राजनीति
महिला आरक्षण बिल में अड़ंगा डालने की कोशिश, OBC आरक्षण को लेकर उलझा मामला
10 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. संसद (Parliament) और विधानसभाओं (Legislative Assemblies) में महिलाओं (Women) को एक तिहाई आरक्षण (Reservation) के मामले में विपक्ष (Opposition) ओबीसी कोटा (OBC Quota) का पेच फंसाने की तैयारी कर रहा है। विपक्षी इंडिया ब्लॉक में शामिल सपा, राजद जैसे कुछ विपक्षी दलों ने कांग्रेस से सरकार के समक्ष इस आशय का मांग रखने का दबाव बना रहे हैं। कांग्रेस शुक्रवार को होने वाली अपनी कार्यसमिति की बैठक में इस मामले में निर्णय ले सकती है।
महिला आरक्षण अधिनियम में ओबीसी कोटा नहीं
गौरतलब है कि बीते लोकसभा चुनाव से ठीक पहले महिला आरक्षण के लिए पारित किए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में ओबीसी कोटे का प्रावधान नहीं किया गया है। विधेयक पर चर्चा के दौरान सपा, राजद जैसे कुछ दलों ने भी ओबीसी कोटा लागू करने की मांग की। तब सरकार ने संविधान में इस आशय की व्यवस्था न होने का हवाला दिया था। हालांकि कांग्रेस ने तब ओबीसी कोटे की मांग से दूरी बना ली थी। सपा के सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व ने सरकार के समक्ष आरक्षण में ओबीसी कोटा तय करने की मांग पर विचार का आश्वासन दिया है।
कार्यसमिति की अहम बैठक
अब जबकि सरकार ने बजट सत्र की 16 से 18 अप्रैल तक विस्तारित बैठक बुलाने के फैसले के बाद बुधवार को केबिनेट की बैठक में महिला आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयकों को मंजूरी मिल गई है, तब शुक्रवार को होने वाली कांग्रेस की कार्यसमिति की बैठक अहम हो गई है।
कांग्रेस के ही एक धड़े का मानना है कि राहुल गांधी की सामाजिक न्याय की राजनीति को मजबूती देने के लिए ओबीसी कोटे की मांग का व्यापक असर होगा।
अगर कांग्रेस की ओर से ओबीसी कोटे की मांग की गई तो संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को अतिरिक्त मशक्कत करनी होगी। सरकार अब तक कांग्रेस का समर्थन मिलने को लेकर निश्चिंत थी।
बंपर वोटिंग के बीच बढ़ा मतदान प्रतिशत, सीएम हिमंता बिस्व सरमा ने किया बड़ा खुलासा
10 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। असम (Assam) के मुख्यमंत्री (CM) हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने राज्य के चुनाव और मतदान बात की। उन्होंने कहा कि इस बार असम में मतदान (Voting) प्रतिशत काफी अधिक रहा है, जो लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत है। सीएम ने ये भी कहा कि सुबह तक इसमें एक-दो प्रतिशत का ओर इजाफा हो सकता है। असम विधानसभा चुनाव में 85 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुआ है।
असम सीएम ने बताई मतदान प्रतिशत बढ़ने की वजह
सीएम सरमा ने कहा, ‘इस बार हमारे असमिया लोगों ने खूब वोट किया। पहले बांग्लादेश से आए हुए हमारे मुस्लिम मतदाता ज्यादा वोट करते थे। लेकिन इस बार असम के मूल निवासियों ने 90-92 प्रतिशत तक वोट दिया। इसी से फर्क पड़ा और मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई। यह लोकतंत्र के लिए अच्छा है।’
गौरव गोगोई की पत्नी को बताया विदेशी
सीएम सरमा ने गौरव गोगोई पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गौरव गोगई की पत्नी एक विदेशी है, उनके दोनों बच्चे विदेश में रहते हैं और दोनों ने अपना धर्म परिवर्तन करा लिया है। सीएम ने इस बात पर भी जोर दिया कि गौरव गोगई के घर में अकेले गौरव शायद हिंदू हैं और भारतीय हैं। गौरव गोगोई की पत्नी भारत की नागरिक है ही नहीं, तो वे कैसे मतदान करेगी?
‘पवन खेड़ा लंबा समय असम में बिताएंगे’
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से संबंधित सवाल पर सीएम सरमा ने दो टूक अंदाज में पवन खेड़ा को चेतावनी दी। सरमा ने कहा कि खेड़ा ने फर्जी कागजात बनाकर उनकी पत्नी पर आरोप लगाए और पवन खेड़ा अपने जीवन का लंबा समय असम में ही बिताने वाले हैं। असम में यूसीसी लागू करने के सवाल पर सरमा ने कहा कि हम अपने एजेंडे पर लगातार काम कर रहे हैं, अगर नई सरकार आती हैं तो उनका अलग एजेंडा होगा। हमारा एजेंडा ऐसे ही होगा, जो अभी कर रहे हैं, वो ही आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार भी असम में भाजपा और एनडीए गठबंधन की सरकार बनने जा रही है और उन्होंने 90 से ज्यादा सीटें जीतने की बात कही।
खरगे के बयान पर जताई आपत्ति
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर असम सीएम ने कहा कि खरगे ने अपने बयान में लोगों को हिंसा के लिए भड़काया और उनके जैसे नेता के लिए ये शोभा नहीं देता। दरअसल खरगे ने हाल ही में असम में चुनाव प्रचार के दौरान एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में भाजपा और आरएसएस की तुलना जहरीले सांप से कर दी थी। उन्होंने कहा कि अगर आप नमाज पढ़ रहे हैं और वहां से जहरीला सांप गुजरता है तो कुरान भी नमाज रोककर सांप को मारने की अनुमति देती है। खरगे ने कहा कि ये जहरीला सांप भाजपा और आरएसएस हैं और अगर आप इन्हीं नहीं मारेंगे तो आप जिंदा नहीं बचेंगे। खरगे के इस भाषण को नफरती बताते हुए भाजपा और आरएसएस ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। भाजपा ने चुनाव आयोग से भी इसकी शिकायत की है।
AAP नेता राघव चड्ढा के पोस्ट ने बढ़ाया सस्पेंस, क्या है ‘Gen-Z पार्टी’ का संकेत?
