राजनीति
21 करोड़ के मालिक हैं नए शिक्षा मंत्री, पर कार नहीं उनके पास
26 Jul, 2026 11:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कर्नाटक से भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उनके पास 21 करोड़ की संपत्ति पर कार नहीं है। प्रह्लाद जोशी वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उन्हें अपने वर्तमान कर्तव्यों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का प्रभार संभालने का निर्देश दिया है।2024 के लोकसभा चुनाव हलफनामे के अनुसार, प्रह्लाद जोशी और उनके परिवार की कुल संपत्ति 21.09 करोड़ रुपये है, जबकि उन पर 8.01 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। परिवार के पास 8.97 करोड़ रुपये की चल और 12.11 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है। चल संपत्ति में प्रह्लाद जोशी के नाम 2.72 करोड़, उनकी पत्नी के नाम 5.93 करोड़ और बेटी के नाम 32 लाख रुपये हैं।
इसमें नकद, बैंक जमा, म्यूचुअल फंड, शेयर, पीएफ और आभूषण शामिल हैं। अचल संपत्ति की बात करें तो प्रह्लाद जोशी के नाम 11.24 करोड़ और उनकी पत्नी के नाम 86.39 लाख रुपये की संपत्ति है, जिसमें हुबली और बेंगलुरु में आवासीय-व्यावसायिक भूमि व मकान शामिल हैं। 27 नवंबर 1962 को जन्मे प्रह्लाद जोशी ने अपनी स्कूली शिक्षा हुबली से पूरी की और 1983 में कर्नाटक विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने वर्ष 2004 में धारवाड़ लोकसभा सीट से जीत दर्ज कर पहली बार संसद में कदम रखा था। वे लगातार पांच बार इस सीट से सांसद चुने जा चुके हैं और राज्य में भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। उनकी पत्नी का नाम ज्योति जोशी और बेटी का नाम अनन्या जोशी है। हलफनामे के अनुसार, प्रह्लाद जोशी के पास अपनी कोई निजी कार या बाइक नहीं है। उनके पास 1 लाख रुपये की नकद राशि तथा विभिन्न बैंकों में खाते हैं। उन्होंने निजी कंपनियों में शेयर और म्यूचुअल फंड में निवेश किया है। इसके अलावा, उन्होंने कुछ व्यक्तियों को व्यक्तिगत ऋण भी दिया हुआ है और उनके नाम पर कोई विवादित देनदारी नहीं है। अब एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता के रूप में उन पर शिक्षा मंत्रालय की व्यवस्था को सुचारू बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देना चाहते थे! छात्र आंदोलन पर बीजेपी नेता का बड़ा खुलासा
26 Jul, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नीट परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी हंगामे के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पद छोड़ने के बाद उनके इस कदम को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इसी गहमागहमी के बीच मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू होते ही दिया था प्रस्ताव
इंदौर में मीडिया से बातचीत करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और विपक्ष का विरोध प्रदर्शन शुरू होने के पहले ही दिन अपने पद से हटने की मंशा जाहिर कर दी थी। विजयवर्गीय के अनुसार, शिक्षा मंत्री ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने यह स्पष्ट कर दिया था कि यदि संगठन या सरकार की साख के लिए आवश्यक हो, तो वे स्वेच्छा से अपना पद छोड़ने को तैयार हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज
कैलाश विजयवर्गीय के इस खुलासे के बाद भाजपा के आंतरिक घटनाक्रम और भावी रणनीति को लेकर सियासी चर्चाएं और ज्यादा गर्म हो गई हैं। एक तरफ जहां विपक्ष इस इस्तीफे को अपनी नैतिक जीत बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर इसे जिम्मेदारी और शुचिता की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। फिलहाल इस पूरे मामले पर केंद्रीय नेतृत्व की ओर से आगामी कदमों का इंतजार किया जा रहा है।
'धोखेबाज भतीजे' पर CM शुभेंदु का करारा प्रहार, सेबाश्रय शिविर घोटाले में दी चेतावनी
25 Jul, 2026 04:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन एक तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। इस दौरान विधानसभा में 'सेबाश्रय' स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन में हुए कथित भ्रष्टाचार और भारी अनियमितताओं का मामला प्रमुखता से उठाया गया।
सत्र के दौरान पेश किए गए बयानों और चर्चाओं में यह बात सामने आई कि डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र में पिछली व्यवस्था के दौरान आयोजित किए गए इन स्वास्थ्य शिविरों की आड़ में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं।
स्वास्थ्य शिविरों के नाम पर अनियमितताओं के गंभीर आरोप
चर्चा के दौरान यह बात उठाई गई कि 'सेबाश्रय' शिविरों के नाम पर हुई वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर दक्षिण 24 परगना जिले के बिष्णुपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों से स्थानीय लोगों द्वारा पुलिस में बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।
