राजनीति
बिहार में राजनीतिक हलचल: 15 तारीख को नए सीएम का शपथ ग्रहण, प्रधानमंत्री की मौजूदगी की चर्चा
13 Apr, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की सियासत में बड़े बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है। राज्य में नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा के लिए 14 अप्रैल का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है, जब औपचारिक रूप से विधायक दल के नेता का चुनाव किया जाएगा। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, 15 अप्रैल को आयोजित होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं शामिल हो सकते हैं। इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं के भी मौजूद रहने की उम्मीद है।
सत्ता हस्तांतरण की इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 14 अप्रैल को बतौर पर्यवेक्षक पटना पहुंच रहे हैं। उनकी मौजूदगी में भाजपा विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। इसी दिन मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट की आखिरी बैठक बुलाई गई है, जिसके बाद उनके पद से इस्तीफा देने की पूरी संभावना है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि प्रधानमंत्री 14 अप्रैल की शाम ही पटना पहुंच सकते हैं और राजभवन या सुरक्षित स्थान पर रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन यानी 15 अप्रैल को समारोह में शिरकत करेंगे।
हालांकि, नए मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सस्पेंस अभी भी बरकरार है। राजनीतिक गलियारों में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे मजबूती से उभरा है, लेकिन केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय समेत कुछ अन्य नामों पर भी कयास लगाए जा रहे हैं। भाजपा आलाकमान राज्य के जातीय समीकरणों और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए किसी ऐसे नाम पर दांव लगाना चाहता है, जो सर्वमान्य हो। विधायक दल की बैठक के बाद एनडीए के घटक दलों के साथ संयुक्त चर्चा होगी, जिसके बाद नेता के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा। शपथ ग्रहण समारोह के लिए पटना के बापू सभागार और लोकभवन को विकल्प के तौर पर तैयार रखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पहले चरण में मुख्यमंत्री के साथ केवल उपमुख्यमंत्री और कुछ बेहद महत्वपूर्ण विभागों के मंत्रियों को ही शपथ दिलाई जाएगी, जबकि मंत्रिमंडल का पूर्ण विस्तार बाद के चरणों में किया जाएगा। फिलहाल पूरी राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है और बिहार की जनता की निगाहें 14 और 15 अप्रैल की गतिविधियों पर टिकी हैं।
सायनी घोष का चुनावी गाना बना सियासी बवाल, BJP ने TMC पर साधा निशाना, क्या है पूरा मामला?
13 Apr, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Saayoni ghosh: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का प्रचार चल रहा है. तमाम नेता अपने अपने तरीके से प्रचार में जुटे हुए हैं. इस बीच टीएमस सांसद सायनी घोष काफी चर्चाओं में हैं. उनके चर्चा में रहने के पीछे की वजह उनका गीत माना जा रहा है. जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वे गा रही हैं कि हृदय माझे काबा और नयने मदीना… यानी दिल में काबा और आंखों में मदीना है. हालांकि बीजेपी उन पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगा रही है.
सायोनी घोष का चुनाव प्रचार का ये तरीका कुछ लोगों को पसंद आ रहा है, तो वहीं कुछ इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं. घोष हमेशा ही अपने बयानों और भाषणों की वजह से सोशल मीडिया पर चर्चा में बनी रहती हैं.
भाजपा समर्थकों की ओर से कई रील शेयर किए गए हैं और लिखा जा रहा है कि आखिर एक सांसद कैसे मंच से इस तरह का गाना गा सकती है. सायनी का यह गाना उन इलाकों में बज रहा है जो मुस्लिम बहुल इलाके हैं.
हमेशा चर्चा में बनी रहती हैं सायनी घोष
सायनी घोष का जन्म 27 जनवरी 1993 को हुआ था. राजनीति में आने से पहले बंगाली फिल्म इंडस्ट्री बड़ा चेहरा थीं, उन्होंने कई फिल्मों में काम किया है. फिल्मों में सुर्खियां बटोरने के बाद राजनीति में भी सायनी घोष TMC का चर्चित चेहरा हैं.
वे पहली बार साल 2021 में चर्चा में आईं थी. उस समय उनका एक पोस्ट जमकर वायरल हुआ था, जिसमें धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगा था. हालांकि उनका यह पोस्ट सालों पुराना था. लेकिन इसके खिलाफ उन पर कई मामले दर्ज किए गए थे. पोस्ट में शिवलिंग की तस्वीर थी और उसे लेकर अपमानजनक टिप्पणी की गई थी. विवाद बढ़ने के बाद सायनी घोष ने तर्क दिया कि उनका अकाउंट हैक हो गया था.
उस समय उनके चर्चा में आने के पीछे की वजह उनका विधानसभा चुनाव लड़ना था. 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने उन्हें आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया था. हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.
हार के बाद भी मिली थी जिम्मेदारी
आसनसोल में चुनाव हारने के बाद भी सायनी घोष को टीएमसी ने कई पद दिए थे. जून 2021 में वो तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा का अध्यक्ष बनाया गया था. इसके बाद साल 2024 के भारतीय आम चुनाव में, उन्होंने तृणमूल उम्मीदवार के तौर पर जादवपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की और संसद पहुंचीं. संसद में भी वे अपनी स्पीच के कारण हमेशा चर्चा में बनी रहती हैं.
