राजनीति
सोनम वांगचुक के फैसले पर विपक्ष का वार, संजय राउत बोले- सच सामने आना चाहिए
24 Jul, 2026 12:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 26 दिन लंबे अनशन को समाप्त करने के तरीके पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। राउत ने कहा कि सोनम वांगचुक का उपवास जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों और आम जनता की उपस्थिति में खत्म होना चाहिए था। उन्होंने आंदोलन की समाप्ति पर खुशी तो जताई, लेकिन अनशन तुड़वाने के दौरान दो केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी को लेकर सरकार की मंशा पर संदेह जताया है।
केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी पर उठाए सवाल
संजय राउत ने कहा कि जिस सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ 26 दिनों तक यह देशव्यापी आंदोलन चला, उसी सरकार के दो मंत्रियों की उपस्थिति में अनशन का समाप्त होना कई गंभीर सवाल पैदा करता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि सोनम वांगचुक को दिए गए सभी आश्वासनों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राउत ने सवाल उठाया कि जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की प्रमुख मांग पूरी ही नहीं हुई, तो आखिर इतनी जल्दी अनशन खत्म करने की क्या वजह थी?
शिक्षा मंत्री को बचाने का आरोप और मुंबई में प्रदर्शन का ऐलान
शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने केंद्र सरकार पर शिक्षा मंत्री को बचाने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अनशन खत्म करने के लिए अस्पताल के बजाय जंतर-मंतर पर घायल छात्रों या साथी आंदोलनकारियों के हाथों जूस पीना अधिक उपयुक्त होता, जिससे आंदोलन की गरिमा बनी रहती। इसके साथ ही राउत ने घोषणा की कि मुंबई में इस मुद्दे को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में 'राष्ट्रगान आंदोलन' और रविवार को उद्धव ठाकरे व राज ठाकरे की अगुआई में एक विशाल मार्च निकाला जाएगा।
सोनम वांगचुक के त्याग की सराहना और सरकार पर हमला
राउत ने कहा कि 26 दिनों तक युवाओं और शिक्षा प्रणाली की रक्षा के लिए भूखे रहना एक महान त्याग है और इसके लिए सोनम वांगचुक पूरे सम्मान के पात्र हैं। हालाँकि, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जंतर-मंतर के आंदोलन को कुचलने और वांगचुक के साथ अमानवीय व्यवहार करने का प्रयास किया। अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने भाजपा सरकार पर दल-बदल विरोधी कानून की धज्जियां उड़ाने और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखने का भी गंभीर आरोप लगाया।
वांगचुक के अनशन खत्म होने के बाद RSS का बड़ा बयान, विदेशी एजेंसी का लगाया आरोप
24 Jul, 2026 12:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) विवाद और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने पर राजनीति और बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिनों की भूख हड़ताल खत्म करने के बाद अब इस पूरे घटनाक्रम पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
RSS नेता इंद्रेश कुमार का बड़ा बयान
आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने इस आंदोलन पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सोनम वांगचुक और प्रदर्शन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बीच का अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक का आंदोलन और सीजेपी दोनों अलग-अलग विषय हैं। इसके साथ ही उन्होंने वांगचुक को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि उन्हें यह समझना होगा कि उनके निष्पक्ष आंदोलन पर विदेशी ताकतों का प्रभाव बढ़ने लगा है, जिससे उन्हें दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
विदेशी शक्तियों की कठपुतली न बनने की सलाह
इंद्रेश कुमार ने बातचीत में आगे कहा कि आंदोलनकारियों को अपनी मांगों और तरीकों को पूरी तरह से भारतीय बनाए रखना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि किसी भी सामाजिक या छात्र आंदोलन को विदेशी ताकतों के हाथों की कठपुतली नहीं बनने देना चाहिए। संघ नेता के इस बयान के बाद नीट परीक्षा विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और ज्यादा गरमाने की संभावना है।
संसद में नहीं थमा पेपर लीक विवाद, लोकसभा स्थगित, राज्यसभा में हंगामा जारी
