धर्म एवं ज्योतिष
होली भाई दूज कब है, आज या कल? जानें सही तारीख, मुहूर्त और महत्व
5 Mar, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होली भाई दूज का पर्व हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाते हैं. होली के अगले दिन ही भाई दूज का पर्व होता है क्योंकि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को होली खेली जाती है. हालांकि कई बार तिथियों के समय में कम का अंतर होने पर यह होली के दिन ही पड़ सकता है. होली भाई दूज के दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाती हैं और उनके सुखी जीवन की कामना करती हैं. आइए जानते हैं कि होली भाई दूज कब है? होली भाई दूज का मुहूर्त क्या है?
होली भाई दूज कब है?
दृक पंचांग के अनुसार, होली भाई दूज के लिए आवश्यक चैत्र कृष्ण द्वितीया तिथि का प्रारंभ 4 मार्च दिन बुधवार को शाम 04:48 पी एम से होगा. इस तिथि का समापन 5 मार्च दिन गुरुवार को 05:03 पी एम पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर होली भाई दूज का पर्व 5 मार्च गुरुवार को मनाया जाएगा.
होली भाई दूज मुहूर्त
5 मार्च को होली भाई दूज के दिन सुबह में ही शुभ-उत्तम मुहूर्त है. यह सुबह 06:42 ए एम से 08:10 ए एम तक है. इससे पहले ब्रह्म मुहूर्त 05:04 ए एम से 05:53 ए एम तक है. उसके बाद दिन का शुभ मुहूर्त यानि अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:09 पी एम से 12:56 पी एम तक है.
इस बार होली भाई दूज पर राहुकाल दोपहर में है. राहुकाल दोपहर में 02:00 पी एम से लेकर 03:28 पी एम तक है. राहुकाल में भाई दूज का तिलक न लगाएं.
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में होली भाई दूज
होली भाई दूज के दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है. यह प्रात:काल से लेकर सुबह 08:17 ए एम तक है, उसके बाद से हस्त नक्षत्र है. उस दिन शूल योग प्रात:काल से लेकर सुबह 07:46 ए एम तक है, उसके बाद से गंड योग है. ये दोनों शुभ योग नहीं हैं.
होली भाई दूज का महत्व
होली भाई दूज के दिन बहन अपने भाई को तिलक लगाती हैं और उनके सुखी जीवन की कामना करती हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, दूज के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे तो उन्होंने उनका आदर सत्कार किया, जिससे यम प्रसन्न हुए. उन्होंने यमुना को आशीर्वाद दिया कि भाई दूज पर जो भाई अपनी बहन के घर आएगा, उसे अकाल मृत्यु से भय नहीं होगा. इस वजह से साल में दो बार भाई दूज का पर्व मनाते हैं. एक होली भाई दूज और दूसरा दिवाली भाई दूज.
माइंडफुलनेस का सरल तरीका: नींद अधूरी, दिमाग बंद? शिव के 7 नामों का जप आपके मानसिक तनाव को कर सकता है कम
5 Mar, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेज़ रफ्तार, काम का दबाव, रिश्तों की उलझनें और लगातार चलती सोच-आज का इंसान शायद पहले से ज्यादा मानसिक शोर में जी रहा है. कई लोग कहते हैं कि उनका दिमाग बंद ही नहीं होता, नींद अधूरी रहती है और छोटी-सी बात पर गुस्सा आ जाता है. ऐसे में लोग मेडिटेशन ऐप, थेरेपी या दवाओं की ओर जाते हैं, लेकिन दिलचस्प बात ये है कि भारतीय परंपरा में सदियों से एक सरल मानसिक तकनीक मौजूद है-“नाम जप”. खासकर शिव के नामों का जप, जिसे केवल धार्मिक अभ्यास नहीं बल्कि मन को स्थिर करने की प्रक्रिया माना गया है. मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि धीमी, लयबद्ध ध्वनि का दोहराव नर्वस सिस्टम को शांत कर सकता है. ऐसे में सवाल उठता है-क्या शिव के अलग-अलग नाम वास्तव में अलग मानसिक अवस्थाओं को छूते हैं? और क्या ये माइंडफुलनेस जैसा असर दे सकते हैं?
क्यों माना जाता है शिव नाम जप को मानसिक संतुलन का अभ्यास? भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में शिव केवल देवता नहीं, बल्कि चेतना और शांति के प्रतीक माने गए हैं. उनके अलग-अलग नाम, अलग भाव और मनोदशा से जोड़े जाते हैं. यही वजह है कि कई लोग तनाव या बेचैनी में अपने-आप “ॐ नमः शिवाय” बोलने लगते हैं-जैसे मन खुद शांत होने का रास्ता ढूंढ रहा हो. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जब कोई शब्द या ध्वनि बार-बार शांत गति से दोहराई जाती है, तो दिमाग की “फाइट-ऑर-फ्लाइट” प्रतिक्रिया धीमी पड़ती है. इसे ही माइंडफुलनेस या मंत्र-मेडिटेशन का आधार माना जाता है. यानी नाम जप केवल आस्था नहीं, एक मानसिक प्रक्रिया भी बन सकता है.
शिव के 7 नाम और उनसे जुड़ी मानसिक अवस्था 1. ॐ नमः शिवाय -संतुलन और स्थिरता यह पंचाक्षरी मंत्र शैव परंपरा में मन-इंद्रिय संतुलन का प्रतीक माना जाता है. लयबद्ध जप श्वास को स्थिर करता है, जिससे मानसिक बेचैनी कम हो सकती है. कैसे करें: सुबह या रात 11 या 21 बार धीमी आवाज में जप करें, हर अक्षर स्पष्ट बोलें.
2. महादेव -निडरता और आंतरिक विस्तार “महादेव” सर्वोच्च चेतना का प्रतीक है. इसका स्मरण व्यक्ति को भीतर से मजबूत होने का भाव देता है. जब मन दबा-सा लगे, यह नाम विस्तार का एहसास देता है. कैसे करें: शांत बैठकर धीरे-धीरे उच्चारण करें, ध्वनि की गूंज महसूस करें.
3. नीलकंठ -भावनात्मक सहनशीलता कथा में शिव ने विष धारण किया, इसलिए यह नाम कठिन भावनाओं को सहने की क्षमता का प्रतीक माना जाता है. गुस्सा या आक्रोश के समय यह जप संयम का अभ्यास बन सकता है. कैसे करें: हर जप के साथ गहरी सांस लें और छोड़ें.
4. शम्भो -आंतरिक आनंद “शम्भो” शिव के सौम्य रूप का नाम है. भावनात्मक थकान या उदासी में इसका जप मन को हल्का करने से जोड़ा जाता है. कैसे करें: 5-10 मिनट धीमी गति से जप, बिना जोर लगाए.