एंटी इनकंबेंसी के डर से बदली रणनीति? 15 साल बाद वाम मोर्चा की शैली में दिखीं ममता बनर्जी की राजनीति
13 Apr, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Bengal Elections 2026: बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव प्रचार तेज कर दिया है। वहीं इस बार ममता बनर्जी को एंटी इनकंबेंसी का डर सता है। इसको लेकर करीब 74 विधायकों के टिकट काट दिए हैं। कई विधायकों की सीट भी बदली है।
2011 में वाम मोर्चा ने काटे थे 81 विधायकों के टिकट
2011 में 34 साल तक सत्ता में रही वाम मोर्चा सरकार ने एंटी-इनकंबेंसी को कम करने के लिए 81 विधायकों के टिकट काट दिए थे। इसके बावजूद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने नंदीग्राम और सिंगूर के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलनों के दम पर सत्ता पर कब्जा कर लिया। उस चुनाव में TMC-कांग्रेस गठबंधन ने 294 में से 228 सीटें जीतीं थी।
ममता ने काटे 74 विधायकों के टिकट
करीब 15 साल बाद अब ममता बनर्जी खुद एंटी-इनकंबेंसी से निपटने के लिए बड़े बदलाव कर रही है। पार्टी ने 74 विधायकों के टिकट काटे हैं और 15 उम्मीदवारों की विधानसभा सीट बदल दी है।
ममता ने यह कदम बीजेपी द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचारों के आरोपों के बीच उठाया है। बंगाल में पीएम नरेंद्र मोदी ने भी वादा किया है कि यदि प्रदेश में बीजेपी की सरकार आती है तो वे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।
एंटी-इनकंबेंसी से SIR पर फोकस
बंगाल में विधानसभा चुनाव के समय सबसे ज्यादा SIR को लेकर विवाद रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनावी चर्चा का केंद्र एंटी-इनकंबेंसी से हटकर वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर आ गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि एसआईआर का मुद्दा नहीं होता तो ममता बनर्जी को एंटी इनकंबेंसी का ज्यादा असर झेलना पड़ता। उनका मानना है कि इस बार विपक्ष बिखरा हुआ है और BJP, वाम दल व कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे TMC को फायदा मिल सकता है।
91 लाख नाम हटे
बंगाल में SIR प्रक्रिया के तहत करीब 7.66 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 91 लाख नाम हटाए गए हैं। BJP का दावा है कि इनमें ज्यादातर बांग्लादेशी घुसपैठिए थे, जबकि TMC का आरोप है कि असली मतदाताओं को वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया है।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मुद्दा मुस्लिम वोटरों को ममता बनर्जी की पार्टी की तरफ एकजुट करने का हो सकता है। बता दें कि प्रदेश में करीब 27 फीसदी मुसलमान है और करीब 120 सीटों पर अपना प्रभाव डालते है।
मतुआ और OBC समीकरण भी अहम
विश्लेषकों का कहना है कि SIR का असर मतुआ समुदाय पर भी पड़ा है, जो पहले BJP का समर्थन करता रहा है। ऐसे में इस समुदाय के वोटों में बदलाव संभव है। वहीं ग्रामीण इलाकों में हिंदू OBC मतदाताओं पर BJP का प्रभाव अब भी मजबूत बताया जा रहा है।
सियासी बयान से मचा हंगामा: हरीश रावत बोले—हां मैं तांत्रिक हूं और घमंडी हूं
13 Apr, 2026 02:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: कुछ दिन पहले हल्द्वानी में कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के सामने कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी ने अपने संबोधन में 'नेता और तांत्रिक' का जिक्र किया था. उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नेता और तांत्रिक के बीच का अंतर समझने की बात कही थी. उनके इस बयान के बाद उत्तराखंड में चर्चा तेज हो गई थी कि आखिर कांग्रेस में ये तांत्रिक कौन है. लोग दबी जुबान में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता की ओर इस इशारे को मान रहे थे.
अब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस से सबसे सीनियर लीडर हरीश रावत ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने अपने सेशल मीडिया अकाउंट पर एक लंबी पोस्ट लिखी है. पोस्ट की शुरुआत...वाह, am I - #Tantrik...!! से की गई है. इसके बाद हरीश रावत ने लिखा-
क्या भला कहा कि गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि "मेरे बिना कांग्रेस नहीं चलेगी"। क्या मैंने कभी ऐसा कहा?
मैं तांत्रिक हूं। 1968 में देश के सभी दिग्गज आदरणीय इंदिरा गांधी जी के विरुद्ध हो गए थे। सिंडिकेट-इंडिकेट का संघर्ष था। लखनऊ विश्वविद्यालय में उन्हें आमंत्रित किया। श्री राज नारायण जी और तत्कालीन मुख्यमंत्री टी.एम. सिंह आदि के प्रबल विरोध के बावजूद लखनऊ विश्वविद्यालय में उनकी सभा करवाई। सबके मन को जीतकर वह दिल्ली चली गई। उन्होंने इतिहास बनाया और मैं युवक कांग्रेस का कार्यकर्ता बन गया। वर्ष 1977 में हमारे जिलों में कांग्रेस लगभग खाली हो गई। मैं, इंदिरा भक्त कांग्रेसजनों और युवा कांग्रेसजनों के साथ कांग्रेस का झंडा थामकर खड़ा रहा। सन् 1990 के बाद पहाड़ों में कांग्रेस संकट में आई। कई सूरमा दाएं-बाएं हो गए। राज्य आंदोलन के फलस्वरूप कांग्रेस को खलनायक चित्रित करने लगे। यहां तक कि सन् 1996 में लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार नहीं मिल पा रहे थे, तब भी मैं साथियों के साथ कांग्रेस का झंडा थामे खड़ा रहा।
आज के कालखंड में भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के खिलाफ झंडा थामे खड़ा हूं। केंद्र सरकार का दंश झेला और झेल रहा हूं। मगर कांग्रेस और उत्तराखंडियत का झंडा थामे अटल खड़ा हूं। मैं हारा, मगर हार के बाद न कांग्रेस छोड़ी, न क्षेत्र छोड़ा। यदि अल्मोड़ा संसदीय सीट आरक्षित नहीं होती, हारता-जीतता मगर वहीं से लड़ता।
हरिद्वार ने मुझे अपनाया, तो मैं अभी पूरी शक्ति और समर्पण के साथ हरिद्वार के भाई-बहनों के साथ हूं। मैंने हर चुनाव में सीट नहीं बदली है। कार्यकर्ताओं के साथ हार में भी खड़ा रहा हूं। यही कारण है कि जिन विधानसभा सीटों में मैं हारा, दूसरे चुनाव में कांग्रेस जीती है।
शायद इसलिए मैं तांत्रिक हूं, शायद इसीलिए मैं घमंडी हूं और गलतफहमी का शिकार हूं। तंत्र का सहारा लिए अब भी खड़ा हूं। मगर यह तंत्र कार्यकर्ताओं और उत्तराखंडियत पर विश्वास रखने वाले भाई-बहनों का है।
कांग्रेस लीडर रणजीत रावत भी हरीश रावत पर लगा चुके तंत्र मंत्र का आरोप: दरअसल हरीश रावत के सीएम रहने के दौरान उनके सबसे पावरफुल साथी रहे रामनगर से कांग्रेस के नेता रणजीत रावत ने उनसे मनमुटाव के बाद एक बार आरोप लगाया था कि हरीश रावत चुनाव जीतने के लिए तंत्र मंत्र का सहारा लेते हैं.