24 Jul, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होते ही जोरदार हंगामा देखने को मिला। लोकसभा की बैठक प्रारंभ होते ही विपक्षी सांसदों ने नीट परीक्षा धांधली और विरोध कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर नारेबाजी की। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह परीक्षार्थियों के हितों की रक्षा करने और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी बीच, पिछले 26 दिनों से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार और जनप्रतिनिधियों के आश्वासन के बाद अपना उपवास समाप्त कर दिया है।
अस्पताल पहुंचे केंद्रीय मंत्री और टूटा अनशन
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की। मंत्रियों ने अस्पताल में भर्ती वांगचुक से छात्रों की चिंताओं और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। सरकार की ओर से मिले सकारात्मक रुख और रचनात्मक कदम उठाने के भरोसे के बाद सोनम वांगचुक ने अपना 26 दिनों से चला आ रहा अनशन खत्म करने का निर्णय लिया।
संसदीय आश्वासन और सरकार की प्रतिबद्धता
सोनम वांगचुक को केंद्र सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों द्वारा भरोसा दिलाया गया है कि देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवालों को संसद के पटल पर उठाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कठोरतम कदम उठाने के लिए संकल्पबद्ध है।
संसद परिसर में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन
एक तरफ अनशन समाप्त होने से बड़ी राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ संसद परिसर में सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्षी दलों के सांसद परिसर में एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष नीट-यूजी पेपर लीक मामले की नैतिक जिम्मेदारी तय करने और प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है।
सोनिया गांधी बोलीं- छात्रों के साथ हो रहा दुश्मनों जैसा व्यवहार, सरकार पर साधा निशाना
24 Jul, 2026 10:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। एक समाचार पत्र में लिखे अपने लेख के माध्यम से सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार ने शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनों का जवाब कायरता और क्रूरता से दिया है तथा देश के युवाओं के साथ राष्ट्र के दुश्मनों जैसा व्यवहार किया है। सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार से छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को तुरंत रोकने और उनसे संवाद शुरू करने की अपील की है। उन्होंने 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई कार्रवाई को कलंक का दिन करार दिया।
युवाओं के साथ क्रूर व्यवहार
सोनिया गांधी ने लिखा, "पिछले कुछ हफ्तों से पूरे भारत में छात्र परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के पतन के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांगें सीधी हैं- सरकार से जवाबदेही और शिक्षा सुधार। लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने उनके साहस का जवाब कायरता और क्रूरता से दिया।"
PM मोदी का छात्रों को भरोसा, पेपर लीक पर आएगा नया कानून
24 Jul, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात आंदोलन कर रहे छात्रों के नाम संदेश जारी करते हुए कहा कि पेपर लीक रोकने और दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट के प्रावधान वाला नया बिल ला रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बिल के मसौदे पर शुक्रवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में चर्चा की जाएगी और कैबिनेट सहयोगियों के सुझावों के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में कहा, "मैं जानता हूं कि पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है। लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए यह बहुत ही पीड़ादायक है। इसलिए पिछले ढाई महीनों में अनेक वैधानिक कदम उठाए गए और गुनहगारों को जेल भेजा गया।" उन्होंने आगे कहा, "हमारा सबसे महत्वपूर्ण जिम्मा था कि विद्यार्थियों का एक वर्ष बर्बाद न हो। सरकार ने अपनी पूरी शक्ति का उपयोग कर कम से कम समय में 22 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा कराने का प्रबंध किया, जिसका परिणाम भी घोषित हो चुका है।"
सोमवार को संसद में पेश होगा विधेयक
प्रधानमंत्री ने बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा के प्रावधान वाले मसौदे को सोमवार से शुरू हो रहे संसद के दूसरे सप्ताह के दौरान सदन में जल्द से जल्द पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। इससे पहले गुरुवार सुबह भी पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
CJP प्रोटेस्ट पर सियासत तेज, ओवैसी बोले- क्या प्रदर्शन करना अब खतरा माना जाएगा?
