राजनीति
बंगाल से असम तक सियासी टकराव: ममता को बुलावा, हिमंत का नॉनवेज पर बयान चर्चा में
16 Apr, 2026 03:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता | पश्चिम बंगाल और असम की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। चुनावी रैलियों के दौरान दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने एक दूसरे पर खूब निशाने साधे और कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। पहले बात अगर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की करें तो उन्होंने बंगाल के कूच बिहार में एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी पर एक साथ कई मामलों को लेकर निशाना साधा। सीएम सरमा ने कहा कि ममता बनर्जी मांसहारी भोजन को लेकर लोगों में झूठा डर फैला रही हैं। रैली को संबोधित करते हुए सीएम सरमा ने कहा कि ममता बनर्जी यह कहकर डर फैला रही हैं कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनी तो नॉन-वेज खाने पर रोक लगाई जाएगी। सरमा ने ममता बनर्जी को असम आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि मैं उन्हें एक बार असम आने का न्योता देता हूं, ताकी वो आएं और देखे कि असम में नौन-वेज मिलता है की नहीं।
सीएम सरमा ने ममता बनर्जी पर लगाए गंभीर आरोप
सीएम सरमा ने अपने बयान में आगे इस बात पर जोर दिया कि असम में 10 साल से भाजपा की सरकार है, और वहां के लोग अच्छा नॉन-वेज खाना खाते हैं और इस पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि असली चिंता का कारण नॉन-बेज नहीं बीफ और गौहत्या है, क्योंकी अगर भाजपा बंगाल में सत्ता में आएगी तो गॉहत्या पर पूरी तरह से रोक लगा देगी। इसलिए ममता बनर्जी लोगों को नॉन वेज का डर दिखा कर भड़का रहीं हैं।
यूसीसी पर क्या बोले सीएम सरमा
इसके साथ ही अपने संबोधन में सीएम सरमा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की दिशा में काम चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है तो वहां भी ऐसे कानून लागू किए जाएंगे।
ममता बनर्जी ने भी ममता सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
दूसरी ओर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी मथाभांगा में एक चुनावी रैली के दौरान केंद्र सरकार और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि देश को बांटने की कोशिश की जा रही है और महिला आरक्षण तथा परिसीमन जैसे अहम मुद्दों को जोड़कर समाज में भ्रम फैलाया जा रहा है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इन विधेयकों के बहाने मतदाता सूची से नाम हटाने और एनआरसी लागू करने की साजिश की जा रही है।
कूच बिहार हिंसा पर चुनाव आयोग को घेरा
इसके साथ ही कूच बिहार में हो रही राजनीतिक हिंसा पर सवाल उठाते हुए सीएम ममता ने कहा कि जब भी चुनाव आयोग की निगरानी में मतदान होता है, तभी वहां कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में राजनीतिक हिंसा चिंता का विषय है और इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
आचार संहिता पर घमासान: स्मृति ईरानी और सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ TMC की शिकायत
16 Apr, 2026 02:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता | तृणमूल कांग्रेस ने गुरुवार को भाजपा नेताओं स्मृति ईरानी, सुवेंदु अधिकारी और अन्य के खिलाफ आचार संहिता (एमसीसी) का कथित उल्लंघन करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत अपराधों में शामिल होने के आरोप में भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) में शिकायत दर्ज कराई।
भाजपा नेता के खिलाफ शिकायत दर्ज
तृणमूल कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल को लिखे पत्र में कहा, ‘यह आपके ध्यान में लाना है कि 15.04.2026 को श्री सुवेंदु अधिकारी, श्रीमती स्मृति ईरानी और भाजपा के अन्य नेताओं, सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने 'मातृशक्ति भोरसा कार्ड' नामक एक नई योजना की घोषणा की है, जिसके तहत वे कार्डधारकों के खातों में सीधे मासिक आधार पर 3,000 रुपये देने का वादा कर रहे हैं। वे इस नई योजना के फॉर्म विभिन्न स्थानों पर वितरित कर रहे हैं।’
नियमों का गंभीर उल्लंघन
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी ने आगे कहा, 'इस तरह के कृत्य एमसीसी और ईसीआई द्वारा निर्धारित नियमों और विनियमों का गंभीर उल्लंघन हैं। इस तरह की घोषणा की आड़ में महिला लाभार्थियों को उपरोक्त फॉर्म भरने और जमा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप प्रत्यक्ष बैंक हस्तांतरण या नकद के माध्यम से मौद्रिक राशि का भुगतान किया जाता है।' तृणमूल कांग्रेस के अनुसार, 'इस तरह के धन वितरण की प्रकृति, समय और तरीका स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि यह कोई अलग-थलग या परोपकारी कार्य नहीं है, बल्कि चुनावी अवधि के निकट की गई एक सुनियोजित और समन्वित गतिविधि है, जिसका स्पष्ट उद्देश्य मतदाताओं को एक विशेष राजनीतिक दल के पक्ष में प्रभावित करना है।'