व्यापार
सरकार की कोटा नीति के बावजूद निर्यात लक्ष्य अधूरा रहने की आशंका
1 May, 2026 12:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीनी निर्यात पर संकट: वैश्विक कीमतों में गिरावट से भारत का लक्ष्य प्रभावित, कोटे से आधा ही हो पाएगा एक्सपोर्ट
नई दिल्ली: चालू विपणन सत्र 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) में भारत का चीनी निर्यात उम्मीद से काफी कम रहने का अनुमान है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, वैश्विक बाजार में कीमतों की प्रतिकूल स्थिति के कारण इस सीजन में केवल 7.5 से 8 लाख टन चीनी का ही निर्यात हो पाने की संभावना है।
कोटा ज्यादा, निर्यात कम
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश भारत में निर्यात पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में होता है। सरकार मिलों के लिए कोटा निर्धारित करती है। इस सीजन की शुरुआत में खाद्य मंत्रालय ने 15 लाख टन निर्यात की अनुमति दी थी, जिसे बाद में 5 लाख टन अतिरिक्त कोटे के साथ बढ़ाया गया। हालांकि, इस अतिरिक्त कोटे में से अब तक केवल 87,587 टन को ही मंजूरी मिल सकी है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि, "फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें उतनी आकर्षक नहीं हैं कि मिलें निर्यात को प्राथमिकता दें। इस पूरे सीजन में वास्तविक भौतिक शिपमेंट 8 लाख टन के आंकड़े तक ही सिमट सकता है।"
खपत के पैटर्न में बदलाव और बढ़ता स्टॉक
रिपोर्ट के अनुसार, 3 मार्च तक भारत लगभग 5 लाख टन चीनी का निर्यात कर चुका है। दिलचस्प बात यह है कि देश में चीनी की खपत का पैटर्न बदल रहा है। मांग में वृद्धि अब स्थिर हो गई है, जिससे घरेलू स्तर पर चीनी का अधिक अधिशेष (Surplus) बच रहा है।
उत्पादन में सुधार
पिछले साल की तुलना में इस बार चीनी उत्पादन में भी मामूली बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है:
मौजूदा सीजन उत्पादन: अब तक 27.5 मिलियन टन चीनी का उत्पादन हो चुका है।
कुल अनुमान: सीजन के अंत तक उत्पादन 28.2 मिलियन टन रहने की उम्मीद है।
पिछला रिकॉर्ड: साल 2024-25 में उत्पादन 26.1 मिलियन टन रहा था।
Maharashtra Day के चलते बाजार में छुट्टी, सेंसेक्स-निफ्टी रहेंगे बंद
1 May, 2026 11:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शेयर बाजार अपडेट: महाराष्ट्र दिवस और मजदूर दिवस पर आज कारोबार बंद, सोमवार को खुलेंगे बाजार
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में आज यानी 1 मई को अवकाश रहेगा। महाराष्ट्र दिवस और अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के उपलक्ष्य में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में कोई कामकाज नहीं होगा।
ट्रेडिंग के लिए जरूरी जानकारी
इक्विटी और डेरिवेटिव्स: इक्विटी, डेरिवेटिव्स और एसएलबी (SLB) सेगमेंट पूरी तरह बंद रहेंगे। अब नियमित कारोबार सोमवार, 4 मई को शुरू होगा।
कमोडिटी मार्केट: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में सुबह के सत्र (9:00 AM से 5:00 PM) में छुट्टी रहेगी, लेकिन शाम के सत्र में रात 11:55 बजे तक ट्रेडिंग सामान्य रूप से जारी रहेगी।
NCDEX: कृषि-वस्तु बाजार (एनसीडीईएक्स) सुबह और शाम दोनों सत्रों के लिए बंद रहेगा।
वैश्विक बाजारों की स्थिति
मजदूर दिवस के कारण केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई प्रमुख बाजारों में आज छुट्टी है। एशिया में चीन, हांगकांग, सिंगापुर और पाकिस्तान सहित कई देशों के बाजार बंद हैं। वहीं यूरोप में भी फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देशों में व्यापारिक अवकाश रहेगा।
बीते सत्र का हाल: गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार
छुट्टी से ठीक पहले, गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार भारी दबाव में नजर आया। अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण बाजार लाल निशान पर बंद हुआ:
सेंसेक्स: 582.86 अंक (0.75%) फिसलकर 76,913.50 पर आ गया।
निफ्टी: 180.10 अंक (0.74%) की कमजोरी के साथ 23,997.55 के स्तर पर बंद हुआ।
तेज आर्थिक वृद्धि का असर: FDI 90 अरब डॉलर के पार पहुंचने की उम्मीद
1 May, 2026 10:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत में विदेशी निवेश की रफ्तार तेज: वित्त वर्ष 2025-26 में 90 अरब डॉलर के पार पहुँचने का अनुमान
नई दिल्ली: भारत में विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का आँकड़ा 90 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर को पार कर सकता है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने बताया कि अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच ही देश में 88 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आ चुका है।
विदेशी निवेशकों का बढ़ा भरोसा
सचिव भाटिया के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में कुल एफडीआई 80.61 अरब डॉलर रहा था, जिसकी तुलना में इस बार की वृद्धि बेहद उत्साहजनक है। भारत के वैश्विक निवेश का केंद्र बनने के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