5. रुद्र -परिवर्तन की ऊर्जा वैदिक परंपरा में रुद्र शुद्धि और परिवर्तन का प्रतीक है. जब व्यक्ति नकारात्मक सोच में फंस जाए, यह नाम मानसिक जड़ता तोड़ने का संकेत माना जाता है. कैसे करें: शांत अवस्था में जप करें, तीव्र क्रोध में न करें.
6. आदियोगी -जागरूकता और अनुशासन आदियोगी यानी प्रथम योगी. ध्यान से पहले इसका जप एकाग्रता बढ़ाने का अभ्यास माना जाता है. कैसे करें: ध्यान से पहले 5 मिनट जप, श्वास पर ध्यान.
7. भोलेनाथ -स्वीकृति और आत्मविश्वास भोलेनाथ सरलता और स्वीकार का प्रतीक है. अपराधबोध या आत्म-संदेह की स्थिति में इसका जप आत्मविश्वास बढ़ाने से जोड़ा जाता है. कैसे करें: कोमल स्वर में 21 बार जप.
पुराने कपड़ों में होली खेलना घातक, पीछे पड़ सकती हैं बुरी शक्तियां, मीठा खाकर बाहर निकलना भी खतरनाक, जानें उपाय
4 Mar, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दीपावली के त्यौहार की तरह ही होली पर भी नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं और किसी के भी जीवन को यह बर्बाद कर सकती हैं. हमारी छोटी-छोटी गलतियां हमें इन शक्तियों की जद में ला सकती हैं. ऐसे में होली वाले दिन कुछ गलतियां भूलकर भी नहीं करनी चाहिए क्योंकि नकारात्मक ऊर्जा इनसे पीछे लग जाती है. इस दिन अगर आप तैयार होकर लोगों को आकर्षित करने के लिए परफ्यूम लगाते हैं तो संभल जाएं. इससे कोई और आकर्षित हो न हो, निगेटिव एनर्जी आपकी और खिंची चली आएगी. अगर आप मीठा खाने के बाद बाहर जाते हैं तो भी ठीक नहीं. होली खेलने के दौरान फटे पुराने कपड़ों को पहनने की गलती न करें. यह भी आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है.
होगा क्या-क्या
देहरादून के ज्योतिषाचार्य योगेश कुकरेती बताते हैं कि होली का त्योहार रंगों, खुशियों और भाईचारे का प्रतीक है, लेकिन आध्यात्मिक और तांत्रिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय नकारात्मक ऊर्जा के दृष्टिकोण से भी बहुत संवेदनशील माना जाता है. पूर्णिमा और अमावस्या पर भी नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है, इसलिए महिलाओं और बच्चों को तो इस वक्त बाहर ऐसी वैसी जगह पर जाने से बचना चाहिए. जिस प्रकार से दिवाली की रात को ‘कालरात्रि’ माना जाता है, उसी तरह होली की रात को ‘महारात्रि’ या ‘सिद्ध रात्रि’ कहा जाता है. कई लोगों का मानना है कि इस दौरान ब्रह्मांड में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह की शक्तियां अपने चरम पर होती हैं. ऐसे में आपकी छोटी सी लापरवाही नकारात्मक ऊर्जाओं को आपकी ओर आकर्षित कर सकती है, जिससे जीवन में मानसिक तनाव, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं या बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं.
आचार्य कुकरेती बताते हैं कि होली के दिन कई लोग तैयार होकर तेज सुगंध वाले इत्र या परफ्यूम लगाते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, तेज खुशबू नकारात्मक शक्तियों को बहुत जल्दी आकर्षित करती हैं, खासकर सुनसान रास्तों या चौराहों पर जहां उनका बसेरा होता है. ऐसे रास्तों से गुजरना हो तो बिलकुल भी खुशबू का उपयोग न करें. इसी तरह, मीठा खाकर तुरंत घर से बाहर निकलना भी वर्जित माना गया है क्योंकि ‘सफेद मिठाई’ और ‘मीठी ऊर्जा’ को नकारात्मकता का वाहक माना जाता है. इनसे बचने के लिए घर से बाहर निकलने से पहले थोड़ा पानी पी लें या तुलसी का पत्ता मुंह में रख लें.
कई लोग होली खेलने के लिए बहुत पुराने या फटे हुए कपड़े निकाल लेते हैं, यह सोचकर की नए कपड़े खराब न हों, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, फटे-पुराने और गंदे कपड़े राहु और दरिद्रता का प्रतीक होते हैं, जो व्यक्ति की आभा को कम कर देते हैं. कमजोर आभा वाले व्यक्ति पर बुरी शक्तियों का प्रभाव जल्दी पड़ता है, इसलिए कोशिश करें कि साफ-सुथरे और साबुत कपड़े पहनने चाहिए. शाम के समय यानी सूर्यास्त के बाद बाल खुले रखकर बाहर न घूमें, क्योंकि यह भी नकारात्मकता को न्योता देने जैसा है.
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि होली और होलिका दहन के आसपास कई तरह के तांत्रिक अनुष्ठान और ‘टोटके’ किए जाते हैं, जो ज्यादातर चौराहों पर रखे मिलते हैं. होली वाले दिन अनजान वस्तुओं को छूना या उन पर पैर रखना भारी पड़ सकता है. अगर आपको रास्ते में कहीं सिंदूर, नींबू, मिठाई या जलता हुआ दीपक दिखाई दे तो उससे दूरी बनाकर चलें. ऐसी चीजों के संपर्क में आने से नकारात्मक ऊर्जा व्यक्ति के साथ उसके घर तक प्रवेश कर सकती है, जो लंबे समय तक पीछा नहीं छोड़ती है और उसके जीवन को बर्बाद कर सकती है.
क्या और कर सकते हैं
आप होलिका दहन के समय पीली सरसों को मुट्ठी में लेकर सात बार सिर से पैर तक 7 बार उतारकर आग में डाल दीजिए. मन-मस्तिष्क में बुरे विचारों को आने न दीजिए. नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से बचने के आप होलिका दहन की राख को माथे पर तिलक के रूप में लगा सकते हैं. जेब में काले तिल या राई के कुछ दाने रखना भी नजर दोष से बचा जा सकता है. सबसे जरूरी बात है कि अपनी मानसिक शक्ति को मजबूत रखें और भगवान का स्मरण करते रहें, क्योंकि सकारात्मक विचार और दृढ़ संकल्प किसी भी बाहरी नकारात्मकता को आप पर हावी नहीं होने देते हैं.
