धर्म एवं ज्योतिष
1000 हजार साल पुराना है काशी का यह मंदिर, स्कंद पुराण में है जिक्र, अब हालात कुछ ऐसे कि
1 Mar, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक वाराणसी, जिसे बनारस या काशी भी कहा जाता है, हिंदुओं का प्रमुख तीर्थस्थल है. उत्तर प्रदेश में गंगा के तट पर स्थित वाराणसी एक पवित्र और ऐतिहासिक शहर है, जिसे शिव की नगरी भी कहा जाता है. बनारस अपने प्रसिद्ध ‘काशी विश्वनाथ मंदिर’ के साथ सुबह-शाम की भव्य और पारंपरिक तरीके से की जाने वाली गंगा आरती के लिए जाना जाता है. माना जाता है कि गंगा स्नान और काशी विश्वनाथ के दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह शहर ज्ञान, आध्यात्मिकता, संगीत, संस्कृति और कला के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है, जो अपने घाटों, साड़ियों और पान के लिए भी विश्व भर में जाना जाता है.
मंदिरों का शहर है काशी
बनारस सनातन संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र है, जहां 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर के साथ हजारों मंदिर स्थित हैं. बनारस के बारे में कहा जाता है कि यहां की हर गली में एक मंदिर है, जिसके कारण इसे मंदिरों का शहर भी कहा जाता है. वाराणसी के उन्हीं मंदिरों में से एक ‘सोमेश्वर महादेव मंदिर’ है, जो काशी के हृदय में स्थित एक अत्यंत पवित्र, ऐतिहासिक और प्राचीन शिव मंदिर है.
1000 साल पुराना सोमेश्वर महादेव मंदिर
लगभग 1,000 साल पुराना सोमेश्वर महादेव मंदिर अब अपना अस्तित्व खोने के कगार पर है. मंदिर पूर्ण रूप से जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है और वहां तक जाने का रास्ता भी खतरनाक और खंडहरनुमा हो गया है. इस मंदिर की स्थिति ऐसी हो गई है कि छत कभी भी गिर सकती है. मान्यता है कि काशी का सोमेश्वर महादेव मंदिर कभी सनातन धर्म का प्रकाशमान केंद्र था, जहां महादेव के परम उपासक दूर-दूर से ध्यान करने के लिए आते थे
स्कंद पुराण में है मंदिर का जिक्र
मंदिर में सफेद संगमरमर शिवलिंग के सामने नंदी की मूर्ति विराजमान है. इसी के साथ मंदिर में हनुमानजी का भी एक दुर्लभ स्वरूप है, जिनके दोनों कंधों पर राम और लक्ष्मण विराजमान हैं. सोमेश्वर महादेव मंदिर का जिक्र स्कंद पुराण में भी पाया जाता है. वहीं, सनातनियों का यह प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहर अब समय के साथ नष्ट होते नजर आ रहा है. होली के पर्व की शुरुआत हो चुकी है और ब्रज के बाद काशी की होली की चर्चा पूरे विश्व में की जाती है. होली के मौके पर शिव की नगरी काशी में कई कार्यक्रम किए जाते हैं. यहां धूमधाम से होली का पर्व मनाया जाता है.
19 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरू, विमलकोट देवी शक्तिपीठ पर लगेगा भव्य मेला, प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध
1 Mar, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत, जो अपनी प्राचीन और विविध संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है, को मंदिरों और ऋषियों की पवित्र भूमि माना जाता है. यहां अनेकों मंदिर और तीर्थ स्थल हैं, जो अपनी अनूठी विशेषता और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाने जाते हैं. उन्हीं में से एक है विमलकोट देवी मंदिर. यह मंदिर देवभूमि उत्तराखंड के अल्मोरा जिले के धौलछीना क्षेत्र में आठ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जो माता के शक्तिपीठों में शामिल एक प्राचीन मंदिर है. विमलकोट देवी मंदिर मां दुर्गा को समर्पित है. चैत्र नवरात्रि की शुरुआत इस बार 19 मार्च से होगी और समापन 27 मार्च को. ऐसे में चैत्र नवरात्रि के मौके पर देश-विदेश से लाखों की संख्या में भक्त पहुंचकर माता का आशीर्वाद लेते हैं.
भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्य आकर्षण
माता विमलकोट मंदिर में प्रत्येक नववर्ष पर मंदिर समिति द्वारा भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें कुमाऊंनी लोक नृत्य, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्य आकर्षण के केंद्र होते हैं. मेले में देश-दुनिया से आए हजारों भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है. विमलकोट देवी मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए काफी प्रसिद्ध है.
दूर दूर से आते हैं भक्त
मंदिर को लेकर मान्यता है कि जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से यहां देवी की उपासना करते हैं, माता उनके सभी दुखों को हरके उनकी सभी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं, इसलिए यहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मन्नत लेकर आते हैं. मनोकामना पूरी होने के बाद भक्त फिर से माता के दर्शन करने आते हैं और उनकी आंखों में माता की कृपा साफ दिखाई देती है.
मंदिर के चारों ओर सुंदर पहाड़
माता विमलकोट शक्तिपीठ मंदिर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है, जहां से हिमालय की लंबी श्रृंखला दिखाई देती है. मंदिर की खासियत है कि ये चारों ओर सुंदर पहाड़ों और हरे-भरे पेड़ों से घिरा है, जो मंदिर के दृश्य को अलौकिक और अद्भुत बनाता है. मंदिर में भंडारे का भी आयोजन किया जाता है, जिसे श्रद्धालु प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं.
19 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरू
चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है और नवमी तिथि के दिन समापन होता है. इस बार चैत्र नवरात्रि की शुरुआत इस बार 19 मार्च से होगी और समापन 27 मार्च को हो रहा है. 27 मार्च को रामनवमी और 28 मार्च को दशहरा का पर्व मनाया जाएगा. नवरात्रि के मौके पर माता विमलकोट शक्तिपीठ में अलग ही रौनक देखने को मिलती है, यहां देश विदेश से लाखों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं.
होलिका दहन के दिन शुक्र का मीन राशि में गोचर, मेष, कर्क समेत 6 राशियों की जिंदगी में आएंगे खुशियों के रंग
1 Mar, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होलिका दहन 2 मार्च को किया जाएगा और इसी दिन शुक्र ग्रह मीन राशि में गोचर करने वाले हैं. शुक्र ग्रह दिन सोमवार को सुबह सुबह 12 बजकर 56 मिनट पर कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में गोचर करने वाले हैं. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, वृषभ और तुला राशि के स्वामी शुक्र की मीन राशि में शनि के साथ युति भी बनेगी. शुक्र ग्रह भौतिक सुख सुविधा, रचनात्मकता, सौंदर्य, आनंद आदि के कारक ग्रह हैं, शुक्र जब एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो इसका प्रभाव देश दुनिया समेत मेष से मीन तक सभी 12 राशियों पर पड़ता है. आज हम आपको उन राशियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको शुक्र गोचर से फायदा होने वाला है. आइए जानते हैं होलिका दहन के दिन शुक्र का गोचर होना किन किन राशियों के लिए फायदेमंद होने वाला है.
शुक्र गोचर का मेष राशि पर प्रभाव
मेष राशि वालों के लिए दूसरे और सातवें भाव के स्वामी शुक्र का गोचर आपकी राशि से 12वें भाव में हो रहा है. शुक्र के 12वें भाव में जाने का मतलब है कि आपके काफी समय से अटके हुए कार्य पूरे होंगे और मकान व वाहन खरीदने की इच्छा भी पूरी होगी. होलिका दहन के दिन शुक्र गोचर नौकरी पेशा जातकों के लिए बेहद शुभ रहने वाला है, अधिकारियों के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे और आमदनी के अन्य स्त्रोत भी बनेंगे. जो लोग अपना खुद का बिजनेस करते हैं, उन्हें भी आर्थिक लाभ मिल सकता है और वे इस दौरान अपने कारोबार का विस्तार कर सकते हैं.
