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500 शहर बनेंगे नए आर्थिक केंद्र, निर्मला सीतारमण ने बताई विकास की रणनीति
4 Jul, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को फ्रांस के एक प्रमुख आर्थिक मंच 'रेनकॉन्ट्रेस इकनॉमिक्स डी'एक्स-एन-प्रोवेंस' में वैश्विक मंच पर भारत का मजबूत आर्थिक पक्ष रखा। उन्होंने देश के मध्यम वर्ग (Middle Class) की सराहना करते हुए उसे भारत की आर्थिक वृद्धि का असली इंजन बताया। उन्होंने एक बड़ा विजन साझा करते हुए कहा कि देश के लगभग 500 शहर अब आर्थिक गतिविधियों के अगले बड़े केंद्र (Economic Hubs) के रूप में उभरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पैनल चर्चा में भाग लेते हुए वित्त मंत्री ने आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से बताया कि आज भारत की कुल आबादी का लगभग 31 फीसदी हिस्सा मध्यम वर्ग के अंतर्गत आता है।
वित्त मंत्री ने आर्थिक विकास के आंकड़े साझा करते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के बाद से देश का मध्यम वर्ग सालाना 6.3 फीसदी की शानदार दर से बढ़ रहा है। उन्होंने अनुमान जताया कि आने वाले समय में भारत में होने वाले कुल उपभोक्ता खर्च का लगभग 93 फीसदी हिस्सा इसी मध्यम वर्ग या इससे थोड़े अधिक संपन्न उपभोक्ताओं के जरिए आएगा। सीतारमण ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह मध्यम वर्ग अब केवल बड़े महानगरों तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी बहुत तेजी से फैल रहा है, जिससे धन और समृद्धि का वितरण स्वचालित रूप से बड़े शहरों से निकलकर छोटे कस्बों तक पहुंच रहा है।
चीन को पीछे छोड़ देगा भारत का मध्यम वर्ग
पैनल चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि मध्यम वर्ग केवल देश की आर्थिक तरक्की का लाभार्थी ही नहीं है, बल्कि वास्तव में वही इस पूरी जीडीपी ग्रोथ का मुख्य चालक है। इस वर्ग की मजबूत खपत (Consumption Pattern) ही पूरी अर्थव्यवस्था को रफ्तार दे रही है।
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के एक हालिया अध्ययन का हवाला देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न नीतिगत कदमों के कारण भारत साल 2030 से 2035 के बीच मध्यम वर्ग की आबादी के मामले में पड़ोसी देश चीन को भी पीछे छोड़ देगा। उन्होंने रेखांकित किया कि कोविड-19 महामारी के वैश्विक संकट के बाद भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है, जिसका मुख्य श्रेय इसी मध्यम वर्ग द्वारा संचालित आंतरिक खपत को जाता है।
मध्यम वर्ग के विस्तार के लिए सरकार की बड़ी पहलें
देश में मध्यम वर्ग के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। वित्त मंत्री ने इस दिशा में उठाए गए कई महत्वपूर्ण नीतिगत कदमों की जानकारी दी:
वित्तीय समावेशन: समाज के हर तबके को बैंकिंग और औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ना।
जीएसटी दर युक्तिकरण: आम उपयोग की वस्तुओं पर माल एवं सेवा कर (GST) की दरों को तार्किक और कम करना।
बिना गारंटी ऋण: छोटे और मध्यम उद्यमियों को स्वरोजगार के लिए बिना किसी गारंटी के आसान लोन (जैसे मुद्रा योजना) मुहैया कराना।
प्रधानमंत्री आवास योजना: मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को उनके अपने पक्के घर का सपना पूरा करने के लिए सब्सिडी और वित्तीय सहायता देना।
वित्त मंत्री ने कहा कि इन संयुक्त कदमों से सीधे तौर पर मध्यम वर्ग को लाभ मिल रहा है और सरकार का अंतिम लक्ष्य यही है कि देश के अधिक से अधिक गरीब लोग गरीबी रेखा से बाहर निकलकर इस सशक्त मध्यम वर्ग का हिस्सा बनें।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कौशल विकास के नए अवसर
एआई (AI) तकनीक से मध्यम वर्ग को मिलने वाले लाभों और रोजगार की चिंताओं पर बात करते हुए वित्त मंत्री ने सकारात्मक दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा कि भारत का कार्यबल वैश्विक बाजार में आगे रहने के लिए लगातार अपने तकनीकी कौशल (Technical Skills) को अपग्रेड कर रहा है।
जो लोग एआई के आने से नौकरियों के विस्थापन या कम होने की आशंका से डरे हुए हैं, उन्हें सरकार की तरफ से व्यापक सुरक्षा और सहायता दी जा रही है। देश भर में बड़े स्तर पर एआई-केंद्रित कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके तहत निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ साझेदारी करके जिला स्तर पर विशेष 'एआई कौशल शिविर' आयोजित किए जा रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि भारत का मध्यम वर्ग देश की इस बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था में उभर रहे नए और उच्च वेतन वाले अवसरों का पूरा लाभ उठा पा रहा है।
एमएसएमई (MSME) और ग्लोबल डेटा सेंटर्स के रूप में उभरता भारत
देश में हो रहे इस बड़े आर्थिक बदलाव के कुछ बेहद ठोस संकेतक भी सामने आए हैं:
निर्यात में हिस्सेदारी: भारत के कुल वैश्विक निर्यात का लगभग 40 फीसदी हिस्सा देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) से आता है।
तकनीक का समावेश: ये छोटे और मध्यम उद्यम अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर बहुत तेजी से एआई-संचालित (AI-driven) बिजनेस मॉडल को अपना रहे हैं, जिससे बाजार में ऐसे कुशल पेशेवरों की मांग तेजी से बढ़ी है जो नए तकनीकी समाधान दे सकें।
वैश्विक पसंदीदा गंतव्य: भारत आज दुनिया भर की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर' (GCC) और अत्याधुनिक 'डेटा सेंटर' के रूप में पहली पसंद बनकर उभरा है।
बड़ी वैश्विक कंपनियां भारत में अपनी उपस्थिति का लगातार विस्तार कर रही हैं क्योंकि भारत के पास एआई के नेतृत्व वाली इस आर्थिक वृद्धि और डिजिटल परिवर्तन को गति देने के लिए दुनिया का सबसे बड़ा और प्रतिभावान कुशल युवाओं का समूह मौजूद है।
गोल्ड में जोरदार तेजी, निवेशकों को राहत; 4500 डॉलर तक पहुंचने का अनुमान
4 Jul, 2026 07:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। इस हफ्ते सोने और चांदी के निवेशकों ने राहत की सांस ली है। पिछले कुछ समय से जारी भारी गिरावट के बाद, मई के बाद यह पहला हफ्ता है जब सोने की कीमतों में शानदार साप्ताहिक तेजी दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम 4,200 डॉलर प्रति औंस के बेहद करीब पहुंच गए हैं। इस कारोबारी सप्ताह में वैश्विक स्तर पर सोने में 2.2 फीसदी की बड़ी तेजी आई है। हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को भी घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों में कीमती धातुओं में बढ़त का रुख बना रहा, जिसमें चांदी भी सोने के कदम-से-कदम मिलाकर दौड़ती नजर आई।
इन तीन बड़े कारणों से सोने की कीमतों में आया उछाल
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, सोने की कीमतों में आई इस हालिया तेजी के पीछे मुख्य रूप से तीन अंतरराष्ट्रीय कारक जिम्मेदार हैं:
अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख: अमेरिका में ब्याज दरें (Interest Rates) बढ़ने की उम्मीदें अब काफी कम हो गई हैं। जून महीने के लिए रोजगार के नए अवसरों के जो कमजोर आंकड़े आए हैं, उसके बाद यह माना जा रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व फिलहाल ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं करने जा रहा है। आमतौर पर ब्याज दरें बढ़ने पर सोने की चमक घटती है, लेकिन मौजूदा रुख से इसे सहारा मिला है।
कमजोर होता डॉलर: काफी समय के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स में नरमी देखी जा रही है। डॉलर के कमजोर होने से अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए सोना खरीदना सस्ता और आकर्षक हो जाता है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की होल्डिंग रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने मई और जून के महीने में सोने की रिजर्व खरीदारी को काफी बढ़ा दिया है, जिससे बाजार को मजबूत सपोर्ट मिला है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,200 डॉलर के करीब पहुंचा सोना