प्रकाश जोशी ने तांत्रिक विवाद छेड़ा: इसके बाद पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी ने तांत्रिक वाली बात छेड़ी तो हरीश रावत ने इसका जवाब दे दिया है. कांग्रेस के अंदर इस समय जो अंदरूनी राजनीति चल रही है, आने वाले दिनों में इसमें बयानबाजी और बढ़ेगी ये तय है.
वोटर लिस्ट में भारी बदलाव: 12 राज्यों में 7.2 करोड़ नाम हटे, नेट 5.2 करोड़ की गिरावट
13 Apr, 2026 01:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने देश की चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव किया है। इस प्रक्रिया में जहां 12 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों से 7.2 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए, वहीं करीब 2 करोड़ नए मतदाता भी जोड़े गए हैं। इस तरह कुल मिलाकर शुद्ध रूप से लगभग 5.2 करोड़ नाम अंतिम सूची से बाहर हो गए हैं।
कुल मतदाताओं में 10% से ज्यादा की कमी
एसआईआर के बाद इन राज्यों में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 45.8 करोड़ रह गई है, जबकि पहले यह आंकड़ा करीब 51 करोड़ था। यानी लगभग 10.2 फीसदी मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं।
यूपी में सबसे ज्यादा बदलाव
उत्तर प्रदेश इस प्रक्रिया में सबसे आगे रहा।
नए मतदाताओं के जुड़ने में यूपी 92.4 लाख के साथ शीर्ष पर है।
वहीं हटाए गए नामों में भी यूपी पहले स्थान पर है, जहां 2.04 करोड़ नाम सूची से हटे।
इसके अलावा:
तमिलनाडु: 35 लाख नए जुड़े, 97 लाख हटे
केरल: 20.4 लाख नए जुड़े
राजस्थान: 15.4 लाख नए जुड़े
मध्य प्रदेश: 12.9 लाख नए जुड़े
गुजरात: 12.1 लाख नए जुड़े
पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा विवाद
पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर सबसे ज्यादा सियासी घमासान देखने को मिला।
60 लाख से अधिक लोगों की जांच हुई
27 लाख नाम सत्यापन में हटे
6 लाख नाम आपत्तियों के आधार पर हटाए गए
कुल मतदाता संख्या घटकर 6.75 करोड़ रह गई (पहले 7.66 करोड़)
क्यों हटाए गए इतने नाम?
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार:
66.9 लाख नाम मृत्यु के कारण हटे
1.3 करोड़ नाम डुप्लीकेट (एक से अधिक जगह पंजीकरण) पाए गए
1.3 करोड़ लोग पते पर नहीं मिले
3.1 करोड़ मतदाता स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर शिफ्ट हो चुके थे
12.7 लाख नाम अन्य कारणों से हटाए गए
क्या है इसका असर?
एसआईआर के इस बड़े अभियान से मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस भी तेज हो गई है। कई राज्यों में इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
कुल मिलाकर, यह प्रक्रिया आने वाले चुनावों की दिशा और रणनीति पर बड़ा असर डाल सकती है।
देश की विकास यात्रा पर जोर: प्रधानमंत्री मोदी बोले—भारत जल्द लेगा ऐतिहासिक फैसला
13 Apr, 2026 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय स्तर के 'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' को संबोधित कर रहे हैं. सम्मेलन में सरकार, शिक्षा, विज्ञान, खेल, उद्यमिता, मीडिया, सामाजिक कार्य और संस्कृति सहित अलग-अलग क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियां और सफल महिलाएं शामिल हुईं.
'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार भी हमारे बीच हैं. देश की विकास यात्रा में भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसलों में से एक लेने वाला है.' यह फैसला महिला शक्ति को समर्पित है. यह महिला शक्ति के सम्मान के लिए समर्पित है
हमारे देश की संसद एक नया इतिहास बनाने के करीब है. एक ऐसा नया इतिहास जो अतीत की सोच को साकार करेगा. एक ऐसा इतिहास जो भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा. एक ऐसे भारत का संकल्प जो समतावादी हो, जहां सामाजिक न्याय सिर्फ एक नारा न हो, बल्कि हमारे काम करने के तरीके, हमारे फैसले लेने की प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा हो. दशकों के इंतजार को खत्म करने का समय आ गया है, राज्य विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक आज 16, 17 और 18 अप्रैल है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, '2023 में पार्लियामेंट की नई बिल्डिंग में हमने महिला सशक्तिकरण एक्ट पेश किया. इसे समय पर लागू किया जा सके, इसके लिए 16 अप्रैल से पार्लियामेंट के बजट सेशन की स्पेशल मीटिंग होने जा रही है. नारी शक्ति वंदन प्रोग्राम के जरिए हमें देश की लाखों माताओं और बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है. मैं आपको उपदेश देने नहीं आया हूँ, न ही आपको जगाने आया हूँ. मैं आज आपके देश की लाखों माताओं और बहनों का आशीर्वाद लेने आया हूँ.'
नेशनल कमीशन फॉर विमेन की चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने संबोधित किया
इस मौके पर नेशनल कमीशन फॉर विमेन की चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने कहा, 'अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कहा था, महिलाएं आधा आसमान संभालती हैं, तो क्या उन्हें कम से कम एक तिहाई पॉलिटिकल जमीन नहीं संभालनी चाहिए? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस नारी शक्ति वंदन अधिनियम के साथ उनके दूर के विचार को पूरा किया है.
