व्यापार
ईंधन को लेकर चिंता बेवजह, सप्लाई पूरी तरह सामान्य: सरकार
17 Apr, 2026 03:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे भू-राजनीतिक संकट के बीच भारत सरकार ने देशवासियों को ईंधन की आपूर्ति को लेकर आश्वस्त किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य है।
इस महत्वपूर्ण जानकारी के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
ईंधन आपूर्ति की वर्तमान स्थिति
सामान्य उपलब्धता: पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, देश के किसी भी हिस्से से गैस खत्म होने या 'ड्राई-आउट' की कोई खबर नहीं है। रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से कार्य कर रही हैं।
ऑटो एलपीजी की मांग में उछाल: आंकड़ों के अनुसार, ऑटो एलपीजी की दैनिक बिक्री में भारी वृद्धि हुई है। फरवरी के 177 टन के मुकाबले अप्रैल में यह बढ़कर 296 टन प्रतिदिन हो गई है। इसका सबसे अधिक असर कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में देखा जा रहा है।
रणनीतिक कदम: सरकार अब एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) के नेटवर्क को तेजी से फैलाने पर ध्यान दे रही है।
समुद्री सुरक्षा और नाविकों का हाल
भारतीय नाविक सुरक्षित: शिपिंग मंत्रालय ने जानकारी दी है कि तनावग्रस्त क्षेत्रों में मौजूद सभी भारतीय नाविक और जहाज पूरी तरह सुरक्षित हैं। पिछले 24 घंटों में किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।
बंदरगाहों का संचालन: देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों पर परिचालन सामान्य है और माल की आवाजाही में कोई बाधा नहीं आ रही है।
सरकार की अपील
प्रशासन ने जनता से अनुरोध किया है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास न करें और ईंधन की 'पैनिक बाइंग' (घबराहट में खरीदारी) न करें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल का स्टॉक किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त है।
हरे निशान पर बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स में जोरदार उछाल
17 Apr, 2026 03:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ संभावित समझौते के संकेत दिए जाने के बाद वैश्विक और घरेलू बाजारों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी और भू-राजनीतिक तनाव घटने की उम्मीद ने भारतीय शेयर बाजार और रुपये को मजबूती प्रदान की है।
इस आर्थिक घटनाक्रम के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
शेयर बाजार में उछाल
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय शेयर बाजारों में रौनक लौट आई है। शुक्रवार को दोनों प्रमुख सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई:
सेंसेक्स: 504.86 अंकों (0.65%) की तेजी के साथ 78,493.54 के स्तर पर बंद हुआ।
निफ्टी: 156.80 अंकों (0.65%) के सुधार के साथ 24,353.55 पर पहुंच गया।
विदेशी निवेश: आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बाजार में शुद्ध खरीदारी की, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा।
डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ मजबूत
अमेरिकी मुद्रा (डॉलर) में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण भारतीय रुपये में भी शानदार मजबूती देखी गई:
शुक्रवार को रुपया 29 पैसे की बढ़त के साथ 92.85 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान वार्ता और मध्य पूर्व में तनाव कम होने की संभावनाओं से रुपये में आने वाले समय में भी सकारात्मक रुझान बना रह सकता है।
कच्चा तेल और वैश्विक संकेत
ब्रेंट क्रूड: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 3.23% की बड़ी गिरावट आई और यह 96.18 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
डॉलर इंडेक्स: छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती मापने वाला इंडेक्स 0.12% गिरकर 97.90 पर आ गया।
ब्लूमबर्ग सूची में बड़ा उलटफेर, अदाणी फिर नंबर-1
17 Apr, 2026 10:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति के ताज को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दिग्गज कारोबारी गौतम अदाणी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ते हुए एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब फिर से अपने नाम कर लिया है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अदाणी की संपत्ति में हुए हालिया इजाफे ने उन्हें इस सूची में शीर्ष पर पहुंचा दिया है।
आंकड़ों में संपत्ति का हाल
इस नए फेरबदल के बाद दोनों भारतीय दिग्गजों की कुल संपत्ति और वैश्विक रैंकिंग इस प्रकार है:
गौतम अदाणी: इनकी कुल संपत्ति बढ़कर 92.6 अरब डॉलर हो गई है। इसके साथ ही वह वैश्विक स्तर पर दुनिया के 19वें सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं।
मुकेश अंबानी: लंबे समय तक शीर्ष पर रहने वाले अंबानी अब 90.8 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ एशिया में दूसरे और दुनिया में 20वें स्थान पर आ गए हैं।
क्यों आया यह बदलाव?
अदाणी और अंबानी की रैंकिंग और संपत्ति में आए इस अंतर के पीछे मुख्य रूप से शेयर बाजार का प्रदर्शन जिम्मेदार है:
अदाणी ग्रुप का शानदार प्रदर्शन: इस साल गौतम अदाणी की संपत्ति में 8.1 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। गुरुवार के एक हालिया कारोबारी सत्र में, जब बीएसई सेंसेक्स 123 अंक गिर गया था, तब भी अदाणी ग्रुप के शेयरों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। अकेले उस दिन अदाणी की संपत्ति में लगभग 3.56 अरब डॉलर जुड़ गए।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का मिला-जुला रुख: दूसरी ओर, मुकेश अंबानी को इस साल अपनी संपत्ति में 16.9 अरब डॉलर की गिरावट का सामना करना पड़ा है, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। हालांकि, उन्हें हाल ही में 7.67 करोड़ (76.7 मिलियन) डॉलर का मामूली फायदा भी हुआ, लेकिन रिलायंस के शेयर मोटे तौर पर सपाट ही रहे, जिससे रैंकिंग में बदलाव आ गया।
वैश्विक अरबपतियों का क्या है हाल?
दुनिया के शीर्ष 20 अरबपतियों में से सात को इस साल अपनी संपत्ति में गिरावट का सामना करना पड़ा है। सबसे बड़ा नुकसान लक्जरी ब्रांड के मालिक बर्नार्ड अरनॉल्ट को हुआ है, जिनकी संपत्ति 44 अरब डॉलर घटी है। बिल गेट्स, वारेन बफे, स्टीव बाल्मर, लैरी एलिसन और मुकेश अंबानी जैसे दिग्गज भी इस साल नुकसान उठाने वाली सूची में शामिल हैं। वहीं, दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति की बात करें तो टेस्ला के सीईओ एलन मस्क 656 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ पहले स्थान पर मजबूती से कायम हैं। उनके बाद 286 अरब डॉलर की कुल संपत्ति के साथ लैरी पेज दूसरे नंबर पर हैं।
अब आगे क्या?