शुक्र गोचर का मिथुन राशि पर प्रभाव
मिथुन राशि वालों के लिए शुक्र पांचवें और 12वें भाव के स्वामी हैं और 10वें भाव में गोचर करने वाले हैं. होलिका दहन के दिन शुक्र का गोचर प्रोफेशनल तौर पर मिथुन राशि वालों के लिए बहुत अच्छा रहने वाला है. इस राशि के नौकरी पेशा जातक ऑफिस में अच्छा प्रदर्शन करेंगे और अगर आप मैनेजर की भूमिका में हैं तो आपके सुझाव और आलोचनाओं को अधिकारी गंभीरता से लेंगे. अगर आप खुद का बिजनेस शुरू करने की प्लानिंग कर रहे हैं तो होलिका दहन के बाद ही आपके लिए शुभ संयोग बनना शुरू हो जाएंगे.
शुक्र गोचर का कर्क राशि पर प्रभाव
होलिका दहन के दिन शुक्र का गोचर आपकी राशि से नौवें भाव में होने जा रहा है और शुक्र चौथे और 11वें भाव के स्वामी भी हैं. कर्क राशि के लोग अब राहत की सांस ले सकते हैं क्योंकि शुक्र की वजह से वेतनभोगी लोगों को लंबे समय से प्रतीक्षित आर्थिक लाभ और प्रमोशन मिल सकता है. दैनिक कामकाज वालों को मेहनत के बदले अच्छा वेतन मिल सकती है और धूमधाम से होली का पर्व भी मनाएंगे. मुनाफा कमाने वाले व्यवसायी भी इस समय का आनंद लेंगे. परिवार में अगर कोई परेशानी चल रही है तो वह दूर हो जाएगी और धन की वजह से अटके हुए कई कार्य पूरे होंगे.
शुक्र गोचर का कन्या राशि पर प्रभाव
कन्या राशि वालों के लिए दूसरे और नौवें भाव के स्वामी शुक्र आपकी राशि से सातवें भाव में गोचर करने वाले हैं. होलिका दहन के दिन शुक्र का गोचर आपके जीवन की कई परेशानियों को दूर करेगा और घर या फ्लैट ले पाने की स्थिति में भी होंगे. इस अवधि में आप जीवनसाथी की मदद से बिजनेस में अच्छा पैसा कमा सकते हैं. कॉर्पोरेट निवेश से भी धीरे-धीरे लाभ मिलेगा. इस राशि के नौकरी पेशा जातकों के लिए शुक्र गोचर फायदेमंद रहेगा. अगर आप नई नौकरी खोज रहे हैं तो आपको अच्छे अवसर मिलेंगे और बॉस इस समय आपके पक्ष में रह सकते हैं. सामाजिक और धार्मिक कार्यों में भाग लेने से आपको पहचान और प्रसिद्धि भी मिलेगी.
शुक्र गोचर का वृश्चिक राशि पर प्रभाव
वृश्चिक राशि वालों के लिए शुक्र सातवें और 12वें भाव के स्वामी हैं और आपकी राशि से पांचवें भाव में गोचर करने वाले हैं. होलिका दहन के दिन शुक्र का गोचर आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा और आपको कई शुभ समाचार सुनने को भी मिलेंगे. होली के मौके पर कई खास दोस्तों से मिलने का मौका मिलेगा, जिनसे आपको जरूरी जानकारी भी मिल सकती है. क्रिएटिव फील्ड में काम करने वाले लोग काम के प्रति नई ऊर्जा महसूस करेंगे और प्रोफेशनली आगे बढ़ेंगे. अगर आप किसी विवाद में फंसे हुए हैं तो इस अवधि में आपको मुक्ति मिलेगी.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (01 मार्च 2026)
1 Mar, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कुटुम्ब की समस्याओं में समय बीतेगा, धन का व्यय होगा, मन उद्विघ्न रहे।
वृष राशि :- मानसिक बेचैनी क्लेश अशांति के योग बनेंगे तथा कार्य भार अवश्य ही बढ़ेगा।
मिथुन राशि :- व्यर्थ भ्रमण से धन हानि का आरोप, क्लेश से बचे तथा स्थिति संदिग्ध रहेगी।
कर्क राशि :- परिश्रम से कुछ सफलता मिलेगी, अर्थव्यवस्था कुछ अनुकूल बन जायेगी।
सिंह राशि :- मनोबल उत्साह वर्धक होवे, कार्यगति में सुधार होगा कार्य आनंद से हो।
कन्या राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होवे, व्यक्तिगत मान प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
तुला राशि :- इष्ट मित्र सुख वर्धक होगे तथा सामाजिक कार्यों में मान प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
वृश्चिक राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल हो, कार्य गति में सुधार होगा बिगड़े कार्य बनेंगे।
धनु राशि :- कुटुम्ब में धन का व्यय, मानसिक व्यग्रता स्वभाव में बेचैनी बनेगी।
मकर राशि :- चिन्ताऐं दूर हो, सफलता के साधन जुटाये तथा रुचि कार्य अवश्य बनेगें।
कुंभ राशि :- स्त्रीवर्ग से हर्ष, उल्लास कार्यगति में अनुकूलता अवश्य ही बनेगी, चिन्ता हो।
मीन राशि :- अधिकारियों से तनाव स्थिति रखे, मित्रों से विवाद तथा धोखा होगा।
मणिकर्णिका घाट पर 'मसान की होली' को लेकर क्या है विवाद? आस्था और शास्त्र में से किसकी होगी जीत
28 Feb, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फाल्गुन मास में जहां पूरा देश रंगों की होली की तैयारी करता है, वहीं काशी में एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है जो आस्था, वैराग्य और जीवन-मृत्यु के दर्शन को एक साथ समेटे हुए है. बाबा विश्वनाथ की नगरी में स्थित मणिकर्णिका घाट पर खेली जाने वाली मसान की होली सदियों पुरानी परंपरा मानी जाती है. यह आयोजन होलिका दहन से पहले या उसके आसपास विशेष तिथि पर किया जाता है, जिसमें साधु-संत, अघोरी और स्थानीय लोग शामिल होते हैं. आइए जानते हैं मसान की होली को लेकर क्या है विवाद
भगवान शिव की नगरी काशी के मणिकर्णिका घाट पर खेले जाने वाली मसान की होली विवादों में घिर गई है. मसान की होली हर वर्ष फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मणिकर्णिका घाट पर खेली जाती है. खबरों की मानें तो मसान की होली को लेकर डोम राजा परिवार के वंशज विश्वनाथ चौधरी ने जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है. इस ज्ञापन में मसान की होली के आयोजन पर रोक लगाने की मांग की है. चौधरी का कहना है कि मणिकर्णिका घाट पर चिता की राख से होली खेलने की परंपरा शास्त्रसम्मत नहीं है. बता दें कि 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी है और 28 फरवरी को मणिकर्णिका घाट पर 'मसान की होली' खेली जाएगी. आइए जानते हैं आखिर किस तरह शुरू हुई यह परंपरा...