यह एक्ट सिर्फ लोकसभा और विधानसभा में रिजर्वेशन देने के लिए नहीं है, बल्कि यह उस सोच को बदलने की कोशिश करता है जिसने सालों से महिलाओं को फ़ैसले लेने की प्रक्रिया से बाहर रखा है. यह भारत के लोकतंत्र को सिर्फ संख्या से आगे बढ़ाकर ज़्यादा संवेदनशीलता की ओर ले जाने की दिशा में एक मजबूत कदम है.'
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ: सीएम रेखा गुप्ता
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'हमने यह सफर बेटी बचाओ से शुरू किया था, एक समय था जब बेटियों को कोख में ही मार दिया जाता था. बेटियों को पढ़ाने का अगला दौर आया, तो हम बेटी पढ़ाओ के दौर में आ गए. मुझे बहुत खुशी है कि आज पीएम मोदी के नेतृत्व में हम 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ' के दौर में आ गए हैं.'
इस कार्यक्रम का मकसद भारत की विकास यात्रा में महिलाओं की भूमिका पर चर्चा करने के लिए अलग-अलग तरह के हितधारकों को एक साथ लाना है. यह कार्यक्रम केंद्र सरकार के महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की दिशा में बड़े पैमाने पर प्रयासों के तहत आयोजित किया जा रहा है और इसका मकसद फैसले लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी के महत्व को बताना है.
यह पंचायत जैसे जमीनी स्तर के सरकारी संस्थानों से लेकर राष्ट्रीय संसद तक सभी सेक्टर में लीडरशिप रोल में महिलाओं की बढ़ती मौजूदगी को भी दिखाएगा. यह इवेंट सितंबर 2023 में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के पास होने के बाद हो रहा है, जो विधायी निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम था.
इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई रिजर्वेशन का प्रावधान है, जिसे भारत के राजनीतिक माहौल के लिए बड़े पैमाने पर बदलाव लाने वाला कदम माना जा रहा है.
अब जब पूरा ध्यान पूरे देश में महिला आरक्षण लागू करने पर है तो इस मुद्दे पर आगे चर्चा करने के लिए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का एक सत्र बुलाया गया है. उम्मीद है कि सम्मेलन इस पहल को लेकर तेजी लाएगा और शासन में ज्यादा सबको साथ लेकर चलने के केंद्र सरकार के वादे को फिर से पक्का करेगा.
आधिकारिक बयान के मुताबिक सम्मेलन में भारत के भविष्य को बनाने में महिलाओं की भागीदारी के महत्व पर भी जोर दिया जाएगा, क्योंकि देश 2047 तक एक विकसित देश बनने के अपने लंबे समय के विजन की ओर बढ़ रहा है, जिसे अक्सर 'विकसित भारत 2047' कहा जाता है.
केंद्र सरकार ने लगातार महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को एक विकसित भारत के अपने विजन का एक अहम हिस्सा बताया है. इस सम्मेलन से इस बात को और मजबूत करने और सबको साथ लेकर चलने वाली और टिकाऊ विकास पाने की कोशिशों को और मजबूत करने की उम्मीद है.
आचार संहिता उल्लंघन मामला: असम चुनाव में कुनकी चौधरी पर पुलिस की कार्रवाई, समन जारी
13 Apr, 2026 12:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव (Assam assembly elections) के बीच सियासी माहौल और गरमा गया है। गुवाहाटी सेंट्रल सीट (Guwahati Central seat) से चुनाव लड़ रहीं युवा उम्मीदवार कुनकी चौधरी (Kunki Chaudhary) को पुलिस ने आदर्श आचार संहिता (model code of conduct) के कथित उल्लंघन के मामले में पूछताछ के लिए समन जारी किया है। उन्हें पान बाजार थाने में तलब किया गया, जहां उन्होंने अपना पक्ष रखा।
कैंपेन टीम पर कार्रवाई, तीन सदस्य हिरासत में
मतदान खत्म होने के कुछ घंटों बाद पुलिस ने इस मामले में उनकी कैंपेन टीम के तीन सदस्यों को हिरासत में लिया था। पुलिस के अनुसार, ये तीनों सदस्य हरियाणा के रहने वाले हैं और चुनाव नियमों का उल्लंघन करते हुए मतदान से 48 घंटे पहले भी क्षेत्र में मौजूद थे।
सबसे युवा उम्मीदवार पर सियासी घमासान
27 वर्षीय कुनकी चौधरी इस चुनाव की सबसे युवा उम्मीदवार हैं और असम जातीय परिषद (AJP) के टिकट पर मैदान में हैं। उनका मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार विजय गुप्ता से है।
इस बीच मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने चौधरी और उनके परिवार पर तीखे आरोप लगाए, जिससे यह मुकाबला और ज्यादा चर्चा में आ गया। सरमा ने सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर उनके परिवार पर सवाल उठाए थे।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
पुलिस ने यह केस लोक सेवक के आदेश में बाधा डालने, चुनाव के दौरान अनुचित प्रभाव डालने और जनप्रतिनिधित्व कानून के उल्लंघन से जुड़ी धाराओं के तहत दर्ज किया है। आरोप यह भी है कि मतदान के दिन भी प्रचार जारी था और सुरक्षा कर्मियों को मतदान केंद्रों के पास ले जाया गया।
चौधरी ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
पूछताछ के बाद कुनकी चौधरी ने कहा कि उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि मुझे अपना पक्ष रखने का मौका मिला। मुझे सिस्टम पर भरोसा है और जांच निष्पक्ष होगी।”
विपक्ष का आरोप-प्रशासन का दुरुपयोग
वहीं, लुरिंज्योति गोगोई ने इसे राजनीतिक दबाव बताते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल प्रशासन और पुलिस का इस्तेमाल कर विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है।
क्यों अहम है यह मामला?
