदेश के वनधन केंद्रों को नई दिशा मिलेगी।
न्यूजीलैंड से आये प्रतिनिधिमंडल ने एमएफपी पार्क की प्रयोगशाला तथा शहद प्रसंस्करण इकाई का भ्रमण भी किया और वहां संचालित व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। कार्यशाला में ट्रायफेड, एपीडा तथा विश्व बैंक के प्रतिनिधियों सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए वन विभाग के अधिकारियों एवं वनधन केंद्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
माता और बहनों का सम्मान सर्वोपरि : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
13 May, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार के लिये माताओं और बहनों का सम्मान सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मातृ शक्ति के कल्याण के लिये प्रदेश शासन द्वारा संचालित सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है। आज यहाँ पर रक्षाबंधन, भाईदूज और दीवाली सहित सभी त्यौहार एक साथ मनाने का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नरसिंहपुर जिले के ग्राम मुंगवानी में आयोजित मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 36वीं किस्त के राशि अन्तरण और हितलाभ वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश की 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में 1835 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 296 करोड़ रुपये लागत के 40 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक संबल देने के साथ ही उन्हें सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अब तक योजना में 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि लाड़ली बहनों के खातों में अंतरित की जा चुकी है।
रानी दुर्गावती के पराक्रम के सम्मान में जबलपुर व सिंग्रामपुर में हुईं कैबिनेट बैठकें
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान नरसिंह की यह भूमि रानी दुर्गावती के पराक्रम की साक्षी है। रानी दुर्गावती के सम्मान में प्रदेश सरकार द्वारा जबलपुर और सिंग्रामपुर में कैबिनेट बैठक आयोजित की है। वहीं आदिवासी शहीद भभूत सिंह के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के सम्मान में भी विशेष कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। वर्तमान में प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 6 पर महिला सांसद हैं, जबकि 27 महिला विधायक एवं 5 महिला मंत्री कार्यरत हैं।
कम्प्यूटर एवं सुरक्षा के क्षेत्र में महिलाएं आ रहीं हैं आगे
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से बेटियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि कम्प्यूटर और सुरक्षा के क्षेत्र में भी महिलाएं आगे आ रही है। पुलिस विभाग में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। उन्होंने बताया कि 4 लाख से अधिक महिलाएँ स्वरोजगार से जुड़ी हैं। रेडीमेड कपड़ा उद्योग एवं कारखानों में कार्य करने वाली महिलाओं को 5000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। साथ ही 34 लाख महिला कृषकों को दुग्ध उत्पादन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि 25 गाय या भैंस का पालन करने वाले पशुपालकों को सरकार द्वारा 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है।
उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नरसिंहपुर जिला गन्ने की खेती के लिए प्रसिद्ध है और यह शक्कर का कटोरा है। इससे यहां के 20 हजार से अधिक परिवारों को रोजगार मिल रहा है। गाडरवारा की तुअर दाल प्रदेश ही नहीं देश में भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। नरसिंहपुर जिला सोयाबीन और गेहूं के उत्पादन में भी अग्रणी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गेहूं, चना, सरसों, मसूर एवं उड़द की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित कर रही है। उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जाएगा। मध्यप्रदेश देश का सबसे अधिक गेहूं खरीदी करने वाला राज्य है। किसानों के हित में 23 मई तक खरीदी की जा रही है। आवश्यकता हुई तो आगे भी खरीदी की अवधि बढ़ाई जाएगी।
मध्यप्रदेश में हो रहा तेजी से विकासात्मक बदलाव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से देश बदल रहा है और इसके साथ ही मध्यप्रदेश में भी तेजी से बदलाव हो रहा है। सिकलसेल, कुपोषण से लड़ने में प्रदेश सरकार सफल हो रही है। लाड़ली लक्ष्मी योजना से 53 लाख बेटियों की जिंदगी में बदलाव आ रहा है। प्रदेश की 80 लाख बेटियों को शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति दी जा रही है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में 55 हजार रुपये की राशि दी जा रही है।
सड़क दुर्घटना में घायलों के उपचार का 1.50 लाख रुपये का खर्च देगी सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री राहत योजना में नरसिंहपुर जिले में बेहतर कार्य हो रहा है। इस योजना में सड़क दुर्घटना में घायलों के उपचार के लिए डेढ़ लाख रुपये तक का सारा खर्च सरकार दे रही है। पहले दुर्घटना के समय घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए लोग डरते थे, लेकिन अब उन्हें डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि मानवीय पहल कर घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्तियों को सरकार द्वारा 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदाय की जा रही है।
जल की एक-एक बूंद बचाने की अपील
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान की चर्चा करते हुए कहा कि जल है, तो जीवन है, जल है तो खेती है और जल है तो समृद्धि है। हमारे धार्मिक अनुष्ठानों में भी जल का विशेष महत्व है। प्रदेश के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण का अभियान चलाया जा रहा है। इसमें आमजन को सहभागी बनना चाहिए। उन्होंने नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव विकासखंड के ग्राम मेख में एक मालगुजार द्वारा 21 एकड़ जमीन तालाब निर्माण के लिए दान किए जाने की सराहना करते हुए कहा कि यह अनुकरणीय उदाहरण है। परिवार को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जायेगा।
जिले की धरोहरों पर केंद्रित कैलेंडर का विमोचन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नरसिंहपुर जिले की ऐतिहासिक धार्मिक एवं पुरातात्विक धरोहरों पर आधारित कलेंडर का विमोचन किया। कैलेंडर में बरमान घाट, मृगनाथ तपोवन आश्रम, दादा दूल्हादेव महाराज, नरसिंह मंदिर, चौगान का किला, बरहेटा की पुरातात्विक धरोहर, गरूण मंदिर, बिनेकी टोला के शैल चित्र, मां राजराजेश्वरी त्रिपुरसुंदरी मंदिर, पीतल नगरी चीचली, गुरू गुफा अमोदा शंकर घाट को शामिल किया गया है।
40 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में 296 करोड़ 34 लाख रुपये की लागत के 40 विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमि-पूजन किया। इसमें 215 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत के 17 कार्यों का भूमि-पूजन एवं 80 करोड़ 68 लाख रुपये लागत के 23 कार्यों का लोकार्पण के कार्य शामिल है।
