राजनीति
भाजपा अध्यक्ष ने ममता सरकार को घेरा, जमीन विवाद को लेकर लगाए गंभीर आरोप
9 Apr, 2026 10:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अलीपुरद्वार | भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार ने पश्चिम बंगाल के लोगों की जमीन छीनकर घुसपैठियों को दे दी, जिससे राज्य की जनसांख्यिकी बदल गई। उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार में एक चुनावी रैली में उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार बनने पर, वह जनसांख्यिकीय परिवर्तनों को ठीक करेगी और घुसपैठियों को बाहर निकालेेगी। भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि तृणमूल की तुष्टीकरण की राजनीति और अराजकता के कारण बंगाल के निवासियों को राज्य छोड़ने को मजबूर होना पड़ रहा।उन्होंने तृणमूल सरकार पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को बंगाल में बसने में मदद करने का आरोप लगाया। नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल में बंगाल का विशेष स्थान है। यहां विकास की रफ्तार धीमी हो गई है। तृणमूल सरकार ने राज्य की पहचान व जनसांख्यिकी को बदल दिया है। उन्होंने कहा, पहले कांग्रेस थी, फिर वामपंथी और अब तृणमूल। जो राज्य कभी उद्योगों से लेकर संस्कृति तक हर क्षेत्र में देश का नेतृत्व करता था, वह अब अंधकार में डूबा हुआ है।
नवीन ने टीएमसी नेताओं को दी चेतावनी
नवीन ने तृणमूल नेताओं व गुंडागर्दी करने वालों को चेतावनी देते हुए कि यह चुनाव जनता लड़ रही है। जब आम जनता अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरती है, तो कोई नेता या गुंडा कुछ नहीं कर सकता, वे या तो जेल जाएंगे या घर में दुबक जाएंगे। नितिन नवीन ने आरोप लगाया कि राज्य में नारदा, सारदा, स्कूल नौकरियों, नगर निगम की भर्ती, कोयला और राशन घोटाले सभी तृणमूल शासनकाल में हुए। उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की सरका बनने पर इन सभी घोटालों के दोषियों को जेल भेजा जाएगा।
टीएमसी का समझाया अर्थ, जानिए क्या कहा?
टीएमसी का अर्थ समझाया भाजपा अध्यक्ष ने कहा, तृणमूल में ‘टी’ का अर्थ है तोलाबाजी व तुष्टीकरण, ‘एम’ का अर्थ है माफियाराज व महिलाओं पर अत्याचार और ‘सी’ का अर्थ है करप्शन व रिश्वतखोरी। नवीन ने जोर देकर कहा कि राज्य में भाजपा सरकार नौकरियों व व्यापार एवं आपूर्ति जैसे अन्य क्षेत्रों में सिंडिकेट-राज को समाप्त कर देगी।
बंगाल में BJP का घोषणापत्र जल्द, विकास से लेकर सुरक्षा तक ये होंगे बड़े वादे
9 Apr, 2026 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता | भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र 10 अप्रैल को जारी कर सकती है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता में इसे जारी करेंगे। इस घोषणापत्र में समाज के सभी वर्गों को शामिल किए जाने की उम्मीद है। हालांकि इसमें महिलाओं के विकास, किसानों और युवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।भाजपा के इस संकल्प पत्र में कई बड़े वादे शामिल किए जा सकते हैं। पार्टी महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये की आर्थिक मदद देने की योजना बना रही है। इसके अलावा, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज का इंतजाम होगा। राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नए औद्योगिक क्षेत्र बनाए जाएंगे। महिलाओं की शिक्षा के लिए नए कॉलेज और बेहतर इलाज के लिए ज्यादा अस्पताल खोलने का वादा भी इसमें शामिल है। मछली पालन और खेती से जुड़े उद्योगों के लिए भी विशेष पैकेज की घोषणा की जा सकती है। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना पार्टी की बड़ी प्राथमिकता हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने इस घोषणापत्र को तैयार करने के लिए जमीनी स्तर पर काफी मेहनत की है। फरवरी की शुरुआत से ही इसके लिए काम शुरू हो गया था। भाजपा ने 'विकसित पश्चिम बंगाल संकल्प पत्र - परामर्श संग्रह अभियान' चलाया। इस अभियान के तहत पार्टी कार्यकर्ता हर बूथ और घर-घर तक पहुंचे। उन्होंने लोगों की शिकायतें और उनकी उम्मीदें सुनीं। पार्टी ने इसे केवल एक राजनीतिक वादा नहीं, बल्कि एक सामाजिक समझौता माना है।सुझाव जुटाने के लिए भाजपा ने आधुनिक तरीकों का भी इस्तेमाल किया। लोगों ने फोन नंबर, ईमेल और क्यूआर कोड के जरिए भी अपनी राय दी। हर जिले में 'आकांक्षा संग्रह बक्से' रखे गए ताकि लोग अपनी लिखित राय दे सकें। भाजपा नेता अनिर्बान गांगुली ने बताया कि अब तक 8 लाख से ज्यादा सुझाव मिले हैं। इसमें उद्योगपतियों, डॉक्टरों, शिक्षकों, किसानों और विदेशों में रहने वाले बंगाल के लोगों से भी बात की गई है।
