धर्म एवं ज्योतिष
शमी से लेकर मदार तक...होलिका दहन में बस एक लकड़ी बदलेगी आपकी किस्मत, जानिए राशि अनुसार आपके लिए कौन सी बेस्ट
24 Feb, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होलिका दहन का पर्व केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक नहीं है, बल्कि इसे नकारात्मक शक्तियों और अशुभ प्रभावों से मुक्ति का विशेष मौका भी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से की गई पूजा और उपाय जीवन की बाधाओं को दूर कर सकते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि व्यक्ति अपनी राशि के अनुरूप विशेष लकड़ी होलिका में अर्पित करे, तो उसे रुके हुए कार्यों में सफलता, आर्थिक उन्नति और मानसिक शांति का लाभ मिल सकता है. यह उपाय करते समय एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि होलिका के सात फेरे लेते समय ही संबंधित लकड़ी श्रद्धा भाव से अर्पित करें. ऐसा करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
मेष और वृश्चिक राशि के जातकों के लिए खैर या खादिर की लकड़ी को शुभ माना गया है. इन राशियों पर मंगल ग्रह का प्रभाव होता है, जो साहस और ऊर्जा का कारक है. खैर की लकड़ी अग्नि तत्व से जुड़ी मानी जाती है और यह नकारात्मक ऊर्जा को शीघ्र नष्ट करने की क्षमता रखती है. वृष और तुला राशि के लोग गूलर की लकड़ी अर्पित करें. इन राशियों के स्वामी शुक्र हैं, जो सुख-संपत्ति और वैभव के प्रतीक हैं. गूलर का संबंध स्थिरता और समृद्धि से जोड़ा जाता है, इसलिए इसे होलिका में डालने से आर्थिक स्थिति में सुधार और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है.
मिथुन और कन्या राशि के जातकों को अपामार्ग की लकड़ी डालनी चाहिए. इन राशियों के स्वामी बुध हैं, जो बुद्धि, वाणी और व्यापार के कारक हैं. अपामार्ग को दोष निवारण के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है. इसे अर्पित करने से मानसिक उलझनें दूर होती हैं और करियर तथा व्यापार में नए अवसर मिलते हैं. धनु और मीन राशि के लोगों के लिए पीपल की लकड़ी फलदायी मानी गई है. इन राशियों के स्वामी बृहस्पति हैं, जो ज्ञान और धर्म के प्रतीक हैं. पीपल का वृक्ष आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है. इसे होलिका में अर्पित करने से गुरु दोष शांत होता है और भाग्य का साथ मिलता है.
दु:ख दूर करने में मदद
ज्योतिषी अखिलेश पांडेय के मुताबिक, मकर और कुंभ राशि के जातकों को शमी की लकड़ी होलिका में डालनी चाहिए. इन राशियों पर शनि का प्रभाव रहता है. शमी को शनि की प्रिय माना जाता है और यह कष्टों को कम करने में सहायक है. इससे कार्यों में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और न्याय संबंधी मामलों में राहत मिलती है. कर्क राशि के लिए पलाश की लकड़ी शुभ मानी गई है. चंद्रमा से प्रभावित इस राशि के जातकों को पलाश अर्पित करने से मानसिक शांति और पारिवारिक सुख प्राप्त होता है. सिंह राशि के लोग मदार की लकड़ी अर्पित करें. सूर्य के प्रभाव वाली इस राशि के लिए मदार आत्मविश्वास और प्रतिष्ठा में वृद्धि का संकेत देती है.
महिलाओं में सुंदरता से ज्यादा जरूरी हैं ये 5 गुण, तभी मर्दों से भरी ये दुनिया सुनती है आपकी बातें
24 Feb, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आज के दौर में अक्सर महिलाओं की पहचान उनकी बाहरी सुंदरता से जोड़ दी जाती है, लेकिन सच्चाई यह है कि व्यक्तित्व की असली चमक भीतर के गुणों से आती है. बाहरी चमक कुछ समय के लिए रहती है लेकिन अच्छे संस्कार और व्यवहार जीवनभर साथ देते हैं. जीवन के हर रिश्ते चाहे परिवार हो, दोस्ती हो या प्रोफेशन में लंबे समय तक वही लोग प्रभाव छोड़ते हैं, जिनमें मजबूत चरित्र और सकारात्मक सोच होती है. आइए जानते हैं वे 5 गुण जो किसी भी महिला को सच मायनों में खास बनाते हैं...
चाणक्य ने देखा कि आकर्षण रिश्तों की शुरुआत कर सकता है, लेकिन उन्हें टिकाए रखने के लिए अंदरूनी गुण जरूरी हैं. उन्होंने समझा कि जब जिम्मेदारी, दबाव और समय सामने आता है, तो प्रशंसा धीरे-धीरे कम हो जाती है. उनके अनुसार सुंदरता कभी भी शांति, बुद्धि या स्थिरता की गारंटी नहीं होती यह सिर्फ एक अस्थायी प्रभाव है. चाणक्य नीति बाहरी रूप से आगे बढ़कर एक कठिन सवाल पूछते हैं. जब जिंदगी मुश्किल हो जाती है, तब कौन भरोसेमंद रहता है? चाणक्य के अनुसार, महिला की असली कीमत तब पता चलती है जब हालात आसान नहीं होते, तब वह कैसे सोचती है, कैसे प्रतिक्रिया देती है और क्या चुनती है? महिलाओं में जब ये 5 गुण होते हैं, तभी मर्दों से भरी इस दुनिया में आपकी आवाज को पहचान मिलती है.
आचार्य चाणक्य मानते थे कि भावनात्मक असंतुलन सबसे जल्दी निर्णय को खराब करता है. जो महिला तनाव के समय अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाती, वह अक्सर ऐसे फैसले लेती हैं जो भरोसे, रिश्तों और स्थिरता को नुकसान पहुंचाते हैं. भावनाओं पर नियंत्रण का मतलब भावनाओं को दबाना नहीं है. इसका मतलब है कि गुस्सा, डर या असुरक्षा को अपने फैसलों पर हावी ना होने देना. चाणक्य ने सिखाया कि स्थिर मन सम्मान की रक्षा करता है और अस्थायी भावनाओं से स्थायी नुकसान नहीं होने देता. रोजमर्रा की जिंदगी में यह गुण झगड़ों को बढ़ने से रोकता है और जब हालात असहज या अनिश्चित हो जाएं, तब भी स्पष्टता बनाए रखता है.
आचार्य चाणक्य ने चेतावनी दी थी कि लापरवाही से बोले गए शब्द कमजोरी को उजागर करते हैं. बिना सोचे समझे बोले गए शब्द पल भर में सालों की मेहनत को मिटा सकते हैं. जो महिला बोलने से पहले सोचती है, वह समय, माहौल और असर को समझती है. वह तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देती या दिखावे के लिए नहीं बोलती. बल्कि वह अपने शब्दों को तौलती है, क्योंकि अक्सर चुप्पी अनावश्यक सफाई से ज्यादा असरदार होती है. यह आदत सम्मान बढ़ाती है. धीरे-धीरे लोग उन लोगों की बातों को ज्यादा ध्यान से सुनते हैं जो कम बोलते हैं, लेकिन समझदारी से बोलते हैं.
चाणक्य के अनुसार, चरित्र की परीक्षा आराम में नहीं बल्कि मुश्किल में होती है. जब जिंदगी आसान हो, तब कोई भी अच्छा दिख सकता है. असली चरित्र तब सामने आता है जब फैसलों में नुकसान, दबाव या लालच शामिल हो. मजबूत चरित्र वाली महिला हर हाल में एक जैसी रहती है. उसके मूल्य सुविधा, भावनाओं या बाहरी दबाव से नहीं बदलते. यही भरोसेमंदता विश्वास पैदा करती है, जिसे चाणक्य आकर्षण या सुंदरता से ज्यादा महत्वपूर्ण मानते थे.
