व्यापार
लाल निशान में बंद हुआ बाजार, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट
5 May, 2026 09:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय शेयर और मुद्रा बाजार में आज भारी उथल-पुथल का माहौल देखा जा रहा है। बिकवाली के दबाव के कारण जहां शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट आई है, वहीं भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
बाजार में हावी रही मुनाफावसूली: सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के, रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया
मुंबई: सप्ताह के कारोबारी सत्र में आज घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर की गई मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों के कारण बाजार में गिरावट का रुख बना हुआ है।
शेयर बाजार का लेखा-जोखा
शुरुआती सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में कारोबार करते दिखे:
सेंसेक्स: बीएसई का सेंसेक्स 361.62 अंक टूटकर 76,907.78 के स्तर पर आ गया।
निफ्टी: एनएसई का निफ्टी 134.90 अंकों की गिरावट के साथ 23,980.60 पर पहुंच गया।
सेक्टोरल अपडेट: बाजार में सबसे ज्यादा मार बैंकिंग, रियल एस्टेट, मेटल और वित्तीय क्षेत्रों पर पड़ी है। हालांकि, आईटी और मीडिया सेक्टर में कुछ खरीदारी देखी गई, जिससे इन्हें थोड़ी राहत मिली। वहीं, फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर में सुस्ती छाई रही।
रुपये में ऐतिहासिक गिरावट
शेयर बाजार के साथ-साथ मुद्रा बाजार से भी नकारात्मक खबरें आ रही हैं। डॉलर की मजबूती और विदेशी फंडों की निकासी के बीच भारतीय रुपया 17 पैसे कमजोर होकर 95.40 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर जा गिरा है। रुपये की इस कमजोरी ने आयातकों और अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ा दी है।
वैश्विक बाजारों का दबाव
भारतीय बाजारों पर अंतरराष्ट्रीय संकेतों का भी गहरा असर पड़ रहा है। एशियाई बाजारों में हांगकांग का 'हैंग सेंग' 1.4% और ऑस्ट्रेलिया का 'एसएंडपी/एएसएक्स 200' 0.8% तक नीचे गिर गया है। यूरोपीय वायदा बाजारों में भी कमजोरी के संकेत मिल रहे हैं।
गिरावट के प्रमुख कारण: विशेषज्ञों का विश्लेषण
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रणनीतिकारों के अनुसार, बाजार पर इस समय कई प्रतिकूल कारक एक साथ दबाव बना रहे हैं:
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जो भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए बड़ा झटका है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: अमेरिका में 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.44% हो गई है। इसके चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से हाथ खींच रहे हैं।
चुनावी उत्साह का अंत: विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया चुनावी नतीजों से मिला मनोवैज्ञानिक लाभ अब समाप्त हो चुका है और बाजार अब वास्तविक आर्थिक आंकड़ों पर ध्यान दे रहा है।
पांच राज्यों के रिजल्ट से पहले शेयर बाजार में रौनक, निफ्टी 24240 पार
4 May, 2026 12:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त रौनक देखने को मिली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने घरेलू बाजार के लिए 'बूस्टर डोज़' का काम किया, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही हरे निशान के साथ खुले।
बाजार का ताजा हाल: सेंसेक्स और निफ्टी में उछाल
सोमवार की सुबह निवेशकों के लिए खुशियां लेकर आई। शुरुआती कारोबार में ही बाजार ने लंबी छलांग लगाई:
सेंसेक्स: करीब 800 अंकों की भारी तेजी के साथ 77,716.85 के स्तर पर पहुंच गया।
निफ्टी: 245 अंकों से ज्यादा की बढ़त लेकर 24,243.35 के पार निकल गया।
रुपया: हालांकि, शेयर बाजार की तेजी के उलट डॉलर के मुकाबले रुपया 9 पैसे कमजोर होकर 94.93 पर ट्रेड करता दिखा।
चुनावी नतीजों और स्थिरता पर टिकी नजरें
बाजार की इस तेजी के पीछे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। निवेशकों को उम्मीद है कि नतीजों के बाद आने वाली राजनीतिक मजबूती आर्थिक सुधारों को गति देगी।
विशेषज्ञों का विश्लेषण:
विशेषज्ञों का मानना है कि असम और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों में राजनीतिक स्थिरता से न केवल सुरक्षा चुनौतियां कम होंगी, बल्कि औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
आंतरिक स्थिरता: पड़ोसी देशों से जुड़ी चुनौतियों के बीच देश के भीतर एक मजबूत राजनीतिक ढांचा निवेशकों के भरोसे को बढ़ाता है।
निवेशकों का उत्साह: एग्जिट पोल के सकारात्मक रुझानों ने भी बाजार की धारणा को मजबूत किया है। विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि यह तेजी जारी रही, तो निफ्टी जल्द ही 25,000 के ऐतिहासिक स्तर को छू सकता है।
प. एशिया तनाव बेअसर, भारत का मैन्युफैक्चरिंग PMI अप्रैल में 54.7
4 May, 2026 12:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत के विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र के लिए अप्रैल का महीना उत्साहजनक रहा। सोमवार को जारी एचएसबीसी (HSBC) फ्लैश इंडिया पीएमआई के आंकड़ों के मुताबिक, नए ऑर्डर और रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी की वजह से मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई मार्च के 53.9 से बढ़कर अप्रैल में 54.7 पर पहुंच गया है।
निर्यात और नए व्यापार में मजबूती
आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारतीय कारखानों में गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। नए बिजनेस और ऑर्डर्स में लगातार सुधार हो रहा है। विशेष रूप से निर्यात (Export) के मोर्चे पर अच्छी खबर है; पिछले साल सितंबर के बाद से निर्यात की वृद्धि दर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर दर्ज की गई है।
महंगाई और वैश्विक तनाव का साया
सकारात्मक आंकड़ों के बीच पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी संघर्ष ने चिंताएं भी बढ़ाई हैं। युद्ध की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका असर उत्पादन लागत पर दिख रहा है।
लागत में वृद्धि: कच्चे माल की कीमतों में पिछले 44 महीनों की सबसे तेज बढ़ोतरी देखी गई है।
बिक्री मूल्य: उत्पादन महंगा होने के कारण कंपनियों ने उत्पादों की कीमतें भी पिछले छह महीनों की तुलना में सबसे तेजी से बढ़ाई हैं।
अर्थशास्त्री की राय
एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट का असर अब महंगाई के रूप में साफ नजर आने लगा है। अगस्त 2022 के बाद से उत्पादन की लागत अब अपने उच्चतम स्तर पर है।
क्या है विनिर्माण पीएमआई (Manufacturing PMI)?
