व्यापार
8वें वेतन आयोग में इन बदलावों के बिना सैलरी बढ़ोतरी का असर रह सकता है सीमित
7 Jul, 2026 03:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश भर के लाखों केंद्रीय कर्मचारी आगामी 8वें वेतन आयोग के गठन और उसकी सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारियों के बीच फिटमेंट फैक्टर, महंगाई भत्ता (DA) और मकान किराया भत्ता (HRA) जैसे अहम मुद्दों को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इस बीच, कर्मचारियों के वेतन ढांचे को लेकर एक ठोस और व्यावहारिक निर्णय पर पहुंचने के लिए वेतन आयोग देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित कर रहा है। इसी सिलसिले में वर्तमान में ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोग की महत्वपूर्ण बैठक चल रही है, जिसके तुरंत बाद आगामी 9 और 10 जुलाई को कोलकाता में भी उच्च स्तरीय मंथन किया जाएगा। इन क्षेत्रीय बैठकों का मुख्य उद्देश्य सभी पक्षों के जमीनी पहलुओं को समझना है, ताकि अगले 10 वर्षों के लिए कर्मचारियों के वेतन में एक सम्मानजनक वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
विभिन्न शहरों में कर्मचारी संगठनों के साथ आयोग का संवाद
वेतन आयोग अपनी फाइनल रिपोर्ट तैयार करने से पहले देश के अलग-अलग नीतिगत केंद्रों और बड़े शहरों में दौरों का सिलसिला जारी रखे हुए है। नई दिल्ली और लखनऊ के बाद अब भुवनेश्वर में हो रही इन बैठकों में विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी संगठन और एसोसिएशन आयोग के समक्ष अपनी मांगों का पुलिंदा रख रहे हैं। कर्मचारी प्रतिनिधि अपनी वित्तीय चिंताओं, महंगाई के अनुपात में वेतन विसंगतियों और अन्य भत्तों में सुधार को लेकर विस्तृत सुझाव दे रहे हैं। आयोग इन तमाम मांगों और प्रस्तुतियों का बारीकी से अध्ययन कर रहा है, जिसके आधार पर ही आने वाले समय में अंतिम सिफारिशों का मसौदा तैयार किया जाएगा।
वेतन वृद्धि का मुख्य आधार और फिटमेंट फैक्टर का गणित
केंद्रीय कर्मचारियों के मूल वेतन (बेसिक सैलरी) में सबसे बड़ा और व्यापक बदलाव फिटमेंट फैक्टर के निर्धारण से ही तय होता है। इतिहास पर नजर डालें तो छठे वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 निर्धारित था, जिसे सातवें वेतन आयोग के लागू होने पर बढ़ाकर 2.57 कर दिया गया था। इस बदलाव के कारण कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन सीधे ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गया था। अब कर्मचारियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 8वें वेतन आयोग में इस फैक्टर को कितना बढ़ाया जाएगा। हालांकि, इस संवेदनशील विषय पर अभी तक आयोग या केंद्र सरकार की ओर से कोई भी आधिकारिक घोषणा या संकेत नहीं दिया गया है।
सैलरी के निर्धारण में अन्य भत्तों और प्रोमोशन की भूमिका
कर्मचारियों को मिलने वाला कुल मासिक वेतन केवल फिटमेंट फैक्टर पर ही आधारित नहीं होता, बल्कि इसमें कई अन्य महत्वपूर्ण घटक भी शामिल होते हैं। कुल वेतन की गणना में हर छमाही पर बढ़ने वाला महंगाई भत्ता, शहर की श्रेणी के अनुसार मिलने वाला एचआरए, वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) और प्रोमोशन के बाद मिलने वाले वित्तीय लाभ भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने इस बार फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी के साथ-साथ मकान किराया भत्ता और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TPTA) को न्यूनतम ₹9,000 तक करने की पुरजोर पैरवी की है। यदि आयोग इन अन्य भत्तों में भी सकारात्मक वृद्धि की सिफारिश करता है, तो कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में एक बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
LPG Price Update: घरेलू गैस सिलेंडर के ताजा रेट चेक करें, जानें आज का अपडेट
7 Jul, 2026 02:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश भर में घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में आज कोई फेरबदल नहीं किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं को फिलहाल मौजूदा दरों पर ही सिलेंडर उपलब्ध होंगे। हालांकि, बीते 1 जुलाई को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी राहत देते हुए 183.50 रुपये की भारी कटौती की गई थी। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में व्याप्त तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कमर्शियल गैस के दाम 3,100 रुपये के आंकड़े को पार कर गए थे। आम नागरिकों के लिए घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बार जून महीने में राहत दी गई थी, जब दरों में 29 रुपये तक की कमी की गई थी। उसके बाद से ही कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
प्रमुख महानगरों में एलपीजी गैस की वर्तमान दरें
देश के विभिन्न शहरों में एलपीजी की कीमतों की स्थिति पर नजर डालें तो दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 942 रुपये और कमर्शियल 2,930 रुपये, मुंबई में घरेलू 941.5 रुपये और कमर्शियल 2,885.5 रुपये, कोलकाता में घरेलू 968 रुपये और कमर्शियल 3,082 रुपये, तथा चेन्नई में घरेलू सिलेंडर की कीमत 957.5 रुपये और कमर्शियल की 3,106 रुपये है। इसी प्रकार नोएडा, देहरादून, हैदराबाद, गोवा और तिरुवनंतपुरम सहित अन्य शहरों में भी घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडरों के दाम अलग-अलग निर्धारित हैं। इन दरों में स्थानीय करों और परिवहन लागत के अनुसार भिन्नता हो सकती है।
सऊदी अरब का बड़ा ऐलान और वैश्विक तेल बाजार में बदलाव
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सऊदी अरब ने एशिया के अपने खरीदारों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड कटौती करने का निर्णय लिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में स्थिति सामान्य होने के बाद वैश्विक आपूर्ति में सुधार हुआ है और तेल विक्रेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी 'सऊदी अरामको' ने अगले महीने के लिए 'अरब लाइट' तेल की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कटौती करने का ऐलान किया है, जो साल 2000 के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है।