चाणक्य मानते थे कि आत्मसम्मान ही सम्मान की नींव है. इसके बिना बुद्धि और सुंदरता भी अपना महत्व खो देती है. आत्मसम्मान वाली महिला लगातार मान्यता नहीं चाहती और सिर्फ जुड़ाव के लिए अपमान सहन नहीं करती. वह जानती है कि सीमाएं कहां तय करनी हैं और उन्हें बचाने के लिए उसे अपराधबोध नहीं होता. यह गुण भावनात्मक शोषण, मनोवैज्ञानिक दबाव और लंबे समय की असंतुष्टि से बचाता है. चाणक्य ने सिखाया कि जो खुद का सम्मान करता है, उसे दूसरों का सम्मान भी मिलता है.
आचार्य चाणक्य ने अंत में कहा कि एक सबसे मजबूत सिद्धांत है दूरदर्शिता. चाणक्य उन लोगों की सराहना करते थे जो तात्कालिक भावनाओं से आगे सोचकर भविष्य के परिणामों पर ध्यान देते हैं. समझदार महिला पल भर की इच्छा, गुस्सा या उत्साह से महत्वपूर्ण फैसले नहीं लेती. वह सोचती है कि उसके फैसले भविष्य, शांति और जिम्मेदारियों पर क्या असर डालेंगे. यह क्षमता रिश्तों, आर्थिक स्थिति और व्यक्तिगत ईमानदारी की रक्षा करती है. चाणक्य मानते थे कि दीर्घकालिक सोच ही समझदारी और आवेग में फर्क करती है.
होलिका दहन में क्यों भूनी जाती हैं गेहूं की बालियां, इन बीमारियों से मुक्ति
24 Feb, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होलिका दहन कि आग बेहद पवित्र बताई गई है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी मानी जाती है. ज्योतिष शास्त्र में होलिका दहन पर कई उपाय ऐसे बताए गए हैं, जो शारीरिक बीमारियों को दूर करने के साथ सुख-समृद्धि में बेहद सहायक हैं. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन से दो-तीन दिन पूर्व तोड़कर घर पर सुखाई गई गेहूं की बालियां यदि होलिका दहन की आग में सेंकी जाए तो औषधि तैयार हो जाती है. गेहूं के इन भुने हुए दानों को प्रसाद रूप में लेने से कई रोगों से मुक्ति मिलने की धार्मिक मान्यता है. इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है.
सालभर इंतजार
लोकल 18 से बात करते हुए हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि होलिका दहन का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होता है. होलिका दहन पूर्णिमा की रात को किया जाता है, जिसका इंतजार हिंदू धर्म के लोग सालभर करते हैं. होलिका दहन पर गोबर के बड़कुल्ले, गन्ना, सूखे मेवे की माला और गेहूं की सूखी हुई बालियां आदि भूनकर खाने की परंपरा काफी पुरानी है. ऐसा करने से मौसम परिवर्तन में होने वाली सभी बीमारियां खत्म हो जाती हैं. गेहूं की बाल ही क्यों सेक कर खानी चाहिए, इसका जवाब देते हुए श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि वैसे तो सूखे मेवे, गन्ना भी सेंक कर खाने की परंपरा है, लेकिन गेहूं नया अनाज होता है और इस समय गेहूं की कटाई शुरू हो जाती है. नया अनाज किसी को बीमार न करें इसलिए गेहूं की बाल को होलिका की आग में सेंक कर खाने की परंपरा है.
पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि गेहूं की बाली दो या तीन दिन पहले तोड़कर सुखाई जाती है. सूखने के बाद पूर्णिमा की रात होलिका दहन पर इन्हें भूनकर या सेंक कर खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होती है. गेहूं की बाली को शक्कर में मिलाकर उसका प्रसाद अपने ईष्ट मित्रों, परिजनों और सगे संबंधियों को बांटा जाता है, जिससे सर्दी जुकाम, वायरल बुखार आदि सभी से बचाव होता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (24 फ़रवरी 2026)
24 Feb, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- स्थिति नियंत्रण में रखें, अचानक दूसरों के कार्यों में सहयोग न करें अन्यथा हानि होगी।
वृष राशि :- मानसिक उदासीनता, असमंजस की स्थिति बनेगी, कार्य अवरोध तथा कार्य में ध्यान दें।
मिथुन राशि :- सफलता के साधन जुटायें, धन लाभ, आशानुकूल सफलता से प्रसन्नता अवश्य होगी।
कर्क राशि :- संघर्ष बना रहेगा, भावनायें मन को उद्विघ्न रखेंगी, ध्यान पूर्वक कार्य करें।
सिंह राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल होगा, बिगड़े हुये कार्य अवश्य ही बनेंगे, समय का ध्यान रखें।
कन्या राशि :- अर्थ-व्यवस्था में अनुकूलता, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, समय का लाभ अवश्य लें।
तुला राशि :- असमर्थता व असमंजस की स्थिति बनेगी, धन का व्यय अवश्य होगा।
वृश्चिक राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे।
धनु राशि :- सभी का समर्थन फलप्रद होगा, आर्थिक योजना में लाभ अवश्य होगा ध्यान दें।
मकर राशि :- सामाजिक कार्यों में प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि तथा क्रोध बढ़ेगा, धैर्य पूर्वक कार्य करें।
कुंभ राशि :- आवश्यकता के अनुरूप चिन्ता से मुक्त होंगे, परिश्रम से कार्य करने पर ही लाभ होगा।
मीन राशि :- किसी के अरोप से बचें, प्रत्येक कार्य में बाधा होगी, सावधानी से कार्य करें।
पंचांग : सोमवार को मासिक कार्तिगई पर बन रहा है अमृत योग, इस शुभ मुहूर्त में करें मुरुगन चालीसा का पाठ
23 Feb, 2026 07:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचांग : आज 23 फरवरी, 2026 सोमवार, के दिन फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि है. भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) इस तिथि के शासक हैं. जमीन-जायदाद या नए गहने खरीदने के लिए यह तिथि बहुत शुभ मानी जाती है. आज मासिक कार्तिगई है
23 फरवरी का पंचांग
विक्रम संवत : 2082
मास : फाल्गुन
पक्ष : शुक्ल पक्ष षष्ठी
दिन : सोमवार
तिथि : शुक्ल पक्ष षष्ठी
योग : ब्रह्म
नक्षत्र : भरणी
करण : तैतिल
चंद्र राशि : मेष
सूर्य राशि : कुंभ राशि
सूर्योदय : सुबह 06:53 बजे
सूर्यास्त : शाम 06:16 बजे
चंद्रोदय : सुबह 10.11 बजे
चंद्रास्त : देर रात 12.31 बजे (24 फरवरी)
राहुकाल : 08:18 से 09:44
यमगंड : 11:09 से 12:34
शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं है नक्षत्र
आज के दिन चंद्रमा मेष राशि और भरणी नक्षत्र में रहेंगे. मेष राशि में 13:20 से 26:40 तक इसका विस्तार होता है. इस नक्षत्र के देवता यम और शुक्र इस नक्षत्र के स्वामी ग्रह हैं. ये नक्षत्र उग्र और क्रूर स्वभाव का होता है. माना जाता है कि इस नक्षत्र में क्रूर कार्य, कुआं खोदना, कृषि संबंधी काम, दवाई बनाने, आग से कोई वस्तु बनाने आदि के कार्य करना उपयुक्त माना जाता है. इस नक्षत्र में किसी को भी पैसा उधार नहीं देना चाहिए. हथियार संबंधी काम, पेड़ काटने या प्रतियोगिता में आगे बढ़ने के लिए इस नक्षत्र में कार्य करना अच्छा रहता है. शुभ कार्यों के लिए यह नक्षत्र अनुकूल नहीं है.