पीएमआई एक ऐसा सूचकांक है जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की सेहत बताता है। यह मुख्य रूप से पांच कारकों पर आधारित होता है:
नए ऑर्डर
उत्पादन (Output)
रोजगार की स्थिति
आपूर्तिकर्ताओं द्वारा सामान पहुंचाने का समय
खरीद स्टॉक
भविष्य को लेकर भारतीय कंपनियों का नजरिया
सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों का मानना है कि बेहतर विज्ञापन और मांग में स्थिरता की वजह से बिक्री और उत्पादन को मजबूती मिल रही है। हालांकि, कुछ चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं:
बाजार में प्रतिस्पर्धा: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ा मुकाबला।
वैश्विक युद्ध: पश्चिम एशिया के तनाव के कारण अनिश्चितता।
धीमी मंजूरी: कुछ ग्राहकों द्वारा कोटेशन को अंतिम रूप देने में देरी।
इन सबके बावजूद, भारतीय निर्माता भविष्य के विकास को लेकर काफी आशावादी हैं। हालांकि सकारात्मकता का स्तर मार्च के मुकाबले थोड़ा कम हुआ है, लेकिन यह नवंबर 2024 के बाद का दूसरा सबसे मजबूत स्तर है।
भारत-जमैका संबंध मजबूत, जयशंकर ने पीएम होलनेस से की मुलाकात
4 May, 2026 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत की विदेश नीति को कैरेबियाई देशों के साथ और अधिक प्रगाढ़ बनाने के उद्देश्य से विदेश मंत्री एस जयशंकर वर्तमान में तीन देशों की आधिकारिक यात्रा पर हैं। 2 से 10 मई 2026 तक चलने वाले इस विदेश दौरे के दौरान वे जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद व टोबैगो के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देंगे। इस यात्रा की शुरुआत जमैका से हुई, जहाँ कूटनीति के साथ-साथ खेलों के प्रति साझा प्रेम की झलक भी देखने को मिली।
क्रिकेट और कूटनीति का मेल
जमैका की राजधानी किंग्स्टन में विदेश मंत्री जयशंकर ने प्रधानमंत्री एंड्रयू होलनेस से मुलाकात की। इस दौरान भारत की ओर से जमैका के ऐतिहासिक क्रिकेट मैदान सबीना पार्क को एक आधुनिक 'इलेक्ट्रॉनिक स्कोरबोर्ड' उपहार स्वरूप भेंट किया गया।
मैत्री का प्रतीक: सोशल मीडिया पर साझा किए संदेश में जयशंकर ने कहा कि भारत और जमैका के रिश्तों की नींव 'रनों, सम्मान और गहरी दोस्ती' पर टिकी है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह स्कोरबोर्ड दोनों देशों की अटूट मित्रता और यादगार क्रिकेट पारियों का गवाह बनेगा।
भारतीय समुदाय के साथ संवाद
जमैका में प्रवास कर रहे भारतीय मूल के लोगों से बातचीत करते हुए विदेश मंत्री ने उनके योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच संबंधों ने एक नई रफ्तार पकड़ी है।
नया भारत: जयशंकर ने भारतीय समुदाय को भारत में हो रहे बड़े बदलावों से अवगत कराया। उन्होंने विशेष रूप से तकनीक आधारित शासन (Tech-based Governance), मजबूत बुनियादी ढांचे और उद्यमिता के क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख किया।
ऐतिहासिक विरासत को नमन
विदेश मंत्री ने ओल्ड हार्बर का दौरा किया, जो भारतीय प्रवासियों के इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है।
180 साल पुराना इतिहास: करीब 180 साल पहले भारतीय इसी तट पर पहुँचे थे। यहाँ जयशंकर ने भारतीय मूल के लोगों की सांस्कृतिक जड़ों और उनकी परंपराओं के प्रति निष्ठा की प्रशंसा की।
उन्होंने जमैका के पर्यटन मंत्री एडमंड बार्टलेट और संस्कृति मंत्री ओलिविया ग्रेंज का शानदार आतिथ्य के लिए आभार भी व्यक्त किया।
कैरेबियाई देशों के साथ रणनीतिक जुड़ाव
इस दौरे का उद्देश्य केवल व्यापारिक संबंध नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करना है।
साझा विरासत: जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद व टोबैगो जैसे देशों में गिरमिटिया समुदाय की बड़ी आबादी रहती है, जो भारत के साथ एक गहरा भावनात्मक और ऐतिहासिक जुड़ाव महसूस करती है।
भारत इस क्षेत्र में अपने विकास मॉडल और साझेदारी के नए अवसरों को साझा कर वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका को और विस्तार दे रहा है।
गोल्ड इन्वेस्टमेंट पर बड़ा सवाल: क्या अब भी है फायदे का सौदा?