10 Apr, 2026 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) में कथित मतभेदों के बीच राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chaddha) को लेकर नई राजनीतिक संभावनाओं की चर्चा तेज हो गई है। खासकर उनके इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो और उस पर की गई टिप्पणी ने यह अटकलें पैदा कर दी हैं कि वह युवाओं, खासकर जेन-Z को केंद्र में रखकर नई पार्टी बनाने पर विचार कर सकते हैं।
दरअसल, राज्यसभा में AAP के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने तीन वीडियो जारी किए हैं। इन वीडियो में उन्होंने संकेत दिया कि वह इस बदलाव को सहज रूप से स्वीकार करने वाले नहीं हैं और सार्वजनिक मुद्दों को उठाते रहेंगे। इसी बीच इंस्टाग्राम पर साझा की गई एक रील ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
इंस्टाग्राम रील से शुरू हुई चर्चा
चड्ढा ने “Seedhathok” नाम के एक क्रिएटर की रील शेयर की, जिसमें समर्थक ने सुझाव दिया कि उन्हें युवाओं के लिए “Gen-Z” आधारित नई राजनीतिक पार्टी बनानी चाहिए। इस रील पर चड्ढा ने “दिलचस्प विचार” लिखकर प्रतिक्रिया दी। बस इसी टिप्पणी के बाद नई पार्टी को लेकर अटकलें तेज हो गईं।
समर्थक ने क्या कहा?
रील में क्रिएटर रिहान ने कहा कि कई युवा चाहते हैं कि चड्ढा मौजूदा मतभेदों के बावजूद अपनी पार्टी बनाएं। उनका मानना है कि किसी दूसरी पार्टी में जाने की बजाय नई पार्टी बनाना उनके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि युवा वर्ग उन्हें व्यापक समर्थन दे सकता है।
पद से हटाए जाने के बाद बढ़ी हलचल
पिछले सप्ताह AAP ने चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाकर उनकी जगह सांसद अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त किया। यह फैसला कथित तौर पर चड्ढा और पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के बीच मतभेदों की खबरों के बीच लिया गया।
‘पिक्चर अभी बाकी है’ वाला संदेश
AAP द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में चड्ढा ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने पंजाब से जुड़े मुद्दों—भूजल संकट, भगत सिंह से जुड़े संदर्भ और अन्य क्षेत्रीय विषय—उठाए। वीडियो को उन्होंने “छोटा सा ट्रेलर” बताते हुए कहा, “पिक्चर अभी बाकी है।”
उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब उनके लिए केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि उनका घर और कर्तव्य है।
फिलहाल, चड्ढा ने नई पार्टी बनाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सोशल मीडिया संकेतों और हालिया घटनाक्रमों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है।
बड़ी राजनीतिक खबर: हरिवंश फिर बने राज्यसभा उपसभापति, मिला नया कार्यकाल
10 Apr, 2026 08:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. राज्यसभा (Rajya Sabha) के उपसभापति (Deputy Chairman) हरिवंश ( Harivansh) का बतौर सदस्य कार्यकाल आज यानी 10 अप्रैल को समाप्त हो रहा है. रिक्त हो रही सीट के लिए निर्वाचन की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है. हरिवंश की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने इस बार उनको राज्यसभा नहीं भेजा था. हरिवंश की उच्च सदन से विदाई तय मानी जा रही थी, लेकिन ऐन मौके पर उनको एक और कार्यकाल का तोहफा मिल गया है.
हरिवंश को राष्ट्रपति ने अपने कोटे से राज्यसभा सांसद मनोनीत कर दिया है. इस संबंध में गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है. राष्ट्रपति कोटे से मनोनयन के बाद अब यह तय हो गया है कि अगले छह साल तक उच्च सदन में हरिवंश की आवाज अभी गूंजती रहेगी. हरिवंश का राज्यसभा सदस्य के रूप में यह तीसरा कार्यकाल होगा.
गृह मंत्रालय की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन में कहा गया है कि राष्ट्रपति एक नामित सदस्य की सेवानिवृत्ति के कारण हुई रिक्ति को भरने के लिए राज्यसभा में हरिवंश को नामित करती हैं. गौरतलब है कि संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकती हैं.
साहित्य, कला, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रतिष्ठित व्यक्तियों को मनोनीत किए जाने का प्रावधान संविधान में है. मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल भी निर्वाचित सदस्यों की ही तरह छह साल का होता है. बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले हरिवंश पेशे से पत्रकार रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के जयप्रकाश नगर निवासी हरिवंश अप्रैल, 2014 में पहली बार राज्यसभा सांसद निर्वाचित हुए थे. तब उनको जेडीयू ने ही उच्च सदन में भेजा था. जेडीयू ने हरिवंश को लगातार दो बार राज्यसभा भेजा, लेकिन पार्टी ने तीसरा कार्यकाल नहीं दिया था. इसके बाद उच्च सदन में उनकी संसदीय पारी खत्म मानी जा रही थी, लेकिन ऐन वक्त पर सरकार ने राष्ट्रपति के कोटे से उनको मनोनीत करा दिया.