सदन के भीतर इस प्रकरण से जुड़े कुछ दस्तावेज और तस्वीरें भी प्रस्तुत किए गए, जिनके माध्यम से यह दावा किया गया कि इन शिविरों में इलाज या स्वास्थ्य सेवाओं के दौरान कई लोगों को गंभीर शारीरिक नुकसान उठाना पड़ा था।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी काफी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मामले पर कानूनी तथा राजनीतिक शिकंजा और अधिक कसने के आसार जताए जा रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान विवाद के बीच मायावती का बड़ा कमेंट, पार्टी कैडर को किया सतर्क
25 Jul, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET UG) परीक्षा और पेपर लीक के मामलों को लेकर धरने पर बैठे छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहने को एक 'जिद्दी मांग' करार दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने अपने सभी पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर पूरी तरह सजग और सतर्क रहने की सख्त हिदायत दी है।
विपक्षी दलों पर राजनीतिक लाभ लेने का गंभीर आरोप
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर सिलसिलेवार पोस्ट साझा करते हुए मायावती ने कहा कि देश भर के विभिन्न विपक्षी दलों में केवल अपने राजनीतिक हितों और चुनावी लाभ को साधने के लिए सड़क से लेकर संसद तक एक-दूसरे से होड़ मची हुई है।
आंदोलन के हिंसक होने की आशंका: उन्होंने चिंता जताई कि विपक्षी पार्टियों की इस खींचतान के कारण अब यह छात्र आंदोलन धीरे-धीरे हिंसक रूप लेकर फैलता जा रहा है, जो देश के हित में नहीं है।
कार्यकर्ताओं को निर्देश: इस संवेदनशील राजनीतिक स्थिति में बसपा के सभी कार्यकर्ताओं को उग्र, निराश या हताश होने के बजाय अपने पार्टी मिशन के प्रति पूरी लगन, तन, मन और धन के साथ अडिग भाव से डटे रहने की जरूरत है।
असली मुद्दों से भटक रहा है देश का ध्यान
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि नीट-यूजी सहित देश भर में हो रही विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने और इसके तनाव के कारण परीक्षार्थियों द्वारा आत्महत्या जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से उपजे हालात में इस आंदोलन को आम जनमानस की गहरी सहानुभूति अवश्य प्राप्त है।
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकारी जवाबदेही के नाम पर केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े रहने की जिद के कारण इस समय विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच केवल राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही हैं। इस तू-तू मैं-मैं के चक्कर में देश की शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक और बुनियादी सुधार किए जाने का जो सबसे असली और महत्वपूर्ण मुद्दा है, वह पूरी तरह से पीछे छूटता जा रहा है और जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है।
नई कार्यकारिणी के जरिए मिशन चुनाव की तैयारी, यूपी कांग्रेस जल्द करेगी बड़ा ऐलान
25 Jul, 2026 03:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी राजनीतिक रणनीतियों को धार देने के लिए कांग्रेस पार्टी ने अब आक्रामक रुख अपना लिया है। पार्टी के भीतर अगले महीने तक प्रदेश कार्यकारिणी के नए गठन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय ने विभिन्न पदों के लिए योग्य और सक्रिय नेताओं की सूची लगभग पूरी तरह तैयार कर ली है।
प्राप्त आंतरिक जानकारियों के अनुसार, प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय बहुत जल्द इस तैयार सूची को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अनुमोदन के लिए सौंपेंगे। इसके तुरंत बाद नई और विस्तारित प्रांतीय कार्यकारिणी की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।
विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बड़ी होगी कार्यकारिणी
आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों और चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इस बार कांग्रेस की नई कार्यकारिणी में सदस्यों की संख्या पिछली कार्यकारिणी की तुलना में काफी ज्यादा होने की पूरी संभावना है।
पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय के कार्यकाल के दौरान ही नई कार्यकारिणी के गठन को लेकर संभावित नेताओं की एक विस्तृत सूची तैयार करवाई जा रही थी।
हालांकि, जब तक वह इस सूची को पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व को सौंप पाते, उससे पहले ही आलाकमान ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त कर दिया।
दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं को मिलेगा विशेष स्थान
कार्यभार संभालने और प्रदेश प्रभारी का जिम्मा लेने के बाद से ही राजेंद्र पाल गौतम बेहद सक्रिय नजर आ रहे हैं। वह अब तक लखनऊ स्थित प्रदेश पार्टी मुख्यालय का दो बार दौरा कर चुके हैं और स्थानीय नेताओं तथा कार्यकर्ताओं से फीडबैक ले चुके हैं।
सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने पार्टी के तमाम वरिष्ठ और जमीनी नेताओं को यह बेहद स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के लगातार खिसकते जा रहे जनाधार और वोटबैंक को अपनी ओर खींचने के लिए कांग्रेस पार्टी इस बार दलित और पिछड़े वर्ग (OBC) के मजबूत नेताओं को नई कार्यकारिणी में विशेष तवज्जो देगी। इसी रणनीतिक बदलाव के तहत सूची में कुछ नए और प्रभावी चेहरों को भी शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है, ताकि राज्य में पार्टी के सामाजिक समीकरणों को और अधिक संतुलित और मजबूत किया जा सके।