आज के दिन का वर्जित समय
आज के दिन 08:18 से 09:44 बजे तक राहुकाल रहेगा. ऐसे में कोई शुभ कार्य करना हो, तो इस अवधि से परहेज करना ही अच्छा रहेगा. इसी तरह यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम से भी परहेज करना चाहिए.
वृश्चिक राशिफल : सोमवार को बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, धन लाभ के साथ खुलेगा तरक्की का बंद दरवाजा
23 Feb, 2026 07:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- 23 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए पहले भाव में होगा. आज का दिन आपके लिए बेहद अनुकूल रहेगा. आप तन और मन से स्वस्थ होकर कई तरह के काम आसानी से पूरे कर पाएंगे. सफलता मिलने से आपके उत्साह में वृद्धि होगी. आज भाग्य आपका साथ देगा. इनकम बढ़ेगी. परिजनों के साथ आनंद एवं उल्लास से समय गुजरेगा. माता से लाभ होने के संकेत आपको मिल रहे हैं. मित्र और संबंधियों से घर का वातावरण अच्छा रहेगा. जीवनसाथी के साथ विचारों का मतभेद दूर होगा.
वृषभ- 23 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए बारहवें भाव में होगा. आज किसी भी प्रकार के निर्णय लेने से पहले सोच-विचारकर आगे बढ़ें. किसी के साथ गलतफहमी होने की संभावना है. खराब तबीयत के कारण आप उदास हो सकते हैं. परिवार में किसी के विरोध के कारण मतभेद होगा, जिससे आपको ग्लानि होगी. परिश्रम का उचित मुआवजा नहीं मिलने से आप निराशा महसूस करेंगे. आज का दिन खर्चीला होगा. कार्यस्थल पर आपके काम में विलंब हो सकता है.
मिथुन- 23 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए ग्यारहवें भाव में होगा. आपके परिवार में सुख और शांति बनी रहेगी. व्यापार में लाभ हो सकेगा. आज लोग आपके काम की सराहना करेंगे. विवाह के इच्छुक लोगों का विवाह पक्का होने की संभावना है. मित्रों से लाभ प्राप्त कर सकेंगे. आपकी आय में वृद्धि होगी. वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहेगी. संतान से अच्छे समाचार प्राप्त होंगे. घर के इंटीरियर को बदलने के लिए आज आप कुछ बड़ा कदम उठा सकते हैं.
कर्क- 23 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए दसवें भाव में होगा. आज का दिन आपके व्यवसाय के लिए लाभदायी है. आप पर उच्च अधिकारियों की कृपा रहेगी. आपके वर्चस्व में वृद्धि होगी. पदोन्नति की संभावना है. व्यापार में विरोधियों को आप पीछे छोड़ देंगे. आर्थिक लाभ से आपका दिन अच्छा बीतेगा. परिवार में आवश्यक विषयों पर चर्चा होगी. माता का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. धन, संपत्ति और मान सम्मान के अधिकारी बनेंगे. घर के इंटीरियर में फेरबदल कर सकते हैं. दोपहर के बाद कुछ थकान का अनुभव करेंगे. इस दौरान अनावश्यक चिंता से आपको बचना चाहिए.
सिंह- 23 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए नवें भाव में होगा. आलस और थकान आपके कार्य करने की गति कम कर देंगे. पेट संबंधी शिकायत से अस्वस्थता का अनुभव होगा. नौकरी या व्यवसाय में विघ्न उत्पन्न हो सकता है. क्रोध को वश में रखना आवश्यक है. धार्मिक कामों में आज धन खर्च हो सकता है. किसी मंदिर या धार्मिक स्थल पर जाना हो सकता है. इससे मानसिक शांति मिलेगी. तनाव को दूर रखने के लिए आप ध्यान या मनपसंद संगीत सुन सकते हैं. शाम को घर-परिवार के साथ समय गुजारेंगे.
कन्या- 23 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए आठवें भाव में होगा. आज नए काम हाथ में लेना हितकर नहीं है. जो काम अभी आप कर रहे हैं, उसे ही पूरा करने की कोशिश करें. व्यापारियों के लिए दिन सामान्य है. बाहर के खाद्य पदार्थों से तबीयत खराब होने की आशंका रहेगी. क्रोध को नियंत्रण में रखने के लिए मौन रहना सही साबित होगा. धन खर्च अधिक होगा. गुप्त शत्रु आपका नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे. सरकार विरोधी या नियम विरोधी कामों से दूर रहें. जीवनसाथी के साथ विचारों का मतभेद हो सकता है.
तुला- 23 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए सातवें भाव में होगा. आज का दिन रोमांस, मनोरंजन और मौज-मस्ती से भरपूर है. सार्वजनिक जीवन में आप सम्मान प्राप्त करेंगे. यश और कीर्ति में वृद्धि होगी. व्यापार में उन्नति का दिन है. भागीदारों से लाभ की बात होगी. आज किसी नए काम की शुरुआत भी कर सकते हैं. सुंदर वस्त्र या आभूषणों की खरीदारी होगी. दांपत्यसुख और वाहनसुख उत्तम रहेगा. तंदुरुस्ती और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा बना रहेगा. मित्रों के साथ बाहर जाने का कार्यक्रम बन सकता है.
वृश्चिक- 23 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए छठे भाव में होगा. आज आप के घर में सुख शांति और आनंद का माहौल रहेगा. आपका शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. जरूरी कामों पर धन खर्च होगा. बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य में सुधार होगा. शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी. दफ्तर में सहकर्मियों का अच्छा साथ मिलेगा. मित्रों से मुलाकात होगी. महिलाओं के मायके से अच्छे समाचार आने के योग हैं. धन लाभ होगा और अधूरे काम पूरे हो सकते हैं.
धनु- 23 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए पांचवें भाव में होगा. आज आपको क्रोध पर संयम बरतने की जरूरत है. पेट से संबंधित बीमारियों में परेशानी होगी. किसी भी काम में सफलता नहीं मिलने से निराशा हो सकती है. साहित्य या अन्य किसी रचनात्मक काम के प्रति रुचि बनी रहेगी. संतान के प्रति चिंता रहने से आप परेशान रह सकते हैं. कहीं जाने की योजना को हर संभव टालें. नौकरीपेशा लोग आज केवल अपने काम से काम रखें.
मकर- 23 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए चौथे भाव में होगा. आज आपको शारीरिक अस्वस्थता और मानसिक बेचैनी का अनुभव होगा. थकान और तनाव के चलते आप समय पर काम पूरा कर पाने की स्थिति में नहीं रहेंगे. पारिवारिक वातावरण क्लेशमय रहने से मन उदास रहेगा. स्फूर्ति और ताजगी का अभाव रहेगा. स्वजनों के साथ मनमुटाव हो सकता है. सीने में दर्द हो सकता है. इस दौरान आपको चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत पड़ सकती है. सार्वजनिक रूप से अपमानित होने की आशंका है. वाद-विवाद से बचना ही बेहतर है.