गुवाहाटी सेंट्रल सीट पर मुकाबला इस बार खासा दिलचस्प हो गया है। एक तरफ युवा चेहरा और उभरती राजनीति, तो दूसरी तरफ सत्ताधारी दल की मजबूत पकड़—ऐसे में यह विवाद चुनावी परिणामों पर भी असर डाल सकता है।
UP में कैबिनेट विस्तार की चर्चा गर्म, विनोद तावड़े आज करेंगे योगी आदित्यनाथ से अहम बैठक
13 Apr, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Uttar Pradesh Politics: उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज हो गई हैं. रविवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े लखनऊ दौरे पर रहे. इस दौरान उन्होंने एक दर्जन से अधिक पार्टी के नेताओं से की मुलाकात की है. तावड़े ने पार्टी के नेताओं से मुलाकात करते हुए मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया. विनोद तावड़े के लखनऊ दौरे के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार किया जाएगा.
जानकारी के मुताबिक, विनोद तावड़े ने इस दौरान यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ विशेष बैठक की. इसके बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना से भी मुलाकात की. तावड़े ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक से अलग-अलग बैठकें कर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा की. तावड़े के लखनऊ दौरे के बाद संगठन और सरकार में संभावित बदलावों को लेकर मंथन तेज हो गया है.
CM योगी से करेंगे मुलाकात
विनोद तावड़े आज सोमवार को सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात करेंगे. इसके बाद तावड़े दिल्ली रवाना होंगे, जहां केंद्रीय नेताओं से मुलाकात करेंगे. वहां पर प्रदेश की जमीनी हकीकत को लेकर हाईकमान के पास रिपोर्ट सौंपेंगे. इसके साथ ही भाजपा की नई टीम बनाने एवं राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भी मुहर लगने की संभावना है.
रविवार को तावड़े ने इन नेताओं से की मुलाकात
पंकज चौधरी, यूपी बीजेपी अध्यक्ष
धर्मपाल, संगठन महामंत्री यूपी
केशव मौर्य, डिप्टी सीएम, यूपी
बृजेश पाठक, डिप्टी सीएम, यूपी
भूपेन्द्र चौधरी, पूर्व यूपी बीजेपी अध्यक्ष
धर्मपाल सिंह लोधी, कैबिनेट मंत्री
हरीश द्विवेदी, पूर्व सांसद व प्रभारी असम
रमापति राम त्रिपाठी, पूर्व यूपी बीजेपी अध्यक्ष
सूर्य प्रताप शाही, कैबिनेट मंत्री
सुरेश खन्ना, कैबिनेट मंत्री
बंगाल को विभाजित करने की कोशिश’—ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरो
13 Apr, 2026 10:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने केंद्र सरकार (Central government) पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि बंगाल को तीन हिस्सों में बांटने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के कुछ इलाकों को बिहार और ओडिशा में मिलाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे वहां रहने वाले बंगालियों को परेशान किया जा सके।
बांकुरा जिले में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने केंद्र और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा परिसीमन विधेयक के जरिए पश्चिम बंगाल का पुनर्गठन करना चाहती है, जिससे राज्य की भौगोलिक और सामाजिक संरचना प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव ड्यूटी पर तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जांच के नाम पर महिलाओं के साथ अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर टीएमसी सरकार को गिराने के लिए बड़ी साजिश रचने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी टीएमसी को सत्ता से हटाने के लिए 1000 करोड़ रुपये की डील की गई है। इस दौरान उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर के एक वायरल वीडियो का जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर भाजपा नेताओं, जिनमें सुवेंदु अधिकारी भी शामिल हैं, के साथ संपर्क की बात कही गई है।
ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को भी निशाने पर लिया और इसे हाल के समय का “देश का सबसे बड़ा घोटाला” बताया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार दोबारा सत्ता में आती है, तो केंद्र द्वारा लाए गए सभी जनविरोधी कानूनों को रद्द कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2026 में केंद्र की मौजूदा सरकार सत्ता से बाहर हो सकती है और तब नीतियों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
दिल्ली में डेरा, कर्नाटक में बदलाव के संकेत—कैबिनेट से लेकर मुख्यमंत्री तक पर चर्चा
13 Apr, 2026 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के भीतर कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की मांग को लेकर असंतोष के स्वर उभरने लगे हैं। ताजा घटनाक्रम में करीब 30 वरिष्ठ कांग्रेस विधायक दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं, जिससे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सरकार पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। ये विधायक दिल्ली में आलाकमान, विशेषकर राहुल गांधी से मुलाकात कर कैबिनेट में जगह देने की गुहार लगा सकते हैं। या फिर मुख्यमंत्री बदलने की प्रक्रिया का हिस्सा होने की भी आशंका जताई जा रही है।
विधायकों के इस कदम का मुख्य उद्देश्य कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल करवाना है। कांग्रेस विधायक बेलूर गोपालकृष्ण ने इस गुट की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि कई ऐसे नेता हैं जिन्हें तीन से पांच बार मंत्री बनने का मौका मिला है। अब समय आ गया है कि उन वरिष्ठ सदस्यों को अवसर दिया जाए जो अब तक वंचित रहे हैं। वहीं, विधायक अशोक पाटन ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री ने पहले दो साल बाद बदलाव के संकेत दिए थे, लेकिन अब तीन साल बीत जाने के बाद भी फेरबदल का इंतजार बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि केवल अनुभवी नेता ही नहीं, बल्कि पहली बार जीतकर आए विधायक भी मंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी मजबूती से पेश कर रहे हैं। मांड्या से विधायक रविकुमार गौड़ा ने बताया कि लगभग 38 नए विधायकों ने नेतृत्व को पत्र लिखकर मांग की है कि प्रस्तावित फेरबदल में उनमें से कम से कम पांच को मंत्री बनाया जाए। उनका तर्क है कि राज्य की सेवा के लिए नए दृष्टिकोण की भी आवश्यकता है। वरिष्ठ विधायकों की मांग है कि कम से कम 20 नए चेहरों को कैबिनेट में स्थान मिले। इस बीच, विपक्ष ने सत्तारूढ़ दल की इस आंतरिक खींचतान पर निशाना साधा है। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने दावा किया कि यह दिल्ली यात्रा केवल मंत्री पद के लिए नहीं, बल्कि नेतृत्व परिवर्तन के दबाव का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायकों का एक गुट उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की पैरवी कर रहा है, जबकि दूसरा गुट सिद्धारमैया को बनाए रखना चाहता है। हालांकि, दिल्ली गए विधायकों ने इसे केवल कैबिनेट में उचित प्रतिनिधित्व की मांग बताया है। अब सारा फैसला कांग्रेस आलाकमान और मुख्यमंत्री के हाथ में है कि वे इस असंतोष को कैसे शांत करते हैं।
परिसीमन पर घमासान: सोनिया गांधी ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
13 Apr, 2026 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Sonia Gandhi Women Reservation: देश में इन दिनों महिला आरक्षण को लेकर खूब चर्चा हो रही है. इसको लेकर संसद का सत्र भी बुलाया गया है. बीजेपी भी विपक्ष को इस विधेयक के लिए एकजुट करने में लगी हुई है. इस बीच कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने सोमवार को महिला आरक्षण को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं.
