राजनीति
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई से गरमाई सियासत, प्रियंका गांधी ने सरकार को घेरा
20 Jul, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और शशि थरूर ने सोमवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। दोनों नेताओं ने सरकार पर संसद में जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया है। प्रियंका गांधी ने जहां शिक्षा नीति की विफलता और छात्रों पर बल प्रयोग की निंदा की, वहीं शशि थरूर ने अयोध्या मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं और नीट परीक्षा पेपर लीक जैसे ज्वलंत विषयों को सदन में उठाने की मांग की।
छात्रों के दमन और शिक्षा नीति पर सवाल
प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हम लगातार चर्चा की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने शिक्षा प्रणाली में व्याप्त समस्याओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब छात्र अपने भविष्य के लिए आवाज उठा रहे हैं, तो सरकार उन पर आंसू गैस छोड़ रही है और लाठीचार्ज कर रही है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर वे अपने ही देश के बच्चों के साथ इस तरह का हिंसक व्यवहार क्यों कर रहे हैं।
विरोध प्रदर्शन और लाठीचार्ज का तर्क
संसद मार्ग पर प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज पर शशि थरूर ने गहरा रोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि एक अहिंसक विरोध प्रदर्शन पर सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग करना पूरी तरह से हिंसात्मक कृत्य है, जिसका कोई तर्क समझ से परे है। थरूर ने सवाल किया कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने वालों को लाठियों से क्यों कुचला जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद वह जगह है जहाँ जनता की समस्याओं को रखा जाना चाहिए, न कि केवल सरकारी एजेंडे को रबर स्टैंप की तरह पारित किया जाना चाहिए।
संसदीय लोकतंत्र में संवाद की अनिवार्यता
शशि थरूर ने संसद में गतिरोध पर जोर देते हुए कहा कि सरकार को विपक्ष की आवाज सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष तभी सहयोग कर सकता है जब सरकार भी चर्चा के लिए गुंजाइश रखे, क्योंकि लोकतंत्र में कामकाज आपसी सहमति और लेनदेन से चलता है। थरूर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि संसद का मंच जनता के मुद्दों को उठाने के लिए नहीं है, तो फिर इसकी सार्थकता क्या है। उन्होंने मांग की कि सरकार नीट और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर बहस की अनुमति दे ताकि देश को सच्चाई का पता चल सके।
संसद हंगामे के बीच शशि थरूर का बड़ा आरोप, बोले- लोकतांत्रिक विरोध को दबाया जा रहा है
20 Jul, 2026 03:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा किए गए लाठीचार्ज को लेकर राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश है। विपक्षी दलों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी इस कार्रवाई पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक अहिंसक विरोध प्रदर्शन पर लाठीचार्ज करना पूरी तरह से अनुचित और हिंसात्मक कृत्य है, जिसका कोई ठोस तर्क समझ से परे है।
संसद में चर्चा की मांग और विपक्षी रुख
मानसून सत्र के पहले दिन संसद में भारी हंगामा देखने को मिला, जिसके चलते कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि संसद का मुख्य उद्देश्य देशभर के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करना है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम जनता की चिंताओं को सरकार के सामने रखना है, चाहे सरकार के पास बहुमत ही क्यों न हो। थरूर के अनुसार, संसद केवल सरकारी बिलों को रबर स्टैंप की तरह पारित करने का स्थान नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मंच है जहां विभिन्न विचारों को सुना जाना चाहिए और उन पर सार्थक बहस होनी चाहिए।
लोकतंत्र में विरोध और सरकार की जवाबदेही
थरूर ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद को जनता की आवाज़ बुलंद करने का माध्यम बनना चाहिए, न कि केवल सरकारी घोषणाओं का नोटिस बोर्ड। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष मुद्दों को उठाना चाहता है और सरकार चर्चा से इनकार करती है, तो हंगामा होना स्वाभाविक है। उन्होंने पुरानी कहावत का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को संसद में खुलकर बात करने की अनुमति देनी चाहिए, भले ही बाद में वह असहमति जताए। विपक्षी सदस्यों का मानना है कि मुद्दों को दबाने के बजाय उन पर चर्चा करना ही संसदीय परंपरा के अनुकूल है।
सहयोग के लिए सार्थक संवाद जरूरी
प्रधानमंत्री द्वारा विपक्ष से मांगे गए सहयोग पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि लोकतंत्र में सहयोग एक द्विपक्षीय प्रक्रिया होनी चाहिए। यदि सरकार चाहती है कि विपक्ष सहयोग करे, तो उन्हें भी विपक्षी दलों की बातों को सुनना होगा और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की अनुमति देनी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद का कामकाज आपसी लेनदेन और सहमति पर आधारित होना चाहिए, तभी देशहित में बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं।
मतभेदों के बीच पंजाब कांग्रेस की बड़ी बैठक, क्या एक मंच पर दिखेंगे चन्नी और बघेल?