सरकार द्वारा किए गए निरंतर नीतिगत सुधार।
विभिन्न देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौते (FTAs)।
भारत की तेज आर्थिक विकास दर।
इन्वेस्ट इंडिया की अहम भूमिका
राष्ट्रीय निवेश प्रोत्साहन एजेंसी 'इन्वेस्ट इंडिया' ने इस वित्त वर्ष में अब तक 6.1 अरब डॉलर के 60 प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतारने में मदद की है।
रोजगार: इन परियोजनाओं से देश के 14 राज्यों में 31,000 से अधिक नौकरियों के सृजन की उम्मीद है।
प्रमुख स्रोत: कुल निवेश का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय देशों से आया है। इसके अलावा अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया से भी भारी निवेश प्राप्त हुआ है।
FDI नियमों में ढील: जल्द जारी होगी अधिसूचना
सरकार विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत उन नियमों को जल्द ही अधिसूचित करने वाली है, जिनसे विदेशी कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी।
नया बदलाव: ऐसी विदेशी कंपनियाँ जिनमें चीनी निवेशकों की हिस्सेदारी 10 फीसदी तक है, उनके लिए निवेश के नियमों में ढील दी जाएगी।
अपवाद: हालांकि, यह छूट उन कंपनियों के लिए नहीं होगी जो चीन, हांगकांग या भारत की जमीनी सीमाओं से सटे देशों में पंजीकृत (Registered) हैं। सरकार ने इस संबंध में मार्च में प्रेस नोट-3 (2020) में संशोधन को मंजूरी दी थी।
गैस सिलेंडर के दाम बढ़े, महंगाई ने फिर तोड़ी कमर
1 May, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: 1 मई 2026 से नए महीने के आगाज के साथ ही आम आदमी और व्यापारियों पर महंगाई की भारी मार पड़ी है। विधानसभा चुनावों के समापन के तुरंत बाद सरकारी तेल कंपनियों ने एलपीजी (LPG) सिलेंडर की नई दरें जारी कर दी हैं, जिसमें कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में लगभग ₹1000 की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। इस बड़े इजाफे के बाद देश के लगभग सभी महानगरों में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹3000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई है। वैश्विक बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतों और हालिया चुनावों के बाद इसे अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी माना जा रहा है।
महानगरों का नया रेट कार्ड: कोलकाता और चेन्नई में कीमतें सबसे अधिक
इंडियन ऑयल द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹993 बढ़कर ₹3071.50 हो गई है। वहीं, कोलकाता में यह वृद्धि सबसे अधिक रही, जहाँ अब एक सिलेंडर के लिए ₹3355 चुकाने होंगे। मुंबई में भी कीमतें ₹2031 से उछलकर ₹3046.50 पर पहुँच गई हैं, जबकि चेन्नई में यह आंकड़ा ₹3259.50 दर्ज किया गया है। रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है।
घरेलू उपभोक्ताओं को राहत: 14.2 किलो वाले सिलेंडर के दाम स्थिर
महंगाई के इस दौर में राहत की एकमात्र खबर घरेलू रसोई गैस का इस्तेमाल करने वाले परिवारों के लिए आई है। तेल कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। मिडिल क्लास और आम उपभोक्ताओं के लिए यह बड़ी तसल्ली की बात है कि उनके किचन का बजट फिलहाल पुराने दामों पर ही टिका हुआ है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर अभी भी अपने पुराने रेट (लगभग ₹913) पर उपलब्ध है। हालांकि, कमर्शियल गैस की बढ़ती कीमतों का असर परोक्ष रूप से बाहर मिलने वाले खाने-पीने की चीजों पर पड़ना तय माना जा रहा है।
KPMG में बड़े पैमाने पर layoffs, advisory बिजनेस में सुस्ती का असर
1 May, 2026 09:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिग्गज कंपनी KPMG में बड़ी छंटनी: एडवाइजरी विभाग के 400 कर्मचारियों की जाएगी नौकरी
वॉशिंगटन: दुनिया की प्रतिष्ठित वित्तीय सेवा और बिजनेस एडवाइजरी कंपनी केपीएमजी (KPMG) ने अपने कर्मचारियों की संख्या में कटौती करने का बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह छंटनी मुख्य रूप से उसके एडवाइजरी (परामर्श) डिवीजन में की जाएगी।
कार्यबल में 4 फीसदी की कटौती
'वाल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के मुताबिक, केपीएमजी अपने एडवाइजरी विभाग से लगभग 400 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाएगी। यह संख्या कंपनी के कुल कार्यबल का लगभग 4 प्रतिशत है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर निम्नलिखित विभागों पर पड़ेगा:
रेगुलेटरी रिस्क एडवाइजरी
कस्टमर ऑपरेशंस
फाइनेंशियल सर्विसेज कंसल्टेंट
रणनीतिक बदलाव है मुख्य वजह
कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में इस छंटनी को 'रणनीतिक पुनर्गठन' का हिस्सा बताया है। कंपनी का कहना है कि वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके कर्मचारियों का कौशल और क्षमताएं भविष्य में बाजार की मांग के अनुरूप हों। कंपनी समय-समय पर अपने कार्यबल के आकार और स्वरूप का मूल्यांकन करती रहेगी।
क्यों लेनी पड़ी यह नौबत?