नकल माफिया पर योगी सरकार का शिकंजा, सीएम बोले- युवाओं के साथ अन्याय नहीं होगा
25 Jul, 2026 03:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फतेहपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस सख्त फैसले का दिल से स्वागत किया है, जिसमें पेपर लीक जैसी गंभीर वारदातों को अंजाम देने वाले आरोपियों के लिए 10 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने के कड़े प्रावधान किए गए हैं। सीएम योगी ने दोटूक शब्दों में कहा कि जो कोई भी मासूम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करेगा और उनके जीवन को बर्बाद करने की कोशिश करेगा, ऐसे नकल और पेपर लीक माफियाओं को अब पूरी तरह से 'मिट्टी में मिला दिया जाएगा'।
फतेहपुर में 489 करोड़ की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज फतेहपुर जिले का दौरा किया और यहाँ 489 करोड़ रुपये से अधिक लागत की कुल 125 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण तथा शिलान्यास किया। इस दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले यह जिला एक 'आकांक्षी जनपद' के रूप में जाना जाता था। इसका मतलब यह था कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि विकास, रोजगार और औद्योगिक विकास जैसे बुनियादी सुविधाओं के जितने भी मानक तय किए गए थे, उनमें फतेहपुर की गिनती सबसे निचले पायदान और सबसे पिछड़े जनपदों में होती थी।
‘विकास योजनाओं का पैसा सैफई में नाच-गानों पर खर्च कर दिया जाता था’
पिछली सरकारों पर जोरदार हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तब फतेहपुर से विकास कोसों दूर था, क्योंकि यहाँ के विकास के लिए आने वाले पैसों पर तथाकथित 'सैफई सिंडिकेट' द्वारा खुली लूट मचाई जाती थी।
फतेहपुर की जनता के विकास का सारा पैसा सैफई में होने वाले नाच-गानों और उनके वीआईपी विदेश दौरों पर पानी की तरह बहा दिया जाता था।
उस दौर में न तो ढंग की सड़कें थीं, न बिजली आती थी, न कोई मेडिकल कॉलेज था और औद्योगिक निवेश की बात करना तो बेमानी था।
यहाँ के युवाओं के सामने अपनी पहचान का गंभीर संकट खड़ा था, क्योंकि नौजवानों की नौकरियों पर सैफई सिंडिकेट सीधी डकैती डालता था और तथाकथित चाचा-भतीजे की जोड़ी वसूली के अभियान पर निकल पड़ती थी।
‘नकल माफिया और पेपर लीक करने वालों की अब खैर नहीं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि फतेहपुर का युवा वर्ग लंबे समय तक प्रशासनिक व्यवस्था से परेशान रहा है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में नकल माफिया बच्चों के भविष्य पर लगातार डाका डालते रहे हैं, लेकिन अब ऐसा तांडव कतई नहीं चलेगा।
सीएम योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक प्रदेश के युवाओं का भीषण शोषण किया और उनके जीवन को अंधकार में धकेल दिया, आज वही लोग जनता के सामने घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद आभारी हैं, जो ऐसा कड़ा और ऐतिहासिक कानून लेकर आ रहे हैं जिसके तहत नकल और पेपर लीक माफियाओं का नामोनिस्तान मिटा दिया जाएगा। सोमवार को यह ऐतिहासिक बिल संसद में पेश किया जाएगा, जिसके पारित होने के बाद देश या प्रदेश में कोई भी माफिया किसी भी छात्र का भविष्य खराब करने की जुर्रत नहीं कर पाएगा।
'छात्रों की आवाज जीती', टीकाराम जूली ने PM से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर करने की मांग की
25 Jul, 2026 03:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जयपुर: नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर पर राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस घटनाक्रम को देश भर के छात्रों और युवाओं के लंबे एवं अटूट संघर्ष की ऐतिहासिक जीत करार दिया। जूली ने कहा कि नैतिक आधार पर शिक्षा मंत्री का यह इस्तीफा बहुत पहले आ जाना चाहिए था, फिर भी देर से लिया गया यह निर्णय स्वागत योग्य है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वे बिना किसी विलंब के इस इस्तीफे को तत्काल स्वीकार करें।
देशभर के युवाओं की एकजुटता और संघर्ष का सुखद परिणाम
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने जोर देकर कहा कि शिक्षा मंत्री का पद से हटना महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं के संकल्प की जीत है जो सड़कों पर अपने हक के लिए डटे रहे। उन्होंने उल्लेख किया कि विपक्षी दल लगातार इस संवेदनशील मुद्दे को संसद से लेकर सड़कों तक पुरजोर तरीके से उठा रहे थे। अंततः देश के युवाओं और छात्रों के भारी दबाव के आगे केंद्र सरकार को झुकना ही पड़ा और जवाबदेही तय करनी पड़ी।
प्रदर्शनकारी परीक्षार्थियों पर लाठीचार्ज करने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग
आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों पर किए गए बल प्रयोग की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए जूली ने न्याय की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि अपने भविष्य की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे मासूम छात्रों पर लाठियां बरसाने, आंसू गैस के गोले दागने और बल प्रयोग करने वाले सभी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी छात्र आंदोलन का इस तरह दमन न किया जा सके।
छात्रों को बदनाम करने वाले भाजपा नेताओं के बयानों पर घेराबंदी
टीकाराम जूली ने भारतीय जनता पार्टी के प्रादेशिक नेतृत्व और राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को निशाने पर लेते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान भाजपा नेताओं ने छात्रों को बेहद अपमानजनक शब्द कहे। उन्होंने याद दिलाया कि किस तरह प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों को बाहरी तत्वों और असामाजिक तत्वों से जोड़कर प्रचारित किया गया था। जूली ने सवाल किया कि अब जब सच्चाई सामने आ चुकी है और शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा है, तब पार्टी उन गैर-जिम्मेदाराना बयान देने वाले अपने नेताओं पर क्या कार्रवाई करेगी।
युवा शक्ति के आगे झुकी सरकार और लोकतंत्र की जीत
अपने वक्तव्य के समापन में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह देश के लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अवसर है, जब केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री को भारत की युवा शक्ति के वास्तविक सामर्थ्य का अहसास हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश का जागरूक युवा वर्ग इसी प्रकार संगठित रहकर भविष्य में भी व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा और पारदर्शी शासन प्रणाली सुनिश्चित कराएगा।
वांगचुक की तबीयत और पुलिस विवाद पर मचा घमासान, वायरल वीडियो ने बढ़ाई हलचल
25 Jul, 2026 02:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: प्रसिद्ध पर्यावरण एवं जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में सुरक्षाकर्मियों के साथ तीखी बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल फुटेज में वांगचुक अस्पताल परिसर में सुरक्षा अधिकारियों और कर्मचारियों पर अपनी नाराजगी जताते हुए नजर आ रहे हैं। इस पूरी घटना पर आधिकारिक स्पष्टीकरण देते हुए संबंधित अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन ने बताया है कि यह स्थिति उस समय उत्पन्न हुई थी जब वांगचुक बिना औपचारिक अदालती आदेश के अस्पताल से निकलकर मेदांता अस्पताल जाने का प्रयास कर रहे थे।
सुरक्षा कर्मियों से बहस के बाद फर्श पर बैठकर जताया विरोध
सोशल मीडिया और यूट्यूब पर साझा किए गए वीडियो में वांगचुक सुरक्षाकर्मियों पर अनशन के दौरान बेवजह परेशान करने का आरोप लगाते दिखाई दे रहे हैं। तीखी नोकझोंक के दौरान उन्होंने अपनी गिरफ्तारी की मांग करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को यातना करार दिया। विरोध को चरम पर ले जाते हुए वांगचुक अस्पताल के फर्श पर ही लेट गए और अपने समर्थकों को पूरी घटना की रिकॉर्डिंग करने का निर्देश दिया। इस दौरान उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो भी सुरक्षाकर्मियों के रवैये पर कड़ा रोष व्यक्त करती नजर आईं।
अदालती आदेश की प्रति न मिलने तक रोकने पर अड़ा रहा प्रशासन
प्रशासनिक अधिकारियों और सफदरजंग अस्पताल प्रबंधन ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो 21 जुलाई का है। उस दिन दिल्ली हाईकोर्ट में वांगचुक को मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने की बात कही गई थी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वांगचुक मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तत्काल जाने की जिद कर रहे थे, जबकि अस्पताल को अदालत का लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ था। शाम को जैसे ही लिखित आदेश प्राप्त हुआ, उन्हें तत्काल मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों की टीम को सौंप दिया गया था।
अस्पताल में कैदियों जैसा व्यवहार किए जाने का लगाया गंभीर आरोप
अनशन समाप्त करने के बाद जारी अपने विस्तृत वक्तव्य में सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल में बिताए समय को बेहद दुखद बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि 18 जुलाई को अस्पताल लाए जाने के बाद से ही उनके साथ किसी कैदी जैसा व्यवहार किया गया, जहां उन्हें स्वतंत्र रूप से मिलने-जुलने, मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग करने की अनुमति नहीं थी। उन्होंने इस स्थिति की तुलना बेहद दर्दनाक व्यवस्था से करते हुए कहा कि अदालत का आदेश होने के बावजूद उन्हें घंटों तक रोके रखा गया।
आलोचनाओं का जवाब और अनशन समाप्त करने की बताई वजह
अपनी नीयत और समझौतों को लेकर उठ रहे सवालों पर वांगचुक ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 26 दिनों के कठिन अनशन के बाद उन्होंने प्रदर्शनकारियों को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए सरकार के लिखित आश्वासन के बाद ही अपना आंदोलन समाप्त किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उन्हें कोई निजी समझौता करना ही होता तो वे दिल्ली की भीषण गर्मी में 26 दिनों तक लगातार भूखे रहकर अपनी जान जोखिम में क्यों डालते।