'टीडी सिक्योरिटीज' में कमोडिटीज स्ट्रेटेजी के वैश्विक प्रमुख बार्ट मेलेक के अनुसार, सोना इस समय अपने मजबूत रेजिस्टेंस लेवल 4,280 डॉलर प्रति औंस की तरफ बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहा है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर बने इन्फ्लेशनरी प्रेशर (महंगाई के दबाव) के कारण इसके अगले साल से पहले 5,300 डॉलर के दीर्घकालिक टारगेट तक पहुंचने की उम्मीद थोड़ी कम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड (हाजिर सोना) 1.3 फीसदी चढ़कर 4,176.94 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी (सिल्वर) भी 2 फीसदी की छलांग लगाकर 62.42 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई।
भारतीय वायदा बाजार (MCX) में भी आया भारी उछाल
वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजारों पर भी साफ तौर पर देखने को मिला। घरेलू कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में शुक्रवार को गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स (वायदा कारोबार) में भारी तेजी दर्ज की गई:
धातु
वायदा भाव (MCX)
कुल बढ़त (रुपये में)
प्रतिशत उछाल
सोना (प्रति 10 ग्राम)
₹1,47,365
+ ₹1,607
1.10%
चांदी (प्रति किलोग्राम)
₹2,34,081
+ ₹4,845
2.11%
घरेलू और विदेशी बाजारों में सोने की यह शानदार वापसी इस बात का साफ संकेत है कि कीमती धातुएं अब मजबूत रिकवरी के रास्ते पर हैं। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) में आई आंशिक कमी ने भी बाजार के सेंटिमेंट को सुधारा है।
जेपी मॉर्गन ने दिया 4,500 डॉलर का नया टारगेट
दिग्गज वैश्विक निवेश बैंक जेपी मॉर्गन (JPMorgan) ने सोने को लेकर अपना सकारात्मक आउटलुक जारी किया है। बैंक का अनुमान है कि साल 2026 की तीसरी तिमाही में सोने की औसत कीमतें 4,300 डॉलर प्रति औंस और चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) तक यह बढ़कर 4,500 डॉलर के स्तर को छू सकती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वर्तमान में सोने की फिजिकल डिमांड उतनी मजबूत नहीं है जितनी उम्मीद की जा रही थी।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से लंबी अवधि में मजबूती के आसार
जेपी मॉर्गन के आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि सोने का लॉन्ग टर्म आउटलुक (लंबी अवधि का भविष्य) बेहद सकारात्मक बना हुआ है। विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करने के लिए की जा रही लगातार खरीदारी के दम पर यह तेजी साल 2027 तक जारी रह सकती है। इसके साथ ही आगामी महीनों में चांदी की औसत कीमतें भी 60 से 65 डॉलर प्रति औंस के बीच रहने का अनुमान जताया गया है।
मालूम हो कि इस साल की शुरुआत में सोना और चांदी अपने रिकॉर्ड लाइफ-टाइम हाई पर पहुंच गए थे, जिसके बाद 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच पैदा हुए तनाव व अन्य वैश्विक कारणों से बाजार में भारी मुनाफावसूली और गिरावट देखने को मिली थी, जिससे बाजार अब उबर रहा है।
WhatsApp के नए फीचर पर सरकार की नजर, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स डेटा लीक मामले में जांच जारी
3 Jul, 2026 04:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने अब सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने वॉट्सऐप (WhatsApp), सिग्नल और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स पर आने वाले 'यूजरनेम' फीचर को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सरकार का मानना है कि यह नया फीचर देश में डिजिटल धोखाधड़ी और अपराधों को एक नए स्तर पर ले जा सकता है।
यूजरनेम फीचर से बढ़ेगा खतरा, पहचान छिपाना होगा आसान
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के एक सम्मेलन के दौरान आईटी सचिव एस. कृष्णन ने इन प्लेटफॉर्म्स की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। वर्तमान में किसी भी मैसेजिंग ऐप को चलाने के लिए मोबाइल नंबर की जरूरत होती है, जिससे अपराधी को ट्रैक करना आसान होता है। लेकिन 'यूजरनेम' आधारित मैसेजिंग शुरू होने से कोई भी अपनी असली पहचान छिपा सकता है।
अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इस फीचर का फायदा उठाकर साइबर ठग किसी दूसरे का रूप (प्रतिरूपण) धारण कर सकते हैं और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देकर कानून की नजरों से बच सकते हैं। इसी को देखते हुए मंत्रालय ने वॉट्सऐप समेत अन्य प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर इस पर तुरंत स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। जब सचिव से पूछा गया कि क्या वॉट्सऐप ने जवाब के लिए और समय मांगा है, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार को ऐसा कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है और वे जल्द से जल्द जवाब की उम्मीद कर रहे हैं।
एप्पल की सप्लायर 'टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स' के डेटा लीक की जांच तेज
सम्मेलन के दौरान आईटी सचिव ने एक और बड़े मामले की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सरकार 'टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स' से जुड़े कथित डेटा लीक मामले की भी बारीकी से जांच कर रही है। बता दें कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक दिग्गज एप्पल (Apple) की वैश्विक विनिर्माण आपूर्ति शृंखला का एक बहुत बड़ा हिस्सा है, जो भारत में आईफोन (iPhone) के पार्ट्स बनाती है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कंपनी की बेहद संवेदनशील और आंतरिक जानकारी लीक होने की रिपोर्ट सामने आई थी। सरकार अब इस साइबर हमले की प्रकृति, इसके प्रभाव और इससे देश की साइबर सुरक्षा को होने वाले संभावित खतरों का पता लगा रही है।
बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे विदेशी VPN पर कसेगा शिकंजा
वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) के बढ़ते गलत इस्तेमाल को लेकर भी सरकार ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। आईटी सचिव कृष्णन के मुताबिक, वीपीएन की चुनौती से सिर्फ कानून के भरोसे नहीं निपटा जा सकता, इसके लिए 'तकनीकी और कानूनी' (Techno-Legal) दोनों तरह के कड़े कदम उठाने होंगे।
मंत्रालय का रुख: "मौजूदा नियमों के तहत भारत में काम करने वाले हर वीपीएन सेवा प्रदाता के लिए पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य है। लेकिन कई विदेशी कंपनियां देश के बाहर से सेवाएं दे रही हैं और नियमों का पालन नहीं कर रहीं। सरकार अब ऐसे तकनीकी रास्ते तलाश रही है जिससे भारत के अधिकार क्षेत्र से बाहर काम करने वाले इन ऐप्स पर भी प्रभावी ढंग से प्रतिबंध लागू किया जा सके।"
निवेशकों की हुई बल्ले-बल्ले! Nestle India देगी स्पेशल और फाइनल डिविडेंड
3 Jul, 2026 01:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। मैगी और किटकैट जैसे बेहद लोकप्रिय ब्रांड्स बनाने वाली दिग्गज एफएमसीजी (FMCG) कंपनी नेस्ले इंडिया (Nestle India) के निवेशकों के लिए एक शानदार ख़बर है। कंपनी के बोर्ड ने शुक्रवार (3 जुलाई) को हुई अपनी अहम बैठक में शेयरहोल्डर्स के लिए 'स्पेशल डिविडेंड' (विशेष लाभांश) देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कंपनी की ओर से प्रति शेयर 2 रुपये का स्पेशल डिविडेंड दिया जाएगा, जिसका भुगतान आगामी 30 जुलाई या उसके बाद से शुरू कर दिया जाएगा।
स्पेशल और फाइनल मिलाकर मिलेंगे कुल ₹7 प्रति शेयर
नेस्ले इंडिया ने हाल ही में समाप्त हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पहले ही 5 रुपये प्रति शेयर का 'फाइनल डिविडेंड' घोषित कर रखा था। अब इस नए ऐलान के बाद, कंपनी के निवेशकों को फाइनल और स्पेशल डिविडेंड दोनों को मिलाकर कुल 7 रुपये प्रति शेयर का बड़ा फायदा मिलने जा रहा है। इस संयुक्त डिविडेंड पर आज (3 जुलाई) को ही होने वाली कंपनी की सालाना आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों से अंतिम मंजूरी ली जाएगी। इससे पहले कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 7 रुपये का अंतरिम डिविडेंड भी दे चुकी है।
10 जुलाई है 'रिकॉर्ड डेट', जानिए किसे मिलेगा फायदा?