अदाणी और अंबानी के बीच संपत्ति का यह अंतर दर्शाता है कि शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव कितनी तेजी से अरबपतियों की रैंकिंग को बदल सकता है। आने वाले समय में भी दुनिया के सबसे अमीर लोगों के बीच यह प्रतिस्पर्धा जारी रहने की उम्मीद है, जो सीधे तौर पर उनकी कंपनियों के बाजार प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।
बाजार खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान पर, लेकिन रफ्तार सुस्त
17 Apr, 2026 09:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सुस्त शुरुआत हुई है। सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ हरे निशान पर कारोबार कर रहे हैं। एशियाई बाजारों और कच्चे तेल के भाव में नरमी है। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 177.52 अंक चढ़कर 78,166.20 पर पहुंच गया। निफ्टी 37.4 अंक बढ़कर 24,234.15 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 27 पैसे बढ़कर 92.87 पर पहुंच गया।
सूचकांक / मुद्रा शुरुआती बदलाव वर्तमान स्तर
सेंसेक्स 177.52 अंक की बढ़त 78,166.20
निफ्टी 37.4 अंक की बढ़त 24,234.15
रुपया (डॉलर के मुकाबले) 27 पैसे की बढ़त 92.87
वैश्विक भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता शुरू होने की उम्मीदों तथा लेबनान-इजरायल के बीच 10 दिवसीय युद्धविराम लागू होने के चलते शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख देखने को मिला। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और विदेशी फंडों की वापसी ने बाजार की धारणा को मजबूत किया है।
बाजार का हाल और ब्रॉडर मार्केट का दबदबा
शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 177.52 अंक चढ़कर 78,166.20 पर पहुंच गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 37.4 अंक बढ़कर 24,234.15 पर पहुंच गया। खास बात यह है कि बाजार की इस तेजी में बड़े शेयरों की तुलना में छोटे और मझोले शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.85% और निफ्टी मिडकैप 100 में 0.5% की तेजी दर्ज की गई, जबकि मुख्य सूचकांक निफ्टी 50 केवल 0.14% चढ़ा।
प्रमुख शेयरों और सेक्टर्स का क्या हाल?
बाजार के सेक्टोरल रुख और प्रमुख शेयरों की बात करें तो स्थिति कुछ इस प्रकार रही:
टॉप गेनर्स: सेंसेक्स में आईटीसी, एनटीपीसी, ट्रेंट, मारुति सुजुकी, अदाणी पोर्ट्स, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे शेयरों में 2% तक की तेजी दर्ज की गई।
टॉप लूजर्स: इसके विपरीत बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल और टाटा स्टील के शेयरों में मामूली गिरावट देखी गई।
सेक्टोरल इंडेक्स: निफ्टी एफएमसीजी और मीडिया इंडेक्स ने 1% से अधिक की छलांग लगाई, जबकि निफ्टी मेटल इंडेक्स 0.4% टूट गया।
कच्चे तेल में नरमी और रुपये की रिकवरी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ सप्ताहांत में वार्ता की संभावना जताने से कच्चे तेल के बाजार में शांति लौटी है। ब्रेंट क्रूड 1% से ज्यादा गिरकर 98.31 डॉलर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 93.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। अप्रैल महीने में क्रूड का 100 डॉलर से नीचे आना भारत के आयात बिल के लिहाज से बेहद सकारात्मक है। कच्चे तेल में नरमी का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा। शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 27 पैसे मजबूत होकर 92.87 के स्तर पर पहुंच गया।
विदेशी निवेशकों की वापसी
लगातार 1.6 लाख करोड़ रुपये की भारी बिकवाली के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक एक बार फिर लगातार दूसरे सत्र में शुद्ध खरीदार बने हैं। एफआईआई ने गुरुवार को 382 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और पिछले दो दिनों में कुल 1,048 करोड़ रुपये का निवेश किया है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, छोटे और मझोले शेयरों में रिटेल निवेशकों की खरीदारी से तेजी है। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी है कि लंबी अवधि के लिए लार्ज-कैप शेयरों पर ध्यान दें और मौजूदा चौथी तिमाही के नतीजों और मैनेजमेंट की टिप्पणियों पर करीब से नजर रखें। वहीं एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने आगाह किया है कि रुपये की रिकवरी अभी भी भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर है।
अब आगे क्या?
भू-राजनीतिक मोर्चे पर आ रही शांति की खबरों ने शेयर बाजार को फौरी राहत जरूर दी है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता किसी सकारात्मक नतीजे पर पहुंचती है और विदेशी निवेशकों का पैसा यूं ही भारतीय बाजार में आता रहता है, तो आने वाले सत्रों में यह तेजी और स्थिरता कायम रह सकती है।
तेल कीमतों का असर सीमित, भारत की ग्रोथ 6.3% रहने का अनुमान
17 Apr, 2026 06:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/मुंबई। वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने कहा है कि अगर चालू वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है, तब भी भारत की अर्थव्यवस्था 6.3 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। एजेंसी के मुताबिक, यदि कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के आधार स्तर पर रहती है, तो भारत की वृद्धि दर 7.1 फीसदी रहने का अनुमान है। यह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज रफ्तार होगी।
एसएंडपी के निदेशक (संप्रभु एवं अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक वित्त रेटिंग) यी फर्न फुआ ने कहा, दुनिया की किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तुलना में यह आंकड़ा बहुत मजबूत है। इस संकट काल में भारत की विकास दर 6.3 फीसदी रहना एक मजबूत संकेत है जो अन्य अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। हालांकि, एजेंसी ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा आपूर्ति में बाधा या ईंधन की कमी जैसी स्थितियां जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसके अलावा, क्रूड की ऊंची कीमतों से चालू खाता घाटा बढ़ सकता है। कंपनियों की लागत बढ़ने से मुनाफा प्रभावित हो सकता है। इसके साथ ही महंगाई बढ़ने से उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति पर भी दबाव पड़ सकता है।
एसएंडपी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ऊर्जा की बढ़ी कीमतों का असर कम करने के लिए सरकार को उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सब्सिडी पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। इससे राजकोषीय दबाव बढ़ेगा, लेकिन भारत की संप्रभु क्रेडिट रेटिंग पर इसका खास असर नहीं पड़ेगा। सरकार दीर्घकाल में राजकोषीय संतुलन के प्रति प्रतिबद्ध है। खर्चों में लचीलापन है और जरूरत पड़ने पर वह अन्य मदों में कटौती कर राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को बनाए रख सकती है। यदि ऊर्जा कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो 2026-27 में देश की शीर्ष 100 कंपनियों की आय में 15 से 20 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। इससे कर्ज बढ़ेगा जो अंततः उनकी वित्तीय स्थिति पर दबाव डालेगा। बड़ी कंपनियों का कर्ज से कमाई अनुपात (लीवरेज) 0.5 से एक गुना तक बढ़ सकता है।
रिफाइनिंग और एविएशन सेक्टर सबसे अधिक संवेदनशील हैं। ऊर्जा आयात पर निर्भर होने के कारण सीमेंट, धातु और स्टील जैसे क्षेत्र भी जोखिम में हैं। ईधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी से लोगों की क्रय शक्ति घट सकती है, जिसका असर बैंकिंग क्षेत्र पर भी पड़ेगा। जोखिम वाले ऋण, वाहन ऋण और किफायती आवास में कमी आ सकती है। खराब स्थिति में एनपीए में बढ़ोतरी सालाना एक फीसदी के आसपास हो सकती है। यदि हालात लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण बने रहते हैं तो रिजर्व बैंक कुछ क्षेत्रों के लिए ऋण पुनर्गठन की अनुमति दे सकता है ताकि अल्पकालिक नकदी दबाव को संभाला जा सके। फिलहाल भारत की बीबीबी निवेश-ग्रेड संप्रभु रेटिंग पर तत्काल कोई खतरा नहीं है।
पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव सीमित देश की कर्ज अदायगी पर नहीं पड़ा असर
ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद भी भारत की कर्ज चुकाने की क्षमता मजबूत बनी हुई है। आयात-निर्यात बैंक (एक्जिम बैंक) ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का भारतीय कंपनियों की कर्ज अदायगी पर अब तक कोई असर नहीं पड़ा है। आयात-निर्यात बैंक की एमडी और सीईओ हर्षा बंगारी ने बताया कि भले ही पश्चिम एशिया में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों की गतिविधियों पर हाल के महीनों में कुछ असर पड़ा हो, लेकिन उनकी ऋण चुकाने (पुनर्भुगतान) की क्षमता मजबूत बनी हुई है। स्थिर और भरोसेमंद आर्थिक बुनियाद ने वैश्विक अनिश्चितता के दौर में कंपनियों को वित्तीय संकट में फंसने से बचाया है। भारतीय कंपनियों की मजबूती का मुख्य कारण उनके राजस्व स्रोतों का विविधीकरण है। यह सिर्फ पश्चिम एशिया के देशों तक सीमित नहीं हैं। हालांकि, यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो कंपनियों के लिए बहुत-सी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। रुपये में जारी कमजोरी से एक्जिम बैंक को फायदा हो सकता है। बैंक का बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा में होता है, ऐसे में बैलेंस शीट मजबूत हो सकती है। मौजूदा परिस्थितियों में रुपये में कर्ज लेने को प्राथमिकता दी जा रही है।
ट्रेड से डिफेंस तक मजबूत हुई साझेदारी, भारत-ऑस्ट्रिया ने किए 6 अहम MoU साइन
16 Apr, 2026 05:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत और ऑस्ट्रिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक सहयोग को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, अंतरिक्ष और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कुल छह समझौतों, समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और सहमति पत्रों (एलओआई) का आदान-प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ऑस्ट्रियाई चांसलर के सम्मान में आयोजित एक विशेष लंच के बाद इन समझौतों को अंतिम रूप दिया गया।
सरकार की ओर से क्या बताया गया?
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने इस उच्च स्तरीय दौरे पर एक विशेष ब्रीफिंग में बताया कि हैदराबाद हाउस में दोनों देशों के नेताओं के बीच व्यापक बातचीत हुई। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं को कवर किया और आपसी हित के क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विस्तार से विचारों का आदान-प्रदान किया।
भारत-ऑस्ट्रिया के बीच समझौतों का किस क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा?
व्यापारिक जगत के लिए इस वार्ता का सबसे बड़ा आकर्षण निवेश और उद्योग से जुड़े फैसले रहे:निवेश के लिए फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म: दोनों देशों की ओर से द्विपक्षीय निवेश को तेजी से बढ़ावा देने के लिए एक 'फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म' (त्वरित तंत्र) स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इससे भारतीय और ऑस्ट्रियाई कंपनियों के लिए एक-दूसरे के देश में पूंजी प्रवाह और व्यापार करना ज्यादा आसान हो जाएगा।खाद्य सुरक्षा और मानक: दोनों देशों ने खाद्य सुरक्षा और मानकों पर एक अहम समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) और कृषि व्यापार से जुड़े क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है|
रक्षा, अंतरिक्ष और अन्य अहम समझौते
भारत और ऑस्ट्रिया ने अपनी रणनीतिक साझेदारी का दायरा बढ़ाते हुए कई अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग की रूपरेखा तैयार की है:
रक्षा और तकनीक क्षेत्र: सैन्य मामलों, रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी साझेदारी में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक लेटर ऑफ इंटेंट पर मुहर लगी है। यह समझौता इस साल जनवरी में हस्ताक्षरित 'भारत-ईयू रक्षा और सुरक्षा साझेदारी' के आधार पर आगे बढ़ेगा।
ऑडियो-विजुअल और मीडिया: मीडिया और मनोरंजन उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'ऑडियो-विजुअल को-प्रोडक्शन' के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया गया है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग: अंतरिक्ष उद्योग को नई गति देने के लिए दोनों पक्ष वर्ष 2026 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में एक संयुक्त रूप से द्विपक्षीय अंतरिक्ष उद्योग सेमिनार आयोजित करने पर सहमत हुए हैं।
रोजगार और शांति स्थापना: युवाओं और पेशेवरों की गतिशीलता के लिए 'वर्किंग हॉलिडे प्रोग्राम' को शुरू करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही 'इंडिया सेंटर फॉर यूएन पीसकीपिंग' (संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना के लिए भारत केंद्र) और 'ऑस्ट्रियाई आर्म्ड फोर्सेज इंटरनेशनल सेंटर' के बीच एक नई साझेदारी का भी ऐलान किया गया है।
कुल मिलाकर, ऑस्ट्रियाई चांसलर की यह भारत यात्रा दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत है। विशेषकर निवेश के लिए स्थापित किया गया 'फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म' और रक्षा व अंतरिक्ष उद्योग में होने वाले संयुक्त प्रयास आने वाले समय में दोनों देशों के व्यापारिक समुदाय के लिए नए और मजबूत अवसर पैदा करेंगे।समझौतों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पीएम मोदी ने कहा, "चांसलर स्टॉकर, आपकी पहली भारत यात्रा पर मैं आपका हार्दिक स्वागत करता हूँ। हमे बहुत खुशी है कि आपने यूरोप के बाहर अपनी पहली यात्रा के लिए भारत को चुना। यह आपके विज़न और भारत-ऑस्ट्रीया संबंधों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"पीएम मोदी ने कहा कि चार दशकों के बाद ऑस्ट्रिया के चांसलर की भारत यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2026 के ऐतिहासिक भारत -यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड अग्रीमन्ट के बाद, भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच संबंधों में एक नए सुनहरे अध्याय की शुरुआत हुई है। चांसलर स्टॉकर की विज़िट से, हम भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों को भी एक नए कालखंड में ले जा रहे हैं।
नौकरी संकट की अफवाहों पर विराम, TCS ने कर्मचारियों को दी खुशखबरी
16 Apr, 2026 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने कहा है कि उनके यहां छंटनी का दौर अब खत्म हो गया है. अब कंपनी अपने स्टैंडर्ड इंक्रीमेंट साइकिल पर लौट आएगी. यानी कि अब कंपनी अपनी पुरानी सामान्य स्थिति में लौट आएगी, जिससे सैलरी में इंक्रीमेंट को लेकर न कोई अनिश्चितता रहेगी और न ही लंबा इंतजार करना पड़ेगा. TCS का स्टैंडर्ड साइकिल 1 अप्रैल से शुरू होता है, जिसमें पिछले साल देरी हुई थी.दरअसल, साल 2025 के जुलाई में कंपनी ने बड़े पैमाने पर छंटनी का ऐलान किया था, जो इसके ग्लोबल वर्कफोर्स का 2 परसेंट (लगभग 12,261 कर्मचारी) था. इसके पीछे स्ट्रक्चरल रिस्ट्रक्चरिंग और AI (Artificial Intelligence) जैसी तकनीकों के अनुरूप खुद को ढालने का हवाला दिया गया था. कंपनी के इस फैसले के चलते कर्मचारी सैलरी हाइक और अपनी जॉब सिक्योरिटी को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे थे. हालांकि, कंपनी के नए फैसले से अब इन कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है.