बुधवार को भाजपा नेता स्मृति ईरानी कोलकाता में 'मातृशक्ति भोरसा कार्ड' का शुभारंभ और शहर की महिलाओं को वितरण करने के लिए मौजूद थीं। इस घटनाक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस ने कहा, 'इस तरह का आचरण मतदाताओं की पसंद की स्वतंत्रता से समझौता करके और चुनाव लड़ने वाली पार्टियों के बीच समान अवसर को बाधित करके स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की नींव पर ही प्रहार करता है।' पार्टी का मानना है कि उपर्युक्त कृत्य आर.पी.ए., 1951 की धारा 123 के अर्थ में भ्रष्ट आचरण का गठन करते हैं और बी.एन.एस., 2023 की धारा 61(2)/173/174 के तहत दंडात्मक दायित्व को आकर्षित करते हैं। पत्र में तृणमूल ने चुनाव आयोग से सुवेंदु अधिकारी, स्मृति ईरानी और भाजपा के अन्य नेताओं, सदस्यों और कार्यकर्ताओं को एमसीसी के उपर्युक्त उल्लंघनों के लिए कारण बताओ नोटिस जारी करने का अनुरोध किया।
अब 28 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई, कानूनी प्रक्रिया में देरी
16 Apr, 2026 02:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली|कांग्रेस नेता राजेन्द्र भारती की समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही। 15 अप्रैल बुधवार को राजेन्द्र भारती मामले में सुनवाई होनी थी लेकिन उनके वकील कोर्ट में नहीं पहुंचे।जिसके चलते सुनवाई नहीं हो सकी। अब दिल्ली हाई कोर्ट ने 28 अप्रैल सुनवाई की नई तारीख तय की है। कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती की विधायकी हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी है। सहकारिता बैंक घोटाला मामले में उन्हें एमपी-एमएलए कोर्ट ने 3 साल की सजा सुनाई है। जिसके बाद उनकी विधायकी खत्म हो चुकी है। उन्होंने फैसले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। ऐसे में उनका आगे का सियासी भविष्य कोर्ट के फैसले पर टिका है। फैसले से पहले कांग्रेस नेता भारती लगातार भाजपा पर आरोपों की बौछार कर रहे हैं। तीन दिन पहले राजेन्द्र भारती ने भोपाल में प्रेसवार्ता का आयोजन कर आरोप लगाया था कि उन्हें भाजपा के एक केन्द्रीय मंत्री के ओएसडी ने 70 करोड़ रुपये का आफर देकर भाजपा में शामिल होने के लिए कहा था इसके साथ ही भारतीय ने कहा था कि उनके डेढ़ सौ करोड़ रुपये अब तक बर्बाद हो चुके हैं। अब सवाल इस बात का उठता है कि राजेन्द्र भारती के पास डेढ़ सौ करोड़ से अधिक का धन कहां से आया जिसके खर्च होने की बात उन्होने की। जब कांग्रेस नेता ने खुद इस बात को स्वीकार किया तो यह सवाल खड़ा होता है कि भारतीय के पास इतने पैसे हैं तो दस लाख एफडी मामले में वो किस तरह फंसे। कोर्ट से भारती को तीन साल की सजा होने के बाद वो अलग-अलग बयान देते नजर आ रहे हैं और अपनी समस्याओं का दोस भाजपा और भाजपा के नेताओं पर मढ़ते हुए देखे जा रहे हैं।
‘महिला-विरोधी मानसिकता’ का आरोप: अनुराग ठाकुर का विपक्ष पर तीखा हमला
16 Apr, 2026 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद अनुराग ठाकुर ने बुधवार को विपक्षी पार्टियों की आलोचना करते हुए कहा कि वे महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं कर रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 'महिला-विरोधी सोच' रखने वाले लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं.उनकी यह टिप्पणी संसद के तीन दिन के बढ़े हुए बजट सत्र के दोबारा शुरू होने से ठीक एक दिन पहले आई है. इस सत्र के दौरान 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023' में संशोधनों और एक प्रस्तावित परिसीमन बिल पर चर्चा होने की उम्मीद है, ताकि संसद में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके.
आईएएनएस से बात करते हुए ठाकुर ने कहा: 'जो लोग महिला-विरोधी हैं, वे ही यह काम कर रहे हैं। 1971 में ही यह तय हो गया था कि किसे कितनी सीटें मिलेंगी। दक्षिण भारतीय राज्यों को उससे ज्यादा सीटें मिल रही हैं.'उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण भी मिल रहा है. इसलिए जिन पार्टियों की विचारधारा महिला-विरोधी है, वे आज इसका विरोध कर रही हैं—चाहे वह (कांग्रेस सांसद) सोनिया गांधी हों, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हों, डीएमके हो या कोई अन्य पार्टी. उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूएपीए सरकार पर अपने कार्यकाल के दौरान इस बिल को पारित न कर पाने का आरोप लगाया.उन्होंने कहा कि जब वे यूएपीए सरकार का हिस्सा थे, तब भी उन्होंने अपने 10 साल के कार्यकाल के दौरान महिला आरक्षण बिल को पारित नहीं होने दिया; लेकिन हमने इस बिल को पारित कर दिया है.
इसके अलावा, ठाकुर ने कहा कि हम महिलाओं को उनके अधिकार देते हैं और महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम करते हैं. इस बीच, भाजपा सांसद ने पत्रकारों से तृणमूल कांग्रेस के शासन और अगले हफ्ते होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा की संभावनाओं के बारे में भी बात की.उन्होंने कहा कि लोगों ने ममता बनर्जी की आवाज बंद कर दी है. तृणमूल कांग्रेस की हार तय है। 4 मई को तृणमूल कांग्रेस सत्ता से बाहर हो जाएगी. इसीलिए ममता बनर्जी घबराई हुई हैं. वह राज्य में अपने 15 साल के शासन की किसी भी उपलब्धि के बारे में बात नहीं कर पा रही हैं.