हरिवंश साल 2018 में 9 अगस्त को राज्यसभा के उपसभापति निर्वाचित हुए थे. 14 सितंबर 2020 को उन्हें लगातार दूसरी बार उच्च सदन का उपसभापति चुना गया था. अब उनको उच्च सदन में तीसरा कार्यकाल भी मिल गया है, ऐसे में क्या उनको लगातार तीसरी बार उपसभापति भी चुना जाएगा? अब नजरें इस पर हैं.
‘हजार करोड़ डील’ वीडियो के बाद बंगाल में बड़ा सियासी उलटफेर, AIMIM ने गठबंधन खत्म किया
10 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल (West Bengal) में बीच चुनाव (Election) भी गठबंधनों (Alliances) का गणित बदलने का सिलसिला जारी है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निकाले जाने के बाद हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने अपनी पार्टी बना ली थी. हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन कर असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) अपनी सियासी जड़े जमाने की कोशिश में थी.
इस बार मिलकर चुनावी रणभूमि में उतरने का ऐलान करने वाली दोनों पार्टियों की राहें अब जुदा हो गई हैं. ओवैसी की अगुवाई वाली एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया है. एआईएमआईएम ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल से पोस्ट कर कहा है कि पार्टी पश्चिम बंगाल चुनाव अकेले लड़ेगी. आगे किसी भी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं किया जाएगा.
एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर के बयानों से किनारा करते हुए कहा है कि पार्टी किसी भी ऐसे बयान से खुद को नहीं जोड़ सकती, जिसमें मुस्लिमों की निष्ठा और ईमानदारी पर सवाल उठाए जाएं. एआईएमआईएम की ओर से कहा गया है कि आज के हालात में पार्टी ने हुमायूं कबीर के दल के साथ अपना गठबंधन समाप्त कर दिया है.
एआईएमआईएम ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी कहा है कि बंगाल के मुस्लिम देश के सबसे गरीब, उपेक्षित और उत्पीड़न का शिकार समुदायों में से एक हैं. पार्टी ने लेफ्ट और टीएमसी पर तंज करते हुए कहा कि दशकों तक तथाकथित धर्मनिरपेक्ष शासन के बावजूद पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों के लिए कुछ खास नहीं किया गया.
ओवैसी की पार्टी ने इसी पोस्ट में यह भी कहा है कि किसी भी राज्य में चुनाव लड़ने को लेकर एआईएमआईएम की नीति यह है कि हाशिए पर मौजूद समुदायों को एक स्वतंत्र राजनीतिक आवाज मिले. एआईएमआईएम की ओर से यह ऐलान हुमायूं कबीर का वीडियो वायरल होने के बाद आया है.
वायरल वीडियो में क्या था
तृणमूल कांग्रेस ने एक वीडियो शेयर किया था. इस वीडियो में आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर के बीजेपी के साथ मिलकर एक हजार करोड़ रुपये का खेल करने की बात थी. टीएमसी ने दावा किया था कि मुस्लिमों की भावनाओं का इस्तेमाल कर उनके वोट बीजेपी की ओर मोड़ने की कोशिशें हो रही हैं. फिरहाद हकीम ने टीएमसी नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वीडियो जारी किया, जिसमें हुमायूं कबीर किसी से बात करते दिखाई दे रहे हैं.
हुमायूं कबीर इस वीडियो में कहते दिखाई दे रहे हैं कि बाबरी मस्जिद बनेगी या नहीं, ये छोड़ो. एक हजार करोड़ रुपये आएंगे. मुस्लिम बहुत भोले हैं, उनको बेवकूफ बनाना बहुत आसान है. टीएमसी ने हुमायूं कबीर और बीजेपी के बीच हजार करोड़ रुपये की डील का दावा किया था. इस वीडियो पर हुमायूं कबीर की सफाई भी आई थी. हुमायूं कबीर ने वीडियो को एआई जेनरेटेड बताते हुए कहा था कि टीएमसी की ओर से लगाए गए सभी आरोप गलत हैं.
हुमायूं कबीर ने क्या कहा था
हुमायूं कबीर ने कहा था कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह हैं. साल 2019 के बाद इनमें से किसी से भी कोई संपर्क नहीं है. उन्होंने टीएमसी को चुनौती दी कि 2019 के बाद किसी बीजेपी नेता से मुलाकात की फोटो या सबूत हो, तो दिखाएं. हुमायूं कबीर ने इस मामले में फिरहाद हकीम और कुणाल घोष के साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भी मानहानि का मुकदमा दायर करने की बात कही थी.