मुंगवानी में बनेगा कॉलेज, शेढ़ नदी पर बनेगा पुल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव के ग्राम मुंगवानी में कॉलेज खोलने की घोषणा की। उन्होंने बेलखेड़ी- बरहटा- मुंगवानी मार्ग के शेढ़ नदी पर पुल निर्माण, नरसिंहपुर में इंडोर आउडोर स्टेडियम का उन्नयन के साथ ही हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान और ग्राम बुढ़ैना में बांध निर्माण की घोषणा की।
पेट्रोल-डीजल का अनावश्यक उपयोग न करने की अपील
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई अपील अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से ईधन के न्यूनतम उपयोग का आहवान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब उनके काफिले में गाड़ियों की संख्या 13 से घटाकर कर 8 कर दी गई है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए एक साल तक सोना न खरीदें। रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करें, जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा दे और प्राकृतिक खेती को अपनाएं।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि आज का दिन प्रदेश की लाड़ली बहनों के लिये उत्सव और सम्मान का दिन है। प्रदेश सरकार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिये लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना और लाड़ली लक्ष्मी योजना जैसी पहल ने प्रदेश की महिलाओं और बेटियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि प्रदेश सरकार गांव, गरीब, किसान, श्रमिक और मातृशक्ति के कल्याण के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने प्रदेश की करोड़ों महिलाओं के जीवन में आर्थिक आत्मविश्वास पैदा किया है और महिलाओं को परिवार तथा समाज में नई पहचान मिली है।
सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना जैसी महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर मध्यप्रदेश ने पूरे देश के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण, किसानों के उत्थान और ग्रामीण विकास को केंद्र में रखकर निरंतर कार्य कर रही है।
सांसद चौधरी दर्शन सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसान, युवाओं, महिलाओं और गरीबों के समग्र कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। विभिन्न जनहितकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों को आधुनिक कृषि सुविधाएं, युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर, महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने तथा गरीब परिवारों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
विभिन्न योजनाओं में किया हितलाभ वितरण, प्रतिभाओं को किया सम्मानित
कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा शासकीय योजनाओं एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई, जिसने आगंतुकों और उपस्थित जनसमूह का विशेष ध्यान आकर्षित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभागों के नवाचारों और प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले की नवाचारी पहल “अभ्युदय निःशुल्क कोचिंग” के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को दी जा रही शैक्षणिक सहायता को प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कृषि विभाग द्वारा प्रदर्शित समेकित नरवाई प्रबंधन प्रणाली के मॉडल का अवलोकन कर अधिकारियों से चर्चा की तथा किसानों के हित में इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
प्रदर्शनी में गन्ने के अवशेषों से निर्मित पर्यावरण अनुकूल प्लाईवुड, पारंपरिक पीतल के बर्तन तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार किए गए सजावटी एवं उपयोगी उत्पाद भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन उत्पादों का अवलोकन कर स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों को हितलाभों का वितरण किया। उन्होंने पात्र हितग्राहियों को स्वीकृति-पत्र एवं आर्थिक सहायता प्रदान कर शासन की योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक बोर्ड परीक्षाओं की प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति-पत्र एवं टैबलेट प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही वॉलीबॉल एवं क्रिकेट प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को ट्रैक सूट भेंट कर प्रोत्साहित किया गया।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाओं को सीसीएल राशि सहित विभिन्न हितलाभ वितरित किए गए। राहवीर योजना अंतर्गत सड़क दुर्घटनाओं के दौरान घायलों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाने वाले राहगीरों को भी सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यक्रम में 51 लाड़ली बहनों ने कलश यात्रा के माध्यम से अगवानी की। उन्होंने इन बहनों को साड़ी भेंट कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित लाड़ली बहनों पर पुष्प-वर्षा कर उनका आत्मीय अभिनंदन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या-पूजन व दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस अवसर परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती ज्योति काकोड़िया, तेंदूखेड़ा विधायक विश्वनाथ सिंह पटेल, विधायक सिवनी दिनेश राय, पूर्व राज्यमंत्री जालम सिंह पटेल, जनप्रतिनिधि, नागरिक और बड़ी संख्या में लाड़ली बहने मौजूद रहीं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रमुख घोषणाएं
नरसिंहपुर के मुंगवानी में महाविद्यालय खोला जाएगा।
शेढ़ नदी पर 24 करोड़ की लागत से 250 मीटर लंबा पुल बनेगा।
नरसिंहपुर के हॉकी स्टेडियम में एस्ट्रो टर्फ बिछाई जाएगी।
सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए बुडेना बांध के लिए परीक्षण करवाया जाएगा।
जीतू पटवारी और 20 कार्यकर्ताओं पर टाइगर रिजर्व में कानूनी कार्रवाई
13 May, 2026 08:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पन्ना: केन-बेतवा लिंक परियोजना और आदिवासियों के विस्थापन को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच, पन्ना टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित क्षेत्र में कांग्रेस नेताओं की उपस्थिति ने एक नया कानूनी और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में प्रवेश पर कानूनी शिकंजा
पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने नियमों के उल्लंघन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और युवा कांग्रेस नेता अभिषेक परमार सहित करीब 20 कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वन विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि यह क्षेत्र वन्यजीवों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है और यहां बिना पूर्व अनुमति के प्रवेश करना पूरी तरह वर्जित है। इसी आधार पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत यह कार्रवाई की गई है, जिससे प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
साक्ष्यों का संकलन और प्रशासन की सख्त घेराबंदी