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी एक भ्रष्ट मुख्यमंत्री हैं, जो अपने नेताओं को बचाने के लिए ईडी की छापेमारी वाली जगह पर पहुंच गईं.इसके अलावा, ठाकुर ने कहा कि राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद पश्चिम बंगाल भ्रष्टाचार, कमीशन और अवैध घुसपैठ से मुक्त हो जाएगा. जब राज्य तृणमूल कांग्रेस से छुटकारा पा लेगा, तो वह अपने आप ही सभी बुराइयों से मुक्त हो जाएगा.
चुनावी तैयारी तेज: TVK आज जारी करेगी घोषणापत्र, कर्ज राहत और LPG पर फोकस
16 Apr, 2026 01:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई | तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ एक हफ्ता बचा है और राज्य की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। सभी प्रमुख दल मतदाताओं को लुभाने के लिए जोरदार प्रचार और अपने-अपने चुनावी वादे लेकर मैदान में उतर चुके हैं। राज्य की बड़ी पार्टियों द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) हो या फिर अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) ने पहले ही अपने घोषणापत्र जारी कर दिए हैं। इनमें विकास और कल्याण से जुड़े कई बड़े वादे किए गए हैं।ऐसे में अब अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) अपना बहुप्रतीक्षित चुनावी घोषणापत्र जारी करने जा रही है। यह कार्यक्रम चेन्नई के नुंगमबक्कम इलाके में स्थित ताज कोरोमंडल होटल में आयोजित किया जाएगा। पार्टी के अनुसार, विजय दोपहर 3 बजे होने वाली कार्यकारी समिति की बैठक में विजनरी घोषणापत्र पेश करेंगे।
कार्यक्रम में केवल 800 पार्टी कार्यकर्ताओं को अनुमति
बता दें कि इस कार्यक्रम में केवल 800 पार्टी कार्यकर्ताओं को ही अनुमति दी गई है और प्रवेश के लिए क्यूआर कोड आधारित पास अनिवार्य होगा। सुरक्षा और चुनाव आयोग के नियमों के कारण इसे सीमित और नियंत्रित रखा गया है।
घोषणा पत्र में संभावित वादे क्या-क्या?
बताया जा रहा है कि टीवीके के घोषणापत्र में पहले भी कई लोकलुभावन वादे किए गए हैं, जैसे कुछ कर्ज माफी, परिवार प्रमुख को हर महीने 2500 रुपये की आर्थिक मदद और साल में 6 मुफ्त एलपीजी सिलेंडर। अब सबकी नजर इस बात पर है कि विजय अपनी पार्टी को द्रविड़ राजनीति के बड़े दलों के मुकाबले कैसे पेश करते हैं और उनका यह घोषणापत्र मतदाताओं को कितना प्रभावित करता है।
संशोधन बिल पर सियासी संग्राम: शाह और मेघवाल आगे, विपक्ष आमने-सामने
16 Apr, 2026 12:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | देश की चुनावी और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलावों से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 को लेकर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इसी बीच बुधवार को संसद के विशेष सत्र की कार्यवाही जोरदार हंगामे के साथ शुरू हुई। सत्र की शुरुआत में ही सरकार ने तीन अहम विधेयकों को लोकसभा में पेश करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 को सदन में पेश करने का प्रस्ताव रखा।इसके साथ ही दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 को पेश करने का प्रस्ताव दिया। प्रस्ताव रखने के साथ ही संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। विपक्ष ने इन प्रस्तावों पर आपत्ति जताई, जबकि सरकार का कहना है कि ये बदलाव देश की चुनावी व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए जरूरी हैं।
केसी वेणुगोपाल ने किया विरोध
सरकार की ओर से इस विधेयक को सामने रखने के साथ ही कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इन तीनों विधेयकों के पेश किए जाने का विरोध किया है। उन्होंने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 को सदन में लाने के खिलाफ आपत्ति जताई। इसको लेकर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस तेज होने की संभावना है।
वेणुगोपाल के बयान पर अमित शाह का पलटवार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। अमित शाह ने कहा कि केसी वेणुगोपाल विधेयकों के गुण-दोष पर टिप्पणी नहीं कर सकते और वे केवल तकनीकी आपत्तियां ही उठा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बहस के दौरान विपक्ष को मजबूत जवाब देगी।
अब समझिए पूरा मामला
सरकार के अनुसार, प्रस्तावित विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 की जा सकती है, ताकि 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण को लागू किया जा सके। इसके लिए 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाएगा। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएंगी, और ये सीटें रोटेशन के आधार पर तय होंगी। विपक्षी दलों ने बुधवार को ही तय किया था कि वे परिसीमन से जुड़े प्रावधानों का संयुक्त रूप से विरोध करेंगे, हालांकि महिला आरक्षण का समर्थन जारी रहेगा।
रोड शो में हंगामा: हावड़ा में भाजपा-टीएमसी समर्थकों के बीच टकराव, वीडियो सामने आया
16 Apr, 2026 11:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हावड़ा | पश्चिम बंगाल विधानसभा के विपक्ष के सांसद शुभेंदु अधिकारी हावड़ा जिले के बाली विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के रोड शो में टीएमसी कार्यकर्ताओं पर भड़क गए। उन्होंने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर बाधा डालने का आरोप लगाया। यह रोड शो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार संजय सिंह के समर्थन में आयोजित किया गया था।शुभेंदु रैली में टीएमसी कार्यकर्ताओं पर जमकर बरसते नजर आए, जब वे 'जय बांग्ला' समेत कई नारे लगा रहे थे। अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से भाजपा के उम्मीदवार हैं।
घटना पर शुभेंदु अधिकारी ने क्या कहा?