5 मार्च को दाऊजी महाराज मंदिर की हुरंगा होली, यहां लट्ठ से नहीं बल्कि कोड़े से मारती हैं महिलाएं
4 Mar, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक होली का उत्सव पूरे देश में शुरू हो चुका है. रंग-गुलाल और आनंद से भरे इस पारंपरिक त्योहार की बात करें तो ब्रज का जिक्र किए बिना यह अधूरा है. ब्रज में होली सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि लगभग 40 दिनों तक चलने वाला महाउत्सव है. यहां इस पर्व को अलग-अलग पारंपरिक तरीके से विभिन्न प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों में मनाया जाता है. उन्हीं में से एक मथुरा के बलदेव में स्थित दाऊजी महाराज मंदिर की होली है, जिसे ‘हुरंगा’ कहा जाता है. इस बार यह हुरंगा 5 मार्च दिन गुरुवार को खेला जाएगा. बताया जाता है कि दाऊजी के हुरंगा को देखने के लिए देश विदेश से लाखों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं.
हुरंगा होली का उत्सव
मथुरा के दाऊजी महाराज मंदिर में होली के अगले दिन यानी इस साल 5 मार्च को ‘हुरंगा’ होली का उत्सव मनाया जाएगा, जहां महिलाएं पुरुष हुरियारों के कपड़े फाड़कर उससे कोड़े बनाती हैं और फिर उसी से उन्हें पीटती हैं. यहां रंग और टेसू (पलाश) के पानी से जमकर पारंपरिक, प्राकृतिक और हर्बल रंग से होली खेली जाती है.
कोड़ेमार होली का उत्सव
मथुरा के दाऊजी महाराज मंदिर का हुरंगा और कोड़ेमार होली पूरे विश्व में मशहूर है, जिसमें सखियां पुरुषों पर कोड़े बरसाती हैं. 5 मार्च को दाऊजी महाराज मंदिर में सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक हुरंगा और कोड़ेमार होली का उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा.
मंदिर श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम को समर्पित
मथुरा के बलदेव में स्थित दाऊजी महाराज एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है, जो भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम (दाऊजी) को समर्पित है. मंदिर में भगवान बलराम की लगभग 7 फीट ऊंची काली प्रतिमा के साथ उनकी पत्नी रेवती जी भी विराजमान हैं. इसे ‘गोपाल लालजी का मंदिर’ और ‘बलभद्र कुंड’ के लिए भी जाना जाता है.
ब्रज के इस मंदिर में होली का अनोखा उत्सव
दाउजी महाराज मंदिर मथुरा से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर बलदेव कस्बे में स्थित है. यह ब्रज के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों में से एक है, जहां होली के समय दूर-दराज से श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं. यह मंदिर भगवान श्री कृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम के भाईचारे और गोपियों के प्रेम का जीवंत प्रतीक है. ब्रज के इस मंदिर में होली का अनोखा उत्सव तब मनाया जाता है, जब पूरी दुनिया में होली खत्म हो जाती है.
काशी की तरह कर्नाटक के इस मंदिर में रंग से नहीं 5 दिन तक राख से खेलते हैं होली, कामदेव और शिवजी से जुड़ा है इतिहास
4 Mar, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देशभर में 4 मार्च दिन बुधवार को होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा. जहां उत्तर भारत में होली को प्रह्लाद और होलिका की पौराणिक कथा के साथ जोड़कर मनाया जाता है, वहीं दक्षिण भारत में होली भगवान शिव और कामदेव से जुड़ी है. दक्षिण भारत में होली अहंकार नष्ट होने का प्रतीक है और इस दिन भगवान शिव व कामदेव के एक साथ दर्शन करना शुभ माना जाता है. होली के दिन कर्नाटक के रामलिंगेश्वर कामन्ना मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ पहुंचती है. इस मंदिर में 5 दिन होली का पर्व मनाया जाता है और हर दिन अलग-अलग विभिन्न अनुष्ठान किए जाते हैं. काशी की तरह यहां भी राख से होली खेलने की परंपरा है. आइए जानते हैं कर्नाटक के इस मंदिर की होली के बारे में…
गर्भगृह में भगवान शिव और कामदेव एक साथ
कर्नाटक का रामलिंगेश्वर कामन्ना मंदिर बाकी मंदिरों से काफी अलग है. यह दक्षिण भारत का पहला मंदिर है, जहां गर्भगृह में भगवान शिव और कामदेव एक साथ विराजमान हैं. मान्यता है कि होली के दिन अगर भगवान शिव और कामदेव के एक साथ दर्शन कर लिए जाएं तो सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और अहंकार का भी नाश होता है. मंदिर के गर्भगृह में कामदेव की प्रतिमा शिवलिंग के साथ स्थापित है और प्रतिमा ध्यान की अवस्था में है.
मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में जानें
पौराणिक कथाओं की मानें तो भगवान शिव को लंबी और कठोर तपस्या से उठाने के लिए देवताओं ने कामदेव का सहारा लिया था. देवी सती के देह त्याग के बाद भगवान शिव सृष्टि का पालन छोड़ कठोर तपस्या में लीन हो गए थे. सृष्टि की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए कामदेव ने कामबाण महादेव पर चलाया था. तपस्या भंग होने के बाद महादेव के तीसरे नेत्र के तेज से कामदेव राख में बदल गए थे. माना जाता है कि कामदेव को अपनी शक्तियों पर बहुत घमंड था, यही वजह रही कि भगवान शिव ने कामदेव का अहंकार तोड़ने के लिए तीसरा नेत्र खोला था.
राख लगाई जाती है माथे पर
इसी पौराणिक कथा की वजह से आज भी कर्नाटक के रामलिंगेश्वर कामन्ना मंदिर और बाकी मंदिरों में होली के दिन राख को माथे पर लगाया जाता है. माना जाता है कि यह राख कामदेव के अहंकार का प्रतीक है, जो याद दिलाती है कि अहंकार का अंत कैसे होता है.
5 दिन तक चलता है आयोजन
रामलिंगेश्वर कामन्ना मंदिर में होली का आयोजन पांच दिन तक चलता है, और अलग-अलग दिन विभिन्न अनुष्ठान होते हैं. इन पांच दिनों में कामदेव और भगवान शिव पर चांदी की वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं, खासकर चांदी का पालना. माना जाता है कि अगर किसी दंपत्ति को संतान प्राप्ति नहीं हो रही है, तो वह होली के समय चांदी का झूला अर्पित करता है, तो मनोकामना जरूर पूरी होती है.