इस संवेदनशील मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए प्रशासन अब घटनास्थल से जुड़े वीडियो फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्य एकत्र करने में जुटा है ताकि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है और संरक्षित वन क्षेत्र की मर्यादा का उल्लंघन किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। वन विभाग की इस सक्रियता को कांग्रेस नेताओं की घेराबंदी के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।
कांग्रेस ने कार्रवाई को बताया सरकार का राजनीतिक प्रतिशोध
दूसरी ओर, कांग्रेस ने वन विभाग की इस कार्रवाई को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित और दबाव की रणनीति करार दिया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि उनके नेता केवल केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित होने वाले ग्रामीणों और विस्थापितों की पीड़ा सुनने के लिए वहां गए थे और उनका उद्देश्य किसी भी तरह से वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाना या नियमों को तोड़ना नहीं था। कांग्रेस के अनुसार, भाजपा सरकार आदिवासियों के अधिकारों की आवाज उठाने वाले नेताओं को डराने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है।
विस्थापन के मुद्दे पर बढ़ा सत्तापक्ष और विपक्ष का टकराव
केन-बेतवा परियोजना और जंगल की जमीन से जुड़े अधिकारों को लेकर शुरू हुआ यह संघर्ष अब एक बड़े राजनीतिक टकराव में तब्दील हो चुका है। भाजपा जहां इसे कानून के उल्लंघन का मामला बताकर कांग्रेस को घेर रही है, वहीं कांग्रेस इसे जनहित और आदिवासियों के हक की लड़ाई बताकर पलटवार कर रही है। पन्ना के जंगलों से शुरू हुआ यह विवाद अब भोपाल की राजनीति का केंद्र बन गया है, जिससे विकास बनाम पर्यावरण और विस्थापन के मुद्दे पर नई बहस छिड़ गई है।
मुलताई की राजनीति में बड़ा बदलाव, नीतू परमार बनीं भाजपा सदस्य
13 May, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
-क्षेत्र के विकास व जनसेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने भाजपा में शामिल हुईं परमार
- भाजपा एक परिवार, सभी कार्यकर्ता मिलकर संगठन के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे
बैतूल/भोपाल, 13/05/2026। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने बुधवार को बैतूल में बैतूल जिले की मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू परमार एवं उनके पति श्री प्रहलाद सिंह परमार को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता दिलाई। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री खण्डेलवाल ने पार्टी का अंगवस्त्र पहनाकर उनका स्वागत किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू परमार ने भारतीय जनता पार्टी की रीति-नीति एवं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा किए जा रहे विकास व जनकल्याण के कार्यों से प्रभावित होकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन एक परिवार है। हम सभी कार्यकर्ता परिवार भाव से मिलकर संगठन के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे और सरकार के कार्यों को जनता तक पहुंचाएंगे।
जनता की सेवा करने वालों के लिए कांग्रेस में कोई स्थान नहीं
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक परिवार है, यहां सभी का स्वागत है। सभी कार्यकर्ता परिवार भाव के साथ जनता की सेवा और संगठन के कार्यों को बुलंदियों तक पहुंचाते हैं। कांग्रेस पार्टी में जनता की सेवा करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए कोई स्थान नहीं है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। देश और प्रदेश की जनता लगातार भाजपा पर भरोसा कर रही है। भाजपा संगठन साफ सुधरी राजनीति करने वालों को काम करने के लिए अनुकूलता प्रदान करना और मौका देने का कार्य करता है।
भाजपा मेरा परिवार, मैं इसकी सदस्य- श्रीमती नीतू सिंह परमार
भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू परमार ने कहा कि मैं पहले भी भाजपा की सदस्य रही हूं। वर्षों तक भाजपा संगठन में एक सामान्य कार्यकर्ता की तरह रहकर कार्य किया है। भाजपा मेरा परिवार है और मैं इसकी सदस्य हूं। मुलताई नगर पालिका क्षेत्र में रहने वाली देवतुल्य जनता की सेवा और अधिक प्रभावी रूप से कर सकूं, इसलिए भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है।इस अवसर पर जिला अध्यक्ष श्री सुधाकर पंवार, विधायक श्री चंद्रशेखर देशमुख, जिला मंत्री श्रीमती वर्षा गढ़ेकर उपस्थित रहीं।
27% आरक्षण: कोर्ट ने निर्धारित किया 15 मई तक रोज़ाना सुनवाई का शेड्यूल
13 May, 2026 05:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जबलपुर। मध्यप्रदेश में पिछले सात वर्षों से कानूनी पेचीदगियों में उलझे 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के संवेदनशील मामले पर जबलपुर हाईकोर्ट ने अंतिम सुनवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। माननीय न्यायालय ने आगामी 15 मई तक इस प्रकरण पर प्रतिदिन नियमित रूप से अंतिम दलीलें सुनने का निर्णय लिया है, ताकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित तीन माह की समय सीमा के भीतर इस पर अंतिम फैसला सुनाया जा सके। सुनवाई के पहले दिन मुख्य रूप से उन पक्षों के तर्कों को सुना गया जो आरक्षण की सीमा बढ़ाए जाने का विरोध कर रहे हैं, जिन्होंने शीर्ष अदालत द्वारा पूर्व में निर्धारित 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा का हवाला देते हुए अपनी बात रखी।
अदालती कार्यवाही और कानूनी तर्कों का दौर
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार सचदेवा की खंडपीठ इस महत्वपूर्ण विषय पर कल दोपहर 3 बजे से पुनः सुनवाई जारी रखेगी। पहले दिन की कार्यवाही के दौरान विरोध पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि आरक्षण का दायरा बढ़ाना सुप्रीम कोर्ट के पुराने दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हो सकता है। न्यायालय अब लगातार इस मामले के हर कानूनी पहलू को परख रहा है ताकि वर्षों से लंबित इस विवाद का तार्किक और संवैधानिक समाधान निकाला जा सके। चूंकि इस फैसले का सीधा असर प्रदेश की हजारों सरकारी भर्तियों और युवाओं के भविष्य पर पड़ने वाला है, इसलिए अदालत इस बार बेहद त्वरित गति से दलीलें सुनकर फैसले की ओर बढ़ रही है।
हक की मांग को लेकर ओबीसी उम्मीदवारों का बड़ा प्रदर्शन
न्यायालय में चल रही सुनवाई के बीच जबलपुर की सड़कों पर ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों का भारी आक्रोश और दर्द भी देखने को मिला। प्रदेश के लगभग 50 जिलों से आए सैकड़ों उम्मीदवारों ने एक विशाल रैली निकालकर अपनी मांगों को बुलंद किया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर चिलचिलाती धूप में शामिल हुईं। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी हाईकोर्ट परिसर स्थित महाधिवक्ता कार्यालय पहुंचकर अपनी बात रखना चाहते थे, हालांकि सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक दिया गया। इन युवाओं का मुख्य रूप से यही कहना है कि 13 प्रतिशत आरक्षण को होल्ड पर रखने से उनका करियर अधर में लटका हुआ है, अतः सरकार की ओर से कोर्ट में पुख्ता पैरवी की जानी चाहिए।