शुभेंदु अधिकारी ने कहा, मैं करीब पांच हजार समर्थकों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव प्रचार कर रहा था। लेकिन टीएमसी के कुछ समर्थकों ने जानबूझकर भड़काऊ नारे लगाए और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। मैं बाली थाने के प्रभारी अधिकारी को तत्काल हटाने की मांग करता हूं।
पहले चरण में केंद्रीय बलों की 2,407 कंपनियां
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। 23 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए आयोग ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 2,407 कंपनियां तैनात करने का निर्णय लिया है। मतदाताओं में विश्वास जगाने के लिए सुरक्षा बलों ने संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च शुरू कर दिया है।
मुर्शिदाबाद और पूर्व मेदिनीपुर पर विशेष नजर
सुरक्षा के लिहाज से मुर्शिदाबाद जिले को सबसे संवेदनशील माना गया है, जहां सर्वाधिक 316 कंपनियां तैनात होंगी। इसमें मुर्शिदाबाद पुलिस जिले में 240 और जंगीपुर में 76 कंपनियां मोर्चा संभालेंगी। पिछले वर्षों में एनआरसी और वक्फ कानून के विरोध के दौरान हुई हिंसा को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। दूसरे नंबर पर पूर्व मेदिनीपुर जिला है, जहां 273 कंपनियां तैनात की जाएंगी। नंदीग्राम सीट के कारण यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से बेहद अहम है।
कोलकाता-11 सीटों पर सियासी संग्राम, जीतने वाला ही बनाएगा सरकार
16 Apr, 2026 10:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता | बंगाल की सियासत की बात जम्मू-कश्मीर से शुरू करते हैं। कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग और पूर्ण राज्य बनाने के लिए जनसंघ के पहले अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे...का नारा गढ़ा था। कश्मीर के पूर्ण एकीकरण की लड़ाई लड़ने वाले मुखर्जी का सपना 66 साल बाद 2019 में पूर्ण हुआ, जब जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करते हुए अनुच्छेद 370 हटा दिया गया। बड़ा सवाल यह है कि जिस राज्य से जनसंघ को पहला अध्यक्ष मिला था, जिसके संघर्षों से जम्मू-कश्मीर में नया इतिहास रचा गया, क्या उस पश्चिम बंगाल में कमल खिलाकर भाजपा इतिहास रच पाएगी।
कोलकाता की विधानसभा सीटें तय करेंगी सत्ता किसे मिलेगी?
बंगाल की राजधानी कोलकाता की 11 विधानसभा सीटों का रुख ही पूरे राज्य की सत्ता का भविष्य तय करने जा रहा है। इतिहास की विरासत और वर्तमान की सीधी टक्कर में सिटी ऑफ जॉय इस समय बंगाल का सबसे बड़ा रणक्षेत्र बन गया है। फुटबॉल और क्रिकेट के दीवाने इस शहर में 11 की संख्या का अपना एक रोमांच है। जैसे मैदान पर 11 खिलाड़ी हार-जीत का फैसला करते हैं, ठीक वैसे ही कोलकाता की 11 सीटें तय करेंगी कि नबन्ना यानी सचिवालय पर किसका परचम लहराएगा। फिलहाल सभी सीटों पर तृणमूल का कब्जा है। शहर में घुसते ही हवा का रुख कुछ बदला-बदला नजर आ रहा है। कमल भी जोर दिखा रहा है। मुकाबला सीधा है...तृणमूल की दो पत्तियां बनाम भाजपा का कमल। लोगों का मानना है कि मौजूदा में माहौल में कुछ सीटों पर कमल का खिलना तय है। कांग्रेस और वामपंथ के लिए यहां कोई गुंजाइश नजर नहीं आती। बंगाल में अगर परिर्वतन की सुनामी आती है, तो उसका केंद्र कोलकाता ही होगा। अगर ममता हवा का रुख थामने में कामयाब रहीं, तो भाजपा के लिए सत्ता तक पहुंचना कठिन हो जाएगा।
इस बार लड़ाई बराबर की
कोलकाता की गलियों में इस बार चुनावी सरगर्मी का मिजाज बदला हुआ है। दमदम हवाई अड्डे से शहर में दाखिल होते ही राजनीति की चर्चाएं तीखी हो जाती हैं। टैक्सी चालक सूरज मंडल के शब्दों में कहें तो लड़ाई इस बार बराबर की है। भाजपा ने घेराबंदी मजबूत की है, तो दीदी ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। न्यू टाउन जैसे आधुनिक इलाकों के ड्राइंग रूम से लेकर ढाबे की बेंचों तक, भ्रष्टाचार और हालिया प्रशासनिक चूकों पर असंतोष की लहर साफ दिखती है। यह माहौल संकेत दे रहा है कि इस बार मतदाता खामोश जरूर है, पर उसका फैसला चौंकाने वाला हो सकता है।
आरजी कर की घटना को लेकर आक्रोश
कोलकाता में आरजी कर मेडिकल कॉलेज जैसी घटनाओं ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। सड़कों पर उतरा जनसैलाब और विशेषकर महिलाओं की स्वतःस्फूर्त भागीदारी यह बताती है कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि एक सामाजिक उबाल है। भ्रष्टाचार और विकास की सुस्त रफ्तार जैसे मुद्दे अब घर-घर की चर्चा बन चुके हैं। आमतौर पर चुनावी चर्चाओं से दूर रहने वाले कोलकाता में ऐसी टिप्पणियां चौंकाती हैं और परिवर्तन की आहट का संकेत देती हैं। न्यू टाउन के भद्रलोक इलाकों में जाने पर भी यही असंतोष सुनाई देता है। सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त दिगंत बनर्जी भ्रष्टाचार और आरजी कर अस्पताल जैसी हालिया दुखद घटनाओं का उल्लेख करते हुए मानते हैं कि इस बार सत्ता विरोधी लहर का झटका कोलकाता में भी महसूस होगा।