कुंभ- 23 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए तीसरे भाव में होगा. आपके मन पर छाए हुए चिंता के बादल दूर होने से आप मानसिक राहत अनुभव करेंगे. धीरे-धीरे काम करने में आपको उत्साह आने लगेगा. आप अपने निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी कोशिश करेंगे. भाई-बंधुओं के साथ घरेलू मामलों पर चर्चा करेंगे और आनंदपूर्वक समय व्यतीत करेंगे. आपका मन प्रसन्न रहेगा. मित्रों, स्नेहीजनों का आगमन आपके आनंद में वृद्धि करेगा. विरोधियों पर विजय प्राप्त होगी. भाग्य वृद्धि होगी. प्रिय व्यक्तियों के साथ से आनंद मिलेगा. स्वास्थ्य लाभ मिलेगा. आज आप काफी समय परिवार में देंगे.
मीन- 23 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए दूसरे भाव में होगा. आज का दिन आर्थिक योजना बनाने के लिए बहुत अच्छा है. आप जो काम पूरा करने का निश्चय करेंगे, उसे पूरा कर सकेंगे. व्यापार में वृद्धि होगी. आपकी आय भी बढ़ेगी. किसी मीटिंग के लिए बाहर जाने का कार्यक्रम बन सकता है. नए लोगों से मित्रता होगी. उनसे लाभ और मान-सम्मान प्राप्त कर सकेंगे. संतान और पत्नी की तरफ से अच्छे समाचार मिलने से आनंद अनुभव करेंगे. वैवाहिक जीवन में आनंद रहेगा. विद्यार्थियों के लिए भी शुभ समय है. एकाग्रता से पढ़ाई पर ध्यान दे पाएंगे.
1000 स्तंभों पर टिका है यह मंदिर, नहीं है कोई दीवार, यहां भगवान विष्णु और शिव के साथ सूर्यदेव की होती है पूजा
23 Feb, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देश के अलग-अलग राज्यों में रहस्य और भक्ति से भरे कई मंदिर हैं, जहां भक्त अपने आराध्य के लिए मीलों चलकर आते हैं और उनकी पूजा-अर्चना करते हैं. भगवान शिव और भगवान विष्णु को दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा पूजा जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक मंदिर ऐसा है, जहां भगवान शिव और भगवान विष्णु के साथ एक ही गर्भगृह में भगवान सूर्य भी विराजमान हैं? मंदिर के प्रांगण में मौजूद हाथी और विशाल नंदी महाराज की प्रतिमा को विशाल बेसाल्ट पत्थर से जाकर बनाया गया है. आइए जानते हैं 1000 स्तंभों पर टिके इस मंदिर के बारे में खास बातें…
रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर
तेलंगाना राज्य के हनमकोंडा में हजार स्तंभों वाला मंदिर मौजूद है, जिसे रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. मंदिर को हजार स्तभों वाला मंदिर इसलिए कहा जाता है क्योंकि मंदिर स्तभों पर ही टिका है और मंदिर को सपोर्ट देने के लिए कोई दीवार नहीं है. मंदिर की बनावट ऐसी है कि कुछ स्तभों को सीधे तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन कुछ स्तंभ एक दूसरे से इस कदर चिपके हुए हैं कि उन्होंने लंबी दीवार का रूप ले लिया है. मंदिर की हालत बहुत जर्जर थी, लेकिन सरकार के अधीन आते ही मंदिर की मरम्मत का काम जारी है और अब मंदिर को भक्तों के लिए खोल दिया गया है.
हजार स्तंभ मंदिर एक लोकप्रिय तीर्थस्थल
स्टार शेप की वास्तुकला में निर्मित, हजार स्तंभ मंदिर एक लोकप्रिय तीर्थस्थल है जहां लगभग हर दिन 1000 से अधिक श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. मंदिर में काले बेसाल्ट पत्थर से बनी एक विशाल नंदी प्रतिमा भी है. मंदिर में स्थित तीनों गर्भगृहों को सामूहिक रूप से त्रिकूटलयम के नाम से जाना जाता है. गर्भगृह में भगवान शिव और भगवान विष्णु के साथ भगवान सूर्य भी विराजमान हैं. ये देश का पहला मंदिर है, जहां ब्रह्मांड को चलाने वाली तीन बड़ी शक्तियों को एक ही छत के नीचे देखा गया है.
धूमधाम से मनाए जाते हैं ये त्योहार
भगवान सूर्य की प्रतिमा होने की वजह से मकर संक्रांति (पोंगल) पर भक्त सूर्य देव का आशीर्वाद लेने आते हैं. मंदिर में मकर संक्रांति (पोंगल) के अलावा, महाशिवरात्रि, कुंकुमा पूजा, कार्तिक पूर्णिमा, उगादी, नागुला चविती, गणेश चतुर्थी, बोनालु महोत्सव और बथुकम्मा महोत्सव भी धूमधाम से सेलिब्रेट किए जाते हैं.
12वीं शताब्दी में किया था निर्माण
12वीं शताब्दी में मंदिर का निर्माण रुद्र देव ने किया था. मंदिर में रुद्र देव के गृह देवता की प्रतिमा भी मौजूद है, जिसकी वजह से मंदिर को रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर के नाम से जाना जाता है. यह मंदिर चालुक्य मंदिरों की स्थापत्य शैली में निर्मित है. मंदिर के प्रांगण में मौजूद हाथी और विशाल नंदी महाराज की प्रतिमा को विशाल बेसाल्ट पत्थर से जाकर बनाया गया है. प्रतिमा पर बारीक नक्काशी भी देखने को मिलती है, जो नंदी महाराज की शोभा को बढ़ाती है.
24 फरवरी से होलाष्टक शुरू, आखिर क्यों अशुभ होते हैं ये 8 दिन! जानें क्या करें और क्या ना करें?
23 Feb, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि सो होलाष्टक शुरू हो जाता हें और पूर्णिमा तिथि यानी होलिका दहन होते ही होलाष्टक खत्म हो जाते हैं. होली से 8 दिन पहले लगने वाले होलाष्टक इस बार 24 फरवरी से शुरू हो रहे हैं, जो होलिका दहन तक प्रभावी रहेंगे. धार्मिक मान्यता के अनुसार इन आठ दिनों में शुभ और मांगलिक कार्यों को वर्जित माना गया है. विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे कार्य इस अवधि में नहीं किए जाते. आइए जानते हैं आखिर होलाष्टक को अशुभ काल क्यों माना जाता है और इन 8 दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं…
होलाष्टक में ग्रह रहते हैं उग्र और रुद्र
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दिनों में ग्रहों की स्थिति उग्र मानी जाती है. ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक का समय अशुभ प्रभाव वाला होता है. इस दौरान आठ ग्रह उग्र भाव में रहते हैं. अष्टमी तिथि को चंद्रमा, नवमी तिथि को सूर्य, दशमी तिथि को शनि, एकादशी तिथि को शुक्र, द्वादशी तिथि को गुरु बृहस्पति, त्रयोदशी तिथि को बुध, चतुर्दशी तिथि को मंगल और पूर्णिमा तिथि को मायावी ग्रह राहु उग्र और रुद्र अवस्था में रहते हैं. इसलिए इन 8 दिनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है. ग्रहों की उग्र अवस्था की वजह से व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो जाती है इसलिए इस काल में केवल ईश्वर का भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ, जप-तप आदि धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है.
होलाष्टक से जुड़ी पौराणिक कथा भी प्रचलित है. कथा के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने के लिए अनेक यातनाएं दीं. इन्हीं आठ दिनों में प्रह्लाद को कठोर कष्ट दिए गए थे. अंततः पूर्णिमा के दिन उसकी बहन होलिका अग्नि में भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद की रक्षा हुई. इसी कारण इन आठ दिनों को अशांत और उग्र समय माना जाता है.