कैसे अपनी पुरानी स्थिति में लौटी कंपनी?
कंपनी के CEO के. कृतिवासन के अनुसार, कंपनी मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, डिमांड में सुधार और कारोबारी माहौल के प्रति बढ़ते आत्मविश्वास को देखते हुए अपनी पुरानी स्थिति में लौट आई है. TCS ने Q4 में 13718 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया, जो पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 12.2 परसेंट ज्यादा है. कंपनी का रेवेन्यू भी 9.6 परसेंट की उछाल के साथ 70698 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. कंपनी ने पिछले कुछ समय में 12 बिलियन डॉलर के नए कॉन्ट्रैक्ट्स भी हासिल किए हैं, जिसमें कई मेगा डील्स भी हैं. इन सबके चलते कंपनी को अपनी पुरानी स्थिति में लौटने में मदद मिली है|
टीसीएस में सैलरी हाइक
टीसीएस में परफॉर्मेंस के आधार पर हर साल सैलरी बढ़ती है. अगर रिपोर्टों की माने तो TCS में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को आम तौर पर डबल डिजिट में सैलरी ग्रोथ मिलती है. ज्यादातर कर्मचारियों के लिए सामान्य वेतन वृद्धि आमतौर पर प्रदर्शन रेटिंग और ग्रेड के आधार पर 4.5 परसेंट से 7 परसेंट के बीच होती है|
TCS में हड़कंप
महाराष्ट्र के नासिक में TCS की BPO यूनिट में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण का हाल ही में सनसनीखेज खुलासा हुआ. यहां काम करने वाली कुछ महिलाओं ने कथित यौन उत्पीड़न, गंभीर शोषण और जबरन धर्मांतरण की कोशिशों के चौंकाने वाले दावे किए. इस मामले में नासिक पुलिस ने 9 FIR दर्ज की है और कई लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तौसिफ अत्तार और निदा खान नाम के दो सस्पेंड कर्मचारियों को इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है|
काले धन पर शिकंजा कसने की तैयारी, पेंशन सिस्टम को मजबूत करेगा नया समझौता
16 Apr, 2026 03:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आम आदमी के जीवन भर की बचत और पेंशन फंड को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। भारत में मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को वैध बनाने) और वित्तीय अपराधों के खिलाफ अपनी लड़ाई को मजबूत करते हुए 'फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया' (एफआईयू-आईएनडी) और 'पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी' (पीएफआरडीए) ने एक व्यापक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस करार का सीधा मकसद सूचनाओं को साझा करके पेंशन सिस्टम में पारदर्शिता लाना और संदिग्ध लेन-देन पर रोक लगाना है।
क्या हैं पीएफआरडीए और एफआईयू-आईएनडी?
आम निवेशक के लिहाज से यह जानना जरूरी है कि पीएफआरडीए भारत में 'नेशनल पेंशन सिस्टम' (एनपीएस) और 'अटल पेंशन योजना' (एपीवाई) सहित पूरे पेंशन सेक्टर का नियमन और विकास करता है। वहीं, एफआईयू-आईएनडी देश की वह केंद्रीय एजेंसी है जो संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जानकारी प्राप्त करने, उसका विश्लेषण करने और मनी लॉन्ड्रिंग व आतंकवाद की फंडिंग के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम देती है। इस महत्वपूर्ण समझौते पर फआईयू-आईएनडी के निदेशक अमित मोहन गोविल और पीएफआरडीए के पूर्णकालिक सदस्य रणदीप सिंह जगपाल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर पीएफआरडीए के अध्यक्ष शिवसुब्रमण्यम रमन भी मौजूद रहे।
सुरक्षा तंत्र मजबूत करने के लिए उठाए जाने वाले कदम
इस भागीदारी के तहत दोनों एजेंसियां मिलकर कई अहम मोर्चों पर काम करेंगी, जिनका सीधा फायदा पेंशन ढांचे की मजबूती में दिखेगा:
संदिग्ध लेन-देन की पहचान: मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग (एमएल/टीएफ) के जोखिमों का आकलन किया जाएगा और किसी भी संदिग्ध लेन-देन को पकड़ने के लिए 'रेड फ्लैग इंडिकेटर्स' (खतरे के संकेत) तैयार किए जाएंगे।
कड़ी निगरानी: पेंशन सेक्टर से जुड़ी संस्थाओं द्वारा 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), इसके नियमों और पीएफआरडीए के दिशानिर्देशों का सही से पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी की जाएगी।
ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण: एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (एएमएल) और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने (सीएफटी) से जुड़ी क्षमताओं को बेहतर करने के लिए आउटरीच और ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जाएंगे।
नोडल अधिकारियों की नियुक्ति: दोनों एजेंसियों के बीच लगातार संपर्क और बेहतर तालमेल बनाए रखने के लिए विशेष 'नोडल अधिकारी' और एक 'वैकल्पिक नोडल अधिकारी' नियुक्त किए जाएंगे।
नियमित समीक्षा और विदेशी एजेंसियों से सहयोग: अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ तालमेल बिठाने के लिए हर तिमाही बैठकें होंगी। इसके अलावा, 'एगमोंट प्रिंसिपल्स' के तहत विदेशी एफआईयू के साथ भी सूचनाओं के आदान-प्रदान में मदद मिलेगी।
आम आदमी को क्या फायदा?