छलांग लंबी, मगर फासला बरकरार
भाजपा के पिछले प्रदर्शन ने राजनीति के पंडितों को हैरान किया है, लेकिन मंजिल तक पहुंचने के लिए उसे अभी पहाड़ चढ़ना बाकी है सफर : 2016 में मात्र 3 सीटों वाली भाजपा 2021 में 77 तक पहुंची।लक्ष्य : 148 के जादुई आंकड़े के लिए उसे अपनी मौजूदा ताकत को लगभग दोगुना करना होगा।बाधा : तृणमूल और भाजपा के बीच लगभग 10 प्रतिशत मतों का वह अंतर है, जो पिछले चुनाव में हार-जीत की सबसे बड़ी दीवार बना था।पिछले लोकसभा चुनाव के रुझान बताते हैं कि कोलकाता उत्तर में तृणमूल का किला दरक रहा है।उत्तर कोलकाता : जोरासांको (7,401 अंतर), श्यामपुकुर (8,401 अंतर) और काशीपुर-बेलगछिया (7,268 अंतर) जैसी सीटों पर मार्जिन इतना कम है कि भाजपा यहां कभी भी पासा पलट सकती है।दक्षिण कोलकाता : यहां तृणमूल की पकड़ अब भी फौलादी नजर आती है। बालीगंज, कसबा और पोर्ट जैसी सीटों पर 40 हजार से 60 हजार तक की बढ़त भाजपा के लिए एक कठिन चुनौती है।
सत्ता का फाइनल राउंड
बंगाल की सत्ता का संघर्ष अब पूरे राज्य से सिमटकर कोलकाता की इन 11 सीटों पर केंद्रित हो गया है। भवानीपुर जैसे हाई-प्रोफाइल गढ़ में भाजपा की घेराबंदी और उत्तर कोलकाता की सीटों पर तृणमूल की रक्षात्मक मुद्रा ने मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है। संदेश साफ है कि जिसके पास कोलकाता-11 उसी के हाथ में बंगाल की सत्ता की चाबी होगी
लाल सलाम की गूंज फीकी: वेस्ट बंगाल चुनाव में रोजगार और विकास की चर्चा तेज
16 Apr, 2026 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता | सिलीगुड़ी से निकलते ही शहर की रफ्तार पीछे छूट जाती है और उत्तर बंगाल की वह जमीन शुरू हो जाती है, जहां चाय बागानों की कतारें और पहाड़ों की हल्की ढलानें रास्ते को अलग ही रंग देती हैं। एशियन हाईवे पर पहुंचते ही चुनावी माहौल साफ दिखने लगता है। सड़कों के किनारे पार्टी झंडे, दीवारों पर नारे और राजनीतिक चर्चाएं। फिर आता है भारत-नेपाल सीमा के पास बसे दार्जिंलिंग का नक्सलबाड़ी। यहीं 1967 में नक्सल आंदोलन की नींव पड़ी थी, और यहीं से उठी चिंगारी बाद में झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों तक फैलकर लाल गलियारा बन गया। कभी 200 से अधिक जिलों में इसका प्रभाव था, पर आज उसी जमीन पर अलग कहानी लिखी जा रही है। हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि देश अब नक्सलवाद से लगभग मुक्त हो चुका है। पर, सवाल है कि क्या यह केवल आंकड़ों की कहानी है या जमीन पर भी यही हकीकत है। अमर उजाला ने नक्सलबाड़ी की गलियों, चाय दुकानों और खेतों तक जाकर हालात को समझने की कोशिश की।
भत्ता नहीं, नौकरी चाहिए...उद्योग आएंगे तो रुकेंगे लोग
नक्सलबाड़ी की गलियों में अब नक्सल आंदोलन चर्चा का विषय नहीं रहा। चाय की दुकान पर बैठे बुजुर्ग हर्षवर्धन ने कहा, हमने वह दौर देखा है, पर अब सब खत्म हो चुका है। नई पीढ़ी को तो बस नाम भर पता है। यहां अब कोई लाल सलाम नहीं बोलता। अटल गांव के प्रदीप साफ कहते हैं, अब यहां सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार है। लोग आंदोलन नहीं, काम चाहते हैं। अगर उद्योग आएंगे, तो लोग यहीं रुकेंगे। पास खड़े अजय की बात तस्वीर और साफ कर देती है कि हमें भत्ता नहीं चाहिए, नौकरी चाहिए। पढ़ाई के बाद भी अगर बाहर जाना पड़े तो क्या फायदा।स्थानीय निवासी अजीत कहते हैं, अब राजनीति विचारधारा नहीं चलती। लोग सड़क, बिजली, पानी व रोजगार देखकर वोट देते हैं। चाय बागान की सुजाता कहती हैं, अगर लखपति दीदी बनने का अवसर मिले, तो इसे कौन छोड़ना चाहेगा।
वाम गढ़ में कमल मजबूत
नक्सलबाड़ी की कहानी एक इलाके की नहीं, बल्कि उस बड़े बदलाव की झलक है जो देश के कई हिस्सों में दिख रहा है। कभी वामदलों के गढ़ रहे इस इलाके में उसका जनाधार तकरीबन खत्म हो चुका है। 30 वर्षों तक प्रभुत्व दिखाने वाले वामदल का वोट शेयर 2021 में सिर्फ 5 फीसदी रह गया। 2021 में भाजपा के आनंदमय बर्मन ने 58% वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की। तृणमूल उम्मीदवार राजेन सुंदास दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस तीसरे स्थान पर खिसक गई। इस बार भी भाजपा ने आनंदमय बर्मन पर भरोसा जताया है, जबकि तृणमृल ने कांग्रेस से आए शंकर मलाकार को उम्मीदवार बनाया है।
CM बनते ही फुल एक्शन में सम्राट चौधरी, पहली ही बैठक में अधिकारियों को दिखाया सख्त रुख