डोम राजा परिवार के वंशज ने क्या कहा? - विश्वनाथ चौधरी ने ज्ञापन सौंपकर कहा है कि मणिकर्णिका घाट पर खेली जाने वाली मसान की होली का कोई स्पष्ट शास्त्रीय आधार नहीं है. पहले यह आयोजन मसाननाथ मंदिर तक सीमित था लेकिन अब इसका दायरा बढ़ गया है. इस आयोजन से श्मशान की गरिमा प्रभावित हो रही है. लोग इस आयोजन में शराब का सेवन, हुडदंग और शवदाह में बाधा उत्पन्न करते हैं. उन्होंने चेतावनी भी दी है अगर इस आयोजन को नहीं रोका गया तो वे महाश्मशान में दाह संस्कार रोकने को बाध्य होंगे. बता दें कि मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की परंपरा सदियों से डोम समुदाय के हाथ में ही रही है.
कैसे शुरू हुई यह परंपरा? - मान्यताओं के आधार पर जब भगवान शिव माता पार्वती को विवाह के बाद काशी लेकर आए थे, तब उनके गण और नगरवासियों ने उत्सव की इच्छा जताई थी. भगवान शिव ने उनकी इच्छा को माना, तब नगरवासियों ने रंगों के साथ इस उत्सव को मनाया. इस उत्सव में देवी-देवता भी शामिल हुए थे. लेकिन इस उत्सव से शिव के अन्य भूत-प्रेत, यक्ष, गंधर्व आदि दूर रहे थे. यह बात भगवान शिव को अच्छी नहीं लगी थी क्योंकि शिवजी हर किसी के भगवान हैं. इसके बाद फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष के द्वादशी तिथि को शिवजी ने काशी में गणों के साथ भस्म की होली खेली थी. बताया जाता है कि तभी से काशी में चिता की राख से होली खेलने की परंपरा शुरू हुई थी, जो आज भी अनोखे अंदार में निभाई जाती है.
काशी का मणिकर्णिका घाट - काशी का मणिकर्णिका घाट सबसे प्रसिद्ध घाट में से एक है, यहां 24 घंटे दाह संस्कार होते रहते हैं. मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार होने से आत्मा को मुक्ति प्राप्त होती है. ऐसी आस्था है कि स्वयं भगवान शिव इस भूमि पर विराजमान हैं और मृत आत्माओं को तारक मंत्र प्रदान करते हैं. इसी विश्वास के साथ मसान की होली की परंपरा जुड़ी हुई है. मान्यता है कि मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार करने से आत्मा जीवन-मरण के चक्र से मुक्त हो जाती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां माता पार्वती की कान की बाली गिर गई थी इसलिए इस घाट को मणिकर्णिका घाट कहते हैं.
क्या कहना है आयोजकों का? - दूसरी ओर आयोजकों का कहना है कि संपूर्ण काशी स्वयं में महाश्मशान है, जहां मृत्यु को भी उत्सव और मोक्ष की दृष्टि से देखा जाता है. इस अवसर पर शिवजी भस्मांगरागाय महेश्वर के रूप में गणों के साथ चिता भस्म से फाग रचते हैं. दोपहर के समय घाट पर राग-रागिनियों के बीच चिताओं की राख से होली खेली जाती है. मसान की होली में साधु-संत, नागा, तांत्रिक और अघोरी परंपरा से जुड़े लोग इसमें शामिल होते हैं. मसान की होली यह संदेश देती है कि जीवन और मृत्यु एक ही चक्र के दो पहलू हैं. यहां रंगों की जगह चिता की राख का उपयोग किया जाता है, जो यह बताता है कि अंततः सब कुछ पंचतत्व में विलीन हो जाता है. मसान की होली की परंपरा वर्षों से चली आ रही है, इसको अचानक से रोकना सांस्कृतिक विरासत पर आघात होगा. विवाद को देखते हुए जिला प्रशासन सतर्क हो गया है और दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है.
ऋषि मनु ने क्यों खत्म कराई पराए पुरुष से संतान पैदा करने की नियोग प्रथा, क्यों इसे कहा खराब
28 Feb, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाभारत काल में पराए पुरुष के जरिए संतान पैदा करने की एक धर्म सम्मत प्रथा थी,जिसको नियोग कहते थे. पांडवों और कौरवों के पिता पांडु और धृतराष्ट्र का जन्म नियोग से ही हुआ था. फिर ऐसा ही पांडवों के जन्म के साथ हुआ. लेकिन महाभारत काल के खत्म होने के बाद नियोग परंपरा खत्म होती चली गई. इसे खत्म करने का काम मुख्य तौर पर ऋषि मनु द्वारा कराया गया. जानें क्या थी उसकी वजह
महाभारत के दौर में नियोग प्रथा खूब फलीफूली. उस दौर में अगर किसी पुरुष को कोई संतान नहीं हो पाती थी या किसी महिला के पति का निधन हो चुका होता था तो वो परिजनों की अनुमति से दूसरे पुरुष से संतान पैदा कर सकती थी. हालांकि नियोग प्रथा के भी नियम थे ताकि इसमें नैतिकता और शुचिता बनी रहे. जैसे ही किसी महिला को नियोग से संतान पैदा हो जाती थी, उस पुरुष के साथ उसके नियोग रिश्ते तुरंत खत्म हो जाते थे. अब सवाल ये उठता है कि जो परंपरा महाभारत काल में खूब स्वीकार की गई, उसको बाद में क्यों रोक दिया गया. क्यों ऋषि मनु ने इसे खराब बताया.
महाभारत काल के आखिर तक समाज में नैतिकता के मानक बदलने लगे. लोग इस प्रथा का दुरुपयोग करने लगे. इससे सामाजिक व्यवस्था बिगड़ने का डर पैदा हो गया. बाद में ऋषि मनु ने इसे पूरी तरह वर्जित घोषित कर दिया. ऋषि मनु ने तो इसे ‘पशुधर्म’ कहकर इसकी आलोचना की.
ऋषि मनु का मानना था कि एक बार विवाह होने के बाद स्त्री को केवल अपने पति के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए. उन्होंने विधवाओं के लिए कठोर ब्रह्मचर्य का समर्थन किया. उन्होंने नियोग को सामाजिक तौर पर कड़ाई से हतोत्साहित किया. उनके अनुसार, यह प्रथा केवल विषम परिस्थितियों के लिए थी न कि सामान्य व्यवहार के लिए.
अब हम आपको एक बार फिर बता देते हैं कि नियोग प्रथा क्या थी? प्राचीन काल की एक ऐसी परंपरा थी जिसमें यदि कोई स्त्री निसंतान हो और उसका पति संतानोत्पत्ति में अक्षम हो या उसकी मृत्यु हो गई हो, तो वह अपने देवर या किसी प्रतिष्ठित ऋषि से केवल संतान प्राप्ति के उद्देश्य से संतान प्राप्ति के लिए संपर्क कर सकती थी.
2 मिनट में बनेगा सुरक्षा कवच! लहसुन, सरसों-होलिका भस्म की जादुई पोटली, जानें नजर उतारने का देसी नुस्खा
28 Feb, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन परंपरा में होली केवल रंगों का त्यौहार नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय का महापर्व है. फाल्गुन पूर्णिमा की रात होने वाला होलिका दहन आध्यात्मिक शुद्धि और नकारात्मक शक्तियों के नाश का प्रतीक माना जाता है. पूर्णिया के प्रसिद्ध पंडित मनोत्पल झा के अनुसार होलिका दहन की अग्नि में न केवल बुराइयां जलती हैं. बल्कि इसकी भस्म और परंपरागत टोटकों में बच्चों को बुरी नजर से बचाने की अद्भुत शक्ति समाहित होती है. आइए जानते हैं क्या उपाय है.
भक्त प्रह्लाद की आस्था और होलिका का अंत
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब अहंकारी हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका (जिसे अग्नि से न जलने का वरदान था) की गोद में बिठाकर आग के हवाले किया. तब भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सकुशल बच गए. होलिका भस्म हो गई. पंडित जी बताते हैं कि तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि होलिका की पवित्र अग्नि से निकली भस्म सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होती है.