90 लाख वोटर्स का नाम कटने का दावा, बंगाल में चुनावी राजनीति गरमाई
9 Apr, 2026 05:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुए बदलावों ने राजनीतिक गलियारे में तूफान खड़ा कर दिया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी, माकपा (सीपीआई-एम) ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं। माकपा का कहना है कि बंगाल में लगभग 90 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं।
'वोटर संदिग्ध नहीं, नागरिक हैं'
माकपा के महासचिव एमए बेबी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे पत्र में विरोध दर्ज कराया है। पत्र में दावा किया गया है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान वोटर को एक संदिग्ध की तरह देखा गया। पार्टी का आरोप है कि अब मतदाता को यह साबित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है कि वह निर्दोष है और उसे वोट देने का हक है, जबकि यह जिम्मेदारी प्रशासन की होनी चाहिए थी।
तकनीक के इस्तेमाल पर सवाल
माकपा ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी मतदाता सूची के विशेष सुधार अभियान (एसआईआर) पर सवाल उठाते हुए इसे बड़े पैमाने पर मताधिकार छीनने की साजिश करार दिया है। पार्टी के मुताबिक, अब जमीनी स्तर पर वेरिफिकेशन की जगह 'एल्गोरिदम' और सॉफ्टवेयर के जरिए नाम हटाए जा रहे हैं। लाखों लोगों को बिना किसी ठोस आधार के 'अंडर एडजूडिकेशन' यानी, विचाराधीन श्रेणी में डाल दिया गया है। इतना ही नहीं, माकपा ने दावा किया है कि शिकायत निवारण के सरकारी पोर्टल और तंत्र या तो काम नहीं कर रहे हैं या आम जनता की पहुंच से बाहर हैं।
हाशिए के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित-माकपा
माकपा ने दावा किया गया है कि इस छंटनी का सबसे बुरा असर मुस्लिम समुदाय, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर पड़ा है। पार्टी ने इसे संविधान के अनुच्छेद 326, वोट देने का अधिकार का उल्लंघन बताया है। माकपा का कहना है कि वोट देना सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि इंसान की गरिमा और समानता से जुड़ा मौलिक अधिकार है।माकपा ने यह भी कहा कि लिस्ट से नाम कटने और उसे दोबारा जुड़वाने की जद्दोजहद में लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। पार्टी ने यहां तक दावा किया कि इस प्रक्रिया के कारण पैदा हुए तनाव से लोगों को मानसिक आघात पहुंचा है और कुछ मामलों में मौतें भी हुई हैं। माकपा ने चुनाव आयोग से मांग की है कि इस डिजिटल छंटनी को तुरंत रोककर पारदर्शी तरीका अपनाया जाए, जिससे बंगाल का कोई भी असली नागरिक लोकतंत्र के इस महापर्व से बाहर न छूटे।
कांग्रेस का बड़ा फैसला, बारामती सीट पर उपचुनाव नहीं लड़ेगी
9 Apr, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई | महाराष्ट्र की राजनीति में बारामती विधानसभा उपचुनाव को लेकर बड़ा मोड़ आया है। कांग्रेस ने एलान किया है कि वह इस उपचुनाव में हिस्सा नहीं लेगी। यह फैसला पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद सम्मान जताने के तौर पर लिया गया है। इस निर्णय के बाद अब बारामती सीट पर चुनाव का माहौल पूरी तरह बदल गया है।दरअसल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्नाथाला ने साफ कहा कि पार्टी ने अपने उम्मीदवार को मैदान से हटाने का निर्देश दे दिया है। कांग्रेस के उम्मीदवार आकाश मोरे ने नामांकन दाखिल किया था, लेकिन अब उसे वापस लिया जाएगा। नामांकन वापस लेने का आज आखिरी दिन था, इसलिए यह फैसला अहम माना जा रहा है।
क्यों लिया कांग्रेस ने चुनाव न लड़ने का फैसला?
कांग्रेस ने कहा कि यह उपचुनाव अजित पवार के दुखद निधन के कारण हो रहा है, इसलिए पार्टी ने सम्मान के तौर पर चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया। पार्टी का मानना है कि ऐसे समय में राजनीतिक मुकाबले से दूर रहना उचित है। यह कदम राजनीतिक मर्यादा और संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
क्या अन्य दलों ने भी की थी अपील?
इस फैसले से पहले कई नेताओं ने कांग्रेस से चुनाव न लड़ने की अपील की थी। शरद पवार, सुप्रिया सुले और रोहित पवार समेत कई नेताओं ने कांग्रेस से उपचुनाव को निर्विरोध कराने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि यह चुनाव एक दुखद घटना के बाद हो रहा है, इसलिए इसे सम्मानजनक तरीके से होना चाहिए।
क्या पहले विवाद भी हुआ था?
उपचुनाव को लेकर पहले माहौल थोड़ा तनावपूर्ण हो गया था। सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार ने कांग्रेस पर उम्मीदवार उतारने को लेकर आलोचना की थी और पार्टी के भविष्य को लेकर बयान दिया था। इससे राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी, लेकिन अब कांग्रेस के फैसले से विवाद खत्म होने की उम्मीद है।
अब आगे क्या होगा बारामती सीट पर?
कांग्रेस के मैदान से हटने के बाद सुनेत्रा पवार का रास्ता आसान माना जा रहा है। अगर अन्य कोई बड़ा उम्मीदवार सामने नहीं आता, तो यह चुनाव लगभग निर्विरोध हो सकता है। बारामती सीट पर अजित पवार आठ बार विधायक रह चुके थे और यह क्षेत्र उनके राजनीतिक प्रभाव का गढ़ माना जाता है।
सियासी अटकलें तेज, ओमप्रकाश राजभर की सीट बदलने की चर्चा
9 Apr, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ | उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अभी एक साल से ज्यादा का समय बचा हुआ है. इससे पहले तमाम नेता अपने और अपने परिवार के लिए आरक्षित सीटों की तलाश में जुट गए हैं. इस सब काम में सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने सबसे ज्यादा तेजी से काम लिया है. उन्होंने अपनी परंपरागत जहूराबाद सीट छोड़ने का फैसला ले लिया है. इसके साथ ही उन्होंने संजय निषाद की पार्टी के प्रभाव वाली सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है. इसके बाद से ही कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं.ओम प्रकाश राजभर ने गाजीपुर की जहूराबाद विधानसभा सीट छोड़कर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ने की बात कही है. इस सीट पर संजय निषाद की पार्टी चुनाव लड़ती आ रही है. ऐसे में एनडीए में सबकुछ ठीक होने को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं. राजभर का यह ऐलान संजय निषाद के लिए काफी परेशानी करने वाला है. ऐसा इसलिए क्योंकि उन सीटों पर दावा ठोका है जो निषाद पार्टी की हैं.
राजभर की बात मानेगा एनडीए?