घरेलू रसोई गैस की कीमतों में कटौती की उम्मीद
अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के अंतरिम समझौते के बाद होर्मुज से तेल की आपूर्ति सुचारू रूप से बहाल हुई है, जिससे तेल उत्पादक देशों में अपना माल खपाने के लिए होड़ मच गई है। इस प्रतिस्पर्धी माहौल के कारण तेल की कीमतों में दबाव बना हुआ है। यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहती हैं, तो यह संभावना प्रबल है कि तेल कंपनियां अगस्त महीने में घरेलू 14.2 किलोग्राम वाले रसोई गैस सिलेंडर के दामों में भी कुछ राहत प्रदान कर सकती हैं।
आज सस्ता हुआ गोल्ड और सिल्वर, निवेश या खरीदारी से पहले चेक करें ताजा रेट
7 Jul, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। यदि आप आज सराफा बाजार से सोना या चांदी के आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो शोरूम जाने से पहले आज की नई कीमतों पर नजर जरूर डाल लें। वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और स्थानीय स्तर पर जेवरों की मांग के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों में कीमती धातुओं के भाव हर दिन बदलते हैं। ऐसे में सटीक दाम जानना आपके लिए घाटे का सौदा होने से बचा सकता है। यहां देश के प्रमुख शहरों के ताजा दाम तालिका के माध्यम से साझा किए गए हैं, जो आपकी खरीदारी में मददगार साबित होंगे।
विभिन्न श्रेणियों में सोने के आज के भाव
आज देश के चुनिंदा महानगरों और शहरों में 10 ग्राम सोने की कीमतें इसकी शुद्धता के आधार पर तय की गई हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर सहित दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और लखनऊ में आज 24 कैरेट शुद्ध सोने का दाम ₹1,46,770 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है। वहीं इन शहरों में आम उपभोक्ताओं द्वारा सबसे ज्यादा खरीदी जाने वाली 22 कैरेट शुद्धता वाले जेवराती सोने की कीमत ₹1,34,550 और 18 कैरेट सोने का भाव ₹1,10,120 प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ है। इसके उलट मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में 24 कैरेट सोना ₹1,46,620 पर ट्रेड कर रहा है, जबकि चेन्नई में यह सबसे महंगा यानी ₹1,47,930 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है।
चांदी की चमक और प्रति किलोग्राम की नई दरें
सफेद धातु यानी चांदी के शौकीनों के लिए भी बाजार से नए रेट सामने आ गए हैं। जयपुर समेत दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पटना और इंदौर जैसे अधिकांश प्रमुख व्यापारिक केंद्रों पर आज चांदी का भाव ₹2,45,000 प्रति किलोग्राम (1 किलो) के स्तर पर खुला है। यदि कोई उपभोक्ता छोटे स्तर पर खरीदारी करना चाहता है, तो उसे 100 ग्राम चांदी के लिए ₹24,500 और मात्र 10 ग्राम चांदी के लिए ₹2,450 का भुगतान करना होगा। सोने की ही तरह चांदी के मामले में भी चेन्नई का बाजार सबसे तेज रहा, जहां आज चांदी की कीमत ₹2,50,000 प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है।
बाजार के उतार-चढ़ाव और निवेश की सही रणनीति
सराफा विशेषज्ञों के मुताबिक बहुमूल्य धातुओं के दामों में रोजाना होने वाले इस बदलाव के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां, रुपये-डॉलर की विनिमय दर, सीमा शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) और देश के भीतर जारी फेस्टिव या शादियों की डिमांड मुख्य वजह होती है। जो लोग इस समय निवेश के लिहाज से सोना खरीदने का मन बना रहे हैं, उन्हें बाजार के रुख और अपनी वित्तीय क्षमता का आकलन जरूर कर लेना चाहिए। इसके अलावा, यदि आप केवल पहनने के लिए आभूषण बनवा रहे हैं, तो विभिन्न आभूषण विक्रेताओं के मेकिंग चार्ज (घड़ाई शुल्क) की तुलना करना आपके लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है।
Liquor Price Hike: शराब की कीमतों में बढ़ोतरी की तैयारी, जानें कितना महंगा होगा आपका पसंदीदा ब्रांड
7 Jul, 2026 11:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई। तमिलनाडु में मदिरा प्रेमियों की जेब पर जल्द ही अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है। राज्य सरकार अपने यहां शराब के दामों में 10 रुपये से लेकर 50 रुपये प्रति बोतल तक की बढ़ोतरी करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। सचिवालय में शराबबंदी और आबकारी मंत्री के. विग्नेश की अगुवाई में तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (टास्माक) की बोर्ड बैठक के दौरान इस नीतिगत प्रस्ताव पर गहन मंथन किया गया। माना जा रहा है कि इस सप्ताहांत से ही नई बढ़ी हुई दरें पूरे सूबे में प्रभावी की जा सकती हैं।
साधारण ब्रांड से लेकर प्रीमियम श्रेणी तक के नए दाम
सामने आ रहे संभावित आंकड़ों के मुताबिक, साधारण और मध्यम दर्जे के ब्रांड्स की कीमतों में 10 से 20 रुपये प्रति बोतल की वृद्धि देखी जा सकती है। वहीं, जो उपभोक्ता प्रीमियम और विदेशी शराब (आईएमएफएल) के शौकीन हैं, उन्हें हर बोतल के लिए 30 से 50 रुपये तक अधिक जेब ढीली करनी पड़ सकती है। इसके साथ ही बीयर की प्रति बोतल पर भी न्यूनतम 10 रुपये का इजाफा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है। इससे पहले राज्य में आख़िरी बार मदिरा की कीमतों में संशोधन 1 फरवरी, 2024 को हुआ था। यदि वर्तमान बढ़ोतरी को हरी झंडी मिलती है, तो यह दो साल से अधिक समय के बाद कीमतों में होने वाला पहला बदलाव माना जाएगा।
राजस्व घाटे की भरपाई और बंद दुकानें बनीं वजह