होली: केवल गुलाल नहीं, भीतर के आनंद का उत्सव है, क्रोध और ईर्ष्या के अशुभ रंगों को प्रेम में बदलने का साधन
4 Mar, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होली सिर्फ चेहरे पर गुलाल मलने का नाम नहीं है. असली होली तब है जब आपके भीतर से प्रेम और आनंद की सुगंध आए. होली के दिन हमारा जीवन भी उत्साह और प्रेम के रंगों से खिलना चाहिए. हमारा चेहरा खुशी से चमकना चाहिए और हमारी वाणी में मधुरता होनी चाहिए. जीवन का रंग ऐसा ही होना चाहिए – वह रंग जो परमात्मा में गहरे विश्वास से उपजता है. हमें जीवन के जीवंत, सुगंधित और सुंदर रंगों के साथ होली खेलनी चाहिए, कीचड़ भरे पानी के साथ नहीं. हमें इस त्योहार को क्रोध, लालसा, लोभ, मोह, द्वेष और वासना के ‘अशुभ रंगों’ के साथ नहीं मनाना चाहिए. हर बार जब आप नकारात्मक होते हैं, तो आप क्रोध, ईर्ष्या, लोभ, हताशा और घृणा के नकारात्मक स्पंदन प्रसारित करते हैं. जीवन में चुनौतियां आती हैं और अलग-अलग मानसिकता वाले लोग मिलते हैं, लेकिन जब आप अपनी दृष्टि का विस्तार करते हैं और अपने जीवन को व्यापक परिप्रेक्ष्य से देखते हैं, तो आप इन सभी छोटी समस्याओं को छोड़ देते हैं जो अभी आपको बहुत महत्वपूर्ण लग रही हैं.
मन के भावों का साक्षी बनना ही असली रंग है
प्रत्येक व्यक्ति के भीतर अलग-अलग रंगों के दीये जल रहे हैं. किसी में क्रोध का दीपक जल रहा है, किसी में ईर्ष्या आदि का. यदि आपको लगता है कि कुछ लोग नकारात्मक हैं, तो उन्हें खुद से दूर रखें. दूसरी बात यह है कि यह जान लें कि वे हमेशा ऐसे नहीं रहेंगे. समय के साथ वे बदल जाएंगे. यहाँ तक कि आपका अपना मन भी हर समय एक जैसा नहीं रहता. आपके मन के कई भाव होते हैं. आप खुशी महसूस करते हैं. आप क्रोध और ईर्ष्या महसूस करते हैं. आप करुणा महसूस करते हैं. आप उदारता महसूस करते हैं. लेकिन जब आप यह जान जाते हैं कि आप ये नहीं हैं, तो आप एक साक्षी के रूप में उनका आनंद लेते हैं. आप अपने मन के खेलों के साक्षी बनते हैं. आपके जीवन में सबसे कष्टदायक चीज कोई और नहीं, बल्कि आपका अपना मन है.
स्वयं में सुधार और परमात्मा पर अटूट विश्वास
आपको जो सोचने और करने की आवश्यकता है, वह है स्वयं में सुधार करना. दूसरे कैसे सुधरें- फिलहाल इसे उन्हीं पर छोड़ दें. यदि आप कर सकते हैं, तो उन्हें शिक्षित करें, लेकिन करुणा के साथ. प्रार्थना करें कि उनका जीवन बेहतर हो. कुछ समय प्रतीक्षा करें, फिर और प्रयास करें. यदि वे बदल जाते हैं, तो यह अच्छा है, लेकिन यदि वे नहीं बदलते हैं, तो बस आगे बढ़ें. और तीसरा विकल्प यह सोचना है, ‘ठीक है, उन्हें रहने दो. वे मुझ में और कुशलता ला रहे हैं.’ वे आपको अपने बोलचाल और व्यवहार में कुशल होने पर और अपनी सकारात्मकता पर बने रहने पर विवश करते हैं. अंतिम विकल्प है कि इसे परमात्मा पर छोड़ दें. बस अपने भीतर देखें कि आप में कितनी नकारात्मक बातें हैं और कितनी सकारात्मक?
साझा करने की खुशी और कर्म का सिद्धांत
जो दूसरों को कष्ट देते हैं वे वास्तव में स्वयं पीड़ित होते हैं और किसी न किसी रूप में आहत या घायल होते हैं. ऐसे लोग अपने आसपास के दूसरों के लिए दुख और पीड़ा का कारण बनते हैं. एक सुखी और संतुष्ट व्यक्ति कभी किसी दूसरे को किसी भी तरह से परेशान नहीं करेगा. इसलिए वही प्रार्थना करें – सभी का मन और बुद्धि शुद्ध हो और सभी सही दिशा में चलें. जब आप कुछ करते हैं, तो प्रकृति आपको उससे और अधिक वापस देती है. यदि आप दूसरों को दुःख देते हैं, तो आपको वही वापस मिलता है. यदि आप खुशियाँ देते हैं, तो आपको वही वापस मिलता है, और यदि आप अपने पास जो कुछ भी है उसका थोड़ा सा हिस्सा दूसरों के साथ साझा करते हैं, तो वह आपके पास कई गुना होकर वापस आता है.