कंपनी प्रबंधन के मुताबिक, इस स्पेशल और फाइनल डिविडेंड का लाभ उठाने के लिए 10 जुलाई, 2026 को 'रिकॉर्ड डेट' तय किया गया है। इसका मतलब यह है कि 10 जुलाई तक जिन भी निवेशकों के नाम कंपनी के 'रजिस्टर ऑफ मेंबर्स' या डिपॉजिटरी रिकॉर्ड में बतौर शेयरहोल्डर दर्ज होंगे, वे सीधे तौर पर इस डिविडेंड के हकदार माने जाएंगे।
खबर के बाद नेस्ले के शेयरों में उछाल, 3 महीने में 22% चढ़ा स्टॉक
डिविडेंड की इस घोषणा के बाद शुक्रवार को नेस्ले इंडिया के शेयरों में बाजार के भीतर हल्की तेजी का रुख देखा गया। बीएसई (BSE) पर कंपनी का शेयर 1 प्रतिशत से ज्यादा की मजबूती के साथ 1,462.70 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। पिछले 3 महीनों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो नेस्ले के स्टॉक ने निवेशकों को करीब 22 प्रतिशत का तगड़ा रिटर्न दिया है। वर्तमान में 1 रुपये की फेस वैल्यू वाले इस शेयर का 52 सप्ताह का हाई 1,498.60 रुपये और लो 1,085 रुपये है। कंपनी का कुल मार्केट कैप 2.79 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
22 जुलाई को आएंगे जून तिमाही के नतीजे
निवेशकों और बाजार की नजरें अब नेस्ले इंडिया की आगामी 22 जुलाई को होने वाली बोर्ड बैठक पर टिकी हैं। इस बैठक में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के वित्तीय नतीजों को पेश और मंजूर किया जाएगा। अगर कंपनी के पिछले प्रदर्शन की बात करें, तो जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन आधार पर नेस्ले का कुल रेवेन्यू 6,747.79 करोड़ रुपये रहा था, जबकि कंपनी ने 1,114.11 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) कमाया था। बाजार विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आगामी तिमाहियों में भी कंपनी अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखेगी।
Q1 बिजनेस अपडेट ने बढ़ाया भरोसा, Bajaj Housing Finance पर जेपी मॉर्गन मेहरबान
3 Jul, 2026 01:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर की दिग्गज कंपनी बजाज हाउसिंग फाइनेंस (Bajaj Housing Finance) के शेयरों में शुक्रवार (3 जुलाई) को शानदार बढ़त देखने को मिली। कारोबार के दौरान कंपनी के शेयर बीएसई (BSE) पर 6 प्रतिशत तक उछलकर 94 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गए। दरअसल, कंपनी द्वारा एक दिन पहले जारी किए गए चालू वित्त वर्ष (2026-27) की पहली तिमाही के बेहतरीन आंकड़ों और उसके बाद ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म 'जेपी मॉर्गन' (JPMorgan) की तरफ से आए पॉजिटिव कमेंट्री के बाद निवेशकों ने इस शेयर में जमकर खरीदारी की है।
JPMorgan ने बदला नजरिया, 'पॉजिटिव कैटलिस्ट वॉच' में डाला
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन ने बजाज हाउसिंग फाइनेंस पर अपना रुख बदलते हुए इसकी रेटिंग को 'अंडरवेट' से अपग्रेड कर 'न्यूट्रल' कर दिया है। इसके साथ ही स्टॉक को 'पॉजिटिव कैटलिस्ट वॉच' कैटेगरी में रखा गया है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इसका मतलब यह है कि शॉर्ट टर्म में आने वाले वित्तीय नतीजों और ट्रिगर्स के दम पर इस शेयर में और तेजी देखने को मिल सकती है। ब्रोकरेज ने इसके लिए 85 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। जेपी मॉर्गन का मानना है कि कंपनी वित्त वर्ष 2026-27 में बाजार की उम्मीदों (22%) से बेहतर प्रदर्शन करते हुए करीब 25% की लोन ग्रोथ दर्ज कर सकती है।
जून तिमाही में लोन डिस्बर्समेंट 33% बढ़ा, AUM 1.50 लाख करोड़ के पार
कंपनी की तरफ से जारी आधिकारिक बिजनेस अपडेट के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन बेहद दमदार रहा है:
नया लोन वितरण: जून 2026 तिमाही में कंपनी ने करीब 19,500 करोड़ रुपये के लोन बांटे, जो पिछले साल की इसी तिमाही (14,651 करोड़ रुपये) के मुकाबले 33 प्रतिशत अधिक है।
एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM): 30 जून 2026 तक कंपनी का कुल एयूएम सालाना आधार पर 24 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है।
लोन एसेट्स: कंपनी की कुल लोन एसेट्स भी पिछले साल के 1.06 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अब 1.31 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई हैं।
3 महीने में 17% सुधरा स्टॉक, प्रमोटर्स की मजबूत हिस्सेदारी
बजाज फाइनेंस के मालिकाना हक वाली यह कंपनी सितंबर 2024 में 6,560 करोड़ रुपये के मेगा आईपीओ के साथ बाजार में लिस्ट हुई थी। वर्तमान में कंपनी का मार्केट कैप 76,000 करोड़ रुपये से अधिक है। पिछले एक साल के प्रदर्शन को देखें तो शेयर में कुछ गिरावट रही है, लेकिन पिछले 3 महीनों में इसने निचले स्तरों से शानदार रिकवरी दिखाते हुए निवेशकों को 17 प्रतिशत का दमदार रिटर्न दिया है। बीएसई पर इसका 52 सप्ताह का हाई 124.10 रुपये और लो 72.60 रुपये है। मार्च 2026 के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के मुताबिक, कंपनी में प्रमोटर्स के पास 86.70 प्रतिशत की मजबूत हिस्सेदारी बनी हुई है।
कैसा रहा पिछला वित्तीय ट्रैक रिकॉर्ड?