इस मूल्य वृद्धि के पीछे सरकार के राजस्व में आई बड़ी गिरावट को मुख्य कारण माना जा रहा है। दरअसल, प्रशासन ने हाल ही में सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शिक्षण संस्थानों, धार्मिक स्थलों और बस अड्डों के समीप संचालित होने वाले 717 टास्माक रिटेल काउंटर्स को पूरी तरह बंद कर दिया था। इस फैसले से सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई के लिए अब कीमतों को संशोधित करने की तैयारी है। इसके अतिरिक्त, राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि शराब निर्माताओं पर हाल ही में एक नया मैन्युफैक्चरिंग सेस (उत्पादन उपकर) लगाया गया है, जिससे प्रशासन को सालाना लगभग 6,000 से 10,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है।
उत्पादन लागत बढ़ने से शराब निर्माताओं का दबाव
दूसरी ओर, टैक्स की ऊंची दरों और कच्चे माल की लगातार बढ़ती लागत के कारण शराब बनाने वाली डिस्टिलरीज और कंपनियों ने भी अपनी सीमाएं बढ़ा दी हैं। इन विनिर्माताओं ने सरकार से आग्रह किया था कि उनके उत्पादों का सरकारी खरीद मूल्य बढ़ाया जाए ताकि वे घाटे से उबर सकें। निर्माताओं की इसी मांग और राज्य के अपने वित्तीय संतुलन को बनाए रखने के लिए आबकारी विभाग ने इस बढ़ोतरी का मसौदा तैयार किया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के बाद पूरे तमिलनाडु में लागू कर दिया जाएगा।
सेंसेक्स-निफ्टी की दमदार ओपनिंग, डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती से निवेशकों में उत्साह
7 Jul, 2026 10:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक आज बढ़त के साथ हरे निशान पर खुले। इसके साथ ही शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपया भी 15 पैसे की मजबूती दर्ज करने में सफल रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का मुख्य सूचकांक सेंसेक्स 61.39 अंक चढ़कर 78,346.46 के स्तर पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 25.65 अंकों की हल्की तेजी के साथ 24,456.00 के स्तर पर खुला। इस बीच, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दामों में भी कमी दर्ज की गई है।
शेयर बाजार में शुरुआती बढ़त
कारोबारी हफ्ते के दौरान घरेलू शेयर बाजार ने मजबूती के साथ शुरुआत की। निवेशकों की लिवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक संकेतों और घरेलू बाजार में सकारात्मक रुख के कारण शुरुआती घंटों में यह तेजी देखने को मिली है, जिससे निवेशकों का मनोबल बढ़ा है।
डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत
शेयर बाजार की इस तेजी का सीधा असर मुद्रा बाजार पर भी दिखाई दिया। विदेशी पूंजी के निरंतर प्रवाह और घरेलू बाजार की मजबूती के दम पर भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के सामने 15 पैसे मजबूत हो गया। इस मजबूती से आयातकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक अच्छा संकेत माना जा रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिल रहे आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी कमी दर्ज की गई है। सामने आई एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 26 वर्षों के इतिहास में पहली बार कच्चे तेल के दामों में इतनी बड़ी कटौती देखने को मिली है। तेल की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट से भारत जैसे प्रमुख आयातक देश को अपने व्यापार घाटे को कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है।
बाजार की रफ्तार बरकरार, चौथे दिन बढ़त के साथ निफ्टी 24,400 के ऊपर; कल कैसी रहेगी चाल?
6 Jul, 2026 04:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी का सिलसिला जारी रहा। मॉनसून की रफ्तार दोबारा बेहतर होने और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से बाजार में खरीदारी लौटने के कारण निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। इसके दम पर घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी शानदार बढ़त के साथ बंद हुए।
बाजार की बड़ी छलांग और सेक्टोरल प्रदर्शन
कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 521 अंक (0.67%) की मजबूती के साथ 78,285 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 160 अंक (0.66%) की बढ़त लेकर 24,430 पर पहुंच गया। इस तेजी के कारण बीएसई (BSE) में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 482 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिससे निवेशकों ने एक ही दिन में 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की।
सेक्टरों की बात करें तो रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा 1.69% की तेजी रही। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑटो और ऑयल एंड गैस सेक्टर भी बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी तरफ, मीडिया, पीएसयू बैंक और आईटी सेक्टर में गिरावट दर्ज की गई।
इन शेयरों में रही हलचल
दिग्गज शेयरों में सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वालों में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी (ONGC), बजाज ऑटो और महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) शामिल रहे। इसके विपरीत कोटक महिंद्रा बैंक, टीसीएस (TCS), मैक्स हेल्थकेयर, बजाज फिनसर्व और विप्रो के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया और ये नुकसान के साथ बंद हुए। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में भी क्रमशः 0.75% और 0.45% की अच्छी बढ़त दर्ज की गई।
बाजार के जानकारों की राय
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर एआई (AI) आधारित शेयरों में मुनाफावसूली का असर दिखा, लेकिन कच्चे तेल की स्थिर कीमतों और विदेशी निवेशकों (FIIs) के बढ़ते इनफ्लो के कारण भारतीय बाजार मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारत की मैक्रो स्टेबिलिटी और कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को सपोर्ट मिलेगा।
7 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
तकनीकी चार्ट पर निफ्टी चार महीने से अधिक समय में पहली बार अपने 50-हफ्ते के ईएमए (EMA) से ऊपर बंद हुआ है, जो बाजार की आंतरिक मजबूती को दर्शाता है।