साल 2019 से जारी कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि
मध्यप्रदेश में आरक्षण का यह विवाद साल 2019 में तब शुरू हुआ था जब तत्कालीन सरकार ने ओबीसी कोटे को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। इस फैसले को तुरंत हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिसके बाद बढ़े हुए आरक्षण के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी। यह लंबी कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंची, लेकिन अंततः देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस मामले को वापस मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को सौंपते हुए एक निश्चित समय सीमा के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। अब सबकी निगाहें 15 मई तक चलने वाली इस निरंतर सुनवाई पर टिकी हैं, जो प्रदेश की राजनीति और सामाजिक दिशा तय करने में निर्णायक साबित होगी।
यात्रियों की सुरक्षा की अनदेखी, अशोक ट्रेवल्स की बस को किया जब्त
13 May, 2026 04:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नीमच। शहर में यात्री सुरक्षा को ताक पर रखकर लग्जरी बसों का व्यावसायिक माल ढोने के लिए उपयोग करने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। प्रशासन ने इस दिशा में कड़ा रुख अपनाते हुए 'अशोक ट्रेवल्स' की एक बस के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसमें बस की छत पर क्षमता से कहीं अधिक भारी माल लादकर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। हालांकि इस कार्रवाई के दौरान बस संचालकों ने अपने ऊंचे संपर्कों और रसूख का इस्तेमाल कर अधिकारियों पर दबाव बनाने की पुरजोर कोशिश की और कई जगह सिफारिशी फोन भी करवाए, परंतु कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों ने किसी की एक न सुनी और अंततः बस को जब्त कर लिया गया।
यात्री बसों में अवैध माल ढुलाई और सुरक्षा से खिलवाड़
लग्जरी बसों का मालगाड़ी के रूप में धड़ल्ले से हो रहा इस्तेमाल अब यात्रियों की जान के लिए बड़ा खतरा बन गया है क्योंकि छत पर अत्यधिक वजन होने से दुर्घटनाओं की आशंका काफी बढ़ जाती है। अशोक ट्रेवल्स की बस पर हुई इस जब्ती ने स्पष्ट कर दिया है कि किस तरह बस ऑपरेटर अधिक मुनाफे के लालच में सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर रहे हैं। प्रशासन की इस सख्ती के बाद अब आम नागरिकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भविष्य में भी इसी तरह की निष्पक्ष कार्रवाई जारी रहेगी या यह केवल एक बार की दिखावटी कार्यवाही बनकर रह जाएगी।
चुनिंदा कार्रवाई ने खड़े किए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
एक विशेष ट्रेवल्स एजेंसी पर हुई इस कार्रवाई के बाद अब स्थानीय परिवहन विभाग और प्रशासन की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं क्योंकि शहर में कई अन्य ऑपरेटर भी इसी तरह के अवैध कार्यों में संलिप्त हैं। अजय ट्रेवल्स, गायत्री ट्रेवल्स, मुल्तानी सोना और कोठानी जैसी अन्य कई एजेंसियां भी अपनी बसों में क्षमता से अधिक व्यावसायिक माल ढो रही हैं, परंतु उनके विरुद्ध अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों के बीच यह संशय बना हुआ है कि आखिर अन्य ऑपरेटरों पर प्रशासन की यह 'विशेष मेहरबानी' क्यों बनी हुई है और क्या नियम केवल कुछ ही संचालकों के लिए सीमित हैं।
भविष्य की निष्पक्ष जांच और व्यापक सुधार की उम्मीद
सोशल मीडिया पर इस घटना के वायरल होने के बाद अब प्रशासन पर यह दबाव बढ़ गया है कि वह 'पिक एंड चूज' की नीति छोड़कर सभी बस संचालकों के खिलाफ समान रूप से चाबुक चलाए। यदि प्रशासन वास्तव में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है, तो उसे कोठानी, मुल्तानी सोना, अजय और गायत्री जैसे अन्य नामों पर भी शिकंजा कसना होगा ताकि 'फिक्स मंथली' के आरोपों को झुठलाया जा सके। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विभाग अपनी कुंभकर्णी नींद से जागकर पूरे परिवहन तंत्र में व्यापक सुधार लाने की हिम्मत जुटा पाता है या फिर यात्रियों की सुरक्षा इसी तरह रसूखदारों के आगे दांव पर लगी रहेगी।
ओंकारेश्वर में आस्था पर सवाल, परिक्रमा मार्ग बदलाव से श्रद्धालु नाराज
13 May, 2026 03:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओंकारेश्वर। नर्मदा तट पर स्थित पावन तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में इन दिनों धार्मिक परंपराओं और आधुनिक विकास के बीच एक बड़ा गतिरोध पैदा हो गया है। सदियों पुरानी ओंकार पर्वत परिक्रमा के मार्ग में किए गए बदलाव ने देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है। वर्षों से जिस सात किलोमीटर लंबे पथ पर श्रद्धालु अपनी आस्था की डगर नापते आए थे, उसे निर्माण कार्यों के चलते बंद कर दिए जाने से अब साधु-संत और आम नागरिक सड़क पर उतरकर विरोध जता रहे हैं। लोगों का स्पष्ट कहना है कि विकास की गति तो आवश्यक है, किंतु यह किसी भी सूरत में करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं और प्राचीन मान्यताओं की बलि देकर नहीं होनी चाहिए।
प्राचीन परिक्रमा पथ और श्रद्धालुओं की बढ़ती असुविधा
ओंकार पर्वत की परिक्रमा का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है और प्रतिदिन हजारों भक्त भगवान शिव की कृपा पाने हेतु इस पथ पर चलते हैं, परंतु मार्ग परिवर्तन ने उनकी श्रद्धा की राह में बाधाएं उत्पन्न कर दी हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार शंकराचार्य संग्रहालय और अन्य परियोजनाओं के कारण पुराने मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया गया है, जिससे अब भक्तों को एक नए और अत्यंत दुर्गम रास्ते का उपयोग करना पड़ रहा है। इस व्यवस्था से सबसे अधिक कष्ट बुजुर्गों और महिला श्रद्धालुओं को उठाना पड़ रहा है क्योंकि नया मार्ग न केवल कठिन है बल्कि बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित है, जिसके परिणामस्वरूप कई श्रद्धालुओं ने अब भारी मन से यहाँ की यात्रा तक कम कर दी है।
विकास परियोजनाओं के बीच आस्था के संरक्षण की चुनौती
प्रदेश सरकार द्वारा ओंकार पर्वत पर आदिगुरु शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा की स्थापना और हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्यों के माध्यम से इसे वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन इन भव्य योजनाओं के क्रियान्वयन के तरीके पर अब सवाल उठ रहे हैं। कई स्थानीय नागरिकों और जानकारों का मानना है कि निर्माण कार्यों की धीमी गति और बिना किसी ठोस वैकल्पिक योजना के रास्तों को बंद करने से क्षेत्र के प्राकृतिक और धार्मिक स्वरूप को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है। प्रशासन और जनता के बीच बढ़ता यह विवाद अब केवल एक रास्ते तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आस्था और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाए रखने की एक गंभीर चुनौती बन गया है जिससे भविष्य में तीर्थयात्रियों की संख्या पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
साधु-संतों का कड़ा रुख और परंपरा बचाने की पुकार