20 Jul, 2026 02:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में पार्टी के प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने नई दिल्ली में पंजाब प्रदेश चुनाव समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में प्रदेश चुनाव समिति के सदस्यों के साथ-साथ राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों, पार्टी सांसदों और अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति सुनिश्चित की गई है, ताकि आगामी चुनावी चुनौती के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जा सके।
चुनावी रणनीति और संगठन की मजबूती पर मंथन
इस उच्च-स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव के लिए सटीक रणनीति तैयार करना और संगठन के जमीनी ढांचे को मजबूत करना है। पार्टी आलाकमान राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करने पर विशेष जोर दे रहा है। बैठक में वरिष्ठ नेताओं के बीच आपसी समन्वय बढ़ाने और चुनावी प्रचार के एजेंडे को अंतिम रूप देने पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है, ताकि पार्टी चुनाव में एकजुट होकर उतर सके।
चरणजीत सिंह चन्नी की भूमिका पर केंद्रित बैठक
कांग्रेस हाईकमान ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब प्रदेश चुनाव समिति की कमान सौंपी है। हालांकि, नियुक्ति के तुरंत बाद उन्होंने इस दायित्व को स्वीकार करने से अनिच्छा जताई थी, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया था। अब इस बैठक में उनकी सक्रिय भूमिका को लेकर विशेष चर्चा होने की संभावना है। पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि चुनाव से पहले समिति के भीतर पूर्ण सहमति और नेतृत्व का स्पष्ट संदेश जनता के बीच जाए।
आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में तेजी
पंजाब में कांग्रेस का पूरा ध्यान चुनाव में अपनी खोई हुई पकड़ को फिर से हासिल करने पर है। संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करते हुए पार्टी अब उन सभी मुद्दों को उठाने की तैयारी कर रही है जो चुनावी नतीजों पर प्रभाव डाल सकते हैं। दिल्ली में हो रही यह बैठक इसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे पंजाब कांग्रेस की चुनावी दिशा और दशा तय होगी। पार्टी नेता अब उन तमाम चुनौतियों के समाधान पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो उनके लिए जीत के मार्ग में बाधा बन सकती हैं।
सपा का आरोप- डिंपल यादव, इकरा हसन सहित कई सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लिया
20 Jul, 2026 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में नीट परीक्षा में हुई धांधली और युवाओं के भविष्य को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है। मैनपुरी से समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव समेत कई अन्य सपा सांसदों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इस कार्रवाई की जानकारी समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया के माध्यम से दी है। पार्टी ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और जन प्रतिनिधियों की हिरासत को अलोकतांत्रिक और निंदनीय करार दिया है। प्रदर्शनकारी छात्र और विपक्षी नेता नीट परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर सड़कों पर डटे हुए हैं।
छात्रों की पीड़ा और विपक्ष का आक्रोश
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार से सवाल किया है कि आखिर नीट पेपर लीक और परीक्षा में हुई गड़बड़ी का जिम्मेदार कौन है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सांसद पुलिस हिरासत में हैं, तो दूसरी तरफ बाहर छात्रों को बेरहमी से पीटा जा रहा है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार न तो युवाओं को रोजगार दे पा रही है और न ही उनकी समस्याओं को सुनने के लिए तैयार है। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो सरकार बच्चों की बात नहीं सुन सकती, उसे सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
लोकतंत्र और विरोध प्रदर्शन की मर्यादा
अखिलेश यादव ने ब्रिटिश शासन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में भी शासक विरोध प्रदर्शन करने वालों की बात सुनते थे, लेकिन वर्तमान सरकार दमनकारी नीति अपना रही है। वहीं, सांसद डिंपल यादव ने भी सरकार को घेरा और कहा कि देश का हर वर्ग—चाहे वह किसान हो, युवा हो या पर्यावरण कार्यकर्ता—आज परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार निष्पक्ष परीक्षा कराने में पूरी तरह विफल रही है और लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का प्रयास कर रही है। डिंपल यादव ने छात्रों के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की यह संवेदनहीनता अब बर्दाश्त से बाहर हो गई है।
