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LPG Price Today: आपके शहर में 14.2 किलो गैस सिलेंडर कितने रुपये में मिल रहा है?
19 Jun, 2026 01:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत में रसोई गैस (LPG) की दरें पूरी तरह से सरकारी तेल विपणन कंपनियों द्वारा निर्धारित की जाती हैं, जिनमें वैश्विक ऊर्जा बाजार के अनुरूप हर महीने संशोधन किया जाता है। इसी सिलसिले में आज 19 जून को देश के भीतर 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत राजधानी दिल्ली में 942.00 रुपये और आर्थिक राजधानी मुंबई में 941.50 रुपये पर स्थिर है। वहीं, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम इन दोनों महानगरों में क्रमशः 3113.50 रुपये और 3067.50 रुपये दर्ज किए गए हैं।
महानगरों सहित देश के प्रमुख शहरों में रसोई गैस के ताजा दाम
विभिन्न राज्यों में लगने वाले स्थानीय करों और परिवहन लागत के अंतर के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में एलपीजी सिलेंडरों के दाम अलग-अलग होते हैं। वर्तमान में देश के अन्य बड़े शहरों की बात करें, तो कोलकाता में घरेलू गैस सिलेंडर 968.00 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3256.00 रुपये में उपलब्ध है। दक्षिण के प्रमुख शहर चेन्नई में घरेलू सिलेंडर का भाव 957.50 रुपये और कमर्शियल का 3283.00 रुपये है। बेंगलुरु में उपभोक्ताओं को घरेलू सिलेंडर के लिए 944.50 रुपये और कमर्शियल के लिए 3198.00 रुपये देने पड़ रहे हैं। अहमदाबाद में यह दरें क्रमशः 949.00 रुपये और 3133.00 रुपये हैं, जबकि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में घरेलू गैस 979.50 रुपये और कमर्शियल 3236.00 रुपये में मिल रही है। ओडिशा के भुवनेश्वर में घरेलू सिलेंडर 968.00 रुपये और कमर्शियल 3290.50 रुपये का है, वहीं बिहार के पटना में घरेलू रसोई गैस की कीमत 1031.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर का दाम 3400.50 रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
हालिया मूल्य वृद्धियों से बिगड़ा आम जनता के घर का बजट
बीते कुछ महीनों में रसोई गैस की कीमतों में हुई लगातार बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं की जेब और मासिक बजट पर सीधा असर डाला है। सरकारी तेल कंपनियों ने अभी हाल ही में 7 जून को घरेलू सिलेंडर के दामों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की थी, जिससे पहले मार्च महीने में भी इसमें 60 रुपये का तगड़ा इजाफा किया गया था। केवल घरेलू ही नहीं, बल्कि कमर्शियल सिलेंडरों के दामों में भी मई के महीने में 993 रुपये की ऐतिहासिक और रिकॉर्डतोड़ वृद्धि देखी गई थी, जिसके ठीक बाद 1 जून को फिर से इसकी कीमतों को 42 रुपये बढ़ा दिया गया। इन भारी-भरकम वृद्धियों के बीच अब ईरान और अमेरिका के मध्य हुए हालिया शांति समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा सुचारू रूप से खुलने के बाद वैश्विक स्तर पर आपूर्ति सुधरने की उम्मीद है, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं को भी दामों में जल्द कटौती की आस है।
अन्तरराष्ट्रीय लागत से कम दाम पर बिक्री और कंपनियों को भारी नुकसान
पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, देश में घरेलू रसोई गैस की खुदरा कीमतें इस समय वास्तविक बाजार लागत की तुलना में काफी कम रखी गई हैं। वास्तव में विदेशों से एलपीजी का आयात करने और फिर उसे रीफिलिंग प्लांट से उपभोक्ताओं के घरों तक सुरक्षित पहुंचाने का कुल खर्च प्रति सिलेंडर लगभग 1600 रुपये बैठता है। इसके विपरीत, तेल कंपनियां देश के नागरिकों को राहत देने के लिए इसे केवल 942 रुपये में बेच रही हैं, जिसके कारण उन्हें हर एक सिलेंडर पर करीब 700 रुपये का सीधा घाटा (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ रहा है। इस भारी वित्तीय नुकसान की भरपाई में अभी लंबा समय लग सकता है, इसलिए तुरंत राहत मिलने की संभावना बेहद कम है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल में आई मंदी का लाभ देने के लिए आगामी 1 जुलाई को होने वाली तेल कंपनियों की मासिक समीक्षा बैठक में आंशिक कटौती का निर्णय लिया जा सकता है।
वाहन लेकर निकलने से पहले चेक करें फ्यूल रेट, आज कितना महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल?
19 Jun, 2026 01:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में वाहन ईंधनों के खुदरा भाव में पिछले कुछ समय से किसी भी प्रकार का फेरबदल देखने को नहीं मिला है और कीमतें अपने पुराने स्तर पर ही टिकी हुई हैं। इसके बावजूद बाजार में तेल के दामों पर लगातार पैनी नजर रखी जा रही है। यदि आप भी आज अपने वाहन में पेट्रोल या डीजल भरवाने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए आज के ताजा भाव जानना बेहद जरूरी है। तेल विपणन कंपनियों ने आज, 19 जून 2026 के लिए देशव्यापी स्तर पर पेट्रोल और डीजल की नई दरें घोषित कर दी हैं। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी प्रमुख सरकारी तेल कंपनियां रोजाना सुबह 6 बजे वैश्विक कच्चे तेल की चाल, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की साख और स्थानीय टैक्स संरचना के आधार पर खुदरा कीमतों को संशोधित व अपडेट करती हैं।
कच्चे तेल में गिरावट के बावजूद घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया मंदी के बाद से ही आम उपभोक्ताओं के बीच यह उम्मीद काफी बढ़ गई है कि घरेलू बाजार में भी पेट्रोल-डीजल के दाम घटाए जाएंगे। इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 77.69 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड का रेट 74.90 डॉलर प्रति बैरल के इर्द-गिर्द बना हुआ है। बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट लंबे समय तक बरकरार रहती है, तो निश्चित तौर पर आने वाले दिनों में आम जनता को महंगी ईंधन दरों से कुछ राहत मिल सकती है।
महानगरों और प्रमुख शहरों में आज के ताजा भाव
देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में लगने वाले स्थानीय वैट (VAT) और माल ढुलाई शुल्क के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग होती हैं। आज देश के प्रमुख शहरों में ईंधन की दरें प्रति लीटर के हिसाब से निर्धारित की गई हैं। देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.18 रुपये और डीजल की कीमत 97.83 रुपये बनी हुई है। कोलकाता में उपभोक्ताओं को प्रति लीटर पेट्रोल के लिए 113.47 रुपये और डीजल के लिए 99.82 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। चेन्नई में आज पेट्रोल का भाव 107.77 रुपये और डीजल का भाव 99.55 रुपये है। बेंगलुरु में पेट्रोल 110.93 रुपये और डीजल 98.80 रुपये में बिक रहा है, जबकि हैदराबाद में पेट्रोल की दर 115.69 रुपये और डीजल की दर 103.82 रुपये प्रति लीटर है। पर्वतीय क्षेत्र शिमला में पेट्रोल 102.55 रुपये और डीजल 94.61 रुपये में उपलब्ध है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल 102.05 रुपये और डीजल 95.55 रुपये प्रति लीटर है, जबकि बिहार के पटना में पेट्रोल की कीमत 113.35 रुपये और डीजल की कीमत 99.36 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की वैश्विक परिस्थितियों पर नजर, जल्द राहत के आसार कम