ओंकारेश्वर के विद्वान पंडितों और साधु-संतों ने परिक्रमा मार्ग को खंडित किए जाने पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए इसे धर्म विरुद्ध कदम बताया है। विद्वानों का तर्क है कि ओंकार पर्वत की परिक्रमा अनादिकाल से चली आ रही एक अखंड परंपरा है जिसे प्रशासनिक आदेशों से बदलना श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। संतों का आरोप है कि प्राचीन धरोहरों और मान्यताओं को विकास के नाम पर किनारे किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी इस विषय की गंभीरता को समझने के बजाय इसे नजरअंदाज कर रहे हैं। वर्तमान में यह मांग जोर पकड़ रही है कि प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए श्रद्धालुओं के लिए सुगम और परंपरागत मार्ग की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।
Shri Satya Sai University ने आरोपी छात्र से जुड़े दस्तावेज पुलिस को सौंपे
13 May, 2026 02:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीहोर: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के पेपर लीक मामले में हर दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले के तार मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी से जुड़ते नजर आ रहे हैं। इस मामले के मुख्य आरोपियों में से एक शुभम खैरनार, जिसे राजस्थान पुलिस ने 3 मई 2026 को महाराष्ट्र के नासिक से गिरफ्तार किया था, इसी विश्वविद्यालय का छात्र रह चुका है।
2021 में लिया था प्रवेश, फिर हो गया लापता
विश्वविद्यालय के कुलगुरु मुकेश तिवारी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी शुभम खैरनार ने साल 2021 में संस्थान के BAMS कोर्स में दाखिला लिया था। हालांकि, प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने और फीस जमा करने के बाद वह अचानक गायब हो गया। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने उससे संपर्क करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन छात्र की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
प्रबंधन का पक्ष: पुलिस जांच में पूर्ण सहयोग
कुलगुरु ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने शुभम के एडमिशन से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगे थे, जिन्हें जांच टीम को सौंप दिया गया है। छात्र का माइग्रेशन सर्टिफिकेट और अन्य मूल दस्तावेज अभी भी यूनिवर्सिटी के पास हैं। वहीं, विश्वविद्यालय के पीआरओ अंकित जोशी ने बताया कि रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि शुभम किसी भी शैक्षणिक गतिविधि में शामिल नहीं था और उसने यहाँ कोई परीक्षा भी नहीं दी थी। प्रबंधन को इस मामले में उसकी संलिप्तता की जानकारी मीडिया के माध्यम से ही मिली है।
NTA ने रद्द की परीक्षा, 22 लाख छात्र प्रभावित
3 मई को आयोजित हुई इस नीट परीक्षा में बरती गई अनियमितताओं के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने कड़ा फैसला लेते हुए पूरी परीक्षा को रद्द कर दिया है। इस फैसले से देश भर के करीब 22 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। NTA ने घोषणा की है कि परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी, हालांकि इसकी नई तारीखों का ऐलान अभी बाकी है। साथ ही, पंजीकृत छात्रों को उनकी फीस वापस करने का आश्वासन भी दिया गया है।
सीहोर के इस संस्थान का नाम जुड़ने के बाद स्थानीय प्रशासन और शिक्षा जगत में हलचल तेज हो गई है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या शुभम ने यहाँ रहते हुए भी पेपर लीक नेटवर्क को बढ़ाने का काम किया था।
NCRB रिपोर्ट से खुलासा: बुजुर्गों के लिए मध्यप्रदेश सबसे खतरनाक, विपक्ष ने मांगी कार्रवाई
13 May, 2026 02:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताजा आंकड़ों के जरिए प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गहरा प्रहार किया है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश लगातार तीसरे साल भी बुजुर्गों के लिए देश का सबसे असुरक्षित राज्य बना हुआ है, जो प्रदेश की छवि पर एक गंभीर दाग है। कमलनाथ ने उन दुखद घटनाओं का भी उल्लेख किया जहां पेंशन जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए अपनों ने ही बुजुर्गों के साथ मारपीट और अत्याचार किया। उन्होंने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने और वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए विशेष सुरक्षा अभियान चलाने की पुरजोर मांग की है।
वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ बढ़ते जघन्य अपराध और सरकारी चुप्पी
मध्यप्रदेश में बुजुर्गों के विरुद्ध हो रहे अपराधों की फेहरिस्त अत्यंत लंबी और भयावह होती जा रही है जिसमें हत्या, हत्या के प्रयास, यौन उत्पीड़न, लूट और साइबर ठगी जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि केवल वर्ष 2024 में ही प्रदेश के भीतर 144 बुजुर्गों की हत्या कर दी गई, जो इस वर्ग के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता और पुलिसिंग की विफलता को दर्शाता है। एनसीआरबी की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि पिछले तीन वर्षों से अपराधों का यह ग्राफ लगातार बढ़ रहा है और वर्ष 2024 में लगभग छह हजार मामले दर्ज होना स्थिति की गंभीरता को और अधिक बढ़ा देता है।
बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए विशेष जनजागरूकता अभियान की आवश्यकता
कांग्रेस नेता कमलनाथ ने इस विषय को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिक अक्सर अपनी सुरक्षा करने या कानूनी लड़ाई लड़ने में शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम नहीं होते हैं। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि पूरे प्रदेश में बुजुर्गों को केंद्रित कर एक बड़ा सुरक्षा अभियान शुरू किया जाना चाहिए जिसमें जनभागीदारी और सामाजिक कार्यकर्ताओं का सक्रिय सहयोग लिया जाए। इसके साथ ही स्कूलों और कार्यालयों में भी जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए ताकि समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और सुरक्षा का भाव विकसित हो सके और मध्यप्रदेश के माथे से देश के सबसे असुरक्षित राज्य होने का कलंक मिटाया जा सके।
एनसीआरबी की रिपोर्ट में उजागर हुई कानून व्यवस्था की चुनौतियां
एनसीआरबी की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ दर्ज कुल 31,067 मामलों में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही है। रिपोर्ट का यह पहलू और भी डराने वाला है कि अकेले रहने वाले या अपने परिवारों से अलग-थलग पड़ चुके बुजुर्ग अपराधियों के निशाने पर सबसे ज्यादा रहते हैं। वरिष्ठ महिलाओं के साथ बढ़ते यौन अपराधों के मामलों ने भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। ये चिंताजनक आंकड़े संकेत देते हैं कि प्रदेश में बुजुर्गों के लिए जीवन यापन करना कठिन होता जा रहा है और अब समय आ गया है कि प्रशासन इन आंकड़ों को केवल कागजी न मानकर जमीनी स्तर पर ठोस सुरक्षा उपाय लागू करे।
MP News: प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद नहीं रुका मल्टी निर्माण कार्य