निफ्टी का दायरा: आने वाले दिनों में निफ्टी के लिए 24,570 से 24,600 का क्षेत्र अगला बड़ा रेजिस्टेंस (रुकावट) होगा। यदि बाजार इस स्तर को पार करता है, तो यह 24,750 और 24,900 की तरफ बढ़ सकता है। नीचे की तरफ बाजार के लिए 24,300 से 24,280 के स्तर पर मजबूत सपोर्ट है।
बैंक निफ्टी का आउटलुक: बैंकिंग इंडेक्स भी 0.61% की बढ़त के साथ मजबूत बंद हुआ है। चार्ट पर इसका अगला रेजिस्टेंस 58,700 से 58,800 के ज़ोन में दिख रहा है। इस स्तर को पार करने पर बैंक निफ्टी 59,400 और फिर ऐतिहासिक 60,000 के स्तर की ओर रुख कर सकता है, जबकि नीचे की ओर 57,800 पर तुरंत सपोर्ट मौजूद है।
मेगा फंड जुटाने की तैयारी, अगले हफ्ते से शुरू होगी ₹30,000 करोड़ इश्यू की मार्केटिंग
6 Jul, 2026 04:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। खबरों के मुताबिक, एक्सचेंज अगले हफ्ते से अपने इस मेगा आईपीओ की औपचारिक मार्केटिंग और रोड शो की शुरुआत कर सकता है। इस बड़े इश्यू का आकार लगभग 3 अरब डॉलर (करीब 30,000 करोड़ रुपये) होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जिसका बाजार को लंबे समय से इंतजार है।
दुनियाभर के बड़े शहरों में होगी निवेशकों के साथ बैठकें
ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज भारत के अलावा दुनिया के कई बड़े वित्तीय केंद्रों में निवेशकों के साथ बैठकें करने की योजना बना रहा है। इन शहरों में अमेरिका, लंदन, सिंगापुर, हांगकांग और मिडिल ईस्ट शामिल हैं। इस मार्केटिंग प्लान को अंतिम रूप देने के लिए फिलहाल बैंकों के साथ बातचीत का दौर जारी है। हालांकि, बाजार की स्थितियों को देखते हुए आईपीओ के आकार, वैल्यूएशन और समयसीमा में बदलाव भी संभव है।
सितंबर में लॉन्चिंग का लक्ष्य, पूरी तरह 'ऑफर फॉर सेल' होगा इश्यू
एक्सचेंज ने इस आईपीओ को सितंबर महीने में बाजार में उतारने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए जून में ही ड्राफ्ट पेपर जमा किए जा चुके हैं। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) पर आधारित होगा। इसका मतलब है कि कंपनी कोई नया शेयर जारी नहीं करेगी, बल्कि इसके मौजूदा शेयरधारक अपनी करीब 6% हिस्सेदारी यानी 14.89 करोड़ शेयर बिक्री के लिए रखेंगे।
LIC और SBI समेत कई बड़े संस्थान बेचेंगे अपनी हिस्सेदारी
ग्रे मार्केट के जानकारों के मुताबिक, अनलिस्टेड मार्केट में इस समय एनएसई (NSE) का वैल्यूएशन 5.25 लाख करोड़ रुपये (लगभग 55.1 अरब डॉलर) से ऊपर आंका जा रहा है। इस वैल्यूएशन के आधार पर आईपीओ के जरिए करीब 30,600 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं। इस ऑफर फॉर सेल में एलआईसी (LIC), एसबीआई (SBI), एसबीआई कैपिटल मार्केट्स, बैंक ऑफ बड़ौदा और विदेशी निवेशक टेमासेक होल्डिंग्स अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। गौरतलब है कि एलआईसी 10.72% हिस्सेदारी के साथ एनएसई की सबसे बड़ी शेयरधारक है।
दिग्गज बैंकों और लॉ फर्म्स की फौज संभाल रही है कमान
देश के इस सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज ने अपने आईपीओ प्रोसेस को सुचारू रूप से चलाने के लिए देश-विदेश के 20 बड़े इनवेस्टमेंट बैंकों को शॉर्टलिस्ट किया है। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी, जेएम फाइनेंशियल, जेपी मॉर्गन, एचएसबीसी (HSBC) सिक्योरिटीज और मॉर्गन स्टेनली जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं। इसके साथ ही कानूनी प्रक्रियाओं को देखने के लिए सिरिल अमरचंद मंगलदास, ट्राईलीगल (Trilegal) और अमेरिका की लैथम एंड वॉटकिन्स जैसी 7 से 9 प्रतिष्ठित लॉ फर्म्स को भी इस काम में लगाया गया है।
8GB RAM और 8,100mAh बैटरी के साथ आया Vivo का नया स्मार्टफोन
6 Jul, 2026 01:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: स्मार्टफोन निर्माता कंपनी वीवो (Vivo) ने अपने यूजर्स के लिए एक नया हैंडसेट बाजार में उतारा है। कंपनी ने पिछले साल सितंबर में चीन के मार्केट में धमाल मचाने वाले अपने लोकप्रिय स्मार्टफोन Vivo Y500 5G का अब एक नया 4G वेरिएंट लॉन्च कर दिया है। हालांकि, वीवो ने इस किफायती 4G डिवाइस को फिलहाल कुछ चुनिंदा वैश्विक बाजारों (ग्लोबल मार्केट) में ही पेश किया है। नए Vivo Y500 4G में इसके ओरिजिनल 5G मॉडल की तुलना में कुछ बड़े और दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
बैटरी क्षमता में किया गया बदलाव
नए Vivo Y500 4G और इसके पुराने 5G वेरिएंट के बीच सबसे बड़ा और मुख्य अंतर इसकी पावर बैकअप क्षमता में देखने को मिलता है। जहां इसके 5G मॉडल में एक बेहद दमदार और बड़ी बैटरी दी गई थी, वहीं कंपनी ने इस नए 4G वेरिएंट की बैटरी साइज को थोड़ा छोटा कर दिया है। हालांकि, कम कीमत वाले इस 4G वेरिएंट के हिसाब से यह बैटरी भी आम यूजर्स के दैनिक कामकाज और सामान्य इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सक्षम है।
कैमरा डिजाइन में नया लुक
बैटरी के अलावा फोन के बैक पैनल यानी रियर डिजाइन में भी बड़ा कॉस्मेटिक बदलाव किया गया है। Vivo Y500 5G में जहां पीछे की तरफ एक बड़ा गोल (सर्कुलर) कैमरा मॉड्यूल दिया गया था, वहीं नए Vivo Y500 4G वेरिएंट में कंपनी ने उस डिजाइन को छोड़ते हुए एक ट्रेंडी आयताकार (रेक्टेंगुलर) कैमरा मॉड्यूल दिया है। यह नया कैमरा सेटअप फोन को एक अलग और फ्रेश लुक प्रदान करता है।
ग्लोबल मार्केट से भारत आगमन की उम्मीद
चूंकि इस फोन को अभी केवल कुछ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सीमित रूप से लॉन्च किया गया है, इसलिए इसके भारतीय बाजार में आने को लेकर तकनीकी विश्लेषक काफी उम्मीदें जता रहे हैं। वीवो की 'Y' सीरीज भारत में अपने बजट फ्रेंडली स्मार्टफोन और दमदार लुक्स के लिए जानी जाती है। ऐसे में माना जा रहा है कि कंपनी जल्द ही इस किफायती 4G मॉडल को भारतीय उपभोक्ताओं के लिए भी पेश कर सकती है, जहां इसकी सीधी टक्कर बजट सेगमेंट के अन्य ब्रांड्स से होगी।
कंपनी के Q1 प्रदर्शन ने बढ़ाया भरोसा, नए चेयरमैन के ऐलान पर शेयर में तेजी