होलाष्टक में क्या करें?
होलाष्टक के दौरान भगवान विष्णु, नारायण और श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करना शुभ माना गया है. भगवान विष्णु की आराधना से नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं.
होलाष्टक में धार्मिक अनुष्ठान, सत्संग, भजन-कीर्तन और मंत्र जप करना लाभकारी होता है. इन 8 दिनों में हर रोज भगवान कृष्ण को गुलाल अबीर लगाना चाहिए.
होलाष्टक में मथुरा-वृंदावन की परिक्रमा करना शुभ माना गया है. साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.
गांवों और मोहल्लों में होलिका दहन की तैयारियां इसी दौरान शुरू हो जाती हैं. यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है.
होलाष्टक में क्या ना करें?
होलाष्टक में शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, हवन, 16 संस्कार, नई दुकान या व्यवसाय की शुरुआत जैसे कार्य टालने की सलाह दी जाती है.
होलाष्टक में भूमि, मकान या वाहन खरीदना भी इस समय शुभ नहीं माना जाता. इस काल में ज्यादा यात्रा करने से भी बचना चाहिए.
ज्योतिषाचार्य होलाष्टक में बड़े फैसलों को स्थगित करने की सलाह देते हैं. साथ ही विवाहित महिलाओं को इस समय अपने मायके रहना चाहिए.
अगर आप नौकरी में बदलाव कर रहे हैं तो होलाष्टक के बाद ज्यादा सही रहेगा. साथ ही इस समय ना तो प्रॉपर्टी खरीदें और ना ही बचें.
होली के दिन चंद्र ग्रहण, जानें सूतक काल का समय, ज्योतिष प्रभाव और इससे संबंधित पूरी जानकारी
23 Feb, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
3 मार्च दिन मंगलवार को साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है और इस चंद्र ग्रहण की सबसे खास बात यह है कि ग्रहण होली के त्योहार पर पड़ेगा. होली के दिन लगने वाला यह चंद्र ग्रहण सूर्यदेव की राशि सिंह और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के अंतर्गत घटित होने वाला है. चंद्र ग्रहण वह क्षण होता है, जब ब्रह्मांड अपनी ऊर्जा की धारा को बदलता है और उसके साक्षी पृथ्वी पर मौजूद सभी जीव-जंतु, पशु-पंक्षी, मनुष्य होते हैं. चंद्र ग्रहण केवल एक खगोलिय घटना नहीं बल्कि इसका धार्मिक महत्व भी है और होली के दिन इस ग्रहण का होना बेहद दुर्लभ संयोग माना जा रहा है. बता दें कि साल 2026 में कुछ चार ग्रहण लगने वाले हैं, जिनमें 2 चंद्र ग्रहण होते हैं और 2 सूर्य ग्रहण. आइए जानते हैं होली पर लगने वाले चंद्र ग्रहण के बारे में, क्या यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा या नहीं…
होली पर चंद्र ग्रहण
इस साल होली 3 मार्च 2026 को मनाई जाएगी और इसी दिन चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है, जिससे इसका प्रभाव देश-दुनिया समेत अर्थव्यवस्था, राजनीति, करियर, मेष से मीन तक सभी 12 राशियों पर पड़ने वाला है. यह चंद्र ग्रहण कई लोगों के लिए शुभ नहीं रहेगा क्योंकि यह कई बदलाव लेकर आ रहा है.
बहुत से लोगों में कन्फ्यूजन है कि होलिका दहन के दिन चंद्र ग्रहण है तो कैसे क्या होगा. तो हम आपको बता दें कि भारत में चंद्रोदय होने से पहले ही चंद्र ग्रहण खत्म भी हो जाएगा. इसलिए होलिका दहन पर लगने वाला यह चंद्र ग्रहण ग्रस्तोदय ग्रहण कहा जा रहा है.
क्या यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
हां, इस बार पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत से भी दिखाई देगा, इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि वे इस ग्रहण के लिए तैयार रहें क्योंकि वे इसे अपनी खुली आंखों से भी देख सकते हैं. भारत में चंद्र ग्रहण लगभग 25 मिनट तक दिखाई देगा.
क्या भारत में सूतक काल लगेगा?
हां, जैसा कि ऊपर बताया गया है कि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए उस समय सूतक काल भी रहेगा.
सूतक काल कब शुरू होगा?
सूतक काल चंद्र ग्रहण से नौ घंटे पहले शुरू हो जाएगा और ग्रहण समाप्त होने के बाद खत्म होगा. इस दौरान शुभ कार्य, पूजा-पाठ आदि से बचना चाहिए. चंद्र ग्रहण का सूतक काल भारत में 6 बजकर 20 मिनट पर शुरू हो जाएगा. इसका असर होली के त्योहार पर भी पड़ेगा. वहीं सूर्य ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है.
कब शुरू होगा चंद्र ग्रहण?
3 मार्च को लगने वाला ग्रहण भारतीय समय के अनुसार, दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. चंद्र ग्रहण की अवधि 3 घंटे 27 मिनट की होने वली है.
यहां से शुरू हुई थी शिवलिंग पूजने की परंपरा, हवा भी करती है ॐ का उच्चारण, 2500 साल से ज्यादा पुराना है यह मंदिर!
23 Feb, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हम सभी के मन में सवाल रहता है कि आखिर शिवलिंग की पूजा की परंपरा कब से शुरू हुई और कहां पहली बार शिवलिंग का पूजन किया गया था. उत्तराखंड के जागेश्वर मंदिर के बारे में बताया जाता है कि यहीं से पहली बार शिवलिंग पूजने की परंपरा शुरू हुई थी. यहां हवा भी ओम का उच्चारण करती है. आइए जानते हैं भगवान शिव के इस मंदिर के बारे में...
हिंदू धर्म में सभी देवी-देवताओं की प्राण-प्रतिष्ठित या फिर स्वयंभू प्रतिमाओं को पूजने करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. देश के हर मंदिर में स्थापित प्रतिमा किसी ना किसी चमत्कार और आस्था से जुड़ी है, लेकिन शिवलिंग की पूजा की परंपरा कहां से शुरू हुई और क्यों शुरू हुई, इसका जवाब किसी के पास नहीं है. महादेव की देवभूमि उत्तराखंड में इसके पीछे की पौराणिक कहानी और जवाब दोनों छिपे हैं. आइए जानते हैं भगवान शिव के इस मंदिर के बारे में...
यहां रखी गई थी शिव पूजा की नींव - लोगों के बीच धारणा है कि 12 ज्योतिर्लिंग ही सबसे प्रभावी शिवालय हैं और शिव की शक्ति का प्रतीक हैं. यह बात सच भी है, लेकिन उत्तराखंड के अल्मोड़ा शहर से लगभग 40 किमी दूर भगवान शिव का ऐसा मंदिर स्थित है, जहां शिव पूजा की नींव रखी गई. हम बात कर रहे हैं जागेश्वर मंदिर की, जिसे जागृत महादेव का मंदिर भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं की मानें तो ये जागेश्वर मंदिर वही मंदिर है, जहां पहली बार स्वयं भगवान शिव प्रकट हुए थे और इसी स्थान पर सप्तऋषियों ने भगवान शिव की पूजा की थी.
मंदिर के प्रांगण में 124 मंदिर - इतना ही नहीं, मंदिर के प्रांगण में 124 बड़े और छोटे मंदिर हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि खुद देवी-देवताओं ने स्वर्ग छोड़कर इसी मंदिर में अपना स्थान लिया है. मंदिर में महामृत्युंजय मंदिर, केदारनाथ मंदिर, कुबेर मंदिर और पुष्टि माता समेत कई देवी-देवताओं के मंदिर मौजूद हैं. भक्त भगवान शिव की कृपा के साथ बाकी देवी-देवताओं की विशेष कृपा लेने के लिए दूर-दूर से मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं.