13 May, 2026 01:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुरैना: शहर के सबसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र सदर बाजार स्थित झंडा चौक पर कानून की धज्जियां उड़ाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ एक निर्माणाधीन मल्टी (बहुमंजिला इमारत) का कार्य माननीय हाई कोर्ट के स्थगन आदेश (Stay Order) के बावजूद धड़ल्ले से जारी है। आरोप है कि कुछ रसूखदार और दबंग लोग न्यायिक आदेशों की अवहेलना करते हुए खुलेआम निर्माण कार्य को अंजाम दे रहे हैं।
हाई कोर्ट ने निर्माण पर लगाई है रोक
पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा है, जिसे लेकर देवीराम उपाध्याय द्वारा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (ग्वालियर खंडपीठ) में रिट याचिका क्रमांक 11334/2026 दायर की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय हाई कोर्ट ने 08 अप्रैल 2026 को अंतरिम आदेश जारी किया था। कोर्ट ने 25 फरवरी 2026 के आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था।
प्रशासनिक निर्देशों को भी किया गया नजरअंदाज
न्यायिक आदेश के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने से स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आया। अतिक्रमण विरोधी मुहिम के दौरान जब डिप्टी कलेक्टर उमेश स्वास्थ्य और तहसीलदार ज्योति लक्ष्यकर मौके पर पहुँचे, तब उन्हें हाई कोर्ट के स्टे के बावजूद काम चालू रहने की जानकारी मिली। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों को कड़ी हिदायत देते हुए तत्काल काम रोकने के निर्देश दिए। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि दबंगों पर इन प्रशासनिक चेतावनियों का भी कोई असर नहीं हुआ और काम फिर शुरू कर दिया गया।
कानून व्यवस्था पर खड़े हो रहे सवाल
हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद भी निर्माण कार्य जारी रहना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या रसूखदार लोग कानून से भी ऊपर हैं? स्थानीय लोगों और व्यापारियों में इस बात को लेकर काफी रोष है कि आखिर प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहा है।
अब शहरवासियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इन दबंगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए हाई कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित कराएगा या फिर कानून केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में हड़कंप, इंटर्न डॉक्टर को बंधक बनाने का मामला
13 May, 2026 12:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े चिकित्सा संस्थानों में शुमार हमीदिया अस्पताल से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक महिला इंटर्न डॉक्टर ने विभाग की एचओडी (HOD) पर मानसिक प्रताड़ना और तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। इस घटना के सामने आने के बाद न केवल अस्पताल प्रबंधन, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
बंधक बनाने और भोजन न देने का गंभीर आरोप
हमीदिया अस्पताल में पदस्थ इंटर्न डॉक्टर ऋचा ने एक वीडियो जारी कर अपनी आपबीती साझा की है। उन्होंने स्त्री रोग विभाग (Gynecology) की विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. कविता सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके द्वारा किए जा रहे मानसिक शोषण का विरोध करने पर उन्हें अस्पताल की 10वीं मंजिल पर स्थित एक कमरे में तीन दिनों तक कैद कर दिया गया। डॉक्टर ऋचा का दावा है कि इस दौरान उन्हें भोजन तक उपलब्ध नहीं कराया गया और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
पीड़ित डॉक्टर का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें वह अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर करती नजर आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें सजा के तौर पर बंधक बना लिया गया।
पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
वीडियो में डॉक्टर ऋचा ने कोहेफिजा पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस को इस पूरे मामले की शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस की इस चुप्पी ने मामले को और अधिक संदेहास्पद बना दिया है।
अस्पताल प्रबंधन ने साधी चुप्पी
इतने गंभीर आरोपों और वीडियो वायरल होने के बावजूद हमीदिया अस्पताल प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच की बात कह रहे हैं, लेकिन एचओडी पर लगे इन आरोपों ने अस्पताल के आंतरिक माहौल और जूनियर डॉक्टरों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
भोपाल में नकली 500 के नोट खपाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, जांच तेज
13 May, 2026 12:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जाली मुद्रा (Fake Currency) की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि आरोपी सैफुल इस्लाम भोपाल को एक सुरक्षित 'ट्रांजिट पॉइंट' के रूप में इस्तेमाल कर रहा था। आरोपी का काम करने का तरीका बेहद शातिर था; वह लोगों को कम कीमत पर असली जैसे दिखने वाले नकली नोट देने का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। पुलिस अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचने के लिए पश्चिम बंगाल में छापेमारी कर रही है।
लालच का खेल: 300 रुपये में मिलता था 500 का जाली नोट
आरोपी सैफुल इस्लाम बाजार में नकली करेंसी खपाने के लिए भारी डिस्काउंट का सहारा लेता था। जांच के अनुसार, वह 500 रुपये का एक नकली नोट मात्र 300 रुपये में बेचता था। इतना ही नहीं, यदि कोई थोक में जाली नोट लेना चाहता, तो उसे 1 लाख रुपये की फेक करेंसी लगभग 70 हजार रुपये के असली नोटों के बदले दी जाती थी। सस्ते में ज्यादा रकम मिलने के इसी लालच में कई लोग अनजाने में या जानबूझकर इस अवैध कारोबार का हिस्सा बन जाते थे।
बाजारों में रेकी और भरोसे का इस्तेमाल
नकली नोटों को सीधे बाजार में उतारने के बजाय, आरोपी पूरी योजना के साथ काम करता था। वह पहले भीड़भाड़ वाले बाजारों और छोटी दुकानों की पहचान करता था। इसके बाद वह दुकानदारों और छोटे व्यापारियों से मेल-जोल बढ़ाकर उनका भरोसा जीतता था। एक बार पहचान हो जाने के बाद, वह धीरे-धीरे लेनदेन में नकली नोटों को शामिल करना शुरू कर देता था। पुलिस को संदेह है कि इस काम में कुछ स्थानीय लोग भी उसकी मदद कर रहे थे, जो कमीशन के चक्कर में जाली नोट खपाने में सहयोग देते थे।
MBBS डॉक्टर की पहचान और हाईटेक तरीके से धोखाधड़ी
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब पुलिस को पता चला कि खुद को एमबीबीएस डॉक्टर बताने वाला सैफुल इस्लाम तकनीकी रूप से भी काफी शातिर है। कोहेफिजा पुलिस ने जब उसे सैफिया कॉलेज मैदान के पास से गिरफ्तार किया, तो उसके पास से 500-500 के 280 नकली नोट (कुल 1.40 लाख रुपये) बरामद हुए। अपनी पहचान छिपाने के लिए वह आईफोन में यूके (+44) के नंबर का उपयोग कर व्हाट्सएप कॉलिंग करता था, ताकि सुरक्षा एजेंसियां उसे आसानी से ट्रैक न कर सकें। आरोपी पिछले तीन साल से पश्चिम बंगाल से जाली नोट लाकर भोपाल और आसपास के इलाकों में सप्लाई कर रहा था।
500 रुपये के असली नोट की पहचान कैसे करें?