6 Jul, 2026 12:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के ऋणदाता, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के शेयरों में सोमवार, 6 जुलाई को शानदार रौनक देखने को मिली। दिन के कारोबार के दौरान बीएसई (BSE) पर बैंक का शेयर करीब 3 प्रतिशत तक उछलकर 825.10 रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, शेयर में आई इस तेजी की मुख्य वजह शनिवार को बैंक द्वारा जारी किए गए अप्रैल-जून 2026 तिमाही के शानदार बिजनेस अपडेट और नए चेयरमैन की नियुक्ति की घोषणा है। इन सकारात्मक संकेतों के दम पर बैंक का कुल मार्केट कैप (बाजार पूंजीकरण) भी बढ़कर 12.67 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गया है।
लोन और डिपॉजिट में शानदार सालाना बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) के बिजनेस अपडेट के अनुसार, एचडीएफसी बैंक के लोन और डिपॉजिट दोनों में ही सालाना आधार पर दमदार बढ़त दर्ज की गई है। जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही के दौरान बैंक के मुख्य वित्तीय आंकड़े इस प्रकार रहे:
कुल लोन (ग्रॉस एडवांसेज): सालाना आधार पर 15.4% की बढ़त के साथ ₹30.61 लाख करोड़ तक पहुंच गए।
कुल डिपॉजिट (जमा राशि): पिछले साल के मुकाबले 14.7% मजबूत होकर ₹31.7 लाख करोड़ रहे।
टाइम डिपॉजिट (फिक्स्ड डिपॉजिट): 17.4% की बड़ी छलांग लगाकर 21.45 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर आ गए।
कासा (CASA) डिपॉजिट: करंट और सेविंग्स अकाउंट डिपॉजिट में 9.4% की वृद्धि हुई, जो ₹10.25 लाख करोड़ दर्ज किए गए। इसके अलावा, बैंक के 'मैनेजमेंट के तहत एडवांसेज' (Advances under Management) भी 12.4% बढ़कर ₹31.27 लाख करोड़ पर पहुंच गए हैं।
राजीव कुमार होंगे बैंक के नए पार्ट-टाइम चेयरमैन
एचडीएफसी बैंक ने शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए राजीव कुमार को अपना नया पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त करने का ऐलान किया है। यह पद अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद पिछले 3 महीनों से खाली चल रहा था। इसके साथ ही बैंक के बोर्ड ने उन्हें एडिशनल इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में भी मंजूरी दे दी है। राजीव कुमार का कार्यकाल चेयरमैन के तौर पर 3 साल और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में 4 साल का होगा। चेयरमैन के पद पर उनकी अंतिम नियुक्ति भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी के बाद प्रभावी होगी, जबकि इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के पद के लिए 5 अगस्त को होने वाली बैंक की सालाना आम बैठक (AGM) में शेयरहोल्डर्स से मंजूरी ली जाएगी।
ब्रोकरेज फर्म्स हुए बुलिश, सभी 47 विश्लेषकों ने दी 'बाय' रेटिंग
बैंक के इस तिमाही प्रदर्शन और नए नेतृत्व के फैसले के बाद दिग्गज ब्रोकरेज हाउस इस स्टॉक पर काफी भरोसा जता रहे हैं। विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन (Bernstein) ने इस शेयर पर अपनी "आउटपरफॉर्म" रेटिंग को बरकरार रखते हुए 1,150 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस दिया है। वहीं जेफरीज (Jefferies) ने भी 1,050 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ अपनी "बाय" (खरीदारी) की रेटिंग जारी रखी है। सबसे खास बात यह है कि इस स्टॉक को ट्रैक करने वाले सभी 47 बाजार विश्लेषकों ने इस पर "बाय" रेटिंग बनाए रखी है। गौरतलब है कि पिछले एक महीने में यह शेयर 10 प्रतिशत तक चढ़ चुका है, हालांकि लंबी अवधि में देखें तो यह पिछले एक साल के मुकाबले अब भी करीब 17 प्रतिशत नीचे ट्रेड कर रहा है।
गोल्ड खरीदने का मौका? देशभर में सोने की कीमतों में गिरावट, देखें ताजा रेट
6 Jul, 2026 11:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: घरेलू सर्राफा बाजार में सोमवार, 6 जुलाई की सुबह सोने और चांदी की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। देश के अधिकांश बड़े शहरों में आज 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के दाम कम हुए हैं। दिल्ली में आज 24 कैरेट सोना गिरकर $146,870$ रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। हालांकि, अगर पिछले पूरे हफ्ते पर नजर डालें, तो सोने में जोरदार तेजी रही थी, जहां 24 कैरेट सोना करीब $2,780$ रुपये और 22 कैरेट सोना $2,550$ रुपये प्रति 10 ग्राम तक मजबूत हुआ था। वैश्विक स्तर पर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) फिलहाल $4,175.02$ डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।
महानगरों से लेकर प्रमुख शहरों तक गोल्ड रेट
देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय टैक्स और चुंगी के कारण सोने की कीमतों में थोड़ा अंतर देखा जा रहा है। आज देश के प्रमुख शहरों में कीमतें इस प्रकार हैं:
शहर
22 कैरेट सोने का भाव (₹/10 ग्राम)
24 कैरेट सोने का भाव (₹/10 ग्राम)
दिल्ली
1,34,640
1,46,870
चेन्नई
1,34,540
1,49,450
अहमदाबाद
1,34,810
1,46,770
भोपाल
1,34,540
1,46,770
मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, पुणे, बेंगलुरु
1,34,490
1,46,720
जयपुर, लखनऊ, चंडीगढ़
1,34,640
1,46,870
वैश्विक मांग कमजोर, जेपी मॉर्गन का अनुमान
दिग्गज वैश्विक वित्तीय संस्थान जेपी मॉर्गन (JPMorgan) के विश्लेषकों का मानना है कि इस साल सोने की कीमतों में तेजी तो आएगी, लेकिन इसकी रफ्तार सीमित रह सकती है। इसका मुख्य कारण यह है कि प्रमुख औद्योगिक और उपभोक्ता सेक्टरों से सोने की वैसी मजबूत मांग नहीं निकल रही है जैसी उम्मीद की जा रही थी। हालांकि, लंबी अवधि के अनुमान के अनुसार, साल की तीसरी तिमाही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना $4,300$ डॉलर प्रति औंस और चौथी तिमाही तक $4,500$ डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू सकता है।
चांदी की चमक भी पड़ी फीकी