15 Apr, 2026 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार के राजनीतिक इतिहास में आज एक ऐतिहासिक पल था क्योंकि पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के किसी नेता ने मुख्यमंत्री का पद संभाला। बुधवार को सुबह 11:00 बजे लोक भवन में सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह समाप्त होने के तुरंत बाद सम्राट चौधरी सीधे मुख्य सचिवालय पहुंचे, जहां उन्होंने औपचारिक रूप से अपने कर्तव्यों का कार्यभार संभाला।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में प्रवेश करते ही सम्राट चौधरी ने सबसे पहले महत्वपूर्ण फाइलों की समीक्षा की और प्रशासनिक सक्रियता बढ़ाने वाले आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। उनकी मौजूदगी में मुख्य सचिव और विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिवों की पहली औपचारिक बैठक हुई। सचिवालय से सामने आई तस्वीरों में सम्राट चौधरी को फाइलों की बारीकी से जांच करते और अधिकारियों को निर्देश देते हुए देखा गया।
पहली ही बैठक में अधिकारियों को कड़े निर्देश
अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार की कार्यशैली अब से एक्शन-ओरिएंटेड (कार्य-उन्मुख) और परिणाम-आधारित होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता की शिकायतों का निवारण तय समयसीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ तुरंत होना चाहिए।
सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों से संबंधित अटकी हुई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर प्रगति रिपोर्ट तुरंत सौंपे। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही के दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने सरकारी सेवाओं को सरल और अधिक सुलभ बनाने के लिए तकनीकी सुधारों को लागू करने को प्राथमिकता दी।
कानून-व्यवस्था और विकास पर फोकस
बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि उनकी सरकार की सर्वोपरि प्राथमिकताएं राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति को और मजबूत करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के विकास को ध्यान में रखते हुए, नई विकास योजनाओं के प्रस्ताव तैयार करने में तेजी लाएं।
मुख्यमंत्री के साथ विजय और बिजेंद्र ने भी शपथ ली
शपथ ग्रहण समारोह बुधवार सुबह 10:50 बजे लोक भवन स्थित राजेंद्र मंडप में हुआ, जहां बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री के रूप में और जदयू के विजय कुमार चौधरी तथा बिजेंद्र प्रसाद यादव को मंत्री पद की शपथ दिलाई। जदयू के ये दोनों नेता नई सरकार में उपमुख्यमंत्री के तौर पर कार्य करेंगे। इस शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और NDA के अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।
सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण पर छलके मांझी के आंसू, बोले- नीतीश न होते तो पहचान नहीं मिलती
15 Apr, 2026 05:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार के राजनीतिक इतिहास में आज बुधवार को एक नया अध्याय लिखा गया। पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा है। सुबह 11:00 बजे सम्राट चौधरी ने लोक भवन में मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस समारोह में शामिल होने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित कई वरिष्ठ नेता पहुंचे थे, जिनमें केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी शामिल थे। शपथ ग्रहण समारोह के बाद मांझी ने एक ओर जहां सम्राट चौधरी के लिए अपनी खुशी जाहिर की, वहीं दूसरी ओर नीतीश कुमार के बारे में बात करते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए।
नीतीश कुमार ने मुझे पहचान दी
पटना में मीडिया से बात करते हुए जीतन राम मांझी काफी भावुक दिखें। उन्होंने कहा, 'मेरी दो आंखें हैं, एक से खुशी के आंसू बह रहे हैं, तो दूसरी आंख से दुख के आंसू निकल रहे हैं।' जब उनसे इसका कारण पूछा गया, तो वे बहुत भावुक हो गए और कहा कि सम्राट चौधरी अब मुख्यमंत्री बन गए इसलिए खुशी के आंसू और दुख के आंसू नीतीश कुमार के लिए क्योंकि आज जीतन राम मांझी जो भी है वो नीतीश कुमार के द्वारा ही पहचानित है, वह पूरी तरह से नीतीश कुमार का दिया हुआ तोहफा है। जीतन राम मांझी ने कहा, 'अगर नीतीश कुमार ने 2014 में मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनाया होता, तो आज मेरी इतनी चर्चा नहीं हो रही होती। पूरे भारत में लोग नहीं जानते कि मैं कौन हूं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने महादलित समुदाय के एक बेटे को इतना ऊंचा पद दिया, मुख्यमंत्री बनाया। जाहिर है, जब यह कहानी नीतीश कुमार की है, तो मेरे आंखों में आंसू कैसे न आते?'