ओमप्रकाश राजभर यूपी में बीजेपी और सपा दोनों के साथ ही रह चुके हैं. फिलहाल वह एनडीए में हैं और उन्होंने जब से अपनी पसंदीदा सीटों का ऐलान किया है. तब से कई नेताओं में नाराजगी देखने को मिली है. लेकिन उम्मीद है कि एनडीए आलाकमान उनकी बात को सुनेगा और सही फैसला लेगा. यही वजह है कि संजय निषाद ने अब तक अपना रुख शांत रखा हुआ है. हालांकि कुछ राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि पूर्वांचल क्षेत्र में पहले भी सीट शेयरिंग आसान नहीं रही है, अगर राजभर अपनी जिद पर अड़े रहते हैं तो समीकरण और आने वाले दिनों कुछ अलग ही समीकरण देखने को मिल सकते हैं.
क्यों अपनी पुरानी सीट छोड़ रहे राजभर?
पुराने लोगों का नहीं मिलेगा साथ?
ओम प्रकाश राजभर ने अपनी परंपरागत और मजबूत मानी जाने वाली सीट जहूराबाद छोड़ने का ऐलान कर दिया है. जहां से वो दो बार से विधायक चुनकर आए हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि साल 2022 के चुनाव में राजभर ने अपना चुनाव सपा के साथ मिलकर लड़ा था. यही वजह है कि उस समय उन्हें अंसारी परिवार का साथ मिल गया था. अगर इस चुनाव में वह वहां से बीजेपी के सहारे लड़ते हैं तो उन्हें कड़ा मुकाबला मिल सकता है. ऐसा कहा जा रहा है कि अंसारी परिवार के डर से ही राजभर ने सीट बदलने का ऐलान किया है.
सवर्ण समाज की नाराजगी पड़ेगी भारी
ओमप्रकाश राजभर अपनी बयानबाजी के कारण हमेशा ही चर्चा में बने रहते हैं, कई बार उन्हें अपने बयानों की वजह से विरोध का सामना भी करना पड़ा है. ऐसा कहा जा रहा है कि इस बार सवर्ण जातियां राजभर से नाराज हैं और उनका वोट मिलना मुश्किल माना जा रहा है. उनके साथ घोसी विधानसभा सीट पर भी कुछ ऐसा ही हुआ था. यही वजह है कि उन्होंने बचाव करते हुए इस बार बहुत पहले ही पचड़े से दूर होने का फैसला ले लिया है.
सेफ जोन में खेलना चाहते हैं राजभर
राजभर को लेकर राजनीतिक गलियारों चर्चा यह भी है कि वह सुरक्षित सीट से ही चुनाव लड़ना चाहते हैं. इसी वजह से उन्होंने अपने लिए अतरौलिया सीट को चुना है तो बेटे अरविंद राजभर के लिए दीदारगंज सीट चाहते हैं.
सत्ता विरोधी लहर के बीच विकास बना बड़ा मुद्दा, केरल में दिलचस्प मुकाबला
9 Apr, 2026 01:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम | केरलम में 140 सदस्यीय विधानसभा के लिए बृहस्पतिवार को वोट डाले जाएंगे। राज्य का चुनाव इस बार अनुभव बनाम बदलाव की लड़ाई नजर आ रहा है। सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने जहां अपने मौजूदा विधायकों को बड़ी संख्या में फिर से मैदान में उतारा तो वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने नए चेहरों के भरोसे सत्ता में वापसी का मंसूबा संजोया है। दूसरी तरफ राज्य में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश में जुटे भाजपा के नेतृत्ववाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदें जनता के करिश्मे पर टिकी हुई हैं।मुख्यमंत्री पी. विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ ने 69 मौजूदा विधायकों को फिर से उम्मीदवार बनाया है। इनमें से कई ने 2021 के चुनाव में अच्छे अंतर से जीत हासिल की थी। हालांकि सत्ता विरोधी लहर को भांपते हुए 30 विधायकों के टिकट काटे गए और कुछ सीटों पर बदलाव भी किए गए हैं। एलडीएफ ने 2021 में हारने वाले केवल तीन उम्मीदवारों को ही मौका दिया है, जबकि हारे 38 उम्मीदवारों को इस बार टिकट नहीं मिला। एलडीएफ का मानना है कि उसके मौजूदा विधायकों का प्रदर्शन अच्छा रहा है, इसलिए उन्हें दोहराना सही रहेगा।
केरलम में धर्म और पहचान की कैसी राजनीति?
केरलम विधानसभा चुनाव में धर्म और पहचान की राजनीति भी खूब हुई। हाल ही में आई एक रिपोर्ट को लेकर ईसाई संगठन केरल कैथोलिक बिशप परिषद (केसीबीसी) ने असंतोष जताया और कहा कि सरकार को सिर्फ रिपोर्ट जारी करने के बजाय ठोस कदम उठाने चाहिए। रिपोर्ट में ईसाई और मुस्लिम समुदायों के बीच तुलना की गई है। इसे कुछ लोग चुनाव से पहले तनाव बढ़ाने की कोशिश मान रहे हैं। भाजपा और माकपा ने आरोप लगाया कि अगर यूडीएफ सत्ता में आती है तो उस पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का प्रभाव बढ़ेगा। इसे हिंदू और ईसाई मतदाताओं को प्रभावित करने की रणनीति माना जा रहा है।
सबरीमाला मंदिर विवाद भी अहम चुनावी मुद्दा
चुनाव में सबरीमाला मंदिर से जुड़ा विवाद भी चुनावी मुद्दा रहा। भाजपा नेताओं खासकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे जमकर उछाला ताकि हिंदू पहचान को मजबूती दी जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार केरल चुनाव में विकास के साथ-साथ धर्म और पहचान की राजनीति भी अहम भूमिका निभा रही है। सभी दल अलग-अलग समुदायों को साधने में लगे हैं।
कांग्रेस के गठबंधन का कैसा है हाल?
कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 99 सीटों पर उम्मीदवार बदले हैं। केवल 27 मौजूदा विधायकों को फिर से मैदान में उतारा है और बड़ी संख्या में नए उम्मीदवारों को मौका दिया है। इसके अलावा 14 विधायकों के टिकट काटे हैं। पिछले चुनाव में हारे 85 उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया गया है। यूडीएफ ने बदलाव के जरिये मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश की है। वहीं भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को केरलम में अब तक ज्यादा सफलता नहीं मिली है। गठबंधन 2021 के विधानसभा चुनाव में मात्र एक सीट पर जीत हासिल कर सका था। इस बार राजग 129 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। भाजपा इनमें से 98 सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रही है। राजग से 2021 में चुनाव लड़ने वाले 15 उम्मीदवारों को ही दोबारा मैदान में उतारा गया है।
स्टेज पर अंधेरा, नेता का गुस्सा कुणाल चौधरी ने JE को दी मुर्गा बनाने की धमकी
9 Apr, 2026 01:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शाजापुर। शाजापुर में किसानों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन उस समय गरमा गया जब मंच पर भाषण के दौरान अचानक लाइट चली गई. शाजापुर जिले के ग्राम खोंकराकला में आयोजित धरने में पहुंचे कालापीपल के पूर्व कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने इस पूरे मामले में कड़ी नाराजगी जाहिर की और कार्यक्रम स्थल से ही बिजली विभाग के अधिकारियों को फोन करके फटकार लगा दी।
कुणाल चौधरी ने बीएल को लगाया कॉल
किसानों के लिए चल रहे इस प्रदर्शन के दौरान करीब 400 लोगों की मौजूदगी में बिजली जाने पर कुणाल चौधरी ने माइक हाथ में रखते हुए कार्यपालन यंत्री बीएल गुजराती को कॉल लगा दिया. बातचीत के दौरान कुणाल चौधरी ने बिजली कंपनी पर आरोप लगाते हुए कहा कि ‘वसूली गैंग’ की तरह काम करती है और किसानों से जबरन वसूली कर रही है।
चौधरी ने JE को मुर्गा बनाने की दी धमकी
चौधरी ने आरोप लगाया कि किसानों के हित में कांग्रेस द्वारा किए जा रहे इस विरोध प्रदर्शन को राेकने के लिए जानबूझकर बिजली को कट किया गया. साथ ही सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ किसानों की गेहूं खरीदी नहीं हो रही है, वहीं दूसरी तरफ बिजली कंपनी दबाव बनाकर वसूली कर रही है. इस दौरान ही कुणाल चौधरी ने इंजीनियर (जेई) को ‘मुर्गा’ बनाने की भी धमकी दे दी. इसके बाद कार्यक्रम माहौल और गरमाता नजर आया।
जनसभा में शुभेंदु अधिकारी का ऐलान, हल्दिया की सभी सीटों पर बीजेपी की जीत का दावा
9 Apr, 2026 12:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में जोश और आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है। हल्दिया में आयोजित जनसभा में भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आश्वस्त करते हुए दावा किया कि इस साल भाजपा हल्दिया के सभी 16 विधानसभा सीटें जीतकर जीत का परचम लहराएगी।जनसभा में शुभेंदु अधिकारी ने कहा 'मैं पीएम मोदी को यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि इस जिले में भाजपा पहले से ही 16 में 15 सीटों पर जीत रही थी। इस साल कमल का फूल सभी 16 सीटों पर खिलेगा।' इस दावे के साथ भाजपा ने हल्दिया जिले में अपनी ताकत और लोकप्रियता को लेकर स्पष्ट संदेश दिया कि पार्टी इस विधानसभा चुनाव में पूरी तरह तैयार है।
टीएमसी पर जमकर हमला बोला
शुभेंदु अधिकारी की रैली में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की बड़ी भीड़ ने उत्साह और जोश के साथ उनके समर्थन में नारे लगाए। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभा में टीएमसी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि टीएमसी ने युवाओं के सपनों को कुचला है और प्राइवेट सेक्टर का नामोनिशान मिटा दिया है।पीएम मोदी ने कहा कि टीएमसी वोट बैंक को खुश करने के लिए धर्म के आधार पर आरक्षण देने और तुष्टिकरण की नीति में लगी हुई है। पीएम मोदी ने यह भी भरोसा दिलाया कि भाजपा सरकार में भर्ती ट्रांसपेरेंट, समयबद्ध और पूरी तरह निष्पक्ष होगी। कोई कमीशन, रिश्वत या भेदभाव नहीं होगा।
हल्दिया भाजपा का मजबूत गढ़
हल्दिया शुभेंदु अधिकारी का गृह क्षेत्र है और राज्य में भाजपा के मजबूत गढ़ों में से एक माना जाता है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पूर्वी मेदिनीपुर जिले की 16 में से 8 सीटें जीती थीं। वहीं, 2024 के आम चुनाव में इस जिले की दोनों लोकसभा सीटें भाजपा ने जीती थीं। हालांकि बीरभूम टीएमसी का गढ़ माना जाता है, लेकिन जिले के कुछ हिस्सों में लंबे समय से आरएसएस का संगठनात्मक नेटवर्क मजबूत है। भाजपा एंटी-इनकंबेंसी का फायदा उठाकर इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
722 उम्मीदवारों की किस्मत का दिन, असम में किसके सिर सजेगा ताज
9 Apr, 2026 12:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिसपुर | असम में 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए आज मतदान होना है, जहां सत्ता की लड़ाई अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। एक ओर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में भाजपा लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में है, तो दूसरी ओर गौरव गोगोई की अगुवाई में कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी है। राज्य की ज्यादातर सीटों पर सीधा मुकाबला एनडीए और विपक्षी गठबंधन के बीच है, ऐसे में आज का मतदान यह तय करेगा कि असम में भाजपा का दबदबा बरकरार रहेगा या फिर सियासी समीकरण बदलेंगे। मतदान को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