सोने के नक्शेकदम पर चलते हुए आज चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। 6 जुलाई की सुबह भारतीय बाजार में चांदी $2,49,900$ रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह के दौरान चांदी में $10,000$ रुपये की बड़ी तेजी देखी गई थी, जिसके बाद अब मुनाफावसूली हावी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी (स्पॉट सिल्वर) $62.47$ डॉलर प्रति औंस पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू स्तर पर स्थानीय मांग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की चाल जैसे मिले-जुले ग्लोबल फैक्टर्स इस उतार-चढ़ाव को तय कर रहे हैं।
दुनिया को राहत! ओपेक+ ने अगस्त से बढ़ाया तेल उत्पादन, जानें कितना होगा कुल आउटपुट
6 Jul, 2026 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: ओपेक प्लस (OPEC+) देशों ने वैश्विक बाजार को देखते हुए कच्चे तेल के उत्पादन को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। संगठन ने आगामी अगस्त 2026 से तेल उत्पादन में प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल की बढ़ोतरी करने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल का निर्यात फिर से पटरी पर लौट रहा है और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें युद्ध से पहले वाले स्तर पर आ गई हैं।
युद्ध के बाद उत्पादन में उतार-चढ़ाव
पश्चिम एशिया में उपजे संघर्ष के कारण तेल उत्पादन पर काफी बुरा असर पड़ा था। ओपेक प्लस समूह का कुल उत्पादन जो फरवरी में 4.28 करोड़ बैरल प्रतिदिन था, वह मई तक गिरकर 3.31 करोड़ बैरल प्रतिदिन पर आ गया था। हालांकि, जून से निर्यात में कुछ सुधार जरूर देखा गया, लेकिन उत्पादन अब भी संकट से पहले के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अप्रैल के आखिर में इस समूह से अलग होने के फैसले ने भी संगठन के समीकरण बदले हैं।
कोटा बढ़ोतरी और चरणबद्ध वापसी
ओपेक और उसके सहयोगी देशों के 7 बड़े उत्पादकों ने अप्रैल से जुलाई के बीच अपने तय कोटे में लगभग 8 लाख बैरल प्रतिदिन की वृद्धि की थी। लेकिन तनाव के चलते सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण बाजार पर इसका सकारात्मक असर तुरंत नहीं दिख सका। अब सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, अल्जीरिया, कजाकिस्तान और ओमान जैसे देश साल 2023 में तय की गई 16.5 लाख बैरल प्रतिदिन की स्वैच्छिक कटौती को धीरे-धीरे खत्म कर रहे हैं।
कीमतें सामान्य होने की मुख्य वजहें
तमाम भू-राजनीतिक तनावों और आपूर्ति में दिक्कतों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर पर आ चुकी हैं। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
चीन की ओर से आयात की मांग का कमजोर होना।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के बाहर के देशों से तेल की सप्लाई बढ़ना।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा अपने रणनीतिक तेल भंडार से रिकॉर्ड मात्रा में तेल जारी किया जाना।
बाजार में ओवरसप्लाई का खतरा
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एक तरफ जहां सप्लाई तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ मांग उस रफ्तार से नहीं है। ऐसे में बाजार में 'ओवरसप्लाई' (जरूरत से ज्यादा तेल) की स्थिति बन सकती है, जिससे आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा। इसके अलावा, यूएई जैसे बड़े खिलाड़ी के ओपेक छोड़ने से अब इस संगठन की एकजुटता और भविष्य की रणनीतियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
Bank of Baroda पर ₹63.6 लाख की पेनाल्टी, RBI ने GIC Housing Finance पर भी लिया एक्शन
4 Jul, 2026 12:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) पर नियमों की अनदेखी के चलते 63.6 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। केंद्रीय बैंक द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बैंक ऑफ बड़ौदा 'उधार देने वालों के लिए उचित व्यवहार संहिता' (Fair Practices Code for Lenders) और 'अपने ग्राहक को जानें' (Know Your Customer यानी KYC) को लेकर जारी किए गए दिशा-निर्देशों के कुछ बेहद महत्वपूर्ण प्रावधानों का ठीक से पालन नहीं कर रहा था। इसी लापरवाही को देखते हुए आरबीआई ने 30 जून, 2026 के अपने एक सख्त आदेश के जरिए बैंक पर 63.60 लाख रुपये की यह दंडात्मक कार्रवाई की है।
आरबीआई ने स्पष्ट किया कि 31 मार्च, 2025 तक की वित्तीय स्थिति के आधार पर बैंक ऑफ बड़ौदा का विस्तृत वैधानिक निरीक्षण (Statutory Inspection) किया गया था। इस निरीक्षण के दौरान कई तकनीकी खामियां और नियमों का उल्लंघन सामने आया, जिसके बाद केंद्रीय बैंक ने बैंक ऑफ बड़ौदा को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में बैंक से यह जवाब मांगा गया था कि केंद्रीय बैंक के नियमों और निर्देशों का पालन न करने के लिए उस पर वित्तीय जुर्माना क्यों न लगाया जाए।
पर्सनल हियरिंग और जांच के बाद सही पाए गए आरोप
इस कारण बताओ नोटिस पर बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा दिए गए लिखित जवाब, उनके द्वारा प्रस्तुत की गई अतिरिक्त जानकारियों और पर्सनल हियरिंग (व्यक्तिगत सुनवाई) के दौरान बैंक के प्रतिनिधियों द्वारा मौखिक रूप से दी गई दलीलों पर आरबीआई ने गहराई से विचार किया। पूरी समीक्षा और तथ्यों के मिलान के बाद, भारतीय रिजर्व बैंक इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ नियमों के उल्लंघन के आरोप पूरी तरह सही थे और उन पर मौद्रिक जुर्माना लगाना बेहद जरूरी था।
जांच में यह भी सामने आया कि बैंक ने कुछ लोन खातों में तय किए गए आधिकारिक मानदंडों से परे जाकर ग्राहकों से अधिक ब्याज वसूला था, जो उचित बैंकिंग व्यवहार संहिता का खुला उल्लंघन है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल विनियामक अनुपालन (Regulatory Compliance) में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य ग्राहकों के साथ बैंक द्वारा किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर सवाल उठाना नहीं है।
जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड पर भी लगा जुर्माना
भारतीय रिजर्व बैंक ने एक अन्य आधिकारिक बयान में गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र पर भी नकेल कसी है। आरबीआई ने 'जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड' (GIC Housing Finance) पर भी केवाईसी (KYC) दिशानिर्देशों के उल्लंघन के लिए 3.1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
नेशनल हाउसिंग बैंक ने 31 मार्च, 2025 तक की वित्तीय स्थिति के आधार पर इस हाउसिंग फाइनेंस कंपनी का विस्तृत वैधानिक निरीक्षण किया था, जिसके बाद कंपनी को नोटिस जारी किया गया था। जांच में मुख्य आरोप यह था कि कंपनी अपने ग्राहकों के खातों की रिस्क कैटेगरी (जोखिम श्रेणी) का हर 6 महीने में एक बार रिव्यू करने की अनिवार्य प्रणाली को लागू करने में पूरी तरह विफल रही थी। कंपनी के स्पष्टीकरणों पर विचार करने के बाद, आरोपों की पुष्टि होने पर आरबीआई ने यह आर्थिक जुर्माना तय किया है।
Yes Bank के लोन और एडवांसेज में 18% की बढ़ोतरी, डिपॉजिट भी 14% बढ़े
4 Jul, 2026 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। निजी क्षेत्र के प्रमुख ऋणदाता 'यस बैंक' (Yes Bank) के शेयरों पर सोमवार, 6 जुलाई को बाजार खुलने के साथ ही निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। बैंक द्वारा साझा किए गए हालिया आंकड़ों के बाद इस शेयर में तेजी आने की मजबूत उम्मीद जताई जा रही है। दरअसल, यस बैंक ने शुक्रवार, 3 जुलाई को शेयर बाजार बंद होने के बाद चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के अपने प्रोविजनल बिजनेस अपडेट और तिमाही प्रदर्शन का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया है।
एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, पहली तिमाही के दौरान यस बैंक के लोन और एडवांसेज में साल-दर-साल (YoY) आधार पर 18.4% की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके बाद कुल एडवांस का आंकड़ा बढ़कर ₹2.85 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। इसके साथ ही, बैंक के कुल डिपॉजिट (जमा पूंजी) में भी 14.3% का उछाल देखा गया है, जो अब बढ़कर ₹3.15 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गए हैं। हालांकि, अगर तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर देखें, तो जहां लोन और एडवांसेज में 4.3% की वृद्धि हुई है, वहीं कुल जमा में 1.1% की आंशिक कमी दर्ज की गई है।
कैसा रहा कासा (CASA) और अन्य बैंकिंग वित्तीय अनुपात?
यस बैंक के मुख्य प्रोविजनल वित्तीय आंकड़े इस प्रकार रहे:
CASA डिपॉजिट: बैंक का करेंट अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट (CASA) डिपॉजिट ₹1.03 लाख करोड़ रहा। यह साल-दर-साल आधार पर 14.3% की बढ़त दर्शाता है, हालांकि पिछली मार्च तिमाही के मुकाबले इसमें 7.8% की गिरावट आई है।
CASA रेश्यो: सर्टिफिकेट्स ऑफ डिपॉजिट (CDs) को मिलाकर बैंक का कासा अनुपात 32.7% रहा। यह पिछली जून 2025 तिमाही के (32.8%) के लगभग बराबर है, लेकिन मार्च 2026 तिमाही के (35.1%) के मुकाबले इसमें मामूली नरमी है।
क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेश्यो: 30 जून, 2026 तक बैंक का क्रेडिट-टू-डिपॉजिट अनुपात सुधरकर 90.5% हो गया है, जो मार्च 2026 के आखिर में 85.7% और पिछले साल इसी तिमाही में 87.4% दर्ज किया गया था।
लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो (LCR): कंसोलिडेटेड बेसिस पर बैंक का औसत तिमाही एलसीआर शानदार सुधार के साथ 138.5% पर पहुंच गया है, जो मार्च 2026 तिमाही में 119.0% और जून 2025 तिमाही में 135.8% था।
बड़ा फंड जुटाने की तैयारी: शेयरधारकों से ली जाएगी मंजूरी
कारोबार विस्तार और अपनी पूंजीगत स्थिति को और अधिक मजबूत करने के लिए यस बैंक ने एक बड़े फंड रेजिंग प्लान की भी घोषणा की है। बैंक एक या एक से अधिक चरणों में विभिन्न माध्यमों से कुल ₹16,000 करोड़ का फंड जुटाने की योजना बना रहा है:
इक्विटी सिक्योरिटीज के जरिए: पात्र माध्यमों से ₹7,500 करोड़ तक जुटाने का प्रस्ताव।
डेट सिक्योरिटीज (ऋण साधनों) के जरिए: ₹8,500 करोड़ तक की पूंजी जुटाने का प्रस्ताव।
यस बैंक के प्रबंधन के मुताबिक, इस फंड को घरेलू और विदेशी बाजारों में सभी आवश्यक परमिशन वाले तरीकों (जैसे QIP या बॉन्ड्स) से जुटाया जा सकता है। इस डेट इश्यू में भारतीय मुद्रा (INR) के साथ-साथ विदेशी करेंसी में डिनॉमिनेटेड इंस्ट्रूमेंट भी शामिल हो सकते हैं। इस बड़े प्रस्ताव को आगामी 19 अगस्त, 2026 को होने वाली बैंक की 22वीं सालाना आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों और संबंधित रेगुलेटर्स के सामने अंतिम मंजूरी के लिए रखा जाएगा। पहली तिमाही के मजबूत प्रोविजनल आंकड़े बताते हैं कि बैंक अपनी एसेट क्वालिटी और क्रेडिट ग्रोथ को लेकर सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
होर्मुज संकट कम होने से कच्चा तेल सस्ता होने के संकेत, भारतीय कंपनियों को राहत
4 Jul, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। वैश्विक ऊर्जा बाजार से भारत के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास भू-राजनीतिक तनाव कम होने से कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति से जुड़ी वैश्विक चिंताएं अब लगभग पूरी तरह खत्म हो गई हैं। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब द्वारा अपने तेल निर्यात को दोबारा सामान्य दरों पर बढ़ाने से वैश्विक बाजार में क्रूड की कीमतों में गिरावट और ज्यादा गहरी हो गई है। चीन की तरफ से मांग कमजोर होने और बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ने से अब 'सप्लाई सरप्लस' (मांग से अधिक आपूर्ति) की स्थिति बन रही है, जिससे आने वाले दिनों में कच्चे तेल के दामों में और बड़ी गिरावट की उम्मीद है।