आत्मा के रंगों में रंगकर राष्ट्र सेवा की प्रेरणा
इस ग्रह पर सभी प्रकार के लोगों की आवश्यकता है. वे दुनिया को और अधिक रंगीन बनाते हैं. वे आपके भीतर कुछ बटन दबाते हैं और विशेष भावनाओं को जगाते हैं, और देखते हैं कि आप उस पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं. हमारा लक्ष्य क्या होना चाहिए? उनसे कहें, ‘अरे! जागो! हंसो और मुस्कुराओ.’ हमें ऐसा बनना चाहिए कि हम जहाँ भी जाएँ, हमारे भीतर से प्रेम और आनंद की सुगंध फैले. घटनाओं या परिस्थितियों के बावजूद, स्थिर रहें और स्वयं में स्थापित रहें. प्रसन्न और आनंदित रहें. यदि हमारे पास आंतरिक संतोष है, तो हम न केवल अपनी इच्छाओं को पूरा कर पाएंगे, बल्कि दूसरों की इच्छाओं को भी पूरा करने में सक्षम होंगे. होली मौज-मस्ती और खुशियों का त्योहार है. और जीवन का यह रंग हमें समाज और राष्ट्र के लिए कुछ अच्छा काम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए. इसलिए ऐसी होली न खेलें जहाँ आप केवल एक-दूसरे पर रंग लगाते हैं. इसे एक ऐसा त्योहार बनाएं जहाँ आप अपनी आत्मा के रंगों में रंगे हों.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (04 मार्च 2026)
4 Mar, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- प्रत्येक कार्य में बाधा, विलम्ब कष्टप्रद होगा, थकावट व बेचैनी बनेगी।
वृष राशि :- कुटुम्ब की समस्याओं में समय बीतेगा, धन का व्यय, चिन्ता बढ़ जायेगी।
मिथुन राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, प्रेम-प्रसंग सफलता से कार्य अनुकूल अवश्य होंगे।
कर्क राशि :- आर्थिक योजना पूर्ण होगी, भाग्य का सितारा प्रबल होगा, रुके कार्य बनेंगे।
सिंह राशि :- भाग्य की प्रबलता का लाभ लें, रुके कार्य समय पर पूर्ण करने का प्रयास करें।
कन्या राशि :- मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि, नवीन योजना फलप्रद होगी, कार्य पर ध्यान दें।
तुला राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्यगति में सुधार होगा, विरोधी पराजित होंगे।
वृश्चिक राशि :- लेन-देन के कार्य में हानि होगी, विरोधी तत्वों से परेशानी अवश्य बनेगी।
धनु राशि :- दैनिक सफलता के साधन सम्पन्न होंगे, स्वभाव में क्रोध व अशांति होगी।
मकर राशि :- दैनिक सम्पन्नता के साधन जुटायेंगे, आलस्य, प्रमाद से हानि होगी।
कुंभ राशि :- बिगड़े हुये कार्य बनेंगे, योजनायें फलीभूत होंगी, रुके कार्य बनेंगे।
मीन राशि :- स्त्री वर्ग से चिन्तायें कम होंगी, विशेष कार्य स्थगित रखें, समय का ध्यान रखें।
खाटूश्याम जी के दरबार में दिखा अनोखा नजारा, पहली बार पंचमेवों से हुआ श्रृंगार, दूर-दूर से पहुंचे भक्त
3 Mar, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ब्लू सिटी जोधपुर के 14 सेक्टर, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित मंछापूर्ण महादेव श्री श्याम मंदिर में द्वादशी के पावन अवसर पर इस बार कुछ खास देखने को मिला. चार साल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में खाटू श्याम बाबा का 51 किलो पंचमेवों से भव्य और अनोखा श्रृंगार किया गया. मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और खाटू श्याम बाबा की जय के जयकारों से पूरा मंदिर गूंज उठा. आमतौर पर बाबा का श्रृंगार फूलों से किया जाता है, लेकिन इस बार बादाम, काजू और अखरोट जैसे सूखे मेवों से दरबार सजाया गया.
पंचमेवों से बनाई गई कलात्मक आकृतियां और सजावट देखने लायक रही. विशेष बात यह रही कि इस अनोखे श्रृंगार की तैयारी के लिए सेवाभावी कार्यकर्ता करीब दो दिन तक दिन-रात जुटे रहे. बड़ी सावधानी और श्रद्धा के साथ एक-एक मेवे को सजाकर दरबार को भव्य रूप दिया गया. द्वादशी के दिन बाबा के मनोहारी स्वरूप के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे. मंदिर समिति के सदस्यों ने दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा, जिससे सभी भक्तों को सहज और शांतिपूर्ण तरीके से बाबा के दर्शन हो सके.
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
द्वादशी के दिन सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग गई. परिवार सहित पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया और विशेष श्रृंगार की सराहना की. मंदिर समिति और सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने सुव्यवस्थित दर्शन व्यवस्था संभाली, जिससे पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय और शांतिपूर्ण माहौल बना रहा.
हर ग्यारस पर होता है विशेष श्रृंगार
जोधपुर के इस खाटू श्याम मंदिर में केवल इस अवसर पर ही नहीं, बल्कि हर ग्यारस को बाबा का विशेष श्रृंगार किया जाता है. कभी विदेश से मंगाए गए फूलों से तो कभी अलग-अलग किस्म के आकर्षक फूलों से दरबार सजाया जाता है. हालांकि पंचमेवों से 51 किलो का यह श्रृंगार पहली बार किया गया, जिसने भक्तों के बीच अलग ही उत्साह और चर्चा का माहौल बना दिया. मंदिर पहुंचे एक श्रद्धालु कैलाश ने बताया कि हम हर ग्यारस को बाबा के दर्शन करने आते हैं, लेकिन आज का श्रृंगार सच में अद्भुत है. 51 किलो पंचमेवों से सजा दरबार हमने पहली बार देखा है. दो दिन की मेहनत साफ नजर आ रही है. बाबा के दरबार में आकर मन को शांति मिलती है और ऐसा लगता है जैसे सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो.
रमजान के वो 10 दिन जो बदल सकते हैं तकदीर, जानें दूसरा अशरा क्यों है सबसे खास?
3 Mar, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रमजान का पाक महीना इस्लाम में रहमत और बरकत का संदेश लेकर आता है, लेकिन ग्यारहवें रोजे से शुरू होने वाला दूसरा अशरा खास तौर पर मगफिरत यानी गुनाहों की माफी के लिए जाना जाता है. मान्यता है कि इन 10 दिनों में बंदा सच्चे दिल से तौबा करे तो अल्लाह उसकी दुआ कबूल फरमाता है. यही वजह है कि मस्जिदों में इबादत का जोश बढ़ जाता है, लोग ज्यादा से ज्यादा नमाज, तिलावत और दुआ में वक्त बिताते हैं.
रमजान का पवित्र महीना इस्लाम में आत्मशुद्धि, सब्र और इबादत का महीना माना जाता है. पहले दस दिनों को रहमत का अशरा कहा जाता है. वहीं ग्यारहवें रोजे से शुरू होने वाला दूसरा अशरा मगफिरत यानी माफी का अशरा कहलाता है. यह दौर 11वें से 20वें रोजे तक चलता है और इसे गुनाहों से तौबा कर अल्लाह से माफी पाने का सबसे खास समय माना जाता है.
सच्चे दिल से मांगी माफी होती है कबूल
इस अशरे में अल्लाह अपने बंदों के लिए मगफिरत के दरवाजे खोल देता है. जो भी शख्स सच्चे दिल से अपने किए गए गुनाहों पर पछतावा करता है और तौबा करता है, उसकी दुआ कबूल होने की उम्मीद ज्यादा मानी जाती है. यही वजह है कि इन दिनों मस्जिदों में नमाजियों की संख्या बढ़ जाती है और लोग ज्यादा समय इबादत में बिताते हैं.
माफी मांगने के लिए पढ़ी जाती है यह दुआ
बाड़मेर शहर के आयशा मस्जिद इंद्रा कॉलेनी के हाजी मुनव्वर कादरी बताते हैं कि तौबा केवल जुबान से माफी मांगना नहीं है बल्कि दिल से पछताना और भविष्य में वही गलती दोबारा न करने का पक्का इरादा करना है. इस अशरे में पढ़ी जाने वाली मशहूर दुआ “अस्तग़फिरुल्लाह रब्बी मिन कुल्लि ज़ंबिं व अतूबु इलैह” इंसान को अपने गुनाहों की माफी मांगने और अल्लाह की ओर लौटने का संदेश देती है.