भाजपा का लक्ष्य पिछले 15 वर्षों के कथित भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को खत्म करना है। पार्टी एक पारदर्शी और रोजगार देने वाली सरकार का वादा कर रही है। बाहर काम करने वाले मजदूरों को वापस लाना और स्थानीय स्तर पर नौकरियां देना मुख्य लक्ष्य है। प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल की संस्कृति और विरासत को ध्यान में रखकर यह विजन तैयार किया गया है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, एमएसएमई, बुनियादी ढांचे और कानून-व्यवस्था जैसे विषयों पर लोगों से सुझाव मांगे थे। पार्टी का मानना है कि यह संकल्प पत्र बंगाल के लोगों के सपनों को पूरा करने का रास्ता बनेगा।
बंगाल में नरेंद्र मोदी का मेगा प्रचार, बीजेपी ने झोंकी पूरी ताकत
9 Apr, 2026 09:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राज्य में तीन बड़ी चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे।कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री की पहली रैली सुबह 9:30 बजे पूर्व मेदिनीपुर जिले के हल्दिया टाउनशिप में होगी। इसके बाद दोपहर 12 बजे पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल स्थित पोलो ग्राउंड के आउटडोर स्टेडियम में दूसरी सभा को संबोधित करेंगे। वहीं, दिन की तीसरी और आखिरी रैली दोपहर 2 बजे बीरभूम जिले के सूरी के चांदमारी मैदान में आयोजित होगी।यह चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद पीएम मोदी का राज्य का दूसरा दौरा है। इससे पहले 5 अप्रैल को उन्होंने कूचबिहार से अपने अभियान की शुरुआत की थी, जहां उन्होंने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार को घेरा था और ‘भय बनाम भरोसा’ का नारा दिया था।
मोदी की रैली क्यों है अहम?
राजनीतिक दृष्टि से इन रैलियों को बेहद अहम माना जा रहा है। हल्दिया को नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी का गढ़ माना जाता है, जहां भाजपा अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहती है। वहीं, औद्योगिक क्षेत्र आसनसोल में पार्टी दोबारा अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है।बीरभूम जिले के सूरी में आयोजित रैली भी खास महत्व रखती है, क्योंकि यह इलाका टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता है। यहां भाजपा संगठनात्मक नेटवर्क और सत्ता विरोधी माहौल के सहारे अपनी पकड़ बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।
केरल में कल वोटिंग, चुनाव के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार
8 Apr, 2026 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
883 उम्मीदवार मैदान में, 2.71 करोड़ मतदाता करेंगे अपने मताधिकार का प्रयोग
तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि 9 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने बताया कि इस बार चुनावी मैदान में कुल 883 उम्मीदवार हैं, जो राज्य के लगभग 2.71 करोड़ मतदाताओं का समर्थन हासिल करने के लिए प्रयासरत हैं। निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर इंतजाम किए गए हैं। राज्यभर में कुल 30,495 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें 24 सहायक मतदान केंद्र भी शामिल हैं। ये अतिरिक्त केंद्र मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद बनाए गए हैं। कासरगोड, कन्नूर, पलक्कड़, मलप्पुरम और एर्नाकुलम जिलों में नए मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं ताकि मतदाताओं को सुविधा मिल सके। चुनाव आयोग ने समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल भी की है। कुल मतदान केंद्रों में से 352 केंद्रों का संचालन पूरी तरह महिला कर्मचारियों द्वारा किया जाएगा, जबकि 37 केंद्र दिव्यांग कर्मियों के जिम्मे होंगे। इसके अलावा, चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए 140 वितरण और संग्रह केंद्र बनाए गए हैं। मतगणना के लिए 140 ‘स्ट्रांग रूम’ तैयार किए गए हैं, जहां ईवीएम को सुरक्षित रखा जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत 1.46 लाख प्रशिक्षित चुनाव अधिकारियों को तैनात किया गया है। साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 76,000 पुलिसकर्मियों और केंद्रीय बलों के जवानों को भी तैनात किया गया है। चुनाव आयोग को उम्मीद है कि इन व्यापक तैयारियों के चलते केरल में मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होगा। अब सभी की नजरें 9 अप्रैल को होने वाले मतदान और इसके बाद आने वाले परिणामों पर टिकी हैं।