ईंधन की कीमतों में कटौती कब होगी, इस सवाल पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार वैश्विक भू-राजनीतिक हालातों और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार के उतार-चढ़ाव का लगातार बारीकी से आकलन कर रही है। देश की आर्थिक स्थिरता और तेल कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही खुदरा दरों में संशोधन का अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि कच्चे तेल में नरमी के बावजूद देश के घरेलू बाजार में तुरंत प्रभाव से दाम कम होने की संभावना फिलहाल काफी कम दिखाई दे रही है।
बंगाल को मिलेगी नई रफ्तार! हुगली नदी के नीचे अंडर-रिवर टनल बनाने की योजना
19 Jun, 2026 01:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के बाद नवगठित शुभेंदु अधिकारी की सरकार राज्य के चहुंमुखी कायाकल्प और प्रशासनिक सुधारों में पूरी ताकत से जुट गई है। इस नई राजनीतिक व्यवस्था के तहत प्रदेश को आर्थिक प्रगति की राह पर ले जाने के लिए सरकार का मुख्य फोकस भारी औद्योगिक निवेश आकर्षित करने पर है। राज्य की छवि को पूरी तरह 'बिजनेस-फ्रेंडली' बनाने और स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से खुद मुख्यमंत्री देश के शीर्ष कॉर्पोरेट घरानों और उद्योगपतियों से निरंतर संपर्क कर रहे हैं, ताकि बंगाल की आर्थिक रीढ़ को मजबूत किया जा सके।
अडानी ग्रुप की बंगाल में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर नजर
इस औद्योगिक कायाकल्प के बीच देश के विख्यात कारोबारी समूह अडानी ग्रुप द्वारा पश्चिम बंगाल में बड़े स्तर पर अपने कारोबार का विस्तार करने की योजना सामने आ रही है। कंपनी के एक वरिष्ठ रणनीतिकार के अनुसार, ग्रुप की गहरी दिलचस्पी राज्य के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (बुनियादी ढांचा परियोजनाओं) में है। समूह ने बंगाल में निवेश की गति को तीव्र करने के लिए राज्य सरकार से एक पारदर्शी और सुदृढ़ पॉलिसी फ्रेमवर्क (नीतिगत ढांचा) तैयार करने की अपेक्षा की है, जिससे बड़े निवेशों को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारा जा सके।
कोलकाता को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए हुगली नदी के नीचे सुरंग की योजना
महानगर कोलकाता की सबसे बड़ी समस्या यानी यातायात के अत्यधिक दबाव और भारी जाम से निपटने के लिए अडानी ग्रुप ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना पर काम करने की इच्छा जताई है। ग्रुप के अधिकारियों के मुताबिक, कोलकाता शहर को सीधे राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ने और मालवाहक वाहनों के सुगम आवागमन के लिए वे हुगली नदी के नीचे एक अंडर-रिवर टनल (जलमग्न सुरंग) परियोजना का निर्माण करना चाहते हैं। यह मेगा प्रोजेक्ट बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की समूह की मुख्य तकनीकी क्षमताओं के पूरी तरह अनुकूल है।
पावर सेक्टर में कदम रखने और डीप-सी पोर्ट के अवसरों का मूल्यांकन
यातायात के साथ-साथ अडानी ग्रुप राज्य के बिजली उत्पादन (पावर जेनरेशन) और वितरण नेटवर्क (डिस्ट्रीब्यूशन) में भी निवेश की संभावनाओं को बारीकी से टटोल रहा है। उनका मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में निजी सहभागिता बढ़ने से बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा होगी, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली मिल सकेगी। इसके अतिरिक्त, ग्रुप राज्य में गहरे समुद्र वाले बंदरगाह (डीप-सी पोर्ट) के विकास पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है, हालांकि अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की विशाल तटीय परियोजनाओं के साथ पर्यावरण मंजूरी और केंद्र-राज्य के अधिकार क्षेत्रों जैसे कई नीतिगत विषय भी जुड़े हुए हैं।
Gold Import में बड़ी गिरावट, आयात 70% कम; महंगे शुल्क और अपील का पड़ा असर
19 Jun, 2026 09:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में सोने के बढ़ते आयात पर अंकुश लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक वर्ष तक सोना न खरीदने की अपील और सरकार द्वारा सीमा शुल्क में की गई बढ़ोतरी का बड़ा असर दिखने लगा है। एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, बीती 13 मई को आयात शुल्क को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किए जाने के बाद महज एक महीने के भीतर सोने का आयात 70 प्रतिशत तक गिर गया है। पहले जहां हर महीने लगभग 75 से 100 टन सोने का आयात होता था, वहीं अब यह घटकर केवल 25 से 30 टन रह गया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के ऊंचे दामों की वजह से मई महीने में मूल्य के आधार पर सोने का आयात सालाना तौर पर 34 प्रतिशत बढ़कर 3.41 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
आयात मूल्य में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और हिस्सेदारी
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि चालू वर्ष की अप्रैल-मई अवधि के दौरान सोने का आयात मूल्य 60.14 फीसदी की छलांग लगाकर 9.04 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। इससे पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर मूल्य का सोना खरीदा था, जो सालाना आधार पर 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। हालांकि, अगर वजन या मात्रा के हिसाब से देखें तो इसमें 4.76 फीसदी की कमी आई और यह कुल 721.03 टन रहा। वर्तमान में देश के कुल आयात बजट में अकेले सोने की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत से भी ज्यादा बनी हुई है।
प्रत्यक्ष कर संग्रह में 15 प्रतिशत का उछाल
देश की अर्थव्यवस्था के मोर्चे से एक और बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक का शुद्ध प्रत्यक्ष कर (income tax) संग्रह लगभग 15 फीसदी की मजबूती के साथ 5.21 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। राजस्व के इस कुल आंकड़े में शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स और शुद्ध गैर-कॉरपोरेट टैक्स (व्यक्तिगत आयकर) दोनों से प्राप्त होने वाली राशियां शामिल हैं, जो देश के मजबूत आर्थिक विकास और बेहतर टैक्स अनुपालन की ओर इशारा करती हैं।