जानकारों का मानना है कि इस कटौती के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
मांग में गिरावट: एडवाइजरी क्षेत्र में सेवाओं की मांग में कमी आई है।
अत्यधिक भर्तियां: कोरोना महामारी के दौरान कंपनी ने बहुत आक्रामक तरीके से नियुक्तियां की थीं, जिसका दबाव अब आर्थिक रूप से महसूस किया जा रहा है।
राजस्व वृद्धि में सुस्ती: परामर्श क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के राजस्व में गिरावट देखी जा रही है, जिसके कारण कई फर्म अपने कार्यबल को समायोजित (Adjust) कर रही हैं।
ऑडिट विभाग पर भी मंडरा रहा खतरा
एडवाइजरी के अलावा, केपीएमजी अपने अमेरिकी ऑडिट कारोबार में भी छंटनी पर विचार कर रही है। चर्चा है कि इस विभाग के लगभग 10 प्रतिशत कर्मचारियों की भी छुट्टी की जा सकती है। हालांकि, कंपनी ने साथ ही यह भी कहा है कि वे रणनीति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी उभरती हुई सेवाओं में निवेश और विस्तार करना जारी रखेंगे।
जंग धीमी फिर भी असर तेज, कच्चा तेल पहुंचा रिकॉर्ड ऊंचाई पर
1 May, 2026 06:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कच्चे तेल में भारी उबाल: ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर के पार, 4 साल का रिकॉर्ड टूटा
नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ईरान के साथ जारी तनाव और आपूर्ति में भारी कमी के चलते ब्रेंट क्रूड उछलकर 126.41 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। यह मार्च 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। हालांकि, बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव के बीच कीमतें बाद में गिरकर 113.89 डॉलर पर भी आईं।
ट्रंप की रणनीति और बाजार की घबराहट
कच्चे तेल की कीमतों में इस अचानक तेजी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित सैन्य योजना को मुख्य कारण माना जा रहा है।
सैन्य योजना: रिपोर्टों के अनुसार, ईरान को परमाणु समझौते के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से अमेरिका सैन्य हमलों की श्रृंखला पर विचार कर रहा है।
अनिश्चितता: ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के इस कड़े रुख से खाड़ी देशों में संघर्ष और लंबा खिंच सकता है, जिससे तेल की वैश्विक आपूर्ति में बड़ी बाधा आएगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य: संकट की असली जड़
तेल बाजार में मची खलबली की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली आपूर्ति में गिरावट है:
निर्यात में कमी: युद्ध से पहले यहाँ से प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल से अधिक तेल और गैस का परिवहन होता था, जो अप्रैल में घटकर महज 38 लाख बैरल रह गया है।
कुल नुकसान: वैकल्पिक रास्तों के इस्तेमाल के बावजूद, बाजार को अभी भी प्रतिदिन लगभग 1.3 करोड़ बैरल तेल की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
भंडार में आई भारी कमी
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ युद्ध का डर ही नहीं, बल्कि जमीन पर तेल की उपलब्धता भी कम हुई है:
मार्च के दौरान वैश्विक तेल भंडार में 8.5 करोड़ बैरल की कमी आई है।
समुद्र के रास्ते होने वाला तेल परिवहन (Oil on Water) भी 10.7 करोड़ बैरल घट गया है।
शेयर बाजार में भारी गिरावट, बिकवाली का दबाव बढ़ा
30 Apr, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 580 अंक टूटा, निफ्टी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसला
मुंबई|भारतीय शेयर बाजार में आज बिकवाली का जबरदस्त दबाव देखा गया। गुरुवार को बाजार बंद होते समय बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 580 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर को बरकरार नहीं रख सका और इसके नीचे बंद हुआ। इस गिरावट से निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए और बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया।
बैंकिंग और मेटल सेक्टर ने बढ़ाई चिंता
बाजार की गिरावट में सबसे बड़ी भूमिका मेटल और बैंकिंग सेक्टर ने निभाई। मेटल इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks), ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर में भी लगातार बिकवाली का दौर चला। रियल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरों ने भी बाजार को निराश किया, जिससे रिकवरी की सारी उम्मीदें धुंधली पड़ गईं।