मंदिर के आसपास की ऊर्जा बहुत प्रभावशाली - मंदिर की बनावट भी अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए है. मंदिर के शिखर ध्रुव तारे की तरफ इशारा करते हैं और घने जंगलों में जब भी हवा चलती है तो ओम की ध्वनि गूंजती है. मंदिर में दर्शन करने वाले भक्तों और ध्यान लगाने वाले साधुओं को इस ध्वनि का कई बार अहसास हुआ है. यही कारण है कि जागेश्वर मंदिर को ध्यान की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ स्थान माना गया है और विज्ञान भी इस बात को मानता है कि मंदिर के आसपास की ऊर्जा बहुत प्रभावशाली है.
2500 से ज्यादा पुराना मंदिर - मंदिर तकरीबन 2500 से ज्यादा पुराना है, और मंदिरों के पत्थरों, पत्थर की मूर्तियों और वेदों पर नक्काशी मंदिर का मुख्य आकर्षण है. मंदिर को सख्त काले चट्टान वाले पत्थर से बनाया गया है, और यही कारण है कि मंदिर आज भी मजबूती से टिका है. सावन के महीने और महाशिवरात्रि पर भक्तों की विशेष भीड़ मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचती है और पूरा परिवार हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (23 फ़रवरी 2026)
23 Feb, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष, कार्यवृत्ति में सुधार तथा कार्य में ध्यान दें।
वृष राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, दैनिक कार्यगति अनुकूल बनेगी ध्यान दें।
मिथुन राशि :- इष्ट मित्र से हर्ष, दैनिक कार्यगति में सुधार, समय का ध्यान रखें।
कर्क राशि :- विशेष परिवर्तन स्थिगित रखें, प्रयास करने पर थोड़ी सफलता मिलेगी।
सिंह राशि :- सामाजिक कार्य में हर्ष-उल्लास, स्त्री वर्ग से सुख, भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी।
कन्या राशि :- आशानुकूल सफलता से हर्ष, कार्यवृत्ति में सुधार की मनोवृत्ति होगी।
तुला राशि :- अशुद्ध गोचर रहने से उत्साहहीनता बनेगी, असमर्थता से असमंजस का वातावरण बनेगा।
वृश्चिक राशि :- इष्ट मित्रों से लाभ, बिगड़े कार्य बनेंगे, भाग्य प्रबल होगा, कार्य बनेंगे।
धनु राशि :- मनोवृत्ति संवेदनशील रहेगी, हर्ष-उल्लास का वातावरण रहेगा।
मकर राशि :- विशेष कार्य बिगड़ेंगे तथा किसी विवाद व झगड़े से बचें, कार्य करें।
कुंभ राशि :- अकारण ही मन उदासीन बना रहेगा, चिंता होगी, सफलता के साधन बनेंगे।
मीन राशि :- दैनिक कार्यगति अनुकूल, चिन्ता में कमी, धन प्राप्ति के साधन बनेंगे।
पंचांग : स्कंद षष्ठी रविवार...सिर्फ एक पूजा और दूर होंगे जीवन के सारे संकट, जानें शुभ मुहूर्त और विधि
22 Feb, 2026 07:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचांग : आज 22 फरवरी, 2026 रविवार, के दिन फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि है. माता ललिता त्रिपुर सुंदरी इस तिथि की रक्षक है. यह तिथि सभी तरह के शुभ काम के लिए अच्छी मानी जाती है. आज स्कंद षष्ठी है. पंचमी तिथि सुबह 11.09 बजे तक है.
22 फरवरी का पंचांग
विक्रम संवत : 2082
मास : फाल्गुन
पक्ष : शुक्ल पक्ष पंचमी
दिन : रविवार
तिथि : शुक्ल पक्ष पंचमी
योग : शुक्ल
नक्षत्र : अश्विनी
करण : बलव
चंद्र राशि : मेष
सूर्य राशि : कुंभ
सूर्योदय : सुबह 06:54 बजे
सूर्यास्त : शाम 06:15 बजे
चंद्रोदय : सुबह 09.32 बजे
चंद्रास्त : रात 11.22 बजे
राहुकाल : 16:50 से 18:15
यमगंड : 12:35 से 14:00
पढ़ाई की शुरुआत के लिए अच्छा है नक्षत्र
आज के दिन चंद्रमा मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में रहेंगे. नक्षत्र गणना में अश्विनी पहला नक्षत्र है. इसका विस्तार मेष राशि में 0 से 13.2 डिग्री तक होता है. इसके देवता अश्विनी कुमार हैं, जो जुड़वा देवता हैं और देवताओं के चिकित्सक के रूप में प्रसिद्ध हैं. इसके स्वामी ग्रह केतु हैं. यह नक्षत्र यात्रा करने, हीलिंग, ज्वैलरी बनाने, अध्ययन की शुरुआत, वाहन खरीदने/बेचने के लिए अच्छा माना जाता है. नक्षत्र का वर्ण हल्का और तेज होता है. खेल, सजावट और ललित कला, व्यापार, खरीदारी, शारीरिक व्यायाम, गहने पहनने और निर्माण या व्यापार शुरू करने, शिक्षा और शिक्षण, दवाएं लेने, ऋण देने और लेने, धार्मिक गतिविधियों, विलासिता की वस्तुओं का आनंद लेने के लिए भी इस नक्षत्र में कार्य किए जा सकते हैं.
आज के दिन का वर्जित समय
आज के दिन 16:50 से 18:15 बजे तक राहुकाल रहेगा. ऐसे में कोई शुभ कार्य करना हो, तो इस अवधि से परहेज करना ही अच्छा रहेगा. इसी तरह यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम से भी परहेज करना चाहिए.
तुला राशिफल : रविवार लाएगा खुशियों की सौगात, बिगड़े काम बनेंगे और बढ़ेगा मान-सम्मान
22 Feb, 2026 07:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- 22 फरवरी, 2026 रविवार के दिन चंद्रमा आज मेष राशि में है. यह आपकी राशि से पहले भाव में होगा. स्फूर्ति और ताजगीपूर्ण सुबह से दिन की शुरुआत करेंगे. घर में मित्रों और सगे-संबंधियों के आने से खुशी का माहौल रहेगा. उनकी तरफ से मिले उपहारों से आपको खुशी होगी. आज आर्थिक लाभ मिलने की भी संभावना है. यात्रा की तैयारी रखें. नए काम शुरू कर सकते हैं. उत्तम भोजन करने का अवसर मिलेगा. आज आप ज्यादातर समय आराम करने के मूड में रहेंगे. आने वाले त्योहार को देखते हुए किसी शॉपिंग का मन बना सकते हैं.
वृषभ- 22 फरवरी, 2026 रविवार के दिन चंद्रमा आज मेष राशि में है. यह आपकी राशि से बारहवें भाव में होगा. आप के भीतर क्रोध और हताशा हावी होगी. स्वास्थ्य खराब हो सकता है. परिवार और आर्थिक मामलों में चिंता बनी रहेगी. स्वभाव की उग्रता के कारण किसी के साथ मतभेद या झगड़े होने की संभावना है. मेहनत का परिणाम नहीं मिलेगा. अपने काम को समय पर पूरा करने की कोशिश करें. त्योहारी सीजन में ज्यादा खर्च आपके बजट को बिगाड़ सकता है. आज आप आर्थिक चिंता में रह सकते हैं. बचत के पैसों को खर्च करना पड़ सकता है.