सरकारी विफलता और 'अमृत काल' के दावों पर सवाल
समाजवादी पार्टी ने अपने बयानों में सरकार के 'विश्वगुरु' और 'अमृत काल' के दावों को खोखला बताया है। पार्टी का तर्क है कि यदि युवाओं को समय पर नौकरियां और निष्पक्ष परीक्षाएं मिली होतीं, तो आज उन्हें सड़कों पर उतरने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सपा नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते छात्रों की मांगों को स्वीकार नहीं किया और जिम्मेदार मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र हो सकता है। फिलहाल दिल्ली में जारी यह गतिरोध प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
क्या मानसून सत्र में सरकार की बढ़ेंगी मुश्किलें? राहुल-अखिलेश की सीक्रेट मीटिंग पर सबकी नजर
20 Jul, 2026 01:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र 2026 की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। नीट पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांगों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के आंदोलन और संसद के भीतर विपक्ष के कड़े रुख ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस बीच, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ हुई बंद कमरे की बैठक ने मानसून सत्र में किसी बड़ी राजनीतिक हलचल के संकेत दिए हैं।
रणनीति बनाने के लिए राहुल-अखिलेश की गहन मंत्रणा
विपक्ष के नेता के कक्ष में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने सरकार को घेरने की साझा रणनीति पर विस्तृत चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य नीट पेपर लीक और राम मंदिर चंदा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही तय करना है। दोनों नेताओं ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि आगामी सत्र के दौरान विपक्ष सरकार की नीतियों पर एकजुट रहे और जनता से जुड़े इन विषयों को सदन में पुरजोर तरीके से उठाया जाए।
विपक्ष की एकजुटता और मजबूत होती सपा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की बढ़ती मजबूती और सरकार के प्रति उनके आक्रामक तेवरों को बखूबी समझ रहे हैं। मानसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष के कड़े तेवरों के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है, जो सरकार के लिए चुनौती बन गई है। राहुल गांधी का समाजवादी पार्टी पर बढ़ता फोकस इस बात का संकेत है कि 'इंडिया' गठबंधन के भीतर अब एक ठोस और साझा रणनीति के तहत काम करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि सरकार को कटघरे में खड़ा किया जा सके।
सरकार को घेरने का साझा एजेंडा
विपक्ष की कोशिश है कि राम मंदिर चंदा चोरी विवाद और भर्ती परीक्षाओं में धांधली जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को संसद के भीतर कोई भी ढिलाई न बरतने दी जाए। दोनों दलों के नेता इस बात पर सहमत नजर आ रहे हैं कि यदि गठबंधन के सभी सहयोगी दल एकजुट होकर मुद्दों को उठाएंगे, तो सरकार पर दबाव बनाना आसान होगा। संसद के मानसून सत्र में अब विपक्ष का स्पष्ट लक्ष्य केवल हंगामे तक सीमित नहीं, बल्कि सरकार की विफलताओं को प्रमाणित करते हुए जनता के बीच अपनी पैठ को और मजबूत करना है, जिसके लिए राहुल गांधी और अखिलेश यादव की यह बैठक एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, TMC के फ्रीज बैंक खातों के संचालन पर अंतरिम मंजूरी से इनकार
20 Jul, 2026 01:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को उस समय बड़ा झटका दिया है, जब कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फ्रीज किए गए पार्टी के बैंक खातों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया। ED ने पार्टी के तीन बैंक खातों को फ्रीज किया था, जिनमें कुल 440 करोड़ रुपये की धनराशि जमा है। पूर्व में हाई कोर्ट की एक अन्य बेंच ने कुछ कड़ी शर्तों के साथ इन खातों को रोजमर्रा के खर्चों के लिए आंशिक रूप से खोलने की मंजूरी दी थी, लेकिन ED ने कार्रवाई करते हुए उन्हें पुनः फ्रीज कर दिया था, जिस पर अब हाई कोर्ट ने अपनी असहमति जताई है।
अदालत की सख्त निगरानी और पूर्व आदेश