कच्चे तेल की कीमतों का असर: ऑयल एंड गैस स्टॉक्स गिरे
कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में कमी आने से तेल और गैस क्षेत्र की कंपनियों के मुनाफे पर संकट मंडराने लगा है। रिलायंस को छोड़कर इस सेक्टर की लगभग सभी दिग्गज कंपनियां लाल निशान में रहीं।
ऑयल एंड गैस सेक्टर का प्रदर्शन (इंट्रा-डे):
कंपनी
वर्तमान भाव (₹)
बदलाव (%)
अडानी टोटल गैस
635.05
-3.34%
हिंदुस्तान पेट्रोलियम
374.65
-1.60%
गेल (GAIL)
163.15
-1.54%
आईओसी (IOC)
142.35
-1.32%
रिलायंस
1,431.30
+0.36%
IT सेक्टर बना ढाल
चौतरफा बिकवाली के बीच सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र ने बाजार को संभालने की कोशिश की। इंफोसिस और टेक महिंद्रा जैसे शेयरों में लिवाली देखी गई, जिससे इंडेक्स की गिरावट कुछ हद तक नियंत्रित रही। आज के टॉप गेनर्स में बजाज ऑटो और सन फार्मा जैसे नाम शामिल रहे, जबकि टाटा मोटर्स और हिंडाल्को को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट
बाजार में छाई इस कमजोरी का असर केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप में करीब 1 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में आधा प्रतिशत की गिरावट आई। बाजार में घबराहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 'इंडिया विक्स' (India VIX), जो बाजार की अस्थिरता को दर्शाता है, उसमें 6 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल देखा गया।
1 मई से लागू होंगे नए नियम, गैस सिलेंडर और क्रेडिट कार्ड यूजर्स को झटका
30 Apr, 2026 11:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मई महीने की शुरुआत के साथ ही आम आदमी की जेब और बैंकिंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं। 1 मई 2026 से लागू होने वाले ये परिवर्तन रसोई बजट से लेकर क्रेडिट कार्ड के उपयोग और ऑनलाइन मनोरंजन तक को प्रभावित करेंगे। यहाँ इन प्रमुख बदलावों का विस्तृत विवरण दिया गया है:
ईंधन की कीमतों में संभावित संशोधन
हर महीने की पहली तारीख को तेल विपणन कंपनियाँ (OMCs) रसोई गैस (LPG), सीएनजी और पीएनजी की नई दरों की समीक्षा करती हैं। 1 मई को घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बदलाव की उम्मीद है, जिसका सीधा असर घर के बजट और रेस्तरां के खाने पर पड़ेगा। इसके अलावा, हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव संभव है, जिससे हवाई यात्रा के टिकटों के दाम प्रभावित हो सकते हैं।
सुरक्षित गैस डिलीवरी और ओटीपी सिस्टम
गैस वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए डिलीवरी नियमों में सख्ती की जा रही है। अब सिलेंडर की डिलीवरी के समय ग्राहकों को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त 'वन टाइम पासवर्ड' (OTP) साझा करना अनिवार्य होगा। यह कदम ब्लैक मार्केटिंग और गलत डिलीवरी को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
एसबीआई क्रेडिट कार्ड के सख्त नियम
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने क्रेडिट कार्ड धारकों के लिए शुल्क संरचना में बदलाव किया है। 1 मई से विलंब शुल्क (Late Payment Fee) बकाये की राशि के आधार पर अलग-अलग स्लैब में वसूला जाएगा। साथ ही, 'BPCL SBI' क्रेडिट कार्ड के ग्राहकों को अब अपनी वार्षिक फीस माफ कराने के लिए सालाना 1 लाख रुपये खर्च करने होंगे, जबकि पहले यह सीमा केवल 50,000 रुपये थी।
ऑनलाइन गेमिंग पर सरकारी शिकंजा
ऑनलाइन गेमिंग उद्योग को विनियमित करने के लिए सरकार नए दिशा-निर्देश लागू कर रही है। अब सट्टा या पैसे वाले गेम्स, सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स के लिए अलग-अलग श्रेणियां होंगी।
पंजीकरण अनिवार्य: वित्तीय लेन-देन वाले गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को अब सरकारी संस्था के पास पंजीकरण कराना होगा।
निगरानी: यूजर्स के पैसों के लेन-देन पर सख्त नजर रखी जाएगी ताकि धोखाधड़ी और लत को नियंत्रित किया जा सके।
मई 2026 में बैंक अवकाश और छुट्टियाँ
मई के महीने में बैंक कई दिनों तक बंद रहेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सूची के अनुसार, मई में रविवार और दूसरे/चौथे शनिवार के अलावा निम्नलिखित प्रमुख अवकाश रहेंगे:
1 मई: मजदूर दिवस (महाराष्ट्र दिवस)।
9 मई: गुरु रवींद्रनाथ टैगोर जयंती।
मई के अंत में: ईद-उल-अजहा (चांद के अनुसार)।
ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे बैंक से जुड़े कार्यों के लिए अवकाश सूची देख लें, हालांकि यूपीआई और नेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं निर्बाध रूप से चालू रहेंगी।
ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल, निवेशक सतर्क
30 Apr, 2026 10:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैश्विक ऊर्जा संकट: $120 के पार पहुँचा कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान तनाव से बिगड़े हालात
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई यह भारी तेजी मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक गतिरोध का परिणाम है। ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली आपूर्ति रुकने की खबरों ने निवेशकों को डरा दिया है।
ट्रंप का कड़ा रुख और चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है जिसमें जलमार्ग को फिर से खोलने की बात कही गई थी। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि जब तक कोई ठोस परमाणु समझौता नहीं होता, प्रतिबंध जारी रहेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विवादित एआई-जनरेटेड तस्वीर के साथ ईरान को चेतावनी देते हुए "नो मोर मिस्टर नाइस गाय" का संदेश साझा किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट का रूप ले सकती है।
बाजार के ताजा आंकड़े
तेल की कीमतों में लगातार नौवें दिन बढ़त देखी गई है:
ब्रेंट क्रूड: 1.62% की वृद्धि के साथ 119.94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया।
WTI क्रूड: 0.59% की तेजी के साथ 107.51 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
इन बढ़ती कीमतों का सीधा प्रभाव मुंबई, दिल्ली और चेन्नई जैसे भारतीय महानगरों में परिवहन लागत और कॉरपोरेट मुनाफे पर पड़ने की आशंका है।
आपूर्ति की चुनौतियां और यूएई का बड़ा कदम
आपूर्ति के मोर्चे पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 1 मई से ओपेक (OPEC) गठबंधन से अलग होने का निर्णय लिया है। इस कदम से तेल उत्पादन और कीमतों पर नियंत्रण रखने की ओपेक की शक्ति कमजोर हो सकती है। वहीं, 28 फरवरी से जारी सैन्य संघर्ष के बाद से खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर गंभीर प्रतिबंध लगे हुए हैं।
भारत पर प्रभाव और भविष्य का अनुमान
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे औद्योगिक केंद्रों में उत्पादन लागत बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका की नाकेबंदी जारी रही और होर्मुज़ जलमार्ग बंद रहा, तो आपूर्ति का संकट और गहराएगा। फिलहाल बाजार में स्थिरता की उम्मीद कम है और आने वाले दिनों में कीमतों में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
भारतीय एयरलाइंस ने शेड्यूल जारी, यात्रियों को मिली राहत
30 Apr, 2026 10:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हवाई यात्रियों के लिए राहत: 1 मई से भारत और दोहा के बीच फिर शुरू होंगी नियमित उड़ानें
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष के कारण पिछले दो महीनों से प्रभावित हवाई सेवाओं को अब फिर से पटरी पर लाने की तैयारी कर ली गई है। 28 फरवरी से शुरू हुए सैन्य अभियान के बाद यह पहली बार है जब वाणिज्यिक उड़ानें पूरी क्षमता के साथ संचालित होंगी।
तीन प्रमुख एयरलाइंस भरेंगी उड़ान
भारत की तीन बड़ी एयरलाइंस—एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और इंडिगो—1 मई से दोहा के लिए अपनी सेवाएं फिर से शुरू करेंगी। इससे दिल्ली, मुंबई, कोच्चि, हैदराबाद और लखनऊ जैसे प्रमुख भारतीय शहरों का सीधा संपर्क कतर की राजधानी से फिर बहाल हो जाएगा।
दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए इस जानकारी की पुष्टि की है। दूतावास ने बताया कि परिचालन का विस्तार वैश्विक विमानन प्राधिकरणों के समन्वय के साथ किया जा रहा है ताकि हवाई सेवाओं को स्थिर किया जा सके।
दूतावास ने जारी की सतर्कता सलाह
हालांकि उड़ानें शुरू हो रही हैं, लेकिन भारतीय दूतावास ने यात्रियों को आगाह भी किया है। सुरक्षा स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए उड़ान कार्यक्रम में अंतिम समय पर बदलाव संभव है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे टर्मिनल और बुकिंग की ताजा जानकारी के लिए मुंबई, चेन्नई या बेंगलुरु स्थित अपनी एयरलाइंस के दफ्तरों या आधिकारिक वेबसाइटों से संपर्क बनाए रखें।
दो महीने बाद कतर के हवाई क्षेत्र में हलचल