सोनिया गांधी ने द हिन्दू (अखबार) में लिखा कि पीएम विपक्षी दलों से उन बिलों का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं. जिन्हें सरकार संसद के विशेष सत्र में जबरदस्ती पास कराना चाहती है. सोनिया ने सवाल उठाया कि ये सत्र ऐसे समय में क्यों बुलाया जा रहा है जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव अभियान अपने चरम पर है.
सोनिया गांधी ने मंशा पर उठाए सवाल
सोनिया गांधी ने कहा कि इस समय पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव प्रचार चल रहा है. इसके साथ ही संसद के सत्र में विधेयक को पास कराने की तैयारी चल रही है. इस जल्दबाजी का सिर्फ एक ही मकसद राजनीतिक फायदा उठाना है.
सरकार ने 2023 में ही ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को संसद में पास कर लिया था, हालांकि उसी समय ये भी तय किया गया था कि इसे अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू किया जाएगा. इस जल्दबाजी से बीजेपी राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है.
किस वजह से की जा रही जल्दबाजी
सोनिया गांधी ने सरकार की तरफ से हो रही जल्दबाजी पर भी सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार महिला आरक्षण की वजह से इतनी जल्दबाजी नहीं कर रही है. इसकी असली वजह परिसीमन है. उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ तो पहले ही पारित हो चुका है. जनगणना के बिना अचानक इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है?
सोनिया गांधी ने दी सलाह
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रक्रिया में पारदर्शिता मायने रखती है. लोकतंत्र सिर्फ हिसाब-किताब नहीं चलता है बल्कि निष्पक्षता भी अहम मायने रखता है .एजेंडा साझा किए बिना ही 16 अप्रैल से स्पेशल सेशन बुलाया गया, जो इसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है.
सोनिया गांधी ने कहा कि पहले विधानसभा चुनावों के बाद इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए. जिसमें सभी दलों की राय ली जाए. इसके बाद मानसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का असल मकसद जाति जनगणना के मुद्दे को भटकाना और टालना है.
उत्तराखंड दौरे को लेकर सियासत तेज, कांग्रेस ने PM मोदी पर साधा निशाना
12 Apr, 2026 12:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: मसूरी में कार्यकर्ताओं सम्मेलन में भाग लेने के बाद उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा सुभाष रोड स्थित गुरु नानक वेडिंग पॉइंट पहुंची. जहां उन्होंने पछुवादून, परवादून में कार्यकर्ताओं के साथ संवाद स्थापित किया. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड दौरे पर निशाना साधा है. कहा कि हाल ही में हुए कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ और जोश ने साबित कर दिया है कि उत्तराखंड की जनता अब बदलाव चाहती है.
दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को अपने एक दिवसीय दौरे पर देहरादून आ रहे हैं. इस दौरान प्रधानमंत्री दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे का शुभारंभ करने के साथ ही देहरादून के गढीं कैंट स्थित महिंद्रा ग्राउंड में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे. उनके दौरे पर सांसद व उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने कहा कि हमेशा देखा गया है कि जब भी किसी राज्य में चुनाव आता है, तब चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आधे कच्चे आधे पक्के प्रोग्राम्स के साथ वहां पहुंच जाते हैं. उसके बाद उद्घाटनों का सिलसिला भी शुरू हो जाता है.
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता को डबल इंजन की सरकार से बड़ी उम्मीदें थी. लेकिन डबल इंजन की सरकार से उत्तराखंड के निवासियों को कोई लाभ नहीं मिल पाया. बल्कि इसके विपरीत डबल इंजन की सरकार ने उत्तराखंड में बाहर के ऐसे लोगों को संरक्षण दिया और काम दिया. उसका कोई भी फायदा उत्तराखंड की जनता को नहीं हुआ. यहां के युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिल पाये और युवाओं व लोगों को कोई काम करने का भी फायदा नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हैं कि यहां के युवा पलायन करने को मजबूर हैं.
उन्होंने इस दौरान पलायन ,बेरोजगारी पर भी सरकार को घेरा है. कमारी शैलजा का कहना है कि हाल ही में हुए कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ और जोश ने साबित कर दिया है कि उत्तराखंड की जनता अब बदलाव चाहती है. उन्होंने कहा अभी तो यह शुरुआत है और हमने पूरे प्रदेश का दौरा करने की रणनीति बनाई है. ताकि कांग्रेस पार्टी को चुनाव में पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतारा जा सके. बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड दौरे को लेकर शासन-प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं और शासन प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. कार्यक्रम स्थल और सुरक्षा व्यवस्थाओं को पुख्ता किया जा रहा है.
चुनावी रण में कांग्रेस के दिग्गज, राहुल, प्रियंका और खड़गे करेंगे जोरदार प्रचार
12 Apr, 2026 10:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: कांग्रेस के टॉप तीन नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खड़गे अब अपना ध्यान तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल पर लगा रहे हैं, जहां वे आने वाले दिनों में ज़ोरदार कैंपेन करने का प्लान बना रहे हैं.