उमरेठ उपचुनाव से AAP ने किया किनारा, बड़ा राजनीतिक फैसला
8 Apr, 2026 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। गुजरात की राजनीति में एक अहम मोड़ लेते हुए आम आदमी पार्टी (आप) ने उमरेठ विधानसभा उपचुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा, पार्टी अब पूरी तरह से आगामी स्थानीय निकाय चुनावों पर ध्यान केंद्रित करेगी।
गढ़वी ने मंगलवार को अपने एक बयान में स्पष्ट किया कि आप इस उपचुनाव में हिस्सा नहीं लेगी और चाहती है कि मुकाबला सीधे कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच हो। उन्होंने कांग्रेस को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि वह खुद को मजबूत विपक्ष मानती है, तो उसे भाजपा को हराकर दिखाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम उमरेठ उपचुनाव नहीं लड़ेंगे। हमारा फोकस केवल स्थानीय निकाय चुनावों पर है। हम चाहते हैं कि भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला हो, क्योंकि कांग्रेस अक्सर हमें भाजपा की ‘बी-टीम’ कहती है। अब उनके पास मौका है कि वे सीधे भाजपा का सामना करें।”
आप के इस फैसले को राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी फिलहाल जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने और स्थानीय निकाय चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है। गुजरात में पिछले कुछ वर्षों में आप ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, लेकिन विधानसभा और उपचुनावों में उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है। ऐसे में पार्टी का यह कदम संकेत देता है कि वह अपनी ऊर्जा और संसाधनों को अधिक प्रभावी चुनावी क्षेत्रों में लगाना चाहती है।
PM मोदी के आक्रामक कैंपेन से तमिलनाडु में सियासी हलचल, कांग्रेस-DMK पर निशाना
8 Apr, 2026 08:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चैन्नई। तमिलनाडु में चुनावी पारा अपने चरम पर है और राज्य की सभी प्रमुख पार्टियां मतदाताओं को लुभाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। हालांकि, इस चुनावी रण में दो बड़े राष्ट्रीय चेहरों की सक्रियता ने नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के लिए लगातार राज्य के दौरे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तमिलनाडु में प्रचार से अब तक की दूरी कई राजनीतिक सवाल खड़े कर रही है। पिछले दो महीनों के भीतर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सहयोगियों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए तीन बार तमिलनाडु का दौरा किया है। उनका यह आक्रामक अभियान यहीं रुकने वाला नहीं है, क्योंकि वे 15 अप्रैल को फिर से नागरकोइल में एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे।
प्रधानमंत्री के इस ताबड़तोड़ प्रचार के ठीक विपरीत, राहुल गांधी ने अब तक तमिलनाडु में एक भी रैली नहीं की है। उनकी इस अनुपस्थिति ने इन अटकलों को हवा दे दी है कि कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। राजनीतिक विश्लेषक इस स्थिति की तुलना 2021 के विधानसभा चुनाव से कर रहे हैं, जब राहुल गांधी ने चुनाव से काफी पहले जनवरी में ही तीन दिवसीय दौरे के साथ अपने प्रचार का शंखनाद कर दिया था। दोनों दलों के बीच बढ़ती दूरियों का सबसे स्पष्ट संकेत हाल ही में पुडुचेरी में देखने को मिला। वहां राहुल गांधी ने प्रचार के दौरान जनता से गठबंधन के लिए समर्थन तो मांगा, लेकिन अपने पूरे भाषण में उन्होंने सहयोगी पार्टी डीएमके या उसके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन का एक बार भी नाम नहीं लिया। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिस दिन राहुल गांधी पुडुचेरी में थे, उसी दिन एम.के. स्टालिन भी वहीं मौजूद थे। लेकिन दोनों शीर्ष नेताओं के कार्यक्रमों को इस तरह तय किया गया था कि उनका आमना-सामना न हो सके। जहां राहुल ने सुबह प्रचार किया, वहीं स्टालिन शाम को पहुंचे। इसके जवाब में स्टालिन ने भी अपने भाषण में राहुल गांधी का जिक्र नहीं किया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह दूरी दरअसल चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर हुई खींचतान और मनमुटाव का नतीजा है। हालांकि, डीएमके ने सफाई दी है कि कार्यक्रमों में बदलाव संभव नहीं था और दोनों नेता जल्द ही साथ दिखेंगे। कांग्रेस के अनुसार, राहुल गांधी 10 अप्रैल के बाद तमिलनाडु का रुख कर सकते हैं।
उपचुनाव से पहले हेमंत खंडेलवाल की बड़ी बैठक, क्या बड़ा दांव खेलने की तैयारी में बीजेपी?