कॉरपोरेट टैक्स में वृद्धि और रिफंड के आंकड़े
आधिकारिक तौर पर जारी किए गए वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल से लेकर 17 जून तक की समयावधि में शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स का संग्रह सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की शानदार बढ़त के साथ 2.08 लाख करोड़ रुपये रहा। इसके समानांतर, शुद्ध गैर-कॉरपोरेट टैक्स भी 8 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 2.94 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसी अवधि के दौरान सरकार द्वारा करदाताओं को 89,026 करोड़ रुपये की रिफंड राशि भी जारी की गई, जो पिछले साल की तुलना में 1.19 प्रतिशत अधिक है। वहीं, देश का सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह (Gross Direct Tax Collection) 12.46 फीसदी बढ़कर 6.10 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
IT शेयरों ने बिगाड़ा खेल, सेंसेक्स धड़ाम; निफ्टी 24,000 का स्तर गंवाया
19 Jun, 2026 09:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। गुरुवार को दिखाई गई मजबूती के बाद, सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। शुरुआती ट्रेडिंग सेशन में ही चौतरफा बिकवाली के दबाव के कारण प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी भारी गिरावट के साथ धड़ाम हो गए। शुरुआती कारोबार के दौरान बीएसई का 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स 750 अंकों से अधिक का गोता लगाकर 76,694.65 के स्तर पर आ गया, जिसमें 715.33 अंक (0.92%) की वास्तविक गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 199.00 अंक (0.82%) की कमजोरी के साथ 24,000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ते हुए 23,969.00 के स्तर पर फिसल गया।
आईटी सेक्टर की भारी बिकवाली ने बिगाड़ा सेंटीमेंट
दलाल स्ट्रीट पर मचे इस कोहराम के पीछे मुख्य रूप से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) कंपनियों के शेयरों में हुई भारी बिकवाली जिम्मेदार रही। बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, आईटी इंडेक्स में करीब छह फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसने पूरे बाजार के घरेलू सेंटीमेंट को पूरी तरह से नीचे खींच लिया। इसके अलावा वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेत भी कमजोर रहे, जहां अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स और जापान के टॉपिक्स इंडेक्स में 0.3% की गिरावट देखी गई। वहीं ऑस्ट्रेलिया के बाजारों सहित यूरोप का यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स भी 0.5% तक टूट गया।
डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती से मिली राहत
घरेलू शेयर बाजार में मची उठापटक के विपरीत, विदेशी मुद्रा बाजार से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर आई। शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये ने शानदार वापसी की और 10 पैसे की मजबूती दर्ज करते हुए 94.30 के स्तर पर पहुंच गया। इसके अतिरिक्त, प्राइमरी मार्केट (प्राथमिक बाजार) में भी सरगर्मी तेज रही, जहां आज से निवेशकों के लिए 'टर्टलमिंट आईपीओ' की बुकिंग का पहला दिन शुरू हो चुका है।
भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से बाजार में रिकवरी की उम्मीद
भले ही शुरुआती कारोबार में मंदी का माहौल रहा, लेकिन बाजार के जानकारों को उम्मीद है कि भारतीय बाजार जल्द ही इस झटके से उबरकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगा। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होगा। कच्चे तेल की घटती कीमतें, पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद और स्थिर होता रुपया आने वाले दिनों में निवेशकों के भरोसे को दोबारा बहाल करने में मदद कर सकते हैं।
रिलायंस के पूर्व शीर्ष अधिकारी सतीश सेठ की बढ़ीं मुश्किलें, कोर्ट ने भेजा न्यायिक हिरासत में
18 Jun, 2026 01:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दिल्ली की द्वारका स्थित एक अदालत ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (आरआईएल) के पूर्व समूह प्रबंध निदेशक सतीश सेठ को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्देश जारी किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई सघन पूछताछ के बाद उन्हें आगामी 2 जुलाई तक जेल में रहना होगा। मनी लॉन्ड्रिंग के इस गंभीर मामले में गिरफ्तार किए गए सेठ को बृहस्पतिवार के दिन अवकाशकालीन न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।
मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप और ईडी की कार्रवाई
सतीश सेठ पर फर्जी इनवॉइस और बिलों के माध्यम से हीरे के आयात की आड़ में हवाला नेटवर्क का उपयोग करके अवैध रूप से विदेशी मुल्कों में मोटी धनराशि भेजने का संगीन आरोप है। जांच एजेंसी ईडी का दावा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की दो प्रमुख सड़क परियोजनाओं से सरकारी धन का गबन किया गया और इस वित्तीय धोखाधड़ी का मुख्य फायदा उठाने वाली कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ही थी।
राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से जुड़ी धन की हेराफेरी
वित्तीय गबन और अनियमितताओं से जुड़ा यह पूरा मामला मुख्य रूप से दो अलग-अलग राज्यों की सड़क परियोजनाओं से संबंधित है, जिनमें राजस्थान की जयपुर-रिंगस टोल रोड और दक्षिण भारत की त्रिची-करूर टोल रोड परियोजनाएं शामिल हैं। अदालत के पटल पर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पेश की गई विस्तृत चार्जशीट के मुताबिक, नियमों को ताक पर रखकर आरआईएल द्वारा अवैध चैनलों के जरिए कुल 92 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि विदेशों में हस्तांतरित की गई।
अदालत द्वारा न्यायिक हिरासत और विशेष रियायतें
सुनवाई पूरी होने के बाद माननीय अदालत ने मानवीय आधार पर सतीश सेठ को न्यायिक अभिरक्षा के दौरान अपने पास चश्मा रखने और डॉक्टरों द्वारा लिखे पर्चे के मुताबिक नियमित दवाएं लेने की विशेष अनुमति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया है कि आरोपी की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए जेल नियमावली (जेल मैनुअल) के प्रावधानों के तहत उन्हें उपयुक्त बिस्तर उपलब्ध कराने के संबंध में उचित निर्णय लिया जाए।