महिलाओं को टिकट देने में कांग्रेस आगे
विधानसभा चुनाव में सिर्फ 59 महिला उम्मीदवार हैं। इनमें कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 14 महिला उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि भाजपा ने 7 महिलाओं को टिकट दिया है। यह आंकड़ा राज्य की राजनीति में महिला भागीदारी की सीमित उपस्थिति को भी दर्शाता है।
ये दिग्गज चुनाव मैदान में ठोक रहे ताल
कुल 722 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई, नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया, एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल, राइजर दल के नेता अखिल गोगोई और एजेपी अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई जैसे बड़े चेहरे शामिल हैं। राज्य के 35 जिलों में कुल 31,490 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक वोट डाले जाएंगे। इस चुनाव में 2.50 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें करीब 1.25 करोड़ महिलाएं और 318 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।
किस पार्टी ने कितने उम्मीदवार उतारे
उम्मीदवारों के लिहाज से कांग्रेस सबसे आगे है, जिसने 99 प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। भाजपा ने 90 उम्मीदवारों को टिकट दिया है।एआईयूडीएफ 30 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि एनडीए के सहयोगी दल एजीपी 26 और बीपीएफ 11 सीटों पर किस्मत आजमा रहे हैं। इसके अलावा विपक्षी दलों में राइजर दल 13, असम जातीय परिषद 10,सीपीएम 3, एपीएचएलसी 2, आम आदमी पार्टी 18, यूपीपीएल 18, तृणमूलकांग्रेस 22 और झारखंड मुक्ति मोर्चा 16 सीटों पर मैदान में है। वहीं 258 निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना रहे हैं।दो सीटों पर सबसे ज्यादा 15 और 9 सीटों पर सबसे कम दो-दो उम्मीदवार अलगापुर-कटलीचेरा और करीमगंज साउथ सीटों पर सबसे ज्यादा 15-15 उम्मीदवार मैदान में हैं। वहीं रंगिया, जागीरोड (एससी), होजाई, नौदुआर, जोनाई (एसटी), डूमडूमा, महमारा, टियोक और लखीपुर जैसी नौ सीटों पर सिर्फ दो-दो उम्मीदवार ही चुनाव लड़ रहे हैं।
इन सीटों पर टिकीं सबकी नजरें
इस बार कई हाई-प्रोफाइल मुकाबले चुनाव को और रोचक बना रहे हैं। जलुकबारी सीट से हिमंत बिस्व सरमा लगातार छठी जीत की तलाश में हैं, जहां उनका मुकाबला कांग्रेस की बिदिशा नियोग से है। जोरहाट सीट से गौरव गोगोई विधानसभा में पहली बार प्रवेश की कोशिश करेंगे। उन्हें भाजपा के हितेंद्रनाथ गोस्वामी चुनौती दे रहे हैं। नाजिरा में देबब्रत सैकिया अपनी पारिवारिक सीट बचाने की जंग लड़ रहे हैं। बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन की तामुलपुर सीट पर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा, जहां यूपीपीएल प्रमुख प्रमोद बोरों की सीधी टक्कर बीपीएफ के दाइमारी से है। इसके अलावा, बिन्नाकांडी से बदरुद्दीन अजमल, सिबसागर से अखिल गोगोई, खोवांग से लुरिनज्याोति गोगोई, बोकारहाट से एजीपी अध्यक्ष अतुल बोरा और कालियाबोर से मंत्री केशव महंत भी प्रमुख मुकाबलों में शामिल हैं। इसके अलावा दिसपुर सीट पर भी सबकी नजर रहेगी।
असम में इस बार 6.42 लाख मतदाता पहली बार वोट डालेंगे, जो चुनाव परिणामों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। वहीं 80 वर्ष से अधिक आयु के 2.50 लाख मतदाता, जिनमें 2,466 शतायु शामिल हैं, लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा, 2.05 लाख दिव्यांग मतदाता भी मतदान प्रक्रिया में शामिल होंगे। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि असम का यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन या बरकरार रखने का नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरणों, गठबंधनों और जनमत की दिशा तय करने वाला चुनाव है। भाजपा जहां हैट्रिक के जरिए अपनी पकंड़ मजबूत करना चाहती है, वहीं कांग्रेस के लिए यह अस्तित्व और वापसी की निर्णायक लड़ाई है। आज होने वाला मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजे राज्य की राजनीति का नया अध्याय लिखेंगे।मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल के अनुसार सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है, जिससे रियल टाइम निगरानी संभव होगी। चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, विशेषकर सीआरपीएफ की तैनाती की गई है।
बिहार उपचुनाव की तारीखों का ऐलान, मतदान और मतगणना का पूरा कार्यक्रम जारी
9 Apr, 2026 11:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार विधान परिषद् की एक सीट पर उपचुनाव का शिड्यूल जारी कर दिया गया है। भोजपुर-सह-बक्सर विधान परिषद स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र की सीट 16 नवंबर 2025 को खाली हुई थी। इस सीट से विधान परिषद् सदस्य रहे जनता दल यूनाईटेड के नेता राधाचरण सेठ ने इस्तीफा दिया था। तब से यह सीट खाली थी। अब भारत निर्वाचन आयोग की ओर से इस सीट के लिए उपचुनाव की तारीख की घोषणा कर दी गई है।
12 मई को होगी वोटिंग
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी शिड्यूल के अनुसार, 16 अप्रैल को यानी खरमास बाद इस सीट पर उपचुनाव की अधिसूचना जारी होगी। 23 अप्रैल को नामांकन की अंतिम तिथि जारी है। 24 अप्रैल तक नामांकन पत्रों की जांच होगी। 27 अप्रैल तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं। 12 मई को वोटिंग होगी। वहीं 14 मई को काउंटिंग होगा। हालांकि आज से यानी नौ अप्रैल से ही भोजपुर-सह-बक्सर विधान परिषद स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी।