इससे पहले की सुनवाई में, हाई कोर्ट की एक बेंच ने इन खातों के संचालन के लिए एक विशेष व्यवस्था लागू की थी। अदालत ने बैंक खातों के कामकाज की देखरेख के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी (स्पेशल ऑफिसर) के रूप में नियुक्त किया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि पार्टी इन खातों का उपयोग केवल अपने दैनिक प्रशासनिक और जरूरी कार्यों के लिए ही कर सकेगी। किसी भी भुगतान के लिए अधिकृत पदाधिकारियों के हस्ताक्षर के साथ-साथ स्पेशल ऑफिसर के काउंटर-सिग्नेचर अनिवार्य किए गए थे।
कार्रवाई की तत्परता पर कोर्ट की टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था कि 18 जून को एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद 19 जून को इतनी जल्दबाजी में खातों को फ्रीज कर दिया गया। अदालत ने तंज कसते हुए कहा था कि शुरुआती जांच के दौरान ऐसा कोई ठोस आधार या साक्ष्य नजर नहीं आता, जो इतनी तीव्र कार्रवाई को उचित ठहरा सके। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि आम नागरिकों के मामलों में पुलिस अक्सर इतनी तत्परता नहीं दिखाती है, जितनी इस मामले में दिखाई गई है।
वित्तीय पाबंदियां और पार्टी के समक्ष संकट
अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी की देखरेख में भी पार्टी को केवल सीमित वित्तीय स्वतंत्रता ही दी गई थी, ताकि रोजमर्रा के कामकाज न रुकें। हालांकि, ED द्वारा खातों को फिर से फ्रीज करने और हाई कोर्ट द्वारा राहत न मिलने के बाद TMC के लिए अपनी वित्तीय गतिविधियों को संचालित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। फिलहाल, 440 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि के फ्रीज रहने से पार्टी के सामने अपने दैनिक खर्चों को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। यह कानूनी लड़ाई अब और अधिक जटिल होती जा रही है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
मानसून सत्र से पहले विपक्ष आक्रामक, खरगे ने राम मंदिर और पेपर लीक को लेकर सरकार को घेरा
20 Jul, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र आज से प्रारंभ हो गया है, जिसके साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सत्र के पहले ही दिन आक्रामक रुख अपनाते हुए मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। खरगे ने स्पष्ट किया है कि विपक्ष संसद में जनता का प्रतिनिधित्व करते हुए सरकार से हर मोर्चे पर तीखे सवाल करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की जनता के अधिकारों और उनके विश्वास की रक्षा के लिए विपक्ष सदन के भीतर और बाहर पूरी मजबूती के साथ अपनी आवाज उठाएगा।
राम मंदिर निर्माण में चंदे की जांच की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने श्री राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे में अनियमितताओं का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी गाढ़ी कमाई मंदिर निर्माण के लिए समर्पित की थी, जिसके साथ कथित 'चंदा चोरी' और आस्था से खिलवाड़ किया गया है। खरगे ने इस मामले में श्रद्धालुओं को न्याय दिलाने के उद्देश्य से एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे का पूरा हिसाब-किताब सार्वजनिक किया जाए ताकि लोगों की आस्था पर लगे प्रश्नों का समाधान हो सके।
पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा
खरगे ने शिक्षा प्रणाली की बदहाली और परीक्षाओं में हो रहे पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि 2014 से अब तक देश में 152 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं हो चुकी हैं, जिसके कारण न केवल लाखों युवाओं का भविष्य अधर में है, बल्कि 25 छात्रों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है। इस गंभीर विफलता के लिए उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। उनका तर्क है कि शिक्षा जगत में आई इस गिरावट के लिए सीधे तौर पर सरकार जिम्मेदार है।
नीतिगत फैसलों और एथेनॉल पर सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार के विभिन्न नीतिगत निर्णयों पर भी निशाना साधा। उन्होंने 3.5 करोड़ वाहन मालिकों पर अनिवार्य रूप से थोपे गए एथेनॉल मिश्रण को जनता पर आर्थिक बोझ और एक असफल 'प्रयोग' करार दिया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या भाजपा सरकार का एकमात्र कार्य जनता की कमाई को लूटकर अपनी नीतियों को थोपना रह गया है। आगामी दिनों में विपक्ष इन मुद्दों के अलावा अन्य विधेयकों और देश की आम जनता को प्रभावित करने वाले विषयों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर चुका है।