नकली नोटों के बढ़ते प्रसार को देखते हुए आम नागरिकों के लिए असली और नकली की पहचान करना बेहद जरूरी है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, असली 500 रुपये के नोट में ये प्रमुख विशेषताएं होती हैं:
वॉटरमार्क और लाइट टेस्ट: नोट को लाइट के सामने रखने पर महात्मा गांधी के वॉटरमार्क के पास '500' लिखा हुआ स्पष्ट दिखता है।
सिक्योरिटी थ्रेड: नोट को हल्का मोड़ने पर सिक्योरिटी थ्रेड (सुरक्षा धागा) का रंग हरे से बदलकर नीला हो जाता है।
नंबर पैनल: ऊपर बाईं और नीचे दाहिनी तरफ लिखे नंबरों का आकार बाएं से दाएं की ओर बढ़ता जाता है।
अशोक स्तंभ: नोट के दाहिनी तरफ अशोक स्तंभ का चिन्ह होता है और पास में एक छोटा वृत्त (सर्कल) होता है जिसमें '500' लिखा होता है।
ब्लीड लाइन्स: दृष्टिबाधित लोगों की पहचान के लिए नोट के दोनों किनारों पर 5 'ब्लीड लाइन्स' उभरी हुई होती हैं।
स्विमिंग पूल हादसे में बच्चे की जान गई, जांच के आदेश के बाद कब्र से निकलेगा शव
13 May, 2026 11:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ गिरवाई स्थित 'होटल प्रिंस मामा' के स्विमिंग पूल में डूबने से 7 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। मासूम अपने परिवार के साथ वहां पूल पार्टी और डिनर के लिए गया था। घटना सोमवार की बताई जा रही है, लेकिन मामले में नया मोड़ तब आया जब परिजनों ने बच्चे को दफनाने के दो दिन बाद पुलिस से पोस्टमार्टम की मांग की। बुधवार को पुलिस की मौजूदगी में शव को बाहर निकाला गया ताकि मौत के असली कारणों का पता लगाया जा सके।
अंधेरे का फायदा उठाकर गहरे पानी में उतरा बच्चा
जानकारी के मुताबिक, जनकगंज थाना क्षेत्र के गोल पहाड़िया निवासी देवेंद्र पाल अपनी पत्नी भारती, भाई दिनेश और बेटे वेद के साथ सोमवार शाम होटल पहुंचे थे। होटल में दो तरह के पूल बने हुए हैं—एक बच्चों के लिए कम गहरा और दूसरा वयस्कों के लिए अधिक गहराई वाला। पूरा परिवार साथ में पूल में नहा रहा था, तभी अचानक बिजली गुल हो गई और चारों तरफ अंधेरा छा गया। बताया जा रहा है कि इसी दौरान बच्चा खेलते हुए बड़े पूल की तरफ चला गया और डूब गया।
परिजन और स्टाफ को देरी से मिली खबर
दुखद पहलू यह रहा कि जब बच्चा गहरे पानी में संघर्ष कर रहा था, तब परिवार के किसी भी सदस्य या होटल स्टाफ को इसकी भनक तक नहीं लगी। काफी देर बाद जब बच्चे का शव पानी की सतह पर तैरता हुआ मिला, तब जाकर कोहराम मचा। परिजनों और होटल कर्मचारियों ने तुरंत उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। हादसे के बाद होटल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन लाइटिंग (Emergency Lighting) के इंतजामों पर भी सवाल उठ रहे हैं।
दफनाने के दो दिन बाद पोस्टमार्टम का फैसला
हादसे के तुरंत बाद परिजन गहरे सदमे में थे और उन्होंने कानूनी पचड़े से बचने के लिए बिना पुलिस को सूचना दिए सोमवार को ही बच्चे के शव को दफना दिया था। हालांकि, बाद में उन्हें अहसास हुआ कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, जिसके बाद वे थाने पहुंचे। परिजनों की शिकायत और पोस्टमार्टम की मांग पर पुलिस हरकत में आई। बुधवार दोपहर को प्रशासन की मौजूदगी में शव को कब्र से बाहर निकलवाया गया।
पुलिस जांच और सुरक्षा मानकों की पड़ताल
ग्वालियर पुलिस अब इस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या होटल के पास वैध लाइसेंस था और क्या वहां सुरक्षा गार्ड या लाइफगार्ड की तैनाती थी। इसके अलावा, स्विमिंग पूल के पास अंधेरे के समय सुरक्षा के क्या इंतजाम थे, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस होटल प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कर सकती है। इस घटना ने शहर के होटलों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
स्टेट बार काउंसिल चुनाव में रिकॉर्ड भागीदारी, 67.50 प्रतिशत वोटिंग
13 May, 2026 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्वालियर: मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल के लिए मंगलवार को ग्वालियर जिला न्यायालय परिसर में मतदान की प्रक्रिया संपन्न हुई। सुबह से ही न्यायालय परिसर का माहौल किसी आम चुनाव की तरह नजर आया, जहाँ काले कोट में सजे अधिवक्ताओं की लंबी कतारें अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए डटी रहीं। जिला न्यायालय के हनुमान मंदिर के समीप स्थित सुभाषचंद्र बोस बार कक्ष को विशेष रूप से मतदान केंद्र बनाया गया था। लोकतंत्र के इस उत्सव में वकीलों ने न केवल बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, बल्कि चुनावी समीकरणों को लेकर दिनभर बहस और चर्चाओं का दौर भी गर्म रहा।
चुनावी गहमागहमी और कड़ी सुरक्षा के बीच वोटिंग
मतदान की शुरुआत सुबह 10 बजे हुई, जिसके बाद हेल्प डेस्क पर अधिवक्ताओं के परिचय पत्रों की गहन जांच की गई। मतदाता पर्ची प्राप्त करने के बाद अधिवक्ताओं ने निर्धारित बूथों पर जाकर वोट डाले। हालांकि परिसर में प्रत्याशियों के समर्थकों की भारी भीड़ मौजूद थी, लेकिन पुलिस और चुनाव अधिकारियों की मुस्तैदी के कारण पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही। दोपहर तक माहौल काफी गर्म हो गया था और भले ही सीधे चुनाव प्रचार पर रोक थी, लेकिन समर्थकों की सक्रियता साफ इशारा कर रही थी कि मुकाबला काफी दिलचस्प है।