बुरी नजर से बचाव के अचूक देसी उपाय
पंडित मनोत्पल झा कहते हैं कि आज के आधुनिक दौर में भी ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोग सदियों पुराने इन उपायों पर अटूट विश्वास रखते हैं. छोटे बच्चों को नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचाने के लिए निम्नलिखित विधि अपनाई जाती है.
पवित्र भस्म का टीका. होलिका दहन के अगले दिन सुबह लोग अग्नि के अवशेष यानी भस्म को घर लाते हैं. इसे मंदिर में देवताओं को अर्पित करने के बाद बच्चों और बड़ों के माथे पर लगाया जाता है. मान्यता है कि यह भस्म मानसिक शांति और सुरक्षा प्रदान करती है.
सुरक्षा पोटली. होलिका दहन की रात कई लोग गेहूं की बालियां, लहसुन की कलियां और पीली सरसों जैसी सामग्रियों को जलती आग में हल्का पकाते हैं. इन अधपकी सामग्रियों के अवशेषों को एक साथ मिलाकर एक विशेष पोटली बनाई जाती है.
नेगेटिव ऊर्जा का नाश. इन सामग्रियों से तैयार ताबीज या पोटली को बच्चों के गले में पहनाया जाता है. माना जाता है कि ऐसा करने से बच्चों के आसपास कोई भी बुरी शक्ति नहीं भटकती और वे बीमारियों व नजर दोष से सुरक्षित रहते हैं.
वैज्ञानिक और सामाजिक नजरिया
धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह परंपरा सामाजिक एकता का भी संदेश देती है. होलिका दहन में अनाज (जैसे गेहूं और चना) को अग्नि को समर्पित करना आने वाली नई फसल की खुशी और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का तरीका भी है. पूर्णिया और आस-पास के क्षेत्रों में आज भी बड़ी संख्या में लोग इन उपायों को पूरी श्रद्धा के साथ अपनाते हैं.
यहां गुप्त रूप से जंगल में विराजमान है तंत्र की देवी, मंदिर के पेड़ों पर गड़े मिलते हैं नींबू और कीलें
28 Feb, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
19 मार्च दिन गुरुवार से चैत्र नवरात्रि की शुरू होने वाली हैं, हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है. नवरात्रि के नौ दिन देश भर में मां भगवती के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है और हर कोई मां की भक्ति में डूबा रहता है. नौ दिन मां के शांत से लेकर उग्र रूपों की पूजा होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जंगलों में गुप्त रूप से ऐसी मां विराजमान हैं, जिन्हें तंत्र की देवी कहा जाता है? हम बात कर रहे हैं मसान मेलडी माता की, जो उज्जैन के जंगलों में बसी हैं और गुजरात की रक्षक के रूप में पूजी जाती हैं. जंगलों के बीच में स्थित माता का यह मंदिर बेहद चमत्कारी माना जाता है. आइए जानते हैं माता के इस मंदिर के बारे में..
भक्तों को अद्भुत शक्ति का अहसास
उज्जैन के भैरवगढ़ के पास जंगलों में भक्तों को अद्भुत शक्ति का अहसास होता है. भक्तों का मानना है कि यहां आकर मां के होने का अहसास होता है. जंगलों में गुप्त रूप से विराजमान मां मेलडी का मंदिर लोकप्रिय मंदिरों में से एक है. मां मेलडी को मुख्यत: गुजरात की देवी माना जाता है. आज भी गुजरात के ग्रामीण इलाकों में बसे लोग मसान मेलडी को गुजरात की रक्षिका के रूप में पूजते हैं.
मंदिर तक पहुंचने का रास्ता सरल नहीं
उज्जैन के भैरवगढ़ के जंगलों में बने मां मसान मेलडी का नजारा अद्भुत होने के साथ-साथ डरावना भी है, क्योंकि मंदिर तक पहुंचने का रास्ता सरल नहीं है. रास्ते में लंबे-लंबे बांस का जंगल है और रास्ते में पड़ने वाले पेड़ तंत्र के साक्ष्य हैं. पेड़ों पर बड़ी कीलें, नींबू, और कपड़े से बनी गुड़ियां लटकी दिखती हैं. माना जाता है कि अघोरी रात के समय मां की तपस्या करते हैं और अपनी तंत्र विद्या की सिद्धि के लिए अनुष्ठान भी करते हैं. मसान मेलडी के मंदिर की बात करें तो देखने में मंदिर बहुत छोटा है, जो टीन के शेड में बना है, लेकिन वहां मां की चरण पादुका हैं. चरण पादुका के साथ मां की छोटी सी धातु की प्रतिमा भी मौजूद है.
भक्त की मनोकामना हो जाती हैं पूरी
दर्शन करने आए भक्त मां के चरणों पर तेल या परफ्यूम चढ़ाते हैं. माना जाता है कि मां के दर्शन मात्र से ही भक्त की मनोकामना पूरी हो जाती है, लेकिन ध्यान देने वाली बात यह भी है कि मां के मंदिर में सूरज ढलने के बाद आना मना है. स्थानीय मान्यताओं की मानें तो सूरज ढलने के बाद मां की साधना तांत्रिक करते हैं, तो ऐसे में मंदिर में आम लोग जाने से परहेज करते हैं.
इस तरह किया माता ने असुर का अंत
मां मसान मेलडी मां दुर्गा का ही स्वरूप हैं, जिन्होंने असुर अमरुवा को अंत किया था. माना जाता है कि असुर अमरुवा मां पार्वती के क्रोध से बचने के लिए गाय के कंकाल में छिप गया था. मां पार्वती ने अपनी पवित्रता के चलते अमरुवा को मारना उचित नहीं समझा और अपने हाथ मलकर मां मसान मेलडी को उत्पन्न किया. तब मां मेलडी ने असुर अमरुवा का अंत कर बुराई का विनाश किया.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (28 फ़रवरी 2026)
28 Feb, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- धन का व्यय होगा, तनाव पूर्ण वातावरण से बचने का प्रयास करें, स्वास्थ्य नरम रहेगा।
वृष राशि :- अधिकारियों के समर्थन से साधन जुटायेंगे, शुभ समाचार अवश्य ही मिलेगा।
मिथुन राशि :- चिन्तायें कम होंगी, सफलता के साधन जुटायेंगे, शुभ समाचार से हर्ष होगा।
कर्क राशि :- बड़े-बड़े लोगों से मेल-मिलाप होगा, सुख-समृद्धि के साधन अवश्य ही बनेंगे।
सिंह राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास होगा, भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, कार्यगति उत्तम होगी।
कन्या राशि :- प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, संघर्ष से अधिकार प्राप्त करेंगे, भाग्य आपका साथ देगा।
तुला राशि :- कुटुम्ब और धन की चिन्ता बनी ही रहेगी, सोचे कार्य परिश्रम से पूर्ण होंगे ध्यान दें।
वृश्चिक राशि :- प्रत्येक कार्य में बाधा क्लेशयुक्त रखे, स्थिति सामर्थ योग्य बनेगी ध्यान अवश्य दें।
धनु राशि :- भावनायें विक्षुब्ध रहेंगी, दैनिक कार्यगति मदं रहेगी, परिश्रम से कार्य अवश्य बनेंगे।
मकर राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, धन का व्यय, मानसिक खिन्नता अवश्य ही बनेगी।
कुंभ राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, व्यवसायिक समृद्धि के साधन अवश्य ही जुटायेंगे।
मीन राशि :- कुटुम्ब के कार्यों में समय बीतेगा तथा हर्षप्रद समाचार मिलेगा, मित्र मिलेंगे।
रंगों के त्योहार पर ग्रहों का शुभ संयोग, 4 राशियां रहेंगी लकी
27 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Holi 2026: ज्योतिष के अनुसार, होली 2026 (4 मार्च) बहुत खास होगी. इस साल ग्रहों की स्थिति दशकों बाद एक शुभ राजयोग बना रही है. ज्योतिषियों का कहना है कि इस राजयोग के प्रभाव से ब्रह्मांड की पॉजिटिव एनर्जी कुछ राशियों पर मेहरबान रहेगी.