23 Jul, 2026 04:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में नया विवाद खड़ा कर दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा दिल्ली पुलिस आयुक्त को तीन महीने की अवधि के लिए एनएसए के तहत कार्रवाई करने का अधिकार देने के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने युवाओं के आंदोलन को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ने के इस कदम पर तीखे सवाल उठाए हैं।
युवाओं के प्रदर्शन पर कड़े कानूनों का विरोध
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपने अधिकारों और बेहतर भविष्य के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताना सरासर गलत है। उनका मानना है कि सरकार को युवाओं की मांगों और चिंताओं को संवेदनशीलता से सुनना चाहिए, न कि उन पर ऐसे कड़े और सख्त कानून लागू करने की तैयारी करनी चाहिए जो उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करते हों।
लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल
ओवैसी ने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि देश का युवा वर्ग रोजगार और पारदर्शी व्यवस्था के लिए आवाज उठा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ प्रधानमंत्री न्याय और जन-सुनवाई की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस को बिना तुरंत कारण बताए लंबे समय तक हिरासत में रखने वाले अधिकार दिए जा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार हालात को संभालने में नाकाम रहने के बाद अब दमनकारी कानूनों का सहारा ले रही है, जो अभिव्यक्ति की आजादी पर बड़ा हमला है।
गृह मंत्रालय का आदेश और विपक्षी हमला
गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने 19 जुलाई से प्रभावी करते हुए अगले तीन महीनों के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 1980 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई करने की शक्तियां सौंपी हैं। इस फैसले के सामने आने के बाद से ही विपक्षी दल केंद्र सरकार पर हमलावर हैं और इस कदम को लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का प्रयास करार दे रहे हैं।
संवाद बनाम आंदोलन, CJP प्रदर्शन पर सरकार ने चार बार दिया बातचीत का प्रस्ताव
23 Jul, 2026 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नीट (NEET) परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर देशभर के युवाओं में गहरा आक्रोश बना हुआ है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली के पुनर्गठन की मांग को लेकर हो रहा आंदोलन अब राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर से निकलकर देशव्यापी रूप ले चुका है। जगह-जगह जारी प्रदर्शनों और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के बीच अब केंद्र सरकार ने मामले को शांत करने के लिए बातचीत की मेज सजाई है और प्रदर्शनकारियों को बिना किसी पूर्व शर्त के संवाद का निमंत्रण दिया है।
सरकार ने दिए बातचीत के 4 विकल्प
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रदर्शनकारी छात्रों और युवा संगठनों से उग्र आंदोलन का रास्ता छोड़कर वार्ता की राह चुनने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने बीते 24 घंटों में छात्र प्रतिनिधियों को बातचीत के चार अलग-अलग विकल्प दिए हैं। सरकार का रुख पूरी तरह लचीला है—आंदोलनकारी जब चाहें, जितने समय के लिए चाहें, अपनी बात रख सकते हैं। यह वार्ता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के आवास या कार्यालय में आयोजित की जा सकती है।
पारदर्शी चर्चा के लिए तैयार केंद्र सरकार
केंद्रीय मंत्री ने दोहराया कि केंद्र सरकार परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी हर शंका, पेपर लीक के आरोपों और छात्रों की सभी समस्याओं पर खुले दिल से बात करने के लिए तत्पर है। हालांकि, इससे पहले सोमवार को छात्र प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच आयोजित शुरुआती दौर की वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई थी, जिसके बाद सरकार ने पुनः नए सिरे से बातचीत की पेशकश की है।
दोषियों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट की घोषणा
छात्रों के असंतोष को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि परीक्षा धांधली और पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों (Fast-Track Courts) का गठन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और परीक्षा प्रणाली से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त