पश्चिम एशिया संकट के दौरान कतर का हवाई क्षेत्र लगभग दो महीनों तक सामान्य उड़ानों के लिए बंद रहा। मार्च के बाद से वहां केवल आपातकालीन और निकासी विमानों को ही अनुमति दी जा रही थी। अप्रैल के मध्य में हुए युद्धविराम के बाद अब स्थिति में सुधार हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की वापसी का रास्ता साफ हुआ है। दोहा, दुबई और मस्कट जैसे क्षेत्रों में अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।
Nifty 50 24,000 के नीचे, निवेशकों को झटका
30 Apr, 2026 09:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 950 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी भी 24,000 के नीचे फिसला
मुंबई: सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद खराब रही। कच्चे तेल के $125 प्रति बैरल के करीब पहुँचने और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण निवेशकों ने भारी बिकवाली की। मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे वित्तीय केंद्रों में ट्रेडर्स के बीच घबराहट का माहौल देखा गया।
बाजार के प्रमुख आंकड़े
सेंसेक्स: शुरुआती सत्र में ही 959.22 अंक (-1.23%) गिरकर 76,537.14 के स्तर पर आ गया।
निफ्टी: 285.66 अंक (-1.18%) की कमजोरी के साथ 23,892.00 पर कारोबार करता दिखा।
इंडिया VIX: बाजार में अस्थिरता मापने वाला यह इंडेक्स 4.90% उछलकर 18.29 पर पहुँच गया, जो बढ़ते जोखिम का संकेत है।
विदेशी निवेशकों का पलायन
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले कारोबारी सत्र में 2,468.42 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचकर बाजार से हाथ खींच लिए। कोलकाता, चेन्नई और हैदराबाद के विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय इक्विटी और डेट बाजार से पैसा निकालकर डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं।
दिग्गज कंपनियों की स्थिति
सेंसेक्स की प्रमुख 30 कंपनियों में से महिंद्रा एंड महिंद्रा, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट और अदाणी पोर्ट्स जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा और इंफोसिस जैसी कंपनियों के शेयरों में मामूली बढ़त देखी गई। अहमदाबाद और पुणे के निवेशक भी आईटी सेक्टर की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
वैश्विक बाजारों का हाल
एशियाई बाजार: जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।
अमेरिकी बाजार: फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बदलाव न करने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में दबाव में बंद हुए थे।
विदेशी मुद्रा बाजार में भारी गिरावट, निवेशक चिंतित
30 Apr, 2026 09:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ऐतिहासिक गिरावट: रुपया 95.20 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँचा, कच्चे तेल और डॉलर की मजबूती ने बिगाड़ा खेल
मुंबई: विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत होते ही भारतीय रुपये में 32 पैसे की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। रुपया 95.20 के सर्वकालिक निचले स्तर पर जा गिरा है। मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे आर्थिक केंद्रों के विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव और डॉलर की बढ़ती मांग ने रुपये की स्थिति नाजुक कर दी है।
डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व का रुख
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.01 पर खुलने के बाद संभल नहीं पाया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती न करने के संकेत और सुरक्षित निवेश के लिए डॉलर की ओर निवेशकों के झुकाव से डॉलर इंडेक्स 98.96 पर पहुँच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते कूटनीतिक विवाद ने वैश्विक निवेशकों में घबराहट पैदा कर दी है।
कच्चे तेल का संकट और आपूर्ति की चिंता
कच्चे तेल की कीमतें 122 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गई हैं, जिसका सीधा असर भारत की आयात लागत पर पड़ रहा है। चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद जैसे शहरों के उद्योग जगत में इस बात को लेकर चिंता है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बाधित रहती है, तो आने वाले दिनों में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
शेयर बाजार में हाहाकार और निवेशकों का पलायन