हिंदू धर्म में फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होली का त्योहार बहुत पवित्र और आध्यात्मिक माना जाता है. फाल्गुन महीने में पड़ने वाला यह त्योहार न सिर्फ रंगों का त्योहार है, बल्कि ज्योतिष के अनुसार ग्रहों के प्रभाव से जीवन में बदलाव लाने का शुभ समय भी है. जाने-माने ज्योतिषी कृष्ण कमलनाथ के अनुसार, होली 2026 के मौके पर पांच शक्तिशाली राजयोग बन रहे हैं. ये योग कई राशियों के जीवन पर असर डालेंगे.
ये हैं मालव्य राजयोग, बुधादित्य योग, शुक्रादित्य योग, लक्ष्मी-नारायण योग और धनशक्ति योग. ज्योतिषी कृष्ण कमलनाथ के अनुसार, शुक्र, बुध और सूर्य त्रिकोण में मुख्य ग्रहों की स्थिति हैं, जो धन, पद और नए मौके लाते हैं. ये पांच महा राजयोग हैं मालव्य राजयोग, बुधादित्य योग, शुक्रादित्य योग, लक्ष्मी-नारायण योग और धनशक्ति योग. ये योग तब बनते हैं जब शुक्र, बुध और सूर्य जैसे बड़े ग्रह त्रिकोण में मज़बूत स्थिति में होते हैं. ज्योतिषियों का मानना है कि इनके प्रभाव से धन, प्रॉपर्टी, पद, प्रतिष्ठा और नए मौके मिलते हैं.
गौरतलब है कि यह राजयोग सभी बारह राशियों पर असर डालता है, लेकिन चार राशियों में जन्मे लोगों के जीवन पर इसका खास असर पड़ता है. इन चार राशियों का उनके करियर और बिज़नेस पर अच्छा असर पड़ता है.
हालांकि यह राजयोग सभी बारह राशियों पर असर डालता है, लेकिन चार राशियों को खास तौर पर शुभ नतीजे मिलेंगे. यह समय वृषभ, मिथुन, सिंह और तुला राशि के लिए बहुत अच्छा रहेगा.
वृष राशि का स्वामी शुक्र है. इस बार शुक्र की मज़बूत स्थिति के कारण मालव्य राजयोग बन रहा है. इससे वृषभ राशि वालों को ज़्यादा खुशियां मिलेंगी. इनकम के सोर्स बढ़ने की संभावना है. परिवार में कोई अच्छी खबर आ सकती है. नई प्रॉपर्टी या गाड़ी खरीदने का प्लान सफल होगा. फाइनेंशियल स्थिति मज़बूत होगी.
मिथुन राशि का स्वामी बुध है. बुधादित्य योग और लक्ष्मी-नारायण योग का असर इस राशि के लिए अच्छी किस्मत लाएगा. समझदारी, फ़ैसले लेने की क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ेगा. नौकरी करने वालों को प्रमोशन के मौके मिलेंगे. मज़दूरों को पार्टनरशिप से फ़ायदा होगा. अच्छी फ़ाइनेंशियल तरक्की हो सकती है.
सिंह राशि वालों पर शुक्रादित्य और बुधादित्य योग का अच्छा असर होगा. सूर्य की मज़बूत स्थिति से समाज में इज़्ज़त और लीडरशिप की क्षमता बढ़ेगी। सरकारी और एडमिनिस्ट्रेटिव सेक्टर में काम करने वालों के लिए यह सफलता का समय है। नए काम शुरू होने की संभावना है, और नाम और इज़्ज़त मिलने की संभावना है.
शुक्र के राज वाली तुला राशि वालों को मालव्य और लक्ष्मी-नारायण योग के शुभ नतीजों का फ़ायदा मिलेगा. फ़ाइनेंशियल स्थिरता बढ़ेगी. कला, ब्यूटी, फ़ैशन और खुशहाली के फ़ील्ड में काम करने वालों को खास फ़ायदा होगा. वे खर्चों पर कंट्रोल कर पाएंगे और बचत बढ़ा पाएंगे. शादीशुदा ज़िंदगी सुख और शांति से भरी रहेगी. होली 2026 के मौके पर बन रहे ये पांच राजयोग कई लोगों के लिए उम्मीद लेकर आएंगे.
शादी से पहले हल्दी क्यों लगाई जाती है? धार्मिक और वैज्ञानिक कारण
27 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय विवाह संस्कारों में तेल और हल्दी की रस्म अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. यह न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ है, बल्कि इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण भी जुड़े हैं. यह रस्म दूल्हा–दुल्हन के लिए शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से शुद्धिकरण की प्रक्रिया मानी जाती है.
धार्मिक महत्व
1. पवित्रता और शुभारंभ का प्रतीक
हल्दी को हिंदू धर्म में मंगल और शुभ का प्रतीक माना गया है. विवाह से पहले दुल्हन और दूल्हे को हल्दी लगाने का अर्थ है कि वे एक पवित्र और नई यात्रा शुरू करने जा रहे हैं. हल्दी को देवी लक्ष्मी का प्रिय माना जाता है, इसलिए इसे सौभाग्य और समृद्धि का भी प्रतीक माना गया है.
2. बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा
धार्मिक मान्यता है कि हल्दी और सरसों के तेल का लेप व्यक्ति के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनाता है. शादी के समय दूल्हा–दुल्हन पर लोग अधिक ध्यान देते हैं, इसलिए हल्दी की परत उन्हें नज़रदोष से बचाने वाला मानी जाती है.
3. शरीर और मन का शुद्धिकरण
हल्दी रस्म को प्री-वेडिंग संस्कारों का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना गया है. यह प्रतीक है कि विवाह से पहले मन, शरीर और आत्मा को पवित्र किया जा रहा है.
वैज्ञानिक महत्व
1. प्राकृतिक एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल
हल्दी में करक्यूमिन पाया जाता है, जो एक शक्तिशाली एंटीसेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व है. यह त्वचा को संक्रमण, कीटाणुओं और एलर्जी से बचाता है, खासकर शादी की भीड़ और मेकअप के समय.
2. त्वचा में निखार और ग्लो
हल्दी, बेसन और दही का लेप त्वचा को एक्सफोलिएट करता है, टैन हटाता है और ग्लो बढ़ाता है. सरसों या तिल का तेल त्वचा को मुलायम बनाता है और मेकअप के लिए प्राकृतिक बेस तैयार करता है. इसलिए दूल्हा–दुल्हन इस रस्म के बाद और भी ज्यादा दमकते हुए दिखाई देते हैं.
3. तनाव कम करने वाला प्रभाव
हल्दी की गर्म तासीर रक्त संचार को बेहतर बनाती है और होटल–मैरेज हॉल की भागदौड़ में जमा तनाव को कम करती है. तेल की मालिश शरीर को रिलैक्स करती है और नींद भी बेहतर आती है.