अगर कंपनी के पिछले वित्तीय प्रदर्शन की बात करें, तो जनवरी-मार्च 2026 तिमाही (Q4FY26) में स्टैंडअलोन आधार पर कंपनी का कुल रेवेन्यू 2,902.61 करोड़ रुपये रहा था, जबकि शुद्ध मुनाफा (Net Profit) 669.19 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। वहीं, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने 11,147.20 करोड़ रुपये के रेवेन्यू पर 2,560.34 करोड़ रुपये का शानदार मुनाफा कमाया था। विश्लेषकों को उम्मीद है कि फंड की लागत को समझदारी से मैनेज करने के कारण जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में भी कंपनी के मार्जिन मजबूत रहेंगे।
PB Fintech Stock Today: ओपनिंग बेल के साथ लुढ़का शेयर, जानें वजह
3 Jul, 2026 11:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: बड़ी ब्लॉक डील के बाद पीबी फिनटेक के शेयरों में भारी गिरावट, बाजार में रही बंपर तेजी
भारतीय शेयर बाजार के लिए 3 जुलाई का दिन मिला-जुला रुख लेकर आया। एक तरफ जहाँ मुख्य सूचकांकों (सेंसेक्स और निफ्टी) में लगातार तीसरे दिन शानदार तेजी देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर दिग्गज कंपनी पीबी फिनटेक (पॉलिसीबाजार की पैरेंट कंपनी) के शेयरों में बाजार खुलते ही भारी गिरावट दर्ज की गई। कंपनी में हुई एक बड़ी ब्लॉक डील के चलते निवेशकों ने आज बिकवाली पर जोर दिया।
पीबी फिनटेक का शेयर क्रैश, 1741 करोड़ रुपये की हुई ब्लॉक डील
शुक्रवार को बाजार खुलते ही पीबी फिनटेक के शेयरों पर भारी दबाव देखा गया। सुबह 10:00 बजे कंपनी का शेयर 7.31 फीसदी की बड़ी गिरावट के साथ 1,563.50 रुपये पर कारोबार कर रहा था। बाजार सूत्रों के मुताबिक, कंपनी के 2.3 फीसदी शेयरों की एक बड़ी ब्लॉक डील हुई है, जिसकी कुल वैल्यू करीब 1,741 करोड़ रुपये आंकी गई है।
स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, इस ब्लॉक डील के तहत करीब 1.08 करोड़ शेयरों का लेन-देन 1,601 रुपये प्रति शेयर के भाव पर हुआ। यह भाव पिछले कारोबारी दिन (2 जुलाई) के बंद भाव 1,682.10 रुपये से लगभग 4.8 फीसदी डिस्काउंट (कम कीमत) पर है। फिलहाल इस डील में आधिकारिक तौर पर खरीदार और विक्रेता के नाम सामने नहीं आए हैं।
टेमासेक होल्डिंग्स द्वारा हिस्सेदारी घटाने की चर्चा
बाजार में आई खबरों के मुताबिक, सिंगापुर की सॉवरेन इन्वेस्टमेंट फर्म 'टेमासेक होल्डिंग्स' अपनी सब्सिडियरी कंपनी 'मैकरिची इन्वेस्टमेंट्स' (MacRitchie Investments) के जरिए पीबी फिनटेक में अपनी हिस्सेदारी कम करना चाहती है। इस डील से पहले कंपनी में टेमासेक की कुल हिस्सेदारी 6.47 फीसदी थी। इस ब्लॉक डील के लिए सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया को एकमात्र प्लेसमेंट एजेंट नियुक्त किया गया था। इस सौदे के बाद टेमासेक पर अपनी बची हुई हिस्सेदारी बेचने के लिए 60 दिनों का लॉक-अप पीरियड लागू होगा।
इस साल अब तक 14 फीसदी टूट चुका है स्टॉक
72,000 करोड़ रुपये से अधिक के मार्केट कैप वाली पीबी फिनटेक के लिए यह साल अब तक उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इस साल अब तक कंपनी का शेयर करीब 14 फीसदी गिर चुका है, जबकि इस दौरान बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी में सिर्फ 7 फीसदी की गिरावट आई है।
पिछले कुछ महीनों में कई बड़े संस्थागत निवेशकों और प्रमोटर्स ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेची है:
मई 2026: कंपनी के को-फाउंडर्स यशीश दहिया और आलोक बंसल ने 654 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील के जरिए करीब 38 लाख शेयर (0.8% हिस्सेदारी) बेचे थे।
मई 2026: चीन की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी टेनसेंट (Tencent) ने भी पीबी फिनटेक में अपनी बची हुई 1.05 फीसदी हिस्सेदारी पूरी तरह बेच दी थी।
दूसरी तरफ शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन रौनक
पीबी फिनटेक में गिरावट के विपरीत, घरेलू शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। सुबह 10:20 बजे बाजार के मुख्य सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे:
सेंसेक्स: 506 अंक (0.65%) के उछाल के साथ 78,000 के स्तर पर पहुंच गया। (कारोबार के दौरान यह 655 अंक तक उछला, जिससे निवेशकों की संपत्ति में 2.43 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई)।
निफ्टी: 165 अंक (0.68%) की बढ़त के साथ 24,342 पर ट्रेड कर रहा था।
बैंक निफ्टी: इसमें भी 0.23 फीसदी की मजबूती देखी गई।
Gold Silver Price Today: देश-विदेश के बाजारों में सोना-चांदी चमके, जानें तेजी की वजह
3 Jul, 2026 11:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल, रिकॉर्ड निचले स्तर से बाजार में लौटी रौनक
वैश्विक और घरेलू बाजारों में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों को एक बार फिर पंख लग गए हैं। बीते 3 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ भारतीय सर्राफा बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में शानदार तेजी दर्ज की गई। पिछले पांच हफ्तों में यह पहला मौका है जब सोने के भाव में इस तरह का बड़ा उछाल देखा गया है। इस पूरे हफ्ते के दौरान सोने की कीमतों में करीब 2.2 फीसदी की मजबूती आई है।
ग्लोबल मार्केट: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमका सोना
वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड (हाजिर सोना) 1.3 फीसदी की बड़ी छलांग लगाकर 4,177.31 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। यह 23 जून के बाद से सोने का सबसे उच्चतम स्तर है। वहीं, अगस्त डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स भी 1.6 फीसदी की तेजी के साथ 4,190.70 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।
घरेलू बाजार: MCX पर सोने-चांदी में भारी तेजी
अंतरराष्ट्रीय संकेतों का असर भारतीय बाजारों पर भी साफ देखने को मिला। भारत के प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स (MCX) पर गोल्ड फ्यूचर्स 1.40 फीसदी यानी 2,035 रुपये की बढ़त के साथ 1,47,793 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि चांदी में भी जबरदस्त लिवाली रही। सिल्वर फ्यूचर्स 1.76 फीसदी यानी 4,026 रुपये के उछाल के साथ 2,33,262 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था।
क्यों आई अचानक तेजी? ये हैं 3 मुख्य कारण:
1. अमेरिका में कमजोर रोजगार के आंकड़े: सोने की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आए आर्थिक आंकड़े हैं। जून महीने में अमेरिका में गैर-कृषि क्षेत्र में उम्मीद से काफी कम (सिर्फ 57,000) नई नौकरियां पैदा हुईं, जबकि जानकारों को 1,10,000 नौकरियों की उम्मीद थी। कमजोर डेटा के चलते अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) द्वारा ब्याज दरें जल्द बढ़ाने की आशंका कम हो गई है, जिससे निवेशकों का रुझान सोने की तरफ बढ़ा।
2. डॉलर इंडेक्स में गिरावट: इस हफ्ते अमेरिकी डॉलर में कमजोरी देखी गई है। डॉलर के कमजोर होने से दूसरी करेंसी वाले देशों के लिए सोना खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ती हैं।
3. केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने मई महीने में अपने ऑफिशियल रिजर्व में 41 टन सोने की बढ़ोतरी की है। केंद्रीय बैंकों की इस लगातार खरीदारी ने सोने की कीमतों को मजबूत सपोर्ट दिया है।
रिकॉर्ड ऊंचाई से अब भी काफी नीचे
भले ही बाजार में अभी तेजी का रुख दिख रहा हो, लेकिन सोना अभी भी अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई से काफी पीछे है। इस साल जनवरी के अंत में सोने की कीमतें 5,600 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं, जिसके बाद इसमें करीब 28 फीसदी की बड़ी गिरावट आई। अकेले जून महीने में ही सोने में 14 फीसदी की मंदी देखी गई थी। जानकारों का मानना है कि मध्य-पूर्व (अमेरिका-ईरान) में तनाव कम होने के बाद बाजार में यह स्थिरता और सुधार देखने को मिल रहा है।
GMP हुआ और मजबूत, 7x सब्सक्रिप्शन वाले IPO से कितना होगा फायदा?