सम्राट चौधरी बिहार को आगे ले जाएंगे- मांझी
जीतन राम मांझी ने सम्राट चौधरी को बिहार के नए मुख्यमंत्री बनने की शुभकामनाएं दीं और कहा कि नीतीश कुमार ने पिछले 20 सालों तक बिहार पर शासन किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर नीतीश कुमार के कार्यकाल में कोई कमी रह गई होगी, तो सम्राट चौधरी अपनी प्रशासनिक सूझबूझ से उन्हें दूर करेंगे और बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
जीतन राम मांझी ने नई सरकार के लिए दी बधाई
इसके अलावा जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर भी नहीं सरकार को बधाई दी। मांझी ने एक्स पर लिखा, 'शपथ सम्राट का, इतिहास रचा जाएगा बिहार के विकास का। सम्राट चौधरी जी को बिहार के 24वें मुख्यमंत्री तथा विजय कुमार चौधरी व बिजेंद्र प्रसाद यादव जी को उपमुख्यमंत्री पद का शपथ ग्रहण करने पर अनंत बधाई एवं शुभकामनाएं।
शपथ ग्रहण के पोस्टर से छिड़ा सियासी घमासान, रोहिणी ने BJP को बताया रंग बदलने वाला
15 Apr, 2026 04:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना : बिहार में सत्ता का केंद्र अब आधिकारिक तौर पर बदल गया है और अब यह BJP के हाथों में है। मंगलवार को NDA विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद सम्राट चौधरी ने बुधवार सुबह 11:00 बजे लोक भवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, शपथ ग्रहण समारोह को लेकर जारी किए गए एक पोस्टर ने गठबंधन की मर्यादा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पोस्टर को लेकर लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक साथ BJP और नीतीश कुमार दोनों पर निशाना साधा है।
क्या है पोस्टर में?
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शपथ ग्रहण का एक विज्ञापन साझा किया है। इस विज्ञापन में शपथ ग्रहण समारोह का स्थान, समय और दिनांक बताया गया है। इसके अलावा पोस्टर में बिहार के नक्शे के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की बड़ी तस्वीरें हैं, लेकिन नीतीश कुमार कहीं नजर नहीं आ रहे। इस पोस्टर को रोहिणी आचार्या ने नीतीश कुमार की घोर बेइज्जती बताया है।
24 घंटे भी नहीं हुए और विज्ञापन से चाचा गायब
रोहिणी ने तंज कसते हुए लिखा कि अभी चाचा जी (नीतीश कुमार) के इस्तीफे को 24 घंटे भी अभी नहीं बीते हैं और उन्हें पोस्टर-विज्ञापनों से भी बाहर कर दिया गया है। उन्होंने तीखे लहजे में कहा, 'इस्तीफे के पहले तक चाचा जी को यह कह कर ताड़ पर चढ़ाया जा रहा था कि बिहार उनके हिसाब से, उनकी ही छत्रछाया में चलाया जाएगा, मगर इस्तीफा होते ही गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली जमात को चाचा जी की तस्वीर से भी ऐतराज हो गया।'
माया मिली न राम…
रोहिणी ने नीतीश कुमार की वर्तमान स्थिति को 'Catch-22' (ऐसी उलझन जिससे निकलना मुश्किल हो) बताया। उन्होंने पुरानी कहावत का जिक्र करते हुए नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए लिखा, 'चाचा जी जिस हालात में फंसे हैं, उसके लिए कहा गया है कि दुविधा में दोनों गए, माया मिली न राम।' रोहिणी का इशारा साफ था कि नीतीश कुमार ने अपनी दशकों पुरानी साख भी गंवा दी और अब नई सरकार में उन्हें वह सम्मान भी नहीं मिल रहा, जिसके लिए उन्होंने पाला बदला था।
क्या कह रहे सोशल मीडिया यूजर
रवि मणि नाम के एक यूजर ने लिखा, 'जिस चाचा ने पूरे परिवार को तरस नहस कर दिया, जिस चाचा में आरजेडी के दौर को गलत प्रचार किया, जिस चाचा ने मतलब के लिए कुर्सी के लिए जीवन भर समझौता किया, उस चाचा के लिए आपको ज़्यादा सोचने की क्या जरूरत है, अपने पार्टी परिवार पर फोकस कीजिए।'
एक यूजर ने रोहिणी पर ही वार करते हुए लिखा, 'मैडम बौखला गई है मैडम को उम्मीद था कि नीतीश कुमार चाचा पलटी मारेंगे और इनका भाई मुख्यमंत्री बनेगा पर इच्छा पूरी नहीं हुई इसलिए मैडम को ज्यादा प्रॉब्लम हो रही है।' इसी तरह कई अन्य यूजर ने भी तरह-तरह की प्रतिक्रिया दी है।
बिहार को मिले नए उपमुख्यमंत्री, पीएम मोदी बोले- अनुभव से बढ़ेगी प्रगति की रफ्तार
15 Apr, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिल्ली: बिहार में लंबे समय से चल रही राजनीतिक चर्चाओं और नई सरकार के गठन को लेकर लोगों की उत्सुकता आखिरकार समाप्त हो गई है। राज्य में नई सरकार के शपथ ग्रहण के साथ ही मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों ने पदभार संभाल लिया है। बिहार की जनता पिछले कई दिनों से यह जानने को उत्सुक थी कि नए नेतृत्व में राज्य की कमान किसके हाथ में होगी।
आज हुए शपथ ग्रहण समारोह में भारतीय जनता पार्टी के नेता सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ ही जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने उप मुख्यमंत्री (Deputy CM) के रूप में शपथ ग्रहण की। इस अवसर पर पीएम मोदी ने प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्हें बधाई दी।
पीएम मोदी ने X पर लिखते हुए कहाः
“बिहार के उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले विजय कुमार चौधरी जी और बिजेंद्र प्रसाद यादव जी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं! मुझे पूरा भरोसा है कि इनका जमीनी अनुभव और जनहित को लेकर प्रतिबद्धता बिहार के विकास को नई दिशा और गति देगी। इसके साथ ही राज्य सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण के नित-नए मानक स्थापित करेगा।”
नए अध्याय की शुरुआत
पीएम मोदी के इस संदेश को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं। बिहार में इस नए नेतृत्व के साथ राज्य की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
महिला आरक्षण पर मायावती का बड़ा बयान, बोलीं- 50% नहीं तो 33% ही सही
15 Apr, 2026 02:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि यह कम से कम महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व दिलाने की दिशा में एक शुरुआत है. उन्होंने कहा कि इसमें काफी देरी हुई है, लेकिन देरी के बावजूद BSP इसका स्वागत करती है.