8 Apr, 2026 03:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के अयोग्य घोषित होने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. जहां कांग्रेस, बीजेपी पर लगातार निशाना साध रही है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका भी जताई है. वहीं, बीजेपी में चर्चाओं और बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
बंद कमरे में हुई बैठक
पूर्व गृह मंत्री और दतिया से बीजेपी के पूर्व विधायक नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता बढ़ गई है. साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में हार के बाद वे सक्रिय राजनीति से दूर रहे. अब बैठकों और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. नरोत्तम मिश्रा और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच भोपाल में बंद कमरे में सीक्रेट बैठक हुई. इस बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि उपचुनाव को लेकर चर्चा हुई होगी।
7742 वोटों से मिली थी हार
साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में दतिया से राजेंद्र भारती को कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी बनाया था. वहीं, बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा को मैदान में उतारा था. इस चुनाव में भारती को 88977 और नरोत्तम मिश्रा को 81235 वोट मिले थे. मिश्रा को 7742 वोटों से हार मिली थी।
6 महीनों में कराना होगा चुनाव
दरअसल, दिल्ली की MP-MLA कोर्ट ने दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एफडी घोटाला मामले में दोषी पाया था और तीन साल की सजा सुनाई थी. इस फैसले को चुनौती देने के लिए भारती ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था. जहां अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया. इसके साथ HC ने मध्य प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. उच्च न्यायालय अपने फैसले में बदलाव नहीं करता है तो भारती अयोग्य रहेंगे और दतिया विधानसभा सीट पर 6 महीने के भीतर चुनाव कराने होंगे।
CM ममता बनर्जी का बयान: SIR पर केस जारी रहेगा, 91 लाख वोटरों के नाम हटना चिंता का विषय
8 Apr, 2026 02:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा की गई विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद राज्य की मतदाता सूची से लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार ममता बनर्जी ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नामों को हटाए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है और अगर जरूरी हुआ तो वे फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी।
ममता बनर्जी ने कहा, "मुझे बेहद दुख है कि एसआईआर में कई नाम हटा दिए गए हैं। अदालत में याचिका दायर करने के बाद कुछ नाम बहाल किए गए। आदेश के अनुसार, जिन मामलों पर सुनवाई चल रही थी, उन्हें शामिल किया जाना था। लगभग 32 लाख नाम बहाल किए जा चुके हैं, लेकिन शेष 58 लाख मामलों की सुनवाई अभी तक शुरू भी नहीं हुई है।''
सभी को मिलना चाहिए वोट देने का अधिकार : ममता बनर्जी
टीएमसी प्रमुख ने कहा, ''कुछ नाम वैध रूप से हटाए गए हो सकते हैं, जैसे मृत मतदाता, लेकिन लगभग 27.6 लाख मामले अभी भी विचाराधीन हैं। मेरा मानना है कि हर किसी को वोट देने का अधिकार होना चाहिए। अगर उनके नाम बहाल नहीं किए गए, तो कई लोग वोट नहीं दे पाएंगे। जरूरत पड़ने पर हम फिर से अदालत जाएंगे।''
भवानीपुर से दाखिल किया नामांकन
ममता बनर्जी ने ये बयान भवानीपुर विधानसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल करने के बाद दिया। उन्होंने कहा, "मैं यहां बचपन से रह रही हूं, मेरा सब कुछ यहीं है। मैं भवानीपुर के लोगों को धन्यवाद और सलाम करती हूं। मैंने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है, और मैं सभी तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत की कामना करती हूं। हम सरकार बनाएंगे।"
एसआईआर के बाद कटे लाखों नाम
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस व्यापक पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से लगभग 91 लाख नामों को हटाया गया है। इस प्रक्रिया में पहले से हटाए गए लगभग 63 लाख नामों को भी शामिल किया गया है। साथ ही न्यायिक निर्णय के बाद अयोग्य घोषित किए गए अतिरिक्त 27 लाख मतदाताओं के नाम भी काटे गए हैं।
भवानीपुर में ममता का नामांकन, असम, केरल और पुदुचेरी में कल वोटिंग
8 Apr, 2026 01:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Assembly Election Updates: देश के तीन राज्यों असम, केरल और पुदुचेरी में कल यानी गुरुवार को एक चरण में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। वहीं, तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होगा। कौन सा दल किस मुद्दे के सहारे जनता के बीच जा रहा है? किस राज्य में कौन सा गठबंधन या रणनीति अधिक कारगर साबित होगी?