राहुल गांधी का सरकार पर दबाव, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत रखी तीन मांगें
25 Jul, 2026 01:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: कथित NEET परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उन्होंने सरकार की नीतियों और शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। राहुल गांधी ने बताया कि अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारी परीक्षार्थियों से उनकी विस्तृत बातचीत हुई है। छात्रों ने अपनी मुख्य मांगें रखी हैं, जिन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता और पूरी कांग्रेस पार्टी इन मांगों पर छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री को तत्काल पद से हटाने की प्रमुख मांग
राहुल गांधी ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों की सबसे प्राथमिक मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में पूरी तरह से जवाबदेही का अभाव दिखाई दे रहा है। कांग्रेस नेता के अनुसार छात्र मानते हैं कि शिक्षा मंत्री अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने में विफल रहे हैं, इसलिए उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए।
मंत्रालय बदलने की चर्चाओं पर राहुल गांधी का कड़ा ऐतराज
प्रेस वार्ता के दौरान राहुल गांधी ने दावा किया कि सरकारी गलियारों और कैबिनेट के भीतर शिक्षा मंत्री का विभाग बदलने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल विभाग बदल देना इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं हो सकता। देश का युवा और छात्र वर्ग इस तरह के किसी भी कदम को स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि मामला लाखों विद्यार्थियों के भविष्य और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली से जुड़ा हुआ है।
प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई को लेकर जवाबदेही की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने आंदोलनकारी छात्रों पर हुए कथित बल प्रयोग और पुलिस बर्बरता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने मांग की कि शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक की आवाज उठा रहे विद्यार्थियों के खिलाफ जिस तरह की सख्त कार्रवाई की गई, उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करने वाले कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना अत्यंत आवश्यक है।
देश के युवाओं और छात्रों से प्रधानमंत्री के माफीनामे की मांग
राहुल गांधी ने कहा कि देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य ही राष्ट्र की असली ताकत है, लेकिन बार-बार सामने आ रही परीक्षाओं की धांधली से उनका विश्वास टूटा है। उन्होंने कहा कि इस पूरी अव्यवस्था की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के युवाओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे इस मुद्दे को हर मंच पर उठाते रहेंगे।
विरोध प्रदर्शन के लिए विदेशी फंडिंग का दावा? CJP मामले में MEA ने दी सफाई
25 Jul, 2026 11:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: राजधानी में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा चलाए जा रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर कूटनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में विदेशी वित्तीय सहायता और बाहरी सोशल मीडिया नेटवर्क की भूमिका पर चर्चा गर्म हो गई है। प्रदर्शन के पीछे विदेशी धन के इस्तेमाल, खाड़ी देशों और पड़ोसी देशों से संचालित टूलकिट साजिश तथा संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों के आरोपों के बीच भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर दिया है।
विदेश मंत्रालय ने दावों पर दिया आधिकारिक वक्तव्य
आंदोलन में विदेशी फंडिंग और बाहरी तत्वों के हस्तक्षेप के दावों के संदर्भ में विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार के आरोपों की पुष्टि के लिए उसके पास फिलहाल ऐसा कोई तथ्य या सूचना उपलब्ध नहीं है जिसे साझा किया जा सके। सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करने का संकेत दिया है।
साप्ताहिक प्रेस वार्ता में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने किया स्पष्टीकरण
शुक्रवार को आयोजित नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से प्रदर्शन के पीछे विदेशी फंडिंग और बाहरी नेटवर्क की संभावित भूमिका को लेकर सीधा सवाल किया गया था। सवाल का जवाब देते हुए प्रवक्ता ने कहा कि CJP के आंदोलन में किसी भी प्रकार की विदेशी वित्तीय मदद या पड़ोसी देश की भूमिका को लेकर मंत्रालय के पास कोई प्रमाणित या पुख्ता जानकारी दर्ज नहीं है।
सोशल मीडिया नेटवर्क और टूलकिट साजिश की अटकलें खारिज