पीएफआरडीए अपने अंतर्गत आने वाले मध्यस्थों जैसे- पेंशन फंड्स, सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियों, ट्रस्टियों, एग्रीगेटर्स और पॉइंट ऑफ प्रेजेंस के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा प्रदान करता है। इसका मुख्य उद्देश्य पेंशन इकोसिस्टम का सुव्यवस्थित विकास और अंशधारकों (सब्सक्राइबर्स) के हितों की रक्षा करना है। इस समझौते से वित्तीय उप-क्षेत्रों में जोखिमों पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी। इसका सीधा मतलब यह है कि आम आदमी जो पैसा अपने रिटायरमेंट या भविष्य के लिए एनपीएस और एपीवाई जैसी योजनाओं में जमा कर रहा है, वह वित्तीय धोखाधड़ी और काले धन के खतरे से सुरक्षित रहेगा।एफआईयू-आईएनडी और पीएफआरडीए के बीच हुआ यह रणनीतिक समझौता भारत के पेंशन सेक्टर को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह पहल न केवल वित्तीय अपराधों पर नकेल कसेगी, बल्कि आम लोगों का देश की नियामक संस्थाओं के प्रति भरोसा भी बढ़ाएगी।
फंड जुटाना अब आसान: SEBI ने NPO के लिए बदले नियम, सोशल स्टॉक एक्सचेंज को बढ़ावा
16 Apr, 2026 03:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सोशल स्टॉक एक्सचेंज (एसएसई) को बढ़ावा देने के लिए कई अहम सुधार लागू किए हैं। बुधवार को जारी एक सर्कुलर में, सेबी ने नॉट-फॉर-प्रॉफिट संगठनों (एनपीओ) के लिए रजिस्ट्रेशन की वैधता बढ़ाने और फंड जुटाने की शर्तों को आसान बनाने की घोषणा की है। इन कदमों का मुख्य उद्देश्य बाजार में सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाना और उनके लिए धन जुटाने की प्रक्रिया को सुगम बनाना है।
रजिस्ट्रेशन की अवधि में विस्तार
नियामक ने बिना फंड जुटाए सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर पंजीकृत रहने की सीमा को बढ़ा दिया है। पहले यह सीमा दो साल थी, जिसे अब बढ़ाकर अधिकतम तीन साल कर दिया गया है। सेबी ने यह फैसला एनपीओ द्वारा सामना की जाने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, जैसे वैधानिक और विनियामक मंजूरियों में होने वाली देरी, को ध्यान में रखते हुए लिया है। नए नियमों के अनुसार, कोई भी एनपीओ पंजीकरण की तारीख से दो साल तक बिना फंड जुटाए एक्सचेंज पर पंजीकृत रह सकता है। इसके बाद, सोशल स्टॉक एक्सचेंज (एसएसई) की मंजूरी के साथ इस अवधि को एक अतिरिक्त वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है।
फंड जुटाने की सीमा में कटौती
एनपीओ के लिए फंडरेजिंग में लचीलापन लाने के लिए, सेबी ने 'जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल' (जेडसीजेडपी) इंस्ट्रूमेंट्स के लिए न्यूनतम सब्सक्रिप्शन की आवश्यकता को 75 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि, नियामक ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल उन्हीं प्रोजेक्ट्स पर लागू होगी जहां लागत और परिणामों को प्रति-इकाई के आधार पर स्पष्ट रूप से लागू किया जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आंशिक फंड मिलने से प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
सख्त निगरानी और रिफंड की शर्त
सेबी के दिशानिर्देशों के तहत, आंशिक फंडरेजिंग वाले मामलों में इन-प्रिंसिपल मंजूरी देने से पहले सोशल स्टॉक एक्सचेंज को उचित जांच करनी होगी। एक्सचेंज को यह सुनिश्चित करना होगा कि जुटाए गए फंड का सार्थक तरीके से उपयोग किया जा सके और प्रोजेक्ट के उद्देश्य व्यावहारिक बने रहें। इसके अलावा, यदि तय न्यूनतम सब्सक्रिप्शन प्राप्त नहीं होता है, तो निवेशकों का पैसा रिफंड कर दिया जाएगा।
रिटेल निवेशकों की भागीदारी पर जोर
बाजार में खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सेबी लगातार प्रयास कर रहा है। इससे पहले मार्च में भी सेबी बोर्ड ने सोशल इंपैक्ट फंड्स में व्यक्तिगत निवेशकों की भागीदारी आसान करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया था। नियामक ने एनपीओ के लिए फंड जुटाने को सुगम बनाने के उद्देश्य से न्यूनतम निवेश सीमा को 2 लाख रुपये से भारी कटौती करते हुए मात्र 1,000 रुपये कर दिया था।
अब आगे क्या आउटलुक?
सेबी के इन ताजा सुधारों से सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर निवेश और भागीदारी दोनों के बढ़ने की उम्मीद है। छोटे निवेशकों के लिए निवेश सीमा घटाने और एनपीओ के लिए अनुपालन में ढील देने से भारत में सामाजिक परियोजनाओं के लिए पारदर्शी तरीके से फंड जुटाने के एक नए और सशक्त ढांचे का निर्माण होगा।
सेंसेक्स में जोरदार तेजी, शुरुआती कारोबार में 550 अंक की बढ़त
16 Apr, 2026 09:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार में हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन गुरुवार को भी हरे निशान पर कारोबार होता दिखा। भारतीय बाजार के दो बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में सेसेक्स 566.32 (0.72%) अंकों की बढ़त के साथ 78,677.56 के स्तर पर कारोबार शुरू हुआ। सुबह 10 बजकर 36 मिनट पर सेंसेक्स 289.60 (0.37%) अंकों की बढ़त के साथ 78,400.84 और निफ्टी 84.96 (0.35%) अंक मजबूत होकर 24,316.25 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 619 अंक के उच्चतम स्तर 78,730.32 पर पहुंचा। दूसरी ओर, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 144.45(0.60%) अंक उछलकर 24,375.75 के स्तर पर पहुंच और देखते-देखते 169.65 अंक चढ़कर 24,400.95 तक की छलांग लगाने में सफल रहा। शुरुआती कारोबार के दौरान आईसीआईसीआई और एलएंडटी के शेयर टॉप गेनर्स के रूप में कारोबार करते दिखे। बाजार में आई तेजी से बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि हुई, जिससे यह बढ़कर 462 लाख करोड़ रुपये हो गया।
बाजार में हरियाली का क्या कारण?
वैश्विक भू-राजनीतिक चिंताओं के कम होने और अमेरिका तथा ईरान के बीच वार्ता फिर से शुरू होने की उम्मीदों के चलते गुरुवार को शुरुआती कारोबार में घरेलू शेयर बाजारों के बेंचमार्क सूचकांकों- सेंसेक्स और निफ्टी- में मजबूत बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और विदेशी फंडों की वापसी से बाजार की धारणा को सकारात्मक बल मिला है।
बाजार के प्रमुख सेक्टर्स में क्या चल रहा?
बाजार की इस तेजी के बीच कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयरों में शानदार प्रदर्शन देखने को मिला, जबकि कुछ पर दबाव बना रहा:
टॉप गेनर्स: सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से इटरनल (Eternal), इन्फोसिस (Infosys), टेक महिंद्रा (Tech Mahindra), बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance), टाटा स्टील (Tata Steel) और इंटरग्लोब एविएशन (InterGlobe Aviation) के शेयर सबसे अधिक लाभ में रहे।
टॉप लूजर्स: दूसरी ओर, सन फार्मा (Sun Pharma) और टाइटन (Titan) के शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक बाजार का क्या हाल और कच्चे तेल का भाव क्या?
एशियाई बाजारों में भी मजबूत कारोबारी धारणा देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225, शंघाई का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। बुधवार को अमेरिकी बाजार भी अधिकतर बढ़त के साथ ही बंद हुए थे। इस बीच, वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड मामूली 0.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 94.97 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
बाजार की चाल पर जानकारों की क्या राय?
इनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. के अनुसार, "अमेरिका-ईरान वार्ता को फिर से शुरू करने की दिशा में प्रगति के इर्द-गिर्द नए सिरे से पैदा हुए आशावाद ने तत्काल भू-राजनीतिक चिंताओं को कम करने में मदद की है, जिससे समग्र जोखिम लेने की क्षमता में वृद्धि हुई है"। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें अब 94-95 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल की सीमा में समेकित हो रही हैं, जो घरेलू बाजार के लिए एक सकारात्मक है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के मोर्चे पर भी अच्छी खबर है। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, एफआईआई ने बुधवार को 666.15 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर खरीदे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पहले कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण एफआईआई की निरंतर निकासी ने भारतीय इक्विटी पर भारी दबाव डाला था। हालांकि, अब बाजार में स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि विदेशी निवेशक 666 करोड़ रुपये का निवेश कर फिर से मामूली रूप से शुद्ध खरीदार (नेट बायर्स) बन गए हैं।
बाजार में आगे के लिए क्या आउटलुक?
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक शांति, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और विदेशी निवेशकों के लौटते भरोसे ने भारतीय बाजारों को एक मजबूत आधार प्रदान किया है। यदि वैश्विक मोर्चे पर कोई नई नकारात्मक खबर नहीं आती है, तो अल्पकाल में बाजार की यह रिकवरी और स्थिरता आगे भी जारी रह सकती है।
2025-26 में एक्सपोर्ट ने छुआ नया मुकाम, भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन
16 Apr, 2026 06:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात के मोर्चे पर नया इतिहास रचा है। वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात पहली बार 860 अरब डॉलर के पार पहुंच गया, जो देश की वैश्विक व्यापार में बढ़ती हिस्सेदारी को दर्शाता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से मार्च 2025-26 के दौरान कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के 825.26 अरब डॉलर के मुकाबले 4.22 फीसदी अधिक है।
वस्तु निर्यात में भी हल्की लेकिन सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। यह 2024-25 के 437.70 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 441.78 अरब डॉलर हो गया। मार्च 2026 में वस्तु निर्यात 38.92 अरब डॉलर रहा, जो पूरे वित्त वर्ष का सबसे ऊंचा मासिक स्तर है। फरवरी में यह 36.61 अरब डॉलर था। वहीं, आयात 6.51 फीसदी घटकर फरवरी के 63.71 अरब डॉलर के मुकाबले 59.59 अरब डॉलर हो गया। इसके चलते व्यापार घाटा कम होकर 20.67 अरब डॉलर रह गया। हालांकि, देश के वस्तु निर्यात में एक साल पहले के मुकाबले 7.44 फीसदी कमी दर्ज की गई।
अमेरिकी निर्यात में वृद्धि ने युद्ध का प्रभाव कम करने में मदद की। इस तेजी के पीछे पेट्रोलियम उत्पादों और इंजीनियरिंग वस्तुओं की अहम भूमिका रही। मशीनरी, ऑटो पुर्जे और औद्योगिक उपकरणों की मांग से इंजीनियरिंग क्षेत्र ने मजबूती दिखाई। मांस व डेयरी निर्यात भी बढ़ा। मार्च में माल निर्यात 38.92 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले 42.05 अरब डॉलर से कम है।
एमएसएमई सेक्टर के लिए 5.27 लाख से अधिक क्रेडिट गारंटी
ईरान युद्ध जैसे संकट से निपटने के लिए सरकार ने फरवरी-मार्च में सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसएमई) को 5.27 लाख से अधिक क्रेडिट गारंटी दी है। इसका मूल्य 92,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अलावा, एमएसएमई क्षेत्र के लिए इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) जैसी क्रेडिट योजना लाने पर विचार कर रही है। क्रेडिट योजना के लिए वित्त मंत्रालय के वित्त सेवा विभाग से परामर्श किया जा रहा है। उधर, रिजर्व बैंक ने भी बिना गारंटी वाले ऋण की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी है। एमएसएमई मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव रजनीश ने कहा, सरकार एमएसएमई संघों और नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन के साथ संपर्क में है ताकि छोटे उद्योगों को घरेलू स्तर पर थोक कच्चा माल उपलब्ध कराया जा सके। फरवरी-मार्च में 20 लाख से अधिक एमएसएमई ने उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। देश में पंजीकृत एमएसएमई की कुल संख्या 8 करोड़ से अधिक हो गई है।
नए टैरिफ और व्यापार जांच पर होगी अहम चर्चा
15 Apr, 2026 03:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की बातचीत एक बार फिर से रफ्तार पकड़ने जा रही है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और द्विपक्षीय वार्ताओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल आगामी 20 से 22 अप्रैल 2026 तक अमेरिका का दौरा करेगा। हाल ही में अमेरिका द्वारा लगाए गए नए आयात शुल्क (टैरिफ) और व्यापारिक जांच से जुड़े घटनाक्रमों के बीच इस आगामी बैठक को व्यापार जगत के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अंतरिम समझौते और टैरिफ में मिली छूट
इस साल की शुरुआत में दोनों देशों के बीच व्यापारिक मोर्चे पर कई बड़े फैसले देखने को मिले हैं। 2 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की आधिकारिक घोषणा की गई थी। इसके कुछ ही दिनों बाद, 7 फरवरी 2026 को दोनों देशों ने इस विषय पर एक संयुक्त बयान भी जारी किया था। इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए, अमेरिका ने 7 फरवरी को 25 प्रतिशत के अतिरिक्त यथामूल्य टैरिफ को हटा लिया था, जो कि भारतीय व्यापार के लिए एक बड़ी राहत थी। इसके अतिरिक्त, 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले ने पारस्परिक टैरिफ को पूरी तरह से अमान्य कर दिया। हालांकि, इस फैसले के तहत धारा 232 वाले टैरिफ और इससे जुड़ी छूट पहले की तरह ही जारी रहेंगी।
नए अमेरिकी टैरिफ और व्यापारिक चुनौतियां
इन सकारात्मक व्यापारिक कदमों के बीच, अमेरिकी सरकार के कुछ नए फैसलों ने नई चुनौतियां भी खड़ी की हैं। 24 फरवरी 2026 से अमेरिकी सरकार ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत एक कार्यकारी आदेश लागू किया है। इस आदेश के माध्यम से अमेरिका ने सभी देशों से आने वाले कुछ चुनिंदा उत्पादों पर 10 प्रतिशत का नया टैरिफ लगा दिया है। इसके साथ ही, अमेरिका ने व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत दो नई वैश्विक जांच भी शुरू कर दी हैं, जिनका सीधा प्रभाव भारतीय निर्यात पर भी पड़ सकता है:
अतिरिक्त क्षमता: अमेरिका द्वारा शुरू की गई पहली जांच 'अतिरिक्त क्षमता' को लेकर है, जिसके दायरे में भारत सहित दुनिया की 16 अर्थव्यवस्थाएं शामिल की गई हैं।
जबरन श्रम: दूसरी जांच 'जबरन श्रम' के संवेदनशील मुद्दे पर केंद्रित है, और इस जांच में भारत समेत 60 अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया है।