चुनाव आयोग की टीएमसी को दो टूक
चुनाव आयोग की तृणमूल कांग्रेस को दो टूक पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव भय रहित, हिंसा रहित, धमकी रहित, प्रलोभन रहित, छापा रहित, बूथ एवं सोर्स जामिंग रहित होकर ही रहेंगे।
नामांकन के बाद ममता बनर्जी ने किया सरकार बनाने का दावा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र से नामांकन दाखिल करने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “मैं सभी को अपनी शुभकामनाएं, धन्यवाद, सम्मान, सलाम, जय जिनेंद्र और सत श्री अकाल का संदेश देती हूं। आज नामांकन दाखिल करते हुए मैं कहना चाहती हूं कि भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र के साथ-साथ मैं हर केंद्र और हर क्षेत्र के लिए काम करूंगी। हम सरकार बनाएंगे।”
बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़: नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य बनेंगे, सरकार गठन की तैयारियां बढ़ीं
8 Apr, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। जदयू के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री तीन दिवसीय दौरे पर 9 अप्रैल की दोपहर दिल्ली रवाना होंगे। शुक्रवार को शपथ लेने के बाद शनिवार 11 अप्रैल को पटना वापस आएंगे। दिल्ली में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री (Prime Minister and Home Minister) से भी उनकी मुलाकात हो सकती है।
नीतीश कुमार के पटना वापसी के साथ ही बिहार में भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो जाएगी। इसके बाद किसी भी दिन नीतीश मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ सकते हैं। एनडीए के दलों में यह आपसी साझेदारी बन चुकी है कि अगला मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। सरकार में जदयू की मौजूदगी भी दमदार रहेगी तथा इस पार्टी से राज्य को उप मुख्यमंत्री मिलेगा। यह दोनों बातें पहली बार होगी।
नीतीश कुमार बतौर राज्यसभा सदस्य शपथ लेकर पटना वापसी पर किसी दिन एनडीए विधानमंडल दल की बैठक बुला सकते हैं और इस बैठक में वह सीएम पद छोड़ने की जानकारी आधिकारिक तौर पर विधायकों को देंगे। फिर राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे। नई सरकार के गठन को पहले एनडीए के सभी घटक दलों के विधायक दल की अलग-अलग बैठकों में नेता चुने जाएंगे।
फिर एनडीए विधानमंडल दल के नेता की घोषणा संयुक्त बैठक में होगी। नए नेता सरकार गठन का प्रस्ताव राज्यपाल को सौंपेंगे। एनडीए के दलों में हो रही चर्चा के मुताबिक 15 अप्रैल के बाद ही नई सरकार अस्तित्व में आएगी। पद छोड़ने के पहले सीएम की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक होने के भी आसार हैं, जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।
कौन बनेगा बिहार का सीएम?
अब भले ही बिहार में नई सरकार बनने का प्रोग्राम सेट हो गया हो लेकर राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इसपर अभी सस्पेंस बरकरार है। सीएम की रेस में सम्राट चौधरी का नाम अभी सबसे आगे चल रहा है। मौजूदा डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने हाल ही में यह कर सम्राट चौधरी की राह और भी आसान कर दी थी कि वो सीएम की रेस में नहीं हैं बल्कि वो सेवक की रेस में हैं। हालांकि, बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर अभी बीजेपी ने चुप्पी साध रखी है। पार्टी नेता लगातार यह कह रहे हैं कि एनडीए की बैठक में बिहार के नए सीएम का नाम तय किया जाएगा। इधऱ डिप्टी सीएम की रेस में नीतीश कुमार के बेटे निशांत का नाम है। हालांकि, सीएम और डिप्टी सीएम के नामों को लेकर यह सिर्फ कयासबाजी है अभी इसपर आधिकारिक तौर से कुछ भी साफ नहीं किया गया है।
राजनीति का नया मोड़: तमिलनाडु में DMK-कांग्रेस गठबंधन पर उठ रहे सवाल, मोदी और राहुल की भूमिका चर्चा में
8 Apr, 2026 12:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। तमिलनाडु (Tamil Nadu) में चुनावी हलचल तेज़ है। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) लगातार राज्य के दौरे कर भाजपा (BJP) और एनडीए (NDA) उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की तमिलनाडु में गुमशुदगी ने राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीएम मोदी का आक्रामक प्रचार
पिछले दो महीनों में पीएम मोदी ने तीन बार तमिलनाडु का दौरा किया और एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में जनसभाओं को संबोधित किया। उनका प्रचार अभियान 15 अप्रैल को नागरकोइल में भी जारी रहेगा, जहां वे विशाल रैली में वोटरों से समर्थन मांगेंगे।
राहुल गांधी की गैरमौजूदगी और DMK के साथ रिश्ते
राहुल गांधी अब तक तमिलनाडु में चुनाव प्रचार में शामिल नहीं हुए हैं। इससे अटकलें बढ़ गई हैं कि कांग्रेस और DMK गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। विश्लेषक बताते हैं कि 2021 में राहुल गांधी ने जनवरी से ही राज्य में तीन दिवसीय दौरा कर प्रचार की शुरुआत कर दी थी।
पुडुचेरी में संकेत
हाल ही में पुडुचेरी में दोनों दलों के प्रचार कार्यक्रमों ने गठबंधन के अंदर दूरी को उजागर किया। राहुल गांधी ने अपनी सभा में DMK और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का नाम नहीं लिया, जबकि स्टालिन उसी दिन अलग समय पर वहां पहुंचे।
सीट बंटवारे की खींचतान का असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस दूरी का मुख्य कारण सीट बंटवारे और गठबंधन के भीतर मनमुटाव है। DMK सूत्रों के अनुसार, उनके पास राहुल और स्टालिन की मुलाकात कराना संभव नहीं हुआ।
पार्टियों की सफाई और आगामी योजना