4 May, 2026 11:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कानपुर। कानपुर के किदवई नगर के रहने वाले मनोहर पाल इन दिनों अपनी जमा-पूंजी को लेकर थोड़े चिंतित हैं। जनवरी की शुरुआत में जब सोने की कीमतें अपने चरम पर थीं, तब उन्होंने एक बड़ा निवेश किया था। उन्हें उम्मीद थी कि यह एक सुरक्षित कदम होगा, लेकिन बाजार के हालिया रुख ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
जो सोना 29 जनवरी 2026 को एमसीएक्स पर 1,80,779 रुपये प्रति दस ग्राम के ऐतिहासिक शिखर पर था, वह 28 अप्रैल 2026 तक करीब 18% गिरकर 1,49,502 रुपये पर आ गया है। अब मनोहर जैसे कई निवेशक इस कशमकश में हैं कि क्या वे इस निवेश से बाहर निकल जाएं या और गिरावट का इंतजार करें।
सोने में निवेश: डरें नहीं, भविष्य अभी भी सुनहरा है
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में आई यह गिरावट एक अस्थायी सुधार (Correction) है। लॉन्ग-टर्म में सोने की चमक बरकरार रहने के कई कारण हैं:
वैश्विक केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: दुनिया भर के बैंक अपने भंडार में लगातार सोना बढ़ा रहे हैं।
भू-राजनीतिक अस्थिरता: अमेरिका-ईरान जैसे वैश्विक तनाव और अनिश्चितता के दौर में सोना सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता है।
डॉलर का दबाव: दुनिया भर में डॉलर पर निर्भरता कम करने (De-dollarization) की कोशिशें सोने को मजबूती दे रही हैं।
महंगाई से बचाव: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई को जन्म देती हैं, और सोना इस महंगाई के खिलाफ एक मजबूत ढाल का काम करता है।
सफल निवेश के लिए अपनाएं ये रणनीतियां
एकमुश्त के बजाय SIP: उतार-चढ़ाव वाले बाजार में सारा पैसा एक साथ लगाने के बजाय Gold ETF या डिजिटल गोल्ड में मासिक निवेश (SIP) का रास्ता चुनें।
पोर्टफोलियो का संतुलन: अपने कुल निवेश का केवल 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा ही सोने में रखें। यह आपके शेयर बाजार के पोर्टफोलियो में होने वाले नुकसान को संतुलित करने में मदद करेगा।
लंबी अवधि का नजरिया: सोने को कम समय में मुनाफा कमाने का जरिया न समझें। बेहतर रिटर्न (Double Digit CAGR) के लिए कम से कम 5 से 10 साल का लक्ष्य रखें।
विशेषज्ञों की राय: क्या है अगला लक्ष्य?
"मनोहर जैसे निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। रुपये की कमजोरी भारतीय बाजार में कीमतों को सहारा देगी। 2027 के अंत तक सोना 1,95,000 रुपये के स्तर को पार कर सकता है।" — अंकित कपूर, हेड रिसर्च, कमोडिटी समाचार सिक्योरिटीज
"सोने ने ऐतिहासिक रूप से 15% की दर से रिटर्न दिया है। मौजूदा गिरावट बुल मार्केट का एक हिस्सा मात्र है। हमारा 2,40,000 रुपये का लक्ष्य अभी भी कायम है।" — मनोज जैन, डायरेक्टर, पृथ्वी फिनमार्ट
"सोना फिलहाल एक सीमित दायरे में है। इस गिरावट को खरीदारी के एक बेहतरीन अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।"
क्या लोन जल्दी चुकाने पर देना होगा चार्ज? जानें RBI के नियम
4 May, 2026 10:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज: क्या है यह?
जब कोई कर्जदार अपने लोन को उसकी निर्धारित अवधि (Tenure) पूरी होने से पहले ही आंशिक (Partial) या पूर्ण (Full) रूप से चुका देता है, तो बैंक उस पर एक शुल्क लगाते हैं, जिसे प्री-पेमेंट चार्ज कहते हैं। चूँकि कर्ज जल्दी चुकाने से बैंकों को भविष्य में मिलने वाले ब्याज का नुकसान होता है, वे इसकी भरपाई इस शुल्क के जरिए करते हैं।
RBI के नियम: कब देना होगा शुल्क और कब नहीं?