'क्या यही अमृत काल है?' वांगचुक मुद्दे पर अखिलेश यादव का केंद्र सरकार पर तीखा वार
20 Jul, 2026 12:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा जंतर-मंतर पर शुरू किया गया अनशन अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया है। नीट पेपर लीक मामले में सरकार की चुप्पी और जवाबदेही के अभाव पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव ने इसे सत्ता के अहंकार से प्रेरित बताया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या यही वह 'अमृत काल' है जिसका वादा जनता से किया गया था।
विपक्ष का समर्थन और वांगचुक का संघर्ष
सोनम वांगचुक के इस आंदोलन को समाजवादी पार्टी का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। पार्टी की सांसद डिंपल यादव, प्रिया सरोज, इकरा सरोज और राजीव राय ने जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक के प्रति अपनी एकजुटता प्रकट की है। इससे पूर्व, जब दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को जबरन अस्पताल में भर्ती कराया था, तब भी सपा नेताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए थे। विपक्ष का स्पष्ट मानना है कि वांगचुक की लड़ाई केवल एक व्यक्ति का संघर्ष नहीं, बल्कि देश के उन लाखों छात्रों की आवाज है, जिनका भविष्य पेपर लीक और लचर शिक्षा व्यवस्था के कारण अंधकार में है।
अनशन समाप्ति के लिए ठोस आश्वासन की मांग
सोनम वांगचुक ने अपने अनशन को समाप्त करने के लिए स्पष्ट शर्तें रखी हैं। उनका कहना है कि उनकी तबीयत भले ही कैसी भी हो, वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं दे देती। वांगचुक की मुख्य मांग यह है कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था में आई हालिया नाकामियों और पेपर लीक जैसी शर्मनाक घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया है कि संसद मार्च के उपरांत ही वे अनशन वापस लेने पर विचार करेंगे, बशर्ते उनकी मांगों को लेकर सरकार एक गंभीर और विश्वसनीय रुख अपनाए।
युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था पर चिंता
शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल सुधार, पेपर लीक पर अंकुश और युवाओं के लिए सुरक्षित भविष्य का निर्माण वांगचुक के आंदोलन के केंद्र बिंदु हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि बार-बार हो रही पेपर लीक की घटनाएं न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती हैं, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोबल को भी पूरी तरह तोड़ रही हैं। अब यह आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित न रहकर एक राष्ट्रव्यापी मुद्दा बन गया है, जिससे सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया न आना युवाओं के बीच आक्रोश को और अधिक गहरा बना रहा है।
संसद मार्च से पहले मायावती का बड़ा संदेश, बोलीं- ऐसे संभल सकते हैं हालात
20 Jul, 2026 11:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। संसद के मानसून सत्र और सीजेपी के प्रस्तावित मार्च के बीच बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश के ज्वलंत मुद्दों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने पेपर लीक, गिरती शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मायावती का कहना है कि संसद से लेकर सड़कों और जंतर-मंतर तक जो टकराव की स्थिति बनी है, उसे देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए परिपक्व सूझबूझ के साथ हल किया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं की समस्याओं को नजरअंदाज न करने की चेतावनी दी है।
परीक्षाओं में धांधली और युवाओं का संकट
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि मेडिकल समेत तमाम अखिल भारतीय और राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक और अनियमितताओं के कारण परीक्षाएं रद्द करना एक गंभीर समस्या बन गई है। इससे युवा और बेरोजगार वर्ग में भारी निराशा और अनिश्चितता का माहौल है। उन्होंने सरकारों से मांग की है कि इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल सख्त कदम उठाए जाएं और परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों व तत्वों की जवाबदेही तय करते हुए उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सरकारी शिक्षा और कोचिंग संस्थानों की स्थिति