जकात और सदका देकर करते हैं जरूरतमंद की मदद
दूसरे अशरे में लोग पांच वक्त की नमाज के साथ-साथ नफ्ल नमाज, कुरआन की तिलावत, जिक्र और दुआ पर खास ध्यान देते हैं. जकात और सदका देकर जरूरतमंदों की मदद करना भी इस दौर में ज्यादा महत्व रखता है. समाज में भाईचारे, माफी और मेल-मिलाप की भावना को भी बढ़ावा मिलता है. बीसवें रोजे के बाद रमजान का तीसरा अशरा शुरू होता है, जिसे जहन्नम की आग से निजात का अशरा कहा जाता है. इन अंतिम दस दिनों में इबादत और भी बढ़ जाती है और शब-ए-कद्र की तलाश की जाती है.
3 मार्च को आसमान में ग्रहण का साया! सिंह राशि में चंद्र ग्रहण, 5 राशियों पर मंडरा रहा खतरा?
3 Mar, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मार्च की हल्की गर्माहट, होली की आहट और इसी बीच आसमान में एक खास खगोलीय घटना साल का पहला चंद्र ग्रहण. 3 मार्च 2026, मंगलवार को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. कई ज्योतिष आचार्यों का मानना है कि इसका प्रभाव सामान्य ग्रहण से अधिक गहरा हो सकता है, खासकर इसलिए क्योंकि यह भारत में दृश्य होगा और सिंह राशि में घटित होगा. ऐसे में स्वाभाविक है कि लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं क्या यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा? सूतक काल कब से कब तक रहेगा? और किन राशियों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?
चंद्र ग्रहण का समय और सूतक काल
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य राज मिश्रा के अनुसार, 3 मार्च 2026 को दोपहर 3:20 बजे से चंद्र ग्रहण प्रारंभ होगा और शाम 6:47 बजे इसका समापन होगा. सूतक काल ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले यानी सुबह 6:20 बजे से शुरू माना जाएगा. चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य रहेगा. यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है. ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है. ऐसे में चंद्र ग्रहण को भावनाओं, मानसिक स्थिति और पारिवारिक संबंधों से जोड़कर देखा जाता है.
सूतक काल में क्या करें, क्या न करें
धार्मिक मान्यताएं और सावधानियां
शास्त्रों के अनुसार, सूतक काल में शुभ कार्यों से परहेज करना चाहिए. मंदिर के कपाट बंद रखना, मूर्तियों को स्पर्श न करना और यात्रा टालना उचित माना गया है. हालांकि, मानसिक जप और ध्यान को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है. कई परिवारों में आज भी ग्रहण के दौरान घर के बने भोजन में तुलसी के पत्ते डालने की परंपरा निभाई जाती है.
एक बुजुर्ग महिला बताती हैं कि वे हर ग्रहण पर मौन रखकर “ॐ नमः शिवाय” का जप करती हैं. उनका मानना है कि इससे मन स्थिर रहता है. दरअसल, ज्योतिषीय उपायों का मूल उद्देश्य भी यही है मन को संतुलित रखना.
ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर घर में गंगाजल का छिड़काव करने की परंपरा भी प्रचलित है. लेकिन यदि घर में कोई बीमार या वृद्ध है तो विवेक से काम लेना चाहिए.
इन 5 राशियों को रहना होगा विशेष सावधान
1. सिंह राशि
चूंकि ग्रहण इसी राशि में लग रहा है, इसलिए सिंह राशि वालों पर इसका प्रभाव सीधा माना जा रहा है. प्रेम संबंधों में तनाव या भावनात्मक अस्थिरता संभव है. सलाह है कि इस दौरान वाद-विवाद से बचें.
2. मेष राशि
संतान और प्रेम प्रसंग के मामलों में चिंता बढ़ सकती है. किसी छोटी बात को बड़ा न बनने दें.
3. वृषभ राशि
वाहन चलाते समय सावधानी जरूरी है. संपत्ति से जुड़े कागजात दोबारा जांच लें.
4. कर्क राशि
घर-परिवार में मतभेद की स्थिति बन सकती है. संवाद ही समाधान है.
5. कन्या राशि
निवेश से जुड़े फैसले फिलहाल टालना बेहतर रहेगा. जल्दबाजी नुकसान दे सकती है.
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण डरने का नहीं बल्कि सजग रहने का संकेत देता है. यह आत्ममंथन का समय भी हो सकता है थोड़ा ठहरकर सोचने का, अपनी भावनाओं को समझने का.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (03 मार्च 2026)
3 Mar, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- विशेष कार्य स्थिगित रखें, लेन-देन के मामले में हानि तथा चिन्ता होगी।
वृष राशि :- विवादग्रस्त होने से बचें, क्लेश होगा, हानि होने की संभावना ध्यान दें।
मिथुन राशि :- व्यग्रता असमंजस में रखे, विषय व्यवस्था से बचने की चेष्ठा अवश्य करेंगे।
कर्क राशि :- स्त्री भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति तथा सुख-समृद्धि के साधन अवश्य बनेंगे।
सिंह राशि :- समय और धन नष्ट न हो, क्लशे व अशांति, विघटनकारी तत्व परेशान करेंगे।
कन्या राशि :- नवीन योजना फलप्रद होगी, भावनायें संवेदनशील बनी रहेंगी ध्यान दें।
तुला राशि :- धन के व्यर्थ व्यय से बचें, कार्य कुशलता से संतोष होगा, मनोबल बढ़ेगा।
वृश्चिक राशि :- भाग्य का सितारा साथ देगा, समय अनुकूल नहीं कार्य स्थिगित रखें।
धनु राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी।
मकर राशि :- मान-प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, कार्य कुशलता से संतोष होगा।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे तथा भाग्य का सितारा प्रबल अवश्य होगा।
मीन राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा तथा कार्य कुशलता से संतोष बना रहेगा।
क्या तंत्र क्रिया सच में शरीर को करती है कमजोर? जानिए सबसे पहले कौन सा अंग होता है खराब, कैसे होता है ब्लैक मैजिक
2 Mar, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कभी आपने महसूस किया है कि सब कुछ ठीक होते हुए भी जिंदगी उलझती चली जा रही है? डॉक्टर की रिपोर्ट सामान्य, घर में पूजा-पाठ भी जारी, फिर भी मन अशांत, शरीर ढीला और रिश्ते बिखरते हुए. ऐसे सवाल अक्सर ज्योतिष और आध्यात्म की दुनिया में उठते हैं. कई साधक मानते हैं कि जब तांत्रिक क्रिया या नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है, तो उसका असर सीधे शरीर और चक्रों पर दिखाई देता है. यह लेख उसी ज्योतिषीय दृष्टि से समझने की कोशिश है डराने के लिए नहीं, बल्कि जागरूक करने के लिए.