1. फ्लोटिंग रेट लोन (पूरी तरह निशुल्क)
आरबीआई के निर्देशों के अनुसार, यदि आपने फ्लोटिंग ब्याज दर (बदलती दरों) पर होम लोन या व्यक्तिगत उद्देश्यों के लिए कोई ऋण लिया है, तो बैंक आपसे कोई भी प्री-पेमेंट पेनाल्टी नहीं वसूल सकते। आप जब चाहें, बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपना लोन बंद कर सकते हैं।
2. फिक्स्ड रेट लोन (पारदर्शिता का नियम)
स्थिर ब्याज दर (Fixed Rate) वाले लोन पर बैंक शुल्क ले सकते हैं, लेकिन इसके लिए शर्तें हैं:
लोन समझौते (Agreement) में इस शुल्क का पहले से उल्लेख होना अनिवार्य है।
बैंक अपनी मर्जी से बाद में अचानक इस शुल्क को बढ़ा नहीं सकते।
नए नियम और राहत (1 जनवरी 2026 से प्रभावी)
आरबीआई ने कर्जदारों के हितों की रक्षा के लिए नियमों को और सख्त और पारदर्शी बनाया है:
व्यावसायिक ऋण: व्यक्तियों और MSME को दिए गए फ्लोटिंग रेट बिजनेस लोन पर अब कोई प्री-पेमेंट शुल्क नहीं लगेगा।
स्मॉल फाइनेंस और ग्रामीण बैंक: 50 लाख रुपये तक के कर्ज पर प्री-पेमेंट पेनाल्टी लगाने पर रोक रहेगी।
लोन क्लोजर प्रक्रिया: अब और भी आसान
दस्तावेजों की वापसी: लोन पूरी तरह चुकता होने के 30 दिनों के भीतर बैंक को आपके सभी ओरिजिनल पेपर (जैसे रजिस्ट्री आदि) वापस करने होंगे।
विलंब पर जुर्माना: यदि बैंक 30 दिनों में दस्तावेज नहीं लौटाता, तो उसे ग्राहक को 5,000 रुपये प्रतिदिन का हर्जाना देना होगा।
स्पष्टता: लोन देते समय ही बैंक को सभी 'छिपे हुए शुल्कों' (Hidden Charges) की जानकारी लिखित में देनी होगी।
नई नौकरी, नई जिम्मेदारी: भविष्य सुरक्षित करने के लिए अपनाएं ये निवेश टिप्स
4 May, 2026 06:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पहली नौकरी और बड़े सपने: 24 वर्षीय अभिषेक की अनुशासित वित्तीय यात्रा
पहली नौकरी मिलते ही अक्सर युवा अपनी इच्छाओं पर पैसा खर्च करना शुरू कर देते हैं, लेकिन मुंबई में एक सरकारी बैंक में अधिकारी के रूप में तैनात 24 साल के अभिषेक सिंह ने एक अलग रास्ता चुना है। उनके कंधों पर छोटी बहन की शिक्षा और विवाह जैसी पारिवारिक जिम्मेदारियां हैं, साथ ही दिल्ली-एनसीआर में अपना घर और एक कार खरीदने का सपना भी।
मुंबई जैसे महानगर में रहते हुए बचत और निवेश का सही संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन एक लक्ष्य-आधारित निवेश रणनीति (Goal-Based Investment Strategy) के माध्यम से वह अपने सभी सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं।
अभिषेक का मास्टर प्लान: निवेश और लक्ष्य
1. सुरक्षा कवच: इमरजेंसी फंड
किसी भी निवेश की शुरुआत से पहले एक सुरक्षा कोष होना अनिवार्य है।
लक्ष्य: कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर राशि।
रणनीति: 5,000 रुपये प्रति माह की SIP लिक्विड म्यूचुअल फंड में शुरू करें। यह पैसा नौकरी में बदलाव या किसी मेडिकल इमरजेंसी के समय काम आएगा।
2. बहन की उच्च शिक्षा (समय: 2 वर्ष)
अभिषेक की बहन अभी 12वीं में है और उसे आगे की पढ़ाई के लिए करीब 5 लाख रुपये की आवश्यकता होगी।
रणनीति: समय कम होने के कारण जोखिम न लें। 10,000 रुपये प्रति माह शॉर्ट ड्यूरेशन डेट फंड या बैंक FD में निवेश करें। किसी भी अतिरिक्त बोनस या एरियर को इसी मद में डालें।
3. बहन की शादी का प्रबंध (समय: 6 वर्ष)
भविष्य की महंगाई को देखते हुए शादी का बजट करीब 20 लाख रुपये तक जा सकता है।
रणनीति: 20,000 रुपये की SIP इक्विटी म्यूचुअल फंड में शुरू करें। इसमें हर साल 10% की बढ़ोतरी (Step-up) करना फायदेमंद रहेगा।
4. नई कार और डाउन पेमेंट (समय: 6 वर्ष)
अभिषेक 10 लाख रुपये की कार लेना चाहते हैं।
रणनीति: 4,000 रुपये प्रतिमाह लार्ज-कैप या फ्लेक्सी-कैप फंड में जमा करें। 2 साल बाद जब बहन की शिक्षा वाली SIP पूरी हो जाए, तो वह राशि भी इसी लक्ष्य में जोड़ दें।
5. स्वयं की शादी और घर का सपना (समय: 8-10 वर्ष)
अभिषेक दिल्ली-एनसीआर में अपना घर चाहते हैं, जिसके लिए उन्हें करीब 23 लाख रुपये डाउन पेमेंट के लिए चाहिए होंगे।
रणनीति: स्वयं की शादी के लिए 18,000 रुपये की SIP शुरू करें। साथ ही घर के लिए शुरुआती तौर पर 10,000 रुपये का निवेश इक्विटी फंड्स में करें।
अभिषेक के लिए विशेष वित्तीय परामर्श
SIP स्टेप-अप: जैसे-जैसे सरकारी वेतन में वृद्धि या DA (महंगाई भत्ता) बढ़े, अपने निवेश को भी हर साल कम से कम 10% बढ़ाएं।
बीमा (Insurance): सरकारी कर्मचारी होने के नाते स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ तो मिलेगा ही, लेकिन परिवार की सुरक्षा के लिए 1 करोड़ रुपये का टर्म इंश्योरेंस तुरंत लें।
सरकारी योजनाओं का लाभ: अपना घर खरीदने के लिए बैंक कर्मचारियों को मिलने वाली रियायती ब्याज दरों और प्रधानमंत्री आवास योजना का फायदा उठाना न भूलें।
ईरान और अमेरिका के तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा पर सवाल
2 May, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
समुद्री संकट के बीच भारत की बड़ी कोशिश: 45 हजार टन गैस लेकर होर्मुज की ओर बढ़ा टैंकर 'सर्व शक्ति', भारत की रसोई पर टिकीं नजरें
नई दिल्ली|मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े जहाजों पर बढ़ती सख्ती के बीच, भारत के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। लगभग ठप पड़े 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के रास्ते भारत से जुड़ा एक विशाल एलपीजी टैंकर ‘सर्व शक्ति’ अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा है। यह सफर केवल एक व्यापारिक यात्रा नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
क्यों खास है 'सर्व शक्ति' का यह सफर?
मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले इस टैंकर पर करीब 45,000 टन एलपीजी लदी हुई है। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह टैंकर ईरान के लारक और केश्म द्वीपों के पास से होते हुए ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ता देखा गया है।
भारतीय क्रू: जहाज पर भारतीय चालक दल मौजूद है, जिन्होंने संकेत दिया है कि वे सीधे भारत की ओर आ रहे हैं।
रणनीतिक महत्व: यदि यह टैंकर सुरक्षित निकल जाता है, तो हालिया तनाव के बाद इस खतरनाक रास्ते से गुजरने वाला यह भारत का पहला बड़ा टैंकर होगा।
भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का सवाल
दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश भारत के लिए एलपीजी की आपूर्ति में जरा सी भी देरी गंभीर संकट पैदा कर सकती है।
सप्लाई चेन पर असर: हाल के दिनों में सप्लाई बाधित होने के कारण देश के कई हिस्सों में गैस की कमी और लंबी कतारें देखी गई थीं।
मजबूरी और मांग: भारत में रोजाना करीब 80,000 टन एलपीजी की खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर फिलहाल 54,000 टन किया गया है। शेष आपूर्ति के लिए भारत पूरी तरह से समुद्री रास्तों पर निर्भर है।
सरकार की रणनीति और जोखिम
भारत सरकार इस संकट को टालने के लिए बहुआयामी रणनीति अपना रही है:
प्राथमिकता: बंदरगाहों पर एलपीजी टैंकरों के लिए विशेष 'प्रायोरिटी क्लीयरेंस' की व्यवस्था की गई है।
राजनयिक प्रयास: ईरान के साथ लगातार बातचीत कर सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
बढ़ा हुआ उत्पादन: घरेलू एलपीजी उत्पादन में 60% की वृद्धि की गई है ताकि बाहरी निर्भरता कम हो सके।
खतरा अभी टला नहीं
अप्रैल में मार्ग के एक बार खुलने के बाद फिर से हुई फायरिंग की घटनाओं ने सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि कुछ जहाज अपनी लोकेशन (AIS) छिपाकर इस क्षेत्र को पार करने की कोशिश कर रहे हैं।
एविएशन सेक्टर में बड़ा झटका, स्पिरिट एयरलाइंस का ऑपरेशन बंद
2 May, 2026 05:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विमानन क्षेत्र में बड़ा संकट: अमेरिका की स्पिरिट एयरलाइन ने 34 साल बाद बंद किया परिचालन, सभी उड़ानें रद्द
वॉशिंगटन। अमेरिका की सबसे लोकप्रिय अल्ट्रा-लो-कॉस्ट एयरलाइन 'स्पिरिट एयरलाइन' का सफर अब खत्म हो गया है। कंपनी ने शनिवार को घोषणा की कि वह अपनी सभी सेवाओं को तत्काल प्रभाव से बंद कर रही है। इस फैसले के बाद हजारों यात्री फंस गए हैं और विमानन बाजार में हड़कंप मच गया है।
यात्रियों के लिए क्या है व्यवस्था?
एयरलाइन के अचानक बंद होने से उन यात्रियों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है जिन्होंने पहले से टिकट बुक करा रखे थे:
रिफंड का वादा: कंपनी ने कहा है कि प्रभावित यात्रियों को उनके टिकट का पैसा वापस (Refund) दिया जाएगा।
नहीं मिलेगी वैकल्पिक उड़ान: एयरलाइन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह यात्रियों के लिए किसी अन्य विमान या वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था नहीं करेगी। यात्रियों को खुद ही अन्य एयरलाइंस में अपनी बुकिंग करानी होगी।
सेवाएं ठप: कंपनी की ग्राहक सेवा (Customer Support) को भी पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
क्यों बंद हुई कंपनी? (संकट के मुख्य कारण)
स्पिरिट एयरलाइन पिछले काफी समय से आर्थिक तंगहाली के दौर से गुजर रही थी। इस बंदी के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं:
वित्तीय संकट और दिवालियापन: कंपनी पहले ही दिवालिया होने की कगार पर थी और उस पर भारी कर्ज का बोझ था।
ईंधन की बढ़ती कीमतें: वैश्विक स्तर पर विमानन ईंधन (ATF) के दामों में उछाल ने कंपनी की कमर तोड़ दी।
युद्ध का वैश्विक असर: ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न हुए भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में बाधा ने एयरलाइन के खर्चों को अनियंत्रित कर दिया।
सरकारी मदद की विफलता: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अंतिम प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद, कंपनी को बचाने के लिए जरूरी सरकारी वित्तीय सहायता (Bailout) नहीं मिल सकी।
अर्थव्यवस्था और नौकरियों पर असर
इस एयरलाइन के बंद होने का प्रभाव केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा:
17,000 नौकरियों पर खतरा: कंपनी के इस फैसले से करीब 17,000 कर्मचारियों के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
प्रतिस्पर्धा में कमी: विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि स्पिरिट जैसी बड़ी बजट एयरलाइन के हटने से बाजार में प्रतिस्पर्धा घटेगी, जिससे भविष्य में हवाई किराए में बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