LPG Price Update: गैस सिलेंडर खरीदने से पहले चेक करें 18 जून के ताजा दाम
18 Jun, 2026 12:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने 18 जून के लिए रसोई गैस और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों के नए दाम घोषित कर दिए हैं। राहत की बात यह है कि आज 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की दरों में कोई नया फेरबदल नहीं किया गया है, हालांकि देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में स्थानीय करों (टैक्स) और परिवहन व्यय के अंतर के कारण अंतिम खुदरा मूल्य में थोड़ा उतार-चढ़ाव दिखाई दे सकता है। ऐसे में उपभोक्ता द्वारा आज अपनी रीफिल बुकिंग कराने से पहले अपने स्थानीय बाजार के भावों की जानकारी प्राप्त करना एक समझदारी भरा निर्णय होगा।
प्रमुख महानगरों और बड़े शहरों में दोनों सिलेंडरों के ताजा दाम
देश के विभिन्न क्षेत्रों में सिलेंडरों के दाम अलग-अलग स्तर पर बने हुए हैं, जिसके तहत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर 942.0 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3113.5 रुपये का मिल रहा है। आर्थिक राजधानी मुंबई में घरेलू सिलेंडर 941.5 रुपये और 19 किलो वाला व्यावसायिक सिलेंडर 3067.5 रुपये के स्तर पर है। इसके अतिरिक्त कोलकाता में कीमतें क्रमशः 968.0 रुपये और 3256.0 रुपये, चेन्नई में 957.5 रुपये और 3283.0 रुपये, जयपुर में 945.5 रुपये और 3141.0 रुपये, नोएडा-गाजियाबाद में 939.50 रुपये और 3113.50 रुपये तथा चंडीगढ़ में 951.5 रुपये और 3136.0 रुपये दर्ज की गई हैं। बिहार की राजधानी पटना में रसोई गैस के दाम सबसे ऊंचे 1031.5 रुपये और कमर्शियल गैस 3400.5 रुपये पर पहुंच गई है, जबकि भुवनेश्वर में यह दरें क्रमशः 968.0 रुपये और 3290.5 रुपये बनी हुई हैं।
चालू महीने की शुरुआत में हुआ था मूल्य विस्तार
उल्लेखनीय है कि चालू जून महीने के आरंभ में ही तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं को झटका देते हुए घरेलू रसोई गैस के दामों में लगभग 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी थी, जिसके बाद से ही आम जनता के मासिक बजट पर इसका अतिरिक्त बोझ बना हुआ है। इसी प्रकार होटल, ढाबों, रेस्तरां और छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम के भारी कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में भी जून के पहले सप्ताह में उल्लेखनीय वृद्धि की गई थी, जिससे व्यावसायिक परिचालन लागत बढ़ गई है, हालांकि आज के दिन इन दोनों ही श्रेणियों में कोई नया इजाफा न होने से बाजार स्थिर बना हुआ है।
वैश्विक बाजार के कारक और घर बैठे रेट जानने का तरीका
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, एलपीजी की कीमतों में समय-समय पर होने वाले इन बदलावों के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के भाव, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की विनिमय दर (एक्सचेंज रेट), आयात पर आने वाली लागत और केंद्र व राज्य सरकारों की नीतियां सबसे अहम भूमिका निभाती हैं। वर्तमान में इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस के करोड़ों उपभोक्ता किसी भी असमंजस से बचने के लिए अपनी संबंधित प्रदाता कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट अथवा अधिकृत मोबाइल एप्लीकेशन पर जाकर अपने क्षेत्र के सटीक दामों की रीयल-टाइम जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
खरीदारों के लिए राहत, सोना हुआ सस्ता; जानिए सोने-चांदी के नए भाव
18 Jun, 2026 12:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। यदि आप भी बहुमूल्य धातुओं जैसे सोना या चांदी के आभूषण खरीदने का विचार कर रहे हैं या इनमें निवेश करना चाहते हैं, तो यह खबर विशेष रूप से आपके काम की है। सर्राफा बाजार में 18 जून को कीमती आभूषणों की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का सिलसिला देखने को मिला है। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक हलचल और अमेरिकी डॉलर के मूल्य में आ रहे बदलावों का सीधा असर घरेलू सर्राफा बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, ऐसे में किसी भी प्रकार के लेन-देन से पहले अपने शहर के ताजा भावों की बारीकी से जांच कर लेना बेहद समझदारी भरा कदम होगा।
महानगरों और प्रमुख शहरों में 24, 22 और 18 कैरेट सोने के दाम
घरेलू बाजार में शुद्धता के आधार पर सोने की दरें तय की गई हैं, जिसके तहत देश की राजधानी दिल्ली, लखनऊ, जयपुर और चंडीगढ़ सहित कई शहरों में 24 कैरेट (10 ग्राम) सोने की कीमत ₹1,51,250 पर ट्रेंड कर रही है, जबकि इन्हीं शहरों में 22 कैरेट का भाव ₹1,38,650 और 18 कैरेट का दाम ₹1,13,470 बना हुआ है। वहीं व्यापारिक नगरी मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में 24 कैरेट सोना ₹1,51,100 तथा पटना व अहमदाबाद में ₹1,51,150 प्रति दस ग्राम पर उपलब्ध है। दक्षिण भारत के प्रमुख केंद्र चेन्नई में दरें थोड़ी ऊंची दर्ज की गई हैं, जहां 24 कैरेट के लिए ग्राहकों को ₹1,53,060 चुकाने पड़ रहे हैं।
चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव, चेन्नई और हैदराबाद सबसे महंगे
चांदी के बाजार पर नजर डालें तो देश के अधिकांश बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पटना और लखनऊ में 1 किलोग्राम चांदी की कीमत ₹2,65,000 के स्तर पर टिकी हुई है, जहां प्रति 10 ग्राम चांदी का भाव ₹2,650 और 100 ग्राम का दाम ₹26,500 चल रहा है। इसके विपरीत, चेन्नई, हैदराबाद, भुवनेश्वर, कटक और केरल जैसे क्षेत्रों में चांदी की कीमतों में तेजी का रुख है, जहां 1 किलो चांदी खरीदने के लिए ₹2,80,000 खर्च करने पड़ रहे हैं, जो अन्य शहरों के मुकाबले सीधे ₹15,000 अधिक है।
वैश्विक बाजार के समीकरण और खरीदारी से जुड़े जरूरी नियम
सर्राफा विशेषज्ञों के अनुसार, धातुओं की कीमतों में दैनिक फेरबदल के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक काम करते हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के हाजिर भाव, भारतीय मुद्रा के मुकाबले डॉलर की मजबूती या कमजोरी, केंद्रीय बैंकों द्वारा की जाने वाली थोक खरीदारी और शेयर बाजार की अस्थिरता मुख्य रूप से शामिल हैं। आम उपभोक्ताओं के लिए यह जानना भी जरूरी है कि जब वे शोरूम से आभूषण खरीदते हैं, तो प्रदर्शित रेट के अलावा उन पर अलग से मेकिंग चार्ज (गढ़ाई शुल्क) और 3 प्रतिशत जीएसटी (GST) भी लागू होता है, जिससे गहनों का अंतिम बिल बढ़ जाता है, इसलिए बजट बनाते समय इन अतिरिक्त करों को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए।
इस शहर में ओला सेवा पर संकट, लाइसेंस सस्पेंड होने के पीछे क्या है कारण?