3 Jul, 2026 10:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पैकेजिंग सेक्टर की दिग्गज कंपनी 'नैक पैकेजिंग' (Knack Packaging) का मेनबोर्ड आईपीओ (IPO) आज यानी 3 जुलाई को सब्सक्रिप्शन के लिए बंद होने जा रहा है। बीते 1 जुलाई को खुले इस आईपीओ को शुरुआती दो दिनों में ही निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। दूसरे दिन के अंत तक यह इश्यू 7 गुना से अधिक सब्सक्राइब हो चुका था, जहां निवेशकों ने 1.89 करोड़ शेयरों के मुकाबले करीब 13.68 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगाईं। गुजरात आधारित यह कंपनी एकीकृत पैकेजिंग समाधान (इंटीग्रेटेड पैकेजिंग सॉल्यूशंस) प्रदान करती है।
ग्रे मार्केट में धूम: 16% से ज्यादा लिस्टिंग गेन की उम्मीद
शेयर बाजार के जानकारों के मुताबिक, इस आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) लगातार मजबूत बना हुआ है, जो अगले हफ्ते होने वाली लिस्टिंग पर अच्छे मुनाफे का संकेत दे रहा है। 3 जुलाई को कंपनी का लेटेस्ट जीएमपी 28 रुपये दर्ज किया गया है। 170 रुपये के अपर प्राइस बैंड के लिहाज से इसके शेयर बाजार में ₹198 (₹170 + ₹28) पर डेब्यू कर सकते हैं। इसका सीधा मतलब है कि निवेशकों को पहले ही दिन प्रति शेयर करीब 16.47% का तगड़ा मुनाफा मिल सकता है। (नोट: जीएमपी केवल एक अनुमान होता है, यह आधिकारिक नहीं है)।
प्राइस बैंड और मिनिमम इन्वेस्टमेंट (निवेश की राशि)
प्राइस बैंड: कंपनी ने इस आईपीओ के लिए 161 रुपये से 170 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है।
लॉट साइज: खुदरा (रिटेल) निवेशकों के लिए न्यूनतम एक लॉट के लिए आवेदन करना जरूरी है, जिसमें 88 शेयर शामिल हैं।
न्यूनतम निवेश: ऊपरी मूल्य (₹170) के आधार पर निवेशकों को कम से कम 14,960 रुपये का निवेश करना होगा।
इश्यू का साइज: कुल 439.50 करोड़ रुपये के इस आईपीओ में 380 करोड़ रुपये के नए शेयर (फ्रेश इश्यू) जारी किए जा रहे हैं, जबकि 59.50 करोड़ रुपये का ऑफर-फॉर-सेल (OFS) शामिल है।
महत्वपूर्ण तारीखें: अलॉटमेंट और लिस्टिंग कब?
यदि आपने इस आईपीओ में दांव लगाया है या लगाने जा रहे हैं, तो इन तारीखों को नोट कर लें:
शेयर अलॉटमेंट (आवंटन): 6 जुलाई को तय होगा कि आपको शेयर मिले हैं या नहीं।
शेयर बाजार में लिस्टिंग: 8 जुलाई को कंपनी के शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्ट होंगे।
कहां होगा जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल?
नैक पैकेजिंग मैनेजमेंट के अनुसार, नए शेयर जारी करने से मिलने वाली राशि (380 करोड़ रुपये) का बड़ा हिस्सा गुजरात के मेहसाना जिले के कडी (बोरिसाना) में एक नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने में खर्च किया जाएगा। इसके अलावा बची हुई धनराशि का उपयोग कंपनी के सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों और कामकाजी जरूरतों को पूरा करने के लिए होगा।
कंपनी का बैकग्राउंड: साल 1993 में स्थापित हुई नैक पैकेजिंग मुख्य रूप से औद्योगिक पैकेजिंग (Industrial Packaging) जैसे बीओपीपी लैमिनेटेड पीपी बुने हुए बैग, पिंच बॉटम बैग और बुने हुए बोरे बनाती है। इनका उपयोग चावल, सीमेंट और पेट फूड (पालतू पशुओं के भोजन) जैसे थोक कृषि और उपभोक्ता सामानों की पैकिंग में होता है।
इस पब्लिक इश्यू के बुक-रनिंग लीड मैनेजर्स 'सिस्टमैटिक्स कॉर्पोरेट सर्विसेज लिमिटेड', 'आईडीबीआई कैपिटल मार्केट्स' और 'पैंटोमैथ कैपिटल एडवाइजर्स' हैं।
शेयर बाजार में होगी Carlsberg India की एंट्री, ₹6,600 करोड़ जुटाने का प्लान
2 Jul, 2026 03:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। डेनमार्क की दिग्गज शराब निर्माता कंपनी कार्ल्सबर्ग ए/एस (Carlsberg A/S) भारतीय शेयर बाजार में कदम रखने की बड़ी तैयारी कर रही है। कंपनी ने अपनी भारतीय इकाई के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ (IPO) के लिए गोपनीय तरीके (कॉन्फिडेंशियल रूट) से ड्राफ्ट पेपर जमा करा दिए हैं। इस प्रस्तावित आईपीओ के जरिए कंपनी बाजार से करीब 70 करोड़ डॉलर यानी लगभग 6,600 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इस लिस्टिंग को भारतीय कॉर्पोरेट जगत और शराब उद्योग के लिए एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
गोपनीय रूट से दाखिल किए शुरुआती दस्तावेज
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कार्ल्सबर्ग ने इस आईपीओ के लिए 'कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग' का रास्ता चुना है। यह विशेष प्रक्रिया कंपनियों को अपने संवेदनशील व्यावसायिक विवरण, वित्तीय आंकड़े और जोखिमों को प्रतिस्पर्धी कंपनियों से तब तक गोपनीय रखने की अनुमति देती है, जब तक कि लिस्टिंग पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता। मानक प्रक्रिया (स्टैंडर्ड DRHP) के विपरीत, यह दस्तावेज तुरंत सार्वजनिक नहीं होता है। इसके तहत अगर बाजार की स्थितियां अनुकूल न हों, तो कंपनी बिना किसी जानकारी को सार्वजनिक किए अपने ड्राफ्ट को वापस भी ले सकती है। माना जा रहा है कि इस लिस्टिंग में पूरी हिस्सेदारी केवल 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के रूप में हो सकती है, जिसके तहत मौजूदा प्रमोटर्स अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।
देश की दूसरी सबसे बड़ी शराब निर्माता कंपनी
कार्ल्सबर्ग इंडिया घरेलू बाजार में एक बेहद मजबूत पकड़ रखती है और यह देश की दूसरी सबसे बड़ी शराब निर्माता कंपनी है। भारतीय बाजार के करीब 22 प्रतिशत हिस्से पर इसका सीधा कब्जा है। कंपनी ने भारत में अपने परिचालन की शुरुआत साल 2007 में की थी और वर्तमान में यह देश भर में कुल 14 ब्रुअरीज (शराब बनाने के कारखाने) का संचालन कर रही है। इनमें से 8 कारखानों पर कंपनी का अपना मालिकाना हक है, जबकि 6 इकाइयां कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग के आधार पर चलाई जा रही हैं। आपको बता दें कि वैश्विक स्तर पर कार्ल्सबर्ग समूह का इतिहास काफी पुराना है और इसकी शुरुआत साल 1847 में हुई थी।
दिग्गज वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर तैयारी
इस बड़े आईपीओ को अमलीजामा पहनाने के लिए कार्ल्सबर्ग वैश्विक और घरेलू स्तर के बड़े मर्चेंट बैंकर्स के साथ मिलकर काम कर रही है। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी और सिटीग्रुप इंक की भारतीय इकाइयां मुख्य रूप से शामिल हैं। कंपनी के पोर्टफोलियो में कार्ल्सबर्ग, टुबोर्ग, क्रोननबर्ग 1664, ग्रिमबर्गेन, सोमरस्बी और होल्स्टन जैसे कई लोकप्रिय और स्थापित ब्रांड्स शामिल हैं। हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में बाजार की स्थितियों को देखते हुए इस आईपीओ के आकार, संरचना और पेश किए जाने के समय में बदलाव की संभावना बनी हुई है।
बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों में कार्ल्सबर्ग इंडिया की सबसे करीबी और सीधी टक्कर यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड से मानी जाती है। कार्ल्सबर्ग के इस कदम के बाद इस सेक्टर में हलचल काफी तेज हो गई है। चर्चा यह भी है कि एब्सोल्यूट वोदका और चिवास रीगल स्कॉच व्हिस्की जैसी मशहूर ब्रांड्स बनाने वाली एक और दिग्गज कंपनी, पेरनोड रिकार्ड एसए (Pernod Ricard SA) भी अपने भारतीय कारोबार को शेयर बाजार में लिस्ट कराने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस सेक्टर में निवेशकों को निवेश के कई बड़े और नए विकल्प मिल सकते हैं।
व्हीकल रजिस्ट्रेशन में शानदार उछाल, फिर क्यों फिसला Ola Electric का शेयर?