तंत्र क्रिया और पंचतत्व का संबंध
ज्योतिष शास्त्र कहता है कि हमारा शरीर पंचतत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है. जब कोई तांत्रिक क्रिया की बात होती है, तो मान्यता है कि ये क्रियाएं इन्हीं तत्वों को असंतुलित करती हैं. निम्न स्तर की क्रियाओं में व्यक्ति की वस्तुएं बाल, कपड़े या भोजन ऊर्जा माध्यम बनते हैं.
उच्च स्तर पर, कुछ साधक मानते हैं कि बिना किसी वस्तु के भी केवल नाम, दिशा या ऊर्जा पहचान के आधार पर प्रभाव डाला जा सकता है. लोककथाओं में मां काली या शिव जैसी दिव्य शक्तियों का उदाहरण दिया जाता है, जो केवल न्याय हेतु हस्तक्षेप करती हैं. ज्योतिषी इसे कर्म और ग्रह दशाओं से जोड़कर समझाते हैं कि बिना कर्म आधार के कोई ऊर्जा स्थायी प्रभाव नहीं डाल सकती.
चक्रों पर पहला असर कहां पड़ता है?
1. मणिपुर और नाभि चक्र
यदि व्यक्ति अत्यधिक सोच-विचार करने वाला है, जिसका ध्यान आज्ञा चक्र (थर्ड आई) पर केंद्रित रहता है, तो मान्यता है कि उस पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने पर सबसे पहले मणिपुर यानी नाभि क्षेत्र प्रभावित होता है. पेट संबंधी दिक्कतें, बिना कारण घबराहट, बार-बार कमजोरी ये संकेत माने जाते हैं.
कई लोग बताते हैं कि रिपोर्ट सामान्य आती है, पर बेचैनी बनी रहती है. ज्योतिष इसे चक्र असंतुलन और ग्रह पीड़ा से जोड़ता है, खासकर राहु या केतु की दशा में.
2. हृदय चक्र और भावनात्मक टूटन
यदि कोई व्यक्ति भावनात्मक रूप से संवेदनशील है और हृदय चक्र प्रधान है, तो असर दिल और मन पर दिख सकता है. अचानक डिप्रेशन, रिश्तों में दूरी, दिल की धड़कन अनियमित होना ये लक्षण बताए जाते हैं. हालांकि आधुनिक चिकित्सा इसे तनाव और जीवनशैली से जोड़ती है, लेकिन पारंपरिक मान्यता में इसे ऊर्जा अवरोध कहा जाता है.
3. मूलाधार और काम केंद्र
अघोर प्रयोग की चर्चा में कहा जाता है कि व्यक्ति के भीतर वासना तो बढ़ती है, पर शरीर साथ नहीं देता. दांपत्य जीवन प्रभावित होता है, विवाह में बाधा आती है. ज्योतिषी इसे शुक्र ग्रह की पीड़ा या कुंडली में मंगल दोष से जोड़कर देखते हैं.
परिवार पर असर: श्राप या ग्रह दशा?
कभी-कभी पूरा परिवार आर्थिक, मानसिक या शारीरिक संकट में फंस जाता है. घर का मुखिया नशे या गलत आदतों में पड़ जाता है, बच्चे दिशा भटक जाते हैं, धन आता है पर टिकता नहीं. इसे कई लोग “श्रापित कुल” मान लेते हैं.
पर ज्योतिष का एक व्यावहारिक पक्ष भी है यदि कुंडली में शनि, राहु या केतु की प्रतिकूल दशा चल रही हो, तो ऐसा दौर आ सकता है. फर्क सिर्फ इतना है कि तांत्रिक व्याख्या इसे बाहरी क्रिया मानती है, जबकि ज्योतिष इसे कर्मफल और ग्रह गोचर से जोड़ता है.
क्या हर बीमारी तंत्र का परिणाम है?
यहां सावधानी जरूरी है. अचानक गंभीर बीमारी जैसे हृदय रोग, कैंसर या लीवर समस्या को केवल तंत्र का परिणाम मान लेना खतरनाक हो सकता है. कई बार हम मानसिक तनाव, गलत खानपान या अनदेखी को नजरअंदाज कर देते हैं और दोष किसी अदृश्य शक्ति को दे देते हैं. एक अनुभवी ज्योतिषी हमेशा पहले चिकित्सा जांच की सलाह देता है, फिर ग्रह स्थिति देखता है. क्योंकि ऊर्जा का सिद्धांत कर्म और विज्ञान से अलग नहीं, बल्कि पूरक माना जाता है.
बचाव का ज्योतिषीय मार्ग
डर समाधान नहीं है. अगर आपको लगता है कि जीवन में लगातार बाधाएं आ रही हैं, तो कुछ व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं:
-नियमित ध्यान और प्राणायाम से चक्र संतुलन.
-गुरु या अनुभवी ज्योतिषी से कुंडली विश्लेषण.
-राहु-केतु शांति या शनि उपासना जैसे उपाय, यदि दशा अनुकूल न हो.
-सबसे महत्वपूर्ण सकारात्मक संगति.
लोकमान्यता कहती है कि नकारात्मक ऊर्जा अक्सर करीबी लोगों के माध्यम से आती है ईर्ष्या, द्वेष या गलत सलाह के रूप में. इसलिए सतर्क रहना जरूरी है.
डर नहीं, सजगता जरूरी
तंत्र और ज्योतिष की चर्चा हमेशा रहस्य और डर से घिरी रहती है. लेकिन हर समस्या को अदृश्य शक्ति से जोड़ना भी उचित नहीं. जीवन में उतार-चढ़ाव कर्म, ग्रह दशा, मानसिक स्थिति और परिवेश का मिश्रण हैं. अगर आप साधक हैं, तो अपने चक्रों की स्थिति समझें. अगर आप सामान्य गृहस्थ हैं, तो पहले स्वास्थ्य और व्यवहार सुधारें. ज्योतिष मार्गदर्शन देता है, भाग्य नहीं लिखता. और याद रखिए सबसे बड़ी शक्ति आपका संतुलित मन है.