तमिलनाडु में कैंपेन 21 अप्रैल को खत्म हो जाएगा, जिससे कांग्रेस मैनेजरों को 23 अप्रैल को वोटिंग से पहले करीब 10 दिन का समय मिलेगा. पश्चिम बंगाल में पहले फेज के चुनाव के लिए कैंपेन 23 अप्रैल को वोटिंग से पहले 21 अप्रैल को खत्म हो जाएगा और दूसरे फेज के लिए कैंपेन 29 अप्रैल को वोटिंग से पहले 27 अप्रैल को खत्म हो जाएगा.
कांग्रेस के अंदर के लोगों ने बताया कि तीनों टॉप नेताओं के कैंपेन की डिटेल्स पर तमिलनाडु में काम हो रहा है, जहाँ ये नेता कांग्रेस-डीएमके अलायंस को आगे बढ़ाएंगे और पश्चिम बंगाल में जहाँ वोट शेयर बढ़ाने के साथ-साथ असेंबली में कुछ सीटें जीतने पर फोकस है.
कांग्रेस तमिलनाडु में 234 सीटों में से 28 पर चुनाव लड़ रही है, जहां डीएमके बड़ी पार्टी है, लेकिन पश्चिम बंगाल में पुराने साथी लेफ्ट पार्टियों को छोड़ने के बाद सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है. ग्रैंड ओल्ड पार्टी और लेफ्ट पार्टियों ने पश्चिम बंगाल में 2021 का चुनाव एक साथ लड़ा था लेकिन अपना अकाउंट नहीं खोल पाई थी. टीएमसी के राज वाले राज्य में कांग्रेस को सिर्फ 4 फीसदी वोट शेयर मिला था.
दोनों राज्यों में से तमिलनाडु में उम्मीदें ज्यादा अच्छी है जहाँ कांग्रेस ने 2021 में 25 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 19 जीती थी. फिर भी कांग्रेस हाईकमान ने पश्चिम बंगाल को बराबर समय देने का फैसला किया, जहां वह लंबे समय में विकास की उम्मीदें देख रही है.
कांग्रेस ने 28 सीटें पाने के लिए डीएमके के साथ कड़ी बातचीत की. इसने तमिलनाडु के नेताओं की अगुवाई में अपना कैंपेन पहले ही शुरू कर दिया है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि आने वाले दिनों में टॉप तीन नेताओं की मौजूदगी से जोर मिलेगा.
ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) की तमिलनाडु इंचार्ज सेक्रेटरी निवेदित अल्वा ने ईटीवी भारत को बताया, 'टॉप लीडरशिप निश्चित रूप से राज्य में कैंपेन करेगी. वे असम, केरल और पुडुचेरी में कैंपेन में बिजी थे, जहां 9 अप्रैल को वोटिंग हुई. तमिलनाडु के लिए उनके शेड्यूल पर काम किया जा रहा है.'
कांग्रेस के अंदर के लोगों ने कहा कि पार्टी कैंपेन का फोकस गठबंधन की एकता पर होगा और इसी मकसद से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ एक जॉइंट रैली कर सकते हैं, जिन्हें वह प्यार से 'मेरा भाई' कहते हैं. अल्वा ने कहा, 'हमारा फीडबैक है कि गठबंधन को एक और टर्म के लिए लोगों का सपोर्ट मिल रहा है.'
टॉप तीन नेताओं के दौरे से पहले तमिलनाडु के लिए एआईसीसी के सीनियर ऑब्जर्वर मुकुल वासनिक ने तेलंगाना और कर्नाटक के सीनियर नेताओं के साथ कैंपेन स्ट्रेटेजी का रिव्यू किया, जिन्हें कांग्रेस द्वारा लड़ी जा रही 28 सीटों में से हर एक पर ऑब्जर्वर के तौर पर तैनात किया गया है.
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस मैनेजरों ने राहुल, प्रियंका और खड़गे की तीन-तीन रैलियां करने का प्लान बनाया है जो मालदा, मुर्शिदाबाद, नॉर्थ दिनाजपुर, पुरुलिया और दार्जिलिंग इलाकों पर फोकस करेंगी. अंदर के लोगों ने कहा कि खड़गे के कूच बिहार, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी जैसे दलित-बहुल इलाकों में रैलियां करने की संभावना है.
खड़गे ने 7 अप्रैल को पार्टी का मैनिफेस्टो लॉन्च किया. कांग्रेस ने एससी, एसटी और मुस्लिम कैंडिडेट्स को ज़्यादा टिकट दिए हैं और सत्तारूढ़ टीएमसी और विपक्षी बीजेपी को एक ही सिक्के के दो पहलू मानकर खुद को तीसरे ऑप्शन के तौर पर पेश करने का प्लान बनाया है.
पिछले कुछ सालों में राज्य के वोटर्स ने टीएमसी के राज के साथ-साथ सेंटर में बीजेपी की गवर्नेंस भी देखी है. वे एक ही सिक्के के दो पहलू जैसे हैं. राज्य में पिछले कुछ सालों में ज्यादा डेवलपमेंट नहीं हुआ है और लोगों को ऊँची कीमतों और बेरोजगारी से राहत चाहिए.
लोकल इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की जरूरत है. कांग्रेस खुद को एक भरोसेमंद ऑप्शन के तौर पर पेश करेगी. हमें कुछ सीटें जीतने की उम्मीद है, हालाँकि मकसद पूरे राज्य में पार्टी को फिर से खड़ा करना है.' एआईसीसी के पश्चिम बंगाल इंचार्ज गुलाम अहमद मीर ने ईटीवी भारत को बताया.
'टीएमसी और बीजेपी सिर्फ पब्लिसिटी पाने के लिए एक-दूसरे से लड़ रही हैं. कोई भी एजुकेशन, हेल्थ और बेरोजगारी के बारे में बात नहीं कर रहा है. कांग्रेस ही पश्चिम बंगाल की खोई हुई शान और आम लोगों के हक वापस दिला सकती है.' स्टेट यूनिट चीफ शुभंकर सरकार ने ईटीवी भारत को बताया. वह श्रीरामपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.