मायावती ने टिप्पणी की कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों में गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा के अभाव के कारण निजी कोचिंग संस्थानों का व्यवसायीकरण तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि परिवार अपनी सीमित आय और बढ़ती महंगाई के बावजूद बच्चों की पढ़ाई के लिए भारी आर्थिक बोझ उठा रहे हैं, जो यह साबित करता है कि युवा अपने करियर के प्रति कितने गंभीर हैं। उन्होंने मांग की कि कोचिंग संस्थानों पर प्रभावी व भ्रष्टाचार मुक्त निगरानी रखी जाए, लेकिन इसके समानांतर प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक के सरकारी ढांचे को मजबूत करना भी अनिवार्य है।
संविधान के विजन और आंदोलनों पर रुख
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का सर्वांगीण विकास बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के शिक्षित, सुरक्षित और कल्याणकारी भारत के सपने के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आंदोलनों के प्रति दमनकारी के बजाय सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाकर समस्याओं का समाधान निकाला जाए। मायावती का मानना है कि यदि सरकारें समय रहते युवाओं की पीड़ा को समझें और सार्थक संवाद करें, तो किसी भी वर्ग को सड़कों पर उतरने या आंदोलन करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। शिक्षित युवा ही देश की असली पूंजी हैं और उनकी नींव मजबूत करना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है।
LJP का पंजाब मिशन शुरू! चिराग पासवान बोले- हर सीट पर लड़ेंगे चुनाव, बताया पंजाब से अपना खास रिश्ता
20 Jul, 2026 10:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमृतसर। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस की आंतरिक कलह और अन्य दलों की चुनौतियों के बीच, केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने राज्य के चुनावी मैदान में उतरने का बड़ा ऐलान किया है। पीली पगड़ी पहनकर अमृतसर पहुंचे चिराग ने अपनी मां के साथ स्वर्ण मंदिर में माथा टेका और जलियांवाला बाग का दौरा भी किया। उन्होंने पंजाब को अपना ननिहाल बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी राज्य की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर रही है।
पंजाब की राजनीति में बदलाव की हुंकार
चिराग पासवान ने अमृतसर और जालंधर के अपने दौरे के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) की राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता मौजूदा सरकार से पूरी तरह तंग आ चुकी है और एक सकारात्मक बदलाव चाहती है। उन्होंने आप पर दिल्ली को लूटने और पंजाब में भ्रष्टाचार व नशे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। जालंधर में डेरा सचखंड बल्लां पहुंचकर डेरा प्रमुख संत निरंजन दास से आशीर्वाद लेने के बाद, उन्होंने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी राज्य के भविष्य के लिए एक उपयुक्त विकल्प नहीं है।
अकाली दल और कांग्रेस पर तीखे प्रहार
राज्य की अन्य प्रमुख पार्टियों को आड़े हाथों लेते हुए चिराग ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल अपने लंबे शासनकाल में विकास करने में पूरी तरह विफल रहा है। वहीं, कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता आपस में ही उलझे हुए हैं, जिससे जनता का उन पर से भरोसा उठ चुका है। उन्होंने कहा कि सिद्धू, चन्नी और राजा वडिंग के बीच की तनातनी ने कांग्रेस की रही-सही साख भी खत्म कर दी है। चिराग के अनुसार, राज्य की जनता अब इन तीनों पारंपरिक दलों से विकल्प की तलाश में है।
संगठन विस्तार और पिता की इच्छा
अपने पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय रामविलास पासवान को याद करते हुए चिराग ने बताया कि उनके पिता हमेशा पार्टी का विस्तार देश के विभिन्न राज्यों में करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि इसी संकल्प को पूरा करने के लिए उनकी पार्टी न केवल पंजाब, बल्कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों की भी तैयारी कर रही है। चिराग ने स्पष्ट किया कि हालांकि अभी यह तय नहीं है कि भविष्य में किसी के साथ गठबंधन होगा या नहीं, लेकिन फिलहाल उनकी पार्टी संगठन को मजबूत करने और सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
वांगचुक मुद्दे पर उद्धव का केंद्र पर वार, बोले- पाकिस्तान से बातचीत मंजूर, अपने लोगों से क्यों नहीं?