DMK के संगठनात्मक सचिव आर.एस. भारती ने कहा कि दोनों पार्टियों की रैलियों का शेड्यूल पहले से तय था, और आखिरी समय में संयुक्त रैली संभव नहीं थी। कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी बताते हैं कि राहुल गांधी 10 अप्रैल के बाद तमिलनाडु दौरे पर आ सकते हैं। इस तरह दोनों दलों के नेता जल्द ही एक साथ प्रचार में दिखाई दे सकते हैं।
राजनीतिक विवाद बढ़ा: BJP ने खरगे के बयान पर कार्रवाई की मांग की, माफी पर जोर
8 Apr, 2026 11:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/गुवाहाटी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) के खिलाफ “हेट स्पीच” (Hate speech) का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग और स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी का कहना है कि असम में चुनावी रैली के दौरान दिए गए बयान हिंदू मान्यताओं का अपमान करने वाले और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरनाक हैं।
असम में दर्ज हुई शिकायतें
असम BJP के प्रवक्ता प्रांजल कलिता ने बताया कि एक शिकायत गुवाहाटी के वशिष्ठ पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई है, जबकि दूसरी शिकायत चुनाव आयोग को सौंपी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता संविधान की बात करते हैं, लेकिन उनके बयान सभी धर्मों के सम्मान की भावना के विपरीत हैं।
क्या कहा था खरगे ने?
बताया गया कि असम के श्रीभूमि जिले के नीलाबाजार में चुनाव प्रचार के दौरान खरगे ने BJP और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा को “जहरीला” बताते हुए तुलना “जहरीले सांप” से की। साथ ही उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को “अत्यधिक भ्रष्ट और अहंकारी” बताया।
BJP बोली— बयान विभाजनकारी
BJP का कहना है कि ऐसे बयान सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकते हैं। पार्टी ने चुनावी अभियान के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ टिप्पणी करने के आरोप में तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
माफी की मांग भी उठी
पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खरगे के बयान को “अशोभनीय और आपत्तिजनक” बताते हुए उनसे माफी की मांग की। उन्होंने गुजरात को लेकर कथित टिप्पणी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि किसी राज्य के लोगों को “अनपढ़” कहना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व— सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा —से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख बताने को कहा।
चुनावी पृष्ठभूमि
असम विधानसभा की 126 सीटों के लिए मतदान 9 अप्रैल को प्रस्तावित है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। ऐसे में बयान को लेकर सियासी माहौल और गर्मा गया है।
मुस्लिम वोट बैंक पर टकराव: असम और केरल में सियासी समीकरण बदल रहे हैं
8 Apr, 2026 10:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। असम (Assam), केरल (Kerala) और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव (Puducherry Assembly Elections) के लिए प्रचार थम चुका है और 9 अप्रैल को मतदान (Voting) होना है। इन चुनावों में जहां असम में बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) के बीच सीधा मुकाबला है, वहीं केरल में वाम मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के बीच टक्कर है। दोनों राज्यों में मुस्लिम मतदाता (Muslim Voters) निर्णायक भूमिका में हैं, जिसके चलते मुस्लिम राजनीति से जुड़े दलों की भी असली परीक्षा मानी जा रही है। देश में मुस्लिम आबादी भले 14-15 प्रतिशत के आसपास हो, लेकिन केरल में यह करीब 27 प्रतिशत और असम में 34-35 प्रतिशत तक है। यही वजह है कि इन राज्यों में मुस्लिम वोट बैंक चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
असम में बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) और केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की सियासी पकड़ इस चुनाव में कसौटी पर है। केरल में मुस्लिम लीग कांग्रेस के साथ गठबंधन में है, जबकि असम में AIUDF और कांग्रेस अलग-अलग मैदान में हैं।
असम में अजमल की चुनौती
असम की 126 विधानसभा सीटों पर 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन बदरुद्दीन अजमल की पार्टी केवल 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी मुख्य रूप से निचले असम के उन इलाकों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जहां मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में हैं और कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
2021 के चुनाव में कांग्रेस और AIUDF साथ थे, लेकिन इस बार दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में अजमल को बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस से भी सीधी टक्कर मिल रही है। धुबरी, बारपेटा और गोलपाड़ा जैसे इलाकों में मुकाबला खास तौर पर दिलचस्प है। पिछली बार AIUDF ने 16 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार परिस्थितियां बदली हुई हैं।अजमल ने 2005 में AIUDF की स्थापना की थी और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के मुद्दों को लेकर अपनी राजनीति मजबूत की। 2006 में 10 सीटों से शुरू हुई पार्टी 2021 तक 16 सीटों तक पहुंची, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में अजमल की हार ने पार्टी को झटका दिया। अब 2026 का चुनाव उनके लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
मुस्लिम वोट किसके साथ?