राजधानी लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मायावती ने कहा कि भले ही यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से कम है, लेकिन यह महिलाओं को उनका हक दिलाने की दिशा में एक अहम कदम है. उन्होंने कहा, अगर 50 नहीं, तो 33 प्रतिशत ही सही, यह भी एक अच्छी शुरुआत है.
उन्होंने कहा, ‘हमारी पार्टी बसपा पहले भी लगातार महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग करती रही है. लेकिन कोई भी अन्य पार्टी इस पर सहमत नहीं हुई, और न ही अब ऐसा लगता है कि वे सहमत होंगी. हम परम पूज्य बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर को भी धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने पुरुषों की तरह महिलाओं को भी समान मताधिकार दिया (सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार)’ उन्होंने कहा कि 2023 में पहली बार पारित कानून को लागू करने में देरी के बावजूद, उनकी पार्टी अभी भी इसका स्वागत करती है, और ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर पड़ी महिलाओं को आरक्षण देने की आवश्यकता व्यक्त करती है.
उन्होंने कहा, ‘हालांकि इसमें काफी देरी हुई है, लेकिन देरी के बावजूद हमारी पार्टी इसका स्वागत करती है. अगर वास्तव में शोषित और हाशिए पर पड़ी महिलाओं, विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान किया जाता है, जो सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से लगातार हाशिए पर धकेली जा रही हैं, तो यह उचित और ऐतिहासिक दोनों होगा’.
उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर केवल बयानबाजी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि ठोस नीति और मजबूत इच्छाशक्ति की कमी के कारण महिलाओं को उनका अधिकार नहीं मिल पाया है.साथ ही उन्होंने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और हिंसा पर भी चिंता जताई.
उन्होंने महिलाओं के लिए आरक्षण में ऐतिहासिक रूप से देरी करने के लिए कांग्रेस की कड़ी आलोचना की और कहा कि जाति एक ऐसा कारक है जिसने स्वतंत्रता के बाद पार्टी की नीति को प्रभावित किया है. उन्होंने कहा ‘तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अपने संकीर्ण जातिवाद से प्रभावित होकर इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया और बाद में इसे टुकड़ों में पारित किया. इस प्रकार बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को ओबीसी के लिए आरक्षण के अभाव और महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और बेहतरी के लिए कोई ठोस कदम न उठाए जाने के विरोध में देश के पहले कानून मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा’.
पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: राघव चड्ढा की Z+ सिक्योरिटी खत्म, सुरक्षा का जिम्मा दिल्ली पुलिस को
15 Apr, 2026 02:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Raghav Chadha Security: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की जेड प्लस कैटेगरी सुरक्षा वापस ले ली गई है. पंजाब सरकार ने राघव चड्ढा को यह सुरक्षा दी थी, जिसे अब वापस ले लिया है. पिछले महीने राघव चड्ढा को पार्टी ने राज्यसभा के डिप्टी लीडर पद से भी हटा दिया था. जिसके बाद राघव चड्ढा ने कहा कि उन्हें खामोश किया गया है, पराजित नहीं.मीडिया रिपोर्ट के सूत्रों के मुताबिक, पंजाब पुलिस ने पिछले सप्ताह ही राघव चड्ढा का सुरक्षा घेरा हटा लिया था. पंजाब पुलिस की सुरक्षा हटने के बाद राघव को केंद्रीय सुरक्षा प्रदान की गई है. दिल्ली पुलिस ने राघव चड्ढा की सुरक्षा को संभालने की जिम्मेदारी के निर्देश दिए हैं.
पार्टी ने सॉफ्ट पीआर के लगाए थे आरोप
आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा पर आरोप लगाए थे कि उन्होंने संसद में पंजाब के बड़े मुद्दे उठाने की बजाय अपने पीआर में व्यस्त रहते हैं. पार्टी ने आरोप लगाए थे कि राघव चड्ढा केंद्र के प्रति आक्रामक रुख नहीं अपनाते, बल्कि विपक्षी कार्रवाइयों से भी दूरी बनाए रखते हैं.
वीडियो जारी कर दी थी सफाई
इसके बाद राघव चड्ढा ने भी सोशल मीडिया पर लगातार चल रही प्रतिक्रियाओं को लेकर वीडियो बनाते हुए सफाई दी और कहा कि उन्हें खामोश किया गया है, पराजित नहीं. राघव चड्ढा ने इस दौरान अपने बयानों से पार्टी के सभी आरोपों का जवाब दिया था.
दिल्ली पुलिस के हवाले राघव की सुरक्षा
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को जब से पार्टी ने डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी छीनी है. तब से ही वे लगातार अपने सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी को चुनौती दे रहे हैं. फिलहाल, पार्टी और राघव चड्ढा के बीच विवाद चल ही रहा था कि इसी दौरान पंजाब सरकार ने Z+ सिक्योरिटी हटा दी. फिलहाल, अभी दिल्ली सरकार के अंतर्गत राघव चड्ढा की सुरक्षा की जिम्मेदारी है.
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