दूसरी तरफ, दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है, जहां स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई तनातनी को देखते हुए इलाके में कड़ी घेराबंदी की गई है। आंदोलनकारी छात्र शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, पूरी परीक्षा प्रणाली में कड़े सुधारों और तनाव के चलते जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के आश्रितों को वित्तीय सहायता देने की मांग पर अड़े हुए हैं।
NEET मुद्दे पर कांग्रेस का बड़ा आरोप, केंद्र पर पारदर्शिता नहीं बरतने का दावा
23 Jul, 2026 04:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में लगातार हो रही परीक्षा धांधलियों और पेपर लीक के मामलों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं की जिम्मेदारी लेने से लगातार बच रही है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार के शीर्ष मंत्री विपक्ष के जायज सवालों पर गोलमोल जवाब देकर मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने की राजनीति कर रहे हैं।
नड्डा के बयान पर कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा को विपक्ष पर अनर्गल आरोप लगाने के बजाय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री की विफलताओं को स्वीकार करना चाहिए। रमेश के अनुसार, सरकार परीक्षा प्रणाली की पूरी तरह से नाकाम हो चुकी व्यवस्था का बचाव करने में जुटी है, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है।
एनटीए की कार्यप्रणाली और के. राधाकृष्णन समिति की अनदेखी
कांग्रेस नेता ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के गठन की मंशा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं के केंद्रीकरण के उद्देश्य से बनी यह एजेंसी अब पेपर लीक और अनियमितताओं का केंद्र बन चुकी है। उन्होंने याद दिलाया कि 2024 के विवादों के बाद सुधारों का ढांग रचते हुए के. राधाकृष्णन समिति बनाई गई थी। इस समिति ने सुधार के लिए 101 अहम सुझाव दिए थे, लेकिन सरकार ने उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया। एजेंसी के शीर्ष पद को लंबे समय तक अतिरिक्त प्रभार पर चलाना सरकार की इस मुद्दे के प्रति घोर लापरवाही को दर्शाता है।
NEET-UG और UGC-NET परीक्षाओं में गड़बड़ी का आरोप
जयराम रमेश ने हालिया परीक्षाओं के नतीजों पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि नीट-यूजी (NEET-UG) का पेपर लीक होना और परीक्षा का रद्द होना कोई सामान्य चूक नहीं है। इसके अलावा यूजीसी-नेट (UGC-NET) जैसी बड़ी परीक्षाओं में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पीड़ित छात्र और युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे, तो उनके जायज आक्रोश को सुनने के बजाय सरकार ने उन पर पुलिस बल का इस्तेमाल किया। यह पूरी स्थिति शिक्षा मंत्रालय की लचर कार्यप्रणाली और केंद्र सरकार की गलत नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट से मिलेगा जल्द न्याय, अमित शाह ने PM मोदी के फैसले को बताया अहम
23 Jul, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के बढ़ते विवादों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों के निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट (त्वरित अदालतें) स्थापित करने के निर्णय का केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने जोरदार स्वागत किया है। गृह मंत्री ने इस फैसले को युवाओं के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मील का पत्थर करार दिया है।
युवाओं के भविष्य के लिए प्रतिबद्धता का प्रतीक: अमित शाह
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा कि युवाओं का कल्याण और उनका भविष्य सुरक्षित करना मोदी सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक में शामिल दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का यह फैसला सरकार के संकल्प को दर्शाता है। गृह मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ करेंगे, उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा कर सख्त से सख्त सजा दी जाएगी।
प्रधानमंत्री ने दिए कड़े निर्देश
इससे पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से देश के छात्रों को आश्वस्त किया कि युवाओं का हित उनके लिए सर्वोपरि है। उन्होंने जानकारी दी कि पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित की जा रही हैं और संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। प्रधानमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
विपक्ष के प्रदर्शन के बीच रविशंकर प्रसाद का पलटवार