4. प्राकृतिक डिटॉक्स का काम
हल्दी लगाने से त्वचा के रोमछिद्र खुलते हैं, शरीर से घुल–मिल चुके टॉक्सिन निकलते हैं और त्वचा भीतर से स्वस्थ होती है. यह शादी से पहले दूल्हा–दुल्हन को प्राकृतिक चमक देता है.
शादी की हल्दी और तेल रस्म केवल परंपरा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि, वैज्ञानिक लाभ, सौंदर्य निखार का सुंदर सम्मिलन है. इसलिए यह रस्म सदियों से भारतीय विवाह का अनिवार्य और सबसे आनंदमय हिस्सा बनी हुई है.
धन लाभ के योग! जानिए किन मूलांकों पर मेहरबान है किस्मत
27 Feb, 2026 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Ank Jyotish 26 February 2026: ज्योतिषाचार्य चिराग दारूवाला के अनुसाार, आज मूलांक ज्योतिष के सभी मूलांकों के लिए अवसरों और सावधानी का मिला-जुला दिन है. मूलांक 1, 2, 3, 5 और 9 को धन, व्यवसाय और नियोजित कार्यों में अनुकूल परिणाम मिलेंगे. मूलांक 1 को व्यावसायिक साझेदारी और धन के नए स्रोतों से मजबूत समर्थन मिलेगा, जबकि मूलांक 2 और 3 को रुके हुए पैसे की वसूली और अचानक धन लाभ से फायदा होगा. मूलांक 5 को व्यवसाय में उत्कृष्ट प्रगति और कार्यों को बुद्धिमानी से पूरा करने का अनुभव होगा, जबकि मूलांक 9 सकारात्मक सोच और ऊर्जा से लक्ष्य प्राप्त कर सकता है, हालांकि गुस्से पर नियंत्रण रखना आवश्यक है. मूलांक 6 और 8 के लिए सामान्य दिन रहेगा और उन्हें मध्यम अवसर मिलेंगे, और मूलांक 7 और 4 को बाधाओं, काम से संबंधित चुनौतियों या स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए धैर्य और सावधानी से काम करने की आवश्यकता होगी. जन्मतिथि से जानिए बुधवार का दिन मूलांक 1 से लेकर मूलांक 9 वालों तक कैसा रहने वाला है...
मूलांक 1 (किसी भी महीने की 1, 10, 19 और 28 तारीख को जन्मे लोग) – नंबर एक वाले लोगों के लिए आज का दिन बहुत अच्छा है. आपके सभी सोचे हुए काम आज पूरे होंगे. बिजनेस क्लास के लिए आज का दिन बेहतर है. अगर आप किसी के साथ पार्टनरशिप में बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो आज का दिन बहुत अच्छा है. यह पार्टनरशिप भविष्य में आपके लिए पैसे आने की संभावना बनाएगी. परिवार के मामले में आज का दिन सामान्य है. आज आप अपने जीवनसाथी के साथ सुखद दिन बिताएंगे. पैसे की बात करें तो आज का दिन अनुकूल है. आज पैसे आने के नए रास्ते खुलते हुए दिखेंगे.
मूलांक 2 (किसी भी महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख को जन्मे लोग) – नंबर दो वाले लोगों के लिए आज का दिन बहुत अच्छा रहने वाला है. पैसे की बात करें तो आज आपको धन लाभ की संभावना है. आज आपको अपना रुका हुआ पैसा वापस मिलेगा. इससे आप आज मानसिक रूप से बहुत खुश रहेंगे. सोच-समझकर अपनी तरक्की के लिए फैसले लेना फायदेमंद साबित होगा. परिवार के साथ आज का दिन अच्छा रहेगा. आज आप अपने जीवनसाथी के साथ प्यार भरा दिन बिताएंगे.
मूलांक 3 (किसी भी महीने की 3, 12, 21, 30 तारीख को जन्मे लोग) – नंबर तीन वाले लोगों के लिए आज का दिन अच्छा है. आज आप दिन भर बहुत समझदारी से काम लेंगे. पैसे की बात करें तो आज का दिन अनुकूल है. आज आपको धन लाभ के योग हैं. आज आपको अचानक कहीं से पैसा मिल सकता है. आज आप अपने परिवार वालों के साथ प्यार भरा दिन बिताएंगे. आज आप अपने जीवनसाथी के साथ प्यार भरा दिन बिताएंगे. आज आप अपने जीवनसाथी के साथ कहीं बाहर घूमने का प्लान भी बना सकते हैं.
मूलांक 4 (किसी भी महीने की 4, 13, 22 या 31 तारीख को जन्मे लोग) – नंबर चार वाले लोगों के लिए आज का दिन सामान्य से कम है. आज आपको अपने कामों में बेवजह की रुकावटों का सामना करना पड़ेगा. ऐसा लगता है कि आज आप और आपके पिता की तबीयत खराब हो सकती है. आज आपको दिल से जुड़ी कोई समस्या परेशान कर सकती है, जिससे आप आज थोड़े परेशान रह सकते हैं. परिवार के मामले में आज का दिन सामान्य है. आज आप अपने जीवनसाथी के साथ सुखद दिन बिताएंगे.
मूलांक 5 (किसी भी महीने की 5, 14, 23 तारीख को जन्मे लोग) – आज नंबर पांच वाले लोगों का दिन अच्छा रहेगा. बिज़नेस के मामले में आज का दिन बहुत बढ़िया है. आज आप अपने काम बहुत समझदारी और चतुराई से पूरे करेंगे, जो आपके आने वाले भविष्य के लिए बहुत फायदेमंद होगा. पैसे के मामले में भी आज का दिन अच्छा है. परिवार की बात करें तो आज आपको परिवार वालों से बहुत प्यार और सपोर्ट मिलेगा. आज आप अपने जीवनसाथी के साथ खुशी भरा दिन बिताएंगे.
मूलांक 6 (किसी भी महीने की 6, 15 या 24 तारीख को जन्मे लोग) – आज नंबर छह वाले लोगों के लिए सामान्य दिन है. आज आप किसी बात को लेकर परेशान हो सकते हैं. पैसे के मामले में, आज आप अपने पैसे इन्वेस्ट करने के बारे में सोच सकते हैं. परिवार की बात करें तो आज आपका दिन अच्छा रहेगा. आज आप परिवार वालों के साथ मनोरंजन का प्रोग्राम रख सकते हैं. आज आपके जीवनसाथी के साथ बहस हो सकती है, इसलिए आज शांत रहें और गुस्सा न करें.
मूलांक 7 (किसी भी महीने की 7, 16 और 25 तारीख को जन्मे लोग) – आज नंबर सात वाले लोगों के लिए सामान्य से कम अच्छा दिन है. आज आपको अपने काम में रुकावटों का सामना करना पड़ेगा. आज आपके दिन की शुरुआत में आपकी सोच बहुत पॉजिटिव रहेगी, लेकिन आप इसे पूरे दिन बनाए नहीं रख पाएंगे. आज आप स्वभाव से थोड़े घमंडी दिखेंगे. आज आपकी अपने वर्कप्लेस पर किसी से बहस हो सकती है, इसलिए आज किसी से भी फालतू की बातें न करें. धैर्य से काम लें. आज नंबर आठ वाले लोगों के लिए सामान्य दिन है. आज पैसे का इस्तेमाल सोच-समझकर करें. आज आप परिवार और जीवनसाथी के साथ खुशी भरा दिन बिताएंगे.