प्रदर्शन को हवा देने के लिए डिजिटल प्लेटफार्मों और खाड़ी देशों से जुड़े ऑनलाइन तंत्र के इस्तेमाल की आशंकाएं जताई जा रही थीं। हालांकि विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद बाहरी साजिशों और विदेशी फंडिंग को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। प्रशासन पूरी स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और देश के भीतर की गतिविधियों पर कानून-व्यवस्था के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
प्रदर्शन से जुड़ी भावी स्थिति और प्रशासनिक रुख
विदेश मंत्रालय द्वारा स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद अब सारा ध्यान आंतरिक सुरक्षा तंत्र और प्रशासनिक बैठकों पर टिक गया है। सरकार की प्राथमिकता बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के देश की आंतरिक व्यवस्था और छात्र आंदोलनों से जुड़ी चिंताओं का बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने पर केंद्रित बनी हुई है।
शिक्षा मंत्री पर उठे सवालों के बीच तीसरे दौर की वार्ता आज, दोपहर 3:30 बजे होगी चर्चा
25 Jul, 2026 11:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच आज शनिवार दोपहर केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के मध्य तीसरे दौर की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है। इससे पूर्व आयोजित दो चरणों की वार्ताओं में किसी अंतिम निष्कर्ष तक न पहुंचने के बाद इस बैठक को आंदोलन का भविष्य तय करने के लिहाज से बेहद निर्णायक माना जा रहा है। दोनों ही पक्षों की ओर से अपने-अपने रुख पर टिके रहने के कारण इस बातचीत पर देश भर के छात्रों की निगाहें टिकी हुई हैं।
सरकार के समक्ष रखी गईं तीन मुख्य मांगें और सुधार के सुझाव
पूर्व में हुई वार्ताओं के संदर्भ में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया था कि छात्र प्रतिनिधियों की ओर से सरकार के समक्ष तीन प्राथमिक मांगें और परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने हेतु पांच महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर इन सभी सुझावों और मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार-विमर्श जारी है। सरकार का प्रयास है कि संवाद के माध्यम से छात्र हित में किसी संतोषजनक और सकारात्मक समाधान तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।
केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे और मांगों पर अड़ा आंदोलनकारी पक्ष
दूसरी ओर, आंदोलनकारी संगठन का स्पष्ट तौर पर कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से त्यागपत्र नहीं देते, तब तक आंदोलन का पूर्ण समाधान संभव नहीं है। इसके साथ ही छात्र प्रतिनिधियों का दावा है कि पूर्व की बैठकों में आंदोलन के दौरान प्रभावित हुए छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और दर्ज प्रकरणों को वापस लेने के विषय पर सकारात्मक रुख देखने को मिला है। हालांकि, सरकार की ओर से इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और उसका मुख्य ध्यान व्यवस्था में पारदर्शिता लाने पर केंद्रित है।
देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन के बीच तीसरे दौर की वार्ता पर टिकीं निगाहें
देश के कई राज्यों में विभिन्न छात्र संगठनों और विपक्षी दलों के समर्थन के चलते इस आंदोलन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। परीक्षाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आज की बैठक को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लद्दाख के प्रसिद्ध कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन समाप्ति के बाद केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच संवाद की इस प्रक्रिया में तेजी आई है, जिससे आज की वार्ता से किसी ठोस नतीजे की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रशासन का ध्यान व्यवस्था सुधार पर और भविष्य की रणनीति
सरकार के अब तक के रुख से यह साफ संकेत मिलते हैं कि उसका प्राथमिकता क्षेत्र परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार लागू करना है, जबकि इस्तीफे की मांग को वे समस्या का स्थाई समाधान नहीं मान रहे हैं। आज दोपहर बाद शुरू होने वाली इस बैठक के परिणामों से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आंदोलन समाप्त होगा या आने वाले दिनों में यह नया रूप धारण करेगा।
बांकीपुर उपचुनाव को लेकर भाजपा सक्रिय, पटना में नितिन नवीन ने संभाला मोर्चा
25 Jul, 2026 11:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अपने दो दिवसीय प्रवास के तहत शुक्रवार को राजधानी पटना पहुंचे। पटना हवाई अड्डे पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी सहित कई वरिष्ठ नेताओं और बड़ी संख्या में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। जुलाई माह में उनका यह तीसरा दौरा है, जिसे बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 30 जुलाई को होने जा रहे इस उपचुनाव के प्रचार का दौर अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और पार्टी इस क्षेत्र पर अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
बूथ प्रबंधन और चुनावी रणनीति की गहन समीक्षा