मिथुन- 22 फरवरी, 2026 रविवार के दिन चंद्रमा आज मेष राशि में है. यह आपकी राशि से ग्यारहवें भाव में होगा. आज अनेक रूप से लाभ होने के कारण आपके उल्लास में दोगुनी वृद्धि होगी. कार्यस्थल पर आप टारगेट पूरा करने में सक्षम होंगे. व्यापार में लाभ प्राप्त हो सकता है. पत्नी एवं बेटे की तरफ से लाभदायी समाचार मिलेंगे. मित्रों से हुई मुलाकात से आनंद मिलेगा. शादी के लिए योग्य जीवनसाथी तलाश रहे युवक-युवतियों को खुशखबरी मिल सकती है. आज उत्तम भोजन का योग है. स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अच्छा है. हालांकि यात्रा करने के दौरान आपको बेहद सावधानी रखना होगी.
कर्क- 22 फरवरी, 2026 रविवार के दिन चंद्रमा आज मेष राशि में है. यह आपकी राशि से दसवें भाव में होगा. नौकरी या व्यवसाय करने वालों के लिए आज का दिन लाभदायक है. नौकरीपेशा लोगों की प्रशंसा होगी. आपको कोई नया काम दिया जा सकता है. अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण मामलों में खुले मन से चर्चा होगी. शारीरिक और मानसिक ताजगी का अनुभव होगा. माता के साथ संबंध अच्छे रहेंगे. धन और मान-सम्मान के हकदार बनेंगे. गृह-सज्जा में आप रुचि लेंगे. वाहन सुख मिलेगा. सरकार की तरफ से लाभ और सांसारिक सुख में वृद्धि होगी.
सिंह- 22 फरवरी, 2026 रविवार के दिन चंद्रमा आज मेष राशि में है. यह आपकी राशि से नवें भाव में होगा. आज गुस्से वाला स्वभाव होने के कारण किसी भी काम में मन नहीं लगेगा. संघर्ष या विवाद के कारण किसी के नाराज होने की आशंका बनी रहेगी. स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा. जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लें, अन्यथा गलती हो सकती है. व्यापार या नौकरी में परेशानी आएगी. इच्छानुसार परिणाम नहीं मिलेंगे. किसी धार्मिक स्थल की यात्रा हो सकती है. हालांकि आज का दिन आप धैर्य के साथ गुजारें.
कन्या- 22 फरवरी, 2026 रविवार के दिन चंद्रमा आज मेष राशि में है. यह आपकी राशि से आठवें भाव में होगा. आज नए काम की शुरुआत ना करें. क्रोध और वाणी पर संयम रखना आवश्यक होगा. कार्यस्थल पर अधीनस्थों के साथ विवाद करने से बचें. बाहरी खाद्य पदार्थ खाने से तबीयत खराब होने की आशंका है. पारिवारिक सदस्यों के साथ उग्र बोलचाल और मनमुटाव न हो, इसका ध्यान रखें।. आय मध्यम रहेगी, लेकिन आज जरूरत से ज्यादा धन खर्च होगा. पानी वाली जगहों से दूर रहें. नियम विरोधी काम ना करें. विद्यार्थियों को एकाग्र होने के लिए कुछ ज्यादा मेहनत करनी होगी.
तुला- 22 फरवरी, 2026 रविवार के दिन चंद्रमा आज मेष राशि में है. यह आपकी राशि से सातवें भाव में होगा. आज आपका दिन आनंद-प्रमोद में गुजरेगा. रोमांस के लिए आज का दिन अच्छा है. किसी खास व्यक्ति का साथ आपको आनंद देगा. मित्र एवं प्रियजन आपके प्रवास को आनंद से भर देंगे. नए वस्त्रों की खरीदी के योग हैं. तन और मन की तंदुरस्ती अच्छी रहेगी. मान-सम्मान मिलेगा. अच्छे भोजन एवं वैवाहिक सुख की अनुभूति होगी. परिजनों के साथ चल रहा कोई पुराना मतभेद दूर हो सकता है.
वृश्चिक- 22 फरवरी, 2026 रविवार के दिन चंद्रमा आज मेष राशि में है. यह आपकी राशि से छठे भाव में होगा. आज का दिन हर तरह से सुखमय रहेगा. परिजनों संग आनंदपूर्वक समय व्यतीत होगा. शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ और प्रसन्न रहेंगे. नौकरीपेशा लोगों को साथी कर्मचारियों का सहयोग मिलेगा. महिलाओं को मायके से अच्छे समाचार मिलेंगे. धन लाभ होगा. अधूरे काम आज पूरे होंगे. व्यापार बढ़ाने के लिए आप कोई मीटिंग कर सकते हैं.
धनु- 22 फरवरी, 2026 रविवार के दिन चंद्रमा आज मेष राशि में है. यह आपकी राशि से पांचवें भाव में होगा. यात्रा स्थगित रखें. कार्य के सफल नहीं होने से हताशा हो सकती है. इससे आपको क्रोध होगा. ज्यादातर समय मौन रहने से बात अधिक नहीं बिगड़ेगी. पेट संबंधी बीमारियों से परेशानी होगी. संतान के मामले में चिंता पैदा होगी. हालांकि दोपहर के बाद स्थिति में सुधार होगा. कार्यस्थल पर आप समय पर काम पूरा कर पाने की स्थिति में रहेंगे. रोमांस और धन प्राप्ति के लिए अनुकूल समय है. परिवार में छोटे भाई-बहनों के साथ व्यवहार में कठोरता नहीं रखें. जीवनसाथी का भी सम्मान करें.
मकर- 22 फरवरी, 2026 रविवार के दिन चंद्रमा आज मेष राशि में है. यह आपकी राशि से चौथे भाव में होगा. आपके तन-मन में चुस्ती और स्फूर्ति का अभाव रहेगा. मन में किसी बात का भय रहेगा. पारिवारिक सदस्यों के साथ मतभेद या विवाद से आप उदास हो सकते हैं. समय पर भोजन और नींद नहीं मिलेगी. इससे थकान रहेगी. दोस्तों से नुकसान होने अथवा उनके साथ मतभेद होने की आशंका है. आज अनावश्यक खर्च हो सकता है. बचत के लिए खुद को प्रेरित करना होगा. संतान संबंधी कोई चिंता आपको रह सकती है. स्वास्थ्य के मामले में लापरवाही ना करें.
कुंभ- 22 फरवरी, 2026 रविवार के दिन चंद्रमा आज मेष राशि में है. यह आपकी राशि से तीसरे भाव में होगा. आज आपको मानसिक राहत मिलेगी. शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होने के कारण आपका उत्साह बढ़ेगा. दोस्तों और पड़ोसियों के साथ रिश्ते बेहतर होंगे. घर में रिश्तेदार और मित्रों के आने से खुशी का अनुभव करेंगे. व्यापार के सिलसिले में किसी यात्रा पर जाने का कार्यक्रम बन सकता है. आप प्रियजनों से मिल सकेंगे. किस्मत का साथ मिलेगा. स्वास्थ्य संबंधी कोई पुरानी तकलीफ दूर हो सकती है. दोपहर के बाद और ऊर्जावान महसूस करेंगे. गृहस्थ जीवन सुखमय बीतेगा.