जदयू इस सीट पर उतारेगी अपना उम्मीदवार
राधाचरण सेठ के विधायक बनने से खाली हुई भोजपुर-सह-बक्सर विधान परिषद स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र की सीट का कार्यकाल 7 अप्रैल 2028 तक है। मतलब, जो भी चुने जाएंगे- करीब 26 महीने के लिए होंगे। राधाचरण सेठ के इस्तीफा से खाली हुई विधान परिषद् की सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी गई है। यह सीट जदयू के कोटे में है। इसलिए जदयू इस पर अपना उम्मीदवार उतारेगी।
फर्जी कंपनी विवाद पर घमासान, हजारिका ने खेड़ा को घेरा
9 Apr, 2026 11:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिसपुर | असम की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राज्य के मंत्री पीजूष हजारिका ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने एक स्क्रीन-रिकॉर्डेड वीडियो साझा कर यह दिखाने की कोशिश की कि ऑनलाइन फर्जी कंपनी बनाना कितना आसान है।हजारिका ने बुधवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें अमेरिका के वायोमिंग राज्य की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए 'Pawan Peda LLC' नाम की कंपनी बनाने की प्रक्रिया दिखाई गई है। इस वीडियो में कथित तौर पर काल्पनिक पते और आयोजकों का इस्तेमाल किया गया, जिसे उन्होंने खेड़ा के आरोपों पर व्यंग्यात्मक जवाब बताया।
फर्जी कंपनियां बनाना सामान्य बात है- हजारिका
वीडियो के जरिए भाजपा नेता ने यह संदेश देने की कोशिश की कि इस तरह की कंपनियां बनाना एक सामान्य ऑनलाइन प्रक्रिया है और केवल किसी कंपनी के अस्तित्व से ही गलत काम साबित नहीं होता। उन्होंने कांग्रेस और पवन खेड़ा पर फर्जी कंपनियों से जुड़े मामलों में भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया।
खेड़ा झूठ पकड़े जाने के डर से नए आरोप गढ़ रहे है
हजारिका ने अपने पोस्ट में कहा कि खेड़ा झूठ पकड़े जाने के डर से नए आरोप गढ़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने खुद रिसर्च कर वायोमिंग में यह कंपनी बनाई और वीडियो के जरिए पूरी प्रक्रिया दिखाई।
पवन खेड़ा ने क्या लगया था आरोप?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पवन खेड़ा ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर गंभीर आरोप लगाए। खेड़ा ने दावा किया था कि उनके पास तीन पासपोर्ट हैं, दुबई में अघोषित संपत्तियां हैं और वे अमेरिका में शेल कंपनियों से जुड़ी हुई हैं।इन आरोपों के बाद असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप शामिल हैं। मंगलवार को दिल्ली स्थित उनके आवास पर तलाशी ली गई, जबकि बुधवार को हैदराबाद स्थित घर के बाहर बैरिकेडिंग भी की गई। वहीं, पवन खेड़ा ने एक वीडियो बयान जारी कर कहा कि वह इन कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं और इस मुद्दे पर सवाल उठाते रहेंगे।
नीतीश कुमार का दिल्ली दौरा, शपथ से पहले अहम मुलाकातों की संभावना
9 Apr, 2026 10:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। 20 साल बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा से अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। आज दोपहर 3:40 बजे वह दिल्ली रवाना होंगे। 10 अप्रैल को वह राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। सीएम नीतीश कुमार के लिए शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया है। इसके लिए सारी तैयारी पूरी हो चुकी है। खास बात यह है कि 10 अप्रैल को बिहार से केवल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही शपथ लेंगे। इनके अलावा बिहार से निर्वाचित हुए नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश कुमार खरमास बाद शपथ लेंगे। चर्चा है कि 16 अप्रैल को यह चारों नेता शपथ लें।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार चल रहा है। नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। वहीं जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष विजय चौधरी ने कहा कि आज सीएम दिल्ली जा रहे हैं। उनका दिल्ली जाना किसी को अच्छा नहीं लग रहा है। लेकिन, राज्यसभा जाने की इच्छा उन्होंने ही जताई है। वह हर काम संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही करते हैं।
आज दिल्ली में क्या करेंगे नीतीश कुमार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ लेने से पहले जनता दल यूनाईटेड के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक करेंगे। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह पहले से दिल्ली में मौजूद हैं। बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सभी नेता मौजूद रहेंगे। इस बैठक में सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद जदयू की भूमिका, मंत्री और डिप्टी सीएम के पद पर विचार विमर्श किया जाएगा। निशांत कुमार की क्या भूमिका होगी? इस पर भी चर्चा की जाएगी।
पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह से भी मुलाकात करेंगे सीएम नीतीश कुमार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ लेने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलकात करेंगे। उनके साथ ललन सिंह और संजय झा भी रहेंगे। बिहार में नई एनडीए सरकार के प्रारूप को लेकर सीएम नीतीश कुमार गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत कर सकते हैं। नई सरकार का मंत्रिमंडल कैसा रहेगा? कौन रिपीट होंगे? किस नए चेहरे को मौका दिया जाएगा? इस पर सीएम नीतीश कुमार अपनी राय रखेंगे।
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