मशहूर वैश्विक वित्तीय सेवा प्रदाता 'सिटीग्रुप' ने अपनी होल्डिंग रिपोर्ट में कहा है कि भू-राजनीतिक तनाव में आई कमी के चलते ब्रेंट क्रूड ने संघर्ष के दौरान हुई अपनी सारी बढ़त गंवा दी है और इसमें ऊपरी स्तरों से करीब 30 फीसदी की गिरावट देखी जा चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि हालात इसी तरह सामान्य रहे, तो ब्रेंट क्रूड के दाम इस साल के अंत तक गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ सकते हैं।
इस अंतरराष्ट्रीय राहत से भारत की सरकारी तेल कंपनियों को अपने पिछले घाटे की भरपाई करने में बड़ी मदद मिलेगी, जिन्हें जून तिमाही तक करीब 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल के दाम इसी तरह कम रहे, तो सरकार आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती कर बड़ी राहत देने पर गंभीरता से विचार कर सकती है।
खाड़ी देशों से निर्यात युद्ध-पूर्व स्तर के 90% तक पहुंचा
तेल बाजार की इस बड़ी गिरावट के पीछे खाड़ी देशों से होने वाली निर्बाध आपूर्ति है। सऊदी अरब पिछले हफ्ते के अंत में अपने विशाल 'रास तनुरा टर्मिनल' से शिपमेंट को दोबारा शुरू करने के बाद, अपने पुराने स्तर के करीब 90 फीसदी पर कच्चे तेल को लोड करने में कामयाब रहा है। सऊदी अरब की यह वापसी उसके पड़ोसी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसी ही है, जिसने पिछले महीने अपने तेल निर्यात को युद्ध-पूर्व स्तर यानी 39 लाख बैरल प्रतिदिन से भी अधिक पर बहाल कर दिया था।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि होर्मुज के रास्ते अब कच्चे तेल की आपूर्ति एक करोड़ बैरल प्रतिदिन से अधिक हो गई है। इसके चलते बाजार में तेल की एक तरह से बाढ़ आ गई है, वह भी ऐसे समय में जब युद्ध के दौरान अपनाए गए कई वैकल्पिक और लंबे समुद्री रूट अब भी लागू हैं। दिग्गज ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली ने भी हाल के हफ्तों में कच्चे तेल के मूल्य के अपने अनुमानों में दो बार कटौती की है और आने वाले समय में सप्लाई सरप्लस को लेकर बाजार को सचेत किया है।
ऊर्जा बाजार में धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं हालात
होर्मुज के समुद्री मार्ग से जहाजों का आवागमन पूरी तरह सुचारू होने के साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार अब धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है। इससे निकट अवधि में कच्चे तेल की उपलब्धता में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। यह वैश्विक रिफाइनरियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत है, जिन्हें संघर्ष के दिनों में महंगे और वैकल्पिक स्रोतों से तेल सुरक्षित करने के लिए भारी आपाधापी का सामना करना पड़ रहा था। तेल की कीमतें घटने से भारत जैसे बड़े आयातक देश के राजकोषीय घाटे में कमी आएगी और मुद्रास्फीति (महंगाई) को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
आम आदमी को महंगाई का झटका, कमजोर मानसून से बढ़ सकती हैं खाद्य कीमतें
4 Jul, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। इस साल आम आदमी की रसोई और थाली का बजट और अधिक बिगड़ सकता है। देश की प्रतिष्ठित रेटिंग एजेंसी 'केयरएज रेटिंग्स' (CareEdge Ratings) की होल्डिंग रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में देश में औसत खाद्य महंगाई (Food Inflation) बढ़कर 6 फीसदी के आसपास रह सकती है। वहीं, आम उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाली खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) भी 5 फीसदी के उच्च स्तर पर टिक सकती है। आर्थिक और कृषि विश्लेषकों के अनुसार, इस बड़ी चिंता की मुख्य वजह मानसून की शुरुआत में हुई कम बारिश है, जिससे देश में खेती-किसानी और आगामी फसलों के उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका गहरा गई है।
रिपोर्ट के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, एक से 30 जून के बीच देश में सामान्य के मुकाबले 40 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मानसून की इस भारी कमी ने सरकार और आम आदमी दोनों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। गौरतलब है कि मई के महीने में पहले ही खाद्य तेल की महंगाई दर 9.5 फीसदी के उच्च स्तर पर बनी हुई थी। ऐसे में कमजोर मानसून और फसलों की धीमी बुआई आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों को और ज्यादा भड़का सकती है।
जुलाई महीने में भी कम बारिश का अनुमान
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी कृषि क्षेत्र को लेकर चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, जुलाई में मानसून की बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) के 94 फीसदी से भी कम रहने का अनुमान है। इससे कृषि उत्पादन एवं खरीफ फसलों की पैदावार को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। गौरतलब है कि भारत के कृषि क्षेत्र में सालाना होने वाली कुल बारिश का लगभग 70 फीसदी हिस्सा अकेले दक्षिण-पश्चिम मानसून से ही आता है, जो इस बार उम्मीद के मुताबिक सक्रिय नहीं दिख रहा है।
इतिहास के सबसे सूखे महीनों में शुमार हुआ जून
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत में साल 1901 के बाद से यानी पिछले 125 से अधिक वर्षों के इतिहास में इस बार का जून पांचवां सबसे सूखा महीना दर्ज किया गया है, जहां देश स्तर पर बारिश सामान्य से 40 फीसदी तक कम रही।
मौसम विभाग ने पहले जून में मानसून की बारिश लंबी अवधि के औसत के 92 फीसदी से कम रहने की भविष्यवाणी की थी, लेकिन जमीनी हालात उससे भी बदतर रहे। आईएमडी के ताजा बुलेटिन के अनुसार, आने वाले दिनों में भी देश के मध्य, पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों के बड़े इलाकों में औसत से कम बारिश होने का अनुमान है, जिसका सीधा असर बाजार में अनाज और सब्जियों की आपूर्ति पर पड़ेगा।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
शिक्षा मंत्रालय में बड़ा बदलाव! प्रल्हाद जोशी ने संभाला कार्यभार
'न कर्फ्यू-न दंगा, सब चंगा', योगी के बयान से मैनपुरी की सियासत गरमाई