मूलांक 8 (किसी भी महीने की 8, 17 और 26 तारीख को जन्मे लोग) – आज नंबर आठ वाले लोगों के लिए सामान्य दिन है. आज आप परिवार के अंदरूनी मामलों से बहुत परेशान हो सकते हैं, जिसकी वजह से आप आज मानसिक रूप से परेशान रह सकते हैं. पैसे के मामले में आज का दिन सामान्य है. आपके लिए सलाह है कि अगर आप आज घर के किसी बड़े-बुजुर्ग से सलाह लेकर पैसे इन्वेस्ट करते हैं, तो इससे आपको आर्थिक फायदा होने की संभावना बनेगी. परिवार के मामले में, आज आपकी परेशानी की वजह से परिवार के किसी सदस्य के साथ आपके विचारों में मतभेद हो सकता है. आज आपके जीवनसाथी के साथ भी तालमेल खराब हो सकता है.
मूलांक 9 (किसी भी महीने की 9, 18 और 27 तारीख को जन्मे लोग) – आज नंबर नौ वाले लोगों के लिए बेहतर दिन है. आज आप अपनी पॉजिटिव सोच से सभी काम पूरे करेंगे. आज आप एनर्जेटिक महसूस करेंगे. बस आज आपको अपने गुस्से पर कंट्रोल रखना होगा. आपका बेवजह का गुस्सा आपका काम बिगाड़ सकता है. पैसे की बात करें तो आज का दिन अच्छा है. आपको पैसों का फायदा होने के भी चांस हैं. परिवार के मामले में आज का दिन नॉर्मल रहेगा. आज परिवार वालों के साथ विचारों में मतभेद हो सकते हैं. अपने जीवनसाथी की बात करें तो आज आपका जीवनसाथी किसी बात पर आपसे गुस्सा हो सकता है, इसलिए आज शांत रहें और गुस्सा न करें.
शब्दों से परे शांति: जानिए क्या है श्री श्री रवि शंकर का मौन मंत्र
27 Feb, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
क्या आपने कभी गौर किया है कि सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक, हम शब्दों के एक मायाजाल में फंसे रहते हैं? हम हर बात का अर्थ खोजते हैं और हर काम में कोई न कोई उद्देश्य, लेकिन इसी भागदौड़ में हम जीवन का वास्तविक आनंद खो देते हैं. आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर कहते हैं कि जिस दिन आपको यह अनुभव होने लगे कि शब्द सीमित और अधूरे हैं, समझ लीजिए कि आपका जीवन गहराई की ओर बढ़ रहा है.
अक्सर हम मौन से डरते हैं और उसे बातों से भरने की कोशिश करते हैं, जबकि असली संवाद हृदय से और मौन में ही संभव है. चाहे वह प्रेम हो, सुंदरता हो या ईश्वर—इनका सच्चा अनुभव शब्दों के पार जाने पर ही मिलता है. इस लेख में जानिए श्री श्री रवि शंकर के वे विचार, जो आपको चिंता के चक्रव्यूह से बाहर निकालकर ‘स्वयं’ से रूबरू कराएंगे और बताएंगे कि क्यों कभी-कभी एक-दूसरे की भाषा न समझना भी रिश्तों के लिए वरदान साबित हो सकता है.
शब्द होने लगे सीमित तो जीवन गहराई में
जब हमें यह अनुभव होने लगता है कि शब्द सीमित हैं, अधूरे हैं,तब समझ लेना चाहिए कि हमारा जीवन गहराई की ओर बढ़ रहा है. तब हम सचमुच जीना शुरू करते हैं. सुबह से रात तक हम शब्दों में जीते हैं – हर बात का अर्थ चाहिए, हर कार्य उद्देश्यपूर्ण होना चाहिए. इस उद्देश्य की दौड़ में हम जीवन का वास्तविक उद्देश्य ही खो बैठते हैं. इस निरंतर उद्देश्य की खोज में हम जीवन का वास्तविक उद्देश्य ही खो बैठते हैं. सामने लटकी गाजर की ओर उछलते खरगोश की भांति – पास होते हुए भी दूर. रात में भी शब्द हमें परेशान करते हैं. वे हमारी गहरी नींद छीन लेते हैं. कई लोग नींद में भी बोलते रहते हैं. शब्दों से मानो कोई मुक्ति ही नहीं. चिंता का मूल कारण भी शब्द ही हैं. बिना शब्दों के क्या आप चिंता कर सकते हैं? दस मिनट चिंता करके देखिए, पर एक भी शब्द का उपयोग न करें – ये संभव ही नहीं! हमारी मित्रता भी शब्दों पर आधारित है. कोई कह दे, “आप बहुत अद्भुत, सुंदर और दयालु हैं,” और हम प्रेम में पड़ जाते हैं. कोई अपशब्द कह दे तो हम आहत और क्रोधित हो जाते हैं. पर प्रशंसा और अपमान, दोनों शब्द ही तो हैं. यदि जीवन शब्दों पर आधारित है, तो वह बहुत सतही है. प्रेम, सच्ची कृतज्ञता, वास्तविक सुंदरता और सच्ची मित्रता, इनका अनुभव शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता.
शब्द अपर्याप्त हो जाए तो जीवन को गहराई मिलती है
क्या कभी आप किसी प्रियजन के साथ पूर्ण मौन में बैठे हैं? प्रायः हम उस मौन को भी बातों से भर देते हैं. पिकनिक पर जाते हैं, सुंदर स्थान देखते हैं, पर उसका आनंद लेने के बजाय बोलते ही रहते हैं. कार में चार लोग हों तो चारों एक साथ बोलते हैं. कोई किसी को सुनता नहीं. सब अपनी बारी की प्रतीक्षा में रहते हैं. हमने अपने मन को शोर से भर दिया है. भीतर जितनी अधिक अशांति होती है, बाहर उतना ही ऊंचा संगीत अच्छा लगता है, क्योंकि वह भीतर के शोर को ढक देता है. संगीत में खो जाना आसान है, क्षणिक राहत मिलती है. पर जैसे-जैसे चेतना सूक्ष्म और तनावमुक्त होती है, हम ध्वनि के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं. आज हम शोर के प्रति लगभग असंवेदनशील हो चुके हैं. जब भीतर मौन होता है, तब पक्षियों का गीत और उनके गीतों के बीच का विराम भी मधुर लगता है. बिना किसी वाद्य के वे लय में गाते हैं. यदि हम थोड़ा भीतर जाएँ, तो पाएँगे कि हमारे शरीर में भी दिव्य संगीत चल रहा है,पर हम उससे अनभिज्ञ हैं. जिस दिन हमें अनुभव हो जाए कि शब्द अपर्याप्त हैं, उसी दिन जीवन में गहराई आती है. मित्रों से हमें क्या चाहिए – उनके शब्द या उनकी उपस्थिति? केवल मौन में साथ बैठकर भी आनंद लिया जा सकता है. उपस्थिति स्वयं बोलती है.
तुम स्वयं प्रेम हो
प्रेम पर अनेक सेमिनार होते हैं. पर क्या प्रेम वास्तव में जीवन में है? लॉस एंजेलिस की एक महिला प्रेम पर कार्यशालाएँ चलाती थी, पर तीन बार उसका तलाक हो चुका था. मैंने उससे कहा, “अपने साथ बैठो, ध्यान करो, मौन में जाओ और अनुभव करो कि तुम स्वयं प्रेम हो. जब शब्दों से परे जाते हो, प्रेम प्रकट होता है.” जब हम स्वयं प्रेम बन जाते हैं, वह दूसरों तक फैल जाता है. सुंदरता भी ऐसा ही प्रभाव डालती है. उसे देखकर भीतर ऊर्जा का झरना फूट पड़ता है. पर हम उसे अपना बनाना चाहते हैं. जैसे ही हम उसे पाने का प्रयास करते हैं, तो एक और खोज शुरू होती है, एक अंतहीन मृगतृष्णा. और जब उसे पा लेते हैं, तो उसका आकर्षण कम हो जाता है. सुंदरता को पाने की नहीं, उसकी पूजा और समर्पण की आवश्यकता है. जिसे हम समर्पित होते हैं, उसे बाँधना नहीं चाहते. ईश्वर को हमने अक्सर एक वृद्ध पुरुष के रूप में देखा है, पर ईश्वर सदा युवा है. मेरे लिए ईश्वर बहुत चंचल है और आनंदप्रिय है. यह समस्त सृष्टि एक दिव्य खेल है. हमारी चिंताएँ भी उसी खेल का हिस्सा हैं. जीवन एक उत्सव है. आध्यात्मिकता का अर्थ गंभीर चेहरा नहीं है. मौन में ही सुंदरता का सच्चा अनुभव प्रकट होता है. अपने भीतर के प्रेम-स्रोत को जीवित रखने के लिए हमें स्वयं में गहराई तक उतरना होगा.