पार्टी सूत्रों के अनुसार, अपने इस दौरे के दौरान नितिन नवीन उपचुनाव की तैयारियों की बिंदुवार समीक्षा करेंगे। वे बूथ स्तर पर चलाए जा रहे जनसंपर्क अभियानों, कार्यकर्ताओं की गतिविधियों और संगठनात्मक प्रगति का फीडबैक लेने के साथ-साथ शीर्ष नेताओं के साथ आगामी रणनीति पर विस्तृत चर्चा करेंगे। इसके अतिरिक्त एनडीए सरकार के 100 दिनों के कार्यकाल की उपलब्धियों और विकास योजनाओं को जन-जन तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
बांकीपुर सीट पर प्रतिष्ठा की जंग और त्रिकोणीय मुकाबला
बांकीपुर विधानसभा सीट नितिन नवीन और उनके परिवार का पारंपरिक गढ़ रही है, जहां से उनके दिवंगत पिता नबीन किशोर सिन्हा और वे स्वयं प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई इस सीट पर पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस क्षेत्र में जन सुराज के प्रशांत किशोर और राष्ट्रीय जनता दल की प्रत्याशी रेखा गुप्ता की मौजूदगी से मुकाबला दिलचस्प हो गया है, जबकि जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने भी जनसुराज को अपना समर्थन देने की घोषणा की है।
जमीनी कार्यकर्ताओं के सम्मान और समर्पण पर बल
चुनावी बैठकों के दौरान नितिन नवीन ने कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर संवाद स्थापित करने और मतदान के दिन अधिक से अधिक मतदाताओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने रेखांकित किया कि भाजपा की सबसे बड़ी विशेषता साधारण कार्यकर्ताओं का सम्मान है, यही कारण है कि मंडल अध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके एक निष्ठावान कार्यकर्ता को इस महत्वपूर्ण सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। नीरज कुमार सिन्हा जनसंघ के समय से जुड़े एक समर्पित परिवार से आते हैं जो निरंतर जनसेवा में लगे रहे हैं।
दो दशकों के विकास कार्यों और प्राथमिकताओं का रेखांकन
अपने संबोधन में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बांकीपुर की जनता के साथ अपने पारिवारिक और भावनात्मक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र ने उन्हें कार्य करने की प्रेरणा दी है। उन्होंने पिछले दो दशकों में क्षेत्र में हुए बुनियादी ढांचागत विकास, सड़कों, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, पार्क और स्वच्छता जैसे नागरिक सुधारों का जिक्र किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्यसभा में जाने के बाद भी बांकीपुर के विकास और वहां के नागरिकों की समस्याओं का समाधान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
वकीलों की CJI से गुहार, पीएम आवास के पास प्रदर्शन पर जताई चिंता
24 Jul, 2026 03:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश भर के अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत को एक पत्र भेजकर सुप्रीम कोर्ट से 21 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास '7, लोक कल्याण मार्ग' के समक्ष हुए विरोध-प्रदर्शन का स्वतः संज्ञान (Sua Sponte) लेने की गुहार लगाई है। यह प्रदर्शन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य प्रमुख विपक्षी नेताओं द्वारा किया गया था।
हाईकोर्ट के वकीलों का हस्ताक्षर अभियान, राष्ट्रीय सुरक्षा पर जताई चिंता
विभिन्न उच्च न्यायालयों के वकीलों द्वारा हस्ताक्षरित और अधिवक्ता संकेत गुप्ता द्वारा समन्वित इस पत्र में शीर्ष अदालत से पूरी घटना की निष्पक्ष तथ्य-जाँच कराने की माँग की गई है। इसके साथ ही, वकीलों ने माँग की है कि अति-संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में इस प्रकार के बिना अनुमति प्रदर्शनों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट बाध्यकारी दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी करे। वकीलों का तर्क है कि प्रधानमंत्री आवास के ठीक बाहर बिना पूर्व सूचना या अनुमति के जुटी यह भीड़ कोई सामान्य जनसभा नहीं थी, बल्कि यह सीधा राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक मर्यादाओं से जुड़ा गंभीर मामला है।
केंद्रीय मंत्री के आश्वासन और पुलिस के अनुरोध के बाद भी जारी रहा धरना
पत्र में उल्लेख किया गया है कि राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव तथा केरल एवं कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों समेत कई सांसदों ने इस उच्च सुरक्षा वाले इलाके में अचानक धरना दिया था। आरोप है कि दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के बार-बार हटने के अनुरोध को दरकिनार कर दिया गया। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने व्यक्तिगत रूप से राहुल गांधी से मुलाकात कर संसद में इस मुद्दे पर चर्चा का आश्वासन दिया और धरना समाप्त करने की अपील की, फिर भी कई घंटों तक प्रदर्शन जारी रहा। वकीलों ने राहुल गांधी के सोशल मीडिया पोस्ट पर भी सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने आम जनता से वहां जुटने का आह्वान किया था।
विरोध का अधिकार असीमित नहीं, कानून के सामने सब समान