2 Jul, 2026 03:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। प्रमुख इलेक्ट्रिक टूव्हीलर निर्माता कंपनी ओला इलेक्ट्रिक के लिए चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही बेहद शानदार साबित हुई है। मजबूत मांग, उत्पादों की बाजार में बेहतर उपलब्धता और दमदार खुदरा बिक्री के दम पर कंपनी के वाहनों के पंजीकरण में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। अप्रैल से जून की अवधि के दौरान कंपनी के वाहनों का रजिस्ट्रेशन लगभग दोगुना बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे बाजार में कंपनी की स्थिति और मजबूत हुई है।
पहली तिमाही में वाहन रजिस्ट्रेशन में रिकॉर्ड उछाल
एक्सचेंज फाइलिंग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में ओला इलेक्ट्रिक के वाहनों का कुल पंजीकरण बढ़कर 43,719 यूनिट पर पहुंच गया। यह आंकड़ा पिछली तिमाही यानी जनवरी-मार्च अवधि के 22,252 यूनिट के मुकाबले तकरीबन दोगुना है। अकेले जून के महीने में कंपनी ने 16,144 टूव्हीलर्स का रजिस्ट्रेशन कराया है, जो हाल की तिमाहियों में कंपनी का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड है। कंपनी के प्रवक्ताओं के मुताबिक, यह लगातार बनी हुई रफ्तार उनके बेहतर ऑपरेशंस, मजबूत प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और ग्राहकों के भरोसे का सीधा परिणाम है। कंपनी को उम्मीद है कि भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग आगे भी इसी तरह तेजी से बढ़ती रहेगी।
सकारात्मक नतीजों के बीच शेयर बाजार में गिरावट
इस बेहतरीन और सकारात्मक व्यावसायिक अपडेट के बाद भी शेयर बाजार में ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों को लेकर आज कुछ सुस्ती देखी गई। दिन के कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर करीब 2 प्रतिशत तक नीचे फिसल गया और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर 44.14 रुपये के निचले स्तर तक पहुंच गया। इस गिरावट के बावजूद कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) 20,400 करोड़ रुपये से अधिक बना हुआ है। पिछले तीन महीनों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो इस शेयर ने निवेशकों को लगभग 56 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दिया है।
कंपनी के घाटे में आई बड़ी कमी
वित्तीय मोर्चे पर कंपनी के लिए एक और राहत की खबर रही है। जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान ओला इलेक्ट्रिक का शुद्ध कंसोलिडेटेड घाटा सालाना आधार पर करीब 42.5 प्रतिशत तक कम हो गया है। अब यह घाटा घटकर 500 करोड़ रुपये रह गया है, जो कि इससे पिछले वर्ष की समान अवधि में 870 करोड़ रुपये के स्तर पर था। हालांकि, इस दौरान ऑपरेशंस से होने वाला कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की मार्च तिमाही के 611 करोड़ रुपये के मुकाबले कम होकर 56.6 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, लेकिन कंपनी ने अपने खर्चों को भी 1,306 करोड़ रुपये से घटाकर 546 करोड़ रुपये पर लाने में सफलता पाई है।
अगस्त 2024 में हुई थी सफल लिस्टिंग
आपको बता दें कि ओला इलेक्ट्रिक ने अगस्त 2024 में भारतीय शेयर बाजारों में कदम रखा था। कंपनी का शुरुआती सार्वजनिक प्रस्ताव यानी आईपीओ (IPO) 6,145.56 करोड़ रुपये का रहा था, जिसे निवेशकों की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। ₹10 की फेस वैल्यू वाला यह शेयर वर्तमान में बीएसई 500 इंडेक्स का एक प्रमुख हिस्सा है और भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में इलेक्ट्रिक क्रांति का नेतृत्व कर रहा है।
नौकरीपेशा लोगों के लिए जरूरी खबर, EPF स्कीम 2026 के साथ आए बड़े बदलाव
2 Jul, 2026 02:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 'कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026' को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है। सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत तैयार की गई यह नई योजना देश भर में लागू हो चुकी है। इस बड़े कदम के साथ ही केंद्र सरकार ने करीब छह दशक पुरानी 'ईपीएफ योजना, 1952' को पूरी तरह से बदल दिया है। हालांकि नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत की बात यह है कि भविष्य निधि (पीएफ) का मुख्य ढांचा और मिलने वाले वित्तीय फायदे पहले जैसे ही रहेंगे, लेकिन इसके प्रशासनिक और डिजिटल तौर-तरीकों को बेहद आधुनिक बना दिया गया है।
पीएफ कटौती और यूएएन नंबर में कोई बदलाव नहीं
नए नियमों के लागू होने के बाद भी नौकरीपेशा लोगों की हर महीने होने वाली पीएफ कटौती की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का अनिवार्य योगदान पहले की तरह ही मूल वेतन का 12-12 प्रतिशत बना रहेगा, जबकि कुछ विशेष अधिसूचित संस्थानों के लिए यह सीमा 10 प्रतिशत रहेगी। इसके अलावा कर्मचारियों का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) भी पहले की तरह ही स्थायी रहेगा, जिससे नौकरी बदलने पर पीएफ ट्रांसफर करना आसान होगा। जो लोग पुरानी योजना के सदस्य थे, वे सीधे इस नई योजना में शामिल हो जाएंगे और उनकी पुरानी जमा पूंजी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।
स्वैच्छिक भविष्य निधि (VPF) के नियमों में लचीलापन
नई योजना में कर्मचारियों को अपनी मर्जी से वैधानिक सीमा से अधिक योगदान करने यानी स्वैच्छिक प्रोविडेंट फंड (VPF) के विकल्प में अधिक छूट और लचीलापन दिया गया है। नए प्रावधानों के तहत कंपनियां चाहें तो कर्मचारी द्वारा किए जाने वाले इस अतिरिक्त वीपीएफ योगदान के बराबर अपनी ओर से भी हिस्सा डाल सकती हैं। हालांकि, कंपनियों के लिए ऐसा करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं होगा, यह पूरी तरह से उनके अपने विवेक और आंतरिक नीतियों पर निर्भर करेगा।
प्राइवेट पीएफ ट्रस्टों के लिए तय किए कड़े नियम
जो बड़ी कंपनियां ईपीएफओ से छूट प्राप्त करके अपना खुद का निजी पीएफ ट्रस्ट चलाती हैं, उनके लिए सरकार ने नियम बेहद कड़े कर दिए हैं। अब इन सभी निजी ट्रस्टों के लिए अपने हर कर्मचारी का पूरा रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही उन्हें कर्मचारियों को ऑनलाइन बैलेंस चेक करने की सुविधा और सालाना डिजिटल अकाउंट स्टेटमेंट देना होगा। पीएफ से पैसे निकालने, एडवांस लेने या अकाउंट ट्रांसफर करने के दावों का निपटारा अब एक तय समय सीमा के भीतर केवल ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम से ही करना होगा।
नौकरीपेशा वर्ग पर होने वाला असर और लाभ
इस बड़े बदलाव का सीधा मतलब यह है कि आम कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी या पीएफ बचत पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। सरकार का पूरा ध्यान पीएफ की पूरी व्यवस्था को पारदर्शी, आधुनिक और पूरी तरह डिजिटल बनाने पर है। कागजी कार्रवाई खत्म होने से पीएफ खातों का मैनेजमेंट बेहद आसान हो जाएगा और कर्मचारियों को क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया में होने वाली देरी से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।
Motorola ला रहा दमदार 5G स्मार्टफोन, 7000mAh बैटरी और Android 16 से होगा लैस