मोहन भागवत ने बताया संघ स्थापना का कारण, हिंदू समाज में एकता की कमी
12 Apr, 2026 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने तेलंगाना पहुंचे थे. यहां उन्होंने कहा कि केशव बलिराम हेडगेवार ने संघ की स्थापना हिंदू समाज को एक करने के लिए की थी. उन्होंने कहा कि हेडगेवार का मानना था कि समाज में एकता की कमी ही बार-बार गुलामी की बड़ी वजह रही है. संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदू समाज में आज भी एकता की कमी है. जबकि इस समाज में अलग-अलग विचारों और परंपराओं का सम्मान किया जाता है.
संघ प्रमुख मोहन भागवत तेलंगाना के निजामाबाद पहुंचे थे. यहां केशव बलिराम हेडगेवार का पैतृक गांव है. उन्होंने कहा कि हिंदुत्व का अर्थ सभी के साथ सामंजस्य के साथ रहना और विविधता का सम्मान करना है. हेडगेवार चाहते थे कि समाज मजबूत, निडर और गुणवान बने.
मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस का पूरा काम इसके स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत पर आधारित है, न कि किसी की कृपा पर आधारित है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि संगठन के कामों में किसी की कृपा की कमी के कारण भी कभी बाधा नहीं आई.
क्यों की गई थी संघ की स्थापना?
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हिंदुत्व का मतलब दूसरों के साथ मिलकर रहना होता है. इसमें अपने रास्ते पर चलना और बाकी लोगों का सम्मान करना है. RSS की प्रार्थना भी इन्हीं गुणों को दिखाती है और शाखा में आने वालों में यही संस्कार विकसित होते हैं. उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना किसी के खिलाफ नहीं की गई थी. न तो इसका मकसद किसी पर हमला करना था. इसकी स्थापना तो मातृभूमि को गुलामी से मुक्त कराने के लिए की गई थी.
एकता की कमी का महत्व
भागवत ने आगे कहा कि हेडगेवार ने यह महसूस किया कि ब्रिटिश शासन को खत्म करने के लिए सिर्फ राजनीतिक और हथियारबंद विरोध ही काफी नहीं होगा. बल्कि समाज में मौजूद आंतरिक कमजोरी को भी दूर करना होगा. उनके अनुसार, समस्या केवल बाहरी शक्तियों की नहीं थी, बल्कि हमें अपने समाज के भीतर भी एकता की कमी को समझना होगा. जिसे दूर करना होगा. ताकि इस तरह के संघर्ष बार-बार न करना पड़े.
तेजस्वी यादव का आरोप- भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रही है
11 Apr, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना|तेजस्वी यादव ने शनिवार को राजधानी पटना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर बड़ा हमला बोला है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) देश का संविधान बदलना चाहते हैं, लेकिन अल्पसंख्यक समाज के लोगों को इससे सचेत रहने की जरूरत है। उन्होंने यह बातें श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में राष्ट्रीय जनता दल के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की तरफ से आयोजित अभिनंदन समारोह के दौरान कहीं।
अपने संबोधन में तेजस्वी यादव ने मौजूदा दौर को समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश में आरएसएस और बीजेपी संविधान को खत्म करके अपना संविधान थोपना चाहते हैं। यह वक्त आपस में लड़ने का नहीं है, बल्कि एकजुट रहने का है। तेजस्वी ने यह भी साफ किया कि अगर कोई भी व्यक्ति भड़काऊ भाषण देता है, तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, भले ही वह खुद ही क्यों न हो। उनका जोर रहा कि देश में लोकतंत्र को बचाने और संविधान को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी हम सबकी है।
राजद नेता ने भाजपा को दी चेतावनी
राजद नेता ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव का जिक्र करते हुए भाजपा को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि वे लालू प्रसाद के बेटे हैं और झुकने वाले नहीं हैं। तेजस्वी ने याद दिलाया कि यही बिहार है, जहां उनके पिता लालू प्रसाद ने लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को रोका था और उन्हें गिरफ्तार किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तेजस्वी कानून-व्यवस्था का सवाल उठाते हैं, तो उन पर झूठे मुकदमे किए जाते हैं। उनका सवाल था कि जब लालू प्रसाद कभी नहीं झुके, तो उनका बेटा कैसे झुकेगा?
बिहार विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए तेजस्वी यादव ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दोहराया कि राजद विचार के पक्के हैं और उन्होंने भाजपा के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया। उनका कहना था कि पार्टी ने अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं किया है, भले ही इसके लिए संघर्ष करना पड़ा हो।
तेजस्वी यादव का केंद्र सरकार की नीतियों पर हमला
केंद्र सरकार की नीतियों पर हमला बोलते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि इस सरकार ने कई ऐसे बिल लाए हैं जिनका राजद ने हमेशा विरोध किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो भी बिल अल्पसंख्यकों को तबाह करने के लिए लाए गए हैं या भविष्य में लाए जाएंगे, उनका हमेशा पुरजोर विरोध किया जाएगा। तेजस्वी ने चिंता जताई कि पहले राजद की सरकार में अल्पसंख्यक समाज के 35 से 40 विधायक होते थे, लेकिन अब उनकी संख्या घट रही है। उन्होंने असम में हुए परिसीमन का उदाहरण भी दिया, जहां 30 मुस्लिम सीटें घटकर 20 रह गईं। उन्होंने इसे संविधान में बदलाव करने की साजिश का हिस्सा बताया।
तेजस्वी यादव ने अल्पसंख्यक समाज के लोगों को एकजुट रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे पार्टी को मजबूत करें और संघर्ष के इस दौर में फिरकापरस्त ताकतों से लड़ें। उन्होंने स्वीकार किया कि शायद पूर्व में उनसे कोई गलती हुई होगी, लेकिन उन गलतियों को सुधारा जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि समय की मांग है कि सब एक साथ रहें, काम करें और किसी भी तरह के भड़कावे में न आएं। उनका संकल्प था कि एकजुट होकर बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत किया जाएगा ताकि संविधान और लोकतंत्र को बचाया जा सके।
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