18 Jun, 2026 12:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। आधुनिक दौर में दफ्तर जाने, पर्यटन या दैनिक कामकाज के लिए ओला जैसी ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं का उपयोग आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। मोबाइल के जरिए पलक झपकते ही वाहन बुक करने की इस सहूलियत के बीच ऐप आधारित कैब प्रदाता कंपनी ओला को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। चंडीगढ़ प्रशासन के अंतर्गत आने वाली स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ने कड़ा रुख अपनाते हुए ओला का एग्रीगेटर परिचालन लाइसेंस अगले 6 महीने के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रशासन के इस कड़े कदम के बाद न केवल संबंधित कंपनी को बड़ा झटका लगा है, बल्कि इससे जुड़े हजारों ड्राइवर पार्टनर्स और रोजाना सफर करने वाले मुसाफिरों की मुश्किलें भी काफी बढ़ गई हैं।
नियमों की अनदेखी और सुरक्षा मानकों में कोताही
परिवहन विभाग द्वारा की गई इस सख्त दंडात्मक कार्रवाई का मुख्य आधार 'चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन मोटर व्हीकल्स एग्रीगेटर रूल्स 2025' के प्रावधानों का खुला उल्लंघन करना है। अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पिछले काफी समय से वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं की ओर से कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर ढेरों गंभीर शिकायतें दर्ज कराई जा रही थीं। इन आवेदनों में मुख्य रूप से आरोप लगाया गया था कि कंपनी अपने ड्राइवर पार्टनर्स को अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा (हेल्थ इंश्योरेंस) और टर्म इंश्योरेंस जैसी बेहद जरूरी सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने में लगातार लापरवाही बरत रही थी। इसके अलावा, चालकों के लिए जरूरी ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित न करने और यात्रियों से वसूले जाने वाले किराए से जुड़े तय नियमों व दिशानिर्देशों की सरेआम अवहेलना करने की बात भी जांच में सही पाई गई।
प्रशासनिक नोटिसों की अवमानना और दफ्तर की गोपनीयता
अधिकारियों ने यह भी खुलासा किया कि ऐसा नहीं है कि यह कार्रवाई अचानक की गई हो, बल्कि इससे पहले कंपनी प्रबंधन को नियमों का कड़ाई से पालन करने और उसकी विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट सौंपने के कई बार लिखित निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कंपनी के रवैए में कोई सकारात्मक सुधार या संजीदगी देखने को नहीं मिली। इस मामले की गहन जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला प्रशासनिक उल्लंघन उजागर हुआ कि कंपनी ने लगभग एक वर्ष पूर्व ही चंडीगढ़ स्थित अपने मुख्य परिचालन कार्यालय को चुपके से किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित (शिफ्ट) कर लिया था, परंतु इस महत्वपूर्ण बदलाव की कोई भी आधिकारिक सूचना संबंधित नियामक विभाग को देना मुनासिब नहीं समझा।
जवाब न देने पर निलंबित हुआ परिचालन लाइसेंस
स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) के आला अधिकारियों का दावा है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत कंपनी को अपना पक्ष और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के पर्याप्त तथा उचित अवसर दिए गए थे। इसके बावजूद, यात्रियों से तय सीमा से अधिक किराया वसूलने और अन्य नीतिगत उल्लंघनों को लेकर जारी किए गए कारण बताओ नोटिसों का कंपनी ने कोई संतोषजनक उत्तर देना जरूरी नहीं समझा। प्रबंधन के इसी उदासीन और गैर-जिम्मेदाराना रुख को देखते हुए आखिरकार लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने चंडीगढ़ एग्रीगेटर नियमावली 2025 के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए ओला के परिचालन पर छह माह का प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे अब शहर में कंपनी की व्यावसायिक गतिविधियों और कैब संचालन पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।
शेयर बाजार में नरमी, सेंसेक्स और निफ्टी सपाट दायरे में कारोबार करते दिखे
18 Jun, 2026 10:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में लगातार चार दिनों से जारी तेजी के सिलसिले पर गुरुवार सुबह अचानक ब्रेक लग गया। बाजार के प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत गिरावट के साथ लाल निशान में हुई। शुरुआती कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 111.23 अंक टूटकर 77,044.39 के स्तर पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 26.85 अंकों की सुस्ती के साथ 24,058.85 पर कारोबार करता देखा गया। शेयर बाजार में आई इस गिरावट के साथ-साथ विदेशी मुद्रा बाजार में भी कमजोरी दर्ज की गई, जहां अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 21 पैसे कमजोर होकर 94.71 के स्तर पर पहुंच गया।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक के सख्त रुख से टूटा बाजार
घरेलू बाजार में अचानक आई इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अपनाए गए कड़े तेवर माने जा रहे हैं। अमेरिका में महंगाई की दर लगातार ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण फेड की ओपन मार्केट कमेटी ने बाजार को सख्त संकेत दिए हैं, जिससे इस वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में और इजाफा होने की आशंका बढ़ गई है। इस घोषणा के बाद अमेरिका में 10 साल के बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.46 प्रतिशत हो गई, जिसके चलते अमेरिकी बाजारों में भारी बिकवाली का माहौल देखा गया और वैश्विक स्तर पर निवेशकों की चिंताएं बढ़ गईं। फेड के नए प्रमुख के इस अप्रत्याशित और सख्त फैसले ने बाजार के जानकारों को भी हैरान किया है, क्योंकि वे हमेशा से ब्याज दरों में कटौती की वकालत करते रहे हैं।
कच्चे तेल में नरमी और भू-राजनीतिक मोर्चे से राहत
वैश्विक स्तर पर मचे इस घमासान के बीच भारतीय निवेशकों के लिए कुछ सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कम होने और वहां शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों से भारतीय बाजार धीरे-धीरे अपनी रिकवरी कर सकता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से देश में महंगाई का दबाव कम होने की संभावना है, जिससे अर्थव्यवस्था के बाहरी मोर्चे को काफी सहारा मिलेगा। वहीं अगर दुनिया के अन्य शेयर बाजारों की बात करें तो जापान के टॉपिक्स और अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में मजबूती देखी गई, जबकि हांगकांग के हैंग सेंग और यूरोप के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट का रुख रहा।
एचडीएफसी बैंक ने रचा नया वित्तीय इतिहास