पत्र में वकीलों ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि लगभग तीन घंटे चले इस ड्रामे के बाद पुलिस को नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को शारीरिक रूप से हटाना पड़ा। अधिवक्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(b) का हवाला देते हुए कहा कि यद्यपि नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का मौलिक अधिकार है, लेकिन अनुच्छेद 19(3) के तहत यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में उचित प्रतिबंधों के अधीन आता है। पत्र में अंत में कहा गया है कि संविधान के समक्ष आम नागरिक और देश के शीर्ष पदों पर बैठे जनप्रतिनिधि समान हैं, अतः ऐसे संवेदनशील इलाकों में अराजक परंपरा की शुरुआत को रोकने के लिए सख्त कदम आवश्यक हैं।
मुद्दों को लेकर विपक्ष आक्रामक, लोकसभा 27 जुलाई तक के लिए स्थगित
24 Jul, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में नीट (NEET) परीक्षा विवाद को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सांसदों द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की लगातार मांग और जोरदार नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। लोकसभा की अगली बैठक अब 27 जुलाई 2026 (सोमवार) को सुबह 11 बजे निर्धारित की गई है।
रिजिजू की अपील: "चर्चा नहीं होने से जाएगा गलत संदेश"
हंगामे के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में अपनी बात रखते हुए विपक्ष से सहयोग की अपील की। रिजिजू ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल से एक बार फिर अनुरोध किया है कि जब सभी दल नीट मुद्दे पर चर्चा के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हैं, तो सदन में सार्थक बहस होनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी देश को पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई का भरोसा दे चुके हैं।
सोनम वांगचुक के अनशन और चर्चा की मांग का दिया हवाला
किरेन रिजिजू ने अपने वक्तव्य में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक ने सरकार के आश्वासन के बाद अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है और उन्होंने भी संसद में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा की मांग रखी है। संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष को आगाह करते हुए कहा कि यदि ऐसे संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व के विषय पर संसद में सार्थक चर्चा नहीं होती है, तो इसका पूरे देश और छात्रों के बीच बहुत ही नकारात्मक और गलत संदेश जाएगा।
‘छात्र भूलेंगे नहीं, हिसाब-किताब होगा’, पीएम मोदी के बयान पर टीकाराम जूली का बड़ा बयान
24 Jul, 2026 12:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अलवर: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पेपर लीक मामलों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रधानमंत्री के फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए दोषियों पर तेजी से कार्रवाई करने वाले बयान पर सवाल उठाते हुए जूली ने पूछा कि जब बीते 12 सालों में देश भर में करीब 150 पेपर लीक के मामले सामने आए, तब सरकार को त्वरित अदालत (फास्ट ट्रैक कोर्ट) की याद क्यों नहीं आई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल बयानबाजी कर रही है, जबकि लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
कांग्रेस सरकार ने बनाया देश का सबसे कड़ा कानून
टीकाराम जूली ने दावा किया कि राजस्थान की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए देश का सबसे सख्त कानून बनाया था। उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार ने 10 लाख से लेकर 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने और 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया था। इसके अलावा दोषी सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त करने का कड़ा नियम लागू किया गया था। इसकी तुलना में केंद्र सरकार द्वारा लाया गया कानून काफी कमजोर है, जिसमें केवल 1 लाख से 10 लाख का जुर्माना और 1 से 10 साल की सजा तय की गई है।
NTA अधिकारियों की जांच और छात्रों पर अत्याचार का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अधिकारियों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों की गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार युवाओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन पर लाठियां बरसा रही है और आंदोलनकारी छात्राओं से दुर्व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो सरकार छात्रों पर अत्याचार कर रही है, देश का युवा उसे उखाड़ फेंकने का काम करेगा।
विदेशी फंडिंग के आरोपों पर सार्वजनिक सबूत देने की मांग
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ द्वारा प्रदर्शनकारियों पर लगाए गए विदेशी फंडिंग के आरोपों पर पलटवार करते हुए जूली ने कहा कि अगर सरकार के पास इसके पुख्ता सबूत हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार के पास ऐसी खुफिया जानकारी थी, तो अब तक दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? उन्होंने मांग की कि सरकार केवल अनर्गल आरोप लगाने के बजाय पेपर लीक के असल मास्टरमाइंडों पर सख्त कार्रवाई कर युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करे।
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