भगवान का सबसे प्रिय आहार अहंकार
2 Mar, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहंकार शब्द बना है अहं से, जिसका अर्थ है मैं। जब व्यक्ति में यह भावना आ जाती है कि जो हूं सो मैं, मुझसे बड़ा कोई दूसरा नहीं है तभी व्यक्ति का पतन शुरू हो जाता है। द्वापर युग में सहस्रबाहु नाम का राजा हुआ। इसे बल का इतना अभिमान हो गया कि शिव से ही युद्घ करने पहुंच गया। भगवान शिव ने सहस्रबाहु से कह दिया कि तुम्हारा पतन नजदीक आ गया है। परिणाम यह हुआ कि भगवान श्री कृष्ण से एक युद्घ में सहस्रबाहु को पराजित होना पड़ा।
रावण विद्वान होने के साथ ही महापराप्रमी था। उसे अपने बल और मायावी विद्या का अहंकार हो गया और उसने सीता का हरण कर लिया। इसका फल रावण को यह मिला कि रावण का वंश सहित सर्वनाश हो गया। अंत काल में उसका सिर भगवान राम के चरणों में पड़ा था। भगवान कहते हैं मेरा सबसे प्रिय आहार अहंकार है अर्थात अहंकारियों का सिर नीचा करना भगवान को सबसे अधिक पसंद है। अहंकारी का सिर किस प्रकार भगवान नीच करते हैं इस संदर्भ में एक कथा है कि, नदी किनारे एक सुन्दर सा फूल खिला। इसने नदी के एक पत्थर को देखकर उसकी हंसी उड़ायी कि, तुम किस प्रकार से नदी में पड़े रहते हो। नदी की धारा तुम्हें दिन रात ठोकर मारती रहती है। मुझे देखो मैं कितना सुन्दर हूं। हवाओं में झूमता रहता हूं। पत्थर फूल की बात को चुपचाप सुनता रहा।
पानी में घिसकर पत्थर ने शालिग्राम का रूप ले लिया था। किसी व्यक्ति ने उसे उठाकर अपने पूजा घर में स्थापित किया और उसकी पूजा की। पूजा के समय उस व्यक्ति ने फूल को शालिग्राम के चरणों में रख दिया। फूल ने जब खुद को पत्थर के चरणों में पाया तो उसे एहसास हो गया कि उसे अपने अहंकार की सजा मिली है। पत्थर ने अब भी कुछ नहीं कहा वह फूल की मन?स्थिति को देखकर मुस्कुराता रहा।
लंका जाते-जाते देवघर में क्यों रुक गए शिव? बैद्यनाथ धाम की स्थापना की रहस्यमयी गाथा
2 Mar, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की कहानी केवल धार्मिक कथा नहीं है, बल्कि यह अटूट भक्ति, अहंकार और दैवीय न्याय का एक दिलचस्प संगम है। झारखंड के देवघर में स्थित यह ज्योतिर्लिंग कामना लिंग के रूप में जाना जाता है। कहानी की शुरुआत लंकापति रावण से होती है। रावण भगवान शिव का परम भक्त था, लेकिन उसके भीतर अपनी शक्ति को लेकर अहंकार आ गया था। वह चाहता था कि महादेव लंका में स्थायी रूप से निवास करें ताकि उसकी लंका अजेय बन जाए।
शिव पुराण की कथाओं में उल्लेख मिलता है कि रावण ने हिमालय पर घोर तपस्या की और प्रसन्न करने के लिए एक-एक करके अपने नौ सिर काट दिए। जब वह अपना दसवां सिर काटने वाला था, तब महादेव प्रकट हुए और उस वरदान मांगने को कहा। इस पर रावण ने महादेव से लंका चलने का आग्रह किया। शिवजी तैयार हो गए, लेकिन उन्होंने एक अटूट शर्त रख दी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शिवजी ने रावण को एक लिंग स्वरूप दिया और कहा, तुम इस लेकर जा सकते हो, लेकिन याद रखना, लंका पहुंचने से पहले अगर तुमने इस लिंग स्वरूप कहीं भी जमीन पर रखा, तब वहां वहीं स्थापित हो जाएगा और फिर इस कोई नहीं हिला पाएगा।
जब रावण शिवलिंग लेकर चला, तब स्वर्ग में हलचल मच गई। देवताओं को डर था कि अगर शिवजी लंका चले गए, तब रावण को हराना असंभव होगा। तब भगवान विष्णु ने एक लीला रची। उन्होंने वरुण देव (जल के देवता) की मदद से रावण के पेट में इतनी लघुशंका भर दी कि वह बेचैन हो उठा। ठीक उसी समय, विष्णु जी एक साधारण चरवाहे (बैजू) का रूप धारण कर वहां प्रकट हो गए। रावण ने उस चरवाहे को बुलाया और कुछ देर के लिए शिवलिंग पकड़ने को कहा। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार जैसे ही रावण शिवलिंग सौंपकर गया, चरवाहे ने (जो स्वयं भगवान विष्णु थे) शिवलिंग को जमीन पर रख दिया।
जब रावण वापस आया, तब देखा कि शिवलिंग जमीन से चिपक चुका था। उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी, लेकिन महादेव अपनी शर्त के अनुसार वहीं स्थिर हो गए। रावण को अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हार मानकर रावण ने अंगूठे से शिवलिंग को नीचे की ओर दबा दिया और वहां से चला गया। जिस चरवाहे बैजू के नाम पर यह स्थान प्रसिद्ध हुआ, उसी के कारण इसे बैद्यनाथ कहा जाने लगा।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (02 मार्च 2026)
2 Mar, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- मान-प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, कार्य व्यवसाय गति उत्तम, स्त्री वर्ग से क्लेश होगा।
वृष राशि :- धन प्राप्ति के योग बनेंगे, नवीन मैत्री-मंत्रणा प्राप्त होगी ध्यान अवश्य दें।
मिथुन राशि :- इष्ट मित्र सहायक रहेंगे, व्यवसाय क्षमता में वृद्धि होगी तथा कार्य बनेंगे।
कर्क राशि :- सामाजिक कार्य में प्रतिष्ठा, कार्य कुशलता से संतोष तथा रुके कार्य बनेंगे।
सिंह राशि :- परिश्रम से समय पर सोचे कार्य पूर्ण होंगे, व्यवसाय गति उत्तम होगी।
कन्या राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, कार्य कुशलता से संतोष होगा।
तुला राशि :- दैनिक व्यवसाय गति उत्तम, कार्यगति उत्तम बनेगी, चिन्तायें कम होंगी।
वृश्चिक राशि :- कार्यवृत्ति में सुधार होगा, असमंजस तथा सफलता के कार्य अवश्य बनेंगे।
धनु राशि :- स्थिति अनियंत्रित रहेगी, सफलता के लिये परिश्रम करें, कार्य नियंत्रण से लाभ होगा।
मकर राशि :- मानसिक खिन्नता तथा स्वाभाव में उद्विघ्नता अवश्य होगी, कार्य करें।
कुंभ राशि :- कार्य योजना फलीभूत होगी, विघटनकारी तत्व परेशान करेंगे, कार्य समय पर करें।
मीन राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्य कुशलता से संतोष अवश्य होगा।
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