रुपये की गिरावट का सीधा असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला:
सेंसेक्स: शुरुआती सत्र में 821.79 अंक टूटकर 76,674.57 के स्तर पर आ गया।
निफ्टी: 287.3 अंक फिसलकर 23,890.35 पर कारोबार करता दिखा।
FII की निकासी: विदेशी निवेशकों ने पिछले सत्र में करीब 2,468 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे अहमदाबाद, पुणे और गुरुग्राम के ट्रेडिंग सेंटर्स में बिकवाली का दबाव बढ़ गया है।
आर्थिक प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, रुपये में अभी और गिरावट की संभावना बनी हुई है। कच्चे तेल के बढ़ते दाम न केवल मुद्रास्फीति (महंगाई) को बढ़ावा देंगे, बल्कि देश के चालू खाता घाटे (CAD) पर भी बुरा असर डालेंगे। इंदौर, भोपाल और लखनऊ जैसे शहरों के बाजारों में भी इस वैश्विक उथल-पुथल का असर महंगाई के रूप में महसूस किया जा सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
मजदूरों और असंगठित क्षेत्र को मिलेगा बड़ा सहारा
30 Apr, 2026 07:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
एनपीएस संचय' से संवरेगा असंगठित क्षेत्र के कामगारों का भविष्य: PFRDA की नई पहल
नई दिल्ली: देश की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए PFRDA 'एनपीएस संचय' योजना को व्यापक स्तर पर लॉन्च करने जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य उन दिहाड़ी मजदूरों, छोटे दुकानदारों और घरेलू कामगारों को पेंशन के दायरे में लाना है, जो अब तक रिटायरमेंट के बाद नियमित आय की सुविधा से वंचित थे।
पायलट प्रोजेक्ट के बाद देशभर में दस्तक
PFRDA के चेयरमैन एस. रमन के अनुसार, इस योजना का प्रायोगिक परीक्षण (पायलट प्रोजेक्ट) शुरू हो चुका है और जल्द ही इसे मुंबई, दिल्ली, भोपाल, लखनऊ और अहमदाबाद जैसे बड़े केंद्रों सहित पूरे भारत में लागू किया जाएगा। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका सरल निवेश मॉडल है। इसमें निवेशकों को इक्विटी या बॉन्ड्स के बीच चुनाव करने की जटिलता से नहीं जूझना होगा; सिस्टम खुद फंड का प्रबंधन करेगा।
50 करोड़ श्रमिकों को मिलेगा लाभ
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में करीब 50 करोड़ लोग असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत करीब 31.63 करोड़ श्रमिक, जो पीएफ (PF) या ईएसआई (ESI) जैसी सुविधाओं से बाहर हैं, इस योजना के प्राथमिक लाभार्थी होंगे। रायपुर, पटना, इंदौर और जयपुर जैसे शहरों में सक्रिय रिक्शा चालक, कृषि श्रमिक और छोटे कारीगरों के लिए यह योजना बुढ़ापे की लाठी बनेगी। विशेष बात यह है कि इन कामगारों में 54 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं।
सरकारी मॉडल जैसी सुरक्षा
'एनपीएस संचय' को सरकारी कर्मचारियों के एनपीएस मॉडल की तर्ज पर डिजाइन किया गया है। इसमें फंड का आवंटन पहले से निर्धारित अनुपात में होगा, जिससे निवेश का जोखिम कम रहेगा और एक सुरक्षित रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार हो सकेगा। पुणे, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे औद्योगिक शहरों के प्रवासी मजदूरों के लिए भी यह बचत का एक बेहतरीन माध्यम साबित होगा।
सामाजिक सुरक्षा की दिशा में क्रांतिकारी कदम
यह योजना केवल एक निवेश विकल्प नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव की ओर संकेत है। वाराणसी, कानपुर और मेरठ जैसे व्यापारिक केंद्रों में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूरों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
‘E-PRAAPTI’ पोर्टल से बंद पड़े पीएफ खातों की तलाश होगी सरल
29 Apr, 2026 06:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों सदस्यों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। यदि आपका कोई पुराना पीएफ खाता सालों से बंद पड़ा है या आप उसकी जानकारी भूल चुके हैं, तो अब उसे खोजना और सक्रिय करना बहुत आसान होने वाला है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने बुधवार को जानकारी दी कि ईपीएफओ जल्द ही 'E-PRAAPTI' नामक एक नया वेब पोर्टल शुरू करने जा रहा है। यह पोर्टल विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए वरदान साबित होगा जिनके खाते 2014 से पहले के हैं, यानी उस समय के जब यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) की सुविधा शुरू नहीं हुई थी।
क्या है 'E-PRAAPTI' और इसके फायदे?