Financial Fraud Case: कमलेश पारेख प्रत्यर्पण, CBI की बड़ी कार्रवाई
2 May, 2026 03:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
CBI की बड़ी स्ट्राइक: बैंक घोटाले का आरोपी कमलेश पारेख और फर्जी पासपोर्ट गिरोह का सरगना यशपाल यूएई से प्रत्यर्पित
नई दिल्ली। इंटरपोल और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से भारत ने 1 मई को दो बड़े वांछित अपराधियों को अपनी हिरासत में ले लिया है। दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुँचते ही सीबीआई की टीम ने इन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया।
1. कमलेश पारेख: करोड़ों के बैंकिंग घोटाले का मास्टरमाइंड
लंबे समय से विदेश में छिपे कमलेश पारेख के खिलाफ सीबीआई ने इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया था।
बैंकों से धोखाधड़ी: पारेख पर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले कई बैंकों के समूह के साथ सैकड़ों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है।
फंड की हेराफेरी: जांच में खुलासा हुआ कि उसने अन्य प्रमोटरों के साथ मिलकर बैंकों से मिली राशि को विदेशी कंपनियों में डायवर्ट किया। इसके लिए फर्जी निर्यात और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का सहारा लिया गया।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क: आरोपी ने यूएई समेत कई देशों में फैले अपने व्यापारिक संपर्कों का इस्तेमाल कर इस घोटाले को अंजाम दिया था।
2. आलोक कुमार उर्फ यशपाल सिंह: फर्जी पासपोर्ट रैकेट का मुखिया
CBI ने यूएई से ही एक अन्य वांछित आरोपी आलोक कुमार उर्फ यशपाल सिंह को भी भारत लाया है।
संगठित अपराध: हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज मामले के अनुसार, आलोक एक ऐसे गिरोह का संचालन करता था जो जाली दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाता था।
अपराधियों की मदद: आरोप है कि उसने फर्जी नाम और पते का इस्तेमाल कर कई आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को देश से बाहर भागने के लिए अवैध रूप से पासपोर्ट उपलब्ध कराए।
कैसे सफल हुआ यह मिशन?
यह पूरी कार्रवाई विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है:
भारतपोल प्लेटफॉर्म: सीबीआई, जो भारत में इंटरपोल के लिए नोडल एजेंसी है, अपने 'भारतपोल' प्लेटफॉर्म के जरिए वैश्विक स्तर पर अपराधियों को ट्रैक कर रही है।
रिकॉर्ड प्रत्यर्पण: पिछले कुछ वर्षों में भारत इस समन्वय के जरिए अब तक 150 से अधिक वांछित अपराधियों को वापस लाने में सफल रहा है।
अगली कार्रवाई
सीबीआई अब दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ करेगी। कमलेश पारेख से बैंक घोटाले की डूबी हुई रकम की रिकवरी और इस नेटवर्क में शामिल अन्य सफेदपोशों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। वहीं, आलोक कुमार से फर्जी पासपोर्ट गिरोह के अन्य सदस्यों और उन अपराधियों के बारे में पूछताछ होगी जिन्होंने इस गिरोह की मदद ली थी।
Global Tension के बीच भारत की ग्रोथ बरकरार, RBI ने दी सावधानी की सलाह
2 May, 2026 12:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
RBI गवर्नर की चेतावनी: वैश्विक कर्ज और रक्षा खर्च बन सकते हैं चुनौती, पर भारत की नींव मजबूत
एम्स्टर्डम। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू खपत और सरकारी निवेश के कारण भारत की आर्थिक स्थिति स्थिर बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने बढ़ते रक्षा बजट और देशों पर बढ़ते कर्ज को लेकर दुनिया को आगाह भी किया है।
भारत की मजबूती के पीछे के कारण
गवर्नर के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था को दो मुख्य स्तंभों से सहारा मिल रहा है:
सार्वजनिक निवेश: सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर किए जा रहे खर्च (Capex) ने निजी निवेश को नई गति दी है।
घरेलू मांग: देश के भीतर वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ती खपत ने उत्पादन क्षमता को विस्तार दिया है।
कॉरपोरेट सेहत: कंपनियों की बैलेंस शीट पहले से बेहतर हुई है और पूंजी बाजारों से फंड जुटाने की प्रक्रिया में तेजी आई है।
गवर्नर मल्होत्रा ने किन खतरों की ओर किया इशारा?
वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कुछ प्रमुख जोखिमों का जिक्र किया:
राजकोषीय दबाव: रक्षा खर्च में हो रही बढ़ोतरी और वित्तीय विस्तार के कारण कई देशों की राजकोषीय स्थिति बिगड़ सकती है।
ऊंचा मूल्यांकन: तकनीकी क्षेत्र सहित कुछ विशेष परिसंपत्तियों (Assets) की कीमतों का वास्तविकता से अधिक होना बाजार के लिए खतरा बन सकता है।
महंगाई का चक्र: सप्लाई चेन में बाधा और ऊर्जा (ईंधन) की बढ़ती कीमतें 'सेकेंड-ऑर्डर महंगाई' को जन्म दे सकती हैं।
समझिए क्या है 'सेकेंड-ऑर्डर महंगाई'?