67.5 प्रतिशत मतदान और 15 जून से मतगणना
ग्वालियर जिले में कुल 6275 अधिवक्ता मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें से 4237 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस प्रकार जिले में कुल 67.5 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। शाम 5 बजे तक मतदान की प्रक्रिया चलने के बाद मतपेटियों को सुरक्षित रूप से सील कर दिया गया। अब सभी की नजरें 15 जून पर टिकी हैं, जब प्रदेश स्तर पर मतगणना की शुरुआत होगी। इस चुनाव के परिणाम यह तय करेंगे कि अगले कार्यकाल के लिए स्टेट बार काउंसिल की कमान किन हाथों में होगी।
विधायक सतीश सिकरवार का वोट निरस्त, पहचान पत्र पर रही सख्ती
इस चुनाव में एक बड़ा वाकया ग्वालियर पूर्व के विधायक डॉ. सतीश सिकरवार के साथ हुआ। वकालत की डिग्री होने के कारण वे मतदान करने पहुंचे थे, लेकिन दस्तावेजी खामियों और पात्रता संबंधी तकनीकी कारणों से चुनाव अधिकारियों ने उनका वोट निरस्त कर दिया, जिसके चलते वे अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके। अधिकारियों ने पहचान पत्र को लेकर काफी सख्ती बरती; केवल उन्हीं वकीलों को वोट डालने दिया गया जिनके पास स्टेट बार काउंसिल या हाई कोर्ट बार एसोसिएशन का वैध आईडी कार्ड था। जिनके पास कार्ड नहीं था, उन्हें अपनी 'सनद' (Enrolment Certificate) दिखानी पड़ी।
मैदान में 122 प्रत्याशी, ग्वालियर से 12 दावेदार
मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव में इस बार प्रदेशभर से कुल 122 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें से ग्वालियर जिले से 12 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें चार महिला अधिवक्ता भी शामिल हैं। चुनाव को निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए चीफ रिटर्निंग ऑफिसर ऋतुराज सिंह चौहान और रिटर्निंग ऑफिसर एमएनएच रिजवी के साथ एआरओ सीपी सिंह, कल्पना परमार और बृजेश त्यागी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब 15 जून को होने वाली मतगणना के बाद ही ग्वालियर के इन 12 दिग्गजों का भविष्य साफ हो पाएगा।
UCC को लेकर मोहन सरकार एक्टिव, दिवाली तक लागू होने के संकेत
13 May, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने अपनी प्रशासनिक तैयारियों की रफ्तार बढ़ा दी है। इसी सिलसिले में, मंगलवार को देश की राजधानी दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन में एक उच्चस्तरीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित इस छह सदस्यीय समिति ने करीब दो घंटे तक विभिन्न कानूनी पहलुओं पर मंथन किया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में लागू हो चुके UCC के ढांचे को समझना और मध्य प्रदेश की विशिष्ट सामाजिक व सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप एक नया मसौदा तैयार करने की रूपरेखा बनाना था।
दिवाली 2026 तक कानून लागू करने का लक्ष्य
राज्य सरकार प्रदेश की जनता को दिवाली 2026 तक समान नागरिक संहिता का उपहार देने की योजना पर काम कर रही है। दिल्ली में हुई इस पहली बैठक के दौरान समिति के सदस्यों को अन्य राज्यों के ड्राफ्ट सौंपे गए हैं ताकि वे उनका गहन अध्ययन कर सकें। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मध्य प्रदेश की सामाजिक संरचना काफी विविधतापूर्ण है, इसलिए यहां के पारंपरिक मूल्यों और स्थानीय मान्यताओं को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ा जाएगा। समिति के सदस्यों ने स्पष्ट किया है कि वे अगले 10 दिनों के भीतर दोबारा बैठक करेंगे, जिसमें विशेष रूप से प्रदेश के आदिवासी समुदायों से जुड़े कानूनों और उनकी अनूठी सामाजिक व्यवस्थाओं पर चर्चा की जाएगी।
मई के अंत तक जनता से सुझाव लेने की योजना
UCC के निर्माण में आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए समिति ने जनसुनवाई का मार्ग चुना है। संभावना जताई जा रही है कि 30 मई 2026 से पहले प्रदेश के विभिन्न संभागों और जिला मुख्यालयों में परामर्श बैठकों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। इसके माध्यम से समाज के हर वर्ग, धर्म और समुदाय के लोगों से उनके सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। इस पूरी प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए भोपाल के वल्लभ भवन और दिल्ली के मध्य प्रदेश भवन में समर्पित कार्यालय भी स्थापित किए जा रहे हैं, जो ड्राफ्ट तैयार करने के दौरान समन्वय का केंद्र बनेंगे।
दो महीने में तैयार होगी विस्तृत रिपोर्ट
समिति को अपनी पूरी जांच-परख और अध्ययन के बाद 60 दिनों के भीतर राज्य सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट और कानून का प्रारूप सौंपना है। इस रिपोर्ट में विवाह, तलाक, संपत्ति के अधिकार, गोद लेने की प्रक्रिया और उत्तराधिकार जैसे संवेदनशील व्यक्तिगत कानूनों का समावेश होगा। इसके साथ ही, बदलते सामाजिक परिवेश को देखते हुए महिला व बाल अधिकारों की सुरक्षा और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे आधुनिक मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार की कोशिश एक ऐसा संतुलित और व्यावहारिक कानून बनाने की है जो प्रदेश की सांस्कृतिक अखंडता को बनाए रखते हुए सभी नागरिकों को समान कानूनी सुरक्षा प्रदान कर सके।
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