इसका पूरा नाम 'एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड आधार-बेस्ड एक्सेस पोर्टल फॉर ट्रैकिंग इनऑपरेटिव अकाउंट्स' (E-PRAAPTI) है।
आधार से जुड़ाव: यह पोर्टल पूरी तरह आधार प्रमाणीकरण पर आधारित होगा। इसके जरिए सदस्य अपने पुराने खातों को ट्रैक कर सकेंगे, भले ही उनमें यूएएन लिंक न हो।
लिंकिंग की सुविधा: पुराने खाते को ढूंढने के बाद सदस्य उसे अपने वर्तमान सक्रिय यूएएन से जोड़ सकेंगे और अपनी प्रोफाइल अपडेट कर पाएंगे।
कम कागजी कार्रवाई: इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य मानवीय दखल और दस्तावेजों की जरूरत को कम करना है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और तेज होगी।
दावा निपटान में बनाया नया रिकॉर्ड
ईपीएफओ ने सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में लंबी छलांग लगाई है, जिसका असर हालिया आंकड़ों में दिख रहा है:
रिकॉर्ड निपटान: वित्त वर्ष 2025-26 में ईपीएफओ ने कुल 8.31 करोड़ दावों का निपटान किया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 6.01 करोड़ के मुकाबले काफी ज्यादा है।
ऑटो-मोड की रफ्तार: लगभग 71 प्रतिशत एडवांस दावों को 'ऑटो मोड' के जरिए महज 3 दिनों के भीतर निपटाया गया।
बिना नियोक्ता के काम: करीब 1.59 करोड़ सदस्यों ने अपने बैंक खातों को बिना एम्प्लॉयर की मंजूरी के खुद ही सीड (लिंक) किया, जिससे प्रक्रिया काफी सरल हो गई है।
ट्रांसफर क्लेम: 70 लाख से ज्यादा ट्रांसफर क्लेम बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के ऑटो-प्रोसेस किए गए।
एविएशन सेक्टर में ‘हब-एंड-स्पोक’ क्रांति, एअर इंडिया ने सराहा सरकारी फैसला
29 Apr, 2026 05:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय विमानन क्षेत्र में एक युगांतरकारी बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। भारत को वैश्विक ट्रांजिट हब बनाने की दिशा में सरकार द्वारा प्रस्तावित 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल का एअर इंडिया ने जोरदार स्वागत किया है। इस रणनीति के तहत एअर इंडिया ने वाराणसी से अपनी अंतरराष्ट्रीय सेवाएं शुरू कर विमानन क्षेत्र में नए अध्याय का आगाज किया है।
विदेशी हब पर निर्भरता कम करने की चुनौती
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत के लगभग 35 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय यात्री वर्तमान में दुबई, लंदन और सिंगापुर जैसे विदेशी हवाई अड्डों के माध्यम से यात्रा करते हैं। सरकार की नई रणनीति का लक्ष्य दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे प्रमुख हवाई अड्डों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी केंद्रों के रूप में विकसित कर इस निर्भरता को खत्म करना है।
एअर इंडिया का दृष्टिकोण: एक 'क्रांतिकारी' कदम
एअर इंडिया के सीईओ और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने इस पहल को विमानन पारिस्थितिकी तंत्र (Aviation Ecosystem) के लिए 'परिवर्तनकारी' बताया है। उनके अनुसार:
इससे न केवल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि देश के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिकतम उपयोग भी सुनिश्चित होगा।
यह मॉडल भारतीय विमानन कंपनियों को वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान दिलाने में सहायक होगा।
छोटे शहरों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय पंख
'हब-एंड-स्पोक' मॉडल के लागू होने से भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों की किस्मत बदलने वाली है:
उड़ान योजना से जुड़ाव: यह मॉडल 'उड़ान' योजना के तहत विकसित छोटे हवाई अड्डों को सीधे अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से जोड़ेगा।
महानगरों से आगे विस्तार: एअर इंडिया के अनुसार, विमानन सेवाओं को अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि वाराणसी जैसे शहरों से सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पूर्वी भारत के यात्रियों के लिए यात्रा सुलभ बनाएंगी।
क्या है 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल?
यह मॉडल एक साइकिल के पहिये की तरह काम करता है, जो परिवहन दक्षता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है:
हब (धुरी): एक बड़ा और प्रमुख हवाई अड्डा (जैसे दिल्ली या मुंबई) मुख्य केंद्र के रूप में कार्य करता है।
स्पोक (तीलियां): छोटे क्षेत्रीय हवाई अड्डों को 'स्पोक' कहा जाता है।
कार्यप्रणाली: छोटे शहरों से यात्रियों को पहले 'हब' पर लाया जाता है। वहां से उन्हें उनकी मंजिल के अनुसार बड़ी अंतरराष्ट्रीय या अन्य घरेलू उड़ानों में स्थानांतरित कर अंतिम गंतव्य तक पहुंचाया जाता है।
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