शेयर बाजार के इस उतार-चढ़ाव भरे घटनाक्रम के बीच देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के ऋणदाता, एचडीएफसी बैंक ने एक विशेष उपलब्धि अपने नाम की है। बैंक ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की '1.5% फिक्स्ड-रेट स्वैप फैसिलिटी' योजना का उपयोग करते हुए 750 मिलियन डॉलर का विदेशी वाणिज्यिक कर्ज (ECB) जुटाया है। इस विशेष सरकारी योजना का लाभ उठाने वाला एचडीएफसी बैंक पूरे देश का पहला वित्तीय संस्थान बन गया है। बैंक ने इस 5 साल की अवधि वाले विदेशी बॉन्ड को अपनी 'गिफ्ट सिटी' शाखा के माध्यम से जारी किया है, जो बैंकिंग सेक्टर में इसकी मजबूत पकड़ और साख को प्रदर्शित करता है।
सिर्फ 10 दिन का सहारा! कच्चे तेल के भंडार को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
18 Jun, 2026 10:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है, जिसके अनुसार देश का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (एसपीआर) संकट की स्थिति में केवल 9 से 10 दिनों की कच्चे तेल की आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की ओर से जारी इस अध्ययन में बताया गया है कि पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर भारी निर्भरता होने के बावजूद भारत की भंडारण क्षमता जापान और दक्षिण कोरिया जैसे विकसित राष्ट्रों की तुलना में बेहद सीमित है। इन देशों के पास अपनी आवश्यकता के अनुसार 200 से अधिक दिनों का बैकअप स्टॉक मौजूद रहता है, जो उन्हें किसी भी वैश्विक संकट से निपटने में मजबूती प्रदान करता है।
आयात पर निर्भरता और संभावित आर्थिक खतरे
विश्लेषण के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल मुख्य रूप से रूस और पश्चिम एशिया के महज छह देशों से खरीदता है। ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में कोई भी रुकावट आने पर देश का संकट प्रबंधन तंत्र कमजोर पड़ सकता है। चिंता की बात यह भी है कि देश में प्राकृतिक गैस के लिए कोई विशेष रणनीतिक भंडारण ढांचा नहीं है, जिससे सीधे तौर पर खाद कारखानों और शहरों की गैस वितरण प्रणालियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का डर बना रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल, एलएनजी, एलपीजी या समुद्री परिवहन मार्गों में पैदा होने वाला कोई भी अवरोध देश में ईंधन की कीमतों, घरेलू रसोई गैस, उर्वरक सब्सिडी और आम महंगाई को सीधे प्रभावित कर सकता है।
भविष्य के संकट से बचने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए इस अध्ययन में कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की सलाह दी गई है। इसके तहत देश के भीतर जो गैस के कुएं अब खाली हो चुके हैं, उन्हें प्राकृतिक गैस के भंडारण केंद्रों के रूप में विकसित करने के काम में तेजी लाई जानी चाहिए। साथ ही, एक राष्ट्रीय रिफाइनरी परिवर्तन योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने की आवश्यकता जताई गई है, ताकि भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटा जा सके।
रिफाइनरी क्षमता के पुनर्संतुलन की आवश्यकता
साल 2030 के बाद बाजार में पेट्रोल और डीजल की मांग के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिफाइनरियों के मौजूदा बुनियादी ढांचे को नया रूप देने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, विदेशी बाजारों में भेजे जाने वाले डीजल के निर्यात को रोककर घरेलू जरूरतों की तरफ मोड़ने का विकल्प सुझाया गया है। रणनीतिकारों का यह भी कहना है कि वर्ष 2040 के बाद जो रिफाइनिंग क्षमताएं अनुपयोगी हो सकती हैं, उनमें अभी अतिरिक्त निवेश करने से बचा जाना चाहिए ताकि देश को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
क्लेम रिजेक्शन पर लगेगी लगाम, IRDAI के नए नियम से उपभोक्ताओं को राहत
17 Jun, 2026 04:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मौजूदा दौर में अनियंत्रित जीवनशैली और लगातार बढ़ती गंभीर बीमारियों के मद्देनजर स्वास्थ्य बीमा (हेल्थ इंश्योरेंस) सुरक्षा लेना बेहद अनिवार्य हो चुका है। विशेषकर वैश्विक कोरोना महामारी के बाद से आम नागरिकों के बीच चिकित्सा बीमा कराने के प्रति जागरूकता में भारी इजाफा देखा गया है। अस्पतालों के अत्यधिक महंगे इलाज और भारी-भरकम खर्चों से खुद को सुरक्षित रखने के लिए लोग अपनी जेब से मोटा प्रीमियम भरकर इन नीतियों को खरीद रहे हैं। हालांकि, दूसरी तरफ बीमा प्रदाता कंपनियां भी प्रतिवर्ष प्रीमियम की दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी कर रही हैं। इतनी महंगी किश्तों का भुगतान करने के बाद भी वर्तमान में एक बेहद चिंताजनक स्थिति सामने आ रही है, जहां बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को जरूरत के समय क्लेम (दावा राशि) हासिल नहीं हो पा रहा है। हाल ही में जारी एक आधिकारिक वित्तीय रिपोर्ट के चौंकाने वाले विश्लेषण के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) के दौरान देश में किए गए प्रत्येक 12 स्वास्थ्य दावों में से औसतन एक क्लेम को बीमा कंपनियों द्वारा पूरी तरह से खारिज (रिजेक्ट) कर दिया गया, जिसने इस क्षेत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
करोड़ों दावों का पंजीकरण, अरबों का भुगतान और खारिज होने का बड़ा अनुपात
सांख्यिकीय आंकड़ों की गहराई से पड़ताल करें, तो बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान पूरे देश में पॉलिसीधारकों की तरफ से बीमा कंपनियों के समक्ष कुल 3.26 करोड़ स्वास्थ्य बीमा दावे प्रस्तुत किए गए थे। इन पंजीकृत दावों के एवज में विभिन्न कंपनियों द्वारा कुल मिलाकर 94,248 करोड़ रुपये की विशाल राशि का क्लेम भुगतान भी सेटल किया गया। इसके बावजूद, कुल आवेदनों में से तकरीबन 8 प्रतिशत क्लेम को सीधे तौर पर अमान्य घोषित कर निरस्त कर दिया गया। इस गणितीय अनुपात का सीधा और कड़वा अर्थ यह है कि समय पर प्रीमियम जमा करने वाले प्रत्येक 12 पॉलिसीधारकों में से कम से कम एक अभागे उपभोक्ता को अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी फूटी कौड़ी नसीब नहीं हुई और उन्हें अपनी गाढ़ी कमाई से ही पूरा बिल चुकाना पड़ा।
नियामक संस्था आईआरडीएआई का कड़ा रुख और रिजेक्शन के पारदर्शी कारण की अनिवार्यता
पॉलिसीधारकों के साथ हो रहे इस कथित अन्याय और बढ़ती शिकायतों का संज्ञान लेते हुए देश की सर्वोच्च बीमा नियामक संस्था, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने अब बेहद कड़ा और सुधारात्मक कदम उठाया है। नियामक द्वारा जारी नए कानूनी दिशानिर्देशों के तहत यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है कि अब कोई भी इंश्योरेंस कंपनी किसी उपभोक्ता का क्लेम अपनी मर्जी से हवा में रिजेक्ट नहीं कर पाएगी। यदि कोई कंपनी किसी दावे को खारिज करती है, तो उसे उसके पीछे का एक बेहद ठोस, तार्किक और विधिक कारण लिखित रूप में अनिवार्य रूप से स्पष्ट करना होगा। इसके साथ ही, बीमा प्रदाता को अपनी मूल पॉलिसी बुकलेट की उन विशिष्ट नियम व शर्तों (क्लॉज) का साफ तौर पर उल्लेख करना होगा, जिनके आधार पर क्लेम न देने का निर्णय लिया गया है। यह सख्त नियम ऐसे समय में लागू किया गया है जब कंपनियों द्वारा क्लेम प्रोसेसिंग की तकनीकी स्पीड बढ़ाने के दावों के बावजूद उपभोक्ताओं की शिकायतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