असम में परिसीमन के बाद मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों की संख्या घटकर 32 से 22 रह गई है। ऐसे में मुस्लिम वोटों के बंटवारे का सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ेगा। कांग्रेस और AIUDF दोनों की नजर इस वोट बैंक पर टिकी है। 2024 लोकसभा चुनाव के संकेत बताते हैं कि मुस्लिम मतदाता का रुझान बदल रहा है, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया है।
केरल में मुस्लिम लीग की स्थिति
केरल में मुस्लिम राजनीति मुख्य रूप से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के इर्द-गिर्द घूमती है। यह पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन का अहम हिस्सा है और 140 में से 26 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
मलप्पुरम, कोझिकोड और कासरगोड जैसे जिलों में मुस्लिम मतदाता चुनावी समीकरण तय करते हैं। IUML का इन क्षेत्रों में मजबूत जनाधार रहा है और मलप्पुरम को उसका गढ़ माना जाता है।
केरल विधानसभा में 32 मुस्लिम विधायक हैं, जिनमें सबसे ज्यादा IUML के हैं। राज्य की 43 सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। पिछले कई दशकों से IUML ने मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी पकड़ बनाए रखी है, खासकर कांग्रेस के साथ गठबंधन के कारण वोटों का बिखराव नहीं होता।
इस बार केरल में यूडीएफ और एलडीएफ के बीच मुकाबले में यूडीएफ का पलड़ा थोड़ा भारी माना जा रहा है, जिससे मुस्लिम लीग को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, असम और केरल दोनों ही राज्यों में मुस्लिम वोट बैंक चुनावी नतीजों की दिशा तय कर सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि असम में बदरुद्दीन अजमल अपनी पकड़ बरकरार रख पाते हैं या नहीं, और केरल में मुस्लिम लीग अपना वर्चस्व कायम रखती है या नहीं।
बिहार मॉडल पर रणनीति, अमित शाह की बंगाल योजना: अगले 15 दिन में होने वाले अहम कदम
8 Apr, 2026 09:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल (west bengal) की सत्ता पर काबिज होने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के रणनीतिकार अमित शाह (Amit Shah) ने पिछले सप्ताह भवानीपुर में एक बड़ी चुनावी रैली के दौरान घोषणा की कि वे आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान लगातार 15 दिनों तक बंगाल में ही प्रवास करेंगे। वहीं, शुभेंदु अधिकारी की नामांकन रैली के दौरान शाह ने हुंकार भरते हुए कहा कि भाजपा इस बार 294 सीटों वाली विधानसभा में 175 से अधिक सीटें जीतकर एक ऐतिहासिक बदलाव लाएगी।
अमित शाह का यह ऐलान भवानीपुर की धरती से आया, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अपना निर्वाचन क्षेत्र है। भाजपा ने यहां ममता बनर्जी के कट्टर प्रतिद्वंद्वी शुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतारा है। शाह ने इस मुकाबले को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “अगर भवानीपुर की जनता भाजपा को यहां जीत दिलाती है, तो बंगाल में सत्ता परिवर्तन अपने आप हो जाएगा। यह ममता दीदी की विदाई का सबसे छोटा रास्ता (शॉर्टकट) होगा।”
गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी ने पिछले चुनाव में नंदीग्राम से ममता बनर्जी को पराजित किया था। इस बार भाजपा ने उन्हें नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों ही हाई-प्रोफाइल सीटों से मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
कैसा होगा अमित शाह का 15 दिनों का कैंप प्लान?