यह महंगाई का वह चक्र है जो एक क्षेत्र से शुरू होकर पूरी अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले लेता है।
शुरुआत: मान लीजिए कच्चे तेल या कच्चे माल की कीमतें बढ़ती हैं।
असर: इससे परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ जाती है।
परिणाम: कंपनियां घाटे से बचने के लिए अपने उत्पादों के दाम बढ़ा देती हैं। इसके बाद कर्मचारी भी अपना घर चलाने के लिए ज्यादा वेतन की मांग करते हैं, जिससे लागत और बढ़ती है और महंगाई का एक कभी न खत्म होने वाला लूप बन जाता है।
विकास दर का अनुमान
आरबीआई गवर्नर ने भारत की विकास दर (GDP Growth) के आंकड़े भी साझा किए:
2021-25: औसत वृद्धि दर 8.2% रही।
2025-26: अनुमानित विकास दर 7.6%।
2026-27: अनुमानित विकास दर 6.9%।
छोटे व्यवसाय हुए मजबूत: डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ी कमाई और पहुंच
2 May, 2026 09:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डिजिटल गवर्नेंस का कमाल: छोटे उद्योगों की उत्पादकता में भारी उछाल, IMF की रिपोर्ट में खुलासा
भारत में प्रशासनिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण ने सूक्ष्म और लघु उद्योगों (Micro Enterprises) की तस्वीर बदल दी है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के हालिया अध्ययन के अनुसार, जिन राज्यों ने सरकारी कामकाज को तेजी से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट किया, वहां के छोटे कारोबारों की कार्यक्षमता में न केवल सुधार हुआ है, बल्कि बाजार में प्रतिस्पर्धा भी अधिक संतुलित हुई है।
डिजिटल सुधारों का जमीनी प्रभाव
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु दर्शाते हैं कि डिजिटल सुधारों को अपनाने वाले राज्यों में:
उत्पादकता में वृद्धि: व्यवसायों की काम करने की क्षमता तेजी से बढ़ी है।
समान अवसर: बड़ी और छोटी कंपनियों के बीच का उत्पादकता अंतर (Productivity Gap) कम हुआ है, जिससे छोटे व्यवसायों को भी आगे बढ़ने का मौका मिला है।
संतुलित प्रतिस्पर्धा: अब छोटे स्टार्टअप और पारंपरिक बड़े उद्योग एक ही स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर पा रहे हैं।
98-पॉइंट एक्शन प्लान: सुधारों का रोडमैप
वर्ष 2014 में राज्यों द्वारा अपनाया गया '98-पॉइंट एक्शन प्लान' इस बदलाव की धुरी रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य व्यापारिक नियमों को सरल बनाना और प्रक्रियाओं को डिजिटल करना था।
इस योजना के तहत 6 प्रमुख क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव किए गए:
कर प्रणाली (Tax System): ऑनलाइन फाइलिंग और पारदर्शिता।
निर्माण अनुमति (Construction Permits): अनुमति प्रक्रियाओं का सरलीकरण।
पर्यावरण और श्रम नियम: नियमों के पालन में सुगमता।
निरीक्षण (Inspection): पारदर्शी और डिजिटल जांच प्रणाली।
व्यावसायिक विवाद: विवादों का त्वरित समाधान।
सिंगल-विंडो क्लीयरेंस: एक ही जगह से सभी जरूरी मंजूरियां।
छोटे कारोबारियों के लिए 'गेम चेंजर'
डिजिटल सिस्टम ने सूक्ष्म उद्यमियों के लिए बाधाओं को कम किया है:
समय और धन की बचत: सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत कम हुई।
पारदर्शिता: ऑटोमेटेड मंजूरी ने भ्रष्टाचार और रिश्वत जैसे अनौपचारिक खर्चों पर लगाम लगाई है।
प्रभावी संसाधन: कंपनियां अब अपनी पूंजी और श्रम (Labour) का बेहतर इस्तेमाल कर पा रही हैं।
एक रोचक तथ्य: रिपोर्ट में पाया गया कि इन सुधारों का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी लाभ शुरुआती दौर में देखा गया। शुरुआती प्रशासनिक बदलावों ने छोटे उद्योगों को सबसे ज्यादा मजबूती प्रदान की।
MSME: भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार स्तंभ
भारत का सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र देश की आर्थिक मजबूती के लिए अपरिहार्य है:
उत्पादन: कुल मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में 35% का योगदान।
रोजगार: लगभग 11 करोड़ लोगों को आजीविका प्रदान करता है।
संवेदनशीलता: ये व्यवसाय सरकारी नियमों और लागत में होने वाले बदलावों से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, इसलिए डिजिटल गवर्नेंस इनके लिए सुरक्षा कवच की तरह है।
पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ने की चेतावनी, संकट गहराया
2 May, 2026 06:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल की बढ़ती कीमतें और सब्सिडी का बोझ: सरकार के सामने बड़ी आर्थिक चुनौती
व्यावसायिक गैस सिलिंडर (Commercial Cylinder) की कीमतों में 993 रुपये की भारी वृद्धि ने बाजार में खलबली मचा दी है। हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस (LPG) और पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल स्थिर रखे गए हैं। लेकिन यह 'राहत' केवल ऊपरी है; पर्दे के पीछे तेल कंपनियों पर बढ़ती लागत और घाटे का दबाव एक बड़े आर्थिक संकट की ओर इशारा कर रहा है।
लागत और बिक्री के बीच बढ़ता अंतर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की लागत काफी बढ़ चुकी है। रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) के विश्लेषण के अनुसार:
यदि कच्चा तेल 120-125 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहता है, तो तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 14 रुपये और डीजल पर 18 रुपये प्रति लीटर का नुकसान (निगेटिव मार्केटिंग मार्जिन) उठाना पड़ रहा है।
घरेलू एलपीजी की स्थिति और भी गंभीर है। अनुमान है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो वित्त वर्ष 2026-27 में तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी (लागत से कम वसूली) 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
बजट और सब्सिडी का गणित
सरकार के लिए सबसे बड़ी मुश्किल बजट प्रावधानों और वास्तविक घाटे के बीच का अंतर है।
बजट 2026-27 में एलपीजी सब्सिडी के लिए केवल 11,085 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
इसमें से 9,200 करोड़ रुपये गरीब परिवारों के कनेक्शन और 1,500 करोड़ रुपये 'पहल' (DBT) योजना के लिए हैं।