भारत सरकार का रुख और आगे की राह
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) द्वारा इन नई जांचों के संबंध में विचार-विमर्श का अनुरोध किया गया था। इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए, भारत सरकार ने अपना आधिकारिक जवाब अमेरिकी प्रशासन को सौंप दिया है। भारतीय दल की 20 से 22 अप्रैल की यह अमेरिका यात्रा द्विपक्षीय व्यापार नीतियों में स्थिरता लाने के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम है। इस वार्ता से उम्मीद की जा रही है कि नए अमेरिकी टैरिफ नियमों और व्यापारिक जांच के कारण पैदा हुई मौजूदा चिंताओं का कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा, जिससे भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक साझेदारी को एक नई दिशा मिलेगी।
महंगाई ने फिर बढ़ाई चिंता, मार्च में दर पहुंची 3.88%
15 Apr, 2026 12:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में थोक महंगाई (WPI) लगातार पांचवें महीने बढ़ते हुए मार्च 2026 में 3.88 फीसदी पर पहुंच गई। यह फरवरी के 2.13 फीसदी और पिछले साल मार्च के 2.25 फीसदी से काफी ज्यादा है। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस तेजी के पीछे मुख्य वजह ईंधन, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कीमतों का तेज उछाल है। उद्योग मंत्रालय ने बयान में कहा कि मार्च में महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, बेसिक मेटल्स, नॉन-फूड आर्टिकल्स और अन्य मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की कीमतों में वृद्धि रही।
ईंधन और कच्चे तेल में बड़ा उछाल
WPI आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई फरवरी के -3.78 फीसदी (गिरावट) से बढ़कर मार्च में 1.05 फीसदी हो गई। खासतौर पर कच्चे तेल (क्रूड पेट्रोलियम) में महंगाई 51.57 फीसदी तक पहुंच गई, जो फरवरी में -1.29 फीसदी थी।
मैन्युफैक्चरिंग महंगी, लेकिन खाने-पीने की रफ्तार धीमी
मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की महंगाई भी फरवरी के 2.92 फीसदी से बढ़कर मार्च में 3.39 फीसदी हो गई। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार थोड़ी कम हुई है।
फूड आर्टिकल्स महंगाई: 1.90% (फरवरी: 2.19%)
सब्जियों की महंगाई: 1.45% (फरवरी: 4.73%)
पश्चिम एशिया संकट का असर
अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद पश्चिम एशिया में जारी संकट का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ा है। 28 फरवरी से अब तक कच्चे तेल के दाम 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुके हैं। एक महीने के भीतर कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।
सरकार का कदम: एक्साइज ड्यूटी में कटौती
तेल कीमतों के असर को कम करने के लिए सरकार ने 26 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाई, ताकि कंपनियां बढ़ी लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर न डालें।
रिटेल महंगाई भी बढ़ी, आरबीआई ने दरें स्थिर रखीं
इससे पहले जारी आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा महंगाई (CPI) मार्च में बढ़कर 3.4 फीसदी हो गई, जो फरवरी में 3.21 फीसदी थी। रिजर्व बैंक ने हाल ही में अपनी द्वैमासिक मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को यथावत रखा है। केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से खुदरा महंगाई के आधार पर ही नीतिगत दरों का फैसला करता है।कुल मिलाकर, ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने थोक महंगाई को ऊपर धकेला है, जबकि खाद्य महंगाई में थोड़ी नरमी देखने को मिली है।
शेयर बाजार में रौनक, सेंसेक्स-निफ्टी दोनों में शानदार बढ़त
15 Apr, 2026 09:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। एक दिन की छुट्टी के बाद घरेलू शेयर बाजार में बुधवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत हरे निशान पर हुई। सेंसेक्स में 1,350 अंक से अधिक की तेजी देखी गई, वहीं निफ्टी 24,200 के पार पहुंचने में सफल रहा। शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स 78,270.42 के स्तर तक गया। वहीं, निफ्टी भी 24,280.90 के ऊच्च स्तर तक पहुंच गया। बैंक और रियल्टी इंडेक्स में 2% का उछाल दिखा। ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता की नई उम्मीदों समेत कई अन्य कारकों ने बाजार में बढ़त को बढ़ावा दिया। बुधवार को शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में उछाल आया, जो वैश्विक बाजारों में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिरावट को दर्शाता है। यह उछाल अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक संबंधों के फिर से शुरू होने की उम्मीदों के बीच आया है। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,422.85 अंक बढ़कर 78,270.42 के हाई पर पहुंच गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 438.25 अंक चढ़कर 24,280.90 पर पहुंचा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता फिर से शुरू होने की उम्मीदों के बीच कमजोर अमेरिकी मुद्रा के कारण बुधवार को शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 20 पैसे मजबूत होकर 93.15 पर पहुंच गया।
शुरुआती कारोबार में सेसेक्स के सभी 30 शेयर हरे निशान पर दिखे
शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों के शेयर सकारात्मक दायरे में थे। इंटरग्लोब एविएशन, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एटर्नल, लार्सन एंड टुब्रो और बजाज फाइनेंस प्रमुख लाभ कमाने वाली कंपनियां थीं। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.26 प्रतिशत बढ़कर 95.04 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। रिसर्च एनालिस्ट और लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा, "बाजार तात्कालिक जोखिमों को नजरअंदाज करते हुए अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक संबंधों के फिर से शुरू होने की संभावना को ध्यान में रख रहे हैं। इस बदलाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जो ऊर्जा आयात पर भारत की निर्भरता को देखते हुए उसके लिए एक महत्वपूर्ण सकारात्मक पहलू है,"
ट्रंप का दावा- जल्द खत्म हो सकता है युद्ध
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध "समाप्त होने के कगार पर है", और उन्होंने दावा किया है कि अगर वह अभी अपना समर्थन वापस ले लेते हैं, तो तेहरान को देश का पुनर्निर्माण करने में 20 साल लगेंगे। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "मुझे लगता है कि यह लगभग खत्म हो चुका है, हाँ। मैं इसे लगभग खत्म होने के कगार पर मानता हूँ"। इस इंटरव्यू का प्रसारण बाद में होना है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया कि ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ वार्ता का दूसरा दौर अगले दो दिनों में इस्लामाबाद में आयोजित किया जा सकता है।एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक उच्च स्तर पर कारोबार कर रहे थे।