सूत्रों के अनुसार, अमित शाह का यह 15 दिवसीय प्रवास केवल रैलियों तक सीमित नहीं रहेगा। वे माइक्रो-मैनेजमेंट के तहत राज्य के अलग-अलग हिस्सों में रातें बिताएंगे और वॉर रूम से चुनावी कमान संभालेंगे। अमित शाह सिलीगुड़ी और बालुरघाट जैसे क्षेत्रों में रुकेंगे, जहां 2019 के बाद से भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा है। वे हुगली, खड़गपुर और दुर्गापुर जैसे इलाकों में भी डेरा डालेंगे। यहां मुख्य ध्यान उन 40 सीटों पर होगा जहां 2021 के चुनाव में भाजपा 5% से भी कम अंतर से हार गई थी।
देर रात तक बैठकें
शाह की रणनीति का मुख्य हिस्सा रात 2 बजे तक चलने वाली संगठनात्मक बैठकें होंगी। इनमें वे बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेंगे, नाराज नेताओं को मनाएंगे और टिकट वितरण से उपजे असंतोष को दूर करेंगे।
MP, महाराष्ट्र और बिहार का फॉर्मूला
अमित शाह की यह कार्यशैली नई नहीं है। इससे पहले उन्होंने मध्य प्रदेश (2023), महाराष्ट्र (2024) और बिहार (2025) के विधानसभा चुनावों में भी इसी तरह का गहन प्रवास किया था। बिहार में भाजपा के ऐतिहासिक प्रदर्शन और पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने की सफलता के पीछे शाह की क्लस्टर रणनीति को ही श्रेय दिया जाता है। बंगाल में भी वे राज्य को विभिन्न सांगठनिक क्लस्टरों में बांटकर खुद निगरानी करेंगे।
2021 के चुनावों में भाजपा ने 3 से सीधे 77 सीटों पर छलांग लगाई थी और उसका वोट शेयर करीब 38% तक पहुंच गया था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने वापसी की और भाजपा की सीटों की संख्या 18 से घटकर 12 रह गई। अब अमित शाह का पूरा जोर उन सीटों पर है जिन्हें भाजपा जीतते-जीतते हार गई थी। जलपाईगुड़ी, राजगंज और मेखलीगंज जैसे क्षेत्रों में शाह खुद रणनीति बनाएंगे ताकि पिछली गलतियों को न दोहराया जाए।
खरगे का बड़ा बयान: BJP और TMC के विवादों के बीच कांग्रेस है तीसरा विकल्प
8 Apr, 2026 08:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) में आगामी विधानसभा चुनाव (assembly elections) को लेकर राजनीतिक माहौल तेज हो गया है। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष (Congress President) मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ‘नफरत और समाज में बंटवारे की राजनीति’ करते हैं और पश्चिम बंगाल में भी इसी आधार पर सत्ता हासिल करना चाहते हैं।
कांग्रेस ने जारी किया चुनावी घोषणापत्र
मंगलवार को कांग्रेस का चुनावी घोषणापत्र जारी करते हुए खरगे ने कहा कि बंगाल के लोगों के सामने अब तीन विकल्प हैं। पहला, ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी सरकार, जिस पर उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। दूसरा, भाजपा, जिस पर उन्होंने नफरत और ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। और तीसरा, कांग्रेस, जो विकास, रोजगार और सुधार की बात कर रही है।
टीएमसी पर खरगे ने साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राज्य में पिछले 15 साल से टीएमसी की सरकार होने के बावजूद विकास के क्षेत्र में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा है। वहीं केंद्र की भाजपा सरकार पर भी उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि वह सिर्फ बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन बंगाल की अर्थव्यवस्था, उद्योग और युवाओं के रोजगार को लेकर कोई ठोस योजना नहीं देती। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति ‘डर, नफरत और अलगाव’ पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकारी एजेंसियों जैसे ईडी, आयकर विभाग और अन्य संस्थाओं का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को डराने और अपनी पार्टी में शामिल करने के लिए करती है। उन्होंने इसे डराने-धमकाने की राजनीति बताया।
कांग्रेस के घोषणापत्र में क्या-क्या?
घोषणापत्र में कांग्रेस ने कई बड़े वादे किए हैं। पार्टी ने महिलाओं को हर महीने 2000 रुपये देने, किसानों को सालाना 15,000 रुपये की सहायता, हर परिवार को 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने का वादा किया है। इसके अलावा हर जिले में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) ट्रेनिंग सेंटर खोलने की भी बात कही गई है।
अपने दम पर मैदान में कांग्रेस- जयराम रमेश
वहीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी लगभग दो दशक बाद बंगाल में अकेले चुनाव लड़ रही है और यह पार्टी के लिए नई ऊर्जा जैसा है। उन्होंने इसे फिल्म बीस साल बाद से जोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस अब अपने दम पर मैदान में उतरकर नई शुरुआत कर रही है। रमेश ने भाजपा पर सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर भी हमला बोला और आरोप लगाया कि वह रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे महान व्यक्तित्व का अपमान करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का तीसरा विकल्प बंगाल को नफरत की राजनीति और मौजूदा सरकार की कमियों दोनों से बाहर निकाल सकता है।
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