विपक्ष द्वारा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और संसद से लेकर सड़क तक किए जा रहे प्रदर्शनों के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी सरकार के कदम की सराहना की। उन्होंने विपक्षी रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार संसद में हर विषय पर सकारात्मक चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष का उद्देश्य केवल हंगामा और अराजकता फैलाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता गंभीर मुद्दों पर बहस करने के बजाय बिना सूचना के धरना देकर गैर-जिम्मेदाराना राजनीति कर रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर राज्यसभा में हंगामा, नड्डा ने रखा सरकार का पक्ष
23 Jul, 2026 03:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर जारी भारी विरोध प्रदर्शन की गूंज राज्यसभा में भी लगातार सुनाई दे रही है। इस संवेदनशील मुद्दे पर उच्च सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और जोरदार हंगामा देखने को मिला। गतिरोध समाप्त न होने के कारण राज्यसभा की कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
विपक्ष की मांग: शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और तत्काल चर्चा
राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर हमला बोलते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पुरजोर मांग की। खरगे ने सदन में कहा कि सड़कों पर आंदोलन कर रहे युवाओं की आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता। उन्होंने साफ किया कि शिक्षा मंत्री के पद छोड़ने के बाद ही इस मुद्दे पर आगे की कोई बातचीत या चर्चा संभव होगी। विपक्ष ने नियम 267 के तहत अन्य सभी कार्यों को रोककर इस विषय पर तुरंत बहस कराने पर जोर दिया।
जेपी नड्डा का पलटवार: विपक्ष का रवैया गैर-जिम्मेदाराना
विपक्ष की मांगों पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने विपक्षी रवैये को लोकतंत्र विरोधी और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा को तार-तार करके और नारेबाजी के बल पर विपक्ष चर्चा से भाग रहा है। नड्डा ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार नीट सहित हर विषय पर नियम एवं प्रक्रिया के तहत चर्चा कराने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन विपक्ष शर्त रखकर जानबूझकर गतिरोध पैदा कर रहा है।
लगातार दूसरे दिन ठप रही राज्यसभा की कार्यवाही
पेपर लीक विवाद के चलते संसद के उच्च सदन का कामकाज लगातार दूसरे दिन भी बुरी तरह प्रभावित रहा। बार-बार के हंगामे और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। सरकार का कहना है कि सभी राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श कर बहस का समय तय किया जा सकता है, जबकि विपक्ष इस्तीफे की अपनी जिद पर अड़ा हुआ है।
छात्रों से संवाद के लिए सरकार ने बढ़ाया हाथ
संसदीय गतिरोध के बीच केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारी छात्रों से सीधे संवाद की पहल की है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार की ओर से छात्र प्रतिनिधियों को बातचीत के चार अलग-अलग प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वे और जे.पी. नड्डा छात्रों द्वारा तय की गई किसी भी जगह पर उनके प्रतिनिधियों से मुलाकात कर हल निकालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
नितिन नवीन बोले- NEET मामले में सरकार पूरी तरह जवाबदेह, हर सवाल का देंगे उत्तर
23 Jul, 2026 03:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नीट (NEET) परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन ने नीट धांधली के आरोपों को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को संसद के पटल पर सीधी बहस करने की ललकार दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार विपक्ष के सभी सवालों का पारदर्शी और तथ्यपूर्ण जवाब देने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
विपक्ष पर चर्चा से पीछे हटने का आरोप
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी बात रखते हुए नितिन नवीन ने विपक्षी खेमे पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल केवल बाहर हंगामा खड़ा कर रहे हैं, जबकि असलियत में वे सदन के भीतर होने वाली बहस से किनारा कर रहे हैं। भाजपा नेता का मानना है कि यदि इस मुद्दे पर संसद में गंभीर चर्चा होती है, तो देश के युवाओं और आम जनता के सामने विपक्ष का असली चेहरा और उनका दोहरा रवैया साफ हो जाएगा।
युवाओं से जुड़े मुद्दों पर खुली चुनौती
राजग (NDA) सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों और देश के भविष्य से जुड़े किसी भी विषय पर बात करने से पीछे नहीं हट रही है। उन्होंने विपक्षी नेताओं को खुलकर चुनौती दी कि वे सदन के भीतर आएं और नीट सहित युवाओं से जुड़े तमाम मुद्दों पर तर्कसंगत बहस करें। सरकार हर शंका का समाधान करने और हर सवाल का उत्तर देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