अमेरिकी बाजार में भी दिखी हरियाली
मंगलवार को अमेरिकी बाजार सकारात्मक रुख के साथ बंद हुए। नैस्डैक कंपोजिट में 1.96 प्रतिशत की उछाल आई, एसएंडपी 500 में 1.18 प्रतिशत की वृद्धि हुई और डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.66 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा, "अमेरिका-ईरान वार्ता और इजरायल-लेबनान वार्ता के फिर से शुरू होने की उम्मीदें और दो दिनों में ब्रेंट क्रूड में 10 डॉलर की गिरावट निकट भविष्य में बाजार के लिए अच्छे संकेत हैं।" डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में मंगलवार को शेयर बाजार बंद रहे। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने एक दिन की राहत के बाद सोमवार को फिर से 1,983.18 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,432.30 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
सोमवार को बाजार में दिखी थी बड़ी गिरावट
सोमवार को सेंसेक्स 702.68 अंक या 0.91 प्रतिशत गिरकर 76,847.57 पर बंद हुआ। निफ्टी 207.95 अंक या 0.86 प्रतिशत गिरकर 23,842.65 पर समाप्त हुआ। पश्चिम एशिया संकट के बीच पाकिस्तान में हुुई शांति वार्ता विफल होने के बाद अनिश्चितताओं का माहौल छा गया, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया और वैश्विक स्तर पर डॉलर की मांग बढ़ गई। इसके चलते सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 52 पैसे गिरकर 93.35 पर बंद हुआ। विदेशी मुद्रा विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी घोषणा के बाद ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी करने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने को लेकर अनिश्चितताओं ने घरेलू शेयरों से विदेशी पूंजी की निकासी को और तेज कर दिया, जिससे भारतीय मुद्रा कमजोर हो गई।
सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर सेंसेक्स और निफ्टी
सेंसेक्स
78,197.58
+1350.01 +1.76 %
15 Apr 26 | 9:15
निफ्टी
24,232.45
389.80(1.63%)
15-Apr-2026 09:15 IST
UPI का जलवा कायम, डिजिटल ट्रांजैक्शन में भारत ने बनाया रिकॉर्ड
15 Apr, 2026 08:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत में छोटे लेनदेन के लिए यूपीआई का चलन तेजी से बढ़ा है। इंडिया डिजिटल पेमेंट्स 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, यूपीआई के जरिये 2025 में 228.5 अरब लेनदेन दर्ज किए। कुल लेनदेन मूल्य बढ़कर 299.74 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस बीच, औसत लेनदेन आकार लगातार घट रहा है, जो इस बात का संकेत है कि अब छोटी खरीदारी में भी यूपीआई का चलन बढ़ रहा है। व्यापारिक लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। व्यक्ति-से-व्यापारी (पीटूएम) भुगतान 34 फीसदी बढ़कर 143.82 अरब हो गया। यूपीआई क्यूआर कोड की संख्या बढ़कर 73 करोड़ से अधिक हो गई है, जबकि पॉइंट-ऑफ-सेल टर्मिनल की संख्या 1.14 करोड़ से अधिक पहुंच गई है। जहां यूपीआई छोटे भुगतान में अग्रणी बना हुआ है, वहीं क्रेडिट कार्ड का उपयोग बड़े लेनदेन में बढ़ रहा है। 2025 में क्रेडिट कार्ड लेनदेन 27 फीसदी बढ़कर 5.69 अरब हो गया, जबकि डेबिट कार्ड के उपयोग में 23 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
भारत बनेगा दूसरा बड़ा सौर ऊर्जा बाजार
भारत 2026 तक दूसरा बड़ा सौर ऊर्जा बाजार बनने की राह पर है। भारत ने मात्र 14 महीनों में 50 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़कर अब तक की सबसे तेज वृद्धि हासिल की है। देश का सौर ऊर्जा उत्पादन 150 गीगावाट तक पहुंच गया है। पहले 50 गीगावाट तक पहुंचने में 11 साल लगे थे।
आज से भुना सकेंगे सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
आरबीआई ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2019-20 सीरीज-पांच के लिए समयपूर्व मोचन (प्रीमैच्योर रिडेम्पशन) कार्यक्रम घोषित कर दिया है। निवेशक 15 अप्रैल 2026 को अपने बॉन्ड समय से पहले भुना सकेंगे। इसे 15 अक्तूबर 2019 को जारी किया गया था।
पेटीएम के स्वामित्व ढांचे में हुआ बदलाव
पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशन्स में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 50.3 फीसदी हो गई। इसके साथ ही यह बहुलांश भारतीय स्वामित्व एवं नियंत्रण वाली कंपनी बन गई। इसमें म्यूचुअल फंड कंपनियों की बड़ी भूमिका रही।
10 फीसदी तक बढ़ सकता है निजी कर्मचारियों का वेतन
नौकरी छोड़ने की दर बढ़ने की चिंताओं के बीच भारतीय कंपनियां वित्त वर्ष 2026-27 में अपनी भर्ती रणनीति को अधिक संतुलित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। जीनियस एचआरटेक के अनुसार, अब कंपनियों का फोकस मझोले स्तर की भर्तियों पर अधिक रहेगा। वेतन वृद्धि औसतन 5 से 10 फीसदी रहने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 49 फीसदी कंपनियां मझोले स्तर के कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं। कार्यबल विस्तार को लेकर रुख मिला-जुला है। करीब 28 फीसदी संस्थान भर्ती 10-15 फीसदी बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, जबकि 43 फीसदी कंपनियां सीमित वृद्धि के पक्ष में हैं। 46 फीसदी कंपनियां 10 फीसदी तक वेतन बढ़ा सकती हैं। नए श्रम कानूनों के बाद 57 फीसदी कंपनियां अपने वेतन ढांचे में बदलाव की योजना बना रही हैं। इन कर्मचारियों को होगा फायदा: वेतन वृद्धि का सबसे अधिक लाभ मध्यम-सीनियर स्तर के कर्मचारियों को मिलने की उम्मीद है। इनका हिस्सा 48 फीसदी तक हो सकता है। इसके मुकाबले जूनियर और सीनियर स्तर के कर्मचारियों की वेतन वृद्धि क्रमशः 26 फीसदी और 22 फीसदी रहने का अनुमान है।
आईएमएफ का भारत पर भरोसा 6.5% विकास दर का अनुमान
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की आर्थिक वृद्धि पर सकारात्मक अनुमान जताते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2026-27 में 6.5 फीसदी रफ्तार से बढ़ सकती है। वृद्धि अनुमान में बढ़त को मजबूत घरेलू प्रदर्शन और बाहरी कारकों से समर्थन मिला है। इसके बूते भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना रहेगा। आईएमएफ के अनुसार, 2025 में बेहतर आर्थिक प्रदर्शन का असर आगे भी दिखेगा। भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ में कमी से निर्यात को राहत मिली है। इससे पश्चिम एशिया के तनाव से उत्पन्न नकारात्मक प्रभाव कुछ हद तक संतुलित हुए हैं।युद्ध ने वैश्विक वृद्धि की धीमी: आईएमएफ ने कहा, यदि पश्चिम एशिया का संघर्ष सीमित अवधि के लिए रहता है, तो विश्व अर्थव्यवस्था की वृद्धि में मामूली नरमी आ सकती है। 2026 में वैश्विक वृद्धि दर 3.1 फीसदी और 2027 में 3.2 फीसदी रहने का अनुमान है।
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