पॉलिसीधारकों को कानूनी संबल, कैशलेस अप्रूवल और डिस्चार्ज की समय-सीमा तय
इस नए प्रशासनिक सुधार के लागू होने से सीधे तौर पर आम पॉलिसीधारकों को एक बड़ा कानूनी और व्यावहारिक लाभ प्राप्त होगा। अब उपभोक्ताओं के लिए यह समझना बेहद आसान हो जाएगा कि कंपनी द्वारा उनके दावे को खारिज करने का फैसला नियमानुसार सही है अथवा उनके साथ कोई धोखाधड़ी की गई है। यदि उपभोक्ता कंपनी के तर्क से असंतुष्ट रहता है, तो वह इन लिखित आधारों को ढाल बनाकर उपभोक्ता निवारण मंचों, शिकायत निवारण सेल अथवा सीधे 'बीमा लोकपाल' (इंश्योरेंस ओम्बड्समैन) की शरण में जाकर अपने हक की कानूनी लड़ाई लड़ सकेगा। इसके अतिरिक्त, नियामक ने मरीजों को मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए समय-सीमा भी निर्धारित कर दी है। अब सभी कंपनियों के लिए अस्पतालों से मिलने वाले कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन अनुरोधों को अधिकतम एक घंटे के भीतर प्रोसेस करना अनिवार्य होगा, साथ ही मरीज के ठीक होने पर अस्पताल से फाइनल बिल मिलने के महज तीन घंटे के भीतर डिस्चार्ज संबंधी अंतिम वित्तीय निर्णय की सूचना देना भी कानूनी रूप से बाध्यकारी बना दिया गया है।
Pizza Hut को नया मालिक मिलेगा? 2.7 अरब डॉलर की डील के पीछे की बड़ी वजह
17 Jun, 2026 03:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक फास्ट फूड उद्योग से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी आर्थिक खबर सामने आई है, जहां दुनिया की सबसे मशहूर और अग्रणी पिज्जा चेन 'पिज्जा हट' अब बिकने जा रही है। पिज्जा हट, केएफसी और टाको बेल जैसे दिग्गज ब्रांड्स का संचालन करने वाली मूल (पेरेंट) कंपनी 'यम ब्रांड्स' ने आखिरकार पिज्जा हट को पूरी तरह से बेचने का आधिकारिक फैसला ले लिया है। बाजार के विश्लेषकों के अनुसार, यह ऐतिहासिक और मेगा डील करीब 2.7 अरब डॉलर (भारतीय मुद्रा में अरबों रुपये) में तय हुई है। वैश्विक स्तर पर उपभोक्ताओं की बदलती पसंद, खान-पान की नई आदतें, फास्ट फूड बाजार में तेजी से बढ़ती कड़ी प्रतिस्पर्धा और पिछले कई वित्तीय वर्षों से लगातार कमजोर होती बिक्री के दबाव के चलते पैरेंट कंपनी को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है। इस सौदे को वैश्विक रेस्टोरेंट इंडस्ट्री के इतिहास के अब तक के सबसे बड़े और दूरगामी सौदों में से एक माना जा रहा है।
दो कॉर्पोरेट हिस्सों में बंटेगा पिज्जा हट का साम्राज्य और अरबों डॉलर की हिस्सेदारी
इस बड़े बिजनेस सौदे के तहत पिज्जा हट के वैश्विक साम्राज्य को दो अलग-अलग हिस्सों में विभाजित कर बेचा जा रहा है। तय शर्तों के मुताबिक, 'यम चाइना होल्डिंग्स' नामक कंपनी चीन के भीतर संचालित होने वाले पिज्जा हट के पूरे कारोबार को 1.2 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि में अधिग्रहित (परचेज) करेगी। वहीं, चीन के अलावा दुनिया के बाकी तमाम देशों में फैले इसके विशाल वैश्विक व्यापारिक नेटवर्क को एक प्रमुख निजी इक्विटी फर्म 'लॉन्ग रेंज कैपिटल' (LongRange Capital) द्वारा 1.5 अरब डॉलर में खरीदा जाएगा। कॉर्पोरेट जगत के सूत्रों का कहना है कि विभिन्न देशों की आवश्यक सरकारी और नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद इस सौदे के वित्तीय वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही तक पूरी तरह से संपन्न होने की प्रबल उम्मीद है।
बाजार की कड़ी चुनौतियां, बदलती जीवनशैली और बिक्री में लगातार बड़ी गिरावट
यदि इस ब्रांड को बेचने के पीछे की मुख्य वजहों पर गौर करें, तो पिज्जा हट पिछले काफी समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में खान-पान के बदलते तौर-तरीकों और नए ब्रांड्स की आक्रामक प्रतिस्पर्धा के कारण अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी। वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई और कच्चे माल की आसमान छूती कीमतों ने भी पिज्जा के मुनाफे और मार्जिन पर भारी दबाव बना दिया था। इसके अतिरिक्त, आधुनिक दौर में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ता अब जंक फूड के बजाय पौष्टिक और स्वस्थ भोजन के विकल्पों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं, जिससे इसके पारंपरिक डाइनिंग मॉडल को बड़ा झटका लगा। ऑनलाइन फूड डिलीवरी एग्रीगेटर्स के आ जाने से भी पिज्जा हट के रेवेन्यू को काफी नुकसान पहुंचा। कई तिमाहियों तक लगातार घाटा उठाने के बाद यम ब्रांड्स ने इसे बेचने की रूपरेखा तैयार की थी।
केएफसी और टाको बेल पर रहेगा पूरा फोकस तथा पिज्जा हट का गौरवमयी इतिहास
यम ब्रांड्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) क्रिस टर्नर ने इस रणनीतिक सौदे पर अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि इस विनिवेश से कंपनी को अपने अन्य अत्यधिक सफल और मुनाफे वाले ब्रांडों पर अपनी पूरी ऊर्जा और संसाधन केंद्रित करने में बड़ी मदद मिलेगी। पिज्जा हट के अलग होने के बाद यम ब्रांड्स के पास मुख्य रूप से केएफसी (KFC) और टाको बेल (Taco Bell) जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स का स्वामित्व रह जाएगा, जिनका हालिया वित्तीय प्रदर्शन और विकास दर बेहद शानदार रही है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की बात करें, तो पिज्जा हट को 1977 में पेप्सीको द्वारा खरीदा गया था, जिसे बाद में 1997 में ट्राइकोन ग्लोबल रेस्टोरेंट्स के तहत लाया गया, जो आगे चलकर 2002 में यम ब्रांड्स के रूप में स्थापित हुआ। दशकों तक इस ब्रांड ने पूरी दुनिया में आधुनिक पिज्जा डाइनिंग संस्कृति को घर-घर तक लोकप्रिय बनाने में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी भूमिका निभाई है।
LPG सिलेंडर के नए दाम आए सामने, जानें आपके शहर में क्या है आज का रेट
17 Jun, 2026 12:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। रसोई गैस (एलपीजी) का उपभोग करने वाले देश के करोड़ों आम उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण समाचार है। हर महीने की स्थापित व्यवस्था की तरह जून महीने में भी गैस सिलेंडरों के दामों में फेरबदल दर्ज किया गया है। ऐसी स्थिति में, यदि आप आज अपने घर के लिए रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग करने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए अपने शहर के नवीनतम भाव जान लेना बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में वृद्धि का फैसला किया गया था, जिसके चलते देश के विभिन्न शहरों में आम जनता को जेब से अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। अगर आज यानी 17 जून 2026 की बात करें, तो घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के दामों में कोई नया बदलाव या संशोधन नहीं किया गया है और फिलहाल जून की शुरुआत में बढ़ाई गई दरें ही पूरे देश में प्रभावी हैं। तेल विपणन कंपनियां अमूमन हर महीने की पहली तारीख या शुरुआती हफ्ते में गैस की नई कीमतें जारी करती हैं।
घरेलू सिलेंडरों पर बढ़ा आर्थिक बोझ और प्रमुख शहरों के दाम