राहुल गांधी की राजनीति पर निशाना
विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए नितिन नवीन ने कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और उनके सहयोगियों का इतिहास ही संसदीय चर्चाओं से भागने का रहा है। बहस का सामना करने की हिम्मत न होने के कारण ही विपक्षी दल सदन की कार्यवाही में बाधा डालते हैं और स्वस्थ चर्चा से दूरी बनाए रखते हैं।
संसद में नहीं थम रहा बवाल, राज्यसभा 3 बजे तक टली, लोकसभा में भिड़े सत्ता-विपक्ष
23 Jul, 2026 02:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन भी दोनों सदनों में जोरदार हंगामा देखने को मिला, जिसके चलते विधायी कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े विपक्षी सांसदों के उग्र रुख को देखते हुए लोकसभा की बैठक को अगले दिन तक के लिए टाल दिया गया, जबकि राज्यसभा की कार्यवाही को अपराह्न तीन बजे तक स्थगित करना पड़ा।
विपक्ष का हमला और खरगे का सवाल
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए सवाल उठाया कि यदि सरकार बहस कराने के पक्ष में थी, तो उसने विपक्ष की शुरुआती मांग पर तुरंत ध्यान क्यों नहीं दिया? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की देरी के कारण ही स्थिति बिगड़ी और बाद में छात्रों को लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा। खरगे ने आगे कहा कि सत्तापक्ष के सदस्यों द्वारा संसद के मुख्य द्वार को बाधित करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के लिए प्रधानमंत्री की खामोशी को जिम्मेदार ठहराते हुए शिक्षा मंत्री के पद छोड़ने तक अपना विरोध जारी रखने का ऐलान किया।
सत्तापक्ष की पलटवार और भाजपा की सफाई
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इसी प्रतिबद्धता के तहत प्रधानमंत्री ने फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर संसद का समय बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष वास्तव में किसी सार्थक चर्चा में रुचि नहीं रखता, बल्कि केवल बिना पूर्व सूचना के प्रदर्शन करके गैर-जिम्मेदाराना राजनीति में लिप्त है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर संसद में घमासान, दोनों पक्ष आमने-सामने
23 Jul, 2026 12:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन भी नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे पर भारी हंगामा देखने को मिला। गतिरोध के चलते लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद स्थगित करनी पड़ी। एक ओर जहां विपक्ष केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और तुरंत विस्तृत चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ है, वहीं सरकार का कहना है कि वह हर विषय पर बहस के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष चर्चा से भाग रहा है।
"विपक्ष बिना शर्त चर्चा के लिए आए"
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा:
"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया है कि युवाओं के भविष्य के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। सरकार सब कुछ रोककर चर्चा कराने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष इस्तीफे की पूर्व शर्त लगाकर सदन से भाग रहा है। शर्त थोपना यह साबित करता है कि विपक्ष का इरादा चर्चा का नहीं, सिर्फ हंगामा करने का है।"
वहीं, बीजेपी सांसद नितिन नबीन ने विपक्ष को खुली चुनौती देते हुए कहा कि सरकार संसद के पटल पर हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
विपक्ष की मांग: "पहले इस्तीफा, फिर चर्चा"
सरकार के दावों के बीच विपक्ष अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट किया कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा नहीं देते, तब तक कोई सार्थक चर्चा संभव नहीं है। विपक्ष का कहना है कि केवल घोषणाओं से छात्रों का खोया भरोसा वापस नहीं आएगा।
मकर द्वार पर प्रदर्शन और पीएम का ऐलान
सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही संसद परिसर के मकर द्वार पर सरकार और विपक्ष के सांसदों ने आमने-सामने आकर नारेबाजी की। गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा की थी। हालांकि, विपक्षी सांसदों ने इस घोषणा को नाकाफी बताते हुए कहा कि जब तक राजनीतिक जवाबदेही तय नहीं होती, संसद में उनका विरोध जारी रहेगा।
पेपर लीक मामले में सियासी घमासान, कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब
23 Jul, 2026 12:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: पेपर लीक विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट (ट्वीट) के बाद राजनीतिक पारा और चढ़ गया है। प्रधानमंत्री द्वारा दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के ऐलान के तुरंत बाद, कांग्रेस के शीर्ष नेताओं—लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा—ने पीएम पर सीधा हमला बोला है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के ऐलान को अपर्याप्त बताते हुए स्पष्ट किया कि जब तक छात्रों की मुख्य मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक कोई समाधान संभव नहीं है।
राहुल गांधी का सीधा हमला: "शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद होने दिया"
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा:
"आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है। आपने न सिर्फ हमारी शिक्षा व्यवस्था पर पूरा कब्ज़ा होने और उसे बर्बाद होने दिया, बल्कि उसे बढ़ावा भी दिया और इसके ज़िम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया।"
राहुल गांधी ने मांग की कि सरकार को तुरंत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना चाहिए, प्रदर्शनकारी छात्रों से माफी मांगनी चाहिए और छात्रों पर हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रियंका गांधी: "सिस्टम पर से छात्रों का भरोसा पूरी तरह उठ चुका है"
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी पीएम के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्र अपनी बात बिल्कुल साफ रख रहे हैं, लेकिन सरकार किसी और दिशा में जवाब दे रही है। समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए प्रियंका ने कहा कि छात्रों का मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और जांच प्रणाली से पूरी तरह भरोसा उठ चुका है। ऐसे में यदि पुरानी व्यवस्था के तहत ही जांच कराई जाएगी, तो छात्र उसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को अब वास्तविक नेतृत्व दिखाते हुए सबसे पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना चाहिए।
क्या था प्रधानमंत्री का ट्वीट?
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर भरोसा दिलाते हुए लिखा था कि देश के युवाओं का भविष्य और उनका हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने घोषणा की थी कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को त्वरित व कठोर सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएंगे और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, विपक्ष इसे केवल एक बयानबाजी बताकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है।
विपक्ष की मांग के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान पर सरकार का भरोसा बरकरार?
23 Jul, 2026 11:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: नीट पर्चा लीक मामले और छात्रों के आंदोलन पर मचे घमासान के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सरकार का रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार संसद के पटल पर इस संवेदनशील मुद्दे पर विस्तृत और पारदर्शी चर्चा के लिए तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को साफ तौर पर खारिज करते हुए कहा कि सरकार में ऐसी किसी बात पर विचार नहीं हो रहा है।
विपक्ष पर राजनीति और चुनिंदा रुख अपनाने का आरोप
पत्रकार वार्ता के दौरान जेपी नड्डा ने विपक्षी दलों पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए नड्डा ने कहा कि वह राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए सेलेक्टिव रवैया अपना रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि राहुल गांधी को उन राज्यों में हुई पर्चा लीक की घटनाओं पर भी जवाब देना चाहिए जहां कांग्रेस या उनके सहयोगी दलों की सरकारें हैं। नड्डा ने सभी दलों से छात्रों के भविष्य के हित में एकजुट होकर स्थायी समाधान निकालने का आह्वान किया।
संसद में चर्चा की चुनौती और वांगचुक के पत्र पर जवाब
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि पूरा मामला जांच के अधीन है और छात्रों के प्रदर्शन को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से संसद में चर्चा का समय तय करने को कहा ताकि सरकार सभी तथ्यों के साथ जवाब रख सके। दूसरी ओर, सोनम वांगचुक द्वारा आंदोलनकारी छात्रों पर दंडात्मक कार्रवाई न करने के आश्वासन के बाद अनशन समाप्त करने के संदर्भ में नड्डा ने बताया कि सरकार उनके पत्र का गंभीरता से अध्ययन कर रही है और जल्द ही इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दी जाएगी।
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