2 Jul, 2026 01:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली:भारतीय स्मार्टफोन बाजार में मोटोरोला अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए तैयार है। कंपनी अपनी लोकप्रिय 'G-सीरीज' के अंतर्गत एक और नया और दमदार स्मार्टफोन लॉन्च करने जा रही है। इस नए हैंडसेट को 'Moto G77 Power' के नाम से बाजार में उतारा जाएगा। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि कर दी है कि यह स्मार्टफोन 8 जुलाई 2026 को भारत में दस्तक देगा। मोटोरोला का यह नया डिवाइस विशेष रूप से उन यूजर्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है जो एक बड़ी और लंबे समय तक चलने वाली बैटरी के साथ-साथ हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और लेटेस्ट एंड्रॉयड सॉफ्टवेयर का अनुभव लेना चाहते हैं।
लॉन्चिंग के बाद इन प्लेटफॉर्म्स पर होगी बिक्री
आगामी 8 जुलाई को होने वाले इस शानदार लॉन्च इवेंट के बाद, भारतीय उपभोक्ता इस स्मार्टफोन को बेहद आसानी से खरीद सकेंगे। कंपनी ने इसके लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट (Flipkart) के साथ साझेदारी की है। इसके अलावा, ग्राहक इसे मोटोरोला की आधिकारिक वेबसाइट और देश भर में फैले कंपनी के चुनिंदा ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स से भी सीधे जाकर खरीद पाएंगे। लॉन्चिंग के साथ ही कंपनी इसके लिए कुछ आकर्षक लॉन्च ऑफर्स और बैंक डिस्काउंट की घोषणा भी कर सकती है, जिससे यह फोन अपनी श्रेणी में और भी प्रतिस्पर्धी हो जाएगा।
शानदार डिस्प्ले और व्यूइंग एक्सपीरियंस
लीक हुई जानकारियों और आधिकारिक संकेतों के मुताबिक, मोटोरोला का यह नया फोन डिस्प्ले के मामले में काफी दमदार होने वाला है। Moto G77 Power में यूजर्स को 6.72 इंच का बड़ा फुल एचडी प्लस (FHD+) डिस्प्ले देखने को मिल सकता है। बेहतरीन और स्मूथ स्क्रॉलिंग के साथ-साथ गेमिंग के शौकीनों के लिए इसमें 120Hz का हाई रिफ्रेश रेट दिया जा रहा है। स्क्रीन को अचानक गिरने और स्क्रैच से बचाने के लिए इस पर कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास की सुरक्षात्मक लेयर मिल सकती है। इसके फ्रंट में आधुनिक पंच-होल डिजाइन दिया गया है, जो यूजर्स को बिना किसी रुकावट के एक शानदार और इमर्सिव व्यूइंग एक्सपीरियंस प्रदान करेगा।
बड़ी बैटरी और अन्य संभावित खूबियां
जैसा कि इसके नाम 'Power' से ही साफ है, इस फोन का मुख्य आकर्षण इसकी बैटरी क्षमता होने वाली है। कंपनी इसमें एक बेहद शक्तिशाली और बड़ी बैटरी देने जा रही है, जो फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगी ताकि कम समय में फोन को तेजी से चार्ज किया जा सके। इसके अलावा, स्मार्टफोन में परफॉर्मेंस के लिए लेटेस्ट जेनरेशन का प्रोसेसर और फोटोग्राफी के लिए दमदार कैमरा सेटअप देखने को मिल सकता है। यह फोन आउट-ऑफ-द-बॉक्स लेटेस्ट एंड्रॉयड वर्जन पर काम करेगा, जिससे यूजर्स को एक क्लीन, सुरक्षित और यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस मिलेगा। फोन की सटीक कीमत और सभी वेरिएंट्स का खुलासा 8 जुलाई को होने वाले आधिकारिक लॉन्च के दौरान ही किया जाएगा।
राधिका गुप्ता की बड़ी चेतावनी! 'साउथ कोरिया अब अगला सिल्वर ट्रेड बनता दिख रहा है'
2 Jul, 2026 10:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव और दुनिया भर में जारी अनिश्चितताओं के बीच हर निवेशक इस उलझन में है कि अपनी गाढ़ी कमाई को कहां सुरक्षित रखें। क्या इस समय शेयर बाजार में पैसा बढ़ाना चाहिए, सोना खरीदना चाहिए या फिर विदेशी बाजारों का रुख करना चाहिए? इन सभी महत्वपूर्ण सवालों पर एडलवाइज म्यूचुअल फंड की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ (CEO) राधिका गुप्ता ने खुलकर अपनी राय रखी है। उन्होंने नए निवेशकों को 'फोमो' (FOMO - छूट जाने का डर) से बचने की सलाह देते हुए एक बेहतरीन निवेश फॉर्मूला साझा किया है।
ग्लोबल इन्वेस्टिंग: भेड़चाल से बचें, सही वजह से निवेश करें
पिछले कुछ समय से कई विदेशी बाजारों (जैसे साउथ कोरिया) में आई तेजी को देखकर भारतीय निवेशक वहां पैसा लगाने के लिए उतावले हो रहे हैं। इस पर राधिका गुप्ता ने सचेत करते हुए कहा कि किसी देश के सिर्फ हालिया रिटर्न को देखकर वहां पैसा नहीं झोंकना चाहिए। ग्लोबल इन्वेस्टिंग का असली मकसद पोर्टफोलियो को विविधता (Diversification) देना और रुपये की कमजोरी के खिलाफ सुरक्षा पाना होना चाहिए। निवेशकों को केवल उन्हीं थीम्स या सेक्टर्स के लिए विदेशी बाजारों का रुख करना चाहिए जो फिलहाल भारत में उपलब्ध नहीं हैं।
भारतीय बाजार का आउटलुक: साल की दूसरी छमाही होगी दमदार
भारतीय शेयर बाजार को लेकर उनका नजरिया काफी सकारात्मक है। उनका मानना है कि भारत से जुड़ी ज्यादातर भू-राजनीतिक चिंताएं और अनिश्चितताएं अब खत्म हो चुकी हैं। हालांकि, मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) के कॉर्पोरेट नतीजे ऊंचे कच्चे तेल की वजह से शायद बहुत ज्यादा चमकीले न रहें, लेकिन दूसरी और तीसरी तिमाही से कंपनियों की कमाई में बड़ी रिकवरी दिखने लगेगी। कुल मिलाकर, साल का दूसरा हिस्सा पहले हिस्से के मुकाबले निवेशकों के लिए कहीं ज्यादा मजबूत और दिलचस्प रहने की उम्मीद है।
पसंदीदा सेक्टर्स और मल्टी-कैप अप्रोच
बाजार में बने रहने के लिए राधिका गुप्ता ने 'मल्टी-कैप' नजरिया अपनाने की सलाह दी है। सारा पैसा केवल बड़ी कंपनियों (Large-Cap) में लगाने के बजाय मध्यम (Mid-Cap) और छोटी कंपनियों (Small-Cap) में भी बांटना चाहिए, क्योंकि नई टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, कैपिटल मार्केट्स और डेटा सेंटर्स जैसी बेहतरीन थीम्स यहीं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि उनके खुद के पोर्टफोलियो का करीब 70% हिस्सा इक्विटी में है, जिसमें वे मल्टी-कैप फंड्स को चुनती हैं। सेक्टर्स की बात करें तो वे इस समय प्राइवेट बैंक, पावर, डिफेंस और प्रीमियम कंजम्पशन (महंगे प्रोडक्ट्स की खपत) को काफी पसंद कर रही हैं।
नए निवेशकों के लिए ₹10 लाख का फॉर्मूला और गोल्ड स्ट्रेटेजी
यदि कोई निवेशक पहली बार बाजार में आ रहा है और उसके पास ₹10 लाख की एकमुश्त रकम है, तो उन्हें सीधे शुद्ध इक्विटी के बजाय हाइब्रिड फंड्स (जैसे बैलेंस्ड एडवांटेज या एग्रेसिव हाइब्रिड फंड) से शुरुआत करनी चाहिए। ये फंड्स गिरावट के समय सेफ्टी नेट का काम करते हैं, जिससे नया निवेशक घबराकर बाजार से बाहर नहीं भागता।
सोने-चांदी पर राय रखते हुए उन्होंने कहा:
"सोना और चांदी आपके पोर्टफोलियो के रक्षक हैं, इन्हें वेल्थ क्रिएटर (दौलत बढ़ाने वाला) मानकर दांव न लगाएं। अपने पोर्टफोलियो का 10 से 15% हिस्सा सोने में रखना स्थिरता के लिए बिल्कुल सही है, और इसके लिए एसआईपी (SIP) का रास्ता सबसे बेहतर है।"
अंत में, आजकल चर्चा में चल रहे स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) को लेकर उन्होंने साफ चेतावनी दी कि जब तक आप किसी प्रोडक्ट की रणनीति, उसके रिस्क और फंड मैनेजर के अनुभव को पूरी तरह समझ न लें, तब तक सिर्फ फैंसी नाम देखकर उसमें पैसा कतई न फंसाएं।
13 जुलाई का हफ्ता रहेगा खास! ₹1.17 लाख करोड़ वैल्यूएशन वाली कंपनी की लॉन्चिंग संभव