यदि घाटा 80,000 करोड़ रुपये तक जाता है, तो यह बजट में तय राशि से लगभग सात गुना अधिक होगा।
पिछला अनुभव: अगस्त 2025 में भी सरकार ने तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) के नुकसान की भरपाई के लिए 30,000 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया था।
चौतरफा दबाव: केवल तेल ही नहीं, खाद भी महंगी
ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का असर केवल तेल तक सीमित नहीं है। इक्रा का अनुमान है कि उर्वरक (Fertilizer) सब्सिडी भी बजट में आवंटित 1.71 लाख करोड़ से बढ़कर 2.05 - 2.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। इसका सीधा मतलब है कि सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा, जिसका असर अंततः अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
सरकार के पास मौजूद तीन कठिन विकल्प
अप्रैल 2022 से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर हैं, जबकि कच्चा तेल हाल ही में 126 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू चुका है। इस कठिन परिस्थिति में सरकार के पास केवल तीन रास्ते बचते हैं:
विकल्प
संभावित परिणाम
कंपनियों पर बोझ छोड़ना
तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति (Balance Sheet) खराब होगी और निवेश घटेगा।
बजट से भरपाई करना
राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) बढ़ेगा, जिससे अन्य विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
कीमतों में क्रमिक वृद्धि
आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा और मध्यम वर्ग की जेब ढीली होगी।
उड़ान भरना होगा महंगा: ATF कीमतों में 5% उछाल, एयरफेयर पर असर
1 May, 2026 01:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विमानन ईंधन अपडेट: अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में 5% की बढ़ोतरी, घरेलू दरों में बदलाव नहीं
नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का असर अब विमानन क्षेत्र पर दिखने लगा है। तेल कंपनियों ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) की दरों में 5 फीसदी का इजाफा किया है। यह लगातार दूसरा महीना है जब ईंधन की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू एयरलाइंस के लिए कीमतों को स्थिर रखा गया है।
घरेलू यात्रियों को राहत, किराया बढ़ने की आशंका कम
सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने एक संतुलित रुख अपनाते हुए घरेलू एयरलाइंस के लिए जेट फ्यूल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इस फैसले से अनुमान लगाया जा रहा है कि फिलहाल घरेलू हवाई यात्रा के किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी, जिससे आम यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
एक महीने में दूसरी बार बढ़ीं कीमतें
एक मई से लागू हुए नए फैसले के बाद दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमत 76.55 डॉलर प्रति किलोलीटर (5.33%) बढ़कर 1511.86 डॉलर प्रति किलोलीटर हो गई है। इससे पहले एक अप्रैल को भी कीमतों में वृद्धि की गई थी।
पश्चिम एशिया संकट का असर
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में भारी अस्थिरता देखी जा रही है। इसी के मद्देनजर तेल कंपनियों ने यह समायोजन किया है। जहां विदेशी एयरलाइंस को अब नई बाजार दरों के अनुसार भुगतान करना होगा, वहीं घरेलू बाजार को फिलहाल कीमतों के मामले में नियंत्रित रखा गया है।
मुख्य बातें:
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जेट ईंधन 5% महंगा हुआ।
घरेलू हवाई ईंधन की कीमतों में कोई परिवर्तन नहीं।
दिल्ली में नई दर 1511.86 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोलीटर।
कीमतों में लगातार दूसरे महीने देखी गई वृद्धि।
सरकार की कोटा नीति के बावजूद निर्यात लक्ष्य अधूरा रहने की आशंका
1 May, 2026 12:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीनी निर्यात पर संकट: वैश्विक कीमतों में गिरावट से भारत का लक्ष्य प्रभावित, कोटे से आधा ही हो पाएगा एक्सपोर्ट
नई दिल्ली: चालू विपणन सत्र 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) में भारत का चीनी निर्यात उम्मीद से काफी कम रहने का अनुमान है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, वैश्विक बाजार में कीमतों की प्रतिकूल स्थिति के कारण इस सीजन में केवल 7.5 से 8 लाख टन चीनी का ही निर्यात हो पाने की संभावना है।
कोटा ज्यादा, निर्यात कम
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश भारत में निर्यात पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में होता है। सरकार मिलों के लिए कोटा निर्धारित करती है। इस सीजन की शुरुआत में खाद्य मंत्रालय ने 15 लाख टन निर्यात की अनुमति दी थी, जिसे बाद में 5 लाख टन अतिरिक्त कोटे के साथ बढ़ाया गया। हालांकि, इस अतिरिक्त कोटे में से अब तक केवल 87,587 टन को ही मंजूरी मिल सकी है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि, "फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें उतनी आकर्षक नहीं हैं कि मिलें निर्यात को प्राथमिकता दें। इस पूरे सीजन में वास्तविक भौतिक शिपमेंट 8 लाख टन के आंकड़े तक ही सिमट सकता है।"
खपत के पैटर्न में बदलाव और बढ़ता स्टॉक
रिपोर्ट के अनुसार, 3 मार्च तक भारत लगभग 5 लाख टन चीनी का निर्यात कर चुका है। दिलचस्प बात यह है कि देश में चीनी की खपत का पैटर्न बदल रहा है। मांग में वृद्धि अब स्थिर हो गई है, जिससे घरेलू स्तर पर चीनी का अधिक अधिशेष (Surplus) बच रहा है।
उत्पादन में सुधार
पिछले साल की तुलना में इस बार चीनी उत्पादन में भी मामूली बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है:
मौजूदा सीजन उत्पादन: अब तक 27.5 मिलियन टन चीनी का उत्पादन हो चुका है।
कुल अनुमान: सीजन के अंत तक उत्पादन 28.2 मिलियन टन रहने की उम्मीद है।
पिछला रिकॉर्ड: साल 2024-25 में उत्पादन 26.1 मिलियन टन रहा था।
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