20 Jul, 2026 09:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन और जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। दिल्ली में छात्रों और कार्यकर्ताओं पर की गई कार्रवाई के विरोध में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। शिवाजी पार्क में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि ऐसी सरकार को बदलने के लिए एक व्यापक संघर्ष की शुरुआत की जाए, जो जनता और युवाओं के प्रति जवाबदेह नहीं है।
सरकार की प्राथमिकता और दोहरे मापदंड पर प्रहार
उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार को पाकिस्तान के साथ बातचीत करने में तो कोई संकोच नहीं है, लेकिन देश के युवाओं के भविष्य के लिए अनशन कर रहे सोनम वांगचुक से बात करने के लिए उनके पास समय नहीं है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार पाकिस्तान के साथ संवाद के लिए दरवाजे खुले रखने की बात करती है, जो लगातार घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों में संलिप्त रहता है, वहीं दूसरी तरफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे अपने ही देश के नागरिक की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरएसएस नेताओं के बयानों का जिक्र करते हुए सरकार से सवाल किया कि आखिर वे देश के युवाओं की बात सुनने से क्यों कतरा रहे हैं।
युवाओं के भविष्य और संघर्ष की अपील
अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने इस आंदोलन को केवल एक कार्यकर्ता का संघर्ष मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल रोजगार या शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार द्वारा युवाओं का भविष्य छीनने के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि सच्चाई को पर्दे के पीछे छिपाकर नहीं रखा जा सकता और सोनम वांगचुक जैसे व्यक्ति, जिन्होंने सशस्त्र बलों के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरण विकसित किए हैं, उन्हें राष्ट्र-विरोधी करार देना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने क्षेत्रों में शांतिपूर्ण कैंडल मार्च, सभाएं और मशाल मार्च निकालकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाएं।
लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प
उद्धव ठाकरे ने लोगों से अपील की है कि वे 'मैं देशभक्त हूं, अंधभक्त नहीं' का संदेश लेकर लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हों। उन्होंने अन्ना हजारे के आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि देश के हर कोने में जनता अपनी मुखर आवाज दर्ज कराए। उन्होंने साफ किया कि यह केवल सत्ता बदलने की नहीं, बल्कि व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की लड़ाई है। ठाकरे ने जोर देकर कहा कि चंदे और वोट की राजनीति से ऊपर उठकर अब युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए सड़कों पर उतरना अनिवार्य हो गया है।
सियासत में नया मोड़! TMC के बागी सांसदों के NCPI में विलय पर आज आ सकती है मुहर
20 Jul, 2026 07:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला आज सोमवार सुबह तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों के नए दल 'राष्ट्रवादी सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) में विलय संबंधी प्रस्ताव पर अपना निर्णय सुना सकते हैं। संसद का मानसून सत्र आज पूर्वाह्न 11 बजे से प्रारंभ होने जा रहा है, जिसके पूर्व ही अध्यक्ष द्वारा इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने की संभावना है।
दस्तावेजों की जांच और निर्णय की प्रक्रिया
हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ने शिवसेना के बागी सांसदों के विलय को स्वीकृति प्रदान की थी, जबकि टीएमसी के बागी गुट के मामले पर निर्णय सुरक्षित रखा था। बागी सांसदों को संसद में मूल पार्टी से अलग बैठने की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है। बागी गुट द्वारा चुनाव आयोग में एनसीपीआई के पंजीकरण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज रविवार शाम को अध्यक्ष कार्यालय को सौंप दिए गए थे। सूत्रों के अनुसार, इन दस्तावेजों की विधिवत समीक्षा पूरी हो चुकी है और अध्यक्ष सोमवार सुबह सत्र शुरू होने से पूर्व अपना अंतिम फैसला सार्वजनिक कर सकते हैं।
टीएमसी में बगावत और एनडीए में शामिल होने की कवायद
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष उभरा था, जिसके परिणामस्वरूप पार्टी के 28 में से 20 सांसदों ने बगावत कर दी। ये सभी सांसद अब एनसीपीआई के बैनर तले एक अलग राजनीतिक दल के रूप में मान्यता चाहते हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये बागी सांसद भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा बनने की इच्छा रखते हैं, जिसके लिए उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष औपचारिक याचिका भी प्रस्तुत की है।
सर्वदलीय बैठक में दिखा विरोध का स्वर
संसद सत्र के पूर्व रविवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक में इस राजनीतिक घटनाक्रम का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला। जब बैठक में एनसीपीआई के प्रतिनिधियों के रूप में काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बंद्योपाध्याय शामिल हुए, तो विपक्षी दलों ने कड़ी नाराजगी जताई। इस कदम के विरोध में विपक्षी नेताओं ने बैठक से कुछ समय के लिए वॉकआउट भी किया, हालांकि बाद में वे वापस लौट आए। अब सभी की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय पर टिकी हैं, जो इस विलय की वैधता और बागी सांसदों की भविष्य की भूमिका तय करेगा।
उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका: शिंदे गुट का ऑपरेशन टाइगर सफल, लोकसभा अध्यक्ष ने छह बागी सांसदों के समूह को दी मान्यता
19 Jul, 2026 11:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह बागी सांसदों के अलग समूह को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा आधिकारिक मान्यता दिए जाने के बाद उद्धव ठाकरे को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी के बाद लोकसभा सचिवालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री (तत्कालीन शिवसेना विभाजन के बाद बने गुट के नेता) एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट का चर्चित ऑपरेशन टाइगर सफल माना जा रहा है। मालूम हो कि लोकसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के कुल 9 सांसद निर्वाचित हुए थे। इनमें से 6 सांसद, जो कुल संख्या के दो-तिहाई हैं, बाद में शिंदे गुट के साथ चले गए। पहले इन सांसदों को दिल्ली ले जाया गया, जहां उन्होंने अलग संसदीय समूह बनाने का दावा किया। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने इस समूह को मान्यता प्रदान कर दी। बाद में इन सांसदों ने मुंबई में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में औपचारिक रूप से प्रवेश किया। हालांकि, इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद भी लोकसभा अध्यक्ष की अंतिम मंजूरी लंबित थी। अब लोकसभा सचिवालय द्वारा मंजूरी मिलने के साथ ही इन छह सांसदों के अलग समूह को आधिकारिक मान्यता मिल गई है। इससे उद्धव ठाकरे गुट को एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
यूपी चुनाव 2027 पर ओवैसी का बड़ा दावा, बोले- भाजपा को रोकने के लिए गठबंधन को तैयार
19 Jul, 2026 11:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बड़ा बयान दिया है। इंडिया टीवी को दिए विशेष साक्षात्कार में ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी चुनाव की तैयारी पूरी ताकत से कर रही है और भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से रोकने के लिए गठबंधन के विकल्प खुले हैं। हालांकि, उन्होंने गठबंधन में सम्मान और बराबरी को अहम शर्त बताया। ओवैसी ने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के साथ संभावित गठबंधन को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने संकेत दिया कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम और दलित मतदाताओं के बीच नए राजनीतिक समीकरण की कोशिश कर रही है। एआईएमआईएम ने राज्य में अपना संगठन मजबूत करने और कई सीटों पर चुनावी तैयारी तेज कर दी है।
साक्षात्कार में परिसीमन और ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे मुद्दों पर भी ओवैसी ने खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि चुनावी व्यवस्था में होने वाले बदलावों का सीधा असर राज्यों और प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है। ओवैसी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
ओवैसी की सक्रियता से उत्तर प्रदेश की सियासत में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। अब देखना होगा कि क्या समाजवादी पार्टी या बहुजन समाज पार्टी के साथ उनकी पार्टी की कोई राजनीतिक समझ बनती है।
SP नेता आज़म खान को मिली कानूनी राहत, कोर्ट ने फैसल लाला की याचिका ठुकराई
18 Jul, 2026 04:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म खान को एक पुराने कानूनी मामले में बड़ी राहत मिली है। रामपुर की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने फैसल लाला द्वारा दायर की गई क्रिमिनल अपील को खारिज कर दिया है। यह अपील ट्रायल कोर्ट के उस पूर्ववर्ती निर्णय के विरुद्ध थी, जिसमें आज़म खान को 18 दिसंबर 2025 को दोषमुक्त करार दिया गया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने इस न्यायिक फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि कोर्ट के इस आदेश के बाद अब ट्रायल कोर्ट का बरी करने वाला फैसला पूरी तरह से बहाल और प्रभावी है।
क्या था पूरा मामला और विवाद
यह कानूनी विवाद 29 मार्च 2019 की एक घटना से जुड़ा है, जिसमें आज़म खान पर उनके कार्यालय में पदस्थ चार अधिकारियों के प्रति अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का उपयोग करने का आरोप लगाया गया था। इसी संदर्भ में 2 अप्रैल 2019 को फैसल लाला की शिकायत पर कोतवाली पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। लंबे समय तक चली अदालती कार्यवाही और साक्ष्यों के विश्लेषण के पश्चात ट्रायल कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त करते हुए राहत दी थी।
अपील खारिज होने के निहितार्थ
ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए फैसल लाला ने जो क्रिमिनल अपील दायर की थी, उसे आज कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस निर्णय से आज़म खान को बड़ी राहत मिली है क्योंकि अब निचली अदालत का दोषमुक्ति का आदेश जस का तस बना हुआ है। कोर्ट के इस रुख से मामले में चल रही कानूनी खींचतान का पटाक्षेप हो गया है, जिससे आज़म खान के पक्ष में स्थिति और मजबूत हो गई है। यह निर्णय रामपुर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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