मीन- 22 फरवरी, 2026 रविवार के दिन चंद्रमा आज मेष राशि में है. यह आपकी राशि से दूसरे भाव में होगा. अपने गुस्से पर नियंत्रण रखें. किसी के साथ संघर्ष हो सकता है. वित्तीय मामले और लेन-देन में सावधानी रखनी पड़ेगी. परिवार के सदस्यों के साथ मतभेद हो सकता है. मन पर नकारात्मकता हावी होगी. नकारात्मक विचारों को खुद से दूर रखें. खानपान पर ध्यान नहीं रखने से स्वास्थ्य खराब हो सकता है. व्यापारियों के लिए दिन सामान्य है. नौकरीपेशा लोग भी आज केवल अपने काम पर ध्यान दें.
वैष्णो देवी की छोटी बहन हैं मां संकटा, भगवान शिव के कष्टों को किया दूर, दर्शन मात्र से मिट जाते पाप
22 Feb, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शिव की नगरी काशी को मंदिरों का शहर कहा जाए तो इसमें कोई गलत नहीं होगा. बनारस में बहती गंगा मां की गोद में मां भगवती के ऐसे रूप की पूजा होती है, जो भक्तों के संकट हरने के लिए प्रसिद्ध हैं. खास बात ये है कि जब भगवान शिव के पास भी संकट का समाधान नहीं था, तब वे भी मां संकटा के चरणों में पहुंचे थे. इस देवी को संकटा देवी के नाम से जाना जाता है, जो वैष्णो देवी की छोटी बहन कहलाती हैं. आइए जानते हैं मां संकटा के मंदिर और उनसे जुड़े चमत्कार के बारे में.
हर संकट को हर लेती हैं मां संकटा
आदिशक्ति स्वरूपा मां संकटा मंदिर बनारस की तंग गलियों में मौजूद है, लेकिन फिर भी मां को पूजने वाले भक्तों की संख्या में कमी नहीं है. भक्तों और स्थानीय लोगों को विश्वास है कि मां आने वाले संकट को भी हर लेती हैं और उन्हें उपचार की देवी के नाम से भी जाना जाता है. संकट चाहे शारीरिक हो या मानसिक, मां संकटा हर तरह के संकट को भक्तों से दूर कर देती हैं. यही कारण है कि मां की प्रातः काल और संध्या काल आरती में भक्तों की विशेष भीड़ रहती है.
वैष्णो देवी की छोटी बहन हैं मां संकटा
नवरात्रि के नौ दिन मंदिर में भव्य आयोजन और अनुष्ठान किए जाते हैं. नवरात्रि के नौ दिनों में से आठवां दिन मां संकटा देवी को समर्पित होता है. माना जाता है कि मां सकंटा मां वैष्णो देवी की छोटी बहन हैं, जो त्रिकुटा पर्वत पर विराजमान हैं. यह दोनों दिव्य शक्तियां मिलकर भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं. अगर आप भी मां संकटा मंदिर का आशीर्वाद लेना चाहते हैं तो मंदिर की वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से दूरी मात्र 6 किलोमीटर है, जबकि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से 3 किलोमीटर है.
चार भुजा वाली देवी का अन्नकूट श्रृंगार
मंदिर के गर्भगृह में मां देवी संकटा की विशाल प्रतिमा है, जिनकी चार भुजाएं हैं. मां का रोजाना फूलों से अलग-अलग शृंगार किया जाता है और अन्नकूट शृंगार को बेहद खास माना गया है. मान्यता है कि मां अपने किसी भी बच्चों को भूखा नहीं सोने देती और उनका पेट भरने के लिए अन्न की देवी के रूप में विद्यमान हैं. मंदिर में प्रवेश द्वार पर विशाल सिंह भी देखने को मिलेगा, जो मां की सवारी है. इसके साथ ही मंदिर में नौ ग्रहों की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं.
नारी पूजा का प्रतीक है देवी की चांदी वाली मूर्ति
चार भुजाओं वाली देवी संकटा इस मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण देवी हैं. देवी की चांदी से मढ़ी प्रतिमा लगभग चार से पांच फीट ऊंची है और इसे नारी पूजा का प्रतीक माना जाता है.
हनुमान और भैरव करते हैं रक्षा
मां की रक्षा के लिए उनकी प्रतिमा के साथ हनुमान और भैरव दोनों स्थापित हैं. ऐसा माना जाता है कि पांडव अपने वनवास के दौरान देवी संकटा की पूजा करने के लिए इस स्थान पर आए थे.
चैत्र माह की शुरुआत कब से है? हिंदू नववर्ष के पहले महीने में क्या करें, क्या न करें
22 Feb, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चैत्र माह पंचांग या फिर कहें कि हिंदू नववर्ष का पहला महीना होता है. यह पूजा पाठ और व्रत की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर चित्रा नक्षत्र का शुभ संयोग बनता है, इसकी वजह से इस माह का नाम चैत्र है. चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपद तिथि से हिंदू नववर्ष का प्रारंभ होता है. उस दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत भी होती है. चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान राम का जन्म हुआ था, इसलिए इसे राम नवमी कहते हैं. पंचांग से जानते हैं कि चैत्र माह की शुरुआत कब से हो रही है? चैत्र महीने में क्या करें और क्या न करें?
चैत्र माह की शुरुआत कब?
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 3 मार्च दिन मंगलवार को शाम में 05 बजकर 07 मिनट से से शुरू होगी. इस तिथि का समापन 4 मार्च दिन बुधवार को शाम में 04 बजकर 48 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर चैत्र माह की शुरुआत 4 मार्च बुधवार को होगी.
धृति योग और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में चैत्र का प्रारंभ
इस साल चैत्र माह का शुभारंभ धृति योग और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में होगा. चैत्र कृष्ण प्रतिपदा के दिन धृति योग प्रात:काल से लेकर सुबह 08 बजकर 52 मिनट तक है, उसके बाद से शूल योग प्रारंभ होगा. उस दिन पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 07 बजकर 39 मिनट तक है. उसके बाद से उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है.
धृति योग को शुभ योग माना जाता है. इस योग में आप जो कार्य करते हैं, उसमें स्थिरता प्राप्त होती है. वहीं पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी ग्रह शुक्र हैं और इस नक्षत्र के देवता भग हैं, जो भाग्य और दांपत्य सुख के कारक हैं. वहीं शूल योग को अशुभ और कष्टकारक माना गया है. उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र भी स्थिर और शुभ होता है.
चैत्र माह में क्या करें?
चैत्र माह से ऊर्जा और नवीनता का प्रारंभ होता है. इस वजह से आप व्रत और पूजा पाठ करें.
चैत्र में पापमोचनी एकादशी आएगी. इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति पाप मुक्त हो जाता है, इसलिए यह व्रत सभी को करना चाहिए.
चैत्र के समय में गर्मी बढ़ने लगती है. इस वजह से इस माह में अधिक पानी पिएं और फल खाएं.
चैत्र के महीने में चने का सेवन करना चाहिए. इससे आपकी सेहत ठीक रहेगी.
चैत्र के शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा से नवमी तक नवरात्रि रहेगी, उस समय व्रत रखें और मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा करें. दुर्गासप्तशती का पाठ या दुर्गा मंत्र का जाप शुभ फलदायी होगा.
नाम, यश, पद, प्रतिष्ठा में बढ़ोत्तरी के लिए चैत्र माह में सूर्य देव की पूजा करें. लाल रंग के फल का दान करें.
चैत्र माह में क्या न करें?
चैत्र के महीने में गुड़ खाना वर्जित होता है. आयुर्वेद में इस बात का वर्णन विस्तार से बताया गया है.
चैत्र में बासी भोजन न करें. गर्मी के कारण रखा गया भोजन खराब हो सकता है, जिसे खाने से तबीयत खराब हो सकती है.
चैत्र में मांस, मदिरा या अन्य तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए.
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