सुंदरता हमें ईश्वर की ओर ले जाती है
एक जर्मन युवक था, जो किसी भी प्रेमिका के साथ तालमेल नहीं बैठा पाता था. वह बहुत बोलता था – प्रश्न स्वयं पूछता और उत्तर भी स्वयं दे देता. कोई उसे सुनना नहीं चाहता था. एक ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ कार्यक्रम में उसकी मुलाकात एक इटैलियन युवती से हुई. न युवती को जर्मन आती थी और न युवक को इटैलियन. दोनों ने विवाह कर लिया और आज भी साथ हैं. मैंने उनसे कहा, “एक-दूसरे की भाषा मत सीखना, ऐसे ही ठीक हो.” जब कुछ कहना होता, शब्दकोश देखना पड़ता. समय लगता, पर संबंध में सांस लेने की जगह मिलती थी. हम मौन में भी गहराई से संवाद कर सकते हैं. हृदय से भी संवाद संभव है. यदि हम अपने भीतर के मौन को नहीं जीते, तो जीवन की बहुत-सी सुंदरता से वंचित रह जाते हैं. प्रतिदिन दस मिनट आकाश को निहारिए. तारों को देखिए. गुलाब को देखिए, पर तुलना मत कीजिए. बस यह अनुभव कीजिए कि वह है और सुंदर है. सुंदरता हमें ईश्वर की ओर ले जाती है, कृतज्ञता की ओर ले जाती है. जब सुंदरता को देखकर भीतर धन्यवाद का भाव उठे, तब समर्पण हो चुका होता हैऔर वहीं से प्रेम का जन्म होता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (27 फ़रवरी 2026)
27 Feb, 2026 12:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- धन का व्यय संभव, तनाव पूर्ण वातावरण से बचें, रुके कार्य बन जायेंगे।
वृष राशि :- चिन्तायें कम होंगी, सफलता के साधन जुटायें तथा शुभ समाचार मिलेगा।
मिथुन राशि :- चिन्ताओं का समय पर निराकरण करें, शुभ समाचार मिलेगा, समय का ध्यान रखें।
कर्क राशि :- सोचे कार्य परिश्रम से समय पर पूर्ण होंगे, व्यवसायिक गति मंद रहेगी।
सिंह राशि :- सामाजिक मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी, कार्य कुशलता से संतोष होगा, समय का ध्यान अवश्य रखें।
कन्या राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद रहेगा, कार्य कुशलता से संतोष अवश्य होगा।
तुला राशि :- दैनिक व्यवसायिक गति उत्तम तथा व्यवसायिक चिन्तायें कम अवश्य होंगी।
वृश्चिक राशि :- कार्यगति में सुधार होगा, असमंजस का वातावरण रहेगा, धैर्य पूर्वक कार्य करें।
धनु राशि :- स्थिति पर नियंत्रण रखकर कार्य करें, मानसिक उद्विघ्नता रहेगी, धैर्य रखें।
मकर राशि :- मानसिक खिन्नता एवं स्वभाव में अशांति, उद्विघ्नता अवश्य बनेगी।
कुंभ राशि :- योजनायें फलीभूत होंगी, विघटनकारी तत्व परेशान अवश्य ही करेंगे।
मीन राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक रहेगा तथा कार्य कुशलता से संतोष होगा।
तिलक लगाने का सही तरीका क्या है? जानिए धार्मिक नियम
26 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय शास्त्रों और आध्यात्मिक परंपराओं में टीका या तिलक का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है. इसे केवल सजावट या परंपरा नहीं, बल्कि ऊर्जा, आस्था और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है. तिलक लगाने का स्थान, आज्ञा चक्र (दो भौंहों के बीच का भाग), योग और तंत्रशास्त्र में अत्यंत शक्तिशाली माना गया है.
1. आज्ञा चक्र को सक्रिय करता है
शास्त्रों में कहा गया है कि तिलक लगाने से मन स्थिर होता है, विचारों में स्पष्टता आती है और ध्यान शक्ति बढ़ती है. आज्ञा चक्र आत्मबोध और जागरूकता का केंद्र माना गया है.
2. सकारात्मक ऊर्जा का संरक्षण
तिलक माथे पर सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है. माना जाता है कि यह नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है और शरीर की ऊष्मा को संतुलित रखता है.
3. पुण्य और शुभता का प्रतीक
पूजा के बाद तिलक लगाना शुभ माना जाता है. यह दर्शाता है कि व्यक्ति ईश्वर के संपर्क में आया है और उसके संरक्षण में है.
4. मन और आत्मा का शुद्धिकरण
चंदन, हल्दी, रोली या भस्म, इन सबका अपना आध्यात्मिक और औषधीय महत्व है. इनके स्पर्श से मन शांत और आत्मा शुद्ध मानी जाती है.
5. पहचान और धर्म का संकेत
देवताओं और आस्तिकों की पहचान भी तिलक से की जाती रही है. शैव, वैष्णव और शाक्त परंपराओं में अलग-अलग तिलक उसकी विशिष्टता दर्शाते हैं.
कैसा होना चाहिए आपका पूजा का टीका?
1. चंदन का तिलक – शीतलता और शांति
चंदन का तिलक मन को शांत करता है और ऊर्जा को संतुलित रखता है. ध्यान, पूजा और आध्यात्मिक अभ्यास के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.
किसके लिए: सभी आयु वर्ग, ध्यान करने वाले, मानसिक तनाव वाले.
2. रोली/कुमकुम का तिलक – शक्ति और शुभता
रोली से बना लाल तिलक मंगल और शक्ति का प्रतीक है. पूजा में इसे सबसे शुभ माना जाता है.
किसके लिए: देवी-देवता की पूजा, हवन या मंगल कार्य.
3. हल्दी का तिलक – पवित्रता और आरोग्य
हल्दी को अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है. यह शरीर में रोग प्रतिरोधकता बढ़ाती है.
किसके लिए: आरती, घर की पूजा, सुबह के तिलक.
4. भस्म का तिलक – वैराग्य और सुरक्षा
त्रिपुंड भस्म तिलक विशेष रूप से शैव संप्रदाय में लगाया जाता है. यह अहंकार को नष्ट करने और आत्मज्ञान को बढ़ाने का प्रतीक है.
5. चावल (अक्षत) के साथ तिलक – पूर्णता और आशीर्वाद
तिलक के ऊपर अक्षत लगाने से यह और शुभ माना जाता है. यह पूर्णता और स्थिरता का प्रतीक है.
शास्त्रों के अनुसार तिलक सिर्फ धार्मिक चिह्न नहीं, बल्कि ऊर्जा–संतुलन, सुरक्षा, शुभता और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है. पूजा करते समय चंदन, रोली या हल्दी का तिलक अपने स्वभाव और आवश्यकता अनुसार चुनें, आपका तिलक आपका आध्यात्मिक परिचय भी होता है.
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