2 Jul, 2026 10:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: भारत की दिग्गज एसेट मैनेजमेंट कंपनी, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट (SBI Funds Management) शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री करने जा रही है। कंपनी अपने आगामी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के जरिए करीब 1,17,000 करोड़ रुपये ($12.3 अरब) के वैल्यूएशन का टारगेट लेकर चल रही है। निवेशकों के साथ बैठकें पूरी हो चुकी हैं और वैल्यूएशन का दायरा भी तय कर लिया गया है। पूरी उम्मीद है कि जुलाई महीने के मध्य में यह आईपीओ दस्तक दे देगा।
इस तारीख को खुल सकता है IPO
बाजार के जानकारों के मुताबिक, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का आईपीओ 13 जुलाई वाले हफ्ते में दांव लगाने के लिए खुल सकता है, जबकि शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग 22 जुलाई तक होने की उम्मीद है। इसके अलावा कंपनी मुख्य आईपीओ से ठीक पहले 'प्री-आईपीओ राउंड' के जरिए भी फंड जुटाने पर विचार कर रही है। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने 12 जून को ही कंपनी के ड्राफ्ट पेपर्स (DRHP) को अपनी हरी झंडी दे दी थी, जिसे कंपनी ने इसी साल 19 मार्च को जमा किया था।
प्रमोटर्स बेचेंगे अपनी हिस्सेदारी
यह पूरा आईपीओ 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के तहत लाया जा रहा है। इसका मतलब है कि कंपनी कोई भी नया शेयर जारी नहीं करेगी, बल्कि इसके मौजूदा प्रमोटर्स और निवेशक ही अपने 20.37 करोड़ इक्विटी शेयर बेचेंगे। इस बिक्री से मिलने वाली पूरी रकम सीधे शेयर बेचने वाले निवेशकों के पास जाएगी। ओएफएस के तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) अपनी 6.3% हिस्सेदारी (12.83 करोड़ शेयर) और फ्रांस की अमुंडी इंडिया होल्डिंग अपनी 3.7% हिस्सेदारी (7.53 करोड़ शेयर) बाजार में बेचेगी। फिलहाल कंपनी में एसबीआई की हिस्सेदारी 61.76% और अमुंडी की हिस्सेदारी 36.26% है।
एसबीआई की तीसरी लिस्टेड सब्सिडियरी
साल 1992 में शुरू हुई एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट मार्च 2021 से लगातार देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी बनी हुई है, जिसका म्यूचुअल फंड मार्केट में 15.4% शेयर है। साल 2011 से यह अमुंडी एसेट मैनेजमेंट के साथ एक जॉइंट वेंचर के रूप में काम कर रही है। यदि यह आईपीओ सफल रहता है, तो यह देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई (SBI) की शेयर बाजार में लिस्ट होने वाली तीसरी सब्सिडियरी (सहायक कंपनी) बन जाएगी।
वित्तीय मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन
कंपनी की फाइनेंशियल सेहत बेहद मजबूत नजर आ रही है। चालू वित्त वर्ष (अप्रैल-दिसंबर 2025) के शुरुआती 9 महीनों में कंपनी का नेट प्रॉफिट 25.9% की शानदार बढ़त के साथ 2,432.9 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में 1,933 करोड़ रुपये था। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू भी 23% बढ़कर 3,250.6 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। कोटक महिंद्रा कैपिटल, एक्सिस कैपिटल, जेफरीज और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज समेत कई दिग्गज इन्वेस्टमेंट बैंक इस बड़े आईपीओ को सफल बनाने के लिए काम कर रहे हैं।
सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! जानिए 8th Pay Commission में सैलरी का पूरा गणित
1 Jul, 2026 03:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच आगामी 8वें वेतन आयोग को लेकर सुगबुगाहट काफी तेज हो गई है। हर कोई यह जानने के लिए उत्सुक है कि नए आयोग के गठन और उसकी सिफारिशें लागू होने के बाद उनके मासिक वेतन तथा भत्तों में कितनी वृद्धि होगी। इस पूरी गणना और वेतन वृद्धि की बुनियाद एक खास फॉर्मूले पर टिकी होती है, जिसे 'फिटमेंट फैक्टर' कहा जाता है। केंद्रीय कर्मचारी संगठनों की निगाहें इसी एक मुख्य गुणांक पर टिकी हैं, क्योंकि यही वह चाबी है जो भविष्य में कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी और हाथ में आने वाले कुल वेतन का निर्धारण करेगी।
क्या है फिटमेंट फैक्टर और इसका सीधा फॉर्मूला
सरल शब्दों में कहें तो फिटमेंट फैक्टर वह तय संख्या या गुणांक है, जिसके जरिए वर्तमान मूल वेतन (बेसिक पे) को नए और संशोधित मूल वेतन में बदला जाता है। नए वेतन आयोग के लागू होने पर रिवाइज्ड बेसिक पे निकालने का सीधा गणित यह है कि मौजूदा मूल वेतन को सरकार द्वारा तय किए गए फिटमेंट फैक्टर से गुणा कर दिया जाता है। हालांकि इस फैक्टर का उपयोग सीधे तौर पर मकान किराया भत्ता (एचआरए) या अन्य भत्तों को तय करने में नहीं होता, लेकिन यह मूल वेतन को बढ़ा देता है। चूंकि महंगाई भत्ता (डीए) और एचआरए जैसे तमाम बड़े भत्ते मूल वेतन के प्रतिशत के आधार पर ही गिने जाते हैं, इसलिए इसके बढ़ते ही पूरा सैलरी पैकेज अपने आप काफी बढ़ जाता है।
सातवें वेतन आयोग का आधार और इस बार की मांगें
बीते सातवें वेतन आयोग के दौरान सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर मंजूर किया था, जिसके चलते केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 7,000 रुपये से बढ़कर सीधे 18,000 रुपये प्रति माह हो गया था। अब जबकि 8वें वेतन आयोग को लेकर कवायद चल रही है, कर्मचारी यूनियनों और विभिन्न संगठनों ने सरकार के सामने इस गुणांक को और अधिक बढ़ाने की पुरजोर मांग रखी है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों की ओर से इस फिटमेंट फैक्टर को न्यूनतम 3 गुणा से लेकर अधिकतम 3.68 गुणा तक करने का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि बढ़ती महंगाई के दौर में कर्मचारियों को उचित वित्तीय राहत मिल सके।
फिटमेंट फैक्टर के अलग-अलग स्तर और सैलरी का गणित
यदि सरकार आने वाले समय में फिटमेंट फैक्टर के अलग-अलग स्तरों पर मुहर लगाती है, तो पे-मैट्रिक्स के विभिन्न लेवल वाले कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि इसे बढ़ाकर 3 गुना किया जाता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर सीधे 54,000 रुपये के पार पहुंच सकती है। इसी तरह मध्यम और उच्च स्तर के अधिकारियों के वेतन में भी उनके मौजूदा पे-लेवल के हिसाब से भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। फिटमेंट फैक्टर का स्तर जितना ऊंचा होगा, कर्मचारियों की बेसिक पे उतनी ही मजबूत होगी और उसी अनुपात में उनके रिटायरमेंट के बाद बनने वाली पेंशन की राशि में भी बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा।
बजट और देश की वित्तीय स्थिति पर टिका अंतिम फैसला
वेतन आयोग फिलहाल कर्मचारियों के विभिन्न प्रस्तावों, उनकी जरूरतों और संगठनों की मांगों का गहन मूल्यांकन करने में जुटा हुआ है। हालांकि, आयोग की अंतिम सिफारिशें और उन पर केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी पूरी तरह से देश की राजकोषीय क्षमता और सरकारी खजाने की स्थिति पर निर्भर करेगी। सरकार को यह बारीकी से देखना होगा कि वेतन और पेंशन में इतनी बड़ी वृद्धि करने के बाद देश के बजट और वित्तीय देनदारियों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। इस पूरे मामले में अंतिम और पूरी तरह स्पष्ट तस्वीर तभी सामने आ पाएगी जब आयोग अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके सौंपेगा और केंद्रीय कैबिनेट उस पर अपनी अंतिम मुहर लगाएगी।
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