जून महीने के पहले हफ्ते में घरेलू उपयोग वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये प्रति सिलेंडर का इजाफा किया गया था। इस मूल्य वृद्धि के लागू होने के बाद देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से उछलकर 942 रुपये के स्तर पर पहुंच गई है। देश के अन्य महानगरों और प्रमुख शहरों में गैस के दामों पर नजर डालें तो मुंबई में घरेलू सिलेंडर 941.5 रुपये, कोलकाता में 968.0 रुपये और चेन्नई में 957.5 रुपये में मिल रहा है। इसके अलावा, राजस्थान के जयपुर में इसकी कीमत 945.5 रुपये, उत्तर प्रदेश के नोएडा व गाजियाबाद में 939.50 रुपये, बिहार की राजधानी पटना में 1031.5 रुपये, भुवनेश्वर में 968.0 रुपये तथा चंडीगढ़ में 951.5 रुपये निर्धारित है।
कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भी भारी उछाल
घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यावसायिक क्षेत्र को भी इस बार महंगाई का झटका लगा है, क्योंकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में भी जून की शुरुआत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई थी। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर का दाम बढ़कर 3,113.50 रुपये हो गया है। इसी तरह मुंबई में व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 3067.5 रुपये, कोलकाता में 3256.0 रुपये, चेन्नई में 3283.0 रुपये, जयपुर में 3141.0 रुपये, पटना में 3400.5 रुपये, भुवनेश्वर में 3290.5 रुपये और चंडीगढ़ में 3136.0 रुपये प्रति सिलेंडर पर पहुंच गई है। इस मूल्य वृद्धि से रेस्तरां, ढाबा संचालकों और खान-पान के कारोबार से जुड़े लोगों की लागत बढ़ गई है।
वैश्विक परिस्थितियां और अपने शहर के रेट जानने का तरीका
बाजार के आर्थिक जानकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में ईंधन की कीमतों में होने वाले लगातार उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक स्तर पर आपूर्ति शृंखला (सप्लाई चेन) से जुड़ी बाधाओं का सीधा विपरीत असर एलपीजी की कीमतों पर पड़ रहा है। यही मुख्य कारण है कि पिछले कुछ समय से घरेलू और व्यावसायिक दोनों ही गैस सिलेंडर लगातार महंगे हो रहे हैं। उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए कंपनियों ने डिजिटल माध्यम दिए हैं, जिसके तहत इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस के उपभोक्ता अपने मोबाइल फोन के जरिए संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल एप्लीकेशन पर लॉगिन करके किसी भी समय अपने शहर के एलपीजी के दैनिक और सटीक रेट आसानी से देख सकते हैं।
बाजार में लौटी रौनक, हरे निशान पर सेंसेक्स-निफ्टी; रुपये ने दिखाई मजबूती
17 Jun, 2026 12:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में आई नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीदों के चलते पिछले तीन सत्रों से जारी तेजी पर बुधवार को ब्रेक लगता दिखा। सुबह के कारोबारी सत्र में घरेलू शेयर बाजार के दोनों मुख्य सूचकांक लगभग स्थिर या सपाट स्तर पर कारोबार करते नजर आए। शुरुआती उठापटक के बीच बंबई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स महज 8.58 अंक अथवा 0.01 प्रतिशत की मामूली बढ़त लेकर 76,817.58 के स्तर पर बना हुआ था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक सिर्फ 1 अंक की गिरावट के साथ 23,988 के स्तर पर रेंगता दिखा। इससे पहले, शुरुआती घंटी बजते ही 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 284.69 अंक यानी 0.37 प्रतिशत की मजबूती के साथ 77,093.17 के इंट्राडे उच्च स्तर तक भी गया, और 50 शेयरों वाला निफ्टी भी 58.89 अंक की बढ़त लेकर 24,044.50 पर खुला था। विभिन्न सेक्टर्स की बात करें तो निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सूचकांक 1.26 फीसदी की तेजी के साथ सबसे आगे रहा, जिसके बाद निफ्टी आईटी और निफ्टी मीडिया में बढ़त दर्ज की गई।
फार्मा शेयरों में लिवाली और मेटल-रियल्टी में मुनाफावसूली
बाजार के रुख को देखें तो आज हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल सेक्टर के शेयरों में निवेशकों ने अच्छी रुचि दिखाई, जिससे निफ्टी फार्मा 0.24 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.18 प्रतिशत के मुनाफे के साथ हरे निशान में टिके रहे। इसके विपरीत, धातु (मेटल) और रियल्टी संपदा से जुड़े शेयरों पर बिकवाली का भारी दबाव साफ महसूस किया गया, जिसके कारण निफ्टी मेटल में 0.87 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी में 0.68 प्रतिशत की गिरावट आ गई। इनके साथ ही निफ्टी ऑटो, निफ्टी प्राइवेट बैंक और सरकारी बैंकों का सूचकांक निफ्टी पीएसयू बैंक भी लाल निशान के भीतर ही कारोबार करते नजर आए। निफ्टी 50 के प्रमुख शेयरों में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, एनटीपीसी, ट्रेंट, ओएनजीसी, भारती एयरटेल, डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज और एक्सिस बैंक के भाव टूटने से बाजार पर दबाव बना रहा।
क्रूड ऑयल की गिरावट से भारतीय बाजार को बड़ी राहत
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, आने वाले कुछ दिनों में भारतीय शेयर बाजार की चाल दो मुख्य वजहों से तय होगी, जिनमें से एक भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अच्छी है तो दूसरी थोड़ी चिंताजनक है। अच्छी बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बड़ी गिरावट आ रही है। बीते पांच दिनों के भीतर वैश्विक मानक माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड तकरीबन 16 फीसदी तक टूटकर करीब 79 डॉलर प्रति बैरल के पास आ गया है, जिससे भारत के चालू खाता घाटे (पेमेंट डेफिसिट) को लेकर बनी चिंताएं काफी हद तक कम हुई हैं। कमोडिटी मार्केट में ताजा गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड 0.72 प्रतिशत और फिसलकर 78.39 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी लगभग 1 प्रतिशत की मंदी के साथ 75.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
कमजोर मानसून से खाद्य महंगाई की चिंता और मजबूत होता रुपया
शेयर बाजार के जानकारों ने दूसरी तरफ आगाह करते हुए कहा कि देश के कुछ हिस्सों में मानसून की सुस्त रफ्तार के कारण खाद्य मुद्रास्फीति (खाने-पीने की चीजों की महंगाई) बढ़ने का जोखिम खड़ा हो गया है, जो बाजार के लिए एक नकारात्मक संकेत है। हालांकि, मौसम के पिछले अनुभवों को देखते हुए यह उम्मीद भी है कि आने वाले दिनों में देश भर में मानसूनी हवाएं रफ्तार पकड़ लेंगी। इस बीच, भारतीय मुद्रा (रुपया) में लगातार आ रही मजबूती बाजार के सेंटिमेंट को सहारा दे रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की संभावित लिवाली और डॉलर सूचकांक में नरमी के चलते आने वाले समय में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और अधिक सुदृढ़ हो सकता है, जिससे बाजार का सकारात्मक रुख लंबी अवधि के लिए बरकरार रहेगा।
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